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Himachal Pradesh Gazette · Government of Himachal Pradesh

Himachal Pradesh Gazette, No. 185, 17 December 2018

Published 17 December 2018

Gazette no.
185
Gazetteid
185/GAZETTE/2018-17/12/2018
Identifier
in.gazette.himachal.2018-12-17.185_gazette_2018-17_12_2018
Languages
English, Hindi
Published at
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राजपत्र, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित सोमवार, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940

हिमाचल प्रदेश सरकार

लोक निर्माण विभाग

अधिसूचना

शिमला-2, 6 दिसम्बर, 2018

संख्याः पी0बी0डब्ल्यू(बी0)एफ0(5)47/2018.--यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामतः गांव कोट/114 व 185-राजपत्र/2018-17-12-2018 (6741) 6742 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 सांवीधार/133, तहसील करसोग, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश मे महोता-बगशाड़ सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्‌द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।

2. यह अधिसूचना ऐसे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 (2013 का 30) की धारा-11 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।

3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों/कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।

4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षे़त्र में कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपाि हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के साठ (60) दिन की अवधि के भीतर भू0-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, मण्डी, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपाि दायर कर सकता है।

विवरणी

जिला तहसील गांव खसरा नं0 क्षेत्र (बीघा मे ं )
मण्डी करसोग कोट/114 430/1 00-15-13
सांवीधार/133 459/1 00-05-05
629/1 00-07-00
961/1 00-13-03
कुल जोड़ . . कित्ता-4 02-01-01

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- (मनीषा नंदा), अति0 मुख्य सचिव (लोक निर्माण)।

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लोक निर्माण विभाग

अधिसूचना

शिमला-2, 6 दिसम्बर, 2018

संख्या पी0बी0डब्ल्यू0(बी0)एफ0(5)15/2018.--यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामत गांव सोमगढ़/634, तहसील बालीचौकी, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश में बसान से सोमगढ़ सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्‌द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।

2. यह अधिसूचना ऐसे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 (2013 का 30) की धारा-11 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।6743 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों/कर्मचारियों और श्रमिकाें को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।

4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेत्र में कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपाि हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के साठ (60) दिन की अवधि के भीतर भू0-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, मण्डी, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपाि दायर कर सकता है।

विवरणी

जिला तहसील गांव खसरा नं0 क्षेत्र (है0 में)
मण्डी बालीचौकी सोमगढ़/634 568 0-7-16
कुल जोड़ . . कित्ता-1 0-7-16

आदेश द्वारा,

हस्ताक्षरित/- (मनीषा नंदा), अति0 मुख्य सचिव (लोक निर्माण)।

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लोक निर्माण विभाग

अधिसूचना

शिमला-2, 6 दिसम्बर, 2018

सं0 पी0 बी0 डब्ल्यू0(बी0)एफ0(5)36/2018.--यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामतः गांव बन्टेरा, मौजा कोहला, तहसील नादौन, जिला हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश में जालन्धर-होशियारपुर-गगरेट-मुबारिकपुर-अम्ब-नादौन- हमीरपुर-टौणीदेवी-अवाहदेवी-धर्मपुर-कोटली राष्ट्रीय उच्च मार्ग-70 (नया 03) कि0 मी0 111/503 से कि0 मी0 111/616 तक सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्‌द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।

2. यह अधिसूचना ऐसे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 (2013 का 30) की धारा-11 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।

3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों/कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उस धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं। 6744 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षे़त्र में कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपाि हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के साठ (60) दिन की अवधि के भीतर भू0-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, मण्डी, हिमाचल प्रदेश के समक्ष लिखित आपाि दायर कर सकता है।

विवरणी

जिला तहसील गांव खसरा नं0 रकवा (है0 में)
हमीरपुर नादौन बन्टेरा 173 0-01-71
कित्ता-1 0-01-71

आदेश द्वारा,

हस्ताक्षरित/- (मनीषा नंदा), अति0 मुख्य सचिव (लोक निर्माण)।

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लोक निर्माण विभाग

अधिसूचना

शिमला-2, 6 दिसम्बर, 2018

सं0 पी0 बी0 डब्ल्यू0(बी0)एफ0(5) 66/2017.--यतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को यह प्रतीत होता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार को सरकारी व्यय पर सार्वजनिक प्रयोजन हेतु नामतः गांव पालियों, तहसील नाहन, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश में माजरी बरमा पापड़ी-मीरपुर कोटला सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित करनी अपेक्षित है, अतएव एतद्‌द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि उक्त परिक्षेत्र में जैसा कि निम्न विवरणी में निर्दिष्ट किया गया है, उपरोक्त प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन अपेक्षित है।

2. यह अधिसूचना ऐसे सभी व्यक्तियों को, जो इससे सम्बन्धित हो सकते हैं, की जानकारी के लिए भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 (2013 का 30) की धारा-11 के उपबन्धों के अन्तर्गत जारी की जाती है।

3. पूर्वोक्त धारा द्वारा प्रदत्त शक्तियाें का प्रयोग करते हुए राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश इस समय इस उपक्रम में कार्यरत सभी अधिकारियों उनके कर्मचारियों और श्रमिकों को इलाके की किसी भी भूमि में प्रवेश करने और सर्वेक्षण करने तथा उप धारा द्वारा अपेक्षित अथवा अनुमतः अन्य सभी कार्यों को करने के लिए सहर्ष प्राधिकार देते हैं।

4. कोई भी हितबद्ध व्यक्ति जिसे उक्त परिक्षेत्र में कथित भूमि के अर्जन पर कोई आपत्ति हो तो वह इस अधिसूचना के प्रकाशित होने के साठ दिन की अवधि के भीतर लिखित रूप में भू0-अर्जन समाहर्ता, लोक निर्माण विभाग, विन्टर फिल्ड शिमला (हि0 प्र0) के समक्ष अपनी आपत्ति दायर कर सकता है।6745 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 विवरणी

जिला तहसील गांव खसरा नं0 रकवा (है0 में)
सिरमौर नाहन पालियों 152/1 0-02-00
153/1 0-00-11
कित्ता-2 0-02-11

आदेश द्वारा,

हस्ताक्षरित/- (मनीषा नंदा), अति0 मुख्य सचिव (लोक निर्माण)।

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लोक निर्माण विभाग

शुद्धि-पत्र

शिमला-2, 7 दिसम्बर, 2018

सं0 पी0बी0डब्ल्यू0(बी0)एफ0(5)68/2016.--इस विभाग द्वारा भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 (2013 का 30) की धारा 11 के अन्तर्गत जारी समसंख्यक अधिसूचना दिनांक 05-04-2017 जिसके अन्तर्गत गांव बाडी, तहसील कोटखाई, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश में धाली-डकाहल वैली सड़क के निर्माण हेतु भूमि अर्जित की जा रही है में "खसरा नं0 425/1, रकबा 00-00-85 हैक्टेयर'' के स्थान पर "खसरा नं0 425/2, रकबा 00-00-85 हैक्टेयर" पढ़ा जाए।

आदेश द्वारा,

हस्ताक्षरित/- (मनीषा नंदा), अति0 मुख्य सचिव (लोक निर्माण)।

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उद्योग विभाग

(भौमिकीय शाखा)

शुद्धि-पत्र

शिमला-171 001, ..........................., 2018

संख्या उद्योग-भू0(खनि0-4)लघु-633/2018.--सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि जिला चम्बा की लघु खनिज खानों/खड्‌डों की निविदा एवं नीलामी बारे दिनांक 30-11-2018 को प्रमुख समाचार- पत्रों में प्रकाशित सूचना एवम्‌ हिमाचल प्रदेश सरकार के राजपत्र में जारी अधिसूचना संख्या उद्योग-भू0 (खनि0-4) लघु-633/2018-8231-8238 दिनांक 4-12-2018 के सम्बन्ध में, दिनांक 21-12-2018 को 6746 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 प्रस्तावित उक्त निविदा एवं नीलामी की पूर्व में जारी नियम एवं शर्तों में संशोधन किया गया है। संशोधित शर्तों के प्रारूप के अवलोकन हेतु किसी भी कार्य दिवस में राज्य भू0-विज्ञानी, हिमाचल प्रदेश, शिमला-171001 (दूरभाष नं0 0177-2657339) अथवा खनि0 अधिकारी, जिला चम्बा, हिमाचल प्रदेश (दूरभाष नं0 01899-223843) के कार्यालय में सम्पर्क किया जा सकता है। संशोधित शर्तों का प्रारूप विभाग की वेबसाईट www.emerginghimacal.hp.gov.in पर भी उपलब्ध है।

अतः आप से अनुरोध है कि उपरोक्त सूचना को व्यापक प्रचार हेतु हिन्दी व अंग्रेजी के चार अग्रणी दैनिक समाचार-पत्रों में प्रकाशित करवाने की कृपा करें।

हस्ताक्षरित/- राज्य भू0-विज्ञानी, हिमाचल प्रदेश।

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निविदा-एवं-नीलामी शर्तें :

1. विभाग द्वारा जिला चम्बा में खाली पड़ी लघु खनिज की खानोेें को हिमाचल प्रदेश गौण खनिज (रियायत) और खनिज (अवैध खन्‌न उसके परिवहन और भण्डारण का निवारण) नियम, 2015 के अन्तर्गत खन्‌न हेतु निविदा व खुली नीलामी द्वारा आबंटित किया जायेगा। खन्‌न हेतु रायल्टी राशि के एवज मेें विभाग द्वारा प्रतिवर्ष के आधार पर निविदा/नीलामी राशि वसूल की जायेगी तथा निविदा/नीलामी उच्चतम निविदा/नीलामी देेने वाले व्यक्ति के पक्ष में प्रदान की जायेगी। 2. निविदा/नीलामी राशि प्रतिवर्ष के आधार पर ली जाएगी तथा राशि उसी दर पर दो वर्ष तक वसूल की जाएगी, उसके उपरान्त ठेके की शेष अवधि के दौरान निविदा/नीलामी राशि के अतिरिक्त उक्त राशि पर प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत बढ़ौतरी चक्रवृद्धि ब्याज की दर से अतिरिक्त राशि वसूल की जाएगी।

3. निविदा/नीलामी देने वाला व्यक्ति किसी भी जिला में खन्‌न से सम्बन्धित देय राशि का बकायादार नहीं होना चाहिए। यदि कोई निविदा/नीलामी देने वाला व्यक्ति विभाग के बकायादार होने का दोषी पाया जाता है तो उस व्यक्ति को निविदा/नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जायेगी । यदि कोई बकायादार व्यक्ति कोई खान निविदा/नीलामी पर ले लेता है, जिसका विभाग को बाद में ज्ञान होता है तो उस अवस्था में उस व्यक्ति द्वारा जमा राशि, बकाया राशि में समायोजित कर दी जाएगी तथा खान का ठेका रद्‌द करके खानो की पुनः नीलामी आमंत्रित की जाएगी।

4. सफल निविदादाता/बोलीदाता एक वर्ष के लिए दी गई बोली राशि की 25 प्रतिशत राशि निविदा/नीलामी खुलने के समय प्रस्तुत करेगा जो कि जमानत राशि होगी। इसके अतिरिक्त निविदा/नीलामी राशि के आधार पर आयकर, पंचायत टैक्स, District Mineral Foundation Fund व अन्य टैक्स/राशि समय-समय पर जो नियमानुसार देय है उच्चतम निविदा दाता/बोलीदाता को जमा करवाने होेंगे। प्रथम वर्ष की निविदा/नीलामी राशि के 25 प्रतिशत के बराबर राशि उच्चतम निविदादाता/बोलीदाता द्वारा Upfront Premium के रूप में जमा करवानी होगी जो कि देय त्रैमासिक किस्त में समायोजित की जाएगी। यह Upfront Premium राशि उच्चतम निविदादाता/बोलीदाता द्वारा Letter of Intent जारी किए जाने की तिथि से एक महीने की अवधि के भीतर जमा करवानी होगी अन्यथा जमा करवाई गई जमानत राशि को जब्त करके खान को पुनः नीलाम किया जायेगा।

5. नीलामी के समय दी जाने वाली बोली यदि 10 लाख रुपये की सीमा से बढ़ जाती है तो उस अवस्था में बोलीदाताओं द्वारा अगली बोली 50 हजार रुपये प्रति बोली के आधार पर ही देनी6747 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 होगी। इसके अतिरिक्त अगर यह सीमा 25 लाख रुपये से बढ़ जाती है तो उस अवस्था में अगली बोली एक लाख रुपये प्रति बोली के हिसाब से देनी होगी।

6. बोली के दौरान यदि कमेटी को यह आभास होता है कि दी जाने वाली बोली पुलिंग (Pooling) आदि की वजह से संदयास्पद है या आशानुरूप कम आ रही है तो उस अवस्था में कमेटी को उक्त किसी खान की नीलामी प्रक्रिया को निलम्बित करने का अधिकार होगा।

7. यदि कोई निविदादाता/बोलीदाता किसी लघु खनिज खान के खनिज अधिकारों की बोली देता है, परन्तु जमानत राशि निविदा/नीलामी प्रक्रिया सम्पन्न होने के समय जमा नहीं करवाता है या निविदा/नीलामी प्रक्रिया सम्पन्न होने के उपरान्त अनुपस्थित हो जाये, उस स्थिति में उस द्वारा जमा की गई अग्रिम धरोहर राशि जब्त कर ली जायेगी और भविष्य में कम से कम 5 वर्ष के लिए प्रदेश में किसी भी स्थान पर ऐसा व्यक्ति निविदा/नीलामी में हिस्सा नही ले सकेगा तथा उक्त खानों/खड्‌डों कीे पुनः निविदा/नीलामी आमंत्रित की जायेगी।

8. जिन खानों/खड्‌डों के खनिज अधिकारों को निविदा/नीलामी हेतु अधिसूचित किया गया है उनके खसरा नं0/राजस्व रिकार्ड या फिर भौगोलिक सीमा/स्थाई चिन्हों की जानकारी, इच्छुक व्यक्ति सम्बन्धित खनि0 अधिकारी से प्राप्त कर सकता है व क्षेत्र का निरीक्षण भी अपने स्तर पर कर सकता है, ताकि क्षेत्र के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकें। निविदा/नीलामी केवल उसी क्षेत्र की होगी, जो कि अधिसूचना में प्रस्तावित किए गए हैं जिसका पूर्ण विवरण सम्बन्धित खनि0 अधिकारी के कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है। इस बारे में बाद में कोई भी आपत्ति स्वीकार्य नही होगी।

9. 08 हैक्टेयर तक के क्षेत्र हिमाचल निवासियों के लिए आरक्षित होंगे ताकि स्थानीय लोगांें को रोजगार सुनिश्चित किया जा सके। उक्त लाभ प्राप्त करने के लिए निविदादाता/बोलीदाता को निविदा/नीलामी से पूर्व खन्‌न अधिकारी के समक्ष, अपना हिमाचली निवासी होने का प्रमाण-पत्र (Bonafide Certificate) जो कि सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया हो प्रस्तुत करना अनिवार्य है। यदि 8 हैक्टेयर व उससे कम क्षेत्र वाली खड्‌डों हेतु कोई भी हिमाचली निविदा दाता/बोलीदाता बोली नहीं देता है तो उस अवस्था में कोई भी गैर-हिमाचली उक्त खड्‌डों की बोली दे सकता है।

10. अगर पीठासीन अधिकारी को लगे कि निविदा/नीलामी द्वारा प्राप्त राशि किसी खान की अपेक्षित राशि के अनुरूप कम है तो उस स्थिति में समिति निविदा/नीलामी द्वारा खान को आबंटित न करने के लिए सिफारिश कर सकती है। खानों के न्यूनतम आरक्षित मूल्य खनि0 अधिकारी कार्यालय में उपलब्ध है।

11. खनिजों के दोहन हेतु पर्यावरण प्रभाव आंकलन (EIA Clearance) तथा वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के अन्तर्गत (अगर अनिवार्य हो तो) स्वीकृतियां ठेकेदार/सफल निविदादाता/बोलीदाता द्वारा अपने स्तर पर व अपने खर्च व जोखिम पर सक्षम Authority से Letter of Intent जारी होने की तिथि से दो वर्ष के भीतर प्राप्त करनी हाेंगी। यदि उच्चतम बोलीदाता इस अवधि में Environment clearance या वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के अन्तर्गत स्वीकृति प्राप्त करने में असमर्थ रहता है तो उस स्थिति में उच्चतम निविदादाता/बोलीदाता द्वारा Environment clearance व अन्य स्वीकृतियां प्राप्त करने बारे की गई प्रगति की समीक्षा करने के उपरान्त Letter of Intent की अवधि को आगामी एक वर्ष तक समय बढ़ौतरी बारे निदेशक उद्योग द्वारा निर्णय लिया जायेगा तथा इस बढ़ाये हुए एक वर्ष की अवधि तक भी अगर उच्चतम निविदा दाता/बोलीदाता यह स्वीकृतियां प्राप्त नहीं करता है तो Letter of Intent की अवधि के आगामी समय बढ़ौतरी बारे केवल सरकार द्वारा ही निर्णय लिया जायेगा । तदोपरांत यदि सफल उच्चतम निविदादाता/बोलीदाता Environment clearance व अन्य स्वीकृतियां प्राप्त करने में असमर्थ रहता है तो उस अवस्था में Letter of Intent रद्‌द करके उसके द्वारा दी गई जमानत राशि व अन्य जमा करवाई गई राशियां जब्त कर ली जायेगी। EIA प्राप्त करने के उपरान्त ही सफल6748 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 उच्चतम निविदादाता/बोलीदाता को जिस क्षेत्र के लिए उसने निविदा/नीलामी दी थी उस क्षेत्र में खन्‌न कार्य करने की अनुमति प्रदान की जाएगी। Environment clearance व वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के अन्तर्गत की गई प्रगति के बारे में ठेकेदार समय-समय पर विभाग को अवगत्‌ करवायेगा।

12. रेत, पत्थर व बजरी आदि की लघु खनिज खानों की अधिकतम अवधि 10 वर्ष सरकारी भूमि के लिए व वन विभाग से सम्बन्धित 15 वर्ष होगी तथा उच्चतम निविदादाता/बोलीदाता को खान में कार्य करने से पूर्व अपने स्तर पर पर्यावरण एवं वन मन्त्रालय भारत सरकार से खान क्षेत्र का पर्यावरण प्रभाव आंकलन स्वीकृति (EIA Clearance) व वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के अन्तर्गत स्वीकृति (अगर अनिवार्य हो तो) व Registered Qualified Person से Mining Plan बनवाना अनिवार्य है। उच्चतम निविदादाता/बोलीदाता के पक्ष में सक्षम अधिकारी द्वारा सरकार से स्वीकृति के पश्चात्‌ निविदा/नीलामी खुलने के एक महीने के उपरान्त Letter of Intent जारी किया जाएगा ताकि उच्चतम बोलीदाता खान क्षेत्र का पर्यावरण प्रभाव आंकलन स्वीकृति सक्षम Authority से तय सीमा जो कि 2 वर्ष की है के भीतर प्राप्त कर सकें। Letter of Intent में दर्शाई गई शर्तों की अनुपालना के उपरान्त उच्चतम निविदादाता/बोलीदाता के पक्ष में नियमानुसार स्वीकृति आदेश जारी किए जाएंगे ताकि शर्तनामा निष्पादन किया जा सके। शर्तनामा निष्पादन करने से पूर्व सभी औपचारिकताएं पूर्ण करने पर सफल उच्चतम निविदा दाता/बोलीदाता द्वारा सम्बन्धित कर आदि के रूप में राशि खनि0 अधिकारी के कार्यालय में जमा करवाना अनिवार्य होगा व शेष वर्षों में भी 25 प्रतिशत त्रैमासिक किश्त के आधार पर बकाया राशि समय-समय पर खनि0 अधिकारी के कार्यालय में शर्त नं0 2 के अनुसार अग्रिम रूप से जमा करवानी होगी।

13. निविदा/नीलामी केवल उसी अवस्था में स्वीकार होगी, यदि निविदा/नीलामी किसी सक्षम अधिकारी द्वारा अनुमोदित की गई हो।

14. शर्तनामा निष्पादन करने के उपरान्त उच्चतम निविदादाता/बोलीदाता, निविदा/नीलामी में लिए गये क्षेत्र से पांच वर्ष के लिए अनुमोदित Mining Plan के अनुरूप कार्य करेगा। Mining Plan में आंकलित खनिज से अधिक मात्रा में खनिज निकालने पर ठेका रद्‌द किया जा सकता है। पांच वर्ष पूर्ण होने के उपरान्त ठेकेदार को Mining Plan फिर से अनुमोदित करवाना होगा जिसके लिए वह नियमानुसार Mining Plan की अवधि के समाप्त होने से कम से कम 120 दिन पूर्व नवीकरण के लिए आवेदन करेगा ।

15. नीलामी कमेटी को अधिकार है कि वे नीलामी के समय किन्हीं विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग से शर्तें लगा सकते हैं जो कि सभी इच्छुक व्यक्ति को मान्य होगी। इसके अतिरिक्त खन्‌न सम्बन्धी जो दिशा-निर्देश सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए जायेंगे वे भी सभी को मान्य होंगे। नीलामी कमेटी को यह अधिकार है कि वह किसी भी निविदा/नीलामी क्षेत्र को बिना कारण बताए अस्वीकार कर सकती है। निविदा/नीलामी के दौरान यदि कोई बोलीदाता दुव्र्यवहार करता है तो पीठासीन अधिकारी को यह अधिकार होगा कि वह उस द्वारा जमा की गई अग्रिम धरोहर राशि जब्त करते हुये उसे निविदा/नीलामी में हिस्सा लेने के लिए अयोग्य घोषित कर सकता है तथा इस बारे में पीठासीन अधिकारी द्वारा विस्तृत रिपोर्ट सरकार को प्रेषित की जायेगी।

16. निविदा/नीलामी पर लिए गये क्षेत्र से उठाए गये खनिज को किसी स्थापित स्टोन क्रशर में उपयोग करने हेतु अनुमति नहीं होगी परन्तु यदि कोई निविदादाता/बोलीदाता, निविदा/ नीलामी पर लिए गये खनिजों को अपने पहले से ही स्थापित स्टोन क्रशर में उपयोग में लाना चाहता है या नया स्टोन क्रशर स्थापित करना चाहता है तो उक्त क्रशर स्थल की दूरी निविदा/नीलामी में लिए गये क्षेत्र से नियमों के अन्तर्गत दशाई गई दूरी के अनुसार होनी चाहिए परन्तु इस स्थिति में उसे बोलडर की खुली बिक्री करने की अनुमति नहीं होगी। नया स्टोन क्रशर लगाने हेतु सरकार द्वारा जारी किए गये नियमों/अधिसूचनाओं के अन्तर्गत अनुमति6749 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 प्राप्त करनी अनिवार्य होगी। इसके अतिरिक्त किसी खान के लिए यदि निविदादाता/बोलीदाता एक से अधिक व्यक्ति हाें तो उस स्थिति में उच्चतम निविदादाता/बोलीदाता को नीलामी क्षेत्र से उठाऐ गए खनिजों को अपने पक्ष में पहले से स्थापित केवल एक ही स्टोन क्रशर में प्रयोग करने की अनुमति होगी लेकिन यदि निविदा एवं नीलामी पर दिए जाने वाली लघु खनिज खान का क्षेत्र 2 हैक्टेयर से कम हो तो ऐसी अवस्था में उक्त खान (2 हैक्टेयर से कम क्षेत्र) के आधार पर, नया स्टोन क्रशर स्थापित करने की अनुमति नहीं होगी।

17. जनहित में यदि आवश्यक हो तो किसी भी निविदा/नीलामी में ली गई खान के भाग को कम किया जा सकता है या खान को पूर्ण रूप से भी बन्द किया जा सकता है। क्षेत्र कम करने की अवस्था में ठेका राशि भी उसी अनुपात में कम की जाएगी।

18. निविदा हेतु प्रस्तावित लघु खनिज खानों/खड्‌डों की सूची में क्रम संख्या 10, 11, 12 व 13 में उल्लिखित क्षेत्र भारत के संविधान के अनुच्छेद 244 के खण्ड (1) में यथानिर्दिष्ट अनुसूचित क्षेत्र के अन्तर्गत आते हैं अतः निविदादाता/बोलीदाता द्वारा खन्‌न से पूर्व हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 व पंचायतों के प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 के प्रावधानों के अनुसार सम्बन्धित ''ग्राम सभा'' से मंजूरी प्राप्त करना आवश्यक है।

19. निविदा हेतु प्रस्तावित लघु खनिज खानों/खड्‌डों की सूची में क्रम संख्या 10, 11, 12 व 13 में उल्लिखित क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र के अन्तर्गत आते हैं। अतः इन क्षेत्रों के मामलों में गैर-जनजातिय निविदादाता/बोलीदाता को खन्‌न से पूर्व माननीय उच्च्तम न्यायालय द्वारा समताः बनाम आंध्र प्रदेश व अन्य के मामले में पारित निर्णय के अनुरूप वांछित अनुमति लेना अनिवार्य है। 20. खन्‌न हेतु मशीन उपकरण Mechanical/Hydraulic Excavator/जैसे जे0सीबी0 इत्यादि के प्रयोग की स्वीकृति हि0 प्र0 गौण खनिज (रियायत) और खनिज (अवैध खन्‌न उसके परिवहन और भण्डारण का निवारण) नियम, 2015 व समय-समय पर संशोधित उक्त नियमों के प्रावधानों के अन्तर्गत एवम्‌ Environment Clearance में दर्शाई गई शर्तांे के अनुरूप ही दी जाएगी तथा सक्षम अधिकारी से स्थल निरीक्षण के उपरान्त इस बारे स्वीकृति लेना आवश्यक है। 21. खान/नदी/खड्‌ड में पहुंचने के लिए मार्ग बनाने व प्रयोग करने हेतु ठेकेदार सम्बन्धित पक्षों/ विभागों से अनुमति अपने स्तर पर प्राप्त करेगा। खान तक पहुंचने के मार्ग के लिए विभाग की कोई जिम्मेवारी नहीं होगी।

22. नीलामी के लिए प्रस्तावित क्षेत्र में यदि कोई निजी भूमि पड़ती है या किसी अन्य व्यक्ति/ व्यक्तियों के भू0-स्वामित्व अधिकार हों तो इस अवस्था में ठेकेदार सम्बन्धित भू0-स्वामियों से अपने स्तर पर अनुमति प्राप्त करेगा व इस सम्बन्ध में विभाग की कोई जिम्मेवारी नहीं होगी। 23. बोल्डर व हाथ से तोड़ी गई रोड़ी को राज्य की सीमा से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं होगी। 24. अवैध खन्‌न को रोकने हेतु लघु खनिजों का परिवहन रात आठ बजे से प्रातः छः बजे तक प्रतिबन्धित रहेगा।

25. ठेका धारी को सुनिश्चित करना होगा कि उसके द्वारा लगाए गये मज़दूर, नदी/खड्‌ड में मछलियों का शिकार न करें।

26. खन्‌न कार्य नदी के धरातल से एक मीटर से अधिक गहराई में नहीं किया जाएगा। 27. खनिजों के एकत्रीकरण से भू0 स्वामित्वों के निहित अधिकारों में कोई भी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। 6750 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 28. यदि वर्णित शर्तों की अवहेलना होती है या साथ लगते वन क्षेत्र को किसी भी प्रकार की क्षति विभाग के ध्यान में लाई जाती है, तो इस बारे नियमानुसार कार्यवाही अम्ल में लाई जायेगी। 29. ठेकेदार ठेकेे पर स्वीकृत क्षेत्र से निकाले गये खनिजों की मात्रा का मासिक ब्यौरा विभाग को देगा।

30. खन्‌न कार्य हि0 प्र0 गौण खनिज (रियायत) और खनिज (अवैध खन्‌न उसके परिवहन और भण्डारण का निवारण) नियम, 2015 व समय-समय पर संशोधित उक्त नियमों के प्रावधानों, सरकार द्वारा अधिसूचित हिमाचल प्रदेश खनिज नीति, पर्यावरण प्रभाव आंकलन/वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के अन्तर्गत स्वीकृति की शर्तों के अनुसार, विभाग द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों, माननीय न्यायालयों के आदेशों के अनुरूप किया जाएगा। उपरोक्त नियमों/ अधिसूचना/आदेशों की प्रति, खनि0 अधिकारी कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है। 31. ठेके की स्वीकृति व खनन कार्य माननीय सर्वोच्च न्यायालय में लम्बित SLP (C) No. 13393/ 2008 जो कि माननीय उच्च न्यायालय में हिमाचल प्रदेश द्वारा याचिका संख्या C.W.P. No. 1077/2006 खतरी राम अन्य के मामले में पारित निर्णय के विरुद्ध दायर की गई है के अन्तिम निर्णय के अनुरूप ही मान्य होगा। इसके अतिरिक्त किसी अन्य न्यायालय द्वारा समय-समय पर इस बारे पारित आदेश भी मान्य होंगे।

32. ठेकेदार या उसका कोई भी कर्मचारी निविदा/नीलामी में लिए गये क्षेत्र की आड़ में यदि कहीं अवैध खन्‌न में संलिप्त पाया जाता है तो उसके विरुद्ध हि0 प्र0 गौण खनिज (रियायत) और खनिज (अवैध खन्‌न उसके परिवहन और भण्डारण का निवारण) नियम, 2015 व समय-समय पर संशोधित के प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। यदि ठेकेदार या उसका कोई भी कर्मचारी या वाहन अगर बार-बार अवैध खन्‌न व बिना "W" फार्म से ढुलान में सम्मिलित पाया जाता है तो सरकार उसका ठेका रद्‌द भी कर सकती है।

33. ठेका धारी सरकार को तृतीय पक्ष की क्षतिपूर्ति के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराएगा अतः वह स्वयं जिम्मेदार होगा।

34. सरकार को अधिकार है कि वे उच्चतम बोली को बिना किसी कारण बताये अस्वीकार कर सकती है।

35. सरकार को अधिकार है कि उपरोक्त मद्‌ संख्या 1-34 में दर्शायी गई शर्तों के अतिरिक्त अन्य शर्तें, ठेका शर्तनामा निष्पादन के दौरान लगा सकती है।

36. सरकार को अधिकार है कि उपरोक्त मद्‌ संख्या 1-34 में दर्शायी गई शर्तों, तथ्यों व नियमों की अवहेलना की अवस्था में ठेका रद्‌द भी किया जा सकता है तथा इस स्थिति में ठेकेदार द्वारा जमा राशि, जमानत राशि, Upfront Premium व त्रैमासिक किस्त जब्त कर ली जाएगी।

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हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय

अधिसूचना

शिमला-4, 12 दिसम्बर, 2018

संख्याः वि0स0-विधायन-विधेयक/1-58/2018.-हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक,6751 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 2018 (2018 का विधेयक संख्यांक 13) जो कि आज दिनांक 12 दिसम्बर, 2018 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्वसाधारण की सूचनार्थ राजपत्र में अधिसूचित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।

हस्ताक्षरित/- (यशपाल), सचिव, हि0 प्र0 विधान सभा।

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2018 का विधेयक संख्यांक 13 हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2018

(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)

हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (2017 का अधिनियम संख्यांक 10) का संशोधन करने के लिए विधेयक।

भारत गणराज्य के उनहारवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ.--(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) अधिनियम, 2018 है।

(2) इस अधिनियम की धारा 3 और धारा 30 के उपबन्ध प्रथम जुलाई, 2017 से प्रवृत्त हुए समझे जाएंगे और शेष उपबन्ध उस तारीख को प्रवृत्त होंगे जो सरकार राजपत्र (ई-गजट), हिमाचल प्रदेश में अधिसूचना द्वारा नियत करेः

परन्तु इस अधिनियम के विभिन्न उपबन्धों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और किसी ऐसे उपबन्ध में इस अधिनियम के प्रारम्भ के प्रति किसी निर्देश का अर्थान्वयन उस उपबन्ध के प्रवृा होने के प्रति निर्देश के रूप में किया जाएगा।

2. धारा 2 का संशोधन.--हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (जिसे इसमें इसके पश्चात्‌ 'मूल अधिनियम' कहा गया है) की धारा 2 में,-

(क) खण्ड (4) में, "अपील प्राधिकारी और अपील अधिकरण" शब्दों के स्थान पर, "अपील प्राधिकारी, अपील अधिकरण और धारा 171 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्राधिकारी" शब्द, अंक और चिन्ह रखे जाएंगेे;

(ख) खण्ड (16) में, "केन्द्रीय उत्पाद-शुल्क और सीमाशुल्क बोर्ड" शब्दों के स्थान पर, "केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमाशुल्क बोर्ड" शब्द रखे जाएंगेे;

(ग) खण्ड (17) के उपखण्ड (ज) के स्थान पर निम्नलिखित उपखण्ड रखा जाएगा, अर्थात्‌ः- "(ज) किसी घुड़दौड़ क्लब द्वारा योगक या अनुज्ञप्ति के माध्यम से बुकमेकर को उपलब्ध कराई गई सेवाएं या किसी अनुज्ञप्तिधारी बुकमेकर की ऐसे क्लब को सेवाएं; और";

(घ) खण्ड (18) का लोप किया जाएगा;

6752 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 (ङ) खण्ड (35) में, "खण्ड (ग)" शब्दों और चिन्हों के स्थान पर "खण्ड (ख)" शब्द और चिन्ह रखे जाएंगे;

(च) खण्ड (69) के उपखण्ड (च) में "अनुच्छेद 371" शब्दों और अंकाें के पश्चात्‌्‌ "और अनुच्छेद 371" शब्द, अंक और अक्षर अंतःस्थापित किए जाएंगे; और

(छ) खण्ड (102) के अन्त में निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ :-

''स्पष्टीकरण.--शंकाओं के निवारण के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि "सेवा" पद में प्रतिभूतियों में संव्यवहारों को सुकर बनाना या प्रबन्ध करना सम्मिलित है;"।

3. धारा 7 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 7 में,--

(क) उपधारा (1) में,--

(i) खंड (ख) में, "चाहे वह कारबार के दौरान या उसे अग्रसर करने के लिए हो या नहीं;" शब्दों और चिन्ह के पश्चात्‌, "और" शब्द अंतःस्थापित किया जाएगा और सदैव अंतःस्थापित किया गया समझा जाएगा;

(ii) खंड (ग) में, ''; और'' चिन्ह और शब्द के स्थान पर ''।'' चिन्ह रखा जाएगा और सदैव रखा गया समझा जाएगा।

(iii) खंड (घ) का लोप किया जाएगा और सदैव लोप किया गया समझा जाएगा;

(ख) उपधारा (1) के पश्चात्‌, निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाएगी और सदैव अंतःस्थापित की गई समझी जाएगी, अर्थात्‌ः-

"(1क) जहां कतिपय कार्यकलाप या संव्यवहार उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार कोई प्रदाय है, उन्हें अनुसूची 2 में यथानिर्दिष्ट माल का प्रदाय या सेवा का प्रदाय माना जाएगा।"; और (ग) उपधारा (3) में, "उपधारा (1) और उपधारा (2)" शब्दों, चिन्हों और अंकों के स्थान पर, "उपधारा (1), उपधारा (1क) और उपधारा (2)" शब्द, चिन्ह, अंक और अक्षर रखे जाएंगे।

4. धारा 9 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 9 की उपधारा (4) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रखी जाएगी, अर्थात्‌ः-

"(4) सरकार परिषद्‌ की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के एक वर्ग को विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जो किसी अरजिस्ट्रीकृत प्रदायकर्ता से प्राप्त माल या सेवाओं या दोनों के विनिर्दिष्ट प्रवर्गाेें के प्रदाय के सम्बन्ध में माल या सेवा या दोनों के ऐसे प्रदाय के प्राप्तिकर्ता के रूप में प्रतिलोम प्रभार के आधार पर कर का संदाय करेंगे तथा इस अधिनियम के सभी उपबंध ऐसे प्राप्तिकर्ता को लागू होंगे मानो वह माल या सेवा या दोनों के ऐसे प्रदाय के सम्बन्ध में कर का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति है।"।

5. धारा 10 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 10 में,--

(क) उपधारा 1 में,--

(i) "उसके द्वारा संदेय कर के स्थान पर ऐसी दर पर" शब्दों और चिन्हों के स्थान पर, "धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन उसके द्वारा संदेय कर के स्थान पर ऐसी दर पर संगणित कर की रकम" शब्द, अंक और चिन्ह रखे जाएंगे; और6753 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 (ii) परंतुक में, "एक करोड़ रुपए" शब्दों के स्थान पर, "एक करोड़ पचास लाख रुपए" शब्द और "।" चिन्ह के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा और तत्पश्चात्‌ निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ः-

"परंतु यह और कि कोई व्यक्ति, जो खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) के अधीन कर का संदाय करने का विकल्प लेता है, किसी राज्य में पूर्ववर्ती वित्त वर्ष में आवर्त के दस प्रतिशत से अनधिक मूल्य की सेवाओं (अनुसूची 2 के पैरा 6 के खंड (ख) में निर्दिष्ट से भिन्न) या पांच लाख रुपए, जो भी अधिक हो, का प्रदाय कर सकेगा।"; और

(ख) उपधारा (2) के खंड (क) के स्थान पर निम्नलिखित खंड रखा जाएगा, अर्थात्‌ः-

"(क) उपधारा (1) में यथा उपबंधित के सिवाय, वह सेवा के प्रदाय में नहीं लगा हुआ है;"। 6. धारा 12 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 12 की उपधारा (2) के खंड (क) में, "उपधारा (1)" शब्द, चिन्ह और अंक का लोप किया जाएगा।

7. धारा 13 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 13 की उपधारा (2) में, "की उपधारा (2)" शब्द, चिन्ह और अंक जहां-जहां आते हैं का लोप किया जाएगा।

8. धारा 16 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 16 की उपधारा (2) में,--

(क) खंड (ख) में, स्पष्टीकरण के स्थान पर निम्नलिखित स्पष्टीकरण रखा जाएगा, अर्थात्‌ः-- ''स्पष्टीकरण.--इस खंड के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति ने, यथास्थिति, माल या सेवा को प्राप्त किया हैः-

(i) जहां माल का परिदान किसी प्रदायकर्ता द्वारा किसी प्राप्तिकर्ता या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति के निदेश पर किया गया है, चाहे वह अभिकर्ता के रूप में या अन्यथा माल के संचलन से पूर्व या दौरान, माल के मालिकाना दस्तावेजों के अंतरण के माध्यम से या अन्यथा कार्य कर रहा हो; और

(ii) जहां किसी व्यक्ति को ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति के निदेश पर और उसके मद्‌दे प्रदायर्काा द्वारा सेवाएं प्रदान की जाती हैं।"; और

(ख) खंड (ग) में, "धारा 41" शब्द और अंक के पश्चात्‌ "या धारा 43क" शब्द, अंक और अक्षर अन्तःस्थापित किए जाएंगे।

9. धारा 17 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 17 में,--

(क) उपधारा (3) में निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ः-

''स्पष्टीकरण.-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए "छूट-प्राप्त प्रदाय का मूल्य" पद में उक्त अनुसूची के पैरा 5 में विनिर्दिष्ट से अन्यथा अनुसूची 3 में विनिर्दिष्ट कार्यकलापों या संव्यवहारों का मूल्य सम्मिलित नहीं होगा।"; और

(ख) उपधारा (5) के खंड (क) और खंड (ख) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड रखे जाएंगे, अर्थात्‌ः- "(क) तेरह से अनधिक (चालक सहित) बैठने की क्षमता रखने वाले व्यक्तियों के परिवहन के लिए मोटरयान, सिवाय तब जब उनका उपयोग निम्नलिखित कराधेय प्रदायों को करने के लिए किया जाता है, अर्थात्‌ः-6754 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 (i) ऐसे मोटरयानों का और प्रदाय; या

(ii) यात्रियाें का परिवहन; या

(iii) ऐसे मोटरयान को चलाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना;

(कक) जलयान और वायुयान, सिवाय तब जब उनका उपयोग-

(i) निम्नलिखित कराधेय प्रदायों को करने के लिए किया जाता है, अर्थात्‌ः-

(अ) ऐसे जलयानों और वायुयान के और प्रदाय; या

(आ) यात्रियाें का परिवहन; या

(इ) ऐसे जलयानों को चलाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना; या

(ई) ऐसे वायुयान को चलाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना; और

(ii) माल के परिवहन के लिए;

(कख) साधारण बीमा, सर्विसिंग, मुरम्मत और अनुरक्षण की सेवाओं से खंड (क) या खण्ड (कक) में निर्दिष्ट मोटरयान, जलयान या वायुयान, जहां तक ये इनसे सम्बन्धित हैं, से हैः

परन्तु ऐसी सेवाओं के सम्बन्ध में इनपुट कर प्रत्यय उपलब्ध होगा--

(i) जहां खंड (क) या खंड (कक) में निर्दिष्ट मोटरयान, जलयान या वायुयान का उपयोग उसमें विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए किया जाता है; और

(ii) जहां किसी कराधेय व्यक्ति द्वारा प्राप्त किया जाता है, जो-

(अ) ऐसे मोटरयान, जलयान या वायुयान के विनिर्माण में लगा हुआ है; या

(आ) उसके द्वारा बीमाकृत ऐसे मोटरयान, जलयान या वायुयान के सम्बन्ध में साधारण बीमा सेवाओं के प्रदाय में लगा हुआ है;

(ख) माल या सेवा या दोनों के निम्नलिखित प्रदाय-

(i) खाद्य और सुपेय, आउटडोर कैटरिंग, सौंदर्य उपचार, स्वास्थ्य सेवाएं, कॉस्मेटिक और प्लास्टिक शल्यक्रिया, खंड (क) या खंड (कक) में निर्दिष्ट मोटरयान, जलयान या वायुयान, सिवाय तब जब उनका उपयोग उनमें विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए किया जाता है, को पट्‌टे पर देने, किराए पर देने या भाड़े पर देने, जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमाः

परंतु ऐसे माल या सेवा या दोनों के सम्बन्ध में इनपुट कर प्रत्यय उपलब्ध होगा जब ऐसे माल या सेवा या दोनों के आवक प्रदाय का उपयोग किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा उसी प्रवर्ग के माल या सेवा या दोनों की जावक कराधेय प्रदाय के लिए या कराधेय समिश्र या मिश्रित प्रदाय के एक तत्व के रूप में किया जाता है;

(ii) किसी क्लब, स्वास्थ्य और फिटनेस केन्द्र की सदस्यता; और6755 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 (iii) छुट्‌टी या गृह यात्रा रियायत, जैसे अवकाश पर कर्मचारियों को विस्तारित यात्रा फायदेः परन्तु ऐसे माल या सेवा या दोनों के सम्बन्ध में इनपुट कर प्रत्यय उपलब्ध होगा, जहां किसी नियोक्ता के लिए अपने कर्मचारियों को तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन उपलब्ध करवाना बाध्यकर हो।"।

10. धारा 20 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 20 के स्पष्टीकरण के खंड (ग) में, "प्रविष्टि 84" शब्दों और अंकों के स्थान पर, "प्रविष्टि 84 और प्रविष्टि 92 क" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे। 11. धारा 22 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 22 में,--

(क) उपधारा (1) के परन्तुक के अंत में चिन्ह "।" के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा और तत्पश्चात्‌, निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ः

"परंतु यह और कि सरकार विशेष प्रवर्ग के किसी राज्य के अनुरोध पर तथा परिषद्‌ की सिफारिशों पर प्रथम परंतुक में निर्दिष्ट समग्र आवर्त को दस लाख रुपए से ऐसी रकम तक बढ़ा सकेगी, जो बीस लाख रुपए से अधिक नहीं होगी और ऐसी शर्तों और सीमाओं के अधीन रहते हुए, जो इस प्रकार अधिसूचित की जाए।"; और

(ख) स्पष्टीकरण के खंड (iii) में, "विशेष प्रवर्ग राज्यों से" शब्दों के पश्चात्‌ "जम्मू-कश्मीर राज्य और अरूणाचल प्रदेश, असम, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम और उत्तराखंड राज्यों के सिवाय" शब्द और चिन्ह अन्तःस्थापित किए जाएंगे।''।

12. धारा 24 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 24 के खंड (x) में "वाणिज्य ऑपरेटर" शब्दों के पश्चात्‌ "जिससे धारा 52 के अधीन कर का संग्रहण करने की अपेक्षा है" शब्द और अंक अंतःस्थापित किए जाएंगे।

13. धारा 25 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 25 में,--

(क) उपधारा (1) में, परन्तुक के अंत में चिन्ह "।", के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा और तत्पश्चात्‌ स्पष्टीकरण से पूर्व निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ः-

"परंतु यह और कि किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसके पास किसी विशेष आर्थिक जोन में विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 (2005 का 28) में यथापरिभाषित कोई यूनिट है या जो विशेष आर्थिक जोन विकासकर्ता है, ऐसे किसी पृथक्‌्‌ रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करना होगा, जो कि उसी राज्य में विशेष आर्थिक जोन के बाहर अवस्थित उसके कारबार के स्थान से सुभिन्न है।"; और

(ख) उपधारा (2) के परंतुक के स्थान पर निम्नलिखित परन्तुक रखा जाएगा, अर्थात्‌ः

"परंतु किसी ऐसे व्यक्ति, जिसके पास किसी राज्य में कारबार के बहुल स्थान हैंं, को ऐसी शर्ताें, जो विहित की जाएं, के अध्यधीन रहते हुए कारबार के ऐसे प्रत्येक स्थान के लिए पृथक्‌ रजिस्ट्रीकरण मंजूर किया जा सकेगा ।"।

14. धारा 29 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 29 में,--

(क) पाश्र्व शीर्ष में, "रद्‌दकरण" शब्द के पश्चात्‌ "या निलंबन" शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;

(ख) उपधारा (1) के खंड (ग) के अन्त में "।" चिन्ह के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा और तत्पश्चात्‌ निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ः6756 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 "परंतु रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्रीकरण के रद्‌दकरण के सम्बन्ध में फाइल की गई रजिस्ट्रीकरण के रद्‌दकरण से सम्बन्धित कार्यवाहियों के लंबित रहने के दौरान, रजिस्ट्रीकरण को ऐसी अवधि के लिए और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, निलम्बित किया जा सकेगा।"; और (ग) उपधारा (2) के परंतुक के अंत में "।", चिन्ह के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा और तत्पश्चात्‌ निम्नलिखित परन्तुक रखा जाएगा, अर्थात्‌ः

"परंतु यह और कि रजिस्ट्रीकरण के रद्‌दकरण से सम्बन्धित कार्यवाहियों के लम्बित रहने के दौरान, समुचित अधिकारी रजिस्ट्रीकरण को ऐसी अवधि के लिए और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, निलम्बित कर सकेगा ।"।

15. धारा 34 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 34 में,--

(क) उपधारा (1) में,--

(i) "कोई कर बीजक जारी किया गया है" शब्दों के स्थान पर "एक या एक से अधिक कर बीजक जारी किए गए हैं" शब्द रखे जाएंगे; और

(ii) "जमा पत्र जारी" शब्दों के स्थान पर "किसी वित्तीय वर्ष में किए गए प्रदायों के लिए एक या एक से अधिक जमा पत्र जारी" शब्द रखे जाएंगे; और

(ख) उपधारा (3) में,--

(i) "कोई कर बीजक जारी किया गया है" शब्दों के स्थान पर "एक या एक से अधिक कर बीजक जारी किए गए हैं" शब्द रखे जाएंगे; और

(ii) "नामे नोट" शब्दों के स्थान पर "किसी वित्तीय वर्ष में किए गए प्रदायों के लिए एक या एक से अधिक नामे नोट" शब्द रखे जाएंगे।

16. धारा 35 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 35 की उपधारा (5) के अन्त में "।" चिन्ह के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा और तत्पश्चात्‌ निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ः "परन्तु इस उपधारा में अंतर्विष्ट कोई बात, केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के किसी विभाग या किसी ऐसे स्थानीय प्राधिकरण को लागू नहीं होगी, जिसकी लेखाबहियां, भारत के नियन्त्रक-महालेखापरीक्षक या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी स्थानीय प्राधिकरण के लेखाओं की संपरीक्षा के लिए नियुक्त किसी लेखापरीक्षक द्वारा संपरीक्षा किए जाने के अधीन है।"। 17. धारा 39 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 39 में,--

(क) उपधारा (1) में "और ऐसेे कैलेण्डर मास या उसके किसी भाग के उत्तरवर्ती मास के बीसवें दिवस या उससे पूर्व ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, विवरणी देगा।" शब्दों और चिन्हों के स्थान पर "ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में तथा ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, विवरणी देगाः" शब्द और चिन्ह रखे जाएंगे और तत्पश्चात्‌ निम्नलिखित परन्तुक अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌्‌ः

"परन्तु सरकार परिषद्‌ की सिफारिशों पर रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के कतिपय ऐसे वर्गों को अधिसूचित कर सकेगी, जो ऐसी शर्तों और सुरक्षोपायों के, जो उसमेें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के अध्यधीन, प्रत्येक तिमाही या उसके भाग के लिए विवरणी प्रस्तुत करेंगे।";

6757 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940

(ख) उपधारा (7) के अन्त में "।" चिन्ह के पश्चात्‌ "ः" चिन्ह अन्तःस्थापित किया जाएगा और तत्पश्चात्‌्‌ निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ः--

"परन्तु सरकार परिषद्‌्‌ की सिफारिशों पर, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के कतिपय ऐसे वर्गों को अधिसूचित कर सकेगी, जो ऐसी शर्तों और सुरक्षोपायों, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के अध्यधीन, ऐसी विवरणी के अनुसार, ऐसी विवरणी को प्रस्तुत करने के लिए उससे अपेक्षित अंतिम तारीख को या उससे पूर्व सरकार को, शोध्य कर या उसके किसी भाग का संदाय करेंगे।"; और (ग) उपधारा (9) में,--

(i) "उस मास या तिमाही जिसके दौरान ऐसा लोप या अशुद्ध विशिष्टियां ध्यान में आई हैं" शब्दों के स्थान पर "ऐसे प्ररूप और रीति में, जो विहित की जाए," शब्द और चिन्ह रखे जाएंगे;

(ii) परंतुक में "वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात्‌ '', शब्दों के स्थान पर ''वित्तीय वर्ष, जिससे ऐसे ब्यौरे सम्बन्धित हैं, की समाप्ति के पश्चात्‌्‌'' शब्द और चिन्ह रखे जाएंगेे।

18. धारा 43क का अंतःस्थापन.--मूल अधिनियम की धारा 43 के पश्चात्‌ निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाएगी, अर्थात्‌ः--

''43क. विवरणी प्रस्तुत करने और इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने के लिए प्रक्रिया.--(1) धारा 16 की उपधारा (2), धारा 37 या धारा 38 में किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति धारा 39 की उपधारा (1) के अधीन प्रस्तुत विवरणियों में प्रदायकर्ताओें द्वारा किए गए प्रदायों के ब्यौरों का सत्यापन, विधिमान्यकरण, उसमें उपांतरण करेगा या उन्हें हटाएगा।

(2) धारा 41, धारा 42 या धारा 43 मेंं किसी बात के होते हुए भी, प्राप्तिकर्ता द्वारा इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने की प्रक्रिया और उसका सत्यापन उस प्रकार किया जाएगा, जो विहित किया जाए।

(3) प्राप्तिकर्ता द्वारा इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने के प्रयोजनों के लिए, सामान्य पोर्टल पर प्रदायकार द्वारा जावक प्रदायों के ब्यौरे प्रस्तुत करने की प्रक्रिया ऐसी होगी, जैसी विहित की जाए।

(4) उपधारा (3) के अधीन प्रस्तुत न किए गए जावक प्रदायों के सम्बन्ध में इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने की प्रक्रिया ऐसी होगी, जैसी विहित की जाए और ऐसी प्रक्रिया में इनपुट कर प्रत्यय की ऐसी अधिकतम रकम सम्मिलित हो सकेगी, जिसका इस प्रकार फायदा लिया जा सकता है, जो उक्त उपधारा के अधीन प्रदायकर्ताओें द्वारा प्रस्तुत ब्यौरों के आधार पर उपलब्ध इनपुट कर प्रत्यय के बीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।

(5) ऐसे जावक प्रदायों में, जिसके लिए प्रदायकर्ता द्वारा उपधारा (3) के अधीन ब्यौरों को प्रस्तुत किया गया है, विनिर्दिष्ट कर की रकम को, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन उसके द्वारा संदेय कर के रूप में माना जाएगा।

(6) किसी प्रदाय का प्रदायकर्ता और प्राप्तिकर्ता, संयुक्ततः और पृथकतः, जावक प्रदायों के सम्बन्ध में लिए गए, यथास्थिति, कर का संदाय या इनपुट कर प्रत्यय का संदाय करने के लिए दायी होंगे, जिनके ब्यौरे उपधारा (3) या उपधारा (4) के अधीन प्रस्तुत किए गए हैं, किन्तु जिनकी विवरणी प्रस्तुत नहीं की गई है।

(7) उपधारा 6 के प्रयोजनों के लिए, वसूली ऐसी रीति में की जाएगी, जो विहित की जाए और ऐसी प्रक्रिया में गलती से प्राप्त की गई एक हजार रुपए से अनधिक कर या इनपुट कर प्रत्यय की रकम की वसूली न करने के लिए उपबंध हो सकेगा। 6758 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 (8) ऐसे जावक प्रदायों, जिनके ब्यौरे उपधारा (3) के अधीन किसी ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा निम्नलिखित अवधि में प्रस्तुत किए जा सकते हैं, के सम्बन्ध में प्रक्रिया, सुरक्षोपाय और कर की रकम की अवसीमा,--

(i) रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने के छह मास के भीतर; और

(ii) जिसने कर के संदाय में व्यतिक्रम किया है और जहां ऐसा व्यतिक्रम, व्यतिक्रम की रकम के संदाय की अंतिम तारीख से दो मास से अधिक की अवधि के लिए जारी रहता है, ऐसी होगी, जो विहित की जाए।

19. धारा 48 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 48 की उपधारा (2) में, "प्रस्तुत करने के लिए" शब्द और चिन्हों के पश्चात्‌ "और ऐसे अन्य कृत्यों का अनुपालन करने के लिए" शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे।

20. धारा 49 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 49 में,--

(क) उपधारा (2) में, "धारा 41" शब्द और अंकों के पश्चात्‌ "या धारा 43-क" शब्द, अंक और अक्षर रखे जाएंगे; और

(ख) उपधारा (5) में,--

(i) खण्ड (ग) के अन्त में, ";" चिन्ह के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा और तत्पश्चात्‌ निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ः

"परन्तु राज्य कर के मद्‌दे इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग एकीकृत कर के संदाय के लिए केवल वहां किया जाएगा, जहां केन्द्रीय कर के मद्‌दे इनपुट कर प्रत्यय का अतिशेष एकीकृत कर के संदाय के लिए उपलब्ध नहीं है;"; और

(ii) खण्ड (घ) के अन्त में, ";" चिन्ह के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा और तत्पश्चात्‌ निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ः

"परन्तु संघ राज्यक्षेत्र कर के मद्‌दे इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग एकीकृत कर के संदाय के लिए केवल वहां किया जाएगा, जहां केन्द्रीय कर के मद्‌दे इनपुट कर प्रत्यय का अतिशेष एकीकृत कर के संदाय के लिए उपलब्ध नहीं है ;";

21. धारा 49 क और 49 ख का अंतःस्थापन.--मूल अधिनियम की धारा 49 के पश्चात्‌ निम्नलिखित धाराएं अंतःस्थापित की जाएंगी, अर्थात्‌ः-

''49क. कतिपय शर्तोें के अधीन रहते हुए इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग.--धारा 49 में किसी बात के होते हुए भी, राज्य कर के मद्‌दे इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग, यथास्थिति, एकीकृत कर या राज्यकर के संदाय के मद्‌्‌दे, केवल तब किया जाएगा, जब एकीकृत कर के मद्‌्‌दे उपलब्ध इनपुट कर प्रत्यय का पहले ही ऐसे संदाय के प्रति पूर्णतया उपयोग कर लिया गया है।

49 ख. इनपुट कर प्रत्यय के उपयोग का आदेश.--इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी और धारा 49 की उपधारा (5) के खंड (ङ) और खंड (च) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, सरकार परिषद्‌ की सिफारिशों से, यथास्थिति, एकीकृत कर, केन्द्रीय कर, राज्य कर या संघ राज्यक्षेत्र कर का, किसी ऐसे कर के संदाय के मद्‌दे इनपुट कर प्रत्यय के उपयोग किए जाने के आदेश और रीति को विहित कर सकेगी।"।6759 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 22. धारा 52 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 52 की उपधारा (9) में, "धारा 37" शब्द और अंकों के पश्चात्‌ "या धारा 39" शब्द और अंक अन्तःस्थापित किए जाएंगे।

23. धारा 54 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 54 में,--

(क) उपधारा (8) के खंड (क) में, "शून्य अंकित माल" शब्दों के स्थान पर "माल के निर्यात" शब्द रखे जाएंगे और "ऐसे शून्य अंकित प्रदायों" शब्दों के स्थान पर "ऐसे निर्यातों" शब्द रखे जाएंगे; और (ख) स्पष्टीकरण के खंड (2) में,--

(i) उपखण्ड (ग) की मद (i) में "विदेशी मुद्रा मेेंं" शब्दों के पश्चात्‌ "या भारतीय रुपए में, जहां कहीं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमति दी जाए" शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे;

(ii) उपखण्ड (ङ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपखण्ड रखा जाएगा, अर्थात्‌ः--

"(ङ) उपधारा (3) के प्रथम परंतुक के खण्ड (ii) के अधीन उपयोग न किए गए इनपुट कर प्रत्यय के प्रतिदाय की दशा में, उस अवधि के लिए, जिसमें ऐसे प्रतिदाय के लिए दावा उत्पन्न होता है, धारा 39 के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने की देय तारीख;"।

24. धारा 79 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 79 की उपधारा (4) के पश्चात्‌ निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ः-

''स्पष्टीकरण.--इस धारा के प्रयोजनों के लिए "व्यक्ति शब्द" में, यथास्थिति, धारा 25 की उपधारा (4) या उपधारा (5) में यथानिर्दिष्ट "विशिष्ट व्यक्ति" सम्मिलित होंगे।"।

25. धारा 107 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 107 की उपधारा (6) के खण्ड (ख) में, "बराबर राशि का" शब्दों के पश्चात्‌, "अधिकतम पच्चीस करोड़ रुपए के अध्यधीन रहते हुए" शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे।

26. धारा 112 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 112 की उपधारा (8) के खण्ड (ख) में, "बराबर राशि" शब्दों के पश्चात्‌, "अधिकतम पचास करोड़ रुपए के अध्यधीन रहते हुए," शब्द और चिन्ह अंतःस्थापित किए जाएंगे।

27. धारा 129 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 129 की उपधारा (6) में, "सात दिन" शब्द जहाँ-जहाँ आते हैं, के स्थान पर "चौदह दिन" शब्द रखे जाएंगे।

28. धारा 143 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 143 की उपधारा (1) के खण्ड (ख) के परंतुक के अन्त में "।", चिन्ह के स्थान पर "ः" चिन्ह रखा जाएगा और तत्पश्चात्‌्‌ निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ः

"परंतु यह और कि पर्याप्त हेतुक दर्शित किए जाने पर, एक वर्ष और तीन वर्ष की अवधि को, आयुक्त द्वारा क्रमशः एक वर्ष और दो वर्ष से अनधिक की और अवधि के लिए बढ़ाया जा सकेगा।"। 29. अनुसूची 1 का संशोधन.--मूल अधिनियम की अनुसूची 1 के पैरा 4 में, "कराधेय व्यक्ति" शब्दों के स्थान पर "व्यक्ति" शब्द रखा जाएगा।

30. अनुसूची 2 का संशोधन.--मूल अधिनियम की अनुसूची 2 के शीर्षक में, "क्रियाकलाप" शब्द के पश्चात्‌ "या संव्यवहार" शब्द अंतःस्थापित किए जाएंगे और सदैव अंतःस्थापित किए गए समझे जाएंगे। 6760 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 31. अनुसूची 3 का संशोधन.--मूल अधिनियम की अनुसूची 3 में,--

(i) पैरा 6 के पश्चात्‌, निम्नलिखित पैरे अंतःस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्‌ः-

"7. भारत के बाहर किसी स्थान से भारत के बाहर किसी अन्य स्थान को, ऐसे माल के भारत में प्रवेश किए बिना, माल का प्रदाय।

8. (क) घरेलू उपभोग के लिए अनुमति प्रदान किए जाने से पूर्व किसी व्यक्ति को भांडागार में रखे गए माल का प्रदाय;

(ख) परेषिती द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को, माल का भारत के बाहर अवस्थित मूल पान से प्रेषण किए जाने के पश्चात्‌ किन्तु घरेलू उपभोग के लिए अनुमति दिए जाने से पूर्व माल के मालिकाना हक के दस्तावेज में पृष्ठांकन द्वारा माल का प्रदाय।";

(ii) स्पष्टीकरण को स्पष्टीकरण 1 के रूप में पुनःसंख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार पुनःसंख्यांकित स्पष्टीकरण 1 के पश्चात्‌ निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्‌ः-

"स्पष्टीकरण 2.-पैरा 8 के प्रयोजनों के लिए, "भांडागार में रखे गए माल" पद का वही अर्थ होगा, जो सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) में उसका है।"।

32. 2018 के अध्यादेश संख्यांक 1 का निरसन और व्यावृतियां.--(1) हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2018 का एतद्‌्‌द्वारा निरसन किया जाता है।

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी इस प्रकार निरसित अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई समझी जाएगी।

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उद्‌्‌देश्यों और कारणों का कथन

हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (2017 का अधिनियम संख्यांक 10) को राज्य सरकार द्वारा माल या सेवाओं या दोनों के राज्यान्तरिक प्रदाय पर कर के उद्‌ग्रहण और संग्रहण के लिए उपबन्ध करने के दृष्टिगत अधिनियमित किया गया था। अधिनियम नए माल और सेवा कर प्रणाली हेतु विद्यमान करदाताओं के अबाध पारगमन के लिए कतिपय प्रावधानों का उपबन्ध करता है। तथापि, नई कर प्रणाली को कतिपय कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। इसलिए, उन कठिनाईयों से पार पाने के आशय से माल और सेवा कर परिषद्‌्‌ की संस्तुतियों के अनुसार अधिनियम में संशोधन करना प्रस्तावित किया गया है। यहां यह उल्लेख करना भी प्रासंगिक है कि केन्द्रीय सरकार ने माल और सेवा कर परिषद्‌्‌ की संस्तुतियों को कार्यान्वित करने के लिए तत्स्थानी केन्द्रीय माल और सेवा कर (संशोधन) अधिनियम, 2018 (2018 का अधिनियम संख्यांक 31) तारीख 30 अगस्त, 2018 को पहले ही अधिसूचित कर दिया है।

प्रस्तावित विधेयक, अन्य बातों के साथ, प्रदाय की परिधि को स्पष्ट करने; अरजिस्ट्रीकृत प्रदायकर्ताओं से माल या सेवाओं या दोनों के कतिपय विनिर्दिष्ट प्रवर्गों के प्रदायों की प्राप्ति की बावत प्रतिलोम प्रभार के आधार पर कर संदाय के लिए रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के वर्गों को अधिसूचित करने; प्रशमन उद्‌्‌ग्रहण की सीमा को एक करोड़ रुपए से एक करोड़ पचास लाख रुपए तक की वृद्धि करने; इनपुट कर प्रत्यय की परिधि विनिर्दिष्ट करने; रजिस्ट्रीकरण के लिए छूट सीमा में दस लाख रुपए से बीस लाख रुपए तक की वृद्धि करने; करदाता को उसी राज्य में अवस्थित कारबार के बहुल स्थानों के लिए बहुल रजिस्ट्रीकरण अभिप्राप्त करने का विकल्प लेने हेतु सुकर बनाने और विशेष आर्थिक क्षेत्र यूनिट या विकासक के पृथक्‌ रजिस्ट्रीकरण के लिए6761 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 व्यवस्था करने; रजिस्ट्रीकरण के रद्‌्‌दकरण की प्रक्रिया के दौरान रजिस्ट्रीकरण के अस्थायी निलम्बन का प्रावधान अन्तःस्थापित करने; विवरणी दाखिल करने की नई प्रणाली और इनपुट कर प्रत्यय को प्राप्त करने की व्यवस्था करने; अपील दायर करने के लिए संदेय पूर्व-निक्षेप की रकम की सीमा को पच्चीस करोड़ रुपए तक करने की व्यवस्था करने और माल का निरोध या अभिग्रहण और अभिवहन में परिवहन से सम्बन्धित अवधि को सात दिन से बढ़ाकर चौदह दिन तक करने का उपबन्ध करता है।

क्योंकि हिमाचल प्रदेश विधान सभा सत्र में नहीं थी और हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 में संशोधन किया जाना अनिवार्य हो गया था, इसलिए महामहिम, राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश द्वारा, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खण्ड (1) के अधीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए, हिमाचल प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2018 (2018 का अध्यादेश संख्यांक 1) तारीख 29 अक्तूबर, 2018 को प्रख्यापित किया गया था और जिसे राजपत्र (ई-गजट), हिमाचल प्रदेश में तारीख 5 नवम्बर, 2018 को प्रकाशित किया गया। अब उक्त अध्यादेश के स्थान पर बिना किसी उपान्तरण के नियमित विधान लाया जा रहा है।

यह विधेयक उपर्युक्त उद्‌्‌देश्यों की पूर्ति के लिए है।

(जयराम ठाकुर) मुख्य मन्त्री। धर्मशाला : तारीखः ................... 2018

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AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT

BILL No. 13 of 2018 THE HIMACHAL PRADESH GOODS AND SERVICES TAX (AMENDMENT) BILL, 2018

(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)

A

BILL

to amend the Himachal Pradesh Goods and Services Tax Act, 2017 (Act No.10 of 2017).

BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-ninth Year of the Republic of India as follows:—

1. Short title and comencement.—(1) This Act may be called the Himachal Pradesh Goods and Services Tax (Amendment) Act, 2018.

(2) The provisions of section 3 and section 30 shall be deemed to have come into force with effect from 1st day of July, 2017 and the remaining provisions of this Act shall come into force on such date as the Government may, by notification in the Rajpatra (e-Gazette), Himachal Pradesh, appoint:

6762 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940

Provided that different dates may be appointed for different provisions of this Act and any reference in any such provision to the commencement of this Act shall be construed as a reference to the coming into force of that provision.

2. Amendment of section 2.—In section 2 of the Himachal Pradesh Goods and Services Tax Act, 2017 (hereinafter referred to as the 'principal Act'),––

(a) in clause (4), for the words "the Appellate Authority and the Appellate Tribunal", the words, signs and figures "the Appellate Authority, the Appellate Tribunal and the Authority referred to in sub-section (2) of section 171" shall be substituted;

(b) In clause (16), for the words "Central Board of Excise and Customs", the words "Central Board of Indirect Taxes and Customs" shall be substituted;

(c) in clause (17), for sub-clause (h), the following sub-clause shall be substituted, namely:—

"(h) activities of a race club including by way of totalisator or a license to book maker or activities of a licensed book maker in such club; and";

(d) clause (18) shall be omitted;

(e) in clause (35), for the word and signs "clause (c)", the word and sign "clause (b)'' shall be substituted;

(f) in clause (69), in sub-clause (f), after the word and figures "article 371", the words, figures and letter "and article 371J" shall be inserted; and

(g) in the end of clause (102), the following Explanation shall be inserted, namely:–– "Explanation.––For the removal of doubts, it is hereby clarified that the expression "services" includes facilitating or arranging transactions in securities;".

3. Amendment of section 7.—In section 7 of the principal Act,––

(a) in sub-section (1), ––

(i) in clause (b), after the words and sign "or furtherance of business;", the word "and" shall be inserted and shall always be deemed to have been inserted;

(ii) in clause (c), for the sign and word "; and", the sign "." shall be substituted and shall always be deemed to have been substituted; and

(iii) clause (d) shall be omitted and shall always be deemed to have been omitted;

(b) after sub-section (1), the following sub-section shall be inserted and shall always be deemed to have been inserted, namely:––

"(1A) where certain activities or transactions constitute a supply in accordance with the provisions of sub-section (1), they shall be treated either as supply of goods or supply of services as referred to in SCHEDULE-II."; and6763 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 (c) in sub-section (3), for the words, signs and figures "sub-sections (1) and (2)", the words, signs, figures and letter "sub-sections (1), (1A) and (2)" shall be substituted.

4. Amendment of section 9.—In section 9 of the principal Act, for sub-section (4), the following sub-section shall be substituted, namely:—

"(4) The Government may, on the recommendations of the Council, by notification, specify a class of registered persons who shall, in respect of supply of specified categories of goods or services or both received from an unregistered supplier, pay the tax on reverse charge basis as the recipient of such supply of goods or services or both, and all the provisions of this Act shall apply to such recipient as if he is the person liable for paying the tax in relation to such supply of goods or services or both.".

5. Amendment of section 10.—In section 10 of the principal Act,—

(a) in sub-section (1) ,—

(i) for the words and sign "in lieu of the tax payable by him, an amount calculated at such rate", the words, signs and figures "in lieu of the tax payable by him under sub-section (1) of section 9, an amount of tax calculated at such rate" shall be substituted; and

(ii) in the proviso, for the words "one crore rupees", the words "one crore and fifty lakh rupees" and for the sign ".", the sign ":" shall be substituted and thereafter the following proviso shall be inserted, namely:

"Provided further that a person who opts to pay tax under clause (a) or clause (b) or clause (c) may supply services (other than those referred to in clause (b) of paragraph 6 of SCHEDULE-II), of value not exceeding ten percent. of turnover in a State in the preceding financial year or five lakh rupees, whichever is higher."; and

(b) in sub-section (2), for clause (a), the following clause shall be substituted, namely :—

"(a) save as provided in sub-section (1), he is not engaged in the supply of services;".

6. Amendment of section 12.—In section 12 of the principal Act, in sub-section (2), in clause (a), the words, signs and figure "sub-section (1) of " shall be omitted.

7. Amendment of section 13.—In section 13 of the principal Act, in sub-section (2), the words, signs and figure "sub-section (2) of" wherever occurring, shall be omitted.

8. Amendment of section 16.—In section 16 of the principal Act, in sub-section (2),– (a) in clause (b), for the Explanation, the following Explanation shall be substituted, namely:—

"Explanation.— For the purposes of this clause, it shall be deemed that the registered person has received the goods or, as the case may be, services––6764 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 (i) where the goods are delivered by the supplier to a recipient or any other person on the direction of such registered person, whether acting as an agent or otherwise, before or during movement of goods, either by way of transfer of documents of title to goods or otherwise; and

(ii) where the services are provided by the supplier to any person on the direction of and on account of such registered person."; and

(b) in clause (c), after the word and figures "section 41", the words, figures and letter "or section 43A" shall be inserted.

9. Amendment of section 17.—In section 17 of the principal Act,––

(a) in sub-section (3), the following Explanation shall be inserted, namely:–– "Explanation.— For the purposes of this sub-section, the expression ''value of exempt supply'' shall not include the value of activities or transactions specified in SCHEDULE-III, except those specified in paragraph 5 of the said Schedule."; and

(b) in sub-section (5), for clauses (a) and (b), the following clauses shall be substituted, namely:—

"(a) motor vehicles for transportation of persons having approved seating capacity of not more than thirteen persons (including the driver), except when they are used for making the following taxable supplies, namely:—

(i) further supply of such motor vehicles; or

(ii) transportation of passengers; or

(iii) imparting training on driving such motor vehicles;

(aa) vessels and aircraft except when they are used––

(i) for making the following taxable supplies, namely:—

(A) further supply of such vessels or aircraft; or

(B) transportation of passengers; or

(C) imparting training on navigating such vessels; or

(D) imparting training on flying such aircraft; and

(ii) for transportation of goods;

(ab) services of general insurance, servicing, repair and maintenance in so far as they relate to motor vehicles, vessels or aircraft referred to in clause (a) or clause (aa):

Provided that the input tax credit in respect of such services shall be available—

(i) where the motor vehicles, vessels or aircraft referred to in clause (a) or clause (aa) are used for the purposes specified therein; and6765 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 (ii) where received by a taxable person engaged— (A) in the manufacture of such motor vehicles, vessels or aircraft; or

(B) in the supply of general insurance services in respect of such motor vehicles, vessels or aircraft insured by him;

(b) the following supply of goods or services or both—

(i) food and beverages, outdoor catering, beauty treatment, health services, cosmetic and plastic surgery, leasing, renting or hiring of motor vehicles, vessels or aircraft referred to in clause (a) or clause (aa) except when used for the purposes specified therein, life insurance and health insurance:

Provided that the input tax credit in respect of such goods or services or both shall be available where an inward supply of such goods or services or both is used by a registered person for making an outward taxable supply of the same category of goods or services or both or as an element of a taxable composite or mixed supply;

(ii) membership of a club, health and fitness centre; and

(iii) travel benefits extended to employees on vacation such as leave or home travel concession:

Provided that the input tax credit in respect of such goods or services or both shall be available, where it is obligatory for an employer to provide the same to its employees under any law for the time being in force.".

10. Amendment of section 20.—In section 20 of the principal Act, in the Explanation, in clause (c), for the words and figures "under entry 84", the words, figures and letters "under entries 84 and 92A" shall be substituted.

11. Amendment of section 22.—In section 22 of the principal Act,––

(a) in sub-section (1), in the end of the proviso for the sign ".", the sign ":" shall be substituted and thereafter the following new proviso shall be inserted, namely:

"Provided further that the Government may, at the request of a special category State and on the recommendations of the Council, enhance the aggregate turnover referred to in the first proviso from ten lakh rupees to such amount, not exceeding twenty lakh rupees and subject to such conditions and limitations, as may be so notified."; and

(b) in the Explanation, in clause (iii), after the word "Constitution", the words and signs "except the State of Jammu Kashmir and States of Arunachal Pradesh, Assam, Himachal Pradesh, Meghalaya, Sikkim and Uttarakhand" shall be inserted.".

12. Amendment of section 24.—In section 24 of the principal Act, in clause (x), after the words "commerce operator", the words and figures "who is required to collect tax at source under section 52" shall be inserted.

6766 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 13. Amendment of section 25.—In section 25 of the principal Act,––

(a) in sub-section (1), in the end of the proviso for the sign ".", the sign ":" shall be substituted and thereafter before the Explanation, the following proviso shall be inserted, namely:

"Provided further that a person having a unit, as defined in the Special Economic Zones Act, 2005 (28 of 2005) in a Special Economic Zone or being a Special Economic Zone developer shall have to apply for a separate registration, as distinct from his place of business located outside the Special Economic Zone in the same State."; and

(b) in sub-section (2), for the proviso, the following proviso shall be substituted, namely:

"Provided that a person having multiple places of business in the State may be granted a separate registration for each such place of business, subject to such conditions as may be prescribed.".

14. Amendment of section 29.—In section 29 of the principal Act,––

(a) in the marginal heading after the word "Cancellation", the words "or suspension" shall be inserted;

(b) in sub-section (1), in the end of clause (c) for the sign ".", the sign ":" shall be substituted and thereafter, the following proviso shall be inserted, namely:

"Provided that during pendency of the proceedings relating to cancellation of registration filed by the registered person, the registration may be suspended for such period and in such manner as may be prescribed."; and

(c) in sub-section (2), in the end of the proviso for the sign ".", the sign ":" shall be substituted and thereafter the following proviso shall be inserted, namely:—

"Provided further that during pendency of the proceedings relating to cancellation of registration, the proper officer may suspend the registration for such period and in such manner as may be prescribed.".

15. Amendment of section 34.—In section 34 of the principal Act,––

(a) in sub-section (1),––

(i) for the words "Where a tax invoice has", the words "Where one or more tax invoices have" shall be substituted; and

(ii) for the words "a credit note", the words "one or more credit notes for supplies made in a financial year" shall be substituted; and

(b) in sub-section (3),––

(i) for the words "Where a tax invoice has", the words "Where one or more tax invoices have" shall be substituted; and6767 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 (ii) for the words "a debit note", the words "one or more debit notes for supplies made in a financial year" shall be substituted.

16. Amendment of section 35.—In section 35 of the principal Act, in sub-section (5), in the end for the sign ".", the sign ":" shall be substituted and thereafter, the following proviso shall be inserted, namely:

"Provided that nothing contained in this sub-section shall apply to any department of the Central Government or a State Government or a local authority, whose books of account are subject to audit by the Comptroller and Auditor-General of India or an auditor appointed for auditing the accounts of local authorities under any law for the time being in force.".

17. Amendment of section 39.—In section 39 of the principal Act,––

(a) in sub-section (1), for the words "in such form and manner as may be prescribed", the words and sign "in such form, manner and within such time as may be prescribed" shall be substituted and for the words and sign "on or before the twentieth day of the month succeeding such calendar month or part thereof ." , the sign ":" shall be substituted and thereafter the following proviso shall be inserted, namely:

"Provided that the Government may, on the recommendations of the Council, notify certain classes of registered persons who shall furnish return for every quarter or part thereof, subject to such conditions and safeguards as may be specified therein.";

(b) In sub-section (7), in the end for the sign ".", the sign ":" shall be substituted and thereafter the following proviso shall be inserted, namely:––

"Provided that the Government may, on the recommendations of the Council, notify certain classes of registered persons who shall pay to the Government the tax due or part thereof as per the return on or before the last date on which he is required to furnish such return, subject to such conditions and safeguards as may be specified therein."; and

(c) in sub-section (9),––

(i) for the words "in the return to be furnished for the month or quarter during which such omission or incorrect particulars are noticed", the words "in such form and manner as may be prescribed" shall be substituted; and

(ii) in the proviso, for the words "the end of the financial year", the words "the end of the financial year to which such details pertain" shall be substituted.

18. Insertion of section 43A.—After section 43 of the principal Act, the following section shall be inserted, namely:—

"43A. Procedure for furnishing return and availing input tax credit.—(1) Notwithstanding anything contained in sub-section (2) of section 16, section 37 or section 38, every registered person shall in the returns furnished under sub-section (1) of section 39 verify, validate, modify or delete the details of supplies furnished by the suppliers.

6768 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940

(2) Notwithstanding anything contained in section 41, section 42 or section 43, the procedure for availing of input tax credit by the recipient and verification thereof shall be such as may be prescribed.

(3) The procedure for furnishing the details of outward supplies by the supplier on the common portal, for the purposes of availing input tax credit by the recipient shall be such as may be prescribed.

(4) The procedure for availing input tax credit in respect of outward supplies not furnished under sub-section (3) shall be such as may be prescribed and such procedure may include the maximum amount of the input tax credit which can be so availed, not exceeding twenty percent. of the input tax credit available, on the basis of details furnished by the suppliers under the said sub-section.

(5) The amount of tax specified in the outward supplies for which the details have been furnished by the supplier under sub-section (3) shall be deemed to be the tax payable by him under the provisions of the Act.

(6) The supplier and the recipient of a supply shall be jointly and severally liable to pay tax or to pay the input tax credit availed, as the case may be, in relation to outward supplies for which the details have been furnished under sub-section (3) or sub-section (4) but return thereof has not been furnished.

(7) For the purposes of sub-section (6), the recovery shall be made in such manner as may be prescribed and such procedure may provide for non-recovery of an amount of tax or input tax credit wrongly availed not exceeding one thousand rupees.

(8) The procedure, safeguards and threshold of the tax amount in relation to outward supplies, the details of which can be furnished under sub-section (3) by a registered person,—

(i) within six months of taking registration; and

(ii) who has defaulted in payment of tax and where such default has continued for more than two months from the due date of payment of such defaulted amount, shall be such as may be prescribed.".

19. Amendment of section 48.—In section 48 of the principal Act, in sub-section (2), after the word and figures "section 45", the words "and to perform such other functions" shall be inserted.

20. Amendment of section 49.—In section 49 of the principal Act,––

(a) in sub-section (2), after the word and figures "section 41", the words, figures and letter "or section 43A" shall be inserted; and

(b) in sub-section (5),––

(i) in clause (c), in the end for the sign ";", the sign ":" shall be substituted and thereafter the following proviso shall be inserted, namely:– "Provided that the input tax credit on account of State tax shall be utilised towards payment of integrated tax only where the balance of the input tax6769 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 credit on account of central tax is not available for payment of integrated tax;"; and

(ii) in clause (d) in the end for the sign ";", the sign ":" shall be substituted and thereafter, the following proviso shall be inserted, namely:–

"Provided that the input tax credit on account of Union territory tax shall be utilised towards payment of integrated tax only where the balance of the input tax credit on account of central tax is not available for payment of integrated tax;".

21. Insertion of Sections 49A and 49B.—After section 49 of the principal Act, the following sections shall be inserted, namely:––

"49A. Utilisation of input tax credit subject to certain conditions.—Notwithstanding anything contained in section 49, the input tax credit on account of State tax shall be utilised towards payment of integrated tax or State tax, as the case may be, only after the input tax credit available on account of integrated tax has first been utilised fully towards such payment.

49B. Order of utilisation of input tax credit.—Notwithstanding anything contained in this Chapter and subject to the provisions of clause (e) and clause (f) of sub-section (5) of section 49, the Government may, on the recommendations of the Council, prescribe the order and manner of utilisation of the input tax credit on account of integrated tax, central tax, State tax or Union territory tax, as the case may be, towards payment of any such tax.".

22. Amendment of section 52.—In section 52 of the principal Act, in sub-section (9), after the word and figures "section 37", the words and figures "or section 39" shall be inserted.

23. Amendment of section 54.—In section 54 of the principal Act,—

(a) in sub-section (8), in clause (a), for the words and signs "zero-rated supplies of", the words "export of " and for the words and sign "such zero-rated supplies", the words "such exports" shall be substituted; and

(b) in the Explanation, in clause (2),—

(i) in sub-clause (c), in item (i), after the words "foreign exchange", the words "or in Indian rupees wherever permitted by the Reserve Bank of India" shall be inserted; and

(ii) for sub-clause (e), the following sub-clause shall be substituted, namely:– "(e) in the case of refund of unutilised input tax credit under clause (ii) of the first proviso to sub-section (3), the due date for furnishing of return under section 39 for the period in which such claim for refund arises;".

24. Amendment of section 79.—In section 79 of the principal Act, after sub-section (4), the following Explanation shall be inserted, namely:—

"Explanation.––For the purposes of this section, the word "person" shall include "distinct persons" as referred to in sub-section (4) or, as the case may be, sub-section (5) of section 25.".

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25. Amendment of section 107.—In section 107 of the principal Act, in sub-section (6), in clause (b), after the words and sign "arising from the said order,", the words and sign "subject to a maximum of twenty-five crore rupees," shall be inserted.

26. Amendment of section 112.—In section 112 of the principal Act, in sub-section (8), in clause (b), after the words and sign "arising from the said order," the words and sign "subject to a maximum of fifty crore rupees," shall be inserted.

27. Amendment of section 129.—In section 129 of the principal Act, in sub-section (6), for the words "seven days", wherever occurring the words "fourteen days" shall be substituted.

28. Amendment of section 143.—In section 143 of the principal Act, in sub-section (1), in clause (b), in the end of proviso for the sign ".", the sign ":" shall be substituted and thereafter, the following proviso shall be inserted, namely:—

"Provided further that the period of one year and three years may, on sufficient cause being shown, be extended by the Commissioner for a further period not exceeding one year and two years respectively.".

29. Amendment of SCHEDULE-I.—In SCHEDULE-I of the principal Act, in paragraph 4, for the words "taxable person", the word "person" shall be substituted.

30. Amendment of SCHEDULE-II.—In SCHEDULE-II of the principal Act, in the heading, after the word "ACTIVITIES", the words "OR TRANSACTIONS" shall be inserted and shall always be deemed to have been inserted.

31. Amendment of SCHEDULE-III.—In SCHEDULE-III of the principal Act, —

(i) after paragraph 6, the following paragraphs shall be inserted, namely:–– "7. Supply of goods from a place outside India to another place outside India without such goods entering into India.

8. (a) Supply of warehoused goods to any person before clearance for home consumption;

(b) Supply of goods by the consignee to any other person, by endorsement of documents of title to the goods, after the goods have been dispatched from the port of origin located outside India but before clearance for home consumption.";

(ii) the Explanation shall be numbered as Explanation 1 and after Explanation 1 as so numbered, the following Explanation shall be inserted, namely:—

"Explanation 2.––For the purposes of paragraph 8, the expression "warehoused goods" shall have the same meaning as assigned to it in the Customs Act, 1962 (52 of 1962).".

32. Repeal of Ordinance No. 1 of 2018 and savings.—(1) The Himachal Pradesh Goods and Services Tax (Amendment) Ordinance, 2018 is hereby repealed.

(2) Notwithstanding such repeal, anything done or any action taken under the Ordinance so repealed shall be deemed to have been done or taken under the corresponding provisions of this Act.

6771 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS

The Himachal Pradesh Goods and Services Tax Act, 2017 (No.10 of 2017) was enacted with a view to make a provision for levy and collection of tax on intra-State supply of goods or services or both by the State Government. The Act provides for certain provisions for smooth transition of existing tax payers to new goods and services tax regime. However, the new tax regime had faced certain difficulties. Therefore, in order to overcome those difficulties, it is proposed to amend the Act as per the recommendations of GST Council. It is pertinent to add that the Central Government has already notified the corresponding Central Goods and Services Tax (Amendment) Act, 2018 vide Act No. 31 of 2018 on 30th August, 2018 to implement the recommendations of GST Council.

The proposed Bill 2018, inter-alia, provides to clarify the scope of supply; to notify classes of registered persons to pay the tax on reverse charge basis in respect of receipt of supplies of certain specified categories of goods or services or both from unregistered suppliers; to enhance the limit of composition levy from one crore rupees to one crore and fifty lakh rupees; to specify the scope of input tax credit; to enhance the exemption limit for registration from ten lakh rupees to twenty lakh rupees; to facilitate tax payers to have the option to obtain multiple registrations for multiple places of business located within the same State and to provide for separate registration for Special Economic Zone unit or developer; to insert a provision for temporary suspension of registration while cancellation of registration is under process; to provide for the new system of filing return and availing input tax credit; to provide that the amount of pre-deposit payable for filing of appeal shall be capped at twenty five crore rupees and to further increase the period relating to detention or seizure of goods and conveyance in transit from seven days to fourteen days.

Since, the Legislative Assembly was not in session and amendment in the Himachal Pradesh Goods and Services Tax Act, 2017 had to be made urgently, therefore, His Excellency the Governor, Himachal Pradesh in excercise of the powers under article 213(1) of the constitution of India, promulgated the Himachal Pradesh Goods and Services Tax (Amendment) Ordinance, 2018 on 29th October, 2018, which was published in the Rajpatra (e-Gazette), Himachal Pradesh on 5th November, 2018. Now a regular legislation is being brought in place of said Ordinance without any modification.

The Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.

Chief Minister.

DHARAMSHALA: THE ……………….2018.

________

हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय

अधिसूचना

धर्मशाला, 14 दिसम्बर, 2018

संख्याः वि0स0-विधायन-विधेयक/1-62/2018.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत हिमाचल प्रदेश राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद्‌ (स्थापना 6772 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 और विनियमन) विधेयक, 2018 (2018 का विधेयक संख्यांक 15) जोकि आज दिनांक 14 दिसम्बर, 2018 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्वसाधारण की सूचनार्थ राजपत्र में अधिसूचित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।

हस्ताक्षरित/- यशपाल, सचिव, हि0 प्र0 विधान सभा।

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2018 का विधेयक संख्यांक 15 हिमाचल प्रदेश राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद्‌ (स्थापना और विनियमन) विधेयक, 2018

(विधान सभा में पुरःस्थापित रुप में)

उच्चतर शिक्षा के समन्वित विकास के लिए राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद्‌ (एस0एच0ई0सी0) की स्थापना, निगमन और विनियमन करने तथा इसके क्रियाकलापों का विनियमन करने और उससे सम्बन्धित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबन्ध करने के लिए विधेयक।

भारत गणराज्य के उनहत्तरवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रुप में यह अधिनियमित होः-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ.--(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद्‌ (स्थापना और विनियमन) अधिनियम, 2018 है।

(2) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो राज्य सरकार राजपत्र (ई-गजट), हिमाचल प्रदेश में अधिसूचना द्वारा नियत करे।

2. परिभाषाएं.--इस अधिनियम में, जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) ''अध्यक्ष'' से, परिषद्‌ का अध्यक्ष अभिप्रेत है;

(ख) ''महाविद्यालय'' से, स्वायत्त महाविद्यालय सहित किसी विश्वविद्यालय द्वारा अनुरक्षित या अनुमोदित, या उससे संबद्ध कोई महाविद्यालय या संस्था अभिप्रेत है, जो प्रवेश से परीक्षा तक पाठ्‌य विवरण के अध्ययन की सुविधा प्रदान करता है;

(ग) ''परिषद्‌'' से, धारा 3 के अधीन गठित हिमाचल प्रदेश राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद्‌ अभिप्रेत है;

(घ) ''सरकार'' या ''राज्य सरकार'' से, हिमाचल प्रदेश सरकार अभिप्रेत है;

(ङ) ''उच्चतर शिक्षा'' स,े शिक्षा की कोई भी शाखा (स्ट्रीम), चाहे वह अनुसंधान अध्ययन सहित वित्तीय, तकनीकी हो, जिसके लिए उपाधि, डिप्लोमा या प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाता है, अभिप्रेत है किन्तु इसके अन्तर्गत चिकित्सा, —षि, पशुपालन और उद्यान-—षि शाखा नहीं है;

(च) ''संस्था'' से, विश्वविद्यालय द्वारा अनुरक्षित या इसके विषेशाधिकार प्राप्त उच्चतर शिक्षा की कोई शैक्षणिक संस्था अभिप्रेत है;

6773 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940

(छ) ''सदस्य'' से, परिषद्‌ का सदस्य अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष भी है;

(ज) ''विहित'' से, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(झ) ''राज्य'' से, हिमाचल प्रदेश राज्य अभिप्रेत है;

(ञ) ''विश्वविद्यालय'' से, राज्य विधानमण्डल द्वारा पारित किसी अधिनियम के अधीन स्थापित कोई विश्वविद्यालय अभिप्रेत है;

(ट) ''विश्वविद्यालय अनुदान आयोग'' से, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 (1956 का 3) के अधीन स्थापित आयोग अभिप्रेत है; और

(ठ) ''उपाध्यक्ष'' से, अधिनियम की धारा 3 के अधीन गठित परिषद्‌ का उपाध्यक्ष अभिप्रेत है। 3. परिषद्‌ का गठन.--(1) राज्य सरकार, राजपत्र (ई-गजट), हिमाचल प्रदेश में अधिसूचना द्वारा निम्नलिखित से गठित हिमाचल प्रदेश राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद्‌ के नाम से ज्ञात निकाय का गठन करेगी, अर्थात्‌ः--

(क) पदेन सदस्य,-

(i) परिसिद्ध नेतृत्व गुणों से युक्त कोई ख्यातिप्राप्त अध्यक्ष; शिक्षाविद्‌

(ii) सचिव (उच्चतर शिक्षा), हिमाचल प्रदेश सरकार उपाध्यक्ष;

(iii) किन्हीं दो राज्य शासकीय विश्वविद्यालयों के सदस्य; कुलपति

(iv) केन्द्रीय विश्वविद्यालय का कुलपति सदस्य;

(v) राज्य सरकार द्वारा द्विवार्षिक चक्रानुक्रम में सदस्य; नामनिर्देशित किए जाने वाले प्राइवेट विश्वविद्यालयों के दो कुलपति

(vi) सचिव (वित्त), हिमाचल प्रदेश सरकार सदस्य; या उसका प्रतिनिधि, जो संयुक्त सचिव की पंक्ति से नीचे का न हो

(vii) सचिव (तकनीकी शिक्षा), हिमाचल प्रदेश सदस्य; सरकार या उसका प्रतिनिधि, जो संयुक्त सचिव की पंक्ति से नीचे का न हो

(viii) निदेशक, उच्चतर शिक्षा सदस्य;

(ix) राज्य परियोजना निदेशक, राष्ट्रीय सदस्य-सचिव; उच्चतर शिक्षा अभियान (रुसा)

(ख) गैर-सरकारी सदस्य,-

(i) कला, विज्ञान, सिविल सोसाइटी, प्रौद्योगिकी या सदस्य;

6774 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 कौशल विकास के क्षेत्र में से राज्य सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाने वाले पांच सदस्य

(ii) राज्य सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए सदस्य; जाने वाले उद्योग से दो विशेषज्ञ

(iii) राज्य सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाने सदस्य; वाले सम्बद्ध महाविद्यालयों के तीन प्रधानाचार्य

(iv) मानव संसाधन विकास मन्त्रालय, भारत सदस्य; और सरकार द्वारा नामनिर्देशित एक सदस्य

(v) राज्य सरकार द्वारा नामनिर्देशित किए जाने सदस्य। वाला शिक्षाविद्‌, जिसके पास उच्चतर शिक्षा में योजना और नीति बनाने का अनुभव हो

(2) परिषद्‌ उपरोक्त नाम से एक निगमित निकाय होगी जिसका शाश्वत्‌ उत्तराधिकार होगा और उसकी सामान्य मुद्रा होगी और उक्त नाम से वह वाद ला सकेगी और उस पर वाद लाया जा सकेगा। (3) प्रत्येक नामनिर्देशित सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष की अवधि के लिए होगा और उसके नामनिर्देशित सदस्यों में से एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष के पश्चात्‌ सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

(4) परिषद्‌ का मुख्यालय शिमला में होगा।

4. प्रथम अध्यक्ष.--परिषद्‌ का प्रथम अध्यक्ष राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा और वह तब तक इसी प्रकार बना रहेगा जब तक कि चयन समिति इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन अध्यक्ष का चयन नहीं कर देती।

5. सलाहकार समिति.--(1) परिषद्‌ के अध्यक्ष की नियुक्ति हेतु चयन समिति को संस्तुतियां देने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता के अधीन तीन सदस्यों की एक सलाहकार समिति होगी।

(2) सलाहकार समिति के अन्य दो सदस्य प्रख्यात शिक्षाविद्‌ या ख्याति प्राप्त बुद्धिजीवी होंगे, जिनमें से एक को राज्य सरकार द्वारा और दूसरे को परिषद्‌ द्वारा नामनिर्देशित किया जायेगा।

6. चयन समिति.--निम्नलिखित सदस्यों से गठित चयन समिति सलाहकार समिति की सिफारिश पर अध्यक्ष का चयन करेगी, अर्थात्‌ः-

(क) मुख्य मन्त्री; (ख) शिक्षा मन्त्री; और (ग) राज्य विधान सभा में विपक्ष का नेताः

परन्तु शिक्षा का संविभाग यदि मुख्य मन्त्री के पास है, तो कोई अन्य मन्त्री, जो मुख्य मन्त्री द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाए, चयन समिति का सदस्य होगा।

7. अध्यक्ष का कार्यकाल.--(1) अध्यक्ष का कार्यकाल पांच वर्ष की अवधि के लिए होगा। (2) परिषद्‌ का अध्यक्ष राज्य सरकार द्वारा हटाया जा सकेगा यदि उसका कार्य और आचरण सन्तोषजनक नहीं पाया जाता है।

8. सदस्य का हटाया जाना.--(1) राज्य सरकार किसी सदस्य को हटा सकेगी यदि वह,-6775 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 (क) अनुन्मोचित दिवालिया हो गया है;

(ख) किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है और कारावास से दण्डादिष्ट किया गया है जो राज्य सरकार की राय में नैतिक अधमता से अन्तवर्लित है;

(ग) वि—त्तचित हो गया है और सक्षम न्यायालय द्वारा ऐसा घोषित कर दिया गया है;

(घ) कार्य करने से इन्कार करता है या कार्य करने में असमर्थ हो गया है;

(ङ) परिषद्‌ से अनुपस्थिति की इजाजत लिए बिना परिषद्‌ की तीन लगातार बैठकों से अनुपस्थित रहता है; या

(च) उसका कार्य और आचरण असंतोषजनक पाया जाता है।

(2) किसी सदस्य की निरर्हता से सम्बन्धित किसी विवाद पर सरकार का विनिश्चय अन्तिम होगा। (3) कोई भी व्यक्ति तब तक परिषद्‌ के सदस्य के रुप में नामनिर्दिष्ट किए जाने के लिए पात्र नहीं होगा जब तक कि वह स्नातक न हो।

9. परिषद्‌ के कर्त्तव्य और —त्य.--परिषद्‌ के कर्तव्य और —त्य निम्नलिखित होंगे,-- (क) राज्य के लिए उच्चतर शिक्षा (भावी योजना, वार्षिक योजना और बजट) की नीति पर संस्तुतियां देना;

(ख) राज्य के संस्थानों की योजना बनाने और उनका कार्यान्वयन करने में सहायता करना;

(ग) शिक्षा के अत्युतम संस्थानों, विनियामक निकायों और राज्य सरकार के मध्य समन्वय करना;

(घ) उच्चतर शिक्षा की योजना का निरीक्षण और कार्यान्वयन करना;

(ङ) सूचना प्रणाली की विरचना करना और इसके रख-रखाव का प्रबन्ध करना;

(च) सरकारी स्तर पर और संस्थान के स्तर पर समय-समय पर उच्चतर शिक्षा से सम्बन्धित डाटा का संग्रहण करना;

(छ) राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा मिशन द्वारा विरचित प्रमुख निष्पादन सूचकों के अनुसार राज्य में संस्थानों का मूल्यांकन करना और यदि अपेक्षित हो तो उनके लिए पैरामीटर (प्राचल) तैयार करना;

(ज) राज्य में अध्यापन गुणवत्ता और अनुसंधान में निरंतर वृद्धि के लिए योजना बनाना और उस पर उपायों का सुझाव देना;

(झ) परीक्षा प्रणाली में सुधारों के लिए सुझाव देना;

(ञ) पाठ्‌य विवरण को समकालीन और सुसंगत बनाना;

(ट) अनुसंधान में नवप्रवर्तन को प्रोत्साहित करना;

(ठ) राज्य में उच्चतर शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता के सुरक्षोपाय करना;

(ड) नए संस्थानों, महाविद्यालयों की स्थापना पर सुझाव देना;

(ढ) संस्थानों की मान्यता की प्रक्रियाओं को सुधारने हेतु उपायों का सुझाव देना;

6776 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 (ण) सरकार को उच्चतर शिक्षा में विनिधानों से सम्बन्धित मामलों पर सलाह देना;

(त) विश्वविद्यालयों को विनियमों और उप-विधियों आदि को बनाने में सलाह देना;

(थ) राज्य सरकार के माध्यम से राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा मिशन के अभिदाय के रुप में प्राप्त रकम का प्रबंध करना;

(द) ऐसी प्रक्रियाएं संस्तुत करना, जैसी सरकार द्वारा संस्थानों को अनुदान प्रदान करने में अपेक्षित हों;

(ध) राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा मिशन के अधीन विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को वित्तीय सहायता अंतरित करने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया बनाना और उसका अनुसरण करना;

(न) उच्चतर शिक्षा में पहुंच, श्रेष्ठता, समावेशन और निष्पक्षता की अभिवृद्धि करने हेतु किए जाने वाले उपायों पर सलाह देना;

(प) उच्चतर शिक्षा और अनुसंधान के विकास में असंतुलनों (जिनके अन्तर्गत क्षेत्र, धर्म, शैक्षिक शाखाएं, लिंग और अन्य सामाजिक-आर्थिक कारक हैं) को दूर करने हेतु उपायों का सुझाव देना;

(फ) संस्थानों के प्रत्यायन और बेंचमार्किंग के मामलों में शैक्षिक उत्—ष्टता के प्रमापों और मानकों को विनिर्दिष्ट करना;

(ब) राज्य सरकार, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों या संस्थानों को और किसी विषय पर अनुसंधान, जो परिषद्‌ को विनिर्दिष्ट किया जाए, सलाह देना; और

(भ) उच्चतर शिक्षा और अनुसंधान में मानकों के अवधारण, समन्वयन और अनुरक्षण से संबंधित ऐसे अन्य —त्यों का निर्वहन करना, जो राज्य सरकार विहित करे ।

10. परिषद्‌ की बैठक.--(1) परिषद्‌ की बैठकें अपेक्षानुसार आयोजित की जाएंगी। तथापि, छह मास में कम से कम एक बैठक बुलाना अनिवार्य होगा।

(2) परिषद्‌ का सदस्य सचिव, अध्यक्ष की सलाह पर परिषद्‌ की बैठक बुलाएगा।

(3) परिषद्‌ की बैठक की गणपूर्ति अध्यक्ष और सदस्य-सचिव सहित कुल सदस्यों के एक-तिहाई से होगी।

11. रिक्ति से कार्यवाहियों का अविधिमान्य न होना.--परिषद्‌ का कोई कार्य या कार्यवाहियां परिषद्‌ में मात्र किसी रिक्ति, सदस्य की अनुपस्थिति या इसके गठन में कोई त्रुटि है, के आधार पर अविधिमान्य नहीं होंगी।

12. त्यागपत्र.--कोई भी नामनिर्देशित सदस्य अध्यक्ष को त्यागपत्र भेज सकेगाः

परन्तु ऐसा त्यागपत्र उस तारीख से ही प्रभावी होगा, जिसको ऐसा त्यागपत्र अध्यक्ष द्वारा स्वीकार किया गया है।

13. सदस्यों के भत्ते.--सदस्य ऐसे यात्रा भत्ते, दैनिक भत्ते, स्थानीय व्यय और सहभागिता फीस आदि प्राप्त करने के हकदार होंगे, जैसे राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं।

14. रिक्ति का होना.--यदि मृत्यु, त्यागपत्र, सेवानिवृत्ति से या अन्यथा कोई रिक्ति होती है तो राज्य सरकार शेष कार्यकाल के लिए किसी सदस्य को नामनिर्देशित कर सकेगी।6777 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 15. वार्षिक लेखे और संपरीक्षा.--(1) परिषद्‌ के लेखे और लेखों की वार्षिक रिपोर्ट, ऐसी रीति में अनुरक्षित की जाएगी, जैसी विहित की जाए।

(2) परिषद्‌ के लेखों की संपरीक्षा परिषद्‌ द्वारा नियुक्त संपरीक्षक द्वारा की जाएगी।

(3) सदस्य-सचिव लेखों की वार्षिक रिपोर्ट को तैयार करने के लिए उत्तरदायी होगा और प्रत्येक सदस्य को उसकी सीलबन्द प्रति उपलब्ध करवाएगा और उसे अनुमोदन के लिए परिषद्‌ के समक्ष प्रस्तुत करेगा।

(4) संपरीक्षक द्वारा इंगित गलतियां और अनियमितताएं परिषद्‌ द्वारा सम्यक्‌ प्रक्रिया का अनुसरण करके परिशोधित की जाएंगी।

(5) परिषद्‌ के लेखों की संपरीक्षित रिपोर्ट परिषद्‌ की टिप्पणियों सहित विहित समय सीमा के भीतर राज्य सरकार को प्रस्तुत की जाएगी।

(6) राज्य सरकार वार्षिक लेखा और संपरीक्षा रिपोर्ट प्राप्त करने के पश्चात्‌ उसे यथासंभव शीघ्र राज्य विधानमण्डल के समक्ष रखेगी।

16. वार्षिक रिपोर्ट.--(1) परिषद्‌ प्रत्येक वर्ष अपने कार्यकलापों की वार्षिक रिपोर्ट राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

(2) राज्य सरकार वार्षिक रिपोर्ट प्राप्त करने के पश्चात्‌ इसे यथा शक्य शीघ्र राज्य विधानमण्डल के समक्ष रखेगी।

17. सद्‌भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण.--इस अधिनियम या तद्‌धीन बनाए गए नियमों के अनुसरण में सद्‌भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से हुई क्षति या संभावतः कारित क्षति के लिए किसी लोक सेवक या राज्य सरकार के विरुद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाहियां नहीं हाेंगी।

18. परिषद्‌ के अधिकारी और कर्मचारिवृंद.--(1) परिषद्‌ ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेगी जैसे परिषद्‌ के सुचारु —त्यकरण के लिए आवश्यक समझे जाएं।

(2) परिषद्‌ के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा के निबंधन व शर्तें ऐसी होंगी, जैसी विहित की जाएं।

19. परिषद्‌ के सदस्य, अधिकारी और कर्मचारिवृंद का लोक सेवक होना.--परिषद्‌ के सदस्य, अधिकारी और कर्मचारी भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थान्तर्गत लोक सेवक समझे जाएंगे।

20. विनियम बनाने की शक्ति.--परिषद्‌, ऐसे विनियम बना सकेगी, जैसे अपेक्षित हों और जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों।

21. कठिनाईयों को दूर करने की शक्ति.--(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो राज्य सरकार राजपत्र (ई-गजट), हिमाचल प्रदेश में प्रकाशित साधारण या विशेष आदेश द्वारा, ऐसे उपबन्ध, जो इस अधिनियम या तद्‌धीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों से असंगत न हाें, कर सकेगी जो उक्त कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत होंः

परन्तु इस धारा के अधीन कोई भी आदेश इस अधिनियम के प्रारम्भ से दो वर्ष की अवधि के अवसान के पश्चात्‌ नहीं किया जाएगा।

(2) इस धारा के अधीन किया गया कोई आदेश इसके किए जाने के पश्चात्‌, यथाशीघ्र विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा। 6778 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 22. नियम बनाने की शक्ति.--(1) राज्य सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए राजपत्र (ई-गजट) हिमाचल प्रदेश में अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी।

(2) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए समस्त नियम, इनके बनाए जाने के पश्चात्‌, यथाशक्य शीघ्र, विधान सभा के समक्ष जब यह पन्द्रह दिन से अन्यून अवधि के लिए सत्र में हो, जो एक या दो आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी, रखे जाएंगे और यदि उस सत्र, जिसमें यह इस प्रकार रखे गए हैं या सत्र के ठीक बाद के सत्र के अवसान से पूर्व विधान सभा नियमों में कोई उपांतरण करती है या विधान सभा विनिश्चय करती है कि नियम नहीं बनाए जाने चाहिए, तो ऐसे नियम, यथास्थिति, केवल ऐसे उपान्तरित रुप में ही प्रभावी होंगे या उनका कोई प्रभाव नहीं होगा। तथापि, ऐसे किसी उपांतरण या बातिलीकरण से तद्‌धीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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उद्‌देश्यों और कारणों का कथन

राज्य में छात्रों को शिक्षा प्रदान करने के लिए विभिन्न शैक्षणिक संस्थान और विनियामक निकाय —त्यशील हैं। किन्तु सामाजिक-आर्थिक परिवेश के तीव्रता से बदलते परिदृश्य के कारण राज्य में शिक्षा प्रदान करने की पद्धति को समझने की आवश्यकता है। राज्य में उच्चतर शिक्षा के समन्वित विकास हेतु सरकार, विश्वविद्यालयों, उद्योग और जनसाधारण के प्रतिनिधियों तथा शैक्षणिक विशेषज्ञों से समाविष्ट एक संस्थान, जो इसमें सहक्रियात्मक सम्बन्ध स्थापित करने का आशय रखते हों, स्थापित करने की अपेक्षा है। इसलिए नीति निरुपण और सतत्‌ योजना के लिए सरकार को सुसंगत आवक (इनपुटस) प्रदान करके राज्य में उच्चतर शिक्षा के समस्त संस्थानों की स्वायत्तता सुनिश्चित करने और उन्हें शैक्षणिक उत्—ष्टता और सामाजिक-न्याय को बढ़ावा देने के लिए उत्तरदायी बनाने हेतु राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद्‌ स्थापित करना अनिवार्य हो गया है। इसलिए, इससे राज्य की बदलती सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं के अनुसार उच्चतर शिक्षा का मार्गदर्शन करने और उसकी अभिवृद्धि करने में भी सहायता मिलेगी। परिषद्‌, सरकार और विश्वविद्यालयोें तथा विनियामक निकायों के मध्य सेतु के रूप में कार्य करेगी।

यह विधेयक उपर्युक्त उद्‌देश्यों की पूर्ति के लिए है।

(सुरेश भारद्वाज) प्रभारी मन्त्री। धर्मशालाः तारीखः , 2018

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AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT

Bill No. 15 of 2018

THE HIMACHAL PRADESH STATE HIGHER EDUCATION COUNCIL

(ESTABLISHMENT AND REGULATION) BILL, 2018

(As INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)

6779 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 A

BILL

to provide for establishment, incorporation and regulation of the State Higher Education

Council (SHEC) for coordinated development of Higher Education and to regulate its functioning

and for matters connected therewith or incidental thereto.

BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Sixty-ninth year of the Republic of India as follows:—

1. Short title and commencement.—(1) This Act may be called the Himachal Pradesh State Higher Education Council (Establishment and Regulation) Act, 2018.

(2) It shall come into force on such date as the State Government may, by notification in the Rajpatra (e-Gazette), Himachal Pradesh, appoint.

2. Definitions.—In this Act, unless the context otherwise requires,—

(a) "Chairperson" means the Chairperson of the Council;

(b) "college" means a college or institution including autonomous college maintained or approved, or affiliated to any University which provides facility of studying in syllabi from admission until examination;

(c) "Council" means the Himachal Pradesh State Higher Education Council constituted under section 3;

(d) "Government" or "State Government" means the Government of Himachal Pradesh;

(e) "Higher Education" means any education stream whether financial, technical including research studies that leads to award of degree, diploma or certificate but does not include Medical, Agriculture, Animal Husbandry and Horticulture stream;

(f) "institution" means an academic institution of Higher Education maintained by, or admitted to the privileges of the University;

(g) "member " means a member of the Council and includes the Chairperson and Vice-Chairperson;

(h) "prescribed" means prescribed by the rules made under this Act;

(i) "State" means the State of Himachal Pradesh;

(j) "University" means any University established by an Act passed by the State Legislature;

(k) "University Grants Commission" means the Commission established under the University Grants Commission Act, 1956 (3 of 1956); and6780 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 (l) "Vice-Chairperson" means the Vice-Chairperson of the Council.

3. Constitution of Council.—(1) The State Government shall, by notification in the Rajpatra (e-Gazette), Himachal Pradesh, constitute a body to be known as the Himachal Pradesh State Higher Education Council consisting of the following, namely:—

(a) ex-officio members,–

(i) an eminent academician with proven Chairperson; leadership qualities

(ii) Secretary (Higher Education), Vice- Government of Himachal Pradesh Chairperson;

(iii) Vice-Chancellors of any two State Member; Public Universities

(iv) Vice-Chancellor of Central University Member;

(v) two Vice Chancellors of Private Member; Universities to be nominated by the State Government in rotation of two years (vi) Secretary (Finance), Government of Member; Himachal Pradesh or his representative not below the rank of Joint Secretary

(vii) Secretary (Technical Education), Member; Government of Himachal Pradesh or his representative not below the rank of Joint Secretary

(viii) Director of Higher Education Member; and

(ix) State Project Director (RUSA) Member-Secretary;

(b) non-official members,—

(i) five members to be nominated by the State Government from the field of art, science, civil society, technology or skill development;

(ii) two experts from Industry to be nominated by State Government;

(iv) one member to be nominated by the Ministry of Human Resource Development, Government of India;

(v) one academician to be nominated by the State Government having experience of planning and policy making in Higher Education.

6781 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940

(2) The Council shall be a body corporate by the name aforesaid having perpetual succession and a common seal and may by the said name, sue and be sued.

(3) The tenure of each nominated member shall be for a period of six years and one-third of the nominated members shall retire after every two years.

(4) The headquarter of the Council shall be at Shimla.

4. First Chairperson.—The first Chairperson of the Council shall be appointed by the State Government and shall continue as such until the Selection Committee selects a Chairperson under the provisions of this Act.

5. Advisory Committee.—(1) There shall be an Advisory Committee of three members under the chairmanship of the Chief Secretary for making recommendations to the Selection Committee for the appointment of the Chairperson of the Council.

(2) Two other members of the Advisory Committee shall be reputed academicians or famous intellectuals, out of which one shall be nominated by the State Government and other by the Council.

6. Selection Committee.—The Selection Committee consisting of the following members shall select the Chairperson on the recommendations of the Advisory Committee, namely:—

(a) the Chief Minister;

(b) the Education Minister; and

(c) Leader of the Opposition in the State Legislative Assembly:

Provided that, if the portfolio of Education happens to be with the Chief Minister, any other Minister, as may be nominated by the Chief Minister shall, be the member of the Selection Committee.

7. Tenure of Chairperson.—(1) The tenure of the Chairperson shall be for a period of five years.

(2) The Chairperson of the Council may be removed by the State Government, if his work and conduct is not found satisfactory.

8. Removal of member.—(1) The State Government shall remove a member if,—

(a) he becomes an undischarged insolvent;

(b) he is convicted and sentenced to imprisonment for an offence which in the opinion of the State Government involves moral turpitude;

(c) he becomes of unsound mind and stands so declared by a competent court;

(d) he refuses to act or becomes incapable of acting;

(e) he is, without obtaining leave of absence from the Council, absents from three consecutive meetings of the Council; or6782 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 (f) his work and conduct is found unsatisfactory. (2) On a controversy regarding the disqualification of a member, the decision of the Government shall be final.

(3) No person shall be eligible to be nominated as a member of the Council unless he is a graduate.

9. Duties and functions of Council.—The duties and functions of the Council shall be,– (a) to make recommendations on the policies of Higher Education for the State (Future Planning, Annual Planning and Budget);

(b) to help the institutions of the State in planning and implementation;

(c) to coordinate between the top institutions of education, regulatory bodies and the State Government;

(d) to invigilate and implement the planning of Higher Education;

(e) to manage, frame information system and its maintenance;

(f) to collect data pertaining to Higher Education at Government level and institution level from time to time;

(g) to evaluate the institutions in the State in accordance with the key performance indicators framed by the National Higher Education Mission and if required, make parameters;

(h) to plan and suggest measures for continuous growth in teaching quality and research in the State;

(i) to suggest reforms in examination system;

(j) to make syllabi contemporary and relevant;

(k) to encourage innovation in research;

(l) to safeguard the autonomy of the institutions in the State;

(m) to suggest the establishment of new institutions, colleges;

(n) to suggest measures to improve the procedures of the recognition of the institutions;

(o) to advise the Government on issues relating to investments in the Higher Education;

(p) to advise the Universities in making regulations and bye-laws etc.;

(q) to manage the amounts received as contribution of the National Higher Education Mission through the State Government;

(r) to recommend such procedures, as may be required, in making Grants-in-aid by the Government to the institutions;

6783 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 (s) to make and follow a transparent procedure for transferring the financial aids to the

Universities and colleges under the National Higher Education Mission;

(t) to advise on the measures to be taken for enhancing access, excellence, inclusion and equity in Higher Education;

(u) to suggest measures to remove imbalances (including those relating to regions, religions, academic disciplines, gender and other socio-economic factors) in the development of Higher Education and research;

(v) to specify norms and standards of academic excellance in the matters of accreditation and benchmarking of institutions;

(w) to advise the State Government, Universities, colleges or institutions and research on any matter as may be referred to the Council; and

(x) to discharge such other functions in relation to the determination, co-ordination and maintenance of standards in Higher Education and research as the State Government may prescribe.

10. Meeting of Council.—(1) The meetings of the Council shall be held as per requirement. However, it shall be mandatory to convene at least one meeting in six months.

(2) The Member-Secretary of the Council shall convene the meeting of the Council on the advice of the Chairperson.

(3) The quorum of the meeting of the Council shall be one-third of the total members including the Chairperson and Member-Secretary.

11. Vacancy not to invalidate proceedings.—No act or proceedings of the Council shall be invalid merely on the ground of the existence of any vacancy, absence of member or defect in the constitution of the Council.

12. Resignation.—Any nominated member may forward a resignation letter to the Chairperson:

Provided that such resignation shall take effect from the date on which such resignation is accepted by the Chairperson.

13. Allowances to members.—The Members shall be entitled to receive such travelling allowances, daily allowances, local expenses and participation fees etc., as may be prescribed by the State Government.

14. Occurrence of a vacancy.—If any vacancy occurs due to death, resignation, retirement or otherwise the State Government shall nominate a member for the remaining term.

15. Annual accounts and audit.—(1) The accounts of the Council and the annual report of accounts shall be maintained in such manner, as may be prescribed.

(2) The accounts of the Council shall be audited by an Auditor appointed by the Council.

(3) The Member-Secretary shall be responsible for preparing the annual report of accounts and make available a sealed copy of the same to each member and present the same before the Council for approval.

6784 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940

(4) Mistakes and irregularities pointed out by the Auditor shall be rectified by the Council by following due procedure.

(5) The audited report of accounts of the Council shall be presented to the State Government within prescribed time limit alongwith the comments of the Council.

(6) After receiving the annual accounts and audit report, the State Government shall lay it before the State Legislature as soon as possible.

16. Annual report.—(1) The Council shall present the annual report of its activities every year before the State Government.

(2) After receiving the annual report, the State Government shall lay the same before the State Legislature as soon as possible.

17. Protection of action taken in good faith.—No suit, prosecution or other legal proceedings shall lie against any public servant or the State Government in respect of any damage caused or likely to be caused by anything which is in good faith done or intended to be done in pursuance of this Act or the rules made thereunder.

18. Officers and employees of Council.—(1) The Council may appoint such officers and employees as may be deemed necessary for smooth functioning of the Council.

(2) The terms and conditions of the service of the officers and employees of the Council shall be such, as may be prescribed.

19. Members, officers, and employees of Council to be public servant.—The members, officers and employees of the Council shall be deemed to be public servant within the meaning of section 21 of the Indian Penal Code, 1860 (45 of 1860) .

20. Power to make regulations.—The Council may make such regulations, as may be required and are not inconsistent with the provisions of this Act.

21. Power to remove difficulties.—(1) If any difficulty arises in giving effect to the provisions of this Act, the State Government may, by general or special order published in the Rajpatra (e-Gazette), Himachal Pradesh, make such provisions, not inconsistent with the provisions of this Act or rules made thereunder, as may appear to be necessary or expedient for removing the said difficulty:

Provided that no order under this section shall be made after the expiry of a period of two years from the date of commencement of this Act.

(2) Any order made under this section shall, as soon as may be after it is made, be laid before the Legislative Assembly.

22. Power to make rules.—(1) The State Government may, by notification in the Rajpatra (e-Gazette), Himachal Pradesh, make rules for carrying out the purposes of this Act. (2) All the rules made under this Act, shall be laid, as soon as may be after they are so made, before the Legislative Assembly, while it is in session, for a period of not less than fifteen days, which may be comprised in one session or in two successive sessions and, if before the expiry6785 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 of the session in which they are so laid or the session immediately following, the Assembly makes any modification(s) in the rules or the Assembly decides that the rules should not be made, such rules shall have effect only in such modified form or be of no effect, as the case may be. However, any such modification or annulment shall be without prejudice to the validity of anything previously done.

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STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS

There are various educational institutions and regulatory bodies functioning in the State to impart education to the students. But, due to fast changing scenario of the socio-economic environment, there is a need to understand the methods of imparting education in the State. There is a requirement to establish an institution in the State comprising of Academic experts and the representatives from the Government, Universities, Industry and public in order to forge among them a synergic relationship for coordinated development of Higher Education. Therefore, it has become imperative to set up a State Higher Education Council for ensuring the autonomy of all Institutions of Higher Education in the State and to make them accountable for promoting academic excellence and social justice by providing the relevant inputs to the Government for policy formulation and perspective planning. It will also guide and steer the growth of Higher Education in accordance with changing socio-economic needs of the State. The Council will act as a bridge between the Government and Universities and the regulatory bodies.

This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.

(SURESH BHARDWAJ) Minister-in-charge.

DHARAMSHALA:

THE ........... , 2018.

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ब अदालत नायब तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0

तारीख पेशी : 26-12-2018 केस नं0 : ............. /NC/2018

श्री ईश्वर सिंह पुत्र श्री सेस राम पुत्र श्री राम दास, निवासी गांव सुजैहणी, डाकघर न्युल, तहसील . . प्रार्थी। भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0

बनाम

आम जनता

. . प्रत्यार्थी। विषय.--दरख्वास्त बराये कागजात माल में नाम की दुरुस्ती बारे।

श्री ईश्वर सिंह पुत्र श्री सेस राम पुत्र श्री राम दास, निवासी गांव सुजैहणी, डाकघर न्युल, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 द्वारा दिनांक 08-10-2018 को इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि 6786 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 उसका नाम वाक्या फाटी न्युल, कोठी बजौरा, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 के राजस्व रिकार्ड में श्री चुहड़ू दर्ज है जबकि असली नाम श्री ईश्वर सिंह है। अब प्रार्थी अराजी हजा के इन्द्राज में अपना नाम श्री चुहडू़ से दरुस्त करके चुहड़ू उर्फ ईश्वर सिंह दर्ज करना चाहता है।

अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उपरोक्त प्रार्थी के नाम की दुरुस्ती का इन्द्राज करने बारे कोई एतराज हो तो वह दिनांक 26-12-2018 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत आकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है, इसके उपरान्त कोई भी एतराज समायत न होगा तथा नियमानुसार नाम दुरुस्ती का इन्द्राज करने के आदेश पारित कर दिये जायेंगे।

आज दिनांक 30-11-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

हस्ताक्षरित/- मोहर। नायब तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी,

भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0।

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ब अदालत नायब तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0

तारीख पेशी : 26-12-2018 केस नं0 : 38/NC/2018

श्री भाग चन्द पुत्र श्री दीन दयाल पुत्र श्री गिरू, निवासी गांव छैंऊर, डा0 छैंऊर, तहसील भुन्तर, . . प्रार्थी। जिला कुल्लू, हि0 प्र0

बनाम

आम जनता

. . प्रत्यार्थी। विषय.--दरख्वास्त बराये कागजात माल में नाम की दुरुस्ती बारे।

श्री भाग चन्द पुत्र श्री दीन दयाल पुत्र श्री गिरू, निवासी गांव छैंऊर, डा0 छैंऊर फाटी शिलीहार, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 द्वारा दिनांक 25-05-2018 को इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उसका नाम वाक्या फाटी शिलीहार, कोठी कोटकन्डी, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 के राजस्व रिकार्ड में श्री भागी दर्ज है जबकि असली नाम श्री भाग चन्द है। अब प्रार्थी अराजी हजा के इन्द्राज में अपना नाम श्री भागी से दरुस्त करके भागी उर्फ भाग चन्द दर्ज करना चाहता है।

अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उपरोक्त प्रार्थी के नाम की दुरुस्ती का इन्द्राज करने बारे कोई एतराज हो तो वह दिनांक 26-12-2018 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत आकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है, इसके उपरान्त कोई भी एतराज समायत न होगा तथा नियमानुसार नाम दुरुस्ती का इन्द्राज करने के आदेश पारित कर दिये जायेंगे।

आज दिनांक 30-11-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

हस्ताक्षरित/- मोहर। नायब तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी,

भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0।6787 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 ब अदालत नायब तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0

तारीख पेशी : 26-12-2018 केस नं0 : 39/NC/2018

श्री देवा पुत्र श्री शुकरू पुत्र श्री जाढ़ा उर्फ जाढ़ा राम, निवासी गांव मलाणा, डाकघर मलाणा, तहसील . . प्रार्थी। भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0

बनाम

आम जनता

. . प्रत्यार्थी। विषय.--दरख्वास्त बराये कागजात माल में नाम की दुरुस्ती बारे।

श्री देवा पुत्र श्री शुकरू पुत्र श्री जाढ़ा उर्फ जाढ़ा राम, निवासी गांव मलाणा, डाकघर मलाणा फाटी मलाणा, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 द्वारा दिनांक 25-8-2018 को इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उसका नाम वाक्या फाटी मलाणा, कोठी नगर, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 के राजस्व रिकार्ड में श्री देवी राम दर्ज है जबकि असली नाम श्री देवा है। अब प्रार्थी अराजी हजा के इन्द्राज में अपना नाम श्री देवी राम से दरुस्त करके देवी राम उर्फ देवा दर्ज करना चाहता है।

अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उपरोक्त प्रार्थी के नाम की दुरुस्ती का इन्द्राज करने बारे कोई एतराज हो तो वह दिनांक 26-12-2018 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत आकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है, इसके उपरान्त कोई भी एतराज समायत न होगा तथा नियमानुसार नाम दुरुस्ती का इन्द्राज करने के आदेश पारित कर दिये जायेंगे।

आज दिनांक 30-11-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

हस्ताक्षरित/- मोहर। नायब तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी,

भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0।

--------

ब अदालत नायब तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0

तारीख पेशी : 26-12-2018 केस नं0 : 37/NC/2018 दायर तिथि : 30-10-2018

श्रीमती सोभी देवी पुत्री श्री राम नाथ, निवासी गांव सरानाऊली, डाकघर जलुग्रां, तहसील भुन्तर, जिला . . प्रार्थिया। कुल्लू, हि0 प्र0

बनाम

आम जनता

. . प्रत्यार्थी। 6788 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 दिसम्बर, 2018/26 मार्गशीर्ष, 1940 विषय.--दरख्वास्त बराये कागजात माल में नाम की दुरुस्ती बारे।

श्रीमती सोभी देवी पुत्री श्री राम नाथ, निवासी गांव सरानाऊली, डाकघर जलुग्रां, फाटी चौंग, कोठी चौंग, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 द्वारा दिनांक 30-10-2018 को इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उसका नाम वाक्या फाटी चौंग, कोठी चौंग, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 के राजस्व रिकार्ड में श्रीमती खीमी दर्ज है जबकि असली नाम श्रीमती सोभी देवी है। अब प्रार्थिया अराजी हजा के इन्द्राज में अपना नाम श्रीमती खीमी से दरुस्त करके खीमी उर्फ सोभी देवी दर्ज करना चाहती है।

अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि यदि किसी को उपरोक्त प्रार्थिया के नाम की दुरुस्ती का इन्द्राज करने बारे कोई एतराज हो तो वह दिनांक 26-12-2018 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत आकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है, इसके उपरान्त कोई भी एतराज समायत न होगा तथा नियमानुसार नाम दुरुस्ती का इन्द्राज करने के आदेश पारित कर दिये जायेंगे।

आज दिनांक 30-11-2018 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

हस्ताक्षरित/- मोहर। नायब तहसीलदार एवं सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी,

भुन्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0। नियन्त्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, हिमाचल प्रदेश, शिमला-5 द्वारा मुद्रित तथा प्रकाशित इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरित राजपत्र, वैबसाइट http://rajpatrahimachal.nic.in पर उपलब्ध है एवम्‌ ऑनलाइन सत्यापित किया जा सकता है

Cite this issue. Himachal Pradesh Gazette, Government of Himachal Pradesh, 17 December 2018. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.himachal.2018-12-17.185_gazette_2018-17_12_2018/. Archive identifier in.gazette.himachal.2018-12-17.185_gazette_2018-17_12_2018.