ध्य प्रदेश शासन
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सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
( असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 316]
भोपाल , सोमवार , दिनांक 21 सितम्बर 2020- भाद्र 30, शक 1942
विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश
भोपाल, दिनांक 21 सितम्बर 2020
क्र. 9109 - मप्रविस - 15- विधान- 2020.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम 64 के उपबंधों के पालन में, मध्यप्रदेश वित्त विधेयक, 2020 ( क्रमांक 17 सन् 2020 ) जो विधान सभा में दिनांक 21 सितम्बर 2020 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 21 सितम्बर 2020
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक १७ सन् २०२०
मध्यप्रदेश वित्त विधेयक, २०२०
मध्यप्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवम् बजट प्रबंधन अधिनियम , २००५ तथा भारतीय स्टाम्प अधिनियम, १८ ९९ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.
हो:- भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान- मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित १. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश वित्त अधिनियम, २०२० है.
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.
( २ ) यह मध्यप्रदेश राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा.
२. मध्यप्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम, २००५ ( क्रमांक १८ सन् २००५) में, धारा ९ में, उपधारा ( ३ ) के पश्चात्, निम्नलिखित नई उपधाराएं जोड़ी जाएं, अर्थात् : -
अधिनियम क्रमांक १८ सन् २००५ की धारा ९ का संशोधन.
" (४) उपधारा ( २ ) में अन्तर्विष्ट किसी सीमा या लक्ष्य के होते हुए भी, राज्य सरकार ३१ मार्च, २०२० को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए, रुपए ४४४३.०० करोड़ का अतिरिक्त ऋण प्राप्त कर सकेगी , जो कि उपधारा ( २ ) में अतंविष्ट किसी सीमा के लक्ष्य के विरुद्ध संगणित नहीं किया जाएगा.
(५) उपधारा ( २ ) में अन्तर्विष्ट किसी सीमा या लक्ष्य के होते हुए भी राज्य सरकार, ३१ मार्च, २०२१ को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के लिये केन्द्र सरकार द्वारा यथा अवधारित अतिरिक्त ऋण ले सकेगी जो कि उपधारा ( २ ) में अन्तर्विष्ट किसी सीमा या लक्ष्य के विरुद्ध संगठित नहीं किया जाएगा . ".
३. मध्यप्रदेश राज्य को लागू हुए रूप में भारतीय स्टाम्प अधिनियम, १८ ९९ ( १८ ९९ का २ ) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) को, इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रीति में संशोधित किया जाए.
मध्यप्रदेश राज्य को लागू हुए रूप में केन्द्रीय अधिनियम, १८ ९९ का संख्यांक २ का संशोधन.
४. मूल अधिनियम की अनुसूची १ - क में, -
( १ ) अनुच्छेद ६ में, खण्ड ( छ ख ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात् : - अनुसूची १ -क का संशोधन.
" (छ ख ) कोई संकर्म संविदा, जिसमें संविदा के सम्यक् अनुपालन अथवा किसी दायित्व के सम्यक् निर्वहन को प्रतिभूत करने वाला कोई करार अंतर्विष्ट हो और जो कोई विकास अथवा निर्माण करार अथवा प्रतिभूति बंध पत्र न हो-
पाँच सौ रुपए
(एक) यदि संविदा मूल्य पचास लाख रुपए तक है.
पांच लाख रुपए की अधिकतम (दो) यदि संविदा मूल्य पचास लाख रुपए से अधिक है
सीमा के अध्यधीन रहते हुए
संविदा मूल्य का ०.१ प्रतिशत.".
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 21 सितम्बर 2020
(२ ) अनुच्छेद ३८ में, खण्ड ( ख ) के स्थान पर , निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्:-
उप-
" ( ख ) किसी भी कालावधि का खनन पट्टा, जिसके अंतर्गत अवर- पट्टा या उप- पट्टा तथा पट्टे या पट्टे पर देने का कोई करार या पट्टे का कोई नवीकरण सम्मिलित है-
(एक) मुख्य खनिज के मामले में
ऐसे पट्टे के अधीन देय या परिदेय पूरी रकम का २ प्रतिशत.
(दो) गौण खनिज के मामले में
ऐसे पट्टे के अधीन देय या परिदेय पूरी रकम का १.२५ प्रतिशत. ".
५. ( १ ) मध्यप्रदेश वित्त अध्यादेश, २०२० ( क्रमांक १ सन् २०२० ) एतद्वारा निरसित किया जाता है . निरसन व्यावृत्ति. तथा ( २ ) उक्त अध्यादेश के निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंध के अधीन की गई समझी जाएगी.
उद्देश्यों और कारणों का कथन
वित्तीय वर्ष २०१ ९ -२० के लिये केन्द्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी काफी हद तक घटी है. कई राज्य सरकारें गंभीर वित्तीय दबाव का सामना कर रही थीं. उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए और राज्य सरकारों द्वारा किये गए अनुरोध पर विचार करते हुए, भारत सरकार ने राज्यों को एक बार विशेष व्यवस्था के रूप में रुपये ५८,८४३.०० करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि उधार लेने की अनुज्ञा प्रदान की थी. इस व्यवस्था के अंतर्गत मध्यप्रदेश सरकार रुपये ४,४४३.०० करोड़ उधार ले सकती थी . यह अतिरिक्त उधार केवल २०१ ९ -२० में उपयोग किया जाना था और आगामी वर्षों में कोई दावा या मांग नहीं की जानी थी. इस उधार का लाभ लेने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश वित्त अध्यादेश , २०२० (क्रमांक १ सन् २०२० ) प्रख्यापित किया गया था.
२. कोविड-१ ९ महामारी ने राज्य सरकारों के संसाधनों पर दबाव बनाया है . राज्य सरकारों को सहायता करने के लिये भारत सरकार ने, राज्य सरकारों के सकल राज्य घरेलू उत्पाद की २ प्रतिशत की अतिरिक्त उधार सीमा की अनुमति दी है जिसका ०.५ प्रतिशत बिना शर्त के और १.५ प्रतिशत कतिपय राज्य स्तरीय सुधारों जैसे एक राष्ट्र एक राशन कार्ड व्यवस्था, व्यापार सुधार करने में आसानी ( इज ऑफ डुइंग विजनेस ) , शहरी स्थानीय निकाय/उपयोगिता सुधारों और ऊर्जा सेक्टर सुधारों के क्रियान्वयन के अध्यधीन है.
३. अतएव, मध्यप्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम, २००५ ( क्रमांक १८ सन् २००५ ) की धारा ९ की उपधारा ( ३ ) के पश्चात् उपधाराएं (४ ) और ( ५ ) जोड़ी जाना प्रस्तावित हैं.
४. मध्यप्रदेश राज्य को लागू हुए रूप में भारतीय स्टाम्प अधिनियम, १८ ९९ ( १८९९ का २ ) की अनुसूची एक- क में निम्नलिखित कारणों से कतिपय संशोधन प्रस्तावित हैं, अर्थात्:-
(क) वर्तमान में अनुसूची एक- क के अनुच्छेद ६ के खण्ड ( छ ख ) के अधीन संकर्म संविदा पर रुपए पच्चीस हजार की अधिकतम सीमा के अध्यधीन रहते हुए विलेख द्वारा प्रतिभूत राशि पर ०.२५ प्रतिशत की दर से स्टाम्प शुल्क प्रभारित किया जाता है. विलेख द्वारा प्रतिभूत राशि के संबंध में संदेहों को दूर करने तथा कर्तव्यों के सुव्यवस्थीकरण के उद्देश्य से यह अनिवार्य है कि प्रतिभूत राशि के ०.२५ प्रतिशत के बजाय संविदा मूल्य का ०.१ प्रतिशत स्टाम्प शुल्क की दर से गणना की जाए. इसके अतिरिक्त , ५० लाख रुपये शुल्क तक संविदा राशि वाली संकर्म संविदा के मामले में, अनुबंध के प्रस्तावित शुल्क के समान अर्थात् पांच सौ रुपए शुल्क प्रभारित किया जाए.
(ख) वर्तमान में खननपट्टे के विलेख पर, ऐसे पट्टे के अधीन देय अथवा प्रदेय संपूर्ण राशि का ०.७५ प्रतिशत स्टाम्प शुल्क प्रभारित किया जाता है. यह प्रस्तावित है कि मुख्य खनिज एवं गौण खनिज की दशा में शुल्क को क्रमशः ०.७५ से २ प्रतिशत तथा ०.७५ से १.२५ प्रतिशत बढ़ाया जाए. अतएव, मध्यप्रदेश राज्य को लागू हुए रूप में भारतीय स्टाम्प अधिनियम, १८ ९९ ( १८ ९९ का २ ) की अनुसूची एक- क के अनुच्छेद ६ तथा अनुच्छेद ३८ को संशोधित किया जाना प्रस्तावित है.
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मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 21 सितम्बर 2020
५. चूंकि मामला अत्यावश्यक था और विधान- मण्डल का सत्र चालू नहीं था, उक्त प्रयोजन के लिए मध्यप्रदेश वित्त अध्यादेश , २०२० (क्रमांक १ सन् २०२० ) प्रख्यापित किया गया था. अब उक्त अध्यादेश के स्थान पर राज्य विधान- मण्डल का अधिनियम लाया जाना प्रस्तावित है और मध्यप्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम , २००५ की धारा ९ की उपधारा ( ४ ) के पश्चात् उपधारा ( ५ ) जोड़ा जाना प्रस्तावित है.
६. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.
भोपाल :
दिनांक : १६ सितम्बर, २०२०.
जगदीश देवड़ा भारसाधक सदस्य.
" संविधान के अनुच्छेद २०७ के अधीन राज्यपाल द्वारा अनुशंसित.".
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
अध्यादेश के संबंध में विवरण
वित्तीय वर्ष २०१ ९ -२० के लिए केन्द्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी काफी हद तक घटी है . कई राज्य सरकारें गंभीर वित्तीय दबाव का सामना कर रही थीं. उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए और राज्य सरकारों द्वारा किये गए अनुरोध पर विचार करते हुए, भारत सरकार ने राज्यों को एक बार विशेष व्यवस्था के रूप में रुपये ५८,८४३.०० करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि उधार लेने की अनुज्ञा प्रदान की थी. इस व्यवस्था के अंतर्गत मध्यप्रदेश सरकार रुपये ४,४४३.०० करोड़ उधार ले सकती थी. यह अतिरिक्त उधार केवल २०१ ९ -२० में उपयोग किया जाना था और आगामी वर्षों में कोई दावा या मांग नहीं की जानी थी. इस उधार का लाभ लेने के उद्देश्य से एवं मध्यप्रदेश राज्य को लागू हुए रूप में भारतीय स्टाम्प अधिनियम , १८ ९९ ( १८९९ का २ ) की अनुसुची एक- क में अनुच्छेद ६ के खण्ड ( छ ख ) के अधीन संकर्म संविदा पर रुपए पच्चीस हजार की अधिकतम सीमा के अध्यधीन रहते हुए विलेख द्वारा प्रतिभूत राशि पर ०.२५ प्रतिशत की दर से स्टाम्प शुल्क प्रभारित किया जाता है. विलेख द्वारा प्रतिभूत राशि के संबंध में संदेहों को दूर करने तथा कर्तव्यों के सुव्यवस्थीकरण के उद्देश्य से यह अनिवार्य है कि प्रतिभूत राशि के ०.२५ प्रतिशत के बजाए संविदा मूल्य का ०.१ प्रतिशत स्टाम्प शुल्क की दर से गणना की जाए. इसके अतिरिक्त, ५० लाख रुपये शुल्क तक संविदा राशि वाली संकर्म संविदा के मामले में , अनुबंध के प्रस्तावित शुल्क के समान अर्थात् पांच सौ रुपए शुल्क प्रभारित किया जाए. वर्तमान में खननपट्टे के विलेख पर , ऐसे पट्टे के अधीन देय अथवा प्रदेय संपूर्ण राशि का ०.७५ प्रतिशत स्टाम्प शुल्क प्रभारित किया जाता है. जिसे मुख्य खनिज एवं गौण खनिज की दशा में शुल्क को क्रमशः ०.७५ से २ प्रतिशत तथा ०.७५ से १.२५ प्रतिशत बढ़ाया जाना आवश्यक था.
चूंकिमामला अत्यावश्यक था तथा विधानसभा का सत्र चालू नहीं था, अतएव मध्यप्रदेश वित्त अध्यादेश , २०२० ( क्रमांक १ सन् २०२० ) इस प्रयोजन के लिये प्रख्यापित किया गया था.
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2020.