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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

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Published 27 August 2010

Type
Ordinary
Gazette no.
35
Part
1
Identifier
in.gazette.madhya.2010-08-27.35.Ordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

पंजी. क्रमांक भोपाल डिवीजन म. प्र. - 108- भोपाल - 09-11 .

मध्यप्रदे श शासन

मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल डाक परिमंडल, के पत्र क्रमांक 22/153, दिनांक 10-1-06 द्वारा पूर्व भुगतान योजनान्तर्गत डाक व्यय की पूर्व अदायगी डाक द्वारा भेजे जाने के लिए अनुमत.

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 35]

भोपाल, शुक्रवार, दिनांक 27 अगस्त 2010- भाद्र 5 , शक 1932

विषय-सूची

भाग 1.- ( 1 ) राज्य शासन के आदेश , ( 2 ) विभाग प्रमुखों के आदेश, (3 ) उच्च न्यायालय के आदेश और अधिसूचनाएं, (4 ) राज्य शासन के संकल्प, ( 5 ) भारत शासन के आदेश और अधिसूचनाएं, ( 6 ) निर्वाचन आयोग , भारत की अधिसूचनाएं, ( 7 ) लोक- भाषा परिशिष्ट.

भाग 2.-- स्थानीय निकाय की अधिसूचनाएं.

भाग 3.- ( 1 ) विज्ञापन और विविध सूचनाएं,

(2) सांख्यिकीय सूचनाएं,

भाग 4.- ( क) ( 1 ) मध्यप्रदेश विधेयक, ( 2 ) प्रवर समिति के प्रतिवेदन, (3 ) संसद् में पुरःस्थापित विधेयक,

(ख ) ( 1 ) अध्यादेश, ( 2 ) मध्यप्रदेश अधिनियम, (3) संसद्के अधिनियम,

(ग ) ( 1 ) प्रारूप नियम, ( 2 ) अंतिम नियम.

भाग १

राज्य शासन के आदेश

सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल

Bhopal , the 15th June 2010

No. E - 5-502 - IAS- Leave - 5- One . Sanction is hereby accorded to Dr. J. T. Ekka , IAS ( 1986 ) Commissioner- cum - Director , Bhopal Gas Tragedy Relief and Rehabilitation to avail ex - India earned leave from 11th to 28th August , 2010 with permission to suffix gazetted holidays falling on dated 29th August , 2010.

(2) Shri Arun Tiwari , IAS ( 1992) , Director , AIDS & Ex-Officio Secretary Government of Madhya Pradesh Public Health and Family Welfare Deptt . , shall hold the additional charge of Commissioner - cum -Director , Bhopal Gas Tragedy Relief And Rehabilitation, during the leave period of Dr. J. T. Ekka .

(3) On return from leave Dr. J. T. Ekka is again posted as officiating Commissioner - cum Director , Bhopal Gas Tragedy Relief and Rehabilitation , temporarily , until further orders .

(4) Shri Arun Tiwari , IAS ( 1992) , Director , AIDS & Ex- Officio Secretary , Government of Madhya Pradesh , Public Health and Family Welfare Department shall be relieved from the additional charge of Commissioner- cum-Director , Bhopal Gas Tragedy Relief and Rehabilitation after Dr. J. T. Ekka joins the post on return from leave .

2107

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2010.

2108

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1 (5) Dr. J. T. Ekka will be entitled to draw leave salary and other allowances on the same rates he was getting before proceeding on leave.

(6) It is certified that had Dr. J. T. Ekka not proceeded on leave , he would have continued on this post.

क्र. ई- 5-484- आयएएस-लीव- 5 - एक. श्री प्रभाकर बंसोड़, आयएएस. , प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन , जन शिकायत निवारण एवं सामान्य प्रशासन विभाग ( मानव अधिकार ) को दिनांक 3 से 17 सितम्बर 2010 तक पन्द्रह दिन का अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है. इस अवकाश के साथ दिनांक 2 एवं 18 , 19 सितम्बर 2010 का सार्वजनिक अवकाश जोड़ने की अनुमति दी जाती है.

भोपाल, दिनांक 12 अगस्त 2010

(2) अवकाश से लौटने पर श्री प्रभाकर बंसोड़ को अस्थायी रूप से, आगामी आदेश तक, स्थानापन्न प्रमुख सचिव , मध्यप्रदेश शासन , जन शिकायत निवारण एवं सामान्य प्रशासन विभाग ( मानव अधिकार ) के पद पर पुनः पदस्थ किया जाता है .

क्र. ई - 5-613- आयएएस लीव- 5- एक. - श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव, आयएएस. , प्रबंध संचालक, पाठ्यपुस्तक निगम तथा पदेन सचिव, मध्यप्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग को दिनांक 16 अगस्त से 4 सितम्बर 2010 तक बीस दिन का एक्स इंडिया अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है तथा इस अवकाश के साथ दिनांक 5 सितम्बर 2010 के सार्वजनिक अवकाश जोड़ने की अनुमति दी जाती है.

(3) अवकाशकाल में श्री प्रभाकर बंसोड़ , को अवकाश वेतन एवं भत्ता उसी प्रकार देय होगा जो उन्हें अवकाश पर जाने के पूर्व मिलता था.

(4) प्रमाणित किया जाता है कि यदि श्री प्रभाकर बंसोड़, अवकाश पर नहीं जाते तो अपने पद पर कार्य करते रहते.

(2) अवकाश से लौटने पर श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव को अस्थायी रूप से, आगामी आदेश तक, स्थानापन्न प्रबंध संचालक, पाठ्य पुस्तक निगम तथा पदेन सचिव , मध्यप्रदेश शासन , स्कूल शिक्षा विभाग के पद पुनः पदस्थ किया जाता है.

क्र. ई. - 1-320-2010-5- एक. नीचे तालिका के खाना ( 2 ) में दर्शाये भाप्रसे के अधिकारियों को उनके नाम के समक्ष खाना ( 3 ) में दर्शाये गए पद पर, आगामी आदेश तक, स्थानापन्न रूप से पदस्थ किया जाता है:-

( 3 ) अवकाशकाल में श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव को अवकाश वेतन तथा भत्ता उसी प्रकार देय होगा जो उन्हें अवकाश पर जाने के पूर्व मिलता था.

क्रमांक

नवीन पदस्थापना (4 ) प्रमाणित किया जाता है कि श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव, अवकाश पर नहीं जातीं तो अपने पद पर कार्य करतीं रहतींः

(1)

अधिकारी का नाम तथा वर्तमान पदस्थापना (2)

(3)

मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, होशंगाबाद (कनिष्ठ वेतनमान) .

क्र. ई- 1-312-2010-5- एक.- भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति से लौटने पर श्री पी. के. दाश , भाप्रसे ( 1981 ) , को अस्थाई रूप से, आगामी आदेश तक, स्थानापन्न प्रमुख सचिव , मध्यप्रदेश शासन, वाणिज्य, उद्योग एवं रोजगार विभाग पदस्थ किया जाता है.

. 1 श्री श्रीमन शुक्ला ( 2007 ) , अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) , शुजालपुर जिला शाजापुर.

मुख्यकार्यपालन अधिकारी , जिला पंचायत, हरदा . (कनिष्ठ वेतनमान ).

2 श्री नागरगोजे मदन विभीषण ( 2007 ) , अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) , जावरा जिला रतलाम.

भोपाल, दिनांक 17 अगस्त 2010 (2 ) उपरोक्तानुसार श्री पी. के. दाश , भाप्रसे ( 1981 ) , द्वारा प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, वाणिज्य, उद्योग एवं रोजगार विभाग का कार्यभार ग्रहण करने पर श्री वी. सी. सेमवाल, भाप्रसे ( 1985 ) , विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी- सह- आयुक्त, उद्योग , मध्यप्रदेश तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य उद्योग निगम एवं पदेन प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन , वाणिज्य, उद्योग एवं रोजगार विभाग केवल पदेन प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन , वाणिज्य, उद्योग एवं रोजगार विभाग के प्रभार से मुक्त होंगे .

भोपाल, दिनांक 16 अगस्त 2010

क्र. ई - 1-303-2010-5- एक. श्रीमती सीमा शर्मा, भाप्रसे (1992) , नियंत्रक, मुद्रण तथा लेखन सामग्री एवं पदेन सचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग तथा पदेन अपर राहत आयुक्त को अपने वर्तमान कर्त्तव्यों के साथ - साथ , आगामी आदेश तक, पदेन सचिव, मध्यप्रदेश शासन , पुनर्वास एवं धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग भी घोषित किया जाता है .

क्र. ई- 1-321-2010-5- एक. श्री एस. बी. सिंह, भाप्रसे ( 1993 ) , कमिश्नर, ग्वालियर संभाग , ग्वालियर के अवकाश अवध में उनका प्रभार श्री एस. डी. अग्रवाल , भाप्रसे ( 1989 ) , कमिश्नर, चंबल संभाग, मुरैना को अपने वर्तमान कर्तव्यों के साथ- साथ , अतिरिक्त रूप से सौंपा जाता है .

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, अवनि वैश्य, मुख्य सचिव.

2109

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

भाग 1 ]

भोपाल, दिनांक 19 अगस्त 2010

क्र. एफ ए- 5-11-2010- एक ( 1 ) . - राज्य शासन द्वारा माननीय न्यायाधिपति महोदया श्रीमती सुषमा श्रीवास्तव , मध्यप्रदेश, उच्च न्यायालय , जबलपुर को निम्नांकित विवरण अनुसार कम्युटेड अवकाश स्वीकृत किया जाता है:-

कुल दिन अवकाश अभियुक्ति का प्रकार

अ.क्र . अवकाश अवधि

12 दिन पूर्ण वेतन तथा भत्तों सहित 9 जुलाई 2010 तक.

कम्यूटेड

21 दिन अवकाश

1 28 जून 2010 से इसी अनुक्रम में दिनांक 10 जुलाई 2010 से 30 जुलाई 2010 तक.

कुल 33 दिन

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, बी. आर. विश्वकर्मा, उपसचिव.

भोपाल, दिनांक 12 अगस्त 2010

क्र. ई-5-481 - आयएएस- लीव- 5- एक. श्री इकबाल सिंह बैंस , आयएएस. , प्रमुख सचिव , मुख्यमंत्री तथा प्रमुख सचिव , मध्यप्रदेश शासन, विमानन विभाग तथा पर्यटन विभाग एवं पदेन आयुक्त, पर्यटन, मध्यप्रदेश को दिनांक 29 जुलाई से 3 अगस्त 2010 तक छः दिन का लघुकृत अवकाश कार्योत्तर स्वीकृत किया जाता है.

(2) अवकाश से लौटने पर श्री इकबाल सिंह बैस को अस्थायी रूप से, आगामी आदेश तक, स्थानापन्न प्रमुख सचिव , मुख्यमंत्री तथा प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, विमानन विभागं तथा पर्यटन विभाग एवं पदेन आयुक्त, पर्यटन, मध्यप्रदेश के पद पर पुनः पदस्थ किया जाता है.

(3) अवकाशकाल में श्री इकबाल सिंह बैस को अवकाश वेतन एवं भत्ता उसी प्रकार देय होगा जो उन्हें अवकाश पर जाने के पूर्व मिलता था.

(4) प्रमाणित किया जाता है कि यदि श्री इकबाल सिंह बैंस, अवकाश पर नहीं जाते तो अपने पद पर कार्य करते रहते .

क्र. ई- 5-812 - आयएएस- लीव-5 - एक. श्री जी.पी. कबीरपंथी, आयएएस. , उप सचिव , मध्यप्रदेश शासन, योजना , आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग को दिनांक 1 अप्रैल से 14 मई 2010 तक चवालीस दिन का अर्जित अवकाश कार्योत्तर स्वीकृत किया जाता है.

(2 ) अवकाश से लौटने पर श्री जी . पी. कबीरपंथी को अस्थायी रूप से, आगामी आदेश तक, स्थानापन्न उप सचिव , मध्यप्रदेश शासन, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के पद पर पुनः पदस्थ किया जाता है .

(3) अवकाशकाल में श्री जी. पी. कबीरपंथी को अवकाश वेतन. एवं भत्ता उसी प्रकार देय होगा जो उन्हें अवकाश पर जाने के पूर्व मिलता था.

(4 ) प्रमामित किया जाता है कि यदि श्री जी. पी. कबीरपंथी , अवकाश पर नहीं जाते तो अपने पद पर कार्य करते रहते .

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, के. सी. पन्त, अवर सचिव.

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल

भोपाल , दिनांक 2 अगस्त 2010

क्र. एफ- 5-35-2009-2-उन्तीस. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 ( 1986 की सं. 68 ) की धारा 10 की उपधारा ( 1 - क) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य शासन, चयन समिति की सिफारिश पर श्री सुरेन्द्र कुमार सक्सेना आत्मज श्री पुरुषोत्तम लाल कोजिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम, राजगढ़ में उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से सदस्य के रूप में नियुक्त करता है.

(2) जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य प्रत्येक कार्य दिवस पर पूर्वान्ह 10.30 बजे से अपरान्ह 4.00 बजे तक जिला उपभोक्ता फोरम में उपस्थित रहेंगे . उन्हें यह भी निर्देशित किया जाता है कि वे बिना उपयुक्त कारण के फोरम की बैठक में तीन बार अनुपस्थित रहते हैं तो उन्हें पद से हटाने की कार्यवाही की जावेगी . सदस्य को केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेना अनिवार्य होगा.

No. F. 5-35-2009-2 - XXIX. In exercise of the power conferred by sub - section ( 1 - A) of Section 10 the Consumer Protection Act , 1986 (No. 68 of 1986) and on recommendation of the Selection Committee , the State Government hereby appoint shri Surander Kumar Saxena S/o shri Pursotam Lal as the member in the District Consumer Disputes Redressal Forum, Rajghar with effect from the date he takes over the charge of the office.

The member of the District Consumer Forum should positively attend office on every working day from 10.30 AM to 4.00 PM and is instructed that if he 2110

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1

के लाभ सहित दिनांक 2 से 5 अगस्त 2010 तक कुल चार दिवस का अर्जित अवकाश ( Ex India ) निम्नलिखित शर्तों के साथ स्वीकृत किया जाता है:-

remains absent continuously for three consecutive sitting of the forum, except for a reasonable cause , then action will be taken to remove him from the membership of the District Consumer Forum . The member of the District Consumer Forum have to participate in the training provided by the State/Central Government from time to time.

( 1 ) विदेश में स्वास्थ्य/चिकित्सा आदि पर होने वाला व्यय वे स्वयं वहन करेंगे , राज्य शासन नहीं.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, ललित दाहिमा, उपसचिव.

(2) विदेश में शासकीय अथवा किसी निजी संस्था का आतिथ्य स्वीकार नहीं करेंगे .

( 3 ) विदेश में कोई Assignment नहीं लेंगे .

पशुपालन विभाग मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल

भोपाल, दिनांक 5 अगस्त 2010

(2) श्री सुखराज सिंह , भापुसे , की अवकाश अवधि में डॉ. आर. के. गर्ग , भापुसे, पुलिस महानिरीक्षक ( रेल ) , भोपाल को वर्तमान कर्तव्यों के साथ- साथ , अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नारकोटिक्स ) पु.मु. , भोपाल का प्रभार सौंपा जाता है.

( 3) श्री सुखराज सिंह, भापुसे, द्वारा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नारकोटिक्स ) पु.मु. भोपाल का कार्यभार ग्रहण करने पर डॉ. आर. के . गर्ग भापुसे , उक्त पद के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त होंगे.

क्र. एफ 23-15-2007- पैंतीस.- भारतीय पशु चिकित्सा परिषद् अधिनियम , 1984 ( 1984 का सं. 52 ) की धारा 32 की उपधारा ( 1 ) के खण्ड (ङ) के अन्तर्गत नामांकन के फलस्वरूप धारा 32 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार, एतद्वारा , डॉ. टी.पी. वैद्य, पशु चिकित्सा , सहायक शल्यज्ञ, शासकीय कुक्कुट पालन प्रक्षेत्र, हताईखेड़ा, भोपाल को पशु चिकित्सा परिषद् , मध्यप्रदेश के सदस्य के रूप में नामनिर्दिष्ट होने की अधिसूचना जारी करती है.

(4) अवकाश से लौटने पर, श्री सुखराज सिंह, भापुसे को अस्थायी रूप से, आगामी आदेश तक, स्थानापन्न अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नारकोटिक्स) , पु.मु. , भोपाल के पद पुनः पदस्थ किया जाता है.

(5) अवकाश काल में श्री सुखराज सिंह, भापुसे को अवकाश वेतन एवं भत्ता उसी प्रकार देय होगा जो उन्हें अवकाश पर जाने के पूर्व मिलता था.

(6 ) प्रमाणित किया जाता है कि यदि श्री सुखराज सिंह, भापुसे अवकाश पर नहीं जाते तो अपने पद पर कार्य करते रहेंगे .

No. F 23-15-2007 - XXXV. In exercise of the power conferred by sub- section (2) of Section 32 of the Indian Veterinary Council Act , 1984 (No. 52 of 1984) in context to nomination under clause (e) of sub - section (1) of Section 32 of the India Veterinary Council Act , 1984 (No. 52 of 1984) , the State Government hereby notify the nomination of Dr. T.P. Vaidya , Veterinary Assistant Surgen , Govt . Poultry Farm , Hataikheda , Bhopal as member of Veterinary Council Madhya Pradesh .

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, डी. पी. अहिरवार, उपसचिव.

क्र. एफ 1 ( ए) 180-86- ब-2- दो. श्री मैथिलीशरण गुप्त, भापुसे, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक , ( प्रशासन ) पु.मु. भोपाल को Phase- V Training of Mid Carreer में भाग लेने के उपरान्त लंदन (यू.के. ) में प्रवास हेतु दिनांक 1 अगस्त 2010 के विज्ञप्त अवकाश के लाभ सहित दिनांक 2 से 5 अगस्त 2010 तक कुल चार दिवस का अर्जित अवकाश (Ex India ) निम्नलिखित शर्तों के साथ स्वीकृत किया जाता है:-

गृह विभाग मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल भोपाल , दिनांक 11 अगस्त 2010

( 1 ) विदेश में स्वास्थ्य/ चिकित्सा आदि पर होने वाला व्यय वे स्वयं वहन करेंगे , राज्य शासन नहीं.

1

(2 ) विदेश में शासकीय अथवा किसी निजी संस्था का आतिथ्य स्वीकार नहीं करेंगे.

क्र. एफ 1 ( ए) 112-86-ब-2-दो. श्री सुखराज सिंह, भापुसे, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, ( नारकोटिक्स ) पु.मु. भोपाल को Phase- V Training of Mid Carreer में भाग लेने के उपरान्त लंदन (यू.के. ) में प्रवास हेतु दिनांक 1 अगस्त 2010 के विज्ञप्त अवकाश (3 ) विदेश में कोई Assignment नहीं लेंगे ..

2111

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

भाग 1 ]

(2 ) श्री मैथिलीशरण गुप्त , भापुसे, की अवकाश अवधि में श्री अशोक दोहरे, भापुसे, पुलिस महानिरीक्षक (चयन ) , पुलिस मुख्यालय , भोपाल को वर्तमान कर्तव्यों के साथ- साथ , अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) पु.मु. , भोपाल का प्रभार सौंपा जाता है.

(3 ) श्री मैथिलीशरण गुप्त, भापुसे, द्वारा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशासन ) पु.मु. , भोपाल का कार्यभार ग्रहण करने पर श्री अशोक दोहरे, भापुसे, उक्त पद के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त होंगे.

(4) अवकाश से लौटने पर, श्री मैथिलीशरण गुप्त , भापुसे को अस्थायी रूप से , आगामी आदेश तक, स्थानापन्न अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ( प्रशासन ) पु.मु. , भोपाल के पद पर पुनः पदस्थ किया जाता है .

(5 ) अवकाश काल में श्री मैथिलीशरण गुप्त , भापुसे को अवकाश वेतन एवं भत्ता उसी प्रकार देय होगा जो उन्हें अवकाश पर जाने के पूर्व मिलता था.

(6 ) प्रमाणित किया जाता है कि यदि श्री मैथिलीशरण गुप्त, भापुसे अवकाश पर नहीं जाते तो अपने पद पर कार्य करते रहेंगे .

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, राजेश ओगरे , अवर सचिव.

पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल

भोपाल, दिनांक 12 अगस्त 2010

क्र. एफ 4-3-2010- चौवन-2.- राज्य शासन द्वारा भोपाल , रायसेन एवं सीहोर जिले की मसाजिद कमेटी की कार्य नियमावली के नियम- 3 एवं 4 में प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए एतद्वारा उपर्युक्त जिलों के लिए मसाजिद कमेटी का गठन करता है:-

अध्यक्ष (1 ) श्री अब्दुल हकीम कुरैशी , पुत्र श्री अब्दुल हमीद कुरैशी, 847, इस्लामपुरा, भोपाल.

सचिव पुत्र श्री अब्दुल मतीन फारूखी, खैरी छापा बड़वाई, तहसील (2) श्री सईद फारूखी, गौहरगंज, रायसेन.

सदस्य (3) श्री अनवर हुसैन, पुत्र श्री अख्तर हुसैन ,

किला मोहल्ला, आष्टा, सीहोर.

सदस्य (4 ) श्री मो. अमीन ,

पुत्र श्री शेख अहमद,

तहसील मोहल्ला, वार्ड नं. 16 , रायसेन.

सदस्य (6 ) शहर काजी- आरिफ बारी , आष्टा, जिला-सीहोर.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, जी. एस. खैरवार , उपसचिव.

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल भोपाल, दिनांक 12 अगस्त 2010

क्र. डी- 15-12-2010- चौदह-3. चूंकि, राज्य शासन द्वारा इस विभाग की अधिसूचना क्रमांक डी- 15-12-2010-चौदह -3 , दिनांक 19 मई 2010 द्वारा मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम , 1972 की धारा 70 की उपधारा ( 1 ) के खण्ड ( एक ) के उपबन्धों के अधीन मंदसौर जिले की तहसील शामगढ़ के ग्राम झोबरा का समाविष्ट क्षेत्र (जो इसमें इसके पश्चात् " उक्त क्षेत्र " के नाम से निर्दिष्ट है ) को अपवर्जित करके उक्त मंडी क्षेत्र की सीमाओं में परिवर्तन करने के अपने आशय को और उक्त मंडी क्षेत्र में नीचे दी गई अनुसूची में उल्लेखित जिला मन्दसौर की तहसील शामगढ़ के ग्रामों में समाविष्ट क्षेत्र ( जो इसमें इसके पश्चात् " उक्त क्षेत्र " के नाम से निर्दिष्ट है ) को सम्मिलित करके उक्त मंडी क्षेत्र की सीमाओं में परिवर्तन करने का अपने आशय को संज्ञापित किया गया था.

अतएव मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1972 ( क्रमांक 24 सन् 1973 ) की धारा 71 की उपधारा ( 2 ) के खण्ड ( क ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुये राज्य सरकार, एतद्वारा इस अधिसूचना के मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशन होने के दिनांक से उक्त अधिनियम के प्रयोजन के लिये मंदसौर जिले की तहसील शामगढ़ के ग्राम झोबरा का समाविष्ट क्षेत्र ( जो इसमें इसके पश्चात् " उक्त क्षेत्र" के नाम से निर्दिष्ट है ) को अपवर्जित करके उक्त मंडी क्षेत्र की सीमाओं में परिवर्तन करने के अपने आशय को और उक्त. मंडी क्षेत्र में नीचे दी गई अनुसूची में उल्लेखित जिला मन्दसौर की तहसील शामगढ़ के ग्रामों में समाविष्ट क्षेत्र ( जो इसमें इसके पश्चात् " उक्त क्षेत्र" के नाम से निर्दिष्ट है ) को सम्मिलित करके उक्त मंडी क्षेत्र की सीमाओं में परिवर्तन किया जाता है:-

अनुसूची ( 1 ) चांदखेड़ी बुजुर्ग, ( 2 ) पिपल्या घाटा.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, बी. एस. बघेल, अपर सचिव.

[भाग 1 2112

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

भोपाल, दिनांक 12 अगस्त 2010

क्र.डी- 15-12-2010- चौदह- 3.- भारत के संविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड ( 3 ) के अनुसरण में, इस विभाग की समसंख्यक अधिसूचना, दिनांक 12 अगस्त 2010 का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतद्वारा , प्रकाशित किया जाता है.

19 मई 2010 द्वारा मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1972 की धारा 70 की उपधारा ( 1 ) के खण्ड ( एक ) के उपबन्धों के अधीन मंदसौर जिले की कृषि उपज मंडी समिति गरोठ के निम्नलिखित ग्रामों में समाविष्ट क्षेत्र को ( जो इसमें इसके पश्चात् " उक्त मंडी क्षेत्र " के नाम से निर्दिष्ट है ) को सम्मिलित करके मंडी क्षेत्र की सीमाओं में परिवर्तन करने के अपने आशय को संज्ञापित किया गया था.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, बी. एस. बघेल, अपर सचिव.

Bhopal , the 12th August 2010

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अतएव, मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1972 ( क्रमांक 24 सन् 1973 ) की धारा 71 की उपधारा ( 2 ) के खण्ड ( क ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुये राज्य सरकार, एतद्वारा इस अधिसूचना का मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशन होने के दिनांक से उक्त अधिनियम के प्रयोजन के लिये निम्नलिखित अनुसूची में उल्लेखित ग्रामों में समाविष्ट " उक्त क्षेत्र " को उक्त अधिनियम के प्रयोजन के लिये मन्दसौर जिले की कृषि उपज मंडी समिति गरोठ के " मंडी क्षेत्र" में सम्मिलित करते हुये " उक्त मंडी क्षेत्र " की सीमाओं में परिवर्तन किया जाता है:-

अनुसूची

1. गरोठ, 2. भीलखेड़ी, 3. बाराखेड़ी, 4. हरिपुरा, 5. कराड़िया (बोरखेड़ी ) , 6. सकरिया खेड़ी, 7. ढोलनी , 8. झोबरा.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, बी. एस. बघेल, अपर सचिव.

No.D -15-12-2010- XIV -3.- WHEREAS by this department Notification No. D- 15-12-2010 - XIV - 3 , dated 19th May , 2010 issued under the provisions of clause ( i) of sub - section ( 1 ) of Section 71 of the Madhya Pradesh Krishi Upaj Mandi Adhiniyam , 1972 (No. 24 of 1973 ) , the State Government have signified its intention to alter the limit of the " said market area " by excluding therefrom the area comprising of village of Jhobra in Shayamgarh Tehsil of District Mandsaur (hereinafter referred to as the " said area " ) and it is proposed to alter the limit of the " said market area " by including therein the area comprising of villages specified in the schedule below in Shayamgarh Tehsil of District Mandsaur . (hereinafter referred to as the " said area" ) .

भोपाल , दिनांक 12 अगस्त 2010

क्र. डी- 15-12-2010- चौदह - 3.- भारत के संविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड ( 3 ) के अनुसरण में इस विभाग की समसंख्यक अधिसूचना, दिनांक 12 अगस्त 2010 का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतद्वारा , प्रकाशित किया जाता है.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, बी. एस. बघेल , अपर सचिव.

Bhopal , the 12th August 2010 NOW , THEREFORE , in exercise of the powers conferred by clause ( a) of sub section (2) of Section 71 of the Madhya Pradesh Krishi Upaj Mandi Adhiniyam , 1972 (No. 24 of 1973 ) , the State Government , from the date ofpublication of this notification in the Madhya Pradesh Gazette , hereby alter the limit of the " said market area " by excluding therefrom the area comprising of village of Jhobra in Shayamgarh Tehsil of District Mandsaur (hereinafter referred to as the " said area " ) and it is proposed to alter the limit of the " said market area " by including therein the area comprising of villages specified in the schedule below in Shayamgarh Tehsil of District Mandsaur . ( hereinafter referred to as the " said area " ) :-

SCHEDULE

1. Chandkhedi Bujurg , 2. Pipaliya Ghata .

By Order and in the name of the Governor of the Madhya Pradesh , B.S. BAGHEL, Addl . Secy.

भोपाल, दिनांक 12 अगस्त 2010

No.D - 15-12-2010-XIV -3.- WHEREAS by this department Notification No. D- 15-12-2010 - XIV - 3 , dated 19th May , 2010 issued under the provisions of clause (i ) of sub - section ( 1 ) of section 70 of the Madhya Pradesh Krishi Upaj Mandi Adhiniyam , 1972 (No. 24 of 1973 ) , the State Government have signified its intention to alter the limit of the market area of Krishi Upaj Mandi Commettee Garoth of District Mandsaur (herein - after referred to as the " said market area " by including therewith the area comprising of fallowing villages specified in the schedule below in Garoth Tehsil of District Mandsaur ( hereinafter rererred to as the " said area " ) .

क्र. डी- 15-12-2010- चौदह-3 . चूंकि राज्य शासन द्वारा इस विभाग की अधिसूचना क्रमांक डी-15-12-2010-चौदह -3 , दिनांक भाग 1 ]

2113

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

NOW, THEREFORE , in exercise of the powers conferred by clause ( a) of sub - section (2) of Section 71 of the Madhya Pradesh Krishi Upaj Mandi Adhiniyam , 1972 (No. 24 of 1973) , the State Government , from the date ofpublication of this notification in the Madhya Pradesh Gazette, hereby alter the limit of the " said market area " for the purpose of the said Act, by including the " said area " comprising of following villages mentioned in the schedule therewith the market area of Krishi Upaj Mandi Commettee Garoth of District Mandsaur:-

SCHEDULE

1. Garoth , 2. Bhilkhedi , 3. Baarakhedi , 4. Haripura , 5. Karadiya (Borkhedi) , 6. Sakariya Khedi , 7. Dholni , 8. Jhobra .

By Order and in the name of the Governor of the Madhya Pradesh , B.S. BAGHEL , Addl . Secy.

खनिज साधन विभाग मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल

भोपाल, दिनांक 13 अगस्त 2010

क्र. एफ- 2-25-06- बारंह- 1.- मेसर्स मेटल माइनिंग इंडिया प्रा. लि. द्वारा जिला कटनी , उमरिया एवं शहडोल में सोना, तांबा, लेड, जिंक खनिजों की खोज हेतु अवीक्षी अनुज्ञापंत्र अन्तर्गत टोही कार्यों हेतु धारित 180 वर्ग कि. मी . क्षेत्र का समर्पण किया गया है. इस क्षेत्र को खनि रियायत नियम, 1960 के नियम 59 के उप नियम ( 1 ) के खण्ड ( एक) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार एतद्वारा , खुला घोषित करती है . क्षेत्र का विवरण निम्नानुसार है:-

बिन्दु (1)

अक्षांश (2)

देक्षांश (3) ब्लाक 1

i

23° 50' 36 "

80° 38' 54 " 2

23° 51 ' 58 "

80° 41' 39 " 3

23° 51 ' 40 "

80° 41' 50 " 4

23° 55' 31 "

80° 50' 48 " 6

23° 54' 20 "

80° 51 ' 42 " 23° 50 ' 22 "

80° 42' 31 " , 6

7

23° 49' 22 "

80° 43 ' 05 " 8

23°48 ' 00"

80° 40' 35 "

4 से 5 जिला सीमा

(1)

(3)

(2)

ब्लाक 2

9

80° 52' 37 " 23° 55' 08 "

23° 59 ' 17 "

81° 03′ 44 " 10

11

23 ° 58' 08 "

81° 04' 11 "

81° 09 ' 04 " 12

24° 00' 01 "

81° 08 ' 24 " 24° 01 ' 21 "

13

81° 09' 30 " 14

24° 01 ' 45"

81° 10' 50 " 23°59' 23 "

15

80° 53' 40" 23° 52' 51 "

16

इस अधिसूचना के " मध्यप्रदेश राजपत्र " में प्रकाशन की तारीख से 30 दिवस की कालावधि समाप्ति के पश्चात्, 90 दिवस तक खुला घोषित क्षेत्र स्वीकृति हेतु उपलब्ध होगा. उक्त क्षेत्र का मानचित्र संचालनालय भौमिकी तथा खनिकर्म " खनिज भवन " 29 - ए, अरेरा हिल्स, भोपाल में अधिसूचना के प्रकाशन के पश्चात् किसी भी कार्यालयीन दिवस में अवलोकन हेतु उपलब्ध होगा.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, ए. के. तोमर , उपसचिव.

भोपाल , दिनांक 13 अगस्त 2010

क्र. एफ - 2-25-06- बारह - 1.- भारत के संविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड ( 3 ) के अनुसरण में, इस विभाग की अधिसूचना समक्रमांक दिनांक 13 अगस्त 2010 का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतद्वारा प्रकाशित किया जाता है.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, ए. के. तोमर , उपसचिव.

Bhopal , the 13th August 2010

No. F- 2-25-06- XII - 1 . In exercise of posers conferred by clause (a) of sub rule ( 1 ) of rule 59 of the Mineral Concession Rule , 1960 the State Government hereby declare throw open an area of 180 Km² in Katni , Umariya & Shahdol Districts which was previously held by M/ s Metal Mining India Private Limited , for the reconnanissance operations of Gold, Copper , Lead, Zinc minerals under reconnaissance permit , which has now been surrendered . Details of the area are as below :-

Longitude (3) Point (1)

Latitude (2)

BLOCK 1

80° 38 ' 54 " 1

23° 50 ' 36 " 2114

(2)

(3) (1)

23 ° 51 ' 58 "

2

80° 41 ' 39 " 3

80° 41 ' 50 " 23° 51 ' 40 "

4

80° 50' 48" 23° 55' 31 "

23° 54' 20"

80° 51 ' 42 " 5

6

23° 50' 22 "

80° 42' 31 " 23° 49' 22"

80° 43 ' 05 " 7

23° 48' 00 "

8

80° 40' 35 "

4 to 5 District Boundary BLOCK 2

23° 55' 08 "

80° 52' 37 " 9

81° 03 ′ 44 " 23° 59' 17 "

10

11

23° 58' 08 "

81° 04' 11 " 24° 00' 01 "

81° 09' 04" 12

24° 01' 21 "

81° 08' 24 " 13

14

24° 01' 45 "

81° 09' 30 " 15

23° 59' 23 "

81° 10' 50 "

80° 53' 40 " 23° 52' 51 "

16

The area shall be available for regrant after 30 days from the date of publication of this notification in the Madhya Pradesh Gazette , till 90 days . The Plan of the aforesaid area can be seen in the Directorate of Geology and Mining , Khanij Bhawan , 29 - A, Arera Hills , Bhopal , Madhya Pradesh , on any working day after publication of this notification .

By order and in the name of the Governor of Madhya Pradesh ,

A. K. TOMAR , Dy . Secy .

विधि और विधायी कार्य विभाग भोपाल , दिनांक 13 अगस्त 2010

फा. क्र. 3 (ए) 11-2009 - इक्कीस - ब( एक ) .- राज्य शासन, एतद्वारा , श्री गुरूबख्श सिंह , प्रथम अपर जिला सेशन न्यायाधीश , मुरैना का त्यागपत्र दिनांक 3 अगस्त 2010 के अपरान्ह से स्वीकृत करता है.

भोपाल , दिनांक 16 अगस्त 2010

फा. क्र . 1 ( अ) -3-03 - इक्कीस ब ( दो ) .- राज्य शासन , निम्नलिखित अधिवक्ताओं को महाधिवक्ता कार्यालय , जबलपुर में

[ भाग 1

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010.

उनके नाम के समक्ष दर्शाये गये पद एवं निश्चित् मासिक पारिश्रमिक पर महाधिवक्ता के परामर्श से उच्च न्यायालय में शासन की ओर से पैरवी करने के लिए आदेश जारी होने के दिनांक से 15 अगस्त 2011 तक एक वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त करता है. उक्त अवधि में दोनों पक्ष एक माह का नोटिस देकर यह संविदा समाप्त करने के लिए स्वतंत्र होंगे:-

महाधिवक्ता कार्यालय , जबलपुर

क्रमांक शास . अधिवक्ता

पद

पारिश्रमिक प्रतिमाह का नाम

(1)

(2)

(3)

(4) 1 श्री समीर चिले

शास. अधिवक्ता 20,000 2 श्री संजय द्विवेदी शास. अधिवक्ता 20,000 3 श्री राजेश तिवारी शास. अधिवक्ता 20,000

शास. अधिवक्ता

4 श्री अखिलेन्द्र सिंह

20,000

शास . अधिवक्ता 20,000 5 श्री समदर्शी तिवारी

शास. अधिवक्ता 20,000 6 श्री बृजेन्द्रनाथ मिश्रा

पद

क्रमांक उप शास . अधिवक्ता

पारिश्रमिक प्रतिमाह का नाम

(3)

(4) (1)

(2)

उप शास. अधिवक्ता 17,000 1 श्री अखिलेश शुक्ला

इस संबंध में होने वाला व्यय मांग संख्या 29-2014 न्याय प्रशासन ( 14) कानूनी सलाहकार और परिषद् ( 3428 ) महाधिवक्ता- 01- वेतन- 001- अधिकारियों वेतन के अन्तर्गत विकलनीय होगा.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, ए. के. मिश्रा , प्रमुख सचिव.

भोपाल, दिनांक 19 अगस्त 2010

फा. क्र. 17 ( ई ) 231-2008 - इक्कीस - ब (दो ) .- इस विभाग के समसंख्यक आदेश दिनांक 29 जुलाई 2010 द्वारा रिट याचिका क्रमांक 11122/2008 राजकिशोर चौधरी विरुद्ध शासन में माननीय उच्च न्यायालय , जबलपुर द्वारा पारित आदेश दिनांक 8 मई 2009 के परिपालन में श्री लालमणि सिंह बघेल, अधिवक्ता, निवासी- बजरंग कालोनी , तहसील नागौद, जिला सतना का तहसील नागौद में नोटरी व्यवसाय करने का नोटरी व्यवसाय प्रमाण - पत्र निरस्त किया गया था परन्तु उक्त वर्णित रिट याचिका की रिट अपील क्रमांक 482/2009 लालमणि सिंह बघेल एवं प्रभुदयाल पाण्डेय विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य वर्तमान में माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर में विचाराधीन है और माननीय उच्च न्यायालय द्वारा प्रकरण में यथास्थिति बनाये रखने के निर्देश दिये हैं, उक्त आदेश के परिपालन में इस विभाग का समसंख्यक आदेश दिनांक 29 जुलाई 2010 निरस्त किया जाता है.

2115

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

भाग 1 ]

फा. क्र. 17 (ई ) 232-2008 - इक्कीस- ब( दो ) . इस विभाग के समसंख्यक आदेश दिनांक 29 जुलाई 2010 द्वारा रिट याचिका क्रमांक 11122/2008 राजकिशोर चौधरी विरुद्ध शासन में माननीय उच्च न्यायालय , जबलपुर द्वारा पारित आदेश दिनांक 8 मई 2009 के परिपालन में श्री प्रभुदयाल पाण्डेय, अधिवक्ता, निवासी शास्त्री नगर, तहसील नागौद, जिला सतना का तहसील नागौद में नोटरी व्यवसाय करने का नोटरी व्यवसाय प्रमाण - पत्र निरस्त किया गया था परन्तु उक्त रिट याचिका की रिट अपील क्रमांक 482/2009 लालमणि सिंह बघेल एवं प्रभुदयाल पाण्डेय विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य वर्तमान में माननीय उच्च न्यायालय , जबलपुर में विचाराधीन है और माननीय उच्च न्यायालय द्वारा प्रकरण में यथास्थिति बनाये रखने के निर्देश दिये हैं, उक्त आदेश के परिपालन में इस विभाग का समसंख्यक आदेश दिनांक 29 जुलाई 2010 निरस्त किया जाता है.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, ए. जे. खान, सचिष.

वाणिज्य, उद्योग और रोजगार विभाग मंत्रालय, वल्लभ भवन , भोपाल

भोपाल , दिनांक 17 अगस्त 2010

क्र. एफ- 13-10-10-अ- ग्यारह. इंडियन बायलर्स एक्ट, 1923 की धारा 34 ( 2 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राज्य शासन , सतपुड़ा ताप विद्युत् गृह क्रमांक 1 की इकाई क्रमांक 4 के वाष्पयंत्र क्रमांक एम. पी. / 3220 को निम्नलिखित शर्तों पर उक्त अधिनियम की धारा 6 (सी ) के उपबंधों के प्रवर्तन से दिनांक 28 मई 2010 से 27 जून 2010 तक एक माह के लिये छूट देता है:-

( 1 ) संदर्भाधीन बायलर को पहुंचने वाली किसी भी हानि की सूचना भारतीय बायलर्स अधिनियम, 1923 की धारा 18 ( 1 ) की अपेक्षानुसार तत्काल बायलर मुख्य निरीक्षक मध्यप्रदेश , इन्दौर को दी जावेगी एवं दुर्घटना होने के दिनांक से छूट की मान्यता समाप्त समझी जावेगी.

(2 ). उपर्युक्त अधिनियम की धारा 02 तथा 13 की अपेक्षानुसार बायलर मुख्य निरीक्षक मध्यप्रदेश के पूर्वानुमोदन के बिना संदर्भाधीन बायलर में किसी प्रकार का संरचनात्मक परिवर्तन अथवा नवीनीकरण नहीं किया जावेगा.

(3) संदर्भाधीन बायलर का सरसरी दृष्टि से निरीक्षण किये जाने पर यदि यह खतरनाक स्थिति में पाया गया तो यह छूट समाप्त हो जावेगी.

(4) नियत कालिक सफाई और नियमित रूप से गैस निकलने (रेग्युलर ब्लोडाऊन ) का कार्य किया जावेगा और उसका अभिलेख रखा जावेगा.

( 5 ) मध्यप्रदेश बायलर निरीक्षक नियम, 1969 के नियम 6 की अपेक्षानुसार संदर्भाधीन बायलर के संबंध में वार्षिक निरीक्षण शुल्क अग्रिम दी जावेगी एवं

(6 ) यदि राज्य शासन आवश्यक समझे तो प्रश्नांकित छूट में संशोधन कर सकता है अथवा उसे वापस ले सकता है .

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, भरत कुमार व्यास , अपर सचिव.

परिवहन विभाग मंत्रालय , वल्लभ भवन , भोपाल भोपाल, दिनांक 19 अगस्त 2010

क्र. एफ- 22-39-10- आठ. केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 65 की उपधारा 2 के खण्ड ( ख ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों एवं मध्यप्रदेश मोटरयान नियम, 1994 के नियम 41 के खण्ड 1 से 3 तक के उपबंधों को ध्यान में रखते हुए इस विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ 7-2-89- आठ, दिनांक 23 जुलाई 89 एवं अधिसूचना क्रमांक 4-3-99- आठ, दिनांक 23 अगस्त 99 को अधिक्रमित करते हुए राज्य शासन एतद्वारा नीचे दी गयी सारणी के कॉलम ( 1 ) में विर्निदिष्ट रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी को पंजीयन चिन्ह के उपयोग के लिये इसके कालम ( 2 ) की तत्संबंधी प्रविष्टि विनिर्दिष्ट कोड संख्या कालम ( 3 ) में उल्लेखित वाहनों के लिये अधिसूचना के जारी होने के दिनांक से अधिकृत करती है: -

सारणी

वाहनों का विवरण पंजीयन प्राधिकार कोड

नम्बर

01 महामहिम राज्यपाल की मोटरयानों के लिये

सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, भोपाल.

02 समस्त शासकीय मोटरयानों के लिए.

03 पुलिस विभाग की मोटरयानों के लिये.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, दिलीप राज द्विवेदी , उपसचिव.

2116

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1

आवास एवं पर्यावरण विभाग

मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल

भोपाल , दिनांक 18 अगस्त 2010

क्र. 26-2010- बत्तीस. मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 ( क्रमांक 23 , सन् 1973 ) की धारा 23-" क " की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार, एतद्वारा , इस विभाग की सूचना क्रमांक एफ-3-126-2010- बत्तीस, दिनांक 21 जुलाई 2010 द्वारा उक्त धारा की उपधारा ( 2 ) द्वारा अपेक्षित किये गये अनुसार प्रकाशित जबलपुर विकास योजना 2021 में निम्नलिखित उपांतरण की उल्लिखित शर्तों के साथ पुष्टि करती है. उपांतरण ब्यौरे निम्नानुसार है:-

उपांतरण विवरण

क्रमांक ग्राम

खसरा क्रमांक

क्षेत्रफल ( हेक्टेयर में ) उपांतरण पश्चात् उपांतरित भू उपयोग

विकास योजना

में निर्दिष्ट भू

उपयोग

(1) (2) (3)

(5)

(4) 1

करौंदी

0.709

खसरा क्र. 32/2

(6)

आमोद- प्रमोद के

अन्तर्गत नगर, वन

(वृक्षारोपण)

योग .. 0.709 (2 ) उपरोक्त उपांतरण जबलपुर विकास योजना 2021 का एकीकृत भाग होगा.

आमोद- प्रमोद अन्तर्गत इण्डोर स्टेडियम. शर्तें-1 . यह उपांतरण शासकीय भूमि के खेल एवं युवा कल्याण विभाग को भूमि इण्डोर स्टेडियम हेतु आवंटित होने की दशा में ही प्रभावशील होगा.

2. जबलपुर विकास योजना 2021 की कण्डिका 4.6 के अनुसार तटीय क्षेत्र से 30 मीटर दूरी तक निर्माण निषेध होगा.

क्र. एफ- 3-127-2010- बत्तीस. मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 ( क्रमांक 23 , सन् 1973 ) की धारा 23-" क " की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार, एतद्वारा, इस विभाग की सूचना क्रमांक एफ-3-127-2010- बत्तीस, दिनांक 21 जुलाई 2010 द्वारा उक्त धारा की उपधारा ( 2 ) द्वारा अपेक्षित किये गये अनुसार प्रकाशित जबलपुर विकास योजना 2021 में निम्नलिखित उपांतरण की उल्लिखित शर्तों के साथ पुष्टि करती है. उपांतरण ब्यौरे निम्नानुसार है:-

उपांतरण विवरण

क्रमांक ग्राम

खसरा क्रमांक

क्षेत्रफल ( हेक्टेयर में ) (1) (2)

(3)

(4) उपांतरण पश्चात् उपांतरित भू उपयोग

विकास योजना

में निर्दिष्ट भू

उपयोग

(5)

1

करौंदी खसरा क्र. 8/2

6.074 हेक्टेयर में से 0.605 हेक्टेयर

(6)

आमोद- प्रमोद के

अन्तर्गत नगर , वन

( वृक्षारोपण )

योग .. 0.605 (2 ). उपरोक्त उपांतरण जबलपुर विकास योजना 2021 का एकीकृत भाग होगा.

सार्वजनिक/अर्द्ध सार्वजनिक अन्तर्गत शैक्षणिक. शर्तें- 1. यह उपांतरण शासकीय भूमि के शासकीय विद्यालय भवन निर्माण हेतु आवंटित होने की दशा में ही प्रभावशील होगा. 2. जबलपुर विकास योजना 2021 की कण्डिका 4.6 के अनुसार तटीय क्षेत्र से 30 मीटर दूरी तक निर्माण निषेध होगा. 3. जबलपुर विकास योजना 2021 के मापदण्ड के अनुसार विकास किया जाये .

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार , वर्षा नावलेकर, उपराचिव.

भाग 1 ]

2117

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

विभाग प्रमुखों के आदेश

कार्यालय , जिला दण्डाधिकारी, सिवनी , मध्यप्रदेश

सिवनी , दिनांक 9 अगस्त 2010

क्र. 5305- सा.लि. - 2010.-दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 ( 1974 का अधिनियम संख्यांक 2 ) की धारा 2 ( द ) ( ध ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए जिला दण्डाधिकारी , पुलिस अधीक्षक एवं जिला अभियोजन अधिकारी , सिवनी की गठित समिति की अनुशंसा के आधार पर सिवनी जिले की थाना एवं पुलिस चौकियों का परिसीमन किया जाता है.

मनोहर दुबे , जिला दण्डाधिकारी .

परिसीमन हेतु प्रस्ताव

स. क्र . थाना का नाम

ग्रामों का नाम

ग्रामों की दूरी

(1) (2)

(3) 1. कान्हीवाडा

डूंडा सिवनी 2. कान्हीवाडा

चामरमारा 3.

रोशान

कान्हीवाडा

4. कान्हीवाडा

चन्दनवाडाकला 5. कान्हीवाडा

चन्दनवाडाखुर्द 6. कान्हीवाडा

डोकररांजी 7.

खापाबाजार कान्हीवाडा

8. कान्हीवाडा

डुंगरिया

9.

कंजई

कान्हीवाडा

10. कान्हीवाडा

गोंडी हिनोतिया 11.

थाना लखनवाडा

आमा झिरिया 12.

थाना लखनवाडा

पलारी

13.

छिडिया

थाना लखनवाडा

14.

थाना लखनवाडा

कोनियापार 15. थाना लखनवाडा

सिमरिया एनटीपीसी 16. थाना लखनवाडा

राधादेही

17. थाना लखनवाडा

कोहका

18. थाना लखनवाडा

रूंझाई

19. थाना लखनवाडा

भूरकाल खापा 20. थाना लखनवाडा

मठ्ठाटोला 21 .

थाना लखनवाडा

गहरानाला 22.

बकौडी

थाना लखनवाडा

थाने से दूरी ग्रामों को जिस थाना में सम्मिलित किया जाना है उस थाने का नाम

(4)

(5)

(6)

चौंकी पलारी

16 कि.मी.

3 कि.मी.

13 कि.मी.

चाँकी पलारी

4 कि.मी.

12कि.मी.

चौंकी पलारी

5 कि.मी.

25 कि.मी.

चौंकी पलारी

6 कि.मी.

12कि.मी.

चाँकी पलारी

8 कि.मी.

15 कि.मी.

चाँकी पलारी

8 कि.मी.

21 कि.मी.

चौंकी पलारी

15 कि.मी.

चौंकी पलारी

27 कि.मी.

15 कि.मी.

चौंकी पलारी

13 कि.मी.

19 कि.मी.

19 कि.मी.

चौंकी पलारी

13 कि.मी.

12कि.मी.

थाना सिवनी

5 कि.मी.

11 कि.मी.

थाना सिवनी

4कि.मी.

12कि.मी.

थाना सिवनी

5 कि.मी.

5 कि.मी.

थाना सिवनी

3 कि.मी.

12कि.मी.

थाना सिवनी

5 कि.मी.

13 कि.मी.

थाना सिवनी

6 कि.मी.

12कि.मी.

थाना सिवनी

5 कि.मी.

15 कि.मी.

थाना सिवनी

7 कि.मी.

थाना सिवनी

15 कि.मी.

7 कि.मी.

15 कि.मी.

थाना सिवनी

7 कि.मी.

13कि.मी.

थाना सिवनी

6 कि.मी.

30 कि.मी.

थाना अरी

20कि.मी.

2118

(1)

(2)

(3) 23. थाना लखनवाडा

नान्हीकन्हान 24.

थाना लखनवाडा

मेहराबोडी 25 . थाना कुरई

लामाज्योति 26 .

आमगांव थाना कुरई

27.

सारसडोल थाना कुरई

28.

चिखली थाना कुरई

29.

बडगांव थाना कुरई

30.

बटामा थाना कुरई

31.

लेंहगी थाना कुरई

32. थाना कुरई

मूण्डापार 33.

करकोटी थाना कुरई

34.

केशरदिया थाना कुरई

35.

बकरमपाठ थाना कुरई

36.

सालीवाडा थाना धूमा

37.

जमकोना थाना धूमा

38. थाना धूमा

खूबीरैयत 39.

दबकिया थाना धूमा

40.

भानेरी थाना धूमा

41. थाना किन्दरई

गाडाघाट 42. थाना किन्दरई

बसुरिया 43. थाना किन्दरई

मदनपुर 44. थाना किन्दरई

सारंगपुर 45. थाना किन्दरई

बीजासैन 46 . थाना किन्दरई

कुदवारी 47. थाना किन्दरई

बगदरी 48. थाना किन्दरई

बरदिया 49 . थाना किन्दरई

लेहडीकोल 50 . थाना किन्दरई

चमरवाहा 51 .

जोबा थाना किन्दरई

52.

सर्रा

थाना किन्दरई

53. थाना किन्दरई

प्रतापगढ़ 54. थाना किन्दरई

बरगांव 55. थाना किन्दरई

कुडोपार 56. थाना किन्दरई

मूंडापार

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1 (4)

(5)

(6) 20 कि.मी.

थांना अरी

12 कि.मी. 22कि.मी.

थाना अरी

14 कि.मी.

35 कि.मी.

थाना लखनवाडा

15 कि.मी.

30 कि.मी.

20 कि.मी.

थाना लखनवाडा

31 कि.मी.

थाना लखनवाडा

20 कि.मी.

33 कि.मी.

थाना लखनवाडा

22कि.मी.

30 कि.मी.

थाना अरी

20 कि.मी.

29 कि.मी.

थाना अरी

21 कि.मी.

28 कि.मी.

थाना अरी

22कि.मी.

30 कि.मी.

थाना अरी

12 कि.मी. 34कि.मी.

थाना अरी

12 कि.मी. 32कि.मी.

थाना अरी

14कि.मी.

37 कि.मी.

थाना अरी

15 कि.मी. 24कि.मी.

थाना लखनादौन

15. कि.मी.

26 कि.मी.

थाना लखनादौन

18 कि.मी.

26 कि.मी.

थाना लखनादौन

19 कि.मी.

25 कि.मी.

थाना लखनादौन

16 कि.मी.

23 कि.मी.

थाना लखनादौन

17 कि.मी.

40 कि.मी.

थाना घंसौर

20 कि.मी.

38 कि.मी.

थाना घंसौर

19 कि.मी.

36 कि.मी.

थाना घंसौर

18 कि.मी.

36 कि.मी.

थाना घंसौर

18 कि.मी. 40कि.मी.

थाना घंसौर

23 कि.मी.

38 कि.मी.

थाना घंसौर

21 कि.मी.

35 कि.मी.

थाना घंसौर

18 कि.मी. 32कि.मी.

थाना घंसौर

17 कि.मी.

30 कि.मी.

थाना घंसौर

18 कि.मी. 32कि.मी.

थाना घंसौर

20 कि.मी.

33 कि.मी.

थाना घंसौर

21 कि.मी.

35 कि.मी.

थाना घंसौर

22 कि.मी. 34कि.मी.

थाना घंसौर

21 कि.मी.

25 कि.मी.

थाना घंसौर

15 कि.मी.

18 कि.मी.

थाना घंसौर

10 कि.मी.

20 कि.मी.

थाना घंसौर

12कि.मी.

भाग 1 ]

2119

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग

निर्वाचन भवन

58 अरेरा हिल्स , भोपाल ( म.प्र. ) 462011

आदेश

भोपाल, दिनांक 19 अगस्त 2010

क्र. एफ- 67-104-10-तीन- 2453.-मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो , पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा.

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी " निर्वाचन व्यय ( लेखा संधारण और प्रस्तुति ) आदेश 1997 " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण) दिनांक 6 जून 97 में प्रकाशित हुआ है. उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.

माह दिसम्बर 2009 में सम्पन्न हुए नगर पंचायत खुजनेर, जिला राजगढ़ के आम निर्वाचन में सुश्री मीना मनीष उपाध्याय, अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थीं. नगर पंचायत खुजनेर, जिला राजगढ़ के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 15-12-2009 को घोषित हुआ. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् 14-1-2010 तक, इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी राजगढ़ के पास दाखिल किया जाना था किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी राजगढ़ के पत्र क्र. 561 /व्यय लेखा/ 10 दिनांक 29 जनवरी 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार सुश्री मीना मनीष उपाध्याय द्वारा विहित समय में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.

विहित समयावधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत न करने का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर सुश्री मीना मनीष उपाध्याय को कारण बताओ सूचना पत्र दिनांक 11-2-2010 जारी कर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी राजगढ़ के माध्यम से दिनांक 18-2-2010 को तामील कराया गया. कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी से जवाब ( लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था. नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है , उनके विरुद्ध एक पक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा.

सुश्री मीना मनीष उपाध्याय को नोटिस दिनांक 18-2-2010 को तामील कराया गया. अतः उनको दिनांक 5-3-2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था. किन्तु उनके द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया. नोटिस की तामीली उपरांत कलेक्टर, राजगढ़ ने अपने पत्र दिनांक 3-5-2010 में लेख किया कि " सुश्री मीना मनीष उपाध्याय को जारी कारण बताओ सूचना पत्र तामीली के पश्चात् उक्त अभ्यर्थी द्वारा निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किये गये .". आयोग द्वारा दिनांक 31-5-2010 को सुश्री मीना मनीष उपाध्याय को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक 7-6-2010 को उपस्थित होने हेतु पत्र लिखा गया. किन्तु वे आयोग कार्यालय में उपस्थित नहीं हुई और ना ही उनके द्वारा आयोग में इस संबंध में कोई अभ्यावेदन ही प्रेषित किया गया.

उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं . अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है .

अतः मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ग के उपबन्धों के अन्तर्गत सुश्री मीना मनीष उपाध्याय को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा नगर पंचायत खुजनेर, जिला राजगढ़ का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिए इस आदेश के तारीख से 5 वर्ष ( पांच वर्ष ) की कालावधि के लिए निरर्हित ( अयोग्य) घोषित किया जाता है .

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./-

( रजनी उइके )

सचिव

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.

2120

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1 भोपाल, दिनांक 19 अगस्त 2010

भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है , उनके विरुद्ध एकपक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा .

क्र. एफ-67-93-10-तीन- 2455.- मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नामनिर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा.

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी " निर्वाचन व्यय ( लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश , 1997 " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) दिनांक 6 जून 97 में प्रकाशित हुआ है . उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.

श्री मांगीलाल डाबी, को नोटिस दिनांक 25-2-2010 को तामील कराया गया. अतः उनको दिनांक 12-3-2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था. अभ्यर्थी द्वारा दिनांक 11-3-10 को आयोग कार्यालय में निर्वाचन व्यय लेखा एवं अभ्यावेदन चिकित्सक के प्रमाण पत्र सहित प्रस्तुत किए गए. अभ्यावेदन में उन्होंने लेख किया कि " चुनाव के तुरन्त पश्चात् मेरा स्वास्थ्य बिगड़ जाने से, चिकित्सक की सलाह पर घर पर ही स्वास्थ्य लाभ ले रहा था. आपका यह पत्र मिलने पर मैं सम्पूर्ण लेखा लेकर माननीय जिला निर्वाचन महो. के समक्ष दि. 5-3-10 को प्रस्तुत हुआ. मान. अधिकारी महो . ने बताया कि इसकी समय -सीमा निकल चुकी है व उनकी सलाह पर राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय पर लेखा जोखा प्रस्तुत करने के लिए उपस्थित हुआ हूं. " आयोग द्वारा अभ्यर्थी से प्राप्त अभ्यावेदन कलेक्टर, देवास को अभिमत हेतु भेजे गये. कलेक्टर, देवास ने अपने अभिमत में लेख किया कि " अभ्यावेदन के संलग्न चिकित्सक का प्रमाण- पत्र प्रस्तुत किया है, उसमें अवधि दिनांक 14-1-10 से दिनांक 7-3-10 दर्शाई गई है जबकिव्यय लेखा प्रस्तुत करने हेतु निर्वाचन परिणाम की घोषणा होने की तिथि अर्थात् दि. 17-12-09 से 30 दिवस अर्थात् 18-1-10 तक प्रस्तुत करना था. यह कि अभ्यर्थी के पास पर्याप्त समय था तथा स्वास्थ्यतो 14-1-10 से खराब हुआ है . अभ्यर्थी द्वारा जो चिकित्सा प्रमाण- पत्र प्रस्तुत किया है, वह भी शासकीय चिकित्सक का नहीं है. उपरोक्त वर्णित स्थिति में अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत लेखे स्वीकार योग्य प्रतीत नहीं होता है .

आयोग द्वारा दिनांक 31-5-10 को श्री मांगीलाल डाबी को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक 7-6-10 को उपस्थित होने हेतु पत्र लिखा गया. सूचना- पत्र की तामीली दिनांक 3-6-10 को हुई. किन्तु वे व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए.

माह दिसम्बर 2009 में सम्पन्न हुए नगर पंचायत करनावद, जिला देवास , के आम निर्वाचन में श्री मांगीलाल डाबी, अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे . नगर पंचायत करनावद जिला देवास के निर्वाचन का परिणाम दिनांक17-12-2009 को घोषित हुआ. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् 16-1-2010 तक, किन्तु 16-1-10 एवं 17-1-10 का सार्वजनिक अवकाश होने के कारण दिनांक18-1-10 तक, इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , देवास के पास दाखिल किया जाना था किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , देवास के पत्र क्र. 193/ स्था. निर्वा./ 10 दिनांक 21 जनवरी 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार श्री मांगीलाल डाबी द्वारा विहित समय में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.

उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं. अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है .

विहित समयावधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत न करने का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर श्री मांगीलाल डाबी को कारण बताओ सूचना पत्र दिनांक 6-2-2010 जारी कर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , देवास के माध्यम से दिनांक 25-2-2010 को तामील कराया गया. कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी से जवाब ( लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था. नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह

अतः मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ग के उपबन्धों के अन्तर्गत श्री मांगीलाल डाबी को इस प्रकार चुने भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

2121 जाने के लिये तथा नगर पंचायत करनावद जिला देवास का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिए इस आदेश के तारीख से 04 वर्ष (चार वर्ष ) की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य ) घोषित किया जाता है.

दाखिल किया जाना था किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी टीकमगढ़ के पत्र क्र. न.नि./व्यय लेखा/ 10/406 , दिनांक 29 जनवरी , 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार सुश्री आर्य कलावती कोरी द्वारा विहित समय में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,

हस्ता./- ( रजनी उइके )

सचिव

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.

भोपाल, दिनांक 19 अगस्त 2010

विहित समयावधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत न करने का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर सुश्री आर्य कलावती कोरी को कारण बताओ सूचना पत्र दिनांक 16-2-2010 जारी कर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी टीकमगढ़ के माध्यम से दिनांक 26-3- 2010 को तामील कराया गया. कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी से जवाब ( लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था. नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है, उनके विरुद्ध एकपक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा.

क्र. एफ-67-172-10-तीन- 2457.- मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नामनिर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो , पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा.

सुश्री आर्य कलावती कोरी को नोटिस दिनांक 26-3-2010 को तामील कराया गया. अतः उनको दिनांक 10-4-2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था . किन्तु उनके द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया. नोटिस की तामीली उपरांत कलेक्टर, टीकमगढ़ ने अपने पत्र दिनांक4-5-2010 में लेख किया कि " सुश्री आर्य कलावती कोरी को जारी कारण बताओ नोटिस की तामीली के पश्चात् नोटिस में उल्लेखित अवधि में अपना निर्वाचन व्यय लेखा/ अभ्यावेदन इस कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किया गया है " आयोग द्वारा दिनांक 31-5-2010 को अभ्यर्थी को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक 7-6-10 को उपस्थित होने हेतु पत्र लिखा गया. व्यक्तिगत सुनवाई हेतु जारी सूचना- पत्र की तामीली कलेक्टर, टीकमगढ़ द्वारा दिनांक 5-6-10 को कराई गई , किन्तु अभ्यर्थी उपस्थित नहीं हुईं.

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा " निर्वाचन व्यय ( लेखा संधारण और प्रस्तुति ) आदेश , 1997 " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) दिनांक 6 जून 97. में प्रकाशित हुआ है. उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.

उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं . अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है .

अतः मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ग के उपबन्धों के अन्तर्गत सुश्री आर्य कलावती कोरी को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा नगर पंचायत पृथ्वीपुर, जिला टीकमगढ़ का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिए इस आदेश के तारीख माह दिसम्बर 2009 में सम्पन्न हुए नगर पंचायत , पृथ्वीपुर जिला टीकमगढ़ के आम निर्वाचन में सुश्री आर्य कलावती कोरी , अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थीं. नगर पंचायत पृथ्वीपुर जिला टीकमगढ़ के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 17-12-2009 की घोषित हुआ. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् 16-1-2010 तक, किन्तु 16-1-10 एवं 17-1-10 का सार्वजनिक अवकाश होने के कारण दिनांक 18-1-10 तक, इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी टीकमगढ़ के पास 2122

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1 से 5 वर्ष ( पांच वर्ष ) की कालावधि के लिए निरर्हित ( अयोग्य ) घोषित किया जाता है .

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,

हस्ता./-

( रजनी उइके )

सचिव

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.

विहित समयावधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत न करने का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर सुश्री उषाबाई को कारण बताओ सूचना पत्र दिनांक 16-2-2010 जारी कर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, राजगढ़ के माध्यम से दिनांक 13-3-2010 को तामील कराया गया. कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी से जवाब ( लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था. नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है , उनके विरुद्ध एक पक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा.

भोपाल , दिनांक 19 अगस्त 2010

सुश्री उषाबाई को नोटिस दिनांक 13-3-2010 को तामील कराया गया. अतः उनको दिनांक 28-3-2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था. किन्तु उनके द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया. नोटिस की तामीली उपरांत कलेक्टर, राजगढ़ ने अपने पत्र दिनांक 10-5-2010 में लेख किया कि " सुश्री उषाबाई को जारी कारण बताओ सूचना- पत्र तामीली उपरांत नोटिस में उल्लेखित अवधि में अपना निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया है " आयोग द्वारा दिनांक 31-5-2010 को सुश्री उषाबाई को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक 7-6-10 को उपस्थित होने हेतु पत्र लिखा गया. सूचना- पत्र की तामीली दिनांक 6-6-10 को हुई . किन्तु वे व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित नहीं हुईं.

क्र. एफ-67-102-10- तीन-2464.- मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - क. के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने , नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो , पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा.

उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं . अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है .

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी " निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति ) आदेश 1997 " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) दिनांक 6 जून 97 में प्रकाशित हुआ है . उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.

अतः मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - ग के उपबन्धों के अन्तर्गत सुश्री उषाबाई अशोक अग्रवाल को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा नगर पंचायत सुठालिया, जिला राजगढ़ का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिए इस आदेश के तारीख से 5 वर्ष ( पांच वर्ष ) की कालावधि के लिए निरर्हित ( अयोग्य) घोषित किया जाता है .

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (रजनी उइके)

सचिव माह दिसम्बर 2009 में सम्पन्न हुए नगर पंचायत सुठालिया , जिला राजगढ़ के आम निर्वाचन सुश्री उषाबाई अशोक अग्रवाल अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थीं. नगर पंचायत सुठालिया, जिला राजगढ़ के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 15-12-2009 को घोषित हुआ. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् 14- 1-2010 तक इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , राजगढ़ के पास दाखिल किया जाना था किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , राजगढ़ के पत्र क्र. 561 /व्यय लेखा/ 10, दिनांक 29 जनवरी 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार सुश्री उषाबाई द्वारा विहित समय में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल .

भाग 1 ]

2123

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

भोपाल , दिनांक 19 अगस्त 2010

क्र. एफ- 67-102-10-तीन- 2465.- मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यंय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो , पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा.

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी " निर्वाचन व्यय ( लेखा संधारण और प्रस्तुति ) आदेश 1997 " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) दिनांक 6 जून 97 में प्रकाशित हुआ है. उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.

माह दिसम्बर 2009 में सम्पन्न हुए नगर पंचायत सुठालिया, जिला राजगढ़ के आम निर्वाचन में सुश्री समन्दरबाई - भारतसिंह गुर्जर, अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थीं. नगर पंचायत सुठालिया , जिला राजगढ़ के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 15-12-2009 को घोषित हुआ. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् 14-1-2010 तक, इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी राजगढ़ के पास दाखिल किया जाना था किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी राजगढ़ के पत्र क्र. 561 /व्यय लेखा/ 10, दिनांक 29 जनवरी 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार सुश्री समन्दरबाई- भारतसिंह गुर्जर द्वारा विहित समय में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.

विहित समयावधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत न करने का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर सुश्री समन्दरबाई - भारतसिंह गुर्जर को कारण बताओ सूचना पत्र दिनांक 16-2-2010 जारी कर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , राजगढ़ के माध्यम से दिनांक 10-3-2010 को तामील कराया गया. कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी से जवाब ( लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था. नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है, उनके विरुद्ध एक पक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा.

सुश्री समन्दरबाई - भारतसिंह गुर्जर को नोटिस दिनांक 10-3-2010 को तामील कराया गया. अतः उनको दिनांक 25-3-2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था . किन्तु उनके द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया. नोटिस की तामीली उपरांत कलेक्टर, राजगढ़ ने अपने पत्र दिनांक 10-5-2010 में लेख किया कि " सुश्री समन्दरबाई- भारतसिंह गुर्जर को जारी कारण बताओ सूचना- पत्र तामीली उपरांत नोटिस में उल्लिखित अवधि में अपना निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया. " आयोग द्वारा दिनांक 31-5-2010 को सुश्री समन्दरबाई - भारतसिंह गुर्जर को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक7-6-2010 को उपस्थित होने हेतु पत्र लिखा गया. सूचना- पत्र की तामीली दिनांक 6-6-2010 को हुई किन्तु वे व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित नहीं हुईं.

2 उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं. अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है.

अतः मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ग के उपबन्धों के अन्तर्गत सुश्री समन्दरबाई - भारतसिंह गुर्जर को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा नगर पंचायत सुठालिया, जिला राजगढ़ का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिए इस आदेश के तारीख से 5 वर्ष ( पांच वर्ष ) की कालावधि के लिए निरर्हित ( अयोग्य) घोषित किया जाता है .

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,

हस्ता./-

(रजनी उइके)

सचिव

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.

2124

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1 भोपाल , दिनांक 19 अगस्त 2010

(लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था . नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं करना है , उनके विरुद्ध एक पक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा.

क्र. एफ- 67-87-10- तीन- 2459.-मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नामनिर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो , पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा.

श्री दयाराम पंचरंगिया को नोटिस दिनांक 18-2-2010 को तामील कराया गया. अतः उनको दिनांक 5-3-2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था. किन्तु उनके द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया. नोटिस की तामीली उपरांत कलेक्टर, उज्जैन ने अपने पत्र दिनांक 19-4-2010 में लेख किया कि " श्री दयाराम पंचरंगिया को आपके द्वारा जारी कारण बताओ सूचना पत्र तामील होने के पश्चात् उक्त अभ्यर्थी द्वारा आज दिनांक तक अपना निर्वाचन व्यय लेखा/अभ्यावेदन इस कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किया है . " आयोग द्वारा दिनांक 14-6-2010 को अभ्यर्थी को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक 26-6-2010 को उपस्थित होने हेतु पत्र लिखा गया. व्यक्तिगत सुनवाई हेतु जारी सूचना - पत्र की तामीली कलेक्टर, उज्जैन द्वारा दिनांक 23-6-2010 को कराई गई, किन्तु अभ्यर्थी उपस्थित नहीं हुए.

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी " निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 1997 " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) दिनांक 6 जून 97 में प्रकाशित हुआ है . उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.

उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं. अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है .

अतः मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ग के उपबन्धों के अन्तर्गत श्री दयाराम पंचरंगिया को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा नगर पंचायत उन्हेल , जिला उज्जैन का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिए इस आदेश के तारीख से 5 वर्ष (पांच वर्ष ) की कालावधि के लिए निरर्हित ( अयोग्य ) घोषित किया जाता है.

माह दिसम्बर 2009 में सम्पन्न हुए नगर पंचायत उन्हेल , जिला उज्जैन के आम निर्वाचन में श्री दयाराम पंचरंगिया , अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे. नगर पंचायत उन्हेल , जिला उज्जैन के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 17-12-2009 की घोषित हुआ. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् 16-1-2010 तक, किन्तु 16-1-2010 एवं 17-1-2010 को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण 18-1-2010 तक, इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , उज्जैन के पास दाखिल किया जाना था किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , उज्जैन के पत्र क्र. स्था. निर्वा./ 10/ 385 , दिनांक 21 जनवरी 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार श्री दयाराम पंचरंगिया द्वारा विहित समय में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार ,

हस्ता./- (रजनी उड़के )

सचिव

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.

विहित समयावधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत न करने का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर श्री दयाराम पंचरंगिया को कारण बताओ सूचना- पत्र दिनांक 2-2-2010 जारी कर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, उज्जैन के माध्यम से दिनांक 18-2-2010 को तामील कराया गय कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी से जवाब 2125

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

भाग 1 ]

भोपाल, दिनांक 19 अगस्त 2010

क्र. एफ-67-87-10- तीन- 2460.- मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नामनिर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा.

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी " निर्वाचन व्यय ( लेखा संधारण और प्रस्तुति ) आदेश, 1997 " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) दिनांक 6 जून 1997 में प्रकाशित हुआ है. उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.

माह दिसम्बर 2009 में सम्पन्न हुए नगर पंचायत उन्हेल, जिला उज्जैन के आम निर्वाचन में श्री इकरामुद्दीन करीमउद्दीन, अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे . नगर पंचायत उन्हेल , जिला उज्जैन के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 17-12-2009 को घोषित हुआ . मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् 16-1-2010 तक, किन्तु 16-1-2010 एवं 17-1-2010 को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण 18-1-2010 तक, इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी उज्जैन के पास दाखिल किया जाना था किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी उज्जैन के पत्र क्र. स्था. निर्वा./ 10/ 385 , दिनांक 21 जनवरी 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार श्री इकरामुद्दीन करीमउद्दीन द्वारा विहित समय में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.

विहित समयावधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत न करने का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर श्री इकरामुद्दीन करीमउद्दीन को कारण बताओ सूचना पत्र दिनांक 2-2-2010 जारी कर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , उज्जैन के माध्यम से दिनांक 18-2-2010 को तामील कराया गया. कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी से जवाब (लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था . नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है, उनके विरुद्ध एकपक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा.

श्री इकरामुद्दीन करीमउद्दीन को नोटिस दिनांक 18-2-2010 को तामील कराया गया. अतः उनको दिनांक 5-3-2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था. किन्तु उनके द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया. नोटिस की तामीली उपरांत कलेक्टर, उज्जैन ने अपने पत्र दिनांक 19-4-2010 में लेख किया कि " श्री इकरामुद्दीन करीमउद्दीन को आपके द्वारा जारी कारण बताओ सूचना पत्र को तामील होने के पश्चात् उक्त अभ्यर्थी द्वारा आज दिनांक तक अपना निर्वाचन व्यय लेखा/ अभ्यावेदन इस कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किया है." आयोग द्वारा दिनांक 14-6-2010 को अभ्यर्थी को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक 26-6-2010 को उपस्थित होने हेतु पत्र लिखा गया. व्यक्तिगत सुनवाई हेतु जारी सूचना- पत्र की तामीली कलेक्टर, उज्जैन द्वारा दिनांक 23-6-2010 को कराई गई, किन्तु अभ्यर्थी उपस्थित नहीं हुए.

उपरोक्तविवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं. अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है .

अतः मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 -ग के उपबन्धों के अन्तर्गत श्री इकरामुद्दीन करीमउद्दीन को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा नगर पंचायत उन्हेल , जिला उज्जैन- का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिए इस आदेश के तारीख से 5 वर्ष (पांच वर्ष) की कालावधि के लिए निरर्हित ( अयोग्य ) घोषित किया जाता है .

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,

हस्ता./- (रजनी उइके) सचिव

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.

2126

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1 भोपाल , दिनांक 19 अगस्त 2010

(लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था. नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है, उनके विरुद्ध एकपक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा.

क्र. एफ- 67-87-10- तीन- 2461.-मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने , नामनिर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा.

श्री बाबूलाल भेरूलाल को नोटिस दिनांक 19-2-2010 को तामील कराया गया. अतः उनको दिनांक 6-3-2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था. किन्तु उनके द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गंया. नोटिस की तामीली उपरांत कलेक्टर, उज्जैन ने अपने पत्र दिनांक 19-4-2010 में लेख किया कि " श्री बाबूलाल भेरूलाल को आपके द्वारा जारी कारण बताओ सूचना पत्र की तामील होने के पश्चात् उक्त अभ्यर्थी द्वारा आज दिनांक तक अपना निर्वाचन व्यय लेखा/अभ्यावेदन इस कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किया है. " आयोग द्वारा दिनांक 14-6-2010 को अभ्यर्थी को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक 26-6-2010 को उपस्थित होने हेतु पत्र लिखा गया. व्यक्तिगत सुनवाई हेतु जारी सूचना- पत्र की तामीली कलेक्टर, उज्जैन द्वारा दिनांक 23-6-2010 को कराई गई, किन्तु अभ्यर्थी उपस्थित नहीं हुए.

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी " निर्वाचन व्यय ( लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश , 1997 " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण) दिनांक 6 जून 1997 में प्रकाशित हुआ है . उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.

उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं . अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है .

अतः मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - ग के उपबन्धों के अन्तर्गत श्री बाबूलाल भेरूलाल को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा नगर पंचायत उन्हेल, जिला उज्जैन का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिए इस आदेश के तारीख से 5 वर्ष (पांच वर्ष) की कालावधि के लिए निरर्हित ( अयोग्य ) घोषित किया जाता है .

माह दिसम्बर 2009 में सम्पन्न हुए नगर पंचायत उन्हेल, जिला उज्जैन के आम निर्वाचन में श्री बाबूलाल भेरूलाल, अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे. नगर पंचायत उन्हेल , जिला उज्जैन के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 17-12-2009 को घोषित हुआ. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् 16-1-2010 तक, किन्तु 16-1-2010 एवं 17-1-2010 को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण 18-1-2010 तक, इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , उज्जैन के पास दाखिल किया जाना था किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी उज्जैन के पत्र क्र. स्था.निर्वा./ 10/385 , दिनांक 21 जनवरी 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार श्री बाबूलाल भेरूलाल द्वारा विहित समय में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,

हस्ता./- (रजनी उइके ) सचिव

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.

विहित समयावधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत न करने का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर श्री बाबूलाल भेरूलाल को कारण बताओ सूचना- पत्र दिनांक 2-2-2010 जारी कर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , उज्जैन के माध्यम से दिनांक 19 2 2010 को तामील कराया गया. कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी से जवाब भाग 1 ]

2127

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

भोपाल , दिनांक 19 अगस्त 2010

क्र. एफ-67-87-10- तीन- 2462.- मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने , नामनिर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो , पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा.

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी " निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश , 1997 " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) दिनांक 6 जून 1997 में प्रकाशित हुआ है . उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.

माह दिसम्बर 2009 में सम्पन्न हुए नगर पंचायत उन्हेल , जिला उज्जैन के आम निर्वाचन में श्री शाकीरउद्यीन शमीम उद्यीन जागीरदार, अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे. नगर पंचायत उन्हेल , जिला उज्जैन के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 17-12-2009 को घोषित हुआ. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् 16-1-2010 तक, किन्तु 16-1-2010 एवं 17-1-2010 को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण 18-1-2010 तक, इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , उज्जैन के पास दाखिल किया जाना था किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी उज्जैन के पत्र क्र. स्था.निर्वा./10/385 , दिनांक 21 जनवरी 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार श्री शाकीरउद्यीन शमीम उद्यीन जागीरदार द्वारा विहित समय में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.

विहित समयावधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत न करने का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर श्री शाकीरउद्यीन शमीम उद्यीन जागीरदार को कारण बताओ सूचना पत्र दिनांक 2-2-2010 जारी कर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , उज्जैन के माध्यम से दिनांक 18-2-2010 को तामील कराया गया. कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी से जवाब ( लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था. नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है , उनके विरुद्ध एकपक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा.

श्री शाकीरउद्यीन शमीम उद्यीन जागीरदार को नोटिस दिनांक 18-2-2010 को तामील कराया गया . अतः उनको दिनांक 5-3-2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था . किन्तु उनके द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया. नोटिस की तामीली उपरांत कलेक्टर, उज्जैन ने अपने पत्र दिनांक 19-4-2010 में लेख किया कि " श्री शाकीरउद्यीन शमीम उद्यीन जागीरदार को आपके द्वारा जारी कारण बताओ सूचना पत्र को तामील होने के पश्चात् उक्त अभ्यर्थी द्वारा आज दिनांक तक अपना निर्वाचन व्यय लेखा/ अभ्यावेदन इस कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किया है . " आयोग द्वारा दिनांक 14-6-2010 को अभ्यर्थी को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक 26-6-2010 को उपस्थित होने हेतु पत्र लिखा गया. व्यक्तिगत सुनवाई हेतु जारी सूचना - पत्र की तामीली कलेक्टर, उज्जैन द्वारा दिनांक 23-6-2010 को कराई गई, किन्तु अभ्यर्थी उपस्थित नहीं हुए.

उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं. अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है .

अतः मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ग के उपबन्धों के अन्तर्गत श्री शाकीरउद्यीन शमीम उद्यीन जागीरदार को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा नगर पंचायत उन्हेल , जिला उज्जैन का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिए इस आदेश के तारीख से 5 वर्ष ( पांच वर्ष ) की कालावधि के लिए निरर्हित ( अयोग्य ) घोषित किया जाता है .

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,

हस्ता./- ( रजनी उइके )

सचिव मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.

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मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1 भोपाल , दिनांक 19 अगस्त 2010

से जवाब ( लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था. नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है, उनके विरुद्ध एकपक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा.

क्र. एफ-67-168-10- तीन-2467. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने , नामनिर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा, मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा.

श्री अशोक कुमार बिदुआ को नोटिस दिनांक 6-3-2010 को तामील कराया गया. अतः उनको दिनांक 21-3-2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था . किन्तु उनके द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया. नोटिस की तामीली उपरांत कलेक्टर, टीकमगढ़ ने अपने पत्र दिनांक 4-5-2010 में लेख किया कि " श्री अशोक कुमार बिदुआ को जारी कारण बताओ नोटिस की तामीली के पश्चात् नोटिस में उल्लिखित अवधि में अपना निर्वाचन व्यय लेखा/ अभ्यावेदन इस कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किया गया है . ". आयोग द्वारा दिनांक 31-5-2010 को अभ्यर्थी को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक7-6-2010 को उपस्थित होने हेतु पत्र लिखा गया. व्यक्तिगत सुनवाई हेतु जारी सूचना - पत्र की तामीली कलेक्टर, टीकमगढ़ द्वारा दिनांक 5-6-2010 को कराई गई, किन्तु अभ्यर्थी उपस्थित नहीं हुए.

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी " निर्वाचन व्यय ( लेखा संधारण और प्रस्तुति ) आदेश , 1997 " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) दिनांक 6 जून 1997 में प्रकाशित हुआ है . उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.

उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं. अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है .

माह दिसम्बर 2009 में सम्पन्न हुए नगर पंचायत जैरोन खालसा, जिला टीकमगढ़ के आम निर्वाचन में श्री अशोक कुमार बिदुआ, अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे. नगर पंचायत जैरोन खालसा , जिला टीकमगढ़ के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 15-12-2009 को घोषित हुआ. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् 14-1-2010 तक, इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , टीकमगढ़ के पास दाखिल किया जाना था किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , टीकमगढ़ के पत्र क्र. न.नि./व्यय लेखा/10/406, दिनांक 29 जनवरी 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार श्री अशोक कुमार बिदुआ द्वारा विहित समय में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.

अतः मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ग के उपबन्धों के अन्तर्गत श्री अशोक कुमार बिदुआ को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा नगर पंचायत जैरोन खालसा , जिला टीकमगढ़ का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिए इस आदेश के तारीख से 5 वर्ष (पांच वर्ष ) की कालावधि के लिए निरर्हित ( अयोग्य ) घोषित किया जाता है .

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार ,

हस्ता./-

(रजनी उइके)

सचिव विहित समयावधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत न करने का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर श्री अशोक कुमार बिदुआ को कारण बताओ सूचना पत्र दिनांक 18-2-2010 जारी कर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , टीकमगढ़ के माध्यम से दिनांक 6-3-2010 को तामील कराया गया. कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल .

भाग 1 ]

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

भोपाल , दिनांक 19 अगस्त 2010

से जवाब ( लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था. नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है , उनके विरुद्ध एकपक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा..

क्र. एफ-67-168-10-तीन- 2468.- मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नामनिर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा.

`श्री फूल सिंह यादव को नोटिस दिनांक 5-3-2010 को तामील कराया गया. अतः उनको दिनांक 20-3-2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था . किन्तु उनके द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया. नोटिस की तामीली उपरांत कलेक्टर, टीकमगढ़ ने अपने पत्र दिनांक 4-5-2010 में लेख किया कि " श्री फूल सिंह यादव को जारी कारण बताओ नोटिस की तामीली के पश्चात् नोटिस में उल्लिखित अवधि में अपना निर्वाचन व्यय लेखा/ अभ्यावेदन इस कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किया है . " आयोग द्वारा दिनांक 31-5-2010 को अभ्यर्थी को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज़ लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक 7-6-2010 को उपस्थित होने हेतु पत्र लिखा गया. व्यक्तिगत सुनवाई हेतु जारी सूचना- पत्र की तामीली कलेक्टर , टीकमगढ़ द्वारा दिनांक 5-6-2010 को कराई गई, किन्तु अभ्यर्थी उपस्थित नहीं हुए .

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी " निर्वाचन व्यय ( लेखा संधारण और प्रस्तुति ) आदेश , 1997 " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) दिनांक 6 जून 1997 में प्रकाशित हुआ है. उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.

उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं. अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है .

माह दिसम्बर 2009 में सम्पन्न हुए नगर पंचायत जैरोन खालसा, जिला टीकमगढ़ के आम निर्वाचन में श्री फूल सिंह यादव, अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे. नगर पंचायत जैरोन खालसा , जिला टीकमगढ़ के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 15-12-2009 को घोषित हुआ. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात्14-1-2010 तक, इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , टीकमगढ़ के पास दाखिल किया जाना था किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , टीकमगढ़ के पत्र क्र. न.नि./व्यय लेखा/ 10/406 , दिनांक 29 जनवरी 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार श्री फूल सिंह यादव द्वारा विहित समय में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.

अतः मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ग के उपबन्धों के अन्तर्गत श्री फूल सिंह यादव को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा नगर पंचायत जैरोन खालसा , जिला टीकमगढ़ का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिए इस आदेश के तारीख से 5 वर्ष (पांच वर्ष ) की कालावधि के लिए निरर्हित ( अयोग्य ) घोषित किया जाता है .

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,

हस्ता./-

(रजनी उइके)

सचिव

विहित समयावधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत न करने का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर श्री फूल सिंह यादव को कारण बताओ सूचना पत्र दिनांक 18-2-2010 जारी कर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी टीकमगढ़ के माध्यम से दिनांक 5-3-2010 को तामील कराया गया. कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.

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[भाग 1

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

भोपाल, दिनांक 19 अगस्त 2010

क्र. एफ-67-171-10-तीन- 2472.- मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा.

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा " निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति ) आदेश 1997 " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण) दिनांक 6 जून 97 में प्रकाशित हुआ है. उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.

माह दिसम्बर 2009 में सम्पन्न हुए नगर पंचायत पलेरा , जिला टीकमगढ़ के आम निर्वाचन में श्री खटीक जगन्नाथ , अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थे. नगर पंचायत पलेरा , जिला टीकमगढ़ के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 17-12-2009 की घोषित हुआ. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् 16-1-2010 तक, किन्तु 16-1-2010 एवं 17-1-2010 को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण 18-1-2010 तक , इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी टीकमगढ़ के पास दाखिल किया जाना था किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी टीकमगढ़ के पत्र क्र. न.नि. /व्यय लेखा/ 10/406 , दिनांक 29 जनवरी 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार श्री खटीक जगन्नाथ द्वारा विहित समय में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.

विहित समयावधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत न करने का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर श्री खटीक जगन्नाथ को कारण बताओ सूचना-पत्र क्र. एफ 67-171/ 2010/ तीन/ 1182 , दिनांक 22-2-2010 जारी कर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी टीकमगढ़ के माध्यम से दिनांक 9-4-2010 को तामील कराया गया. कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी से जवाब ( लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था. नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना .है , उनके विरुद्ध एक पक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा .

श्री खटीक जगन्नाथ को नोटिस दिनांक 9-4-2010 को तामील कराया गया. अतः उनको दिनांक 24-4-2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था . किन्तु उनके द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया. नोटिस की तामीली उपरांत कलेक्टर, टीकमगढ़ ने अपने पत्र दिनांक 4-5-2010 में लेख किया कि " श्री खटीक जगन्नाथ के द्वारा तामील उपरांत व्यय लेखा/ अभ्यावेदन इस कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किये गये. ". आयोग द्वारा दिनांक 15-6-2010 को श्री खटीक जगन्नाथ को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक 26-6-2010 को उपस्थित होने हेतु पत्र लिखा गया. अभ्यर्थी स्वयं उपस्थित हुए. लिखित जवाब में उल्लेखित किया है कि " मेरी पत्नी का बहुत अधिक बीमार पड़ने से समय पर आपके सामने पेश नहीं हो पाये. ". उनके द्वारा प्रस्तुत कारण संतोषप्रद नहीं पाए गए.

उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं . अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है.

अतः मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - ग के उपबन्धों के अन्तर्गत श्री खटीक जगन्नाथ को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा नगर पंचायत पलेरा , जिला टीकमगढ़ का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिए इस आदेश के तारीख से 03 वर्ष (तीन वर्ष) की कालावधि के लिए निरर्हित ( अयोग्य ) घोषित किया जाता है .

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,

हस्ता./-

(रजनी उइके )

सचिव

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.

भाग 1 ]

2131

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

भोपाल, दिनांक 19 अगस्त 2010

तामील कराया गया. कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी से जवाब (लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था. नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है , उनके विरुद्ध एक पक्षीय आंदेश पारित कर दिया जायेगा.

क्र. एफ- 67-170-10-तीन- 2474.- मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने , नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो , पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा .

सुश्री रंजना देवी मिश्रा को नोटिस दिनांक 24-3-2010 को तामील कराया गया. अतः उनको दिनांक 8-4-2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था . किन्तु उनके द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया. नोटिस की तामीली उपरांत कलेक्टर, टीकमगढ़ ने अपने पत्र दिनांक 4-5-2010 में लेख किया कि "सुश्री रंजना देवी मिश्रा को जारी कारण बताओ नोटिस की तामीली के पश्चात् नोटिस में उल्लेखित अवधि में अपना निर्वाचन व्यय लेखा/ अभ्यावेदन इस कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किया गया है . आयोग द्वारा दिनांक 31-5-2010 को अभ्यर्थी को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक 7-6-2010 को उपस्थित होने हेतु पत्र लिखा गया. व्यक्तिगत सुनवाई हेतु जारी सूचना- पत्र की तामीली कलेक्टर, टीकमगढ़ द्वारा, दिनांक 5-6-2010 को कराई गई, किन्तु अभ्यर्थी उपस्थित नहीं हुई.

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा " निर्वाचन व्यय ( लेखा संधारण और प्रस्तुति ) आदेश 1997 " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) दिनांक 6 जून 97 में प्रकाशित हुआ है . उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.

उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं . अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है.

अतः मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ग के उपबन्धों के अन्तर्गत सुश्री रंजना देवी मिश्रा को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा नगर पंचायत बडागांव धसान , जिला टीकमगढ़ का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिए इस आदेश के तारीख से 5 वर्ष (पांच वर्ष) की कालावधि के लिए निरर्हित ( अयोग्य ) घोषित किया जाता है.

माह दिसम्बर 2009 में सम्पन्न हुए नगर पंचायत बडागांव धसान, जिला टीकमगढ़ के आम निर्वाचन में सुश्री रंजना देवी मिश्रा , अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थीं. नगर पंचायत बडागांव धसान , जिला टीकमगढ के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 17-12-2009 की घोषित हुआ . मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात्16-1-2010 तक, किन्तु 16-1-2010 एवं 17-1-2010 को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण दिनांक 18-1-2010 तक, इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी टीकमगढ़ के पास दाखिल किया जाना था किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी टीकमगढ़ के पत्र क्र. न.नि. /व्यय लेखा/ 10/406, दिनांक 29 जनवरी 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार सुश्री रंजना देवी मिश्रा द्वारा विहित समय में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,

हस्ता./-

(रजनी उड़के )

सचिव

विहित समयावधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत न करने का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर सुश्री रंजना देवी मिश्रा को कारण बताओ सूचना पत्र दिनांक 16-2-2010 जारी कर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी टीकमगढ़ के माध्यम से दिनांक 24-3-2010 को

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1 भोपाल, दिनांक 19 अगस्त 2010

तामील कराया गया. कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी से जवाब (लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था. नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है , उनके विरुद्ध एक पक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा.

क्र. एफ-67-170-10- तीन- 2475.- मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा.

सुश्री गिरजा बाई लोधी को नोटिस दिनांक 26-3-2010 को तामील कराया गया. अतः उनको दिनांक 10-4-2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था . किन्तु उनके द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया. नोटिस की तामीली उपरांत कलेक्टर, टीकमगढ़ ने अपने पत्र दिनांक 4-5-2010 में लेख किया कि अभ्यर्थी को जारी कारण बताओ नोटिस की तामीली के पश्चात् नोटिस में उल्लिखित अवधि में अपना निर्वाचन व्यय लेखा/ अभ्यावेदन इस कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किया गया है . आयोग द्वारा दिनांक 31-5-2010 को अभ्यर्थी को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक 7-6-2010 को उपस्थित होने हेतु पत्र लिखा गया. व्यक्तिगत सुनवाई हेतु जारी सूचना- पत्र की तामीली कलेक्टर, टीकमगढ़ द्वारा दिनांक 5-6-2010 को कराई गई, किन्तु अभ्यर्थी उपस्थित नहीं हुई .

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा " निर्वाचन व्यय ( लेखा संधारण और प्रस्तुति ) आदेश 1997 " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) दिनांक 6 जून 97 में प्रकाशित हुआ है. उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.

उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं. अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है.

अतः मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - ग के उपबन्धों के अन्तर्गत सुश्री गिरजा बाई लोधी को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा नगर पंचायत बडागांव धसान, जिला टीकमगढ़ का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिए इस आदेश के तारीख से 5 वर्ष (पांच वर्ष ) की कालावधि के लिए निरर्हित ( अयोग्य ) घोषित किया जाता है.

माह दिसम्बर 2009 में सम्पन्न हुए नगर पंचायत बडागांव धसान, जिला टीकमगढ़ के आम निर्वाचन में सुश्री गिरजा बाई लोधी , अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थीं . नगर पंचायत बडागांव धसान , जिला टीकमगढ़ के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 17-12-2009 को घोषित हुआ. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात्16-1-2010 तक, किन्तु 16-1-2010 एवं 17-1-2010 को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण 18-1-2010 तक, इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी टीकमगढ़ के पास दाखिल किया जाना था किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी टीकमगढ़ के पत्र क्र. न.नि. /व्यय लेखा/ 10/406 , दिनांक 29 जनवरी 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार सुश्री गिरजा बाई लोधी द्वारा विहित समय में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,

हस्ता./- (रजनी उइके ) सचिव विहित समयावधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत न करने का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर सुश्री गिरजा बाई लोधी को क..ण बताओ सूचना- पत्र दिनांक 16-2-2010 जारी कर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी टीकमगढ़ के माध्यम से दिनांक 26-3-2010 को

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.

2133 भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

भोपाल , दिनांक 19 अगस्त 2010

(लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था. नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है , उनके विरुद्ध एक पक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा.

क्र. एफ- 67-86-10-तीन- 2477.- मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने , नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो , पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा.

सुश्री जमीला बानो को नोटिस दिनांक 6-2-2010 को तामील कराया गया. अतः उनको दिनांक 21-2-2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था. किन्तु उनके द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया. नोटिस की तामीली उपरांत कलेक्टर, उज्जैन ने अपने पत्र दिनांक 29-3-2010 में लेख किया कि " सुश्री जमीला बानो द्वारा आज दिनांक तक अपना निर्वाचन व्यय लेखा/ अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया है. ". आयोग द्वारा दिनांक 15-6-2010 को अभ्यर्थी को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक 26-6-2010 को उपस्थित होने हेतु पत्र लिखा गया. व्यक्तिगत सुनवाई हेतु जारी सूचना - पत्र की तामीली कलेक्टर, उज्जैन द्वारा दिनांक 23-6-2010 को कराई गई, किन्तु अभ्यर्थी उपस्थित नहीं हुईं.

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा " निर्वाचन व्यय ( लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 1997 " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) दिनांक 6 जून 97 में प्रकाशित हुआ है . उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.

उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं. अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है.

अतः मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों के अन्तर्गत सुश्री जमीला बानो को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा नगरपालिका परिषद् महिदपुर , जिला उज्जैन का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिए इस आदेश के तारीख से 5 वर्ष (पांच वर्ष) की कालावधि के लिए निरर्हित ( अयोग्य ) घोषित किया जाता है.

माह दिसम्बर 2009 में सम्पन्न हुए नगरपालिका परिषद् महिदपुर, जिला उज्जैन के आम निर्वाचन में सुश्री जमीला बानो , अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थीं. नगरपालिका परिषद् महिदपुर , जिला उज्जैन के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 17-12-2009 को घोषित हुआ. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् 16-1-2010 तक, किन्तु 16-1-2010 एवं 17-1-2010 को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण 18-1-2010 तक, इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी उज्जैन के पास दाखिल किया जाना था किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी उज्जैन के पत्र क्र. स्था. निर्वा./ 10/385 , दिनांक 21 जनवरी 2010 केद्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार सुश्री जमीला बानो द्वारा विहित समय में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,

हस्ता./-

(रजनी उड़के)

सचिव

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.

विहित समयावधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत न करने का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर सुश्री जमीला बानो को कारण बताओ सूचना- पत्र दिनांक 27-1-2010 जारी कर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी उज्जैन के माध्यम से दिनांक 6-2-2010 को तामील कराया गया . कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी से जवाब 2134

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1

राज्य शासन के आदेश

राजस्व विभाग

कार्यालय , कलेक्टर, जिला खण्डवा, मध्यप्रदेश एवं पदेन अपर सचिव , मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग

खण्डवा , दिनांक 28 जून 2010

भू-अर्जन-प्र. क्र. 50-अ- 82-09-10.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा, सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा, अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारियों को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( क ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) तथा उपधारा ( 4 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होंगे :-

अनुसूची

भूमिका वर्णन

जिला तहसील नगर/ग्राम

सार्वजनिक प्रयोजन कावर्णन

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में)

(2)

(3)

(4)

(5)

(6) (1) खण्डवा

आरोदा रैयत

1.78

पुनासा

कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक 25, नर्मदानगर .

पुनासा उद्वहन सिंचाई योजना के अंतर्गत वितरण पाईप लाईन के निर्माण हेतु.

(2) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी , खण्डवा/कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-25 , नर्मदानगर के कार्यालय में किया जा सकता है.

खण्डवा, दिनांक 5 अगस्त 2010

प्र. क्र. 1 - अ- 82-2009-2010.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा, अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है : -

अनुसूची

जिला तहसील

भूमि का वर्णन नगर/ग्राम

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन

धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी

लगभग क्षेत्रफल (वर्गमीटर में)

(2)

(3)

(1) खण्डवा हरसूद हरिपुरा

(5) कार्यपालन यंत्री , नर्मदा विकास संभाग क्रमांक 13 , खण्डवा.

(4) 47.53 वर्गमीटर एवं उस पर स्थित संपत्ति.

(6) इंदिरा सागर परियोजना के बीडब्ल्यूएल अंतर्गत डूब में आने के कारण.

नोट. भूमि के नक्शे व ( प्लान ) आदि ( 1 ) कार्यालय कलेक्टर, जिला खण्डवा, ( 2 ) कार्यालय, कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्र. - 13 , खण्डवा, ( 3 ) कार्यालय, भू-अर्जन एवं पुनर्वास अधिकारी , इंदिरा सागर परियोजना क्र. - 1 , खण्डवा में देखा जा सकता है.

भाग 1 ]

2135

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

प्र. क्र. 2- अ - 82-2009-2010.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक , सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा, सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है :-

अनुसूची

भूमि का वर्णन

जिला तहसील

ग्राम

सार्वजनिक प्रयोजन कावर्णन

धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में)

(1) (2)

(3)

(4)

(5)

(6) खण्डवा

हरसूद हरिपुरा

कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक 13 , खण्डवा.

इंदिरा सागर परियोजना के एफ आर एल अंतर्गत डूब में आने के कारण.

3.43 हे . एवं उस पर स्थित संपत्तियाँ एवं परिसंपत्तियां.

नोट.- भूमि के नक्शे व ( प्लान ) आदि ( 1 ) कार्यालय, कलेक्टर, जिला खण्डवा, ( 2 ) कार्यालय, कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्र. - 13 , खण्डवा, ( 3 ) कार्यालय , भू- अर्जन एवं पुनर्वास अधिकारी , इंदिरा सागर परियोजना क्र. -1 , खण्डवा में देखा जा सकता है.

प्र. क्र. 3 - अ-82-2009-2010.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है :-

अनुसूची

भूमिका वर्णन

तहसील

जिला

ग्राम

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन

धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में)

(1)

(2)

(3)

(4)

(5)

(6) खण्डवा

बरमलाय

हरसूद

कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक 13 , खण्डवा.

इंदिरा सागर परियोजना के एफ आर एल अंतर्गत डूब में आने के कारण.

4.21 हे. एवं उस पर स्थित संपत्तियां एवं परिसंपत्तियां.

नोट.- भूमि के नक्शे व ( प्लान ) आदि ( 1 ) कार्यालय , कलेक्टर, जिला खण्डवा, ( 2 ) कार्यालय , कार्यपालन यंत्री , नर्मदा विकास संभाग क्र. - 13 , खण्डवा, ( 3 ) कार्यालय , भू-अर्जन एवं पुनर्वास अधिकारी , इंदिरा सागर परियोजना क्र. - 1 , खण्डवा में देखा जा सकता है.

खण्डवा, दिनांक 9 अगस्त 2010

प्र. क्र. 1- अ-82-2009-10. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक , सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, सभी संबंधित व्यक्तियों को इसके द्वारा , इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि 2136

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1 के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है :-

भूमिका वर्णन

जिला तहसील

ग्राम

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

(3)

(1)

(2)

(4) खण्डवा

एखण्ड

पुनासा

शासकीय भूमि खसरा नंबर 238 पर स्थित मकान कच्चा-01 .

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन कावर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी

(5)

(6)

कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक 32 , बड़वाह.

औंकारेश्वर परियोजना के अन्तर्गत F.R.L.-B.W.L. के मध्य डूब प्रभावित होने के कारण.

नोट.- भूमि का नक्शा व ( प्लान ) आदि ( 1 ) कार्यालय , कलेक्टर, जिला खण्डवा, ( 2 ) कार्यालय, कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्र. - 32 , बड़वाह ( म.प्र. ) , ( 3 ) कार्यालय , भू-अर्जन एवं पुनर्वास अधिकारी , एन.एच.डी.सी. औंकारेश्वर क्र. 1 मुख्यालय , खण्डवा में देखा जा सकता है.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार , डी.डी. अग्रवाल , कलेक्टर एवं पदेन अपर सचिव.

कार्यालय , कलेक्टर, जिला रायसेन, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग

रायसेन, दिनांक 9 जुलाई 2010

प्र. क्र. 06 - अ- 82-2009-2010.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है: -

भूमि का वर्णन

अनुसूची

लगभग क्षेत्रफल ( एकड़ में )

जिला (1)

तहसील (2)

नगर/ग्राम (3)

(4)

रकबा

ख. न .

रायसेन गौहरगंज

115/2

4.00

सिंगपुर

119/3

इमलिया स्पल चेनल

119/4

2.50 0.65

118/4

2.50

धारा 4 (2 ) के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी (5)

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन (6) अर्जित किया जाने वाला रकबा

कार्यपालन यंत्री,

सिंगपुर इमलिया 0.80 0.75

0.30

जल संसाधन विभाग, रायसेन.

तालाब एवं स्पल चेनलके निर्माण हेतु.

0.08 1.93

योग .. 9.65

तालाब

4.00

119/7

4.95

120 121

0.90

0.20 4.95 0.90 भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

(1) . (2)

(3)

(4)

122

1.00

123

2.50

125

3.25

124

2.18

126

1.00

119/6

7.26

योग .. 27.04

36.69

महायोग

2137

(5).

(6) 1.00

2.50

3.25

2.18

1.00

0.16

16.14

18.07

टीप.- भूमि का नक्शा ( प्लान ) एवं अर्जित की जाने वाली भूमि का विवरण अनुविभागीय अधिकारी , गौहरगंज के कार्यालय में देखा जा सकता है.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आंदेशानुसार, सुनीता त्रिपाठी, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.

कार्यालय , कलेक्टर, जिला शिवपुरी , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग

शिवपुरी , दिनांक 19 जुलाई 2010

क्र. क्यू- भू- अर्जन- 13-09-10-अ- 82.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 7 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा. 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, सभी संबंधित व्यक्तियों को, इसके द्वारा , इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के सम्बन्ध में, उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-

अनुसूची

भूमि का वर्णन

जिला

नगर/ग्राम

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी

लगभग क्षेत्रफल

(हेक्टर में)

(1)

तहसील/ तालुक (2)

(3)

खसरा नंबर (4)

(5) नरवर

रामनगर

150

0.08

शिवपुरी

151/1

0.08

(गधाई)

156

0.09

157

0.34

161

0.14

166/2

0.40

167/1

0.11

168/1

0.11

169/1

0.10

170

0.27

178

0.35

179/1

0.13

180

0.10

182

1.25 (6)

(7)

सिंध परियोजना दायां तट नहर (महुअर नदी तक) तथा 1 आर माइनर के निर्माण हेतु.

कार्यपालन यंत्री, सिंध परियोजना दायां तट नहर संभाग , करैरा , जिला शिवपुरी.

2138

(1)

(2)

(4)

183

184

185

197 、

198

202/3

202/4

202/5

203/3

203/4

203/5

296

301

311

312

313

315

316

321

833

834

897

899

900

901

903

904

907

908

909

910

911

912

917

918

962

964

965

967

968

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1 (5)

(6)

(7) 0.15

0.09

0.60

0.11

0.44

0.12

0.08

0.08

0.31

0.03

0.02

0.10

0.28

0.01

0.13

0.08

0.08

0.08

0.05

0.02

0.02

0.43

0.09

0.07

1.15

0.10

0.29

0.06

0.11

0.11

0.02

0.25

0.47

0.15

0.01

0.02

0.14

0.27

0.37

0.40

10.94

कुल योग

भूमि का नक्शा (प्लान ) भू-अर्जन अधिकारी , शिवपुरी के कार्यालय में देखा जा सकता है.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, राजकुमार पाठक, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.

भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

2139 कार्यालय, कलेक्टर, जिला शाजापुर, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग

शाजापुर , दिनांक 20 जुलाई 2010

क्र. भू- अर्जन- 2010-520.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने क्रमांक ( 3 ) से (6 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 8 ) में बताये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता पड़ने की संभावना है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अधीन इसके द्वारा, सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा, अनुसूची के खाने ( 7 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है :-

अनुसूची

भूमि का वर्णन

तहसील

जिला

ग्राम

(1) (2)

(3)

भूमि का विवरण ( हेक्टर में ) शासकीय निजि योग (4) (5) (6)

4.97 शाजापुर नलखेड़ा लटूरी गेहलोत

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी

(7)

(8) 4.97

कार्यपालन यंत्री,

पीलिया खाल बांध नहर निर्माण हेतु.

जल संसाधन संभाग, आगर.

नोट - भूमि का नक्शा एवं ( प्लान ) का निरीक्षण , भू- अर्जन अधिकारी , सुसनेर के कार्यालय में किया जा सकता है .

क्र. भू- अर्जन- 2010-521.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने क्रमांक ( 3 ) से ( 6 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 8 ) में बताये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक , सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अधीन इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने (7 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है :-.

अनुसूची

भूमि का वर्णन

तहसील

ग्राम

जिंला

निजि (1) (2)

(3)

शासकीय (4)

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी

भूमि का विवरण ( हेक्टर में )

(5)

11.91

गुर्जरखेड़ी

शाजापुर नलखेड़ा

(7)

(8) योग ( 6)

11.91

पीलिया खाल बांध नहर निर्माण हेतु.

कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग, आगर.

नोट- भूमि का नक्शा एवं ( प्लान ) का निरीक्षण , भू-अर्जन अधिकारी , सुसनेर के कार्यालय में किया जा सकता है.

क्र. भू- अर्जन-2010-522.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने क्रमांक ( 3 ) से (6 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 8 ) में बताये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 (क्रमांक एक , सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अधीन इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना 2140

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1 दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा, अनुसूची के खाने ( 7 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है :-

भूमि का वर्णन जिला तहसील

ग्राम

शासकीय अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन

धारा 4 ( 2 ) के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी

भूमि का विवरण ( हेक्टर में )

निजी

(1) (2)

(3)

(4) शाजापुर सुसनेर धन्डेड़ा

योग

(5)

(6)

(7)

(8) 1.96

1.96

पीलिया खाल बांध नहर निर्माण हेतु.

कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग, आगर.

नोट- भूमि का नक्शा एवं ( प्लान ) का निरीक्षण , भू-अर्जन अधिकारी , सुसनेर के कार्यालय में किया जा सकता है.

क्र. भू- अर्जन- 2010-523. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने क्रमांक ( 1 ) से ( 6 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 8 ) में बताये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अधीन इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने (7 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है :-

भूमि का वर्णन तहसील

जिला

ग्राम

शासकीय अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी

निजी

भूमि का विवरण ( हेक्टर में )

योग

(1) (2)

(3)

(4)

गरेली

शाजापुर नलखेड़ा

(5)

(6)

(7)

(8) 9.56

9.56

पीलिया खाल बांध नहर निर्माण हेतु.

कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग, आगर.

नोट - भूमि का नक्शा एवं ( प्लान ) का निरीक्षण , भू-अर्जन अधिकारी , सुसनेर के कार्यालय में किया जा सकता है.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, शेखर वर्मा , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.

कार्यालय , कलेक्टर, जिला जबलपुर , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग

जबलपुर , दिनांक 6 अगस्त 2010

प्र. क्र. अ- 82-09-10-भू.अ. जबलपुर. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 , संशोधन , 1984 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, उसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने भाग 1 ]

2141

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

( 5) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-

अनुसूची

लगभग क्षेत्रफल जिला तहसील

भूमि का वर्णन ग्राम

अर्जित रकबा ( हेक्टर में ) (1)

(2) (3)

(4) पाटन

3.975 जबलपुर

पाटन प.ह.नं. 24 नं. बं. 100

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 की उपधारा ( 2 ) के द्वारा प्राधिकृत अधिकारी

(5)

(6)

कृषि उपज मंडी, पाटन के स्वतंत्र मंडी स्थापना.

सचिव, कृषि उपज मंडी समिति, शहपुरा भटौनी.

भूमि का नक्शा ( प्लान ) भू-अर्जन अधिकारी , जबलपुर के कार्यालय में देखा जा सकता है .

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, गुलशन बामरा , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.

कार्यालय, प्रशासक, भू- अर्जन एवं पुनर्वास , बाणसागर परियोजना, जिला रीवा , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग

रीवा , दिनांक 10 अगस्त 2010

क्र. 753- प्रशा.- भू-अर्जन-10-11.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में अर्जित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने के अनुसार इसके द्वारा संबंधित व्यक्तियों को इसके द्वारा, इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये अधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 - अ के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं :-

अनुसूची

भूमि का विवरण

जिला

ग्राम

तहसील

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में) (1) (2) (3)

(4)

बरों

रीवा

2.886 सिरमौर

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन

धारा 4( 2) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी

(5)

(6)

कार्यपालन यंत्री, अपर पुरवा नहर संभाग , रीवा ( म . प्र. ) .

बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत चचाई वितरक नहर की चचाई माइनर नं. 1 में आने वाली भूमि के लिए भूमि तथा उस पर स्थित संपत्तियों का अर्जन.

भूमि के नक्शे (प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .

2142

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1 क्र. 755- भू-अर्जन.- चूंकि , राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिए गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 - अ के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं : -

भूमिकाविवरण

जिला तहसील नगर/ग्राम अर्जित क्षेत्रफल लगभग (हेक्टर में) (1) (2) (3)

(4) रीवा सेमरिया वीरखाम

0.988 अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 (2) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी

(5)

(6)

कार्यपालन यंत्री, अपर पुरवा नहर संभाग, रीवा.

कोठी टोला माइनर के अंतर्गत आने वाली भूमि के लिए तथा उस पर स्थित सम्पत्तियों का अर्जन.

भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, प्रशासक, भू- अर्जन एवं पुनर्वास बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है..

रीवा , दिनांक 13 अगस्त 2010

क्र. 757 - भू-अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में अर्जित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने के अनुसार इसके द्वारा संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 -अ के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं :-

भूमिकाविवरण

जिला तहसील नगर/ग्राम लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में) (2)

(3)

(4) (1) रीवा सिरमौर

0.074

जुरौट

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी

(5)

(6)

कार्यपालन यंत्री, बाणसागर वितरिका नहर संभाग , रीवा ( म.प्र. ) .

बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत आने वाली क्योटी नहर की जुरौट माइनर में आने वाली भूमिके लिये तथा उस पर स्थित संपत्तियों का अर्जन.

भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, भू-अर्जन एवं पुनर्वास बाणसागर परियोजना के कार्यालय में देखा जा सकता है.

भाग 1 ]

2143

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

क्र. 759 - भू-अर्जन.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में अर्जित भूमि की , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने के अनुसार इसके द्वारा संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा, अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 - अ के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं :-

भूमिकाविवरण

जिला तहसील नगर/ग्राम लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में) (1) (2) (3)

(4)

0.113 सिरमौर

रीवा

संसारपुर जनं . 538

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन कावर्णन धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी

(6)

(5)

कार्यपालन यंत्री, बाणसागर वितरिका नहर संभाग , रीवा ( म.प्र.) .

बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत आने वाली क्योटी नहर की संसारपुर माइनर में आने वाली भूमि के लिये तथा उस पर स्थित संपत्तियों का अर्जन.

भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, प्रशासक, भू- अर्जन एवं पुनर्वास बाणसागर, परियोजना के कार्यालय में किया जा सकता है.

क्र. 763 - भू- अर्जन.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में अर्जित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने के अनुसार इसके द्वारा संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 - अ के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं :-

भूमिका विवरण

जिला तहसील नगर/ग्राम लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में)

(3)

(1)

(2)

(4)

0.032 रीवा सिरमौर फूलमुड़वार नं. 1.

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन कावर्णन धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी

(6)

(5)

कार्यपालन यंत्री, बाणसागर वितरिका नहर संभाग , रीवा ( म.प्र. ) .

बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत आने वाली क्योटी नहर की खैरा माइनर में आने वाली भूमिके लिये तथा उस पर स्थित संपत्तियों का अर्जन.

भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, प्रशासक, भू- अर्जन एवं पुनर्वास बाणसागर , परियोजना के कार्यालय में किया जा सकता है.

क्र. 781 - भू- अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4 ) अर्जित भूमि की अनुसूची के खाने (6) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता पड़ने 2144

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1 के अनुसार इसके द्वारा संबंधित व्यक्तियों को इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम के धारा 5 - अ के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं :-

अनुसूची

भूमि काविवरण

जिला तहसील नगर/ग्राम

सार्वजनिक प्रयोजन कावर्णन

धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में)

(1)

(2) (3)

(4)

(5)

(6) रीवा

2.838

बहुरीबाध -425

हुजूर

कार्यपालन यंत्री, अपर पुरवा नहर संभाग , रीवा ( म. प्र. ) .

बाणसागर परियोजना अन्तर्गत चेचाई वितरक नहर के खम्हरिया सब-माइनर नं. 2 में आने वाली भूमिके लिए , भूमि पर स्थित संपत्तियों का अर्जन.

भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.

मध्यप्रदेश. के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, आर. आर. वर्मा , प्रशासक एवं पदेन उपसचिव .

कार्यालय, कलेक्टर, जिला झाबुआ, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग

झाबुआ, दिनांक 12 अगस्त 2010

क्र. 2228 - भू- अर्जन-2010- रा.प्र.क्र. A-82-09-10. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इसके संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उल्लेखित किये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, सभी संबंधित व्यक्तियों को , इसके द्वारा इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-

अनुसूची

भूमिका वर्णन

जिला तहसील

ग्राम

सार्वजनिक प्रयोजन कावर्णन

धारा 4 की उपधारा ( 2) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में)

(1)

(2)

(3)

(4)

(5)

(6) पेटलावद पंथबोराली

झाबुआ

निजी भूमि 0.18

माही परियोजना की पंथबोराली माइनर नहर के निर्माण हेतु.

कार्यपालन यंत्री, माही परियोजना मुख्य बांध संभाग पेटलावद, जिला झाबुआ.

योग . 0.18

(2 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) , एवं भू- अर्जन अधिकारी , पेटलावद के कार्यालय में देखा जा सकता है .

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,

शोभित जैन, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.

भाग 1 ]

2145

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

कार्यालय , कलेक्टर, जिला छतरपुर, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग

छतरपुर , दिनांक 13 अगस्त 2010

प्र. क्र. 40 - अ-82-09-10.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के पद ( 6 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता हूं :-

अनुसूची

धारा 4 की उपधारा

भूमि का वर्णन

जिला तहसील

ग्राम लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

(3)

(1) (2)

(4)

13.821

गौहानी

छतरपुर गौरिहार

( 2)

( 2 ) द्वारा

सार्वजनिक प्रयोजन

का विवरण

अधिकृत अधिकारी

(6)

(5)

बरियारपुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत रावपुर अनुविभागीय अधिकारी , राजस्व लौड़ी.

माइनर एवं गौहानी माइनर हेतु.

सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- बरियारपुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत रावपुर माइनर एवं गौहानी माइनर का भू- अर्जन.

(3) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , तहसील कार्यालय , गौरिहार में किया जा सकता है.

प्र. क्र. 41 - अ-82-09-10 .- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 6 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता हूं :-

भूमि का वर्णन

जिला तहसील

ग्राम लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (2)

(3)

(1)

(4)

13.600

महोईकला

छतरपुर गौरिहार

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन

का विवरण

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा अधिकृत अधिकारी

(5)

(6)

राजस्व

अनुविभागीय अधिकारी, लौड़ी.

बरियारपुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत चकखडेहा वितरक नहर की माइनरों एवं सरबई वितरक नहर क्र. 2 की माइनर हेतु.

(2) सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- बरियारपुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत चकखडेहा वितरक नहर की माइनरों एवं सरबई वितरक नहर क्र. 2 की माइनर का भू-अर्जन.

(3) भूमि के नक्शे (प्लान ) का निरीक्षण, तहसील कार्यालय गौरिहार में किया जा सकता है .

2146

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1 प्र. क्र. 56- अ-82-09-10.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 6 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता हूं :-

भूमि का वर्णन

जिला तहसील

ग्राम लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) .

(2)

(1)

(3)

(4)

4.000 छतरपुर गौरिहार प्रतापपुरा

(2)

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन काविवरण

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा अधिकृत अधिकारी

(5)

(6)

अनुविभागीय अधिकारी , राजस्व लौड़ी. (

बरियारपुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत सरबई वितरक नहर क्र. 2 की माइनर सहित.

सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- बरियारपुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत सरबई वितरक नहर क्र. 2 की माइनर सहित का भू-अर्जन.

(3) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण, तहसील कार्यालय , गौरिहार में किया जा सकता है .

प्र. क्र. 98 - अ- 82-09-10.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 6 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता हूं :-

भूमि का वर्णन

जिला

ग्राम

तहसील

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

(3)

(1) (2)

(4)

उमरी

6.68 छतरपुर गौरिहार

(2)

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन का विवरण

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा अधिकृत अधिकारी

(5)

(6)

अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व लौड़ी.

बरियारपुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत उमरी माइनर हेतु.

सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- बरियारपुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत उमरी माइनर का भू-अर्जन.

(3) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , तहसील कार्यालय , गौरिहार में किया जा सकता है .

प्र. क्र. 99- अ- 82-09-10.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 6 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा भाग 1 ]

2147

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता हूं :-

अनुसूची

( 2 ) द्वारा

धारा 4 की उपधारा

भूमि का वर्णन

ग्राम

जिला तहसील

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

(4) (1)

(3)

(2)

8.17 गौरिहार

छतरपुर

कीरतपुरा

सार्वजनिक प्रयोजन का विवरण

अधिकृत अधिकारी

(6)

(5)

अनुविभागीय अधिकारी , राजस्व लौड़ी.

बरियापुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत कीरतपुर माइनर क्र. 1. एवं कीरतपुर माइनर क्र. 2 हेतु.

(2) सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- बरियारपुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत कीरतपुर माइनर क्र. 1 एवं कीरतपुर माइनर क्र. 2 का भू- अर्जन.

(3) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , तहसील कार्यालय , गौरिहार में किया जा सकता है.

प्र. क्र. 100- अ- 82-09-10.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 6 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक , सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के. उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता हूं :-

भूमि का वर्णन

ग्राम

तहसील

जिला

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

(3)

(4) (2)

(1)

7.56

नांद

गौरिहार

छतरपुर

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन का विवरण

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा अधिकृत अधिकारी

(6)

(5)

अनुविभागीय अधिकारी , राजस्व लौड़ी.

बरियापुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत नांद माइनर क्र. 1 एवं नांद माइनर क्र. 2 हेतु.

(2) सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- बरियारपुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत नांद माइनर क्र. 1 एवं नांद माइनर क्र. 2 का भू- अर्जन.

भूमि के नवशे ( प्लान ) का निरीक्षण, तहसील कार्यालय , गौरिहार में किया जा सकता है.

(3)

प्र . क्र. 101 - अ - 82-09-10.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 6 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन, इसके द्वारा, अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित 2148

[भाग 1

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता हूं :

अनुसूची

धारा 4 की उपधारा

भूमि का वर्णन

जिला तहसील

ग्राम लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (1) (2)

(4)

(3)

सडवाकोल

गौरिहार

1.79 छतरपुर

(2)

( 2 ) द्वारा

सार्वजनिक प्रयोजन का विवरण

अधिकृत अधिकारी

(5)

(6)

अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व लौड़ी.

बरियापुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत सडवाकोल माइनर हेतु.

सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- बरियारपुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत सडवाकोल माइनर का भू-अर्जन.

(3) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण, तहसील कार्यालय , गौरिहार में किया जा सकता है.

प्र. क्र. 102 - अ- 82-09-10.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) से (4) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 6 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता हूं :-

भूमि का वर्णन

ग्राम

जिला तहसील

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1) (2)

(3)

सिमरिया .

चंदला

(4) 2.71 छतरपुर

(2)

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन का विवरण

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा अधिकृत अधिकारी

(6)

(5)

अनुविभागीय अधिकारी , राजस्व लौड़ी.

बरियापुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत सिमरिया माइनर हेतु.

सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- बरियारपुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत सिमरिया माइनर का भू- अर्जन.

भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , तहसील कार्यालय , चंदला में किया जा सकता है.

(3 )

प्र. क्र. 103 - अ- 82-09-10.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 6 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा, अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता हूं :-

भूमि का वर्णन

ग्राम

जिला तहसील

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1) (2)

(4)

(3)

चंदला

11.785 छतरपुर

कमलपुरवा

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन . का विवरण

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा अधिकृत अधिकारी

(6)

(5)

अनुविभागीय अधिकारी , राजस्व लौड़ी.

बरियापुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत चंदला वितरक नहर की चंदला माइनर नं. 3 हर्रई माइनर कमलपुरवा सब-माइनर नं . 1 , 2 व 3 हेतु.

2149

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

भाग 1 ]

(2 ) सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- बरियारपुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत चंदला वितरक नहर की चंदला माइनर नं. 3 हर्रई माइनर कमलपुरवा सबमाइनर नं. 1 , 2 व 3 का भू-अर्जन .

(3) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , तहसील कार्यालय , चंदला में किया जा सकता है.

प्र. क्र. 104 - अ- 82-09-10.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 6 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता हूं :-

भूमि का वर्णन

ग्राम

जिला तहसील

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

(4) (1) (2)

(3)

10.325 चंदला विसनाखेड़ा

छतरपुर

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन का विवरण

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा अधिकृत अधिकारी

(6)

(5)

अनुविभागीय अधिकारी , राजस्व लौड़ी.

बरियापुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत चंदला वितरक नहर की चंदला माइनर नं. 3 हर्रई माइनर विसनाखेड़ा सबमाइनर नं. 1 व 2 हेतु.

(2) सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- बरियारपुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत चंदला वितरक नहर की चंदला माइनर नं. 3 हर्रई माइनर विसनाखेड़ा सबमाइनर नं. 1 व 2 का भू-अर्जन.

(3) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , तहसील कार्यालय , चंदला में किया जा सकता है.

प्र. क्र. 106- अ- 82-09-10.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 6 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम, 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है.. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता हूं:-

भूमि का वर्णन

जिला

ग्राम

तहसील

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (2)

(3)

(4) (1)

16.65 चंदला

कनवई

छतरपुर

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन काविवरण

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा अधिकृत अधिकारी

(6)

(5)

अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व लौड़ी.

बरियापुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत चंदला वितरक नहर की अमहा माइनर हर्रई माइनर, कनवई सबमाइनर नं. 1 व 2 हेतु.

(2) सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- बरियारपुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत चंदला वितरक नहर की अमहा माइनर, हर्रई माइनर, कनवई सबमाइनर नं. 1 व 2 का भू-अर्जन.

(3) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , तहसील कार्यालय , चंदला में किया जा सकता है .

2150

[भाग 1

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

प्र. क्र. 108 - अ- 82-09-10.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) से ( 4) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 6 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता हूं :-

भूमि का वर्णन

जिला तहसील

ग्राम लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1)

(3)

(4) (2)

5.825 चंदला

छतरपुर

घुरापुरवा

(2)

अनुसूची

( 2 ) द्वारा

सार्वजनिक प्रयोजन का विवरण

धारा 4 की उपधारा अधिकृत अधिकारी

(5)

(6)

अनुविभागीय अधिकारी , राजस्व लौड़ी.

बरियारपुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत अमहा वितरक नहर एवं घुरापुरवा सबमाइनर हेतु.

सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- बरियारपुर बायीं नहर की उमराहा शाखा नहर के अंतर्गत अमहा वितरक नहर एवं घुरापुरवा सबमाइनर का भू-अर्जन.

(3) भूमि के नक्शे (प्लान ) का निरीक्षण, तहसील कार्यालय , चंदला में किया जा सकता है.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, ई. रमेश कुमार, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.

कार्यालय , कलेक्टर, जिला उज्जैन , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग

उज्जैन , दिनांक 16 अगस्त 2010

क्र. भूमि संपादन- 2010-6552.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4. की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को, इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के सम्बन्ध में, उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) के द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-

भूमि का वर्णन

जिला

नगर/ग्राम

तहसील

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (2)

(1)

(3)

(4)

4.047 उज्जैन घट्टिया भदेड़मयचक

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन

धारा 4 ( 2 ) के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी

(5)

(6)

भू-अर्जन अधिकारी, तहसील घट्टिया.

उज्जैन- उन्हेल-नागदा-घिनोदा- जावरा बी.ओ.टी. टू-लेन मार्ग निर्माण हेतु निजी भूमि का अर्जन.

भूमि का नक्शा ( प्लान ) कार्यालय , अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी , घट्टिया में देखा जा सकता है .

2151

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

भाग 1 ]

क्र. भूमि संपादन - 2010-6553. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को, इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा, अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के सम्बन्ध में, उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) के द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-

भूमि का वर्णन

तहसील

नगर/ग्राम

जिला

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

(3)

(4) (2)

(1)

0.76

चकरावदा

उज्जैन घट्टिया

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन

धारा 4 ( 2 ) के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी

(6)

(5)

भू-अर्जन अधिकारी, तहसील घट्टिया.

उज्जैन-उन्हेल-नागदा- घिनोदा- जावरा बी.ओ.टी. टू-लेन मार्ग निर्माण हेतु निजी भूमि का अर्जन.

भूमि का नक्शा ( प्लान ) कार्यालय , अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी , घट्टिया में देखा जा सकता है.

क्र. भूमि संपादन - 2010-6554.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को , इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के सम्बन्ध में , उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) के द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-

भूमि का वर्णन

नगर/ग्राम

तहसील

जिला

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

(4)

( 3 )

(1) (2)

2.280 उज्जैन घट्टिया मौजमखेड़ी

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन

धारा 4 (2 ) के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी

(6)

(5)

भू-अर्जन अधिकारी, तहसील घट्टिया.

उज्जैन उन्हेल-नागदा- घिनोदा- जावरा बी.ओ.टी. टू- लेन मार्ग निर्माण हेतु निजी भूमि का अर्जन.

भूमि का नक्शा ( प्लान ) कार्यालय , अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी , घट्टिया में देखा जा सकता है.

2152

मध्यप्रदेश राजपंत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1 क्र. भूमि संपादन- 2010-6555.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को, इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के सम्बन्ध में, उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) के द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है: -

भूमि का वर्णन

नगर/ग्राम

जिला तहसील

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (2)

(3)

(4) (1)

0.31 उज्जैन

रामगढ़

घट्टिया

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन

धारा 4 ( 2 ) के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी

(6)

(5)

भू-अर्जन अधिकारी, तहसील घट्टिया.

उज्जैन उन्हेल-नागदा- घिनोदा- जावरा बी.ओ.टी. टू-लेन मार्ग निर्माण हेतु निजी भूमि का अर्जन.

भूमि का नक्शा ( प्लान ) कार्यालय , अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी , घट्टिया में देखा जा सकता है.

क्र. भूमि संपादन-2010-6556 .- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा, सभी संबंधित व्यक्तियों को, इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के सम्बन्ध में, उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) के द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है: -

भूमि का वर्णन

जिला तहसील नगर/ग्राम लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1)

(3)

(2)

(4)

10.529 उज्जैन

कमेड़

घट्टिया

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन

धारा 4 ( 2 ) के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी

(5)

(6)

भू-अर्जन अधिकारी, तहसील घट्टिया.

उज्जैन- उन्हेल-नागदा-घिनोदा- जावरा बी.ओ.टी. टू-लेन मार्ग निर्माण हेतु ग्राम कमेड़ की अशासकीय निजी भूमि का अर्जन.

भूमि का नक्शा ( प्लान ) कार्यालय , अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी , घट्टिया में देखा जा सकता है.

2153

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

भाग 1 ]

क्र. भूमि संपादन - 2010-6557 .-चूंकि , राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को, इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के सम्बन्ध में , उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) के द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-

भूमि का वर्णन

जिला तहसील नगर/ग्राम लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) ( 2 )

(3)

(4) ( 1 )

उज्जैन

2.48

सोडंग

घट्टिया

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन

धारा 4 (2 ) के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी

(5)

(6)

भू-अर्जन अधिकारी , तहसील घट्टिया.

उज्जैन- उन्हेल-नागदा-घिनोदा- जावरा बी.ओ.टी. टू- लेन मार्ग निर्माण हेतु निजी भूमि का अर्जन .

भूमि का नक्शा ( प्लान ) कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी घट्टिया में देखा जा सकता है.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,

एम. गीता, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.

कार्यालय, कलेक्टर, जिला छिन्दवाड़ा, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग

छिन्दवाड़ा, दिनांक 17 अगस्त 2010

क्र. 6955 - भू- अर्जन-2010 .-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, एतद्वारा , सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को, इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित प्राधिकृत अधिकारी को उक्त भूमि के सम्बन्ध में, उक्त भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 की उपधारा ( 2 ) में दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-

भूमि का वर्णन

जिला

नगर/ग्राम अर्जित कीजाने तहसील

वाली प्रस्तावित भूमि

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (2)

(3)

(4) (1)

ग्राम खामी ,

छिन्दवाड़ा अमरवाड़ा

ब.न. 46,

आने वाली

प.ह.न. 57,

रा.नि.मं.

71.818 हे . एवं ( उक्त भूमि पर सम्पत्तियां) .

अमरवाड़ा.

अनुसूची

अर्जित की जानेवाली प्रस्तावित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 (2 ) के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी

(6)

(5)

खामी बडेला जलाशय के अंतर्गत बांध निर्माण के लिये निजी भूमि का अधिग्रहण.

कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग छिन्दवाड़ा, जिला छिन्दवाड़ा.

[भाग 1 2154

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नवशे ( प्लान ) का निरीक्षण , कलेक्टर ( भू- अर्जन शाखा में ) जिला छिन्दवाड़ा के न्यायालय में किया जा सकता है .

(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , कार्यालय यंत्री, संसाधन संभाग , संभाग छिन्दवाड़ा के कार्यालय में देखा जा सकता है.

(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शा ( प्लान ) एवं प्रकरण का निरीक्षण, अनुविभागीय अधिकारी, जल संसाधन उपसंभाग अमरवाड़ा, जिला छिन्दवाड़ा के कार्यालय में किया जा सकता है.

(5) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई व्यक्ति अधिसूचना प्रकाशन के 30 दिनों के भीतर भू- अर्जन किये जाने के संबंध में आक्षेप लिखित रूप से कलेक्टर ( भू- अर्जन शाखा ) छिन्दवाड़ा में प्रस्तुत कर सकता है.

क्र. 6956 - भू- अर्जन- 2010.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4 ) में उल्लेखित वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, एतद्वारा, सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को, इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित प्राधिकृत अधिकारी को उक्त भूमि के सम्बन्ध में, उक्त भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 की उपधारा ( 2 ) में दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-

अनुसूची

भूमि का वर्णन

भू-अर्जन अधिनियम, 1894

अर्जित की जानेवाली प्रस्तावित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन नगर/ग्राम

जिला तहसील

की धारा 4 (2 ) के अंतर्गत

प्राधिकृत अधिकारी

(6)

(5)

(3)

अर्जित कीजाने वाली प्रस्तावित भूमि लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (4)

(2)

(1)

कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन

0.580 हे. एवं

पांढुर्णा ग्राम पीपरपानी,

छिन्दवाड़ा

संभाग छिन्दवाड़ा,

(उक्त भूमि पर

बिछुआसानी जलाशय के अंतर्गत नहर निर्माण के लिये निजी भूमि का अधिग्रहण.

आने वाली

जिला छिन्दवाड़ा.

ब.न. 244, प.ह.न. 16/40,.

सम्पत्तियां ) .

रा.नि.मं. नान्दनवाड़ी.

(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण, कलेक्टर ( भू-अर्जन शाखा में ) जिला छिन्दवाड़ा के न्यायालय में किया जा सकता है.

(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , कार्यालय यंत्री , संसाधन संभाग, संभाग छिन्दवाड़ा के कार्यालय में देखा जा सकता है.

(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शा ( प्लान ) एवं प्रकरण का निरीक्षण , अनुविभागीय अधिकारी, जल संसाधन उपसंभाग पांढुर्णा , जिला छिन्दवाड़ा के कार्यालय में किया जा सकता है .

(5) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई व्यक्ति अधिसूचना प्रकाशन के 30 दिनों के भीतर भू- अर्जन किये जाने के संबंध में आक्षेप लिखित रूप से कलेक्टर ( भू- अर्जन शाखा ) छिन्दवाड़ा में प्रस्तुत कर सकता है.

2155 भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

क्र. 6957 - भू- अर्जन- 2010.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4 ) में उल्लेखित वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, एतद्वारा , सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को, इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित प्राधिकृत अधिकारी को उक्त भूमि के सम्बन्ध में , उक्त भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 की उपधारा ( 2 ) में दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-

अनुसूची

भूमि का वर्णन

अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन जिला तहसील नगर/ग्राम

भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 (2 ) के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी

अर्जित कीजाने वाली प्रस्तावित भूमि लगभग क्षेत्रफल

(हेक्टेयर में)

(6) (2)

(5)

(1)

(3)

(4)

ग्राम चाटवा,

पांढुर्णा

छिन्दवाड़ा

ब.न. 123 ,

बिछुआसानी जलाशय के अंतर्गत नहर निर्माण के लिये निजी भूमि का अधिग्रहण.

01.841 हे. एवं (उक्त भूमि पर आने वाली

कार्यपालन यंत्री , जल संसाधन संभाग छिन्दवाड़ा, जिला छिन्दवाड़ा.

सम्पत्तियां ) .

प.ह.न. 23, रा.नि.मं. नान्दनवाड़ी.

(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , कलेक्टर ( भू- अर्जन शाखा में ) जिला छिन्दवाड़ा के न्यायालय में किया जा सकता है.

(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, कार्यालय यंत्री, संसाधन संभाग , संभाग छिन्दवाड़ा के कार्यालय में देखा जा सकता है.

(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शा ( प्लान ) एवं प्रकरण का निरीक्षण , अनुविभागीय अधिकारी , जल संसाधन उपसंभाग पांढुर्णा , जिला छिन्दवाड़ा के कार्यालय में किया जा सकता है .

(5) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई व्यक्ति अधिसूचना प्रकाशन के 30 दिनों के भीतर भू- अर्जन किये जाने के संबंध में आक्षेप लिखित रूप से कलेक्टर ( भू- अर्जन शाखा ) छिन्दवाड़ा में प्रस्तुत कर सकता है.

क्र. 6958 - भू- अर्जन -2010 . - चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में उल्लेखित वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, एतद्वारा, सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को, इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा, अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित प्राधिकृत अधिकारी को उक्त भूमि के सम्बन्ध में, उक्त भू-अर्जन अधिनियम , 1894 की धारा 4 की उपधारा ( 2 ) में दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-

अनुसूची

भू-अर्जन अधिनियम, 1894

भूमि का वर्णन

अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन जिला

नगर/ग्राम

तहसील

की धारा 4 (2 ) के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी

अर्जित कीजाने वाली प्रस्तावित भूमि लगभग क्षेत्रफल

(हेक्टेयर में)

(6) (1) (2)

(3)

(4)

(5)

छिन्दवाड़ा अमरवाड़ा

कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग छिन्दवाड़ा,

ग्राम बिनेकी, ब.न. 209,

03.588 हे. एवं (उक्त भूमि पर आने वाली

खामी बडेला जलाशय के अंतर्गत नहर निर्माण के लिये निजी भूमि का अधिग्रहण .

प.ह.न. 58,

जिला छिन्दवाड़ा.

रा.नि.मं. अमरवाड़ा. सम्पत्तियां ) .

2156

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1 (2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , कलेक्टर ( भू- अर्जन शाखा में ) जिला छिन्दवाड़ा के न्यायालय में किया जा सकता है.

(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, कार्यालय यंत्री, संसाधन संभाग , संभाग छिन्दवाड़ा के कार्यालय में देखा जा सकता है.

(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) एवं प्रकरण का निरीक्षण , अनुविभागीय अधिकारी, जल संसाधन उपसंभाग अमरवाड़ा, जिला छिन्दवाड़ा के कार्यालय में किया जा सकता है.

(5) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई व्यक्ति अधिसूचना प्रकाशन के 30 दिनों के भीतर भू- अर्जन किये जाने के संबंध में आक्षेप लिखित रूप से कलेक्टर ( भू- अर्जन शाखा ) छिन्दवाड़ा में प्रस्तुत कर सकता है .

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, पवन कुमार शर्मा , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.

कार्यालय, कलेक्टर, जिला खरगोन , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग

खरगोन, दिनांक 17 अगस्त 2010

क्र. 1021 - भू-अर्जन-10-प्र.क्र. 28 - अ-82-09-10.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की; अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार सभी संबंधित व्यक्तियों को , इसके द्वारा , इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा (2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( क ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 ( 1 ) , सह 17 (4 ) के उपबंध इसके संबंध में लागू होते हैं : -

अनुसूची

भूमि का वर्णन

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) के

जिला तहसील ग्राम/नगर

लगभग क्षेत्रफल

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन

द्वारा प्राधिकृत अधिकारी

(हेक्टेयर में)

(1)

(2)

(3)

(4)

(5)

(6) खरगोन

मलगांव

कसरावद

0.156

महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पो. लिमि. , मण्डलेश्वर.

महेश्वर जल विद्युत् परियोजना के डूब क्षेत्र में आने के कारण.

नोट. - भूमि का नक्शा ( प्लान ) - ( 1 ) कलेक्टर, जिला खरगोन, ( 2 ) भू-अर्जन अधिकारी , महेश्वर जल विद्युत् परियोजना, मण्डलेश्वर, मुख्यालय खरगोन, ( 3 ) कार्यपालन अभियंता ( सिविल 1 ) महेश्वर जल विद्युत् परियोजना, म.प्र.रा.वि. मण्डल, मण्डलेश्वर, (4 ) महाप्रबंधक, श्री महेश्वर डायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. , मण्डलेश्वर के कार्यालय में अवलोकन किया जा सकता है .

2157

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

भाग 1 ]

क्र. 1020 - भू-अर्जन- 10-प्र.क्र. 29- अ-82-09-10.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने कीसंभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार सभी संबंधित व्यक्तियों को, इसके द्वारा , इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( क ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 ( 1 ) , सह 17(4) के उपबंध उसके संबंध में होते हैं:-

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन तहसील

भूमिका वर्णन ग्राम/नगर

जिला

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) के द्वारा प्राधिकृत अधिकारी

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

(6)

(4)

(3)

(5)

(1) (2)

10.796

तेल्यांव

खरगोन कसरावद

महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पो. लिमि. , मण्डलेश्वर.

महेश्वर जल विद्युत् परियोजना के डूब क्षेत्र में आने के कारण.

नोट.- भूमि का नक्शा ( प्लान ) -( 1 ) कलेक्टर, जिला खरगोन, ( 2 ) भू-अर्जन अधिकारी , महेश्वर जल विद्युत् परियोजना, मण्डलेश्वर, मुख्यालय खरगोन, ( 3 ) कार्यपालन अभियंता ( सिविल 1 ) महेश्वर जल विद्युत् परियोजना, म.प्र.रा.वि. मण्डल, मण्डलेश्वर, (4) महाप्रबंधक, श्री महेश्वर डायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. , मण्डलेश्वर के कार्यालय में अवलोकन किया जा सकता है.

क्र. 1016 - भू-अर्जन - 10-प्र.क्र. 30- अ- 82-09-10.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार सभी संबंधित व्यक्तियों को, इसके द्वारा , इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्तअधिनियम की धारा 5 ( क ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 ( 1 ) , सह 17(4 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं: -

अनुसूची

सार्वजनिक प्रयोजन कावर्णन तहसील

भूमिका वर्णन ग्राम/नगर

जिला

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) के द्वारा प्राधिकृत अधिकारी

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

(6) (3)

(5)

(1)

(2)

(4)

नांदिया

0.770

खरगोन कसरावद

महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पो. लिमि. , मण्डलेश्वर.

महेश्वर जल विद्युत् परियोजना के डूब क्षेत्र में आने के कारण.

नोट. भूमि का नक्शा ( प्लान ) - ( 1 ) कलेक्टर, जिला खरगोन , ( 2 ) भू-अर्जन अधिकारी , महेश्वर जल विद्युत् परियोजना, मण्डलेश्वर, मुख्यालय खरगोन, ( 3 ) कार्यपालन अभियंता ( सिविल 1 ) महेश्वर जल विद्युत् परियोजना, म.प्र.रा.वि. मण्डल, मण्डलेश्वर, (4) महाप्रबंधक, श्री महेश्वर डायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. , मण्डलेश्वर के कार्यालय में अवलोकन किया जा सकता है .

2158

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1 क्र. 1017 - भू-अर्जन-10-प्र.क्र. 31-अ-82-09-10. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार सभी संबंधित व्यक्तियों को, इसके द्वारा , इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा, अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( क ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 ( 1 ) , सह 17 (4 ) के उपबंध उसके संबंध में होते हैं :-

अनुसूची

भूमिका वर्णन

जिला तहसील ग्राम/नगर

सार्वजनिक प्रयोजन कावर्णन

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) के द्वारा प्राधिकृत अधिकारी

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

(1)

(2)

(3)

(4)

(5)

(6) खरगोन

0.720

कसरावद लालपुरा

महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पो. लिमि. , मण्डलेश्वर.

महेश्वर जल विद्युत् परियोजना के डूब क्षेत्र में आने के कारण .

नोट. भूमि का नक्शा ( प्लान ) - ( 1 ) कलेक्टर, जिला खरगोन, ( 2 ) भू-अर्जन अधिकारी , महेश्वर जल विद्युत् परियोजना , मण्डलेश्वर, मुख्यालय खरगोन, (3 ) कार्यपालन अभियंता ( सिविल 1 ) महेश्वर जल विद्युत् परियोजना, म.प्र.रा.वि. मण्डल , मण्डलेश्वर, (4 ) महाप्रबंधक, श्री महेश्वर डायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. , मण्डलेश्वर के कार्यालय में अवलोकन किया जा सकता है.

क्र. 1019 - भू- अर्जन-10-प्र.क्र. 32-अ-82-09-10.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार सभी संबंधित व्यक्तियों को, इसके द्वारा , इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 (क) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 ( 1 ) , सह 17(4) के उपबंध उसके संबंध में होते हैं: -

अनुसूची

भूमिका वर्णन

जिला

ग्राम/नगर

तहसील

सार्वजनिक प्रयोजन कावर्णन

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) के द्वारा प्राधिकृत अधिकारी

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

(1) (2) (3)

(4)

(5)

(6) खरगोन महेश्वर

0.930

कुण्डा

महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पो. लिमि. , मण्डलेश्वर.

महेश्वर जल विद्युत् परियोजना के डूब क्षेत्र में आने के कारण.

नोट.- भूमि का नक्शा ( प्लान ) -( 1 ) कलेक्टर, जिला खरगोन, (2 ) भू- अर्जन अधिकारी , महेश्वर जल विद्युत् परियोजना, मण्डलेश्वर, मुख्यालय खरगोन , ( 3 ) कार्यपालन अभियंता ( सिविल 1 ) महेश्वर जल विद्युत् परियोजना , म.प्र.रा.वि. मण्डल , मण्डलेश्वर, (4) महाप्रबंधक, श्री महेश्वर डायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. , मण्डलेश्वर के कार्यालय में अवलोकन किया जा सकता है.

2159 भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

क्र. 1018 - भू-अर्जन-10-प्र.क्र. 33-अ-82-09-10.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है . अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार सभी संबंधित व्यक्तियों को, इसके द्वारा , इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( क ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17( 1 ) , सह 17 (4 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं: -

अनुसूची

भूमि का वर्णन

तहसील ग्राम/नगर

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन जिला

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) के द्वारा अधिकृत अधिकारी.

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

(5)

(1)

(2)

(6) (3)

(4)

खैगांव

0.450

महेश्वर

खरगोन

महेश्वर जल विद्युत् परियोजना के डूब क्षेत्र में आने के कारण.

महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पो. लिमि. , मण्डलेश्वर.

नोट.- भूमि का नक्शा ( प्लान ) -( 1 ) कलेक्टर, जिला खरगोन, ( 2 ) भू-अर्जन अधिकारी, महेश्वर जल विद्युत् परियोजना, मण्डलेश्वर, मुख्यालय खरगोन, ( 3 ) कार्यपालन अभियंता ( सिविल 1 ) महेश्वर जल्ल विद्युत् परियोजना, म.प्र.रा.वि. मण्डल, मंण्डलेश्वर, (4) महाप्रबंधक, श्री महेश्वर डायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. , मण्डलेश्वर के कार्यालय में अवलोकन किया जा सकता है.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, केदार शर्मा , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.

कार्यालय, कलेक्टर, जिला अनूपपुर, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग

अनूपपुर, दिनांक 17 अगस्त 2010

क्र. 9792 - दस- भू-अर्जन-2010. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये कंपनी प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 संशोधन 1984 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार सभी संबंधित व्यक्तियों को, इसके द्वारा , इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है :-

अनुसूची

भूमि का वर्णन

तहसील

जिला

नगर/ग्राम

विभाग प्रयोजन का वर्णन

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी

लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

(6) (2)

(3)

*(4)

(1)

(5)

जैतहरी पपरौड़ी

वार्डर चेकपोस्ट निर्माण हेतु अनूपपुर

4.530 योग : 4.530

परिवहन आयुक्त, मोतीमहल , ग्वालियर (म.प्र.) .

नोट.- भूमि का नक्शा ( प्लान ) कलेक्टर कार्यालय अनूपपुर/अनुविभागीय अधिकारी राजस्व , जैतहरी , जिला अनूपपुर ( म.प्र. ) के कार्यालय में निरीक्षण किया जा सकता है.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, कवीन्द्र कियावत, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.

2160

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1

राजस्व विभाग

कार्यालय , कलेक्टर, जिला कटनी , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग

कटनी, दिनांक 28 जून 2010 रा. प्र. क्र. 04- अ- 82-2009-10- भू.अ.अ. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो चुका है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-

अनुसूची

( 1 ) भूमि का वर्णन-

(क ) जिला- कटनी

(ख) तहसील- ढीमरखेड़ा

(ग) ग्राम- जामुनचुवा प. ह. न. 110

(घ) क्षेत्रफल-06.03 हेक्टेयर

रकबा ( हेक्टेयर में ) खसरा नंबर (1)

(2) 59 .

0.08 68

0.04 69

0.25 72

0.65 70

0.33 732

0.15 84

0.25 85

0.45

0.45 79/1

88/1

0.08 89/1

0.32 80

0.57 88/2

0.13 88/3

0.14 89/3

0.27 94

0.05 95

0.08 96/2

0.21 99/2

0.06

0.07 99/1

96/1

0.21 97

0.18 (1)

(2)

98

0.20

100/3

0.70

112

0.11

योग : 6.03

(2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए भूमि की आवश्यकता है- जामुनचुवा जलाशय हेतु.

(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) भू-अर्जन अधिकारी ढीमरखेड़ा, जिला कटनी के कार्यालय में देखा जा सकता है.

कटनी, दिनांक 3 अगस्त 2010

प्र. क्र. 1 - A82-2009-10- भू. अ.अ. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत, इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-

अनुसूची

( 1 ) भूमि का वर्णन-

(कं ) जिला-कटनी

(ख ) तहसील-विजयराघवगढ़

(ग) ग्राम- बरहटा

(घ ) लगभग क्षेत्रफल-0.13 हेक्टेयर

खसरा नंबर

अर्जित रकबा ( हेक्टेयर में ) (1)

(2)

189/2

0.06

246

0.07

योग : 0.13

(2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए भूमि की आवश्यकता है- बरेहटी उ. सिं. यो . निर्माण कार्य ( नहर कार्य) .

(3 ) भूमि का नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व विजयराघवगढ़ में किया जा सकता है .

प्र. क्र. 2- A82-2009-10- भू. अ.अ. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यक है. अंतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत, इसके द्वारा , यह भाग 1 ]

घोषित किया जाता है किं उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-

अनुसूची

(1 ) भूमि का वर्णन-

(क) जिला- कटनी

(ख) तहसील- विजयराघवगढ़

(ग ) ग्राम- कुठिया महगवां

(घ) लगभग क्षेत्रफल-0.52 हेक्टेयर.

खसरा नंबर

अर्जित रकबा ( हेक्टेयर में ) (1)

(2)

1379

0.15

1380/1

0.09

1383

0.05

1384

0.07

1385

0.02

1387

0.06

1388

0.03

1389

0.05

योग : 0.52

( 2 ) सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- गुरेहा नाला जलाशय निर्माण कार्य (नहर कार्य ) .

(3) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, विजयराघवगढ़ में किया जा सकता है.

प्र. क्र. 3- A82-2009-10- भू. अ.अ. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 (क्रमांक एक , सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है : -

अनुसूची

(1) भूमि का वर्णन

(क) जिला- कटनी

(ख) तहसील- बरही

(ग ) ग्राम- सूरजपुरा

(घ) लगभग क्षेत्रफल-1.48 हेक्टेयर

अर्जित रकबा ( हेक्टेयर में ) खसरा नंबर (1)

(2)

16

0.06

19

0.10

2161

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010.

(1)

(2)

24

0.12

25

0.12

0.15

26

28/3

0.05

88

0.06

89/1

0.08

89/2

0.03、

91

0.22

92

0.07

93

0.02

94

0.05

95/1

0.01

95/2

0.09

98/5

0.23

99

0.02

योग : 1.48

(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए आवश्यकता है- गुरेहा नाला जलाशय निर्माण कार्य ( नहर कार्य ).

(3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, विजयराघवगढ़ में किया जा सकता है .

प्र. क्र. 4- A82-2009-10- भू. अ. अ. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित्त भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा , घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-

अनुसूची

( 1 ) भूमि का वर्णन -

(क) जिला-कटनी

(ख ) तहसील- विजयराघवगढ़

(ग) ग्राम- गुड़ेहा

(घ) लगभग क्षेत्रफल-3.85 हेक्टेयर

खसरा नंबर

अर्जित रकबा ( हेक्टेयर में ) (1)

(2)

448

0.01

215

0.12

449

0.02

443

0.04 2162

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

(1)

(2) 442

0.02 441

0.02 440/1

0.07 438

0.08 357

0.11 425

0.03 353

0.01 346

0.01 354

0.01 431

0.08 430

0.02 358/2

0.03 359

0.03 345

0.07 314

0.04 315

0.03 312

0.08 293

0.01 621

0.21 292

0.10 200

0.04 202

0.02 201

0.06 210

0.04 203

0.04 204

0.03 208

0.09 209

0.06 211

0.06 259/1

0.01 259/2

0.07 258

0.07 252/1

0.04 251

0.09 250

0.04 227

0.05 226

0.08 225/1

0.07 225/3

0.07 1067

0.09 1186/1

0.07 429/1

0.01

[ भाग 1 (1)

(2)

424

0.03.

0.02

429/2

428

0.04

423

0.03

362

0.02

365

0.05

369

0.02

422

0.02

372

0.04

373

0.04

379

0.05

377

0.01

663

0.08

698/1

0.03

699

0.01

700

0.01

705

0.01

706

0.01

707

0.09

0.07

710/1

712

0.07

0.06

713/1

713/2

0.16

713/3

0.05

862

0.10

0.06

861

870

0.15

871/5

0.07

योग : 3.85

( 2 ) सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- गुरेहा पिपरा जलाशय निर्माण कार्य ( नहर कार्य ) .

(3) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, विजयराघवगढ़ में किया जा सकता है.

प्र. क्र. 5- A82-2009-10- भू. अ.अ. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची.के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत, इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये भाग 1 ]

2163

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

आवश्यकता है :-

अनुसूची

( 1 ) भूमि का वर्णन-

(क) जिला- कटनी

(ख ) तहसील- विजयराघवगढ़

(ग) ग्राम-पिपरा

(घ) लगभग क्षेत्रफल-1.30 हेक्टेयर

खसरा नंबर

अर्जित रकबा ( हेक्टेयर में ) (1)

(2)

50/1

0.06

49

0.06

48

0.05

47

0.05

53

0.11

64/2

0.08

62

0.11

68

0.11

69/1

0.06

77/5

0.19

76

0.15

74

0.12

98

0.15

योग : 1.30

( 2 ) सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- गुरेहा पिपरा जलाशय निर्माण कार्य ( नहर कार्य ).

(3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, विजयराघवगढ़ में किया जा सकता है .

प्र. क्र. 6 - A82-2009-10- भू. अ.अ. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत, इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है : -

अनुसूची

( 1 ) भूमि का वर्णन-

(क) जिला-कटनी

(ख) तहसील-विजयराघवगढ़

(ग) ग्राम-खिरवा नंबर 1

(घ) लगभग क्षेत्रफल-1.14 हेक्टेयर

खसरा नंबर

अर्जित रकबा ( हेक्टेयर में ) (1)

(2)

1349

0.23

1347

0.14

1346

0.33

1345

0.22

1359

0.13

1366

0.10

1369

0.10

1365

0.16

योग : 1.14

(2) सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- चपना उ. सिं. यो. निर्माण कार्य ( नहर कार्य) .

(3 ) भूमि के नक्शे (प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, विजयराघवगढ़ में किया जा सकता है .

प्र. क्र. 7- A82-2009-10- भू. अ. अ. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-

अनुसूची

( 1 ) भूमि का वर्णन-

(क) जिला-कटनी

(ख ) तहसील-विजयराघवगढ़

(ग) ग्राम- चपना

(घ) लगभग क्षेत्रफल-4.26 हेक्टेयर

खसरा नंबर

अर्जित रकबा ( हेक्टेयर में ) (1)

(2)

579

0.12

320/2

0.01

578/1

0.21

577

0.06

0.07

580/1

578/2

0.01

558

0.01

560

0.14

555

0.13

554

0.18

548

0.10 2164

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

(1)

(2) 547

0.01 545/1

0.07 545/2

0.07 544

0.01 572

0.03 357

0.27 356

0.15 575

0.10 355

0.10 313

0.04 315

0.02 314

0.02 354

0.01 317

0.03 116

0.02 318

0.05 319

0.01 320/1

0.01 352

0.03 350

0.03 345

0.02 324

0.01 351

0.02 323

0.02 334

0.07 61/1

0.06 28/2

0.07 28/1

0.07 74

0.01 62/2

0.06 341

0.01 112/1

0.03 113

0.07 112/2

0.03 333

0.04 39

0.28 29

0.01 340

0.03. 66

0.06 34

0.01 335/2

0.01 335/1

0.06 65

0.05 68/1

0.03 68/2

0.03

[भाग 1 (1)

(2)

64/1

0.01

69/2

0.01

132/2

0.01

63

0.18

0.06

61/5

62

0.03

72

0.10

0.03

73

75

0.12

121

0.07

120

0.02

122

0.01

119

0.02

118

0.02

115.

0.07

144/1

0.02

153

0.02

152

0.11

576

0.07

योग :4.26

(2) सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- चपना उ. सिं. यो. निर्माण कार्य ( नहर कार्य )

(3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व विजयराघवगढ़ में किया जा सकता है.

प्र. क्र. 8 - A82-2009-10- भू. अ.अ. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि, सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-

अनुसूची

( 1 ) भूमि का वर्णन -

(क) जिला-कटनी

(ख ) तहसील- विजयराघवगढ़

(ग) ग्राम- हथेड़ा

(घ) लगभग क्षेत्रफल-9.40 हेक्टेयर

खसरा नंबर

अर्जित रकबा ( हेक्टेयर में ) (1)

(2)

629/1

0.13

629/2

0.13 भाग 1 ]

2165

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

(1)

(2) 636

0.10 642

0.04 647

0.04

0.03 1299

640

0.06 629

0.04 641/1

0.05 657

0.04 646

0.02 661

0.01 655

0.04 1300

0.03 654

0.18 662

0.01 652

0.10 1148/1

0.09 838

0.15 844

0.15 847

0.07 848

0.03 849

0.09 850

0.03 863

0.04 1215

0.06 879

0.02 861/1

0.03 1305/1

0.06 860/1

0.05 592/1

0.08

0.03 861/2

1305/2

0.05 860/2

0.06 1285

0.02 1213

0.07 1284

0.02.

0.06 1237

1233

0.06 1283

0.13 862

0.04 1216

0.21 880

0.02 (1)

(2)

874/1

0.07

1302

0.11

1149

0.18

1295/1

0.08

0.01

1295/2

1294

0.02

0.09

1293

0.08

1290

608

0.02

606

0.01

593

0.05

594

0.06

595/1

0.03

595/2

0.03

596/1

0.05

596/2

0.05

0.04

597/1

0.04

597/2

574

0.08

508

0.15

541

0.11

573

0.04

572/1

0.03

0.02

572/2

571

0.03

570

0.10

557

0.15

527

0.07

0.02

528

529

0.06

530

0.06

0.06

540

1231

0.29

1230

0.13

1178

0.07

1212

0.09

1203/1

0.03

1203/2

0.03

0.12

1206

542/1

0.03

1209

0.02 2166

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

(1)

(2)

1208

0.03

1187

0.06

1186

0.06

1179

0.08

1254

0.41

1175

0.18

1158

0.07

1147

0.06

1148/2

0.08

1257/1

0.23

1257/2

0.30

1238/1

0.06

1239

0.07

1251

0.18

1068

0.08

1069/2

0.04

1066

0.16

999

0.15

995/1

0.04

995/4

0.03

976

0.19

978

0.13

979

0.02

980

0.02

987/1

0.02

981/1

0.11

986/2

0.04

984

0.03

983

0.09

1301

0.02

1282

0.45

1070

0.01

1153

0.06

1152

0.06

630

0.15

977

0.05

योग : 9.40

( 2 ) सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- चपना उ. सिं. यो. निर्माण कार्य ( नहर कार्य ) .

( 3) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व विजयराघवगढ़ में किया जा सकता है.

[भाग 1 प्र. क्र. 02 - A82-2007-08- भू. अ.अ. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि, सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा , घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-

अनुसूची

( 1 ) भूमि का वर्णन-

(क) जिला- कटनी

(ख ) तहसील- विजयराघवगढ़

(ग) ग्राम- गुड़ेहा, लुकामपुर

( घ ) लगभग क्षेत्रफल-14.79 हेक्टेयर ( गुड़ेहा -11.39 हे . ,

लुकामपुर-3.40 हे. )

रकबा ( हेक्टेयर में) खसरा नंबर (1)

(2)

ग्राम-गुड़ेहा

91

0.21

96/1

0.36

96/2

0.36

97

0.74

98/ 1क

0.11

98/ 1ख

0.72

98/2

0.27

99

0.55

100

0.61

101/1

0.05

101/2

0.05

102

0.24

103

0.26

104

0.26

108

1.11

150

0.08

154

0.20

155

0.26

156

1.23

169

2.49

170/1

0.82

170/2

0.41 योग : 11.39 भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

2167 (1)

(2)

(ग) ग्राम-ग्वारा प. ह. नं. 13/7

(घ) लगभग क्षेत्रफल-6.68 हेक्टेयर ग्राम-लुकामपुर

283

0.40

खसरा नंबर

रकबा ( हेक्टेयर में ) 284

0.30

(1)

(2) 286

0.38

64/2

0.60 293/1

0.05

64/2क

0.30 294/1

0.21

64/2ख

0.20 293/2

0.05

64/2ग

0.24 294/2

0.21

64/2घ

0.40 296

0.06

64/2ङ

0.24 297

0.10

64/2च

0.20 298

0.90

64/2छ

0.18 291

0.30

64/2ज

0.40 292

0.14

89

0.35 301

0.30

70

0.36 योग : 3.40

71

0.22 कुल योग : 14.79

72

0.68

73

0.30 ( 2 ) सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है- गुरेहा पिपरा जलाशय निर्माण कार्य ( शीर्ष कार्य ) .

74

0.75

75

0.68

76

0.58 (3) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व विजयराघवगढ़ में किया जा सकता है.

योग : 6.68 मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, एम. सेलवेन्द्रन, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.

(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए आवश्यकता है- सुरक्षात्मक कारणों से .

(3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय कलेक्टर मण्डला में किया जा सकता है.

कार्यालय, कलेक्टर, जिला मण्डला, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग

मण्डला, दिनांक 17 अगस्त 2010 मण्डला, दिनांक 27 जुलाई 2010

क्र. भू- अर्जन-11 ( अ -82 ) 2009-10 .-चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित , सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यक है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-

क्र. भू- अर्जन-6 ( अ -82 ) 2008-09.-चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो चुका है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित , सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत, इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है : -

अनुसूची

अनुसूची

( 1 ) भूमि का वर्णन-

(1 ) भूमि कावर्णन-

(क) जिला- मण्डला

(क) जिला- मण्डला

(ख ) तहसील- बिछिया

(ख) तहसील - मण्डला

(ग) ग्राम- खम्हरिया प. ह. नं. 56 2168

[भाग 1

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

(घ) लगभग क्षेत्रफल-2.55 हेक्टेयर

खसरा नंबर

रकबा ( हेक्टेयर में ) (1)

(2)

80/1

0.17

31

0.06

32

0.10

33/2

0.12

37

0.13 ..

36

0.02

25

0.12

39

0.03

0.02

42

18

0.29

0.17

43

8

0.29

15/1

0.27

79

0.08

32

0.12

77/1

0.11

84

0.03

67/2

0.29

63

0.06

65/1-

0.03

78

0.02

65/3

0.02

योग : 2.55

(2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए आवश्यकता है- खम्हरिया जलाशय के अन्तर्गत नहर निर्माण हेतु.

(3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय कलेक्टर मण्डला में किया जा सकता है.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, के. के. खरे , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.

कार्यालय, कलेक्टर, जिला टीकमगढ़, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग टीकमगढ़, दिनांक 10 अगस्त 2010

क्र. 1 भू-अर्जन- 2010- प्र. क्र. 1 -अ-82-10-11.-चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो चुका है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लिखित, सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. इस सम्बन्ध में माननीय आयुक्त, सागर संभाग , सागर द्वारा अपने पत्र क्रमांक 690 - एक-स. अ.-2010, दिनांक 24 जुलाई 2010 अनुसार भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 17 ( 1 ) के तहत् अर्जेन्सी क्लाज की अनुमति दी जा चुकी है. अतः भू-अर्जन अधिनियम 1894 (क्रमांक एक सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत, इसके द्वारा , घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :

अनुसूची

( 1 ) भूमि का वर्णन-

(क) जिला- टीकमगढ़

(ख ) तहसील-खरगापुर

(ग) ग्राम- मझगुवां

(घ) पटवारी हल्का नम्बर- 01

(ङ) क्षेत्रफल-19.210 हेक्टेयर

खसरा नंबर

रकबा ( हेक्टेयर में) (1)

(2)

70

0.100

0.100

71

80

4.400

1.513

81 अ

82

0.330

82अ

0.010

84अ

0.800

0.560

84ब

1.343

84 स

86/1 ब

0.165

86/2 ब

0.290

0.290

86/3 ब

86 स

0.275

1.586

88

91

0.190

0.145

106 ब

112 द

0.051

112/2

0.350

0.195

122

126

0.230

0.100

126 अ

126 ब

0.425

0.264

127 भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

(1)

(2)

127 अ

0.364

128

0.206

129

0.117

130/1

0.636

130/2

0.640

132

0.587

133

0.240

134/1

0.025

134/2

0.025

156

0.270

158 स/ 1

0.923

158 स/2

0.805

158 द

0.010

162

0.650

योग : 19.210

( 2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए भूमि की आवश्यकता है- जरुआ तालाब लघु परियोजना के निर्माण कार्य हेतु ( बांध, नहर एवं स्पिल चैनल ) .

(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व ) एवं भू-अर्जन अधिकारी , टीकमगढ़ और कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग टीकमगढ़ के कार्यालय में देखा जा सकता है.

क्र. 2 भू-अर्जन- 2010-प्र. क्र. 2 -अ-82-10-11.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लिखित, सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. इस सम्बन्ध में माननीय आयुक्त, सागर संभाग, सागर द्वारा अपने पत्र क्रमांक 691 - एक-स. अ. -2010, दिनांक 24 जुलाई 2010 अनुसार भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 17 ( 1 ) के तहत् अर्जेन्सी क्लाज की अनुमति दी जा चुकी है. अतः भू-अर्जन अधिनियम 1894 (क्रमांक एक सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा, यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-

अनुसूची

(1 ) भूमि का वर्णन -

(क) जिला- टीकमगढ़

(ख ) तहसील-खरगापुर

2169 (ग) ग्राम- सरकनपुर ऊगढ़

( घ) पटवारी हल्का नम्बर- 19

(ङ) क्षेत्रफल-100.883 हेक्टेयर

खसरा नंबर

रकबा ( हेक्टेयर में ) (1)

(2)

6

0.210

7

0.910

9

0.086

11

1.995

12

2.618

13

0.738

14

0.793

15

3.300

18

0.162

18 ब

0.344

19

0.049

20

2.266

21

0.866

21 अ

0.688

21 ब

0.267

23

1.323

24

0.425

25

0.178

27

0.837

28

0.179

29

1.024

30

0.773

32

1.335

35/1

0.837

35/2

0.610

36

0.575

38

0.858

39

1.219

41/1

0.030

41/2

0.030

45

0.202

1.000

45जु.

47

0.413

48/1

0.770

48/2

0.780 2170

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

(2) (1)

51

2.314 52

0.612 53

1.129

0.376 54.

56

1.951 58

0.680 59

0.494 59/अ

1.239

0.789 60

61

1.299 62

0.296 62/931

0.802 63

0.040 64

0.914 66

0.668 67

1.080 68/1

0.591 68/2

0.809 69

0.450 70

2.016 71

1.011 72

0.579 73

0.514 76

0.760 77

0.170 78

1.376 79

0.040 80

0.607 81

0.045 82

0.837 83

0.534 84

0.672 85

0.668 86

0.494 87

0.254 88

0.443 89

0.364 90

0.384

[ भाग 1

(2)

(1)

91

0.324

.92

0.340

93

0.353

94

0.473

95

0.365

96

1.415

100/1

0.405

100/2

1.500

101

1.368

102

0.012

103

0.162

104

0.299

0.040

104/935

105

0.125

106

0.268

107

0.028

108

0.624

111 अ

0.440

117

0.645

0.085

119 जुज

0.800

119/1

120

0.077

121

0.180

122

0.263

124

1.161

125

0.194

126

0.138

127

0.032

128

0.235

129

0.138

130

0.331

131

0.121

132

0.020

133

0.534

134

0.450

135

0.397

0.057

136

137

0.053 2171

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

भाग 1 ]

(2) (1)

0.085 138

0.040 139

0.645 140

141/1

0.500

0.500 141/2

0.215 143/अ/1

0.370 148

0.105 150

0.520 152

0.105 153

0.967 154

0.441 155

0.445 156

2.330 157

0.350 158

0.400 162/1

1.254 163

1.413 165

166

1.470

0.930 167

0.460 168

170

0.180

0.010 172

0.160 173

*0.186 174

3.430 175

0.028 176

0.053 177

0.223 178

0.045 180

1.640 181

0.405 182

1.554 183

184

0.061

0.611 186

0.150 187

0.024 188

0.024 189

(2)

(1)

0.178

190

0.016

191

0.130

195

0.710

196

0.295

197

0.429

198

0.140

200

0.200

201

1.750

202

0.142

203

0.016

204-

0.008

205

0.413

206

0.085

207

0.563

208

0.061

209

0.012

211

0.056

221

0.053

223

0.162

224

0.530

225

0.012

239

0.247

258

0.240

299

0.065

303

0.012

309

0.336

310

0.100

311/1

0.150

932

योग .. 100.883

(2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए भूमि की आवश्यकता है-जरुआ तालाब लघु परियोजना के निर्माण कार्य हेतु (बांध एवं डूब क्षेत्र ).

(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व ) एवं भू-अर्जन अधिकारी , टीकमगढ़ और कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , टीकमगढ़ के कार्यालय में देखा जा सकता है .

2172

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

क्र. 3 भू-अर्जन- 2010- प्र. क्र. 3 -अ-82-10-11.-चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित , सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. इस सम्बन्ध में माननीय आयुक्त, सागर संभाग, सागर द्वारा अपने पत्र क्रमांक 692 - एक-स. अ.-2010, दिनांक 24 जुलाई 2010 अनुसार भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 17 ( 1 ) के तहत् अर्जेन्सी क्लाज की अनुमति दी जा चुकी है. अतः भू-अर्जन अधिनियम 1894 (क्रमांक एक सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-

अनुसूची

(1 ) भूमि का वर्णन-

(क) जिला- टीकमगढ़

(ख ) तहसील- खरगापुर

(ग) ग्राम-पिपरा

(घ) पटवारी हल्का नम्बर- 19

(ङ) क्षेत्रफल -18.351 हेक्टेयर .

खसरा नंबर

रकबा ( हेक्टेयर में ) (1)

(2) 16/2

0.161 36

0.010 38

0.065 39

0.109 41

0.097 42

0.454 43

0.101 44

0.660 46

1.465 47

0.798 48

0.024 49

1.582 50

0.372 51

0.093 52

2.298 53

0.368 54

0.850 60

0.355 61

0.437

[ भाग 1 (1)

(2)

62

1.295

63/3

0.405

64

1.185

65

0.520

130

0.155

136

0.540

137

0.016

138

0.336

139

0.279

140

0.551

141

0.480

142

2.290

योग 18.351

( 2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए भूमि की आवश्यकता है- जरुआ तालाब लघु परियोजना के निर्माण कार्य हेतु (बांध एवं डूब क्षेत्र ) .

(3) भूमि का नक्शा ( प्लान ) अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं भू-अर्जन अधिकारी, टीकमगढ़ और कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , टीकमगढ़ के कार्यालय में देखा जा सकता है .

क्र. 4 भू-अर्जन- 2010-प्र. क्र. 4-अ-82-10-11.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित, सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. इस सम्बन्ध में माननीय आयुक्त, सागर संभाग, सागर द्वारा अपने पत्र क्रमांक 693 - एक-स. अ.- 2010, दिनांक 24 जुलाई 2010 अनुसार भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 17 ( 1 ) के तहत् अर्जेन्सी क्लाज की अनुमति दी जा चुकी है . अतः भू-अर्जन अधिनियम 1894 (क्रमांक एक सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है : -

अनुसूची

( 1 ) भूमि का वर्णन-

(क) जिला- टीकमगढ़

(ख ) तहसील- खरगापुर

(ग) ग्राम-मड़ोरी

(घ) पटवारी हल्का नम्बर- 19 भाग 1 ]

2173

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

(ङ) क्षेत्रफल -16.808 हेक्टेयर.

खसरा नंबर

रकबा ( हेक्टेयर में ) (1)

(2) 3

0.821

0.121 3/अ

3/ब

0.320 4

0.937 5

0.280 5अ/1

0.232

0.202 18/अ .

18ब/1

0.160 18ब/2

1.542 18/स

0.348 19

0.352 20

0.478 22

0.381 23

0.522 24

0.210 25

1.696 26

0.852 28

2.699 29

0.040 33

0.190 34

0.137 35

0.350 39

0.085 44

0.250 45/1

0.060 48

0.070 49

0.024 50

0.024 50/अ

0.010 53/ब

0.060 53/स

0.012 54/2

0.010 87

0.248 89

1.023 90/1/1

0.409 90/1/2

0.320 90/2

0.801

(2)

(1)

90/3

0.154

0.285

90/4

90/632

0.093

योग .. 16.808

( 2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए भूमि की आवश्यकता है- जरुआ तालाब लघु परियोजना के निर्माण कार्य हेतु (डूब क्षेत्र) .

(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं भू-अर्जन अधिकारी , टीकमगढ़ और कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , टीकमगढ़ के कार्यालय में देखा जा सकता है .

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, अखिलेश श्रीवास्तव, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.

कार्यालय , कलेक्टर, जिला धार, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग धार , दिनांक 11 अगस्त 2010

क्र. 10594- भू- अर्जन-2010 .- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अन्तर्गत, इसके द्वारा, यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है : -

अनुसूची

( 1 ) भूमि का वर्णन-

(क) जिला- धार

(ख ) तहसील-सरदारपुर

(ग ) ग्राम-लेडगांव

-1.936 हेक्टर .

(घ) लगभग क्षेत्रफल

अर्जित रकबा

सर्वे नम्बर

निजी

(हेक्टर में)

(2)

(1)

0.070

74/1

74/3

0.070 2174

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27. अगस्त 2010

(1)

(2)

74/5

0.055

104/2

0.045

105/1

0.035

105/2

0.035

107/1

0.035

107/2

0.035

107/3

0.035

107/4

0.035

109

0.010

110

0.110

148

0:100

0.050

150

151

0.030

174/1

0.100

175

0.070

177/1

0.053

177/3

0.070

182

0.035

190/1

0.130

190/2

0.130

198

0.053

226

0.005

228

0.080

229

0.200

238

0.010

239

0.250

योग .. 1.936

( 2 ) सार्वजनिक प्रयोजन के लिये भूमि की आवश्यकता है- दौलतपुरा तालाब की नहर निर्माण अन्तर्गत प्रभावित होने से.

( 3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) , एवं भू-अर्जन अधिकारी , सरदारपुर तथा कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग क्रमांक 1 , धार, जिला धार के कार्यालय में कार्यालयीन समय में देखा जा सकता है.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, बी. एम. शर्मा, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.

[भाग 1 कार्यालय , कलेक्टर, जिला झाबुआ , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग झाबुआ , दिनांक 12 अगस्त 2010

क्र. 2226 - भू- अर्जन- 2010- रा.प्र.क्र. अ-82.-- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अन्तर्गत , इसके द्वारा , यह भी घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-

अनुसूची

(1 ) भूमि का वर्णन -

(क) जिला- झाबुआ

(ख) तहसील-पेटलावद

(ग) ग्राम-छायनपुर्व

(घ) लगभग क्षेत्रफल- 1.20 हेक्टर.

निजी भूमि

सर्वे नम्बर

अर्जित रकबा (हेक्टर में)

(1)

(2)

738

0.15

0.07

739

740

0.28

741

0.02

742

0.06

743

0.18

803/2

0.40

804

0.04

योग .. 1.20

(2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है-छायनपुर्व माईनर नहर निर्माण होने से ग्राम छायनपुर्व का कुल निजी भूमि रकबा 1.20 हेक्टर.

(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) भू-अर्जन एवं अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) , पेटलावद के कार्यालय में देखा जा सकता है .

क्र. 2230- भू-अर्जन- 2010- रा.प्र.क्र . अ-82.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है . अतः भाग 1 ]

2175

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अन्तर्गत , इसके द्वारा, यह भी घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-

अनुसूची

(1 ) भूमि का वर्णन-

(क) जिला-झाबुआ

(ख) तहसील- पेटलावद

(ग) ग्राम - बडीदेहण्डी

(घ) लगभग क्षेत्रफल-3.82 हेक्टर .

निजी भूमि

सर्वे नम्बर

अर्जित रकबा (हेक्टर में)

(2)

(1)

105

0.13

106

0.02

0.15

107.

110

0.25

111

0.27

112

0.01

113

0.07

127

0.02

957

0.20

1020

0.02

1021

0.15

1022

0.25

0.26

1024

0.46

1031

1041

0.05

0.15

1042

0.24

1044

0.02

1072

1076

0.12

0.30

1078

1080

0.05

1103

0.04

0.04

1105

0.01

1106

0.04

1107

0.40

1110

1150

0.10

योग 3.82

(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है- गेहण्डी मायनर नहर निर्माण होने से ग्राम बडीदेहण्डी का कुल निजी भूमि रकबा 3.82 हेक्टर.

(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) भू- अर्जन एवं अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) , पेटलावद के कार्यालय में देखा जा सकता है.

क्र. 2232 - भू-अर्जन- 2009-10- रा.प्र.क्र. अ- 82.-चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है . अत; भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अन्तर्गत , इसके द्वारा, यह भी घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-

अनुसूची

(1 ) भूमि का वर्णन-

(क) जिला-झाबुआ

(ख) तहसील- पेटलावद

(ग ) ग्राम- छायनपुर्व

(घ) लगभग क्षेत्रफल-1.22 हेक्टर.

निजी भूमि

सर्वे नम्बर

अर्जित रकबा (हेक्टर में )

(2)

(1)

0.02

306

0.06

433

0.08

436

0.11

446

452

0.05

0.08

456

0.32

457

0.15

720

0.10

733

734

0.02

0.02

735

736

0.03

0.18

738

योग .. 1.22

( 2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है- घुघरी माईनर नहर निर्माण होने से ग्राम छायनपुर्व का कुल निजी भूमि रकबा 1.22 हेक्टर .

(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) भू-अर्जन एवं अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) , पेटलावद के कार्यालय में देखा जा सकता है .

2176

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

क्र. 2234- भू-अर्जन 2010 - रा.प्र.क्र . अ- 82.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है . अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अन्तर्गत, इसके द्वारा यह भी घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-

अनुसूची

( 1 ) भूमि का वर्णन-

(क) जिला-झाबुआ

(ख) तहसील-पेटलावद

(ग) ग्राम- गुणावद ( बल्यापाडा)

(घ) लगभग क्षेत्रफल-1.75 हेक्टर.

निजी भूमि

सर्वे नम्बर

अर्जित रकबा (हेक्टर में)

(1)

(2)

1124

0.07

1219

0.20

1221/1

0.12

1221/2

0.13

1254

0.16

1256

0.01

1257

0.08

1269

0.02

1374

0.15

1375

0.05

1378

0.17

1393

0.03

1394

0.11

1395

0.45

योग .. 1.75

(2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है- छायनपुर्व माईनर नहर निर्माण होने से ग्राम गुणावद बल्यापाडा का कुल निजी भूमि रकबा 1.75 हेक्टर.

(3) भूमि का नक्शा ( प्लान ) भू-अर्जन एवं अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) , पेटलावद के कार्यालय में देखा जा सकता है .

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, शोभित जैन , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.

[भाग 1 कार्यालय , प्रशासक, भू- अर्जन एवं पुनर्वास, बाणसागर परियोजना, जिला रीवा, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन राजस्व विभाग

रीवा , दिनांक 13 अगस्त 2010

क्र. 761 - भू- अर्जन-10-11.-चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि , सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अन्तर्गत, इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि निजी/शासकीय भूमि पर स्थित भूमि के अर्जन हेतु आवश्यकता है:-

अनुसूची

( 1 ) भूमि का वर्णन -

(क) जिला-रीवा

(ख) तहसील- सिरमौर

(ग) ग्राम- महमूदपुर

(घ) लगभग क्षेत्रफल -0.056 हेक्टेयर

खसरा नं.

अर्जित रकबा (हे. में)

(2)

(1)

1215

0.056

योगग .. 0.056

(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए आवश्यकता है- बाणसागर. परियोजना क्योटी नहर की पिपरवार वितरक नहर में आने वाले महमूदपुर माइनर नं. 1 की निजी/ शासकीय भूमि पर स्थित संपत्तियों के अर्जन हेतु.

(3) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, भू-अर्जन एवं पुनर्वास, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, आर. आर. वर्मा, प्रशासक एवं पदेन उपसचिव.

भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

कार्यालय , कलेक्टर, जिला सतना, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग सतना , दिनांक 17 अगस्त 2010

क्र. एफ 659 - भू-अर्जन10. चूंकि, राज्य शासन को इस बात कासमाधान हो गयाहै कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लिखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम 1894, संशोधन 1984 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-

अनुसूची

(1 ) भूमि का वर्णन ( म. प्र. शासन/निजी खाता)

(क) जिला- सतना

(ख) तहसील- मैहर

(ग) नगर/ ग्राम - डांडी

(घ) क्षेत्रफल-2.198 हेक्टेयर.

खसरा नं.

क्षेत्रफल (हे. में)

(1)

(2)

313/1

0.178

314

0.018

330

0.052

356/330 क

0.031

354/330

0.052

355/330 क

0.042

337

0.261

311/2

0.261

312/2

0.388

332

0.118

336/2

0.640

339

0.031

331/2

0.105

340/1

0.021

योग .. 2.198

(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये अर्जन आवश्यक है-132 के. व्ही. केन्द्र , मैहर के उन्नयन हेतु.

(3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , कलेक्टर (भू- अर्जन) जिला सतना के न्यायालय में किया जा सकता है.

2177 क्र. एफ 670- भू-अर्जन10. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लिखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम 1894, संशोधन 1984 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-

अनुसूची

( 1 ) भूमि का वर्णन (म. प्र. शासन/निजी खाता ) (क) जिला-सतना

(ख) तहसील- नागौद

(ग) नगर/ ग्राम-सितपुरा

(घ) क्षेत्रफल-7.179 हेक्टेयर.

खसरा नं.

(1)

क्षेत्रफल (हे. में) (2)

207

0.418

257

0.261

260

0.052

261

1.327

262/1

0.397

262/2

0.209

262/3

0.209

263/1

0.211

263/2

1.045

264

0.042

712

0.073

713

0.063

714

0.063

715

0.063

10.052

7.16

0.240

717

718

0.282

720

0.345

721

0.355

722

0.188

723

0.658

724

0.188

725

0.125

728

0.073

729

0.021

730

0.031

731

0.021

732

0.073

733

0.094

7.179

योग ..

2178

[भाग 1

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

(1)

(2)

916/1

0.067 ( 2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये अर्जन आवश्यक है- पावरग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, सतना के विस्तार हेतु .

1.198

917/1

0.037

931/2 क

( 3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण, कलेक्टर ( भू- अर्जन ) जिला सतना के न्यायालय में किया जा सकता है .

0.037

931/2 ख

931/2 ग

0.031

932

0.240

0.441

933/1 का 1

0.442

933/1 का 2

0.505

933/2

क्र. एफ 671 - भू-अर्जन 10. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लिखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम 1894 , संशोधन 1984 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-

योग .. 3.020 अनुसूची

(1 ) भूमि का वर्णन ( म. प्र. शासन/निजी खाता)

(क) जिला- सतना

(ख ) तहसील- नागौद

(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये अर्जन आवश्यक है-पावरग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड , सतना के विस्तार हेतु.

(ग ) नगर/ ग्राम-लालपुर

(घ) क्षेत्रफल-3.020 हेक्टेयर.

(3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण, कलेक्टर ( भू- अर्जन ) जिला सतना के न्यायालय में किया जा सकता है.

खसरा नं.

क्षेत्रफल (हे. में)

(1)

(2)

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, सुखबीर सिंह, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव. 900/1

0.022

कार्यालय , कलेक्टर, जिला सीहोर, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग

सीहोर , दिनांक 8 जुलाई 2010

क्र. 8 - अ - 82-2009-10. -चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इसमें संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इसके द्वारा , इस आशय की, सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत करता है :-

अनुसूची

भूमि का वर्णन

सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन जिला

ग्राम

तहसील

धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी

(6) /

लगभग क्षेत्रफल (एकड़/ हेक्टर में) (4)

(1) (2)

(3)

(5)

इछावर बोरदीकलां

सीहोर

12.62 एकड़/ 5.107 हे.

कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग, सीहोर.

बोरदीकलां जलाशय के निर्माण हेतु भू-अर्जन.

(2) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण, अ.वि.अ./ भू-अर्जन अधिकारी , इछावर के कार्यालय में किया जा सकता है.

(3) उपरोक्त के संबंध में किसी भी व्यक्ति को यदि कोई आपत्ति हो तो वह 30 दिवस के भीतर अविअ कार्यालय, इछावर में प्रस्तुत कर सकेंगे .

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, अजयसिंह गंगवार, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.

2179

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

भाग 1 ]

विभाग प्रमुखों के आदेश

कार्यालय, कलेक्टर, जिला खरगोन मध्यप्रदेश

खरगोन , दिनांक 11 अगस्त 2010

भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( 1894 का क्रमांक -1 ) की धारा 41 के अन्तर्गत अनुबंध पत्र

क्र, 986 - भू- अर्जन- 09 - राजस्व प्रकरण क्रमांक 26-अ- 82-2009-10.- यह अनुबंध पत्र प्रथम पक्ष के रुप में मध्यप्रदेश के राज्यपाल जिनकी ओर से कलेक्टर, जिला खरगनोन एवं पदेन उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग कार्य कर रहे हैं, ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " राज्यपाल " कहा गया है जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है ) तथा द्वितीय पक्ष के रूप में श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. , मण्डलेश्वर, जिला खरगोन , मध्यप्रदेश जो भारतीय कम्पनी अधिनियम , 1956 के अन्तर्गत रजिस्टर्ड है ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " कम्पनी " कहा गया है ) जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके विधिक प्रतिनिधि, निष्पादक, पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है . जिसकी ओर से मुख्यत्यार-

श्री असद जाफर, महाप्रबंधक जो श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. , अभयांचल परिसर, मण्डलेश्वर, जिला खरगोन, मध्यप्रदेश में कार्य कर रहे हैं , के मध्य आज दिनांक 9 अगस्त 2010 को सम्पादित किया जा रहा है .

1. कंपनी ने मध्यप्रदेश शासन को ( जिसे आगे राज्य शासन कहा गया है ) महेश्वर जल विद्युत् परियोजना के निर्माण के कारण आंशिक डूब से प्रभावित होने से ग्राम बकावां प. ह. नं. 30, तहसील बडवाह, जिला खरगोन की आबादी भूमि सर्वे नं. 05 , 09 , 349 , 352, 526/2 भूमि एवं उस पर स्थित संरचनाएं तथा निजी कृषि भूमि सर्वे नम्बर 10/1 , 10/2, 350/1 पर स्थित संरचनाएं एवं शासकीय भूमि सर्वे नम्बर 01 , 06 , 11 , 346 , 348 , 524 पर स्थित संरचनाओं के भू- अर्जन हेतु भू-अर्जन अधिनियम 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत आवेदन - पत्र पेश किया है. जिसका विवरण निम्नानुसार परिशिष्ट 1 , 2, 3 पर अंकित किया गया है.

परिशिष्ट -1

आबादी भूमि एवं उस पर स्थित संरचनाएं ( एफ. आर. एल. के अन्तर्गत डूब से प्रभावित ) स्वत्वधारक या भूमि स्वामी का

नाम/पिता का नाम/पूरा पता

(2)

अनु. क्र. (1)

1 सीतला माता मंदिर

मोटीमाता मंदिर सार्वजनिक 2

3 माता का झीरा सार्वजनिक सार्वजनिक बावडी

4

5 अन्नपूर्णा आश्रम सीताराम धाम शाला भवन शासकीय

6

7 समाधि सिलदार एवं छितरनाथ 8 देवराम पिता नत्थु बंजारा 9 संतोष पिता तुलाराम गुर्जर

विवरण

क्षेत्रफल वर्गमीटर में

मोहल्ला शीट क्र.

प्लाट नम्बर/ भूखण्ड क्र.

(7)

(6.)

(5)

(4)

सर्वे नम्बर (3)

5

1

5

1

1

2

6

5

6

1

1

9

2

31

1

9

1

83

1

349

514

2

1

349

3

30

1

349

24

1

5

349

29

1

6

349 2180

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1 (1)

(2)

(3)

(4)

(5)

(6)

(7) 10

349

1

7

तेजू, मंशाराम, राजू पिता कालू बंजारा

32

11 नानीबाई बेवा छितरनाथ नाथ

349

1

8

45

12

349

1

मंगत पिता कृष्णा दर्जी

9

28

13 दीपक पिता मांगीलाल दर्जी

349

1

10

23

14

352

1

225

नानकराम पिता पुनमचंद नावड़ा

31

15

352

कड़वा पिता छोगालाल कहार

1

226

84

16

352

1

227

5

गुलाबचंद पिता अनोकचंद सुतार

17

352

228

भगवान पिता मोतीराम नावड़ा

1

305

18 नैन पिता बोखार केवट

352

1

230

57

19

352

हरिशंकर पिता गेन्दालाल नावड़ा

1

231

54

20

352

1

232

मयाराम पिता ओंकार नावड़ा

57

21

352

1

326

मयाराम पिता ओंकार नावड़ा

17

22

352

1

सुरेश पिता फूलचंद सोनी

233

40

23

352

1

236

34

शोभाराम पिता चंपालाल सुतार

24

352

1

237

चैनसिंग पिता कोलू कहार

10

25 आनन्दराम पिता गोपाल प्रजापत

352

1

238

11

26

352

1

चैतराम पिता रामाजी गुर्जर

242

22

27

352

1

कैलाश पिता चैतराम गुर्जर

243

23

28 हिरालाल पिता बांगाजी कहार

352

1

245

11

29

352

1

246

6

प्रहलाद पिता दगडू राजपूत

30 कडवा पिता शंकर केवट

352

1

248

18

31

352

कडवा पिता शंकर केवट

1

266

37

32

352

1

249

रेवाराम पिता नत्थुजी केवट

14

33 नैनसिंह पिता कोल्या कहार

352

1

249/641

9

34

352

1

रमेश पिता पुनाजी कहार

251

37

35

352

1

252

मनोहर पिता पुनाजी कहार

41

36

352

1

253

33

किशोर पिता पुनाजी कहार

37

352

1

254

मिश्रीलाल पिता पुनाजी कहार

53

38

352

1

255

नैनसिंग पिता कोलू कहार

12

39

352

1

321

शोभाराम पिता दल्या नावड़ा

40

40

352

1

322

नारायण पिता बोंदर ठाकुर

30

41

352

राजाराम पिता छोगालाल कहार

1

323

31 भाग 1 ]

2181

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

(2)

(1)

42 मोहनलाल पिता नत्थुजी केवट 43 राधाकृष्ण मंदिर सार्वजनिक 44 नानू पिता मांगीलाल नावड़ा 45 भवरसिंह पिता दगडूसिंह राजपूत 46 बालकराम पिता बोंदर नावड़ा 47 बालकराम पिता बोंदर नावड़ा 48 कड़वा पिता बाबू नावड़ा 49 कन्हैया पिता किशन नावड़ा 50 प्रभु पिता मांगीलाल कुम्हार 51 चेतराम पिता रूपाजी केवट 52 चेतराम पिता रूपाजी केवट 53 नानकराम पिता चम्पालाल केवट 54 लखन पिता बोखार कुम्हार 55 संजय पिता चम्पालाल कलाल 56 प्रकाश पिता भागीरथ बलाई 57 नत्थु पिता प्रभु कुम्हारं

58 शिवराम पिता हरिराम कुम्हार 59 लक्ष्मीबाई बेवा गेन्दालाल नावड़ा 60 दुर्गाराम पिता मंशाराम गुर्जर 61 मंगु पिता गोविन्द बलाई

62 तुलाराम पिता गलाजी बलाई 63 जीवन पिता सुखलाल बलाई 64 मिश्रीलाल पिता बाबूलाल केवट 65 नानकराम पिता रघुनाथ नावड़ा 66 काशीराम पिता पुनाजी बलाई 67 बोखार पिता शंकर बलाई 68 संजय पिता चम्पालाल बलाई 69 चम्पालाल पिता मांगीलाल बलाई 70 सखाराम पिता लच्छीराम बलाई 71 लच्छीराम पिता दुलीचंद बलाई (3)

(4)

(5)

(6)

(7) 352

1

324

36

352

1

328

135

352

1

329

46

352

1

330

33

352

1

331

35

352

20

338

1

352

1

332

31

352

1

333

30

352

1

334

67

352

1

335

34

352

1

342

54

352

336

1

49

352

1

337

44

352

1

32

339

1

352

340

38

1

352

1

343

41

352

1

45

344

1

352

516

124

352

1

517

80

352

522

1

30

1

352

523

61

352

1

531

41

352

1

532

83

352

1

533

74

1

352

534

75

352

1

535

64

352

1

537

18

352

1

538

23

352

1

548

97

352

1

549

107

महायोग 3625 2182

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1

परिशिष्ट -1

आबादी भूमि एवं उस पर स्थित संरचनाएं ( एफ. आर. एल. एम. डब्ल्यू. एल. के अन्तर्गत डूब से प्रभावित )

सर्वे नम्बर

अनु. क्र.

. स्वत्वधारक या भूमि स्वामी का नाम/पिता का नाम/पूरा पता

प्लाट नम्बर/ भूखण्ड क्र.

(1)

(2)

(3)

मोहल्ला शीट क्र. (4)

विवरण (7)

क्षेत्रफल वर्गमीटर में (6)

(5)

11

1 लीलाधर पिता राजाराम दर्जी

349

1

93

2

1

12

33

349

राजू पिता कालू बंजारा

3

349

1

13

13

मंशाराम पिता कालू बंजारा

4

352

1 208 पैकी

17

प्रेमलाल पिता सखाराम गुर्जर

5

352

1 209 पैकी

57

जगदीश पिता आनन्दराम गुर्जर

6

352

210

1

40

केसरीलाल पिता गोविन्द गुर्जर

1

7

352

211

44

सजनबाई पिता कड़वा, महेश पिता कड़वा कहार

352

1

8

212

38

रेवाबाई बेवा देवीसिंग नावड़ा

9

352

1

51

213

लीलाबाई बेवा कालू नावड़ा

10

352

1

214

12

देवकीबाई पति भीकाराम नावड़ा

11

352

216

21

कमलचंद पिता शंकर दर्जी

1

12

352

1

217

33

अन्नपूर्णाबाई बेवा बाबूलाल नाथ

13

1

218

97

दीपक, शिवनारायण पिता मांगीलाल दर्जी 352

14

352

1

219

72

संतोष पिता देवराम गुर्जर

15

352

1 220 पैकी

80

गलाजी पिता झापूजी गुर्जर

16

352

1

227

गेन्दालाल पिता ओंकार प्रजापत

221 पैकी

17

352

1

223 पैकी

40

आनन्दराम पिता गोपाल

18

1

352

229

55

रणछोड़ पिता शंकर केवट

19

352

1

234

184

केवट समाज धर्मशाला अध्यक्ष केसरीलाल पिता मयाराम केवट

20

352

1

235

33

शिवराम पिता चम्पालाल सुतार

21

352

1

256

त्रिलोकचंद पिता धन्नालाल कहार

78

1

352

257

71

22 मंगू पिता धन्नालाल कहार

352

23

1

258

62

बीनाबाई बेवा कोलू कहार

24

352

1

259

76

नैनसिंग पिता कोलू कहार

25

352

1 260 पैकी

60

चैनसिंग पिता कोलू कहार

26

352

1

267

43

त्रिलोकचंद पिता शिवराम सुतार

27

352

45

दयाराम पिता छोगालाल कहार

1

268

28

1

352

269

45

सखाराम पिता छोगालाल कहार भाग 1 ]

2183

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

(1)

(2)

29 हिरालाल पिता बांगाजी कहार 30 जितेन्द्र पिता हिरालाल गुर्जर 31 संतोष पिता चेतराम गुर्जर 32 भवरसिंह पिता दगडूसिंह राजपूत 33 प्रहलाद पिता दगडू राजपूत 34 चैनसिंह पिता दगडू राजपूत 35 नत्थु पिता बाबू सेन

36 रेवाराम पिता नत्थुजी केवट 37 बोखारं पिता हिरालाल कुम्हार 38 शान्ताबाई बेवा टीकाराम अनील, दुर्गाबाई, सुमनबाई, ममताबाई पिता टीकाराम कुम्हार धामनोद.

39 कड़वा पिता बाबू नावड़ा 40 मिश्रीलाल पिता बाबूलाल केवट 41 हरिराम पिता मांगीलाल कुम्हार 42 प्रभु पिता मांगीलाल कुम्हार 43 शोभाराम पिता दयाराम नावड़ा 44 गबरु पिता सुक्या बलाई 45 कन्हैया पिता किशन नावड़ा 46 बालकराम पिता बोंदर नावड़ा 47 काशीराम पिता मांगीलाल बलाई 48 दिनेश पिता शोभाराम नावड़ा 49 नाना पिता गोविन्द बलाई 50 भागीरथ पिता फत्थु बलाई 51. सोमारिया पिता पुनाजी बलाई 52 बिहारी पिता शोभाराम बलाई 53 जयराम पिता गेन्दालाल बंजारा 54 पुनाजी पिता गोविन्द बलाई 55 जीवन पिता तोताराम बलाई 56 मांगीलाल पिता पुन्या बलाई 57 आनंदराम पिता मांगीलाल बलाई 58 करसन पिता मांगीलाल बलाई 59 सखाराम पिता मांगीलाल बलाई (3)

(4)

(5)

(6)

(7) 352

1

45

270पैकी

314पैकी

352

1

5

1

352

315 पैकी

21

352

1

317

65

352

1

318

60

352

1

319

61

1

352

320

101

325

352

1

12

352

1

345

81

352

1

345/644

80

346 पैकी

352

1

73

352

1

5

347 पैकी

351

352

1

67

352

106

352पैकी

1

352

1 353 पैकी

27

352

1 511 पैकी

56

1

352

66

514पैकी

352

1

515

110

1

352

519

28

352

1

520

35

1

521

352

31

1

352

526 पैकी

9

30

527

352

1

352

1 528पैकी

60

352

1

529

89

1

352

530

44

352

1

540

28

352

1

541

20

352

1

542

45

352

1

543

68

352

544 पैकी

18

1 2184

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1 (1)

(2)

(4)

(3)

(5)

(6)

(7) 60

352

1 550 पैकी

राधेश्याम पिता सुखलाल बलाई

56 61

352

1

दिनेश पिता पुनाजी बलाई

551 पैकी

60 62

526/2

2

बाबूलाल पिता बोखार हरिजन

106 पैकी

45 63

526/2

2 107 पैकी

65 दुर्गामाता मंदिर निर्माणकर्ता अंबाराम पिता बांगाजी हरिजन .

64

526/2

2

नन्दु पिता लच्छीराम हरिजन

115 पैकी

28 65 तोताराम पिता लल्छीराम हरिजन

526/2

2 116. पैकी

18 66

526/2

2 117 पैकी

22 देवराम पिता लच्छीराम, ललीताबाई बेवा लच्छीराम हरिजन.

67

526/2

देवराम पिता नरसिंग हरिजन

2 120 पैकी

15 68

526/2

लिम्बाराम पिता सीताराम हरिजन

2 121 पैकी

8 69

526/2

2

125

20 वेणीराम पिता रेवाराम गुर्जर

70

526/2

धन्नालाल पिता गणपत हरिजन

2.

127

22

योग 3625

महायोग 7250

परिशिष्ट-2

निजी कृषि भूमि में स्थित संरचनाएं

नाम मकान मालिक पिता का नाम

ख. नं.

संपत्ति का विवरण अनु. क्र. (1)

(2)

(3)

(4) 1

10/1

राजाराम पिता धनाजी गुर्जर

1 मकान पक्का 2

प्रभु पिता मांगीलाल प्रजापत

10/1

1 मकान पक्का 3

10/1

भीका पिता नत्थूकेवट

1 मकान पक्का 4

नारायण पिता गेन्दालाल केवट

10/1

1 मकान पक्का 5

10/1

1 मकान पक्का बलीराम पिता सखाराम गुर्जर

6

बंसतीबाई पति रामेश्वर बलाई

10/1.

1 मकान पक्का 7

10/1

कड़वा पिता बदु हरिजन

1 मकान पक्का 8

10/1

भैय्यालाल पिता कड़वाजी गुर्जर

1 मकान पक्का 9

10/1

रूपचंद्र पिता तुलसीराम हरिजन

1 मकान पक्का 10

जगन पिता दयाराम हरिजन

10/1

1 मकान पक्का 11

10/1

चेतराम पिता मयाराम गुर्जर

1 मकान पक्का 12

10/1

मुकेश पिता हुकुमचंद गुर्जर

1 मंकान पक्का 13

10/1

छगन पिता रामचन्द गुर्जर

1 मकान पक्का 14

10/1

आनन्दराम पिता रामलाल गुर्जर

1 मकान पक्का भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

(1)

(2) 15

जगन्नाथ पिता चम्पालाल गुर्जर 16

प्रेमलाल पिता लक्ष्मण गुर्जर 17

फुलसिंह पिता रूकडु भिलाला 18

रामेश्वर पिता लक्ष्मण गुजर 19

आनन्दराम पिता गोपाल प्रजापत 20

'लखनलाल पिता मोजीलाल गुर्जर 21

चिन्ताराम पिता मांगीलाल गुर्जर 22

भलाजी पिता झापुजी गुर्जर 23

कमलाबाई बेवा रघुराम गुर्जर 24

बलीराम पिता नत्थू गुर्जर 25

फूलसिंह पिता मेहताब भिलाला 26

शिवराम पिता शोभाराम गुर्जर 27

रेवाराम पिता भाउजी गुर्जर 28

भुवानीराम पिता करसन गुर्जर 29

चिन्ताराम पिता दयाराम गुर्जर 30

केशरीमल पिता छितर सोनी 31

शोभाराम पिता कालूजी गुर्जर 32

मुरार पिता रतन गुर्जर

33

दिलीप पिता वेणीराम गुर्जर 34

भुवानीराम पिता रामाजी गुर्जर 35

अनोखीबाई बेवा गेन्दालाल गुर्जर 36

बलीराम पिता शोभाराम गुर्जर 1

सिद्धनाथ पिता छज्जू नाथ 2

गौरीशंकर पिता सुरजमल बंजारा 3

प्रेमलाल पिता जवारिया बंजारा 4

संतोषबाई पिता नानकराम केवट 5

हरिराम पिता नानकराम केवट 6

मिश्रीलाल पिता मुकुन्द केवट 7

रमेश पिता हिरालाल गुर्जर 8

गीताबाई पिता गोविन्द गुर्जर

2185 (3)

(4):

10/1

1. मकान पक्का 10/1

1 मकान पक्का 10/1

1 मकान पक्का 10/1

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 10/2

1 मकान पक्का 350/1

1 मकान पक्का :

350/1

1 मकान पक्का 350/1

1 मकान पक्का 350/1

1 मकान पक्का 350/1

1 मकान पक्का 350/1

1 मकान ईंट 350/1

1.मकान पक्का 350/1

1 मकान ईंट 2186

[भाग 1

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

(1)

(2) 9

द्विलीप पिता गोविन्द नामदेव 10

बालु पिता धनाजी गुर्जर 11

नंदराम पिता बालुजी गुर्जर 12

शंकर मंदिर निर्माता चिन्ताराम, हुकुमचन्द पिता मांगीलाल गुर्जर.

13

रामेश्वर पिता शंकर दर्जी 14

महेश पिता कालू नावड़ा 15

बालकराम पिता बाबूलाल केवट 16

राजाराम पिता फूलचंद दर्जी 17

गौरीशंकर पिता सुरजमल बंजारा

(3)

(4)

350/1

1 मकान ईंट

1 मकान पक्का

350/1

350/1

1 मकान पक्का

1 मकान पक्का आर. सी. सी.

350/1

350/1

' 1 मकान पक्का

350/1

1 मकान पक्का

350/1

1 मकान कच्चा

350/1

1 मकान पक्का

350/1

1 मकान पक्का परिशिष्ट-3

शासकीय भूमि में स्थित संरचनाएं

ख. नं .

अनु. क्र.

(1)

(2)

1

1

2

6

संपत्ति का विवरण

मद (3)

(4)

नर्मदा नदी

नर्मदा घाट पक्का

40 मकान

ना. का. चरनोई

3

11

4

346

1 लेटरिन्ग

1 निलकठेश्वर मंदिर

1 आश्रम गुजर समाज

1 मड़ी गुजर समाज

1 नर्मदा मंदिर

सार्वजनिक ओटला

1

1 बाबा का ओटला

40 पम्प हाउस

02 कुआ पक्का

118 पाईप लाईन

मकान

11

नि. चरागाह

51 मकान

नि. चरागाह

348

5

1 गोरबरगैस संयंत्र

2 मकान

नि. चरागाह

6

524

14 मकान

ना. का. चरनोई

2187 भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

2. राज्य शासन ने नियमों के अनुसार आवश्यक एवं निर्धारित प्रक्रिया से जांच कर इस बात की संतुष्टी कर ली है कि उक्त जल विद्युत परियोजना राज्य में विद्युत की कमी की पूर्ति हेतु और क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है.

3. कंपनी के भू-अर्जन आवेदन- पत्र के आधार पर राज्य शासन द्वारा दिनांक 1 सितम्बर 2007 को संपन्न भू-अर्जन समिति की बैठक में लिये गये निर्णय अनुसार मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग मंत्रालय , भोपाल के पत्र क्रमांक एफ-12-15- 07-सात- 2- ए भोपाल, दिनांक 4 अक्टूबर 2007 द्वारा भू-अर्जन की सशर्त अनुमति प्रदान की है इसका इस अनुबंध पत्र में समावेश किया गया है .

4. कंपनी को प्रदत्त अनुमति की शर्त के पालन में कंपनी को राज्यपाल के साथ भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 41 के अन्तर्गत विहित प्रावधान अनुसार अनुबंध निष्पादित करना है . कंपनी की ओर से सहमत होकर यह अनुबंध पत्र निष्पादित किया जाता है.

कंपनी निम्न प्रकार सहमत होकर घोषणा करती है कि

(क) कंपनी राज्य शासन को अथवा राज्य शासन के द्वारा इस हेतु नियुक्ति व्यक्ति को ऐसी समस्त राशि का अग्रिम भुगतान करेंगी जो भू- अर्जन अधिनियम, 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत अवार्ड की राशि जो उक्त भूमि पर स्वत्वधारी व्यक्तियों को मुआवजे के रूप में भुगतान योग्य होंगी .

(ख ) कंपनी राज्य शासन को ऐसे सभी प्रभारों ( खर्च ) का भुगतान भी करेगी जो अधिनियम के अनुसार उक्त भूमि के भू-अर्जन कार्य से युक्तिसंगत संबंधित होगा.

(ग.) उपर्युक्त ( क ) तथा ( ख ) में वर्णित समस्त भुगतानों के बाद ही राज्यपाल परिशिष्ट 1 में वर्णित आबादी भूमि तथा उस पर स्थित संरचनाएं तथा परिशिष्ट 2 , 3 में वर्णित संरचनाऐं कंपनी को प्रदाय करेगा , जो अनुमति में उल्लेखित निम्न शर्तों के अधीन होगा

1. अर्जित की गयी निजी भूमि का वार्षिक व्यपवर्तन कर कंपनी द्वारा देय होगा.

2. भूमि जिस उपयोग के लिए अर्जित की जा रही है , वही उपयोग कंपनी द्वारा किया जायेगा.

3. भूमि पर निर्माण कार्य करते समय सामान्य जनता के निस्तार आदि का ध्यान रखा जावेगा.

4. कंपनी ( इस आशय के करारनामे या वचनबद्धता के अनुसार) जिन कृषकों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है उन कृषकों के परिवार के कम से कम एक संदस्य को कंपनी में आदर्श पुनर्वास नीति में दिए गये निर्देशों के अनुरूप नौकरी देगी.

5. कंपनी को दी गई भूमि या उसके किसी भाग अथवा उस पर निर्मित किसी भी निर्माण अथवा भवन आदि को बेचने , बंधक रखने, दान देने , पट्टे पर देने या अन्य प्रकार से अन्तरित करने का अधिकार नहीं होगा. (धारा 44ए)

6.

यदि कंपनी को दी गई भूमि/ भवन या उसके किसी भी भाग को विक्रय करती है तो भूमि अथवा उस पर निर्मित भवन, इमारतें शासन को अपने कब्जे में लेने का अधिकार होगा और कंपनी को किसी प्रकार का मुआवजा देय नहीं होगा.

7. भूमि की केवल सतह का ही उपयोग किया जावेगा. आवश्यक निर्माण जैसे भवन निर्माण, नीव आदि के अतिरिक्त खुदाई नहीं की जावेगी तथा ऐसी खुदाई में प्राप्त खनिज एवं गौड़ खनिज पर नियमानुसार रोयल्टी का भुगतान करना होगा.

2188 .

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1 8. शासन की पुर्वानुमति के बिना भूमि के उपयोग के स्वरूप को बदला नहीं जावेगा.

9. पर्यावरण की दृष्टि से पर्याप्त आवश्यक वृक्षारोपण किया जावेगा.

10. प्रदूषण नहीं किया जावेगा. इस संबंध में विभाग के आदेशों का पालन करना होगा तथा उनसे एवं प्रदूषण निवारण मंडल से अनापत्ति प्रमाण पत्र इस आशय के प्राप्त करना होंगे कि, " पर्यावरण, जल स्त्रोत या वायु में प्रदूषण नहीं किया जावेगा" .

11. भूमि के किसी उपयोग या उस पर किसी निर्माण के पूर्व सभी आवश्यक अनुमतियां अनुमोदन एवं अनापत्तियां संबंधित एवं स्थानीय संस्था को जैसे नगर निगम , नगर तथा ग्रामीण निवेश विभाग , कलेक्टर आदि से प्राप्त करना होगा तथा मास्टर प्लान एवं पर्यावरण संस्था के नियमों आदि का पूर्ण पालन किया जावेगा.

12. यदि कभी भी उक्त भूमि का उपयोग उक्त प्रयोजन के लिए नहीं होता है या बाद में कभी बंद कर दिया जाता है तो भूमि तथा उस पर निर्मित भवनों, सम्पत्तियों के साथ शासन में निहित हो जावेगी और कंपनी को मुआवजा देय नहीं होगा.

13. भूमि या उसके किसी भाग या उस पर बने किसी भवन आदि को उक्त उल्लेखित उपयोग के अलावा ना तो किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने दिया जावेगा और ना ही पट्टे या किराये पर दिया जावेगा.

14. भूमि जिस प्रयोजन हेतु दी गई हो, उससे भिन्न प्रयोजन हेतु उपयोग किये जाने से अधिकृत कब्जा मान कर भूमि शासन में निहित कर ली जावेगी.

15. शासन के प्रतिनिधि कलेक्टर या उसके द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि को भूमि के सही उपयोग तथा शर्तों के पालन की दृष्टि से कभी भी भूमि पर निर्मित भवन निर्माण आदि तथा परिसर के निरीक्षण करने का अधिकार होगा .

16. मौंके की स्थिति या स्थानीय आवश्यकतानुसार भू- अर्जन की कार्यवाही के तौरान कलेक्टर द्वारा लगाई अन्य आवश्यक शर्तें.

17. प्रचलित नियमों के अन्तर्गत अग्रिम राशि कंपनी से शासन के खाते में जमा करने की नियमानुसार कार्यवाही की जावे.

(क) राज्य शासन कंपनी को आश्वस्त करता है कि भूमि और भूमि पर निर्मित भवन या अन्य निर्माण का मुआवजा मिल जाने पर प्राप्त राशि का उपयोग प्रभावित व्यक्ति नये पुनर्वास स्थल पर उसे आवंटित प्लाट पर मकान बनाने के लिए करेगा. यदि वह उसका उपरोक्त अनुसार उपयोग नहीं करता है, तो वह आवंटित स्थल पर मकान बनाने के लिए अन्य राशि और अनुदान राशि की मांग करने का अधिकारी नहीं होगा.

(ख) राज्य शासन की अनुमति से कंपनी को दी गई भूमि एवं उस पर निर्मित भवन और अन्य निर्माण से पुराने मालिक द्वारा नये पुनर्वास स्थल पर अपना मकान बनाने हेतु उपयोगी सामग्री ले जाने के बाद उसका उस भूमि और मकान पर कोई अधिकार नहीं होगा, यदि वह उस पर अतिक्रमण / अधिपत्य रखता है, तो राज्य शासन उचित कार्यवाही कर उसे हटायेगा. जिसमें लगने वाले व्यय के संदाय का उत्तरदायी भी होगा.

(ग) स्थानीय आवश्यकता एवं परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक होने पर सार्वजनिक हित में राज्य शासन या कलेक्टर द्वारा समय- समय पर जारी निर्देशों एवं आदेशों का पालन किये जाने के लिए कंपनी बाध्य होगी .

2189 भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

(घ) इस अनुबंध पत्र की कंडिका 1 में उल्लेखित परिशिष्ट 1. 2. 3 में वर्णित भूमि एवं संरचनाओं के अर्जन के फलस्वरूप मूल्य निर्धारण में जो राज्य शासन द्वारा किया गया है , कोई विवाद उत्पन्न होता है , तो उस विवाद का निपटारा नियमानुसार सक्षम न्यायालय ( सिविल न्यायालय ) द्वारा किया जावेगा तथा अंतिम अपीलिय न्यायालय का आदेश मान्य होगा. यदि किसी देय राशि का भुगतान कंपनी द्वारा नहीं किया जाता है , तो राज्य शासन भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही वापस ले सकेगी और भूमि अधिग्रहण वापस लेने की स्थिति में शासन को हुई क्षति जो भूमि अधिग्रहण करने की वापसी के फलस्वरूप होगी , उसका भुगतान भी कंपनी द्वारा राज्य शासन को किया जावेगा.

भू-अर्जन की समस्त प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरांत पक्ष क्र. 1 राज्य शासन, पक्ष क्र. 2 कंपनी को अर्जित की गयी भूमि का अधिपत्य एवं स्वत्व प्रदान करने के बाबद आवश्यक कार्यवाही कर दस्तावेज निष्पादन करावेगी. अनुबंध के निष्पादन पंजीयन तथा अन्य दस्तावेजों के निष्पादन , स्टाम्प ड्यूटी , पंजीयन शुल्क तथा अन्य प्रासंगिक व्यय का भुगतान कंपनी द्वारा किया जावेगा.

इस अनुबंध में अन्यथा कोई कार्यवाही शेष रहती है, तो दोनों पक्षों द्वारा विधि पूर्वक प्रक्रिया के तहत निपटारा किया जावेगा.

दो साक्षियों की उपस्थिति में पक्ष क्र. 1 राज्य शासन की ओर से कलेक्टर, जिला खरगोन एवं पक्ष क्र. 2 की ओर से श्री असद जाफर, महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. मण्डलेश्वर, जिला खरगोन द्वारा हस्ताक्षरित कर यह अनुबंध पत्र साक्षियों के समक्ष लिखित हस्ताक्षरित एवं निष्पादित किया गया है.

पक्ष क्र. 1

साक्षियों के हस्ताक्षर

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, (पूरा नाम पिता का नाम एवं पूरा पता)

हस्ता./-

(केदार शर्मा)

कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव ,

मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग.

साक्षी क्र. 1

हस्ता./-

जिला खरगोन (म. प्र. )

नाम : के. पी. ठाकरे,

पता : रेवेन्यूकालोनी,

जिला खरगोन ( म. प्र. )

पक्ष क्र. 2

साक्षी क्र. 2

हस्ता./-

हस्ता./-

नाम : छोटेखान

(असद जाफर)

महाप्रबंधक,

पता म. नं. 15, टवड़ी मोहल्ला ,

खरगोन.

श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पो. लिमि. ,

मण्डलेश्वर.

2190

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1

खरगोन दिनांक 16 अगस्त 2010

भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( 1894 का क्रमांक -1 ) की धारा 41 के अन्तर्गत अनुबंध- पत्र क्र. 1013- भू-अर्जन-10- रा.प्र.क्र. 11-अ-82-09-10.-यह अनुबंध पत्र प्रथम पक्ष के रूप में मध्यप्रदेश के राज्यपाल जिनकी ओर से कलेक्टर जिला खरगोन एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग कार्य कर रहे हैं, ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " राज्यपाल " कहा गया है जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है ) तथा द्वितीय पक्ष के रूप में श्री महेश्वर हायड़ल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. मण्डलेश्वर, जिला खरगोन, मध्यप्रदेश जो भारतीय कम्पनी अधिनियम, 1956 के अन्तर्गत रजिस्टर्ड है . ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " कम्पनी " कहा गया है ) जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके विधिक प्रतिनिधि , निष्पादक, पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है. जिसकी ओर से मुख्यत्यार-

श्री असद जाफर, महाप्रबंधक जो श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. अभयांचल परिसर मण्डलेश्वर, जिला खरगोन, म. प्र. में कार्य कर रहे हैं , के मध्य आज दिनांक 11 अगस्त 2010 को सम्पादित किया जा रहा है-

1. कंपनी ने मध्यप्रदेश शासन को (जिसे आगे राज्य शासन कहा गया है ) महेश्वर जल विद्युत् परियोजना के निर्माण के कारण आंशिक डूब से प्रभावित होने से ग्राम पाछला, प.ह.नं. 29, तहसील बड़वाह, जिला खरगोन की निजी कृषि भूमि सर्वे नं. 07 पैकी क्षेत्रफल 0.648 है?हे. एवंएवं सर्वे नं. 33 पैकी क्षेत्रफल 0.040 हे. भूमि एवं उस पर स्थित परिसंपत्तियों के भू-अर्जन हेतु भू-अर्जन अधिनियम, 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत आवेदन - पत्र भाननीय उच्च न्यायालये , जबलपुर में दायर याचिका क्रमांक W.P./1359/09 , दिनांक 6 मई 2009 में पारित आदेश के पालन में पेश किया है. जिसका विवरण निम्नानुसार परिशिष्ट 1 पर अंकित किया गया है .

परिशिष्ट-1

निजी कृषि भूमि एवं उस परस्थित संस्चनाएं/परिसंपत्तियां एफ.आर.एल. के अन्तर्गत ग्राम पाछला

खसरा नंबर

अनु.क्र. नाम भूमि स्वामी/पिता का नाम

अर्जनीय

सम्पत्ति का विवरण एवं जाति

क्षेत्रफल

(1)

(2)

(3)

(4)

(5) 1

07 पैकी

0.648

नीम-2 नानीबाई बेवा राजाराम गुर्जर, निवासी रावेर.

2

33 पैकी

0.040

छतरसिंह , जमनाबाई, गंगाबाई, पिता श्यामलाल नहाल, निवासी मर्दाना.

योग .. 0.688

2. राज्य शासन ने नियमों के अनुसार आवश्यक एवं निर्धारित प्रक्रिया से जांच कर इस बात की संतुष्टी कर ली है कि उक्त जल विद्युत् परियोजना राज्य में विद्युत की कमी की पूर्ति हेतु और क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है.

3. कंपनी के भू- अर्जन आवेदन- पत्र के आधार पर राज्य शासन द्वारा दिनांक 20-4-2010 को सम्पन्न भू-अर्जन समिति की बैठक में लिये गये निर्णय अनुसार मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग, मंत्रालय, भोपाल के पत्र क्र. एफ-12-07/2010/सात/-- 2ए, भोपाल दिनांक 10 मई 2010 द्वारा भू-अर्जन की सशर्त अनुमति प्रदान की है इसका इस अनुबंध पत्र में समावेश किया गया है .

4. कंपनी को प्रदत्त अनुमति की शर्त के पालन में कंपनी को राज्यपाल के साथ भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 41 के अन्तर्गत विहित प्रावधान अनुसार अनुबंध निष्पादित करना है. कंपनी की ओर से सहमत होकर यह अनुबंध- पत्र निष्पादित किया जाता है.

भाग 1 ]

2191

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

कंपनी निम्न प्रकार सहमत होकर घोषणा करती है कि-

(क) कंपनी राज्य शासन को अथवा राज्य शासन के द्वारा इस हेतु नियुक्त व्यक्ति को ऐसी समस्त राशि का अग्रिम भुगतान करेंगी जो भू-अर्जन अधिनियम , 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत अवार्ड की राशि जो उक्त भूमि पर स्वत्वधारी व्यक्तियों को मुआवजे के रूप में भुगतान योग्य होगी .

(ख) कंपनी राज्य शासन को ऐसे सभी प्रभारों ( खर्च ) का भुगतान भी करेंगी जो अधिनियम के अनुसार उक्त भूमि के भू- अर्जन कार्य से युक्तिसंगत संबंधित होगा.

(ग) उपर्युक्त ( क ) तथा ( ख में वप्रिति समस्त भुगतानों के बाद ही राज्यपाल परिशिष्ट 1 , में वर्णित निजी कृषि भूमि तथा उस पर स्थित संरचनाएं/परिसंपत्तियां कंपनी को प्रदाय करेगा, जो अनुमत्ति में उल्लेखित निम्न शर्तों के अधीन होगा- 1.

कंपनी ( इस आशय के करारनामे या बच्चनबद्धता के अनुसार ) जिन कृषकों की भूष्टि अधिग्रहित की जा रही है उनके परिवार के कम से कम एक सदस्य को पात्रतानुसार नौकरी देने में प्राथमिकत्ता देगी. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के व्यक्तियों के लिए पुनर्वास किये जाने की स्थायी योजना को संबंधित प्रोजेक्ट में शामिल किया जावेगा.

2.. भू-अर्जन अधिनियम के अन्तर्गत भू- अर्जन की जा रही भूमि के मूल्यांकत के आधार पर शत- प्रतिशत राशि के साथ 10 प्रतिशत राशि जमा कराये जाने के उपरांत ही कलेक्टर के द्वारा भू-अर्जन की कार्यवाही की जाये.

3. संबंधित कंपनी के लिये भू- अर्जन किये जाने संबंधी कार्य संबंधित कलेक्टर्स के द्वारा भू-अर्जन अधिनियम तथा संबंधित विधिक उपबंधों एवं शासनादेशों के अन्तर्गत दिये गये प्रावधानों तथा शर्तों के आधार पर किया जावे.

4. संबंधित परियोजना को स्थापित करने के संबंध में संबंधित कंपनी द्वारा म.प्र. पुनर्वास नीति के अन्तर्गत पुनर्वास की कार्यवाही. कीजायेगी.

5. कंपनी के संबंध में करारनामा, वचनबद्धता एवं शर्तें आदि लागू करने के लिए कलेक्टर कार्यवाही करेंगे.

6. भूमि के किसी उपयोग या उस पर किसी निर्माण के पूर्व सभी आवश्यक अनुमतियां अनुमोदन एवं अनापत्तियां संबंधित संस्था को जैसे नगर निगम, नगर तथा ग्रामीण निवेश विभाग एवं अन्य स्थानीय संस्थाओं, कलेक्टर आदि से प्राप्त करना होगा तथा मास्टर प्लान एवं पर्यावरण संस्था के नियमों आदि का पूर्ण पालन किया जावेगा.

7. अर्जित की गयी निजी भूमि का वार्षिक व्यपवर्तन कर कंपनी द्वारा देय होगा.

8. भूमि जिस उपयोग के लिये अर्जन की जा रही है वही उपयोग कंपनी द्वारा किया जायेगा.

9. भूमि पर निर्माण कार्य कराते समय सामान्य जनता के निस्तार आदि का ध्यान रखा जावेगा .

10. कंपनी को दी गई भूमि या उसके किसी भाग अथवा उस पर निर्मित किसी भी निर्माण अथवा भवन आदि को बेचने , बंधक रखने, दान देने, पट्टे पर देने या अन्य प्रकार से अन्तरित करने का अधिकार नहीं होगा. ( धारा 44 - ए, भू-अर्जन अधिनियम के तहत ) .

11. यदि कंपनी को दी गई भूमि / भवन या उसके किसी भी भाग को विक्रय करती है तो भूमि अथवा उस पर निर्मित भवन, इमारतें शासन को कब्जे में लेने का अधिकार होगा और कंपनी को किसी प्रकार का मुआवजा देय नहीं होगा .

12. भूमि की केवल सतह का ही उपयोग किया जावेगा. आवश्यक निर्माण जैसे भवन निर्माण , नींव आदि के अतिरिक्त खुदाई नहीं की जायेगी तथा ऐसी खुदाई में प्राप्त खनिज एवं गौड़ खनिज पर नियमानुसार रायल्टी का भुगतान करना होगा.

13. शासन की पुर्वानुमति के बिना भूमि के उपयोग के स्वरूप को बदला नहीं जावेगा.

14. पर्यावरण की दृष्टि से पर्याप्त आवश्यक वृक्षारोपण किया जावेगा.

2192

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1 15. कंपनी द्वारा प्रदूषण निवारण हेतु व्यवस्था की जावेगी. इस संबंध में शासन के संबंधित विभाग के आदेशों का पालन करना होगा तथा उनसे एवं प्रदूषण निवारण मंडल से अनापत्ति प्रमाण- पत्र प्राप्त करना होंगे कि, पर्यावरण , जल स्रोत या वायु में प्रदूषण नहीं किया जावेगा.

16. यदि कभी उक्त भूमि का उपयोग उक्त प्रयोजन के लिये नहीं होता है या बाद में कभी बंद कर दिया जाता है तो भूमि तथा उस पर निर्मित भवनों, सम्पत्तियों के साथ शासन में निहित हो जावेगी और कंपनी को इस हेतु मुआवजा देय नहीं होगा.

17. भूमि या उसके किसी भाग या उस पर बने किसी भवन आदि को उक्त उल्लेखित उपयोग के अलावा ना तो किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने दिया जावेगा, और ना ही पट्टे या किराये पर दिया जावेगा.

18. भूमि जिस पर प्रयोजन हेतु दी गई हो उससे भिन्न प्रयोजन हेतु उपयोग किये जाने से अनाधिकृत कब्जा मान कर भूमि शासन में निहित कर ली जावेगी.

19. शासन के प्रतिनिधि या कलेक्टर या उसके द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि को भूमि के सही उपयोग तथा शर्तों के पालन की दृष्टि से कभी भी भूमि पर निर्मित भवन आदि तथा परिसर के निरीक्षण करने का अधिकार होगा .

20 स्थानीय आवश्यकता एवं परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक होने पर सार्वजनिक हित में राज्य शासन या कलेक्टर द्वारा समय - समय पर जारी आदेशों एवं निर्देशों का पालन किये जाने के लिए कंपनी बाध्य होगी .

(2 ) भू- अर्जन कार्यवाही से पूर्व यह भी देख लिया जाये कि यदि किसी अधिसूचित क्षेत्र के ग्रामों में निजी भूमि अर्जित की जा रही है तो ग्राम सभा की बैठक नियमानुसार की जाकर एवं ग्राम सभा की सहमति प्राप्त करने के पश्चात् ही यह अनुमति प्रभावशील होगी . इसके साथ ही इस परिस्थिति में वैकल्पिक भूमि क्रय कर देने की कार्यवाही की जायेगी.

(3 ) भू- अर्जन कार्यवाही प्रारंभ करने के पूर्व यह भी देख लिया जाये कि प्रस्तावित परियोजना में वनअभ्यारण्य क्षेत्र ( सेन्च्युरी ) का कोई हिस्सा तो नहीं आ रहा है . यदि ऐसा होता है तो उस हेतु विधि द्वारा स्थापित सक्षम अनुमति ली जाना होगी.

(4) कंपनी से भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 41 के प्रावधानों अनुसार करारनामा निष्पादित कराया जाये, जिसमें उपरोक्त शर्तों का भी समावेश किया जावे .

(5 ) भू-अर्जन की प्रक्रिया एवं अन्य कार्यवाहियों बाबद् शासन द्वारा समय - समय पर जारी दिशा- निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाये.

दो साक्षियों की उपस्थिति में पक्ष क्र. 1 राज्य शासन की ओर से कलेक्टर, जिला खरगोन एवं पक्ष क्र. 2 की ओर से श्री असद जाफर, महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. मण्डलेश्वर, जिला खरगोन द्वारा हस्ताक्षरित कर यह अनुबंध पत्र साक्षियों के समक्ष लिखित हस्ताक्षरित एवं निष्पादित किया गया है.

साक्षियों के हस्ताक्षर (पूरा नाम पिता का नाम एवं पूरा पता )

पक्ष क्र. 1 मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,

हस्ता./-

साक्षी क्र. 1

(केदार शर्मा ) कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग. जिला खरगोन ( म. प्र. ) .

हस्ता./- नाम : डॉ. ममता खेड़े पता : एफ -१ , न्यू आफिसर्स कालोनी, खरगोन .

साक्षी क्र. 2

हस्ता./-

नाम : छोटेखान पता : म. नं. 15, टवड़ी मोहल्ला खरगोन.

पक्ष क्र. 2 हस्ता./- (असद जाफर) महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पो . लिमि. , मण्डलेश्वरं.

2193 भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

खरगोन दिनांक 16 अगस्त 2010

भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( 1894 का क्रमांक -1 ) की धारा 41 के अन्तर्गत अनुबंध-पत्र क्र. 1009- भू-अर्जन-10- राजस्व प्रकरण क्र. 13-अ- 82-09-10.- यह अनुबंध- पत्र प्रथम पक्ष के रूप में मध्यप्रदेश के राज्यपाल जिनकी ओर से कलेक्टर जिला खरगोन एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग कार्य कर रहे हैं, ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " राज्यपाल " कहा गया है जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है ) तथा द्वितीय पक्ष के रूप में श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. मण्डलेश्वर, जिला खरगोन, मध्यप्रदेश जो भारतीय कम्पनी अधिनियम, 1956 के अन्तर्गत रजिस्टर्ड है. ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " कम्पनी " कहा गया है ) जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके विधिक प्रतिनिधि, निष्पादक, पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है. जिसकी ओर से मुख्यत्यार-

श्री असद जाफर, महाप्रबंधक जो श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. अभयांचल परिसर मण्डलेश्वर, जिला खरगोन, म. प्र. में कार्य कर रहे हैं, के मध्य आज दिनांक 11 अगस्त 2010 को सम्पादित किया जा रहा है-

1. कंपनी ने मध्यप्रदेश शासन को ( जिसे आगे राज्य शासन कहा गया है ) महेश्वर जल विद्युत् परियोजना के निर्माण के कारण आंशिक डूब से प्रभावित होने से ग्राम पीतनगर, प.ह.नं. 24 , तहसील बड़वाह, जिला खरगोन की निजी कृषि भूमि कुल सर्वे नं. संख्या 21 , कुल क्षेत्रफल 2.126 हे. भूमि एवं उस पर स्थित परिसंपत्तियों के भू- अर्जन हेतु भू-अर्जन अधिनियम , 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत आवेदन - पत्र माननीय उच्च न्यायालय , जबलपुर में दायर याचिका क्रमांक W.P./1359/09 , दिनांक 6 मई 2009 में पारित आदेश के पालन में पेश किया है. जिसका विवरण निम्नानुसार परिशिष्ट 1 पर अंकित किया गया है.

परिशिष्ट-1

निजी कृषि भूमि एवं उस पर स्थित संरचनाएं/परिसंपत्तियां एफ.आर.एल. के अन्तर्गत ग्राम पीतनगर

खसरा नंबर

अनु.क्र.

सम्पत्ति का विवरण नाम भूमि स्वामी/पिता का नाम एवं जाति

अर्जनीय क्षेत्रफल

(1)

(2)

(3)

(4)

(5)

51

0.020

मकान-1 1 भगवान, मोहनलाल गुलपति, गंगा, मांगी पिता छितु, मंगत, मिश्रीलाल, अनोखीबाई, कलाबाई, नीलाबाई पिता मुरार , जाति नावड़ा, नि. पीतनगर.

53

0.024

2 राजाराम चुन्या, पुन्या पिता एडीया, नि. पीतनगर

54

0.008

3 मांग्या, बुदीया पिता सरवण, निवासी पीतनगर

0.004

98

4 देवा, जयराम, तापीबाई जड़ावबाई सोलकीबाई पिता शिवा, श्रीराम, कमलाबाई पिता गणपत, अनोखीबाई बेवा गणपत , जाति गुजर, नि. दौड़वां.

111

0.030

5 पुनीबाई बेवा बोंदर, जाति नावड़ा, नि. नावघाट खेड़ी

220/1

0.070

6 धनईबाई बेवा छोगालाल , निलाबाई, भगवतबाई, पिता छोगालाल, अ. गीताबाई पिता छोगालाल , अ.पा.क. धनईबाई बेवा छोगालाल, जाति नावडा.

2194

मध्यप्रदेशं राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

(1)

(2)

7 अबिद खां, शरीफ खां, अकिला बी पिता सरदार, रसीदा बेवा सरदार, रसीद, हमीद, बाबु जरदार, अफरोज पिता हिम्मत , अनिस , कनिसबाई, बिलकीस पिता हबिब, हसीनाबाई बेवा हबिब, जाति मुसलमान, नि. पीतनगर.

8 बेडीया एग्रो प्राईवेट लिमि. , बेडीया तर्फे डायरेक्टर समरविजयसिंह पिता दिग्ग्वजयसिंह, जाति राजपुत , नि. बेड़ीया.

9 भगवान मोहनलाल गुलपति, गंगा, मांगी पिता छितु, मंगत, मिश्रीलाल, अनोखीबाई, कलाबाई , नीलाबाई पिता मुरार, जाति नावड़ा, नि. पीतनगर.

10 भगवान मोहनलाल गुलपति, गंगा मांगी पिता छितु, मंगत , मिश्रीलाल , अनोखीबाई, कलाबाई, नीलाबाई, पिता मुरार, जाति नावड़ा, नि. पीतनगर.

11 भगवान मोहनलाल गुलपति, गंगा मांगी पिता छितु, मंगत, मिश्रीलाल, अनोखीबाई , कलाबाई , नीलाबाई, पिता मुरार, जाति नावड़ा, नि. पीतनगर.

12 बेडिया एग्रो प्राईवेट लिमि. , बेडीया तर्फे डायरेक्टर समरविजयसिंह पिता दिग्विजयसिंह , राजपूत, निवासी बेड़ीया.

13 बेडीया एग्रो प्राईवेट लिमि. , बेडीया तर्फे डायरेक्टर समरविजयसिंह पिता दिग्विजयसिंह, राजपूत, निवासी बेडीया.

14 धनईबाई बेवा छोगालाल , निलाबाई, भागवतबाई, पिता छोगालाल, अ. गीताबाई पिता छोगालाल , अ.पा.क. धनईबाई बेवा छोगालाल, जाति नावडा.

15 हरिकरण पिता भाउजी , कमलचंद पिता जयकिशन निवासी टोकसर, नत्थू पिता तुकाराम, रजाक पिता लतीफ खां, जाति मुसलमान, नि. भूलगांव.

16 हरिकरण पिता भाउजी , कमलचंद पिता जयकिशन निवासी टोकसर, नत्थू पिता तुकाराम , रजाक पिता लतीफ खां, जाति मुसलमान, नि. भूलगांव.

17 जगदीश पिता ओंकार, जाति गुजर, नि. टोकसर

[ भाग 1 (3)

(5)

(4)

0.020

220/2

242

0.073

आम-1 243

0.120

आम -3 0.304

244

245

0.093

गुलर-1 पाईप लाईन दुर्गामंदिर.

246

0.030

247

0.280

जामवृक्ष-18 , आवला-3 , शहतुत-1 , नीम-2 , पाईप लाईन-8. 251/1

0.140

251/2

0.120

252/2

0.080

256

0.450 C

भाग 1 ]

2195

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

(1)

(2)

(3)

(5)

(4)

258/1

0.020

18 धनईबाई बेवा छोगालाल , निलाबाई, भागवतबाई, पिता छोगालाल , अ. गीताबाई पिता छोगालाल, अ.पा.क. धनईबाई बेवा छोगालाल, जाति नावड़ा.

258/2

0.020

19 अबिद खां, शरीफ खां , अकिला बी पिता सरदार, रसीदा बेवा सरदार, रसीद, हमीद, बाबु जरदार , अफरोज पिता हिम्मत , अनिस , कनिसबाई, बिलकीसबाई पिता हबिब , हसीनाबाई बेवा हबिब, जाति मुसलमान, नि. पीतनगर.

280/1

0.200

20 धनंईबाई बेवा छोगालाल , निलाबाई, भागवतबाई, पिता छोगालाल, अ. गीताबाई पिता छोगालाल, अ.पा.क. धनईबाई बेवा छोगालाल , जाति नावड़ा.

280/3

0.020

21 दुर्गाराम, सेवकराम, कमलाबाई पिता गोकुल, जाति नावड़ा, नि. पीतनगर.

21

2.126

योग .

2. राज्य शासन ने नियमों के अनुसार आवश्यक एवं निर्धारित प्रक्रिया से जांच कर इस बात की संतुष्टी कर ली है कि उक्त जल विद्युत् परियोजना राज्य में विद्युत की कमी की पूर्ति हेतु और क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है.

3. कंपनी के भू-अर्जन आवेदन- पत्र के आधार पर राज्य शासन द्वारा दिनांक 20-4-2010 को सम्पन्न भू- अर्जन समिति की बैठक में लिये गये निर्णय अनुसार मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग , मंत्रालय , भोपाल के पत्र क्र. एफ- 12-07/2010/सात/-2ए, भोपाल, दिनांक 10 मई 2010 द्वारा भू-अर्जन की सशर्त अनुमति प्रदान की है इसका इस अनुबंध पत्र में समावेश किया गया है.

4. कंपनी को प्रदत्त अनुमति की शर्त के पालन में कंपनी को राज्यपाल के साथ भू- अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 41 के अन्तर्गत विहित प्रावधान अनुसार अनुबंध निष्पादित करना है. कंपनी की ओर से सहमत होकर यह अनुबंध - पत्र निष्पादित किया जाता है.

कंपनी निम्न प्रकार सहमत होकर घोषणा करती है कि-

(क) कंपनी राज्य शासन को अथवा राज्य शासन के द्वारा इस हेतु नियुक्त व्यक्ति को ऐसी समस्त राशि का अग्रिम भुगतान करेंगी जो भू-अर्जन अधिनियम, 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत अवार्ड की राशि जो उक्त भूमि पर स्वत्वधारी व्यक्तियों को मुआवजे के रूप में भुगतान योग्य होगी.

(ख) कंपनी राज्य शासन को ऐसे सभी प्रभारों ( खर्च ) का भुगतान भी करेंगी जो अधिनियम के अनुसार उक्त भूमि के भू- अर्जन कार्य से युक्तिसंगत संबंधित होगा.

(ग ) उपर्युक्त (क ) तथा ( ख में वर्णित समस्त भुगतानों के बाद ही राज्यपाल परिशिष्ट 1 , में वर्णित निजी कृषि भूमि तथा उस पर स्थित संरचनाएं/ परिसंपत्तियां कंपनी को प्रदाय करेगा, जो अनुमति में उल्लेखित निम्न शर्तों के अधीन होगा- 1. कंपनी ( इस आशय के करारनामे या वचनबद्धता के अनुसार ) जिन कृषकों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है उनके परिवार के कम से कम एक सदस्य को पात्रतानुसार नौकरी देने में प्राथमिकता देगी. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के व्यक्तियों के लिए पुनर्वास किये जाने की स्थायी योजना को संबंधित प्रोजेक्ट में शामिल किया जावेगा.

2196

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1 2. भू-अर्जन अधिनियम के अन्तर्गत भू- अर्जन की जा रही भूमि के मूल्यांकन के आधार पर शत- प्रतिशत राशि के साथ 10 प्रतिशत राशि जमा कराये जाने के उपरांत ही कलेक्टर के द्वारा भू-अर्जन की कार्यवाही की जाये.

3. संबंधित कंपनी के लिये भू-अर्जन किये जाने संबंधी कार्य संबंधित कलेक्टर्स के द्वारा भू- अर्जन अधिनियम तथा संबंधित विधिक उपबंधों एवं शासनादेशों के अन्तर्गत दिये गये प्रावधानों तथा शर्तों के आधार पर किया जावे.

4. संबंधित परियोजना को स्थापित करने के संबंध में संबंधित कंपनी द्वारा म.प्र. पुनर्वास नीति के अन्तर्गत पुनर्वास की कार्यवाही की जायेगी.

5. कपनी के संबंध में करारनामा, वचनबद्धता एवं शर्ते आदि लागू करने के लिए कलेक्टर कार्यवाही करेंगे.

6. भूमि के किसी उपयोग या उस पर किसी निर्माण के पूर्व सभी आवश्यक अनुमतियां अनुमोदन एवं अनापत्तियां संबंधित संस्था को जैसे नगर निगम, नगर तथा ग्रामीण निवेश विभाग एवं अन्य स्थानीय संस्थाओं, कलेक्टर आदि से प्राप्त करना होंगी तथा मास्टर प्लान एवं पर्यावरण संस्था के नियमों आदि का पूर्ण पालन किया जावेगा.

7. अर्जित की गयी निजी भूमि का वार्षिक व्यपवर्तन कर कंपनी द्वारा देय होगा.

8. भूमि जिस उपयोग के लिये अर्जित की जा रही है वही उपयोग कंपनी द्वारा किया जायेगा.

9. भूमि पर निर्माण कार्य करातें समय सामान्य जनता के निस्तार आदि का ध्यान रखा जावेगा .

10. कंपनी को दी गई भूमि या उसके किसी भाग अथवा उस पर निर्मित किसी भी निर्माण अथवा भक्न आदि को बेचने, बंधक रखने, दान देने , पट्टे पर देने या अन्य प्रकार से अन्तरित करने का अधिकार नहीं होगा. ( धारा 44 - ए, भू-अर्जन अधिनियम के तहत ) .

11. यदि कंपनी को दी गई भूमि/ भवन या उसके किसी भी भाग को विक्रय करती है तो भूमि अथवा उस पर निर्मित भवन, इमारतें शासन को अपने कब्जे में लेने का अधिकार होगा और कंपनी को किसी प्रकार का मुआवजा देय नहीं होगा.

12. भूमि की केवल सतह का उपयोग किया जावेगा. आवश्यक निर्माण जैसे भवन निर्माण , नींव आदि के अतिरिक्त खुदाई नहीं की जायेगी तथा ऐसी खुदाई में प्राप्त खनिज एवं गौड़ खनिज पर नियमानुसार रायल्टी का भुगतान करना होगा .

13. शासन की पुर्वानुमति के बिना भूमि के उपयोग के स्वरूप को बदला नहीं जावेगा.

14. पर्यावरण की दृष्टि से पर्याप्त आवश्यक वृक्षारोपण किया जावेगा.

15. कंपनी द्वारा प्रदूषण निवारण हेतु व्यवस्था की जावेगी. इस संबंध में शासन के संबंधित विभाग के आदेशों का पालन करना होगा तथा उनसे एवं प्रदूषण निवारण मंडल से अनापत्ति प्रमाण- पत्र प्राप्त करना होंगे कि पर्यावरण , जल स्रोत या वायु में प्रदूषण नहीं किया जावेगा.

16 . यदि कभी उक्त भूमि का उपयोग उक्त प्रयोजन के लिये नहीं होता है या बाद में कभी बंद कर दिया जाता है तो भूमि तथा उस पर निर्मित भवनों , सम्पत्तियों के साथ शासन में निहित हो जावेगी और कंपनी को मुआवजा देय नहीं होगा.

17. भूमि या उसके किसी भाग या उस पर बने किसी भवन आदि को उक्त उल्लेखित उपयोग के अलावा ना तो किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने दिया जावेगा, और ना ही पट्टे या किराये पर दिया जावेगा.

18. भूमि जिस प्रयोजन हेतु दी गई हो, उससे भिन्न प्रयोजन हेतु उपयोग किये जाने से अनाधिकृत कब्जा मानकर भूमि शासन में निहित कर ली जायेगी.

2197

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

भाग 1 ]

19. शासन के प्रतिनिधि या कलेक्टर या उसके द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि को भूमि के सही उपयोग तथा शर्तों के पालन की दृष्टि से कभी भी भूमि पर निर्मित भवन आदि तथा परिसर के निरीक्षण करने का अधिकार होगा.

20 स्थानीय आवश्यकता एवं परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक होने पर सार्वजनिक हित में राज्य शासन या कलेक्टर द्वारा समय- समय पर जारी आदेशों एवं निर्देशों का पालन किये जाने के लिए कंपनी बाध्य होगी.

(2 ) भू- अर्जन कार्यवाही से पूर्व यह भी देख लिया जाये कि यदि किसी अधिसूचित क्षेत्र के ग्रामों में निजी भूमि अर्जित की जा रही है तो ग्राम सभा की बैठक नियमानुसार की जाकर एवं ग्राम सभा की सहमति प्राप्त करने के पश्चात् ही यह अनुमति प्रभावशील होगी . इसके साथ ही इस परिस्थिति में वैकल्पिक भूमि क्रय कर देने की कार्यवाही की जायेगी.

(3) भू- अर्जन कार्यवाही प्रारंभ करने के पूर्व यह भी देख लिया जाये, कि प्रस्तावित परियोजना में वनअभ्यारण्य क्षेत्र ( सेन्च्युरी ) का कोई हिस्सा तो नहीं आ रहा है. यदि ऐसा होता है तो उस हेतु विधि द्वारा स्थापित सक्षम अनुमति ली जाना होगी.

(4) कंपनी से भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 41 के प्रावधानों अनुसार करारनामा निष्पादित कराया जाये , जिसमें उपरोक्त शर्तों का भी समावेश किया जावे.

(5 ) भू- अर्जन की प्रक्रिया एवं अन्य कार्यवाहियों बाबद् शासन द्वारा समय- समय पर जारी दिशा- निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाये.

दो साक्षियों की उपस्थिति में पक्ष क्र. 1 राज्य शासन की ओर से कलेक्टर, जिला खरगोन एवं पक्ष क्र. 2 की ओर से श्री असद जाफर, महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. मण्डलेश्वर, जिला खरगोन द्वारा हस्ताक्षरित कर यह अनुबंध पत्र साक्षियों के समक्ष लिखित हस्ताक्षरित एवं निष्पादित किया गया है.

पक्ष क्रमांक 1 मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, साक्षियों के हस्ताक्षर (पूरा नाम पिता का नाम एवं पूरा पता)

हस्ता./-

(केदार शर्मा )

साक्षी क्र. 1

कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग. जिला खरगोन ( म. प्र. ) .

हस्ता./- नाम : डॉ. ममता खेड़े पता : एफ-9 , न्यू आफिसर्स कालोनी, खरगोन.

हस्ता./-

साक्षी क्र. 2 नाम : छोटेखान पता : म. नं. 15, टवड़ी मोहल्ला

खरगोन.

पक्ष क्रमांक 2 हस्ता./- (असद जाफर) महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पो. लिमि. , मण्डलेश्वर.

2198

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1

खरगोन दिनांक 16 अगस्त 2010

भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( 1894 का क्रमांक -1 ) की धारा 41 के अन्तर्गत अनुबंध-पत्र क्र. 1011 - भू-अर्जन-10- राजस्व प्रकरण क्रमांक-14-अ- 82-09-10.- यह अनुबंध- पत्र प्रथम पक्ष के रूप में मध्यप्रदेश के राज्यपाल जिनकी ओर से कलेक्टर, जिला खरगोन एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग कार्य कर रहे हैं, ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " राज्यपाल " कहा गया है जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है ) तथा द्वितीय पक्ष के रूप में श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. मण्डलेश्वर, जिला खरगोन , मध्यप्रदेश जो भारतीय कम्पनी अधिनियम, 1956 के अन्तर्गत रजिस्टर्ड हैं. ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " कम्पनी " कहा गया है ) जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके विधिक प्रतिनिधि, निष्पादक, पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है. जिसकी ओर से मुख्यत्यार-

श्री असद जाफर, महाप्रबंधक जो श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. , अभयांचल परिसर , मण्डलेश्वर, जिला खरगोन, म. प्र. में कार्य कर रहे हैं, के मध्य आज दिनांक 11 अगस्त 2010 को सम्पादित किया जा रहा है-

1. कंपनी ने मध्यप्रदेश शासन को ( जिसे आगे राज्य शासन कहा गया है ) महेश्वर जल विद्युत् परियोजना के निर्माण के कारण आंशिक डूब से प्रभावित होने से ग्राम निमसर, प.ह.नं. 24, तहसील बड़वाह, जिला खरगोन की निजी कृषि भूमि सर्वे नं. 12 पैकी क्षेत्रफल 0.180 हे. भूमि एवं उस पर स्थित परिसंपत्तियां के भू-अर्जन हेतु भू-अर्जन अधिनियम, 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत आवेदन- पत्र माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर में दायर याचिका क्रमांक W.P./1359/09 , दिनांक 6 मई 2009 में पारित आदेश के पालन में पेश किया है . जिसका विवरण निम्नानुसार परिशिष्ट 1 पर अंकित किया गया है .

परिशिष्ट-1

निजी कृषि भूमि एवं उस पर स्थित संरचनाएं/परिसंपत्तियां एफ.आर.एल. के अन्तर्गत ग्राम निमसर अनु.क्र.

खसरा नंबर

सम्पत्ति का विवरण नाम भूमि स्वामी/पिता का नाम एवं जाति

अर्जनीय क्षेत्रफल

(1)

(2)

(3)

(4)

(5) 1

12पैकी

0.180

अनोखीबाई पिता भाईराम , कड़वीबाई बेवा भाईराम, शोम्या, पुन्या, चुन्या, रेवाराम, पिता गणपत, नत्थु, रूकमणीबाई, सुकमाबाई पिता गंगाराम अ.पा.क. लालचंद पिता भगा, ओंकार पिता टल्लू, जसोदाबाई बेवा कल्याण, भाईराम, फत्या, नारायण , शोभ्या पिता ओंकार, हंसराज पिता गोपाल , रमेश, मोहन, सुरेश , लखन पिता मांग्या, समोतीबाई बेवा मांग्या, नरतम पिता गप्पु, फत्तु, भगन पिता हरि, विरेन्द्र, ममता, पार्वती अ. हेमलता , अ. प्रेमलता पुनम, तुलसी पिता जगन, अ.पा.क. शान्ताबाई बेवा जगन , शान्ताबाई बेवा जगन, कालु, रेशमबाई, सोनूबाई, लक्ष्मीबाई, सुमन पिता छगन , शान्ताबाई बेवा छगन, कड़वा पिता चम्पालाल, रतन, रेशम , कुसुम, पिता टुटा, फुन्दाबाई बेवा टुटा सा. पितनगर.

भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

2199 2. राज्य शासन ने नियमों के अनुसार आवश्यक एवं निर्धारित प्रक्रिया से जांच कर इस बात की संतुष्टी कर ली हैं कि उक्त जल विद्युत् परियोजना राज्य में विद्युत की कमी की पूर्ति हेतु और क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है.

3. कंपनी के भू-अर्जन आवेदन पत्र के आधार पर राज्य शासन द्वारा दिनांक 20-4-2010 को सम्पन्न भू- अर्जन समिति की बैठक में लिये गये निर्णय अनुसार मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग , मंत्रालय , भोपाल के पत्र क्र. एफ- 12-07/2010/सात-2ए, भोपाल, दिनांक 10 मई 2010 द्वारा भू-अर्जन की सशर्त अनुमति प्रदान की है इसका इस अनुबंध पत्र में समावेश किया गया है.

4. कंपनी को प्रदत्त अनुमति की शर्त के पालन में कंपनी को राज्यपाल के साथ भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 41 के अन्तर्गत विहित प्रावधान अनुसार अनुबंध निष्पादित करना है . कंपनी की ओर से सहमत होकर यह अनुबंध - पत्र निष्पादित किया जाता है .

कंपनी निम्न प्रकार सहमत होकर घोषणा करती है कि-

(क) कंपनी राज्य शासन को अथवा राज्य शासन के द्वारा इस हेतु नियुक्त व्यक्ति को ऐसी समस्त राशि का अग्रिम भुगतान करेंगी जो भू- अर्जन अधिनियम, 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत अवार्ड की राशि जो उक्त भूमि पर स्वत्वधारी व्यक्तियों को मुआवजे के रूप में भुगतान योग्य होगी .

(ख) कंपनी राज्य शासन को ऐसे सभी प्रभारों ( खर्च ) का भुगतान भी करेंगी जो अधिनियम के अनुसार उक्त भूमि के भू-अर्जन कार्य से युक्तिसंगत संबंधित होगा.

(ग) उपर्युक्त ( क) तथा ( ख ) में वर्णित समस्त भुगतानों के बाद ही राज्यपाल परिशिष्ट 1 , में वर्णित निजी कृषि भूमि तथा उस्त पर स्थित संरचनाएं/परिसंपत्तियां कंपनी को प्रदाय करेगा, जो अनुमति में उल्लेखित निम्न शर्तों के अधीन होगा- 1. कंपनी ( इस आशय के करारनामे या वचनबद्धता के अनुसार ) जिन कृषकों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है उनके परिवार के कम से कम एक सदस्य को पात्रतानुसार नौकरी देने में प्राथमिकता देगी. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के व्यक्तियों के लिए पुनर्वास किये जाने की स्थायी योजना को संबंधित प्रोजेक्ट में शामिल किया जावेगा.

2. भू-अर्जन अधिनियम के अन्तर्गत भू-अर्जन की जा रही भूमि के मूल्यांकन के आधार पर शत - प्रतिशत राशि के साथ 10 प्रतिशत राशि जमा कराये जाने के उपरांत ही कलेक्टर के द्वारा भू- अर्जन की कार्यवाही की जाये.

3. संबंधित कंपनी के लिये भू- अर्जन किये जाने संबंधी कार्य संबंधित कलेक्टर्स के द्वारा भू- अर्जन अधिनियम तथा संबंधित विधिक उपबंधों एवं शासनादेशों के अन्तर्गत दिये गये प्रावधानों तथा शर्तों के आधार पर किया जावे.

4. संबंधित परियोजना को स्थापित करने के संबंध में संबंधित कंपनी द्वारा म. प्र. पुनर्वास नीति के अन्तर्गत पुनर्वास की कार्यवाही की जायेगी.

5. कपनी के संबंध में करारनामा, वचनबद्धता एवं शर्तें आदि लागू करने के लिए कलेक्टर कार्यवाही करेंगे .

6. भूमि के किसी उपयोग या उस पर किसी निर्माण के पूर्व सभी आवश्यक अनुमतियां अनुमोदन एवं अनापत्तियां संबंधित संस्थाको जैसे नगर निगम, नगर तथा ग्रामीण निवेश विभाग एवं अन्य स्थानीय संस्थाओं, कलेक्टर आदि से प्राप्त करना होंगी तथा मास्टर प्लान एवं पर्यावरण संस्था के नियमों आदि का पूर्ण पालन किया जावेगा.

7. अर्जित की गयी निजी भूमि का वार्षिक व्यपवर्तन कर कंपनी द्वारा देय होगा.

8. भूमि जिस उपयोग के लिये अर्जित की जा रही है, वही उपयोग कंपनी द्वारा किया जायेगा.

9. भूमि पर निर्माण कार्य करते समय सामान्य जनता के निस्तार आदि का ध्यान रखा जावेगा.

2200

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1 10. कंपनी को दी गई भूमि या उसके किसी भाग अथवा उस पर निर्मित किसी भी निर्माण अथवा भवन आदि को बेचने, बंधक रखने , दान देने , पट्टे पर देने या अन्य प्रकार से अन्तरित करने का अधिकार नहीं होगा. ( धारा 44- ए, भू-अर्जन अधिनियम के तहत) .

11.. यदि कंपनी को दी गई भूमि/ भवन या उसके किसी भी भाग को विक्रय करती है तो भूमि अथवा उस पर निर्मित भवन, इमारतें शासन को कब्जे में लेने का अधिकार होगा और कंपनी को किसी प्रकार का मुआवजा देय नहीं होगा.

12. भूमि की केवल सतह का उपयोग किया जावेगा. आवश्यक निर्माण जैसे भवन निर्माण, नींव आंदि के अंतिरिक्त खुदाई नहीं की जायेगी तथा ऐसी खुदाई में प्राप्त खनिज एवं गौड़ खनिज पर नियमानुसार रायल्टी का भुगतान करना होगा.

13. शासन की पुर्वानुमति के बिना भूमि के उपयोग के स्वरूप को बदला नहीं जायेगा.

14. पर्यावरण की दृष्टि से पर्याप्त आवश्यक वृक्षारोपण किया जायेगा.

15. कंपनी द्वारा प्रदूषण निवारण हेतु व्यवस्था की जावेगी. इस संबंध में शासन के संबंधित विभाग के आदेशों का पालन करना होगा तथा उनसे एवं प्रदूषण निवारण मंडल से अनापत्ति प्रमाण- पत्र प्राप्त करना होंगे कि पर्यावरण , जल स्रोत या वायु में प्रदूषण नहीं किया जायेगा.

16. यदि कभी उक्त भूमि का उपयोग उक्त प्रयोजन के लिये नहीं होता है या बाद में कभी बंद कर दिया जाता है तो भूमि तथा उस पर निर्मित भवनों, सम्पत्तियों के साथ शासन में निहित हो जावेंगी और कंपनी को इस हेतु मुआवजा देय नहीं होगा.

17. भूमि या उसके किसी भी या उस पर बने किसी भवन आदि को उक्त उल्लेखित उपयोग के अलावा ना तो किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने दिया जावेगा और न ही पट्टे या किराये पर दिया जायेगा.

18. भूमि जिस प्रयोजन हेतु दी गई हो , उससे भिन्न प्रयोजन हेतु उपयोग किये जाने से अधिकृत कब्जा मान कर भूमि शासन में निहित कर ली जायेगी.

19. शासन के प्रतिनिधि या कलेक्टर या उसके द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि को भूमि के सही उपयोग तथा शर्तों के पालन की दृष्टि से कभी भी भूमि पर निर्मित भवन आदि तथा परिसर के निरीक्षण करने का अधिकार होगा.

20 स्थानीय आवश्यकता एवं परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक होने पर सार्वजनिक हित में राज्य शासन या कलेक्टर द्वारा समय- समय पर जारी आदेशों एवं निर्देशों का पालन किये जाने के लिए कंपनी बाध्य होगी .

( 2 ) भू- अर्जन कार्यवाही से पूर्व यह भी देख लिया जाये कि यदि किसी अधिसूचित क्षेत्र के ग्रामों में निजी भूमि अर्जित की जा रही है तो ग्राम सभा की बैठक नियमानुसार की जाकर एवं ग्राम सभा की सहमति प्राप्त करने के पश्चात् ही यह अनुमति प्रभावशील होगी . इसके साथ ही इस परिस्थिति में वैकल्पिक भूमि क्रय कर देने की कार्यवाही की जायेगी.

(3 ) भू- अर्जन कार्यवाही प्रारंभ करने के पूर्व यह भी देख लिया जाये , कि प्रस्तावित परियोजना में वन अभ्यारण्य क्षेत्र ( सेन्च्युरी) का कोई हिस्सा तो नहीं आ रहा है. यदि ऐसा होता है तो उस हेतु विधि द्वारा स्थापित सक्षम अनुमति ली जाना होगी .

(4) कंपनी से भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 41 के प्रावधानों अनुसार करारनामा निष्पादित कराया जाये , जिसमें उपरोक्त शर्तों का भी समावेश किया जावे.

( 5 ) भू- अर्जन की प्रक्रिया एवं अन्य कार्यवाहियों बाबद् शासन द्वारा समय -समय पर जारी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाये.

भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

2201 दो साक्षियों की उपस्थिति में पक्ष क्र. 1 राज्य शासन की ओर से कलेक्टर, जिला खरगोन एवं पक्ष क्र. 2 की ओर से श्री असद जाफर, महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. मण्डलेश्वर, जिला खरगोन द्वारा हस्ताक्षरित कर यह अनुबंध पत्र साक्षियों के समक्ष लिखित हस्ताक्षरित एवं निष्पादित किया गया है.

साक्षियों के हस्ताक्षर

पक्ष क्र. 1

(पूरा नाम पिता का नाम एवं पूरा पता)

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,

हस्ता./-

साक्षी क्र. 1

(केदार शर्मा )

नाम : डॉ. ममता खेड़े

कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग, जिला खरगोन ( म. प्र. ) .

हस्ता./- पता : एफ-१ , न्यू आफिसर्स कालोनी , खरगोन.

साक्षी क्र. 2

पक्ष क्र. 2

हस्ता./-

हस्ता./-

नाम : छोटेखान

पता : म. नं. 15, टवडी मोहल्ला,

(असद जाफर) महाप्रबंधक,

खरगोन.

श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पो . लिमि. , मण्डलेश्वर.

खरगोन दिनांक 16 अगस्त 2010

भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( 1894 का क्रमांक-1 ) की धारा 41 के अन्तर्गत अनुबंध-पत्र क्र. 1006 - भू-अर्जन-10- राजस्व प्रकरण क्रमांक 15-अ- 82-09-10.- यह अनुबंध - पत्र प्रथम पक्ष के रूप में मध्यप्रदेश के राज्यपाल . जिनकी ओर से कलेक्टर, जिला खरगोन एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग कार्य कर रहे हैं, ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " राज्यपाल " कहा गया है जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है ) तथा द्वितीय पक्ष के रूप में श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. मण्डलेश्वर, जिला खरगोन, मध्यप्रदेश जो भारतीय कम्पनी अधिनियम, 1956 के अन्तर्गत रजिस्टर्ड है. ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " कम्पनी " कहा गया है ) जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके विधिक प्रतिनिधि, निष्पादक़ , पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है. जिसकी ओर से मुख्यत्यार-

श्री असद जाफर, महाप्रबंधक जो श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. अभयांचल परिसर, मण्डलेश्वर, जिला खरगोन , म. प्र. में कार्य कर रहे हैं, के मध्य आज दिनांक 11 अगस्त 2010 को सम्पादित किया जा रहा है-

1. कंपनी ने मध्यप्रदेश शासन को ( जिसे आगे राज्य शासन कहा गया है ) महेश्वर जल विद्युत् परियोजना के निर्माण के कारण आंशिक डूब से प्रभावित होने से ग्राम रावेर , प.ह.नं. 29, तहसील बड़वाह , जिला खरगोन की निजी कृषि भूमि कुल सर्वे नं. संख्या 20 कुल क्षेत्रफल 19.845 हे. भूमि एवं उस पर स्थित परिसंपत्तियों के भू-अर्जन हेतु भू- अर्जन अधिनियम, 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत आवेदन - पत्र माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर में दायर याचिका क्रमांक W.P./1359/09 , 2202

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1 दिनांक 6 मई 2009 में पारित आदेश के पालन में पेश किया है. जिसका विवरण निम्नानुसार परिशिष्ट 1 पर अंकित किया गया है .

परिशिष्ट-1

निजी कृषि भूमि एवं उस पर स्थित संरचनाएं/परिसंपत्तियां एफ.आर.एल. के अन्तर्गत ग्राम रावेर

अनु.क्र. नाम भूमि स्वामी/पिता का नाम एवं जाति

(1)

(2)

1 देवेन्द्र पिता प्यारेलाल, राधेश्याम पिता छज्जुलाल, श्रीराम पिता बाबुलाल, मोहनलाल पिता गप्पुजी, कालुसिंह पिता पुनाजी, सा. मर्दाना , नैनसिंह पिता गुलाबसिंह सा. मर्दाना, गुजर भू. स्वा.

2 मकुन पितां सिकदार, शिवराम पिता मुरार, राधाबाई पिता सिकदार, जयराम , मोहन पिता मोतीराम , शांताबाई राधाबाई, रूखमाबाई पिता मोतीराम, काशीबाई बेवा मोतीराम, काशीबाई बेवा राजाराम नावड़ा पिटामली, बहेगांव भू. स्वा.

3 भूरा पिता फत्तु, काशीबाई बेवा राजाराम, मकुंद पिता सिकदार, शिवराम पिता मुरार, राधाबाई , पिता सिकदार , नावड़ा, सा. बहेगांव, पिटामली.

4 मोहनलाल पिता दामोदरदास, श्याम सुंदर पिता बालकिशन, महेश्वरी सा. सनावद .

5 मोहनलाल पिता दामोदरदास, श्याम सुंदर पिता बालकिशन, महेश्वरी सा. सनावद.

6 ताराचंद पिता बिहारीलाल कमलवंशी सा. बड़वाह 7 मोहन पिता मोतीराम, काशीबाई बेवा मोतीराम, शांताबाई, राधाबाई , रुकमाबाई पिता मोतीराम, सुमन बेवा जयराम, ओंकार, सुकलाल, राकेश पिता जयराम, कैलाशबाई प्रमीलाबाई पिता जयराम केवट सा. देह.

8 अब्दुल वहीद पिता अब्दुल लतीफ, मुसलमान सा. बेड़ीया.

9 नसीम बी पति अनवर खां, मुसलमान सा. बेड़ीयां 10 संजय प्रसाद पिता शेवमेल प्रसाद सा. इन्दौर 11 नत्थु तिलोकचंद पिता सीताराम गुजर. सा. खेड़ी.

12 संजय प्रसाद पिता शेवमेल प्रसाद सा. इन्दौर 13 भाईराम पिता दयाराम नावड़ा सा. देह

खसरा नंबर

सम्पत्ति का विवरण अर्जनीय क्षेत्रफल

(3)

(4)

(5) 2

1.943

पाईप लाईन -11 4

0.401

5

0.951

15

3.237

पाईप लाईन -1 16/2

2.711

18/1

2.023

रेतखदान परिवर्तित भूमि 18/2

3.636

18/4

0.608

18/6

0.607

22/4

0.190

पाईप लाईन -1 नीम -1 22/6

0.080

23

0.780

पाईप लाईन-1 नीम-1 24/1

-0.230 2203

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

भाग 1 ]

(4)

(5) (1)

(2)

(3)

32

1.150

14 शेरू, राजन , पिता राजाराम, अ. प्रहलाद, लक्ष्मीनारायण, उदयकुमार पिता राजाराम , अ.पा.क. अजुध्याबाई बेवा राजाराम, अ. दयाबाई, सरोजबाई , करूणाबाई पिता राजाराम, अ. पा. क. अजुध्याबाई बेवा राजाराम कमलाबाई पति चेतराम , मनुबाई बेवा रेवाराम , अजुध्याबाई बेवा राजाराम सा. देह.

0.080

37

15 भाईराम पिता दयाराम नावड़ा सा. देह

39

0.304

16 शेरू, राजन, पिता राजाराम, अ. प्रहलाद, लक्ष्मीनारायण, उदयकुमार पिता राजाराम, अ.पा.क. अजुध्याबाई बेवा राजाराम, अ. दयाबाई, सरोजबाई, करूणाबाई पिता राजाराम, अ.पा.क. अजुध्याबाई बेवा राजाराम, कमलाबाई पति चेतराम, मनुबाई बेवा रेवाराम, अजुध्याबाई बेवा राजाराम सा. देह.

0.024

42

17 भाईराम पिता दयाराम नावड़ा सा. देह

92

0.520

18 आनंदराम, बलीराम पिता हिरा गुजर सा. देह

93/2

0.170

19 रामसिंह पिता छितु नहाल सा. खेड़ी

0.200

99

20 नारायण पिता बनसिंह, दुरपताबाई पिता बनसिंह , तुलसीराम पिता गोविंद गुजर सा. देह.

19.845

योग .

20

2. राज्य शासन ने नियमों के अनुसार आवश्यक एवं निर्धारित प्रक्रिया से जांच कर इस बात की संतुष्टी कर ली है कि उक्त जल विद्युत् परियोजना राज्य में विद्युत की कमी की पूर्ति हेतु और क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है .

3. कंपनी के भू-अर्जन आवेदन - पत्र के आधार पर राज्य शासन द्वारा दिनांक 20-4-2010 को सम्पन्न भू- अर्जन समिति की बैठक में लिये गये निर्णय अनुसार मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग, मंत्रालय , भोपाल के पत्र क्र. एफ- 12-07/2010/सात-2ए, भोपाल, दिनांक 10 मई 2010 द्वारा भू-अर्जन की सशर्त अनुमति प्रदान की है इसका इस अनुबंध पत्र में समावेश किया गया है.

4. कंपनी को प्रदत्त अनुमति की शर्त के पालन में कंपनी को राज्यपाल के साथ भू-अर्जन अधिनियम , 1894 की धारा 41 के अन्तर्गत विहित प्रावधान अनुसार अनुबंध निष्पादित करना है . कंपनी की ओर से सहमत होकर यह अनुबंध - पत्र निष्पादित किया जाता है .

कंपनी निम्न प्रकार सहमत होकर घोषणा करती है कि-

(क) कंपनी राज्य शासन को अथवा राज्य शासन के द्वारा इस हेतु नियुक्त व्यक्ति को ऐसी समस्त राशि का अग्रिम भुगतान करेंगी जो भू-अर्जन अधिनियम , 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत अवार्ड की राशि जो उक्त भूमि पर स्वत्वधारी व्यक्तियों को मुआवजे के रूप में भुगतान योग्य होगी.

(ख) कंपनी राज्य शासन को ऐसे सभी प्रभारों ( खर्च ) का भुगतान भी करेंगी जो अधिनियम के अनुसार उक्त भूमि के भू-अर्जन कार्य से युक्तिसंगत संबंधित होगा..

(ग ) उपर्युक्त ( क) तथा ( ख ) में वर्णित समस्त भुगतानों के बाद ही राज्यपाल परिशिष्ट 1 , में वर्णित निजी कृषि भूमि तथा उस पर स्थित संरचनाएं/परिसंपत्तियां कंपनी को प्रदाय करेगा, जो अनुमति में उल्लेखित निम्न शर्तों के अधीन होगा- 1. कंपनी ( इस आशय के करारनामे या वचनबद्धता के अनुसार ) जिन कृषकों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है उनके परिवार के कम से कम एक सदस्य को पात्रतानुसार नौकरी देने में प्राथमिकता देगी. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति 2204

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1 तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के व्यक्तियों के लिए पुनर्वास किये जाने की स्थायी योजना को संबंधित प्रोजेक्ट में शामिल किया जावेगा.

2. भू-अर्जन अधिनियम के अन्तर्गत भू-अर्जन की जा रही भूमि के मूल्यांकन के आधार पर शत - प्रतिशत राशि के साथ '10 प्रतिशत राशि जमा कराये जाने के उपरांत ही कलेक्टर के द्वारा भू- अर्जन की कार्यवाही की जाये .

3 . संबंधित कंपनी के लिये भू-अर्जन किये जाने संबंधी कार्य संबंधित कलेक्टर्स के द्वारा भू-अर्जन अधिनियम तथा संबंधित विधिक उपबंधों एवं शासनादेशों के अन्तर्गत दिये गये प्रावधानों तथा शर्तों के आधार पर किया जावे.

4. संबंधित परियोजना को स्थापित करने के संबंध में संबंधित कंपनी द्वारा म.प्र. पुनर्वास नीति के अन्तर्गत पुनर्वास की कार्यवाही की जायेगी.

5. कंपनी के संबंध में करारनामा , वचनबद्धता एवं शर्तें आदि लागू करने के लिए कलेक्टर कार्यवाही करेंगे.

6. भूमि के किसी उपयोग या उस पर किसी निर्माण के पूर्व सभी आवश्यक अनुमतियां अनुमोदन एवं अनापत्तियां संबंधित संस्था को जैसे नगर निगम, नगर तथा ग्रामीण निवेश विभाग एवं अन्य स्थानीय संस्थाओं , कलेक्टर आदि से प्राप्त करना होंगी तथा मास्टर प्लान एवं पर्यावरण संस्था के नियमों आदि का पूर्ण पालन किया जावेगा .

7. अर्जित की गई निजी भूमि का वार्षिक व्यपवर्तन कर कंपनी द्वारा देय होगा.

8. भूमि जिस उपयोग के लिये अर्जन की जा रही है , वही उपयोग कंपनी द्वारा किया जायेगा.

9. भूमि पर निर्माण कार्य कराते समय सामान्य जनता के निस्तार आदि का ध्यान रखा जावेगा.

10. कंपनी को दी गई भूमि या उसके किसी भाग अथवा उस पर निर्मित किसी भी निर्माण अथवा भवन आदि को बेचने, बंधक रखने , दान देने, पट्टे पर देने या अन्य प्रकार से अन्तरित करने का अधिकार नहीं होगा. ( धारा 44 - ए, भू-अर्जन अधिनियम के तहत) .

11. यदि कंपनी को दी गई भूमि/ भवन उसके किसी भी भाग को विक्रय करती है तो भूमि अथवा उस पर निर्मित भवन, इमारतें शासन को कब्जे में लेने का अधिकार होगा और कंपनी को किसी प्रकार का मुआवजा देय नहीं होगा.

12. भूमि की केवल सतह का उपयोग किया जावेगा. आवश्यक निर्माण जैसे भवन निर्माण, नींव आदि के अतिरिक्त खुदाई नहीं की जायेगी तथा ऐसी खुदाई में प्राप्त खनिज एवं गौड़ खनिज पर नियमानुसार रायल्टी का भुगतान करना होगा .

13. शासन की पुर्वानुमति के बिना भूमि के उपयोग के स्वरूप को बदला नहीं जावेगा .

14. पर्यावरण की दृष्टि से पर्याप्त आवश्यक वृक्षारोपण किया जायेगा.

15. कंपनी द्वारा प्रदूषण निवारण हेतु व्यवस्था की जावेगी. इस संबंध में शासन के संबंधित विभाग के आदेशों का पालन करना होगा तथा उनसे एवं प्रदूषण निवारण मंडल से अनापत्ति प्रमाण - पत्र प्राप्त करना होंगे कि, पर्यावरण , जल स्रोत या वायु में प्रदूषण नहीं किया जायेगा.

16. यदि कभी उक्त भूमि का उपयोग उक्त प्रयोजन के लिये नहीं होता है या बाद में कभी बंद कर दिया जाता है तो भूमि तथा उस पर निर्मित भवनों, सम्पत्तियों के साथ शासन में निहित हो जावेगी और कंपनी को इस हेतु मुआवजा देय नहीं होगा.

17. भूमि या उसके किसी भी या उस पर बने किसी भवन आदि को उक्त उल्लेखित उपयोग के अलावा न तो किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने दिया जावेगा , और न ही पट्टे या किराये पर दिया जायेगा .

2205 भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

18. भूमि जिस पर प्रयोजन हेतु दी गई हो, उससे भिन्न प्रयोजन हेतु उपयोग किये जाने से अनाधिकृत कब्जा मानकर भूमि शासन में निहित कर ली जायेगी.

19. शासन के प्रतिनिधि या कलेक्टर या उसके द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि को भूमि के सही उपयोग तथा शर्तों के पालन की दृष्टि से कभी भी भूमि पर निर्मित भवन आदि तथा परिसर के निरीक्षण करने का अधिकार होगा.

20 स्थानीय आवश्यकता एवं परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक होने पर सार्वजनिक हित में राज्य शासन या कलेक्टर द्वारा समय- समय पर जारी आदेशों एवं निर्देशों का पालन किये जाने के लिए कंपनी बाध्य होगी .

( 2) भू- अर्जन कार्यवाही से पूर्व यह भी देख लिया जाये कि यदि किसी अधिसूचित क्षेत्र के ग्रामों में निजी भूमि अर्जित की जा रही है तो ग्राम सभा की बैठक नियमानुसार की जाकर एवं ग्राम सभा की सहमति प्राप्त करने के पश्चात् ही यह अनुमति प्रभावशील होगी. इसके साथ ही इस परिस्थिति में वैकल्पिक भूमि क्रय कर देने की कार्यवाही की जायेगी.

( 3 ) भू- अर्जन कार्यवाही प्रारंभ करने के पूर्व यह भी देख लिया जाये , कि प्रस्तावित परियोजना में वनअभ्यारण्य क्षेत्र ( सेन्च्युरी ) का कोई हिस्सा तो नहीं आ रहा है . यदि ऐसा होता है तो उस हेतु विधि द्वारा स्थापित सक्षम अनुमति ली जाना होगी .

(4) कंपनी से भू-अर्जन अधिनियम , 1894 की धारा 41 के प्रावधानों अनुसार करारनामा निष्पादित कराया जाये, जिसमें उपरोक्त शर्तों का भी समावेश किया जावे .

(5 ) भू- अर्जन की प्रक्रिया एवं अन्य कार्यवाहियों बाबद् शासन द्वारा समय - समय पर जारी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाये.

दो साक्षियों की उपस्थिति में पक्ष क्र. 1 राज्य शासन की ओर से कलेक्टर, जिला खरगोन एवं पक्ष क्र. 2 की ओर से श्री असद जाफर, महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. मण्डलेश्वर, जिला खरगोन द्वारा हस्ताक्षरित कर यह अनुबंध पत्र साक्षियों के समक्ष लिखित हस्ताक्षरित एवं निष्पादित किया गया है.

साक्षियों के हस्ताक्षर (पूरा नाम, पिता का नाम एवं पूरा पता)

पक्ष क्र. 1 मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,

हस्ता./-

साक्षी क्रं. 1

(केदार शर्मा)

कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग. - जिला खरगोन (म. प्र.) .

हस्ता./- नाम : डॉ. ममता खेड़े पता : एफ-१ , न्यू आफिसर्स कालोनी, खरगोन.

साक्षी क्र. 2

पक्ष क्र. 2

हस्ता./- नाम : छोटेखान पता : म. नं. 15 , टबडी मोहल्ला खरगोन.

हस्ता./- (असद जाफर) महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पो, लिमि. , मण्डलेश्वर.

2206

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1

खरगोन दिनांक 16 अगस्त 2010

भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( 1894 का क्रमांक -1 ) की धारा 41 के अन्तर्गत अनुबंध- पत्र क्र. 1010- भू-अर्जन-10- रा.प्र.क्र. 16-अ-82-09-10.- यह अनुबंध- पत्र प्रथम पक्ष के रूप में मध्यप्रदेश के राज्यपाल जिनकी ओर से कलेक्टर जिला खरगोन एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग कार्य कर रहे हैं, ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " राज्यपाल " कहा गया है जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है ) तथा द्वितीय पक्ष के रूप में श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. मण्डलेश्वर, जिला खरगोन , मध्यप्रदेश जो भारतीय कम्पनी अधिनियम, 1956 के अन्तर्गत रजिस्टर्ड है. ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " कम्पनी " कहा गया है ) जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षितः न हो उनके विधिक प्रतिनिधि, निष्पादक, पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है. जिसकी ओर से मुख्यत्यार-

श्री असद जाफर, महाप्रबंधक जो श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. अभयांचल परिसर मण्डलेश्वर, जिला खरगोन , म. प्र. में कार्य कर रहे हैं , के मध्य आज दिनांक 11 अगस्त 2010 को सम्पादित किया जा रहा है-

1. कंपनी ने मध्यप्रदेश शासन को ( जिसे आगे राज्य शासन कहा गया है ) महेश्वर जल विद्युत् परियोजना के निर्माण के कारण आंशिक डूब से प्रभावित होने से ग्राम टोकसर प.ह.नं. 24, तहसील बड़वाह, जिला खरगोन की निजी कृषि भूमि सर्वे नं. 26 पैकी क्षेत्रफल 0.100 हे. एवं सर्वे क्र. 48 पैकी क्षेत्रफल 0.180 हे. भूमि एवं उस पर स्थित परिसंपत्तियों के भू- अर्जन हेतु भू- अर्जन अधिनियम, 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत आवेदन - पत्र माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर में दायर याचिका क्रमांक W.P./1359/09 , दिनांक 6 मई 2009 में पारित आदेश के पालन में पेश किया है . जिसका विवरण निम्नानुसार परिशिष्ट 1 पर अंकित किया गया है.

परिशिष्ट -1

निजी कृषि भूमि एवं उस पर स्थित संरचनाएं/परिसंपत्तियां एफ.आर.एल. के अन्तर्गत ग्राम टोकसर

खसरा नंबर

सम्पत्ति का विवरण अनु.क्र. नाम भूमि स्वामी/पिता का नाम

एवं जाति

अर्जनीय क्षेत्रफल

(1)

(2)

(3)

(4)

(5) 1

26 पैकी

0.100

जशोदाबाई बेवा कल्याण , एड़िया पिता कल्याण, फत्तु, भगन पिता एड़िया, विरेन्द्र, ममता, पार्वती, अज्ञान हेमलता, प्रेमलता, पुनम, तुलसी पिता जगन, अ. पा.क.मां शान्ताबाई बेवा जगन , शान्ताबाई बेवा जगन, कालू, रेशम , सोनूबाई, लक्ष्मीबाई, सुमन पिता छगन , शान्ताबाई बेवा छगन, रामा, नानकराम पिता घिस्या, मीराबाई पिता डूका, भगवान पिता फत्या , मिसरबाई बेवा फत्या, शोभाराम पिता ओंकार, हंसराज पिता गोपाल, नरतम, दयाराम पिता गप्पु हरिजन निवासी टोकसर.

2

48पैकी

0.180 नीम-2, बोर-2, बिजली की खोली-1 पाईप लाईन-4

योग 0.280

गोवासिंह , हुकूमसिंह पिता गुलाबसिंह प्रलादसिंह, राजेशसिंह, संगीता, सुनिता, सीमाबाई, चंदाबाई, पिता ओंकार, द्रोपदाबाई बेवा ओंकार राजपूत निवासी टोकसर.

2207 भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

2. राज्य शासन ने नियमों के अनुसार आवश्यक एवं निर्धारित प्रक्रिया से जांच कर इस बात की संतुष्टी कर ली है कि उक्त जल विद्युत् परियोजना राज्य में विद्युत की कमी की पूर्ति हेतु और क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है .

3. कंपनी के भू-अर्जन आवेदन - पत्र के आधार पर राज्य शासन द्वारा दिनांक 20-4-2010 को सम्पन्न भू- अर्जन समिति की बैठक में लिये गये निर्णय अनुसार मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग, मंत्रालय, भोपाल के पत्र क्र. एफ-12-07/2010/सात/-2ए, भोपाल, दिनांक 10 मई 2010 द्वारा भू-अर्जन की सशर्त अनुमति प्रदान की है इसका इस अनुबंध पत्र में समावेश किया गया है.

4. कंपनी को प्रदत्त अनुमति की शर्त के पालन में कंपनी को राज्यपाल के साथ भू- अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 41 के अन्तर्गत विहित प्रावधान अनुसार अनुबंध निष्पादित करना है. कंपनी की ओर से सहमत होकर यह अनुबंध - पत्र निष्पादित किया जाता है.

कंपनी निम्न प्रकार सहमत होकर घोषणा करती है कि

(क) कंपनी राज्य शासन को अथवा राज्य शासन के द्वारा इस हेतु नियुक्त व्यक्ति को ऐसी समस्त राशि का अग्रिम भुगतान करेंगी जो भू- अर्जन अधिनियम, 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत अवार्ड की राशि जो उक्त भूमि पर स्वत्वधारी व्यक्तियों को मुआवजे के रूप में भुगतान योग्य होगी.

(ख) कंपनी राज्य शासन को ऐसे सभी प्रभारों ( खर्च ) का भुगतान भी करेंगी जो अधिनियम के अनुसार उक्त भूमि के भू- अर्जन कार्य से युक्तिसंगत संबंधित होगा.

(ग) उपर्युक्त ( क ) तथा ( ख ) में वर्णित समस्त भुगतानों के बाद ही राज्यपाल परिशिष्ट 1 , में वर्णित निजी कृषि भूमि तथा उस पर स्थित संरचनाएं/परिसंपत्तियां कंपनी को प्रदाय करेगा, जो अनुमति में उल्लेखित निम्न शर्तों के अधीन होगा- 1. कंपनी ( इस आशय के करारनामे या वचनबद्धता के अनुसार ) जिन कृषकों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है उनके परिवार के कम से कम एक सदस्य को पात्रतानुसार नौकरी देने में प्राथमिकता देगी . अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के व्यक्तियों के लिए पुनर्वास किये जाने की स्थायी योजना को संबंधित प्रोजेक्ट में शामिल किया जावेगा.

2. भू-अर्जन अधिनियम के अन्तर्गत भू- अर्जन की जा रही भूमि के मूल्यांकन के आधार पर शत- प्रतिशत राशि के साथ 10 प्रतिशत राशि जमा कराये जाने के उपरांत ही कलेक्टर के द्वारा भू- अर्जन की कार्यवाही की जाये.

3. संबंधित कंपनी के लिये भू- अर्जन किये जाने संबंधी कार्य संबंधित कलेक्टर्स के द्वारा भू-अर्जन अधिनियम तथा संबंधित विधिक उपबंधों एवं शासनादेशों के अन्तर्गत दिये गये प्रावधानों तथा शर्तों के आधार पर किया जावे.

4. संबंधित परियोजना को स्थापित करने के संबंध में संबंधित कंपनी द्वारा म.प्र. पुनर्वास नीति के अन्तर्गत पुनर्वास की कार्यवाही कीजायेगी.

5. कंपनी के संबंध में करारनामा, वचनबद्धता एवं शर्तें आदि लागू करने के लिए कलेक्टर कार्यवाही करेंगे .

6. भूमि के किसी उपयोग या उस पर किसी निर्माण के पूर्व सभी आवश्यक अनुमतियां अनुमोदन एवं अनापत्तियां संबंधित संस्था को जैसे नगर निगम, नगर तथा ग्रामीण निवेश विभाग एवं अन्य स्थानीय संस्थाओं , कलेक्टर आदि से प्राप्त करना होगी तथा मास्टर प्लान एवं पर्यावरण संस्था के नियमों आदि का पूर्ण पालन किया जावेगा.

7. अर्जित की गयी निजी भूमि का वार्षिक व्यपवर्तन कर कंपनी द्वारा देय होगा.

8. भूमि जिस उपयोग के लिये अर्जन की जा रही है, वही उपयोग कंपनी द्वारा किया जायेगा.

9. भूमि पर निर्माण कार्य कराते समय सामान्य जनता के निस्तार आदि का ध्यान रखा जावेगा.

2208

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1 10. कंपनी को दी गई भूमि या उसके किसी भाग अथवा उस पर निर्मित किसी भी निर्माण अथवा भवन आदि को बेचनें, बंधक रखने , दान देने , पट्टे पर देने या अन्य प्रकार से अन्तरित करने का अधिकार नहीं होगा. ( धारा 44 - ए, भू-अर्जन अधिनियम के तहत ) .

11. यदि कंपनी को दी गई भूमि/ भवन 'उसके किसी भी भाग को विक्रय करती है तो भूमि अथवा उस पर निर्मित भवन, इमारतें शासन को कब्जे में लेने का अधिकार होगा और कंपनी को किसी प्रकार का मुआवजा देय नहीं होगा.

12. भूमि की केवल सतह का उपयोग किया जावेगा. आवश्यक निर्माण जैसे भवन निर्माण , नींव आदि के अतिरिक्त खुदाई नहीं की जायेगी तथा ऐसी खुदाई में प्राप्त खनिज एवं गौड़ खनिज पर नियमानुसार रायल्टी का भुगतान करना होगा .

13. शासन की पुर्वानुमति के बिना भूमि के उपयोग के स्वरूप को बदला नहीं जावेगा.

14. पर्यावरण की दृष्टि से पर्याप्त आवश्यक वृक्षारोपण किया जावेगा.

15. कंपनी द्वारा प्रदूषण निवारण हेतु व्यवस्था की जावेगी . इस संबंध में शासन के संबंधित विभाग के आदेशों का पालन करना होगा तथा उनसे एवं प्रदूषण निवारण मंडल से अनापत्ति प्रमाण- पत्र के प्राप्त करना होंगे कि, पर्यावरण , जल स्रोत या वायु में प्रदूषण नहीं किया जावेगा.

16. यदि कभी उक्त भूमि का उपयोग उक्त प्रयोजन के लिये नहीं होता है या बाद में कभी बंद कर दिया जाता है तो भूमि तथा उस पर निर्मित भवनों , सम्पत्तियों के साथ शासन में निहित हो जावेगी और कंपनी को इस हेतु मुआवजा देय नहीं होगा.

17. भूमि या उसके किसी भाग या उस पर बने किसी भवन आदि को उक्त उल्लेखित उपयोग के अलावा ना तो किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने दिया जावेगा, और ना ही पट्टे या किराये पर दिया जावेगा.

18. भूमि जिस पर प्रयोजन हेतु दी गई हो , उससे भिन्न प्रयोजन हेतु उपयोग किये जाने से अनाधिकृत कब्जा मान कर भूमि शासन में निहित कर ली जायेगी .

19 . शासन के प्रतिनिधि या कलेक्टर या उसके द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि को भूमि के सही उपयोग तथा शर्तों के पालन की दृष्टि से कभी भी भूमि पर निर्मित भवन आदि तथा परिसर के निरीक्षण करने का अधिकार होगा.

20 स्थानीय आवश्यकता एवं परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक होने पर सार्वजनिक हित में राज्य शासन या कलेक्टर द्वारा समय - समय पर जारी आदेशों एवं निर्देशों का पालन किये जाने के लिए कंपनी बाध्य होगी.

(2 ) भू- अर्जन कार्यवाही से पूर्व यह भी देख लिया जाये कि यदि किसी अधिसूचित क्षेत्र के ग्रामों में निजी भूमि अर्जित की जा रही है तो ग्राम सभा की बैठक नियमानुसार की जाकर एवं ग्राम सभा की सहमति प्राप्त करने के पश्चात् ही यह अनुमति प्रभावशील होगी . इसके साथ ही इस परिस्थिति में वैकल्पिक भूमि क्रय कर देने की कार्यवाही की जायेगी.

(3) भू- अर्जन कार्यवाही प्रारंभ करने के पूर्व यह भी देख लिया जाये, कि प्रस्तावित परियोजना में वन अभ्यारण्य क्षेत्र ( सेन्चुरी ) का कोई हिस्सा तो नहीं आ रहा है . यदि ऐसा होता है तो उस हेतु विधि द्वारा स्थापित सक्षम अनुमति ली जाना होगी .

(4) कंपनी से भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 41 के प्रावधानों अनुसार करारनामा निष्पादित कराया जाये, जिसमें उपरोक्त शर्तों का भी समावेश किया जावे.

(5 ) भू अर्जन की प्रक्रिया एवं अन्य कार्यवाहियों बाबद् शासन द्वारा समय - समय पर जारी दिशा- निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाये .

2209 भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

दो साक्षियों की उपस्थिति में पक्ष क्र. 1 राज्य शासन की ओर से कलेक्टर, जिला खरगोन एवं पक्ष क्र. 2 की ओर से श्री असद जाफर, महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. मण्डलेश्वर, जिला खरगोन द्वारा हस्ताक्षरित कर यह अनुबंध पत्र साक्षियों के समक्ष लिखित हस्ताक्षरित एवं निष्पादित किया गया है .

पक्ष क्र. 1

साक्षियों के हस्ताक्षर

(पूरा नाम पिता का नाम एवं पूरा पता)

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,

हस्ता./-

साक्षी क्र. 1

(केदार शर्मा )

हस्ता./-

नाम : डॉ. ममता खेड़े

कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग .

जिला खरगोन ( म . प्र.) .

पता : एफ-१ , न्यू आफिसर्स कालोनी,

खरगोन.

साक्षी क्र. 2

पक्ष क्र. 2

हस्ता./-

नाम : छोटेखान

(असद जाफर)

पता : म. नं. 15, टवडी मोहल्ला

महाप्रबंधक,

खरगोन.

श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पो. लिमि. ,

हस्ताः/- मण्डलेश्वर.

खरगोन दिनांक 16 अगस्त 2010

भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( 1894 का क्रमांक -1 ) की धारा 41 के अन्तर्गत अनुबंध-पत्र

क्र. 1008 - भू- अर्जन- 10- रा.प्र.क्र. 17-अ-82-09-10.- यह अनुबंध- पत्र प्रथम पक्ष के रूप में मध्यप्रदेश के राज्यपाल जिनकी ओर से कलेक्टर जिला खरगोन एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग कार्य कर रहे हैं, ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " राज्यपाल " कहा गया है जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है ) तथा द्वितीय पक्ष के रूप में श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. मण्डलेश्वर, जिला खरगोन , मध्यप्रदेश जो भारतीय कम्पनी अधिनियम , 1956 के अन्तर्गत रजिस्टर्ड है . ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " कम्पनी " कहा गया है ) जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके विधिक प्रतिनिधि, निष्पादक, पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है . जिसकी ओर से मुख्यत्यार-

श्री असद जाफर, महाप्रबंधक जो श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. अभ्यांचल परिसर मण्डलेश्वर, जिला खरगोन, म. प्र. में कार्य कर रहे हैं, के मध्य आज दिनांक 11 अगस्त 2010 को सम्पादित किया जा रहा है-

1. कंपनी ने मध्यप्रदेश शासन को ( जिसे आगे राज्य शासन कहा गया है ) महेश्वर जल विद्युत् परियोजना के निर्माण के कारण आंशिक डूब से प्रभावित होने से ग्राम धनपाल्या, प.ह.नं. 23 , तहसील बड़वाह , जिला खरगोन की निजी कृषि भूमि सर्वे नं. 03 पैकी क्षेत्रफल 0.130 हे. भूमि एवं उस पर स्थित परिसंपत्तियों के भू-अर्जन हेतु भू-अर्जन अधिनियम, 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत आवेदन- पत्र माननीय उच्च न्यायालय , जबलपुर में दायर याचिका क्रमांक W.P./1359/09, दिनांक 6 मई 2009 में पारित आदेश के पालन में पेश किया है . जिसका विवरण निम्नानुसार परिशिष्ट 1 पर अंकित किया गया है .

2210

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1

परिशिष्ट-1

निजी कृषि भूमि एवं उस पर स्थित संरचनाएं/परिसंपत्तियां एफ.आर.एल. के अन्तर्गत ग्राम धनपाल्या

खसरा नंबर

सम्पत्ति का विवरण नाम भूमि स्वामी/पिता का नाम

अनु.क्र.

अर्जनीय क्षेत्रफल

एवं जाति

(1)

(3)

(2)

(5)

(4)

0.130

03 पैकी

1 रामलाल , बलीराम पिता मोजीलाल, भागाबाई , लक्ष्मीबाई, भूरीबाई पिता मोजीलाल गुजर टोकसर.

2. राज्य शासन ने नियमों के अनुसार आवश्यक एवं निर्धारित प्रक्रिया से जांच कर इस बात की संतुष्टि कर ली है कि उक्त जल विद्युत् परियोजना राज्य में विद्युत की कमी की पूर्ति हेतु और क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है.

3. कंपनी के भू-अर्जन आवेदन - पत्र के आधार पर राज्य शासन द्वारा दिनांक 20-4-2010 को सम्पन्न भू-अर्जन समिति की बैठक में लिये गये निर्णय अनुसार मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग , मंत्रालय, भोपाल के पत्र क्र. एफ-12-07/2010/सात/-2ए, भोपाल, दिनांक 10 मई 2010 द्वारा भू-अर्जन की सशर्त अनुमति प्रदान की है इसका इस अनुबंध पत्र में समावेश किया गया है.

4. कंपनी को प्रदत्त अनुमति की शर्त के पालन में कंपनी को राज्यपाल के साथ भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 41 के अन्तर्गत विहित प्रावधान अनुसार अनुबंध निष्पादित करना है . कंपनी की ओर से सहमत होकर यह अनुबंध - पत्र निष्पादित किया जाता है .

कंपनी निम्न प्रकार सहमत होकर घोषणा करती है कि-

(क) कंपनी राज्य शासन को अथवा राज्य शासन के द्वारा इस हेतु नियुक्त व्यक्ति को ऐसी समस्त राशि का अग्रिम भुगतान करेंगी जो भू-अर्जन अधिनियम, 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत अवार्ड की राशि जो उक्त भूमि पर स्वत्वधारी व्यक्तियों को मुआवजे के रूप में भुगतान योग्य होगी.

(ख) कंपनी राज्य शासन को ऐसे सभी प्रभारों ( खर्च ) का भुगतान भी करेंगी जो अधिनियम के अनुसार उक्त भूमि के भू- अर्जन कार्य से युक्तिसंगत संबंधित होगा.

(ग) उपर्युक्त ( क ) तथा ( ख ) में वर्णित समस्त भुगतानों के बाद ही राज्यपाल परिशिष्ट 1 , में वर्णित निजी कृषि भूमि तथा उस पर स्थित संरचनाएं/परिसंपत्तियां कंपनी को प्रदाय करेगा, जो अनुमति में उल्लेखित निम्न शर्तों के अधीन होगा- 1. कंपनी ( इस आशय के करारनामे या वचनबद्धता के अनुसार ) जिन कृषकों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है उनके परिवार के कम से कम एक सदस्य को पात्रतानुसार नौकरी देने में प्राथमिकता देगी . अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के व्यक्तियों के लिए पुनर्वास किये जाने की स्थायी योजना को संबंधित प्रोजेक्ट में शामिल किया जावेगा.

2.

भू-अर्जन अधिनियम के अन्तर्गत भू-अर्जन की जा रही भूमि के मूल्यांकन के आधार पर शत - प्रतिशत राशि के साथ 10 प्रतिशत राशि जमा कराये जाने के उपरांत ही कलेक्टर के द्वारा भू- अर्जन की कार्यवाही की जाये.

3. संबंधित कंपनी के लिये भू- अर्जन किये जाने संबंधी कार्य संबंधित कलेक्टर्स के द्वारा भू-अर्जन अधिनियम तथा संबंधित विधिक उपबंधों एवं शासनादेशों के अन्तर्गत दिये गये प्रावधानों तथा शर्तों के आधार पर किया जावे.

4. संबंधित परियोजना को स्थापित करने के संबंध में संबंधित कंपनी द्वारा म.प्र. पुनर्वास नीति के अन्तर्गत पुनर्वास की कार्यवाही की जायेगी.

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

भाग 1 ]

5. कंपनी के संबंध में करारनामा, वचनबद्धता एवं शर्तें आदि लागू करने के लिए कलेक्टर कार्यवाही करेंगे.

6. भूमि के किसी उपयोग या उस पर किसी निर्माण के पूर्व सभी आवश्यक अनुमतियां अनुमोदन एवं अनापत्तियां संबंधित संस्था को जैसे नगर निगम , नगर तथा ग्रामीण निवेश विभाग एवं अन्य स्थानीय संस्थाओं, कलेक्टर आदि से प्राप्त करना होगी तथा मास्टर प्लान एवं पर्यावरण संस्था के नियमों आदि का पूर्ण पालन किया जावेगा.

7. अर्जित की गयी निजी भूमि का वार्षिक व्यपवर्तन कर कंपनी द्वारा देय होगा.

8. भूमि जिस उपयोग के लिये अर्जन की जा रही है वही उपयोग कंपनी द्वारा किया जायेगा.

9. भूमि पर निर्माण कार्य कराते समय सामान्य जनता के निस्तार आदि का ध्यान रखा जावेगा.

10. कंपनी को दी गई भूमि या उसके किसी भाग अथवा उस पर निर्मित किसी भी निर्माण अथवा भवन आदि को बेचने , बंधक रखने, दान देने , पट्टे पर देने या अन्य प्रकार से अन्तरित करने का अधिकार नहीं होगा . ( धारा 44 - ए, भू- अर्जन अधिनियम के तहत) .

11. यदि कंपनी को दी गई भूमि/ भवन उसके किसी भी भाग को विक्रय करती है तो भूमि अथवा उस पर निर्मित भवन, इमारतें शासन को कब्जे में लेने का अधिकार होगा और कंपनी को किसी प्रकार का मुआवजा देय नहीं होगा.

12. भूमि की केवल सतह का उपयोग किया जावेगा. आवश्यक निर्माण जैसे भवन निर्माण, नींव आदि के अतिरिक्त खुदाई नहीं की जायेगी तथा ऐसी खुदाई में प्राप्त खनिज एवं गौड़ खनिज पर नियमानुसार रायल्टी का भुगतान करना होगा .

13. शासन की पुर्वानुमति के बिना भूमि के उपयोग के स्वरूप को बदला नहीं जावेगा.

14. पर्यावरण की दृष्टि से पर्याप्त आवश्यक वृक्षारोपण किया जायेगा.

15. कंपनी द्वारा प्रदूषण निवारण हेतु व्यवस्था की जावेगी. इस संबंध में शासन के संबंधित विभाग के आदेशों का पालन करना होगा तथा उनसे एवं प्रदूषण निवारण मंडल से अनापत्ति प्रमाण - पत्र प्राप्त करना होंगे कि, पर्यावरण, जल स्त्रोत या वायु में प्रदूषण नहीं किया जावेगा.

16. यदि कभी उक्त भूमि का उपयोग उक्त प्रयोजन के लिये नहीं होता है या बाद में कभी बंद कर दिया जाता है तो भूमि तथा उस पर निर्मित भवनों, सम्पत्तियों के साथ शासन में निहित हो जावेगी और कंपनी को इस हेतु मुआवजा देय नहीं होगा.

17. भूमि या उसके किसी भाग या उस पर बने किसी भवन आदि को उक्त उल्लेखित उपयोग के अलावा ना तो किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने दिया जावेगा, और ना ही पट्टे या किराये पर दिया जावेगा.

18. भूमि जिस पर प्रयोजन हेतु दी गई हो, उससे भिन्न प्रयोजन हेतु उपयोग किये जाने से अनाधिकृत कब्जा मान कर भूमि शासन में निहित कर ली जायेगी.

19. शासन के प्रतिनिधि या कलेक्टर या उसके द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि को भूमि के सही उपयोग तथा शर्तों के पालन की दृष्टि से कभी भी भूमि पर निर्मित भवन आदि तथा परिसर के निरीक्षण करने का अधिकार होगा.

20 स्थानीय आवश्यकता एवं परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक होने पर सार्वजनिक हित में राज्य शासन या कलेक्टर द्वारा समय- समय पर जारी आदेशों एवं निर्देशों का पालन किये जाने के लिए कंपनी बाध्य होगी.

(2) भू- अर्जन कार्यवाही से पूर्व यह भी देख लिया जाये कि यदि किसी अधिसूचित क्षेत्र के ग्रामों में निजी भूमि अर्जित की जा रही है तो ग्राम सभा की बैठक नियमानुसार की जाकर एवं ग्राम सभा की सहमति प्राप्त करने के पश्चात् ही यह अनुमति प्रभावशील होगी . इसके साथ ही इस परिस्थिति में वैकल्पिक भूमि क्रय कर देने की कार्यवाही की जायेगी.

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मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1 (3) भू-अर्जन कार्यवाही प्रारंभ करने के पूर्व यह भी देख लिया जाये, कि प्रस्तावित परियोजना में वनअभ्यारण्य क्षेत्र ( सेन्च्युरी ) का कोई हिस्सा तो नहीं आ रहा है . यदि ऐसा होता है तो उस हेतु विधि द्वारा स्थापित सक्षम अनुमति ली जाना होगी.

(4) कंपनी से भू-अर्जन अधिनियम , 1894 की धारा 41 के प्रावधानों अनुसार करारनामा निष्पादित कराया जाये, जिसमें उपरोक्त शर्तों का भी समावेश किया जावे .

(5) भू-अर्जन की प्रक्रिया एवं अन्य कार्यवाहियों बाबद् शासन द्वारा समय - समय पर जारी दिशा- निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाये .

दो साक्षियों की उपस्थिति में पक्ष क्र. 1 राज्य शासन की ओर से कलेक्टर, जिला खरगोन एवं पक्ष क्र. 2 की ओर से श्री असद जाफर, महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. मण्डलेश्वर, जिला खरगोन द्वारा हस्ताक्षरित कर यह अनुबंध पत्र साक्षियों के समक्ष लिखित हस्ताक्षरित एवं निष्पादित किया गया है.

साक्षियों के हस्ताक्षर (पूरा नाम पिता का नाम एवं पूरा पता )

पक्ष क्र. 1 मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार , :

हस्ता./- (केदार शर्मा ) कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग . जिला खरगोन ( म. प्र. ) .

साक्षी क्र. 1 हस्ता./- नाम : डॉ. ममता खेड़े पता : एफ-१ , न्यू आफिसर्स कालोनी, खरगोन.

साक्षी क्र. 2 हस्ता./- नाम : छोटेखान पता : म. नं. 15, टवडी मोहल्ला खरगोन .

पक्ष क्र. 2 हस्ता./- (असद जाफर ) महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पो. लिमि. , मण्डलेश्वर.

खरगोन दिनांक 16 अगस्त 2010

भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( 1894 का क्रमांक -1 ) की धारा 41 के अन्तर्गत अनुबंध-पत्र क्र. 1007- भू-अर्जन-10- रा.प्र.क्र. 18-अ- 82-09-10.- यह अनुबंध- पत्र प्रथम पक्ष के रूप में मध्यप्रदेश के राज्यपाल जिनकी ओर से कलेक्टर जिला खरगोन एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग कार्य कर रहे हैं, ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " राज्यपाल " कहा गया है जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है ) तथा द्वितीय पक्ष के रूप में श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. मण्डलेश्वर, जिला खरगोन , मध्यप्रदेश जो भारतीय कम्पनी अधिनियम, 1956 के अन्तर्गत रजिस्टर्ड है . ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " कम्पनी " कहा गया है ) जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके विधिक प्रतिनिधि , निष्पादक, पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है. जिसकी ओर से मुख्यत्यार-

श्री असद जाफर, महाप्रबंधक जो श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. अभयांचल परिसर मण्डलेश्वर, जिला खरगोन, म. प्र. में कार्य कर रहे हैं, के मध्य आज दिनांक 11 अगस्त 2010 को सम्पादित किया जा रहा है- भाग 1 ]

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मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

कंपनी ने मध्यप्रदेश शासन को ( जिसे आगे राज्य शासन कहा गया है ) महेश्वर जल विद्युत् परियोजना के निर्माण के कारण आंशिक डूब से प्रभावित होने से ग्राम खेड़ी, पं.ह.नं. 29 , तहसील बड़वाह, जिला खरगोन की निजी कृषि भूमि सर्वे नं. 18 कुल क्षेत्रफल 7.500 हे. भूमि एवं उस पर स्थित परिसंपत्तियों के भू- अर्जन हेतु भू- अर्जन अधिनियम , 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत आवेदन- पत्र माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर में दायर याचिका क्रमांक W.P./1359/09 , दिनांक 6 मई 2009 में पारित आदेश के पालन में पेश किया है. जिसका विवरण निम्नानुसार परिशिष्ट 1 पर अंकित किया गया है.

परिशिष्ट-1

निजी कृषि भूमि एवं उस पर स्थित संरचनाएं/परिसंपत्तियां एफ.आर.एल. के अन्तर्गत ग्राम खेडी

अनु.क्र. नाम भूमि स्वामी/पिता का नाम

एवं जाति

(1)

(2)

1 लक्ष्मण पिता मांगीलाल गुजर सा. देह 2 बाबुलाल पिता रतनलाल गुजर सा. देह 3 नहारू पिता राजाराम गुजर सा. देह 4 बाबुलाल पिता रतनलाल गुजर सा. देह 5 बाबुलाल पिता रतनलाल गुजर सा. देह 6 तुलसीराम धीरू नहारू पिता राजाराम कड़वाजी पिता रामलाल गुजर सा. देह.

7 तुलसीराम धीरू नहारू पिता राजाराम कड़वाजी पिता रामलाल गुजर सा. देह.

8 तुलसीराम धीरू नहारू पिता राजाराम कड़वाजी पिता रामलाल गुजर सा. देह.

9 रूखमाबाई बेवा मेहकाल कहार सा. देह 10 राधेश्याम पिता भगवान गुजर सा. देह 11 राधेश्याम पिता भगवान गुजर सा. देह 12 राधेश्याम, गोविंद सेवंतीबाई पिता मोतीराम, रुखमाबाई बेवा मोतीराम, गुजर सा. देह.

13 बाबुलाल पिता रतनलाल भगवान पिता लक्ष्मण, घीसू, नहारू पिता राजाराम, कड़वाजी पिता रामलाल गुजर सा. देह खसरा नंबर

सम्पत्ति का विवरण अर्जनीय क्षेत्रफल

(3)

(4)

(5)

0.510

3/2

24

0.080

25/2

0.310 नीम-40, जामुन-2, ईमली -2 26

0.340

29

2.500

34

0.696

36

0.982

पाईप लाईन-1 38

0.986

43

0.005

143/2

0.140

143/3

0.050

0.070

143/4

146

0.348 [ भाग 1 2214

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

(2)

(3)

(4)

(1)

(5)

0.425

147

14 राधेश्याम पिता भगवान गुजर सा. देह

0.016

166

15 'बाबूलाल पिता चुन्नीलाल ब्राह्मण सा. कानापुर

0.010

435

16 भगवान पिता गंगाराम गुजर सा. देह

0.020

470/3

17 तुकाराम पिता फत्तु गुजर सा. देह

0.012

470/4

18 मंशाराम पिता शोभाराम गुजर सा. देह

18 7.500

योग ..

2. राज्य शासन ने नियमों के अनुसार आवश्यक एवं निर्धारित प्रक्रिया से जांच कर इस बात की संतुष्टी कर ली है कि उक्त जल विद्युत् परियोजना राज्य में विद्युत की कमी की पूर्ति हेतु और क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है .

3. कंपनी के भू-अर्जन आवेदन- पत्र के आधार पर राज्य शासन द्वारा दिनांक 20-4-2010 को सम्पन्न भू- अर्जन समिति की बैठक में लिये गये निर्णय अनुसार मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग , मंत्रालय , भोपाल के पत्र क्र. एफ- 12-07/2010/सात/-2 ए, भोपाल, दिनांक 10 मई 2010 द्वारा भू-अर्जन की सशर्त अनुमति प्रदान की है इसका इस अनुबंध पत्र में समावेश किया गया है.

4. कंपनी को प्रदत्त अनुमति की शर्त के पालन में कंपनी को राज्यपाल के साथ भू- अर्जन अधिनियम , 1894 की धारा 41 के अन्तर्गत विहित प्रावधान अनुसार अनुबंध निष्पादित करना है. कंपनी की ओर से सहमत होकर यह अनुबंध- पत्र निष्पादित किया जाता है.

कंपनी निम्न प्रकार सहमत होकर घोषणा करती है कि-

(क) कंपनी राज्य शासन को अथवा राज्य शासन के द्वारा इस हेतु नियुक्त व्यक्ति को ऐसी समस्त राशि का अग्रिम भुगतान करेंगी जो भू-अर्जन अधिनियम , 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत अवार्ड की राशि जो उक्त भूमि पर स्वत्वधारी व्यक्तियों को मुआवजे के रूप में भुगतान योग्य होगी.

(ख) कंपनी राज्य शासन को ऐसे सभी प्रभारों ( खर्च ) का भुगतान भी करेंगी जो अधिनियम के अनुसार उक्त भूमि के भू-अर्जन कार्य से युक्तिसंगत संबंधित होगा.

(ग) उपर्युक्त ( क ) तथा ( ख ) में वर्णित समस्त भुगतानों के बाद ही राज्यपाल परिशिष्ट 1 , में वर्णित निजी कृषि भूमि तथा उस पर स्थित संरचनाएं/परिसंपत्तियां कंपनी को प्रदाय करेगा, जो अनुमति में उल्लेखित निम्न शर्तों के अधीन होगा- 1. कंपनी ( इस आशय के करारनामे या वचनबद्धता के अनुसार ) जिन कृषकों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है उनके परिवार के कम से कम एक सदस्य को पात्रतानुसार नौकरी देने में प्राथमिकता देगी. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के व्यक्तियों के लिए पुनर्वास किये जाने की स्थायी योजना को संबंधित प्रोजेक्ट में शामिल किया जावेगा.

2. भू-अर्जन अधिनियम के अन्तर्गत भू- अर्जन की जा रही भूमि के मूल्यांकन के आधार पर शत - प्रतिशत राशि के साथ 10 प्रतिशत राशि जमा कराये जाने के उपरांत ही कलेक्टर के द्वारा भू- अर्जन की कार्यवाही की जाये.

2215 भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

3. संबंधित कंपनी के लिये भू- अर्जन किये जाने संबंधी कार्य संबंधित कलेक्टर्स के द्वारा भू- अर्जन अधिनियम तथा संबंधित विधिक उपबंधों एवं शासनादेशों के अन्तर्गत दिये गये प्रावधानों तथा शर्तों के आधार पर किया जावे.

4. संबंधित परियोजना को स्थापित करने के संबंध में संबंधित कंपनी द्वारा म.प्र. पुनर्वास नीति के अन्तर्गत पुनर्वास की कार्यवाही की जायेगी.

5. कंपनी के संबंध में करारनामा, वचनबद्धता एवं शर्तें आदि लागू करने के लिए कलेक्टर कार्यवाही करेंगे .

6. भूमि के किसी उपयोग या उस पर किसी निर्माण के पूर्व सभी आवश्यक अनुमतियां अनुमोदन एवं अनापत्तियां संबंधित संस्था को जैसे नगर निगम, नगर तथा ग्रामीण निवेश विभाग एवं अन्य स्थानीय संस्थाओं , कलेक्टर आदि से प्राप्त करना होगा तथा मास्टर प्लान एवं पर्यावरण संस्था के नियमों आदि का पूर्ण पालन किया जावेगा.

7. अर्जित की गयी निजी भूमि का वार्षिक व्यपवर्तन कर कंपनी द्वारा देय होगा.

8. भूमि जिस उपयोग के लिये अर्जन की जा रही है वही उपयोग कंपनी द्वारा किया जायेगा.

9. भूमि पर निर्माण कार्य कराते समय सामान्य जनता के निस्तार आदि का ध्यान रखा जावेगा.

10. कंपनी को दी गई भूमि या उसके किसी भाग अथवा उस पर निर्मित किसी भी निर्माण अथवा भवन आदि को बेचने , बंधक रखने, दान देने, पट्टे पर देने या अन्य प्रकार से अन्तरित करने का अधिकार नहीं होगा . ( धारा 44 - ए, भू-अर्जन अधिनियम के तहत ) .

11. यदि कंपनी को दी गई भूमि/ भवन या उसके किसी भी भाग को विक्रय करती है तो भूमि अथवा उस पर निर्मित भवन, इमारतें शासन को कब्जे में लेने का अधिकार होगा और कंपनी को किसी प्रकार का मुआवजा देय नहीं होगा.

12. भूमि की केवल सतह का उपयोग किया जावेगा. आवश्यक निर्माण जैसे भवन निर्माण , नींव आदि के अतिरिक्त खुदाई नहीं की जायेगी तथा ऐसी खुदाई में प्राप्त खनिज एवं गौड़ खनिज पर नियमानुसार रायल्टी का भुगतान करना होगा .

13. शासन की पुर्वानुमति के बिना भूमि के उपयोग के स्वरूप को बदला नहीं जावेगा.

14. पर्यावरण की दृष्टि से पर्याप्त आवश्यक वृक्षारोपण किया जावेगा.

15. कंपनी द्वारा प्रदूषण निवारण हेतु व्यवस्था की जावेगी . इस संबंध में शासन के संबंधित विभाग के आदेशों का पालन करना होगा तथा उनसे एवं प्रदूषण निवारण मंडल से अनापत्ति प्रमाण - पत्र के प्राप्त करना होंगे कि, पर्यावरण, जल स्रोत या वायु में प्रदूषण नहीं किया जावेगा.

16. यदि कभी उक्त भूमि का उपयोग उक्त प्रयोजन के लिये नहीं होता है या बाद में कभी बंद कर दिया जाता है तो भूमि तथा उस पर निर्मित भवनों , सम्पत्तियों के साथ शासन में निहित हो जावेगी और कंपनी को इस हेतु मुआवजा देय नहीं होगा.

17. भूमि या उसके किसी भी या उस पर बने किसी भवन आदि को उक्त उल्लेखित उपयोग के अलावा ना तो किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने दिया जावेगा, और ना ही पट्टे या किराये पर दिया जावेगा.

18. भूमिजिस पर प्रयोजन हेतु दी गई हो , उससे भिन्न प्रयोजन हेतु उपयोग किये जाने से अनाधिकृत कब्जा मान कर भूमि शासन में निहित कर ली जायेगी .

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1 19. शासन के प्रतिनिधि या कलेक्टर या उसके द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि को भूमि के सही उपयोग तथा शर्तों के पालन की दृष्टिसे कभी भी भूमि पर निर्मित भवन आदि तथा परिसर के निरीक्षण करने का अधिकार होगा.

20 स्थानीय आवश्यकता एवं परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक होने पर सार्वजनिक हित में राज्य शासन या कलेक्टर द्वारा समय - समय पर जारी आदेशों एवं निर्देशों का पालन किये जाने के लिए कंपनी बाध्य होगी.

(2) भू- अर्जन कार्यवाही से पूर्व यह भी देख लिया जाये कि यदि किसी अधिसूचित क्षेत्र के ग्रामों में निजी भूमि अर्जित की जा रही है तो ग्राम सभा की बैठक नियमानुसार की जाकर एवं ग्राम सभा की सहमति प्राप्त करने के पश्चात् ही यह अनुमति प्रभावशील होगी . इसके साथ ही इस परिस्थिति में वैकल्पिक भूमि क्रय कर देने की कार्यवाही की जायेगी .

( 3 ) भू- अर्जन कार्यवाही प्रारंभ करने के पूर्व यह भी देख लिया जाये , कि प्प्रस्तावित परियोजना में वनअभ्यारण्य क्षेत्र ( सेन्च्युरी ) का कोई हिस्सा तो नहीं आ रहा है . यदि ऐसा होती है तो उस हेतु विधि द्वारा स्थापित सक्षम अनुमति ली जाना होगी.

(4) कंपनी से भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 41 के प्रावधानों अनुसार करारनामा निष्पादित कराया जाये, जिसमें उपरोक्त शर्तों का भी समावेश किया जावे.

(5) भू- अर्जन की प्रक्रिया एवं अन्य कार्यवाहियों बाबद् शासन द्वारा समय- समय पर जारी दिशा- निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाये.

दो साक्षियों की उपस्थिति में पक्ष क्र. 1 राज्य शासन की ओर से कलेक्टर, जिला खरगोन एवं पक्ष क्र. 2 की ओर से श्री असद जाफर, महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. मण्डलेश्वर, जिला खरगोन द्वारा हस्ताक्षरित कर यह अनुबंध पत्र साक्षियों के समक्ष लिखित हस्ताक्षरित एवं निष्पादित किया गया है .

पक्ष क्र. 1

साक्षियों के हस्ताक्षर

(पूरा नाम पिता का नाम एवं पूरा पता)

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,

हस्ता./- (केदार शर्मा ) कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग . जिला खरगोन ( म. प्र.) .

साक्षी क्र. 1 हस्ता./- नाम : डॉ. ममता खेड़े पता : एफ -१ , न्यू आफिसर्स कालोनी, खरगोन.

साक्षी क्र. 2 हस्ता./- नाम : छोटेखान पता : म. नं. 15, टवडी मोहल्ला खरगोन.

पक्ष क्र. 2 हस्ता./- (असद जाफर) महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पो . लिमि. , मण्डलेश्वर.

भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

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खरगोन, दिनांक 16 अगस्त 2010

[ भू-अर्जन अधिनियम 1894 ( 1894 का क्रमांक -1 ) की धारा 41 के अन्तर्गत अनुबंध पत्र ] क्र. 1012- भू-अर्जन-10 - राजस्व प्रकरण क्रमांक 19-अ- 82-2009-10.- यह अनुबंध पत्र प्रथम पक्ष के रुप में मध्यप्रदेश के राज्यपाल जिनकी ओर से कलेक्टर , जिला खरगनोन एवं पदेन उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग कार्य कर रहे हैं, ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् ' राज्यपाल " कहा गया है जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है ) तथा द्वितीय पक्ष के रुप में श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. , मण्डलेश्वर, जिला खरगोन , मध्यप्रदेश जो भारतीय कम्पनी अधिनियम, 1956 के अन्तर्गत रजिस्टर्ड है ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " कम्पनी " कहा गया है ) जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके विधिक प्रतिनिधि, निष्पादक, पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है . जिसकी ओर से मुख्यत्यार-

श्री असद जाफर, महाप्रबंधक जो श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. , अभयांचल परिसर, मण्डलेश्वर, जिला खरगोन, मध्यप्रदेश में कार्य कर रहे हैं, के मध्य आज दिनांक 11 अगस्त 2010 को सम्पादित किया जा रहा है.

1. कंपनी ने मध्यप्रदेश शासन को ( जिसे आगे राज्य शासन कहा गया है ) महेश्वर जल विद्युत् परियोजना के निर्माण के कारण आंशिक डूब से प्रभावित होने से ग्राम उमट्टी प. ह. नं. 29, तहसील बड़वाह, जिला खरगोन की निजी कृषि भूमि सर्वे नम्बर 7/2 , क्षेत्रफल 0.020 हे . एवं सर्वे नं. 33 क्षेत्रपल 0.425 हे. भूमि एवं उस पर स्थित परिसंपत्तियां के भू- अर्जन अधिनियम 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत आवेदन- पत्र माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में दायर याचिका क्रमांक W. P. - 1359-09 दिनांक 6 मई 2009 में पारित आदेश के पालन में पेश किया है . जिसका विवरण निम्नानुसार परिशिष्ट 1 पर अंकित किया गया है .

परिशिष्ट -1

निजी कृषि भूमि एवं उस पर स्थित संरचनाएं/परिसम्पत्तियां एफ. आर. एल. के अंतर्गत ग्राम उमट्टी नाम भूमि स्वामी/पिता का नाम

ख. नं.

संपत्ति का विवरण अनु. क्र.

एवं जाति

अर्जनीय क्षेत्रपल

(1)

(2)

(3)

(4)

(5) 1

7/2

0.020

मोटरघर-5 तोताराम पिता नत्थु, भाईराम, देवराम,

श्रीराम पिता कन्हैया सा. भोगावासिपानी गुजर

2

33

भागवतबाई पिता हरिराम सा.

0.425

भोगावासिपानी गुजर

0.445

योग .

2. राज्य शासन ने नियमों के अनुसार आवश्यक एवं निर्धारित प्रक्रिया से जांच कर इस बात की संतुष्टी कर ली है कि उक्त जल विद्युत परियोजना राज्य में विद्युत की कमी की पूर्ति हेतु और क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है.

3. कंपनी के भू-अर्जन आवेदन पत्र के आधार पर राज्य शासन द्वारा दिनांक 20 अप्रैल 2010 को संपन्न भू-अर्जन समिति की बैठक में लिये गये निर्णय अनुसार मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग मंत्रालय, भोपाल के पत्र क्रमांक एफ- 12-07-2010- सात - 2- ए भोपाल , दिनांक 10 मई 2010 द्वारा भू-अर्जन की सशर्त अनुमति प्रदान की है इसका इस अनुबंध पत्र में समावेश किया गया है .

4.

कंपनी को प्रदत्त अनुमति की शर्त के पालन में कंपनी को राज्यपाल के साथ भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 41 के अन्तर्गत विहित प्रावधान अनुसार अनुबंध निष्पादित करना है . कंपनी की ओर से सहमत होकर यह अनुबंध पत्र निष्पादित किया जाता है.

[ भाग 1

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 27 अगस्त 2010

2218

कंपनी निम्न प्रकार सहमत होकर घोषणा करती है कि

(क) कंपनी राज्य शासन को अथवा राज्य शासन के द्वारा इस हेतु' नियुक्त व्यक्ति को ऐसी समस्त राशि का अग्रिम भुगतान करेंगी जो भू-अर्जन अधिनियम , 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत अवार्ड की राशि जो उक्त भूमि पर स्वत्वधारी व्यक्तियों को मुआवजे के रूप में भुगतान योग्य होगी.

( ख) कंपनी राज्य शासन को ऐसे सभी प्रभारों ( खर्च ) का भुमतान भी करेंगी जो अधिनियम के अनुसार उक्त भूमि के भू- अर्जन कार्य से युक्तिसंगत संबंधित होगा.

(ग) उपर्युक्त ( क ) तथा ( ख ) में वर्णित समस्त भुगतानों के बाद ही राज्यपाल परिशिष्ट 1 में वर्णित निजी कृषि भूमि तथा उस पर स्थित संरचनाएं/परिसंपत्तियां कंपनी को प्रदाय करेगा, जो अनुमति में उल्लेखित निम्न शर्तों के अधीन होगा 1. कंपनी ( इस आशय के करारनामे या वचनबद्धता के अनुसार ) जिन कृषकों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है उनके परिवार के कम से कम एक सदस्य को पात्रतानुसार नौकरी देने में प्राथमिकता देगी. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के व्यक्तियों के लिए पुनर्वास किये जाने की स्थायी योजना को संबंधित प्रोजेक्ट में शामिल किया जावेगा.

2. भू-अर्जन अधिनियम के अन्तर्गत भू- अर्जन की जा रही भूमि के मूल्यांकन के आधार पर शत - प्रतिशत राशि के साथ 10 प्रतिशत राशि जमा कराये जाने के उपरांत ही कलेक्टर के द्वारा भू- अर्जन की कार्यवाही की जाये .

3. संबंधित कंपनी के लिये भू- अर्जन किये जाने संबंधी कार्य संबंधित कलेक्टर्स के द्वारा भू-अर्जन अधिनियम तथा संबंधित विधिक उपबंधों एवं शासनादेशों के अन्तर्गत दिये गये प्रावधानों तथा शर्तों के आधार पर किया जावे.

4. संबंधित परियोजना को स्थापित करने के संबंध में संबंधित कंपनी द्वारा म.प्र. पुनर्वास नीति के अन्तर्गत पुनर्वास की कार्यवाही कीजायेगी.

5. कंपनी के संबंध में करारनामा, वचनबद्धता एवं शर्तें आदि लागू करने के लिए कलेक्टर कार्यवाही करेंगे.

6. भूमि के किसी उपयोग या उस पर किसी निर्माण के पूर्व सभी आवश्यक अनुमतियां अनुमोदन एवं अनापत्तियां संबंधित संस्था को जैसे नगर निगम , नगर तथा ग्रामीण निवेश विभाग एवं अन्य स्थानीय संस्थाओं, कलेक्टर आदि से प्राप्त करना होंगी तथा मास्टर प्लान एवं पर्यावरण संस्था के नियमों आदि का पूर्ण पालन किया जावेगा.

7. अर्जित की गयी निजी भूमि का वार्षिक व्यपवर्तन कर कंपनी द्वारा देय होगा .

8. भूमि जिस उपयोग के लिये अर्जन की जा रही है वही उपयोग कंपनी द्वारा किया जावेगा.

9. भूमि पर निर्माण कार्य कराते समय सामान्य जनता के निस्तार आदि का ध्यान रखा जायेगा.

10. कंपनी को दी गई भूमि या उसके किसी भाग अथवा उस पर निर्मित किसी भी निर्माण अथवा भवन आदि को बेचने , बंधक रखने, दान देने , पट्टे पर देने या अन्य प्रकार से अन्तरित करने का अधिकार नहीं होगा . ( धारा 44 - ए, भू-अर्जन अधिनियम के तहत ) .

11. यदि कंपनी को दी गई भूमि/ भवन या उसके किसी भी भाग को विक्रय करती है तो भूमि अथवा उस पर निर्मित भवन, इमारतें शासन को कब्जे में लेने का अधिकार होगा और कंपनी को किसी प्रकार का मुआवजा देय नहीं होगा.

12. भूमि की केवल सतह का उपयोग किया जायेगा. आवश्यक निर्माण जैसे भवन निर्माण , नींव आदि के अतिरिक्त खुदाई नहीं की जायेगी तथा ऐसी खुदाई में प्राप्त खनिज एवं गौड़ खनिज पर नियमानुसार रायल्टी का भुगतान करना होगा.

13. शासन की पुर्वानुमति के बिना भूमि के उपयोग के स्वरूप को बदला नहीं जावेगा.

14. पर्यावरण की दृष्टि से पर्याप्त आवश्यक वृक्षारोपण किया जायेगा.

15. कंपनी द्वारा प्रदूषण निवारण हेतु व्यवस्था की जावेगी . इस संबंध में शासन के संबंधित विभाग के आदेशों का पालन करना होगा तथा उनसे एवं प्रदूषण निवारण मंडल से अनापत्ति प्रमाण- पत्र प्राप्त करना होंगे कि, पर्यावरण , जल स्त्रोत या वायु में प्रदूषण नहीं किया जावेगा.

2219 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

भाग 1 ]

16. यदि कभी उक्त भूमि का उपयोग उक्त प्रयोजन के लिये नहीं होता है या बाद में कभी बंद कर दिया जाता है तो भूमि तथा उस पर निर्मित भवनों, सम्पत्तियों के साथ शासन में निहित हो जावेगी और कंपनी को इस हेतु मुआवजा देय नहीं होगा.

17. भूमि या उसके किसी भी या उस पर बने किसी भवन आदि को उक्त उल्लेखित उपयोग के अलावा ना तो किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने दिया जावेगा, और ना ही पट्टे या किराये पर दिया जावेगा.

18 . भूमि जिस प्रयोजन हेतु दी गई हो , उससे भिन्न प्रयोजन हेतु उपयोग किये जाने से अनाधिकृत कब्जा मानकर भूमि शासन में निहित कर ली जायेगी.

19. शासन के प्रतिनिधि या कलेक्टर या उसके द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि को भूमि के सही उपयोग तथा शर्तों के पालन की दृष्टि से कभी भी भूमि पर निर्मित भवन आदि तथा परिसर के निरीक्षण करने का अधिकार होगा.

20 स्थानीय आवश्यकता एवं परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक होने पर सार्वजनिक हित में राज्य शासन या कलेक्टर द्वारा समय - समय पर जारी आदेशों एवं निर्देशों का पालन किये जाने के लिए कंपनी बाध्य होगी .

(2 ) भू- अर्जन कार्यवाही से पूर्व यह भी देख लिया जाये कि यदि किसी अधिसूचित क्षेत्र के ग्रामों में निजी भूमि अर्जित की जा रही है तो ग्राम सभा की बैठक नियमानुसार की जाकर एवं ग्राम सभा की सहमति प्राप्त करने के पश्चात् ही यह अनुमति प्रभावशील होगी . इसके साथ ही इस परिस्थिति में वैकल्पिक भूमि क्रय कर देने की कार्यवाही की जायेगी.

( 3 ) भू- अर्जन कार्यवाही प्रारंभ करने के पूर्व यह भी देख लिया जाये, कि प्रस्तावित परियोजना में वनअभ्यारण्य क्षेत्र ( सेन्च्युरी ) का कोई हिस्सा तो नहीं आ रहा है . यदि ऐसा होता है तो उस हेतु विधि द्वारा स्थापित सक्षम अनुमति ली जाना होगी.

(4) कंपनी से भू-अर्जन अधिनियम , 1894 की धारा 41 के प्रावधानों अनुसार करारनामा निष्पादित कराया जाये , जिसमें उपरोक्त शर्तों का भी समावेश किया जावे .

(5) भू-अर्जन की प्रक्रिया एवं अन्य कार्यवाहियों बाबद् शासन द्वारा समय - समय पर जारी दिशा- निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाये .

दो साक्षियों की उपस्थिति में पक्ष क्र. 1 राज्य शासन की ओर से कलेक्टर, जिला खरगोन एवं पक्ष क्र. 2 की ओर से श्री असद जाफर, महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. मण्डलेश्वर, जिला खरगोन द्वारा हस्ताक्षरित कर यह अनुबंध पत्र साक्षियों के समक्ष लिखित हस्ताक्षरित एवं निष्पादित किया गया है.

पक्ष क्र. 1 मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, साक्षियों के हस्ताक्षर (पूरा नाम, पिता का नाम एवं पूरा पता)

हस्ता./- (केदार शर्मा ) कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग . जिला खरगोन ( म. प्र. ) .

सांक्षी क्र. 1 हस्ता./- नाम : डॉ. ममता खेड़े पता : न्यू आफिसर्स कालोनी, खरगोन.

साक्षी क्र. 2 हस्ता./- नाम : छोटेखान पता : म. नं. 15, टवड़ी मोहल्ला खरगोन.

पक्ष क्र. 2 हस्ता./- (असद जाफर) महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पो. लिमि. , मण्डलेश्वर.

2220

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[ भाग 1

खरगोन, दिनांक 16 अगस्त 2010

[ भू-अर्जन अधिनियम 1894 ( 1894 का क्रमांक -1 ) की धारा 41 के अन्तर्गत अनुबंध पत्र ] क्र. 1005 - भू-अर्जन-10- राजस्व प्रकरण क्रमांक 20-अ-82-09-10.- यह अनुबंध पत्र प्रथम पक्ष के रूप में मध्यप्रदेश के राज्यपाल जिनकी ओर से कलेक्टर, जिला खरगोन एवं पदेन उप सचिव , मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग कार्य कर रहे हैं, ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " राज्यपाल " कहा गया है जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है ) तथा द्वितीय पक्ष के रुप में श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. , मण्डलेश्वर, जिला खरगोन, मध्यप्रदेश जो भारतीय कम्पनी अधिनियम, 1956 के अन्तर्गत रजिस्टर्ड है ( जिन्हें इसमें इसके पश्चात् " कम्पनी " कहा गया है ) जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो उनके विधिक प्रतिनिधि, निष्पादक, पद उत्तरवर्ती और समनुदेशिति भी सम्मिलित है . जिसकी ओर से मुख्यत्यार-

श्री असद जाफर, महाप्रबंधक जो श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. , अभयांचल परिसर, मण्डलेश्वर, जिला खरगोन , मध्यप्रदेश में कार्य कर रहे हैं, के मध्य आज दिनांक 11 अगस्त 2010 को सम्पादित किया जा रहा है.

1.

कंपनी ने मध्यप्रदेश शासन को ( जिसे आगे राज्य शासन कहा गया है ) महेश्वर जल विद्युत् परियोजना के निर्माण के कारण आंशिक डूब से प्रभावित होने से ग्राम जायखेंड़ा प . ह. नं. 25, तहसील बडवाह, जिला खरगोन की निजि कृषि भूमि कुल सर्वे नं. संख्या 08, कुल क्षेत्रफल 2.623 हे . भूमि एवं उस पर स्थित परिसंपत्तियां के भू- अर्जन हेतु भू-अर्जन अधिनियम, 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत आवेदन पत्र माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर में दायर याचिका क्रमांक W.P./1359/09 दिनांक 6 मई 2009 में पारित आदेश के पालन में पेश किया है. जिसका विवरण निम्नानुसार परिशिष्ट 1 पर अंकित किया गया है.

परिशिष्ट-1

निजी कृषि भूमि एवं उस पर स्थित संरचनाएं / परिसम्पत्तियां एफ. आर. एल . के अन्तर्गत ग्राम जायखेंड़ा अनु. क्र.

नाम भूमिस्वामी/पिता का नाम एवं जाति

ख. नं.

संपत्तिका विवरण

अर्जनीय क्षेत्रफल

(1)

(2)

.(3)

(4)

(5) 1

3

0.446

रमेश पिता बाबु, रेवाबई पिता बाबु, झुमकाबाई पिता बाबु बलाई , नि. काकरियां.

4/2

2 पदमाबाई पति विजय जैन, नि. सनावद

0.080

5/1

1.204

3 चिंताराम पिता रामा गुजर, नि. काकरियां

पाईप लाईन-4 , नीम -1 ,

धर्मशाला -1 , हनुमान मंदिर -1 ,

शिवओटला-1 , हवनकुण्ड,

पीपल-4, नीबू-3 , कनेर-4,

बिलपत्र-1 , खोली-1 4

5/3

मोटर पंप

0.081

खोली 11 सोभागचंद पिता जयराम, जगदीश पिता ठाकुर, महेश पिता जगदीश , गजानंद पिता चेतराम , दुर्गाराम पिता गोविंद, प्रेमलाल पिता शिवराम, भागीरथ पिता देवाजी, प्यारेलाल पिता बलीराम, शोभाराम पिता रतन, राधेश्याम पिता बाबुजी, देवेंद्र पिता मंगतुजी रामा पिता भलाजी, कमलचंद पिता तुकाराम , नत्थूजी पिता दशरथ , आत्माराम पिता नानाजी, रामकरण पिता भीलुजी, गुर्जर सा. ठनगांव, आनंदराम पिता नत्थू कहार, रेवाराम पिता गोविंद गुर्जर नि. काकरियां.

2221 भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

(5) (2)

(3)

(4)

(1)

6/2

0.140

5 गीताबाई, भूरीबाई, नीलाबाई , कलाबाई पिता राघोराम गुर्जर, नि. काकरियां.

6/4

0.202

6 मोताबाई बेवा नत्थू, कोरजी , एडूजी, नानाजी , जगदीश पिता नत्थू, ग्यारसबाई, शांताबाई पिता नत्थू नहाल सा. फनगांव.

8/1

0.190

7 पदमाबाई पति विजय जैन, नि. सनावद

8/2 0.280

8 विजय पिता मूलचंद जैन, नि. सनावद

योग .. 8 2.623

2. राज्य शासन ने नियमों के अनुसार आवश्यक एवं निर्धारित प्रक्रिया से जांच कर इस बात की संतुष्टी कर ली है कि उक्त जल विद्युत परियोजना राज्य में विद्युत की कमी की पूर्ति हेतु और क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है.

3. कंपनी के भू- अर्जन आवेदन पत्र के आधार पर राज्य शासन द्वारा दिनांक 20 अप्रैल 2010 को संपन्न भू- अर्जन समिति की बैठक में लिये गये निर्णय अनुसार मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग मंत्रालय , भोपाल के पत्र क्रमांक एफ- 12-07- 2010- सात- 2 - ए भोपाल , दिनांक 10 मई 2010 द्वारा भू-अर्जन की सशर्त अनुमति प्रदान की है इसका इस अनुबंध पत्र में समावेश किया गया है .

4. कंपनी को प्रदत्त अनुमति की शर्त के पालन में कंपनी को राज्यपाल के साथ भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 41 के अन्तर्गत विहित प्रावधान अनुसार अनुबंध निष्पादित करना है. कंपनी की ओर से सहमत होकर यह अनुबंध पत्र निष्पादित किया जाता है .

कंपनी निम्न प्रकार सहमत होकर घोषणा करती है कि

(क) कंपनी राज्य शासन को अथवा राज्य शासन के द्वारा इस हेतु नियुक्त व्यक्ति को ऐसी समस्त राशि का अग्रिम भुगतान करेंगी जो भू-अर्जन अधिनियम , 1894 के प्रावधानों के अन्तर्गत अवार्ड की राशि जो उक्त भूमि पर स्वत्वधारी व्यक्तियों को मुआवजे के रूप में भुगतान योग्य होगी .

(ख) कंपनी राज्य शासन को ऐसे सभी प्रभारों ( खर्च ) का भुगतान भी करेंगी जो अधिनियम के अनुसार उक्त भूमि के भू- अर्जन कार्य से युक्तिसंगत संबंधित होगा.

(ग) उपर्युक्त ( क ) तथा ( ख ) में वर्णित समस्त भुगतानों के बाद ही राज्यपाल परिशिष्ट 1 में वर्णित निजि कृषि भूमि तथा उस पर स्थित संरचनाएं/ परिसंपत्तियां कम्पनी को प्रदाय करेगा, जो अनुमति में उल्लेखित निम्न शर्तों के अधीन होगा 1. कंपनी ( इस आशय के करारनामे या वचनबद्धता के अनुसार ) जिन कृषकों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है उनके परिवार के कम से कम एक सदस्य को पात्रतानुसार नौकरी देने में प्राथमिकता देगी . अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के व्यक्तियों के लिए पुनर्वास किये जाने की स्थायी योजना को संबंधित प्रोजेक्ट में शामिल किया जावेगा.

2. भू-अर्जन अधिनियम के अन्तर्गत भू- अर्जन की जा रही भूमि के मूल्यांकन के आधार पर शत - प्रतिशत राशि के साथ 10 प्रतिशत राशि जमा कराये जाने के उपरांत ही कलेक्टर के द्वारा भू- अर्जन की कार्यवाही की जाये.

2222

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

[भाग 1 3. संबंधित कंपनी के लिए भू-अर्जन किये जाने संबंधी कार्य संबंधित कलेक्टर्स के द्वारा भू-अर्जन अधिनियम तथा संबंधित विधिक उपबंधों एवं शासनादेशों के अन्तर्गत दिये गये प्रावधानों तथा शर्तों के आधार पर किया जावे.

4. संबंधित परियोजना को स्थापित करने के संबंध में संबंधित कंपनी द्वारा म.प्र. पुनर्वास नीति के अन्तर्गत पुनर्वास की कार्यवाही की जायेगी.

5. कपनी के संबंध में करारनामा, वचनबद्धता एवं शर्तें आदि लागू करने के लिए कलेक्टर कार्यवाही करेंगे.

6. भूमि के किसी उपयोग या उस पर किसी निर्माण के पूर्व सभी आवश्यक अनुमतियां अनुमोदन एवं अनापत्तियां संबंधित संस्था को जैसे नगर निगम, नगर तथा ग्रामीण निवेश विभाग एवं अन्य स्थानीय संस्थाओं , कलेक्टर आदि से प्राप्त करना होगी तथा मास्टर प्लान एवं पर्यावरण संस्था के नियमों आदि का पूर्ण पालन किया जावेगा.

7. अर्जित की गयी निजी भूमि का वार्षिक व्यपवर्तन कर कंपनी द्वारा देय होगा.

8. भूमि जिस उपयोग के लिये अर्जिन की जा रही है वही उपयोग कंपनी द्वारा किया जावेगा .

9. भूमि पर निर्माण कार्य कराते समय सामान्य जनता के निस्तार आदि का ध्यान रखा जावेगा .

10. कंपनी को दी गई भूमि या उसके किसी भाग अथवा उस पर निर्मित किसी भी निर्माण अथवा भवन आदि को बेचने, बंधक रखने , दान देने , पट्टे पर देने या अन्य प्रकार से अन्तरित करने का अधिकार नहीं होगा. ( धारा 44 - ए, भू-अर्जन अधिनियम के तहत ) .

11. यदि कंपनी को दी गई भूमि / भवन या उसके किसी भी भाग को विक्रय करती है तो भूमि अथवा उस पर निर्मित भवन, इमारतें शासन को कब्जे में लेने का अधिकार होगा और कंपनी को किसी प्रकार का मुआवजा देय नहीं होगा.

12. भूमि की केवल सतह का उपयोग किया जावेगा. आवश्यक निर्माण जैसे भवन निर्माण , नींव आदि के अतिरिक्त खुदाई नहीं की जायेगी तथा ऐसी खुदाई में प्राप्त खनिज एवं गौड़ खनिज पर नियमानुसार रायल्टी का भुगतान करना होगा.

13. शासन की पुर्वानुमति के बिना भूमि के उपयोग के स्वरूप को बदला नहीं जावेगा.

14. पर्यावरण की दृष्टि से पर्याप्त आवश्यक वृक्षारोपण किया जावेगा.

15. कंपनी द्वारा प्रदूषण निवारण हेतु व्यवस्था की जावेगी. इस संबंध में शासन के संबंधित विभाग के आदेशों का पालन करना होगा तथा उनसे एवं प्रदूषण निवारण मंडल से अनापत्ति प्रमाण- पत्र प्राप्त करना होंगे कि, पर्यावरण , जल स्रोत या वायु में प्रदूषण नहीं किया जावेगा .

16. यदि कभी उक्त भूमि का उपयोग उक्त प्रयोजन के लिये नहीं होता है या बाद में कभी बंद कर दिया जाता है तो भूमि तथा उस पर निर्मित भवनों , सम्पत्तियों के साथ शासन में निहित हो जावेगी और कंपनी को इस हेतु इस हेतु मुआवजा देय नहीं होगा.

17. भूमि या उसके किसी भी या उस पर बने किसी भवन आदि को उक्त उल्लेखित उपयोग के अलावा न तो किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने दिया जावेगा, और न ही पट्टे या किराये पर दिया जायेगा.

18. भूमि जिस प्रयोजन हेतु दी गई हो, उससे भिन्न प्रयोजन हेतु उपयोग किये जाने से अनाधिकृत कब्जा मानकर भूमि शासन में निहित कर ली जायेगी.

भाग 1 ]

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 27 अगस्त 2010

2223 19 . शासन के प्रतिनिधि या कलेक्टर या उसके द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि को भूमि के सही उपयोग तथा शर्तों के पालन की दृष्टि से कभी भी भूमि पर निर्मित भवन आदि तथा परिसर के निरीक्षण करने का अधिकार होगा.

20 स्थानीय आवश्यकता एवं परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक होने पर सार्वजनिक हित में राज्य शासन या कलेक्टर द्वारा समय - समय पर जारी आदेशों एवं निर्देशों का पालन किये जाने के लिए कंपनी बाध्य होगी.

(2 ) भू- अर्जन कार्यवाही से पूर्व यह भी देख लिया जाये कि यदि किसी अधिसूचित क्षेत्र के ग्रामों में निजी भूमि अर्जित की रही है तो ग्राम सभा की बैठक नियमानुसार की जाकर एवं ग्राम सभा की सहमति प्राप्त करने के पश्चात् ही यह अनुर्मान प्रभावशील होगी. इसके साथ ही इस परिस्थिति में वैकल्पिक भूमि क्रय कर देने की कार्यवाही की जायेगी.

(3 ) भू- अर्जन कार्यवाही प्रारंभ करने के पूर्व यह भी देख लिया जाये कि प्रस्तावित परियोजना में वनअभ्यारण्य क्षेत्र ( सन्च्युरी ) का कोई हिस्सा तो नहीं आ रहा है. यदि ऐसा होता है तो उस हेतु विधि द्वारा स्थापित सक्षम अनुमति ली जाना होगी.

(4) कंपनी से भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 41 के प्रावधानों अनुसार करारनामा निष्पादित कराया जाये , जिसमें उपरोक शर्तों का भी समावेश किया जावे .

( 5) भू- अर्जन की प्रक्रिया एवं अन्य कार्यवाहियों बांबद् शासन द्वारा समय- समय पर जारी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चि किया जाये.

दो साक्षियों की उपस्थिति में पक्ष क्र. 1 राज्य शासन की ओर से कलेक्टर, जिला खरगोन एवं पक्ष क्र. 2 की ओर से श्री असद जाप महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पोरेशन लिमि. मण्डलेश्वर, जिला खरगोन द्वारा हस्ताक्षरित कर यह अनुबंध पत्र साक्षियों के सम लिखित हस्ताक्षरित एवं निष्पादित किया गया है.

साक्षियों के हस्ताक्षर (पूरा नाम, पिता का नाम एवं पूरा पता)

पक्ष क्र. 1 मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार ,

हस्ता./- (केदार शर्मा ) कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग . जिला खरगोन ( म. प्र. ).

साक्षी क्र. 1 हस्ता./- नाम : डॉ. ममता खेड़े पता : एफ-१, न्यू आफिसर्स कालोनी, खरगोन.

साक्षी क्र. 2 हस्ता./- नाम : छोटेखान

पता : म. नं. 15, टवड़ी मोहल्ला खरगोन.

पक्ष क्र. 2 हस्ता./- (असद जाफर) महाप्रबंधक, श्री महेश्वर हायडल पॉवर कार्पो. लिमि. , मण्डलेश्वर.

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 27 August 2010. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2010-08-27.35.Ordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2010-08-27.35.Ordinary.