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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

शोक प्रस्‍ताव

Published 18 September 2018

Department
सामान्य प्रशासन
Type
Extraordinary
Gazette no.
496
Identifier
in.gazette.madhya.2018-09-18.496.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
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मध्यप्रदे श शासन

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 496]

भोपाल , मंगलवार , दिनांक 18 सितम्बर 2018 - भाद्र 27 , शक 1940

सामान्य प्रशासन विभाग

मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल

:: शोक प्रस्ताव::

भोपाल , दिनांक 18 सितम्बर 2018 क्रमांक एफ-8-06-2018 -एक-4

मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल, ग्वालियर में जन्में, प्रदेश की माटी के सपूत, देश के पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर गहरा शोक प्रकट करता है. उनके निधन से मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की अपूरणीय क्षति हुई है. मध्यप्रदेश से उन्हें विशेष लगाव था . उन्होंने मध्यप्रदेश का गौरव पूरे देश ही नहीं बल्कि दुनिया में बढ़ाया. मध्यप्रदेश को उन पर गर्व है. उन्होंने देश की राजनीति को नई दिशा देते हुए नए मूल्य और आदर्श स्थापित किए.

25 दिसम्बर, 1924 को ग्वालियर में श्रीमती कृष्णा देवी और श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई जिनका नाम उन्होंने अटल बिहारी रखा . उन्होंने अपनी शिक्षा ग्वालियर एवं कानपुर में पूरी की. तत्पश्चात् वह कुछ समय तक पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े रहे तथा उन्होंने ' राष्ट्रधर्म ', ' पांचजन्य' और ' वीर अर्जुन ' जैसे समाचार पत्रों का संपादन भी किया. प्रारंभ में वह ' आर्य समाज ' और बाद में ' राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ' के सम्पर्क में आए और फिर राजनीतिक जीवन में प्रवेश किया. उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया तथा ' भारत छोड़ो आन्दोलन ' के दौरान जेल भी गए. वह भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष तत्पश्चात् भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष बने. उन्होंने संसदीय दल के नेता और फिर प्रधानमंत्री के रूप में अविस्मरणीय योगदान दिया.

श्री वाजपेयी लोकसभा के लिए दस बार तथा राज्यसभा के लिए दो बार निर्वाचित हुए. वर्ष 1975 से 1977 तक उन्होंने आपातकाल का पुरजोर विरोध किया, जिसके फलस्वरूप उन्हें जेल की यातना भी सहनी पड़ी. लम्बे समय तक नेता - विरोधी दल रहने के उपरान्त वे मई, 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री बने. सन् 1998-99 में दूसरी बार और 1999 से 2004 तक पुनः उन्होंने प्रधानमंत्री का पद सुशोभित किया. जननायक और युगपुरूष श्री अटल बिहारी वाजपेयी मन, कर्म और वचन से राष्ट्र के प्रति पूर्णतः समर्पित राजनेता थे . राजनीति में उनके विरोधी कोई नहीं थे , प्रतिद्वन्दी जरूर थे. मध्यप्रदेश हो या देश या विदेश , अपनी पार्टी हो

991 992

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 18 सितम्बर 2018

या विरोधी दल सभी उनकी प्रतिभा के कायल थे . इस मायने में अटल जी अजातशत्रु थे. उनकी वाणी पर साक्षात् सरस्वती विराजमान थीं. अपनी वक्तृत्व क्षमता के कारण उन्होंने लोगों के दिलों पर राज किया .

मध्यप्रदेश और देश के सार्वजनिक जीवन पर उन्होंने अपने व्यक्तित्व और कृतित्व की अमिट छाप छोड़ी है . उनके विराट व्यक्तित्व में मध्यप्रदेश और देश का अनेक दशकों का इतिहास समाया हुआ है. श्री वाजपेयी एक परिपक्व राजनीतिज्ञ , एक कुशल प्रशासक, संवेदनशील कवि, साहित्यकार के साथ - साथ एक श्रेष्ठ मानव भी थे. भूख , भय , निरक्षरता और अभाव से मुक्त भारत के निर्माण को समर्पित उनकी कविताएँ बहुत लोकप्रिय हैं. उनकी मानवीय संवेदनाओं ने एक संवदेनशील राजनेता के रूप में उन्हें विश्व पटल पर खड़ा किया. वैश्विक मंचों पर उनकी भूमिका आज भी स्मरण की जाती है. वे मध्यप्रदेश के एक ऐसे राजनेता थे जिनकी लोकप्रियता देश नहीं पूरी दुनिया में थी . पहले सांसद, फिर विदेश मंत्री और फिर प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने भारत की विदेश नीति को नए आयाम दिए. पूरी दुनिया में विश्व बन्धुत्व, परस्पर समानता, विश्व शान्ति के लिए किए गए उनके सतत् प्रयास सदैव याद किए जाते रहेंगे . भारत के विदेश मंत्री के रूप में संयुक्त राष्ट्र संघ मंच से पहली बार हिन्दी में भाषण देकर उन्होंने हिन्दी को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर और मुखर किया.

सफल परमाणु परीक्षणों तथा कारगिल युद्ध के समय प्रदर्शित उनकी दृढ़ संकल्प शक्ति ने पूरी दुनिया में भारत को अग्रणी राष्ट्रों की पंक्ति में शामिल किया. वे भारत के पड़ोसी देशों के साथ मधुर और शान्तिपूर्ण संबंधों को बनाए रखने के प्रयासों में निरन्तर लगे रहे तथा सदैव भारत के हितों को सर्वोपरि रखा. इस दिशा में लाहौर बस यात्रा और आगरा शिखर सम्मेलन प्रमुख मील के पत्थर हैं. प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल तेजी से प्रगति और विकास के नए- नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए सदैव याद किया जाएगा. स्वर्णिम चतुर्भुज राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, टेलिकॉम संपर्कता, आई.टी. तथा ऊर्जा सेक्टर में उनके योजनाओं का सफल प्रारंभ उनकी कुछ उल्लेखनीय पहलें थीं.

अटल जी के कार्यकाल के दौरान तीन नए राज्यों- छत्तीसगढ़ , झारखंड और उत्तराखंड का गठन भी हुआ. पहाड़ी क्षेत्रों और आदिवासी इलाकों के लोगों की आशाओं-आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में ये बहुत बड़ा फैसला था .

श्रद्धेस श्री अटल बिहारी वाजपेजी न केवल एक प्रखर और ओजस्वी वक्ता थे अपितु एक विशाल हृदय के व्यक्ति भी थे. उनकी संवेदनाएं उनके राजनीतिक जीवन में भी प्रकट होती रहीं. जब वे विपक्ष में थे, तब भी सरकार के जनहित के कार्यों की प्रशंसा करने में संकोच नहीं करते थे . उनका विरोध भी रचनात्मक होता था. उनके इन्हीं गुणों ने उन्हें दलीय सीमाओं से ऊपर उठाकर एक सर्वप्रिय राजनेता के रूप में स्थापित किया था.

संसदीय परंपराओं का जीवन भर पालन कर उन्होंने भारत के संसदीय लोकतंत्र को नए आयामों के साथ समृद्ध किया. पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने उनमें भारत का भविष्य देखा था. पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भी उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए यह कहा था कि एक दिन वे भारत का नेतृत्व करेंगे . डॉ. राममनोहर लोहिया उनके हिन्दी प्रेम के प्रशंसक थे . पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था.

देशहित उनके लिए सर्वोपरि था. इसका प्रत्यक्ष उदाहरण उस समय मिला, जब उन्होंने 1993 में विपक्ष का नेता रहते हुए मानव अधिकार आयोग की बैठक में भारतीय प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व करने का सरकार का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और जिनेवा में इस आयोग की बैठक में उन्होंने भारत के पक्ष को बहुत प्रभावी ढंग से रखा.

उनके निधन से न केवल मध्यप्रदेश अपितु पूरे देश और दुनिया से एक दूरदर्शी, परिपक्व, संवेदनशील, विशाल हृदयी और दृढ़ संकल्प वाला नेता चला गया. उनके दिखाये रास्ते पर चलकर मध्यप्रदेश को एक विकसित राज्य और भारत को एक महान राष्ट्र बनाने के उनके संकल्प को पूरा करने में हम सहभागी बनेंगे .

मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल श्री अटल बिहारी वाजपेयी के दुःखद निधन पर गहरा शोक प्रकट करता है तथा शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी तथा संपूर्ण राज्य की ओर से हार्दिक संवेदनाएं अभिव्यक्त करता है. कृतज्ञ मध्यप्रदेश का अटल जी को शत्-शत् नमन .

बसंत प्रताप सिंह , मुख्य सचिव.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री , मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2018 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 18 September 2018. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2018-09-18.496.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2018-09-18.496.Extraordinary.