ध्य प्रदेश शासन
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सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
भोपाल , सोमवार , दिनांक 21 सितम्बर 2020- भाद्र 30 , शक 1942
क्रमांक 315]
विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश
भोपाल, दिनांक 21 सितम्बर 2020
क्र. 9106 - मप्रविस- 15- विधान-2020.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम 64 के उपबंधों के पालन में, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) विधेयक, 2020 ( क्रमांक 13 सन् 2020 ) जो विधान सभा में दिनांक 21 सितम्बर, 2020 को पुरःस्थापित हुआ है . जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव,
मध्यप्रदेश विधान सभा .
629 630
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 21 सितम्बर 2020
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक १३ सन् २०२०
मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) विधेयक , २०२०
विषय-सूची.
खण्ड:
१. संक्षिप्त नाम तथा प्रारंभ
२. धारा २ का संशोधन.
३. धारा १० का संशोधन.
४. धारा १६ का संशोधन.
५. धारा २ ९ का संशोधन.
६. धारा ३० का संशोधन.
७. धारा ३१ का संशोधन.
८. धारा ५१ का संशोधन.
९. धारा १२२ का संशोधन.
१०. धारा १३२ का संशोधन.
११. धारा १४० का संशोधन.
१२. धारा १६८क का अंतःस्थापन.
१३. धारा १७२ का संशोधन .
१४. अनुसूची २ का संशोधन.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 21 सितम्बर 2020
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मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक १३ सन् २०२०
मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) विधेयक , २०२०
मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम , २०१७ को और संशोधित करने हेतु विधेयक
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान- मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) अधिनियम, २०२० है.
संक्षिप्त नाम तथा प्रारंभ ( २ ) इस अधिनियम में यथा उपबंधित के सिवाय ,-
(क) इस अधिनियम का खण्ड १२ , ३१ मार्च २०२० से प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा;
(ख) अन्य खण्ड ऐसी तारीख से प्रवृत्त होंगे, जैसा कि राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करेः
परंतु इस अधिनियम के भिन्न- भिन्न उपबंधों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी.
धारा २ का संशोधन.
२. मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ ( क्रमांक १ ९ सन् २०१७ ) ( जो इसमें इसके पश्चात्मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है) की धारा २ में, खण्ड ( ११४ ) में, उपखण्ड ( ग ) और ( घ ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किए जाएं, अर्थात्ः-
" ( ग ) दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव;
(घ) लद्दाख;".
धारा १० का संशोधन.
३. मूल अधिनियम की धारा १० में, उपधारा ( २ ) में, खण्ड ( ख ) , ( ग ) और ( घ ) में, शब्द " माल का " के पश्चात् शब्द" या सेवा का " अंतःस्थापित किए जाएं.
४. मूल अधिनियम की धारा १६ में, उपधारा ( ४) में, शब्द " से संबंधित बीजक " का लोप किया जाए.
धारा १६ का संशोधन.
धारा २९ का संशोधन.
५. मूल अधिनियम की धारा २ ९ में, उपधारा ( १ ) में, खण्ड ( ग ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्:-
" ( ग) कराधेय व्यक्ति धारा २२ या धारा २४ के अधीन इससे अधिक रजिस्ट्रेशन के लिए दायी नहीं है या धारा २५ की उपधारा ( ३ ) के अधीन किए गए स्वेच्छिक रजिस्ट्रेशन से बाहर आने का आशय रखता हो. ".
धारा ३० का संशोधन.
६. मूल अधिनियम की धारा ३० में, उपधारा ( १ ) के पश्चात्, पूर्ण विराम के स्थान पर कोलन स्थापित किया जाए और तत्पश्चात्, निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाए:-
" परन्तु यह कि ऐसी कालावधि दर्शाए गए पर्याप्त कारण के आधार पर और कारण लेखबद्ध कर बढ़ाई जा सकेगी ,-
(क) संयुक्त आयुक्त द्वारा तीस दिन से अनधिक की कालावधि के लिए;
(ख) अतिरिक्त आयुक्त या विशेष आयुक्त द्वारा खण्ड ( क) में विनिर्दिष्ट कालावधि से अधिक , तीस दिन से अनधिक की और कालावधि के लिए. ".
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 21 सितम्बर 2020
630( 2)
संशोधन.
धारा ३१ का ७. मूल अधिनियम की धारा ३१ में, उपधारा ( २ ) में , परन्तुक के स्थान पर, निम्नलिखित परन्तुक स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" परन्तु सरकार, परिषद् की सिफारिश पर, अधिसूचना द्वारा,-
( क) सेवाओं या पूर्तियों के प्रवर्गों को विनिर्दिष्ट कर सकेगी जिनके संबंध में ऐसे समय के भीतर तथा ऐसी रीति में , जैसी कि विहित की जाए, कर बीजक जारी किया जाएगा;
(ख) उसमें उल्लिखित शर्तों के अध्यधीन रहते हुए, सेवाओं के प्रवर्गों को विनिर्दिष्ट कर सकेगी , जिनके संबंध में,-
पूर्ति के संबंध में जारी किया गया कोई अन्य दस्तावेज कर बीजक समझा जाएगा; या (एक)
कर बीजक जारी नहीं किया जा सकेगा.
(दो)
धारा ५१ का
८. मूल अधिनियम की धारा ५१ में, -
संशोधन.
(क) उपधारा ( ३ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा जोड़ी जाए, अर्थात्ः-
" ( ३ ) स्रोत पर कर कटौत्री का प्रमाणपत्र ऐसे प्ररूप में तथा ऐसी रीति में जारी किया जाएगा , जैसा कि विहित किया जाए. " ;
(ख) उपधारा ( ४ ) का लोप किया जाए.
धारा १२२ का
संशोधन.
९ . मूल अधिनियम की धारा १२२ में , उपधारा ( १ ) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्:-
" ( १क ) कोई व्यक्ति जो उपधारा ( १ ) के खण्ड ( एक ) , ( दो ) , ( सात ) या ( नौ ) के अधीन आने वाले संव्यवहार का लाभ प्रतिधारित करता है और जिसके कारण उस समय जब ऐसा संव्यवहार किया गया , कर अपबंचन अथवा उपभोग किए गए कर प्रत्यय के समतुल्य राशि की शास्ति का दायी होगा. " .
धारा १३२ का
१०. मूल अधिनियम की धारा १३२ में , उपधारा ( १ ) में, -
संशोधन.
( एक) शब्द " जो निम्नलिखित में से किसी अपराध को कारित करता है " के स्थान पर, शब्द " जो निम्नलिखित में से किसी अपराध को कारित करता है अथवा कारित करवाता है और उससे उत्पन्न होने वाले लाभों को प्रतिधारित करता है " स्थापित किए जाएं;
(दो) खण्ड ( ग ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" ( ग ) खण्ड ( ख ) में निर्दिष्ट बीजक या बिल का प्रयोग करते हुए इनपुट कर प्रत्यय को प्राप्त करता है या बिना किसी कर बीजक या बिल के कपट पूर्वक इनपुट कर प्रत्यय को प्राप्त करता है ;";
(तीन) खण्ड (ङ) में, शब्द " कपट से इनपुट कर प्रत्यय की प्राप्ति" का लोप किया जाए.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 21 सितम्बर 2020
630(3) ११. मूल अधिनियम की धारा १४० में, निम्नलिखित संशोधन १ जुलाई, २०१७ से प्रभावी हुए समझे जाएंगे, - धारा १४० का संशोधन.
(एक) उपधारा ( १ ) में, शब्द " विद्यमान विधि के अधीन " के पश्चात्, शब्द " ऐसे समय के भीतर
और " अन्तःस्थापित किए जाएं.
(दो) उपधारा ( २ ) में, शब्द " नियत दिन के तत्काल पूर्ववर्ती दिन " के पश्चात्, शब्द " ऐसे समय के भीतर और " अन्तःस्थापित किए जाएं.
(तीन) उपधारा ( ३ ) में, शब्द " नियत दिन को " के पश्चात्, शब्द " ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीति में जैसा कि विहित किया जाए " अन्तःस्थापित किए जाएं.
(चार) उपधारा ( ५ ) में, शब्द " विद्यमान विधि के अधीन " के पश्चात् शब्द " ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीति में जैसा कि विहत किया जाए " अन्तःस्थापित किए जाएं.
(पांच) उपधारा ( ६ ) में, शब्द " नियत दिन को " , पश्चात्, शब्द " ऐसे समय के भीतर और ऐसी रीति में जैसा कि विहित किया जाए " अन्तःस्थापित किए जाएं.
१२. मूल अधिनियम की धारा १६८ के पश्चात्, निम्नलिखित धारा अन्तःस्थापित की जाए, अर्थात्ः-
धारा १६८ क का संशोधन.
" १६८ ( १ ) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , परिषद् की अनुशंसाओं पर, अधिसूचना द्वारा, उन कार्रवाइयों के संबंध में जो अप्रत्याशित घटनाओं के कारण पूरी नहीं की जा सकती हैं या अनुपालन नहीं किया जा सकता है , सरकार इस अधिनियम के अधीन विनिर्दिष्ट या
विहित या अधिसूचित समय सीमा को बढ़ा सकेगी.
(२ ) उपधारा ( १ ) के अधीन अधिसूचना जारी करने की शक्ति में, उन अधिसूचनाओं को भूतलक्षी प्रभाव देने की शक्ति भी सम्मिलित होगी जो इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के दिनांक से पूर्व की नहीं होगी.
स्पष्टीकरण
.- इस धारा के प्रयोजन के लिए अभिव्यक्ति " अपरिहार्य घटना " से अभिप्रेत है, युद्ध, महामारी, बाढ़ , सूखा , आग , ज्वालामुखी, भूकंप या अन्य प्रकृति द्वारा या अन्यथा कारित कोई आपदा जिससे इस अधिनियम के किन्हीं भी उपबंधों का क्रियान्वयन प्रभावित होता हो.
धारा १७२ का संशोधन.
१३. मूल अधिनियम की धारा १७२ में, उपधारा ( १ ) में, परन्तुक में, शब्द " तीन वर्ष " के स्थान पर, शब्द " पांच वर्ष " स्थापित किएजाएं .
अनुसूची २ का संशोधन.
१४. मूल अधिनियम की अनुसूची दो में, पैराग्राफ ४ में , निम्नलिखित संशोधन किए जाएं जो १ जुलाई २०१७ से प्रभावशील माने जाएंगे, -
(एक) मद (क) में, शब्द " जो विचारणीय है या नहीं " का लोप किया जाए.
(दो) मद ( ख ) में, शब्द " चाहे वह किसी प्रतिफल के लिए हो या नहीं " का लोप किया जाए.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 21 सितम्बर 2020
630(4)
उद्देश्यों और कारणों का कथन
करदाताओं की सुगमता के लिए समझौता, आगाम कर उधार, पंजीयन निरस्तीकरण, पंजीयन बहाली बिल स्रोत से कम किए गए कर और मध्यवर्ती उधार तथा फर्जी संव्यहारों के हित को दंडित करने की सुनिश्चितता के लिए भी आगामी अवधि के लिए विनिश्चय के अभिलेख जारी करने के लिए माल एवं सेवा कर परिषद् को सशक्त करने के अनुक्रम में मध्यप्रदेश माल एवं सेवा कर अधिनियम, २०१७ ( क्रमांक १ ९ सन् २०१७ ) को संशोधित करना आवश्यक हो गया है .
२. विश्व के अनेक देशों जिसमें भारत सम्मिलित है , कोविड-१ ९ महामारी के फैलाव को दृष्टि में रखते हुए, जिससे जनता के जीवन को असीम नुकसान हो रहा है , यह आवश्यक हो गया है कि मध्यप्रदेश माल एवं सेवा कर अधिनियम , २०१७ में नई धारा १६८ - ए के अंतःस्थापन के रूप में विभिन्न उपबंधों की समय सीमा पर विचार किया जाए.
३. मध्यप्रदेश माल तथा सेवा कर अधिनियम, २०१७ के संशोधन के कथन निम्नानुसार हैं,-
(क) केन्द्र शासित प्रदेश के संवैधानिक परिवर्तन और नवीन केन्द्र शासित लद्दाख के गठन के कारण केन्द्र शासित प्रदेश की परिभाषा में परिवर्तन करना;
(
ख) करदाताओं को सुकर बनाने के लिए सेवा प्रदाताओं को कुछ सीमा तक प्रशमन सुविधा उपलब्ध कराना;
(ग) आगामी वित्तीय वर्ष के सितम्बर में विवरणी के देय दिनांक से पूर्व वित्तीय वर्षों से संबंधित डेबिट नोट्स पर आगत कर क्रेडिट का दावों की सुविधा उपलब्ध कराना;
(घ) उन करदाताओं को, जिन्होंने स्वेच्छया रजिस्ट्रीकरण कराया है , को रजिस्ट्रीकरण या रद्द करने के लिए आवेदन दायर करने की सुविधा उपलब्ध कराना;
(ङ) रजिस्ट्रीकरण विखण्डित करने के लिए आवेदन दाखिल करने के लिए अतिरिक्त कालावधि उपलब्ध कराना;
(च) कर इन्वाइस में छूट उपलब्ध कराना;
(छ) कर कटौती प्रमाण- पत्र जारी करने की रीति अवधारित करना;
(ज) उन व्यक्तियों को दण्ड सुनिश्चित करना जो कतिपय अपराध के अधीन आने वाले संव्यवहारों के लाभ पहुंचाते हैं या रोकते हैं ;
(झ) इन्वाइस या बिल के बिना आगत कर क्रेडिट प्राप्त करने के प्रकरणों में दण्ड सुनिश्चित करना;
(ञ) संक्रमण कालीन आगत कर क्रेडिट का दावा करने का समय और रीति अवधारित करना;
(ट) कोविड-१ ९ महामारी के प्रसार के कारण विभिन्न उपबंधों की समय सीमा में विस्तार करना;
(ठ) आगामी २ वर्षों के लिए कठिनाई को दूर करने के लिए आदेश जारी करने के लिए माल तथा सेवा कर परिषद् को सशक्त करना.
४. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.
भोपाल :
जगदीश देवड़ा
भारसाधक सदस्य.
तारीख १६ सितम्बर, २०२० .
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 21 सितम्बर 2020
630(5) प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में का व्याख्यात्मक ज्ञापन
प्रस्तावित विधेयक के जिन खण्डों द्वारा विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन किया जा रहा है , उनका विवरण निम्नानुसार है:-
खण्ड- १- अधिनियम के विभिन्न उपबंधों को, विभिन्न तारीखों को अधिसूचना जारी कर के लागू करने;
खण्ड- ७ - जीएसटी परिषद की अनुशंसा पर कुछ विशेष सेवाओं के प्रदाय के संबंध में;
खण्ड- ८- करदाता को टी.डी.एस. प्रमाण- पत्र जारी करने हेतु प्रारुप तथा प्रक्रिया विहित किये जाने;
खण्ड- ११- करदाताओं द्वारा ट्रांजिशनल क्रेडिट का दावा करने हेतु समय तथा प्रक्रिया निर्धारित करने; तथा खण्ड- १२- अप्रत्याशित स्थितियां आने पर विभिन्न अनुपालनाएं पूर्ण करने के लिए समय - सीमा का विस्तार किये जाने;
के संबंध में नियम बनाए जाएंगे , जो सामान्य स्वरूप के होंगे.
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2020.