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ध्य प्र
शासन
सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 274]
भोपाल , मंगलवार , दिनांक 9 जुलाई 2019-आषाढ़ 18 शक 1941
विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश
भोपाल , दिनांक 9 जुलाई 2019
क्र. 8780 -मप्रविस- 15- विधान - 2019.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम-64 के उपबंधों के पालन में मध्यप्रदेश माध्यस्थम् अधिकरण ( संशोधन ) विधेयक, 2019 ( क्रमांक 13 सन् 2019 ) जो विधान सभा में दिनांक 9 जुलाई, 2019 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.
ए. पी. सिंह , प्रमुख सचिव.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 9 जुलाई 2019
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक १३ सन् २०१ ९
मध्यप्रदेश माध्यस्थम् अधिकरण ( संशोधन ) विधेयक , २०१ ९ .
मध्यप्रदेश माध्यस्थम् अधिकरण अधिनियम, १ ९ ८३ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.
भारत गणराज्य के सत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान -मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम.
१. इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश माध्यस्थम् अधिकरण ( संशोधन ) अधिनियम, २०१ ९ है.
धारा २ का संशोधन.
२. मध्यप्रदेश माध्यस्थम् अधिकरण अधिनियम, १ ९८३ ( क्रमांक २९ सन् १ ९८३ ) की धारा २ में, उपधारा ( १ ) में, खण्ड ( घ ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" (घ ) " विवाद " से अभिप्रेत है , ५०,००० रुपए या उससे अधिक मूल्यांकन के अभिनिश्चित धन अथवा अभिनिश्चित किए जाने योग्य धन के दावे से संबंधित कोई विवाद जो किसी संकर्म संविदा या उसके भाग के निष्पादन या अनिष्पादन से उद्भूत होता है . " .
उद्देश्यों और कारणों का कथन
माध्यस्थम् अपील क्रमांक १४/२०१७ वीवा हाईवे लिमिटेड विरुद्ध मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम लिमिटेड में, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय दिनांक ५ मई २०१७ में यह बताया है कि मध्यप्रदेश माध्यस्थम् अधिकरण अधिनियम, १ ९ ८३ ( क्रमांक २ ९ सन् १ ९ ८३ ) में " विवाद " की परिभाषा में रुपये ५०,०००/- या " अभिनिश्चित धन " के संबंध में विवाद सम्मिलित है, जहां धन अभिनिश्चित नहीं है वहां विवाद मध्यप्रदेश माध्यस्थम अधिकरण अधिनियम, १ ९ ८३ की परिधि के भीतर नहीं आता है.
. २. यह स्थिति राज्य सरकार और उसके अभिकरणों के हित में नहीं है क्योंकि समस्त दावे जहां धन निश्चित नहीं हैं, के विवाद राज्य अधिनियम के अंतर्गत नहीं आएंगे . राज्य अधिनियम का मूल उद्देश्य विफल हो जाएगा. राज्य अधिनियम की धारा २० (घ) में यथोचित संशोधन द्वारा सुधार किया जाना आवश्यक है जिससे कि अस्पष्टता को दूर किया जा सके तथा संकर्म संविदा से संबंधित समस्त विवाद राज्य अधिनियम के भीतर लाए जाएं.
३. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.
पी. सी. शर्मा भोपाल :
भारसाधक सदस्य.
तारीख ५ जुलाई , २०१ ९
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2019.