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Himachal Pradesh Gazette · Government of Himachal Pradesh

Himachal Pradesh Gazette, No. 152, 26 October 2018

Published 26 October 2018

Gazette no.
152
Gazetteid
152/GAZETTE/2018-26/10/2018
Identifier
in.gazette.himachal.2018-10-26.152_gazette_2018-26_10_2018
Languages
English, Hindi
Published at
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राजपत्र, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित शुक्रवार, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940

हिमाचल प्रदेश सरकार

LANGUAGE, ART & CULTURE DEPARTMENT

NOTIFICATION

Shimla-2, the 23rd October, 2018

No. LCD-B (15)-5/2018.—The Governor, Himachal Pradesh is pleased to constitute a District Level Committee in each district of the State for the smooth and proper implementation of the scheme "Aaj Purani Raahon Se" (APURSA) notified vide this Department Notification of even 152-राजपत्र/2018-26-10-2018 (5749)5750 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 No., Dated: October 05, 2018 formulated by Language, Art & Culture Department in compliance with para 128 of the Budget Assurance—2018 of the Hon'ble Chief Minister to boost employment and cultural tourism by leveraging and preserving the rich cultural heritage of the State. This Committee will also submit the suggestions received from local Hon'ble MLA's on APURSA sites.

The committee shall comprise of the following:—

1. Deputy Commissioner

. . Chairman 2. All Sub-Divisional Magistrates

. . Member 3. District Language Officer

. . Member 4. Representative of the Forest Department

. . Member 5. Representative of the Public Works Department

. . Member 6. ASI Members

. . Member

. . Special Invitee 7. Local Registered Travel Agents/Hotel Association Tour Operators.

By order,

PURNIMA CHAUHAN, Secretary (LAC).

_____________

LANGUAGE, ART & CULTURE DEPARTMENT

NOTIFICATION

Shimla-2, the 23rd October, 2018

No. LCD-B (15)-5/2018.—The Governor, Himachal Pradesh is pleased to constitute a State Level Committee for the smooth and proper implementation of the scheme "Aaj Purani Raahon Se" (APURSA) notified vide this Department Notification of even No. Dated: October 05, 2018 formulated by Language, Art & Culture Department in compliance with para 128 of the Budget Assurance—2018 of the Hon'ble Chief Minister to boost employment and cultural tourism by leveraging and preserving the rich cultural heritage of the State.

The committee shall comprise of the following:—

1. Administrative Secretary (Language, Art & Culture) . . Chairman 2. Curator, H.P. State Museum, Shimla

. . Member 3. Joint Director (Language, Art & Culture)

. . Member 4. Deputy/Assistant Director (Performing Art/Fine Art) . . Member Department of Language, Art & Culture5751 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 5. Director (Language, Art & Culture) . . Member Secretary By order, PURNIMA CHAUHAN, Secretary (LAC).

____________

LANGUAGE, ART & CULTURE DEPARTMENT

NOTIFICATION

Shimla-2, the 23rd October, 2018

No. LCD-F (3)-1/2018.—The Governor, Himachal Pradesh is pleased to constitute a District Level Committee in each district of the State for the smooth and proper implementation of the scheme "Dev Bhoomi Darshan" notified vide this Department Notification of even No. Dated: September 29, 2018 as per the Budget Assurance—2018-19 of the Hon'ble Chief Minister to provide transport facility for senior citizens of the State to visit different religious places in the State formulated by the Department of Language, Art & Culture.

The committee shall comprise of the following:

1. Deputy Commissioner or his representative

. . Chairman 2. Superintendent of Police or his representative

. . Member 3. Representative of the Health Department

. . Member 4. District Welfare Officer

. . Member 5. District Language Officer

. . Member Secretary

By order, PURNIMA CHAUHAN, Secretary (LAC).

_____________

LANGUAGE, ART & CULTURE DEPARTMENT

NOTIFICATION

Shimla-2, 11th October, 2018

No. LCD-F(8)-1/2015.—In supersession of this Department's Notification of even No. dated March 20, 2017, the Governor, Himachal Pradesh is pleased to notify the "Grant-in-aid scheme for worship/prayers and maintenance of the religious institutions through Revolving Fund" (Annexure- A) formulated by the Department of Language, Art & Culture.

By order, PURNIMA CHAUHAN, Secretary (LAC).

5752 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940

आवर्ती निधि से धार्मिक संस्थानों की पूजा-अर्चना एवं रख-रखाव हेतु अनुदान योजना 1. उद्देश्य.--हिमाचल प्रदेश में धार्मिक संस्थानों की एक समृद्ध विरासत है। प्रदेश सरकार इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं प्रोत्साहन के लिए कटिबद्ध है। विगत में प्रदेश के बहुत से मन्दिरों की अपनी भू-सम्पदा थी, जिससे प्राप्त आय का उपयोग धार्मिक संस्थानों के रख-रखाव व दैनिक पूजा-अर्चना इत्यादि के लिए किया जाता था। विभिन्न भूमि सुधार कानूनों के क्रियान्वयन के कारण बहुत से धार्मिक संस्थानों की भू-सम्पदा मुजारों/सरकार में निहित होने के फलस्वरूप उनकी आय में भारी कमी आ गई है जिस कारण धार्मिक संस्थानों का रख-रखाव, यहां तक कि नियमित पूजा अर्चना भी वर्तमान में ठीक तरह से नहीं हो पा रही है। इस हेतु हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा आवर्ती निधि (Revolving Fund) का सृजन किया गया है, जिसका उद्देश्य निम्नलिखित प्रकार सेे रहेगा :-

(क) धार्मिक संस्थानों में नित्य प्रति पूजा आदि को विधिवत चलाना

(ख) धार्मिक संस्थानों के रख-रखाव को ठीक करना

(ग) धार्मिक संस्थानों के रख-रखाव हेतु उनकी आय को बढ़ाना

2. आवर्ती निधि का संचालन.--निदेशक, भाषा एवं संस्कृति विभाग, आवर्ती निधि की राशि को वित्त विभाग द्वारा समय-समय पर जारीे नियमों के अनुसार सबसे अधिक ब्याज देने वाले राष्ट्रीय—त/राज्य सहकारी बैंक में विभिन्न अवधि की सावधि जमा (Fixed Deposit) खाता योजना में जमा करवाएंगे तथा इससे प्राप्त ब्याज की राशि का सदुपयोग इस योजना के कार्यान्वयन के लिए किया जाएगा। इस प्रकार कुल प्राप्त ब्याज राशि से इस योजना में आने वाले धार्मिक संस्थानों को क्रमांक 3 के अनुसार वार्षिक या एकमुश्त अनुदान प्रदान किया जा सकेगा। सावधि व बचत खातों का संचालन निदेशक, भाषा एवं संस्कृति विभाग, हिमाचल प्रदेश द्वारा किया जाएगा।

3. अनुदान के प्रकार.--अनुदान दो प्रकार से दिया जा सकता है :-

(क) वार्षिक अनुदान.--धार्मिक संस्थानों के नित्य प्रति पूजा आदि को विधिवत चलाने व रख-रखाव करने हेतु प्रति वर्ष एक निश्चित राशि अनुदान के रूप में प्रदान की जाएगी।

या

(ख) परिसम्पत्तियों के सृजन हेतु एकमुश्त अनुदान.--धार्मिक संस्थानों की आय बढ़ाने के लिए संसाधनों/परिसम्पत्तियों के सृजन हेतु एकमुश्त अनुदान प्रदान किया जाएगा जिससे कि धार्मिक संस्थान आत्मनिर्भर हो सकें, जो कि निम्नलिखित प्रकार से हो सकते हैंः-

(1) खाली भूमि में, जिस पर इन संस्थानों को स्वामित्व प्राप्त है, सराय, दुकानें, पार्किंग, होटल इत्यादि बनाना।

(2) कोई भी ऐसा कार्य जो इन संस्थानों की निरन्तर आय का साधन हो सके

(जिन धार्मिक संस्थानों को एकमुश्त अनुदान दिया जाएगा उनकी वार्षिक अनुदान की पात्रता समाप्त हो जाएगी)।

या

(ग) मन्दिर की सुरक्षा हेतु उपकरणों का प्रावधान.--सीसीटीवी कैमरे तथा रिकॉर्डिंग सिस्टम/उपकरण आदि की खरीद हेतु अधिकतम रुपये 1.00 लाख की राशि एक मुश्त अनुदान की भांति केवल एक बार ही प्रदान की जाएगी।5753 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 (जिन धार्मिक संस्थानों को सुरक्षा उपकरणों की खरीद हेतु एकमुश्त अनुदान दिया जाएगा वह वार्षिक अनुदान लेने के लिए चार वर्ष के उपरान्त पुनः पात्र होंगे।)

4. पात्रता.--(क) आवर्ती निधि से अनुदान प्राप्त करने के लिए वही धार्मिक संस्थान पात्र होंगे, जिनकी भूमि विभिन्न भू-सुधार अधिनियमों के अन्तर्गत मुजारों/सरकार में निहित हुई है।

(ख) अपवर्जन.--'हिमाचल प्रदेश हिन्दू सार्वजनिक धार्मिक संस्थान व पूर्त विन्यास अधिनियम, 1984' की अनुसूची-1 में शामिल मन्दिर

तथा

'हिमाचल प्रदेश प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मारक एवं पुरातात्त्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1976' के तहत राज्य संरक्षित स्मारक।

तथा

'प्राचीन संस्मारक एवं पुरातात्त्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958' के तहत केन्द्रीय संरक्षित स्मारक

तथा

निजी स्वामित्व वाले धार्मिक संस्थान अनुदान के पात्र नहीं होंगे।

(ग) धार्मिक संस्थान की जिस भूमि का अधिग्रहण हुआ है और यदि उसका मुआवजा धार्मिक संस्थान को मिल चुका है, वह भूमि, इस अनुदान योजना के तहत गणना में नहीं ली जाएगी। (घ) धार्मिक संस्थान जिन्होंने अपने स्तर पर ही आय संसाधन बढ़ाने हेतु (सराय, दुकान अथवा पार्किंग या अन्य कोई निर्माण) का कार्य शूरू कर रखा है/कर रखा था तथा धन के अभाव के कारण अधूरा पड़ा है वह भी इस परियोजना में अनुदान के पात्र होंगे। अन्य विभागीय परियोजनाओं से सहायतानुदान लेने वाले धार्मिक संस्थान इस योजना में भी सहायतानुदान हेतु पात्र होंगे।

5. प्रक्रिया.--पात्र धार्मिक संस्थान के अध्यक्ष अथवा क़ारदार, निम्नलिखित निर्धारित प्रपत्रों पर अपेक्षित दस्तावेज़ों सहित प्रकरण सम्बन्धित जिला भाषा अधिकारी को प्रस्तुत करेंगे :-

(1) वार्षिक अनुदान प्राप्त करने हेतु :

(क) प्रथम बार अनुदान प्राप्त करने हेतु :

(1) आवेदन (प्रपत्र-1)

(2) विहित हुई भूमि का विवरण (प्रपत्र-2)

(3) भूमि की नकल जमाबंदी व अक्स ततीमा, जिस पर धार्मिक संस्थान अवस्थित है (4) धार्मिक संस्थान के चारों ओर से खींचे गए चार रंगीन स्पष्ट छायाचित्र, जो कि कम से कम 5x7 इंच के हों और जिनमें कि धार्मिक संस्थान के भवन की दाएं से बाएं व ऊपर से नीचे तक की छवि स्पष्ट होती हो।

(5) कोई अन्य ऐसा प्रमाण पत्र अथवा दस्तावेज जो कि प्रकरण की जांच के दौरान अथवा उपरांत, विभाग की संतुष्टि के लिए आवश्यक प्रतीत होता हो, मांगा जा सकता है।5754 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 (ख) उसके बाद हर वर्ष अनुदान प्राप्त करने हेतु : (1) विगत वर्ष में दी गई अनुदान राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (प्रपत्र-3)

(2) आवेदन (प्रपत्र-1)

(3) पूर्व प्रदत्त अनुदान के उपयोग जांचने हेतु संस्था को जिला भाषा अधिकारी के समक्ष सत्यापन के लिए, मूल वाउचरज़ व उनकी सत्यापित छाया प्रतियां तथा कैश बुक प्रस्तुत की जाएंगी। इन दस्तावेजों के संतोषजनक पाए जाने के उपरांत ही जिला भाषा अधिकारी अगले वर्ष अनुदान प्रदान करने हेतु संस्तुति करेंगे।

(4) कोई अन्य ऐसा प्रमाणपत्र अथवा दस्तावेज जो कि प्रकरण की जांच के दौरान अथवा उपरांत, विभाग की संतुष्टि के लिए आवश्यक प्रतीत होता हो, मांगा जा सकता है। (5) विभाग किसी भी धार्मिक संस्थान को हर वर्ष अनुदान प्रदान करने हेतु बाध्य नहीं है। यह आवर्ती निधि में उपलब्ध राशि तथा इस योजना में समय-समय पर होने वाले संशोधनों पर निर्भर होगा।

(6) अनुदान 'पहले आओ-पहले पाओ' आधार पर दिया जाएगा।

(7) यदि विभाग यह समझता है कि धार्मिक संस्थान वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर है या अब आत्म निर्भर हो गया है तो उसे अनुदान देने पर विचार नहीं किया जाएगा। (8) यदि किसी आवेदक संस्था ने अभी तक कैश बुक व वाउचरज़ सहेजने की लेखा प्रणाली नहीं अपनाई है, तो उसे केवल प्रथम बार आवेदन करते हुए इस बारे छूट मिलेगी परंतु उसके उपरांत उसे यह लेखा प्रणाली अपनी संस्था में तुरंत प्रभाव से चालू करनी होगी तभी उसे अगली बार यह अनुदान मिल पाएगा।

(2) परिसम्पत्तियों के सृजन हेतु एकमुश्त अनुदान प्राप्त करने के लिए.--(क) एकमुश्त अनुदान प्राप्त करने हेतु निम्नलिखित औपचारिकताएं पूर्ण करनी होंगी :-

(1) आवेदन (प्रपत्र-1)

(2) विहित हुई भूमि का विवरण (प्रपत्र-2)

(3) भूमि की नकल जमाबंदी व अक्स ततीमा जिस पर धार्मिक संस्थान अवस्थित है

(4) भूमि की नकल जमाबंदी व अक्स ततीमा जिस पर धार्मिक संस्थान द्वारा प्रस्तावित निर्माण कार्य (सराय अथवा दुकानें अथवा पार्किंग या अन्य कोई निर्माण) प्रस्तावित है। यह भूमि धार्मिक संस्थान की होनी आवश्यक है।

(5) प्रस्तावित निर्माण/शेष बचे हुए कार्य की ड्राईंग्ज़ व प्राक्कलन की चार प्रतियां

(6) धार्मिक संस्थान के चारों ओर से खींचे गए चार रंगीन स्पष्ट छायाचित्र, जो कि कम से कम 5x7 इंच के हों और जिनमें कि धार्मिक संस्थान के भवन की दाएं से बाएं व ऊपर से नीचे तक की छवि स्पष्ट होती हो। प्रस्तावित निर्माण कार्य के लिए चिन्हित भूमि के छाया चित्र/शेष बचे हुए कार्य के छाया चित्र।

(7) छायाचित्र सत्यापन व अन्य प्रमाणपत्र प्रपत्र-4 पर पटवारी द्वारा जारी प्रमाणपत्र5755 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 (8) प्रस्तावित संरचना के लिए प्रपत्र-5 पर पंचायत द्वारा जारी अन्नापत्ति प्रमाणपत्र

(9) कोई अन्य ऐसा प्रमाणपत्र जो कि प्रकरण की जांच के दौरान अथवा उपरांत, विभाग की संतुष्टि के लिए आवश्यक प्रतीत होता हो, मांगा जा सकता है।

(10) प्रस्तावित निर्माण संरचना व धार्मिक संस्थान के प्राक्कलन व ड्राईंग्ज चार-चार प्रतियों में। खण्ड विकास अधिकारी कार्यालय के कनिष्ठ अभियंता द्वारा तैयार किए हुए ही प्राक्कलन एवं ड्रार्इंग स्वीकार्य होंगे।

(11) अनुदानग्राही को प्रपत्र-8 के अनुसार अनुदान सम्बंधी वचन/शपथ पत्र देना होगा (ख) एकमुश्त अनुदान हेतु प्रक्रिया.--(1) सम्बंधित ज़िला भाषा अधिकारी प्राप्त प्रकरणों की नियमानुसार जांच पड़ताल कर अपनी संस्तुति सहित नियमित रूप से निदेशालय को भेजेंगे।

(2) विभाग के अभियांत्रिकी प्रभाग द्वारा प्रकरणों का निरीक्षण किया जाएगा।

(3) विभाग के पुरातत्त्व प्रभाग द्वारा प्रकरणों का निरीक्षण किया जाएगा और स्थल का निरीक्षण भी कर सकते हैं तथा जो भी संशोधन आवश्यक हो, तीन मास के भीतर सूचित करेंगे। प्राक्कलन को पुरातत्त्व अभियन्ता अपने स्तर पर औचित्य सहित घटा अथवा बढ़ा भी सकेंगे और तत्सम्बंधी प्रस्ताव अनुवीक्षण समिति के समक्ष भी रख सकते हैं।

(4) सभी प्रकार के प्रकरणों में सहायतानुदान की अधिकतम राशि सामान्यतः रुपये 25 लाख होगी तथापि यदि यह राशि अपर्याप्त हो तो अपवादात्मक परिस्थितियों में जिला भाषा अधिकारी की विशेष अनुशंसा जो कि उपायुक्त द्वारा पुनरीक्षित हो, तत्सम्बंधी कारणों का उल्लेख करते हुए व प्राक्कलन तथा औचित्य सहित कार्य की आवश्यकता के अनुसार इस सीमा से अधिक अनुदान दिया जा सकता है।

(5) वित्तीय वर्ष के प्रत्येक अप्रैल मास मेंं, निम्नलिखित अनुवीक्षण समिति प्राप्त सभी प्रकरणों (वार्षिक अथवा एकमुश्त) की जांच कर उनकी समीक्षा करेगी और प्रत्येक प्रकरण पर नियमानुसार अनुदान राशि की संस्तुति करेगी :--

1. निदेशक

. . अध्यक्ष

2. अतिरिक्त/संयुक्त निदेशक

. . सदस्य

. . सदस्य

3. संग्रहालयाध्यक्ष-I

4. पुरातत्त्व अभियन्ता

. . सदस्य

. . सदस्य

5. अधीक्षक-I

6. सम्बन्धित जिला भाषा अधिकारी . . सदस्य

7. कनिष्ठ अभियंता/अतिरिक्त सहायक अभियंता (निदेशालय) . . सदस्य सचिव। (6) इसके उपरांत प्रकरणों का निपटान निम्नलिखित अनुसार किया जाएगा :

(1) दस लाख तक के प्रकरण निदेशक भाषा-संस्—ति विभाग स्वी—त करेंगे

(2) रुपये दस लाख से अधिक राशि वाले प्रकरण सरकार को स्वीकृत्यार्थ भिजवाए जाएंगे5756 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 (3) अनुदान दो किस्तों में दिया जाएगा : (1) 50 प्रतिशत अनुदान की मांग स्वी—ति होने पर

(2) शेष 50 प्रतिशत आधा कार्य पूर्ण होने पर

(3) जनजातीय क्षेत्रों में वर्ष भर में कार्य अवधि कम होने के कारण यह अनुदान एकमुश्त दिया जा सकेगा।

(7) विभाग द्वारा स्वी—त राशि तथा प्रस्तावित कार्य पर व्यय होने वाली कुल राशि की शेष राशि धार्मिक संस्थान के आवेदक को जन-सहभागिता के रूप में सुनिश्चित करनी आवश्यक होगी।

(8) सहायतानुदान राशि सम्बंधित उपायुक्त के माध्यम सेे खण्ड विकास अधिकारी को प्रदान की जाएगी, जो इस राशि को आवेदक को कार्य की प्रगति व आवश्यकतानुसार जारी करेंगे। ऐसे प्रत्येक स्वी—त मामले में अनुमोदित प्राक्कलन की प्रति व स्वी—ति पत्र की प्रति सम्बन्धित जिला भाषा अधिकारी तथा आवेदक को पृष्ठांकित की जाएगी। खण्ड विकास अधिकारी को स्वी—ति की प्रति प्राक्कलन की अनुमोदित प्रति सहित भेजी जाएगी।

(9) निर्माण कार्यों का निष्पादन आवेदक संस्था सम्बंधित खण्ड विकास अधिकारी कार्यालय के कनिष्ठ अभियंता के पर्यवेक्षण में करेगी। निर्माण कार्य ग्रामीण विकास विभाग द्वारा उनके निर्माण कार्य सम्बंधी संहिता, नियमावली तथा हि. प्र. सरकार द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों (Works Code, Manaul & the instructions issued by the H.P. Govt. from time to time) के अनुरूप किया जाएगा।

(10) खण्ड विकास अधिकारी कार्यालय के कनिष्ठ अभियंता, भाषा-संस्कृति विभाग द्वारा अनुमोदित प्राक्कलन के आधार पर कार्य करवाना सुनिश्चित करेंगे। यदि मंदिर आवेदक, अनुमोदित प्राक्कलन के आधार पर कार्य नहीं करता है तो वह सम्बंधित खण्ड विकास अधिकारी व उपमण्डलाधिकारी को तुरंत रिपोर्ट करेंगे और उसकी एक प्रति अविलम्ब इस विभाग को भी भेजेंगे। इसके उपरांत इस विभाग के अधिकारी निरीक्षण कर, अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे और सचिव (भाषा-संस्—ति) इस पर अंतिम निर्णय लेंगे।

(11) यदि आवेदक द्वारा अनुदान नियमों की अवहेलना पाई जाएगी तो उसे सारी राशि ब्याज सहित एक-मुश्त लौटानी होगी।

(12) निर्माण कार्य को समय-समय पर भाषा एवं संस्—ति विभाग के अधिकारियों को देखने की खुली छूट होगी। ये अधिकारी चल रहे कार्य में परिवर्तन भी मन्दिर समितियों को बतायेंगे, जो मन्दिर समितियोंं को मान्य होगा। निरीक्षण अधिकारी प्रत्येक निरीक्षित धार्मिक संस्थान की रिपोर्ट छायाचित्रों सहित तुरंत निदेशालय को भेजेगा।

(13) अनुदान की राशि, एक वर्ष के भीतर व्यय करनी होगी अन्यथा भाषा विभाग ऐसी राशि को ब्याज सहित एक-मुश्त वापस लेने का हकदार होगा।

(14) निदेशक अपनी संतुष्टि पर इस अवधि को, विशेष कारणों को देखते हुए एक वर्ष तक और बढ़ाने में सक्षम होंगे।

(15) धार्मिक संस्थान समिति द्वारा निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने पर उपयोगिता प्रमाण-पत्र (प्रपत्र-7) प्रस्तुत करना होगा।

(16) प्रत्येक अनुदानग्राही संस्था को विभाग द्वारा प्रदत्त अनुदान की निम्नलिखित सूचना धार्मिक संस्थान अथवा पुरातन स्मारक के पास साईन बोर्ड लगा कर प्रदर्शित करनी आवश्यक रहेगी :

➢ कार्य का पूर्ण नाम ➢ स्वी—त राशि5757 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 ➢ स्वी—ति वर्ष ➢ अनुदान प्रदाता विभागः--भाषा-संस्—ति विभाग (हि0 प्र0) ➢ कार्य आरम्भ की तिथि ➢ कार्य समाप्ति की तिथि

(17) धार्मिक संस्थान को आवर्ती निधि से प्राप्त अनुदान (वार्षिक अनुदान/हर वर्ष अनुदान एवं परिसम्पतियों के सृजन हेतु एक मुश्त अनुदान) की धन राशि के उपयोग हेतु एक अलग बैंक खाता संचालित करना होगा जिसकी अलग से कैश बुक लगाई जाएगी व अनुदान से सम्बन्धित व्यय के समस्त वाऊचरों का संकलन कर सम्बन्धित जिला भाषा अधिकारी से सत्पापित करवाने होंगे। (प्रपत्र-3 ख)।

6. अनुदान राशि निर्धारण.--(1) अप्रैल मास में पिछले वित्त वर्ष में बैंक में जमा आवर्ती निधि पर प्राप्त कुल ब्याज से सहायतानुदान प्रदान किया जाएगा।

(2) इस ब्याज राशि का कम से कम 70%, वार्षिक अनुदान वाले प्रकरणों के लिए सुरक्षित रहेगा (3) शेष 30% से एकमुश्त अनुदान केे प्रकरणों पर विचार किया जाएगा

(4) यदि प्रकरणों की अधिकता व धन की अल्पता के कारण एकमुश्त वाले प्रकरणों पर उस वर्ष अनुदान नहीं दिया जा रहा है तो उन्हें उस वर्ष वार्षिक सहायतानुदान दिया जाएगा और यह तब तक मिलता रहेगा, जब तक उस धार्मिक संस्थान को एकमुश्त अनुदान नहीं मिलता है। एकमुश्त अनुदान वाले प्रकरणों की प्राथमिकता सूची बनाई जाएगी और इसमें 'पहले आओ-पहले पाओ' आधार पर अनुदान स्वी—त किया जाएगा।

(5) परन्तु क्रमांक 2 व 3 के अधिक्रमण में विभाग वार्षिक एवं एक मुश्त अनुदान हेतु प्राप्त/स्वीकृत प्रकरणों में अद्यतन व्यय स्थिति (अनुमोदित वार्षिक/एकमुश्त अनुदान के प्रकरणों की संख्या) के अनुपातानुसार अपने स्तर पर 70% तथा 30% राशि को आवश्यकता अनुसार कम ज्यादा कर बटवारा कर सकेगा। (क) वार्षिक अनुदान का निर्धारण.--वार्षिक अनुदान का आधार, मुजारों अथवा सरकार में निहित भूमि (इसमें वह भूमि शामिल नहीं होगी, जिसका मुआवजा मिल चुका है) की मात्रा के आधार पर होगा।

वार्षिक अनुदान की राशि निम्नलिखित प्रकार से जारी की जाएगी :-

क्र0 सं0 निहित हुई कुल भूमि (इसमें वह भूमि शामिल नहीं होगी, जिसका मुआवजा मिल चुका है)। वार्षिक अनुदान (रुपये)
1. 10 बीघा तक 10,000
2. 10 से अधिक तथा 50 बीघा तक 15,000
3. 50 से अधिक तथा 100 बीघा तक 20,000
4. 100 बीघा से अधिक 25,000

(ख) परिसम्पत्तियों के सृजन हेतु एकमुश्त अनुदान.--एकमुश्त अनुदान वाले प्रकरणों में निदेशक द्वारा पुरातत्त्व प्रभाग के अभियंताओं द्वारा प्राक्कलन की तकनीकी रूप से निरीक्षित राशि के 75 प्रतिशत से अधिक नहीं दी जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा सामान्यतः रुपये 25 लाख से अधिक नहीं होगी तथापि यदि यह राशि अपर्याप्त हो तो अपवादात्मक परिस्थितियों में जिला भाषा अधिकारी की विशेष अनुशंसा जो कि उपायुक्त द्वारा पुनरीक्षित हो, तत्सम्बंधी कारणों का उल्लेख करते हुए व प्राक्कलन तथा औचित्य सहित कार्य की आवश्यकता के अनुसार इस सीमा से अधिक अनुदान दिया जा सकता है। 5758 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 विभाग द्वारा स्वी—त राशि तथा प्रस्तावित कार्य पर व्यय होने वाली कुल राशि की शेष राशि आवेदक को जन-सहभागिता के रूप में सुनिश्चित करनी आवश्यक होगी।

7. वार्षिक अनुदान के व्यय की मदें.--(1) पात्र धार्मिक संस्थानों को अनुदान राशि मुख्यतः पूजा- अर्चना एवं रख-रखाव के लिए ही दी जाएगी। धार्मिक संस्थानों में प्रचलित प्रथानुसार पूजा-अर्चना सामग्री के क्रय हेतु अनुदान राशि का उपयोग किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त धार्मिक संस्थान के रख-रखाव के लिए भी अनुदान राशि का उपयोग किया जा सकेगा। रख-रखाव में धार्मिक संस्थान की साफ-सफाई, बिजली, पानी की व्यवस्था, छुट-पुट मुरम्मत इत्यादि सम्मिलित होंगे।

(2) धार्मिक संस्थान अथवा उसके परिसर में बड़ी मुरम्मत अथवा किसी भी तरह का सरंचनात्मक फेरबदल व पुनर्निर्माण कार्य, रख-रखाव में सम्मिलित नहीं होगा।

(3) अनुदान राशि का उपयोग किसी भी कर्मचारी की नव नियुक्ति या वर्तमान में नियुक्त कर्मचारियों के वेतन अथवा भत्तों की अदायगी के लिए नहीं किया जाएगा।

(4) अनुदान राशि का उपयोग भण्डारे, प्रतिष्ठा, यज्ञ इत्यादि के लिए नहीं किया जाएगा (5) पारम्परिक पूजा पद्धति के अनुरूप (धार्मिक उत्सवों/धार्मिक अनुष्ठानों/धार्मिक पूजा में होने वाला व्यय) को भी मन्दिर के व्यय में शामिल किया जा सकेगा।

8. अवधि.--धार्मिक संस्थान की पूजा-अर्चना एवं रख-रखाव के लिए अनुदान राशि, वर्ष में केवल एक बार ही देय होगी। प्रत्येक धार्मिक संस्थान को हर वित्तीय वर्ष के अप्रैल मास में इस योजना में प्राविधित औपचारिकताओं को पूर्ण करके अनुदान हेतु प्रकरण विभाग को भिजवाना होगा।

9. उपयोगिता प्रमाण पत्र.--(क) वार्षिक अनुदान के प्रकरण में.--(1) अनुदानग्राही धार्मिक संस्थान को प्रदत्त अनुदान का उपयोगिता प्रमाण पत्र [प्रपत्र-3(क), (ख)] तीन प्रतियों में सम्बन्धित जिला भाषा अधिकारी के पास सत्यापित कर देना होगा जिसे कि जिला भाषा अधिकारी दो प्रतियों में निदेशालय को भिजवाएंगे और भविष्य संदर्भ हेतु एक प्रति अपने पास सहेज कर रखेंगे। उपयोगिता प्रमाण-पत्र के साथ प्रदत्त अनुदान के उपयोग के वाउचरज़ की छाया प्रतियां प्रस्तुत करनी होंगी, जो कि संस्था के अध्यक्ष द्वारा सत्यापित होंगी, जिसके आधार पर ही अनुदान का सदुपयोग सुनिश्चित होगा।

(2) किसी भी धार्मिक संस्थान को जब प्रथम बार इस वार्षिक योजना के तहत अनुदान स्वी—त हो जाएगा, उसके उपरांत प्रत्येक वर्ष के अप्रैल मास में मन्दिर प्रबन्धन द्वारा जिला भाषा अधिकारी के समक्ष, प्रपत्र-1 के साथ धार्मिक संस्थान का पिछले वित्त वर्ष का आय-व्यय का सम्पूर्ण विवरण, बिल-वाउचर व कैश बुक सहित प्रस्तुत करना होगा व इसके साथ पिछले वर्ष में जारी राशि का उपयोगिता प्रमाण-पत्र भी प्रस्तुत करना होगा। जिला भाषा अधिकारी इन दस्तावेजों की जांच कर, अपनी संतुष्टि के उपरांत, प्रकरण निदेशालय को स्वी—त्यार्थ भिजवाएंगे। उपयोगिता प्रमाण-पत्र के बिना प्रस्तुत प्रकरण पर विचार नहीं किया जाएगा। (3) धार्मिक संस्थान की समिति को संस्था की पूरी आय व व्यय का विवरण एक कैश बुक में दर्ज करना होगा व समस्त बिल/वाउचरज़ सहेज कर रखने होंगे, जिसका निरीक्षण/सत्यापन सम्बन्धित जिला भाषा अधिकारी/विभाग के अधिकारियों द्वारा किसी भी समय पर किया जा सकता है।

(ख) परिसम्पत्तियों के निर्माण वाले प्रकरणों में.--(1) आधा कार्य हो जाने पर इस तथ्य हेतु निर्धारित प्रमाण-पत्र, प्रपत्र-6 पर विभाग को भेजा जायेगा, जो कि सम्बंधित खण्ड विकास अधिकारी द्वारा सत्यापित होना चाहिए।

(2) इस निर्धारित प्रमाणपत्र की प्राप्ति पर, दूसरी/अंतिम किस्त जारी कर दी जायेगी

(3) आवेदक को प्रदत्त कुल अनुदान राशि का उपयोगिता प्रमाण-पत्र (प्रपत्र-7) तीन प्रतियों में5759 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 सम्बन्धित उपायुक्त से सत्यापनोपरांत, निदेशक (भाषा-संस्—ति) को भेजना होगा। आवेदक को उपयोगिता प्रमाणपत्र के साथ प्रदत्त अनुदान के उपयोग के वाउचरज़ की छाया प्रतियां प्रस्तुत करनी होंगी जो कि आवेदक द्वारा सत्यापित होंगी, जिसके आधार पर ही अनुदान का सदुपयोग सुनिश्चित होगा। सभी वाउचरज़ कैश बुक में दर्ज होने चाहिएं तथा सहेज कर रखे जाने चाहिएं, जिसका निरीक्षण अथवा सत्यापन सम्बन्धित जिला भाषा अधिकारी अथवा विभाग के अधिकारियों द्वारा किसी भी समय पर किया जा सकता है। 10. निरीक्षण एवं नियम उल्लंघना.--(क) परिसम्पत्तियों के निर्माण कार्य को समय-समय पर भाषा एवं संस्—ति विभाग के अधिकारियों को देखने की खुली छूट होगी। ये अधिकारी चल रहे कार्य में आवश्यक परिवर्तन भी आवेदक समितियों को बतायेंगे, जो आवेदक समितियोंं को मान्य होगा। निरीक्षण अधिकारी, प्रत्येक निरीक्षित धार्मिक संस्थान की रिपोर्ट छाया चित्रों सहित तुरंत निदेशालय को भेजेगा। विभाग के कनिष्ठ अभियंता/संरक्षण सहायक आवश्यकतानुसार हर अनुदान प्राप्त धार्मिक संस्थान का निरीक्षण करेंगे तथा पुरातत्त्व अभियंता नमूना-जांच (Test Check) के तौर पर 10 प्रतिशत निरीक्षण करेंगे।

(ख) सहायतानुदान प्राक्कलन की जिन कार्य मदों के लिए दिया गया है उसी पर खर्च किया जाना होगा। ऐसा न करने पर सारी राशि ब्याज सहित वापस ली जा सकेगी।

प्रपत्र-1

आवेदन प्रपत्र

1. धार्मिक संस्थान का नाम व पूरा पता। नाम ......................................... डाकघर .................................. तहसील .................................. जिला ...................................... गांव ....................................... प ंचायत ................................ ि वकास खण्ड ...................... उ पमण्डल ............................ पिन कोड ............................. NaN
2. धार्मिक संस्थान का प्रबन्धन समिति का नाम ........................................................................ NaN
3. क्या धार्मिक संस्थान किसी अधिनियम के अधीन पंजीकृत है, यदि हां तो सूचना दे । ं 1. नाम ............................................................................................................ 2 . पंजीकरण संख्याः .................................................................................... (जिस अधिनियम के तहत पंजी—त है, अंकित करें) 'सभायें पंजीकरण अधिनियम, 1860' या हि0प्र0 सभाएं पंजीकरण अधिनियम, 2006 या 'भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882' (संविधान व पंजीकरण की छाया प्रति संलग्न करें) NaN
4. प्रबन्धक समिति के मुखिया का नाम .................................................................................................................... पूरा पता ........................................................................................................... टैलीफोन/ मोबाईल नम्बर : ........................................................... NaN
5. धार्मिक संस्थान का इतिहास, महत्त्व, जनश्रुतियां। (अलग से संलग्न करें) NaN
6. धार्मिक संस्थान से सम्बन्धित कोई अन्य सूचना। (अलग से संलग्न करें) NaN
7. क्या विभाग द्वारा पूर्व प्रदत्त अनुदान राशि का जिला भाषा अधिकारी द्वारा सत्यापित उपयोगिता प्रमाण पत्र संलग्न है। हां/नहीं NaN
8. धार्मिक संस्थान की प्रबन्धन समिति द्वारा आवर्ती निधि से सम्बन्धित/संचालित बैंक खाता विवरण। बैंक का नाम : ब ैंक शाखा का पता : ब ै क खाता संख्या : ं I FS ब्वकम संख्या : ( बैंक पास बुक के प्रथम पृष्ठ जिसमें अकाउंट सम्बंधी समस्त जानकारी अंकित हो, की स्पष्ट छाया प्रति लगाएं)। NaN
9. मन्दिर की वार्षिक आय (नकद चढ़ावा व अन्य सभी स्रोतों से प्राप्त आय का पूर्ण विवरण अलग से लगाएं। वार्षिक नकद चढ़ावा (विभागीय अनुदान राशि सहित)। रु0 NaN
बची हुई भूमि तथा अन्य सभी स्रोतों/ सम्पत्ति से प्राप्त वार्षिक नकद आय का पूर्ण विवरण। रु0 NaN
कुल वार्षिक नकद आय रु0 NaN
10. मन्दिर का वार्षिक खर्च (पूर्ण विवरण अलग से लगाएं इसमें भण्डारे/लंगर का खर्च शामिल न हो) धार्मिक उत्सवों/अनुष्ठानों/ धार्मिक पूजा में होने वाला व्यय। रु0 NaN
11. मन्दिर की वार्षिक शुद्ध आय (10-11)। रु0 NaN
12. धार्मिक संस्थान की कुल सम्पत्ति। चल (नकदी, आभूषण इत्यादि अन्य चल सम्पत्तियों का अलग से विवरण लगाएं)। अ चल (भूमि व भवनों का अलग से विवरण लगाएं) NaN
मैं सत्यनिष्ठा से घोषणा करता हूं कि प्रपत्र में दी गई उपरोक्त सूचना मेरे ज्ञान अनुसार सही है। NaN
स्थान ............................................................................. तिथि ............................................................................. दूरभाष (कोड सहित) ................................................ मोबाईल नम्बर ............................................................. आधार नम्बर .............................................................. हस्ताक्षर नाम ..................................................................................... पदनाम .............................................................................. पूरा पता ........................................................................ स ं स्था की मोहर भी लगाएं NaN
5760 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940

जिला भाषा अधिकारी की सिफारिश

मैं ................................., जिला भाषा अधिकारी, जिला............................ प्रमाणित करता/करती हूं, कि उपरोक्त प्रकरण विभागीय योजना के अनुसार सही पाया गया है। अतः मैं प्रकरण निरीक्षणोपरान्त अनुदान राशि जारी करने की संस्तुति करता/करती हूं।

स्थान :

दिनांक :

हस्ताक्षरित/- जिला भाषा अधिकारी, जिला ........................... भाषा एवं संस्कृति विभाग, हिमाचल प्रदेश।

(मोहर सहित)।

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प्रपत्र-2 धार्मिक संस्थान की मुजारों/सरकार में विहित हुई भूमि का विवरण

(इसमें उस भूमि को शामिल न किया जाए जिसका मुआवजा दिया जा चुका हो)

धार्मिक संस्थान का नाम ........................................................................................., मौजा......................................., परगना................................, तहसील..............................., जिला..........................................., हि0 प्र0।

क्र0 सं0 विवरण भूमि का क्षेत्रफल इकाई (बीघे/कनाल/हैक्टेयर)
हिमाचल प्रदेश बड़ी जमींदारी उन्मूलन एवं भू-सुधार अधिनियम, 1953 :
1. उक्त अधिनियम के लागू होने से पूर्व धार्मिक संस्थान की भूमि। .....-........-......
2. उक्त अधिनियम के तहत मुजारों/सरकार म े ं निहित की गई भूमि। .....-........-......
3. उक्त अधिनियम के कार्यान्वयन के उपरान्त धार्मिक संस्थान के पास बची हुई भूमि (1-2=3)।
हिमाचल प्रदेश मुजारियत एवं भू-सुधार अधिनियम, 1972
4. उक्त अधिनियम के लागू होने से पूर्व धार्मिक संस्थान की भूमि (=3)।
5. उक्त अधिनियम के तहत मुजारों/सरकार म े निहित की गई भूमि। ं
6. उक्त अधिनियम के कार्यान्वयन के उपरान्त धार्मिक संस्थान के पास बची हुई भूमि (4-5=6)।
हिमाचल प्रदेश भू-जोत अधिकतम सीमा अधिनियम, 1972 :
7. उक्त अधिनियम के लागू होने से पूर्व धार्मिक संस्थान की भूमि (=6)।
8. उक्त अधिनियम के तहत सरकार में निहित की गई भूमि।
9. उक्त अधिनियम के कार्यान्वयन के उपरान्त धार्मिक संस्थान के पास बची हुई भूमि (7-8=9)।
सत्यापित किया जाता है कि :- 1 . उपरोक्त विवरण, राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार सही है। 2 . श्री....................... जिन्होंने कि इस अनुदान प्रकरण के लिए बतौर ............... (कारदार/संस्था अध्यक्ष) आवेदन किया हुआ है, ही इस धार्मिक संस्थान के, सरकार से अनुदान प्राप्त करने के लिए, वैध आवेदक हैं।
हस्ताक्षर हस्ताक्षर
पटवारी का नाम.......................................................... म ोहर सहित तहसीलदार का नाम........................................................ मोहर सहित
5762 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940

प्रपत्र-3(क)

वार्षिक अनुदान का उपयोगिता प्रमाण-पत्र

प्रमाणित किया जाता है कि धार्मिक संस्थान ....................................................., गांव .................................... डाकघर .............................................., तहसील....................................., जिला .................................... के लिए स्वीकृत अनुदान राशि .................................................., वर्ष .............................. के दौरान अनुदान के रूप में विभाग के पत्र संख्या ..................................................................., दिनांक ................................. के अधीन मन्दिर के पूजा-अर्चना एवं रख-रखाव तथा सी.सी.टी.वी. के क्रय/रखरखाव प्रयोजन के उद्देश्य के लिए उपयोग की गई जिसके लिए यह स्वीकृत की गई थी।

स्थान ....................................................... हस्ताक्षर ................................

तिथि ........................................................ पदनाम .................................

पूरा पता ....................................................................................................

संस्था के अध्यक्ष/कारदार की मोहर5763 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 प्रमाणित किया जाता है कि :

(1) मैं इससे सन्तुष्ट हूं कि जिन कार्यों के लिए अनुदान राशि स्वीकृत की गई थी पूर्ण कर ली गई हैं।

(2) मैंने यह देखा है कि धन का वास्तव में उसी उद्देश्य के लिए उपयोग किया गया है जिसके लिए स्वीकृत किया गया था।

हस्ताक्षर

स्थान : दिनांक

नाम ................................ जिला भाषा अधिकारी जिला ........................... भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश।

(मोहर सहित)

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प्रपत्र-3(ख)

जिला भाषा अधिकारी का प्रमाण-पत्र

प्रमाणित किया जाता है कि धार्मिक संस्थान .....................................................गांव .................................... डाकघर................................., तहसील.........................................., जिला .................................., के लिए स्वीकृत अनुदान राशि .................................................. वर्ष ........................................ के दौरान अनुदान के रूप में विभाग के पत्र संख्या ...................................................................दिनांक ................................. द्वारा प्रदान की गई थी के सन्दर्भ में प्रमाणित किया जाता है कि आवेदक/संस्था ........................................................................................................................ ने कैश बुक तथा मूल वाऊचर सहेजने की लेखा प्रणाली अपना ली है तथा मैं इनके लेखा प्रणाली से संतुष्ट हूं। कैश बुक तथा मूल वाऊचर की छाया प्रतियां मेरे द्वारा भविष्य सन्दर्भ हेतु सहेज ली गई हैं। स्थान : दिनांक :

हस्ताक्षर नाम ................................ जिला भाषा अधिकारी जिला ........................... भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश।

(मोहर सहित)

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प्रपत्र-4

प्रमाण-पत्र

प्रमाणित किया जाता है कि ................................................................... (धार्मिक संस्थान/स्मारक/स्थल का नाम) मौजा.........................., परगना..........................., तहसील..........................., जिला................................के खसरा नम्बर...............................में बना हुआ है, जिसका फोटो नीचे चिपकाया गया है इस धार्मिक संस्थान/ स्मारक/स्थल के सम्बंध में यह भी प्रमाणित किया जाता है कि (जो लागू न हो उसे काट दें) :--5764 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 (1) उपरोक्त खसरा नम्बर आबादी देह/मिलकीयत का नम्बर है (2) उपरोक्त धार्मिक संस्थान/स्मारक किसी की निजी सम्पत्ति न हो कर सार्वजनिक सम्पत्ति है (3) इस धार्मिक संस्थान की दैनिक पूजा तथा अन्य कार्यकलापों के लिए होने वाला व्यय निकाल पाना कठिन हो रहा है अतः इसकी आय बढ़ाने के लिए प्रस्तावित .................................निर्माण कार्य हेतु अनुदान मिलना उचित है।

(4) उपरोक्त निर्माण, इस धार्मिक संस्थान की भूमि पर किया जाना प्रस्तावित है

(5) प्रमाणित किया जाता है कि ................................................ (धार्मिक संस्थान/स्मारक /स्थल का नाम) तथा धार्मिक संस्थान/स्मारक/स्थल का प्रस्तावित निर्माण कार्य (सराय अथवा दुकान अथवा पार्किंग या अन्य कोई निर्माण) एक ही खसरा नम्बर ...................., मौजा ..................., परगना ................, तहसील ............................, जिला ................ पर स्थित है अथवा प्रस्तावित निर्माण कार्य खसरा नं0......................., मौजा........................, परगना..................., तहसील................, जिला........................ पर स्थित है जो कि धार्मिक संस्थान की ही भूमि है।

यहां फोटो

चिपकाएं

(हस्ताक्षर का कुछ भाग छायाचित्र व कुछ भाग इस पृष्ठ पर अंकित होना चाहिए)

स्थान................ हस्ताक्षर (पटवारी) ...................................

दिनांक..............

(नाम) .............................................................. (मोहर सहित)

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प्रपत्र-5

प्रमाण-पत्र

प्रमाणित किया जाता है कि............................... (देवी/देवता का नाम) धार्मिक संस्थान, गांव ..............., परगना ................, तहसील .................., जिला ..................., की भूमि 'भूमि सुधार अधिनियम' के तहत मुजारों को चली गई है। अतः अब इस धार्मिक संस्थान की दैनिक पूजा तथा अन्य कार्यकलापों के लिए होने वाला व्यय निकाल पाना कठिन हो रहा है। अतः धार्मिक संस्थान की आय बढ़ाने के लिए प्रस्तावित ................................... निर्माण कार्य तथा इसके निर्माण स्थल पर इस पंचायत को कोई आपत्ति नहीं है और पंचायत इनके इस प्रस्ताव का समर्थन करती है ।

स्थान................

हस्ताक्षर (पंचायत प्रधान).................................

दिनांक.............. मोहर सहित5765 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 प्रपत्र-6

दूसरी किस्त जारी करने के लिए प्रमाण-पत्र

(एकमुश्त अनुदान के प्रकरण)

1. प्रमाणित किया जाता है कि मैैं इससे संतुष्ट हूं कि जिन नियमों के अनुसार ......................................

धार्मिक संस्थान को रुपये .............................................. का सहायतानुदान स्वीकृत हुआ है उसके अनुसार इन्हाेंने अपना आधा कार्य पूर्ण कर लिया है ।

2. संस्था द्वारा कृत कार्य प्राक्कलन में अनुमोदित मदों के आधार पर हुआ है

3. मैंने स्वयं देखा है

4. मेरा निवेदन है कि उसी के शेष बचे कार्य के लिए, इन्हेंं अनुदान की दूसरी किस्त, जो कि रुपये ................................................ बनती है, को जारी कर दिया जाए।

नाम

(..............................................) (........................................................) नाम कनिष्ठ अभियंता, विकास खण्ड खण्ड विकास अधिकारी मोहर सहित।

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प्रपत्र-7

उपयोगिता प्रमाण-पत्र

(एकमुश्त अनुदान के प्रकरण)

—पया पत्र संख्या -----------------------, दिनांक ------------------, राशि----------------- प्रमाणित किया जाता है कि ------------------------, मात्र की स्वीकृति सहायतानुदान राशि से वर्ष के दौरान ------------------------- के रूप में इस विभाग के पत्र संख्या ----------------------------- तथा हाशियों में दी गई तिथि के अधीन रुपये --------------------------------------------- की राशि हिमाचल ------------------------ के प्रयोजन/उद्देश्य के लिए उपयोग की गई है जिसके लिए यह स्वीकृति की गई थी तथा शेष --------------------------- रुपये की वर्ष के अन्त तक उपयोग न की गई राशि का सरकार को पत्र संख्या ------------------------ के द्वारा अभ्यर्पण किया गया है जो कि आगामी ----------------- वर्ष ---------- में दी जाने वाली सहायता अनुदान में समायोजित की जायेगी।

स्थान ---------------------- हस्ताक्षर -------------------------

तिथि -------------------------------------------

संस्थाध्यक्ष ----------------------------------------

5766 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 प्रमाणित किया जाता है कि मैं इससे संतुष्ट हूं कि जिन शर्तों पर सहायतानुदान स्वीकृत किया गया था, पूर्ण की गई हैं/ पूर्ण की जा रही हैं तथा धन का वास्तव में उसी उद्देश्य के लिए उपयोग किया गया है जिसके लिए यह स्वीकृत किया गया था।

(..............................................) नाम

(...................................................................) नाम

कनिष्ठ अभियंता, विकास खण्ड

खण्ड विकास अधिकारी मोहर सहित

प्रतिहस्ताक्षरित

(..................................) नाम

उपायुक्त जिला...........................

मोहर सहित

भाषा एवं संस्—ति विभाग, हिमाचल प्रदेश

आहरण एवं वितरण अधिकारी, के हस्ताक्षर व पदनाम

प्रतिहस्ताक्षर विभागाध्यक्ष

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प्रपत्र-8

अनुदान सम्बन्धी वचन/शपथ-पत्र

(एकमुश्त अनुदान के प्रकरण)

भाषा एवं संस्कृति विभाग, हिमाचल प्रदेश, शिमला-171 009 द्वारा जो........................................(धार्मिक संस्थान का नाम) (गांव........................................, पंचायत......................................, डाकघर.............................., उपतहसील.................................., तहसील..........................., उपमण्डल...............................,जिला.........................................) की सराय/दुकान/.........................................(कार्य का नाम) बनाने के लिए रुपये......................................./- (रुपये...............................................................................................मात्र) की राशि स्वीकृत की गई है इस सहायतानुदान के सम्बध में, मैं ...............................................सपुत्र श्री............................................., गांव................................, परगना/ फाटी..........................., डाकघर......................., पंचायत........................, तहसील......................., उपमण्डल........................., जिला..............................वचन देेता हूं/शपथ लेता हूं /प्रमाणित करता हूं कि :--

1. सरकार द्वारा जो उपरोक्त धनराशि इस धार्मिक संस्थान/स्मारक के लिए स्वीकृत की गई है और जो कुल धनराशि इस प्रस्तावित संरचना के निर्माण पर व्यय होगी, उसका शेष, संस्था/आवेदक द्वारा स्वयं वहन किया जाएगा।

2. आवेदक/संस्था किसी भी भ्रष्ट कार्यकलाप से सम्बंध्ािंत नहीं है

3. स्वीकृत धनराशि का उपयोग स्वीकृति की तिथि से एक वर्ष के भीतर कर लिया जाएगा5767 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 4. प्रस्तावित संरचना का निर्माण कार्य, प्राक्कलन में अनुमोदित मदों के आधार पर ही निष्पादित किया जाएगा।

5. यह कार्य खण्ड विकास अधिकारी कार्यालय के कनिष्ठ अभियंता की देख-रेख व निर्देशन में होगा। इसमें मुझे अथवा संस्था को कोई आपत्ति नहीं है। उनके निर्देशों की अनुपालना की जाएगी।

6. यदि किसी कारणवश अनुदान राशि का उपयोग नहीं हो पाता है या इस राशि में से कुछ राशि बच जाती है तो उसे तुरन्त ही सरकार को लौटा दिया जाएगा।

7. विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों का धार्मिक संस्थान/स्मारक के प्रत्येक भाग में प्रवेश मान्य होगा।

8. निर्माण कार्य के दौरान विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा जारी निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाएगा।

9. धार्मिक संस्थान/स्मारक किसी व्यक्ति/व्यक्तियों की निजी सम्पत्ति नहीं है

10. निर्माण कार्य पूर्ण होने के एक मास के भीतर उपयोगिता प्रमाण-पत्र (लेखा परीक्षा रिपोर्ट/व्यय विवरण सहित) विभाग को भिजवा दिया जाएगा।

11. मुरम्मत/निर्माण कार्य में स्मारक/धार्मिक संस्थान के भवन के किसी भी भाग पर रंग रोगन/सफेदी/डिस्टैम्पर या आधुनिक फिनिश नहीं किया जाएगा और न ही ऐसे किसी रसायन/आधुनिक सामग्री का प्रयोग किया जाएगा जिससे कि भवन का रंग/मूल स्वरूप बदले या उसे किसी प्रकार से प्रत्यक्ष/परोक्ष रूप से उसकी पुरामहत्ता को कोई क्षति पहुंचे। 12. मैंंने इस कार्य के लिए किसी अन्य विभाग, संस्था या व्यक्ति से अनुदान प्राप्त नहीं किया है

या

मैंंने इस कार्य के लिए ......................................................................................विभाग, संस्था या व्यक्ति से रुपये ..........................................का अनुदान प्राप्त किया है।

13. निहित भूमि जिसका आवेदक/संस्था मुआवजा ले चुकी है, अनुदान योजना के तहत गणना में नहीं ली गई है।

या

आवेदक/संस्था ने निहित भूमि मात्रा ....................................... के विभाग, संस्था या व्यक्ति से रुपये .............................. का मुआवजा प्राप्त किया है।

14. प्रस्तावित निर्माण कार्य (सराय, दुकान अथवा पार्किंग या अन्य कोई निर्माण) के सन्दर्भ में सभी प्रकार की विभागीय तथा स्थानीय निकाय की स्वीकृतियां/अनुमोदन प्राप्त करना संस्था/ आवेदक की ही जिम्मेवारी समझी जाएगी। वांछित स्वीकृतियां/अनुमोदन प्राप्त न होने की स्थिति में संस्था/आवेदक को अनुदान राशि वर्तमान ब्याज सहित वापिस करनी होगी।

15. आवेदक संस्था सी0सी0टी0वी0 प्रणाली का सुचारू परिचालन तथा भविष्य में रख-रखाव तथा दुर्घटना होने की स्थिति में सम्बन्धित विभाग (जिला/पुलिस प्रशासन) को रिकार्डिंग उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करेगी।5768 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 16. भविष्य में राजस्व/वित्तीय/अन्य किसी भी प्रकार के विवाद/निराकरण के लिए आवेदक/संस्था स्वयं जिम्मेवार होगी। यदि मैं उपरोक्त शर्तोंं का पालन नहीं करता हूं तो अनुदान की सारी राशि, सरकार द्वारा निर्धारित ब्याज सहित, अविलम्ब लौटा दूंगा अन्यथा मैं इस राशि की भरपाई भू-राजस्व (Land Revenue) के रूप में वसूलने के लिए जिला समाहर्ता.................................(जिला) को प्राधि—त करता हूं।

दिनांक :

आवेदक/अनुदानग्राही के हस्ताक्षर स्थान :

पूर्ण नाम, पदनाम तथा मोहर सहित

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[Authoritative English text of this Department Notification No.EXN-F(10)-31/2018, dated

25-10-2018 as required under clause (3) of Article 348 of the Constitution of India].

EXCISE AND TAXATION DEPARTMENT

NOTIFICATION No. 56/2018—State Tax

Shimla-2, the 25th October, 2018

No. EXN-F(10)-31/2018.—In exercise of the powers conferred by sub-section (2) of section 23 of the Himachal Pradesh Goods and Services Tax Act, 2017 (10 of 2017), hereinafter referred to as the "said Act", the Governor of Himachal Pradesh, on the recommendations of the Council and in supersession of the notification No. 32/2017–State Tax, dated the 9th October, 2017 published in the Gazette vide number EXN-F(10)-34/2017, dated the 23 rd October, 2017, except as respects things done or omitted to be done before such supersession, hereby specifies the categories of casual taxable persons (hereinafter referred to as 'such persons') who shall be exempted from obtaining registration under the said Act—

(i) such persons making inter-State taxable supplies of handicraft goods as defined in the "Explanation" in notification No. 21/2018 -State Tax (Rate), dated the 27th July, 2018, published in the Gazette of Himachal Pradesh, vide number EXN-F(10)- 24/2018, dated the 27th July, 2018 and falling under the Chapter, Heading, Sub- heading or Tariff item specified in column (2) of the Table contained in the said notification and the Description specified in the corresponding entry in column (3) of the Table contained in the said notification; or

(ii) such persons making inter-State taxable supplies of the products mentioned in column (2) of the Table below and the Harmonised System of Nomenclature (HSN) code mentioned in the corresponding entry in column (3) of the said Table, when made by the craftsmen predominantly by hand even though some machinery may also be used in the process:—

Table

Sl. No. Products HSN Code
1 2 3
1. Leather articles (including bags, purses, saddlery, harness, garments) 4201, 4202, 4203
2. Carved wood products (including boxes, inlay work, cases, casks)
3. Carved wood products (including table and kitchenware)
4. Carved wood products
5. Wood turning and lacquer ware
6. Bamboo products [decorative and utility items]
7. Grass, leaf and reed and fibre products, mats, pouches, wallets
8. Paper mache articles
9. Textile (handloom products)
10. Textiles hand printing
11. Zari thread
12. Carpet, rugs and durries
13. Textiles hand embroidery
14. Theatre costumes
15. Coir products (including mats, mattresses)
16. Leather footwear
17. Carved stone products (including statues, statuettes, figures of animals, writing sets, ashtray, candle stand)
18. Stones inlay work
19. Pottery and clay products, including terracotta
20. Metal table and kitchen ware (copper, brass ware)
21. Metal statues, images/statues vases, urns and crosses of the type used for decoration of metals of Chapters 73 and 74
22. Metal bidriware
23. Musical instruments
24. Horn and bone products
25. Conch shell crafts 96
26. Bamboo furniture, cane/Rattan furniture
27. Dolls and toys 9503
28. Folk paintings, madhubani, patchitra, Rajasthani miniature. 97
5770 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940

Provided that such persons are availing the benefit of notification No. 03/2018– Integrated Tax, dated the 22nd October, 2018, published in the Gazette of India, Extraordinary, Part II, Section 3, Sub-section (i) vide number G.S.R. 1052(E), dated the 22nd October, 2018:

Provided further that the aggregate value of such supplies, to be computed on all India basis, does not exceed the amount of aggregate turnover above which a supplier is liable to be registered in the State or Union territory in accordance with sub-section (1) of section 22 of the said Act, read with clause (iii) of the Explanation to that section.

2. Such persons mentioned in the preceding paragraph shall obtain a Permanent Account Number and generate an e-way bill in accordance with the provisions of rule 138 of the Central Goods and Services Tax Rules, 2017.

By order, JAGDISH CHANDER SHARMA, Pr. Secretary (E&T).

_____________

[Authoritative English text of this Department Notification No. EXN-F(10)-31/2018, dated

25-10-2018 required under clause(3) of Article 348 of the Constitution of India].

EXCISE AND TAXATION DEPARTMENT

NOTIFICATION No. 57/2018—State Tax

Shimla-2, the 25th October, 2018

No. EXN-F(10)-31/2018.—In exercise of the powers conferred by sub-section (3) of section 1 of the Himachal Pradesh Goods and Services Tax Act, 2017 (10 of 2017) read with section 51 of the Himachal Pradesh Goods and Services Tax Act, 2017 (hereafter in this notification referred to as the said Act), the Governor of Himachal Pradesh, on the recommendations of the Council, is pleased to make the following further amendment in the notification No. 50/2018- State Tax dated the 17th September, 2018 published in the Gazette of Himachal Pradesh, vide number EXN-F(10)-24/2018-Loose dated the 18th September, 2018, namely:–

In the paragraph of the notification, the following proviso shall be inserted, namely:—

"Provided that with respect to persons specified under clause (a) of sub-section (1) of section 51 of the Act, nothing in this notification shall apply to the authorities under the Ministry of Defence, other than the authorities specified in the Annexure-'A' and their offices, with effect from the 1st day of October, 2018."5771 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 ANNEXURE 'A'

CODE NUMBERS ALLOTTED TO THE PRINCIPAL CONTROLLERS/CONTROLLERS

OF DEFENCE ACCOUNTS

Sl. No. Designation of Controller/Office Code No.
1. Controller of Defence Accounts, Patna 00
2. Pr. Controller of Defence Accounts (Pensions), Allahabad 01
3. Pr. Controller of Defence Accounts (Officers), Pune 02
4. Controller of Defence Accounts, (Army), Meerut 03
5. Pr. Controller of Defence Accounts, Southern Command, Pune 04
6. Pr. Controller of Defence Accounts, Bangalore 05
7. Pr. Controller of Defence Accounts, Western Command, Chandigarh. 06
8. Pr. Controller of Accounts (Factories), Kolkata 07
9. Pr. Controller of Defence Accounts (Air Force), Dehradun 08
10. Pr. Controller of Defence Accounts (Navy), Mumbai 09
11. Controller of Defence Accounts (Funds), Meerut 10
12. Pr. Controller of Defence Accounts, Northern Command, Jammu 12
13. Zonal Office (Pension Disbursement), Chennai 13
14. AO DAD Min. of Defence (Civil), New Delhi 14
15. Controller of Defence Accounts, Canteen Stores Dept., Mumbai 15
16. Pr. Controller of Defence Accounts, New Delhi 16
17. Controller of Defence Accounts, Chennai 18
18. Pr. Controller of Defence Accounts (R&D) New Delhi 19
19. Controller of Defence Accounts (Pension Disbursement), Meerut 20
20. Controller of Defence Accounts, Gauhati 21
21. Pr. Controller of Defence Accounts, (CC) Lucknow 22
22. Pr. Controller of Defence Accounts (Border Roads), New Delhi 23
23. Controller of Defence Accounts (R&D), Bangalore 24
24. Controller of Defence Accounts, Secunderabad 25
25. Controller of Defence Accounts, Jabalpur 26
26. Pr. Controller of Defence Accounts (Air Force), New Delhi 27
27. Pr. Controller of Defence Accounts (R&D), Hyderabad 28
28. Controller of Defence Accounts, New Delhi 29
29. Controller of Defence Accounts (IDS), New Delhi 30
30. Pr. Controller of Defence Accounts (SWC), Jaipur 31
5772 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940

By order, JAGDISH CHANDER SHARMA, Pr. Secretary (E&T).

Note.— Principal notification No. 50/2018-State Tax dated 17th September, 2018 was published in the Gazette of Himachal Pradesh, vide number EXN-F(10)-24/2018-Loose on 18th September, 2018.

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परिवहन विभाग

अधिसूचना

शिमला-2, 23 अक्तूबर, 2018

संख्या टी0पी0टी0-सी(9)-4/2013.--हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश मोटरयान अधिनियम, 1972 (1973 का अधिनियम संख्यांक 4) की धारा 14 की उपधारा (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और इस निमित जारी अधिसूचना समसंख्यक पत्र दिनांक 30 जनवरी, 2014 और 4 अक्तूबर, 2017 आदेशों/अनुदेशों के अधिक्रमण में, उक्त अधिनियम के अधीन समस्त कराधान प्राधिकारियों को, हिमाचल प्रदेश राज्य के किसानों द्वारा अपने कृषि प्रयोजन के लिए उपयोग किए जा रहे/उपयोग किए जाने वाले टै्रैक्टरों की बाबत, ऐसे टै्रैक्टरों के स्वामी द्वारा निम्नलिखित शर्तों को पूर्ण करने के अध्यधीन, पूर्वोक्त अधिनियम की धारा 3 के अधीन उद्‌यग्रणीय कर के संदाय से लोक हित में छूट प्रदान करने हेतु प्राधिकृत करती हैः-- 1. टै्रक्टर स्वामी के पास कृषि योग्य कम से कम 5 कनाल (2.5 बीघा) भूमि होनी चाहिए जिसके लिए वह टै्रक्टर का प्रयोग करेगा। यदि स्वामी के पास अपने नाम जमीन नहीं है लेकिन पिता व दादा के नाम जमीन है तो उन्हें शपथ-पत्र देना होगा। टै्रक्टर का पंजीकरण केवल कृषि कार्य के लिए ही किया जाएगा।

2. भूमि सम्बन्धी कागजात तथा उसकी किस्म सम्बन्धित पंजीयन अधिकारी के पास देनी होगी जिसके अधिकार क्षेत्र में टै्रक्टर पंजीकृत होगा। इसके साथ सम्बन्धित पटवारी के द्वारा जारी रिपोर्ट जोकि सम्बन्धित तहसीलदार से प्रतिहस्ताक्षारित की गई हो, देनी होगी।5773 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 3. प्रार्थी एक शपथ देगा कि टै्रक्टर का प्रयोग कृषि कार्य के लिए ही करेगा तथा गैर-कृषि गतिविधियों में इसका प्रयोग नहीं करेगा।

4. प्रार्थी पटवारी/प्रधान द्वारा जारी प्रमाण-पत्र को प्रस्तुत करेगा कि टै्रक्टर का स्वामी इसका प्रयोग कृषि कार्य हेतु ही कर रहा है।

5. कृषि कार्य के लिए एक किसान को अधिकतम एक टै्रक्टर पंजीकृत करने की छूट होगी। 6. टै्रक्टर स्वामी यदि गैर-कृषि गतिविधियों में टै्रक्टर का प्रयोग करते हुए पाया जाता है तो उसको मोटर वाहन व अन्य नियमों/अधिनियमों के तहत दण्डित किया जायेगा।

7. कृषि गतिविधियों में प्रयोग किए जाने वाले टै्रक्टर पर हरे रंग की पट्‌टी लगवाना अनिवार्य होगा। टोकन कर के संदाय से छूट प्रदान करने हेतु मामले पर विचार करने से पूर्व समस्त संबद्ध कराधान प्राधिकारी, आवेदक/टै्रैक्टर के स्वामियों द्वारा दिए जाने वाले उपरोक्त दस्तावेजों के साथ-साथ टै्रैक्टर स्वामी द्वारा पूर्व में निर्धारित उपाबन्ध का सत्यापन सुनिश्चित करेंगे।

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- (जगदीश चन्द्र शर्मा), प्रधान सचिव (परिवहन)।

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TRANSPORT DEPARTMENT

NOTIFICATION

Shimla-2, the 23rd October, 2018

TPT-C(9)-4/2013.—In exercise of the Powers conferred by the sub-section 14(3) of Himachal Pradesh Motor Vehicles Taxation Act, 1972 (Act No. 4 of 1973) and in supersession of this department notification of even number dated 30-01-2014 & 04-10-2017, the Governor, Himachal Pradesh is pleased to authorize all Taxation Authorities under the said Act to grant exemption from the payment of tax leviable under section 3 of the act ibid, in respect of tractors being used/to be used by farmers for his agriculture purpose in the State of Himachal Pradesh, subject to the fulfillment of the following conditions by the owner of such tractors in the public interest:—

1. The Tractor owner should be in possession of atleast 5 Kanal (two and half bigha) of agriculture land and in case the owner not owning the land in his own name, father or grandfather who is the owner could give affidavit. The tractor registration should be allowed only for agriculture purpose.

2. The revenue papers relating to land holding, its KISAM (classification), shall be submitted to the concerned taxation authorities in whose jurisdiction the tractor is to be registered alongwith the report of concerned Patwari duly countersigned by the Tehsildar.

3. An affidavit to the effect that owner will use the tractor for agriculture activities only and that the tractor shall not be used for commercial activities.

5774 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 4. The report of the Patwari/Pradhan of the area concerned that the owner is using the

tractor for agriculture purpose only.

5. A farmer can register only one tractor for agriculture activities.

6. If the owner of the tractor found indulged in non agriculture activities, action against him will be taken as per Motor Vehicles Act, 1988 or other Act/rules.

7. There will be a green strip on the tractor.

Before considering the case for granting exemption from the payment of token tax, all concerned taxation authorities shall ensure verification of above documents to be tendered by the applicant/owners of tractor as well as the affidavit and Performa already prescribed.

By order, Sd/- (JAGDISH CHANDER SHARMA), Principal Secretary (Transport).

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ब अदालत उप-मंडलाधिकारी (नागरिक) श्री नैनादेवी स्थित स्वारघाट, जिला बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश

दीक्षा शर्मा पुत्री श्री संजीव कुमार, गांव नैला, डाकघर भाखड़ा, ग्राम पंचायत तरसूह, तहसील श्री नैनादेवी जी, जिला बिलासपुर (हि0 प्र0)

बनाम

1. आम जनता 2. प्रधान, ग्राम पंचायत तरसूह, तहसील श्री नैनादेवी जी, जिला बिलासपुर (हि0 प्र0)

विषय.-प्रार्थीया का नाम व जन्म तिथि ग्राम पंचायत तरसूह के जन्म पंजीकरण रजिस्टर में दर्ज करवाए जाने बारे कि अधीन धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियिम, 1969 के अन्तर्गत जन्म पंजीकरण बारे।

हर खास व आम जनता को बजरिया इश्तहार सूचित किया जाता है कि प्रार्थीया दीक्षा शर्मा ने अधोहस्ताक्षरी के न्यायालय में एक आवेदन-पत्र प्रस्तुत किया है कि उसने अपना नाम व जन्म तिथि ग्राम पंचायत तरसूह के जन्म पंजीकरण रजिस्टर में दर्ज नहीं करवाया है, अब प्रार्थीया अपना नाम व जन्म तिथि ग्राम पंचायत तरसूह के जन्म पंजीकरण रजिस्टर में दर्ज करवाना चाहती है जो कि इस प्रकार से हैैः- नाम सम्बन्ध जन्म तारीख दीक्षा शर्मा पुत्री संजीव कुमार एवं श्रीमती बीना 03-12-1998 अतः ग्राम पंचायत तरसूह, तहसील श्री नैनादेवी जी की जनता को बजरिया इश्तहार सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त जन्म पंजीकरण बारे कोई आपत्ति हो तो वह तारीख 01-11-2018 को या इससे पूर्व असालतन व वकालतन हाजिर अदालत आकर अपनी आपत्ति प्रस्तुत करें अन्यथा आवेदन-पत्र पर जन्म पंजीकरण आदेश पारित करके सचिव ग्राम पंचायत तरसूह को आगामी कार्यान्वयन हेतु भेज दिया जायेगा।

आज दिनांक 01-10-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत से जारी किया गया। मोहर।

हस्ताक्षरित/- उप-मंडलाधिकारी (नागरिक) श्री नैनादेवी जी, जिला बिलासपुर (हि0 प्र0)।5775 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 ब अदालत सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, उप-तहसील सैंज, जिला कुल्लू, हिमाचल प्रदेश

. . प्रार्थी। विन्टु नेगी पुत्र श्री रूप चन्द, निवासी गांव धराली, डा0 मदाना, उप-तहसील सैंज, जिला कुल्लू, हि0 प्र0

बनाम

आम जनता

विषय.--जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) के तहत ग्राम पंचायत रिकार्ड में पुत्र के नाम व जन्म तिथि की प्रविष्टि बारे।

सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि विन्टु नेगी पुत्र श्री रूप चन्द, निवासी गांव धराली, डा0 मदाना, उप-तहसील सैंज, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 ने अधोहस्ताक्षरी की अदालत में एक प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया है कि इसके पुत्र हरीश नेगी का जन्म दिनांक 05 मार्च, 2017 को हुआ है। इसके पुत्र का नाम व जन्म तिथि ग्राम पंचायत शांघढ़, उप-तहसील सैंज के रिकार्ड में दर्ज नहीं है। इस सम्बन्ध में श्री विन्टु नेगी ने शपथ-पत्र भी प्रस्तुत किया है व ग्राम पंचायत शांघड़ के रिकार्ड में अपने पुत्र हरीश नेगी का नाम व जन्म तिथि 05-03-2017 दर्ज किये जाने बारे प्रार्थना की है।

अतः इस इश्तहार द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि इस सम्बन्ध में किसी भी व्यक्ति को कोई आपत्ति हो तो वह असालतन या वकालतन अपनी आपत्ति इस न्यायालय में दिनांक 1-11-2018 या इससे पूर्व प्रस्तुत कर सकता है अन्यथा इसका इन्द्राज ग्राम पंचायत शांघड़, उप-तहसील सैंज, जिला कुल्लू के रिकार्ड में दर्ज करवा दिया जाएगा।

आज दिनांक 01-10-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर।

हस्ताक्षरित/- सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, उप-तहसील सैंज, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।

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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, उप-तहसील सैंज, जिला कुल्लू, हिमाचल प्रदेश

. . प्रार्थी। गोकल चन्द पुत्र श्री प्रेम चन्द, निवासी गांव बाईटीसारी, डा0 रोपा, उप-तहसील सैंज, जिला कुल्लू, हि0 प्र0

बनाम

आम जनता

विषय.--जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) के तहत ग्राम पंचायत रिकार्ड में पुत्र के नाम व जन्म तिथि की प्रविष्टि बारे।

सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि गोकल चन्द पुत्र श्री प्रेम चन्द, निवासी गांव बाईटीसारी, डा0 रोपा, उप-तहसील सैंज, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 ने अधोहस्ताक्षरी की अदालत में एक प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत 5776 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 किया है कि इसके पुत्र मानव का जन्म दिनांक 16 मर्ई, 2016 को हुआ है। इसके पुत्र का नाम व जन्म तिथि ग्राम पंचायत सचैहण, उप-तहसील सैंज के रिकार्ड में दर्ज नहीं है। इस सम्बन्ध में श्री गोकल चन्द ने शपथ-पत्र भी प्रस्तुत किया है व ग्राम पंचायत सचैहण के रिकार्ड में अपने पुत्र मानव का नाम व जन्म तिथि 16-05-2016 दर्ज किये जाने बारे प्रार्थना की है।

अतः इस इश्तहार द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि इस सम्बन्ध में किसी भी व्यक्ति को कोई आपत्ति हो तो वह असालतन या वकालतन अपनी आपत्ति इस न्यायालय में दिनांक 1-11-2018 या इससे पूर्व प्रस्तुत कर सकता है अन्यथा इसका इन्द्राज ग्राम पंचायत सचैहण, उप-तहसील सैंज, जिला कुल्लू के रिकार्ड में दर्ज करवा दिया जाएगा।

आज दिनांक 01-10-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर।

हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, उप-तहसील सैंज, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।

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In the Court of Shri Rishabh Sharma, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa,

District Shimla, Himachal Pradesh

Smt. Geeta Devi w/o Sh. Bhagat Ram, r/o Vill. Chour, P.O. Tikkari, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. ..Applicant.

Versus

General Public

.. Respondent.

Application under section 13(3) of Birth and Death Registration Act, 1969.

Whereas Smt. Geeta Devi w/o Sh. Bhagat Ram, r/o Vill. Chour, P.O. Tikkari, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. has preferred an application to the undersigned for registration of name of his/her son/daughter namely Mr. Abhijit whose date of birth 21-04-2000 in the Gram Panchayat Chainjan, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

Therefore by this proclamation, the General Public is hereby informed that any person having any objection for entry as to date of birth mentioned above, may submit his objection in writing in this court on or before 08-11-2018 failing which no objection will be entertained after expiry of date and will be decided accordingly.

Given under my hand and seal of the Court of this 08-10-2018.

Seal.

RISHABH SHARMA, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

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In the Court of Shri Rishabh Sharma, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa,

District Shimla, Himachal Pradesh

Sh. Prem Singh s/o Sh. Bhinder Singh, r/o Vill. Gumma, P.O. Baur, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. ..Applicant.

Versus

5777 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 General Public .. Respondent.

Application under section 13(3) of Birth and Death Registration Act, 1969.

Whereas Sh. Prem Singh s/o Sh. Bhinder Singh, r/o Vill. Gumma, P.O. Baur, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. has preferred an application to the undersigned for registration of name of his/her son/daughter namely Mr. Neeraj whose date of birth 28-01-2005 & Mr. Ravi 28- 02-2006 in the Gram Panchayat Baur, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

Therefore by this proclamation, the General Public is hereby informed that any person having any objection for entry as to date of birth mentioned above, may submit his objection in writing in this court on or before 08-11-2018 failing which no objection will be entertained after expiry of date and will be decided accordingly.

Given under my hand and seal of the Court of this 08-10-2018.

Seal.

RISHABH SHARMA, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

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In the Court of Shri Rishabh Sharma, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa,

District Shimla, Himachal Pradesh

Sh. Balak Ram s/o Sh. Chhaju Ram, r/o Vill. Aar, P.O. Bijmal, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. ..Applicant.

Versus

General Public

.. Respondent.

Application under section 13(3) of Birth and Death Registration Act, 1969.

Whereas Sh. Balak Ram s/o Sh. Chhaju Ram, r/o Vill. Aar, P.O. Bijmal, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. has preferred an application to the undersigned for registration of name of his/her son/daughter namely Mr. Manjit whose date of birth 06-04-2003 in the Gram Panchayat Bijmal, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

Therefore by this proclamation, the General Public is hereby informed that any person having any objection for entry as to date of birth mentioned above, may submit his objection in writing in this court on or before 08-11-2018 failing which no objection will be entertained after expiry of date and will be decided accordingly.

Given under my hand and seal of the Court of this 08-10-2018.

Seal.

RISHABH SHARMA, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

5778 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940

In the Court of Shri Rishabh Sharma, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa,

District Shimla, Himachal Pradesh

Sh. Surender Singh s/o Sh. Khayali Ram, r/o Vill. Chalrana, P.O. Deiya, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. . .Applicant.

Versus

General Public

.. Respondent.

Application under section 13(3) of Birth and Death Registration Act, 1969.

Whereas Sh. Surender Singh s/o Sh. Khayali Ram, r/o Vill. Chalrana, P.O. Deiya, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. has preferred an application to the undersigned for registration of name of his/her son/daughter namely Mr. Akhil Kumar whose date of birth 03-09-1998 in the Gram Panchayat Deiya, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

Therefore by this proclamation, the General Public is hereby informed that any person having any objection for entry as to date of birth mentioned above, may submit his objection in writing in this court on or before 08-11-2018 failing which no objection will be entertained after expiry of date and will be decided accordingly.

Given under my hand and seal of the Court of this 08-10-2018.

Seal.

RISHABH SHARMA, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

__________

In the Court of Shri Rishabh Sharma, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa,

District Shimla, Himachal Pradesh

Sh. Mast Ram s/o Sh. Jatu Ram, r/o Vill. Aara, P.O. Tikkari, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. ..Applicant.

Versus

General Public

.. Respondent.

Application under section 13(3) of Birth and Death Registration Act, 1969.

Whereas Sh. Mast Ram s/o Sh. Jatu Ram, r/o Vill. Aara, P.O. Tikkari, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. has preferred an application to the undersigned for registration of name of his/her son/daughter namely Miss Navena whose date of birth 27-12-2006 in the Gram Panchayat Dhanat, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

Therefore by this proclamation, the General Public is hereby informed that any person having any objection for entry as to date of birth mentioned above, may submit his objection in writing in this court on or before 08-11-2018 failing which no objection will be entertained after expiry of date and will be decided accordingly.

5779 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 Given under my hand and seal of the Court of this 08-10-2018.

Seal.

RISHABH SHARMA, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

__________

In the Court of Shri Rishabh Sharma, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa,

District Shimla, Himachal Pradesh

Sh. Surinder Singh s/o Sh. Karam Dass, r/o Vill. Shawala, P.O. Ruslah, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. ..Applicant.

Versus

General Public

.. Respondent.

Application under section 13(3) of Birth and Death Registration Act, 1969.

Whereas Sh. Surinder Singh s/o Sh. Karam Dass, r/o Vill. Shawala, P.O. Ruslah, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. has preferred an application to the undersigned for registration of name of his/her son/daughter namely Mr. Kamal Kishor whose date of birth 27-12-2006 in the Gram Panchayat Pujarli, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

Therefore by this proclamation, the General Public is hereby informed that any person having any objection for entry as to date of birth mentioned above, may submit his objection in writing in this court on or before 08-11-2018 failing which no objection will be entertained after expiry of date and will be decided accordingly.

Given under my hand and seal of the Court of this 08-10-2018.

Seal.

RISHABH SHARMA, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

__________

In the Court of Shri Rishabh Sharma, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa,

District Shimla, Himachal Pradesh

Sh. Bhop Singh s/o Sh. Sant Ram, r/o Vill. Telor, P.O. Telor, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. ..Applicant.

Versus

General Public

.. Respondent.

Application under section 13(3) of Birth and Death Registration Act, 1969.

Whereas Sh. Bhop Singh s/o Sh. Sant Ram, r/o Vill. Telor, P.O. Telor, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. has preferred an application to the undersigned for registration of name of his/her son/daughter namely Miss Sakshi Chauhan whose date of birth 16-08-2000 in the Gram Panchayat Telor, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

5780 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940

Therefore by this proclamation, the General Public is hereby informed that any person having any objection for entry as to date of birth mentioned above, may submit his objection in writing in this court on or before 08-11-2018 failing which no objection will be entertained after expiry of date and will be decided accordingly.

Given under my hand and seal of the Court of this 08-10-2018.

Seal.

RISHABH SHARMA, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

__________

In the Court of Shri Rishabh Sharma, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa,

District Shimla, Himachal Pradesh

Sh. Nain Singh s/o Sh. Khayalu Ram, r/o Vill. Gumma, P.O. Baur, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. ..Applicant.

Versus

General Public

.. Respondent.

Application under section 13(3) of Birth and Death Registration Act, 1969.

Whereas Sh. Nain Singh s/o Sh. Khayalu Ram, r/o Vill. Gumma, P.O. Baur, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. has preferred an application to the undersigned for registration of name of his/her son/daughter namely Mr. Vishal whose date of birth 30-12-2004 in the Gram Panchayat Baur, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

Therefore by this proclamation, the General Public is hereby informed that any person having any objection for entry as to date of birth mentioned above, may submit his objection in writing in this court on or before 08-11-2018 failing which no objection will be entertained after expiry of date and will be decided accordingly.

Given under my hand and seal of the Court of this 08-10-2018.

Seal.

RISHABH SHARMA, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

__________

In the Court of Shri Rishabh Sharma, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa,

District Shimla, Himachal Pradesh

Sh. Dhani Ram s/o Sh. Malmi Ram, r/o Vill. Aar, P.O. Bijmal, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. ..Applicant.

Versus

General Public

.. Respondent.

5781 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940 Application under section 13(3) of Birth and Death Registration Act, 1969.

Whereas Sh. Dhani Ram s/o Sh. Malmi Ram, r/o Vill. Aar, P.O. Bijmal, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. has preferred an application to the undersigned for registration of name of his/her son/daughter namely Miss Banita whose date of birth 08-06-2000 & Mr. Ajay 10-09-2003 in the Gram Panchayat Bijmal, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

Therefore by this proclamation, the General Public is hereby informed that any person having any objection for entry as to date of birth mentioned above, may submit his objection in writing in this court on or before 08-11-2018 failing which no objection will be entertained after expiry of date and will be decided accordingly.

Given under my hand and seal of the Court of this 08-10-2018.

Seal.

RISHABH SHARMA, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

__________

In the Court of Shri Rishabh Sharma, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa,

District Shimla, Himachal Pradesh

Sh. Kewal Ram Chauhan s/o Sh. Hari Chand, r/o Vill. Paban, P.O. Paban, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. ..Applicant.

Versus

General Public

.. Respondent.

Application under section 13(3) of Birth and Death Registration Act, 1969.

Whereas Sh. Kewal Ram Chauhan s/o Sh. Hari Chand, r/o Vill. Paban, P.O. Paban, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. has preferred an application to the undersigned for registration of name of his/her sons/daughter namely Miss Banidhi whose date of birth 23-11-1997 & Miss Dipshita 02-11-1998 and Mr. Pritik Chauhan 28-12-2000 in the Gram Panchayat Paban, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

Therefore by this proclamation, the General Public is hereby informed that any person having any objection for entry as to date of birth mentioned above, may submit his objection in writing in this court on or before 08-11-2018 failing which no objection will be entertained after expiry of date and will be decided accordingly.

Given under my hand and seal of the Court of this 08-10-2018.

Seal.

RISHABH SHARMA, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

5782 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 26 अक्तूबर, 2018/04 कार्तिक, 1940

In the Court of Shri Rishabh Sharma, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa,

District Shimla, Himachal Pradesh

Sh. Jahir Alam s/o Sh. Karam Deen, r/o Vill. Chadwa, P.O. Gianh, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. ..Applicant.

Versus

General Public

.. Respondent.

Application under section 13(3) of Birth and Death Registration Act, 1969.

Whereas Sh. Jahir Alam s/o Sh. Karam Deen, r/o Vill. Chadwa, P.O. Gianh, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. has preferred an application to the undersigned for registration of name of his/her son/daughter namely Mr. Muzammil whose date of birth 01-03-2010 & Miss Anha Sidhiky 01-01-2012 in the Gram Panchayat Manu Bhabiya, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. Therefore by this proclamation, the General Public is hereby informed that any person having any objection for entry as to date of birth mentioned above, may submit his objection in writing in this court on or before 08-11-2018 failing which no objection will be entertained after expiry of date and will be decided accordingly.

Given under my hand and seal of the Court of this 08-10-2018.

Seal.

RISHABH SHARMA, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P. नियन्त्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, हिमाचल प्रदेश, शिमला-5 द्वारा मुद्रित तथा प्रकाशित इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरित राजपत्र, वैबसाइट http://rajpatrahimachal.nic.in पर उपलब्ध है एवम्‌ ऑनलाइन सत्यापित किया जा सकता है

Cite this issue. Himachal Pradesh Gazette, Government of Himachal Pradesh, 26 October 2018. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.himachal.2018-10-26.152_gazette_2018-26_10_2018/. Archive identifier in.gazette.himachal.2018-10-26.152_gazette_2018-26_10_2018.