ध्यप्र
शास
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सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
भोपाल , सोमवार , दिनांक 24 जून 2019- आषाढ़ 3 , शक 1941
क्रमांक 247]
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग निर्वाचन भवन , 58 , अरेरा हिल्स, भोपाल
आदेश
भोपाल , दिनांक 24 जून 2019
क्रमांक-एफ-87-294-2015-11-814.-
:: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1981 की धारा-32-' क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह फरवरी, 2015 में संपन्न नगर परिषद् बड़ौनी, जिला- दतिया (म ०प्र०) के अध्यक्ष पद के आम निर्वाचन में इंजी. विमलेश वंशकार भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-04 /02/ 2015 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक- 03/03/2015 तक अभ्यर्थी इंजी. विमलेश वंशकार को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला- दतिया के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, जिला दतिया के पत्र क्रमांक 416 दिनांक- 08/04/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट-छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, इंजी. विमलेश वंशकार द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया ।
493 494
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 जून 2019
निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत न करने के परिणामस्वरूप, अभ्यर्थी को आयोग की ओर से कारण बताओ नोटिस दिनांक 15/06/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला- दतिया के पत्र क्रमांक 503 दिनांक 03/07/2015 द्वारा कारण बताओ नोटिसों की तामीली की पावती पत्र के साथ संलग्न कर आयोग को भेजी गई है । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अभ्यर्थी, इंजी. विमलेश वंशकार द्वारा व्यय लेखे प्रस्तुत होने की जानकारी आयोग को प्राप्त नहीं होने पर आयोग द्वारा अनतत्वोगत्वा न्यायहित में अभ्यर्थी को सूचना- पत्र दिनांक 03/04/2019 जारी कर समस्त कागजातों / प्रमाणों सहित अपना पक्ष रखने हेतु व्यक्तिगत सुनवाई हेतु आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 10/04/2019 को उपस्थित होने को कहा गयाः ।
अभ्यर्थी, इंजी. विमलेश वंशकार को जारी सूचना- पत्र क्रमांक क्यू/ स्था०निर्वा० /व्यय लेखा/ 2019 /11 दिनांक 09/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्वप्राप्त हो चुकी थी ।
अभ्यथी इंजी. विमलेश वंशकार व्यक्तिगत सुनवाई दिनांक-10/04/ 2019 को आयोग मुख्यालय में उपस्थित हुई । व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान अभ्यर्थी द्वारा अपने निर्वाचन व्यय लेखे समयावधि में विहित अधिकारी को दाखिल / प्रस्तुत नहीं किये गये हैं साथ ही निर्वाचन व्यय पंजी बिना शपथ- पत्र सुनवाई के दौरान दिखाये गये ।
निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश दिनांक-10 / 07 / 2014 की कंडिका 7 की उप कंडिका (4) के अनुसार निर्वाचन व्ययों के लेखों के साथ प्रोफार्मा- घ में एक शपथ- पत्र भी प्रस्तुत किया जाएगा और ऐसे शपथ- पत्र के बिना लेखा पूर्ण नहीं माना जायेगा । इसके अलावा कंडिका -7 की उप कंडिका (1 ) में निर्वाचन व्यय लेखे दाखिल करने के संबंध में प्रावधान है कि निर्वाचन लड़ने वाला प्रत्येक अभ्यर्थी या उसका निर्वाचन अभिकर्ता अधिनियम में विनिर्दिष्ट समय अर्थात् निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अंदर निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
अभ्यर्थी, इंजी. विमलेश वंशकार द्वारा उपर्युक्त आदेश के प्रावधान के अधीन अपने निर्वाचन व्यय लेखे जिला निर्वाचन अधिकारी , दतिया के पास 04 वर्ष से अधिक की कालावधि व्यतीत हो जाने के पश्चात् भी प्रस्तुत नहीं किये गये ।
उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि अभ्यर्थी इंजी. विमलेश वंशकार के पास निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने की इस असफलता के लिए अभ्यर्थी, इंजी. विमलेश वंशकार को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32-ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11 -'क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद् बड़ौनी , जिला- दतिया का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार , हस्ता./- (सुनीतात्रिपाठी) सचिव,
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
494(1)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 जून 2019
आदेश
भोपाल, दिनांक 24 जून 2019
क्रमांक एफ-87-294-2015-11-815.- :: मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा- 32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेंगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह फरवरी, 2015 में संपन्न नगर परिषद् बड़ौनी , जिला- दतिया (म०प्र०) के अध्यक्ष पद के आम निर्वाचन में श्रीमती राजकुमारी नारान भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-04/02/ 2015 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32-'ख' के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक- 03/03/2015 तक अभ्यर्थी श्रीमती राजकुमारी नारान को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला- दतिया के पास दाखिल करना था ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, जिला दतिया के पत्र क्रमांक 416 दिनांक- 08/04/2015 के संलग्न प्रेषित परिशिष्ट - छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्रीमती राजकुमारी नारान द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया , और न ही शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया ।
निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत न करने के परिणामस्वरूप, अभ्यर्थी को आयोग की ओर से कारण बताओ नोटिस दिनांक 15/06/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी ।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला- दतिया के पत्र क्रमांक 503 दिनांक 03/07/2015 द्वारा कारण बताओ नोटिसों की तामीली की पावती पत्र के साथ संलग्न कर आयोग को भेजी गई है । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अतंतः आयोग द्वारा अभ्यर्थी, श्रीमती राजकुमारी नारान के लंबित निर्वाचन व्यय लेखों पर अंतिम निर्णय लिए जाने हेतु एवं अभ्यर्थी का पक्ष सुनने हेतु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्थानीय निर्वाचन) जिला दतिया के माध्यम से अभ्यर्थी को नोटिस दिनांक 03/04/2019 जारी कर आयोग मुख्यालय , भोपाल में दिनांक 10/04/2019 को पूर्वान्हः 11.00 बजे व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित होने कोकहा गया ।
अभ्यर्थी, श्रीमती राजकुमारी नारान को जारी सूचना- पत्र क्रमांक क्यू/ स्था० निर्वा० /व्यय लेखा/2019/11 दिनांक 09/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्व प्राप्त हो चुकी थी । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 जून 2019
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नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 10/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हुई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त विवेचना से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी श्रीमती राजकुमारी नारान के पास निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, श्रीमती राजकुमारी नारान को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम , 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, बड़ौनी, जिला- दतिया का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य ) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीतात्रिपाठी)
सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग, भोपाल.
आदेश
भोपाल, दिनांक 24 जून 2019
क्रमांक- एफ-87-294-2015-11-816.-
::मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा-32-'क' के अनुसार अध्यक्ष के निर्वाचन में भाग लेने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिये यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन संबंधी उस समस्त व्यय का, जो उसने स्वयं या उसके निर्वाचन अभिकर्ता ने, नाम निर्दिष्ट होने की तारीख से निर्वाचन के परिणाम की घोषणा की तारीख की अवधि के बीच उपगत किया हो या उपगत करने के लिए प्राधिकृत किया हो, पृथक और सही लेखा रखेगा या अपने निर्वाचन अभिकर्ता द्वारा रखवाएगा । मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 32-' ख' के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए यह अनिवार्य है कि वह निर्वाचन की तारीख से 30 दिन के अन्दर अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अधिकारी के पास दाखिल करेगा ।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी "निर्वाचन व्यय (लेखा संधारण और प्रस्तुति) आदेश 2014" म.प्र. राजपत्र (असाधारण) दिनांक 10/07/2014 में प्रकाशित हुआ है । उसमें यह निर्दिष्ट किया गया है कि निर्वाचन व्ययों का लेखा विहित अवधि में तथा विनिर्दिष्ट प्रोफार्मा में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास दाखिल किया जाएगा ।
माह फरवरी, 2015 में संपन्न नगर परिषद् बड़ौनी , जिला- दतिया (म०प्र०) के अध्यक्ष पद के आम निर्वाचन में श्रीमती मंजू भागीरथ कोरी भी अध्यक्ष पद की अभ्यर्थी थी । इस नगर परिषद् के निर्वाचन का परिणाम दिनांक-04/02/ 2015 को घोषित हुआ । मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 32- ख के अनुसार निर्वाचन परिणाम की घोषणा की तारीख से 30 दिन के अन्दर अर्थात् दिनांक- 03/03/2015 तक अभ्यर्थी श्रीमती मंजू भागीरथ कोरी को अपने निर्वाचन व्ययों का लेखा जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला- दतिया के पास दाखिल करना था । 494(3)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 जून 2019
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला दतिया के पत्र क्रमांक 416 दिनांक- 08/04/2015 के. संलग्न प्रेषित परिशिष्ट-छत्तीस के अनुसार अभ्यर्थी, श्रीमती मंजू भागीरथ कोरी द्वारा निर्वाचन व्ययों का लेखा प्रस्तुत नहीं किया गया, और न ही शपथ- पत्र प्रस्तुत किया गया ।
निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत न करने के परिणामस्वरूप, अभ्यर्थी को आयोग की ओर से कारण बताओ नोटिस दिनांक 15/06/2015 जारी किया गया । नोटिस में सभी वैधानिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी।
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी , जिला - दतिया के पत्र क्रमांक 503 दिनांक 03/07/2015 द्वारा कारण बताओ नोटिसों की तामीली की पावती पत्र के साथ संलग्न कर आयोग को भेजी गई है । इसके उपरांत जिले को इस संबंध में निरन्तर स्मरण पत्र जारी किए जाते रहे ।
अतंतः आयोग द्वारा अभ्यर्थी, श्रीमती मंजू भागीरथ कोरी के लंबित निर्वाचन व्यय लेखों पर अंतिम निर्णय लिए जाने हेतु एवं अभ्यर्थी का पक्ष सुनने हेतु कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (स्थानीय निर्वाचन) जिला दतिया के माध्यम से अभ्यर्थी को नोटिस दिनांक 03/04/2019 जारी कर आयोग मुख्यालय, भोपाल में दिनांक 10/04/2019 को पूर्वान्हः 11.00 बजे व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित होने को कहा गया ।
अभ्यर्थी, श्रीमती मंजू भागीरथ कोरी को जारी सूचना- पत्र क्रमांक क्यू/ स्था०निर्वा० /व्यय लेखा/ 2019/ 11 दिनांक 09/04/2019 द्वारा तामीली की पावती आयोग को व्यक्तिगत सुनवाई के पूर्वप्राप्त हो चुकी थी ।
नोटिस की तामीली अभ्यर्थी को समय पूर्व हो जाने के उपरांत भी वे व्यक्तिगत सुनवाई तिथि 10/04/2019 को आयोग मुख्यालय, भोपाल में उपस्थित नहीं हई और न ही इस अनुपस्थिति बावत् कोई अभ्यावेदन व अन्यादि उनकी ओर से जिला कार्यालय एवं आयोग को प्राप्त हुआ ।
उपरोक्त विवेचना से स्वयमेव स्पष्ट है कि अभ्यर्थी श्रीमती मंजू भागीरथ कोरी के पास निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने का कोई न्यायोचित एवं समाधानकारक कारण नहीं है ।
अतः राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुरूप निर्वाचन व्यय लेखे प्रस्तुत नहीं करने के कारण अभ्यर्थी, श्रीमती मंजू भागीरथ कोरी को मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , 1961 की धारा 32- ग के उपबन्धों सहपठित म.प्र. नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के नियम, 11 -' क' के अधीन इस प्रकार चुने जाने तथा नगर परिषद्, बड़ौनी , जिला- दतिया का अध्यक्ष या पार्षद होने के लिए आदेश जारी होने की तिथि से 05 (पांच) वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित (अयोग्य ) घोषित किया जाता है ।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेशानुसार, हस्ता./- (सुनीता त्रिपाठी) सचिव, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग , भोपाल.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2019.