राजपत्र, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित सोमवार, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940
हिमाचल प्रदेश सरकार
श्रम एवं रोजगार विभाग
अधिसूचना
शिमला-2, 27 सितम्बर, 2018
संख्याः श्रम (ए) 4-5/2017.--हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, बालक श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 (1986 का 61) की धारा 18 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, इस विभाग की 159-राजपत्र/2018-05-11-2018 (5935) 5936 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 अधिसूचना संख्या श्रम (ए) 4-4/93, तारीख 12-10-1999 द्वारा अधिसूचित हिमाचल प्रदेश बालक श्रम (प्रतिषेध और विनियम) नियम, 1999 का और संशोधन करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाते हैं, अर्थात्ः-- 1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ.--(1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश बालक और कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) प्रथम संशोधन नियम, 2018 है।
(2) ये नियम, राजपत्र, हिमाचल प्रदेश में इनके अंतिम प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होंगे। 2. संक्षिप्त नाम का संशोधन.--हिमाचल प्रदेश बालक श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) नियम, 1999 (जिन्हें इसमें इसके पश्चात् 'उक्त नियम' कहा गया है) के नियम 1 के उप-नियम (1) में, "हिमाचल प्रदेश बालक श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) नियम, 1999" शब्दों, कोष्ठक, चिन्ह और अंकों के स्थान पर "हिमाचल प्रदेश बालक और कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) नियम," शब्द, कोष्ठक, चिन्ह और अंक रखे जाएंगे। 3. नियम 2 का संशोधन.--उक्त नियमों के नियम 2 में,--
(i) खण्ड (क) के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड रखा जाएगा, अर्थात्ः--
(क) "अधिनियम" से बालक और कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 (1986 का 61) अभिप्रेत है; और
(ii) खण्ड (ख) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड अन्तःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्ः-- "(खक) "निधि" से अधिनियम की धारा 14 ख की उपधारा (1) के अधीन गठित बालक और कुमार श्रम पुनर्वास निधि अभिप्रेत है;
(खख)"निरीक्षक" से अधिनियम की धारा 17 के अधीन राज्य सरकार द्वारा नियुक्त निरीक्षक अभिप्रेत हैै;।"
4. उक्त नए नियम 2 अ, 2 आ, 2 इ और 2 उ का अन्तःस्थापन.--उक्त नियमों के नियम 2 के पश्चात् निम्नलिखित नियम अंतःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात :--
"2अ. अधिनियम के उल्लंघन में बालकों और कुमारों के नियोजन के प्रतिषेध के सम्बंध में जागरूकता.--राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कि अधिनियम के उपबंधाें के उल्लंघन में बालकों और किशोरों को नियोजित न किया जाए या उन्हें किसी व्यवसाय या प्रक्रिया में कार्य करने के लिए अनुज्ञात न किया जाए, समुचित उपायों के माध्यम से,--
(क) दूरदर्शन, रेडियो, इंटरनेट और प्रिंट मीडिया सहित मीडिया में लोक जागरूकता अभियानों का प्रबंध करेगी ताकि जनसाधारण, जिसके अंतर्गत बालकों और कुमारों, जिन्हें अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन में नियोजित किया गया हो, के नियोक्ताओं को अधिनियम के उपबंधाें के विषय में जागरूक किया जाए जिससे कि नियोक्ताओं या अन्य व्यक्तियों को बालकों और कुमारों को अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन में किसी व्यवसाय या प्रक्रिया में नियोजित करने से हतोत्साहित किया जा सके;
(ख) उपक्रमों या अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन में बालकों या कुमारों के नियोजन की घटनाओं की, राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट प्राधिकारियों को रिपोर्ट करने के लिए संचार के आसानी से पहुंच वाले साधनों का विकास और विज्ञापनों का संवर्धन;
(ग) संभव परिणाम तक अधिनियम के उपबंध, इन नियमों और उनसे सम्बंधित सूचना का रेल कोचों, रेलवे स्टेशनों, मुख्य बस स्टेशनों, पत्तनों और पत्तन प्राधिकरणाें, विमानपत्तनों तथा अन्य लोक5937 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 स्थानों सहित शॉपिंग सेंटर, मार्किट, सिनेमा हाल, होटल, अस्पताल, पंचायत कार्यालय, पुलिस स्टेशन, आवासीय कल्याण संगम कार्यालय, औद्योगिक क्षेत्र, विद्यालय, न्यायालय परिसर तथा अधिनियम के अधीन प्राधिकृत सभी प्राधिकारियों के कार्यालयों में प्रदर्शन;
(घ) अधिनियम के उपबंधों का समावेश करके समुचित विधि के माध्यम से विद्यालय शिक्षा में शिक्षण सामग्री और पाठ्यक्रम में संवर्धन; और
(ङ) प्रशिक्षण को समाविष्ट करने और अधिनियम के उपबंधों पर सामग्री के प्रति संवेदनशील बनाने तथा उसके प्रति विभिन्न पणधारियों के उत्तरदायित्व, पुलिस, न्यायिक और सिविल सेवा अकादमियों, अध्यापक प्रशिक्षण और पुनश्चर्या पाठयक्रमों का संवर्धन तथा अन्य सुसंगत पणधारियों, जिसके अंतर्गत पंचायत के सदस्य चिकित्सक और सरकार के सम्बंधित कर्मचारी हैं, के लिए संवेदनशीलता कार्यक्रमों का प्रबंध करना ।
2आ. बालक का शिक्षा को प्रभावित किए बिना कुटुम्ब की सहायता करना.--(1) धारा 3 के उपबन्धाें के अध्यधीन, बालक किसी भी रीति में अपनी विद्यालय शिक्षा को प्रभावित किए बिना.--
(क) अपने कुटुम्ब के उपक्रम में इस शर्त के अध्यधीन, सहायता कर सकेगा कि ऐसी सहायता,- (i) अधिनियम की अनुसूची के भाग क एवं ख में सूचीबद्ध किसी परिसंकटमय व्यवसाय या प्रक्रिया में नहीं होगी;
(ii) उत्पादन, आपूर्ति या खुदरा श्रंखला के किसी स्तर पर कोई कार्य या व्यवसाय या प्रक्रिया में सम्मिलित नहीं होगी, जो बालक या उसके कुटुम्ब के उपकक्रम के लिए पारिश्रमिक प्रदान करती हो;
(iii) में उसके कुटुम्ब या कुटुम्ब उपक्रम की सहायता करने के लिए केवल वहां अनुज्ञात किया जाएगा, जहां उसका कुटुम्ब अधिभोगी है;
(iv) में वह विद्यालय समय और 7 बजे सांय और 8 बजे प्रातः के बीच कोई कार्य नहीं करेगा;
(v) में वह सहायता के ऐसे कार्य में नियोजित नहीं होगा, जो बालक की शिक्षा के अघिकार या विद्यालय में उपस्थिति के साथ हस्तक्षेप करती हो या उसमें बाधा डालती हो या जो प्रतिकूल रूप से उसकी शिक्षा को प्रभावित करती हो, जिसके अंतर्गत ऐसे कार्यकलाप हैं, जिन्हें सम्पूर्ण शिक्षा से अलग नहीं किया जा सकता है जैसे गृह कार्य या अन्य अतिरिक्त पाठयक्रम गतिविधियां, जो उसे विद्यालय द्वारा सौंपी गई हैं;
(vi) में बिना विश्राम के सतत्् रूप से किसी कार्य में नियोजित नहीं होगा जो उसे थका दें और उसे उसके स्वास्थ्य और मस्तिष्क को तरोताजा करने के लिए विश्राम अनुज्ञात किया जाएगा तथा कोई बालक एक दिन में विश्राम की अवधि को सम्मिलित न करते हुए तीन घंटे से ज्यादा के लिए सहायता नहीं करेगा;
(vii) में किसी बालक का किसी वयस्क या कुमार के स्थान पर उसके कुटुम्ब या कुटुम्ब के उपक्रम की सहायता के लिए रखा जाना सम्मिलित नहीं है, और
(viii)तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उल्लंघन में नही होगी;
(ख) अपने कुटुम्ब की मदद या सहायता ऐसी रीति में करना, जो किसी व्यवसाय, संकर्म, पेशे, विनिर्माण या कारोबार या किसी संदाय या बालक या किसी अन्य व्यक्ति को फायदे के लिए, जो बालक पर नियंत्रण रखता है, के लिए है तथा जो बालक की वृद्धि, शिक्षा और समग्र विकास के लिए अवरोधकारी नहीं है। 5938 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 स्पष्टीकरण 1.--इस नियम के प्रयोजनों के लिए, केवल-
(क) बालक का सगा भाई और बहन;
(ख) बालक के माता-पिता द्वारा विधिपूर्वक गोद लेने के माध्यम से बालक का भाई या बहन;
और
(ग) बालक के माता-पिता का सगा भाई और बहन को बालक के कुटुम्ब में सम्मिलित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण 2.--इस नियम के प्रयोजन के लिए किसी शंका की दशा में, कि किसी बालक द्वारा किया गया कार्य अधिनियम की धारा 3 के उपबन्धों की अनुपालना उसके कुटुम्ब की सहायता सुनिश्चित करने के लिए है, तो निरीक्षक, राज्य सरकार से स्पष्टीकरण प्राप्त कर सकेगा और इस प्रकार अभिप्राप्त स्पष्टीकरण की अनुपालना करेगा ।
2इ. बालक का कलाकार के रूप में कार्य करना.--(1) धारा 3 के उपबंधाें के अध्यधीन, बालक को निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन, कलाकार के रूप में कार्य करने के लिए अनुज्ञात किया जा सकेगा, अर्थात्ः-
(क) किसी बालक को एक दिन में पांच घंटे से ज्यादा कार्य करने के लिए और बिना किसी विश्राम के तीन घंटों के अनाधिक के लिए कार्य करने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जाएगा;
(ख) किसी श्रव्य-दृश्य कार्यक्रम या किसी वाणिज्यिक समारोह, जिसमें बालक की भागीदारी अंतर्वलित है, का निर्माता, बालक की सहभागिता को उस जिले के जिला मजिस्ट्रेट से, जिसमें उस कार्यकलाप को किया जाना है, अनुज्ञा प्राप्त करने पश्चात् ही शामिल करेगा और जिला मजिस्ट्रेट को कार्यक्रम को आम्रभ करने से पूर्व प्रारूप ग में एक वचनबंध तथा बालक सहभागियों, यथास्थिति, माता-पिता या संरक्षक की सहमति, प्रोडक्शन या समारोह से व्यष्टिक का नाम, जो बालक की सुरक्षा और संरक्षा के लिए उत्तरदायी हैं, की सूची प्रस्तुत करेगा;
(ग) खंड (ख) में निर्दिष्ट वचनबंध छह मास के लिए विधिमान्य होगा और उसमें ऐसे प्रयोजन के लिए समय-समय पर केंद्रीय/राज्य सरकार द्वारा जारी मार्गदर्शक सिद्धांतो तथा संरक्षण नीतियों के अनुसार बालक की शिक्षा, सुरक्षा, संरक्षा तथा बाल शोषण की रिपोर्ट करने के लिए उपबंधाें का स्पष्ट कथन होगा, जिसके अंतर्गत-
(i) बालक के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए सुविधाओं को सुनिश्चित करना;
(ii) बालक के लिए समयबद्ध पोषक आहार की व्यवस्था करना;
(iii) दैनिक आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त आपूर्ति के साथ सुरक्षित, स्वच्छ आश्रय की व्यवस्था करना; और
(iv) बालकों के संरक्षण के लिए तत्समय प्रवृत्त सभी लागू विधियों के अनुपालन की व्यवस्था करना, जिसके अंतर्गत उनकी शिक्षा, देखरेख और संरक्षण तथा यौन अपराधों से सुरक्षा के लिए अधिकार हं;
(घ) बालक की शिक्षा के लिए समुचित सुविधाओं का प्रबंध किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विद्यालय में पाठों की निरंतरता बनी रहे;
(ङ) समारोह या कार्यक्रम के लिए अधिकतम पांच बालकों के लिए एक उत्तरदायी व्यक्ति की नियुक्ति की जाएगी ताकि बालक की सुरक्षा, देखरेख और उसके सर्वोत्तम हित को सुनिश्चित किया जा सके;
5939 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940(च) बालक द्वारा कार्यक्रम या समारोह से अर्जित आय के कम से कम बीस प्रतिशत को सीधे किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में बालक के नाम से नियत जमा खाते में जमा किया जाएगा जिसको बालक के व्यस्क होने पर बालक को प्रत्यित किया जा सकेगा; और
(छ) किसी बालक को उसकी इच्छा और सहमति के विरूद्ध किसी श्रव्य-दृश्य और क्रीडा कार्यकलाप में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
(2) अधिनियम की धारा 3 की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण के खंड (ग) के प्रयोजनों के लिए उसमें अंतर्विष्ट "अन्य ऐसा कार्यकलाप" पद से निम्नलिखित अभिप्रेत होगा-
(i) कोई कार्यकलाप, जिसमें बालक किसी खेल प्रतिस्पर्धा या समारोह या ऐसी खेल प्रतिस्पर्धा या समारोह के लिए प्रशिक्षण में भाग ले रहा है ;
(ii) दूरदर्शन पर सिनेमा, इंटरनेट, रेडियो या किसी अन्य माध्यम (मीडिया), जिसके अन्तर्गत रियल्टी शो में जिसमें क्विज शो और टैलेन्ट शो भी है, का प्रदर्शन;
(iii) नाटक सीरियल;
(iv) किसी कार्यक्रम या समारोह में एंकर के रूप में भागीदारी; और
(v) कोई अन्य कलात्मक अभिनय, जिसे केंद्रीय/राज्य सरकार व्यष्टिक मामलों में अनुज्ञात करें, जिसके अंतर्गत धनीय फायदे के लिए स्ट्रीट प्रदर्शन सम्मिलित नहीं है।
5. नियम 3 का प्रतिस्थापन.--उक्त नियमों के नियम 3 के स्थान पर निम्नलिखित नियम रखा जाएगा, अर्थात :--
3. कार्य के घंटे.--धारा 7 के उपबंधों के अध्यधीन किसी कुमार से किसी स्थापना में कार्य के उतने घंटों से अधिक कार्य करने की अपेक्षा नहीं होगी या उसे अनुज्ञात नहीं किया जाएगा जितने कि ऐसे स्थापन में कुमार के कार्य के घंटाें को विनियमित करने के लिए तत्समय प्रवृत्त विधि के अधीन अनुज्ञेय हैं ।"।
6. नियम 4 का संशोधन.--उक्त नियमों के नियम 4 के उपनियम (1) में "बालकों" शब्द के स्थान पर "कुमारों" शब्द रखा जाएगा।
7. उक्त नए नियम 4अ का अन्तःस्थापन.--उक्त नियमों के नियम 4 के पश्चात् निम्नलिखित नियम अंतस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :--
"4अ. बालक या कुमार को बालक और श्रम पुनर्वास निधि से रकम का संदाय.--(1) अधिनियम की धारा 14 ख की उपधारा (3) के अधीन बालक और कुमार श्रम पुनर्वास निधि में, यथास्थिति, प्रत्यय, जमा या विनिधान की गई निधि और उस पर उद्भूत ब्याज का उस बालक या कुमार को निम्नलिखित रीति में संदाय किया जाएगा जिसके पक्ष में ऐसे रकम को प्रत्ययित किया गया है, अर्थात्ः--
(i) अधिकारिता रखने वाला निरीक्षक अपने पर्यवेक्षण के अधीन सुनिश्चित करेगा कि ऐसे बालक या कुमार का एक खाता किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खोला जाए और, यथास्थिति, उस बैंक को, जिसमें निधि की रकम को जमा किया गया है या धारा 14ख की उपधारा (3) के अधीन निधि में रकम को जमा करने के लिए उत्तरदायी अधिकारी को;
(ii) बालक या कुमार के पक्ष में निधि में समानुपाती रकम पर उद्भूत ब्याज को वार्षिक रूप से, यथास्थिति, बालक या कुमार के खाते में बैंक या रकम का विनिधान करने के लिए उत्तरदायी अधिकारी को निरीक्षक को सूचना के अधीन ;
5940 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 (iii) जब संबद्ध बालक या कुमार अठारह वर्ष की आयु पूरी कर लेता है तब यथासम्भव शीघ्र तुरन्त या तीन मास की अवधि के भीतर, बालक के पक्ष में उस पर उद्भूत ब्याज, जिसमें बैंक में शेष ब्याज या धारा 14ख की उपधारा (3) के अधीन इस प्रकार विनिधान किया गया शेष भी है, के साथ जमा की गई, निक्षेप की गई या विनिधान की गर्ई कुल रकम, यथास्थिति, बालक या कुमार के उक्त बैंक खाते में अन्तरित की जाएगी; और
(iv) निरीक्षक सम्बद्ध बालक या कुमार की विश्ष्टिियों, जो उसकी पहचान करने के लिए पर्याप्त है, के साथ खंड (ii) और खंड (iii) के अधीन अन्तरित रकम की एक रिपोर्ट तैयार करेगा तथा राज्य सरकार को प्रतिवर्ष रिपोर्ट की एक प्रति सूचनार्थ भेजेगा।
(2) अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन के लिए बालक या कुमार के पक्ष में न्यायालय के आदेश या निर्णय के अनुसरण में जुर्माने के माध्यम से या अपराधों के शमन के लिए वसूल की गई कोई रकम भी निधि में जमा की जाएगी और ऐसे आदेश या निर्णय के अनुसार व्यय की जाएगी"। 8. नियम 5 का प्रतिस्थापन.--उक्त नियमों के नियम 5 के स्थान पर, निम्नलिखित नियम रखा जाएगा, अर्थातः--
"5 आयु का प्रमाण-पत्र.--(1) जहां निरीक्षक को यह आशंका है कि किसी कुमार को किसी ऐसे व्यवसाय या प्रसंस्करणों में नियोजित किया गया है जिनमें उसे अधिनियम की धारा 3क के अधीन नियोजित किया जाना प्रतिषिद्ध है, तो वह ऐसे कुमार के नियोजक से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह समुचित चिकित्सा प्राधिकारी से आयु का प्रमाण-पत्र निरीक्षक को प्रस्तुत करे। (2) समुचित चिकित्सा प्राधिकारी, उपधारा (1) के अधीन आयु का प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए कुमार की परीक्षा करते समय.-
(i) कुमार का आधार कार्ड, और उसके अभाव में;
(ii) विघालय से जारी जन्म की तारीख का प्रमाण-पत्र या कुमार के सम्बद्ध परीक्षा बोर्ड से जारी मैट्रिकुलेशन या समतुल्य प्रमाण-पत्र, यदि उपलब्ध हों और उसके अभाव में;
(iii) निगम या नगरपालिका प्राधिकारी या पंचायत द्वारा दिए गए कुमार के जन्म प्रमाण-पत्र पर विचार करेगा और खंड (i) से खंड (iii) में विनिर्दिष्ट पद्धतियों के अभाव में ही, अस्थिविकास परीक्षण या किसी अन्य नवीनतम चिकित्सीय आयु अवधारण परीक्षण के माध्यम से ऐसे चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा आयु अवधारित की जाएगी।
(3) अस्थिविकास परीक्षण या कोई अन्य नवीनतम चिकित्सीय आयु अवधारण परीक्षण श्रम आयुक्त की पंक्ति के समुचित प्राधिकारी, जो राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए, के आदेश पर संचालित किया जाएगा और ऐसा अवधारण, ऐसे आदेश की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर पूरा किया जाएगा।
(4) उप-नियम (1) में निर्दिष्ट आयु प्रमाण-पत्र प्रारूप 'ख' में जारी किया जाएगा।
(5) आयु प्रमाण-पत्र के जारी किए जाने के लिये चिकित्सा प्राधिकारी को संदेय प्रभार वही हाेंगे जो, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा उनके चिकित्सा बोर्डोंं के लिए विनिर्दिष्ट किए जाएं।
(6) चिकित्सा प्राधिकारी को संदेय प्रभार उस कुमार के नियोजक द्वारा वहन किए जाएंगे जिसकी आयु इस नियम के अधीन अवधारित की जाती है।5941 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 स्पष्टीकरणः--इस नियम के प्रयोजन के लिए,-
(i) "चिकित्सा प्राधिकारी" से ऐसा कोई सरकारी चिकित्सक, जो किसी जिले के सहायक शल्य चिकित्सक की पंक्ति से अन्यून का न हो या कर्मचारी राज्य बीमा औषधालय या अस्पतालों में नियोजित समतुल्य पंक्ति का नियमित चिकित्सक अभिप्रेत है;
(ii) "कुमार" से अधिनियम की धारा 2 के खंड (i) में यथा परिभाषित कुमार अभिप्रेत है.-"। 9. नए नियम 5अ, 5आ, 5इ, 5र्ई और 5उ का अन्तःस्थापन.--उक्त नियम के नियम 5 के पश्चात, निम्नलिखित नियम अन्तःस्थापित किए जाएंगे; अर्थात्ः--
5अ. व्यक्ति, जो परिवाद फाइल कर सकेंगे--ऐसा कोई व्यक्ति, जो किसी अपराध के किए जाने के लिए अधिनियम के अधीन परिवाद फाइल कर सकेगा, में स्कूल प्रबंधन समिति, बालक संरक्षण समिति, पंचायत या नगरपालिका से स्कूल अध्यापक और प्रतिनिधि सम्मिलित हैं, जो उस दशा में परिवाद फाइल करने के लिए संवेदनशील होंगे कि उनके अपने-अपने स्कूलों के छात्रों में से कोई छात्र इस अधिनियम के उपबंधों का उल्लंघन करके नियोजित किया जाता है। 5आ. अपराधों का शमन करने की रीति.-(1) कोई अभियुक्त व्यक्ति,--
(i) जो इस अधिनियम की धारा 14 की उपधारा (3) के अधीन पहली बार कोई अपराध करता है; या (ii) जो माता-पिता या संरक्षक होते हुए, उक्त धारा के अधीन अपराध करता है, इस अधिनियम की धारा 14घ की उप-धारा (1) के अधीन अपराध का शमन करने की अधिकारिता रखने वाले जिला मजिस्ट्रेट के पास आवेदन फाइल कर सकेगा।
(2) जिला मजिस्ट्रेट उप-नियम (1) के अधीन फाइल किए गए आवेदन पर अभियुक्त व्यक्ति और संबद्ध निरीक्षक को सुनने के पश्चात्, आवेदन का निपटान करेगा और यदि आवेदन अनुज्ञात कर दिया जाता है तो निम्नलिखित के अध्यधीन, शमन करने का प्रमाण-पत्र जारी करेगा- (i) ऐसे प्रमाण-पत्र में विनिर्दिष्ट समय के भीतर, ऐसे अपराध के लिए उपबंधित अधिकतम जु़र्माने के पचास प्रतिशत की राशि का संदाय; या
(ii) खण्ड (i) के अधीन विर्निर्दिष्ट शमनकारी रकम के साथ ऐसे अपराध के लिये उपबंधित अधिकतम जु़र्माने का पच्चीस प्रतिशत की अतिरिक्त राशि का संदाय, यदि अभियुक्त उक्त खंड के अधीन विर्निर्दिष्ट समय के भीतर शमनकारी रकम का संदाय करने में असफल रहता है और ऐसा विलम्बित संदाय भी शमन के प्रमाण-पत्र में ऐसे प्रयोजन के लिए विर्निर्दिष्ट की जाने वाली अवधि के भीतर किया जाएगा।
(3) शमनकारी रकम अभियुक्त व्यक्ति द्वारा राज्य सरकार को संदा की जाएगी।
(4) यदि अभियुक्त व्यक्ति उप-नियम (2) के अधीन शमनकारी रकम का संदाय करने में असफल रहता है तो कार्यवाही अधिनियम की धारा 14घ की उप-धारा (2) के अधीन यथा विनिर्दिष्ट के अनुसार जारी रहेगी।
5इ. जिला मजिस्ट्रेट के र्काव्य.--(1) जिला मजिस्ट्रेट-
(i) नोडल अधिकारियों के रूप में ज्ञात होने वाले उसके अधीनस्थ ऐसे अधिकारियों को, जो वह आवश्यक समझे, विनिर्दिष्ट करेगा, जो अधिनियम की धारा 17क के अधीन राज्य सरकार द्वारा उसको प्रदत्त और अधिरोपित जिला मजिस्ट्रेट की सभी या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करेेंगे और सभी या किन्हीं र्काव्यों का पालन करेंगे ;
5942 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 (ii) नोडल अधिकारी को अधीनस्थ अधिकारी के रूप में उसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर उसके द्वारा प्रयोग की जाने वाली ऐसी शक्तियों और पालन किए जाने वाले कर्त्तव्यों, जो वह समुचित समझे, को समनुदेशित करेगा; और
(iii) निम्नलिखित से मिलकर बनी जिले में बनाई जाने वाले कार्यबल के अघ्यक्ष के रूप में अध्यक्षता करेगा :-
(क) उसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के प्रयोजनों के लिये धारा 17 के अधीन नियुक्त निरीक्षक;
(ख) उसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के प्रयोजनों के लिए पुलिस अधीक्षक;
(ग) उसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के प्रयोजनों के लिए अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट;
(घ) उसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के प्रयोजनों के लिए खंड (i) के अधीन र्निर्दिष्ट नोडल अधिकारी;
(ङ) उसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के प्रयोजनों के लिये श्रम अधिकारी;
(च) दो वर्ष की अवधि के लिए चक्रानुक्रमी आधार पर जिले में नियोजित बालकों के बचाव और पुनर्वास में अन्तर्वलित प्रत्येक स्वैच्छिक संगठन से दो-दो प्रतिनिधि;
(छ) जिला न्यायाधीश द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाने वाला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का एक प्रतिनिधि;
(ज) जिला दुव्र्यापार निवारण यूनिट का सदस्य;
(झ) जिले की बालक कल्याण समिति का अध्यक्ष;
(ञ) महिला और बाल विकास से संबंधित भारत सरकार के मंत्रालय की एकीकृत बालक संरक्षण स्कीम के अधीन जिला में बाल श्रम संरक्षण अधिकारी;
(ट) जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नाम र्निर्दिष्ट किया गया कोई अन्य व्यक्ति; और
(ठ) कार्य बल का सचिव, खंड (i) में र्निर्दिष्ट कोई नोडल अधिकारी होगा और अध्यक्ष द्वारा नाम र्निर्दिष्ट किया जाएगा।
(2) उप-धारा (1) के खंड (iii) में र्निर्दिष्ट कार्यबल प्रत्येक मास में कम से कम एक बार बैठक करेगा और उपलब्ध समय, तत्समय प्रवृत्त विधि के अनुसार छापामारी का बिन्दु, योजना की गोपनीयता, समय-समय पर केन्द्रीय/राज्य सरकार द्वारा जारी बचाव और प्रत्यावर्तन के लिए मार्गदर्शी सिद्वांतों के अनुसार पीड़ितों और साक्षियों का संरक्षण तथा अंतरिम अनुतोष को ध्यान में रखते हुए बचाव कार्य संचालित करने की व्यापक कार्रवाई योजना बनाएगा और कार्य बल राज्य सरकार द्वारा ऐसे प्रयोजन के लिए सृजित पोर्टल पर ऐसी बैठक के कार्यवृत्त को भी अपलोड कराएगा।
(3) उप-धारा (1) में निर्दिष्ट कर्त्तव्यों के अलावा, जिला मजिस्टे्रट नोडल अधिकारियों के माध्यम से सुनिश्चित करेगा कि बालक और कुमार, जो अधिनियम के उपबंधों का उल्लघंन करके नियोजित किए जाते हैं, बचाए जाते हैं तथा उन्हें निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार पुनर्वसित किया जाएगा-
(i) किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (2016 का 2) तथा तद्धीन बनाए गए नियम;
5943 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940(ii) बंधित श्रम पद्धति (उत्सादन) अधिनियम, 1976 (1976 का 19);
(iii) केन्द्रीय बंधित श्रमिक पुनर्वास सैक्टर स्कीम, 2016;
(iv) कोई राष्ट्रीय बालक श्रम परियोजना;
(v) तत्समय प्रवृत कोई अन्य विधि स्कीम, जिसके अधीन ऐसे बालकों या कुमारों को पुनर्वसित किया जाए; और निम्नलिखित के अध्यधीन-
(I) सक्षम अधिकारिता के न्यायालय के निदेश, यदि कोई हों;
(II) इस संबंध में समय-समय पर केन्द्रीय/राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए बचाव और प्रत्यावर्तन के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत।
5ई. निरीक्षकों के कर्त्तव्य.--धारा 17 के अधीन राज्य सरकार द्वारा नियुक्त कोई निरीक्षक, अधिनियम के उपबंधों का अनुपालन सुनिश्चित करने के प्रयोजनों के लिए,
(i) समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा जारी निरीक्षण के सन्नियमों का अनुपालन करेगा;
(ii) इस अधिनियम के उपबंधों का अनुपालन सुनिश्चित करने के प्रयोजनों के लिए समय-समय पर केन्द्रीय/राज्य सरकार द्वारा जारी अनुदेशों का अनुपालन करेगा; और
(iii) इस अधिनियम के उपबंधों का पालन सुनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए उसके द्वारा किए गए निरीक्षण तथा ऐसे प्रयोजनों के लिए उसके द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में राज्य सरकार को त्रैमासिक रिपोर्ट करेगा।
5उ. आवधिक निरीक्षण और मॉनीटर करना.--राज्य सरकार धारा 17 के उपबंधाें को कार्यान्वित करने के लिए मॉनिटर करने तथा निरीक्षण की प्रणाली सृजित करेगी, जिसमें निम्नलिखित सम्मिलित होंगे- (i) उन स्थानों का निरीक्षक द्वारा संचालन किए जाने वाले आवधिक निरीक्षण की संख्या, जिन पर बालकों के नियोजन प्रतिषिद्ध हैं और परिसंकटमय व्यवसायों या प्रसंस्करण किए जाते हैं;
(ii) ऐसे अन्तरालों, जिन पर निरीक्षक राज्य सरकार को खंड (i) अधीन निरीक्षक की विषय-वस्तु से संबंधित उसको प्राप्त हुई शिकायतों तथा तत्पश्चात् उसके द्वारा की गई कार्यवाई के ब्यौरों की रिपोर्ट करेगा;
(iii) निम्नलिखित का इलैक्ट्रॉनिक रूप से या अन्यथा अभिलेख का रखा जाना-
(क) अधिनियम के उपबंधों का उल्लंघन करने पर कार्य करते हुए पाए गए बालक और कुमार, जिसमें ऐसे बालक भी हैं जो इस अधिनियम का उल्लंघन करने पर कुटुम्ब या कुटुम्ब उधमों में लगे हुए पाए जाते हैं;
(ख) शमन किए गए अपराधों की संख्या और ब्यौरे;
(ग) अधिरोपित और वसूल की गई शमनकारी रकम के ब्यौरे; और
(घ) अधिनियम के अधीन बालकों और किशोरों को प्रदान की गई पुनर्वास सेवाओं के ब्यौरे;"। (10) प्रारूप 'क' का संशोधन.--उक्त नियम से संलग्न प्रारूप (क) के स्तम्भ 2 के शीर्ष में, "बालक का नाम" शब्दों के स्थान पर "कुमार का नाम" शब्द रखे जाएंगे। 5944 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 (11) प्रारूप 'ग' का अन्तःस्थापन.--उक्त नियमों से संलग्न प्रारूप (ख) के पश्चात्, निम्नलिखित प्रारूप अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :--
"प्रारूप-ग'
[नियम 2 ग (ख) देखें]
हिमाचल प्रदेश बालक और कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) नियम, 1999 के नियम 2ग (ख) के अधीन वचनबंध
मैं,वाणिज्यिक आयोजनका श्रव्य दृश्य मीडिया प्रस्तुतीकरण या आयोजकका उत्पादक हूं जिसमें निम्नलिखित बालक भाग ले रहे हैं, अर्थात् :--
क्र0 सं0 बालक/बालकों माता-पिता/संरक्षक पता का नाम का नाम
यह वचन देता हूं कि..................................आयोजन (आयोजन को विनिर्दिष्ट करें) में ऊपर उल्लिखित बालकों के शामिल होने के दौरान, बालक और कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 (1986 का 61) और हिमाचल प्रदेश बालक और कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) नियम, 1999 के किसी उपबंध का उल्लंघन नहीं होगा और बालकों के शारारिक और मानसिक स्वास्थ्य तथा अन्य अपेक्षाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा ताकि उसे/उन्हें कोई असुविधा न हो। मैं यह भी वचन देता हूं कि आयोजन के दौरान बालकों के संरक्षण, जिसके अन्तर्गत उनके शिक्षा के अधिकार, देखभाल और संरक्षण, लैंगिक अपराधों के विरूद्ध विधिक उपबंध भी है, के लिए तत्समय प्रवृत्त लागू सभी विधियों का अनुपालन किया जाएगा।
तारीख
नाम और हस्ताक्षर।
आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/-
प्रधान सचिव (श्रम एवं रोजगार)।
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[Authoritative English text of this Department Notification No. Shram (A)4-5/2017, dated
27-09-2018 as required under clause (3) of Article 348 of the Constitution of India].
LABOUR & EMPLOYMENT DEPARTMENT
NOTIFICATION
Shimla-171002, the 27th September, 2018
No. Shram (A)4-5/2017.—In exercise of the powers conferred by Section 18 of the Child Labour (Prohibition and Regulation) Act, 1986 (61 of 1986), the Governor, Himachal Pradesh is pleased to amend the Himachal Pradesh Child Labour (Prohibition and Regulation) Rules, 1999 notified vide this Department Notification No. Shram (A)4-4/1993 dated 12-10-1999, namely:—
1. Short title and commencement.—(1) These rules may be called as the Himachal Pradesh Child and Adolescent Labour (Prohibition and Regulation) First Amendment Rules, 2018.
5945 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940(2) They shall come into force from the date of their final publication in the Official Gazette.
2. Amendment of Short Title.—In the Himachal Pradesh Child Labour (Prohibition and Regulation) Rules, 1999 (hereinafter referred to as the "said rules"), in rule 1, in sub-rule (1), for the words, brackets, signs and figures "Himachal Pradesh Child Labour (Prohibition and Regulation) Rules, 1999", the words, brackets, signs and figures "Himachal Pradesh Child and Adolescent Labour (Prohibition and Regulation) Rules," shall be substituted.
3. Amendment of rule 2.—In rule 2 of the said rules,—
(i) for clause (a), the following clause shall be substituted, namely:—
"(a) "Act" means the Child and Adolescent Labour (Prohibition and Regulation) Act, 1986 (61 of 1986); and
(ii) after clause (b), the following clause shall be inserted, namely:—
(ba) "Fund" means the Child and Adolescent Labour Rehabilitation Fund constituted under sub-section (1) of section 14B of the Act;
(bb) "Inspector" means the Inspector appointed by the State Government under section 17 of the act",
4. Insertion of new rule 2A, 2B and 2C.—After rule 2 of the said rules, the following rules shall be inserted, namely:—
"2A. Awareness on prohibition of employment of child and adolescents in contravention to Act.—The State Government shall, ensure that the children and adolescents are not employed or permitted to work in any occupation or process in contravention to the provisions of the Act, through appropriate measures,–
(a) arrange public awareness campaigns in media including television, radio, internet and the print media to make the general public, including the employers and the children and adolescents who may be employed in contravention to the provisions of the Act, aware about the provisions of the Act, and thereby discourage employers or other persons from engaging children and adolescents in any occupation or process in contravention of the provisions of the Act;
(b) promote reporting of enterprises or instances of employment of children or adolescents in contravention to the provisions of the Act, by developing and advertising easily accessible means of communication to authorities specified by the State Government; (c) display to the possible extent the provisions of the Act, these rules and any other information relating thereto in railway coaches, at railway stations, major bus stations, ports and port authorities, airports and other public places including shopping centers, markets, cinema halls, hotels, hospitals, panchayat offices, police stations, resident welfare association offices, industrial areas, schools, court complexes and offices of all authorities authorised under the Act;
(d) promote through appropriate method the inclusion of the provisions of the Act in learning material and syllabus in school education; and5946 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 (e) promote inclusion of training and sensitization material on the provisions of the Act and the responsibilities of various stakeholders thereto, in police, judicial and civil service academies, teachers training and refresher courses and arrange sensitisation programmes for other relevant stakeholders including, panchayat members, doctors and concerned officials of the Government.
2B. Child to help his family without affecting education.—(1) Subject to the provisions of section 3, a child may, without affecting his school education, in any manner,– (a) help his family in his family enterprise, subject to the condition that such help:—
(i) shall not be in any hazardous occupation or process listed in Part A and B of the Schedule to the Act;
(ii) shall not include work or occupation or process at any stage of the production, supply or retail chain that is remunerative for the child or his family or the family enterprise;
(iii) shall only be allowed to help in his family, or in a family enterprise, where his family is the occupier;
(iv) shall not perform any tasks during school hours or between 7 P.M. and 8 A.M.; (v) shall not be engaged in such tasks of helping which hinders or interferes with the right to education of the child, or his attendance in the school, or which may adversely affect his education including activities which are inseparably associated to complete education such as homework or any extracurricular activity assigned to him by the school;
(vi) shall not be engaged in any task continuously without rest which may make him tired and shall be allowed to take rest to refresh his health and mind, and a child shall not help for more than three hours excluding the period of rest in a day;
(vii) shall not include in anyway substitution of the child for an adult or adolescent while helping his family or family enterprise; and
(viii)shall not be in contravention to any other law for the time being in force;
(b) aid or assist his family in such manner which is not incidental to any occupation, work, profession, manufacture or business, or for any payment or benefit to the child or any other person exercising control over the child, and which is not detrimental to the growth and overall development of the child.
Explanation 1.—For the purposes of this rule, only–
(a) real brother and sister of the child;
(b) brother or sister of the child through lawful adoption by the parents of the child; and (c) real brother and sister of the parents of the child, shall be included for comprising the family of a child.
5947 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940Explanation 2.—For the purposes of this rule, in case of any doubt as to whether the task performed by a child amounts to helping his family for securing compliance with the provisions of section 3, the Inspector may seek clarification from the State Government and shall abide by the clarification so obtained.
2C. Child to work as an artist.—(1) Subject to the provisions of section 3, a child may be allowed to work as an artist subject to the following conditions, namely :–
(a) no child shall be allowed to work for more than five hours in a day, and for not more than three hours without rest;
(b) any producer of any audio-visual media production or any commercial event involving the participation of a child, shall involve a child in participation only after obtaining the permission from the District Magistrate of the district where the activity is to be performed and shall furnish to the District Magistrate before starting the activity an undertaking in Form C and the list of child participants or guardian, as the case may be, consent of parents, name of the individual from the production or event who shall be responsible for the safety and security of the child;
(c) the undertaking referred to in clause (b) shall be valid for six months and shall clearly state the provisions for education, safety, security and reporting of child abuse in consonance with the guidelines and protection policies issued by the Central/ State Government from time to time for such purpose including–
(i) ensuring facilities for physical and mental health of the child;
(ii) timely nutritional diet of the child;
(iii) safe, clean shelter with sufficient provisions for daily necessities; and
(iv) compliance to all laws applicable for the time being in force for the protection of children, including their right to education, care and protection, and against sexual offences;
(d) appropriate facilities for education of the child to be arranged so as to ensure that there is no discontinuity from his lessons in school;
(e) one responsible person be appointed for maximum of five children for the production or event, so as to ensure the protection, care and best interest of the child;
(f) at least twenty percent of the income earned by the child from the production or event to be directly deposited in a fixed deposit account in a nationalised bank in the name of the child which may be credited to the child on attaining majority; and
(g) no child shall be made to participate in any audio-visual and sports activity against his will and consent.
(2) For the purposes of clause (c) to the Explanation to sub-section (2) of section 3 of the Act, the expression "such other activity" contained therein, shall mean–
(i) any activity where the child himself is participating in a sports competition or event or training for such sports competition or event;
5948 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 (ii) cinema shows on television, internet, radio or any other media including reality showswhich includes quiz shows and talent shows;
(iii) drama serials;
(iv) participation as anchor of a show or events; and
(v) any other artistic performances which the Central/State Government permits in individual cases, which shall not include street performance for monetary gain.".
5. Substitution of rule 3.—For rule 3 of the said rules, the following rule shall be substituted, namely:—
"3. Hours of work.—Subject to the provisions of section 7, no adolescent shall be required or permitted to work in an establishment in excess of such number of hours of work as is permissible under the law for the time being in force regulating the hours of work of the adolescent in such establishment."
6. Amendment of rule 4.—In rule 4 of the said rules, in sub-rule (1), for the word "children", the word "adolescents" shall be substituted.
7. Insertion of new rule 4A.—After rule 4 of the said rules, the following rule shall be inserted, namely:—
"4A. Payment of amount to child or adolescent from and out of Child and Adolescent Labour Rehabilitation Fund.—(1) The amount credited, deposited or invested, as the case may be, under sub-section (3) of section 14B of the Act, to the Child and Adolescent Labour Rehabilitation Fund and the interest accrued on it, shall be paid to the child or adolescent in whose favour such amount is credited in the following manner, namely:—
(i) the Inspector having jurisdiction shall, under his supervision, ensure that an account of such child or adolescent is opened in a nationalised bank and inform the bank in which the amount of the Fund is deposited or, as the case may be, to the officer responsible to invest the amount of the Fund under sub-section (3) of section 14B;
(ii) the interest accrued on the proportionate amount of the Fund in favour of the child or adolescent shall be annually transferred to the account of the child or adolescent, as the case may be, by the bank or officer responsible to invest the amount under information to the Inspector;
(iii) when the concerned child or adolescent completes the age of eighteen years, then, as soon as may be possible forthwith or within a period of three months, the total amount credited, deposited or invested in favour of the child along with interest accrued thereon including the interest remaining in the bank or remaining so invested under sub-section (3) of section 14B, shall be transferred to the said bank account of child or adolescent, as the case may be; and
(iv) the Inspector shall prepare a report of the amount transferred under clause (ii) and clause (iii) with particulars of the concerned child or adolescent sufficient to identify him and send a copy of the report annually to the State Government for information.
(2) Any amount recovered by way of fine or for composition of offences in pursuance of an order or judgement of a Court in favour of a child or adolescent for the contravention of the provisions of the Act, shall also be deposited in the Fund and shall be spent in accordance with such order or judgement."5949 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 8. Substitution of rule 5.—For rule 5 of the said rules, the following rule shall be substituted, namely:—
"5. Certificate of age.—(1) Where an Inspector has an apprehension that any adolescent has been employed in any of the occupation or processes in which he is prohibited to be employed under section 3A of the Act, he may require the employer of such adolescent to produce to the Inspector a certificate of age from the appropriate medical authority.
(2) The appropriate medical authority shall, while examining an adolescent for issuing the certificate of age under sub-rule (1), take into account –
(i) the Aadhar card of the adolescent, and in the absence thereof;
(ii) the date of birth certificate from school or the matriculation or equivalent certificate from the concerned examination Board of the adolescent, if available, and in the absence thereof;
(iii) the birth certificate of the adolescent given by a corporation or a municipal authority or a panchayat; and only in the absence of the methods specified in clauses (i) to (iii), the age shall be determined by such medical authority through an ossification test or any other latest medical age determination test.
(3) The ossification test or any other latest medical age determination test shall be conducted on the order of the appropriate authority of the rank of Labour Commissioner, as may be specified by the State Government in this behalf and such determination shall be completed within fifteen days from the date of such order.
(4) The certificate of age referred to in sub-rule (1) shall be issued in Form B.
(5) The charges payable to the medical authority for the issue of the certificate of age shall be same as specified by the Central Government or the State Government, as the case may be, for their Medical Boards.
(6) The charges payable to the medical authority shall be borne by the employer of the adolescent whose age is determined under this rule.
Explanation.—For the purposes of this rule,–
(i) "medical authority" means a Government medical doctor not below the rank of an Assistant Surgeon of a District or a regular doctor of equivalent rank employed in Employees' State Insurance dispensaries or hospitals;
(ii) "adolescent" means an adolescent as defined in clause (i) of section 2 of the Act.". 9. Insertion of new rules 5A, 5B, 5C, 5D and 5E.—After rule 5 of the said rules, the following rules shall be inserted, namely:—
"5A. Persons who may file complaint.—Any person who may file a complaint under the Act for commission of any offence include school teachers and representatives from school management committee, child protection committee, Panchayat or Municipality, who shall be sensitized to file complaint, in the event that any of students in their respective schools is employed in contravention to the provisions of the Act.
5950 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 5B. Manner of compounding the offence.—(1) An accused person,—(i) who commits an offence first time under sub-section (3) of section 14 of the Act; or (ii) who being parent or a guardian, commits an offence under the said section, may file application to the District Magistrate having jurisdiction for compounding the offence under sub-section (1) of section 14D of the Act.
(2) The District Magistrate shall after hearing the accused person and the Inspector concerned, on an application filed under sub-rule (1), dispose of such application, and if the application is allowed, issue the certificate of compounding, subject to– (i) the payment of a sum of fifty percent of the maximum fine provided for such offence within a time specified in such certificate; or
(ii) the payment of an additional sum of twenty-five percent of the maximum fine provided for such offence together with the compounding amount specified under clause (i), if the accused person fails to pay the compounding amount under the said clause within the specified time and such delayed payment shall also be made within the period specified for such purpose in the certificate of compounding.
(3) The compounding amount shall be paid by the accused person to the State Government.
(4) If the accused person fails to pay the compounding amount under sub-rule (2), then, the proceeding shall be continued as specified under sub-section (2) of section 14D of the Act.
5C. Duties of District Magistrate–
(1) The District Magistrate shall–
(i) specify such officers subordinate to him, as he considers necessary, to be called the nodal officers, who shall exercise all or any of the powers and perform all or any of the duties of the District Magistrate conferred and imposed on him by the State Government under section 17A of the Act;
(ii) assign such powers and duties, as he thinks appropriate, to a nodal officer to be exercised and performed by him within his local limits of jurisdiction as subordinate officer; and
(iii) preside over as chairperson of the Task Force to be formed in a district consisting of :—
(a) Inspector appointed under section 17 for the purposes of his local limits of jurisdiction;
(b) Superintendent of Police for the purposes of his local limits of jurisdiction;
(c) Additional District Magistrate for the purposes of his local limits of jurisdiction;
(d) nodal officer referred to under clause (i) for the purposes of his local limits of jurisdiction;
5951 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 (e) Labour Officer for the purposes of his local limits of jurisdiction;(f) two representatives each from a voluntary organisation involved in rescue and rehabilitation of employed children in the district on rotation basis for a period of two years;
(g) a representative of the District Legal Services Authority to be nominated by the District Judge;
(h) a member of the District Anti-trafficking Unit;
(i) Chairperson of the Child Welfare Committee of the District;
(j) Child Labour Protection Officer in the District under the Integrated Child Protection Scheme of the Ministry of the Government of India dealing with women and child development;
(k) any other person nominated by the District Magistrate; and
(l) Secretary of the Task Force shall be any of the nodal officer referred to in clause (i) and nominated by the Chairperson.
(2) The Task Force referred to in clause (iii) of sub-rule (1) shall meet at least once in every month and shall make a comprehensive action plan for conducting the rescue operation, taking into account the time available, point of raid in accordance with the law for the time being in force, confidentiality of the plan, protection of victims and witnesses and the interim relief in accordance with the guidelines for rescue and repatriation issued by the Central/State Government from time to time; and the Task Force shall also cause to upload the minutes of such meeting on the portal created for such purpose by the State Government.
(3) Apart from the duties referred to in sub-rule (1), the District Magistrate shall ensure through nodal officers that the children and adolescents who are employed in contravention of the provisions of the Act are rescued and shall be rehabilitated in accordance with the provisions of –
(i) the Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 (2 of 2016) and the rules made thereunder;
(ii) the Bonded Labour System (Abolition) Act, 1976 (19 of 1976);
(iii) the Central Sector Scheme for Rehabilitation of Bonded Labourers, 2016;
(iv) any National Child Labour Project;
(v) any other law or scheme for the time being in force under which such children or adolescents may be rehabilitated; and subject to—
(I) the directions, if any, of a court of competent jurisdiction;
(II) the guidelines for rescue and repatriation issued by the Central/State Government from time to time in this regard.
5952 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 5D. Duties of Inspectors.—An Inspector appointed by the State Government under section17, for the purposes of securing compliance with the provisions of the Act, shall– (i) comply with the norms of inspection issued by the State Government from time to time;
(ii) comply with the instructions issued by the Central/State Government from time to time for the purposes of securing the compliance with the provisions of the Act; and
(iii) report the State Government quarterly regarding the inspection made by him for the purposes of securing the compliance with the provisions of the Act and the action taken by him for such purposes.
5E. Periodical inspection and monitoring.—The State Government shall create a system of monitoring and inspection for carrying into effect the provisions of section 17, which may include–
(i) the number of periodical inspection to be conducted by the Inspector of the places at which the employment of children is prohibited and hazardous occupations or processes are carried out;
(ii) the intervals at which an Inspector shall report to the State Government complaints received to him relating to the subject matter of inspection under clause (i) and the details of action taken by him thereafter;
(iii) maintenance of record electronically or otherwise of—
(a) children and adolescent found to be working in contravention of the provisions of the Act including children who are found to be engaged in family or family enterprises in contravention of the Act;
(b) number and details of the offences compounded;
(c) details of compounding amount imposed and recovered; and
(d) details of rehabilitation services provided to children and adolescents under the Act.".
10. Amendment in Form A.—In Form A appended to the said rules, in the heading of column 2, for the words "Name of child", the words "Name of adolescent" shall be substituted.
11. Insertion of Form C.—After Form B appended to the said rules, the following Form shall be inserted, namely :—
"FORM-C
[See Rule 2C(b)]
Undertaking under rule 2C(b) of the Himachal Pradesh Child and Adolescent Labour (Prohibition and Regulation) Rules, 1999
I ............................................................... producer of.............................................................. an audio visual-media production or organiser of ..................................................................... a commercial event, involving the participation of the following child/children, namely :—
5953 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940Sl. No. Name of the Child/ Parent's/Guardian's Address
Children Name
do hereby undertake that in the course of the involvement of the above mentioned child/children in the event.........................................................................(specify the event), there shall be no violation of any of the provisions of the Child and Adolescent Labour (Prohibition and Regulation) Act, 1986 (61 of 1986) and the Himachal Pradesh Child and Adolescent Labour (Prohibition and Regulation) Rules, 1999 and full care shall be taken of the physical and mental health and other requirements of the child/children, so that he/they should not feel any inconvenience. I also undertake that during the event, all laws applicable for the time being in force for the protection of children, including their right to education, care and protection, and legal provisions against sexual offences will be complied.
Name and Signature.
Date...........................
By order, Sd/- Principal Secretary (L&E).
___________
LAW DEPARTMENT
NOTIFICATION
Shimla-2, the 12th October, 2018
No. LLR-E(9)-1/2018.—In continuation of this Department's notifications of even number dated 7th March, 2018, 17th March, 2018, 3rd July, 2018 and 29th September, 2018 the Governor, Himachal Pradesh is pleased to order to appoint Sh. K.D. Shreedhar and Sh. Ankush Dass Sood, Senior Advocates as Standing Counsel/Special Counsel to defend the specific cases on behalf of the State of Himachal Pradesh before the Hon'ble Supreme Court of India and High Court of Himachal Pradesh in Civil/Criminal cases with immediate effect.
2. This engagement is purely at the pleasure of the State Government and can be withdrawn at any stage without assigning any reason(s) thereof.
3. The terms and conditions of fee of the above Senior Advocates will be notified separately after due deliberation and in consultation with concerned Advocates and shall be communicated to all the departments accordingly.
4. All the Departments are requested that whenever they need the services of any Advocate in the particular Civil/Criminal case or in cases of vital importance to the State, they may engage above Advocate with the prior approval of the Law Department and in consultation with the Advocate General, Himachal Pradesh.
By order, Sd/- LR-cum-Pr. Secretary (Law).
5954 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940विधि विभाग
अधिसूचना
शिमला-2 3 नवम्बर, 2018
संख्या एल0एल0आर0-डी0(6)-15/2018-लेज.--हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 (1) के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दिनांक 29-10-2018 को अनुमोदित हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2018 (2018 का अध्यादेश संख्यांक 1) को संविधान के अनुच्छेद 348 (3) के अधीन उसके अंगे्रजी प्राधिकृत पाठ सहित हिमाचल प्रदेश ई-राजपत्र में प्रकाशित करते हैं।
आदेश द्वारा, यशवंत सिंह चोगल, प्रधान सचिव (विधि)।
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2018 का हिमाचल प्रदेश अध्यादेश संख्यांक 1 हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2018
भारत गणराज्य के उनहत्तरवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित।
हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (2017 का अधिनियम संख्यांक 10) का संशोधन करने के लिए अध्यादेश।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा सत्र में नहीं है और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का यह समाधान हो गया है कि ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं जिनके कारण उनके लिए तुरन्त कार्रवाई करना आवश्यक हो गया है;
अतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खण्ड (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों प्रयोग करते हुए, निम्नलिखित अध्यादेश प्रख्यापित करते है :--
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ.--(1) इस अध्यादेश का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2018 है।
(2) इस अध्यादेश की धारा 7 और धारा 30 के उपबन्ध प्रथम जुलाई, 2017 से प्रवृत्त हुए समझे जाएंगे और शेष उपबन्ध उस तारीख को प्रवृत्त होंगे जो सरकार राजपत्र (ई-गजट), हिमाचल प्रदेश में अधिसूचना द्वारा नियत करे :
परन्तु इस अध्यादेश के विभिन्न उपबन्धों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और किसी ऐसे उपबन्ध में इस अध्यादेश के प्रारम्भ के प्रति किसी निर्देश का अर्थान्वयन उस उपबन्ध के प्रवृा होने के प्रति निर्देश के रूप में किया जाएगा।
2. धारा 2 का संशोधन.--हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (जिसे इसमें इसके पश्चात् 'मलू अधिनियम' कहा गया है) की धारा 2 में,-
(क) खण्ड (4) में, "अपील प्राधिकारी और अपील अधिकरण" शब्दों के स्थान पर, "अपील प्राधिकारी, अपील अधिकरण और धारा 171 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्राधिकारी" शब्द, अंक और चिन्ह रखे जाएंगे ;
5955 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940(ख) खण्ड (16) में, "केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और सीमाशुल्क बोर्ड" शब्दों के स्थान पर, "केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमाशुल्क बोर्ड" शब्द रखे जाएंगे ;
(ग) खण्ड (17) के उपखण्ड (ज) के स्थान पर निम्नलिखित उपखण्ड रखा जाएगा, अर्थात्ः- "(ज) किसी घुड़दौड़ क्लब द्वारा योगक या अनुज्ञप्ति के माध्यम से बुकमेकर को उपलब्ध कराई गई सेवाएं या किसी अनुज्ञप्तिधारी बुकमेकर की ऐसे क्लब को सेवाएं; और";
(घ) खण्ड (18) का लोप किया जाएगा;
(ङ) खण्ड (35) में, "खण्ड (ग)" शब्दों और चिन्हों के स्थान पर "खण्ड (ख)" शब्द और चिन्ह रखे जाएंगे;
(च) खण्ड (69) के उपखण्ड (च) में "अनुच्छेद 371" शब्दों और अंकाें के पश्चात् "और अनुच्छेद 371" शब्द, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे ;
(छ) खण्ड (102) के अन्त में निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
"स्पष्टीकरण.--शंकाओं के निवारण के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि "सेवा" पद में प्रतिभूतियों में संव्यवहारों को सुकर बनाना या प्रबन्ध करना सम्मिलित है;"।
3. धारा 7 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 7 में, --
(क) उपधारा (1) में,--
'(i) खंड (ख) में, "चाहे वह कारबार के दौरान या उसे अग्रसर करने के लिए हो या नहीं;" शब्दों और चिन्ह के पश्चात्, "और" शब्द अंतःस्थापित किया जाएगा और सदैव अंतःस्थापित किया गया समझा जाएगा;
(ii) खंड (ग) में, "क्रियाकलाप;" शब्द और चिन्ह के पश्चात्, "और" शब्द का लोप किया जाएगा और सदैव लोप किया गया समझा जाएगा।
(iii) खंड (घ) का लोप किया जाएगा और सदैव लोप किया गया समझा जाएगा;
(ख) उपधारा (1) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी और सदैव अंतःस्थापित की गई समझी जाएगी, अर्थात्ः-
"(1क)जहां कतिपय कार्यकलाप या संव्यवहार उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार कोई प्रदाय है, उन्हें अनुसूची 2 में यथानिर्दिष्ट माल का प्रदाय या सेवा का प्रदाय माना जाएगा।";
(ग) उप-धारा (3) में, "उप-धारा (1) और उप-धारा (2)" शब्दों, चिन्हों और अंकों के स्थान पर, "उप-धारा (1), उप-धारा (1क) और उप-धारा (2)" शब्द, चिन्ह, अंक और अक्षर रखे जाएंगे।
4. धारा 9 का संशोधन.--मलू अधिनियम की धारा 9 की उप-धारा (4) के स्थान पर निम्नलिखित उप-धारा रखी जाएगी, अर्थात्ः-
"(4) सरकार परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के एक वर्ग को विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जो किसी अरजिस्ट्रीकृत प्रदायर्काा से प्राप्त माल या सेवाओं या दोनों के विनिर्दिष्ट प्रवर्गों के प्रदाय के सम्बन्ध में माल या सेवा या दोनों के ऐसे प्रदाय के प्राप्तिकर्ता के रूप में5956 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 प्रतिलोम प्रभार के आधार पर कर का संदाय करेंगे तथा इस अध्यादेश के सभी उपबंध ऐसे प्राप्तिकर्ता को लागू होंगे मानो वह माल या सेवा या दोनों के ऐसे प्रदाय के सम्बन्ध में कर का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति हैं।"।
5. धारा 10 का संशोधन.--मलू अधिनियम की धारा 10 में,--
(क) उप-धारा 1 में,--
'(i) "उसके द्वारा संदेय कर के स्थान पर ऐसी दर पर" शब्दों और चिन्हों के स्थान पर, "धारा 9 की उप-धारा (1) के अधीन उसके द्वारा संदेय कर के स्थान पर ऐसी दर पर संगणित कर की रकम" शब्द, अंक और चिन्ह रखे जाएंगे;
(ii) परंतुक में, "एक करोड़ रुपए" शब्दों के स्थान पर, "एक करोड़ पचास लाख रुपए" शब्द और "।" चिन्ह के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा ; और
(iii) परंतुक के पश्चात् निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-
"परंतु यह और कि कोई व्यक्ति, जो खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) के अधीन कर का संदाय करने का विकल्प लेता है, किसी राज्य में पूर्ववर्ती वित्त वर्ष में आवर्त के दस प्रतिशत से अनधिक मूल्य की सेवाओं (अनुसूची 2 के पैरा 6 के खंड (ख) में निर्दिष्ट से भिन्न) या पांच लाख रुपए, जो भी अधिक हो, का प्रदाय कर सकेगा।";
(ख) उप-धारा (2) के खंड (क) के स्थान पर निम्नलिखित खंड रखा जाएगा, अर्थात्ः-
"(क) उप-धारा (1) में यथा उपबंधित के सिवाय, वह सेवा के प्रदाय में नहीं लगा हुआ है;"। 6. धारा 12 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 12 की उप-धारा (2) के खंड (क) मेंं, "उप-धारा (1)" शब्द, चिन्ह और अंक का लोप किया जाएगा।
7. धारा 13 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 13 की उप-धारा (2) में, "की उप-धारा (2)" शब्द, चिन्ह और अंक जहां-जहां आते हैं का लोप किया जाएगा।
8. धारा 16 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 16 की उपधारा (2) में,--
(क) खंड (ख) में, स्पष्टीकरण के स्थान पर निम्नलिखित स्पष्टीकरण रखा जाएगा, अर्थात्ः- "स्पष्टीकरण.--इस खंड के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति ने, यथास्थिति, माल या सेवा को प्राप्त किया है-
(i) जहां माल का परिदान किसी प्रदायर्काा द्वारा किसी प्राप्तिकर्ता या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति के निदेश पर किया गया है, चाहे वह अभिकर्ता के रूप में या अन्यथा माल के संचलन से पूर्व या दौरान, माल के मालिकाना दस्तावेजों के अंतरण के माध्यम से या अन्यथा कार्य कर रहा हो; और
(ii) जहां किसी व्यक्ति को ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति के निदेश पर और उसके मद्दे प्रदायर्काा द्वारा सेवाएं प्रदान की जाती हैं।"; और
(ख) खंड (ग) में, "धारा 41" शब्द और अंक के पश्चात् "या धारा 43क" शब्द, अंक और अक्षर अन्तःस्थापित किए जाएंगे।5957 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 9. धारा 17 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 17 में,--
(क) उप-धारा 3 के पश्चात्, निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः- "स्पष्टीकरण.--इस उप-धारा के प्रयोजनों के लिए "छूट-प्राप्त प्रदाय का मूल्य" पद में उक्त अनुसूची के पैरा 5 में विनिर्दिष्ट से अन्यथा अनुसूची 3 में विनिर्दिष्ट कार्यकलापों या संव्यवहारों का मूल्य सम्मिलित नहीं होगा।";
(ख) उप-धारा (5) के खंड (क) और खंड (ख) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड रखे जाएंगे, अर्थात्ः--
"(क) तेरह से अनधिक (चालक सहित) बैठने की क्षमता रखने वाले व्यक्तियों के परिवहन के लिए मोटरयान, सिवाय तब जब उनका उपयोग निम्नलिखित कराधेय प्रदायों को करने के लिए किया जाता है, अर्थात्ः-
(i) ऐसे मोटरयानों का और प्रदाय; या
(ii) यात्रियाें का परिवहन; या
(iii) ऐसे मोटरयान को चलाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना;
(कक) जलयान और वायुयान, सिवाय तब जब उनका उपयोग-
(i) निम्नलिखित कराधेय प्रदायों को करने के लिए किया जाता है, अर्थात्ः- (अ) ऐसे जलयानों और वायुयान के और प्रदाय; या
(आ) यात्रियाें का परिवहन; या
(इ) ऐसे जलयानों को चलाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना; या
(ई) ऐसे वायुयान को चलाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना; और
(ii) माल के परिवहन के लिए;
(कख) साधारण बीमा, सर्विसिंग, मरम्मत और अनुरक्षण की सेवाओं से खंड (क) या खण्ड (कक) में निर्दिष्ट मोटरयान, जलयान या वायुयान, जहां तक ये इनसे सम्बन्धित हैं, से हैः परन्तु ऐसी सेवाओं के सम्बन्ध में इनपुट कर प्रत्यय उपलब्ध होगा--
(i) जहां खंड (क) या खंड (कक) में निर्दिष्ट मोटरयान, जलयान या वायुयान का उपयोग उसमें विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए किया जाता है; और
(ii) जहां किसी कराधेय व्यक्ति द्वारा प्राप्त किया जाता है, जो-
(अ) ऐसे मोटरयान, जलयान या वायुयान के विनिर्माण में लगा हुआ है; या (आ) उसके द्वारा बीमाकृत ऐसे मोटरयान, जलयान या वायुयान के सम्बन्ध में साधारण बीमा सेवाओं के प्रदाय में लगा हुआ है;
5958 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 (ख) माल या सेवा या दोनों के निम्नलिखित प्रदाय-(i) खाद्य और सुपेय, आउटडोर कैटरिंग, सौंदर्य उपचार, स्वास्थ्य सेवाएं, कॉस्मेटिक और प्लास्टिक शल्यक्रिया, खंड (क) या खंड (कक) में निर्दिष्ट मोटरयान, जलयान या वायुयान, सिवाय तब जब उनका उपयोग उनमें विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए किया जाता है, को पट्टे पर देने, किराए पर देने या भाड़े पर देने, जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमाः
परंतु ऐसे माल या सेवा या दोनों के सम्बन्ध में इनपुट कर प्रत्यय उपलब्ध होगा जब ऐसे माल या सेवा या दोनों के आवक प्रदाय का उपयोग किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा उसी प्रवर्ग के माल या सेवा या दोनों की जावक कराधेय प्रदाय के लिए या कराधये समिश्र या मिश्रित प्रदाय के एक तत्व के रूप में किया जाता है;
(ii) किसी क्लब, स्वास्थ्य और फिटनेस केन्द्र की सदस्यता; और
(iii) छुट्टी या गृह यात्रा रियायत, जैसे अवकाश पर कर्मचारियों को विस्तारित यात्रा फायदे :
परन्तु ऐसे माल या सेवा या दोनों के सम्बन्ध में इनपुट कर प्रत्यय उपलब्ध होगा, जहां किसी नियोक्ता के लिए अपने कर्मचारियों को तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन उपलब्ध करवाना बाध्यकर हो।"।
10. धारा 20 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 20 के स्पष्टीकरण के खंड (ग) में, "प्रविष्टि 84" शब्दों और अंकों के स्थान पर, "प्रविष्टि 84 और प्रविष्टि 92 क" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे। 11. धारा 22 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 22 में, --
(क) उप-धारा (1) के परन्तुक के अंत में चिन्ह "।" के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा और तत्पश्चात्, निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-
"परंतु यह और कि सरकार विशेष प्रवर्ग के किसी राज्य के अनुरोध पर तथा परिषद् की सिफारिशों पर प्रथम परंतुक में निर्दिष्ट समग्र आवर्त को दस लाख रुपए से ऐसी रकम तक बढ़ा सकेगी, जो बीस लाख रुपए से अधिक नहीं होगी और ऐसी शर्तों और सीमाओं के अधीन रहते हुए, जो इस प्रकार अधिसूचित की जाए ;";
(ख) स्पष्टीकरण के, खंड (iii) में, "विशेष प्रवर्ग राज्यों से" शब्दों के पश्चात् "जम्मू-कश्मीर राज्य और अरूणाचल प्रदेश, आसाम, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम और उत्तराखंड राज्यों के सिवाय" शब्द और चिन्ह अन्तःस्थापित किए जाएंगे।
12. धारा 24 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 24 के खंड (x) में "वाणिज्य ऑपरेटर" शब्दों के पश्चात् "जिससे धारा 52 के अधीन कर का संग्रहण करने की अपेक्षा है" शब्द और अंक अंतःस्थापित किए जाएंगे।
13. धारा 25 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 25 में,--
(क) उपधारा (1) में, परन्तुक के अंत में चिन्ह "।" के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा और परन्तुक के पश्चात् और स्पष्टीकरण से पूर्व निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः- "परंतु यह और कि किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसके पास किसी विशेष आर्थिक जोन में विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 में यथापरिभाषित कोई यूनिट है या जो विशेष आर्थिक जोन5959 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 विकासकर्ता है, ऐसे किसी पृथक रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करना होगा, जो कि उसी राज्य में विशेष आर्थिक जोन के बाहर अवस्थित उसके कारबार के स्थान से सुभिन्न है।";
(ख) उपधारा (2) के परंतुक के स्थान पर निम्नलिखित परन्तुक रखा जाएगा, अर्थात्ः-
"परंतु किसी ऐसे व्यक्ति, जिसके पास किसी राज्य में कारबार के बहुल स्थान हैं, को ऐसी शर्ताें, जो विहित की जाएं, के अध्यधीन रहते हुए कारबार के ऐसे प्रत्येक स्थान के लिए पृथक् रजिस्ट्रीकरण मंजूर किया जा सकेगा ।"।
14. धारा 29 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 29 में,--
(क) पाश्र्व शीर्ष में, "रद्दकरण" शब्द के पश्चात् "या निलंबन" शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(ख) उपधारा (1) के खंड (ग) के अन्त में "।" चिन्ह के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-
"परंतु रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण के सम्बन्ध में फाइल की गई रजिस्ट्रीकरण के रदद्करण से सम्बन्धित कार्यवाहियों के लंबित रहने के दौरान, रजिस्ट्रीकरण को ऐसी अवधि के लिए और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, निलम्बित किया जा सकेगा।"; और (ग) उपधारा (2) के, परंतुक के अंत में "।" चिन्ह के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक रखा जाएगा, अर्थात्ः-
"परंतु यह और कि रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण से सम्बन्धित कार्यवाहियों के लम्बित रहने के दौरान, समुचित अधिकारी रजिस्ट्रीकरण को ऐसी अवधि के लिए और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, निलम्बित कर सकेगा।"।
15. धारा 34 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 34 में, --
(क) उप-धारा (1) में,--
(i) "कोई कर बीजक जारी किया गया है" शब्दों के स्थान पर "एक या एक से अधिक कर बीजक जारी किए गए हैं'' शब्द रखे जाएंगे; और
(ii) "जमा पत्र जारी" शब्दों के स्थान पर "किसी वित्तीय वर्ष में किए गए प्रदायों के लिए एक या एक से अधिक जमा पत्र जारी" शब्द रखे जाएंगे; और
(ख) उप-धारा (3) में,--
(i) "कोई कर बीजक जारी किया गया है" शब्दों के स्थान पर "एक या एक से अधिक कर बीजक जारी किए गए हैं"ं शब्द रखे जाएंगे; और
(ii) "नामे नोट" शब्दों के स्थान पर "किसी वित्तीय वर्ष में किए गए प्रदायों के लिए एक या एक से अधिक नामे नोट" शब्द रखे जाएंगे।
16. धारा 35 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 35 की उपधारा (5) के अन्त में "।" चिन्ह के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-5960 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 "परन्तु इस उपधारा में अंतर्विष्ट कोई बात, केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के किसी विभाग या किसी ऐसे स्थानीय प्राधिकरण को लागू नहीं होगी, जिसकी लेखाबहियां, भारत के नियन्त्रक- महालेखापरीक्षक या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी स्थानीय प्राधिकरण के लेखाओं की संपरीक्षा के लिए नियुक्त किसी लेखापरीक्षक द्वारा संपरीक्षा किए जाने के अधीन है।"
17. धारा 39 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 39 में,--
(क) उपधारा (1) में "और ऐसे कैलेण्डर मास या उसके किसी भाग के उत्तरवर्ती मास के बीसवें दिवस या उससे पूर्व ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, विवरणी देगा।" शब्दों और चिन्हों के स्थान पर "ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में तथा ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, विवरणी देगाः" शब्द और चिन्ह रखे जाएंगे और तत्पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-
"परन्तु सरकार परिषद् की सिफारिशों पर रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के कतिपय ऐसे वर्गों को अधिसूचित कर सकेगी, जो ऐसी शर्तों और सुरक्षोपायों के, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के अध्यधीन, प्रत्येक तिमाही या उसके भाग के लिए विवरणी प्रस्तुत करेंगे।";
(ख) उपधारा (7) के अन्त में "।" चिन्ह के पश्चात् "ः" चिन्ह अन्तःस्थापित किया जाएगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः--
"परन्तु सरकार परिषद् की सिफारिशों पर, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के कतिपय ऐसे वर्गों को अधिसूचित कर सकेगी, जो ऐसी शर्तों और सुरक्षोपायों, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के अध्यधीन, ऐसी विवरणी के अनुसार, ऐसी विवरणी को प्रस्तुत करने के लिए उससे अपेक्षित अंतिम तारीख को या उससे पूर्व सरकार को, शोध्य कर या उसके किसी भाग का संदाय करेंगे।";
(ग) उप-धारा (9) म,ें --
(i) "उस मास या तिमाही जिसके दौरान ऐसा लोप या अशुद्ध विशिष्टियां ध्यान में आई हैं" शब्दों के स्थान पर "ऐसे प्ररूप और रीति में, जो विहित की जाए," शब्द और चिन्ह रखे जाएंगे;
(ii) परंतुक में "वित्तीय वर्ष" शब्दों के पश्चात्, ''जिससे ऐसे ब्योरे सम्बन्धित हैं," शब्द और चिन्ह अन्तःस्थापित किए जाएंगे।
18. धारा 43क का अंतःस्थापन.--मूल अधिनियम की धारा 43 के पश्चात् निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः--
"43क विवरणी प्रस्तुत करने और इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने के लिए प्रक्रिया.--(1) धारा 16 की उप-धारा (2), धारा 37 या धारा 38 में किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति धारा 39 की उपधारा (1) के अधीन प्रस्तुत विवरणियों में प्रदायर्कााओं द्वारा किए गए प्रदायों के ब्योरों का सत्यापन, विधिमान्यकरण, उसमें उपांतरण करेगा या उन्हें हटाएगा।
(2) धारा 41, धारा 42 या धारा 43 मेंं किसी बात के होते हुए भी, प्राप्तिकर्ता द्वारा इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने की प्रक्रिया और उसका सत्यापन उस प्रकार किया जाएगा, जो विहित किया जाए। (3) प्राप्तिकर्ता द्वारा इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने के प्रयोजनों के लिए, सामान्य पोर्टल पर प्रदायकार द्वारा जावक प्रदायों के ब्योरे प्रस्तुत करने की प्रक्रिया ऐसी होगी, जैसी विहित की जाए। (4) उप-धारा 3 के अधीन प्रस्तुत न किए गए जावक प्रदायों के सम्बन्ध में इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने की प्रक्रिया ऐसी होगी, जैसी विहित की जाए और ऐसी प्रक्रिया में इनपुट कर प्रत्यय की ऐसी5961 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 अधिकतम रकम सम्मिलित हो सकेगी, जिसका इस प्रकार फायदा लिया जा सकता है, जो उक्त उप-धारा के अधीन प्रदायर्कााओं द्वारा प्रस्तुत ब्योरों के आधार पर उपलब्ध इनपुट कर प्रत्यय के बीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
(5) ऐसे जावक प्रदायों में, जिसके लिए प्रदायर्काा द्वारा उपधारा (3) के अधीन ब्योरों को प्रस्तुत किया गया है, विनिर्दिष्ट कर की रकम को, इस अध्यादेश के उपबंधों के अधीन उसके द्वारा संदेय कर के रूप में माना जाएगा।
(6) किसी प्रदाय का प्रदायर्काा और प्राप्तिकर्ता, संयुक्ततः और पृथकतः, जावक प्रदायों के सम्बन्ध में लिए गए, यथास्थिति, कर का संदाय या इनपुट कर प्रत्यय का संदाय करने के लिए दायी होंगे, जिनके ब्योरे उप-धारा (3) या उप-धारा (4) के अधीन प्रस्तुत किए गए हैं, किन्तु जिनकी विवरणी प्रस्तुत नहीं की गई है। (7) उप-धारा 6 के प्रयोजनों के लिए, वसूली ऐसी रीति में की जाएगी, जो विहित की जाए और ऐसी प्रक्रिया में गलती से प्राप्त की गई एक हजार रुपए से अनधिक कर या इनपुट कर प्रत्यय की रकम की वसूली न करने के लिए उपबंध हो सकेगा।
(8) ऐसे जावक प्रदायों, जिनके ब्योरे उप-धारा (3) के अधीन किसी ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा निम्नलिखित अवधि में प्रस्तुत किए जा सकते हैं, के सम्बन्ध में प्रक्रिया, सुरक्षोपाय और कर की रकम की अवसीमा,--
(i) रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने के छह मास के भीतर; और
(ii) जिसने कर के संदाय में व्यतिक्रम किया है और जहां ऐसा व्यतिक्रम, व्यतिक्रम की रकम के संदाय की अंतिम तारीख से दो मास से अधिक की अवधि के लिए जारी रहता है, ऐसी होगी, जो विहित की जाए।
19. धारा 48 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 48 की उप-धारा (2) में, "प्रस्तुत करने के लिए" शब्द और चिन्हों के पश्चात् "और ऐसे अन्य कृत्यों का अनुपालन करने के लिए" शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे।
20. धारा 49 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 49 में,--
(क) उप-धारा (2) में, "धारा 41" शब्द और अंकों के पश्चात् "या धारा 43-क" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे;
(ख) उप-धारा (5) में,--
(i) खण्ड (ग) के अन्त में, ";" चिन्ह के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-
"परन्तु राज्य कर के मद्दे इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग एकीकृत कर के संदाय के लिए केवल वहां किया जाएगा, जहां केन्द्रीय कर के मद्दे इनपुट कर प्रत्यय का अतिशेष एकीकृत कर के संदाय के लिए उपलब्ध नहीं है ;";
(ii) खण्ड (घ) के अन्त में, ";" चिन्ह के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-5962 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 "परन्तु संघ राज्यक्षेत्र कर के मद्दे इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग एकीकृत कर के संदाय के लिए केवल वहां किया जाएगा, जहां केन्द्रीय कर के मद्दे इनपुट कर प्रत्यय का अतिशेष एकीकृत कर के संदाय के लिए उपलब्ध नहीं है ;";
21. नई धारा 49क और 49ख का अंतःस्थापन.--मूल अधिनियम की धारा 49 के पश्चात् निम्नलिखित धाराएं अंतःस्थापित की जाएंगी, अर्थात्ः-
"49क. कतिपय शर्तों के अधीन रहते हुए इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग.--धारा 49 में किसी बात के होते हुए भी, राज्य कर के मद्दे इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग, यथास्थिति, एकीकृत कर या राज्यकर के संदाय के मद्दे, केवल तब किया जाएगा, जब एकीकृत कर के मद्दे उपलब्ध इनपुट कर प्रत्यय का पहले ही ऐसे संदाय के प्रति पूर्णतया उपयोग कर लिया गया है।
49ख. इनपुट कर प्रत्यय के उपयोग का आदेश.--इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी और धारा 49 की उप-धारा (5) के खंड (ङ) और खंड (च) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, सरकार परिषद् की सिफारिशों से, यथास्थिति, एकीकृत कर, केन्द्रीय कर, राज्य कर या संघ राज्यक्षेत्र कर का, किसी ऐसे कर के संदाय के मद्दे इनपुट कर प्रत्यय के उपयोग किए जाने के आदेश और रीति को विहित कर सकेगी।"।
22. धारा 52 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 52 की उपधारा (9) में, "धारा 37" शब्द और अंकों के पश्चात् "या धारा 39" शब्द और अंक अन्तःस्थापित किए जाएंगे।
23. धारा 54 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 54 में,--
(क) उप-धारा (8) के खंड (क) में, "शून्य अंकित माल" शब्दों के स्थान पर "माल के निर्यात" शब्द रखे जाएंगे और "ऐसी शून्य अंकित प्रदायों" शब्दों के स्थान पर "ऐसे निर्यातों" शब्द रखे जाएंगे। (ख) उप-धारा (14) के पश्चात् स्पष्टीकरण के खंड (2) में,--
(i) उप-खण्ड (ग) की मद (i) में "विदेशी मुद्रा में'' शब्दों के पश्चात् "या भारतीय रुपए में, जहां कहीं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमति दी जाए,", शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;
(ii) उप-खण्ड (ङ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपखण्ड रखा जाएगा, अर्थात्ः--
"(ङ) उपधारा (3) के प्रथम परंतुक के खण्ड (ii) के अधीन उपयोग न किए गए इनपुट कर प्रत्यय के प्रतिदाय की दशा में, उस अवधि के लिए, जिसमें ऐसे प्रतिदाय के लिए दावा उत्पन्न होता है, धारा 39 के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने की देय तारीख;"।
24. धारा 79 का संशेाधन.--मूल अधिनियम की धारा 79 की उप-धारा (4) के पश्चात् निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-
"स्पष्टीकरण.--इस धारा के प्रयोजनों के लिए "व्यक्ति शब्द" में, यथास्थिति, धारा 25 की उपधारा (4) या उप-धारा (5) में यथानिर्दिष्ट "विशिष्ट व्यक्ति" सम्मिलित होंगे।"।
25. धारा 107 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 107 की उप-धारा (6) के खण्ड (ख) में, "बराबर राशि का" शब्दों के पश्चात्, "अधिकतम पच्चीस करोड़ रुपए के अध्यधीन रहते हुए," शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे।
26. धारा 112 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 112 की उप-धारा (8) के खण्ड (ख) में, "बराबर राशि" शब्दों के पश्चात, "अधिकतम पचास करोड़ रुपए के अध्यधीन रहते हुए," शब्द और चिन्ह अंतःस्थापित किए जाएंगे।5963 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 27. धारा 129 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 129 की उप-धारा (6) में, "सात दिन" शब्दों के स्थान पर "चौदह दिन" शब्द रखे जाएंगे।
28. धारा 143 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 143 की उप-धारा (1) के खण्ड (ख) के परंतुक के अन्त में "।" चिन्ह के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-
"परंतु यह और कि पर्याप्त हेतुक दर्शित किए जाने पर, एक वर्ष और तीन वर्ष की अवधि को, आयुक्त द्वारा क्रमशः एक वर्ष और दो वर्ष से अनधिक की और अवधि के लिए बढ़ाया जा सकेगा।"। 29. अनुसूची 1 का संशोधन.--मूल अधिनियम की अनुसूची 1 के पैरा 4 में, "कराधेय व्यक्ति" शब्दों के स्थान पर "व्यक्ति" शब्द रखा जाएगा।
30. अनुसूची 2 का संशोधन.--मूल अधिनियम की अनुसूची 2 के शीर्षक में, "क्रियाकलाप" शब्द के पश्चात् "या संव्यवहार" शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे और सदैव अंतःस्थापित किए गए समझे जाएंगे। 31. अनुसूची 3 का संशोधन.--मूल अधिनियम की अनुसूची 3 में,--
(i) पैरा 6 के पश्चात्, निम्नलिखित पैरे अंतःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्ः-
"7. भारत के बाहर किसी स्थान से भारत के बाहर किसी अन्य स्थान को, ऐसे माल के भारत में प्रवेश किए बिना, माल का प्रदाय।
8. (क) घरेलू उपभोग के लिए अनुमति प्रदान किए जाने से पूर्व किसी व्यक्ति को भांडागार में रखे गए माल का प्रदाय;
(ख) परेषिती द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को, माल का भारत के बाहर अवस्थित मूल पान से प्रेषण किए जाने के पश्चात् किन्तु घरेलू उपभोग के लिए अनुमति दिए जाने से पूर्व माल के मालिकाना हक के दस्तावेज में पृष्ठांकन द्वारा माल का प्रदाय।";
(ii) स्पष्टीकरण को स्पष्टीकरण 1 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार पुनःसंख्यांकित स्पष्टीकरण 1 के पश्चात् निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-
"स्पष्टीकरण 2.--पैरा 8 के प्रयोजनों के लिए, "भांडागार में रखे गए माल" पद का वही अर्थ होगा, जो सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) में उसका है।"।
हस्ताक्षरित/- आचार्य देवव्रत, राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश। (यशवत सिंह चोगल) प्रधान सचिव (विधि)।
शिमला : तारीख : 3 नवम्बर, 20185964 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT
H. P. Ordinance No. 1 of 2018
THE HIMACHAL PRADESH GOODS AND SERVICES TAX
(AMENDMENT) ORDINANCE, 2018
Promulgated by the Governor of Himachal Pradesh in the Sixty ninth year of the Republic of India.
AN ORDINANCE further to amend the Himachal Pradesh Goods and Services Tax Act, 2017 (Act No.10 of 2017)
WHEREAS, the Legislative Assembly of Himachal Pradesh is not in session and the Governor of Himachal Pradesh is satisfied that circumstances exist which render it necessary for him to take immediate action;
NOW THEREFORE, in exercise of the powers conferred by clause (1) of Article 213 of the Constitution of India, the Governor of Himachal Pradesh is pleased to promulgate the following Ordinance.
1. Short title and Commencement.—(1) This Ordinance may be called the Himachal Pradesh Goods and Services Tax (Amendment) Ordinance, 2018.
(2) The provisions of section 7 and section 30 shall be deemed to have come into force with effect from 1st day of July, 2017 and the remaining provisions of this Ordinance shall come into force on such date as the Government may, by notification in the Rajpatra(e-Gazette) Himachal Pradesh, appoint:—
Provided that different dates may be appointed for different provisions of this ordinance and any reference in any such provision to the commencement of this Ordinance shall be construed as a reference to the coming into force of that provision.
2. Amendment of section 2.—In section 2 of the Himachal Pradesh Goods and Services Tax Act, 2017 (hereinafter referred to as the principal Act),––
(a) in clause (4), for the words "the Appellate Authority and the Appellate Tribunal", the words, signs and figures "the Appellate Authority, the Appellate Tribunal and the Authority referred to in subsection (2) of section 171" shall be substituted;
(b) In clause (16), for the words "Central Board of Excise and Customs", the words "Central Board of Indirect Taxes and Customs" shall be substituted;
(c) in clause (17), for sub-clause (h), the following subclause shall be substituted, namely:—
"(h) activities of a race club including by way of totalisator or a license to book maker or activities of a licensed book maker in such club; and";
(d) clause (18) shall be omitted;
(e) in clause (35), for the word and signs "clause (c)", the word and sign "clause (b)'' shall be substituted;
5965 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 (f) in clause (69), in sub-clause (f), after the word and figures "article 371", the words,figures and letter "and article 371J" shall be inserted;
(g) in the end of clause (102), the following Explanation shall be inserted, namely:–– "Explanation.––For the removal of doubts, it is hereby clarified that the expression "services" includes facilitating or arranging transactions in securities;".
3. Amendment of section 7.—In section 7 of the principal Act,––
(a) in sub-section (1), ––
(i) in clause (b), after the words "or furtherance of business;", the word "and" shall be inserted and shall always be deemed to have been inserted;
(ii) in clause (c), after the words "a consideration", the word "and" shall be omitted and shall always be deemed to have been omitted.
(iii) clause (d) shall be omitted and shall always be deemed to have been omitted;
(b) after sub-section (1), the following sub-section shall be inserted and shall always be deemed to have been inserted, namely:––
"(1A) where certain activities or transactions constitute a supply in accordance with the provisions of sub-section (1), they shall be treated either as supply of goods or supply of services as referred to in Schedule II.";
(c) in sub-section (3), for the words, signs and figures "sub-sections (1) and (2)", the words, signs, figures and letter "sub-sections (1), (1A) and (2)" shall be substituted.
4. Amendment of section 9.— In section 9 of the principal Act, for sub-section (4), the following sub-section shall be substituted, namely:––
"(4) The Government may, on the recommendations of the Council, by notification, specify a class of registered persons who shall, in respect of supply of specified categories of goods or services or both received from an unregistered supplier, pay the tax on reverse charge basis as the recipient of such supply of goods or services or both, and all the provisions of this Act shall apply to such recipient as if he is the person liable for paying the tax in relation to such supply of goods or services or both.".
5. Amendment of section 10.— In section 10 of the principal Act,—
(a) in sub-section (1) ,—
(i) for the words and sign "in lieu of the tax payable by him, an amount calculated at such rate", the words, signs and figures "in lieu of the tax payable by him under sub-section (1) of section 9, an amount of tax calculated at such rate" shall be substituted;
(ii) in the proviso, for the words "one crore rupees", the words "one crore and fifty lakh rupees" and for the sign ".", the sign ":" shall be substituted; and
(iii) after the proviso, the following proviso shall be inserted, namely:––5966 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 "Provided further that a person who opts to pay tax under clause (a) or clause (b) or clause (c) may supply services (other than those referred to in clause (b) of paragraph 6 of Schedule II), of value not exceeding ten per cent of turnover in a State in the preceding financial year or five lakh rupees, whichever is higher.";
(b) in sub-section (2), for clause (a), the following clause shall be substituted, namely:—
"(a) save as provided in sub-section (1), he is not engaged in the supply of services;".
6. Amendment of section 12.— In section 12 of the principal Act, in sub-section (2), in clause (a), the words, signs and figure "sub-section (1) of " shall be omitted.
7. Amendment of section 13.— In section 13 of the principal Act, in sub-section (2), the words, signs and figure "sub-section (2) of" wherever occurring, shall be omitted.
8. Amendment of section 16.—In section 16 of the principal Act, in sub-section (2),–– (a) in clause (b), for the Explanation, the following Explanation shall be substituted, namely:—
"Explanation.—For the purposes of this clause, it shall be deemed that the registered person has received the goods or, as the case may be, services–– (i) where the goods are delivered by the supplier to a recipient or any other person on the direction of such registered person, whether acting as an agent or otherwise, before or during movement of goods, either by way of transfer of documents of title to goods or otherwise; and
(ii) where the services are provided by the supplier to any person on the direction of and on account of such registered person."; and
(b) in clause (c), after the word and figures "section 41", the words, figures and letter "or section 43A" shall be inserted.
9. Amendment of section 17.—In section 17 of the principal Act,––
(a) after sub-section (3), the following Explanation shall be inserted, namely:–– "Explanation.— For the purposes of this sub-section the expression ''value of exempt supply'' shall not include the value of activities or transactions specified in Schedule III, except those specified in paragraph 5 of the said Schedule.";
(b) in sub-section (5), for clauses (a) and (b), the following clauses shall be substituted, namely:—
"(a) motor vehicles for transportation of persons having approved seating capacity of not more than thirteen persons (including the driver), except when they are used for making the following taxable supplies, namely:—
(i) further supply of such motor vehicles; or (ii) transportation of passengers; or (iii) imparting training on driving such motor vehicles;
5967 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 (aa) vessels and aircraft except when they are used––(i) for making the following taxable supplies, namely:—
(A) further supply of such vessels or aircraft;
or
(B) transportation of passengers; or
(C) imparting training on navigating such vessels; or
(D) imparting training on flying such aircraft; and
(ii) for transportation of goods; (ab) services of general insurance, servicing, repair and maintenance in so far as they relate to motor vehicles, vessels or aircraft referred to in clause (a) or clause (aa):
Provided that the input tax credit in respect of such services shall be available—
(i) where the motor vehicles, vessels or aircraft referred to in clause (a) or clause (aa) are used for the purposes specified therein; and
(ii) where received by a taxable person engaged—
(A) in the manufacture of such motor vehicles, vessels or aircraft; or
(B) in the supply of general insurance services in respect of such motor vehicles, vessels or aircraft insured by him;
(b) the following supply of goods or services or both—(i) food and beverages, outdoor catering, beauty treatment, health services, cosmetic and plastic surgery, leasing, renting or hiring of motor vehicles, vessels or aircraft referred to in clause (a) or clause (aa) except when used for the purposes specified therein, life insurance and health insurance:
Provided that the input tax credit in respect of such goods or services or both shall be available where an inward supply of such goods or services or both is used by a registered person for making an outward taxable supply of the same category of goods or services or both or as an element of a taxable composite or mixed supply;
(ii) membership of a club, health and fitness centre; and
(iii) travel benefits extended to employees on vacation such as leave or home travel concession:
Provided that the input tax credit in respect of such goods or services or both shall be available, where it is obligatory for an employer to provide the same to its employees under any law for the time being in force.".
10. Amendment of section 20.—In section 20 of the principal Act, in the Explanation, in clause (c), for the words and figures "under entry 84", the words, figures and letters "under entries 84 and 92A" shall be substituted.
5968 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 11. Amendment of section 22.—In section 22 of the principal Act,––(a) in sub-section (1), in the end of the proviso for the sign ".", the sign ":" shall be substituted and thereafter the following new proviso shall be inserted, namely:—
"Provided further that the Government may, at the request of a special category State and on the recommendations of the Council, enhance the aggregate turnover referred to in the first proviso from ten lakh rupees to such amount, not exceeding twenty lakh rupees and subject to such conditions and limitations, as may be so notified.";
(b) in the Explanation, in clause (iii), after the word "Constitution", the words and signs "except the State of Jammu Kashmir and States of Arunachal Pradesh, Assam, Himachal Pradesh, Meghalaya, Sikkim and Uttarakhand" shall be inserted.".
12. Amendment of section 24.—In section 24 of the principal Act, in clause (x), after the words "commerce operator", the words and figures "who is required to collect tax at source under section 52" shall be inserted.
13. Amendment of section 25.— In section 25 of the principal Act,––
(a) in sub-section (1), in the end of the proviso for the sign ".", the sign ":" shall be substituted and after the proviso and before the Explanation, the following proviso shall be inserted, namely:––
"Provided further that a person having a unit, as defined in the Special Economic Zones Act, 2005, in a Special Economic Zone or being a Special Economic Zone developer shall have to apply for a separate registration, as distinct from his place of business located outside the Special Economic Zone in the same State."; and (b) in sub-section (2), for the proviso, the following proviso shall be substituted, namely:––
"Provided that a person having multiple places of business in the State may be granted a separate registration for each such place of business, subject to such conditions as may be prescribed.".
14. Amendment of section 29.—In section 29 of the principal Act,––
(a) in the marginal heading after the word "Cancellation", the words "or suspension" shall be inserted;
(b) in sub-section (1), in the end of clause (c) for the sign ".", the sign ":" shall be substituted and thereafter, the following new proviso shall be inserted, namely:—
"Provided that during pendency of the proceedings relating to cancellation of registration filed by the registered person, the registration may be suspended for such period and in such manner as may be prescribed."; and
(c) in sub-section (2), in the end of the proviso for the sign "." the sign ":" shall be substituted and thereafter the following proviso shall be inserted, namely:—
"Provided further that during pendency of the proceedings relating to cancellation of registration, the proper officer may suspend the registration for such period and in such manner as may be prescribed.".
5969 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 15. Amendment of section 34.— In section 34 of the principal Act,––(a) in sub-section (1),––
(i) for the words "Where a tax invoice has", the words "Where one or more tax invoices have" shall be substituted; and
(ii) for the words "a credit note", the words "one or more credit notes for supplies made in a financial year" shall be substituted; and
(b) in sub-section (3),––
(i) for the words "Where a tax invoice has", the words "Where one or more tax invoices have" shall be substituted; and
(ii) for the words "a debit note", the words "one or more debit notes for supplies made in a financial year" shall be substituted.
16. Amendment of section 35.— In section 35 of the principal Act, in sub-section (5), in the end for the sign ".", the sign ":" shall be substituted and thereafter, the following proviso shall be inserted, namely:—
"Provided that nothing contained in this subsection shall apply to any department of the Central Government or a State Government or a local authority, whose books of account are subject to audit by the Comptroller and Auditor-General of India or an auditor appointed for auditing the accounts of local authorities under any law for the time being in force.".
17. Amendment of section 39.— In section 39 of the principal Act,––
(a) in sub-section (1),–– for the words "in such form and manner as may be prescribed", the words and sign "in such form, manner and within such time as may be prescribed" shall be substituted and for the words and sign "on or before the twentieth day of the month succeeding such calendar month or part thereof ." , the sign ":" shall be substituted and thereafter the following proviso shall be inserted, namely:—
"Provided that the Government may, on the recommendations of the Council, notify certain classes of registered persons who shall furnish return for every quarter or part thereof, subject to such conditions and safeguards as may be specified therein.";
(b) In sub-section (7), in the end for the sign ".", the sign ":" shall be substituted and thereafter the following proviso shall be inserted, namely:––
"Provided that the Government may, on the recommendations of the Council, notify certain classes of registered persons who shall pay to the Government the tax due or part thereof as per the return on or before the last date on which he is required to furnish such return, subject to such conditions and safeguards as may be specified therein.";
(c) in sub-section (9),––
(i) for the words "in the return to be furnished for the month or quarter during which such omission or incorrect particulars are noticed", the words "in such form and manner as may be prescribed" shall be substituted;
5970 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940(ii) in the proviso, after the words "the end of the financial year", the words "to which such details pertain" shall be inserted.
18. Insertion of section 43A.—After section 43 of the principal Act, the following section shall be inserted, namely:—
"43A. Procedure for furnishing return and availing input tax credit.—(1) Notwithstanding anything contained in sub-section (2) of section 16, section 37 or section 38, every registered person shall in the returns furnished under sub-section (1) of section 39 verify, validate, modify or delete the details of supplies furnished by the suppliers.
(2) Notwithstanding anything contained in section 41, section 42 or section 43, the procedure for availing of input tax credit by the recipient and verification thereof shall be such as may be prescribed.
(3) The procedure for furnishing the details of outward supplies by the supplier on the common portal, for the purposes of availing input tax credit by the recipient shall be such as may be prescribed.
(4) The procedure for availing input tax credit in respect of outward supplies not furnished under subsection (3) shall be such as may be prescribed and such procedure may include the maximum amount of the input tax credit which can be so availed, not exceeding twenty per cent. of the input tax credit available, on the basis of details furnished by the suppliers under the said sub-section.
(5) The amount of tax specified in the outward supplies for which the details have been furnished by the supplier under sub-section (3) shall be deemed to be the tax payable by him under the provisions of the ordinance.
(6) The supplier and the recipient of a supply shall be jointly and severally liable to pay tax or to pay the input tax credit availed, as the case may be, in relation to outward supplies for which the details have been furnished under sub-section (3) or sub-section (4) but return thereof has not been furnished.
(7) For the purposes of sub-section (6), the recovery shall be made in such manner as may be prescribed and such procedure may provide for non-recovery of an amount of tax or input tax credit wrongly availed not exceeding one thousand rupees.
(8) The procedure, safeguards and threshold of the tax amount in relation to outward supplies, the details of which can be furnished under sub-section (3) by a registered person,—
(i) within six months of taking registration; and
(ii) who has defaulted in payment of tax and where such default has continued for more than two months from the due date of payment of such defaulted amount, shall be such as may be prescribed.".
19. Amendment of section 48.—In section 48 of the principal Act, in sub-section (2), after the word and figures "section 45", the words "and to perform such other functions" shall be inserted.
5971 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 20. Amendment of section 49.—In section 49 of the principal Act,––(a) in sub-section (2), after the word and figures "section 41", the words, figures and letter "or section 43A" shall be inserted;
(b) in sub-section (5),––
(i) in clause (c), in the end for the sign ";", the sign":" shall be substituted and thereafter the following proviso shall be inserted, namely:––
"Provided that the input tax credit on account of State tax shall be utilised towards payment of integrated tax only where the balance of the input tax credit on account of central tax is not available for payment of integrated tax;";
(ii) in clause (d) in the end for the sign";", the sign ":" shall be substituted and thereafter, the following proviso shall be inserted, namely:––
"Provided that the input tax credit on account of Union Territory Tax shall be utilised towards payment of integrated tax only where the balance of the input tax credit on account of central tax is not available for payment of integrated tax;".
21. Insertion of new sections 49A and 49B.—After section 49 of the principal Act, the following sections shall be inserted, namely:––
"49A. Utilisation of input tax credit subject to certain conditions.—Notwithstanding anything contained in section 49, the input tax credit on account of State Tax shall be utilised towards payment of integrated tax or State Tax, as the case may be, only after the input tax credit available on account of integrated tax has first been utilised fully towards such payment.
49B. Order of utilisation of input tax credit.—Notwithstanding anything contained in this Chapter and subject to the provisions of clause (e) and clause (f) of sub-section (5) of section 49, the Government may, on the recommendations of the Council, prescribe the order and manner of utilisation of the input tax credit on account of integrated tax, central tax, State tax or Union territory tax, as the case may be, towards payment of any such tax.".
22. Amendment of section 52.—In section 52 of the principal Act, in sub-section (9), after the word and figures "section 37", the words and figures "or section 39" shall be inserted.
23. Amendment of section 54.—In section 54 of the principal Act,—
(a) in sub-section (8), in clause (a), for the words and signs "zero-rated supplies of ", the words "export of " and for the words and sign "such zero rated supplies", the words "such exports" shall be substituted;
(b) in the Explanation after sub-section(14), in clause (2),—
(i) in sub-clause (c), in item (i), after the words "foreign exchange", the words "or in Indian rupees wherever permitted by the Reserve Bank of India" shall be inserted;
5972 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940(ii) for sub-clause (e), the following sub-clause shall be substituted, namely:–– "(e) in the case of refund of unutilised input tax credit under clause (ii) of the first proviso to sub section (3), the due date for furnishing of return under section 39 for the period in which such claim for refund arises;".
24. Amendment of section 79.— In section 79 of the principal Act, after sub-section (4), the following Explanation shall be inserted, namely:—
"Explanation.––For the purposes of this section, the word "person" shall include "distinct persons" as referred to in sub-section (4) or, as the case may be, sub-section (5) of section 25.".
25. Amendment of section 107.—In section 107 of the principal Act, in sub-section (6), in clause (b), after the words "arising from the said order,", the words "subject to a maximum of twenty-five crore rupees," shall be inserted.
26. Amendment of section 112.—In section 112 of the principal Act, in sub-section (8), in clause (b), after the words "arising from the said order," the words "subject to a maximum of fifty crore rupees," shall be inserted.
27. Amendment of section 129.—In section 129 of the principal Act, in sub-section (6), for the words "seven days", the words "fourteen days" shall be substituted.
28. Amendment of section 143.—In section 143 of the principal Act, in sub-section (1), in clause (b), in the end of proviso for the sign ":", the sign" " shall be substituted and thereafter, the following proviso shall be inserted, namely:—
"Provided further that the period of one year and three years may, on sufficient cause being shown, be extended by the Commissioner for a further period not exceeding one year and two years respectively.".
29. Amendment of schedule I.—In Schedule I of the principal Act, in paragraph 4, for the words "taxable person", the word "person" shall be substituted.
30. Amendment of schedule II.—In Schedule II of the principal Act, in the heading, after the word "ACTIVITIES", the words "OR TRANSACTIONS" shall be inserted and shall always be deemed to have been inserted.
31. Amendment of schedule III.—In Schedule III of the principal Act, —
(i) after paragraph 6, the following paragraphs shall be inserted, namely:–– "7. Supply of goods from a place outside India to another place outside India without such goods entering into India.
8. (a) Supply of warehoused goods to any person before clearance for home consumption;
5973 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940(b) Supply of goods by the consignee to any other person, by endorsement of documents of title to the goods, after the goods have been dispatched from the port of origin located outside India but before clearance for home consumption.";
(ii) the Explanation shall be numbered as Explanation 1 and after Explanation 1 as so numbered, the following Explanation shall be inserted, namely:—
"Explanation 2.––For the purposes of paragraph 8, the expression "warehoused goods" shall have the same meaning as assigned to it in the Customs Act,1962 (52 of 1962).".
Sd/- (ACHARYA DEVVRAT) Governor, Himachal Pradesh.
(YASHWANT SINGH CHOGAL), Principal Secretary (Law).
SHIMLA : The 3rd November, 2018.
————
आबकारी एवं कराधान विभाग
अधिसूचना संख्या : 61/2018--राज्य कर
शिमला-2, 5 नवम्बर, 2018
संख्याः ई0एक्स0एन0-एफ0(10)-31/2018.--हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (2017 का 10), जिसे इस अधिसूचना में इसके पश्चात् उक्त अधिनियम कहा गया है, की धारा 51 के साथ पठित धारा 1 की उपधारा 3 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, परिषद् की सिफारिशों पर, हिमाचल प्रदेश के राजपत्र में संख्या ई0एक्स0एन0-एफ0(10)-24/2018-लूज द्वारा तारीख 18 सितम्बर, 2018 को प्रकाशित अधिसूचना संख्या 50/2018-राज्य कर तारीख 17 सितम्बर, 2018 में निम्नलिखित संशोधन करते हैं, अर्थात्ः--
उक्त अधिसूचना के परन्तुक के पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :--5974 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 "परन्तु यह और कि इस अधिसूचना की कोई बात किसी पब्लिक सेक्टर उपक्रम से किसी अन्य पब्लिक सेक्टर उपक्रम को, चाहे वह सुभिन्न व्यक्तियों या न हो, माल या सेवाओं या दोनों के प्रदाय को 1 अक्तूबर, 2018 से लागू नहीं होगी।"।
आदेश द्वारा,
जगदीश चन्द्र शर्मा, प्रधान सचिव (आबकारी एवं कराधान)। टिप्पण.--मूल अधिसूचना हिमाचल के राजपत्र में संख्या ई0एक्स0एन0-एफ0(10)-24/2018-लूज द्वारा तारीख 18 सितम्बर, 2018 को प्रकाशित हुई थी तथा तदोपरान्त अधिसूचना संख्या 57/ 2018-राज्य कर तारीख 27 अक्तूबर द्वारा संशोधित तथा संख्या ई0 एक्स0 एन0-एफ0 (10)-31/2018 के तहत तारीख 29 अक्तूबर, 2018 को राजपत्र में प्रकाशित की गई थी।
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[Authoritative English text of this Department Notification No. EXN-F(10)-31/2018, dated
05-11-2018 required under clause (3) of Article 348 of the Constitution of India].
EXCISE AND TAXATION DEPARTMENT
Notification No. 61/2018—State Tax
Shimla-2, the 5th November, 2018
No. EXN-F(10)-31/2018.—In exercise of the powers conferred by sub-section (3) of section 1, read with section 51 of the Himachal Pradesh Goods and Services Tax Act, 2017 (10 of 2017), hereafter in this notification referred to as the said Act, the Governor of Himachal Pradesh, on the recommendations of the Council, is pleased to make the following further amendments in the notification of the Government of Himachal Pradesh No. 50/2018—State Tax, dated the 17th September, 2018, published in the Gazette of Himachal Pradesh vide number EXN-F(10)- 24/2018-Loose, dated the 18th September, 2018, namely :—
In the said notification, after the proviso, the following proviso shall be inserted, namely:—
"Provided further that nothing in this notification shall apply to the supply of goods or services or both from a public sector undertaking to another public sector undertaking, whether or not a distinct person, with effect from the 1st day of October, 2018.".
By order,
JAGDISH CHANDER SHARMA, Principal Secretary (E&T).
Note.—The principal notification was published in the Gazette of Himachal Pradesh vide number EXN-F(10)-24/2018-Loose, dated the 18th September, 2018 and subsequently amended vide notification No. 57/2018—State Tax, dated the 27th October, 2018, published vide number EXN- F(10)-31/2018, dated the 29th October, 2018.
5975 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940ब अदालत श्री ओंकार सिंह, नायब तहसीलदार, कार्यकारी दण्डाधिकारी, ककीरा, जिला चम्बा, हिमाचल प्रदेश
श्री किरण कुमार थापा सुपुत्र श्री खेम बहादुर थापा, निवासी गांव चलामा, डाकघर बकलोह, उप-तहसील ककीरा, जिला चम्बा, हिमाचल प्रदेश।
विषय.-प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
उपरोक्त प्रार्थी ने अधोहस्ताक्षरी की अदालत में प्रार्थना-पत्र, ब्यान-हल्फी बमय अन्य कागजात इस आशय से गुजारा है कि उसकी पुत्री नीतिका थापा की जन्म तिथि 25-12-1993 है, जोकि ग्राम पंचायत चलामा के रिकार्ड में दर्ज न है। जिसे दर्ज किया जावे।
इस सम्बन्ध में सर्वसाधारण जनता को बजरिया इश्तहार सूचित किया जाता है कि प्रार्थी की पुत्री की जन्म तिथि ग्राम पंचायत चलामा के रिकार्ड में दर्ज करने पर, यदि किसी को कोई उजर-एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन अदालत अधोहस्ताक्षरी दिनांक 27-11-2018 को हाजिर आकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है। हाजिर न आने की सूरत में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जा करके नाम व जन्म तिथि दर्ज करने के आदेश दे दिए जाएंगे।
आज दिनांक 10-10-2018 को मेरे हस्ताक्षर व अदालत मोहर से जारी हुआ।
मोहर।
ओंकार सिंह, कार्यकारी दण्डाधिकारी, ककीरा, जिला चम्बा (हि0 प्र0)।
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ब अदालत श्री मदन सिंह राणा, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, प्रागपुर, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0 किस्म मुकद्दमा : तकसीम हुकमन मु0 नम्बर 12/एन0टी0 2017 सब-तहसील परागपुर तारीख पेशी : 22-11-2018 हरी कृषण बनाम जसबीर सिंह आदि कान्ता देवी पत्नी मंगत राम, लखबीर सिंह पुत्र मंगत राम, अतुल कुमार पुत्र नरेंदर चन्द, ब्रिज मोहन पुत्र मौल राज, अजय कुमार पुत्र मौल राज, अचला पुत्री मौल राज, ओंकार चन्द पुत्र भगवान दास, कमला देवी, विद्या देवी पुत्रियां भगवान दास, मुनीश कुमार पुत्र सन्तोष देवी, मीनाक्षी, मोनिका पुत्रियां संतोष देवी, शम्बू नाथ सहाय, कैलाश नाथ सहाय पुत्र व लीला देवी, सवर्ण देवी पुत्रियां व उर्मिला देवी पत्नी स्व0 श्री रघु नाथ सहाय, शेष राम पुत्र व कांता देवी, कृष्णा देवी, साधना देवी पुत्रियां तुलसी राम, पंकज कुमार पुत्र टेक चन्द, औम प्रकाश पुत्र छांगन राम, सुभाष चन्द, वेद प्रकाश, तिलक राज पुत्र छांगन राम, राजीव कुमार पुत्र कृषण देव, संजीव कुमार पुत्र कृषण देव, रश्मी पुत्री कृषण देव, अंजु पुत्री कृषण देव, गांव व डाकघर गरली, सब-तहसील परागपुर, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0, जोगिन्दर सिंह, मनोहर लाल, प्रताप चन्द, गांव व डाकघर बनी, सब-तहसील प्रागपुर, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0, संजीव कुठियाला व राजीव कुठियाला पुत्र देव राज, राजन सूद, रमण सूद, शरद सूद पुत्र टेक चन्द, अनिला देवी पत्नी स्व0 श्री टेक चन्द, अजय कुमार पुत्र अनंत राम, अरविन्द, अतुल, अनिल पुत्र विपन चन्द व उर्मिला देवी पत्नी स्व0 श्री विपन चन्द गांव व डाकघर गरली, उप-तहसील प्रागपुर, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0। दिनांक पेशी 22-11-2018 को हाजिर न होने की सूरत में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। 5976 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 आज दिनांक 28-09-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, प्रागपुर, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0।
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ब अदालत श्री सुशील कुमार, नायब तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, इन्दौरा, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0
मिसल नं0 : 69
तारीख पेशी :-12-11-2018 श्रीमती रक्षा देवी पत्नी श्री विजय कुमार, निवासी गांव कयारी, डा0 मदोली, तहसील इन्दौरा, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0 . .प्रार्थिया।
बनाम
आम जनता
विषय.--प्रार्थना-पत्र जेरे धारा 15 जन्म एवम् मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 दरुस्ती करने बारे। इश्तहार राजपत्र
प्रार्थिया श्रीमती रक्षा देवी पत्नी श्री विजय कुमार, निवासी गांव कयारी, डा0 मदोली, तहसील इन्दौरा, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0 ने प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करते हुए निवेदन किया है कि उसके पुत्र प्रियांश सिंह के जन्म प्रमाण-पत्र, ग्राम पंचायत राजा खासा के रिकार्ड में पिता का नाम अमरीक सिंह दर्ज है। जिसे गोद लेने के बाद उसके पिता का नाम प्रियांश सिंह दतक पुत्र श्री विजय कुमार दर्ज करवाना चाहती है। जिस बारा शपथ-पत्र व गोद पत्र मूल प्रार्थना-पत्र के साथ संलग्न हैं।
अतः इस इश्तहार राजपत्र के द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि उक्त जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण रिकार्ड में पिता का नाम दतक पुत्र श्री विजय कुमार दर्ज करवाने बारे किसी भी व्यक्ति को कोई एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन दिनांक 12-11-2018 को प्रातः 10.00 बजे अदालत हजा में उपस्थित होकर अपना एतराज पेश कर सकता है। कोई एतराज पेश न होने की सूरत में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण रिकार्ड ग्राम पंचायत राजा खासा के रिकार्ड में दर्ज करने बारे आदेश पारित कर दिए जाएंगे। आज दिनांक 09-10-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत सहित जारी किया गया।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- नायब तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, इन्दौरा, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0।
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ब अदालत श्री सुशील कुमार, नायब तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, इन्दौरा, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0
मिसल नं0 : 17/तह0/2018 तारीख पेशी :-12-11-2018 सुदेश कुमारी बनाम आम जनता विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवम् मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
5977 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940प्रार्थी श्रीमती सुदेश कुमारी पत्नी श्री विन्दू लाल, निवासी घगवा, डा0 सुरडवां, तहसील इन्दौरा, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0 ने प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करते हुए निवेदन किया है कि उसके लड़के नवी की जन्म तिथि 18-07-2013 ग्राम पंचायत सुरडवां के अभिलेख में दर्ज न है जो कि दर्ज की जाए।
अतः इस इश्तहार द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि वे उक्त विषय से सम्बन्धित एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन दिनांक 12-11-2018 को प्रातः 10.00 बजे अदालत हजा में उपस्थित होकर अपना एतराज दें। कोई एतराज न होने की सूरत में जन्म पंजीकरण के आदेश पारित कर दिए जाएंगे। आज दिनांक 10-10-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत सहित जारी किया गया।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी
इन्दौरा, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0।
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ब अदालत जनाब सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी ज्वाली, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0
श्री परमजीत पुत्र श्री गोरख राम, निवासी महाल अमनी, मौजा कोण्डीवन्डा, तहसील ज्वाली, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0।
बनाम
आम जनता
विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवम् मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
श्री परमजीत पुत्र गोरख राम, गांव अमनी, डा0 धंडू, तहसील ज्वाली, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0 ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र गुजारा है कि श्रीमती गोहडी देवी पत्नी श्री गोरख राम की मृत्यु 25-08-1986 को गांव अमनी में हुई थी, जो गलती से पंचायत रिकार्ड में पंजीकृत नहीं करवा सका। अब यह मृत्यु तिथि पंचायत रिकार्ड में दर्ज करवाना चाहता है।
अतः इस नोटिस के माध्यम से सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त पंजीकरण बारे कोई उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 22-11-2018 को प्रातः 10.00 बजे इस न्यायालय में असालतन या वकालतन हाजिर आकर पेश कर सकता है अन्यथा हाजिर न आने की सूरत में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर मृत्यु तिथि पंचायत रिकार्ड में पंजीकृत करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे। इसके उपरान्त कोई एतराज न सुना जायेगा।
आज दिनांक 10-10-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ। , मोहर।
हस्ताक्षरित/-
सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी,
ज्वाली, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0।
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ब अदालत सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी शाहपुर, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0
मुकद्दमा : इन्द्राज सेहत नाम
पेशी : 09-11-2018 कुलदीप चन्द शर्मा पुत्र पूर्ण चन्द शर्मा, निवासी गांव गोरडा, तहसील शाहपुर, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।5978 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 बनाम
आम जनता
विषय.--दरुस्ती नाम हि0 प्र0 रा0 अधिनियम, 1954 की जेर धारा 37 के तहत महाल गोरडा में नाम की दरुस्ती बारे।
उपरोक्त मुकद्दमा बारे प्रार्थी ने इस न्यायालय में प्रार्थना-पत्र गुजारा है जिसमें लिखा है कि उसका सही नाम कुलदीप चन्द शर्मा चन्द पुत्र पूर्ण चन्द शर्मा है जबकि महाल गोरडा के राजस्व अभिलेख में उसका नाम कुलदीप कुमार पुत्र पूर्ण चन्द दर्ज है, जोकि गलत इन्द्राज हुआ है। प्रार्थी उक्त नाम को दरुस्त करके कुलदीप कुमार उपनाम कुलदीप चन्द शर्मा पुत्र पूर्ण चन्द उपनाम पूर्ण चन्द शर्मा से दर्ज करवाना चाहता है। अतः उक्त प्रार्थना-पत्र के सन्दर्भ में उपरोक्त नाम की दरुस्ती बारे किसी को कोई एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन इस अदालत में दिनांक 09-11-2018 को दोपहर बाद 2 बजे हाजिर आ सकता है। हाजिर न आने की स्थिति में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर आगामी आदेश पारित कर दिए जाएंगे और बाद में कोई भी उजर या एतराज जेरे समायत न होगा।
आज दिनांक 05-10-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी,
शाहपुर, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।
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ब अदालत सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी शाहपुर, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0
मुकद्दमा : इन्द्राज सेहत नाम
पेशी : 25-10-2018 वुधी सिंह पुत्र किरपा, निवासी वासा, तहसील शाहपुर, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश
बनाम
आम जनता
विषय.--दरुस्ती नाम हि0 प्र0 रा0 अधिनियम, 1954 की जेर धारा 37 के तहत महाल बासा में नाम की दरुस्ती बारे।
उपरोक्त मुकद्दमा बारे प्रार्थी ने इस न्यायालय में प्रार्थना-पत्र गुजारा है जिसमें लिखा है कि उसका सही नाम वुधी सिंह पुत्र किरपा है जबकि महाल बासा के राजस्व अभिलेख में उसका नाम वुधू पुत्र किरपा दर्ज है, जोकि गलत इन्द्राज हुआ है। प्रार्थी उक्त नाम को दरुस्त करके वुधू उपनाम वुधी सिंह पुत्र किरपा दर्ज करवाना चाहता है।
अतः उक्त प्रार्थना-पत्र के सन्दर्भ में उपरोक्त नाम की दरुस्ती बारे किसी को कोई एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन इस अदालत में दिनांक 25-11-2018 को दोपहर बाद 2 बजे हाजिर आ सकता है। हाजिर न आने की स्थिति में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर आगामी आदेश पारित कर दिए जाएंगे और बाद में कोई भी उजर या एतराज जेरे समायत न होगा।
आज दिनांक 29-09-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी,
शाहपुर, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।5979 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940
ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, शाहपुर, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0
मुकद्दमा : इन्द्राज जन्म तिथि तारीख पेशी : 26-11-2018 रविन्द्र कुमार महाजन पुत्र चुहडू राम, निवासी गांव व डाकघर भनाला, तहसील शाहपुर, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश
बनाम
आम जनता
विषय.--जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम की जेर धारा 13(3) पुनर्वालोकित 1969 के तहत जन्म प्रमाण-पत्र लेने बारे प्रार्थना पत्र।
उपरोक्त मुकद्दमा बारे प्रार्थी ने इस न्यायालय में प्रार्थना-पत्र गुजारा है जिसमें लिखा है कि उसके पुत्र विशाल महाजन का जन्म दिनांक 13-01-1974 को महाल भनाला में हुआ है परन्तु अज्ञानतावश इसका इन्द्राज ग्राम पंचायत भनाला के रिकार्ड में दर्ज नहीं हुआ है। प्रार्थी उक्त जन्म तिथि को दर्ज करवाना चाहता है।
अतः उक्त प्रार्थना-पत्र के सन्दर्भ में यदि आम जनता या अन्य किसी को उक्त जन्म तिथि को ग्राम पंचायत भनाला के रिकार्ड के जन्म रजिस्टर में दर्ज करवाने बारे कोई एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन इस अदालत में दिनांक 26-11-2018 को दोपहर बाद 2.00 बजे हाजिर आ सकता है। हाजिर न आने की स्थिति में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर आगामी आदेश पारित कर दिए जाएंगे और बाद में कोई भी उजर या एतराज जेरे समायत न होगा।
आज दिनांक 11-10-2018 को मेरी मोहर व हस्ताक्षर सहित जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
कार्यकारी दण्डाधिकारी,
शाहपुर, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।
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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, शाहपुर, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0
मुकद्दमा : इन्द्राज जन्म तिथि तारीख पेशी : 12-11-2018 रमेश चन्द पुत्र रसीला राम, निवासी गांव मंझग्रां, डाकघर लदवाड़ा, तहसील शाहपुर, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश
बनाम
आम जनता
विषय.--जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम जेर धारा 13(3) पुनर्वालोकित 1969 के तहत जन्म प्रमाण-पत्र लेने बारे प्रार्थना पत्र। 5980 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 उपरोक्त मुकद्दमा बारे प्रार्थी ने इस न्यायालय में प्रार्थना-पत्र गुजारा है जिसमें लिखा है कि उसके पुत्र सोनू चौधरी का जन्म दिनांक 23-06-1982 को महाल मंझग्रां में हुआ है परन्तु अज्ञानतावश इसका इन्द्राज ग्राम पंचायत मुन्दला के रिकार्ड में दर्ज नहीं हुआ है। प्रार्थी उक्त जन्म तिथि को दर्ज करवाना चाहता है। अतः उक्त प्रार्थना-पत्र के सन्दर्भ में यदि आम जनता या अन्य किसी को उक्त जन्म तिथि को ग्राम पंचायत मुन्दला के रिकार्ड के जन्म रजिस्टर में दर्ज करवाने बारे कोई एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन इस अदालत में दिनांक 12-11-2018 को दोपहर बाद 2.00 बजे हाजिर आ सकता है। हाजिर न आने की स्थिति में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर आगामी आदेश पारित कर दिए जाएंगे और बाद में कोई भी उजर या एतराज जेरे समायत न होगा।
आज दिनांक 04-10-2018 को मेरी मोहर व हस्ताक्षर सहित जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
कार्यकारी दण्डाधिकारी,
शाहपुर, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।
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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, शाहपुर, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0
मुकद्दमा : इन्द्राज मृत्यु तिथि तारीख पेशी : 14-11-2018 सुभद्रा देवी विधवा कर्म चन्द, निवासी गांव व डा0 चड़ी, तहसील शाहपुर, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।
बनाम
आम जनता
विषय.--प्रार्थना-पत्र जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम की जेर धारा 13(3) पुनर्वालोकित 1969 के तहत मृत्यु प्रमाण-पत्र लेने बारे।
उपरोक्त मुकद्दमा बारे प्रार्थिया ने इस न्यायालय में प्रार्थना-पत्र गुजारा है जिसमें लिखा है कि उसकी बुआ सास तुलसी देवी विधवा परमा पुत्र शंकर, निवासी चड़ी, तहसील शाहपुर का देहान्त दिनांक 10-12-1988 को महाल चड़ी में हुआ है परन्तु अज्ञानतावश इसका इन्द्राज ग्राम पंचायत चड़ी के रिकार्ड में दर्ज नहीं हुआ है। प्रार्थिया उक्त मृत्यु तिथि को दर्ज करवाना चाहती है।
अतः उक्त प्रार्थना-पत्र के सन्दर्भ में यदि आम जनता या अन्य किसी को उक्त मृत्यु तिथि को ग्राम पंचायत चड़ी के रिकार्ड के मृत्यु रजिस्टर में दर्ज करवाने बारे कोई एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन इस अदालत में दिनांक 14-11-2018 को दोपहर बाद 2.00 बजे हाजिर आ सकता है। हाजिर न आने की स्थिति में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर आगामी आदेश पारित कर दिए जाएंगे और बाद में कोई भी उजर या एतराज जेरे समायत न होगा।
आज दिनांक 11-10-2018 को मेरी मोहर व हस्ताक्षर सहित जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
कार्यकारी दण्डाधिकारी,
शाहपुर, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।5981 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 ब अदालत सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील खुण्डियां, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0) तारीख पेशी : 13-11-2018 केस नं0 : 4/NT/2018
श्री शक्ति चन्द पुत्र श्री बख्शी राम, निवासी महाल थलाकन, मौजा गन्धवाड़, तहसील खुण्डियां, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0)।
बनाम
आम जनता
उनवान मुकद्दमा.--नाम दरुस्ती।
प्रार्थी श्री शक्ति चन्द पुत्र श्री बख्शी राम, निवासी महाल थलाकन, मौजा गन्धवाड़, तहसील खुण्डियां, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0) ने स्वयं उपस्थित होकर प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया कि मेरा नाम स्कूल सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, ग्राम पंचायत सुरानी के परिवार रजिस्टर तथा अन्य सभी जगह शक्ति चन्द दर्ज है जबकि राजस्व विभाग पटवार वृत्त गन्धवाड़ के महाल थलाकन के अभिलेख में मेरा नाम गलती से शक्ति चन्द की जगह बाबू राम दर्ज हो चुका है, जो कि गलत है। वास्तव में भिन्न-भिन्न दो नामों का मैं एक ही व्यक्ति हूं। अतः राजस्व अभिलेख में मेरा नाम बाबू राम के बजाये बाबू राम उपनाम शक्ति चन्द दर्ज किया जाये। अतः सर्वसाधारण को सुनवाई हेतु बजरिये इश्तहार व मुस्त्री मुनादी द्वारा सूचित किया जाता है कि इस सम्बन्ध में किसी प्रकार का उजर/एतराज हो तो वह दिनांक 13-11-2018 को असालतन व वकालतन पेश होकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है। उसके उपरान्त कोई भी उजर/एतराज जेर समायत न होगा तथा शक्ति चन्द पुत्र श्री बख्शी राम, निवासी महाल थलाकन, मौजा गन्धवाड़, तहसील खुण्डियां, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0) का नाम राजस्व अभिलेख महाल थलाकन के अभिलेख में बाबू राम के बजाये बाबू राम उपनाम शक्ति चन्द दर्ज करने के आदेश पारित कर दिये जायेंगे।
आज दिनांक 01-11-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी,
तहसील खुण्डियां, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0)।
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ब अदालत सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील खुण्डियां, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0)
तारीख पेशी : 15-11-2018 केस नं0 : 6/NT/2018
श्री पुरुषोतम सिंह राणा पुत्र श्री लौहका राम, निवासी गांव अलूहा, डाकखाना टिहरी, तहसील खुण्डियां, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0)।
बनाम
आम जनता
उनवान मुकद्दमा.--नाम दरुस्ती। 5982 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 प्रार्थी श्री पुरुषोतम सिंह राणा पुत्र श्री लौहका राम, निवासी गांव अलूहा, डाकखाना टिहरी, तहसील खुण्डियां, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0) ने स्वयं उपस्थित होकर प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया कि मेरा नाम स्कूल सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, ग्राम पंचायत नाहलियां के परिवार रजिस्टर तथा अन्य सभी जगह पुरुषोतम सिंह राणा दर्ज है जबकि राजस्व विभाग पटवार वृत्त टिप के महाल अलूहा के अभिलेख में मेरा नाम गलती से पुरुषोतम सिंह राणा की जगह प्रशोतम सिंह दर्ज हो चुका है, जो कि गलत है। वास्तव में भिन्न-भिन्न दो नामों का मैं एक ही व्यक्ति हूं। अतः राजस्व अभिलेख में मेरा नाम प्रशोतम सिंह के बजाये पुरुषोतम सिंह राणा दर्ज किया जाये।
अतः सर्वसाधारण को सुनवाई हेतु बजरिये इश्तहार व मुस्त्री मुनादी द्वारा सूचित किया जाता है कि इस सम्बन्ध में किसी प्रकार का उजर/एतराज हो तो वह दिनांक 15-11-2018 को असालतन व वकालतन पेश होकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है। उसके उपरान्त कोई भी उजर/एतराज जेर समायत न होगा तथा पुरुषोतम सिंह राणा पुत्र श्री लौहका राम, निवासी गांव अलूहा, डाकखाना टिहरी, तहसील खुण्डियां, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0) का नाम राजस्व अभिलेख महाल अलूहा के अभिलेख में प्रशोतम सिंह के बजाये पुरुषोतम सिंह राणा दर्ज करने के आदेश पारित कर दिये जायेंगे।
आज दिनांक 18-10-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी,
तहसील खुण्डियां, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0)। ------
ब अदालत सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील खुण्डियां, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0)
केस नं0 : 5/NT/2018
तारीख पेशी : 15-11-2018 श्री मंगल सिंह पुत्र श्री भाग मल, निवासी गांव कण्ढा, मौजा टिहरी, तहसील खुण्डियां, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0)।
बनाम
आम जनता
उनवान मुकद्दमा.--नाम दरुस्ती।
प्रार्थी श्री मंगल सिंह पुत्र श्री भाग मल, निवासी महाल कण्ढा, मौजा टिहरी, तहसील खुण्डियां, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0) ने स्वयं उपस्थित होकर प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया कि मेरा नाम आधार कार्ड, ग्राम पंचायत टिहरी के परिवार रजिस्टर तथा अन्य सभी जगह मंगल सैन दर्ज है जबकि राजस्व विभाग पटवार वृत्त टिहरी के महाल कण्ढा के अभिलेख में मेरा नाम गलती से मंगल सैन की जगह मंगल सिंह दर्ज हो चुका है, जो कि गलत है। वास्तव में भिन्न-भिन्न दो नामों का मैं एक ही व्यक्ति हूं। अतः राजस्व अभिलेख में मेरा नाम मंगल सिंह के बजाये मंगल सिंह उपनाम मंगल सैन दर्ज किया जाये।
अतः सर्वसाधारण को सुनवाई हेतु बजरिये इश्तहार व मुस्त्री मुनादी द्वारा सूचित किया जाता है कि इस सम्बन्ध में किसी प्रकार का उजर/एतराज हो तो वह दिनांक 15-11-2018 को असालतन व वकालतन पेश होकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है। उसके उपरान्त कोई भी उजर/एतराज जेर समायत न होगा5983 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 तथा मंगल सिंह पुत्र श्री भाग मल, निवासी महाल कण्ढा, मौजा टिहरी, तहसील खुण्डियां, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0) का नाम राजस्व अभिलेख महाल कण्ढा के अभिलेख में मंगल सिंह के बजाये मंगल सिंह उपनाम मंगल सैन दर्ज करने के आदेश पारित कर दिये जायेंगे।
आज दिनांक 18-10-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/-
सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी,
तहसील खुण्डियां, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0)। ------
ब अदालत श्री मुकन्द लाल, नायब-तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, थुरल, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0)
किस्म मुकद्दमा : दुरुस्ती नाम
तारीख पेशी : 15-10-2018 श्री गुरमेल सिंह पुत्र श्री डोसुं, निवासी महाल लाहड डूहक, मौजा आलमपुर, उप-तहसील थुरल, . . प्रार्थी। जिला कांगड़ा (हि0 प्र0)
बनाम
आम जनता
. . प्रतिवादी। विषय.--प्रार्थना-पत्र दरुस्ती नाम राजस्व अभिलेख महाल लाहड डूहक, मौजा आलमपुर, उप-तहसील थुरल, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0।
प्रार्थी श्री गुरमेल सिंह पुत्र श्री डोसुं, निवासी महाल लाहड डूहक, मौजा आलमपुर, उप-तहसील थुरल, जिला कांगड़ा (हि0 प्र0) ने एक प्रार्थना-पत्र मय शपथ पत्र पीठासीन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करते हुए अनुरोध किया है कि उसका नाम पंचायत अभिलेख, आधार कार्ड व राशन कार्ड में गुरमेल सिंह दर्ज है, व उसका विख्यात व सही नाम भी गुरमेल सिंह ही है। परन्तु राजस्व अभिलेख महाल लाहड डूहक, मौजा आलमपुर, उप-तहसील थुरल में उसका नाम गोरख राम गलत दर्ज हो गया था। अतः प्रार्थी अब अपना नाम राजस्व अभिलेख महाल लाहड डूहक, मौजा आलमपुर, उप-तहसील थुरल में दुरुस्ती करवा करके श्री गोरख राम के बजाए गोरख राम उपनाम गुरमेल सिंह पुत्र डोसुं दर्ज करवाना चाहता है। अतः प्रार्थी का आवेदन स्वीकार करते हुए, इस मुस्त्री मुनादी चस्पांगी व इश्तहार अखबारी के माध्यम से आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त प्रार्थी के नाम की राजस्व अभिलेख महाल लाहड डूहक, मौजा आलमपुर उप-तहसील थुरल में श्री गोरख राम के बजाय श्री गोरख राम उपनाम गुरमेल सिंह पुत्र डोसुं दर्ज करवाने बारे किसी किस्म की आपत्ति या उजर हो तो वो तारीख पेशी 12-11-2018 को असालतन या वकालतन हाजिर अदालत होकर अपना उजर पेश कर सकता है। अन्यथा बाद तारीख पेशी किसी किस्म का उजर एवं एतराज नहीं सुना जावेगा व नाम दरुस्ती का आदेश पारित कर दिया जाएगा।
यह इश्तहार आज दिनांक 01-10-2018 को मोहर अदालत व मेरे हस्ताक्षर से जारी हुआ। मोहर।
हस्ताक्षरित/-, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, थुरल, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0।5984 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 ब अदालत श्री सुशील कुमार, नायब तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, इन्दौरा, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0
मिसल नं0 : 70
तारीख पेशी : 12-11-2018 श्रीमती सत्या देवी पुत्री श्री वरडू राम, निवासी मलाल, तहसील इन्दौरा, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0
...प्रार्थी।
बनाम
आम जनता
विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवम् मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
प्रार्थी श्रीमती सत्या देवी पुत्री श्री वरडू राम, निवासी मलाल, तहसील इन्दौरा, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0 ने प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करते हुए निवेदन किया है कि उसके पिता श्री वरडू राम पुत्र श्री जल्हा राम की मृत्यु पंचायत रिकार्ड में दर्ज न हुई है। जिसे मैं ग्राम पंचायत भोग्रवां के पंचायत रिकार्ड में दर्ज करवाना चाहती हूं। अतः इस इश्तहार राजपत्र के द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि उक्त मृत्यु दर्ज करवाने बारे किसी भी व्यक्ति को कोई एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन दिनांक 12-11-2018 को प्रातः 10.00 बजे अदालत हजा में उपस्थित होकर अपना एतराज पेश कर सकता है। कोई एतराज पेश न होने की सूरत में मृत्यु ग्राम पंचायत मोहटली के पंचायत रिकार्ड में दर्ज करने बारे आदेश पारित कर दिए जाएंगे। आज दिनांक 10-10-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत सहित जारी किया गया।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- नायब तहसीलदार एवम् सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी इन्दौरा, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0।
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ब अदालत श्री करतार सिंह, नायब तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी बैजनाथ, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0
मुकद्दमा संख्या : 30/ता/2018
दिनांक पेशी : 27-11-2018 नरेन्द्र कुमार बनाम नीरज आदि निवासीयान महाल कोठी, मौजा पपरोला, तहसील बैजनाथ, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।
नरेन्द्र कुमार ने अदालत हजा में बराये (तकसीम) भूमि विभाजन हेतु प्रार्थना-पत्र गुजारा है। प्रार्थी खाता नं0 81, खतौनी नं0 182, खसरा नम्बरान कित्ता 2, रकबा तादादी 0-12-69 है0, मुहाल कोठी, मौजा पपरोला, तहसील बैजनाथ में भू-मालिक है। प्रार्थी इस रकबा की तकसीम करवाना चाहता है लेकिन कुछ हिस्सादारान को साधारण तरीके से इत्तलाह न हो पा रही है। इसलिए प्रार्थी प्रतिवादीगण 1. नीरज पुत्र , 2. मनोहरा विधवा राम चन्द, 3. राजेश पुत्र 4. पुजा पुत्री, 5. विन्द्रा विधवा कृष्ण कुमार, निवासीगण कोठी, मौजा पपरोला, तहसील बैजनाथ, जिला कांगड़ा को बजरिया इश्तहार सूचित किया जाता है कि वह असालतन या वकालतन पेशी तिथि 27-11-2018 (मामला तकसीम) में उपस्थित होकर मुकद्दमा की पैरवी करें व उजर/एतराज पेश करें अन्यथा उनके विरुद्ध एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।5985 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 आज दिनांक 01-10-2018 को अदालत की मोहर व मेरे हस्ताक्षर के साथ जारी हुआ।
मोहर।
करतार सिंह,
तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी,
बैजनाथ, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0।
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ब अदालत श्री करतार सिंह, नायब तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी बैजनाथ, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0
मुकद्दमा संख्या : 31/ता/2018
दिनांक पेशी : 27-11-2018 रजिन्द्र कुमार बनाम नीरज आदि निवासीयान महाल कोठी, मौजा पपरोला, तहसील बैजनाथ, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।
रजिन्द्र कुमार ने अदालत हजा में बराये (तकसीम) भूमि विभाजन हेतु प्रार्थना-पत्र गुजारा है। प्रार्थी खाता नं0 82, खतौनी नं0 183, खसरा नम्बरान 13, रकबा तादादी 0-83-98 है0, मुहाल कोठी, मौजा पपरोला, तहसील बैजनाथ में भू-मालिक है। प्रार्थी इस रकबा की तकसीम करवाना चाहता है लेकिन कुछ हिस्सादारान को साधारण तरीके से इत्तलाह न हो पा रही है। इसलिए प्रार्थी प्रतिवादीगण 1. नीरज पुत्र, 2. मनोहरमा देवी विधवा राम चन्द, 3. राजेश पुत्र, 4. पुजा पुत्री, 5. विन्द्रा विधवा कृष्ण कुमार, निवासीगण महाल काठी, मौजा पपरोला, तहसील बैजनाथ, जिला कांगड़ा को बजरिया इश्तहार सूचित किया जाता है कि वह असालतन या वकालतन पेशी तिथि 27-11-2018 (मामला तकसीम) में उपस्थित होकर मुकद्दमा की पैरवी करें व उजर/एतराज पेश करें अन्यथा उनके विरुद्ध एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
आज दिनांक 01-10-2018 को अदालत की मोहर व मेरे हस्ताक्षर के साथ जारी हुआ।
मोहर।
करतार सिंह,
तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी,
बैजनाथ, जिला कांगड़ा, हि0 प्र0।
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ब अदालत तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0
केस नं0 : 45-BT/18
तारीख पेशी : 16-11-2018 राजेन्द्र चौहान पुत्र श्री नाग राम, निवासी गांव कलैहली, डा0 बजौरा, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 । .
बनाम
सर्वसाधारण एवं आम जनता
विषय.-- प्रार्थना-पत्र अधिनियम धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
राजेन्द्र चौहान पुत्र श्री नाग राम, निवासी गांव कलैहली, डा0 बजौरा, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 ने इस कार्यालय में प्रार्थना-पत्र मय शपथ-पत्र दिया है कि उसकी पुत्री आंचल चौहान का जन्म दिनांक 23-04-1999 को स्थान गांव कलैहली, डा0 बजौरा, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 में हुआ है 5986 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 परन्तु उसकी जन्म की तिथि का इन्द्राज किसी कारणवश ग्राम पंचायत कलैहली, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 के अभिलेख में दर्ज न किया गया है।
अतः इस इश्तहार हजा द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को आंचल चौहान पुत्री श्री राजेन्द्र चौहान के जन्म तिथि दर्ज करवाने बारे कोई आपत्ति हो तो वह दिनांक 16-11-2018 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत आकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है। इसके उपरान्त कोई भी एतराज समायत न होगा तथा नियमानुसार जन्म तिथि दर्ज करवाने के आदेश सम्बन्धित ग्राम पंचायत को पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 16-11-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर। हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी एवं तहसीलदार, भुन्तर, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0।
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ब अदालत तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0
केस नं0 : 44-BT/18
तारीख पेशी : 16-11-2018 नीफू पुत्र श्री शरीफ अली, निवासी गांव व डा0 बजौरा, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0
बनाम
सर्वसाधारण एवं आम जनता
विषय.--प्रार्थना-पत्र अधिनियम धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.
नीफू पुत्र श्री शरीफ अली, निवासी गांव व डा0 बजौरा, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 ने इस कार्यालय में प्रार्थना-पत्र मय शपथ-पत्र दिया है कि उसकी पुत्री शाहिन का जन्म दिनांक 24-06-2013 को स्थान गांव बजौरा, डा0 बजौरा, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 में हुआ है परन्तु उसकी जन्म की तिथि का इन्द्राज किसी कारणवश ग्राम पंचायत बजौरा, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 के अभिलेख में दर्ज न किया गया है।
अतः इस इश्तहार हजा द्वारा सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को शाहिन पुत्री श्री नीफू की जन्म तिथि दर्ज करवाने बारे कोई आपत्ति हो तो वह दिनांक 16-11-2018 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत आकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है। इसके उपरान्त कोई भी एतराज समायत न होगा तथा नियमानुसार जन्म तिथि दर्ज करवाने के आदेश सम्बन्धित ग्राम पंचायत को पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 16-11-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
हस्ताक्षरित/- मोहर। कार्यकारी दण्डाधिकारी एवं तहसीलदार, भुन्तर, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0।5987 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 ब अदालत तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0
तारीख पेशी : 16-11-2018 केस नं0 : 103-MT/2017
1. श्री गिरजानन्द पुत्र स्व0 श्री जीवानन्द शुक्ला, निवासी गांव बड़़ा भुईन, डाकघर व तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0।
2. श्रीमती किरना देवी पुत्री श्री गीतानन्द शर्मा, निवासी गांव भटवाड़ी, डा0 कोटखमराधा, तहसील औट, जिला मण्डी, हि प्र0।
बनाम
सर्वसाधारण एवं आम जनता
विषय.-- प्रार्थना-पत्र जेर धारा 5(4) हि0 प्र0 रजिस्ट्रीकरण नियम 2004 विवाह पंजीकरण बारे।
उपरोक्त मामला में प्रार्थीगण ने दिनांक 07-07-2018 को इस अदालत में प्रार्थना-पत्र मय शपथ पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 04-12-2011 को शादी कर ली है और तब से दोनों पति-पत्नी के रूप में रहते चले आ रहे हैं। परन्तु प्रार्थीगण ने अपनी शादी का इन्द्राज सम्बन्धित ग्राम पंचायत बड़ा भुईन, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 में दर्ज नहीं करवाया है।
अतः सर्वसाधारण व आम जनता को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त प्रार्थीगणों की शादी से सम्बन्धित पंचायत के अभिलेख में दर्ज करने बारे एतराज हो तो वह दिनांक 16-11-2018 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत पेश होकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है। इसके उपरान्त कोई भी एतराज समायत न होगा तथा नियमानुसार शादी दर्ज करने के आदेश सम्बन्धित ग्राम पंचायत को पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 16-10-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर। हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी एवं तहसीलदार, भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0।
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In the Court of Dr. Amit Guleria, H.A.S., Marriage Officer-cum-Sub Divisional
Magistrate, Kullu, District Kullu, H.P.
In the matter of :
1. Dinesh Kumar s/o Shri Parmanand Kapoor, r/o Shant Kunj Shamshi, P.O. Shamshi, Tehsil Bhunter, District Kullu, H.P.
2. Neena Kapoor d/o Shri P. R. Agnihotri r/o Ujain Opposite UCO Bank Dharamshala . . Applicants. Road, Kangra, H.P.
Versus
General Public
5988 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 Subject.—Proclamation for the registration of Marriage under Section 16 of Special Marriage Act,1954.
Dinesh Kumar and Neena Kapoor have filed an application alongwith affidavits in the court of undersigned under Section 16 of Special Marriage Act, 1954 that they have solemnized their marriage on 14-04-1987 and they are living as husband and wife since then, hence their marriage may be registered under Act, ibid.
Therefore, the general public is hereby informed through this notice that any person who has any objection regarding this marriage can file the objection personally or in writing before this court on or before 12-11-2018. The objection received after 12-11-2018 will not be entertained and marriage will be registered accordingly.
Issued today on 12-10-2018 under my hand and seal of the court.
Seal.
DR. AMIT GULERIA (HAS), Marriage Officer-cum-Sub Divisional Magistrate, Kullu, District Kullu, H.P.
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ब अदालत सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील बालीचौकी, जिला मण्डी (हि0 प्र0) मिसल नम्बर : 14/18-06-2018
श्री नरेश कुमार पुत्र श्री जोगिन्द्र सिंह, निवासी गांव पाणू, डाकघर खुहण, तहसील बालीचौकी, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश।
बनाम
आम जनता
विषय.--राजस्व रिकार्ड में नाम दरुस्ती बारे आवेदन-पत्र।
श्री नरेश कुमार पुत्र श्री जोगिन्द्र सिंह, निवासी गांव पाणू, डाकघर खुहण, तहसील बालीचौकी, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ने एक आवेदन-पत्र मय शपथ पत्र इस आशय के साथ गुजारा है कि उसका नाम ग्राम पंचायत खलवाहन के रिकार्ड में नरेश कुमार दर्ज है लेकिन राजस्व विभाग के रिकार्ड मुहाल खुहण में गलती से नेत्रपाल दर्ज हुआ है। अब प्रार्थी राजस्व रिकार्ड में ग्राम पंचायत खलवाहन के रिकार्ड के आधार पर अपना नाम नरेश कुमार दर्ज करवाना चाहता है।
अतः इस इश्तहार द्वारा सर्वसाधारण जनता व हितबद्ध व्यक्तियों को सूचित किया जाता है कि उपरोक्त नाम को दरुस्त करने बारे किसी भी व्यक्ति को कोई आपाि हो तो वह दिनांक 19-11-2018 को या इससे पूर्व अधोहस्ताक्षरी के समक्ष असालतन या वकालतन उपस्थित होकर अपनी आपाि दर्ज कर सकता है। इसके पश्चात् कोई भी एतराज काबिले समायत नहीं होगा तथा आवेदन-पत्र पर नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
आज दिनांक 18-10-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील बालीचौकी, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।5989 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 ब अदालत सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील बालीचौकी, जिला मण्डी (हि0 प्र0) मिसल नम्बर : 15/18-06-2018
श्री यशपाल पुत्र श्री जोगिन्द्र सिंह, निवासी गांव पाणू, डाकघर खुहण, तहसील बालीचौकी, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश।
बनाम
आम जनता
विषय.--राजस्व रिकार्ड में नाम दरुस्ती बारे आवेदन-पत्र।
श्री यशपाल पुत्र श्री जोगिन्द्र सिंह, निवासी गांव पाणू, डाकघर खुहण, तहसील बालीचौकी, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ने एक आवेदन-पत्र मय शपथ पत्र इस आशय के साथ गुजारा है कि उसका नाम ग्राम पंचायत खलवाहन के रिकार्ड में यशपाल दर्ज है लेकिन राजस्व विभाग के रिकार्ड मुहाल खुहण में गलती से आवेदक का घरेलू नाम यशवन्त दर्ज हुआ है। अब प्रार्थी राजस्व रिकार्ड में ग्राम पंचायत खलवाहन के रिकार्ड के आधार पर अपना नाम यशपाल दर्ज करवाना चाहता है।
अतः इस इश्तहार द्वारा सर्वसाधारण जनता व हितबद्ध व्यक्तियों को सूचित किया जाता है कि उपरोक्त नाम को दरुस्त करने बारे किसी भी व्यक्ति को कोई आपाि हो तो वह दिनांक 19-11-2018 को या इससे पूर्व अधोहस्ताक्षरी के समक्ष असालतन या वकालतन उपस्थित होकर अपनी आपाि दर्ज कर सकता है। इसके पश्चात् कोई भी एतराज काबिले समायत नहीं होगा तथा आवेदन-पत्र पर नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
आज दिनांक 18-10-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील बालीचौकी, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।
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न्यायालय कार्यकारी दण्डाधिकारी, चच्योट स्थित गोहर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)
श्रीमती प्रमिला देवी पत्नी श्री कर्म सिंह, निवासी गांव बाग, डाकघर जाच्छ, तहसील चच्योट, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।
बनाम
आम जनता
विषय..--दरख्वास्त बाबत पुनम शर्मा पुत्री श्री कर्म सिंह, गांव बाग, डाकघर जाच्छ, तहसील चच्योट का नाम ग्राम पंचायत धिस्ती के जन्म रजिस्टर में दर्ज करने बारे।
अधोहस्ताक्षरी के कार्यालय में श्रीमती प्रमिला देवी पत्नी श्री कर्म सिंह, निवासी गांव बाग, डाकघर जाच्छ, तहसील चच्योट, जिला मण्डी (हि0 प्र0) ने आवेदन प्रस्तुत किया है कि उनकी पुत्री कुमारी पुनम शर्मा पुत्री कर्म सिंह का नाम ग्राम पंचायत धिस्ती के जन्म रजिस्टर में दर्ज नहीं है। मुताबिक रिपोर्ट M.O. Mandi , पत्र क्रमांकः HFW (MND) (Birth & Death) 2018-10203 दिनांक 10-10-2018, कुमारी पुनम शर्मा पुत्री कर्म सिंह की जन्म तिथि 16-05-2014 है। प्रार्थी ने आग्रह किया है कि उनकी पुत्री की जन्म तिथि 16-05-2014 ही है, को सम्बन्धित ग्राम पंचायत के जन्म रजिस्टर में दर्ज किया जाए। प्रार्थी ने आवेदन-पत्र 5990 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 के साथ साक्ष्य के रूप में रिपोर्ट चिकित्सा अधिकारी, शपथी-पत्र, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग का प्रारुप-2, अप्राप्यता प्रमाण-पत्र साथ संलग्न है।
अतः इस आशय की जानकारी आम जनता को हो या कोई उजर/एतराज हो तो वह एक माह के भीतर अपना पक्ष दिनांक 19-11-2018 तक प्रस्तुत कर सकते हैं। इस इश्तहार के प्रकाशन के पश्चात् किसी भी प्रकार का उजर/एतराज मान्य नहीं होगा एवं आदेश पारित कर दिए जाएंगे।
आज दिनांक 18-10-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर से जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी,
चच्योट स्थित गोहर, जिला मण्डी, हि0 प्र0।
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In the Court of Shri Anil Sharma, Sub-Divisional Magistrate, Shimla (R),
District Shimla (H. P.)
Smt. Surekha w/o Shri Raj Kumar, r/o Village Chouri, P.O. and Sub-Tehsil Junga, District Shimla.
Versus
General Public
. . Respondent.
Whereas Smt. Surekha w/o Shri Raj Kumar, r/o Village Chouri, P.O. and Sub-Tehsil Junga, District Shimla Himachal Pradesh has filed an application alongwith affidavit in the court of undersigned under section 13(3) of the Birth & Death Registration Act, 1969 to correct the date of birth of her own named Smt. Surekha w/o Shri Raj Kumar, r/o Village Chouri, P.O. and Sub- Tehsil Junga, District Shimla Himachal Pradesh in the record of Secy., Birth and Death, Gram Panchayat Junga, Sub-Tehsil Junga, District Shimla.
| Sl. No. | Name of the family member | Relation | Date of birth |
| 1. | Surekha | Own | 05-06-1970 |
Hence, this proclamation is issued to the general public if they have any objection/claim regarding correction of date of birth of above named in the record of Secy., Birth and Death, Gram Panchayat of Junga, Sub- Tehsil Junga, District Shimla may file their claims/objections on or before one month of publication of this notice in Govt. Gazette in this court, failing which necessary orders will be passed.
Issued today 01-11-2018 under my signature and seal of the court.
Seal.
Sd/-
Sub-Divisional Magistrate,
Shimla (R), District Shimla.
5991 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940In the Court of Shri Anil Sharma, Sub-Divisional Magistrate, Shimla (R),
District Shimla (H. P.)
Smt. Darshan Devi w/o Late Shri Kali Ram, r/o Village Behal, P.O. Neen, Tehsil Sunni, District Shimla.
Versus
General Public
. . Respondent.
Whereas Smt. Darshan Devi w/o Late Shri Kali Ram, r/o Village Behal, P.O. Neen, Tehsil Sunni, District Shimla, Himachal Pradesh has filed an application alongwith affidavit in the court of undersigned under section 13(3) of the Birth & Death Registration Act, 1969 to enter the name and date of birth of her son named—Bhupender Kumar s/o Smt. Darshan Devi w/o Late Shri Kali Ram, r/o Village Behal, P.O. Neen, Tehsil Sunni, District Shimla, Himachal Pradesh in the record of Secy., Birth and Death, Gram Panchayat Ghaini, P.O. Neen, Tehsil Sunni, District Shimla.
| Sl. No. | Name of the family member | Relation | Date of birth |
| 1. | Bhupender Kumar | Son | 20-5-1985 |
Hence, this proclamation is issued to the general public if they have any objection/claim regarding entry of date of birth of above named in the record of Secy., Birth and Death, Gram Panchayat Ghaini, P.O. Neen, Tehsil Sunni, District Shimla may file their claims/objections on or before one month of publication of this notice in Govt. Gazette in this court, failing which necessary orders will be passed.
Issued today 29-10-2018 under my signature and seal of the court.
Seal.
Sd/-
Sub-Divisional Magistrate,
Shimla (R), District Shimla.
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ब अदालत श्री विजय कुमार राय, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, ऊना़, तहसील व जिला ऊना (हि0 प्र0)
श्री पोहू लाल पुत्र बन्सी लाल पुत्र मस्तु, जात ब्राहम्ण, वासी भड़ोलियां कलां, तहसील व जिला ऊना . .सायल। (हि0 प्र0)
बनाम
आम जनता
राजस्व अभिलेख में नाम दरूस्ती हेतु प्रार्थना-पत्र।
श्री पोहू लाल पुत्र बन्सी लाल पुत्र मस्तु, जात ब्राहम्ण, वासी भड़ोलियां कलां, तहसील व जिला ऊना (हि0 प्र0) ने प्रार्थना-पत्र मय शपथ-पत्र दिया है कि राजस्व अभिलेख उप-महाल भड़ोलियां गुगाड़ा में खेवट नं0 92, खतौनी नं0 92 में प्रार्थी का नाम पोहू राम पुत्र बन्सी लाल पुत्र मस्तु दर्ज है जो गलत है। अतः उसने राजस्व अभिलेख में अपना नाम दरूस्त करने बारे प्रार्थना की है। 5992 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 05 नबम्बर, 2018/14 कार्तिक, 1940 अतः इस इश्तहार राजपत्र, हिमाचल प्रदेश द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त नाम राजस्व अभिलेख में दरूस्ती इन्द्राज बारे कोई आपत्ति/एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन दिनांक 19-11-2018 को सुबह 10.00 बजे हाजिर होकर आपत्ति/एतराज प्रस्तुत कर सकता है अन्यथा श्री पोहू लाल पुत्र बन्सी लाल पुत्र मस्तु, जात ब्राहम्ण, वासी भड़ोलियां कलां, तहसील व जिला ऊना (हि0 प्र0) के नाम दरूस्ती उप-महाल भड़ोलियां गुगाड़ा, में खेवट नं0 92, खतौनी नं0 92 के राजस्व अभिलेख में करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।
मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से दिनांक 17-10-2018 को जारी किया गया।
मोहर। हस्ताक्षरित/-
तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी,
ऊना़, जिला ऊना (हि0 प्र0)।
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ब अदालत श्री विजय कुमार राय, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, ऊना़, तहसील व जिला ऊना (हि0 प्र0)
श्री शाम लाल पुत्र बन्सी लाल पुत्र मस्तु, जात ब्राहम्ण, वासी भड़ोलियां कलां, तहसील व जिला ऊना . .सायल। (हि0 प्र0)
बनाम
आम जनता
राजस्व अभिलेख में नाम दरूस्ती हेतु प्रार्थना-पत्र।
श्री शाम लाल पुत्र बन्सी लाल पुत्र मस्तु, जात ब्राहम्ण, वासी भड़ोलियां कलां, तहसील व जिला ऊना (हि0 प्र0) ने प्रार्थना-पत्र मय शपथ-पत्र दिया है कि राजस्व अभिलेख उप-महाल भड़ोलियां गुगाड़ा में खेवट नं0 92, खतौनी नं0 92 में प्रार्थी का नाम राज कुमार पुत्र बन्सी लाल पुत्र मस्तु दर्ज है जो गलत है। अतः उसने राजस्व अभिलेख में अपना नाम दरूस्त करने बारे प्रार्थना की है।
अतः इस इश्तहार राजपत्र, हिमाचल प्रदेश द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त नाम राजस्व अभिलेख में दरूस्ती इन्द्राज बारे कोई आपत्ति/एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन दिनांक 19-11-2018 को सुबह 10.00 बजे हाजिर होकर आपत्ति/एतराज प्रस्तुत कर सकता है अन्यथा श्री शाम लाल पुत्र बन्सी लाल पुत्र मस्तु, जात ब्राहम्ण, वासी भड़ोलियां कलां, तहसील व जिला ऊना (हि0 प्र0) के नाम दरूस्ती उप-महाल भड़ोलियां गुगाड़ा में खेवट नं0 92, खतौनी नं0 92 के राजस्व अभिलेख में करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।
मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से दिनांक 17-10-2018 को जारी किया गया।
मोहर। हस्ताक्षरित/-
तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी,
ऊना, जिला ऊना (हि0 प्र0)। नियन्त्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, हिमाचल प्रदेश, शिमला-5 द्वारा मुद्रित तथा प्रकाशित इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरित राजपत्र, वैबसाइट http://rajpatrahimachal.nic.in पर उपलब्ध है एवम् ऑनलाइन सत्यापित किया जा सकता है