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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि (संशोधन) विधेयक 2019

Published 20 December 2019

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
510
Identifier
in.gazette.madhya.2019-12-20.510.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

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मध्यप्रदेश शासन

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 510]

भोपाल , शुक्रवार , दिनांक 20 दिसम्बर 2019- अग्रहायण 29 शक 1941

विधान सभा सचिवालय , मध्यप्रदेश

भोपाल , दिनांक 20 दिसम्बर 2019

क्र. 20888 - मप्रविस - 15 - विधान-2019 .- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम -64 के उपबंधों के पालन में , मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( संशोधन ) विधेयक, 2019 ( क्रमांक 38 सन् 2019 ) जो विधान सभा में दिनांक 20 दिसम्बर, 2019 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है .

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा .

1019 1020

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 दिसम्बर 2019

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक ३८ सन् २०१ ९

मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( संशोधन ) विधेयक , २०१ ९ मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम, १ ९ ५६ तथा मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, १ ९६१ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.

भारत गणराज्य के सत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान- मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो : - १. इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( संशोधन ) अधिनियम, २०१९ है.

संक्षिप्तनाम.

भाग- एक

मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम , १ ९ ५६ ( क्रमांक २३ सन् १ ९ ५६ ) का संशोधन २. मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम, १ ९ ५६ (क्रमांक २३ सन् १ ९ ५६ ) में, -

मध्यप्रदेश अधिनियम क्रमांक २३ सन् १९५६ कासंशोधन.

धारा ९ में, -

(१)

उपधारा ( १ ) में, खण्ड ( क ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, ( क)

अर्थात्ः-

" (क) नगरपालिक वार्डों से निर्वाचित पार्षदों द्वारा निर्वाचित महापौर;" ;

(ख) उपधारा (४ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- " (४) यदि किसी नगरपालिक क्षेत्र का कोई वार्ड , पार्षद् का निर्वाचन करने में असफल रहता है , तो ऐसे वार्ड के स्थान को भरने के लिए छह माह के भीतर नई निर्वाचन कार्यवाहियां प्रारंभ की जाएंगी और जब तक उस स्थान को भरा नहीं जाता, उसे आकस्मिक रिक्ति समझा जाएगाः परंतु अध्यक्ष, महापौर, किन्हीं विभागीय समितियों या समितियों में से किसी के निर्वाचन की कार्यवाहियां ऐसे स्थान का निर्वाचन लंबित रहते स्थगित नहीं की जाएंगी .".

(२) धारा १० में, उपधारा (४ ) में, प्रथम परन्तुक में, शब्द " छह मास " के स्थान पर, शब्द " दो मास " स्थापित किए जाएं.

धारा १२ में, -

(३)

एक) खण्ड ( ग ) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः- (

" ( घ) किसी पंचायत या किसी नगरपालिका के नगरपालिक क्षेत्र से संबंधित किसी निर्वाचक नामावली में रजिस्ट्रीकृत नहीं है; " ;

(दो) परंतुक के पश्चात्, निम्नलिखित स्पष्टीकरण जोड़े जाएं, अर्थात्ः-

" स्पष्टीकरण . १- इस धारा के प्रयोजन हेतु " पंचायत " का वही अर्थ होगा जैसा कि मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, १ ९९ ३ ( क्रमांक १ सन् १ ९९४ ) की धारा २ के खण्ड ( सत्रह ) में इसके लिए समनुदेशित किया गया है.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 दिसम्बर 2019

1020(1) " स्पष्टीकरण . २- इस धारा के प्रयोजन हेतु " नगरपालिक क्षेत्र " का वही अर्थ होगा जैसा कि मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, १ ९ ६१ ( क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ ) की धारा ३ के खण्ड ( १८ - क) में इसके लिए समनुदेशित किया गया है . " .

धारा १४ में, -

(४)

(क) उपधारा ( १ ) में, शब्द " तथा महापौर " का लोप किया जाए;

(ख) उपधारा ( २ ) में , शब्द " तथा महापौर " का लोप किया जाए.

(५) धारा १४ -क में, उपधारा ( १ ) में, शब्द " महापौर " के स्थान पर, शब्द " पार्षद " स्थापित किया जाए.

(६) धारा १४ - ख में, शब्द " महापौर " के स्थान पर, शब्द " पार्षद " स्थापित किया जाए.

(७) धारा १४ - ग में, शब्द " या महापौर " का लोप किया जाए.

(८) धारा १५ में, -

(क) शब्द " या महापौर " का लोप किया जाए;

(ख) परंतुक के स्थान पर, निम्नलिखित परंतुक स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" परन्तु कोई भी व्यक्ति पार्षदों के किसी निर्वाचन में एक से अधिक बार मतदान नहीं करेगा. " .

(९) धारा १६ में, उपधारा ( ४ ) का लोप किया जाए.

धारा १७ में,-

(१०)

(क) उपधारा ( १ ) में, -

(एक) पार्श्व शीर्ष में, शब्द " या महापौर " का लोप किया जाए;

(दो) प्रारंभिक पैरा में , शब्द " या महापौर " का लोप किया जाए;

(तीन) खण्ड ( ख ख ) में, शब्द " या महापौर " का लोप किया जाए;

उपधारा ( २ ) में, -

(ख)

(एक) पार्श्व शीर्ष में, शब्द " या महापौर " का लोप किया जाए;

(दो) प्रारंभिक पैरा में, शब्द " या महापौर " का लोप किया जाए;

(तीन) खण्ड (ङ) में, शब्द " या महापौर " का लोप किया जाए;

(ग) उपधारा ( ३ ) में, शब्द " पार्षद या महापौर " जहां कहीं भी वे आए हों, के स्थान पर, शब्द " पार्षद " स्थापित किया जाए.

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 दिसम्बर 2019

1020 ( 2)

धारा १७-ख में, -

(११)

पार्श्व शीर्ष में, शब्द " महापौर तथा " का लोप किया जाए;

(क)

(ख) उपधारा ( १ ) में, प्रारंभिक पैरा के स्थान पर, निम्नलिखित पैरा स्थापित किया जाए, अर्थात्ः- " प्रत्येक पार्षद्, यथास्थिति, निगम के प्रथम सम्मिलन में अध्यक्ष ( स्पीकर ) के चुनाव में भाग लेने के पूर्व या अपना पद ग्रहण करने के पूर्व राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष निम्नलिखित प्ररूप में शपथ या प्रतिज्ञान पर हस्ताक्षर करेगा:- ";

उपधारा ( २ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- (ग)

" ( २ ) यदि पार्षद् उपधारा ( १ ) के अधीन शपथ नहीं लेता है, तो यह समझा जाएगा कि ऐसे पार्षद् ने अपना पद ग्रहण नहीं किया है:

परंतु यदि पार्षद्, संभागीय आयुक्त की अनुमति के सिवाय, उसके निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट होने की तारीख से तीन माह के भीतर शपथ नहीं लेता है तो उसका स्थान स्वयंमेव ही रिक्त हुआ समझा जाएगा. ".

धारा १८ में,-

(१२)

(क) पार्श्व शीर्ष के स्थान पर, निम्नलिखित पार्श्व शीर्ष स्थापित किया जाए, अर्थात्ः- " अध्यक्ष तथा महापौर का निर्वाचन " ;

(ख) उपधारा ( १ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- " ( १ ) राज्य निर्वाचन आयोग , धारा २२ के अधीन निर्वाचन की अधिसूचना की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर, अध्यक्ष तथा महापौर के निर्वाचन के प्रयोजन के लिए निर्वाचित पार्षदों का सम्मिलन बुलाएगा. " ;

उपधारा ( ३ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- (ग)

" (३ ) उपधारा ( १ ) के अधीन सम्मिलन , ऐसी रीति में बुलाया जाएगा, जैसी कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अवधारित की जाए, जिसकी अध्यक्षता राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा की जाएगी . अध्यक्षता करने वाले अधिकारी को मत देने का अधिकार नहीं होगा और मत बराबर होने की दशा में परिणाम लाट द्वारा ऐसी रीति में विनिश्चत किया जाएगा , जैसी कि विहित की जाए. " .

( १३) धारा २० में, स्पष्टीकरण में , शब्द " अध्यक्ष " के पश्चात्, शब्द " तथा महापौर " अन्तःस्थापित किए जाएं.

धारा २३ -क में, -

(१४)

( क) पार्श्व शीर्ष में तथा उपधारा ( १ ) में, शब्द " अध्यक्ष " जहां कहीं भी आया हो , के पश्चात्, शब्द "या महापौर " अन्तःस्थापित किए जाएं;

( ख) उपधारा ( २ ) के खण्ड (दो ) में, शब्द " महापौर " के स्थान पर, शब्द " अध्यक्ष , महापौर, " स्थापित किए जाएं.

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 दिसम्बर 2019

1020 (3) धारा २४ का लोप किया जाए.

(१५)

(१६) धारा ४४१ में, उपधारा ( २ ) में, खण्ड ( ख ) में, उपखण्ड ( तीन) के स्थान पर, निम्नलिखित उपखण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" (तीन ) महापौर के निर्वाचन की दशा में, किसी निर्वाचित पार्षद् द्वारा. ".

भाग-दो

मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, १ ९ ६१ ( क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ ) का संशोधन

३. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , १ ९ ६१ ( क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ ) में, -

मध्यप्रदेश

नगरपालिका

अधिनियम , १ ९ ६१ धारा १ ९ में,-

(१)

(क्रमांक ३७ सन्

१९६१ ) का

संशोधन (क) उपधारा ( १ ) में , खण्ड ( क ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" (क) नगरपालिका परिषद् या नगर परिषद् के निर्वाचित पार्षदों द्वारा निर्वाचित अध्यक्ष अर्थात् सभापति (चेयरपर्सन);

(ख) उपधारा (४ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" (४ ) यदि किसी नगरपालिक क्षेत्र का कोई वार्ड, पार्षद् का निर्वाचन करने में असफल रहता है तो ऐसे वार्ड के स्थान को भरने के लिए छह माह के भीतर नई निर्वाचन कार्यवाहियां प्रारंभ की जाएंगी और जब तक उस स्थान को भरा नहीं जाता, उसे आकस्मिक रिक्ति समझा जाएगाः

परंतु अधिनियम के अधीन अध्यक्ष या उपाध्यक्ष या किन्हीं समितियों के निर्वाचन की कार्यवाहियां ऐसे स्थान का निर्वाचन लंबित रहते हुए स्थगित नहीं की जाएंगी. " .

(२) धारा २० में, उपधारा ( २ ) में , खण्ड ( ख ) में, उपखण्ड ( तीन) के स्थान पर, निम्नलिखित उपखण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" (तीन ) अध्यक्ष के निर्वाचन की दशा में, किसी पार्षद् द्वारा ; " .

( ३) धारा २ ९ में , उपधारा (४ ) में प्रथम परन्तुक में, शब्द " छह मास " के स्थान पर, शब्द " दो मास " स्थापित किए जाएं.

धारा ३० में, -

(४)

(एक) खण्ड (ग ) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" (घ ) किसी पंचायत या किसी नगरपालिक निगम के नगरपालिक क्षेत्र से संबंधित किसी निर्वाचक नामावली में रजिस्ट्रीकृत नहीं है; ";

दो) परंतुक के पश्चात्, निम्नलिखित स्पष्टीकरण जोड़े जाएं, अर्थात्ः-

(

" स्पष्टीकरण . १- इस धारा के प्रयोजन हेतु " पंचायत " का वही अर्थ होगा जैसा कि मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, १ ९९ ३ ( क्रमांक १ सन् १ ९९ ४ ) की धारा २ के खण्ड ( सत्रह )

में इसके लिए समनुदेशित किया गया है.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 दिसम्बर 2019

1020 (4)

स्पष्टीकरण. २ - इस धारा के प्रयोजन हेतु " नगरपालिक क्षेत्र " का वही अर्थ होगा जैसा कि मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम , १ ९ ५६ ( क्रमांक २३ सन् १ ९ ५६ ) की धारा ५ के खण्ड ( ३४- क ) में इसके लिए समनुदेशित किया गया है. ".

धारा ३२ में, -

( ५)

(क) उपधारा ( १ ) में , शब्द " अध्यक्ष तथा " का लोप किया जाए ;

(ख) उपधारा ( २ ) में, शब्द " अध्यक्षों तथा " का लोप किया जाए;

(६) धारा ३२ - क में , उपधारा ( १ ) में , शब्द " अध्यक्ष " जहां कहीं भी आया हो, के स्थान पर , शब्द " पार्षद " स्थापित किया जाए.

धारा ३२ - ख में, शब्द " अध्यक्ष " के स्थान पर, शब्द " पार्षद " स्थापित किया जाए.

(७)

धारा ३२ - ग में , शब्द " या अध्यक्ष " का लोप किया जाए.

(८)

धारा ३३ में, -

(९)

प्रारंभिक पैरा में, शब्द " या अध्यक्ष " का लोप किया जाए;

(क)

(ख) विद्यमान परंतुक के स्थान पर, निम्नलिखित परंतुक स्थापित किया जाए, अर्थात्ः- " परन्तु कोई भी व्यक्ति पार्षद के किसी निर्वाचन में एक से अधिक बार मतदान नहीं करेगा. ".

धारा ३५ में, शब्द " अध्यक्ष के रूप में निर्वाचन या " का लोप किया जाए.

(१०)

धारा ४३ में, -

(११)

पार्श्व शीर्ष में, शब्द " उपाध्यक्ष " के पूर्व, शब्द " अध्यक्ष तथा " अंतःस्थापित किए जाएं ;

(क)

(ख) उपधारा ( १ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- " ( १ ) राज्य निर्वाचन आयोग , नगरपालिका परिषद् एवं नगर परिषद् के प्रत्येक निर्वाचन के तुरंत पश्चात् अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का निर्वाचन, ऐसी रीति में, जैसी कि विहित की जाए, करवाएगा. परिषद् के निर्वाचित सदस्य धारा ५५ में यथाविनिर्दिष्ट अपने प्रथम सम्मिलन में निर्वाचित सदस्यों **. में से, विहित रीति में एक अध्यक्ष तथा एक उपाध्यक्ष का निर्वाचन करेंगे . " ;

(ग) उपधारा ( ३ ) में , शब्द " उपाध्यक्ष " के पूर्व, शब्द " अध्यक्ष तथा " अंतःस्थापित किए जाएं.

धारा ४३ - क में, -

(१२)

(क) पार्श्व शीर्ष में , शब्द " उपाध्यक्ष " के पूर्व, शब्द " अध्यक्ष या " अंतःस्थापित किए जाएं;

(ख) उपधारा ( १ ) में, शब्द " उपाध्यक्ष " जहां कहीं भी वे आए हों , के पूर्व , शब्द " अध्यक्ष या " अंतःस्थापित किए जाएं ;

(ग) उपधारा ( २ ) में, खण्ड (दो ) में, शब्द " अध्यक्ष " के स्थान पर, शब्द " अध्यक्ष , उपाध्यक्ष " स्थापित किए जाएं.

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 20 दिसम्बर 2019

1020( 5) (१३) धारा ४७ का लोप किया जाए.

(१४) धारा ५५ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

साधारण निर्वाचन के

प्रथम

पश्चात्

सम्मिलन, " ५५. ( १ ) राज्य निर्वाचन आयोग , धारा ४५ के अधीन निर्वाचन की अधिसूचना की तारीख से १५ दिन के भीतर, अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष के निर्वाचन के प्रयोजन के लिए निर्वाचित पार्षदों का सम्मिलन बुलाएगा.

(२) उपधारा ( १ ) के अधीन सम्मिलन, ऐसी रीति में बुलाया जाएगा , जैसी कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अवधारित की जाए, जिसकी अध्यक्षता राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा की जाएगी. अध्यक्षता करने वाले अधिकारी को मत देने का अधिकार नहीं होगा और मत बराबर होने की दशा में परिणाम लाट द्वारा ऐसी रीति में विनिश्चित किया जाएगा , जैसी कि विहित की जाए. ".

(१५) धारा ५६ में , अंक " ४७ " का लोप किया जाए.

(१६) धारा ६२ में, उपधारा ( ३ ) में, खण्ड ( तीन ) के परंतुक में, शब्द, अंक तथा अल्पविराम " या ४७, " का लोप किया जाए.

(१७) धारा ६३ में, परन्तुक में, शब्द " उपाध्यक्ष या " का लोप किया जाए.

(१८) धारा ३२८ में, उपधारा ( १ ) में, खण्ड ( ख ) में, शब्द " उपाध्यक्ष " जहां कहीं भी वे आए हों , के पूर्व, शब्द " अध्यक्ष तथा " अंतःस्थापित किए जाएं.

तथा

निरसन व्यावृत्ति.

४. ( १ ) मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( संशोधन ) अध्यादेश , २०१ ९ ( क्रमांक ७ सन् २०१ ९ ) एतद्वारा निरसित किया जाता है.

( २ ) उक्त अध्यादेश के निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंध के अधीन की गई समझी जाएगी .

उद्देश्यों और कारणों का कथन

वर्तमान में नगरीय निकायों के अध्यक्ष तथा महापौर का निर्वाचन प्रत्यक्ष व्यवस्था के माध्यम से किया जाता है. अध्यक्ष तथा महापौर की प्रत्यक्ष निर्वाचन व्यवस्था के कारण , निर्वाचित पार्षदों के साथ उनके समन्वय में कमी रह जाती है, जिसके परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय नहीं हो पाता है , अतएव नगरों का विकास प्रभावित होता है. पूर्व में अध्यक्ष तथा महापौर का निर्वाचन निर्वाचित पार्षदों द्वारा होता था. निर्वाचित पार्षदों द्वारा निर्वाचित अध्यक्ष तथा महापौरों के पास बहुमत होता था, अतएव निर्णय तथा कार्य सहजता से निष्पादित किए जाते थे. अतएव , निर्वाचित पार्षदों द्वारा अध्यक्ष तथा महापौरों के निर्वाचन के लिए यथोचित संशोधन प्रस्तावित हैं.

२. पिछले वर्षों में नगरीय स्थानीय निकायों से लगे हुए क्षेत्रों में जनसंख्या में अत्यधिक वृद्धि देखी गई है . इस परिस्थिति में, नागरिकों को आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दृष्टि से, नगरीय स्थानीय निकायों की सीमा का विस्तार आवश्यक है , किन्तु सामान्यतः नगरीय स्थानीय निकाय, आवश्यकतानुसार सीमा विस्तार/वार्ड विभाजन की प्रक्रिया निर्वाचन से पूर्व प्रारंभ करते हैं . वार्डों के पुनर्गठन के लिए क्षेत्र को सम्मिलित या बाहर करने के ६ माह के उपबंध का ध्यान रखते हुए, प्रक्रिया प्रारंभ करने के लिए अपेक्षित समय ८ - ९ मास पूर्व का है , क्योंकि सीमा विस्तार के संबंध में पूर्व प्रकाशन के पश्चात् प्राप्त आपत्तियों/ सुझावों के निराकरण के पश्चात्, अंतिम प्रकाशन के लिए कम से कम ४५ दिनों की कालावधि अपेक्षितं है . इसी प्रकार , विस्तार के पश्चात्, वार्ड के नए सिरे से परिसीमन के लिए ३० दिन की कालावधि अपेक्षित है , इस दृष्टि से ६ मास की कालावधि अधिक है , अतएव ६ मास के स्थान पर, २ मास स्थापित किया गया है.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 दिसम्बर 2019

1020 (6)

३. मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, १ ९९ ३ (क्रमांक १ सन् १ ९९४ ) की धारा ५ " ग्राम के मतदाताओं का रजिस्ट्रीकरण " यह उपबंध करती है कि " कोई व्यक्ति मतदाता सूची में रजिस्ट्रीकृत किए जाने का हकदार नहीं होगा यदि वह किसी अन्य स्थानीय प्राधिकारी से संबंधित निर्वाचक नामावली में रजिस्ट्रीकृत है ". अतएव , कोई मतदाता दो स्थानों अर्थात् किसी नगरपालिक निगम या नगरपालिका के साथ - साथ किसी पंचायत का मतदाता नहीं हो सकता है. मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम, १ ९ ५६ (क्रमांक २३ सन् १ ९ ५६ ) की धारा १२ में तथा मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , १ ९ ६१ ( क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ ) की धारा ३० में समान उपबंध नहीं होने के कारण किसी मतदाता का नाम नगरपालिक निगम, नगरपालिका और पंचायत में होने पर, वर्तमान में नगरपालिक निगमों तथा नगरपालिकाओं के रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी को अन्य स्थान से मतदाता का नाम हटाने की शक्ति नहीं है. नगरपालिक निगम या नगरपालिका निर्वाचन में, मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन का तत्स्थानी उपबंध किए जाने हेतु यथोचित संशोधन प्रस्तावित है. जिसके कारण दोहरे मतदाताओं को रोका जाएगा और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, १ ९ ५० ( १ ९ ५० का ४३ ) की धारा १७ और १८ के उपबंधों तथा आधारभूत संकल्पनाओं को सुनिश्चित किया जाएगा.

४. चूंकि मामला अत्यावश्यक था तथा विधान सभा का सत्र चालू नहीं था अतएव , मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( संशोधन) अध्यादेश , २०१ ९ ( क्रमांक ७ सन् २०१ ९ ) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किया गया था . अब उक्त अध्यादेश के स्थान पर, राज्य विधान-मण्डल का अधिनियम बिना किसी उपांतरण के लाया जाना प्रस्तावित है.

५. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.

जयवर्द्धन सिंह भोपाल :

भारसाधक सदस्य.

तारीख १६ दिसम्बर, २०१ ९ .

प्रत्यायोजित विधि निर्माण संबंधी व्याख्यात्मक ज्ञापन

प्रस्तावित संशोधन विधेयक के खण्ड २ ( १२ ) ( ग ) तथा खण्ड ३ ( १४ ) द्वारा निर्वाचन के प्रयोजन के लिए सम्मिलन बुलाने , सम्मिलन की अध्यक्षता हेतु प्राधिकारी नियुक्त किये जाने तथा मदतान बराबर होने की दशा में परिणम लाट द्वारा विनिश्चित किए जाने के संबंध में राज्य सरकार को विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन किया जा रहा है जो सामान्य स्वरूप के होंगे.

अध्यादेश के संबंध में विवरण

वर्तमान में नगरीय निकायों के अध्यक्ष तथा महापौर का निर्वाचन प्रत्यक्ष व्यवस्था के माध्यम से किया जाता है . अध्यक्ष तथा महापौर की प्रत्यक्ष निर्वाचन व्यवस्था के कारण, निर्वाचित पार्षदों के साथ उनके समन्वय में कमी रह जाती है , जिसके परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय नहीं हो पाता है , अतएव नगरों का विकास प्रभावित होता है. पूर्व में अध्यक्ष तथा महापौर का निर्वाचन निर्वाचित पार्षदों द्वारा होता था. निर्वाचित पार्षदों द्वारा निर्वाचित अध्यक्ष तथा महापौरों के पास बहुमत होता था , अतएव निर्णय तथा कार्य सहजता से निष्पादित किए जाते थे . पिछले वर्षों में नगरीय स्थानीय निकायों से लगे हुए क्षेत्रों में जनसंख्या में अत्यधिक वृद्धि को दृष्टिगत रखते हुए नागरिकों को आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने , नगरीय स्थानीय निकायों की सीमा का विस्तार आवश्यक था, एवं मध्यप्रदेश पंचायत एवं ग्राम स्वराज अधिनियम , १ ९९ ३ ( क्रमांक १ सन् १ ९९४ ) की धारा ५ " ग्राम के मतदाताओं का रजिस्ट्रीकरण " यह उपबंध करती है कि " कोई व्यक्ति मतदाता सूची में रजिस्ट्रीकृत किए जाने का हकदार नहीं होगा यदि वह किसी अन्य स्थानीय प्राधिकारी से संबंधित निर्वाचक नामावली में रजिस्ट्रीकृत है ". अतएव, कोई मतदाता दो स्थानों अर्थात् किसी नगरपालिक निगम या नगरपालिका के साथ- साथ किसी पंचायत का मतदाता नहीं हो सकता है. मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम, १ ९ ५६ ( क्रमांक २३ सन् १ ९ ५६ ) की धारा १२ में तथा मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, १ ९ ६१ (क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ ) की धारा ३० में समान उपबंध नहीं होने के कारण किसी मतदाता का नाम नगरपालिक निगम, नगरपालिका और पंचायत में होने पर, वर्तमान में नगरपालिक निगमों तथा नगरपालिकाओं के रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी को अन्य स्थान से मतदाता का नाम हटाने की शक्ति नहीं थी. नगरपालिक निगम या नगरपालिका निर्वाचन में, मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन का तत्स्थानी उपबंध किए जाने हेतु यथोचित संशोधन किया जाना आवश्यक हो गया था.

1020 ( 7)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 20 दिसम्बर 2019

चूंकि मामला अत्यावश्यक था तथा विधान सभा का सत्र चालू नहीं था अतएव, मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( संशोधन ) अध्यादेश, २०१ ९ ( क्रमांक ७ सन् २०१ ९ ) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किया गया था.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2019.

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 20 December 2019. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2019-12-20.510.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2019-12-20.510.Extraordinary.