Servants of Knowledge
Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

राज्‍यपाल महोदय स्‍वर्गीय श्री लालजी टंडन, को विन्रम श्रृद्धांजलि एवं शोक प्रस्‍ताव-दिनांक 21-07-2020...

Published 10 August 2020

Department
सामान्‍य प्रशासन
Type
Extraordinary
Gazette no.
254
Identifier
in.gazette.madhya.2020-08-10.254.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

इसे वेबसाईट www.govtpressmp.nic.in से भी डाउन लोड किया जा सकता है.

ध्य प्रदेश शासन

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

भोपाल , सोमवार, दिनांक 10 अगस्त 2020- श्रावण 19 , शक 1942

क्रमांक 254]

सामान्य प्रशासन विभाग

मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल

भोपाल , दिनांक 10 अगस्त 2020 क्रमांक एफ 8-5-2020-1-4

मध्यप्रदेश के राज्यपाल महोदय स्वर्गीय श्री लालजी टंडन को विनम्र श्रृद्धांजलि एवं

शोक प्रस्ताव- दिनांक 21-07-2020

आज सुबह प्रदेश के राज्यपाल श्रद्धेय श्री लालजी टंडन के अवसान का दुःखद समाचार मिला. वे जीवनभर राष्ट्र सेवा में संलग्न रहे. उनका योगदान सदैव याद किया जायेगा.

माननीय लाल जी टंडन सार्वजनिक जीवन में शुचिता के प्रतीक थे. मध्यप्रदेश में राज्यपाल के रूप में उन्होंने हमेशा जनहित में मार्गदर्शन और प्रेरणा दी. उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश में उनके सुझाव नवाचार को हम सबने देखा है . राजनीति में आपसी सौहार्द और संबंधों को हमेशा उन्होंने वरीयता दी . हमेशा उनका सोच यही था कि राजनीति सेवा का माध्यम है. दल कोई भी हो लेकिन सभी को मिलजुल कर राष्ट्र की सेवा करना चाहिए.

12अप्रैल 1935 को जन्में श्री लाल जी टंडन ने सात दशकों की सुदीर्घ समाज सेवा का सार्वजनिक जीवन बड़ी जीवंतता से जीया. उन्होंने समाज के सभी वर्गों से गहरा तादात्म्य स्थापित किया . सबको साथ लेकर चलने और अजात शत्रु रहकर समाजहित में कार्य करने की अटूट आत्मशक्ति उनके व्यक्त्वि में समाहित थी . निरंतर क्रियाशील रहने के कारण ही जन कल्याणकारी कार्यों की बड़ी लम्बी श्रृखंला उनके खाते में है. वे उन चंद जन नेताओं में रहे जिन्होंने राष्ट्र सेवा और नैतिक मूल्यों की साधना राजनीति के माध्यम से की और अन्त्योदय की भारतीय अवधारणा को साकार किया.

सार्वजनिक जीवन की ऐसी उदात्त, व्यापक और तपी हुई पृष्ठभूमि के साथ विधान परिषद में जब वर्ष 1978 में टंडन जी पहुंचे थे तो वहाँ भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी और संसदीय मर्यादाओं को नयी उँचाइयों दी. उत्तरप्रदेश विधान परिषद के दो बार सदस्य रहने के अलावा उन्होंने वहाँ नेता सदन की भी भूमिका निभायी. विधान सभा के लिए तीन बार चुने गये. वहाँ नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में उन्होंने बताया कि विरोध के स्वर कैसे होने चाहिए और शालीन रहकर भी सरकार को जन- आवाज सुनने के लिए किस प्रकार बाध्य किया जा सकता है.

507 508

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2020

उत्तरप्रदेश के वरिष्ठ मंत्री के रूप में तो टंडन जी का हर कदम प्रगति की एक नयी दास्तान बनता चला गया और नये- नये कीर्तिमान रचे जाने लगे . पांच बार मंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने के साथ उन्होंने उर्जा, आवास , नगर विकास, जल संसाधन जैसे भारी भरकम विभाग संभाले. अपने प्रशासनिक कौशल , दूरदृष्टि और दृढसंकल्प से टंडन जी ने उत्तरप्रदेश के करोड़ों नागरिकों को सीधा लाभ पहुंचाया. इन विभागों की दशा और दिशा बदल दी.

आवास के साथ एक फलदार वृक्ष और एक दुधारू पशु देने की योजना टंडन जी की बहुआयामी सोच का परिणाम थी. उन्होंने गरीबी उन्मूलन के लिए बड़े पैमाने पर जमीनी कार्य किये. सामुदायिक केन्द्र बने , रैन बसेरे बने, मलिन बस्तियों का कालाकल्प हुआ. मथुरा - वृंदावन की खारे पानी की बड़ी समस्या का समाधान हुआ.

लोक-कल्याण की प्रवृत्ति के चलते उन्होंने ऐतिहासिक कार्य किये . हरिद्वार में हरि की पैडी पर पॉच किलोमीटर लंबा घाट जनसहयोग से बनवाना उनकी विलक्षण सोच का नतीजा था . हरिद्वार में कुंभ के लिए इतनी मूलभूत सुविधाओं का विकास उन्होंने करा दिया कि अब वहाँ कुंभ के आयोजन में बहुत कुछ नया नहीं करना पड़ता है. अयोध्या मामलों के प्रभारी के रूप में श्रीराम जन्मभूमि न्यास को 42 एकड़ जमीन सौंपने का काम जिस तत्परता और संकल्पबद्धता से टंडन जी ने किया, उसकी दूसरी मिसाल नहीं मिलती.

टंडन जी के जीवन में असंभव को संभव बनाने का सिलसिला कभी थमा नहीं. वर्ष 2003 में उनके द्वारा एक साथ 1001 योजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास विश्व रिकार्ड के रूप में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्डस में दर्ज किया गया.

लाल जी टंडन जी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि राजनेता बनने पर भी उन्होंने समाजसेवक के अपने रूप को बनाये रखा. इसीलिए उन्हें साम्प्रदायिक एकता के प्रतीक और मानवता के लाडले सपूत के रूप में सदैव देखा गया. लखनऊ में होली के शालीन जुलूस की प्राचीन परम्परा को टंडन जी ने पुनर्जीवित किया था. सार्वजनिक कवि सम्मेलन, मुशायरे की परम्परायें भी कायम की और उसमें जीवंतता से हमेशा मौजूद रहे. जयप्रकाश नारायण के समग्र क्रांति आंदोलन की लखनऊ में कमान संभाली. इमरजेंसी में जेल गये, भारी प्रताड़ना सही. ओजस्वी वक्ता के रूप में अपनी पहचान बनायी.

सर्वप्रिय होना श्री टंडन की सबसे बड़ी पूंजी थी इस के बल पर वर्ष 2009 में टंडन जी लखनऊ से सांसद बने और अटल जी की विरासत को विस्तार दिया . पंडित दीनदयाल उपाध्याय और लोहिया जी जैसे प्रखर चिंतक, भारत रत्न नाना जी देशमुख , अटल बिहारी वाजपेयी और जयप्रकाश नारायण जैसे महान नेताओं से टंडन जी के अत्यंत निकट के पारिवारिक संबंध रहे . कर्मयोगी टंडन जी ने 29 जुलाई 2019 से अब तक मध्यप्रदेश के राज्यपाल के रूप में अपनी सम्पूर्ण सामर्थ्य- शक्ति को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कायाकल्प के लिए लगा दिया था.

आज श्री टंडन हमारे बीच नहीं रहे हैं , मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल प्रदेश के राज्यपाल श्री लाल जी टंडन के दुखद निधन पर गहरा शोक प्रकट करता है तथा शोक संतप्त परिवार को अपनी तथा संपूर्ण राज्य की ओर से हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करता है. मध्यप्रदेश के राज्यपाल के रूप में उनके कार्यों को मध्यप्रदेश की जनता सदैव स्मरण रखेगी . कृतज्ञ मध्यप्रदेश का श्री लाल जी टंडन, माननीय राज्यपाल को शत्-शत् नमन.

डी. के. नागेन्द्र, उपसचिव.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2020.

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 10 August 2020. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2020-08-10.254.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2020-08-10.254.Extraordinary.