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मध्यप्रदे
श शासन
सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
( असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 15]
भोपाल , गुरुवार , दिनांक 10 जनवरी 2019- पौष 20, शक 1940
विधान सभा सचिवालय , मध्यप्रदेश
भोपाल, दिनांक 10 जनवरी 2019
क्र. 380 - मप्रविस- 15 - विधान-2019 .- मंध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम 64 के उपबंधों के पालन मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) विधेयक, 2019 ( क्रमांक 2 सन् 2019 ) जो विधान सभा में दिनांक 10 जनवरी, 2019 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है.
अवधेश प्रताप सिंह, प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक २ सन् २०१ ९
मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) विधेयक , २०१ ९
विषय-सूची.
खण्ड:
१. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.
२. धारा २ का संशोधन.
३. धारा ६ का संशोधन.
४. धारा ७ का संशोधन.
५. धारा ९ का संशोधन.
६. धारा १० का संशोधन.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 जनवरी 2019
७. धारा १२ का संशोधन.
८. धारा १३ का संशोधन.
९. धारा १६ का संशोधन.
१०. धारा १७ का संशोधन.
११. धारा २० का संशोधन.
१२. धारा २२ का संशोधन.
१३. धारा २४ का संशोधन.
१४. धारा २५ का संशोधन.
१५. धारा २ ९ का संशोधन.
१६. धारा ३४ का संशोधन.
१७. धारा ३५ का संशोधन .
१८ . धारा ३ ९ का संशोधन.
१९. धारा ४३ क का अंतःस्थापन.
२०. धारा ४८ का संशोधन.
२१. धारा ४९ का संशोधन.
२२. धारा ४९क और ४९ख का अंतःस्थापन.
२३. धारा ५२ का संशोधन.
२४. धारा ५४ का संशोधन.
२५. धारा ६७ का संशोधन.
२६. धारा ७ ९ का संशोधन.
२७. धारा १०७ का संशोधन.
२८ . धारा ११२ का संशोधन.
२९ . धारा १२ ९ का संशोधन .
३० . धारा १४० का संशोधन.
३१ . धारा १४२ का संशोधन.
३२. धारा १४३ का संशोधन.
३३. धारा १६५ का संशोधन.
३४. धारा १६६ का संशोधन.
३५. धारा १७४ का संशोधन.
३६. अनुसूची १ का संशोधन.
३७. अनुसूची २ का संशोधन.
३८ . अनुसूची ३ का संशोधन.
३९. निरसन तथा व्यावृत्ति.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 जनवरी 2019
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक २ सन् २०१ ९
मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) विधेयक, २०१ ९
मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.
भारत गणराज्य के उनहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान- मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:-
१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) अधिनियम , २०१ ९ है. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.
(२ ) अन्यथा उपबंधित के सिवाय , इस अधिनियम के उपबंध उस तारीख को प्रवृत्त होंगे, जो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , नियत करेः
परंतु इस अधिनियम के विभिन्न उपबंधों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और इस अधिनियम के प्रारंभ पर किसी ऐसे उपबंध में किसी निर्देश का अर्थान्वयन उस उपबंध के प्रवृत्त होने के निर्देश के रुप में किया जाएगा.
धारा २ का संशोधन.
२. मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ ( क्रमांक १ ९ सन् २०१७ ) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) की धारा २ में, -
(क) खण्ड ( ४ ) में, शब्द " अपील प्राधिकारी और अपील अधिकरण " के स्थान पर, शब्द, अंक और कोष्ठक " अपील प्राधिकारी , अपील अधिकरण और धारा १७१ की उपधारा ( २ ) में निर्दिष्ट प्राधिकारी " स्थापित किए जाएं;
(ख) खण्ड १६ में, शब्द " केन्द्रीय उत्पाद शुल्क और सीमाशुल्क बोर्ड " के स्थान पर , शब्द "केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमाशुल्क बोर्ड " स्थापित किए जाएं;
(ग) खण्ड ( १७ ) में, उपखंड ( ज) के स्थान पर, निम्नलिखित उपखंड स्थापित किया जाए, अर्थात्: -
" (ज) किसी घुड़दौड़ की गतिविधियां जिसमें किसी योगक या बुक मेकर की अनुज्ञप्ति या ऐसे क्लब में अनुज्ञप्तिधारी बुक मेकर की गतिविधियां सम्मिलित हैं; और ";
(घ) खण्ड ( १८ ) का लोप किया जाए;.
(ङ) १ जुलाई, २०१७ से, खण्ड ( २१ ) लोप किया गया समझा जाएगा;
(च) १ जुलाई, २०१७ से, खण्ड ( २२ ) से खण्ड ( १११ ) तक को क्रमशः खण्ड ( २१ ) से (११० ) तक पुनर्क्रमांकित किया गया समझा जाएगा;
(छ) इस प्रकार पुनर्क्रमांकित किए गए खण्ड ( ३५ ) में, शब्द, कोष्ठक और अक्षर " खण्ड ( ग ) " के स्थान पर, शब्द, कोष्ठक और अक्षर " खण्ड ( ख ) " स्थापित किए जाएं;
(ज) इस प्रकार पुनर्क्रमांकित किए गए खण्ड ( ६ ९ ) में, उपखण्ड ( च ) में, शब्द और अंक "अनुच्छेद ३७१ " के पश्चात् शब्द और अंक " और अनुच्छेद ३७१ज " अंतःस्थापित किए जाएं;
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(झ) इस प्रकार पुनर्क्रमांकित खण्ड ( १०२ ) में, निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्:-
"स्पष्टीकरण.-शंकाओं के निवारण के लिए, एतद्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि अभिव्यक्ति " सेवा " में प्रतिभूतियों में संव्यवहारों को सुकर बनाना या प्रबंध करना सम्मिलित है; ";
(ञ) १ जुलाई, २०१७ से, इस प्रकार पुनर्क्रमांकित खंड ( ११० ) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया गया समझा जाएगा, अर्थात्:-
" ( १११ ) केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ से अभिप्रेत है, केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ ( २०१७ का १२ ); ".
३. मूल अधिनियम की धारा ६ के पार्श्व शीर्ष के स्थान पर, निम्नलिखित पार्श्व शीर्ष स्थापित किया जाए, धारा ६ का संशोधन. अर्थात्:-
" कतिपय परिस्थितियों में उचित अधिकारी के रूप में केन्द्रीय कर के अधिकारियों की प्राधिकारिता ".
४. मूल अधिनियम की धारा ७ में, १ जुलाई, २०१७ से,-
धारा ७ का संशोधन.
(क) उपधारा ( १ ) में, -
(एक ) खण्ड (ख ) में, शब्द, " चाहे वह कारबार के दौरान या उसे अग्रसर करने के लिये ", के पश्चात्, शब्द " और " अंतःस्थापित किया जाए और सदैव अंतःस्थापित किया गया समझा जाएगा;
(दो) खण्ड ( ग ) में , शब्द प्रतिफल के पश्चात्, शब्द " और " का लोप किया जाए और सदैव लोप किया गया समझा जाएगा;
तीन) खण्ड ( घ) का लोप किया जाए और सदैव लोप किया गया समझा जाएगा;
(
(ख ) उपधारा ( १ ) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाए और सदैव अंतःस्थापित की गई समझी जाएगी , अर्थात्:-
" ( १ क) जहां उपधारा ( १ ) के उपबंधों के अनुसार कतिपय कार्यकलाप या संव्यवहार प्रदाय का गठन करते हैं वहां उन्हें अनुसूची २ में यथानिर्दिष्ट माल का प्रदाय या सेवा का प्रदाय माना जाएगा. ";
(ग ) उपधारा ( ३ ) में, शब्द, कोष्ठक और अंकों " उपधारा ( १ ) और उपधारा ( २ ) " के स्थान पर, शब्द, कोष्ठक और अंक, " उपधारा ( १ ) , उपधारा ( १ क ) और उपधारा ( २ ) " स्थापित किए जाएं.
धारा ९ का संशोधन. ५. मूल अधिनियम की धारा ९ में, उपधारा ( ४ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्:-
" (४ ) सरकार, परिषद् की अनुशंसाओं पर, अधिसूचना द्वारा , रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के एक वर्ग को विनिर्दिष्ट कर सकेगी, जो किसी अरजिस्ट्रीकृत प्रदायकर्ता से प्राप्त माल या सेवाओं या दोनों के विनिर्दिष्ट प्रवर्गों के प्रदाय के संबंध में, माल या सेवा या दोनों के ऐसे प्रदाय के प्राप्तिकर्ता के रूप में विपरीत प्रभार के आधार पर कर का संदाय करेंगे तथा इस अधिनियम के सभी उपबंध ऐसे प्राप्तिकर्ता पर इस प्रकार लागू होंगे , मानो वह ऐसा व्यक्ति है जो ऐसे माल या सेवा या दोनों के प्रदाय के संबंध में कर का संदाय करने के लिये दायी है. ".
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६. मूल अधिनियम की धारा १० में, -
धारा १० का संशोधन.
(क) उपधारा ( १ ) में, -
( एक ) शब्द " उसके द्वारा संदेय कर के स्थान पर, ऐसी दर पर, " के स्थान पर, शब्द, कोष्ठक और अंक " धारा ९ की उपधारा ( १ ) के अधीन उसके द्वारा संदेय कर के स्थान पर, ऐसी दर पर" स्थापित किए जाएं;
(दो) विद्यमान परंतुक में , शब्द " एक करोड़ रुपये " के स्थान पर, शब्द " एक करोड़ पचास लाख रुपये" स्थापित किए जाएं;
(तीन) विद्यमान परंतुक के पश्चात्, निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्:-
" परंतु यह और कि कोई व्यक्ति, जो खंड ( क ) या खण्ड ( ख ) या खण्ड ( ग ) के अधीन कर के संदाय का विकल्प लेता है , किसी राज्य में पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में के कारबार के दस प्रतिशत से अनधिक मूल्य या पाँच लाख रुपए, जो भी अधिक हों की सेवा ( अनुसूची २ के पैरा ६ के खण्ड ( ख ) में निर्दिष्ट से भिन्न) का प्रदाय कर सकेगा. " ;
(ख ) उपधारा ( २ ) में खण्ड ( क) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्:-
" (क) उपधारा ( १ ) में यथाउपबंधित के सिवाय , वह सेवा के प्रदाय में नहीं लगा हुआ है; ".
धारा १२ का संशोधन.
७. मूल अधिनियम की धारा १२ में, उपधारा ( २ ) में खण्ड ( क) में , शब्द, कोष्ठक और अंक " की उपधारा ( १ ) " का लोप किया जाए.
धारा १३ का संशोधन.
८. मूल अधिनियम की धारा १३ में , उपधारा ( २ ) में, दोनों स्थानों पर आने वाले शब्द, कोष्ठक और अंक " की उपधारा ( २ ) " का लोप किया जाए.
९. मूल अधिनियम की धारा १६ में, उपधारा ( २ ) में, -
धारा १६ का संशोधन.
(क) खण्ड ( ख) में, विद्यमान स्पष्टीकरण के स्थान पर निम्नलिखित स्पष्टीकरण स्थापित किया जाए, अर्थात्:-
" स्पष्टीकरण.- इस खण्ड के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति ने, यथास्थिति, माल या सेवा को प्राप्त कर लिया है-
(एक) जहां माल, किसी प्रदायकर्ता द्वारा किसी प्राप्तिकर्ता या किसी अन्य व्यक्ति को, ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति के निदेश पर परिदान किया गया है, चाहे व अभिकर्ता के रूप में या अन्यथा माल के संचलन से पूर्व या दौरान, माल के मालिकाना दस्तावेजों के अंतरण के माध्यम से या अन्यथा कार्य कर रहा हो;
(दो) जहां सेवाएं, किसी व्यक्ति को ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति के निदेश और उसकी ओर से प्रदायकर्या द्वारा उपलब्ध कराई जाती हो. ";
(ख) खण्ड ( ग ) में, शब्द और अंक " धारा ४१ " के स्थान पर, शब्द, अंक और अक्षर " धारा ४१ या धारा ४३ क " स्थापित किए जाएं.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 जनवरी 2019
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१०. मूल अधिनियम की धारा १७ में, -
धारा १७ का संशोधन.
उपधारा ( ३ ) में, निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्:-
(क)
"स्पष्टीकरण.- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, अभिव्यक्ति " छूट - प्राप्त प्रदाय के मूल्य " में उक्त अनुसूची के पैरा ५ में विनिर्दिष्ट के सिवाय , अनुसूची- तीन में विनिर्दिष्ट कार्यकलाप या संव्यवहार का मूल्य सम्मिलित नहीं होगा. ";
उपधारा ( ५ ) में, खण्ड ( क) और ( ख ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किए जाएं, (ख)
अर्थात्:-
" ( क ) तेरह से अनधिक व्यक्तियों ( चालक सहित ) की बैठने की अनुमोदित क्षमता के परिवहन के लिए मोटरयान, सिवाय तब जब उनका उपयोग निम्नलिखित कराधेय प्रदाय करने के लिए किया जाता हो, अर्थात्: -
ऐसे मोटरयानों की आगे और प्रदाय; या
(अ)
(आ) यात्रियों का परिवहन; या
(इ) ऐसे मोटरयानों को चलाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना;
(कक) जलयान और वायुयान , सिवाय तब जब उनका उपयोग-
एक) निम्नलिखित कराधेय प्रदाय के लिए किया जा रहा हो, अर्थात्:-
(
(अ) ऐसे जलयान या वायुयान की आगे और प्रदाय ; या
(आ) यात्रियों का परिवहन; या
ऐसे जलयानों को चलाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना; या
(इ)
(ई) ऐसे वायुयान चलाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना;
माल के परिवहन के लिए;
(दो)
(
कख ) साधारण बीमा सेवाएं, सर्विसिंग, मरम्मत और अनुरक्षण की सेवाएं, जहां तक उनका संबंध खण्ड (क) या खण्ड ( कक) में निर्दिष्ट मोटरयान , जलयान या वायुयान से है :
परन्तु ऐसी सेवा के लिए इनपुट कर प्रत्यय उपलब्ध होगा-
(एक) जहां खण्ड (क ) या खण्ड ( कक ) में निर्दिष्ट मोटरयान, जलयान या वायुयान का उपयोग उसमें विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए किया जाता है;
जहां किसी कराधेय व्यक्ति द्वारा प्राप्त किया जाता है, जो-
(दो)
ऐसे मोटरयान , जलयान या वायुयान के विनिर्माण में लगा हुआ है; या (एक)
(दो) उसके द्वारा बीमाकृत ऐसे मोटरयान, जलयान या वायुयान के संबंध में साधारण बीमा सेवाओं के प्रदाय में लगा हुआ है ;
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माल या सेवा या दोनों का निम्नलिखित प्रदाय-
(ख)
(एक) खाद्य और सुपेय , आउटडोर कैटरिंग , सौंदर्य उपचार, स्वास्थ्य सेवाएं, कास्मेटिक और प्लास्टिक शल्यक्रिया , खण्ड ( क ) या खण्ड ( कक) में निर्दिष्ट मोटरयान , जलयान या वायुयान को लीज, भाड़े या भाटक पर देने के सिवाय जब कि उनका उपयोग उसमें विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए किया जाता है, जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा :
परन्तु ऐसे माल या सेवा या दोनों के संबंध में इनपुट कर प्रत्यय वहां उपलब्ध होगा जहां ऐसे माल या सेवा या दोनों की आवक प्रदाय का उपयोग किसी रजिस्ट्रकृत व्यक्ति द्वारा उसी प्रवर्ग के माल या सेवा या दोनों की जावक कराधेय प्रदाय के लिए या कराधेय समिश्र या मिश्रित प्रदाय के तत्व के रूप में किया जाता है ;
(दो) किसी क्लब , स्वास्थ्य और फिटनेस केन्द्र की सदस्यता; और
(तीन ) कर्मचारियों को अवकाश के दौरान प्रदात्त यात्रा लाभ जैसे छुट्टी या गृह यात्रा रियायतः
परन्तु ऐसे माल या सेवा या दोनों के संबंध में इनपुट कर प्रत्यय वहां उपलब्ध होगा , जहां किसी नियोक्ता के लिए अपने कर्मचारियों को तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन उपबंध करना बाध्यकर हो.".
धारा २० का संशोधन.
११. मूल अधिनियम की धारा २० में , स्पष्टीकरण में, खण्ड ( ग ) में, शब्द तथा अंक " प्रविष्टि ८४ " के स्थान पर, शब्द अंक और अक्षर, " प्रविष्टि ८४ और ९ २ क " स्थापित किए जाएं.
१२. मूल अधिनियम की धारा २२ में,-
धारा २२ का संशोधनः (क) उपधारा ( १ ) में, परन्तुक के पश्चात्, निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्:-
" परन्तु यह और कि सरकार, किसी विशेष प्रवर्ग के राज्य के अनुरोध पर तथा परिषद् की सिफारिशों पर पहले परन्तुक में निर्दिष्ट समग्र आवर्त को दस लाख रुपये से ऐसी रकम तक बढ़ा सकेगी , जो बीस लाख रुपये से अधिक नहीं होगी और ऐसी शर्तों और सीमाओं के अध्यधीन रहते हुए, जैसी कि अधिसूचित की जाए ; "
(ख) स्पष्टीकरण में, खण्ड ( तीन ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्:-
" ( तीन ) अभिव्यक्ति " विशेष प्रवर्ग राज्यों " से अभिप्रेत होंगे , जम्मू और कश्मीर, अरूणाचल प्रदेश , आसाम, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम तथा उत्तराखण्ड राज्य के सिवाय , संविधान के अनुच्छेद, २७ ९क के खण्ड ( ४ ) के उपखण्ड ( छ ) में यथाविनिर्दिष्ट राज्य. ".
धारा २४ का संशोधन.
१३. मूल अधिनियम की धारा २४ में, खण्ड ( दस ) में, शब्द " वाणिज्य आपरेटर " के पश्चात्, शब्द तथा अंक " जिससे धारा ५२ के अधीन स्रोत पर कर का संग्रहण करने की अपेक्षा है " अंतःस्थापित किए जाएं.
धारा २५ का १४. मूल अधिनियम की धारा २५ में,-
संशोधन.
(क) उपधारा ( १ ) में , विद्यमान परन्तुक के पश्चात् और स्पष्टीकरण से पहले निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्:-
" परन्तु यह और कि किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसके पास किसी विशेष आर्थिक जोन में विशेष आर्थिक जोन अधिनियम , २००५ में यथापरिभाषित कोई इकाई है या एक विशेष आर्थिक जोन विकासकर्ता मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 10 जनवरी 2019
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होने के चलते, उसे एक पृथक् रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन करना होगा , जो कि उसी राज्य में विशेष आर्थिक जोन के बाहर अवस्थित उसके कारबार के स्थान से सुभिन्न है. " ;
(ख) उपधारा ( २ ) में, विद्यमान परन्तुक के स्थान पर , निम्नलिखित परन्तुक स्थापित किया जाए, अर्थात्:-
" परन्तु ऐसे किसी व्यक्ति को, जो राज्य में कारबार के बहु स्थान का धारक है, को कारबार के ऐसे प्रत्येक स्थान के लिए उन शर्तों के अध्यधीन रहते हुए जैसी कि विहित की जाएं पृथक् रजिस्ट्रीकरण मंजूर किया जा सकेगा. ".
१५. मूल अधिनियम की धारा २९ में, -
धारा २ ९ का संशोधन.
पार्श्व शीर्ष के स्थान पर, निम्नलिखित पार्श्व शीर्ष स्थापित किया जाए, अर्थात् :-
(क)
" रजिस्ट्रीकरण का रद्दकरण अथवा निलंबन";
(ख) उपधारा ( १ ) में, खण्ड ( ग ) के पश्चात्, निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्:-
" परन्तु रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा फाइल की गई रजिस्ट्रीकरण से रद्दकरण से संबंधित कार्यवाहियों के लंबित रहने के दौरान , रजिस्ट्रीकरण को ऐसी अवधि के लिए और ऐसी रीति में , जो कि विहित की जाए, निलंबित किया जा सकेगा. " ;
(ग) उपधारा ( २ ) में, विद्यमान परन्तुक के पश्चात्, निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्:-
" परन्तु यह और कि रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण से संबंधित कार्यवाहियों के लंबित रहने के दौरान, समुचित अधिकारी रजिस्ट्रीकरण को ऐसी अवधि के लिए और ऐसी रीति में, जो कि विहित की जाए, निलंबित कर सकेगा. ".
१६. मूल अधिनियम की धारा ३४ में, -
धारा ३४ का संशोधन.
उपधारा ( १ ) में, -
(क)
( एक) शब्द " कोई कर बीजक जारी किया गया है " के स्थान पर , शब्द " एक या अधिक कर बीजक जारी किए गए हैं " स्थापित किए जाएं;
(दो) शब्द " जमापत्र " के स्थान पर, शब्द " किसी वित्तीय वर्ष में किए गए प्रदायों के लिए एक या अधिक जमापत्र " स्थापित किए जाएं ;
उपधारा ( ३ ) में, -
(ख)
( एक) शब्द " कोई कर बीजक जारी किया गया है " के स्थान पर, शब्द " एक या अधिक कर बीजक जारी किए गए हैं " स्थापित किए जाएं;
( दो) शब्द " नामे पत्र " के स्थान पर, शब्द " किसी वित्तीय वर्ष में की गई पूर्तियों के लिए एक या अधिक नामे पत्र" स्थापित किए जाएं.
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१७. मूल अधिनियम की धारा ३५ में, उपधारा ( ५ ) में, निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाए, धारा ३५ का संशोधन.
अर्थात्:-
" परन्तु इस उपधारा में अंतर्विष्ट कोई बात, केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के किसी विभाग या किसी स्थानीय प्राधिकरण को लागू नहीं होगी , जिसकी लेखाबहियां, भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किन्हीं स्थानीय प्राधिकरणों के लेखाओं की संपरीक्षा के लिए नियुक्त किसी लेखापरीक्षक द्वारा संपरीक्षा किए जाने के अध्यधीन हैं. ".
१८. मूल अधिनियम की धारा ३ ९ में, -
धारा ३ ९ का संशोधन.
(क) उपधारा ( १ ) में, -
(एक) शब्द " ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए " के स्थान पर, शब्द " ऐसे प्ररूप , रीति में तथा ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए " स्थापित किए जाएं;
(दो ) " ऐसे कलैंडर मास या उसके किसी भाग के उत्तरवर्ती मास के बीसवें दिन से पूर्व या को " शब्दों का लोप किया जाए;
(तीन) निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्:-
" परन्तु सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के कतिपय वर्गों को अधिसूचित कर सकेगी, जो ऐसी शर्तों और रक्षोपायों, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के अध्यधीन रहते हुए, प्रत्येक तिमाही या उसके भाग के लिए विवरणी प्रस्तुत करेंगे. ";
(ख) उपधारा ( ७ ) में , निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्:-
" परन्तु सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के कतिपय वर्गों को अधिसूचित कर सकेगी, जो ऐसी शर्तों और रक्षोपायों, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के अध्यधीन रहते हुए, ऐसी विवरणी प्रस्तुत करने के लिए उससे अपेक्षित अंतिम तारीख को या उससे पूर्व ऐसी विवरणी के अनुसार सरकार को, शोध्य कर या उसके किसी भाग का संदाय करेंगे. " ;
(ग) उपधारा ( ९ ) में, -
(एक) शब्द " उस मास या तिमाही, जिसके दौरान ऐसा लोप या अशुद्ध विशिष्टियां ध्यान में आई हैं " के स्थान पर , शब्द " ऐसे प्ररूप और रीति में, जो विहित की जाए " स्थापित किए जाएं ;
(दो) परन्तुक के स्थान पर, निम्नलिखित परन्तुक स्थापित किया जाए, अर्थात्: -
" परन्तुक वित्तीय वर्ष, जिससे ऐसे ब्यौरे संबंधित हैं, की समाप्ति पश्चात्, सितम्बर मास या दूसरी तिमाही के लिए विवरणी देने की नियत तारीख या सुसंगत वार्षिक विवरणी देने की तिथि, जो भी पूर्वोत्तर हो, के पश्चात् किसी लोप या अशुद्ध विशिष्टियों का ऐसा सुधार अनुज्ञात नहीं किया जाएगा.".
१९ . मूल अधिनियम की धारा ४३ के पश्चात्, निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्:-
धारा ४३ क का अंतःस्थापन.
"४३ क. विवरणी प्रस्तुत करने और इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने के लिए प्रक्रिया.
(१) धारा १६ की उपधारा ( २ ) , धारा ३७ या धारा ३८ में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, धारा ३ ९ की उपधारा ( १ ) के अधीन प्रस्तुत विवरणियों में, प्रदायकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रदायों के ब्यौरों को सत्यापित , विधिमान्य, उपांतरित या विलोपित करेगा.
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(२) धारा ४१ , धारा ४२ या धारा ४३ में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , प्राप्तिकर्ता द्वारा इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने की प्रक्रिया और उसका सत्यापन ऐसा होगा , जैसा कि विहित किया जाए.
(३) प्राप्तिकर्ता द्वारा इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने के प्रयोजनों के लिए, सामान्य पोर्टल पर प्रदायकर्ता द्वारा जावक प्रदायों के ब्यौरे प्रस्तुत करने की प्रक्रिया ऐसी होगी , जैसे कि विहित की जाए.
(४) उपधारा ( ३ ) के अधीन प्रस्तुत नहीं की गई जावक प्रदायों के संबंध में इनपुट कर प्रत्यय का फायदा लेने की प्रक्रिया ऐसी होगी , जो विहित की जाए और ऐसी प्रक्रिया में इनपुट कर प्रत्यय की ऐसी अधिकतम रकम सम्मिलित हो सकेगी , जिसका इस प्रकार फायदा लिया जा सकता है, जो उक्त उपधारा के अधीन प्रदायकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत ब्यौरों के आधार पर उपलब्ध इनपुट कर प्रत्यय के बीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगी.
(५) जावक प्रदायों में , विनिर्दिष्ट कर की रकम जिसके लिए प्रदायकर्ता द्वारा उपधारा (३ ) के अधीन ब्यौरों को प्रस्तुत किया गया है, अधिनियम के उपबंधों के अधीन उसके द्वारा संदेय कर के रूप में माना जाएगा.
(६) किसी प्रदाय का प्रदायकर्ता और प्राप्तिकर्ता , संयुक्ततः और पृथकतः, ऐसी जावक प्रदायों के संबंध में, जिनके ब्यौरे उपधारा ( ३ ) या उपधारा ( ४ ) के अधीन प्रस्तुत किए गए हैं, किन्तु उनकी विवरणी प्रस्तुत नहीं की गई है, यथास्थिति फायदा लिए गए इनपुट कर प्रत्यय का संदाय या कर का संदाय करने के लिए दायी होंगे.
(७) उपधारा ( ६ ) के प्रयोजनों के लिए, वसूली ऐसी रीति में की जाएगी , जैसी कि विहित की जाए और ऐसी प्रक्रिया गलती से फायदा लिए गए एक हजार रुपए से अनधिक कर या इनपुट कर प्रत्यय की रकम की वसूली न करने के लिए उपबंध कर सकेगी.
(८ ) जावक प्रदायों के संबंध में प्रक्रिया , रक्षोपाय और कर की रकम की अवसीमा, जिनके ब्यौरे उपधारा (३ ) के अधीन किसी ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति द्वारा निम्नलिखित अवधि में प्रस्तुत किए जा सकते हैं,-
रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने के छह मास के भीतर;
(एक)
( दो) जिसने कर के संदाय में व्यतिक्रम किया है और जहां ऐसा व्यतिक्रम ऐसी व्यतिक्रमित राशि के भुगतान की नियत तारीख से दो मास से अधिक के लिए जारी रहता है ऐसी होगी , जैसी कि विहित की जाए. " .
धारा ४८ का संशोधन.
२०. मूल अधिनियम की धारा ४८ में, उपधारा ( २ ) में , शब्द तथा अंक " धारा ३ ९ या धारा ४४ या धारा ४५ के अधीन विवरणी" के पश्चात्, शब्द " और ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन " अंतःस्थापित किए जाएं.
धारा ४९ का
२१. मूल अधिनियम की धारा ४९ में, -
संशोधन.
( क) उपधारा ( २ ) में, शब्द और अंक " धारा ४१ " के स्थान पर, शब्द, अंक और अक्षर " धारा ४१ या धारा ४३ क " स्थापित किए जाएं;
उपधारा ( ५ ) में, -
(ख)
एक) खण्ड ( ग ) में, निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात् :-
(
" परन्तु राज्य कर के मद्दे इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग एकीकृत कर के संदाय के लिए केवल वहां किया जाएगा, जहां केन्द्रीय कर के मद्दे इनपुट कर प्रत्यय का अतिशेष एकीकृत कर के संदाय के लिए उपलब्ध नहीं है; ";
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 जनवरी 2019
खण्ड ( घ ) में, निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्: -
(दो)
" परन्तु संघ राज्यक्षेत्र कर के मद्दे इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग एकीकृत कर के संदाय के लिए केवल वहां किया जाएगा , जहां केन्द्रीय कर के मद्दे इनपुट कर प्रत्यय का अतिशेष एकीकृत कर के संदाय के लिए उपलब्ध नहीं है; ".
२२. मूलं अधिनियम की धारा ४९ के पश्चात्, निम्नलिखित धाराएं अंतःस्थापित की जाएं, अर्थात्: -
धारा ४ ९क और ४९ख अंतःस्थापन. का " ४९क. कतपिय शर्तों के अध्यधीन रहते हुए इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग.- धारा ४९ में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , राज्य कर के मद्दे इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग , यथास्थिति एकीकृत कर या राज्य कर के संदाय के लिए, केवल तब किया जाएगा, जबकि एकीकृत कर के मद्दे उपलब्ध इनपुट कर प्रत्यय का पहले ही ऐसे संदाय के प्रति पूर्णतया उपयोग कर लिया गया है.
४९ख. इनपुट कर प्रत्यय के उपयोग का आदेश.-इस अध्याय में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी और धारा ४ ९ की उपधारा ( ५ ) के खण्ड (ङ) और खण्ड ( च ) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, सरकार, परिषद् की अनुशंसाओं पर, इनपुट कर प्रत्यय के यथास्थिति, एकीकृत कर, केन्द्रीय कर, राज्य कर या संघ राज्यक्षेत्र कर के मद्दे ऐसे किसी कर के संदाय के उपयोग किए जाने के आदेश और रीति को विहित कर सकेगी. ".
धारा ५२ का संशोधन.
२३. मूल अधिनियम की धारा ५२ में, उपधारा (९ ) में, शब्द और अंक " धारा ३७ " के स्थान पर, शब्द और अंक " धारा ३७ या धारा ३ ९ " स्थापित किए जाएं.
२४. मूल अधिनियम की धारा ५४ में, -
धारा ५४ का संशोधन.
उपधारा ( ८ ) में, खण्ड ( क) में, दो बार आए शब्द " शून्य अंकित प्रदायों " के स्थान पर , क्रमशः शब्द " निर्यात " एवं " निर्यातों " स्थापित किए जाएं ; (क)
(ख) स्पष्टीकरण में, खण्ड ( २ ) में, -
(एक) उपखण्ड ( ग ) में, मद ( एक ) में, शब्द " विदेशी मुद्रा में " के पश्चात्, शब्द " या भारतीय रुपए में, जहां कहीं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमति दी जाए, ", अंतःस्थापित किया जाए;
(दो) उपखण्ड (ङ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपखण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्:-
(ङ) उपधारा ( ३ ) के प्रथम परंतुक के खण्ड ( दो ) के अधीन उपयोग न किए गए इनपुट कर प्रत्यय के प्रतिदाय की दशा में, उस अवधि के लिए, जिसमें ऐसे प्रतिदाय का दावा उत्पन्न होता है , धारा ३ ९ के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने की अंतिम तारीख;" .
धारा ६७ का संशोधन.
२५. १ जुलाई, २०१७ से मूल अधिनियम की धारा ६७ की उपधारा ( २ ) में, प्रारंभिक पैरा के स्थान पर, निम्नलिखित पैरा स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" जहां संयुक्त आयुक्त की पंक्ति से अन्यून समुचित अधिकारी के पास या तो उपधारा ( १ ) के अधीन किए गए निरीक्षण के अनुसरण में या अन्यथा यह विश्वास करने का कारण है कि अधिहरण के लिए दायी कोई माल या कोई दस्तावेज या बहियां या चीजें, जो उसके मत में इस अधिनियम के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के लिये उपयोगी या सुसंगत होंगी , जिन्हें किसी स्थान पर छिपाकर रखा गया है तो वह राज्य कर के किसी अन्य अधिकारी को तलाशी और अभिग्रहण करने के लिए लिखित में प्राधिकृत कर सकेगा या ऐसे मालों, दस्तावेजों या बहियों या चीजों की तलाशी ले सकेगा और अभिग्रहण कर सकेगा: ".
30 (9)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 जनवरी 2019
खण्ड ( घ ) में , निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्:-
(दो)
" परन्तु संघ राज्यक्षेत्र कर के मद्दे इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग एकीकृत कर के संदाय के लिए केवल वहां किया जाएगा , जहां केन्द्रीय कर के मद्दे इनपुट कर प्रत्यय का अतिशेष एकीकृत कर के संदाय के लिए उपलब्ध नहीं है; ".
२२. मूल अधिनियम की धारा ४ ९ के पश्चात्, निम्नलिखित धाराएं अंतःस्थापित की जाएं, अर्थात्: -
धारा ४९क और ४९ख अंतःस्थापन. का " ४९क. कतपिय शर्तों के अध्यधीन रहते हुए इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग.- धारा ४९ में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, राज्य कर के मद्दे इनपुट कर प्रत्यय का उपयोग, यथास्थिति एकीकृत कर या राज्य कर के संदाय के लिए, केवल तब किया जाएगा , जबकि एकीकृत कर के मद्दे उपलब्ध इनपुट कर प्रत्यय का पहले ही ऐसे संदाय के प्रति पूर्णतया उपयोग कर लिया गया है.
४९ख. इनपुट कर प्रत्यय के उपयोग का आदेश.- इस अध्याय में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी और धारा ४९ की उपधारा ( ५ ) के खण्ड ( ङ) और खण्ड ( च) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, सरकार, परिषद् की अनुशंसाओं पर, इनपुट कर प्रत्यय के यथास्थिति, एकीकृत कर, केन्द्रीय कर, राज्य कर या संघ राज्यक्षेत्र कर के मद्दे ऐसे किसी कर के संदाय के उपयोग किए जाने के आदेश और रीति को विहित कर सकेगी.".
धारा ५२ का संशोधन.
२३. मूल अधिनियम की धारा ५२ में, उपधारा ( ९ ) में , शब्द और अंक " धारा ३७ " के स्थान पर, शब्द और अंक " धारा ३७ या धारा ३ ९ " स्थापित किए जाएं.
धारा ५४ का संशोधन.
२४. मूल अधिनियम की धारा ५४ में,-
(क) उपधारा ( ८ ) में, खण्ड ( क ) में , दो बार आए शब्द " शून्य अंकित प्रदायों " के स्थान पर, क्रमशः शब्द " निर्यात " एवं " निर्यातों " स्थापित किए जाएं;
स्पष्टीकरण में, खण्ड ( २ ) में, -
(ख)
(एक) उपखण्ड (ग ) में, मद ( एक ) में, शब्द " विदेशी मुद्रा में " के पश्चात्, शब्द " या भारतीय रुपए में, जहां कहीं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमति दी जाए, " , अंतःस्थापित किया जाए;
(दो) उपखण्ड (ङ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपखण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्:-
(ङ) उपधारा ( ३ ) के प्रथम परंतुक के खण्ड ( दो ) के अधीन उपयोग न किए गए इनपुट कर प्रत्यय के प्रतिदाय की दशा में, उस अवधि के लिए, जिसमें ऐसे प्रतिदाय का दावा उत्पन्न होता है , धारा ३ ९ के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने की अंतिम तारीख; ".
धारा ६७ का संशोधन.
२५. १ जुलाई, २०१७ से मूल अधिनियम की धारा ६७ की उपधारा ( २ ) में, प्रारंभिक पैरा के स्थान पर, निम्नलिखित पैरा स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" जहां संयुक्त आयुक्त की पंक्ति से अन्यून समुचित अधिकारी के पास या तो उपधारा ( १ ) के अधीन किए गए निरीक्षण के अनुसरण में या अन्यथा यह विश्वास करने का कारण है कि अधिहरण के लिए दायी कोई माल या कोई दस्तावेज या बहियां या चीजें, जो उसके मत में इस अधिनियम के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के लिये उपयोगी या सुसंगत होंगी, जिन्हें किसी स्थान पर छिपाकर रखा गया है तो वह राज्य कर के किसी अन्य अधिकारी को तलाशी और अभिग्रहण करने के लिए लिखित में प्राधिकृत कर सकेगा या ऐसे मालों, दस्तावेजों या बहियों या चीजों की तलाशी ले सकेगा और अभिग्रहण कर सकेगा : ".
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 10 जनवरी 2019
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२६. मूल अधिनियम की धारा ७ ९ में, उपधारा ( ४ ) के पश्चात्, निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाए, धारा ७९ का संशोधन.
अर्थात्:-
"स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, शब्द " व्यक्ति" में , धारा २५ की उपधारा ( ४ ) या यथास्थिति, उपधारा ( ५ ) में यथानिर्दिष्ट " सुभिन्न व्यक्ति " सम्मिलित होंगे. " .
धारा १०७ का संशोधन.
२७. मूल अधिनियम की धारा १०७ में, उपधारा ( ६ ) में , खण्ड ( ख ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" ( ख) उक्त आदेश , जिसके संबंध में अपील फाईल की गई है, से उद्धत विवाद में बकाया कर की रकम के दस प्रतिशत के बराबर राशि का, अधिकतम पच्चीस करोड़ रुपये के अध्यधीन रहते हुए, संदाय नहीं किया हो. ".
धारा ११२ का संशोधन.
२८. मूल अधिनियम की धारा ११२ में, उपधारा ( ८ ) में, खंड ( ख ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" (ख) धारा १०७ की उपधारा ( ६ ) के अधीन संदत्त रकम के अतिरिक्त, उक्त आदेश , जिसके संबंध में अपील फाईल की गई है , से उद्धत विवाद में बकाया कर की रकम के बीस प्रतिशत के बराबर राशि, अधिकतम पचास करोड़ रुपए के अध्यधीन रहते हुए. ".
२९ . मूल अधिनियम की १२९ में,-
धारा १२ ९ का संशोधन.
(
क) १ जुलाई, २०१७ से, उपधारा ( १ ) में, खण्ड ( ख ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" (ख ) लागू कर के और उस पर संदत्त कर की रकम द्वारा कम करके माल के मूल्य का पचास प्रतिशत के बराबर शास्ति और, छूट प्राप्त माल की दशा में, माल के मूल्य के पांच प्रतिशत के बराबर रकम या पच्चीस हजार रुपए जो भी कम हो, के संदाय पर जहां माल का स्वामी ऐसे कर और शास्तिके संदाय के लिए आगे नहीं आता है; ".
(ख) उपधारा ( ६ ) में , शब्द " सात दिन " के स्थान पर, शब्द " चौदह दिन " स्थापित किए जाएं.
३०. १ जुलाई, २०१७ से, मूल अधिनियम की धारा १४० में-
धारा १४० का संशोधन.
उपधारा (४ ) में , प्रारंभिक पैरा के स्थान पर, निम्नलिखित पैरा स्थापित किया जाए, अर्थात्ः- ( क)
" कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जो विद्यमान विधि के अधीन ऐसे कराधेय मालों के साथ - साथ छूट प्राप्त मालों या कर मुक्त मालों, चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हों के विक्रय में लगा हुआ है, किन्तु जो इस अधिनियम के अधीन कर के दायी हैं, अपने इलेक्ट्रानिक जमा खाते में लेने का हकदार होगा, -";
उपधारा ( ६ ) में, प्रारंभिक पैरा के स्थान पर, निम्नलिखित पैरा स्थापित किया जाए, अर्थात्ः- (ख)
" कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति जो या तो किसी नियत दर पर कर का संदाय कर रहा था विद्यमान विधि के अधीन संदाय कर रहा था , निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन रहते हुए नियत दिन को अपने स्टाक में अंतर्विष्ट अर्धनिर्मित या निर्मित मालों के इनपुट को स्टाक में धारित स्टाक और इनपुट के संबंध में पात्र मूल्यवर्धित कर की जमा अपने इलेक्ट्रानिक जमा खाते में लेने का हकदार होगा, अर्थात्:- ".
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 जनवरी 2019
३१. १ जुलाई, २०१७ से, मूल अधिनियम की धारा १४२ में, -
धारा १४२ का संशोधन.
(क) उपधारा ( १ ) में, प्रारंभिक पैरा के स्थान पर, निम्नलिखित पैरा स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" ( १ ) जहां किसी माल पर कोई कर, यदि कोई हो , उसके विक्रय के समय पर विद्यमान विधि के अधीन देय किया गया था नियत तारीख से पूर्व छह मास से पूर्व का समय ना हुआ हो , नियत तारीख को या उसके पश्चात् कारबार के किसी स्थान पर वापिस किया जाता है , रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति विद्यमान विधि के अधीन संदत्त कर के वापस किए जाने के लिए पात्र होगा, जहां ऐसा माल नियत तारीख से छह मास की अवधि के भीतर, कारबार के उक्त स्थान के लिए किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्तिके अलावा किसी व्यक्ति द्वारा वापस कर दिया जाता है तथा ऐसे माल का उचित अधिकारी के समाधान होने हेतु पहचाने जाने योग्य हैः ";
उपधारा ( ७ ) में, खण्ड ( क) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
(ख)
" (क) आशयित बाहरी देय कर के संबंध में अपील , पुनरीक्षण, पुनर्विलोकन अथवा निर्देश की प्रत्येक कार्यवाही चाहे वह विद्यमान विधि के अधीन नियत तारीख के पूर्व अथवा उसके पश्चात् की गई हो, विद्यमान विधि के उपबंधों के अनुसार निपटाई जाएगी तथा यदि कोई रकम, ऐसी अपील, पुनरीक्षण, पुनर्विलोकन या निर्देश के परिणाम के रूप में वसूली योग्य है तो वह विद्यमान विधि के अधीन जब तक वसूल ना कर ली गई हो , इस अधिनियम के अधीन कर के किसी बकाया के रूप में वसूल की जाएगी और इस प्रकार वसूल की गई रकम इस अधिनियम के अधीन इनपुट कर प्रत्यय के रूप में स्वीकार नहीं की जाएगी .".
धारा १४३ का संशोधन.
३२. मूल अधिनियम की धारा १४३ में , उपधारा ( १ ) में, खंड ( ख ) में, परन्तुक के पश्चात्, निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" परंतु यह और कि पर्याप्त हेतुक दर्शित किए जाने पर, एक वर्ष और तीन वर्ष की अवधि को, आयुक्त द्वारा क्रमशः एक वर्ष और दो वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए आगे और बढ़ाया जा सकेगा. ".
धारा १६५ का संशोधन.
३३. १ जुलाई, २०१७ से, मूल अधिनियम की धारा १६५ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-
" १६५. विनियम बनाने की शक्ति.
सरकार, अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के उपंबंधों को कार्यान्वित करने के लिए इस अधिनियम तथा इसके अधीन बनाए गए नियमों से संगत विनियम बना सकेगी . ".
धारा १६६ का संशोधन.
३४. १ जुलाई, २०१७ से, मूल अधिनियम की धारा १६६ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-
" १६६. नियमों, विनियमों और अधिसूचनाओं का रखा जाना.
इस अधिनियम के अधीन सरकार द्वारा बनाए गए प्रत्येक नियम, प्रत्येक विनियम और सरकार द्वारा जारी प्रत्येक अधिसूचना, उसे बनाए जाने अथवा जारी किए जाने के पश्चात् राज्य विधान- मंडल के समक्ष , जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा, यह अवधि एक सत्र या दो या अधिक अनुक्रमिक सत्रों में हो सकेगी और यदि पूर्वोक्त सत्र या अनुक्रमिक सत्रों से तुरन्त पूर्व के सत्र के अवसान के पूर्व राज्य विधान - मंडल यथास्थिति, नियम , विनियम या अधिसूचना में कोई उपांतरण करने पर सहमत हो जाता है या राज्य विधान- मंडल इस बात के लिए सहमत हो जाता है कि यथास्थिति ऐसे नियम, विनियम या अधिसूचना को नहीं बनाया जाना चाहिए तो ऐसा नियम, विनियम या अधिसूचना उसके पश्चात् यथास्थिति केवल ऐसे उपांतरित रूप में ही प्रभावी होगी या प्रभावी नहीं रहेगी; तथापि ऐसा कोई उपांतरण या रद्दकरण, यथास्थिति इस नियम या विनियम या अधिसूचना के अधीन पूर्व में की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा.".
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 जनवरी 2019
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३५. १ जुलाई, २०१७ से, मूल अधिनियम की धारा १७४ में, -
धारा १७४ का संशोधन.
उपधारा ( २ ) में , खण्ड ( च ) के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः- (क)
" (च ) कोई कार्यवाहियां, जिनका संबंध किसी अपील , पुनरीक्षण, पुनर्विलोकन या निर्देश जिन्हें नियत दिन के पूर्व, उस दिन पर या उसके पश्चात् उक्त संशोधित अधिनियम या निरसित अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियम के अधीन संस्थित किया गया है , और ऐसी कार्यवाहियां उक्त संशोधित अधिनियम या निरसित अधिनियम के अधीन जारी रहेगी जैसे कि यह अधिनियम प्रवृत्त नहीं हुआ हो और उक्त अधिनियम को संशोधित या निरसित नहीं किया गया है, को प्रभावित नहीं करेगा; ".
उपधारा ( ३ ) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-
(ख)
" (३ ) निरसन के प्रभाव के संदर्भ में मध्यप्रदेश साधारण खंड अधिनियम, १ ९ ५७ (क्रमांक ३ सन् १ ९५८ ) साधारण उपयोजन पर प्रतिकूल प्रभावित करने के लिए धारा १७३ और उपधारा ( १ ) में निर्दिष्ट विशिष्ट विषयों के उल्लेख को नहीं रखा जाएगा .".
अनुसूची १ का संशोधन.
३६. मूल अधिनियम की अनुसूची १ में, पैरा ४ में शब्द " कराधेय व्यक्ति " के स्थान पर, " व्यक्ति" स्थापित किया जाए.
अनुसूची २ का संशोधन.
३७. मूल अधिनियम की अनुसची २ में, शीर्षक में, शब्द " क्रियाकलापों " के पश्चात् शब्द " या संव्यवहारों " अंतःस्थापित किया जाए और सदैव १ जुलाई, २०१७ से अंतःस्थापित किया गया समझा जाए.
३८. मूल अधिनियम की अनुसूची ३ में, -
अनुसूची ३ का संशोधन.
(क) पैरा ६ के पश्चात् निम्नलिखित पैरा अंतःस्थापित किए जाएं, अर्थात्ः-
" ७. भारत के बाहर किसी स्थान से, भारत के बाहर किसी अन्य स्थान पर माल का, ऐसे माल के भारत में प्रवेश किए बिना प्रदाय.
८. (क) घरेलू उपभोग के लिए अनुमति प्रदान किये जाने से पूर्व किसी व्यक्ति को भांडागार में रखे गए माल का प्रदाय;
(ख) परेषिती द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को , माल का भारत से बाहर अवस्थित मूल पत्तन से प्रेषण किए जाने के पश्चात् किन्तु घरेलू उपभोग के लिए अनुमति दिए जाने से पूर्व माल के मालिकाना हक के दस्तावेज में पृष्ठांकन द्वारा माल का प्रदाय. ";
(ख ) स्पष्टीकरण को, स्पष्टीकरण १ के रूप में क्रमांकित किया जाए और इस प्रकार पुर्नक्रमांकित स्पष्टीकरण १ के पश्चात् निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
स्पष्टीकरण २.-पैरा ८ के प्रयोजनों के लिए, अभिव्यक्ति " भांडागार में रखे गये माल " का वही अर्थ होगा , जैसा कि सीमा शुल्क अधिनियम, १ ९ ६२ ( १ ९ ६२ का ५२ ) में उसके लिए समानुदेशित किया गया है. ".
निरसन तथा व्यावृत्ति.
३ ९. ( १ ) मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) अध्यादेश २०१८ ( क्रमांक ११ सन् २०१८ ) एतद्वारा निरसित किया जाता है.
( २ ) उक्त अध्यादेश के निरसन के होते हुए भी , उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई बात या की गई कार्रवाई समझी जाएगी .
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 जनवरी 2019
उद्देश्यों और कारणों का कथन
मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ , राज्य सरकार द्वारा माल या सेवाओं या दोनों के अंतर्राज्यीय प्रदाय पर कर के उद्ग्रहण और संग्रहण के लिए उपबंध करने की दृष्टि से अधिनियमित किया गया था.
२. अधिनियम में नए माल और सेवा कर पद्धति के लिए विद्यमान कर दाताओं हेतु आसान अभिवहन के लिए कतिपय उपबंध है. यद्धपि, नई कर पद्धति में कतिपय कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था. कर दाताओं को विशेषकर लघु और मध्यम उद्यमों को कारित प्रमुख असुविधाओं में से एक वस्तु और सेवा कर विधियों के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने और कर का भुगतान करने की प्रक्रिया थी. इस संबंध में, प्रस्तावित नई विवरणी फाइल करने की पद्धति में न्यूनतम कागजी कार्य के साथ - साथ छोटे कर दाताओं के लिए विवरणी की त्रैमासिक फाइलिंग और कर का भुगतान परिकल्पित है. नई विवरणी फाइल करने की प्रणाली को क्रियान्वित करने के उद्देश्य से तथा उपरोक्त कठिनाइयों को दूर करने के लिए यह प्रस्तावित है कि मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ को संशोधित किया जाए.
३. प्रस्तावित मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) विधयेक, २०१ ९ में अन्य बातों के साथ निम्नलिखित के लिए उपबंध है , अर्थात्:-
प्रदाय की परिधि को स्पष्ट करने के लिए धारा ७ को संशोधित करना;
(एक)
(दो) अरजिस्ट्रीकृत प्रदायकर्ताओं से कतिपय विनिर्दिष्ट माल के प्रदाय की पावती के संबंध में विपरीत प्रभार के आधार पर कर का भुगतान करने के लिए रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के एक वर्ग को अधिसूचित करने के लिए राज्य सरकार को सशक्त करने के लिए अधिनियम की धारा ९ को संशोधित करना;
(
तीन) प्रशमन उद्ग्रहण की सीमा में वृद्धि कर एक करोड़ रुपए से एक करोड़ पचास लाख रुपए करने के लिए अधिनियम की धारा १० को संशोधित करना;
इनपुट कर प्रत्यय के विस्तार को विनिर्दिष्ट करने के लिए अधिनियम की धारा १७ को संशोधित करना;
(चार)
(
पांच) विशिष्ट प्रवर्ग के राज्यों में रजिस्ट्रीकरण के लिए छूट सीमा दस लाख रुपए से बढ़ाकर बीस लाख रुपये करने हेतु अधिनियम की धारा २२ को संशोधित करना;
(
छह) कर दाताओं को एक ही राज्य या संघ राज्य क्षेत्र के भीतर अवस्थित कारबार के बहु स्थानों के लिए बहु रजिस्ट्रीकरण प्राप्त करने का विकल्प लेने और विशेष आर्थिक जोन इकाई या विकासकर्ता के लिए पृथक् रजिस्ट्रीकरण उपलब्ध कराने की सुविधा के लिए अधिनियम की धारा २५ को संशोधित करना;
(सात ) रजिस्ट्रीकरण के रद्द करने की कार्यवाही के चलते रजिस्ट्रीकरण को अस्थाई रूप से निलंबित करने का उपबंध अंतःस्थापित करने के लिए अधिनियम की धारा २ ९ को संशोधित करना;
(आठ) विवरणी प्रस्तुत करने और इनपुट कर प्रत्यय का उपभोग करने के लिए नई व्यवस्था का उपबंध करने के लिए नई धारा ४३क अंतःस्थापित करना.
(नौ) अपील फाइल करने के लिए देय पूर्व निक्षेप की रकम पच्चीस करोड़ रुपए स्थिर करने के उपबंध करने हेतु अपील से संबंधित अधिनियम की धारा १०७ की उपधारा ( ६ ) को संशोधित करना;
(दस) अभिवहन हस्तांतरण और माल के निरोध या अभिग्रहण से संबंधित कालावधि को बढ़ाकर सात दिन से चौदह दिन करने के लिए अधिनियम की धारा १२ ९ को संशोधित करना; और
(ग्यारह) धारा २ , ६, १२, १३, १३, ६७, १४०, १६५ , १६६ तथा धारा १७४ को संशोधित करना और उक्त संशोधन प्रारूपण की प्रकृति के हैं.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 जनवरी 2019
30(14)
४. चूंकि मामला अत्यावश्यक था और विधान सभा का सत्र चालू नहीं था इसलिए मध्यप्रदेश माल तथा सेवा कर ( संशोधन ) अध्यादेश , २०१८ ( क्रमांक ११ सन् २०१८ ) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किया गया था. अब उक्त अध्यादेश को राज्य विधान सभा के अधिनियम से बिना किसी उपांतरण के बदला जाना प्रस्तावित है.
५. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.
भोपाल :
बृजेन्द्र सिंह राठौर
भारसाधक सदस्य.
तारीख : ७ जनवरी , २०१९.
" संविधान के अनुच्छेद २०७ के अधीन राज्यपाल द्वारा अनुशंसित "
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश विधान सभा.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 जनवरी 2019
30-(15) प्रत्यायोजित विधि निर्माण संबंधी ज्ञापन
प्रस्तावित विधेयक के निम्नलिखित खण्डों द्वारा विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन राज्य सरकार को किया जा रहा
है.-
खण्ड १ - अधिनियम के विभिन्न उपबंधों को विभिन्न तारीखों में अधिसूचना जारी करके लागू करने;
खण्ड ५ जीएसटी परिषद् की अनुशंसाओं पर राज्य सरकार रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों द्वारा अरजिस्ट्रीकृत प्रदायकर्ता से प्राप्त मालों के विषय में कर के संदाय ;
खण्ड १२ विशेष प्रवर्ग के राज्य के अनुरोध पर तथा परिषद की सिफारिशों पर समग्र आवर्त की सीमा अधिसूचना द्वारा बढ़ाये जाने;
खण्ड १४ - राज्य में कारोबार के बहु स्थान के धारकों के रजिस्ट्रीकरण के लिए शर्तें तय करने;
खण्ड १५ रजिस्ट्रीकरण रद्द करने एवं निलंबित करने की रीति निर्धारित करने;
खण्ड १८ परिषद् की सिफारिशों पर रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के वर्गों को अधिसूचित एवं करों के भुगतान हेतु प्रक्रिया निर्धारित करने;
खण्ड १ ९
इस ' खण्ड में विवरणी देने और इनपुट कर प्रत्यय की उपलब्धता की प्रक्रिया निर्धारित करने;
खण्ड २२
किसी भी कर की इनपुट कर प्रत्यय के उपयोग हेतु विशिष्ट आदेश जारी करने; तथा
खण्ड ३३ राज्य सरकार को अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने;
के संबंध में नियम बनाये जायेंगे , जो सामान्य स्वरूप के होंगे.
ए. पी. सिंह
प्रमुख सचिव
मध्यप्रदेश विधान सभा.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 जनवरी 2019
30(16)
अध्यादेश के संबंध में विवरण
मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम २०१७ , राज्य सरकरा द्वारा माल या सेवाओं या दोनों के अंतर्राज्यीय प्रदाय पर कर के उग्रहण और संग्रहण के लिये उपबंध करने की दृष्टि से अधिनियमित किया गया था.
अधिनियम में नए माल और सेवा कर पद्धति के लिये विद्यमान कर दाताओं हेतु आसान अभिवहन के लिये कतिपय उपबंध है . यद्यपि, नई कर पद्धति में कतिपय कठिनाईयों का सामना करना पड़ा था. कर दाताओं को विशेषकर लघु और मध्यम उद्यमों को कारित प्रमुख असुविधाओं में से एक वस्तु और सेवा कर विधियों के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने और कर का भुगतान करने की प्रक्रिया थी. इस संबंध में, प्रस्तावित नई विवरणी फाइल करने की पद्धति में न्यूनतम कागजी कार्य के साथ- साथ छोटे कर दाताओं के लिये विवरणी की त्रैमासिक फाइलिंग और कर का भुगतान परिकल्पित है. नई विवरणी फाइल करने की प्रणाली को क्रियान्वित करने के उद्देश्य से तथा उपरोक्त कठिनाईयों को दूर करने के लिये मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ को संशोधित किया जाना आवश्यक था.
चूंकि मामला अत्यावश्यक था और विधानसभा का सत्र चालू नहीं था इसलिए मध्यप्रदेश माल तथा सेवा कर ( संशोधन ) अध्यादेश , २०१८ ( क्र. ११ सन् २०१८ ) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किया गया था.
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश विधान सभा.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2019 .