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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

अनुसूचित जाति बस्‍ती विकास मजरे टोलों का विद्युतीकरण एवं अनुसूचित जाति वर्ग के कृषकों के कुओं तक विधुत लाईन का विस्‍तार योजना नियम 2018

Published 15 May 2018

Department
अनुसूचित जाति कल्‍याण
Type
Extraordinary
Gazette no.
275
Identifier
in.gazette.madhya.2018-05-15.275.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

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मध्य प्रदेश शासन

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

( असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 275]

भोपाल, मंगलवार, दिनांक 15 मई 2018-वैशाख 25 , शक 1940

अनुसूचित जाति कल्याण विभाग

मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल

भोपाल, दिनांक 15 मई 2018

अनुसूचित जाति बस्ती विकास , मजरे टोलों का विद्युतीकरण एवं अनुसूचित जाति वर्ग के कृषकों के कुओं तक विद्युत लाईन का विस्तार योजना नियम 2018

क्र.एफ-12-22/2016 /25-4 राज्य शासन एतद द्वारा अनुसूचित जाति बाहुल्य ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों की अनुसूचित जाति बाहुल्य बस्तियों के विकास , मजरे टोलों का विद्युतीकरण एवं अनुसूचित जाति वर्ग के कृषकों के कुओं तक विदयुत लाईन का विस्तार हेतु पूर्व में जारी समस्त नियमों/ निर्देशानुसार को अधिक्रमित करते हुए निम्नानुसार नियम बनाये जाते हैं: -

1. संक्षिप्त नाम-विस्तार एवं प्रारंभ -

1.1 यह नियम मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति बस्ती विकास, मजरे टोलों का विद्युतीकरण एवं अनुसूचित जाति वर्ग के कृषकों के कुओं तक विदयुत लाईन का विस्तार योजना नियम 2018 कहे जायेंगे ।

1.2 इनका विस्तार एवं कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण मध्यप्रदेश राज्य होगा।

1.3 ये नियम राज्य शासन द्वारा जारी किये जाने के दिनांक से प्रभावशील होगें ।

1.4 मध्यप्रदेश शासन , अनुसूचित जाति कल्याण विभाग द्वारा अनुसूचित जाति बस्ती विकास , मजरे टोलों का विद्युतीकरण एवं अनुसूचित जाति वर्ग के कृषकों के कुओं तक विद्युत लाईन का विस्तार के लिये प्रावधानित राशि का उपयोग इन नियमों के अनुसार किया जावेगा।

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 मई 2018

2. योजना का उद्देश्यः-

वर्ष 2011 की जनगणना अनुसार प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग की कुल जनसंख्या 1.13 करोड़ है, जो कुल जनसंख्या का 15.6 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति बाहुल्य ग्रामों में नालियां, सी.सी रोड विभागीय आवासीय संस्थाओं को मुख्य सड़क से जोड़ने हेतु सी.सी. रोड, आंतरिक रोड तथा विभागीय आवासीय संस्थाओं एवं अनुसूचित जाति बाहुल्य बस्तियो को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली सड़कों पर पुलिया/ रपटों का निर्माण बस्तियों/ मजरे / टोलों में विद्युतीकरण , कृषकों के कुओं तक विद्युत लाईन का विस्तार ( पम्पों का ऊर्जीकरण ) सामाजिक कार्यक्रम/ समारोहों हेतु सामुदायिक/ मंगल भवनों एवं विभागीय आवासीय संस्थाओ में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार हेतु योजना प्रस्तावित है। 3. परिभाषायें:-

3.1 राज्य शासन से तात्पर्य मध्यप्रदेश शासन से है ।

3.2 अनुसूचित जाति से तात्पर्य ऐसी जातियों से है जिन्हें भारत शासन द्वारा राज्य के लिये अनुसूचित जातियों के रूप में अधिसूचित किया गया है । सूची परिशिष्ट ' 1 ' पर है ।

3.3 अनुसूचित जाति बाहुल्य बस्ती से तात्पर्य ऐसे ग्रामों/ बस्ती/वार्डों/ मजरे/टोलों/ पारों से है जिनमें वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जातियों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 40 प्रतिशत या उससे अधिक हो । बस्ती/कालोनी/वार्ड/ मोहल्ले/ मजरे /टोलों में भी अनुसूचित जाति के व्यक्तियों की संख्या 40 प्रतिशत या उससे अधिक होने पर हीं प्रावधानित कार्य कराये जा सकेगें । जनसंख्या 2011 की जनगणना में पृथक से नहीं होने से इनमें अनुसचित जाति की जनसंख्या का प्रमाणीकरण ग्रामीण क्षेत्र के लिये संबंधित मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत द्वारा किया जावेगा।

3.4 नगरीय अनुसूचित जाति बस्ती से तात्पर्य नगरीय क्षेत्रों में ऐसी बस्ती/ कालोनी/वार्ड/मोहल्ले से है जिनमें अनुसूचित जातियों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 40 प्रतिशत या उससे अधिक हो । बस्ती/कालोनी/वार्ड/ मोहल्ले/ मजरे /टोलों में भी अनुसूचित जाति के व्यक्तियों की संख्या 40 प्रतिशत या उससे अधिक होने पर ही प्रावधानित कार्य कराये जा सकगें। जनसंख्या 2011 की जनगणना में पृथक से नहीं होने से इनमें अनुसचित जाति की जनसंख्या का प्रमाणीकरण नगरीय क्षेत्र के लिये संबंधित मुख्य नगरपालिका अधिकारी/ आयुक्त नगर निगम नगरीय क्षेत्र द्वारा किया जावेगा । 3.5 "कलेक्टर/जिलाध्यक्ष" से तात्पर्य जिला कलेक्टर से है ।

3.6 "जिला पंचायत" से तात्पर्य मध्यप्रदेश पंचायत राज अधिनियम के तहत गठित जिला पंचायत से है।

3.7 "जनपद पंचायत " से तात्पर्य मध्यप्रदेश पंचायत राज अधिनियम के तहत गठित जनपद पंचायत से है।

3.8 " ग्राम पंचायत" से तात्पर्य मध्यप्रदेश पंचायत राज अधिनियम के तहत गठित ग्राम पंचायत से है। 3.9 "स्थानीय निकाय" ( नगरीय क्षेत्र) से तात्पर्य मध्यप्रदेश नगरपालिका निगम अधिनियम 1956, मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 के तहत गठित नगर पालिका निगम , नगर पालिका परिषद तथा नगर परिषद आदि स्थानीय निकायों से है ।

3.10 इन नियमों के प्रयोजन के लिए विभागीय आवासीय एवं शिक्षण संस्थाएँ अनुसूचित जाति बस्ती मान्य की जावेगी तथा वहां कंडिका 6.1 से 6.7 तक के कार्य किये जा सकेंगे । 550 ( 1)

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3.11 अनुसूचित जाति कृषकों से तात्पर्य गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले सीमांत कृषक एवं अनुसूचित जाति के भूमि धारक व्यक्ति से है ।

3.12 किसी जिले में कंडिका 3.11 अनुसार पात्र हितग्राही ( कृषक) उपलब्ध न होने पर आय सीमा एवं कृषि भूमि की उपलब्धता अनुसार बढ़ते क्रम में कृषकों की सूची तैयार की जाकर इस आशय का प्रमाण-पत्र सहित विस्तृत प्रस्ताव जिला कलेक्टर से प्राप्त होने पर आयुक्त, अनुसूचित जाति विकास स्वीकृति हेतु सक्षम होगें।

4. अनुसूचित जाति बस्तियों का चिन्हांकन एवं अनुसूचित जाति के कृषकों का चयन-

4.1 प्रत्येक जिले में अनुसूचित जाति बस्तियों का चिन्हांकन निर्धारित संलग्न प्रारूप " परिशिष्ट-2 " में किया जायेगा। अनुसूचित जाति की आबादी के घटते अनुक्रम में निर्धारित प्रतिशत तक की सूची तैयार की जायेगी। यह सूची जिले के लिये अनिवार्य प्राथमिकता क्रम में होगी ।

4.2 अनुसूचित जाति के कृषकों के खेतों में सिंचाई सुविधा हेतु विद्युत लाईन के विस्तार (पम्पों के ऊर्जीकरण ) हेतु आवेदन जिला स्तर पर प्राप्त किए जायेंगे। इस योजना अन्तर्गत केवल गरीबी रेखा की सूची में सम्मलित कृषक ही आवेदन कर सकेगें । जिला स्तर पर प्राप्त आवेदनों की सूची कम से अधिक आय सीमा के बढ़ते क्रम में विकासखंडवार तैयार की जावेगी जिसका अनुमोदन कंडिका- 4.3 में उल्लेखित समिति द्वारा किया जावेगा । यह आवश्यक नही होगा कि यह कृषक केवल कंडिका 4.1 में चिन्हित ग्रामीण/ नगरीय क्षेत्र का निवासी हो, केवल कंडिका 3.11 अन्तर्गत पात्र होना आवश्यक है ।

4.3 जिला स्तर पर जिले के प्रभारी मंत्रीजी की अध्यक्षता में हितग्राही के चयन एवं कार्यों की स्वीकृति हेतु निम्नानुसार समिति होगी: -

अध्यक्ष 1 जिले के प्रभारी मंत्री

सदस्य 2कलेक्टर

सदस्य 3 जिले के समस्त अनुसूचित जाति वर्ग के विधायक

सदस्य 4 मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत

सदस्य 5 निर्माण विभाग के एक कार्यपालन यंत्री

सदस्य 6 विद्युत वितरण कम्पनी के जिला स्तरीय अधिकारी (जी.एम/डी.जी.एम)

सदस्य सचिव 7 सहायक आयुक्त/जिला संयोजक अनुसूचित जाति एवं आदिम जाति कल्याण

(जिन जिलों में अनुसूचित जाति वर्ग के निर्वाचित विधायक नहीं है उन जिलों में जिले के प्रभारी मंत्री एक स्थानीय विधायक को समिति में सदस्य नामांकित कर सकेंगे)

4.4 उक्त समिति की बैठक वित्‌तीय वर्ष के प्रथम त्रैमास में की जाकर प्रस्तावों का अनुमोदन किया जाना अनिवार्य होगा । समिति की बैठक एवं प्रस्तावों के अनुमोदन की कार्यवाही प्रथम त्रैमास में नहीं होने पर विभागीय जिला अधिकारी के प्रस्ताव पर जिला कलेक्टर द्वारा प्रभारी मंत्री से अनुमोदन प्राप्त कर नियमानुसार प्रस्तावों की स्वीकृति दी जा सकेगी ।

4.5 बस्ती विकास/ मजरे टोलों का विद्युतीकरण/ कृषकों के कुओं तक विद्युत लाईन का विस्तार ( पंपों के उर्जीकरण ) में पात्रतानुसार जिले हेतु प्रावधानित बजट की सीमा में ही नियमानुसार कार्यों की स्वीकृति हेतु जिला स्तरीय समिति की संपूर्ण जिम्मेदारी होगी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 मई 2018

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5. कार्य योजना तैयार करना -

5.1 प्रत्येक जिले में गाम बस्ती , मजरे टोलों/ मोहल्ले, नगरीय बस्ती , वार्ड , मोहल्ले, की एकजाई कार्य योजना तैयार की जायेगी । इस कार्य योजना में उपरोक्त बस्तियों में बस्ती विकास योजनान्तर्गत क्या क्या कार्य कराये जाने है उसको सूचीवद्ध किया जायेगा । यह सूची संलग्न प्रारूप परिशिष्ट 2 में तैयार की जायेगी उपरोक्त कार्य योजना से ही प्रत्येक वर्ष प्राप्त आवंटन की सीमा में कार्य कराये जायें । इस सूची के कार्य पूर्ण होने के उपरांत ही अन्य बस्तियों में आवश्यकता अनुसार कार्य कराए जाये ।

5.2 यह योजना अनुसूचित जाति बाहुल्य ग्रामों/ बस्तियों एवं नगरीय अनुसूचित जाति बाहुल्य बस्तियों के सुधार एवं विकास हेतु प्रचलित योजनाओं की अनुपूरक योजना होगी।

5.3 योजनांतर्गत यथा-संभव ऐसी योजना में राशि व्यय की जायेगी जो वित्तीय वर्ष में ही पूर्ण की जा सके।

5.4 विद्युतीकरण के स्वीकृत कार्यों पर सुपरविजन चार्ज सम्बन्धी विद्युत वितरण कम्पनी को नियमानुसार देय होगा।

5.5 बस्तियों में कार्य की आवश्यकता के अनुरूप कार्य की वास्तविक लागत तकनीकी प्रतिवेदन के आंधार पर निर्धारित होगी। योजनान्तर्गत रु.10.00 लाख तक की लागत के कार्य की प्रशासकीय स्वीकृति कलेक्टर द्वारा जारी की जावेगी । कार्य की लागत रुपये 10.00 लाख से अधिक होने पर प्रशासकीय स्वीकृति आयुक्त, अनुसूचित जाति विकास से प्राप्त की जायेगी।

5.6 उपरोक्तानुसार मूलभूत सुविधायें सर्वप्रथम उन अनुसूचित जाति बाहुल्य बस्तियों/ मजरे/टोलों/पारों तथा नगरीय बस्तियों में ऐसे वार्डों में ली जावेगी जिनमें इन सुविधाओं को पूर्ण रूप से अभाव हो । उदाहरण के लिये जिले की अनुसूचित जाति की बस्ती जहां अनुसूचित जाति की जनसंख्या के आधार पर प्राथमिकता क्रम में ऊपर आती है, किन्तु वहां मूलभूत कार्य पहले से संपादित कर लिये गये हों तो उसके बाद की प्राथमिकता की बस्ती का चयन करना होगा जहां मूलभूत कार्य किये न गये हों और उनकी आवश्यकता हो ।

5.7 अनुसूचित जाति बस्तियों के विकास में कम्पोजिट प्लान (समेकित कार्य योजना) हेतु प्राथमिकता दी जावेगी। अर्थात ऐसे कार्यक्रम/ कार्य योजना पहले ली जावेगी, जिससे किसी अनुसूचित जाति बस्ती/ग्राम के सम्पूर्ण विकास की योजना तैयार की गई है।

6. कार्यों का निर्धारण-

6.1 बस्ती विकास योजना/ मजरे टोलों के विद्युतीकरण योजनान्र्तत प्राथमिकता क्रम में निम्नानुसार कार्य लिये जा सकेंगे: -

6.1.1 बस्तियों/ मजरे/ टोलों का विद्युतीकरण।

6.1.2 स्वच्छ पेयजल आपूर्ति हेतु हेण्डपम्प/ नलकूप खनन सब -मर्सिबल पंप सहित (अनुसूचित जाति बस्ती/छात्रावासों आश्रम मे) हेण्डपंप एवं नल कूप खनन ( सबमर्सिवल पंप सहित) हेण्डपंप के आसपास पक्का कार्य ।

6.1.3 ग्राम पंचायत स्तर में आवश्यक सामुदायिक भवनों एवं विकासखण्ड स्तर पर सामुदायिक भवन/ मंगल भवनों का निर्माण नगरीय निकाय अन्तर्गत सामुदायिक भवन/ मंगल भवनों का निर्माण 550( 3)

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6.1.4 छात्रावास/ विद्यालयों में आवश्यकतानुसार स्वच्छता एवं सुरक्षा संबंधी कार्य

6.1.5 विभागीय आवासीय/ शैक्षणिक संस्थाओं तक पहुँच मार्ग तक सी.सी रोड विभागीय आवासीय संस्थाओं को तथा अनुसूचित जाति बाहुल्य बस्तियों को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली सड़कों पर पुलिया/ रपटों का निर्माण आदि मूलभूत सुविधाओं के विस्तार कार्य किये जा सकेगे।

6.1.6 छात्रावास/आश्रम/ वि‌द्यालयों में आवश्यकतानुसार स्वच्छता एवं सुरक्षा संबंधी कार्य ।

6.1.7 जल- मल निकासी हेतु पक्की नाली का निर्माण ।

6.2 अनुसचित जाति वर्ग के गरीबी रेखा से नीचे के कृषकों के कुओं तक विद्युत लाईन की विस्तार योजना ( पंपों का उर्जीकरण) अंतर्गत कम आय वाले कृषकों को प्राथमिकता दी जावेगी । 7. प्राक्कलन एवं तकनीकी स्वीकृति के अधिकारः-

7.1 बस्ती विकास/ विद्युतीकरण के कार्य एवं पंप उर्जीकरण योजनान्तर्गत हितग्राही चयन उपरांत चयनित कार्य एजेन्सी/विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कार्यों का प्राक्कलन तैयार किया जावेगा एवं प्रदत्त अधिकारों की सीमा में प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति/ प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति जारी की जायेगी ।

इस योजना के तहत स्वीक़त कार्यों के प्राक्कलन चयनित निर्माण ऐजेन्सी के कार्य विभाग के मैन्युअल/ प्रदत्त वित्तीय अधिकार अनुसार होगी । ग्रामीण अनुसूचित जाति/ जनजाति बस्तियों में आंतरिक सड़क तथा नाली निर्माण में प्रति वर्ग मीटर निर्माण लागत विकास आयुक्त मध्यप्रेश के परिपत्र क्र. 7505/22/ वि/ ग्रायांसो/2016, दिनांक 24.12.16 तथा 53/22/वि'10/2017 , दिनांक 4.1.17 में दिये निर्देशों के अनुरूप होगी तथा तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति में उल्लेखित किया जायेगा।

7.2 इस योजना के तहत स्वीकृत कार्यों की तकनीकी स्वीकृति । प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति के अधिकार-वित्तीय अधिकार पुस्तिका खण्ड-2 के अनुसार होगें ।

8. प्रशासकीय स्वीकृति के अधिकारः-

बस्ती विकास , विद्युतीकरण एवं पंपों के उर्जीकरण के कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति कंडिका 4.3 में उल्लेखित समिति के अनुमोदन उपरांत कंडिका 5.4 में उल्लेख अनुसार प्रशासकीय स्वीकृति जारी की जावेगी ।

9. निर्माण कार्यों का निष्पादनः-

9.1 अनुसूचित जाति बाहुल्य बस्तियों में इस योजना के तहत स्वीकृत निर्माण कार्यों का निष्पादन ठीक उसी प्रकार किया जावेगा जिस प्रकार ग्रामीण विकास विभाग द्वारा पंच परमेश्वर योजना के मार्गदर्शी सिद्धांतों के अनुरूप तथा निर्माण विभागों के मेन्युअल में निर्धारित किया गया है । अनुसूचित जाति बस्तियों में आंतरिक सड़कों तथा नाली निर्माण में प्रति वर्ग मीटर निर्माण लागत विकास आयुक्त, मध्यप्रदेश के परिपत्र क्र. 7505/22/वि-10/ ग्रायांसे/2016 , दिनांक 24.12.2016 तथा 53/22/वि-10/2017 , दिनांक 4.01.2017 में दिये निर्देशों के अनुरूप होगी तथा तकनीकी प्रतिवेदन में इसका उल्लेख किया जायेगा। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 मई 2018

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9.2 गुणवत्ता के लिए जिम्मेदारी संबंधित क्रियान्वयन एजेंसी की होगी और विभागीय अधिकारी कार्य का निरीक्षण करेंगे। राज्य शासन चाहे तो स्वतंत्र मूल्यांकन करा सकता है ।

9.3 योजनान्तर्गत प्रावधानित समिति के अनुमोदन उपरांत स्वीकृत कार्यों हेतु निर्माण एजेन्सी/कार्य ऐजेन्सी का चयन कलेक्टर द्वारा कार्यों की प्रकृति के आधार पर किया जायेगा तथा कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जायेगी । राज्य शासन आवश्यकतानुसार तृतीय पक्ष से स्वतंत्र मूल्यांकन करा सकेगा । कार्यों के संधारण की जिम्मेदारी संबंधित नगरीय निकाय/ ग्रामीण निकाय/ / विद्युत वितरण कंपनी की होगी । 9.4

9.5 विद्युतीकरण/ पंपों के ऊर्जीकरण कार्यों का निष्पादन विद्युत वितरण कंपनी अथवा कलेक्टर द्वारा टेण्डर प्रक्रिया से निर्धारित कार्य एजेन्सी द्वारा उनके नियमों के अनुसार पारदर्शी प्रक्रिया अपनाते हुए किया जायेगा ।

10. आवंटन का प्रदायः-

10.1 योजना के अन्तर्गत आबंटन का प्रदाय जिले की अनुसूचित जाति की जनसंख्या के आधार पर संबंधित जिला कलेक्टर को किया जायेगा एवं जिला कलेक्टर द्वारा राशि का निर्धारण जिले के प्रत्येक विकासखण्ड/ नगरीय क्षेत्र के अनुसूचित जाति के प्रतिशत के मान से राशि का निर्धारण कर कार्यों की स्वीकृति प्रदान की जावेगी । विभागीय अधिकारी कडिका 4.3 में उल्लेखत समिति के अनुमादन के उपरांत कलेक्टर की प्रशासकीय स्वीकृति के आधार पर संबंधित निर्माण एजेन्सी को आवंटन राशि अंतरित करेंगे ।

10.2 योजनान्तर्गत योजना क्र. 4722 अनुसूचित जाति बस्तियों के विकास एवं मजरे टोलों के विद्युतीकरण में प्रावधानित बजट की कुल राशि में से 80 प्रतिशत राशि का आवंटन जिलों को अनुसूचित जाति की जनसंख्या के अनुपातिक आधार पर आयुक्त अनुसूचित जाति विकास द्वारा संबंधित जिला कलेक्टरों के आवंटित किया जावेगा तथा बजट प्रावधान की शेष 20 प्रतिशत राशि शासन विकल्प पर सुरक्षित रहेगी जिसकी कार्यों की स्वीकृति राज्य शासन द्वारा की जावेगी। 10.3 कंडिका 10.2 अनुसार जिलो को आवटित राशि से प्रथम त्रैमास पर कार्यों की स्वीकृति नही किये जाने पर राशि वापस ली जाकर आवश्यकतानुसार अन्य जिलों को राशि आवंटित करने हेतु आयुक्त अनुसूचित जाति विकास सक्षम होगे।

10.4 निर्माण एजेन्सियों, ग्राम पंचायतों एवं स्थानीय निकायों को धनराशि उपलब्ध कराने के पूर्व "परिशिष्ट-3 " प्रारूप में एक करार (अनुबंध) निष्पादित कराया जावेगा।

10.5 अनुसूचित जाति के कृषकों के कुओं तक विद्युत लाईन का विस्तार (पंपो के ऊर्जीकरण) योजना क्र. 5084 कार्यों हेतु आवंटन का प्रदाय जिले की अनुसूचित जाति की जनसंख्या के आधार पर कलेक्टर को किया जाएगा । विभागीय अधिकारी कंडिका 4.3 में उल्लेखत समिति/ के अनुमोदन के उपरांत कलेक्टर की प्रशासकीय स्वीकृति के आधार पर संबंधित निर्माण एजेन्सी/ विद्युत वितरण कंपनी को राशि अंतरित करेंगे।

11. कार्य पूर्णता एवं धनराशि का उपयोगिता प्रमाण पत्रः-

11.1 इस योजना के तहत स्वीकृत कार्यों की पूर्णता तथा उपयोगिता प्रमाण-पत्र सम्बन्धित निर्माण एजेन्सी के जिला स्तरीय अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराया जायेगा। 550( 5)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 मई 2018

11.2 निर्माण कार्य उसी वित्तीय वर्ष में पूर्ण कराने आवश्यक होंगे जिस वर्ष में वे स्वीकृत किये गये है । विशेष परिस्थिति में कलेक्टर कार्य पूर्ण होने की अवधि में वृ‌द्धि कर सकेंगे किन्तु कार्य अवधि में वृद्धि करते समय निर्माण लागत बढ़ने के कारण अतिरिक्त धनराशि कदापि स्वीकृत नहीं की जायेगी ।

11.3 विद्युतीकरण/पंपों के ऊर्जीकरण कार्यों हेतु पूर्णता प्रमाण पत्र एवं राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र निर्धारित प्रपत्र में कंपनी के जी.एम./डी.जी.एम. द्वारा विभागीय जिला अधिकारी को उपलब्ध कराये जायेंगे। परीक्षण उपरांत कलेक्टर के प्रतिहस्ताक्षर से संबंधित विभागाध्यक्ष/ महालेखाकार प्रेषित किये जायेगे ।

12. योजना के तहत स्वीकृत कार्यों का लेखा:-

योजना के अंतर्गत वर्ष में कार्यों का लेखा- जोखा रखने हेतु संलग्न" परिशिष्ट-4 " के अनुसार पंजी का संधारण सहायक आयुक्त/ जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण कार्यालय के अतिरिक्त संबंधित निर्माण एजेन्सी/स्थानीय निकाय एवं विद्युत वितरण कम्पनी के कार्यालय में अनिवार्य रूप से किया जायेगा।

योजना के अंतर्गत निर्मित कार्यों का हस्तांतरण एवं रखरखाव:-

13.

13.1. इस योजना के अन्तर्गत निर्मित कराये जाने वाले निर्माण कार्यों का हस्तांतरण सम्बन्धित ग्राम पंचायत/स्थानीय निकाय/संबंधित विभाग को करने का अधिकार जिला कलेक्टर का होगा जो कि कार्यों का रख रखाव नियमानुसार करेंगे।

13.2 मजरे टोलों का विद्युतीकरण अनुसूचित जाति के कृषकों के विद्युत लाईन का विस्तार ( पंपों का उर्जीकरण) कार्यों को संबंधित विद्युत वितरण कंपनी अथवा जिला कलेक्टरों द्वारा विभागीय स्तर पर टेण्डर प्रकिया के माध्यम से कार्यवाही की जावेगी तथा उसका रख रखाव/संधारण संबंधित कंपनी द्वारा इस हेतु उर्जा विभाग द्वारा स्थापित नियमों के अनुसार किया जायेगा ।

14. अनुश्रवण एवं मूल्यांकनः-

आयुक्त, अनुसूचित जाति विकास के अनुसंधान/ मूल्यांकन प्रकोष्ठ द्वारा समय - समय पर योजना का मूल्यांकन किया जावेगा ।

15. निरसन- एतद् द्वारा मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति बस्ती विकास नियम 2004 , नियम 2010, नियम 2011 , नियम 2014, नियम 2016, नियम 2017 में अनुसचित जाति कल्याण विभाग के लिये प्रावधानित भाग एवं संशोधित नियम 20 सितम्बर 2017 तथा उक्त नियमों के संबंध में समय -समय पर जारी संशोधनों संबंधी समस्त आदेशों को निरस्त किया जाता है। योजनान्तर्गत नियम 7 जून 2017 आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग दोनों के लिये लागू थे इसमें अनुसूचित जाति विभाग के लिये प्रावधानित नियमों को ही निरस्त माना जायेगा। जो कार्य पूर्व प्रचलित नियमों के अधीन प्रारम्भ किये गये थे, उन्हें उसी प्रचलित नियम के प्रावधानों के अनुसार पूर्ण कराया जावेगा ।

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,

संजय बंदोपाध्याय, प्रमुख सचिव.

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550 ( 6)

परिशिष्ट-1

अनुसूचित जातियों की सूची

1. औघेलिया

2. बागरी , बागड़ी

3. बहना, बहाना,

4. बलाही , बलाई

5. बांछड़ा

6. बरहर, बसोड़

7. बरगुन्ड़ा

8. बसोर, बुरूड़ , बंसोर, बांसोड़ी, बांसफोद, बसार

9. बेड़िया

10.बेलदार, सुनकर

11. भंगी , मेतर, वाल्मीक,लालबेगी, धरकार

12.भानुमती

13. चडार

14. चमार, चमारी, बैरवा, भांबी, जाटव,मोची,रेगर, नोना, रोहितदास , रामनामी ,सतनामी, सूर्य्यावंशी, सूर्यरामनामी, अहिरवार, चमारमोंगन ,रैदास

15. चिदार

16. चिकवा,चिकवी

17. चित्तार

18. दहाइत , दहायत, दाहत

19. देवर

20. धानुक

21. धेड़,धेड़

22. धोबी (भोपाल , रायसेन एवं सीहोर जिले में)

23. डोडोर

24. डोम, डुमार, डोने , डोमार, डोरिस

25. गांड़ा, गांडी

26. घासी, घसिया

27. होलिया,

28. कंजर

29. कातिया, पथरिया

30. खटीक

31. कोली,कोरी

32. कोतवाल (भिंड, धार, देवास , गुना, ग्वालियर, इदौर, झाबुआ,खरगौन,मंदसौर, मुरैना,राजगढ़, रतलाम , शाजापुर, शिवपुरी , उज्जैन और विदिशा जिले में)

33. खंगार, कनेरा, मिरधा

34. कुचबंधिया

35. कुम्हार (छतरपुर, दतिया, पन्ना,रीवा, शहडोल, सीधी और टीकमगढ़ जिलों में)

36. महार, मेहरा, मेहर

37. मांग , मांग गरोड़ी, मांग गारूडी, दंखनी मांग , मांग महाषी, मदारी, गारूड़ी, राधे मांग 550( 7)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 मई 2018

38 . मेघवाल

39. मोधिया

40. मुसखान

41. नट, कालबेलिया, सपेरा , नवदिगार, कुबुतर

42. पारधी (भिंड, धार, देवास, गुना,ग्वालियर,इंदौर, झाबुआ, खरगौन , मंदसौर, मुरैना, राजगढ़ , रतलाम, शाजापुर, शिवपुरी उज्जैन और विदिशा जिलें में)

43. पासी

44.रुज्झर

45.सांसी, सांसिया

46.सिलावट

47.झमराल

परिशिष्ट-2

अनुसचित जाति बाहुल्य बस्तियों की प्राथमिकता सूची

अनुसचित जाति बाहुल्य ग्राम बस्ती, मजरे टोले/पांरे/मोहल्ले की प्राथमिकता सूची जिले का नाम

जिले का नाम

शहरी क्षेत्र

ग्रामीण क्षेत्र

क.

विकासखण्ड

का नाम

क. बस्ती का नाम

मजरे टोलों, पारे मोहल्ले का नाम

ग्राम पंचायत का नाम

नगर निगम/नगर पालिका/ नगर पंचायत का नाम

मोहल्ले अनु. जाति. की आबादी प्रतिशत

अनुसूचित जाति की आबादी का प्रतिशत (40 प्रतिशत एवं अधिक)

रिर्माक

(बस्ती में

पूर्वसे

सुविधा

उपलब्ध है

अथवा नही)

1

2

3

4

5

6

7

8

09

10 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 मई 2018

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परिशिष्ट- 3

(नियम 9.2 देखिये)

अनुबंध पत्र

1. यह अनुबंध आज दिनांक को मध्यप्रदेश शासन के प्रतिनिधि के रूप में जिलाध्यक्ष.............. और.. ग्राम पंचायत / नगर पालिका / नोटोफाईल एरिया कमेटी / नगर निगम........... तहसील.............के मध्य किया जाता है ।

2. राज्य शासन की ओर से जिलाध्यक्ष दिनांक के द्वारा प्राप्तकर्ता को (अक्षरों में द्वारा उनके कार्यालयीन आदेश क्रमांक कार्य की कुल अनुमानित लागत के निर्माण हेत ..... के व्यय की स्वीकृति प्रदान की गई तथा राशि रूपये प्राप्तकर्ता को उक्त धनराशि को उपयुक्त आशय हेतु निम्न अनुबन्धों एवं प्रतिबन्धों पर लेने के लिये सहमत है ।

के संदर्भित आदेश पत्र में दर्शाये स्थान पर का निर्माण 3. (अ) (प्राप्तिकर्ता जिलाध्यक्ष....... कार्य जिलाध्यक्ष ......द्वारा अनुमोदित एवं मानचित्र तथा प्रशासकीय स्वीकृति के अन्तर्गत और आधार पर एवं समय सीमा में करेगा ।

(ब ) प्राप्तिकर्ता प्रदानकर्ता द्वारा स्वीकृति डिजाईन एवं विस्तुत विवरण में कोई संशोधन एवं परिवर्तन बिना प्रदानकर्ता की स्वीकृति के नहीं करेगा और प्राप्त राशि का उपयोग मानचित्र में दर्शाये कार्यों के निर्माण हेतु करेगा ।

4. प्राप्तिकर्ता द्वारा उपरोक्त निर्माण कार्य राशि प्राप्त होने में 6 माह के भीतर पूर्ण कर दिया जायेगा यदि इस अवधि में निर्माण पूर्ण नहीं किया गया तो प्राप्तिकर्ता द्वारा संपूर्ण राशि 10 प्रतिशत ब्याज के साथ प्रदानकर्ता को एक माह के भीतर लौटाई जावेगी ।

5. प्राप्तिकर्ता द्वारा उपरोक्त निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ संपादित किया जावेगा तथा मूल्यांकन के मान से निर्माण कार्य यदि कम राशि का हुआ तो शेष राशि 10 प्रतिशत ब्याज के साथ प्राप्तिकर्ता प्रदानकर्ता को एक माह के भीतर लौटायेगा ।

6. यदि प्राप्तिकर्ता द्वारा प्राप्त की गई राशि या उसकी आंशिक राशि का कोई दुरूपयोग पाया गया जो प्राप्तिकर्ता द्वारा प्रदानकर्ता की ऐसी राशि मय 10 प्रतिशत ब्याज के एक माह के भीतर लौटाई जायेगी ।

7. प्राप्तिकर्ता उक्त निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की पाई जाने वाली हानि एवं क्षति के प्रति उत्तरदायी होगा तथा ऐसी परिस्थिति में होने वाला अतिरिक्त व्यय प्राप्तिकर्ता के द्वारा वहन किया जावेगा ।

8. निर्माण कार्य का निरीक्षण प्रदानकर्ता तथा उनके द्वारा मनोनीत व्यक्ति तथा आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारी या मंत्रियों द्वारा किया जा सकेगा, यदि निरीक्षणर्ता अधिकारी द्वारा निर्माण कार्य में कोई कमी या त्रुटि पाई जाती है जो प्राप्तिकर्ता द्वारा उक्त निर्माण कार्य में निरीक्षणकर्ता अधिकारी द्वारा दिये गये सुझाव के अनुसार पूर्ति की जानी होगी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 मई 2018

550( 9) *9. प्राप्तिकर्ता उपरोक्त निर्माण कार्य को लेख पृथक तथा नियमानुसार रखेगा तथा उपरोक्त निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी प्रतिवेदन मासिक रूप से प्रतिमाह तारीख 10 तक प्रदानकर्ता को प्रेषित करेगा ।

10. निर्माण कार्य पूर्ण होने के तुरन्त पश्चात् एक माह के भीतर प्राप्तिकर्ता कार्य का लेखा जोखा , मूल्यांकन प्रमाण पत्र पूर्णतः प्रमाण पत्र तथा उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रदानकर्ता को प्रस्तुत करेगा । 11. प्राप्तिकर्ता के हिसाब लेखा जोखा की जॉच जिलाध्यक्ष द्वारा नामांकित प्रतिनिधि अनुसूचित जाति विभाग के अधिकारी संचालनालय कोष एवं लेखा / महालेखाकार मध्यप्रदेश आयुक्त अनुसूचित जाति के आडिट दल द्वारा की जा सकेगी ।

12. यदि अनुबंध में या इसमें अतदृष्टि किन्हीं भी उपबंधों या उनसे उत्पन्न होने वाली किसी भी बात के सबंध में इसमें संबंधित पक्षों के मध्य कोई विवाद उत्पन्न हो तो उसे आयुक्त अनुसूचित जाति की मध्यस्थता के लिये संदर्भित किया जावेगा जिस पर उनका निर्णय अंतिम एवं दोनों पक्षों को बंधनकारी होगा ।

13. प्राप्तिकर्ता द्वारा निर्माण कार्य पूर्ण होने के उपरांत इसका विधिवत हस्तांतरण प्राप्त किया जावेगा तथा प्राप्ति रसीद प्रदानकर्ता को दी जावेगी तथा उक्त निर्मित कार्य भी भली- भांति रख - रखाव संरक्षण तथा यदि कोई विस्तार आवश्यक हुआ तो स्वतः अपने स्त्रोतों से किया जावेगा । 14. यह अनुबंध दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षर दिनांक से लेकर जब तक उपरोक्त कार्य शर्तों के अनुसार पूर्ण नहीं होता तथा यदि कोई विवाद उत्पन्न हो तो उसके पूर्ण निपटारा होने तक प्रभावशील होगा ।

15. इस लिखान का देय मुद्रा / पंजीयन शुल्क का भुगतान प्राप्तिकर्ता द्वारा किया जावेगा ।

16. इसके साक्ष्य स्वरूप इनसे संबंधित पत्रों में अपने हस्ताक्षरों के सामने लिखी तारीख और वर्ष को इस विलेख पर अपने हस्ताक्षर किये है: -

साक्षीगण

1

2

3

4.

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 15 मई 2018

550 ( 10)

परिशिष्ट- 4

(नियम 12.1 देखिये)

अनुसूचित जाति बस्ती विकास योजनान्तर्गत स्वीकृत कार्यों की पंजी जिला स्तर पर रखी जाने वाली

जिला..

क. कार्य का नाम

पंजी

स्वीकृत वर्ष...

विकासखण्ड तहसील ग्राम/ नगर

स्थान/मोहला पारा

3 1

2

प्राक्कलन की राशि स्वीकृत राशि

7

8

कार्य पूर्ण करने की तिथि कार्य प्रारम्भ होने की तिथि

12

11

राशि

महालेखाकार को पूर्णता प्रमाण पत्र भेजने का पत्र क. एवं राशि

पत्र क्रमांक

16

15

यदि राशि अवशेष रही हो तो उस ट्रेजरी में

6 4

5

जिला कार्यालय का स्वीकृत आदेश क्र. व दिनांक

कार्य करने वाली संस्था एजेन्सी 9-

10

कार्य पर हुये व्यय की राशि कार्य के मूल्यांकन कीराशि

14 13

महालेखाकार को पूर्णता प्रमाण पत्र भेजने का पत्र क. एवं राशि

राशि

राशि पत्र कमांक व दिनांक

17

19 18

हस्तांतरण ग्रहिता का कार्य पूर्ण होने

रिफंड करने की

राशि

दिनांक

चालान कमांक

नाम

पदनाम के उपरांत किय संस्था को सौपा गया

21

22 20

हस्ताक्षर

24

25 23

रिमार्क

हस्ताक्षर की तिथि

26

(प्रत्येक कार्य के लिये अलग पन्ना रखा जावे) 27

28 नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2018.

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 15 May 2018. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2018-05-15.275.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2018-05-15.275.Extraordinary.