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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

सिचाई के प्रयोजन के लिए सोलर पम्प स्थापना की योजना.........

Published 04 February 2020

Department
नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा
Type
Extraordinary
Gazette no.
43
Identifier
in.gazette.madhya.2020-02-04.43.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

वध्यप्रदे श शासन

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सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 43 ]

भोपाल, मंगलवार , दिनांक 4 फरवरी 2020 माघ 15, शक 1941

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग

मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल

भोपाल, दिनांक 4 फरवरी 2020

क्र. -एफ- 1-1-2015- साठ.- मंत्रिपरिषद् दिनांक 11 दिसम्बर 2019 को सम्पन्न बैठक में मध्यप्रदेश शासन नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग और नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय , भारत सरकार की " कुसुम योजना " के घटक ( ब ) द्वारा देय अनुदान के माध्यम से सिंचाई प्रयोजन के लिए सोलर पम्प स्थापना की योजना ( मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना) अनुमोदित की गई है. सर्व साधारण की जानकारी के लिए उक्त का प्रकाशन " मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) " में किया जा रहा है.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, मनु श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव.

राज्य सरकार मध्यप्रदेश राज्य में सिंचाई प्रयोजन के लिए सोलर पम्प की स्थापना हेतु निम्नलिखित निर्देश जारी करती है:-

(1) (i ) मध्यप्रदेश शासन , और ( ii ) नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय , भारत सरकार की " कुसुम " योजना के घटक (ब ) द्वारा देय अनुदान के माध्यम से सिंचाई प्रयोजन के लिए सोलर पम्प स्थापना की योजना को " मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना" कहा जाएगा.

(2) अनुदान व्यवस्था.-( i ) नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय , भारत सरकार की " कुसुम " योजना के घटक ( ब ) अंतर्गत प्राप्त अनुदान को मध्यप्रदेश शासन, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अनुदान से " टॉपअप " किया जाएगा, जिससे हितग्राही को कंडिका 3 अनुसार हितग्राही अंश देना होगा .

(ii) इस योजना के अंतर्गत सोलर पम्प की कुल कीमत ( पाँच वर्षीय रख - रखाव एवं मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम के सर्विस चार्जेस सहित ) के आधार पर ही अनुदान का निर्धारण होगा .

85 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 4 फरवरी 2020

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(3) हितग्राही अंशः-

सोलर पंपिंग सिस्टम के प्रकार

क्र.

कृषक का योगदान (रुपये में) (3)

(2)

(1)

19,000

1. 1 एच. पी. डी. सी. सोलर पम्प

23,000

2. 2 एच. पी. डी. सी. सरफेस सोलर पम्प

25,000

3. 2 एच. पी. डी. सी. सबमर्सिबल सोलर पम्प

36,000

4. 3 एच. पी. डी. सी. सोलर पम्प

72,000

5. 5 एच. पी . डी. सी. सोलर पम्प

1,35,000

6. 7.5 एच. पी . डी. सी. सोलर पम्प

1,35,000

7. 7.5 एच. पी. ए. सी. सोलर पम्प

योजनान्तर्गत 7.5 एच. पी. से अधिक क्षमता के डी. सी. व ए. सी. सोलर पंप भी स्थापित किये जा सकेंगे , किन्तु केन्द्रांश व राज्यांश की राशि 7.5 एच.पी. के सोलर पंप तक सीमित रहेगी .

(4) सोलर पम्प स्थापना की दरों का निर्धारण.- प्रतिस्पर्धात्मक एवं पारदर्शी प्रक्रिया से की गई खुली निविदा के माध्यम से दरों का निर्धारण किया जाएगा. सोलर पम्प की कुल कीमतों का निर्धारण , नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय , भारत सरकार के मानकों अथवा उससे बेहतर मानकों के अनुसार होगा , जिसमें 5 वर्षीय रख - रखाव एवं मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम का सर्विस चार्ज भी शामिल होगा. निविदा की जो भी दरें हो, प्रत्येक क्षमता के पम्प, कण्डिका-3 अनुसार एक ही दर पर हितग्राहियों को दिए जाएँगे , चाहे वह ए.सी. या डी.सी. हों, अथवा वे नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रावधानित यूनिवर्सल सोलर पम्प कन्ट्रोलर ( यू.एस.पी.सी. ) के साथ हों अथवा नहीं.

(5) तकनीकी पहलू. - योजना के अंतर्गत 5 एच. पी. क्षमता तक केवल डी.सी. तथा बड़े पम्पों की श्रेणी में ए.सी. व डी.सी. दोनों तरह के पम्प मान्य होंगे. सोलर पम्प की उपयोगिता उपरांत , सोलर पैनलों से उत्पादित ऊर्जा के वैकल्पिक उपयोग हेतु नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय , भारत सरकार के दिशा- निर्देश एवं तकनीकी मापदण्ड अनुसार यूनिवर्सल सोलर पम्प कन्ट्रोलर ( यू.एस.पी.सी. ) के उपयोग का विकल्प कृषकों को दिया जाएगा.

योजना का क्रियान्वयन :-

(6)

(i) संस्थागत व्यवस्था. ( क) योजना क्रियान्वयन के लिए आवश्यक राज्यांश के लिए उपलब्ध बजट आवंटन के उपरांत शेष आवश्यकता हेतु मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड द्वारा FRBM के मापदण्डों तथा ऋण संवहनीयता ( Debt Sustainability ) के अधीन रहते हुए सॉफ्ट ऋण लिया जाएगा, जिसकी प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा आगामी वर्षों के बजट आवंटन के माध्यम से की जाएगी.

जिला स्तर पर योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा एवं परामर्श हेतु निम्न समिति का गठन किया जाता है:-

(ख)

* जिला कलेक्टर

मुख्य कार्यपालन अधिकारी , जिला पंचायत

उप संचालक, कृषि

***

प्रबन्धक, जिला सहकारी बैंक

* सहायक संचालक, उद्यानिकी

* अधीक्षण यंत्री, मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कम्पनी

* जिला अक्षय ऊर्जा अधिकारी , मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड ( सदस्य सचिव) .

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 4 फरवरी 2020

(ii) मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम के वेब पोर्टल पर सोलर पम्प के आवेदन का प्रारूप उपलब्ध होगा. हितग्राही द्वारा वेब पोर्टल पर ऑनलाईन आवेदन कर निम्न जानकारी अंकित करनी होगी:-

(क) हितग्राही का नाम, पता, आधार नम्बर तथा मोबाईल क्रमांक ( यदि हो).

(ख) भू- स्वामित्व संबंधी दस्तावेज का विवरण ( खसरा नंबर, ग्राम , आर.आई. सर्कल, तहसील एवं जिला ) .

(ग) उस खसरे/खसरे बटांकन पर सिंचाई का वर्तमान स्रोत.

(घ) उस खसरे/खसरे बटांकन पर कृषि हेतु विद्युत कनेक्शन है या नहीं.

(ङ) इस आशय की घोषणा कि शासकीय योजनान्तर्गत कृषक को सोलर पम्प का लाभ इस शर्त पर दिया जाएगा कि कृषक की कृषि भूमि के उस खसरे/ खसरे बटांकन पर भविष्य में विद्युत पम्प लगाए जाने पर उसको विद्युत प्रदाय पर कोई अनुदान देय नहीं होगा. कृषक द्वारा यह स्वप्रमाणीकरण भी दिया जाएगा कि वर्तमान में कृषक के उस खसरे/ खसरे बटांकन की भूमि पर विद्युत पम्प संचालित/ संयोजित नहीं है. तथापि, यदि सम्बन्धित कृषक उक्त विद्युत पम्प का कनेक्शन विच्छेद करवा लेता है अथवा उस पर प्राप्त अनुदान छोड़ देता है, तब उसे सोलर पम्प पर अनुदान दिया जा सकता है.

लक्षित लाभार्थी. ( एक ) योजना के लिए राज्य के सभी कृषक पात्र होंगे.

(iii)

एक निश्चित समय - सीमा के भीतर प्राप्त ऑनलाईन आवेदनों का निष्पादन निम्नानुसार किया जाएगा:-

(दो)

(क) यदि किसी जिले/ब्लॉक में प्राप्त आवेदनों की संख्या, उस जिले/ब्लॉक के लिए आवंटित लक्ष्य से कम है, तो सभी आवेदकों को ( पात्र होने पर) सोलर पम्प स्थापना हेतु कार्यवाही की जाएगी .

(ख) यदि आवेदनों की संख्या आवंटित संख्या से अधिक है, तो हितग्राहियों का चयन पात्र आवेदकों में से कण्डिका 6 ( iii ) ( तीन ) में दर्शित प्राथमिकता क्रम के अनुरूप किया जाएगा.

(तीन ) यह योजना प्राथमिकता पर प्रदेश के उन दूर - दराज के क्षेत्रों में क्रियान्वित की जाएगी , जहाँ विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा विद्युत अधोसंरचना का विकास नहीं किया जा सका है और कृषि पम्पों हेतु स्थाई विद्युत कनेक्शन नहीं है. योजना में निम्न श्रेणियों के हितग्राहियों को प्राथमिकता दी जाएगी:-

(क) ऐसे टोले/वन क्षेत्र या अन्य स्थल जो अविद्युतीकृत हैं.

(ख) ऐसे विद्युतीकृत ग्राम जिसमें प्रश्नाधीन स्थल विद्युत वितरण कम्पनियों की विद्युत लाईन से दूर स्थित है.

(ग) उन क्षेत्रों में भी सोलर पम्प लगाने पर जोर दिया जाएगा, जहाँ विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा अत्याधिक वाणिज्यिक हानि के कारण ट्रान्सफार्मर हटा लिए गए हैं व परिणामतः क्षेत्र के किसान असंयोजित हैं.

(घ) नदी या बाँध के समीप ऐसे स्थान जहाँ पानी की पर्याप्त उपलब्धता हो, एवं फसलों के चयन के कारण जहाँ वाटर पंपिंग की आवश्यकता अधिक रहती हो ( जैसे बुरहानपुर का केला क्षेत्र ) , जिसके कारण कृषकों द्वारा बिजली की वास्तविक खपत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित यूनिट प्रति एच.पी. से अधिक होती है.

(ङ) यह योजना राज्य के उन जिलों में भी क्रियान्वित की जाना प्रस्तावित है, जहाँ विद्युत वितरण कम्पनियों की वाणिज्यिक हानि काफी अधिक है .

(iv) शासकीय योजनान्तर्गत कृषक को सोलर पम्प का लाभ इस शर्त पर दिया जाएगा कि कृषक के उस खसरे पर भविष्य में विद्युत पम्प लगाए जाने पर उसको विद्युत प्रदाय पर कोई अनुदान देय नहीं होगा , साथ ही कृषक के उस खसरे/ खसरे बटांकन पर विद्युत पम्प संचालित /संयोजित नहीं है. तथापि, यदि सम्बन्धित कृषक उक्त विद्युत पम्प का कनेक्शन विच्छेद करवा लेता है अथवा उस पर प्राप्त अनुदान छोड़ देता है, तब उसे सोलर पम्प पर अनुदान दिया जा सकता है .

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(v) विद्युत पम्प व सोलर पम्प के हितग्राहियों के आधार नम्बर एवं पम्प जिस खसरे/ खसरे बटांकन में स्थापित हैं, उसकी जानकारी क्रमशः ऊर्जा विभाग और नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा संधारित की जाएगी और एक दूसरे से साझा की जाएगी , ताकि एक व्यक्ति के खसरे/खसरे बटांकन के लिए दोहरा अनुदान न मिले.

(vi) कृषक अंश की राशि मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम के कार्यालय में कृषकों द्वारा जमा कराई जाएगी. तत्पश्चात् यह सुनिश्चित होने पर कि कृषक द्वारा अंश की राशि जमा कर दी गई है, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा सोलर पम्प के लिए आदेश प्रदत्त कर क्रय एवं स्थापना प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी.

(7) शेष ऊर्जा के वैकल्पिक उपयोग. सोलर पम्पों के सोलर पैनलों से वर्ष के लगभग 330 दिन व औसतन 8 घंटे प्रतिदिन ऊर्जा का उत्पादन होता है , जबकि कृषि पम्पिंग हेतु आवश्यकता मात्र लगभग 150 दिन ही होती है. अतः शेष ऊर्जा के वैकल्पिक ऊर्जा उपयोगों, जैसे- चाफ कटर, आटा चक्की , कोल्ड स्टोरेज, ड्रायर, बैटरी चार्जर, आदि, हेतु यूनिवर्सल सोलर पम्प कन्ट्रोलर ( यू.एस.पी.सी. ) को बढ़ावा दिया जाएगा.

(8) नोडल एजेन्सी. - योजना के क्रियान्वयन के लिए तकनीकी मापदण्डों का निर्धारण , प्रदायकर्ता इकाईयों का चयन, इकाईयों द्वारा संयंत्र स्थापना का कार्य एवं भुगतान का दायित्व नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अधीन मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड को सौंपा जाता है. सोलर पम्प की स्थापना के साथ ड्रिप/ स्प्रिंकलर सिस्टम की स्थापना व उपलब्ध अनुदान को जोड़ने के संबंध में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग व उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा प्राथमिकता देते हुए कार्यवाही की जाएगी.

( 9) प्रत्येक सोलर पम्प के साथ एक बोर्ड लगाया जाएगा, जिसमें योजना का नाम व उसमें दिए गए अनुदान का उल्लेख होगा.

(10) सोलर पम्प के लिए राज्य अनुदान गौशाला में सोलर पम्प लगाने पर भी दिया जाएगा.

(11 ) पूर्व में प्रचलित " मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना " से विस्थापन हेतु.- ऐसे समस्त हितग्राही, जिन्होंने इस नीति के अधिसूचित किए जाने से पूर्व तत्समय प्रचलित " मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना " के अंतर्गत सोलर पम्प स्थापना हेतु पंजीकरण किया हो, वे निर्धारित शर्तें पूरी करने पर योजना का लाभ प्राथमिकता से ले सकेंगे.

(12) यह नीति, प्रशासकीय विभाग को इस नीति के प्रावधानों के बारे में स्पष्टीकरण और/ या व्याख्या प्रदान करने हेतु आदेश जारी करने हेतु अधिकृत करती है.

योजना अवधि.- यह योजना मार्च 2024 तक लागू रहेगी. इस दौरान कुल दो लाख सोलर पम्पों की स्थापना की जाएगी .

(13)

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री , मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2020 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 04 February 2020. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2020-02-04.43.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2020-02-04.43.Extraordinary.