मध्यप्रदेश शासन
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सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
भोपाल , मंगलवार , दिनांक 3 जुलाई 2018- आषाढ़ 12, शक 1940
क्रमांक 376]
जनजातीय कार्य विभाग
मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल
भोपाल , दिनांक 3 जुलाई 2018
मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति बस्ती विकास एवं विद्युतीकरण योजना नियम 2018
क्रमांक एफ 23-15/ 2015/3-25 राज्य शासन द्वारा अनुसूचित जनजाति बाहुल्य ग्रामों एवं नगरीय क्षेत्रों की अनुसूचित जनजाति बाहुल्य बस्तियों के विकास हेतु निम्नानुसार नियम बनाये जाते हैं: -
1. संक्षिप्त नाम विस्तार एवं प्रारंभः-
1.1 यह नियम मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति बस्ती विकास एवं विद्युतीकरण योजना नियम 2018 कहे जायेंगे।
1.2 इनका विस्तार एवं कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण मध्यप्रदेश राज्य होगा ।
1.3 ये नियम राजपत्र में प्रकाशित होने के दिनांक से प्रभावशाली होगें ।
1.4 मध्यप्रदेश शासन, जनजातीय कार्य विभाग द्वारा अनुसूचित जनजाति बस्ती विकास एवं विद्युतीकरण के लिये प्रावधानित राशि का उपयोग इन नियमों के अनुसार किया जावेगा।
751 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 3 जुलाई 2018
752
2. योजना का उद्देश्य : -
अनुसूचित जनजाति बस्तियों में मूलभूत आवश्यकताओं से सम्बन्धित अधोसंरचना विकास कार्य विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राज्य शासन द्वारा किया जाता है । वर्ष 2011 की जनगणना अनुसार प्रदेश में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या कुल 1.53 करोड है जो कुल जनसंख्या का 21.1 प्रतिशत है । अनुसूचित जनजाति बाहुल्य ग्रामों में नालियां, मुख्य सडकें, ग्राम तक सड्क, पुलिया, रपटों, बस्तियों का विद्युतीकरण, पम्पों के ऊर्जीकरण , सामाजिक कार्यक्रम/ समारोहों हेतु सामुदायिक भवनों आदि मूलभूत सुविधाओं के विस्तार तथा विभाग की विभिन्न शैक्षणिक एवं आवासीय संस्थाओं की सुविधाओं के विस्तार हेतु यह योजना प्रस्तावित है ।
3. परिभाषायें
3.1 " राज्य शासन " से तात्पर्य " मध्यप्रदेश शासन " है ।
3.2 "अनुसूचित जनजाति" से तात्पर्य ऐसी जनजातियों से है जिन्हें भारत शासन द्वारा राज्य के लिये अनुसूचित जनजातियों के रूप में अधिसूचित किया गया है (वर्तमान सूची " परिशिष्ट 1 " )
3.3 "अनुसूचित जनजाति बाहुल्य बस्ती " से तात्पर्य ऐसे ग्राम/ बस्ती/ वार्ड /मजरा/टोला/पारा ( ग्रामीण एवं नगरीय) से है, जिसमें अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या उसी ग्राम/बस्ती/वार्ड/मजरा/टोला/पारा ( ग्रामीण एवं नगरीय) की कुल जनसंख्या का 50 प्रतिशत या उससे अधिक हो ।
"कलेक्टर/जिलाध्यक्ष " से तात्पर्य जिला कलेक्टर से है । 3.4
3.5 " जिला पंचायत, जनपद पंचायत एवं ग्राम पंचायत " से तात्पर्य मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 के तहत गठित जिला पंचायत, जनपद पंचायत एवं ग्राम पंचायत से है ।
3.6 "स्थानीय निकाय " से तात्पर्य मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम 1956, अथवा मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 के तहत गठित नगर पालिक निगम , नगर पालिका परिषद तथा नगर परिषद आदि स्थानीय निकायों से है ।
3.7 इन नियमों के प्रयोजन के लिए विभागीय आवासीय एवं शिक्षण संस्थाएं अनुसूचित जनजाति बस्ती मान्य की जावेगी तथा वहां इन नियमों के तहत कार्य किये जा सकेंगे ।
3.8 अनुसूचित जनजाति कृषक से तात्पर्य अनुसूचित जनजाति के व्यक्तिसे है जिसके नाम पर अधिकतम 10 हेक्टेयर भूमि हो । 752 (1)
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4. अनुसूचित जनजाति बस्तियों का चिन्हांकन एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों का चयन-
4.1 प्रत्येक जिले में अनुसूचित जनजाति बस्तियों का चिन्हांकन निर्धारित संलग्न प्रारूप "परिशिष्ट-2 " में किया जायेगा। अनुसूचित जनजाति की बस्ती की आबादी के घटते क्रम में सूची तैयार की जायेगी । यह सूची जिले के लिये प्राथमिकता सूची होगी । निर्धारित प्रतिशत से कम आबादी वाली बस्तियों को सूची में शामिल नहीं किया जावेगा ।
4.2 अनुसूचित जनजाति के कृषकों के खेतों में सिंचाई सुविधा हेतु विद्युत लाईन के विस्तार/पम्पों के ऊर्जीकरण हेतु आवेदन जिला स्तर पर प्राप्त किये जावेगे । जिला स्तर पर प्राप्त आवेदनो की सूची छोटे से बडे भूमि धारक के बढते क्रम में तैयार की जावेगी जिसका अनुमोदन नियम-4.3 में उल्लेखित समिति द्वारा किया जावेगा । यह आवश्यक नही होगा कि यह कृषक केवल नियम 4.1 में चिन्हित बस्ती में निवासरत हो। केवल नियम 3.8 अन्तर्गत पात्र होना आवश्यक होगा ।
4.3 जिला स्तर पर प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में हितग्राही के चयन एवं कार्यों के अनुमोदन हेतु निम्नानुसार समिति होगी:-
अध्यक्ष 1 जिले के प्रभारी मंत्री
सदस्य 2 कलेक्टर
सदस्य 3 जिले के अनुसूचित जनजाति के सभी विधायक
सदस्य 4 मुख्य कार्यपालन अधिकारी , जिला पंचायत
सदस्य 5 निर्माण विभाग के एक अधीक्षण यंत्री/कार्यपालन यंत्री
सदस्य 6 विद्युत वितरण कम्पनी के जिला स्तरीय अधिकारी (जी.एम/डी.जी.एम)
सदस्य सचिव 7 सहायक आयुक्त/ जिला संयोजक अनुसूचित जाति एवं जनजातीय कार्य
4.4 उपरोक्तानुसार प्राथमिकता क्रम एवं चयनित कार्य/ हितग्राहियों का विवरण अनिवार्यतः जिले की वेवसाईट पर प्रतिवर्ष प्रदर्शित किया जाएगा ।
A 752(2)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 3 जुलाई 2018
5. कार्यों का निर्धारण -
इस योजना मे निम्नानुसार कार्य लिये जा सकेंगे:-
5.1 बस्तियों का विद्युतीकरण एवं कृषकों के पम्पों का ऊर्जीकरण- विशेष ध्यान दें कि विद्युत आपूर्ति निकटतम सोर्स से लाई जाये ।
5.2 विभागीय संस्थाओं में पेयजल आपूर्ति हेतु हेण्डपंप एवं नलकूप खनन (सबमर्सिबल पंप सहित ) ।
5.3 ग्राम पंचायत स्तर के सामुदायिक भवनों का निर्माण ।
5.4 छात्रावास/आश्रम/विद्यालयों में आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कक्ष, शौचालय निर्माण तथा बाउण्ड्रीवाल संबंधी कार्य ।
5.5 उन अनुसूचित जनजाति बस्तियों में जहां किसी भी योजना में सी सी रोड/आंतरिक नाली निर्माण नहीं किया गया हो, वहां सी सी रोड/आंतरिक नाली निर्माण कार्य ।
5.6 जल -मल निकासी हेतु पक्की नाली का निर्माण ।
5.7 सार्वजनिक चबूतरा निर्माण ।
5.8 पुलिया, रपटा निर्माण
6. प्राक्कलन एवं तकनीकी स्वीकृति के अधिकार : -
6.1 इस योजना के तहत स्वीकृत कार्यों के प्रॉक्कलन चयनित निर्माण एजेन्सी द्वारा उनके विभागीय एसओआर के अंतर्गत तैयार किये जावेगे। तकनीकी स्वीकृति के अधिकार सम्बन्धित कार्य एजेन्सी के कार्य विभाग के मेनुअल/ प्रदत्त वित्तीय अधिकार अनुसार होगी । ग्रामीण अनुसूचित जनजाति बस्तियों में आंतरिक सडको तथा नाली निर्माण में प्रति वर्ग मीटर निर्माण लागत विकास आयुक्त, मध्यप्रदेश के अद्यतन परिपत्र में दिये निर्देशों के अनुरूप होगी तथा तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति में इसका उल्लेख किया जाएगा। 752(3)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 3 जुलाई 2018
7. प्रशासकीय स्वीकृति के अधिकार : -
कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति नियम 4.3 में उल्लेखित समिति के अनुमोदन उपरांत वित्तीय संहिता में प्रदत्त वित्तीय अधिकार के अनुरूप जारी की जाएगी । विद्युत कार्यो में प्रशासकीय स्वीकृति में विद्युत लाइन में कार्य पूर्ण होने के बाद संभावित कनेक्शन चार्ज की राशि कंपनी के डिमांड नोट के आधार पर शामिल की जाएगी ।
8. कार्य एजेन्सी का निर्धारण एवं निर्माण कार्यों का निष्पादन :-
8.1 समिति द्वारा कार्य/ हितग्राही के अनुमोदन के पश्चात् कलेक्टर द्वारा कार्य एजेन्सी का निर्धारण किया जावेगा , जो कार्य विभाग जैसे लोक निर्माण विभाग , ग्रामीण यांत्रिकी विभाग , विद्युत वितरण कम्पनी एवं ग्राम पंचायत इत्यादि हो सकते है । जनजातीय कार्य विभाग के यांत्रिकी अमले से वही कार्य कराया जाये जो उनके विभाग अन्तर्गत वित्तीय शक्ति पुस्तिका भाग-2 में प्रदत्त वित्तीय अधिकार सीमा के अन्तर्गत हो ।
8.2 अनुसूचित जनजाति बाहुल्य बस्तियों में इस योजना के तहत स्वीकृत निर्माण कार्यों का निष्पादन उसी वित्तीय वर्ष में पूर्ण किया जावे जिसमें कार्य स्वीकृत हुआ हो ।
9. आबंटन का प्रदाय : -
9.1 योजना के अन्तर्गत उपलब्ध राशि का 80 प्रतिशत आबंटन जिले की अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या के अनुपात में संबंधित जिला कलेक्टर को किया जायेगा । विभागीय अधिकारी प्रशासकीय स्वीकृति के आधार पर संबंधित निर्माण एजेन्सी को राशि अंतरित करेंगे । शेष 20 प्रतिशत राशि शासन के विकल्प पर सुरक्षित रहेगी जिसके अंतर्गत कार्यों की तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति प्रदत्त वित्तीय अधिकारों के तहत जारी की जावेगी। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 3 जुलाई 2018
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9.2 निर्माण एजेन्सियों, ग्राम पंचायतों एवं स्थानीय निकायों को धनराशि उपलब्ध कराने के पूर्व "परिशिष्ट - उ " पर संलग्न प्रारूप में एक करार (अनुबंध) निष्पादित कराया जावेगा।
9.3 यदि किसी निर्माण एजेन्सी, ग्राम पंचायत एवं स्थानीय निकाय ने उसे पूर्व में स्वीकृत राशि का उपयोग अनुबन्ध की शर्तों के अनुसार नहीं किया है तो उसे आगामी वर्ष में नये कार्यों हेतु धनराशि उपलब्ध नहीं कराई जायेगी । इस हेतु विभागीय अधिकारी उत्तरदायी होंगे।
10. कार्य पूर्णता एवं धनराशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र : -
10.1 इस योजना के तहत स्वीकृत कार्यों की पूर्णता तथा उपयोगिता प्रमाण- पत्र सम्बन्धित निर्माण एजेन्सी के जिला स्तरीय अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराया जायेगा ।
10.2 निर्माण कार्य को पूर्ण करने हेतु निर्धारित अवधि में वृद्धि विशेष परिस्थिति में कलेक्टर कर सकेंगे किन्तु कार्य अवधि में वृद्धि करते समय निर्माण लागत बढने के कारण अतिरिक्त धनराशि कदापि स्वीकृत नहीं की जायेगी । 11. योजना के तहत स्वीकृत कार्यो का लेखा : -
योजना के अंतर्गत वर्ष में कार्यों का लेखा-जोखा रखने हेतु संलग्न परिशिष्ट- 4 के अनुसार पंजी का संधारण सहायक आयुक्त/जिला संयोजक, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग कार्यालय के अतिरिक्त संबंधित निर्माण एजेन्सी/स्थानीय निकाय एवं विद्युत वितरण कंपनी के कार्यालय में अनिवार्य रूप से किया जायेगा ।
12. अनुश्रवण एवं मूल्यांकन : -
आयुक्त, आदिवासी विकास के अनुसंधान/मूल्यांकन प्रकोष्ठ द्वारा समय- समय पर योजना का मूल्यांकन किया जावेगा ।
1.
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13. निरसन -एतद द्वारा मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति/ जनजाति बस्ती विकास नियम 2005 तथा 2014 एवं अनुसूचित जाति/ जनजाति बस्तियों में विद्युतीकरण , अनुसूचित जाति/ जनजाति के कृषको को सिंचाई सुविधा हेतु विद्युत लाईन का विस्तार (पम्पों का उर्जीकरण) योजना नियम 2016 तथा मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति/ जनजाति बस्ती विकास एवं विद्युतीकरण योजना नियम 2017 तथा इन नियमों के सम्बन्ध में समय -समय पर जारी पूर्व के आदेश संशोधन सम्बन्धी समस्त आदेश तत्काल प्रभाव से निरसित किये जाते है ।
सुषमाशर्मा, उपसचिव.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 3 जुलाई 2018
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परशिष्ट- एक
मध्यप्रदेश की अनुसूचित जनजातियों
27.
अगरिया
1
कोरकू, बोपची, मोआसी, निहाल, नाहुल बोधी, बौदेया
28
कोरवा, कोडाकू
आन्ध
2
माझी
29
3
बैगा
मझवार
30
भैना
4
मवासी
31
5 भारिया, भुमिआ, मुंईहार, भूमिंआ, भूमिया, भारिया, पलिहा, पांडो
विलोपित
32
भत्तरा
6
मुंडा
33
7
भील, मिलाला , बारेला, पटेलिया
34
नगेसिया, नगासिया
भील मीना
8
35
उरांव, धनका, धनगड़
9 भुजिया
36
बिआर, बियार
10
पनिका, (1 ) (छतरपुर , दतिया, पन्ना, रीवा, सतना, सीधी, शहडोल और टीकमगढ़ जिलों में)
11 बिंझवार
12 बिरहुल, बिरहोर
पीव
37
13 डामोर, डामरिया
38
परधान, पठारी, सरोती,
14 धनवार
विलोपित
39
15. गदाबा, गदबा
16
40.
गोंड, अरख, अर्राख , अगरिया, असुर, बड़ी मारिया, बड़ा मारिया, मटोला, मिम्मा, भूता, कोइलाभूता, कोइलाभूती, भार, बायसनहार्न मारिया, छोटा मारिया, दंडामी मारिया , धुरू, धुरवा, धोबा, धुलिया, दोरला, गायकी, गत्ता, गत्ती, गैता, गॉड-गोवारी , हिल मारिया, कंडरा, कलंगा, खटोला, कोइतर, कोया, खिरवार, खिरवारा, कुचा मारिया, कुचकी मारिया, माडिया, मारिया, माना , मन्नेवार, मोध्या, मोंगिया, मोध्या, मुड़िया, मुरिया, नगारची, नागवंशी, ओझा, राज गोंड, सोन्झाारी, झरेका, थाटिया , थोट्या, बड़े-मारिया, वडेमाडिया, दरोई
पारधी, बहेलिया, बहेल्लिया, चिता पारधी, लांगोली पारधी, फांस पारधी, शिकारी, टाकनकर, टाकिया (1 ) छिन्दवाड़ा, मंडला, डिडोरी एवं सिवनी जिलों में (2) बालाघाट जिले की बैहर तहसील (3) बैतूल जिले को बैतूल, भैंसदेही एवं शाहपुर तहसीलों में (4) जबलपुर जिले की पाटन तहसील और सीहोरा एवं मझोली विकासखण्डों में 5 कटनी जिले की मुडवारा और विजयराघवगढ़ तहसीलें एवं बहोरीबंद और ढीमरखेड़ा विकासखण्डो में (6) होशंगाबाद जिले की होशंगाबाद, बाबई सोहागपुर, पिपरिया और बनखेड़ी तहसीलों और केशला वि.ख. , (7) नरसिंहपुर जिला और (8) खण्डवा जिलें की हरसूद तहसील
परजा
41
17 हलबा, हलबी
सहारिया, सहरिया, सेहरिया, सहरिया,
42
कमार
18
सोसिया, सोर
साओता, सौता
43
19 कारकू
सौर
44
20 कवर , कंवर, कौर, चेरवा, राठिया, तंवर, चत्री
45
सावर, सावरा
विलोपित
21
सौर
46
खैरवार, कोंदर
22
23
खरिया
24 कांध, खोड, कंघ
कोल
25
कोलम
26 752(7)
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6
रिमार्क
(बस्तीमेंपूर्वसे
सुविधाउपलब्धहै
अथवानहीं)
5
बस्तीमेंअनुसूचित जनजातिकी आबादीकाप्रतिशत
4
विकास खण्डका नाम
ग्रामीणक्षेत्र
3
ग्रामपंचायत कानाम
2
ग्रामका
नाम/बस्तीका
नाम
1
क्र.
'परिशिष्ट2
जिलेकानाम
5
(नियम4.1देखिये)
रिर्माक(बस्तीमें
पूर्वसेसुविधा
उपलब्धहैअथवा
नहीं)
अनुसूचितजनजातिबाहुल्यबस्तीप्राथमिकतासूची
4
मोहल्लेमेंअनु.
जनजातिकी
आबादीका
प्रतिशत
शहरीक्षेत्र
3
नगरनिगम/नगर
पालिका/नगर
परिषदकानाम
2
मोहल्ला/बस्ती कानाम
1
क्र.
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परिशिष्ट-3
(नियम 9.2 देखिये)
अनुबन्ध पत्र
...को मध्यप्रदेश शासन के प्रतिनिधि के रूप में जिलाध्यक्ष.. ....ग्राम पंचायत / नगर पालिका / नोटोफाईल एरिया कमेटी / नगर निगम........... 1.यह अनुबन्ध आज दिनांक तहसील ..के मध्य किया जाता है ।
2. राज्य शासन की ओर से जिलाध्यक्ष.. ..द्वारा उनके कार्यालयीन आदेश क्रमांक ......दिनांक ..के द्वारा प्राप्तकर्ता को हेतुरू ..(अक्षरों में रूपये ..कार्य की कुल अनुमानित लागत के निर्माण ...प्राप्तकर्ता को उक्त निर्माण कार्य पर व्यय करने के लिये अग्रिम रूप से देना स्वीकार किया है और प्राप्तकर्ता उक्त धनराशि को उपयुक्त आशय हेतु निम्न अनुबन्धों एवं प्रतिबन्धों पर लेने के लिये सहमत है । के व्यय की स्वीकृति प्रदान की गई तथा राशि 3. (अ) (प्राप्तिकर्ता जिलाध्यक्ष ..का निर्माण कार्य जिलाध्यक्ष ......के सन्दर्भित आदेश पत्र में दर्शाये स्थान पर ...द्वारा अनुमोदित प्राक्क्लन एवं मानचित्र तथा प्रशासकीय स्वीकृति के अन्तर्गत और आधार पर एवं समय सीमा में करेगा ।
(ब) प्राप्तिकर्ता, प्रदानकर्ता द्वारा स्वीकृति डिजाईन एवं विस्तृत विवरण में कोई संशोधन एवं परिवर्तन बिना प्रदानकर्ता की स्वीकृति के नहीं करेगा और प्राप्त राशि का उपयोग मानचित्र में दर्शाये कार्यो के निर्माण हेतु करेगा ।
4. प्राप्तिकर्ता द्वारा उपरोक्त निर्माण कार्य राशि प्राप्त होने में 6 माह के भीतर पूर्ण कर दिया जायेगा. यदि इस अवधि में निर्माण पूर्ण नहीं किया गया तो प्राप्तिकर्ता द्वारा सम्पूर्ण राशि 10 प्रतिशत ब्याज के साथ प्रदानकर्ता को एक माह के भीतर लौटाई जावेगी ।
5. प्राप्तिकर्ता द्वारा उपरोक्त निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ संपादित किया जावेगा तथा मूल्यांकन के मान से निर्माण कार्य यदि कम राशि का हुआ तो शेष राशि 10 प्रतिशत ब्याज के साथ प्राप्तिकर्ता प्रदानकर्ता को एक माह के भीतर लौटायेगा.
6. यदि प्राप्तिकर्ता द्वारा प्राप्त की गई राशि या उसकी आंशिक राशि का कोई दुरूपयोग पाया गया तो प्राप्तिकर्ता द्वारा प्रदानकर्ता की ऐसी राशि मय 10 प्रतिशत ब्याज के एक माह के भीतर लौटाई जायेगी. 7.प्राप्तिकर्ता उक्त निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की पाई जाने वाली हानि एवं क्षति के प्रति उत्तरदायी होगा तथा ऐसी परिस्थिति में होने वाला अतिरिक्त व्यय प्राप्तिकर्ता के द्वारा वहन किया जायेगा.
M. 8. निर्माण कार्य का निरीक्षण प्रदानकर्ता तथा उनके द्वारा मनोनीत व्यक्ति तथा आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारी या मंत्रियों द्वारा किया जा सकेगा. यदि निरीक्षणकर्ता अधिकारी द्वारा निर्माण कार्य में कोई कमी या त्रुटि पाई जाती है तो प्राप्तिकर्ता द्वारा उक्त निर्माण कार्य में निरीक्षणकर्ता अधिकारी द्वारा दिये गये सुझाव के अनुसार पूर्ति की जानी होगी.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 3 जुलाई 2018
9.प्राप्तिकर्ता उपरोक्त निर्माण कार्य को लेख पृथक तथा नियमानुसार रखेगा तथा उपरोक्त निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी प्रतिवेदन मासिक रूप से प्रतिमाह तारीख 10 तक प्रदानकर्ता को प्रेषित करेगा.
10. निर्माण कार्य पूर्ण होने के तुरन्त पश्चात् एक माह के भीतर प्राप्तिकर्ता कार्य का लेखा जोखा, मूल्यांकन प्रमाण पत्र पूर्णतः प्रमाण पत्र तथा उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रदानकर्ता को प्रस्तुत करेगा.
11. प्राप्तिकर्ता के हिसाब लेखा जोखा की जॉच जिलाध्यक्ष द्वारा नांमांकित प्रतिनिधि आदिमजाति कल्याण विभाग के अधिकारी संचालनालय कोष एवं लेखा / महालेखाकार मध्यपदेश आयुक्त, आदिवासी विकास के आडिट दल द्वारा की जा सकेगी ।
12. यदि अनुबन्ध में या इसमें अंतःदृष्टि किन्हीं भी उपबन्धों या उनसे उत्पन्न होने वाली किसी भी बात के सम्बन्ध में इसमें सम्बन्धित पक्षों के मध्य कोई विवाद उत्पन्न हो तो उसे आयुक्त, आदिवासी विकास की मध्यस्थता के लिये सन्दर्भित किया जावेगा जिस पर उनका निर्णय अंतिम एवं दोनो पक्षों को बंधनकारी होगा.
13. प्राप्तिकर्ता द्वारा निर्माण कार्य पूर्ण होने के उपरांत इसका विधिवत हस्तांतरण प्राप्त किया जावेगा तथा प्राप्ति रसीद प्रदानकता को दी जावेगी तथा उक्त निर्मित कार्य की भली भांति रख रखाव संरक्षण तथा यदि कोई विस्तार आवश्यक हुआ तो स्वतः अपने स्त्रातों से किया जावेगा.
14. यह अनुबन्ध दोनो पक्षों द्वारा हस्ताक्षर दिनांक से लेकर जब तक उपरोक्त कार्य शर्तों के अनुसार पूर्ण नहीं होता तथा यदि कोई विवाद उत्पन्न हो तो उसके पूर्ण निपटारा होने तक प्रभावशील होगा.
15. इस लिखान का देय मुद्रा / पंजीयन शुल्क का भुगतान प्राप्तिकर्ता द्वारा किया जावेगा.
16. इसके साक्ष स्वरूप इनसे संबंधित पत्रों में अपने हस्ताक्षरों के सामने लिखी तारीख और वर्ष को इस विलेख पर अपने हस्ताक्षर किये है :- साक्षीगण
2
3.
4 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 3 जुलाई 2018
752 ( 10)
परिशिष्ट-4
(नियम 11 देखिये)
अनुसूचित जनजाति बस्ती विकास एवं विद्युतीकरण योजना के अन्तर्गत स्वीकृत कार्यो की जिला स्तर पर रखी जाने वाली पंजी
जिला
..स्वीकृत वर्ष
तहसील ग्राम पंचायत
ग्राम /नगर
क्र कार्य का नाम
वार्ड/ स्थान/ पारा / मजरा / टोला / बस्ती/
3
2
1
प्राक्कलन की राशि
स्वीकृत राशि
9 8
कार्य पूर्ण करने की तिथि
कार्य प्रारम्भ होने की तिथि
13
12
पत्र क्रमांक व दिनांक
16
यदि राशि अवशेष राही हो तो उस ट्रेजरी में
रिफंड करने की
राशि
दिनांक
चालान क्रमांक
20
19
18
हस्ताक्षर प्राधिकृत अधिकारी
24
(प्रत्येक कार्य के लिये अलग पन्ना रखा जावे )
विकास खण्ड
7
6
4
5
कार्य करने वाली संस्था एजेन्सी
जिला कार्यालय का स्वीकृत आदेश क्र. व
दिनांक
11
10
कार्य के मूल्यांकन की राशि
कार्य पर हुये व्यय की राशि
15
14
महालेखाकार को पूर्णता प्रमाण पत्र भेजने का पत्र क्र. एवं राशि
राशि
17
हस्तांतरण ग्रहिता का
पदनाम
नाम
कार्य पूर्ण होने के उपरांत किस संस्था को सौंपा गया
23
22
21
रिमार्क हस्ताक्षर की तिथि
26 25
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री , मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2018.