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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

मध्‍यप्रदेश अनुसूचित जनजाति ऋण विमुक्ति विधेयक 2020...

Published 21 September 2020

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
317
Identifier
in.gazette.madhya.2020-09-21.317.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
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मध्यप्रदेश शासन

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

( असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 317]

भोपाल, सोमवार , दिनांक 21 सितम्बर 2020- भाद्र 30 , शक 1942

विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश

भोपाल, दिनांक 21 सितम्बर 2020

क्र. 9112- मप्रविस- 15- विधान-2020.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम 64 के उपबंधों के पालन में मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति ऋण विमुक्ति विधेयक, 2020 ( क्रमांक 16 सन् 2020 ) जो विधान सभा में दिनांक 21 सितम्बर 2020 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है .

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

633 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 21 सितम्बर 2020

634

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक १६ सन् २०२०

मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति ऋण विमुक्ति विधेयक, २०२०.

विषय-सूची.

खण्ड:

१. संक्षिप्त नाम , विस्तार और प्रारंभ.

२. परिभाषाएं.

३. परिणाम जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर होंगे .

४. शास्तियां.

५. इस अधिनियम के लागू होने का वर्जन.

६. वे प्राधिकारी जो कि इस अधिनियम के उपबन्धों का क्रियान्वयन करने के लिए विनिर्दिष्ट किये जा सकेंगे .

७. सिविल न्यायालय की अधिकारिता का वर्जन.

८. नियम बनाने की शक्ति.

९. कठिनाइयां दूर करने की शक्ति.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 21 सितम्बर 2020

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मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक १६ सन् २०२०

मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति ऋण विमुक्ति विधेयक , २०२०.

राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में निवासरत मध्यप्रदेश की अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को ऋण- ग्रस्तता से राहत के लिए उपबंध करने हेतु विधेयक.

भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान - मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति ऋण विमुक्ति अधिनियम, २०२० है . संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ.

(२ ) इसका विस्तार संपूर्ण मध्यप्रदेश राज्य पर होगा.

(३ ) यह मध्यप्रदेश राजपत्र में, इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा.

२. ( १ ) इस अधिनियम में , जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

परिभाषाएं.

(क) " सिविल न्यायालय " में सम्मिलित हैं,-

(एक) दिवाला विषयक अधिकारिता का प्रयोग करते हुए कार्य करने वाला कोई न्यायालय;

(दो ) कोई ऐसा न्यायालय , जो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन ( क ) लघुवाद न्यायालय के रूप में गठित किया गया है या (ख ) जिसमें लघुवाद न्यायालय की अधिकारिता विनिहित की गई है;

(तीन ) मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति ऋणि सहायता अधिनियम, १ ९ ६७ ( क्रमांक १२ सन् १ ९ ६७ ) के अधीन स्थापित कोई ऋणि सहायता- न्यायालय;

(ख) " सहकारी सोसाइटी " से अभिप्रेत है, मध्यप्रदेश को- आपरेटिव सोसाइटीज एक्ट, १ ९ ६० ( क्रमांक १७ सन् १ ९ ६१ ) के अधीन रजिस्ट्रीकृत या रजिस्ट्रीकृत समझी गई कोई सोसाइटी;

(ग) " ऋण " में सम्मिलित है , किसी लेनदार को देय समस्त दायित्व जो नगदी में हों या वस्तु के रूप में हों, प्रतिभूत हों या अप्रतिभूत हों और जो किसी सिविल न्यायालय की डिक्री या आदेश के अधीन या अन्यथा संदेय हों तथा १५ अगस्त, २०२० को अस्तित्व में हों चाहे वे शोध्य हो गए हों या शोध्य न हुए हों;

(घ) " अनुसूचित जनजाति का सदस्य " से अभिप्रेत है, ऐसी जनजातियों या जनजाति समुदायों का अथवा जनजातियों या जनजाति समुदायों के भागों या उनमें के समूहों का, जिन्हें कि भारत के संविधान के अनुच्छेद ३४२ के अधीन मध्यप्रदेश राज्य के संबंध में उस रूप में विनिर्दिष्ट किया गया हो, सदस्य;

(ङ) " अनुसूचित क्षेत्र " से अभिप्रेत है, भारत के संविधान की पांचवी अनुसूची के पैरा ६ के अधीन मध्यप्रदेश राज्य के भीतर अनुसूचित क्षेत्र के रूप में घोषित किया गया कोई क्षेत्र;

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 21 सितम्बर 2020

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(२ ) उन शब्दों तथा अभिव्यक्तियों के, जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं किन्तु परिभाषित नहीं की गई हैं और जो मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, १ ९५ ९ ( क्रमांक २० सन् १ ९५९ ) में परिभाषित की गई हैं , वे ही अर्थ होंगे जो उस संहिता में उनके लिए दिए गए हैं.

परिणाम जो इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर होंगे.

३. तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या विधि का बल रखने वाली किसी संविदा या किसी लिखत में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी तथा इस अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित के सिवाय, इस अधिनियम के प्रारंभ होने पर निम्नलिखित परिणाम होंगे , अर्थात्ः-

(क) १५ अगस्त, २०२० तक दिया गया प्रत्येक ऋण , जिसमें ब्याज की रकम , यदि कोई हो, भी सम्मिलित है जो अनुसूचित क्षेत्र में निवासरत अनुसूचित जनजाति के सदस्य द्वारा किसी लेनदार को देय हो, पूर्णतः उन्मोचित हो गया समझा जाएगा;

(ख) अधिकारिता रखने वाला कोई भी सिविल न्यायालय खण्ड ( क ) में विनिर्दिष्ट किसी ऋणी के विरुद्ध कोई भी वाद या कार्यवाही, जो उसके ऋण की वसूली के लिए हो, ग्रहण नहीं करेगा;

(ग) खण्ड ( क ) में विनिर्दिष्ट किये गये किसी ऋणी के विरुद्ध धन की किसी डिक्री के निष्पादन में की समस्त कार्यवाहियां या पुरोबन्ध अथवा विक्रय के लिए किसी प्रारंभिक डिक्री को अंतिम रूप देने संबंधी कार्यवाहियां या विक्रय संबंधी किसी अंतिम डिक्री के निष्पादन में की कार्यवाहियां, जो कि उसके ऋण की वसूली के लिए हों, प्रत्याहृत हो जाएंगी तथा उक्त ऋणी की ऐसी समस्त सम्पत्ति, जो किन्हीं ऐसी कार्यवाहियों में कुर्क की गई हो, तत्काल निर्मुक्त कर दी जाएगी;

(घ) खण्ड ( क) में विनिर्दिष्ट प्रत्येक ऋणी को, जिसे धन की किसी डिक्री के, जो किसी ऋण के संबंध में किसी सिविल न्यायालय द्वारा उसके विरुद्ध पारित की गई हो, निष्पादन में किसी सिविल कारागार में निरुद्ध किया गया हो , तत्काल छोड़ दिया जाएगा;

(ङ) ऋण की वसूली के लिए समस्त वादों तथा कार्यवाहियों का, जो खण्ड ( क) में विनिर्दिष्ट किसी ऋणी के विरुद्ध लंबित हों, उपशमन हो जाएगा;

(च) खण्ड (क ) में विनिर्दिष्ट किसी भी ऋणी द्वारा गिरवी रखी गई प्रत्येक सम्पत्ति ऐसे ऋणी के पक्ष में निर्मुक्त हो जाएगी तथा लेनदार इस बात के लिए आबद्ध होगा कि वह उस ऋणी को वह संपत्ति तत्काल वापस कर दे;

(छ) खण्ड ( क) में विनिर्दिष्ट किसी ऋणी द्वारा किसी लेनदार के पक्ष में निष्पादित किए गये प्रत्येक बंधक का मोचन हो जाएगा तथा बंधक संपत्ति ऐसे ऋणी के पक्ष में निर्मुक्त कर दी जाएगी:

परन्तु जहां कोई वाद या कार्यवाही, उक्त ऋण के प्रत्याभूति - दाता या प्रतिभू को छोड़कर, उक्त ऋणी तथा किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध संयुक्ततः संस्थित की गई हो वहां इस धारा में की कोई भी बात किसी वाद या कार्यवाही के चलाये जाने के संबंध में उस सीमा तक, जहां तक कि वह वाद या कार्यवाही ऐसे अन्य व्यक्ति से संबंधित है , केवल इस आधार पर लागू नहीं होगी कि उसके विरुद्ध कार्यवाही संयुक्ततः की जा रही है.

स्पष्टीकरण.- इस धारा में की किसी भी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जायगा कि वह उक्त ऋणी को किसी ऋण के किसी ऐसे भाग के प्रतिदाय ( रिफण्ड) का हकदार बनाती है जो कि इस अधिनियम के प्रारंभ होने के पूर्व उसके द्वारा पहले ही प्रतिसंदत्त कर दिया गया है या उससे वसूल कर लिया गया है.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 21 सितम्बर 2020

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शास्तियां ४. ( १ ) कोई भी लेनदार, -

(एक) किसी ऐसे ऋण के लिये जो कि इस अधिनियम के अधीन उन्मोचित कर दिया गया हो, किसी दावे के प्रति कोई संदाय प्रतिगृहीत नहीं करेगा; या

(दो) ऋणी को, उसके द्वारा गिरवी या बंधक रखी गई उस संपत्ति का कब्जा वापस करने या पुनः परिदत्त करने से इंकार नहीं करेगा जो ऐसी ऋणी के पक्ष में इस अधिनियम में अधीन निर्मुक्त या मोचित हो गई हो.

( २ ) जो कोई उपधारा ( १ ) के उपबंधों का उल्लघंन करेगा, वह कारावास से, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा, या जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा.

( ३ ) इस धारा के अधीन कोई अपराध संज्ञेय तथा जमानतीय अपराध होगा.

इस अधिनियम के लागूहोने का वर्जन.

५. इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट कोई भी बात निम्नलिखित शीर्षों के अधीन आने वाले दायित्यों को लागू नहीं होगी, अर्थात्ः-

किसी ऋणी को भाटक पर दी गई किसी संपत्ति के संबंध में शोध्य कोई भाटक;

(क)

(ख) न्यास भंग के कारण उद्भूत कोई दायित्व या कोई अपकृत्यजनित दायित्व ;

(ग) मजदूरी के संबंध में या किसी ऐसे पारिश्रमिक के संबंध में, जो कि की गई सेवा के लिए वेतन के रूप में या अन्यथा शोध्य हो , कोई दायित्व;

(घ) भरणपोषण के संबंध में कोई दायित्व, चाहे वह किसी न्यायालय की डिक्री या आदेश के अधीन हो या अन्यथा;

(ङ) कोई ऋण , जो-

(एक) केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार ;

(दो) किसी स्थानीय प्राधिकारी ;

रजिस्ट्रीकृत समझा गया कोई सहकारी भूमि विकास बैंक या अन्य सहकारी बैंक तथा बैंककारी

(तीन) बैंककारी विनियमन अधिनियम, १ ९ ४९ ( १ ९४९ का १० ) की धारा ५ में यथा परिभाषित कोई बैंककारी कम्पनी, और जिसमें भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, १ ९ ५५ ( १ ९ ५५ का २३ ) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक, क्रमशः बैंककारी कम्पनी ( उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण ) अधिनियम, १९७० ( १९७० का ५ ) में या बैंककारी कम्पनी ( उपक्रमों का अर्जन और अन्तरण ) अधिनियम, १९ ८० ( १ ९८० का ४० ) में यथा- परिभाषित कोई तत्स्थानी नया बैंक, प्रादेशिक ग्रामीण बैंक अधिनियम, १ ९ ७६ ( १ ९७६ का २१ ) के अधीन स्थापित कोई प्रादेशिक ग्रामीण बैंक , मध्यप्रदेश को- आपरेटिव सोसाइटीज एक्ट, १ ९ ६० ( क्रमांक १७ सन् १९ ६१ ) के अधीन रजिस्ट्रीकृत या विनियमन अधिनियम, १ ९४ ९ ( १ ९ ४९ का १० ) की धारा ५६ के साथ पठित धारा ५ ( गग तीन क ) के अधीन यथा परिभाषित बहुराज्यीय सहकारी बैंख सम्मिलित है ;

(चार) कृषिक पुनर्वित्त निगम अधिनियम, १ ९ ६३ ( १ ९ ६३ का १० ) के अधीन गठित कृषिक पुनर्वित्त निगम;

(पांच ) रिजर्व बैंक आफ इंडिया द्वारा अनुज्ञप्त किसी गैर बैंककारी वित्तीय कंपनी और सूक्ष्म- वित्त संस्थान;

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मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 21 सितम्बर 2020

(छह ) केन्द्र सरकार या राज्य सरकार की नीतियों और नियमों के अधीन संचालित किसी स्व- सहायता समूह;

(सात ) मध्यप्रदेश कृषि उद्योग विकास निगम, मर्यादित ( मध्यप्रदेश एग्रो इण्डस्ट्रीज डेवलपमेन्ट कार्पोरेशन लिमिटेड) ;

(आठ ) किसी सहकारी सोसाइटी ;

(नौ) कम्पनी अधिनियम, २०१३ ( २०१३ का १८ ) के अर्थ के अन्तर्गत किसी कम्पनी ;

( दस) रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया द्वारा अनुज्ञप्त समस्त वित्तीय संस्थाएं;

(ग्यारह) सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम , २००८ ( २०० ९ का ६ ) के अर्थ के अंतर्गत किसी सीमित दायित्व भागीदारी;

( बारह ) मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति साहूकार अधिनियम, १ ९ ७२ के अधीन अनुज्ञप्त किसी साहूकार; को शोध्य हो.

(च) कोई ऐसा ऋण जो किसी ऋणी द्वारा क्रय किये गये माल या दी गई सेवा की कीमत के रूप में हो.

वे प्राधिकारी जो कि इस अधिनियम के उपबंधों का क्रियान्वयन करने के लिएविनिर्दिष्टकिये जा सकेंगे.

६. राज्य सरकार किसी कलेक्टर को ऐसी शक्तियां प्रदत्त कर सकेगी तथा उस पर ऐसे कर्तव्य अधिरोपित कर सकेगी जो कि यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हों कि इस अधिनियम के उपबंध उचित रूप से कार्यान्वित किए जाते हैं और वह कलेक्टर अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी या उन अधिकारियों को, जो डिप्टी कलेक्टर से अनिम्न श्रेणी के हों, जो कि इस प्रकार प्रदत्त की गई समस्त शक्तियों का या उन में से किसी शक्ति का प्रयोग करेगा/करेंगे या इस प्रकार अधिरोपित किए गए समस्त कर्तव्यों का या उनमें से किसी कर्तव्य का पालन करेगा/ करेंगे , विनिर्दिष्ट कर सकेगा तथा उन स्थानीय सीमाओं को अवधारित कर सकेगा, जिनके कि भीतर उस अधिकारी या उन अधिकारियों द्वारा , जो कि इस प्रकार विनिर्दिष्ट किया गया हो/किये गये हों, ऐसी शक्तियों का प्रयोग या ऐसे कर्तव्यों का पालन किया जाएगा.

७. किसी भी सिविल न्यायालय को ऐसे ऋण के , जिसको कि इस अधिनियम के उपबंध लागू होते हैं, के संबंध में किसी भी प्रश्न को ग्रहण करने या विनिश्चित करने की अधिकारिता नहीं होगी.

सिविल न्यायालय की अधिकारिता का वर्जन.

८. ( १ ) राज्य सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए अधिसूचना द्वारा , नियम बना सकेगी.

नियम बनाने की शक्ति.

( २ ) इस अधिनियम के अधीन बनाये गये समस्त नियम विधान सभा के पटल पर रखे जाएंगे .

कठिनाइयां दूर करने कीशक्ति.

९ . यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो , राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा , ऐसे उपबंध बना सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों, जो कठिनाई को दूर करने में आवश्यक प्रतीत हो.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 21 सितम्बर 2020

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उद्देश्यों और कारणों का कथन

मध्यप्रदेश ग्रामीण ऋण विमुक्ति अधिनियम , १ ९ ८२ राष्ट्रपति की सहमति के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में ऋणग्रस्तता से राहत प्रदान करने के लिए अधिनियमित किया गया था. मध्यप्रदेश ग्रामीण ऋण विमुक्ति अधिनियम , १ ९८२ में यह उपबंधित था कि १६ अगस्त १ ९ ८२ से पूर्व लिए गए समस्त ऋण , जिसमें ब्याज यदि कोई हो, सम्मिलित है , और जो सीमांत कृषक, भूमिहीन कृषि श्रमिक, ग्रामीण कारीगर और छोटे कृषकों द्वारा ऋणदाता को देय हो , उन्मोचित हो गया समझा जाएगा.

राज्य के अनुसूचित क्षेत्र में निवास कर रहे अनुसूचित जनजाति के सदस्य , अत्यधिक ब्याज दरों पर उन्हें दिये गए ऋऋणों के कारण लगातार कठिनाई का सामना कर रहे हैं . परिणमास्वरूप अनुसूचित जनजाति के ऐसे सदस्यों को और अधिक हानि और पीड़ा हो रही है. अतः राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में निवास कर रहे अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को १५ अगस्त, २०२० तक उन्हें दिए गए समस्त ऋण , जिनमें ब्याज की राशि सम्मिलित है, के उन्मोचन द्वारा, राहत प्रदान करने के लिए विधेयक बनाया जाना प्रस्तावित है.

२. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.

भोपाल:

गोविन्द सिंह राजपूत

भारसाधक सदस्य तारीख १८ सितम्बर , २०२० .

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 21 सितम्बर 2020

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प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन

प्रस्तावित विधेयक के जिन खण्डों द्वारा विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन किया जा रहा है, उनका विवरण निम्नानुसार है :-

खण्ड ६ द्वारा अधिनियम के उपबंधों का क्रियान्वयन करने के लिये प्राधिकारी विनिर्दिष्ट किए जाने;

खण्ड ८ द्वारा अधिनियम के प्रयोजनों के क्रियान्वयन के संबंध में अधिसूचना द्वारा नियम बनाये जाने ; तथा

खण्ड ९ द्वारा अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में उद्भूत कठिनाइयों को दूर करने

के संबंध में राज्य सरकार नियम बना सकेगी , जो सामान्य स्वरुप के होंगे.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2020.

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 21 September 2020. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2020-09-21.317.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2020-09-21.317.Extraordinary.