मध्यप्रदेश शासन
इसे वेबसाईट www.govtpressmp.nic.in से भी डाउन लोड किया जा सकता है.
सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
भोपाल, शुक्रवार, दिनांक 1 नवम्बर 2019- कार्तिक 10 , शक 1941
क्रमांक 430]
नगरीय विकास एवं आवास विभाग
मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल संचालनालय , नगर तथा ग्राम निवेश , मध्यप्रदेश, भोपाल "कचनार ", ई-5 , पर्यावरण परिसर, अरेरा कॉलोनी, भोपाल-462016
भोपाल, दिनांक 30 अक्टूबर 2019 क्र.-6482-वि.यो. नग्रानि-2019.-
सूचना
एतद् द्वारा यह सूचना दी है कि खजुराहों निवेश क्षेत्र के लिए विकास योजना का प्रारूप म.प्र . नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 (क्र. 23 सन् 1973 ) की धारा 18 की उपधारा (1 ) के उपबंधों के अनुसार दिनांक 31.10.2019 को निम्नानुसार प्रकाशित किया गया है, इसकी एक प्रति संचालनालय की वेब साईट www.mptownplan.gov.in पर तथा कार्यालयीन समय में निम्नलिखित कार्यालयों में निरीक्षण के लिए उपलब्ध हैं
1. आयुक्त, सागर संभाग , सागर, म.प्र.
2. कलेक्टर, जिला छतरपुर, म.प्र.
3. मुख्य नगर पालिका अधिकारी , नगर परिषद्, खजुराहों
4. मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर परिषद्, राजनगर
5. सहायक संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश, जिला कार्यालय छतरपुर म.प्र.
यदि कोई आपत्ति या सुझाव प्रारूप विकास योजना खजुराहों के संबंध में हों, उसे लिखित रूप में सहायक संचालक , नगर तथा ग्राम निवेश, जिला कार्यालय छतरपुर में इस सूचना के म.प्र. राजपत्र में प्रकाशित होने के दिनांक से 30 दिन की अवधि का अवसान होने के पूर्व, सम्यक विचार हेतु प्रस्तुत किया जा सकता है ।
राहुल जैन, संचालक.
859 860
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
भोपाल , दिनांक 01 नवम्बर 2019
क्र.-एफ-03-53-2019-अठारह-5.- भारत के संविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड (3) के अनुसरण में , संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश की सूचना क्रमांक-6482 -विंयो-नग्रानि-2019, दिनांक 30 अक्टूबर 2019 का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतद्वारा प्रकाशित किया जाता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, शुभाशीष बैनर्जी , उपसचिव.
No. - 6482 - D.P. - TCP - 2019.-
Bhopal , the 30th October 2019
NOTICE
Notice is hereby given that the Draft Development Plan for Khajuraho Planning area has been published as under on 31.10.2019 in accordance with the provisions of sub - section [ 1 ] of Section 18 of the Madhya Pradesh Nagar Tatha Gram Nivesh Adhiniyam , 1973 (No.23 of 1973 ) , a copy thereof is available for inspection on Directorate's website www.mptownplan.gov.in and at following offices during office hours namely -
1.Commissioner , Sagar Division , Sagar, (M.P. )
2.Collector , District Chhatarpur, (M.P. )
3.Chief Municipal officer, Nagar Parishad, Khajuraho , Chhatarpur , (M.P. ) 4.Chief Municipal officer, Nagar Parishad , Rajnagar, Chhatarpur, (M.P. )
5.Assistant Director , Town & Country Planning , District office Chhatarpur , If there be any objection or suggesstion with respect to the said Draft Plan , the same may be submitted in writing to the Assistant Director , Town and Country Planning, Chhatarpur, before the expiry of thirty days from the date of publication of this notice in the Madhya Pradesh Gazette for due consideration .
RAHUL JAIN , Director.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(1)
खजुराहो
विकास योजना (प्रारूप)
2031 मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 के प्रावधानान्तर्गत के अंतर्गत प्रकाशित
संचालनालय नगर तथा ग्राम निवेश मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(2)
प्रस्तावना
चंदेलो का कीर्तिस्थल खजुराहो, 13 वी से 17 वी शताब्दी तक पूर्णरूपेण उपेक्षित रहा । इस दौरान इसका निर्माण और परिवेश आंशिक रूप से खंडित होता रहा , किन्तु वर्तमान में यह राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन के क्षितिज पर एक विश्व स्तरीय पर्यटन केन्द्र के रूप में उभरा है । खजुराहो का वह क्षेत्र जो संवेदनशील है, सुरक्षा उपायों के साथ परिवर्तित करते हुये क्षेत्र की समृद्धि हेतु प्रस्तावित विकास योजना में समग्र रूप से विचार का प्रस्तावित किया गया है । पर्यटक सुविधाओ के संवर्द्धन एवं समुचित पर्यटक अधोसंरचना के सृजन, पर्यटन उद्योग में कार्यरत जनसंख्या की सुविधाओके विकास का प्रयास भी विकास योजना में किया गया है, जिसमें मुख्य रूप से राजनगर से बमीठा एवं खजुराहो, जहाँ विकास का दबाव अत्यधिक है, प्रस्ताव सृजित किये गये है । विकास योजना प्रस्तावो की मूल अवधारणा निम्नानुसार है-
1. पुरातत्व महत्व के स्मारको के परिवेश का संरक्षण एवं संवर्द्धन ।
2. एकीकृत भू- दृश्यीकरण (लैण्ड स्केपिंग ) के प्रस्ताव ।
3. विदेशी एवं भारतीय पर्यटको की निवास व्यवस्था ।
4. स्थानीय मूर्ति कला व्यवसाय की संरक्षण ।
5. स्थानिय निवासियों के वर्तमान रिहायशी क्षेत्रो का पर्यावरण सुधार व विस्तार
6. स्थानीय निवासिंयों तथा पर्यटन उद्योग हेतु पेयजल व्यवस्था ।
7. राजनगर एवं बमीठा के सुनियोजित विकास प्रस्ताव ।
8 . स्वीकृत एवं स्वीकार्य भूमि उपयोग के व्यापक एवं व्यवहारिक प्रस्ताव ।
इस क्षेत्र के पर्यटन महत्व को दृष्टिगत रखते हुये विकास योजना में यातायात संरचना का इस प्रकार से सृजन किया गया है कि अतंराष्ट्रीय एवं भारतीय/ स्थानीय पर्यटक जिस अपेक्षा से खजुराहो पहुचते है, उनकी अभिलाषाओ की पूर्ति हो सके ।
विकास योजना बनाने में विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण , खजुराहो, पर्यटन विभाग , राज्य एवं केन्द्र शासन तथा पुरातत्व विभाग के अमुल्य सुझाव एवं अन्य शासकीय, अर्द्धशासकीय संस्थाओ, खजुराहो , राजनगर एवं छतरपुर के नागरिकों का सक्रिय सहयोग प्रशंसनीय है खजुराहो विकास योजना 2011 राज्य शासन के आवास एवं पर्यावरण विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ- 6-205-91 बत्तीस दिनांक 5 जून 1995द्वारा अनुमोदित कर, खजुराहो विशेष क्षेत्र पर प्रभावशील की गयी है ।
इसी उदेश्य से खजुराहो की प्रथम विकास योजना में तत्समय की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुये विकास के प्रस्ताव दिए गये थे । अभी तक हुये नगरीय विकास, जनसंख्या वृद्धि, विकास योजना क्रियान्वयन आदि तथ्यों को ध्यान में रखकर खजुराहो नगर की उपांतरित विकास योजना वर्ष 2031 की अनुमानित जनसंख्या 91,735 की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुये तैयार की गयी है जिसमें भूमि उपयोग एवं नगर विकास के प्रस्ताव के साथ- साथ पर्याप्त अधोसंरचना एवं सेवा सुविधायों के प्रस्ताव भी सृजित किये गये है उक्त प्रस्तावों के क्रियान्वयन हेतु नगर विकास योजना का प्रस्ताव भी विकास योजना में ही समाहित किया हुआ है ।
खजुराहों नगर की यह प्रारूप विकास योजना 2031 जन- सामान्य से आपत्ति एवं सुझाव आमंत्रित करने हेतु प्रकाशित की जा रही है ।
मुझे आशा है कि नागरिक गण अपने व्यवहारिक एवं सृजनशील सुझावों को व्यक्त करेगे ताकि उनके सक्रिय योगदान से इसको अंतिम रूप दिया जाकर प्रभावशील करने में नागरिको एवं पर्यटको की अपेक्षाओ की पूर्ति कर सकेगी ।
(राहुल जैन) संचालक नगर तथा ग्राम निवेश भोपाल मध्यप्रदेश 860(3)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
योजना दल
अपर संचालक
(श्री बी.एन.त्रिपाठी)
संयुक्त संचालक
डॉ. अमित कुमार गजभिये श्री राजेश नागल
सहायक संचालक
श्री बी.पी.दोगने
श्री मनोज गहोदिया
कर्मचारीगण
श्री जयंत शील (मानचित्रकार) श्रीमती शताक्षी मिश्रा (सहा.सू.प्रौ. अधिकारी)
श्री एम.एल. कोल (उपयंत्री)
श्री अरविंद सक्सेना (मानचित्रकार) श्री राकेश मरकाम (सहा.सू.प्रौ. अधिकारी)
कु. रश्मिजैन (सहा. मानचित्रकार)
श्रीमती सरिता ठाकुर (सहा.मानचित्रकार) श्रीमती मानसी गुज्जेवार (कम्प्यूटर ऑपरेटर)
श्री जगदीप मटेले (स्टेनो-टायपिस्ट)
श्री सर्वेश पिड़हा (वरिष्ठ शोध सहा. ) समय- समय पर योजना दल से सम्बद्ध अधिकारीगण / कर्मचारीगण
श्रीमती वर्षा जैन
(सहा. वास्तुविद, सिटॉप)
श्री योगेश पाठक
(सीनियर प्रोजेक्ट फेलो)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(4)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
अध्याय-एक
शहर एवं योजना क्षेत्र का परिचय स्थिति
खजुराहो मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के राजनगर तहसील में अवस्थित है । यह 24.85 ° N उत्तरी अक्षांश एवं 79.93 °E पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है । खजुराहो नई दिल्ली के दक्षिण- पूर्व में लगभग 620 किमी एवं पन्ना से उत्तर पश्चिम मे 40 कि.मी. की दूरी पर है ।
यह भारत में सर्वाधिक लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है । यह शहर प्राचीन एवं विशाल मंदिरों, पत्थरों में उत्कृष्ट नक्काशी के लिए देशी एवं विदेशी पर्यटकों में ताज महल के बाद सबसे अधिक लोकप्रिय स्थल है । यहां राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक पत्थर में खुदे हुऐ प्राचीन और विशाल मंदिरों को देखने आते हैं । चित्र 11: खजूराहो की
स्थिति
KHAJURAHO PLANINIG AREA INDIA
MADHYA PRADESH
MADHYA PRADESH 860(5)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
खजुराहो का इतिहास एवं महत्व
इतिहास के अनुसार, खजुराहो शहर का नाम उसके प्रवेश द्वार के दोनों तरफ स्थित खजूर के पेड़ से है । खजुराहो , गुप्त राजवंश (ई. 4-5 ) में एक महत्वपूर्ण यात्रा मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जाता था । यह शहर उज्जैन और कौशम्भ के बीच गुप्त मार्ग में पड़ता है । यह शहर 11 वीं शताब्दी के मध्यतक राजपूत शासकों, जो चंदेल वंश के थे, उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक राजधानी थी । चंदेल वंश के दौरान इस शहर की प्रांरभिक आबादी (ई 831-1308) मंदिरों और प्रमुख जलाशयों जैसे शिव सागर, प्रेम सागर और खजूर सागर के आसपास थी । चंदेल शासक महोबा में थे, और ग्रामवासी मुख्य आबादी के आसपास बसे हुऐ थे ।
चित्र 12: चंदेल अवधि के दौरान खजुराहो
स्त्रोत: इन्टेक प्रतिवेदन(INTACH Report) , 1998
खजुराहो एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केन्द्र है । खजुराहो खूबसूरत नक्काशीदार मंदिर समूहों के लिए जाना जाता है, जो की यूनेस्को द्वारा वर्ष 1986 में विश्व धरोहर स्थल के रूप में घोषित किए गये और वे 22 विश्व धरोहर स्थल में से एक है । यह शहर हिन्द-आर्य वास्तुकला का अनूठा उदाहरण है, जो विश्व भर में अपने मंदिरों की वास्तुकला एवं उत्कृष्ट मूर्तिकला के लिए जाना जाता है । विश्व प्रसिद्ध खजुराहो मंदिर का निर्माण, चंदेल वंश के शासन के दौरान 9 वीं सदी में किया गया था । खजुराहों में मध्यकालीन हिन्दू एवं जैन मंदिरों का विशाल समूह है जो अपनी सुंदर नक्काशीदार मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है ।
क्षेत्रीय रूपरेखा
क्षेत्रीय स्तर पर , विभिन्न बस्तियों की पैटर्न, इनकी वृद्धि एवं विकास की प्रवृत्ति एंव आन्तरिक जुड़ाव की जानकारी आवश्यक है ।
1.3.1 क्षेत्रीय भूआकृति
केन नदी, खजुराहो के पश्चिमी ओर , 12 किमी की दूरी पर बहती है । नदी दो जिलो कीं सीमाओं को स्पष्ट करती हैः पश्चिम की ओर, छतरपुर, एवं पूर्व की ओर , पन्ना ।
ऐतिहासिक रूप से भी केन नदी क्षेत्र की महत्वपूर्ण नदी है । खजुराहो से 33 किमी की दूरी पर , नदी पर बांध का निर्माण किया गया है, जिसे गंगाउ जलाशय के नाम से जाना जाता है । खजुराहो से 10 किमी की दूरी पर बेनीसागर जलाशय अवस्थित है जिसका जलग्रहण क्षेत्र 8 वर्गकिमी है । यह बांध खुदर नदी पर अवस्थित है ।
क्षेत्र में महत्वपूर्ण छोटी पहाड़ियां, दर पहाड़, गोपी पहाड़ एवं जुस्का पहाड़ हैं जो पश्चिम में हैं एवं दंताला एवं लावण्य पहाड़ियाँ पूर्व में हैं । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860 (6)
Satn
L
Panna
Damoh
DirectorateofTownand CountryPlanning,Bhopal
StateInstituteforTownPlanning Bhopal,MadhyaPradesh MUNICIPALBOUNDARY
PLANNINGAREABOUNDARY
NATIONALHIGHWAY
LOCATIONDISTANCE
DISTRICTBOUNDARY
OTHERROAD
TALUKABOUNDARY
MAJORROAD
STATEHIGHWAY
SAIConsultingEngineersPvt.Ltd Khajuraho RegionalMap
MapNo.-1.1
Legend
FEHRAILWAYLINE
SubmittedBy
Checkedby
Scale
24°0'0"N
24°10'0"N
24°20'0"N
24'40'0"N
24°30′0″N
24°50'0"N
25'0'0"N
25'10'0"N
25°20'0"N
25°30′0″N
Amarplan
Amarpata
80-500E
Mainer
Chitrakoot
Maihar
Raghuranagar
80-500E
80-400E
Uchahara
Vijayraghavgarh
100KM
Kymore
Majhgaw
Nagod
80400€
80-300E
60KM
Murwara UttarPradesh
803002
80-200E
Sharmagar
40 KM
Ajaygyrh
Pawa
Panna
80°10′0″E Gaurihar
Rahi
Chandia
8010080200
80-00F
Amanga
Simanya
Raipurapura Laundi
8000
20KM
79500E 79-500E
RaynagarKhajuraho
Hatla
Ratera
Maharajpur
79400E 19-4008
Samon
Nowgaon
79-300E
Balayagam 79-3002
lowgang
ChhatarpurChhatarpur
79°20′0″E
Patharia
Buxwaha
Badmathera Badamalhera
19200E
Palera
79°10′0″E 79-100E
Banda
amgam
79-00E
Shangarh
Jatara
Banda 79.00€
24°0'0"N
24°10'0"N
24°20'0"N
24°40'0"N
24°30'0"N
25°00'N
24°50'0"N
25°10′0″N
25°20'0"N
25'30'0"N 860(7)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
z
Panna
SAIConsubingEngineersPvtLt
DirectoraleofTownand CountryPlanning,Bhopal
StateInstituteforTownPlanning. BhopalMadhyaPradesh
CONTOUR
PLANNINGAREABOUNDARY
NATONALHIGHWAY
RAILWAYLINE
RAILWAYSTATION
AIRPORT
OTHERROADS
VILLAGEBOUNDARY
MAJORROADS
STATEHIGHWAY
WATERBODY
Khajuraho ContourMap
MapNo.1.2
BUSSTAND
Legend
+
Scale
2446011 20120N
24540N
NO
BOGUE
KRUDAR ARRIVER
KHAJURAHO
ACHNAR
ZATKARA
TIKURI
RAJNAGAGAR
ALGAWAN
TOCHANDRANAGAR 745406
KHAROHI
BAMITHA
195QUE
FROMCHATTARPUR मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(8)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
1.3.2 क्षेत्रीय महत्व
खजुराहो के आर्थिक संबंध, महोबा, पन्ना एवं सतना के शहरी केन्द्रों के साथ हैं । राजनगर एवं खजुराहो, उच्च स्तरीय शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए छतरपुर पर आश्रित हैं । इनटेक (INTACH ) रिपोर्ट " द हेरिटेज रीजन ऑफ खजुराहो " के अनुसार खजुराहो अपने आसपास के 50 गांवों को प्रभावित करता है । आसपास के गांव वाले , पर्यटन उद्योग से जुड़ी सेवाएं देने के लिए नियमित तौर पर खजुराहो आते-जाते रहते हैं ।
प्रशासनिक रूप से राजनगर शहर, राजनगर तहसील का तहसील मुख्यालय है । राजनगर में कृषि उत्पादन बाजार समिति (APMC) बाजार एवं निजी गोदाम हैं जिसके परिणामस्वरूप आसपास के ग्राम आवश्यक खाद्य वस्तुओं की बिक्री एवं खरीद के लिए राजनगर पर अत्यंत निर्भर है । राजनगर में 325 व्यावसायिक प्रतिश्ठान हैं एवं एक साप्ताहिक बाजार भी लगता है । ये प्रतिष्ठान क्षेत्रीय स्तर पर उपयोगी वस्तुओं की पूर्ति करते हैं ।
1.3.3 संयोजकता
खजुराहो शहर आसपास के शहरों से सड़क, रेल एवं वायुमार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है । सड़क:-खजुराहो शहर बमीठा राजनगर राजमार्ग पर अवस्थित है । निकटवर्ती राष्ट्रीय राजमार्ग ( NH - 75 ) है जो छतरपुर एवं पन्ना जिला मुख्यालय को जोड़ती है । खजुराहो , छतरपुर, महोबा, हरपलपुर, सतना, पन्ना, झांसी, ग्वालियर, आगरा , सागर, जबलपुर,
इन्दौर, भोपाल , वाराणसी एवं इलाहाबाद से नियमित एवं सीधी बस सेवाओं से जुड़ा है ।
रेल:- खजुराहो से निकटवर्ती रेलवे स्टेशन महोबा (80 किमी), हरपालपुर (100 किमी), सतना (120 किमी) एवं झांसी (175 किमी) है । मुम्बई, दिल्ली एवं चेन्नई की तरफ आने वाले लोगों के लिए झांसी रेलवे स्टेशन सुविधाजनक है ।
वायु मार्ग:- खजुराहो में एक स्थानीय हवाई अड्डा है जिसे " सिटी एयरपोर्ट खजुराहो" के नाम से जाना जाता है । यह खजुराहो शहर के दक्षिण में 2 किमी. की दूरी पर अवस्थित है । खजुराहो की वायुसेवा दिल्ली, आगरा , वाराणसी एवं काठमाण्डू के साथ जुड़ी है ।
निवेश क्षेत्र का गठन
खजुराहो के प्राचीन मंदिरों के संरक्षण एवं पर्याप्त सामाजिक सुविधाओं के प्रावधान के साथ , ऐतिहासिक मंदिरों के संदर्भ में क्षेत्र में नियोजित विकास पूरा करने के उद्देश्य से, मध्य प्रदेश शासन ने म. प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 64 की उपधारा 1-2 एवं 3 के अंतर्गत, अधिसूचना कमांक एफ-11-6-33 /73 दिनांक 7.6.1973 एवं कमांक 2697/33/75 दिनांक 4.9.75 द्वारा खजुराहो में विशेष क्षेत्र का गठन किया गया । इस विशेष क्षेत्र को पिछली विकास योजना में, स्थानीय योजना क्षेत्र माना गया था । विकास योजना 2031 के लिए उपरोक्त योजना क्षेत्र लिया गया है । साडा के तहत आवरित किया गया कुल स्थानीय योजना क्षेत्र लगभग 104.25 वर्ग किमी है एवं इसमें खजुराहो नगर परिषद , राजनगर नगर परिषद एवं दो ग्राम बमीठा एवं टिकुरी शामिल हैं । 860(9)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
खजुराहो निवेश क्षेत्र में 8 गांव है एवं खजुराहो और राजनगर प्रमुख शहरी बस्तियां है । वर्ष 2001 में खजुराहो नगर परिषद में खजुराहों के अतिरिक्त 4 ग्राम (अचनार, लालगवाँ , जटकारा, खरोही) शामिल हुए । प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए खजुराहो नगर परिषद को 15 वार्डों में विभाजित किया गया है । राजनगर को वर्ष 1998 में नगर परिषद का दर्जा मिला । वर्तमान में राजनगर नगर परिषद में भी 15 वार्ड हैं ।
सारणी क्र. 1 -सा -1 खजुराहो निवेश क्षेत्र का विवरण
गांव का नाम
क्षेत्रफल (वर्गकिमी)
क्र.सं.
3
2
1
59.82
1 खजुराहो (नगर परिषद)
13.78
2 राजनगर (नगर परिषद)
11.20
3 बमीठा
19.45
4 टिकुरी
104.25
कुल
नियोजन प्रयास एवं विकास :
खजुराहो के लिए दो विकास योजना बनी हैं । पहली विकास योजना वर्ष 1978 से 1991 की अवधि के लिए तैयार की गयी थी । दूसरी विकास योजना वर्ष 1995 से 2011 की अवधि के लिए बनायी गयी थी । खजुराहो विकास योजना (1978-1995)
कलात्मक शिल्पों के संरक्षण एवं इन शिल्प स्थलों के परिवेश का सुनियोजित विकास करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश शासन आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 64 की उपधारा (1 ), (2) एवं (3 ) के अंतर्गत, अधिसूचना क. एफ-11-6-33/73 दिनांक 7.6. 1973 एवं क. 2697/33/75 दिनांक 4-9-75 द्वारा खजुराहो में विशेष क्षेत्र का गठन किया है । उक्त निर्धारित 10425 हेक्टर क्षेत्रफल में खजुराहो सहित 8 ग्रामों का समावेश है जिसमें बमीठा एवं राजनगर प्रमुख ग्राम भी शामिल है ।
शासन द्वारा गठित खजुराहो विशेष क्षेत्र के लिए उक्त अधिनियम की धारा 68 सहपठित धारा 18 की उपधारा 1 के अंतर्गत प्रारूप विकास योजना दिनांक 26-10-75 को प्रकाशित की गई थी । मध्यप्रदेश शासन, आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा खजुराहो विकास योजना को उक्त अधीनियम की धारा 19 के आधीन स्वीकृति प्रदान की गई ।
खजुराहो विकास योजना (1995-2011 )
शासन द्वारा गठित खजुराहो विशेष क्षेत्र के लिए म.प्र.नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 19 की उपधारा (1 ) के आधीन राज्य सरकार द्वारा धारा 19 (2 ) के अंतर्गत (सूचना क्र. एफ 6-2-5-91- बत्तीस , दिनांक 5 जुन 1995) अनुमोदित की गई । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(10)
Panna
BamonSatna
DirectorateofTownand
STATION
SEMIGOV!BUILDINGS
CountryPlanning,Bhopal
NOADS
StateInstituteforTownPlanning BhopalMadhyaPradesh
STAND
JPLANAREA
EDUCATION
GOVENMER
AIRPORT
CHURCH
RAILWAYSTATION
TEMPLE
HOTEL
MAJORNOADS
WATERBODY
STATEHIGHWAY
TOUR&TRAVEL
SAN
BUSSTAND
NAIUNALHIGHWAY
Khajuraho PlanningArea
Legend
MapNo.:-1.3
+AINPURT
HHRAILWAYLINC
SubmittedBySAIConsultingEngineersPvt.Ltd
Checkedby
24°46'0"N
24°48'0"N
24°50'0"N
24°52′0″N
24°54'0"N
8000E 80'0'0"E
79-580E
TIKURI
79°58′0″E
KHAJURAHO KHUDARRIVER
ACHNAR
79°56'0"E
ZATKARA
79°56′0″E
RAJNAGAR
LALGAWAN
79-540E
TOCHANDRANAGAR
TORAONAGARKHAJURAHOROAD
79°54′0″E
KHAROHI
BAMITHA
TOMAHOBA
79520E 79°52'0"E
FROMCHATTARPUR
79500E 79500E
24°54′0″N
24°50'0"N
24'48'0"N
24°46'0"N
24°52′0″N 860(11)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल
यूनेस्को( UNESCO) विश्व धरोहर स्थल
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों में शामिल, खजुराहो में 25 स्मारक सम्मिलित हैं, जिन्हें चंदेल राजाओं द्वारा बनाया गया था ।
यूनेस्को ने खजुराहो में स्मारकों के समूह की पहचान की एवं ' सांस्कृतिक धरोहर' के अंतर्गत 28 नवंबर, 1986 को सूचीबद्ध किया । सांस्कृतिक धरोहर में सूचीबद्ध करने के लिए कुछ मापदंड बनाये गये हैं । खजुराहो धरोहर क्षेत्र लालखेड़ी, राजनगर एवं अचनार से सटे क्षेत्र सहित लावण्या, दंताला की पहाड़ियों एवं टिकुरी पहाड़ तक फैला हुआ है ।
1.6.2 भारत के स्मारकों का पुरातात्विक सर्वेक्षण
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ए.एस.आई) द्वारा पहचाने गये स्मारक वही हैं जो युनेस्को विश्व धरोहर द्वारा पहचाने गये हैं । ए.एस.आई एवं युनेस्कों दोनों के द्वारा कुल 25 स्मारकों की पहचान की गई है जिनकी सूची निम्नलिखित सारणी में दी गई है ।
खजुराहो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है जो आमतौर पर अपने प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है , जो शहर के विभिन्न हिस्सों में अवस्थित हैं ।मंदिरों की भौगोलिक अवस्थिति के आधार पर इन सभी मंदिरों को 3 वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है जिनमें से मंदिरों का पश्चिमी समूह बहुत आकर्षक एवं सुन्दर स्मारक हैं । कंडारिया महादेव मंदिर, चतुर्भुज मंदिर एवं लक्ष्मण मंदिर प्रमुख मंदिर हैं जो पर्यटकों के लिये आकर्षण के केन्द्र हैं ।
खजुराहो मंदिरों का पूर्वी समूह
पूर्वी मंदिर समूह में आने वाले मंदिरों का विवरण नीचे सारणी में सूचीबद्ध है :-
सारणी क्र.1 - सा-2: खजुराहो मंदिरों का पूर्वी समूह
विवरण
क्र.सं. मंदिर
आदिनाथ मंदिर
1
जैन तीर्थंकर, आदिनाथ को समर्पित यह मंदिर यक्षिस एवं अन्य मूर्तियों से सजा हुआ है ।
जवारी मंदिर
2
बलुवा पत्थर एवं ग्रेनाइट से बना यह विष्णु मंदिर खजुराहों के मंदिरों में सबसे पुराना मंदिर है ।
3 घंटाई मंदिर
यह एक जैन मंदिर है जिसके भीत्ति चित्र में भगवान महावीर जी की माता जी के 14 अलग-अलग सपने दर्शाये गये हैं इसके अतिरिक्त एक देवी गरूड़ पर बैठी हुई हैं ।
पार्श्वनाथ मंदिर
4
यह इस समूह में सबसे बड़े मंदिरों में से एक है जिसमें सर्वोत्कृश्ट नक्काशी की झलक दिखाई देती है । वर्ष 1860 में स्थापित उत्तरी दीवार की मूर्तिकला मंदिर के प्रमुख विशेाताओं में से एक है ।
5 वामन मंदिर
साधारण वास्तुशिल्प शैली के अलावा यह मंदिर भगवान विष्णु जी के वामनावतार की मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है ।
ब्रह्मा मंदिर
6
यह मंदिर साधारण योजना एवं बनावट के साथ बना है एवं इसका शिखर बलुई पत्थर एवं ढांचा ग्रेनाइट से बना है ।
शांतिनाथ मंदिर
7
यह मंदिर पार्श्वनाथ , आदिनाथ के अतिरिक्त अनेक आधुनिक मंदिर समूहों के साथ अवस्थित है जिनमें से कुछ पुराने मंदिरों के खंडहरों पर हैं एवं शेश आंशिक तौर पर पुरानी सामग्री से बने हुए हैं तथा प्राचीन छवियां प्रदर्शित करते हैं । मंदिर जैन पूजा का मुख्य स्थान है ।
8 हनुमान मंदिर
हनुमान जी की विशाल प्रतिमा, वानर देवता एक आधुनिक मंदिर में स्थित है जो पश्चिमी मंदिर समूह एवं खजुराहो गांव के बीच लगभग मध्य में स्थित है । 9 खाकरा मठ मंदिर
यह जर्जरित वैश्णव मंदिर छोटे टीले पर स्थित है । यहां मंदिर बिना छत के है एवं यहां केवल स्तंभ मंडप ही बचे हैं । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(12)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
खजुराहो मंदिरों का पश्चिमी समूह
पश्चिमी मंदिर समूहों के भीतर पड़ने वाले मंदिरों का विवरण नीचे सारणी में सूचीबद्ध हैं ।
सारणी क्र.1 - सा-3 : खजुराहो मंदिरों का पश्चिमी समूह
विवरण
मंदिर
क्र.सं.
चौंसठ योगिनी
1
खजुराहो के मंदिरों के समूह के बीच यह ग्रेनाइट का अकेला मंदिर है।
2
पूर्वी छोर के सामने यह मंदिर सूर्य भगवान को समर्पित है । चित्रगुप्त मंदिर
देवी जगदंबा मंदिर
3
जगत की देवी को समर्पित, यह छोटा एवं बहुत सुन्दर मंदिर महान मूर्तिकला का नमूना है । यद्यपि प्रारंभिक तौर पर मंदिर भगवान विष्णु के मंदिर के रूप में स्थापित किया गया था, इस मंदिर के गर्भ गृह में जगदम्बा की बहुत बड़ी मूर्ति है जो जगत की देवी है ।
4 कंडारिया महादेव मंदिर यह खजुराहो मंदिर विभिन्न मूर्तियों से सजा है जो भारत की स्थापत्य कलाकृतियों में से एक है ।
लक्ष्मण मंदिर
5
पश्चिमी मंदिरों का सर्वोत्तम एवं पुराना समूह वैष्णव मंदिर है एवं प्रवेश द्वार पर क्षैतिज बीम के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें देवी लक्ष्मी के साथ भगवान ब्रह्मा, भगवान विश्णु एवं भगवान शिव की त्रिमूर्ति है । 6 विश्वनाथ मंदिर
भगवान ब्रह्मा को समर्पित यह मंदिर अपने प्रभावशाली प्रवेश द्वार के लिए प्रसिद्ध है जो अपने दक्षिणी चरणों एवं उत्तरी चरणों के निकट शानदार पत्थर की संरचनाओं की ओर हाथियों की चित्रकारी के साथ विशेष रूप से प्रदर्शित है ।
मतंगेश्वर मंदिर
7
मतंगेश्वर मंदिर खजुराहो के सबसे पवित्र एवं सबसे पुराने मंदिरों में से एक है । यह मंदिर मृत्युन्जय मंदिर के नाम से भी जाना जाता है । 8 वराह एवं लक्ष्मी मंदिर वराह मंदिर की वास्तुकला काफी सरल है एवं बनावट लालगवाँ महादेव मंदिर की तरह है । यह मंदिर लक्ष्मण मंदिर के सामने अवस्थितहै ।
यह मंदिर नंदी (बैल ) को समर्पित है जो भगवान शिव का वाहन था । नंदी मंदिर
9
पार्वती मंदिर
10
पार्वती मंदिर अपनी वास्तुकला एवं मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध है एवं यह विश्वनाथ मंदिर के दक्षिणी- पश्चिमी छोर पर अवस्थित है ।
भगवान शिव का मंदिर छोटा है और वर्तमान में जर्जर अवस्था में है । महादेव मंदिर
11
12
चोपड़ टंकी तीन मंजिला सीढ़ीनुमा टंकी है जो वर्तमान परिदृश्य में जर्जर अवस्था में है ।
चोपड़ अथवा वर्गाकार टंकी
लालगवाँ महादेव मंदिर
13
यह मंदिर चौंसठ योगिनी मंदिर के पश्चिम में स्थित है एवं लालगवाँ सागर नामक पुरानी झील के किनारे बना हुआ है ।
खजुराहो मंदिरों का दक्षिणी समूह
दक्षिणी मंदिर समूहों के भीतर पड़ने वाले मंदिरों का विवरण ब्यौरे के साथ नीचे सारणी में सूचीबद्ध हैं ।
सारणी क्र.1 - सा-4: खजुराहो मंदिरों का दक्षिणी समूह विवरण
मंदिर
क्र.सं.
1 चतुर्भुज मंदिर जटकारी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर एकमात्र कामुक मूर्तिकला से रहित है । 1100 AD में निर्मित यह मंदिर भगवान विश्णु के चार भुजा (चतुर्भुज) की 9 फीट ऊँची 2
नक्काशीदार मूर्ति के साथ अपनी वास्तुकला की पद्धति के लिए प्रसिद्ध है । चतुर्भुज मंदिर के निकट इस मंदिर के टूटे - फूटे भाग पाये गये हैं ।
बीजमंडल मंदिर
3 दूल्हादेव मंदिर घंटाई मंदिर के दक्षिणी छोर पर अवस्थित यह शिव मंदिर, खजुराहो का सबसे नया मंदिर है एवं विभिन्न अलंकृत चित्रों से पर्यटकों को आकर्शित करता है । 860(13)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
जनसंख्या
वर्तमान जनसंख्याः
(अ) आवासीय जनसंख्याः
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार खजुराहो नगर परिषद एवं राजनगर नगर परिषद की जनसंख्या क्रमशः 24,481 एवं 14,253 है जबकि योजना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों की जनसंख्या 10,029 है । वर्ष 2011 में खजुराहो योजना क्षेत्र की कुल जनसंख्या 48,943 थी ।
सारणी क्र.1-सा-5 आवासीय जनसंख्या
जनसंख्या
ग्राम का नाम
क्रम संख्या
3
2
1
24,481
(खजुराहों ) नगर परिषद
14,253
2 (राजनगर) नगर परिषद
5762
3
बमीठा
4,447
4 टिकुरी
48,943
खजुराहो निवेश क्षेत्र
स्त्रोतः भारत की जनगणना, 2011 पर्यटकों की जनसंख्याः
(ब)
खजुराहो अत्यंत प्रतिष्ठित पर्यटक स्थल है अतः यहां भारतीय पर्यटकों के साथ विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में भ्रमण करने आते हैं । पर्यटन विवेचन कार्यालय (टूरिस्ट इंटरप्रिटेशन ऑफीस ) , पर्यटन विभाग , खजुराहो द्वारा उपलब्ध कराये गये आंकडो के अनुसार वर्ष 2012-13 में खजुराहों में भ्रमण करने वाले पर्यटकों की कुल संख्या 4,11,941 थी । खजुराहों में भ्रमण करने वाले भारतीय एवं विदेशी पर्यटकों का विवरण निम्नलिखित सारणी में दिया गया है ।
सारणी क्र.1 - सा-6 : वर्ष 2012-13 में खजुराहों में भ्रमण करने वाले पर्यटकों की कुल संख्या
प्रकार
पर्यटकों की कुल संख्या
2
1
3,12,810
भारतीय
99,131
विदेशी
4,11,941
कुल
स्त्रोतःपर्यटन विवेचन कार्यालय (टूरिस्ट इंटरप्रिटेशन ऑफीस), पर्यटन विभाग, खजुराहो
जनसंख्या वृद्धि
सारणी क्र.1 - सा-7 : खजुराहो की जनसंख्या वृद्धि दर
वर्ष
जनसंख्या
क्र.स.
वृद्धि दर(%)
4
3
2
1
13,958
1971
44.19
20,126
2
1981
25.67
3
1991
25,293
56.28
2001
4
39,528
23.82
5
2011
48,943
स्त्रोतःजनगणना, 2011, जनगणना, 2001, खजुराहो मास्टर प्लान, 2011 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(14)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
जैसा कि उपरोक्त सारणी से स्पष्ट है कि, खजुराहो योजना क्षेत्र, में वर्ष 1971 से वर्ष 2011 तक वृद्धि दर असामान्य है । वर्ष 1991-2001 के दौरान उच्च वृद्धि दर रहा, जो की 56.28 प्रतिशत था जबकि वर्ष 2001-2011 के दौरान निम्न वृद्धि दर रहा , जो 23.82 प्रतिशत था जो की पिछले दशक के वृद्धि दर के आधे से भी कम है ।
घनत्व की पद्धति
खजुराहो नगर परिषद , राजनगर नगर परिषद एवं ग्रामीण आबादी जैसे बमीठा एवं टिकुरी की आबादी का घनत्व निम्नलिखित सारणी में दर्शाया गया है ।
सारणी क्र.1 -सा-8 निवेश क्षेत्र में आबादी के घनत्व की पद्धति
नाम
घनत्व में वृद्धि (%)
घनत्व (2011 ) (व्यक्ति/ वर्गकिमी)
घनत्व (2001 ) (व्यक्ति/ वर्गकिमी)
3
4
2
1
26.94
409.24
322.40
खजुराहो नगर परिषद
14.49
238.26
208.11
राजनगर नगर परिषद
42.03
96.32
67.82
बमीठा
19.03
74.34
62.45
टिकुरी
स्त्रोतः भारत की जनगणना 2001 एवं 2011
उपरोक्त सारणी दर्शाती है कि बमीठा के घनत्व में काफी वृद्धि हुई है क्योंकि यह राष्ट्रीय राजमार्ग 75 पर अवस्थित है । उपरोक्त आंकड़ों के अनुसार खजुराहो नगर परिषद एवं राजनगर नगर परिषद में पिछले दशक में ज्यादा वृद्धि नहीं हुई है ।
अर्थव्यवस्था
अर्थव्यवस्था के अन्तर्गत, उत्पादन, वितरण अथवा व्यापार एवं वस्तुओं की खपत एवं विभिन्न सेवाएं शामिल होती है । अर्थव्यवस्था, किसी भी शहर की वृद्धि एवं विकास की भावी पद्धति का निर्धारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है । खजुराहो की अर्थव्यवस्था में , इस शहर के विश्व धरोहर के तौर पर घोषित होने के पश्चात काफी बदलाव आया है । विकास एवं पर्यटन की गतिविधियों में वृद्धि से शहरीकरण को बढ़ावा मिला ।
योजना क्षेत्र में कुल कार्यबल भागीदारी (work force participation ) दर 34 प्रतिशत है । सबसे ज्यादा कार्यबल भागीदारी दर टिकुरी गाँव (41 प्रतिशत) के बाद राजनगर नगर परिषद (30 प्रतिशत ) में देखा गया है । अर्थव्यवस्था की सबसे ज्यादा निर्भरता पर्यटन और कृषि क्षेत्र पर है ।
1.8.1 अर्थव्यवस्था के क्षेत्र
योजना क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्यतः प्राथमिक एवं तृतीयक क्षेत्रों पर आधारित है । शहर में एवं शहर के निकट कोई औद्योगिक गतिविधि विद्यमान नहीं है । 860(15)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
Sato
Panna
Damon
DirectorateofTownand CountryPlanning,Bhopal
StateInstituteforTownPlanning BhopalMadhyaPradesh
HERITAGESITE
NATONALHIGHWAY
PLANNINGAREABOUNDARY
RAILWAYSTATION
OTHERROADS
VILLAGEBOUNDARY
MAJORROADS
VILLAGEAABADI
STATEHIGHWAY
WATERBODY
Khajuraho HeritagePlan
200mBUFFER
100mBUFFER
MapNo.:-1.4
BUSSTAND
HRAILWAYLINE
Legend
+AIRPORT
SubmittedBySAIConsultingEngineersPvt.Ltd
Checkedby
Scale
24°46'0"N
24°48'0"N
24°50′0″N
24°52′0″N
24°54'0"N
80.00E 8000E
79°58′0″E
TIKURI
79°58'0"E
KHAJURAHO KHUDARRIVER
ACHNAR
79°56'0"E
ZATKARA
79°56′0″E
GAN
RAJNAGAR
LALGAWAN
79-5410E
RAJNAGARKHAJURAHOROAD
*TOCHANDRANAGAR 79°54′0″E
KHAROHI
BAMITHA
TO MAH
79°52′0″E 79°52'0E
FROMCHATTARPUR
79-50°0°F 79500E
24°46'0"N
24°48'0"N
24'50'0"N
24°52'0"N
24°54'0"N मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860( 1(16)
Y
Satn
Panna
Damoh
DirectorateofTownand CountryPlanning,Bhopal
StaleInstituteforTownPlanning, BhopalMadhyaPradesh MapNo.:1.5
RAILWAYSTATION
NATONALHIGHWAY
Khajuraho PopulationDensity
51-100
MAJORROADS
VILLAGEBOUNDARY
16-30
WATERBODY
OTHERROADS
31-50
STATEHIGHWAY
100>
BUSSTAND
<15
PopulationDensity(Persons/Hact.)
1PLANNINGAREABOUNDARY
Scale
Legend
Checkedby
SubmittedBySAIConsultingEngineersPvt.Ltd.
HERAILWAYLINE
+AIRPORT
24°46'0"N
24°48'0"N
24°50′0″N
24°52′0″N
24°54'0"N
80-00E 80°00'E
79-580E
TIKURI
79°58'0'8'0"E
KHUDARRIVER
KHAJURAHO
ACHNAR
79-56'0°F
ZATKARA
79-56'0"E
RAJNAGAR
11
1519
10
LALGAWAN
79-540E 14
TOCHANDRANAGAR
ROAD TORAJNAGARKHAJURAHORO
13
9
79°54'0"E
KHAROHI
BAMITHA
15
79-520E 79°52'0"E
FROMCHATTARPUR
79500E 79°50′0″E
24°46'0"N
24°48'0"N
24°50'0"N
24°52'0"N
24°54'0"N 860(17)
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 नवम्बर 2019
= खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
पर्यटन
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, कामकाजी आबादी का 56 प्रतिशत (अन्य कामगार ) प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तौर पर पर्यटन क्षेत्र में कार्यरत है । पर्यटन गतिविधि के कारण खजुराहो शहर की अर्थव्यवस्था, आसपास के क्षेत्र की तुलना में उन्नत है ।
चित्र 1.3 : खजुराहो में एम.पी.एस.टी.डी.सी. होटल
HOTEL JHANKA
म.प्र . राज्य पर्यटन सांख्यिकी की रिपोर्ट अनुसार खजुराहों में 1410 बिस्तरों की क्षमतायुक्त कुल 35 होटल हैं । तीन होटल एम.पी.एस.टी.डी.सी. ( MPSTDC) द्वारा संचालित किये जा रहे हैं जबकि 26 होटल निजी स्वामित्व में हैं । खजुराहो में होटल उद्योग में 621 कर्मचारी प्रत्यक्ष तौर पर जुड़े हुए हैं । भारत में बेरोजगारी पर एक समीति की रिपोर्ट, 1973 के अनुसार, इस उद्योग की सहायता करने वाले क्षेत्र में सृजित रोजगार, होटल उद्योग में सृजित प्रत्यक्ष रोजगार का सीधा नौ गुना है ।
म.प्र. विरासत न्यास ने खजुराहो के आसपास 42 गांवों की पहचान की है जो स्व - सहायता समूह एवं कुटीर उद्योगों का विकास करके पर्यटन से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तौर पर लाभान्वित हो सकते हैं ।
चित्र 1.4 : शिल्प ग्राम शिल्प ग्राम
शिल्प ग्राम की कल्पना और स्थापना इसलिए की गई थी, ताकि ग्रामीण माहौल में आवास के साथ कार्य स्थल में शिल्पकारों , कारीगरों एवं प्रस्तुतिकरण देने वाले कलाकारों को उपलब्ध कराया जा सके और कलाकार, स्थानीय लोगों को आकर्षित करने के अलावा विदेशी दर्शकों को भी आकर्षित कर सकें ।
चित्र 1.5: खजुराहो में इंपोरियम शिल्पग्राम में निम्नलिखित सुविधाएँ विद्यमान हैं: -
KUBER
वर्क शेड/स्थायी पवेलियन
इसका उपयोग आने- जाने वाले शिल्पकारों के शिल्प के प्रदर्शन एवं उत्पादन के लिए , किया जाता है ।
सेल्स इंपोरियम
शिल्पग्राम में वहीं उत्पादित शिल्पों की केन्द्रीकृत बिक्री के लिए सेल्स इंपोरियम भी विद्यमान हैं ।
शयनागार
शिल्पग्राम में आने - जाने वाले शिल्पकारों एवं प्रदर्शन करने वाले कलाकारों के लिए आवासीय क्षेत्र के तौर पर 6 शयनागार विद्यमान हैं ।
स्थानीय लोग मूर्ति निर्माण एवं कलाकृति बनाने के काम से जुड़े हुए हैं । शिल्पग्राम इन कलाकारों को पर्यटकों के सामने अपनी दस्तकारी एवं निर्मित उत्पाद दिखाने का मंच प्रदान करता है । शिल्पग्राम के अलावा यहां इंपोरियम भी विद्यमान हैं, जो इन मूर्तियों एवं कलाकृतियों इत्यादि की बिक्री करते हैं एवं यहां तक कि, इन वस्तुओं का निर्यात भी किया जाता है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(18)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
खजुराहो में पश्चिमी मंदिर समूह के निकट बाजार में कम महंगे नग , पीतल की मूर्तियां, हस्तशिल्प एवं जवाहरात की दुकानें भी विद्यमान हैं । जवेरी मंदिर के रास्ते में हस्तशिल्प की दुकानें हैं । शिवसागर झील के निकट चंदेला इंपोरियम में शिल्प एवं आभूषणों का विशाल संग्रह है । खजुराहो कपड़ा बुनाई के लिए भी काफी प्रसिद्ध है । कुछ आम शापिंग स्थलों में गोल मार्केट, ओसवाल काम्पलैक्स, सिटी सेंटर एवं सेवाग्राम इत्यादि शामिल हैं ।
कृषि
स्थानीय लोगों की, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि पर अधिक निर्भरता है, जो कि टिकुरी क्षेत्र में सबसे अधिक है । यहां का कृषि क्षेत्र, मध्य प्रदेश के ज्वार - गेहूं उत्पादन क्षेत्र में पड़ता है । क्षेत्र के प्रमुख कृषि उपजों में गेहूं, ज्वार, मक्का, तिल, सोयाबीन, चना एवं सरसों इत्यादि शामिल हैं ।
चित्र 1.5: राजनगर की मंडी बंजर भूमि, सिंचाई की सुविधाओं का अभाव एवं खेती की अवैज्ञानिक विधि, कृषि पर आश्रित लोगों की आर्थिक स्थिति के लिए कारणभूत है । यह क्षेत्र , एक अल्प कृषि क्षेत्र है । जिसमें ठोस चट्टान के केवल 2 फीट ऊपर मिट्टी की पतली परत है । इंटेक ( INTACH ) बेल्जियम के जोन डी'हल्सर के अध्ययन के अनुसार, खजुराहो में वर्ष 2006 से 2008 तक लगातार तीन वर्षों से, बारिश में भारी गिरावट आई थी जिसके परिणाम स्वरूप बहुत कम भूमि का उपयोग कृषि के लिए हुआ है ।
राजनगर , एक तहसील मुख्यालय होने के कारण यहाँ वर्ष 1974 मे एक मंडी स्थापित की गयी जो कि करीब 2,06,971 लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही है । यह मंडी अपने इलाके में 177 गांव सहित कृषि उपज के लिए क्षेत्रीय व्यापार की भूमिका निभा रही है । वर्ष 2010-11 में मंडी 421.55 मेट्रिक टन उपज बिक्री के लिए आई थी । (Source:http: //agmarknet.nic.in/profile/profile online /displayformdetails.asp ? mkt= 2728)
क्षेत्र के अधिकांश किसान सामुदायिक बीज बैंक से जुड़े हुए हैं जिससे किसान एक निश्चित राशि पर बीज मुफ्त में प्राप्त करते हैं, इस शर्त पर कि वे खेती के बाद, बीज की उक्त राशि (एक चौथाई जोड़कर) वापिस करेंगे । बीज बैंक रानी बाग में स्थित है । राजनगर में पटेरिया के बाग में एक बीज की दुकान है । 860( 19 )
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
चित्र 1.6: वाणिज्यिक प्रतिश्ठान वाणिज्य एवं उद्योग
योजना क्षेत्र में कोई बड़े उद्योग विद्यमान नहीं हैं । क्षेत्र में कुछ छोटे गृह उद्योग विद्यमान हैं । ये उद्योग पर्यटन से संबंधित गतिविधियों की पूर्ति कर रहे हैं । खजुराहों के एंपोरियम एवं दुकानों में अपने उत्पादनों जैसे कि, मूर्ति एवं पीतल के बर्तनो की आपूर्ति का कार्य कर रहे है ।
खजुराहो में लगभग 176 एवं राजनगर में 352 वाणिज्यिक प्रतिष्ठान विद्यमान हैं । ( स्त्रोतःखजुराहो एवं राजनगर शहर विकास योजना (CDP) )
राजनगर में वाणिज्यिक गतिवधियां शहर के मुख्य सड़कों के समानान्तर हैं । विशेष उपयोगी वस्तुओं का बाजार केवल कुछ हिस्सों में फैला हुआ है । राजनगर से निर्यात होने वाले प्रमुख वस्तुओं में रेडीमेड गारमेंट एवं पीतल के बर्तन हैं । खजुराहों के लोग इस तरह की गतिविधियों के लिए राजनगर पर आश्रित हैं । खजुराहों में वाणिज्यिक गतिविधियां मुख्य तौर पर खजुराहों के पर्यटकों की आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहे हैं । खजुराहों एवं राजनगर के बीच एक मजबूत आर्थिक संबंध है ।
1.8.2 संभावनाए एवं मुद्दे
संभावनाएँ:
खजुराहों को ईको बिजनेस सिटी ( Eco Business City) के रुप मे विकास करने के प्रस्ताव से यहां के लोगो की आर्थिक परिस्थिति में सुधार आ सकता है ।
शहर में समृद्ध विरासत की उपस्थिति, सेवा क्षेत्र मे विकास की अपार क्षमता दर्शाती है जो स्थानीय लोगो की अर्थव्यवस्था में सुधार ला सकती है ।
राजनगर शहर में गोदाम अवस्थित होने की वजह से राजनगर में कृषि उघोग विकसित होने की क्षमता है ।
मुद्दे:
स्थानीय लोगों की आमदनी का प्रमुख स्त्रोत पर्यटन है । खजुराहो की अर्थव्यवस्था की उन्नति के लिए रचनात्मक कदम उठाने की जरूरत हैं ।
होटल उद्योग के अलावा अन्य क्षेत्रों में कोई निजी निवेश नहीं है जो अर्थव्यवस्था के सुधार ला सके । स्थानीय लोगों की अर्थव्यवस्था में सुधार लाने में विभिन्न रोजगार योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए और अधिक सरकारी प्रयास किए जाने की जरूरत हैं ।
द्वितीयक क्षेत्र में बहुत कम प्रतिष्ठान हैं । क्षेत्र में लघु एवं मध्यम स्तरीय उद्योग विद्यमान नहीं हैं । खजुराहो इको- बिजनेस सिटी का दृष्टिकोण अर्थव्यवस्था में सुधार लाने का एक अभिनव तरीका है लेकिन योजना बनाते समय शहर के विश्व धरोहर स्मारको के अस्तित्व के बारे में विचार नहीं किया गया है । 860(20)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
विकास योजना का लक्ष्य एवं उद्देय
परियोजना का प्रमुख लक्ष्य खजुराहो शहर के लिए संतुलित, मध्यम एवं प्रगतिशील विकास योजना का प्रारूप तैयार करना है । विकास योजना 2031 , शहर में एवं उसके आसपास वर्तमान विकास का आंकलन करेगा । इस विकास योजना के अन्तर्गत वर्तमान में एवं प्रक्षेपित योजना की अवधि के लिए सड़क, जल आपूर्ति एवं जल निकास जैसे बुनियादी सुविधाओं से संबंधित मुद्दों को सावधानी पूर्वक अध्ययन किया गया है । विकास योजना 2031 में शहरी समस्याओं एवं उनके समाधान को संबोधित किया गया है । विकास योजना 2031 के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं ।
. क्षेत्र में नियोजित तरीके से शहरी विकास का संवर्धन, नियंत्रण एवं मार्गदर्शन करने के लिए विकास योजना का सार्थक प्रारूप तैयार करना ।
अनाधिकृत निर्माण एवं भू उपयोग के प्रतिकूल विकास को रोकना ।
शहरी गरीबी का उन्मूलन , स्ट्रीट वेंडरों का पुनर्वास , बुनियादी ढाँचे का विकास , सामुदायिक सुविधाएँ इत्यादि के लिए प्रस्ताव ।
आवासीय , वाणिज्यिक , विरासत संरक्षण , आवास, यातायात एवं परिवहन के लिए प्रस्ताव ।
जीवन की उन्नत गुणवत्ता के लिए शहरी क्षेत्रों में पर्याप्त बुनियादी ढाँचे की योजना ।
पर्यटन क्षेत्र के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के उपायों का सुझाव देना ।
विकास योजना के प्रस्ताव का क्रियान्वयन के लिए कार्यनीति का विवरण देना ।
कार्यशालाओं , सेमीनार इत्यादि के माध्यम से जन भागीदारी की योजना ।
अनौपचारिक क्षेत्र के लिए नियोजन ।
योजनाओं के माध्यम से हस्तशिल्प , स्थानीय शिल्प व्यवसाय को बढ़ावा देना । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(21) खजुराहो विकास योजना (प्रारूप ) 2031
अध्याय-दो
नियोजन दृष्टिकोण एवं कार्य प्रणाली 2.1 सेटेलाईट छवि, सांख्यिकी एवं केडेस्ट्रल मानचित्र का संग्रहण
सलाहकार ने भौगोलिक सूचना प्रणाली जी.आई.एस. साफटवेयर मे सभी मानचित्र तैयार किये है जिसके लिए आर्क जी.आई.एस. साफ्टवेयर का प्रयोग किया हैं । खजुराहो शहर के मानचित्रों की तैयारी के लिए सलाहकार द्वारा सेटेलाईट छवि का उपयोग किया गया है ।
चित्र 2.1 : सेटेलाईट छवि File Edt Yow Rocinarksheet Selection Tools window
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Daplay Source Selection
A
नगर पालिका की सीमाएँ, वन क्षेत्र की सीमाएँ एवं विभिन्न विभागों की भावी परियोजनाओं के रूप में डाटा विभिन्न स्रोतों से विभिन्न प्रारूपों में एकत्रित किए गये थे । हार्ड कॉपी के रूप में केडेस्ट्रल मानचित्र सलाहकार ने एस.एल.आर. (अधीक्षक भू-अभिलेख ) से प्राप्त किए थे । भू संदर्भित उपग्रह छवि, मूल संदर्भ के तौर पर लिए गये थे ।
आधार मानचित्र के लिए विभिन्न स्त्रोतों से एकत्रित जानकारी में निम्नलिखित शामिल है ।
हार्ड कॉपी के रूप में, खसरा मानचित्र , सर्वेक्षण की संख्या एवं सीमा सहित एस.एल.आर. से प्राप्त किए गये थे ।
खजुराहो एवं राजनगर की नगर परिषद् की सीमा जे.पी.ई.जी. (. jpeg ) प्रारूप में प्राप्त की गयी थी । हार्ड कॉपी में विकास योजना के मानचित्र ।
हार्ड कॉपी में वन क्षेत्र की सीमाऐं वन विभाग से ।
भावी परियोजनाओं के विवरण विभिन्न विभागो से प्राप्त किए गये थे ।
2.2 उपग्रह चित्र के आधार पर आधार मानचित्र की तैयारी
आधार मानचित्र मौलिक डेटा सेट (महत्वपूर्ण भौतिक विशेषताएँ जैसे सड़क, रेलवे नेटवर्क, नदियां , सीमाएँ , विद्यालय , अन्य ऐतिहासिक स्थल इत्यादि) दर्शाता है जिसका उपयोग क्षेत्र के लिए अधिक सार्थक डाटा प्रस्तुत करने में किया जाता है । एक आदर्श मानचित्र में आसानी से दिखाई देना चाहिए की मानचित्र पर कहाँ पर खास विशेषता स्थित है । सड़क, ऐतिहासिक स्थल एवं अन्य स्थल जो मानचित्र में शामिल किया गया है, वह स्थानिक एवं जमीनी स्थिति के अनुरूप है । क्षेत्र सम्बन्धी डाटा के साथ आधार डाटा का प्रदर्शन अथवा विश्लेषण, प्रभावी एवं बहुश्रुत निर्णय लेने में सहायता करता है । भू- संदर्भित आधार मानचित्र, अलग -अलग मानचित्रण आवश्यकताओं के लिए एक आधार के रूप में कार्य करता है जबकि अन्य सभी विषयक मानचित्र स्थानिक विश्लेषण प्रदर्शित करते हैं । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(22)
खजुराहो विकास योजना (प्रारूप ) 2031
आधार मानचित्र की विषय वस्तु इसमें आधार मानचित्र की विशेषताओं की सूची शामिल है जिन्हें इसमें जोड़ने की आवश्यकता है जैसे सही निशान / भौगोलिक निर्देशांक, सीमाएँ, प्राकृतिक विशेषताएँ जैसे प्रमुख नदियाँ, मानव निर्मित विशेषताएँ जैसे परिवहन नेटवर्क, पुल, महत्वपूर्ण स्थल / स्थान एवं अन्य स्थानीय विशेषताएँ, डाटा के लिए स्रोत, आबादी क्षेत्र, जनोपयोगी विशेषताएँ, भौगोलिक संदर्भ के साथ प्रशासनिक इकाईयाँ इत्यादि ।
इस आधार मानचित्र का उपयोग अनेक उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जैसे वर्तमान विकसित क्षेत्रों का मानचित्रण , वर्तमान भू उपयोग, यातायात एवं परिवहन योजना , बुनियादी सेवाओं के प्रावधान इत्यादि । आधार मानचित्र तैयार करने में स्थलाकृतिक शीट के स्वरूप में डाटा , नगर परिषद वार्ड मानचित्र , कॅडस्ट्रल सम्बन्धी मानचित्र को संकलित एवं समायोजित किया जाता है ।
सारणी क्र. 2 - सा-1 जिला एवं स्थानीय प्रशासनिक सीमाएँ
जिला एवं स्थानीय प्रशासनिक सीमाऐं
प्रशासनिक सीमाएँ
2
1
सड़क
परिवहन नेटवर्क
राष्ट्रीय राजमार्ग ( NH ) , राज्य राज मार्ग (SH ) , प्रमुख सड़क , ग्रामीण सड़क , बस टर्मिनल , पुल एवं अन्य भवन / भवन खंड , खाली / खुले स्थल , पार्क / क्रीड़ा स्थल , अभिन्यास, निर्मित क्षेत्र
सार्वजनिक एवं अर्ध सार्वजनिक जनोपयोगी सुविधाएँ
नदी, धारा , नाला इत्यादि
जल निकास
जलाशय / झील , टंकी, तलाब , नहर
जलाशय
जनोपयोगी सुविधाएँ
उच्च विद्युत शक्ति लाईन ( हाई टेंशन लाईन) , प्रशोधन संयत्र , विद्युत उप स्टेशन, इत्यादि
आधार मानचित्र को बनाए जाने के लिए निम्नलिखित व्यापक चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई गयी हैं । डाटा दो स्वरूपों में हो सकता है तकनीकी विवरण एवं पेपर मानचित्र । तकनीकी विवरण से लिए गये संख्यात्मक डाटा को सांकेतीकरण कर लेना एक महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष कदम है जो बाद में बिंदुओं या आकृतियों में परिवर्तित होता है ।
स्थानिक डाटा अधिकांशतः रेखीय प्रपत्र (मानचित्र, हवाई फोटोग्राफ इत्यादि) में उपलब्ध होता है । Analog Data / मानचित्र का डिजिटल प्रारूप में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को अंकीकरण कहते हैं । यह भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) में डाटा इनपुट एवं संग्रहण की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक है । इस प्रक्रिया में मानचित्र में, सड़क, जल निकाय, भौतिक सीमा इत्यादि जैसे स्वरूपों को डिजिटल स्वरूप में बदला जाता है ।
भू संदर्भित उपग्रह छवि को आधार के रुप में लेकर, खसरा (केडेस्ट्रल ) मानचित्र का इस पर समन्वय किया गया था । उपग्रह छवि के साथ भू- मानचित्रों के स्थानान्तरण एवं असंतुलन का संशोधन , आर्क जीआईसी सॉफ्टवेयर में भौगोलिक विश्लेषण के साधनो का उपयोग करके किया गया था । राजस्व खसरा मानचित्र एवं उपग्रह छवि भौगोलिक आधार पर तैयार किए गये थे एवं एक दूसरे पर ओव्हर - ले किये गये थे । यह आधार मानचित्र के लिए प्रारंभिक मानचित्र का गठन करता है । आधार मानचित्र का उपयोग अनेक उद्देश्यों के लिए किया गया था जैसे प्रशासनिक सीमाओं एवं वन क्षेत्र की सीमाओं इत्यादि के मानचित्र में ।
इसे जीआईएस सोफ्टवेयर का उपयोग करके किया जाता है । इस सोफ्टवेयर का फायदा यह है कि इसमें अंकरूपण के बाद प्रत्येक इकाई के लिए विशेष डाटा भी तैयार किया जा सकता है । यह विशेष डाटा सारणीबद्ध स्वरूप में आमतौर पर गैर ज्यामितीय प्रारूप है, पर एक यथोचित संरचना पर भी कार्य किया गया है जो डाटा बरकरार रखने में मदद करता है । 860(23 )
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 नवम्बर 2019
- खजुराहो विकास योजना (प्रारूप) 2031
आधार मानचित्र की तैयारी
एक बार जब छवि की प्रक्रिया पूरी की गयी उसके पश्चात विभिन्न परतों एवं विशेषताओं का वर्गीकरण किया गया था । उपग्रह छवि के अनुसार उपलब्ध विभिन्न भू आकृति एवं भौगोलिक विशेषताएं चिन्हित की गयी थी एवं मानचित्र में सम्मिलित की गयी थी। स्थानिक डाटा अधिकतर अनुरूप स्वरूप (मानचित्र, हवाई फोटोग्राफ इत्यादि) में उपलब्ध हैं । डिजिटल प्रारूप में अनुरूप डाटा / मानचित्र के रूपांतरण की प्रक्रिया, अंकरूपण के तौर पर जानी जाती है । यह भौगोलिक सूचना प्रणाली (जी.आई.एस.) में डाटा इनपुट एवं भंडारण की सबसे महत्वपूर्ण तकनीक है । इस प्रक्रिया के दौरान मानचित्र में विभिन्न परतों को छवि के स्वरूप में जैसे सड़कों, जल निकायों, भौतिक सीमाओं इत्यादि को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित किया जाता है ।
यह गैर ज्यामितीय गुण युक्त प्रारूप में यह विशेष डाटा आम तौर पर सारणीबद्ध है । एक उचित निर्देशिका तैयार की गयी जो डाटा का सुरक्षित रखने में मदद करती है । पहले चरण में दिशाकरण की त्रुटियों का संशोधन करने के लिए ओवरशूट , अंडरशूट जैसे साधनों का उपयोग किया गया है ।
Final Output
Data
Attribution
Superimposed Map
Spatial Adjustment/
Geo- referencing
CadastralMap
Satellite Imagery मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(24)
खजुराहो विकास योजना (प्रारूप) 2031
2.3 योजना क्षेत्र का भौतिक सर्वेक्षण एवं वर्तमान भू उपयोग मानचित्र की तैयारी
चित्र 2.2 : भू सर्वेक्षण योजना क्षेत्र के आकृति विज्ञान को समझने के लिए , वर्तमान भूमि उपयोग का मानचित्र बनाना जरुरी था । इसमें विभिन्न जगहों पर होने वाली गतिविधिर्या, शहर के विकास की सीमा, प्रकार आदि शामिल हैं । कन्सल्टॅन्ट के दल द्वारा शहर के भू उपयोग के अंकन के लिए व्यापक भू सर्वेक्षण किया गया ।
भू उपयोग सर्वेक्षण करने के लिए, कुछ महत्वपूर्ण परतें जैसे नगर पालिका की सीमाएँ , गावों की सीमाऐं इत्यादि को उपग्रह छवि पर लगाया गया था । योजना क्षेत्र का सर्वेक्षण करने के लिए योजना क्षेत्र को ग्रिड में विभाजित किया गया था । शीट के प्रत्येक ग्रिड के क्षेत्र को साथ में सटे शीटों के साथ समायोजित करने के लिए लगाया गया था । भू उपयोग का सर्वेक्षण का संचालन करने में परामर्शदाता द्वारा सर्वेक्षण करने के लिए एक दल गठित किया गया था । सर्वेक्षण दल को सर्वेक्षण का संचालन करने के लिए उपग्रह छवि के साथ एक हार्ड कॉपी का प्रिंट दिया गया था एवं इसकी कोडिंग के साथ शीट में भू उपयोग का कोड चिन्ह निर्दिष्ट किया गया था ।
सर्वेक्षण दल ने संबंधित कोड के साथ शीट पर आवासीय, वाणिज्यिक , सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक, जनोपयोगी सेवा जैसी विशेषताओं को अंकित किया । एक बार जब सर्वेक्षण हो गया उसके बाद हार्ड कॉपी में विद्यमान सर्वेक्षण कोड शीट के डाटा सॉफ्टकॉपी में परिवर्तित कर दिये गये थे । डाटा का यह रूपांतरण जी.आई.एस. का प्रयोग करके किया गया था । सर्वेक्षण के विवरण के अनुसार विभिन्न पॉलीगोन में समुचित भू उपयोग की विशेषताएं निर्दिष्ट की गयी थीं । विवरणों को शामिल करने के बाद मौजूदा भू उपयोग मानचित्र तैयार किया गया था ।
भू उपयोग की तैयारी की प्रक्रिया को निम्नलिखित चार्ट में दर्शाया गया है । 860(25)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना (प्रारूप) 2031
चित्र 2.3: भू उपयोग की तैयारी की प्रक्रिया दर्शाती सारणी
Procurement of
Cadastral Maps
Procurement of Data & Mapsfrom various Government Departments
Geo referencing of
Cadastral Maps
Feature Extraction from Satellite Imagery
Quality Check
+
Road
WaterBody
Digitization of Cadastral
Maps
Drains
Railway
Airport
Quality Check
+
Builtup
Village Settlements
Quality Check
Edgematching of Village Boundaries & generation of Seamless Revenue Map for Local Area
Base Map finalisation through Ground checking
Quality Check
+
Land use survey
Integration of Seamless Revenue Map With Feature Extracted from Satellite Imagery
Land use attribution
BaseMap
Land UseMap
Final ELU Map
On ground verification ofLand useMap
Preparation of Thematic Maps based on data
Stakeholder Consultation
analysis viz .
↓
Contour Map
DensityMap
Preparation of Concept
Plan
Map Showing Heritage
Monuments
Existing Traffic & Transportation Map
Finalisation of Concept
Plan with Directorate of
T& CP
Preparation of
Proposed Land Use
Map (PLU)
Publication of PLU by
Directorate ofT& CP
Final Proposed Land UseMap
Incorporation of Changes if any after publication मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(26)
खजुराहो विकास योजना (प्रारूप ) 2031
भू उपयोग के मानचित्र की तैयारीचरणबद्ध तरीके से किया गया है । इन चरणों का उल्लेख नीचे किया गया है ।
रेखाचित्र 2.1 : भू उपयोग की तैयारी के चरण
वर्तमान भू उपयोग की चरण - वार तैयारी
चरण 2: सड़कों का अंकरूपण
चरण 1: उपग्रह छवि
चरण 3: फुटप्रिंट का अंकरूपण
चरण 4: जल निकायों एवं प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों का अंकन 860(27)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
- खजुराहो विकास योजना (प्रारूप) 2031
2.4 विषयक एवं प्रस्तावित भू उपयोग का मानचित्र
वे सभी विषयक मानचित्र तैयार किए गये हैं जो समुचित विश्लेषण एवं शहर की वर्तमान स्थिति के अध्ययन में अपेक्षित होंगे । इनके आधार पर प्रस्तावित भू उपयोग के मानचित्र तैयार किए गये है ।
Proposal Maps
Analysis & Overlays
Thematic Maps
Existing Land Use Map
Linking Data
BaseMap
Cadastral Map superimposition
Satellite Imagery मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(28)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
अध्याय-तीन
वर्तमान भू उपयोग 3.1 शहर के स्थानिक विकास की प्रवृत्ति
3.1.1 खजुराहो शहर
रेखाचित्र 3.1: वर्ष 2004 में खजुराहो का स्थानिक विकास
GovtColony:
ManjoorNagar
CoreArea
Khajuraho villege
2004का चित्र
रेखाचित्र 3.2 : वर्ष 2014 में खजुराहो का स्थानिक विकास
Govt Colony
Laiguan
Grawtiralong
ha
Khajuraho-LalquanRoad
ManjoorNagar
Co
Growth siang
Khajuraho Laiguan
Khajurang village
Growtihalong Khajuraho-
कुल मिलाकर शहर का चरित्र अर्द्ध शहरी है एवं अभी भी स्थानीय लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि संबंधित है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(29) - खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
शहरीकरण की दर बहुत धीमी है जिसका प्रमुख कारण लोगों की कमजोर आर्थिक स्थिति है । योजना क्षेत्र में कोई भी प्रमुख उद्योग नहीं हैं । खजुराहो में शहरीकृत क्षेत्र कुल नगर परिषद क्षेत्र का केवल 15 प्रतिशत है ।
शहर के मूल क्षेत्र में घर मुख्य तौर पर पक्के एवं अर्द्ध पक्के हैं जबकि सीमावर्ती क्षेत्रों में अधिकांश घर कच्चे हैं । खजुराहो में सर्वत्र छिट- पुट विकास है जिसमें खरोही , अचनार, सेवाग्राम, शांति नगर इत्यादि जैसी बस्तियां शामिल हैं । लेकिन मंदिर परिसर शहर के विकास के केन्द्र के तौर पर है । मंदिर परिसर के निकट अधिकांश आवासीय एवं व्यापारिक गतिविधियां हैं । इस प्रकार शहर के अन्य क्षेत्रों की तुलना में मंदिर परिसर के निकट आबादी का घनत्व अधिक है । अच्छी सुविधाऐं एवं होटल उद्योग का विकास बमीठा जाने वाली मार्ग के समानांतर हो रहा है जिसके साथ- साथ हवाई अड्डा स्थित है ।
3.1.2 राजनगर शहर
यह देखा गया है कि राजनगर शहर में स्थानिक विकास शहर के मुख्य धमनीय मार्गों जैसे कि राजनगर- छतरपुर मार्ग , राजनगर- खजुराहो मार्ग एवं राजनगर- लौंडी रेखाचित्र 3.3 : राजनगर में स्थानिक विकास मार्ग के समानांतर है । विकास , मुख्य तौर पर राष्ट्रीय राजमार्ग के आस- पास केंद्रित है एवं मुख्य तौर पर पहाड़ी एवं जल सेना तालाब के आसपास है जिसके परिणामस्वरूप शहर के मूल क्षेत्रों में आबादी का उच्च घनत्व है । बाहरी क्षेत्र कम जनसंख्या वाले हैं ।
3.2वर्तमान भूमि उपयोग , वर्ष 2018
भूमि उपयोग का मानचित्र तैयार करने की एक विस्तृत प्रक्रिया अध्याय 2 में वर्णित की गई है । वर्ष 2014 के लिऐ योजना क्षेत्र में विभिन्न श्रेणियों के तहत भूमि वितरण का अध्ययन किया गया । योजना क्षेत्र के लिए वर्तमान भू उपयोग (2018) निम्नलिखित है ।
पूरे योजना क्षेत्र के लिए विभिन्न वर्गों के अन्तर्गत भूमि के वितरण का अध्ययन किया गया । क्षेत्र के अवलोकन से विस्तृत भू उपयोग योजना तैयार की गई । निम्नलिखित सारणी विभिन्न भू उपयोगों के क्षेत्र दर्शाती है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(30)
Satne
Panna
MAP3.1
Damon
DirectorateofTownand CountryPlanning,Bhopal
StateInstituteforTownPlanning. BhopalMadhyaPradesh
AGRICULTURE
RECREATIONAL
HAICHERY
RESERVEDFOREST
COMMERCIAL
RESIDENTIAL
BLICUTILITIES
RAILWAYSTATION
MAJORHUADS
OTHERROADS
PLANNINGAREABOU
WATERBODIES
VILLAGESETTLEMENT
VILLAGEBOUNDARY
MELAGROUND
HILI
BUSSTAND
田 Khajuraho ExistingLanduse
EXISTINGLANDUSE
Legend LANDUSE
P
Checkedby-
SubmittedBySAIConsultingEngineersPvt.Ltd.
24°46'0"N
24°48'0"N
24°50′0″N
24°52′0″N
24°54'0"N
8000Ε 8000E
79°58′0″E
TIKURI
79580E
KHAJURAHO
KHUDARRIVER
ACHNAR
79°56′0″E
ZATKARA
VamanJemple JavariTemple
DuchadTemple
79-560E
MRAJNAGAR
LALGAWAN
RAJNAGARKHAJURAHOROAD
79°54′0″E
TOCHANDRANAGAR 79540E
KHAROHI
BAMITHA
TOMAHOBA
79-520E 79-520E
FROMCHATTARPUR
79500E 79500E
24-46'0"N
24°48′0″N
24°50'0"N
24°54'0"N
24°52'0"N 860(31)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
सारणी क्र.3 - सा-1 वर्तमान भू उपयोग का क्षेत्र
विकसित क्षेत्र 2018 (प्रतिशत) क्र.स.
भूउपयोग
क्षेत्रफल (हेक्टेयर)
4
3
2
1
35.95%
279.74
आवासीय
33.05%
260.14
आवासीय
2.49%
19.6
ग्रामीण आबादी
8.53%
67.13
2 वाणिज्यिक
5.97%
47
3
सार्वजनिक , अर्द्ध सार्वजनिक
3.92%
30.88
प्रशासन, पुरातत्व स्मारक
1.35%
10.63
धार्मिक
0.48%
3.76
शैक्षणिक
0.19%
1.48
स्वास्थ्य
0.22%
1.73
पर्यटक आघारित गतिविधि
0.23%
1.78
4 सार्वजनिक उपयोगिता एवं सेवाए
3.52%
27.73
5 आमोद-प्रमोद
46.21%
363.73
6
यातायात
13.96%
109.89
सड़क
0.11%
0.90
बस स्टैंड
30.09%
236.84
हवाई अड्डा
1.73%
13.63
रेलवे स्टेशन
0.34%
2.69
पार्किंग
7 औद्योगिक
100.00%
787.11
कुल विकसित क्षेत्र
187.00
8 वन
8800.7
9 कृषि
206.95
10 पहाड़ी/ ढलान
443.24
जल निकाय
10425
कुल योजना क्षेत्र मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(32)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
ग्राफ 31: विकसित भूमि का वर्तमान भू उपयोग 2018
Residential
Commercial
35.95%
46.21%
Public-Semi Public
Recreation
8.53%
3.52%
5.97%
Trafficand Transportation उपरोक्त सारणी में यह देखा गया कि खजुराहो योजना क्षेत्र में भूमि का अधिकांश हिस्सा कृषि के अतंर्गत है । खजुराहो में अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्रोत पर्यटन एवं कृषि है । योजना क्षेत्र में औद्योगिक विकास बहुत कम है । योजना क्षेत्र में झीलों एवं खुदर नदी की उपस्थिति के कारण काफी बडे क्षेत्र में पानी विद्यमान है । नीचे विभिन्न भू उपयोग के वर्ग का विवरण दिया गया है ।
आवासीय भू उपयोगः
योजना क्षेत्र 10425 हेक्टेयर के कुल विकसित क्षेत्र में से आवासीय उपयोग के अंतर्गत लगभग 35.95% क्षेत्र है । खजुराहो शहर में प्रमुख आवासीय विकास इसके उत्तरी हिस्से में है जो विद्याधर कॉलोनी का क्षेत्र है । यह क्षेत्र खजुराहो बाय - पास मार्ग के निकट अवस्थित है । रविन्द्र कॉलोनी, मंजूर नगर, प्रेम नगर कॉलोनी एवं जैन संग्रहालय में भी आवासीय क्षेत्र हैं । राजनगर में आवासीय भू उपयोग के अंतर्गत काफी बड़ा क्षेत्र है । खजुराहो - बमीठा मार्ग के किनारे भी आवासीय विकास है जो योजना क्षेत्र के दक्षिणी हिस्से में है ।
व्यावसायिक भू उपयोगः
67.13 हेक्टेयर का क्षेत्र आरक्षित विकसित क्षेत्र का 8.53 प्रतिशत क्षेत्र व्यावसायिक उपयोग के अंतर्गत है । होटलों की मौजूदगी के कारण राजनगर - बमीठा मार्ग के समान्तर प्रमुख व्यापारिक गतिविधियां देखी गई । राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 75 ( NH - 75 ) पर बमीठा में व्यापारिक विकास हैं । ये सड़क बेहतर जुड़ाव एवं पहुंच प्रदान करती हैं इसलिए अधिकांश प्रमुख व्यावसायिक प्रतिष्ठान इस सड़क के किनारे समानांतर हैं । अन्य प्रमुख व्यावसायिक प्रतिष्ठान गोल मार्केट में है जो खजुराहो शहर के मूल क्षेत्र में अवस्थित है एवं कृषि उपज मंडी राजनगर में अवस्थित है । जैसा कि शहर की अर्थव्यवस्था मुख्य तौर पर कृषि एवं पर्यटन क्षेत्र पर निर्भर है इसलिए व्यावसायिक प्रतिष्ठान अपेक्षाकृत से कम हैं ।
सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिकः
सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक भू उपयोग 47.00 हेक्टेयर में हैं जो विकसित क्षेत्र का 5.97 प्रतिशत है । इस वर्ग में प्रशासन (सरकारी कार्यालय ) , शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य संस्थान व धार्मिक स्थल इस वर्ग के अंतर्गत आते हैं । 860(33)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
प्रशासन एवं पुरातात्विक स्मारकः प्रशासन एवं पुरातात्विक स्मारक 30.88 हेक्टेयर में है जो विकसित क्षेत्र का 3.92 प्रतिशत है । अधिकांश सरकारी कार्यालय खजुराहो- राजनगर मार्ग पर अवस्थित हैं । तहसील मुख्यालय होने के कारण राजनगर में अनेक सरकारी कार्यालय हैं । यूनेस्को एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा अधिसूचित विरासत स्मारकों में 42.15हेक्टेयर क्षेत्र का बड़ा हिस्सा शामिल है क्योंकि क्षेत्र में पश्चिमी, पूर्वी एवं दक्षिणी मंदिर समूहों की मौजूदगी है ।
शैक्षणिकःशैक्षणिक उपयोग के अंतर्गत 3.76 हेक्टेयर का क्षेत्र है । जो विकसित क्षेत्र का 0.48 प्रतिशत है । राजनगर के वार्ड 4 में अवस्थित राजा बलवंत सिंह नामक एक निजी कॉलेज के अतिरिक्त योजना क्षेत्र में कोई बड़ा कॉलेज नहीं है ।
स्वास्थ्यः विकसित क्षेत्र का 1.48 हेक्टेयर का क्षेत्र स्वास्थ्य संस्थानों के अंतर्गत है । राजनगर में एक सरकारी अस्पताल है । खजुराहो में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र है । राजनगर एवं बमीठा में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र उपलब्ध हैं ।
धार्मिकः धार्मिक उपयोग के अंतर्गत 10.63 हेक्टेयर का क्षेत्र है जो विकसित क्षेत्र का 1.35 प्रतिशत है । आमोद-प्रमोदः आमोद - प्रमोद स्थल में लगभग 27.73 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है जो विकसित क्षेत्र का 3.52 प्रतिशत है । आमोद- प्रमोद वर्ग में पार्क, क्रीड़ास्थल एवं मेला मैदान शामिल हैं । आमोद - प्रमोद सुविधाओं में मेला मैदान सबसे प्रमुख है । खजुराहो शहर में 5 उद्यान हैं एवं नगर परिषद द्वारा एक नगर पालिका पार्क विकसित किया गया है । राजनगर शहर में एक पार्क एवं एक क्रीड़ा स्थल विद्यमान हैं ।
यातायात एवं परिवहनः लगभग 363.73 हेक्टेयर का क्षेत्र जो विकसित क्षेत्र का 46.21 प्रतिशत है यातायात एवं परिवहन के अंतर्गत है । इस वर्ग में सड़कें , हवाई अड्डा, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन एवं पार्किंग आते हैं । सड़कः सड़कों में 109.89 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है जो विकसित क्षेत्र का 13.96 प्रतिशत है । योजना क्षेत्र से गुजरने वाली प्रमुख सड़कें राष्ट्रीय राजमार्ग 75 , राजनगर- बमीठा मार्ग, खजुराहो बायपासमार्ग , राजनगर- बमीठा मार्ग एवं खजुराहो बायपासमार्ग के बीच लिंक रोड़, लालगवाँ खजुराहो मार्ग , राजनगर-छतरपुर मार्ग इत्यादि हैं ।
हवाई अड्डाः हवाई अड्डे में 236.84 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है जो विकसित क्षेत्र का 30.09 प्रतिशत है । हवाई अड्डा योजना क्षेत्र के दक्षिणी हिस्से में जटकारा के निकट अवस्थित है । हवाई अड्डे की पहुंच अच्छी है क्योंकि यह राजनगर- बमीठा मार्ग पर अवस्थित है । हवाई पट्टी के दक्षिण दिशा में विद्यमान टीले की ऊंचाई कम किया जाना / समतल किया जाना भी प्रस्तावित है ।
बस अड्डाः बस अड्डा विकसित क्षेत्र के 0.90 हेक्टेयर में है । यह मूल खजुराहो शहर में अवस्थित है । रेलवे स्टेशनः रेलवे स्टेशन में लगभग 13.63 हेक्टेयर का क्षेत्र शामिल है जो विकसित क्षेत्र का लगभग 1 . 73 प्रतिशत है । यह खजुराहो एवं राजनगर दोनों शहरों के लिए उपयोगी हैं ।
पार्किंगः पार्किंग में 2.69 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है जिसमें विकसित क्षेत्र का 0.34 प्रतिशत क्षेत्र शामिल है । गोल मार्केट क्षेत्र एवं पश्चिमी मंदिर समूह के सामने व्यवस्थित पार्किंग सुविधाएं उपलब्ध हैं । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(34)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
सार्वजनिक उपयोगिता एवं सेवाऐं:
सार्वजनिक उपयोगिता एवं सेवाए में क्षेत्र का 1.78 हेक्टेयरशामिल है । इस वर्ग में पानी की टंकिया, श्मशान घाट, कब्रिस्तान, वैद्युत सब स्टेशन एवं सार्वजनिक शौचालय शामिल किए गये हैं ।
औद्योगिकः
योजना क्षेत्र में कोई बड़े उद्योग विद्यमान नहीं हैं ।
जल निकायः
जल निकाय में 443.24 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है जो योजना क्षेत्र का 4.25 प्रतिशत है । जल निकाय में प्रमुख रूप से नदी, बांध , झील, नहर एवं नाले शामिल हैं । योजना क्षेत्र में गुजरने वाली प्रमुख नदी खुदर नदी है । जल निकायों में बेनीसागर बांध भी महत्वपूर्ण योगदान देता है ।
कृषिः
कृषि उपयोग के अंतर्गत योजना क्षेत्र का लगभग 84.44 प्रतिशत(8800.7 हेक्टेयर) है । स्थानीय लोगों की कृषि पर निर्भरता ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है । योजना क्षेत्र की कृषि भूमि, मध्य प्रदेश के ज्वार एवं गेंहू का उत्पादन करने वाले क्षेत्र में आती है ।
वनः
वन में योजना क्षेत्र का लगभग 1.79 प्रतिशत क्षेत्र शामिल है जो 187.00 हेक्टेयर है । यह वन क्षेत्र संरक्षित वन श्रेणी में है । वन क्षेत्र अचनार, लालगवाँ, खरोही एवं खजुराहों में अवस्थित हैं । योजना क्षेत्र में मुख्य तौर पर शुश्क पर्णपाती जंगल है जिसमें सागौन, महुआ एवं तेंदु शामिल हैं ।
3.3 वर्तमान यातायात एवं परिवहन संरचना
3.3.1 मार्गों की संयोजकता
मार्ग , किसी भी शहर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं । योजना क्षेत्र में वर्तमान प्रमुख क्षेत्रीय मार्गों को निम्नलिखित सारणी में प्रदर्शित किया गया है :
सारणी क्र.3 - सा-2: प्रमुख क्षेत्रीय मार्ग
मार्ग का प्रकार
मार्ग
मार्गों की चौडाई (मीटर) क्र. सं.
4
3
1
2
18
1
राष्ट्रीय राजमार्ग 75
पन्ना छतरपुर मार्ग
30
2
बमीठा-राजनगर मार्ग
प्रमुख जिला मार्ग
धमनीय मार्ग
09
राजनगर- गंज मार्ग
3
12
4
राजनगर- महोबा मार्ग
राष्ट्रीय राजमार्ग 75 जो पन्ना छतरपुर मार्ग के नाम से भी जाना जाता है वह योजना क्षेत्र के दक्षिणी भाग , बमीठा गांव के निकट से गुजरता है । बमीठा - राजनगर मार्ग, योजना क्षेत्र में प्रमुख जिला मार्ग है जो विकसित क्षेत्र में रीढ़ के तौर पर कार्य करता है । बमीठा -राजनगर मार्ग योजना क्षेत्र के दक्षिणी भाग मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(35) - खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
में राष्ट्रीय राजमार्ग -75 से शुरू होता है एवं योजना क्षेत्र के उत्तरी भाग की ओर बछोन को जोड़ता है । बमीठा- राजनगर मार्ग से होते हुए योजना क्षेत्र के दक्षिणी भाग में रेलवे लाईन गुजरती है । बमीठा - राजनगर मार्ग एक महत्वपूर्ण मार्ग है क्योंकि रेलवे स्टेशन , हवाई अड्डा एवं प्रुमख व्यावसायिक विकास उसके समानांतर स्थित है ।
इन मार्गों के अलावा, छतरपुर- राजनगर मार्ग , चंदेलागंज मार्ग एवं लौडी- छतरपुर मार्ग राजनगर को अन्य महत्वपूर्ण शहरी केन्द्रो से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है ।
योजना क्षेत्र के अंतर्गत कुछ ऐसे मार्ग हैं, जो शहर के भीतर एवं शहर के आसपास के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों को जोडते है, उनका विवरण निम्नानुसार है ।
सारणी क्र. 3 - सा-3 उप धमनीय मार्ग
मार्ग का प्रकार
मार्ग
क्र.सं.
मार्गोकी चौडाई (मीटर मे)
4
3
2
1
06
उप धमनीय मार्ग
जैन मंदिर मार्ग
1
06
उप धमनीय मार्ग
2
दूल्हादेव मंदिर मार्ग
09
3
रानेह जलप्रपात मार्ग
रानेह जलप्रपात मार्ग , बमीठा- राजनगर मार्ग से अलग होकर अचनार गांव से गुजरता हुआ रानेह जल प्रपात की ओर जाता है । रानेह जल प्रपात खजुराहो शहर से 20 किमी की दूरी पर स्थित है जो कि एक महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल है । दूल्हादेव मंदिर मार्ग, एक उप धमनीय मार्ग है जो जैन मंदिर मार्ग से दूसरी ओर मुड़ता है एवं जैन मंदिर की ओर जाता है । योजना क्षेत्र के प्रमुख शहरी मार्गे निम्नलिखित है: -
सारणी क्र. 3 - सा-4 धमनीय मार्ग
मार्ग
मार्ग का प्रकार
क्र.सं.
मार्गों की चौडाई (मीटर में)
4
3
2
1
1
06
धमनीय मार्ग
बायपास मार्ग
2
06
धमनीय मार्ग
लिंक मार्ग 1
3
06
धमनीय मार्ग
लिंक मार्ग 2
4
18
स्थानीय मार्ग
आबादी मार्ग
5
3-6
स्थानीय मार्ग
पुरी क्षेत्र का अंतर्गत मार्ग
स्त्रोतः खजुराहो विकास योजना 2011 ,
बायपास मार्ग जो एक धमनीय मार्ग है, शिल्पग्राम के निकट बमीठा- राजनगर मार्ग से दूसरे मार्ग की ओर जाता है । यह मार्ग स्थानीय क्षेत्र के दक्षिणी भाग में पुनः राजनगर- बमीठा मार्ग से जुड़ती है । लिंक मार्ग 1 एवं लिंक मार्ग 2 , जैन मंदिर मार्ग अन्य धमनीय मार्ग हैं जो बायपास मार्ग को राजनगर- बमीठा मार्ग से जोडते है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(36)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
चित्र 3.2: पश्चिमी मंदिर समूह की
ओर जाने वाला मार्ग
चित्र 3.1 : राजनगर शहर की ओर जाने वाला मार्ग
वस्थित मंदिर समूह, खजुराही
नगर खन्नाद नजमना
ध्वनि एवं प्रकाश शो
खजुराहो के भीतर मार्गो की कुल लंबाई 35.45 कि.मी. है जिसमें से केवल 34 प्रतिशत मार्ग पक्के हैं । राजनगर में मार्गों की कुल लंबाई 19.51 कि.मी. है, जिसमें से 13.50 कि.मी. मार्ग नगर परिषद के अंतर्गत है, एवं शेष मार्ग लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत है । राजनगर में अधिकांश मार्ग बहुत संकरे है जिसके फलस्वरूप यातायात में बाधा उत्पन्न होती है ।
3.3.2 मार्गों का स्वरूप
खजुराहो एवं राजनगर के लिए मार्ग संरचना का अलग -अलग विश्लेषण किया गया है ।
खजुराहो शहर में राजनगर - बमीठा मार्ग , केन्द्रीय रीढ के तौर पर काम करती है जो लिंक मार्ग 1 एवं लिंक मार्ग 2 , जैन मंदिर मार्ग एवं खजुराहो- लालगवाँ मार्ग से जुड़ा है । लिंक मार्ग 1 एवं लिंक मार्ग 2 , जैन मंदिर मार्ग बायपास मार्ग से मिलता है जो राजनगर- बमीठा मार्ग के समानांतर एक लूप बनाता है । खजुराहो- लालगवाँ मार्ग चंदेलागंज मार्ग को जोड़ता है ।
राजनगर शहर में मार्ग का स्वरूप गोलाकार अर्द्धव्यास ( Ring Radial ) मार्ग जैसा दिखता है । राजनगर से मार्ग विभिन्न दिशाओं में जैसे बछोन , छतरपुर , चंदेला जैसे स्थलों की ओर जाते हैं । 3.3.3 टर्मिनल
रेलवे स्टेशनः
खजुराहो में रेलवे स्टेशन विद्यमान है जो शहर से 5 किमी की दूरी पर अवस्थित है । यह दिल्ली एवं वाराणसी जैसे शहरों से रेल से जुड़ा हुआ है ।
राजनगर का रेलवे स्टेशन नगर परिषद के अधिकार क्षेत्र से करीब 6 किमी की दूरी पर अवस्थित है वर्तमान में इस स्टेशन पर कोई एक्सप्रेस ट्रेन नहीं रुकती है । इसलिए राजनगर शहर से 8 किमी की दूरी पर स्थित खजुराहो रेलवे स्टेशन राजनगर की आवश्यकताओं की भी पूर्ति करता है । 860(37)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
बस टर्मिनलः
चित्र 3.5 : बस स्टेन्ड
चित्र 3.4: रेलवे स्टेशन
चित्र 3.1 : हवाई अड्डा
विर्मन बस स्टैण्ड
1000
२० खजुराहो 0000
खजुराहो अन्य शहरों से सार्वजनिक एवं निजी बसों के द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है । शहर में एक इंटरसिटी बस टर्मिनल विद्यमान है जो मेला स्थल एवं नगर परिषद के पीछे की तरफ स्थित है । खजुराहो से सतना , हरपालपुर, वाराणसी एवं महोबा के लिए नियमित बस सेवा उपलब्ध है ।
राजनगर में स्थाई बस अड्डा विद्यमान नहीं है । शहर में एक अस्थायी बस अड्डा है जो की मुख्य व्यावसायिक क्षेत्र में अवस्थित है ।
3.3.4 वायु मार्ग से संयोजकता
खजुराहो में एक आंतरिक (Domestic ) हवाई अड्डा है जो 241.07 हेक्टेयर में फैला हुआ है और वर्ष 1962 से संचालन में है । यह खजुराहो शहर से 3 किमी की दूरी पर अवस्थित है । वायुयान से सफर करने वाले यात्रियों में मुख्य तौर पर विदेशी होते हैं, एवं इनका आगमन पर्यटक सीज़न पर निर्भर है । हवाई अड्डे को छोटे हवाई अड्डे के तौर पर वर्गीकृत किया जा सकता है । खजुराहो से सभी मुख्य एयरलाइनों के विमान उड़ान भरते हैं । खजुराहो , हवाई मार्ग से वाराणसी, दिल्ली, मुंबई, भोपाल, इंदौर, आगरा एवं इलाबाहाद से जुड़ा हुआ है ।
यहां एक अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा निर्माणाधीन है, अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का प्रावधान , अन्तर्राष्ट्रीय उड़ानों की सीधी उपलब्धता, स्थानीय अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन को बढ़ा सकता है ।
3.3.5 सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएँ
खजुराहो शहर में ऑटो रिक्शा एवं कैब / टैक्सी जैसी सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएं विद्यमान हैं ।
स्थान /स्टैंड
स्रोत
2
1
ऑटो रिक्शा बस अड्डा खजुराहो
गोल मार्केट पार्किंग क्षेत्र के सामने
टैक्सी
3.3.6 पार्किंग की सुविधाऐं
अधिकांश व्यावसायिक संस्थान प्रमुख मार्गों एवं चौराहों के समानांतर विकसित हैं । वर्तमान में पार्किंग की सुविधाऐं अपर्याप्त हैं । पुराने शहर में प्रमुख मार्गों के समानांतर पार्किंग देखी गयी । बस अड्डा, सभी व्यावसायिक केन्द्रों एवं पश्चिमी मंदिर समूहों के निकट सार्वजनिक पार्किंग स्थल विद्यमान हैं । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(38)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
चित्र 3.6: खजुराहो शहर के भीतर विभिन्न स्थलों पर पार्किंग की सुविधाएं
पार्किंग
दो पहिया कहिगों केलिये
पार्किंग स्थल
BUS PARKING
पार्किंग स्थल
गोल मार्केट क्षेत्र में नियोजित सार्वजनिक पार्किंग उपलब्ध है , जिसमें 10 बसें एवं 80 मोटर कार खड़ी की जा सकती हैं । इसके अतिरिक्त पश्चिमी मंदिर समूह के सामने भी नियोजित पार्किंग स्थल विद्यमान है जिसमें लगभग 40 मोटर कार खड़ी की जा सकती हैं ।
चित्र 37 : खजुराहो शहर में असंगत पार्किंग एवं मार्गों पर अतिक्रमण असंगत पार्किंग :शहर में मासिक मेला समारोह के दौरान दो पहिया वाहनों की असंगत पार्किंग देखी जा सकती है । कुछ क्षेत्रों जैसे जैन मंदिर मार्ग के निकट स्थित पुरातात्विक संग्रहालय में पार्किंग की अव्यवस्था देखी जा सकती है ।
3.3.7 यातायात प्रबंधन
खजुराहो में संकरे मार्ग एवं मार्गों पर अनौपचारिक दुकानों के अतिक्रमण के कारण यातायात की समस्या पैदा होती है। विचार - विमर्श के दौरान यह सामने आया कि खजुराहो में समुचित यातायात प्रबंधन के अभाव के कारण निरंतर दुर्घटनाएं होती हैं । संकरे मार्गों के कारण धीमी एवं तेज गति वाले वाहन आपस में टकराते हैं ।
राजनगर में भी असंगत यातायात प्रबंधन है जिसके का कारण वाहनों का अव्यवस्थित आवागमन होता है । अतिक्रमण के कारण प्रभावी कैरिज वे ( carriage way ) कम है यदि इसे नियोजित नही किया गया, तो ये और कम हो सकता है । 860(39)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
अध्याय-चार
विकास योजना 2011 की समीक्षा 4.1 वर्ष 2011 के प्रस्तावित भू उपयोग (PLU )
विकास योजना 2011 के अनुसार, वर्ष 1993 के वर्तमान भू उपयोग के अनुसार कुल योजना क्षेत्र में से केवल 1.49 वर्ग कि.मी. विकसित है । वर्ष 2011 के लिए कुल 7.72 वर्गकि.मी. विकास योग्य भू क्षेत्र होने की पहचान की गई है ।
रेखाचित्र 4.1 विकास योजना (2011 )
खजुराहो विकास योजना २०११
संचालनालय, नगर तथा ग्राम निवेश मध्य प्रदेश
स्त्रोतः विकास योजना, 1993-2011 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(40)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
विकास योजना के अनुसार खजुराहो का 2011 के लिए प्रस्तावित भू उपयोग का विवरण नीचे दिया गया है:-
सारणी क्र- 4- सा-1 प्रस्तावित भू उपयोग, 2011
भूउपयोग
भूउपयोग
क्र. स.
अतिरिक्त जोडा गया क्षेत्र (हेक्टेयर )
विकास योग्य क्षेत्र (2011 के लिए प्रस्तावित) (हेक्टेयर )
विकास योग्य क्षेत्र का प्रतिशत (हेक्टेयर)
वर्तमान
भूउपयोग
1993 (हेक्टेयर)
6
5
4
3
2
1
24.55
189.73
52.79
136.94
आवासीय
19.86
153.37
123.02
30.35
2 वाणिज्यिक
2.15
16.63
15.5
1.13
3 औद्योगिक
9.62
74.27
51.46
22.81
4 सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक
1.30
10.03
7.95
2.08
5 सार्वजनिक उपयोगिता एवं सेवाएं
18.04
139.32
114.22
25.1
6 आमोद-प्रमोद
24.48
130.92
189.11
58.19
7 यातायात
100.00
772.46
580.01
192.45
कुल विकसित क्षेत्र
स्त्रोतः खजुराहो विकास योजना, 2011 4.2विकास योजना 2011 के मुख्य प्रस्ताव
विकास योजना 2011 में शामिल प्रमुख प्रस्ताव निम्नलिखित है ।
बेनिसागर के डाउनस्ट्रीम के पास बॉटनिकल गार्डन
पश्चिमी मंदिर समूह के दक्षिण पश्चिम के पास प्राणी उघान
हवाई अड्डे के पश्चिमी ओर के पास फ्लावर गार्डन
झीलों को सूखने से रोकने के लिए उसकी सुरक्षा और पुर्नविकास
पर्यटक सुविधाऐं
राजनगर की पहाड़ियों के आसपास घूमने हेतु और वृक्षारोपरण के रूप में विकास
बमीठा तिराहा का विकास
खजुराहो पैलेस के पास बस स्टैंड का नवीनीकरण
खजुराहो के पुरी क्षेत्र में नई पार्किंग प्रदान करना
रेल लाइन के प्रस्ताव में खजुराहो को शामिल करना
एयर कनेक्टिविटी
हारून झील के पश्चिमी किनारे के पास कच्ची बस्तियों का पुनर्वास
दूल्हादेव मंदिर के पास खूदर नदी के उपर नया बाध
मूर्तिकला, कला व्यवसाय के लिए स्थान का प्रावधान
4.3 विकास योजना 2011 की विकास क्षमता एवं प्रमुख मुददे
क्षमता:
राजनगर में और उसके आसपास आर्थिक गतिविधियों का प्रावधान किया गया था ।
पर्यटको की गतिविधियां खजुराहो के मध्य भाग में केंद्रित होने के कारण महत्वपूर्ण व्यावसायिक गतिविधियों का प्रावधान बमीठा- राजनगर मार्ग पर खजुराहो के दक्षिणी भाग में किया गया था ।
जल निकायों के संरक्षण के इरादे के साथ मनोरंजन सुविधाओं का भी प्रावधान किया गया था ।
बमीठा तिराहा का विकास मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(41) खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
मुद्दे:-
हवाई अड्डे के आसपास विकास के लिए प्रस्ताव
जी.आई.एस. में भू संदर्भित आधार नक्शे का अभाव
आर.एफ./ पी.एफ. सीमाओं को नहीं दिखाया गया
प्रस्तावित प्राणी उघान का हिस्सा वन क्षेत्र में पड़ता है
टिकुरी गाँव के लिए प्राकृतिक विस्तार का प्रावधान नहीं किया गया
सिंचाई विभाग कॉलोनी के पास प्रस्तावित सड़क प्रासंगिक नहीं है
राजनगर की मौजूदा सड़को का योजना बनाने में विचार नहीं किया गया
सड़कों के समानांतर संभावित विकास को परिकल्पित नहीं किया गया
महोबा - राजनगर मार्ग के पश्चिमी छौर पर सड़कों का ठीक से निष्कर्ष नही निकाला गया
4.4 विकास योजना के प्रस्तावो की वर्तमान परिद्रश्य के संबंध में समीक्षा प्रस्तावित भू उपयोग 2011 एवं वर्तमान भू उपयोग 2018 की तुलनाः
प्रस्तावित भू उपयोग , 2011 एवं वर्तमान भू उपयोग , 2018 के बीच तुलनात्मक विश्लेषण किया गया जो निम्नवत है :-
प्रस्तावित (2011 ) और वर्तमान (2018 ) के भू उपयोग की तुलना
सारणी क्र.-4- सा-2
भूउपयोग
वर्तमान भूमि उपयोग (2018)(हेक्टेयर)
प्रस्तावित भूमि उपयोग
(2011 ) (हेक्टेयर)
3
2
1
279.74
189.73
आवासीय
67.13
153.37
व्यावसायिक
16.63
औद्योगिक
47
74.27
सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक
1.78
10.03
सार्वजनिक उपयोगिता एवं सेवाऐं
27.73
139.32
आमोद-प्रमोद
363.73
189.11
यातायात एवं परिवहन
787.11
772.46
कुल
ग्राफ 0.1: प्रस्तावित भू उपयोग (2011 ) एवं वर्तमान भू उपयोग (2018) की तुलना वर्तमान भू उपयोग -2018 के साथ प्रस्तावित भू उपयोग -2011 की तुलना करने पर यह देखा गया कि प्रस्तावित भू उपयोग -2011 के अनुसार जो विकसित भूमि 772.46 हेक्टेयर थी वर्तमान भू उपयोग-2018 के अनुसार 787.11 हेक्टेयर तक बढ़ी । प्रस्तावित भू उपयोग - 2011 के अनुसार आवासीय उपयोग में जो भूमि 189.73 हेक्टेयर थी वह वर्तमान भू उपयोग -2018 में 279.74 हेक्टेयर तक बढ़ी। प्रस्तावित भू उपयोग-2011 के अनुसार व्यावसायिक उपयोग में जो भूमि 153.37 हेक्टेयर प्रस्तावित थी वह वर्तमान भू उपयोग-2018 में यह केवल 87.82 हेक्टेयर थी । प्रस्तावित भू उपयोग -2011 के अनुसार सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक उपयोग में जो भूमि 74.27 हेक्टेयर प्रस्तावित थी वह वर्तमान भू उपयोग -2018 में 47.00 हेक्टेयर थी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(42)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
प्रस्तावित भू उपयोग- 2011 के अनुसार आमोद - प्रमोद स्थल के उपयोग में जो भूमि 139.32 हेक्टेयर प्रस्तावित थी वह वर्तमान भू उपयोग-2018 में केवल 27.73 हेक्टेयर थी । प्रस्तावित भू उपयोग-2011 के अनुसार यातायात एवं परिवहन में जो भूमि 189.11 हेक्टेयर प्रस्तावित थी वह वर्तमान भू उपयोग-2018 में 363.73 हेक्टेयर तक बढ़ी । प्रस्तावित भू उपयोग-2018 का सबसे अधिक ध्यान योजना क्षेत्र में आमोद- प्रमोद क्षेत्र, यातायात एवं परिवहन तथा आवासीय विकास पर केन्द्रित था लेकिन वर्तमान स्थिति के अनुसार प्रस्तावित भू उपयोग-2018 में जो मंनोरंजनात्मक क्षेत्र प्रस्तावित था उसे विकसित नहीं किया जा सका ।
प्रस्तावित भू उपयोग 2011 के कार्यान्वयन का स्तर
खजुराहो निवेश क्षेत्र के लिए स्वीकृत विकास योजना 1993-2011 के अनुसार वर्ष 2011 के प्रस्तावों का विश्लेषण किया गया । विकास योजना 1993-2011 का विश्लेषण करने के लिए परियोजना के प्रस्ताव एवं प्रस्तावित भू उपयोगों को तीन वर्गों में विभाजित किया गया है जिसका उल्लेख नीचे किया गया है । 1. विकास योजना 1993-2011 के अनुसार कार्यान्वित परियोजना /भू उपयोग
2. विकास योजना 1993-2011 के अनुसार कार्यान्वित नहीं की गई परियोजना / भू उपयोग 3. विकास योजना 1993-2011 के अनुसार वर्तमान भू- उपयोग 2018 जिसमें विकास नहीं ।
4.4.1.1 विकास योजना 1993-2011 के अनुसार कार्यान्वित परियोजना/ भू उपयोग
विकास योजना 1993-2011 में जो योजनाएं प्रस्तावित थी एवं जिसे कार्यान्वित नहीं किया जा सका उन्हें निम्नलिखित सारणी में सूचीबद्ध किया गया हैः
4.4.1.2: प्रस्तावित भू उपयोग (2011 ) के अनुसार प्रस्ताव
सारणी क्र. -4- सा-3 प्रस्तावित भू उपयोग (2011 ) के अनुसार प्रस्ताव
क्रियान्वयन की वर्ष 2018 में स्थिति
प्रस्तावित भू उपयोग (2011 ) में
प्रस्तावित स्थल
प्रस्तावित भू उपयोग (2011 ) के अनुसार प्रस्ताव
3
2
1
बुनियादी ढांचा
कार्यान्वित
हारूण झील का पश्चिमी किनारा
कच्ची बस्तियों का पुनर्वास
यातायात एवं परिवहन
कार्यान्वित
नई सड़कों का निर्माण
चतुर्भुज मंदिर से दूल्हादेव मंदिर तक
पर्यटन
कार्यान्वित
पर्यटक गांव
खुदर नदी का उत्तरी छोर
कार्यान्वित
पुरातात्विक स्थल
पर्यटन सुविधाएं
भूउपयोग
आंशिक तौर पर कार्यान्वित
राष्ट्रीय राजमार्ग -75 के दोनो किनारे
मिश्रित भू उपयोग मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(43) खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
4.4.1.3 विकास योजना 1993-2011 के अनुसार कार्यान्वित नहीं की गई परियोजना / भू उपयोग विकास योजना 1993-2011 में जो योजनाएं प्रस्तावित थी एवं जिसे कार्यान्वित नहीं किया जा सका उन्हें निम्नलिखित सारणी में सूचीबद्ध किया गया है: -
रेखाचित्र 4.2
1993-2011
खजुराहो ३.१
विकास योजना २०११
2
1
संचालनालय , नगर तथा ग्राम निवेश मध्य प्रदेश
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(44)
-खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
सारणी क्र-4- सा-4 विकास योजना 1993-2011 के अनुसार कार्यान्वित नहीं की गई परियोजना/भू-उपयोग
प्रस्तावित भू उपयोग (2011 ) के अनुसार प्रस्ताव जो संख्या उपरोक्त मानचित्र में दिखाई गयी है
2
1
बुनियादी ढांचा
1
पर्यटक स्थल के रूप में विकास
भू उपयोग
2
आमोद-प्रमोद वानस्पतिक उद्यान
3
आमोद- प्रमोद प्राणी उद्यान
4
आमोद-प्रमोद पुष्प उद्यान
5
आमोद-प्रमोद झील का पुनर्विकास
6
औद्योगिक, आमोद-प्रमोद एवं व्यावसायिक विकास
आमोद-प्रमोद
7
यातायात एवं परिवहन
नई सड़क का निर्माण
8
नई सड़क का निर्माण
9
4.4.1.4 विकास योजना 1993-2011 के अनुसार वर्तमान भूमि उपयोग 2018
प्रस्तावित भू उपयोग (2011 ) में प्रस्तावित स्थल
क्रियान्वयन की वर्ष 2018में स्थिति
4 3
दूल्हादेव मंदिर के आसपास का क्षेत्र विकसित नहीं
बेनीसागर के बहाव की ओर
विकसित नहीं
पश्चिमी मंदिर समूह का उत्तर- पश्चिम विकसित नहीं
हवाई अड्डे का पश्चिमी छोर
विकसित नहीं
हारूण झील का पश्चिमी हिस्सा
विकसित नहीं
राजनगर
विकसित नहीं
विकसित नहीं
राजनगर- बमीठा मार्ग, विद्याधर कॉलोनी के निकट
निर्मित नहीं
चतुर्भुज मंदिर से बेनीगंज जलाशय तक
निर्मित नहीं
चतुर्भुज मंदिर से गुजरने वाली एवं रानेह जलप्रपात को जोड़ने वाले
खजुराहो - राजनगर सड़क के समानांतर
सडक
विकास योजना 1993-2011 में प्रस्तावित विकास के अनुसार, वर्तमान भू उपयोग , 2018 में नहीं किया गया उन्हें निम्नलिखित सारणी में सूचीबद्ध किया गया हैः-
वर्तमान भू उपयोग , 2018के अनुसार वर्तमान स्थिति जो संख्या उपरोक्त मानचित्र में दिखाई गयी है
2
1
भूउपयोग
आवासीय
आवासीय
2
3
व्यावसायिक
रेखाचित्र 43 1993-2011
खजुराहो
सारणी क्र.-4- सा-5 वर्तमान भूमि उपयोग 2018 के अनुसार विकास
वर्तमान भू उपयोग, 2018 के अनुसार स्थल
प्रस्तावित भू उपयोग , 2011 के अनुसार प्रस्ताव
4
3
लालगवाँ मार्ग कृषि
प्रेम सागर झील के निकट आमोद-प्रमोद
राजनगर-बमीठा मार्ग कृषि 860(45)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
अध्याय-पाँच
विकास योजना 2031 के
नियोजन प्रस्ताव यह योजना, वर्ष 2031 के लिये तैयार की गई है । नियोजन के भौतिक , आर्थिक एवं सामाजिक आयाम होते हैं । नगर का विकास, भौतिक एवं जनसांख्यिकीय दोनों दृष्टि से होता है । सतत् विकास , बेहतर जीवन गुणवत्ता के लिऐ सुविधाओं का प्रावधान करना एवंआर्थिक आधार को सशक्त बनाते हुए विकास योजना के माध्यम से भूमि आवंटन द्वारा नगर का सुनियोजित भौतिक विकास करने का लक्ष्य होता है । इस लक्ष्य को प्राप्त करते समय , नगर एवं इसके परिवेश के विकास को स्थायी एवं सुसंबंधित स्वरूप प्रदान करने के प्रयास किए जाते हैं । प्रस्ताव में तीन प्रमुख घटकों को शामिल किया गया है, जो निम्नानुसार हैं: - प्रस्तावित भूमि उपयोग
प्रस्तावित यातायात एवं परिवहन
विकास नियंत्रण नियमन के साथ विकास योजना हेतु कियान्वयन
योजना प्रस्तावों को तैयार करते समय निम्नलिखित बिन्दुओं का ध्यान रखा गया था :
अनुमोदित विकास योजना के प्रस्ताव
विकास का स्वरूप एवं विकास की प्रवृत्ति
नियोजित काल की अनुमानित जनसंख्या
निवेश क्षेत्र के आधीन निवासियों हेतु सुरक्षित जीवनयापन परिवेश का प्रावधान
चित्र 5.1 : उभरती अवधारणा की प्रक्रिया वर्तमान स्थितियों, भूमि उपयोगों, विकास के
Process of evolving concept
विभिन्न स्वरूप, सामाजिक-आर्थिक मापदंडों आदि का मूल्यांकन
ए.एस.आई. / यूनेस्को द्वारा अधिसूचित स्मारकों एवं पर्यावरणीय संसाधनों का संरक्षण करना
Review of Sarictioned development Plan
Tourist Movement Pattern नगर की संस्कृति को संरक्षित रखना एवं पर्यटन केंद्र के रूप में नगर के विकास को प्रोत्साहित करना
Study of Existing Landuse
Analysis of existing Scenario (Base Studies viz terrain )
भूमि उपयोग - परिवहन समन्वय एवं स्थायी पर्यावरण हेतु व्यापक दृश्टिकोण
Assessment of Land in terms of Potential
5.1 प्रस्तावों हेतु बुनियादी बातें
Lard to be coriserved
Land with potential ofdevelopment
Natural Resources
Water bodies . Hills Forests
Land use Proposal
Important Tourist Places
प्रस्तावित भूमि उपयोग मानचित्र , डायग्नोस्टिक (diagnostic) अध्ययनों एवं विश्लेषणों के एकीकरण एवं संयोजन का अंतिम परिणाम है । कई विचार-विमर्श , वर्तमान स्थितियों, एवं भावी विकास के अनुमानों के विश्लेषण, व्यापक एवं व्यवस्थित दृश्टिकोण , स्टेकहोल्डर्स ( हितधारकों) से मिले सुझावों एवं सिद्धांतों, सभी को संयुक्त करने के बाद प्रस्तावों को तैयार किए जाते हैं । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(46)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
भूमि उपयोग के प्रस्ताव तैयार करते समय पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ - साथ निवासियों हेतु सुरक्षित वातावरण प्रदान करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है । इसके साथ ही विकास की गतिशीलता, भूमि की क्षमता का आंकलन, पुरी क्षेत्र में भीड़ भाड़ कम करना, एवं विस्तृत कृषि क्षेत्रों को बनाए रखने के लिए अथक प्रयास किये गये हैं । विकास योजना के द्वारा सुव्यवस्थित एवं संतुलित विकास को प्रोत्साहित करना लक्षित है । यह विकास योजना के द्वारा खजुराहो विकास योजना क्षेत्र के अनूकूलित, निर्मित पर्यावरण का स्वरूप प्रदान करेगी । इसके अलावा, वर्तमान परिदृश्य की दृश्टि से पुरानी विकास योजना के प्रस्तावों को अग्रसर करने की समीक्षा की गई है ।
खजुराहो निवेश क्षेत्र हेतु विकास योजना की तैयारी की प्रक्रिया में, कई घटको का समावेश किया गया है । और फिर विभिन्न उपयोगों के लिए भूमि आवंटन किया गया है । इनमें से कुछ घटकों का वर्णन नीचे दिया गया हैं :
प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण
निवेश क्षेत्र को प्राकृतिक झीलों, नदियों, हरियाली क्षेत्रों एवं वनों का वरदान मिला हुआ है । निवेश क्षेत्र में आने वाले प्राकृतिक संसाधनों के अन्तर्गत कुल भूमि उपयोग 1170.5 हेक्टर हैं जो कि निवेश क्षेत्र का 11 प्रतिशत भू- भाग है । इन प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने पर विशेष ध्यान दिया गया है । निवेश क्षेत्र के 80 प्रतिशत याने 8363 हेक्टर कृषि क्षेत्र को संरक्षित करने का भी प्रयत्न किया गया है । विशेष नियमनों का समावेश
एयरपोर्ट एवं ए.एस.आई / यूनेस्को द्वारा अधिसूचित स्मारकों के लिए संबधित प्राधिकारीयों के नियमनो के अनुसार बफर का प्रावधान रखा गया है ।
आगामी परियोजनाओ का एकत्रीकरण एवं एकीकरण
संबंधित विभागों की आगामी परियोजनाओं का विवरण प्राप्त करने का प्रयत्न किया गया है । विमिन्न विभागों द्वारा उपलब्ध कराई गई प्रस्तावित परियोजनाओं की सूचना एवं जानकारी को घ्यान में रखा गया है । प्रस्तावित भूमि उपयोग में इन परियोजनाओं हेतु भूमि प्रस्तावित की है । प्रस्तावित विकास योजना में संबंधित विभागों द्वारा प्रस्तावित परियोजनाऐं सम्मलित हैं । विभिन्न सेक्टरों के लिए , नगरीय स्वच्छता योजना एवं नगरीय विकास योजना जैसे उपलब्ध रिपोटों का भी उचित विश्लेषण भी किया गया है। 860(47)
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
5.2 खजुराहो के लिए योजना की अवधारणाः विकास योजना वर्ष 2031
1. सबसे अधिक महत्व वाला क्षेत्र (High Value Zone- हाई वेल्यु ज़ोन):
HighValueZone
NativeZone
Promotion / New hfra Zone अत्याधिक महत्वपूर्ण विरासत वाले क्षेत्र (हाई वेल्यु जोन ) को योजना क्षेत्र में सबसे अधिक महत्व वाला क्षेत्र माना गया है । इस क्षेत्र का इथनिक ( Ethnic ) मूल्य उच्च स्तर का है , जिसके कारण इसका परिरक्षण एवं संरक्षण करना अनिवार्य है । इस क्षेत्र का महत्व , शहर में पर्यटन की संभावनाओ का निर्धारण करता है।
खजुराहो योजना क्षेत्र के लिए पश्चिमी समूह के मंदिरों के आसपास सबसे अधिक महत्व वाला क्षेत्र हैं । पश्चिमी ओर यह क्षेत्र प्रस्तावित पैदल मार्ग तक एवं पूर्व ओर में यह प्रेमसागर झील एवं महाराजा प्रताप संग्रहालय तक सीमित है । मंदिर समूहों के पश्चिमी ओर एवं पूर्व ओर के पास हरित पट्टी / आमोद - प्रमोद क्षेत्र प्रस्तावित है । सबसे अधिक महत्व वाले क्षेत्र ( High Value Zone ) में किसी भी प्रकार के विकास की अनुमति नहीं दी जायेगी ।
2. मूल क्षेत्र (Native Zone- नेटिव ज़ोन):
इस जोन में स्थानीय लोगों के लिए आवासीय क्षेत्र का प्रावधान है । इसके अतिरिक्त यह क्षेत्र संस्कृति की रक्षा एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में सहयोग करता है ।
योजना क्षेत्र में मूल जोन पश्चिमी और प्रस्तावित रिंग रोड़ तक सीमित है । मूल क्षेत्र में जो प्रस्तावित उपयोग हैं उनमें स्थानीय लोगों के लिए आवासीय उपयोग , स्थानीय अर्थव्यवस्था में सहायक वाणिज्यिक गतिविधियां , पर्यटकों के साथ ही स्थानीय लोगों के लिए सार्वजनिक-अर्द्ध सार्वजनिक सुविधाऐं शामिल हैं ।
3. नव विकसित क्षेत्र (New Development Zone):
यह क्षेत्र पर्यटकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के अलावा शहर के विकास के लिए प्रस्तावित है । नये विकास वाले जोन दक्षिण में खुदर नदी एवं उत्तर में लालगवां रोड एवं राजनगर - खजुराहो के बायपास को जोड़ने वाली सेमी - सर्कुलर रोड़ तक सीमित है । बमीठा- राजनगर रोड के पास दक्षिणी छोर में उच्च स्तर के वाणिज्यिक उपयोग प्रस्तावित है एवं उत्तरी छोर में आवासीय उपयोग प्रस्तावित है । पश्चिमी छोर पर किसी भी प्रकार का विकास प्रस्तावित नहीं है । सबसे अधिक महत्व वाले क्षेत्र में सीमित पहुंच होनी चाहिए । जबकि नये विकास वाले क्षेत्र में मजबूत जुड़ाव होना चाहिए । अतः इन क्षेत्रों की पहुंच को बढ़ाया जाना चाहिए । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
5.3 व्यापक कार्यनीति
विकास योजना 2031 में नियोजित हस्तक्षेप एवं एकीकृत विकास के माध्यम से विकेन्द्रीकरण , संरक्षण एवं संवर्धन का लक्ष्य रखा गया है । इस लक्ष्य को निम्नलिखत कार्यनीतियों की सहायता से प्राप्त किया जा सकता है ।
खजुराहो, राजनगर विकास केन्द्रों का एकीकृत विकास एवं उनकी स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करना ।
खजुराहो एवं राजनगर केन्द्रों के लिए एक समन्वित तरीके से अधोसंरचना योजना एवं सेवाओं के प्रावधान ।
खजुराहो एवं राजनगर शहर के मध्य से होकर गुजरने वाले यातायात को सुगमता प्रदान करना । विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों पर परिवहन केंन्द्रों का प्रावाधान करना ।
अंतरराष्ट्रीय एवं धरेलू पर्यटकों की सुविधाओं की आवश्यकता की पूर्ति करना ।
ऐतिहासिक स्मारकों के आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त भीड - भाड़ पर अंकुश लगाने के लिए भूमि उपयोग को विनियमित करना एवं इन क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नियोजन करना ।
अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए, पर्यटन, हस्तशिल्प , कृषि आधारित उघोगों (आटा मिल्स, शीतभंडारण एवं सहयोगी उघोगों जैसे अन्य उघोगों) को प्रोत्साहित किया जाएगा । इस के लिए , नियोजित व्यावसायिक केंन्द्रों का प्रावधान करना ।
प्राकृतिक संसाधनो को संरक्षित एवं सुरक्षित करने के लिए विशेष नियमन परिक्षेत्रों का प्रावधान करना । प्राचीन स्मारकों एवं पुरातत्व क्षेत्रों हेतु निर्मित अधिनियम 1958 , के निर्देशानुसार बफर के माध्यम से ए. एस.आई स्मारकों का संरक्षण करना ।
विशिष्ट एवं व्यवस्थित तरीके से विकास को प्रोत्साहित करने के लिए डी.सी.आर तैयार किए गए हैं । डी.सी.आर (विकास नियंत्रण नियमन ) खजुराहो निवेश क्षेत्र में अनियंत्रित एवं अव्यवस्थित विकास पर अंकुश लगाने में सहायक रहेंगे ।
5.4 जनसंख्या अनुमान
ग्राफ 5.1 : जनसख्या अनुमान
90,000
80,000
70,000
60,000
50,000
Population 40,000
30,000
20,000
10,000
0
2001 year2011 2021
1981 1991 -Linear (Total Population ) Expon . (Total Population) 2031 किसी भी नियोजन निर्णय के लिए भावी जनसंख्या का अनुमान मुख्य आधार है । यह प्रक्रिया पिछले वर्षों के उपलब्ध आंकडो पर आधारित निश्चित अनुमान लगाकर भावी जनसंख्या के परिदृश्य पर नजर डालने का प्रयास है । अनुमानित जनसंख्या के लिए जलापूर्ति. मलजल, ठोस अपशिश्ट प्रबंधन आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए भावी मांग का भी अनुमान लगाने की आवश्यकता होती है । 860(49)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
हालॉकि इस बात पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि इन विधियों में से कोईभी प्रयोगसिध्द्ध नही है क्योंकि सभी संभावना के नियम पर आधारित होते है । सभी पांच विधियों के द्वारा जन संख्या का अनुमान लगाने के बाद, सी.ए.जी.आर. विधि को खजुराहो निवेश क्षेत्र के लिए सबसे उपयुक्त विधि माना गया है । जनसंख्या अनुमान के अनुसार खजुराहो निवेश क्षेत्र हेतु दशकीय वृद्धि दर वर्ष 2011-2021 एवं 2021-2031 हेतु 37 प्रतिशत होगा ।
जनसंख्या
वर्ष
क.सं
वृद्धिदर(%)
4
3
2
1
13,958
1
1971
44.19
20,126
2
1981
25.67
3
1991
25,293
56.28
4
39,528
2001
23.82
2011
48,943
5
36.91
6
2021
67,006
36.91
2031
91,735
7
वर्ष 2031 के लिए खजुराहो निवेशक्षेत्र की कुल अनुमानित जनसंख्या 91,735 है । मध्यप्रदेश पर्यटक कार्यालय से प्राप्त हुए आंकडो के विश्लेषण से यह माना गया है की एक दशक में धरेलु एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटको की संख्या में करीबन 20 प्रतिशत वृद्धि होगी । इस प्रकार वर्ष 2031 में 8.15 लाख पर्यटको का आवागमन होगा ।
5.5 प्रस्तावित जनसंख्या घनत्व
यू.डी.पी.एफ.आई. निर्देशानुसार मैदानीक्षेत्रो के मध्यम स्तरीय नगर के लिए सकल धनत्व (विकास क्षेत्रका औसत जनसंख्या धनत्व ) 100-150 व्यक्ति प्रति हेक्टर माना गया है । हालाकि, जनसंख्या वृद्धि की निम्न दर के विचार से, कम रोजगारो के अवसरोंकी उपलब्धता एवं निम्न विकास की प्रवृति को ध्यान में रखते हुए 75 व्यक्ति प्रति हैक्टर सकल, धनत्व वर्ष 2031 के लिए माना गया है ।
5.6 वर्ष 2031 के लिए भूमि आवश्यकता
यू.डी.पी.एफ.आई. के अनुसार मध्य वर्ष 2031 मे विभिन्न भूमि उपयोग के लिए क्षेत्र की आवश्यकता नीचे दी गयी है:--
सारणी क्र.5- सा-1: क्षेत्र आवश्यकता यू.डी.पी.एफ.आई. के अनुसार
क्षेत्र(हेक्टेयर )
जनसंख्या
वर्ष
धनत्व (व्यक्ति प्रति हेक्टर)
4
3
2
1
71
55550
787.11
2018 (विकसित)
54
91735
1718.47
2031 (प्रस्तावित) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
सारणी क्र. 5-सा-2 क्षेत्र आवश्यकता प्रस्तावित विकास योजना 2031 के लिए
प्रस्तावित विकास योजना 2031 के लिए भूमि आवश्यकता
क्षेत्र की आवश्यकता विकास योजना 2031 के लिए
प्रभावशील विकास योजना के अनुसार
प्रस्तावित
प्रस्तावित भू उपयोग 2011- वर्तमान
वर्तमान
वर्तमान
कुल प्रस्तावित विकास (2031) वर्तमान विकास सहित (हेक्टेयर)
भू उपयोग 2018
प्रस्तावित भू उपयोग 2031 (हेक्टेयर)
भूउपयोग
2018 (हेक्टेयर)
भू उपयोग 2011 (हेक्टेयर)
भूउपयोग 1993 (हेक्टेयर)
भूमि उपयोग श्रेणी
7 (4+6)
(6)= 2031 के लिए प्रस्तावित क्षेत्र (6)
(5)=(4)-(3)
(4)
(3)
(2)
(1)
820.51
540.77
+89.41
आवासीय
279.74
189.73
52.79
228.12
228.12
मिश्रित
302.66
235.53
86.24
67.13
वाणिज्यिक
153.37
30.35
16.63
औद्योगिक
16.63
1.13
67.11 सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक
20.11
27.27
47.00
74.27
22.81
243.52
224.77
111.59
आमोद-प्रमोद
27.73
139.32
25.1
832.90
469.17
+174.63
363.73
189.11
58.19
यातायात
1.78 सार्वजनिक उपयोगिता एवं सेवाए
8.25
1.78
2.08
10.03
2496.74
1718.47
787.11
772.46
192.45
कुल
वर्ष 2031 के लिए, 54 व्यक्ति प्रति हेक्टर सकल जनसंख्या धनत्व माना गया है । यू.डी.पी.एफ.आई. निर्देशानुसार आवासीय , वाणिजिक एवं औधौगिक जैसी विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणीयों हेतु वर्ष 2031 में आवश्यक क्षेत्र की गणना उपरोक्त दी कई सारणी के कॉलम 6 में की गई है । प्रत्येक भूमि उपयोंग श्रेणी हेतु आवश्यक अतिरिक्त क्षेत्र इस सारणी में निर्दिश्ट की गई है ।
कुछ भूमि उपयोग श्रेणियों में, वर्तमान भूमि उपयोग वर्ष 2031 के लिए, आवश्यक क्षेत्र की तुलना में पहले से ही अधिक है । इन श्रेणियों के अंतर्गत वाणिज्यिक, यातायात एवं परिवहन आते है । ये नगर कीविशेाता के कारण हो सकता है । हालाकि, अतिरिक्त क्षेत्र का प्रावधान, इस श्रेणियों के लिए भी बनाया गया है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(51)
42
53
A राकंत
મતારાય
विशेषप्रयोजन
daldh aldialo
-19
SAIConsultingEngineersPvt.Ltd.
DirectorateofTown&Country Planning,MP,Bhopal EXISTINGPROPOSED
StateInstituteforTownPlanning, Bhopal,MadhyaPradesh (2031)
खजुराहोविकारायोजना2031(प्रारूप)
TRANSPORTATION
LEGEND
AGRICULTURE
KHAJURAHODEVELOPMENTPLAN2031(DRAFT)
AGRICULTURE
PROPOSEDLANDUSE
Submittedto
Submittedby:
PROTECTEDFCHES:
PEDESTRIANPATΗΛΑΣ
REGULATEDZONE
RESIDENTIAL
COMMERCIAL
PARKING
RAILWAYSTATION
RAILWAYLINU TRANSPORTNAGAN
VILLAGEABAALA
VILLAGEBOUNDARY
AINPORT
ROADS
STADIUM SPECIAL POSE
WATERBODIES
PUBLIC&SERIPUBLIC
NAGANPARISHADBOUNDARYCCC
GREENAREA
PLL/SLOPE PROHIBITEDZONE
BUSSTAND
MIXED
RECRE
PUBLICUTILITIES &FACILITIES
PARA MELAGROUND
BOGOME
79580E
TIKURI
KHAJURAHO
CHUDARVER
ACHNAR
79°56′0″E
ZATKARÁ
LALGAWAN
RAJNAGAR
751540E
TOCHAN DRANAG
OHI
KHARO
BAMITHA
FROMCHATTARPUR
24480N
24500N
24120
N.OPS 70
24
N.0.9 % ৮৫ मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(52)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
यातायात एवं परिवहन के आधीन उच्च क्षेत्र पडने का कारण हवाई अड्डा की उपस्थिति हो सकती है । हालाकि, नए मार्गो , का चौडीकरण आदि प्रस्तावित किए गए हैं । इसके अलावा, उच्च वाणिज्यिक क्षेत्र का कारण , होटल एवं पर्यटक अधोसंरचना की उपस्थिति हो सकती है ।
5.7 भूमि उपलब्धता
वन क्षेत्र, जल स्रोतों एवं विरासत ढांचों के आसपास के बफरों एवं जल स्रोतों व पहाड़ी / ढलान के अंतर्गत पड़ने वाले क्षेत्रों के संरक्षण के उद्देश्य से इन क्षेत्रों को विकास के उद्देश्य हेतु नहीं माना गया है । अतः योजना क्षेत्र में विकास हेतु उपलब्ध भूमि को नीचे दर्शाया गया हैः
नो डेवेलपमेन्ट जोन (विकास रहित परिक्षेत्र)
विकासहेतु भूमि उपलब्धता
वन क्षेत्र
ई.एल.यू-2014 अनुसार विकसित क्षेत्र
जल स्रोतों
पहाड़ी / ढलान
योजना क्षेत्र हेक्टेयर
ए.एस.आई. के बफर
7 = 1-
6
4
3
5
2
1
(2+3+4+5+6)
379.94
8430.76
433.24
187.00
206.95
10425
787.11
इसके अतिरिक्त योजना क्षेत्र में विकास हेतु उपलब्ध भूमि के भीतर कुछ क्षेत्रों में विकास को नियमित किया जाएगा उदाहरणार्थ भारतीय पुरातत्व विभाग (ए.एस.आई. ) के स्मारकों के आसपास के बफर (सेकन्डरी) एवं जल स्रोतों के आसपास के बफर को संरक्षित किया जाएगा ।
5.8 अनुमानित आवासीय माँग
विकास योजना 1991-2011 के अनुसार, खजुराहो निवेश क्षेत्र में आवासों की कमी है ।
विकास योजना 1991-2011
के अनुसार आवासीय माँग
सारणी क्र.5 - सा-3
आवासीय माँग
जगह
क्र.स.
3
1
2
2488
1
खजुराहो नगरः
3386
2
राजनगर शहर
3
बमीठा
1309
4010
4
अन्य
11,193
कुल
स्त्रोतः खजुराहो विकास योजना, 2011
विकास योजना 1991-2011 के अनुसार, वर्ष 2011 की अनुमानित जनसंख्या 70,125 हेतु निवेश क्षेत्र में 11,193 अतिरिक्त आवासों की आवश्यकता थी । आवासों की माँग के बारे में विस्तृत विवरण संलग्न सारिणी में दिया गया हैं । लेकिन , जनगणना 2011 के अनुसार, वर्ष 2011 में क्षेत्र की जनसंख्या 48,943 है । इस जनसंख्या हेतु लगभग 4,200 अतिरिक्त आवासों की आवश्यकता थी । लेकिन, वर्ष 1991 से 2011 तक कुल 4487 आवासों की ही वृद्धि हो पायी है । 860( 53)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
आवासों में हुई वृद्धि के विवरण नीचे सारिणी में दिए गए हैं: -
सारणी क्र. 5 - सा-4 वर्ष 1911 से 2011 तक आवासों में हुई वृद्धि
2011
2001
1991
वर्ष
जनसंख्या आवास
आवास
जनसंख्या
आवास
जनसंख्या
जगह
1991-2011 में वृद्धि
8
6
7
5
4
3
2
1
778
1246
720
5762
4057
468
2167
बमीठा
884
411
622
4447
3736
1326
473
टिकुरी
2527
791
14253
2032
12449
10348
1736
राजनगर
2507
3297
24481
4591
11452
19286
2084
खजुराहो
4487
अतिरिक्त आवासों
आवासों की माँगः
हैं । वर्ष 2031 की अनुमानित जनसंख्या के अनुसार, आवासीय माँग का अनुमान लगाया गया है और तदनुसार, अतिरिक्त आवासों की संख्या पर कार्य किया गया है । उसका विवरण नीचे सारिणी में दिए गए
ारणी क्र. 5 - सा -5 : वर्ष 2031 हेतु अनुमानित आवासीय माँग
2031
कुल
2021
वर्ष
जगह
अतिरिक्त आवासीय माँग
अतिरिक्त आवासीय माँग
जनसं ख्या
जनसं ख्या
आवास इकाई परिमाण
अतिरिक्त आवासीय माँग
10% जीर्ण इमारत
आवास इकाई परिमाण
9
6
7
8
5
3
4
2
1
125
1199
4.3
794
280 10437
4.5
7024
बमीठा
1245
88
4.6
952
9810
205
5432 4.8
टिकुरी
2722
253
5.2
1834
27220
635
17683 5.4
राजनगर
2263
4341
459
5.0
44215
1619
5.2
32900
खजुराहो
925
9507
5843
91735
2740
63039
कुल
ग्राफ 5.2: खजुराहो निवेश क्षेत्र में आवासीय माँग
20,000
18,000
16,000
14,000
12,000
10,000
8,000
6,000
No.ofHouseholds
4,000
2,000
0
2031
2021
2001
2011
year 1991 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
जनगणना 2011 के अनुसार, निवेश क्षेत्र में 9248 आवास थे । वर्ष 2031 की अनुमानित जनसंख्या हेतु निवेश क्षेत्र में 9507 अतिरिक्त आवासों की आवश्यकता है ।
5.9 यातायात एवं परिवहन प्रस्ताव
यातायात एवं परिवहन किसी भी नगर का सबसे अधिक महत्वपूर्ण घटक होता है क्योंकि यह वर्तमान एवं भावी पद्धति दोनों के, विकास प्रारूप एवं नगरीय विकास को परिभाशित एवं निर्धारित करता है । क्योंकि, किसी भी नगर में यातायात एवं परिवहन भूमि उपयोग का कृत्य है, तदनुसार, विभिन्न भूमि उपयोगों के बीच संपर्कता एवं यात्रा विकल्पों के उच्च स्तर प्रदान करने के उद्देश्य से प्रस्तावित भूमि उपयोग के साथ एकीकृत किए जाने हेतु यातायात एवं परिवहन की आवश्यकता है । प्रस्तावित भूमि उपयोग योजना के साथ एकीकृत प्रस्तावित यातायात एवं परिवहन योजना, खजुराहो निवेश क्षेत्र का तर्कसंगत एवं नियोजित विकास को प्रोत्साहित करने हेतु आधार बनेगी ।
भूमि- उपयोग का सुसंबद्ध विकास, लोगों को उचित समय में कुछ स्थलों की यात्रा करने या सुविधाजनक चलने में सहायता करता है । इसका परिणाम मार्गों पर कम समय एवं यातायात की भीड़भाड़ में कमी आना है ।
खजुराहो निवेश क्षेत्र की परिसंरचण योजना, वर्तमान यातायात एवं परिवहन परिदृश्य के आधार पर एवं भावी नगरीय योग्य क्षेत्र को ध्यान में रखकर प्रस्तावित किया गया है एवं तदनुसार भूमिउपयोगों के निर्णय लिए गए हैं ताकि प्रमुख स्थलों पर पहुँचने वाले पर्यटकों को कम दूरी तय करनी पड़े । यातायात एवं परिवहन से संबंधित प्रस्तावों का लक्ष्य सुव्यवस्थित मार्गों का अनुक्रम एवं उचित पार्किंग स्थलों (वाहन विराम स्थलों) का निर्माण कर , वर्तमान रोड नेटवर्क एवं आंतरिक एवं अंतर्राज्यीय नगरीय यातायात को सुसंगत बनाना है । वाहन संबंधी प्रदूशण को न्यूनतम करके उचित पर्यावरण का निर्माण करने एवं संचालन क्षमता में सुधार करने के उद्देश्य से नगर में यातायात गतिविधि की क्षमता में सुधार करने , विभिन्न भूमि उपयोगों के बीच सुव्यवस्थित अंतराफलक (इंटरफेस) का विकास करने, प्रस्तावित एवं वर्तमान विकास के अनुरूप नगर के विभिन्न भागों में यातायात वितरण को सुनिश्चित करेगा ।
5.9.1 यातायात एवं परिवहन प्रस्ताव
खजुराहो निवेश क्षेत्र की प्रस्तावित यातायात एवं परिवहन योजना, वर्तमान के साथ - साथ भावी जनसंख्या के जीवनयापन, कार्य करने वाले एवं यहाँ आने वाले लोगों की यातायात आवश्यकता की पूर्ति करने के उद्देश्य से उचित अनुक्रम के सुव्यवस्थित रोड नेटवर्क (मार्ग तंत्र) पर आधारित है । इसमें नगरीकरण के तहत लाए जाने हेतु प्रस्तावित क्षेत्रों एवं नगर के भीतर यातायात एवं परिवहन को सुसंगत बनाने के उद्देश्य से अतिरिक्त संपर्कों ( लिंकेज ) की पहचान करना एवं वर्तमान रोड नेटवर्क का पुनर्निधारण, सशक्त बनाना एवं संवर्धन करना सम्मिलित है । इसलिए , परिवहन की एक सक्षम एवं प्रभावी प्रणाली का निर्माण करने की आवश्यकता है । प्रस्तावों को तैयार करते समय पयर्टकों, सामानों एवं स्थानीय यातायात की गतिविधियों पर विचार किए गए हैं ।
खजुराहोः
1. बमीठा- राजनगर मार्ग , नगर का प्रवेश द्वार होने के अलावा निवेश क्षेत्र की रीढ़ के रूप में कार्य करता है जिसके समांतर कई महत्वपूर्ण विकास स्थापित हैं । इस मार्ग के किनारे हवाई अड्डा एवं रेलवे स्टेशन भी स्थापित हैं । खजुराहो डोमेस्टिक हवाई अड्डे को अंतर्राश्ट्रीय स्तरीय हवाई अड्डे में परिवर्तित किए जाने के प्रस्ताव से एवं रेल से पन्ना को खजुराहो से प्रत्याशित संपर्कता से इस मार्ग पर यातायात गतिविधि में वृद्धि होगी। इसलिए , इस मार्ग का75 मीटर तक चौड़ीकरण करना प्रस्तावित है । 860(55)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
= खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
क्योंकि यह मार्ग खजुराहो से जाने के बजाय, खजुराहो से बायपास मार्ग के रूप में कार्य करता है और यह मार्ग ए.एस.आई. बफर को बिना क्षति पहुँचाए पर्यटकों एवं निवासियों को आवागमन की सुविधा प्रदान करेगा ।
2. वर्तमान स्थिति में, बमीठा - राजनगर मार्ग ही केवल एक मार्ग है जो खजुराहो नगर तक जाता है । इसलिए , प्रस्ताव में बमीठा-राजनगर मार्ग के पश्चिमी भाग में एक वैकल्पिक पहुँच मार्ग चिन्हित किया गया है, जो गंज के निकट एन.एच -75 से प्रारंभ होकर लालगर्वां मार्ग को जोड़ते हुए राजनगर वृत्त मार्ग ( रिंग रोड) की ओर जाता है । इस मार्ग को 45 मीटर तक चौड़ा किया जाना प्रस्तावित है । बमीठा के निकट निवेश क्षेत्र के दक्षिणी भाग में बमीठा - राजनगर मार्ग के पूर्वी भाग पर, एक नया रेडियल मार्ग प्रस्तावित है जो एन. एच -75 से प्रारंभ होकर बमीठा - राजनगर मार्ग के विपरीत मार्ग को जोड़ते हुए प्रस्तावित गोल्फ कोर्स की ओर जाता है । ये दोनों वैकल्पिक मार्ग , बमीठा ग्राम के निकट बमीठा- राजनगर मार्ग को अतिरिक्त भीड़भाड़ से बचाने के प्रयोजन की पूर्ति करते हैं ।
3. लालगर्वां मार्ग के चौड़ीकरण करने का प्रस्ताव किया जा रहा है, जो छत्तरपुर की ओर से आनेवाले पर्यटकों के लिए नगर के प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करेगा । यह मार्ग बहुत ही महत्वपूर्ण होगा क्योंकि यह मार्ग से नगर में प्रवेश करने वाले पर्यटकों को स्वयं नगर की एक अलग छवि प्रस्तुत करेगा । इस प्रकार, इस मार्ग का सामरिक महत्व है और इस मार्ग को 45 मीटर तक चौड़ा किया जाना प्रस्तावित किया गया है । तदनुसार, इस मार्ग के समांतर के भूमि उपयोगों का विकास कार्य किया जाएगा ।
4. एक नया अर्ध- परिधीय मार्ग (सेमी सर्कुलर रोड) प्रस्तावित किया गया है जो वर्तमान बायपास मार्ग के साथ संयुक्त रूप से खजुराहो नगर के भीतर निर्मित पर्यावरण को सम्मिलित करते हुए रिंग (वृत्त) को पूर्ण करता है । यह प्रस्तावित मार्ग , लालगर्वां मार्ग एवं खजुराहो बायपास मार्ग के बमीठा- राजनगर मार्ग के जंक्शन (संगम) के बीच महत्वपूर्ण संपर्क स्थापित करता है । इस मार्ग के परे, पैदल - पथ मार्ग के माध्यम से, पश्चिमी समूह के मंदिरों को पहुँच मार्ग प्रदान किया गया है । 5. उक्त वर्णित प्रस्तावित मार्ग एवं बमीठा- राजनगर मार्ग के बीच, 9 मीटर चौड़ा एक अर्ध-परिधीय (सर्कुलर रोड) पैदल- पथ प्रस्तावित है । यह मंदिरों के पश्चिमी समूह के बफर की संपूर्ण परिधि में आने वाले पर्यटकों को दर्शनीय विरासत प्रदान करेगा ।
6. खजुराहो नगर में , यातायात की भीड़भाड़ को कम करने एवं आसान आवागमन प्रदान करने के लिए वर्तमान लिंक रोड 1 एवं 2 को 18 मीटर तक चौड़ा करना प्रस्तावित है । नगर में बिना प्रवेश किए सीधे रानेहफॉल तक पहुँचने की सुविधा प्रदान करने हेतु खजुराहो बायपास एवं रानेहफॉल को जोडने वाला 18 मीटर का नया मार्ग प्रस्तावित है । दंताला पहाड़ की ओर अग्रणी मार्ग को 30 मीटर तक चौड़ा किया जाएगा क्योंकि यहाँ पर एम.आई.सी.ई ( MICE) टुरिजम का प्रस्ताव है । रानेहफॉल की ओर के मार्ग को भी 18 मीटर चौड़ा किया जाना प्रस्तावित है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(56)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
7. खजुराहो के उत्तरी- पश्चिम भाग में , राजनगर- खजुराहो मार्ग एवं नये प्रस्तावित सामरिक मार्ग को जोड़ने वाला 18 मीटर चौड़ा एक नया मार्ग प्रस्तावित है ।
8. लिंक रोड 1 को लिंक रोड 2 से जोड़नेवाला 18 मीटर चौड़ा एक नया मार्ग प्रस्तावित है । बायपास मार्ग को इस नए मार्ग से जोड़ने वाले वर्तमान मार्ग को 18 मीटर के रूप में चौड़ा किया जाना प्रस्तावित है । जैन मंदिर मार्ग को 18 मीटर चौड़ा करना प्रस्तावित है ।
9. लिंक रोड 2 से निकलते हुए पूर्व मंदिर समुह को जोडते हुए योजना क्षेत्र के पूर्व दक्षिणी दिशा की और जाते हुए वर्तमान मार्ग को 18 मीटर चौड़ा करने का प्रस्ताव है ।
10. खजुराहो नगर के आंतरिक मार्गों को 9 मीटर चौड़ा बनाए रखा है ।
राजनगरः
1. राजनगर के वर्तमान रिंग रेडियल रोड पैटर्न की दृश्टि से, 45 मीटर चौड़ाई का एक नया रिंग रोड प्रस्तावित है , जो रानेहफॉल की विपरीत दिशा से निकलता है और फिर निवेश क्षेत्र के उत्तरी भाग में बमीठा- राजनगर मार्ग से जुड़ता है ।
2. प्रस्तावित रिंग रोड (वृत्त मार्ग ) के पश्चिमी भाग में, इस मार्ग से निकलने वाले वर्तमान तीनों रेडियल मार्ग को 18 मीटर के रूप में चौड़ा किया जाना प्रस्तावित है ।
3. राजनगर शहर के भीतर रिंग रोड के दोनों अंतिम किनारों के बीच संपर्क के रूप में चौड़ा करने हेतु दो आंतरिक मार्गों को चिन्हित किया गया है । इसमें से एक राजनगर फोर्ट (किला) के पश्चिमी छोर पर है और दूसरा , राजनगर माउंट (पहाड़ी ) के पूर्वी छोर से गुजरते हुए महोबा मार्ग में मिलता है ।
4. राजनगर झील के किनारे वर्तमान मार्ग को 18 मीटर के रूप में चौड़ा किया जाना प्रस्तावित है । 5. 18 मीटर चौड़ा एक नया मार्ग प्रस्तावित है जो खजुराहो बायपास मार्ग को रानेहफॉल मार्ग से जोड़ता है । यह मार्ग विकास योजना 2011 में प्रस्तावित था, लेकिन अभी तक क्रियान्वित नहीं हुआ है । 860(57)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
मार्ग
क्र.सं.
2
1
वर्तमान मार्ग का चौड़ीकरण (अ)
1 एन.एच-75
बमीठा-राजनगर मार्ग
2
3 लालगर्वां मार्ग
वर्तमान लिंक रोड 1 एवं 2
4
5 खजुराहो के आंतरिक मार्गों
6 दंताला पहाड़ की ओर अग्रणी मार्ग रानेहफॉल की ओर का मार्ग
7
8 राजनगर रिंग रोड के पश्चिमी भाग के तीनों रेडियल मार्ग
9 राजनगर झील के किनारे वर्तमान मार्ग 10 राजनगर फोर्ट (किला ) के पश्चिमी छोर पर आंतरिक मार्ग
11 राजनगर माउंट से गुजरते हुए महोबा मार्ग में मिलता आंतरिक मार्ग है ।
नए प्रस्तावित मार्ग
(बी)
12 गंज के निकट एन.एच -75 से प्रारंभ होकर लालगर्वां मार्ग को जोड़ता हुआ मार्ग राजनगर रिंग रोड
13
14 अर्ध-परिधीय मार्ग (जो वर्तमान खजुराहो बायपास मार्ग को सम्मिलित करते हुए रिंग को पूर्ण करेगा )
15 अर्ध - परिधीय मार्ग के परे पश्चिमी समूह के मंदिरों के लिए पैदल-पथ मार्ग 16 खजुराहो बायपास एवं रानेहफॉल मार्ग को जोड़ने वाला मार्ग
17 राजनगर- खजुराहो मार्ग एवं नया प्रस्तावित सामरिक मार्ग को जोड़ने वाला 18 लिंक रोड 1 को लिंक रोड 2 से जोड़नेवाला चौड़ा नया मार्ग
19 राजनगर झील से प्रारंभ होकर बंदरगढ तक नया मार्ग
20 राष्ट्रीय राजमार्ग (छतरपुर- पन्ना) से बमीठा राजनगर को जोड़ने वाला मार्ग सारणी क्र. 5 - सा-6 मार्गों की वर्तमान एवं प्रस्तावित चौड़ाई
मार्ग की प्रस्तावित चौडाई
मार्ग की वर्तमान चौडाई
4
3
80मीटर 24
75मीटर 30
45 मीटर 09
18मीटर 06
9 मीटर 3-6
30मीटर 12
18मीटर 09
18मीटर 09
18 मीटर 12
09
18मीटर 09
18मीटर मार्ग की प्रस्तावित चौडाई
45 मीटर
45मीटर
45मीटर
9 मीटर
18मीटर
18 मीटर
18मीटर
45मीटर
45मीटर मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(58)
Satry
Panna
Chhatan Damon
DirectorateofTownand CountryPlanning,Bhopal
StaleInstituteforTownPlanning, BhopalMadhyaPradesh Khajuraho Transportation Map
PLANNINGAREABOUNDARY
SAIConsultingEngineersPvt.Ltd
RAILWAYLINE
NATONALHIGHWAY
RAILWAYSTATION
OTHERROADS
VILLAGEBOUNDARY
MAJORROADS
STATEHIGHWAY
WATERBODY
BUSSTAND
MapNo.:5.1
Legend
+AIRPORT
SubmittedBy
Checkedby
Scale
24°46'0"N
24°48'0"N
24°50′0″N
24°52′0″N
24°54'0"N
8000E 80-0'0"E
79'58'0"E
TIKURI
79°58′0″E
KHAJURAHO KHUDARRIVER
ACHNAR
79°56′0″E
ZATKARA
79°56'0"E
e
RAJNAGAR
LALGAWAN
RAJNAGARKHAJURAHO HOROAD
79°54′0″E
TOCHANDRANAGAR 79°54'0"E
KHAROHI
BAMITHA
79-52′0″E 79°52′0″E
FROMCHATTARPUR
79-500E 79°50′0″E
24°46'0"N
24'48'0"N
24°50′0″N
24°52'0"N
24°54'0"N 860(59)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
i
Satn
Panna
Chhatarp Camob
DirectorateofTownand CountryPlanning,Bhopal
StateinstituteforTownPlanning. BhopalMadhyaPradesh Khajuraho Proposed Transportation
PROPOSEDROAD
PROPOSEDPEDESTRIANPATHWAY
EXISTINGROAD
PLANNINGAREABOUNDARY
VILLAGEBOUNDARY
MapNo.:5.2
WATERBODY
ROADWIDENING
BUSSTAND
TRANSPORTNAGAR
J
+RAILWAYLINE
Legend
TTRANSPORTNAGAR
+RAILWAYSTATION
+ AIRPORT
Checkedby
SubmittedBy-SAIConsultingEngineersPvt.Ltd.
Scale
24-460"N
4480N 24'4
24500N
24:520N
24°54'0N
80°00'E 80°0′0″E
79°58′0″E
TIKURI
79°58′0″E
KHAJURAHO KHUDARRIVER
CHNAR
79°56′0″E
ZATKARA
79°56′0″E
RAJNAGAR
LALGAWAN
TOCHANDRANAGAR
TORAJNAGARKHAJURAHOROA
79°54′0″E 79°54′0″E
KHAROHI
BAMITHA
TO MAHOBA
79°52′0″E 79-52'0'E
FROMCHATTARPUR
79'500'E 79°50′0″E
24°46'0"N
24°48'0"N
24°50'0"N
24°52′0″N
24°54'0"N मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(60)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
KHAJURAHO CROSS SECTION OF ROADS ULTIMATE
35
FP D
9.00-
5.00-
6.00
15.00
11.0939
SAMEDIATE
CT SR FP
FP
CW
CV
FP
CW
FP SR CT
135
FP
FP
18m WIDE ROAD
80m WIDE ROAD (Section )
ULTIMATE
INMEDIATE
FP D
-15 .
15.00
8.00-
CW
FP CT SR FP
CV
CW
FP SR CT FP
12m WIDE ROAD
75m WIDE ROAD (Section )
ULTIMATE
FP
0.51-23 FP
MMEDIATE
FP
FP D
9m WIDE ROAD
CW
CW
45.00-
10001000
1.00-1
1.00
45m WIDE ROAD (Section )
ULTIMATE
0.50-3.00 -0.50
50
1.00-
-1.00
0968-
IMMEDIATE 0.502.00 0 50
6m WIDE ROAD
CW D FP
FP D CW
30m WIDE ROAD (Section )
LOCAL ROADS
SECTOR ROADS
NOTES:
ROAD HIERARCHY:
RIGHT OF WAY: 60-80M
NOTATIONS :
SIDE FP ONLY FOR COMMERCIAL STREETS AND ROADS , OTHERWISE BERMS
SPEED RANGE 50-70 KM/HR
CV: CENTRAL VERGE
MOTORIZED LANES PER DIRECTION , MIN 3.3M
WIDE
CW : CARRIAGE WAY FOR COMMERCIAL STREETS . SIDE FP & SR CAN BE INTERCHANGED BY 0.6 MGV
D: DRAIN
CYCLE TRACK/ NMV TRACKS : SEGREGATED
CYCLE
GV : GREEN VERGE SIDE FP FOR COMMERCIAL STREETS, OTHERWISE BERMS
FP : FOOT PATH
TRACKS REQUIRED; MIN 2.5 M WIDE FOR TWO
WAYMOVEMENT
CT: CYCLE TRACK
SR : SERVICE ROAD
SERVICE LANE: REQUIRED
DR: DERM
THE POSITION OF LIGHT AND OTHER FIXTURE FOR DIFFERENT ROAD WIDTH SHALL BE GIVEN DURING THE ACTUAL CONSTRUCTION OF ROAD.
MEDIANS: CONTINUOUS MEDIAN , ALL OPENINGS AND INTERSECTIONS ACCOMPANIED BY SIGNALS AND TRAFFIC CALMING.
860(61)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
5.9.2 प्रस्तावित परिवहन टर्मिनल्स केंद्र (टर्मिनल्स)
खजुराहो में एक वर्तमान बस टर्मिनल (टर्मिनल केंद्र ) है । वर्ष 2031 हेतु प्रस्तावित भूमि उपयोग योजना में , खजुराहो निवेश क्षेत्र के चार विभिन्न स्थानों पर परिवहन केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण स्थानों पर परिवहन टर्मिनल केंद्र प्रस्तावित हैं । ये परिवहन केंद्र निम्नलिखित जगह पर प्रस्तावित हैं:
1. राजनगर ए.पी.एम.सी के निकट,
2. बमीठा में एन.एच .75 पर छतरपुर छोर पर,
3. लालगवा मार्ग एवं मंदिरों के पश्चिमी समूह के निकट प्रस्तावित रिंग रोड के जंक्शन के निकट, और 4. 45 मीटर चौड़ा बमीठा बायपास मार्ग एवं एन.एच. 75 के जंक्शन के निकट; मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग / एन.एच बायपास पर जहाँ पर बस एवं ट्रक टर्मिनल केंद्र दोनों का प्रावधान किया जा सकता है ।
1. राजनगर ए.पी.एम.सी के निकट ट्रक टर्मिनल:
एक परिवहन केंद्र, वर्तमान राजनगर ए.पी.एम.सी एवं 45 मीटर चौड़ा गंज- राजनगर मार्ग के निकट प्रस्तावित है । इसके भीतर ट्रक टर्मिनल के प्रावधान से , राजनगर ए.पी.एम.सी की पूर्ति होगी एवं राजनगर शहर के भीतर ट्रक गतिविधियों को प्रतिबंध करेगा । वर्तमान में, आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले ट्रकों के लिए कोई उचित पार्किंग (वाहन विराम ) स्थलों का प्रावधान नहीं है और इसप्रकार, कई ट्रकों को राजनगर- महोबा मार्ग के किनारे पार्क किए जाते हैं । इस परिवहन केंद्र में गैरेज / लॉजिस्टिक पार्क आदि जैसे संबंद्ध गतिविधियों के साथ ट्रक हेतु उचित पार्किंग (वाहन विराम स्थल) स्थलों का प्रावधान किया जाएगा ।
2. बमीठा में एन.एच. 75 पर छतरपुर छोर परबस स्टेण्ड
बमीठा में एन.एच. 75 पर पन्ना छोर परदूसरा परिवहन केंद्र प्रस्तावित है, जो मुख्य रूप से पर्यटक बसों एवं टैक्सियों की गतिविधियों की पूर्ति करेगा । यह परिवहन केंद्र, खजुराहो एवं राजनगर दोनों शहरों के लिए संयुक्त बस टर्मिनल के रूप में कार्य करेगा । इस परिवहन केंद्र में राज्य परिवहन बस टर्मिनल भी होगा, जिससे महोबा, ग्वालियर , ओरछा एवं छतरपुर से आने वाली बसों की आवश्यकता की पूर्ति होगी । खजुराहो के मेला मैदान के निकट वर्तमान बस टर्मिनल सतना, पन्ना आदि से आनेवाली बसों की आवश्यकता की पूर्ति करेगा ।
3. लालगवा मार्ग एवं 45 मीटर चौड़े प्रस्तावित रिंग रोड के जंक्शन के निकट पार्किंग सुविधा एवं प्रेमसागर तालाब के पास
मंदिरों के पश्चिमी समूह के निकट 18 मीटर चौडे प्रस्तावित मार्ग एवं लालगवा मार्ग के जंक्शन के निकट एवं प्रेमसागर तालाब के पास पार्किंग सुविधा प्रस्तावित है । इसके अंतर्गत बस कोचों हेतु स्थल के प्रावधान से खजुराहो नगर के भीतर पर्यटक बसों की गतिविधि कम होगी । यहाँ से पर्यटक नगर के अंदर जा सकते हैं । वर्तमान में, ग्वालियर, ओरछा एवं छत्तरपुर से आनेवाली बसों हेतु कोई उचित पार्किंग स्थल का प्रावधान नहीं है । इस परिवहन केंद्र में फूड प्लाजा, गैरेज आदि जैसे संबंद्ध गतिविधियों के साथ बसों एवं टैक्सियों हेतु उचित पार्किंग (वाहन विराम स्थल ) स्थलों का प्रावधान किया जाएगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(62)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
4. छतरपुर- पन्ना मार्ग पर परिवहन केन्द्र एवं एन.एच. -75 के जंक्शन के निकट परिवहन केंद्र
छतरपुर- पन्ना मार्ग पर परिवहन केन्द्र प्रस्तावित है । इस परिवहन केंद्र में सतना, पन्ना एवं अन्य स्थलों से आने वाले पर्यटकों को पार्किंग एवं आराम करने की सुविधा के साथ विश्रामालय एवं फूड प्लाजा की सुविधा होगी । इस परिवहन केंद्र में एन.एच. - 75 पर ट्रक गतिविधियों की आवश्यकता की पूर्ति करने हेतु ट्रक पार्किंग (वाहन विराम स्थल) स्थल भी होगा ।
5.10 प्रस्तावित भूमि उपयोग - वर्ष2031
निवेश क्षेत्र में, पहाड़ों, वनों, जलाशयों, ए.एस.आई / यूनेस्को स्मारकों जैसे विशेष क्षेत्रों की पहचान करके इन क्षेत्रों के आसपास बफर चिन्हित किए गए हैं । इन क्षेत्रों को विकास रहित परिक्षेत्र के रूप में जाना जाता है । शेष निवेश क्षेत्रों का विश्लेषण एवं मूल्यांकन , विकास क्षमता की दृश्टि से किया गया है और तदनुसार, नगरीय योग्य क्षेत्र निर्धारित किया गया है ।
5.10.1 विकास रहित परिक्षेत्र
बफर के साथ चिन्हित विशेष क्षेत्रों में कोई विकास परिक्षेत्र सम्मिलित नहीं है । इन क्षेत्रों को ए.एस. आई / यूनेस्को अधिसूचित स्मारकों के रूप श्रेणीबद्ध किया जा सकता हैः
ए.एस.आई / यूनेस्को अधिसूचित स्मारकों को संरक्षित एवं सुरक्षित करने के लिए , नियमनों के कुछ समूह संबंधित विभागों और प्राधिकारणों के द्वारा तैयार किए गए हैं । इस प्रकार उचित विकास नियंत्रण नियमनों के माध्यम से महत्वपूर्ण धरोहर एवं ऐतिहासिक स्मारकें चिन्हित एवं संरक्षित किए गये हैं ।
एयरपोर्टः एयरपोर्ट प्राधिकरण के नियमनों को ध्यान में रखते हुए , एयरपोर्ट के आसपास फनल क्षेत्र के प्रावधान का देखभाल, प्रदत्त उचित विकास नियंत्रण नियमनों के माध्यम से किया जाता है ।
जलाशयःनिवेश क्षेत्र के सभी जलाशयों के आसपास के उचित बफरों की देखभाल विकास नियंत्रण नियमनों के द्वारा किया गया है ।
संरक्षित वनः संरक्षित वनों की सीमाओं की जानकारी वन विभाग से ली गई है और उसके आधार पर मानचित्र पर चिन्हितकिया गया है ।संरक्षित वनों की सीमाओं के भीतर कोई विकास प्रस्तावित नहीं करने का विशेष ध्यान दिया है ।
5.10.2 नगरीय योग्य क्षेत्र नगरीय योग्य क्षेत्र का प्रावधान , भावी आवश्यकताओं, विकास की प्रत्याशित दिशा एवं प्रस्तावित परिसंरचण पद्धति को ध्यान में रखकर किया गया है । वर्तमान खजुराहो बायपास रोड एवं नए प्रस्तावित रिंग रोड से बनाए गए लूप के भीतर मुख्य रूप से पर्यटक आधारित गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है । प्रस्तावित पर्यटक सुविधाओं का विस्तार निवेश क्षेत्र मे स्थित दक्षिणी भाग में एयरपोर्ट तक किया गया है ।
लूप के पूर्वी छोर पर खाकरा मठ की ओर जाने वाले मार्ग के नीचे , वर्तमान ए.एस.आई / यूनेस्को अधिसूचित स्मारकों की सघनता की दृश्टि से कोई विकास कार्य प्रस्तावित नहीं किया गया है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(63) खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
संरक्षित वनों की मौजूदगी की दृश्टि से लूप के पश्चिमी छोर पर कोई विकास कार्य प्रस्तावित नहीं किया गया है । बेनीसागर डैम के निकट, रेलवे ट्रैक एवं खुदर नदी के बीच सम्मिलित क्षेत्र में, डी.आई.सी के द्वारा प्रस्तावित गोल्फ कोर्स की आनेवाली परियोजना को प्रस्ताव में बरकरार रखा गया है ।
निवेश क्षेत्र के दक्षिणी भाग के अंतिम छोर में, बमीठा में विकास की संभावना पर विचार करते हुए एन.एच. - 75 के साथ मिश्रित भूमिउपयोग प्रस्तावित किया गया है । एन.एच. - 75 एवं बमीठा- राजनगर मार्ग के आसपास बड़ी मात्रा में आवासीय विकास प्रस्तावित है । टिकुरी ग्राम में प्राकृतिक प्रसार का प्रावधान किया गया है ।
लालगवां मार्ग के किनारे, वर्तमान विकास और अतिरिक्त विकास की संभावना की दृश्टि से मिश्रित विकास प्रस्तावित किया गया है । संरक्षित वन एवं वर्तमान सरकारी भूमि में भूमि का बड़ा भू- भाग , अमोद- प्रमोद प्रयोजन हेतु आवंटित किया गया है । खजुराहो एवं राजनगर शहर के बीच में आवासीय भूमि उपयोग का प्रावधान किया गया है । क्योंकि राजनगर में पर्यटक गतिविधि सीमित है, इसलिए , खजुराहो एवं राजनगर शहर हेतु आवासीय विकास का प्रावधान, राजनगर के लूप के उत्तरी दिशा में किया गया है । लूप से तथा लूप से घिरे नगर प्रस्तावित रेडियल मार्ग तक आवासीय विकास का विस्तार किया गया है । राजनगर- बमीठा मार्ग के किनारे मिश्रित भूमि उपयोग की पट्टी के प्रावधान के सिवाय राजनगर के दक्षिणी भाग में 45 मीटर चौड़ा प्रस्तावित मार्ग एवं लालगवां के बीच कोई विकास प्रस्तावित नहीं है । राजनगर की ओर अग्रणी नए प्रस्तावित मार्ग तक सीमित बमीठा- राजनगर मार्ग के पूर्वी भाग में खजुराहो एवं राजनगर शहर के बीच आवासीय विकास प्रस्तावित किया गया है ।
राजनगर में, विकास कार्य , नगर के 45 मीटर चौड़ा मार्ग के लूप के भीतर तक ही सीमित है । कुछ वाणिज्यिक गतिविधियाँ मुख्य मार्ग के किनारे स्थित हैं ।
प्रस्तावित भूमि उपयोग क्षेत्र
पूर्व वर्णित भूमि आवश्यकता के अनुसार, वर्ष 2031 हेतु आवश्यक अतिरिक्त विकास 2789.94 हेक्टे. क्षेत्र में प्रस्तावित है । अतिरिक्त क्षेत्र का बड़ा हिस्सा , राजनगर एवं खजुराहो नगर में तथा खजुराहो- राजनगर मार्ग के किनारे उपलब्ध कराया गया है । पिछले विकास की प्रवृत्ति, खजुराहो- राजनगर शहर के संगम स्थल की दिशा में दिखाई पड़ता है, इसलिए यह माना गया है कि विकास कार्य इस मार्ग के किनारे ही होगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(64)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
प्रस्तावित भूमि उपयोग
क्र. भूमि उपयोग श्रेणी
2
1
1. आवासीय
2. वाणिज्यिक
3. मण्डी (वाणिज्यिक के अंतर्गत)
4. मिश्रित भूमि उपयोग
5. सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक 6. सार्वजनिक उपयोगिताएं एवं सेवाऐं 7. आमोद-प्रमोद
8.
यातायात
9. ग्रामीण विकास
10 .
विकास रहित क्षेत्र
कुल विकसित क्षेत्र
आवासीयः
सारणी क्र- 5 - सा -7 प्रस्तावित भूमि उपयोग
विकसित क्षेत्र का प्रतिशत
प्रस्तावित अतिरिक्त क्षेत्र (हेक्टेयर)
4
3
361.132
12.94%
8.24% 229.76
0.21% 5.77
8.18% 228.12
0.72% 20.11
0.00%
32.35% 902.51
482.96
17.31%
6.44% 179.64
13.62% 379.94
100.00% 2789.94
आवासीय भूमि उपयोग का गठन नगरीय योग्य क्षेत्र के काफी बड़े घटक में होता है । यह नगर की संपूर्ण संरचना सहित उसके निर्मित समूह को प्रतिरूपित एवं परिभाशित करता है । प्रस्तावित आवासीय क्षेत्र, मुख्य रूप से निवेश क्षेत्र के उत्तरी भाग में केंद्रित किया गया है । भावी जनसंख्या को सुविधा प्रदान करने हेतु आवासीय परिक्षेत्र , जिसमें वर्तमान आवासीय क्षेत्रों के साथ- साथ नए आवासीय क्षेत्र दोनों सम्मिलित है , वह मुख्य रूप से राजनगर शहर में एवं उसके आसपास तथा राजनगर एवं खजुराहो शहर के बीच निकटवर्ती क्षेत्रों में प्रस्तावित है ।
प्रस्तावित आवासीय क्षेत्रों के वर्णन नीचे दिए गए हैं:
खजुराहो नगरः वर्तमान आवासीय विकास की दृश्टि से आवासीय क्षेत्र, बमीठा- राजनगर मार्ग के पूर्वी छोर पर यानी पुरी क्षेत्र में एवं विद्याधर कॉलोनी के निकट प्रस्तावित किए गए हैं । साथ ही ये माना गया है कि राजनगर की ओर बमीठा- राजनगर मार्ग तथा ललगवां मार्ग के बीच आवासीय विकास की संभावना है । 860(65)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
राजनगर शहरः इस नगर के वर्तमान स्वरूप की दृष्टि से, इस नगर को मुख्य रूप से आवासीय शहर, कृषि आधारित औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों सहयोगी अधोसंरचना के साथ समायोजित करते हुए विकसित करने की परिकल्पना की गई है । इस प्रकार, सघन आवासीय विकास , 45 मीटर मार्ग के लूप में प्रस्तावित किया गया है , जो लगभग राजनगर शहर के प्रस्तावित विकास से घिरा हुआ है ।
बमीठा- राजनगर मार्ग के पूर्वी भाग में , आवासीय विकास का काफी बड़ा भूखंड प्रस्तावित किया गया है जो रानेहफॉल मार्ग को बायपास मार्ग से जोड़ने वाला प्रस्तावित नए मार्ग तक सीमित है । वर्तमान आवासीय विकास की दृश्टि से, आवासीय विकास रानेहफॉल मार्ग के उपर की ओर प्रस्तावित किया गया है, जो रानेहफॉल मार्ग को खजुराहो- राजनगर मार्ग से जोड़ने वाले मार्ग तक सीमित है ।
पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षित करते समय भूमि का कार्यक्षम उपयोग से नगर का स्थायी विकास प्राप्त किया जा सकता है । यह लक्ष्य सघन नियोजन से प्राप्त किया जा सकता है । सघन विकास, अधोसरंचना के अधिक कार्यक्षम उपयोग के माध्यम से विकास मूल्य काफी कम करता है जिससे आवास किफायती हो जाता है । मौजुदा आवासीय क्षेत्रों के साथ भावी जनसंख्या हेतु संयुक्त किए जाने वाले प्रस्तावित आवासीय क्षेत्रों को एकीकृत कर, इस लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास किया गया है ।
भूमि आवश्यकता गणना के अनुसार आवासीय विकास हेतु आवश्यक क्षेत्र 550 हेक्टेयर है, लेकिन प्रावधान 687.33 हेक्टेयर क्षेत्र किया गया है ।
वाणिज्यिकः
वाणिज्यिक क्षेत्रों की महत्वपूर्ण संख्या, निवास करने वाले संपूर्ण जनसंख्या की मूलभूत आवश्यकता एवं पयर्टन उद्योग की विशिष्ट आवश्यकताओं की पूर्ति करने हेतु प्रस्तावित किया गया है । इसके अलावा, वाणिज्यिक क्षेत्रों का विकास, नए आवासीय क्षेत्रों के अभिन्न अंग के रूप में भी किया जाएगा । प्रस्तावित वाणिज्यिक क्षेत्रों की चर्चा नीचे की गई हैं:
खजुराहो शहरः
नगर में आने वाले पर्यटकों की उच्च प्रवाह / संख्या को ध्यान में रखकर वाणिज्यिक क्षेत्रों का प्रावधान किया गया है । वर्तमान वाणिज्यिक विकास की दृश्टि से, मुख्य रूप से वाणिज्यिक क्षेत्रों का प्रस्ताव खजुराहो नगर के दक्षिणी भाग में बमीठा - राजनगर मार्ग के साथ हवाई अड्डा (एयरपोर्ट) के निकट प्रस्तावित किया गया है । प्रस्तावित रिंग रोड (वृत्तीय मार्ग ) एवं पैदलयात्री मार्ग के बीच , वाणिज्यिक विकास प्रस्तावित है क्योंकि यह क्षेत्र सड़कमार्ग , रेलमार्ग, वायुमार्ग से आने वाले पर्यटकों के रास्ते में आएगा । खजुराहो नगर के अधीन, पर्यटक ग्राम के निकट में, वाणिज्यिक क्षेत्र प्रस्तावित किए गए हैं, जिसमें पर्यटक संबंधी सुविधाएँ जैसे की हाट की अनुमति दी जाएगी । वाणिज्यिक क्षेत्र, जिसमें खाघ हाट (फूड प्लाजा) सम्मिलित हो सकते हैं, वह दंताला पहाड के प्रस्तावित पर्यटक क्षेत्र एवं खाकरा मठ को अग्रणी मार्ग एवं खजुराहो बायपास मार्ग के संगम के निकट प्रस्तावित किया गया है । रिंग रोड ( वृत्तीय मार्ग ) के उत्तरी भाग में, वाणिज्यिक क्षेत्र की संभावना की दृश्टि से दो परिवहन केंद्र के निकट वाणिज्यिक क्षेत्र प्रस्तावित किये गये है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
राजनगर शहरः
राजनगर शहर में, विचारणीय वाणिज्यिक विकास, बमीठा - राजनगर मार्ग के ऊपरी भाग के किनारे एवं महोबा मार्ग के किनारे प्रस्तावित है । नगर के मध्य में , राजनगर किला के निकट, यहाँ पर रहने वाले लोगों की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने के उद्देश्य से वाणिज्यिक विकास प्रस्तावित किया गया है । कृषि उपज मंडी समिति के निकट कृषि आधारित वाणिज्यिक विकास प्रस्तावित किया गया है क्योंकि इससे नगर की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है ।
पर्यटकों के उच्च प्रवाह के प्रतिबिंब के रूप में, वर्तमान वाणिज्यिक विकास, यू.डी.पी.एफ.आई. निर्देशानुसार आवश्यक वाणिज्यिक क्षेत्र से उच्चतर है । यू.डी.पी.एफ.आई. के अनुसार , नगर में कोई अतिरिक्त वाणिज्यिक विकास आवश्यक नहीं है । लेकिन , पर्यटकों के उच्च प्रवाह के कारण नगर में वाणिज्यिक विकास हेतु अतिरिक्त प्रावधान करने की आवश्यकता है । इस प्रकार, 320 हेक्टेयर क्षेत्र , वाणिज्यिक क्षेत्र के रूप में विकसित किए जाने हेतु प्रस्तावित है, जिसमें पर्यटक संबंधी अधोसंरचना की भी सुविधा होगी ।
सार्वजनिक / अर्ध-सार्वजनिकः
खजुराहो शहरः
वर्तमान सार्वजनिक एवं अर्ध- सार्वजनिक विकास की दृश्टि से, अतिरिक्त सार्वजनिक एवं अर्ध- सार्वजनिक भूमि उपयोग , लिंक रोड 2 के संलग्न क्षेत्र में प्रस्तावित किया है । इसके अलावा सार्वजनिक एवं अर्ध- सार्वजनिक क्षेत्र , पूर्वी छोर में एम.पी.ई.बी सर्किट हाउस के निकट बमीठा- खाजुराहो मार्ग के साथ भी प्रस्तावित किया है ।
राजनगर शहरः
तहसील प्रशासनिक मुख्यालय होने की वजह से राजनगर में पहले से ही काफी मात्रा में सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक क्षेत्र उपलब्ध है । लेकिन भावी मांगों की दृश्टि से, सार्वजनिक एवं अर्ध- सार्वजनिक के अधीन भूमि संवर्धित की गई है । राजनगर किले के उत्तरी भाग में, सार्वजनिक एवं अर्ध- सार्वजनिक प्रस्तावित किया गया है । दो अर्धव्यास (रेडियल ) मार्गों के बीच राजनगर नगरपालिका कार्यालय के निकट 100 मीटर की पट्टी को सार्वजनिक एवं अर्ध- सार्वजनिक क्षेत्र के रूप में प्रस्तावित किया गया है । सार्वजनिक एवं अर्ध- सार्वजनिक का कुल 97 हेक्टेयर क्षेत्र प्रदान किया गया है ।
आमोद- प्रमोद (आमोद- प्रमोद):
मुख्य रूप से आमोद - प्रमोद क्षेत्र जलाशयों के निकट प्रस्तावित किया है । इसके पीछे बहुत ही सरल कारण है, जलाशयों को संरक्षित करना एवं उनके आसपास प्राकृतिक एवं आमोद - प्रमोद क्षेत्र का विकास करना । खजुराहो नगर में, वर्तमान आमोद - प्रमोद क्षेत्र को बरकरार रखा गया है । जबकि प्रेमसागर झील , पर्यटक ग्राम एवं विद्याधर कॉलोनी के निकट कीझीलों को आमोद- प्रमोद क्षेत्रों के रूप में प्रस्तावित किया गया है । इसके अलावा मेला मैदान के आसपास के क्षेत्र को आमोद- प्रमोद क्षेत्र के रूप में प्रस्तावित किया गया है । हारुन तालाब से उत्तरी ओर में दंताला पहाड जाते हुए मार्ग तक आमोद प्रमोद क्षेत्र प्रस्तावित है । पश्चिमी मंदिर समूह के पश्चिमी ओर से प्रस्तावित पेदल मार्ग तक आमोद प्रमोद क्षेत्र का प्रस्ताव है । 860(67)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
राजनगर शहर में, राजनगर झील के आसपास बड़े क्षेत्र में नगर स्तरीय आमोद -प्रमोद क्षेत्र का विकास किया जाना प्रस्तावित है । इसके अलावा, पहाड़ी के निकट एवं राजनगर नगरपालिका कार्यालय के विपरीत क्षेत्र को आमोद- प्रमोद क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाना प्रस्तावित है । कुल 944 हेक्टेयर भूमि, आमोद -प्रमोद क्षेत्र के रूप में प्रस्तावित है । मध्य प्रदेश शासन ने दंताला पहाड़ के निकट एम.आई.सी.ई पर्यटन प्रस्तावित किया है जो निवेश क्षेत्र में मुख्य आमोद - प्रमोद गतिविधि के रूप में कार्य करेगा । पिछली विकास योजना में प्रस्तावित प्राणी उद्यान एवं वनस्पति उद्यान को यथावत रखा गया है ।
मिश्रित भूमि उपयोगः
बमीठा ग्राम के निकट मिश्रित भूमि उपयोग प्रस्तावित है । एन.एच. 75 के समांतर 50 मीटर की पट्टी मिश्रित भूमि उपयोग के रूप में प्रस्तावित है । खजुराहो - राजनगर मार्ग के किनारे , मिश्रित भूमि उपयोग प्रस्तावित है । इसके अलावा ललगर्वां मार्ग के किनारे , मिश्रित विकास प्रस्तावित है क्योंकि इस मार्ग के किनारे विकास की अच्छी संभावना की परिकल्पना की गई है । पूर्वी मंदिर समूह की ओर जाते हुए मार्ग पर दक्षिणी दिशा में 50 मीटर की पट्टी मिश्रित भूमि उपयोग के रूप में प्रस्तावित है । खजुराहो रेल्वे स्टेशन के दोनो ओर 100 मीटर की पट्टी मिश्रित भूमि उपयोग के रूप में प्रस्तावित है । राजनगर में कृषि उपज मंडी एवं नगर परिषद कार्यालय के बीच 100 मीटर की पट्टी मिश्रित भूमि उपयोग के रूप में प्रस्तावित है। मिश्रित क्षेत्र में आवासीय , वाणिज्यिक और सार्वजनिक एवं अर्द्धसार्वजनिक भूमि उपयोग के स्वीकृत उपयोग शामील है । संपूर्ण निवेश क्षेत्र में , 146 हेक्टेयर क्षेत्र मिश्रित भूमि उपयोग के रूप में प्रस्तावित है । यातायात एवं परिवहनःकुछ नए मार्ग , वर्तमान क्षेत्रों के साथ- साथ प्रस्तावित क्षेत्रों में संपर्कता प्रदान करने के उद्देश्य से प्रस्तावित किये गये है । हवाई अड्डे के कारण , यातायात एवं परिवहन (टीएंडटी) के अधीन आनेवाला वर्तमान क्षेत्र काफी अधिक है और इस प्रकार, आवश्यक भूमि की गणना से यह पता चलता है कि अतिरिक्त परिवहन सुविधाओं की आवश्यकता नहीं है । लेकिन , निवेश क्षेत्र के वर्तमान एवं प्रस्तावित मांग की दृश्टि से, कुछ नए मार्गों एवं परिवहन संगम स्थल प्रस्तावित है और इन क्षेत्रों में यातायात भीड़भाड़ को कम करने के उद्देश्य से कुछ मार्गों का चौड़ीकरण प्रस्तावित किया गया है । इस प्रकार, यातायात एवं परिवहन के रूप में विकसित किए जाने हेतु 463 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित है ।
5.11 ग्राम विकास
नगरपालिका सीमाओं के अधीन के ग्राम
ग्राम विकास हेतु प्रस्ताव इस तरीके से दिए गए हैं कि ग्राम स्वयं स्थायी/ निर्भर हों । लालगवां ग्राम जो विकास की जबर्दस्त क्षमता दर्शा रहा है उसके आसपास पर्याप्त उचित आवासीय भूमि उपयोग दिया गया है । अचनार ग्राम में रानेहफॉल मार्ग के साथ आवासीय भूमि उपयोग का प्राकृतिक प्रसार दिया गया है । नगरपालिका सीमाओं के बाहर के ग्राम
नगरपालिका सीमाओं के बाहर बमीठा एवं टिकुरी ग्राम है । बमीठा में, एन.एच. 75 के निकटवर्ती क्षेत्र में मिश्रित उपयोग का विकास प्रस्तावित है । नगर के प्रमुख प्रवेश स्थलों में से एक होने के कारण से बमीठा को नगर की अच्छी छवि बनाने के उद्देश्य से सुव्यवस्थित विकास किए जाने की आवश्यकता है । इस लिए बमीठा ग्राम से एक बायपास मार्ग प्रस्तावित है । वर्ष 2031 की अनुमानित जनसंख्या की पूर्ति करने के उद्देश्य से आवासीय क्षेत्र के विस्तार का प्रावधान किया गया है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
5.12 नगरीय अधोसंरचना - भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर
मूलभूत सुविधाएं शहरी जीवन की बुनियादी आवश्यकता है । इसकी पर्याप्तता एवं पहुंच दो महत्वपूर्ण तत्व है । एवं ये शहरी जीवन की गुणवत्ता के उन्नयन एवं सवंर्धन में महत्वपूण योगदान देते हैं जो किसी भी नियोजित विकास के प्रयास का मूल उद्देश्य है ।
शहरी अवसंरचना ' प्रावधान में दक्षता' , 'सभी के जीवन की गुणवत्ता बनाए रखना' एवं 'संसाधन की स्थिरता' की समस्या से जूझ रहा है । यह महसूस किया गया कि शहरी क्षेत्र वैश्विक एवं राष्ट्रीय पूंजी निवेश के लिए प्रमुख स्थलों के तौर पर उभर रहे हैं जिसे राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में उनके योगदान देखा जा सकता है । शहरी क्षेत्रों में स्थिरता एवं जीवन की गुणवत्ता भौतिक अवसंरचनाओं की गुणवत्ता एवं दक्षता से जुड़ा हुआ है । तदनुसार बेहतर भौतिक अवसंरचना प्रदान करने के महत्व की कल्पना की जाती है । 5.12.1 जल आपूर्ति
खजुराहो में जल का प्रमुख स्रोत खुडर नदी है । केन नदी पर निर्मित बेनीसागर बांध भी खजुराहो शहर के लिए जल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है । यह बांध आंशिक रुप से नगर परिषद की सीमा में शहर के दक्षिण पश्चिम में 12 किमी की दूरी पर स्थित है । बेनीसागर बांध के निकट लगभग 0.70 MLD क्षमता का जल प्रशोधन संयत्र विद्यमान है । खजुराहो शहर में कुल 2.5 MLD पानी की आपूर्ति की जाती है, जबकि जल आपूर्ति की मांग 10 MLDहै इसलिए शहर में मांग -आपूर्ति का अंतर 7.5 MLDहै । वर्तमान प्रति व्यक्ति आपूर्ति 98 Ipcd है जोकि जल प्रदाय आवश्यकता से बहुत कम है । खजुराहो में 50 प्रतिशत से अधिक लोग पानी के भूमिगत स्रोत पर आश्रित हैं ।
राजनगर में जल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत भूमिगत जल है । शहर में 0.86 MLD पानी की आपूर्ति की जाती है एवं प्रति व्यक्ति आपूर्ति लगभग 60.5 MLD है ।
बमीठा एवं टिकुरी गांव दोनों अपनी जल आपूर्ति के लिए पूरी तरह से भूमिगत जल पर आश्रित हैं । वर्ष 2031 के लिए खजुराहो योजना क्षेत्र की कुल प्रक्षेपित जनसंख्या 91,735 है । सी.पी.एच.ई.ई.ओ. के दिशा निर्देश के अनुसार 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन को मानते हुए योजना क्षेत्र में वर्ष 2031 के लिए पानी की मांग 12.38 एमएलडी है । वर्ष 2031 के लिए पर्यटकों की प्रतिदिन प्रक्षेपित औसत संख्या 2500 व्यक्ति प्रतिदिन है । सी.पी.एच.ई.ई.ओ. के दिशा निर्देश के अनुसार पर्यटकों की जनसंख्या के लिए पानी की मांग 135 लीटर प्रति इकाई प्रतिदिन है । अतः पर्यटकों के लिए पानी की कुल मांग 0.34 एमएलडी है । इस प्रकार योजना क्षेत्र में वर्ष 2031 में पानी की कुल मांग 12.72 एमएलडी है ।
प्रक्षेपित जनसंख्या की भावी मांग की पूर्ति के लिए , खजुराहो शहर के उत्तर में 13 कि.मी. की दूरी पर अवस्थित कुटनी बांध का उपयोग खजुराहो एवं राजनगर शहर की जल आपूर्ति के स्रोत के तौर पर किया जा सकता है जबकि वर्तमान स्रोत अर्थात बेनीसागर बांध का उपयोग बमीठा एवं टिकुरी गांवों को पानी उपलब्ध कराने में किया जा सकता है । 860(69)
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
5.12.2 मल निकास एवं स्वच्छताः
योजना क्षेत्र में घरेलू मल जल की सुविधा के लिए भूमिगत मल जल प्रणाली का नितांत अभाव है । पूरा मल जल खुली नालियों के माध्यम से बहता है एवं कुछ स्थानों पर घरेलू मल जल के निकाल के लिए गड्ढों का निर्माण किया गया है । सेप्टिक टैंक का प्रवाह खुली नालियों में जाता है । मल जल के निकाल के लिए अस्थाई समाधान के तौर पर अधिकांशतः कच्ची नालियां बनाई गई हैं । बमीठा एवं टिकुरी गांव में घरेलू मल जल के निकाल के लिए सोख्ता गड्ढे बनाये गये हैं ।
खजुराहो शहर में औसतः 55 प्रतिशत गृह इकाईयां एवं राजनगर में 45 प्रतिशत गृह इकाईयां खुले में शौच करते हैं । यहां तक की अधिकांश भीड़भाड़ वाले स्थलों जैसे की सेवाग्राम एवं गोल मार्केट के निकट भी समुचित सार्वजनिक स्वच्छता एवं सुविधाऐ विद्यमान नहीं हैं ।
खजुराहो एवं राजनगर दोनों शहरों में एक उचित मल निर्यास प्रणाली नितांत आवश्यक है । शहर विकास योजना - राजनगर के अनुसार, राजनगर शहर के लिए उत्पादित मल निकास के प्रशोधन के लिए विकेन्द्रीकृत मल जल प्रशोधन संयत्र का प्रस्ताव किया गया है । प्रत्येक प्रशोधन संयत्र की कवरेज 300-400 गृह इकाईयों तक होनी चाहिए । जबकि विकास योजना- खजुराहो के अनुसार पश्चिमी समूह के मंदिरों के निकट एक मल निकास प्रशोधन संयत्र (एस.टी.पी.) का प्रस्ताव किया गया है ।
खजुराहो एवं राजनगर दोनों शहरों में महत्वपूर्ण पर्यटक स्थलों एवं बाजार क्षेत्रों में सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध कराए जाने की आवश्यकता है । खजुराहो में गोल मार्केट क्षेत्र , नव प्रस्तावित बस टर्मिनल एवं सेवाग्राम के निकट केन्द्रीय वाणिज्यिक क्षेत्र में शौचालय ब्लॉकों का प्रावधान किए जाने की आवश्यकता है । राजनगर में बस टर्मिनल, ए.पी.एम.सी. मार्केट , प्रस्तावित वाणिज्यिक क्षेत्रों में शौचालय ब्लॉकों के प्रावधान किए जाने की आवश्यकता है ।
5.12.3 ठोस कचरा प्रबंधनः
खजुराहो शहर में प्रतिदिन लगभग 7.6 मेट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है जिसमें से 30 प्रतिशत से भी कम कचरा एकत्रित किया जाता है एवं क्षेपण स्थल मे फेंका जाता है । सेवाग्राम एवं गोल मार्केट क्षेत्र में अवस्थित छोटे प्रतिश्ठानों में उत्पादित ठोस कचरा मलख भूमि में फेंका जाता हैं । कचरे को चिन्हित क्षेपण स्थल (Dumping Site ) में फेंका जाता है जो शहर से 2 किमी की दूरी पर लालगवाँ मार्ग पर अवस्थित है । राजनगर शहर में 3.56 मेट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है । शहर में लगभग 60 प्रतिशत कचरा कुशलतापूर्वक एकत्रित किया जाता है । एकत्रित कचरा शहर के बाहर खुले स्थल में निश्कासित किया जाता है।
0.3 किग्रा प्रति इकाई प्रति दिन कचरे के उत्पादन को मानते हुए वर्ष 2031 में प्रक्षेपित ठोस कचरे का उत्पादन 27 मीट्रिक टन / दिन लगाया गया है । सक्षम ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली प्रदान करने के उद्देश्य के लिए भू भराव स्थल अभिज्ञात किए जाने चाहिए । इस हेतु ट्रेंचिंग ग्राउन्ड के लिए उपयुक्त भूमि का निर्धारण गैर नगरीय क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया जायेगा, जो कि कृषि उपयोग के अंतर्गत अनुज्ञेय होगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
5.12.4 ऊर्जा
खजुराहो में दो सब स्टेशन अवस्थित हैं । राजनगर शहर में अवस्थित सब स्टेशन को खजुराहो सब स्टेशन से बिजली की आपूर्ति की जाती है ।
बमीठा , छत्तरपुर जिले के निकट बरेठी गांव में एनटीपीसी थर्मल पावर प्लांट का प्रस्ताव है । यह संयत्र (प्लांट) 4000 मेगावाट बिजली का उत्पादन करेगा । इस परियोजना के लिए 2841 एकड़ भूमि की आवश्यकता है । (स्त्रोत: http://pib.nic.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=104433 यथा 2, मार्च, 2014)
5.13 सामाजिक अधोसंरचना
शैक्षणिक संस्थानः यू.डी.पी.एफ.आई. के दिशा निर्देशों के अनुसार मौजूदा परिदृश्य के लिए योजना में क्षेत्र में विद्यालय पर्याप्त मात्रा में विद्यमान हैं । प्रक्षेपित वर्ष की मांग का विवरण निम्नलिखित तालिका में दर्शाया गया है:
वर्ष 2031
वर्ष 2018
प्रकार
यू.डी.पी.एफ.आई. दिशा निर्देशों के अनुसार (आवरित जनसंख्या/स्कूल)
अंतर
अपेक्षित
वर्तमान
32
19
5000
(-13) प्राथमिक शाला
13
7500
17
(-2) सेकन्डरी एवं हायर सेकन्डरी शाला
1
0
2
कॉलेज
1,25,000
तलिका से प्रदर्शित होता है कि वर्ष 2031 के लिए अपेक्षित विद्यालयों की कुल संख्या मौजूदा संख्या से कम है इसलिए वर्ष 2031 की मांग की तुलना में वर्ष 2018 में प्राथमिक , माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों की संख्या अधिक है । राजनगर में राजा बलवंत सिंह एक निजी विद्यालय विद्यमान है जो वार्ड नंबर 4 में स्थित है । योजना क्षेत्र में एक आई.टी.आई. कॉलेज भी विद्यमान है हालांकि उच्च शिक्षण सुविधाओं के प्रावधान की आवश्यकता है ।
स्वास्थ्य सुविधाऐः खजुराहो में केवल एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र विद्यमान है जबकि राजनगर में एक सरकारी चिकित्सालय एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र विद्यमान है ।
पर्यटकों को बढ़ावा देने के अनेक प्रस्तावों के साथ यह परिलक्षित होता है कि क्षेत्र में और अधिक पर्यटक आऐंगे । इसलिए पर्यटकों के साथ- साथ क्षेत्र में रहने वाले लोगों को पर्याप्त एवं अच्छी गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाऐ उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है । खजुराहो पारिस्थितिकी व्यापार शहर की आदर्श परियोजना के तहत परिपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान विकसित किए जाने का प्रस्ताव किया गया है ।
आमोद- प्रमोद सुविधाऐः बेनीसागर जलाशय के समीप एक गोल्फ कोर्स विकसित करने का प्रस्ताव है । यह पर्यटकों को आकर्शित करेगा एवं खजुराहों में आमोद - प्रमोद सुविधाओं में बढावा मिलेगा । पिछली विकास योजना में प्रस्तावित वानस्पतिक एवं प्राणी उद्यान का प्रस्ताव निजी भूमि में किया गया था अतः नई विकास योजना में ये प्रस्ताव नहीं लाये जा सके चूंकि ये परियोजनाएं व्यावहारिक प्रतीत नहीं होती । राजनगर में राजनगर झील एवं राजनगर किले के आसपास के क्षेत्र में आमोद- प्रमोद क्षेत्र का प्रस्ताव किया गया है । 860(71)
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
राजनगर में प्रस्तावित खजुराहो के लुप्तप्रायः उद्यान की परियोजना को कार्यान्वित किए जाने की आवश्यकता है । यह राजनगर में आमोद - प्रमोद गतिविधियों में बढोतरी करेगी एवं खजुराहो में आने वाले पर्यटकों को पर्यटन के क्षेत्र उपलब्ध कराएगी ।
अग्नि शमनः राजनगर एवं खजुराहो में अग्नि शमन केन्द्र उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है चूंकि बमीठा को पारगमन (ट्रांजिट ) केन्द्र एवं दंतिला पहाड़ को एम.आई.सी.ई. पर्यटन के तौर पर विकसित किए जाने का प्रस्ताव किया गया है इसलिए इन क्षेत्रामें में अग्नि शमन की सुविधाऐ प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है । पर्यटन
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दो प्रमुख प्रस्ताव किये गये हैं । एक खजुराहो पारिस्थितिकी व्यापार शहर एवं दूसरा दंतिला पहाड़ में एम.आई.सी.ई. (बैठक, प्रोत्साहन, सम्मेलन एवं प्रदर्शन) पर्यटन का विकास है । खजुराहो पारिस्थितिकी व्यापार शहरः
खजुराहो को पारिस्थितिकी व्यापार शहर की अवधारणा के नमूने के तौर पर विकसित किए जाने का प्रस्ताव किया गया है । खजुराहो को पारिस्थितिकी व्यापार शहर का आम उद्देश्य एकीकृत सामाजिक, आर्थिक एवं पारिस्थितिकी विकास का प्रदर्शन कराना है । क्षेत्र में युवाओं को बनाये रखने के लिए निम्न एवं मध्य वर्ग , टिकाऊ तरीके में भूमि का विकास करने एवं नये व्यवसाय एवं सतत शिक्षण सुविधाओं का सृजन करने पर विशेष ध्यान दिया गया है ।
इसमें विभिन्न परियोजनाएं अभिज्ञात की गयी हैं जो निम्नलिखित हैं:
।.। खजुराहो पारिस्थितिकी कृषि सहयोग
1.2 माइक्रो क्रेडिट एवं लैंड बैंक
1.3 आवास एवं ऊर्जा योजना
1.4 अंतर्राष्ट्रीय पारिस्थितिकी व्यवसाय विद्यालय
1.5 खजुराहो के परिपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान
1.6 ग्रामीण एवं शहरी विकास के लिए विशेष खजुराहो प्रक्रिया
यह परियोजना न केवल खजुराहो की स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढावा देने में मदद करेगी अपितु पर्यावरण का संरक्षण भी करेगी । इस सहयोगात्मक ढांचे के मूल्य एवं आय का उपयोग उद्यान शहर की अवधारणा की 21 वीं सदी में आवास , शिक्षण एवं कृषि में सतत भविश्य की दिशा में शहर एवं भूमि के विकास के वित्त पोशण में किया जाएगा ।
दतला पहाड़ में एम.आई.सी.ई. पर्यटन का विकासः
दतला पहाड़ में लगभग 200 सीटों की क्षमता का सम्मेलन केन्द्र का प्रस्ताव किया गया है । इसके अतिरिक्त पहाड़ी दर्शाते रेस्तरां एवं रिर्सोट भी विकसित किए जा सकते हैं । दंतिला पहाड़ में साहसिक पर्यटन की सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं जैसे केन नदी में ट्रेकिंग एवं पर्यटकों के लिए रात्रि शिबिर सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं । इस क्षेत्र में दिशा सूचक संकेतक, जन सुविधाऐ जैसी सुविधाऐ भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए ।
खजुराहो महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल होने के कारण खजुराहो विरासत क्षेत्र के लिए विस्तृत पर्यटन मास्टर प्लान तैयार करना एवं इसका कार्यान्वयन करना आवश्यक है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
5.14 पर्यटन की भावी परियोजनाएं
आई.एन.टी.ए.सी.एच. द्वारा एक पहलः
खजुराहो में वातावरण के अधोपतन को रोकने के उद्देश्य से डेवलेपमैंट अल्टरनेटिव्स के सहयोग से इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट, कल्चरल एंड हेरिटेज (आई.एन.टी.एसी.एच. ) ने दिसंबर, 1997 में मध्य प्रदेश सरकार को एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया । इस प्रस्ताव में खजुराहो विरासत क्षेत्र के लिए संरक्षण एवं सतत विकास की कार्यनीति तैयार करनी थी । यह प्रस्ताव प्रारंभिक स्वीकृति के साथ मध्य प्रदेश सरकार द्वारा अनुमोदित था । लेडी हेलेन हमलिन, यू.के. द्वारा समतुल्य राशि प्रदान की गयी थी एवं पूरक अंशदान आई.एन.टी.ए.सी.एच.- यूके ट्रस्ट ऐंड डेवलेपमैंट अल्टरनेटिव्स द्वारा किया गया था । इस परियोजना की शुरुआत जनवरी , 1998 में हुई थी । यह रिपोर्ट 7 मार्च , 1999 को श्री के.आर. नारायण, माननीय राष्ट्रपति, भारत को प्रस्तुत की गयी थी ।
इस अध्ययन की रूपरेखा में निम्नलिखित शामिल हैः
खजुराहो विरासत क्षेत्र जिसमें लगभग 65,000 लोगों की जनसंख्या के साथ 42 गांवों में फैला लगभग 38000 हेक्टेयरशामिल है । इस क्षेत्र के भीतर गतिविधियों के बीच परस्पर निर्भरता जिसके फलस्वरूप खजुराहो विरासत जोन की परिभाषा जिसमें लगभग 30,000 लोगों की जनसंख्या के साथ 12 गांवों में फैला 14000 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है जहां अभिज्ञात सभी प्रमुख विरासत घटक अवस्थित हैं ।
विस्तृत कार्य योजना के प्रस्तावों के लिए विश्व धरोहर स्थलों के आसपास सुलभ वातावरण का भी वर्णन किया गया था ।
यह रिपोर्ट कार्ययोजना कार्यक्रम दर्शाती है जिसमें तीन एकीकृत घटकों के साथ कार्य योजना के प्रस्ताव शामिल हैं:
1. एकीकृत विरासत प्रबंधन
2. सतत पर्यटन का विकास
3. एकीकृत सामुदायिक विकास
लुप्तप्रायः उद्यानों की परियोजनाः
वर्ष 1998 से पहले राजनगर में लुप्तप्रायः उद्यानों के लिखित अभिलेख विद्यमान नहीं थे जब तक कि भारतीय विरासत के गैर सरकारी संगठन (एनजीओ ) आईएनटीएसीएच द्वारा उक्त प्रस्तुत नहीं किए गये थे । यह रिपोर्ट राजनगर में एवं राजनगर के आसपास के क्षेत्रों में दीवारयुक्त उद्यानों को अभिज्ञात करती है । 18 वीं सदी में पाये गये इन उद्यानों के मिश्रित रूप की कुछ विशे ाताओं में पूर्णतः सटी हुई दीवार, कुएं एवं सिंचाई की नहरें, मंदिर छोटा महल एवं अक्सर कुछ पवेलियन शामिल हैं । आज ये क्षेत्र जीर्ण शीर्ण अवस्था में हैं ।
वर्ष 2004 में खजुराहो के लुप्तप्रायः उद्यानों की परियोजना का शुभारंभ किया गया था । इस परियोजना के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थेः
क्षेत्र में जैविक कृषि एवं मृदा संरक्षण को बढ़ावा देना ।
उद्यानों का उनके पुराने वैभव के साथ पुनरूद्धार ।
उद्यानों को सतत पर्यटन के उदाहरण के तौर पर मानचित्र में रखना ।
स्थानीय रोजगार पैदा करना । 860(73)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
अपेक्षित निष्कर्ष यह है कि न केवल प्रत्यक्ष स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से बल्कि पर्यटकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से इन उद्यानों का उनके विविध प्रकार की बागवानी एवं विशाल सैर सपाटे के स्थल के साथ उनके मूल वैभव में पुनरूद्धार करना है ताकि पर्यटकों के वहां रुकने की अवधि में वृद्धि हो । यद्यपि खजुराहो में प्रति वर्ष मुख्यतौर पर विदेशी पर्यटक आते हैं जिनमें में अधिकांश खजुराहो में ही रह जाते हैं जिससे पर्यटन का आर्थिक लाभ व्यापक तौर पर नहीं फैलता है । उपरोक्त परियोजना के माध्यम से इन उद्यानों का यात्रा- भ्रमण , पिकनिक एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए स्थान के तौर पर पुनरूद्धार किया जा सकता है जो स्थानीय लोगों के आय के स्रोत के रूप में कार्य कर सकता है ।
इस पुनरुद्धार परियोजना के बहु उद्देशीय दृष्टिकोण विभिन्न ऐतिहासिक , पुरातात्विक, सांस्कतिक, सामाजिक एवं पर्यावरणी संबंधी पहलुओं को रेखांकित करते हैं ।
जनवरी , 2004 में इस परियोजना के लिए धन जुटाने के लिए आईएनटीएसीएच बेल्जियम की स्थापना की गयी। बेल्जियम में भारतीय समुदाय के सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया ।
अभी तक दो उद्यानों का आंशिक तौर पर पुनरूद्धार किया जा चुका हैः पटेरिया का बाग एवं रानी बाग । पारंपरिक तकनीकों का उपयोग करते हुए भवनों एवं ढांचों का पुनरूद्धार किया गया है ।
पर्यटन अवसंरचनाः
खजुराहो क्षेत्र में दिशा सूचक संकेतक, जन सुविधाएं एवं पेट्रोल पंप जैसी सुविधाएं बढ़ाये जाने की आवश्यकता है । दक्षिणी मंदिर समूह में दिशा सूचक संकेतक , विश्राम गृह, पेयजल की सुविधाएं एवं सार्वजनिक शौचालय इत्यादि के संबंध में समुचित बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने चाहिए । लोगों अनुमानित अस्थाई जनसंख्या को देखते हुए विश्राम गृह , पेयजल की सुविधाएं एवं सार्वजनिक शौचालय इत्यादि जैसी सुविधाएं बढ़ाये जाने की आवश्यकता है ।
मौजूदा टैक्सी स्टैंड के पुनर्वास के लिए क्षेत्र के बाहर साइलेंट जोन की आवश्यकता है । मंदिरों के समूह के आसपास ई- रिक्शा जैसे पर्यावरण अनुकूल वाहन उपलब्ध कराए जा सकते हैं । बेणीसागर जलाशय के समीप गोल्फ कोर्स का विकास एवं नौकायन की सुविधाए उपलब्ध कराई जा सकती हैं । राजनगर में पर्यटन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए एवं " खजुराहो के लुप्तप्रायः उद्यानों की परियोजना का यथाशीघ्र कार्यान्वयन किया जाना अत्यंत आवश्यक है । पर्यटकों को आकर्शित करने के लिए इन क्षेत्रों में प्रदर्शन पार्क विकसित किए जा सकते हैं ।
पूर्वी मंदिर समूह के समीप अभिज्ञात पीएसपी क्षेत्र में सांस्कृतिक गांव स्थापित किया जा सकता है । यह गांव चोकी धानी की लाईन , जयपुर गांव में विकसित किया जा सकता है । गांव में प्रदर्शन के लिए रंगभूमि (अखाड़ा) की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं ।
पर्यटन परिपथः
ग्वालियर-शिवपुरी-ओरछा-खजुराहो
इस परिपथ में विरासत एवं वन्यजीव का मिश्रण है । यह परिपथ पर्यटन मंत्रालय द्वारा चिन्हित की गयी है एवं समग्र विकास के लिए भारत सरकार द्वारा चयनित नौ राष्ट्रीय परिपथों के एक भाग का गठन करती है । खजुराहो ग्वालियर- शिवपुरी-ओरछा- खजुराहो के पर्यटन परिपथ में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है । खजुराहो पहले से ही एक अंतर्राष्ट्रीय पयर्टन स्थल है यदि यह पर्यटन परिपथ विकसित हो जाय तो अभी भी इसकी क्षमता का पूर्णतः विकसित किया जा सकता है । सड़क, रेल एवं वायु मार्ग की संयोजकता के मामले में इस पर्यटन स्थल के बीच की संयोजकता में काफी हद तक सुधार लाये जाने की आवश्यकता है । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 नवम्बर 2019
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
ग्वालियर में वायु मार्ग की अच्छी संयोज़कता है एवं अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के तौर पर खजुराहो के हवाई अड्डे को विकसित किए जाने का प्रस्ताव इस परिपथ के आकर्षण एवं सुदृढ़ीकरण में मदद करेगा । इस पर्यटन परिपथ का विकास खजुराहों एवं इसके आसपास के पर्यटक स्थलों में अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करेगा । इसके परिणामस्वरूप खजुराहो में मौजूदा रुझान की तुलना में अस्थाई जनसंख्या काफी हद तक वृद्धि होगी। विकसित किए जाने वाले आसपास के पर्यटन स्थलों के विवरण का उल्लेख अगले खंड में किया गया है ।
रेखा चित्र 5.1 - मार्ग संरचना Gwalior
232 Shivpuri 78
Orachha.
Khajuraho जैसा कि उपरोक्त मानचित्र में देखा गया है योजना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 75 एवं राष्ट्रीय राजमार्ग 76 महत्वपूर्ण सड़कें हैं जो खजुराहो को ओरछा एवं शिवपुरी से जोड़ती है । अतः इन सड़कों का उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण किए जाने की आवश्यकता है जिसके फलस्वरूप पर्यटन परिपथ भी सुदृढ़ होगा ।
पर्यटन क्षेत्र परिपथः खजुराहो- रानेह जल प्रपात अजयगढ़ किला पन्ना राष्ट्रीय उद्यान गंगऊ अभयारण्य पांडव जल प्रपात ।
वर्तमान में खजुराहो का एकमात्र आकर्षण मंदिरों के समूह हैं । पर्यटन को प्रोत्साहन देने एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आसपास के आकर्षण वाले क्षेत्रों को विकसित किए जाने की आवश्यकता है एवं इस प्रकार एक मजबूत परिपथ विकसित किया जा सकता है । यह पर्यटकों को खजुराहो में लंबी अवधि तक रहने एवं आसपास के पर्यटन स्थलों आने- जाने के लिए आकर्शित करेगा । इस परिपथ में विरासत एवं वन्यजीव का मिश्रण है । गंतव्य स्थलों की संयोजकता का सुदृढीकरण किए जाने की आवश्यकता है ।
पन्ना राष्ट्रीय उद्यान पहले से ही आकर्षक पर्यटन स्थल है यहां पर्यटन सुविधाएं उपलब्ध कराये जाने की आवश्यकता है । पांडव जल प्रपात एवं रानेह जल प्रपात को पिकनिक स्थल के तौर पर विकसित किया जा सकता है । पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पन्ना हीरा खान में हीरा संग्रहालय विकसित किया जा सकता है । खुदर नदी के तटाग्रों का विकास दूसरी संभावना है जिसे तलाशा जा सकता है । इन स्थलों में सक्रिय प्रोत्साहन की आवश्यकता है एवं खजुराहो की पर्यटन विपणन रणनीति के तहत उनका एकीकरण करने की आवश्यकता है । यह खजुराहो की एकल, छवि को प्रबल करेगी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(75) खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
उपरोक्त अभिज्ञात स्थलों के अतिरिक्त चूंकि योजना क्षेत्र का अधिकांश हिस्से का चरित्र ग्रामीण है इसलिए ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है । इसके लिए सबसे पहले संभावित स्थलों का अभिज्ञान करना है । अनुभवशील जीवन शैली, कला एवं संस्कृति जैसी गतिविधियां जैसा ग्रामीण बस्तियों में जीवन यापान किया जाता है पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए उसे बढ़ावा दिया जा सकता है जो स्थानीय अर्थव्यवस्था में सहायक सिद्ध हो सकती है ।
रेखा चित्र 5.2 - मार्ग संरचना
Ajaigarh Fort
Raneh Falls
Ken Gharial Sanctuary
KHAJURAHO
Bavina
Panda Falls
Panna
Panna National Park
Panna Diamond Mines
पर्यटन स्थल के परिपथ के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 75 एवं राष्ट्रीय राजमार्ग 76 प्रमुख सड़कों के रूप में परिवर्तित हो गयी है इसलिए इन सड़कों का सुदृढ़ीकरण किया जाना अत्यंत आवश्यक है । खजुराहो को रानेह जल प्रपात एवं अयजगढ़ किले से जोड़ने वाली खजुराहो - रानेह जल प्रपात रोड एक महत्वपूर्ण सड़क है । राज्य राजपथ -49 अजयगढ़ किला, पन्ना उद्यान एवं गंगऊ अभयारण्य को जोड़ती है । राष्ट्रीय राजमार्ग 75 एवं बमीठा - राजनगर रोड खजुराहो को पांडव जल प्रपात, पन्ना एवं गंगऊ अभयारण्य से जोड़ती है । इन पर्यटन स्थलों से सीधे जुड़ने के लिए नई सड़क विकसित की जा सकती है और इस प्रकार परिपथ का विकास किया जा सकता है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
अध्याय-छः
विकास नियमन
6.1 प्रवृत्तशीलता
यह नियमन निम्न गतिविधियों को नियंत्रित करेंगे :-
1. निवेश क्षेत्र के अंदर समस्त विकास ।
भूमि के स्वरूप में परिवर्तन जिसमें भूमि का उप विभाजन शामिल है तथा भूमि के व्यवसायिक उपयोग 2. के परिपेक्ष्य में भूमि उपयोग ।
3. समूह आवासीय परियोजनाओं का सम्मिलित संस्थागत विकास ।
4. सभी प्रकार के भवन जिसमें भवन की ऊंचाई सम्मिलित हो ।
5. ऐसे क्षेत्र में जो नगरपालिका सीमा से बाहर, किन्तु निवेश क्षेत्र सीमा के अंदर है, भूमि का विकास, भवनों का निर्माण / परिवर्तन ।
6.2क्षेत्राधिकार
1. इस अध्याय में वर्णित नियमन राज्य शासन द्वारा मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम , 1973 (क्रमांक 23 सन् 1973 ) की धारा 13 (1 ) के अंतर्गत गठित खजूराहो निवेश क्षेत्र पर लागू होंगे तथा जो नियमन इस अध्याय में वर्णित नहीं हैं, वे म.प्र. भूमि विकास नियम 2012 में निहित प्रावधानों के अनुरूप लागू होंगे ।
2. विकास योजना प्रस्तावों का विस्तृतीकरण परिक्षेत्रिक योजना में किया जायेगा । यह संभावना है कि विकास योजना में परिभ्रमण एवं उपयोग परिक्षेत्रों के निर्धारण संबंधी प्रस्तावों को क्रियान्वयन संबंधी यांत्रिकी आवश्यकताओं के परिपेक्ष्य में संशोधित करना पड़े तो ऐसे संशोधनों के संबंध में राज्य शासन का निर्णय अंतिम होगा , जो कि योजना प्रस्तावों का एक भाग माना जायेगा ।
3. विकास योजना मानचित्र में चिन्हित प्रस्ताव सांकेतिक एवं स्थूल स्वरूप के हैं तथा उक्त प्रस्ताव मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 17 के आधार पर चिन्हित किये गए हैं । उदाहरणार्थ आवासीय परिक्षेत्र में आंतरिक मार्ग , खुले तथा हरित क्षेत्र , शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं तथा सेवाएं आदि का प्रावधान समाविष्ट है । इस कारण विकास योजना मानचित्र में दर्शाए गए आवासीय क्षेत्रों में उक्त सुविधाओं को नहीं दर्शाया गया है ।
4. सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुज्ञा प्राप्त तथा वर्तमान में किसी उपयोग परिक्षेत्र में स्थित भवन, वर्तमान रूप में उसी उपयोग के लिए प्रस्तावित है, जिस उपयोग में इस भवन का उपयोग हो रहा है ।
5. विकास योजना मानचित्र, जो रिपोर्ट के साथ संलग्न है, को क्षेत्रफल की गणना एवं रेखीय नाप आदि हेतु उपयोग नहीं किया जावेगा । इस हेतु 1 :4000 की माप पर बने मानचित्र का उपयोग किया जावेगा । 6. परिक्षेत्रिक योजना तैयार करने की प्रक्रिया विकास योजना तैयार करने के समान है । विकास के स्वरूप के अनुसार पृथक विकास नियमन / परिक्षेत्रिक नियमन की आवश्यकता हो सकती है । किन्तु जब तक परिक्षेत्रिक योजना प्रकाशित / प्रभावशील नहीं होती है, तब तक इस अध्याय में वर्णित नियमनों के आधार पर विकास अनुज्ञा दी जायेगी । विकास योजना प्रस्तावों के अनुसार परिक्षेत्रिक योजना त्वरित गति से तैयार करना नितांत आवश्यक है । यह कार्य नगर परिषद , खजूराहो द्वारा किया जावेगा । परिक्षेत्रिक योजना तैयार करने की प्रक्रिया निरन्तर रूप से जारी रखना आवश्यक है ।
7. प्रत्येक उपयोग परिसर की परिक्षेत्रिक योजना / विस्तृत अभिन्यास में दी गई स्थिति एवं सीमायें स्थल पर विद्यमान वर्तमान मार्ग / गाड़ी मार्ग एवं अन्य भौतिक स्वरूपों को संदर्भ माना जायेगा । 860(77)
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
8. सक्षम अधिकारी द्वारा अनुमोदन प्राप्त अभिन्यास की स्वीकृति समयावधि विकास योजना प्रारूप प्रकाशन की तिथि पर वैध है, उस दशा में यह माना जाएगा कि वह अभिन्यास विकास योजना में प्रस्तावित भूमि उपयोग के अनुरूप है ।
9. सार्वजनिक उपयोग के लिए विशेष परिस्थिति में विकास अनुज्ञा जिसमें राष्ट्रीय , राज्य स्तरीय गतिविधियां सम्मिलित हों, राज्य शासन द्वारा म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के प्रावधान के अंतर्गत दी जा सकती है ।
10. किसी भी उपयोग परिक्षेत्र में उपयोगिता अधोसंरचना से संबंधित निर्माण अथवा गतिविधि जो स्थल पर आवश्यकता के अनुरूप तथा उपयुक्त अधोसंरचना, नियोजित एवं रूपांकन के द्वारा सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित हों, स्वीकार्य होंगे ।
11. ऐसे क्षेत्र जहां सुरक्षा की दृष्टि से प्रतिबंध आवश्यक होंगे इसके लिए आदेश जारी करने हेतु राज्य शासन सक्षम होगा ।
12. विकास अनुज्ञा के लिए प्रस्तुत मानचित्रों में यदि संशोधन आवश्यक हों तो संबंधित अधिकारी द्वारा सुधार कर पुनः प्रस्तुत करने हेतु आवेदक को वापस किया जायेगा । विकास अनुज्ञा संबंधित मानचित्र पर ही दी जा सकेगी ।
13. निवेश क्षेत्र स्थित कृषि प्रधान ग्रामों में स्थित शासकीय भूमि विकास योजना 2031 के प्रस्तावों के परिपेक्ष्य में म.प्र. भू- राजस्व संहिता 1959 की धारा 57 के अनुसार नियंत्रित होगी ।
14. निवेश क्षेत्र में अनियमित आबादी क्षेत्र में ऐसा विकास जिसमें आवासीय विकास भी सम्मिलित है जो उस स्थान पर विकास योजना में निर्दिष्ट भूमि उपयोगो से भिन्न हो तथा आबादी क्षेत्र विकास योजना में दिखायी गयी ग्रामीण आबादी क्षेत्र से भिन्न है तथा अवैध कालोनी के नियमितीकरण हेतु वर्गीकृत प्रकरणो से भिन्न है अनियमित विकास क्षेत्र कहलायेगा उक्त क्षेत्र पर नियमानुसार कार्यवाही कजाकर उसके सुधार हेतु नगर विकास योजना तैयार की जावेगी ।
15. मध्यप्रदेश नगर पालिका (कालोनाईजर कररजिस्ट्रीकरण निर्बन्धन तथा शर्ते) नियम 1998 के अतंर्गत अवैध कालोनियो के नियमितीकरण संबंधी कार्यवाही की जा सकेगी परंतु नियमितीकरण के पूर्व पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय विभाग से अनापत्ति प्राप्त करना आवश्यक होगा ।
16. विकास योजना घटको का क्रियान्वयन विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकारी को प्रदत्त शक्तियों के अनुसार ही योजना तैयार कर क्रियांन्वित किया जाना है । विकास योजना में साडा की स्कीम का जो क्षेत्र दर्शाया गया है । उक्त क्षेत्र में साडा की स्कीम का प्रकाशन राजपत्र में जब तक प्रकाशन नहीं होता तब तक उस क्षेत्र में विकास योजना में दर्शित भूमि उपयोग में स्वीकृत एवं स्वीकार्य भूमि उपयोग के अनुसार उसमें सम्मिलित भूमि के भूमि स्वामियों को विकास अनुज्ञा प्रदान की जावेगी ।
17. ग्रामीण आबादी से 200 मीटर की दूरी तक कंडिका क्रमांक 6.22 स्वीकृत एवं स्वीकार्य उपयोग । उपयोग गतिविधियों की सारणी 6.11 के अनुसार ग्रामीण आवासीय भूमि उपयोग में मान्य होगी इस संबंध में पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय विभाग को अनापत्ति प्राप्त करना आवश्यक होगा । 18. विकास योजना मानचित्र में दर्शित नगर विकास योजना के क्षेत्र की योजना तैयार कर उसका विकास / क्रियान्वयन संबंधित संस्था / विभाग द्वारा किया जावेगा । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 नवम्बर 2019
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
19. नगर विकास योजना (टाउन प्लानिंग स्कीम) के तहत मार्ग एवं अन्य अधोसंरचना का विकास शासकीय विभाग / निकाय करेगा । विकास योजना में प्रस्तावित नगर विकास योजना सीमा के अंतर्गत कोई भूमि स्वामी यदि भूमि विकास अनुज्ञा हेतु आवेदन करता है तो उसे नजदीक विकसित कालोनी की कलेक्टर गाईड लाईन का 10 प्रतिशत की दर से विकसित की जाने वाली संपूर्ण भूमि का शुल्क स्थानीय निकाय / संबंधित विभाग को देना होगा । एवं इस राशि का उपयोग योजना क्षेत्र में ही मार्ग एवं अन्य अधोसंरचना विकास हेतु किया जावेगा ।
6.3 परिभाषाएं
उपयोग परिक्षेत्र
मुख्य भू- उपयोग से संबंधित प्रस्तावित विशिष्ट नगरीय कार्यकलापों में से किसी एक कार्यकलाप का क्षेत्र ।
उपयोग परिसर
उपयोग परिसर से तात्पर्य ऐसा परिसर जो कि उपयोग परिक्षेत्र के उपविभाजन का एक भाग हो एवं जिसे अभिन्यास तैयार करते समय एक विशिष्ट मुख्य उपयोग या गतिविधि के लिए स्पश्ट किया गया हो ।
अभिन्यास
अभिन्यास से तात्पर्य उप विभाजित योजना से है, जिसमें उपयोग परिसर के सभी आकार एवं प्रकार इंगित हों ।
भूमि उपयोग मानचित्र सभी उपयोग उपक्षेत्रों को दर्शाने वाला मानचित्र भूमि उपयोग मानचित्र कहलायेगा ।
परिक्षेत्रिक योजना
निवेश क्षेत्र के एक परिक्षेत्र की योजना जिसमें नियोजन के प्रावधानों का विस्तार, सामाजिक अधोसंरचना, उद्यान , खुले क्षेत्र एवं यातायात तंत्र संबंधी विस्तृत जानकारी प्रावधानित हो ।
नगरीय ग्राम
भूमि उपयोग मानचित्र में दर्शाये एवं प्रस्तावित उपयोग परिक्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली ग्रामीण आबादी नगरीय ग्राम कहलायेंगे ।
नगरीय विरासत
नगरीय विरासत से तात्पर्य ऐसा परिसर जिसमें कि पुरातत्व महत्व के ऐतिहासिक भवन एवं उसके आसपास का परिसर सम्मिलित हो ।
संवेदनशील क्षेत्र
परिस्थितिजन्य एवं विरासत के आधार पर सीमांकित पर्यावरणीय , धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पुरातत्व महत्व के घोषित क्षेत्र, संवेदनशील क्षेत्र कहलायेंगे । नियंत्रित क्षेत्र
नाली विभाजक, तालाब के जल ग्राह्य क्षेत्र एवं परिदृश्य गुणवत्ता की संभावनाओं के आधार पर निर्धारित किया गया क्षेत्र ।
विनियमित क्षेत्र
परिस्थितिजन्य एवं विरासत के आधार पर सीमांकित पर्यावरणीय , धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पुरातत्व महत्व के घोषित क्षेत्र के प्रतिबंधित क्षेत्र 100 मीटर के पश्चात् 200 मीटर का क्षेत्र ।
6.4 भूमि उपयोग परिक्षेत्र
खजुराहो निवेश क्षेत्र को 10 उपयोग परिक्षेत्र में विभक्त किया गया है । प्रत्येक उपयोग परिक्षेत्र आगे विभिन्न उपयोग परिसरों के रूप में उपविभाजित किए गए हैं । प्रत्येक परिसर में विशिष्ट उपयोग / उपयोग गतिविधियां शर्तों या बिना शर्तों के स्वीकार्य होगी । ऐसे क्षेत्र जिसका कि निर्धारित अभिन्यास स्वीकृत नहीं है, का प्रतिबंध विकास योजना / परिक्षेत्रिक योजना के भू- उपयोग / प्रस्तावों के अधीन निर्धारित होगा । निर्धारित मुख्य 10 भू- उपयोगों के अनुरूप ही उपयोग परिक्षेत्र रहेंगे यथा आवासीय , वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक, सार्वजनिक उपयोगिताएं एवं सेवायें, आमोद-प्रमोद, यातायात एवं परिवहन, कृषि । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(79) खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
सारणी क्र. 6 - सा-1 उपयोग परिक्षेत्र
परिक्षेत्र
उपयोग श्रेणियां उपयोग
क्रमांक
3
2
1
आवासीय परिक्षेत्र
आवासीय
1
वाणिज्यिक परिक्षेत्र
2 मिश्रित
मण्डीपरिक्षेत्र
3 मण्डी
4 वाणिज्यिक
आवासीय , वाणिज्यिक , सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक / परिक्षेत्र
5
सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक परिक्षेत्र
सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक
सार्वजनिक उपयोगिता एवं सेवा परिक्षेत्र
6 सार्वजनिक उपयोगिता एवं सेवायें
7 यातायात
मार्ग , बस स्टेन्ड, रेल्वे स्टेशन , रेल्वे मार्ग , विमान तल 8 आमोद - प्रमोद (आमोद - प्रमोद ) क्षेत्रीय उद्यान, नगरीय एवं अन्य उद्यान, स्टेडीयम , हरित क्षेत्र
9
जलाशय , नदी, नाले, तालाब , नहर
जलाशय
10 कृषि
ग्राम आबादी को सम्मिलित करते हुए कृषि परिक्षेत्र
6.5 नवीन आवासीय क्षेत्र हेतु विकास नियमन
1. इस नियमन का उद्देश्य परिक्षेत्रों के अभिन्यास तैयार करने में मार्गदर्शन देना है । इन नियमनों में परिभ्रमण संरचना एवं सुविधाओं के प्रावधानों के मानक सम्मिलित हैं । ऐसे अभिन्यासों से जुड़े सेवा प्रावधान जैसे भौतिक संरचनायें, जल प्रदाय , जल - मल निकास आदि नगरपालिका उपनियमों के अनुरूप होंगे ।
2. सामान्यतः भूखण्ड की चौड़ाई एवं गहराई अनुपात 1: 1.5 से 1:3 होना चाहिये ।
3. भूखण्ड का आकार, भूखण्ड का प्रकार, फर्शी क्षेत्रानुपात , भू-आच्छादन , भवन की ऊँचाई, स्वीकार्य आवासीय इकाई के रूप में आवासीय विकास हेतु मापदण्ड, भवन निर्माणकर्ताओं को भवन/ योजना हेतु आवयश्क है । आवासीय क्षेत्र के लिए सीमान्त खुले क्षेत्र एवं निर्मित क्षेत्र के प्रावधान सारणी 6.2 में दिए गए हैं । सारणी में दर्शाये अनुसार भूखण्ड आकार को अनुमोदित अभिन्यास का भाग होना चाहिए एवं अनुज्ञा हेतु यह पूर्णतः विकसित होना चाहिये ।
4. एक भूखण्ड में चार आवासीय इकाईयों से अधिक समाहित करने हेतु प्रस्तावित आवासीय क्षेत्र में तैयार किये गये अभिन्यास की स्वीकृति तभी दी जावेगी जब आवश्यक प्रावधान जैसे जल प्रदाय, जल- मल निकास तथा पार्किंग सुविधा का प्रावधान किया हो तथा भवन निर्माण की अनुमति देने के पूर्व उक्त सेवायें एवं सुविधायें आवश्यक रूप से उपलब्ध होना चाहिये ।
5. एकल / संयुक्त परिवार इकाई को आवश्यक सेवा तथा सुविधाओं के भौतिक सत्यापन के पश्चात् बहुइकाई भूखण्डीय विकास में परिवर्तन करने की अनुमति दी जा सकती है ।
6. आवासीय अभिन्यासों में शासन द्वारा निर्धारित मापदण्डों एवं समय - समय पर जारी आदेशानुसार समाज के कमजोर वर्गों हेतु भूमि का आरक्षण किया जावेगा ।
7. अल्प आय वर्ग का अभिन्यास परिशिष्ट एम (नियम 99 ) मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम, 2012 के प्रावधानानुसार तैयार किया जावेगा । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 नवम्बर 2019
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8. म.प्र. नगरपालिका कालोनाईजर रजिस्ट्रेशन निर्बंधन एवं शर्तें अधिनियम, 1998 एवं म० प्र० ग्राम पंचायत (कालोनियों का विकास नियम 2014) के प्रावधानों के अनुरूप कमजोर आय वर्ग हेतु भूमि / भवन आरक्षित की जावेगी ।
सारणी क्र. 6- सा-2:नवीन आवासीय क्षेत्रों हेतु विकास नियमन
सीमांत खुला क्षेत्र मीटर में क्र.
भूतल पर निर्मित क्षेत्र
विकास का प्रकार
अग्र
आजू बाजू
पृष्ठ
फर्शी क्षेत्र अनुपात
क्षेत्रफल (वर्ग मीटर में)
भूखण्ड का आकार (मीटर में)
9
10
6
7
8
3
4
5
2
1
0.0
0.0 0.0
1.00 3.0
60
32
पंक्ति
4.0x8.0
1.
0.0 0.0
1.5
60
1.00 3.0
48
पंक्ति
4.0x12.0
2.
0.0
0.0
1.5
3.0
1.00
60
75
पंक्ति
5.0x15.0
3.
0.0 0.0
1.5
3.0
60
0.75
105
4.
7.0x15.0
पंक्ति
1.5 0.0
3.0 2.5
0.75
50
9.0x15.0
5.
अर्द्ध पृथक्कृत
135
2.5
2.5 0.0
3.0
50
0.75
200
11.0x18.0
6.
अर्द्ध पृथक्कृत
0.0
3.0
2.5
3.5
50
0.50
216
7.
12.0x18.0
अर्द्ध पृथक्कृत
1.5
2.5
40
0.50 4.5 3.0
288
12.0x24.0
8.
पृथक्कृत
2.5 3.0
6.0 3.0
35
0.50
360
15.0x24.0
9.
पृथक्कृत
3.0 3.0
0.50 7.5 3.5
33
405
15.0x27.0
10.
पृथक्कृत
3.0 3.0
4.0
8.0
33
0.50
18.0x30.0
540
11 .
पृथक्कृत
3.0 4.5 3.0
0.50 9.0
600
33
20.0x30.0
12.
पृथक्कृत
4.5 4.5
12.0 4.5
30
0.50
750
13. 25.0x30.0
पृथक्कृत 860(81)
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
नोट:-
1. उपरोक्त सारणी एकल परिवार / संयुक्त परिवार हेतु प्रस्तावित भूखण्डीय विकास हेतु प्रस्तावित है । 2. सारणी के अनुक्रमांक 1 से 4 के भूखण्ड 7.50 मीटर परन्तु भवन की ऊचाई 7.50 मीटर से अधिक नहीं चौड़े मार्ग पर स्थित होने की दशा में इन पर केवल दो मंजिला आवास निर्माण अनुज्ञेय होंगे । 3. सारणी के अनुक्रमांक 9 से 13 में दर्शाये भूखंड आकार को केवल प्रस्तावित आवासीय क्षेत्रों में बहु- इकाई भूखण्डीय विकास के रूप में मान्य किया जा सकता है । ऐसे भूखण्डों पर स्वीकार्य आवासीय इकाईयों की गणना म.प्र. भूमि विकास नियम, 2012 के द्वारा अधिशासित होंगी ।
4. ऐसे भूखण्ड जिनका आकार नियमित अथवा अनियमित हो एवं जो सारणी में दर्शाई श्रेणियों के मध्य के आकार के हों, को इसके पूर्व की श्रेणी के एम.ओ.एस. आच्छादित क्षेत्र, एफ.ए.आर. के साथ अथवा नियोजन अनुज्ञा में वर्णित अनुसार स्वीकृति दी जानी चाहिये ।
5. समूह आवास में स्वीकार्य भूतल आच्छादित क्षेत्र में यदि आच्छादित पार्किंग व्यवस्था की गयी हो तो उसकी गणना फर्शी क्षेत्रानुपात में न की जाये ।
6. विमानतल के आसपास एवं नगरीय विरासत वाले क्षेत्र (ASI & UNESCO World Heritage Sites) होने के कारण खजुराहो में 7.0 मीटर तक भवन की ऊँचाई स्वीकार्य होंगी और राजनगर, बमीठा एवं टिकूरी में 12.00 मीटर तक भवन की ऊँचाई स्वीकार्य होंगी ।
7. एकल / संयुक्त परिवार के भूखण्ड पर 4 आवासीय इकाईयों से अधिक स्वीकार्य नहीं होगी ।
8. एक कर्मचारी आवास का अधिकतम आकार 20 वर्गमीटर होगा जिसमें एक रहवासी कमरा 11 वर्गमीटर फर्शी क्षेत्र का होगा । इसके अतिरिक्त ऐसी आवासीय इकाई में जिसमें किचन, बरांडा एवं शौचालय होना आवश्यक होगा ।
9. घनत्वीय गणना हेतु एक आवासीय इकाई में 5.0 व्यक्ति तथा कर्मचारी आवास में 3.0 का रहवास माना जायेगा ।
10. 288 वर्गमीटर से अधिक के भूखंडों में स्वीकार्य निर्मित फर्शी क्षेत्र के प्रति 240 वर्गमीटर पर एक कार पार्किंग स्थल प्रावधित होना चाहिये ।
11. झुग्गियों के पुनर्स्थापना की दशा में 32 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल के भूखण्ड स्वीकार्य होंगे । 12. म.प्र. भूमि विकास नियम , 2012 के नियम 81 उपनियम (4) के तहत छत पर वर्षा के जल के उपयोग के लिए रूफ वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली की व्यवस्था उन समस्त निर्माणाधीन भवनों में की जावेगी जिनका भूखण्ड क्षेत्रफल 140 वर्गमीटर से अधिक हो ।
6.5.1 समूह आवास
समूह आवासीय परियोजनाओं हेतु म.प्र. भूमि विकास नियम, 2012 के प्रावधानों के अनुसार मापदण्ड लागू होंगे ।
6.5.2 बहुमंजिली इकाई निर्माण (सिर्फ राजनगर के लिए) म.प्र. भूमि विकास नियम, 2012 को मापदण्ड अनुसार नियंत्रित होंगे ।
6.5.3 मल्टीप्लेक्स विकास नियमन
म.प्र. भूमि विकास नियम, 2012 के (नियम 95 ) मापदण्ड अनुसार अनुज्ञेय होंगे ।
6.5.4 पोडियम
म.प्र. भूमि विकास नियम, 2012 के नियम 62 के मापदण्ड अनुसार नियंत्रिण होंगे । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(82)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
6.5.5 पार्किंग तल
म.प्र. भूमि विकास नियम, 2012 के नियम 63 के मापदण्ड अनुसार नियंत्रित होंगा ।
6.6 अनौपचारिक व्यावसायिक वर्ग के लिए प्रावधान
नवीन वाणिज्यिक केन्द्रों के नियोजन के समय फुटपाथ दुकानें, हाथ ठेला एवं इसी तरह की अन्य गतिविधियों के लिए निम्न सारणी में दिये गये मानकों के अनुसार अनौपचारिक वर्ग हेतु प्रावधान किये गये हैं ।
सारणी क्र. 6- सा-3:अनौपचारिक व्यावसायिक वर्ग के लिए योजना प्रावधान
मानक
विवरण
क्र.
3
2
1
फुटकर व्यापार
खंड केन्द्र
3 से 4 इकाई प्रति 10 औपचारिक दुकानें
1
उपखंड केन्द्र
सुलभ शापिंग
5 से 6 इकाई प्रति एक हजार कर्मकार
2 शासकीय एवं वाणिज्यिक कार्यालय
3 से 4 इकाई प्रति 10 औपचारिक दुकानें
3 थोक व्यापार एवं मालभाड़ा परिसर
3 से 4 इकाई प्रति 100 बिस्तर
4 चिकित्सालय
1 इकाई प्रति 2 बस स्थान
5 बस विराम स्थल
विद्यालय
3 से 4 इकाई
6
प्राथमिक
माध्यमिक/ उच्चतर माध्यमिक
उद्यान
5 से 6 इकाई
7
क्षेत्रीय / नगर उद्यान
पासवर्ती उद्यान
8 से 10 इकाई प्रत्येक प्रमुख प्रवेश द्वार 2 से 8 आवासीय
3 इकाई
1 इकाई प्रति 1000 जनसंख्या
9 औद्योगिक
टीप - प्रत्येक इकाई 2.5 से 5 वर्गमीटर के आकार की नियत होगी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(83) खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
6.7 वाणिज्यिक क्षेत्र हेतु विकास नियमन
नगरीय / निवेश इकाई केन्द्रों में निम्नलिखित घटक होंगे
फुटकर दुकानें
वाणिज्यिक कार्यालय
सेवा केन्द्र
सांस्कृतिक परिसर
होटल
सुविधाएं
थोक व्यापार
कुछ परिस्थिति में उपरोक्त सभी घटकों के लिए एकीकृत योजना बनाना संभव हो सकता है । अन्य परिस्थितियों में भूमि विकास एवं उसके बिकने , कार्यविधि अथवा कतिपय रूपांकन संबंधी आवश्यकताओं के कारण इस समाधान की संभावना नहीं हो सकती है । संभवतः अन्य समूह यथा खेरची, कार्यालय , संस्कृति परिसर तथा आवासीय उपयोग को भू- दृश्य एवं परिभ्रमण के माध्यम से उसी भवन स्थल या क्षेत्र में ज्यादा सरलता से एकीकृत किया जा सकता है । सभी घटकों को कुल घटकों को शामिल करते हुए एकीकृत योजना तैयार करें । नगर / उपनगर के समीप के रहवासी क्षेत्र से पैदल या उपमार्गों के द्वारा पहुंच के योग्य होना चाहिए । प्रस्तावित वाणिज्यिक क्षेत्र हेतु स्वीकार निर्मित क्षेत्र तथा फर्शी क्षेत्रानुपात सारणी 6- सा -4 के अनुसार होंगे -
सारणी क्र. 6 - सा -4 :वाणिज्यिक विकास हेतु मापदंड
स्थिति
वर्ग
क्र.
फर्शी क्षेत्र अनुपात
भूखंड निर्मित क्षेत्र (भूखंडीय विकास)
निर्मित क्षेत्र (निगमित विकास)
5
6
4
3
1
2
25 प्रतिशत
1.25
80 प्रतिशत
1
नगर केन्द्र
मध्य क्षेत्र (मुख्य मार्ग) / वर्तमान विकसित क्षेत्र
80 प्रतिशत 25प्रतिशत
1.25 2
परिक्षेत्रिक योजना प्रस्तावों के अनुरूप
इकाई केन्द्र वृत्त खण्ड स्तरीय केन्द्र/ सामुदायिक
3
80 प्रतिशत 30प्रतिशत 1.00 निवेश इकाई केन्द्र
सभी निवेश इकाई केन्द्र के वाणिज्यिक क्षेत्र
40प्रतिशत
80 प्रतिशत
0.60 4
स्थानीय केन्द्र
परिक्षेत्रिक योजना प्रस्तावों के अनुरूप
60 प्रतिशत 40प्रतिशत
5
0.60 सुविधाजनक दुकानें
अभिन्यास प्रस्ताव के अनुसार
25 प्रतिशत
70प्रतिशत
1.00 6 गोदाम एवं भंडार
25 प्रतिशत
7
70 प्रतिशत
1.00 थोक बाजार मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860 (84)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
सारणी क्र. 6 - सा -5 : थोक वाणिज्यिक विकास हेतु अभिन्यास के मानक
वर्ग
कुल क्षेत्र का प्रतिशत
क्रमांक
3
2
1
अधिकतम 50 प्रतिशत
1 भूखण्डों का क्षेत्र
अधिकतम 40 प्रतिशत
परिभ्रमण एवं वाहन विराम स्थल का क्षेत्र
2
3
न्यूनतम 10 प्रतिशत
खुले स्थानों को सम्मिलित कर सुविधाओं का क्षेत्र
4 मार्गों की चौड़ाई
12मीटर
० ' बाजार से गुजरने वाले मुख्य सीधे मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई
18मीटर
दुकानों के सामने ट्रकों के खड़े होने एवं मुड़ने के लिए न्यूनतम चौड़ाई
03मीटर
दुकानों के सामने पादचारी की न्यूनतम चौड़ाई
5
विराम स्थल
1.50 कार स्पेस प्रति 100 वर्गमीटर फर्शी क्षेत्र के
6.8 ईंधन भराव केन्द्र के मापदण्ड
ईंधन भराव के विकास के मापदण्ड म० प्र० भूमि विकास नियम 2012 के नियम 53 (3 ) (चार) के अनुसार होगें ।
6.9 छविगृहों के मापदण्ड
म०प्र ० भूमि विकास नियम 2012 के अनुसार होगे ।
6.10 मिश्रित उपयोग नियमन
खजुराहो की विकास योजना 2011 में मिश्रित उपयोग संबंधी प्रावधान दिये गये थे । इसी की निरंतरता में मिश्रित उपयोग के संबंध में अध्ययन किया गया । अध्ययन में यह परिलक्षित हुआ कि मिश्रित उपयोग पारंपरिक नगर नियोजन तथा भारतीय सामाजिक-आर्थिक- सांस्कृतिक परिवेश पर आधारित है । इस दृश्टिकोण के आधार पर मिश्रित उपयोग के अंतर्गत पूर्व में निर्धारित मार्गों के अतिरिक्त और अधिक मार्गों को जोड़ा जाना आवश्यक है । साथ ही इसके नियमन को अधिक विस्तृत किये जाने की आवश्यकता भी महसूस की गई ।
6.10.1 मिश्रित उपयोग के मार्गदर्शी सिद्धांत
1. मिश्रित उपयोग का आशय आवासीय परिसर में गैर आवासीय गतिविधि किये जाने से है ।
2. ऐसे कार्य कलापों की सामाजिक, आर्थिक आवश्यकता तथा आवासीय क्षेत्र में उक्त कार्यकलापों से पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित विपरीत प्रभाव के बीच संतुलन बनाये रखना आवश्यक है ।
3. मिश्रित उपयोग से, अलग अलग मोहल्लों में निकटतम क्षेत्र में व्यावसायिक सुविधायें प्राप्त हो सकेंगी जिससे आवागमन में कमी आयेगी किन्तु इससे रिहायशी इलाकों में भीड़ भाड़ बढ़ने, पार्किंग की असुविधा एवं अन्य पर्यावरणीय दुश्प्रभाव भी पड़ना संभावित है । प्रस्तावित नियमन से इन प्रभावों का प्रबंधन एवं नियंत्रण संभव होगा । 860(85)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
6.10.2 मिश्रित उपयोग की सामान्य शर्ते:-
1. केन्द्र शासन / राज्य शासन तथा इनके उपक्रमों, सार्वजनिक एवं अर्ध सार्वजनिक संस्थाओं, संगठनों, बैंक इत्यादि द्वारा अपने सेवकों हेतु निर्मित आवासीय कालोनी में गैर आवासीय गतिविधियाँ प्रतिबंधित रहेगी । इसके अतिरिक्त विकास योजना में चिन्हित संवेदनशील क्षेत्र , सक्षम प्राधिकारी द्वारा सूचित विरासतीय भवन/क्षेत्र में मिश्रित उपयोग प्रतिबंधित होगा ।
2. आवासीय क्षेत्र में विकास नियंत्रण के जो मापदण्ड (एफ. ए. आर. , ग्राउण्ड कवरेज इत्यादि ) पूर्व से लागू हैं, वही मापदण्ड मिश्रित उपयोग के लिये लागू रहेंगे ।
3. मिश्रित उपयोग निर्धारित सीमा तक भूतल पर ही मान्य होंगे तथा आवासीय विकास का मूल स्वरूप अपरिवर्तनीय रहेगा ।
4. मिश्रित उपयोग के यह नियमन पूर्व से विकसित क्षेत्र एवं नवीन प्रस्तावित क्षेत्रों में लागू होंगे जिसके मापदण्ड एवं प्रक्रिया पृथक- पृथक इस अध्याय की आगामी कंडिकाओं में स्पष्ट किये गये है । 6.10.3 मिश्रित उपयोग के प्रकार
1. वाणिज्यिक गतिविधियाँ फुटकर दुकानों के रूप में ।
2. सार्वजनिक एवं अर्ध सार्वजनिक गतिविधियाँ
3. व्यावसायिक परामर्श कार्यालय
नोट: -उपरोक्त मिश्रित उपयोग की अनुमति बिन्दु क्रं. 6.10 में वर्णित प्रावधानों के अद्यधीन दी जा सकेगी । 6.10.4 वाणिज्यिक गतिविधियों, फुटकर दुकानों के अंतर्गत स्वीकार्य गतिविधियाँ:-
आवासीय परिसरों में यह निम्न गतिविधियाँ निधारित मानकों सहित निर्धारित सीमा तक स्वीकार्य होंगी:-
(अ) 1. बेकरी सामग्री / कॉन्फेक्शनरी सामग्री
2. किराना/ जनरल स्टोर्स
3. डेयरी उत्पाद
4. स्टेशनरी / बुक्स/ उपहार / बुक बाईंडिंग
5. साईबर कैफे/ काल फोन बूथ
6. एल.पी.जी. बुकिंग आफीस / शोरूम एल. पी.जी. सिलेण्डर रहित
7. पान की दुकान
8. लाण्ड्री/ड्राय क्लीनिग / कपड़ो पर प्रेस की दुकान
9. मिठाई की दुकान, चाय की दुकान बैठने व्यवस्था रहित
10. केमिस्ट/ दवाई की दुकान
11. चश्मे की दुकान
12. घरेलू इलेक्ट्रिक / इलेक्ट्रानिक सामग्री के मरम्मत की दुकान
13. फोटो स्टूडियो
14. केबल टी.वी. / डी. टी. एच. आपरेशन
15. होजरी/ रेडीमेड वस्त्र / कपड़े की दुकान
16. साईकल मरम्मत की दुकान
17. सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत संचालित राशन एवं केरोसिन वितरण की दुकान मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(86)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
1. साग - सब्जी/ फल/ फूल की दुकान
(ब)
2. फोटो स्टेट / फेक्स / एस.टी.डी. पी.सी.ओ.
3. नाई की दुकान / हेयर कटिंग सलून / ब्यूटी पार्लर
4. दर्जी की दुकान/ बुटीक
5. केबल टी. वी. / डी.टी.एच.
6. डेयरी उत्पाद
7. बेकरी सामग्री / कन्फेक्शनरी
नोट : 1. इसके अतिरिक्त समय - समय पर राज्य शासन के अनुमोदन से अन्य गतिविधियाँ भी स्वीकार्य होंगी ।
2. ध्वनि, वायु, पार्किंग अथवा जल प्रदूशण से संबंधित जो भी मापदण्ड / नियम है उनकी पूर्ति होने पर ही यह गतिविधियाँ मान्य होगी ।
6.10.5 गतिविधियाँ जो स्वीकार्य नही है
1. ऐसा कोई भी व्यवसाय , जिसमें दुर्गंधी पूर्ण, खतरनाक, ज्वलनशील, असंगत, प्रदूशणकारी क्रिया सम्मिलित हो ।
2. बिल्डिंग मटेरियल्स
3. लकड़ी एवं लकड़ी के उत्पाद,
4. मार्बल की दुकान
5. लोहे, स्टील की दुकान
6. सीमेंट, रेत एवं गिट्टी की दुकान
7. जलाऊ लकड़ी व कोयले की दुकान
8. वाहन सुधार की दुकान एवं वाहनों की मरम्मत के वर्कशाप
9. टायर रिसाईकलिंग एवं रिट्रेडिंग
10. बैटरी चार्जिंग
11. भण्डारण , गोडाउन एवं वेयर हाउसिंग
12. भंगार (कबाड़ी की दुकान)
13. मदिरा की दुकान
14. छपाई, डाईंग एवं वार्निशिंग
15. और ऐसी अन्य गतिविधियाँ जो समय - समय पर राज्य शासन के निर्देशों से निर्धारित की जाए । 6.10.6 सार्वजनिक एवं अर्ध सार्वजनिक गतिविधियाँ जो कि आवासीय परिसर में निर्धारित मानकों सहित निर्धारित सीमा तक स्वीकार्य होंगी:-
1. प्री प्रायमरी स्कूल (नर्सरी / मांटेसरी स्कूल, क्रेच सहित)
2. नर्सिंग होम (क्लिनिक, डिस्पेंसरी , पैथोलाजी लैब तथा डायग्नोस्टिक सेन्टर सहित )
3. कम्पनी गेस्ट हाऊस
4. ए.टी.एम. /बैंक
5. फिटनेस सेन्टर (जिम्नेसियम , योगा / मेडिटेशन सेंटर सहित)
6. कोचिंग / ट्यूशन सेन्टर (परंतु ऐसी शैक्षणिक गतिविधियाँ स्वीकार्य नहीं होगी जिनके द्वारा डिग्री / डिप्लोमा प्रदत्त किया जाता हो ) । 860(87)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
- खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
6.10.7 व्यावसायिक परामर्श कार्यालय जो कि आवासीय परिसर में निर्धारित मानकों सहित निर्धारित सीमा तक स्वीकार्य होंगें :-
व्यावसायिक कार्यकलापों का तात्पर्य उन कार्यकलापों से है जिनमें डाक्टर, वकील, वास्तुविद और चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे व्यावसायिक कौशल पर आधारित सेवायें शामिल हैं । इन कार्यकलापों में केवल परामर्श कार्यालय ही स्वीकार्य होंगे ।
6.10.8 मिश्रित उपयोग की निर्धारित सीमा / नियमन विकास योजना में पूर्व से विकसित क्षेत्र में:-
(अ) भूखण्डीय विकास हेतु :-
1. बिन्दु क्रं. , 6.10.4 (अ) (ब) , 6.10.6, में दर्शाई गई गतिविधियाँ ( मिश्रित उपयोग ) केवल मिश्रित उपयोग हेतु चिन्हित मार्गों पर स्थित भूखण्डों पर ही स्वीकृत होगी ।
2. मिश्रित उपयोग 100 मी. की गहराई तक ही स्वीकार्य होगा ।
3. मिश्रित उपयोग तभी स्वीकार्य होंगे जब भूखण्ड पर किया गया निर्माण आवासीय हेतु स्वीकार्य कव्हरेज एवं एफ. ए. आर. की सीमा में हो एवं वाणिज्यिक तथा आवासीय गतिविधियों हेतु आवश्यक पार्किंग का प्रावधान आवेदित भूखण्ड में ही किया जाना संभव हो ।
4. भूखण्ड के सम्मुख मार्ग अथवा सार्वजनिक भूमि में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं होगा । 5. यदि भूखण्ड के सामने स्थित मार्ग में सर्विस मार्ग उपलब्ध है तो मिश्रित उपयोग भूखण्ड को पहुँच सर्विस मार्ग से ही प्राप्त करनी होगी, मुख्य मार्ग से किसी भी दशा में पहुँच प्राप्त करना प्रतिबंधित रहेगा । 6. भूखण्ड के सम्मुख के खुले क्षेत्र (फ्रण्ट एम. ओ. एस.) के सामने बाउण्ड्रीवाल का निर्माण प्रतिबंधित रहेगा तथा भू-स्वामी को इस खुले क्षेत्र को स्वयं के स्त्रोत से मार्ग के लेवल से 5 सेन्टीमीटर निचे के लेवल पर स्लोप (ढलान) नाली की ओर रखते हुए, कठोर सतह के रूप में विकसित करना होगा तथा इस भूमि का उपयोग केवल पार्किंग के लिये हो सकेगा ।
7. मिश्रित उपयोग के कारण जनित अतिरिक्त पार्किंग की व्यवस्था भूखण्ड के अंदर ही मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम-2012 के नियम अनुसार करना अनिवार्य रूप से प्रावधित किया जायेगा ।
8. मिश्रित उपयोग भूखण्ड के भूतल कवरेज के 50 प्रतिशत अथवा 75 वर्गमीटर जो भी कम हो के बराबर केवल भूतल पर ही स्वीकार्य होगी ।
9. मिश्रित उपयोग हेतु मार्ग चिन्हित किये जाने के फलस्वरूप यातायात और पार्किंग के अतिरिक्त भार को ध्यान में रखते हुए ऐसे मार्गों पर सामूहिक पार्किंग क्षेत्र निर्धारित किये जायेंगे । यदि कोई पार्किंग स्थल उपलब्ध नहीं है तो यथासंभव उक्त मार्ग पर स्थानीय निकायों द्वारा उपलब्ध कराया जायेगा अथवा पार्किंग सुविधाओं ( बहुतलीय पार्किंग को प्राथमिकता) के निर्माण के लिये अधिगृहित किया जा सकेगा । इस प्रकार की पार्किंग सुविधाओं का विकास स्थानीय निकायों द्वारा किया जाएगा और कार्यान्वयन के लिए सार्वजनिक निजी साझेदारी (पी.पी.पी. ) पद्धति अपनाई जा सकती है । इस प्रकार सुविधा निर्मित होने के पश्चात ही मार्ग पर मिश्रित उपयोग स्वीकार्य होगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
6.10.8 (ब) समूह आवास:-
समूह आवास में केवल 6.10.7 में उल्लेखित व्यावसायिक कार्यकलाप अनुज्ञेय है । समूह आवास के अभिन्यास में अनुमोदन के समय निर्धारित सीमा तक सुविधा दुकानों की स्वीकृति दी जा सकेगी । समूह आवास में किसी भी तल पर व्यावसायिक कार्यकलाप की अनुमति होगी किन्तु यह कार्यकलाप प्रति आवासीय इकाई के क्षेत्रफल का अधिक से अधिक 25 प्रतिशत अथवा 25 वर्गमीटर (जो भी कम हो) तक ही मान्य होंगे । 6.10.9 मिश्रित उपयोग परिसरों का पंजीकरण तथा प्रभारों का भुगतान:-
1. मिश्रित उपयोग के अंतर्गत पहले से आने वाले अथवा मिश्रित उपयोग के अंतर्गत लाए जाने वाले रिहायशी परिसरों के मामले में यदि भूखण्डीय विकास है तो भूखण्ड / रिहायशी यूनिट के स्वामी/आवंटी/निवासी तथा यदि ग्रुप हाउसिंग है तो रिहायशी यूनिट के मालिक को इस संबंध में एक फार्म भरकर ऐसे मिश्रित उपयोग की घोशणा कर फार्म को स्थानीय निकाय के पास जमा करना होगा तथा सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित दरों पर एकमुश्त पंजीकरण प्रभार जमा कराना होगा ।
2. मिश्रित उपयोग वाले परिसरों को स्थानीय निकाय को, निर्धारित दरों पर , जिस अवधि के लिए संपत्ति को मिश्रित उपयोग में लाया गया है उसके लिए हर साल मिश्रित उपयोग प्रभारों को भी भुगतान करना होगा ।
3. मिश्रित उपयोग नीति के अंतर्गत गैर- रिहायशी कार्यकलापों के लिए रिहायशी परिसर का उपयोग करने के लिए भवन में कोई परिवर्तन की अनुमति तब तक नहीं होगी , जब तक कि आवंटी / स्वामी ने संशोधित भवन योजना की स्वीकृति न ले ली हो और आवश्यक शुल्क अथवा प्रभार का भुगतान न कर दिया हो ।
4. स्थानीय निकाय मिश्रित उपयोग वाली परिसम्पत्तियों, चाहे उसके पास पंजीकृत हो या न हो, के परीक्षण / जॉच करने के लिए अधीकृत होगा ।
5. मिश्रित उपयोग जो पूर्व से विद्यमान है उन्हे विकास योजना लागू होने की दिनांक से दो वर्ष के भीतर नगरीय निकाय से अनुमति प्राप्त करना होगी । तत्पश्चात संगत अधिनियम के अंतर्गत प्रावधानित अन्य दण्डात्मक कार्रवाई के अलावा , पंजीकरण न की गई अथवा इन निर्बन्धनों का उल्लंघन करने वाली संपत्तियों को मिश्रित उपयोग के लिए वार्षिक मिश्रित उपयोग प्रभार का 10 गुना जुर्माना स्थानीय निकाय को अदा करना होगा ।
6. पंजीकरण प्रभार स्थानीय निकायों में जमा कराई जाएगी तथा स्थानीय निकायों द्वारा इस राशि का उपयोग संबंधित क्षेत्र की अधोसंरचना एवं पार्किंग विकास हेतु किया जायेगा ।
6.11 होटल हेतु मापदंड
होटल हेतु निम्न मापदण्ड दिये गये हैं -
33प्रतिशत
1. भूतल पर अधिकतम आच्छादित क्षेत्र
1.00
2. अधिकतम फर्शी क्षेत्रानुपात
12मीटर
3. अधिकतम ऊँचाई
फर्शी क्षेत्र अनुपात का 5 प्रतिशत होटल गतिविधि से सम्बन्धित वाणिज्यिक उपयोग में लाया जा सकेगा । अधिकतम स्वीकार्य तलघर का क्षेत्र भूतल पर स्वीकार्य निर्मित क्षेत्र के अंदर मान्य होगा । वाहन विराम स्थल सारणी 6.11 अनुसार होंगे । 860(89)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
6.12 मांगलिक भवन / मैरिज गार्डन हेतु मापदण्ड
मांगलिक भवन / मैरिज गार्डन हेतु निम्न मापदण्ड दिए गए हैं
4000 वर्गमीटर
1. भूखण्ड का न्यूनतम क्षेत्र
न्यूनतम 40 मीटर
2. भूखण्ड का अग्र भाग
18मीटर
3. भूखण्ड के सम्मुख मार्ग
कीन्यूनतम चौड़ाई
0.1 (दशमलव एक)
4. फर्शी क्षेत्र अनुपात
10 प्रतिशत अधिकतम
5. भू- आच्छादित क्षेत्र
अग्रभाग भूखण्ड के कुल क्षेत्रफल का 35 प्रतिशत पार्किंग 6. एम.ओ.एस.
तीनों ओर 4.50 हेतु छोड़ने के पश्चात् सामने 6.00 मीटर न्यूनतम । अन्य
मीटर 4.50मीटर न्यूनतम ।
मांगलिक भवन / मैरिज गार्डन में समस्त पार्किंग परिसर 7. पार्किंग
वाले 35 प्रतिशत पार्किंग के भीतर किया जाना अनिवार्य होगा । सामने छोड़े जाने
प्रावधान किया जाना आवश्यक होगा । के क्षेत्रफल पर पार्किंग का
6.13 मण्डी के विकास हेतु मानक
सारणी क्र. 6-सा-6:मण्डी हेतु विकास मापदंड
न्यूनतम सीमांत खुला क्षेत्र
क्र.
भूखंड का आकार
पीछे
आजूबाजू
सामने
अधिकतम फर्शी क्षेत्र अनुपात
अधिकतम निर्मित क्षेत्र (प्रतिशत)
5
6
7
4
2
3
1
1.0
2.5
60
3/ 2.5
3/ 2.5
1 0.05 हेक्टेयर तक
0.8
2.5
55
4/ 2.5
4/2.5
2
0.05 से अधिक 0.1 हेक्टेयर तक
3.0
0.75
50
3/4.5
3/4.5
3
0.1 हेक्टेयर से अधिक, 0.2हेक्टेयर तक
0.75
3.0
45
4.5/6
4.5/6
4
0.2 से हेक्टेयर से अधिक , 1.0 हेक्टेयर तक
1.0 हेक्टेयर से अधिक
4.5
0.75
6/6
45
6/6
5
2.0 हेक्टेयर तक
0.75
33
4.5
6/6
6/6
6 2.0 हेक्टेयर से अधिक मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(90)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
6.14 कृषि पर्यटन सुविधा के मापदण्ड म० प्र ० भूमि विकास नियम 2012 के नियम 19 (क) के अनुरूप मान्य होगे ।
6.15 सूचना प्रोद्योगिकी मापदण्ड:- सूचना प्रोद्योगिकी के मापदण्ड म०प्र० भूमि विकास नियम 2012 के नियम 42 के अनुसार मान्य होगे ।
6.16 वाहन विराम के मापदण्डः- वाहन विराम के मापदण्ड म०प्र ० भूमि विकास नियम 2012 के नियम 84 के अनुसार मान्य होगे ।
6.17 सामाजिक अधोसंरचना हेतु मानक
सेवायें एवं सुविधाओं का प्रावधान खजुराहो विशेष क्षेत्र की अनुमानित जनसंख्या क्षेत्र जनसंख्या के आधार पर सार्वजनिक सेवाये एवं सुविधाओं का प्रावधान किया जाना प्रस्तावित है उक्त प्रावधान म०प्र० के विकास नियम 2012 के नियम 49 (1 ) के अंतर्विष्ट उल्लेखित अनुरूप रहेगे ।
6.18 यातायात नगर के मानक
यातायात नगर के अभिन्यास हेतु निम्नलिखित मानक होंगे
सारणी क्र. 6-सा -7 :यातायात नगर के मानक कार्य का प्रकार
क्रमांक
पुनरीक्षित क्षेत्रफल की सीमा प्रति इकाई वर्गमीटर
इकाईयां प्रति
100 ट्रक
4
3
2
1
29-450
30-40
1 माल बुकिंग कार्यालय एवं गोदाम
9-72
10-15
2 कलपुर्जों की दुकानें
7.5-13.5
15-25
3 यांत्रिक एवं विद्युत वर्कशाप
7.5-90
12-20
4 टायर ट्यूब बिकी दुकानें
30-90
5-7
5 ढाबा
9-14
8-18
6 चाय-नाश्ता दुकान
2-5
10-14
7 पान-सिगरेट दुकान
10-15
1
8 नाई सिलाई , कड़ाई दुकान आदि
टीप- सकल क्षेत्र 1.10 से 1.50 हेक्टेयर प्रति 1000 ट्रक की आवश्यकता होती है । 860(91)
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
सुविधायें
प्रति 100 ट्रकों के लिए विभिन्न सेवा- सुविधाओं के प्रावधान निम्न मानकों के अनुरूप होंगे
सारणी क्र. 6 -सा-8 :यातायात नगर में सुविधाओं के मापदंड
टिप्पणी
क्रमांक सुविधा
क्षेत्रफल प्रति इकाई (वर्गमीटर)
4
3
2
1
100
1 बैंक
200 ट्रक पर कम से कम एक
100
2 डाकघर
प्रत्येक अवसान बिन्दु पर एक
800
3
निर्गम / आगमन बिन्दु पर
पेट्रोल पंप
600
ऊपरी मंजिल पर
4 होटल, लॉज
सामरिक स्थानों पर
200
5 चौकी
सामरिक स्थानों पर
6
200
उपचार गृह
सामरिक स्थानों पर
200
7 अग्नि शमन केन्द्र
300
धर्मकांटा
8
निर्गम / आगमन बिन्दु पर
टीप:-
1. सकल क्षेत्र 0.25 हेक्टेयर प्रति 100 ट्रक (व्यस्ततम समय) अथवा अभिन्यास का लगभग 67 प्रतिशत क्षेत्र ।
परिभ्रमण तंत्र
2.
18 मीटर चौड़े
अभिन्यास में प्रमुख मार्ग
9-12 मीटर चौड़े
द्वितीयक मार्ग
12-18 मीटर चौड़े
खुले क्षेत्रों की ओर के मार्ग
3. पार्किंग एवं खुले स्थान 36 वर्गमीटर प्रति ट्रक की मार्ग के समानान्तर पार्किंग वे या खुले यार्ड के रूप में ।
6.19 सड़कों के किनारे कार विराम स्थल
75 मीटर
बस स्थानक का आकार
75मीटर
मार्ग संगम से न्यूनतम दूरी
15 मीटर
प्रत्येक बस स्टाप विश्राम स्थल की दूरी
1.8
टेपर वांछनीय
1.6
न्यूनतम
4.5
एक बस स्थानक
7.0मीटर
दोहरा बस स्थानक मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(92)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
सड़कों के किनारे कार पार्किंग
कोणीय विराम का क्रियान्वयन तभी किया जाना चाहिये , जबकि मार्ग की चौड़ाई कम से कम 20 मीटर हो तथा यातायात का आवागमन बहुत अधिक न हो । कार विराम के लिए सामान्यतः 2.5 मीटर से 5 मीटर तथा ट्रक के लिए 3.75 मीटर से 7.5 मीटर का स्थल सामान्य आकार के रूप में रखा जा सकता है ।
सारणी क्र. 6-सा-9 :सड़कों के किनारे वाहन विराम स्थल का आकार विराम का प्रकार
कर्व लाईन से समानांतर नापी गयी कार के लिए लंबाई की आवश्यकता (मीटर में) कर्ब से वास्तविक चौड़ाई (मीटर में)
2
3
1
5.90
2.50
समानांतर
5.00
4.66
30 डिग्री
3.54
5.31
45डिग्री
5.58
2.89
60 डिग्री
5.00
2.50
90डिग्री
6.20 रिसोर्ट हेतु नियमन
रिसोर्ट हेतु निम्न मापदण्ड दिये गये है :-
1. भूतल पर अधिकतम आच्छादित क्षेत्र 33प्रतिशत
2. अधिकतम फर्शी क्षेत्रानुपात 1.00
3. अधिकतम ऊंचाई 12मीटर
फर्शी क्षेत्र अनु पात का 5 प्रतिशत रिसोर्ट गतिविधि से संबंधित वाणिज्यिक उपयोग में लाया जा सकेगा । अधिकतम स्वीकार्य तलघर का क्षेत्र भूतल पर स्वीकार्य निर्मि त क्षेत्र के अंदर ही मान्य होगा ।
6.21 हवाई अडडे के आसपास विकास के मानक
विमानतल के निकट भवनों की अधिकतम ऊंचाई विमानन विभाग के मानदण्डों से नियंत्रित होगी । इस हेतु भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (A.A.I. ) से N.O.C. लेना अति आवश्यक होगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(93) खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
6.22 स्वीकृत एवं स्वीकार्य उपयोग गतिविधियां
सारणी क्र.- 6- सा-10 स्वीकृत एवं स्वीकार्य उपयोग गतिविधियां
प्रतिबंधित उपयोग परिक्षेत्र में स्वीकृत उपयोग
भूमि उपयोग
सक्षम अधिकारी द्वारा स्वीकार्य नियंत्रित उपयोग
5
4
3
1
2
आवासीय
1
मैरिज हॉल , बारात घर, लॉजिंग एवं बोर्डिंग हाउस , रेस्टोरेन्ट, होटेल क्लब
1.1
ग्रामीण आवासीय
औषधालय, शासकीय कार्यालय, बारातघर, विधुत उपकेन्द्र, पंप हाउस, पानी की टंकी, रैन बसेरा , धर्मशाला, कांजी हाउस ।
ग्रामीणः आवास, उपासना स्थल, स्वास्थ केन्द्र सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थान , उद्यान, क्रीडांगन , सामुदायिक भवन, सार्वजनिक सुविधाये एवं उपयोगी सेवाये, वृद्ध आश्रम , पुलिस चौकी, दैनिक उपयोगी संबंधित दुकान, हस्त शिल्प , गृह उद्योग , रोपणी , ईंधन भराव केन्द्र
1.2
शहरी आवासीय
हल्के उद्योग , भारी एवं बड़े उद्योग (हानिकारक, अस्वास्थ्यकर , प्रदूषणकारी एवं खतरनाक उद्योग ) , अत्यंत ज्वलनशील एवं विस्फोटक संग्रहण / भण्डारण वेयर-हाऊस , अनाज भण्डारण एवं गोदाम , संक्रमित रोगियों हेतु अस्पताल , ठोस अपशिष्ट डम्पिंग
व्यवसायिक कार्यालय या घरेलू व्यवसायिक इकाई आदि जो उसी भवन में स्थित हो, शासकीय एवं अर्द्ध-शासकीय कार्यालय , स्थानीय दुकानें, आटा चक्की, सह सर्विस , स्टेशन , हल्के वाहनों के रिपेयर से संबंधित दुकानें, ओपन एयर, संग्रहालय , पेकिंग
आवासीय भू- खण्ड, समूह आवास भवन (असंबद्ध , अर्द्ध- संबद्ध, पंक्तिबृद्ध) , आवासीय फ्लैट, आवासीय भवन (शासकीय कर्मचारी / स्थानीय निकायों के पारगमन कर्मचारियों के लिए ), आवासीय - सह -कार्य , छात्रावास, सुविधाजनक शॉपिंग सेंटर , स्थानीय फुटकर दुकानें, पुलिस चौकी, गेस्टहाउस , विवाह पार्क (मैरिज गार्डन) लॉजिंग एवं बोर्डिंग हाउस , धर्मशाला, बारात घर, सामुदायिक हॉल, मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(94)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
इकाई , गैस बुकिंग ,
विदेशी मिशनरी , रैन बसेरा , ईंधन भराव केन्द्र, मोटर वाहनों की मरम्मत की
यार्ड, मल एवं जल शोधन संयंत्र , बस वर्कशॉप, वधशाला, थोक मण्डी, ऑट-डोर / इन -डोर गेम स्टेडियम, शूटिंग रेंज, जुलॉजिकल प्राणी उद्यान, पक्षी अभ्यारण , पिकनिक हॅट, अर्न्तराष्ट्रीय परिचर्चा केन्द्र, न्यायालय, खेल प्रशिक्षण केन्द्र, बालसुधार गृह , जिला बटालियन कार्यालय , फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला
कार्यशाला / गैरेज, घरेलू उद्योग , बेकरी एवं कन्फेक्शनरी , रसोई गैस , डिस्पेंशरी , सहकारी उपभोक्ता भण्डार, सिलेंडर भण्डारण, रेस्टॉरेंट एवं होटल , प्रिंटिंग प्रेस, गोदाम / वर्कशॉप, सिनेमा हॉल, सभागृह, खुदरा वस्तुओं का बाज़ार, साप्ताहिक बाज़ार (यातायात बाधित नही हो एवं) , अनौपचारिक बाज़ार, रिपेयर तथा सर्विस शॉप, रेस्टोरेंट/ कैफेटोरि या, वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर, हेल्थ सेंटर,
आश्रम गृह, मेडिकल क्लिनिक, दवाखाना (Dispensaries) , नर्सिंग हॉम एवं हेल्थ सेंटर (20 बिस्तर) , पालतू एवं जानवरों का दवाखाना (Dispensaries) , व्यावसायिक कार्यालय, प्रयोगशालाए , शैक्षणिक स्कूल (नर्सरी, प्राथमिक, माध्यमिक, हाई- स्कूल , हाई- सेकेण्ड्री) , तकनीकी प्रशिक्षण केन्द्र, अनुसंधान संस्थान , धार्मिक परिसर, आवासगृह ,क्लब रिसोर्ट बाल गृह वृद्धाश्रम जिमनेशिम , नाईट सेंटर, कम्युनिटी सेंटर , क्लब रिसोर्ट, पार्किंग लाट, वाचनालय / पुस्तकालय , व्यायामशाला, योगा / हेल्थ सेंटर, मानसिक एवं शारीरिक विकलांग स्कूल , शिशु सदन, बालविहार, दैनिक देख- भाल केन्द्र, पाठशालाएं , धार्मिक स्थान, प्रदर्शनी एवं आर्ट गैलरी , झुलाघर, आध्यात्मिक केन्द्र , नेचरोपेथी केन्द्र, वाटर स्टोरेज केन्द्र, क्लब , बैंक / ए. टी.एम. , पुलिस स्टेशन, पोस्ट ऑफिस, टैक्सी / तीन पहिये वाहन व स्कूटर स्टैण्ड, बस स्टॉप , विद्युत वितरण उपकेन्द्र , आमोद -प्रमोद
उपयोग क्लब , पौधशाला, बस स्टॉप , नगरीय विकास के कार्यालय , ससार्वजनिक सेवा
फिजियोथेरेपी सेंटर, बहुउद्देशीय या कनिष्ठ तकनीकी 860(95)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
एवं सुविधाये ।
दुकानें, नर्सिंग होम, हास्पीटल क्लिीनिक
चलायमान आगंतुक शिविर, नगरपालिका तथा राज्य एवं केन्द्र सरकार के कार्यालय , रेस्टोरेन्ट रिपेयर सर्विस शॉप म०प्र० विकास नियम 2012 के नियम 2012 के नियम 37(1 ) च भाग -1 में प्रस्तावित गैस बुकिंग संटर , गृह उपयोग , सहकारी उपयोगिता ।
2. वाणिज्यिक
सर्विस भवनों को छोड़कर, आवश्यक प्रचालन, हल्के उद्योग , भारी एवं बड़े उद्योग (हानिकारक, अस्वास्थ्यकर , प्रदूषणकारी एवं खतरनाक उद्योग ) , अत्यंत ज्वलनशील अनाज भण्डारण एवं गोदाम, एवं विस्फोटक संग्रहण / भण्डारण , वेयर-हाऊस ,
केन्द्र सहकारी उपभोक्ता भण्डार, धर्मशाला, विवाह पार्क ( मैरिज गार्डन ) एक कमरे में लगने वाले प्रशिक्षण संस्थान, सामुदायिक हॉल , सांस्कृतिक प्रचार केन्द्र, प्रदर्शनी केन्द्र, कला केन्द्र , संग्रहालय , संगीत नृत्य एवं नाटक प्रशिक्षण केन्द्र, पुस्तकालय ,
व्यापारिक , वाणिज्यिक / थोक /फुटकर दुकानें, होटल, सुविधाजनक दुकानें, सुविधाजनक शॉपिंग सेंटर, स्थानिय शॉपिंग सेंटर , व्यावसायिक कार्यालय , कार्य स्थल कार्यालय , बैंक / ए.टी. एम. , स्टॉक एक्सचेंज /वित्तीय संस्थान, बेकरी एवं कन्फेक्शनरी , सिनेमा हॉल / थिएटर, होटल, साप्ताहिक बाज़ार, पेट्रोल पम्प, मंडी गोदाम एवं वेयर हाउस , सामान्य व्यवसाय, समूह आवास, छात्रावास मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(96)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
संक्रमित रोगियों
उद्योग , प्रेस
प्रयोगशाला, मोटर गेरेज एवं वर्कशॉप, शीतगृह, सेवा परिसर, ऑटो मोबाईल एवं स्पेयर पार्ट,
फार्मास्युटीकल,
ऑडिटोरियम तथा
हेतु अस्पताल, ठोस अपशिष्ट डम्पिंग यार्ड , मल एवं जल शोधन संयंत्र, मुर्गी एवं दुग्ध पालन, उत्खनन (रेत, पत्थर, मिट्टी) वधशाला, थोक मण्डी, ऑट-डोर / इन-डोर गेम स्टेडियम , शूटिंग रेंज , जुलॉजिकल प्राणी उद्यान, पक्षी अभ्यारण , पीकनिक हॅट, अर्न्तराष्ट्रीय परिचर्चा केन्द्र, न्यायालय, खेल प्रशिक्षण केन्द्र, बालसुधार गृह, जिला बटालियन कार्यालय , फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, हानिकारक एवं
म० प्र ० भूमि विकास नियम 2012 के नियम 37 (1 ) परिशिष्ट - च , भाग-3 में सम्मिलित गृह उधोग , कर्मशाला , ईंधन भराव केन्द्र, शासकीय एवं अर्द्धशासकीय कार्यालय /उपक्रम के प्रशिक्षण केन्द्र संग्राहालय , सार्वजनिक
अस्वास्थ्यकर
उपयोगिता एवं
गतिविधियां ।
सेवाये , कृषि
आधारित वाणिज्यक ।
/ बोर्डिंग आवास , रेस्तरां , साभागृह, कॉलेज, नर्सिंग होम / मेडिकल क्लीनिक, पालतू जानवरों हेतु क्लीनिक, कार्य स्थल , वाणिज्यिक कार्यालय , रेस्टोरेंन्ट रिटेल रॉप साप्ताहिक बाजार अनुसंधान / प्रशिक्षण संस्थान, वाणिज्यिक सेवा केन्द्र / गैरेज / कार्यशाला, बारात घर, रैन बसेरा , साप्ताहिक / औपचारिक बाज़ार, पुस्तकालय , पार्क /खुला स्थान , संग्रहालय , पुलिस स्टेशन , पोस्ट ऑफिस , टैक्सी स्टैण्ड/ तीन पहिया वाहन स्टैण्ड, डाकघर, पार्क / खुला स्थान, शासकीय / संस्थागत कार्यालय , दूरभाष केन्द्र,फायर स्टेशन , टेलीकॉम टॉवर एवं स्टेशन वाटर, वाटर स्टोरेज टैंक , पम्पिंग स्टेशन, कबाड खाना, रिसोर्ट, वाटर एवं एम्युजमेंट पार्क, वेयर हाउसिंग एवं आच्छादित भण्डारण, अनुसंधान संस्थान, शॉपिंग माल , आर्ट गैलेरी , पुलिस चौकी, धार्मिक परिसर सेवा, अस्पताल (30 से लेकर 100 बिस्तर)
छविगृह / मल्टीप्लेक्स, बस टर्मिनल , धार्मिक परिसर, सेवा एवं सुविधाएं, छात्रावास , थोक व्यापार, सेवा केन्द्र, धार्मिक परिसर, मोटल , कबाड़खाना , मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(97) खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
मण्डी, व्यावसायिक प्रशिक्षण
संस्थान सेवाएं , कबाड़खाना ।
(अ)
पर्यटक आवास
तारांकित हाटेल , मध्य श्रेणी होटल , निम्न श्रेणी होटेल, धर्मशाला, कैपिंग क्षेत्र क्षेत्र पर्यटक ।
सुविधा दुकाने
पर्यटक ग्राम
(ब)
उद्यान/ पार्क , भू- दृश्यीकरण पर्यटक ग्राम कुटीर, वाहन विराम स्थल, वृक्षारोपण एवं भृ- दृश्यीकरण, स्वल्पाहार गृह ।
सुविधा दुकाने
(स)
कैंपिंग ग्राउण्ड
अस्थाई पर्यटक आवास व्यवस्था, जल प्रदाय, विद्युत व्यवस्था, स्वल्पाहार एवं भोजनालय , शौचालय , पर्यटक वाहन, विराम स्थल , पर्यटक संबंधी कार्यालय
मोटर गैरेज एंव कार्यशाला, उपाहार उपसना स्थल , गृह एवं खेल के मैदान, कला केन्द्र,
3.
वधशाला, थोक मण्डी, मुर्गी एवं दुग्ध पालन , फार्म हाऊस , सेवा कार्य एवं मरम्मत कार्यशाला, कृषि संयंत्रों का निर्माण एवं विक्रय तथा इनका उपयोग । सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक
शासकीय कार्यालय , केन्द्रीय , राज्य, स्थानीय तथा अर्द्ध-शासकीय , सार्वजनिक उपक्रम कार्यालय , रक्षा न्यायालय , विश्वविद्यालय एवं विशेष शैक्षणिक संस्थान, पॉलिटेक्निक, कॉलेज, स्कूल (नर्सरी , प्राथमिक, माध्यमिक, हाई- स्कूल , हाई- सेकेण्ड्री) , बालवाड़ी, अनुसंधान एवं विकासकेन्द्र, समाजिक एवं कल्याण केन्द्र,
कर्मचारियों के लिये आवासीय फ्लैट एवं भू-खण्ड, जल आपूर्ति प्रतिष्ठान , सीवेज निपटान कार्य , सर्विस स्टेशन, रेलवे स्टेशन /यार्ड , बस /ट्रक टर्मिनल, शमशान घाट एवं
पुस्तकालय /वाचनालय, धार्मिक भवन / परिसर, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थान , समुदायिक हॉल , सभागृह, विवाह पार्क (मैरिज मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(98)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
कब्रिस्तान, गोदाम/ भण्डारण , हेलीपैड, सिनेमा वाणिज्यिक उपयोग केन्द्र एवं इससे संबंधित अन्य उपयोग गतिविधियाँ, उपासना स्थल, संग्राहालय , ईंधन भराव केन्द्र, पार्किंग स्थल अति आवश्यक आवास सुविधाये / सेवा दुकाने संग्रहालय , अनाथालय , स्वल्पाहार एवं भोजनालय, सिनेमा, शौचालय, इलेक्ट्रीक प्रिटिंग प्रेस , सुलभ शौचालय । नोटः- आवासीय / कैफेटोरिया तथा रेस्टोरेन्ट के लिये अनुशांगिक गतिविधियों के रूप में कुल भूमि का अधिकतम 15 प्रतिशत भाग ही स्वीकार्य होगा ।
गार्डन, ) धर्मशाला, गेस्ट हाउस, संग्रहालय , प्रदर्शनी केन्द्र, ओपर एयर थियेटर, मनोरंजन क्लब , खेल मैदान, बैंक , पुलिस स्टेशन / चौकी, पुलिस लाइन , पुलिस मुख्यालय, शिल्पकला मंदिर, शोध प्रयोगशाला, जेल, अग्निशमन स्टेशन , पोस्ट एव टेलीग्राफ कार्यालय, सार्वजनिक उपयोगिताएँ एवं भवन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं डम्पिंग ग्राउण्ड, स्थानीय राज्य एवं केन्द्र सरकार के कार्यालय और रक्षा उद्देश्य, बस एवं रेलवे यात्री टर्मिनल, सार्वजनिक उपयोगिता हेतु भवन , स्थानीय नगर पालिका सुविधाएँ, सरकारी कार्यालयों हेतु आकस्मिक उपयोगिता, स्मारकों, रेडियों ट्रांसमीटर एवं वायरलेस स्टेशन , दूसंचार केन्द्र, अस्पताल , स्वास्थ्य केन्द्र, नर्सिंग होम , डिस्पेंसरी एवंक्लिनिक, सार्वजनिक उपक्रम, परिचर्चा हॉल , व्याख्यालय, औषधालय , सांस्कृतिक प्रचार केन्द्र, सार्वजनिक सेवाएं सूचना प्रौद्योगिकी , गैर प्रदूषणकारी उद्योग , आहार गृह, उद्यान स्वाल्पाहार, पर्यटन सूचना केन्द्र, अतिआवश्यक आवास ।
4 सार्वजनिक उपयोगिता केन्द्र, पोस्ट आफिस , पुलिस दमकल स्टेशन, दूर संचार पशुवध गृह, यातायात एवं 860(99)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
एव सुविधाये
संचार सुविधायें बायो गैस प्रक्षेत्र ट्रेचिंग ग्राउंड , सौर ऊर्जा संयत्र ।
स्टेशन , जल - मल शोधन संयत्र , अपशिष्ट उपचार संयंत्र , कब्रिस्तान, शमशान घाट, विधुत दाह संस्कार, विधुत सब स्टेशन , ट्रेचिंग ग्राउंड रेडियो / टी वी स्टेशन , अग्नि नियंत्रण स्टेशन, कांजी हाउस , धोबी घाट
5 आमोद- प्रमोद
खुले मनोरंजन हेतु आवश्यक भवन को छोड़कर , देख - रेख एवं निगरानी कर्मचारी हेतु आवास को छोड़कर ।
अग्निशमन केन्द्र, स्टडफार्म , ईंधन भराव केन्द्र, उपाहार गृह भोजनालय , मोटल, अतिथि गृह , आमोद- प्रमोद से संबंधित प्रासंगिक स्थान सेवाएं, योग केन्द्र, विज्ञान केन्द्र आतंरिक खेल हाल क्लब, गोल्प कोर्स, वैद्या शाला आवश्यक कार्यालय सेवा
दुकाने ।
समस्त आमोद -प्रमोद स्थल जैसे-क्रीड़ा स्थल , क्रीड़ागण , तरण पुष्कर (स्विमिंग पूल) , पौधशाला, क्षेत्रीय पार्क, जिला पार्क , खेल मैदान, बच्चों के यातायात पार्क, वनस्पति / प्राणी उद्यान, भू- गर्भय उद्यान पक्षी अभ्यारण , वोट क्लब , वृक्षारोपण , नाट्य इनडोर / आउटडोर स्टेडियम (स्वास्थ्य केन्द्र के बिना), पिकनिक हट्स , हॉलिडे रिसॉर्ट, शूटिंग रेंज , एग्युजमेंट पार्क, ओपन एयर थियेटर, खेल प्रशिक्षण केन्द्र, मल्टीपर्स हेतु विशेष पार्क / मैदान , विशेष मनोरंजन एवं शैक्षिक क्षेत्र , पुस्तकालय , सार्वजनिक उपयोगिताएँ , उम्पन क्षेत्र मेला स्थल , प्रदर्शनी स्थल , नगर सेवा उपवन , नर्सरी , ग्रीन हाउस , वाहन पार्किंग स्थल । नोटः- उपरोक्त गतिविधियाँ उद्यान एवं क्षेत्रीय उद्यान में ही मान्य होगी ।
वाणिज्यिक उपयोग के अन्तर्गत अस्थाई सिनेमा, सर्कस एवं अन्य शो, सार्वजनिक सभागृह, रेस्तरां एवं कारवां पार्क, स्पोर्ट्स स्टेडियम एवं ओपन एयर सिनेमा, चिडिया मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 नवम्बर 2019
860( 100)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
घर/ पर्यटक संग्राहालय, कुटीर/ रेशम केन्द्र मत्स्य पालन केन्द्र, वाहन विराम स्थल अभ्यारण्य सेवा ।
6. यातायात एवं परिवहन
इसमें विशेषकर अनुमति नही है, किन्तु हवाई अड्डों से 10 कि.मी. के आस-पास कसाईखाना, चमड़े का कारखाना एवं ठोस अपशिष्ट का निष्पादन । बस स्थानक, मार्ग हेलीपेड, माल प्रांगण, सभागार प्रांगण, नगरीय बस यात्रा आरंभ एवं समाप्ति केन्द्र, कर्मशाला, ट्रक यात्रा समाप्ति केन्द्र, सड़क मार्ग से भरने वाले माल हेतु गोदाम, सड़क परिवहन टर्मिनल (बस टर्मिनल एवं डिपो) , माल टर्मिनल , पार्किंग क्षेत्र, परिसंचरण, हवाई अड्डे (भवन एवं आधारित संरचना) , ट्रक टर्मिनल , मोटर गैरेज, कार्यशाला, मरम्मत एवं फुटकर दुकानें , रैन बसेरा , बोर्डिंग हाउस, बैंक , रेस्तरां , बुकिंग कार्यालय , ट्रांसमिशन सेंटर, वायरलेस स्टेशन , रेडियो एवं टेलीविजन स्टेशन, वेधशाला, मौसम कार्यालय ।
सर्विस सेटर , मरम्मत दुकाने, आटो पार्टस शॉप , अग्रेषण अभिकरण , माल गोदाम, शोरूम शीतगृह , ईंधन भराव केन्द्र, होटल, धर्मशाला सेवा केन्द्र, मरम्मत की दुकानें, उपकरणों की दुकानें, उपाहार गृह, मदिरालय क्लब, उपासना केन्द्र क्लब, मोटल, भोजनालय, परिवहन एवं संचार हेतु कर्मचारियों के लिए अन्य उपयोग व सुविधाएँ, देख - रेख एवं निगरानी कर्मियों
हेतु आकस्मिक अन्य उपयोग /गतिविधि 860(101)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
7.
कृषि
ऐसे समस्त स्वीकृत उपयोग जो कि कृषि की परिभाषा में मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम , 1973 के अन्तर्गत आते हैं । कृषि संबंधी अनुसंधान केन्द्र, प्रदर्शन एवं प्रयोगात्मक कृषि कार्य, फार्म , हेलीपेड, विद्युत / दूरदर्शन / रेडियो केन्द्र, खुले डिपो, ग्रामीण वर्तमान आबादी क्षेत्र से लगकर 300 मी . परिधि के अन्तर्गत आवासीय क्षेत्र अनुसार विकास , फार्म हाउस, बागवानी एवं वानिकी, मुर्गी एवं सुअर पालन, डेयरी फार्म, कुटीर उद्योग , भण्डारण, कृषि उपज का प्रसंस्करण एवं बिक्री , मत्स्य- ग्रहण, पेट्रोल व डीजल, विस्फोटक पदार्थों गैस भण्डारण का संग्रहण केन्द्र, सार्वजनिक उपयोगिता एवं सुविधाएँ हेतु भवन,
सूचना प्रौद्योगिकी , गैर प्रदूषणकारी उद्योग , केम्पिंग ग्राउन्ड, कृषि पर्यटन सुविधा । ***
कब्रिस्तान, शमशान , मल शोधन केन्द्र, कचरा प्रबंधन विद्युत वितरण संयंत्र, उत्खनन (बजरी, रेत , मिट्टी, पत्थर) खन्ती स्थान , ईंट भट्टे एवं कुम्हारी कार्य , पत्थर तोड़ने का कार्य , दुग्ध एवं कुटकुट पालन, सहायक एवं खतरनाक उद्योग , स्कूल एवं पुस्तकालय , मंदिर, चर्च , मस्जिदएवं संरचना , स्टेशन अन्य धार्मिक एवं पेस्टिसिएशन प्लांट, माल गोदाम , विवाह पार्क (मैरिज गार्डन, ) ईंधन भराव केन्द्र, वृक्षारोपण , एल.पी. जी. गोदाम, ट्रक पार्किंग , दुग्ध शीतजन केन्द्र सेवाएं , साप्ताहिक बाजार खाद एंव बीज संग्रहण केन्द्र, कृषि यांत्रिकी एवं सुधार प्रतिष्ठान, मध्यप्रदेश, राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860( 102)
= खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
सौर ऊर्जा संयंत्र सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, गौशाला, खेल मैदान स्टेडियम , गोदाम के स्थान पर समस्त प्रकार के भण्डारण ।
ग्रामीण आबादी से 200 मीटर तक स्थानीय संस्था द्वारा सार्वजनिक सेवा एवं सुविधा
व्याख्या-
1. सूचना प्रौद्योगिकी से तात्पर्य है कि मध्य - प्रदेश शासन द्वारा सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग की नीति पत्र में वर्णित उद्योग एवं संस्थायें ।
2. ** गैर प्रदूषणकारी उद्योग से तात्पर्य है मध्य- प्रदेश प्रदूषण निवारण मण्डल द्वारा सफेद श्रेणी में वर्गीकृत उद्योग ।
3. *** कृषि पर्यटन सुविधा से तात्पर्य है कि मध्य - प्रदेश भूमि विकास नियम-2012 के निमय 17 (क) में वर्णित अनुसार ।
टीप:- 1 . उपरोक्त व्याख्या के 1 एवं 2 के भू- खण्ड हेतु पहुंच मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई 12.00 मीटर होगी ।
2. हरित क्षेत्र व कृषि क्षेत्र से लगे मार्गो पर भूमि से जुडे परिवारो को उनके निजी आवास हेतु स्वीकृति दी जा सकती है ऐसे भूमि का क्षेत्रफल 2.0 एकड़ से कम नहीं होगा । ऐसे प्रत्येक संयुक्त परिवार उनके अधीन कृषि भूमि 1000 वर्गफीट (कवर्ड एरिया) के आधार पर आवासीय उपयोग की स्वीकृति दी जा सकेगी ।
3. केंम्पिग ग्राउण्डः- मार्ग, जलग्रहण क्षेत्र को छोडकर सभी भूमि उपयोग में केंम्पिग ग्राउन्ड स्वीकार्य होंगा । जिसमें अस्थाई पर्यटक आवास व्यवस्था जलप्रदाय, विद्युत व्यवस्था , स्वल्पाहार एवं भोजनालय , शौचालय , पर्यटक वाहन विराम स्थल पर्यटक संबंधित कार्यालय , अस्थायी सुविधा दुकाने गतिविधि स्वीकार्य होंगी । 860(103)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
4. विकास योजना भूमि उपयोग मानचित्र में दर्शित वन भूमि परिक्षेत्र में भूमि कोई निजी भूमि संम्मिलित हो तो इस भूमि का उपयोग कृषि माना जावेगा यदि इस कृषि भूमि पर विकास / अनुज्ञा देय आवेदन आता है तो इस संबंध में वन विभाग की अनापत्ति भी लेना आवश्यक होगा ।
5. राज्य शासन द्वारा पर्यटन प्रोत्साहन हेतु ली जाने वाली गतिविधि आमोद -प्रमोद अंतर्गत मान्य होगी ।
6.23 प्राकृतिक परिसंकट उन्मुख क्षेत्र : -
खजुराहो निवेश क्षेत्र का गठन 8 ग्रामों को सम्मिलित कर किया गया है । प्राकृतिक परिसंकट से सुरक्षा की दृष्टि से भवनों की संरचनात्मक डिजाइन एवं निर्माण भारतीय मानक संस्थान द्वारा निर्धारित मापदण्डों के अनुरूप होना चाहिए । सभी प्रकार के भवनों चाहे वे शासकीय , अर्द्ध शासकीय अथवा निजी हो , में निर्माण / पुनर्निर्माण की अनुज्ञा देते समय म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 (संशोधन 2012 ) एवं म.प्र. भूमि विकास नियम 2012 के नियम 88 के अंतर्गत संरचनात्मक डिजाइन मानकों को स्थानीय संस्था द्वारा सुनिश्चित किया जावेगा तथा शासन द्वारा समय - समय पर नियमों में हुए संशोधनों का कड़ाई से पालन किया जाना आवश्यक होगा ।
6.24 कृषि उपयोग परिक्षेत्र :-
1. कृषि उपयोग परिक्षेत्र अंतर्गत मूलतः म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा -2 में कृषि की परिभाषा में उल्लेखानुसार तथा भू- संरक्षण एवं बाढ़ नियंत्रण संबंधी कार्य स्वीकृत उपयोग परिसर की परिधि में होंगे । इनके अतिरिक्त कृषि उपयोग परिक्षेत्र में ऐसे क्षेत्र जो मुख्य मार्गों से लगकर 200 मीटर की गहराई तक प्रस्तावित नगरीय सीमा से 400 मीटर की दूरी के अंतर्गत स्थित है । वहां पर्यटन एंव आध्यात्म को प्रोत्साहित करने वाली गतिविधियां, पेट्रोल पम्प स्वीकार्य श्रेणी के अंतर्गत मान्य होंगे , जिसकी अनुज्ञा सक्षम प्राधिकारी द्वारा दी जा सकेगी । इनका विकास कार्य मूल उपयोग के अंतर्गत लागू होने वाले मापदण्डों के अनुरूप ही होगा ।
2. कृषि उपयोग परिक्षेत्र में ठोस अपशिष्ट (सेनेटरी लैण्ड सिलिंग ) , श्मशान तथा कब्रिस्तान, मुर्गी पालन, पशुपालन , डेरीफार्म , मछली पालन, उपयोग परिसर, नगरीय विस्तार हेतु प्रस्तावित क्षेत्र से 0.5 कि.मी. की दूरी के बाहर उन स्थानों पर प्रस्तावित किये जा सकेंगे । जहां तक पहुंचने हेतु कम से कम 7.5 मीटर चौड़े पहुंच मार्ग उपलब्ध हो सके । इसी प्रकार गैस गोदाम, कोयला / लकड़ी गोदाम / नगरीय विस्तार हेतु प्रस्तावित क्षेत्र से 0.5 कि.मी. की दूरी के पश्चात् स्वीकार्य होंगे । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(104)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
6.25 पर्यटन प्रोत्साहन परिसर : -
पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न गतिविधियां इस परिसर में प्रस्तावित की गई है , जिनका विकास निम्न सारणी में उल्लेखित मापदण्डों के अनुरूप होगा: - (अ) अभिन्यास के मानक : -
1. न्यूनतम भूखण्ड क्षेत्रफल 1.0 हेक्टेयर
2. भूतल पर पर्यटन गतिविधि क्षेत्र- 25 प्रतिशत
3. आमोद-प्रमोद / खुला क्षेत्र 40 प्रतिशत
4. वाहन विराम क्षेत्र 10 प्रतिशत
5. अत्यावश्यक आवास प्रति 500 व.मी. निर्मित क्षेत्र पर 20 व.मी. की एक इकाई
6. शेष क्षेत्र परिभ्रमण एवं सेवा सुविधाओं हेतु
टीप : - 1. प्रत्येक भूखण्ड को व्यक्तिगत पहुंच मार्ग उपलब्ध होना चाहिये ।
2. 1.50 हेक्टेयर से बड़े भूखण्डों पर अधिकतम 750 वर्गमीटर भूतल पर पर्यटन गतिविधि क्षेत्र मान्य होगा ।
(ब) भवन विकास मानक:-
1. न्यूनतम भूखण्ड क्षेत्र 200 वर्गमीटर
7.5 मीटर
2. भवन की उंचाई (अधिकतम)
3. वाहन विराम स्थल एक कार क्षेत्र (13.75 व.मी. ) प्रति 100 व.मी. निर्मित क्षेत्र पर
4. तलघर की गहराई (अधिकतम)- 1.20 मीटर
पर्यटन प्रोत्साहन परिसर में पर्यटक आवास भूखण्डीय विकास के मापदण्ड निम्नानुसार होंगे : - मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(105) खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
खजुराहो : पर्यटक आवास भूखण्डों के विकास मापदण्ड
सारणी क्र. 6- सा-11 पर्यटक आवास भूखण्डों के विकास मापदण्ड
सीमांत खुला क्षेत्र
क्षेत्रफल वर्गमीटर में
विकास का प्रकार
क्र. भूखण्ड का आकर मीटर में
भूतल पर निर्मित क्षेत्र प्रतिशत में
अधिक तम फर्शी क्षेत्र अनुपात
अग्र पृष्ठ आजू बाजू
6
3
5
9
2
4
7
10 1
8
अर्धपृथक्कृत 40
5.0
3.0
1 10X20 200
2.5
0.75
पृथक्कृत
2.5
2 12X18
216
35
5.0 3.0
2.5 0.50
पृथक्कृत
35
6.0 3.0
2.5
3 12X21
252
4.5
0.50
पृथक्कृत
6.0
315
4.5
4
35
3.0
15X21
4.5 0.50
पृथक्कृत
4.0
30
7.0
4.5 0.50 405
5 15X27
4.5
पृथक्कृत
8.0
18X30 540
30
4.0
6.0
4.5 0.50 6
पृथक्कृत
756
25
9.0 5.0
4.5 0.50 7 21X36
7.5
पृथक्कृत
854
25
10.0 6.0 7.5 6.0 0.35 8 24X36
टीप :- भवन की अधिकतम उंचाई 7.5 मीटर अनुज्ञेय होगी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860 (106)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
6.26 यातायात एवं परिवहन उपयोग परिक्षेत्र :-
यातायात से संबंधित समस्त गतिविधियां इस उपयोग परिक्षेत्र के अंतर्गत आती है, जैसे बस स्थानक , मार्ग , हेलीपेड, सार्वजनिक वाहन विराम स्थल आदि परिवहन उपयोग के उपयोग परिक्षेत्र निम्नानुसार है :-
(1 ) हेलीपेड : -
विकास योजना में प्रस्तावित हेलीपेड का विकास भारतीय विमान पत्तनम प्राधिकरण एवं म.प्र. भूमि विकास नियम 2012 के मापदण्डों के अनुरूप किया जाना प्रावधानित है ।
बस स्थानक:-
(2)
बस स्थानक हेतु आरक्षित क्षेत्र का विकास निम्न प्रावधानों के अंतर्गत किया जावेगा:-
25 प्रतिशत
1. भूतल पर निर्मित क्षेत्र
7.5 मीटर
2. भवन की अधिकतम उंचाई
25कार
3. कार/ टैक्सी विराम सुविधा
15 मीटर
अग्र
4. सीमांत खुले क्षेत्र
9-9मीटर
अन्य तीनों ओर
1.0
5. फर्शी क्षेत्रानुपात
-2-2 मीटर आकार की 10-15 इकाईयां 6. स्थानीय दुकानें
20 वर्गमीटर की 2 इकाईयां 7. सार्वजनिक प्रसाधन सुविधा
1 इकाई
8. रेन बसेरा / अल्पाहार गृह
(3) मार्ग एवं पादचारी मार्ग :-
विकास योजना के प्रस्ताव अनुसार ही मार्ग एवं पादचारी मार्ग विकसित किये जायेंगे । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(107) खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
6.27 संवेदनशील क्षेत्रों हेतु नियमन
संवेदनशील क्षेत्रों में विकास की गतिविधियां निम्नानुसार हैं: -
बड़े नालों एवं तालाबों के किनारे क्रमशः न्यूनतम 15 मीटर एवं 30 मीटर दूरी तक का क्षेत्र संवेदनशील क्षेत्र के रूप में खुला रखा जावेगा । इस सीमा के अंतर्गत स्थित संरचनाओं में किसी प्रकार के बदलाव या नव-निर्माण की अनुमति नहीं दी जावेगी । नियंत्रित क्षेत्र में वृक्षारोपण एवं बैठक की व्यवस्था स्वीकार्य होगी । इस क्षेत्र में ऐतिहासिक / विरासत महत्व के स्मारकों एवं मंदिरों को सुरक्षित रखा जावेगा तथा इन स्मारकों में रखरखाव को प्रोत्साहन किया जावेगा । कीचड़, मल निकास , सेप्टिक टैंक निकास किसी भी स्थिति में तालाबों में प्रवाहित नहीं किया जावेगा ।
प्रतिबंधित क्षेत्रों में विकास की अनुमति नहीं होगी, विनियमित क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से पर्यटको के प्रोत्साहन, मनोरंजन हेतु आमोद - प्रमोद प्रोत्साहन, दर्शनीय स्थलों एवं धार्मिक स्थलों (मंदिरों) के विकास एवं अन्य संबंधित कार्य स्वीकार्य होगें तथा विनियमित क्षेत्रो में आने वाले वर्तमान भवनो में आच्छादित क्षेत्रो में या फर्शी क्षेत्रो में वृद्धि स्वीकार्य नहीं होंगी , बशर्ते कि पूर्व में प्राधिकारी द्वारा अनुज्ञा दी गई हो । धार्मिक स्थलों का विकास, आसपास के विकास की वास्तुकला क्षेत्र की दृश्यता से समन्वय करते हुये पत्थर से निर्मित आदि किये जा सकेंगे । धार्मिक स्थल / नवीन मंदिर संरचना की ऊंचाई भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI ) द्वारा अनुमत ऊंचाई तक सीमित रखी जावेगी । उक्त प्रावधान विनियमित क्षेत्र के अलावा भी मान्य होंगे ।
पेट्रोलियम आधारित उर्वरकों का उपयोग कर जल स्त्रोतों के जल ग्रहण क्षेत्र में कृषि कार्य को प्रतिबंधित किया जायेगा जिससे कि तालाबों में जलीय घासफूस एवं अन्य ऐसी गतिविधियां जो भूमि का कटाव करती हैं, को रोका जा सके ।
नियंत्रित क्षेत्र से बाहर के खुले क्षेत्रों में निम्नलिखित श्रेणियों के निर्माण के अतिरिक्त अन्य निर्माण प्रतिबंधित होंगे । तालाबों के किनारे के क्षेत्रों में अपने भवनों को व्यक्तिगत सेप्टिक टैंक , ग्रिडल मल लाइन , जब उसका निर्माण हो जाये, जोड़ना होगा ।
तालाबों की सुरक्षा एवं जल गुणवत्ता के संग्रहण हेतु किये जाने वाले कार्य स्वीकार्य होंगे । संवेदनशील क्षेत्रों में निम्न श्रेणी के रख रखाव के विस्तार संबंधी कार्य स्वीकार्य होंगे ।
ऐतिहासिक महत्व । ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के भवन । प्राचीन वास्तुकला भवन यदि निजी आधिपत्य में हों तो भी ।
पार्किंग की समस्या हेतु 200 मीटर के विनियमित क्षेत्र में पुरातत्व विभाग एवं पर्यटन विभाग को स्थानीय निकाय अथवा शासकीय संस्था को पार्किंग हेतु भूमि उपलब्ध कराना होगा जिसमें खुली पार्किंग विकसित की जा सकेगी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(108)
- खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
संवेदनशील क्षेत्रो का पर्यावरण नियंत्रण
खजुराहो का पर्यावरण तथा नियंत्रण केवल सामंजस्य पूर्ण भूमि उपयोग में ही निहित नहीं है वरन मंदिरों के समीप का निमार्ण, भू- दृश्यीकरण विज्ञापन के फलक आदि भी वास्तु शिल्प की दृश्यता को प्रभावित करते है तथा पर्यावरण को विकृत करते है । इस दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र को निरूपित करना होगा जिसमें पर्यावरण संरक्षण एवं नियंत्रित किया जा सके । खजुराहो में निम्न क्षेत्रो को संवेदनशील क्षेत्र के रूप में निरूपित किया गया है जहाँ पूरे क्षेत्र को विशेष संवेदनशील क्षेत्र में रखा गया है ।
पश्चिमी मंदीर के समूहो में लक्ष्मीनारायण मंदिर से 500 मीटर की परिधि में आने वाला क्षेत्रफल । 1.
पूर्वके मंदिर समूहो के 300 मीटर की परिधि में आना वाला क्षेत्र । 2.
3. अन्य मंदिरो के 300 मीटर की परिधि में आने वाला क्षेत्र ।
4. विमान तल (भारतीय विमानपतन प्राधिकरण के नियम अनुसार) ।
5. जलाशय के किनारे 200 मीटर की परिधि में आने वाला जल संग्रह क्षेत्र किसी भी प्रकार के स्वीकार्य उपयोगो के अंतर्गत आने वाले निर्माण से मुक्त रहेगा ।
उपरोक्त क्षेत्रो में विकास के संबंध में क्षेत्रीय नियमो के अतिरिक्त पर्यावरण नियंत्रण की दृष्टि से भी परीक्षण किया जावेगा । इसमें निम्नलिखित बातें सम्मिलित होगी ।
1. भवन के बाहय भाग की रचना ।
2. बाहय भाग हेतु सामग्री का प्रयोग ।
3. बाहय दीवारो की रंग छटा ।
4. भवन की चार दीवारी (परकोटे) का रूपांकन ।
5. भवन के आसपास के क्षेत्र का विकास ।
विज्ञापन पर नियंत्रणः-
दीवारो पर लगाये जाने वाले विज्ञापन फलक आदि इस क्षेत्र में बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुज्ञा प्राप्त किये नहीं लगाये जावेगे ।
वृक्षो का परिरक्षणः-
वृक्षो की डालियों को काटना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित होगा, केवन सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त करने पर ही इस क्षेत्र के वृक्षो की डालियाँ काटी जा सकेगी ।
संवेदनशील क्षेत्रो के नियंत्रण विनियमनः-
संवेदनशील क्षेत्र में भवनो की ऊचाई
1. सम्पूर्ण संवेदनशील क्षेत्र एवं विशेष संवेदनशील क्षेत्र में भवनो की ऊचाई 7 मीटर से अधिक नही होगी ।
2.. विशेष क्षेत्रो में केवल राजनगर में बहुमंजिला विकास की अनुमति होगी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(109) खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
परिक्षेत्रिक नियमनः-
विमान तल के सामने के वाणिज्यिक उपयोग एवं खूडर नदी के भू- दृश्यीकरण प्रस्ताव से संबंधित नियमनः-
1. होटल हेतु भू- खण्डो को क्षेत्रफल 6.00 एकड़ से कम नही होगा जिसके अंतर्गत 60 प्रतिशत हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाये तथा शेष 40 प्रतिशत मुख्य होटल उपयोग हेतु रहेगा । 2. आच्छादित क्षेत्र- होटल उपयोग हेतु क्षेत्रफल का 10 प्रतिशत रखा जावेगा ।
3. होटल परिसर में किसी भी भवन की ऊचाई विमानन विभाग द्वारा निर्दिष्ट मापदण्डो को अपनाते हुये सीमित रखी जाये ।
4. भवनो की वास्तुकला क्षेत्र के वास्तुकला के अनुरूप हो ।
5. स्थल जल तटीय क्षेत्र से लगा हुआ होने से अत्यधिक भू- भाग पर जल तटीय विकाय किया जाये ।
6. इस क्षेत्र से जल मल निकास की ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाये जिससे नदी के जल में किसी भी प्रकार का प्रदूषण न हो । यह व्यवस्था ऐसी होनी चाहिये कि उपचारित जल का भी निस्तारण नदी में न जावे बल्कि इसका उपयोग हरित क्षेत्र में किया जावे । उपरोक्त में ठोस अवशिष्ट का निस्तारण भी सम्मिलित है ।
6.28 नगरीय विरासत वाले क्षेत्रों हेतु नियमन
सक्षम प्राधिकारी द्वारा शीघ्रता से विरासत महत्व के स्मृति चिन्हों के संरक्षण एवं सुधार हेतु विस्तृत अध्ययन कर प्रस्ताव तैयार किये जाने चाहिये । इस प्रकार का अध्ययन एवं प्रस्ताव कियान्वयन हेतु तैयार होने तक सक्षम प्राधिकारी द्वारा चयनित एवं सूचीबद्ध विरासत भवन/ क्षेत्र निम्न नियमनों द्वारा नियंत्रित होंगे ।
चयनित एवं सूचीबद्ध विरासत भवनों को गिराने की अनुमति नहीं होगी चाहे वे निजी आधिपत्य में ही क्यों न हों ।
प्रतिबंधित क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली संरचना नगर में प्रभावशील सामान्य मापदंड से संचालित नहीं होगी । प्रतिबंधित क्षेत्र में स्थित भवनों की ऊंचाई एवं रूपांकन विरासत भवनों के वास्तुकला के समान होना चाहिये ।
मार्ग , नगरीय स्थल, चौराहे, आंगन जो कि नगर के प्रमुख तत्व हैं , को संरक्षित रखा जाना चाहिये एवं किसी नगरीय नवीनीकरण एवं पूर्ण विकास के माध्यम से यथास्थिति दिये जाने का प्रयास किया जाना चाहिये ।
खजुराहो में मंदिर परिक्षेत्र के विकास हेतु जो भी विकास कार्य किये जावेगे उसके लिये नगर तथा ग्राम निवेश की अनुमति आवश्यकहोगी क्योंकि उक्त स्थल विरासत क्षेत्र के समतुल्य हैं । ए.एस.आई के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र को ए.एस.आई. द्वारा स्वयं के मद से विकसित किया जावे। ए.एस.आई के 100 से 200 मीटर के अंतर्गत प्रस्तावित ग्रीन एरिया का स्वामित्व खजुराहो नगर परिषद का होगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(110)
- खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
6.29विकास/ निवेश अनुज्ञा प्राप्ति की प्रक्रिया
विकास योजना प्रस्तावों के अंतर्गत आवेदनकर्ता को अनुज्ञा प्राप्त करने हेतु अपने आवेदन पत्र के साथ म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के प्रावधान अनुसार निम्न दस्तावेज / जानकारी संलग्नित की जाना आवश्यक होगी ।
1. म.प्र . भूमि विकास नियम, 2012 के नियम 14 (4) में के अंतर्गत धारा 16 अथवा 29 (1 ) के अधीन विकास अनुज्ञा हेतु आवेदन प्रस्तुत करना चाहिए ।
2. स्वामित्व संबंधी प्रमाण: खसरा पंचसाला, खसरा खतौनी, पंजीयननामा, प्रश्नाधीन भूमि का नामांतरण । 3. म.प्र. नगरपालिका (कालोनाईजर का रजिस्ट्रीकरण निर्बन्धन तथा शर्तें) नियम, 1998 एवं म.प्र. ग्राम पंचायत (कॉलोनियों का विकास ) नियम, 2014 के अंतर्गत जानकारी ।
4. भूमि का विवरण (स्थान के साथ सड़क / सड़कों के नाम ) जिस पर या जिसके सामने संपदा स्थित हो एवं भू- सीमायें ।
5. मूल खसरा मानचित्र जिसमें प्रश्नाधीन भूमि के कमांक अंकित हों, साथ ही प्रश्नाधीन भूमि की बाहरी सीमा से 200 मीटर के अंतर्गत निहित पास के खसरा क्रमांक दर्शाये हों, प्रश्नाधीन भूमि खसरा मानचित्र पर लाल रंग से चिन्हित की जावे ।
6. विकसित क्षेत्र के प्रकरण में भूखंड क्रमांक तथा स्वीकृत अभिन्यास के विस्तृत विवरण ।
7. स्थल मानचित्र मूल जिसमें प्रश्नाधीन भूमि चिन्हित हों, साथ ही मुख्य पहुंच मार्ग , भूमि के आसपास वर्तमान भू- उपयोग एवं महत्त्वपूर्ण भवन ।
8. 1: 500/1000/2000 की माप पर सर्वे प्लान जिसमें प्रश्नाधीन भूमि की सीमा, प्राकृतिक स्वरूप्जैसे नाले, गड्ढे, पहाड़ियां, वृक्ष, यदि भूमि समतल न हो तो कंटूर प्लान, प्रश्नाधीन भूमि में से 200 मीटर तक की समीपस्थ भूमि से जा रही उच्च दाब विद्युत लाईन, राईट आफ वे दर्शाते वर्तमान मार्ग । विद्युत एवं टेलीफोन के खंभे , वृक्ष एवं अन्य सभी संबंधित स्वरूप जो समीपस्थ क्षेत्रों से सामंजस्य करने हेतु आवश्यक हों ।
9. सामान्य प्रतिवेदन के साथ प्रश्नाधीन भूमि से संबंधित सभी विभागीय प्रस्ताव दर्शाता प्लान / मानचित्र । 10. प्रस्तावों के यथोचित परीक्षण हेतु भवन के वास्तुविदीय विवरण प्रस्तुत करना होंगे ।
11. विकास प्रस्ताव के प्रकार जैसे आवासीय , वाणिज्यिक, औद्योगिक आदि पर एक प्रतिवेदन । 12. म.प्र . भूमि विकास नियम 2012 के प्रावधानों के अनुरूप विकास / निवेश अनुज्ञा शुल्क जमा करना होगा । अनुज्ञा आवेदन के साथ निर्धारित शीर्श में जमा शुल्क का चालान संलग्नित होना चाहिये । 13. अधिनियम के अंतर्गत आवश्यक प्रमाण/ जानकारी या अधिनियम के अंतर्गत शासन द्वारा जारी परिपत्रों के अनुरूप प्रमाण / जानकारी एवं प्रश्नाधीन भूमि के विकास प्रस्ताव आवेदन के साथ संलग्नित होना चाहिये । 860(111)
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
14. म.प्र. भूमि विकास नियम 2012 की धारा 49 (4) में निहित प्रावधानों के अंतर्गत प्रश्नाधीन भूमि का विकास योजना में प्रस्तावित भूमि उपयोग प्राप्त कर विकास अनुज्ञा आवेदन के साथ संलग्नित करें । 15. अनुज्ञा हेतु प्रस्तुत मानचित्रों के अतिरिक्त प्राधिकृत वास्तुविद / यंत्री/ नियोजक द्वारा हस्ताक्षरित यथोचित भू- दृश्यीकरण प्लान, जहां आवश्यक हो, वहां का परिवहन प्लान जिसमें वाहन एवं नगरीय रूपांकन योजना दर्शायी गयी हो, को आवेदन के साथ प्रस्तुत करना होंगे ।
6.30 विकास योजना के प्रस्तावों की प्राप्ति हेतु प्रक्रिया (प्रस्तावित भू- उपयोग)
म.प्र. भूमि विकास नियम 1984 की धारा 49 (4 ) के अनुरूप विकास योजना प्रस्ताव प्राप्ति हेतु निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:-
1. निर्धारित प्रपत्र में आवेदन पत्र ।
2. प्रश्नाधीन भूमि का मूल खसरा मानचित्र जिसमें इस भूमि तथा 200 मीटर तक के समीपस्थ खसरा क्रमांक दर्शित हों ।
3. अद्यतन खसरा पंचसाला एवं खसरा खतौनी ।
4. आवेदन केवल भू-स्वामी द्वारा ही प्रस्तुत किया जायेगा ।
5. जब आवश्यक हो भूमि का पंजीकरण प्रमाण पत्र आवेदन के साथ प्रस्तुत हो । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 नवम्बर 2019
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
अध्याय-सात
योजना क्रियान्वयन
सभी नियोजन व्यर्थ है , यदि विकास योजना के क्रियान्वयन एवं प्रभावशील करने हेतु संभव प्रयास पूर्ण रूप से नहीं किये जाते है । यह अपेक्षित है कि इसमें नागरिकों द्वारा व्यक्तिगत या संगठित रूप से निर्माण / पुनर्निर्माण और विभिन्न उपयोग हेतु भूमि विकास करके योगदान करना होगा । इसलिए यह आवश्यक होगा कि ऐसे प्रयासों का मार्गदर्शन , तकनीकी सलाह देकर किया जावे जिससे कि विकास एवं निर्माण , विकास योजना या परिक्षेत्रीय योजना के उपबंधो के अनुरूप हो सके । विकास योजना का प्रभावीकरण तभी संभव हो सकेगा , जब मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम , 1973 के प्रावधानों के अन्तर्गत कोई भी विकास कार्य चाहे वह शासकीय, अर्द्धशासकीय या व्यक्तिगत हो, उसकी अनुज्ञा नगर तथा ग्राम निवेश से प्राप्त कर किया जावें । भूमि विकास के नियंत्रण संबंधी प्रावधान मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 एवं अधिनियम 1973 में निहित है ।
विकास योजना का क्रियान्वयन मुख्यतः छतरपुर नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी द्वारा किया जावेंगा । इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल , लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग , लोक निर्माण विभाग, उद्योग विभाग, नगर पालिका निगम द्वारा भी अपने संबंधित कार्य क्षेत्र में निर्माण कार्य किया जाता है । उससे विकास योजना के क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। इसलिए यह अपेक्षित होगा कि सभी प्रकार की निर्माण गतिविधियों को समन्वित करने हेतु शासकीय अर्द्ध शासकीय निकाय, विकास योजना के क्रियान्वयन की कमावस्था तथा कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दें । विकास योजना का क्रियान्वयन कुछ उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाना है । इन उद्देश्यों में से कुछ प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैंः
1. नगर के पर्यावरण का अनुरक्षण एवं उन्नयन ।
2. सौंदर्यपूरक पर्यावरण का उन्नयन ।
3. भूमि के उपयोग का अनुकूलन ।
सामाजिक और भौतिक अधोसंरचना का विकास ।
4.
5. भूमि की सतत् उपलब्धता, ताकि विकास प्रक्रिया चलती रहे ।
6. भूमि की उपलब्धता और अधोसंरचना के विकास के लिए सहभागी दृष्टिकोण ।
7. अनियोजित विकास पर नियंत्रण ।
8. नगर में रोज़गार के अवसरों में वृद्धि ।
7.1 विकास योजना का क्रियान्वयन
विकास योजना के प्रस्ताव वर्ष 2031 तक की कालावधि के लिए है । वर्तमान मूल्यों के अनुसार पूर्ण प्रस्ताव क्रियान्वयन करने में 1,03,762.00 लाख रूपये का व्यय अनुमानित है । इसमें विभिन्न भूमि उपयोग हेतु 1,718.47 हे.भूमि के अर्जन हेतु मुआवजा एवं भूमि के विकास पर व्यय , जिसमें नये मार्गो पर पुलों का निर्माण आदि शामिल है ।
भूमि अर्जन की औसत दर 10.00 लाख रूपये प्रति हेक्टर मानी गई है । विकास व्यय का जहाँ तक प्रश्न है वह भूमि उपयोग के प्रकार अनुसार अलग-अलग माना गया है । संपूर्ण विकास योजना 2031 के क्रियान्वयन की लागत का अनुमान निम्नलिखित सारणी में दर्शाया गया है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
860(113)
योजना क्रियान्वयन की लागत
क्षेत्र (हे.मे. )
शेष अर्जन
प्रस्तावित
क्रं.
भू-अर्जन रू. 20लाख (प्रति हे.)
भूमिउपयोग
6
5 2
3
1
5407.7
540.77
540.77
1 आवासीय
2355.3
235.53 235.53 2 वाणिज्यिक
2281.2
228.12
228.12
3 मिश्रित
20.11 201.10
20.11
सार्वजनिक एवं 4 अर्द्धसार्वजनिक
2247.7
224.77
224.77
5 आमोद-प्रमोद
179.64 1,796.40
179.64
ग्रामीण आबादी
6
469.17 4,691.70
469.17
7 यातायात
17,184.70
1,718.47
1,718.47
योग
7.2योजना क्रियान्वयन की नीति
सारणी क्र .7 - सा-1 योजना क्रियान्वयन की लागत
अर्जित भूमि का 60 प्रति. पर
क्षेत्र हे. में
मूल्य (लाख रू. मे)
विकास व्यय कुल लागत सहित (8+9) दर प्रतिहे. (लाख रू.)
7
8
9
10
27038
32445.7 540.77
50
50 11,776.00 14,131.30 235.53
228.12
50 11,406.00 13,687.20
5037
25
704.1 20.11
224.77
15 3,372.00 5,619.70 179.64
25
6,287.40
4,491.00
28.149.70 469.17
50 23,458.00
103,762.00
86,578.00
योजना क्रियान्वयन द्वारा नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार हेतु ठोस प्रयास की आवश्यकता है । खजुराहो विकास योजना 2011 के कियान्वयन का मूल्यांकन करने से यह स्पश्ट होता है कि बहुत से प्रस्तावों का वास्तविक क्रियान्वयन नहीं हो पाया है । उपयुक्त प्रबंधन की कमी के कारण जिन क्षेत्रों की योजना प्रभावित हुई है उनका उल्लेख अध्याय - चार में किया गया है । जिस पर पुनर्विचार करते हुए योजना के सफलतापूर्वक कियान्वयन हेतु नीति निर्धारण अनिवार्य है ।
अतएव निम्नलिखित उदेश्यों की प्राप्ति हेतु योजना कियान्वयन नीति निर्धारण की नितांत आवश्यकता है । 1. प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण तथा उत्कृष्ट भू- स्वरूप
2. सांस्कृतिक धरोहरों के क्षेत्रों का संरक्षण 3. भूमि कुशलतम उपयोग
4. अधोसंरचना और सेवाओं की उपलब्धता / संधारण इन उदेश्यों का कियान्वयन निम्न क्षेत्रों में किया जाना प्रस्तावित है:-
(अ) पर्यावरण प्रबंधन एवं संरक्षण कार्यक्रम (ब ) नगर अधोसंरचना एवं सेवा संबंधी काग्रक्रम (स) भूमि विकास एवं भूमि प्रबंधन कार्यनीति 5. मुख्य मार्गों के किनारे प्रस्तावित भू- उपयोग के क्रियान्वयन के अन्तर्गत प्राप्त आवेदन पत्रों का निराकरण इस विधि से किया जावेगा कि मार्गो हेतु प्रस्तावित भूमि स्थानीय प्राधिकारी को विकास हेतु उपलब्ध हो सके ।
6. किसी भी तरह के स्वीकार्य उपयोग 12 मीटर चौडाई से कम चौडाई वाले मार्ग पर विकसित नहीं किये जा सकेगे ।
7. आवासीय परिक्षेत्रों में चिकित्सक एवं इलेक्ट्रानिक व्यवसाय से संबंधित विद्युत शक्ति की सीमा से मुक्त होंगे । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
8. प्रत्येक अभिन्यास के खुले क्षेत्र में प्रत्येक 100 आवासीय इकाईयों के लिये एक बालवाडी, एक झुलाघर हेतु क्षेत्र आरक्षित रखना होगा । इसके अतिरिक्त उपयुक्त स्थान पर बंद कचराघर हेतु कम से कम 20X20 फीट स्थान आरक्षित रखना होगा । जहाँ से स्थानीय संस्थाएं सुविधापूर्वक कचरे का उठान कर सके । जिससे कि पर्यावरणीय दुश्प्रभाव न पड़े ।
9. ऐसे आवासीय प्रक्षेत्र में भूखंड का आकार एवं खुला क्षेत्र मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 के अनुसार नियंत्रित होगा ।
7.3 पर्यावरणीय प्रबंधन एवं संरक्षण कार्यनीतिः
विरासत ढांचों को संरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि शहर में भारतीय पुरातत्व विभाग (एएसआई ) के अनेक अधिसूचित स्मारक विद्यमान हैं जिनका अत्यंत महत्वपूर्ण महत्व है । प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेश अधिनियम के अनुसार "संरक्षित सीमा से 100 मीटर तक एवं संरक्षित स्मारकों के निकट अथवा सटे 200 मीटर तक के क्षेत्र खनन गतिविधि एवं निमार्ण गतिविधि दोनों के उद्देश्य के लिए क्रमशः प्रतिबंधित एवं विनियमित होने चाहिए । "
अतः प्रतिबंधित क्षेत्रों में विकास की अनुमति नहीं होगी, विनियमित क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से पर्यटको के प्रोत्साहन, मनोरंजन हेतु आमोद -प्रमोद प्रोत्साहन, दर्शनीय स्थलों एवं धार्मिक स्थलों (मंदिरों ) के विकास एवं अन्य संबंधित कार्य स्वीकार्य होगें तथा विनियमित क्षेत्रो में आने वाले वर्तमान भवनो में आच्छादित क्षेत्रो में या फर्शी क्षेत्रो में वृद्धि स्वीकार्य नहीं होंगी, बशर्ते कि पूर्व में प्राधिकारी द्वारा अनुज्ञा दी गई हो एवं धार्मिक स्थलो का विकास , आसपास की वास्तुकला से समन्वय करते हुये पत्थर से निर्मित आदि किये जा सकेगें , वर्तमान में विद्यमान प्राचीन मंदिरों की भाँति ही नवीन मंदिर संरचना की ऊचाई सीमित रखी जावेगी, साथ ही विनियमित क्षेत्रो में आमोद- प्रमोद उपयोग जैसे खुले हरे- भरे क्षेत्रो की अनुमति दी जा सकेगी ।
इसके अतिरिक्त योजना क्षेत्र के अन्तर्गत पड़ने वाले संरक्षित वन क्षेत्र भी विद्यमान हैं जिन्हें संरक्षित किए जाने की आवश्यकता है । खुदर नदी के दोनों किनारों से 30 मीटर तक को यथावत रखा जाएगा एवं इस क्षेत्र में आमोद - प्रमोद स्थलों के अतिरिक्त किसी अन्य विकास को अनुमति नहीं दी जाएगी । अवांछित विकास का नियंत्रण करने एवं लुप्तप्राय होने के खतरे का सामना करने वाली झीलों के संरक्षण के लिए झीलों में बफर क्षेत्र उपलब्ध किए गये हैं ।
विकास योजना में पर्यावरण पर यथोचित ध्यान देते हुए योजना क्षेत्र में रहने वाले लोगों की रहन- सहन की गुणवत्ता को उन्नत बनाना अत्यंत आवश्यक है । इसे निम्नलिखित उपायों से सुगम बनाया जा सकता है:
शिव सागर, प्रेम सागर, राजनगर झील , गावों के जोहड़ (पूर्वी समूह) जैसी झीलों की सफाई एवं सौन्दर्याकरण ।
सभी जल निकायों की पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी विशेष तौर पर वे क्षेत्र जिनका उपयोग जल आपूर्ति के स्रोत के तौर पर किया जा रहा है ।
झीलों के चारों ओर मनोरजनात्मक गतिविधियों का प्रावधान ।
जल निकायों में अप्रशोधित मल जल की निकासी पर प्रतिबंध ।
पर्याप्त सार्वजनिक एवं गृह इकाई शौचालयों का प्रावधान जिसके परिणामस्वरूप खुले में शौच का प्रचलन रुकेगा एवं
प्रमुख सड़कों में सड़कों के किनारे वृक्षारोपण, चारागाह का प्रस्ताव किया गया है उदाहरण के लिए बमीठा- राजनगर रोड इत्यादि के किनारे सुन्दर भू दृश्य का प्रावधान । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(115) खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
7.4 नगर अधोसंरचना तथा सेवासंबंधी कार्यनीति
नियंत्रित विकास
विकास कार्यक्रमों में भूस्वामी / विकासकर्ता / सामुदायिक समूह की सक्रिय भागीदारी से नियंत्रित विकास तंत्र प्राप्त किया जाएगा । यहाँ पर समन्वयक संस्था की भूमिका प्रदायकर्ता की होगी । सार्वजनिक संस्थाएँ सेवा सुविधाओं के मुख्य भाग के एकीकृत नियोजन एवं रूपांकन हेतु उत्तरदायी होंगी । वहीं अधोसंरचना का परिधि विकास निजी संस्थाओं के साथ संयुक्त भागीदारी द्वारा किया जा सकता है । इस प्रकार परिधि अधोसंरचना की पहुंच के साथ विकसित बड़े भूमि भागों, का आवंटन भूमि के हिस्सों के अनुसार का दिया जाएगा । उक्त व्यवस्था की जांच एवं अनुमति राज्य शासन से लेनी आवश्यक होगी ।
अधोसंरचना भूमि बैंक का गठन
एकीकृत नगर विकास कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाली सार्वजनिक संस्थाओं तथा निजी संस्थाओं की विभिन्न परियोजनाओं में प्रयुक्त भूमि को जोड़कर भूमि बैंक की स्थापना प्रस्तावित है । नगर के मुख्य मार्गों एवं सार्वजनिक खुले क्षेत्रों हेतु भूमिदान करने वालों को राज्य शासन से अनुमति प्राप्त होने पर प्रोत्साहन स्वरूप छूट या लाभ दिया जाना प्रस्तावित है ।
समेकित नगर विकास योजना
एकीकृत विकास कार्यक्रम को निम्नलिखित नीतिगत ढाँचे के अनुरूप तैयार एवं क्रियान्वित किया जा सकता है । विकास योजना के अनुरूप प्राथमिकता तय कर वार्षिक विकास योजना/ कियान्वयन योजना, आदि स्थानीय निकाय द्वारा तैयार की जानी चाहिए ।
वार्शिक विकास कार्यक्रम सामुदायिक समूह की भागीदारी से नगर की विकास प्रक्रिया निर्धारित करेगा । यह कार्यक्रम भूमि अधिग्रहण लक्ष्य, भूमि विकास प्रस्ताव , वृत्तखण्ड एवं उपवृत्त खण्ड स्तर की सुविधाओं का विकास प्रमुख रूप से दर्शायेगा । यह कार्यक्रम चालू वर्ष में पूर्ण किये जाने वाले नगर मार्ग तंत्र तथा मुख्य सेवा सुविधाओं को विशेष रूप से प्रदर्शित करेगा । इस निवेश योजना का एकीकृत दृश्टिकोण नाजुक / संकटपूर्ण क्षेत्रों में नगर अधोसंरचना के विकास के लिये समुचित धन राशि का समय पर उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा ।
यह छोटे तथा मध्यम नगरों के नगरीय अधोसंरचना विकास योजना (आई.डी.एस.एम.टी. ) के अन्तर्गत काम करेगा, जिसका उद्देश्य नगर की अधोसंरचना में नियोजित ढंग से सुधार करना है ।
विकास नियमनों हेतु व्यापक दृश्टिकोण
नगरीय भूमि के अधिकतम सक्षम उपयोग के साथ - साथ आधुनिक भूमि उपयोग प्रबंधन नीतियों को अंगीकृत करने की आवश्यकता को दृश्टिगत रखते हुए यह आवश्यक है कि भूमि विकास नियमों को पुनर्परिभाशित किया जाए । यह आवश्यक है कि विकास नियमनों का पालन किया जाये, ताकि नगर को पूर्णतः वांछित अनुसार विकसित किया जा सके ।
7.5 भूमि विकास एवं भूमि प्रबंधन कार्यनीति
विकास के अस्तित्व को बनाये रखने तथा प्रस्तावित प्रस्तावों को क्रियान्वित करने के लिए निम्नलिखित प्रतिरूप पर सावधानीपूर्वक सोच- विचार किया जाना चाहिए । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
7.5.1 भूमि का पूर्ण अर्जन
किसी भी विकास योजना का क्रियान्वयन में वित्तीय प्रबंध एक मुख्य प्रभावकारी घटक है । विकास योजना को स्वमेव अस्तित्व बनाये रखे जाने के लिये 100 प्रतिशत भूमि का अर्जन किया जाना विकास के लिये एक सबसे अच्छा आदर्श होगा । इस तरीके के निम्नलिखित लाभ तथा हानि हैं :
1. लाभ
1. समाज के सभी वर्गों (कमजोर आय वर्ग , निम्न तथा मध्य आय वर्ग) के लिये आवासीय भवन उपलब्ध होंगे ।
2. गंदी बस्तियों का विकास कम होना ।
3. नियोजित तथा सुव्यवस्थित विकास ।
4. प्रस्तावों के क्रियान्वयन में लचीलापन ।
5. खण्ड स्तर पर भौतिक तथा सामाजिक अधोसंरचना विकास उपलब्ध होगा तथा प्रथम पीढ़ी द्वारा ही इसका उपयोग किया जा सकेगा ।
6. सम्पूर्ण निवेश क्षेत्र में यातायात तंत्र का विकास ।
2. हानि
1. भू-स्वामियों का विरोध ।
2. भू-अर्जन की कीमत अधिक होगी- आंदोलनों के कारण भू-अर्जन प्रक्रिया में विलम्ब ।
3. अतिरिक्त मुआवजा की माँग सतत् रहेगी ।
7.5.2 नगर विकास योजना (टाउन प्लानिंग स्कीम)
भूमि स्वामियों का विरोध कम करने के लिये भूमि विकास जनभागीदारी के आधार पर किया जाना चाहिये । जनभागीदारी प्रतिरूप निम्नानुसार है:-
1. कम मुआवजा पर भूमि का पूर्ण अधिग्रहण ।
2. राज्य द्वारा लागू लैंड पुलिंग के माध्यम से ।
3. भौतिक तथा सामाजिक अधोसंरचना के लिए न्यूनतम आवश्यक भूमि की आवश्यकता होगी । 4. सामाजिक तथा अधोसंरचना हेतु कीमत का आकलन ।
5. अनुपातिक विकास / विक्रय योग्य भूमि घटक, जो अधोसंरचना के मूल्य के बराबर हो, विकास प्राधिकारी के पास रखा जाना चाहिए ।
6. शेष विकसित भूमि भू- स्वामियों को वापस सौंपी जानी चाहिए ।
7. ऐसे भू- स्वामी जो इस प्रतिरूप में हिस्सा नहीं लेना चाहते हैं, उन्हें 100 प्रतिशत भू-अर्जन मुआवजा राशि लेकर किया जाना चाहिए ।
1. लाभ
1. भू-अर्जन पर कम विरोध ।
2. नियोजित तथा सुव्यवस्थित विकास ।
3. प्रस्तावों के क्रियान्वयन में लचीलापन ।
4. भौतिक तथा सामाजिक अधोसंरचना विकास खण्ड स्तर पर उपलब्ध होगा तथा प्रथम पीढ़ी द्वारा उपभोग किया जा सकेगा ।
5. गंदी बस्तियों के विकास में कमी ।
6. व्यक्तियों को विकास में भागीदारी के लिए प्रेरित करना । 860(117)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
2. हानियाँ
यह प्रतिरूप भूमि के विकसित होने की संभावनाओं पर निर्भर करेगा । यदि विकास हेतु माँग नहीं दिखती है, तो आम व्यक्ति योजना क्रियान्वयन में भाग नहीं लेंगे ।
7.5.3 केवल आरक्षित भूमि हेतु भू-अर्जन
आरक्षित भूमि मार्गों के विकास , खेल मैदान , सामाजिक सुविधाएँ, उद्योगों, वाणिज्यिक क्षेत्रों, ट्रक अवसान केन्द्र एवं अन्य आरक्षित उपयोगों हेतु पूर्ण भूमि का अर्जन किया जाना चाहिए तथा शेश भूमि भू-स्वामियों के अधिकार में रहनी चाहिए ।
1. लाम
1. कम भूमि का अर्जन ।
2. हानि
1. अव्यवस्थित रूप से विकास होगा ।
2. भू-स्वामियों द्वारा आरक्षण मान्य नहीं किया जाएगा ।
3. निजी भूमियों पर आरक्षित भूमि हेतु अधिग्रहण से संबंधित अधिसूचना के विरूद्ध सबसे ज्यादा न्यायालयीन कार्यवाही होगी तथा आरक्षित भूमियों पर अनाधिकृत विकास होगा ।
4. वित्तीय उत्पादन एक समस्या होगी ।
5. निजी भूमियों पर विकास , विकास प्राधिकारी के नियंत्रण में नहीं है ।
7.5.4 लोक संस्थाओं के प्रयास संबंधी मुख्य तत्व
एकीकृत नगरीय विकास कार्यक्रम हेतु लोक संस्थाओं द्वारा किए गए प्रयास निम्न सिद्धांतों के अनुसार होने चाहिए:-
1. यह सुनिश्चित किया जाना कि भूमि की उपलब्धता में कमी तथा उपयुक्त अधोसंरचना में कमी के कारण विकास अवरूद्ध न हो ।
2. उपलब्ध व्यपवर्तित नगरीय भूमि का पूरी तरह उपयोग करना ।
3. बिखरे हुए नगरीय विकास के लिये पहुँच मार्ग उपलब्ध करना ।
4. अर्द्ध विकसित तथा अविकसित क्षेत्रों में नगर स्तरीय अधोसंरचना का उन्नयन।
5. नये प्रस्तावित विकसित क्षेत्रों में विकास की गति को तेज करने के लिए महत्वपूर्ण अधोसंरचना उपलब्ध कराना ।
6. भू-स्वामियों, सार्वजनिक समूहों एवं निजी विकासकर्ताओं के विकास कार्य में सहभागिता के दृश्टिकोण को ध्यान में रखते हुए भूमि विकास कार्यक्रम हाथ में लेना ।
7.6 योजना का चरणबद्ध कियान्वयन
योजना प्रस्तावों के तेजी से क्रियान्वयन हेतु वार्शिक विकास बजट निजी विकासकर्ताओं, भूमि स्वामियों, सामुदायिक समूहों एवं सार्वजनिक संस्थाओं के माध्यम से संसाधन गतिशीलता का सहभागिता के आधार पर निर्माण अभियन्ताओं के माध्यम से प्रभावी कार्यक्रम बनाये जाने की आवश्यकता है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
योजना प्रस्तावों में निर्धारित समयावधि में क्रियान्वयन करने के लिये नीति को सुविधाजनक बनाने में राज्य शासन की "सहयोगी संस्था" की भूमिका होगी । इन उद्देश्यों की पूर्ति हेतु राज्य शासन और वर्तमान में कार्यरत संस्थाओं के साथ नगर विकास प्राधिकारी / नगर पालिका परिषद राज्य स्तरीय नोडल एजेन्सी की सहायता से एक विशेष परिणाम मूलक अधोसंरचना बनाने की आवश्यकता है, जिससे विकास योजनाओं का क्रियान्वयन हो सकेगा ।
विकास योजना का क्रियान्वयन दो चरणों में किया जायेगा:-
1. अल्पकालीन अवधि प्रथम चरण (2011-2021 )
2. दीर्घकालीन अवधि द्वितीय चरण (2021-2031 )
7.6.1 प्रथम चरण
विकास योजना के क्रियान्वयन द्वारा नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार हेतु निरंतर प्रयास की आवश्यकता है । विकास योजना का क्रियान्वयन चरनवार एवं आज की जनसंख्या की मूलभूत आवश्यकताओं की प्राथमिकता के अनुसार होना जरूरी है । विकास योजना का क्रियान्वयन कुछ उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाना है । इन उद्देश्यों में से कुछ प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं: -
1. वर्तमान आवासीय क्षेत्र के साथ के आवासीय क्षेत्र का विकास ।
2. गांवों की आबादी के मध्य में रिक्त पड़े क्षेत्रों का विकास ।
3. परिधि मार्ग के लिये भूमि अधिग्रहण (वर्तमान मार्गों पर आने वाले भागों का चौड़ा किया जाना सम्मिलित है) । जिन क्षेत्रों में प्रथम चरण में विकास संभावित है, वहाँ पर परिधि मार्ग का विकास प्रस्तावित है ।
4. सभी वर्तमान 24 मीटर तथा 30 मीटर प्रस्तावित चौड़ीकरण वाले मार्गों का विकास ।
5. नये बस स्थानक का विकास ।
6. सभी नये प्रस्तावित 24 मीटर तथा 30 मीटर श्रेणी के मार्गों के लिये भूमि अर्जन ।
7. वर्तमान विकसित क्षेत्र एवं प्रथम चरण में प्रस्तावित आवासीय क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले वाणिज्यिक, मिश्रित, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्धसार्वजनिक क्षेत्रों तथा उद्यान का विकास ।
8. वर्तमान विकसित क्षेत्र में स्थित जलाशयों के चारों ओर प्रस्तावित हरी पट्टी का विकास । 9. नगर के पर्यावरण का अनुरक्षण एवं उन्नयन ।
10. सौंदर्यपरक पर्यावरण का उन्नयन ।
11. भूमि के उपयोग का अनुकूलन ।
12. सामाजिक और भौतिक अधोसंरचना का विकास ।
13. भूमि की सतत् उपलब्धता, ताकि विकास प्रक्रिया चलती रहे ।
14. भूमि की उपलब्धता और अधोसंरचना के विकास के लिए सहभागी दृष्टिकोण ।
15. अनियोजित विकास पर नियंत्रण । 860(119)
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
खजुराहो- प्रथम चरण कार्यक्रम की लागत एवं अनुमानित व्यय
सारणी क्र. 7- सा-2 प्रथम चरण कार्यक्रम की लागत एवं अनुमानित व्यय
विकास दर 70 प्रतिशत
भूअर्जन
भौतिक लक्ष्य
कुल लागत
दर/देयक व्यय
भूमि उपयोग का विवरण
व्यय (लाख रू.)
भौतिक लक्ष्य (हे.)
क्र.
8
7
6
4
5
2
3
1
11,295.60
50 9,413.00
188.26
1,882.60
188.26
आवासीय
1
8,209.80
50 6,841.50
136.83
1,368.30
136.83
2 वाणिज्यिक
8,050.50
50 6,708.75
134.175
1,341.75
3
134.175
मिश्रित
538.97
384.98
25
15.399
153.99
15.399
4 सार्व, अर्द्ध.
5,216.50
3,129.90
15
208.66
2,086.60
208.66
5 आमोद-प्रमोद
25
3,547.95
2,534.25
101.37
1,013.70
6
101.37
ग्रामीण आबादी
621.00
517.50
50
10.35
103.50
10.35
यातायात एवं परिवहन
7
37480.32
29529.88
7950.44
795.044
योग
नगर में रोज़गार के अवसरों में वृद्धि ।
उपर्युक्त लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये निम्नलिखित नीतियों को अपनाना होगा :-
पर्यावरणीय प्रबंधन एवं संरक्षण कार्यनीति । 1.
2. नगरीय अधोसंरचना तथा सेवा कार्यनीति ।
3. भूमि विकास एवं भूमि प्रबंधन कार्यनीति ।
7.7 संसाधन गतिशीलता
नगर नियोजन वास्तव में संसाधन के उत्सर्जन, संसाधन विकास एवं प्रबंधन का अभ्यास है । वर्तमान में नगर विकास हेतु अलग - अलग प्रयास किये गये हैं, जिसके परिणाम स्वरूप संसाधन का अपव्यय हुआ है । संसाधनों का संग्रहण निवेश नियोजन के एकीकृत दृष्टिकोण द्वारा किया जा सकता है । नगरीय भूमि अपने आप में ही सबसे बड़ा संसाधन है । वर्तमान में भूमि मंडी का उपयोग कर नगर विकास के प्रयास पृथक- पृथक रहे हैं । स्थानीय आय के लिए एक सुनियोजित व्यवस्था को विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि नगर में विद्यमान नगरीय भूमि मंडी का अच्छी तरह उपयोग किया जा सके । स्थानीय संसाधन संग्रहण से तात्पर्य संसाधनों का स्थानीय स्तर पर नए तरीकों द्वारा प्रयोग कर संस्था को सहायता प्रदान करना और और उसे स्वपोषित करना है । इसके अंतर्गत राजस्व वृद्धि योजना से लेकर अनुदान संचयन जैसी रणनीतियाँ शामिल होती हैं । सामाजिक , आर्थिक और सांस्कृतिक संदर्भों को एकजुट करने वाली कई तरह की नई सोच में यह देखने को मिलता है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
स्थानीय निकाय स्थानीय वित्तीय स्रोतों का उचित उपयोग कर राष्ट्रीय निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है । वित्तीय स्रोत संग्रहण से तात्पर्य पर्याप्त राजस्व की उगाही एवं स्थानीय नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अनुदानों के उचित वितरण, दोनों से है । स्थानीय निकाय को अपना स्वयं का वित्तीय स्रोत करों / शुल्क लगाकर, धन उधार लेकर तथा केन्द्रीय शासन से अनुदान लेकर बढ़ाने के लिए अधिकृत किया जाना चाहिए । स्थानीय नागरिकों की जरूरतों तथा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये स्थानीय निकाय को करों की दरों / सेवा शुल्क दरों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप संशोधन करने हेतु शक्तिसंपन्न बनाना चाहिए ।
विकास कार्यक्रमों को क्रियान्वित करने के लिए संसाधन संग्रहण हेतु नगरीय स्थानीय निकायों द्वारा निम्नलिखित कुछ उपाय अपनाया जा सकते हैं:-
1. सम्पत्ति कर - भारत मेंस्थानीय नगर निकायों (यू.एल.बी. ) के लिएसम्पत्ति कर राजस्व का मुख्य स्रोत है ।
2. स्व- मूल्यांकन प्रणाली सम्पत्ति कर के मूल्यांकन को सरल तथा पारदर्शी बनाने के लिए स्थानीय नगर निकाय मूल्याँकन प्रणाली को प्रस्तावित कर सकता है ।
3. बेहतर सूचना आधार - स्थानीय निकाय अपनी सम्पत्ति कर की जानकारी में सुधार कर सकता है । 4. संग्रहण अभियान -स्थानीय नगर निकाय सम्पत्ति कर बिलों के संग्रहण हेतु विशेष अभियान के तहत विशेष टीमों का गठन कर सकते हैं ।
5. बिल वितरण का ठेकीकरण - बिल संग्रहण हेतु निकाय निजी कम्पनियों की मदद ले सकते हैं, क्योंकि संग्रहण में लगा श्रम तथा लागत कभी-कभी एकत्रित राजस्व की राशि से अधिक हो जाती है । 6. कम्प्यूटरीकृत अभिलेख - स्थानीय निकाय कोजल / मल व्यवस्था प्रणाली, हाऊस टैक्स बिल, भुगतान तथा प्राप्तियों को कम्प्यूटरीकृत करना चाहिए ।
7. ई-शासन नगर पालिका को अपनी नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन बनाना चाहिए ।
8. मल व्यवस्था शुल्क - नगर पालिका एक भूमिगत जल निकासी व्यवस्था के वित्त निर्माण में एक नवीन (अभिनव) तन्त्र का निर्माण कर सकता है । लाभार्थियों से लिया गया कनेक्शन शुल्क उस योजना की पूँजीगत लागत का हिस्सा होगा । इससे राजस्व कर्ज कम हो जाएगा ।
9. नगर सम्पत्तियों का ठेकीकरण तथा नियमितीकरण नगर पालिका सभी उप ठेके की दुकानों को नियमित कर सकता है ।
10. टैक्स न्यायालय - कर मामलों को सुलझाने में देरी से होने वाली राजस्वों की हानि से बचने के लिए , सम्पत्ति कर निपटाने में देरी से बचने के लिए , लम्बित कर विवादों तथा समस्याओं को जल्दी सुलझाने के लिए स्थानीय निकाय " कर अदालत" स्थापित कर सकती है ।
11. बॉण्ड बैंक- केन्द्रीय सरकार छोटे नगरीय निकायों में वास्तविक रूप में " बॉण्ड बैंकों" को बढ़ावा देने के लिए एक राज्य स्तरीय मध्यस्थता या संघ के माध्यम से बाजार का दोहन करने की योजना बना रहा है । ये बॉण्ड बैंक भी छोटे नगर निगमों के लिए सस्ता ऋण प्रदान करेगा । छोटे नगर निकाय अपने सामर्थ्य पर धन एकत्रित करने की स्थिति में नहीं होंगे । ऐसे में प्रस्तावित "बॉण्ड बैंक" इन निकायों की सहायता करेंगे । राज्य स्तर पर विद्यमान नगरीय अधोसंरचना वित्त विकास निगम , मध्यस्थता या बॉण्ड बैंक के रूप में कार्य करेगा । सरकार सम्पत्ति प्रबंधन कम्पनी को शुरू करने की योजनाओं का अनुमोदन कर सकती है । इससे नगर के बाहरी विस्तार में अधोसंरचना विकास हेतु संबंधित नगर निकाय को, जब वे बाज़ार से धन एकत्रित करने के लिए बॉण्ड (अनुबंध) जारी करते हैं, को गारंटी देने में सहायता मिलेगी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(121) खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
12. जल कर - जल उपभोक्ताओं से केवल वास्तविक खपत (जो जल का मीटर सूचित करता है) के अनुसार जल कर लिया जाना चाहिए , न कि अनुमानित खपत पर (सन् 1988 के उच्चतम न्यायालय तथा कर्नाटक उच्च न्यायालय के निर्णय अनुसार) ।
13. उपकर 'प्रदूषण या पर्यावरण उपकर" -क्षेत्र में स्थित सभी सक्रिय उद्योगों पर प्रदूशण विरोधी और पर्यावरण संबंधी कार्यक्रमों को वृहद् पैमाने पर लागू करने के लिए धनोपार्जन हेतु यह कदम लागू किया जा सकता है । ऐसा कदम प्रदूषण तथा भविष्य में पर्यावरण क्षरण के खिलाफ लड़ाई के लिए उठाया जा सकता है ।
14. ठोस अपशिष्ट शुल्क -अपशिष्ट पदार्थ घर जाकर एकत्रित करने की परियोजना को आंशिक रूप से नगर निकाय द्वारा वित्त पोषित किया जाएगा । घरेलू अपशिष्ट संग्रहण, अलगाव, परिवहन, उपचार, विक्रय या निस्तारण पर्यावरणीय अनुकूल तरीके से करने का इस परियोजना को ध्यान में रखा गया है । रिक्त विकसित भूमि पर कर, बाह्य विकास शुल्क, भूमि उपयोग परिवर्तन, आवासीय के अलावा अन्य गतिविधियों हेतु अनुमति शुल्क, स्थानांतरण शुल्क, निवेश अनुमति शुल्क, विकास अनुमति शुल्क, किराया राशि, परिसर निर्माण शुल्क, खुला मैदानों के उपयोग पर शुल्क, इत्यादि संसाधन एकत्र करने के लिए अन्य सम्भावित उपाय हो सकते हैं । इनसे मिले राजस्व को नगर विकास निधि में जमा किया जाना चाहिए , ताकि महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास किया जा सके । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(122)
Panna
Chhatail BamonSatne
DirectorateofTownand CountryPlanning,Bhopal FIRST_PHASE_PROPOSED_LANDUSE
StateInstituteforTownPlanning. BhopalMadhyaPradesh
RECREATIONAL1
RECREATIONAL
COMMERCIAL
RESIDENTIAL
PROPOSEDROAD
EXISTINGROAD
RAILWAYLINE
RAILWAYSTATION
MapNo.:-7.1
PLANNINGAREABOUNDARY
RAILWAYASSUMEDAREA
VILLAGEEXPANSION
WATERBODY
VILLAGEBOUNDARY
PUBLICANDSEMIPUBLIC
MANDI
BUSSTAND
MIX
Legend
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24°46'0"N
24°48'0"N
24°50'0"N
24°52′0″N
24°54'0"N
80-00E 80-00E
79-580E
TIKUR
79580
KHUDARRIVER
KHAJURANO
ACHNAR
79-560E
ZATKARA
795602
RAJNAGAR
LALGAWAN
79-540E
BOAD TRAJNAGARKHAJURAHOD
TOCHANDRANAGAR 79540
KHAROHI
BAMITHA
TOMAHOBA
79-520E 79520
FROMCHATTARPUR
79-500E
24°46'0"N
24'48'0"N
24°52'0"N
24°50′0″N
24'54'0"N मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(123) खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
अनुसूची - 1
परिसरों की परिभाषायें
1. आवासीय भू-खण्ड, भू- खण्डीय आवास
एक या अधिक आवासीय इकाईयों का ऐसा परिसर जिसमें मुख्य भवन खण्ड तथा एक गैरेज / गैरेजेस्, सेवक आवास हेतु एक अतिरिक्त खण्ड सम्मिलित हो ।
2. आवासीय भू-खण्ड समूह आवास
न्यूनतम 5000 वर्गमीटर का परिसर, जिसमें मूलभूत सेवा सुविधाऐं जैसे वाहन विराम स्थल , उद्यान , सुविधाजनक दुकानें, सार्वजनिक सुविधाऐं आदि के साथ आवासीय प्रकोश्ठ स्थित हो ।
3. आवासीय फ्लेट
एक परिसर के लिसे आवासीय इकाई जो कि समूह आवास का भाग या स्वतंत्र हो ।
4. आवासीय - सह-कार्य भू- खण्ड
एक परिसर में एक परिवार के लिये उपलब्ध आवासीय जगह हो तथा जिसका कार्य स्थल भूतल तक सीमित हो, ऐसे परिसर केवल सार्वजनिक आवासीय परियोजनाओं में मान्य होंगे ।
5. आवासीय परिसर
नियमन में दिये अनुसार मिश्रित उपयोग रहित या सहित आवासीय स्थान ।
6. छात्रावास (होस्टल)
दीर्घावधि हेतु आवंटित संस्थानों से जुड़े कमरों का परिसर ।
7. अतिथिगृह बोर्डिंग एवं लॉजिंग गृह
अतिथिगृह से तात्पर्य अल्पावधि हेतु शासकीय , अर्द्धशासकीय , सार्वजनिक उपक्रम संस्थाओं हेतु आवासीय परिसर । एवं निजी मर्यादित बोर्डिंग हाउस वह परिसर जिसमें कमरों को छात्रावासों की अपेक्षा दीर्घावधि के लिये किराये पर दिये हो । 8. धर्मशाला एवं इसके समकक्ष
वह परिसर जिसमें बिना किसी लाभ के अल्पावधि के लिये अस्थाई रहवासी जगह उपलब्ध हो । 9. बारात घर
सार्वजनिक संस्था द्वारा संचालित विवाह एवं अन्य सामाजिक कार्यों के उपयोग हेतु स्थान ।
10. रैन बसेरा (नाईट शेल्टर) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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- खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप ) =
ऐसा परिसर जिसमें व्यक्तियों को रात्रि में स्थान बिना किसी शुल्क या सांकेतिक शुल्क के साथ उपलब्यध कराया जाता हो, जो कि स्थानीय शासन या स्वैच्छिक संस्थाओं द्वासरा संचालित हो ।
11. फुटकर दुकानें
आवश्यक भण्डारण के साथ उपभोक्ताओं हेतु सीधे आवश्यक वस्तुओं का विक्रय परिसर ।
12. मरम्मत दुकान
गृह सामग्री, इलेक्ट्रानिक सामान, आटोमोबाईल , साईकिल आदि की मरम्मत हेतु फुटकर दुकानों के समकक्ष परिसर ।
13. व्यक्तिगत सेवा दुकान
फुटकर दुकान के समकक्ष ऐसा परिसर जिसमें दर्जी , नाई , आदि की सेवायें उपलब्ध हो ।
14. बेडिंग बूथ
यांत्रिकी या अन्य व्यवस्था के माध्यम से दैनिक उपयोग की वस्तुओं का विकय परिसर जो कि एक बूथ के स्वरूप में हो ।
15. सुविधाजनक दुकान केंद्र
लगभग 5000 जनसंख्या हेतु आवासीय क्षेत्र में अधिकतम 50 दुकानों का समूह ।
16. स्थानीय दुकान केंद्र
लगभग 15 हजार जनसंख्या हेतु आवासीय क्षेत्र में 75 दुकानों का समूह ।
17. साप्ताहिक बाजार / अनौपचारिक समूह इकाई
बाजार में सप्ताह में एक बार उपयोगिता अनौपचारिक दुकानों का समूह क्षेत्र । यह बाजार सप्ताह में विभिन्न दिवसों में एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित होता हो ।
थोक व्यापार
18.
ऐसा परिसर जहां से वस्तुएँ एवं सामग्री फुटकर व्यवसायियों को विक्रय हेतु पहुँचाई जाती हो । 860(125)
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
19. स्टोरेज गोदाम एवं भण्डारण
ऐसा परिसर जहां केवल विशेष रूप से संबंधित वस्तुओं की आवश्यकता के अनुरूप सामग्री एवं वस्तुओं के भण्डारण का उपयोग किया जाता हो ।
20. शीतगृह (कोल्ड स्टोरेज)
आवश्यक तापमान बनाये रखने हेतु यांत्रिकी एवं विद्युत उपकरणों के साथ ऐसी बंद जगह जहां शीघ्र नश्ट होने वाली वस्तुओं का भण्डारण किया जाता हो ।
गैस गोदाम
21.
ऐसा परिसर जहां खाना पकाने की गैस के सिलेण्डर या अन्य गैस सिलेण्डरों का भण्डारण किया जाता हो । बैंक
22 .
ऐसा परिसर जहां बैकिंग कार्य एवं गतिविधियों से संबंधित कार्य होता हो ।
23. मोटर गैरेज एवं वर्कशॉप
वहनों के मरम्मत एवं सर्विसिंग परिसर ।
24. छविगृह
ऐसा परिसर जहाँ दर्शकों की बैठक व्यवस्था के साथ बंद जगह में चलचित्र दिखाये जाने की व्यवस्था हो । 25. पेट्रोल पम्प
ऐसा परिसर जहां उपभोक्ताओं को पेट्रोलियम उत्पाद विक्रय हो, साथ ही वाहन सर्विसिंग की व्यवस्था हो । 26. रेस्टोरेट/ उपाहार गृह
ऐसा परिसर जिसका उपयोग व्यवसायिक आधार पर खाने के व्यंजनों को उपलब्ध कराने के लिये किया जाता हो (व्यंजन पकाने की व्यवस्था के साथ ) जिसमें खुले, बंद या दोनों प्रकार की बैठक व्यवस्था हो । 27. होटल
ऐसा परिसर जहां भोजन अथवा बिना भोजन व्यवस्था के 15 व्यक्तियों की सशुल्क रहवास की व्यवस्था हो । 28. फ्लेटेड समूह उद्योग
ऐसा समूह जिसमें अहानिकारक लघु उद्योग इकाईयों का समूह स्थित हो, यह इकाईयां बहुमंजिला भवन में हो सकती हैं । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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सेवा केंद्र
29.
ऐसा परिसर जिसमें विशिष्ट रूप से वाहन मरम्मत, विद्युतीय उपकरण मरम्मत , भवन सामग्री आदि की दुकानें स्थित हो, ताकि संलग्न आवासीय क्षेत्रों को आवश्यकसेवा प्रदाय हो सके ।
30. औद्योगिक भूखण्ड - हल्के उद्योग
अहानिकारक 50 कर्मचारियों वाली उद्योग इकाईयों का परिसर ।
31 . औद्योगिक भूखण्ड विशिष्ट उद्योग
ऐसी औद्योगिक इकाईयों का परिसर जिसमें इलेक्ट्रानिक सामग्री आदि जैसी विशिष्ट उत्पादन इकाईयों का समूह सम्मिलित हो ।
32. उद्यान (पार्क)
आमोद- प्रमोद गतिविधियों के उपयोग का परिसर इसमें भू- दृश्यीकरण , वाहन विराम, सार्वजनिक शौचालय , फेंसिंग आदि संबंधित सुविधायें हों, इसमें लॉन, खुले एवं हरित क्षेत्र आदि सम्मिलित होंगे ।
33. कीड़ांगन
बाह्य खेलों के उपयोग में आने वाला परिसर, इसमें भू- दृश्यीकरण , वाहन विराम, सार्वजनिक शौचालय सम्मिलित हों ।
34. तरण पुष्कर
ऐसा परिसर जिसमें तैराकी की सुविधा एवं आकार , मानक एवं उद्देश्य के अनुपात में दर्शकों के बैठने की व्यवस्था हो ।
35. आमोद - प्रमोद क्लब
संबंधित सुविधाओं के साथ ऐसा परिसर जहां सामाजिक एवं मनोरंजन के उद्देश्य से व्यक्तियों के समूह का एकत्रीकरण होता हो ।
36. ऐतिहासिक स्मारक
ऐसा परिसर जिसमें प्राचीन समय के खण्डहर एवं ढांचे स्थित हों ।
पक्षी अभ्यारण
37.
पक्षियों के संरक्षण एवं प्रजनन हेतु वन या विस्तृत उद्यान के रूप में संबंधित सर्वसुविधायुक्त परिसर । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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38. वनस्पति उद्यान
अनुसंधान एवं प्रदर्शन के लिये उद्यान के स्वरूप में वृक्षारोपण वाला परिसर ।
39. पिकनिक हट / कैम्पिंग साइट
ऐसा परिसर जहां पर्यटन एवं आमोद -प्रमोद के उद्देश्य से अल्पावधि के लिये परिवार सहित ठहरने की सुविधा उपलब्ध हो ।
40. सड़क परिवहन टिकिट घर
ऐसा परिसर जिसका उपयोग यात्रियों के प्रवास हेतु सड़क परिवहन द्वारा टिकिट घर के रूप में किया जाता हो जिसमें गोदाम भी सम्मिलित हो या सम्मिलित नहीं हो ।
41 . वाहन विराम
सार्वजनिक वाहन विराम हेतु उपयोग में लाया जाने वाला परिसर जो कि व्यवसायिक या गैर व्यवसायिक आधार पर संचालित किया जाता हो ।
42. टैक्सी एवं तिपहिया वाहन स्थानक
ऐसा परिसर जिसका उपयोग अंतर्वर्ती सार्वजनिक यातायात वाहनों, जो कि व्यवसायिक आधार पर चलती हों, द्वारा विराम हेतु किया जाता हो । वाहन विराम स्थल व्यवसायिक अथवा गैर व्यवसायिक हो । बस अवसान केंद्र
43.
ऐसा परिसर जिसका उपयोग जनता के उपयोग में आने वाली सार्वजनिक यातायात संस्था की बस द्वारा कम समय के विराम हेतु किया जाता हो, इसमें यात्रियों के लिये आवश्यकसुविधायें शामिल हो सकती है । 44.
बस स्थानक
ऐसा परिसर जिसका उपयोग सार्वजनिक यातायात संस्था या अन्य किसी संस्था द्वारा बसों के रख - रखाव, मरम्मत एवं विराम हेतु किया जाता हो, इसमें कर्मशाला भी शामिल की जा सकती है अथवा नहीं भी । 45. सार्वजनिक उपयोगिता परिसर
1. पानी की टंकी - ऐसा परिसर जिसमें समीपस्थ क्षेत्रों में जल वितरण एवं संग्रहण हेतु पानी की टंकी स्थित हो, इसमें पंप हाउस भी सम्मिलित किया जा सकता है ।
2. भूमिगत टंकी - ऐसा परिसर जिसमें समीपस्थ क्षेत्रों में जल वितरण एवं संग्रहण हेतु पानी की भूमिगत टंकी स्थित हो, इसमें पंप हाउस भी सम्मिलित किया जा सकता है ।
3. आक्सीकरण पौंड ऐसा परिसर जिसमें स्थित तालाब का उपयोग जल निकास एवं अन्य अवशिश्ट पदार्थों के आक्सीकरण हेतु किया जाता हो । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
4. सेप्टिक टैंक ऐसा परिसर जिसमें जल निकास संकलन एवं उसके निराकरण हेतु भूमिगत टेंक स्थित हो ।
5. जल - मल पंपिंग स्टेशन - ऐसा परिसर जिसका उपयोग जल - मल को ऊंचाई पर भेजने हेतु पंपिंग स्टेशन हेतु किया जाता हो ।
6. सार्वजनिक शौचालय एवं मूत्रालय – ऐसा परिसर जिसमें सार्वजनिक शौचालय एवं मूत्रालय स्थित हो, इस परिसर में पानी की सुविधा का प्रावधान भी सम्मिलित किया जा सकता है ।
7. विद्युत उपकेंद्र – ऐसा परिसर जिसमें विद्युत वितरण हेतु ट्रांसफार्मर एवं संबंधित उपकारण स्थित हो । 8. घूरा एवं कचराघर ऐसा परिसर जिसका उपयाग अपशिश्टि पदार्थों के एकत्रीकरण एवं आगे गड्ढों को भरने हेतु लदान किया जाता हो ।
9. धोबी घाट ऐसा परिसर जिसका उपयोग कपड़े धोने, सुखाने इत्यादि के लिये किया जाता हो । 46. केंद्र शासन के कार्यालय
ऐसा परिसर जिसका उपयोग केंद्र शासन के कार्यालयों द्वारा किया जाता हो ।
स्थानीय शासन के कार्यालय
47.
ऐसा परिसर जिसका उपयोग स्थानीय शासन एवं स्थानीय संस्थाओं के कार्यालयों हेतु किया जाता हो । 48. सार्वजनिक उपक्रम कार्यालय
ऐसा परिसर जिसका उपयोग सार्वजनिक उपक्रम ब्यूरो अधिनियम के अंतर्गत स्थापित कंपनियों के कार्यालयों द्वारा किया जाता हो ।
न्यायालय
49.
ऐसा परिसर जिसका उपयोग न्यायलयीन कार्यालयों द्वारा किया जाता हो ।
50. शासकीय भूमि
राज्य या केंद्र शासन के स्वामित्व की भूमि ।
51 . चिकित्सालय
ऐसा परिसर जिसमें आंतरिक एवं बाह्य रोगियों की सामान्य एवं विशे पीकृत चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध हो। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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52. स्वास्थ्यकेंद्र
ऐसा परिसर जिसमें आंतरिक एवं बाह्य रोगियों की (30 बिस्तर तक) की चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध हो । स्वास्थ्य केंद्र का प्रबंधन सार्वजनिक एवं धर्मार्थ संस्था द्वारा गैर-व्यवसायिक आधार पर किया जाता हो । इसमें परिवार कल्याण केंद्र भी सम्मिलित हैं ।
उपचार केंद्र
53.
ऐसा परिसर जिसमें 30 बिस्तरों वाले आंतरिक एवं बाह्य रोगियों की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो । जिसका संचालन चिकित्सक या चिकित्सक समूह द्वारा व्यवसायिक आधार पर किया जा सकता है ।
54. औषधालय
ऐसा परिसर जिसमें सार्वजनिक अथवा धर्मार्थ संस्थाओं द्वारा चिकित्सकीय परामर्श एवं दवाईयों के प्रबंधन की व्यवस्था हो ।
55. क्लीनिक / चिकित्सा केंद्र
ऐसा परिसर जिसमें चिकित्सक द्वारा बाह्य रोगियों के उपचार की सुविधाएँ उपलब्ध हो । पाली क्लीनिक की दशा में चिकित्सकों के समूह द्वारा प्रबंधन किया जायेगा ।
उपचार प्रयोगशाला
56.
ऐसा परिसर जिसमें रोगों की पुष्टि करने हेतु विभिन्न प्रकार के परीक्षण की सुविधा हो ।
57. स्वैच्छिक स्वास्थ्य सेवा
ऐसा परिसर जिसमें स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा रक्त बैंक एवं बाह्य रोगियों के चिकित्सा की सुविधा हो । यह सेवा धर्मार्थ उद्देश्य से अस्थाई कैंप द्वारा भी उपलब्ध कराई जा सकती है ।
58. झूलाघर एवं दिवस देख- देख केंद्र
ऐसा परिसर जिसमें दिन में छोटे बच्चों की देख- रेख की सुविधा हो । यह केंद्र व्यक्तिगत अथवा व्यवसायिक अथवा गैर व्यवसायिक संस्था द्वारा संचालित हो सकता है ।
59. नर्सरी एवं किंडरगार्डन स्कूल
ऐसा परिसर जिसमें पाठशाला पूर्व बच्चो के खेलने एवं प्रशिक्षण की सेवायें उपलब्ध हो ।
60. प्राथमिक शाला
ऐसा परिसर जिसमें कक्षा 5 तक के छात्रों के पढने एवं खेलने की सुविधा हो । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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माध्यमिक शाला
61 .
ऐसा परिसर जिसमें कक्षा 6 से 10 तक के छात्रों के पढने खेलने की सुविधा हो । इसमें वर्तमान में संचालित कक्षा 8 तक की माध्यमिक शालायें सम्मिलित हैं ।
62. उच्चतर माध्यमिक शाला
ऐसा परिसर जिसमें कक्षा 10 से 12 तक के छात्रों के खेलने एवं शिक्षण की सुविधा हो ।
63. एकीकृत शाला
ऐसा परिसर जिसमें कक्षा 12 तक के छात्रों के खेलने एवं शिक्षण की सुविधा हो ।
64. एकीकृत आवासीय शाला
ऐसा परिसर जिसमें कक्षा 12 तक के छात्रों के खेलने एवं शिक्षण की सुविधा हो तथा छात्रों के लिये बोर्डिंग सुविधा हो । इसमें अध्यापकों के आवास भी हो सकते है ।
महाविद्यालय
65.
ऐसा परिसर जिसमें विश्वविद्यालय के स्नातक एवं स्नातकोत्तर तक के छात्रों के खलने एवं शिक्षण की सुविधा हो । इसमें सभी व्यावसायिक शिक्षण शामिल हैं ।
व्यावसासिक प्रशिक्षण केंद्र
66.
ऐसा परिसर जिसमें कम अवधि के शिक्षण पाठ्यक्रम तथा कतिपय विशेष व्यवसाय व व्यापार से संबंधित रोजगार हेतु प्रशिक्षण सुविधा हो । ये सार्वजनिक अथवा धार्मिक संस्था द्वारा गैर व्यवसायिक आधार पर संचालित होना चाहिये । इसमें प्रशिक्षण- सह- कार्य केंद्र शामिल हैं ।
सामाजिक कल्याण केंद्र
67.
ऐसा परिसर जिसमें सामुदायिक विकास के उन्नयन एवं कल्याण की सुविधा हो । यह सार्वजनिक अथवा धार्मिक संस्थाओं द्वारा संचालित हो सकता है ।
68. पुस्तकालय
ऐसा परिसर जिसमें एक विशेष वर्ग अथवा सामान्य जनता के पढने एवं संदर्भ के लिये वृहद् संख्या में पुस्तकों का संलकन हो ।
तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र
69.
ऐसा परिसर जिसमें तकनीकी प्रकृति के विशय में प्रशिक्षण की सुविधा हो । इसमें तकनीकी शाला, औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र आदि शामिल हैं । 860(131)
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 नवम्बर 2019
- खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
70. वाणिज्यिक एवं सचिवालयीन प्रशिक्षण
ऐसा परिसर जिसमें शीघ्रलेखन एवं टंकण, पत्राचार, रिकार्ड रिखने आदि के प्रशिक्षण की सुविधा हो । 71. संगीत, नृत्य एवं नाटक प्रशिक्षण केंद्र
ऐसा परिसर जिसमें संगीत, नृत्य एवं नाटकों आदि के प्रशिक्षण प्रदान करने की सुविधा हो ।
खेल प्रशिक्षण केंद्र
72.
ऐसा परिसर जिसमें तैराकी सहित विभिन्न आंतरिक एवं बाह्य खेलों के प्रशिक्षण की सुविधा हो । इसमें शारीरिक शिक्षा केंद्र भी शामिल हैं ।
73 . वाहन चालन प्रशिक्षण केंद्र
ऐसा परिसर जिसमें आटो/ वाहनों के चालन के प्रशिक्षण की सुविधा हो ।
74. संग्रहालय
ऐसा परिसर जिसमें प्राचीन वस्तुओं, प्राकृतिक, ऐतिहासिक एवं काल संबंधी वस्तुओं के संकलन एवं प्रदर्शन की सुविधा हो ।
75. कला दीर्घा एवं प्रदर्शनी स्थल
ऐसा परिसर जिसमें पेंटिंग , छाया चित्रों, मूर्तियों, भित्ती चित्र, मिट्टी से बनी कलाकृतियों, हाथ करघा अथवा विशेष वर्ग के उत्पादन को प्रदर्शन करने की सुविधा हो ।
76. सभागृह
ऐसा परिसर जिसमें संगीत विद्या गतिविधियों के विभिन्न आयोजन हेतु दर्शक दीर्घा सहित मंच हो । 77. खुला रंगमंच
ऐसा परिसर जिसमें आयोजनों के लिये दर्शक दीर्घा व मंच सहित खुला रंगमंच हो ।
78. सामुदायिक भवन
ऐसा भवन / परिसर जिसमें 15000 की समीपस्थ जनसंख्या की विभिन्न सामाजिक सांस्कृतिक गतिविधियों हेतु सुविधा हो ।
79. मेला मैदान
ऐसा परिसर जिसमें सहभागी समूह के लिये प्रदर्शनी, प्रदर्शन एवं अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों की सुविधायें हो । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
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80. सांस्कृतिक एवं सूचना केंद्र
ऐसा परिसर जिसमें संस्था राज्य तथा देश के लिये सांस्कृतिक व सूचना सेवा की सुविधायें हो ।
81 . सुधार गृह
ऐसा परिसर जिसमें अपराधियों के कारावास एवं सुधार की सुविधायें हो ।
82. अनाथालय
ऐसा परिसर जिसमें अनाथ बच्चों के रहने की सुविधा हो । यह शैक्षणिक सहित या रहित हो सकता है । धार्मिक
83.
ऐसा परिसर जिसमें ईश्वर अथवा धार्मिक प्रकृति के अन्य उद्देश्यों से संबंधित अन्य सेवायें एवं स्थल हो, में विभिन्न धर्मों जैसे मंदिर (सभी धमों के) , मस्जिद, चर्च, गुरूद्वारा , यहूदियों का प्रार्थना भवन, आश्रम, स्नानघाट, गौशाला आदि हो सकते है ।
84. योग , ध्यान, आध्यात्मिक एवं धार्मिक प्रवचन केंद्र
ऐसा परिसर जिसमें आत्म चिंतन , शरीर एवं मस्तिश्क की उच्च गुणतत्ता प्राप्ति करना, आध्यात्मिक एवं धार्मिक प्रवचन आदिं की सुविधायें शामिल हो ।
85. पुलिस चौकी
पुलिस स्टेशन की तुलना में लघु एवं अस्थाई स्थानीय पुलिस चौकी हेतु सुविधायुक्त परिसर ।
86. पुलिस स्टेशन
ऐसा परिसर जिसमें स्थानीय पुलिस चौकी के कार्यालयों हेतु सुविधा हो ।
87. अग्निशमन केंद्र
ऐसा परिसर जहां अल्प स्तर पर अग्निशमन व्यवस्था हो । अग्नि प्रवृत्त गतिविधियों वाले विशिष्ट परिसरों में यह व्यवस्था संलग्नित की जा सकती है ।
88. डाकघर एवं तारघर
सार्वजनिक उपयोग के लिये डाक एवं दूरसंचार सुविधायुक्त परिसर ।
89. टेलीफोन एक्सचेंज
ऐसा परिसर जहां सार्वजनिक टेलीफोन प्रणाली केंद्र स्थापित हो ।
90. कब्रिस्तान
मृतकों के अंतिम संस्कार हेतु आवश्यकसुविधायुक्त परिसर । 860(133)
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
91 . विश्रामघाट (श्मशान)
दाह विधि से मृतकों के अंतिम संस्कार हेतु आवश्यकसुविधायुक्त परिसर ।
92. सिमिट्री
ईसाई समुदाय के मृतकों के अंतिम संस्कार हेतु आवश्यक सुविधायुक्त परिसर ।
93. विद्युत दाहगृह
ऐसा परिसर जहां विद्युत फरनेस में मृतकों का दाह संस्कार किया जाता हो ।
94. बाग (ओरचर्ड)
सघन फल वृक्षों का परिसर, जिसमें फल वृक्षों के साथ उद्यान सम्मिलित हो सकता है ।
पौध नर्सरी
95.
पौध के उगाने एवं विक्रय हेतु सुविधायुक्त परिसर ।
96. वन
सघन प्राकृतिक वन युक्त परिसर ।
डेयरी फार्म
97.
ऐसा परिसर जहां डेयरी उत्पाद के उपचार एवं उत्पादन की सुविधा उपलब्ध हो । जिसमें अस्थायी रूप से पशु एवं पक्षियों के शेड्स सम्मिलित हो सकते है ।
98. कुक्कुटफार्म
कुक्कुट उत्पाद के प्रजनन एवं उपचार का सुविधायुक्त परिसर जिसमें अस्थायी रूप से पक्षियों के शेड्स सम्मिलित हो सकते हैं । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 नवम्बर 2019
860.(134)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
परिशिष्ट ' क' -1
(नियम 14 देखिये)
विकास अनुज्ञा हेतु आवेदन प्रारूप
प्रति
महोदय
जिला के कालोनी के बाजार
मैं नगर में स्थित खसरा क्रमांक तहसील भ-खण्ड क्रमांक क्षेत्र ग्राम हेक्टर / वर्ग मीटर (विकास के प्रयोजन का उल्लेख करे) में तथा मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 के अनुसार विकास करना चाहता हूँ और मै इसके साथ मेरे तथा प्राधिकृत वास्तुविद या संरचना इंजीनियर या इंजीनियर या नगर निवेशक (नाम स्पष्ट अक्षरो में ) अनुज्ञप्ति क्रमांक जो इसके विकास का पर्यवेक्षण करेगा द्वारा सम्यक हस्ताक्षरित तथा प्राधिकृत निन्नलिखित रेखांक दस्तावेज तथा विशिष्ट विवरण चार प्रतियों में अग्रेषित कर रहा हूँ-
1. मुख्य रेखांक नियम
2. स्थल रेखांक
3. उप विभाजन/अभिन्यास रेखांक (सब डिवीजन /ले आउट प्लान)
4. सेवा आयोजना रेखांक
5. प्रस्तावित कार्य को दर्शाते हुये प्रोजेक्ट रिपोर्ट
6. स्थल के संबंध में भूमि स्वामित्व अथवा कोई विधिक अधिकारी के प्रमाण दर्शाने वाले दस्तावेज 7. सेवा आयोजन (सर्विस प्लान )
8. विशिष्टियाँ (स्पेसिफिकेशन ) सामान्य तथा विस्तृत
9. नजूल अनापत्ति की कॉपी
10. आवेदन शुल्क की पावती की कापी
11 इस आवेदन के साथ भू- स्वामी द्वारा आवेदक को अधिकृत किये जाने के प्रमाण प्रस्तुत करे । (जहाँ आवेदक भू- स्वामी से भिन्न हो)
12 पार्किंग की गणना के साथ पार्किंग प्लान
13 अनुक्रमांक 1 से 11 तक की इलैक्ट्रानिक कापी
मै निवेदन करता हूँ कि प्रस्तावित विकास कार्यों को अनुमोदित किया जाये और मुझे कार्य निष्पादित करने की अनुमति प्रदान की जाए ।
आवेदक के हस्ताक्षर
आवेदक का नाम
आवेदक का पता
ई-मेल पता
दुरभाष / मोबाईल नम्बर
दिनांक 860(135)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
परिशिष्ट -' क ' -2
(नियम 14 देखिये)
स्थानीय प्राधिकारी से भवन अनुज्ञा प्राप्ति हेतु आवेदन का प्रारूप
प्रति
(स्थानीय प्राधिकारी का नाम एवं पता)
महोदय
मै कालोनी यो मोहल्ला या बाजार जिला में स्थित भवन क्रमांक वर्गमीटर या हेक्टेयर ग्राम या नगर ............ तहसील भूखण्ड क्रमांक या खसरा क्रमांक क्षेत्रफल निर्मा का प्रयोजन हेतु मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 के अनुसार परिनिर्माण अथवा पुनर्निमाण अथवा परिवर्तन करना चाहता हूँ और मै इसके साथ मेरे तथा वास्तुविद या संरचना इंजीनियर या इंजीनियर या नगर निवेशक (नाम स्पष्ट अक्षरो में ) जो कि उस परिनिर्माण का पर्यवेक्षण करेगा, द्वारा सम्यक हस्ताक्षरित (हार्ड एवं साप्ट कापी) निन्नलिखित दस्तावेज तथा योजना तथा विशिष्ट विवरण प्रस्तुत कर रहा हूँ ।
1. मुख्य रेखांक (की -प्लान)
2. स्थल रेखांक (साईट प्लान )
3. उपविभाजन/अभिन्यास रेंखांक
(सब डिवीजन/ले आउट प्लान)
4. भवन नक्शे (प्लानस ) चार प्रतियों में
5. सेवा आयोजना रेखांक
6. विशिष्टियाँ (स्पेसिफिकेशन) सामान्य तथा विस्तृत
7. स्थल के संबंध में भूमि स्वामित्व अथवा कोई विधिक अधिकार (लीगल राईट ) के प्रमाण दर्शाने वाले दस्तावेज
8. नजूल अनापत्ति की कॉपी
9. आवेदन शुल्क की पावती की कापी
10 इस आवेदन के साथ भू- स्वामी द्वारा आवेदक को अधिकृत किये जाने के प्रमाण प्रस्तुत करे ।
(जहाँ आवेदक भू- स्वामी से भिन्न हो )
11 पार्किंग की गणना के साथ पार्किंग प्लान
12 अनुक्रमांक 1 से 11 तक की इलैक्ट्रानिक कापी
मै निवेदन करता हूँ कि प्रस्तावित विकास कार्यों को अनुमोदित किया जाये और मुझे कार्य निष्पादित करने की अनुमति प्रदान की जाए ।
आवेदक के हस्ताक्षर
आवेदक का नाम
आवेदक का पता
ई-मेल पता
दुरभाष/मोबाईल नम्बर
दिनांक मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
860(136)
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप)
परिशिष्ट-2
(नियम 49 टिप्पणी 4 देखिये)
विकास अथवा क्षेत्रिक आयोजना के प्रस्तावो को प्राप्त करने का प्रारूप प्रति,
प्राधिकारी
मध्यप्रदेश
महोदय,
मै एतद् द्वारा शहर / जिला तहसील क्रमांक खसरा क्रमांक कालोनी / गली / मार्ग मोहल्ला/ बाजार / मै भूखण्ड की भूमि के विकास / पुर्नविकास करने के इच्छुक हूँ । क्षेत्र से संबंधित विकास योजना / परिक्षेत्रिक योजना से संबंधित प्रस्ताव ऊपर निर्दिष्ट भूमि के लिये उपखण्ड योजनाये तैयार करने के लिये उपलब्ध किये जा सकेगे । विकास योजना / परिक्षेत्रिक योजना संबंधी प्रस्तावों को प्राप्त करने के लिये आवश्यक भुगतान किया जा चुका है और रसीद की अभिप्रमाणित प्रति संलग्न है ।
आवेदक के अथवा स्वामी के हस्ताक्षर
आवेदक अथवा स्वामी का नाम (स्पष्ट अक्षरो में )
आवेदक अथवा स्वामी का पता
दिनांक 860(137)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 नवम्बर 2019
खजुराहो विकास योजना 2031 (प्रारूप )
परिशिष्ट-3
विशेष विवरण पत्रक
प्रस्तावित भवन का विशेष विवरण
1. भूखण्ढ का कुल क्षेत्रफल वर्गफुट / मीटर
2. कुल निर्मित क्षेत्र
वर्गफुट / मीटर
विद्यमान निर्मित क्षेत्र वर्गफुट / मीटर , प्रस्तावित........... वर्गफुट / मीटर विद्यमान प्रथम म...... वर्गफुट / मीटर , प्रस्तावित विद्यमान द्वितीय मंजिल वर्गफुट / मीटर, प्रस्तावित.. वर्गफुट / मीटर
3. उदेश्य कार्य जिसके लिये भवन का उपयोग प्रस्तावित है ।
4. विशेष विवरण जो निम्नलिखित के निर्माण में उपयोग में लाया जायेगा- (एक) नींव
(दो) दीवालें
(तीन) फर्श
(चार) छत
5. भवन में अंतर्विष्ट होने वाली मंजिलो की संख्या
6. ऐसे व्यक्तियों की लगभग संख्या , जिन्हे कि वास स्थान दिया जाना प्रस्तावित है ।
7. उन शौचालयो की संख्या जिनकी कि व्यवस्था की जायेगी ।
8. क्या स्थल पर पूर्व में निर्माण हुआ है, यदि ऐसा हुआ है तो पूर्ववर्ती भवन रहने के लिये कब से उपयुक्त नही रहा
9. भवन निर्माण के प्रयोजनो के लिये उपयोग किये जाने वाले जल का स्त्रोत ।
आवेदक के हस्ताक्षर नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री , मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2019.