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मध्य प्रदेश शासन
सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 29]
भोपाल , शुक्रवार, दिनांक 20 जुलाई 2012- आषाढ़ 29 , शक 1934
विषय-सूची
भाग 1.- ( 1 ) राज्य शासन के आदेश , ( 2 ) विभाग प्रमुखों के आदेश , ( 3 ) उच्च न्यायालय के आदेश और अधिसूचनाएं, (4) राज्य शासन के संकल्प, ( 5 ) भारत शासन के आदेश और अधिसूचनाएं, ( 6 ) निर्वाचन आयोग, भारत की अधिसूचनाएं, ( 7 ) लोक- भाषा परिशिष्ट.
भाग 2.- स्थानीय निकाय की अधिसूचनाएं.
भाग 3.- ( 1 ) विज्ञापन और विविध सूचनाएं.
( 2) सांख्यिकीय सूचनाएं.
4.- ( क) ( 1 ) मध्यप्रदेश विधेयक, ( 2 ) प्रवर समिति के प्रतिवेदन, भाग
(3 ) संसद् में पुरःस्थापित विधेयक,
(ख) ( 1 ) अध्यादेश , ( 2 ) मध्यप्रदेश अधिनियम, (3) संसद्के अधिनियम,
(ग) ( 1 ) प्रारूप नियम, ( 2 ) अंतिम नियम.
भाग १
राज्य शासन के आदेश
सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल भोपाल, दिनांक 4 जुलाई 2012
क्र. ई. - 5-781- आयएएस- लीव- 5- एक.-( 1 ) श्री आर . के. माथुर, आयएएस. , कमिश्नर , सागर संभाग को इस विभाग के समसंख्यक आदेश दिनांक 18 मई 2012 द्वारा दिनांक 12 से 23 जून 2012 तक, बारह दिन के स्वीकृत अर्जित अवकाश में आंशिक संशोधन करते हुए, अब उन्हें दिनांक 12 से 25 जून 2012 तक, चौदह दिन के अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है .
(2 ) इस विभाग के समसंख्यक आदेश दिनांक 18 मई 2012 की शेष कंडिकाएं यथावत रहेंगी.
क्र. ई . - 5-739- आयएएस- लीव - 5 - एक.- ( 1 ) श्री हीरालाल त्रिवेदी, आयएएस. , तत्का. आयुक्त सामाजिक न्याय , मध्यप्रदेश को
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सामाजिक न्याय विभाग के आदेश दिनांक 21 जून 2011 द्वारा दिनांक 28 जून 2011 से 3 जुलाई 2011 तक एथेन्स ( ग्रीस ) भ्रमण की अनुमति प्रदान की गई थी . उक्त शासकीय विदेश भ्रमण के अनुक्रम में श्री त्रिवेदी को दिनांक 28 जून 2011 से 3 जुलाई 2011 तक, छहः दिन का एक्स इंडिया अर्जित अवकाश कार्योत्तर अवकाश स्वीकृत किया जाता है .
(2) अवकाशकाल में श्री हीरालाल त्रिवेदी को भत्ते की पात्रता नहीं होगी.
(3 ) प्रमाणित किया जाता है कि यदि श्री हीरालाल त्रिवेदी अवकाश पर नहीं जाते तो अपने पद पर कार्य करते रहते.
क्र. ई. - 5-606- आयएएस लीव- एक 5.- ( 1 ) श्री पंकज अग्रवाल , आयएएस . , सचिव , मध्यप्रदेश शासन, वित्त विभाग को इस विभाग के आदेश क्रमांक ई - 13-75-2011-5- एक, दिनांक 21 मई 2012 द्वारा दिनांक 23 जुलाई 2012 से 10 अगस्त 2012 तक लंदन नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री , मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2012.
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[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
में आयोजित शार्ट टर्म मिड केरिअर प्रोग्राम में भाग लेने के अनुक्रम दिनांक 11 से 20 अगस्त 2012 तक, दस दिन एक्स इंडिया अर्जित अवकाश तथा दिनांक 21 से 24 अगस्त 2012 तक, चार दिन का अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है .
उक्त एक्स इंडिया अवकाश आपको इस शर्त के साथ स्वीकृत किया जाता है कि आप इस अवधि को नहीं बढ़ायेगे तथा लंदन से वापस लौट आएंगे . साथ ही यदि लंदन के अलावा विदेश में किसी अन्य स्थान का भ्रमण किया जाता है , तो उसकी पूर्व सूचना भी इस विभाग को प्रस्तुत करेंगे .
(2) अवकाश से लौटने पर श्री पंकज अग्रवाल को अस्थायी रूप से, आगामी आदेश तक, स्थानापन्न सचिव , मध्यप्रदेश शासन , वित्त विभाग के पद पर पुनः पदस्थ किया जाता हैं.
(3 ) अवकाशकाल में श्री पंकज अग्रवाल को अवकाश वेतन एवं भत्ता उसी प्रकार देय होगा जो उन्हें अवकाश पर जाने के पूर्व मिलता था.
(4 ) प्रमाणित किया जाता है कि यदि श्री पंकज अग्रवाल अवकाश पर नहीं जाते तो अपने पद पर कार्य करते रहते.
भोपाल , दिनांक 05 जुलाई 2012
क्र. ई. - 1-242-2012-5- एक.- श्री दिलीप कुमार सामन्तराय , भाप्रसे ( 1982 ) , प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग को अस्थायी रूप से , आगामी आदेश तक, स्थानापन्न विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी , मध्यप्रदेश मंत्रालय पदस्थ किया जाता है.
( 2 ) उपरोक्तनुसार श्री दिलीप कुमार सामन्तराय द्वारा कार्यभार ग्रहण करने के दिनांक से राज्य शासन भाप्रसे ( वेतन ) नियमावली, 2007 के नियम, 9 के अंतर्गत विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी , मध्यप्रदेश मंत्रालय के असंवर्गीय पद को प्रतिष्ठा एवं जिम्मेदारी में ऊपर दर्शित नियमों की अनुसूची II में सम्मिलित प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन के संवर्गीय पद के समकक्ष घोषित करता है .
(3 ) श्री सुदेश कुमार, भाप्रसे ( 1984 ) , प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, संसदीय कार्य विभाग तथा जन शिकायत निवारण विभाग को अपने वर्तमान कर्तव्यों के साथ - साथ , आगामी आदेश तक, प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन , सामान्य प्रशासन विभाग का प्रभार अतिरिक्त रूप से सौंपा जाता है.
भोपाल, दिनांक 06 जुलाई 2012
क्र. ई. - 5-353 - आयएएस लीव - एक- 5.-( 1 ) श्री स्वदीप सिंह, आयएएस . , तत्का. विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी , मध्यप्रदेश मंत्रालय तथा अपर मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन, आदिम जाति कल्याण, अनुसूचित जाति कल्याण विभाग को दिनांक 5 से 30 जून 2012 तक, छब्बीस दिन का लघुकृत अवकाश कार्योत्तर स्वीकृत किया जाता है .
( 2) अवकाशकाल में श्री स्वदीप सिंह को अवकाश वेतन एवं भत्ता उसी प्रकार देय होगा जो उन्हें अवकाश पर जाने के पूर्व मिलता था.
(3 ) प्रमाणित किया जाता है कि यदि श्री स्वदीप सिंह अवकाश पर नहीं जाते तो अपने पद पर कार्य करते रहते .
भोपाल, दिनांक 07 जुलाई 2012
क्र. ई. - 5-693 - आयएएस-लीव-5- एक. ( 1 ) श्री अरुण तिवारी, आयएएस . , कमिश्नर, नर्मदापुरम् संभाग होशंगाबाद को दिनांक 11 से 13 जुलाई 2012 तक, तीन दिन का अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है. उक्त अवकाश के साथ दिनांक 14 , 15 जुलाई 2012 के सार्वजनिक अवकाश को जोड़ने की अनुमति दी जाती है .
(2 ) श्री अरुण तिवारी की अवकाश की अवधि में श्री राहुल जैन , आयएएस . , कलेक्टर, जिला होशंगाबाद को अपने वर्तमान कर्तव्यों के साथ- साथ , अस्थायी रूप से , आगामी आदेश तक, कमिश्नर, नर्मदापुरम् संभाग होशंगाबाद का चालू कार्यभार सौंपा जाता है.
( 3 ) अवकाश से लौटने पर श्री अरुण तिवारी को अस्थायी रूप से, आगामी आदेश तक, स्थानापन्न कमिश्नर, नर्मदापुरम् संभाग होशंगाबाद के पद पर पुनः पदस्थ किया जाता है.
(4 ) श्री अरुण तिवारी द्वारा कमिश्नर, नर्मदापुरम् संभाग होशंगाबाद का कार्यभार ग्रहण करने पर श्री राहुल जैन, कमिश्नर, नर्मदापुरम् संभाग होशंगाबाद के चालू कार्यभार से मुक्त होंगे.
( 5) अवकाशकाल में श्री अरुण तिवारी को अवकाश वेतन एवं भत्ता उसी प्रकार देय होगा जो उन्हें अवकाश पर जाने के पूर्व मिलता था.
(6) प्रमाणित किया जाता है कि यदि श्री अरुण तिवारी अवकाश पर नहीं जाते तो अपने पद पर कार्य करते रहते.
भोपाल, दिनांक 09 जुलाई 2012
क्र. ई. -5-876- आयएएस- लीव- 5 - एक. ( 1 ) श्री तेजस्वी एस . नायक, आयएएस. , अनुविभागीय अधिकारी , कटनी को दिनांक 9 से 13 जुलाई 2012 तक, पांच दिन का अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है.
(2) अवकाश से लौटने पर श्री तेजस्वी एस . नायक को अस्थायी रूप से, आगामी आदेश तक, स्थानापन्न अनुविभागीय अधिकारी, कटनी के पद पर पुनः पदस्थ किया जाता है.
( 3) अवकाशकाल में श्री तेजस्वी एस. नायक को अवकाश वेतन एवं भत्ता उसी प्रकार देय होगा जो उन्हें अवकाश पर जाने के पूर्व मिलता था.
(4 ) प्रमाणित किया जाता है कि यदि श्री तेजस्वी एस. नायक अवकाश पर नहीं जाते तो अपने पद पर कार्य करते रहते .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार ,
आर. परशुराम, मुख्य सचिव.
भाग 1 ]
2777
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
भोपाल , दिनांक 5 जुलाई 2012
क्र. ई. - 5-845- आयएएस लीव-5- एक ( 1 ) श्री के. सी. जैन, आयएएस. , उप सचिव , मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग को इस विभाग के समसंख्यक आदेश दिनांक 16 मई 2012 द्वारा दिनांक 11 से 30 जून 2012 तक, बीस दिन के स्वीकृत अर्जित अवकाश में आंशिक संशोधन करते हुए, अब उन्हें दिनांक 18 से 26 जून 2012 तक, नौ दिन अर्जित अवकाश कार्योत्तर स्वीकृत किया जाता है.
(2 ) इस विभाग के समसंख्यक आदेश दिनांक 16 मई 2012 की शेष कंडिकाएं यथावत रहेंगी.
भोपाल , दिनांक 6 जुलाई 2012
क्र. ई. - 5-771 - आयएएस लीव - एक-5.-डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, आयएएस. , कलेक्टर, जिला खरगोन को समसंख्यक आदेश दिनांक 12 जून 2012 द्वारा दिनांक 18 से 30 जून 2012 तक, तेरह दिन के स्वीकृत अर्जित अवकाश में आंशिक संशोधन करते हुए, अब उन्हें दिनांक 18 से 23 जून 2012 तक, छः दिन का अर्जित स्वीकृत किया जाता है तथा उक्त अवकाश के साथ दिनांक 16 , 17 जून 2012 एवं 24 जून 2012 का सार्वजनिक अवकाश जोड़ने की अनुमति दी जाती है.
(2 ) इस विभाग के समसंख्यक आदेश दिनांक 12 जून 2012 की शेष कंडिकाएं यथावत् रहेंगी.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
व्ही.एस. तोमर, अवर सचिव " कार्मिक " .
तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल
भोपाल , दिनांक 24 नवम्बर 2011
क्र. एफ- 1-59-2003- बयालीस ( 1 ) .- मध्यप्रदेश तकनीकी शिक्षा पोलीटेकनिक महाविद्यालय अध्यापन संवर्ग सेवा भरती ( नियम 2004) की कंडिका 11 ( 8 ) में इन नियमों के तहत संविदा पर नियुक्त व्यक्ति को 13 दिन आकस्मिक अवकाश एवं 3 दिवस ऐच्छिकअवकाश का हकदार दर्शाया गया है . राज्य शासन द्वारा उक्त नियमों के पश्चात् निम्नानुसार प्रावधान प्रतिस्थापित किया जाता हैं :-
इन नियमों के तहत संविदा पर नियुक्त महिला/पुरुष कर्मचारी/ अधिकारियों को मध्यप्रदेश सिविल सेवा अवकाश नियम 1977 के नियम 38 में उल्लेखित प्रावधान यथावत लागू रहेंगे .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार ,
शशि कर्णावत , उपसचिव.
कार्यालय कलेक्टर, जिला सिंगरौली मध्यप्रदेश एवं उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग सिंगरौली, दिनांक 30 जून 2012
संशोधित अधिसूचना
क्र. 559 - भू-अर्जन- 2012- अधिसूचना क्र. 490- भू-अर्जन-2012 के अनुसार जारी अधिसूचना में लिपिकीय त्रुटिवश यह उल्लेख किया गया था कि राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध लागू होते हैं , उक्त पैरा विलोपित किया जाता है तथा उसके स्थान पर राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमियों के संबंध में लागू होंगे . शेष शर्तें पूर्व में जारी अधिसूचना की यथावत् रहेगी.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार , एम. सेलवेन्द्रन, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
विधि और विधायी कार्य विभाग भोपाल , दिनांक 11 जुलाई 2012
फा. क्र. - 17 ( ई ) 31-2012- इक्कीस- ब ( एक ) , 1035- 2012.- भारत के संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, मध्यप्रदेश के राज्यपाल , मध्यप्रदेश के माननीय मुख्य न्यायमूर्ति के परामर्श से, एतद्वारा , आकस्मिकता से वेतन पाने वाले कर्मचारियों की भर्ती तथा सेवा शर्तें ( जिला एवं सत्र न्यायाधीशों की स्थापना ) से संबंधित नियम, 1980 में, निम्नलिखित संशोधन करते हैं , अर्थात्ः-
संशोधन
नियम 7 में, उप नियम ( 2 ) में , मद ( 2 ङ) के पश्चात्, निम्नलिखित नई मद अन्तःस्थापित की जाए, अर्थात्ः- " ( 2- च ) आकस्मिकता से वेतन पाने वाले कर्मचारियों की शैक्षणिक अर्हताएं ऐसी होंगी , जैसी कि मध्यप्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा पूर्व में विहित की गई है या समय - समय पर विहित की जाए. " .
No. - 17 ( E) 31-2012 - XXI - B ( 1 ) -1035-2012 .--- In exercise of the powers conferred by the Proviso to Article 309 of the constitution of India , the , Governnor of Madhya Pradesh , in consulation with the Hon'ble Chief Justice of Madhya Pradesh , hereby , makes the following amendment in Rules relating to Recruitment and condition 2778
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
of Service of Contingency Paid ( District and Sessions Judges Establishment ) Employees Rules , 1980, namely:--
AMENDMENT
In rule 7 , in sub - rule ( 2) , - after item ( 2E ) , the following new item shall be inserted , namely : --
"(2-F) Educational qualifications for contingency -Paid employees shall be such as have been previously prescribed or may be prescribed from time to time by the Government of Madhya Pradesh , General Administration Department . " .
फा. क्र. - 17 ( ई ) 31-2012 - इक्कीस ब ( एक ) .- भारत के संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, मध्यप्रदेश के राज्यपाल , एतद्वारा , मध्यप्रदेश के जिला एवं सत्र न्यायाधीशों की स्थापना के अंतर्गत चतुर्थ श्रेणी सेवा भरती के नियम, 1978 में निम्नलिखित संशोधन करते हैं, अर्थात्:-
संशोधन
उक्त नियमों में , अनुसूची में, अनुक्रमांक 3 , 4 , 5 एवं 6 के सामने, कॉलम (6 ) में, अंक और शब्द " पांचवी कक्षा पास " के स्थान पर , अंक और शब्द " आठवीं कक्षा उत्तीर्ण " स्थापित किये जाये.
No.17 ( E) 31-2012 - XXI - B ( 1 ) -1035-2012 .- In cxercise of the powers conferred by the Proviso to Article 309 of the constitution of India , the Governor of Madhya Pradesh , hereby , makes the following amendment in the Madhya Pradesh Class IV Services on the Establishment ofDistrict and Sessinos Judges Recruitment Rules , 1978 , namely:-
AMENDMENT
In the said rules , in the schedule, in column ( 6) , against the serial numbers 3 , 4 , 5 and 6 , for the figure and words "Vth Class pass " , the figure and words " VIIIth class pass " shall be substituted .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, के. डी. खान , प्रमुख सचिव.
भोपाल , दिनांक 4 जुलाई 2012
फा. क्र. - 1 (सी ) -19-2012 - इक्कीस ब ( दो ).- राज्य शासन, इस विभाग के समसंख्यक आदेश दिनांक 12 अप्रैल 2012 को निरस्त करते हुये , दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 ( क्रमांक 52 सन् 1974) की धारा 24 की उपधारा (8 ) एवं मध्यप्रदेश विशेष न्यायालय नियम , 2012 के नियम 7 के उपनियम ( 1 ) एवं नियम 8 के उपनियम, ( 4 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुये , श्री विजय कुमार उइके, जिला अभियोजन अधिकारी , जबलपुर को मध्यप्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम, 2011 के अंतर्गत गठित विशेष न्यायालय एवं प्राधिकृत अधिकारी , जबलपुर के समक्ष विचाराधीन प्रकरणों में मध्यप्रदेश शासन की ओर से संचालन हेतु पदस्थापना ग्रहण करने की दिनांक से तीन वर्ष की कालावधि अथवा अन्यत्र आदेश होने तक के लिये एतद्वारा, विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करता है .
भोपाल, दिनांक 11 जुलाई 2012
फा. क्र.- 1- बी- 30-04- इक्कीस - ब ( दो ) .- राज्य शासन, इस विभाग के समसंख्यक आदेश दिनांक 02 सितम्बर 2004 के द्वारा श्री नंदलाल पाण्डे, अतिरिक्त शासकीय अभिभाषक/अतिरिक्त लोक अभियोजक, फास्ट ट्रेक कोर्ट मऊगंज, जिला रीवा को नियुक्त किया गया था.
श्री नंदलाल पाण्डे, अतिरिक्त शासकीय अभिभाषक/अतिरिक्त लोक अभियोजक, फास्ट ट्रेक कोर्ट , मऊगंज, जिला रीवा की आयु 62 वर्ष की आयु पूर्ण हो जाने के कारण उन्हें राज्य शासन, विधि विभाग नियमावली 2008 के नियम 20 के अंतर्गत आदेश जारी होने के दिनांक से तत्काल पदमुक्त करता है.
भोपाल, दिनांक 11 जुलाई 2012
फा. क्र.- 1-बी- 1-05- इक्कीस ब (दो ) . - राज्य शासन , इस विभाग के समसंख्यक आदेश दिनांक 31 अगस्त 2005 के द्वारा श्री रूप सिंह यादव, अतिरिक्त शासकीय अभिभाषक/अतिरिक्त लोक अभियोजक, जिला सागर को नियुक्त किया गया था.
श्री रूप सिंह यादव , अतिरिक्त शासकीय अभिभाषक/अतिरिक्त लोक अभियोजक, जिला सागर की आयु 62 वर्ष की आयु पूर्ण हो जाने के कारण उन्हें राज्य शासन, विधि विभाग नियमावली 2008 के नियम 20 के अंतर्गत आदेश जारी होने के दिनांक से तत्काल पदमुक्त करता है .
फा. क्र.- 1-बी- 33-2004- इक्कीस- ब ( दो ) .- राज्य शासन , इस विभाग के समसंख्यक आदेश दिनांक 19 अगस्त 2004 द्वारा नियुक्त श्री मनोज सक्सेना, अतिरिक्त शासकीय अभिभाषक/ अतिरिक्त लोक अभियोजक, सीहोर के कार्यकाल दिनांक 19 अगस्त 2010 को समाप्त होने के पश्चात् उन्हें दिनांक 19 अगस्त 2010 से 18 अगस्त 2013 तक में तीन वर्ष की अवधि हेतु पुनर्नियुक्त इस शर्त के अधीन किया जाता है कि यह नियुक्ति एक माह का सूचना - पत्र देकर बिना कोई कारण बताये समाप्त की जा सकती है.
(टीप:- श्री मनोज सक्सेना की जन्म तिथि 26-12-1969 छब्बीस दिसम्बर उन्नीस सौ उनहत्तर है और उनकी आयु 62 वर्ष अवधि दिनांक 26-12-2031 छब्बीस दिसम्बर दो हजार इक्तीस को पूर्ण होगी.) भाग 1 ]
2779
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
भोपाल, दिनांक 13 जुलाई 2012
फा. क्र. -1-बी-14-2004- इक्कीस- ब ( दो ) .- दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 ( क्रमांक 2 सन् 1974 ) की धारा -24 की उपधारा ( 3 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य शासन , एतद्वारा श्री सुधीर माधव शुक्ल, पुत्र श्री माधव पद्मनाभ शुक्ल, अधिवक्ता को उनके कार्यभार ग्रहण करने के दिनांक से एक वर्ष की अवधि के लिये बालाघाट सत्र खण्ड के बालाघाट राजस्व जिले के लिये अति. लोक अभियोजक, बालाघाट नियुक्त करता है . तथापि यह नियुक्ति एक माह का सूचना - पत्र देकर बिना कोई कारण बताये समाप्त की जी सकती है.
(टीप:- श्री सुधीर माधव शुक्ल की जन्म तिथि 08-02-1953 आठ फरवरी उन्नीस सौ तिरेपन अनुसार उनकी आयु 62 वर्ष अवधि दिनांक 08-02-2015 आठ फरवरी दो हजार पन्द्रह को पूर्ण होगी . ) फा. क्र. - 1 (बी) -14-2004- इक्कीस ब ( दो ) .- दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (क्रमांक 2 सन् 1974 ) की धारा -24 की उपधारा ( 3 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य शासन, एतद्वारा श्रीमती अनिता खरे, पुत्री स्व. श्री श्याम मोहन खरे अधिवक्ता को उनके कार्यभार ग्रहण करने के दिनांक से एक वर्ष की अवधि के लिये बालाघाट सत्र खण्ड के बालाघाट राजस्व जिले के लिये लोक अभियोजक, बालाघाट नियुक्त करता है , तथापि यह नियुक्ति एक माह का सूचना- पत्र देकर बिना कोई कारण बताये समाप्त की जा सकती है.
(टीप:- श्रीमती अनिता खरे की जन्म तिथि 20-03-1959 बीस मार्च उन्नीस सौ उनसठ अनुसार उनकी आयु 62 वर्ष अवधि दिनांक 20-03-2021 बीस मार्च दो हजार इक्कीस को पूर्ण होगी. ) फा. क्र.- 1(बी ) -14-2004- इक्कीस ब ( दो ) . -दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 ( क्रमांक 2 सन् 1974 ) की धारा-24 की उपधारा ( 3 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य शासन एतद्वारा श्री एस. मुकुन्द राव, पुत्र स्व. श्री यादोराव, अधिवक्ता को उनके कार्यभार ग्रहण करने के दिनांक से एक वर्ष की अवधि के लिये बालाघाट सत्र खण्ड के बालाघाट राजस्व जिले के लिये अति. लोक अभियोजक , बारासिवनी नियुक्त करता है, तथापि यह नियुक्ति एक माह का सूचना- पत्र देकर बिना कोई कारण बताये समाप्त की जा सकती है.
(टीप:- श्री एस. मुकुन्द राव की जन्म तिथि 09-05-1955 नौ मई उन्नीस सौ पचपन अनुसार उनकी आयु 62 वर्ष अवधि दिनांक 09-05-2017 नौ मई दो हजार सत्रह को पूर्ण होगी . ) मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
अनिल वर्मा, सचिव.
पिछड़ा वर्ग एवं अल्प संख्यक कल्याण विभाग मंत्रालय, वल्लभ भवन , भोपाल भोपाल , दिनांक 06 जुलाई 2012
क्र. एफ-4-3-2012-चौवन-1.- मध्यप्रदेश शासन, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अन्तर्गत संचालित पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग की कल्याणकारी योजनाओं के संचालन हेतु समस्तजिलों में सहायक संचालक, कार्यालय की स्थापना का निर्णय लिया गया है. जुलाई 2012 से ये कार्यालय प्रारंभ होंगे . कलेक्टरों द्वारा इस हेतु स्थान भी आरक्षित कर लिये गये हैं . लिपिक एवं लेखा स्तर के कर्मचारी पूर्व से ही पदस्थ है . निर्देशानुसार सूचित किया जाता है कि सहायक संचालक का प्रभार जिलों में वर्तमान में कार्यरत सहायक आयुक्त/जिला संयोजक, आदिम जाति अनुसूचित जाति कल्याण विभाग अथवा किसी अन्य अधिकारी को दिलाकर कार्यालय प्रारंभ करावें सहायक संचालकों एवं निरीक्षकों के पदस्थापना आदेश पृथक से शीघ्र जारी किये जा रहे हैं. जिला कार्यालयों द्वारा संपादित किये जाने वाले कार्य संलग्न परिशिष्ट " अ " में दर्शित हैं . कार्यालय प्रारंभ करने की सूचना कृपया लौटती डाक से देवें.
संलग्न- परिशिष्ट " अ "
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
जी.एस. खैरवार, उपसचिव.
परिशिष्ट-" अ " नवीन सहायक संचालक, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय के अंतर्गत संपादित किये जाने
वाले कार्य
समस्त जिलों में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के स्वतंत्र रूप से सहायक संचालक कार्यालय स्थापित किये गये हैं इस कार्यालय के अंतर्गत निम्नलिखित कार्य संपादित किये जायेंगे:-
(1 ) पिछड़ा वर्ग स्व. रामजी महाजन सेवा राज्य पुरस्कार योजना.
( 2 ) पिछड़ा वर्ग राज्य स्तरीय परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केन्द्र के आवेदन- पत्र एकत्रित करना.
( 3) मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग से संबंधित कार्य.
(4) मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम से संबंधित समस्त कार्य .
( 5 ) पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति के आवेदन एकत्रित करना.
2780
(6 ) मध्यप्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग से संबंधित कार्य .
(7) मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड अंतर्गत जिला स्तरीय समितियों से संबंधित कार्य.
(8 ) राज्य में वक्फ संपत्तियों के सर्वे कार्य से संबंधित समस्त कार्य.
(१ ) मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग राज्य सलाहकार मण्डल के निर्णयों पर कार्यवाही.
( 10 ) जिला स्तरीय पिछड़ा वर्ग सलाहकार समितियों से संबंधित कार्य.
( 11 ) अल्पसंख्यकों के 15 सूत्रीय राज्य अल्पसंख्यक कल्याण समितियों का गठन तथा बैठकें .
( 12 ) पिछड़े वर्ग शिक्षित युवक- युवतियों को रोजगार गारंटी योजना.
( 13 ) मुख्यालय स्तर से स्वीकृत की जाने वाली अल्पसंख्यक वर्ग की छात्रवृत्तियों के आवेदन एकत्रित करना एवं चेक वितरित करना.
( 14 ) पिछड़ा वर्ग पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास प्रशासन.
( 15 ) पिछड़ा वर्ग पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास प्रशासन.
( 16 ) पिछड़ा वर्ग मेघावी विद्यार्थी छात्रवृत्ति योजना.
( 17) पिछड़ा वर्ग प्री मैट्रिक/ पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति.
( 18 ) पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति.
( 19 ) पिछड़ा वर्ग छात्रगृह योजना.
(20 ) संघ एवं लोक सेवा आयोग की परीक्षा हेतु प्रोत्साहन योजना.
(21 ) मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग स्वरोजगार योजना के प्रस्तावानुसार प्रकरण तैयार करना.
( 22 ) मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक स्वरोजगार योजना के प्रस्तावानुसार प्रकरण तैयार करना.
(23 ) पिछड़ा वर्ग के जाति प्रमाण- पत्रों का लेमिनेशन.
(24 ) चर्च एवं दरगाह को सहायक अनुदान योजना.
(25 ) व्यवसायिक परीक्षा हेतु परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण योजना.
(26 ) छात्रावास भवन निर्माण योजना.
( 27 ) पिछड़े वर्ग विद्यार्थियों को व्यवसायिक परीक्षा हेतु प्रोत्साहन योजना.
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(28 ) जिला स्तर पर वक्फ समितियों का सर्वेक्षण कार्य.
(29 ) जिला स्तरीय अल्पसंख्यक कल्याण समितियॉ.
(30 ) अल्पसंख्यक प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति.
( 31 ) अल्पसंख्यक पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति.
( 32) अल्पसंख्यक मेरिट- कम-मीन्स छात्रवृत्ति.
( 33 ) अल्पसंख्यक कन्या छात्रावास.
(34) अल्पसंख्यक सेवा राज्य पुरस्कार.
2. इसके अतिरिक्त समय - समय पर शासन, आयुक्त एवं कलेक्टर द्वारा सौंपे गये अन्य कार्य सहायक संचालकों द्वारा संपादित किये जावेंगे .
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल भोपाल, दिनांक 3 जुलाई 2012
क्र. एफ- 7-4-2012- छः.- मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना-नियम 2012 के नियम 21 के अंतर्गत श्री राजेश प्रसाद मिश्र , उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन , धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग को आगामी आदेश तक, संचालक, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना नियुक्त किया जाता है .
बसंत प्रताप सिंह, प्रमुख सचिव.
जेल विभाग
मंत्रालय, वल्लभ भवन , भोपाल भोपाल , दिनांक 7 जुलाई 2012
क्र. एफ- 06-16-2002- तीन जेल. जेल प्रिजन्स एक्ट 1894 की धारा- ( 3 ) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए राज्य शासन , एतद्वारा नीलम पार्क, जहाँगीराबाद, भोपाल एवं यादगार ऐ शाहजंहानी पार्क , भोपाल को दिनांक 16 जुलाई , 2012 से 27 जुलाई, 2012 तक के लिए अस्थाई जेल घोषित करता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, दशरथ कुमार, उपसचिव.
किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग मंत्रालय , वल्लभ भवन , भोपाल भोपाल , दिनांक 9 जुलाई 2012
क्र. डी- 15-15-2012- चौदह - 3.- मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 , ( क्रमांक 24 सन् 1973 ) , की धारा 3 की उपधारा ( 1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुये राज्य सरकार एतद्वारा भाग 1 ]
2781
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
उक्त अधिनियम के प्रयोजन के लिये , उक्त अधिनियम की अनुसूची में विर्निदिष्ट की गई कृषि उपज का क्रय- विक्रय करने के लिये जबलपुर जिले के तहसील पाटन में समाविष्ट समस्त राजस्व एवं वन ग्रामों के क्षेत्र में क्रय - विक्रय का विनियमन करने के लिये तहसील पाटन में मंडी स्थापित करने के अपने आशय की घोषणा करती है.
किसी भी ऐसी आपत्ति या सुझाव पर जो लिखित में किसी भी व्यक्ति से इस अधिसूचना के " मध्यप्रदेश राजपत्र " में प्रकाशित होने के दिनांक से 6 सप्ताह की कालावधि के भीतर प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, भोपाल को प्राप्त हो, राज्य सरकार द्वारा विचार किया जावेगा.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, हेमराज सिंह , अवर सचिव.
भोपाल, दिनांक 9 जुलाई 2012
क्रमांक डी- 15-15-2012-चौदह-3. भारत के संविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड ( 3 ) के अनुसरण में, इस विभाग की समसंख्यक अधिसूचना दिनांक 9 जुलाई 2012 का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतद्वारा प्रकाशित किया जाता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
हेमराज सिंह, अवर सचिव.
Bhopal , the 9th July 2012
No. -D - 15-15-2012 - XIV - 3.- WHEREAS in exercise of the powers conferred by the sub- section ( 1 ) of Section 3 of the Madhya Pradesh Krishi Upaj Mandi Adhiniyam 1972 , ( No. 24 of 1973 ) , the State Government hereby declares its intention to establish a market at Tehsil Patan for regulating the purchase and sale of agricultural produce mentioned in the Schdule of the said Act , including all revenue and forest villages of the area of Tehsil Patan of Jabalpur district .
Any objection which may be received in writing by the Principal Secretary to Government of Madhya Pradesh , Farmer Welfare and Agriculture Development Department , Bhopal from any person with respect to this Notification within Six weeks from the date of publication of this Notification in the " Madhya Pradesh Gazette " will be considered by the State Government .
By order and in the name of the Governor of
Madhya Pradesh ,
HEMRAJ SINGH , Under Secy.
भोपाल , दिनांक 9 जुलाई 2012
क्र. डी- 15-15-2012- चौदह- 3.- चूंकि राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम , 1960 ( क्रमांक 19 सन् 1960 ) , की धारा 3 की उपधारा ( 3 ) के अधीन जारी की गई इस विभाग की समसंख्यक अधिसूचना दिनांक 10 अगस्त, 1976 द्वारा जबलपुर जिले की शहपुरा तहसील के क्षेत्र में ( जो इसमें इसके पश्चात " उक्त मंडी क्षेत्र " के नाम से निर्दिष्ट है ) , उक्त अधिसूचना में निर्दिष्ट कृषि उपजों के क्रय - विक्रय को विनियमित किया था.
और चूंकि, उक्त मंडी क्षेत्र में से तहसील पाटन के समस्त राजस्व एवं वन ग्रामों के समाविष्ट क्षेत्र ( जो इसमें इसके पश्चात उक्त क्षेत्र के नाम से निर्दिष्ट है ) को विपाटित करके " उक्त मंडी क्षेत्र" की सीमाओं में परिवर्तन करना प्रस्तावित है.
अतएव, मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 ( क्रमांक 24 सन् 1973 ) की धारा 70 की उप धारा ( 1 ) के खण्ड ( तीन ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुये राज्य सरकार, एतद्वारा " उक्त मंडी क्षेत्र " में " उक्त क्षेत्र " को विपाटित करके मंडी क्षेत्र की सीमाओं में परिवर्तन करने के अपने आशय को संज्ञापित करती है.
किसी भी ऐसी आपत्ति या सुझाव पर जो लिखित में किसी भी व्यक्ति से इस अधिसूचना के " मध्यप्रदेश राजपत्र " में प्रकाशित होने के दिनांक से 6 सप्ताह की कालावधि के भीतर प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन , किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग , भोपाल को प्राप्त हो, राज्य सरकार द्वारा विचार किया जावेगा.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, हेमराज सिंह, अवर सचिव.
भोपाल, दिनांक 9 जुलाई 2012
क्रमांक डी- 15-15-2012- चौदह-3.- भारत के संविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड ( 3 ) के अनुसरण में, इस विभाग की समसंख्यक अधिसूचना दिनांक 9 जुलाई 2012 का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतद्वारा प्रकाशित किया जाता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, हेमराज सिंह , अवर सचिव.
Bhopal , the 9th July 2012
No. -D - 15-15-2012 - XIV - 3.- WHEREAS ,by this department Notification even dated 10th August , 1976 issued uuder the Section 3 of sub section (3 ) of the Madhya Pradesh Agricultural produce market Act , 1960 ( No. 19 of 1960 ) , the State Government regulated the purchase and sale of the Agricultural produce specified in the said notification in the area of Shahpura Tehsil of Jabalpur District (here in after referred to as the " said market area. ") .
And where as it is now proposed to alter the limits of the said market area by split up here with the area comprising of Patan Tehsil of Jabalpur District . (here in after referred to as the " said area" ) .
2782
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
Now, THEREFORE , in exercise of the powers conferred by clause (iii ) of sub - section ( 1 ) of Section 70 of the Madhya Pradesh Krishi Upaj Mandi Adhiniyam , 1972 (No. 24 of 1973 ) , the State Government here by signifies its intention to alter the limit of the said market area by splitting up as per the " said area " .
Any objection which may be received in writing by the Principal Secretary to Government of Madhya Pradesh , Farmar Welfare and Agriculture Development Department, Bhopal from any person with respect to this Notification within Six weeks from the date of publication of this Notification in the " Madhya Pradesh Gazette " will be considered by the State Government .
By order and in the name of the Governor of Madhya Pradesh , HEMRAJ SINGH , Under Secy.
भोपाल, दिनांक 9 जुलाई 2012
क्र. डी- 15-14-2012- चौदह- 3.- मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 (क्रमांक 24 सन् 1973 ) की धारा 5 की उपधारा ( 2 ) के खण्ड ( क ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुये राज्य सरकार एतद्वारा, इस विभाग की समसंख्यक अधिसूचना क्रमांक डी-15-3-2006, दिनांक 10 जुलाई 2006 द्वारा स्थापित कृषि उपज मंडी समिति पवई के मंडी क्षेत्र के निम्नलिखित संरचना, अहाता, खुला स्थान या परिक्षेत्र को मंडी प्रांगण घोषित करती है:-
स्थान
नगर पंचायत पवई, तहसील पवई, जिला पन्ना के निम्नलिखित खसरा क्रमांकों के रकबा 6.51 हेक्टेयर भूमि का क्षेत्रः- क्रमांक खसरा क्रमांक
क्षेत्रफल (हे.में. ) 1
0.43 6198, पवई
2
1.56 611 , जूही
3
1.21 619, जूही
4
1.25 620, जूही
5
0.90 437/2, जूही
6
0.72 612, जूही
7
0.17 613/2, जूही
8 610, जूही
0.27 योग .. 6.51
जिसकी सीमाएं
उत्तर में- श्री रतना आदिवासी की भूमि. दक्षिण में- श्री भौदा यादव की भूमि. पूर्व में- पवई कटनी रोड.
पश्चिम में- श्री रंधीर यादव की भूमि.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, हेमराज सिंह , अवर सचिव.
भोपाल , दिनांक 9 जुलाई 2012
क्रमांक डी-15-14-2012- चौदह-3.- भारत के संविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड ( 3 ) के अनुसरण में , इस विभाग की समसंख्यक अधिसूचना दिनांक 9 जुलाई 2012 का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतद्वारा प्रकाशित किया जाता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, हेमराज सिंह , अवर सचिव.
Bhopal , the 9th July 2012
No. -D - 15-14-2012 - XIV - 3.-In exercise of the powers conferred by clause ( a) of sub - section (2) of Section 5 of the Madhya Pradesh Krishi Upaj Mandi Adhiniyam , 1972 (No. 24 of 1973 ) , the State Government hereby declare the following areas including all structures , enclosure , open places or locality in the market area for which a market at Pawai has been established by this department's Notification even no . D - 15-3-2006 - XIV - 3 , dated 10th July, 2006 shall be market yard namely: --
PLACE
An area of 6.51 hectare land of below mentioned Khasra number at Nagar Panchayat Pawai in Tehsil Pawai of District Panna .
Khasra No.
S. No.
Area ( In Hectare) 1
0.43
6198 , Pawai
2
1.56
611, Juhi
3
1.21
619, Juhi
4
1.25
620, Juhi
5
0.90
437/2 , Juhi
6
0.72
612, Juhi
7
0.17
613/2 , Juhi
8 610, Juhi
Total
0.27 6.51
BOUNDED BY
On the North by- Land of Shri Ratna Schedule trive.
On the South by- Land of Shri Bhouda Yadav .
On the Eastby Pawai - Katani Road .
On the west by Land of Shri Randhir .
By order and in the name of the Governor of Madhya Pradesh ,
HEMRAJ SINGH , Under Secy.
भाग 1 ]
2783
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
भोपाल, दिनांक 9 जुलाई 2012
क्र. डी- 15-14-2012- चौदह- 3.- मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1972 ( क्रमांक 24 सन् 1973 ) की धारा 5 की उपधारा ( 2 ) के खण्ड ( ख ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुये , राज्य सरकार, एतद्वारा, इस विभाग की समसंख्यक अधिसूचना दिनांक 2012 के द्वारा घोषित मंडी प्रांगण के संबंध में मंडी समिति पवई, जिला पन्ना के निम्नलिखित क्षेत्र को मंडी क्षेत्र घोषित करती है:-
क्षेत्र
( 1 ) नगर पंचायत पवई, तहसील पवई, जिला पन्ना की सीमाओं के भीतर का क्षेत्र.
(2) मंडी प्रांगण से 5 किलो मीटर की परिधि के भीतर आने वाले निम्नलिखित ग्रामों को समाविष्ट करता हुआ क्षेत्रः- ( 1 ) बिरहा ( 2 ) हड़ा ( 3 ) जूही (4 ) शिकारपुरा ( 5 ) पवई (6 ) सुनादर ( 7 ) उमरिया ( 8 ) हिनौता ( 9 ) करही ( 10 ) जगनपुरा ( 11 ) मड़ैयन .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, हेमराज सिंह, अवर सचिव.
भोपाल , दिनांक 9 जुलाई 2012
क्रमांकडी- 15-2012- चौदह- 3.- भारत के संविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड ( 3 ) के अनुसरण में, इस विभाग की समसंख्यक अधिसूचना दिनांक 9 जुलाई 2012 का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतद्वारा प्रकाशित किया जाता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
हेमराज सिंह, अवर सचिव.
Bhopal , the 9th July 2012
No. - D - 15-14-2012 - XIV - 3.- In exercise of the powers conferred by clause ( b ) of sub - section (2 ) of Section 5 of the Madhya Pradesh Krishi Upaj Mandi Adhiniyam , 1972 (No. 24 of 1973 ) , the State Government hereby declare thatin the relation to the market yard vide this department notification even number dated 9th July 2012 the following area of Pawai of District Panna shall be market area : -
AREA
( 1) An area within the limit of Nagar Panchayat Pawai in Tehsil Pawai of District Panna .
(2) An area comprising of the following villages within the radious of 5 Kilometers from the market yard namely:--
( 1 ) Birha ( 2 ) Hada (3 ) Juhi (4) Sikarpura ( 5) Pawai (6) Sunadar ( 7) Umariya ( 8 ) Hinouta (9) Karhi ( 10) Jaganpura ( 11 ) Madaiyan .
By order and in the name of the Governor of Madhya Pradesh ,
HEMRAJ SINGH , Under Secy .
भोपाल, दिनांक 12 जुलाई 2012
क्र. डी- 15-11-2005- चौदह- 3.- मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1972 ( क्रमांक 24 सन् 1973 ) की धारा 69 की उपधारा ( 1 ) एवं ( 2 ) के द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग करते हुये, पूर्व में जारी इस विभाग की अधिसूचना क्रमांक डी- 15--11--2005- चौदह-3 , दिनांक 18 दिसम्बर 2009, जो राजपत्र में प्रकाशित हुई है की शर्तों एवं निबंधों के अधीन राज्य सरकार, एतद्वारा , ऐसी अधिसूचित कृषि उपज उड़द उरदा, मूंग, तुअर/अरहर, चना, मसूर एवं मटर/बटरा/ बटरी , जो कि विदेशों से एवं या राज्य के बाहर से किसी मण्डी क्षेत्र मे प्रसंस्करण में उपयोग के लिये लाई गई हो, पर उक्त अधिनियम के अधीन देय मंडी फीस के भुगतान से पूर्णतः छूट प्रदान करती है.
मंडी फीस के भुगतान से यह छूट इस अधिसूचना के " राजपत्र " में प्रकाशन की दिनांक से आगामी केवल एक वर्ष के लिये प्रवृत्त होगी.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
हेमराज सिंह, अवर सचिव.
भोपाल, दिनांक 12 जुलाई 2012
क्रमांक डी-15-58-2010-चौदह-3.- भारत के संविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड ( 3 ) के अनुसरण में , इस विभाग की समसंख्यक अधिसूचना दिनांक 12 जुलाई 2012 का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतद्वारा प्रकाशित किया जाता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
हेमराज सिंह, अवर सचिव.
Bhopal , the 12th July 2012
No. -D- 15-11-2005 - XIV - 3.-In exercise of the powers conferred sub- section ( 1 ) and ( 2) of Section 69 of the Madhya Pradesh Krishi Upaj Mandi Adhiniyam , 1972 (No. 24 of 1973 ) , the State Government hereby , subject to the conditions specified in this department's notification No. D - 15-11-2005 - XIV- 3 , dated 18th December 2009 published in the " Gazette " , exempt , notified agricultural produce Urad/Urda, Mung , Tuar/Arhar, Chana , Masoor and Mattar/Batra/Batri , from payment of whole market fee payable under the said Act, which is brought from foreign and or out of the State for processing in the Dal- Mills established in the markest area .
This notification for exemption from payment of market fee shall come in to force for a period of only one year from the date of publication in " Gazette " .
By order and in the name of the Governor of Madhya Pradesh ,
HEMRAJ SINGH , Under Secy.
2784
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
राजस्व विभाग
मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल
भोपाल, दिनांक 21 अक्टूबर 2012
एफ क्र. - 15-11-2011 - सात- 6.- मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, 1959 ( क्रं. 20, सन् 1959 ) की धारा 108 में निहित शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार निदेश देती है, कि नीचे दी गई अनुसूची के कॉलम ( 2 ) में वर्णित ग्राम के लिए, उसके कॉलम ( 5 ) में वर्णित अधिकारी द्वारा अधिकार अभिलेख तैयार किया जाए:-
अनुसूची
तहसील निवाली , जिला बड़वानी
क्र. गांव/गांवों का नाम
तहसील
प. ह. नं.
अधिकार अभिलेख तैयार करने के लिए प्राधिकृत अधिकारी का नाम
(5)
(2)
(3)
(4)
(1)
1
निवाली
ग्राम तलाव का
अधीक्षक, भू- अभिलेख, बड़वानी .
पुराना 2
वनभाग
नया 9
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, अशोक गुप्ता, अपर सचिव.
भोपाल, दिनांक 21 अक्टूबर 2012
पृ. क्रं. एफ क्र. 15-11-2011 - सात-6. भारत के संविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड ( 3 ) के अनुसरण में, इस विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ 15-11-2011 - सात-6 , दिनांक 21 अक्टूबर 2011 का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतद्वारा प्रकाशित किया जाता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, अशोक गुप्ता, अपर सचिव.
Bhopal , the 21st October 2012
F. No. 15-11-2011- Seven-6 . In exercise of the powers vested under section 108 of the Madhya Pradesh Land Revenue Code , 1959 (No. 20 of 1959 ) , the State Government directs that a record of rights shall be prepared for the village mentioned in column ( 2) of the Schedule below by the Officer mentioned in column (5 ) there of:-
SCHEDULE
Tehsil-Niwali , District Barwani
Tahsil
S. No. Name of villages P.C. No.
Designation of the Officer authorized to prepare record of rights (5)
(4)
(2) .
(3)
(1)
Niwali
1
Superintendent of Land Record , Bawani .
Old 2 New 9
Forest area of village Talav
By order and in the name of the Governor of Madhya Pradesh , ASHOK GUPTA, Addl . Secy.
भोपाल , दिनांक 8 फरवरी 2012
एफ क्र. 15-2-2011- सात-6.- मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता , 1959 ( क्र. 20 सन् 1959 ) की धारा 108 में निहित शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार निदेश देती है, कि नीचे दी गई अनुसूची के कॉलम ( 2 ) में वर्णित ग्राम के लिए, उसके कॉलम ( 5 ) में 2785 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
वर्णित अधिकारी द्वारा अधिकार अभिलेख तैयार किया जाए: -
अनुसूची
जिला-नरसिंहपुर
क्र. गांव/गांवों का नाम प. ह. नं.
अधिकार अभिलेख तैयार करने के लिए प्राधिकृत अधिकारी का नाम (1)
(2)
तहसील (4)
(3)
(5)
1
67
गोटेगांव
पहाड़ीखेड़ा
अधीक्षक, भू-अभिलेख , नरसिंहपुर 2
खापा
1
नरसिंहपुर
3
1
मेहगुंवा
4
78
डुंगरिया
5 विक्रमनगर
82
6 भिलमाढाना
85
गाडरवारा
7
85
हींगपानी
8 कोटरी
85
भैंसा
9
53
53
गनेशनगर
10.
11
जामगांव
53
12
53
मुकुन्दा
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
मनोज श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव.
भोपाल , दिनांक 8 फरवरी 2012
पृ. क्रं. एफ क्र.- 15-2-2011 - सात- 6.- भारत के संविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड ( 3 ) के अनुसरण में , इस विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ 15-2-2011- सात-6 , दिनांक 8 फरवरी 2012 का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतद्वारा प्रकाशित किया जाता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
मनोज श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव.
Bhopal , the 8th February 2012
F. No. 15-2-2011 - Seven- 6.-In exercise of the powers vested under section 108 of the Madhya Pradesh Land Revenue Code , 1959 (No. 20 of 1959 ) , the State Government directs that a record of rights shall be prepared for the villages mentioned in column (2) of the Schedule below by the Officer mentioned in column ( 5) there of:-
SCHEDULE
District-Narsinghpur
Tahsil
S. No. Name of villages P.C. No.
(2)
Designation of the Officer authorized to prepare records of rights (5)
(3)
(4)
(1)
1
67
Pahadikheda
Superintendent of Land Records , Narsinghpur 2
1
Gotegaon
Narsinghpur
Khapa
3
1
Mehguan
4
78
Dungaria
5
82
Vikramnagar
85
Gadarwara
6 Bhimadhana
85
7 Heengpani
8
85
Kotri
9 Bhainsa
53
53
10
دو
Ganeshnagar
53
11 Jamgaon
53
12 Mukunda
By order and in the name of the Governor of Madhya Pradesh,
MANOJ SHRIVASTAVA , Principal Secy.
2786
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
आवास एवं पर्यावरण विभाग
मंत्रालय , वल्लभ भवन , भोपाल
भोपाल , दिनांक 5 जुलाई 2012
क्र. एफ- 3-66-2011- बत्तीस.- मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 ( क्रमांक 23 सन् 1973 ) की धारा 23 " क " की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार, एतद्वारा , इस विभाग की सूचना क्रमांक एफ- 3-66-2011 बत्तीस, दिनांक 18 अप्रैल 2012 द्वारा उक्त धारा की उपधारा ( 2 ) द्वारा अपेक्षित किये गये अनुसार प्रकाशित जबलपुर विकास योजना 2021 में निम्नलिखित उपांतरण की पुष्टि करती है. उपांतरण ब्यौरे निम्नानुसार है:-
उपांतरण विवरण
क्षेत्रफल
क्रमांक
ग्राम
खसरा क्रमांक
उपांतरण पश्चात् उपांतरित
(व. मी. में)
भूमि उपयोग
विकास योजना में निर्दिष्ट भूमि उपयोग
(1)
(2)
(3)
(4)
(5)
(6) 1
102
औद्योगिक
वाणिज्यिक
ग्राम-गोहलपुर
8.50 एकड़
(34400 व.मी.)
भूमि में से 26645 व.मी.
कुल
योग 26645
2. उपरोक्त उपांतरण जबलपुर विकास योजना 2021 का एकीकृत भाग होगा.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
वर्षा नावलेकर, उपसचिव.
महिला एवं बाल विकास विभाग
मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल
भोपाल , दिनांक 7 जुलाई 2012
क्र. 1583-1164-12- पचास-2.-किशोर न्याय ( बालकों की देखरेख और संरक्षण ) अधिनियम , 2000 की धारा 29 द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुये , राज्य सरकार , एतद्वारा ( क ) नीचे दी गई अनुसूची के कॉलम ( 2 ) में विनिर्दिष्ट बाल कल्याण समिति का, उसके ( अनुसूची के ) कॉलम ( 3 ) में की तत्स्थानी प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट क्षेत्रों के लिये गठन करती है , और ( ख ) उसके ( अनुसूची के ) कॉलम (4 ) में की तत्स्थानी प्रविष्टि में वर्णित व्यक्तियों को नियुक्त करती है:-
अनुसूची
अ. क्र.
अवैतनिक सामाजिक कार्यकर्ताओं के नाम
अधिकारिता के अंतर्गत आने
वाले ( राजस्व-जिले)
बाल कल्याण समिति के मुख्यालय का जिला
(4) (1) 1.
अध्यक्ष (2) छतरपुर
(3) छतरपुर
1. श्रीमती भाग्यश्री नातू
2. डॉ. जगदीश चौरसिया सदस्य
3. श्रीमती निशि सिंह
सदस्य
4. श्री भागीरथ चौरसिया सदस्य
सदस्य
5. श्रीमती सुनीता निगम 2.
1. श्यामल राव
सदस्य
छिंदवाड़ा
छिंदवाड़ा
सदस्य
2. कु. शबनम खान भाग 1 ]
2787
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
1583-1164-12 - L- 2.-In cexercise of the power conderred by sub- section ( 1 ) and ( 2 ) of the Section 29 of the Juvenile Justice ( Care & Protection of children) Act 2000 , the State Government hereby constitute the following Child Welfare committee as specified in column ( 2) of the Schedule below , for the District as specified in the column (3) and appoints Socail Workers as specified in Column (4) respectively , thereof for the purposes of exercising the powers and discharging the duties conferred on such committees under the said Act , namely:--
S. No.
(1)
Name of the Child Welfare Committees & its District Head Quarter (2)
1.
Chatarpur
Chatarpur
2.
SCHEDULE
Name of the Honorary Social Workers
(4)
Jurisdiction (Revenue District) (3)
Chair Person 1. Smt . Bhagyashri Natu
Member 2. Dr. Jagdish Chaurasiya
Member 3. Smt . Nishi Singh
Member 4. Shri Bhagirath Chaurasiya
Member 5. Smt . Sunita Nigam
Chindawada
Chindawada
Member 1. Shri Shyamal Rao
Member 2. Ku . Shabnam Khan
क्र. 1583-1164-12- पचास- 2.-किशोर न्याय ( बालकों की देखरेख और संरक्षण ) अधिनियम, 2000 की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) तथा ( 2 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुये , राज्य सरकार, एतद्वारा नीचे दी गई अनुसूची के कॉलम ( 2 ) में यथाविनिर्दिष्ट निम्नलिखित किशोर न्याय बोर्ड का गठन, कॉलम ( 3 ) में यथाविनिर्दिष्ट जिलों के लिये करती है और उक्त अधिनियम के अधीन ऐसे बोर्ड को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने तथा कर्तव्यों का निवर्हन करने के प्रयोजनों के लिए, उसके ( अनुसूची के ) क्रमशः (4 ) में यथाविनिर्दिष्ट सामाजिक कार्यकर्ताओं को नियुक्त करती है अर्थात्ः-
क्र.
अनुसूची
जिलों के नाम
किशोर न्याय बोर्ड ओर उसका मुख्यालय
(1) 1.
(2) छतरपुर
2.
छिंदवाड़ा
3.
नीमच
सामाजिक कार्यकर्ताओं के नाम
(4)
(3) छतरपुर
1. श्री कन्हैयालाल गुप्ता
2. कु. प्रमिला पाण्डेय
1. डॉ. के. सी. जैन
छिंदवाड़ा
नीमच
1. श्री देवेन्द्र प्रजापति
No. 1583-1164-12 - L- 2.-In cexercise of the power conderred by sub- section ( 1 ) and (2 ) of the Section 4 of the Juvenile Justice (Care & Protection of children) Act 2000, the state Government hereby constitute the following Juvenile Justice Boards as specified in the column ( 2) of the Schedule below , for the Districts as specified in column (3) and appoints Social Workers as specified in the column (4) respectively thereof for the purpose of exercising of the powers and discharging the duties conferred on such boards under the said Act , namely: -
S. No.
Name of the Juvenile Justice Board & its Head Quarter (2)
(1)
1.
Chatarpur
2.
Chindawada
2.
Neemuch
SCHEDULE
Name of the Honorary Social Workers
(4)
Jurisdiction (Revenue District) (3)
Chatarpur
1. Shri Kanhaiyalal Gupta
2. Ku . Pramila Pandey
Chindawada
1. Dr. K.C.Jain
Neemuch
1. Shri Devendra Prajapati
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, बी. आर. नायडू, प्रमुख सचिव.
2788
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
संस्कृति विभाग मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल भोपाल , दिनांक 7 जुलाई 2012
क्र. एफ- 11-8-2012- तीस.- राज्य शासन की यह राय है कि नीचे दी गई अनुसूची में विनिर्दिष्ट किये गये प्राचीन स्मारक पुरातत्वीय स्थल तथा अवशेष को विनष्ट किये जाने , क्षतिग्रस्त किये जाने , परिवर्तित किये जाने, विरूपित किये जाने, हटाये जाने , तितर - बितर किये जाने या उनका अपक्षय होने से संरक्षित करना आवश्यक है .
2. अतएव , मध्यप्रदेश एन्शीयेन्ट मान्युमेन्ट्स एण्ड आर्योलॉजीकल साईट्स एण्ड रिमेन्स एक्ट, 1964 ( क्रमांक 12 , सन् 1964 ) की धारा 3 की उपधारा ( 1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य शासन , एतद्वारा दो माह पश्चात् उक्त प्राचीन स्मारक को राज्य संरक्षित स्मारक के रूप में घोषित करने के अपने आशय की सूचना देता है.
3. किसी भी ऐसी आपत्ति पर, जो इस संबंध में उक्त प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष में हित रखने वाले किसी व्यक्ति से इस सूचना के " मध्यप्रदेश राजपत्र " में प्रकाशित होने के दिनांक से एक माह की कालावधि समाप्त होने के पूर्व प्राप्त हो, राज्य शासन द्वारा विचार किया जायेगा : -
अनुसूची
राज्य जिला तहसील
स्थल
स्वामित्व
स्मारक का नाम
क्षेत्रफल (हे. में. )
धार्मिक पूजा के अधीन है अथवा नहीं
राजस्व खण्ड क्रमांक जिसे संरक्षण में सम्मिलित करना है
(2) धार
(3) धार
(1) मध्यप्रदेश
(7) 0.379
(4) छत्रीपाल क्षेत्र
(8) करणसिंह पंवार एवं उनके वंशजों का स्वामित्व है .
(9) करणसिंह पंवार के वंशजों का शमशान है.
(5) छत्रियां राजा महाराजाओं की उदाजी पंवार के वंशजों की
(6) 870 पैकी आबादी (धार- शहर)
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार , लक्ष्मीकांत द्विवेदी, उपसचिव.
आवास एवं पर्यावरण विभाग मंत्रालय , वल्लभ भवन , भोपाल भोपाल, दिनांक 12 जुलाई 2012
क्र. एफ - 3-134-2010- बत्तीस.- मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 ( क्रमांक 23 सन् 1973 ) की धारा 23 " क " की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार , एतद्वारा , इस विभाग की सूचना क्रमांक एफ-3-134-2010 बत्तीस , दिनांक 1 फरवरी 2012 द्वारा उक्त धारा की उपधारा ( 2 ) द्वारा अपेक्षित किये गये अनुसार प्रकाशित इंदौर विकास योजना 2021 में निम्नलिखित उपांतरण की पुष्टि करती है . उपांतरण ब्यौरे निम्नानुसार हैं:-
क्रमांक
ग्राम
सर्वे क्रमांक
उपांतरण विवरण
क्षेत्रफल
(हेक्टेयर में )
उपांतरण पश्चात् उपांतरित भू-उपयोग
विकास योजना में निर्दिष्ट भूमि उपयोग
(1)
(2)
(3)
(4)
(5)
(6) 1
526
ग्राम- पिपल्याहाना
11.161
आमोद- प्रमोद सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक
जलाशय
(प्रशासकीय ) शर्त-सिंचाई विभाग
कुल योग
के तालाब से 30 मीटर हरित क्षेत्र छोड़ने के बाद ही नियमानुसार निर्माण कार्य किया जावे .
2. उपरोक्त उपांतरण जबलपुर विकास योजना 2021 का एकीकृत भाग होगा.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार , वर्षा नावलेकर , उपसचिव.
2789 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग
मंत्रालय , वल्लभ भवन , भोपाल
भोपाल , दिनांक 18 जुलाई 2012
क्र. एफ 1-06-2010 - साठ. मंत्रि - परिषद् की दिनांक 10 जुलाई 2012 को सम्पन्न बैठक में मध्यप्रदेश में सौर ऊर्जा से विद्युत् उत्पादन की परियोजना के क्रियान्वयन हेतु " सौर ऊर्जा परियोजना नीति, 2012 " का अनुमोदन दिया गया है. सर्वसाधारण की जानकारी के लिये उक्त नीति का प्रकाशन " मध्यप्रदेश राजपत्र " में किया जा रहा है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
एस. आर. मोहन्ती, सचिव.
विषय :- मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन की परियोजना के क्रियान्वयन हेतु "सौर ऊर्जा परियोजना नीति 2012 "
प्रस्तावना -
(1)
किसी भी अर्थ व्यवस्था के विकास में ऊर्जा शक्ति एक प्रमुख स्त्रोत है । पारम्परिक ईंधन , जैसे कि कोयला , तेल, आदि जो विद्युत ऊर्जा के प्राथमिक स्त्रोत रहे हैं, की दीर्घकालीन उपलब्धता चिन्ता का विषय रहा है । इसके अलावा भी, वातावरण में इनके बढ़ते हुए उपयोग से ग्रीन हाऊस गैंसों ( Green House Gases ) की सांद्रता में वृद्धि हुई है, जो वैश्विक तापन (Global Warming ) तथा परिणामी जलवायु परिवर्तन ( Climate Change) के संबंध में दिनों- दिन बढ़ती हुई चिन्ता का कारण बनती जा रहा है ।
मध्यप्रदेश राज्य में ऊर्जा की वर्तमान आवश्यकता पारम्परिक ऊर्जा स्त्रोतों पर अत्यधिक निर्भर करती है । मध्यप्रदेश सरकार ने जलवायु परिवर्तन , वैश्विक ऊष्णता से संबंधित बढ़ती हुई समस्याओं को ध्यान में रखा है व इन समस्याओं के निराकरण की त्वरित आवश्यकता को भी संज्ञान में लिया है । इस दिशा में , मध्यप्रदेश राज्य द्वारा नवकरणीय ऊर्जा का संवर्धन किया जाना मुख्य उपायों में से एक है । वर्तमान में, मध्यप्रदेश राज्य में नवकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा की पहल का भाग बनाती जा रहीं है ।
मध्यप्रदेश राज्य को सम्पूर्ण वर्ष में लगभग 300 सतत स्पष्ट सौर विकिरण दिवस उपलब्ध होने का सौभाग्य प्राप्त है । राज्य में ऐसे अनेकों उत्तम स्थल उपलब्ध हैं जिनसे लगभग 5.5 किलोवाट ऑवर प्रति वर्गमीटर प्रतिदिन से भी अधिक सौर विद्युत उत्पादन की संभावनाएं विद्यमान हैं । मध्यप्रदेश राज्य निवेशकों / विकासकों को विभिन्न नीति संबंधी पहल तथा प्रोत्साहनों के माध्यम से नवकरणीय ऊर्जा आधारित ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना हेतु प्रोत्साहित करता आ रहा है । मध्यप्रदेश सरकार द्वारा गैर-पारम्परिक ऊर्जा स्त्रोतों के माध्यम से मध्यप्रदेश राज्य में बढ़ावा प्रदान करने हेतु प्रोत्साहन नीति (वर्ष 2006 ) लागू की गई । यह नीति की अवधि माह अक्टूबर, 2011 में समाप्त हो चुकी है । मध्यप्रदेश राज्य में व्यापक अनन्वेषित ( Untapped ) सौर ऊर्जा की संभावनाओं पर विचार करते हुए, राज्य द्वारा एक पुनरीक्षित निवेशक / विकासक हितैषी नीति प्रतिपादित किये जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी । सौर ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकताओं के समस्त पहलुओं को सम्मिलित करते हुए , यह नीति तैयार की गई है जिसमें विद्युत उत्पादन एवं वितरण की विद्यमान वैधानिक स्थिति तथा नियामक ढांचे को ध्यान में रखा गया है । 2790
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(2) नियामक ढांचा (Regulatory Frame Work)
अ) विद्युत अधिनियम 2003 , जून 2003 से प्रभावशील है, इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कोई भी निजी व्यक्ति अथवा एजेन्सी विद्युत उत्पादन संयंत्र लगाने हेतु स्वतंत्र है तथा उसे पारेषण सुविधा के मुक्त उपयोग (open access ) का अधिकार होगा ।
ब) मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग , वर्ष 1999 से कार्यशील है तथा आयोग द्वारा समय - समय पर पारित आदेश / नियमन इस नीति के प्रावधानों पर लागू होंगे । इसी प्रकार भारत शासन द्वारा ऊर्जा-प्रक्षेत्र में समय - समय पर पारित किए गए अधिनियम भी इस नीति के प्रावधानों पर लागू होंगे । इस नीति के प्रावधान एवं मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी किए गए आदेश/विनियम के मध्य कोई विसंगति की दशा में मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के आदेश / विनियम लागू होंगे ।
(3) नीति के उद्देश्य (Objectives of the Policy)
इस नीति के उद्देश्य निम्नानुसार हैं :
अ) राज्य में सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं की स्थापना हेतु निजी क्षेत्र की सहभागिता को प्रोत्साहित करना ।
ब) निजी क्षेत्र के प्रतिभागियों को दिये जाने वाले प्रोत्साहन एवं लाभ को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना ।
स) सौर ऊर्जा परियोजनाओं को प्रोत्साहन प्रदान करने हेतु अनुकूल वातावरण तैयार करना । द) नीति के क्रियान्वयन हेतु युक्तियुक्त संरचना का निर्धारण करना।
खण्ड अ
नीति के मार्गदर्शी सिद्धांन्त ( Guiding Principles of Policy)
1. नीति प्रभावशीलता की अवधि (Operative Period) :
यह नीति मध्यप्रदेश राज्य के राजपत्र में अधिसूचना जारी होने की तिथि से प्रभावशील होगी । 2. प्रयोज्यता (Applicability)
अ) समस्त सौर ऊर्जा आधारित विद्युत, जो परियोजनाओं के विकासकों सौर फोटोवोल्टीय (Solar PV) / सौर ताप ( Solar Thermal )] . तथा सौर ऊर्जा परियोजनाओं से संबंधित उपकरणों की विनिर्माण इकाईयों या सहायक इकाईयों को इस नीति के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने की पात्रता होगी ।
ब) इस नीति के अंतर्गत केवल नये संयंत्रों तथा मशीनों को ही स्थापित किये जाने की पात्रता होगी ।
3. प्रतिभागिता (Participation)
इस नीति के अंतर्गत , सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लिये किसी भी व्यक्ति/ फर्म / सोसायटी/ संस्था / पंजीकृत कम्पनी आदि को आवेदन प्रस्तुत करने की पात्रता होगी । 2791 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
4. नीति के अंतर्गत सौर परियोजनाओं का वर्गीकरण (Category of Solar Projects Under the Policy) श्रेणी I (Category I) : म.प्र.राज्य की विद्युत वितरण कंपनियां / एमपी पावर मैनेजमेन्ट कंपनी को विद्युत के विक्रय हेतु प्रतियोगी बोली प्रक्रिया ( competitive bidding process ) के माध्यम से चयनित परियोजनाएं । श्रेणी II ( Category II) : राज्य के भीतर या राज्य से बाहर कैप्टिव उपयोग या तृतीय पक्षकार को विद्युत के विक्रय अथवा अन्य राज्यों को मुक्त उपयोग ( open access ) के माध्यम से ऊर्जा के विक्रय के लिये स्थापित की गई परियोजनाएं ।
श्रेणी- III ( Category III) : नवकरणीय ऊर्जा प्रमाण- पत्र (Renewable Energy Certificate ) पद्धति के अंतर्गत स्थापित की गई परियोजनाएं ।
श्रेणी IV (Category IV) : जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन (Jawaharlal Nehru National Solar Mission ) के अंतर्गत आने वाली परियोजनाएं । 5. लक्ष्य (Target)
मध्यप्रदेश राज्य में सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं के संवर्धन के अपने प्रयासों के अंतर्गत मध्यप्रदेश सरकार निम्न लक्ष्य प्रस्तावित करती है :
(क) ग्रिड संयोजित परियोजनाएं : (Grid Connected Projects )
(i) श्रेणी I की परियोजनाएं : मध्यप्रदेश शासन द्वारा मध्यप्रदेश राज्य स्थित विद्युत वितरण कंपनियों/ एमपी पावर मैनेजमेन्ट कम्पनी को विद्युत विक्रय किये जाने हेतु स्थापित की जाने वाली सौर ऊर्जा परियोजनाओं को प्रोत्साहित करेगा । इस श्रेणी के अंतर्गत कुल क्षमता मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग (मप्रविनिआ) द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट नवकरणीय क्रय प्रतिबद्धता ( RPO ) लक्ष्यों के अनुसार या म०प्र ० शासन द्वारा निर्धारित क्षमता रखी जाएगी । इन सौर ऊर्जा परियोजनाओं का चयन विद्युत क्रय दर आधारित प्रतियोगी बोली प्रक्रिया ( tariff based competitive bidding process) के आधार पर किया जाएगा ।
(ii) श्रेणी- II की परियोजनाएं : मध्यप्रदेश शासन द्वारा , इस नीति की कण्डिका 6 (क) के अंतर्गत एकल परियोजना क्षमता परिसीमाओं के अध्यधीन, सौर ऊर्जा उत्पादकों को कैप्टिव उपयोग हेतु या तृतीय पक्षकार / मध्यप्रदेश राज्य के अलावा अन्य राज्यों को विद्युत के विक्रय हेतु, असीमित क्षमता (unlimited capacity) की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित किये जाने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा ।
( iii) श्रेणी- III की परियोजनाएं मध्यप्रदेश शासन द्वारा नवकरणीय ऊर्जा प्रमाण - पत्र क्रियाविधि ( REC Mechanism) के अंतर्गत सौर ऊर्जा उत्पादकों को असीमित क्षमता के ऊर्जा संयत्र स्थापित किये जाने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा ।
(iv) श्रेणी- IV की परियोजनाएं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन (JNNSM ) के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किये जाने को भी प्रोत्साहित किया जाएगा ।
(ख) विकेन्द्रीकृत तथा ग्रिड - बाह्य सौर परियोजनाएं ( Decentralized and off - grid Solar Projects ) : भारत सरकार, मध्यप्रदेश शासन द्वारा विक्रेन्द्रीकृत तथा ऑफ ग्रिड सौर ऊर्जा प्रणालियों को प्रोत्साहित किया जायेगा , जिनमें हाईब्रिड प्रणाली के संयंत्र भी शामिल है, को भारत सरकार नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी दिशा- निर्देशों के अंतर्गत कार्यवाही होगी । 2792
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
6. क्षमता की परिसीमाएं (Capacity Cap)
क) श्रेणी- 1 की परियोजनाएं उपरोक्त कण्डिका 5 - क-1 के अंतर्गत, प्रत्येक सौर ऊर्जा उत्पादक को ग्रिड संयोजित सौर ऊर्जा संयंत्रों हेतु न्यूनतम तथा अधिकतम परियोजना क्षमता आवंटन मध्यप्रदेश शासन द्वारा समय- समय पर चयन हेतु जारी निवेदन अर्हता प्रपत्र { (Request for Selection (RFS ) Qualification Document } के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा ।
ख) श्रेणी- II की परियोजनाएं शासकीय भूमि पर कण्डिका 5 - क- ii के अंतर्गत ग्रिड संयोजित सौर ऊर्जा संयंत्रों हेतु प्रत्येक सौर ऊर्जा उत्पादक को न्यूनतम तथा अधिकतम एकल परियोजना क्षमता आवंटन निम्न तालिका के अनुसार होगा । निजी भूमि पर स्थापना हेतु कोई अधिकतम सीमा नहीं होगी ।
प्रौद्योगिकी
सरल क्रमांक
अधिकतम क्षमता (मेगावाट में)
न्यूनतम क्षमता (मेगावाट में)
100
0.025
1 सौर फोटो वोल्टीय (Solar Photo voltaic)
100
1.00
2 सौर ताप (SolarThermal )
ग) श्रेणी- III की परियोजनाएं : केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग (केविनिआ) प्रवर्तित नवकरणीय ऊर्जा प्रमाण पत्र (CERC - REC ) के अंतर्गत अधिस्वीकृति ( accreditation ) हेतु न्यूनतम तथा अधिकतम एकल परियोजना क्षमता आवंटन केविनिआ / मप्रविनिआ द्वारा समय- समय पर जारी दिशा-निर्देशों / आदेशों/ विनियमों के अनुसार होगा ।
घ) श्रेणी- IV की परियोजनाएं : जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन ( JNNSM) के अंतर्गत स्वीकृत किये गये ग्रिड संयोजित सौर ऊर्जा संयंत्रों हेतु न्यूनतम तथा अधिकतम परियोजना क्षमता आवंटन जेएनएनएसएम द्वारा जारी किये गये दिशा- निर्देशों के अनुसार होगा । 7. पात्र इकाईयां (Eligible Units )
क) श्रेणी- 1 की परियोजनाएं म.प्र. शासन द्वारा सौर ऊर्जा परियोजनाओं के चयन हेतु समय- समय पर विद्युत क्रय दर आधारित प्रतियोगी बोली प्रक्रिया के माध्यम से प्रस्ताव आमंत्रित किये जाएंगे । सौर परियोजनाओं के प्रत्याशित विकासकों हेतु म.प्र. शासन द्वारा निर्धारित योग्यता मानदण्ड (qualification criteria ) निर्धारित किया जाएगा । मूल्यांकन की जाने वाली विशेष जानकारी, उनका परस्पर भारण ( weightage ) (यदि कोई हो) के संबंध में आवश्यक जानकारी, मूल्यांकन के संबंध में दिशा- निर्देश तथा अन्य विवरणों को योग्यता संबंधी अभिलेख में निर्दिष्ट किया जाएगा, जिन्हें म.प्र. शासन द्वारा तैयार किया जाएगा । जो परियोजनाओं मध्यप्रदेश राज्य में स्थापित की जायेंगी उन्हे ही इस नीति का लाभ लेने की पात्रता होगी ।
ख) श्रेणी- II की परियोजनाएं मध्यप्रदेश शासन द्वारा विकासकों से समय- समय पर , प्रस्ताव आमंत्रित किये जाएंगे । निर्दिष्ट की गई समय- सीमा के अंतर्गत ऐसे विकासक, जो मध्यप्रदेश राज्य में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को स्थापित किये जाने के संबंध में प्रस्ताव (प्रत्येक परियोजना के लिए पृथक से) प्रस्तुत करने के इच्छुक हों, वे इन्हें तकनीकी मानदण्डों के साथ , निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन के साथ प्रस्तुत कर सकेंगे । शासकीय भूमि पर स्थापित होने वाली परियोजनाओं से उत्पादित बिजली का कय विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित दर पर क्रय करने का प्रथम अधिकार म०प्र ० पावर मैनेजमेंट कम्पनी को होगा । 2793 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
(ii ) निजी भूमि पर स्थापित की जाने वाली परियोजनाएं : कोई भी विकासक, जो मध्यप्रदेश राज्य में सौर ऊर्जा (सौर फोटो वोल्टीय / सौर ताप) पर आधारित विद्युत उत्पादन परियोजनाएं निजी भूमि पर स्थापित करने का इच्छुक हों ।
(iii ) शासकीय भूमि पर स्थापित की जाने वाली परियोजनाएं शासकीय भूमि पर विकसित की जाने वाली परियोजनाओं के संबंध में प्रत्याशित विकासकों हेतु, म.प्र. शासन द्वारा योग्यता मानदण्डों को निर्धारित किया जाएगा । मूल्यांकन की जाने वाली विशेष जानकारी, उनका परस्पर भारण ( weightage ) (यदि कोई हो) , के संबंध में आवश्यक जानकारी , मूल्यांकन के संबंध में दिशा- निर्देशों तथा अन्य विवरणों को आवेदन प्रक्रिया के पूर्व वेबसाईट पर उपलब्ध कराया जावेगा । ऐसे प्रत्येक आवेदक का मूल्यांकन, प्रत्येक योग्यता मानदण्ड जैसा कि आमंत्रण सूचना में निर्दिष्ट किया गया हो, के विरूद्ध, आमंत्रण सूचना(invitation document ) में निर्दिष्ट किया गया हो, किया जाएगा, पात्र विकासकों को उपलब्ध भूमि उनके द्वारा प्रति मेगावाट के आधार पर निशुल्क ऊर्जा प्रदाय की वरियता के अनुसार प्रस्तावित की जायेगी । ऐसे चयनित विकासकों को नीति के अंतर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करने की पात्रता होगी ।
ग) श्रेणी III की परियोजनाएं नवकरणीय ऊर्जा प्रमाण-पत्र क्रियाविधि (REC Mechanism) के अंतर्गत सम्मिलित की गई परियोजनाओं को नीतिगत लाभ प्राप्त करने (म.प्र. शासन स्तर पर पंजीकरण कराये जाने के अध्यधीन) की पात्रता होगी जैसा कि इसे केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग- नवकरणीय ऊर्जा प्रमाण- पत्र क्रियाविधि (CERC- REC Mechanism) के अंतर्गत केविनिआ/ मप्रविनिआ द्वारा समय - समय पर जारी दिशा-निर्देशों/ आदेशों / विनियमों के अनुसार अनुज्ञेय किया जाए ।
(i ) निजी भूमि पर स्थापित की जाने वाली परियोजनाएं कोई भी विकासक, जो मध्यप्रदेश राज्य में सौर ऊर्जा ( सौर फोटो वोल्टीय / सौर ताप) पर आधारित विद्युत उत्पादन परियोजनाएं निजी भूमि पर स्थापित करने का इच्छुक हों ।
(ii ) शासकीय भूमि पर स्थापित की जाने वाली परियोजनाएं : मध्यप्रदेश शासन द्वारा विकासकों से समय - समय पर, प्रस्ताव आमंत्रित किये जाएंगे । निर्दिष्ट की गई समय- सीमा के अंतर्गत ऐसे विकासक, जो मध्यप्रदेश राज्य में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को स्थापित किये जाने के संबंध में प्रस्ताव (प्रत्येक परियोजना के लिए पृथक से) प्रस्तुत करने के इच्छुक हों, वे इन्हें तकनीकी मानदण्डों के साथ, निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन के साथ प्रस्तुत कर सकेंगे ।
शासकीय भूमि पर विकसित की जाने वाली परियोजनाओं के संबंध में प्रत्याशित विकासकों हेतु, म.प्र. शासन द्वारा योग्यता मानदण्डों को निर्धारित किया जाएगा । मूल्यांकन की जाने वाली विशेष जानकारी, उनका परस्पर भारण (weightage) (यदि कोई हो) , के संबंध में आवश्यक जानकारी , मूल्यांकन के संबंध में दिशा- निर्देशों तथा अन्य विवरणों को आवेदन प्रक्रिया के पूर्व वेबसाईट पर उपलब्ध कराया जावेगा । ऐसे प्रत्येक आवेदक का मूल्यांकन, प्रत्येक योग्यता मानदण्ड जैसा कि आमंत्रण सूचना में निर्दिष्ट किया गया हो, के विरूद्ध , आमंत्रण सूचना ( invitationdocument ) में निर्दिष्ट किया गया हो, किया जाएगा, पात्र विकासकों को उपलब्ध भूमि उनके द्वारा प्रति मेगावाट के आधार पर निशुल्क ऊर्जा प्रदाय की वरियता के अनुसार प्रस्तावित की जायेगी । ऐसे चयनित विकासकों को नीति के अंतर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करने की पात्रता होगी । 2794
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(iii) इस श्रेणी के विकासकों को नीति संबंधी लाभ, जैसे कि अधिकोष करना (banking) , चंक्रण (wheeling ) आदि, जैसा कि इनका प्रावधान इस नीति के अंतर्गत किया गया है , केविनिआ और / या प्राधिकारियों द्वारा इस संबंध में किये गये उपबंधों के अनुसार प्रयोज्य होंगे ।
घ) श्रेणी IV की परियोजनाएं जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन ( JNNSM ) द्वारा जारी किये गये मार्गदर्शन के अनुसार होंगे , जैसा कि इन्हें म.प्र . शासन द्वारा समय- समय पर संशोधित किया जाए ।
8. पंजीकरण ( Registration ) : पंजीकरण तथा विकासोत्तर गतिविधियों के संबंध में कार्यालय आयुक्त, नवीन तथा नवकरणीय ऊर्जा विभाग , म.प्र. शासन समन्वयन विभाग (Nodal Department ) ' होगा। क) विकासकों (जो कि व्यक्ति/ कम्पनी / फर्म/ सोसायटी/ गैर शासकीय संस्थायें , आदि हो सकते है) को पंजीकरण के लिए जो लागू हो, अभिलेख प्रस्तुत करने होंगे :
i. निर्धारित प्रारूप में आवेदन ।
ii . कंपनी के मेमोरेण्डम ऑफ आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन / पंजीकृत सोसायटी की उपविधियों की प्रमाणित प्रति ।
iii . भागीदारी , विलेख की प्रमाणित प्रतिलिपि ।
ख) परियोजना के उपयुक्त पाये जाने पर 15 दिवस के भीतर आदेशिका शुल्क (processing fee) जमा करने का मांग- पत्र ( demand note ) जारी किया जायेगा और चयनित आवेदक को आदेशिका शुल्क एक लाख रू. प्रति मेगावाट या उसके किसी अंश की दर से मांग पत्र जारी होने की पन्द्रह ( 15 ) दिवस की अवधि में जमा कराना होगा तथा परियोजना को पंजीकृत कराना होगा । यह आदेशिका शुल्क वापसी योग्य नहीं होगा ।
ग) निर्धारित समयावधि ( 15 दिवस में) आदेशिका शुल्क जमा न कराने की स्थिति में परियोजना के अंतर्गत पंजीकरण हेतु संबंधित आवेदक का आवेदन निरस्त माना जायेगा । 9. पंजीकरण पश्चात की गतिविधियां ( Post Registration Activities ) :
क) परियोजना विकासकर्ता द्वारा निम्नलिखित अभिलेख निर्धारित समय - सीमा (पंजीकरण दिनांक से तीन माह के भीतर) में अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किए जाएंगे:-
i . विस्तृत परियोजना रिपोर्ट ( Detailed Project Report -DPR)
ii . भूमि संबंधी दस्तावेज (परियोजना हेतु चिन्हित स्थल )
iii . सी.पी.एम. / पर्ट चार्ट (प्रस्तावित परियोजना क्रियान्वयन हेतु)
iv . परियोजना स्थल पर जल की उपलब्धता के आधार पर जल आवंटन आदेश (लागू होने की दशा में) और ग्रिड की स्थिति दर्शाने वाला मानचित्र ।
v. मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा , म.प्र . शासन की नीतियों एवं समय - समय पर सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी दिशा- निर्देश/ अधिसूचनाएं जो सौर आधारित ऊर्जा परियोजना पर लागू हों, का पालन करने का शपथ पत्र ।
vi . इस नीति की कण्डिका 10 द्वारा अपेक्षित निष्पादन गारंटी ( Performance Guarantee ) ख) समयावृद्धि ( Extension of time ): यदि पंजीकरण के पश्चात् अपेक्षित गतिविधियों को निर्धारित समय अवधि के अंतर्गत पूरा करने में विलंब होता है और यह विलंब विकासकर्ता के नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण हों, तो मध्यप्रदेश शासन द्वारा जैसा कि उचित समझा जाए , समय सीमा का विस्तार किया जा सकेगा ।
10. निष्पादन गारंटी ( Performance Guarantee) भाग 1 ]
2795
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
क) श्रेणी I की परियोजनाएं : यह म.प्र. शासन द्वारा जारी योग्यता/ चयन प्रपत्र (Qualification / Selection ofdocument ) में निर्दिष्ट दिशा- निर्देशों के अनुसार जमा करनी होगी ।
ख)
रु. 5.0 लाख श्रेणी II की परियोजनाएं तथा श्रेणी III की परियोजनाएं जिनके द्वारा नीति के अनुसार लाभ प्राप्त किया जाना प्रस्तावित किया गया हो (विकासकर्ता द्वारा निष्पादन बैंक गारंटी जमा की जाएगी) (शासकीय भूमि पर स्थापित की जाने वाली परियोजनाओं हेतु प्रति मेगावाट या उसका कोई अंश के आधार पर देय होगी । यह निष्पादन गारंटी नवीन तथा नवकरणीय ऊर्जा विभाग (म.प्र. शासन) को देय होगी। यह बैंक गारंटी सौर फोटो-वोल्टीय (पीवी) परियोजनाओं हेतु चौबीस (24) माह तथा सौर ताप परियोजनाओं हेतु 40 (चालीस ) माह के लिए विधिमान्य होनी चाहिए ।
(i ) बैंक गारंटी राशि की विमुक्ति भिन्न- भिन्न चरणों में उपलब्धियों तथा परियोजना मापदण्डों ( Projectbenchmarks ) (कण्डिका12 के अनुसार ) को प्राप्त करने के आधार पर की जायेगी । इस दिशा में म ० प्र ० शासन द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम होगा । (ii ) विकासकर्ता द्वारा निर्धारित समयबद्ध गतिविधियों के अनुसार प्रगति को प्राप्त करने में असफल होने की दशा में यदि इस नीति के कण्डिका क्र. 13 के प्रावधानों के अनुसार परियोजना निरस्त कर दी जाती है तो निरस्तीकरण के समय शेष बची. बैंक गारंटी राजसात कर ली जाएगी और शास्ति के बतौर इसे भुना लिया जाएगा । इस संबंध में मध्यप्रदेश शासन का निर्णय अंतिम होगा ।
(iii) यदि राज्य तथा केन्द्र शासन द्वारा स्वीकृति के अभाव में परियोजना की स्थापना संभव न हो तो निष्पादन गारंटी विमुक्त कर दी जाएगी । इस संबंध में मध्यप्रदेश शासन का निर्णय अंतिम होगा ।
(iv) यदि परियोजना की स्थापना निजी भूमि पर की जाती है तो विकासकर्ता को निष्पादन गारंटी जमा करने से छूट रहेगी ।
11. प्रशासनिक अनुमोदन ( Administratve Approval ) :
प्रावधानों के अनुरूप प्राप्त किये गये आवेदनों का परीक्षण किया जाएगा तथा यदि इन्हें स्वीकार-योग्य पाया जाता है तो ऐसे आवेदनों को समस्त अभिलेखों की प्रस्तुति दिनांक से तीस (30 ) दिवस की अवधि के भीतर प्रशासकीय अनुमोदन प्रदान किया जाएगा (देखें कण्डिका 8.0 ) ।
12. अनुमोदन पश्चात की गतिविधियां ( Post Approval activities ) :
क) श्रेणी I की परियोजनाएं इस श्रेणी के अंतर्गत सौर परियोजनाओं को मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी किये गये योग्यता / बोली अभिलेख में निर्दिष्ट की गई समय सीमाओं का कठोरता से पालन करना होगा ।
ख) श्रेणी II की परियोजनाएं तथा श्रेणी III की परियोजनाएं जिनके द्वारा नीति के अनुसार लाभ प्राप्त किया जाना प्रस्तावित किया गया है परियोजना को प्रशासनिक अनुमोदन की तिथि से निम्न दर्शाई गई समय- सीमाओं के भीतर क्रियाशील (कमीशनिंग ) करना होगा । प्रगति का अनुश्रवण निम्न उल्लेखित मानदण्डों के अनुसार किया जाएगा
सौर ऊर्जा परियोजनाओं हेतु मापदण्ड ( Benchmarks ) तथा उसकी समय सीमा
मापदण्ड
निष्पादन गारंटी का प्रतिशत प्रत्यार्पण (% )
समय सीमा (शून्य
दिवस से
सरल क्रमांक
सौर पीवी
सोलर ताप
1
शून्य दिवस
प्रशासकीय अनुमोदन जारी होने की तिथि
शून्य दिवस 3 माह
2
3 माह 10 प्रतिशत (साक्ष्य प्रस्तुति के पंद्रह दिवस के भीतर ) भूमि का आधिपत्य आदेश / भूमि उपयोग 2796
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
अनुज्ञापत्र/ का आवंटन
3
5 माह
5 माह
20 प्रतिशत (साक्ष्य प्रस्तुति के पंद्रह दिवस के भीतर) ऊर्जा क्रय अनुबंध (Power Purchase Agreement)
4
11 माह
11 माह
वित्तीय प्रबंधन पूर्ण (Financial Closure)
30 प्रतिशत (साक्ष्य प्रस्तुति के पंद्रह दिवस के भीतर) 5
17 माह
24 माह
परियोजना को क्रियाशील किया जाना
40 प्रतिशत (परियोजना क्रियाशील होने से तीन माह के सफल प्रचालन के उपरांत)
13. मासिक प्रगति प्रतिवेदन तथा परियोजना निरस्तीकरण (Monthly Progress Report and Project Cancellation)
क) विकासकर्ता (डेवलपर) , पंजीकरण की तिथि से वाणिज्यिक प्रचालन (कमीशनिंग) की तिथि तक मासिक प्रगति प्रतिवेदन निर्धारित प्रारूप में संबंधित दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत करेंगे । ख) प्रगति का मिलान कण्डिका 12.0 में निर्दिष्ट किये गये मानदण्डों तथा समयावधि से किया जाएगा । किसी विलंब या चूक के लिये विकासक से इस संबंध में स्पष्टीकरण प्राप्त किया जाएगा । विकासक से स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे युक्तियुक्त सुनवाई का अवसर भी प्रदान किया जाएगा तथा म.प्र. शासन द्वारा उचित आदेश पारित किये जाएंगे । 14. समय वृद्धि (Extension of time limit )
क) श्रेणी 1 की परियोजनाएं इस श्रेणी की परियोजनाओं के लिए निर्धारित समय सीमा में कोई भी वृद्धि मध्यप्रदेश शासन द्वारा योग्यता / चयन अभिलेख में निर्दिष्ट किये गये दिशा-निर्देशों के अंतर्गत क्रियान्वित की जाएगी ।
ख) श्रेणी II की परियोजनाएं तथा श्रेणी III की परियोजनाएं जिनके द्वारा नीति के अनुसार लाभ प्राप्त किया जाना प्रस्तावित किया गया है :
(i ) मध्यप्रदेश शासन द्वारा वित्तीय प्रबंधन की प्राप्ति (Financial Closure ) हेतु एक बार छः (6) माह की समयवृद्धि अनुज्ञेय की जा सकेगी , बशर्ते विकासक द्वारा विलंब के कारणों के लिये विकासक की नियंत्रण से बाहर परिस्थितियां होने का पर्याप्त साक्ष्य प्रदान किया जाए । इसके बाद कोई भी समय - वृद्धि, नवीन तथा नवकरणीय ऊर्जा विभाग के विवेकाधिकार के अध्यधीन प्रदान की जा सकेगी ।
(ii ) यदि मध्यप्रदेश शासन द्वारा आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करने तथा वित्तीय प्रबंधन पूर्ण किये जाने हेतु मूल अवधि में समय वृद्धि की सहमति प्रदान की जाती है तो अनुसूचित वाणिज्यिक प्रचालन तिथि (scheduled commercial operationdate ) जैसा कि इसका उल्लेख पूर्व में दर्शाई गई कंडिका 12.0 में किया गया है, में भी तदनुसार वृद्धि की जाएगी ।
15. विद्युत विक्रय दर (Tariff)
क) श्रेणी I की परियोजनाएं ऐसी परियोजनाएं, जिनका आवंटन विद्युत विक्रय दर आधारित प्रतियोगिता बोली माध्यम ( tariff based competitive bidding route ) से मध्यप्रदेश स्थित विद्युत वितरण कंपनियों / एमपी पावर मैनेजमेंट कम्पनी को विद्युत विक्रय के लिए विद्युत क्रय अनुबंध (Power Purchase Agreement ) का निष्पादन म.प्र. विद्युत वितरण कंपनियों / एमपी पावर मैनेजमेंट कम्पनी तथा सफल बोलीकर्ताओं (bidders ) के मध्य बोली / योग्यता प्रपत्र के उपबंधों भाग 1 ]
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
के अनुसार विद्युत विक्रय दर आधारित बोली (tariff based bidding ) प्रक्रिया द्वारा निर्धारित की गई विद्युत विक्रय दर के अनुसार किया जाएगा। निर्धारित क्रय दर म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित दरों से अधिक नहीं होगी
ख) श्रेणी II की परियोजनाएं तृतीय पक्षकार विद्युत विक्रय / केप्टिव उपयोग / अन्य राज्यों के लिए विद्युत विक्रय के प्रकरण में, विद्युत क्रय अनुबंध का निष्पादन विद्युत उत्पादक (Power Producer ) तथा उपाप्तिकर्ता (Procurer) के मध्य परस्पर सहमत दरों ( mutually agreed rates ) के आधार पर किया जाएगा ।
इस प्रकार के ऊर्जा के अधिकोषण (banking ) के लिए एक पृथक अनुबंध म.प्र. विद्युत वितरण कंपनियों/ एमपी पावर मैनेजमेंट कम्पनी से निष्पादित किया जाएगा । मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कम्पनी लिमिटेड (MPPTCL) / म.प्र . विद्युत वितरण . कंपनियों/ या किसी अन्य ग्रिड व्यवस्था या नेटवर्क के साथ, जैसा कि लागु हो, चक्रण अनुबंध (wheeling agreement ) पृथक से निष्पादित किया जाएगा ।
ग) श्रेणी III की परियोजनाएं नवकरणीय ऊर्जा प्रमाण- पत्र (Renewal Energy Certificate-REC) क्रियाविधि के अंतर्गत स्थापित किये गये सौर ऊर्जा संयंत्रों के प्रकरणों में वांछित विद्युत क्रय अनुबंध , सौर ऊर्जा उत्पादकों तथा उपाप्तिकर्ता के मध्य केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग और/ या मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा इस संबंध में समय- समय पर जारी विनियमों/ आदेशों के आधार पर किया जाएगा ।
घ) श्रेणी IV की परियोजनाएं जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन के अंतर्गत परियोजनाओं के लिये , विद्युत क्रय अनुबंध सौर ऊर्जा उत्पादक तथा उपाप्तिकर्ता एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम और/ या म.प्र. विद्युत वितरण कंपनियों / एमपी पावर मैनेजमेंट कम्पनी) / या अन्य के मध्य जेएनएनएसएम द्वारा जारी दिशा- निर्देशों के अनुसार होगा ।
16. मीटरीकरण (Metering)
मापयंत्र उपकरण (Metering Equipment ) , जैसा कि एमपीपीटीसीएल ( MPPTCL) या संबंधी म.प्र. विद्युत वितरण कंपनी द्वारा निर्दिष्ट किया जाए , की स्थापना अन्तर्फलक बिन्दू ( intersection point ) पर की जाएगी, जो एकत्रीकरण उपकेन्द्र (pooling substation ) के उच्चदाब छोर (HV side ) पर बहिर्गमन संभरक (outgoing feeder ) का लाईन वियोजक (line isolator ) होगा । विकासकों द्वारा मापयंत्र उपकरण की स्थापना उनके स्वयं के व्यय पर मीटरीकरण से संबंधित मप्रविनिआ के मीटरीकरण संबंधी विनियमों तथा म.प्र. विद्युत प्रदाय संहिता, 2004 के मानदण्डों तथा उपबंधों के अनुसार की जाएगी । विकासक द्वारा एमपीपीटीसीएल / संबंधित विद्युत वितरण कंपनियों के किसी भी अधिकारी को इनके निरीक्षण हेतु पहुंच की अनुमति प्रदान की जाएगी । स्थापित किये गये मापयंत्र (मीटर) केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA ) द्वारा मापयंत्रों की स्थापना तथा प्रचालन से संबंधित जारी किये गये विनियम 'Installation and Operation of Metres 'की अर्हताओं के अनुरूप होंगे । 17. ग्रिड अंर्तसंयोजन तथा विद्युत निकास सुविधा ( Grid Interfacing & Evacuation Facility) क) विद्युत उत्पादन स्थल से निकटतम उपकेन्द्र (सबस्टेशन) या अंर्तफलक बिन्दु पर संयोजन व्यवस्था जिसमें ट्रान्सफामर पैनल, संरक्षण, मीटरीकरण परियोजना स्थल से निकटतम उपकेन्द्र तक लाईन डाले जाने का कार्य इत्यादि शामिल है का उत्तरदायित्व विकासक का होगा जो मध्यप्रदेश ग्रिड संहिता मध्यप्रदेश विद्युत प्रदाय संहिता 2004 प्रयोज्य म०प्र ० विनिआ तथा केवीनिअ के विनियमों के अंतर्गत यथा संशोधित तकनीकी तथा सुरक्षा मापदण्डों के अनुरूप होगा । मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड और / या मप्र राज्य स्थित संबंधित विद्युत वितरण कम्पनी द्वारा लागत आधार पर कार्य का निष्पादन तथा तत्संबंधी संधारण किया जा सकेगा , जिसका सम्पूर्ण व्यय विकासक को वहन करना होगा । वैकल्पिक तौर पर, विकासक द्वारा उपरोक्त कार्य एमपीपीटीसीएल या विद्युत वितरण कंपनी से अनुमोदन प्राप्ति के आधार पर भी निष्पादित किया जा सकता है जिसके लिये उसे प्रयोज्य पर्यवेक्षण प्रभार चुकाने होंगे । तथापि, एमपीपीटीसीएल और/ या संबंधित विद्युत वितरण कंपनी द्वारा, 2798
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
उपकेन्द्रों, के आवर्धन (augmentation ) कार्य का उत्तरदायित्व , यदि यह आवश्यक हो, संभाला जाएगा । उपरोक्त व्यवस्था मप्रविनिआ के अंतिम निर्णय के अध्यधीन होगा । ख) विकासक द्वारा तृतीय पक्ष उपभोक्ताओं / वितरण अनुज्ञप्तिधारी / पावर मैनेजमेंट कंपनी को ऊर्जा विक्रय किये जाने संबंधी प्रकरणों में विकासक, एमपीपीटीसीएल / संबंधित विद्युत वितरण कम्पनी को चक्रण तथा पारेषण प्रभारों के भुगतान म.प्र. विद्युत नियामक आयोग के निर्णय के अध्याधीन होगा ।
18. भूमि उपयोग की अनुमति (Land Use Permission )
क) भूमि की आवश्यकता ( Land requirement ) : मध्यप्रदेश राज्य में सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना हेतु, सौर ऊर्जा उत्पादक की अधिकतम् भूमि उपयोग हेतु शासकीय भूमि आवंटन की अनुमति, यदि उपलब्ध हो तो 3 हेक्टेयर प्रति मेगावाट के अनुसार दी जा सकेगी ।
ख) शर्ते: शासकीय राजस्व भूमि के आवंटन तथा भूमि उपयोग की अनुमति हेतु राजस्व विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी परिपत्र क्रमांक एफ 16-3/93/ सात/ 2 ए दिनांक 06.09.2010 (परिशिष्ट-1 ) एवं क्र. एफ 6-53 / 2011 / सात/ नजूल दिनांक 08.08.2011 (परिशिष्ट-2) में अधिकथित शर्ते लागू होंगी ।
शासकीय राजस्व भूमि, राजस्व अभिलेखों में छोटे - बड़े झाड़ के जंगल के रूप में अभिलेखित हुई अथवा राजस्व विभाग के दिये प्रावधानों के अंतर्गत वन भूमि के रूप में परिभाषित हुई हो तो आवेदक वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के प्रावधानों के अंतर्गत सक्षम अधिकारी वन विभाग के माध्यम से अनुमति प्राप्त करना होगा ।
ग) निजी भूमि के क्रय पर स्टाम्प ड्यूटी में छूट ( Stamp duty exemptiom on Purchase of private land): यदि परियोजना हेतु निजी भूमि का क्रय विकासकर्ता द्वारा किया जाता है, तो स्टाम्प ड्यूटी पर 50 ( पचास) प्रतिशत छूट की पात्रता होगी । इस भूमि पर परियोजना संस्थापित नहीं किये जाने पर दी गई छूट वापस ली जाएगी एवं वसूली की कार्यवाही अधिसूचना क्रमांक 70 बी-4-08-2-पॉच, दिनांक 21.08.2008 (परिशिष्ट-3 ) के अनुसार की जाएगी । घ) शासकीय भूमि के उपयोग की अनुमति (Governmant Land Use Permission ) : राजस्व विभाग या राज्य सरकार के अन्य किसी विभाग के स्वामित्व वाली भूमि के प्रकरण में , नवीन तथा नवकरणीय ऊर्जा विभाग , म.प्र . शासन भूमि के संबंध में संबंधित विभाग से भूमि का आधिपत्य प्राप्त करेगा तथा तत्पश्चात उक्त भूमि के उपयोग की अनुमति विकासक , (जिसकी परियोजना को प्रशासकीय अनुमोदन प्रदान किया गया है) को प्रदान करेगा । जानकारी संबंधित जिला कलेक्टर को प्रदान की जाएगी ।
इ) भूमि संबंधी अन्य शर्ते ( Other Land Conditions )
(i ) यदि शासकीय भूमि का उपयोग विकासक द्वारा किसी अन्य प्रयोजन हेतु किया जाना पाया जाता है, तो भूमि उपयोग की अनुमति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जावेगी । भूमि पर विकासक द्वारा किये गये निर्माण कार्य तथा संयंत्रों को राजसात किया जावेगा तथा मप्र शासन में वेष्ठित ( vested ) किया गया माना जावेगा ।
(ii) राज्य शासन द्वारा अधिकृत कोई व्यक्ति , जिसका पद तहसीलदार से कम न हो, एवं विभाग के अधिकृत अधिकारी के साथ अथवा विभाग के निर्देशानुसार परियोजना स्थल का निरीक्षण तथा परियोजना स्थल के विशिष्ठ उपयोग को सुनिश्चित किये जाने के संबंध में निरीक्षण किया जा सकेगा ।
( iii ) यदि विकासक जिसे कि सौर संयंत्र स्थापित करने हेतु भूमि उपयोग की अनुमति दी गई है , परियोजना अन्य तृतीय पक्ष के साथ लगाता है तो भूमि के उस भाग की अनुमति जिस पर तृतीय पक्ष द्वारा संयंत्र स्थापित होता है, कि अनुमति राजस्व विभाग 2799 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
के समान नियम एवं शर्तों पर दी जा सकेगी जिस पर विकासक को भूमि उपयोग की अनुमति दी गई है ।
19. मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग का अनन्य अधिकार
क. विद्युत अधिनियम, 2003 की प्रबंधन व्यवस्था के अंतर्गत निहित प्रावधानों के अनुसूचीकरण विद्युत विक्रय दर, विद्युत क्रय अनुबंध, चक्रण (wheeling ) , अधिकोषण (Banking ) ] वितरण, पारेषण हानि, प्रभारों इत्यादि के संबंध में मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ( MPERC ) का विशेषाधिकार रहेगा । इसी प्रकार, विद्युत अधिनियम , 2003 में निहित प्रावधानों के अनुसार अपारंपरिक ऊर्जा स्त्रोतों की उन्नति, ऊर्जा की पारेषण सुविधा तथा मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटड ( MPPTCL) / पारेषण अनुज्ञप्तिधारी / वितरण अनुज्ञप्तिधारी के मध्य विद्युत क्रय करने का बटवारा इत्यादि मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अधिकार क्षेत्र में रहेगा । इस विषय में मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ( MPERC ) द्वारा समय- समय पर जारी दिशा-निर्देश , विनियमों / नियमों आदि के पालन हेतु सभी पक्ष बाध्य होंगे । ख. विकासक एवं शासन की किसी विभाग अथवा मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड / पारेषण अनुज्ञप्तिधारी / वितरण अनुज्ञप्तिधारी के मध्य नीति की व्याख्या संबंधी विवाद की स्थिति में शासन अथवा प्रकरण विद्युत अधिनियम , 2003 की धारा 86 (i) के अंतर्गत मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग की ओर निर्णय हेतु प्रेषित किया जाएगा ।
खण्ड-ब
सामान्य प्रावधान
1. नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा नीति, 2006 के अंतर्गत पंजीकृत सौर परियोजनाओं का प्रत्यार्पण (Migration of Solar Projects registered under NRSE Policy, 2006)
क) एकल- बार प्रस्ताव (one- time offer) ऐसे समस्त सौर परियोजना विकासकों के लिये {(जिनकी परियोजनाएं वर्तमान में नवीन तथा नवकरणीय ऊर्जा नीति, 2006 (NRSE Policy , 2006 ) के अंतर्गत पंजीकृत हैं, परन्तु क्रियाशील (कमीशन ) नहीं हो पाई हैं) निम्न परियोजना श्रेणियों के अंतर्गत परियोजना विकसित करने का एकल- बार (one- time ) प्रस्ताव अवसर प्रदान किया जाएगा । मध्यप्रदेश राजपत्र में इस सौर नीति की अधिसूचना तिथि से दो माह के भीतर, ऐसे विकासकों को लिखित में नवीन तथा नवकरणीय ऊर्जा विभाग , मध्यप्रदेश शासन को मध्यप्रदेश राज्य में निम्न में से किसी एक श्रेणी में सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित किये जाने के बारे में सूचित करना होगा ।
(i ) मध्यप्रदेश राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों / एमपी पावर मैनेजमेंट कम्पनी को विद्युत विक्रय ( श्रेणी I के अंतर्गत) ( Sale to MP Discoms / MP Tradeco ): सौर ऊर्जा की अधिप्राप्ति ( Procurement) हेतु, मध्यप्रदेश राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों/ एमपी पावर मैनेजमेंट कम्पनी को विक्रय के लिए , ऐसे विकासक जो शासन द्वारा आयोजित विद्युत दर आधारित प्रतिस्पर्धा बोली प्रक्रिया ( tariff based competitive bidding process ) में सफल होते है, तो परियोजना के सफल आवंटन के उपरांतं, वर्तमान सौर नीति के अंतर्गत लाभ प्राप्त किये जाने हेतु पृथक से पंजीकरण कराया जाना आवश्यक नहीं होगा । इस सौर नीति में निर्धारित प्रयोज्य आदेशिका शुल्क (processing fee) , देय होगा । ऐसे प्रकरणों में जहां पूर्व में जमा किया गया आदेशिका शुल्क, नवीन नीति के अंतर्गत निर्दिष्ट की गई राशि से अधिक हो, वहां मध्यप्रदेश शासन द्वारा विकासकों को शेष राशि की विमुक्ति (बिना ब्याज के) सौर ऊर्जा परियोजनाओं के सफल आवंटन पर की जाएगी । ऐसे प्रकरणों में जहां प्रारंभिक भुगतान की गई आदेशिका शुल्क की राशि वर्तमान नीति के अंतर्गत निर्दिष्ट की गई राशि से कम हो, वहां विकासक को बकाया राशि वर्तमान नीति के अंतर्गत पंजीकरण हेतु मध्यप्रदेश शासन को सौर ऊर्जा के परियोजना के सफल आवंटन होने के तीस (30 ) दिवस या इस नीति के अधिसूचित होने के तीस (30) दिवसों के अंदर, जो बाद में हो , करना होगा । असफल बोलीकर्ता 2800
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
विकासकों के लिखित आवेदन पर प्रांरभिक भुगतान की गई आदेशिका शुल्क की सम्पूर्ण राशि को, बिना किसी ब्याज के , सौर ऊर्जा परियोजना के अंतिम आवंटन की तिथि से 30 दिवस के भीतर या इस नीति के अधिसूचित होने के तीस (30 ) दिवस जो बाद में हो, वापिस विमुक्त कर दिया जाएगा । यदि प्रतिस्पर्धा में असफल विकासकर्ता निम्न दर्शाई अन्य श्रेणियों के अंतर्गत परियोजना को विकसित करने के इच्छुक हों, तो उन्हें इस लिखित आवेदन सौर ऊर्जा परियोजनाओं की अंतिम आवंटन तिथि से तीस (30) दिवस के अंदर या नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग , मध्यप्रदेश शासन को प्रस्तुत करनी होगी ।
(ii) कैप्टिव उपयोग तृतीय पक्षकारों / मध्य प्रदेश राज्य के अलावा अन्य राज्यों मुक्त उपयोग के माध्यम से ( श्रेणी II की परियोजनाओं के अंतर्गत) विक्रय ( Captive use/direct sale to 3rd party/States other thar Madhya Pradesh through open access ) मध्यप्रदेश शासन द्वारा (इस श्रेणी के अंतर्गत) मध्य प्रदेश राज्य में सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित किये जाने बाबत (प्रत्येक परियोजना हेतु पृथक- पृथक) प्रस्ताव आमंत्रित किये जाएंगे , तथापि नीति 2006 के अंतर्गत पंजीकृत की गई सौर परियोजनाएं में विकासक द्वारा कार्य इस नीति के अंतर्गत प्रारंभ किया जा सकेगा , जिसके लिये उन्हें इस सौर नीति की अधिसूचना जारी होने की तिथि से दो माह के भीतर नवीन तथा नवकरणीय ऊर्जा विभाग को लिखित आवेदन प्रस्तुत करना होगा । ऐसे विकासकों को इस कण्डिका के प्रावधानों के अनुसार तीन माह के अंदर तृतीय पक्षकार विक्रय हेतु विद्युत क्रय अनुबंध (PPA) प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा ।
ऐसे प्रकरणों में, जहां पूर्व में की गई आदेशिका शुल्क, नवीन नीति के अंतर्गत निर्दिष्ट की गई राशि से अधिक हो, वहां मध्यप्रदेश शासन द्वारा विकासकों को शेष राशि की (बिना ब्याज के) , इस श्रेणी के अंतर्गत सौर परियोजना के विकास हेतु विकासकों से लिखित सूचना प्राप्त होने पर तीस (30) दिवस के भीतर की जाएगी । यद्यपि ऐसे प्रकरणों के अंतर्गत जहां प्रारंभिक भुगतान की गई आदेशिका शुल्क की राशि नवीन नीति के अंतर्गत निर्दिष्ट की गई राशि से अधिक हो, वहां विकासक को बकाया राशि का भुगतान नवीन नीति की अधिसूचना की तिथि से तीस (30) दिवस के अन्दर लिखित आवेदन के साथ , नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग को इस श्रेणी के अंतर्गत सौर परियोजना के विकास हेतु करना होगा । (iii) नवकरणीय ऊर्जा प्रमाण- पत्र क्रियाविधि के अंतर्गत परियोजना के प्रकरण में (श्रेणी तीन के अंतर्गत) (Project under REC Mechanism ): ऐसे प्रकरणों के अंतर्गत जहां विकासक परियोजनाओं की स्थापना नवकरणीय ऊर्जा प्रमाण- पत्र कार्यविधि के अंतर्गत, इस नीति के प्राप्ति के साथ करना चाहता है । सौर नीति (जैसा कि इसे केविनिआ-नवकरणीय ऊर्जा प्रमाण- पत्र क्रियाविधि के अंतर्गत केविनिआ / मप्रविनिआ द्वारा समय - समय पर जारी किये गये दिशा-निर्देशों / आदेशों/ विनियमों के अनुसार अनुज्ञेय किया गया हो), प्रयोज्य आदेशिका शुल्क (Processing fee ) राशि इस सौर नीति में विनिर्दिष्ट के अनुसार देय होगी । ऐसे प्रकरणों में, जहां पूर्व में जमा किया गया आदेशिका शुल्क, नवीन नीति के अंतर्गत निर्दिष्ट की गई राशि से अधिक हो, वहां मध्यप्रदेश शासन द्वारा विकासकों को अबशेष राशि की वापिस ( बिना ब्याज के), इस श्रेणी के अंतर्गत सौर परियोजना के विकास हेतु विकासकों से लिखित आवेदन प्राप्त होने पर तीस (30 ) दिवस के अन्दर की जाएगी । यद्यपि ऐसे प्रकरणों के अंतर्गत जहां प्रारंभिक भुगतान की गई आदेशिका शुल्क की राशि नवीन नीति के अंतर्गत निर्दिष्ट की गई राशि से अधिक हो , वहां विकासक को बकाया राशि का भुगतान इस नीति की अधिसूचना की तिथि से तीस (30) दिवस के अन्दर लिखित आवेदन नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग को इस श्रेणी के अंतर्गत सौर परियोजना के विकास हेतु करना होगा ।
यदि ऐसे प्रकरणों में जहां विकासक नवकरणीय ऊर्जा प्रमाण-पत्र क्रियाविधि के अंतर्गत, नीति के अंतर्गत घोषित किये गये लाभों के बगैर, परियोजना स्थापित करने के इच्छुक हों, शासन द्वारा ऐसे विकासकों को उनके द्वारा पूर्व में भुगतान की गई प्रारंभिक आदेशिका भाग 1 ]
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
शुल्क (बिना ब्याज के) इस आशय की लिखित सूचना की प्राप्ति के तीस (30 ) दिवस के भीतर उन्हें विमुक्त कर दी जाएगी ।
ख) पंजीकरण का निवर्तन ( Withdrawal of Registration) : ऐसे प्रकरणों में जहां सौर परियोजना विकासक नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा नीति 2006 (NRSE Policy, 2006 ) के अंतर्गत पंजीकृत किये गये हों व जिनकी परियोजना क्रियाशील (कमीशनिंग) नहीं हुई हो तथा अपने पंजीकरण का निवर्तन करने के इच्छुक हों, उन्हें वर्तमान नीति की अधिसूचना की तिथि से दो माह के भीतर नवीन सौर नीति में सहभागिता करने की असमर्थता के बारे में लिखित आवेदन नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग (म.प्र. शासन) को प्रस्तुत किया जाना होगा । मध्यप्रदेश शासन द्वारा ऐसे प्रकरणों में पूर्व में भुगतान की गई पंजीकरण शुल्क की पूर्ण राशि (बिना ब्याज के) ऐसे विकासकों से लिखित आवेदन प्राप्त होने पर (सहभागिता करने की असमर्थता के बारे में) वापिस कर दी जाएगी ।
ग) नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा नीति , 2006 (NRSE Policy , 2006 ) के अंतर्गत सौर ऊर्जा पंजीकृत परियोजनाओं व जो अब तक क्रियाशील नही हुई है के द्वारा उपरोक्तानुसार किसी भी श्रेणी में परियोजना विकास हेतु आवेदन इस नीति के अधिसूचित होने के तीन माह के अंदर यदि नहीं किया जाता है, तो ऐसी परियोजनाओं का पंजीयकरण निरस्त किया गया माना जावेगा । ऐसे प्रकरणों में आदेशिका शुल्क का प्रत्यार्पण ( refund ) नहीं किया जाएगा । घ) परियोजना वचनबद्धता तथा समय - सीमा ( Project milestones & timelines ) : इस नीति के अंतर्गत परियोजनाओं के सफलतापूर्वक प्रत्यर्पण होने पर, प्रत्यर्पित की गई परियोजनाएं इस नीति के अंतर्गत उपबंधों के अनुसार (परियोजना वचनबद्धताओं तथा समय - सीमा को सम्मिलित करते हुए) संचालित की जाएगी ।
2. आवंटित परियोजना का समर्पण ( Surrender of Project Allotment ) अनुबंध निष्पादन के उपरांत, विकासक किसी भी चरण में परियोजना के समर्पण हेतु स्वतंत्र होगा किन्तु ऐसी स्थिति में निष्पादन गारंटी (performance guarantee ) राजसात कर ली जाएगी । परन्तु विकासक द्वारा परियोजना का समर्पण उसके नियन्त्रण के बाहर की परिस्थितिवश होगा तो निष्पादन गारन्टी विमुक्त की जा सकेगी।
3. परियोजना का हस्तानांतरण ( Transfer of Project ) सौर परियोजना विकासक को परियोजना के क्रियाशील (कमीशनिंग ) होने के पूर्व नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग , मध्यप्रदेश शासन के अनुमोदन के बगैर किसी अन्य विकासक / निवेशक को परियोजना के हस्तानांतरण की अनुमति प्रदान नहीं की जाएगी । ऐसे कोई हस्तानांतरण हेतु, रूपये एक लाख प्रतिमेगावाट के शुल्क का भुगतान (अप्रत्यर्पणीय) लागू होगा ।
4. सौर प्रौद्योगिकी पार्को का संवर्धन ( Promotion of Solar Energy Technology Parks ) : राज्य शासन द्वारा सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन परियोजनाओं के अन्तर्गत निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सौर ऊर्जा पार्कों की स्थापना हेतु कार्यवाही की जावेगी । इन सौर ऊर्जा पार्कों की स्थापना राज्य शासन द्वारा स्वयं अथवा सार्वजनिक निजी क्षेत्र सहभागिता ( PPP ) के माध्यम से की जा सकेगी । सौर प्रणालियों के अंतर्गत उत्पादन तथा विनिर्माण इकाईयों तथा संबंधित सहायक इकाईयों के संवर्धन हेतु सौर प्रौद्योगिकी पार्कों को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा मध्यप्रदेश राज्य में उचित स्थानों पर इनकी स्थापना की जाएगी । लघु तथा मध्यम उद्यम क्षेत्र ( SME Sector ) को सौर प्रणालियों के विभिन्न कलपुर्जा तथा प्रणालियों के विनिर्माण हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा । राज्य सरकार द्वारा सौर प्रौद्योगिकी पार्कों की स्थापना हेतु भूमि आवंटन तथा अत्यावश्यक सुविधाओं के सृजन हेतु प्राथमिकता प्रदान की जाएगी । ऐसे सौर प्रौद्योगिकी पार्कों को राज्य की औद्योगिक प्रोत्साहन नीति (Industrial Promotion Policy ) (जैसा कि इसे समय - समय पर संशोधित किया जाए) के अंतर्गत सुविधाएं प्राप्त करने की पात्रता भी होगी । 2802
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
5. अन्य प्रावधान (Other Provisions )
क) जीवाश्म ईंधन का उपयोग ( Fossil fuel usage ) : ग्रिड संयोजित सौर ताप ऊर्जा परियोजनाओं में जीवाश्म ईंधन (जैसे कि कोयला, गैस , लिग्नाईट , नैप्था, डीजल, काष्ठ आदि) के प्रयोग की अनुमति प्रदान नहीं की जाएगी । संकर प्रणालियों (hybrid systems ) को भारत सरकार के नवीन तथा नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार अनुज्ञेय किया जाएगा । ख) परियोजना निरीक्षण ( Project Inspection ) : मध्यप्रदेश शासन के अधिकृत अधिकारियों को, जिनका पद कार्यपालन यंत्री से कम ने, पूर्व लिखित सूचना के साथ, ऊर्जा परियोजना की सुरक्षा के आकलन के बारे में परियोजना के निरीक्षण का अधिकार होगा । ऐसे निरीक्षण के दौरान, विकासक द्वारा ऐसे निरीक्षण के निष्पादन में वांछित सहायता तथा सहयोग प्रदान किया जाएगा ।
विकासक द्वारा ऊर्जा उत्पादन से संबंधित समस्त अभिलेख , जैसे कि क्षमता, उत्पादन , उत्पादन में गतिरोध, प्रतिबंध आदि संधारित किये जाएंगे तथा निरीक्षण अधिकारियों को समस्त ऐसे अभिलेख निरीक्षण हेतु उपलब्ध कराये जाएंगे ।
ग) आंकड़ों का अनुश्रवण तथा प्रस्तुतिकरण (Data monitoring and submission) : नवीन तथा नवकरणीय ऊर्जा विभाग (म.प्र. शासन) के साथ पंजीकृत समस्त ग्रिड संयोजित सौर ऊर्जा परियोजनाओं हेतु विकासकों को सौर प्रदीप्ति (डीएनआई को सम्मिलित करते हुए) { Solar Irradiance (including DNI) } , परिवेशी वायु तापमान ( ambient air temperature ) ] वायुगति (wind speed) तथा अन्य जलवायु विशिष्टताओं (weather parameters ) के नियमित अनुश्रवण हेतु उपकरणों की स्थापना की जाएगी तथा इसी के साथ- साथ संयंत्र से उत्पादित विद्युत ऊर्जा की मात्रा के अनुश्रवण की व्यवस्था भी उनके द्वारा की जाएगी । उनके द्वारा इन आंकड़ों को म.प्र . शासन को ऑनलाईन (online ) और/ या प्रतिवेदन के माध्यम से नियमित आधार पर (मासिक) विद्युत क्रय अनुबंध की सम्पूर्ण अवधि के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा । परियोजना के क्रियाशील (कमीशन) होने के तुरन्त बाद, सौर ऊर्जा परियोजना विकासक को मासिक तथा वार्षिक उत्पादन विवरणों को संबंधित वितरण / पारेषण इकाई से यथोचित सत्यापित करा कर, हार्ड प्रति तथा साफ्ट प्रति में (आनलाईन) नवीन तथा नवकरणीय ऊर्जा विभाग , मध्यप्रदेश शासन को प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा ।
घ) आंकड़ा संकोष (Data bank) नवीन तथा नवकरणीय विभाग मध्यप्रदेश शासन द्वारा एक तकनीकी पुस्तकालय (technical library ) , एक आंकड़ा संकोष और / या सूचना केन्द्र (information centre ) की स्थापना तथा संधारण, सौर ऊर्जा स्त्रोतों से संबंधित जानकारी के संग्रहण तथा सहसंबंध (collect and correlate ) स्थापित करने के प्रयोजन से किया जाएगा । 6. यदि विकासक ग्रामीण क्षेत्रों में, जो कि राज्य शासन के परिपत्र क्रमांक 2010- एफ- 13-05-13-2006, दिनांक 25 मार्च , 2006 द्वारा अधिसूचित है , ऊर्जा उत्पादन एवं वितरण की योजना तैयार करता है तो उसे ऊर्जा उत्पादन एवं वितरण हेतु अनुज्ञा पत्र लेना आवश्यक नहीं होगा, परन्तु वह केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा निर्धारित विद्युत अधिनियम की धारा 53 में उल्लेखित मापदण्डों के पालन हेतु बाध्य होगा ।
7. परियोजना स्वीकृति एवं क्रियान्वयन बोर्ड (Project Clearance and Implementation Board) परियोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन में आ रही कठिनाईयों के निराकरण एवं अंतर्विभागीय समन्वय के विषयों पर निराकरण हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित परियोजना स्वीकृति एवं क्रियान्वयन बोर्ड (PCIB ) के समक्ष प्रकरण प्रस्तुत किए जा सकेंगे ।
8. रिएक्टीव पावर चार्जेस यदि संयत्र ग्रिड से रिएक्टीव पावर लेता है तो विकासक को संबंधित वितरण कम्पनी को म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित दर से रिएक्टीव पावर चार्जेस का भुगतान करना होगा । 2803 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
खण्ड- स
प्रोत्साहन
क) विद्युत शुल्क तथा उपकर (सेस) में छूट (Electricity duty and cess exemption ) : समस्त सौर ऊर्जा परियोजनाओं (कैप्टिव सहित) को परियोजना के क्रियाशील ( कमीशनिंग) होने की तिथि से 10 ( दस) वर्ष तक विद्युत शुल्क एवं उपकर में छूट की पात्रता होगी ।
ख) चक्रण प्रभार ( wheeling charges ) : मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित किए गए चक्रण प्रभार (wheeling charges ) अनुसार, म.प्र . पावर ट्रांसमिशन कंपनी/ मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी के माध्यम से (जैसा प्रकरण में लागू हो) मप्रविनिआ द्वारा विनिर्दिष्ट किये गये अनुसार चक्रण ( wheeling ) की सुविधा समस्त सौर ऊर्जा परियोजनाओं हेतु उपलब्ध होगी । उपरोक्त चक्रण प्रभारों के संबंध में , मध्यप्रदेश शासन द्वारा चार (4 ) प्रतिशत का अनुदाने अन्तःक्षेपित ऊर्जा ( energy injected) हेतु प्रदान किया जाएगा तथा अवशेष मात्रा यदि कोई हो, तो उसका व्यय परियोजना विकासक को वहन करना होगा ।
स) बैंकिंग :- प्रत्येक वित्तीय वर्ष में शत - प्रतिशत ऊर्जा संचय की अनुमति निम्नलिखित शर्तों पर प्रदान की जाएगी:-
1. वित्तीय वर्ष में संचित ऊर्जा के आंकड़ों का सत्यापन संबंधित राज्य वितरण कंपनी / राज्य विद्युत विपरण कंपनी के अधिकारियों द्वारा किया जाएगा । विकासक द्वारा संचित ऊर्जा का दो प्रतिशत संचय शुल्क के रूप में संबंधित राज्य वितरण कंपनी / राज्य विद्युत विपणन कंपनी को भुगतान करना होगा ।
2. संचित की गई ऊर्जा की वापिसी, विद्युत नियामक आयोग द्वारा ऊर्जा के नवीनीकरणीय (अक्षय ) स्त्रोतों से विद्युत का सह उत्पादन तथा उत्पादन (पुनरीक्षण-प्रथम ) विनियम 2010" के व नियामक आयोग द्वारा समय- समय पर जारी विनियमनों के आधार पर होगी ।
3. वापिस ली गई संचित ऊर्जा के बाद यदि कोई ऊर्जा वित्तीय वर्ष के अन्त में शेष रहती है तो राज्य वितरण कम्पनी / राज्य विद्युत विपणन कम्पनी, नियामक आयोग द्वारा जारी नियमों / निर्देशो के अनुसार शेष ऊर्जा क्रय करेगी ।
घ) संविदा मांग में कमी (Contract Demand reduction ) : सौर ऊर्जा परियोजना से ऊर्जा क्रय का विकल्प देने वाले औद्योगिक उपभोक्ता को स्थायी आधार पर संविदा मांग ( Contract Demand) में समानुपातिक ( Prorata ) कटौती की अनुमति होगी , जो कि मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के निर्णय के अध्याधीन होगी ।
ड .) तृतीय पक्ष विक्रय (Third Party Sale) : तृतीय पक्ष को विक्रय की पात्रता, विद्युत अधिनियम , 2003 के संबंधित प्रावधानों एवं मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा इस संबंध में समय- समय पर जारी आदेशों/ विनियमों के अनुसार होगी ।
च) उद्योग का दर्जा ( Industry Status) इस नीति के अधीन क्रियान्वित सौर परियोजनाओं को उद्योग का दर्जा प्राप्त होगा और उन्हें समय - समय पर यथासंशोधित राज्य शासन की ' उद्योग संवर्धन नीति' के अधीन सभी सुविधाएं प्राप्त होंगी । यदि राज्य की उद्योग संवर्धन नीति एवं सौर नीति में कोई विरोधाभास हो तो राज्य की सौर नीति मान्य होगी ।
छ) वेट/ प्रवेश कर से छूट (VAT/ Entry Tax Exemptoin ) : वेट/ प्रवेश कर से छूट: सौर ऊर्जा परियोजना हेतु क्रय किए गए उपरकणों पर मध्यप्रदेश वेट अधिनियम , 2002 की अनुसूची-1 की प्रविष्टि क्रमांक 71 एवं की अनुसूची-1 की प्रविष्टि क्रमांक 1 के अनुसार वेट / प्रवेश कर से छूट होंगी ।
ज) सीडीएम प्रसुविधाएं ( CDM Benefits ) : सौर ऊर्जा परियोजना के विकासकों/ निवेशकों को प्राप्त होने वाले कार्बन क्रेडिट प्रसुविधा (सीडीएम ) के लाभ मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के आदेशानुसार प्राप्त होंगे । 2804
[ भाग 1
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झ) अन्य सुविधाओं / प्रोत्साहन से संबंधित उपबंध, जो मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा मुक्त उपयोग ( open access ) , प्रतिक्रिय ऊर्जा ( Reactive Power) , मीटरीकरण ( Metering) तथा नवकरणीय ऊर्जा क्रय प्रतिबद्धता ( Renewal Purchase Obligation- RPO ) के बारे में विनिर्दिष्ट किए जाएं , लागू होंगे ।
No. F 1-06-2010 - LX. In the cabinet meeting held on 10th July 2012 , approval on Policy for Implementation of Solar power based projects in Madhya Pradesh , 2012 has been accorded . The publiation of the said policy in " Madhya Pradesh Gazette " is being done in Hindi and the translated version in English is hereby published for general public .
Subject : - POLICY FOR IMPLEMENTATION OF SOLAR POWER BASED PROJECTS IN MADHYA PRADESH , 2012
Preamble-
(1)
Energy is a prime mover of the development of any economy. While conventional fuels like coal and oil have been the primary sources for energy , their long term availability has been an area of concern . Further , their increased usage has led to high concentrations of greenhouse gases (GHGs ) in the atmosphere , which is a growing concern with regard to global warming and resultant climate changes .
The current energy requirement of the state of Madhya Pradesh is heavily dependent on conventional energy sources . The Government of Madhya Pradesh ( GoMP) acknowledges the increasing concern related to climate change , global warming and has recognised the urgent need to address these issues . The promotion of Renewable Energy is one of the key measures taken by the GoMP in this direction . Today Renewable Energy is increasingly becoming an integral part of energy security initiative in the state .
The state of Madhya Pradesh is endowed with high solar radiation with around 300 days of clear sun . The state offers good sites having potential of more than 5.5 kWh/ sq.m /per day for installation of Solar based power projects . The GoMP has been promoting the setting up of Renewable Energy based power plants through various Policy initiatives and incentives for Investors /Developers . GoMP had earlier issued the Incentive Policy for 2805 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
'' encouraging generation of power in Madhya Pradesh through Non - conventional Energy Sources in 2006. This Policy period got over in October 2011. Considering the huge untapped potential of solar energy in Madhya Pradesh , the need for a revised Investor/Developer friendly policy was being felt . By inclusion of all aspects of necessities of solar power sector , this policy has been formulated in which present statutory status of power generation and distribution as well as regulatory frame work has been considered .
(2) Regulatory Framework -
a) The Electricity Act , 2003 has been in force since June , 2003. In accordance with the provisions of this Act , any private individual or Agency is free to set up a Power Generation Plant and they shall have right to open access of the transmission facility.
b) Madhya Pradesh Electricity Regulatory Commission ( MPERC ) is functioning since 1999 and the orders / Regulations passed by the Commission from time to time shall be applicable to the provisions of this Policy . Similarly, Acts passed by Government of India in respect of Power Sector shall also be applicable to provisions of this Policy . In case of any discrepancy between the provisions of this Policy and Orders /Regulations issued by the MPERC , the orders /Regulations issued by the MPERC will take precedence.
(3) Objectives of the Policy -
The objectives of the Policy are as follows :
a) To encourage participation of Private Sector to set up Solar Power based projects in the State .
To define the incentives and benefits to be provided to the participants of the Private Sector in clear terms . b)
c) To build a favourable atmosphere for setting up Solar Power projects .
d) Lay down framework for policy implementation .
Part - A
GUIDING PRINCIPLES OF POLICY
1. Operative Period
This Policy shall become operative from the date of its notification in the Madhya Pradesh State Gazette .
2806
[ भाग 1
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2. Applicability :
a) All Solar energy based power project Developers ( Solar PV/ Solar thermal ) and manufacturing units of equipments , ancillaries related to Solar Power projects shall be eligible for benefits under the Policy .
b) Only new plant and machinery shall be eligible for installation under the Policy.
3. Participation
For the development of Solar power Projects under this policy , any Individual / Firm/ Society/ Institution/ Registered Company etc. shall be eligible to apply.
4. Category of Solar Projects under the Policy:
Category I
: Projects selected as per the competitive bidding process for selling power to MP Discoms / MP Power
Category II
Management Company : Projects set up for captive use or sale of power to 3rd party within or outside the state or for sale of power to
other states through open access .
Category III : Projects set up under Renewable Energy Certificate (REC) mode
Category IV
Projects under Jawaharlal Nehru National Solar Mission.
5. Target :
The Government of Madhya Pradesh in its endeavour to promote solar energy based projects in Madhya Pradesh proposes following targets:
a) Grid connected projects :,
i. Category I Projects : GoMP will promote setting up of Solar Power projects for direct sale to MP Discoms / MP Power Management Company Ltd. The total capacity under this category will be as per the Renewable Purchase Obligation (RPO) targets specified by M.P. Electricity Regulatory Commission ( MPERC ) from time to time or as decided by the GoMP . Selection of these Solar Power projects shall be through tariff based competitive bidding process .
ii. Category II Projects : The GoMP will promote Solar power Producers to set up Solar power plants of unlimited capacity , subject to single project 2807 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
capacity limitation as per clause 6 (b ) of this policy for captive use or sale of power to 3rd party / states other than Madhya Pradesh.
Category III Projects : The GoMP will promote Solar Power producers to set up Solar Power plants of unlimited capacity under REC mechanism .
iv. Category IV Projects : The GoMP will also promote setting up of Solar Power plants under the guidelines of JNNSM .
b) Decentralized and off- grid solar projects : The GoMP will promote decentralized and off- grid solar applications , including hybrid systems as per guidelines issued by MNRE .
6. Capacity Cap :
a) Category I Projects : The minimum and maximum project capacity allocation to each solar power producer for the grid connected solar power plants under Clause 5(a) (i) will be as per the guidelines under the Request for Selection (Rfs) / qualification document issued by GoMP from time to time .
b) Category II Projects : The minimum and maximum single project capacity allocation to each Solar power producer for the grid connected Solar power plants to be installed on Government land ( there will be no maximum capacity cap for projects to be installed on private land) under Clause 5 (a) (ii) will be as under
Maximum S.No.
Minimum
Technology
Capacity (MW)
Capacity (MW)
100
0.025
1
Solar Photovoltaic
100
2
1
Solar Thermal
c) Category III Projects : The minimum and maximum single project capacity for accreditation under REC mechanism will be as per the Guidelines /Orders / Regulations issued by CERC/MPERC from time to time .
d) Category IV Projects : The minimum and maximum project capacity allocation to each Solar Power producer for the grid connected Solar Power Plants sanctioned under JNNSM ( Clause 5(a) (iv)) will be as per the guidelines under JNNSM .
2808
[ भाग 1
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7. Eligible Units :
a) Category I Projects: GoMP shall invite proposals from time to time for selection of Solar Power projects through tariff based competitive bidding process . There shall be a set of qualification criteria fixed by GoMP for the prospective Developers of Solar projects . The necessary information regarding attributes to be evaluated , their inter- se weightage (if any) , guidelines for evaluation and other details shall be specified in the qualification document , which shall be prepared by GoMP.
Only project capacities to be installed in the state of Madhya Pradesh shall be eligible for incentives under this Policy , subject to registration as per the provisions of this policy.
b) Category II Projects : GoMP will invite offers from Developers from time to time . Within the specified time limit , the Developers who want to submit proposals ( separate for each project ) for setting Solar Power projects in Madhya Pradesh will be able to apply in the prescribed format along with technical specifications . The MP Power Management Co. Ltd shall have the first right of rejection of purchase of power produced from the plants installed on Government land . In this case the power purchase rate shall be as notified by MP Electricity Regulatory Commission (MPERC ).
i. Projects on Private Land : Any Developer willing to establish power generation projects based on Solar Energy ( Solar PV/ Solar thermal ) on private land under this category in the state shall be eligible for incentives under the new Policy , subject to registration with the GoMP.
Projects on Government Land: There shall be a set of qualification criteria fixed by the GoMP for the prospective Developers proposing to develop projects on government land. The necessary information regarding attributes to be evaluated , their inter - se weightage ( if any ) , guidelines for evaluation and other details shall be specified put on public domain through website before invitation of proposals . Every such applicant shall be evaluated against each of the qualification criteria as specified in the invitation document . Upon eligibility , the available land shall be offered on the basis of maximum free energy per Mega Watt 2809 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
offered by the qualified bidders . Only such selected projects shall be eligible for incentives under this Policy
c) Category III Projects : Solar projects under the REC mechanism shall be eligible for Policy benefits (subject to registration with GoMP) as allowed under CERC REC mechanism as per the Guidelines /Orders /Regulations issued by CERC/ MPERC from time to time.
i. Projects on Private Land : Any enterprise fulfilling the requirements / criterion as specified under CERC REC mechanism may apply to the State Nodal Agency as per the procedures laid down by CERC and/or MPERC . Such developers can apply for registration any time.
ii . Projects on Government Land : GoMP will invite offers from Developers from time to time . Within the specified time limit , the Developers who want to submit proposals ( separate for each project) for setting Solar power projects in the state will be able to apply in the prescribed format along with technical specifications . In addition to the requirements/ criterion as specified under CERC REC mechanism , there shall be a set of qualification criteria fixed by GoMP for the prospective Developers proposing to develop projects on government land . The necessary information regarding attributes to be evaluated , their inter - se weightage ( if any) , guidelines for evaluation and other details shall be specified in the invitation document , prepared by GoMP.
Every such applicant shall be evaluated against each of the qualification criteria as specified in the invitation document . Upon eligibility , the available land shall be offered on the basis of maximum free energy per Mega Watt offered by the qualified bidders . Only such selected projects shall be eligible for incentives under this Policy , subject to registration with GoMP.
ii. Policy benefits like banking , wheeling etc. as brought out in this policy shall be applicable as per the provisions made out by CERC and or the authorities in this respect .
d) Category IV Projects : As per the Guidelines under JNNSM and as amended by GoMPfrom time to time .
2810
[ भाग 1
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8. Registration: Office of Commissioner , New and Renewable Energy , Government of M.P shall be the nodal department for registration and post development activities .
a) The Developers /Investor who may be individual , Company , firm , society , NGO etc. shall submit the following documents as applicable for registration:
i. Application in the given format ;
ii . Certified copy of Memorandum & Articles of Association of the company/ Certified copy of the bye- laws of the registered society ;
Certified copy of partnership deed
b) In case the project is found to be eligible after evaluation , a demand note for depositing the requisite processing fee will be issued within fifteen ( 15) days and such Developers will be required to deposit the processing fee (non- refundable ) of Rs . 1 Lac/MW or part thereof and get the project registered within a period of fifteen ( 15) days from the issuance of the demand note ;
and
c) In case of failure to submit the processing fee within the stipulated timeline (15 days) , the application for registration of the project by such Developer shall be considered cancelled.
9. Post - Registration activities :
a) The following documents shall be submitted by the project Developer within the specified timeline ( 3 months from the date of registration ) for approval:
i. Detailed Project Report (DPR) ;
ii . Land related document ( tagged/ identified project site ) ;
CPM/ PERT chart ( for implementation of the proposed project ) ;
iv. Water allocation order on the basis of water availability at the project site ( if applicable) and map presenting the grid situation ;
V. Affidavit for abiding by the Regulations /Orders of the MPERC , Policies of GoMP and the Guidelines/Notifications ( applicable to solar based power projects) issued by the authorized Officials from time to time ;
vi . Performance guarantee as specified under clause 10.0 .
b) Extension of time : If there is a delay in completion of post registration activities within the stipulated timeline and the cause of delay is beyond the 2811 भाग 1 ]
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control of the Developer , then time limit could be extended by the GoMP on a case - to - case basis as found appropriate .
10. Performance Guarantee :
a) Category I Projects : As per the guidelines specified in the qualification/ selection document issued by GoMP.
b) Category II Projects and Category III projects availing policy benefits :
The Developer shall submit Performance Bank Guarantee ( for projects being setup on government land at the rate of Rs . 5.0 Lac/ MW or part thereof to New & Renewable Energy Department ( GoMP ) . The Bank Guarantee shall be valid for a period of twenty four (24) months for Solar PV projects and for a period of forty (40 ) months for Solar thermal projects respectively .
i. The Bank Guarantee shall be released in stages to the project Developer after evaluating the achievements and project benchmarks ( as per clause 12) .
ii . In case the project Developer fails to achieve the desired progress and the project is cancelled (as per the provisions under clause 13 ) , the balance remaining Bank Guarantee at the time of cancellation of the project shall be forfeited and encashed as penalty . The decision of GoMP shall be final in this regard.
In case the project cannot be set up for want of an approval from the State or the Central Government , the performance guarantee shall be released. The decision of GoMP shall be final in this regard.
iv. In case the project is set up on private land then developer is exempted from submitting any performance guarantee .
11. Administrative approval :
Applications received as per the provisions shall be examined and accorded approval , if found acceptable by the GoMP within a period of thirty (30 ) days from the date of submission of all the documents (refer clause 8) .
12. Post approval activities :
a) Category I Projects : Solar projects under this category will be required to strictly adhere to the timelines as specified in the qualification/bid document issued by the GoMP.
2812
[ भाग 1
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b) Category II Projects and Category III projects availing policy benefits : The project must be commissioned within the timelines mentioned below from the date of administrative approval . Monitoring of progress of the project shall be done based on the criteria mentioned below -
Benchmarks and timelines for Solar power projects
Benchmark
S. No.
Timeline (from
zero day)
Percentage refund of performance guarantee (%)
Solar PV
Solar Thermal
1
Day 0
Day 0
Date of issue of administrative approval
2
3 Months
3 Months
Letter of land. possession/Land use permission/ allotment
10% ( within 15 days of the submission of proof) 3
5 Months
5 Months
Power purchase agreement
20% (within 15 days of the submission of proof) 4 Financial closure
11 Months
11 Months
30% (within 15 days of the submission of proof) 5 Project commissioning 17 Months
24 Months
40% ( after 3 months of successful operation from the date of project commissioning) 13. Monthly progress report and project cancellation:
a) The Developer shall submit monthly progress report in the prescribed format with related documents from the date of registration till the commercial operation date .
b) The progress will be compared against the timelines and benchmarks as specified in clause 12. Explanation will be sought from the developers in case of any delays and slippages in this regard . On receipt of explanations the Developer will be given a reasonable opportunity of being heard and the GoMP shall pass appropriate orders accordingly .
2813 भाग 1 ]
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14. Extension of time limit in special circumstances :
a) Category I Projects : Any timeline extension for this category of projects shall be undertaken as per the guidelines specified in the qualification/ selection document issued by GoMP.
b) Category II Projects and Category III projects availing policy benefits :
i. GoMP may allow a one - time extension of six (6 ) months for achieving financial closure , provided the Developer is able to provide adequate proof for the reasons of delay being beyond the control of the Developer . Any further extension , if any , shall be the sole prerogative of the New & Renewable Energy Department ,GoMP .
ii . In case GoMP agrees to extend the original period for obtaining necessary approvals and for achieving financial closure , the scheduled commercial operation date mentioned above ( clause 12) shall be extended accordingly .
15. Tariff:
a ) Category I Projects : For the projects allotted under tariff based competitive bidding route for sale to MP Discoms / MP Power Management Co Ltd. , the Power Purchase Agreement will be executed between MP Discoms / MP Power Management Co. Ltd and successful bidders as per the provisions of bid/qualification document on the tariff arrived by the process of tariff- based bidding . However the rates shall not be more than the rates specified by the MPERC .
b) Category II Projects : In case of third party sale /captive use/sale to other states , the Power Purchase Agreement will be executed between the Power Producer and the Procurer on mutually agreed rates .
A separate Agreement will be executed for banking of power with MP Discoms/ MP Power Management Co Ltd. for such banking . The wheeling agreement with Madhya Pradesh Power Transmission Company Limited (MPPTCL) / MP Discoms/ or with other grid or network as appropriate will be executed separately.
c) Category III Projects : In case of solar power projects established under REC mechanism , the Power Purchase Agreement as required , will be executed 2814
[ भाग 1
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between solar power producers and the Procurer as per the Regulations / Orders of CERC and/ or MPERC issued from time to time in this regard .
d ) Category IV Projects : For projects under JNNSM, the Power Purchase Agreement will be executed between the solar power producer and the Procurer (NVVN and/ or MP Discoms/ MP Power Management Co Ltd. ) as per Guidelines under JNNSM .
16.Metering:
Metering equipment , as may be stipulated by MPPTCL or by respective MP Discom, shall be installed at the interconnection point which shall be line isolator of outgoing feeder on HV side of the pooling substation . Developers will install metering equipments at their own cost as per specifications and provisions ofMPERC Regulations on metering and MP Electricity Supply Code , 2004. All officials of the MPPTCL/ respective Distribution Company authorized for the purpose shall be allowed access by the Developer to inspect the same . Meters shall comply with the requirements of CEA regulation on ' Installation and Operation of meters' .
17. Grid evacuation & evacuation facility:
a) The developer shall be responsible for laying of power evacuation line from generating station to the nearest substation or interconnection point . He shall also be responsible for interconnection arrangement which includes transformer panel , protections , metering etc , at the substation or interconnection point . These arrangements shall be in accordance with the Madhya Pradesh State Grid Code , Madhya Pradesh Electricity Supply Code, 2004 , applicable MPERC and CERC Regulations as amended from time to time . The Madhya Pradesh Power Transmission Company Limited (MPPTCL ) and /or the concerned Distribution Company in the state of Madhya Pradesh may take up the work and maintain the same on cost basis , which are to be borne by the Developer . The Developer under approval of MPPTCL or Discom can carry out the construction work by paying the supervision charges as applicable . However , MPPTCL and/ or the concerned Distribution Company will undertake the augmentation of sub- station ( s ) , if required . Any dispensation in this regard that may be made by the MPERC shall be final.
2815 भाग 1 ]
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b) The Developer shall be responsible for payment of all wheeling and transmission charges to the MPPTCL / respective Distribution Company in case of sale of power to Third Party Consumers/ Distribution Licensee/ Power Management Co. Ltd utilizing their network the payment shall be subject to the regulations of MPERC .
18. Land Use Permission:
a) Land requirement : For setting up Solar Power Plant in Madhya Pradesh , maximum land use permission for government land, if available , to the Solar Power Producer shall be 3.0 Hectares per MW.
b) Conditions : For allocation of Government revenue land and for permission for land use , the conditions as laid down in the Circular No. F - 16-3 /93 / 7 / 2 A dated 06.09.2010 (Annexure I) and Circular No. F6-53 /2011 / dated 8-08-2011 (Annexure II) of the Revenue Department ( GoMP) shall be applicable . If the government revenue land is recorded as forest land with small and minor trees in the revenue records or it is defined as a forest land as per Revenue Department ( GoMP) Circular dated 8-08-2011 , then the applicant will have to take permission , as per provisions of Forest Conservation Act 1980 , from concerned authorities .
c) Stamp duty exemption on purchase of private land: In case the Developer purchases private land for the project , then they will be eligible for an exemption of 50% on stamp duty as per Notification No : 70 B - 4-08-2-5 dated 21-08-2008 (Annexure III) . In case of non - installation of the project on this land , the exemption (given) will be withdrawn and recovery shall be made as per rules.
d) Government land Use Permission : In case of land owned by Revenue Department or any other State Government Department , the New & Renewable Energy Department shall take possession of the land and subsequently give permission for use of land to the concerned Developer (whose project has been accorded administrative approval ) .
e) Other land conditions :
i. In case the government land is found to be used for purposes other than that related to the project , the land use permission will be cancelled with immediate effect . The construction carried out by the Developer and 2816
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
equipments on such land will be seized and be treated as vested in the GoMP.
ii. Any authorized personnel not below the rank of Tehsildar of GoMP along with the designated officer of NRE or under the direction of NRE department can visit the project site for inspection of land and the project regarding compliance of the land use for the specified project purpose .
In case Developer who has been given permission for land use for setting up solar power project, intends to set up the solar project along with third party participation then land use permission for the part on which solar project to be set up by the third party , will be given to such third party on the same terms and conditions of Revenue Department on which permission is given to the developer.
19.
Exclusive Jurisdiction of Madhya Pradesh Electricity Regulatory Commission ( MPERC)
a . The MPERC shall have exclusive jurisdiction on those provisions of this policy which are within its regulatory mandate for management of the Electricity Act , 2003 , especially regarding notification of Electricity Tariffs for sale for power , power purchase agreements , wheeling , banking , distribution, transmission loss chargesetc. Similarly , the MPERC shall have jurisdiction under the provisions of the Electricity Act , 2003 as regards promotion of non- conventional energy sources , facilities for transmission of energy sources , facilities for transmission of energy and sharing of purchase of power amongst MPPTCL/ Transmission Licensee/ Distribution Licensee etc. Compliances of Guidelines , Directives , Regulations , Rulesetc. issued by the MPERC issued from time to time regarding these shall be binding on all concerned parties .
b. In the event of any dispute in the interpretation of this policy or any terms and conditions of agreement/ clauses between the Developer and any state govt . department or MPPTCL / Transmission Licensee/ Distribution Licensee , the same shall be referred to the State Government or the MPERC as the case may be.
Part - B
General Provisions
1. Migration of Solar projects registered under NRSE Policy , 2006 :
a) One time offer : A onetime offer will be extended to all the solar project Developers currently registered under NRSE Policy , 2006 and which have not 2817 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
attained commissioning to develop projects under the following project categories . Within two months from the date of notification in official gazette of MP this Solar Policy , such Developers will have to intimate in writing to the New & Renewable Energy Department ( GoMP) for setting up Solar power projects in Madhya Pradesh under any of the following categories :
i. Sale to MP Discoms/ MP Power Management Co Ltd (As per Category I Projects): Such Developers who have successfully participated in the tariff based competitive bidding process , undertaken , by GoMP for procurement of Solar Power for sale to MP Discoms/ MP Power Management Co Ltd.
On successful allotment of the project under the tariff based competitive bidding process , no separate registration will be required for availing benefits under the present Policy . The applicable processing fee amount will be as specified under the present Policy . In case the processing fee initially paid by the Developer is higher than the amount specified under the present Policy , the GoMP shall release the balance amount (without interest) to such Developers . In case the processing fee initially paid by the Developer is less than the amount specified under the new Policy , the Developer shall submit the balance amount to GoMP for registration (under this Policy) within thirty ( 30) days of the declaration of successful allotment of Solar power projects by GoMP or within thirty ( 30 ) days of the declaration of this policy whichever is later .
However, in case of unsuccessful bidders under the tariff based competitive bidding process undertaken by the GoMP , the entire processing fee initially paid by the Developers will be released by the GoMP without interest to such Developers on receipt of an application for the same , within thirty ( 30 ) days of the declaration of final allotment of Solar power projects by the GoMP or within thirty (30) days of the declaration of this policy whichever is later. In case such unsuccessful Developers wish to develop projects under other categories , specified as under , written intimation must be made by such unsuccessful Developers to New & Renewable Energy Department ( GoMP ) within thirty ( 30 ) days of the declaration of final allotment of Solar power projects by the GoMP 2818
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
or within two months of the declaration of present policy whichever is later.
ii. Captive use /direct sale to 3rd party/ states other than Madhya Pradesh through Open Access (As per category II Projects ) : Though GoMP would be inviting offers (separate for each project ) for setting Solar Power projects (under this category ) in Madhya Pradesh as outlined above , the already registered Solar projects under the NRSE Policy 2006 may proceed with project development under this category after written intimation to New & Renewable Energy Department within two months of the notification of present Policy . Within the period of three months , of notification of present policy such Developers need to submit the PPA for the purpose of third party sale as per the provisions of this clause .
In case the processing fee initially paid by the Developers is higher than the amount specified under the this Policy, GoMP shall release the balance amount ( without interest) to such Developers within thirty (30 ) days of the receipt of written request from the Developers for development of Solar project under this category . Whereas , in case the processing fee initially paid by the Developers is less than the amount specified under the present Policy , the Developer shall submit the balance amount to GoMP for registration ( under present Policy ) along with request for development of project under this category .
Project under REC mechanism (As per Category III Projects) : In case the Developers wish to set up projects under the REC mechanism along with benefits under the present Policy (as allowed under CERC REC mechanism as per the Guidelines / Orders /Regulations issued by CERC /MPERC from time to time) , the applicable processing fee amount will be as specified under the present Policy. In case the processing fee initially paid by the Developers is higher than the amount specified under the present Policy, the GoMP shall release the balance payment (without interest) to such Developers within thirty (30 ) days of the receipt of written request from the Developer for development of Solar project under this category . Whereas , in case the processing fee initially paid by the Developer is less than the amount specified under the present Policy, 2819 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
the Developer shall submit the balance payment to GoMP for registration (under present Policy) within thirty (30) days of the notification date of this Policy for development of Solar project under this category .
Whereas , in case the Developers wish to set up projects under REC mechanism without availing Policy benefits , GoMP shall release the full processing fee initially paid ( without interest) to such Developers within thirty (30 ) days of the receipt of written request from the Developer.
b) Withdrawal of registration : In case the Solar project Developers , registered under NRSE Policy , 2006 and which have not attained commissioning , wish to withdraw registration , written intimation for non - participation in present Policy will be required to be made to New & Renewable Energy Department (GoMP) within two months of the notification of the present Policy. GoMP shall release the full registration fee initially paid (without interest) to such Developers on receipt of written intimation of non - participation from the Developers .
c) In case of non - receipt of written request from the Developers of the Solar power projects registered under NRSE Policy, 2006 and which have not attained commissioning within three months from the date of notification of this policy in the official gazette for setting up of project under any of the above mode ; the registration of such projects shall be deemed cancelled . In such case no refund of processing fee shall be done by GoMP.
d) Project milestones & timelines : On successful migration of the project under this Policy , the migrated projects shall be governed by the provisions ( including project milestones & timelines ) under this Policy .
2. Surrender of Project Allotment : The Developer shall be free to surrender the Project at any stage after registration , but in such a case the Performance Guarantee thereof shall be forfeited unless it is established that the surrender of project was beyond the developer's control .
3. Transfer of project : The Solar project Developer shall not be allowed to transfer the project before its commissioning to any other Developer /Investor without the prior approval of the New & Renewable Energy Department , GoMP . Payment of fees ( non - refundable) of Rs one ( 1 ) lac per MW shall be applicable , for such transfer .
2820
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
4. Promotion of Solar Technology Parks : The state would take appropriate steps to set up solar parks to promote investment in solar power generation in the state either on its own or through a PPP mode. Solar technology parks for generation and manufacturing units in equipment & related ancillaries for Solar systems shall be promoted and established at appropriate locations in the state of Madhya Pradesh . The SME sector will be promoted for manufacture of various components and systems for Solar systems . The Solar technology parks will be given preference in land allocation and creation of essential facilities by the state government . Such Solar technology parks shall also be eligible for benefits under the state's Industrial Promotion Policy ( or as amended from time to time).
5. Other provisions :
a) Fossil fuel usage : The usage of fossil fuel ( coal , gas , lignite , naphtha, diesel , wood etc.) shall not be allowed in the grid connected solar thermal power projects . Hybrid systems shall be allowed as per the guidelines of the Ministry of New and Renewable Energy ( MNRE ) .
b) Project Inspection : Authorized Representatives of GOMP not less than the rank of Executive Engineer shall , with prior written intimation, have the right of inspection of the power project to assess the safety of the project . The Developer shall render all requisite help and assistance in facilitating such inspection .
The Developer shall maintain all records regarding capacity , generation , downtime , with relevant constraints etc. and make available all these records to the inspecting authority for inspection .
c) Data monitoring and submission : All grid connected solar power plants registered with the New & Renewable Energy Department ( GoMP) will install equipments for regular monitoring of Solar irradiance (including DNI ) , ambient air temperature , wind speed and other weather parameters and for simultaneously monitoring of the amount of electric power generated from the plant . They will submit this data to the GoMP on line and / or through a report on regular basis ( monthly ) for the entire duration of Power Purchase Agreement as prescribed.
Once the project is commissioned , the solar power project developer shall be liable to submit the monthly and annual generation details duly certified by the 2821 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
concerned distribution/ transmission utility: both in hard copy and in soft copy (online) , to New & Renewable Energy Department (GoMP) .
d) Data bank: New & Renewable Energy Department ( GoMP ) will establish and maintain a technical library , a data bank and/ or information centre to collect and correlate information regarding solar energy sources .
e) Reactive Power Charges : In case of drawl of Reactive Power for the Project , necessary charges shall be payable at the rates prescribed by MPERC .
6. If a Developer intends to generate and distribute electricity in a rural area as notified by the State Government vide notification number 2010 -F - 13-05-13- 2006 dated 25th March , 2006 , such a Developer shall not be required to obtain any license for distribution of electricity but shall be bound to comply with the criteria laid down by Central Electricity Authority as per Section 53 of Electricity Act , 2003 .
7. Project Clearance and Implementation Board : The cases relating to removal of difficulties coming in the way of smooth implementation of the Projects and those in respect of Inter - departmental Coordination shall be referred to the Project Clearance and Implementation Board (PCIB ) constituted under the Chairmanship of the Chief Secretary , GoMP .
Part- C
Incentives
1. Electricity duty & cess exemption : All Solar power projects (including captive units ) will be eligible for exemption from payment of electricity duty and cess for a period of 10 years from the date of commissioning of the project .
2. Wheeling charges : Facility of wheeling will be available to all solar power projects through MPPTCL/ MP Discoms , as case may be , as per wheeling charges specified by MPERC . For above wheeling charges , GoMP will provide a grant of four percent (4 %) in terms of energy injected and the balance , if any , shall be borne by the project developer .
3. Banking -
Banking of 100% of energy in every financial year shall be permitted subject to the following conditions - 2822
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
i. The figures of banked energy during the Financial Year shall be subject to verification by the officials of the concerned State Distribution Company/ State Power Trading Company . The Developer will be required to pay two percent (2 % ) of the banked energy towards banking charges to the concerned State Distribution Company/ State Power Trading Company .
ii . The return of banked energy shall be based on Regulations issued by MPERC from time to time .
iii The balance energy , if any , at the end of a Financial Year after return of banked energy shall be purchased by the concerned State Distribution Company/ State Power Trading Company in accordance with the rules/ directions of MPERC .
4. Contract demand reduction : The Industrial Consumers opting to buy power from Solar Power Project under category II and III shall be allowed corresponding pro - rata reduction in Contract Demand on a permanent basis but subject to the decision of MPERC in this regards .
5. Third party sale : Third Party sale within or outside the State of M.P. will be allowed as per Electricity Act 2003 and the Orders and / or Regulations issued by MPERCfrom time to time .
6. Industry status : The Solar projects implemented under this Solar Policy will have the status of industry and will be eligible for all benefits under Industrial Promotion Policy ( or subsequent amendments from time to time) . In case of any inconsistency between the Madhya Pradesh Industrial Promotion Policy and Solar policy , the provisions under the new Solar Policy shall prevail.
7. Entry tax / VAT Exemption : The equipments purchased for installation of Solar power plants under the policy shall be exempted from VAT and entry tax as per entry number 71 , schedule - 1 of VAT notification 2002 and entry 1 of schedule - 1 of entry tax notification 1976 .
8. CDM benefits : CDM benefits to the solar power project Developers / Investors shall be as per the provisions specified by MPERC.
9. Regarding other facilities /incentives such as Open Access , Reactive Power and Renewable Purchase Obligation , the provisions specified by MPERC shall be applicable.
2823 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
परिशिष्ट - 1
मध्यप्रदेश शासन
राजस्व विभाग
"मंत्रालय"
वल्लभ भवन, भोपाल
भोपाल, दिनांक 6--2010.
क्रमांक एफ16-3/ 93 / सात/ 2 ए,
प्रति,
1. समस्त सम्भांगीय आयुक्त, मध्यप्रदेश
2. संमस्त कलेक्टर, मध्यप्रदेश.
विषय :- मध्यप्रदेश में अपारम्परिक ऊर्जा स्त्रोतों (सोलर, वायु, बायो- एनर्जी आदि) से विद्युत उत्पादन को प्रोत्साहन देने हेतु नीति के अन्तर्गत शासकीय भूमि के हस्तन्तरण हेतु निर्देश । :
सन्दर्भ:- विभागीय ज्ञाप क्रमांक 16-3 / 93 / सात / 2 ए, दिनांक 21/25 अक्टूबर, 1997 .
मध्यप्रदेश शासन राजस्व विभाग द्वारा अपारम्परिक ऊर्जा स्त्रोतों से विद्युत उत्पादन के लिए शासकीय भूमि के हस्तान्तरण हेतु विभागीय ज्ञाप क्रमांक एफ 16-3 /93 /सात/ 2ए, दिनांक 21/25 अक्टूबर, 1997 जारी किया गया था । मध्यप्रदेश शासन ऊर्जा विभाग (वर्तमान में अपरम्परागत ऊर्जा विभाग ) द्वारा जारी मध्यप्रदेश में अपारम्परिक ऊर्जा स्त्रोतों (सोलर, वायु, बायो- एनर्जी आदि) की नीति मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) दिनांक 17 अक्टूबर, 2006 में प्रकाशित की गई है । इस नीति में वर्णित प्रावधानों को प्रभादी तरीके से लागू किए जाने के लिए मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग के ज्ञाप क्रमांक, एफ 16-3 / 93 / सात/ 2ए, दिनांक 21/25 अक्टूबर, 1997 को निरस्त करते हुए राज्य शासन विषयांतर्गत नीति के तहत शासकीय राजस्व भूमि के हस्तांतरण/ निजी भूमि के अधिग्रहण हेतु निम्नानुसार निर्देश प्रसारित: करता है :-
(अ) भूमि बंटन-
(1 ) मध्यप्रदेश में अपारम्परिक ऊर्जा स्त्रोतों (सोलर, वायु, बायो-एनर्जी आदि) से विद्युत उत्पादन को प्रोत्साहन देने हेतु नीति, जिसका प्रकाशन मध्यप्रदेश राजपत्र 2824
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
(असाधारण) दिनांक 17 अक्टूबर , 2006 में किया गया है, में वि अनुसार शासकीय राजस्व भूमि अपरंपरागत ऊर्जा विभाग को नि.शुल्व. की जाएगी ।
(2) यदि शासकीय भूमि उपलब्ध न हो तो निधर्धारित विहित प्रक्रिया अनुसार मध्यप्रदेश शासन (राजस्व विभाग ) से निजी भूमि अधिग्रहित करने की अनुमति प्राप्त की जाएंगी । तत्पश्चात् निजी भूमि अधिग्रहित कर अधिगृहण मूल्य पर आवेदक कम्पनी को उपलब्ध कराई जाएगी ।
(ब) प्रक्रिया-
(1 ) चूंकि शासकीथ राजस्व भूमि का आवंटन अपरम्परागत ऊर्जा विभाग को किया जाना है । अतः इस परिपत्र के अधीन भूमि का आवंटन संबंधित जिले के कलेक्टर द्वारा अपरम्परागत ऊर्जा विभागं की ओर से अधिकृत, अपरम्परागत ऊर्जा विभाग के ही अधिकारी के. हस्ताक्षर से प्राप्त आवेदन पर आंरम्परागत ऊर्जा विभाग को किया जाएगा । राजस्व अभिलेख (खसरे) में भूमि मध्यप्रदेश शासन ही अंकित रहेगी, किन्तु खसरे के कैफियत के कॉलम में अपरम्परागता ऊर्जा विभाग को आदेश क्रमांक भूमि अन्तरित । उनके द्वारा उनके आदेश क्रमांक से दिनांक से दिनांक (अपारम्परिक ऊर्जा स्त्रोतों से विद्युत उत्पादन करने वाली इकाई का नाम, पता आदि) को अनुमति दी गई, वर्णित होगा ।
आवेदन के साथ जो भूमि चाही गई है उसकी खसरे तथा नक्शे की नकल अन्य विवरण तथा अपरम्परागत ऊर्जा विभांग अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत संस्था/ निगम का इस आशय का प्रमाण पत्र संलग्न किया जाएगा कि " आवेदित भूमि सोलर /वायु / बायो इनर्जी उत्पादन के लिए सर्वथा उपयुक्त है, इसका परीक्षण करा लिया गया है । "
(2) अपरम्परागत ऊर्जा विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि परियोजना के लिए आवश्यक न्यूनतम शासकीय भूमि के उपयोग की अनुमति ही दी जाए । 2825 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(स) शर्ते-
(1 ) जिन ग्रामों में प्रस्तावित परियोजना के अंतर्गत जो भूमि स्थित है उनके निवासियों एवं उनके मवेशियों को उक्त भूमि के निस्तारी एवं अन्य परम्परागतं आम उपयोग पर कोई रोक- टोक नहीं लगायी जाएगी, परन्तु रोक-टोक उस सीमा तक.. वाजिब होगी, जहां तक वह प्रस्तावित परियोजना के उपकरणों की सुरक्षा के लिए आवश्यक होगी । प्रस्तावित परियोजना में विद्युत संयंत्र एवं सिविल निर्माणं जैसे कि पावर हाऊस, उपकरण के शेड, पहुंच मार्ग आदि की सुरक्षा के लिए चारो ओर फेंसिंग कर सकते हैं । शेष भूमि बिलकुल खुली रखी जाएगी, ताकिं. ग्रामीणों एवं उनके मवेशियों के निस्तार में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं हो ।
(2) कलेक्टर की लिखित एवं पूर्व अनुमति बगैर प्रस्तावित भूमि पर कोई भी वृक्ष नहीं: काटा जाएगा । वृक्ष एवं उसका कब्जा शासकीय ही रहेगा ।
(3) भूमि का उपयोग प्रस्तावित परियोजना एवं उसके सीधे अनुषांगिक प्रयोजन के अलावा अन्य किंसी प्रयोजन के लिए नहीं किया जाएगा ।
(4) भूमि का वर्णित प्रयोजनों के लिए उपयोग न होने अथवा अन्य प्रयोजन होने अथवा प्रयोजन बन्द हो जाने की स्थिति में भूमि व उस पर निर्मित परिसंपत्तियों स्वयमेद ही शासन (राजस्व विभाग) में निहित हो जायेंगी ।
(5) भूमि या उसके किसी भाग या उस पर निर्मित किसी भी भाग कों वर्णित । प्रस्तावित परियोजना के प्रयोज़न के अलावा अन्य किसी भी प्रयोजन के लिए उपयोग में नहीं लाया जाएगा ।
(6) शासन के प्रतिनिधि, प्राधिकृत व्यक्ति तथा जिला कलेक्टर अथवा उसके प्रतिनिि भूमि के सही उपयोग तथा लगायी गई शंर्तों के पालन की दृष्टि से भूमि कार उस पर निर्मित किसी भी सम्पत्ति का कभी भी बाह्य अथवा आंतरिक निरीक्ष कर सकेंगे । 2826
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
परिशिष्ट - 2
मध्यप्रदेश शासन
राजस्व विभाग
मंत्रालय
भोपाल, दिनांक 08/08/2011 क्रमांक एफ: 6-53 /2011 /सात-नजूल
प्रति,
1.
'प्रमुख सचिव/सचिव समस्तविभाग म ०प्र० शासन
2 ..
समस्त, संभागायुक्त मध्य प्रदेश
3
समस्त, कलेक्टर गध्य प्रदेश
गैर शासकीय संस्थाओं को विभिन्न प्रयोजन हेतु भूमि आवंटन की सुस्पष्ट . नीति तैयार किया जाना ।
माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा विशेष अनुमति याचिका (सिविल ) 25509/2009 में पारित आदेश दिनांक 6-4-2011 के परिप्रेक्ष्य में शासकीय तथा औद्योगिक एवं निजी पूंजी निवेश के मामले में भूमि के आवंटन के लिए निम्नानुसार, प्रक्रिया दिहित की जाती है: -
1.. भारत सरकार एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, उपक्रमों, मंडीबोर्ड, मंडी समितियां, मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल, विकासः प्राधिकरण , भारत सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा संचालित विश्वविद्यालय , शासकीय शैक्षणिक संस्थाओं एवं अन्य शासकीय संस्थाओं तथा स्थानीय निकायों आदि के मामले में शासकीय भूमि का उपयोगः संप्रभु सरकार द्वारा जनहित में किया जाता है । अतः ऐसे मामलों में भूमि आवंटन की प्रक्रिया में किसी परिवर्तन की आवश्यकता नहीं है।
2. औद्योगिक विकास केन्द्रों की स्थापना के लिये भी शासकीय भूमि सीधे किसी औद्योगिक संस्था या उद्यमि को न देते हुए उद्योग विभागं को 2827 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
हस्तांतरित की जाती है। अतः प्रचलित प्रक्रिया के अनुसार जिला कलेक्टर राजस्व पुस्तक परिपत्र खंड 4 क्रमाक -1 की कंडिका 36 में विहित प्रावधान का पालन करते हुये उद्योगिक विकास केन्द्रों की स्थापना के लिए उद्योग विभाग को भूमि हस्तांतरित करेंगे ।"
3. औद्योगिक विकास केन्द्रोंके बाहर भूमि आवंटन के मामलों में औद्योगिक संस्था / उद्यमी द्वारा उद्योग विभाग में भूमि आवंटन के लिये आवेदन पत्र प्रस्तुत किया जाएगा। उद्योग विभाग द्वारा भूमि का समुचित उपयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से न्यूनतम आवश्यक भूमि का. आंकलन किया जायेगा और उद्योग विभाग को भूमि हस्तांतरण करने के लिये जिला कलेक्टर को मांग प्रस्तुत की जायेगी। कलेक्टर भूमि हस्तांतरण के लिये प्रकरण तैयार करेगा तथा संभागीय आयुक्त के मांध्यम से प्रस्ताव राजस्व विभाग को भेजेगा। राजस्व विभाग द्वारा उद्योग विभाग को शासकीय भूमि का हस्तांतरण किया जाएगा।
माननीय उच्चतम न्यायालय के उपरोक्त निर्णय दिनांक 6-4-2011 को ध्यान में रखते हुए उद्योग विभाग अंपनी विभागीय नीति में भूमि यावंटन को प्रक्रिया, हस्तांतरित शासकीय भूमि का प्रीमियम, भू-भाटक का निर्धारण तथा शर्त भंग एवं उद्योग/इकाई नियत अवधि में स्थापित नहीं होने अथवा जिस प्रयोजन के लिए शासकीय भूमि का आवंटन किया गया है, उस प्रयोजन हेतु उपयोग न होने की दशा में भूमि की राजस्व विभाग को वापसी अथवा उसी प्रयोजन के लिए अन्य औद्योगिक ईकाईयों को आवंटन आदि के संबंध में सुस्पष्ट प्रावधान का समावेश सुनिश्चित करेगें।
4. उर्जा उत्पादन के लिये पावर प्लांट स्थापना करने के लिये भी शासकीय भूमि का आवंटन किया जायेगा । ऐसे प्रकरणों में उद्यमी द्वारा उर्जा विभाग में भूमि आवंटन के लिये आवेदन पत्र प्रस्तुत किया जावेगा। उर्जा विभाग द्वारा आवेदन पत्र का परीक्षण कर न्यूनतम आवश्यक भूमि का 2828
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
आंकलन किया जावेगा और भूमि हस्तांतरण करने के लिये जिला कलेक्टर को मांग प्रस्तुत की जावेगी । भूमि हस्तांतरण एवं आवंटन की शेष प्रक्रिया यथास्थिति, कंडिका क्रमांक 3 में दिए गए प्रावधान अनुसार सुनिश्चित की जायेगी।
5. राज्य के आर्थिक विकास के लिये निजी पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिये लागू अन्य नीतियो यथा पर्यटन नीति, गैर पारम्परिक उर्जा नीति (मध्यप्रदेश में अपारम्परिक उर्जा स्त्रोंतों जैसे- सोलर,वायु, बायो एनर्जी आदि से विद्युत उत्पादन को प्रोत्साहन देने हेतु नीति) आदि के अंतर्गत शासकीय भूमि के आवंटन के लिये निवेशक/ उद्यमी संबंधित विभाग को आवेदन करेगा। संबंधित विभाग द्वारा आवेदन का परीक्षण कर आवश्यक न्यूनतम भूमि के हस्तांतरण के लिए कलेक्टर को मांग प्रस्तुत किया जाएगा। आवंटन की प्रक्रिया यथास्थिति कंडिका क्रमांक-3. में दर्शाये गये प्रावधान के अनुसार ही की जाएगी ।
यह प्रावधान राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड चार क्रमांक-1 का भाग माना जावेगा।
म०प्र० के राज्यपाल के नाम से
तथा आदेशानुसार
(आर०के०स्वाई ) प्रमुख सचिव
मध्यप्रदेश शासन राजस्व विभागः 2829 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
भोपाल , दिनांक 08/08/201 पृ० क्रमांक एफ़ 6-53 /2011 /सात- नजूल
प्रतिलिपिः-
1 . प्रमुख संचिव, म ०प्र ० शासन , वित्त विभाग मंत्रालय ।
2. महालेखाकार ,म०प्र ० ग्वालियर ।
3. 'आयुक्त, भू-अभिलेख एवं बन्दोबस्त ग्वालियर म० प्र० , की ओर सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित ।
4. सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय , म०प्र० भोपालं ।
5. मुख्य सचिव के स्टाफ आफीसर ।
6. निज सचिव, प्रमुख सचिवं राजस्व विभाग मंत्रालय । की ओर सूचनार्थ ।
7. गार्डफाइल ।
(आर0के0स्वाई ) प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन राजस्व विभाग 2830
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
परिशिष्ट- 3
मध्य प्रदेश शाাম্প্রদা
साणिज्यिक कर विजय मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल,
आदेश
भोपाल, दिनांक अगस्त, 2008 70 बी-4-6/08/2/पांच- भारतीय स्तग्य अधिनियम, 1899 (1899 का सं. 2 ) की धारा 9 की उपधारा (1 ) के खण्ड (क ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुदै राज्य सरकार, एतद्द्वारा, निजी व्यक्तियों द्वारा अपारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से विद्युत उत्पादन ' करने के लिए स्थापित किसी इकाई के पक्ष में निष्पादित की गई विकंय की लिखतों पर, उचत्तं अधिनियम की अनुसूची 1- क के अनुच्छेद-22 के अंधीन प्रभार्य स्टाम्प शुल्क को कम करके निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन रहते हुए, आधा करती है,
:
(1)
इकाई द्वारा , इस आदेश के अधीन छूट दी गई स्टाम्प शुल्क की रकम के बराबर राशि की बैंक गारण्टीः पवन ऊर्जा यां सौर ऊर्जा परियोजना की दशा में 21 मास की कालावधि तथा बायोगैस था नगरीय अवशिष्ट परियोजनाओं के लिए 36 मास की कालावधि के लिए, राज्य सरकार के पक्ष में देनी होगी ।
(2) यदि परियोजना, बैंक गारण्टी हेतु दी गई कालावधि 'के भीतर स्थापित नहीं की जाती है, तो छूट प्राप्त स्टाम्प शुल्क की रकम सरकार को संदाय करने का दायित्व उस इकाई का होगा । इकाई का यह भी उत्तरदायित्व होगा कि वह विहित कालावधि समाप्त होने के पूर्व इस निमित्त ऊर्जा विभाग द्वारा नियुक्त किए गए सक्षम प्राधिकारी से एक प्रमाण पत्र संबंधित जिले, जिसमें कि. कय की गई भूमि स्थित है, के जिला रजिस्ट्रार के समक्ष प्रस्तुत करे कि बैंक गारण्टीमविहित कालावधि के पूर्व इकाई स्थापित की जा चुकी है । व्यतिकेंम की दशा में छूट प्रदान की गई शुल्क की रकम इकाई द्वारा इस प्रयोजन के लिए दी गई बैंक गारण्टी से वसूली योग्य होगी ।
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार.
अध्यादेत शासन भाग 1 ]
2831
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
मध्यप्रदेश शासन
वाणिज्यि कर विभाग
मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल-462004
भोपाल, दिनांक 21 अगस्त 20 क्रमांक एफ-कमांक (70) बी -1-6 / 08 / 2 / पांच भारत के संविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड (3 ) के अनुसरण में इस विभाग की अधिसूचना कमांक (70) बी-4-6/08 / 2/पांच -दिनांक 21 अगस्त 2008 का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतद्वारा प्रकाशित किया जाता है ।
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार
(बी.पी.एस.परिहार) अपर सचिव म.प्र.शासन,वाणिज्यिक कर विभाग 2832
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
Gort. of Madhya Pradesh
Commercial Taxes Department
Mantralaya, Vallabh Bhawan . BHOPAL
ORDER
-4-6/08/2/٧-
Bhopal , Dated 21 August2008 In exercise of the powers conferred by clause (a ) of sub- section (1) of section 9 of the Indian Stamp Act, 1899 ( No. II of 1899 ) , the State Government , hereby, reduces to one half the stamp duty chargeable under Article 22 of Schedule 1 - A of the said Act on instruments of sale executed by private persons in favour of a Unit established to generate electricity from non - conventional energy resources subject to the following conditions that--
(1) a Bank Guarantee of the sum equal to the amount of stamp duty remitted under this order shall be giveri by the Unit in favour of the State Government for a period of 21 months in case of Wind Energy of Solar energy Projects and for a period of 36 months in case of Bio- mass or Municipal Waste Projects
(2) the Unit shall be liable to pay the amount of stamp duty remitted to the State Govei amunt , if the Project is not established within the given period of Bank Guarantee. It shall also be the responsibility of the Unit to produce before the district registrar of the concerned district in which the land purchased is situated , a certificate from the Competent Authority appointed by the Energy Department in this behalf, thất the Unit has been established before the prescribed period of Bank Guarantee. In case of default , the amount of duty remitted shall be recoverable from the Bank Guarantee tendered by the unit for the purpose .
By order and in the name of the Governor of Madhya Pradesh ,
(BIP.S. PARIHAR ) Additional Secretary भाग 1 ]
2833
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
विभाग प्रमुखों के आदेश
आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन अकादमी मध्यप्रदेश भोपाल
(विभागीय परीक्षा प्रकोष्ठ) भोपाल , दिनांक 6 जुलाई 2012
क्र. 5357-2193- वपप्र- 2012.- राज्य शासन द्वारा वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों के लिये विभागीय परीक्षा, जो दिनांक 11 अप्रैल 2012 को प्रश्नपत्र-पुस्तपालन तथा कर- निर्धारण ( पुस्तकों सहित ) विषय में सम्पन्न हुई थी, में सम्मिलित निम्न परीक्षार्थियों को उत्तीर्ण घोषित किया जाता है:-
पदनाम अनुक्रमांक परीक्षार्थी का नाम
(2)
(1)
(3)
उच्चस्तर
सागर संभाग
कराधान सहायक 1 सुश्री दीप्ति यादव
कराधान सहायक 2 श्री सूर्यकान्त दुबे
3 श्री नरेन्द्र कुमार औरसे सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी
कराधान सहायक 4 कु. दीपशिखा यादव
5 श्री राजाराम अहिरवार कराधान सहायक
कराधान सहायक 6 डॉ. अमित कुमार तिवारी
7 श्री विनोद कुमार शिल्पी वाणिज्यिक कर निरीक्षक
भोपाल संभाग
कराधान सहायक 08 श्री महेन्द्र कुमार चौकसे
09 श्री बलवन्त सिंह यादव कराधान सहायक
10 श्री वीरसिंह मैना
कराधान सहायक
11 कु. मेघा शर्मा
कराधान सहायक
12 श्रीमती नेहा अर्मो
कराधान सहायक
कराधान सहायक
13 सुश्री अभिलाषा काले
कराधान सहायक
14 कु. प्रीति धुर्वे
कराधान सहायक
15 कु. पूर्णिमा काजले
कराधान सहायक
16 कु. नसरीन खान
कराधान सहायक
17 कु. हेमलता उईके
कराधान सहायक
18 कु. कंचन लाल निरापुरे
कराधान सहायक
19 श्री सेतु सिंह
20 श्री रत्नेश भदौरिया
कराधान सहायक
21 श्री निर्मल कुमार परिहार वाणिज्यिक कर अधिकारी 22 श्री जीवन सिंह रजक वाणिज्यिक कर अधिकारी 23 कु. सरिता भगत
सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी
24 श्री कमलकान्त मणि वाणिज्यिक कर अधिकारी (1)
(2)
(3) 25 श्री संतोष कतरौरिया
वाणिज्यिक कर अधिकारी
जबलपुर संभाग
कराधान सहायक 26 श्री अजीत कुमार राय
कराधान सहायक 27 कु. रूचि सराफ
28 श्रीमती उर्मिला लाल
वाणिज्यिक कर निरीक्षक
वाणिज्यिक कर निरीक्षक 29 श्री अनुराग ताम्रकर
कराधान सहायक 30 श्रीमती आशा दबड़घाव
कराधान सहायक 31 कु. ज्योति सोनी
32 श्री अल्ताफ अंसारी
कराधान सहायक 33 श्री रजनीश पाण्डेय
कराधान सहायक
वाणिज्यिक कर निरीक्षक 34 कु. सविता पाटिल
35 श्रीमती रश्मि उपवंशी वाणिज्यिक कर निरीक्षक
कराधान सहायक 36 श्री देवेन्द्र कुमार नाग
कराधान सहायक 37 कु. बबीता सोंधीया
38 श्री विकास भारद्वाज
कराधान सहायक
कराधान सहायक 39 कु. मधुलिका ठाकुर
40 श्री राजा अवधिया
कराधान सहायक
कराधान सहायक 41 कु. अल्का कोष्टा
कराधान सहायक 42 श्री रविन्द्र सिंह सेंगर
43 कु. ज्योसना ठाकुर
सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी
ग्वालियर संभाग
वाणिज्यिक कर अधिकारी 44 कु. पारूल अग्रवाल
वाणिज्यिक कर निरीक्षक 45 श्री सुरेन्द्र सिंह यादव
कराधान सहायक 46 श्री शंकर जुमनानी
वाणिज्यिक कर निरीक्षक 47 श्री दामोदर धाकड़
इंदौर संभाग
कराधान सहायक 48 श्री भूपेन्द्र मण्डलोई
कराधान सहायक 49 श्री राजेन्द्र बडुल
50 श्रीमती अनिता वर्मा
कराधान सहायक
कराधान सहायक 51 श्रीमती आशा सुनहरे
कराधान सहायक 52 श्रीमती उषा बड़ोले
53 श्री राजेन्द्र सिंह डाबर
कराधान सहायक 54 श्री मोहन औसारी
सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी
55 श्री भावसिंह राठौर सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी
56 श्री विनय रावत
सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी
57 श्री बाबूसिंह इस्के
सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी 2834
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
(1)
(2)
(3)
58 श्रीमती संध्या सिलावट वाणिज्यिक कर अधिकारी
कराधान सहायक 59 कु. हेमलता सुनहरे
60 श्री नरेन्द्र मोरी
सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी
61 श्री विरेन्द्र मुजाल्दे
सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी
श्री राघवेन्द्र जायसवाल
62
वाणिज्यिक कर अधिकारी
वाणिज्यिक कर अधिकारी 63 सुश्री सपना पगारे
64 श्री राजेश कश्यप
वाणिज्यिक कर अधिकारी 65 श्री महेन्द्र चौहान
कराधान सहायक
निम्नस्तर
सागर संभाग
वाणिज्यिक कर अधिकारी 01 कु. वैष्णवी पटेल
कराधान सहायक 02 श्री सूर्यकान्त दुबे
कराधान सहायक 03 श्री नीलेश कुमार यादव
04
कराधान सहायक श्री गुड्डू काछी
भोपाल संभाग
कराधान सहायक 05 श्री राकेश कुमार पंवार
06 श्री नवनीत शर्मा
कराधान सहायक 07 श्री अनिल यादव
कराधान सहायक 08
कराधान सहायक श्रीमती पूनम ठाकुर
कराधान सहायक 09 कु. नीलम गुप्ता
10 श्रीमती मौसमी राय
कराधान सहायक
कराधान सहायक 11 कु. सीमा रघुवंशी
कराधान सहायक 12 कु. मौसमी नेमा
13 श्री मानसिंह लोधी
कराधान सहायक 14
कराधान सहायक श्री दीनदयाल धाकड़
कराधान सहायक 15 श्री विजय रघुवंशी
16 श्री सोमेश श्रीवास्तव
कराधान सहायक
कराधान सहायक 17 श्री नितिन कुमार विजये
18
कराधान सहायक श्री मृत्युजंय तिवारी
19
कराधान सहायक श्री सपन कुमार साहा
कराधान सहायक 20 श्री सतीश सूर्यवंशी
21 श्री अभिषेक मिश्रा
कराधान सहायक
जबलपुर संभाग
22 श्री दिगम्बर प्रसाद दशरिये वाणिज्यिक कर निरीक्षक 23
कराधान सहायक श्री दिनेश कुमार दुबे
24
कराधान सहायक श्री योगेश कुमार दुबे
कराधान सहायक 25. कु. सुनिता टेम्भरे
ग्वालियर संभाग
26 श्री वीरेन्द्र कौशल
कराधान सहायक 27 श्री वीरेन्द्र सिंह भदौरिया कराधान सहायक 28 श्री नितेश अग्रवाल
कराधान सहायक
(3)
(1)
(2)
श्री दातार सिंह इकलोदिया वाणिज्यिक कर निरीक्षक 29
30 श्री विजय श्रीवास्तव
कराधान सहायक 31 श्रीमती संपदा श्रीवास्तव कराधान सहायक 32
कराधान सहायक श्री कमलेश महदोरिया
कराधान सहायक 33 श्री वीरेन्द्र कुमार सेन
कराधान सहायक 34 कु. चितिमंजूषा गर्ग
कराधान सहायक कु. नीलम कठोरिया
35
कराधान सहायक कु. पिंकी घंघोरिया
36
37
कराधान सहायक श्रीमती बीनू तोमर
श्री अरूण प्रताप सिंह 'कराधान सहायक 38
39
कराधान सहायक श्री सनत कुमार जैन
40
कराधान सहायक श्री राजेन्द्र प्रसाद शर्मा
41 श्री पुष्पेन्द्र सिंह रावत सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी
42 श्री बृजेश कुमार प्रजापति कराधान सहायक
इंदौर संभाग
43
कराधान सहायक श्री अजय कुमार पारस
44 श्री विशाल ललावत
कराधान सहायक श्री नारायण जामोद
45
कराधान सहायक 46 श्री राकेश जैन
कराधान सहायक
कराधान सहायक 47 श्री सुदीप पाटिदार
कराधान सहायक 48 कु. सरिता रावत
कराधान सहायक कु. अनविक्षा परमार
49
कराधान सहायक कु. अलका बात्री
50
51
वाणिज्यिक कर निरीक्षक श्री सुरेन्द्र सिंह रावत
52 डॉ. प्रेम परमार
कराधान सहायक 53 श्रीमती दीपिका नवलखे कराधान सहायक 54
कराधान सहायक श्रीमती रेणुका श्रीवास्तव
कराधान सहायक 55 कु. लता जोशी
कराधान सहायक 56 कु. अनुराधा चौहान
57 श्री मोहन कोठे
कराधान सहायक 58 डॉ. अर्चना अग्रवाल
कराधान सहायक
कराधान सहायक 59 श्री दिनेश डुडवे
60 श्री कैलाश नरगाँवें
कराधान सहायक
कराधान सहायक 61 कु. सुचित्रा अचाले
कराधान सहायक 62 श्रीमती सुषमा निगंवाल
63 श्री आशीष वर्मा
कराधान सहायक
कराधान सहायक 64 श्री दिलीप कुमार गुप्ता
65 श्री प्रकाश कुमार अहिरवार कराधान सहायक 66 श्री संजय कुमार जायसवाल कराधान सहायक
कराधान सहायक 67 कु. बबीता मरमट
कराधान सहायक 68 कु. चंचल अवासिया
कराधान सहायक 69 कु. मीनाक्षी वास्कले
कराधान सहायक 70 कु. शर्मिला मीणा भाग 1 ]
2835
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(1)
(2)
(3)
कराधान सहायक 71 कु. पुष्पा निंबोरिया
72 कु. टीना निंबोरिया
कराधान सहायक 73 कु. उषा करोले
कराधान सहायक
कराधान सहायक सुश्री रीना उईके
74
कराधान सहायक 75 कु. आशा वर्मा
कराधान सहायक 76 कु. सोनू जोरम
कराधान सहायक 77 कु. रागिनी अजमेरा
कराधान सहायक 78 कु. मीनाक्षी नागेन्द्र
कराधान सहायक 79 श्री इन्दर सिंह चौहान
80 श्री विपिन चौधरी
वाणिज्यिक कर निरीक्षक 81
कराधान सहायक श्री कन्हैया लाल पाल
कराधान सहायक 82 श्री रणछोड़ भावर
कराधान सहायक 83 कु. संगीता कटारा
84 श्री मेहताब सिंह
कराधान सहायक 85 डॉ. विशाल महाजन
कराधान सहायक 86 डॉ. निलेश महाजन
कराधान सहायक
वाणिज्यिक कर निरीक्षक 87 कु. ममता परिहार
कराधान सहायक 88 श्री धनसिंह डावर
कराधान सहायक 89 श्री संजय कुमार मीणा
90 श्री प्रवीण गंगारेकर
कराधान सहायक 91
वाणिज्यिक कर निरीक्षक श्री रविन्द्र सावनेर
92 श्री संदीप नरें
वाणिज्यिक कर निरीक्षक 93 श्री हितेन्द्र काशीकर
वाणिज्यिक कर निरीक्षक
वाणिज्यिक कर निरीक्षक 94 सुश्री अनिता दुबे
95 श्री संतोष सोलंकी
कराधान सहायक 96 श्री आनंद यादव
कराधान सहायक
कराधान सहायक 97 श्री महेन्द्र सिंह खोड़िया
98 श्री लोकेश मीणा
कराधान सहायक 99 श्री जयपाल निरवाल
कराधान सहायक
कराधान सहायक 100 श्री देवीसिंह सोलंकी
101 श्री नर्मदा प्रसाद इस्केल कराधान सहायक 102 श्रीमती रंजना जैन
वाणिज्यिक कर निरीक्षक
कराधान सहायक 103 श्री बालमुकुन्द पंवार
कराधान सहायक 104 श्री संजीव कुमार वर्मा
कराधान सहायक 105 श्री सजन खत्री
106 श्री राजाराम कनौजे
कराधान सहायक
कराधान सहायक 107 कु. शकुन्तला बामनिया
कराधान सहायक 108 श्री राजेन्द्र कुमार बोरासी
कराधान सहायक 109 श्री मुकेश परमार
कराधान सहायक 110 श्री अंतिम दरड़ा
111 श्रीमती तरंग श्रीवास्तव वाणिज्यिक कर निरीक्षक
कराधान सहायक 112 सुश्री प्रियंका तोमर
कराधान सहायक 113 सुश्री सीमा चौकसे
114 श्री मुकेश मोरी
सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी
(2)
(1)
(3)
वाणिज्यिक कर अधिकारी श्री सुनील बांगर
115
116 श्री रोहिदास बालके
कराधान सहायक 117 श्री जनतसिंह निगंवाल कराधान सहायक 118 श्री मनोहर सोलंकी
कराधान सहायक 119 श्री शीतल सिंह अजनारिया कराधान सहायक
कराधान सहायक 120 श्री बृजकिशोर सिंह
कराधान सहायक 121 श्री लवकुमार ठाकुर
122
वाणिज्यिक कर निरीक्षक श्री आशीष काबरा
वाणिज्यिक कर निरीक्षक 123 श्री सुभाषकुमार बुनकर
124 श्रीमती आशा गीते
कराधान सहायक 125 श्री योगेश मेहदेले
कराधान सहायक 126 श्री दीपक अग्रवाल
कराधान सहायक 127 श्री लाखन सिंह सिसोदिया कराधान सहायक 128 श्री दीपक मांझी
कराधान सहायक
कराधान सहायक श्री राजेश कुमार जैन
129
130 श्री राजकमल चौधरी
कराधान सहायक 131 श्री विष्णु कुमार बधैरवाल कराधान सहायक 132 श्री सशील राने
कराधान सहायक
वाणिज्यिक कर निरीक्षक 133 श्री अभिषेक सिंह यादव
वाणिज्यिक कर निरीक्षक 134 श्री नाथूलाल राठौर
135 श्री अवनीश मिश्र
वाणिज्यिक कर निरीक्षक
वाणिज्यिक कर निरीक्षक 136 विक्रम सिंह मंडलोई
137 श्री अजीत भाले
कराधान सहायक
वाणिज्यिक कर निरीक्षक 138 श्री मनीष कुमार जोशी
वाणिज्यिक कर निरीक्षक 139 श्री पिरथीलाल भूमरकर
कराधान सहायक 140 श्री प्रदीप कुमार सिंह
141 श्रीमती ललिता जीना
कराधान सहायक
कराधान सहायक 142 श्री अखिलेश कुमार जैन
कराधान सहायक 143 श्री सुनिल पंवार
144 श्रीमती गुरदीप कौर कंग वाणिज्यिक कर निरीक्षक 145 कु. सोनाली बड़ोल
सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी
कराधान सहायक 146 कु. क्षमा अग्रवाल
क्र. 5353-2195- अका-विपप्र-2012.- राज्य शासन द्वारा पंचायत एवं सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों के लिये विभागीय परीक्षा , जो दिनांक 12 अप्रैल 2012 को प्रश्नपत्र लेखा-प्रथम एवं लेखा द्वितीय ( पुस्तकों सहित ) विषय में सम्पन्न हुई थी, में सम्मिलित निम्न परीक्षार्थियों को उत्तीर्ण घोषित किया जाता है:-
(2)
पदनाम (3) अनुक्रमांक परीक्षार्थी का नाम (1)
उच्चस्तर इंदौर संभाग
अधीक्षक
01 श्री आशीष कुमार सिंह
अधीक्षक
02 श्री राजेश कामदार 2836
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(1)
(2)
(3)
निम्नस्तर इंदौर संभाग
01
शिक्षक
श्री शेखर बांगड़े
हाउस मास्टर .
02 श्री ऋषि डोगरे
क्र. 5-2204- अका-विपप्र-2012 .- राज्य शासन द्वारा उत्पाद शुल्क, आबकारी विभाग के अधिकारियों के लिये विभागीय परीक्षा , जो दिनांक 9 अप्रैल 2012 को प्रश्नपत्र- विधि तथा प्रक्रिया ( पुस्तकों सहित-केवल अधिनियम ) विषय में सम्पन्न हुई थी, में सम्मिलित निम्नं परीक्षार्थी को उत्तीर्ण घोषित किया जाता है:-
अनुक्रमांक परीक्षार्थी का नाम
(1)
(2)
पदनाम (3)
उच्चस्तर
जबलपुर संभाग
01 श्री भीमराव वैद्य जिला आबकारी अधिकारी ( सश्रेय ) भोपाल , दिनांक 10 जुलाई 2012
क्र. 5532-2186-अका-विपप्र- 2012.- राज्य शासन द्वारा वन विभाग के अधिकारियों के लिये विभागीय परीक्षा, जो दिनांक 11 अप्रैल 2012 को प्रश्नपत्र- वन विधि ( बिना पुस्तकों के ) विषय में सम्पन्न हुई थी, में सम्मिलित निम्न परीक्षार्थियों को उत्तीर्ण घोषित किया जाता है:-
अनुक्रमांक
(1)
परीक्षार्थी का नाम (2)
पदनाम (3)
उज्जैन संभाग
सहायक वन संरक्षक 01 श्री संतोष कुमार नरशोरे
वन क्षेत्रपाल
02 श्री प्रदीप कछावा
03 श्री अनुपम सहाय
आई.एफ.एस.
वन क्षेत्रपाल
04 श्री दिनेश चन्द्र महाजन
इंदौर संभाग
05 श्री रमेश चंद्र वर्मा
सहायक वन संरक्षक
सहायक वन संरक्षक 06 श्री विजय कुमार रैना
सहायक वन संरक्षक 07 श्री कैलाश भदकारे
08
सहायक वन संरक्षक श्री रामचन्द्र गेहलोत
09
वन क्षेत्रपाल
श्री गोपाल सिंह मुवेल
10 श्रीमती रेखा काले
वन क्षेत्रपाल
रीवा संभाग
11
वन क्षेत्रपाल
श्री आर.एस. कुशवाह
12 श्री आर. के. सिंह
वन क्षेत्रपाल
वन क्षेत्रपाल
13 श्री सुन्दर दास सोनवानी
14 श्री मितेन्द्र कुमार चिचखेड़े वन क्षेत्रपाल
वन क्षेत्रपाल
15 श्री गणेश कुमार उईके
(2)
(1)
(3)
शहडोल संभाग
सहायक वन संरक्षक 16 श्री ओ. पी. गोस्वामी
सहायक वन संरक्षक 17 श्री राहुल मिश्रा
सहायक वन संरक्षक 18 श्री सुरेश बरोले
जबलपुर संभाग
वन क्षेत्रपाल
19 श्री एस. के. मिश्रा
सहायक वन संरक्षक 20 श्री एम. बी . एस. चौहान
सहायक वन संरक्षक 21 श्री तेजमान पाण्डेय
सहायक वन संरक्षक 22 श्री एम. पी. ताम्रकार
वन क्षेत्रपाल
23 श्री राजेन्द्र सिंह चौहान
वन क्षेत्रपाल
24 श्री एम. के. खरे
वन क्षेत्रपाल
25 श्री अमित सोनी
26 श्री विक्रम सिंह सोलंकी सहायक वन संरक्षक
वन क्षेत्रपाल
27 श्री विनय कुमार मेश्राम
वन क्षेत्रपाल
28 श्री मनोज कुमार सोलंकी
वन क्षेत्रपाल
29 श्री संदीप कुमार गौतम
वन क्षेत्रपाल
30 श्री वीरेन्द्र सिंह जामोर
वन क्षेत्रपाल
31 श्री के. एल. कावरे
ग्वालियर संभाग
वन क्षेत्रपाल
32 श्री सुरेश कुमार पाराशर
33 श्री अनुप कुमार श्रीवास्तव वन क्षेत्रपाल
वन क्षेत्रपाल
34 श्री मनोज कुमार जाटव
वन क्षेत्रपाल
35 श्री सुनील कुमार
वन क्षेत्रपाल
36 श्री दशरथ अखण्ड
वन क्षेत्रपाल
37 श्री ललित कुमार पाण्डेय
वन क्षेत्रपाल
38 श्री अनूप कुमार पाराशर
39 श्री ओंकार सिंह चौहान सहायक वन संरक्षक
भोपाल संभाग
सहायक वन संरक्षक 40 श्री विजेन्द्र सिंह यादव
41 श्री ब्रम्ह प्रताप सिंह
सहायक वन संरक्षक
वन क्षेत्रपाल
42 श्री डी. पी . गुप्ता
वन क्षेत्रपाल
43 श्री वीरेन्द्र सिंह यादव
वन क्षेत्रपाल
44 श्री एस. के. उदयपुरे
होशंगाबाद संभाग
वन क्षेत्रपाल
45 श्री मुकेश कुमार जामोर
सहायक वन संरक्षक 46 श्री प्रशांत कुमार सिंह
वन क्षेत्रपाल
47 श्री मनेन्द्र सिंह जयंत
आई.एफ.एस.
48 श्री मधु बी. राज
वन क्षेत्रपाल.
49 श्री नान सिंह मेहता
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, अनुराग श्रीवास्तव, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी.
भाग 1 ]
मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल, भोपाल
भोपाल, दिनांक 10 जुलाई 2012
क्र. 769.- मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार चिकित्सा सहायता योजना-2004 की कंडिका 2.6 सहपठित यथा संशोधित कंडिका 5.6 के प्रावधानानुसार मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल द्वारा अनुसूची- एक में प्राधिकृत अस्पतालों की अनुसूची में निम्नांकित अस्पताल/नर्सिंग होम्स को एतद्वारा मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशन की दिनांक से आगामी आदेश तक जोड़ा जाता है: -
" अनुसूची- एक " (देखें योजना की कंडिका 2.6 एवं 5.6 ) प्राधिकृत अस्पताल की अनुसूची अशासकीय अस्पताल
1. हीरावती हॉस्पिटल, लैब एण्ड रिसर्च सेन्टर , गनियारी , केशव नगर कालोनी , जटाशंकर मार्ग , बैढ़न , जिला-सिंगरौली.
प्रभात दुबे, सचिव.
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग " निर्वाचन भवन "
58 , अरेरा हिल्स, भोपाल , मध्यप्रदेश- 462011
आदेश
भोपाल, दिनांक 10 जुलाई 2012
क्र. एफ. 67-219-10-तीन- 1200.- मध्यप्रदेश नगरपालिक अधिनियम, 1956 की धारा 14 - क के अनुसार महापौर के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नामनिर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिये प्राधिकृत किया हो, पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा . मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम , 1956 की धारा 14 - ख के अनुसार महापौर का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा.
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी " निर्वाचन व्यय ( लेखा संधारण और प्रस्तुति ) आदेश, 1997 " " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) ", दिनांक 6 जून 1997 में प्रकाशित हुआ है . उसमें यह निर्दिष्ट किया
2837
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.
माह दिसम्बर 2009 में सम्पन्न हुए नगरपालिक निगम, कटनी जिला कटनी के आम निर्वाचन में सुश्री सुकमन राजू मास्टर महापौर पद की अभ्यर्थी थीं. नगरपालिक निगम, कटनी जिला कटनी के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 15 दिसम्बर 2009 को घोषित हुआ. मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम, अधिनियम, 1956 की धारा 14 - ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 14 जनवरी 2010 तक, इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , कटनी के पास दाखिल किया जाना था, किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, कटनी के पत्र क्र. 260- ए- व्यय लेखा प्रभारी ( स्था. निर्वा. अधि. ) दिनांक 22 जनवरी 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार सुश्री सुकमन राजू मास्टर द्वारा विहित समयावधि में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.
विहित समयावधि में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत नहीं करने का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर आयोग द्वारा दिनांक 10 फरवरी 2010 को अभ्यर्थी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. उक्त नोटिस कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , कटनी के माध्यम से दिनांक 11 मार्च 2010 को तामील करवाया गया. कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी से जवाब ( लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था. नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है , उनके विरुद्ध एक पक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा.
सुश्री सुकमन राजू मास्टर को नोटिस दिनांक 11 मार्च, 2010 को तामील हो गया था . अतः उनको दिनांक 26 मार्च , 2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था. अभ्यर्थी द्वारा दिनांक 30 मार्च, 2010 को अभ्यावेदन एवं व्यय लेखा रजिस्टर प्रस्तुत किया गया. आयोग द्वारा अभ्यावेदन के संबंध में अभिमत चाहे जाने पर कलेक्टर, कटनी ने अपने पत्र दिनांक 27 अप्रैल, 2012 में लेख किया कि अभ्यर्थी सुश्री सुकमन राजू मास्टर द्वारा अभ्यावेदन के साथ प्रस्तुत व्हाउचर एवं निर्वाचन व्यय लेखा रजिस्टर में कमियां पाई गई हैं . उनके द्वारा मूल व्हाउचर/देयक प्रस्तुत नहीं किये गये हैं, जिन्हें निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा अभिप्रमाणित भी नहीं किया गया है . 50/- रुपये के व्हाउचर की छायाप्रति नहीं है . व्हाउचर क्रमांक 02 का निर्वाचन व्यय लेखा रजिस्टर के दिन , प्रति दिन का लेखा प्रोफार्मा " क " एवं कुल व्यय का सार विवरण प्रोफार्मा " ख " से मिलान नहीं होता है . निर्वाचन व्यय लेखा रजिस्टर के कालम क्रमांक 7 में व्हाउचर की क्रम संख्या तथा कालम क्रमांक 8 में देयक की क्रम संख्या अंकित नहीं हैं.
2838
विहित समयावधि में लेखे प्रस्तुत न करने का अभ्यावेदन में उल्लिखित कारण के संबंध में कलेक्टर कटनी ने अभिमत दिया है कि अभ्यर्थी यदि अनपढ़ है तो निर्वाचन अभिकर्ता नियुक्त कर निर्वाचन व्यय लेखा संधारित कर सकती थीं. अभ्यर्थी द्वारा मूल व्हाउचर प्रस्तुत करने व कमियों की पूर्ति कराने के उपरांत ही निर्वाचन व्यय लेखा स्वीकार्य योग्य है . कलेक्टर, कटनी से उक्त जानकारी प्राप्त होने पर विचारोपरांत आयोग द्वारा दिनांक 22 मई 2012 को अभ्यर्थी को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक 26 जून 2012 को उपस्थित होने हेतु सूचना- पत्र लिखा गया. व्यक्तिगत सुनवाई हेतु जारी सूचना- पत्र की तामीली कलेक्टर, कटनी द्वारा दिनांक 07 जून 2012 को कराई गई, किन्तु अभ्यर्थी उपस्थित नहीं हुईं.
उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं. अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है.
अतः, मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम , 1956 की धारा 14 - ग के उपबंधों के अन्तर्गत सुश्री सुकमन राजू मास्टर को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा नगरपालिक निगम , कटनी जिला कटनी का पार्षद या महापौर होने के लिये इस आदेश की तारीख से 05 वर्ष ( पांच वर्ष ) की कालावधि के लिये निरर्हित ( अयोग्य) घोषित किया जाता है .
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,
हस्ता./-
( सुभाष जैन )
सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
आदेश
भोपाल, दिनांक 10 जुलाई 2012
क्र. एफ. 67-261-10- तीन- 1202.- मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने , नामनिर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिये प्राधिकृत किया हो , पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार अध्यक्ष
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा.
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी " निर्वाचन व्यय ( लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश, 1997 " " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) " , दिनांक 6 जून 1997 में प्रकाशित हुआ है. उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.
माह दिसम्बर 2009 में सम्पन्न हुए नगर पंचायत कोठी, जिला सतना के आम निर्वाचन में सुश्री सुशीला गुप्ता, अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थीं. नगर पंचायत कोठी , जिला सतना के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 17 दिसम्बर 2009 को घोषित हुआ. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 16 जनवरी 2010 तक, किन्तु 16 जनवरी 2010 एवं 17 जनवरी 2010 का सार्वजनिक अवकाश होने के कारण 18 जनवरी 2010 तक इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , सतना के पास दाखिल किया जाना था, किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , सतना के पत्र क्र. 594- स्था. निर्वा./न. पा./09-- 10, दिनांक 26 फरवरी , 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार सुश्री सुशीला गुप्ता द्वारा विहित समय में किन्तु अपूर्ण निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल किया गया.
विहित समयावधि में, किन्तु अपूर्ण निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत करने का प्रतिवेदन प्राप्त होने पर आयोग द्वारा दिनांक 26 मार्च 2010 को कलेक्टर, सतना को निर्देशित किया गया कि वे जिलास्तर पर नोटिस जारी कर अभ्यर्थी से लेखे पूर्ण करवाएं. कलेक्टर , सतना ने दिनांक 09 अप्रैल 2010 को नोटिस जारी कर तीन दिवस में लेखे पूर्ण किये जाने हेतु अभ्यर्थी को सूचना प्रेषित की. कलेक्टर, सतना ने पत्र दिनांक 26 मई 2010 में लेख किया कि अभ्यर्थी द्वारा आज दिनांक तक व्यय लेखा पूर्ण नहीं किया . कलेक्टर से उक्त जानकारी प्राप्त होने पर आयोग द्वारा दिनांक 18 जून 2010 को अभ्यर्थी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया.
उक्त नोटिस कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , सतना के माध्यम से दिनांक 25 जुलाई 2010 को तामील करवाया गया. कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी से जवाब ( लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था. नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्रस्तुत न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है , उनके विरुद्ध एक पक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा .
सुश्री सुशीला गुप्ता को नोटिस दिनांक 25 जुलाई, 2010 को तामील हो गया था. अतः उनको दिनांक 09 अगस्त, 2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था. किन्तु अभ्यर्थी द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया. कलेक्टर , सतना ने अपने पत्र दिनांक 16 अप्रैल 2012 में लेख किया कि अभ्यर्थी सुश्री सुशीला गुप्ता द्वारा अपूर्ण भाग 1 ]
2839
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
लेखों को पूर्ण करने व इस परिप्रेक्ष्य में किसी प्रकार का प्रतिवेदन प्रस्तुत करने हेतु इस कार्यालय में आज पर्यन्त तक उपस्थित नहीं हुई. कलेक्टर सतना से उक्त जानकारी प्राप्त होने पर विचारोपरांत आयोग द्वारा दिनांक 22 मई 2012 को अभ्यर्थी को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक 26 जून 2012 को उपस्थित होने हेतु सूचना- पत्र लिखा गया. व्यक्तिगत सुनवाई हेतु जारी सूचना- पत्र की तामीली कलेक्टर सतना द्वारा दिनांक 07 जून 2012 को कराई गई, किन्तु अभ्यर्थी उपस्थित नहीं हुईं.
उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं. अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है .
अतः , मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - ग के उपबंधों के अन्तर्गत सुश्री सुशीला गुप्ता को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा नगर पंचायत कोठी, जिला सतना का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिये इस आदेश की तारीख से 05 वर्ष ( पांच वर्ष ) की कालावधि के लिये निरर्हित ( अयोग्य ) घोषित किया जाता है.
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./-
( सुभाष जैन )
सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
आदेश
भोपाल , दिनांक 10 जुलाई 2012
क्र. एफ. 67-270-10- तीन- 1204.- मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिये प्राधिकृत किया हो, पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा .
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी " निर्वाचन व्यय ( लेखा संधारण और प्रस्तुति ) आदेश , 1997 " " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) ", दिनांक 6 जून 1997 में प्रकाशित हुआ है. उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा .
माह जनवरी 2010 में सम्पन्न हुए ( नगर पंचायत ) नगर 'परिषद शमशाबाद , जिला विदिशा के आम निर्वाचन में सुश्री आशा देवी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थीं. ( नगर पंचायत ) नगर परिषद, शमशाबाद, जिला विदिशा के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 13 जनवरी 2010 को घोषित हुआ. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 12 फरवरी 2010 तक, इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, विदिशा के पास दाखिल किया जाना था, किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , विदिशा के पत्र क्र. 565 - स्था. निर्वा./ 10, दिनांक 20 अप्रैल , 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार सुश्री आशा देवी द्वारा विहित समय में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.
विहित समयावधि में , निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत न करने का प्रतिवेदन प्राप्त होन पर सुश्री आशा देवी को कारण बताओ नोटिस दिनांक 05 मई 2010 जारी कर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी विदिशा के माध्यम से दिनांक 28 मई , 2010 को तामील कराया गया. कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी से जवाब ( लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था . नोटिस से सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है , उनके विरुद्ध एक पक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा .
सुश्री आशा देवी को नोटिस दिनांक 28 मई, 2010 को तामील कराया गया. अतः उनको दिनांक 12 जून, 2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था . किन्तु उनके द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया. तामीली पश्चात की जानकारी चाहे जाने पर कलेक्टर विदिशा ने अपने पत्र दिनांक 25 अप्रैल , 2012 में लेख किया कि सुश्री आशा देवी द्वारा कोई अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया है. कलेक्टर विदिशा से उक्त अभिमत प्राप्त होने पर आयोग द्वारा दिनांक 15 मई, 2012 को अभ्यर्थी को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक 15 जून, 2012 को उपस्थित होने हेतु पत्र लिखा गया. व्यक्तिगत सुनवाई हेतु जारी सूचना - पत्र की तामीली कलेक्टर विदिशा द्वारा दिनांक 14 जून 2012 को कराई गई , किन्तु अभ्यर्थी उपस्थित नहीं हुई.
उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं . अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है.
अतः , मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ग के उपबंधों के अन्तर्गत सुश्री आशा देवी को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा ( नगर पंचायत ) नगर परिषद शमशाबाद जिला विदिशा का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिये इस आदेश की तारीख से 05 वर्ष ( पांच वर्ष ) की कालावधि के लिये निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है .
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./-
( सुभाष जैन ) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
2840
आदेश
भोपाल , दिनांक 10 जुलाई 2012
क्र. एफ. 67-270-10-तीन- 1205.- मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नामनिर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिये प्राधिकृत किया हो, पृथक् और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा.
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी " निर्वाचन व्यय ( लेखा संधारण और प्रस्तुति ) आदेश , 1997 " " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण) ", दिनांक 6 जून 1997 में प्रकाशित हुआ है. उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा.
माह जनवरी 2010 में सम्पन्न हुए ( नगर पंचायत ) नगर परिषद शमशाबाद , जिला विदिशा के आम निर्वाचन में सुश्री रूपाली अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थीं. ( नगर पंचायत ) नगर परिषद, शमशाबाद, जिला विदिशा के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 13 जनवरी 2010 को घोषित हुआ. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 12 फरवरी 2010 तक, इन्हें अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, विदिशा के पास दाखिल किया जाना था, किन्तु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, विदिशा के पत्र क्र. 565- स्था. निर्वा./ 10 , दिनांक 20 अप्रैल , 2010 के द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार सुश्री रूपाली द्वारा विहित समय में निर्वाचन व्ययों का लेखा दाखिल नहीं किया गया.
विहित समयावधि में , निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत न करने का प्रतिवेदन प्राप्त होन पर सुश्री रूपाली को कारण बताओ नोटिस दिनांक 05 मई 2010 जारी कर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी विदिशा के माध्यम से दिनांक 28 मई, 2010 को तामील कराया गया. कारण बताओ नोटिस में अभ्यर्थी से जवाब ( लिखित अभ्यावेदन ) इस कारण बताओ सूचना के प्राप्त होने के 15 दिन के अन्दर चाहा गया था. नोटिस में सभी वैधानिक स्थिति बताते हुए यह भी अंकित किया गया था कि 15 दिन के अन्दर उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में यह माना जाकर कि उन्हें इस संबंध में कुछ नहीं कहना है, उनके विरुद्ध एक पक्षीय आदेश पारित कर दिया जायेगा.
सुश्री रूपाली को नोटिस दिनांक 28 मई, 2010 को तामील कराया गया. अतः उनको दिनांक 12 जून, 2010 तक अभ्यावेदन प्रस्तुत करना था. किन्तु उनके द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया. तामीली पश्चात् की जानकारी चाहे जाने पर कलेक्टर विदिशा ने अपने पत्र दिनांक 25 अप्रैल , 2012 में लेख किया कि सुश्री रूपाली द्वारा कोई अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं किया गया है . कलेक्टर विदिशा से उक्त अभिमत प्राप्त होने पर आयोग द्वारा दिनांक 15 मई,
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
2012 को अभ्यर्थी को निर्वाचन व्यय लेखों से संबंधित समस्त दस्तावेज लेकर माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष में दिनांक 15 जून , 2012 को उपस्थित होने हेतु पत्र लिखा गया . व्यक्तिगत सुनवाई हेतु जारी सूचना- पत्र की तामीली कलेक्टर विदिशा द्वारा दिनांक 14 जून 2012 को कराई गई. अभ्यर्थी की ओर से उनके पति श्री राजेन्द्र साहू उपस्थित हुए. सुनवाई में उन्होंने लेखे प्रस्तुत न किये जाने का कारण अनिभिज्ञता बतलाते हुए लेखे का संधारण नहीं किया जाना बताया.
उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी द्वारा नियत समयावधि में निर्वाचन व्यय लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया एवं पक्ष समर्थन में कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं . अतः आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास निर्वाचन व्यय लेखा निर्धारित समयावधि में प्रस्तुत करने में असफल रहने का कोई पर्याप्त एवं न्यायोचित कारण नहीं है .
अतः , मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32 - ग के उपबंधों के अन्तर्गत सुश्री रूपाली को इस प्रकार चुने जाने के लिये तथा ( नगर पंचायत ) नगर परिषद शमशाबाद जिला विदिशा ) का पार्षद या अध्यक्ष होने के लिये इस आदेश की तारीख से 05 वर्ष ( पांच वर्ष ) की कालावधि के लिये निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है.
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- ( सुभाष जैन ) सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
कार्यालय , कुलाधिपति, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय , जबलपुर आदेश राजभवन, भोपाल , दिनांक 11 जुलाई 2012 क्र. एफ- 1-1-12 - रा.स. यू.ए. 1-1052.-प्रो. गौतम कल्लू, कुलपति, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय , जबलपुर का कुलपति पद का कार्यकाल दिनांक 11 जुलाई, 2012 को पूर्ण हो रहा है. कुलपति पद के चयन की प्रक्रिया अभी जारी है .
2. अतः , जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 1963 की धारा 15 की उपधारा ( 8 ) के प्रावधानांतर्गत मैं , राम नरेश यादव , कुलाधिपति, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय , जबलपुर, एतद्वारा डॉ. एन.एन. पाठक, प्राध्यापक, वानिकी, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय , जबलपुर को दिनांक 12 जुलाई 2012 से नियमित कुलपति की नियुक्ति होने तक कुलपति के पद का कार्य संपादित करने के लिए नामनिर्देशित करता हूं.
राम नरेश यादव , कुलाधिपति.
भाग 1 ]
2841
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
राज्य शासन के आदेश
राजस्व विभाग
कार्यालय कलेक्टर , जिला दतिया, मध्यप्रदेश एवं पदेन अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग
दतिया, दिनांक 22 जून 2012
क्र. 7- अ- 82-2011-12.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-
अनुसूची
भूमि का वर्णन
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन जिला तहसील/तालुक नगर/ग्राम
धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में)
(2)
(1)
(3)
(4)
(6)
(5)
दतिया दतिया
7.12
बड़ौनकला
कार्यपालन यंत्री, सिंध परियोजना आर.बी.सी. संभाग करैरा , जिला शिवपुरी (म.प्र. ) .
सिंध परियोजना आर.बी.सी. (महुअर नदी पश्चात ) की डी-9 शाखा नहर की एल. एम. - 1 , एल.एम. - 5 एवं एल.एम. - 5 की उपशाखा आर-1 एवं एल-2 के निर्माण हेतु.
भूमि के नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, भू-अर्जन अधिकारी कलेक्ट्रेट , दतिया के कार्यालय में किया जा सकता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, जी.पी. कबीरपंथी , कलेक्टर एवं पदेन अपर सचिव.
कार्यालय , कलेक्टर, जिला बुरहानपुर , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग
बुरहानपुर, दिनांक 26 जून 2012
क्र. क-वाचक- भू-अर्जन- 2012-प्र.क्र.अ-82- वर्ष 2011-12 - चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इसमें संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दर्शाये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है 2842
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है : -
भूमि का विवरण
जिला
तहसील
ग्राम
क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1) (2) (3)
(4) नेपानगर
9.02 बुरहानपुर
रहमानपुरा
गोराडिया
5.74
सिंधखेडा
3.26
0.24
नावरा
0.19
पांचईमली
18.45
योग ..
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का विवरण धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6)
(5)
भू-अर्जन अधिकारी , नेपानगर रहमानपुरा तालाब योजना के अतिशेष कार्य हेतु भू-अर्जन.
अर्जन की जाने वाली भूमि से संबंधित नक्शा ( प्लान ) अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू-अर्जन अधिकारी , नेपानगर के कार्यालय में देखा जा सकता है .
क्र. क-वाचक - भू- अर्जन- 2012 - प्र.क्र. अ- 82- वर्ष 2011-12- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इसमें संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दर्शाये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्तभूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है :-
भूमि का विवरण
जिला
तहसील
ग्राम
क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (1)
(2)
(3)
(4) नेपानगर
1.70 बुरहानपुर
हैदरपुर
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का विवरण धारा 4 (2 ) के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6)
कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग बुरहानपुर .
हैदरपुर तालाब में रिसाव के कारण डूब में आने वाली भूमि का भू-अर्जन.
अर्जन की जाने वाली भूमि से संबंधित नक्शा ( प्लान ) अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू-अर्जन अधिकारी , नेपानगर के कार्यालय में देखा जा सकता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार , आशुतोष अवस्थी, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
भाग 1 ]
2843
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
कार्यालय , कलेक्टर, जिला मण्डला, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग
मण्डला, दिनांक 29 जून 2012
क्र. भू- अर्जन-01 ( अ-82 ) -2009-10.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक , सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है : -
जिला तहसील
भूमि का वर्णन ग्राम एवं प.ह.नं.
(1)
(3)
(2)
भूमि का लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (4) मण्डला
0.24 नारायणगंज लावरमुडिया मा. प.ह.नं. 12
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6)
लावर जलाशय डूब क्षेत्र हेतु कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग, निवास .
भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , कार्यालय , कलेक्टर, मण्डला में किया जा सकता है.
क्र. भू- अर्जन-04 ( अ-82 )-2010-11.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है : -
भूमि का वर्णन
तहसील
जिला
ग्राम एवं प.ह.नं.
भूमि का लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (1) (2)
(3)
(4) मण्डला
112.16 नारायणगंज
टाटीघाट ह.नं. 23 26.40 85.76 64.23
चुटका ह.नं. 23 कुंडा ह.नं. 22 मानेगांव ह.नं. 24 कुल योग . 288.55
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6)
चुटका परमाणु विद्युत संयंत्र स्थापित करने हेतु.
परियोजना प्रबंधक, चुटका परमाणु विद्युत परियोजना, सिविल लाईन , पचपेढी, जबलपुर.
आवासीय कालोनी हेतु.
भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , कार्यालय , कलेक्टर, मण्डला में किया जा सकता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, स्वाति मीणा , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
2844
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
कार्यालय , कलेक्टर, जिला झाबुआ, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग
झाबुआ, दिनांक 2 जुलाई 2012
क्र. 2029 - भू- अर्जन- रीडर- 2012 - भू-अर्जन- 04-अ-82-11-12.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. अतः भू- अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, सभी संबंधित व्यक्तियों को, इसके द्वारा , इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-
भूमि का वर्णन
जिला
नगर/ग्राम
तहसील/ जिला
क्षेत्रफल (हेक्टर में ) (1) (2)
(4)
(3)
15.53 झाबुआ
नाहरपुरा
झाबुआ/ झाबुआ
( 2) भूमि का नक्शा ( प्लान ) कलेक्टर कार्यालय, झाबुआ में देखा जा सकता है .
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन
का वर्णन द्वारा प्राधिकृत अधिकारी धारा 4 की उपधारा ( 2 )
(5)
(6)
कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग क्र. 1 , झाबुआ.
भामची सिंचाई तालाब निर्माण हेतु.
( 3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग क्रमांक -1 झाबुआ तथा अनुविभागीय अधिकारी , जल संसाधन उपसंभाग , रानापुर में किया जा सकता है .
क्र. 2027 - भू- अर्जन- रीडर - 2012 - भू-अर्जन- 04-अ-82-11-12.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजनं के लिए आवश्यकता है. अतः भू- अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार , सभी संबंधित व्यक्तियों को, इसके द्वारा , इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-
अनुसूची
भूमि का वर्णन
जिला
नगर/ग्राम
तहसील/ जिला
क्षेत्रफल (हेक्टर में) (1) (2)
(3)
(4)
गलती
2.39 झाबुआ रानापुर/ झाबुआ
( 2 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) कलेक्टर कार्यालय, झाबुआ में देखा जा सकता है.
सार्वजनिक प्रयोजन
का वर्णन धारा 4 की उपधारा (2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
(6)
(5)
भामची सिंचाई तालाब निर्माण हेतु.
कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग क्र. 1 , झाबुआ.
(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग क्रमांक-1 झाबुआ तथा अनुविभागीय अधिकारी , जल संसाधन उपसंभाग , रानापुर में किया जा सकता है .
क्र. 2031 - भू- अर्जन- रीडर- 2012 - भू-अर्जन- 06-अ-82-11-12.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, सभी संबंधित व्यक्तियों को, इसके द्वारा, इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त भाग 1 ]
2845
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है: --
भूमि का वर्णन
जिला
नगर/ग्राम
तहसील/ जिला
क्षेत्रफल (हेक्टर में) (1)
(3)
(2)
(4)
खेडा
8.88 झाबुआ रानापुर/ झाबुआ
(2 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) कलेक्टर कार्यालय, झाबुआ में देखा जा सकता है .
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन कावर्णन धारा 4 की उपधारा ( 2) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6)
भामची सिंचाई तालाब निर्माण हेतु.
कार्यपालन यंत्री , जल संसाधन संभाग क्र. 1 , झाबुआ.
( 3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग क्रमांक -1 झाबुआ तथा अनुविभागीय अधिकारी, जल संसाधन उपसंभाग, रानापुर में किया जा सकता है .
क्र. 2024 - भू- अर्जन- रीडर - 2012 - भू-अर्जन- 07-अ- 82-11-12.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. अतः भू- अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, सभी संबंधित व्यक्तियों को, इसके द्वारा, इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-
अनुसूची
भूमि का वर्णन
जिला
नगर/ग्राम
तहसील/ जिला
क्षेत्रफल (हेक्टर में) (2)
(3)
(1)
(4)
5.76 झाबुआ
सुरडिया
रानापुर/ झाबुआ
( 2 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) कलेक्टर कार्यालय , झाबुआ में देखा जा सकता है .
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6)
कार्यपालन यंत्री , जल संसाधन संभाग क्र. 1 , झाबुआ.
भामची सिंचाई तालाब निर्माण हेतु.
(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग क्रमांक -1 झाबुआ तथा अनुविभागीय अधिकारी , जल संसाधन उपसंभाग, रानापुर में किया जा सकता है .
झाबुआ, दिनांक 11 जुलाई 2012
पत्र क्र. 2480 - भू-अर्जन-2012 - रा. प्र. क्र.अ-82-2011-12. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उल्लेखित किये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, सभी संबंधित व्यक्तियों को, इसके द्वारा , इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है : ---
अनुसूची
भूमि का वर्णन
तहसील
ग्राम
जिला
क्षेत्रफल भूमि (हेक्टर में) (1)
(2)
(4)
(3)
पेटलावद गेहण्डी
झाबुआ
1.38 1.38
योग ..
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 की उपधारा (2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
(6)
(5)
माही परियोजना की करनगढ़ माईनर नहर निर्माण हेतु.
कार्यपालन यंत्री, माही परियोजना मुख्य बांध संभाग पेटलावद, जिला-झाबुआ ( म.प्र. ).
( 2 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू-अर्जन अधिकारी , पेटलावद के कार्यालय में देखा जा सकता है.
2846
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
पत्र क्र. 2482- भू- अर्जन- 2012- रा. प्र. क्र.अ-82-2011-12. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उल्लेखित किये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, सभी संबंधित व्यक्तियों को, इसके द्वारा , इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-
अनुसूची
भूमिका वर्णन
जिला तहसील
ग्राम
क्षेत्रफल भूमि (हेक्टर में) (1)
(2)
(3)
(4)
गेहण्डी
पेटलावद
झाबुआ
4.54 योग .. 4.54
सार्वजनिक प्रयोजन कावर्णन
धारा 4 की उपधारा ( 2) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
(6)
(5)
माही परियोजना की बडलीपाड़ा सबमाईनर-1 निर्माण हेतु.
कार्यपालन यंत्री, माही परियोजना मुख्य बांध संभाग पेटलावद, जिला-झाबुआ ( म.प्र. ) .
(2 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू- अर्जन अधिकारी , पेटलावद के कार्यालय में देखा जा सकता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, जयश्री कियावत , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव, कार्यालय , कलेक्टर, जिला गुना, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग
गुना, दिनांक 3 जुलाई 2012
प्र. क्र. 13 - अ- 82--2011-12-413.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है : -
अनुसूची
जिला तहसील
भूमि का वर्णन ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में) (2) (3)
(1)
सर्वे नम्बर रकबा (हेक्टर में ) (4)
7.397 गुना
गुना पदमनखेडी कुल किता-21
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6)
रीछई लघु सिंचाई परियोजना अंतर्गत तालाब निर्माण.
संभाग, गुना. कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन
(2) भूमि का नक्शा ( प्लान ) भूमि सर्वे नंबरान का विस्तृत विवरण अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू- अर्जन अधिकारी , गुना के न्यायालय में देखा जा सकता है.
(3) इस संबंध में कोई आपत्ति हो तो अधिसूचना प्रकाशन तिथि के 30 दिवस के भीतर न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी , गुना के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है .
भाग 1 ]
2847
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
प्र. क्र. 14 - अ- 82-2011-12-414.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में , उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है :-
अनुसूची
जिला तहसील
भूमि का वर्णन ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में.)
सर्वे नम्बर रकबा (हेक्टर में)
(1) (2) (3)
(4)
म्याना
11.234
गुना
गुना
कुल किता -18
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 4 की उपधारा ( 2) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
(6)
(5)
रीछई लघु सिंचाई परियोजना अंतर्गत तालाब निर्माण.
संभाग, गुना. कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन
(2) भूमि का नक्शा (प्लान ) भूमि सर्वे नंबरान का विस्तृत विवरण अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू- अर्जन अधिकारी , गुना के न्यायालय में देखा जा सकता है .
(3) इस संबंध में कोई आपत्ति हो तो अधिसूचना प्रकाशन तिथि के 30 दिवस के भीतर न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी , गुना के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है.
गुना, दिनांक 4 जुलाई 2012
प्र. क्र. 11 - अ - 82-2011-12-481.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है . अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में , उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है : -
अनुसूची
भूमि का वर्णन
जिला तहसील ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में) (1) (2) (3)
सर्वे नम्बर रकबा (हेक्टर में ) (4)
भदौरा
14.100 गुना
गुना
कुल किता-24
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6)
मगरधा लघु सिंचाई परियोजना अंतर्गत तालाब निर्माण.
कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , गुना.
(2) भूमि का नक्शा ( प्लान ) भूमि सर्वे नंबरान का विस्तृत विवरण अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू- अर्जन अधिकारी , गुना के न्यायालय में देखा जा सकता है .
(3) इस संबंध में कोई आपत्ति हो तो अधिसूचना प्रकाशन तिथि के 30 दिवस के भीतर न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी, गुना के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है.
2848
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
प्र . क्र. 12- अ- 82-2011-12-466. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में, उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है :-
अनुसूची
भूमि का वर्णन
तहसील ग्राम
जिला
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में) सर्वे नम्बर रकबा (हेक्टर में)
(1) (2) (3)
(4)
लहरकोता
गुना
गुना
कुल किता -29 23.239
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6)
मगरधा लघु सिंचाई परियोजना अंतर्गत तालाब निर्माण.
कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , गुना.
(2) भूमि का नक्शा ( प्लान ) भूमि सर्वे नंबरान का विस्तृत विवरण अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू- अर्जन अधिकारी , गुना के न्यायालय में देखा जा सकता है.
(3) इस संबंध में कोई आपत्ति हो तो अधिसूचना प्रकाशन तिथि के 30 दिवस के भीतर न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी , गुना के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है.
प्र. क्र. 15- अ- 82-2011-12-465.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार , इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में में, उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है :-
अनुसूची
भूमि का वर्णन
जिला तहसील
ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में)
सर्वे नम्बर रकबा (हेक्टर में )
(1) (2) (3)
(4)
8.199
गुना
गुना
कुल किता-25
रीछई (रिछाई)
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
(6)
(5)
रीछई लघु सिंचाई परियोजना अंतर्गत तालाब निर्माण.
कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग, गुना.
(2) भूमि का नक्शा ( प्लान ) भूमि सर्वे नंबरान का विस्तृत विवरण अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू- अर्जन अधिकारी , गुना के न्यायालय में देखा जा सकता है.
(3) इस संबंध में कोई आपत्ति हो तो अधिसूचना प्रकाशन तिथि के 30 दिवस के भीतर न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी , गुना के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है .
भाग 1 ]
2849
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
प्र. क्र. 16- अ-82-2011-12-482.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में , उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है : -
भूमि का वर्णन
जिला
ग्राम
तहसील
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में)
सर्वे नम्बर
रकबा (हेक्टर में )
(1) (2) (3)
(4) गुना
63.794
डुंगासरा
गुना
कुल किता-67 (2)
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन
का वर्णन धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
(6)
(5)
मगरधा लघु सिंचाई परियोजना अंतर्गत तालाब निर्माण.
संभाग, गुना. कार्यपालन यंत्री , जल संसाधन
भूमि का नक्शा ( प्लान ) भूमि सर्वे नंबरान का विस्तृत विवरण अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू- अर्जन अधिकारी, गुना के न्यायालय में देखा जा सकता है.
(3) इस संबंध में कोई आपत्ति हो तो अधिसूचना प्रकाशन तिथि के 30 दिवस के भीतर न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी , गुना के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, संदीप यादव , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय, कलेक्टर, जिला शाजापुर, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग
शाजापुर , दिनांक 4 जुलाई 2012
क्र. भू- अर्जन - 12-231.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार एतद्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है :-
भूमि का वर्णन
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (1)
(2)
(3)
(4)
सिरोलिया
0.627 शाजापुर शाजापुर
निजी भूमि
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन लखुंदर बांध की बायीं तट नहर में ली गई भूमि.
विभाग , शाजापुर.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) आदि का निरीक्षण , अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) शाजापुर/ भू-अर्जन अधिकारी , शाजापुर के कार्यालय में किया जा सकता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, प्रमोद गुप्ता कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
2850
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
कार्यालय, कलेक्टर, जिला सीधी, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग
रीवा, दिनांक 4 जुलाई 2012
क्र. 459 - भू-अर्जन-12.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है : -
भूमि का विवरण
जिला तहसील
नगर/ग्राम लगभग क्षेत्रफल .(हेक्टेयर में) (1) (2)
(3)
(4) सीधी मझौली
39.65
कोटरो (अति. भूमि)
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6)
महान बांध के डूब क्षेत्र हेतु.
कार्यपालन यंत्री, महान परियोजना संभाग , सीधी.
भूमियों का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , कलेक्टर , सीधी के कार्यालय में किया जा सकता है.
क्र. 460- भू- अर्जन-12.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है : -
भूमि का विवरण
जिला तहसील
नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1) (2)
(3)
(4) सीधी मझौली
12.64
चुनगुना
(अति. भूमि)
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 4 ( 2 ) के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6)
(5)
महान बांध के डूब क्षेत्र हेतु.
कार्यपालन यंत्री, महान परियोजना संभाग , सीधी.
भूमियों का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , कलेक्टर, सीधी के कार्यालय में किया जा सकता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, मसूद अख्तर , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
भाग 1 ]
2851
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
कार्यालय , कलेक्टर , जिला खरगोन, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग
खरगोन , दिनांक 6 जुलाई 2012
क्र. 725 - भू.अ. - 2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक , सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार सभी संबंधित व्यक्तियों को, इसके द्वारा , इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है : -
भूमि का वर्णन
जिला तहसील
ग्राम/नगर लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1) (2)
(3)
(4) खरगोन
3.023 बड़वाह खुड़गांव
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 4 की उपधारा (2) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6)
(5)
कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-28 , पुनासा, जिला- खण्डवा ( म.प्र.) .
इंदिरा सागर परियोजना की सनावद वितरण शाखा की उपनहर क्रमांक एम-21 की सब- माईनर क्रमांक-3 , नहर के निर्माण हेतु.
नोट. - भूमि का नक्शा ( प्लान ) कलेक्टर, खरगोन , भू-अर्जन अधिकारी, ओंकारेश्वर/महेश्वर परियोजना, बड़वाह एवं कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-28 , पुनासा के कार्यालय में अवलोकन किया जा सकता है .
क्र. 726 - भू.अ. - 2012.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक , सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार सभी संबंधित व्यक्तियों को, इसके द्वारा , इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है : -
अनुसूची
भूमि का वर्णन
जिला तहसील
ग्राम/नगर लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में )
(3)
(1) (2)
(4) खरगोन
1.579 बड़वाह खंगवाड़ा
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 4 की उपधारा (2) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6)
(5)
कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-28 , पुनासा, जिला- खण्डवा ( म.प्र.) .
इंदिरा सागर परियोजना की सनावद वितरण शाखा की उपनहर क्रमांक एम -16 की सब- माईनर क्रमांक -1 , नहर के निर्माण हेतु.
नोट. - भूमि का नक्शा ( प्लान ) कलेक्टर, खरगोन, भू-अर्जन अधिकारी , ओंकारेश्वर/ महेश्वर परियोजना , बड़वाह एवं कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-28 , पुनासा के कार्यालय में अवलोकन किया जा सकता है.
2852
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 724- भू.अ. - 2012.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने (6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार सभी संबंधित व्यक्तियों को, इसके द्वारा, इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा, अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है :-
भूमि का वर्णन
जिला तहसील
ग्राम/नगर लगभग क्षेत्रफल ( हेक्टेयर में) (2)
(1)
(3)
(4) खरगोन
भोकरिया
3.005 बड़वाह
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 4 की उपधारा (2) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6)
(5)
कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-28 , पुनासा, जिला- खण्डवा ( म.प्र. ) .
इंदिरा सागर परियोजना की सनावद वितरण शाखा की उपनहर क्रमांक एम -16 की एस.एम. - 2, नहर के निर्माण हेतु.
नोट. - भूमि का नक्शा ( प्लान ) कलेक्टर, खरगोन, भू-अर्जन अधिकारी , ओंकारेश्वर/महेश्वर परियोजना, बड़वाह एवं कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक -28 , पुनासा के कार्यालय में अवलोकन किया जा सकता है.
क्र. 723 - भू.अ. - 2012 .- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार सभी संबंधित व्यक्तियों को, इसके द्वारा , इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है :-
भूमि का वर्णन
तहसील
जिला
ग्राम/नगर लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1) (2)
(3)
(4) खरगोन
कपासी
2.235 बड़वाह
अनुसूची
धारा 4 की उपधारा
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
(2) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी (5)
(6)
कार्यपालन यंत्री , नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-28 , पुनासा , जिला- खण्डवा ( म.प्र. ) .
इंदिरा सागर परियोजना की सनावद वितरण शाखा की उपनहर क्रमांक-16 की एस.एम. - 2 , नहर के निर्माण हेतु.
नोट. - भूमि का नक्शा ( प्लान ) कलेक्टर , खरगोन, भू-अर्जन अधिकारी , ओंकारेश्वर/महेश्वर परियोजना , बड़वाह एवं कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-28 , पुनासा के कार्यालय में अवलोकन किया जा सकता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, नवनीत मोहन कोठारी , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
भाग 1 ]
2853
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
कार्यालय, कलेक्टर, जिला कटनी , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग
कटनी , दिनांक 9 जुलाई 2012
प्र.क्र. 0 - अ - 82 - वर्ष 11-12.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को , इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-
भूमि का वर्णन
जिला तहसील नगर/ग्राम
(2)
(1)
(3)
लगभग क्षेत्रफल ( हेक्टेयर में) (4) कटनी
रीठी
2.85
ग्राम घनिया नं. बं. -114, प.ह.नं. 24,
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6)
कार्यपालन यंत्री , जल संसाधन विभाग.
देवलिया जलाशय नहर योजना कार्य.
(2 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) भू-अर्जन अधिकारी , कटनी के कार्यालय में देखा जा सकता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, अशोक सिंह , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय , कलेक्टर, जिला उमरिया , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग
उमरिया, दिनांक 10 जुलाई 2012
क्र. 91 - भू- अर्जन-2012 .- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न सूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता हूं : --
भूमि का वर्णन
जिला
ग्राम
तहसील
कुल क्षेत्रफल (हे. में) (1) (2)
(3)
(4)
पटेहरा
13.100 उमरिया '
मानपुर
0.809
सिगुड़ी कुठूलिया सेमरी सेमरा
2.600 1.200 2.250 योग .. 19.959 (2)
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6)
कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , उमरिया.
भड़ारी जलाशय के शीर्ष एवं नहर निर्माण से प्रभावित भूमि का मुआवजा निर्धारण.
सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए आवश्यकता है- भंड़ारी जलाशय के शीर्ष एवं नहर निर्माण से प्रभावित भूमि का मुआवजा निर्धारण.
(3) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , अनुविभागीय अधिकारी , मानपुर के कार्यालय एवं कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , उमरिया के कार्यालय में किया जा सकता है.
2854
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 93 - भू-अर्जन-2012. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न सूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता हूं :-
भूमि का वर्णन
जिला तहसील
ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हे. में) (1) (2)
(3)
(4) उमरिया मानपुर गडरिया टोला देवगवां चिमटा कोटरी
2.483 2.670 0.120 2.733 योग .. 8.006
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6)
भदार व्यपवर्तन योजना की मुख्य दायीं तट नहर का निर्माण.
कार्यपालन यंत्री , जल संसाधन संभाग, उमरिया.
(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए आवश्यकता है- भदार व्यपवर्तन योजना की मुख्य दायीं तट नहर का निर्माण.
(3) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) , बांधवगढ़ , जिला उमरिया एवं कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , उमरिया के कार्यालय में किया जा सकता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, एन. एस. भटनागर, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय , प्रशासक, भू- अर्जन एवं पुनर्वास, बाणसागर परियोजना, जिला रीवा, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग
रीवा, दिनांक 10 जुलाई 2012
क्र. 2064 - भू-अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 - अ के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे, क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं : -
जिला
भूमि का विवरंण नगर/ग्राम
तहसील
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1) सीधी
(3) चन्दैनी
(4) 0.09 (2) चुरहट
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6) कार्यपालन यंत्री लोवर सिंहावल नहर संभाग , चुरहट जिला सीधी, (म.प्र.) .
बाणसागर सिंहावल के अंतर्गत नहर निर्माण आने वाले ग्रामों के निजी भूमि के लिए भूमि तथा उस पर स्थित संपत्तियों का अर्जन.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
भाग 1 ]
2855
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2066 - भू- अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 - अ के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे, क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं : -
अनुसूची
भूमि का विवरण
जिला तहसील
नगर/ग्राम
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में )
(2)
(1)
(3)
(4)
(6)
(5)
सीधी
कंधवार
2.41
रामपुर नैकिन.
कधवार सब -माईनर नहर निर्माण हेतु.
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग , चुरहट, जिला सीधी, (म.प्र. ).
क्र. 2068 - भू-अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 - अ के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे, क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं :-
अनुसूची
भूमि का विवरण
जिला तहसील
नगर/ग्राम
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
(2)
(3)
(1)
(5)
(6)
(4)
सीधी
0.34
झांझ
रामपुर नैकिन.
तितिरा सब - माईनर नहर निर्माण हेतु .
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग , चुरहट, जिला सीधी, (म.प्र.).
2856
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2076 - भू-अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 - अ के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं : -
अनुसूची
भूमि का विवरण
जिला तहसील
नगर/ग्राम
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
(2)
(3)
(1)
(4)
(5)
(6) सीधी
रायखोर
3.01
रामपुर नैकिन.
रायखोर सब- माईनर नहर निर्माण हेतु.
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग , चुरहट, जिला सीधी , (म.प्र.).
क्र. 2078 - भू-अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 - अ के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं :-
अनुसूची
भूमि का विवरण
नगर/ग्राम
•तहसील
जिला
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में )
(1) (2)
(3)
(4)
(6)
(5)
सीधी
1.25
झाला
रामपुर नैकिन.
झाला सब -माईनर क्र. 2 नहर निर्माण हेतु.
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग , चुरहट, जिला सीधी, (म.प्र.) .
2857 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2080 - भू-अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 -अ के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं : -
अनुसूची
भूमि का विवरण
तहसील
नगर/ग्राम
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन जिला
धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
(3)
(1)
(4)
(5)
(2)
(6) सीधी
2.02
सजहा
रामपुर नैकिन.
झाला सब-माईनर क्र. 1 नहर निर्माण हेतु.
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग , चुरहट , जिला सीधी, (म.प्र. ).
क्र. 2082 - भू-अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 - अ के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं :-
अनुसूची
जिला
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन तहसील
भूमि का विवरण नगर/ग्राम
धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्राधिकृत अधिकारी
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
(1) (2)
(3)
(5)
(6)
(4)
1.70
सीधी
झांझ
रामपुर नैकिन.
पटेल टोला सब- माईनर नहर निर्माण हेतु.
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग , चुरहट , जिला सीधी, (म.प्र. ).
2858
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
रीवा, दिनांक 12 जुलाई 2012
क्र. 2097 - भू- अर्जन-2012.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं: -
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (1)
(2)
(3)
(4) सीधी
3.80 सिंहावल तेन्दुआ
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला- सीधी , (म.प्र. ).
बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत सिंहावल वितरक नहर क्र. 2 की तेन्दुआ माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना , रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
क्र. 2099- भू-अर्जन-2012 .- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं: -
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल - (हेक्टेयर में) (1)
(2)
(3)
सीधी
(4) 2.17 सिंहावल चक तेन्दुआ
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला-सीधी, (म.प्र.) .
(6) बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत सिंहावल वितरक नहर क्र. 2 की तेन्दुआ माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना , रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
भाग 1 ]
2859
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2101 - भू-अर्जन-2012.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
भूमि का विवरण नगर/ग्राम
जिला तहसील
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (2)
(3)
(4) (1)
सीधी सिंहावल
7.04
हटठा कला
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजनं का वर्णन धारा 4 (2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6) कार्यपालन यंत्री , लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला-सीधी, (म.प्र.).
बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत सिंहावल नहर प्रणाली की हटवा सब-माइनर के निर्माण हेतु .
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
क्र. 2103 - भू- अर्जन-2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (2)
(1)
(3)
(4) सीधी सिंहावल बिठौली
1.65
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 (2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट , जिला-सीधी, (म.प्र. ) .
बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत सिंहावल वितरक नहर क्र. 2 की तेन्दुआ माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
2860
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2105 - भू- अर्जन- 2012.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं: -
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1)
(2)
(3)
(4) सीधी सिंहावल बघोर
2.44
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट , जिला-सीधी, (म.प्र. ).
बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत सिंहावल वितरक नहर क्र. 2 की बघोर टेल माइनर के निर्माण हेतु .
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
क्र. 2107 - भू-अर्जन- 2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे, क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1)
(2)
(3)
(4) सीधी
1.34 सिंहावल सतिहा
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 (2) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6) कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला- सीधी , (म.प्र.).
बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत सिंहावल वितरक नहर क्र. 2 की बघोर टेल माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
भाग 1 ]
2861
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2109 - भू-अर्जन-2012 . चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
जिला तहसील
भूमि का विवरण नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1)
(2)
(3)
(4)
2.75 सीधी सिंहावल मेढ़ौली
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6) कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला-सीधी, (म.प्र.).
बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत सिंहावल वितरक नहर क्र. 2 की बघोर टेल माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
क्र. 2111 - भू-अर्जन- 2012.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं : -
भूमि का विवरण
जिला
नगर/ग्राम
तहसील
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1)
(2)
(3)
(4) सीधी
पमरिया
7.92 सिंहावल
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6) कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला- सीधी, (म.प्र.) .
बाणसागर परियोजना के अंतर्गत सिंहावल नहर प्रणाली की पमरिया माइनर के विस्तार के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
2862
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2113- भू-अर्जन-2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं: -
भूमि का विवरण
जिला
नगर/ग्राम
तहसील
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1)
(4) (2)
(3)
सीधी सिंहावल
0.88
हौदा
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहटं, जिला- सीधी , (म.प्र.).
बाणसागर परियोजना के अंतर्गत सिंहावल नहर प्रणाली की हौदा माइनर के विस्तार के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
क्र. 2115 - भू-अर्जन-2012 .- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूर्ची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं: -
जिला तहसील
भूमि का विवरण नगर/ग्राम
(1)
(2)
(3)
सीधी
चक्र कमर्जी
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (4) 1.06 चुरहट
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 (2) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट , जिला-सीधी, (म.प्र. ).
बाणसागर परियोजना के अंतर्गत सिंहावल नहर प्रणाली की कमर्जी सब- माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना , रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
भाग 1 ]
2863
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2117 - भू-अर्जन -2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (2)
(1)
(4)
(3)
सीधी
2.62
पटौहा
चुरहट
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6) कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला- सीधी, (म.प्र.).
बाणसागर परियोजना के अंतर्गत सिंहावल नहर प्रणाली की पटौहा सब - माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, प्रशासक, बाणसागर परियोजना , रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
क्र. 2119 - भू-अर्जन-2012 .- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
(3)
(2)
(1)
(4) सीधी
कमर्जी
2.64 चुरहट
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 (2) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6) कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट , जिला- सीधी, (म.प्र.).
बाणसागर परियोजना के अंतर्गत सिंहावल नहर प्रणाली की कमर्जी सब- माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
2864
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2121 - भू- अर्जन -2012.---चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
जिला
भूमि का विवरण नगर/ग्राम
तहसील
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में )
(3)
(1)
(2)
(4) सीधी
हटवा
3.168 सिंहावल
(बरहा टोला)
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला-सीधी, (म.प्र.) .
बाणसागर परियोजना के अंतर्गत सिंहावल नहर प्रणाली की हटवा टेल माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
क्र. 2123 - भू-अर्जन- 2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं: -
भूमि का विवरण नगर/ग्राम
जिला तहसील
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (2)
(1) सीधी
(4) 3.96 रामपुर नैकिन.
(3) पडखुरी पवाई.
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 (2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला-सीधी , (म.प्र.) .
बाणसागर परियोजना के अंतर्गत सिंहावल नहर प्रणाली की तिवरियान टोला सब- माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना , रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
भाग 1 ]
2865
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2125 - भू-अर्जन-2012. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
भूमि का विवरण
जिला
नगर/ग्राम
तहसील
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (2)
(1)
(3)
(4) सीधी
2.475 रामपुर नैकिन. पवाई. पडखुरी
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6) कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट , जिला-सीधी, (म.प्र.).
बाणसागरं परियोजना के अंतर्गत सिंहावल नहर प्रणाली की मलहियान टोला सब- माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
क्र. 2127 - भू- अर्जन- 2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
जिला
भूमि का विवरण नगर/ग्राम
तहसील
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
(4) (2)
(3)
(1)
सिंहावल
सीधी
सिंहावल
1.48
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला- सीधी, (म.प्र.).
बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत सिंहावल वितरक नहर क्र. 2 की बघोर टेल- माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना , रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
2866
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2129 - भू- अर्जन-2012 .- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं: --
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (2)
(1)
(3)
(4)
गेरुआ
सीधी सिंहावल
6.12
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला-सीधी, (म.प्र.).
बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत सिंहावल वितरक नहर क्र. 2 की बघोर टेल- माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना , रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
क्र. 2131 - भू- अर्जन-2012. -चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं: -
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
(1)
(2)
(3)
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (4)
तितिरा
सीधी
0.54 रामपुर
नैकिन. बाघेलान.
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला- सीधी, (म.प्र.) .
सिंहावल नहर प्रणाली की मढ़ा माइनर की तितिरा सब- माइनर क्रमांक -1 के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना , रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
भाग 1 ]
2867
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2133 - भू-अर्जन-- 2012 . चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (1)
(2)
(3)
(4) सीधी
कोरिगॅवा
0.315 रामपुर नैकिन.
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला- सीधी, (म.प्र.) .
सिंहावल नहर प्रणाली की मढ़ा माइनर की तितिरा सब- माइनर क्रमांक -1 के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
क्र. 2135- भू- अर्जन-2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं: -
जिला तहसील
भूमि का विवरण नगर/ग्राम
(1)
(2)
(3)
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) . (4)
1.34 सीधी सिंहावल बमुरी गजकरन सिंह.
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6) कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला-सीधी, (म.प्र. ) .
बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत सिंहावल वितरक नहर क्र. 2 की बमुरी माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
2868
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2137- भू-अर्जन- 2012.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं: -
भूमि का विवरण
तहसील
जिला
नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1)
(2)
(3)
(4) सीधी सिंहावल
1.04
धुबबार
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6) कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला- सीधी, (म.प्र.) .
बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत सिंहावल वितरक नहर क्र. 2 की बघोर टेल माइनर के निर्माण हेतु .
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक , बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
क्र. 2139 - भू-अर्जन- 2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
भूमि का विवरण
जिला
नगर/ग्राम
तहसील
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (1)
(2)
(3)
(4) सीधी
2.970 रामपुर नैकिन. कोठार. पड़खुरी
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6) कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला- सीधी, (म.प्र.).
सिंहावल नहर प्रणाली की पड़खुरी सब - माइनर क्रमांक -1 के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
भाग 1 ]
2869
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2141 - भू- अर्जन-2012 .- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1)
(2)
(4)
(3)
सीधी
केशौली
2.22 सिंहावल
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6) कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला- सीधी, (म.प्र. ) .
बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत सिंहावल वितरक नहर क्र. 2 की बघोर टेल माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
क्र. 2143- भू-अर्जन- 2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (1)
(2)
(4)
(3)
सीधी
1.39 सिंहावल बरबसा
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6) कार्यपालन यंत्री , लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला- सीधी, (म.प्र.) .
बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत सिंहावल वितरक नहर क्र. 2 की बघोर टेल माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
2870
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2145 - भू-अर्जन- 2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं : -
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1)
(2)
(4)
(3)
सीधी
टकटैया
1.824 चुरहट
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6) कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट , जिला- सीधी, (म.प्र.) .
बाणसागर परियोजना के अतंर्गत सिंहावल नहर प्रणाली की नकबेल सब - माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, प्रशासक, बाणसागर परियोजना , रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
क्र. 2147 - भू-अर्जन-2012. चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं: -
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (1)
(2)
(3)
(4)
बैलकसरी
सीधी
1.88 रामपुर नैकिन.
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
बाणसागर परियोजना के अतंर्गत सिंहावल नहर प्रणाली कीबेलकसरी सब- माइनर हेतु.
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला- सीधी, (म.प्र. ) .
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
भाग 1 ]
2871
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2149 - भू- अर्जन- 2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू- अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (2)
(1)
(3)
(4) सीधी
नकबेल
1.856 चुरहट
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला- सीधी, (म.प्र. ) .
बाणसागर परियोजना के अतंर्गत सिंहावल नहर प्रणाली की नकबेल सब- माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
क्र. 2151 - भू-अर्जन- 2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं: -
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1)
(3)
(2)
(4) सीधी
कमर्जी
2.86 सिंहावल
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6) कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट , जिला- सीधी , (म.प्र.) .
बाणसागर परियोजना के अतंर्गत सिंहावल नहर प्रणाली की पटौहा सब- माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, प्रशासक, बाणसागर परियोजना , रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
2872
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2153- भू-अर्जन-2012 .- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1)
(2)
(3)
(4) सीधी सिंहावल
0.52
दमगढ़ी कोठार.
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला-सीधी, (म.प्र.).
बाणसागर परियोजना के अतंर्गत सिंहावल वितरक नहर क्र. 2 की बघोर टेल माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना , रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
क्र. 2155 - भू-अर्जन-2012 .- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (1)
(2)
(3)
(4) सीधी सिंहावल पटौहा
0.53
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला-सीधी, (म.प्र. ) .
बाणसागर परियोजना के अतंर्गत सिंहावल नहर प्रणाली की कमर्जी सब- माइनर के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना , रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
भाग 1 ]
2873
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2157 - भू- अर्जन-2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
भूमि का विवरण
जिला तहसील नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (1)
(2) (3)
(4) सीधी
1.85 सिंहावल लदबद कला
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला- सीधी, (म.प्र.).
बाणसागर परियोजना के अतंर्गत सिंहावल वितरक नहर क्र . 2 की लदबद माइनर के निर्माण हेतु .
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
क्र. 2159- भू-अर्जन- 2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं:-
जिला तहसील
भूमि का विवरण नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (2)
(1)
(3)
(4) सीधी
1.30 सिंहावल बमुरी कोठार
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 (2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6) कार्यपालन यंत्री , लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला- सीधी, (म.प्र.).
बाणसागर परियोजना के अतंर्गत सिंहावल वितरक नहर क्र. 2 की बमुरी माइनर के निर्माण हेतु .
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना , रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
2874
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. 2161 - भू-अर्जन-2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लिखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 4 की उपधारा ( 2 ) द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उक्त अधिनियम की धारा 5 ( अ ) के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू नहीं होंगे , क्योंकि उसकी राय में उक्त अधिनियम की धारा 17 की उपधारा ( 1 ) के उपबंध उसके संबंध में लागू होते हैं: -
जिला तहसील
भूमि का विवरण नगर/ग्राम
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में ) (2) (3)
(1) सीधी
(4) 1.395 रामपुर नैकिन.
तितिरा शुक्लान
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री, लोवर सिंहावल नहर संभाग चुरहट, जिला- सीधी, (म.प्र.).
सिंहावल नहर प्रणाली की मढ़ा माइनर की तितिरा सब -माइनर क्रमांक-1 के निर्माण हेतु.
भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में देखा जा सकता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, बी. बी. श्रीवास्तव, प्रशासक एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय , कलेक्टर, जिला छिन्दवाड़ा, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग
छिन्दवाड़ा, दिनांक 12 जुलाई 2012
क्र. 4936 - भू- अर्जन -2012 . - चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में उल्लिखित वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजनों के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है . अतएव भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, एतद्वारा सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित प्राधिकृत अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त भू- अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 की उपधारा ( 2 ) में दी गई शक्तियों को प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. इस संबंध में राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उपरोक्त भूमि के अधिग्रहण किये जाने के संबंध में भू- अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 5 ( क) के उपबंध उक्त भूमियों के संबंध में लागू होंगे
अनुसूची
भूमि का वर्णन
तहसील
जिला
नगर/ग्राम
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में ) (1)
(2)
(3)
(4) छिन्दवाड़ा छिन्दवाड़ा
रकबा 06.642 एवं उपरोक्त अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि पर आने वाली संपत्तियां.
ग्राम - सलैया ब.नं. -540 प.ह.नं. -39 रा.नि.मं. छिन्दवाड़ा-1 .
भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन (5)
(6)
कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग छिन्दवाड़ा, जिला छिंदवाड़ा ( म.प्र. ) .
सत्तीधार जलाशय योजना के अन्तर्गत बांध एवं नहर निर्माण हेतु निजी भूमि के अर्जन के संबंध में.
भाग 1 ]
2875
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय , कलेक्टर, ( भू-अर्जन शाखा ) , छिन्दवाड़ा, जिला छिन्दवाड़ा के न्यायालय में किया जा सकता है.
(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , छिन्दवाड़ा के कार्यालय में भी किया जा सकता है.
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) एवं प्रकरण का निरीक्षण अनुविभागीय अधिकारी , कन्हरगॉव नहर उपसंभाग क्रमांक-2 , जिला छिन्दवाड़ा के कार्यालय में भी किया जा सकता है.
(5) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई व्यक्ति अधिसूचना प्रकाशन के 30 दिन के अन्दर भू-अर्जन किये जाने के संबंध में आक्षेप लिखित रूप से कलेक्टर ( भू-अर्जन शाखा ) , छिन्दवाड़ा के कार्यालय में प्रस्तुत कर सकता है .
क्र. 4937 - भू- अर्जन-2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में उल्लिखित वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजनों के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है . अतएव भू- अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक , सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, एतद्वारा सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित प्राधिकृत अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 की उपधारा ( 2 ) में दी गई शक्तियों को प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . इस संबंध में राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उपरोक्त भूमि के अधिग्रहण किये जाने के संबंध में भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 5 ( क ) के उपबंध उक्त भूमियों के संबंध में लागू होंगे :-
अनुसूची
भूमि का वर्णन
जिला तहसील नगर/ग्राम
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि लगभग क्षेत्रफल ( हेक्टर में) (1)
(2)
(3)
(4) छिन्दवाड़ा छिन्दवाड़ा
प.ह.नं.-38
रकबा 01.502 एवं उपरोक्त अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि पर आने वाली संपत्तियां.
ग्राम- खमरा ब.नं. -90 रा.नि.मं. छिन्दवाड़ा 1.
भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन (5)
(6) कार्यपालन यंत्री , जल संसाधन संभाग छिन्दवाड़ा, जिला छिंदवाड़ा ( म.प्र.) .
सत्तीधार जलाशय योजना के अन्तर्गत बांध एवं नहर निर्माण हेतु निजी भूमि के अर्जन के संबंध में.
(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय , कलेक्टर, ( भू- अर्जन शाखा ) , छिन्दवाड़ा, जिला छिन्दवाड़ा के न्यायालय में किया जा सकता है.
(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , छिन्दवाड़ा के कार्यालय में भी किया जा सकता है.
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) एवं प्रकरण का निरीक्षण अनुविभागीय अधिकारी , कन्हरगॉव नहर उपसंभाग क्रमांक-2 , जिला छिन्दवाड़ा के कार्यालय में भी किया जा सकता है .
2876
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
(5) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई व्यक्ति अधिसूचना प्रकाशन के 30 दिन के अन्दर भू- अर्जन किये जाने के संबंध में आक्षेप लिखित रूप से कलेक्टर ( भू- अर्जन शाखा ) , छिन्दवाड़ा के कार्यालय में प्रस्तुत कर सकता है.
क्र. 4938-- भू- अर्जन-2012 .-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में उल्लिखित वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजनों के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतएव भू- अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, एतद्वारा सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित प्राधिकृत अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त भू- अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 की उपधारा ( 2 ) में दी गई शक्तियों को प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. इस संबंध में राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उपरोक्त भूमि के अधिग्रहण किये जाने के संबंध में भू-अर्जन अधिनियम , 1894 की धारा 5 ( क ) के उपबंध उक्त भूमियों के संबंध में लागू होंगे :
अनुसूची
जिला
भूमि का वर्णन नगर/ग्राम
तहसील
(1)
(2) (3)
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में) (4) छिन्दवाड़ा छिन्दवाड़ा ग्राम - शहपुरा ब.नं. -533 प.ह.नं. - 38 रा.नि.मं. छिन्दवाड़ा 1.
रकबा 66.651 एवं उपरोक्त अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि पर आने वाली संपत्तियां .
भू-अर्जन अधिनियम , 1894 की धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
(6) (5)
कार्यपालन यंत्री , जल संसाधन संभाग छिन्दवाड़ा, जिला छिंदवाड़ा ( म.प्र. ) .
सत्तीधार जलाशय योजना के अन्तर्गत बांध एवं नहर निर्माण हेतु निजी भूमि के अर्जन के संबंध में.
(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय , कलेक्टर, ( भू-अर्जन शाखा ) , छिन्दवाड़ा, जिला छिन्दवाड़ा के न्यायालय में किया जा सकता है .
(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , छिन्दवाड़ा के कार्यालय में भी किया जा सकता है.
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) एवं प्रकरण का निरीक्षण अनुविभागीय अधिकारी , कन्हरगॉव नहर उपसंभाग क्रमांक -2 , जिला छिन्दवाड़ा के कार्यालय में भी किया जा सकता है .
(5) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई व्यक्ति अधिसूचना प्रकाशन के 30 दिन के अन्दर . भू-अर्जन किये जाने के संबंध में आक्षेप लिखित रूप से कलेक्टर ( भू- अर्जन शाखा ) , छिन्दवाड़ा के कार्यालय में प्रस्तुत कर सकता है .
क्र. 4939 - भू-अर्जन-2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में उल्लिखित वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजनों के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है . अतएव भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, एतद्वारा सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित प्राधिकृत अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त भू-अर्जन अधिनियम , 1894 की धारा 4 की उपधारा ( 2 ) में दी गई शक्तियों को प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. इस संबंध में राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उपरोक्त भूमि के अधिग्रहण किये जाने के संबंध भाग 1 ]
2877
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
में भू-अर्जन अधिनियम , 1894 की धारा 5 ( क) के उपबंध उक्त भूमियों के संबंध में लागू होंगे : -
अनुसूची
भूमि का वर्णन
जिला तहसील नगर/ग्राम
भू-अर्जन अधिनियम , 1894 की धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में )
(3)
(1)
(2)
(6)
(4)
(5)
चांद
छिन्दवाड़ा
ग्राम- हरनाखेड़ी
कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग छिन्दवाड़ा, जिला छिंदवाड़ा ( म.प्र. ) .
सत्तीधार जलाशय योजना के अन्तर्गत बांध एवं नहर निर्माण हेतु निजी भूमि के अर्जन के संबंध में.
ब.नं.-306 प.ह.नं. -46 रा.नि.मं. - चांद.
रकबा 03.855 एवं उपरोक्त अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि पर आने वाली संपत्तियां.
(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय , कलेक्टर, ( भू-अर्जन शाखा ) , छिन्दवाड़ा, जिला छिन्दवाड़ा के न्यायालय में किया जा सकता है.
(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , छिन्दवाड़ा के कार्यालय में भी किया जा सकता है.
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) एवं प्रकरण का निरीक्षण अनुविभागीय अधिकारी , कन्हरगॉव नहर उपसंभाग क्रमांक-2 , जिला छिन्दवाड़ा के कार्यालय में भी किया जा सकता है.
(5) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई व्यक्ति अधिसूचना प्रकाशन के 30 दिन के अन्दर भू-अर्जन किये जाने के संबंध में आक्षेप लिखित रूप से कलेक्टर ( भू-अर्जन शाखा ) , छिन्दवाड़ा के कार्यालय में प्रस्तुत कर सकता है .
क्र. 4940 - भू- अर्जन -2012 . - चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में उल्लिखित वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतएव भू- अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, एतद्वारा सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित प्राधिकृत अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 की उपधारा ( 2 ) में दी गई शक्तियों को प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. इस संबंध में राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उपरोक्त भूमि के अधिग्रहण किये जाने के संबंध में भू- अर्जन अधिनियम , 1894 की धारा 5 ( क ) के उपबंध उक्त भूमियों के संबंध में लागू होंगे : -
अनुसूची
अर्जित की जाने वाली भूमि का वर्णन
भू-अर्जन अधिनियम , 1894
तहसील नगर/ग्राम
जिला.
की धारा 4. ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
प्रस्तावित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में)
(1)
(2)
(3)
(4)
(6)
(5)
चांद ग्राम- भांडपिपरिया
छिन्दवाड़ा
कार्यपालन यंत्री , जल संसाधन संभाग छिन्दवाड़ा, जिला छिंदवाड़ा (म.प्र. ) .
ब.नं. -217 प.ह.नं. -36 रा.नि.मं. -चांद.
सत्तीधार जलाशय योजना के अन्तर्गत बांध एवं नहर निर्माण हेतु निजी भूमि के अर्जन के संबंध में.
रकबा 02.794 एवं उपरोक्त अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि पर आने वाली संपत्तियां.
2878
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय , कलेक्टर, ( भू-अर्जन शाखा ) , छिन्दवाड़ा, जिला छिन्दवाड़ा के न्यायालय में किया जा सकता है .
(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग, छिन्दवाड़ा के कार्यालय में भी किया जा सकता है .
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) एवं प्रकरण का निरीक्षण अनुविभागीय अधिकारी , कन्हरगॉव नहर उपसंभाग क्रमांक-2 , जिला छिन्दवाड़ा के कार्यालय में भी किया जा सकता है.
(5) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई व्यक्ति अधिसूचना प्रकाशन के 30 दिन के अन्दर भू- अर्जन किये जाने के संबंध में आक्षेप लिखित रूप से कलेक्टर ( भू- अर्जन शाखा ) , छिन्दवाड़ा के कार्यालय में प्रस्तुत कर सकता है.
क्र. 4941 - भू- अर्जन-2012.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में उल्लिखित वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतएव भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 4 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार, एतद्वारा सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित प्राधिकृत अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 की उपधारा ( 2 ) में दी गई शक्तियों को प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . इस संबंध में राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उपरोक्त भूमि के अधिग्रहण किये जाने के संबंध में भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 5 ( क ) के उपबंध उक्त भूमियों के संबंध में लागू होंगे :-
अनुसूची
भूमि का वर्णन
जिला तहसील नगर/ग्राम
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि लगभग क्षेत्रफल (हेक्टर में ) (2)
(1)
(3)
(4)
ग्राम- धमनिया
छिन्दवाड़ा छिन्दवाड़ा
ब.नं. - 281
प.ह.नं. - 38
रा.नि.मं.-
रकबा 45.261 एवं उपरोक्त अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि पर आने वाली
संपत्तियां.
छिन्दवाड़ा-1 .
भू-अर्जन अधिनियम, 1894 की धारा 4 ( 2 ) के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन (5)
(6) कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग छिन्दवाड़ा, जिला छिंदवाड़ा (म.प्र.).
सत्तीधार जलाशय योजना के अन्तर्गत बांध एवं नहर निर्माण हेतु निजी भूमि के अर्जन के संबंध में.
(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय , कलेक्टर, ( भू- अर्जन शाखा ) छिन्दवाड़ा जिला छिन्दवाड़ा के न्यायालय में किया जा सकता है.
(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यपालन यंत्री , जल संसाधन संभाग , छिन्दवाड़ा के कार्यालय में भी किया जा सकता है.
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) एवं प्रकरण का निरीक्षण अनुविभागीय अधिकारी, कन्हरगॉव नहर उपसंभाग क्रमांक-2 , जिला छिन्दवाड़ा के कार्यालय में भी किया जा सकता है.
(5) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई व्यक्ति अधिसूचना प्रकाशन के 30 दिन के अन्दर भू-अर्जन किये जाने के संबंध में आक्षेप लिखित रूप से कलेक्टर ( भू- अर्जन शाखा ) छिन्दवाड़ा के कार्यालय में प्रस्तुत कर सकता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, महेशचन्द्र चौधरी , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
भाग 1 ]
2879
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
कार्यालय , कलेक्टर, जिला बड़वानी, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग बड़वानी, दिनांक 29 मई 2012
क्र. 1004- भू-अर्जन-2012 - रा. प्र . क्र. 25- अ-82-10- 11.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-कृषि
(क) जिला- बड़वानी
(ख) तहसील- बड़वानी
(ग) ग्राम- भामटा ( बसाहट)
(घ) क्षेत्रफल-1.821 हेक्टेयर.
सर्वे नं.
अर्जित क्षेत्रफल
(हे . में)
(1)
(2)
0.283
62/3 क
62/3 ख
0.142
62/3 ग
0.101
62/3 घ
0.089
62/4
0.041
69/2
0.364
0.073
69/8
69/9
0.202
69/10
0.526
योग मकान : 1.821
( 2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए भूमि की आवश्यकता है- सरदार सरोवर परियोजना ( अन्तर्राज्यीय प्रोजेक्ट ) से डूब प्रभावित ग्राम अवल्दा के विस्थापित के पुनर्बसाहट स्थल हेतु अनिवार्य अर्जन.
(3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण भू- अर्जन एवं पुनर्वास अधिकरी सरदार सरोवर परियोजना बड़वानी एवं कार्यपालन यंत्री, लोक निर्माण विभाग , नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण सरदार सरोवर परियोजना, पुनर्वास संभाग बड़वानी के कार्यालय में कार्यालयीन समय में किया जा सकता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार , श्रीमन शुक्ला, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय, कलेक्टर, जिला छतरपुर मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग छतरपुर, दिनांक 18 जून 2012
प्र. क्र. 16- अ- 82-2008-09.-चूंकि, राज्य शासन का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है:-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन- निजी भूमि
(क) जिला- छतरपुर
(ख ) तहसील- राजनगर
(ग ) नगर/ग्राम- जटकरा ( बीजामंडल स्मारक ) (घ) लगभग क्षेत्रफल-2.896 है.
खसरा नं .
अर्जित रकबा (हेक्टेयर में)
(2)
(1)
673/5
0.049
0.097
678/1
678/2
0.145
675
0.105
677
0.130
524/1
0.232
524/2
1.114
556/1
0.157
0.156
556/2
556/3
0.030
556/4
0.032
556/5
0.031
556/6
0.032
556/7
0.032
556/8
0.039
0.039
556/9
0.039
556/10
556/11
0.040
558/1
0.300
673/1
0.049
673/2
0.016
0.016
673/3
673/4
0.016
योग 2.896
कुलयोग (निजी भूमि) 2.896 2880
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
( 2 ) बीजामंडल स्मारक के चतुर्दिक विकासात्मक कार्यों हेतु भूमि की आवश्यकता है.
( 3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कलेक्टर, भू-अर्जन कार्यालय एवं अनुविभागीय अधिकारी, राजनगर के कार्यालय में किया जा सकता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, राहुल जैन , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय , कलेक्टर, जिला बुरहानपुर, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग
बुरहानपुर, दिनांक 26 जून 2012
रा. प्र. क्र. 02 अ- 82-2011-12. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 , (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है : -
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क ) जिला- बुरहानपुर
(ख) तहसील-नेपानगर
(ग) ग्राम- इटारिया
(घ) लगभग क्षेत्रफल-48.99 हेक्टर .
खसरा नंबर
रकबा (हेक्टर में ) (1)
(2)
3.21
10
0.08
12
0.06
13
15
0.10
18
0.13
19
0.44
1.22
20
0.57
22/1
0.58
1.55
23
1.55
24
(2)
(1)
3.49
25
2.00
26/1
1.20
26/2
1.49
26/3
1.15
28/1
1.15
28/2
2.21
29
3.74
31
1.00
32/1
32/2
0.79
33
2.30
35
5.23
41
0.31
1.50
42/1
42/2
1.42
42/3
1.20
43/1
1.50
0.14
44
2.63
48
0.22
43/1
43/2
0.22
0.16
183
170/1
0.29
0.16
184/1
0.50
188
0.22
189
0.08
193
0.04
194
0.24
197
0.08
198
0.10
202/1
202/2
0.10
0.20
207
0.06
214/1
214/2
0.06
214/3
0.06
0.15
271
0.05
270
0.15
272
275/2
0.15
0.21
276/1
0.34
291
0.27
335 भाग 1 ]
2881
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(2)
(1)
0.17
336/1
336/2
0.16
337
0.25
0.26
344
345
0.10
योग : 48.99
( 2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए भूमि की आवश्यकता है- इटारिया तालाब योजना के शीर्ष कार्य एवं नहर कार्य हेतु भूमि का भू-अर्जन.
(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) एवं भू-अर्जन अधिकारी , नेपानगर/ कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , बुरहानपुर के कार्यालय में किया जा सकता है .
बुरहानपुर, दिनांक 11 जुलाई 2012
रा. प्र. क्र. 04 अ- 82-2011-12.-चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू- अर्जन अधिनियम, 1894, ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-
अनुसूची
(1 ) भूमि का वर्णन -
(क) जिला- बुरहानपुर
(ख ) तहसील- बुरहानपुर
(ग ) ग्राम- एमागिर्द, बडाबुजुर्ग , लालबागमाल ( घ ) लगभग क्षेत्रफल-3.611 हे . सड़क निर्माण हेतु
गुरूद्वारा से ताप्ती हास्पीटल तक (सड़क निर्माण)
खसरा नंबर
अर्जित रकबा (हेक्टर में)
(2)
(1)
ग्राम-एमागिर्द
0.061
118/2
0.095
131/1
0.032
131/2,
131/3
0.032
(1)
(2)
0.032
131/4
132
0.270
133
0.080
0.120
135
136
0.060
0.060
137
119/1
0.243
138/1
0.160
योग : 1.245
ग्राम-बाडाबुजुर्ग
102
0.280
103/1
0.140
0.180
101
64
0.050
61/2
0.050
0.050
61/3
0.120
98
0.080
99
65
0.050
66
0.100
97
0.050
0.040
94/1
0.060
94/3
0.060
94/2
0.010
69
70
0.060
86
0.030
81/1
0.210
0.140
71
16
0.052
0.007
16 प्लांट नं. 26
0.014
16 प्लांट नं . 33
16 प्लांट नं . 40
0.014
0.014
16 प्लांट नं. 84
योग : 1.861
ग्राम-लालबागमाल
319/2
0.060
0.040
319/3
0.405
320
0.505
योग :
3.611
कुल योग :
2882
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए भूमि की आवश्यकता है- गुरूद्वारा से ताप्ती हास्पीटल तक सड़क निर्माण कार्य हेतु.
( 3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) एवं भू-अर्जन अधिकारी , बुरहानपुर तथा कार्यपालन यंत्री , लोक निर्माण विभाग , संभाग बुरहानपुर के कार्यालय में किया जा सकता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार , आशुतोष अवस्थी , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय , कलेक्टर, जिला गुना, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग गुना, दिनांक 28 जून 2012
प्र. क्र. 01 - अ- 82-2011-12 - केकडयाखुर्द- 390.-चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लिखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 , ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- गुना
(ख ) तहसील-कुंभराज
(ग) नगर/ ग्राम- केकडयाखुर्द
(घ) लगभग क्षेत्रफल-8.080 हेक्टर.
सर्वे नंबर
रकबा (हेक्टर में ) (1)
(2)
2
0.564
3
0.627
4
0.303
5/2/1
1.881
0.418
5/2/2
17
0.008
6
2.052
7/2
0.188
8
0.209
(2)
(1)
14
0.366
27
0.105
0.010
28/1
0.230
28/2
0.627
29
0.178
31/2
0.314
31/4
योग : 8.080
(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए आवश्यकता है- केकडयाखुर्द तालाब निर्माण योजना ( बांध डूबक्षेत्र ) (3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी , राजस्व , चॉचौड़ा के कार्यालय में किया जा सकता है .
प्र. क्र. 02- अ- 82-2011-12 - केकडयाकलॉ- 391.-चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लिखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 , ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है : -
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला - गुना
(ख) तहसील- कुंभराज
(ग ) नगर/ग्राम- केकडया कलॉ
(घ ) लगभग क्षेत्रफल- 15.098 हेक्टर.
सर्वे नंबर
रकबा (हेक्टर में )
(2)
(1)
8
0.335
10/1
0.094
0.157
9
10/2
0.115
11
0.627
0.669
12/1
0.627
12/2
12/3क
0.745
12/3ख
1.045 भाग 1 ]
2883
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(1)
(2)
14/3/क/2
0.836
14/3/क/3
1.000
14/3/क/4
1.000
15/2
0.230
14/3/ख
0.500
16/2/ 1/क
0.418
16/1/3
0.760
15/1/क
0.314
14/3/ग
0.500
16/1/2
1.400
16/1/1/2
0.791
14/3/घ
0.740
16/1/1/3
1.359
16/2/1 /ग
0.836
15.098
योग :
(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए आवश्यकता है- केकडयाखुर्द तालाब निर्माण योजना ( बांध + डूबक्षेत्र ) (3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण, अनुविभागीय अधिकारी एवं भू- अर्जन अधिकारी, राजस्व चॉचौड़ा के कार्यालय में किया जा सकता है .
प्र. क्र. 03 - अ- 82-2011-12- मानकचौक- 392.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लिखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 , ( क्रमांक एक, सन्1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है : -
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- गुना
(ख ) तहसील- कुंभराज
(ग) नगर/ ग्राम- मानकचौक
(घ ) लगभग क्षेत्रफल-9.583 हेक्टर.
खसरा नंबर
रकबा
(हेक्टर में ) (1)
(2)
47
0.209
49
0.418
(1)
(2)
154
0.010
54/6
0.300
0.105
156
54/4
0.314
64
0.293
158
0.010
65/1
0.162
190/3
0.070
65/2
0.162
0.070
190/4
131
0.021
135
0.005
138/1
0.005
132/2
0.021
0.005
138/2
138/3
0.005
138/4
0.005
138/5
0.005
138/6
0.005
0.010
153/1
0.105
159
0.993
181
163
0.314
182/1
0.183
184/1
0.975
182/2
0.183
0.021
183
184/2
1.131
0.573
190/1
190/2
0.215
190/5
0.880
63/2
1.800
योग : 9.583
( 2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए आवश्यकता है- केकडयाखुर्द तालाब निर्माण योजना ( बांध + डूबक्षेत्र ) .
(3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण, अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी , राजस्व चॉचौड़ा के कार्यालय में किया जा सकता है .
2884
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
प्र. क्र. 04- अ- 82-2011-12- केकडयाखुर्द - 393.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लिखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 , ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन -
(क) जिला- गुना
(ख) तहसील- कुंभराज
( ग) नगर/ग्राम- केकडयाखुर्द ( नहर निर्माण ) (घ) लगभग क्षेत्रफल-2.376 हेक्टर.
खसरा नंबर
(1)
रकबा (हेक्टर में ) (2)
130/2
0.105
130/3
0.188
136/7
0.314
194/3
0.137
136/5 /ख
0.261
181
0.335
182/1/3
0.003
184
0.230
186/2
0.200
193
0.160
194/2
0.137
199/8 में से
0.020
199/7
0.160
0.126
199/1/घ
योग : 2.376
(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए आवश्यकता है- केकडयाखुर्द तालाब निर्माण योजना ( नहर निर्माण ) .
( 3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी , राजस्व चॉचौड़ा के कार्यालय में किया जा सकता है.
प्र. क्र. 05 - अ- 82-2011-12 - केकडयाकलॉ- 394.-चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लिखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू- अर्जन अधिनियम , 1894 , ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है : --
अनुसूची
(1 ) भूमि का वर्णन -
(क) जिला- गुना
(ख ) तहसील- कुंभराज
(ग) नगर/ग्राम- केकडयाकलॉ ( नहर निर्माण ) (घ) लगभग क्षेत्रफल-1.692 हेक्टर.
खसरा नंबर
रकबा
(हेक्टर में) (1)
(2)
16/1/2
0.176
18
0.052
215
0.252
227
0.052
0.314
0.219
16/1/1
0.209
218/4
245/1
0.418
योग : 1.692
(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए आवश्यकता है- केकडयाखुर्द तालाब निर्माण योजना ( नहर निर्माण) .
( 3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण, अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी , राजस्व चॉचौड़ा के कार्यालय में किया जा सकता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार , संदीप यादव , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव .
भाग 1 ]
2885
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
कार्यालय, कलेक्टर, जिला खरगोन , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग खरगोन , दिनांक 2 जुलाई 2012
क्र. 704 - भू-अर्जन- 2012.-चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लिखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है . अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 , ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत, इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है : -
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- खरगोन
(ख) तहसील- झिरन्या
(ग ) ग्राम- कटझिरा
( घ) लगभग क्षेत्रफल-5.440 हेक्टयर.
खसरा नंबर
रकबा (हेक्टर में ) (1)
(2)
42/1
0.195
42/3
0.210
71/1
0.193
71/2
0.155
0.045
72/1
73/1
0.144
0.090
69/3, 74/1
74/2
0.028
0.090
74/3
0.270
76, 77/1
0.270
76, 77/2
0.072
93/1/1
93/1/2
0:090
93/2
0.065
93/3
0.030
93/4
0.045
93/5
0.041
94
0.090
95
0.300
96/1/1
0.027
96/1/2
0.028
96/1/3
0.146
(2)
(1)
96/4/1
0.050
0.049
96/4/2
96/5
0.165
96/7
0.070
96/8
0.070
96/9
0.012
98/1
0.075
98/2
0.280
0.050
98/3
0.077
99/1
0.286
99/2
100/1
0.600
104/4
0.136
0.040
139
0.190
142
0.120
143/1/1/1
0.104
144/1
0.030
144/2
144/3
0.035
145
0.121
0.121
146/1
0.135
146/2
योग : 5.440
( 2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए भूमि की आवश्यकता है- करेलीनाला तालाब योजना के नहर निर्माण कार्य हेतु.
(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) कलेक्टर , जिला खरगोन , अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) एवं भू-अर्जन अधिकारी, भीकनगांव एवं कार्यपालन यंत्री , जल संसाधन संभाग, खरगोन के कार्यालय में अवलोकन किया जा सकता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार , नवनीत मोहन कोठारी , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय , कलेक्टर, जिला झाबुआ मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग झाबुआ , दिनांक 2 जुलाई 2012
क्र. 2033 - भू- अर्जन- 2012 - रा.प्र.क्र.- 02- अ- 82-11- 12.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के 2886
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
पद ( 2 ) में उल्लेखित किये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत, इसके द्वारा, यह भी घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है: -
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला-झाबुआ
(ख) तहसील-रानापुर
(ग ) ग्राम- डाबतलाई
(घ) लगभग क्षेत्रफल-0.49 हेक्टेयर.
निजी भूमि
सर्वे नं.
(1)
रकबा ( हे. में ) (2)
121
0.04
132/1
0.45
योग .. 0.49
( 2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए भूमि की आवश्यकता है- ग्राम डाबतलाई तहसील, रानापुर में इन्टेक वेल निर्माण एवं जल शुद्धीकरण यंत्र, भण्डार, चौकीदार क्वाटर आदि निर्माण हेतु ग्राम डाबतलाई का कुल रकबा निजी भूमि 0.49 हेक्टर .
(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी, रानापुर ( झाबुआ ) जिला झाबुआ के कार्यालय में देखा जा सकता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, जयश्री कियावत, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय , कलेक्टर, जिला उज्जैन , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग उज्जैन, दिनांक 2 जुलाई 2012
क्र. भूमि संपादन -2012 . चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है . अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 , (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है : -
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन -
(क) जिला- उज्जैन
(ख) तहसील- बड़नगर
(ग ) ग्राम- नरसिंगा, पीरझलार
(घ ) लगभग क्षेत्रफल-0.71 हेक्टर.
खसरा नंबर
अर्जित रकबा (हेक्टर में)
(2)
(1)
0.03
0.05
961 962
0.27
1089/1
0.07
1090
0.29
1139
0.71
योग ..
(2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए आवश्यकता है- नरसिंगा पीरझलार, बड़नगर मार्ग पर चम्बल नदी पर निर्माणाधीन जलमग्नीय पुल के पहुंच मार्ग हेतु निजी भूमि का अर्जन.
( 3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी एवं भू- अर्जन अधिकारी, बड़नगर में देखा जा सकता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, एम. गीता, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय , कलेक्टर, जिला मण्डला, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग मण्डला, दिनांक 2 जुलाई 2012
क्र. भू-अर्जन-17-(अ-82 ) 2011-12.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है क़ि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लिखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अन्तर्गत इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
( क) जिला- मण्डला भाग 1 ]
2887
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
(ख) तहसील- घुघरी
(ग) ग्राम- मलवाथर, प. ह. नं. 53
(घ ) लगभग क्षेत्रफल-4.53 हेक्टर
खसरा नम्बर
रकबा (हेक्टर में ) (1)
(2)
280/2
0.35
280/1
0.10
281
2.20
279
1.42
198/2
0.07
178/1
0.20
274
0.09
0.10
191
4.53
योग ..
(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये आवश्यकता है- मलवाथर जलाशय अतिरिक्त डूब क्षेत्र हेतु.
( 3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण, कार्यालय कलेक्टर , मण्डला में किया जा सकता है .
क्र. भू- अर्जन-18-( अ-82 ) 2011-12.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लिखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है . अतः भू- अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अन्तर्गत इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है :-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- मण्डला
(ख) तहसील- घुघरी
( ग ) ग्राम- सुरेहली , प . ह. नं. 71
( घ ) लगभग क्षेत्रफल-0.18 हेक्टर .
खसरा नम्बर
रकबा (हेक्टर में) (2)
(1)
396
0.18
( 2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये आवश्यकता है- सुरेहली जलाशय नहर निर्माण हेतु.
( 3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , कार्यालय कलेक्टर, मण्डला में किया जा सकता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, स्वाति मीणा , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय , कलेक्टर, जिला सतना, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग सतना, दिनांक 3 जुलाई 2012
क्र. एफ. 137 - भू-अर्जन-12. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 संशोधन 1984 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अन्तर्गत इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिए आवश्यकता है : -
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन ( म. प्र. शासन/निजी खाता ) (क) जिला-सतना
(ख ) तहसील- नागौद
( ग ) नगर/ग्राम-रीछुल
(घ ) लगभग क्षेत्रफल-6.440 हेक्टेयर .
खसरा नंबर
अर्जित रकबा (हे. में. ) (2)
(1)
524/2क
0.040
0.050
524/3
0.010
524/3क
524/2ख
0.010
0.010
524/3क
0.030
524/1क
0.010
524/3 घ1
524/3घ2
0.010
527
0.040
0.030
529
0.050
530
538
0.010 2888
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(1)
(2) 533
0.020 534
0.020 535
0.020
0.020 536/2
536/1
0.020 537
0.020 512
0.030 513/ 1 क
0.010 513/ 1 ख
0.010 513/ 1 ग
0.010 513/1 घ
0.010 513/ 1 अ
0.010 510/2
0.050
0.030 511/2
509
0.050 508/3
0.020 507
0.040 506/3
0.020 505
0.130 504
0.100 498/1
0.030
0.030 498/2
440
0.100 448
0.020 449
0.260 450
0.120
0.510 493/1
493/2
0.100 461
0.020 492/2
0.240 491/1
0.060 491/2क
0.020 491/2ख
0.020 466
0.010 464
0.100 482/1 क
0.180
0.140 483
0.180 937
949/1 क
0.180 949/1ख
0.180 949/1 ग
0.140
0.140 949/1 घ
(2)
(1)
0.550
949/2
0.050
923/1क
0.060
923/2
948/1
0.030
948/2
0.120
0.110
949/3
948/4
0.040
0.050
948/5
947/1
0.010
0.010
947/2
946/1
0.300
0.300
946/2
0.100
1024/1
1024/2
0.110
1025
0.240
1028
0.240
1029
0.400
निजी खाता भूमि योग रकबा .. 6.440
(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए अर्जन आवश्यक है .- भितरी मुटमुरू तालाब योजना के निर्माण हेतु.
(3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कलेक्टर ( भू- अर्जन ) , जिला सतना के न्यायालय में किया जा सकता है .
क्र. एफ. 1372 - भू-अर्जन 12. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 संशोधन 1984 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अन्तर्गत इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिए आवश्यकता है :-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन (म. प्र. शासन/निजी खाता ) (क) जिला-सतना
(ख ) तहसील- उचेहरा
(ग) नगर/ग्राम- चौतरहा
(घ ) लगभग क्षेत्रफल- 23.380 हेक्टेयर.
खसरा नंबर
अर्जित रकबा
(हे. में. )
(1)
(2)
18
1.264 भाग 1 ]
(1)
(2) 19
0.449 20
0.418 22
0.157 25
1.891 26
0.523 29/2
0.209 29/1
0.209 29/3
0.199 30/1
0.199 30/2
0.199 30/3
0.199 31
0.397 32/1
0.272 32/2
0.272 32/3
0.272 34
0.763 35
0.627 36
0.021 38/1
0.105 38/2
0.105 39
0.094 40
0.115 42
0.105 43
0.125 44
0.063 45
0.073 46
0.167 47
0.136 48/1
0.073 48/2
0.063 49
0.293 50/1
0.073 50/2
0.073 50/3
0.073 51
0.397 52
0.125 53
0.146 54/2
0.073 55
0.230 56
0.293 57
0.866 58
0.136 59
0.439 60
1.473
2889
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(1)
(2)
61
0.564
65/1
0.449
65/2
0.449
0.460
65/3
0.376
68/1
0.387
68/2
68/3
0.387
0.125
69/1
69/2
0.125
0.125
69/3
70/1
0.084
0.063
70/2
0.063
70/3
73/1
0.094
0.094
73/2
0.094
73/3
74
0.282
75
0.105
0.136
78/1क
0.125
78/1ख
0.042
78/2क
78/2ख
0.042
0.052
78/2 ग
0.021
80/1
0.021
80/2
81
0.031
0.167
82
83/1
0.209
83/2क
0.084
83/2ख
0.063
0.063
83 /2 ग
86
0.282
0.094
88/1
0.094
88/2
0.230
89
0.262
90/1
0.261
90/2
91/1
0.157
91/2
0.167
92
0.951
1/1 ढ
0.523
0.523
1/12
23.380
निजी खाता भूमि योग रकबा 2890
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए अर्जन आवश्यक है.- भितरी मुटमुरू तालाब योजना के निर्माण हेतु.
( 3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कलेक्टर ( भू- अर्जन ) , जिला सतना के न्यायालय में किया जा सकता है.
क्र. एफ. 1373 - भू-अर्जन-12 . चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894, संशोधन, 1984 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अन्तर्गत इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिए आवश्यकता है :-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन ( म. प्र. शासन/निजी खाता ) (क) जिला- सतना
(ख ) तहसील- नागौद
(ग ) नगर/ग्राम - दतुनहा
(घ ) लगभग क्षेत्रफल- 2.420 हेक्टेयर.
खसरा नंबर
अर्जित रकबा (हे. में. )
(1)
(2)
23/1
0.150
23/2
0.150
24/2
0.020
94/2
0.120
93
0.010
0.250
91
96
0.230
98
0.020
92
0.010
104/1
0.150
105
0.020
20/ 1 क
0.030
240/2ख
0.030
242/1
0.030
242/2
0.030
243
0.100
244
0.090
239/1
0.010
238/1
0.020
(2)
(1)
0.030
238/2
237
0.060
228
0.050
236
0.040
0.010
235
234/1
0.020
0.340
261
0.120
285/1
285/2
0.120
293
0.060
292/1 ख
0.010
292/2ख
0.090
निजी खाता भूमि योग रकबा 2.420
(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए अर्जन आवश्यक है- भितरी मुटमुरू तालाब योजना के निर्माण हेतु.
( 3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कलेक्टर ( भू-अर्जन ) , जिला सतना के न्यायालय में किया जा सकता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, के. के. खरे , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय , कलेक्टर, जिला शाजापुर, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग
शाजापुर, दिनांक 4 जुलाई 2012
प्र.क्र. भू- अर्जन-12-230.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अन्तर्गत इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि निम्नानुसार भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है : -
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- शाजापुर
(ख ) तहसील- शाजापुर
(ग) ग्राम-जादमी भाग 1 ]
2891
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(घ) क्षेत्रफल- 0.06 हेक्टर.
सर्वे क्रमांक
क्षेत्रफल जो अर्जन होना है. (हेक्टेयर में ) (1)
(2)
382
0.06
(2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिए भूमि की आवश्यक है- जादमी- सारली सड़क मार्ग के लिये भूमि की आवश्यकता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, प्रमोद गुप्ता, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय , कलेक्टर, जिला ग्वालियर, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग
ग्वालियर , दिनांक 3 जुलाई 2012
प्र. क्र. 01 - अ- 82-11-12- भू-अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है . अतः भू- अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अन्तर्गत इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की निम्न प्रयोजन के लिये आवश्यकता है
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला-ग्वालियर
(ख) तहसील-ग्वालियर
(ग) ग्राम- टिहोली
(घ ) लगभग क्षेत्रफल-7.09 हेक्टेयर.
हर्सी उच्च स्तरीय नहर अर्सेली एवं टिहौली के निर्माण हेतु आने वाले कृषकों की भूमि का मुआवजा निर्धारण प्रस्ताव अर्जित रकबा ( हे. में. )
रिमार्क सर्वे नं. सर्वे नं. का नहर में आने
वाले क्षेत्र का
कुल रकबा
रकबा ( हे . में )
(1)
(2)
(3) (4)
अर्सेली माईनर
9977/मि.1
0.408
0.12
(4) (2)
(3)
(1)
0.909
977/मि.2
0.726
0977/3 मि. 1
0.727
977/3 मि. 2
980
1.338
0.10
979
0.773
0.13
973
1.16
0.14
0.05
968
0.564
0.01
969
0.879
965
1.515
0.26
0.397
0.10
958/1 /मि. 1
0.581
958/2मि. 1
957
0.857
0.10
1.014
0.10
20, 22/3
22/4
0.209
22/5 मि 1
0.073
22/5 मि. 2 0.679
0.17
22/1
1.275
13
0.732
0.14
0.17
14
1.327
0.533
0.06
21, 22/3
0.01
954 मि. 1
0.105
0.104
954/मि. 2
0.24
27/ मि.1
0.453
27/ मि.2
0.452
27/ मि.3
0.453
40
0.293
0.05
39
0.575
0.12
37
0.439
0.01
35
0.742
0.06
100
0.13
0.700
0.11
109
0.418
112
0.606
0.15
0.209
0.01
119
118
0.470
0.13
0.355
128
0.15
142
0.230
0.16
0.120
145
0.01
146
0.042
0.04
0.564
0.28
148
150
0.209
0.1 2892
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
(2)
(1)
(3) (4) 129
0.502
0.02
168
0.648
0.05
टिहौली माईनर
852
0.04
0.334
निजी भूमि 854
0.157
0.06
_"_ 811
0.146
0.09
_ "_ 810
0.564
0.08
_"_
0.10
809
0.428
_"_
0.17
808
0.742
_"_ 859
1.369
0.01
_"_ 897
0.04
0.146
_"_ 861/1
0.951
0.14
" 0.376
861/2
" 861/3
0.261
862
0.92
0.24
0.01
863
1.996
_"_
0.04
864
0.533
0.17
865
1.139
"
0.17
770/1
0.293
_"_ 770/2
0.441
_"_ 770/3
0.739
0.08
774
0.441
678/1
0.105
0.08
" 678/2
0.115
_"_ 669/1
0.303
0.02
669/2
0.230
" 669/3
0.230
_"_ 667/2
0.684
0.24
667/3
0.784
_ "_ 667/4
0.157
_"_ 667/5
0.679
_"_ 633
0.732
0.14
629
0.272
0.12
_ "_ 1.588
682
0.22
_"_
0.03
548
0.219
" 550
0.763
0.13
" 558/1
0.361
0.17
_ "_ 558/2
0.36
558/3
0.732
(2)
(3) (4) (1)
565/1
0.37
0.23 निजी भूमि 565/2
0.369
_"_ 565/3
0.369
_"_
0.05
575
0.857
_"_
0.16
574
577
0.08
0.523
_" _ 465
0.219
0.02
"
0.18
406
0.627
408
0.04
0.23
"
0.04
409
0.69
"
0.13
1.16
412
"
0.09
413/1
0.721
413/2
0.219
413/3
0.084
7.09
योग .
(2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है- हरसी उच्च स्तरीय नहर की अर्सेली एवं टिहोली शाखा नहर के निर्माण कार्य हेतु भूमि का अर्जन.
( 3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , कार्यालय में किया जा सकता है.
प्र. क्र. 37 - अ- 82-10-11- भू-अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. अतः भू- अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अन्तर्गत इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की निम्न प्रयोजन के लिये आवश्यकता है : -
अनुसूची
(1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला-ग्वालियर
(ख ) तहसील- ग्वालियर
( ग ) ग्राम - डबका
(घ) क्षेत्रफल-4.30 हेक्टेयर .
सर्वे नं.
नहर में आने
वाले क्षेत्र का
सर्वे नं. का कुल रकबा
रकबा (हे . में)
(2)
(3) (1)
0.10 513
1.003
1.181
0.18 512/मिन 1 भाग 1 ]
(2)
(1)
(3) 512/मिन 2
1.045
501/1/1
0.35
0.47
0.209
496/3/ख
496/5 ख/2
0.104
302/2
0.035
501/3/क
1.881
501/3/ख
0.209
501/3 /ग
0.418
501/3 /घ
0.627
0.700
501/3/ज्ञ
502/1
1.150
0.11 502/2
0.627
503
0.353
0.05 496/4/ख
0.36
0.627
496/4/ग
0.627
496/5/क
0.282
496/3क/1
0.314
496/ 5/ग
4.8
496/4/क
0.627
506
0.11
0.742
478/1
0.345
0.05 479/1/क
0.314
0.47 478/2
0.314
479/1 /ख
0.314
479 /1 /ग
0.627
455/1 /क
1.358
455/1 /ख
0.157
479/1 /घ
0.314
455/ 1 /ग
0.157
457/1
0.418
0.39 457/2
0.418
457/3
0.418
457/4
0.836
457/5
0.836
457/6
1.254
0.418
457/7
457/8
0.628
456/1
2.372
0.08 456/2
0.627
456/3
0.836
456/4
0.418
456/5
0.418
450/1
0.38
1.118
450/2
1.881
2893
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(1)
(2)
(3)
2.09
450/3
455/2
0.418
0.44 455/3
1.045
2.007
290/1
0.18
1.224
290/2
1.736
292/1
0.47 514
1.902
0.39 291
0.07
4.30
योग ..
(
2 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) भू-अर्जन आधिकारी , ग्वालियर के कार्यालय में देखा जा सकता है.
प्र. क्र. 38 - अ-82-10-11- भू-अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अन्तर्गत , इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की निम्न प्रयोजन के लिये आवश्यकता है : -
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क ) जिला- ग्वालियर
(ख ) तहसील-ग्वालियर
(ग) ग्राम-सोनी
(घ) क्षेत्रफल-2.35 हेक्टेयर.
हरसी उच्च स्तरीय नहर सिंध परियोजना द्वितीय चरण के अन्तर्गत उदयपुरा शाखा नहर के निर्माण हेतु आने वाली कृषकों की भूमि का मुआवजा निर्धारण प्रस्ताव.
सर्वे नं.
सर्वे का
नहर में आने
वाले क्षेत्र का
कुल रकबा
रकबा ( हे. में)
(2)
(3) (1)
1355
0.29
3.971
1.045
1357/1
0.26 1357/2
2.184
0.512
1375/1
1375/2
1.463
0.36
0.05 1377
2.477 2894
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(1)
(2)
(3) 1352/2
0.836
0.04 1352/3
0.157
1352/4
0.366
1352/5
0.105
1352/1/1
0.251
1352/1/2
0.251
1376/1
0.56
2.560
0.449
1376/2
1371/1
0.836
0.20 1371/2
0.387
1372/1
0.836
0.30 1372/2
0.136
1375/3
0.209
1375/4
0.157
1376/3
0.157
1378
1.588
0.28 1379/1
0.157
0.01
0.418
1379/3/ख
1379/2
0.470
1379/3/क
2.299
2.35 कुल रकबा
(2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है- हरसी उच्च स्तरीय नहर की उदयपुरा शाखा नहर के निर्माण हेतु भूमि का अर्जन.
( 3) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , कार्यालय , में किया जा सकता है .
प्र. क्र. 51 - अ-82-11-12- भू-अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अन्तर्गत, इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की निम्न प्रयोजन के लिये आवश्यकता है : -
अनुसूची
(1 ) भूमि का वर्णन -
(क ) जिला- ग्वालियर
(ख ) तहसील- भितरवार
(ग) ग्राम-निकौड़ी
(घ) क्षेत्रफल-3.095 हेक्टेयर.
फार्म- एक ( 3 ) ( ग्राम-निकौड़ी)
ग्राम निकौड़ी में नवीन नहर का निर्माण हेतु आने वाली कृषिकों की भूमि का मुआवजा निर्धारण प्रस्ताव सर्वे नं.
सर्वे का कुल रकबा (हे. में)
(1)
(2)
भू-अर्जन हेतु नहर में आने वाला रकबा ( हे. में ) (3) 138
1.128
0.182 140
0.033
0.763
0.117
0.836
141
147
0.815
0.113 148
0.682
0.114
0.261
0.114 149मिन
149 मिन
0.360
150
0.272
1.505
151/1
0.206
0.690
0.700
151/2
46 मिन
0.419
0.160
0.533
47मिन
0.144
0.135
0.180 49मिन
0.596
49मिन
52
1.035
0.212 208
0.293
0.046
0.826
0.238 209
210
0.042
0.023
0.355
0.114 310
313
0.428
0.090
0.366
0.090 309
315
1.745
0.023
0.360 318/1 मिन
0.532
0.836
0.264 408
3.095
योग .
(2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है- हिम्मतगढ़ तालाब की बांयी तट नहर की वितरिकाओं के निर्माण हेतु भूमि का अर्जन.
(3) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , कार्यालय, में किया जा सकता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, पी. नरहरि, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव .
भाग 1 ]
2895
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
कार्यालय , प्रशासक, भू- अर्जन एवं पुनर्वास, बाणसागर परियोजना, जिला रीवा, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग रीवा , दिनांक 5 जुलाई 2012
क्र. 2021 - प्रका. भू-अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा , घोषित किया जाता है कि निजी भूमि/शासकीय भूमि पर स्थित सम्पत्ति के अर्जन हेतु आवश्यकता है: -
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला-सीधी
(ख ) तहसील- रामपुर नैकिन
(ग) ग्राम-कोटा
(घ) लगभग क्षेत्रफल-3.32 हेक्टयर.
खसरा नं
रकबा ( हे . में ) (2)
(1)
69
0.04
0.02
89जु.
0.01
90/3
116
0.08
119
0.10
120
0.10
296
0.14
297
0.12
306
0.13
307
0.10
326
0.28
338
0.10
339
0.11
340
0.10
398
0.02
400
0.03
401
0.18
410
0.04
411
0.01
413/11
0.11
413/2
(2)
(1)
416 जु. , 416 जु. , 416 जु. 0.16
0.16
0.20
424 जु. , 424 जु.
0.16
0.01
519/1
519/2
519/3
0.30
519/4
519/5
417 0.06 418 0.08 419 0.05 420 421 423 0.06 0.01 517 518 0.25 328 3.32
योग (अ) :
निरंक महायोग (अ +ब) 3.32 (ब) म. प्र. शासन की भूमि का विवरण
प्रमाणित किया जाता है कि दिये गये खसरा तथा रकबा के अलावा कोई रकबा शेष नहीं है .
(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये आवश्यकता है- बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत कोटा सब माइनर में आने वाली निजी भूमि तथा उस पर स्थित संपत्तियों के अर्जन हेतु.
(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
रीवा , दिनांक 10 जुलाई 2012
क्र. 2070- प्रका. भू-अर्जन- 2011-12. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि की सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत, इसके द्वारा , घोषित किया जाता है कि निजी भूमि/शासकीय भूमि पर स्थित संपत्ति के अर्जन हेतु आवश्यकता है:-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- सीधी
(ख) तहसील- रामपुर नैकिन 2896
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20. जुलाई 2012
(ग) ग्राम- बसेंणी
(घ) लगभग क्षेत्रफल- 1.73 हेक्टयर.
खसरा नं.
अर्जित रकबा (हे. में )
कुल रकबा (हे. में)
(1)
(2)
(3) 477
6.02
0.33
3.22
474
0.22
2.16
473
0.07 472
0.14
0.09 471
0.12
0.03 481
0.65
0.22 525
1.27
0.07 523
0.09
0.09 600
2.55
0.04 639
0.90
0.18
0.03
640
0.06 641
5.17
0.33
1.73
योग
(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये आवश्यकता है- बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत सिहावल मुख्य नहर प्रणाली की बसेंणी माइनर क्र. 1 के लिये निजी भूमि तथा उस पर स्थित संपत्तियों के अर्जन हेतु.
(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
क्र. 2072 - प्रका. भू-अर्जन- 2011-12 . चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि की सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा, घोषित किया जाता है कि निजी भूमि/शासकीय भूमि पर स्थित संपत्ति के अर्जन हेतु आवश्यकता है: -
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- सीधी
(ख ) तहसील- रामपुर नैकिन
[भाग 1 (ग ) ग्राम- बसेंणी
(घ) लगभग क्षेत्रफल- 1.425 हेक्टयर.
खसरा नं .
अर्जित रकबा (हे. में)
कुल रकबा (हे. में)
(1)
(2)
(3)
0.28
0.06 541
0.066 542
0.31
543
0.28
0.078
0.43
0.03 560/1
560/2
0.44
0.045
0.06
0.02 575
0.05
0.17
574
0.01 573
0.16
577
0.18
0.006
0.71
0.07 578
0.05
579
0.01
0.21
580
0.06
0.04 583
0.19
584
0.04
0.01 588
0.28
0.04 587
0.02
0.01
0.13
0.04 586
620
0.15
0.14
0.09
1.16
621
623
1.00
0.18
0.01
0.86
624
0.25
0.12 625
0.01 626
0.06
659
0.60
0.10
0.64
661
0.11
1.425
योग
(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये आवश्यकता है- बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत सिहावल मुख्य नहर प्रणाली की बसेंणी माइनर क्र. 2 के लिये निजी भूमि तथा उस पर स्थित संपत्तियों के अर्जन हेतु.
(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
क्र. 2074- प्रका. भू-अर्जन- 2011-12. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि भाग 1 ]
2897
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है . अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत, इसके द्वारा , घोषित किया जाता है कि निजी /शासकीय भूमि पर स्थित सम्पत्ति के अर्जन हेतु आवश्यकता है: -
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला-सीधी
(ख ) तहसील- रामपुर नैकिन
(ग) ग्राम- मझिगंवा
(घ ) लगभग क्षेत्रफल-1.17 हेक्टयर .
खसरा नं.
कुल रकबा (हे. में)
(1)
(2)
अर्जित रकबा (हे. में) (3) 192
0.28
0.06 191
0.54
0.14
0.05
188
0.05 186
1.13
0.06
0.15
174
0.05
0.06
187
0.06 585/1
0.06
0.03 585/2
0.65
0.06 586
0.30
0.02
0.08
0.01 541/1
541/2
0.03
0.73
582
0.62
0.09 593/1
0.06
0.02
0.06
593/2
0.02
0.03
594/1
0.01
0.02
594/2
0.01 595/2
0.12
0.04
0.62
604
0.01
0.13
603
0.06 607/1/2
0.66
0.06 608/1
0.16
0.03 608/2
0.16
0.06 617/1
0.12
0.01 615/2
0.42
0.05 613
0.03
0.01 614
0.44
0.12
योग
1.17 (2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये आवश्यकता है- बाणसागर परियोजना के अन्तर्गत सिहावल मुख्य नहर प्रणाली की मझिगवां उपशाखा माइनर क्र. 1 के लिये निजी भूमि तथा उस पर स्थित संपत्तियों के अर्जन हेतु.
(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक , बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
क्र. 2084 - भू-अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यक है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा , घोषित किया जाता है कि निजीभूमि /शासकीय भूमि पर स्थित सम्पत्ति के अर्जन हेतु आवश्यकता है:-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- सीधी
(ख) तहसील - रामपुर नैकिन
(ग) ग्राम- बुढ़गौना
(घ ) लगभग क्षेत्रफल- 1.081 हेक्टयर.
खसरा नं
रकबा ( हे . में ) (1)
(2)
1072
0.020
0.010
1073
1070
0.041
1059
0.040
1068
0.020
0.040
1069
1060
0.050
0.020
1059
0.020
1052
0.010
1101
1102
0.010
0.010
1050
1046
0.15
1045
0.060
1091
0.060
1100
0.020
0.020
1099
1098
0.020
1106
0.010
1105
0.040 2898
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
(2)
(1)
1240
0.030
1238
0.030
0.010
1239
1236
0.020
1237
0.010
1235
0.020
1245
0.040
1234/1
0.040
1234/2
1254
0.010
1255
0.010
1258
0.050
1262
0.040
1277
0.040
1264
योग :
0.070 1.081
( 2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये आवश्यकता है- बाणसागर परियोजना के नहर निर्माण में आने वाले ग्रामों की निजी भूमि शासकीय भूमि पर स्थित संपत्तियों के अर्जन हेतु.
(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
क्र. 2086 - भू-अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत, इसके द्वारा , घोषित किया जाता है कि निजी भूमि/ शासकीय भूमि पर स्थित सम्पत्ति के अर्जन हेतु आवश्यकता है:-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन -
(क) जिला-सीधी
(ख ) तहसील-चुरहट
( ग ) ग्राम-टीकट खुर्द
(घ ) लगभग क्षेत्रफल-0.62 हेक्टयर.
खसरा नं (1)
रकबा (हे . में ) (2)
106
0.16
107/1
0.01
179
0.24
(1)
(2)
117
0.03
118
0.03
119
0.03
120
0.08
122
0.04
0.62
योग :
(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये आवश्यकता है- बाणसागर परियोजना के नहर निर्माण में आने वाले ग्रामों की निजी भूमि शासकीय भूमि पर स्थित संपत्तियों के अर्जन हेतु.
(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
क्र. 2088 - भू-अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा , घोषित किया जाता है कि निजी भूमि/ शासकीय भूमि पर स्थित सम्पत्ति के अर्जन हेतु आवश्यकता है: -
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- सीधी
(ख ) तहसील - रामपुर नैकिन
(ग ) ग्राम-चोरगड़ी
(घ) लगभग क्षेत्रफल-2.754 हेक्टयर.
खसरा नं
रकबा (हे . में )
(2)
(1)
707
0.020
705
0.048
0.030
706
709
0.029
702
0.017
0.056
704
0.064
703
1114
0.076
1115
0.089
0.061
1122
1123
0.029
1151
0.009 भाग 1 ]
2899
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(1)
(2) 1152
0.014 1153
0.014 1614
0.072 1598
0.071 1597
0.019 1581
0.012 1154
0.019 1156
0.064 1157
0.048 1161
0.088 1373
0.115 1372/1
0.025 1116/1
0.020 1116/2
1118
0.011 1120
0.025 1121
0.016 1169
0.013 1168
0.013 1167
0.009 1595/1
0.008 1596
0.043 1595/2
0.008 1165
0.010 1166
0.008 1164
0.006 1163
0.005 1372/2
0.025 1374
0.094 1375/3743
0.064 1376/3742
0.064 1379/3738
0.072 1379
0.072 1381
0.134 1383
0.046 1437
0.024 1717
0.026 1582
0.045 1599
0.034 1600
0.045 1438
0.029 1439
0.038 1441
0.001 1443
0.048
(2)
(1)
0.018
1743
0.008
1738
0.002
1737
1726
0.043
1728
0.022
0.013
1723
1724
0.022
0.058
1716
1712
0.011
0.011
1715
1711
0.094
1570
0.072
1574
0.035
1601
0.200
योग :
2.754
( 2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये आवश्यकता है- बाणसागर परियोजना के नहर निर्माण में आने वाले ग्रामों की निजी भूमि शासकीय भूमि पर स्थित संपत्तियों के अर्जन हेतु.
(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है .
क्र. 2090 - भू- अर्जन. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 (क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा , घोषित किया जाता है कि निजी भूमि/शासकीय भूमि पर स्थित सम्पत्ति के अर्जन हेतु आवश्यकता है: -
अनुसूची
(1 ) भूमि का वर्णन -
(क) जिला- सीधी
(ख ) तहसील- चुरहट
(ग) ग्राम- मवई
(घ) लगभग क्षेत्रफल-4.86 हेक्टयर.
खसरा नं
रकबा ( हे. में) (1)
(2)
0.02
68
69
0.03
0.01
1216
0.01
1112 2900
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
(1)
(2) 1228
0.02 1801
0.02 1809
0.01 1813
0.01 1814
0.03 70
0.04 109
0.05 1806
0.02 1812
0.01 75
0.01 1197
0.02 1802
0.02 76
0.01 77
0.02 80
0.02 81
0.01 1807
0.02 1083
0.02 20320
0.07 107
0.01 108
0.05 114
0.02 1113
0.01 1224
0.01 1227
0.02 1815
0.06 1828
0.03 1266
0.01 110
0.03 113
0.01 115
0.03 1267
0.02 1062
0.02 1070
0.05 1220
0.04 1222
0.11 1258
0.01 1259
0.03 1071
0.06 1073
0.05 1225
0.02 2030
0.01 1072
0.05 1069
0.05
(2)
(1)
0.02
2589
1771
0.08
0.04
1795
0.02
1796
2026
0.04
0.07
2029
2235
0.08
1081
0.01
0.02
1200
0.02
1207
1082
0.02
1804
0.01
1808
0.04
1084
0.02
2036
0.06
1229
0.01
1085
0.04
1086
0.08
1211
0.02
1803
0.01
0.02
1805
0.01
2031
2251/2
0.01
0.01
1208
1214
0.03
1215
0.01
1218
0.03
2006
0.09
1219
0.01
1862
0.02
0.01
1221
1761
0.07
0.03
1778
0.05
1766
0.05
1792
0.01
1794
1779
0.02
0.06
1767
1780
0.01
1772
0.07
1793
0.04
1789
0.01
0.01
1799
0.01
1800 भाग 1 ]
2901
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(1)
(2) 1825
0.04 1827
0.04 1835
0.18 1826
0.02 1834
0.01 1982/2
0.07 186/1 क
0.03 2041/1
0.07
0.03 1861 /1 ख
2041/2
0.07 2043
0.04 1861/2
0.03 1864
0.02 1865
0.05
0.15 1856
1857
0.02 1981
0.18 1982
0.07 2005
0.09 1983
0.10 2547
0.02 2024
0.05
0.01 2251/3
2248/1
0.02 2028
0.01 2248/2
0.02 2037
0.05 2038
0.05 2039/1
0.03 2039/2
0.03 2230
0.03 2229
0.01
0.04 2232
2233
0.02 2234
0.01 2251/1
0.01 1223
0.04 2010
0.02 1204
0.06 101
0.05 1760
0.05 2044
0.01
योग ..
4.86 (2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये आवश्यकता है- बाणसागर परियोजना के नहर निर्माण में आने वाले ग्रामों की निजी भूमि शासकीय भूमि पर स्थित संपत्तियों के अर्जन हेतु.
(3 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , प्रशासक, बाणसागर परियोजना, रीवा के कार्यालय में किया जा सकता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, बी. बी. श्रीवास्तव, प्रशासक एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय, कलेक्टर, जिला डिण्डौरी, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग डिण्डौरी, दिनांक 6 जुलाई 2012
क्र. भू-अर्जन- 104- अ- 82-2009-2010-408.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा, यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिए आवश्यकता है : -
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन -
(क) जिला डिण्डौरी
(ख ) तहसील-डिण्डौरी
( ग ) ग्राम- गोरखपुर रै. , प. ह. 18 , रा . नि. म. शाहपुर (घ ) लगभग क्षेत्रफल-74.48 हैक्टर.
सर्वे नम्बर भू-अर्जन हेतु प्रस्तावित रकबा (हे. में )
(1)
(2)
0.300
89
40
0.170
0.150
60
61/1
1.910
0.800
61/2
63/1
0.900
63/2
0.240
63/3
0.890
63/4
0.890 2902
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
(1)
(2) 65
0.160
0.160 66
72
0.400 73
0.250 87
0.860 90
0.690 91
1.820 92
0.770 93/1
1.340 93/2
0.270 93/3
0.270 93/4
0.270 93/5
0.270 93/6
0.270 95/1
0.800 95/2
0.800 97/1
1.230 97/2
1.220 98
1.850 99
0.910 100
1.080 101
2.870 103
4.570 105/1
1.620 105/2
1.290 106/1
1.490
0.400 106/2
107
0.400 131
1.950 132/1
0.530 132/2
0.530 132/3
0.530 132/4
0.210 132/5
0.210
(2)
(1)
132/6
0.530
1.600
133
134
3.220
135
1.980
136
1.480
137
0.710
139
1.970
141
3.220
142
1.730
143
1.630
144
1.830
145/1
1.700
145/2
0.180
146
0.800
154
2.070
155
0.700
156/1
1.230
156/2
1.230
157
2.970
2.560
158
नहर कार्य निजी भूमि
160/5
0.410
162
0.320
163/1
0.450
165
0.320
192/3
0.480
194/1
0.420
74.480
योग :
13.260
शासकीय भूमि 25 , 56,62,88,89 , 94, 96 , 102, 104 , 125 , 138, 140, 159
87.740
कुल योग :
(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये आवश्यकता है- गोरखपुर जलाशय ग्राम गोरखपुर शीर्ष एवं नहर निर्माण हेतु.
(3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , जिलाध्यक्ष के कार्यालय में किया जा सकता है .
भाग 1 ]
2903
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
क्र. भू-अर्जन-अ-82-2011-2012.-चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत, इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिए आवश्यकता है : -
अनुसूची
(1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला-डिण्डौरी
(ख ) तहसील - डिण्डौरी
(ग ) ग्राम- रनगॉव रै.
(घ ) लगभग क्षेत्रफल- 21.880 हेक्टयर.
सर्वे नम्बर
भू- अर्जन हेतु प्रस्तावित रकबा (हे. में)
(1)
(2)
निजी भूमि
300
1.580
303/1
1.110
303/2
1.080
302/1
0.390
302/2
0.490
302/3
0.290
301/1
0.600
301/2
0.350
0.350
301/3
309/1
2.600
309/2
0.260
309/3
0.260
314
2.770
315
2.600
299/1
0.750
299/2
0.750
299/3
0.750
289
0.150
291
0.500
297
1.150
296
0.600
310
1.180
311
0.820
(2)
(1)
308
0.450
0.050
287/1
21.880
योग निजी भूमि :
1.93
शासकीय भूमि 286,307,312 , 313,317
23.810
कुल योग भूमि:
(2 ) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये आवश्यकता है- रनगॉव जलाशय शीर्ष कार्य हेतु.
( 3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , जिलाध्यक्ष के कार्यालय में किया जा सकता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, जी. वी. रश्मि, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय, कलेक्टर, जिला उमरिया, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग उमरिया, दिनांक 7 जुलाई 2012
क्र. भू-अर्जन- 2012-73-82-2011-2012.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत , इसके द्वारा , यह घोषित किया जा सकता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिए आवश्यकता है : -
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- उमरिया
(ख) तहसील- नौरोजाबाद
(ग ) ग्राम- आमाडोंगरी , कुर्रिहा
(घ ) लगभग क्षेत्रफल- 30.628 हे . 1.458 , प. ह.नं. 23 खसरा नम्बर
अर्जित रकबा (हे. में) (2)
(1)
आमाडोंगरी
169
0.496
157
2.987
0.060
150 2904
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 जुलाई 2012
(1)
(2) 151
0.192 152
0.924 311
0.300 310
1.163 316
0.424 317
0.703 319
0.806 322
0.648 155
1.125 158
0.231 160/1 /क
0.086 160/1/ख
0.086 160/1 /ग
0.574 160/ 1 /घ
0.573 160/2/क
0.405 160/ 2/ख
0.404 160/3/क
0.405 160/3 /ख
0.404 163
3.211 164
0.978 167
1.979 234
0.154 233
0.892 301
0.420 308/2
0.607 305
1.119 304
2.202 324/1
0.246 324/2
0.246 324/3
0.246 324/4
0.246 324/5
0.987 318/1
0.400 318/2
0.400 318/3
0.400 318/4
0.400 294
0.460 288
0.012 287
0.004 254
0.007 (1)
(2)
169/786
0.044
181
0.060
182
0.048
182/789
0.040
174/774
0.034
230/775
0.066
229
0.060
232
0.072
233
0.108
224
0.089
223
0.028
222
0.004
221
0.038
213
0.057
220
0.003
310
0.024
316
0.160
411
0.084
416
0.072
417
0.128
429
0.064
120
0.048
119
0.030
114
0.058
110
0.040
108
0.056
106
0.086
103
0.045
594
0.146
590
0.104
587
0.024
588
0.024
586
0.072
योग :
30.628
कुरिहा
240
0.050
137/220/1
0.008
0.022
137/220/2
66
0.008
136
0.060 भाग 1 ]
2905
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(1)
(2)
69
0.141
71/217
0.007
107
0.005
108
0.079
106
0.056
102
0.046
80
0.150
90
0.176
87
0.144
16
0.176
15
0.084
5
0.246
1.458
(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये आवश्यकता है- आमाडोंगरी जलाशय योजना ( शीर्ष एवं नहर ) निर्माण कार्य हेतु अतिरिक्त अशासकीय भूमि के अधिग्रहण बाबत्.
( 3 ) भूमि के नक्शा ( प्लाट ) का निरीक्षण, जिलाध्यक्ष कार्यालय एवं कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , उमरिया में देखा जा सकता है.
(4) भू-अर्जन अधिनियम की धारा -7 के अन्तर्गत कार्यवाही हेतु आदेशित किया जा सकता है.
क्र. भू- अर्जन- 2012-83-82-2011-2012.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. अतः भू- अर्जन अधिनियम , 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अंतर्गत, इसके द्वारा , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिए आवश्यकता है :-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन -
(क ) जिला- उमरिया
(ख) तहसील- नौरोजाबाद
(ग) ग्राम-कोहका
( घ) लगभग क्षेत्रफल-32.147, प. ह.नं. 16 खसरा नम्बर
अर्जित रकबा
(हे. में)
(1)
(2)
कोहका
0.240
274/1 ग
274/ 1 घ
0.506
274/1ङ
0.505
274/1ख
0.066
0.291
274/2
167
0.370
156
0.129
156/1 क2
0.170
157/1 ख
0.006
157/1 क
0.129
117
0.043
118/2
0.106
118/1
0.192
94
0.076
96
0.100
230
1.229
226/3 ख
0.004
425
0.060
225
0.125
224
0.201
223
0.100
171
0.273
148
0.072
150
0.024
149
0.060
0.100
139
142,137
0.128
130
0.155
273
0.307 2906
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
(1)
(2) 232
2.754 233
2.063 235
1.683 259
1.534 260
1.335 258
0.613 257
0.144 261
2.174 256
0.095 255
0.156 254
0.380 262
0.169 263
1.150 264
1.053 265
1.234 266
0.813 267
0.230 268/2ख
0.170 268/2 ग
0.176 268/2क 1
0.186 268/2क 2
0.172 268/2क 3
0.146 268/1 ख
0.570
0.289 268/क 1 , क 2
269
0.048 270
3.120 433
0.283 271
0.630 285
1.771 294
0.067 295
0.267 296
0.117 291
0.008 297
0.101 (1)
(2)
298
0.615
0,064
299
योग .. 32.147
( 2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये आवश्यकता है- कोहका जलाशय योजना ( शीर्ष एवं नहर ) निर्माण कार्य हेतु अतिरिक्त अशासकीय भूमि के अधिग्रहण बाबत्.
(3 ) भूमि के नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण , जिलाध्यक्ष कार्यालय एवं कार्यपालन यंत्री , जल संसाधन संभाग उमरिया में किया जा सकता है.
(4 ) भू-अर्जन अधिनियम की धारा -7 के अन्तर्गत कार्यवाही हेतु आदेशित किया जा सकता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, एन. एस. भटनागर, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय, कलेक्टर, जिला छिन्दवाड़ा, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग
छिन्दवाड़ा, दिनांक 12 जुलाई 2012
क्र. 4935 - भू- अर्जन-2012 .- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि की सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. अतः भू-अर्जन अधिनियम, 1894 ( क्रमांक एक, सन् 1894 ) की धारा 6 के अन्तर्गत, इसके द्वारा , यह भी घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है:-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन -
(क) जिला- छिन्दवाड़ा
(ख ) तहसील- मोहखेड
(ग ) नगर/ ग्राम- बुचनई, प.ह.नं. 48/53, ब. नं. 401 , रा. नि. मंडल- इकलबिहरी.
भाग 1 ]
2907
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 जुलाई 2012
( घ ) अर्जित किये जाने वाला प्रस्तावित क्षेत्रफल - 02.442 हेक्टयर एवं प्रस्तावित क्षेत्रफल पर आने वाली संपत्तियां.
प्रस्तावित
प्रस्तावित रकबा खसरा नंबर
(हे. में) (1)
(2)
5/2
0.030
6/1
0.040
6/3
0.040
6/2
0.120
7/1
0.040
7/9
0.042
7/2
0.042
7/6
0.068
7/3
0.020
7/8
0.040
7/7
0.040
92/2
0.080
92/3
0.060
11/2
0.160
11/4
0.080
11/5
0.090
24/1
0.110
24/2
0.060
24/4
0.060
25
0.120
26
0.100
27/1
0.050
27/3
0.160
23/2
0.030
29
0.040
30
0.130
31
0.090
34/1
0.036
(2)
(1)
35/2
0.030
0.100
48/4
50/7
0.010
34/8
0.070
35/4
0.040
0.070
48/2
35/1
0.014
35/3
0.040
50/1
0.030
50/2
0.060
योग .. 02.442
(2 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है. - बुचनई जलाशय योजना के अन्तर्गत बांध एवं नहर निर्माण हेतु निजी भूमि के अर्जन के संबंध में.
(3 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा (प्लान ) का निरीक्षण , कलेक्टर ( भू-अर्जन शाखा छिन्दवाड़ा ) जिला छिन्दवाड़ा के न्यायालय में किया जा सकता है.
(4 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे (प्लान) का निरीक्षण, कार्यपालन यंत्री , जल संसाधन संभाग , छिन्दवाड़ा के कार्यालय में भी किया जा सकता है.
(5 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) एवं प्रकरण का निरीक्षण, अनुविभागीय अधिकारी , कन्हरगांव परियोजना शीर्ष कार्य अनुविभाग , छिन्दवाड़ा, जिला छिन्दवाड़ा के कार्यालय में भी किया जा सकता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार , महेशचन्द्र चौधरी , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.