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ध्य प्रदे श शासन
सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 508 ]
भोपाल, शुक्रवार , दिनांक 20 दिसम्बर 2019- अग्रहायण 29 , शक 1941
विधान सभा सचिवालय , मध्यप्रदेश
भोपाल, दिनांक 20 दिसम्बर 2019
क्र. 20882 - मप्रविस- 15 - विधान- 2019.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम-64 के उपबंधों के पालन में, मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश ( संशोधन ) विधेयक, 2019 ( क्रमांक 35 सन् 2019 ) जो विधान सभा में दिनांक 20 दिसम्बर 2019 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
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मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक ३५ सन् २०१ ९
मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश ( संशोधन ) विधेयक, २०१ ९
विषय-सूची.
खण्ड:
१. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.
२. धारा २ का संशोधन.
३. धारा १७ का संशोधन.
४. धारा ३८ का संशोधन.
५. धारा ४९ का स्थापन.
६. धारा ५० का स्थापन.
७. धारा ५०-क का अन्तःस्थापन.
८. धारा ५६ का संशोधन.
९. धारा ५९ का स्थापन.
१०. धारा ६० का संशोधन.
११. धारा ७८ का संशोधन.
१२. धारा ८५ का संशोधन.
१३. धारा ८७ का संशोधन .
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मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक ३५ सन् २०१ ९
1
मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश ( संशोधन ) विधेयक , २०१ ९
मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम , १ ९ ७३ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.
भारत गणराज्य के सत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान - मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश ( संशोधन ) अधिनियम , २०१९ है. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.
( २ ) यह मध्यप्रदेश राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा.
धारा २ का संशोधन.
२. मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, १ ९७३ ( क्रमांक २३ सन् १ ९ ७३ ) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) की धारा २ में,-
एक) खण्ड (ङ) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड अन्तःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
(
" (ङक) " प्रतिकर " से अभिप्रेत है , मूल भूखण्ड के कुल मूल्य को समतुल्य करने के लिए नगर विकास स्कीम में उपलब्ध कराया गया पुनर्गठित अंतिम भू- खण्ड;
(ङख) " अभिदाय " से अभिप्रेत है , धारा ५० की उपधारा (४ ) के खण्ड ( च ) के अनुसार नगर विकास स्कीम में अधोसंरचना के प्रदाय द्वारा मूल्य में वृद्धि के कारण भू- स्वामी से उदग्रहीत किये जाने वाले अंतिम भू- खण्ड के मूल्य में वृद्धि का भाग; " ;
(दो
) खण्ड ( झ ) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" ( झ-१ ) " अन्तिम भूखण्ड " से अभिप्रेत है, किसी नगर विकास स्कीम में अन्तिम भूखण्ड के रूप में पुनर्गठित कोई भूखण्ड;";
(तीन ) खण्ड (ड ) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" (ड-१ ) " मूल भूखण्ड" से अभिप्रेत है, एकल या संयुक्त स्वामित्व द्वारा धारित भूमि का कोई भाग तथा नगर विकास स्कीम में एक भूखण्ड के रूप में क्रमांकित तथा दर्शित हो; " .
धारा संशोधन. १७ का ३. मूल अधिनियम की धारा १७ में, खण्ड ( ञ ) में , पूर्ण विराम के स्थान पर, सेमी कोलन स्थापित किया जाए और तत्पश्चात् निम्नलिखित नया खण्ड जोड़ा जाए, अर्थात्ः-
" (ट) इन नगर विकास स्कीमों को योजना अवधि में या चरणों में तैयार करने तथा क्रियान्वित करने के लिए नगर विकास स्कीम की सीमाओं की अनन्तिम रूपरेखा विकास योजना में दर्शित करना. ".
धारा ३८ का संशोधन.
४. मूल अधिनियम की धारा ३८ में, उपधारा ( २ ) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा अन्तःस्थापित की जाए, अर्थात्ः-
" ( २क) राज्य सरकार, किसी योजना क्षेत्र के भीतर किसी ऐसे विशिष्ट क्षेत्र के लिए नगर के विकास प्राधिकरण को अपवर्जित करते हुए, शासकीय अभिकरण या सरकारी स्वामित्व वाली कम्पनी अथवा नगरीय स्थानीय निकाय को भी नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकरण के रूप में पदाभिहित कर सकेगी तथा नगर विकास स्कीम तैयार करने तथा क्रियान्वयन करने के लिए ऐसे विशिष्ट कर्तव्य और उत्तरदायित्व प्रत्यायोजित कर सकेगी:
परन्तु धारा ३ ९ से ४८ के उपबंध ऐसे अभिकरणों को लागू नहीं होंगे".
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धारा ४ ९ का स्थापन. ५. मूल अधिनियम की धारा ४९ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- " ४९. नगर विकास स्कीम.-( १ ) नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी अपनी अधिकारिता के भीतर और विकास योजना के प्रस्तावों के अनुरूप , एक या अधिक नगर विकास स्कीम तैयार करेगा तथा क्रियान्वित करेगा. नगर विकास स्कीम-
कोई क्षेत्र जो विकास योजना में भावी विकास के लिए प्रस्तावित है; या
(क)
(ख) कोई क्षेत्र जो कि विकास की प्रक्रिया में है ; या
(ग) पहले से ही विकसित किसी क्षेत्र का पुनर्विकास ; या
(घ) कोई क्षेत्र जिसे अधिनियम के निरसित उपबंधों के अधीन नगर विकास स्कीम के रूप में अधिसूचित किया गया है किन्तु या तो विकास प्रारंभ ही नहीं हुआ है या प्रगति पर है, ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, के लिये तैयार की जा सकेगी.
किसी नगर विकास स्कीम में निम्नलिखित प्रयोजनों में से किसी के लिए उपबंध किया जा सकेगाः (२)
नगर विस्तार के प्रयोजन के लिए भूमि का अर्जन , विकास , विक्रय, पट्टे पर दिया जाना या पुनर्गठन;
( क)
(ख
) भवनों, मार्गों, नालियों, मल वहन लाईनों तथा अन्य वैसी ही सुख सुविधाओं के प्रयोजन के लिये भूखण्डों का पुनर्गठन;
(ग) ऐसे भवन निर्माण अथवा निर्माण कार्य हाथ में लेना जैसे आवासीय , खरीदारी (शॉपिंग ) , वाणिज्यिक या अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक हो;
(घ) इसी प्रकार का कोई अन्य कार्य जो कि पर्यावरण में सुधार लाएगा जिसको नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकरण द्वारा राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से जारी रखा जा सकेगा.
(३) किसी नगर विकास स्कीम में निम्नलिखित मामलों में से किसी के लिए उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्ः-
(क) भूमि का अभिन्यास या पुनः अभिन्यास, चाहे वह खाली हो या फिर पूर्व निर्मित हो;
(ख) नवीन सड़कों या मार्गों का अभिन्यास, सड़कों तथा मार्गों का निर्माण , पथांतर, विस्तार, परिवर्तन , सुधार तथा बन्द करना तथा संचार व्यवस्था को रोकना;
भवनों, पुलों तथा अन्य संरचनाओं का निर्माण , परिवर्तन तथा हटाना;
(ग)
(घ) मार्गों, खुले स्थानों, स्वास्थ्य एवं शिक्षा के लिए तथा समस्त प्रकार के सार्वजनिक प्रयोजनों हेतु सुविधाओं के लिए भूमि का आबंटन या आरक्षण;
(ङ) समस्त परिवहन प्रणालियों, विशिष्टतया पैदल यात्रियों तथा गैर - मोटर सज्जित वाहनों के सुरक्षित संचालन हेतु सुविधाएं;
(च) भौतिक अधोसंरचना तथा नगरपालिका सेवाओं हेतु सुविधाएं, जिसमें जलप्रदाय , अपशिष्ट जल प्रबंधन प्रणालियों, वर्षा जल की निकासी, ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन तथा पथ- प्रकाश व्यवस्था सम्लित हैं;
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धारा ५० का स्थापन
६. मूल अधिनियम की धारा ५० के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- " ५०. नगर विकास स्कीम का तैयार किया जाना.-
(१ ) (क ) नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी , संचालक को, नगर विकास स्कीम तैयार करने तथा कार्यान्वयन करने के लिए चरणबद्ध योजना का अनुसरण करते हुए प्रस्ताव प्रस्तुत करेगा जिसकी एक प्रति राज्य सरकार को प्रेषित की जाएगी . संचालक को प्रस्ताव प्रस्तुत करने के पन्द्रह दिवस के भीतर, विकास प्राधिकारी , प्रस्ताव की सार्वजनिक अधिसूचना राजपत्र तथा प्रमुख हिन्दी समाचार- पत्रों में जारी करेगा . इस अधिसूचना द्वारा संचालक, स्कीम क्षेत्र में, राज्य सरकार द्वारा प्रस्ताव के अनुमोदन अथवा निपटान किये जाने पर अगली अधिसूचना जारी होने तक, समस्त विकास गतिविधियों को प्रतिषिद्ध करेगा.
(ख) अधिनियम के निरसित उपबंधों के अधीन नगर विकास स्कीम अधिसूचित की गई है, किन्तु विकास कार्य या तो प्रारंभ नहीं किया गया है या किन्हीं कारणों से हाथ में नहीं लिया गया है , तो वह व्यपगत हो जाएगी . तथापि, जहां अधोसंरचना विकास कार्य प्रारम्भ किया गया था और अधिनियम में संशोधन की तारीख को गणना करने पर १० प्रतिशत तक व्यय उपगत किया गया है और भूमि स्वामी द्वारा स्कीम पर उपगत किए गए व्यय का विकास प्राधिकरण को प्रतिपूर्ति कर दी गई है तो जैसा कि विहित किया जाए योजना व्यपगत हो जाएगीः
परन्तुछह महीने से अनधिक समय में, विकास प्राधिकरण नवीन विकास योजना तैयार कर सकता है, जैसा कि विहित किया जाए, ऐसे समय तक संचालक, योजना क्षेत्र के सभी विकास कार्यों को प्रतिषिध करेंगे , जिससे कि स्कीम की व्यवहार्यता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़ेः
परन्तु यह और कि नगर विकास स्कीम जहां अधोसंरचना विकास कार्य, संशोधन की तारीख को गणना किए गए अनुसार प्रावधानित लागत पर १० प्रतिशत से अधिक व्यय होकर प्रगति पर है, स्कीम अधिनियम के उपबंधों में प्रकाशित किए अनुसार जारी रहेगी.
(ग) संचालक, प्रस्ताव का परीक्षण करेगा तथा संबंधित विकास प्राधिकारी अधिकारियों के साथ परामर्श करेगा तथा प्रस्ताव प्राप्त होने के एक मास के भीतर स्कीम , अपने मत के साथ या अन्यथा , विकास योजना के प्रस्तावों के साथ राज्य सरकार को प्रेषित करेगा.
(घ) प्रस्ताव की प्राप्ति की तारीख से तीन मास के भीतर, राज्य सरकार या तो प्रस्ताव का उसी रूप में अनुमोदन कर सकेगी या उसे उपान्तरणों के साथ अनुमोदित कर सकेगी या विकास प्राधिकारी को सुनवाई का सम्यक् अवसर प्रदान करने के पश्चात् कारणों सहित, प्रस्ताव को निरसित कर सकेगी:
परन्तु यदि आवश्यक पाया जाए, तो राज्य सरकार, उपरोक्त विनिर्दिष्ट अवधि में तीन माह की अतिरिक्त वृद्धि कर सकेगी.
(२) राज्य सरकार के प्राप्त प्रत्युत्तर के अनुसार, विकास प्राधिकारी एक माह के भीतर, राजपत्र में तथान्यूनतम दो प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में , यथास्थिति नगर विकास स्कीम तैयार करने संबंधी उसके आशय या उसके प्रस्ताव को वापस लेने के बारे में एक अधिसूचना जारी करेगा.
(३) उप- धारा ( २ ) के अधीन घोषणा के प्रकाशन की तारीख से छह माह के अपश्चात् नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी , एक नगर विकास स्कीम प्रारूप , ऐसे प्ररूप में तथा ऐसी रीति में, जैसी कि विहित की जाए, ऐसी सूचना के साथ तैयार करेगा , जिसमें कि किसी भी व्यक्ति से ऐसी 1016 (5)
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तारीख के पूर्व जैसी कि उसमें विहित की जाए तथा जो कि ऐसी सूचना के प्रकाशन की तारीख से तीस दिन के पूर्व की नहीं होगी , उक्त प्रारूप विकास स्कीम के संबंध में आपत्तियां तथा सुझाव आमंत्रित किए जाएंगेः
परन्तु नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी द्वारा , इस निमित्त आवेदन किए जाने पर राज्य सरकार, समय - समय पर, अधिसूचना द्वारा , उपरोक्त अवधि में, ऐसी अवधि या अवधियों के लिए जैसी कि उसमें विनिर्दिष्ट की जाए, वृद्धि कर सकेगी तथा इस प्रकार बढ़ाई गई अवधि या अवधियों में किसी भी दशा में समग्ररूप से तीन माह से अधिक की वृद्धि नहीं की जाएगी.
नगर विकास स्कीम प्रारूप में निम्न विशिष्टियां अंतर्विष्ट होंगी , अर्थात्ः-
(४)
प्रत्येक मूल भूखण्ड का क्षेत्रफल, स्वामित्व तथा भू- धृति;
(क)
(ख) धारा ४९ की उप- धारा ( ३ ) के खण्ड ( घ ) के अधीन आबंटित या आरक्षित की गई भूमि की विशिष्टियां तथा धारा ४९ की उपधारा ( ३ ) के अधीन स्कीम के समस्त अन्य ब्यौरों के पूर्ण विवरण , जो भी लागू हों:
परन्तु सार्वजनिक प्रयोजन हेतु आरक्षित किए गए क्षेत्रों को, अभिदाय की गणना के लिए स्कीम के क्षेत्र के भीतर , स्कीम या नगर स्तर से लगे अन्य क्षेत्रों के, जैसे कि विहित किए जाएं, रहवासियों के बीच अनुपातिक रूप से वितरित किए जाएंगे;
(ग) मूल भूखण्डों के बदले में स्वामियों को आबंटित अन्तिम भूखण्डों के ब्यौरे ;
(घ) मूल तथा अन्तिम पुनर्गठित भूखण्डों के मूल्य का प्राक्कलन;
(ङ) भूखण्ड के पुनर्गठन तथा सार्वजनिक प्रयोजनों हेतु प्रभागों के आरक्षण के कारण स्कीम के हितग्राहियों को प्रतिकर अथवा उनसे अभिदाय का प्रभाजन तथा उसका प्राक्कलन;
(च) प्रत्येक पुनर्गठित भूखण्ड के मूल्य में वृद्धि का मूल्यांकन तथा भूखण्ड धारक पर उद्गृहीत किए जाने वाले विकास अभिदाय का निर्धारणः
परन्तु अभिदाय , मूल्य वृद्धि के आधे से अधिक नहीं होगा;
(छ) किसी पुनर्गठित भूखण्ड के मूल्य में कमी का मूल्यांकन तथा उसके लिए देय प्रतिकर का निर्धारण ;
समुचित प्राधिकारी द्वारा वहन की जाने वाली स्कीम की शुद्ध लागत का प्राक्कलन ; तथा
(ज)
विहित की गई कोई अन्य विशिष्टियां.
(झ)
नगर विकास स्कीम की लागत में निम्नलिखित सम्मिलित किए जाएंगे:-
(५)
(क) अधिनियम के उपबंधों के अधीन नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी द्वारा देय समस्त राशियां जिन्हें विशिष्ट तौर पर स्कीम की लागतों से पृथक् नहीं किया गया हो.
(ख) नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी द्वारा स्कीम को बनाने में तथा निष्पादन करने में व्यय की गई या व्यय किये जाने हेतु प्राक्कलित समस्त राशियां ;
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1016 (3) (छ) प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण;
(ज) निम्न तथा अनौपचारिक आय समूहों के लिए अफोर्डेबल गृह निर्माण हेतु भूमि का आबंटन;
(झ) इस संबंध में प्रचलित विधियों तथा नीतियों के अनुरूप गन्दी बस्ती सुधार, यथावत् पुनर्विकास अथवा पुनर्स्थापन तथा पुनर्वास;
पारिस्थितिक संधारणीय विकास सुनिश्चित करने हेतु उपबंध;
(ञ)
(ट) नगर विकास स्कीम को तैयार करने तथा उसके कार्यान्वयन एवं उसमें अधोसंरचना प्रदान करने संबंधी लागत की वसूली के लिए विक्रय हेतु नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकरण को भूमि का आरक्षण तथा आबंटन; और
कोई अन्य अवशिष्ट अधोसंरचना या कार्य;
(ठ)
कोई अधोसंरचना या विकास कार्य जो कि भविष्य में ऐसी स्कीम लिए आवश्यक हो सकते हैं ;
(ड)
(ढ) (एक) प्राधिकरण भूमि स्वामी को अंतिम भूखण्ड के रूप में मूल भूखण्ड का यथासंभव ५० प्रतिशत की सीमा तक वापस करेगा. यथासंभव स्कीम में भूमि का विवरण निम्नानुसार होगा:-
एक. मार्गों के लिए बीस प्रतिशत,
दो. उद्यानों, खेल के मैदानों तथा खुले स्थानों के लिए पांच प्रतिशत,
तीन. प्रारूप नगर विकास स्कीम में निर्धारित किये गये अनुसार सामाजिक अधोसंरचना जैसे कि शालाओं, औषधालयों (डिस्पेंसरी ) , अग्निशमन सेवाओं, सार्वजनिक उपयोग स्थलों हेतु पांच प्रतिशत, और
चार. विकास की प्रकृति पर आधारित आवासीय , वाणिज्यिक, निम्न तथा अनौपचारिक आय आवासीय या औद्योगिक उपयोग के लिए समुचित प्राधिकारी द्वारा विक्रय हेतु बीस प्रतिशतः
परन्तु पैरा एक से चार में विनिर्दिष्ट भूमि के आबंटन का प्रतिशत, विकास की प्रकृति के आधार पर तथा कारणों को लिखित में अभिलिखित करते हुए, विकास प्राधिकारी द्वारा परिवर्तित किया जा सकेगा;
( दो) उप- खण्ड ( एक) के पैरा चार में निर्दिष्ट भूमि के विक्रय से प्राप्त आगम का उपयोग अधोसंरचनात्मक सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयोजन के लिये किया जाएगा;
( तीन ) उप - खण्ड ( एक) के पैरा दो तथा तीन में निर्दिष्ट प्रयोजन के लिए आबंटित भूमि लोक प्रयोजन से भिन्न प्रयोजन के लिए स्कीमों के फेरफार द्वारा परिवर्तित नहीं की जाएगी;
(ण) दक्ष, वासयोग्य तथा सौंदर्यपरक, सुव्यस्थित नगरीय क्षेत्रों के विकास को सुनिश्चित करने हेतु नगर विकास स्कीम जिसमें नगरीय रूपांकन दिशानिर्देश सम्मिलित हैं, के अन्तर्गत समस्त निर्माण द्वारा विकास नियंत्रण विनियमों का अनुसरण किया जाना है , परन्तु वे विकास योजना के प्रस्तावों तथा आशय से सुसंगत हों. ".
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(ग) किसी सार्वजनिक प्रयोजन या नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी के प्रयोजन हेतु आरक्षित की गई भूमि के लिए या नामनिर्दिष्ट किए जाने के लिए, जो भूमि के स्वामियों या स्कीम क्षेत्र के भीतर रहवासियों के लिये पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से लाभकारी है , प्रतिकर के रूप में देय समस्त राशियां;
(घ) स्कीम को तैयार करने में तथा निष्पादन में नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी द्वारा उपगत किए गए समस्त विधिक व्यय ;
(ङ) अन्य आनुषंगिक व्यय जैसे वैधानिक डिक्री, कानून में परिवर्तन और अपरिहार्य घटना की, स्कीम में सम्मिलित भूमि स्वामियों से वसूले जाएंगे ;
( च) यदि आवश्यक हो, तो स्कीमें तथा उससे आनुषंगिक प्रयोजन हेतु स्कीम के क्षेत्र से लगे क्षेत्र में उपबंधित अधोसंरचना की लागत राशि का बीस प्रतिशत;
(छ) स्कीम की लागतों की पूर्ति पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी द्वारा अन्तिम योजना में सम्मिलित किए गए प्रत्येक भूखण्ड पर वृद्धि के अनुपात में गणना किए गए अनुसार उद्गृहीत किए जाने वाले अभिदाय द्वारा की जाएगी :
परन्तु-
(
एक) (क) जहां स्कीम की लागत, वृद्धि की आधी से अधिक न हो, वहां लागत की पूर्ति पूर्ण रूप से अभिदाय द्वारा की जाएगी ;
(ख) जहां यह लागत , वृद्धि की आधी राशि से अधिक हो वहां आधी वृद्धि की पूर्ति अभिदाय द्वारा तथा आधिक्य का वहन नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी द्वारा किया जाएगा;
(दो ) किसी सार्वजनिक प्रयोजन हेतु या नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी के प्रयोजन हेतु उपयोग किए गए, आबंटित अथवा आरक्षित कोई भू खण्ड, जो स्कीम क्षेत्र के भीतर केवल भूमि के स्वामियों अथवा रहवासियों के लिये लाभकारी हो , पर ऐसा किसी प्रकार का अभिदाय उद्गृहीत नहीं किया जाएगा ; और
(तीन ) किसी सार्वजनिक प्रयोजन हेतु या नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी के प्रयोजन हेतु उपयोग किये गए आबंटित अथवा आरक्षित कोई भूखण्ड, जो आंशिक रूप से स्कीम क्षेत्र के भीतर भूमि के स्वामियों अथवा रहवासियों के लिये अथवा आंशिक रूप से जनसाधारण के लिये लाभकारी हो, पर उद्गृहीत अभिदाय की गणना ऐसे उपयोग , आबंटन अथवा आरक्षण से जनसाधारण को होने वाले अनुमानित लाभ के अनुपात में की जाएगी.
स्पष्टीकरण : -इस अधिनियम के प्रयोजन हेतु वृद्धि को वह राशि माना जाएगा जिनके अनुसार स्कीम बनाने हेतु आशय की घोषणा की तारीख को अन्तिम स्कीम में सम्मिलित किये गये मूल भूखण्ड के बाजार मूल्य का प्राक्कलन इस पूर्वानुमान पर किया जाएगा कि स्कीम को पूर्ण किया जा चुका है, एक कारक (फेक्टर ) के अनुसार, जैसा कि विहित किया जाए, स्कीम में अनुध्यात सुधारों के संदर्भ के बिना भी उन्हीं भूखण्डों के बाजार मूल्य में भी प्राक्कलित वृद्धि उसी तारीख को होगी:
परन्तु ऐसे मूल्य का प्राक्कलन करते समय, भवनों या निर्मित अन्य कार्यों के या ऐसे भूखण्डों पर निर्माण के दौरान के मूल्य पर विचार नहीं किया जाएगा;
(ज ) स्कीम में सम्मिलित किये गये प्रत्येक भू खण्ड का स्वामी , प्राथमिक रूप से ऐसे भूखण्ड के संबंध में उद्रग्रहणीय अभिदाय के भुगतान हेतु दायी होगा.
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(६ ) (क) यदि किसी मूल भू खण्ड के स्वामी को स्कीम में भू खण्ड प्रदाय नहीं किया जाता है या यदि उपधारा (४ ) के अधीन उससे उद्गृहित किये जाने वाला अभिदाय, इस अधिनियम के किसी भी उपबन्ध के अधीन उससे कटौती की जाने वाली कुल राशि से कम हो, तो उसे होने वाली हानि की शुद्ध राशि का भुगतान नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी द्वारा किया जाएगा. किसी भी व्यक्ति को देय समस्त भुगतान, यथासंभवशीघ्र, नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी द्वारा संचालित ऐसे खाते में संबंधित भूखण्ड या किसी अन्य भूखण्ड में जहां उसका हित सन्निहित हो, समायोजन द्वारा किया जाएगा तथा समायोजन करने में असफल होने पर उसे राशि का भुगतान नगद में या ऐसी रीति में, जैसा कि इस बारे में पक्षकारों द्वारा तय किया जाए, करना होगा.
(ख ) इस अधिनियम के उपबंध के अधीन स्कीम में सम्मिलित किए गए भूखण्ड के स्वामी द्वारा देय शुद्ध राशि का भुगतान अभिदाता द्वारा प्रस्तुत किए गए विकल्प के अनुसार एक मुश्त या अधिकतम छह वार्षिक किश्तों में किया जा सकेगा.
(ग) यदि भूखण्ड का स्वामी देय राशि का भुगतान किश्तों में करने का विकल्प चयन करता हो तो देय शुद्ध राशि पर वसूली योग्य ब्याज की गणना समय - समय पर, यथासंशोधित भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम , १ ९ ३४ ( १ ९ ३४ का २ ) की धारा ४ ९ के अधीन प्रकाशित बैंक दर में दो प्रतिशत प्रति वर्ष दर जोड़कर की जाएगी.
(घ) यदि भूखण्ड का स्वामी इस निमित्त नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी द्वारा उसे जारी किये गये सूचना - पत्र में विनिर्दिष्ट तारीख को अथवा उससे पूर्व अपना विकल्प प्रयोग करने में असफल रहता हो तो यह समझा जाएगा कि उसने अपने अंशदान का भुगतान किश्तों में करने का विकल्प प्रस्तुत किया है तथा अंशदान पर ब्याज की गणना सूचना - पत्र में विनिर्दिष्ट की गई तारीख से की जाएगी जिस हेतु उक्त पूर्व तारीख से जब उसके द्वारा अपना विकल्प प्रस्तुत किया जाना अपेक्षित था.
(ङ) यदि भूखण्ड का स्वामी अपने अभिदाय का भुगतान एक मुश्त या किश्तों में करने में असफल रहता है या सूचना- पत्र जारी होने के पश्चात् उपस्थित नहीं होता है, तो उसे खण्ड ( चार ) के अन्तर्गत गणना किए गए अनुसार, सूचना पत्र में विनिर्दिष्ट तारीख को या उससे पूर्व अदायगी के बारे में एक अन्तिम सूचना - पत्र जारी किया जाएगा. इस बारे में नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी द्वारा उसे सूचना- पत्र जारी होने के पश्चात् भी उपस्थित होने में असफल रहने पर, ऐसे अभिदाय की राशि का समायोजन इस प्रकार देय राशि हेतु भूमि में कटौती द्वारा किया जाएगा.
(७ ) (क) उप- धारा ( ३ ) तथा ( ४ ) में निर्दिष्ट प्रारुप स्कीम में, प्रत्येक भूखण्ड का आकार तथा माप निर्धारित किया जाएगा, जहां तक कि उसे भवन निर्माण के प्रयोजनों से उपयुक्त बनाया जा सके तथा जहां भूखण्ड पर पूर्व से निर्माण कार्य किया गया हो वहां यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भवन , विकास के नियंत्रण को विनियमित करने हेतु बने नियमों के संबंध में यथासंभव स्कीम के उपबन्धों का अनुपालन करते हों.
(ख ) खण्ड (क ) के प्रयोजन हेतु प्रारुप स्कीम में निम्न प्रस्ताव समाविष्ट किए जा सकेंगे:
(एक) यदि आवश्यक हो, तो किसी मूल भूखण्ड का पुनर्गठन कर इसकी सीमाओं में परिवर्तन द्वारा अन्तिम भूखण्ड का गठन करना;
(दो) किसी मूल भूखण्ड से लगी हुई भूमियों के अन्तरण द्वारा अन्तिम भूखण्ड का गठन करना;
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(तीन) दो या दो से अधिक मूल भूखण्ड जो अनेक व्यक्तियों के स्वामित्व में हैं या संयुक्त रूप से व्यक्तियों के स्वामित्व में हैं, के स्वामियों की परस्पर सहमति से, सीमाओं में परिवर्तन द्वारा या उसके बिना भी उपलब्ध करना जिससे अन्तिम भूखण्ड के रूप में स्वामित्व धारित किया जा सके ;
(चार) स्कीम को अग्रसर करने में किसी भू खण्ड से बेकब्जा किए गए किसी भू- स्वामी को अन्तिम भूखण्ड का आबंटन करना ; तथा
(पांच) किसी भूखण्ड के स्वामित्व को एक व्यक्ति से अन्य व्यक्ति को अंतरित करना.
(८) नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी द्वारा समस्त आपत्तियों तथा सुझावों जैसे कि उप- धारा ( ३ ) के अधीन सूचना- पत्र ( नोटिस ) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर प्राप्त किये जाएं, पर विचार किया जाएगा तथा उसके द्वारा ऐसे प्रभावित व्यक्तियों को, जो सुनवाई की वांछा करते हैं, सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करते हुए या उप - धारा ( ९ ) के अधीन गठित समिति के प्रतिवेदन पर विचार करने के पश्चात् यथा प्रकाशित प्रारूप स्कीम को अनुमोदित करेगा या उसमें ऐसे उपान्तरण करेगा जो कि वह उचित समझे.
(९) उपधारा ( ७ ) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी उन समस्त आपत्तियों तथा सुझावों पर जो कि उपधारा ( ३ ) के अधीन सूचना में विनिर्दिष्ट कालावधि के भीतर उसे प्राप्त हों, विचार किए जाने के लिए एक समिति गठित करेगा जिसमें उक्त प्राधिकारी का मुख्य कार्यपालक अधिकारी , संचालक द्वारा नामनिर्दिष्ट एक अधिकारी , जिला कलक्टर द्वारा नामनिर्दिष्ट एक अधिकारी , जो तहसीलदार की पंक्ति से नीचे का न हो, ऐसे नगरीय स्थानीय निकाय का आयुक्त या मुख्य नगरपालिका अधिकारी या उसका नामनिर्देशिती जिसकी अधिकारिता के भीतर नगर विकास स्कीम अवस्थित है और उस जिला पंचायत का मुख्य कार्यपालक अधिकारी या उसका नामनिर्देशिती जिसकी अधिकारिता में योजना पूर्णतः या अंशतः आती हो, समाविष्ट होंगे.
(१०) उप - धारा ( ९ ) के अधीन गठित समिति, आपत्तियों तथा सुझावों पर विचार करेगी और ऐसे व्यक्तियों की जो सुनवाई के इच्छुक हों, को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करेगी और नगर तथा ग्राम निवेश प्राधिकारी को, उप- धारा (४ ) के अधीन उपबंधों पर विचार करते हुए नगर विकास स्कीम प्रारूप की विषय सूची में परिवर्तनों के लिये अनुशंसाओं के साथ आपत्तियों तथा सुझावों को इंगित करते हुए तथा स्कीम में किसी सुधार के प्रभाव के लिये, जैसा कि समिति अनुशंसा हेतु उचित समझे, अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगीः
परन्तु ऐसी प्रारूप स्कीम का अंतिम प्रकाशन, उसमें प्रस्तावित किये गये अभिन्यास का अनुमोदन संचालक द्वारा कर दिए जाने के पश्चात् अधिसूचित किया जाएगा. ऐसा अंतिम प्रकाशन , उपधारा ( ३ )के अधीन प्रारूप स्कीम के प्रकाशन होने की तारीख से छह मास से अनधिक के भीतर अधिसूचित किया जाएगा, जिसमें असफल रहने पर प्रारूप स्कीम व्यपगत हो गई समझी जाएगी :
परन्तु यह और कि कोई भी व्यक्ति जो नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी द्वारा उसे आवंटित किये गये अन्तिम भूखण्ड पर कोई विकास कार्य या निर्माण कार्य निष्पादन का आशय रखता हो, ऐसी अनुज्ञा प्राप्त करेगा जैसी की विहित की जाए.
( ११) उप - धारा ( १० ) के अधीन नगर विकास स्कीम उपान्तरणों के साथ या उपान्तरणों के बिना, अनुमोदित हो जाने के अव्यवहित पश्चात् नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी राजपत्र में तथा ऐसी मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 दिसम्बर 2019
1016(9) अन्य रीति में , जैसी कि विहित की जाए, अन्तिम नगर विकास स्कीम प्रकाशित करेगा तथा वह तारीख विनिर्दिष्ट करेगा जिसको कि वह ( स्कीम ) प्रवर्तित होगी.
(क) जहां नगर विकास स्कीम प्रवर्तन में आयी है, वहां निम्नलिखित खण्डोंः
(१२ )
(एक) नई गलियों अथवा सड़कों का अभिन्यास , निर्माण , व्यपवर्तन, विस्तार, परिवर्तन, सुधार तथा गलियों तथा सड़कों का समापन एवं संसूचनाओं के विच्छेदन इत्यादि ;
(दो) जल निकास , जलमल व्यवस्था सहित सतही या अधोभूमि जल निकास तथा मल वहन ;
(तीन ) विद्युत् व्यवस्था ;
(चार ) पेयजल आपूर्ति ;
में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों हेतु नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी द्वारा अपेक्षित समस्त भूमियों, सभी विल्लंगमों से मुक्त होकर नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी में पूर्णतः निहित हो जाएंगी.
(ख) खण्ड ( क ) में की कोई भी बात समुचित प्राधिकारी में निहित होने वाली भूमि के स्वामी के किसी अधिकार को प्रभावित नहीं करेगी.".
७. मूल अधिनियम की धारा ५० के पश्चात् निम्नलिखित धारा अन्तःस्थापित की जाए, अर्थात्ः-
धारा ५०-क का अन्तःस्थापन.
" धारा ५० - क. विवादित स्वामित्व. ( १ ) जहां किसी क्षेत्र में सम्मिलित की गई भूमि जिसके बारे में योजना बनाने के लिये आशय की घोषणा की जा चुकी हो, के किसी टुकड़े के स्वामित्व हेतु विवादित दावा हो तथा ऐसे विवादित दावे के संबंध में अधिकारों अथवा नामांतरण के अभिलेख में की गई प्रविष्टि गलत या अनिश्चायक या अनिर्णायक हो, वहां ऐसा पाये जाने पर समुचित प्राधिकारी द्वारा किसी भी समय पूर्व तारीख से जिसके अनुसार संचालक , नगर तथा ग्राम निवेश धारा ५० की उप- धारा ( १० ) के अधीन स्कीम को अनुमोदित करता हो, वहां इस प्रकार का दावा अन्तिम भूखण्ड पर यथावश्यक परिवर्तन सहित लागू होगा, जब तक कि इस बारे में सक्षम न्यायालय द्वारा विनिश्चय न किया जाए,
( २ ) सिविल न्यायालय द्वारा कोई डिक्री पारित किए जाने की दशा में, जो उससे असंगत हो, ऐसी डिक्री से प्रभावित व्यक्ति द्वारा , ऐसी डिक्री को समुचित प्राधिकारी की जानकारी में लाए जाने के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र, ऐसी डिक्री के अनुसार त्रुटि में सुधार, उपांतरण अथवा विखण्डन किया जाएगा. ".
धारा ५६ का संशोधन.
८. धारा ५६ को उसकी उपधारा ( १ ) के रूप में पुनर्क्रमांकित किया जाए और इस प्रकार क्रमांकित उपधारा (१ ) के पश्चात् निम्नलिखित नई उपधारा अन्तःस्थापित की जाए, अर्थात्ः-
"(२) धारा ४९ के उपबन्धों के अनुसार नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी हेतु आरक्षित तथा आवंटित भूमियों को, जिन्हें धारा ५० की उप - धारा ( ११ ) के अधीन प्राधिकारी में निहित किया गया है , नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी के पूर्ण स्वामित्व ( फ्रीहोल्ड ) में हस्तांतरित कर दिया जाएगा. धारा ५० की उप - धारा (७ ) के अधीन भूखण्ड पुनर्गठन की प्रक्रिया के माध्यम से, धारा ५० की उप - धारा (४) के उपबन्धों के अधीन क्षतिपूर्ति तथा अंशदान की सहवर्ती गणना के साथ किया गया यह अंतरण भूमि अर्जन के संबंध में किसी विधान के उपबन्धों के अध्यधीन नहीं होगाः मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 दिसम्बर 2019
1016 ( 10)
परन्तु अन्तिम स्कीम की घोषणा के पश्चात् नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी अविलम्ब अन्तिम स्कीम की एक प्रति सर्वेक्षण अभिलेखों में सुधार किये जाने के प्रयोजन से क्षेत्र के जिला कलक्टर को अग्रेषित करेगा. ".
धारा ५ ९ का स्थापन .
९. मूल अधिनियम की धारा ५९ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात् :-
" ५९ विकास प्रभार.-( १ ) जहां किसी नगर विकास स्कीम के परिणामस्वरूप नगर तथा ग्राम विकास
प्राधिकारी के अभिमत में किसी स्कीम की पार्श्वस्थ तथा उससे प्रभावित भूमियों के बाजार मूल्य में कोई अधिमूल्यन हुआ हो वहां नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी ऐसी भूमि के अर्जन के लिये उपबन्ध करने के बदले या नगर विकास योजना की विरचना करते हुए, ऐसी भूमि के स्वामियों पर विकास प्रभार उद्गृहीत कर सकेगा :
परन्तु ऐसा उदग्रहण उन भूमियों पर भी प्रभारित किया जा सकेगा जो नगर विकास स्कीम के भीतर आती है और जो संचालक की पूर्व अनुज्ञा से विकास के क्रम में है.
(२ ) विकास प्रभार वह राशि होगी जो धारा ५० की उपधारा ( २ ) के अधीन नगर विकास स्कीम तैयार करने के आशय के प्रकाशन की तारीख को भूमि के मूल्य तथा विकास प्रभार उद्गृहीत करने की तारीख को भूमि के मूल्य के अन्तर के एक- तिहाई के बराबर हो.".
१०. मूल अधिनियम की धारा ६० की उपधारा ( १ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की धारा ६० का
जाए, अर्थात्:-
संशोधन.
" ( १ ) विकास स्कीम के कार्यान्वयन के दौरान नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी सूचना द्वारा जो कि ऐसे प्ररूप में हो तथा ऐसी रीति में प्रकाशित की गई हो, जैसी कि विहित की जाए, स्कीम द्वारा प्रभावित क्षेत्र में या नगर विकास स्कीम के क्षेत्र के भीतर विकास प्रभार उद्गृहीत करने के अपने आशय की घोषणा करेगा. भूमि के ऐसे स्वामियों से , जो विकास प्रभारों का भुगतान करने के लिये दायी हों , ऐसी कालावधि के भीतर जो सूचना के प्रकाशन की तारीख से तीस दिन से कम नहीं होगी, तथा ऐसे प्राधिकारी को, जैसा कि विनिर्दिष्ट किया जाए, आपत्ति यदि कोई हो, प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाएगी. ".
धारा ७८ का
११. धारा ७८ को उसकी उपधारा ( १ ) के रूप में पुनर्क्रमांकित किया जाए और इस प्रकार क्रमांकित उपधारा संशोधन.
(१ ) के पश्चात्, निम्नलिखित नई उपधारा जोड़ी जाए, अर्थात् : -
(
२ ) किसी सिविल न्यायालय को किसी नगर विकास स्कीम, जिसके संबंध में इस अधिनियम द्वारा या केअधीन विकास प्राधिकारी सशक्त है, से संबंधित किसी विवाद को स्वीकार करने की अधिकारिता नहींहोगी." .
धारा ८५ का
१२. मूल अधिनियम की धारा ८५ में उपधारा ( २ ) में, खण्ड (तेरह ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित संशोधन.
किया जाए, अर्थात्:-
" ( तेरह ) ( क) धारा ५० ( १ ) के अधीन घोषणा के प्रकाशन की रीति;
(ख) धारा ५० ( २ ) के अधीन घोषणा के प्रकाशन की रीति;
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 दिसम्बर 2019
1016 (11) ( ग) वह प्ररूप तथा रीति जिसमें धारा ५० ( ३ ) के अधीन नगर विकास स्कीम प्रारूप , के रूप में प्रकाशित की जाएगी;
(घ) प्ररूप तथा रीति जिसमें धारा ( ५० ) (४ ) के अधीन नगर विकास स्कीम की विषय सूची प्रारूप के रूप में प्रकाशित की जाएगी;
(ङ) वह रीति जिसमें धारा ५० ( १० ) के अधीन नगर विकास स्कीम के किसी अंतिम भूखण्ड पर अनुज्ञा जारी की जाएगी;
(च) वह रीति जिसमें धारा ५० ( ११ ) के अधीन अंतिम नगर विकास स्कीम प्रकाशित की जाएगी;".
१३. मूल अधिनियम की धारा ८७ में उपधारा ( २ ) के पश्चात्, निम्नलिखित नई उपधारा जोड़ी जाए, धारा ८७ का संशोधन.
अर्थात्ः-
" ( ३ ) मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश ( संशोधन ) अधिनियम , २०१ ९ की धारा ४९ तथा ५० के स्थापन के होते हुए भी, धारा ५० के निरसित उपबंधों के अधीन स्कीम के अंतिम प्रकाशन के पश्चात् भौतिक विकास के लिये की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई, जहां तक कि वह इस अधिनियम के उपबंधों के असंगत हो , इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई बात या की गई कार्रवाई समझी जाएगी . "
उद्देश्यों और कारणों का कथन
मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, १ ९ ७३ ( क्रमांक २३ सन् १ ९७३ ) की धारा ५० ( ७ ) के अधीन अंतिम अधिसूचना जारी होने के पश्चात्, धारा ५६ के अधीन नगर तथा विकास स्कीम को लागू करने के लिये , ३ वर्ष की समय सीमा तक करार के माध्यम से भूमि अर्जन का उपबंध है. किए गए करार के असफल होने की दशा में, प्राधिकारियों के पास केवल अनिवार्य भू अर्जन प्रक्रिया के माध्यम से भूमि प्राप्त किए जाने की विकल्प बचता है.
२. भूमि अर्जन , पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, २०१३ ( २०१३ का ३० ) में उपबंध है कि नगरीय क्षेत्रों में अनिवार्य भू- अर्जन की दशा में कलक्टर गाइडलाइन दर से दोगुना मुआवजा दिया जाए.
३. राज्य के विकास प्राधिकारियों के लिये नगर विकास स्कीम हेतु नियमित भू अर्जन प्रक्रिया के माध्यम से भूमि अर्जन करना बहुत कठिन हो गया है जिस कारण से ऐसी स्कीमों का क्रियान्वयन लंबे समय से रुका हुआ है तथा इससे राज्य के नागरिकों को भी परेशानी होती है.
४. नगर विकास स्कीमों के क्रियान्वयन में होने वाली परेशानी के कारण देश के कई राज्यों ने अपने अधिनियमों में ऐसे उपबंध किए हैं जिसके अनुसार भू समवेत तकनीक ( जैसे कि संग्रहण, एकीकरण ) के माध्यम से स्कीम विकसित की गई है और तद्नुसार भूमि के स्वामियों को अन्य पूर्ण विकसित अधोसंरचना के साथ पुनर्गठित भूखण्डों के ५५-६० प्रतिशत वापस किए हैं.
५. उपर्युक्त कठिनाइयों को दूर करने के उद्देश्य से, मूल अधिनियम में उपयुक्त संशोधन किया जाना प्रस्तावित है . प्रस्तावित संशोधनों की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं :
(एक) भूमि स्वामियों के संबंध में " प्रतिकर ", " अंशदान ", " मूल भूखण्ड " एवं " अंतिम भूखण्ड " की परिभाषाओं को परिभाषित किया जाना प्रस्तावित किया गया है;
(दो) धारा १७ नए खण्ड की प्रस्तावना के साथ संशोधित की गई है जिसके अनुसार विकास योजना में नगर विकास स्कीम वर्णित की जा सके.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 दिसम्बर 2019
1016 ( 12)
(तीन) धारा ३८ एक अतिरिक्त उपधारा अर्थात् रक के उपबंधों के साथ संशोधित की गई है, जिसमें कोई शासकीय स्वामित्व कंपनी या स्थानीय निकाय को, नगर विकास स्कीम को क्रियान्वित करने के लिए शक्ति के साथ प्रत्यायोजित भी किया जा सकता है;
धारा ४९ के अधीन , नगर विकास स्कीम की तैयारी करते समय क्या उपबंध किए जा सकेंगे , यह उपदर्शित किया गया है.
(चार)
(पांच) धारा ५० में प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से उपबंध किया गया है कि नगर विकास स्कीम के प्रस्ताव की तैयारी तथा अधिसूचना किस प्रकार की जाएगी. ऐसे भी उपबंध किए गए हैं, जिससे पुनर्गठित भूखण्डों के अंतरण की तथा उनके भूस्वामियों को अंतरण की प्रक्रिया प्रारंभ हो.
(छह) नई धारा ५० - क के उपबंध स्कीम में सम्मिलित भूमि के विवादित स्वामित्व से संबंधित विवाद्यक का समाधान करने का उपबंध करते हैं .
(सात) धारा ५६ में नई उपधारा ( २ ) की पुर- स्थापना , उस भूमि के स्थानांतरण के लिए उपबंध करती है, जो नगर विकास स्कीम के क्रियान्वयन हेतु आरक्षित की गई है एवं आवंटित की गई है;
(आठ) धारा ५९ का संशोधन उन भूमियों के संबंध में विकास प्रभारों को वसूल करने के लिये उपबंध करता है, जहां उनके बाजार मूल्य में अधिमूल्यन है.
(नौ) धारा ६० के अधीन , ऐसे उपबंध उपदर्शित किए गए हैं कि विकास प्रभार भूमि के स्वामियों पर कैसे उद्गृहीत किए जाएंगे .
(
दस) नगर विकास स्कीम से उद्भूत विवादों के लिए सिविल न्यायालय की अधिकारिता का वर्जन करने के लिये धारा ७८ में उपधारा ( २ ) पुरःस्थापित की जाती है.
(ग्यारह) धारा ८५ " नियम बनाने की शक्ति " से संबंधित है जिसमें नगर विकास स्कीम की तैयारी के लिये नियम बनाने की शक्ति को निगमित करना प्रस्तावित है.
(बारह ) धारा ८७ निरसित उपबंधों के अधीन घोषित स्कीम के निरसन तथा व्यावृत्तियों से संबंधित है.
६. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.
भोपाल :
जयवर्द्धन सिंह
भारसाधक सदस्य.
तारीख : दिसम्बर, २०१ ९ .
प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन
प्रस्तावित विधेयक के जिन खण्डों द्वारा राज्य सरकार को विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन किया जा रहा है , उनका विवरण निम्नानुसार है :-
खण्ड ५ - किसी क्षेत्र के लिये अधिनियम के निरसित उपबंधों के अधीन अधिसूचित नगर विकास स्कीम जिसमें विकास प्रारंभ नहीं हुआ है अथवा प्रगति पर है, पर स्कीम तैयार किये जाने;
खण्ड ६- नगर विकास स्कीम को तैयार किये जाने वाले चरणों को स्पष्ट करने हेतु, नगर विकास स्कीम से संबंधित विभिन्न चरणों की अधिसूचना प्रकाशन की प्रक्रिया तथा अधिनियम के निरसित उपबंधों के अधीन अधिसूचित नगर विकास स्कीम किन-किन परिस्थितियों में व्यपगत हो जायेगी , इसे स्पष्ट किये जाने तथा सार्वजनिक प्रयोजन हेतु आरक्षित किये गये क्षेत्रों को, अभिदाय की गणना के लिए स्कीम के क्षेत्र के भीतर तथा बाहर होने की स्थिति में रहवासियों के बीच अनुपातिक रूप से वितरित किये जाने के संबंध;
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 दिसम्बर 2019
1016 (13) खण्ड १०- नगर विकास स्कीम से प्रभावित क्षेत्र में तथा नगर विकास स्कीम के क्षेत्र के भीतर विकास प्रभार उद्ग्रहित करने के आशय की घोषणा के संबंध में; तथा
खण्ड १२ - धारा ५० ( १ ), ५० (२ ) , ५० ( ३ ), ५० ( ४), ५० (१० ) एवं ५० ( ११ ) के तहत घोषणा के प्रकाशन की रीति, नगर विकास स्कीम प्रारूप , नगर विकास स्कीम की विषय सूची, नगर विकास स्कीम के अंतिम भूखण्ड पर अनुज्ञा जारी करने संबंधी प्रावधान एवं अंतिम नगर विकास स्कीम प्रकाशित करने की रीति
के संबंध में नियम बनाएं जाएंगे , जो सामान्य स्वरुप के होंगे.
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2019.