राजपत्र, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित मंगलवार, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937
हिमाचल प्रदेश सरकार
आबकारी एवं कराधान विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 नवम्बर, 2015
सख्ंयाःई.एक्स.एन.-एफ(10)-8/2013-लूज.--हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर अधिनियम, 2010( 2010 का अधिनियम सख्ंयाकं 9) की धारा 3 की उपधारा (5)द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, उक्त अधिनियम से सलंग्न अनुसचूी-2 में 1-10-2015 से निम्नलिखित सश्ाोंधन करते हैं, अर्थात्ः-
155-राजपत्र/2015-10-11-2015 (5231)5232 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 संशोधन
उपर्युक्त अधिनियम से संलग्न अनुसूची-2 में विद्यमान प्रविष्टि संख्याः 14 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः-
| क्रम सख्ंया | माल | कर की दर |
| "14. | (क) संविदा विनिर्माण, प्रसंस्करण, सपंरिवतर्न, फटुकर काम और विद्यमान औद्योगिक इकाईयों द्वारा संयोजन सहित उपभोग, विक्रय या विनिर्माण में उपयोग हेतु राज्य के बाहर से लाए गए इस अनुसचूी के क्रम सख्ंया 1(क), 1(ख) और 9(ख) में वर्णित माल से अन्यथा, समस्त औद्योगिक निवेश(इनपुट), कच्ची सामग्री और पैकिंग सामग्री; और ( ख) स्ांविदा विनिर्माण, प्रसंस्करण, सपंरिवतर्न , फटुकर काम और नई औद्योगिक इकाई द्वारा संयोजन सहित उपभोग, विक्रय या विनिर्माण में उपयोग हेतु राज्य के बाहर से लाए गए इस अनुसूची के क्रम संख्या 1(क), 1(ख) और 9(ख) में वर्णित माल से अन्यथा, समस्त औद्योगिक निवेश (इनपुट), कच्ची सामग्री और पैकिंग सामग्री । | 2 प्रतिशत 1 प्रतिशत |
प्रविष्टि सख्ंयाः 14 के प्रयोजन के लिए स्पष्टीकरण.--
(i) 'नई औद्योगिक इकाई' से हिमाचल प्रदेश में अवस्थित औद्योगिक इकाई अभिप्रेत है जिसमें 1-4-2015 को या के पश्चात् वाणिज्यिक उत्पादन आरम्भ हुआ था/आरम्भ होता है । (ii) 'विद्यमान औद्योगिक इकाई' से ऐसी औद्योगिक इकाई अभिप्रेत है जिसमें 1-4-2015 से पूर्व उत्पादन आरम्भ हुआ है ।"
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- अतिरिक्त मुख्य सचिव (आबकारी एवं कराधान)।
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[Authoritative English text of this Department Notification No. EXN-F(10)-8/2013-Loose,
dated 7/11/2015 required under clause (3) of Article 348 of the Constitution of India].
EXCISE AND TAXATION DEPARTMENT
NOTIFICATION
Shimla-2, 7th November, 2015
File No. EXN-F(10)-8/2013-Loose.—In exercise of the powers conferred by sub-section(5) of section 3 of the Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area Act, 2010 (Act No. 9 of 2010), the Governor of Himachal Pradesh is pleased to make the following amendments in Schedule-II appended to the said Act, w.e.f. 1-10-2015, namely:—
5233 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937AMENDMENT
In Schedule-II appended to the aforesaid Act, for the existing entry No.14, the following shall be substituted, namely:—
| Sr. No. | Goods | Rate of Tax |
| "14. | (a) All Industrial Inputs, raw material and packing material other than goods mentioned at Serial No. 1(a), 1(b) and 9(b), of this Schedule, brought from outside the State for consumption, sale or use in manufacturing, including contract manufacturing, processing, conversion, job-work and assembling by existing industrial units; and ( b) All Industrial Inputs, raw material and packing material other than goods mentioned at Serial No. 1(a), 1(b) and 9(b) of this Schedule, brought from outside the State for consumption, sale or use in manufacturing including contract manufacturing, processing, conversion, job-work and assembling by new industrial unit. E xplanation for the purpose of entry No.14.- ( i) 'new industrial unit' means an industrial unit located in Himachal Pradesh which commenced/ commences commercial production on or after 01.4.2015. ( ii) 'existing industrial unit' means an industrial unit which has commenced production before 01.04.2015.". | 2% 1 % |
By order, Sd/- Additional Chief Secretary (E&T).
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आबकारी एवं कराधान विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 नवम्बर, 2015
सख्ंयाः ई.एक्स.एन.-एफ(10)-16/2014.--हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर अधिनियम, 2005 (2005 का अधिनियम सख्यांक 12) की धारा 28 क े साथ पठित धारा 63 द्वारा प्रदत्त शक्त्तियों का प्रयोग करते हुए, इस विभाग की अधिसूचना संख्याः ई.एक्स.एन.-एफ(5)-4/2005 तारीख 02 दिसम्बर, 2005 द्वारा अधिसूिचत आरै राजपत्र, हिमाचल प्रदेश (असाधारण) में तारीख 7 दिसम्बर, 2005 को प्रकाशित हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर नियम, 2005 का और संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाते हैं, अर्थात् :-
1. संक्षिप्त नाम.--इन नियमों का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2015 है ।5234 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 2. नए नियम 75ख, 75ग, 75घ, 75 ङ, और 75च का अन्तःस्थापन.--हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर नियम, 2005 के नियम 75 क के पश्चात् निम्नलिखित नियम 75ख, 75ग, 75घ, 75ङ और 75च अन्तःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात् :-
"75ख. अधिक आगत कर प्रत्यय से सम्बन्धित प्रतिदाय का पूर्व निर्धारण दावा.-धारा 28 की उपधारा (1) के प्रथम परन्तुक के प्रयोजन के लिए कोई व्यौहारी निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन बराबर रकम की बैंकं गारंटी के विरूद्ध अधिक आगत कर प्रत्यय के प्रतिदाय के पूर्व निर्धारण के लिए आवेदन कर सकेगाः-
(i) व्यौहारी का पूर्ववर्ती वर्ष में पांच करोड़ रूपए या इससे अधिक का सकल आवर्त है;
(ii) हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर अधिनियम, 2005 और केन्द्रीय विक्रय कर अधिनियम, 1956 के अधीन वर्ष के लिए पूर्व निर्धारण प्रतिदाय दावे के अन्तर्गत् यथालागू समस्त वैधानिक प्ररूप प्रतिदाय के आवेदन के साथ प्रस्तुत कर दिए हैं;
(iii) व्यौहारी कर या विवरणी व्यतिक्रमी नहीं है और उसे पिछले तीन वर्ष के दौरान हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर अधिनियम, 2005 के अधीन किसी अपराध के लिए दण्डित नहीं किया गया है;
(iv) व्यौहारी ने, उस अवधि जिसके लिए दावा सम्बन्धित है, समस्त ऐसी विवरणियां ऑनलाइन इलैक्ट्रॉनिकली दाखिल कर दी हैं;
(v) प्रतिदाय का दावा व्यौहारी द्वारा मू0प0क0 प्ररूप-45 में दाखिल कर दिया गया है;
(vi) दावाकृत व्यौहारी, उन विक्रेताओं द्वारा किए गए कर सदांय के सत्यापन के लिए अकेलेे ही उत्तरदायी होगा जिनके कर बीजकों पर उसने आगत कर प्रत्यय का दावा किया है और यह सुनिश्चित करेगा कि विक्रेताओं ने उनसे किए गए उसक क्रयों के सम्बन्ध में कर जमा कर दिया है। यदि विक्रेताओं ने कर संदत्त नहीं किया है तो दावाकृत व्यौहारी उक्त संदाय ब्याज सहित करेगा । तथापि वर्ष 2014-15 से आगे के लिए ऐसे दावे केवल तभी ग्रहण किए जाएंगे यदि आगत कर प्रत्यय में अन्तवर्लित समस्त व्यौहारियों द्वारा कर का संदाय विभाग की वैबसाइट के माध्यम से इलैक्ट्रॉनिकली कर दिया है; और
(vii) प्रतिदाय दावे को मैनुअॅली या विभाग की ऑफिशियल वैबसाइट के माध्यम से इलैक्ट्रॉनिकली अध्यर्थित किया जा सकेगा ।
75ग. पूर्वनिर्धारण प्रतिदाय के लिए बैंक गारंटी.--ऐसे पूर्व निर्धारण प्रतिदाय दावों के लिए बैंक गारंटी निम्नलिखित शर्तों को पूरा करने के अध्यधीन स्वीकार की जा सकेगीः-
(i) बैंक गारंटी, प्रतिदाय के रूप में दावाकृत की जा रही रकम के बराबर की रकम के लिए होगी;
(ii) बैंक गारंटी, सरकारी खजाना के रूप में अधिसूचित बैंक की किसी शाखा से होगी । कोई अनिवासी व्यौहारी, हिमाचल प्रदेश से बाहर स्थित किसी बैंक, जो हिमाचल प्रदेश में सरकारी खजाना के रूप में अधिसूचित है, की किसी शाखा से बैंक गारंटी दे सकेगा; और
(iii) दी गई बैंक गारंटी छत्तीस मास की अवधि के लिए होगी।
75घ. बैंक गारंटी के विरूद्द पूर्व निर्धारण प्रतिदाय का प्रदान किया जाना.--मू.प.क. प्ररूप-45 में सही और पूर्ण आवेदन तथा नियम 75ग के अधीन बैंक गारंटी दिए जाने के अध्यधीन नियम 75 के उप-नियम(1)5235 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 के अधीन, विहित प्राधिकारी व्यौहारी द्वारा दाखिल किए गए आवेदन के पैंतालीस दिन के भीतर व्यौहारी को प्रतिदाय प्रदान करेगा ।
75ङ पूर्व निर्धारण प्रतिदाय का निर्धारण.--निर्धारण प्राधिकारी, प्रत्येक उस मामले का, जहां पूर्व निर्धारण प्रतिदाय, ऐसे प्रतिदाय को प्रदान किए जाने के अठारह मास के भीतर, प्रदान किया गया है, निर्धारण करेगा ।
75च. पूर्व निर्धारण प्रतिदाय की जांच.--(1) नियम 66 में किसी बात के होते हुए भी निर्धारण प्राधिकारी या आबकारी एवं कराधान आयुक्त के कार्यालय में संपरीक्षा प्रभाग (ऑडिट सैल) ऐसे प्रत्यके मामल,े जहॉ पूर्व निर्धारण प्रतिदाय, ऐसे प्रतिदाय को प्रदान किए जाने के छत्तीस मास के भीतर, प्रदान किया गया है, की जांच करेगा और उसे अन्तिम रूप देगा ।
(2) ऐसे प्रतिदाय की जांच किए जाने पर निर्धारण प्राधिकारी यदि इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि प्रतिदाय का दावा जानबूझ कर और कपटपूर्वक किया गया है तो वह शास्ति अधिरोपित करेगा जो इस प्रकार किए गए दावे के प्रतिदाय की रकम के दोगुने के बराबर होगी ।
(3) यदि उपनियम (1) के अधीन यथा अपेक्षित ऐसे मामलों की जांच छत्तीस मास के भीतर पूर्ण नहीं होती है तो बैंक गारंटी पुनर्वेलित हो जाएगी या नई बैंक गारंटी अभिप्राप्त की जा सकेगी ।
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- प्रधान सचिव (आबकारी एवं कराधान)
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[Authoritative English text of this Department Notification No. EXN-F(10)-16/2014 dated
7/11/2015 as required under clause(3) of Article 348 of the Constitution of India].
EXCISE AND TAXATION DEPARTMENT
NOTIFICATION
Shimla-2, 7th November, 2015
No. EXN-F(10)-16/2014.—In exercise of the powers conferred by section 63 read with section 28 of the Himachal Pradesh Value Added Tax Act, 2005(Act No.12 of 2005), the Governor, Himachal Pradesh is pleased to make the following rules further to amend the Himachal Pradesh Value Added Tax Rules, 2005, notified vide this Department Notification No. EXN-F(5)-4/2005 dated 2nd December, 2005 and published in the Rajpatra, Himachal Pradesh (Extra Ordinary) dated 7th December,2005, namely:—
1. Short title.—These rules may be called the Himachal Pradesh Value Added Tax (4th Amendment) Rules, 2015.
2. Insertion of new rules 75B, 75C, 75D, 75E and 75F.— In the Himachal Pradesh Value Added Tax Rules, 2005, after rule 75A, the following rules 75B, 75C, 75D, 75E and 75F shall be inserted, namely:—
"75B. Pre-assessment claim of excess input tax credit related refund.—For the purpose of first proviso to sub-section(1) of section 28 a dealer may apply for pre-assessment refund of excess input tax credit against bank guarantee of equal amount subject to the following conditions:—
5236 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 (i) the dealer has a gross turnover of five crore rupees and above in the preceding year;(ii) all statutory Forms under the Himachal Pradesh Value Added Tax Act, 2005 and Central Sales Tax Act, 1956, as applicable, for the year under pre-assessment refund claim, have been submitted alongwith the application for refund;
(iii) the dealer is not a tax or return defaulter and has not been penalized for any offence under the Himachal Pradesh Value Added Tax Act, 2005 for the past three years;
(iv) the dealer must have filed all such returns online electronically for the period to which the claim pertains;
(v) the claim for refund has been filed in Form VAT-XLV by the dealer;
(vi) the claimant dealer shall be solely responsible for verification of the tax payments made by the sellers on whose tax invoices he has claimed the input tax credit and shall ensure that the sellers have deposited the tax in respect of his purchases from them. If the sellers have not paid the tax, the claimant dealer shall make the said payment alongwith interest. However, for the year 2014-15 onwards such claims shall be entertained only if the tax payment by all the dealers involved in the input tax credit have been made electronically through the official website of the Department; and (vii) the refund claim may be claimed manually or electronically through the official website of the Department.
75C. Bank Guarantee for pre-assessment refund.—Bank Guarantee for such pre assessment refund claims may be accepted subject to satisfaction of the following conditions:-
(i) Bank guarantee shall be for an amount equal to the amount being claimed as refund;
(ii) Bank Guarantee shall be from any branch of a bank notified as a Government Treasury. A non-resident dealer may furnish a bank guarantee from any branch, situated outside Himachal Pradesh of a bank which is notified as Government Treasury in Himachal Pradesh; and (iii) Bank guarantee furnished shall be for a period of 36 months.
75D. Grant of pre-assessment refund against Bank Guarantee.—Subject to furnishing of correct and complete application in Form VAT-XLV and bank guarantee under rule 75 C, the prescribed Authority under sub-rule(1) of rule 75 shall grant refund to the dealer within 45 days of the application filed by the dealer.
75 E. Assessment of pre-assessment refund.—The Assessing Authority shall assess every case where pre-assessment refund has been granted within 18 months of the grant of such refund.
75F. Scrutiny of pre-assessment refund.— (1) Notwithstanding anything contained in rule 66, the Assessing Authority or the Audit Cell in the office of Excise and Taxation Commissioner shall scrutinize and finalize every case where pre-assessment refund has been granted within 36 months of the grant of such refund.
(2) If upon scrutiny of such refund the Assessing Authority concludes that the refund has been willfully and fraudulently claimed, it shall impose a penalty equal to twice the amount of refund so claimed.
5237राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 (3) If, scrutiny of such cases are not completed within 36 months, as required under sub- rule(1), the Bank Guarantee may be re-rolled over or a fresh Bank Guarantee may be obtained.".
By order, Sd/- Additional Chief Secretary(E&T).
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आबकारी एवं कराधान विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 7 नवम्बर, 2015
संख्याः ई.एक्स.एन-एफ(6)-1/2005-पार्ट-1.--हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल ने, हिमाचल प्रदेश (होटल और आवास गृह) विलास-वस्तुएं कर अधिनियम, 1979 की धारा 6-ग द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, ऐसे होटलों, जो गृह ठहराव (होम स्टे) के रूप में चलाए जा रहे हैं, के स्वत्वधारियों को पांच वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए, विलास-वस्तु कर के संदाय से छूट देने के लिए राजपत्र, हिमाचल प्रदेश में तारीख 2 जुलाई, 2009 को प्रकाशित अधिसूचना संख्याः ई.एक्स.एन-एफ(6)-1/2005 तारीख 30 जून, 2009 द्वारा हिमाचल प्रदेश गृह ठहराव (होम-स्टे) के स्वत्वधारियों को विलास-वस्तु कर के संदाय से छूट स्कीम, 2009 अधिसूचित की थी;
और उक्त स्कीम जुलाई, 2013 तक प्रवर्तन में रही;
और, सरकार ने उक्त स्कीम का पांच वर्ष से अनधिक की और अवधि के लिए विस्तार करने का विनिश्चय किया है;
अतः, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, इस विभाग की अधिसूचना संख्याः ई. एक्स. एन-एफ(6)-1/2005 तारीख 30 जून, 2009 के क्रम में, हिमाचल प्रदेश (होटल और आवास गृह) विलास-वस्तुएं कर अधिनियम, 1979 (1979 का अधिनियम संख्यांक 15) की धारा 6-ग द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, उपर्युक्त स्कीम का 14 जुलाई, 2018 तक विस्तार करते हैं ।
आदेश द्वारा, (डॉ0 श्रीकान्त बाल्दी) अति0 मुख्य सचिव (आबकारी एवं कराधान)।
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[Authoritative English text of this Department Notification No. EXN-F(6)-1/2005-Part-I dated
07.11.2015 as required under clause (3) of Article 348 of the constitution of India].
EXCISE AND TAXATION DEPARTMENT
NOTIFICATION
Shimla-2,the 7th November, 2015
No. EXN-F(6)-1/2005-Part-I.—WHEREAS, the Governor of Himachal Pradesh, in exercise of powers conferred by section 6-C of the Himachal Pradesh Tax on Luxuries (in Hotels and Lodging Houses) Act, 1979, notified the Himachal Pradesh Exemption from Payment of 5238 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 Luxury Tax by Proprietors of Homestay, Scheme, 2009 vide Notification No. EXN-F(6)- 1/2005 dated 30th June, 2009, published in Rajpatra, Himachal Pradesh on 2nd July, 2009, to exempt from payment of luxury tax, the proprietors of such hotels run as Homestay, for a period not exceeding five years;
AND WHEREAS, the said Scheme remained operative till July, 2013;
AND WHEREAS, the Government has decided to extend the said Scheme for further period not exceeding five years;
NOW, THEREFORE, in continuation of this Department Notification No. EXN-F(6)- 1/2005 dated 30th June, 2009, the Governor of Himachal Pradesh, in exercise of powers conferred by section 6-C of the Himachal Pradesh Tax on Luxuries (in Hotels and Lodging Houses) Act, 1979 (Act No. 15 of 1979), is pleased to extend the aforesaid Scheme upto 14th day of July, 2018.
By order, (Dr. SHRIKANT BALDI) Addl. Chief Secretary (E&T).
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In the Court of Balwan Chand (HAS), Marriage Officer-cum-Sub-Divisional Magistrate,
Sujanpur, District Hamirpur (H. P.)
1. Shanti Swaroop Nag aged 58 years s/o Shri Balak Ram Nag, r/o Village & P. O. Jangal Beri, Tehsil Sujanpur, District Hamirpur (H. P.).
2. Rakhi aged 38 years d/o Shri Nawav Singh, r/o Village & P.O. Duhai, Tehsil & District Ghaziabad (U P).
Versus
General Public
Application for the registration of marriage under Section 16 of Special Marriage Act, 1954 (Central Act) as amended by Marriage Laws (Amendment Act 01, 49 of 2001).
Shanti Swaroop Nag aged 58 years s/o Shri Balak Ram Nag, r/o Village & P. O. Jangal Beri, Tehsil Sujanpur, District Hamirpur (H. P.) & Rakhi aged 38 years d/o Shri Nawav Singh, r/o Village & P.O. Duhai, Tehsil & District Ghaziabad (U P) have filed an application alongwith affidavits in the court under Section 16 of Special Marriage Act, 1954 (Central Act) as amended by Marriage Laws (Amendment Act 01, 49 of 2001) that they have solemnized their marriage ceremony on 10-7-2014 in Jhaniari Devi Mata Mandir at Hamirpur, District Hamirpur (H.P.) as per Hindu Rites and Customs and they are living together as husband and wife since then. Hence their marriage may be registered under Special Marriage Act, 1954.
Therefore, the general public is hereby informed through this notice that any person who has any objection regarding this marriage can file the objection personally or in writing before this court on or before 10-12-2015. After that no objections will be entertained and marriage will be registered accordingly.
5239 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 Issued today on 26-10-2015 under my hand and seal of the court.Seal.
BALWAN CHAND,
Marriage Officer-cum-Sub-Divisional Magistrate,
Sujanpur, District Hamirpur (H.P.).
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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील मनाली, जिला कुल्लू, हिमाचल प्रदेश
श्री थिलन (Thilan) पुत्र श्री नोरबू शेरपा, निवासी गृह संख्या 276, वार्ड नं0 7, गोम्पा रोड़, तहसील मनाली, हि0 प्र0।
बनाम
आम जनता
विषय.-प्रकाशन इश्तहार बावत जन्म तिथि पंजीकरण जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु अधिनियम, 1969.
नोटिस बनाम : आम जनता।
श्री थिलन (Thilan) पुत्र श्री नोरबू शेरपा, निवासी गृह संख्या 276, वार्ड नं0 7, गोम्पा रोड़, तहसील मनाली, हि0 प्र0 ने इस न्यायालय में आवेदन-पत्र मय शपथ-पत्र गुजारा है कि उसके पुत्र नीमा का जन्म दिनांक 7-5-2006 को मनाली में हुआ है परन्तु उसकी जन्म तिथि नगर परिषद् मनाली के रिकार्ड में दर्ज नहीं की गई है, जिसे अब दर्ज करवाने के आदेश सादर फरमाये जावें।
अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को नीमा की जन्म तिथि दर्ज करवाने वारे आपाि हो तो वह दिनांक 30-11-2015 को या इससे पूर्व अदालत हजा में अपनी आपाि दर्ज करवा सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर/एतराज मान्य न होगा तथा नियमानुसार जन्म तिथि दर्ज करवाने के आदेश पारित कर दिये जायेंगे।
आज दिनांक 29-10-2015 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील मनाली, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।
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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील मनाली, जिला कुल्लू, हिमाचल प्रदेश
श्री थिलन (Thilan) पुत्र श्री नोरबू शेरपा, निवासी गृह संख्या 276, वार्ड नं0 7, गोम्पा रोड़, तहसील मनाली, हि0 प्र0।
बनाम
आम जनता
विषय.-प्रकाशन इश्तहार बावत जन्म तिथि पंजीकरण जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु अधिनियम, 1969.
नोटिस बनाम : आम जनता। 5240 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 श्री थिलन (Thilan) पुत्र श्री नोरबू शेरपा, निवासी गृह संख्या 276, वार्ड नं0 7, गोम्पा रोड़, तहसील मनाली, हि0 प्र0 ने इस न्यायालय में आवेदन-पत्र मय शपथ-पत्र गुजारा है कि उसकी पुत्री पसांग डोलमा का जन्म दिनांक 21-12-2001 को मनाली में हुआ है परन्तु उसकी जन्म तिथि नगर परिषद् मनाली के रिकार्ड में दर्ज नहीं की गई है, जिसे अब दर्ज करवाने के आदेश सादर फरमाये जावें।
अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को पसांग डोलमा की जन्म तिथि दर्ज करवाने वारे आपाि हो तो वह दिनांक 30-11-2015 को या इससे पूर्व अदालत हजा में अपनी आपाि दर्ज करवा सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर/एतराज मान्य न होगा तथा नियमानुसार जन्म तिथि दर्ज करवाने के आदेश पारित कर दिये जायेंगे।
आज दिनांक 29-10-2015 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील मनाली, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।
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In the court of Marriage Officer-cum- Sub-Divisional Magistrate, Sadar Mandi,
District Mandi, H. P.
In the matter of :—
1. Shri Mohit Tandon s/o Shri R.P. Tandon, r/o H.No. 103, Lower Bhiuli (near BDO Office) Mandi, District Mandi, H. P.
2. Ms. Dhatri Behl d/o Shri Surender Kumar Behl, r/o H.No. 27/2, Purani Mandi, Mandi Town, District Mandi, H. P. . . Applicants.
Versus
General Public
Subject .—Notice of Intended Marriage under section 5 of Special Marriage Act, 1954.
Shri Mohit Tandon s/o Shri R .P. Tandon, r/o H.No. 103, Lower Bhiuli (near BDO Office) Mandi, District Mandi, H. P. and Ms. Dhatri Behl d/o Shri Surender Kumar Behl, r/o H.No. 27/2, Purani Mandi, Mandi Town, District Mandi, H. P. have presented a notice along with affidavits in the court of undersigned under section 5 of Special Marriage Act, 1954 that they have intend to marry within three calendar months and hence their marriage may be registered under Special Marriage Act, 1954.
Therefore, the general public is hereby informed through this notice that any person who has any objection regarding this marriage can file the objection personally or in writing before this court on or before 27-11-2015 after that no objection will be entertained and marriage will be registered.
Issued today on 29th day of October, 2015 under my hand and seal of the court.
Seal. Sd/- Marriage Officer-cum-Sub-Divisional Magistrate, Sadar Mandi, District Mandi, H.P.
5241 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937व अदालत तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, सन्धोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0) मिसल नं0 : 07/2015 तारीख मजरुआ : 29-10-2015 तारीख पेशी : 21-11-2015 श्री बसन्त सिंह ठाकुुर पुत्र श्री जोगी राम, निवासी गांव लोअर बैरी, डाकखाना कोठुवां, जिला मण्डी (हि0 प्र0)
. . प्रार्थी
बनाम
आम जनता
. . फरीक दोयम अधीन धारा 37(2) भू-राजस्व अधिनियम, 1954 के तहत आवेदन पत्र।
श्री बसन्त सिंह ठाकुुर पुत्र श्री जोगी राम, निवासी गांव लोअर बैरी, डाकखाना कोठुवां, जिला मण्डी (हि0 प्र0) द्वारा समस्त औपचारिकताओं सहित इस न्यायालय में प्रस्तुत आवेदन पत्र में उल्लेख किया है कि उसके पिता जी का वास्तविक नाम श्री जोगी राम है परन्तु राजस्व अभिलेख महाल लोअर बैरी में उनका नाम चूहडू लिखा गया है जो कि गलत है इसलिए उसने निवेदन किया है कि राजस्व अभिलेख महाल लोअर बैरी में दरुस्ती करके उसके पिता का नाम चूहडू उर्फ जोगी राम दर्ज किया जाए।
अतः इससे पूर्व कि मामला में अधीन धारा 37(2) भू-राजस्व अधिनियम, 1954 के तहत आगामी आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाए, इस नोटिस द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उपरोक्त मामला में कोई एतराज हो तो वह इस न्यायालय में दिनांक 21-11-2015 को प्रातः 10.00 बजे असालतन व वकालतन हाजिर आकर अपना उजर/एतराज पेश कर सकता है अन्यथा गैर हाजरी की सूरत में एक तरफा कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
आज दिनांक 29-10-2015 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी किया गया। मोहर।
जोगिन्द्र पटियाल, सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी,
सन्धोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।
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ब अदालत श्री अनिल चौहान, उपमण्डलाधिकारी (ना0) चौपाल, तहसील चौपाल, जिला शिमला (हि0 प्र0)
श्री नरायण सिंह पुत्र स्वर्गीय श्री हरी सिंह, गांव कनाहल, डाकघर केदी, उप-तहसील नेरूवा, तहसील . . वादी चौपाल, जिला शिमला (हि0 प्र0)
बनाम
(1) आम जनता (2) प्रधान, ग्राम पंचायत केदी, उप-तहसील नेरूवा, तहसील चौपाल . . प्रतिवादी। विषय.--अपने बच्चों का नाम व जन्म तिथियां ग्राम पंचायत केदी के जन्म पंजीकरण रजिस्टर में दर्ज करवाये जाने बारे, की अधीन धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अन्तर्गत जन्म पंजीकरण करने बारे।
इश्तहार
हर खास व आम जनता को बजरिया इश्तहार सूचित किया जाता है कि वादी श्री नरायण सिंह ने अधोहस्ताक्षरी के न्यायालय में एक आवेदन पत्र प्रस्तुत किया है कि उसने अपने बच्चों का नाम व जन्म 5242 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 तिथियां ग्राम पंचायत में दर्ज नहीं करवाई है अब वादी अपने बच्चों का नाम व जन्म तिथियां ग्राम पंचायत केदी के जन्म पंजीकरण रजिस्टर में दर्ज करवाना चाहता है जो कि निम्न प्रकार से हैः- क्रम सं0 नाम सम्बन्ध जन्म तिथि (1) अक्षय चौहान पुत्र 7-12-1993 (2) वैभव चौहान पुत्र 16-10-1995 इसलिए ग्राम पंचायत केदी, उप-तहसील नेरूवा, तहसील चौपाल की जनता को बजरिया इश्तहार सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त जन्म पंजीकरण बारे कोई आपाि हो तो वह दिनांक 30-11-15 को या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत आकर अपनी आपाि प्रस्तुत करें। अन्यथा आवेदन पत्र पर जन्म पंजीकरण आदेश पारित करके सचिव, ग्राम पंचायत केदी को आगामी कार्यवाही हेतु भेज दिया जायेगा।
आज दिनांक 30-10-2015 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत से जारी किया गया। मोहर।
अनिल चौहान,
उपमण्डलाधिकारी (ना0), चौपाल, जिला शिमला।
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In the Court of Shri Hemis Negi, H.A.S., Sub-Divisional Magistrate, Shimla (Urban),
District Shimla, Himachal Pradesh
Shri Jubbi Oraon s/o Shri Tempa Oraon, r/o P. K. Construction, Tata Hall Shimla,Tehsil . . Applicant. and District Shimla, H. P.
Versus
General Public . . Respondent.
Application under Section 13(3) of Birth and Death Registration Act, 1969.
Whereas Shri Jubbi Oraon s/o Shri Tempa Oraon, r/o P. K. Construction, Tata Hall Shimla,Tehsil and District Shimla, H. P. has applied for registration the name and date of birth of his sons namely Mr. Kushal Oraon (DOB 25-1-2003) and Mukal Oraon (DOB 15-8-2007) in the record of Municipal Corporation, Shimla, District Shimla.
Therefore, this proclamation, the general public is hereby informed that any person having any objection for entry as to date of birth mentioned above, may submit his objection in writing in this court on or before 8-12-2015 failing which no objection will be entertained after expiry of date and will be decided accordingly.
Given under my hand and seal of the Court on this 7th day of October, 2015.
Seal.
HEMIS NEGI, Sub-Divisional Magistrate,
Shimla (Urban), District Shimla.
5243 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937In the Court of Shri Hemis Negi, H.A.S., Sub Divisional Magistrate, Shimla (Urban),
District Shimla, Himachal Pradesh
Shri Ved Parkesh s/o Shri Jai Ram, r/o Village Malchi, P.O. Balghar, Tehsil Theog, District . . Applicant. Shimla
Versus
General Public . . Respondent.
Application under section 13(3) of Birth and Death Registration Act, 1969.
Whereas Shri Ved Parkesh s/o Shri Jai Ram, r/o Village Malchi, P.O. Balghar, Tehsil Theog, District Shimla H. P. has applied for registration the name and date of birth of his son namely Mr.Sahil Verma (DOB 12-06-2001) record of Municipal Corporation, Shimla,
Therefore, this proclamation, the General Public is hereby informed that any person having and objection for entry as to date of Birth mentioned above, may submit his objection in writing in this court on or before 5-12-2015 failing which no objection will be entertained after expiry of date and will be decided accordingly.
Given under my hand and seal of the Court on this 6th day of November, 2015.
Seal.
HEMIS NEGI, Sub-Divisional Magistrate, Shimla (Urban).
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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
श्री लोकेश पाल पुत्र श्री रणधीर सिंह, निवासी सैनवाला मुबारिकपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला . . वादी सिरमौर
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादी प्रकरण संख्या : 154/15
उनवान मुकद्दमा : प्रार्थना पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्री लोकेश पाल पुत्र श्री रणधीर सिंह, निवासी सैनवाला मुबारिकपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर ने एक प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करके निवेदन किया है कि आवेदक किन्हीं कारणों से अपनी स्वयं की जन्म तिथि 24-01-1993 का इन्द्राज निर्धारित अवधि के अन्दर सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज नहीं करवा पाया है। इस बारे आवेदक द्वारा एक ब्यान हल्फी भी पेश किया गया है तथा इस सम्बन्ध में दो गवाहों के शपथ पत्र भी आवेदक ने अपने प्रार्थना-पत्र के साथ संलग्न किये हैं। आवेदक ने ग्राम पंचायत सैनवाला मुबारिकपुर में अपनी उपर वर्णित जन्म तिथि 24-01-1993 को दर्ज करने का अनुरोध किया है। 5244 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को लोकेश पाल की जन्म तिथि ग्राम पंचायत सैनवाला मुबारिकपुर, तहसील पांवटा साहिब में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह मिति 28-11-2015 को या इससे पूर्व हमारे न्यायालय में हाजिर होकर लिखित अथवा मौखिक एतराज पेश कर सकता है। उक्त निश्चित तिथि के बाद कोई भी एतराज मान्य नहीं होगा और समझा जायेगा कि उक्त श्री लोकेश पाल की जन्म तिथि को ग्राम पंचायत में दर्ज करने बारे किसी को कोई एतराज नहीं है तथा नियमानुसार जन्म तिथि पंजीकरण के आदेश जारी कर दिये जायेंगे।
आज दिनांक 28-10-2015 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर (हि0 प्र0)।
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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
श्रीमती मसर बीबी पत्नी श्री सराजदीन, निवासी ग्राम थापलपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर . . वादिया
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादी प्रकरण संख्या : 158/15
उनवान मुकद्दमा : प्रार्थना पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्रीमती मसर बीबी पत्नी श्री सराजदीन, निवासी ग्राम थापलपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर ने एक प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करके निवेदन किया है कि आवेदिका किन्हीं कारणों से अपनी पुत्री मारिया की जन्म तिथि 20-10-2006 का इन्द्राज निर्धारित अवधि के अन्दर सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज नहीं करवा पाई है। इस बारे आवेदिका द्वारा एक ब्यान हल्फी भी पेश किया गया है तथा इस सम्बन्ध में दो गवाहों के शपथ पत्र भी आवेदिका ने अपने प्रार्थना-पत्र के साथ संलग्न किये हैं। आवेदिका ने ग्राम पंचायत पातलियों में अपनी उपर वर्णित पुत्री की जन्म तिथि 20-10-2006 को दर्ज करने का अनुरोध किया है।
अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को कु0 मारिया की जन्म तिथि ग्राम पंचायत पातलियों, तहसील पांवटा साहिब में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह मिति 28-11-2015 को या इससे पूर्व हमारे न्यायालय में हाजिर होकर लिखित अथवा मौखिक एतराज पेश कर सकता है। उक्त निश्चित तिथि के बाद कोई भी एतराज मान्य नहीं होगा और समझा जायेगा कि उक्त कु0 मारिया की जन्म तिथि को सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज करने बारे किसी को कोई एतराज नहीं है तथा नियमानुसार जन्म तिथि पंजीकरण के आदेश जारी कर दिये जायेंगे।
आज दिनांक 28-10-2015 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर (हि0 प्र0)।5245 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
श्रीमती मसर बीबी पत्नी श्री सराजदीन, निवासी ग्राम थापलपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर . . वादिया
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादी प्रकरण संख्या : 156/15
उनवान मुकद्दमा : प्रार्थना पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्रीमती मसर बीबी पत्नी श्री सराजदीन, निवासी ग्राम थापलपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर ने एक प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करके निवेदन किया है कि आवेदिका किन्हीं कारणों से अपने पुत्र मामसेन की जन्म तिथि 5-12-1997 का इन्द्राज निर्धारित अवधि के अन्दर सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज नहीं करवा पाई है। इस बारे आवेदिका द्वारा एक ब्यान हल्फी भी पेश किया गया है तथा इस सम्बन्ध में दो गवाहों के शपथ पत्र भी आवेदिका ने अपने प्रार्थना-पत्र के साथ संलग्न किये हैं। आवेदिका ने ग्राम पंचायत में अपने उपर वर्णित पुत्र की जन्म तिथि 5-12-1997 को दर्ज करने का अनुरोध किया है।
अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को श्री मामसेन की जन्म तिथि ग्राम पंचायत पातलियों, तहसील पांवटा साहिब में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह मिति 28-11-2015 को या इससे पूर्व हमारे न्यायालय में हाजिर होकर लिखित अथवा मौखिक एतराज पेश कर सकता है। उक्त निश्चित तिथि के बाद कोई भी एतराज मान्य नहीं होगा और समझा जायेगा कि उक्त श्री मामसेन की जन्म तिथि को सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज करने बारे किसी को कोई एतराज नहीं है तथा नियमानुसार जन्म तिथि पंजीकरण के आदेश जारी कर दिये जायेंगे।
आज दिनांक 28-10-2015 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर (हि0 प्र0)।
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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
श्रीमती मसर बीबी पत्नी श्री सराजदीन, निवासी ग्राम थापलपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर . . वादिया
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादी प्रकरण संख्या : 157/15
उनवान मुकद्दमा : प्रार्थना पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्रीमती मसर बीबी पत्नी स्व0 श्री सराजदीन, निवासी ग्राम थापलपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर ने एक प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करके निवेदन किया है कि आवेदिका किन्हीं कारणों से अपने पुत्र बीरू की 5246 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 जन्म तिथि 5-2-2002 का इन्द्राज निर्धारित अवधि के अन्दर सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज नहीं करवा पाई है। इस बारे आवेदिका द्वारा एक ब्यान हल्फी भी पेश किया गया है तथा इस सम्बन्ध में दो गवाहों के शपथ पत्र भी आवेदिका ने अपने प्रार्थना-पत्र के साथ संलग्न किये हैं। आवेदिका ने ग्राम पंचायत पातलियों में अपने उपर वर्णित पुत्र की जन्म तिथि को दर्ज करने का अनुरोध किया है।
अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को बीरू की जन्म तिथि ग्राम पंचायत पातलियों, तहसील पांवटा साहिब में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह मिति 28-11-2015 को या इससे पूर्व हमारे न्यायालय में हाजिर होकर लिखित अथवा मौखिक एतराज पेश कर सकता है। उक्त निश्चित तिथि के बाद कोई भी एतराज मान्य नहीं होगा और समझा जायेगा कि उक्त बीरू की जन्म तिथि को सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज करने बारे किसी को कोई एतराज नहीं है तथा नियमानुसार जन्म तिथि पंजीकरण के आदेश जारी कर दिये जायेंगे।
आज दिनांक 28-10-2015 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर (हि0 प्र0)।
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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
श्रीमती मसर बीबी पत्नी श्री सराजदीन, निवासी ग्राम थापलपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर . . वादिया
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादी प्रकरण संख्या : 155/15
उनवान मुकद्दमा : प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्रीमती मसर बीबी पत्नी श्री सराजदीन निवासी ग्राम थापलपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर ने एक प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करके निवेदन किया है कि आवेदिका किन्हीं कारणों से अपने पुत्र सुलेमान की जन्म तिथि 6-3-1997 का इन्द्राज निर्धारित अवधि के अन्दर सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज नहीं करवा पाई है। इस बारे आवेदिका द्वारा एक ब्यान हल्फी भी पेश किया गया है तथा इस सम्बन्ध में दो गवाहों के शपथ पत्र भी आवेदिका ने अपने प्रार्थना-पत्र के साथ संलग्न किये हैं। आवेदिका ने ग्राम पंचायत पातलियों में अपने उपर वर्णित पुत्र की जन्म तिथि 6-3-1997 को दर्ज करने का अनुरोध किया है।
अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को सुलेमान की जन्म तिथि ग्राम पंचायत पातलियों, तहसील पांवटा साहिब में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह मिति 28-11-2015 को या इससे पूर्व हमारे न्यायालय में हाजिर होकर लिखित अथवा मौखिक एतराज पेश कर सकता है। उक्त निश्चित तिथि के बाद कोई भी एतराज मान्य नहीं होगा और समझा जायेगा कि उक्त सुलेमान की जन्म तिथि को सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज करने बारे किसी को कोई एतराज नहीं है तथा नियमानुसार जन्म तिथि पंजीकरण के आदेश जारी कर दिये जायेंगे।
आज दिनांक 28-10-2015 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर (हि0 प्र0)।5247 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
श्री कुलदीप सिंह पुत्र श्री गौरी दा, निवासी ग्राम भारापुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर
. . वादी
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादी प्रकरण संख्या : 152/15
उनवान मुकद्दमा : प्रार्थना पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्री कुलदीप सिंह पुत्र श्री गौरी दा, निवासी ग्राम भारापुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर ने एक प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करके निवेदन किया है कि आवेदक किन्हीं कारणों से अपनी स्वयं की जन्म तिथि 15-2-1989 का इन्द्राज निर्धारित अवधि के अन्दर सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज नहीं करवा पाया है। इस बारे आवेदक द्वारा एक ब्यान हल्फी भी पेश किया गया है तथा इस सम्बन्ध में दो गवाहों के शपथ पत्र भी आवेदक ने अपने प्रार्थना-पत्र के साथ संलग्न किये हैं। आवेदक ने ग्राम पंचायत रामपुर भारापुर में अपनी उपर वर्णित जन्म तिथि 15-2-1989 को दर्ज करने का अनुरोध किया है।
अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को कुलदीप सिंह की जन्म तिथि ग्राम पंचायत रामपुर भारापुर, तहसील पांवटा साहिब में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह मिति 28-11-2015 को या इससे पूर्व हमारे न्यायालय में हाजिर होकर लिखित अथवा मौखिक एतराज पेश कर सकता है। उक्त निश्चित तिथि के बाद कोई भी एतराज मान्य नहीं होगा और समझा जायेगा कि उक्त श्री कुलदीप सिंह की जन्म तिथि को सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज करने बारे किसी को कोई एतराज नहीं है तथा नियमानुसार जन्म तिथि पंजीकरण के आदेश जारी कर दिये जायेंगे। आज दिनांक 28-10-2015 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर (हि0 प्र0)।
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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
श्री संग्राम पुत्र श्री देवेन्द्र, निवासी ग्राम ब्यास, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादी प्रकरण संख्या : 151/15
उनवान मुकद्दमा : प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्री संग्राम पुत्र श्री देवेन्द्र, निवासी ग्राम ब्यास, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर ने एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करके निवेदन किया है कि आवेदक किन्हीं कारणों से अपने पुत्रों अभिषेक कुमार, अमन कुमार जिनकी जन्म तिथियां क्रमशः 26-4-2000 व 20-4-2005 है का इन्द्राज निर्धारित अवधि के अन्दर सम्बन्धित 5248 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 ग्राम पंचायत में दर्ज नहीं करवा पाया है। इस बारे आवेदक द्वारा एक ब्यान हल्फी भी पेश किया गया है तथा इस सम्बन्ध में दो गवाहों के शपथ पत्र भी आवेदक ने अपने प्रार्थना-पत्र के साथ संलग्न किये हैं। आवेदक ने ग्राम पंचायत कोटड़ी ब्यास में अपने उपर वर्णित पुत्रों की जन्म तिथियां 26-4-2000 व 20-4-2005 को दर्ज करने का अनुरोध किया है।
अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को अभिषेक व अमन कुमार की जन्म तिथि ग्राम पंचायत कोटड़ी ब्यास, तहसील पांवटा साहिब में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह मिति 28-11-2015 को या इससे पूर्व हमारे न्यायालय में हाजिर होकर लिखित अथवा मौखिक एतराज पेश कर सकता है। उक्त निश्चित तिथि के बाद कोई भी एतराज मान्य नहीं होगा और समझा जायेगा कि उक्त अभिषेक कुमार व अमन कुमार की जन्म तिथियों को सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज करने बारे किसी को कोई एतराज नहीं है तथा नियमानुसार जन्म तिथि पंजीकरण के आदेश जारी कर दिये जायेंगे।
आज दिनांक 28-10-2015 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर (हि0 प्र0)।
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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
श्री आरिफ अली पुत्र श्री रमजान मुहम्मद, निवासी ग्राम गुलाबगढ़, तहसील पांवटा साहिब, जिला . . वादी सिरमौर
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादी प्रकरण संख्या : 149/15
उनवान मुकद्दमा : प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्री आरिफ अली पुत्र श्री रमजान मुहम्मद, निवासी ग्राम गुलाबगढ़, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर ने एक प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करके निवेदन किया है कि आवेदक किन्हीं कारणों से अपनी स्वयं की जन्म तिथि 11-8-1989 का इन्द्राज निर्धारित अवधि के अन्दर सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज नहीं करवा पाया है। इस बारे आवेदक द्वारा एक ब्यान हल्फी भी पेश किया गया है तथा इस सम्बन्ध में दो गवाहों के शपथ पत्र भी आवेदक ने अपने प्रार्थना-पत्र के साथ संलग्न किये हैं। आवेदक ने ग्राम पंचायत कुण्डियों में अपनी उपर वर्णित जन्म तिथि 11-8-1989 को दर्ज करने का अनुरोध किया है।
अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को आरिफ अली की जन्म तिथि ग्राम पंचायत कुण्डियों, तहसील पांवटा साहिब में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह मिति 28-11-2015 को या इससे पूर्व हमारे न्यायालय में हाजिर होकर लिखित अथवा मौखिक एतराज पेश कर सकता है। उक्त निश्चित तिथि के बाद कोई भी एतराज मान्य नहीं होगा और समझा जायेगा कि उक्त आरिफ अली की जन्म तिथि को सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज करने बारे किसी को कोई एतराज नहीं है तथा नियमानुसार जन्म तिथि पंजीकरण के आदेश जारी कर दिये जायेंगे।5249 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 आज दिनांक 28-10-2015 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर (हि0 प्र0)।
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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
श्री सलमान खान पुत्र श्री लियाकत अली, निवासी रामपुर बंजारन, तहसील पांवटा साहिब, जिला . . वादी सिरमौर
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादी प्रकरण संख्या : 150/15
उनवान मुकद्दमा : प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्री सलमान खान पुत्र श्री लियाकत अली, निवासी रामपुर बंजारन, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर ने एक प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करके निवेदन किया है कि आवेदक किन्हीं कारणों से अपनी स्वयं की जन्म तिथि 7-2-1994 का इन्द्राज निर्धारित अवधि के अन्दर सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज नहीं करवा पाया है। इस बारे आवेदक द्वारा एक ब्यान हल्फी भी पेश किया गया है तथा इस सम्बन्ध में दो गवाहों के शपथ पत्र भी आवेदक ने अपने प्रार्थना-पत्र के साथ संलग्न किये हैं। आवेदक ने ग्राम पंचायत धौलाकुंआ में अपनी उपर वर्णित जन्म तिथि 7-2-1994 को दर्ज करने का अनुरोध किया है।
अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को सलमान खान की जन्म तिथि ग्राम पंचायत धौलाकुंआ, तहसील पांवटा साहिब में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह मिति 28-11-2015 को या इससे पूर्व हमारे न्यायालय में हाजिर होकर लिखित अथवा मौखिक एतराज पेश कर सकता है। उक्त निश्चित तिथि के बाद कोई भी एतराज मान्य नहीं होगा और समझा जायेगा कि उक्त सलमान खान की जन्म तिथि को सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज करने बारे किसी को कोई एतराज नहीं है तथा नियमानुसार जन्म तिथि पंजीकरण के आदेश जारी कर दिये जायेंगे।
आज दिनांक 28-10-2015 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर (हि0 प्र0)।
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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
श्री निसार मोहम्मद पुत्र श्री इल्मुदीन, निवासी सैनवाला मुबारिकपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला . . वादी सिरमौर
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादी5250 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 प्रकरण संख्या : 153/15 उनवान मुकद्दमा : प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्री निसार मोहम्मद पुत्र श्री इल्मुदीन, निवासी सैनवाला मुबारिकपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर ने एक प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करके निवेदन किया है कि आवेदक किन्हीं कारणों से अपनी पुत्री हीना की जन्म तिथि 1-1-2000 का इन्द्राज निर्धारित अवधि के अन्दर सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज नहीं करवा पाया है। इस बारे आवेदक द्वारा एक ब्यान हल्फी भी पेश किया गया है तथा इस सम्बन्ध में दो गवाहों के शपथ पत्र भी आवेदक ने अपने प्रार्थना-पत्र के साथ संलग्न किये हैं। आवेदक ने ग्राम पंचायत सैनवाला मुबारिकपुर में अपनी उपर वर्णित पुत्री की जन्म तिथि 1-1-2000 को दर्ज करने का अनुरोध किया है।
अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को कु0 हीना की जन्म तिथि ग्राम पंचायत सैनवाला मुबारिकपुर, तहसील पांवटा साहिब में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह मिति 28-11-2015 को या इससे पूर्व हमारे न्यायालय में हाजिर होकर लिखित अथवा मौखिक एतराज पेश कर सकता है। उक्त निश्चित तिथि के बाद कोई भी एतराज मान्य नहीं होगा और समझा जायेगा कि उक्त कु0 हीना की जन्म तिथि को सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज करने बारे किसी को कोई एतराज नहीं है तथा नियमानुसार जन्म तिथि पंजीकरण के आदेश जारी कर दिये जायेंगे।
आज दिनांक 28-10-2015 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर (हि0 प्र0)।
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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
श्रीमती मसर बीबी पत्नी श्री सराजदीन, निवासी ग्राम थापलपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर . . वादिया
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादी प्रकरण संख्या : 159/15
उनवान मुकद्दमा : प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्रीमती मसर बीबी पत्नी श्री सराजदीन, निवासी ग्राम थापलपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर ने एक प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करके निवेदन किया है कि आवेदिका किन्हीं कारणों से अपने पुत्र अर्शफ अली की जन्म तिथि 10-2-1995 का इन्द्राज निर्धारित अवधि के अन्दर सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज नहीं करवा पाई है। इस बारे आवेदिका द्वारा एक ब्यान हल्फी भी पेश किया गया है तथा इस सम्बन्ध में दो गवाहों के शपथ पत्र भी आवेदिका ने अपने प्रार्थना-पत्र के साथ संलग्न किये हैं। आवेदिका ने ग्राम पंचायत पातलियों में अपने उपर वर्णित पुत्र की जन्म तिथि 10-2-1995 को दर्ज करने का अनुरोध किया है।
अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को अशरफ अली की जन्म तिथि ग्राम पंचायत पातलियों, तहसील पांवटा साहिब में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह मिति 28-11-2015 को या इससे पूर्व हमारे न्यायालय में हाजिर होकर लिखित अथवा मौखिक एतराज पेश कर सकता है। उक्त निश्चित तिथि के बाद कोई भी एतराज मान्य नहीं होगा और समझा जायेगा5251 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 कि उक्त अशरफ अली की जन्म तिथि को सम्बन्धित ग्राम पंचायत में दर्ज करने बारे किसी को कोई एतराज नहीं है तथा नियमानुसार जन्म तिथि पंजीकरण के आदेश जारी कर दिये जायेंगे।
आज दिनांक 28-10-2015 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
कार्यकारी दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर (हि0 प्र0)।
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विधि विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 9 नवम्बर, 2015
संख्याः एल.एल.आर,-डी(6)-24/2015-लेज.--हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 (1) के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, दिनांक 6-11-2015 को अनुमोदित हिमाचल प्रदेश अकाशी रज्जु मार्ग (संशोधन) अध्यादेश, 2015 (2015 का अध्यादेश संख्यांक 3) को संविधान के अनुच्छेद 348 (3) के अधीन उसके अंगे्रजी प्राधि—त पाठ सहित हिमाचल प्रदेश ई-राजपत्र में प्रकाशित करते हैं ।
आदेश द्वारा, (डॉ0 बलदेव सिंह) प्रधान सचिव विधि ।
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2015 का हिमाचल प्रदेश अध्यादेश संख्यांक 3 हिमाचल प्रदेश आकाशी रज्जु मार्ग (संशोधन) अध्यादेश, 2015
भारत गणराज्य के छियासठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित।
हिमाचल प्रदेश आकाशी रज्जु मार्ग अधिनियम, 1968 (1969 का अधिनियम संख्यांक 7) का और संशोधन करने के लिए अध्यादेश।
हिमाचल प्रदेश विधान सभा सत्र में नहीं हैं और राज्यपाल का यह समाधान हो गया है कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान है जिनके कारण उनके लिए तुरन्त कार्रवाई करना आवश्यक हो गया है;
अतः राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 213 के खण्ड (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, निम्नलिखित अध्यादेश प्रख्यापित करते हैंः-
1. स्ांक्षिप्त नाम.--इस अध्यादेश का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश आकाशी रज्जु मार्ग (संशोधन) अध्यादेश, 2015 है।
2. धारा 2 का संशोधन.--हिमाचल प्रदेश आकाशी रज्जु मार्ग अधिनियम, 1968 (जिसे इसमें इसके पश्चात् ''मूल अधिनियम'' कहा गया है) की धारा 2 के खण्ड(त) में,-5252 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 (क) उप खण्ड (4) में, ''1956'' अंकों के स्थान पर ''2013'' अंक रखे जाएंगे; और (ख) उप खण्ड (5) में, ''भारतीय रेल अधिनियम, 1890 (1890 का 9)'' शब्दों, चिन्हों और अंकों के स्थान पर ''रेल अधिनियम, 1989 (1989 का 24)''शब्द, चिन्ह और अंक रखे जाएंगे। 3. धारा 5 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 5 में, ''भू-अर्जन अधिनियम, 1894 (1894 का 1)''शब्दों, चिन्हों और अंको के स्थान पर ''भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्थवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 ( 2013 का 30)''शब्द, चिन्ह और अंक रखे जाएंगे।
4. धारा 6का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 6 की उपधारा (4)के खण्ड (xiii)के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड रखा जाएगा, अर्थात्ः-
''(xiii-क) लोक निजी भागीदारी (पीपीपी) पद्धति के अधीन निर्मित की जाने वाली रज्जुमार्ग परियोजनाओं की दशा में, मकानाें या भवनों के छत शिखर और केबिन के आधार के बीच न्यूनतम 10 मीटर का हेडवे;''।
5. नई धारा 18-क का अन्तः स्थापन.--मूल अधिनियम की धारा 18 के पश्चात् निम्नलिखित धारा अन्तः स्थापित की जाएगी, अर्थात्ः-
''18-क. लोक निजी भागीदारी तथा बनाओं चलाओ और अन्तरित करो रज्जु मार्ग परियोजनाओं की भाड़ा दरों (फेअॅर रेटस) का नियतन-(1) राज्य सरकार, विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर, लोक निजी भागीदारी (पीपीपी) तथा बनाओ चलाओ और अन्तरित करो (बीओटी) पद्धति के अधीन निर्मित रज्जु मार्ग परियोजनाओं के लिए भाड़ा दरों (फेअॅर रेटस) की अधिकतम सीमा नियत और अधिसूचित करेगी।
(2) इस धारा के अधीन भाड़ा दरों (फेअॅर रेटस) के नियतन के लिए किया गया प्रत्येक आवेदन, ऐसे आवेदन की प्राप्ति की तारीख से नब्वे दिन की अवधि के भीतर विनिश्चित किया जाएगा, ऐसा न होनेे पर आवेदन को भाड़ा दरों (फेअॅर रेटस) के नियतन के लिए स्वीकृत किया गया समझा जाएगा।''।
6. नई धारा 20-ख का अन्तःस्थापन.--मूल अधिनियम की धारा 20-क के पश्चात् निम्नलिखित धारा अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थातः-
''20-ख. बीमा रक्षण-(1) किसी दुर्घटना या अनिष्ट की दशा में संप्रवर्तक, लोक निजी भागीदारी (पीपीपी) तथा बनाओ चलाओ और अन्तरित करो (बीओटी) पद्धति के अधीन निर्मित रज्जु मार्ग परियोजनाओं की आकाशी रज्जु मार्ग सेवाएं प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को ऐसी रीति में, जैसी विहित की जाए, विस्तृत बीमा रक्षण प्रदान करेगा :
परन्तु राज्य सरकार ऐसी रज्जु मार्ग परियोजनाओं में हुई किसी दुर्घटना या अनिष्ट की बाबत किसी दावे के लिए दायी नहीं होगी।
(2) विस्तृत बीमा की दर विशेषज्ञ समिति के परामर्श पर राज्य सरकार द्वारा विनिश्चित की जाएगी।''।
7. धारा 30 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 30 में, ''भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 (1894 का 1) के भाग 7 केे उपबंधों के अधीन ऐसी भूमि का अर्जन कर सकेगी चाहे उक्त संप्रवर्तक भूमि अर्जन अधिनियम में यथा परिभाषित कम्पनी हो या न हो'' शब्दों, चिन्हों और अंकों के स्थान पर ''भूमि अर्ज़न, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 (2013 का 30) के5253 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 उपबन्धों के अधीन ऐसी भूमि का अर्जन कर सकेगी चाहे उक्त संप्रर्वतक उक्त अधिनियम में यथापरिभाषित कम्पनी हो या न हो'' शब्द, चिन्ह और अंक रखे जाएंगे।
(आचार्य देवव्रत) राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश। (डॉ0 बलदेव सिंह) प्रधान सचिव (विधि)
शिमलाः तारीखः....................... 2015
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AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT
H.P. ORDINANCE NO. 3 OF 2015 THE HIMACHAL PRADESH AERIAL ROPEWAYS ( AMENDMENT) ORDINANCE, 2015
Promulgated by the Governor of Himachal Pradesh in the Sixty-sixth Year of the Republic of India.
An Ordinance further to amend the Himachal Pradesh Aerial Ropeways Act, 1968(Act No.
7 of 1969).
WHEREAS, the Legislative Assembly of Himachal Pradesh is not in session and the Governor is satisfied that circumstances exist which render it necessary for him to take immediate action;
NOW, THEREFORE, in exercise of the powers conferred by clause(1) of article 213 of the Constitution, the Governor is pleased to promulgate the following Ordinance:—
1. Short title.—This Ordinance may be called the Himachal Pradesh Aerial Ropeways (Amendment) Ordinance, 2015.
2. Amendment of section 2.—In section 2 of the Himachal Pradesh Aerial Ropeways Act, 1968 (hereinafter referred to as "principal Act"), in clause (k),-
(a) in sub-clause(iv), for the figures "1956", the figures "2013" shall be substituted; and (b) in sub-clause(v), for the words, figures and signs, "Indian Railways Act, 1890(9 of 1890)", the words figures and signs "Railways Act, 1989 (24 of 1989)" shall be substituted.
3. Amendment of section 5.—In section 5 of the principal Act, for the words, figures and signs, " of section 4 of the Land Acquisition Act, 1894(1 of 1894)", the words, figures and signs "the Right to Fair Compensation and Transparency in the Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013(30 of 2013)" shall be substituted.
5254 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 4. Amendment of section 6.—In section 6 of the principal Act, in sub-section (4), after clause(xiii), the following clause shall be inserted, namely:—
"(xiii-a) the minimum headway of 10 meters between the rooftop of the houses or buildings and base of the cabin, in the case of ropeway projects to be build under Public Private Partnerships(PPP) mode;".
5. Insertion of new section 18-A.—After section 18 of the principal Act, the following section shall be inserted , namely:—
"18-A. Fixation of fare rates of Public Private Partnership and Built Operate and Transfer Ropeway Projects:—
(1) The State Government, on the recommendations of the Expert Committee, shall fix and notify the maximum limit of the fare rates for the Ropeway Projects build under Public Private Partnership(PPP) and Built Operate and Transfer(BOT) mode.
(2) Every application made under this section for fixation of fare rates shall be decided within a period of 90 days from the date of receipt of such application, failing which the application shall be deemed to have been accepted for fixation of fare rates. " 6. Insertion of new section 20-B.—After section 20-A of the principal Act, the following section shall be inserted, namely:—
"20-B. Insurance cover.—(1) In case of any accident or mishap, the promoter shall provide comprehensive insurance cover, in the manner as may be prescribed, to the persons availing aerial ropeway services of the Ropeway Projects built under Public Private Partnership(PPP) or Built Operate and Transfer (BOT) Mode:
Provided that the State Government shall not be liable for any claim on account of any accident or mishap in such Ropeway Projects.
(2) The rate of comprehensive insurance shall be decided by the State Government on the advice of the Expert Committee".
7. Amendment of section 30.—In section 30 of the principal Act, for the words, figures and signs, "Part VII of the Land Acquisition Act, 1894 (1 of 1894), whether the said promoter is or is not a company as defined in the Land Acquisition Act", the words, figures and signs "the Right to Fare Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 (30 of 2013 whether the said promoter is or is not a company as defined in the said Act" shall be substituted.
(DR. BALDEV SINGH) Pr. Secretary (LAW).
Shimla: Dated ……………, 20155255 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 मैं हिमाचल प्रदेश आकाशी रज्जुमार्ग (संशोधन) अध्यादेश, 2015 के उपर्युक्त अंग्रेजी अनुवाद को भारत के संविधान के अनुच्छेद 348(3) के अधीन राजपत्र हिमाचल प्रदेश में प्रकाशित किए जाने के लिए प्राधिकृत करता हूँ।
(आचार्य देवव्रत) राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश।
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माननीय राज्यपाल नेे हिमाचल प्रदेश आकाशी रज्जु मार्ग (संशोधन) अध्यादेश, 2015 के उपर्युक्त अंग्रेजी अनुवाद को भारत के संविधान के अनुच्छेद 348(3) के अधीन राजपत्र, हिमाचल प्रदेश में प्रकाशित किए जाने के लिए प्राधिकृत कर दिया है।
सचिव (विधि), हिमाचल प्रदेश सरकार।
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विधि विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 9 नवम्बर, 2015
संख्याः एल0एल0आर0-डी(6)-20/2015-लेज.-हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, भारत के संविधान के अनुच्छेद 200 के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दिनांक 6-11-2015 को अनुमोदित हिमाचल प्रदेश फल पौधशाला रजिस्ट्रीकरण और विनियमन विधेयक, 2015 (2015 का विधेयक संख्यांक 19) को वर्ष 2015 के अधिनियम संख्यांक 29 के रूप में संविधान के अनुच्छेद 348 (3) के अधीन उसके अंग्रेजी प्राधिकृत पाठ सहित हिमाचल प्रदेश ई-राजपत्र में प्रकाशित करते हैं।
आदेश द्वारा, (डा0 बलदेव सिंह) प्रधान सचिव (विधि)।
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हिमाचल प्रदेश फल पौधशाला रजिस्ट्रीकरण और विनियमन अधिनियम, 2015
धाराओं का क्रम
धारा :
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ। 2. परिभाषाएं। 3. रजिस्ट्रीकरण और अनुज्ञप्ति। 4. अनुज्ञप्ति प्रदान करने या उसका नवीकरण करने के लिए आवेदन। 5. अनुज्ञप्ति का निलम्बन या रद्दकरण। 6. अनुज्ञप्ति का वापस किया जाना। 7. अनुुज्ञप्ति की दूसरी प्रति का जारी किया जाना। 8. अपील। 9. पुनरीक्षण। 5256 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 10. पौध सामग्री का प्रजनन के लिए उपयोग किया जाना। 11. अभिलेख और इसका निरीक्षण। 12. पौधों और वृक्षों को नाशीकीटों और रोगों से मुक्त रखा जाना। 13. पौधशालाओं का निरीक्षण। 14. पैक करना और उन पर लेबल लगाना। 15. रजिस्टर का अनुरक्षण। 16. विक्रय के लिए प्रजनित की जाने वाली किस्में। 17. राज्य सरकार की फल पौधों को राज्य में लाने और बाहर ले जाने को प्रतिषिद्ध करने या विनियमित करने की शक्ति।
18. शास्तियां। 19. अपराधों का संज्ञान। 20. इस अधिनियम के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने वाले व्यक्ति का लोक सेवक होना। 21. सद्भावपूर्वक कार्य करने वाले व्यक्तियों का संंरक्षण। 22. नियम बनाने की शक्ति। 23. शक्तियों का प्रत्यायोजन। 24. अनुज्ञप्ति के निलम्बन या रद्दकरण के लिए कोई प्रतिकर नहीं। 25. निरसन और व्यावृत्तियाँ।
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2015 का अधिनियम संख्यांक 29 हिमाचल प्रदेश फल पौधशाला रजिस्ट्रीकरण और विनियमन अधिनियम, 2015
(राज्यपाल महोदय द्वारा तारीख 6 नवम्बर, 2015 को यथाअनुमोदित)
हिमाचल प्रदेश में फल पौधशालाओं (साँकुर शाखा बैंक और ऊतक संवर्धन प्रयोगशाला सहित) का रजिस्ट्रीकरण और विनियमन करने के लिए विधि समेकित करने और पुनः अधिनियमित करने तथा उससे सम्बन्धित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबन्ध करने के लिए अधिनियम ।
भारत गणराज्य के छियासठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ.-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश फल पौधशाला रजिस्ट्रीकरण और विनियमन अधिनियम, 2015 है।
(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा नियत करे।
2. परिभाषाएं.-इस अधिनियम में, जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) ''अपील प्राधिकारी'' से हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा नियुक्त निदेशक उद्यान, हिमाचल प्रदेश अभिप्रेत है;
(ख) ''साँकुर शाखा बैंक'' से पौधशाला में और वृद्धि करने हेतु कलिका युक्त टहनी या किसी अन्य प्रजनक लेने के लिए अनुरक्षित, चिन्हित किए गए प्रजनन संतति वृक्ष और फलदार वृक्ष अभिप्रेत हैं;
(ग) ''सक्षम प्राधिकारी'' से इस अधिनियम के अधीन कृत्यों का पालन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा नियुक्त कोई प्राधिकारी अभिप्रेत है;
5257 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937(घ) धारा 10, 13 और 16 के प्रयोजन के लिए ''पदाभिहित अभिकरण'' से डॉ0 यशवन्त सिंह परमार औद्यानिकी और वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, सोलन अभिप्रेत है;
(ङ) ''निदेशक'' से निदेशक, उद्यान हिमाचल प्रदेश अभिप्रेत है;
(च) ''कठोरीकृत'' से बाह्य परिस्थितियों के लिए अनुकूल ऊतक संवर्धन जनित पौधे अभिप्रेत हैं;
(छ) ''कृषक की किस्म'' से ऐसी किस्म अभिप्रेत है जिसे कृषक द्वारा अपने खेत में उगाया और विकसित किया गया है;
(ज) ''फल पौधशाला'' से साँकुर शाखा बैंक या प्रजनन इकाई अथवा ऊतक संवर्धन इकाई अभिप्रेत है जहां पौधे नियमित रुप से प्रतिरोपण के लिए प्रजनित और विक्रीत किए जाते हैं;
(झ) ''निरीक्षण अधिकारी'' से फल पौधशालाओं के निरीक्षण के प्रयोजन के लिए निदेशक, उद्यान हिमाचल प्रदेश द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी अभिप्रेत है;
() ''अधिसूचना'' से राज्य सरकार द्वारा जारी और राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है;
(ट) ''पौधशाला पालक (नर्सरीमैन)'' से फल पौधशाला से पौध सामग्री के उत्पादन और विक्रय में लगा हुआ कोई व्यक्ति या अभिकरण अभिप्रेत है;
(ठ) ''राजपत्र'' से राजपत्र, हिमाचल प्रदेश अभिप्रेत है;
(ड) ''पौध सामग्री'' या ''प्रजनक'' से पौधे के उत्पादन के लिए प्रयुक्त कोई प्रजनन सामग्री अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत साँकुर शाखा या कलिका युक्त टहनी, मूलवृन्त, कलमें और बीज आदि भी हैं;
(ढ) ''विहित'' से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;
(ण) ''मूलवृन्त'' से औद्यानिक पौधा या उसका कोई भाग अभिप्रेत है जिस पर किसी औद्यानिक पौधे का साँकुर या कलम लगाई गई है;
(त) ''कलिका युक्त टहनी'' या ''साँकुर शाखा'' से पौधे का वह भाग अभिप्रेत है जिसका प्रयोग मूलवृन्त या वृक्ष पर कलम या साँकुर लगाने के लिए किया जाता है;
(थ) ''राज्य सरकार'' से हिमाचल प्रदेश सरकार अभिप्रेत है; और
(द) ''ऊतक संवर्धन'' से प्रयोगशाला में संवर्धन के माध्यम की अपुतित परिस्थितियों में पौधों के भागों से समरुप कृन्तकों का प्रजनन अभिप्रेत है।
3. रजिस्ट्रीकरण और अनुज्ञप्ति.-(1) कोई भी व्यक्ति, जिसकी अपनी फल पौधशाला है, सक्षम प्राधिकारी के पास स्वयं को या अपनी फर्म को रजिस्ट्रीकृत करवाए बिना और विहित प्ररुप में अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त किए बिना पौधशाला पौधों या पौध सामग्री का उत्पादन और विक्रय नहीं करेगा।
(2) जहाँ किसी व्यक्ति के पास राज्य के भीतर विभिन्न नगरों या गांवों में एक से अधिक साँकुर शाखा बैंक या फल पौधशाला है, वहां उसे प्रत्येक ऐसे साँकुर शाखा बैंक या फल पौधशाला की बाबत पृथक् अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त करनी होगी।
(3) साँकुर शाखा बैंक और फल पौधशालाओं को, चाहे परम्परागत हो या ऊतक संवर्धन जनित, सक्षम प्राधिकारी के पास रजिस्ट्रीकृत करवाना होगा और विहित प्ररुप में अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त करनी होगी। 5258 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 (4) कोई भी रजिस्ट्रीकृत और अनुज्ञप्तिधारी फल पौधशाला रजिस्ट्रीकृत और अनुज्ञप्तिधारी साँकुर शाखा बैंकों से ली गई पौध सामग्री का प्रयोग करने के सिवाय फल की फसलों का प्रजनन नहीं करेगा। 4. अनुज्ञप्ति प्रदान करने या उसका नवीकरण करने के लिए आवेदन.-(1) धारा 3 के अधीन अनुज्ञप्ति के लिए किया गया प्रत्येक आवेदन सक्षम प्राधिकारी को विहित प्ररुप में किया जाएगा।
(2) ऐसी शर्तों और निंर्बधनाें, जैसे विहित किए जाएं, के अध्यधीन यदि सक्षम प्राधिकारी का समाधान हो जाता है कि-
(क) फल पौधशाला, जिसकी बाबत अनुज्ञप्ति के लिए आवेदन किया गया है फल पौधों का उचित प्रजनन करने के लिए उपयुक्त है;
(ख) आवेदक के पास ऐसी फल पौधशाला या कोई ऊतक सवर्धन जनित कठोरीकृत पौध सामग्री का संचालन करने या स्थापित करने के लिए आवश्यक अवसंरचना और प्रसुविधाएं हैं;
(ग) आवेदक, इस बाबत सक्षम प्राधिकारी द्वारा अधिसूचित किसी अन्य शर्त को पूरा करता है;
और
(घ) आवेदक ने अनुज्ञप्ति के लिए विहित फीस संदत्त कर दी है और विहित प्रतिभूति, यदि कोई हो, भी दे दी है,
तो वह अनुज्ञप्ति के निबन्धन और शर्तों और इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के अनुसार आवेदक को साँकुर शाखा बैंक और या फल पौधशाला संचालित करने या स्थापित करने हेतु अनुज्ञप्ति प्रदान करेगा।
(3) इस धारा के अधीन प्रदत्त प्रत्येक अनुज्ञप्ति इसके जारी किए जाने की तारीख से पांच वर्ष की अवधि के लिए विधिमान्य होगी और इसका समय-समय पर ऐसी फीस के संदाय पर और ऐसी रीति में और ऐसी शर्तों के परिपूर्ण करने पर, जैसी विहित की जाएं, नवीकरण किया जा सकेगा।
(4) यदि सक्षम प्राधिकारी इस धारा के अधीन, किसी अनुज्ञप्ति को प्रदान करने या उसका नवीकरण करने से इन्कार करता है तो वह आवेदक को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करेगा और ऐसे इन्कार के कारणों को लिखित में अभिलिखित करेगा तथा आदेश की एक प्रति उसे संसूचित करेगा।
5. अनुज्ञप्ति का निलम्बन या रद्दकरण.-(1) सक्षम प्राधिकारी धारा 4 के अधीन प्रदत्त या नवीकृत किसी अनुज्ञप्ति को निलम्बित या रद्द कर सकेगा, यदि अनुज्ञप्तिधारी-
(क) न्यायनिर्णीत दिवालिया घोषित किया गया है; या
(ख) पूर्णतः या भागतः साँकुर शाखा बैंक या फल पौधशाला पर उसके नियन्त्रण से अलग हो गया है; या
(ग) के पास ऐसे साँकुर शाखा बैंक या फल पौधशाला का संचालन या कब्जा नहीं रहा है; या (घ) ऐसे प्राधिकारी की राय में, ऐसे साँकुर शाखा बैंक या फल पौधशाला के संचालन या कब्जे के योग्य नहीं है; या
(ङ) ने अनुज्ञप्ति के किसी निबन्धन या इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के किसी उपबन्ध का उल्लंघन किया है या उसका अनुपालन करने में असफल रहा है; या5259 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 (च) ने सक्षम प्राधिकारी या उस द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति को अपनी अनुज्ञप्ति या इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन अनुरक्षित किए जाने के लिए अपेक्षित रजिस्टरों या अन्य अभिलेख को अभ्यर्पित करने या प्रस्तुत करने से इन्कार कर दिया है। (2) उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश पारित करने से पूर्व, सक्षम प्राधिकारी अनुज्ञप्तिधारी को उन आधारों के सम्बन्ध में सूचित करेगा जिन पर उसके द्वारा कार्रवाई की जानी प्रस्तावित है और वह उसे सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करेगा।
(3) सक्षम प्राधिकारी उपधारा (1) के अधीन की जाने वाली कार्रवाई के लम्बित रहने के दौरान अनुज्ञप्ति को निलम्बित कर सकेगा।
(4) इस धारा के अधीन पारित प्रत्येक आदेश की प्रति अनुज्ञप्तिधारी को संसूचित की जाएगी। 6. अनुज्ञप्ति का वापस किया जाना.-(1) अनुज्ञप्तिधारी अपनी अनुज्ञप्ति के अवसान पर या इसके निलम्बित अथवा रद्द किए जाने के आदेश की प्राप्ति पर अनुज्ञप्ति को सक्षम प्राधिकारी को वापस कर देगा :
परन्तु ऐसा प्राधिकारी, ऐसे अवसान, निलम्बन या रद्दकरण के पश्चात् पौधशाला पालक (नर्सरीमैन) को उसकी फल पौधशाला के परिसमापन (बन्द करने) के लिए ऐसा युक्तियुक्त समय, जैसा वह उचित समझे, प्रदान कर सकेगा।
(2) यदि पौधशाला पालक (नर्सरीमैन) नियत अवधि के भीतर पौधशाला उत्पादन कार्य को बन्द नहीं करता है तो निरीक्षण करने वाले अधिकारियों द्वारा फल पौधशाला में उत्पादित पौध सामग्री या किसी कठोरीकृत ऊतक संवर्धन जनित पौध सामग्री को ऐसे पौधशाला पालक (नर्सरीमैन) के खर्चे पर नष्ट कर दिया जाएगा और इस प्रकार उपगत व्यय को इस अधिनियम की धारा 18 के अधीन शास्ति के अतिरिक्त भू-राजस्व के बकाया के रुप में उससे वसूल किया जाएगा।
7. अनुज्ञप्ति की दूसरी प्रति का जारी किया जाना.-यदि धारा 4 के अधीन प्रदत्त या नवीकृत अनुज्ञप्ति गुम, नष्ट, विकृत या क्षतिग्रस्त हो जाती है तो सक्षम प्राधिकारी, आवेदन पर और विहित फीस के संदाय पर, अनुज्ञप्ति की दूसरी प्रति जारी करेगा।
8. अपील.-(1) इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति प्रदान करने या नवीकरण करने से इन्कार करने वाले सक्षम प्राधिकारी के आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में तथा ऐसी अवधि के भीतर, जैसी विहित की जाए, अपील प्राधिकारी को अपील कर सकेगाः
परन्तु अपील प्राधिकारी विहित अवधि के अवसान के पश्चात् भी अपील ग्रहण कर सकेगा यदि समय के भीतर अपील दायर न करने के पर्याप्त कारण हैं।
(2) अपील प्राधिकारी अपीलार्थी को सुनने के पश्चात् अपील पर ऐसे आदेश पारित कर सकेगा जैसे वह उचित समझे।
(3) इस धारा के अधीन पारित कोई आदेश, धारा 9 के उपबन्धों के अध्यधीन, अंतिम होगा। 9. पुनरीक्षण.-(1) राज्य सरकार, इस अधिनियम के अधीन पारित किसी आदेश द्वारा व्यथित किसी व्यक्ति के आवेदन पर, ऐसे आदेश की वैधता और औचित्य के बारे में स्वयं के समाधान के प्रयोजन के लिए किसी भी समय मामले का अभिलेख मँंंगवा सकेगी और उसकी जाँच कर सकेगी तथा उस पर ऐसे आदेश कर सकेगी जैसे यह उचित समझेः
परन्तु राज्य सरकार ऐसे आदेश के सम्बन्ध में, जिसके विरूद्ध धारा 8 के अधीन की गई अपील लम्बित है या यदि अपील नहीं की गई है तो उसके लिए नियत समय की परिसीमा के अवसान (समाप्ति) से पूर्व, इस धारा के अधीन शक्तियों का प्रयोग नहीं करेगी।5260 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 (2) इस धारा के अधीन पारित आदेश अंतिम होगा। 10. पौध सामग्री का प्रजनन के लिए उपयोग किया जाना.-(1) रजिस्ट्रीकृत पौधशाला पालक (नर्सरीमैन) या पौधाशाला पालकों की फर्म कलिकायुक्त टहनी और मूलवृन्त की बाबत केवल ऐसी पौध सामग्री का उपयोग करेगी जिसकी पदाभिहित अभिकरण द्वारा समय-समय पर संस्तुति की जाए।
(2) रजिस्ट्रीकृत पौधशाला पालक (नर्सरीमैन) या पौधशाला पालकों की फर्म अच्छी नस्ल के फल वृक्षों के साँकुर शाखा बैंक रखेगी और उनका अनुरक्षण करेगा/करेगी और उनकी संख्या प्रति किस्म पच्चीस वर्ष की न्यूनतम सीमा के अध्यधीन, प्रजनित पौधों का औचित्य सिद्ध करे।
(3) प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत पौधशाला पालक (नर्सरीमैन) या पौधशाला पालकों की फर्म अपनी पौधशाला में निम्नलिखित सूचना दर्शाते हुए संकेतपट्ट प्रदर्शित करेगा/करेगीः-
(i) पौधशाला का नाम; (ii) अनुज्ञप्ति संख्या; और (iii) विधिमान्यता अवध्ािं।
11. अभिलेख और इसका निरीक्षण.-रजिस्ट्रीकृत पौधशाला पालक (नर्सरीमैन) पौध सामग्री के उद्भव या स्त्रोत का पूर्ण अभिलेख रखेगा और अभिलेख को निदेशक या निरीक्षण करने वाले अधिकारी की माँग पर निरीक्षण के लिए प्रस्तुत करेगा।
12. पौधों और वृक्षों को नाशीकीटों और रोगों से मुक्त रखा जाना.-पौधशाला के पौधों और वृक्षोंं की पैदावार (उत्पादन) के लिए प्रयुक्त पौधशाला प्लॉंट, ऊतक संवर्धन इकाई या साँकुर शाखा बैंक को ऐसे कीटों और रोगों, जो विहित किए जाएं, से मुक्त रखा जाएगा।
13. पौधशालाओं का निरीक्षण.-(1) निरीक्षण करने वाला अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए कि पौधशाला के पौधों की पैदावार (उत्पादन) के लिए प्रयुक्त पौधशाला प्लॉंट, ऊतक संवर्धन इकाई या साँकुर शाखा बैंक को कीेटों, नाशीकीटों और रोगों से मुक्त रखा गया है, पौधशालाओं का समय-समय पर निरीक्षण कर सकेगा। वह पौधशाला पालक (नर्सरीमैन) को संदिग्ध पौधों के नमूनों को नाशीकीटों की पहचान के लिए पदाभिहित अभिकरण को भेजे जाने के साथ-साथ विहित अवधि के भीतर संक्रमित या कीटाणुग्रस्त पौध सामग्री को हटाए जाने या नष्ट करने के लिए निदेश दे सकेगा।
(2) पौधशाला पालक (नर्सरीमैन) लिखित में ऐसे निदेश की प्राप्ति पर, विहित अवधि के भीतर, संदिग्ध पौध सामग्री को नाशीकीटों की पहचान के लिए पदाभिहित अभिकरण को भेजेगा और ऐसे पौधों या वृक्षों को विहित अवधि के भीतर हटाएगा या नष्ट करेगा, ऐसा न होने पर निरीक्षण करने वाला अधिकारी पौधशाला पालक (नर्सरीमैन) के खर्चे पर उनकी पहचान करने के लिए उन्हें भिजवाएगा, हटवाएगा और नष्ट करवाएगा तथा इस प्रकार उपगत व्यय को पौधशाला पालक (नर्सरीमैन) से भू-राजस्व के बकाया के रुप में वसूल किया जाएगा।
(3) यदि पौधशाला पालक (नर्सरीमैन) उपधारा (1) और (2) के अधीन निरीक्षण करने वाले अधिकारी द्वारा दिए गए निदेशों का अनुसरण करने में असफल रहता है तो वह अधिनियम की धारा 18 के अधीन दण्डित किए जाने के लिए भी दायी होगा।
14. पैक करना और उन पर लेबल लगाना.-(1) पौध सामग्री से युक्त पैकेज या डिब्बे (कन्टेनर) पर पौधशाला पालक (नर्सरीमैन) का नाम और रजिस्ट्रीकरण संख्या उसकी मुहर सहित अंकित की जाएगी और विक्रीत प्रकार और किस्म को निर्दिष्ट करने हेतु सुभिन्नतया लेबल लगाया जाएगा।
(2) यदि पैकेज या डिब्बे (कन्टेनर) में एक से अधिक प्रकार या किस्म के पौधे रखे गए हैं तो प्रत्येक पृथक पौधे पर लेबल लगाया जाएगा।5261 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 (3) लेबल पर मूलवृन्त और कलिकायुक्त टहनी का नाम लिखा जाएगा।
15. रजिस्टर का अनुरक्षण.-(1) प्रत्येक पौधशाला पालक (नर्सरीमैन) विहित प्ररूप में एक रजिस्टर अनुरक्षित करेगा जिसमें विक्रीत पौध सामग्री, क्रेता का नाम और पूरा पता अंतर्विष्ट होगा जिसे निरीक्षण करने वाले अधिकारी (अधिकारियों) द्वारा सत्यापित किया जा सकेगा।
(2) रजिस्टर को पौधशाला पालक (नर्सरीमैन) द्वारा संव्यवहार की समाप्ति की तारीख से कम से कम दस वर्ष के लिए अनुरक्षित किया जाएगा।
16. विक्रय के लिए प्रजनित की जाने वाली किस्में.-(1) विक्रय के लिए प्रजनित किस्में विशुद्ध प्रकार की होंगी और वही होंगी जिन्हें उद्यान विभाग, हिमाचल प्रदेश या पदाभिहित अभिकरण द्वारा संस्तुत या अनुमोदित किया गया हो।
(2) यदि कतिपय किस्म या किस्में आयात की गई हैं या प्रजनन के लिए आशयित हैं तो ऐसी किस्मों की पूर्ण विशिष्टियाँ, प्रश्नगत किस्म का विक्रय करने से पूर्व निदेशक या इस निमित्त उस द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी को दिखाई जाएंगी और उस द्वारा अनुमोदित की जाएगी।
(3) कोई भी रजिस्ट्रीकृत पौधशाला पालक (नर्सरीमैन) या कृषक, कृषक द्वारा उसकी अपनी सम्पदा पर विकसित की गई कृषक की किस्म की प्रजनन सामग्री का उपयोग नहीं करेगा, यदि इसे पदाभिहित अभिकरण द्वारा संस्तुत नहीं किया गया है और जो पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 के अधीन रजिस्ट्रार जनरल के पास सम्यक् रुप से रजिस्ट्रीकृत नहीं है।
(4) यदि पौधशाला पालक (नर्सरीमैन) उपधारा (1), (2) या (3) के अधीन दिए गए निदेशों का अनुपालन नहीं करता है तो वह अधिनियम की धारा 18 के अधीन दण्डित किए जाने के लिए दायी होगा। (5) विक्रेता, पौधशाला अनुज्ञप्ति की मूल प्रति जब भी निरीक्षण करने वाले अधिकारी द्वारा माँगी जाए उसे प्रस्तुत करेगा। संदेह की दशा में निरीक्षण करने वाला अधिकारी पौध सामग्री को अधिहृत (जब्त) कर सकेगा।
17. राज्य सरकार की फल पौधों को राज्य में लाने और बाहर ले जाने को प्रतिषिद्ध करने या विनियमित करने की शक्ति.-(1) सरकार, अधिसूचना द्वारा, ऐसे निंर्बधनों और शर्तों, जैसी यह अधिरोपित करे, के अध्यधीन, केन्द्रीय सरकार द्वारा यथा परिभाषित सीमा-शुल्क सीमांत से अन्यथा, सक्षम प्राधिकारी द्वारा यथाघोषित अज्ञात वंशावली या किसी संक्रामक अथवा सांसर्गिक रोग या नाशीकीट से प्रभावित किसी पौध सामग्री का राज्य में लाना या राज्य से बाहर ले जाना अथवा राज्य में वहन करना प्रतिषिद्ध या विनियमित कर सकेगी।
(2) जो कोई उपधारा (1) के उपबन्धों का उल्लंघन करता है, अधिनियम की धारा 18 के अधीन दण्डित किए जाने हेतु दायी होगा और निरीक्षण करने वाला अधिकारी संदिग्ध पौध सामग्री को अधिहृत (जब्त) और नष्ट कर सकेगा। इस प्रयोजन के लिए निरीक्षण करने वाला अधिकारी पुलिस की सहायता ले सकेगा।
18. शास्तियां.-(1) जो कोई इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमों के किसी भी उपबन्ध का उल्लंघन करता है अथवा ऐसे किसी उपबन्ध या नियम के उल्लंघन का प्रयत्न करता है या उल्लंघन का दुष्प्रेरण करता है तो वह दोषसिद्धि पर कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पचास हजार रूपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से दण्डनीय होगा।
(2) इस अधिनियम के अधीन अपराध करने वाला यदि कोई व्यक्ति कम्पनी है तो कम्पनी, और अपराध के किए जाने के समय इसके कारबार के संचालन के लिए कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी प्रत्येक व्यक्ति भी, ऐसे अपराध के दोषी समझें जाएंगे और तद्नुसार अपने विरूद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :
5262 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को दण्ड का भागी नहीं बनाएगी, यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण करने के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी।
(3) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है तो वहां वह भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तद्नुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा।
(4) राज्य सरकार, इस अधिनियम के अधीन सक्षम प्राधिकारी को कतिपय अपराधों, जो राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाएं, का शमन करने हेतु इस शर्त के अध्यधीन, कि शमन की फीस तीस हजार रूपए से कम नहीं होगी, प्राधिकृत कर सकेगी।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) ''कम्पनी'' से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम इसके अन्तर्गत है; और
(ख) फर्म के सम्बन्ध में ''निदेशक'' से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है।
19. अपराधों का संज्ञान.-(1) कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी भी अपराध का संज्ञान, सक्षम प्राधिकारी के या सक्षम प्राधिकारी द्वारा साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी या किसी पुलिस अधिकारी, जो सहायक उप-निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो, के लिखित परिवाद (शिकायत) के सिवाय न लेगा।
(2) प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट से निम्नतर कोई न्यायालय, इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा।
20. इस अधिनियम के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने वाले व्यक्ति का लोक सेवक होना.-इस अधिनियम के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने वाले सभी व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझे जाएंगे।
21. सद्भावपूर्वक कार्य करने वाले व्यक्तियों का संरक्षण.-इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए नियमाेंं या किए गए आदेशों के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही राज्य सरकार या अन्य किसी व्यक्ति के विरूद्ध नहीं होगी।
22. नियम बनाने की शक्ति.-(1) राज्य सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित के लिए उपबन्ध कर सकेंगेः-
(क) इस अधिनियम द्वारा विहित करने के लिए अभिव्यक्त रूप से अपेक्षित या अनुज्ञात समस्त मामले;
(ख) पौधशाला पालकों को प्रदान की जाने वाली अनुज्ञप्तियों में अन्तःस्थापित की जाने वाली शर्तें और ऐसे आवेदनों और अनुज्ञप्तियों का प्ररुप;
(ग) इस अधिनियम के अधीन सक्षम प्राधिकारी द्वारा अपने कृत्यों के प्रयोग में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया;
5263 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937(घ) अनुज्ञप्तिधारियों द्वारा अनुरक्षित किए जाने वाले रजिस्टर, लेखा-पुस्तकें और अभिलेख तथा उनके अनुरक्षण की रीति और अवधि जिसमें और जिसके लिए वे अनुरक्षित किए जाएंगे;
(ङ) परिस्थितियाँ, जिनमें अनुज्ञप्तिधारियों से प्रतिभूति अपेक्षित होगी और उन द्वारा दी गई प्रतिभूति समपहृत की जा सकेगी और रीति, जिसमें ऐसे समपहरण के परिणामस्वरुप कोई भी देय राशि वसूल की जा सकेगी;
(च) साँकुर शाखा बैंक और/या फल-पौधशालाओं के रख-रखाव और विकास के लिए दक्षतापूर्ण संचालन;
(छ) उस औद्यानिकी पौध सामग्री का पता लगाना, निरीक्षण करना, प्रमाणन, वहन या नष्ट करने का ढंग जिसके सम्बन्ध में धारा 17 के अधीन अधिसूचना जारी की गई हो या किसी अन्य वस्तु का जिसका इनके साथ सम्पर्क या सामीप्य हो और उन अधिकारियों की शक्तियों और कर्त्तव्यों का विनियमन जो इस निमित्त नियुक्त किए जाएं;
(ज) धारा 8 और 9 के अधीन अपीलों/ पुनरीक्षणों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया और उनकी परिसीमा;
(झ) उन नाशीकीटों, रोगों और कीटों को विहित (की पहचान करना) करना जिनसे पौधशाला की पौध सामग्री को मुक्त रखा जाना अपेक्षित है; और
() पौधशालाओं और साँकुर शाखा बैंकों का निरीक्षण करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया।
(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम उसके बनाए जाने के पश्चात् यथाशक्यशीध्र विधान सभा के समक्ष जब यह सत्र्ा में हो, कुल चौहद दिन से अन्यून अवधि के लिए रखा जाएगा जो एक सत्र्ा या दो या दो से अधिक आनुक्रमिक सत्र्ाों में पूर्ण हो सकेगी और यदि उस सत्र्ा के, जिसमें इसे रखा जाना है, या उपरोक्त सत्र्ाों के अवसान से पूर्व विधान सभा उस नियम में कोई उपान्तरण करती है या यह विनिश्चय करती है कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् ऐसा नियम, यथास्थिति, ऐसे उपान्तरित रुप में ही प्रभावी होगा या वह निष्प्रभाव हो जाएगा तथापि नियम के ऐसे उपान्तरित या निष्प्रभावी होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
23. शक्तियों का प्रत्यायोजन.-राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन अपनी समस्त शक्तियों या उनमें से किसी को, नियम बनाने की शक्ति के सिवाय, अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी या प्राधिकरण को प्रत्यायोजित कर सकेगी।
24. अनुज्ञप्ति के निलम्बन या रद्दकरण के लिए कोई प्रतिकर नहीं.-जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अनुज्ञप्ति निलम्बित या रद्द की जाती है, तो अनुज्ञप्तिधारी उसके लिए न तो किसी प्रतिकर का हकदार होगा और न ही उस द्वारा अनुज्ञप्ति के लिए संदत्त किसी फीस के प्रतिदाय का हकदार होगा।
25. निरसन और व्यावृत्तियां.-हिमाचल प्रदेश फल पौधशाला रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 का एतद् द्वारा निरसन किया जाता हैः
परन्तु इस प्रकार निरसित अधिनियम के अधीन (जारी की गई किसी अनुज्ञप्ति, रजिस्ट्रीकृत की गई पौधशाला, जारी की गई अधिसूचना, दिए गए आदेश या निदेश और बनाए गए किसी नियम, प्रारभ्भ की गई या जारी रखी गई किसी कार्यवाही सहित) की गई कोई बात या कार्रवाई, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई समझी जाएगी।5264 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937
AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT
THE HIMACHAL PRADESH FRUIT NURSERIES REGISTRATION AND
REGULATION ACT, 2015
ARRANGEMENT OF SECTIONS
Sections:
1. Short title and commencement. 2. Definitions. 3. Registration and licence. 4. Application for grant or renewal of licence. 5. Suspension or cancellation of licence. 6. Return of licence. 7. Issue of duplicate licence. 8. Appeal. 9. Revision. 10. Plant material to be utilized for propagation. 11. Record and its inspection. 12. Plants and trees to be kept free from pests and diseases. 13. Inspection of nurseries. 14. Packages and their labelling. 15. Maintenance of register. 16. Varieties to be propagated for sale. 17. Power of State Government to prohibit or regulate the bringing into and taking out of the State fruit plants.
18. Penalties. 19. Cognizance of offences. 20. Person exercising powers under this Act to be public servant. 21. Protection of persons acting in good faith. 22. Power to make rules. 23. Delegation of powers. 24. No compensation for suspension or cancellation of licence. 25. Repeal and savings.
_________
Act No. 29 of 2015 THE HIMACHAL PRADESH FRUIT NURSERIES REGISTRATION AND
REGULATION ACT, 2015
(AS ASSENTED TO BY THE GOVERNOR ON 6TH NOVEMBER, 2015)
AN
ACT
to consolidate and re-enact a law providing for the registration and regulation of fruit
nurseries (including bud wood bank and tissue culture lab) in Himachal Pradesh and for matters
connected therewith or incidental thereto.
5265 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-sixth Year of the Republic of India as follows:-
1. Short title and commencement.— (1) This Act may be called the Himachal Pradesh Fruit Nurseries Registration and Regulation Act, 2015.
(2) It shall come into force on such date as the State Government may, by notification, appoint.
2. Definitions.—In this Act, unless there is anything repugnant in the subject or context,- (a) "Appellate Authority" means the Director of Horticulture, Himachal Pradesh, appointed by the State Government;
(b) "bud wood bank" means earmarked progeny trees and fruit trees maintained for taking scion wood or any other propagule for further multiplication in the nursery;
(c) "competent authority" means an authority appointed by the State Government, by notification, to perform the functions under this Act;
(d) "designated agency" for the purpose of sections 10, 13 and 16 means Dr. Y.S. Parmar University of Horticulture and Forestry, Nauni, Solan;
(e) "Director" means the Director of Horticulture, Himachal Pradesh;
(f) "hardened" means tissue culture raised plants adapted to outdoor conditions;
(g) "farmer's variety" means a variety which has been cultivated and evolved by the farmer in his field;
(h) "fruit nursery" means bud wood bank or propagation unit or tissue culture unit where plants are regularly propagated and sold for transplantation;
(i) "inspecting officer" means any officer authorized by the Director of Horticulture, Himachal Pradesh for the purpose of inspection of fruit nurseries;
(j) "notification" means a notification issued by the State Government and published in the Official Gazette;
(k) "nurseryman" means any individual or agency engaged in the production and sale of plant material from the fruit nursery;
(l) "Official Gazette" means the Rajpatra, Himachal Pradesh;
(m) "plant material" or "propagule" means any propagation material used in raising the plant and includes bud wood or scions, rootstocks, cuttings and seed etc.; (n) "prescribed" means prescribed by rules made under this Act;
(o) "rootstock" means the horticulture plant or part thereof on which any horticulture plant has been budded or grafted;
(p) "scion" or "bud wood" means the part of the plant which is used for grafting or budding a rootstock or a tree;
5266 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 (q) "State Government" means the Government of Himachal Pradesh; and(r) "tissue culture" means propagation of identical clones from plant parts under aseptic conditions on culture medium in the laboratory.
3. Registration and licence.—(1) No person who possesses a fruit nursery shall engage in the production and sale of nursery plants or plant material without getting himself or his firm registered with the competent authority and without obtaining a licence in the prescribed form.
(2) Where a person has more than one bud wood bank or fruit nursery in different towns or villages within the State, he shall have to obtain a separate licence in respect of such bud wood bank or fruit nursery.
(3) Bud wood bank and fruit nurseries either conventional or tissue culture raised shall have to be registered with the competent authority and a licence shall have to be obtained in the prescribed form.
(4) No registered and licensed fruit nursery shall engage in the propagation of fruit crops except by using the plant material from the registered and licensed bud wood banks.
4. Application for grant or renewal of licence.—(1) Every application for a licence under section 3 shall be made to the competent authority in the prescribed form.
(2) Subject to such conditions and restrictions as may be prescribed, if the competent authority is satisfied that -
(a) the fruit nursery is suitable for the proper propagation of fruit plants in respect of which the licence has been applied for;
(b) the applicant has necessary infrastructure and facilities to conduct or establish any such fruit nursery or any tissue culture raised hardened plant material;
(c) the applicant fulfils any other conditions notified by the competent authority in this behalf; and
(d) the applicant has paid the fee prescribed for the licence and has also furnished the prescribed security, if any,
it shall grant a licence to the applicant for conducting or establishing a bud wood bank and or fruit nursery in accordance with the terms and conditions of the licence and the provisions of this Act and the rules made thereunder.
(3) Every licence granted under this section shall be valid for a period of five years from the date of its issue and it may be renewed from time to time on payment of such fee and in such manner and on fulfilment of such conditions as may be prescribed.
(4) If the competent authority refuses to grant or renew a licence under this section, it shall give a reasonable opportunity of being heard and record its reasons for such refusal in writing and communicate a copy of the order to the applicant.
5. Suspension or cancellation of licence.—(1) The competent authority may suspend or cancel any licence granted or renewed under section 4 if, the licensee –5267 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 (a) has been adjudicated an insolvent; or (b) has parted, in whole or in part, with his control over the bud wood bank or fruit nursery; or
(c) has ceased to conduct or possess such bud wood bank or fruit nursery; or (d) in the opinion of such authority is not able to conduct or possess such bud wood bank or fruit nursery; or
(e) has contravened, or failed to comply with any of the terms of the licence or any of the provisions of this Act or the rules made thereunder; or
(f) has refused to surrender or produce his licence or the registers and other record required to be maintained under this Act or the rules made thereunder to the competent authority or any person authorized by it.
(2) Before passing an order under sub-section (1), the competent authority shall intimate to the licensee the grounds on which it proposes to take action and give him a reasonable opportunity of being heard.
(3) The competent authority may suspend the licence during pendency of action to be taken under sub-section (1).
(4) A copy of every order passed under this section shall be communicated to the licensee.
6. Return of licence.—(1) On the expiry of his licence or on the receipt of an order suspending or cancelling it, the licensee shall return the licence to the competent authority:
Provided that such authority may, after such expiration, suspension or cancellation, give such reasonable time as it thinks fit to the nurseryman to enable him to wind up his fruit nursery.
(2) If the nurseryman does not stop nursery production work within the stipulated period, the plant material produced in the fruit nursery or any hardened tissue culture raised plant material shall be destroyed by the inspecting officer at the cost of nurseryman and the expenditure so incurred shall be recovered from him as arrears of land revenue in addition to penalty under section 18 of the Act.
7. Issue of duplicate licence.—If a licence granted or renewed under section 4 is lost, destroyed, mutilated or damaged, the competent authority shall, on application and payment of prescribed fee, issue a duplicate licence.
8. Appeal.—(1) Any person aggrieved by an order of the competent authority, refusing the grant or renewal of licence under this Act may appeal to the Appellate Authority in such form and in such manner and within such period as may be prescribed:
Provided that the Appellate Authority may, admit an appeal after the expiry of prescribed period, if there are sufficient reasons for not filing the appeal within time.
(2) The Appellate Authority may, after hearing the appellant, pass such orders on the appeal as it thinks fit.
(3) An order passed under this section shall, subject to the provisions of section 9, be final.
5268 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 9. Revision.—(1) The State Government may, on the application of any person aggrieved by an order passed under this Act, at any time, for the purpose of satisfying itself as to the legality or propriety of such order, call for and examine the record of the case and may pass such orders thereon as it thinks fit:
Provided that the State Government shall not exercise the powers under this section, in respect of an order against which an appeal preferred under section 8 is pending or in case an appeal has not been preferred, before the expiry of the time limit thereof.
(2) An order passed under this section shall be final.
10. Plant material to be utilized for propagation.—(1) A registered nurseryman or firm of nurserymen shall utilize only such plant material in respect of scion and rootstock, as may be recommended from time to time by the designated agency.
(2) A registered nurseryman or firm of nurserymen shall have and maintain bud wood bank of good pedigree fruit trees and their number should justify the plants propagated subject to the minimum limit of twenty-five trees per variety.
(3) Every registered nurseryman or firm of nurserymen shall display a sign board in his nursery showing the following information:-
(i) Name of the Nursery;
(ii) License Number; and
(iii) Validity period.
11. Record and its inspection.—A registered nurseryman shall maintain a complete record of the origin or source of the plant material and shall produce the record for inspection on demand by the Director or an inspecting officer.
12. Plants and trees to be kept free from pests and diseases.— The nursery plot, tissue culture unit or bud wood bank used for the production of nursery plants and trees shall be kept free from such insects and diseases as may be prescribed.
13. Inspection of nurseries.—(1) The inspecting officer may inspect the nurseries from time to time, to ensure that the nursery plots, tissue culture unit and bud wood bank used for the production of nursery plants are kept free from insects, pests and diseases. He may direct the nurseryman to send suspected plant samples for identification of pests to a designated agency as well as to remove and destroy infected or infested plant material within the prescribed period.
(2) The nurseryman shall, on receipt of such direction in writing, send the suspected plant material to the designated agency for identification of pests and remove and destroy such plants or trees within the prescribed period, failing which the inspecting officer shall cause the same to be sent for identification of pests and removed and destroyed at the cost of the nurseryman and the expenditure so incurred shall be recovered from the nurseryman as a arrears of land revenue.
(3) If the nurseryman fails to follow the directions given by the inspecting officer under sub-sections (1) and (2), he shall also be liable to be punished under section 18 of the Act. 14. Packages and their labelling.—(1) The package or container containing the plant material shall bear the name and registration number of the nurseryman alongwith his seal and shall be distinctly labeled to designate the kind and variety sold.
5269 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937(2) In case the package or container contains plants of more than one kind or variety, each individual plant shall be labeled.
(3) The name of rootstock and scion shall be mentioned on the label.
15. Maintenance of register.—(1) Each nurseryman shall maintain a register in the prescribed form containing complete information regarding the plant material sold, name and complete address of the purchaser that may be verified by the inspecting officer.
(2) The register shall be maintained by the nurseryman for at least ten years after the date of the conclusion of the transaction.
16. Varieties to be propagated for sale.—(1) The varieties propagated for sale must be true to type and shall be those recommended or approved by the Department of Horticulture, Himachal Pradesh or designated agency.
(2) If a certain variety or varieties imported or intended for propagation, the full particulars of such varieties shall be shown to and approved by the Director or an officer authorized by him in this behalf before sale of the variety in question.
(3) No registered nurseryman or farmer shall utilize the propagating material of the farmer's variety, evolved by the farmer at his own estate, if it has not been recommended by the designated agency and duly registered with the Registrar General under the Protection of Plant Variety and Farmers' Rights Act, 2001.
(4) If the nurseryman does not follow the directions given under sub-sections(1), (2) or (3), he shall be liable to be punished under section 18 of the Act.
(5) The seller shall produce original copy of nursery licence as and when asked by the inspecting officer. In case of suspicion, the inspecting officer may confiscate the plant material.
17. Power of State Government to prohibit or regulate the bringing into and taking out of the State fruit plants.—(1) The State Government may, by notification, prohibit or regulate, subject to such restrictions and conditions as it may impose, the bringing into, or and taking out of the State, otherwise than across a customs frontier as defined by the Central Government, or transport within the State any plant material of unknown pedigree or affected by any infectious or contagious disease or pest as declared by the competent authority.
(2) Whoever contravenes the provisions of sub-section(1), shall be liable to be punished under section 18 of the Act, and the inspecting officer may confiscate and destroy suspected plant material. For this purpose the inspecting officer may seek police assistance.
18. Penalties.—(1) Whoever contravenes any of the provisions of this Act or any rules made thereunder, or attempts to contravene or abets the contravention of any such provision or rule, he shall, on conviction, be punished with imprisonment for a term which may extend to one year or with fine which may extend to fifty thousand rupees or with both.
(2) If the person committing an offence under this Act is a company, the company as well as every person in charge of, and responsible to the company for the conduct of its business at the time of the commission of the offence shall be deemed to be guilty of the offence, and shall be liable to be proceeded against and punished accordingly:
5270 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 Provided that nothing contained in this sub-section shall render any such person liable to any punishment if he proves that the offence was committed without his knowledge or that he exercised all due diligence to prevent the commission of such offence.
(3) Notwithstanding anything contained in sub-section (2), where an offence under this Act has been committed by a company and it is proved that the offence has been committed with the consent or connivance of, or that the commission of the offence is attributable to any neglect on the part of any director, manager, secretary or other officer shall also be deemed to be guilty of that offence and shall be liable to be proceeded against and punished accordingly.
(4) The State Government may authorise the competent authority to compound certain offences under the Act which may be notified by the State Government, subject to condition that compounding fee shall not be less than thirty thousand rupees.
Explanation–for the purposes of this section –
(a) "company" means any body corporate and includes a firm or other association of individuals; and
(b) "Director", in relation to a firm, is a partner in the firm.
19. Cognizance of offences.—(1) No court shall take cognizance of an offence punishable under this Act, except upon complaint in writing, made by the competent authority or any other officer authorized in this behalf by the competent authority, by general or special order or by a Police Officer not below the rank of Assistant-Sub-Inspector.
(2) No Court subordinate to that of the Magistrate of Ist Class shall try any offence punishable under this Act.
20. Person exercising powers under this Act to be public servant.— All persons exercising powers under this Act shall be deemed to be public servants within the meaning of section 21 of the Indian Penal Code (45 of 1860).
21. Protection of persons acting in good faith.—No suit, prosecution or other legal proceeding shall lie against the State Government or against any person for anything which is in good faith done or intended to be done in pursuance of this Act or rules or orders made thereunder.
22. Power to make rules.—(1) The State Government may, by notification, make rules to carry out the purposes of this Act.
(2) In particular, and without prejudice to the generality of the foregoing power, such rules may provide for –
(a) all matters expressly required or allowed by this Act to be prescribed;
(b) the condition to be inserted in licences to be granted to nurseryman and the form of such applications and licences;
(c) the procedure to be followed by competent authority in the exercise of its functions under this Act;
(d) the register, books of accounts and records to be maintained by licensees and the manner in which and the period for which they shall be maintained;
5271 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937(e) the circumstances in which security may be required from licensees and the security furnished by them may be forfeited and the manner in which any sum falling due as a result of such forfeiture may be recovered;
(f) the efficient conduct for maintenance and development of the bud wood bank and/or the fruit nurseries;
(g) the detection, inspection, certification, method of transport or destruction of horticulture plant material in respect of which a notification has been issued under section 17 or any article which may have been in contact or proximity thereto and the regulation of the powers and duties of the officers who may be appointed in this behalf;
(h) the procedure to be followed in appeals/ revisions under sections 8 and 9 and limitation thereof;
(i) to prescribe pests, diseases and insects of which the nursery plant materials are required to be kept free; and
(j) the procedure to be followed in conducting inspections of the nurseries and bud wood banks.
(3) Every rule made under this Act shall be laid, as soon as may be after it is made, before the Legislative Assembly while it is in session, for a total period of not less than fourteen days which may be comprised in one session or in two or more successive sessions and if before the expiry of the session in which it is to be laid or the sessions aforesaid, the Assembly makes any modification in the rule or decides that the rule should not be made, the rule thereafter have effect only in such modified form or be of no effect, as the case may be, so, however, that any such modification or annulment shall be without prejudice to the validity of anything previously done under that rule.
23. Delegation of powers.—The State Government may, by notification in the Official Gazette, delegate to any officer or authority subordinate to it all or any of its powers under this Act, except the power to make rules.
24. No compensation for suspension or cancellation of licence.—Where any licence is suspended or cancelled under this Act, the licensee shall not be entitled to any compensation thereof, nor shall he be entitled to the refund of any fee paid by him for the licence.
25. Repeal and savings.—The Himachal Pradesh Fruit Nurseries Registration Act, 1973 is hereby repealed:
Provided that anything done or any action taken (including any licence issued, nursery registered, notification, order or direction issued, any rules made, proceedings commenced or continued) under the Act so repealed shall be deemed to have been issued, done or taken under the corresponding provisions of this Act.
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विधि विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 9 नवम्बर, 2015
संख्याः एल0एल0आर0-डी(6)-21/2015-लेज.-हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, भारत के संविधान के अनुच्छेद 200 के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दिनांक 6-11-2015 को अनुमोदित हिमाचल 5272 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937 प्रदेश (होटल और आवास गृह) विलास-वस्तुएं कर संशोधन विधेयक, 2015 (2015 का विधेयक संख्यांक 20) को वर्ष 2015 के अधिनियम संख्यांक 30 के रूप में संविधान के अनुच्छेद 348 (3) के अधीन उसके अंग्रेजी प्राधिकृत पाठ सहित हिमाचल प्रदेश ई-राजपत्र में प्रकाशित करते हैं।
आदेश द्वारा, (डा0 बलदेव सिंह) प्रधान सचिव (विधि)।
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2015 का अधिनियम संख्यांक 30 हिमाचल प्रदेश (होटल और आवास गृह) विलास-वस्तुएं कर संशोधन अधिनियम, 2015 (राज्यपाल महोदय द्वारा तारीख 6 नवम्बर, 2015 को यथाअनुमोदित)
हिमाचल प्रदेश (होटल और आवास गृह) विलास-वस्तुएं कर अधिनियम, 1979 (1979 का अधिनियम संख्यांक 15) का और संशोधन करने के लिए अधिनियम ।
भारत गणराज्य के छियासठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ.-(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश (होटल और आवास गृह) विलास-वस्तुएं कर संशोधन अधिनियम, 2015 है।
(2) यह 06 अगस्त, 2013 से प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा।
2. धारा 2 का संशोधन.-हिमाचल प्रदेश (होटल और आवास गृह) विलास-वस्तुएं कर अधिनियम, 1979 की धारा 2 में, हिमाचल प्रदेश (होटल और आवास गृह) विलास-वस्तुएं कर संशोधन अधिनियम, 2014 (2014 का अधिनियम संख्यांक 13) द्वारा यथा प्रतिस्थापित खण्ड (छछ) 6 अगस्त, 2013 से प्रतिस्थापित किया गया समझा जाएगा।
3. 2015 के हिमाचल प्रदेश अध्यादेश संख्यांक 2 का निरसन और व्यावृत्तियां.-(1) हिमाचल प्रदेश (होटल और आवास गृह) विलास-वस्तुएं कर संशोधन अध्यादेश, 2015 का एतद्द्वारा निरसन किया जाता है। (2) ऐसे निरसन के होते हुए भी इस प्रकार निरसित अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई समझी जाएगी।
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AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT
Act No. 30 of 2015 THE HIMACHAL PRADESH TAX ON LUXURIES (IN HOTELS AND LODGING HOUSES) AMENDMENT ACT, 2015
(AS ASSENTED TO BY THE GOVERNOR ON 6TH NOVEMBER, 2015 )
AN
ACT
further to amend the Himachal Pradesh Tax on Luxuries (In Hotels and Lodging Houses)
Act, 1979 (Act No.15 of 1979).
5273 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-sixth Year of the Republic of India as follows :—
1. Short title and commencement.— (1) This Act may be called the Himachal Pradesh Tax on Luxuries (In Hotels and Lodging Houses) Amendment Act, 2015.
(2) It shall be deemed to have come into force on 6th August, 2013.
2. Amendment of section 2.—In section 2 of the Himachal Pradesh Tax on Luxuries (In Hotels and Lodging Houses) Act, 1979, clause (gg) as substituted by the Himachal Pradesh Tax on Luxuries (In Hotels and Lodging Houses) Amendment Act, 2014 (Act No. 13 of 2014) shall be deemed to have been substituted with effect from 6th day of August, 2013.
3. Repeal of H.P. Ordinance No. 2 of 2015 and savings.—(1) The Himachal Pradesh Tax on Luxuries (In Hotels and Lodging Houses) Amendment Ordinance, 2015 is hereby repealed.
(2) Notwithstanding such repeal, anything done or any action taken under the Ordinance so repealed shall be deemed to have been done or taken under the corresponding provisions of this Act.
5274 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 10 नवम्बर, 2015/19 कार्तिक, 1937नियन्त्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, हिमाचल प्रदेश, शिमला-5 द्वारा मुद्रित तथा प्रकाशित इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरित राजपत्र, वैबसाइट http://rajpatrahimachal.nic.in पर उपलब्ध है एवम् ऑनलाइन सत्यापित किया जा सकता है