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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

कृषि उपज मण्‍डी (संशोधन) विधेयक 2019

Published 09 July 2019

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
278
Identifier
in.gazette.madhya.2019-07-09.278.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

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मध्यप्रदे श शासन

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 278 ]

भोपाल , मंगलवार , दिनांक 9 जुलाई 2019- आषाढ़ 18 शक 1941

विधान सभा सचिवालय , मध्यप्रदेश

भोपाल, दिनांक 9 जुलाई 2019

क्र. 8792- मप्रविस- 15- विधान-2019.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम-64 के उपबंधों के पालन में मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी ( संशोधन ) विधेयक, 2019 ( क्रमांक 10 सन् 2019 ) जो विधान सभा में दिनांक 9 जुलाई, 2019 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.

ए. पी. सिंह , प्रमुख सचिव.

555 556

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 9 जुलाई 2019

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक १० सन् २०१ ९.

मध्यप्रदेश कृषि उपज मण्डी ( संशोधन ) विधेयक, २०१ ९ .

मध्यप्रदेश कृषि उपज मण्डी अधिनियम, १ ९७२ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.

भारत गणराज्य के सत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान - मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

१. इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश कृषि उपज मण्डी ( संशोधन ) अधिनियम, २०१ ९ है.

संक्षिप्त नाम.

धारा ७२ का

संशोधन.

२. मध्यप्रदेश कृषि उपज मण्डी अधिनियम, १ ९ ७२ ( क्रमांक २४ सन् १ ९७३ ) की धारा ७२ में, उपधारा ( २ ) में, पूर्ण विराम के स्थान पर, कोलन स्थापित किया जाए और तत्पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक अन्तःस्थापित किया जाए, अर्थात्:-

" परंतु राज्य सरकार ऐसी गठित समिति को विघटित करने के लिए सक्षम होगी तथा उसके स्थान पर एक निर्वाचित मण्डी समिति के गठन किए जाने तक एक भारसाधक अधिकारी नियुक्त करेगी. ".

तथा

३. ( १ ) मध्यप्रदेश कृषि उपज मण्डी ( संशोधन ) अध्यादेश , २०१ ९ ( क्रमांक १ सन् २०१ ९ ) एतद्वारा निरसित किया जाता है.

निरसन व्यावृत्ति.

( २ ) उक्त अध्यादेश के निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई समझी जाएगी.

उद्देश्यों और कारणों का कथन

मध्यप्रदेश कृषि उपज मण्डी अधिनियम, १ ९७२ ( क्रमांक २४ सन् १ ९७३ ) के अधीन मण्डी समितियां पांच वर्ष की कालावधि के लिए निर्वाचित की जाती हैं और तत्पश्चात् एक वर्ष की अधिकतम कालावधि की वृद्धि की जा सकती है , जिसके पश्चात् या तो नई समितियों के निर्वाचन कराए जाते हैं या राज्य सरकार द्वारा भारसाधक अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं . यद्यपि, नई मण्डी समितियों को जब अधिसूचित किया जाता है , तब अधिनियम, उन मण्डी समितियों के लिए, जिनका अधिनियम के अनुसार कार्यकाल तब तक निरंतर है जब तक इन मण्डी समितियों का निर्वाचन न हो जाए, मण्डी समिति भारसाधक नामनिर्दिष्ट करने के लिए राज्य सरकार को प्राधिकृत करता है . मण्डी समितियों के विघटन और भारसाधक अधिकारियों की नियुक्ति के लिए कोई उपबंध अस्तित्व में नहीं है, जैसा कि विद्यमान मण्डी समितियों के लिए है. इसका परिणाम कई बार नामनिर्दिष्ट निकायों के एक लम्बी अवधि तक बने रहने और उनका निर्वाचन के पूर्व विघटन करने से नामनिर्दिष्ट समितियों द्वारा न्यायालयीन प्रकरण प्रस्तुत किए जाते हैं.

२. समुचित उपबंधों के अभाव में नामनिर्दिष्ट सदस्य राज्य सरकार के आदेश के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त करने में समर्थ हो जाते हैं. तद्नुसार, मूल अधिनियम की धारा ७२ की उपधारा ( २ ) को यथोचित रूप से संशोधित किया गया है.

३. चूंकि मामला अत्यावश्यक था तथा विधान सभा का सत्र चालू नहीं था, अतएव , मध्यप्रदेश कृषि उपज मण्डी ( संशोधन ) अध्यादेश, २०१ ९ (क्रमांक १ सन् २०१ ९ ) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किया गया था. अब उक्त अध्यादेश के स्थान पर, राज्य विधान- मण्डल का अधिनियम बिना किसी उपांतरण के लाया जाना प्रस्तावित है .

४. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.

भोपाल :

सचिन सुभाष यादव

भारसाधक सदस्य.

तारीख ३ जुलाई , २०१ ९ .

556( 1)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 9 जुलाई 2019

प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन

प्रस्तावित विधेयक के खण्ड २ के द्वारा भारसाधक समितियों को विघटित किए जाने तथा निर्वाचित मण्डी के गठन तक भारसाधक अधिकारी नियुक्त किए जाने के संबंध में विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन राज्य सरकार को किया जा रहा है जो, सामान्य स्वरूप का होगा.

अध्यादेश के संबंध में विवरण

मध्यप्रदेश कृषि उपज मण्डी अधिनियम, १ ९७२ ( क्रमांक २४ सन् १ ९ ७३ ) के अधीन मण्डी समितियां पांच वर्ष की कालावधि के लिए निर्वाचित की जाती है और तत्पश्चात् एक वर्ष की अधिकतम कालावधि की वृद्धि की जा सकती है , जिसके पश्चात् या तो नई समितियों के निर्वाचन कराए जाते हैं या राज्य सरकार द्वारा भारसाधक अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं. यद्यपि, नई मण्डी समितियों को जब अधिसूचित किया जाता है , तब अधिनियम , उन मण्डी समितियों के लिए, जिनका अधिनियम के अनुसार कार्यकाल तब तक निरंतर है जब तक इन मण्डी समितियों का निर्वाचन न हो जाए, मण्डी समिति भारसाधक नामनिर्दिष्ट करने के लिए राज्य सरकार को प्राधिकृत करता है. मण्डी समितियों के विघटन और भारसाधक अधिकारियों की नियुक्ति के लिए कोई उपबंध अस्तित्व में नहीं है, जैसा कि विद्यमान मण्डी समितियों के लिए है.

२. इस हेतु मूल अधिनियम की धारा ७२ की उपधारा ( २ ) में संशोधन आवश्यक हो गया था . चूंकि मामला अत्यावश्यक था तथा विधान सभा का सत्र चालू नहीं था, अतएव, मध्यप्रदेश कृषि उपज मण्डी ( संशोधन ) अध्यादेश , २०१ ९ ( क्रमांक १ सन् २०१ ९ ) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किया गया था.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2019 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 09 July 2019. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2019-07-09.278.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2019-07-09.278.Extraordinary.