इसे वेबसाईट www.govtpressmp.nic.in से भी डाउन लोड किया जा सकता है.
मध्यप्रदेश शास
सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
( असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 184]
भोपाल , सोमवार , दिनांक 13 मई 2019- वैशाख 23 , शक 1941
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग निर्वाचन भवन , 58 , अरेरा. हिल्स, भोपाल
आदेश
भोपाल, दिनांक 13 मई 2019
क्रमांक-एफ-87-78-2015-11-559.-
:: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा- 32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगरपालिका परिषद्, महाराजपुर, जिला-छतरपुर के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में श्री अमरीश वाल्मीकि भी अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम: दिनांक-07 /12/2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी श्री अमरीश वाल्मीकि को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , छतरपुर के पास दाखिल करना था ।
367 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
368
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला- छतरपुर के पत्र क्रमांक 360 दिनांक- 30/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्री अमरीश वाल्मीकि द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्था०निर्वा०) जिला- छतरपुर को पत्र दिनांक 05/03/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्था० निर्वा०) जिला-छतरपुर के पत्र क्रमांक 100 / स्था०निर्वा ० / 2016 दिनांक 25/05/2016 द्वारा कारण बताओ सूचना पत्र की तामीली की पावती आयोग को पत्र के साथ संलग्न कर भेजी गयी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए , जाते रहे ।
अभ्यर्थी, श्री अमरीश वाल्मीकि द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना- पत्र दिनांक 26/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 03/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, श्री अमरीश वाल्मीकि को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांकः 104/ले-76-14/ स्था० निर्वा0 / 2019 दिनांक 30/03/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग 'को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 03/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुए और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, श्री अमरीश वाल्मीकि को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र . नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम , 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगरपालिका परिषद् महाराजपुर जिला-छतरपुर का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीतात्रिपाठी) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
368(1)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
आदेश
भोपाल, दिनांक 13 मई 2019
क्रमांक-एफ-87-78-2015-11-560.-
:: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा-32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा। मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-'ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगरपालिका परिषद्, महाराजपुर, जिला-छतरपुर के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में श्री रतीराम भी अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे। इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-07/12/ 2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी श्री रतीराम को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , छतरपुर के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, जिला- छतरपुर के पत्र क्रमांक 360 दिनांक- 30/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट-छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्री रतीराम द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , (स्था० निर्वा०) जिला- छतरपुर को पत्र दिनांक 05/03/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्था ०निर्वा० ) जिला-छतरपुर के पत्र क्रमांक 100/ स्था ० निर्वा० / 2016 दिनांक 25/05/2016 द्वारा कारण बताओ सूचना पत्र की तामीली की पावती आयोग को पत्र के साथ संलग्न कर भेजी गयी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
368(2)
अभ्यर्थी, श्री रतीराम द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना- पत्र दिनांक 26/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 03/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, श्री रतीराम को जारी कारण बताओ सूचना-पत्र क्रमांकः। 104/ले-76-14/ स्था० निर्वा0 /2019 दिनांक 30/03/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 03/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुए और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं। करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, श्री रतीराम को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम , 11 -'क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगरपालिका परिषद् महाराजपुर जिला-छतरपुर का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य ) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीतात्रिपाठी) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
368(3)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
आदेश
भोपाल , दिनांक 13 मई 2019
:: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा- 32-'क' क्रमांक- एफ-87-78-2015-11-561-
के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने , नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगरपालिका परिषद्, महाराजपुर, जिला-छतरपुर के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में श्री अहिरवार बलराम भी अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-07/12 / 2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी श्री अहिरवार बलराम को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, छतरपुर के पास दाखिल करना था ।
'कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, जिला- छतरपुर के पत्र क्रमांक 360 दिनांक- 30/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्री अहिरवार बलराम द्वारा निर्वाचन: व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , (स्था०निर्वा०) जिला- छतरपुर को पत्र दिनांक 05/03/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्था०निर्वा०) जिला-छतरपुर के पत्र क्रमांक 100/ स्था ०निर्वा० / 2016 दिनांक 25/05/2016 द्वारा कारण बताओ सूचना पत्र की तामीली की पावती आयोग को पत्र के साथ संलग्न कर भेजी गयी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
368(4)
अभ्यर्थी , श्री अहिरवार बलराम द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना- पत्र दिनांक 26/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 03/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, श्री अहिरवार बलराम को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांकः 104/ले- 76-14 / स्था० निर्वा० / 2019 दिनांक 30/03/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 03/04/2019 को आयोग मुख्यालय , भोपाल में उपस्थित नहीं हुए और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, श्री अहिरवार बलराम को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11 -'क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगरपालिका परिषद् महाराजपुर जिला- छतरपुर का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच ) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य ) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी)
सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
368(5)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
आदेश
भोपाल, दिनांक 13 मई 2019
क्रमांक- एफ- 87-78-2015-11-564.-
:: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा- 32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1981 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन: व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014 " म.प्र. राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा . ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगरपालिका परिषद्, महाराजपुर, जिला- छतरपुर के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में श्री अहिरवार बालाप्रसाद भी अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-07 /12/ 2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी श्री अहिरवार बालाप्रसाद को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन' अधिकारी , छतरपुर के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, जिला छतरपुर के पत्र क्रमांक 360 दिनांक- 30/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्री अहिरवार बालाप्रसाद द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , (स्था०निर्वा०) जिला- छतरपुर को पत्र दिनांक 05/03/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्था०निर्वा० ) जिला-छतरपुर के पत्र क्रमांक 100 / स्था० निर्वा 0 / 2016 दिनांक 25/05/2016 द्वारा कारण बताओ सूचना पत्र की तामीली की पावती आयोग को पत्र के साथ संलग्न कर भेजी गयी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, श्री अहिरवार बालाप्रसाद द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना- पत्र दिनांक 26/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 03/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, श्री अहिरवार बालाप्रसाद को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांकः 104/ले-76-14 / स्था०निर्वा० / 2019 दिनांक 30/03/2019 द्वारा तामीली की पावती में बताया गया कि श्री अहिरवार बालाप्रसाद की मृत्यु हो गई है । जिसकी प्रति आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
अतः जिले से प्राप्त जानकारी अनुसार श्री अहिरवार बालाप्रसाद की मृत्यु हो जाने के परिणामस्वरूप उनके प्रकरण में खात्मा लगाया जाता है । राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,
हस्ता./- (सुनीतात्रिपाठी) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 13 मई 2019
368(6)
आदेश
भोपाल, दिनांक 13 मई 2019
क्रमांक-एफ-87-223-2015-11-567- ::मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा-32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-'ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है । कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर , 2014 में संपन्न नगर परिषद्, करनावद, जिला- देवास के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री लीला पति रामप्रसाद पाटीदार कुलमी भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-07/12 / 2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी सुश्री लीला पति रामप्रसाद पाटीदार कुलमी को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , देवास के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, जिला- देवास के पत्र क्रमांक 1263 दिनांक- 29/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट-छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, सुश्री लीला पति रामप्रसाद पाटीदार कुलमी द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया । !
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , (स्थानीय निर्वाचन ) जिला- देवास को पत्र दिनांक 07/05/2015 जारी कर अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत व्यय लेखों को प्रस्तुत कराने हेतु कहा गया । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी , सुश्री लीला पति रामप्रसाद पाटीदार कुलमी द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना-पत्र दिनांक 03/04/2019 जारी कर समस्त कागजातों/ प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 09/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया । 368
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 13 मई 2019
अभ्यर्थी, सुश्री लीला पति रामप्रसाद पाटीदार कुलमी को जारी कारण बताओ सूचना-पत्र क्रमांक / स्था०निर्वा० / 2019 / 662 दिनांक 08/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 09/04/2019 को आयोग मुख्यालय , भोपाल में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, सुश्री लीला पति रामप्रसाद पाटीदार कुलमी को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11 -'क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, करनावद, जिला- देवास का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
368(8)
आदेश
भोपाल, दिनांक 13 मई 2019
क्रमांक-एफ-87-223-2015-11-568.-
:: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा-32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा।। मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-'ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगर परिषद्, करनावद, जिला- देवास के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री शमीम बी मंसूर खां मंसूरी भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-07 / 12 / 2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी सुश्री शमीम बी मंसूर खां मंसूरी को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, देवास के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला- देवास के पत्र क्रमांक 1263 दिनांक- 29/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, सुश्री शमीम बी मंसूर खां मंसूरी द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया । आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , (स्थानीय निर्वाचन ) जिला- देवास को पत्र दिनांक 07/05/2015 जारी कर अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत व्यय लेखों को प्रस्तुत कराने हेतु कहा गया । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, सुश्री शमीम बी मंसूर खां मंसूरी द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना-पत्र दिनांक 03/04/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 09/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया । 368(9)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
अभ्यर्थी, सुश्री शमीम बी मंसूर खां मंसूरी को जारी कारण बताओ सूचना-पत्र क्रमांक / स्था०निर्वा० / 2019 / 662 दिनांक 08/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 09/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, सुश्री शमीम बी मंसूर खां मंसूरी को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम , 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, करनावद , जिला- देवास। का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच ) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी)
सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 13 मई 2019
368(10)
आदेश
भोपाल, दिनांक 13 मई 2019
क्रमांक-एफ-87-223-2015-11-569.- :: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा-32-' क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-'ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2014 में संपन्न नगर परिषद्, करनावद, जिला- देवास के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री शौभा बाई पति दरियावगिरी भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-07/12/ 2014 को घोषित हुआ। मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 06/01/2015 तक अभ्यर्थी सुश्री शौभा बाई पति दरियावगिरी को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , देवास के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला- देवास के पत्र क्रमांक 1263 दिनांक- 29/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट-छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, सुश्री शौभा बाई पति दरियावगिरी द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया । आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , (स्थानीय निर्वाचन) जिला- देवास को पत्र दिनांक 07/05/2015 जारी कर अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत व्यय लेखों को प्रस्तुत कराने हेतु कहा गया । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, सुश्री शौभा बाई पति दरियावगिरी द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को -प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना- पत्र दिनांक 03/04/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 09/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 13 मई 2019
368(11) अभ्यर्थी, सुश्री शौभा बाई पति दरियावगिरी को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांक / स्था०निर्वा0 / 2019 / 662 दिनांक 08/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 09/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, सुश्री शौभा बाई पति दरियावगिरी को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, करनावद, जिला-देवास का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार , हस्ता./- (सुनीतात्रिपाठी) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
368(12)
आदेश
भोपाल , दिनांक 13 मई 2019
क्रमांक- एफ-87-321-2016-11-572.-
:: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा-32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगतं करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा। मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014 " म.प्र. राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2015 में संपन्न नगर परिषद्, मझौली , जिला- सीधी के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में श्रीमती सत्या चतुर्वेदी पति प्रवीण चतुर्वेदी भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-26/12 / 2015 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 25/01/2016 तक अभ्यर्थी श्रीमती सत्या चतुर्वेदी पति प्रवीण चतुर्वेदी को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, सीधी के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला- सीधी के पत्र क्रमांक 318 दिनांक 04/07/2016 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्रीमती सत्या चतुर्वेदी पति प्रवीण चतुर्वेदी द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्था०निर्वा०) जिला- सीधी को पत्र दिनांक 21/07/2016 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी , श्रीमती सत्या चतुर्वेदी पति प्रवीण चतुर्वेदी द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना- पत्र दिनांक 28/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों/ प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 05/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया । 368(13)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
अभ्यर्थी, श्रीमती सत्या चतुर्वेदी पति प्रवीण चतुर्वेदी को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांकः 56/ स्था ०निर्वा ० / 2019 दिनांक 05/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्वप्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 05/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी , श्रीमती सत्या चतुर्वेदी पति प्रवीण चतुर्वेदी को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम , 1994 के नियम, 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, मझौली जिला- सीधी का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच ) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार , हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी)
सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
368(14)
आदेश
भोपाल, दिनांक 13 मई 2019
क्रमांक-एफ-87-321-2016-11-573.-
:: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा-32-' क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2015 में संपन्न नगर परिषद्, मझौली, जिला- सीधी के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री सुमन झल्लू सिंह भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-26/12 / 2015 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 25/01/2016 तक अभ्यर्थी सुश्री सुमन झल्लू सिंह को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, सीधी के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला- सीधी के पत्र क्रमांक 318 दिनांक 04/07/2016: के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट-छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, सुश्री सुमन झल्लू सिंह द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्था०निर्वा० ) जिला- सीधी को पत्र दिनांक 27/07/2016 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, सुश्री सुमन झल्लू सिंह द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना-पत्र दिनांक 28/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 05/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
368(15) अभ्यर्थी, सुश्री सुमन झल्लू सिंह को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांकः 56/ स्था०निर्वा०/ 2019 दिनांक 05/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग कों व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 05/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, सुश्री सुमन झल्लू सिंह को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11-'क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, मझौली जिला-सीधी का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,
हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी)
सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
368(16)
आदेश
भोपाल, दिनांक 13 मई 2019
क्रमांक-एफ- 87-321-2016-11-574.-
:: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा- 32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2015 में संपन्न नगर परिषद्, मझौली , जिला-सीधी के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में श्रीमती चम्पाकली पति कृष्ण मुरारी यादव भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-26 /12/ 2015 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 25/01/2016 तक अभ्यर्थी श्रीमती चम्पाकली पति कृष्ण मुरारी यादव को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, सीधी के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला- सीधी के पत्र क्रमांक 318 दिनांक 04/07/2016 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्रीमती चम्पाकली पति कृष्ण मुरारी यादव द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्था० निर्वा०) जिला- सीधी को पत्र दिनांक 27/07/2016 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, श्रीमती चम्पाकली पति कृष्ण मुरारी यादव द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना-पत्र दिनांक 28/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 05/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
368(17) अभ्यर्थी, श्रीमती चम्पाकली पति कृष्ण मुरारी यादव को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांकः 56 / स्था०निर्वा० / 2019 दिनांक 05/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 05/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, श्रीमती चम्पाकली पति कृष्ण मुरारी यादव को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, मझौली जिला- सीधी का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार ,
हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी)
सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
368(18)
आदेश
भोपाल, दिनांक 13 मई 2019.
क्रमांक- एफ-87-321-2016-11-575-
:: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा- 32-' क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2015 में संपन्न नगर परिषद्, मझौली, जिला- सीधी के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री माया भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-26/12/2015 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 25/01/2016 तक अभ्यर्थी सुश्री माया को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, सीधी के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला- सीधी के पत्र क्रमांक 318 दिनांक- 04/07/2016 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, सुश्री माया द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , (स्था०निर्वा०) जिला-सीधी को पत्र दिनांक 27/07/2016 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, सुश्री माया द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना-पत्र दिनांक 28/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों/ प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 05/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया । 368(19)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
अभ्यर्थी, सुश्री माया को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांकः 56 / स्था ० निर्वा० / 2019 दिनांक 05/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी । नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 05/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, सुश्री माया को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम , 1994 के नियम, 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, मझौली जिला- सीधी का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित: किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,
हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी)
सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
368(20)
आदेश
भोपाल, दिनांक 13 मई 2019
क्रमांक- एफ-87-321-2016-11-576.-
::मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा-32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा। मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2015 में संपन्न नगर परिषद्, मझौली, जिला- सीधी के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री माया शंखधर वकील भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक- 26/12/2015 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 25/01/2016 तक अभ्यर्थी सुश्री माया शंखधर वकील को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी, सीधी के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, जिला- सीधी के पत्र क्रमांक 318 दिनांक 04/07/2016 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, सुश्री माया शंखधर वकील द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्था० निर्वा० ) जिला- सीधी को पत्र दिनांक 27/07/2016 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, सुश्री माया शंखधर वकील द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना-पत्र दिनांक 28/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 05/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया । 368(21)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
अभ्यर्थी, सुश्री माया शंखधर वकील को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांकः 56 / स्था०निर्वा०/ 2019 दिनांक 05/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 05/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, सुश्री माया शंखधर वकील को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम , 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, मझौली जिला-सीधी का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार , हस्ता./-
(सुनीता त्रिपाठी) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
368(22)
आदेश
भोपाल, दिनांक 13 मई 2019
क्रमांक- एफ-87-321-2016-11-577.-
:: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा-32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण ) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर, 2015 में संपन्न नगर परिषद्, मझौली, जिला- सीधी के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में सुश्री सुनैना- रमेश कुमार भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-26/12/ 2015 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 25/01/2016 तक अभ्यर्थी सुश्री सुनैना- रमेश कुमार को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , सीधी के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला- सीधी के पत्र क्रमांक 318 दिनांक 04/07/2016 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट-छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, सुश्री सुनैना-रमेश कुमार द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , (स्था० निर्वा० ) जिला- सीधी को पत्र दिनांक 27/07/2016 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, सुश्री सुनैना- रमेश कुमार द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना- पत्र दिनांक 28/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 05/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया । 368(23)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
अभ्यर्थी, सुश्री सुनैना- रमेश कुमार को जारी कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांकः 56 /स्था०निर्वा०/ 2019 दिनांक 05/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 05/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी अपने निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत ही नहीं किये ।
आयोग का यह समाधान हो गया है कि उनके पास अपने निर्वाचन व्यय लेखों को प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, सुश्री सुनैना-रमेश कुमार को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम , 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, मझौली जिला-सीधी का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार,
हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी)
सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 13 मई 2019
368(24)
आदेश
भोपाल, दिनांक 13 मई 2016
क्रमांक- एफ- 87-78-2015-11-580.-
:: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा- 32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन. व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है। कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह दिसम्बर , 2014 में संपन्न नगर परिषद् कैमोर, जिला- कटनी के अध्यक्ष के आम निर्वाचन में श्री अब्दुल हसीब अहमद भी अध्यक्ष पद के अभ्यर्थी थे । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-04/12/ 2014 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक 03/01/2015 तक अभ्यर्थी श्री अब्दुल हसीब अहमद को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , कटनी के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, जिला- कटनी के पत्र क्रमांक 1553 दिनांक- 12/01/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट- छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्री अब्दुल हसीब अहमद द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ - पत्र प्रस्तुत किया गया ।
आयोग द्वारा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, (स्था ०निर्वा०) जिला- कटनी को पत्र दिनांक 16/03/2015 जारी किया गया। नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, श्री अब्दुल हसीब अहमद द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना- पत्र दिनांक 28/03/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 05/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, श्री अब्दुल हसीब अहमद को जारी कारण बताओ सूचना- पत्र क्रमांकः 27/ स्था ०निर्वा० / स्था ० / 2019 दिनांक 09/04/2019 द्वारा तामीली की पावती में बताया गया कि श्री अब्दुल हसीब अहमद का देहांत हो गया है । जिसकी प्रति आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी ।
अतः जिले से प्राप्त जानकारी अनुसार श्री अब्दुल हसीब अहमद का देहांत हो जाने के परिणामस्वरूप उनके प्रकरण में खात्मा लगाया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीतात्रिपाठी) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2019.