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Himachal Pradesh Gazette · Government of Himachal Pradesh

Himachal Pradesh Gazette, No. 152, 17 October 2019

Published 17 October 2019

Gazette no.
152
Gazetteid
152/GAZETTE/2019-17/10/2019
Identifier
in.gazette.himachal.2019-10-17.152_gazette_2019-17_10_2019
Languages
English, Hindi
Published at
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राजपत्र, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित वीरवार, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941

हिमाचल प्रदेश सरकार

LAW DEPARTMENT

NOTICE

Shimla-2, the 30th September, 2019

No. LLR-E(9)-4/ 2018-Leg.—Whereas, Shri Om Dutt Sharma, Advocate s/o Sh. Siya Ram, r/o Village Dabra, P. O. Shilla, Tehsil Kamrao, District Sirmaur, H. P. has applied for appointment of Notary Public in Sub-Division Shillai of District Sirmaur under rule 4 of the Notaries Rules, 1956.

152-राजपत्र/2019-17-10-2019 (6797)6798 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 Therefore, I, the undersigned in exercise of the power conferred vide Government Notification No. LLR-A (2)-1/2014-Leg., dated 1st July, 2017, hereby issue notice under rule 6 of the Notaries Rules, 1956, for the information of general public for inviting objections, if any, within a period of fifteen days from the date of publication of this notice in e-Rajpatra, H. P. against his appointment as a Notary Public in Sub-Division Shillai of District Sirmaur.

Sd/-

(Competent Authority),

DLR-cum-Deputy Secretary (Law-English).

__________

गृह विभाग

अधिसूचना

शिमला-171002, 11 अक्तूबर, 2019

संख्या गृह (क)ई(3)-31/2015-I.--हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 357-क की उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केन्द्रीय सरकार के समन्वय से, ऐसे पीड़ित व्यक्ति को या उसके आश्रितों, जिन्हें किसी अपराध के परिणामस्वरूप कोई हानिया क्षति हुई है और जिनका पुनवार्स अपेक्षित है, को प्रतिकर के प्रयोजन के लिए निधियों की व्यवस्था करने हेतु निम्नलिखित स्कीम बनाते हैं, अर्थात्‌ः--

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ.--(1) इस स्कीम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश (अपराध से पीड़ित व्यक्ति) प्रतिकर स्कीम 2019 है।

(2) ये राजपत्र (ई0 गजट), हिमाचल प्रदेश में प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त हाेंगे।

2. परिभाषाएं.--(1) इस स्कीम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न होः-

(क) "संहिता" से, दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) अभिप्रेत है;

(ख) "उपाबंध" से स्कीम का उपाबंध-I अभिप्रेत है जिस पर स्कीम के अधीन आवेदक द्वारा आवेदन प्रस्तुत किया जाना है;

(ग) "आवेदक" से पीड़ित व्यक्ति या पीड़ित व्यक्ति, जहां वह शारीरिक या मानसिक अक्षमता के कारण आवेदन प्रस्तुत करने में असमर्थ है, या जहां पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है, की ओर से आवदेन करने वाला व्यक्ति अभिप्रेत है और इसके अन्तगर्त उसके विधिक वारिस भी हैं;

(ङ) "अनुसूची" से, इस स्कीम से संलग्न अनुसूची अभिप्रेत है;

(घ) "निधि" से, इस स्कीम के खण्ड 4 के अधीन गठित हिमाचल प्रदेश पीड़ित व्यक्ति प्रतिकर निधि अभिप्रेत है;

(च) "राज्य सरकार" से, हिमाचल प्रदेश सरकार अभिप्रेत है;

(छ) "जिला विधिक सेवा प्राधिकरण" और "राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण" से, विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की क्रमशः धारा 9 और धारा 6 के अधीन गठित क्रमशः जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण अभिपे्रत है;

6799 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941

(ज) "पीड़ित व्यक्ति" से, ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसको किसी अपराध के परिणामस्वरूप हानि या क्षति हुई है और जिसका पुनर्वासन अपेक्षित है तथा उसकी मृत्यु की दशा में, पद "पीड़ित व्यक्ति" के अन्तगर्त उसका/उसके आश्रित, संरक्षक या विधिक वारिस भी हैं; और

(झ) "हानि या क्षति" से अनुसूची में यथापरिभाषित हानि या क्षति अभिपे्रत है।

(2) उन शब्दों और पदों के, जो इस स्कीम में प्रयुक्त हैं और परिभाषित नहीं हैं, वही अर्थ होंगे जो अधिनियम में हैं।

3. स्कीम के उद्‌देश्य.-- स्कीम का उद्‌देश्य निम्नलिखित उपलब्ध करवाना है,-

(क) पीड़ित व्यक्ति को वित्तीय सहायता; आरै

(ख) पीड़ित व्यक्ति की आवश्यकताओं पर आधारित सहायक सेवाएं जैसे आश्रय देना, परामर्श देना, चिकित्सीय सहायता देना, विधिक सहायता देना, शिक्षा ओर व्यावसायिक प्रशिक्षण देना।

4. पीड़ित व्यक्ति प्रतिकर निधि.--(1) राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश पीड़ित व्यक्ति प्रतिकर निधि के नाम से ज्ञात एक निधि का गठन करेगी जिससे इस स्कीम के अधीन, यथास्थिति, पीडित़ व्यक्ति या उसके/उनके आश्रित (आश्रितों), संरक्षक या विधिक वारिस (वारिसों), जिसे/जिन्हें अपराध के कारण हानि या क्षति हुई है और जिनका पुनर्वासन अपेक्षित है, को प्रतिकर की रकम संदत्त की जानी है।

(2) राज्य सरकार स्कीम के प्रयोजन के लिए प्रतिवर्ष पृथक्‌ बजट आबंटित करेगी।

(3) निधि का संचालन सदस्य सचिव, हिमाचल प्रदेश विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा।

5. प्रतिकर के लिए पात्रता.--(1) पीड़ित व्यक्ति प्रतिकर प्रदान किए जाने के लिए पात्र होगा :-

(क) जहां विचारणीय न्यायालय, संहिता की धारा 357क की उप-धारा (2) के अधीन इसकी संस्तुति करता है या संहिता की धारा 357क की उप-धारा (4) के अधीन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को आवदेन किया है।

(ख) प्रत्येक मामले के सम्बन्ध में स्कीम के अधीन सहायता उपलब्ध होगी जहां प्रथम इत्तिला रिपोर्ट दाखिल की गई है।

(ग) जहां विचारण न्यायालय का, विचारण के निष्कर्ष पर, समाधान हो जाता है कि संहिता की धारा 357 के अधीन अधिनिर्णित प्रतिकर, ऐसे पुनर्वासन हेतु पर्याप्त नहीं है या जहां मामला दोषमुक्ति या उन्मोचन से समाप्त हो गया है और पीड़ित व्यक्ति का पुनर्वासन किया जाना है तथा न्यायालय द्वारा प्रतिकर के लिए सिफारिश की गई हैः

परन्तु पीड़ित व्यक्ति, युक्तियुक्त समय सीमा के भीतर, किसी पुलिस थाना के प्रभारी अधिकारी को ऐसे पुलिस थाना की सीमाओं के भीतर हुए अपराध की या ऐसे अपराध से उद्‌भतू अपराध का संज्ञान लेने के लिए सशक्त किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट को सूचना देता हैः परन्तु यह और कि पीड़ित व्यक्ति मामले के अन्वेषण और विचारण के दौरान पुलिस और अभियोजन के साथ सहयोग करता हैः6800 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 परन्तु यह और भी कि आवेदन जिला, जहां अपराध किया गया था (संहिता की धारा 357क की उप-धारा (4) में यथा उपबन्धित प्रतिकर के अधिनिर्णय के लिए), के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को उपाबन्ध-I पर किया है।

(2) (क) यथास्थिति, ऐसी सिफारिश या आवदेन को, जिला, जहां अपराध किया गया था, के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को अन्तरित किया जाएगा।

(ख) जहां अपराध भागतः एक स्थानीय क्षेत्र में और भागतः किसी अन्य क्षेत्र में या जहां वह विभिन्न स्थानीय क्षेत्रों में किए गए पृथक्‌-पृथक्‌ कार्यों के रूप में किया गया है तो वहां ऐसे किन्हीं स्थानीय क्षेत्रों में अधिकारिता रखने वाला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संहिता की धारा 357क के अधीन कार्यवाही कर सकेगा।

(ग) पीड़ित व्यक्ति उस दशा में भी प्रतिकर की मंजूरी का पात्र होगा जहां अपराधी का पता नही चलता है या उसकी पहचान नही होती है, और जहां अपराध का विचारण नही हुआ है।

6. प्रतिकर की मंजूरी के लिए प्रक्रिया.--(1) जब कभी न्यायालय द्वारा संहिता की धारा 357क की उप-धारा (2) के अधीन प्रतिकर के लिए सिफारिश की गई है या प्रतिकर के अधिनिर्णय के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को संहिता की धारा 357क की उप-धारा (4) के अधीन कोई आवेदन किया गया है तो उक्त प्राधिकरण मामले की जांच करेगा और पीड़ित व्यक्ति को रिपोर्ट किए गए अपराध से उद्‌भूत हानि या क्षति की बाबत दावे की अन्तर्वस्तु का सत्यापन भी करेगा।

(2) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सत्यापन के अनुक्रम के दौरान, दावे की प्रमाणिकता अवधारित करने के आशय से कोई अन्य आवश्यक सुसंगत सूचना मंगवा सकेगा और उपयुक्त जांच करने के पश्चात, अनुसूची के उपबन्धों के अनुसार, साठ दिन के भीतर प्रतिकर अधिनिणिर्त करेगा ।

(3) यथास्थिति, जिला या राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, पीड़ित व्यक्ति की पीड़ा को कम करने के लिए, पुलिस अधिकारी, जो पुलिस थाना के प्रभारी अधिकारी की पंक्ति से नीचे का न हो या सम्बद्ध क्षेत्र के मजिस्टे्रट के प्रमाण- पत्र पर तुरन्त निःशुल्क अंतरिम सहायता सुविधा या चिकित्सीय प्रसुविधा या कोई अन्य अंतरिम अनुतोष, जो समुचित प्राधिकारी उचित समझे, उपलब्ध करवाने के लिए आदेश कर सकेगा।

(4) जहां पर पीड़ित व्यक्ति या उसके आश्रितों को एक से अधिक हानि या क्षति हुई है, तो प्रत्येक व्यक्ति के मामले में, संदेय प्रतिकर केवल, अपराध के परिणामस्वरूप हुई गम्भीर क्षति या हानि के लिए ही होगा।

(5) इस प्रकार संदत्त प्रतिकर, इस शर्त के अध्यधीन होगा कि यदि न्यायालय अपराध से उद्‌भूत मामले पर निर्णय पारित करते समय, अभियुक्त व्यक्ति (व्यक्तियों) को संहिता की धारा 357 की उप-धारा (3) के अधीन प्रतिकर के रूप में कोई रकम संदाय करने का आदेश करता है, तो संहिता की धारा 357क के अधीन इस प्रकार संदत्त प्रतिकर के समतुल्य रकम न्यायालय द्वारा प्रत्यक्षतः, यथास्थिति, राज्य या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को दी जाएगी जिसके द्वारा स्कीम के अधीन संदत्त प्रतिकर संदत्त किया गया है।

(6) यथास्थिति, जिला या राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण पीडित़ व्यक्ति को कारित हानि के प्रकार और गम्भीरता के आधार पर पीडित़ या उसके आश्रितों को अधिनिर्णित किए गए प्रतिकर, उपचार के लिए उपगत किए जाने वाले चिकित्सीय व्यय, युक्तियुक्त यात्रा व्ययों, यदि जिला या राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा समन किया गया है, अन्त्येेष्टि व्ययों आदि के रूप में ऐसे आनुषंगिक प्रभारों सहित पुनर्वासन के लिए अपेक्षित न्यूनतम निर्वाह रकम की मात्रा विनिश्चित करेगा। प्रतिकर, प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर आधारित और अनुसूची में यथा विहित ऐसी सीमाओं के अध्यधीन, प्रत्येक मामले में भिन्न-भिन्न हो सकेगा।6801 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 (7) स्कीम के अधीन अधिनिर्णित प्रतिकर की मात्रा को आवेदन में उपबंधित बैंक खाते में विप्रेषित किया जाएगा। जहां तक यथासाध्य हो रकम इलैक्ट्रानिकली अन्तरित की जा सकेगी ताकि निधि से पीड़ित व्यक्ति को प्रभावकारी और शीघ्र संवितरण हो। यदि पीड़ित व्यक्ति अवयस्क या मानसिक रूप से बीमार है तो रकम, यथास्थिति, जिला या राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के समाधान के पश्चात्‌ उसके माता-पिता या संरक्षक के बैंक खाते में विप्रेषित की जायेगी। अधिनिर्णित प्रतिकर को ऐसे अवस्यक या मानसिक रूप से बीमार पीड़ित व्यक्ति के हित और कल्याण में समुचित रूप से उपयोग किया जाएगा।

(8) प्रश्नगत अपराध के सम्बन्ध में, किसी अन्य अधिनियम या स्कीम (स्कीमों) के अधीन बीमा दावे, अनुग्रहपूर्वक रकम आदि के लेखे में पीड़ित व्यक्ति द्वारा इस प्रकार प्राप्त संदाय को इस स्कीम के अधीन प्रतिकर की रकम का भाग समझा जाएगा और यदि उपयुक्त प्रतिकर रकम उपरोक्त वर्णित सांपार्श्विक स्त्रोतों से पीड़ित व्यक्ति द्वारा इस प्रकार प्राप्त संदायों से अधिक हो जाती है, तो केवल अतिशेष रकम ही निधि में से संदेय होगी।

(9) मोटरयान अधिनियम, 1988 (1988 का 59) के अन्तर्गत आने वाले मामले, जिनमें प्रतिकर मोटर दुर्घटना दावे अधिकरण द्वारा प्रदान किया जाना है, इस स्कीम के अन्तर्गत नहीं आएंगे।

(10) इस स्कीम के उपबन्धों के अधीन राज्य सरकार द्वारा पीड़ित को संदेय प्रतिकर विचारण न्यायालय द्वारा अभियुक्त व्यक्ति पर अधिरोपित पीडित़ को जुर्माने के संदाय के अतिरिक्त होगा। (11) भारतीय दण्ड संहिता की धारा 326 क, 376, 376क, 376ख, 376ग, 376घ या 376ङ के अधीन एसिड हमले के पीडित़ /व्यभिचार (दुराचार) पीड़ित, किसी भी सरकारी अस्पताल/सरकार द्वारा अनुमोदित अस्पताल या अन्य किसी अस्पताल, जहां भारत के भीतर उपचार उपलब्ध है, से शत-प्रतिशत मुुफ्त चिकित्सा उपचार प्राप्त करने का हकदार होगा/होगी।

7. कतिपय मामलों में प्रतिकर का अनुज्ञेय होना.--इस स्कीम के अन्तगर्त कोई प्रतिकर अनुज्ञेय नहीं होगा जहांः--

(क) पीड़ित व्यक्ति ने पूर्व में उसी अपराध की बाबत प्रतिकर का कोई दावा किया है; या (ख) घटना इतनी पुरानी है कि कोई साक्ष्य उपलब्ध न हो सकता।

8. कतिपय मामलों में प्रतिकर का प्रतिदाय.--(1) जहां आवेदक इस स्कीम के अन्तर्गत प्रतिकर प्राप्ति करने के पश्चात :

(क) पुलिस या अभियोजन के साथ मामले की जांच और विचारण के दौरान सहयोग करने मेें असफल रहता है; या

(ख) पीड़ित व्यक्ति स्कीम के अन्तगर्त कार्यवाहियों के संबंध में जिला या राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण को पूर्ण युक्तियुक्त सहयोग देने में असफल हो गया है; या

(ग) अपराध से सम्बन्धित ऐसी सूचना को सही/सत्य बताकर प्रस्तुत करता है, जिसे वह जानता है या उसके विश्वास करने का कारण है कि वह मिथ्या है; या

(घ) किसी अपराध के सम्बन्ध में किसी जनसेवक को किसी शपथ या प्रतिज्ञान द्वारा विधिक रूप से बाध्य होते हुए सत्य का कथन करता है या ऐसी शपथ या प्रतिज्ञान लेने हेतु विधि द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति को कोई ऐसा कथन देता है जो कि मिथ्या है या वह जानता है अथवा उसके पास विश्वास करने का कारण है कि वह मिथ्या है, या 6802 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 (ङ) विधिक कार्यवाहियाें के किसी स्तर पर मिथ्या साक्ष्य देता है या विधिक कार्यवाहियों के किसी स्तर पर प्रयोग किये जाने के प्रयोजन के लिए मिथ्या साक्ष्य गढ़ता है; या (च) किसी अपराधी को विधिक दंड से बचाने के आशय से अपराध के घटित होने के किसी साक्ष्य को छिपाता है या उस आशय से किसी अपराध के सम्बन्ध में कोई ऐसी सूचना देता है जो वह जानता है या उसके पास विश्वास करने का कारण है कि वह मिथ्या है।

(2) यथास्थिति, जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण या राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण, जिसके द्वारा स्कीम के अन्तर्गत प्रतिकर प्रदान किया गया था, को यथास्थिति, पुलिस या अभियोजक अभिकरण द्वारा उक्त तथ्य के सम्बन्ध में लिखित में सूचित किया जायेगा ।

(3) जिला या राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ऐसी सूचना के प्राप्त होने पर, आवेदक को बुलाने/कारण बताने का नोटिस दे सकेगा कि उसके द्वारा इस स्कीम के अधीन इस प्रकार प्राप्त किए गए प्रतिकर को जिला या राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को क्यों न वापस कर दिया जाए।

(4) जिला या राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिसके द्वारा स्कीम के अन्तर्गत प्रतिकर प्रदान किया गया था, जारी किए गए कारण बताओ नाटिस पर स्पष्टीकरण, यदि कोई हो, पर विचार करने के पश्चात्‌ और पीड़ित को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करने के पश्चात्‌, आदेश द्वारा, निर्णय को अभिलिखित कर सकेगा कि क्या इस प्रकार प्राप्त किए गए प्रतिकर की रकम को पीड़ित द्वारा ऐसे प्राधिकरण को, ऐसे आदेश के साठ दिन की अवधि के भीतर, प्रतिदत्त किया जाना है या नहीं, ऐसा न होने पर उक्त रकम को पीडित़ व्यक्ति से भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल किया जाएगा।

9. आदेश को रिकार्ड पर प्रस्ततु करना.--न्यायालय संहिता की धारा 357 की उप-धारा (3) के अधीन प्रतिकर का आदेश करते समय स्कीम के अंतर्गत प्रतिकर के रूप में संदत्त किसी रकम को लेखे में लेगी और संहिता की धारा 357क के अधीन दिए गए प्रतिकर के ऐसे आदेश की प्रति को न्यायालय के अभिलेख में रखा जाएगा ।

10. परिसीमा.--संहिता की धारा 357-क की उप-धारा (4) के अधीन पीड़ित व्यक्ति अथवा उसके आश्रितों द्वारा किया गया कोई भी दावा अपराध किए जाने की तारीख से बारह माह के पश्चात्‌ ग्रहण नहीं किया जाएगा :

परन्तु जिला अथवा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बारह मास की उक्त अवधि के अवसान के पश्चात्‌ प्राप्त किए गए आवेदन को ग्रहण कर सकेगा यदि उसका समाधान हो जाता है कि आवेदक को समय पर आवेदन फाइल करने से पर्याप्त कारण द्वारा निवारित किया गया था। 11. अपील.--(1) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रतिकर के इन्कार से व्यथित कोई आवेदक, ऐसे आदेश के 90 दिन की अवधि के भीतर, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के समक्ष अपील कर सकेगा ।

(2) राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण का यदि समाधान हो जाता है, तो वह कारणों को लिखित में अभिलिखित करके विलम्ब से अपील दायर करने के लिए छूट दे सकेगा ।

(3) स्कीम के पैरा 8 के उप-पैरा (3) में यथा-उपबंधित प्रतिकर को प्रतिदाय करने के, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के आदेश से व्यथित कोई आवेदक, ऐसे आदेश की तारीख से नब्बे दिन की अवधि के भीतर राज्य विधिक सवे ा प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर कर सकेगा ।

(4) राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के आदेश के विरुद्ध, कोई अपील दायर नहीं की जाएगी।6803 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 12. लेखा और स्ांपरीक्षा.--(1) राज्य और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण निधि और अन्य सुसंगत अभिलेखों के समुचित लेखे अनुरक्षित करेंगे और लेखों की वार्षिक विवरणी तैयार करेंगे ।

(2) लेखों की संपरीक्षा, परीक्षक, स्थानीय लेखा विभाग, हिमाचल प्रदेश द्वारा की जाएगी। (3) हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव द्वारा प्रत्येक वर्ष लेखों की संपरीक्षित विवरणी सरकार को प्रस्तुत की जाएगी और स्कीम के समुचित और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अधिक निधियों की अपेक्षा के लिए अध्यापेक्षा भी की जायेगी।

13. निरसन और व्यावृत्तियां.--(1) हिमाचल प्रदेश (अपराध से पीड़ित व्यक्ति) प्रतिकर स्कीम 2012, फाईनैंसियल असिसटसैं एंड सपोर्ट सर्विसिज टू विक्टिम ऑफ रेप स्कीम 2012, रिलीफ एंड रिहैबिलिटेशन टू वुमैन एसिड विक्टिम स्कीम, 2016 का एतद्‌द्वारा निरसन किया जाता है।

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी इस प्रकार निरसित उक्त स्कीम के अधीन की गई कोई बात या कार्रवार्ह इस स्कीम के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन विधि मान्य रूप में की गई समझी जाएगी। (3) वर्तमान स्कीम उन सभी लंबित मामलों पर लागू होगी, जहां वर्तमान स्कीम के प्रवृत्त होने की तारीख को कोई अधिनिर्णय पारित नहीं किया गया है।

आदेश द्वारा, हस्ताक्षरित/- (मनोज कुमार), अति0 मुख्य सचिव (गृह)।

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अनुसूची

[खण्ड 2(ङ) और 6 (6) देखें]

हिमाचल प्रदेश (अपराध से पीड़ित व्यक्ति) प्रतिकर स्कीम, 2019 के अन्तर्गत प्रतिकर की स्कीम

क्रम स ख्या ं क्षति/हानि का विवरण प्रतिकर की न्यूनतम स्कीम
1. 2. 3. 4. 5. 6. 7. 8. 9. 10. 11. 12. एसिड हमला बलात्संग (बलात्कार) नाबालिग का शारीरिक शोषण मानव दुव्र्यापार (तस्करी) से पीड़ित व्यक्ति का पुनर्वासन यौन हमला (बलान्संग को अपवर्जित करके) मृत्यु सरकारी चिकित्सक द्वारा या सरकार द्धारा अनुमोदित प ैनल के चिकित्सक द्वारा प्रमाणित गंभीर चोट स्थायी निःशक्तता (80 प्रतिशत या इससे अधिक) आंशिक निःशक्तता (40 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक) जलने या पच्चीस प्रतिशत से अधिक प्रभावित शरीर (एसिड हमले के मामलों को अपवर्जित करके) भ्रूण की हानि प ्रजनन की हानि तीन लाख रुपए तीन लाख रुपए दो लाख रुपए दो लाख रुपए पचास हजार रुपए दो लाख रुपए पच्चीस हजार रुपए द ा े लाख रुपए एक लाख रुपए दो लाख रुपए प चास हजार रुपए एक लाख पचास हजार रुपए
13. 14. 15. सीमापार से गोलाबारी की पीडित महिलाएंः (क) मृत्यु या स्थायी निःशक्तता 80 प्रतिशत या इससे अधिक (ख) आंशिक निशक्तता (40 प्रतिशत 80 से प्रतिशत तक) अश्लील प्रयोजन (उदेश्य) के लिए इस्तेमाल (प्रयुक्त) किए जाने के लिए बच्चे का उत्पीड़न भारतीस दण्ड संहिता की धारा 511 के साथ पठित भारतीय दण्ड संहिता की धारा 307 और 376 के अधीन अपराध करने का प्रयास दो लाख रुपए एक लाख रुपए पचास हजार रुपए प चास हजार रुपए
6804 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941

टिप्पण.--1. यदि पीड़ित व्यक्ति चौदह वर्ष की आयु से कम है तो प्रतिकर की रकम उपरोक्त विनिर्दिष्ट रकम के पचास प्रतिशत तक बढायी जाएगी।

टिप्पण.-- 2. उपरोक्त अनुसूची के अनुसार प्रतिकर की रकम का विनिर्देश इस शर्त के अध्यधीन है कि यदि सक्षम न्यायालय/प्राधिकरण अधिनिर्णय पारित करने के कारणों को लिखित में अभिलिखित करके समझता है कि प्रतिकर का अधिनिर्णय यथानिर्दिष्ट न्यूनतम रकम से अधिक है तो प्रतिकर की अधिक रकम के संदाय के लिए राज्य सरकार का विशेष आदेश आवश्यक होगा।

स्पष्टीकरण :

1. निःशक्तता, शारीरिक शोषण, क्षतियों की प्रतिशतता या गंभीरता के निर्धारण या भ्रूण की हानि, प्रजनन की हानि को अवधारित करने या मानसिक पीड़ा के प्रयोजन के लिए, यथास्थिति, मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी या उप-मण्डलीय चिकित्सा अधिकारी का प्रमाण पत्र तब तक निश्चायक होगा जब तक कि सक्षम न्यायालय या प्राधिकरण कारणों को लिखित में अभिलिखित करके इसे अस्वीकार्य न समझे।

2. मानव दुव्र्यापार (तस्करी) के कारण उत्पीड़न के मामले में पुनर्वासन का प्रश्न संबंधित जिला विधिक प्राधिकरण द्वारा सम्यक्‌ जांच के पश्चात्‌ विनिश्चित किया जाएगा।

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उपाबन्ध-I 1. पीड़ित व्यक्ति का नाम ः

2. पीड़ित व्यक्ति की आयु ः

3. माता-पिता का नाम ः

(क) पिता ः

(ख) माता ः

4. पता..................... मकान नम्बर........................................................... गांव/वार्ड.............................................................. तहसील..................................................................

जिला......................................................................

पिन कोड नम्बर ................................................

दूरभाष .................................................................

मोबाईल नम्बर ....................................................

6805 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941

5. घटना की तिथि और समय : 6. घटना का स्थान : 7. (प) आवेदक का नाम और ब्यौरे :

(पप) पीड़ित व्यक्ति के साथ संबंध (आश्रित परिवार के सदस्य या कोई अन्य, निर्दिष्ट करें,) यदि आवेदन, अवयस्क, मानसिक रूप से अस्वस्थ/मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्ति की ओर से या पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर किया जाता है।

8. क्या प्रथम इत्तिला रिपोर्ट (एफ आई आर) दर्ज की गई है या शिकायत न्यायिक मजिस्टे्रट को की गई है ?

(क) यदि हां, तो तारीख, समय और स्थान के साथ प्रथम इत्तिला रिपोर्ट की प्रति संलग्न करें। (ख) यदि नहीं तो, उसका कारण बताएं।

13. क्या पीड़ित व्यक्ति ने उसी अपराध की बाबत प्रतिकर के लिए पूर्वत्तर कोई दावा दायर किया है।

14. यदि हां, तो उसका ब्यौरा दें क्या चिकित्सा परीक्षण किया गया है?

(क) यदि हां, तो चिकित्सा जांच (एम एल सी) की प्रति संलग्न करें (यदि उपलब्ध हो) । (ख) यदि नहीं तो उसका कारण बताएं?

15. मृत्यु प्रमाण-पत्र संलग्न करें (जहां अपराध के परिणामस्वरूप पीडित़ व्यक्ति की मृत्यु हुई है)। 16. प्रथम इत्तिला रिपोर्ट को दर्ज करने के नब्बे दिन के भीतर स्कीम के अधीन आवेदन करने में देरी के कारण, यदि कोई हो।

17. बैंक खाते के ब्यौरे..................................................................................

बैंक का नाम............................................................................................. शाखा........................................................................................................... खाता संख्या.............................................................................................. आई एफ एस सी कोड

आवेदक के हस्ताक्षर

पत्राचार हेतु पते सहित स्थान : तारीख : संलग्नकों की सूची :

(1) प्रथम इत्तिला रिपोर्ट या न्यायालय में की गई शिकायत की प्रति

(2) चिकित्सा रिपोर्ट की प्रति

(3) कोई अन्य 6806 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 टिप्पण.--1. यदि पीड़ित व्यक्ति चौदह वर्ष की आयु से कम है तो प्रतिकर की रकम उपरोक्त विनिर्दिष्ट रकम के पचास प्रतिशत तक बढा़ यी जाएगी।

टिप्पण.-- 2. उपरोक्त अनुसची के अनुसार प्रतिकर की रकम का विनिर्देश इस शर्त के अध्यधीन है कि यदि सक्षम न्यायालय/प्राधिकरण अधिनिर्णय पारित करने के कारणाें को लिखित में अभिलिखित करके समझता है कि प्रतिकर का अधिनिर्णय यथानिर्दिष्ट अधिकतम रकम से अधिक है तो प्रतिकर की अधिक रकम के संदाए के लिए राज्य सरकार का विशेष आदेश आवश्यक होगा।

स्पष्टीकरणः

1. निःशक्तता, शारीरिक शोषण, क्षतियों की प्रतिशतता या गंभीरता के निर्धारण या भ्रूण की हानि, प्रजनन की हानि को अवधारित करने या मानसिक पीड़ा के प्रयोजन के लिए, यथास्थिति, मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी या उप-मण्डलीय चिकित्सा अधिकारी को प्रमाण-पत्र तब तक निश्चायक होगा जब तक कि सक्षम न्यायालय या प्राधिकरण कारणों को लिखित में अभिलिखित करके इसे अस्वीकार्य न समझे।

2. मानव दुव्र्यापार (तस्करी) के कारण उत्पीड़न के मामले में पुनर्वासन का प्रश्न संबंधित जिला विधिक प्राधिकरण द्वारा सम्यक्‌ जांच के पश्चात्‌ विनिश्चित किया जाएगा।

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[Authoritative English text of this Department Notification No. Home-A-E(3)-31/2015-I Loose,

dated 11-10-2019 as required under Clause (3) of Article 348 of the Constitution of India].

HOME DEPARTMENT

NOTIFICATION

Shimla-171002, the 11th October, 2019

No. Home (A) E (3)-31/2015-I.—In exercise of the powers conferred by sub-section of Section 357-A of the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974), the Governor of Himachal Pradesh in co-ordination with the Central Government is pleased to frame the following Scheme for providing funds for the purpose of compensation to the victim of crime or his/her dependents, who have suffered loss or injury as a result of the crime and who require rehabilitation, namely:—

1. Short title and Commencement.—(1) This Scheme may be called "The Himachal Pradesh (Victim of Crime) Compensation Scheme, 2019".

(2) It shall come into force from the date of publication in the Rajpatra (e-Gazette), Himachal Pradesh.

2. Definitions.—(1) In this Scheme, unless the context otherwise requires:—

(a) "Code" means the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974);

(b) "Annexure" means the Annexure-I of the Scheme on which application under the scheme has to be submitted by the applicant;

6807 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941

(c) "Applicant" means the victim or the person making an application on behalf of the victim where he or she, due to physical or mental incapacity, is unable to submit the same or where the victim has died, includes his legal heirs;

(d) "Fund" means the Himachal Pradesh Victim Compensation Fund constituted under Clause 4 of the Scheme;

(e) "Schedule" means Schedule appended to this Scheme;

(f) "State Government" means the Government of Himachal Pradesh;

(g) "District Legal Service Authority" and "State Legal Services Authority" shall respectively mean a District Legal Services Authority and State Level Services Authority constituted under Section 9 and Section 6 of the Legal Services Authorities Act, 1987 respectively;

(h) "Victim" means a person who himself/herself suffered loss or injury as a result of crime and requires rehabilitation and the expression "Victim" includes in case of his/her death, also his/her dependant(s), guardian or legal heir(s); and

(i) "Loss or injury" means as defined in the Schedule.

(2) Words and Expressions used in this Scheme and not defined, shall have the same meaning as assigned to them in the Act.

3. Objecitves of the Seheme.—The Scheme aims at providing:—

(a) Financial assistance to the victim; and

(b) Support services such as shelter, counselling, medical aid, legal assistance, education and vocational training depending upon the needs of the victim.

4. Victim Compensation Fund.—(1) The State Government shall constitute a fund called Himachal Pradesh Victim Compensation Fund from which an amount of compensation under this Scheme shall be paid to the victim or his/her dependent(s), guardian or Legal heir(s) as the case may be, who has suffered loss or injury as result of a crime and who requires rehabilitation.

(2) The State Government shall allot a separate budget for the purpose of the Scheme every year.

(3) The fund shall be operated by the Member Secretary, Himachal Pradesh State Legal Services Authority.

5. Eligibility for Compensation.— (1) A victim shall be eligible for the grant of compensation :—

(a) Where the trial Court, under sub section (2) of Section 357A of the code makes a recommendation or an application is made under sub-section (4) of Section 357A of the code to the District or State Legal Services Authorities.

6808 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 (b) Assistance under the Scheme shall be available in respect of each of the cases where

the F.I.R. is lodged;

(c) Where the trial court, at the conclusion of the trial, is satisfied, that the compensation awarded under Section 357 of the code is not adequate for such rehabilitation, or where the case ends in acquittal or discharge and the victim has to be rehabilitated and a recommendation by the Court for compensation is made:

Provided that the victim, within reasonable time frame, gives information to the officer-in-charge of a Police Station of the commission of crime within the limits of such station or to a Judicial Magistrate empowered to take cognizance of such offence arising out of the crime:

Provided further that the victim co- operates with the police and prosecution during investigation and trial of the case:

Provided further that the application is made on Annexure-I to the District Legal Services Authority of the District where the crime was committed (for award of compensation as provided in sub-section (4) of Section 357-A of the code). 2. (a) Such recommendation or application, as the case may be, shall be transferred to the District Legal Services Authority of the District where the crime was committed.

(b) Where the crime is committed partly in one local area and partly in another or where it consists of several acts done in different local areas, the District Legal Services Authority having jurisdiction over any of such local areas may proceed under-section 357A of the code.

(c) A victim would also be eligible for grant of compensation where the offender is not traced or identified; and where no trial of offence takes place.

3. Procedure for grant of compensation.—(1) Whenever under sub-section (2) of section 357A of the code, a recommendation for compensation is made by the Court, or an application is made under sub-section (4) of Section 357A of the Code, to the District Legal Services Authority for award of compensation, the said Authority shall examine the case and verify the contents of the claim with regard to the loss or injury caused to victim arising out of the reported crime.

(2) During the course of verification, the District Legal Services Authority, may call for any other relevant information necessary in order to determine genuineness of the claim and shall after due enquiry, award compensation within sixty days, in accordance with provisions of the Schedule.

(3) The District or the State Legal Services Authority, as the case may be, to elleviate the suffering of the victim, may order for immediate interim aid facility or medical benefit to be made available free of cost on the certificate of Police Officer not below the rank of Officer- in-Charge of the Police Station or a Magistrate of the area concerned, or any other interim relief as the appropriate authority deems fit.

(4) Where the victim or his/her dependents have suffered more than one injury or loss, the compensation payable in each individual case shall only be for the severest injury or loss suffered as a result of the crime.

6809 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941

(5) Compensation so paid shall be subject to the condition that if the Court while passing the judgment in the case arising out of the crime, orders the accused person(s) to pay any amount by way of compensation under sub-section (3) of Section 357 of the code, an amount equivalent to compensation so paid under Section 357-A of the code shall be remitted by the Court directly to the State or the District Legal Services Authority, as the case may be, by whom the compensation had been paid under the Scheme.

(6) The District or the State Legal Services Authority, as the case may be, shall decide the quantum of compensation to be awarded to the victim or his/her dependants on the basis of type and severity of loss caused to the victim, medical expenses to be incurred for treatment, reasonable travelling expenses if summoned by District or State Legal Services Authority, minimum sustenance amount required for rehabilitation including such incidental charges as funeral expenses etc. The compensation may vary from case to case, depending on the facts and circumstances of each case and subject to such limits as prescribed in the Schedule.

(7) The quantum of compensation to be awarded under the Scheme shall be remitted into the Bank Account provided in the application. As far as practicable, the amount may be transferred electronically, so as to provide efficacious and speedy disbursement to the victim from the fund. In case where the victim is a minor or mentally ill, the amount shall be remitted to the Bank Account of his/her parent or guardian after the satisfication of District or State Legal Services Authority, as the case may be, Awarded compensation would be properly utilized in the interest and welfare of such minor or mentally ill victim.

(8) In relation to the crime in question, the payments so received by the victim on account of insurance claim, ex-gratia etc. under any other Act or Scheme(s), shall be considered as part of the compensation amount under this Scheme and if the eligible compensation amount exceeds the payments so received by the victim from collateral sources mentioned above, only the balance amount shall be payable out of the Fund.

(9) The cases covered under Motor Vehicles Act, 1988 (59 of 1988) wherein the compensation is to be awarded by the Motor Accident Claims Tribunal shall not be covered under the Scheme.

(10) The Compensation payable to the victim by the State Government under the provisions of this Scheme shall be in addition to payment of fine to the victim imposed on the accused person by the trial Court.

(11) The victim of Acid attack/Rape victim u/s 326 A, 376, 376A, 376B,376C, 376D or 376-E I.P.C. shall be entitled to receive free of cost 100% medical treatment from any of the Governemnt Hospitals/Government approved Hospitals or any Hospital where treatment is available i.e. within India.

7. Non admissibility of compensation in certain cases.— No Compensation shall be admissible under the Scheme where:—

(a) The victim has previously lodged any claim for compensation in respect of the same crime; or

(b) The incident is so belated that no evidence would be forthcoming.

8. Refund of compensation in certain cases.—(1) Where the applicant after receipt of compensation under the scheme :—

6810 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 (a) Fails to co-operate with the police or prosecution during investigation and trial of the

case ; or

(b) Victim has failed to give all reasonable assistance to the District or State Legal Services Authority in connection with the proceedings under the Scheme; or (c) Furnishes, as true, information relating to the crime which he knows or has reason to believe to be false; or

(d) Being legally bound by an oath or affirmation to state the truth in relation to the crime to any public servant or other person authorized by law to administer such oath or affirmation, makes any statement which is false or knows or believes to be false ; or

(e) Gives false evidence in any stage of a judicial proceeding or fabricates false evidence for the purpose of being used at any stage of a judicial proceeding; or

(f) Causes any evidence of the commission of the offence to disappear with the intention of screening the offender from legal punishment or with that intention gives any information respecting the offence which he knows or believes to be false.

(2) The District Legal Services Authority or the State Legal Services Authority, as the case may be, by whom the compensation was awarded under the Scheme shall be informed in writing of the said fact by the police or the prosecuting agency, as the case may be .

(3) On receipt of such information the District or State Legal Services Authority may serve a notice upon the applicant, calling upon him/her to show cause as to why the compensation under the Scheme so received by him/her may not be refunded back to the District or State Legal Services Authority.

(4) The District or the State Legal Services Authority by whom the compensation was awarded under the Scheme after considering the explanation, if any, to the show cause notice issued and after giving the victim a reasonable opportunity of being heard, by order, record a finding as to whether the amount of compensation so received deserves to be refunded by the victim to such authority within a period of sixty days from such order, failing which the said amount shall be recovered from the victim as arrears of land revenue.

9. Order to be placed on record.—The Court at the time of ordering compensation under sub-section (3) of Section 357 of the code shall take into account any sum paid as compensation under the Scheme and copy of such order of compensation made under-section 357A of the code shall be placed on record of the Court.

10. Limitation.—No claim made by the victim or his dependants under sub-section (4) of Section 357A of the code shall be entertained after a period of twelve months from the date of crime:

Provided that the District or State Legal Services Authourity may entertain the application received after the expiry of said period of twelve months, if it is satisfied, that the applicant was prevented by sufficient cause from filing the application in time.

11. Appeal.—(1) An applicant aggrieved by the denial of compensation by the District Legal Services Authority may file an appeal before the State Legal Services Authority within a period of ninety days from the date of such order.

6811 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941

(2) The State Legal Services Authority, if satisfied for the reasons to be recorded in writing, may condone the delay in filing the appeal.

(3) An applicant aggrieved by the orders of the District Legal Services Authority calling upon him/her to refund the compensation as provided in sub para (3) of para 8 of the Scheme may file an appeal before the State Legal Services Authority within a period of ninety days from the date of such order.

(4) No appeal shall lie against the orders of the State Legal Services Authority.

12. Accounts &Audit.—(1) The State and the District Legal Services Authorities shall maintain proper accounts of the fund and other relevant records and prepare an annual statement of accounts.

(2) The accounts shall be audited by the Examiner, Local Audit Department, Himachal Pradesh.

(3) An audited statement of accounts shall be submitted by the Member Secretary of the Himachal Pradesh State Legal Services Authority to the State Government, every year and shall also place requisition for requirement of more funds for porper and effective implementation of the Scheme.

13. Repeal and Saving.—(1) Himachal Pradesh (Victim of Crime) Compensation Sechme 2012, Financial Assistance and Support Services to Victim of Rape Scheme, 2012, Relief and Rehabilitation to women Acid Victim Scheme, 2016 are hereby repealed.

(2) Notwithstanding such repeal anything done or any action taken under the said Schemes so repealed, shall be deemed to have been done or taken under the corresponding provisions of this Scheme.

(3) The present scheme will apply to all the pending cases where no award has been passed as on the date of coming into force of the present Scheme.

By order, Sd/- (MANOJ KUMAR), Addl. Chief Secretary (Home).

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SCHEDULE

[See clause 2 (e) and 6(6)]

Scheme of Compensation under Himachal Pradesh (Vicim of Crime) Compensation Scheme, 2019

Sl. No. Description of injuries/loss Minimum amount of Compensation
1. Acid attack Rs. 3 lakhs
2. Rape Rs. 3 lakhs
3. Physical abuse of minor Rs. 2 lakhs
4. Rehabilitation of victim of Human Trafficking. Rs. 2 lakhs
5. Sexual assault (Excluding rape) Rs. 50,000/-
6. Death Rs. 2 lakhs
7. Grievous hurt, certified by a Govt. Doctor or Doctor from the panel approved by the Government Rs. 25,000/-
8. Permanent Disability (80% or more) Rs. 2 lakhs
9. Partial Disability (40% to 80%) Rs. 1 lakh
10. Burns affecting greater than 25% of the body (excluding Acid Attack cases) Rs. 2 lakhs
11. Loss of foetus Rs. 50,000/-
12. Loss of fertility Rs. 1.5 lakhs
13. Women victims of cross border firing: Death or Permanent Disability (80% or more) (a) Partial Disability (40%to 80%) (b) R s. 2 lakhs Rs. 1 lakh
14. Harassment of child due to being used for pornographic purpose. Rs. 50,000/-
15. Attempt for commission of offence under-section 307 and 376 IPC read with Section 511 IPC. Rs. 50,000/-
6812 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941

Note—1. If the victim is less than 14 years of age, the compensation shall be increased by 50% over the amount specified above.

Note—2. Specification of the amount of compensation as per the Schedule above is subject to the condition that if the Competent Court/Authority passing the award feels for the reasons to the recorded in writing that the award of compensation be more than the minimum amount as specified, then special order of the State Government shall be necessary for payment of the excess amount of compensation.

Explanation:

1. For the purpose of assessing the percentage or gravity of disability, physical abuse, injuries or determining loss of foetus, loss of fertility, or mental agony the certificate of Chief District Medical Officer or Sub Divisional Medical Officer, as the case may be, shall be conclusive unless the Competent Court or Authority finds it unacceptable for the reasons to be recorded in writing.

2. In the case of victimization due to human trafficking the question of rehabilitation shall be decided by the concerned District Legal Services Authority after due enquiry.

_________

ANNEXURE-I 1. Name of the victim:

2. Age of the victim:

3. Name of the parents

(a) Father:

(b) Mother:

6813 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 4. Address:- House No..........................................................................

Village/Ward.....................................................................

Tehsil................................................................................

District..............................................................................

PIN...................................................................................

Telephone.........................................................................

Mobile..............................................................................

5. Date and time of the incident;

6. Place of the incident:

7. (i) Name and details of the applicant

(ii) Relationship with the victim (dependent family members or any other, specify, in case the application is made on behalf of a minor, mentally ill/mentally challenged victim or on the death of the victim.

8. Whether FIR has been lodged or complaint has been made to the Judicial Magistrate?

(a) If yes, state the date, time and place alongwith the copy of FIR/information.

(b) If not, reasons thereof.

9. Whether the victim has previously lodged any claim for compensation in respect of the same crime.

10. If yes, details thereof whether medical examination has been done?

(a) if yes, copy of MLC ( if available).

(b) If not, reasons thereof ?

11. Enclose death certificate (where death of the victim has taken place as a result of the crime).

12. Reasons for delay, if any, in filing application under the Scheme within 90 days of recording of FIR.

13. Details of Bank Account,……...Name of Bank------------

Branch...................................

Account No............................

IFSC Code..............................

Place :

Signature of the applicant with Address for correspondence.

Dated:

List of enclosures:

(1) Copy of FIR or complaint made to the Court (2) Copy of Medical Report (3) Any other6814 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 ब अदालत श्री मित्रदेव मोहतल, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नं0 : 52/ME/T/2019

श्री प्रवीण कुमार पुत्र श्री परमदेव, गांव बग्गा, डाकघर रायसन, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0

. . प्रार्थीगण। श्रीमती शौलजा पुत्री श्री राजेन्द्र कुमार, गांव दुर्गानगर, डाकघर भेखली, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0

बनाम

. . प्रतिवादीगण। आम जनता

विषय.-- प्रार्थना-पत्र जेर धारा 8(4) हि0 प्र0 रजिस्ट्रीकरण नियम, 2004 विवाह पंजीकरण बारे।

उपरोक्त मामला में प्रार्थीगण ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 08-05-2018 को हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार स्थान बागा में शादी कर ली है और तब से दोनोें पति-पत्नी के रूप में रहते चले आ रहे हैं। परन्तु प्रार्थीगणों द्वारा अपनी शादी का इन्द्राज सम्बन्धित पंचायत में दर्ज नहीं करवाया है।

अतः सर्वसाधारण को व सगे सम्बन्धियों को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त प्रार्थीगणों की शादी को सम्बन्धित पंचायत के अभिलेख में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह दिनांक 23-10-2019 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत पेश होकर अपना उजर व एतराज पेश कर सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर व एतराज प्राप्त न होने की सूरत में नियमानुसार शादी दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 23-09-2019 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

मोहर।

हस्ताक्षरित/- तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0।

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ब अदालत श्री मित्रदेव मोहतल, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0

केस नं0 : 51/ME/T/2019

श्री हरीश पुत्र श्री अमर सिंह, गांव व डाकघर शिरढ़, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0

श्रीमती नीशु पुत्री श्री रूप चन्द, गांव व डाकघर व़ तहसील मनाली, जिला कुल्लू, हि0 प्र0

. . प्रार्थीगण।

बनाम

आम जनता

. . प्रतिवादीगण। विषय.-- प्रार्थना-पत्र जेर धारा 8(4) हि0 प्र0 रजिस्ट्रीकरण नियम, 2004 विवाह पंजीकरण बारे।6815 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 उपरोक्त मामला में प्रार्थीगण ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 20-04-2017 को हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार स्थान शिरढ़ में शादी कर ली है और तब से दोनोें पति-पत्नी के रूप में रहते चले आ रहे हैं। परन्तु प्रार्थीगणों द्वारा अपनी शादी का इन्द्राज सम्बन्धित पंचायत में दर्ज नहीं करवाया है।

अतः सर्वसाधारण को व सगे सम्बन्धियों को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त प्रार्थीगणों की शादी को सम्बन्धित पंचायत के अभिलेख में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह दिनांक 23-10-2019 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत पेश होकर अपना उजर व एतराज पेश कर सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर व एतराज प्राप्त न होने की सूरत में नियमानुसार शादी दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 23-09-2019 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

मोहर।

हस्ताक्षरित/- तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0।

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ब अदालत श्री मित्रदेव मोहतल, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0

केस नं0 : 50/ME/T/2019

श्री गोपाल पुत्र श्री राम चन्द, गांव बन्सू, डाकघर खड़ीहार, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0 श्रीमती कमलेश ठाकुर पुत्री श्री तुले राम, गांव खनीपाद, डाकघर दुधीलग़, तहसील व जिला कुल्लू, . . प्रार्थीगण। हि0 प्र0

बनाम

आम जनता

. . प्रतिवादीगण। विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 8(4) हि0 प्र0 रजिस्ट्रीकरण नियम, 2004 विवाह पंजीकरण बारे।

उपरोक्त मामला में प्रार्थीगण ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 02-09-2018 को हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार स्थान बन्सू में शादी कर ली है और तब से दोनोें पति-पत्नी के रूप में रहते चले आ रहे हैं। परन्तु प्रार्थीगणों द्वारा अपनी शादी का इन्द्राज सम्बन्धित पंचायत में दर्ज नहीं करवाया है।

अतः सर्वसाधारण को व सगे सम्बन्धियों को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त प्रार्थीगणों की शादी को सम्बन्धित पंचायत के अभिलेख में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह दिनांक 23-10-2019 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत पेश होकर अपना उजर व एतराज पेश कर सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर व एतराज प्राप्त न होने की सूरत में नियमानुसार शादी दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 23-09-2019 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

मोहर।

हस्ताक्षरित/- तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0।6816 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 ब अदालत श्री मित्रदेव मोहतल, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 केस नं0 : 27/ME/T/2019

श्री शंकर पुत्र श्री किशोर कुमार, गांव व डाकघर फोजल, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0

. प्रार्थीगण। श्रीमती सुमन पुत्री श्री राज कुमार, गांव शाडावाई, डाकघर बजौरा, तहसील भून्तर, जिला कुल्लू, हि0 प्र0

बनाम

. . प्रतिवादीगण। आम जनता

विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 8(4) हि0 प्र0 रजिस्ट्रीकरण नियम, 2004 विवाह पंजीकरण बारे।

उपरोक्त मामला में प्रार्थीगण ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 20-05-2018 को हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार स्थान फोजल में शादी कर ली है और तब से दोनोें पति-पत्नी के रूप में रहते चले आ रहे हैं। परन्तु प्रार्थीगणों द्वारा अपनी शादी का इन्द्राज सम्बन्धित पंचायत में दर्ज नहीं करवाया है।

अतः सर्वसाधारण को व सगे सम्बन्धियों को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त प्रार्थीगणों की शादी को सम्बन्धित पंचायत के अभिलेख में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह दिनांक 23-10-2019 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत पेश होकर अपना उजर व एतराज पेश कर सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर व एतराज प्राप्त न होने की सूरत में नियमानुसार शादी दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 23-09-2019 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

मोहर।

हस्ताक्षरित/- तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0।

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ब अदालत श्री मित्रदेव मोहतल, तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0

केस नं0 : 49/ME/T/2019

श्री राम चन्द पुत्र श्री आतू, निवासी गांव पारशा, डाकघर अरछन्डी, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0

. प्रार्थीगण। श्रीमती यशबन्ती पुत्री श्री खूब राम, निवासी गांव बैन्ची, डाकघर रायसन, तहसील व जिला कुल्लू, हि0 प्र0

बनाम

आम जनता

. . प्रतिवादीगण। विषय.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 8(4) हि0 प्र0 रजिस्ट्रीकरण नियम, 2004 विवाह पंजीकरण बारे।6817 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 उपरोक्त मामला में प्रार्थीगण ने दिनांक 29-08-2019 को इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि उन्होंने दिनांक 05-05-2012 को हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार स्थान बैन्ची में शादी कर ली है और तब से दोनोें पति-पत्नी के रूप में रहते चले आ रहे हैं। परन्तु प्रार्थीगणों द्वारा अपनी शादी का इन्द्राज सम्बन्धित पंचायत में दर्ज नहीं करवाया है।

अतः सर्वसाधारण को व सगे सम्बन्धियों को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि किसी भी व्यक्ति को उपरोक्त प्रार्थीगणों की शादी को सम्बन्धित पंचायत के अभिलेख में दर्ज करने बारे कोई एतराज हो तो वह दिनांक 23-10-2019 को सुबह 10.00 बजे या इससे पूर्व असालतन या वकालतन हाजिर अदालत पेश होकर अपना उजर व एतराज पेश कर सकता है। इसके उपरान्त कोई भी उजर व एतराज प्राप्त न होने की सूरत में नियमानुसार शादी दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

आज दिनांक 23-09-2019 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ।

मोहर।

हस्ताक्षरित/- तहसीलदार एवं कार्यकारी दण्डाधिकारी, कुल्लू, जिला कुल्लू, हि0 प्र0।

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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी निरमण्ड, जिला कुल्लू, हि0 प्र0

. . वादी। श्री रक्षा नन्द पुत्र बालानन्द, निवासी सिरकोटि, फाटी निरमण्ड, तहसील निरमण्ड, जिला कुल्लू हि0 प्र0

बनाम

. . प्रतिवादी। आम जनता

उनवान मुकद्दमा प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म व मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अन्तर्गत। इस कार्यालय में श्री रक्षा नन्द पुत्र बालानन्द, निवासी सिरकोटि, फाटी निरमण्ड, तहसील निरमण्ड, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 ने उक्त अधिनियम के अन्तर्गत प्रार्थना-पत्र गुजार कर निवेदन किया है कि उसकी माता स्व0 श्रीमती शारदा देवी की मृत्यु हुई है। उसकी मृत्यु तिथि अज्ञानता के कारण व इलाका गैर रहने से निश्चित अवधि में दर्ज नहीं कर सका है और उसकी माता की मृत्यु दिनांक 30-07-1967 को हुई है। जिस विषय उसने अपना शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया है। सायल ने मृत्यु तिथि ग्राम पंचायत निरमण्ड में उसके परिवार रजिस्टर में दर्ज करने का अनुरोध कर रखा है।

इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को शारदा देवी पत्नी बालानन्द की मृत्यु तिथि ग्राम पंचायत निरमण्ड में दर्ज करने के लिए एतराज हो तो वह दिनांक 30-10-2019 तक हमारे कार्यालय में हाजिर होकर लिखित व मौखिक एतराज प्रस्तुत करें, उक्त तारीख के बाद कोई भी एतराज मान्य नहीं होगा और समझा जावेगा कि उक्त मृत्यु तिथि ग्राम पंचायत निरमण्ड मेें दर्ज करने बारे किसी का कोई एतराज नहीं है तथा सचिव ग्राम पंचायत निरमण्ड को पंजीकृत मृत्यु तिथि दर्ज करने के आदेश पारित किये जायेंगे।

आज दिनांक 20-09-2019 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर।

हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, निरमण्ड, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।6818 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941

ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी निरमण्ड, जिला कुल्लू, हि0 प्र0

. . प्रार्थी। श्री तेज राम आयु 46 वर्ष पुत्र देवदत, निवासी बागीपुल, डा0 व्यूणी, तहसील निरमण्ड, जिला कुल्लू हि0 प्र0

बनाम

. . प्रतिवादी। आम जनता

उनवान मुकद्दमा जेर धारा 13(3) अधिनियम 1969 के अन्तर्गत जन्म व मृत्यु पंजीकरण करने बारे। उनवान मुकद्दमा प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म व मृत्यु अधिकार 1969 के अन्तर्गत इस कार्यालय में श्री तेज राम आयु 46 वर्ष पुत्र देवदत, निवासी बागीपुल, डा0 व्यूणी, तहसील निरमण्ड, जिला कुल्लू हि0 प्र0 ने उक्त अधिनियम के अन्तर्गत प्रार्थना-पत्र गुजार कर निवेदन किया है कि उसके पुत्र विकी ठाकुर का जन्म दिनांक 21-02-2000 को व एक पुत्री काजल ठाकुर का जन्म दिनांक 27-05-2003 को स्थान बागीपुल में हुआ है। इनका नाम व जन्म तिथि अज्ञानता के कारण व इलाका गैर रहने से निश्चित अवधि में दर्ज नहीं करवा सका हूं, और जिस विषय उसने अपना शपथ-पत्र भी प्रस्तुत किया है। सायल ने ग्राम पंचायत सराहन में उसके परिवार रजिस्टर में जन्म तिथि दर्ज करने का अनुरोध कर रखा है।

इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को विकी ठाकुर पुत्र व काजल ठाकुर पुत्री तेज राम की जन्म तिथि ग्राम पंचायत सराहन में दर्ज करने के लिए एतराज हो तो वह दिनांक 30-10-2019 तक हमारे कार्यालय में हाजिर होकर लिखित व मौखिक एतराज प्रस्तुत करें, उक्त तारीख के बाद कोई भी एतराज मान्य नहीं होगा और समझा जावेगा कि उपरोक्त विकी ठाकुर व काजल ठाकुर का नाम व जन्म तिथि ग्राम पंचायत सराहन मेें दर्ज करने बारे किसी का कोई एतराज नहीं है तथा सचिव ग्राम पंचायत सराहन को इनके नाम व जन्म तिथि दर्ज करने के आदेश पारित किये जायेंगे। आज दिनांक 20-09-2019 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर।

हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, निरमण्ड, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।

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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी निरमण्ड, जिला कुल्लू, हि0 प्र0

श्री हेम राज आयु 46 वर्ष पुत्र स्व0 जीया राम, निवासी किमधार, डा0 सरघा, तहसील निरमण्ड, जिला . . प्रार्थी। कुल्लू हि0 प्र0

बनाम

. . प्रतिवादी। आम जनता

उनवान मुकद्दमा जेर धारा 13(3) अधिनियम 1969 के अन्तर्गत जन्म व मृत्यु पंजीकरण करने बारे। उनवान मुकद्दमा प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म व मृत्यु अधिकार 1969 के अन्तर्गत इस कार्यालय में श्री हेम राज आयु 46 वर्ष पुत्र स्व0 जीया राम, निवासी किमधार, डा0 सरघा, तहसील निरमण्ड, जिला कुल्लू हि0 प्र0 ने उक्त अधिनियम के अन्तर्गत प्रार्थना-पत्र गुजार कर निवेदन किया है कि मेरे पुत्र अशीष का जन्म दिनांक 08-07-2002 को हुआ है। इसका नाम व जन्म तिथि अज्ञानता व अनपढ़ता के कारण व इलाका गैर रहने से निश्चित अवधि में दर्ज नहीं करवा सका हूं, और जिस विषय उसने अपना शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया है। सायल ने ग्राम पंचायत सरघा में उसके परिवार रजिस्टर में जन्म तिथि दर्ज करने का अनुरोध कर रखा है।6819 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को आशीष पुत्र हेम राज का नाम व जन्म तिथि ग्राम पंचायत सरघा में दर्ज करने के लिए एतराज हो तो वह दिनांक 30-10-2019 तक हमारे कार्यालय में हाजिर होकर लिखित व मौखिक एतराज प्रस्तुत करें, उक्त तारीख के बाद कोई भी एतराज मान्य नहीं होगा और समझा जावेगा कि उपरोक्त आशीष का नाम व जन्म तिथि ग्राम पंचायत सरघा मेें दर्ज करने बारे किसी का कोई एतराज नहीं है तथा सचिव ग्राम पंचायत सरघा को पंजीकृत नाम व जन्म तिथि दर्ज करने के आदेश पारित किये जायेंगे।

आज दिनांक 20-09-2019 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर।

हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, निरमण्ड, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।

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ब अदालत नीरजा शर्मा, कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील निरमण्ड, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 मुकद्दमा नं0 : /201

. . वादी। श्रीमती मीरा देवी पुत्री रिपूराम, निवासी निरमण्ड, फाटी निरमण्ड, तहसील निरमण्ड, जिला कुल्लू, हि0 प्र0

बनाम

. . प्रतिवादी। आम जनता

उनवान मुकद्दमा.--प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म व मृत्यु अधिनियम, 1969 के अन्तर्गत जन्म तिथि दर्ज करने बारे।

इस कार्यालय में श्रीमती मीरा देवी पुत्री रिपूराम, निवासी निरमण्ड, फाटी निरमण्ड, तहसील निरमण्ड, जिला कुल्लू, हि0 प्र0 ने उक्त अधिनियम के अन्तर्गत प्रार्थना-पत्र गुजार कर निवेदन किया है कि इसका नाम अज्ञानता के कारण व इलाका गैर रहने से निश्चित अवधि में पंजी में दर्ज नहीं कर सकी है और इसका नाम मीरा देवी व जन्म तिथि दिनांक 05-01-1967 है। जिस विषय उसने अपना ब्यान हलफिया भी प्रस्तुत किया है। सायल ने ग्राम पंचायत निरमण्ड में उसके परिवार रजिस्टर में दर्ज करने का अनुरोध किया है। इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी भी व्यक्ति को मीरा देवी पुत्री रिपूराम का नाम व जन्म तिथि ग्राम पंचायत निरमण्ड में दर्ज करने के लिए एतराज हो तो वह दिनांक 30-10-2019 तक हमारे कार्यालय में हाजिर होकर लिखित व मौखिक एतराज प्रस्तुत करें उक्त तारीख के बाद कोई भी एतराज मान्य नहीं होगा और समझा जावेगा कि उक्त नाम व जन्म तिथि ग्राम पंचायत में दर्ज करने बारे किसी का कोई एतराज नहीं है तथा सचिव ग्राम पंचायत निरमण्ड को पंजीकृत नाम व जन्म तिथि दर्ज करने के आदेश पारित किया जावेगा।

आज दिनांक 20-09-2019 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर।

हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, निरमण्ड, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)।6820 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 ब अदालत श्री कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील कार्यालय पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

उनवान मुकद्दमा : 13(3)

तारीख पेशी : 25-10-2019 सन्तोषी पुत्री श्री जय देव, गांव मुलसू, डाकघर ग्वाली, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0 . .प्रार्थिया।

बनाम

. . प्रत्यार्थी। आम जनता

आवेदन-पत्र पंजीकरण जन्म जेर अधिनियम 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण, 1969.

उदघोषणा राजपत्र :

हरगाह एतद्‌द्वारा सूचित किया जाता है कि आवेदिका ने इस न्यायालय में एक आवेदन-पत्र दिया है कि उसका जन्म दिनांक 20-04-1981 को हुआ है जो दर्ज रजिस्टर जन्म एवं मृत्यु पंचायत डलाह में नहीं है जिसे दर्ज करने के आदेश दिये जावें। आवेदिका की तामील साधारण तौर पर की जानी संभव है। इसलिय अदालत को पूर्ण विश्वास हो चुका है कि आवेदिका आम जनता को तामील ईश्तहार राजपत्र के द्वारा ही किया जाना संभव है। अतः आवेदिका आम जनता को इस बजरिया इश्तहार राजपत्र के द्वारा आगाह किया जाता है कि मिति 25-10-2019 को वरवक्त 10.00 बजे सुबह असालतन या वकालतन हाजिर अदालत आकर पैरवी मुकद्दमा करें, अन्यथा एकपक्षीय कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिए जाएंगे। यह इश्तहार आज दिनांक 03-10-2019 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ। मोहर।

कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

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ब अदालत श्री कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील कार्यालय पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

उनवान मुकद्दमा : 13(3)

तारीख पेशी : 31-10-2019 डोलमा देवी पुत्री श्री वुधि सिंह, गांव व डाकघर उरला, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0 . . प्रार्थिया।

बनाम

आम जनता

. . प्रत्यार्थी। आवेदन-पत्र पंजीकरण जन्म जेर अधिनियम 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण, 1969.

उदघोषणा राजपत्र :

हरगाह एतद्‌द्वारा सूचित किया जाता है कि आवेदिका ने इस न्यायालय में एक आवेदन-पत्र दिया है कि उसका जन्म दिनांक 02-05-1983 को हुआ है जो दर्ज रजिस्टर जन्म एवं मृत्यु पंचायत उरला में नहीं है जिसे दर्ज करने के आदेश दिये जावें। आवेदिका की तामील साधारण तौर पर की जानी संभव है। इसलिय6821 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 अदालत को पूर्ण विश्वास हो चुका है कि आवेदिका आम जनता को तामील ईश्तहार राजपत्र के द्वारा ही किया जाना संभव है। अतः आवेदिका आम जनता को इस बजरिया इश्तहार राजपत्र के द्वारा आगाह किया जाता है कि मिति 25-10-2019 को वरवक्त 10.00 बजे सुबह असालतन या वकालतन हाजिर अदालत आकर पैरवी मुकद्दमा करें, अन्यथा एकपक्षीय कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिए जाएंगे। यह इश्तहार आज दिनांक 03-10-2019 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ। मोहर।

कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

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ब अदालत श्री कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील कार्यालय पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

उनवान मुकद्दमा : 37(2)

तारीख पेशी : 31-10-2019 जीवन सिंह पुत्र श्री पंजकू राम, गांव व डाकघर ग्वाली, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0 . . प्रार्थी।

बनाम

. . प्रत्यार्थी। आम जनता

दावा : नाम दुरुस्ती।

आवेदन-पत्र जेर धारा 37(2) के अन्तर्गत नाम दुरुस्त करने बारे।

इश्तहार राजपत्र :

आवेदक श्री जीवन सिंह पुत्र श्री पंजकू राम, गांव व डाकघर ग्वाली, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0 ने इस अदालत में पत्र गुजारा है कि उसके पिता का नाम ग्राम पंचायत पाली के रिकार्ड में जीवन सिंह है जबकि महाल ग्वाली के तमाम राजस्व अभिलेख में उसका नाम जीवन वर्मा दर्ज हुआ है जोकि गलत दर्ज हुआ है तथा आवेदक ने इस अदालत से प्रार्थना की है कि उसका नाम जीवन वर्मा के स्थान पर जीवन सिंह दर्ज करने के आदेश दिये जावें।

अतः इस ईश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त नाम दर्ज करने बारे कोई उजर/एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन तारीख पेशी 31-10-2019 को सुबह 10.00 बजे हाजिर होकर अपना उजर पेश कर सकता है बसूरत गैरहाजिरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

यह इश्तहार आज दिनांक 30-09-2019 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ। मोहर।

कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, पधर, तहसील पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।6822 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 ब अदालत श्री कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील कार्यालय पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

उनवान मुकद्दमा : 37(2)

तारीख पेशी : 30-10-2019 जय राम पुत्र श्री रघु राम, गांव हुल्लु, डाकघर द्रंग, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0 . . प्रार्थी।

बनाम

. . प्रत्यार्थी। आम जनता

दावा : नाम दुरुस्ती।

आवेदन-पत्र जेर धारा 37(2) के अन्तर्गत नाम दुरुस्त करने बारे।

इश्तहार राजपत्र :

आवेदक जय राम पुत्र श्री रघु राम, गांव हुल्लु, डाकघर द्रंग, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0 ने इस अदालत में पत्र गुजारा है कि उसके पिता का नाम ग्राम पंचायत पाली के रिकार्ड में रघु राम है जबकि महाल हुल्लु व हियुण के तमाम राजस्व अभिलेख में उसका नाम खेम सिंह दर्ज हुआ है जोकि गलत दर्ज हुआ है तथा आवेदक ने इस कार्यालय में इस अदालत से प्रार्थना की है कि उसका नाम खेम सिंह के स्थान पर खेम सिंह उर्फ रघु राम दर्ज करने के आदेश दिये जावें।

अतः इस ईश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त नाम दर्ज करने बारे कोई उजर/एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन तारीख पेशी 30-10-2019 को सुबह 10.00 बजे हाजिर होकर अपना उजर पेश कर सकता है बसूरत गैरहाजिरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

यह इश्तहार आज दिनांक 30-09-2019 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ। मोहर।

कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, पधर, तहसील पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

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ब अदालत श्री कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील कार्यालय पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

उनवान मुकद्दमा : 37(2)

तारीख पेशी : 30-10-2019 रमेश चन्द पुत्र स्व0 श्री फगू राम, गांव वसेहड, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0 . . प्रार्थी।

बनाम

. . प्रत्यार्थी। आम जनता

दावा : नाम दुरुस्ती।6823 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 आवेदन-पत्र जेर धारा 37(2) के अन्तर्गत नाम दुरुस्त करने बारे। इश्तहार राजपत्र :

आवेदक रमेश चन्द पुत्र स्व0 श्री फगू राम, गांव वसेहड, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0 ने इस अदालत में पत्र गुजारा है कि उसका नाम ग्राम पंचायत डलाह के रिकार्ड में रमेश चन्द पुत्र स्व0 श्री फगू राम है जबकि महाल बसेहड के तमाम राजस्व अभिलेख में उसका नाम रमेश दर्ज हुआ है जोकि गलत दर्ज हुआ है तथा आवेदक ने इस कार्यालय में इस अदालत से प्रार्थना की है कि उसका नाम रमेश के स्थान पर रमेश चन्द दर्ज करने के आदेश दिये जावें।

अतः इस ईश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त नाम दर्ज करने बारे कोई उजर/एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन तारीख पेशी 30-10-2019 को सुबह 10.00 बजे हाजिर होकर अपना उजर पेश कर सकता है बसूरत गैरहाजिरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

यह इश्तहार आज दिनांक 30-09-2019 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ। मोहर।

कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, पधर, तहसील पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

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ब अदालत श्री कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील कार्यालय पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

उनवान मुकद्दमा : 37(2)

तारीख पेशी : 31-10-2019

. . प्रार्थी। कांशी राम उर्फ देवी सिंह पुत्र श्री भगत राम, गांव शिंगार, डा0 पदवाहण, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0 प्र0

बनाम

. . प्रत्यार्थी। आम जनता

दावा : नाम दुरुस्ती।

आवेदन-पत्र जेर धारा 37(2) के अन्तर्गत नाम दुरूस्त करने बारे।

इश्तहार राजपत्र :

आवेदक श्री कांशी राम उर्फ देवी सिंह पुत्र श्री भगत राम, गांव शिंगार, डा0 पदवाहण, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0 प्र0 ने इस अदालत में पत्र गुजारा है कि उसका नाम ग्राम पंचायत कुन्नू के रिकार्ड में कांशी राम उर्फ देवी सिंह पुत्र श्री भगत राम है जबकि महाल शिंगार के तमाम राजस्व अभिलेख में उसका नाम कांशी राम व महाल पदवाहण के राजस्व अभिलेख में देवी सिंह दर्ज हुआ है। आवेदक ने इस कार्यालय में इस अदालत से प्रार्थना की है कि उसका नाम तमाम राजस्व अभिलेख में कांशी राम उर्फ देवी सिंह दर्ज करने के आदेश दिये जावें। 6824 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 अतः इस ईश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त नाम दर्ज करने बारे कोई उजर/एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन तारीख पेशी 31-10-2019 को सुबह 10.00 बजे हाजिर होकर अपना उजर पेश कर सकता है बसूरत गैरहाजिरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

यह इश्तहार आज दिनांक 30-09-2019 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ। मोहर।

कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, पधर, तहसील पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

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ब अदालत श्री कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील कार्यालय पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

उनवान मुकद्दमा : 37(2)

तारीख पेशी : 30-10-2019 रोशन लाल पुत्र श्री महबूब अली, गांव पुन्दल, डा0 ग्वाली, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0 . . प्रार्थी।

बनाम

. . प्रत्यार्थी। आम जनता

दावा : नाम दुरुस्ती।

आवेदन-पत्र जेर धारा 37(2) के अन्तर्गत नाम दुरुस्त करने बारे।

इश्तहार राजपत्र :

आवेदक श्री रोशन लाल पुत्र श्री महबूब अली, गांव पुन्दल, डा0 ग्वाली, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0 प्र0 ने इस अदालत में पत्र गुजारा है कि उसका नाम ग्राम पंचायत ग्वाली के रिकार्ड में रोशन है जबकि महाल घोघर धार के तमाम राजस्व अभिलेख में उसका नाम रोशन अली राम दर्ज हुआ है जोकि गलत दर्ज हुआ है तथा आवेदक ने इस कार्यालय में इस अदालत से प्रार्थना की है कि उसका नाम रोशन अली के स्थान पर रोशन पुत्र महबूब अली दर्ज करने के आदेश दिये जावें।

अतः इस ईश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त नाम दर्ज करने बारे कोई उजर/एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन तारीख पेशी 30-10-2019 को सुबह 10.00 बजे हाजिर होकर अपना उजर पेश कर सकता है बसूरत गैरहाजिरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

यह इश्तहार आज दिनांक 30-09-2019 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ। मोहर।

कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, पधर, तहसील पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।6825 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 ब अदालत श्री कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील कार्यालय पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

उनवान मुकद्दमा : 37(2)

तारीख पेशी : 31-10-2019 भजले राम पुत्र श्री गणपत, गांव ग्वाली, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0 . . प्रार्थी।

बनाम

. . प्रत्यार्थी। आम जनता

दावा : नाम दुरुस्ती।

आवेदन-पत्र जेर धारा 37(2) के अन्तर्गत नाम दुरुस्त करने बारे।

इश्तहार राजपत्र :

आवेदक श्री भजले राम पुत्र श्री गणपत, गांव व डा0 ग्वाली, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0 ने इस अदालत में पत्र गुजारा है कि उसका नाम ग्राम पंचायत ग्वाली के रिकार्ड में भजले राम है जबकि महाल घोघर धार के तमाम राजस्व अभिलेख में उसका नाम भजला राम दर्ज हुआ है जोकि गलत दर्ज हुआ है तथा आवेदक ने इस कार्यालय में इस अदालत से प्रार्थना की है कि उसका नाम भजला राम के स्थान पर भजला राम उर्फ भजला दर्ज करने के आदेश दिये जावें।

अतः इस ईश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त नाम दर्ज करने बारे कोई उजर/एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन तारीख पेशी 31-10-2019 को सुबह 10.00 बजे हाजिर होकर अपना उजर पेश कर सकता है बसूरत गैरहाजिरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

यह इश्तहार आज दिनांक 30-09-2019 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ। मोहर।

कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, पधर, तहसील पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

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ब अदालत श्री कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील कार्यालय पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

उनवान मुकद्दमा : 13(3)

तारीख पेशी : 30-10-2019 भवना देवी पुत्री श्री हरदेव, गांव मसेरन, डाकघर पाली, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0

. . प्रार्थिया।

बनाम

. . प्रत्यार्थी। आम जनता6826 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 आवेदन-पत्र पंजीकरण जन्म जेर अधिनियम 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण, 1969. उदघोषणा राजपत्र :

हरगाह एतद्‌द्वारा सूचित किया जाता है कि आवेदिका ने इस न्यायालय में एक आवेदन-पत्र दिया है कि उसका जन्म दिनांक 25-03-1967 को हुआ है जो दर्ज रजिस्टर जन्म एवं मृत्यु पंचायत पाली में नहीं है जिसे दर्ज करने के आदेश दिये जावें। आवेदिका की तामील साधारण तौर पर की जानी संभव है। इसलिय अदालत को पूर्ण विश्वास हो चुका है कि आवेदिका आम जनता को तामील ईश्तहार राजपत्र के द्वारा ही किया जाना संभव है। अतः प्रतिवादी आम जनता को इस बजरिया इश्तहार राजपत्र के द्वारा आगाह किया जाता है कि मिति 30-10-2019 को वरवक्त 10.00 बजे सुबह असालतन या वकालतन हाजिर अदालत आकर पैरवी मुकद्दमा करें, अन्यथा एकपक्षीय कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिए जाएंगे। यह इश्तहार आज दिनांक 03-10-2019 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ। मोहर।

कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

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ब अदालत श्री कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील कार्यालय पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

उनवान मुकद्दमा : 37(2)

तारीख पेशी : 30-10-2019 गोपाल दास पुत्र श्री नरायण सिंह, गांव खिल, डा0 कुफरी, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0 . . प्रार्थी।

बनाम

. . प्रत्यार्थी। आम जनता

दावा : नाम दुरुस्ती।

आवेदन-पत्र जेर धारा 37(2) के अन्तर्गत नाम दुरुस्त करने बारे।

इश्तहार राजपत्र :

आवेदक श्री गोपाल दास पुत्र श्री नरायण सिंह, गांव खिल, डा0 कुफरी, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0 ने इस अदालत में पत्र गुजारा है कि उसका नाम ग्राम पंचायत कुफरी के रिकार्ड में गोपाल दास है जबकि महाल खिल के तमाम राजस्व अभिलेख में उसका नाम गोपाल सिंह दर्ज हुआ है जोकि गलत दर्ज हुआ है तथा आवेदक ने इस कार्यालय में इस अदालत से प्रार्थना की है कि उसका नाम गोपाल सिंह के स्थान पर गोपाल दास दर्ज करने के आदेश दिये जावें।

अतः इस ईश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त नाम दर्ज करने बारे कोई उजर/एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन तारीख पेशी 30-10-2019 को सुबह 10.00 बजे हाजिर होकर अपना उजर पेश कर सकता है बसूरत गैरहाजिरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिए जाएंगे।6827 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 यह इश्तहार आज दिनांक 30-09-2019 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ। मोहर।

कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, पधर, तहसील पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

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ब अदालत श्री कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील कार्यालय पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

उनवान मुकद्दमा : 37(2)

तारीख पेशी : 30-10-2019 बीरबल पुत्र श्री निक्कू राम, गांव व डा0 पाली, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0 . . प्रार्थी।

बनाम

. . प्रत्यार्थी। आम जनता

दावा : नाम दुरुस्ती।

आवेदन-पत्र जेर धारा 37(2) के अन्तर्गत नाम दुरुस्त करने बारे।

इश्तहार राजपत्र :

आवेदक श्री बीरबल पुत्र श्री निक्कू राम, गांव व डा0 पाली, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0 ने इस अदालत में पत्र गुजारा है कि उसका नाम ग्राम पंचायत पाली के रिकार्ड में बीरबल पुत्र श्री निक्कू है जबकि महाल पाली के तमाम राजस्व अभिलेख में उसका नाम बीरबल राम दर्ज हुआ है जोकि गलत दर्ज हुआ है तथा आवेदक ने इस कार्यालय में इस अदालत से प्रार्थना की है कि उसका नाम बीरबल के स्थान पर बीरबल उर्फ बीरबल दर्ज करने के आदेश दिये जावें।

अतः इस ईश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त नाम दर्ज करने बारे कोई उजर/एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन तारीख पेशी 30-10-2019 को सुबह 10.00 बजे हाजिर होकर अपना उजर पेश कर सकता है बसूरत गैरहाजिरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

यह इश्तहार आज दिनांक 30-09-2019 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ। मोहर।

कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, पधर, तहसील पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

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ब अदालत श्री कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, तहसील कार्यालय पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

उनवान मुकद्दमा : 37(2)

तारीख पेशी : 31-10-2019 हेम सिंह पुत्र स्व0 श्री सौणू, गांव मलोग, डा0 पाली, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0 . . प्रार्थी।6828 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941 बनाम

. . प्रत्यार्थी। आम जनता

दावा : नाम दुरुस्ती।

आवेदन-पत्र जेर धारा 37(2) के अन्तर्गत नाम दुरुस्त करने बारे।

इश्तहार राजपत्र :

आवेदक श्री हेम सिंह पुत्र स्व0 श्री सौणू, गांव मलोग, डा0 पाली, तहसील पधर, जिला मण्डी, हि0प्र0 ने इस अदालत में पत्र गुजारा है कि उसका नाम ग्राम पंचायत पाली के रिकार्ड में हेम सिंह है जबकि महाल मलोग के तमाम राजस्व अभिलेख में उसका नाम हेम राज दर्ज हुआ है जोकि गलत दर्ज हुआ है तथा आवेदक ने इस कार्यालय में इस अदालत से प्रार्थना की है कि उसका नाम हेम राज के स्थान पर हेम सिंह दर्ज करने के आदेश दिये जावें।

अतः इस ईश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त नाम दर्ज करने बारे कोई उजर/एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन तारीख पेशी 31-10-2019 को सुबह 10.00 बजे हाजिर होकर अपना उजर पेश कर सकता है बसूरत गैरहाजिरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

यह इश्तहार आज दिनांक 30-09-2019 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत द्वारा जारी हुआ। मोहर।

कृष्ण चन्द यादव, सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी, पधर, तहसील पधर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

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In the Court of Marriage Officer-cum-Sub-Divisional Magistrate, Rampur Bushahr,

District Shimla, H. P.

In the matter of :

1. Sh. Gaurav Thappa s/o Late Shri Brij Lal Thappa, aged 40 years, r/o H.No. E.P.-1042, Mastgarh, Jammu Tavi (J&K), Presently posted as Colonel at 581 Light Regiment, Jhakri, Tehsil Rampur, District Shimla, H. P.

2. Smt. Shama Sharma d/o Sh. Udhey Chand Sharma, aged 35 years, r/o House No. 481, . . Applicants. Gurha Bakshi Nagar, Jammu (J&K)

Versus

General Public

..Respondent.

Proclamation for the registration of marriage under Section 16 of the Special Marriage Act, 1954.

6829 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941

Sh. Gaurav Thappa s/o Late Shri Brij Lal Thappa, aged 40 years, r/o H.No. E.P.-1042, Mastgarh, Jammu Tavi (J&K), Presently posted as Colonel at 581 Light Regiment, Jhakri, Tehsil Rampur, District Shimla, H. P. and Smt. Shama Sharma d/o Sh. Udhey Chand Sharma, aged 35 years, r/o House No. 481, Gurha Bakshi Nagar, Jammu (J&K) have filed an application alongwith affidavits in the court of undersigned under Section 15 of Special Marriage Act, 1954 that they have solemnized their marriage on 30-01-2005 at Jammu (J&K) according to Hindu Rites and they are living as husband and wife since then, hence their marriage may be registered under Special Marriage Act, 1954.

Therefore, the general public is hereby informed through this notice that any person who has any objection regarding this marriage can file the objection personally or in writing before this court on or before 31-10-2019 after that no objection will be entertained and marriage will be registered.

Issued today on this 1st day of the October, 2018 under my hand and seal of the court.

Seal.

Sd/-

Marriage Officer-cum-

Sub-Divisional Magistrate,

Rampur Bushahr, District Shimla, H. P.

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In the Court of Sh. Arun Kumar, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa,

District Shimla (H. P.)

Shri Jalam Singh s/o Shri Nag Chand, r/o Village Dhamroli, P.O. Baur, Tehsil Nerwa, . . Applicant. District Shimla (H.P.)

Versus

General Public

. . Respondent.

Application under Section 13 (3) of Birth and Death Registration Act, 1969.

Whereas, Shri Jalam Singh s/o Shri Nag Chand, r/o Village Dhamroli, P.O. Baur, Tehsil Nerwa, District Shimla (H.P.) has preferred an application to the undersigned for registration of name of his son namely Mr. Nitesh Tomar whose date of birth (11-04-2007) in the Gram Panchayat Baur, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

Therefore by this proclamation, the general public is hereby informed that any person having any objection for entry as to date of birth mentioned above, may submit his/her objection in writing in this court on or before 26-11-2019 failing which no objection will be entertained after expiry of date and will be decided accordingly.

Given under my hand and seal of the court on this 26-09-2019.

Seal.

ARUN KUMAR,

Executive Magistrate,

Tehsil Nerwa, District Shimla (H.P.).

6830 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 17 अक्तूबर, 2019/25 आश्विन, 1941

In the Court of Sh. Arun Kumar, Executive Magistrate, Tehsil Nerwa,

District Shimla (H. P.)

Shri Shyam Singh s/o Shri Rup Singh, r/o Village Sandli, P.O. Deiya, Tehsil Nerwa, . . Applicant. District Shimla (H.P.)

Versus

General Public

. . Respondent.

Application under Section 13 (3) of Birth and Death Registration Act, 1969.

Whereas, Shri Shyam Singh s/o Shri Rup Singh, r/o Village Sandli, P.O. Deiya, Tehsil Nerwa, District Shimla (H.P.) has preferred an application to the undersigned for registration of name of his son namely Mr. Prince Rathore whose date of birth (01-01-2008) in the Gram Panchayat Deiya Dochi, Tehsil Nerwa, District Shimla, H.P.

Therefore by this proclamation, the general public is hereby informed that any person having any objection for entry as to date of birth mentioned above, may submit his/her objection in writing in this court on or before 30-11-2019 failing which no objection will be entertained after expiry of date and will be decided accordingly.

Given under my hand and seal of the court on this 30-09-2019.

Seal.

ARUN KUMAR,

Executive Magistrate,

Tehsil Nerwa, District Shimla (H.P.).

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CHANGE OF NAME

I, Leela Devi d/o Sh. Lekh Ram, r/o Block No. 4, Set No. 49 US Club, Shimla do hereby solemnly affirm and declare on affidavit dated 07-06-2019 that I have changed my name from Leela Devi to Narda Devi. So, in future, I may be known as Narda Devi for all purposes and records.

LEELA DEVI

d/o Sh. Lekh Ram,

r/o Block No. 4,

Set No. 49 US Club, Shimla.

नियन्त्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, हिमाचल प्रदेश, शिमला-5 द्वारा मुद्रित तथा प्रकाशित इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरित राजपत्र, वैबसाइट http://rajpatrahimachal.nic.in पर उपलब्ध है एवम्‌ ऑनलाइन सत्यापित किया जा सकता है

Cite this issue. Himachal Pradesh Gazette, Government of Himachal Pradesh, 17 October 2019. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.himachal.2019-10-17.152_gazette_2019-17_10_2019/. Archive identifier in.gazette.himachal.2019-10-17.152_gazette_2019-17_10_2019.