Servants of Knowledge
Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

मध्‍यप्रदेश माल और सेवा कर (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2019

Published 19 December 2019

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
494
Identifier
in.gazette.madhya.2019-12-19.494.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

इसे वेबसाईट www.govtpressmp.nic.in से भी डाउन लोड किया जा सकता है .

मध्यप्रदेश शासन

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 494]

भोपाल, गुरुवार , दिनांक 19 दिसम्बर 2019- अग्रहायण 28 , शक 1941

विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश

भोपाल, दिनांक 19 दिसम्बर 2019

क्र. 20589 - मप्रविस- 15- विधान- 2019.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम 64 के उपबंधों के पालन में, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( द्वितीय संशोधन ) विधेयक, 2019 ( क्रमांक 39 सन् 2019 ) जो विधान सभा में दिनांक 19 दिसम्बर, 2019 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिये प्रकाशित किया जाता है.

ए. पी. सिंह, प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

987 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 दिसम्बर 2019

988

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक ३ ९ सन् २०१ ९

मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( द्वितीय संशोधन ) विधेयक , २०१ ९

विषय-सूची.

खण्ड:

१. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ

२. धारा २ का संशोधन.

३. धारा १० का संशोधन.

४. धारा २२ का संशोधन.

५. धारा २५ का संशोधन.

६. नई धारा ३१क का अंतःस्थापन.

७. धारा ३ ९ का संशोधन.

८. धारा ४४ का संशोधन.

९. धारा ४९ का संशोधन.

१०. धारा ५० का संशोधन.

११ . धारा ५२ का संशोधन.

१२. धारा ५३क का अंतःस्थापन.

१३ . धारा ५४ का संशोधन

१४. धारा ९ ५ का संशोधन.

१५. नई धाराएं १०१ क और १०१ ख का अंत:स्थापन.

१६. धारा १०२ का संशोधन .

१७. धारा १०३ का संशोधन.

१८. धारा १०४ का संशोधन.

१९. धारा १०५ का संशोधन.

२०. धारा १०६ का संशोधन.

२१ . धारा १७१ का संशोधन.

२२. मध्यप्रदेश माल एवं सेवा कर अधिनियम, २०१७ की धारा ११ की उप - धारा ( १ ) के अधीन जारी की गई अधिसूचना क्रमांक एफ-ए- ३-३५-२०१७-१-४(१४८ ) , दिनांक १४ नवम्बर, २०१७ का भूतलक्षी रूप से संशोधन.

988 ( 1)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 दिसम्बर 2019

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक ३ ९ सन् २०१ ९

मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( द्वितीय संशोधन ) विधेयक , २०१ ९

मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ के संशोधन हेतु विधेयक

भारत गणराज्य के सत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश राज्य विधान- मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( द्वितीय संशोधन ) अधिनियम, २०१ ९ . संक्षिप्त नाम और प्रारंभ (२ ) अन्यथा उपबंधित के सिवाय , यह अधिनियम के उपबंध उस तारीख को प्रवृत्त होंगे , जो राज्य सरकार, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा , नियत करेः

परंतु इस अधिनियम के विभिन्न उपबंधों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और इस अधिनियम के प्रारंभ पर किसी ऐसे उपबंध में किसी निर्देश का अर्थान्वयन उस उपबंध के प्रवृत्त होने के निर्देश के रूप में किया जाएगा .

धारा संशोधन. २ का २. मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम , २०१७ ( क्रमांक १ ९ सन् २०१७ ) ( जो इसमें इसके पश्चात्मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) की धारा २ में, खण्ड ( ४ ) में, शब्द " अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकारी " के स्थान पर, शब्द " राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकारी " अन्तःस्थापित किए जाएं.

३. मूल अधिनियम की धारा १० में,-

धारा १० का संशोधन.

(क) उप- धारा ( १ ) में, द्वितीय परंतुक के पश्चात्, निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्:-

" स्पष्टीकरण १.- द्वितीय परंतुक के प्रयोजनों के लिए, जहां तक प्रतिफल को ब्याज या बट्टे के रूप में प्रदर्शित किया जाता है , निक्षेपों , ऋणों या अग्रिमों को विस्तारित करके , छूट प्राप्त सेवाओं की पूर्ति के मूल्य को, किसी राज्य में आवर्त के मूल्य के अवधारण के लिए गणना में नहीं लिया जाएगा . " ;

(ख) उप- धारा ( २ ) में,-

(एक) खंड ( घ) में अन्त में आने वाला शब्द " और " का लोप किया जाए;

(दो) खंड (ङ) में, " परिषद; " के स्थान पर, शब्द " परिषद्; और " शब्द स्थापित किए जाएं;

(तीन) खंड (ङ) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" (च) वह न तो कोई नैमित्तिक कराधेय व्यक्ति है और न ही कोई अनिवासी कराधेय व्यक्ति;";

(ग) उप - धारा ( २ ) के पश्चात्, निम्नलिखित उप - धारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" ( रक ) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, परन्तु धारा ९ की उप- धारा ( ३ ) और उप - धारा ( ४) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 दिसम्बर 2019

988 (2)

जो उप - धारा ( १ ) और उप- धारा ( २ ) के अधीन कर के संदाय का विकल्प लेने के लिए पात्र नहीं है और जिसकी पूर्व वित्तीय वर्ष के सकल आवर्त पचास लाख रुपए से अधिक नहीं है, उसके द्वारा धारा ९ की उप- धारा ( १ ) के अधीन संदेय कर के अधीन , विहित की जाने वाली ऐसी दर पर, जो राज्य में उसकी आवर्त के तीन प्रतिशत से अधिक नहीं होगी , संगणित कर की रकम का संदाय करने का विकल्प ले सकेगा, यदि वह,- (क) मालों या सेवाओं के किसी प्रदाय करने में नहीं लगा है, जो इस अधिनियम के अधीन कर से उग्रहणीय नहीं है;

माल या सेवाओं की अंतरराज्यीय जावक प्रदाय करने में नहीं लगा है;

(ख)

(ग) किसी ऐसे इलैक्ट्रानिक वाणिज्य प्रचालक के माध्यम से माल या सेवाओं के ऐसे प्रदाय में नहीं लगा है , जिससे धारा ५२ के अधीन स्रोत पर कर का संग्रहण करना अपेक्षित है;

(घ) ऐसे माल का विनिर्माता या ऐसी सेवाओं का पूर्तिकार नहीं है, जो सरकार द्वारा परिषद् की सिफारिशों पर अधिसूचित की जाएं; और

(ङ) न तो कोई नैमित्तिक कराधेय व्यक्ति है और न ही कोई अनिवासी कराधेय व्यक्ति हैः परंतु जहां एक से अधिक रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों का आय- कर अधिनियम , १ ९ ६१ ( १ ९ ६१ का ४३ ) के अधीन जारी स्थायी खाता संख्यांक एक ही है , वहां ऐसा रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति इस उप - धारा के अधीन तब तक स्कीम के लिए विकल्प का चुनाव करने का पात्र नहीं होगा, जब तक ऐसे सभी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति इस उप - धारा के अधीन कर का संदाय करने के विकल्प का चुनाव नहीं करते हैं. " ;

(घ) उप - धारा ( ३ ) में, शब्दों, कोष्ठक और अंक " उप - धारा ( १ ) के अधीन " दोनों स्थानों पर, जहां कहीं भी आए हैं, के पश्चात्, शब्द कोष्ठक , अंक और अक्षर " या उप- धारा ( २क) के अधीन यथास्थिति , " अंतःस्थापित किए जाएं;

(ङ) उप- धारा ( ४ ) में, शब्द, कोष्ठक तथा अंक " उप- धारा ( १ ) के " के पश्चात्, शब्द, कोष्ठक, अंक तथा अक्षर " या यथास्थिति उप - धारा ( २ क ) " अंतःस्थापित किए जाएं;

(च) उप- धारा ( ५ ) में, शब्द कोष्ठक तथा अंक " उप - धारा ( १ ) के अधीन " के स्थान पर, शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर " या उप - धारा ( २ क ) के अधीन यथास्थिति, " अंतः स्थापित किए जाएं;

(छ) उप- धारा ( ५ ) के पश्चात्, निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः- " स्पष्टीकरण १.- इस धारा के अधीन किसी व्यक्ति की कर संदाय करने की पात्रता का अवधारण करने के लिए, इसके सकल आवर्त की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए, अभिव्यक्ति " सकल आवर्त " पद के अंतर्गत किसी वित्तीय वर्ष के १ अप्रैल से उस तारीख तक की पूर्तियां सम्मिलित होंगी, जिसको वह इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण का दायी बन जाता है , किन्तु जहां तक प्रतिफल को ब्याज या बट्टे के रूप में प्रदर्शित किया जाता है, निक्षेपों, ऋणों या अग्रिमों को विस्तारित करके छूट प्राप्त सेवाओं के प्रदाय का मूल्य सम्मिलित नहीं होगा.

988( 3)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 दिसम्बर 2019

"स्पष्टीकरण २.- इस धारा के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा संदेय कर का अवधारण करने के लिए, अभिव्यक्ति " किसी राज्य में आवर्त " में निम्नलिखित पूर्तियों का मूल्य सम्मिलित नहीं होगा , अर्थात्ः-

(एक) किसी वित्तीय वर्ष के १ अप्रैल से उस तारीख तक की पूर्तियां , जिसको ऐसा व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकरण का दायी बन जाता है ; और

(दो) जहां तक प्रतिफल को ब्याज या बट्टे के रूप में प्रदर्शित किया जाता है , निक्षेपों, ऋणों या अग्रिमों को विस्तारित करके छूट प्राप्त सेवाओं की पूर्ति. ".

धारा २२ का संशोधन.

४. मूल अधिनियम की धारा २२ में , उप - धारा ( १ ) में , द्वितीय परंतुक में, पूर्ण विराम के स्थान पर, कोलन स्थापित किया जाए और तत्पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक तथा स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" परन्तु यह भी कि सरकार, परिषद् की सिफारिशों के आधार पर, पूर्तिकार जो माल के अन्नन्य पूर्ति में लगा हो की दशा में संकलित आवर्त बीस लाख रुपये से चालीस लाख रुपये से अनधिक की ऐसी राशि तक , ऐसी शर्तों तथा परिसीमा के अधीन बढ़ा सकेगा, जैसी कि अधिसूचित की जाएं,

स्पष्टीकरण.- इस उप - धारा के प्रयोजनों के लिए, किसी व्यक्ति के बारे में तब भी यह समझा जाएगा कि वह माल की अनन्य पूर्ति में लगा है , यदि वह निक्षेपों , ऋणों या अग्रिमों को विस्तारित करके छूट प्राप्त सेवाओं की पूर्ति में लगा हुआ है , जहां तक प्रतिफल को ब्याज या बट्टे के रूप में प्रदर्शित किया जाता है . " .

धारा २५ का संशोधन.

५. मूल अधिनियम की धारा २५ में, उप- धारा ( ६ ) के पश्चात्, निम्नलिखित उप - धाराएं अंतःस्थापित की जाएं, अर्थात्ः-

" ( ६क) प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, ऐसे प्ररूप और रीति में तथा ऐसे समय के भीतर जैसी कि विहित की जाएं, सत्यापन कराएगा या आधार संख्या धारित करने का सबूत प्रस्तुत करेगाः

परंतु यदि किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति को आधार संख्या समनुदेशित नहीं की गयी है, तो ऐसा व्यक्ति ऐसी रीति में, जो परिषद् की सिफारिशों पर, सरकार विहित करे, पहचान का कोई वैकल्पिक और व्यवहार्य साधन प्रदान किया जाएगाः

परंतु यह और कि सत्यापन कराने या आधार संख्या धारित करने का सबूत प्रस्तुत करने या पहचान का कोई वैकल्पिक और व्यवहार्य साधन प्रस्तुत करने में असफल रहने की दशा में ऐसे व्यक्ति को आबंटित रजिस्ट्रीकरण अविधिमान्य समझा जाएगा और इस अधिनियम के अन्य उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो ऐसे व्यक्ति के पास रजिस्ट्रीकरण नहीं है.

(६ख ) अधिसूचना की तारीख को तथा से प्रत्येक व्यक्ति, रजिस्ट्रीकरण की मंजूरी के लिए पात्र बनने हेतु, ऐसी रीति में , जैसी कि सरकार, परिषद् की सिफारिशों के अधार पर, उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे सत्यापन कराएगा या आधार संख्या धारित करने का सबूत प्रस्तुत करेगाः

परंतु जहां किसी व्यष्टि को आधार संख्या समनुदेशित नहीं की गई है, वहां ऐसे व्यष्टि को ऐसी रीति में जैसी कि सरकार , परिषद् की सिफारिशों के आधार पर, उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे, पहचान का कोई वैकल्पिक और व्यवहार्य साधन प्रदान किया जाएगा.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 दिसम्बर 2019

988 (4)

(६ग ) अधिसूचना की तारीख को तथा से, व्यष्टि से भिन्न प्रत्येक व्यक्ति, रजिस्ट्रीकरण की मंजूरी के लिए पात्र बनने हेतु, ऐसी रीति में जैसी कि सरकार, परिषद् की सिफारिशों के आधार पर, उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे, सत्यापन कराएगा या कर्ता, प्रबंध निदेशक, पूर्णकालिक निदेशक, ऐसे संख्या के भागीदारों , यथास्थिति, संगम की प्रबंध समिति, न्यासी बोर्ड के सदस्यों, प्राधिकृत प्रतिनिधियों, प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और व्यक्तियों के ऐसे अन्य वर्ग आधार संख्या धारित करने का सबूत प्रस्तुत करेंगे:

परंतु जहां ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग , जिन्हें आधार संख्या समनुदेशित नहीं की गयी है , ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को ऐसी रीति में जैसी कि सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे, पहचान का वैकल्पिक और व्यवहार्य साघन प्रस्तुत किया जाएगा.

(६घ) उप- धारा ( ६क ) या उप- धारा ( ६ख ) या उप - धारा ( ६ ग ) के उपबंध ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग या राज्य के ऐसे भाग को लागू नहीं होंगे, जैसी कि सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे.

स्पष्टीकरण.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए अभिव्यक्ति " आधार संख्या " का वही अर्थ होगा, जो आधार (वित्तीय और अन्य सहायिकियों, फायदों तथा सेवाओं का लक्ष्यित परिदान) अधिनियम, २०१६ ( २०१६ का १८ ) की धारा २ के खंड ( क) में उसे समनुदेशित किया गया है. ".

६. मूल अधिनियम की धारा ३१ के पश्चात्, निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्ः- नई धारा ३१क का

अंतःस्थापन.

" ३१क. प्राप्तिकर्ता को डिजिटल संदाय की सुविधा

सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के ऐसे वर्ग को विहित कर सकेगी , जो उसके द्वारा की गई माल या सेवाओं या दोनों की पूर्ति प्राप्तिकर्ता को इलेक्ट्रानिक संदाय का विहित ढंग उपलब्ध कराएगा और ऐसे प्राप्तिकर्ता को , ऐसी रीति में और ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अधीन , जो विहित किए जाएं, तद्नुसार संदाय करने का विकल्प उपलब्ध कराएगा. ".

धारा ३९ का

७. मूल अधिनियम की धारा ३ ९ में , -

संशोधन.

(क) उप- धारा ( १ ) और उप- धारा ( २ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उप- धाराएं स्थापित की जाएं, अर्थात्ः-

" ( १ ) किसी इनपुट सेवा वितरक या अनिवासी कर योग्य व्यक्ति या धारा १० या धारा ५१ या धारा ५२ के उपबंधों के अधीन कर संदत्त करने वाले व्यक्ति से भिन्न प्रत्येक रंजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, प्रत्येक कलैंडर मास या उसके किसी भाग के लिए माल या सेवाओं या दोनों के आवक और जावक पूर्तियों, प्राप्त किए गए इनपुट कर प्रत्यय , संदेय कर तथा सदत्त कर और ऐसी अन्य विशिष्टियां , ऐसे प्ररूप तथा रीति और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, इलैक्ट्रानिक रूप से विवरणी प्रस्तुत करेगाः

परंतु सरकार, परिषद् की सिफारिशों पर, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के कतिपय वर्ग को अधिसूचित कर सकेगी , जो ऐसी शर्तों और निर्बंधनों, जो उसमें विनिर्दिष्ट किए जाएं, के अध्यधीन रहते हुए, प्रत्येक तिमाही या उसके किसी भाग के लिए विवरणी प्रस्तुत करेंगे.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 दिसम्बर 2019

988 (5) (२) धारा १० के उपबंधों के अधीन कर का संदाय करने वाला कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, प्रत्येक वितीय वर्ष या उसके किसी भाग के लिए, माल या सेवाओं या दोनों की आवक पूर्तियों, संदेय कर, संदत्त कर और ऐसी अन्य विशिष्टियां, ऐसे प्ररूप तथा रीति और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, इलैक्ट्रानिक रूप से राज्य में आवर्त की विवरणी प्रस्तुत करेगा. ";

(ख) उप- धारा ( ७ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उप - धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" (७) उप- धारा ( ३ ) या उप- धारा ( ५ ) या उसके परन्तुक में निर्दिष्ट व्यक्ति से भिन्न प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जिससे उप - धारा ( १ ) के अधीन विवरणी प्रस्तुत किया जाना अपेक्षित है ऐसी विवरणी के अनुसार देय कर, अंतिम तारीख , जिसको उससे ऐसी विवरणी देने की अपेक्षा की जाती है , से अपश्चात् सरकार को संदत्त करेगाः

परंतु उप - धारा ( १ ) के परंतुक के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने वाला प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, किसी मास के दौरान, माल या सेवाओं या दोनों की आवक और जावक पूर्तियों, प्राप्त कर प्रत्यय , संदेय कर और ऐसी अन्य विशिष्टियां ऐसे प्ररूप तथा रीति में और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, सरकार को देय कर का संदाय करेगाः

परंतु यह और कि उप - धारा ( २ ) के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने वाला प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, किसी तिमाही के दौरान, माल या सेवाओं या दोनों की आवक पूर्तियों , संदेय कर और ऐसी अन्य विशिष्टियां ऐसे प्ररूप तथा रीति में और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, सरकार को देय कर का संदाय करेगा. " .

धारा ४४ का संशोधन.

८. मूल अधिनियम की धारा ४४ में, उप- धारा ( १ ) में , पूर्ण विराम के स्थान पर, कोलन स्थापित किया जाए और तत्पश्चात् निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किए जाएं, अर्थात्ः-

" परंतु आयुक्त, परिषद् की सिफारिशों पर और लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, अधिसूचना द्वारा , रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के ऐसे वर्ग, जो उसमें विनिर्दिष्ट किया जाए, के लिए वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने की समय - सीमा को विस्तारित कर सकेगाः

परंतु यह और कि केन्द्रीय कर आयुक्त द्वारा अधिसूचित समय - सीमा के किसी विस्तार को, आयुक्त द्वारा अधिसूचित किया गया समझा जाएगा. " .

धारा ४९ का संशोधन.

९. मूल अधिनियम की धारा ४९ में , उप- धारा ( ९ ) के पश्चात्, निम्नलिखित उप - धाराएं अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" ( १० ) कोई रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, ऐसे प्ररूप और रीति में तथा ऐसी शर्तों और निर्बंधनों के अध्यधीन रहते हुए, जैसी कि विहित की जाएं, सामान्य पोर्टल पर , इस अधिनियम के अधीन इलैक्ट्रानिक नकद खाते में उपलब्ध किसी कर, ब्याज , शास्ति, फीस या किसी अन्य रकम को एकीकृत कर, केन्द्रीय कर, राज्य कर या उपकर के लिए इलैक्ट्रानिक नकद खाते में अंतरित कर सकेगा और ऐसे अंतरण को इस अधिनियम के अधीन इलैक्ट्रानिक नकद खाते से प्रतिसंदाय के रूप में समझा जाएगा.

(११ ) जहां किसी रकम को इस अधिनियम के अधीन इलैक्ट्रानिक नकद खाते में अंतरित किया गया है, वहां उसे उप - धारा ( १ ) के उपबंधों के अनुसार उक्त खाते में जमा किया गया समझा जाएगा.".

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 दिसम्बर 2019

988 (6)

धारा ५० का संशोधन.

१०. मूल अधिनियम की धारा ५० में उप - धारा ( १ ) में पूर्ण विराम के स्थान पर, कोलन स्थापित किया जाए तथा इसके पश्चात् निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" परंतु किसी कर अवधि के दौरान की गई पूर्तियों के संबंध में संदेय कर पर ब्याज को, जिसे धारा ३ ९ के उपबंधों के अनुसार नियत तारीख के पश्चात् उक्त अवधि के लिए प्रस्तुत की गई विवरणी में घोषित किया गया है, सिवाय वहां के , जहां ऐसी विवरणी को उक्त अवधि के संबंध में धारा ७३ या धारा ७४ के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के प्रारंभ होने के पश्चात् प्रस्तुत किया जाता है, कर के उस भाग पर उद्गृहीत किया जाएगा, जिसका संदाय इलैक्ट्रानिक नकद खाते से राशि को निकालकर किया गया है. ".

११. मूल अधिनियम की धारा ५२ में,-

धारा ५२ का

संशोधन.

(

एक) उप- धारा (४ ) में , पूर्ण विराम के स्थान पर, कोलन स्थापित किया जाए तथा इसके पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किए जाएं, अर्थात्ः-

" परंतु आयुक्त, लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, अधिसूचना द्वारा , रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के ऐसे वर्ग के लिए, जो उसमें विनिर्दिष्ट किया जाए, विवरण प्रस्तुत करने की समय - सीमा को विस्तारित कर सकेंगे:

परंतु यह और कि केन्द्रीय कर आयुक्त द्वारा अधिसूचित समय - सीमा के किसी विस्तार को आयुक्त द्वारा अधिसूचित किया गया समझा जाएगा. " ;

( दो) उप- धारा ( ५ ) में , पूर्ण विराम के स्थान पर, कोलन स्थापित किया जाए तथा इसके पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किए जाएं, अर्थात्ः-

" परंतु आयुक्त, परिषद् की सिफारिशों पर और लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, अधिसूचना द्वारा, रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के ऐसे वर्ग के लिए, जो उसमें विनिर्दिष्ट किया जाए, वार्षिक विवरण प्रस्तुत करने की समय - सीमा को विस्तारित कर सकेगाः

परंतु यह और कि केन्द्रीय कर आयुक्त द्वारा अधिसूचित समय- सीमा के किसी विस्तार को आयुक्त द्वारा अधिसूचित किया गया समझा जाएगा. ".

१२. मूल अधिनियम के अध्याय दस में धारा ५३ के पश्चात्, अध्याय दस में निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित धारा ५३ क का अंतःस्थापन.

की जाए, अर्थात्:-

" ५३क. कतिपय रकमों का अंतरण.

जहां किसी रकम को इस अधिनियम के अधीन इलैक्ट्रानिक नकद खाते से किसी केन्द्रीय कर, एकीकृत कर या उपकर के लिए इलैक्ट्रानिक नकद खाते में अंतरित किया गया है , वहां सरकार केन्द्रीय कर खाते, एकीकृत कर खाते या उपकर खाते को, इलैक्ट्रानिक नकद खाते से अंतरित की गई रकम के बराबर रकम को, ऐसी रीति और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, अंतरण करेगी. ".

धारा ५४ का संशोधन.

१३. मूल अधिनियम की धारा ५४ में, उप - धारा ( ८ ) के पश्चात्, निम्नलिखित उप- धारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" ( ८क) जहां केन्द्र सरकार द्वारा राज्य कर के प्रतिदाय का वितरण किया गया है , सरकार, केन्द्रीय सरकार, को उस प्रतिदाय के बराबर रकम अंतरित करेगी. " .

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 दिसम्बर 2019

988 (7)

धारा ९५ का १४. मूल अधिनियम की धारा ९ ५ में, -

संशोधन.

(एक) खंड (क) में, -

(क) शब्द " अपील प्राधिकारी " के पश्चात्, शब्द " या राष्ट्रीय अपील प्राधिकारी " अंतःस्थापित किए जाएं;

(ख) शब्द तथा अंक " की धारा १०० उप - धारा ( १ ) " के पश्चात्, शब्द " या केन्द्रीय माल एवं सेवा कर अधिनियम, २०१७ ( २०१७ का १२ ) की धारा १०१ ग " अंतःस्थापित किए जाएं;

(दो) खंड (ङ) में, पूर्ण विराम के स्थान पर, अर्धविराम स्थापित किया जाए तथा उसके पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" (च) " राष्ट्रीय अपील प्राधिकारी " से अभिप्रेत है धारा १०१ क में निर्दिष्ट राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकारी . ".

१५. मूल अधिनियम की धारा १०१ के पश्चात् निम्नलिखित धाराएं अंतःस्थापित की जाएं, अर्थात्ः-

नई धाराएं १०१क और १०१ ख का अंतःस्थापन.

" १०१क. राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकारी का गठन

इस अध्याय के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए, केन्द्रीय माल एवं सेवा कर अधिनियम, २०१७ ( २०१७ का १२ ) की धारा १०१ क के अंतर्गत गठित राष्ट्रीय अग्रिम विनिर्णय अपील प्राधिकारी , इस अधिनियम के अंतर्गत अग्रिम विनिर्णय के लिए राष्ट्रीय अपील प्राधिकारी माना जाएगा.

१०१ख. राष्ट्रीय अपील प्राधिकारी को अपील

(१ ) जहां धारा ९७ की उप- धारा ( २ ) में निर्दिष्ट प्रश्नों के संबंध में , धारा ९९ के अधीन गठित अपील प्राधिकारी द्वारा तथा धारा १०१ की उप- धारा ( १ ) या उप - धारा ( ३ ) के अधीन किसी अन्य राज्य या राज्यों या किसी संघ राज्य क्षेत्र या संघ राज्यक्षेत्रों या दोनों के अपील प्राधिकरणों द्वारा विरोधाभासी अग्रिमं विनिर्णय दिए जाते हैं, वहां आयुक्त द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी या आवेदक, जो धारा २५ में विनिर्दिष्ट से सुभिन्न व्यक्ति है , जो अग्रिम विनिर्णय से व्यथित है , तो वह राष्ट्रीय अपील प्राधिकारी को अपील कर सकेगाः

परन्तु अधिकारी उन राज्यों से होगा, जहां ऐसे अग्रिम विनिर्णय दिए गए हैं.

( २ ) इस धारा के अधीन प्रत्येक अपील , उस तारीख से, जिसको वह विनिर्णय , जिसके विरुद्ध अपील चाही गई है , आवेदक, संबंधित अधिकारियों और अधिकारिता रखने वाले अधिकारियों को संसूचित किया गया है, तीस दिन की अवधि के भीतर फाइल की जाएगीः

परंतु आयुक्त द्वारा प्राधिकृत अधिकारी , उस तारीख से, जिसको वह विनिर्णय, जिसके विरुद्ध अपील चाही गई है, संबंधित अधिकारी और अधिकारिता रखने वाले अधिकारी को संसूचित किया गया है, नब्बे दिन की अवधि के भीतर अपील फाइल कर सकेगाः

परंतु यह और कि राष्ट्रीय अपील प्राधिकारी , यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी को , यथास्थिति, उक्त तीस दिन या नब्बे दिन के भीतर अपील प्रस्तुत करने से पर्याप्त कारण से निवारित किया गया मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 19 दिसम्बर 2019

988 (8)

था, तो वह ऐसी अपील को तीस दिन से अनधिक और अवधि के भीतर प्रस्तुत करने के लए अनुज्ञात कर सकेगा.

स्पष्टीकरण:- शंकाओं के निराकरण के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि यथास्थिति, तीन दिन या नब्बे दिन की अवधि की गणना, उस तारीख से की जाएगी , जिसको अंतिम विरोधाभासी विनिर्णय को, जिसके विरुद्ध अपील चाही गई है , संसूचित किया गया था.

(

३ ) इस धारा के अधीन प्रत्येक अपील ऐसे प्ररूप में, ऐसी फीस के साथ होगी , और उसे ऐसी रीति में सत्यापित किया जाएगा , जो विहित की जाए. ".

१६. मूल अधिनियम की धारा १०२ में आरंभिक भाग में,-

धारा १०२ का संशोधन.

(क

) शब्द " अपील प्राधिकारी " के पश्चात्, दोनों स्थानों पर, जहां वे आए हैं , शब्द " या राष्ट्रीय अपील प्राधिकारी " अंतःस्थापित किए जाएं;

(

ख) शब्द तथा अंक " धारा १०१ " के पश्चात्, शब्द, अंक तथा अक्षर " या केन्द्रीय माल एवं सेवा कर अधिनियम, २०१७ ( २०१७ का १२ ) की धारा १०१ ग यथास्थिति " अंतःस्थापित किए जाएं;

(ग) शब्द " या अपीलार्थी " के स्थान पर, शब्द " अपीलार्थी " , प्राधिकारी या अपील प्राधिकारी " स्थापित किए जाएं.

१७. मूल अधिनियम की धारा १०३ में, -

धारा १०३ का संशोधन.

(एक) उप- धारा ( १ ) के पश्चात्, निम्नलिखित उप- धारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्ः- " ( १ क) इस अध्याय के अधीन राष्ट्रीय अपील प्राधिकारी द्वारा सुनाया गया अग्रिम विनिर्णय निम्नलिखित पर आबद्धकर होगा-

(क) आवेदक, जो सुभिन्न व्यक्ति हैं, जिन्होंने धारा १०१ ख की उप - धारा ( १ ) के अधीन विनिर्णय चाहा है और वे सभी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जिन्हें आय - कर अधिनियम, १ ९ ६१ ( १ ९ ६१ का ४३ ) के अधीन वही स्थायी खाता संख्यांक जारी किया गया है ;

(ख) खंड (क ) में निर्दिष्ट आवेदकों और ऐसे रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, जिनका आय- कर अधिनियम, १ ९ ६१ (१ ९६१ का ४३ ) के अधीन जारी किया गया समान स्थायी खाता संख्यांक है, की बाबत संबंधित अधिकारी और अधिकारिता रखने वाले अधिकारी . " ;

(दो) उप - धारा ( २ ) में शब्द, कोष्ठक और अंक " उप - धारा ( १ ) " के पश्चात् शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर " और उप- धारा ( १ क ) में " अंतःस्थापित किए जाएं.

१८. मूल अधिनियम की धारा १०४ में , उपधारा ( १ ) में,-

धारा १०४ का संशोधन.

(

क) शब्द" प्राधिकारी या अपील प्राधिकारी " के पश्चात्, शब्द " या राष्ट्रीय अपील प्राधिकारी " अंतः स्थापित किए जाएं;

(ख) शब्द तथा अंक " धारा १०१ की उप - धारा ( १ ) " के पश्चात्, शब्द, अंक, अक्षर तथा कोष्ठक "या केन्द्रीय माल एवं सेवा कर अधिनियम, २०१७ ( २०१७ का १२ ) की धारा १०१ ग " अंतःस्थापित किए जाएं.

988 (9)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 19 दिसम्बर 2019

१९ . मूल अधिनियम की धारा १०५ में , -

धारा १०५ का संशोधन.

(क) पार्श्व शीर्ष के स्थान पर, निम्नलिखित पार्श्व शीर्ष स्थापित किया जाए, अर्थात्ः- " प्राधिकारी , अपील प्राधिकारी और राष्ट्रीय अपील प्राधिकारी की शक्तियां" ;

(ख) उप- धारा ( १ ) में, शब्द " अपील प्राधिकारी " के पश्चात्, शब्द " या राष्ट्रीय अपील प्राधिकारी " अंतः स्थापित किए जाएं;

(ग) उप- धारा ( २ ) में, " अपील प्राधिकारी " के पश्चात्, शब्द " या राष्ट्रीय अपील प्राधिकारी " अंतःस्थापित किए जाएं.

२०. मूल अधिनियम की धारा १०६ में, -

धारा १०६ का संशोधन.

(क) पार्श्व शीर्ष के स्थान पर, निम्नलिखित पार्श्व शीर्ष स्थापित किया जाए, अर्थात्ः- " प्राधिकारी , अपील प्राधिकारी और राष्ट्रीय अपील प्राधिकारी की प्रक्रिया ";

(ख ) शब्द " अपील प्राधिकारी " के पश्चात्, शब्द " या राष्ट्रीय अपील प्राधिकारी " अंतःस्थापित किए जाएं;

धारा १७१ का संशोधन.

२१. मूल अधिनियम की धारा १७१ में, उप- धारा ( ३ ) के पश्चात्, निम्नलिखित उप - धारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" ( ३ क) जहां उक्त उप- धारा के अधीन यथाअपेक्षित परीक्षण करने के पश्चात्, उप - धारा ( २ ) में निर्दिष्ट प्राधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि किसी रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति ने उप - धारा ( १ ) के अधीन मुनाफाखोरी की है , वहां ऐसा व्यक्ति इस प्रकार मुनाफाखोरी की गई रकम के दस प्रतिशत के बराबर शास्तिका संदाय करने का दायी होगाः

परन्तु ऐसी कोई शास्ति उद्धग्रणीय नहीं होगी यदि मुनाफाखोरी की रकम को प्राधिकारी द्वारा आदेश पारित किए जाने की तारीख से तीस दिन के भीतर जमा करा दिया गया है.

स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजन के लिए अभिव्यक्ति " मुनाफाखोरी " से ऐसी रकम अभिप्रेत है, जिसे माल या सेवा या दोनों के प्रदाय पर कर की दर में कमी का फायदा या इनपुट कर प्रत्यय का फायदा माल या सेवा या दोनों की कीमत में कमी की अनुरूपता के माध्यम से प्राप्तिकर्ता को नहीं देने के कारण अवधारित किया गया है. ".

मध्यप्रदेश माल एवं

सेवा कर

अधिनियम, २०१७

की धारा ११ की

उप-धारा ( १ ) के

अधीन जारी की गई २२. (१ ) मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम , २०१७ की धारा ११ की उप - धारा ( १ ) के अधीन परिषद् की सिफारिशों पर मध्यप्रदेश शासन के वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक एफ- ए- ३-३५-२०१७- १ - v ( १४८ ) दिनांक १४ नवम्बर, २०१७ में, अनुसूची में , अनुक्रमांक १०३ और उससे संबंधित प्रविष्टियों के पश्चात्, निम्नलिखित अनुक्रमांक और प्रविष्टियां अंतःस्थापित की जाएं और १ जुलाई , २०१७ से भूतलक्षी रूप से अंतःस्थापित की हुई समझी जाएं, अर्थात्ः-

अधिसूचना क्रमांक

३

एफ- ए- ३-३५- १

२

२०१७-१-

पांच ( १४८ )

२६

" १०३क

यूरेनियम अयस्क सांद्र " .

दिनांक १४ नवम्बर,

२०१७ का भूतलक्षी रूप से संशोधन.

(२ ) उप- धारा ( १ ) के प्रयोजनों के लिए सरकार के पास उप- धारा ( १ ) में विनिर्दिष्ट अधिसूचना का भूतलक्षी रूप से इस प्रकार संशोधन करने की शक्ति होगी और होनी समझी जाएगी मानो राज्य सरकार के पास उक्त अधिनियम, की धारा ११ की उप - धारा ( १ ) के अधीन उक्त अधिसूचना का भूतलक्षी रूप से संशोधन करने की शक्ति सभी तात्विक समयों पर थी.

(३ ) कोई प्रतिदाय, सभी ऐसे करों, जिन्हें संग्रहित किया गया है, किंतु जो संग्रहीत नहीं किए गए होते यदि उप- धारा ( १ ) में निर्दिष्ट अधिसूचना सभी तात्विक समयों पर प्रवृत्त हुई होती , में से नहीं किया जाएगा.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 दिसम्बर 2019

988 ( 10)

उद्देश्यों और कारणों का कथन

मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ राज्य सरकार द्वारा माल या सेवाओं या दोनों के अंतर्राज्यीय प्रदाय पर कर के उद्धग्ररण और संग्रहण के लिए उपबंध करने की दृष्टि से अधिनियमित किया गया था.

२. इस अधिनियम से कर दाताओं को एक अच्छे वातावरण में कार्य करने की सुविधा प्राप्त हुई है. तथापि, नई कर पद्धति को कतिपय कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था. कर दाताओं, को विशेषकर लघु और मध्यम उद्यमों को कारित प्रमुख असुविधाओं में से एक थी वस्तु और सेवा कर विधियों के अधीन विवरणी प्रस्तुत करने, लेखापुस्तकों का रख - रखाव करने और कर का भुगतान करने की प्रक्रिया. इस संबंध में, प्रस्तावित नई विवरणी फाइल करने की पद्धति, न्यूनतम कागजी कार्य के साथ - साथ छोटे कर दाताओं के लिए विवरणी की त्रैमासिक फाइलिंग और कर के भुगतान पर विचार करती है. नई विवरणी फाइल करने की प्रणाली को क्रियान्वित करने के उद्देश्य से तथा उपरोक्त कठिनाइयों को दूर करने के लिए और विभिन्न राज्यों के अग्रिम विनिर्णय प्राधिकारी द्वारा पारित किए गए आदेशों के विरोध को दूर करने के उद्देश्य से यह प्रस्तावित है कि मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम , २०१७ को संशोधित किया जाए. उपरोक्त विवाद्यकों के अतिरिक्त, कुछ अन्य परिवर्तन अधिनियम के उचित क्रियान्वयन के लिए तथा व्यापार करने को सरल बनाने के लिए अपेक्षित है.

३. प्रस्तावित मध्यप्रदेश माल एवं सेवा कर ( द्वितीय संशोधन ) विधेयक, २०१ ९ में अन्य बातों के साथ निम्नलिखित के लिए उपबंध हैं, अर्थात्:-

(एक) अपेक्षित राष्ट्रीय अपीली प्राधिकारी का सृजन करने के उद्देश्य से न्यायनिर्णायक प्राधिकारी को परिभाषित करने के लिए अधिनियम की धारा २ को संशोधित करना;

(दो) आकस्मिक कर व्यक्ति और अनिवासी कराधेय व्यक्ति को प्रतिकर चुनने के लिए स्पष्टीकरण और निर्बंधन जोड़ने के लिए धारा १० का संशोधन करना और ५० लाख तक के टर्न ओवर की सेवाओं के करदाताओं को प्रतिकर का विकल्प उपलब्ध कराने के लिए नई उप- धारा ( २ क) को अंतःस्थापित करना;

(तीन) अधिनियम की धारा २२ को संशोधित करना जिससे कि रजिस्ट्रीकरण लेने के लिए दायित्वों की सीमा को २० लाख से बढ़ाकर ४० लाख किया जा सके;

(चार) रजिस्ट्रीकरण लेने हेतु पहचान के लिए आधार संख्या या वैकल्पिक या व्यवहार्य साधनों के आधार पर सत्यापन की अनिवार्यता करने के लिए नई उप- धाराएं ( ६क) , ( ६ ख ) , ( ६ ग ) एवं ( ६ घ) को जोड़ने के लिए अधिनियम की धारा २५ को संशोधित करना;

(पांच ) इलेक्ट्रानिक तरीके से भुगतान के साधनों में वृद्धि के लिए नई धारा ३१ क को अन्तःस्थापित करना;

(छह) नई विवरणी प्रणाली को विनिर्दिष्ट करने और करदाताओं द्वारा अंगीकृत विवरणी फाइल करने के भिन्न-भिन्न प्रकारों के लिए भुगतान के समय को विनिर्दिष्ट करने के लिए धारा ३ ९ को संशोधित करना;

(सात ) वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने की समय - सीमा में वृद्धि के लिए आयुक्त को सशक्त करने के लिए अधिनियम की धारा ४४ को संशोधित करना;

(आठ) किसी इलेक्ट्रानिक नगद खाते से किसी अन्य इलेक्ट्रानिक नकद खाते में किसी रकम के अंतरण के लिए कर दाताओं को सुकर बनाने के लिए धारा ४९ को संशोधित करना;

(नौ) उस रकम को स्पष्ट करने के लिए जिस पर ब्याज का उद्ग्रहण किया जाए, धारा ५० को संशोधित करना;

(दस) टी डी एस कटोत्रा करने वाले द्वारा विवरण एवं वार्षिक विवरण देने के लिए समय - सीमा को बढ़ाने के लिए आयुक्त को सशक्त करने के लिए अधिनियम की धारा ५२ को संशोधित करना;

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 19 दिसम्बर 2019

988 ( 11) (ग्यारह) धारा ४९ में प्रस्तावित संशोधन के अनुसार नकद खाते से कोष अंतरण की प्रक्रिया को स्पष्ट करने के लिए अधिनियम की धारा ५३क को अन्तःस्थापित करना;

(बारह ) तद्नुसार केन्द्र सरकार द्वारा राज्य कर के प्रतिदाय के संवितरण और कोष अंतरण की प्रक्रिया को स्पष्ट करने के लिए नई उप - धारा ८क को अन्तःस्थापित करने हुए धारा ५४ को संशोधित करना;

(तेरह) अग्रिम विनिर्णय के लिए राष्ट्रीय अपीली प्राधिकारी के कार्य को परिभाषित करने के लिए धारा ९५ को संशोधित करना;

(चौदह ) अग्रिम विनिर्णय के लिए राष्ट्रीय अपीली प्राधिकारी के गठन के लिए नई धारा १०१ क को अन्तःस्थापित करना एवं राष्ट्रीय अपीली प्राधिकारी को अपील करने की प्रक्रिया को स्पष्ट करने के लिए नई धारा १०१ ख को अन्तःस्थापित करना;

(पंद्रह ) राष्ट्रीय अपीली प्राधिकारी द्वारा पारित आदेशों के परिशोधन के लिए राष्ट्रीय अपीली प्राधिकारी को सशक्त करने के लिए धारा १०२ को संशोधित करना;

(सोलह ) अग्रिम विनिर्णय की प्रयोज्यता को पारिभाषित करने के लिए धारा १०३ को संशोधित करना;

( सत्रह) राष्ट्रीय अपीलीय प्राधिकारी द्वारा पारित उन विनिर्णयों के कतिपय परिस्थितियों में शून्य होने को स्पष्ट करने के लिए धारा १०४ को संशोधित करना जिन्हें आवेदक या अपीलार्थी ने इस कपट द्वारा या मुख्य तथ्यों को छिपाकर या तथ्यों के दुर्व्यपदेशन से प्राप्त किया हो;

(अठारह ) राष्ट्रीय अपीली प्राधिकारी की शक्तियों को परिभाषित करने के लिए धारा १०५ को संशोधित करना;

(उन्नीस) राष्ट्रीय अपीली प्राधिकारी को स्वयं की प्रक्रिया को विनियमित करने के लिए सशक्त करने के लिए धारा १०६ को संशोधित करना;

(बीस ) इस प्रकार की गई मुनाफाखोरी रकम के बीस प्रतिशत के समतुल्य शास्ति के उद्ग्रहण के लिए प्रति- मुनाफाखोरी प्राधिकारी को सशक्त करने के लिए धारा १७१ को संशोधित करना;

(इक्कीस ) धारा ११ की उप- धारा ( १ ) के अधीन जारी की गई अधिसूचना क्रमांक एफ ए- ३-३५-२०१७-१- पांच (१४८ ) दिनांक १४ नवम्बर, २०१७ को भूतलक्षी प्रभाव देने के लिए संशोधित करना .

४. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.

भोपाल :

बृजेन्द्र सिंह राठौर

भारसाधक सदस्य.

तारीख १६ दिसम्बर, २०१ ९.

" संविधान के अनुच्छेद २०७ के अधीन राज्यपाल द्वारा अनुशंसित.".

ए. पी. सिंह

प्रमुख सचिव,

मध्यप्रदेश विधान सभा.

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 19 दिसम्बर 2019

988 ( 12)

प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन

प्रस्तावित विधेयक के खण्ड क्रमांक १ , ४, ५, ६, ७, १२ , १३ एवं २२ में निम्नानुसार प्रत्यायोजन संबंधी प्रस्थापनाएं की गई हैं:-

खण्ड क्रमांक १- अधिनियम के विभिन्न उपबंधों को, विभिन्न तारीखों को अधिसूचना जारी कर लागू करने के लिए;

खण्ड क्रमांक ४- जीएसटी परिषद की अनुशंसा पर करदाताओं के पंजीयन हेतु टर्नओवर की सीमा २० लाख वार्षिक से बढ़ाकर ४० लाख वार्षिक करने;

खण्ड क्रमांक ५ - पंजीयन आवेदन के साथ पहचान हेतु आधार के अतिरिक्त अन्य केई वैकल्पिक पहचान - पत्र परिषद की सिफारिश पर अधिसूचित किए जाने ;

खण्ड क्रमांक ६- जीएसटी परिषद की सिफारिश पर ऐसे करदाताओं को वर्गीकृत किये जाने जो माल और सेवाओं के लिए प्राप्तकर्ताओं से केवल डिजिटल मोड पर भुगतान प्राप्त करेंगे;

खण्ड क्रमांक ७ - जीएसटी परिषद की सिफारिश पर पंजीयन करदाताओं के ऐसे वर्ग को अधिसूचित करने जिनके द्वारा त्रैमासिक विवरणी प्रस्तुत की जावेगी;

खण्ड क्रमांक १२- किसी करदाता द्वारा अपने कैश लेजर में SGST के मद से CGST और IGST के मद में राशि अंतरित कर उतनी राशि उन मदों में अंतरित किये जाने;

खण्ड क्रमांक १३- केन्द्र सरकार द्वारा राज्य कर की जिस राशि की वापसी दी गई है उतनी राशि राज्य सरकार द्वारा केन्द्र सरकार को अंतरित किये जाने; तथा

खण्ड क्रमांक २२- जीएसटी परिषद की सिफारिश पर अधिनियम की धारा ११ ( १ ) के अंतर्गत जारी अधिसूचना क्रमांक एफ- ए- ३५-२०१७-१- पांच ( १४८ ) , दिनांक १४ नवम्बर, २०१७ की प्रविष्ट क्रमांक १०३ की भूतलक्षित प्रभावशीलता १ जुलाई, २०१७ से किए जाने;

के संबंध में राज्य सरकार को नियम बनाये जाने की शक्तियां प्रत्यायोजित की गई हैं, उक्त प्रत्यायोजन सामान्य स्वरूप के होंगे.

ए. पी. सिंह

प्रमुख सचिव,

मध्यप्रदेश विधान सभा.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2019.

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 19 December 2019. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2019-12-19.494.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2019-12-19.494.Extraordinary.