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Himachal Pradesh Gazette · Government of Himachal Pradesh

Himachal Pradesh Gazette, No. 53, 09 July 2021

Published 09 July 2021

Gazette no.
53
Gazetteid
53/GAZETTE/2021-09/07/2021
Identifier
in.gazette.himachal.2021-07-09.53_gazette_2021-09_07_2021
Languages
English, Hindi
Published at
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राजपत्र, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश राज्य शासन द्वारा प्रकाशित शुक्रवार, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943

हिमाचल प्रदेश सरकार

पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग

अधिसूचना

शिमला, 29 जून, .2021

संख्याः एस0टी0ई0-ई0 (5)-9/2018.--माननीय उच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश ने क्रमशः देशराज बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य व अन्य और योगराज बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य व अन्य में सी0डब्ल्यु0पी0 संख्या 7949/2011 और 7951 के मामले में अपने आदेश (दैनिक आदेश) तारीख 01-06-2012 में हिमाचल प्रदेश में स्टोन क्रशिंग इकाइयाें की स्थापना करने के लिए विद्यमान मार्गदर्शक सिद्धान्ताें पर नए सिरे से 53—राजपत्र/2021-09-07-2021 (1361) 1362 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943 विचार करने के निर्देश दिए और इसके अनुसरण में पर्यावरण विज्ञान एवं तकनीकी विभाग द्वारा तारीख 29-05-2014 की अधिसूचना संख्याः एस0टी0ई0-ई0 (3)-17/2012 जारी की गई।

माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण को तारीख 19-6-2019 को प्रस्तुत अपनी रिपार्ट में उक्त माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण विशेषज्ञ समिति द्वारा प्रस्तुत दृष्टिकोण और सिफारिशों पर आधारित तारीख 10-7-2019 के आदेश द्वारा जलाशयाें के समीप स्टोन क्रशर इकाइयां स्थापित करने से सम्बन्धित ओ0ए0 संख्या 358 ऑफ 2016 नामतः भाग सिंह बनाम भारत संघ व अन्य के मामले में माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के दृष्टिगत, हिमाचल प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश में स्टोन क्रशर इकाइयां स्थापित करने हेतु अधिसूचित विभिन्न पैरामीटरज (मानकाें) का पुनर्निधारण किया है। अतः हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, स्टोन क्रशर उद्योग के लिए प्रदूषण नियन्त्रण हेतु प्रौद्योगिकियों में विकास/साधनों के आधुनिकीकरण के दृष्टिगत, इस विभाग की अधिसूचना संख्या एस0टी0ई0-ई0 (3)-17/2012, तारीख 29-05-2014 के अधिक्रमण में और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, और उक्त अधिनियम की धारा 7 और पर्यावरण (संरक्षण) नियम, 1986 के नियम-4 के उपबन्धों और माननीय उच्च न्यायालय, हिमाचल प्रदेश के सी0डब्ल्यू0 पी0 संख्या 7949/2011, सी0डब्ल्यू0 पी0 संख्या 7951/2011 में जारी निर्देशाें के अनुसारण में तथा 2016 की ओ0ए0 संख्या 358 नामतः भाग सिंह बनाम भारत संघ व अन्य के मामले में माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर भी विचार करते हुए, समस्त स्टोन क्रशर इकाइयों (जिसे इसमें इसके पश्चात्‌ 'इकाई' कहा गया है) के लिए मार्गदर्शक सिद्धान्त निम्नानुसार जारी करते हैं ताकि राज्य में पर्यावरण और परिस्थिति को बचाने के लिए स्टोन क्रशर प्रचालनों पर तुरन्त प्रभाव से और अधिक नियन्त्रण और निगरानी रखी जा सके, अर्थात्‌ः-

1. स्थल उपयुक्तता :

1.1. मानदण्ड :

पहाड़ी स्थलाकृति, भूमि की कम उपलब्धता और पहाड़ों की नाजुक परिस्थितिकी का अनुरक्षण करने की अपेक्षा का विचार करते हुए निम्नलिखित मानदण्डों के दृष्टिगत इकाइयां स्थापित की जाएंगी, अर्थात्‌ :-

क्रम संख्या मानदण्ड वर्ष 2004 से पूर्व स्थापित विद्यमान स्टोन क्रशरों के लिए दूरी मानदण्ड (सीधी रेखा में, मीटरों में) वर्ष 2004 के पश्चात्‌ मई 2014 तक स्थापित विद्यमान स्टोन क्रशरों के लिए दूरी- मानदण्ड (सीधी रेखा में मीटरों में) तारीख 29-5-2014 की अधिसूचना के अनुसार स्टोन क्रशरों के लिए द ूरी (सीधी रेखा में मीटरो ं में ) तारीख 29-06-2021 की अधिसूचना के जारी होने से भविष्य में स्थापित किए जाने वाले स्टोन क्रशरों के लिए प्रस्तावित दूरी (सीधी रेखा में मीटराें में)
1. राष्ट्रीय राज मार्ग से न्यूनतम दूरी 50(क्षैतिज दूरी) 150 150 150
2. राज्य राज मार्ग से न्यूनतम दूरी 50 150 100 100
3. सम्पर्क सड़क से न्यूनतम दूरी (प्रधानमंत्री ग्रामीण -- 75 50 50 (स्तंभ संख्या (2) में यथा
सड़क योजना/ नाबार्ड/ विश्वबैंक प्रायोजित/अन्य जिला सड़कें) विनिर्दिष्ट के सिवाय, अन्य सड़को को शर्त ं लागू नहीं होगी)।
4. जिला मुख्यालयों से न्यूनतम दूरी (दूरी जिला मुख्यालयों की नगरपालिक सीमा के बाहर मापी जाएगी) 1500 1500 1500 1500 (अधिसूचना संख्या एस0टी0ई0-ई0 (4)-1/2003-1 तारीख 25-4-2006 के शोधन ं के स अनुसार स्तम्भ में संख्या (3) 300 मीटर पढ़ा जाए)
5. नगर या अधिसूचित से क्षेत्र समिति न्यूनतम दूरी (दूरी/ नगर निगम/ नगरपालिका सीमा नगर पंचायत नगर पंचायत की नगरपालिका सीमा के बाहर मापी जाएगी) 1500 1500 1000 1000 (अधिसूचना स ं ख्या स0टी0 ई0-ई0 (4)-1 /2003-1 तारीख 25-4-2006 के स ंशोधन के अनुसार स्तम्भ संख्या (3) में 300 मीटर पढ़ा जाए)।
6. ग्राम आबादी देह से न्यूनतम दूरी 250 500 500 500
7. अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों से न्यूनतम दूरी। 300 (क्षैतिज दूरी) 1000 1000 1000
8. क. जल स्रोत नहर, क्रियाशील जल प्रदाय योजना, जिसके अन्तर्गत जलाशय है, से न्यूनतम दूरी ख. छिद्रण कुएं, मलजल उपचार संयत्र जल अन्तःस्यंदन गैलरी से न्यूनतम दूरी 100 -- -- -- 100 (जल-स्रोत नहर के सिवाय) 100 100 (जल स्रोत नहर के सिवाय) 100
9. झीलों, सिंचाई योजना के वैटलैण्ड और 500 500 500 500
जलाशय, जल विद्युत परियोजनाओं से न्यूनतम दूरी
10. प्राकृतिक जल स्रोत से न्यूनतम दूरी 500 500 100 (क्रम संख्या 8 (क) के अनुसार 100 (क्रम संख्या 8 (क) के अनुसार)
11. अधिसूचित पार्को से न्यूनतम दूरी -- 2000 2000 2000
12. अभ्यारण्यों से न्यूनतम द री ू -- 1000 1000 1000
13. पुल-स्थल से न्यूनतम द री ू -- 200 उध्र्वप्रवाह के विरुद्ध 300 अनुप्रवाह 200 उध्र्वप्रवाह 300 अनुप्रवाह 200 उध्र्वप्रवाह 300 अनुप्रवाह
14. नहर और बारहमासी नालों से न्यूनतम दूरी (100 नहर के लिए) -- 100 100
1363 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943

टिप्पण.-स्टोन क्रशर स्वामियों, संगमों से उपरोक्त मानदण्डों के लागू होने के निर्वचन के संदर्भ में समय-समय पर प्राप्त अभ्यावेदनों के दृष्टिगत समिति ने यह स्पष्ट करना अनिवार्य महसूस किया किः-

1. सिफारिशें भविष्यलक्षी स्वरूप की है और अधिसूचना की तारीख से भविष्य के लिए अधिरोपित की जाएंगी।

2. इसी प्रकार, तारीख 29-4-2003, 10-9-2004, 25-4-2006 और 29-5-2014 को जारी पूर्ववर्ती अधिसूचनाओं का लागू होना भी भविष्यलक्षी है उदाहरणार्थ विनियामक प्राधिकारियों को यह अवश्य ध्यान रखना होगा कि तारीख 29-4-2003 से पूर्व स्थापित स्टोन क्रशर, स्तंभ संख्या (3) के मानदण्डों द्वारा विनियमित किए जाएंगे।

1.2 टिप्पणियांः

1.2.1 सभी दूरियां क्रशर के वाहक पट्‌टे के उच्चतम बिन्दु से राजस्व इकाई या नगरपालिक सीमाओं या सम्बद्ध फीचर की सीमा की बाहरी परिधि से सीधी रेखा में मापी जाएंगी।

1.2.2 इकाई-स्थल और मार्गदर्शक सिद्धान्ताें में उपदर्शित किसी भी वैशिष्टय के मध्य किसी प्राकृतिक अवरोध की दशा में मार्गदर्शक सिद्धान्तों में दी गई दूरियों में छूट प्रदान की जा सकेगी। प्राकृतिक अवरोध को ''किसी प्रकार की नदी/खड्‌ड/प्राकृतिक स्रोत/छतरीनुमा वृक्ष, जो भौतिक दृश्य को अवरोधित करता है और/या वायु और ध्वनि के आवागमन को रोकता है, जिससे वायु और ध्वनि प्रदूषण विहित सीमाओं के भीतर रहे के सिवाय किसी प्राकृतिक भौतिक अस्तित्व के रूप में'' परिभाषित किया जा सकता है। विनिर्दिष्ट मामलों में, जहा स्टोन क्रशिंग इकाई का स्थापित किया जाना लोक हित में आवश्यक है, परन्तु किसी या सभी मार्गदर्शक सिद्धान्तों की अनुपालना व्यावहारिक रूप से साध्य नहीं है, वहां सरकार मार्ग दर्शक सिद्धान्तों में छूट प्रदान कर सकेगी, परन्तु सीमित अवधि के लिए ऐसी छूट पर केवल पैरा 1.3.2 में यथा प्रस्तावित संयुक्त जांच समिति की सिफारिशों पर ही विचार किया जाएगा।1365 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943 1.2.3 शिमला नगर के मामले में, स्थल मानदण्ड हिमाचल प्रदेश के माननीय उच्च न्यायालय द्वारा कोर्ट आन इट्‌स ओन मोशन बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य और अन्य में 1993 की सिविल रिट याचिका संख्या 51, तारीख 26-7-1993 में जारी निर्देशाें के अनुसार हाेंगे।

1.3 स्थल अंकन के लिए संयुक्त निरीक्षण समिति :

1.3.1 इकाई, अन्य सरकारी विभागों से उत्पादन-पूर्व मंजूरियां अभिप्राप्त करने के लिए उद्योग विभाग को/से ''अनंतिम रजिस्ट्र्‌ेशन'' हेतु आवेदन करेगी/अभिप्राप्त करेगी।

1.3.2 इकाई स्थापित करने के लिए स्थल निम्नलिखित से मिलकर गठित संयुक्त निरीक्षण समिति द्वारा अंकित और अनुमोदित किया जाएगाः-

1. सम्बद्ध उप-मण्डल अधिकारी (नागरिक) अध्यक्ष 2. वन मण्डल अधिकारी या उसका प्रतिनिधि सदस्य 3. हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड सदस्य का प्रतिनिधि 4. अधिशासी अभियन्ता (हि0प्र0लो0नि0वि0) सदस्य या उसका प्रतिनिधि 5. अधिशासी अभियन्ता (जल शक्ति विभाग) सदस्य या उसका प्रतिनिधि 6. पर्यटन विभाग का प्रतिनिधि सदस्य 7. सर्वेक्षक सदस्य 8. कृषि विभाग से उप-मण्डल भू-संरक्षण अधिकारी सदस्य; के समतुल्य या उसके ऊपर की पंक्ति का भू-संरक्षण और विशेषज्ञ

9. भू-विज्ञानी या खनन अधिकारी सदस्य सचिव। 1.3.3 पैरा 1.3.2 में गठित समिति उद्योग विभाग की अधिसूचना संख्या उद्योग-1(छ)-4-1/85-11 तारीख 26-4-1993, 24-12-1998 और एस0टी0ई0-ई0(3)-17/2012, तारीख 29-05-2014 के अधिक्रमण में है। समिति का अनुमोदन हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत परिषद्‌ सीमित, हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड के अनुमोदन और उद्योग विभाग के पास स्थायी रजिस्ट्रीकरण सहित मंजूरी और अनुमोदन जारी करने के लिए आधार होगा।

2. उत्सर्जन मानदण्ड और प्रदूषण नियन्त्रण उपायः

2.1.1 मानकः

2.1.2 किसी इकाई के किसी प्रक्रिया-उपस्कर से 3 मीटर से 10 मीटर के मध्य मापा गया आस्थगित विविक्त पदार्थ (सस्पेंडिड पार्टिकुलेट मैटर) 600 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अनधिक होगा। 2.1.3 किसी नियंत्रित विलगता के साथ-साथ किसी समूह में स्थापित इकाई से 40 मीटर की दूरी पर आस्थगित विविक्त पदार्थ अंश परिमाण (suspended particulate matter contribution value) 600mg/Nm3 से अन्यून होगा। माप वर्ष के सभी 12 महीनों के लिए एक महीने में कम से कम दो बार संचालित किए जाएंगे।

2.1.4 ध्वनि स्तर एल 5 क्यू पर्यावरण संरक्षण नियम, 1986 की अनुसूची-III में यथाविर्निष्ट ध्वनि मानकों के भीतर बनाए रखे जाएंगे।

2.2 प्रदूषण नियन्त्रण उपायः1366 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943 2.2.1 प्रत्येक इकाई पर्याप्त धूल संशोधन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपयुक्त बाड़े सहित वायुरोधी दीवार की व्यवस्था करेगी।

2.2.2 प्रत्येक इकाई में जल छ़िड़काव और ''छिड़काव प्रणाली'', सहित धूल उन्मूलन प्रणाली होगी। 2.2.3 प्रत्येक इकाई में क्रशर और अन्तरण बिन्दुओं पर धूल छंटाई और एकत्रीकरण प्रणाली की व्यवस्था की जाएगी।

2.2.4 प्रत्येक इकाई में प्रदूषण नियन्त्रण उपस्करों के संचालन के लिए कम से कम दो दिनों की जल भण्डारण क्षमता सुविधा सहित पर्याप्त जल आपूर्ति की व्यवस्था की जाएगी।

2.2.5 भूमि की नियमित सफाई और आदर््रता की सुविधा की व्यवस्था की जाएगी।

2.2.6 परिसर के भीतर और उसकी सीमाओं के साथ-साथ हरित पट्टी विकसित करने के लिए उपयुक्त प्रजातियों के पौधों का पौधरोपण किया जाएगा।

2.2.7 प्रत्येक इकाई में जहां-जहां उनके संचालन के लिए ऊर्जा की खपत होती है, प्रदूषण नियन्त्रण साधनों के लिए पृथक्‌ ऊर्जा मीटर होंगे और उनका अभिलेख अनुरक्षित किया जाएगा तथा जब भी मांग की जाए तो उसे हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड (जिसे इसमें इसके पश्चात्‌ बोर्ड कहा गया है) को उपलब्ध कराया जाएगा।

2.2.8 स्टोन क्रशिंग इकाई को जॉ शेड के पास ध्वनिक बाड़ा उपलब्ध कराया जाएगा और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अनुसार ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड के मानदंडाें के अनुसार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा उचित प्रकार से डिजाइन और अनुमोदित किया जाएगा।

2.2.9 धूल उन्मूलन प्रणाली, स्टोन क्रेशर में उपयोग में लायी गयी जल छिड़काव प्रणाली समान प्रौद्योगिकी की होगी, क्योंकि यह देखा गया था कि विभिन्न स्थानों पर विभिन्न प्रकार की छिड़काव प्रणाली का उपयोग किया जा रहा था, जिसे जल की बर्बादी और जल के अत्यधिक उपयोग का कारण पाया गया था। धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने में धुंध, स्प्रे-नोजल-प्रणाली पूर्णतया दक्ष होने के कारण धूल उन्मूलन के लिए स्थापित की जाएगी।

2.2.10 वायु विघात वाली दीवारों को वैज्ञानिक ढंग से इकाई के लिए विंड रोज रेखा-चित्र के अनुप्रयोग के साथ अर्थात्‌ वायु की प्रमुख दिशा और क्षेत्र की प्राकृतिक रूपरेखा की ओर पुनर्निर्मित किया जाएगा।

2.2.11 वृक्षरोपण की सत्यापन क्षमता, इकाई की स्थापना के समय की तुलना के साथ किया जाएगा, वृक्षों की वृद्धि की उचित मॉनिटरी वृक्ष-पौधों की इकाई संख्या की स्थापना की तारीख के साथ जुड़ी हुई प्रचालन आदि हेतु सहमति का नवीकरण देते हुए वार्षिक आधार पर फोटो मॉनिटरी के साथ दर्ज की जाएगी।

2.2.12 जल-धुंध-स्पे्र-नोजल प्रणाली को स्टोन क्रशिंग इकाई, मुख्य ऊर्जा आपूर्ति, और जल आपूर्ति मीटर के साथ मिलाया (इंटरलांक) किया जाएगा।

2.3 प्रस्तावित और विद्यमान इकाइयों के लिए प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों में और उन्नतिः 2.3.1 स्टोन क्रशर इकाई परियोजना प्रस्तावक सभी वाहक बैल्ट को कवर करेगा और साथ ही सामग्री अंतरण बिंदु पर धूल-स्कर्ट की व्यवस्था करेगा।1367 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943 2.3.2 स्टोन क्रशर यूनिट परियोजना प्रस्तावक अर्हित इंजीनियर द्वारा डिजाइन की गई वायु के वेग के कारण ध्वनि प्रदूषण के साथ-साथ वायु से होने वाले धूल उत्सर्जन प्रदूषण को कम करने के लिए उच्चतम वाहक (कन्वेयर) बैल्ट से 3 फूट से अधिक ऊंचाई की एल-आकार की दीवार की व्यवस्था करेगा।

2.3.3 सभी प्रवेश सड़कों और ढलानों को उचित प्रकार से पक्का किया जाएगा ताकि इससे धूल प्रदूषण न हो।

2.3.4 क्रशर को आवृत किया जाएगा और सामग्री-हथालन/लदान/उतारने के कार्यकलापाें के कारण उत्पन्न धूल को दबाने के लिए क्रशर पर जल का छिड़काव प्रणाली की व्यवस्था की जाएगी। 2.3.5 परिसर के भीतर के खुले क्षेत्र, क्षेत्र की नियमित सफाई और गीला करना।

2.3.6 ध्वनि के साथ-साथ पलायक उत्सर्जन/धूल प्रदूषण को कम करने के लिए क्रशिंग इकाइयाें की परिधि के साथ सदाबहार प्रजातियोें की कम से कम तीन पंक्तियों की छतरी (कैनोपी) को उगाना।

2.3.7 गति नियंत्रण, कम गति का अर्थ है कम धूल वाहनों के लिए एक कि0मी0 इकाई की परिधि मेें गति सीमा 20 कि0मी0/घंटा होगी।

2.3.8 हाउसकीपिंग-सफाई तुरंत फैलती है। स्टोन क्रेशर मालिकों (स्वामियों) द्वारा स्टोन क्रशर और खनन पट्टे पर जनशक्ति के लिए पर्याप्त शौचालय की सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। 2.3.9 सभी स्टोन क्रशर को घाटी की तरफ जहां कहीं भी लागू हो, वहां आरसीसी/कंक्रीट स्टोन चिनाई की दीवार का निर्माण करना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अनुप्रवाह जल स्रोत आदि प्रभावित न हों।

2.4 जलवायु परिवर्तन की स्थिति में मौसम की परिवर्तनशील स्थितियाें के संदर्भ में मानदण्ड उसके प्रभावों का शमनः

2.4.1 स्टोन क्रशिंग इकाइयों के आसपास के क्षेत्रों में धूल उत्सर्जन प्रदूषण प्रभावोेंं को कम करने के लिए एसपीएम (सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर) पीएम 2.5 के जीएलसी (ग्राउंड लेवल कनसट्रेशन) मानकों को ध्यान में रखते हुए कन्वेयर बेल्ट, क्रशिंग यूनिटस (इकाइयों) स्क्रीनिंग इकाइयों की स्थापना में पुनः समायोजन किया जा सकेगा। जोखिम मूल्यांकन और शमन के लिए जमीनी स्तर पर आरएसपीएम 2.5/10 के फैलाव का परिदृश्य महत्वपूर्ण है। इन मापदंडों की मानिटरी (जांच) वार्षिक आधार पर और भू-टैग की गई तस्वीरों की मॉनिटरी के प्रमाण के साथ की जाएगी। 2.4.2 यदि जीएलसी, विंड रोज मूल्यांकन सभी स्टोन क्रशिंग इकाइयों के लिए किया जाएगा और सिटिंग क्रशिंग इकाइयों में पुनः समायोजन किया जाएगा, वायु विघात वाली दीवारों को पुनः निर्मित करके धूल प्रदूषण के जोखिम को कम किया जाएगा।

2.4.3 वर्षा जल उपयोग प्रणाली के साथ क्षमता पर आधारित पर्याप्त क्षमता के वर्षा जल संचयन टैंक स्थापित करना।

2.4.4 यदि भू-जल निकाला जाना है तो भूजल प्राधिकरण के पास स्टोन क्रशर इकाइयाें का रजिस्ट्रीकरण।

2.4.5 जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए राज्य में स्टोन क्रशिंग इकाइयों के लिए वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण आवश्यक/अनिवार्य होगा। 1368 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943 2.4.6 प्रति वर्ष 1,00,000 टन से अधिक की क्षमता वाला स्टोन क्रशर वायु गुणवत्ता मापने वाले सेंसर स्थापित करेगा, उदाहरणार्थ (पर्पलएयर) Purpleair.com और इसकी मॉनिटरी वास्तविक समय के आधार पर हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण बोर्ड द्वारा की जाएगी।

*प्रस्तावित शर्तें/मानदंड 10,000 मीट्रिक टन/वार्षिक से अधिक की क्षमता के सभी विद्यमान स्टोन क्रशर के लिए पूर्वव्यापी रूप से लागू होगी।

2.5 जल-विज्ञान, मिट्टी और जल संरक्षण, पर्यावरणीय पहलुओं जैसे वायु, जल, वनस्पतियों और जीवोें पर स्टोन क्रशर इकाइयों की अवस्थिति का प्रभावः।

2.5.1 धुलाई संयंत्राें वाली स्टोन क्रशर इकाइयाें के मामले में, संयंत्र की क्षमता की आवश्यकताओं के अनुरूप अवसादन टैंकों का निर्माण तुरन्त किया जाएगा ताकि अपशिष्ट सीधे खुले में न जाएं जो अंततः नदी में मिलते हैं।

2.5.2 उस स्थिति में, अवसादन टैंक से निकलने वाले अपशिष्ट का उपचार किया जाएगा और उपयोग योग्य कच्ची सामग्री जैसे गाद, मिट्टी का पुनः उपयोग खेत, सड़क निर्माण, ईंट बनाने आदि मेें किया जाएगा।

2.5.3 तूफान जल की निकासी के लिए उचित जल-निकासी योजना की व्यवस्था करना। 2.5.4 भूजल का उपयोग करने वाली क्रशर इकाइयां अपने भूजल अवशोषण संरचनाओं का हिमाचल प्रदेश भूजल (विकास और प्रबंधन का विनियमन और नियंत्रण) अधिनियम, 2005 के अधीन रजिस्ट्रीकरण करेगी। प्रकिया emerging himachal.gov.in पर ऑनलाईन है। 2.5.5 नदियों, खड्डों, नालाें के सतही जल का उपयोग करने वाले क्रशरों को जल शक्ति विभाग के संबंधित कार्यकारी अभियन्ता से अपेक्षित अनुज्ञा प्राप्त करनी होगी।

2.5.6 वर्षा जल संचयन के माध्यम से वनस्पतियों पर धूल प्रदूषण के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए स्टोन क्रशिंग इकाइयों में और उसके आस-पास नियमित रूप से जल का छिड़काव अत्यंत सुसंगत है ।

2.5.7 क्रशिंग इकाई में उत्पन्न धूल के उन्मूलन हेतु प्रभावी जल छिड़काव प्रणाली क्रशिंग इकाइयों में स्थापित की जाएगी।

2.5.8 नदी जल स्रोत में अपशिष्ट पदार्थ की डम्पिंग (डालना) पूर्ण रूप से निषिद्ध होगी। 2.6 धुलाई इकाइयां-अपशिष्ट जल उपचारः

2.6.1 धुलाई इकाई स्टोन क्रशर पर्याप्त संख्या में मिट्टी की गाद निकालने वाले चैम्बरों का निर्माण करेंगे, जिसके पश्चात्‌ पर्याप्त क्षमता का सीमेंट कंक्रीट (पक्का) भंडारण टैंक बनाया जाएगा, जहां से एक कीचड़-पंप/स्लेज पंप के माध्यम से उठाए गए धुलाई के जल को फिर से धुलाई कार्यकलाप में परिचालित किया जाएगा। टैंकाें का आकार इकाई की क्षमता के आधार पर विनिश्चित किया जाएगा।

2.6.2 धुलाई संयत्र वाली स्टोन क्रशर इकाइयां निम्नलिखित गणनाओं के आधार पर सयंत्र की क्षमता के अनुसार अवसादन टैंक का निर्माण करेगी।

(क) धुलाई इकाइयों के लिए नियमित जल आपूर्ति की आवश्यकता होती है, जिसे बैठक और रजिस्ट्रीकरण के माध्यम से संबंधित भूजल बोर्ड/जल शक्ति विभाग के माध्यम से विनियमित करने की आवश्यकता होती है।1369 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943 (ख) 100 वर्गफुट (सीएफटी) रेत की धुलाई के लिए 1250 लीटर जल अपेक्षित होता है अर्थात्‌ रेत के उत्पादन से लगभग 1100 लीटर अपशिष्ट जल उत्पन्न हो जाता है। उदाहरणतया 2.1/2 ईंच क्षमता वाले स्टोन क्रशर के द्वितीय जल आपूर्ति हेतु 400 वर्ग फुट (सीएफटी) रेत का उत्पादन करने में 30 मिनट लगते हैं जिसका अभिप्राय हैः = 2. 1/2 ईंच X 30" X 60'' = 1800 X 2.1/2 ईंच = 400 सीएफटी रेत के उत्पादन के लिए 4500-5000 लीटर जल अपेक्षित है। प्रत्येक धुलाई इकाई के लिए तर्कसंगत क्षमता वाले अपशिष्ट जल गाद कम करने का प्रकोष्ठ (डी-सिल्टिंग चैम्बर) बनाना अपेक्षित है, उदाहरणार्थ यदि इकाई की क्षमता निम्न प्रकार से हैः-

^ प्रतिदिन 10ट्रक=एक बार में अपेक्षित अपशिष्ट जल मात्रा का कम से कम आधी कम से कम 2500 लीटर का अपशिष्ट जल प्रकोष्ठ (चैम्बर) की व्वयस्था की जाएगी।

^ प्रतिदिन 20 ट्रक=एक बार में अपेक्षित अपशिष्ट जल मात्रा का कम से कम आधी कम से कम 50000 लीटर के अपशिष्ट जल प्रकोष्ठ (चैम्बर) की व्यवस्था की जाएगी।

जल 100% पुनश्चक्रित किया जाएगा और शून्य तरल निस्सारण होगा। स्थापना हेतु सहमति और प्रचालन हेतु सहमति के नवीकरण के लिए अपशिष्ट जल गाद चैम्बर और पुनश्चक्रम का सत्यापन एक अनिवार्य शर्त होगी।

3. राज्य बोर्ड द्वारा अनुसरित की जाने वाली स्थापना और प्रचालन के लिए प्रक्रियाः

3.1.1 राज्य बोर्ड संयुक्त निरीक्षण समिति द्वारा मामले की सिफारिश करने तथा इकाई द्वारा पैरा 2.1 और 2.2 में दिए गए प्रदूषण नियन्त्रण उपायों को पूरा करने के लिए सहमत होने पर ही सशर्त ''स्थापित करने के लिए सहमति'' देगा।

3.1.2 राज्य बोर्ड 'संचालन के लिए सहमति' केवल तभी जारी करेगा, यदि इकाई ने 'स्थापित करने के लिए सहमति' में दी गई शर्तों का अनुपालन करने के लिए उपाय किए हैं। 3.1.3 प्रत्येक इकाई नियमित रूप से वायु और ध्वनी मॉनिटरी करवाएगी तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

3.1.4 राज्य बोर्ड इन मार्गदर्शक सिद्धान्तों/निदेशाें पर दिए गए प्रदूषण नियन्त्रण उपायों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए प्राधिकरण होगा और राज्य बोर्ड/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, हिमाचल प्रदेश द्वारा अनुमोदित मॉनिटरिंग के कार्यक्रम के अनुसार इकाई की आवश्य मॉनिटरिंग करेगा।

3.1.5.प्रत्येक इकाई समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा जारी अन्य निर्देश (निर्देशाें) का अनुसरण करेगी।

4. स्टोन क्रशर इकाई की स्थापना के लिए नीवनतम प्रौद्योगिकी, अभिवर्धन और आधुनिक मशीनरी और उपस्कर की उपलब्धता राज्य में स्टोन क्रशर इकाई की स्थापना के लिए नीवनतम प्रौद्योगिकी, अभिवर्धन और आधुनिक मशीनरी और उपस्कार की उपलब्धता के दृष्टिगत संयत्र की क्षमता के साथ प्रौद्योगिकियां विनिर्दिष्टतया निम्नलिखित रीति में जोड़ी जाएंगीः-1370 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943

क्रमांक स्टोन क्रशर इकाई की क्षमता प्रौद्योगिकी आच्छादित ग्रेड
1. 20000 टन प्रति वर्ष तक परम्परागत स्टोन क्रशर प्रौद्योगिकियां, स्क्रीनिंग रोलिंग स्क्रीनिंग सहित या उसके बिना जा क्रशिंग हां
2. 20000 से 1,00,000 टन प्रतिवर्ष आधान (होपर) में 1/4 इंच प्रति सैकेण्ड क्षमता की टोटी के जल छ़िडकाव के साथ कच्ची (अपरिष्कृत) सामग्री का गीला जॉं क्रशिंग करना वाहक (ढुलाई करने वाली पट्टी (बेल्टस) के साथ-साथ वाहक (ढुलाई करने वाली) पट्टी पर टोटी से ध्वनिक सिरे तक छिड़काव।
3. 1,00,000 टन 1 वर्ष और अधिक 1/2 ईंच प्रति सैकेण्ड क्षमता के जल स्प्रे नोजल के साथ होपर पर कच्चे माल के गीलेपन के साथ स्क्रिन्ट के साथ जो प्लस कोन क्रशिंग इकाई ध्वनिक बाडों के साथ कन्वेयर बेल्ट को आवरण करने के लिए अवरुद्ध (बंद) लूप प्रणाली। कन्वेयर बेल्ट पर नोजल स्प्रे।

अधिसूचना में संशोधन माननीय उच्च न्यायालय द्वारा 2019 की सी0डब्ल्यू0पी0 संख्या 2067 की सी0 एम0 पी0 संख्या 8459 याचीकर्ता/आवेदक हिमाचल प्रदेश सरकार अन्य बनाम भाग ंिसंह और अन्य, 2019 की सी0डब्ल्य0ूपी0 संख्या 4342 मैसर्ज मातेश्वरी स्टोन क्रशर याचीकर्ता/आवेदक बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य और अन्य में पारित अन्य आदेशाें के अधीन हाेंगे

आदेश द्वारा, कमलेश कुमार पंत प्रधान सचिव (पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)।

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[Authoritative English text of the Department's notifiction No. STE-E(5)-9/2018 dated 29-06-2021

as required under clause (3) of the Article 348 (3) of the Constitution of India].

ENVIRONMENT, SCIENCE & TECHNOLOGY DEPARTMENT

NOTIFICATION

Shimla-2, the 29th June, 2021

No. STE-E-(5)-9/2018.—Whereas the Hon'ble High Court of Himachal Pradesh vide its order dated 01-06-2012 (daily order) in the matter of CWP Nos. 7949/2011 and 7951 titled as Desh Raj V/s State of H.P. & others and Yog Raj V/s State of H.P. & others respectively directed the State Government to consider the existing guidelines for setting up of Stone Crushing Units in Himachal Pradesh, afresh and in pursuance of the same the Department of Environment, Science & Technology issued the notification No. STE-E (3)-17/2012 dated 29-05-2014.

1371 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943

Whereas the Government of Himachal Pradesh, in view of the recommendations of the expert Committee constituted by the Hon'ble National Green Tribunal in the matter of O.A. No. 358 of 2016, titled as Bhag Singh vs. Union of India & Ors. concerning to setting up of Stone Crusher Units close to the water bodies and orders dated 10-07-2019, based on views and recommendations submitted by said Hon'ble National Green Tribunal Expert Committee in its report submitted to the Hon'ble National Green Tribunal on dated 19-06-2019, has reassessed the various parameters notified for setting up of Stone Crusher Units in Himachal Pradesh.

Now, therefore, keeping in view advancement in technologies and modernization of devices for controlling pollution for stone crusher industry, the Governor of Himachal Pradesh in supersession of this Department's Notification No. STE-E(3)-17/2012 dated 29-05-2014 and in exercise of the powers conferred by Section 5 of the Environment (Protection) Act, 1986, and in pursuance of the provisions of Section 7 of the said Act, and Rule 4 of the Environment (Protection), Rules, 1986 and directions of Hon'ble High Court of H.P. issued in CWP No. 7949/2011, CWP No. 7951/2011 & also considering the recommendations of the Expert Committee constituted by Hon'ble National Green Tribunal in the matter of O.A. No. 358 of 2016, titled as Bhag Singh Vs. Union of India & Ors., is pleased to issue the guidelines/ directions as follows for all Stone Crusher Units (hereafter referred to as the Unit) so as to exercise greater control and vigil over the stone crushing operations to save the environment and ecology of the State, with immediate effect, namely:—

1. Site Suitability.—

Norms:

Taking into consideration the hill topography, availability of less land and requirement to maintain the fragile ecology of the hills, the units shall be set up keeping in view the following criteria, namely:—

Sl. No. Criteria Distance norms for existing stone crushers (crow flight, distance in meters) set up prior to year 2004 Distance norms for existing tone crushers (crow flight, distance in meters) set up after year 2004 to May, 2014 Distance for the Stone (crow flight, distance in meters) as per Notification dated 29-05-2014 Proposed distance for the Stone crushers to be set up in future (crow flight, distance in meters) from the issuance of the Notification dated 29-6-2021
1. Minimum distance from National Highway. 50 (Horizontal distance) 150 150 150
2. Minimum distance from State Highway 50 150 100 100
3. Minimum distance from link road (PMGSY, NABARD/World Bank sponsored/ other District roads) — 75 50 50 (condition will not be applicable to other roads except as specified in col. (2).
4. Minimum distance from District headquarters (distance to be measured from the outer of the municipal limit of the District Headquarters) 1500 1500 1500 1500 (may be read as 300 meters in col. (3) as per amendment vide notification no. STEE (4)-1/ 2003-I dated 25-04-2006).
5. Minimum distance from town or Notified Area Committee distance to be measured from the outer of the municipal limit/Nagar Nigam/ Nagar Palika/Nagar Panchayat 1500 1500 1000 1000 (may be read as 300 meters in col. (3) as per amendment vide notification No. STEE (4)-1/ 2003-I dated 25-04-2006)
6. Minimum distance from village abadi- deh 250 500 500 500
7. Minimum distance from Hospital & Educational Institutions 300 Horizontal distance) 1000 1000 1000
8. a. Minimum distance from spring, canal, functional water supply scheme including its reservoir b. Minimum distance from a percolation well, sewerage treatment plant, water infiltration 100 -- — -- 100 (excluding spring, canal) 100 100 (excluding spring, canal) 100
galleries.
9. Minimum distance from lakes, wetlands and reservoir of irrigation scheme, hydro power projects. 500 500 500 500
10. Minimum distance from natural water spring 500 500 (as at Sr. No. 8 (a). 100 (as at Sr. No. 8 (a).
11. Minimum distance from notified parks -- 2000 2000 2000
12. Minimum distance from sanctuaries -- 1000 1000 1000
13. Minimum distance from bridge sight -- 200 upstream 300 downstream 200 upstream 300 downstream 200 upstream 300 downstream
14. Minimum distance from the canal and perennial rivulets (100 for canal) -- 100 100
1372 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943 1373 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943

Note.— Keeping in view the representations received from Stone Crusher Owners, Associations from time to time w.r.t. interpretation of above applicability of parameters committee felt imperative to clarify that:

1. The recommendations are prospective in nature and shall be imposed from date of notification for future.

2. Similarly, applicability of the earlier notifications issued on dated 29.04.2003, 10-09- 2004, 25-04-2006 and 29-05-2014, are also of prospective e.g. the regulatory authorities must take note that the stone crushers set up prior to 29-04-2003 will be governed by the parameters of col. (3).

Notes:

All distances shall be measured as crow flies from the highest node of the crusher conveyor belt to the outer periphery of the revenue unit or the municipal limits or the periphery of the feature concerned.

In the guidelines distances are relaxable in the case of any natural barrier between the site of the Unit and any of the features indicated in the guidelines Natural barrier may be defined as "any natural physical entity except any kind of River/Khad/Natural Stream/Tree Canopy which obstructs the physical view and /or prevents the movement of Air and Noise so as to keep Air and Noise Pollution within prescribed limits".

1374 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943

The Government may relax the guidelines for a limited period in specific cases wherein setting up of stone crushing unit is necessary in public interest but it is not practically feasible to adhere to any or all of the guidelines, provided that such relaxation will be considered only on the recommendation of the Joint Inspection Committee as proposed in Para 1.3.2.

In case of Shimla Town the sitting norms shall be as per the directions of the Hon'ble High Court of Himachal Pradesh dated 26-07-1993 in CWP No. 51 of 199 titled as "Court on its own motion versus State of Himachal Pradesh & Others".

Joint Inspection Committee for site appraisal:

The Unit shall apply /obtain "Provisional Registration" from the Department of Industries for obtaining pre-production clearances from other Government Departments.

The site for setting up the Unit shall be appraised and approved by the Joint Inspection Committee consisting of the following:—

1. Sub-Divisional Officer(Civil) concerned . . Chairman 2. Divisional Forest Officer or his representative . . Member 3. Representative of HP State Pollution Control Board . . Member 4. Executive Engineer, HPPWD or his representative . . Member 5. Executive Engineer, Jal Shakti Vibhag or his representative . . Member 6. Representative of Department of Tourism . . Member 7. Surveyor . . Member 8. Soil Conservation Expert from Agriculture Department equivalent or above Sub Divisional Soil Conservation Officer. . . Member 9. Geologist or Mining officer . . Member Secretary The Committee constituted in Para 1.3.2 is in supersession of the Industries Department Notification No. Udyog I (Chh) 4-1/85-II dated 26-04-1993, 24-12-1998 and STEE (3)5/20014 dated 29-05-2014. The approval of the Committee shall be the basis for issue of clearance and approval including those of the Himachal Pradesh State Electricity Board Ltd., Himachal Pradesh State Pollution Control Board and permanent registration with the Department of Industries.

2. Emission Norms and Pollution Control Measures:

Standards:-

The suspended particulate matter measured between 3 meters and 10 meters from any process equipment of a unit shall not exceed 600 micrograms per cubic meter. The suspended particulate matter contribution value at a distance of 40 meters from a controlled isolation as well as from a unit located in a cluster shall be less than 600 mg/Nm3. The measurements are to be conducted atleast twice a month for all the 12 months in a year.

The noise levels (leq.) shall be maintained within the standards for noise as specified in Schedule -III, of the Environment (Protection) Rules, 1986.

Pollution Control Measures:

Every unit shall provide a wind breaking wall along with suitable enclosure to ensure adequate dust containment.

1375 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943

Every unit shall have a dust suppression system with water spray and sprinkling system. Dust extraction and collection system shall be provided at crusher and transfer points in every unit.

Every Unit shall have adequate water supply along with atleast two days water storage facility for running pollution control equipments.

Facility for regular cleaning and wetting of the ground shall be provided.

Trees of suitable species shall be planted to develop a green belt within and along the boundary of the premises.

Every unit shall have a separate energy meters for pollution control devices wherever the energy is consumed for operating them and record thereof shall be maintained and made available to the Himachal Pradesh State Environment Protection and Pollution Control Board (hereinafter referred to as State Board) whenever demanded.

The stone crushing unit shall be provided with acoustic enclosure near jaw sheds and shall be properly designed and approved by the State Pollution Control Board as per Central Pollution Control Board norms to control noise pollution in accordance with the Environment (Protection) Act,1986.

Dust suppression system, water sprinkler used in stone crusher shall be of uniform technology as it was noticed that at different location different kind of sprinkler system were being used which were observed and found to be causing wastage of water and excessive use of water. The mist, spray nozal system being quite efficient in controlling the dust pollution, shall be installed for dust suppression.

The wind breaking walls shall be reconstructed scientifically with application of wind rose diagram for the unit i.e. towards, the predominant direction of wind and natural profile of the area.

The tree plantation shall be verified with comparison to the capacity, time of establishment of the unit, proper monitoring of growth of trees shall be recorded with photo monitoring on annual basis while giving renewal of Consent to Operate etc. linked with date of establishment of the units number of tree plants.

The water mists spray nozal system shall be interlocked with stone crushing unit main energy supply and water supply meter.

Further advancement in pollution control devices for proposed and existing units:

Stone crushers unit project proponent shall cover all the conveyor belts as well as provide dusts skirt at material transfer point.

Stone Crusher unit project proponent shall provide wind breaking L shape wall of height more than the 3 ft from the highest conveyor belt to reduce noise pollution as well as air borne dust emission pollution due to wind velocity as designed by a qualified engineer.

All approach roads and ramps shall be properly paved so that it does not lead to dust pollution.

Crusher shall be covered and water sprinkling system shall be provided on crusher to suppress the dust generated due to material handling/ loading/ unloading activities.

1376 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943 Regular cleaning and wetting of the uncovered area, ground within the premises.

Growing of atleast three rows canopy of evergreen species to be planted along the periphery of the crushing units to reduce noise as well as fugitive emission/dust pollution.

Speed control, low speed means less dust. For vehicles speeds limit 20 Km/h in 1 Km periphery of unit.

Housekeeping-clean up spills promptly. Adequate toilet facilities for manpower at stone crushers and mining lease area shall be provided by the stone crusher owners.

All the stone crushers shall have to construct a RCC/ concrete stone masonry wall on valley side wherever applicable to ensure that the downstream water sources etc. are not affected.

Parameters in the context of changing weather conditions in the face of Climate

Change-Mitigation of impacts thereof:—

In order to mitigate the dust emission pollution impacts in surrounding areas of stone crushing units, the readjustment in setting up of conveyor belts, crushing units, screening units may be done by taking into consideration the GLC (Ground Level Concentration) values of SPM (Suspended Particulate Matter) PM2.5. The scenario of dispersion of RSPM 2.5/10 at ground level is important for risk assessment and mitigation. The monitoring of these parameters shall be undertaken on yearly basis and the proof of monitoring with geo-tagged photographs.

In case the GLC, wind rose assessment shall be done for all the stone crushing unit and readjustment shall be made in sitting the crushing units, the risks of dust pollution will be mitigated significantly by rebuilding the wind breaking walls.

Install rain water harvesting tanks of adequate capacity based on potential with rain water use system.

Registration of Stone Crusher Units with Ground Water Authority in case ground water is to be extracted.

The rainwater harvesting, tree plantation shall be essential/ mandatory for the stone crushing units in the State to mitigate the climate change impacts.

The stone crusher with the capacity >100000 tones per year shall install air quality measuring sensors e.g. purpleair.com and this shall be monitored by the H.P. State Pollution Control Board on real time basis.

*The proposed conditions/norms should be applicable retrospectively for all existing stone

crushers of capacity>10,000 MT/ annum.

Impact of Stone Crusher Units location on the hydrological, soil & water conservation,

environment aspects such as air, water, flora and fauna:

In case of stone crusher units with washing plants, the sedimentation tanks commensurate to the plant's capacity needs shall be built immediately so that effluents are not drained in the open directly which ultimately feeds the river.

In that case, the effluents from sedimentation tank shall be treated and the usable raw material such as silt, soil shall be reused in field, road construction, brick making etc.

1377 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943

Provisions for proper drainage scheme for evacuation of storm water needs shall be in place.

The crusher units using ground water shall register their ground water abstraction structures with the State Ground Water Authority under the H.P. Ground Water (Regulation & Control of Development and Management) Act, 2005. The process is online at emerginghimachal.gov.in. Those crushers using surface water from rivers, khads, nallahs shall get the requisite permission from the concerned Executive Engineer of Jal Shakti Vibhag.

The regular water sprinkling in and around the stone crushing units is of utmost relevance to minimize the dust pollution impact on flora through rain water harvesting shall be done.

The effective water sprinklers shall be installed at crushing units to suppress the dust generated at the crushing unit.

Dumping of waste material in river water source shall be completely prohibited.

Washing units-waste water treatment:

Washing unit Stone crushers shall construct adequate No. of earthen de silting chambers followed by a Cement concrete (Pucca) storage tank of adequate capacity from where the wash water shall be re-circulated back in the washing activities lifted through a sludge pump. The size of tanks to be decided based on capacity of unit.

The stone crusher units having washing plants shall construct sedimentation tanks as per the plant capacity based on following calculations:

(a) For washing units regular water supply is required which needs to be regulated through Ground Water Board/ Jal Shakti Vibhag concerned through meeting and registration.

(b) 100 CFT washing of sand leads to ~ 1250 lt. water is required i.e. about 1100 lt. waste water is generated from production of sand.

e.g. A washing unit of a Stone Crusher with capacity of 2½inch / second water supply takes 30 minutes to produce 400 CFT sand which means about:

= 2½inch x 30'' x 60'' = 1800 x 2½inch = 4500-5000 ltrs. of water is required for production of ~ 400 CFT sand.

Every washing unit is required to built waste water de-silting chamber of rational capacity i.e. for example, if the capacity of unit is

~ 10 Truck per day = waste water chamber of minimum 25,000 lts. of at least half of

the expected waste water quantity in one go shall be provided.

~20 truck per day = Minimum of 50,000 lts. of atleast half of the expected waste

water quantity in one go shall be provided.

The water would be 100% recycled and there would be zero liquid discharge. Verification of waste water silting chamber and recycling would be a mandatory condition for Consent to Establish & Renewal of Consent to Operate.

1378 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943 3. Procedure for establishment and operation to be followed by the State Board:

The State Board shall issue conditional "Consent to Establish" to the unit only after the Joint Inspection Committee has recommended the case and the unit agrees to fulfill the Pollution Control measures given in para-2.1 and 2.2.

The State Board shall issue "Consent to Operate" only if the unit has taken measure to comply with the conditions given in the "Consent to Establish".

Every unit shall get-monitoring for Air and Noise conducted regularly and submit the reports to the State Pollution Control Board.

The State Board shall be the Authority to ensure the compliance of the Pollution Control measures given on these guidelines/directions and shall do the necessary monitoring of the unit as per schedule of monitoring approved by the State Board/Department of Science & Technology, Himachal Pradesh, Shimla.

Every unit shall follow any other direction(s) issued by the State Government from time to time.

4. Latest technologies advancement and availability of modern machinery and

equipments for setting up of stone crusher units:

Keeping in view the technological advancements, availability of modern machinery and equipment, in the state following technologies shall be specifically linked with capacity of the plant in following manner:—

Sl. No. Capacity of Stone Crushing Unit Technology Covered shed
1. Up to 20000 Tons/year Conventional stone crusher technologies, jaw crushing with or without screening rolling screening Yes
2. >20,000 to 1,00,000 Tones/year Jaw crushing with wetting of raw material at hoper with water spray nozal of ¼ inch per second capacity. To cover conveyor belts as well with nozal sprayer on conveyor belts acoustic ends.
3. >1,00,000 tones/ year and above Jaw plus cone crushing unit with screener with wetting of raw material at hoper with water spray nozal of ½ inch per second capacity. Closed loop system to cover conveyor belts with acoustic enclosures. Nozals sprayer on conveyor belts.

The amendments in the notification shall be subject to any other order passed by Hon'ble High Court in CMP No. 8459 of 2019 of CWP No. 2067 of 2019 State of Himachal Pradesh & ors. Petitioners/ applicants versus Bhag Singh & others. CWP No. 4342 of 2019 M/s Jai Mateshwari Stone Crusher Petitioner/ applicant versus State of Himachal Pradesh & ors.

By order (KAMLESH KUMAR PANT, IAS) Principal Secretary (Env. S&T).

1379 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943

ब अदालत डॉ0 गणेश ठाकुर, कार्यकारी दण्डाधिकारी एवं तहसीलदार, तहसील सदर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

मिसल नं0 : 16/2021 तारीख मजरूआ : 20-04-2021 तारीख पेशी : 20-09-2021 श्री पवन ठाकुर पुत्र श्री नवरात्रू, निवासी मकान नम्बर 112/03, पैलेस कलोनी मण्डी, तहसील सदर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

बनाम

आम जनता

प्रार्थना-पत्र नाम दुरुस्ती बारे।

श्री पवन ठाकुर पुत्र श्री नवरात्रू, निवासी मकान नम्बर 112/03, पैलेस कलोनी मण्डी, तहसील सदर, जिला मण्डी (हि0 प्र0) ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि मेरी बेटी का जन्म 10-08-2010 को हुआ है। इसका घरेलू नाम आयशा ठाकुर दर्ज है जो कि गलत है जब कि सम्बन्धित आधारकार्ड, स्कूल में अवीशा ठाकुर ही दर्ज है। जो कि सही हैै। इसे दुरुस्त किया जाये। अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि यदि इस बारे किसी व्यक्ति को कोई एतराज हो तो वह दिनांक 20-09-2021 को असालतन या वकालतन प्रातः 11.00 बजे हाजिर होकर अपना एतराज लिखित या मौखिक पेश कर सकता है अन्यथा कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद्‌ आयुक्त, नगर निगम मण्डी के रिकार्ड में उक्त नाम दुरुस्त करने के आदेश पारित कर दिये जायेंगे। निर्धारित अवधि के पश्चात्‌ किसी आपत्ति पर विचार नहीं किया जायेगा। आज दिनांक .......................... को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर।

डॉ0 गणेश ठाकुर, सहायक समाहर्ता प्रथम वर्ग, तहसील सदर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

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ब अदालत डॉ0 गणेश ठाकुर, कार्यकारी दण्डाधिकारी एवं तहसीलदार, तहसील सदर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

मिसल नं0 : 21/2021 तारीख मजरूआ : 17-06-2021 तारीख पेशी : 20-09-2021

. . वादी। श्री गुलजार मुहम्मद पुत्र श्री अली हुसैन, गांव हुरला, डाकघर कडशा, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू (हि0 प्र0)

बनाम

आम जनता

प्रार्थना-पत्र जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु अधिनियम, 1969 ता 1978 के अन्तर्गत मृत्यु दर्ज करवाने बारे। श्री गुलजार मुहम्मद पुत्र श्री अली हुसैन, गांव हुरला, डाकघर कडशा, तहसील भुन्तर, जिला कुल्लू (हि0 प्र0) ने इस अदालत में प्रार्थना-पत्र पेश किया है कि मेरे चाचा बुधू पुत्र जवाहरू की मृत्यु दिनांक 10-10-1981 को घर पर हुई थी मेरा परिवार अज्ञानतावश उनकी मृत्यु समय पर ग्राम पंचायत रिकार्ड उबा में दर्ज नही करवा सका। 1380 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943 अतः सर्वसाधारण को इस इश्तहार द्वारा सूचित किया जाता है कि यदि इस बारे किसी को कोई एतराज हो तो वह दिनांक 20-09-2021 को असालतन या वकालतन प्रातः 11.00 बजे हाजिर होकर अपना एतराज लिखित या मौखिक पेश कर सकता है अन्यथा उसके मृतक चाचा की मृत्यु ग्राम पंचायत उबा के रिकार्ड में मृत्यु दर्ज करवाने के आदेश पारित कर दिये जायेंगे। निर्धारित अवधि के पश्चात्‌ किसी आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा।

आज दिनांक .................................... को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर।

डॉ0 गणेश ठाकुर, सहायक समाहर्ता प्रथम वर्ग, तहसील सदर, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

मिसल नं0 : 20/2021 आगामी पेशी : 26-07-2021 श्रीमती मीरा देवी पुत्री श्री पूर्ण चन्द, निवासी गांव रोपा, डाकखाना राहला, तहसील औट, जिला मण्डी . . वादिया। (हि0 प्र0)

बनाम

आम जनता

. . प्रतिवादी। विषय.--जन्म पंजीकरण जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

प्रार्थीन श्रीमती मीरा देवी पुत्री श्री पूर्ण चन्द, निवासी गांव रोपा, डाकखाना राहला, तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0) ने इस अदालत में आवेदन-पत्र मय शपथी-पत्र इस आशय से गुजारा है कि उसका जन्म दिनांक 04-05-1963 को हुआ है परन्तु अज्ञानतावश आवेदिका की जन्म की घटना का पंजीकरण ग्राम पंचायत नगवांई में दर्ज नहीं किया गया। प्रार्थीन अब ग्राम पंचायत नगवांई में अपनी जन्म की घटना का पंजीकरण जन्म एवं मृत्यु पंजिकरण रजिस्टर में दर्ज करवाना चाहती है।

अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त व्यक्ति की जन्म की घटना को पंजीकरण रजिस्टर में दर्ज करने बारा कोई उजर/एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन तारीख पेशी 26-07-2021 को सुबह 10.00 बजे हाजिर होकर अपना उजर/एतराज पेश कर सकता है, व इस सूरत गैरहाजरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिये जाएंगे।

आज दिनांक 16-06-2021 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।1381 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943

ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

श्री धन्नु राम पुत्र श्री चेत राम, निवासी गांव भरसी, मुहाल भटवाड़ी, डाकघर कोटखमराधा, तहसील . . वादी। औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

बनाम

आम जनता . . प्रतिवादी। विषय.--जन्म पंजीकरण जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

प्रार्थी श्री धन्नु राम पुत्र श्री चेत राम, निवासी गांव भरसी, मुहाल भटवाड़ी, डाकघर कोटखमराधा, तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0) ने इस अदालत में आवेदन-पत्र मय शपथी-पत्र इस आशय से गुजारा है कि उसका जन्म दिनांक 16-02-1995 को हुआ है परन्तु अज्ञानतावश आवेदक की जन्म की घटना का पंजीकरण ग्राम पंचायत भटवाड़ी में दर्ज नहीं किया गया। प्रार्थी अब ग्राम पंचायत भटवाड़ी में अपनी जन्म की घटना का पंजीकरण जन्म एवं मृत्यु पंजिकरण रजिस्टर में दर्ज करवाना चाहता है।

अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त व्यक्ति की जन्म की घटना को पंजीकरण रजिस्टर में दर्ज करने बारा कोई उजर/एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन तारीख पेशी 26-07-2021 को सुबह 10.00 बजे हाजिर होकर अपना उजर/एतराज पेश कर सकता है, व इस सूरत गैरहाजरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिये जाएंगे।

आज दिनांक 16-06-2021 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

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ब अदालत कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

श्रीमती श्यामी देवी पुत्री श्री लच्छमण, निवासी गांव टकोली, डाकघर नगवाई, तहसील औट, जिला . . वादिया। मण्डी (हि0 प्र0)

बनाम

आम जनता . . प्रतिवादी। विषय.--जन्म पंजीकरण जेर धारा 13(3) जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969.

प्रार्थीन श्रीमती श्यामी देवी पुत्री श्री लच्छमण, निवासी गांव टकोली, डाकघर नगवांई, तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0) ने इस अदालत में आवेदन-पत्र मय शपथी-पत्र इस आशय से गुजारा है कि उसका जन्म दिनांक 05-03-1966 को हुआ है परन्तु अज्ञानतावश आवेदिक की जन्म की घटना का पंजीकरण ग्राम 1382 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943 पंचायत नगवांई में दर्ज नहीं किया गया। प्रार्थीन अब ग्राम पंचायत नगवांई में अपनी जन्म की घटना का पंजीकरण जन्म एवं मृत्यु पंजिकरण रजिस्टर में दर्ज करवाना चाहती है।

अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त व्यक्ति की जन्म की घटना को पंजीकरण रजिस्टर में दर्ज करने बारा कोई उजर/एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन तारीख पेशी 26-07-2021 को सुबह 10.00 बजे हाजिर होकर अपना उजर/एतराज पेश कर सकता है, व इस सूरत गैरहाजरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिये जाएंगे।

आज दिनांक 16-06-2021 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर हस्ताक्षरित/- कार्यकारी दण्डाधिकारी, तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

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अज कार्यालय सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, औट, तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0) मिसल नं0 : 19/2021 आगामी पेशी : 26-07-2021 श्री प्रेम सिंह पुत्र श्री रणू, निवासी गांव भरसी, मुहाल भटवाड़ी, डाकघर कोटखमराधा, तहसील औट, . . वादी। जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

बनाम

आम जनता

प्रतिवादी। विषय.--राजस्व रिकॉर्ड में नाम दुरुस्ती करने बारे ।

प्रार्थी श्री प्रेम सिंह पुत्र श्री रणू, निवासी गांव भरसी, मुहाल भटवाड़ी, डाकघर कोटखमराधा, तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0) ने दिनांक 20-04-2021 को इस अदालत में एक आवेदन-पत्र गुजारा है कि उसका नाम तहसील औट के राजस्व अभिलेख में मुहाल भटवाड़ी में प्रेमू दर्ज है। जबकि पंचायत व अन्य रिकार्ड में उसका सही नाम 'प्रेम सिंह' दर्ज है। प्रार्थी ने इस अदालत से प्रार्थना की है कि तहसील औट, जिला मण्डी के तमाम भू0-राजस्व अभिलेख में उसका नाम 'प्रेमू' की जगह 'प्रेम सिंह उर्फ प्रेमू' दर्ज करने हेतु आदेश पारित किये जाएं।

अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त प्रार्थी का नाम राजस्व रिकार्ड में दुरुस्त करने बारे कोई उजर/एतराज हो तो वह असालतन/वकालतन तारीख पेशी 26-07-2021 को 10.00 बजे तक कार्यालय हाजिर होकर अपना उजर/एतराज पेश कर सकता है, व इस सूरत गैरहाजरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिए जाएंगे। आज दिनांक 16-06-2021 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर।

हस्ताक्षरित/-

सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी,

तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।1383 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943 अज कार्यालय सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी औट, तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0) मिसल नं0 : 18/2021 आगामी पेशी : 26-07-2021 श्री यशवन्त पुत्र श्री धनी राम, निवासी गांव जाउगी, डाकघर पनारसा, तहसील औट, जिला मण्डी . . वादी। (हि0 प्र0)।

बनाम

आम जनता

प्रतिवादी। विषय.--राजस्व रिकॉर्ड में नाम दुरुस्ती करने बारे ।

प्रार्थी श्री यशवन्त पुत्र श्री धनी राम, निवासी गांव जाउगी, डाकघर पनारसा, तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0) ने दिनांक 22-04-2021 को इस अदालत में एक आवेदन-पत्र गुजारा है कि उसका नाम तहसील औट के राजस्व अभिलेख मुहाल किगस में 'यशपाल' गलती से दर्ज हुआ है। जबकि पंचायत व अन्य रिकार्ड में उसका सही नाम 'यशवन्त' दर्ज है। प्रार्थी ने इस अदालत से प्रार्थना की है कि तहसील औट, जिला मण्डी के तमाम भू0-राजस्व अभिलेख में उसका नाम 'यशपाल' की जगह 'यशवन्त उर्फ यशपाल' दर्ज करने हेतु आदेश पारित किये जाएं।

अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त प्रार्थी का नाम राजस्व रिकार्ड में दुरुस्त करने बारे कोई उजर/एतराज हो तो वह असालतन/वकालतन तारीख पेशी 26-07-2021 को 10.00 बजे तक कार्यालय हाजिर होकर अपना उजर/एतराज पेश कर सकता है, व इस सूरत गैरहाजरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिए जाएंगे। आज दिनांक 16-06-2021 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर।

हस्ताक्षरित/-

सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी,

तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

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अज कार्यालय सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, औट, तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0) मिसल नं0 : 17/2021 आगामी पेशी : 26-07-2021 श्रीमती मोहनी देवी पुत्री श्री छपे राम हाल पत्नी पुरशोतम, निवासी गांव टकोली, मुहाल कोटाधार, . . वादिया। डाकघर पनारसा, तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

बनाम

...प्रतिवादी। आम जनता

विषय.--राजस्व रिकॉर्ड में नाम दुरुस्ती करने बारे ।

प्रार्थीन श्रीमती मोहनी देवी पुत्री श्री छपे राम हाल पत्नी पुरशोतम, निवासी गांव टकोली, मुहाल कोटधार, डाकघर पनारसा, तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0) ने दिनांक 16-04-2021 को इस अदालत में एक आवेदन-पत्र गुजारा है कि उसका नाम तहसील औट के राजस्व अभिलेख मुहाल कोटाधार में 'मूरतू' 1384 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943 गलती से दर्ज हुआ है। जबकि पंचायत व अन्य रिकार्ड में उसका सही नाम 'मोहनी देवी' दर्ज है। प्रार्थीन ने इस अदालत से प्रार्थना की है कि तहसील औट, जिला मण्डी के तमाम भू0-राजस्व अभिलेख में उसका नाम 'मूरतू' की जगह 'श्रीमती मोहनी देवी उर्फ मूरतू' दर्ज करने हेतु आदेश पारित किये जाएं।

अतः इस इश्तहार द्वारा आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को उक्त प्रार्थीन का नाम राजस्व रिकार्ड में दुरुस्त करने बारे कोई उजर/एतराज हो तो वह असालतन/वकालतन तारीख पेशी 26-07-2021 को 10.00 बजे तक कार्यालय हाजिर होकर अपना उजर/एतराज पेश कर सकता ह,ै व इस सूरत गैरहाजरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर उचित आदेश पारित कर दिए जाएंगे। आज दिनांक 16-06-2021 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर अदालत से जारी हुआ।

मोहर।

हस्ताक्षरित/-

सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी,

तहसील औट, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।

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समक्ष मेघना गोस्वामी, तहसीलदार एवम्‌ सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, लडभड़ोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0)

तारीख पेशी : 27-07-2021

. . प्रार्थी।

बनाम

आम जनता

. . फरीकदोयम। अतः इस इश्तहार के माध्यम से सर्वसाधारण आम जनता को सूचित किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को राजस्व अभिलेख मोहाल सियुण में किशोरी लाल के स्थान पर किशोर चन्द दुरुस्त करने बारा कोई उजर/एतराज हो तो वह असालतन या वकालतन तारीख पेशी दिनांक 27-07-2021 को 10.00 बजे इस अदालत में हाजिर होकर अपना उजर/एतराज पेश कर सकते हैं। बसूरत गैरहाजिरी एकतरफा कार्यवाही अमल में लाई जाकर नाम दुरुस्ती दर्ज करने के आदेश पारित कर दिए जाएंगे।

यह इश्तहार आज दिनांक 22-06-2021 को मेरे हस्ताक्षर व मोहर सहित अदालत से जारी हुआ। मोहर।

हस्ताक्षरित/- सहायक समाहर्ता प्रथम श्रेणी, लडभड़ोल, जिला मण्डी (हि0 प्र0)।1385 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943

In the Court of Sh. Anil Kumar Bhardwaj (HPAS), Marriage Officer-cum-Sub-Divisional

Magistrate, Chachyot at Gohar, District Mandi (H. P.)

In the matter of :

1. Sh. Panku s/o Ram Lal, r/o V.P.O. Nandi, Tehsil Chachyot, District Mandi (H.P.).

2. Deepa Kumari d/o Om Chand, r/o Village Pangliur, P.O. Sianj, Tehsil Chachyot, . . Applicants.

District Mandi (H.P.)

Versus

General Public

Subject.—Proclamation for registration of Marriage under section 15 of Special Marriage Act, 1954.

Sh. Panku and Deepa Kumari have filed an application on 25-06-2021 alongwith affidavits in the court of undersigned under section 15 of Special Marriage Act, 1954 that they have solemnized their marriage on 14-04-2021 and they are living as husband and wife since then and hence, their marriage may be registered under Special Marriage Act, 1954.

Therefore, the general public is hereby informed through this notice that any person who has any objection regarding this marriage, can file the objection personally or in writing before this court on or before 26-07-2021. The objection received after 26-07-2021 will not be entertained and marriage will be registered accordingly.

Issued today on 25-06-2021 under my hand and seal of the court.

Seal. Sd/- Marriage Officer-cum-Sub-Divisional Magistrate, Chachyot at Gohar, District Mandi (H.P.).

1386 राजपत्र, हिमाचल प्रदेश, 09 जुलाई, 2021/18 आषाढ़, 1943

नियन्त्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री, हिमाचल प्रदेश, शिमला-5 द्वारा मुद्रित तथा प्रकाशित इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरित राजपत्र, वैबसाइट http://rajpatrahimachal.nic.in पर उपलब्ध है एवम्‌ ऑनलाइन सत्यापित किया जा सकता है

Cite this issue. Himachal Pradesh Gazette, Government of Himachal Pradesh, 09 July 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.himachal.2021-07-09.53_gazette_2021-09_07_2021/. Archive identifier in.gazette.himachal.2021-07-09.53_gazette_2021-09_07_2021.