मध्यप्रदेश शास
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सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
भोपाल , मंगलवार, दिनांक 10 जुलाई 2018- आषाढ़ 19, शक 1940
क्रमांक 386 ]
विधि और विधायी कार्य विभाग
भोपाल, दिनांक 10 जुलाई 2018
क्र. 11338-229 - इक्कीस-अ- ( प्रा. ) अधि.- मध्यप्रदेश विधान सभा का निम्नलिखित अधिनियम जिस पर दिनांक 5 जुलाई 2018 को राज्यपाल महोदया की अनुमति प्राप्त हो चुकी है, एतद्वारा सर्वसाधारण की जानकारी के लिये प्रकाशित किया जाता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
रजनी पंचौली , अवर सचिव.
771 772
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 जुलाई 2018
मध्यप्रदेश अधिनियम
क्रमांक १५ सन् २०१८
मध्यप्रदेश भिक्षा वृत्ति निवारण ( संशोधन ) अधिनियम, २०१८ मध्यप्रदेश भिक्षा वृत्ति निवारण अधिनियम , १ ९७३ को संशोधित करने हेत अधिनियम दिनांक 5 जुलाई , 2018 को राज्यपाल की अनुमति प्राप्त हुई , अनुमति " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) " में दिनांक 10 जुलाई 2018 को प्रथम बार प्रकाशित की गई .
भारत गणराज्य के उनहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान- मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
१. इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश भिक्षा वृत्ति निवारण ( संशोधन ) अधिनियम , २०१८ है.
संक्षिप्त नाम.
२. मध्यप्रदेश भिक्षा वृत्ति निवारण अधिनियम, १ ९ ७३ ( क्रमांक ३ सन् १ ९७४ ) की धारा २६ में, - धारा २६ का संशोधन.
(एक) पार्श्व शीर्ष में , शब्द " कुष्ठ रोगियों और " का लोप किया जाए;
(दो) उपधारा ( १ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्:-
" ( १ ) जहां राज्य सरकार को यह प्रतीत हो कि किसी न्यायालय के आदेश के अधीन किसी प्रमाणित संस्था में निरुद्ध रखा गया कोई भिखारी विकृत चित्त का है , वहां राज्य सरकार अपने इस विश्वास के कि भिखारी विकृत चित्त का है, आधारों को उपवर्णित करते हुए, एक आदेश द्वारा उस अवधि की जिस तक के लिये उसे निरोध में रखे जाने का आदेश दिया गया हो, शेष अवधि के दौरान यथास्थिति मानसिक चिकित्सालय या सुरक्षित अभिरक्षा के अन्य स्थान में रखे जाने के लिये और चिकित्सा की जाने के लिये, जैसा कि राज्य सरकार निदेश दे, उसे वहां ले जाये जाने का आदेश दे सकेगी , या यदि उस अवधि का अवसान होने पर चिकित्सा ऑफिसर द्वारा यह प्रमाणित किया जाए कि भिखारी या अन्य व्यक्तियों की सुरक्षा के लिये यह आवश्यक है कि उसे चिकित्सीय देखरेख या चिकित्सा के अधीन और आगे निरुद्ध रखा जाय तो उसे तब तक रखा जाएगा जब तक कि विधि के अनुसार उसे उन्मोचित न कर दिया जाए. ";
(तीन) उपधारा ( २ ) में, शब्द " या यह कि उसका कुष्ठ रोग ठीक हो गया है " का लोप किया जाए.
भोपाल, दिनांक 10 जुलाई 2018
क्र. 43381-229 - इक्कीस- अ (प्रा. ) अधि. भारत के संविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड ( 3 ) के अनुसरण में, मध्यप्रदेश भिक्षा वृत्ति निवारण ( संशोधन ) अधिनियम , 2018 ( क्रमांक 15 सन् 2018 ) का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतद्वारा प्रकाशित किया जाता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
रजनी पंचौली , अवर सचिव.
772( 1)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 जुलाई 2018
MADHYA PRADESH AСТ
NO . 15 OF 2018
THE MADHYA PRADESH BHIKSHA VRITTI NIVARAN ( SANSHODHAN ) ADHINIYAM , 2018
[Received the assent of the Governor on the 5th July, 2018; assent first published in the "Madhya Pradesh Gazette (Extra - ordinary) " , dated the 10th July, 2018. ]
An Act to amend the Madhya Pradesh Bhiksha Vritti Nivaran Adhiniyam, 1973 .
Be it enacted by the Madhya Pradesh Legislature in the sixty - ninth year of the Republic of India as follows :-
Short title.
1. This Act may be called the Madhya Pradesh Bhiksha Vritti Nivaran (Sanshodhan ) Adhiniyam , 2018 .
Amendment of Section 26.
2. In Section 26 of the Madhya Pradesh Bhiksha Vritti Nivaran Adhiniyam , 1973 ( No. 3 of 1974) ,-
(i) in the marginal heading , the words " leprosy patients and " shall be omitted ;
(ii) for sub - section ( 1) , the following sub - section shall be substituted , namely:-
"(1) Where it appears to the State Government that any beggar detained in a Certified Institution under any order of a court is of unsound mind, the State Government may by an order setting forth the grounds of belief that the beggar is of unsound mind , order his removal to a mental hospital or other place of safe custody , as the case may be , to be kept there and treated as the State Government directs during the remainder of the term from which he has been ordered to be detained or , of on the expiration of that term it is certified by a medical officer that it is necessary for the safety of the beggar or of others that he should be further detained under medical care or treatment , then until he is discharged according to law. " ;
(iii) in sub - section (2) , the words " or is cured of leprosy " shall be omitted.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री , मध्यप्रदेश द्वाग शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित 2018.