ध्य प्रदे
शास
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सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 294]
भोपाल , बुधवार, दिनांक 17 जुलाई 2019- आषाढ़ 26 शक 1941
विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश
भोपाल , दिनांक 17 जुलाई 2019
क्र. 9660 - मप्रविस- 15- विधान- 2019.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम -64 के उपबंधों के पालन में मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी ( संशोधन ) विधेयक, 2019 ( क्रमांक 16 सन् 2019 ) जो विधान सभा में दिनांक 17 जुलाई, 2019 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.
ए. पी. सिंह, प्रमुख सचिव.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 17 जुलाई 2019
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक १६ सन् २०१ ९
मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी ( संशोधन ) विधेयक, २०१ ९ मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी अधिनियम, १ ९९९ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.
भारत गणराज्य के सत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान-मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी ( संशोधन ) अधिनियम, संक्षिप्त नाम तथा प्रारंभ.
२०१९ है.
(२ ) यह ८ मार्च, २०१ ९ से प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा.
धारा ४ का संशोधन.
२. मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी अधिनियम , १ ९९९ ( क्रमांक २३ सन् १ ९९९ ) की धारा ४ में, उपधारा ( ३ ) में, विद्यमान परन्तुक में, पूर्ण विराम के स्थान पर, कोलन स्थापित किया जाए और तत्पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" परन्तु यह और कि सदस्यों की पदावधि के समाप्त होने पर, यदि प्रबंध समिति पुनर्गठित नहीं होती है, तो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा , सदस्यों की पदावधि का विस्तार, ऐसे विस्तार का कारण अभिलिखित करते हुए, ऐसी समाप्ति की तारीख से, और छह माह की कालावधि के लिए, कर सकेगी . निर्वाचन के पश्चात्, यह विस्तारित कालावधि उपधारा ( ३ ) और उपधारा ( ७ ) में यथाविनिर्दिष्ट कालावधि में समायोजित की जाएगी. ".
तथा
निरसन व्यावृत्ति.
३. ( १ ) मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी ( द्वितीय संशोधन ) अध्यादेश , २०१ ९ ( क्रमांक ५ सन् २०१ ९ ) एतद्वारा निरसित किया जाता है .
(२ ) उक्त अध्यादेश के निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंध के अधीन की गई समझी जाएगी.
उद्देश्यों और कारणों का कथन
मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी अधिनियम, १ ९९९ ( क्रमांक २३ सन् १ ९९९ ) की धारा ४ की उपधारा ( ३ ) और उपधारा (७ ) में, यह उपबंधित है कि जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति के अध्यक्ष तथा सदस्यों को, यदि वापस नहीं बुलाया गया हो या हटाया नहीं गया हो तो, नियुक्ति की तारीख से छह वर्ष की कालावधि के लिए, पद पर रहेंगे .
२. अधिनियम के प्रवर्तन के पश्चात्, १७६५ जल उपभोक्ता संथाओं के निर्वाचन कराए गए थे और सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति की अधिसूचना राजपत्र में ४ जनवरी , २०१७ को जारी की गई. इन जल उपभोक्ता संथाओं के अध्यक्ष और ५१२० प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के एक तिहाई सदस्यों की पदावधि ३ जनवरी , २०१ ९ को समाप्त हो गई थी, किन्तु अध्यादेश क्रमांक ३ सन् २०१ ९ दिनांक ८ मार्च, २०१ ९ के अनुपालन में, विभागीय अधिसूचना क्र. ३२/ १८ /२०१ /मध्यम/१४५ दिनांक ९ अप्रैल, २०१ ९ द्वारा पदावधि को, समाप्ति की तारीख ३ जनवरी , २०१ ९ से छह मास की कालावधि के लिए विस्तारित किया गया था, जो ३ जुलाई, २०१ ९ को समाप्त हो रही है , और ९ ३ जल उपभोक्ता संथाओं के ३६० प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के एक तिहाई सदस्यों तथा उसके अध्यक्ष के ३ जुलाई, २०१ ९ को सेवानिवृत्त हो जाने के कारण, यह सभी १७६५+ ९३-१८५८ संस्थाएं प्रभावहीन हो जाएंगी. अतएव , यह आवश्यक है कि उक्त समस्त संस्थाओं की अवधि का, और छह मास की कालावधि के लिए विस्तार किया जाए. निर्वाचन के पश्चात्, यह विस्तारित कालावधि धारा ४ की उपधारा ( ३ ) तथा उपधारा (७ ) में यथाविनिर्दिष्ट कालावधि में समायोजित की जाएगी.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 17 जुलाई 2019
588 ( 1) ३. चूंकि मामला अत्यावश्यक था और विधान सभा का सत्र चालू नहीं था, अतएव, मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी (द्वितीय संशोधन ) अध्यादेश, २०१ ९ ( क्रमांक ५ सन् २०१ ९ ) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किया गया था. अब उक्त अध्यादेश के स्थान पर, राज्य विधान- मण्डल का अधिनियम बिना किसी उपांतरण के लाया जाना प्रस्तावित है.
४. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.
भोपाल :
हुकुम सिंह कराड़ा भारसाधक सदस्य.
तारीख ०८ जुलाई , २०१९.
प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन
प्रस्तावित विधेयक के खण्ड २ द्वारा जल उपभोक्ता संथाओं की प्रबंध समिति के कार्यकाल समाप्त होने तथा पुनर्गठन नहीं किए जाने पर उक्त समितियों के सदस्यों की पदावधि का विस्तार किए जाने के संबंध में विधायनी शक्ति का प्रत्यायोजन राज्य सरकार को किया जा रहा है जो सामान्य स्वरुप का होगा.
अध्यादेश के संबंध में विवरण
१७६५ जल उपभोक्ता संथाओं के अध्यक्ष और ५१२० प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के एक तिहाई सदस्यों की पदावधि ३ जनवरी, २०१ ९ को समाप्त हो गई थी, किन्तु मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी ( संशोधन ) अध्यादेश, २०१ ९ क्रमांक ३ सन् २०१ ९ ( निरसित अध्यादेश ) के अनुपालन में, विभागीय अधिसूचना क्र. ३२ / १८ / १ ९/ २०१ /मध्यम/ १४५ दिनांक ९ अप्रैल , २०१ ९ द्वारा पदावधि को, समाप्ति की तारीख ३ जनवरी , २०१ ९ से छह मास की कालावधि के लिए विस्तारित किया गया था, जो ३ जुलाई, २०१ ९ को समाप्त हो रही थी, और ९ ३ जल उपभोक्ता संथाओं के ३६० प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के एक तिहाई सदस्यों तथा उसके अध्यक्ष के ३ जुलाई , २०१ ९ को सेवानिवृत्त हो जाने के कारण यह सभी १७६५ - ९३-१८५८ संस्थाएं प्रभावहीन हो रही थी. अतएव, यह आवश्यक है कि उक्त समस्त संस्थाओं की अवधि का, और छह मास की कालावधि के लिए विस्तार किया जाए. अतः तत्संबंधी प्रावधान बनाया जाना अत्यावश्यक था . विधान सभा का सत्र चालू नहीं था इस कारण मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागदीारी ( द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, २०१ ९ ( क्रमांक ५ सन् २०१ ९ ) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किया गया था.
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2019 .