ध्य प्र द श शासन
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सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 23]
भोपाल, गुरुवार , दिनांक 23 जनवरी 2020- माघ 3 , शक 1941
विधि और विधायी कार्य विभाग
भोपाल, दिनांक 23 जनवरी 2020
क्र. 1305-17- इक्कीस- अ-( प्रा. ) .- मध्यप्रदेश विधान सभा का निम्नलिखित अधिनियम जिस पर दिनांक 21 जनवरी 2020 को महामहिम राज्यपाल की अनुमति प्राप्त हो चुकी है , एतद्वारा सर्वसाधारण की जानकारी के लिये प्रकाशित किया जाता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, राजेश यादव, अपर सचिव.
मध्यप्रदेश अधिनियम
क्रमांक ५ सन् २०२०
मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी ( द्वितीय संशोधन ) अधिनियम, २०१ ९
विषय-सूची.
धाराएं:
१. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.
२. धारा २ का संशोधन.
३. धारा ३ का संशोधन.
४. धारा ४ का स्थापन .
५. धारा ६ का संशोधन.
६. धारा ८ का संशोधन.
७. धारा १७ का संशोधन.
८. धारा २३ का संशोधन.
९. धारा २५ का संशोधन.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 जनवरी 2020
मध्यप्रदेश अधिनियम
क्रमांक ५ सन् २०२०
मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी ( द्वितीय संशोधन )
अधिनियम, २०१ ९
[दिनांक २१ जनवरी , २०२० को राज्यपाल की अनुमति प्राप्त हुई; अनुमति " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) " में दिनांक २३ जनवरी , २०२० को प्रथम बार प्रकाशित की गई. ]
मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी अधिनियम , १ ९९९ को और संशोधित करने हेतु अधिनियम.
भारत गणराज्य के सत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान- मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी ( द्वितीय संशोधन) संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.
अधिनियम, २०१ ९ है.
( २ ) यह मध्यप्रदेश राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा.
धारा २ का संशोधन.
२. मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी अधिनियम, १ ९९९ ( क्रमांक २३ सन् १ ९९९ ) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) की धारा २ में, उपधारा ( १ ) में, -
(एक) खण्ड ( ग ) में, शब्द " उद्वहन सिंचाई द्वारा , " के पश्चात्, शब्द " या दबावयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली द्वारा " अन्तःस्थापित किए जाएं;
(दो) खण्ड ( ङ) में, उपखण्ड ( तीन ) के पश्चात्, निम्नलिखित नया उपखण्ड जोड़ा जाए, अर्थात्ः- " (चार ) दबावयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली वितरण केन्द्र से संबंधित समस्त संरचनाएं और उपसाधन;" ;
(तीन) खण्ड ( ण ) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड अन्तःस्थापित किए जाएं, अर्थात्ः- " ( ण क ) " दबावयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली " से अभिप्रेत है, एक सिंचाई प्रणाली जिसमें पाइप प्रणाली के माध्यम से जल को दबावयुक्त तथा सुनिश्चित रूप से पौधों तक पहुंचाया जाता है ;
(ण ख ) " दबावयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली वितरण केन्द्र " से अभिप्रेत है, कोई सिविल या यांत्रिक संरचना जहां से किसी विनिर्दिष्ट जल उपभोक्ता क्षेत्र को सिंचाई के लिए जल का वितरण नियंत्रित किया जाता है ;" .
धारा ३ का संशोधन. ३. मूल अधिनियम की धारा ३ में, उपधारा ( १ ) में, शब्द " जलीय आधार पर " के पश्चात्, शब्द " या दबावयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली की दशा में वितरण केन्द्र के आधार पर " अन्तःस्थापित किए जाएं.
धारा ४ का स्थापन .
४. मूल अधिनियम की धारा ४ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति.
" ४. ( १ ) प्रत्येक जल उपभोक्ता संथा के लिए एक प्रबंध समिति होगी जो जल उपभोक्ता क्षेत्र के प्रत्येक प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र से एक अध्यक्ष तथा एक सदस्य से मिलकर बनेगी.
(२) कलक्टर, जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति के अध्यक्ष के निर्वाचन के लिए प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा गुप्त मतदान पद्धति के माध्यम से, ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, व्यवस्था कराएगा.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 जनवरी 2020
(३) कलक्टर, प्रबंध समिति के सदस्यों के निर्वाचन के लिए भी गुप्त मतदान पद्धति के माध्यम से , ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, व्यवस्था करेगा.
(४) यदि उपधारा ( २ ) तथा ( ३ ) के अधीन किसी निर्वाचन में जल उपभोक्ता संथा के अध्यक्ष या किसी प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र के सदस्य निर्वाचित नहीं किए जा सके हों तो नया निर्वाचन, ऐसी रीति में, जैसी कि विहित की जाए, कराया जाएगा.
(५) यदि जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति में कोई महिला सदस्य नहीं है तो प्रबंध समिति, सदस्य' के रूप में एक महिला को सहयोजित कर सकेगी जो कि साधारणतः कृषक संगठन क्षेत्र की निवासी होगी.
(६) प्रबंध समिति के अध्यक्ष और सदस्य यदि पूर्व में उन्हें वापस नहीं बुलाया गया हो, धारा २१ की उपधारा ( १ ) के अधीन सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति की तारीख से पांच वर्ष की कालावधि के लिए पद पर रहेंगे:
परन्तु प्रबंध समिति के अध्यक्ष तथा सदस्यों की पदावधि का अवसान होने पर एक नई प्रबंध समिति गठित नहीं की जाती है, तो राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा , प्रबंध समिति के अध्यक्ष तथा सदस्य की पदावधि में वृद्धि, ऐसी वृद्धि का कारण अभिलिखित करते हुए, ऐसे अवसान की तारीख से छह मास की और कालावधि के लिए कर सकेगी.
(७) प्रबंध समिति, जल उपभोक्ता संथा की शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का पालन करेगी .
(८) राज्यसरकार, अधिसूचना द्वारा , उसके लिए कारणों को अभिलिखित करते हुए, पांच वर्ष की कालावधि के पूर्व, जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति को विघटित कर सकेगी और नया निर्वाचन ऐसी रीति में किया जाएगा जैसी कि विहित की जाए. ".
धारा ६ का संशोधन.
५. मूल अधिनियम की धारा ६ में, उपधारा ( ६ ) के पश्चात्, निम्नलिखित नई उपधारा जोड़ी जाए, अर्थात्ः-
" (७ ) यदि जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति, धारा ४ की उपधारा ( ८ ) के अधीन पांच वर्ष की कालावधि के पूर्व विघटित की जाती है, तो उस दशा में, वितरक समिति की प्रबंध समिति स्वतः विघटित हुई समझी जाएगी. ".
धारा ८ का संशोधन.
६. मूल अधिनियम की धारा ८ में, उपधारा ( ५ ) के पश्चात्, निम्नलिखित नई उपधारा जोड़ी जाए, अर्थात्ः-
" ( ६ ) यदि जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति, धारा ४ की उपधारा ( ८ ) के अधीन पांच वर्ष की कालावधि के पूर्व विघटित की जाती है, तो उस दशा में, परियोजना समिति की प्रबंध समिति स्वतः विघटित हुई समझी जाएगी. ".
धारा १७ का संशोधन.
७. मूल अधिनियम की धारा १७ में, खण्ड ( ग ) में, शब्द " पाइप निकास " के पश्चात्, शब्द " या वितरण केन्द्र " अन्तःस्थापित किए जाएं,
८. मूल अधिनियम की धारा २३ में, -
धारा २३ का संशोधन.
(एक) खण्ड (ज ) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड अन्तःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" ( ज क) किसी दबावयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली या उसके उपसाधनों को किसी भी प्रकार से नष्ट करेगा , नुकसान पहुंचाएगा, चोरी करेगा या जल के प्रवाह में हस्तक्षेप करेगा; ";