राजपत्र, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित सोमवार, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938
हिमाचल प्रदेश सरकार
TRANSPORT DEPARTMENT
NOTIFICATION
Shimla-2, the 7th April, 2016
No. TPT-F (1)-3/2015-I.—In continuation of this department Notification No. Tpt-F(1)- 4/1996-V-Loose dated 30.12.2014 the Governor, Himachal Pradesh in pursuance of the powers conferred under clause (iii) of proviso to sub rule (1) of rule 108 of the Central Motor Vehicle Rules, 1989 and all other powers enabling him in this behalf, is pleased to allow to use "Amber Light with Flasher" upon top front of the official vehicle of Mayor, Municipal Corporation, 8-राजपत्र/2016-11-04-2016 (145) 146 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 Dharamshala within his jurisdiction. This notification will be effective from the date of publication in H.P. Rajpatra (Extraordinary).
By order, (Sanjay Gupta), Principal Secretary (Transport).
___________
हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय
अधिसूचना
दिनांक : 4 अप्रैल, 2016
संख्याः वि0स0-विधायन-सरकारी विधेयक/1-11-2016.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2016 (2016 का विधेयक संख्यांक 3) जो आज दिनांक 4 अप्रैल, 2016 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।
हस्ताक्षरित/- सचिव, हि0 प्र0 विधान सभा।
-----------
2016 का विधेयक संख्यांक 3 हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2016
(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)
हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर अधिनियम, 2010 (2010 का अधिनियम संख्यांक 9) का और संशोधन करने के लिए विधेयक।
भारत गणराज्य के सड़सठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम.-- इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र मेंे माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) अधिनियम, 2016 है।
2. धारा 3 का संशोधन.--हिमाचल प्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर अधिनियम, 2010 (जिसे इसमें इसके पश्चात् ''मूल अधिनियम'' कहा गया है) की धारा 3 की उपधारा (4) के खण्ड (ii) में ''क्रम संख्या 6 और 7'' शब्दों और अंकों के स्थान पर ''क्रम संख्या 1 (क)'' शब्द, अंक और चिन्ह रखे जाएंगे। 3. नई धारा 4-क का अन्तःस्थापन.-- मूल अधिनियम की धारा 4 के पश्चात् निम्नलिखित नई धारा अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात् :-
147 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938''4-क. ई-कामर्स पर कर का उद्ग्रहण.-(1) धारा 3 में किसी बात के होते हुए भी अनुसूची-2 में विनिर्दिष्ट माल के स्थानीय क्षेत्र में ऑनलाइन क्रय या संव्यवहार के माध्यम से या ई-कामर्स के माध्यम से प्रवेश पर कर उद्गृहीत किया जाएगा।
(2) कर, माल के मूल्य पर, विहित रीति में उद्गृहीत किया जाएगा और आयातकर्ता की ओर से माल के भारसाधक व्यक्ति से संगृहीत किया जाएगा।"।
4. धारा 6-क का संशोधन.-- मूल अधिनियम की धारा 6-क में,-
(क) उपधारा (1) और (2) के स्थान पर निम्नलिखित उपधाराएं रखी जाएंगी, अर्थात् :-
''(1) प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यौहारी विवरणी को ऐसी रीति में दाखिल करेगा जैसी विहित की जाए।
(2) उपधारा (1) के अधीन विवरणी को दाखिल करने से पूर्व व्यौहारी यथाविहित प्रत्येक अवधि के लिए देय कर की सम्पूर्ण रकम जमा करेगा और ऐसे कर के संदाय का सबूत निर्धारण प्राधिकारी को देगा।''; और
(ख) उपधारा (3) में ''मासिक'' शब्द का लोप किया जाएगा।
------------
उद्देश्यों और कारणों का कथन
राज्य के भीतर डीजल और स्नेहकों का क्रय करने वाला व्यौहारी क्रमशः 16% और 13.75% की दर से मूल्य परिवर्धित कर का संदाय करता है। जब ऐसा व्यौहारी ऐसे ईंधन और स्नेहकों का उपयोग कराधेय माल के विनिर्माण या ऊर्जा के नियन्त्रित उत्पादन में करता है तो उसे क्रमशः 12% और 9.75% आगत कर प्रत्यय अनुज्ञात किया जाता है, क्योंकि हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा 11 की उपधारा (3) के द्वितीय परन्तुक के अनुसार, ईंधन और स्नेहकोंं पर आगत कर प्रत्यय केवल उस विस्तार तक अनुज्ञात किया जाता है, जहां राज्य में संदत्त कर 4% से अधिक हो। परिणामस्वरुप व्यौहारी को केवल 4% कर ही संदत्त करना पड़ता है। जबकि इसके विपरीत यदि व्यौहारी राज्य के बाहर से डीजल और स्नेहक लाता है तो वह 12% प्रवेश कर और 2% केन्द्रीय विक्रय कर संदत्त करने का दायी है। यदि ऐसा व्यौहारी डीजल और स्नेहकों का उपयोग विक्रय हेतु कराधेय माल के विनिर्माण में करता है तो ऐसा व्यौहारी 12% का मुजरा (सैट ऑफ) प्राप्त करता है और ऐसे व्यौहारी पर कर भार की अंतिम विवक्षा केन्द्रीय विक्रय कर का केवल 2% है। अतः राज्य के भीतर डीजल और स्नेहकों का क्रय करने वाला व्यौहारी उस व्यौहारी की तुलना में अधिक भार वहन करता है जो विक्रय हेतु कराधेय माल के विनिर्माण में उपयोग के लिए राज्य के बाहर से डीजल और स्नेहकाें का क्रय कर रहा है। परिणामस्वरूप व्यौहारी राज्य के बाहर से इनका क्रय करने को अधिमान देता है और व्यौहारियाें के ऐसे प्रवर्ग से राज्य को कोई राजस्व प्राप्त नहीं होता है । इसलिए, राज्य के बाहर से डीजल और स्नेहकों के क्रय पर मुजरा (सैट ऑफ) न्यायोचित नहीं है। इसके अतिरिक्त, निरन्तर बढ़ते हुए ऑन लाइन शॉपिंग बिजनेस से सम्भाव्य राजस्व का दोहन (टेप) करने के दृृष्टिगत यह प्रस्तावित है कि ऑन लाइन क्रयों को पूर्वोक्त अधिनियम की परिधि के अधीन लाया जाए और आयातकर्त्ता की ओर से ऐसे माल का भार-साधक व्यक्ति कर संदत्त करने के लिए दायी होगा । इसके अतिरिक्त यह भी अनिवार्य समझा गया है कि विभाग द्वारा प्रशासित विभिन्न अधिनियमितियों के अधीन रजिस्ट्रीकृत व्यौहारी संयुक्त विवरणियां दाखिल करें और केवल एक दी गई अवधि के दौरान ही करों का संदाय करें। इससे व्यौहारियों को अपने कारबार का सुगमता से प्रबन्ध करना सुकर हो जाएगा और यह विभाग को अधिक प्रभावी रुप से अधिनियम 148 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 को प्रशासित करने में भी समर्थ बनाएगा। इसलिए, वांछनीय उद्देश्यों को पूरा करने के आशय से पूर्वोक्त अधिनियम में तद्नुसार उपयुक्त संशोधन करने का विनिश्चय किया गया है।
यह विधेयक उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए है।
(प्रकाश चौधरी) प्रभारी मन्त्री। शिमला :
तारीख : ......................................., 2016
----------
वित्तीय ज्ञापन
विधेयक के उपबन्ध अधिनियमित किए जाने पर विद्यमान सरकारी तन्त्र द्वारा प्रवर्तित किए जाएंगे और राजकोष से कोई अतिरिक्त व्यय नहीं होगा।
-------
प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन
विधेयक के खण्ड 3 और 4, व्यौहारी द्वारा विवरणी दाखिल करने के लिए प्रक्रिया का और प्रवेश कर के उद्ग्रहण की रीति का उपबंध करने हेतु राज्य सरकार को नियम बनाने के लिए सशक्त करते हैं। शक्तियों का प्रस्तावित प्रत्यायोजन अनिवार्य और सामान्य स्वरुप का है।
____________
AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT
Bill No. 3 of 2016
THE HIMACHAL PRADESH TAX ON ENTRY OF GOODS IN TO LOCAL AREA
(AMENDMENT) BILL, 2016
(AS INTRODUCED IN THE LEGISTLATIVE ASSEMBLY)
A
BILL
further to amend the Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area Act, 2010
(Act No. 9 of 2010).
BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-seventh Year of the Republic of India as follows :—
1. Short title.—This Act may be called the Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area (Amendment) Act, 2016.
149 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 19382. Amendment of section 3.—In section 3 of the Himachal Pradesh Tax on Entry of Goods into Local Area Act, 2010 (hereinafter referred to as the "principal Act"), in sub-section (4), in clause (ii), for the words, figures and signs "Sr. Nos. 6 and 7", the words, figure and signs "Sr. No. 1(a)" shall be substituted.
3. Insertion of new section 4-A.—After section 4 of the principal Act, the following new section shall be inserted, namely:—
"4-A. Levy of tax on e-commerce.—(1) Notwithstanding anything contained in section 3, there shall be levied a tax on entry of goods specified in Schedule-II into local area made through online purchase or transaction or through e-commerce.
(2) The tax shall be levied on the value of the goods in the manner prescribed and shall be collected from the person-in-charge of the goods on behalf of the importer.".
4. Amendment of section 6-A.—In section 6-A of the principal Act,—
(a) for sub-sections (1) and (2), the following sub-sections shall be substituted, namely:—
"(1) Every registered dealer shall furnish return in such manner as may be prescribed.
(2) Before filing of return under sub-section (1), a dealer shall deposit full amount of tax due for each period as prescribed and shall furnish the proof of payment of such tax to the Assessing Authority."; and
(b) in sub-section (3), the word "monthly" shall be omitted.
____________
STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS
A dealer who buys diesel and lubricants within the State pays Value Added Tax at the rate of 16% and 13.75% respectively. When a dealer uses such fuel and lubricants in the manufacture of taxable goods or captive generation of power, he is allowed an Input Tax Credit of 12% and 9.75% respectively, because according to second proviso to sub-section (3) of section 11 of the Himachal Pradesh Value Added Tax Act, 2005, Input Tax Credit on fuel and lubricants is allowed only to the extent by which the tax paid in the State exceeds 4%. As a result a dealer has to pay only 4% tax. Whereas, on the other hand if the dealer brings diesel and lubricants from outside the State, he is liable to pay 12% Entry Tax and 2% CST. If such dealer uses the diesel and lubricants in manufacturing of taxable goods for sale, then such dealer gets set off of 12% and final implication of tax burden on such dealer is only 2% of the Central Sales Tax. Thus a dealer buying diesel and lubricants within the State bears a higher burden vis-a-vis a dealer buying diesel and lubricants from outside the State for using in manufacturing of taxable goods for sale. As a result dealer prefers to buy from outside the State and the State gets no revenue from such class of dealers. Therefore, set off on purchase of diesel and lubricants from outside the State is not justified. Further, with a view to tap the revenue potential of the ever growing online shopping business it is proposed that online purchases may be brought under the ambit of the Act ibid and the person-in- charge of such goods shall be liable to pay the tax on behalf of the importer. Further, it is also considered imperative that dealers registered under the different enactments administrated by the Department should file combined returns and make payment of taxes during one given period only. This will facilitate the dealers in managing their business easily and will also enable the department 150 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 to administer the Act more effectively. Thus, in order to achieve the desired objectives, it has been decided to make suitable amendments in the Act ibid accordingly.
This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.
(PRAKASH CHAUDHARY) Minister-in-Charge.
SHIMLA :
The…………………, 2016.
____________
FINANCIAL MEMORANDUM
The provisions of the Bill when enacted are to be enforced through the existing Government machinery and there will be no additional expenditure from the State exchequer.
—————
MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION
Clauses 3 and 4 of the Bill seeks to empower the State Government to make rules providing for the procedure for filing of returns by the dealer and manner for levy of entry tax. The proposed delegation of power is essential and normal in character.
_______________
हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय
अधिसूचना
दिनांक : 4 अप्रैल, 2016
संख्याः वि0स0-विधायन-सरकारी विधेयक/1-9-2016.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश निक्षेपकों के हित का (वित्तीय स्थापनों में) संरक्षण संशोधन विधेयक, 2016 (2016 का विधेयक संख्यांक 4) जो आज दिनांक 4 अप्रैल, 2016 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।
हस्ताक्षरित/- सचिव, हि0 प्र0 विधान सभा।151 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 2016 का विधेयक संख्यांक 4 हिमाचल प्रदेश निक्षेपकों के हित का (वित्तीय स्थापनों में) संरक्षण संशोधन विधेयक, 2016
(विधान सभा में पुरःस्थापित रुप में)
हिमाचल प्रदेश निक्षेपकों के हित का (वित्तीय स्थापनों में) संरक्षण अधिनियम, 1999 (2000 का अधिनियम संख्यांक 19) का और संशोधन करने के लिए विधेयक।
भारत गणराज्य के सड़सठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम.-- इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश निक्षेपकों के हित का (वित्तीय स्थापनों में) संरक्षण संशोधन अधिनियम, 2016 है।
2. धारा 2 का संशोधन.--हिमाचल प्रदेश निक्षेपकों के हित का (वित्तीय स्थापनों में) संरक्षण अधिनियम, 1999 (2000 का 19) (जिसे इसमें इसके पश्चात् 'मूल अधिनियम' कहा गया है) की धारा 2 में,- (अ) खण्ड (ख) और (ग) के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड रखे जाएंगे, अर्थात् :-
''(ख) ''निक्षेप'' के अन्तर्गत किसी वित्तीय स्थापन द्वारा धन की कोई प्राप्ति या किसी मूल्यवान वस्तु का प्रतिग्रहण आएगा जिसे किसी विनिर्दिष्ट कालावधि के पश्चात् या अन्यथा या तो नकद या वस्तु रूप में या किसी विनिर्दिष्ट सेवा के रूप में प्रसुविधा सहित या बिना किसी प्रसुविधा के ब्याज, बोनस, लाभ के रूप में या किसी अन्य रूप में वापस किया जाना हो और सदैव इसके अन्तर्गत समझा जाएगा किन्तु निम्नलिखित इसके अन्तर्गत नहीं है-
(i) शेयर पूंजी द्वारा या कैसे भी डिबेंचर, बॉण्ड द्वारा या दिए गए मार्गदर्शक सिद्धान्तों और भारतीय प्रतिभूति और विनियम अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन स्थापित भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड द्वारा बनाए गए विनियमों के अधीन आने वाली किसी अन्य लिखत द्वारा जुटाई गई रकम,
(ii) रकमें जिनका पूंजी के रूप में किसी फर्म के भागीदारों द्वारा अभिदाय किया गया हो,
(iii) किसी अधिसूचित बैंक या सहकारी बैंक या बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 के खण्ड (ग) में यथा परिभाषित किसी अन्य बैंककारी कम्पनी से प्राप्त रकमें,
(iv) निम्नलिखित से प्राप्त कोई रकम-
(क) भारतीय औद्योगिक विकास बैंक,
(ख) राज्य वित्तीय संस्था,
(ग) भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम, 1964 (1964 का 18) की धारा
6-क में या उसके अधीन विनिर्दिष्ट कोई वित्तीय संस्था, या
(घ) कोई अन्य संस्था जो इस निमित्त सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, 152 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 (v) कारबार के सामान्य अनुक्रम में निम्नलिखित द्वारा प्राप्त रकम-
(क) प्रतिभूति निक्षेप,
(ख) डीलरशिप निक्षेप,
(ग) अग्रिम धन, या
(घ) माल या सेवाओं की मांग के विरुद्ध अग्रिम,
(vi) किसी व्यष्टि या फर्म या व्यष्टियों के किसी संगम, जो राज्य में तत्समय प्रवृत्त साहूकारी से सम्बन्धित किसी अधिनियमिति के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई निगमित निकाय न हो, से प्राप्त कोई रकम, और
(vii) चिट की प्राप्ति में अभिदानों के रूप में प्राप्त कोई रकम;
स्पष्टीकरण-I.—''चिट'' का वही अर्थ होगा जो चिट फण्ड अधिनियम, 1982 (1982 का 40) की धारा 2 के खण्ड (ख) में है।
स्पष्टीकरण-II.—कोई संव्यवहार इस खण्ड के अर्थान्तर्गत चिट नहीं है, यदि ऐसे संव्यवहार में,- (i) अभिदाताओं में से कोई एकमात्र, न कि समस्त भावी अभिदानों के संदाय के किसी दायित्व के बिना इनाम रकम प्राप्त करता हो, या
(ii) समस्त अभिदाता, भावी अभिदानों के संदाय के दायित्व सहित, बारी-बारी से चिट रकम प्राप्त करते हों।
स्पष्टीकरण.—किसी क्रेता द्वारा, किसी सम्पत्ति (चाहे चल या अचल हो) के विक्रय पर किसी विक्रेता को दिया गया कोई उधार इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए निक्षेप नहीं समझा जाएगा;
(ग) ''वित्तीय स्थापन'' से किसी स्कीम या प्रबन्ध के अधीन या किसी अन्य रीति में निक्षेप अभिप्रात करने के कारबार को कार्यान्वित करने के लिए कोई व्यष्टि, व्यष्टियों का संगम, फर्म या कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) (2013 का 18) या कम्पनी अधिनियम, 2013 के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई कम्पनी अभिप्रेत है किन्तु इसमें किसी राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व में या उसके नियन्त्रणाधीन कोई निगम या कोई सहकारी सोसाइटी या बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 5 के खण्ड (ग) के अधीन यथा परिभाषित कोई बैंककारी कम्पनी सम्मिलित नहीं है;''; और
(आ) खण्ड (ङ) के पश्चात् निम्नलिखित नया खण्ड अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
''(च) ''अभिहित न्यायालय'' से धारा 6 के अधीन गठित अभिहित न्यायालय अभिप्रेत है।''। 3. नई धारा 13क, 13ख, 13ग, 13घ, 13ङ, 13च और 13छ का अन्तःस्थापन.-- मूल अधिनियम की धारा 13 के पश्चात् निम्नलिखित नई धाराएं अन्तःस्थापित की जाएंगी, अर्थात् :-
13क. ''वित्तीय स्थापनों द्वारा रिपोर्ट और विवरणी.--(1) प्रत्येक वित्तीय स्थापन, जो इस रूप में अपना कारबार हिमाचल प्रदेश राज्य में इस अधिनियम के प्रारम्भ को या इसके पश्चात् प्रारम्भ या कार्यान्वित करता है तो वह जिला कलक्टर और जिला के पुलिस अधीक्षक को, ऐसे कारबार को कार्यान्वित करने के अपने प्राधिकार के बारे में ब्यौरों, राज्य में वित्तीय स्थापन की अवस्थिति और इसके मुख्य शाखा कार्यालय, यदि कोई है, जहां कहीं अवस्थित हो और राज्य में वित्तीय स्थापन के कारबार या कार्यकलापों के प्रबन्धन या153 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 संचालन के लिए उत्तरदायी प्रत्येक व्यक्ति के स्थायी पते और ऐसी अन्य विशिष्टियाँ, जो विहित की जाएं, का वर्णन करते हुए रिपोर्ट करेगा।
(2) ऐसी रिपोर्ट, उस तारीख जिसको वित्तीय स्थापन इस रूप में राज्य में अपना कारबार प्रारम्भ या कार्यान्वित करता है, से सात दिन के भीतर की जाएगी :
परन्तु ऐसा वित्तीय स्थापन, जो इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व इस रूप में अपना कारबार कार्यान्वित कर रहा है, ऐसे प्रारम्भ की तारीख से सात दिन के भीतर ऐसी रिपोर्ट करेगा।
(3) प्रत्येक वित्तीय स्थापन, अपने कारबार और वित्तीय स्थिति, अपने निवेश के क्षेत्र और राज्य के भीतर और इससे बाहर इसके द्वारा किए गए धन के विनिधान (निवेश) की अवस्थिति, यदि कोई है, और ऐसी अन्य विशिष्टियां, जैसी विहित की जाएं, की बाबत जिला कलक्टर और जिला के पुलिस अधीक्षक को वित्तीय वर्ष की प्रत्येक तिमाही के अवसान से एक मास के भीतर त्रैमासिक विवरणी प्रस्तुत करेगा।
(4) जो कोई इस धारा के उपबन्धों का उल्लंघन करता है, जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा।
13ख. अपराधों का शमन.--(1) धारा 5 के अधीन दण्डनीय अपराध का, अभियोजन संस्थित करने से पूर्व, सक्षम प्राधिकारी द्वारा या अभियोजन संस्थित करने के पश्चात् अभिहित न्यायालय की अनुज्ञा से सक्षम प्राधिकारी द्वारा निक्षेपकों को ब्याज सहित या ब्याज के बिना देय सम्पूर्ण रकम के संदाय पर, शमन किया जा सकेगा।
(2) जहां उपधारा (1) के अधीन किसी अपराध का शमन किया गया है तो वहां इस प्रकार शमनित अपराध की बाबत किसी अपराधी के विरुद्ध, यथास्थिति, कोई कार्यवाही या आगामी कार्यवाही नहीं की जाएगी या जारी नहीं रखी जा सकेगी और अपराधी यदि अभिरक्षा में है, तो उसे तत्काल उन्मोचित कर दिया जाएगा। 13ग. अग्रिम जमानत का प्रदान न किया जाना.--दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 438 में किसी बात के होते हुए भी, कोई भी न्यायालय, इस अधिनियम के अधीन, किसी भी व्यक्ति को अग्रिम जमानत प्रदान नहीं करेगा।
13घ. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण.--इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए कोई भी वाद या अन्य कार्यवाहियां सरकार या सरकार के सक्षम प्राधिकारी या अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध नहीं होंगी।
13ङ. कठिनाईयों को दूर करने की शक्ति.--(1) यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो सरकार, आदेश द्वारा, ऐसे उपबन्ध, जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हों, जो इसे कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक प्रतीत हों, कर सकेंगी :
परन्तु इस धारा के अधीन ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारम्भ की तारीख से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा।
(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश इसके किए जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र राज्य विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा।
13च. विशेष लोक अभियोजक.--सरकार अधिसूचना द्वारा, अभिहित न्यायालय में मामलों के संचालन के लिए प्रत्येक अभिहित न्यायालय के लिए विशेष लोक अभियोजक के रूप में कम से कम दस वर्ष के अनुभव वाले किसी एक या एक से अधिक अधिवक्ता की नियुक्ति कर सकेगी। 154 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 13छ. अपराधों की बाबत अभिहित न्यायालय की प्रक्रिया और शक्तियां.--(1) अभिहित न्यायालय, विचारण के लिए अभियुक्त को उसे सपुर्द किए बिना, अपराध का संज्ञान ले सकेगा और अभियुक्त व्यक्ति का विचारण करते समय, मजिस्ट्रेट द्वारा वारण्ट मामलों का विचारण करने के लिए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में विहित प्रक्रिया का अनुसरण किया जाएगा।
(2) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबन्ध, यथासम्भव, अभिहित न्यायालय के समक्ष कार्यवाहियों को लागू होंगे और उक्त उपबन्धों के प्रयोजनों के लिए अभिहित न्यायालय मजिस्ट्रेट समझा जाएगा।''।
--------
उद्देश्यों और कारणों का कथन
राज्य में गैर-बैंककारी वित्तीय कम्पनियों के क्रियाकलापों को नियंत्रित करने और इन कम्पनियों में निक्षेपकों (जमाकर्ताओं) के हितों के संरक्षण के आशय से राज्य सरकार ने ''हिमाचल प्रदेश निक्षेपकों के हित का (वित्तीय स्थापनों में) संरक्षण अधिनियम, 1999 (2000 का अधिनियम संख्यांक 19)'' अधिनियमित किया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने पूर्वोक्त अधिनियम में कुछ और उपबन्धों को सम्मिलित करने की संस्तुति की है। इन संस्तुतियों का परीक्षण किया गया और विचार किया गया कि इन नए उपबंधों का सम्मिलित किया जाना विद्यमान विधान में कतिपय कमियों को दूर करने में सहायक होगा जो इसे और अधिक भयोपरापी और प्रभावी बनाएगा। इसलिए पूर्वोक्त अधिनियम में संशोधन करने आवश्यक हो गए हैं।
यह विधेयक उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए है।
(वीरभद्र सिंह) मुख्य मन्त्री। शिमला : तारीख................................., 2016
---------
वित्तीय ज्ञापन
-शून्य-
--------
प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन
-शून्य-
_______________
AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT
Bill No. 4 of 2016
THE HIMACHAL PRADESH PROTECTION OF INTERESTS OF DEPOSITORS (IN
FINANCIAL ESTABLISHMENTS) AMENDMENT BILL, 2016
155 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 (AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)A
BILL
further to amend the Himachal Pradesh Protection of Interests of Depositors (in Financial
Establishments) Act, 1999 (Act No. 19 of 2000).
BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-seventh Year of the Republic of India as follows:—
1. Short title.—This Act may be called the Himachal Pradesh Protection of Interests of Depositors (in Financial Establishments) Amendment Act, 2016.
2. Amendment of Section 2.—In section 2 of the Himachal Pradesh Protection of Interests of Depositors (in Financial Establishments) Act, 1999 (Act No. 19 of 2000) (hereinafter referred to as the 'principal Act'),—
(A) for clauses (b) and (c), the following clauses shall be substituted, namely:—
"(b) "Deposit" includes and shall be deemed always to have included any receipt of money or acceptance of any valuable commodity by any Financial Establishment to be returned after a specified period or otherwise, either in cash or in kind or in the form of a specified service with or without any benefit in the form of interest, bonus, profit, or in any other form, but does not include—
(i) amount raised by way of share capital or by any way of debenture, bond or any other instrument covered under the guidelines given, and regulations made, by the Securities and Exchange Board of India, established under the Securities and Exchange Board of India Act, 1992, (15 of 1992)
(ii) amounts contributed as capital by partners of a firm,
(iii) amounts received from a Scheduled bank or Co-operative bank or any other banking company as defined in clause (c) of section 5 of the Banking Regulation Act,1949, (10 of 1949)
(iv) any amount received from—
(a) the Industrial Development Bank of India,
(b) a State Financial Institution,
(c) any financial institution specified in or under section 6-A of
Industrial Development Bank of India Act, 1964, (18 of 1964) or (d) any other institution that may be specified by the Government in
the behalf, 156 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 (v) amount received in the ordinary course of business by way of—
(a) security deposit,
(b) dealership deposit,
(c) earnest money, or
(d) advance against order for goods or services,
(vi) any amount received from an individual or a firm or an association of individuals not being a body corporate, registered under any enactment relating to money lending which is for the time being in force in the State, and
(vii) any amount received by way of subscription in receipt of a Chit;
Explanation-I.—''Chit'' has the meaning as assigned to in clause (b) of section 2 of the Chit Funds Act, 1982 (40 of 1982).
Explanation-II.— A transaction is not a Chit within the meaning of this clause, if in such transaction,—
(i) some alone, but not all, of the subscribers get the prize amount without any liability to pay future subscriptions, or
(ii) all the subscribers get the Chit amount by turns with a liability to pay future subscriptions.
Explanation.—Any credit given by a seller to a buyer on the sale of any property (whether movable or immovable) shall not be deemed to be a deposit for the purposes of this clause;
(c) "Financial Establishment" means an individual, an association of individuals, a firm or a company registered under the Companies Act, 1956 (1 of 1956 18 of 2013) or Companies Act, 2013, carrying on the business of receiving deposits under any scheme or arrangement or in any other manner but does not include a corporation or a co-operative society owned or controlled by any State Government or the Central Government, or a banking company as defined under clause (c) of section 5 of the Banking Regulation Act, 1949;''; (15 of 1992) and (B) after clause (e), the following new clause shall be inserted, namely:—
"(f) "Designated Court" means the Designated Court constituted under section 6.".
3. Insertion of new sections 13A, 13B, 13C, 13D, 13E, 13F and 13G.—After section 13 of the principal Act, the following new sections shall be inserted, namely:—
13A. "Report and return by Financial Establishments.—(1) Every Financial Establishment which commences or carries on its business as such in the State on or after the commencement of this Act, shall make a report to the District Collector and the Superintendent of Police of the district, mentioning the details about its authority to carry on such business, the157 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 location of the Financial Establishment in the State and its main branch office, if any, wherever situated, permanent address of every person responsible for the management of, or conducting of the business or affairs of, the Financial Establishment in the State and such other particulars as may be prescribed.
(2) Such report shall be made within seven days from the date on which a Financial Establishment commences or carries on its business as such in the State :
Provided that a Financial Establishment which has been carrying on its business as such prior to the commencement of this Act shall make such report within seven days from the date of such commencement.
(3) Every Financial Establishment shall furnish a quarterly return within one month of the expiry of each quarter of a financial year to the District Collector and the Superintendent of Police of the district in respect of its business and financial position, the area of its investment and the location of investments of moneys made by it within and outside the State, if any, and such other particulars as may be prescribed.
(4) Whoever contravenes the provisions of this section shall be punishable with fine which may extend to fifty thousand rupees.
13B. Compounding of offence.—(1) An offence punishable under section 5 may, before the institution of the prosecution, be compounded by the Competent Authority or after the institution of the prosecution, be compounded by the Competent Authority with the permission of the Designated Court on payment of the entire amount due to the depositors with or without interest.
(2) Where an offence has been compounded under sub-section (1), no proceeding or further proceeding, as the case may be, shall be taken or continued against the offender in respect of the offence so compounded and the offender, if in custody, shall be discharged forthwith.
13C. Anticipatory bail not to be granted.—Notwithstanding anything contained in section 438 of the Code of Criminal Procedure, 1973, (2 of 1974) no Court shall grant anticipatory bail to any person under this Act.
13D. Protection of action taken in good faith.—No suit or other proceedings shall lie against the Government or the Competent Authority or an officer or employee of the Government for anything which is, in good faith, done or intended to be done under this Act.
13E. Power to remove difficulties.—(1) If any difficulty arises in giving effect to the provisions of this Act, the Government may, by order, make such provisions not inconsistent with the provisions of this Act as may appear to be necessary for removing the difficulty :
Provided that no order shall be made under this section after expiry of a period of two years from the date of commencement of this Act.
(2) Every order made under this section shall be laid, as soon as may be after it is made, before the State Legislature.
13F. Special Public Prosecutor.—The Government shall, by Notification, appoint one or more Advocates of not less than ten years standing practice as Special Public Prosecutor for each of the Designated Court for the purpose of conducting cases.
158 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 13G. Procedure and powers of Designated Court regarding offences.—The Designated Court may take cognizance of the offence without the accused being committed to it for trial and in trying the accused person, shall follow the procedure prescribed in the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974) for the trial of warrant cases by Magistrates.
(2) The provisions of the Code of Criminal Procedure, 1973 shall, so far as may be, apply to the proceedings before a Designated Court and for the purposes of the said provisions, a Designated Court shall be deemed to be a Magistrate.''.
_____________
STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS
In order to control the activities of Non-Banking Financial Companies in the State and to protect the interests of the depositors in these companies, the State Government has enacted "The Himachal Pradesh Protection of Interests of Depositors (in Financial Establishments) Act, 1999 (Act No. 19 of 2000)". The Reserve Bank of India has recommended some more provisions to be incorporated in the Act ibid . These recommendations have been examined and it is considered that the incorporation of these new provisions would help to remove certain infirmities in the existing legislation and make it more deterrent and effective. This has necessitated amendments in the Act, ibid.
This Bill seeks to achieve the aforesaid objective.
(VIRBHADRA SINGH) Chief Minister.
SHIMLA :
The...................2016.
____________
FINANCIAL MEMORANDUM
—NIL—
____________
MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION
—NIL—
159 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय
अधिसूचना
दिनांक : 4 अप्रैल, 2016
संख्याः वि0स0-विधायन-सरकारी विधेयक/1-12-2016.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2016 (2016 का विधेयक संख्यांक 5) जो आज दिनांक 4 अप्रैल, 2016 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।
हस्ताक्षरित/- सचिव, हि0 प्र0 विधान सभा।
-----------
2016 का विधेयक संख्यांक 5 हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2016
(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)
हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का अधिनियम संख्यांक 4) का और संशोधन करने के लिए विधेयक।
भारत गणराज्य के सड़सठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम.-- इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम, 2016 है।
2. धारा 5 का संशोधन.--हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 5 की उपधारा (3) में, ''एक तिहाई'' शब्दों के स्थान पर ''एक चौथाई'' शब्द रखे जाएंगे।
----------
उद्देश्यों और कारणों का कथन
हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 5 ग्राम सभा की बैठकों और गणपूर्ति का उपबन्ध करती है। इस धारा की उपधारा (3) के अनुसार ग्राम सभा की किसी साधारण बैठक में गणपूर्ति के प्रयोजन के लिए एक या अधिक सदस्यों द्वारा प्रतिनिधित्व करने वाले कुटुम्बों की कुल संख्या के कम से कम एक तिहाई का प्रतिनिधित्व अपेक्षित है और विनिश्चय, उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत द्वारा किया जाता है। यह देखा गया है कि बहुत सी ग्राम सभाओं में, विकास से सम्बन्धित प्रस्ताव गणपूर्ति के अभाव में बैठकों में अनुमोदित नहीं हो पाते और परिणामतः ग्राम पंचायत का विकास प्रतिकूलतः प्रभावित होता है। इसलिए इस बाधा को दूर करने के आशय से व्यापक जनहित में यह समझा गया है कि ग्राम सभा की साधारण बैठक के लिए गणपूर्ति को घटा कर एक चौथाई कर दिया जाए ताकि ग्राम पंचायत के विकासात्मक कार्य गणपूर्ति के अभाव में न रूकें। इसलिए पूर्वोक्त अधिनियम को तद्नुसार संशोधित करने का विनिश्चय किया गया है। 160 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 यह विधेयक उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए है।
(अनिल शर्मा) प्रभारी मन्त्री। शिमला तारीख ................................, 2016.
__________
वित्तीय ज्ञापन
-शून्य-
__________
प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन
-शून्य-
-----------
AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT
Bill No. 5 of 2016
THE HIMACHAL PRADESH PANCHAYATI RAJ (AMENDMENT) BILL, 2016
(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)
A
BILL
further to amend the Himachal Pradesh Panchayati Raj Act, 1994 (Act No. 4 of 1994).
BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-seventh Year of the Republic of India as follows:—
1. Short title.—This Act may be called the Himachal Pradesh Panchayati Raj (Amendment) Act, 2016.
2. Amendment of section 5.—In section 5 of the Himachal Pradesh Panchayati Raj Act, 1994, in sub-section (3), for the words and sign "one-third", the words and sign "one-fourth" shall be substituted.
161 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 STATEMENT OF OBJECTS AND REASONSSection 5 of the Himachal Pradesh Panchayati Raj Act, 1994 provides for meetings and quorum of the Gram Sabha. According to sub-section (3) of this section, for the purpose of quorum in any general meeting of Gram Sabha representation of at least one-third of the total number of the families represented by one or more members is required and decision has to be taken by a majority of members present and voting. It has been observed that in most of the Gram Sabhas, the proposals relating to developments are not approved in the meetings for want of quorum and resultantly, development of the Gram Panchayat is adversely affected. Thus, in order to overcome this hurdle, it is considered in larger public interest that the quorum for the general meeting of the Gram Sabha is reduced to one-fourth so that developmental works of the Gram Panchayat are not hampered for want of quorum. As such, it has been decided to amend the Act ibid accordingly.
This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.
(ANIL SHARMA) Minister-in-Charge.
SHIMLA.
The........................, 2016.
___________
FINANCIAL MEMORADNUM
—Nil —
___________
MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION
—Nil —
___________
हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय
अधिसूचना
04 अप्रैल, 2016
संख्याः वि0स0-विधायन-सरकारी विधेयक/1-10/2016.-हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत शिमला की सड़कों का उपयोग करने वालों तथा पैदल चलने वालों के लिए (लोक सुरक्षा और सुविधा) संशोधन विधेयक, 2016 (2016 का विधेयक 162 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 संख्यांक 6) जो आज दिनांक 4 अप्रैल, 2016 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।
हस्ताक्षरित/- सचिव, हिमाचल प्रदेश विधान सभा।
--------
2016 का विधेयक संख्यांक 6 शिमला की सड़कों का उपयोग करने वालों तथा पैदल चलने वालों के लिए (लोक सुरक्षा और सुविधा) संशोधन विधेयक, 2016
(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)
शिमला की सड़कों का उपयोग करने वालों तथा पैदल चलने वालों के लिए (लोक सुरक्षा और सुविधा) अधिनियम, 2007 (2008 का अधिनियम संख्यांक 2) का और संशोधन करने के लिए विधेयक।
भारत गणराज्य के सड़सठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
1. संक्षिप्त नाम.--इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम शिमला की सड़कों का उपयोग करने वालों तथा पैदल चलने वालों के लिए (लोक सुरक्षा और सुविधा) संशोधन अधिनियम, 2016 है।
2. धारा 2 का संशोधन.--शिमला की सड़कों का उपयोग करने वालों तथा पैदल चलने वालों के लिए (लोक सुरक्षा और सुविधा) अधिनियम, 2007 (जिसे इसमें इसके पश्चात् 'मूल अधिनियम' कहा गया है) की धारा 2 की उपधारा (1) के खण्ड (ख ) में ''कोर (मध्य) माल रोड़ से'' शब्दों और चिन्ह के पश्चात् ''राज्य सरकार द्वारा मेट्रोपोल के सामने अनुज्ञात पार्किंग स्थल के रूप में अधिसूचित क्षेत्र को अपवर्जित करके'' शब्द और चिन्ह अन्तःस्थापित किए जाएंगे।
3. धारा 3 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 3 की उपधारा (1) के खण्ड (iii) में प्रथम परन्तुक के पश्चात्् निम्नलिखित परन्तुक अन्तःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्ः-
''परन्तु यह और कि हिमाचल प्रदेश विधान सभा का वह सदस्य, जो मेट्रोपोल में रह रहा है और जिसे उसके यान को मेट्रोपोल तक चलाए जाने के लिए अनुज्ञात किया गया है, मेट्रोपोल के सामने अनुज्ञात पार्किंग स्थल में अपने यान को पार्क कर सकेगा :
परन्तु यह और कि हिमाचल प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्य मन्त्री, हिमाचल प्रदेश के मन्त्रियों, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और हिमाचल प्रदेश विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष को कोर (मध्य) माल रोड़ के भाग शिमला क्लब से इंदिरा गांधी राज्य खेल परिसर तक उनके यान का चलाया जाना अनुज्ञात किया जा सकेगा :''। 4. धारा 8 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 8 की उपधारा (5) में ''तीन हजार'' शब्दों के स्थान पर ''दस हजार'' शब्द रखे जाएंगे।163 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938
उद्देश्यों और कारणों का कथन
शिमला माल रोड़ की पहचान को वापस लौटाने के लिए, आम रास्ते के रूप में इसका उपयोग रोकने के आशय से तथा शिमला नगर की सील्ड और प्रतिबन्धित सड़कों पर लोक सुरक्षा और सुविधा के हित में यातायात का विनियमन करने के लिए शिमला की सड़कोेंं का उपयोग करने वालों तथा पैदल चलने वालों के लिए (लोक सुरक्षा और सुविधा) अधिनियम, 2007 अधिनियमित किया गया था। उपायुक्त, शिमला से मेट्रोपोल में रह रहे हिमाचल प्रदेश विधान सभा के सदस्यों के लिए मेट्रोपोल के सामने पार्किंग स्थल चिन्हित करने हेतु एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ था। उपायुक्त, शिमला ने यह निवेदित किया है कि माननीय अध्यक्ष, विधान सभा ने विधान सभा के सदस्यों के साथ एक बैठक आयोजित की और उक्त बैठक में माननीय सदस्यों ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि मेट्रोपोल में रहते हुए, मेट्रोपोल के सामने कोई पार्किंग स्थल न होने के कारण, उन्हें अत्यन्त कठिनाई हो रही है। अतः यह अनुरोध किया कि उन्हें मेट्रोपोल के सामने उनके यानों (वाहनों) को पार्क करने की अनुज्ञा प्रदान की जाए। प्रस्ताव का परीक्षण किया गया और माननीय सदस्यों की मांग को उचित समझा गया। अतः पूर्वोक्त अधिनियम में ऐसा उपबन्ध करने का विनिश्चय किया गया जो उन्हें मेट्रोपोल के सामने अधिसूचित पार्किंग स्थल पर उनके यानों (वाहनों) को पार्क करने के लिए समर्थ बनाए। इसके अतिरिक्त कुछ उच्च पदस्थों को उनके यान (वाहन) को इन्दिरा गांधी राज्य खेल परिसर तक चलाया जाना अनुज्ञात करना भी न्यायसंगत और युक्तियुक्त समझा गया है। इसके अतिरिक्त सील्ड सड़क या कोर (मध्य) माल रोड़ के भाग पर फिल्म की शूटिंग के लिए अनुज्ञात किए गए यानों (वाहनों) की दैनिक फीस की रकम को तीन हजार रुपए प्रतिदिन से बढ़ाकर दस हजार रुपए प्रतिदिन किया जाना भी आवश्यक समझा गया है। इसलिए पूर्वोक्त अधिनियम में संशोधन किए जाने आवश्यक समझे गए हैं।
यह विधेयक उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए है।
(वीरभद्र सिंह) मुख्य मन्त्री। शिमला :
तारीख : .............................., 2016
-------
वित्तीय ज्ञापन
-शून्य-
-------
प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन
-शून्य-
___________
AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT
Bill No. 6 of 2016 THE SHIMLA ROAD USERS AND PEDESTRIANS (PUBLIC SAFETY AND CONVENIENCE) AMENDMENT BILL, 2016
(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)
164 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 ABILL
further to amend the Shimla Road Users and Pedestrians (Public Safety and Convenience)
Act, 2007 (Act No.2 of 2008).
BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-seventh Year of the Republic of India as follows:—
1. Short title.—This Act may be called the Shimla Road Users and Pedestrians (Public Safety and Convenience) Amendment Act, 2016.
2. Amendment of section 2.—In section 2 of the Shimla Road Users and Pedestrians (Public Safety and Convenience) Act, 2007, (hereinafter referred to as the 'principal Act'), in sub- section (1), in clause (b), after the words "and Ridge", the words "excluding area notified by the State Government as permitted parking place in front of the Metropole" shall be inserted.
3. Amendment of section 3.—In section 3 of the principal Act, in sub-section (1), in clause (iii), after the first proviso, the following provisos shall be inserted, namely:—
"Provided further that a Member of the Legislative Assembly of Himachal Pradesh who is residing in Metropole and permitted to ply his vehicle upto Metropole may park his vehicle in the permitted parking place in front of Metropole:
Provided further that the Speaker of the Himachal Pradesh Legislative Assembly, the Chief Justice of Himachal Pradesh High Court, former Chief Minister of Himachal Pradesh, Ministers of Himachal Pradesh, Judges of Himachal Pradesh High Court and former Speaker of Himachal Pradesh Legislative Assembly may be permitted to ply their vehicle on portion of Core Mall Road from Shimla Club to Indira Gandhi State Sports Complex:".
4. Amendment of section 8.—In section 8 of the principal Act, in sub-section (5), for the figures "3000", the figures and sign "10,000" shall be substituted.
___________
STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS
In order to restore the sanctity of Shimla Mall Road by preventing its use as a thorough fare and to regulate traffic in the interest of public safety and convenience on sealed and restricted roads of Shimla Town, the Shimla Road Users and Pedestrians (Public Safety and Convenience) Act, 2007 was enacted. A proposal was received from the Deputy Commissioner, Shimla to earmark parking place in front of Metropole for Members of the Legislative Assembly of Himachal Pradesh who are residing in Metropole. The Deputy Commissioner, Shimla has submitted that a meeting was convened by the Hon'ble Speaker, Legislative Assembly with the Members of Legislative Assembly and in the said meeting it was pointed out by the Hon'ble Members that there is a great hardship to them being resident of Metropole as there is no parking place for them in front of Metropole. Thus, it has been requested that they may be permitted to park their vehicles in front of Metropole. The proposal has been examined and the demand of the Hon'ble Members is considered genuine. Therefore, it has been decided to make a provision in the Act ibid which may enable them165 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 to park their vehicles in front of Metropole at the notified parking place. Further, it has also been considered just and reasonable to permit some dignitaries to ply their vehicle upto Indira Gandhi State Sports Complex. Besides this, it is also considered necessary to enhance the amount of daily fee of vehicles permitted for film shooting on portion of Sealed Road or Core Mall Road from Rs. 3000/- per day to Rs.10,000/- per day. This has necessitated amendments in the Act ibid. This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.
(VIRBHADRA SINGH) Chief Minister.
SHIMLA: The —————, 2016.
_________
FINANCIAL MEMORANDUM
—Nil——
MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLASTION
——Nil——
___________
हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय
अधिसूचना
05 अप्रैल, 2016
संख्याः वि0स0-विधायन-सरकारी विधेयक/1-13/2016.-हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2016 (2016 का विधेयक संख्यांक 7) जो आज दिनांक 5 अप्रैल, 2016 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्व-साधारण की सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।
हस्ताक्षरित/- सचिव, हिमाचल प्रदेश विधान सभा।
--------
2016 का विधेयक संख्यांक 7 हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2016
(विधानसभा में पुरःस्थापित रुप में)
166 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर अधिनियम, 2005 (2005 का अधिनियम संख्यांक 12) का और संशोधन करने के लिए विधेयक।
भारत गणराज्य के सड़सठवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रुप में यह अधिनियमित होः-
1. संक्षिप्त नाम.--इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) अधिनियम, 2016 है ।
2. धारा 11 का संशोधन.--हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर अधिनियम, 2005 (जिसे इसमें इसके पश्चात् 'मूल अधिनियम' कहा गया है) की धारा 11 की उपधारा (16) में,-
(क) खण्ड (क) में, "दुगुनी" शब्द का लोप किया जाएगा; और
(ख) खण्ड (ख) में, "पचास" शब्द के स्थान पर "पच्चीस" शब्द रखा जाएगा।
3. नई धारा 14-क का अन्तःस्थापन.--मूल अधिनियम की धारा 14 के पश्चात् निम्नलिखित नई धारा अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात््ः-
"14-क. अनन्तिम रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र प्रदान करने के लिए आवेदन.-(1) राज्य में रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन का आशय रखने वाला कोई भी व्यक्ति विहित प्ररूप में, विहित दस्तावेजों की स्कैन की गई प्रतियों सहित, ऑनलाईन आवेदन कर सकेगा ।
(2) विहित प्राधिकारी, उपधारा (1) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर तीन कार्य दिवसों के भीतर विहित प्ररूप में अनन्तिम रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र प्रदान करेगा ।
(3) विहित प्राधिकारी अनन्तिम रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र जारी करने के पश्चात्, आवेदक को आवेदन में दी गई विशिष्टियों की बाबत साक्ष्य और दस्तावेजों के साथ-साथ कारबार से सम्बन्धित लेखे भी, सत्यापन के लिए प्रस्तुत करने हेतु निदेश देगा। साक्ष्य, दस्तावेजों और लेखों को प्रस्तुत करने पर वह आवेदन में दी गई विशिष्टियों का सत्यापन करेगा और विशिष्टियों की शुद्धता के सम्बन्ध में समाधान होने पर, वह रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र को प्रदान करने हेतु आवेदन की प्राप्ति की तारीख से तीस दिन के अपश्चात् विहित प्ररूप में स्थायी रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र जारी करेगा ।
(4) विहित अधिकारी का यदि यह समाधान हो जाता है कि आवेदक द्वारा आवेदन में दी गई विशिष्टियां अशुद्ध है या आवेदक ने कतिपय तथ्यों का दुव्र्यपदेशन किया है तो वह आवेदक को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात् और कारणों को लिखित में अभिलिखित करके आवेदन को नामंजूर करेगा तथा उपधारा (2) के अधीन जारी किए गए अनन्तिम रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र को आवेदन की प्राप्ति की तारीख से तीस दिन के अपश्चात् रद््द करेगा ।"।
4. धारा 16 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 16 की उपधारा (6) के विद्यमान परन्तुक के स्थान पर निम्नलिखित परन्तुक रखे जाएंगे, अर्थात्ः-
"परन्तु जहां व्यौहारी मासिक विवरणियां दाखिल कर रहा है वहां व्यतिक्रम के जारी रहने तक प्रतिदिन एक हजार रूपए के बराबर की रकम शास्तिस्वरूप प्रभारित की जाएगी किन्तु ऐसी शास्ति पचास हजार रूपए से अधिक नहीं होगीः
परन्तु यह और कि जहां किसी व्यौहारी ने अपना रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-प़त्र रद््द करवाए बिना अपना कारबार बन्द कर दिया है या कारबार करना छोड़ दिया है तो निर्धारण प्राधिकारी तुरन्त उसका167 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र निलम्बित कर देगा और तत्पश्चात्् यथा लागू कोई वृृद्धि सम्बन्धी शास्ति अधिरोपित नहीं की जाएगी ।"।
5. नई धारा 27-क का अन्तःस्थापन.--मूल अधिनियम की धारा 27 के पश्चात् निम्नलिखित नई धारा अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः-
"27-क. अनिर्णय और बकाया के परिनिर्धारण के लिए विशेष उपबन्ध.-इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, यदि सरकार लोकहित में ऐसा करना आवश्यक और समीचीन समझती है तो यह उस व्यौहारी की बाबत, जो एक वित्तीय वर्ष तक के निर्धारण मामलों के लिए, निर्धारण हेतु अपेक्षित वैधानिक प्ररूपों को, उसके नियन्त्रण से बाहर के कारणों से प्रस्तुत नहीं कर सका है, किसी विशिष्ट अवधि के लिए ऐसे मामलों के लिए एक परिनिर्धारण स्कीम अधिसूचित कर सकेगी और कर की रकम का भागतः अधित्यजन और ऐसे वैधानिक प्ररूपों को प्रस्तुत न करने के लिए ब्याज और शास्ति की रकम का पूर्णतः या भागतः अधित्यजन अनुज्ञात कर सकेगी।"। 6. नई धारा 49-क का अन्तःस्थापन.--मूल अधिनियम की धारा 49 के पश्चात् निम्नलिखित नई धारा अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः-
"49-क. अग्रिम विनिर्णय.- (1) आयुक्त, किसी माल की बाबत कर की दर या किसी संव्यवहार के लिए कर की अपेक्षा या आगत कर की कटौती की पात्रता या अधिनियम के अधीन, किसी मामले या मामलों के प्रवर्ग, जैसे आयुक्त विनिर्दिष्ट करे, स्त्रोत पर कर की कटौती के दायित्व को सुस्पष्ट करने के लिए, कम से कम एक अतिरिक्त आयुक्त या संयुक्त आयुक्त, एक क्षेत्रीय कलक्टर और एक उप आयुक्त (विधि) या सहायक आयुक्त (विधि) से मिलकर बनने वाले एक अग्रिम विनिर्णय 'प्राधिकरण' का गठन कर सकेगा ।
(2) इस धारा के अधीन अग्रिम विनिर्णय की माँग करने वाला कोई भी रजिस्ट्रीकृत व्यौहारी, ऐसी रीति, जैसी विहित की जाए, में संदत्त फीस के संदाय के सबूत सहित, विहित प्ररूप में प्राधिकरण को आवेदन करेगा।
(3) प्राधिकरण, आवेदन की प्राप्ति पर सम्बद्ध निर्धारण प्राधिकारी को उसकी एक प्रति अगे्रषित करवाएगा और उठाए गए प्रश्न पर इसका निष्कर्ष तथा इसके द्वारा यथा अपेक्षित कोई अन्य सूचना या अभिलेख मंगवाएगा ।
(4) प्राधिकरण, आवेदन या मंगवाए गए किसी अभिलेख का परीक्षण करने के पश्चात्, आदेश द्वारा, आवेदन को या तो ग्रहण करेगा या अस्वीकार कर सकेगाः
परन्तु प्राधिकरण आवेदन को वहां अनुज्ञात नहीं करेगा जहां आवेदन में उठाया गया प्रश्न,- (i) विभाग के किसी अधिकारी या अन्य प्राधिकारी या अपील अधिकरण अथवा किसी न्यायालय के समक्ष पहले से ही लंबित है; या
(ii) किसी संव्यवहार या विवाद्यक से सम्बन्धित है जिसे प्रकटतया कर के परिवर्जन हेतु परिकल्पित किया गया हैः
परन्तु यह और कि इस उपधारा के अधीन कोई भी आवेदन तब तक अस्वीकार नहीं किया जाएगा जब तक कि सुनवाई का अवसर प्रदान न कर दिया गया हो और जहां आवेदन अस्वीकार कर दिया जाता है वहां ऐसी अस्वीकृति के कारण आदेश में अभिलिखित किए जाएंगे ।
(5) प्रश्न, जिस पर निम्नलिखित की बाबत अग्रिम विनिर्णय की माँग की जा सकेगी,- (क) अधिनियम के अधीन किसी माल का वर्गीकरण;
168 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 (ख) अधिनियम के उपबन्धों के अधीन जारी की गई अधिसूचना की उपयुक्तता जिससे कर की दर पर प्रभाव पड़ता हो;
(ग) अधिनियम के उपबन्धों के अधीन माल के मूल्य के अवधारण के प्रयोजनों के लिए अंगीकृत किए जाने वाले सिद्धान्त;
(घ) अधिनियम केे अधीन कर की बाबत जारी की गर्इं अधिसूचनाएं;
(ङ) संदत्त या संदत्त समझे गए कर के आगत कर प्रत्यय की स्वीकार्यता;
(च) अधिनियम केे अधीन किसी माल पर देय कर के दायित्व का अवधारण; या
(छ) क्या आवेदक का अधिनियम केे अधीन रजिस्ट्रीकरण किया जाना अपेक्षित है । (6) इस धारा के अधीन किसी प्राधिकरण के समक्ष कोई भी कार्यवाही (अग्रिम विनिर्णय की घोषणा सहित) प्रश्नगत नहीं होगी या प्राधिकरण में केवल किसी रिक्ति होने के कारण या उसके गठन में किसी त्रुटि के कारण अविधिमान्य नहीं होगी ।
(7) उपधारा (4) के अधीन किए गए प्रत्येक आदेश की प्रति आवेदक तथा सम्बद्ध अधिकारी को भेजी जाएगी ।
(8) जहां उपधारा (4) के अधीन आवेदन ग्रहण किया गया है वहां प्राधिकरण ऐसी और सामग्री, जो आवेदक द्वारा इसके समक्ष रखी जाए या प्राधिकरण द्वारा अभिप्राप्त की जाए, का परीक्षण करने के पश्चात्, सुनवाई का अवसर देने के पश्चात्् आवेदन में विनिर्दिष्ट प्रश्नों पर ऐसा आदेश पारित करेगा जैसा उचित हो। प्राधिकरण, आवेदन की प्राप्ति के नब्बे दिन के भीतर आदेश पारित करेगा और ऐसे आदेश की प्रति आवेदक तथा सम्बद्ध अधिकारी को भेजी जाएगी ।
(9) प्राधिकरण का आदेश केवल निम्नलिखित पर आबद्धकर होगा,--
(i) आवेदक जो अग्रिम विनिर्णय की मांग करता है;
(ii) माल या संव्यवहार की बाबत, जिसके सम्बन्ध में इसकी माँग की गई है; और (iii) ऐसे आवेदक के सम्बन्ध में, विभाग के अधिकारियों (आयुक्त या अपील अधिकरण से भिन्न) के समक्ष कार्यवाहियों में ।
(10) उपधारा (8) के अधीन पारित आदेश यथापूर्वोक्त आबद्धकर होगा जब तक कि विधि या तथ्यों, जिनके आधार पर ऐसा आदेश किया गया था, में कोई परिवर्तन न हो ।
(11) जहाँ प्राधिकरण को किसी अधिकारी द्वारा इसे किए गए अभ्यावेदन पर या अन्यथा ज्ञात होता है कि उस द्वारा पारित आदेश, कपट या तथ्यों के दुव्र्यपदेशन द्वारा अभिप्राप्त किया गया था तो वह, आदेश द्वारा, ऐसे आदेश को आरम्भ से शून्य घोषित कर सकेगा और तदुपरि अधिनियम के समस्त उपबन्ध आवेदक को लागू होंगे मानो ऐसा आदेश कभी पारित ही नहीं किया गया था।
(12) प्राधिकरण को, प्रकटीकरण और निरीक्षण करने से सम्बन्धित इसकी शक्तियों को प्रयोग करने के प्रयोजन के लिए, किसी व्यक्ति को हाजिर कराने और शपथ पर उसकी परीक्षा करने, कमीशन जारी करने और लेखा पुस्तकों तथा अन्य दस्तावेजों को प्रस्तुत करने हेतु बाध्य करने के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन सिविल न्यायालय की समस्त शक्तियां होंगी ।169 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 (13) प्राधिकरण को दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 के प्रयोजनों के लिए, न कि अध्याय-26 के प्रयोजनों के लिए, सिविल न्यायालय समझा जाएगा और प्राधिकरण के समक्ष प्रत्येक कार्यवाही को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 193 और 228 के अर्थान्तर्गत और धारा 196 (1860 का 45) के प्रयोजनों के लिए, न्यायिक कार्यवाही समझा जाएगा ।
स्पष्टीकरणः-- इस धारा के प्रयोजन के लिए,--
(i) 'अग्रिम विनिर्णय' से इस धारा की उपधारा (1) और (5) के अधीन विनिर्दिष्ट किसी प्रश्न का प्राधिकरण द्वारा अवधारण अभिप्रेत है; और
(ii) 'प्राधिकरण' से इस धारा की उपधारा (1) के अधीन अग्रिम विनिर्णय के लिए गठित प्राधिकरण अभिप्रेत है।''।
7. धारा 50-क का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 50-क की उपधारा (1) में, "अगले उच्चतर प्राधिकारी का अनुमोदन अभिप्राप्त करने के पश्चात्," शब्दों और चिन्ह के स्थान पर ''मू0प0क0-26 और मू0प0क0-26-क प्ररूपों की अपलोडिंग को ब्लाक करने से पूर्व आयुक्त का अनुमोदन अभिप्राप्त करने के प्श्चात् और" शब्द, अंक और चिन्ह रखे जाएंगे ।
----------
उद्देश्यों और कारणों का कथन
हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा 11 आगत कर प्रत्यय (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का उपबन्ध करती है। इस धारा की उपधारा (16) आगत कर प्रत्यय (इनपुट टैक्स क्रेडिट) के मिथ्या दावों से सम्बन्धित है। संदेय कर और ब्याज के अतिरिक्त इसके लिए शास्ति, ऐसे मिथ्या दावे या प्रत्यय की रकम की दुगुनी है जिसे अयुक्तियुक्त और अत्यधिक समझा गया है तथा यह सुगमता से वसूली योग्य भी नहीं है। इसलिए इस शास्ति को घटाकर ऐसे मिथ्या दावे की रकम के बराबर करने का प्रस्ताव किया गया है। इसके अतिरिक्त यह उपधारा, राजस्व हित पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डालने के आशय के बिना, गलत परिकलन के कारण आगत कर प्रत्यय (इनपुट टैक्स क्रेडिट) के गलत दावे के लिए शास्ति का उपबन्ध करती है। इसके लिए शास्ति, संदेय कर और ब्याज के अतिरिक्त ऐसे दावे या प्रत्यय की रकम का पचास प्रतिशत है जिसे भी अयुक्तियुक्त समझा गया है। इसलिए गलत दावों के लिए शास्ति को घटाकर ऐसे दावे की रकम के पच्चीस प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव किया गया है। यह पाया गया है कि व्यौहारियों के रजिस्ट्रीकरण की प्रक्रिया को सरलीकृत किया जाना चाहिए और व्यौहारी को संहिताबद्ध औपचारिकताएं पूर्ण करने के पश्चात् एक अनंतिम (अस्थायी) टिन नम्बर उपलब्ध करवाया जाए। इसे ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव किया गया है कि अनंतिम (अस्थायी) रजिस्ट्रीकरण के लिए पूर्वोक्त अधिनियम में एक उपबन्ध अन्तःस्थापित किया जाए जिसमें आवेदक को अपेक्षित दस्तावेजों और फीस की प्राप्ति पर ऐसे अनंतिम (अस्थायी) रजिस्ट्रीकरण हेतु ऑनलाईन आवेदन करने के तीन दिन के भीतर एक अनंतिम (अस्थायी) टिन (टी आई एन) नम्बर उपलब्ध करवाया जाए । इसके अतिरिक्त, अधिनियम की धारा 16 कर का संदाय करने, विवरणियां दाखिल करने और बिना किसी उच्चतम सीमा के विवरणियां दाखिल न करने हेतु शास्तियों का उपबन्ध करती है जिसे न्यायसंगत और उचित नहीं समझा गया है क्योंकि ऐसे व्यौहारियों के मामलों में जिन्होंने रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र को रद्द करवाए बिना अपना कारबार बन्द कर दिया है और जिनका पता-ठिकाना मालूम नहीं है, शास्ति अनिश्चित अवधि के लिए अधिरोपित की जाती रहेगी और इससे अनावश्यक बकायों की भरमार हो जाएगी और वसूली का कोई अवसर नहीं रहेगा। इसलिए, विवरणियों को दाखिल न करने के लिए शास्ति की अधिकतम सीमा नियत करने का प्रस्ताव किया गया है । यह भी पाया गया है कि ऐसे मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए कुछ उपचारी कदम उठाए जाने की नितान्त आवश्यकता है जिनका निर्धारण प्ररूपों के अभाव में लम्बित है। माल और सेवा कर व्यवस्था की आसन्नता के कारण पुराने मामलों का निपटारा करना और भी महत्वपूर्ण है ताकि विभाग की जनशक्ति और संसाधनों का नए मामलों की संवीक्षा (जांच-पड़ताल) में उपयोजन हो सके। इसलिए शास्ति और ब्याज के भागतः या पूर्णतः अधित्यजन द्वारा ऐसे मामलों का परिनिर्धारण करने के लिए एक 170 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 परिनिर्धारण स्कीम अधिसूचित करने के लिए उपबन्ध करना प्रस्तावित है । पूर्वोक्त अधिनियम की विभिन्न अनुसूचियों की भिन्न-भिन्न प्रविष्टियों के अधीन माल के वर्गीकरण या ऐसे माल आदि को लागू कर की दर की बाबत कर का उद्ग्रहण करने, निर्धारण करने और संग्रहण करने में एकरूपता सुनिश्चित करने और तद्द्वारा भिन्न-भिन्न निर्धारण प्राधिकारियों द्वारा पारित किए जा रहे परस्पर विरोधी आदेशों से बचने के आशय से 'अग्रिम विनिर्णय' को एक परिपूर्ण उपाय समझा गया है। इसलिए, पूर्वोक्त अधिनियम में 'अग्रिम विनिर्णय' का उपबन्ध करने का भी प्रस्ताव किया गया है जो करदाता हितैषी होगा और व्यौहारियाें को उनके भावी कर दायित्वों की बाबत और अधिक स्पष्टता प्रदान करेगा ।
इसके अतिरिक्त, धारा 50-क ऐसे व्यौहारियों की बाबत, जो पूर्वोक्त अधिनियम के अधीन संदेय किसी कर, शास्ति या ब्याज का संदाय करने में असफल रहते हैं या विहित तारीखाें, आदि तक विवरणियां दाखिल करने में असफल रहते हैं, टिन (टी आई एन) को लॉक करने और सेवाओं के स्थगन का उपबन्ध करती है। यह पाया गया है कि कुछ निर्धारण प्राधिकारी, हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर नियम, 2005 से संलग्न मू0प0क0 प्ररूप-26 और मू0प0क0 प्ररूप-26-क को अपलोड करने की सुविधा को मनमाने ढंग से ब्लॉक कर रहे हैं और तद्द्वारा वे व्यौहारियों को असुविधा कारित कर रहे हैं । इसलिए यह सुनिश्चित करने के आशय से कि शक्तियों का दुरूपयोग न हो, यह प्रस्तावित किया गया है कि उपरोक्त प्ररूपों को अपलोड करने की प्रसुविधा को ब्लॉक करने के लिए निर्धारण प्राधिकारियों द्वारा आयुक्त से अनुमोदन अभिप्राप्त किया जाएगा। इसलिए पूर्वोक्त अधिनियम में संशोधन किए जाने आवश्यक हो गए हैं।
यह विधेयक उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए है ।
(प्रकाश चौधरी) प्रभारी मन्त्री । शिमलाः तारीखः........................, 2016
---------
वित्तीय ज्ञापन
विधेयक के उपबन्ध अधिनियमित किए जाने पर विद्यमान सरकारी तन्त्र द्वारा प्रवर्तित किए जाने हैं और इससे कोई अतिरिक्त व्यय अन्तर्वलित नहीं होगा ।
--------
प्रत्यायोजित विधान सम्बन्धी ज्ञापन
विधेयक के खण्ड 3, 5 और 6 राज्य सरकार को इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए क्रमशः नियम बनाने और एक स्कीम अधिसूचित करने को सशक्त करते हैं। शक्तियों का प्रस्तावित प्रत्यायोजन अनिवार्य और सामान्य स्वरूप का है ।
---------
AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT
Bill No. 7 of 2016
THE HIMACHAL PRADESH VALUE ADDED TAX (AMENDMENT) BILL, 2016
(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)
171 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 ABILL
further to amend the Himachal Pradesh Value Added Tax Act, 2005(Act No.12 of 2005).
BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-seventh Year of the Republic of India as follows:--
1. Short title.—This Act may be called the Himachal Pradesh Value Added Tax (Amendment) Act, 2016.
2. Amendment of section 11.—In section 11 of the Himachal Pradesh Value Added Tax Act, 2005 (hereinafter referred to as the 'principal Act'), in sub-section (16),—
(a) in clause (a), the word ''twice" shall be omitted.; and
(b) in clause (b), for the word "fifty", the words "twenty five'' shall be substituted.
3. Insertion of new section 14-A.—After section 14 of the principal Act, the following new section shall be inserted, namely:—
''14-A. Application for grant of Provisional Registration Certificate.—(1) Any person intending to apply for registration in the State may make online application in the prescribed form alongwith scanned copies of the prescribed documents.
(2) On receipt of application under sub-section (1), the prescribed authority shall grant Provisional Registration Certificate within three working days in the prescribed form.
(3) After issue of the Provisional Registration Certificate, the prescribed authority shall direct the applicant to produce evidence and documents in respect of the particulars given in the application and also the accounts relating to the business for verification. On production of the evidence, documents and accounts, it shall verify the particulars given in the application and on being satisfied about the correctness of the particulars, it shall issue a Permanent Registration Certificate in the prescribed form not later than thirty days from the date of receipt of application for grant of Registration Certificate.
(4) If the prescribed authority is satisfied that the particulars given by the applicant in his application are incorrect or that the applicant has misrepresented certain facts, it shall, after giving the applicant an opportunity of being heard and recording the reasons in writing, reject the application and cancel the Provisional Registration Certificate issued under sub-section(2) not later than thirty days of the date of receipt of application.".
4. Amendment of section 16.—In section 16 of the principal Act, in sub-section (6), for the existing proviso, the following provisos, shall be substituted, namely:—
"Provided that where the dealer is filing monthly returns, a sum equal to Rs.1000/- per day shall be charged as penalty till the default continues, but such penalty shall not exceed Rs. 50,000/-:
Provided further that where a dealer has closed down his business or has left the business without getting his Registration Certificate cancelled, the Assessing Authority shall suspend his Registration Certificate immediately, and thereafter no further incremental penalty as applicable shall be imposed.".
172 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 5. Insertion of new section 27-A.—After section 27 of the principal Act, the following new section shall be inserted, namely:—
"27-A. Special provision for settlement of pendency and arrears.—Notwithstanding anything contained in this Act, if the Government considers it necessary and expedient in public interest so to do, it may in respect of a dealer who for reasons beyond his control could not submit the statutory forms required for assessment, for assessment cases up to a financial year, it may notify a Settlement Scheme for such cases for a particular period and allow partial waiver of the tax amount and complete or partial waiver of the interest and penalty amount for non-submission of such statutory forms.".
6. Insertion of new section 49-A.—After section 49 of the principal Act, the following new section shall be inserted, namely:—
"49-A. Advance Ruling.—(1) The Commissioner may constitute an 'Authority' for Advance Ruling, consisting of at least one Additional Commissioner or Joint Commissioner, one Zonal Collector and one Deputy Commissioner (Legal) or Assistant Commissioner (Legal) to clarify the rate of tax in respect of any goods or the eligibility to tax of any transaction or eligibility of deduction of input tax or liability of deduction of tax at source under the Act, in respect of any case or class of cases as the Commissioner may specify.
(2) Any registered dealer seeking advance ruling under this section, shall make application to the Authority in such form, accompanied by proof of payment of such fee and paid in such manner as may be prescribed.
(3) On receipt of application, the Authority shall cause a copy thereof to be forwarded to the Assessing Authority concerned and call for its findings on the question raised and any other information or records as required by it.
(4) The Authority may, after examining the application and any records called for, by order, either admit or reject the application:
Provided that the Authority shall not allow the application where the question raised in the application,—
(i) is already pending before any officer or other authority of the Department or Appellate Tribunal or any Court; or
(ii) relates to a transaction or issue which is designed apparently for the avoidance of tax:
Provided further that no application shall be rejected under this sub-section unless an opportunity of being heard is given and where the application is rejected, reasons for such rejection shall be recorded in the order.
(5) The question on which the advance ruling may be sought shall be in respect of,- (a) classification of any goods under the Act;
(b) applicability of a notification issued under the provisions of the Act having a bearing on the rate of tax;
173 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 (c) the principles to be adopted for the purposes of determination of value of thegoods under the provisions of the Act;
(d) notifications issued, in respect of tax under the Act;
(e) admissibility of input tax credit of tax paid or deemed to have been paid;
(f) determination of the liability to pay tax on any goods under the Act; or (g) whether applicant is required to be registered under the Act;
(6) No proceedings before the Authority (including the pronouncement of advance ruling) under this section shall be questioned or shall be invalid on the ground merely of the existence of any vacancy or defect in the constitution of the Authority.
(7) A copy of every order made under sub-section (4) shall be sent to the applicant and the officer concerned.
(8) Where an application is admitted under sub-section (4), the Authority shall, after examining such further material as may be placed before it by the applicant or obtained by the Authority, pass such order as deems fit on the questions specified in the application, after giving an opportunity of being heard. The Authority shall pass order within ninety days of the receipt of application and a copy of such order shall be sent to the applicant and the officer concerned.
(9) The order of the Authority shall be binding only,-
(i) on the applicant who seeks the advance ruling;
(ii) in respect of the goods or transaction in relation to which it is sought; and (iii) in the proceedings before the officers of the Department (other than the Commissioner and the Appellate Tribunal) relating to such applicant.
(10) The order passed under sub-section (8) shall be binding as aforesaid unless there is a change in law or facts on the basis of which the order was passed.
(11) Where the authority, on a representation made to it by any officer or otherwise find that an order passed by it was obtained by fraud or mis-representation of facts, it may, by order, declare such order to be void-ab-initio, and thereupon, all the provisions of the Act shall apply to the applicant, as if, such order had never been passed.
(12) The Authority shall, for the purpose of exercising its powers regarding discovery and inspection, enforcing the attendance of any person and examining him on oath, issuing commissions and compelling production of books of account and other records, have all the powers of a civil court under the Code of Civil Procedure, 1908 (5 of 1908).
(13) The Authority shall be deemed to be a civil court for the purposes of section 195, (2 of 1974) but not for the purposes of Chapter XXVI of the Code of Criminal Procedure, 1973, and every proceedings before the Authority shall be deemed to be a judicial proceedings within the meaning of sections 193 and 228 (45 of 1860) and for the purpose of section 196 of the Indian Penal Code.
174 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 Explanation.—For the purpose of this section,—
(i) 'Advance Ruling' means the determination, by the Authority, of a question specified under sub-section (1) and (5) of this section; and
(ii) 'Authoirty' means the Authority for advance ruling constituted under sub-section (1) of this section.".
7. Amendment of section 50-A.— In section 50-A of the principal Act, in sub-section (1), for the words and sign "next higher authority," , the words, letters and signs "Commissioner prior to blocking the uploading of forms VAT-XXVI and VAT-XXVI-A and " shall be substituted.
__________
STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS
Section 11 of the Value Added Tax Act, 2005 provides for Input Tax Credit. Sub-section (16) of this section deals with false claims of Input Tax Credit. The penalty for the same is twice the amount of such false claim or credit in addition to tax and interest payable which is considered unreasonable and excessive and is also not easily recoverable. Thus, it is proposed to reduce this penalty to equal to the amount of such false claim. Further, this sub-section provides penalty for incorrect claim of Input Tax Credit due to wrong calculation without any intention to affect revenue interest adversely. The penalty for the same is fifty percent of the amount of such claim or credit in addition to the tax and interest payable which is also considered unreasonable. Thus, the penalty for incorrect claims is proposed to be reduced to twenty five percent of the amount of such claim. It has been felt that process of registration of dealers should be simplified and a provisional TIN number may be provided after the dealer completes the codal formalities. Keeping this in view, it is proposed that a provision for provisional registration may be inserted in the Act ibid wherein the applicant may be provided a provisional TIN number within three days of the online application for such provisional registration on receipt of requisite documents and fees.
Further, section 16 of the Act provides for payment of tax, filing of returns and penalties for non-furnishing of returns with no upper cap which is not considered just and proper, because in case of dealers who have closed down their business without getting the Registration Certificate cancelled and their whereabouts are not traceable, the penalty in such cases will continue to be imposed for an unending period and thereby leading to unnecessary mounting of arrears with no chance of recovery in sight. Thus, it is proposed to fix maximum limit of penalty for non- furnishing of returns. It is also felt that there is urgent need to take some remedial steps for early disposal of cases which are pending assessment due to want of statutory forms. With the Goods and Services Tax regime around the corner it is even more important to dispose of the old cases so that manpower and resources of the Department are diverted to scrutiny of new cases. Therefore, it is proposed to make provision for notifying of a Settlement Scheme to enable the settlement of such cases by partially or fully waiving of the penalty and interst. In order to ensure uniformity in the levy, assessment and collection of tax with regard to classification of goods under different entries of various Schedules to the Act ibid or the rate of tax applicable to such goods etc. thereby avoiding conflicting orders being passed by the different Assessing Authorities, 'Advance Ruling' is considered a perfect measure. As such, it has also been proposed to make a provision of 'Advance Ruling' in the Act ibid which will be a Tax Payer friendly and will afford for greater clarity to the dealers in respect of their prospective tax liabilities.
Further, section 50-A provides for locking of TIN and suspension of e-services in respect of the dealers who fail to pay any tax, penalty or interest payable under the Act ibid or fail to furnish175 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 returns by the prescribed dates etc.. It has been observed that some Assessing Authorities are arbitrarily blocking the facility of uploading Forms VAT-XXVI and VAT-XXVI-A appended to the Himachal Pradesh Value Added Tax Rules, 2005 and thereby causing inconvenience to the dealers. Thus, in order to ensure that the powers are not misused, it has been proposed that approval for blocking of the facility of uploading above forms shall be obtained by the Assessing Authorities from the Commissioner. This has necessitated amendments, in the Act ibid. This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.
SHIMLA : THE ………………, 2016.
__________
FINANCIAL MEMORANDUM
The provisions of the Bill when enacted are to be enforced through the existing Government machinery and no additional expenditure will be involved.
___________
MEMORANDUM REGARDING DELEGATED LEGISLATION
Clauses 3, 5 and 6 of the Bill seeks to empower the State Government to make rules and to notify a Scheme respectively for the purposes of this Act. The proposed delegation of power is essential and normal in character.
___________
ब अदालत श्री कर्म चन्द, कार्यकारी दण्डाधिकारी भोरंज, जिला हमीरपुर, हि0 प्र0
1. श्री राम शर्मा पुत्र श्री चेत राम, गांव भ्याड, डा0 महल, तहसील भोरंज, जिला हमीरपुर, हि0 प्र0 2. बिमला देवी पुत्री श्री सोहन लाल, गांव लगवान, डा0 लम्बलू, तहसील व जिला हमीरपुर, हि0 प्र0 . . प्रार्थीगण।
बनाम
आम जनता
ग्राम पंचायत महल के रिकार्ड में विवाह के पंजीकरण बारे
यह दरख्वास्त उपरोक्त प्रार्थीगणों ने सशपथ इस आशय से गुजार रखी है कि उनका विवाह हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार दिनांक 16-02-1969 को हुआ है परन्तु उनका विवाह ग्राम पंचायत महल के रिकार्ड में दर्ज न हैं। तथा विवाह को सम्बन्धित पंचायत में दर्ज करवाना चाहते हैं। अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि श्री राम शर्मा-बिमला देवी के विवाह को ग्राम पंचायत महल के रिकार्ड में दर्ज करने बारे किसी को कोई आपाि हो तो वह असालतन/वकालतन दिनांक 30-04-2016 को या इससे 176 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 पूर्व हाजिर अदालत आकर एतराज पेश कर सकता है। हाजिर न आने की सूरत में एकतरफा कार्रवाई अमल में लाई जाकर आगामी कार्यवाही की जायेगी। उसके बाद का उजर जेर समायत न होगा।
आज दिनांक 30-3-16 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर।
कर्म चन्द, नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, भोरंज, जिला हमीरपुर, हि0 प्र0।
-----------
ब अदालत श्री कर्म चन्द, कार्यकारी दण्डाधिकारी भोरंज, जिला हमीरपुर, हि0 प्र0
1. श्री राजू राम पुत्र श्री कश्मीर सिंह, गांव गडोला, डा0 बधानी, तहसील भोरंज, जिला हमीरपुर, हि0 प्र0।
2. कुमार पुनम पुत्री श्री बुध राम, गांव छोटी शमसी, डा0 शमसी, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0
. . प्रार्थीगण।
बनाम
आम जनता
ग्राम पंचायत बधानी के रिकार्ड में विवाह के पंजीकरण बारे
यह दरख्वास्त उपरोक्त प्रार्थीगणों ने सशपथ इस आशय से गुजार रखी है कि उनका विवाह हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार दिनांक 14-04-2014 को हुआ है परन्तु उनका विवाह ग्राम पंचायत बधानी के रिकार्ड में दर्ज न हैं तथा विवाह को सम्बन्धित पंचायत में दर्ज करवाना चाहते हैं। अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि श्री राजू राम-कुमारी पूनम के विवाह को ग्राम पंचायत बधानी के रिकार्ड में दर्ज करने बारे किसी को कोई आपाि हो तो वह असालतन/वकालतन दिनांक 30-04-2016 को या इससे पूर्व हाजिर अदालत आकर एतराज पेश कर सकता है। हाजिर न आने की सूरत में एकतरफा कार्रवाई अमल में लाई जाकर आगामी कार्यवाही की जायेगी। उसके बाद का उजर जेर समायत न होगा।
आज दिनांक 30-3-16 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर।
कर्म चन्द, नायब तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, भोरंज, जिला हमीरपुर, हि0 प्र0।
-----------
ब अदालत श्री कर्म चन्द, कार्यकारी दण्डाधिकारी एवं नायब तहसीलदार भोरंज, जिला हमीरपुर, हि0 प्र0
वेद प्रकाश शर्मा पुत्र श्री सदा राम, गांव जौह, डा0 चम्बोह, तहसील भोरंज, जिला हमीरपुर, हि0 प्र0
. . प्रार्थी
बनाम
आम जनता
विषय.-दरख्वास्त जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
अतिरिक्त रजिस्ट्रार जन्म एवं मृत्यु हमीरपुर के कार्यालय पत्र संख्या ः HFW-HMR(B&D)2014- 4968 दिनांक 8-3-2016 अनुसार वेद प्रकाश शर्मा पुत्र श्री सदा राम, गांव जौह, डा0 चम्बोह, तहसील भोरंज,177 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 जिला हमीरपुर, हि0 प्र0 का आवेदन समस्त रिकार्ड व शपथ-पत्र सहित इस कार्यालय में प्राप्त हुआ है जिसमें उल्लेख है कि उसकी पुत्री चन्दा शर्मा का जन्म दिनांक 20-2-1991 को हुआ है परन्तु ग्राम पंचायत चम्बोह, के रिकार्ड में उक्त दिनांक को दर्ज न करवा सका है तथा अब जन्म दिनांक उपरोक्त को ग्राम पंचायत चम्बोह में दर्ज करवाना चाहता है।
अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि चन्दा शर्मा पुत्री वेद प्रकाश शर्मा, गांव जौह, डा0 चम्बोह, तहसील भोरंज, जिला हमीरपुर, हि0 प्र0 की जन्म तिथि 20-2-1991 को ग्राम पंचायत चम्बोह के रिकार्ड में दर्ज करने बारे किसी को कोई उजर/एतराज हो तो वह दिनांक 30-04-2016 को या इससे पूर्व असालतन/वकालतन हाजिर आकर एतराज पेश कर सकता है। हाजिर न आने की सूरत में एकतरफा कार्रवाई अमल में लाई जाकर आगामी कार्यवाही की जायेगी। उसके बाद का उजर जेर समायत न होगा।
आज दिनांक 30-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर। कर्म चन्द, कार्यकारी दण्डाधिकारी एवं नायब तहसीलदार, भोरंज, जिला हमीरपुर, हि0 प्र0।
-----------
ब अदालत श्री कर्म चन्द, कार्यकारी दण्डाधिकारी एवं नायब तहसीलदार भोरंज, जिला हमीरपुर, हि0 प्र0
वेद प्रकाश शर्मा पुत्र श्री सदा राम, गांव जौह, डा0 चम्बोह, तहसील भोरंज, जिला हमीरपुर, हि0 प्र0
. . प्रार्थी
बनाम
आम जनता
विषय.-दरख्वास्त जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
अतिरिक्त रजिस्ट्रार जन्म एवं मृत्यु हमीरपुर के कार्यालय पत्र संख्या ः HFW-HMR(B&D)2014- 4970 दिनांक 8-3-2016 अनुसार वेद प्रकाश शर्मा पुत्र श्री सदा राम, गांव जौह, डा0 चम्बोह, तहसील भोरंज, जिला हमीरपुर, हि0 प्र0 का आवेदन समस्त रिकार्ड व शपथ-पत्र सहित इस कार्यालय में प्राप्त हुआ है जिसमें उल्लेख है कि उसके पुत्र सूरज शर्मा का जन्म दिनांक 5-2-1993 को हुआ है परन्तु ग्राम पंचायत चम्बोह, के रिकार्ड में उक्त जन्म दिनांक को दर्ज न करवा सका है तथा अब जन्म दिनांक उपरोक्त को ग्राम पंचायत चम्बोह में दर्ज करवाना चाहता है।
अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि सूरज शर्मा पुत्र वेद प्रकाश शर्मा, गांव जौह, डा0 चम्बोह, तहसील भोरंज, जिला हमीरपुर, हि0 प्र0 की जन्म तिथि 5-2-1993 को ग्राम पंचायत चम्बोह के रिकार्ड में दर्ज करने बारे किसी को कोई उजर/एतराज हो तो वह दिनांक 30-04-2016 को या इससे पूर्व असालतन/वकालतन हाजिर आकर एतराज पेश कर सकता है। हाजिर न आने की सूरत में एकतरफा कार्रवाई अमल में लाई जाकर आगामी कार्यवाही की जायेगी। उसके बाद का उजर जेर समायत न होगा।
आज दिनांक 30-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर। कर्म चन्द, कार्यकारी दण्डाधिकारी एवं नायब तहसीलदार, भोरंज, जिला हमीरपुर, हि0 प्र0।178 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 ब अदालत जनाब सहायक समाहर्ता एवम् कार्यकारी दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी, ज्वाली, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0)
श्री रमेश चन्द सपुत्र लालू, निवासी गांव भटोली, मौजा हरनोटा खास, तहसील ज्वाली, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0)।
बनाम
आम जनता
विषय.-प्रार्थना-पत्र बराये जाति दरुस्ती बारे।
उपरोक्त प्रार्थी ने अधोहस्ताक्षरी की अदालत में प्रार्थना-पत्र मय व्यान हल्फी इस आशय से गुजारा है कि उसकी जाति राजस्व विभाग के महाल भटोली में जाति ब्राह्मण उप-जाति कालिये दर्ज है। जबकि महाल हरनोटा खास मौजा हरनोटा खास में वह भूमि मालिक बना है। जिसमें उसकी जाति ब्राह्मण उप-जाति कण्डवाल दर्ज है। उसने अनुरोध किया है कि उसकी जाति राजस्व रिकार्ड में ब्राह्मण उप-जाति कण्डवाल के बजाए ब्राह्मण उप-जाति कालिये दर्ज की जाए।
अतः इस सम्बन्ध में सर्वसाधारण को बजरिया इश्तहार सूचित किया जाता है कि प्रार्थी की जाति की दरुस्ती बारे यदि किसी को कोई आपाि हो तो वह असालतन या वकालतन अदालत अधोहस्ताक्षरी दिनांक 23-4-2016 को आकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है। हाजिर न आने की सूरत में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जा करके नियमानुसार जाति दरुस्ती के आदेश पारित कर दिए जायेंगे।
आज दिनांक 26-3-2016 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी किया गया।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, ज्वाली, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0।
----------
ब अदालत नायब तहसीलदार एवम् कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील शाहपुर, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0) श्रीमती शारदा देवी पत्नी स्व0 श्री ओम प्रकाश, गांव व डाकघर डोहब, तहसील शाहपुर, जिला कांगड़ा . . प्रार्थिया। (हि0 प्र0)
बनाम
आम जनता
विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवम् मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 बारे।
श्रीमती शारदा देवी पत्नी स्व0 श्री ओम प्रकाश, गांव व डाकघर डोहब, तहसील शाहपुर, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0) ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र मय व्यान हल्फी गुजारा है कि उसकी लडकी कुमारी पूजा का जन्म 15-03-1993 को हुआ है। लेकिन ग्राम पंचायत के रिकार्ड रजिस्टर में दर्ज न हुआ है।
अतः इस राजपत्र इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि इस बारे किसी भी व्यक्ति को कोई उजर या एतराज हो तो वह दिनांक 26-04-2016 को प्रातः 10.00 बजे अदालत में हाजिर179 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 होकर अपना एतराज पेश कर सकता है। कोई एतराज पेश न होने की सूरत में जन्म तिथि पंजीकृत करने के आदेश कर दिये जाएंगे।
आज दिनांक 15-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, शाहपुर, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।
----------
ब अदालत सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील शाहपुर, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0 सुमीत डोगरा पुत्र श्री जितेन्द्र डोगरा, निवासी अम्बाडी, डाकघर रजोल, तहसील शाहपुर, जिला कांगडा (हि0 प्र0)
. . वादी।
बनाम
आम जनता
विषय.--प्रार्थना-पत्र बाबत जेर धारा 8(4) के अन्तर्गत विवाह के पंजीकरण बारे।
सुमीत डोगरा पुत्र श्री जितेन्द्र डोगरा, निवासी अम्बाडी, डाकघर रजोल, तहसील शाहपुर, जिला कांगडा (हि0 प्र0) प्रार्थना-पत्र मय हल्फिया ब्यान इस अशय से गुजारा है कि उसकी शादी श्रीमती किरण कुमारी पुत्री श्री रविन्द्र कुमार शर्मा, निवासी ग्राम दुने के ब्लाक मोगा-2, जिला मोगा, पंजाब के साथ दिनांक 14-08-2014 को हुई है परन्तु गलती से उसने शादी का पंजीकरण ग्राम पंचायत अम्बाडी के रिकार्ड में दर्ज नही ं करवाया है जिसे प्रार्थी अब दर्ज करवाना चाहता है।
अतः इस सम्बन्ध में सर्वसाधारण को इश्तहार समाचार-पत्र के माध्यम से सूचित करें कि प्रार्थी की शादी के पंजीकरण बारे यदि किसी भी व्यक्ति को कोई उजर या एतराज हो तो वह दिनांक 26-04-2016 को या इससे पूर्व असालतन या वकालतन इस अदालत में हाजिर आकर अपने उजरात/एतराज पेश कर सकता/सकती है। हाजिर न आने की सूरत में नियमानुसार शादी पंजीकरण के आदेश पारित कर दिये जाएंगे।
आज दिनांक 14-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, शाहपुर, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0)।
----------
ब अदालत नायब तहसीलदार एवम् कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील शाहपुर, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0) श्रीमती सन्तोष कुमारी पत्नी श्री बलदेव कुमार, गांव व डाकघर डढम्ब, तहसील शाहपुर, जिला कांगड़ा . . प्रार्थिया। (हि0 प्र0)
बनाम
आम जनता
विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवम् मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 बारे। 180 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 श्रीमती सन्तोष कुमारी पत्नी श्री बलदेव कुमार, गांव व डाकघर डढम्ब, तहसील शाहपुर, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0) ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र मय व्यान हल्फी गुजारा है कि उसकी लडकी तमन्ना का जन्म 30-01-2011 को हुआ है। लेकिन ग्राम पंचायत के रिकार्ड रजिस्टर में दर्ज न हुआ है।
अतः इस राजपत्र इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि इस बारे किसी भी व्यक्ति को कोई उजर या एतराज हो तो वह दिनांक 26-04-2016 को प्रातः 10.00 बजे अदालत में हाजिर होकर अपना एतराज पेश कर सकता है। कोई एतराज पेश न होने की सूरत में जन्म तिथि पंजीकृत करने के आदेश कर दिये जाएंगे।
आज दिनांक 28-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, शाहपुर, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।
---------
ब अदालत सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, शाहपुर, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0)
श्रीमती पिंकी देवी पत्नी श्री सुरिन्दर कुमार, गांव व डाकघर रजोल, तहसील शाहपुर, जिला कांगडा (हि0 प्र0)
. . प्रार्थिया।
बनाम
आम जनता
विषय.--कागजात माल में नाम की दरुस्ती हि0 प्र0 भू-राजस्व अधिनियम, 1954 की धारा 37(2) के अन्तर्गत करने बारे।
श्रीमती पिंकी देवी पत्नी श्री सुरिन्दर कुमार, गांव व डाकघर रजोल, तहसील शाहपुर, जिला कांगडा ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र मय ब्यान हल्फी गुजारा है कि उसके पति का सही नाम सुरिन्दर कुमार है। परन्तु राजस्व अभिलेख महाल रजोल में राजिन्दर सिंह दर्ज है, जो कि गलत है। दरुस्ती की जावे। अतः इस राजपत्र इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को उजर या एतराज हो तो वह दिनांक 26-04-2016 को प्रातः 10.00 बजे हाजिर होकर पेश कर सकता है। बाद पेशी कोई भी उजर या उतराज नहीं सुना जाएगा तथा प्रार्थिया के पति का नाम राजस्व अभिलेख में दर्ज करने के आदेश कर दिये जाएंगे।
आज दिनांक 18-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर
हस्ताक्षरित/- सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, शाहपुर, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0)।181 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 ब अदालत नायब तहसीलदार एवम् कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील शाहपुर, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0) श्री राकेश कुमार पुत्र श्री रघुवीर सिंह, गांव व डाकघर रैत, तहसील शाहपुर, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0)
. . प्रार्थी।
बनाम
आम जनता
विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवम् मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 बारे।
श्री राकेश कुमार पुत्र श्री रघुवीर सिंह, गांव व डाकघर रैत, तहसील शाहपुर, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0) ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र मय व्यान हल्फी गुजारा है कि उसके लड़के नरेन्दर कुमार का जन्म दिनांक 21-03-1990 को हुआ है। लेकिन ग्राम पंचायत के रिकार्ड रजिस्टर में दर्ज न हुई है।
अतः इस राजपत्र इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि इस बारे किसी भी व्यक्ति को कोई उजर या एतराज हो तो वह दिनांक 26-04-2016 को प्रातः 10.00 बजे अदालत में हाजिर होकर अपना एतराज पेश कर सकता है। कोई एतराज पेश न होने की सूरत में जन्म तिथि पंजीकृत करने के आदेश पारित कर दिये जाएंगे।
आज दिनांक 23-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, शाहपुर, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।
------
ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नंम्बर : 2/M.E./T/2016
तारीख पेशी : 22-04-2016 1. श्री शिव चन्द पुत्र श्री रामू, निवासी पराक्षी, डा0 पीज, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0। 2. श्रीमती कान्ता देवी पुत्री श्री धर्मू, निवासी पाहनाला, डा0 मौहल, तहसील न जिला कुल्लू, हि0 प्र0
. . प्रार्थीगण।
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादीगण विषय.-प्रार्थना-पत्र जेर धारा 5(4) हि0 प्र0 रजिस्ट्रीकरण नियम, 2004 विवाह पंजीकरण बारे।
उपरोक्त मामला में प्रार्थीगण उपरोक्त ने दिनांक 23-03-2016 को इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 10-03-2011 को हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार स्थान पाहनाला में शादी कर ली है और तब से पति पत्नी के रुप में रहते चले आ रहे हैं। परन्तु प्रार्थीगण द्वारा अपनी शादी का इन्द्राज सम्बन्धित पंजायत में नहीं करवाया है।
अतः सर्वसाधारण को व आम जनता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त प्रार्थीगणों की शादी को सम्बन्धित पंचायत के अभिलेख में दर्ज करने बारे कोई उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 22-04-2016 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत 182 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 पेश होकर अपना उजर व एतराज पेश कर सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर व एतराज प्राप्त न होने की सूरत में नियमानुसार शादी दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 23-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।
-------
ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नंम्बर : 3/M.E./T/2016
तारीख पेशी : 23-03-2016 1. श्री संजय कुमार पुत्र श्री सेस राम, निवासी व्रामंग, डा0 मौहल, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0। 2. श्रीमती नीना कमारी पुत्री श्री चुन्जू राम, निवासी व्रामंग, डा0 मौहल, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0।
. . प्रार्थीगण।
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादीगण विषय.-प्रार्थना-पत्र जेर धारा 5(4) हि0 प्र0 रजिस्ट्रीकरण नियम, 2004 विवाह पंजीकरण बारे।
उपरोक्त मामला में प्रार्थीगण उपरोक्त ने दिनांक 23-03-2016 को इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 9-05-2015 को हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार स्थान व्रामंग में शादी कर ली है और तब से पति पत्नी के रुप में रहते चले आ रहे हैं। परन्तु प्रार्थीगण द्वारा अपनी शादी का इन्द्राज सम्बन्धित पंजायत में नहीं करवाया है।
अतः सर्वसाधारण को व आम जनता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त प्रार्थीगणों की शादी को सम्बन्धित पंचायत के अभिलेख में दर्ज करने बारे कोई उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 22-04-2016 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत पेश होकर अपना उजर व एतराज पेश कर सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर व एतराज प्राप्त न होने की सूरत में नियमानुसार शादी दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 23-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।
-------
ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नंम्बर : 2/B.E./T/2016
तारीख पेशी : 29-04-2016
बनाम सर्वसाधारण एवं आम जनता
183 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938विषय.-प्रार्थना-पत्र अधिनियम धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्रीमती प्रेम लता पत्नी श्री हरी राम, निवासी फरमेहा, डा0 सेऊवाग, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0 ने इस कार्यालय में प्रार्थना-पत्र दिया है कि उसके लड़के अभिषेक का जन्म दिनांक 22-6-2011 को हुआ है परन्तु उसकी जन्म तिथि का इन्द्राज किसी कारणवश ग्राम पंचायत गाहर के अभिलेख में दर्ज न की गई है। अतः इस इश्तहार हजा द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को अभिषेक की जन्म तिथि दर्ज करवाने बारे कोई आपाि हो तो वह दिनांक 29-4-2016 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन व वकालनत हाजिर अदालत आकर अपना उजर व एतराज दर्ज करवा सकता है इसके उपरान्त कोई भी उजर/एतराज समायत न होगा तथा नियमानुसार जन्म तिथि दर्ज करवाने के आदेश सम्बन्धित पंचायत को पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 30-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।
-------
ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नंम्बर : 3/B.E./T/2016
तारीख पेशी : 29-04-2016
बनाम सर्वसाधारण एवं आम जनता
विषय.-प्रार्थना-पत्र अधिनियम धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्रीमती प्रेम लता पत्नी श्री हरी राम, निवासी फारमेहा, डा0 सेऊवाग, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0 ने इस कार्यालय में प्रार्थना-पत्र दिया है कि उसके पुत्र विवेक का जन्म दिनांक 28-8-2013 को हुआ है परन्तु उसकी जन्म तिथि का इन्द्राज किसी कारणवश ग्राम पंचायत गाहर के अभिलेख में दर्ज न की गई है। अतः इस इश्तहार हजा द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को विवेक की जन्म तिथि दर्ज करवाने बारे कोई आपाि हो तो वह दिनांक 29-4-2016 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन व वकालनत हाजिर अदालत आकर अपना उजर व एतराज दर्ज करवा सकता है इसके उपरान्त कोई भी उजर/एतराज समायत न होगा तथा नियमानुसार जन्म तिथि दर्ज करवाने के आदेश सम्बन्धित पंचायत को पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 30-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।184 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नंम्बर : 4/B.E./T/2016
तारीख पेशी : 29-04-2016
बनाम सर्वसाधारण एवं आम जनता
विषय.-प्रार्थना-पत्र अधिनियम धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्रीमती रामकली पत्नी श्री टिकम राम, निवासी नलहाच, डा0 भेखली, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0 ने इस कार्यालय में प्रार्थना-पत्र दिया है कि उसके भतीजे मोहर सिंह का जन्म दिनांक 1-1-1985 को हुआ है परन्तु उसकी जन्म तिथि का इन्द्राज किसी कारणवश ग्राम पंचायत वयासर के अभिलेख में दर्ज न की गई है।
अतः इस इश्तहार हजा द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को मोहर सिंह की जन्म तिथि दर्ज करवाने बारे कोई आपाि हो तो वह दिनांक 29-4-2016 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन व वकालनत हाजिर अदालत आकर अपना उजर व एतराज दर्ज करवा सकता है इसके उपरान्त कोई भी उजर/एतराज समायत न होगा तथा नियमानुसार जन्म तिथि दर्ज करवाने के आदेश सम्बन्धित पंचायत को पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 30-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।
-------
ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नंम्बर : 5/B.E./T/2016
तारीख पेशी : 29-04-2016
बनाम सर्वसाधारण एवं आम जनता
विषय.-प्रार्थना-पत्र अधिनियम धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्रीमती सुनीता देवी पुत्री श्री इन्द्र चन्द, निवासी गांव डा0 लंराकिलों, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0 ने इस कार्यालय में प्रार्थना-पत्र दिया है कि उसका जन्म दिनांक 5-3-1983 को हुआ है परन्तु उसकी जन्म तिथि का इन्द्राज किसी कारणवश ग्राम पंचायत नथान के अभिलेख में दर्ज न की गई है।
अतः इस इश्तहार हजा द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को सुनीता देवी की जन्म तिथि दर्ज करवाने बारे कोई आपाि हो तो वह दिनांक 29-4-2016 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन व वकालनत हाजिर अदालत आकर अपना उजर व एतराज दर्ज करवा सकता है इसके उपरान्त कोई भी उजर/एतराज समायत न होगा तथा नियमानुसार जन्म तिथि दर्ज करवाने के आदेश सम्बन्धित पंचायत को पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 30-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।185 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नंम्बर : 6/B.E./T/2016
तारीख पेशी : 30-04-2016
बनाम सर्वसाधारण एवं आम जनता
विषय.-प्रार्थना-पत्र अधिनियम धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्री आत्मा राम पुत्र श्री साजू राम, निवासी चलाह, डा0 शांलग, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0 ने इस कार्यालय में प्रार्थना-पत्र दिया है कि उसकी लड़की भूमा देवी का जन्म दिनांक 21-2-2011 को हुआ है परन्तु उसकी जन्म तिथि का इन्द्राज किसी कारणवश ग्राम पंचायत ग्रामंग/डुखरीगाहर के अभिलेख में दर्ज न की गई है।
अतः इस इश्तहार हजा द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को भूमा देवी की जन्म तिथि दर्ज करवाने बारे कोई आपाि हो तो वह दिनांक 30-4-2016 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन व वकालनत हाजिर अदालत आकर अपना उजर व एतराज दर्ज करवा सकता है इसके उपरान्त कोई भी उजर/एतराज समायत न होगा तथा नियमानुसार जन्म तिथि दर्ज करवाने के आदेश सम्बन्धित पंचायत को पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 31-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।
-------
ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नंम्बर : 7/B.E./T/2016
तारीख पेशी : 30-04-2016
बनाम सर्वसाधारण एवं आम जनता
विषय.-प्रार्थना-पत्र अधिनियम धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्रीमती पींकी देवी पुत्री श्री नूप राम पत्नी श्री रेपू, निवासी वनोगी, डा0 भेखली, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0 ने इस कार्यालय में प्रार्थना-पत्र दिया है कि उसके लड़के नानक चन्द का जन्म दिनांक 15-8-1978 को हुआ है परन्तु उसकी जन्म तिथि का इन्द्राज किसी कारणवश ग्राम पंचायत वनोगी के अभिलेख में दर्ज न की गई है।
अतः इस इश्तहार हजा द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को नानक चन्द की जन्म तिथि दर्ज करवाने बारे कोई आपाि हो तो वह दिनांक 30-4-2016 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन व वकालनत हाजिर अदालत आकर अपना उजर व एतराज दर्ज करवा सकता है इसके उपरान्त कोई भी उजर/एतराज समायत न होगा तथा नियमानुसार जन्म तिथि दर्ज करवाने के आदेश सम्बन्धित पंचायत को पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 31-3-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।186 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नंम्बर : 8/B.E./T/2016
तारीख पेशी : 30-04-2016
बनाम सर्वसाधारण एवं आम जनता
विषय.-प्रार्थना-पत्र अधिनियम धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्रीमती धोषी देवी पत्नी श्री हेत राम, निवासी नलहाच, डा0 भेखली, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0 ने इस कार्यालय में प्रार्थना-पत्र दिया है कि उसका जन्म दिनांक 01-08-1979 को हुआ है परन्तु उसकी जन्म तिथि का इन्द्राज किसी कारणवश ग्राम पंचायत नलहाच के अभिलेख में दर्ज न की गई है। अतः इस इश्तहार हजा द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को धोषी देवी की जन्म तिथि दर्ज करवाने बारे कोई आपाि हो तो वह दिनांक 30-4-2016 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन व वकालनत हाजिर अदालत आकर अपना उजर व एतराज दर्ज करवा सकता है इसके उपरान्त कोई भी उजर/एतराज समायत न होगा तथा नियमानुसार जन्म तिथि दर्ज करवाने के आदेश सम्बन्धित पंचायत को पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 31-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।
-------
ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नं0 : 4/M.E./T/2016
तारीख पेशी : 29-04-2016 1. श्री सुमीत शर्मा पुत्र श्री चुड़ामणी शर्मा, निवासी H. No. 34 शास्त्री नगर, डा0 ढ़ालपुर, तहसील व जिला कुल्लू।
2. श्रीमती रिघा टण्डन पुत्री श्री प्रदीप टण्डन, निवासी वक्शी नगर, जम्मू, हाल पत्नी श्री सुमीत . . प्रार्थीगण। शर्मा, कुल्लू
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादीगण विषय.-प्रार्थना-पत्र जेर धारा 5(4) हि0 प्र0 रजिस्ट्रीकरण नियम, 2004 विवाह पंजीकरण बारे।
उपरोक्त मामला में प्रार्थीगण उपरोक्त ने दिनांक 23-3-2016 को इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 17-11-2015 को हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार स्थान शास्त्री नगर में शादी कर ली है और तब से पति पत्नी के रुप में रहते चले आ रहे हैं। परन्तु प्रार्थीगण द्वारा अपनी शादी का इन्द्राज सम्बन्धित पंचायत में नहीं करवाया है।
अतः सर्वसाधारण को व आम जनता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त प्रार्थीगणों की शादी को सम्बन्धित पंचायत के अभिलेख में दर्ज करने बारे कोई उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 29-04-2016 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत187 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 पेश होकर अपना उजर/एतराज पेश कर सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर व एतराज प्राप्त न होने की सूरत में नियमानुसार शादी दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 30-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।
-------
ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नं0 : 5/M.E./T/2016
तारीख पेशी : 29-04-2016 1. श्री वीर सिंह पुत्र श्री भगत राम, निवासी पधर, डा0 खड़ीधार, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0। 2. श्रीमती सरला देवी पुत्री श्री वीर चन्द, निवासी नथान, डा0 भेखली, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0
. . प्रार्थीगण।
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादीगण विषय.-प्रार्थना-पत्र जेर धारा 5(4) हि0 प्र0 रजिस्ट्रीकरण नियम, 2004 विवाह पंजीकरण बारे।
उपरोक्त मामला में प्रार्थीगण उपरोक्त ने दिनांक 28-3-2016 को इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 10-3-2014 को हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार स्थान नथान में शादी कर ली है और तब से पति पत्नी के रुप में रहते चले आ रहे हैं। परन्तु प्रार्थीगण द्वारा अपनी शादी का इन्द्राज सम्बन्धित पंचायत में नहीं करवाया है।
अतः सर्वसाधारण को व आम जनता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त प्रार्थीगणों की शादी को सम्बन्धित पंचायत के अभिलेख में दर्ज करने बारे कोई उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 29-04-2016 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत पेश होकर अपना उजर/एतराज पेश कर सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर व एतराज प्राप्त न होने की सूरत में नियमानुसार शादी दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 30-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।
-------
ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नं0 : 6/M.E./T/2016
तारीख पेशी : 29-04-2016 1. श्री हीरा लाल पुत्र श्री शिव राम, निवासी टाड़ंला, डा0 काईस, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0। 188 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 2. श्रीमती खेखी देवी त्यागी पत्नी श्री नरोाम राम, निवासी विष्ट वेहड, डा0 काईस, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0 हाल पत्नी श्री हीरा लाल, निवासी टाड़ंला, डा0 काईस, तहसील व जिला . . प्रार्थीगण। कुल्लू
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादीगण विषय.-प्रार्थना-पत्र जेर धारा 5(4) हि0 प्र0 रजिस्ट्रीकरण नियम 2004 विवाह पंजीकरण बारे।
उपरोक्त मामला में प्रार्थीगण उपरोक्त ने दिनांक 29-3-2016 को इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 5-2-2000 को हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार स्थान टाडं़ला में शादी कर ली है और तब से पति पत्नी के रुप में रहते चले आ रहे हैं। परन्तु प्रार्थीगण द्वारा अपनी शादी का इन्द्राज सम्बन्धित पंचायत में नहीं करवाया है।
अतः सर्वसाधारण को व आम जनता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त प्रार्थीगणों की शादी को सम्बन्धित पंचायत के अभिलेख में दर्ज करने बारे कोई उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 29-04-2016 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत पेश होकर अपना उजर व एतराज पेश कर सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर व एतराज प्राप्त न होने की सूरत में नियमानुसार शादी दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 30-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।
-------
ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नं0 : 7/M.E./T/2016
तारीख पेशी : 30-04-2016 1. श्री विशन पुत्र श्री तेज राम, निवासी रूमसू, डा0 नगर, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0। 2. श्रीमती नीमों पुत्री श्री राजू राम, निवासी दामचीन, डा0 फोजल, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0 . . प्रार्थीगण।
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादीगण विषय.-प्रार्थना-पत्र जेर धारा 5(4) हि0 प्र0 रजिस्ट्रीकरण नियम, 2004 विवाह पंजीकरण बारे।
उपरोक्त मामला में प्रार्थीगण उपरोक्त ने दिनांक 21-3-2016 को इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 4-4-2014 को हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार स्थान दामचीन में शादी कर ली है और तब से पति पत्नी के रुप में रहते चले आ रहे हैं। परन्तु प्रार्थीगण द्वारा अपनी शादी का इन्द्राज सम्बन्धित पंचायत में नहीं करवाया है।189 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 अतः सर्वसाधारण को व आम जनता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त प्रार्थीगणों की शादी को सम्बन्धित पंचायत के अभिलेख में दर्ज करने बारे कोई उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 30-04-2016 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत पेश होकर अपना उजर व एतराज पेश कर सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर व एतराज प्राप्त न होने की सूरत में नियमानुसार शादी दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 31-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।
-------
ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नं0 : 8/M.E./T/2016
तारीख पेशी : 30-04-2016 1. श्री निशान्त चौहान पुत्र श्री लाल सिंह चौहान, निवासी जटेहड़ विहाल, डा0 कटराई, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0।
2. श्रीमती हेम लता पुत्री श्री कृष्ण चन्द, गांव व डा0 ववेली, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0
. . प्रार्थीगण।
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादीगण विषय.-प्रार्थना-पत्र जेर धारा 5(4) हि0 प्र0 रजिस्ट्रीकरण नियम, 2004 विवाह पंजीकरण बारे।
उपरोक्त मामला में प्रार्थीगण उपरोक्त ने दिनांक 23-3-2016 को इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 23-11-2015 को हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार स्थान ववेली में शादी कर ली है और तब से पति पत्नी के रुप में रहते चले आ रहे हैं। परन्तु प्रार्थीगण द्वारा अपनी शादी का इन्द्राज सम्बन्धित पंचायत में नहीं करवाया है।
अतः सर्वसाधारण को व आम जनता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त प्रार्थीगणों की शादी को सम्बन्धित पंचायत के अभिलेख में दर्ज करने बारे कोई उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 30-04-2016 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत पेश होकर अपना उजर/एतराज पेश कर सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर व एतराज प्राप्त न होने की सूरत में नियमानुसार शादी दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 31-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।190 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नं0 : 9/M.E./T/2016
तारीख पेशी : 30-04-2016 1. श्री भुवनेश्वर पुत्र श्री भगत राम पुत्र श्री चेत राम, निवासी जाणा, डा0 अरछण्डी, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0।
2. श्रीमती सुमन ठाकुर पुत्री श्री धर्मचन्द, निवासी उशलीधार डा0 ववेली, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0
. . प्रार्थीगण।
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादीगण विषय.-प्रार्थना-पत्र जेर धारा 5(4) हि0 प्र0 रजिस्ट्रीकरण नियम, 2004 विवाह पंजीकरण बारे।
उपरोक्त मामला में प्रार्थीगण उपरोक्त ने दिनांक 30-3-2016 को इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 26-9-2012 को हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार स्थान उशलीधार में शादी कर ली है और तब से पति पत्नी के रुप में रहते चले आ रहे हैं। परन्तु प्रार्थीगण द्वारा अपनी शादी का इन्द्राज सम्बन्धित पंचायत में नहीं करवाया है।
अतः सर्वसाधारण को व आम जनता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त प्रार्थीगणों की शादी को सम्बन्धित पंचायत के अभिलेख में दर्ज करने बारे कोई उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 30-04-2016 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत पेश होकर अपना उजर व एतराज पेश कर सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर व एतराज प्राप्त न होने की सूरत में नियमानुसार शादी दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 31-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।
------- ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नं0 : 10/M.E./T/2016
तारीख पेशी : 30-04-2016 1. श्री दीपक कुमार पुत्र श्री सुभाष कुमार, निवासी H.No. 131 Ward No. 2 Akhara Bazar Kullu (H.P.)।
Kullu (H.P.)
2. श्रीमती अर्पिता शर्मा पुत्री श्री राजीव शर्मा, r/o H.No. 53 Ward No. 3 Beasa Mour A.B. . . प्रार्थीगण।
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादीगण विषय.-प्रार्थना-पत्र जेर धारा 5(4) हि0 प्र0 रजिस्ट्रीकरण नियम, 2004 विवाह पंजीकरण बारे।
उपरोक्त मामला में प्रार्थीगण उपरोक्त ने दिनांक 26-3-2016 को इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 19-6-2015 को हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार स्थान व्यासा मोड़ में शादी कर191 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 ली है और तब से पति पत्नी के रुप में रहते चले आ रहे हैं। परन्तु प्रार्थीगण द्वारा अपनी शादी का इन्द्राज सम्बन्धित पंचायत में नहीं करवाया है।
अतः सर्वसाधारण को व आम जनता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त प्रार्थीगणों की शादी को सम्बन्धित पंचायत के अभिलेख में दर्ज करने बारे कोई उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 30-04-2016 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत पेश होकर अपना उजर व एतराज पेश कर सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर व एतराज प्राप्त न होने की सूरत में नियमानुसार शादी दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 31-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।
-------
ब अदालत श्री रघुवीर सिंह शाशनी, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नं0 : 11/M.E./T/2016
तारीख पेशी : 30-04-2016 1. श्री शेर सिंह पुत्र श्री शोभू राम, गांव कोटाधार, डा0 कराड़सू, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0।
2. श्रीमती तारा पुत्री श्री नूप राम, निवासी भाट कराल, डा0 शिरड़, तहसील व जिला कुल्लू, हि0प्र0 . . प्रार्थीगण।
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादीगण विषय.-प्रार्थना-पत्र जेर धारा 5(4) हि0 प्र0 रजिस्ट्रीकरण नियम, 2004 विवाह पंजीकरण बारे।
उपरोक्त मामला में प्रार्थीगण उपरोक्त ने दिनांक 18-2-2016 को इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 5-10-2015 को हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार स्थान भाट कराल में शादी कर ली है और तब से पति पत्नी के रुप में रहते चले आ रहे हैं। परन्तु प्रार्थीगण द्वारा अपनी शादी का इन्द्राज सम्बन्धित पंचायत में नहीं करवाया है।
अतः सर्वसाधारण को व आम जनता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त प्रार्थीगणों की शादी को सम्बन्धित पंचायत के अभिलेख में दर्ज करने बारे कोई उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 30-04-2016 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत पेश होकर अपना उजर व एतराज पेश कर सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर व एतराज प्राप्त न होने की सूरत में नियमानुसार शादी दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 31-3-16 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील कुल्लू, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।192 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 ब अदालत श्री हरि सिंह राणा, हि0प्र0से0 अतिरिक्त जिला पंजीेयक विवाह एवं उप-मण्डल अधिकारी (ना0) पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हि0 प्र0
ईश्तहार
श्री हेमन्त कुमार पुत्र श्री राम लाल नि0 ग्राम घुत्तनपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश।
बनाम
1. सचिव ग्राम पंचायत पातलियों, तहसील पांवटा साहिब
2. आम जनता।
प्रार्थना पत्र जेरे धारा 8(4) के अन्तर्गत विवाह पंजीकरण बारे।
जैसा कि श्री हेमन्त कुमार पुत्र श्री राम लाल नि0 ग्राम घुत्तनपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ने मय शपथ पत्र प्रार्थना इस अनुरोध के साथ प्रस्तुत किया है कि उसका विवाह श्रीमती कमला देवी पुत्री श्री प्रेम चन्द, निवासी ग्राम किशनपुरा, पांवटा साहिब के साथ दिनांक 19-04-2015 को हुआ है तथा अज्ञानतावश ग्राम पंचायत पातलियों, तहसील पांवटा साहिब के रिकार्ड में विवाह का पंजीकरण नहीं करवा सका है जिसे अब पंजीकरण करवाना चाहता है।
अतः इस सम्बन्ध में श्री हेमन्त कुमार पुत्र श्री राम लाल नि0 ग्राम घुत्तनपुर, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश की शादी के पंजीकरण बारे किसी व्यक्ति को कोई एतराज हो तो दिनांक 21-04-2016 तक असालतन अथवा वकालतन अधोहस्ताक्षरी की अदालत में उपस्थित होकर प्रस्तुत कर सकता है। निर्धारित तिथि तक कोई एतराज प्राप्त न होने की सूरत में प्रार्थी का विवाह पंजीकरण एवं दर्ज करने के नियमानुसार आदेश पारित कर दिये जायेंगे।
आज दिनांक 22-03-2016 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर।
हरि सिंह राणा (हि0प्र0से0), अतिरिक्त जिला पंजीयक विवाह एवं उप-मण्डल दण्डाधिकारी, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हि0 प्र0।
-----------
Before the court of Marriage Officer (S.D.M.) Paonta Sahib, District Sirmaur, H. P.
NOTICE UNDER SECTION 16 OF SPECIAL MARRIAGE ACT.
Whereas Shri Naveen Kumar s/o Shri Yashpal, r/o Village Manpur Deora, Tehsil Paonta Sahib, District Sirmaur, H.P. and Rima Dass d/o Shri Phani Bushan Dass aged about 19 years, r/o HQ 37, Assam Rifles, C/o 99 APO, 932037, Medziphema, Nagaland have filed an application for the registration of their marriage, which was solemnized on 28-03-2016 and they have been living husband and wife ever since then.
193राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938 Notices are given to all concerned and General Public to this effect that if anybody has got any objection regarding the registration of marriage duly solemnized on 28-3-2016 between above said Shri Naveen Kumar s/o Shri Yashpal, r/o Village Manpur Deora, Tehsil Paonta Sahib, District Sirmaur, H.P. and Rima Dass d/o Shri Phani Bushan Dass aged about 19 years, r/o HQ 37, Assam Rifles, C/o 99 APO, 932037, Medziphema, Nagaland they should file their written objections and should appear personally or through their authorised agents before me within the period of thirty days from the date of issue of this notices. After expiry of the said period, the marriage certificate would be issued to the applicant by this court and later on no objection will be heard and accepted.
Issued under my hand and seal.
Seal.
Sd/- Marriage Officer (SDM), Paonta Sahib.
____________
In the court of Shri H. S. Rana, H.A.S., Marriage Officer (SDM) Paonta Sahib,
District Sirmaur, Himachal Pradesh
NOTICE UNDER SECTION 16 OF SPECIAL MARRIAGE ACT 1954
In the matter of :—
Shri Jatinder s/o Shri Dharam Pal, r/o Sunder Nagar, District Mandi at present Village Ganguwala, Tehsil Paonta Sahib, District Sirmaur, H.P. and Smt. Jyoti Samuel d/o Shri Sant Ram Samuel, r/o H.No. 2, Village Ganguwala, Tehsil Paonta Sahib, District Sirmaur, H.P.
Versus
General Public
Whereas Shri Jatinder s/o Shri Dharam Pal, r/o Sunder Nagar, District Mandi at present Village Ganguwala, Tehsil Paonta Sahib, District Sirmaur, H.P. and Smt. Jyoti Samuel d/o Shri Sant Ram Samuel, r/o H.No. 2, Village Ganguwala, Tehsil Paonta Sahib, District Sirmaur, H.P have filed an application for registration of their marriage solemnized on 24-04-2015 and they have been living as husband and wife ever since then. Notices are given to all concerned and General Public to this effect that if any body has any objection regarding the registration of marriage duly solemnized on 24-04-2015 Shri Jatinder s/o Shri Dharam Pal, r/o Sunder Nagar, District Mandi at present Village Ganguwala, Tehsil Paonta Sahib, District Sirmaur, H.P. and Smt. Jyoti Samuel d/o Shri Sant Ram Samuel, r/o H.No. 2, Village Ganguwala, Tehsil Paonta Sahib, District Sirmaur, H.P. he should file written objections and appear personally before this court within 30 days from the date of issue of this notice. After expiry of the said period, the marriage certificate would be issued to the applicants by this court.
Issued under my hand and office seal on dated 26-03-2016.
Seal.
HARI SINGH RANA (HAS), Marriage Officer-cums-Sub-Divisional magistrate, Paonta Sahib, District Sirmaur.
194 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 11 अप्रैल, 2016/22 चैत्र, 1938नियन्त्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, हिमाचल प्रदेश, शिमला-5 द्वारा मुद्रित तथा प्रकाशित इलेक्ट्रॉनिके हस्ताक्षरित राजपत्र, वैबसाइट http://rajpatrahimachal.nic.in पर उपलब्ध है एवम् ऑनलाइन सत्यापित किया जा सकता है