ध्य प्रदेश शासन
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सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 183]
भोपाल, शुक्रवार, दिनांक 10 मई 2019- वैशाख 20 , शक 1941
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग
" निर्वाचन भवन "
58 , अरेरा हिल्स, भोपाल-462011
आदेश
भोपाल , दिनांक 10 मई 2019
क्रमांकः एफ-67-07/ 2014/ तीन / 517
:: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा- 32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा । राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह अगस्त, 2014 में संपन्न नगर परिषद्, पीपलरांवा जिला- देवास के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में श्री दिनेश मालवीय पिता सेवाराम मालवीय भी अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-09 /08 / 2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 08/09/2014 तक अभ्यर्थी श्री दिनेश मालवीय पिता सेवाराम मालवीय को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, देवास के पास दाखिल करना था ।
365 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 10 मई 2019
366
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , (स्था०निर्वा०) जिला- देवास द्वारा उल्लेखित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्री दिनेश मालवीय पिता सेवाराम मालवीय द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , (स्था०निर्वा० ) जिला- देवास को पत्र दिनांक 24/10/2014 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्था०निर्वा० ) जिला-देवास के पत्र क्रमांक 82/ स्था०निर्वा 0/ 2016 दिनांक 26/02/2016 द्वारा कारण बताओ सूचना पत्र की तामीली की पावती आयोग को पत्र के साथ संलग्न कर भेजी गयी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, श्री दिनेश मालवीय पिता सेवाराम मालवीय द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना-पत्र दिनांक 03/04/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 09/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, श्री दिनेश मालवीय पिता सेवाराम मालवीय को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांक / स्था०निर्वा०/2019/ 662 दिनांक 08/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 09/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुए और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, श्री दिनेश मालवीय पिता सेवाराम मालवीय को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, पीपलरांवा जिला- देवास का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य ) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी ) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
366 ( 1)
आदेश
भोपाल, दिनांक 10 मई 2019
क्रमांकः एफ-67-07/2014 /तीन / 518 :: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा- 32-' क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा: रखवाएगा। मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा । राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह अगस्त, 2014 में संपन्न नगर परिषद्, पीपलरांवा जिला- देवास के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में श्री नारायण पिता पन्नालाल भी अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-09/ 08/ 2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 08/09/2014 तक अभ्यर्थी श्री नारायण पिता पन्नालाल को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , देवास के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्था ० निर्वा०) जिला- देवास द्वारा उल्लेखित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्री नारायण पिता पन्नालाल द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्था० निर्वा०) जिला- देवास को पत्र दिनांक 24/10/2014 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्था०निर्वा०) जिला-देवास के पत्र क्रमांक 82/ स्था० निर्वा0 / 2016 , दिनांक 26/02/2016 द्वारा कारण बताओ सूचना पत्र की तामीली की पावती आयोग को पत्र के साथ संलग्न कर भेजी गयी। इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, श्री नारायण पिता पन्नालाल द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना- पत्र दिनांक 03/04/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 09/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, श्री नारायण पिता पन्नालाल को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांक / स्था०निर्वा 0 / 2019/662 दिनांक 08/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
366 ( 2)
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 09/04/2019 को आयोग मुख्यालय , भोपाल में उपस्थित नहीं हुए और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, श्री नारायण पिता पन्नालाल को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र . नगरपालिका निर्वाचन : नियम, 1994 के नियम, 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, पीपलरांवा जिला- देवास का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य ) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,
हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी ) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.
आदेश
भोपाल, दिनांक 10 मई 2019
क्रमांकः एफ-67-07/2014/तीन/ 519
:: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा- 32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-'ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा । राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह अगस्त, 2014 में संपन्न नगर परिषद्, पीपलरांवा जिला- देवास के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में श्री हुकुमचंद दतोदिया भी अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम 366( 3)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
दिनांक-09/ 08 / 2014 को घोषित हुआ। मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 08/09/2014 तक अभ्यर्थी श्री हुकुमचंद दतोदिया को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , देवास के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्था०निर्वा०) जिला- देवास द्वारा उल्लेखित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्री हुकुमचंद दतोदिया द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्था० निर्वा०) जिला- देवास को पत्र दिनांक 24/10/2014. जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्था ०निर्वा०) जिला- देवास के पत्र क्रमांक 82/ स्था० निर्वा० / 2016 दिनांक 26/02/2016 द्वारा कारण बताओ सूचना पत्र की तामीली की पावती आयोग को पत्र के साथ संलग्न कर भेजी गयी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, श्री हुकुमचंद दतोदिया द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना पत्र दिनांक 03/04/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय,: भोपाल में दिनांक 09/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, श्री हुकुमचंद दतोदिया को जारी कारण बताओ सूचना- पत्र क्रमांक / स्था०निर्वा0 / 2019/662 दिनांक 08/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 09/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुए और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, श्री हुकुमचंद दतोदिया को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम , 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, पीपलरांवा जिला- देवास का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच ) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी ) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
366 (4)
आदेश
भोपाल, दिनांक 10 मई 2019
क्रमांकः एफ-87-82/2015/ 11 /522 :: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा-32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा। मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगर परिषद्, खजुराहो, जिला-छतरपुर के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री रजनी/ आशाराम पटेल भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-07 /12 / 2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी सुश्री रजनी/ आशाराम पटेल को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, छतरपुर के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, जिला-छतरपुर के पत्र क्रमांक 360 दिनांक- 30/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट-छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, सुश्री रजनी/ आशाराम पटेल द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्थानीय निर्वाचन) जिला-छतरपुर को पत्र दिनांक 20/03/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी ।
जिले द्वारा कारण बताओ नोटिस की तामीली की पावती पत्र क्रमांक 50 दिनांक 15/02/2016 द्वारा आयोग को भेजी गयी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, सुश्री रजनी / आशाराम पटेल द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना-पत्र दिनांक 26/03/2019 जारी: कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 03/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, सुश्री रजनी/ आशाराम पटेल को जारी कारण बताओ सूचना-पत्र क्रमांक /108 / ले-76-02 / स्था० निर्वा० /2019 दिनांक 01/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 03/04/2019 को आयोग मुख्यालय , भोपाल में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
366( 5) उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, सुश्री रजनी / आशाराम पटेल को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन: नियम, 1994 के नियम, 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, खजुराहो , जिला- छतरपुर का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच ) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी ) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
आदेश
भोपाल , दिनांक 10 मई 2019
क्रमांकः एफ-87-82/2015/ 11/ 523 :: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा- 32-' क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगर परिषद्, खजुराहो , जिला-छतरपुर के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री कुसुम फूल सिंह चन्देल भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-07/12/ 2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी सुश्री कुसुम फूल सिंह चन्देल को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , छतरपुर के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, जिला छतरपुर के पत्र क्रमांक 360 दिनांक- 30/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट-छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, सुश्री कुसुम फूल सिंह चन्देल द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
366 ( 6)
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्थानीय निर्वाचन ) जिला-छतरपुर को पत्र दिनांक 20/03/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी ।
जिले द्वारा कारण बताओ नोटिस की तामीली की पावती पत्र क्रमांक 50 दिनांक 15/02/2016 द्वारा आयोग को भेजी गयी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, सुश्री कुसुम फूल सिंह चन्देल द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना-पत्र दिनांक 26/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों/ प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 03/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, सुश्री कुसुम फूल सिंह चन्देल को जारी कारण बताओ सूचना- पत्र क्रमांक /108 / ले-76-02 / स्था० निर्वा० / 2019 दिनांक 01/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 03/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेख प्रस्तुत ही नहीं किये।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, सुश्री कुसुम फूल सिह चन्देल को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, खजुराहो, जिला- छतरपुर का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच ) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य ) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी ) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
आदेश
भोपाल , दिनांक 10 मई 2019
क्रमांकः एफ-87-82/2015/11 /524 :: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा-32-' क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32-'ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले 366 (7)
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 10 मई 2019
प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर , 2014 में संपन्न नगर परिषद्, खजुराहो, जिला- छतरपुर के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री सुहागरानी भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-07/12 / 2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी सुश्री सुहागरानी को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, छतरपुर के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्था० निर्वा० ) जिला- छतरपुर के पत्र क्रमांक 360 दिनांक- 30/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, सुश्री सुष्ठागरानी द्वारा निर्वाचन: व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्थानीय निर्वाचन) जिला- छतरपुर को पत्र दिनांक 20/03/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी ।
जिले द्वारा कारण बताओ नोटिस की तामीली की पावती पत्र क्रमांक 50 दिनांक 15/02/2016 द्वारा आयोग को भेजी गयी थी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, सुश्री सुहागरानी द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना-पत्र दिनांक 26/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों/ प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 03/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, सुश्री सुहागरानी को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांक / 108 / ले-76-02/ स्था०निर्वा० / 2019 दिनांक 01/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि: 03/04/2019 को आयोग मुख्यालय , भोपाल में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेख प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
366 (8)
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, सुश्री सुहागरानी को मध्यप्रदेश: नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम , 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, खजुराहो, जिला-छतरपुर का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,
हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी ) सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल .
आदेश
भोपाल , दिनांक 10 मई 2019
क्रमांकः एफ-87-82 / 2015 / 11 / 525:: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961की धारा- 32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगर परिषद्, खजुराहो, जिला-छतरपुर के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री अर्चना लीडर राजा भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-07 /12 / 2014 को घोषित हुआ। मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी सुश्री अर्चना लीडर राजा को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , छतरपुर के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, जिला छतरपुर के पत्र क्रमांक 360 दिनांक- 30/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, सुश्री अर्चना लीडर- राजा द्वारा: निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्थानीय निर्वाचन) जिला-छतरपुर को पत्र दिनांक 20/03/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । 366 (9)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
जिले द्वारा कारण बताओ नोटिस की तामीली की पावती पत्र क्रमांक 50 दिनांक 15/02/2016 द्वारा आयोग को भेजी गयी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, सुश्री अर्चना लीडर राजा द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्त्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना-पत्र दिनांक 26/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों/ प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 03/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, सुश्री अर्चना लीडर राजा को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांक / 108 / ले-76-02 / स्था० निर्वा0 / 2019 दिनांक 01/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 03/04/2019 को आयोग मुख्यालय , भोपाल में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेख प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, सुश्री अर्चना लीडर राजा को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र . नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, खजुराहो, जिला-छतरपुर का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी )
सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.
आदेश
भोपाल, दिनांक 10 मई 2019
क्रमांकः एफ-87-82/ 2015/11 /5-26 :: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा- 32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-'ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
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राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर , 2014 में संपन्न नगर परिषद्, खजुराहो, जिला-छतरपुर के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री अहिरवार मन्जो भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-07/12 / 2014 को घोषित हुआ। मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी सुश्री अहिरवार मन्जो को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , छतरपुर के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, जिला छतरपुर के पत्र क्रमांक 360 दिनांक- 30/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट-छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, सुश्री अहिरवार मन्जो द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , (स्थानीय निर्वाचन) जिला-छतरपुर को पत्र दिनांक 20/03/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी ।
जिले द्वारा कारण बताओ नोटिस की तामीली की पावती पत्र क्रमांक 50 दिनांक 15/02/2016 द्वारा आयोग को भेजी गयी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी , सुश्री अहिरवार मन्जो द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना- पत्र दिनांक 26/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने हेतु व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 03/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, सुश्री अहिरवार मन्जो को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांक /108/ ले-76-02 / स्था ०निर्वा0 / 2019 दिनांक 01/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 03/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेख प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है । 366 (11)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, सुश्री अहिरवार मन्जो को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम , 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, खजुराहो, जिला-छतरपुर का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी ) सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.
आदेश
भोपाल , दिनांक 10 मई 2019
क्रमांकः एफ-87-82/2015/ 11 / 527 :: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा-32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर , 2014 में संपन्न नगर परिषद्, खजुराहो, जिला- छतरपुर के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री सन्ध्या तिवारी भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-07 /12 / 2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी सुश्री सन्ध्या तिवारी को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, छतरपुर के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, जिला छतरपुर के पत्र क्रमांक 360 दिनांक- 30/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट-छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, सुश्री सन्ध्या तिवारी द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
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आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्थानीय निर्वाचन) जिला- छतरपुर को पत्र दिनांक 20/03/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी ।
जिले द्वारा कारण बताओ नोटिस की तामीली की पावती पत्र क्रमांक 50 दिनांक 15/02/2016 द्वारा आयोग को भेजी गयी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, सुश्री सन्ध्या तिवारी द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना- पत्र दिनांक 26/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों/ प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने हेतु व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 03/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, सुश्री सन्ध्या तिवारी को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांक / 108 / ले- 76-02 /स्था०निर्वा० /2019 दिनांक 01/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्वप्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 03/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेख प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, सुश्री सन्ध्या तिवारी को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम , 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, खजुराहो, जिला-छतरपुर का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी ) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
366 ( 13)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
आदेश
भोपाल, दिनांक 10 मई 2019
क्रमांकः एफ-87-84/2015/11 / 530 ::मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा-32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगर परिषद्, बड़ामलहरा जिला- छतरपुर के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में श्री बिहारी लाल कुशवाहा भी अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-07/12 / 2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी श्री बिहारी लाल कुशवाहा को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , छतरपुर के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला- छतरपुर के पत्र क्रमांक 360 दिनांक- 30/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्री बिहारी लाल कुशवाहा द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्था० निर्वा०) जिला-छतरपुर को पत्र दिनांक 05/03/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । इसके उपरांत ज़िले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, श्री बिहारी लाल कुशवाहा द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना-पत्र दिनांक 26/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 03/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, श्री बिहारी लाल कुशवाहा को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांकः 106 /ले- 76-06 / स्था० निर्वा० / 2019 दिनांक 01/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 03/04/2019 को आयोग मुख्यालय , भोपाल में उपस्थित नहीं हुए और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ । 366 ( 14)
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 10 मई 2019
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, श्री बिहारी लाल कुशवाहा को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, बड़ामलहरा जिला- छतरपुर का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी )
सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.
आदेश
भोपाल, दिनांक 10 मई 2019
कमांकः एफ-87-102/15 / 11 /533 :: मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 कीधारा- 32- क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014 " म.प्र. राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 10/7/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगर परिषद्, नागौद, जिला- सतना के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में श्री रामकुमार उपाध्याय भी अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे । इस नगर परिषद् 366 ( 15)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 07/12/2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी श्री रामकुमार उपाध्याय को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , सतना के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी जिला सतना से प्राप्त पत्र कमांक/ 1883 / स्था०निर्वा ० / न.पा.नि. / 2014 , दिनांक 19/01/15 के संलग्न परिशिष्ट-36 अनुसार अभ्यर्थी, श्री रामकुमार उपाध्याय द्वारा अपने निर्वाचन व्यय के लेखे दाखिल नहीं किए गए ।
निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत न करने के परिणामस्वरूप , अभ्यर्थी को आयोग की ओर से कारण बताओ नोटिस दिनांक 26/02/15 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी ।
गौरतलब है कि अंभ्यर्थी श्री रामकुमार उपाध्याय के लंबित निर्वाचन व्यय लेखों पर अंतिम निर्णय लिए जाने हेतु आयोग की ओर से उन्हें दिनांक 07 अक्टूबर, 2015 को भी सूचना- पत्र जारी कर दिनांक 03/11/2015 को समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने हेतु आयोग मुख्यालय , भोपाल में व्यक्तिगत सुनवाई हेतु तलब किया गया था । किंतु अभ्यर्थी को जारी सूचना - पत्र की तामीली की पावती जिले से आयोग को प्राप्त नहीं होने पर उनके प्रकरण में अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका ।
इस संबंध में जिले को वर्ष 2018 तक वांछित जानकारी आयोग को भिजवाने हेतु पत्राचार किया गया, पर जानकारी जिले से आयोग को प्राप्त नहीं हो सकी ।
अंततः आयोग द्वारा अभ्यर्थी, श्री रामकुमार उपाध्याय के लंबित निर्वाचन व्यय लेखों पर अंतिम निर्णय लिए जाने हेतु एवं अभ्यर्थी का पक्ष सुनने हेतु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्थानीय निर्वाचन) जिला- सतना के माध्यम से अभ्यर्थी को नोटिस दिनांक 26/3/2019 जारी कर आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 03/04/2019 को पूर्वान्ह 11.00 बजे व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित होने हेतु कहा गया ।
जिले के आयोग को प्रेषित पत्र क्रमांक / 123 / स्था. निर्वा. /न.पा. /2019 दिनांक 01/04/2019 के संलग्न अभ्यर्थी को जारी नोटिस की तामीली की पावती व्यक्तिगत सुनवाई की तिथि के पूर्व आयोग को प्राप्त हो चुकी थी ।
अभ्यर्थी, श्री रामकुमार उपाध्याय व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए और न ही इस अनुपस्थिति बावत् उनकी ओर से कोई अभ्यावेदन आदि ही आयोग को प्राप्त.. हुआ । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
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उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी श्री रामकुमार उपाध्याय के पास निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने की इस असफलता के लिए अभ्यर्थी, श्री रामकुमार उपाध्याय को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11 -क के अधीन नगर परिषद्, नागौद, जिला-सतना का अध्यक्ष या पार्षद चुने जाने हेतु आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी) सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.
आदेश
भोपाल, दिनांक 10 मई 2019
क्रमांकः एफ-87-127/2015/11 /536 ::मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा-32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर , 2014 में संपन्न नगर परिषद्, विजयराघवगढ़ जिला कटनी के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में श्री पवन अन्जू सिंह भी अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम: दिनांक-04/ 12 / 2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 03/01/2015 तक अभ्यर्थी श्री पवन अन्जू सिंह को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, कटनी के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, जिला- कटनी के पत्र क्रमांक 1553 दिनांक- 12/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्री पवन अन्जू सिंह द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया । 366 ( 17)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , (स्था० निर्वा० ) जिला- कटनी को पत्र दिनांक 12/02/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, श्री पवन अन्जू सिंह द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना-पत्र दिनांक 28/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 05/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, श्री पवन अन्जू सिंह को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांकः 27 / स्था ०निर्वा ० / स्था0 / 2019 दिनांक 09/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 05/04/2019 को आयोग मुख्यालय , भोपाल में उपस्थित नहीं हुए और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, श्री पवन अन्जू सिंह को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11 -'क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, विजयराघवगढ़ , जिला-कटनी का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी ) सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल .
आदेश
भोपाल, दिनांक 10 मई 2019
क्रमांकः एफ-87-127 / 2015 / 11 / 537:: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा-32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन। संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
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राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर , 2014 में संपन्न नगर परिषद्, विजयराघवगढ़ जिला कटनी के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में श्री मनोज कुमार तिवारी भी अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-04 /12/ 2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 03/01/2015 तक अभ्यर्थी श्री मनोज कुमार तिवारी को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , कटनी के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला- कटनी के पत्र क्रमांक 1553 दिनांक- 12/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्री मनोज कुमार तिवारी द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्था०निर्वा०) जिला- कटनी को पत्र दिनांक 12/02/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, श्री मनोज कुमार तिवारी द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना-पत्र दिनांक 28/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों/ प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 05/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, श्री मनोज कुमार तिवारी को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांकः 27/ स्था० निर्वा ० / स्था० / 2019 दिनांक 09/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 05/04/2019 को आयोग मुख्यालय , भोपाल में उपस्थित नहीं हुए और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, श्री मनोज कुमार तिवारी को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, विजयराघवगढ़, जिला-कटनी का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी ) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
आदेश
भोपाल, दिनांक 10 मई 2019
क्रमांकः एफ-87-127/2015/11 / 538 :: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा- 32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014 " म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगर परिषद्, विजयराघवगढ़ जिला कटनी के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में श्री राजेश साहू भी अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-04/12/2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 03/01/2015 तक अभ्यर्थी श्री राजेश साहू को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, कटनी के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला- कटनी के पत्र क्रमांक 1553 दिनांक- 12/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्री राजेश साहू द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , (स्था०निर्वा०) जिला- कटनी को पत्र दिनांक 12/02/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, श्री राजेश साहू द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना- पत्र दिनांक 28/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों/ प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 05/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, श्री राजेश साहू को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांकः 27/ स्था० निर्वा ० / स्था0 / 2019 दिनांक 09/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 05/04/2019 को आयोग मुख्यालय , भोपाल में उपस्थित नहीं हुए और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
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उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, श्री राजेश साहू को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम , 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, विजयराघवगढ़ , जिला-कटनी का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./-
(सुनीता त्रिपाठी ) सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.
आदेश
भोपाल, दिनांक 10 मई 2019
क्रमांकः एफ-87-127/2015/ 11 / 539 :: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा- 32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य हैं कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र . राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगर परिषद्, विजयराघवगढ़ जिला कटनी के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में श्री संजय गुप्ता उर्फ सन्जू भी अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-04/12/ 2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- 'ख' के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 03/01/2015 तक अभ्यर्थी श्री संजय गुप्ता उर्फ सन्जू को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , कटनी के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला- कटनी के पत्र क्रमांक 1553 दिनांक- 12/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्री संजय गुप्ता उर्फ सन्जू द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया । 366 (21)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्था ०निर्वा०) जिला- कटनी को पत्र दिनांक 12/02/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, श्री संजय गुप्ता उर्फ सन्जू द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना- पत्र दिनांक 28/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों/ प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 05/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, श्री संजय गुप्ता उर्फ सन्जू को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांकः 27/ स्था ०निर्वा० / स्था0 / 2019 दिनांक 09/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगतं सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 05/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुए और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, श्री संजय गुप्ता उर्फ सन्जू को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम , 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, विजयराघवगढ़ , जिला-कटनी का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी ) सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.
आदेश
भोपाल, दिनांक 10 मई 2019
क्रमांकः एफ-87-220/2015/ 11 / 54२ : मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा-32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा। मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- 'ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
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राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगर परिषद्, सोनकच्छ, जिला- देवास के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में कु० निरंजन सिंह घनश्याम सिंह सेंगर भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-04/12/ 2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 03/01/2015 तक अभ्यर्थी कु ० निरंजन सिंह घनश्याम सिंह सेंगर को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, देवास के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला-देवास के पत्र क्रमांक 1263 दिनांक- 29/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, कु० निरंजन सिंह घनश्याम सिंह सेंगर द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया , और न ही शपथ -पत्र प्रस्तुत किया गया । आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , (स्था० निर्वा०) जिला-देवास को पत्र दिनांक 05/05/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, कु ० निरंजन सिंह घनश्याम सिंह सेंगर द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना- पत्र दिनांक 03/04/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 09/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, कु० निरंजन सिंह घनश्याम सिंह सेंगर को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांकः स्था०निर्वा ० / 2019 /662 दिनांक 08/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 09/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, कु० निरंजन सिंह घनश्याम सिंह सेंगर को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, सोनकच्छ, जिला-देवास का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य ) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी ) सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
आदेश
भोपाल, दिनांक 10 मई 2019
कमांकः एफ-87-226/2015/11 /545 ::मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा-32-क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014 " म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/7/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगर परिषद्, कांटाफोड़ जिला- देवास के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री प्रेमबाई मोहन भिलाला भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थीं । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 07/12/2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी सुश्री प्रेमबाई मोहन भिलाला को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, देवास के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्था. निर्वा.) जिला-देवास से प्राप्त पत्र कमांक/1263 /स्था. निर्वा. / 2015, दिनांक 29/01/15 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट-छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, सुश्री प्रेमबाई मोहन भिलाला द्वारा निर्वाचन व्ययों के लेखे ही प्रस्तुत नहीं किए गए ।
निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत न करने के परिणामस्वरूप, अभ्यर्थी को आयोग की ओर से कारण बताओ नोटिस दिनांक 05/05/15 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक. पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी ।
अभ्यर्थी को कारण बताओ नोटिस जारी होने के पश्चात् कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्था० निर्वा० ) जिला- देवास से आयोग के पत्र दिनांक 27/6/2015 द्वारा अभ्यर्थी को जारी नोटिस तामीली सहित यह भी जानकारी चाही गई कि यदि अभ्यर्थी द्वारा नोटिस में उल्लिखित अवधि में उनके समक्ष निर्वाचन व्यय लेखा अथवा विलंब से लेखा प्रस्तुति के संबंध में कोई अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया हो तो लेखों की स्वीकार्यता तथा विलंब से लेखा प्रस्तुति मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
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के कारण की विश्वसनीयता का परीक्षण कर अभिमत आयोग को भेजा जाये । वांछित जानकारी अप्राप्त होने की दशा में जिले से वर्ष 2018 तक पत्राचार किया गया, पर जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी ।
अंततः आयोग द्वारा अभ्यर्थी, सुश्री प्रेमबाई मोहन भिलाला के लंबित निर्वाचन व्यय लेखों पर अंतिम निर्णय लिए जाने हेतु एवं अभ्यर्थी का पक्ष सुनने हेतु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्थानीय निर्वाचन) जिला - देवास के माध्यम से अभ्यर्थी को नोटिस दिनांक 03/04/2019 जारी कर आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 09/04/2019 को पूर्वान्ह 11 . 00 बजे व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित होने हेतु कहा गया ।
जिले के पत्र कमांक / स्था. निर्वा./ 2019 /662, दिनांक 08/04/19 के संलग्न अभ्यर्थी को तामील नोटिस की पावती व्यक्तिगत सुनवाई की तिथि के पूर्व आयोग को प्राप्त हो चुकी थी ।
अभ्यर्थी, सुश्री प्रेमबाई मोहन भिलाला व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् उनकी ओर से कोई अभ्यावेदन आदि ही आयोग को प्राप्त हुआ । उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी सुश्री प्रेमबाई मोहन भिलाला के पास निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है । अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने की इस असफलता के लिए अभ्यर्थी, सुश्री प्रेमबाई मोहन मिलाला को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम , 1994 के नियम, 11 -क के अधीन नगर परिषद्, कांटाफोड़, जिला-देवास का अध्यक्ष या पार्षद चुने जाने हेतु आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी )
सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.
आदेश
भोपाल, दिनांक 10 मई 2019
कमांकः एफ-87-228/15 /11 /548 :: मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा-32- क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करनें के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 366 (25)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
1961 की धारा 32- ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/7/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगर परिषद्, नेमावर, जिला-देवास के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री सुनीता संतोष राठौर भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थीं । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 07/12/2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी सुश्री सुनीता संतोष राठौर को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, देवास के पास दाखिल करना था । कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी जिला- देवास से प्राप्त पत्र कमांक /1263 /स्था० निर्वा0 / 2015, दिनांक 29 जनवरी, 2015 के संलग्न परिशिष्ट-36 अनुसार अभ्यर्थी, सुश्री सुनीता संतोष राठौर द्वारा अपने निर्वाचन व्यय के लेखे दाखिल नहीं किए गए ।
निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत न करने के परिणामस्वरूप , अभ्यर्थी को आयोग की ओर से कारण बताओ नोटिस दिनांक 05/05/15 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी ।
अभ्यर्थी, सुश्री सुनीता संतोष राठौर को कारण बताओ नोटिस जारी होने के उपरांत आयोग के पत्र कमांकः एफ-87-228 /2015 / ग्या0 / 605, दिनांक 27/06/2015 द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्थानीय निर्वाचन) जिला- देवास से जारी कारण बताओ नोटिस की तामीली प्रति सहित इस बात की भी जानकारी चाही गई कि कि यदि अभ्यर्थी द्वारा नोटिस में उल्लिखित अवधि में उनके समक्ष अपना निर्वाचन व्यय लेखा अथवा विलंब से लेखा प्रस्तुति के संबंध में कोई अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया हो तो लेखों की स्वीकार्यता तथा विलंब से लेखा प्रस्तुति के कारण की विश्वसनीयता का परीक्षण कर अभिमत आयोग को भेजा जाए । वांछित जानकारी अप्राप्त होने की दशा में जिले को वर्ष -2018 तक स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे, पर जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं हो सकी ।
अंततः आयोग द्वारा अभ्यर्थी, सुश्री सुनीता संतोष राठौर के लंबित निर्वाचन व्यय लेखों पर अंतिम निर्णय लिए जाने हेतु एवं अभ्यर्थी का पक्ष सुनने हेतु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्थानीय निर्वाचन) जिला- इन्दौर के माध्यम से अभ्यर्थी को नोटिस दिनांक 03/04/2019 जारी कर आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 09/04/2019 को पूर्वान्ह 11 . 00 बजे व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित होने हेतु कहा गया । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 10 मई 2019
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जिले के आयोग को प्रेषित पत्र क्रमांक / स्था० निर्वा0 /2019 /662, दिनांक 08/04/2019 के संलग्न अभ्यर्थी को जारी नोटिस की तामीली की पावती व्यक्तिगत सुनवाई की तिथि के पूर्व आयोग को प्राप्त हो चुकी थी । अभ्यर्थी, सुश्री सुनीता संतोष राठौर व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित नहीं हुई ।
उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी सुश्री सुनीता संतोष राठौर के पास निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेंखे प्रस्तुत नहीं करने की इस असफलता के लिए अभ्यर्थी, श्री सुश्री सुनीता संतोष राठौर को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग़ के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम , 1994 के नियम, 11- क के अधीन नगर परिषद्, नेमावर, जिला-देवास का अध्यक्ष या पार्षद चुने जाने हेतु आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य ) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,
हस्ता./-
(सुनीता त्रिपाठी ) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
आदेश
भोपाल , दिनांक 10 मई 2019
कमांकः एफ-87-228/15 / 11 /549 :: मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा- 32- क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये ' यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी " निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/7/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगर परिषद्, नेमावर, जिला- देवास के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री लीला बुद्धलाल केवट भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थीं । इस नगर परिषद् के 366 (27)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
निर्वाचन का परिणाम दिनांक 07/12/2014 को घोषित हुआ। मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी सुश्री लीला बुद्धलाल केवट को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , देवास के पास दाखिल करना था । कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी जिला-देवास से प्राप्त पत्र कमांक / 1263 / स्था ० निर्वा0/ 2015, दिनांक 29 जनवरी, 2015 के संलग्न परिशिष्ट-36 अनुसार अभ्यर्थी, सुश्री लीला बुद्धलाल केवट ,नगर परिषद्, नेमावर, जिला-देवास द्वारा अपने निर्वाचन व्यय के लेखे दाखिल नहीं किए गए ।
निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत न करने के परिणामस्वरूप, अभ्यर्थी को आयोग की ओर से कारण बताओ नोटिस दिनांक 05/05/15 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी ।
अभ्यर्थी, सुश्री लीला बुद्धलाल केवट को कारण बताओ नोटिस जारी होने के उपरांत आयोग के पत्र कमांकः एफ-87-228 / 2015 / ग्या0 / 605, दिनांक 27/06/2015 द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्थानीय निर्वाचन) जिला - देवास से जारी कारण बताओ नोटिस की तामीली प्रति सहित इस बात की भी जानकारी चाही गई कि यदि अभ्यर्थी द्वारा नोटिस में उल्लिखित अवधि में उनके समक्ष अपना निर्वाचन व्यय लेखा अथवा विलंब से लेखा प्रस्तुति के संबंध में कोई अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया हो तो लेखों की स्वीकार्यता तथा विलंब से लेखा प्रस्तुति के कारण की विश्वसनीयता का परीक्षण कर अभिमत आयोग को भेजा जाए । वांछित जानकारी अप्राप्त होने की दशा में जिले को वर्ष 2018 तक स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे , पर जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं हो सकी ।
अंततः आयोग द्वारा अभ्यर्थी, सुश्री लीला बुद्धलाल केवट के लंबित निर्वाचन व्यय लेखों पर अंतिम निर्णय लिए जाने हेतु एवं अभ्यर्थी का पक्ष सुनने हेतु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्थानीय निर्वाचन ) जिला-इन्दौर के माध्यम से अभ्यर्थी को नोटिस दिनांक 03/04/2019 जारी कर आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 09/04/2019 को पूर्वान्ह 11 . 00 बजे व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित होने हेतु कहा गया ।
जिले के आयोग को प्रेषित पत्र क्रमांक / स्था० निर्वा० / 2019 / 662, दिनांक 08/04/2019 के संलग्न अभ्यर्थी को जारी नोटिस की तामीली की पावती व्यक्तिगत सुनवाई की तिथि के पूर्व आयोग को प्राप्त हो चुकी थी ।
अभ्यर्थी, सुश्री लीला बुद्धलाल केवट व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई सूचना ही आयोग को प्राप्त हुई ।
उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी सुश्री लीला बुद्धलाल केवट के पास निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
366 (28)
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने की इस असफलता के लिए अभ्यर्थी, श्री सुश्री लीला बुद्धलाल केवट को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32 - ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11-क के अधीन नगर परिषद्, नेमावर, जिला- देवास का अध्यक्ष या पार्षद चुने जाने हेतु आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच ) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी ) सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.
आदेश
भोपाल , दिनांक 10 मई 2019
कमांकः एफ-87-228/ 15 / 11 / 550 :: मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा-32- क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी " निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र . राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 10/7/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर , 2014 में संपन्न नगर परिषद्, नेमावर, जिला- देवास के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री सलमा सलामत खॉ भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थीं । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 07/12/2014 को घोषित हुआ। मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी सुश्री सलमा सलामत खौं को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , देवास के पास दाखिल करना था । कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी जिला- देवास से प्राप्त पत्र कमांक / 1263 / स्था० निर्वा0 / 2015 , दिनांक 29 जनवरी , 2015 के संलग्न परिशिष्ट-36 अनुसार अभ्यर्थी, सुश्री सलमा सलामत खाँ, नगर परिषद्, नेमावर, जिला-देवास द्वारा अपने निर्वाचन व्यय के लेखे दाखिल नहीं किए गए । 366 (29)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत न करने के परिणामस्वरूप , अभ्यर्थी को आयोग की ओर से कारण बताओ नोटिस दिनांक 05/05/15 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी ।
अभ्यर्थी, सुश्री सलमा सलामत खाँ को कारण बताओ नोटिस जारी होने के उपरांत आयोग के पत्र कमांकः एफ-87-228 / 2015 / ग्या0 /605, दिनांक 27/06/2015 द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्थानीय निर्वाचन ) जिला- देवास से जारी कारण बताओ नोटिस की तामीली प्रति सहित इस बात की भी जानकारी चाही गई कि कि यदि अभ्यर्थी द्वारा नोटिस में उल्लिखित अवधि में उनके समक्ष अपना निर्वाचन व्यय लेखा अथवा विलंब से लेखा प्रस्तुति के संबंध में कोई अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया हो तो लेखों की स्वीकार्यता तथा विलंब से लेखा प्रस्तुति के कारण की विश्वसनीयता का परीक्षण कर अभिमत आयोग को भेजा जाए । वांछित जानकारी अप्राप्त होने की दशा में जिले को वर्ष - 2018 तक स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे, पर जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं हो सकी ।
अंततः आयोग द्वारा अभ्यर्थी, सुश्री सलमा सलामत खाँ के लंबित निर्वाचन व्यय लेखों पर अंतिम निर्णय लिए जाने हेतु एवं अभ्यर्थी का पक्ष सुनने हेतु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , (स्थानीय निर्वाचन) जिला- इन्दौर के माध्यम से अभ्यर्थी को नोटिस दिनांक 03/04/2019 जारी कर आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 09/04/2019 को पूर्वान्ह 11 . 00 बजे व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित होने हेतु कहा गया ।
जिले के आयोग को प्रेषित पत्र कमांक/ स्था० निर्वा० / 2019 / 662, दिनांक 08/04/2019 के संलग्न अभ्यर्थी को जारी नोटिस की तामीली की पावती व्यक्तिगत सुनवाई की तिथि के पूर्व आयोग को प्राप्त हो चुकी थी ।
अभ्यर्थी, सुश्री सलमा सलामत खाँ व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित नहीं हुई । उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी सुश्री सलमा सलामत खों के पास निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने की इस असफलता के लिए अभ्यर्थी, श्री सुश्री सलमा सलामत खौं को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11-क के अधीन नगर परिषद्, नेमावर, जिला- देवास का अध्यक्ष या पार्षद चुने जाने हेतु आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार , हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी ) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
366 (30)
आदेश
भोपाल , दिनांक 10 मई 2019
कमांकः एफ-87-228 /15 / 11 / 551 :: मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा - 32- क के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, . 1961 की धारा 32 - ख के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी " निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र . राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/7/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगर परिषद्, नेमावर, जिला- देवास के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री सीमा सुनील राठौर भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थीं । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक 07/12/2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी सुश्री सीमा सुनील राठौर को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, देवास के पास दाखिल करना था । कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी जिला-देवास से प्राप्त पत्र क्रमांक / 1263 / स्था० निर्वा0 / 2015 , दिनांक 29 जनवरी, 2015 के संलग्न परिशिष्ट-36 अनुसार अभ्यर्थी , सुश्री सीमा सुनील राठौर नगर परिषद्, नेमावर, जिला- देवास द्वारा अपने निर्वाचन व्यय के लेखे दाखिल नहीं किए गए ।
निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत न करने के परिणामस्वरूप, अभ्यर्थी को आयोग की ओर से कारण बताओ नोटिस दिनांक 05/05/15 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी ।
अभ्यर्थी, सुश्री सीमा सुनील राठौर को कारण बताओ नोटिस जारी होने के उपरांत आयोग के पत्र कमांकः एफ-87-228/ 2015 / ग्या0 / 605, दिनांक 27/06/2015 द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्थानीय निर्वाचन) जिला- देवास से जारी कारण बताओ नोटिस की तामीली प्रति सहित इस बात की भी जानकारी चाही गई कि कि यदि अभ्यर्थी द्वारा नोटिस में उल्लिखित अवधि में उनके समक्ष अपना निर्वाचन व्यय लेखा अथवा 366 (31)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 मई 2019
विलंब से लेखा प्रस्तुति के संबंध में कोई अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया हो तो लेखों की स्वीकार्यता तथा विलंब से लेखा प्रस्तुति के कारण की विश्वसनीयता का परीक्षण कर अभिमत आयोग को भेजा जाए । वांछित जानकारी अप्राप्त होने की दशा में जिले को वर्ष - 2018 तक स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे, पर जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं हो सकी ।
अंततः आयोग द्वारा अभ्यर्थी, सुश्री सीमा सुनील राठौर के लंबित निर्वाचन व्यय लेखों पर अंतिम निर्णय लिए जाने हेतु एवं अभ्यर्थी का पक्ष सुनने हेतु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्थानीय निर्वाचन) जिला-इन्दौर के माध्यम से अभ्यर्थी को नोटिस दिनांक 03/04/2019 जारी कर आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 09/04/2019 को पूर्वान्ह 11 . 00 बजे व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित होने हेतु कहा गया ।
जिले के आयोग को प्रेषित पत्र क्रमांक / स्था ० निर्वा0 / 2019 / 662 , दिनांक 08/04/2019 के संलग्न अभ्यर्थी को जारी नोटिस की तामीली की पावती व्यक्तिगत सुनवाई की तिथि के पूर्व आयोग को प्राप्त हो चुकी थी ।
अभ्यर्थी, सुश्री सीमा सुनील राठौर व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित नहीं हुई ।
उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी सुश्री सीमा सुनील राठौर के पास निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने की इस असफलता के लिए अभ्यर्थी , श्री सुश्री सीमा सुनील राठौर को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11- क के अधीन नगर परिषद्, नेमावर, जिला-देवास का अध्यक्ष या पार्षद चुने जाने हेतु आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी ) सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.
आदेश
भोपाल, दिनांक 10 मई 2019
क्रमांकः एफ-87-244/2015/ 11 /554 :: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा-32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 10 मई 2019
366( 32)
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर , 2014 में संपन्न नगर परिषद्, बेटमा, जिला-इंदौर के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में श्री मुकेश खण्डेलवाल भी अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-07/12 / 2014 को घोषित हुआ। मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी श्री मुकेश खण्डेलवाल को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , इंदौर के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला-इंदौर के पत्र क्रमांक 733 दिनांक- 28/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्री मुकेश खण्डेलवाल द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्था०निर्वा०) जिला- इंदौर को पत्र दिनांक 11/02/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, श्री मुकेश खण्डेलवाल द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना- पत्र दिनांक 03/04/2019 जारी कर समस्त कागजातों/ प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 09/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, श्री मुकेश खण्डेलवाल को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांकः 418 / स्था०निर्वा०/ 2019दिनांक11/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 09/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुए और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, श्री मुकेश खण्डेलवाल को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, बेटमा, जिला-इंदौर का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी ) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2019.