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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

मध्‍यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक 2019

Published 20 December 2019

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
509
Identifier
in.gazette.madhya.2019-12-20.509.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

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वध्यप्रदेश शासन

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

भोपाल , शुक्रवार , दिनांक 20 दिसम्बर 2019- अग्रहायण 29 शक 1941

क्रमांक 509 ]

विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश

भोपाल , दिनांक 20 दिसम्बर 2019

क्र. 20885 - मप्रविस - 15- विधान- 2019.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम-64 के उपबंधों के पालन में , मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( संशोधन ) विधेयक , 2019 ( क्रमांक 40 सन् 2019 ) जो विधान सभा में दिनांक 20 दिसम्बर, 2019 को पुरःस्थापित हुआ है . जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

1017 1018

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 दिसम्बर 2019

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक ४० सन् २०१ ९

मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( संशोधन ) विधेयक , २०१ ९

विषय-सूची.

खण्ड:

१. संक्षिप्त नाम.

२. धारा २ का संशोधन.

३. धारा १३ का संशोधन.

४. धारा १ ९ का संशोधन.

५. धारा २२ का स्थापन.

६. धारा ३३ का संशोधन.

७. धारा ४० का संशोधन.

८. धारा ४७ का स्थापन.

९. धारा ५० का संशोधन.

१०. धारा ५९ का संशोधन.

११. धारा ६७ का स्थापन.

१२. धारा ७२ का संशोधन.

१३. धारा १०८ का संशोधन

१४. धारा ११० का संशोधन.

१५. धारा ११४ का संशोधन.

१६. धारा १२ ९ का संशोधन.

१७. धारा १३४ का संशोधन.

१८. धारा १५८ का संशोधन.

१९. धारा १६५ का संशोधन.

२०. धारा १७६ का अंत:स्थापन.

२१. धारा १८३ का संशोधन.

२२. धारा २४४ का स्थापन.

२३. धारा २४५ का स्थापन .

२४. धारा २४८ का संशोधन.

२५. धारा २५७ का संशोधन.

२६. धारा २५८ का संशोधन.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 दिसम्बर 2019

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मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक ४० सन् २०१ ९

मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( संशोधन ) विधेयक, २०१ ९

मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता , १ ९ ५ ९ को और संशोधित करने लिए विधेयक.

भारत गणराज्य के सत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान-मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

संक्षिप्त नाम.

१. इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( संशोधन ) अधिनियम, २०१ ९ है.

धारा २ का संशोधन.

२. मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, १ ९ ५ ९ ( क्रमांक २० सन् १ ९ ५ ९ ) ( जो इसमें उसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) की धारा २ में उप - धारा ( १ ) में, खण्ड ( प ) के स्थान प, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात् :-

" (प) ' राजस्व अधिकारी ' से अभिप्रेत है , धारा ११ में उल्लिखित राजस्व अधिकारी ;".

३. मूल अधिनियम की धारा १३ में, -

धारा १३ का संशोधन.

( एक) उपधारा ( २ ) के परंतुक का लोप किया जाए ;

(दो) उपधारा ( २ ) के पश्चात्, निम्नलिखित नई उपधारा जोड़ी जाये , अर्थात्ः-

" ( ३ ) राज्य सरकार, किसी भी संभाग या जिले या उपखण्ड या तहसील की सीमाओं में परिवर्तन करने या नवीन सृजन करने या विद्यमान संभागों, जिलों, उपखण्डों या तहसीलों को समाप्त करने के किसी भी प्रस्ताव पर इस धारा के अधीन कोई आदेश पारित करने से पूर्व, ऐसे प्रस्तावों पर विहित प्ररूप में आपत्तियां आमंत्रित करेगी और प्राप्त आपत्तियों पर, यदि कोई हों, विचार करेगी. ".

धारा १ ९ का संशोधन.

४. मूल अधिनियम की धारा १ ९ में, उपधारा ( २ ) एवं उपधारा ( ३ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधाराएं स्थापित की जाएं, अर्थात् :-

" ( २ ) कलक्टर, किसी तहसीलदार को किसी तहसील का भारसाधक बना सकेगा जो ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जो इस संहिता द्वारा या इस संहिता के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति द्वारा या उसके अधीन उसे प्रदत्त की गयी हैं या अधिरोपित किए गये हैं.

(३) कलक्टर , किसी तहसील में एक या एक से अधिक अपर तहसीलदार तथा नायब तहसीलदार नियुक्त कर सकेगा जो वहां ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेंगे तथा ऐसे कर्तव्यों का पालन करेंगे जो इस संहिता द्वारा या इस संहिता के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति द्वारा या उसके अधीन तहसीलदार को प्रदत्त की गयी हैं या अधिरोपित किए गये हैं, जैसा कि जिले का कलक्टर, लिखित आदेश द्वारा निदेशित करे. ".

धारा २२ का स्थापन .

५. मूल अधिनियम की धारा २२ के स्थान पर , निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात् :-

" २२ उपखण्ड अधिकारी.-कलक्टर, किसी सहायक कलक्टर या संयुक्त कलक्टर या डिप्टी कलक्टर को जिले के एक या एक से अधिक उपखण्डों का भारसाधक बना सकेगा जो ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जो इस संहिता द्वारा या इस संहिता के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति द्वारा या उसके अधीन उपखण्ड अधिकारी को प्रदत्त की गयी हैं या अधिरोपित किए गये हैं. ".

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धारा ३३ का संशोधन.

६. मूल अधिनियम की धारा ३३ में शब्द एवं अंक " धारा ४१ " के स्थान पर, शब्द एवं अंक " धारा २५८ " स्थापित किए जाएं.

७. मूल अधिनियम की धारा ४० में , शब्द " इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार " का लोप किया जाए.

धारा ४० का संशोधन.

धारा ४७ का स्थापन.

८. मूल अधिनियम की धारा ४७ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात् :-

" ४७. अपीलों की परिसीमा. प्रथम तथा द्वितीय अपील फाइल करने के लिये परिसीमा अवधि, आदेश जिसके विरूद्ध अपील की गई है की तारीख से, पैंतालीस दिन होगी:

परन्तु जहां कोई आदेश , जिसके विरूद्ध अपील प्रस्तुत की जा रही है, मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( संशोधन ) अधिनियम, २०१८ के प्रवृत्त होने के पूर्व किया गया था , वहां अपील करने की परिसीमा की अवधि, उक्त संशोधन अधिनियम के पूर्व संहिता में उपबंधित किए गए अनुसार होगीः परन्तु यह और कि जहां किसी ऐसे पक्षकार को, जो उस पक्षकार से भिन्न हो जिसके कि विरुद्ध एकपक्षीय आदेश पारित किया गया है, उस तारीख की, जिसको कि आदेश पारित किया गया था, कोई पूर्व सूचना न रही हो , वहां परिसीमा की संगणना ऐसे आदेश के संसूचित किए जाने की तारीख से की जाएगी . ".

धारा ५० का

संशोधन.

९. मूल अधिनियम की धारा ५० में, उपधारा ( ३ ) में , खण्ड ( क ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" ( क ) ऐसा आदेश , यदि वह पुनरीक्षण का आवेदन करने वाले पक्षकार के पक्ष में किया गया होता तो कार्यवाहियों का अंतिम रूप से निपटारा कर देता; या" .

धारा ५९ का

१०. मूल अधिनियम की धारा ५९ में, उपधारा ( ९ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की संशोधन.

जाए, अर्थात्ः-

" ( ९ ) यदि भूमिस्वामी उपधारा ( ६ ) के अधीन व्यपवर्तन की प्रज्ञापना देने में असफल रहता है तो उपखण्ड अधिकारी स्वप्रेरणा से या ऐसी जानकारी प्राप्त होने पर प्रीमियम की गणना तथा ऐसे व्यपवर्तन के मद्दे देय भू- राजस्व का पुनर्निर्धारण करेगा और देय कुल रकम के पचास प्रतिशत के बराबर शास्ति भी अधिरोपित करेगा:

परन्तु ऐसा पुनर्निधारित भू- राजस्व व्यपवर्तन की वास्तविक तारीख से अधिकतम पांच वर्ष की अवधि के अध्यधीन रहते हुए, देय होगाः

परन्तु यह और कि मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( संशोधन ) अधिनियम, २०१८ के प्रारंभ होने की तारीख से एक वर्ष के लिए कोई शास्ति अधिरोपित नहीं की जाएगी . ".

११. मूल अधिनियम की धारा ६७ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- धारा ६७ का स्थापन.

" ६७.-सर्वेक्षण संख्यांक, ब्लाक संख्यांक , भूखण्ड संख्यांक की विरचना और उनको नगरेतर क्षेत्रों में, ग्रामों में तथा नगरीय क्षेत्रों में सेक्टर में समूहीकृत करना. इस संहिता के अधीन बनाए गए नियमों के अध्यधीन रहते हुए, जिला सर्वेक्षण अधिकारी-

(क) उस भूमि का, जिस पर भू- सर्वेक्षण किया जाना है , मापन कर सकेगा तथा उस पर उतनी संख्या में सर्वेक्षण चिन्हों को संनिर्मित कर सकेगा जितने कि आवश्यक हों;

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 दिसम्बर 2019

(ख) यदि ऐसी भूमि कृषि प्रयोजन के लिये उपयोग में है तो ऐसी भूमि को सर्वेक्षण संख्यांकों में विभाजित कर सकेगा, विद्यमान सर्वेक्षण संख्यांकों को मान्य कर सकेगा, सर्वेक्षण संख्यांकों को पुनर्गठित कर सकेगा या नवीन सर्वेक्षण संख्यांक विरचित कर सकेगा;

(ग) यदि ऐसी भूमि गैर कृषि प्रयोजन के लिये उपयोग में है तो ऐसी भूमि को ब्लाक संख्यांकों में विभाजित कर सकेंगा , विद्यमान ब्लाक संख्यांकों को मान्य कर सकेगा, ब्लाक संख्यांकों को पुनर्गठित कर सकेगा या नवीन ब्लाक संख्यांक विरचित कर सकेगा;

(घ) भूमि, जो गैर कृषि प्रयोजन के लिए उपयोग में है, के ब्लाक को भूखण्ड संख्यांकों में विभाजित कर सकेगा, विद्यमान भूखण्ड संख्यांकों को मान्य कर सकेगा, भूखण्ड संख्यांकों को पुनर्गठित कर सकेगा या नवीन भूखण्ड संख्यांक विरचित कर सकेगा;

(ङ) सर्वेक्षण संख्यांकों तथा ब्लॉकों को नगरेतर क्षेत्रों में ग्रामों में तथा नगरीय क्षेत्रों में सेक्टरों में समूहीकृत कर सकेगाः

परन्तु मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम , १ ९७३ ( क्रमांक २३ सन् १ ९ ७३ ) के अधीन अनुमोदित विन्यास की सीमाओं के भीतर आने वाली किसी भूमि के भूखण्ड इस संहिता के अधीन भूखण्ड समझे जाएंगेः

परन्तु यह और कि यहां इसमें इसके पश्चात् यथा उपबंधित के सिवाय और क्षेत्र की अनुमोदित विकास योजना , यदि कोई हो, के अध्यधीन रहते हुए, भविष्य में न्यूनतम विहित सीमा से कम का कोई सर्वेक्षण क्रमांक या भूखण्ड क्रमांक निर्मित नहीं किया जाएगा. ".

धारा ७२ का संशोधन.

१२. मूल अधिनियम की धारा ७२ में, शब्द " ऐसी दरों पर, जैसी की विहित की जाएं, " के स्थान पर, शब्द " धारा ५ ९ एवं ६० के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार " स्थापित किए जाएं.

धारा १०८ का संशोधन.

१३. मूल अधिनियम की धारा १०८ में , उपधारा ( १ ) में, खण्ड ( घ ) में, उपखण्ड ( एक ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपखण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" ( एक) ऐसे व्यक्तियों के अपने-अपने हितों की प्रकृति तथा सीमा और उनसे संलग्न शर्तें या दायित्व, यदि कोई हों;" .

धारा ११० का. संशोधन .

१४. मूल अधिनियम की धारा ११० में , उपधारा ( १ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" ( १ ) पटवारी या नगर सर्वेक्षक या धारा १० ९ के अधीन प्राधिकृत व्यक्ति, अधिकार के प्रत्येक ऐसे अर्जन को, जिसकी कि रिपोर्ट उसे धारा १० ९ के अधीन की गयी हो या जो किसी अन्य स्रोत से प्राप्त सूचना पर उसकी जानकारी में आए, इस प्रयोजन हेतु विहित किए गए रजिस्टर में दर्ज करेगा. ".

धारा ११४ का संशोधन.

१५. मूल अधिनियम की धारा ११४ में, उपधारा ( १ ) में, खण्ड ( क ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" (क) धारा १०७ के अधीन ग्राम का नक्शा, आबादी का नक्शा तथा ब्लॉक का नक्शा; ".

धारा १२ ९ का संशोधन.

१६. मूल अधिनियम की धारा १२ ९ में, उपधारा ( ८ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" (८) धारा ४४ तथा ५० में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई अपील या पुनरीक्षण का आवेदन , इस धारा के अधीन पारित किए गए किसी आदेश या की गई कार्यवाहियों के विरुद्ध नहीं होगा. ".

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 दिसम्बर 2019

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धारा १३४ का संशोधन.

१७. मूल अधिनियम की धारा १३४ में, शब्द एवं अंक " धारा १३१ , १३२ या १३३ " के स्थान पर, शब्द एवं अंक " धारा १३१ या १३३ " तथा शब्द " पांच सौ रुपये " के स्थान पर, शब्द " पांच हजार रुपये " स्थापित किए जाएं.

१८. मूल अधिनियम की धारा १५८ में , उपधारा ( ३ ) के परंतुक के स्थान पर, निम्नलिखित परंतुक स्थापित किया धारा १५८ का संशोधन.

जाए, अर्थात्:-

" परन्तु निम्नलिखित में से किसी भी श्रेणी में आने वाले व्यक्ति से भिन्न ऐसा व्यक्ति पट्टे या आवंटन की तारीख से दस वर्ष की कालावधि के भीतर ऐसी भूमि अंतरित नहीं करेगा और उसके पश्चात् धारा १६५ की उपधारा ( ७ - ख ) के अधीन अनुज्ञा प्राप्त कर ऐसी भूमि अंतरित कर सकेगाः- (

एक) मध्यप्रदेश साधारण खण्ड अधिनियम, १ ९ ५७ ( क्रमांक ३ सन् १ ९५८ ) की धारा २ के खंड ( २० ) में यथा परिभाषित कोई स्थानीय प्राधिकारी ;

(

दो) मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम , १ ९ ७३ ( क्रमांक २३ सन् १ ९ ७३ ) की क्रमशः धारा ३८ तथा ६४ के अधीन गठित किसी नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकरण या विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण;

(

तीन) मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल अधिनियम, १ ९ ७२ ( क्रमांक ३ सन् १ ९७३ ) के अधीन गठित मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल;

(चार ) कम्पनी अधिनियम, २०१३ ( क्रमांक १८ सन् २०१३ ) की धारा २ के खण्ड ( ४५ ) में यथा परिभाषित कोई सरकारी कम्पनी जिसमें राज्य सरकार ५१ प्रतिशत से अधिक शेयर धारण करती है ;

(पांच ) कोई व्यक्ति जिसे राज्य सरकार द्वारा नीलामी के माध्यम से भूमिस्वामी अधिकार में भूमि आवंटित है;

(छह) राज्य सरकार द्वारा समय - समय पर अधिसूचित कोई शासकीय सत्ता जिसे भूमिस्वामी अधिकार में भूमि आवंटित है. ".

१ ९ . मूल अधिनियम की धारा १६५ में , उपधारा ( १ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, धारा १६५ का संशोधन.

अर्थात्ः-

" ( १ ) इस धारा के अन्य उपबंधों, धारा १५८ की उपधारा ( ३ ) के परंतुक के उपबंधों और धारा १६८ के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए कोई भूमिस्वामी अपनी भूमि में का कोई हित अंतरित कर सकेगा. ".

२०. मूल अधिनियम की धारा १७५ के पश्चात् निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्ः- धारा १७६ का अंतः स्थापन.

" १७६. खाते का परित्याग.- ( १ ) यदि कोई भूमिस्वामी, जो अपने खाते पर स्वयं या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा पाँच वर्ष तक खेती नहीं करता है, भू- राजस्व का भुगतान नहीं करता है और उसने उस ग्राम को जिसमें कि वह सामान्यतः निवास करता है, छोड़ दिया हो, तो तहसीलदार ऐसी जांच के पश्चात् जैसी कि वह आवश्यक समझे , उस खाते में समाविष्ट भूमि का कब्जा ले सकेगा और एक बार में एक कृषि वर्ष की कालावधि के लिए भूमिस्वामी की ओर से पट्टे पर देकर उस पर खेती की व्यवस्था कर सकेगा .

(२ ) जहां भूमिस्वामी या भूमि के लिए विधिपूर्वक हकदार कोई अन्य व्यक्ति, उस तारीख के, जिसको कितहसीलदार ने उस भूमि का कब्जा लिया हो , आगामी कृषि वर्ष के प्रारंभ से पांच वर्ष की कालावधि के भीतर उस भूमि के लिए दावा करता है , वहां वह भूमि, शोध्यों का, यदि कोई हो, भुगतान कर दिया जाने पर तथा ऐसे निबंधनों तथा शर्तों पर, जैसी कि तहसीलदार ठीक समझे, उसे वापस दिला दी जाएगी.

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 दिसम्बर 2019

(३) जहां उपधारा ( २ ) के अधीन कोई दावा नहीं किया जाता है या यदि कोई दावा किया जाता है और वह नामंजूर कर दिया जाता है तो तहसीलदार से प्रतिवेदन प्राप्त होने पर, उपखण्ड अधिकारी , ऐसी जांच करने के पश्चात्, जैसी कि वह ठीक समझे, उस खाते को परित्यक्त घोषित करते हुए आदेश करेगा और वह खाता ऐसी तारीख से , जो कि उस आदेश में उस निमित्त विनिर्दिष्ट की जाए, राज्य सरकार में पूर्ण रूप से निहित हो जाएगा.

(४) जहां कोई खाता उपधारा ( ३ ) के अधीन परित्यक्त घोषित कर दिया जाता है, वहां राजस्व की उस बकाया के संबंध में जो कि उस खाते के बाबत् उस भूमिस्वामी से शोध्य हों, उस भूमिस्वामी के दायित्व का उन्मोचन हो जाएगा. ".

धारा १८३ का संशोधन.

२१. मूल अधिनियम की धारा १८३ में, उपधारा ( ६ ) में , शब्द " राज्य सरकार द्वारा यथा अधिसूचित तारीख से " विलोपित किए जाएं.

२२. मूल अधिनियम की धारा २४४ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

धारा २४४ का स्थापन.

" २४४. आबादी स्थल का निपटारा.- इस निमित्त बनाए गए नियमों के अध्यधीन रहते हुए, तहसीलदार आबादी क्षेत्र में भूमिस्वामी अधिकारों में आबादी स्थलों का निपटारा करेगा. ".

२३. मूल अधिनियम की धारा २४५ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

धारा २४५ का संशोधन.

" २४५. भू- राजस्व मुक्त गृह स्थल धारण करने का अधिकार. आबादी में स्थित युक्तियुक्त माप (डायमेंशन ) का कोई भवन स्थल , जो मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( संशोधन ) अधिनियम , २०१८ के प्रारंभ होने के समय किसी कोटवार द्वारा धारित है या किसी व्यक्ति द्वारा जो ऐसे ग्राम में या उस ग्राम में जिसमें कि सामान्यतः ऐसे ग्राम से खेती की जाती है , भूमि धारण करता है या कृषि शिल्पी या कृषि श्रमिक के रूप में कार्य करता है , भू- राजस्व के भुगतान के दायित्वाधीन नहीं होगा. " .

धारा २४८ का संशोधन.

२४. मूल अधिनियम की धारा २४८ में, उपधारा ( १ ) में, शब्द तथा अंक " धारा २३७ के अधीन " के पश्चात् शब्द तथा अंक " या धारा २३३ - क के अधीन किसी लोक प्रयोजन के लिए पृथक् रखी गई हो " अंतः स्थापित किए जाएं.

२५. मूल अधिनियम की धारा २५७ में, -

धारा २५७ का संशोधन.

एक) खण्ड (ख ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

(

" (ख ) भू- सर्वेक्षण की अधिसूचना की विधिमान्यता या उसके प्रभाव के बारे में कोई प्रश्न; ";

(दो) खण्ड ( ग ) में, शब्द " बन्दोबस्त अधिकारी " के स्थान पर, " जिला सर्वेक्षण अधिकारी " स्थापित किए जाएं.

२६. मूल अधिनियम की धारा २५८ ( २ ) में, -

धारा २५८ का संशोधन.

(एक) खण्ड ( एक - क ) में, शब्द, कोष्ठक एवं अंक " धारा १३ ( २ ) " के स्थान पर, शब्द, कोष्ठक एवं अंक " धारा १३ की उपधारा ( ३ ) " स्थापित किए जाएं;

(दो) खण्ड ( तीन ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" (तीन ) निर्धारण की दरें, प्रीमियम का अधिरोपण और भू- राजस्व का निर्धारण तथा पुनर्निधारण और धारा ५९ के अधीन व्यपवर्तन की प्रज्ञापना के लिए रीति; " ;

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 दिसम्बर 2019

1018 ( 6 )

(तीन) खण्ड ( आठ ) का लोप किया जाए;

(चार) खण्ड ( तेईस ) में, -

(क) उपखण्ड ( क) के स्थान पर, निम्नलिखित उपखण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः- " (क) अधिकार के अर्जन की रिपोर्ट करना, प्रज्ञापना;";

(ख) उपखण्ड (ङ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपखण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः- " (ङ) नोटिस का लेख, उसकी प्रज्ञापना या उसका प्रदर्शित किया जाना; " ;

(पांच) खण्ड ( अठ्ठाईस ) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड अन्तःस्थापित किया, अर्थात्ः- " (अठ्ठाईस - क) रीति जिसमें किसी व्यक्ति को धारा १२६ के अधीन संक्षेपतः बेदखल किया जाए; ";

(छ:) खण्ड ( तैंतीस ) का लोप किया जाए;

(सात) खण्ड (पैंतालीस - क) का लोप किया जाए;

(आठ) खण्ड ( चौवन ) का लोप किया जाए;

(नौ) खण्ड ( सत्तावन - क ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया , अर्थात्ः- " ( सत्तावन -क) धारा २३३ - क के अधीन संधारित रखे जाने वाले अभिलेख का विहित किया जाना ;";

खण्ड (अड़सठ ) का लोप किया जाए.

(दस)

उद्देश्यों और कारणों का कथन

मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( संशोधन ) अधिनियम, २०१८ ( क्रमांक २३ सन् २०१८ ) के प्रवृत्त होने के पश्चात् राज्य सरकार के ध्यान में यह बात लाई गई है कि मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, १ ९५ ९ ( क्रमांक २० सन् १ ९ ५९ ) ( जो इसमें इसके पश्चात् संहिता के रूप में निर्दिष्ट है) की कुछ धाराओं में आनुषंगिक संशोधन किए जाना अपेक्षित है. संहिता की कुछ धाराओं में उनके सही अर्थान्वयन के लिए भी कुछ धाराओं में भाषायी उपांतरण आवश्यक हैं.

२. यह प्रस्तावित है कि संहिता की धारा १३४ के अधीन किसी मान्यताप्राप्त सड़क या पथ पर कोई अधिक्रमण या बाधा पहुंचाने को प्रविरत रखने हेतु किसी व्यक्ति द्वारा निष्पादित किए जाने वाले स्वीय बंधपत्र की राशि में वृद्धि की जाए.

३. यह भी प्रस्तावित है कि मध्यप्रदेश साधारण खण्ड अधिनियम , १ ९ ५७ ( क्रमांक ३ सन् १ ९५८ ) की धारा २ के खण्ड ( २० ) में यथा परिभाषित कोई स्थानीय प्राधिकरण , मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम , १ ९ ७३ ( क्रमांक २३ सन् १ ९७३ ) की धारा ३८ तथा ६४ के अधीन क्रमशः गठित नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकरण या विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण , मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल अधिनियम, १ ९७२ (क्रमांक ३ सन् १ ९७३ ) के अधीन गठित मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल , कम्पनी अधिनियम, २०१३ ( क्रमांक १८ सन् २०१३ ) की धारा २ के खण्ड ( ४५ ) में यथा परिभाषित सरकारी कम्पनी जिसमें राज्य सरकार इक्यावन प्रतिशत से अधिक शेयर धारण करती है, कोई व्यक्ति जिसे राज्य सरकार द्वारा नीलामी के माध्यम से भूमिस्वामी अधिकार में भूमि आवंटित की गई है या राज्य सरकार द्वारा समय - समय पर अधिसूचित कोई शासकीय सत्ता जिसे भूमि स्वामी अधिकारों में भूमि आवंटित है, को धारा १५८ की उपधारा ( ३ ) के अधीन अधिरोपित भूमि के अंतरण पर निर्बधंनों से मुक्त रखा जाए.

1018 (7)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 दिसम्बर 2019

४. यह अनुभव किया है कि संहिता की निरसित धारा १७६ जिसमें कि खाते के त्यजन की प्रक्रिया का उपबंध था, कतिपय अतिरिक्त रक्षोपायों के साथ वापस लाया जाना होगा. अतएव धारा १७६ का अंतःस्थापन प्रस्तावित है.

५. यह भी प्रस्तावित है कि किसी नगरीय क्षेत्र में स्थित सेवा भूमि आदि के लिये संहिता की धारा १८३ की उपधारा ( ६ ) के अधीन राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करने की आवश्यकता को हटाया जाए, क्योंकि ऐसे क्षेत्रों का विस्तारण किया जाना सतत् प्रक्रिया है.

६. यह भी प्रस्तावित है कि आबादी स्थल भूमिस्वामी अधिकार में आवंटित किए जाएं.

७. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.

गोविन्द सिंह राजपूत भोपाल :

भारसाधक सदस्य.

तारीख : १८ दिसम्बर, २०१ ९ .

प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन

प्रस्तावित संशोधन विधेयक द्वारा जिन खण्डों के द्वारा विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन राज्य सरकार को किया जा रहा है, उनका विवरण निम्नानुसार है:-

(१) खण्ड ३ : संभाग , जिले , उपखण्ड या तहसील की सीमाओं में परिवर्तन करने हेतु आपत्तियां आमंत्रित किए जाने संबंधी प्रारूप विहित किए जाने; तथा

(२) खण्ड २६ ( पांच ) व्यक्ति को धारा १२६ के अधीन संक्षेपतः बेदखल किए जाने की रीति (नौ) संधारित रखे जाने वाले अभिलेख को विहित किये जाने

के संबंध में नियम बनाये जायेंगे , जो सामान्य स्वरूप के होंगे.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव

मध्यप्रदेश विधान सभा.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2019 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 20 December 2019. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2019-12-20.509.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2019-12-20.509.Extraordinary.