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मध्यप्रदेश शासन
सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 489]
भोपाल , बुधवार , दिनांक 18 दिसम्बर 2019- अग्रहायण 27 , शक 1941
विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश
भोपाल, दिनांक 18 दिसम्बर 2019
क्र. 20374-मप्रविस - 15 - विधान -2019 .- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम -64 के उपबंधों के पालन में मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी ( द्वितीय संशोधन ) विधेयक, 2019 ( क्रमांक 28 सन् 2019 ) जो विधान सभा में दिनांक 18 दिसम्बर, 2019 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.
ए. पी. सिंह
प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक २८ सन् २०१९
मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी ( द्वितीय संशोधन ) विधेयक, २०१ ९
विषय-सूची.
खण्ड:
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.
१.
धारा २ का संशोधन.
२.
३.
धारा ३ का संशोधन.
४.
धारा ४ का स्थापन.
धारा ६ का संशोधन .
५.
६.
धारा ८ का संशोधन.
७.
धारा १७ का संशोधन.
८.
धारा २३ का संशोधन.
९.
धारा २५ का संशोधन.
977 978
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 18 दिसम्बर 2019
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक २८ सन् २०१ ९
मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी ( द्वितीय संशोधन )
विधेयक , २०१ ९
मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी अधिनियम , १ ९९९ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.
भारत गणराज्य के सत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान -मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
संक्षिप्त नाम और
१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी ( द्वितीय संशोधन) प्रारंभ.
अधिनियम, २०१ ९ है.
( २ ) यह मध्यप्रदेश राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा.
धारा २ का संशोधन.
२. मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी अधिनियम , १ ९९९ ( क्रमांक २३ सन् १ ९९९ ) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) की धारा २ में, उपधारा ( १ ) में, -
(एक) खण्ड ( ग ) में, शब्द " उद्वहन सिंचाई द्वारा, " के पश्चात्, शब्द " या दबावयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली द्वारा " अन्तःस्थापित किए जाएं;
(दो) खण्ड (ङ) में, उपखण्ड (तीन ) के पश्चात्, निम्नलिखित नया उपखण्ड जोड़ा जाए, अर्थात्ः- " (चार) दबावयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली वितरण केन्द्र से संबंधित समस्त संरचनाएं और उपसाधन; ";
(तीन) खण्ड ( ण ) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड अन्तःस्थापित किए जाएं, अर्थात्ः- " ( ण क) " दबावयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली " से अभिप्रेत है, एक सिंचाई प्रणाली जिसमें पाइप प्रणाली के माध्यम से जल को दबावयुक्त तथा सुनिश्चित रूप से पौधों तक पहुंचाया जाता है ;
(ण ख ) " दबावयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली वितरण केन्द्र " से अभिप्रेत है, कोई सिविल या यांत्रिक संरचना जहां से किसी विनिर्दिष्ट जल उपभोक्ता क्षेत्र को सिंचाई के लिए जल का वितरण नियंत्रित किया जाता है; ".
धारा ३ का संशोधन.
३. मूल अधिनियम की धारा ३ में , उपधारा ( १ ) में, शब्द " जलीय आधार पर " के पश्चात्, शब्द " या दबावयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली की दशा में वितरण केन्द्र के आधार पर " अन्तःस्थापित किए जाएं.
धारा ४ का स्थापन.
४. मूल अधिनियम की धारा ४ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति.
" ४. ( १ ) प्रत्येक जल उपभोक्ता संथा के लिए एक प्रबंध समिति होगी जो जल उपभोक्ता क्षेत्र के प्रत्येक प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र से एक अध्यक्ष तथा एक सदस्य से मिलकर बनेगी.
(२) कलक्टर, जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति के अध्यक्ष के निर्वाचन के लिए प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा गुप्त मतदान पद्धति के माध्यम से, ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, व्यवस्था कराएगा.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 18 दिसम्बर 2019
978(1) (३) कलक्टर , प्रबंध समिति के सदस्यों के निर्वाचन के लिए भी गुप्त मतदान पद्धति के माध्यम से, ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, व्यवस्था करेगा.
(४) यदि उपधारा ( २ ) तथा ( ३ ) के अधीन किसी निर्वाचन में जल उपभोक्ता संथा के अध्यक्ष या किसी प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र के सदस्य निर्वाचित नहीं किए जा सके हों तो नया निर्वाचन, ऐसी रीति में , जैसी कि विहित की जाए, कराया जाएगा.
(५) यदि जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति में कोई महिला सदस्य नहीं है तो प्रबंध समिति, सदस्य के रूप में एक महिला को सहयोजित कर सकेगी जो कि साधारणतः कृषक संगठन क्षेत्र की निवासी होगी.
( ६) प्रबंध समिति के अध्यक्ष और सदस्य यदि पूर्व में उन्हें वापस नहीं बुलाया गया हो , धारा २१ की उपधारा ( १ ) के अधीन सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति की तारीख से पांच वर्ष की कालवाधि के लिए पद पर रहेंगे:
परन्तु प्रबंध समिति के अध्यक्ष तथा सदस्यों की पदावधि का आवसान होने पर एक नई प्रबंध समिति गठित नहीं की जाती है, तो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा , प्रबंध समिति के अध्यक्ष तथा सदस्य की पदावधि में वृद्धि, ऐसी वृद्धि का कारण अभिलिखित करते हुए, ऐसे अवसान की तारीख से छह मास की और कालावधि के लिए कर सकेगी .
(७) प्रबंध समिति, जल उपभोक्ता संथा की शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का पालन करेगी.
(८ ) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा , उसके लिए कारणों को अभिलिखित करते हुए, पांच वर्ष की कालावधि के पूर्व, जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति को विघटित कर सकेगी और नया निर्वाचन ऐसी रीति में किया जाएगा जैसी कि विहित की जाए. ".
५. मूल अधिनियम की धारा ६ में , उपधारा ( ६ ) के पश्चात्, निम्नलिखित नई उपधारा जोड़ी जाए, अर्थात्ः- धारा ६ का संशोधन.
" (७ ) यदि जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति, धारा ४ की उपधारा ( ८ ) के अधीन पांच वर्ष की कालावधि के पूर्व विघटित की जाती है, तो उस दशा में, वितरक समिति की प्रबंध समिति स्वतः विघटित हुई समझी जाएगी ." .
धारा ८ का संशोधन.
६. मूल अधिनियम की धारा ८ में , उपधारा ( ५ ) के पश्चात्, निम्नलिखित नई उपधारा जोड़ी जाए, अर्थात्ः-
" (६ ) यदि जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति , धारा ४ की उपधारा ( ८ ) के अधीन पांच वर्ष की कालावधि के पूर्व विघटित की जाती है, तो उस दशा में , परियोजना समिति की प्रबंध समिति स्वतः विघटित हुई समझी जाएगी. ".
धारा १७ का संशोधन.
७. मूल अधिनियम की धारा १७ में, खण्ड ( ग ) में, शब्द " पाइप निकास " के पश्चात्, शब्द " या वितरण केन्द्र " अन्तःस्थापित किए जाएं.
८. मूल अधिनियम की धारा २३ में,-
धारा २३ का संशोधन.
(
एक) खण्ड (ज ) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड अन्तःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" ( ज क) किसी दबावयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली या उसके उपसाधनों को किसी भी प्रकार से नष्ट करेगा, नुकसान पहुंचाएगा, चोरी करेगा या जल के प्रवाह में हस्तक्षेप करेगा; ";
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 18 दिसम्बर 2019
978 ( 2)
(दो) शास्तियों से संबंधित अंतिम पैरा में,-
(क) खण्ड (एक ) में, कोष्ठक तथा अक्षर " ( ज) " के स्थान पर, कोष्ठक तथा अक्षर " ( जक ) " स्थापित किए जाएं और शब्द " पांच हजार रुपये " के स्थान पर, शब्द " दस हजार रुपये " स्थापित किए जाएं;
(ख) खण्ड ( दो ) में, शब्द " पांच सौ रुपये " के स्थान पर, शब्द " एक हजार रुपये " स्थापित किए जाएं;
धारा २५ का
संशोधन.
९ . मूल अधिनियम की धारा २५ में , कोष्ठक तथा अक्षर " ( ज ) " के स्थान पर, कोष्ठक तथा अक्षर " ( ज क) " स्थापित किए जाएं.
उद्देश्यों और कारणों का कथन
वर्तमान में मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी अधिनियम, १ ९९९ ( क्रमांक २३ सन् १ ९९९ ) की धारा ४ की उपधारा (२) , (३ ) और ( ५ ) में निम्नलिखित उपबंध हैं:-
(१) जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति एक निरन्तर निकाय होगी, जिसके एक तिहाई निर्वाचित सदस्य उपधारा ( ३ ) में विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार, प्रत्येक दो वर्ष में सेवानिवृत्त होंगे .
(२) प्रत्येक प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के सदस्यों की पदावधि, यदि उन्हें अधिनियम के उपबंधों के अधीन वापस नहीं बुलाया गया हो या हटाया नहीं गया हो या निरर्हित नहीं किया गया हो, धारा २१ की उपधारा ( १ ) के अधीन सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति की तारीख से छह वर्ष होगी .
(३) कलक्टर, विहित रीति में, जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति के सदस्यों में से प्रबंध समिति के एक अध्यक्ष के निर्वाचन की भी व्यवस्था करेगा.
२. उपरोक्तानुसार वर्ष २०१५ से २०१७ तक की कालावधि में जल उपभोक्ता संथा के गठन के पश्चात्, जल उपभोक्ता संथा के अध्यक्ष और प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के सदस्य कमाण्ड क्षेत्र में प्रशिक्षण एवं स्थल निरीक्षण के दौरान उदासीन पाये गये और इस अधिनियम के वर्तमान उपबंध के प्रति असंतोष प्रकट किया. अतः जल उपभोक्ता संथा और प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र की प्रबंध समिति की अवधि पांच वर्ष और संथा का अध्यक्ष एवं सदस्य प्रत्यक्ष निर्वाचन के माध्यम से चुना जाना प्रस्तावित है.
३. जैसा कि ऊपर पैरा २ में अधिकथित है , प्रस्तावित संशोधन के कारण , जल उपभोक्ता संथा की विद्यमान प्रबंध समिति को विघटित किये जाने की आवश्यकता है. यदि धारा ४ की उपधारा ( ८ ) के अधीन जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति पांच वर्ष की कालावधि से पूर्व विघटित की जाती है, तो परिणामतः धारा ६ और ८ में भी संशोधन प्रस्तावित हैं, कि वितरक समिति की प्रबंध समिति तथा परियोजना समिति की प्रबंध समिति स्वतः विघटित हुई समझी जायेगी.
४. अतएव , लोक हित में और सिंचाई परियोजना में नहरों के उचित संचालन एवं रखरखाव के उद्देश्य से, अधिनियम में यथोचित संशोधन प्रस्तावित हैं. उपरोक्त के अतिरिक्त सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से, सिंचाई के लिए, राज्य में नई वृहद्, मध्यम एवं लघु परियोजनाओं का निर्माण कार्य प्रगति पर है , अतः दबावयुक्त पाईप सिंचाई प्रणाली के लिए भी , अधिनियम में उपबंध किया जाना अपेक्षित है.
५. अधिनियम की धारा २३ में उन व्यक्तियों के लिए शास्तियों के उपबंध हैं, जो किसी नहर या सिंचाई प्रणाली को नुकसान पहुंचाते हैं, बाधा डालते हैं. इस धारा में शास्ति बढ़ाई गई है जिससे कि इस धारा में उल्लेखित अपराधों को नियंत्रित किया जा सके.
६. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.
भोपाल :
हुकुम सिंह कराड़ा
भारसाधक सदस्य.
तारीख ७ दिसम्बर , २०१ ९ .
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 18 दिसम्बर 2019
978 (3) प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन
प्रस्तावित मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी ( द्वितीय संशोधन ) विधेयक, २०१ ९ के खण्ड-४ द्वारा विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन निम्नानुसार किया जा रहा है :-
खण्ड ४ द्वारा जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों के प्रत्यक्ष निर्वाचन गुप्त मतदान पद्धति से कराये जाने तथा किसी निर्वाचन में जल उपभोक्ता संथा के अध्यक्ष या किसी प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र के सदस्य निर्वाचित नहीं किए जाने की स्थिति में निर्वाचन संबंधी रीति विहित किये जाने , प्रबंध समिति के अध्यक्ष तथा सदस्य की पदावधि में छह मास की और वृद्धि किये जाने एवं पांच वर्ष की कालावधि के पूर्व जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति को विघटित कर नये निर्वाचन कराये जाने के संबंध में राज्य सरकार नियम बना सकेगी , जो सामान्य स्वरूप के होंगे.
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2019.