राजपत्र, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित सोमवार, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942
हिमाचल प्रदेश सरकार
हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय
अधिसूचना
दिनांक 09 सितम्बर, 2020
संख्या वि0स0-विधायन-विधेयक/1-10/2020.-हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत औद्योगिक विवाद (हिमाचल प्रदेश संशोधन) विधेयक, 103-राजपत्र/2020-14-09-2020 (3505) 3506 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 2020 (2020 का विधेयक संख्यांक 5) जो आज दिनांक 09 सितम्बर, 2020 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्वसाधारण की सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।
हस्ताक्षरित/- सचिव, हि0 प्र0 विधान सभा।
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2020 का विधेयक संख्यांक 5 औद्योगिक विवाद (हिमाचल प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2020
खण्डों का क्रम
खण्ड : 1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ। 2. धारा 22 का संशोधन। 3. धारा 25च का संशोधन। 4. धारा 25ट का संशोधन। 5. 2020 के हिमाचल प्रदेश अध्यादेश संख्यांक 4 का निरसन और व्यावृत्तियाँ।
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2020 का विधेयक संख्यांक 5 औद्योगिक विवाद (हिमाचल प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2020
(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)
हिमाचल प्रदेश राज्य को यथा लागू औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का अधिनियम संख्यांक 14) का संशोधन करने के लिए विधेयक।
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :--
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ.--(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम औद्योगिक विवाद (हिमाचल प्रदेश संशोधन) अधिनियम, 2020 है।
(2) यह 9 जुलाई, 2020 से प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा।
2. धारा 22 का स्ांशोधन.--हिमाचल प्रदेश राज्य को यथा लागू औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) (जिसे इसमें इसके पश्चात् "मूल अधिनियम" कहा गया है) की धारा 22 की उपधारा (1) और (2) में, "लोक उपयोगी सेवा" शब्दों के पश्चात् "और गैर-लोक उपयोगी सेवा" शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे। 3. धारा 25च का स्ांशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 25च के खण्ड (ख) में, ''पंद्रह दिन" शब्दों के स्थान पर ''साठ दिन'' शब्द रखे जाएंगे।3507 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 4. धारा 25ट का स्ांशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 25ट की उपधारा (1) में, ''एक सौ'' शब्दों के स्थान पर ''दो सौ'' शब्द रखे जाएंगे।
5. 2020 के हिमाचल प्रदेश अध्यादेश संख्यांक 4 का निरसन और व्यावृत्तियां.--(1) औद्योगिक विवाद (हिमाचल प्रदेश संशोधन) अध्यादेश, 2020 का एतद्द्वारा निरसन किया जाता हैै।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी इस प्रकार निरसित अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन विधिमान्य रूप में की गई समझी जाएगी।
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उद््देश्यों और कारणों का कथन
आर्थिक उदारीकरण के युग में, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14), जो एक केन्द्रीय विधान है, के कुछ उपबंध अप्रचलित हो गए हैं क्योंकि इन उपबंधों को पिछले कई वर्षों से संशोधित नहीें किया गया है। यह पाया गया है कि औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के अप्रचलित उपबंध राज्य में प्राइवेट विनिधान को आकृष्ट करने में बाधक हैं और राज्य में कारबार करने की सुगमता को भी बाधित कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश राज्य में औद्योगिक विनिधान, उत्पादन और रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने तथा कारबार करने की सुगमता में और वृद्धि करने तथा श्रम विधियों के प्रवर्तन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु पूर्वोक्त अधिनियम में कुछ संशोधन किए जाने आवश्यक हो गए हैं। भारत सरकार द्वारा प्रारम्भ किए गए ''मेक इन इण्डिया'' कार्यक्रम के अनुसार देश में ''कारबार करने की सुगमता'' भी अनिवार्यताओं में से एक है। इसलिए, औद्योगिक स्थापनों के साथ-साथ कर्मकारों को एक सहायक और कारबार अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) के कुछ उपबन्धों को संशोधित करना आवश्यक हो गया है।
हिमाचल प्रदेश विधान सभा सत्र में नहीं थी और हिमाचल प्रदेश राज्य को यथा लागू औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 में संशोधन करना अनिवार्य हो गया था। इसलिए हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल द्वारा, भारत के राष्ट्र्रपति के अनुदेशों को अभिप्राप्त करने के पश्चात्, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खण्ड (1) के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, औद्योगिक विवाद (हिमाचल प्रदेेश संशोधन) अध्यादेश, 2020 (2020 का अध्यादेश संख्यांक 4) तारीख 7 जुलाई, 2020 को प्रख्यापित किया गया था जिसे राजपत्र (ई-गज़ट), हिमाचल प्रदेश में तारीख 9 जुलाई, 2020 को प्रकाशित किया गया था। अब, उक्त अध्यादेश को बिना किसी उपान्तरण के नियमित विधान द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है।
यह विधेयक उपर्युक्त उद््देश्यों की पूर्ति के लिए है।
(बिक्रम सिंह) प्रभारी मन्त्री। शिमला : तारीख : ............................., 2020
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AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT
Bill No. 5 of 2020 THE INDUSTRIAL DISPUTES (HIMACHAL PRADESH AMENDMENT) BILL, 20203508 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 ARRANGEMENT OF CLAUSES
Clauses :
1. Short title and commencement. 2. Amendment of section 22. 3. Amendment of section 25F. 4. Amendment of section 25K. 5. Repeal of the Himachal Pradesh Ordinance No. 4 of 2020 and savings.
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Bill No. 5 of 2020 THE INDUSTRIAL DISPUTES (HIMACHAL PRADESH AMENDMENT) BILL, 2020
(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)
A
BILL
to amend the Industrial Disputes Act, 1947 (Act No. 14 of 1947) in its application to the
State of Himachal Pradesh.
BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Seventy-first Year of the Republic of India as follows :—
1. Short title and commencement.—(1) This Act may be called the Industrial Disputes (Himachal Pradesh Amendment) Act, 2020.
(2) It shall be deemed to have come into force on 9th day of July, 2020.
2. Amendment of section 22.—In section 22 of the Industrial Disputes Act, 1947 (14 of 1947) in its application to the State of Himachal Pradesh (hereinafter referred to as the "principal Act"), in sub-sections (1) and (2), after the words "public utility service", the words "and non- public utility service" shall be inserted.
3. Amendment of section 25F.—In section 25F of the principal Act, in clause (b), for the words "fifteen days", the words "sixty days" shall be substituted.
4. Amendment of section 25K.— In section 25K of the principal Act, in sub-section (1), for the words "one hundred", the words "two hundred" shall be substituted.
5. Repeal of the Himachal Pradesh Ordinance No. 4 of 2020 and savings.—(1) The Industrial Disputes (Himachal Pradesh Amendment) Ordinance, 2020 is hereby repealed.
(2) Notwithstanding such repeal, anything done or any action taken under the Ordinance so repealed, shall be deemed to have been validly done or taken under the corresponding provisions of this Act.
3509 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 STATEMENT OF OBJECTS AND REASONSIn the era of economic liberalisation, some of the provisions of the Industrial Disputes Act, 1947 (Act No. 14 of 1947) which is a Central legislation, have become outdated because these provisions have not been amended for the last so many years. It has been found that the outdated provisions of the Industrial Disputes Act, 1947 are impediment in attracting the private investment and are also hampering the ease of doing business in the State. In order to increase industrial investment, production and employment opportunities and further enhancement of ease of doing business in the State of Himachal Pradesh and to ensure transparency in enforcement of the Labour Laws, some amendments are necessary in the aforesaid Act. As per "Make in India" programme launched by the Government of India, one of the requirements is "Ease of doing business" in the Country. Therefore, to provide a conducive and business friendly environment to the Industrial establishments as well as to the workmen, there is an urgent need to amend some provisions of the Industrial Disputes Act, 1947.
Since, the Himachal Pradesh Legislative Assembly was not in session and the amendments in the Industrial Disputes Act, 1947 in its application to the State of Himachal Pradesh had to be made urgently, therefore, the Governor of Himachal Pradesh, after obtaining the instructions from the President of India, in exercise of the powers conferred under clause (1) of article 213 of the Constitution of India, promulgated the Industrial Disputes (Himachal Pradesh Amendment) Ordinance, 2020 (Ordinance No. 4 of 2020) on 7th July, 2020 which was published in the Rajpatra (e-Gazette), Himachal Pradesh on 9th July, 2020. Now, the said Ordinance is being replaced by a regular Legislation without any modification.
This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.
(BIKRAM SINGH) Minister-in-Charge.
SHIMLA : THE …………….…., 2020
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हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय
अधिसूचना
दिनांक 09 सितम्बर, 2020
संख्या वि0स0-विधायन-विधेयक/1-11/2020.-हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) हिमाचल प्रदेश संशोधन विधेयक, 2020 (2020 का विधेयक संख्यांक 6) जो आज दिनांक 09 सितम्बर, 2020 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्वसाधारण की सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।
हस्ताक्षरित/- सचिव, हि0 प्र0 विधान सभा।3510 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 2020 का विधेयक संख्यांक 6
ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) हिमाचल प्रदेश संशोधन विधेयक, 2020
खण्डों का क्रम
खण्ड : 1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ। 2. धारा 1 का संशोधन। 3. 2020 के हिमाचल प्रदेश अध्यादेश संख्यांक 3 का निरसन और व्यावृत्तियां।
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2020 का विधेयक संख्यांक 6 ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) हिमाचल प्रदेश संशोधन विधेयक, 2020
(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)
हिमाचल प्रदेश राज्य को यथालागू ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम, 1970 (1970 का अधिनियम संख्यांक 37) का संशोधन करने के लिए विधेयक।
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :--
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ.--(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) हिमाचल प्रदेश संशोधन अधिनियम, 2020 है।
(2) यह 9 जुलाई, 2020 से प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा।
2. धारा 1 का संशोधन.--हिमाचल प्रदेश राज्य को यथालागू ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम, 1970 (1970 का 37) की धारा 1 की उपधारा (4) में, ''बीस'' शब्द जहां-जहां आता है के स्थान पर ''तीस'' शब्द रखा जाएगा।
3. 2020 के हिमाचल प्रदेश अध्यादेश संख्यांक 3 का निरसन और व्यावृत्तियां.-- (1) ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) हिमाचल प्रदेश संशोधन अध्यादेश, 2020 का एतद्द्वारा निरसन किया जाता है। (2) ऐसे निरसन के होते हुए भी इस प्रकार निरसित अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन विधिमान्य रूप से की गई समझी जाएगी।
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उद््देश्यों और कारणों का कथन
ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम, 1970 (1970 का अधिनियम संख्यांक 37) की धारा 1 की उपधारा (4) के अधीन अन्तर्विष्ट उपबन्ध ऐसे प्रत्येक प्रतिष्ठापन को लागू हैं जिसमें ठेका श्रम के रूप में पूर्ववर्ती बारह मास के किसी भी दिन बीस या बीस से अधिक कर्मकार नियोजित हैं या नियोजित थे। अधिनियम ऐसे प्रत्येक संविदाकार को भी लागू होता है, जो पूर्ववर्ती बारह मास के किसी भी दिन बीस या बीस3511 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 से अधिक कर्मकारों को नियोजित करता है या उसने नियोजित किए हैं। इस निश्चित सीमा के कारण प्रमुख नियोजकों को, कार्मिकों को काम पर रखते समय या लघु उद्यमियों और छोटे संविदाकारों को संविदा निष्पादित करने में कठिनाई होती है, चूंकि छोटी इकाइयों को अधिनियम के अधीन औपचारिकताओं का अनुपालन सुनिश्चित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यह भी पाया गया है कि निम्नतर सीमा या तो अननुपालन को प्रोत्साहित करती है या मांग के अनुसार अपेक्षित श्रम के नियोजन (वचनबन्ध) को बाधित करती है।
नियोजन के अधिक अवसरों को प्रदान करने और सूक्ष्म और लघु इकाइयों के नियोजकों तथा छोटे संविदाकारों को सुकर बनाने के आशय से उपरोक्त निश्चित सीमा को बीस कर्मकारों से बढ़ाकर तीस कर्मकारों तक करना प्रस्तावित किया गया है। इससे राज्य में औद्योगिक निवेश, उत्पादन में वृद्धि होने और कारबार के सरल होने की भी संभावना है।
हिमाचल प्रदेश विधान सभा सत्र में नहीं थी और हिमाचल प्रदेश राज्य को यथा लागू ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) अधिनियम, 1970 में संशोधन किया जाना अनिवार्य हो गया था। इसलिए हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल द्वारा, भारत के राष्ट्रपति से अनुदेशों को अभिप्राप्त करने के पश्चात्, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खण्ड (1) के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) हिमाचल प्रदेश संशोधन अध्यादेश, 2020 (2020 का अध्यादेश संख्यांक 3) तारीख 7 जुलाई, 2020 को प्रख्यापित किया गया था जिसे राजपत्र (ई-गजट), हिमाचल प्रदेश में तारीख 9 जुलाई, 2020 को प्रकाशित किया गया था। अब, उक्त अध्यादेश को बिना किसी उपांतरण के नियमित विधान द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है।
यह विधेयक उपर्युक्त उद््देश्यों की पूर्ति के लिए है।
(बिक्रम सिंह) प्रभारी मन्त्री। शिमला :
तारीख : ............................, 2020
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AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT
Bill No. 6 of 2020
THE CONTRACT LABOUR (REGULATION AND ABOLITION) HIMACHAL PRADESH
AMENDMENT BILL, 2020
ARRANGEMENT OF CLAUSES
Clauses :
1. Short title and commencement. 2. Amendment of section 1. 3. Repeal of the Himachal Pradesh Ordinance No. 3 of 2020 and savings.
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Bill No. 6 of 2020
THE CONTRACT LABOUR (REGULATION AND ABOLITION) HIMACHAL PRADESH
AMENDMENT BILL, 2020
3512 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 (AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)A
BILL
to amend the Contract Labour (Regulation and Abolition) Act, 1970 (Act No. 37 of 1970)
in its application to the State of Himachal Pradesh.
BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Seventy-first Year of the Republic of India as follows :—
1. Short title and commencement.—(1) This Act may be called the Contract Labour (Regulation and Abolition) Himachal Pradesh Amendment Act, 2020.
(2) It shall be deemed to have come into force on 9th day of July, 2020.
2. Amendment of section 1.—In section 1 of the Contract Labour (Regulation and Abolition) Act, 1970 (3 of 1970) in its application to the State of Himachal Pradesh, in sub- section 4, for the word "twenty" wherever occurs, the word "thirty" shall be substituted.
3. Repeal of the Himachal Pradesh Ordinance No. 3 of 2020 and savings.—(1) The Contract Labour (Regulation and Abolition) Himachal Pradesh Amendment Ordinance, 2020 is hereby repealed.
(2) Notwithstanding such repeal, anything done or any action taken under the Ordinance so repealed, shall be deemed to have been validly done or taken under the corresponding provisions of this Act.
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STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS
The provisions contained under sub-section (4) of section 1 of the Contract Labour (Regulation and Abolition) Act, 1970 (Act No. 37 of 1970) are applicable to every establishment of which twenty or more workmen are employed or were employed on any day of the preceding twelve months as contract labour. The Act also applies to every contractor who employs or who employed on any day of the preceding twelve months, twenty or more workmen. Because of this threshold limit, the principal employers while hiring personnel or procuring commodities from small entrepreneurs and petty contractors, find it difficult to execute contracts, as the small units face hardships in ensuring formalities under the Act. It has been observed that lower limit either encourages non-compliance or restrict the engagement of required labour as per demand.
In order to provide more opportunities of employment and to facilitate employers of small units and petty contractors, it is proposed to enhance the above threshold limit from twenty to thirty workmen. This is also likely to increase industrial investment, production and ease of doing business in the State.
Since, the Himachal Pradesh Legislative Assembly was not in session and the amendments in the Contract Labour (Regulation and Abolition) Act, 1970 in its application to the State of Himachal Pradesh, had to be made urgently, therefore, the Governor of Himachal Pradesh, after obtaining the instructions from the President of India, in exercise of the powers conferred under clause (1) of article 213 of the Constitution of India, promulgated the Contract Labour (Regulation3513 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 and Abolition) Himachal Pradesh Amendment Ordinance, 2020 (Ordinance No. 3 of 2020) on 7th July, 2020 which was published in the Rajpatra (e-Gazette), Himachal Pradesh on 9th July, 2020. Now, the said Ordinance is being replaced by a regular Legislation without any modification.
This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.
(BIKRAM SINGH) Minister-in-Charge.
SHIMLA :
THE…………, 2020.
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हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय
अधिसूचना
दिनांक 09 सितम्बर, 2020
संख्या वि0स0-विधायन-विधेयक/1-12/2020.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत कारखाना (हिमाचल प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2020 (2020 का विधेयक संख्यांक 7) जो आज दिनांक 09 सितम्बर, 2020 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्वसाधारण को सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।
हस्ताक्षरित/- सचिव, हि0 प्र0 विधान सभा।
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2020 का विधेयक संख्यांक 7 कारखाना (हिमाचल प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2020
खण्डों का क्रम
खण्ड : 1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ। 2. धारा 2 का संशोधन। 3. धारा 65 का संशोधन। 4. धारा 85 का संशोधन। 5. धारा 106 ख का अंतःस्थापन। 6. 2020 के हिमाचल प्रदेश अध्यादेश संख्यांक 5 का निरसन और व्यावृत्तियां।3514 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 2020 का विधेयक संख्यांक 7
कारखाना (हिमाचल प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2020
(विधान सभा में पुरःस्थापित रूप में)
हिमाचल प्रदेश राज्य को यथालागू कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का अधिनियम संख्यांक 63) का संशोधन करने के लिए विधेयक।
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :--
1. स्ांक्षिप्त नाम और प्रारम्भ.--(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम कारखाना (हिमाचल प्रदेश संशोधन) अधिनियम, 2020 है।
(2) यह 9 जुलाई, 2020 से प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा।
2. धारा 2 का संशोधन.--हिमाचल प्रदेश राज्य को यथा लागू कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63) (जिसे इसमें इसके पश्चात् ''मूल अधिनियम'' कहा गया है) की धारा 2 के खण्ड (ड) में,-- (क) उप-खण्ड (i) में ''दस'' शब्द के स्थान पर ''बीस'' शब्द रखा जाएगा; और
(ख) उप-खण्ड (ii) में, ''बीस'' शब्द के स्थान पर ''चालीस'' शब्द रखा जाएगा।
3. धारा 65 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 65 की उप-धारा (3) के खण्ड (iv) में ''पचहत्तर से अधिक नहीं होगी'' शब्दों के स्थान पर '', इस शर्त के अध्यधीन कि अतिकाल के लिए साधारण मजदूरी की दर का दो गुणा संदत्त किया जाएगा, एक सौ पंद्रह से अधिक नहीं होगी'' चिह्न और शब्द रखे जाएंगे।
4. धारा 85 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 85 की उप-धारा (1) के खण्ड (i) में ''दस'' और ''बीस'' शब्दों के स्थान पर क्रमशः ''बीस'' और ''चालीस'' शब्द रखे जाएंगे।
5. धारा 106 ख का अन्तःस्थापन.--मूल अधिनियम की धारा 106 क के पश्चात् निम्नलिखित धारा अन्तःस्थापित की जाएगी, अर्थात्ः--
''106ख. अपराधों का शमन.--राज्य सरकार के किसी साधारण या विशेष आदेश के अध्यधीन, इस अधिनियम के अधीन केवल जुर्माने से दण्डनीय प्रथम बार किए गए किसी अपराध का, मुख्य निरीक्षक द्वारा अभियोजन को संस्थित करने से पूर्व या उसके पश्चात् प्रशमन फीस की ऐसी रकम, जैसी वह उचित समझे, किन्तु अपराध के लिए नियत जुर्माने की अधिकतम रकम से अनधिक की वसूली पर किसी अपराध का शमन किया जा सकेगा; और जहां अपराध का शमन,--
(क) अभियोजन संस्थित करने से पूर्व किया जाता है, तो अपराधी ऐसे अपराध के लिए अभियोजन हेतु दायी नहीं होगा और यदि वह अभिरक्षा में है, तो उसे मुक्त कर दिया जाएगा; और
(ख) अभियोजन संस्थित करने के पश्चात् किया जाता है, तो शमन उस अपराधी की दोषमुक्ति से प्रभावी होगा, जिससे अपराध का शमन हुआ है।''।
6. 2020 के हिमाचल प्रदेश अध्यादेश संख्यांक 5 का निरसन और व्यावृत्तियां.--(1) कारखाना (हिमाचल प्रदेश संशोधन) अध्यादेश, 2020 का एतद्द्वारा निरसन किया जाता है।3515 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 (2) ऐसे निरसन के होते भी इस प्रकार निरसित अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन विधिमान्य रूप में की गई समझी जाएगी।
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उद्देश्यों और कारणों का कथन
कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का अधिनियम संख्यांक 63) जो कि एक केन्द्रीय विधान है, सत्तर वर्षों से भी पूर्व अधिनियमित किया गया था। इन वर्षों में संक्रमणकालीन परिवर्तन हो जाने के कारण इसे अधिक प्रभावी और लाभदायक बनाने के आशय से हिमाचल प्रदेश राज्य को यथालागू अधिनियम के कुछ उपबन्धों को संशोधित किया जाना अपेक्षित है। अधिनियम की धारा 2 के खण्ड (ड) में अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अनुसार ''कारखाना'' से, ऐसा परिसर अभिप्रेत है जिसमें पूर्ववर्ती बारह मास मेें किसी भी दिन, दस या अधिक कर्मकार काम कर रहे हैं या काम कर रहे थे और जिसके किसी भाग में विनिर्माण प्रक्रिया शक्ति की सहायता से कार्यान्वित की जा रही है, या साधारणतया शक्ति के बिना कार्यान्वित की जा रही है। इसके अतिरिक्त, परिसर, जिसमें शक्ति की सहायता के बिना विनिर्माण प्रक्रिया की जा रही है, में कर्मकारों की संख्या बीस या अधिक हो सकेगी। विद्यमान सीमा के कारण लघु ईकाइयां भी ''कारखाना'' की परिभाषा के अन्तर्गत आती हैं। राज्य में लघु ईकाइयों द्वारा विनिर्माण क्रियाकलापों में बढ़ौतरी करने के आशय से विद्यमान निश्चित सीमा को 'दस' और 'बीस' कर्मकारों से बढ़ाकर क्रमशः ''बीस'' और ''चालीस'' तक किया जाना प्रस्तावित किया गया है। यह संशोधन कर्मकारों के लिए नियोजन के अधिक अवसरों के सृजन के परिणामस्वरूप लघु विनिर्माण ईकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करने हेतु समयोचित है। परिणामतः धारा 85 के विद्यमान उपबन्ध को भी संशोधित किया जाना प्रस्तावित है।
इसके अतिरिक्त, पूर्वाेक्त अधिनियम की धारा 65 के अधीन कोई कर्मकार किसी तिमाही में अधिकतम पचहत्तर घण्टे के अतिकाल के लिए काम कर सकेगा। इस परिसीमा को इस शर्त के अध्यधीन, कि अतिकाल के लिए साधारण मजदूरी की दर का दो गुणा संदत्त किया जाएगा, एक सौ पन्द्रह घण्टे तक की बढ़ौतरी करने का प्रस्ताव है ताकि कर्मकारों को उपार्जन के अधिक अवसर प्राप्त हो सकें और साथ ही राज्य में सुगमता से कारोबार करने में भी बढ़ौतरी हो सके।
वर्तमानतः, पूर्वोक्त अधिनियम में अपराध का शमन करने के लिए कोई उपबन्ध नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप अनावश्यक मुकद्दमें बाजी हो रही है, जो प्रायः दुष्कर, समय की खपत वाली और मंहगी है। ऐसे मामलों के त्वरित निपटान के लिए और मुकद्दमों की संख्या को कम करने के लिए अपराधों का शमन करने हेतु एक नई धारा 106ख का अन्तःस्थापन प्रस्तावित है।
हिमाचल प्रदेश विधान सभा सत्र में नहीं थी और हिमाचल प्रदेश राज्य को यथालागू कारखाना अधिनियम, 1948 में संशोधन करना अनिवार्य हो गया था। इसलिए हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, द्वारा, भारत के राष्ट्रपति से अनुदेशों को अभिप्राप्त करने के पश्चात्, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 के खण्ड (1) के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, कारखाना (हिमाचल प्रदेश संशोधन) अध्यादेश, 2020 (2020 का अध्यादेश संख्यांक 5) तारीख 7 जुलाई, 2020 को प्रख्यापित किया गया था जिसे राजपत्र (ई-गज़ट), हिमाचल प्रदेश में तारीख 9 जुलाई, 2020 को प्रकाशित किया गया था। अब, उक्त अध्यादेश को बिना किसी उपान्तरण के नियमित विधान द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है।
यह विधेयक उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए है।
(बिक्रम सिंह) प्रभारी मन्त्री। शिमला :
तारीख : ............................, 20203516 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT Bill No. 7 of 2020
THE FACTORIES (HIMACHAL PRADESH AMENDMENT) BILL, 2020
ARRANGEMENT OF CLAUSES
Clauses :
1. Short title and commencement. 2. Amendment of Section 2. 3. Amendment of Section 65. 4. Amendment of Section 85. 5. Insertion of Section 106 B. 6. Repeal of the Himachal Pradesh Ordinance No. 5 of 2020 and savings.
_________
Bill No. 7 of 2020
THE FACTORIES (HIMACHAL PRADESH AMENDMENT) BILL, 2020
(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)
A
BILL
to amend the Factories Act, 1948 (Act No. 63 of 1948) in its application to the State of
Himachal Pradesh.
BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Seventy-first Year of the Republic of India as follows :—
1. Short title and commencement.—(1) This Act may be called the Factories (Himachal Pradesh Amendment) Act, 2020.
(2) It shall be deemed to have come into force on 9th day of July, 2020.
2. Amendment of Section 2.—In Section 2 of the Factories Act, 1948 (63 of 1948) in its application to the State of Himachal Pradesh (hereinafter referred to as the "principal Act"), in clause (m),—
(a) in sub-clause (i), for the word "ten", the word "twenty" shall be substituted; and (b) in sub-clause (ii), for the word "twenty", the word "forty" shall be substituted.
3. Amendment of Section 65.—In Section 65 of the principal Act, in sub-section (3), in clause (iv), for the words "seventy-five", the words "one hundred and fifteen, subject to the condition that overtime shall have to be paid twice the rate of ordinary wages" shall be substituted.
3517 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 19424. Amendment of Section 85.—In Section 85 of the principal Act, in sub-section (1), in clause (i), for the words "ten" and "twenty", the words "twenty" and "forty" shall be substituted respectively.
5. Insertion of Section 106 B.—After Section 106 A of the principal Act, the following section shall be inserted, namely:—
"106 B. Compounding of offences.—Any offence punishable under this Act with fine only and committed for the first time, may subject to any general or special order of the State Government, be compounded by the Chief Inspector, either before or after the institution of the prosecution, on realization of such amount of composition fee as he thinks fit, but not exceeding the maximum amount of fine fixed for the offence; and where the offence is compounded,—
(a) before the institution of prosecution, the offender shall not be liable to prosecution, for such offence and shall, if in custody, be set at liberty; and
(b) after the institution of the prosecution, the composition shall have the effect of an acquittal of the accused with whom the offence has been compounded.".
6. Repeal of the Himachal Pradesh Ordinance No. 5 of 2020 and savings.— (1) The Factories (Himachal Pradesh Amendment) Ordinance, 2020 is hereby repealed.
(2) Notwithstanding such repeal, anything done or any action taken under the Ordinance so repealed, shall be deemed to have been validly done or taken under the corresponding provisions of this Act.
__________
STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS
The Factories Act, 1948 (Act No. 63 of 1948), a central legislation, was enacted more than seventy years ago. Due to the transitional changes having taken place, some of the provisions of the Act are required to be amended in its application to the State of Himachal Pradesh, in order to make it more effective and fruitful. As per the provision contained in clause (m) of Section 2 of the Act, 'factory' means any premises wherein ten or more workers are working, or were working on any day of the preceding twelve months, and in any part of which a manufacturing process is being carried on with the aid of power, or is ordinarily so carried on. Further, in the premises, wherein manufacturing process is being carried on without the aid of power, the number of workers may be twenty or more. Because of the existing limit, small units are also covered under the definition of 'factory'. In order to increase the manufacturing activities by small units in the State, it is proposed to increase the existing threshold limits of 'ten' and 'twenty' workers to 'twenty' and 'forty' respectively. This amendment is likely to encourage the establishment of small manufacturing units resulting in creation of more employment opportunities to the workers. Consequently, the existing provision of Section 85 is also proposed to be amended.
Further, under section 65 of the Act ibid., a worker may work overtime for maximum seventy-five hours in any quarter. There is a proposal to increase this limit to one hundred and fifteen hours subject to the condition that overtime shall have to be paid twice the rate of ordinary wages, so that the workers may get more opportunities to earn and simultaneously also enhance the ease of doing business in the State.
3518 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 Presently, in the Act ibid., there is no provision to compound the offences, resulting in unnecessary litigation, which is often cumbersome, time consuming and expensive. For speedy disposal of such cases and to minimise the number of litigations, a new section 106 B is proposed to be inserted for composition of offences.
Since, the Himachal Pradesh Legislative Assembly was not in session and amendments in the Factories Act, 1948, in its application to the State of Himachal Pradesh were required to be carried out urgently, therefore, the Government of Himachal Pradesh, after obtaining the instructions from the President of India, in exercise of the powers conferred under clause (1) of article 213 of the Constitution of India, promulgated the Factories (Himachal Pradesh Amendment) Ordinance, 2020 on 7th July, 2020 which was published in the Rajpatra (e-Gazette), Himachal Pradesh on 9th July, 2020. Now, the said Ordinance is being replaced by a regular legislation without any modification.
This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.
(BIKRAM SINGH) Minister-in-Charge.
SHIMLA :
The……………………….., 2020
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हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय
अधिसूचना
दिनांक 09 सितम्बर, 2020
संख्या वि0स0-विधायन-सरकारी विधेयक/1-07/2020.--हिमाचल प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली, 1973 के नियम 140 के अन्तर्गत सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2020 (2020 का विधेयक संख्यांक 8) जो आज दिनांक 09 सितम्बर, 2020 को हिमाचल प्रदेश विधान सभा में पुरःस्थापित हो चुका है, सर्वसाधारण को सूचनार्थ राजपत्र में मुद्रित करने हेतु प्रेषित किया जाता है।
हस्ताक्षरित/- सचिव, हि0 प्र0 विधान सभा।
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2020 का विधेयक संंख्यांक 8 हिमाचल प्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2020
खण्डों का क्रम
खण्डः 1. संक्षिप्त नाम। 2. धारा 2 का संशोधन ।3519 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 3. धारा 6 का संशोधन। 4. धारा 8 का संशोधन । 5. धारा 11 का संशोधन। 6. धारा 11 अ का लोप । 7. धारा 14 अ का लोप। 8. धारा 59 का संशोधन । 9. धारा 61 का प्रतिस्थापन। 10. धारा 62 का संशोधन । 11. धारा 93 का संशोधन। 12. धारा 97 क का संशोधन।
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2020 का विधेयक संंख्यांक 8 हिमाचल प्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2020
(विधानसभा में पुरःस्थापित रूप में )
हिमाचल प्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1968 (1969 का अधिनियम संख्यांक 3) का और संशोधन करने के लिए विधेयक।
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में हिमाचल प्रदेश विधानसभा द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1. स्ांक्षिप्त नाम.--इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम हिमाचल प्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधिनियम, 2020 है।
2. धारा 2 का संशोधन.--हिमाचल प्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1968 (1969 का 3) (जिसे इसमें इसके पश्चात्् ''मूल अधिनियम'' कहा गया है) की धारा 2 के खण्ड (1) और (1अ) के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात््ः-
(1) ''लेखा परीक्षक'' से, लेखा परीक्षक या लेखा परीक्षकों या लेखा परीक्षा फर्म या धारा 61 के अधीन गठित पैनल में यथा सम्मिलित सरकार का कोई अधिकारी/पदधारी अभिप्रेत है; (1अ) ''उप-विधि'' से, इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्री—त की गई या रजिस्ट्री—त की गई समझी गई उप-विधि अभिप्रेत है, और इसके अन्तर्गत उप-विधि का रजिस्ट्री—त संशोधन भी है; (1आ) ''कलक्टर'' से जिले का कलक्टर अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत जिलाधीश तथा राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन कलक्टर के —त्यों का पालन करने के लिए विशेष रूप से नियुक्त कोई अन्य अधिकारी भी है।
3. धारा 6 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 6 में,-
(क) ''दस हजार'' शब्द जहां-जहां आते हैं के स्थान पर ''एक लाख'' शब्द रखे जाएंगे। (ख) परन्तुक के अन्त में ''।'' चिन्ह के स्थान पर ''ः'' चिन्ह रखा जाएगा और तत्पश्चात्् निम्नलिखित अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात््ः- 3520 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 ''परन्तु यह और कि किसी प्राइमरी सहकारी बैंक का कोई वैयक्तिक सदस्य ऐसे बैंक की कुल संदत्त शेयर पूंजी का पांच प्रतिशत से अधिक शेयर धारण नहीं करेगा।
स्पष्टीकरणः--इस धारा के प्रयोजन के लिए ''प्राइमरी सहकारी बैंक'' से, ऐसा बैंक अभिप्रेत है जैसा बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) में परिभाषित किया गया है।''। 4. धारा 8 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 8 की उपधारा (1) के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः-
''(1) किसी सहकारी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण हेतु आवेदन की प्राप्ति पर रजिस्ट्रार, आवेदन की विशिष्टियों को या तो मैन्युली या इलेक्ट्रानिक्ली तैयार किए गए आवेदन के रजिस्टर में प्रविष्टि करेगा और आवेदन को क्रमांकित करेगा और तत्पश्चात्् सोसाइटी तथा इसकी उपविधियों को रजिस्ट्री—त करेगा यदि-
(क) प्रस्तावित सोसाइटी के उद््देश्य इस अधिनियम और तद््धीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के विरुद्ध न हो;
(ख) प्रस्तावित सोसाइटी के उद््देश्य सामाजिक न्याय के सिद्धान्त, जैसे विहित किए जाएं, से असंगत न हों।
5. धारा 11 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 11 की उपधारा (2) के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः-
''(2) किसी सहकारी सोसाइटी की उप-विधियों के संशोधन हेतु आवेदन की प्राप्ति पर रजिस्ट्रार, आवेदन की विशिष्टियों को या तो मैन्युली या इलेक्ट्रानिक्ली तैयार किए गए आवेदनों के रजिस्टर में प्रविष्टि करेगा और आवेदन को क्रमांकित करेगा तथा तत्पश्चात्् उप-विधियों में संशोधन रजिस्ट्रीकृत कर सकेगा, यदि-
(क) प्रस्तावित संशोधन इस अधिनियम और तद््धीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के विरुद्ध न हों; और
(ख) प्रस्तावित संशोधन सामाजिक न्याय के सिद्धान्त, जैसे विहित किए जाएं, से असंगत न हो। 6. धारा 11-अ का लोप.--मूल अधिनियम की धारा 11 अ का लोप किया जाएगा।
7. धारा 14-अ का लोप.--मूल अधिनियम की धारा 14-अ का लोप किया जाएगा।
8. धारा 59 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 59 में ''विनिर्दिष्ट की जाए,'' शब्दों और चिन्ह के पश्चात्् किन्तु ''निक्षेप और उधार प्राप्त करेगी'' शब्दों से पूर्व ''मत देने वाले इसके सदस्यों से'' शब्द अन्तःस्थापित किए जाएंगे।
9. धारा 61 का प्रतिस्थापन.--मूल अधिनियम की धारा 61 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा, अर्थात्ः-
''61. लेखा परीक्षा.--(1) प्रत्येक सहकारी सोसाइटी संपरीक्षक द्वारा अपने लेखों की संपरीक्षा सहकारी वर्ष, जिससे लेखे सम्बन्धित हैं, की समाप्ति से छह मास के भीतर संपरीक्षित करवाएगी। (2) सहकारी सोसाइटी के लेखे सरकार द्वारा इस निमित्त अधिसूचित संपरीक्षकों के पैनल से सोसाइटी की साधारण बैठक में अनुमोदित संपरीक्षक द्वारा संपरीक्षित किए जाएंगे। इसके प्राधि—त3521 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 संपरीक्षकों के पैनल की अर्हता, अनुभव, तैयार करने की रीति और सोसाइटी द्वारा संदत्त की जाने वाली संपरीक्षा फीस या पारिश्रमिक सहित संदाय करने की रीति ऐसी होगी जैसी विहित की जाए। (3) यदि लेखा परीक्षा के समय सोसाइटी के लेखे पूर्ण नहीं है तो उपधारा (2) के अधीन प्राधि—त संपरीक्षक लेखे को सोसाइटी के व्यय पर लिखवा सकेगा।
(4) किसी सोसाइटी से संदेय संपरीक्षा फीस या पारिश्रमिक, यदि कोई है या सोसाइटी के लेखे लिखवाने के लिए उपगत व्यय धारा 90 में यथा उपबंधित रीति में वसूलीय होगा।
(5) जहां सहकारी सोसाइटी उपधारा (1) (1949 का 10) के अनुसार अपने वार्षिक लेखों की संपरीक्षा करवाने में असफल रहती है तो रजिस्ट्रार सोसाइटी के लेखों को सोसाइटी के व्ययों पर संपरीक्षित करवाएगा।
(6) जहां रजिस्ट्रार की राय है कि किसी सहायता प्राप्त सोसाइटी के कार्यकलाप धारा 48 के उपबन्धों के अनुसार सहकारी सिद्धान्तों या प्रज्ञापूर्ण वाणिज्यिक परिपाटी या इस अधिनियम, नियमों या उप विधियों के उपबन्धों के अनुसार प्रबन्धित नहीं किए जा रहे हैं, तो वह आदेश द्वारा, ऐसी विशेष लेखा परीक्षा की व्यवस्था कर सकेगा और इस अधिनियम के उपबन्ध और संपरीक्षा को लागू नियम ऐसी विशेष संपरीक्षा के लिए भी लागू होंगेः
परन्तु यदि रजिस्ट्रार का समाधान हो जाता है तो वह धारा 48 के उपबन्धों के अनुसार असहायता प्राप्त सोसाइटी की विशेष संपरीक्षा का आदेश दे सकेगा यदि सोसाइटी के कम से कम एक चौथाई सदस्यों द्वारा इस प्रभाव का अनुरोध किया गया है।
10. धारा 62 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 62 की उपधारा (2) में ''रजिस्ट्रार या उसके द्वारा प्राधि—त किसी व्यक्ति'' शब्दों के स्थान पर ''संपरीक्षक'' शब्द रखा जाएगा।
11. धारा 93 का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 93 की उपधारा (1) में खण्ड (ठ) और (ड) का लोप किया जाएगा।
12. धारा 97 क का संशोधन.--मूल अधिनियम की धारा 97(क) के खण्ड (iv) के पश्चात् निम्नलिखित अन्तःस्थापित किया जाएगा, अर्थात््ः-
''(iv-क) ऐसे बैंक की समिति के अधिक्रमण के लिए यदि किसी आदेश को भारतीय रिजर्व बैंक की अध्यपेक्षा के अनुसार इस धारा के अधीन किया है या किया गया है तो ऐसी समिति का कोई सदस्य ऐसे बैंक की समिति या किसी अन्य बैंक के लिए समिति के अधिक्रमण के आदेश की तारीख से दस वर्ष की अवधि के लिए पुनर्निवाचित, पुनर्नियुक्त या पुनर्नामनिर्दिष्ट या पुनर्सहयोजित किए जाने के लिए पात्र नहीं होगा।
(iv-ख) कोई व्यक्ति, जो सहकारी बैंक की प्रबन्ध समिति के सदस्य के लिए निर्वाचन हेतु अभ्यर्थी है, नामांकन पत्र दाखिल करते समय इस प्रभाव की घोषणा करेगा कि,-
(क) वह सहकारी बैंक की प्रबन्ध समिति, जो इस अधिनियम के अधीन अधिक्रमित की गई है, का कभी सदस्य नहीं रहा है; या
(ख) वह सहकारी बैंक की प्रबन्ध समिति, जो इस अधिनियम के अधीन पूर्वतर अधिक्रमित थी और ऐसे अधिक्रमण के आदेश की तारीख से समिति के दो कार्यकाल की अवधि समाप्त हो गई थी, का सदस्य रहा है।''।3522 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 उद््देश्यों और कारणों का कथन हिमाचल प्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1968 (1969 का अधिनियम संख्यांक 3) को हिमाचल प्रदेश में सहकारी सोसाइटी से सम्बन्धित विधि को समेकित करने और संशोधित करने हेतु अधिनियमित किया गया था । 13 जनवरी, 2012 को अधिसूचित संविधान (सतानवें संशोधन) अधिनियम, 2011 के अधिनियमित होने से सहकारी सोसाइटी का गठन मौलिक अधिकार बना दिया गया है। इस संशोधन द्वारा; राज्य नीति के मार्गदर्शक सिद्धान्तों से सम्बन्धित अध्याय में नया अनुच्छेद 43 ख भी अन्तःस्थापित किया गया है जिसमें यह उपबन्ध किया गया है कि राज्य को सहकारी सोसाइटी के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्यशैली, लोकतान्त्रिक नियन्त्रण और व्यावसायिक प्रबन्धन को प्रोत्साहित करने हेतु प्रयत्न करना होगा। इसलिए सहकारी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण और उसकी संपरीक्षा से सम्बन्धित उपबन्धों को भारत के संविधान के सतानवें संशोधन के अनुरूप लाने के आशय से हिमाचल प्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1968 में उपयुक्त संशोधन करना आवश्यक और समीचीन हो गया है।
इसके अतिरिक्त केन्द्रीय सरकार ने अनियमित जमा योजना प्रतिबन्ध अधिनियम, 2019 अधिनियमित किया है जिसमें सहकारी सोसाइटी में गैर-सदस्यों से निक्षेप प्राप्त करना प्रतिबन्धित किया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी सहकारी सेक्टर में सुधार करने हेतु कुछ सिफारिशें की हैं।
यह विधेयक उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए है।
(सुरेश भारद्वाज) प्रभारी मन्त्री। शिमला : तारीखः......................2020
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AUTHORITATIVE ENGLISH TEXT
Bill No. 8 of 2020
THE HIMACHAL PRADESH CO-OPERATIVE SOCIETIES (AMENDMENT) BILL, 2020
ARRANGEMENT OF CLAUSES
Clauses:
1. Short title. 2. Amendment of section 2. 3. Amendment of section 6. 4. Amendment of section 8. 5. Amendment of section 11. 6. Omission of section 11-A. 7. Omission of section 14-A. 8. Amendment of section 59. 9. Substitution of section 61. 10. Amendment of section 62. 11. Amendment of section 93. 12. Amendment of section 97-A.
3523 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 Bill No. 8 of 2020THE HIMACHAL PRADESH CO-OPERATIVE SOCIETIES (AMENDMENT) BILL, 2020
(AS INTRODUCED IN THE LEGISLATIVE ASSEMBLY)
A
BILL
further to amend the Himachal Pradesh Co-operative Societies Act, 1968 (Act No. 3 of
1969).
BE it enacted by the Legislative Assembly of Himachal Pradesh in the Seventy-first Year of the Republic of India as follows:—
1. Short title.—This Act may be called the Himachal Pradesh Co-operative Societies (Amendment) Act, 2020.
2. Amendment of section 2.—In section 2 of the Himachal Pradesh Co-operative Societies Act, 1968 (3 of 1969) (hereinafter referred to as the "principal Act"), for clauses (1) and (1-a), the following shall be substituted, namely:—
(1) "Auditor" means an auditor or auditors or auditing firm or an officer or official of the Government as included in the panel constituted under section 61.
(1A) "Bye-law" means a bye-law registered or deemed to have been registered under this Act; and includes a registered amendment of the bye-law;
(1B) "Collector" means the Collector of a district and includes a Deputy Commissioner and any other officer specially appointed by the State Government to perform the functions of the Collector under this Act.
3. Amendment of section 6.—In section 6 of the principal Act,—
(a) for the words "ten thousand" wherever occur, the words "one lakh" shall be substituted; and
(b) in the end of the proviso, for the sign ".", the sign ":" shall be substituted and thereafter following shall be inserted, namely:—
"Provided further that no individual member of a primary co-operative bank shall hold more than five percent of the total paid up share capital of such bank.
Explanation.—For the purpose of this section "primary co-operative bank" means a bank as has been defined in the Banking Regulation Act, 1949 (10 of 1949).".
4. Amendment of section 8.—In section 8 of the principal Act, for sub-section (1), the following shall be substituted, namely:—
"(1) On receipt of an application for registration of a co-operative society, the Registrar shall enter the particulars of the application in the Register of the3524 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 applications to be maintained either manually or electronically, and give a serial number to the application and thereafter shall register the society and its bye-laws if—
(a) the aims of the proposed society are not contrary to the provisions of this Act and the rules made thereunder; and
(b) the aims of the proposed society are not inconsistent with the principles of the social justice, as may be prescribed.".
5. Amendment of section 11.—In section 11 of the principal Act, for sub-section (2), the following shall be substituted, namely:—
"(2) On receipt of an application for amendment of bye-laws of a Co-operative Society, the Registrar shall enter the particulars of the application in the Register of applications to be maintained either manually or electronically; and give a serial number to the application and thereafter may register the amendment in the bye-laws if—
(a) the proposed amendments are not contrary to the provisions of this Act and the rules made thereunder; and
(b) the proposed amendments are not inconsistent with the principles of the social justice, as may be prescribed.".
6. Omission of section 11-A.—The section 11-A of the principal Act shall be omitted.
7. Omission of section 14-A.— The section 14-A of the principal Act shall be omited.
8. Amendment of section 59.—In section 59 of the principle Act, after the words "received deposits", the words "from its voting members" shall be inserted.
9. Substitution of section 61.—For section 61 of the principle Act, the following shall be substituted, namely:—
"61. Audit. — (1) Every co-operative society shall cause to be audited its accounts by an auditor, within six months from the close of a co-operative year to which the accounts relate.
(2) The accounts of a co-operative society shall be audited by an auditor approved in the general meeting of the society from the panel of auditors notified by the Government in this behalf. The qualifications, experience, manner of preparation of the panel of auditors and authorization thereof; and audit fee or remuneration to be paid by the society along with the manner of making payment shall be such, as may be prescribed.
(3) If at the time of audit, the accounts of a society are not complete, the auditor authorized under sub-section (2) may cause the accounts to be written up at the expense of the society.
(4) The audit fee or the remuneration, if any, due from any society or the expenses incurred in writing up the accounts of a society shall be recoverable in the manner as provided in section 90.
3525 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942(5) Where a co-operative society fails to get its annual accounts audited as per sub- section (1), the Registrar shall get the accounts of the society audited at the expense of the society.
(6) Where the Registrar is of the opinion that the affairs of any society aided as per the provisions of section 48, are not being managed in accordance with the co- operative principles or prudent commercial practices or the provisions of this Act, the rules or the bye-laws, he may by an order, provide for such special audit and the provisions of this Act, and the rules applicable to the audit shall also apply to such special audit:
Provided that the Registrar, if satisfied, may order special audit of a society not being aided as per the provisions of section 48, if a request to this effect is made by atleast one-forth members of the society.
10. Amendment of section 62.—In section 62 of the principal Act, in sub-section (2), for the words "Registrar or any person authorised by him", the word "auditor" shall be substituted.
11. Amendment of section 93.—In section 93 of the principal Act, in sub-section (1), the clauses (l) and (m) shall be deleted.
12. Amendment in Section 97-A.—In section 97-A of the principle Act, after clause (iv), the following shall be inserted, namely:—
"(iv-a) If an order for supersession of committee of such bank, as per the requisition of Reserve Bank of India, is made or has been made under this section, then no member of such committee shall be eligible for being re-elected, re-appointed, re-nominated or reco-opted on the committee of such bank or any other bank, for a period of ten years from the date of order of supersession of the committee.
(iv-b) Any person, who is a candidate for election to the member of managing committee of a co-operative bank, shall, while filing nomination paper, make a declaration to the effect that,—
(a) he has never been a member of the managing committee of a co-operative bank which has been superseded under the Act; or
(b) he has been a member of the managing committee of a co-operative bank which was earlier superseded under the Act and that a period of two terms of the committee has elapsed from the date of order of such supersession.".
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STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS
The Himachal Pradesh Co-operative Societies Act, 1968 (Act No. 3 of 1969) was enacted to consolidate and amend the laws relating to the Co-operative Societies in the State. With the enactment of the Constitution (Ninety Seventh Amendment) Act, 2011, notified on 13th January, 2012, the formation of the Co-operative Societies has been made a fundamental right. Vide this amendment, a new article 43 B has been inserted in the chapter relating to the Directive Principles of the State Policy, wherein it has been provided that the State shall endeavor to promote voluntary formation, autonomous functioning, democratic control and professional management of the 3526 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 Co-operative Societies. Thus, in order to bring the provisions relating to registration of the co-operative societies and audit thereof, in consonance with 97th amendment of the Constitution, it is necessary and expedient to make suitable amendments in the Himachal Pradesh Co-operative Societies Act, 1968. Further, the Central Government has enacted the Unregulated Deposit Scheme Act, 2019, wherein receiving deposits from non-members in the Co-operative Societies have been barred. The Reserve Bank of India has also made some recommendations for making reforms in the co-operative sector.
This Bill seeks to achieve the aforesaid objectives.
(SURESH BHARDWAJ) Minister-in-charge.
SHIMLA: The...................., 2020.
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ब अदालत सहायक समाहर्ता प्रथम वर्ग, डलहौजी, जिला चम्बा (हि0 प्र0)
. . प्रार्थी। श्री चावल सिंह पुत्र श्री रतन सिंह पुत्र श्री लेख राज, निवासी लक्कडमण्डी, डाकघर व तहसील डलहौजी, जिला चम्बा (हि0 प्र0)
बनाम
. . प्रत्यार्थीगण। आम जनता
प्रार्थना-पत्र बराए नाम दुरुस्ती बारा इश्तहार।
उपरोक्त प्रार्थी ने अधोहस्ताक्षरी की अदालत में प्रार्थना-पत्र, ब्यान हल्फी बमय अन्य कागजात इस आशय से गुजारा है कि उसका सही नाम चावल सिंह है। मेरे आधार कार्ड व मेरी परिवार नकल, ग्राम पंचायत पधरोटू में सही नाम चावल सिंह दर्ज है। लेकिन मेरी मलकियती भूमि महाल आर0एफ0 कालाटोप, पटवार वृत्त रूलयाणी में छवाल सिंह पुत्र श्री रतन चन्द पुत्र श्री लेख राज दर्ज है जोकि गलत है। जिसकी दुरुस्ती की जावे।
इस सम्बन्ध में सर्वसाधारण जनता को बजरिया इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि प्रार्थी के नाम की दुरुस्ती बारे यदि किसी को कोई उजर/एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन अधोहस्ताक्षरी की अदालत में दिनांक 15-10-2020 को हाजिर आकर अपना एतराज दर्ज करवा सकता है। हाजिर न आने की सूरत में एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जा करके नाम दुरुस्ती के आदेश दे दिए जाएंगे।
आज दिनांक ----------2020 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत सहित जारी हुये। मोहर।
हस्ताक्षरित/- (राजेश कुमार जरयाल),
सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, डलहौजी, जिला चम्बा (हि0 प्र0)।3527 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 ब अदालत सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, चढ़गांव, जिला शिमला (हि0 प्र0) विनोद कुमार बनाम आम जनता विषय.--नाम दुरुस्ती राजस्व कागजात वाका मोहाल खशधार
श्री विनोद कुमार पुत्र श्री सरनदास, निवासी गांव दली, डाकघर मसली, तहसील चढ़गांव, जिला शिमला (हि0प्र0) ने एक दरख्वास्त बराये नाम दुरुस्ती राजस्व अभिलेख मोहाल खशधार की इस अदालत में गुजारी है। उक्त दरख्वास्त को मौका की रिपोर्ट हेतु क्षेत्रीय कानूनगो संदासू को भेजा गया था क्षेत्रीय कानूनगो संदासू ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट मौका इस अदालत में प्रस्तुत की है जिसके मुताबिक प्रार्थी श्री विनोद कुमार पुत्र श्री सरमनदास के दादा का नाम खाता नं0 304, मोहाल खशधार में कौल राम दर्ज है जोकि गलत है प्रार्थी के दादा का असली नाम सैन्ज राम है जिसकी पुष्टि हेतु स्थानीय वांशिदगानों के ब्यान, नकल परिवार रजिस्टर से होती है। इसके अलावा क्षेत्रीय कानूनगो ने यह भी रिपोर्ट की है कि प्रार्थी के दादा का नाम खाता नं0 97, नकल जमाबन्दी वर्ष 2013-14 महाल दली में सैन्ज राम दर्ज है। क्षेत्रीय कानूनगो संदासू ने उक्त नाम की दुरुस्ती की सिफारिश की है।
अतः उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए इस इश्तहार के माध्यम से आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त नाम की दुरुस्ती से एतराज हो तो वह अपना एतराज असालतन व वकालतन मिति 15-09-2020 को अदालत हजा में आकर प्रस्तुत कर सकता है। उक्त तारीख के पश्चात् कोई भी दावा व एतराज स्वीकार नहीं किया जाएगा और प्रार्थी श्री विनोद कुमार के दादा के नाम की दुरुस्ती राजस्व अभिलेख मोहाल खशधार में नियमानुसार कर दी जाएगी।
आज दिनांक 26-08-2020 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर न्यायालय सहित जारी हुआ।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, चढ़गांव, जिला शिमला (हि प्र0)।
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ब अदालत श्री नरोतम लाल गौर, सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, तहसील चढ़गांव, जिला शिमला, हि0 प्र0 श्री मेदरू पुत्र श्री गोरखू, निवासी गांव अम्बोट, तहसील चढ़गांव, जिला शिमला, हि0 प्र0
बनाम
1. श्री जोगिन्दर, 2. श्री जश्मन, 3. श्री राम प्रकाश, 4. श्रीमती हिंउदासी, 5. श्री ज्ञान चन्द, 6. देव कुमारी, 7. श्री बालक राम, 8. श्री सरदार सिंह, 9. श्रीमती शिरामणी, 10. श्रीमती टीकम देवी, 11. श्रीमती राजम देवी, 12. श्री जालमपूर, 13. श्री फौजी राम, 14. श्री प्यारे लाल, 15. श्रीमती सुरगुणी, 16. श्री नरेश कुमार, 17. श्री हरीश कुमार, 18. श्री अनिल कुमार, 19. कु0 अनिता, 20. श्रीमती बांका देवी, 21. श्रीमती पियूनी, 22. श्री गुदड़ू, 23. श्रीमती मिसरमणी, 24. श्रीमती गुड्डी, 25. श्री तोतू पुत्र, 26. श्री सूनपूर, 27. श्रीमती पदमदासी, 28. श्रीमती शंखामणि, 29. श्रीमती वरसूनी, 30. श्रीमती चीड़ि, 31. श्री कौल राम, 32. श्री पाण्डू, 33. श्रीमती झूझनू, 34. श्रीमती वाना देवी, 35. प्यारमणी, 36. श्री बलदेव, 37. राजकुमारी, 38. श्रीमती विमला देवी, निवासी दिउदी, तहसील चढ़गांव।
. . फरीकदोयम। उनवान मुकद्दमा :-हुकमन तकसीम जेरे धारा 123 भू-राजस्व अधिनियम, 1954
दरख्वास्त जेरे धारा 123 भू-राजस्व अधिनियम, 1954 के तहत श्री मेदरू पुत्र स्वर्गीय श्री गोरखू, निवासी अम्बोई, तहसील चढ़गांव, जिला शिमला, हि0 प्र0 बराये से हुकमन तकसीम भूमि खाता खतौनी नं0 3528 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 34/51 ता 53, खसरा नं0 188, 193, 187, 186, 185, कित्ता 5, रकबा तादादी 0-64-22 है0, वाका मोहाल टिसर, खाता खतौनी नं0 88/214 ता 217, कित्ता 6, रकबा तादादी 0-67-83 है0 वाका महाल दियूदी, खाता खतौनी नं0 87-166, कित्ता 10, रकबा तादादी 00-39-26 है0 व खाता खतौनी नं0 88/172 ता 175, कित्ता 12, रकबा तादादी 0-37-02 है0, वाका महाल भटबाड़ी इस अदालत में गुजारी। उक्त मिसल में मौका पर तकसीम की जा चुकी है। मिसल में अब मौका पर की गई तकसीम की पुष्टि की जानी है परन्तु बार-बार इत्तलाह के कुछ प्रतिवादीगण मौका पर की गई तकसीम की पुष्टि हेतु अदालत हजा में पेश नहीं हो रहे हैं जिससे इस मिसल में अनचाही देरी हो रही है। उक्त मिसल काफी लम्बे समय से अदालत में विचाराधीन है। अतः इस इश्तहार के माध्यम से उन सभी प्रतिवादीगणों जो अदालत में पेश नहीं हुए हैं को सूचित किया जाता है कि आप असालतन व वकालतन मिति 28-09-2020 को प्रातः 10.00 बजे अदालत हजा में हाजिर आवें। अदालत हजा द्वारा यह आपको अन्तिम मौका दिया जा रहा है तत्पश्चात् आपका कोई भी दावा स्वीकार नहीं किया जायेगा तथा यह समझा जाएगा कि आपको मौका पर की गई तकसीम से कोई एतराज नहीं है और मिसल की पुष्टि की जाए सनद तकसीम तैयार कर दी जाएगी।
आज दिनांक 25-08-2020 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित जारी किया गया।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, चढ़गांव, जिला शिमला, हि प्र0।
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ब अदालत श्री नरोतम लाल गौर, सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, तहसील चढ़गांव, जिला शिमला, हि0 प्र0 श्रीमती रूमीला देवी पुत्री स्वर्गीय श्री कंवर सिंह, निवासी गांव जडकोट, डा0 लढोट, तहसील चढ़गांव, जिला शिमला, हि0 प्र0।
बनाम
1. श्रीमती सूशीला, 2. रमेश, 3. विटू कुमार, 4. शान्ता देवी, 5. परमिला देवी, 6. रामपति, 7. प्रताप सिंह, 8. सवाल देई, 9. आशीष कुमार, 10. स्नेहलता, 11. कुमारी नेविदा, 12. कुमारी मोनिका, 13. श्रीमती विजय लक्ष्मी, 14. भीष्म सिंह, 15. राजेन्दर सिंह, 16. श्रीमती कमली, 17. श्रीमती सावित्री, 18. श्री रईणू, निवासी जड़कोट, तहसील चढ़गांव, जिला शिमला हि0 प्र0। . . फरीकदोयम। उनवान मुकद्दमा :-हुकमन तकसीम जेरे धारा 123 भू-राजस्व अधिनियम, 1954
दरख्वास्त जेरे धारा 123 भू-राजस्व अधिनियम, 1954 के तहत श्रीमती रूमीला देवी पुत्री स्वर्गीय श्री कंवर सिंह, निवासी गांव जड़कोट, डा0 लढोट, तहसील चढ़गांव, जिला शिमला, हि0 प्र0 ने बराये करने हुकमन तकसीम भूमि खाता खतौनी नं0 46/134 ता 140, कित्ता 29, रकबा तादादी 04-59-06 है0, वाका महाल जड़कोट इस एक दरख्वास्त इस अदालत में गुजारी है। उइस अदालत द्वारा सभी वादी एवं प्रतिवादीगण को समन जारी करके अदालत हजा में प्रस्तुत होने को कहा गया परन्तु बावजूद इत्तलाह के केवल प्र0 नं0 3, 9, 13, 14 व 15 ही अदालत हजा में पेश हुए। इस कार्यालय में तैनात तामिल कुनिंदा ने रिपोर्ट की है कि कुछ प्रतिवादीगण दिए गए पते पर नहीं रहते है, इसलिए उनको समन की तामील साधारण तरीके से नहीं की जा सकती है। जिससे मिसल में अनचाही देरी हो रही है।
अतः इस इश्तहार के माध्यम से उन सभी प्रतिवादीगणों जो इस अदालत में पेश नहीं हुए हैं को सूचित किया जाता है कि वह असालतन व वकालतन मिति 28-09-2020 को प्रातः 10.00 बजे अदालत हजा में हाजिर आवें। इस अदालत द्वारा यह आपको अन्तिम मौका दिया जा रहा है तत्पश्चात् आपका कोई भी दावा3529 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 स्वीकार नहीं किया जायेगा तथा यह समझा जाएगा कि आपको उक्त तकसीम से कोई एतराज नहीं है और मिसल में नियमानुसार तकसीम की प्रक्रिया अमल में लाई जावेगी।
आज दिनांक 25-08-2020 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित जारी किया गया।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, चढ़गांव, जिला शिमला, हि प्र0।
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ब अदालत श्री नरोतम लाल गौर, सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, तहसील चढ़गांव, जिला शिमला, हि0 प्र0 1. श्रीमती सुभद्रा देवी पुत्री स्वर्गीय श्री सुख चैन, निवासी गांव भेतयाणि, डा0 चिलाला, तहसील चढ़गांव, जिला शिमला, हि0 प्र0।
2. श्री फकीर चन्द पुत्र स्वर्गीय श्री सुख चैन, निवासी गांव भेतयाणि, डा0 चिलाला, तहसील चढ़गांव, जिला शिमला, हि0 प्र0।
बनाम
1. श्री टेक सिंह, 2. महेन्दर सिंह, 3. आत्मा राम, 4. शालिग राम, 5. राज देई, 6. खुशी राम, 7. देव मणि, 8. जयदेवी, 9. भाग चन्द, 10. प्रेम चन्द, 11. नरेन्दर सिंह, 12. सूरजमणि, 13. श्रीमती ठाकूर दासी, 14. सुनिता देवी, 15. विधा चन्द, 16. पृथ्वी राज, 17. ईमला देवी, 18. श्रीमती मथरा देवी, 19. शिशन देवी, 20. ईश्वरी देवी, 21. मीना देवी, 22. श्री चंद, 23. राम चंद, 24. श्रीमती कौशल्या 25. भजन दास, 26. राजेश, 27. दिनेश, 28. गुड्डू, 29. भीष्म सिंह, 30. जोगिन्दर सिंह़, 31. रविन्दर सिंह, 32. सुभाष, 33. श्रीमती कमलेश, 34. श्रीमती संगीता, 35. श्रीमती दवारका देवी, 36. पुष्पा देवी, 37. गुड्डी देवी, 38. परशोतम, 39. विरमपति, 40. हरदेव, 41. श्रीमती रूकमतिण, 42. कुमारी मंजु, 43. रोशन लाल, 44. देविन्दर सिंह, 45. मुरत सिंह, 46. श्रीमती सुशीला, 47. श्रीमती सूरतू, 48. श्री गजिन्दर निवासी भतयाणि, तहसील चढ़गांव, जिला शिमला, हि0 प्र0।
. . फरीकदोयम। उनवान मुकद्दमा :-हुकमन तकसीम जेरे धारा 123 भू-राजस्व अधिनियम, 1954
दरख्वास्त जेरे धारा 123 भू-राजस्व अधिनियम, 1954 के तहत श्रीमती सुभद्रा देवी पुत्री स्वर्गीय श्री सुख चैन, निवासी गांव भेतयाणि, तहसील चढ़गांव, जिला शिमला, हि0 प्र0 ने बराये करने हुकमन तकसीम भूमि खाता खतौनी नं0 98/232 ता 261, कित्ता 64, रकबा तादादी 03-39-14 है0, वाका महाल चढ़गांव व खाता खतौनी नं0 97/212 ता 231, कित्ता 27, रकबा तादादी 00-40-64 है0 वाका महाल चड़गांव, इस अदालत में गुजारी है। इस अदालत द्वारा सभी वादी एवं प्रतिवादीगण को समन जारी करके अदालत हजा में प्रस्तुत होने को कहा गया परन्तु बावजूद इत्तलाह के कुछ प्रतिवादीगण पेश नहीं हो रहे हैं। इस कार्यालय में तैनात तामिल कुनिंदा ने रिपोर्ट की है कि कुछ प्रतिवादीगण दिए गए पते पर नहीं रहते हैं इसलिए उनको समन की तामील साधारण तरीके से नहीं की जा सकती है। उपरोक्त कारणों से मिसल में अनचाही देरी हो रही है।
इसलिए इस इश्तहार के माध्यम से उन सभी प्रतिवादीगणों जो इस अदालत में पेश नहीं हुए हैं को सूचित किया जाता है कि आप असालतन व वकालतन मिति 28-09-2020 को प्रातः 10.00 बजे अदालत हजा 3530 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 में हाजिर आवें। इस अदालत द्वारा यह आपको अन्तिम मौका दिया जा रहा है तत्पश्चात् आपका कोई भी दावा स्वीकार नहीं किया जायेगा तथा यह समझा जाएगा कि आपको मौका पर की गई तकसीम से कोई एतराज नहीं है और मिसल में नियमानुसार तकसीम की प्रक्रिया अमल में लाई जावेगी।
आज दिनांक 25-08-2020 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित जारी किया गया।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, चढ़गांव, जिला शिमला, हि प्र0।
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ब अदालत श्री नरोतम लाल गौर, सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, तहसील चढ़गांव, जिला शिमला, हि0 प्र0 श्री राजेश कुमार पुत्र श्री बांका राम, निवासी गांव पुजारली, डा0 चिलाला, तहसील चढ़गांव, जिला शिमला, हि0 प्र0।
बनाम
1. श्री कर्ण कुुमार, 2. सपना, 3. रीतू, 4. पुनम, 5. सोनम, 6. सरला, 7. पुष्पा, 8. अनुराधा, 9. शीलावती, 10. लीलावती, 11. चन्दरवती, 12. मुन्नी, 13. बांका राम, 14. श्रीमती गौरी, 15. किशोरी, 16. जोगिन्दर सिंह, 17. गुलाबदेई, 18. सुनील हिमालयन, 19. राम चंद, 20. ईश्वर दास, 21. राम प्यारी, 22. पुष्पा देवी, 23. शारदा देवी, 24. बन्धना देवी 25. ईश्वरी देवी, 26. मित्र देव, 27. पूर्ण चन्द, 28. रविन्दर, 29. नरवदा, 30. सोधा़, 31. रक्षा देवी, 32. भगत राम, 33. शकुन्तला, 34. रणधीर कुमार, 35. मनोज कुमार, 36. जोगिन्दर सिंह तमाम निवासी तहसील चढ़गांव, जिला शिमला, हि0 प्र0। . . फरीकदोयम। उनवान मुकद्दमा :-हुकमन तकसीम जेरे धारा 123 भू-राजस्व अधिनियम, 1954
दरख्वास्त जेरे धारा 123 भू-राजस्व अधिनियम, 1954 के तहत श्री राजेश कुमार पुत्र श्री बांका राम, निवासी गांव पुजारली, डा0 चिलाला, तहसील चढ़गांव, जिला शिमला, हि0 प्र0 ने बराये करने हुकमन तकसीम भूमि खाता खतौनी नं0 53/200 ता 209, कित्ता 31, रकबा तादादी 03-92-65 है0, वाका महाल चिलाला इस अदालत में गुजारी है। मिसल के अवलोकन से पाया कि कुछ प्रतिवादीगण के पते सही नहीं दर्शाये गये हैं या वह दिये गये पते पर नहीं रहते हैं, इसलिए उक्त प्रतिवादीगण को साधारण तरीके से समन की तामील नहीं हो पा रही है, जिससे मिसल में अनचाही देरी हो रही है।
अतः इस इश्तहार के माध्यम से उन सभी प्रतिवादीगणों को जो अभी तक इस अदालत में पेश नहीं हुए हैं को सूचित किया जाता है कि आप असालतन व वकालतन मिति 28-09-2020 को प्रातः 10.00 बजे अदालत हजा में हाजिर आवें। इस अदालत द्वारा यह आपको अन्तिम मौका दिया जा रहा है तत्पश्चात आप का कोई भी दावा स्वीकार नहीं किया जायेगा तथा यह समझा जाएगा कि आपको उक्त तकसीम से कोई एतराज नहीं है और मिसल में नियमानुसार तकसीम की प्रक्रिया अमल में लाई जावेगी।
आज दिनांक 25-08-2020 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित जारी किया गया।
मोहर।
हस्ताक्षरित/- सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, चढ़गांव, जिला शिमला, हि प्र0।3531 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 ब अदालत श्री बसन्दर महन्त, कार्यकारी दण्डाधिकारी, उप-तहसील जांगला,़ जिला शिमला, हि0 प्र0
श्रीमती कौशल्या पत्नी श्री विजय कुमार, निवासी ग्राम व डा0 जांगला, उप-तहसील जांगला, तहसील . . प्रार्थी। चढ़गांव, जिला शिमला, हि0 प्र0
बनाम
आम जनता
उनवान मुकद्दमा.--दरख्वास्त जेर धारा 13(2/3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अन्तर्गत। इस कार्यालय में श्रीमती कौशल्या पत्नी श्री विजय कुमार, निवासी ग्राम व डा0 जांगला, उप-तहसील जांगला, तहसील चढ़गांव, जिला शिमला, हि0 प्र0 ने प्रार्थना-पत्र गुजार कर निवेदन किया है कि उसके पुत्र आरब का जन्म दिनांक 21-06-2015 को हुआ है परन्तु अज्ञानतावश उसका जन्म ग्राम पंचायत जांगला के जन्म रजिस्टर में आज तक पंजीकृत नहीं किया गया है तथा उसकी जन्म तिथि ग्राम पंचायत जांगला में दर्ज करने के आदेश दिये जावें।
अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी को भी आरब की जन्म तिथि ग्राम पंचायत जांगला में दर्ज करने में किसी भी प्रकार का उजर व एतराज हो तो वह दिनांक 26-09-2020 को असालतन या वकालतन हाजिर होकर लिखित व मौखिक प्रस्तुत करें। यदि उक्त तारीख तक कोई उजर/एतराज प्रस्तुत नहीं हुआ तो यह समझा जावेगा कि प्रार्थी की जन्म तिथि ग्राम पंचायत जांगला में दर्ज करने हेतु कोई आपाि नहीं है तथा जन्म तिथि ग्राम पंचायत जांगला में दर्ज करने के आदेश पारित कर दिये जाएंगे।
आज दिनांक 03-09-2020 को हमारे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।
मोहर।
बसन्दर महन्त, कार्यकारी दण्डाधिकारी, जांगला, जिला शिमला (हि0 प्र0)।
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In the Court of Assistant Collector, Ist Grade, Kupvi, District Shimla (H. P.)
Shri Satpal Singh Chauhan s/o Late Shri Hira Singh, r/o Village Chanjah, P.O. Kulag, . . Applicant. Tehsil Kupvi, District Shimla, Himachal Pradesh
Versus
General Public .. Respondent.
Subject.—Application u/s 35 to 38 of H.P. Land Revenue Act, 1954 for correction of name in revenue record.
Whereas, the applicant Shri Satpal Singh Chauhan s/o Late Shri Hira Singh, r/o Village Chanjah, P.O. Kulag, Tehsil Kupvi, District Shimla has filed an application in this court alongwith affidavit and copies of Adhar Card, parivar register stated that his name has been recorded in the revenue record as "Satpal Singh" wrongly in place of "Satpal Singh Chauhan" and requested to correct the name in revenue record Mohal Chanjah as " Satpal Singh Chauhan". He further stated that in other documents his name is also recorded as Satpal Singh Chauhan.
3532 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 14 सितम्बर, 2020/23 भाद्रपद, 1942 Hence, this proclamation is issued to the general public if they have any objection/claim regarding correction of name of applicant in the revenue record as Sh. Satpal Singh Chauhan instead of "Satpal Singh" may file their claim/objections before this court within a period of one month from the publication of this notice in the Govt. Gazette failing which necessary orders will be passed.
Issued under my signature and seal of the court on 01-09-2020.
Seal. Sd/- Assistant Collector, Ist Grade, Tehsil Kupvi, District Shimla (H. P.).
नियन्त्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, हिमाचल प्रदेश, शिमला-5 द्वारा मुद्रित तथा प्रकाशित इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरित राजपत्र, वैबसाइट http://rajpatrahimachal.nic.in पर उपलब्ध है एवम् ऑनलाइन सत्यापित किया जा सकता है