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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

मध्‍यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश. 2020...

Published 24 September 2020

Department
राजस्‍व
Type
Extraordinary
Gazette no.
325
Identifier
in.gazette.madhya.2020-09-24.325.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

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मध्यप्रदेश शास

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 325]

भोपाल, गुरुवार , दिनांक 24 सितम्बर 2020- आश्विन 2, शक 1942

राजस्व विभाग

मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल

भोपाल, दिनांक 24 सितम्बर 2020 क्र. एफ. 6-75-2019 - सात शा .3

नजूल भूमि के प्रबंधन एवं निर्वर्तन से संबंधित वर्तमान में प्रभावशील परिपत्र तथा उनमें समय -समय पर किये गये संशोधन / परिवर्तन / परिवर्धन , जिनका विवरण इस अधिसूचना द्वारा जारी किये जा रहे निर्देशों की कण्डिका 148 में दिया गया है, को अधिकमित करते हुए राज्य सरकार, एतद्वारा , निम्नानुसार ' राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड- चार कमांक 1 मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश, 2020' जारी करती है अर्थात्-

अनुक्रमणिका

मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश , 2020 प्रथम संस्करण, वर्ष 2020

शीर्षक

कण्डिका

अध्याय एक सामान्य

1.

संक्षिप्त नाम, विस्तार और लागू होना

2.

इन निर्देशों में संशोधन की प्रक्रिया

649 650

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

परिभाषाएं

3.

4.

नजूल भूमि के अभिलेखों का निर्माण तथा संधारण

5.

लोक प्रयोजन के लिये भूमि का पृथक् रखा जाना

लैण्ड बैंक

6.

7.

संहिता का लागू होना

8.

नजूल भूमि के निर्वर्तन के लिए जिला, संभाग तथा राज्य स्तर पर समितियाँ

9.

अपर आयुक्त तथा अपर कलेक्टर को शक्तियों का प्रत्यायोजन

10.

नजूल भूमि का निर्वर्तन के तरीके

अध्याय दो

राज्य शासन के किसी विभाग को नजूल भूमि का हस्तांतरण सक्षम प्राधिकारी

11.

12.

भूमि का चिन्हांकन तथा आवेदन

जांच प्रतिवेदन

13.

14.

भूमि हस्तांतरण की स्वीकृति

सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के विरुद्ध अभ्यावेदन

15.

16.

विभाग को भूमि का हस्तांतरण

हस्तांतरण की गई भूमि पर कर निर्धारण

17.

18.

राज्य शासन के किसी विभाग से अनुपयोगी भूमि का वापस लिया जाना

अध्याय तीन

स्थायी पट्टे पर नजूल भूमि का निर्वर्तन

भाग क

स्थायी पट्टे पर निर्वर्तन

सामान्य

19.

प्रयोजन , सक्षम प्राधिकारी , प्रब्याजि, वार्षिक भू-भाटक तथा आंवटन की प्रक्रिया

भाग ख

स्थायी पट्टे पर भूमि आवंटन की सामान्य प्रक्रिया

20.

इस भाग के उपबंधों का लागू होना

भूमि आवंटन के लिए आवेदन

21.

जांच प्रतिवेदन

22.

स्थायी पट्टे की स्वीकृति

23.

24.

प्रब्याजि तथा भू-भाटक

पट्टे का निष्पादन

25.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 1 )

भाग - ग

पूर्त संस्था को पूर्त प्रयोजन के लिए स्थायी पट्टे पर भूमि आवंटन सक्षम प्राधिकारी

26.

27.

भूमि आवंटन के लिये अर्हताएँ

28.

भूमि आवंटन के लिये आवेदन

परीक्षण तथा जांच प्रतिवेदन

29.

जांच प्रतिवेदन पर सक्षम प्राधिकारी का निर्णय

30.

31.

प्रब्याजि तथा भू- भाटक

32.

पट्टे का निष्पादन तथा उसमें सामान्य शर्तों के साथ अन्य अनिवार्य शर्तें जोड़ी जाना

33.

इस भाग के प्रावधान लागू न होना

भाग- घ

मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनैतिक दल को कार्यालय भवन निर्माण हेतु स्थायी पट्टे पर भूमि आवंटन

सक्षम प्राधिकारी

34.

35.

भूमि आवंटन के लिये अर्हताएँ

36.

भूमि आवंटन के लिये आवेदन

आवेदन पत्र का परीक्षण तथा जांच प्रतिवेदन

37.

जांच प्रतिवेदन पर सक्षम प्राधिकारी का निर्णय

38.

39.

प्रब्याजि तथा भू-भाटक

40.

पट्टे का निष्पादन तथा उसमें सामान्य शर्तों के साथ अन्य अनिवार्य शर्तें जोड़ी जाना

41.

इस भाग के प्रावधान लागू न होना

भाग ङ

मध्यप्रदेश विद्युत उत्पादन, पारेषण तथा वितरण कम्पनियों को भूमि आवंटन

42.

मध्यप्रदेश विद्युत उत्पादन, पारेषण तथा वितरण कम्पनियों को भूमि 650 (2)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

का आवंटन

भाग च

चहुँमुखी विकास के लिए निजी पूंजी निवेश के मामलों में भूमि

आवंटन

43.

निजी पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए नजूल भूमि का आवंटन

44.

सक्षम प्राधिकारी

45.

निवेशक द्वारा विभाग को आवेदन पत्र प्रस्तुत किया जाना 46.

विभाग के द्वारा निवेशक के आवेदन का परीक्षण करना

47 .

विभाग द्वारा आवेदन पत्र का परीक्षण करने के लिए समय-सीमा 48.

कलेक्टर द्वारा आवेदन पत्र का परीक्षण

49.

सार्वजनिक उद्घोषणा

50.

जांच प्रतिवेदन पर सक्षम प्राधिकारी का निर्णय

51.

प्रब्याजि तथा भू- भाटक

52.

पट्टे का निष्पादन तथा उसमें सामान्य शर्तों के साथ अन्य अनिवार्य शर्तें जोड़ी जाना

53.

स्थायी पट्टे की शर्तों का पालन कराने के संबंध में संबंधित विभाग का उत्तरदायित्व

54.

आवंटित भूमि के प्रयोजन में परिवर्तन की स्थिति में देय राशि 55.

निजी पूंजी निवेशकों को आवंटित शासकीय पट्टे की भूमियों के अभिहस्तांकन (conveyance) की अनुमति

56.

अभिहस्तांकन की शर्तें

57.

अभिहस्तांकन की अनुमति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया जाना 58.

कलेक्टर द्वारा प्रतिवेदन तैयार कर राज्य शासन को प्रेषित करना 59.

राज्य शासन के द्वारा अभिहस्तांकन की अनुमति के आवेदन पर निर्णय लिया जाना

60.

ऋणदाता संस्था के पक्ष में अभिहस्तांकित भूमि का हस्तांतरण मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 3)

भाग-छ

स्थायी पट्टे का निष्पादन, अग्रिम आधिपत्य तथा समर्पण 61.

प्रब्याजि तथा वार्षिक भू- भाटक जमा करना

62.

पट्टे का निष्पादन तथा भू -अभिलेखों में प्रविष्टियों का अद्यतनीकरण 63.

भूमि का आधिपत्य देना

64.

पट्टे का आरंभ और भू- भाटक की देयता

65.

स्थायी पट्टे की अवधि

66.

स्थायी पट्टा समर्पण या पुर्नप्रवेश के मामले में प्रब्याजि वापसी 67.

सरकारी पट्टेदार के अधिकार तथा दायित्व

68.

गृह निर्माण सहकारी समितियों के उपपट्टेदारों के मामलें में कार्यवाही

भाग ज

भूमि के अग्रिम आधिपत्य देने पर प्रतिबंध तथा अग्रिम आधिपत्य के पुराने मामलों में भूमि का आवंटन, प्रब्याजि व वार्षिक भू-भाटक का

अधिरोपण तथा पट्टा निष्पादन

69.

भूमि के अग्रिम आधिपत्य देने पर प्रतिबंध

70 .

इस भाग के प्रावधानों का लागू होना

71.

प्रब्याजि का निर्धारण

72.

वार्षिक भू- भाटक का निर्धारण

73.

वार्षिक भू-भाटक की गणना की प्रक्रिया

74.

आवंटिति संस्था द्वारा प्रब्याजि तथा वार्षिक भू- भाटक की उप पट्टेदार से वसूली

75.

पट्टे का निष्पादन

76.

इस भाग का पूर्व में निवर्तित मामलों में लागू न होना

भाग - झ

स्थायी पट्टे का नवीनीकरण

77.

स्थायी पट्टे के नवीनीकरण के लिए सक्षम प्राधिकारी

78.

स्थायी पट्टे के नवीनीकरण के लिए आवेदन

79.

नजूल अधिकारी से जांच प्रतिवेदन प्राप्त करना

80.

स्थायी पट्टे की शर्त का उल्लंघन या अपालन न होने की दशा में पट्टे का नवीनीकरण मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (4)

81.

स्थायी पट्टे के नवीनीकरण पर वार्षिक भू- भाटक का पुनर्निर्धारण 82.

स्थायी पट्टे की शर्त का उल्लंघन या अपालन होने की दशा में पट्टे का नवीनीकरण

83.

भूखण्ड के भूमि उपयोग में परिवर्तन के लिए आवेदन

84.

भूखण्ड में अनुमत क्षेत्रफल से अधिक निर्माण के मामलों में कार्यवाही 85.

पट्टे की अन्य शर्तों के उल्लंघन के मामलों में कार्यवाही

86.

नवीनीकरण के पूर्व नामांतरण की कार्यवाही करना

87.

शमन राशि का जमा किया जाना

88.

पट्टावधि के दौरान भू-अभिलेखों में प्रविष्टियां अद्यतन की जाना 89.

पट्टावधि के अवसान पर नवीकृत पट्टा विलेख का निष्पादन तथा पंजीयन

भाग ञ

अस्थायी पट्टे

90.

वर्तमान अस्थायी पट्टों का निराकरण

अध्याय - चार

भाग- क

स्थानीय निकाय को तथा विकास प्राधिकरण / विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण को भूमिस्वामी हक में नजूल भूमि दी जाना नगरीय निकाय को भूमिस्वामी हक में नजूल भूमि का आवंटन 91.

सक्षम प्राधिकारी

92.

प्रयोजन

93.

भूमि का चिन्हांकन तथा आवेदन

94.

जांच प्रतिवेदन

95.

नगरीय निकाय को नजूल भूमि भूमिस्वामी अधिकार में आवंटित करने की स्वीकृति

96.

प्रब्याजि तथा भू- राजस्व

97.

आवंटन आदेश एवं भू-अभिलेखों की प्रविष्टियों का अद्यतनीकरण मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 5)

भाग - ख

स्थानीय निकाय को ध्वजदंड अथवा प्रतिमा की स्थापना के लिए भूमि

का आवंटन

सक्षम प्राधिकारी

98.

99.

भूमि का आकार

100.

आवंटन की प्रक्रिया

जांच प्रतिवेदन

101 .

102.

जांच प्रतिवेदन पर सक्षम प्राधिकारी का निर्णय और भू- राजस्व की देयता

103.

भूमि का कब्जा सौंपना

भाग - ग

विकास प्राधिकरण / विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण को भूमिस्वामी हक में नजूल भूमि का आवंटन

समक्ष प्राधिकारी

104.

105.

प्रयोजन, प्रब्याजि तथा भू-राजस्व

106.

भूमि आवंटन के लिए आवेदन

जांच प्रतिवेदन

107.

108.

विकास प्राधिकरण / विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण को नजूल भूमि भूमिस्वामी हक में आवंटित करने की स्वीकृति

109.

आवंटन आदेश एवं भू-अभिलेखों में प्रविष्टियों का अद्यतनीकरण

अध्याय पांच

नजूल भूमि का नीलामी द्वारा भूमिस्वामी हक में निर्वर्तन 110.

नीलामी द्वारा नजूल भूमि के निर्वर्तन के लिए भूमि का चयन

111.

नीलामी द्वारा निर्वर्तन के लिए भूमि का चयन करने एवं नीलाम करने के लिए सक्षम प्राधिकारी

112.

नीलामी द्वारा निर्वर्तन के लिए भूमि के चयन के लिए प्रतिवेदन तैयार करना 650 (6)

113.

114.

115.

116.

117.

118.

119.

120. मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020 सक्षम प्राधिकारी द्वारा नीलामी द्वारा निवर्तन हेतु भूमि के चयन की स्वीकृति

चयनित भूमि के क्षेत्रफल का सत्यापन एवं सीमांकन नीलामी की प्रक्रिया

निविदा में भाग लेने हेतु पात्रता

निविदाओं का परीक्षण एवं निराकरण भू-राजस्व

विक्रय विलेख निष्पादन, पंजीयन एवं कब्जे का प्रदाय वित्तीय प्रावधान

अध्याय

छः

लाइसेंस

121.

122.

123.

124.

125.

126.

127.

128.

129.

130.

131.

132.

133,

134.

135.

प्रयोजन जिनके लिए नजूल भूमि लाइसेंस पर दी जा सकती है सक्षम प्राधिकारी

पुल, पुलिया, कन्वेयर बेल्ट या रोप ट्रॉली निर्माण के लिये लाइसेंस की अहर्ताएँ और शर्तें

गौशाला के लिए लाइसेंस

लाइसेंस के लिये आवेदन एवं प्रकिया शुल्क लाइसेंस फीस

लाइसेंस का प्ररूप

अध्याय - सात भूमिस्वामी हक में कृषि प्रयोजन के लिए भूमि का आवंटन सक्षम प्राधिकारी

आवंटन के लिए पात्रता

वंटन के लिए भूमि

पात्रता में प्राथमिकता क्रम

कृषि प्रयोजन के लिए आवंटन की सीमा आवंटन की प्रक्रिया

आवंटित कृषि भूमि पर भू- राजस्व का निर्धारण भूमिस्वामी अधिकार पत्र मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (7) 136.

भू- अभिलेख में प्रविष्टि

K

अध्याय - आठ

स्थायी पट्टे का भूमिस्वामी हक में संपरिवर्तन

137.

स्थायी पट्टाधिकार का भूमिस्वामी अधिकार में संपरिवर्तन

संपरिवर्तन की प्रक्रिया

138.

संपरिवर्तन प्रभार

139.

हस्तांतरण विलेख

140.

141.

भू-राजस्व

अध्याय

नौ

प्रकीर्ण

142.

सार्वजनिक उद्घोषणा जारी करने की रीति

143.

नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र

144.

शासकीय निर्माण कार्य के लिए निजी भूमि का शासकीय भूमि से विनिमय

अभ्यावेदन

145.

146.

स्वप्रेरणा से पुनरीक्षण

147.

नजूल भूमि के निर्वर्तन के मामलों में प्राप्त राशि शासकीय खजाने में जमा किया जाना

148.

निरसन तथा व्यावृत्ति

परिशिष्ट

नजूल भूमि के निर्वर्तन के मामलों में प्राप्त राशि शासकीय खजाने में जमा करने की मदें

परिशिष्ट 'क'

प्ररूप

नजूल भूमि के हस्तांतरण / आवंटन के लिए आवेदन का प्ररूप प्ररूप एक मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 8)

प्ररूप दो नजूल अधिकारी द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले जांच प्रतिवेदन का प्ररूप

प्ररूप तीन नजूल भूमि का स्थायी पट्टा

प्ररूप चार मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश, 2020 के अंतर्गत अस्थायी पट्टाधिकार में परिवर्तन हेतु आवेदन

प्ररूप पांच नगरीय निकाय / विकास प्राधिकरण / विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण को नजूल भूमि का भूमिस्वामी अधिकार में आवंटन आदेश का प्ररूप प्ररूप छह मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश, 2020 के अंतर्गत निष्पादित भूमिस्वामी अधिकार में अंतरण विलेख

प्ररूप सात नजूल अधिकारी द्वारा नीलामी के लिये भूमि के चयन हेतु प्रस्तुत किये जाने वाले प्रतिवेदन का प्ररूप

प्ररूप आठ नजूल भूमि के नीलामी द्वारा निर्वर्तन की सार्वजनिक उद्घोषणा का प्ररूप

प्ररूप नौ नजूल अधिकारी द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाला नजूल भूमि की ई- नीलामी की कार्यवाही का प्रतिवेदन

प्ररूप दस भूमि प्रबंधन प्राधिकारी द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाला नजूल भूमि की ई- नीलामी का प्रतिवेदन

नजूल भूमि का नीलामी द्वारा निर्वर्तन - विक्रय विलेख

प्ररूप ग्यारह

प्ररूप बारह नजूल भूमि पर अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) हेतु आवेदन

प्ररूप तेरह नजूल भूमि पर अनुज्ञप्ति (लाइसेंस )

प्ररूप चौदह

अंतर्गत भूमिस्वामी अधिकार पत्र मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश, 2020 के अध्याय सात 'भूमिस्वामी हक में कृषि प्रयोजन के लिए भूमि का आवंटन' के प्ररूप पंद्रह मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश, 2020 के अंतर्गत स्थायी पट्टाधिकार को भूमिस्वामी अधिकार में संपरिवर्तन हेतु आवेदन प्ररूप सौलह

मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश , 2020 के अंतर्गत निष्पादित हस्तांतरण-विलेख

प्ररूप सत्रह नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र

नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र

प्ररूप अठारह मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (9)

भोपाल दिनांक ...सितम्बर, 2020 क्रमांक एफ 6-75 / 2019 / सात / शा .3

राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड चार कमांक 1 मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश , 2020 प्रथम संस्करण , वर्ष 2020

अध्याय एक

सामान्य

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और लागू होना- (1 ) इन निर्देशों का नाम मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश , 2020 है ।

(2) इनका विस्तारं सम्पूर्ण मध्यप्रदेश पर होगा ।

(3 ) ये निर्देश राजपत्र में प्रकाशन की दिनांक से प्रवृत्त होंगे ।

2. इन निर्देशों में संशोधन की प्रकिया- (1 ) इन निर्देशों में किए जाने वाले प्रत्येक संशोधन , परिवर्धन या विलोपन को राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा तथा उसे पहचान के लिए एक सरल क्रमांक तथा दिनांक दिया जाएगा ।

(2) प्रत्येक कैलेण्डर वर्ष में यथासम्भव जनवरी माह में पिछले वर्ष तक जारी किए गए समस्त संशोधनों के प्रावधानों को समाहित करते हुए इन निर्देशों का अद्यतन संस्करण जारी किया जाएगा ।

3. परिभाषाएं- (1 ) इन निर्देशों में, जब तक विषय या संदर्भ से कोई बात विरुद्ध न हो,-

(क) 'संहिता' से अभिप्रेत है, मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, 1959 (क्रमांक 20 सन् 1959) ;

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 10)

(ख) 'विकास योजना' या 'मास्टर प्लान' से अभिप्रेत है, नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 2 के खण्ड (छ) में परिभाषित विकास योजना;

(ग) 'नजूल भूमि' के अंतर्गत है, संहिता की धारा 2 (1 ) (य-3) में यथापरिभाषित समस्त दखलरहित भूमि तथा राज्य शासन के द्वारा गैर- कृषि प्रयोजन के लिए पट्टे पर दी गई भूमि :

परन्तु नगरेतर क्षेत्र में संहिता की धारा 237 के अंतर्गत निस्तार अधिकारों के प्रयोग के लिए पृथक् रखी गई भूमि तथा धारा 233- क के अंतर्गत नगरीय क्षेत्र में लोक प्रयोजन के लिए पृथक् रखी गई भूमि नजूल भूमि नहीं है;

(घ ) 'नजूल अधिकारी' से अभिप्रेत है, ऐसा उपखण्ड अधिकारी , सहायक कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर या डिप्टी कलेक्टर जिसे किसी स्थानीय क्षेत्र में इन निर्देशों द्वारा नजूल अधिकारी को प्रदत्त की गई शक्तियों क। प्रयोग करने तथा इन निर्देशों द्वारा नजूल अधिकारी पर अधिरोपित किए गए कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए कलेक्टर, राज्य शासन द्वारा अधिरोपित किए गए किन्हीं साधारण या विशेष निर्बन्धनों के अध्यधीन रहते हुए लिखित आदेश द्वारा निर्देशित करे;

(ङ) 'लैण्ड बैंक' से अभिप्रेत है, कंडिका 6 के उपबंधों के अधीन आयुक्त, भू-अभिलेख की वेबसाइट mpbhulekh.gov.in पर प्रदर्शित लैण्ड बैंक;

(च ) 'बाजार मूल्य' से अभिप्रेत है, भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (1899 का 2) के अधीन बनाए गए "मध्यप्रदेश बाजार मूल्य मार्गदर्शक सिद्धान्तों का बनाया जाना तथा उनका पुनरीक्षण नियम, 2000" के अधीन कलेक्टर द्वारा जारी किए गए मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसार निर्धारित भूमि का मूल्यः

परन्तु यदि किसी वित्तीय वर्ष के लिए उपरोक्तानुसार बाजार मूल्य उपलब्ध न हो तो प्रश्नाधीन भूमि के निकट की समान आकार व प्रयोजन की भूमि के उस वर्ष की बिकी-छांट के आधार पर परिगणित मूल्य;

(छ) 'पूर्त प्रयोजन' ( Charitable Purpose) से अभिप्रेत है शारीरिक और / अथवा मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिये संस्था/ अनाथ आश्रम स्थापित करना, लड़कियों तथा कामकाजी महिलाओं के लिये छात्रावास स्थापित करना , वृद्धाश्रम स्थापित करना, स्कूल शिक्षा / कौशल विकास गतिविधियों के लिये संस्था स्थापित करना, खेलकूद संबंधी सुविधाएं विकसित 650 ( 11 ) मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

करना और ऐसा ही कोई अन्य प्रयोजन जिसे राज्य सरकार आदेश द्वारा अधिसूचित करे, या आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 2 की उपधारा (15 ) में परिभाषित पूर्त प्रयोजन;

(ज) ' पूर्त संस्था' (Charitable Institution) से अभिप्रेत है पूर्त प्रयोजन से संबंधित गतिविधियां संचालित करने वाली संस्था जो आवेदन की दिनांक से तीन वर्ष पूर्व से सुसंगत विधि के अंतर्गत पंजीकृत है (जैसे- मध्यप्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम , 1973 , मध्यप्रदेश लोक न्यास अधिनियम , 1951 आदि);

(झ) 'आदिम जनजाति' से तात्पर्य किसी ऐसी जाति से है , जिसे मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, 1959 (क्रमांक 20 सन् 1959 ) की धारा 165 की उपधारा (6) के अधीन अधिसूचना द्वारा किसी क्षेत्र के संबंध में आदिम जनजाति घोषित किया गया हो;

(ञ) 'अनुसूचित जाति' से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है, जो संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 की अनुसूची में निर्दिष्ट अनुसूचित जातियों में से किसी अनुसूचित जाति का हो;

(ट) 'पिछड़ा वर्ग' से तात्पर्य ऐसी जाति से है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 15 (4) एवं 16 (4 ) में विहित निर्देशों की पूर्ति हेतु राज्य शासन द्वारा अधिसूचना जारी कर पिछड़ा वर्ग घोषित किया गया हो;

(ठ) ' भूमिहीन व्यक्ति' से तात्पर्य ऐसे वास्तविक कृषक या कृषि श्रमिक से है जो राज्य के किसी नगरेतर क्षेत्र में कम से कम 12 वर्ष से निवासरत हो तथा जिसके पास अथवा उसके कुटुम्ब के किसी सदस्य के पास संयुक्त रूप से या पृथकतः 01 हेक्टेयर से अधिक भूमि नहीं हो; और

(ड) ' कुटुम्ब' में वह स्वयं, उसकी पत्नी या पति, पुत्र, अविवाहित पुत्रियां, माता या पिता सम्मिलित माने जाएंगे ।

(2) उन शब्दों तथा अभिव्यक्तियों के, जो इन निर्देशों में प्रयोग में लाई गई हैं किन्तु परिभाषित नहीं की गई हैं, वहीं अर्थ होंगे जो कि मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, 1959 (क्रमांक 20 सन् 1959) में उनके लिये दिये गये हैं ।

4. नजूल भूमि के अभिलेखों का निर्माण तथा संधारण- नजूल भूमि के अभिलेखों के निर्माण तथा संधारण का कार्य आयुक्त, भू-अभिलेख , मध्यप्रदेश के द्वारा समय - समय पर जारी निर्देशों के अनुसार संपादित किया जाएगा । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 12)

5. लोक प्रयोजन के लिये भूमि का पृथक् रखा जाना- (1 ) कलेक्टर, मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता , 1959 की धारा 233- क तथा राज्य शासन द्वारा इस निमित्त जारी निर्देशों के अनुसार, किसी नगरीय क्षेत्र में लोक प्रयोजन के लिए आवश्यक भूमि पृथक् रख सकेगा, उस लोक प्रयोजन को परिवर्तित कर सकेगा जिसके लिए वह भूमि पृथक् रखी गई है अथवा पृथक् रखने की कार्यवाही समाप्त कर सकेगा : परन्तु कोई भूमि ऐसे प्रयोजन के लिए पृथक् नहीं रखी जाएगी, जो कि अनुमोदित विकास योजना से असंगत है ।

(2) धारा 233-क के अंतर्गत किसी लोक प्रयोजन के लिए पृथक् रखी गई भूमि का निर्वर्तन केवल उसी लोक प्रयोजन के लिए किया जा सकेगा ।

6. लैण्ड बैंक- (1 ) समस्त नजूल भूमि के विस्तृत विवरण, आयुक्त, भू- अभिलेख , मध्यप्रदेश द्वारा उनके कार्यालय की वेबसाइट mpbhulekh.gov.in पर प्रदर्शित किये जाएंगे । इन विवरणों में भूमि की नोईयत तथा विकास योजना (मास्टर प्लान) में उल्लेखित भूमि उपयोग यदि कोई निर्धारित है, और यदि एक से अधिक प्रयोजन के लिए भूमि का उपयोग किया जा सकता है, तो सभी अनुज्ञेय उपयोगों का उल्लेख भी किया जाएगा । वेबसाइट पर उपलब्ध उक्त जानकारी को इस परिपत्र के प्रयोजन के लिए 'लैण्ड बैंक' कहा जाएगा ।

स्पष्टीकरणः- यद्यपि बेवसाईट पर प्रदर्शित लैण्ड बैंक में उल्लेखित भूमियों के लिए भूमि उपयोग का उल्लेख होगा तथापि लैण्ड बैंक में दर्शित भूमियों के लिये भूमि उपयोग तत्समय प्रवृत्त विकास योजना में निर्धारित भूमि उपयोग ही मान्य होगा । (2) नजूल भूमि का निर्वर्तन किए जाने अथवा निर्वर्तित भूमि पर शासन द्वारा पुनर्प्रवेश की कार्यवाही से वापिस प्राप्त किये जाने के फलस्वरूप हुए परिवर्तनों के अनुरूप लैण्ड बैंक की प्रविष्टियां अद्यतन की जाएंगी ।

7. संहिता का लागू होना- यह ध्यान में रखना आवश्यक है कि मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, 1959 नजूल भूमि पर भी लागू होती है । इसलिए नजूल भूमि के संबंध में प्रसंग अनुसार संहिता तथा उसके अधीन बने नियमों के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही अपेक्षित है ।

8. नजूल भूमि के निर्वर्तन के लिए जिला, संभाग तथा राज्य स्तर पर समितियाँ- (1 ) नजूल भूमि के निर्वर्तन के संबंध में निर्णय लेने के लिए विभिन्न स्तरों पर निम्नानुसार समितियाँ होंगी- 650 ( 13) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

(क) जिला नजूल निर्वर्तन समिति;

(ख) संभाग नजूल निर्वर्तन समिति;

(ग) राज्य नजूल निर्वर्तन समिति; और

(घ) 'भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये नजूल निर्वर्तन समिति" । (2) इन समितियों का गठन उपकंडिका (3 ), (4) , (5 ), तथा (6) के अनुसार होगा तथा उनके द्वारा ऐसे उत्तरदायित्वों का निर्वहन किया जाएगा जो इन निर्देशों में उन पर अधिरोपित किए गए हैं तथा ऐसी शक्तियों का प्रयोग किया जाएगा जो इन निर्देशों में उन्हें प्रदत्त की गई हैं ।

(3) जिला नजूल निर्वर्तन समिति निम्न से मिलकर बनेगी-

अध्यक्ष (क) कलेक्टर

सदस्य (ख) उप संचालक/ सहायक संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश

सदस्य (ग) जिला पंजीयक, मुद्रांक एवं पंजीयन

सदस्य (घ) संबंधित आयुक्त नगरनिगम / मुख्य नगरपालिका अधिकारी

(नगरीय क्षेत्र में स्थित नजूल भूमि के मामलों में)

सदस्य (ङ) मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत

(ग्रामीण क्षेत्र में स्थित भूमि के मामलों में)

सदस्य (च) उपखण्ड अधिकारी (जिस उपखण्ड में भूमि स्थित है)

सदस्य (छ) अध्यक्ष की अनुमति से आमंत्रित

सदस्य सचिव (ज) कलेक्टर कार्यालय में नजूल शाखा का प्रभारी संयुक्त/ उप कलेक्टर

(4) संभाग नजूल निर्वर्तन समिति निम्न से मिलकर बनेगी-

अध्यक्ष (क) आयुक्त

सदस्य (ख) अपर आयुक्त मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 14)

सदस्य (ग) नगर तथा ग्राम निवेश का संभाग स्तरीय अधिकारी

(घ) संभाग मुख्यालय के जिले में पदस्थ जिला पंजीयक

सदस्य (च) अध्यक्ष की अनुमति से आमंत्रित

सदस्य (छ) उपायुक्त राजस्व

सदस्य

सचिव स्पष्टीकरण - किसी संभाग में एक से अधिक अपर आयुक्त होने की दशा में ऐसा अपर आयुक्त जिसे आयुक्त द्वारा नाम निर्देशित किया जाए, संभाग नजूल निर्वर्तन समिति का सदस्य होगा ।

(5) राज्य नजूल निर्वर्तन समिति निम्न से मिलकर बनेगी-

(क) मंत्री, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग

अध्यक्ष (ख) सचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग

रादस्य (ग) सचिव, मध्यप्रदेश शासन , वित्त विभाग

सदस्य

सदस्य (घ) सचिव, मध्यप्रदेश शासन, नगरीय प्रशासन तथा विकास विभाग

सदस्य (ङ) मामले से संबंधित मध्यप्रदेश शासन के विभाग का सचिव

(च) आयुक्त, नगर तथा ग्राम निवेश

सदस्य (छ) आयुक्त, भू-अभिलेख

सदस्य (ज) प्रमुख राजस्व आयुक्त

सदस्य

सदस्य

(ञ) अपर/ उप सचिव, राजस्व विभाग (संबंधित शाखा)

सचिव

(6) 'भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये नजूल निर्वर्तन समिति" -

(क) मुख्य सचिव

अध्यक्ष

(ख) सचिव, वित्त

सदस्य

(ग) सचिव, नगरीय विकास एवं आवास

सदस्य 650 ( 15)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

सदस्य (घ) अन्य आमंत्रित

सदस्य (ङ) सचिव, राजस्व

सचिव स्पष्टीकरण-

1. सचिव, राजस्व विभाग से अभिप्रेत है , राजस्व विभाग का भारसाधक सचिव 2. वित्त विभाग , नगरीय प्रशासन तथा विकास विभाग तथा अन्य विभाग के सचिव से अभिप्रेत है, उस विभाग द्वारा नामांकित अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव अथवा सचिव ।

(7) जिला नजूल निर्वर्तन समिति के निर्णय अनुसार यथास्थिति आवंटन की स्वीकृति या अस्वीकृति का आदेश कलेक्टर जारी करेगा । इसी प्रकार संभाग नजूल निर्वर्तन समिति के निर्णय अनुसार यथास्थिति आवंटन की स्वीकृति या अस्वीकृति का आदेश संभागायुक्त जारी करेगा और राज्य नजूल निर्वर्तन समिति अथवा 'भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये नजूल निर्वर्तन समिति " के निर्णय अनुसार यथास्थिति आवंटन की स्वीकृति या अस्वीकृति का शासनादेश राजस्व विभाग जारी करेगा ।

9. अपर आयुक्त तथा अपर कलेक्टर को शक्तियों का प्रत्यायोजन- आयुक्त या कलेक्टर नजूल भूमि के संबंध में इन निर्देशों के द्वारा उसे प्रदत्त की गई ऐसी शक्तियों का प्रयोग करने के लिए तथा इन निर्देशों के द्वारा उस पर अधिरोपित किए गए ऐसे कृत्यों का निर्वहन करने के लिए यथास्थिति अपर आयुक्त या अपर कलेक्टर को लिखित आदेश के द्वारा निर्देशित कर सकेगा जैसा कि वह उचित संमझेः

परन्तु निम्नलिखित वर्गों के मामलों में आयुक्त या कलेक्टर के द्वारा कृत्यों का निर्वहन तथा शक्तियों का प्रयोग सदैव स्वयं ही किया जाएगा-

(क) यथास्थिति संभाग नजूल निर्वर्तन समिति अथवा जिला नजूल निर्वर्तन समिति की बैठक की अध्यक्षता करना;

(ख ) नजूल भूमि नीलामी के द्वारा भूमिस्वामी हक में दिये जाने की स्वीकृति/ अस्वीकृति का आदेश जारी करना;

(ग) नजूल भूमि स्थायी पट्टे पर दिये जाने की स्वीकृति / अस्वीकृति का आदेश जारी करना;

(घ) राज्य शासन के किसी विभाग को नजूल भूमि का हस्तांतरण करने या उससे अनुपयोगी भूमि वापिस लेने का आदेश जारी करना;

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 16)

(ङ) नगरीय निकाय को नजूल भूमि भूमिस्वामी हक में दिये जाने की स्वीकृति/ अस्वीकृति का आदेश जारी करना;

(च) भारत शासन या उसके उपक्रम को नजूल भूमि का स्थायी पट्टे पर आवंटन करने की स्वीकृति / अस्वीकृति का आदेश जारी करना;

(छ) नजूल भूमि के संबंध में वरिष्ठ स्तर को प्रस्ताव, प्रतिवेदन या अभिमत प्रेषित करना; और

(ज) कंडिका 90 की उपकंडिका (4) के अंतर्गत अस्थायी पट्टे को स्थायी पट्टे में परिवर्तित करना ।

10. नजूल भूमि के निर्वर्तन के तरीके- (1 ) इन निर्देशों के प्रभावशील होने के बाद नजूल भूमि का निर्वर्तन निम्नलिखित तरीकों से किया जा सकेगा-

(क) राज्य शासन के किसी विभाग को हस्तांतरण द्वारा ;

(ख) स्थायी पट्टे पर दी जाना;

(ग

) स्थानीय निकाय को भूमिस्वामी अधिकार में दी जाना;

(घ) नीलामी द्वारा भूमिस्वामी अधिकार में दी जाना;

(ङ) लाइसेंस पर दी जाना; और

(च) कृषि प्रयोजन हेतु भूमिस्वामी अधिकार में दी जाना ।

(2) इन निर्देशों में किसी बात के होते हुये भी, पचमढ़ी में राज्य शासन की अनुमति के बिना नजूल भूमि का निर्वर्तन नहीं किया जाएगा ।

(3) भोपाल विकास योजना क्षेत्र में स्थित नजूल भूमि के हस्तांतरण किये जाने, स्थायी पट्टे पर दिये जाने या भूमिस्वामी हक में निर्वर्तित किये जाने की कार्यवाही कंडिका 8 की उपकंडिका (6) में गठित समिति द्वारा की जाएगी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 17)

अध्याय

दो

राज्य शासन के किसी विभाग को नजूल भूमि का हस्तांतरण

11. सक्षम प्राधिकारी- राज्य शासन के किसी विभाग को नजूल भूमि हस्तांतरित करने के लिए या किसी विभाग को हस्तांतरित भूमि राजस्व विभाग को वापस करने के लिए सक्षम प्राधिकारी भोपाल विकास योजना क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले में 'भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये नजूल निर्वर्तन समिति" , संभाग मुख्यालय में स्थित भूमि के मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति तथा अन्य मामले में जिला नजूल निर्वर्तन समिति होगा ।

12. भूमि का चिन्हांकन तथा आवेदन- संबंधित विभाग के द्वारा लैण्ड बैंक में से भूमि का चयन किया जाएगा । संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष द्वारा कलेक्टर को प्ररूप एक में आवेदन किया जाएगा । किसी विभाग का विभागाध्यक्ष न होने की स्थिति में विभाग के सचिव द्वारा आवेदन किया जाएगा ।

13. जांच प्रतिवेदन- (1 ) कलेक्टर लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों के आधार पर आवेदन पत्र अमान्य कर सकेगा अथवा आवेदन पत्र को संबंधित नजूल अधिकारी को जांच व प्रतिवेदन के लिए प्रेषित करेगा ।

(2) नजूल अधिकारी द्वारा आवेदन पत्र के संबंध में कंडिका 142 में विहित रीति में सार्वजनिक उद्घोषणा जारी कर दावे, आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे । नजूल अधिकारी द्वारा स्थानीय निकाय , नगर तथा ग्राम निवेश और यदि आवेदित भूमि किसी अन्य विभाग के आधिपत्य में की भूमि से लगी हुई हो तो उस विभाग के जिला कार्यालय का अभिमत प्राप्त किया जाएगा । स्थानीय निकाय , नगर तथा ग्राम निवेश या अन्य विभाग के जिला कार्यालय अभिमत सामान्यतः पंद्रह दिन में देंगे और यदि तीस दिन की अवधि में भी अभिमत प्राप्त नहीं होता है तो यह माना जाएगा कि उन्हें प्रस्तावित हस्तांतरण में कोई आपत्ति नहीं है ।

(3) नजूल अधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन में अन्य बातों के अलावा निम्न बिंदुओं का भी समावेश किया जाएगा-

(क) तत्समय प्रवृत्त विकास योजना में आवेदन अनुसार भूमि उपयोग अनुमत है अथवा नही? ;

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 18)

(ख) भवनों के निर्माण के लिए संबंधित क्षेत्र के लिए लागू तल क्षेत्र अनुपात (एफ.ए.आर.) के अधिकतम उपयोग के आधार पर भूमि की न्यूनतम आवश्यकता का आकलन;

(ग) आवेदित भूमि का पूर्ण उपयोग करने की कार्ययोजना तथा उसके लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता; और

(घ) क्या आवेदित भूमि की आवश्यकता किसी अन्य महत्वपूर्ण लोक प्रयोजन के लिए है या भविष्य में संभावित है?

(4) नजूल अधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन प्ररूप दो में तैयार किया जाकर जिला नजूल निर्वर्तन समिति के सदस्य सचिव को प्रेषित किया जाएगा ।

14. भूमि हस्तांतरण की स्वीकृति- (1 ) जिस मामले में जिला नजूल निर्वर्तन समिति भूमि हस्तांतरण की स्वीकृति देने के लिए सक्षम प्राधिकारी है उसमें उसके द्वारा निर्णय लिया जाकर आवेदक विभाग को सूचित किया जाएगा और जिस मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति सक्षम प्राधिकारी है उसमें जिला नजूल निर्वर्तन समिति के द्वारा अपने अभिमत के साथ मामला उसे प्रेषित किया जाएगा ।

(2) जिस मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति भूमि हस्तांतरण की स्वीकृति देने के लिए सक्षम प्राधिकारी है उसमें उसके द्वारा जिला नजूल निर्वर्तन समिति से प्राप्त मामले में निर्णय लिया जाकर आवेदक विभाग तथा जिला नजूल निर्वर्तन समिति को सूचित किया जाएगाः

परन्तु भोपाल विकास योजना क्षेत्र में स्थित भूमियों के मामले में " भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये नजूल निर्वर्तन समिति" सक्षम प्राधिकारी है अतः भोपाल संभाग नजूल निर्वर्तन समिति द्वारा अपने अभिमत के साथ मामला उक्त समिति को प्रेषित किया जाएगा ।

15. सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के विरुद्ध अभ्यावेदन- सक्षम प्राधिकारी के निर्णय से व्यथित कोई विभाग ऐसे निर्णय की दिनांक से 15 दिवस के भीतर राज्य शासन के राजस्व विभाग को अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकेगा जो सुसंगत दस्तावेज प्राप्त कर तथा संबंधित विभागों से परामर्श कर अभ्यावेदन का निराकरण करेगा ।

16. विभाग को भूमि का हस्तांतरण- सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त होने पर कलेक्टर के द्वारा विभाग को भूमि का हस्तांतरण कर कब्जा सौंपा जाएगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 19) 17. हस्तांतरण की गई भूमि पर कर निर्धारण- राज्य शासन के किसी विभाग को हस्तांतरित की गई नजूल भूमि के संबंध में कोई कर निर्धारण नहीं होगा । 18. राज्य शासन के किसी विभाग से अनुपयोगी भूमि का वापस लिया जाना- (1 ) सक्षम प्राधिकारी समय - समय पर जिले में स्थित विभिन्न विभागों के कार्यालयों, कार्यस्थलों, योजनाओं या परियोजनाओं आदि के लिए उन्हें पूर्व में आवंटित की गई , उपयोग में लाई गई तथा शेष भूमियों की जानकारी संकलित करेगा एवं वर्तमान समय के संदर्भ में विभागों को भूमि की आवश्यकता की समीक्षा करेगा ।

(2) विभाग के कार्यालयों, कार्यस्थलों, योजनाओं या परियोजनाओं के लिए भूमि की आवश्यकता का आकलन मानक मापदंडो पर किया जाएगा । मानक मापदंड न होने की स्थिति में युक्तियुक्त मापदंडों का प्रयोग किया जाएगा । पूर्व से निर्मित या प्रस्तावित संरचना के लिए भूमि की आवश्यकता के आकलन में क्षितिजीय प्रसार (horizontal spread ) के स्थान पर ऊर्ध्वाधर रचना (vertical rise ) की संभावना पर भी विचार किया जाएगा ।

(3) समीक्षा उपरांत सक्षम प्राधिकारी राज्य शासन के किसी विभाग को हस्तांतरित भूमि अंशतः या पूर्णतः राजस्व विभाग को वापिस करने का निर्णय कर सकेगा । (4) यदि संबंधित विभाग सक्षम प्राधिकारी के निर्णय से व्यथित है तो वह राज्य शासन के राजस्व विभाग को अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकेगा जो सुसंगत दस्तावेज प्राप्त कर व संबंधित विभागों से परामर्श कर अभ्यावेदन का निराकरण करेगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (20)

अध्याय - तीन

स्थायी पट्टे पर नजूल भूमि का निर्वर्तन

भाग - क

स्थायी पट्टे पर निर्वर्तन - सामान्य

19. प्रयोजन, सक्षम प्राधिकारी, प्रब्याजि ( Premium ) , वार्षिक भू- भाटक (Annual Lease- rent) तथा आवंटन की प्रकिया- (1 ) इन निर्देशों के प्रभावशील होने के बाद नजूल भूमि का स्थायी पट्टे पर निर्वर्तन नीचे दी गई तालिका के कालम (2) में उल्लेखित प्रयोजनों के लिए किया जाएगा। इन मामलों में स्वीकृति हेतु सक्षम प्राधिकारी, प्रब्याजि, वार्षिक भू-भाटक तथा आवंटन की प्रक्रिया तालिका के क्रमशः कालम (3), (4) , (5) तथा (6) अनुसार होंगे-

तालिका

स्थायी पट्टे पर नजूल भूमि दिए जाने के प्रयोजन, सक्षम प्राधिकारी, प्रब्याजि, वार्षिक भू-भाटक तथा आवंटन प्रकिया

सरल कमांक

प्रयोजन जिसके लिए नजूल भूमि स्थायी पट्टे पर दी जाना है (1)

(2)

1 रेलवे मंत्रालय अथवा नेशनल अथॉरिटी हाइवेज ऑफ इंडिया को यथास्थिति-

(क) रेल मार्ग निर्माण हेतु केवल रेल लाइन निर्माण के लिए आवश्यक भूमि

(ख) राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण अथवा पूर्व निर्मित सड़क के चौड़ीकरण के लिए

वार्षिक भू-भाटक

आवंटन की प्रकिया प्रब्याजि (भूमि के बाजार मूल्य का प्रतिशत)

स्वीकृति हेतु * सक्षम प्राधिकारी (भोपाल विकास योजना क्षेत्र को छोड़कर)

(3)

(4)

(5)

(6)

सामान्य प्रक्रिया (भाग-ख अनुसार)

1. संभाग मुख्यालय में स्थित भूमि के मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति

शून्य

1/-

(एक रुपया)

शून्य

1/-

2. अन्य स्थान पर स्थित भूमि के मामले में जिला नजूल निर्वर्तन समिति

(एक रुपया) 650 (21)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

सरल कमांक

पट्टे पर दी जाना है प्रयोजन जिसके लिए नजूल भूमि स्थायी

(भोपाल विकास योजना क्षेत्र को छोड़कर) स्वीकृति हेतु * सक्षम प्राधिकारी

(3)

(2)

(1)

आवश्यक भूमि

2

वार्षिक भू-भाटक

आवंटन की प्रक्रिया प्रब्याजि (भूमि के बाजार मूल्य का प्रतिशत)

(6)

(5)

(4)

100 प्रतिशत

राज्य

नजूल

निर्वर्तन

समिति

केन्द्र सरकार के किसी विभाग या उपकम को पूर्ण प्रब्याजि व भू- भाटक पर

3

मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल, विकास प्राधिकरण या विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण

1 .. मुख्यालय स्थित भूमि के मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन संभागीय में समिति (क) केन्द्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा प्रयोजित ई.डब्ल्यू.एस. या कमजोर वर्ग के लिये आवासीय योजना अंतर्गत

सामान्य प्रकिया (भाग-ख अनुसार) मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (भू-राजस्व का निर्धारण एवं पुनर्निर्धारण) नियम, 2018 के अंतर्गत दर निर्धारण की विहित से दो गुना

शून्य

1/- (एक रुपया)

सामान्य प्रक्रिया (भाग-ख अनुसार) 50 प्रतिशत मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता

2.

अन्य स्थान

पर

स्थित भूमि

के

मामले में

(ख) ई.डब्लू.एस. या कमजोर वर्ग के आवासीय प्रयोजन के मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (22)

सरल कमांक

प्रयोजन जिसके लिए नजूल भूमि स्थायी पट्टे पर दी जाना है (1)

(2)

लिए

वार्षिक भू-भाटक

आवंटन की प्रकिया प्रब्याजि (भूमि के बाजार मूल्य का प्रतिशत)

स्वीकृति हेतु * सक्षम प्राधिकारी (भोपाल विकास योजना क्षेत्र को छोड़कर)

(3)

(4)

(5)

(6)

जिला नजूल

निर्वर्तन समिति

व्यावसायिक (ग) प्रयोजन के लिए

(भू-राजस्व का निर्धारण एवं पुनर्निर्धारण) नियम, 2018 के अंतर्गत निर्धारण की विहित से दो गुना दर

100 प्रतिशत -तथैव-

राज्य नजूल

निर्वर्तन समिति

60 प्रतिशत -तथैव-

राज्य

नजूल

निर्वर्तन समिति

(घ) उपरोक्त खण्ड (क), (ख) तथा खण्ड (ग) को छोड़कर अन्य मामले में

4

राज्य सरकार द्वारा स्थापित एवं नियंत्रित कृषि उपज मंडी समिति को मंडी प्रांगण के लिए

2. अन्य स्थान पर स्थित भूमि के मामले में जिला निर्वर्तन समिति नजूल

(मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी (मंडी समिति वर्गीकरण) नियम, 1981 के नियम 3 के अनुसार वर्गीकृत मंडी समितियों के लिये)

सामान्य प्रक्रिया (भाग-ख अनुसार)

1 . संभाग प्रथम वर्ग मुख्यालय में स्थित भूमि के मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति मंडी समिति के लिये 50 प्रतिशत द्वितीय वर्ग मंडी समिति के लिये 40 प्रतिशत

मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण एवं पुनर्निधारण) नियम, 2018 के अंतर्गत निर्धारण की विहित दर से दो गुना

तृतीय वर्ग मंडी समिति के लिये 30प्रतिशत 650 ( 23)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

सरल कमांक

प्रयोजन जिसके लिए नजूल भूमि स्थायी पट्टे पर दी जाना है

स्वीकृति हेतु * सक्षम प्राधिकारी (भोपाल विकास योजना क्षेत्र को छोड़कर)

(3)

(2)

(1)

5

वार्षिक भू-भाटक

आवंटन की प्रकिया प्रब्याजि (भूमि के बाजार मूल्य का प्रतिशत)

(5)

(6) (4)

चतुर्थ वर्ग मंडी समिति के लिये 20 प्रतिशत

75 प्रतिशत

राज्य

निर्वर्तन

नजूल

समिति

स्टेट वेयर हाउसिंग एवं सेन्ट्रल वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन तथा फूड कार्पोरेशन ऑफ इण्डिया के गोदामों के लिए

6

1 . संभाग मुख्यालय में स्थित भूमि के मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति

2. अन्य स्थान पर स्थित भूमि के मामले में जिला नजूल निर्वर्तन समिति नवोदय के मामले में अधिकतम 10 हेक्टेयर या केन्द्र सरकार द्वारा नियत मानदण्ड अनुसार में से जो कम हो और केन्द्रीय विद्यालयों के मामलों में अधिकतम 2 हेक्टेयर या केन्द्र सरकार द्वारा नियत मानदण्ड अनुसार में से जो कम हो

सामान्य प्रक्रिया (भाग-ख अनुसार) मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (भू-राजस्व का निर्धारण एवं पुनर्निधारण) नियम, 2018 के अंतर्गत निर्धारण की विहित दर से दो गुना

शून्य

1/- (एक रुपया)

सामान्य प्रकिया (भाग-ख अनुसार) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (24)

सरल कमांक

प्रयोजन जिसके लिए नजूल भूमि स्थायी पट्टे पर दी जाना है (1)

(2)

7 सहकारी बैंकों को (क) नगरीय क्षेत्र में

वार्षिक भू-भाटक

आवंटन की प्रक्रिया प्रब्याजि (भूमि के बाजार मूल्य का प्रतिशत)

स्वीकृति हेतु * सक्षम प्राधिकारी (भोपाल विकास योजना क्षेत्र को छोड़कर)

(3)

(4)

(5)

(6) 50 प्रतिशत

राज्य नजूल

निर्वर्तन समिति

(ख) नगरेतर क्षेत्र में

2. अन्य स्थान पर स्थित भूमि के मामले में जिला नजूल निर्वर्तन समिति

8 पंचायती भवन के लिए राज संस्थाओं के कार्यालय

1. संभाग मुख्यालय में स्थित भूमि के मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति

2. अन्य स्थान पर स्थित भूमि के मामले में जिला नजूल निर्वर्तन समिति

9

50 प्रतिशत

सामान्य प्रकिया (भाग-ख अनुसार)

1. संभागीय मुख्यालय में स्थित भूमि के मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति

मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू-राजस्व का निर्धारण एवं पुनर्निधारण) नियम, 2018 के अंतर्गत निर्धारण की विहित दर से दो गुना

शून्य

सामान्य प्रक्रिया (भाग-ख अनुसार)

मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (भू-राजस्व का निर्धारण एवं पुनर्निधारण) नियम, 2018 के अंतर्गत निर्धारण की विहित दर से दो गुना

50 प्रतिशत

राज्य नजूल

निर्वर्तन समिति

राज्य सरकार द्वारा स्थापित एवं नियंत्रित दुग्ध संघों द्वारा दुग्ध मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता

सामान्य प्रक्रिया (भाग-ख 650(25)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

सरल | कमांक

प्रयोजन जिसके लिए नजूल भूमि स्थायी पट्टे पर दी जाना है

स्वीकृति हेतु * सक्षम प्राधिकारी (भोपाल विकास योजना क्षेत्र को छोड़कर)

(3)

(2)

(1)

संयंत्र या शीत केन्द्र के लिए

10

वार्षिक भू-भाटक

आवंटन की प्रकिया प्रब्याजि (भूमि के बाजार मूल्य का प्रतिशत)

(6)

(5)

(4)

अनुसार) (भू-राजस्व का निर्धारण एवं पुनर्निधारण) नियम, 2018 के अंतर्गत निर्धारण की विहित दर से दो गुना

शून्य

नजूल

राज्य

निर्वर्तन समिति

युद्ध में मृत सैनिकों के परिवारों को आवासीय प्रयोजन के लिए

(क) कमीशन्ड अधिकारी के मामले में 220 वर्गमीटर तक

(ख) अन्य मामले में 140 वर्गमीटर तक

भाग -ग 11 पूर्त संस्था को

अनुसार 12

भाग -घ अनुसार मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनैतिक दल को कार्यालय भवन निर्माण भूमि के लिए

13

भाग -ङ मध्यप्रदेश विद्युत उत्पादन या पारेषण

सामान्य प्रक्रिया (भाग-ख अनुसार)

मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (भू-राजस्व का निर्धारण एवं पुनर्निधारण)

नियम, 2018 के अंतर्गत निर्धारण की विहित दर से दो गुना

भाग-ग अनुसार भाग-ग अनुसार

भाग -ग अनुसार

भाग-घ अनुसार भाग-घ अनुसार

भाग-घ अनुसार

भाग-ङ भाग-ङ

भाग -ङ मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 26 )

सरल कमांक

प्रयोजन जिसके लिए नजूल भूमि स्थायी पट्टे पर दी जाना है

स्वीकृति हेतु * सक्षम प्राधिकारी (भोपाल विकास योजना क्षेत्र को छोड़कर)

(1)

(2)

(3)

अनुसार तथा वितरण कम्पनियों को भूमि का आवंटन

14

भाग-च अनुसार चहुमुखी विकास के लिए निजी पूंजी निवेश के मामलों में भूमि का आवंटन

वार्षिक

भू-भाटक

आवंटन की प्रक्रिया प्रब्याजि (भूमि के बाजार मूल्य का प्रतिशत)

(4)

(5)

(6) अनुसार अनुसार अनुसार भाग-च

भाग-च

भाग-च अनुसार अनुसार अनुसार * इन निर्देशों में किसी बात के होते हुए भी, भोपाल विकास योजना क्षेत्र के भीतर स्थित भूमियों के निर्वर्तन के लिये उक्त तालिका में विहित उपबंधों के अध्यधीन सक्षम प्राधिकारी "भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये नजूल निर्वर्तन समिति " होगी ।

(2) जिन मामलों में वार्षिक भू- भाटक मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण तथा पुनर्निर्धारण) नियम, 2018 के अंतर्गत निर्धारण की विहित दर से दो गुना रखा गया है उनमें पट्टे की अवधि के दौरान जब - जब भी राज्य शासन के द्वारा निर्धारण दरों में परिवर्तन अधिसूचित किया जाएगा, तब-तब पट्टे का वार्षिक भू- भाटक भी ऐसी पुनरीक्षित निर्धारण दरों के दो गुना स्वयमेव निर्धारित हुआ समझा जाएगा।

(3) इन निर्देशों के पूर्व जारी पट्टो के मामले में भू- भाटक संबंधित पट्टे की शेष अवधि तक पूर्वानुसार देय होगा तथा पट्टे के नवीनीकरण के समय कंडिका 81 के उपबंध अनुसार भू-भाटक पुनर्निर्धारित होगा । 650 (27)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

भाग ख

स्थायी पट्टे पर भूमि आवंटन की सामान्य प्रक्रिया

20. इस भाग के उपबंधों का लागू होना- स्थायी पट्टे पर भूमि आवंटन की सामान्य प्रक्रिया इस भाग के उपबंधों के अनुसार होगी, परन्तु भाग - ग , घ, ङ तथा च के अंतर्गत आने वाले मामलों में उस भाग में विहित की गई प्रक्रिया के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही की जाएगी ।

21. भूमि आवंटन के लिए आवेदन- (1 ) स्थायी पट्टे पर भूमि आवंटन के लिए प्ररूप एक में आवेदन पत्र कलेक्टर को प्रस्तुत किया जाएगा ।

(2) आवेदक द्वारा प्रक्रिया शुल्क रुपए दस हजार शासकीय खजाने में परिशिष्ट ' क' में उल्लेखित मद में जमा कर उसकी पावती की छायाप्रति आवेदन पत्र के साथ संलग्न की जाएगी । प्रक्रिया शुल्क आवेदन के अमान्य होने की दशा में वापिस नहीं किया जाएगा और न ही मान्य होने की दशा में किसी देय राशि के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा ।

22. जांच प्रतिवेदन- (1 ) कलेक्टर लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों के आधार पर आवेदन पत्र अमान्य कर सकेगा अथवा आवेदन पत्र को संबंधित नजूल अधिकारी को जांच व प्रतिवेदन के लिए प्रेषित करेगा ।

(2) नजूल अधिकारी द्वारा आवेदन पत्र के संबंध में कंडिका 142 में विहित रीति में सार्वजनिक उद्घोषणा जारी कर दावे, आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे । (3) सार्वजनिक उद्घोषणा का उस स्थानीय क्षेत्र में जहां पर भूमि स्थित है व्यापक रूप से परिचालित दो समाचार पत्रों में, जिनमें से कम से कम एक हिन्दी का होगा, आवेदक के व्यय पर प्रकाशन भी कराया जाएगा ।

(4) नजूल अधिकारी द्वारा स्थानीय निकाय , नगर तथा ग्राम निवेश विभाग और यदि आवेदित भूमि किसी अन्य विभाग के आधिपत्य में की भूमि से लगी हुई हो तो उस विभाग के जिला कार्यालय का अभिमत प्राप्त किया जाएगा । स्थानीय निकाय , नगर तथा ग्राम निवेश विभाग या अन्य विभाग के जिला कार्यालय अभिमत सामान्यतः पंद्रह दिन में देंगे , यदि तीस दिन की अवधि में भी अभिमत प्राप्त नहीं होता है तो यह माना जाएगा कि उन्हें प्रस्तावित आवंटन में कोई आपत्ति नहीं है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (28)

(5) नजूल अधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन में अन्य बातों के अलावा निम्न बिंदुओं का भी समावेश किया जाएगा-

(क) तत्समय प्रवृत्त विकास योजना में आवेदन अनुसार भूमि उपयोग अनुमत है अथवा नही? ;

(ख) भवनों के निर्माण के लिए संबंधित क्षेत्र के लिए लागू तल क्षेत्र अनुपात (एफ.ए.आर. ) के अधिकतम उपयोग के आधार पर भूमि की न्यूनतम आवश्यकता का आकलन;

(ग) आवेदित भूमि का पूर्ण उपयोग करने की कार्ययोजना तथा उसके लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता; और

(

घ) क्या आवेदित भूमि की आवश्यकता किसी अन्य महत्वपूर्ण लोक प्रयोजन के लिए है या भविष्य में संभावित है?

(6) नजूल अधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन प्ररूप दो में तैयार किया जाकर जिला नजूल निर्वर्तन समिति के सदस्य सचिव को प्रेषित किया जाएगा ।

23. स्थायी पट्टे की स्वीकृति (1 ) जिस मामले में जिला नजूल निर्वर्तन समिति स्थायी पट्टा स्वीकृत करने के लिए सक्षम प्राधिकारी है उसमें उसके द्वारा निर्णय लिया जाकर आवेदक को सूचित किया जाएगा । जिस मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति या राज्य नजूल निर्वर्तन समिति या "भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये नजूल निर्वर्तन समिति" सक्षम प्राधिकारी है उसमें जिला नजूल निर्वर्तन समिति के द्वारा अपने अभिमत के साथ मामला संभाग नजूल निर्वर्तन समिति को प्रेषित किया जाएगा ।

(2 ) जिस मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति स्थायी पट्टा स्वीकृत करने के लिए सक्षम प्राधिकारी है उसमें उसके द्वारा जिला नजूल निर्वर्तन समिति से प्राप्त मामले में निर्णय लिया जाकर आवेदक तथा जिला नजूल निर्वर्तन समिति को सूचित किया जाएगा । जिस मामले में राज्य नजूल निर्वर्तन समिति या 'भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये नजूल निर्वर्तन समिति" स्थायी पट्टा स्वीकृत करने के लिए सक्षम प्राधिकारी है उसमें संभाग नजूल निर्वर्तन समिति द्वारा अपना अभिमत अंकित कर मामला यथास्थिति राज्य नजूल निर्वर्तन समिति या " भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये नजूल निर्वर्तन समिति" को प्रेषित किया जाएगा । 650 (29 ) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

(3 ) जिस मामले में राज्य नजूल निर्वर्तन समिति या 'भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये नजूल निर्वर्तन समिति" स्थायी पट्टा स्वीकृत करने के लिए सक्षम प्राधिकारी है उसमें ऐसी समिति द्वारा संभाग नजूल निर्वर्तन समिति से प्राप्त मामलों में निर्णय लिया जाकर आवेदक, जिला नजूल निर्वर्तन समिति तथा संभाग नजूल निर्वर्तन समिति को सूचित किया जाएगा ।

24. प्रब्याजि तथा भू-भाटक- (1 ) इस भाग के अंतर्गत स्वीकृत किए जाने वाले स्थायी पट्टों पर प्रब्याजि तथा वार्षिक भू- भाटक कंडिका 19 की उपकंडिका (1 ) में दी गई तालिका के अनुसार अधिरोपित किया जाएगा ।

(2) पट्टे की अवधि के दौरान वार्षिक भू- भाटक के संबंध में कंडिका 19 की उपकंडिका (2) के प्रावधान लागू होंगे ।

25. पट्टे का निष्पादन- सक्षम प्राधिकारी से पट्टे की स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात् पट्टे के निष्पादन की कार्यवाही इस अध्याय के भाग- छ के उपबंधों के अनुसार की जाएगी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (30)

भाग ग

पूर्त संस्था को पूर्त प्रयोजन के लिये स्थायी पट्टे पर भूमि आवंटन 26. सक्षम प्राधिकारी - पूर्त ( charitable) संस्था को पूर्त प्रयोजन के लिये स्थायी पट्टे पर नजूल भूमि का आवंटन करने के मामले में सक्षम प्राधिकारी राज्य नजूल निर्वर्तन समिति होगीः

परंतु भोपाल विकास योजना क्षेत्र के भीतर स्थित भूमि के आवंटन के मामले में सक्षम प्राधिकारी "भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये नजूल निर्वर्तन समिति" होगीः

परंतु यह और कि ऐसे मामले में, जिनमें एक ही भूखण्ड के लिये एक से अधिक संस्थाएं आवेदन करती हैं, निर्वर्तन का निर्णय राज्य के मंत्रि- परिषद द्वारा लिया जाएगा ।

27. भूमि आवंटन के लिये अर्हताएँ- (1 ) केवल ऐसी पूर्त संस्था को पूर्त प्रयोजन के लिये स्थायी पट्टे पर भूमि आवंटित की जाएगी जो-

(क) आवेदन की दिनांक से तीन वर्ष पूर्व से सुसंगत विधि के अंतर्गत पंजीकृत है (जैसे- मध्यप्रदेश सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम , 1973 , मध्यप्रदेश लोक न्यास अधिनियम, 1951 आदि);

(ख) संस्था की गतिविधियों अथवा लाभार्थियों में जाति, समुदाय या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता हो;

परन्तु यदि कोई संस्था जाति, समुदाय या धर्म के आधार पर अपनी गतिविधियों अथवा लाभार्थियों में भेदभाव नहीं करती हो तो केवल इस कारण से कि संस्था के नाम में किसी जाति, समुदाय या धर्म का उल्लेख है, उसे अनर्ह नहीं समझा जायेगा ।

(ग) संस्था की आय तथा आस्तियां उन्हीं उद्देश्यों के लिये प्रयुक्त किये जाते हों जो कि उसके उद्देश्यों तथा उपविधियों में वर्णित हों;

(घ) ऐसी संस्था कंडिका (3) के खण्ड (ज) में परिभाषित पूर्त संस्था हो;

(ङ) आवेदन की दिनांक से ठीक तीन पूर्ववर्ती वर्षों में संस्था के द्वारा अपने उद्देश्यों पर औसतन रुपए पांच लाख वार्षिक व्यय किया गया हो तथा आयकर विवरणियां दाखिल की गईं हों;

650 ( 31 ) मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

(च) संस्था के पास न्यूनतम रुपए दस लाख या आवेदित भूखण्ड के बाजार मूल्य के 10 प्रतिशत की राशि के बराबर , इनमें से जो कम हो, की कॉरपस निधि (Corpus fund) होः

(छ) संस्था की आय का कोई अंश प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उसके सदस्यों, संचालकों, संस्थापकों या उनसे संबंधित व्यक्तियों को वितरित नहीं किया जाता हो या किये जाने योग्य नहीं हो; और

(ज) संस्था की उपविधियों के अनुसार संस्था के परिसमापन पर उसकी निबल आस्तियां (Net assets ) उसकी देनदारियों की पूर्ति के उपरांत उसके सदस्यों, संचालकों, संस्थापकों व दानदाताओं को वापस नहीं होती हों ।

(2) किसी भी ऐसी संस्था को एक नगरीय क्षेत्र या ग्राम में एक से अधिक स्थानों पर भूमि आवंटित नहीं की जाएगी ।

28. भूमि आवंटन के लिये आवेदन- (1 ) आवेदक संस्था द्वारा लैण्ड बैंक में से भूमि का चयन कर कलेक्टर को प्ररूप एक में आवेदन पत्र प्रस्तुत किया जाएगा । (2) आवेदक द्वारा प्रक्रिया शुल्क रुपए दस हजार शासकीय खजाने में परिशिष्ट ' क' में उल्लेखित मद में जमा कर उसकी पावती की छायाप्रति आवेदन पत्र के साथ संलग्न की जाएगी । प्रकिया शुल्क आवेदन के अमान्य होने की दशा में वापिस नहीं किया जाएगा और न ही मान्य होने की दशा में किसी देय राशि के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा ।

29. परीक्षण तथा जांच प्रतिवेदन- (1 ) कलेक्टर आवेदन पत्र का संक्षिप्त परीक्षण कर लेखबद्ध किये जाने वाले कारणों के आधार पर उसे अमान्य कर सकेगा । (2) उपकंडिका (1 ) के अंतर्गत आवेदन पत्र अमान्य न किये जाने की दशा में उसे संबंधित नजूल अधिकारी को जांच व प्रतिवेदन के लिए प्रेषित किया जाएगा । (3 ) नजूल अधिकारी द्वारा आवेदन पत्र के संबंध में कंडिका 142 में विहित रीति में सार्वजनिक उद्घोषणा जारी कर दावे, आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 32)

(4) सार्वजनिक उद्घोषणा का उस स्थानीय क्षेत्र में जहां पर भूमि स्थित है व्यापक रूप से परिचालित दो समाचार पत्रों में, जिनमें से कम से कम एक हिन्दी का होगा , आवेदक संस्था के व्यय पर प्रकाशन भी कराया जाएगा ।

(5) सार्वजनिक उद्घोषणा में यह भी लिखा जाएगा कि यदि कोई अन्य पूर्त संस्था आवेदित भूमि का आवंटन चाहती है तो वह उद्घोषणा में उल्लेखित अंतिम तिथि तक प्ररूप एक में आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकेगी । ऐसी अन्य संस्था द्वारा प्रकिया शुल्क रुपए दस हजार शासकीय खजाने में परिशिष्ट 'क' में उल्लेखित मद में जमा कर उसकी पावती की छायाप्रति आवेदन पत्र के साथ संलग्न की जाएगी । प्रक्रिया शुल्क आवेदन के अमान्य होने की दशा में वापिस नहीं किया जाएगा और न ही मान्य होने की दशा में किसी देय राशि के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा । (6) नजूल अधिकारी द्वारा स्थानीय निकाय, नगर तथा ग्राम निवेश और यदि आवेदित भूमि किसी अन्य विभाग के आधिपत्य में की भूमि से लगी हुई हो तो उस विभाग का अभिमत प्राप्त किया जाएगा । स्थानीय निकाय, नगर तथा ग्राम निवेश या अन्य विभाग के जिला कार्यालय अभिमत सामान्यतः पंद्रह दिन में देंगे, यदि तीस दिन की अवधि में भी अभिमत प्राप्त नहीं होता है तो यह माना जाएगा कि उन्हें प्रस्तावित आवंटन में कोई आपत्ति नहीं है ।

(7) नजूल अधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन में अन्य बातों के अलावा निम्न बिंदुओं का भी समावेश किया जाएगा-

(क) तत्समय प्रवृत्त विकास योजना में आवेदन अनुसार भूमि उपयोग अनुमत है अथवा नही?;

(ख) भवनों के निर्माण के लिए संबंधित क्षेत्र के लिए लागू तल क्षेत्र अनुपात (एफ.ए.आर. ) के अधिकतम उपयोग के आधार पर भूमि की न्यूनतम आवश्यकता का आकलन;

(ग) आवेदित भूमि का पूर्ण उपयोग करने की कार्ययोजना तथा उसके लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता; और

(घ) क्या आवेदित भूमि की आवश्यकता किसी अन्य महत्वपूर्ण लोक प्रयोजन के लिए है या भविष्य में संभावित है?

(8) यदि किसी भू- खण्ड प्राप्त करने के लिए अर्हता रखने वाली एक से अधिक संस्थाएँ आवेदन करती है तो उनमें से चयन करने हेतु निम्न मानदण्डों का उपयोग किया जा सकेगा- 650 ( 33) मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

(क) संस्थाओं के द्वारा प्रस्तावित गतिविधियों का क्षेत्रीय संदर्भ में तुलनात्मक महत्व;

(ख) संस्थाओं द्वारा परिचालित गतिविधियों का वर्तमान आकार- वित्तीय एवं भौतिक आयामों पर; और

(ग ) संस्थाओं की दीर्घकालीन संवहनीयता की संभावनाएं ।

(9 ) नजूल अधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन प्ररूप दो में तैयार किया जाकर जिला नजूल निर्वर्तन समिति के सदस्य सचिव को प्रेषित किया जाएगा ।

30. जांच प्रतिवेदन पर सक्षम प्राधिकारी का निर्णय- (1 ) यदि जिला नजूल निर्वर्तन समिति आवेदक संस्था (या संस्थाओं) को स्थायी पट्टा स्वीकृत करना उपयुक्त समझती हैं तो उसके द्वारा अपनी अनुशंसा अंकित कर मामला संभाग नजूल निर्वर्तन समिति को प्रेषित किया जाएगा । अन्यथा स्थिति में जिला नजूल निर्वर्तन समिति के द्वारा आवेदन पत्र अमान्य कर आवेदक संस्था (या संस्थाओं ) को सूचित किया जाएगा ।

(2) यदि संभाग नजूल निर्वर्तन समिति आवेदक संस्था (या संस्थाओं) को स्थायी पट्टा स्वीकृत करना उपयुक्त समझती है तो उसके द्वारा अपनी अनुशंसा अंकित कर मामला यथास्थिति राज्य नजूल निर्वर्तन समिति या ' भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये नजूल निर्वर्तन समिति " को प्रेषित किया जाएगा । अन्यथा स्थिति में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति के द्वारा आवेदन पत्र अमान्य कर आवेदक संस्था (या संस्थाओं) तथा जिला नजूल निर्वर्तन समिति को सूचित किया जाएगा ।

(3) (एक) एकल आवेदन के मामले में यथास्थिति राज्य नजूल निर्वर्तन समिति या 'भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये नजूल निर्वर्तन समिति " द्वारा संभाग नजूल निर्वर्तन समिति से प्राप्त मामले में निर्णय लिया जाकर आवेदक संस्था, जिला नजूल निर्वर्तन समिति तथा संभाग नजूल निर्वर्तन समिति को सूचित किया जाएगा ।

(दो) एक भूखण्ड के लिये एक से अधिक आवेदन के मामले में राज्य के मंत्रि- परिषद द्वारा संभाग नजूल निर्वर्तन समिति से प्राप्त मामले में निर्णय लिया जाकर आवेदक संस्थाओं , जिला नजूल निर्वर्तन समिति तथा संभाग नजूल निर्वर्तन समिति को सूचित किया जाएगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (34)

31. प्रब्याजि तथा भू- भाटक- (1 ) पूर्त संस्था को स्वीकृत किए जाने वाले स्थायी पट्टों पर बाजार मूल्य के 25 प्रतिशत के बराबर प्रब्याजि तथा मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण एवं पुनर्निर्धारण ) नियम, 2018 के अंतर्गत निर्धारण की विहित दर से दो गुना वार्षिक भू- भाटक अधिरोपित किया जाएगा ।

(2) पट्टे की अवधि के दौरान वार्षिक भू- भाटक के संबंध में कंडिका 19 की उपकंडिका (2) के प्रावधान लागू होंगे ।

32. पट्टे का निष्पादन तथा उसमें सामान्य शर्तों के साथ अन्य अनिवार्य शर्तें जोड़ी जाना- (1 ) सक्षम प्राधिकारी से पट्टे की स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात पट्टे के निष्पादन की कार्यवाही इस अध्याय के भाग- छ के उपबंधों के अनुसार की जाएगी ।

(2) पूर्त संस्था को रियायती दर पर स्वीकृत स्थायी पट्टे में सामान्य शर्तों के साथ-साथ निम्न शर्तें जोड़ी जाएंगी-

(क) पट्टा अहस्तांतरणीय होगा तथा विभाजन नहीं किया जाएगा;

(ख) संस्था द्वारा उसे आवंटित भूमि पर एक वर्ष के भीतर निर्माण प्रारंभ कर तीन वर्ष में निर्माण पूर्ण करना होगा ताकि भूमि का समुचित उपयोग सुनिश्चित हो;

(ग) कलेक्टर या उसके द्वारा प्राधिकृत नजूल अधिकारी, उपखण्ड अधिकारी , तहसीलदार या अन्य व्यक्ति को संस्था के लेखा अभिलेख का निरीक्षण करने का अधिकार होगा;

(घ) आवंटित भूमि पर संचालित संस्था की गतिविधियों अथवा लाभार्थियों में जाति, समुदाय या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा;

(ङ) यदि विकास योजना में व्यावसायिक उपयोग अनुमत है तो आवंटित भूमि पर संस्था द्वारा आवंटित भूमि में निर्मित क्षेत्र के 10 प्रतिशत तक व्यावसायिक उपयोग अनुज्ञेय होगा तथा ऐसे क्षेत्र के लिये व्यावसायिक उपयोग हेतु वार्षिक भू- भाटक देय होगा; और

(च) अन्य बिन्दु जो प्रकरण की परिस्थिति के अनुसार कलेक्टर ठीक समझे । 33. इस भाग के प्रावधान लागू न होना- पूर्त संस्थाओं के ऐसे मामलों में इस भाग के प्रावधान लागू नहीं होंगे, जिनमें पूर्व में भूमि आवंटन के आदेश सक्षम स्तर से जारी किये जा चुके हैं । 650( 35) मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

भाग- घ

मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनैतिक दल को कार्यालय भवन निर्माण हेतु स्थायी पट्टे पर भूमि आवंटन

34. सक्षम प्राधिकारी- मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनैतिक दल को स्थायी पट्टे पर नजूल भूमि का आवंटन करने के लिए सक्षम प्राधिकारी राज्य के मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुकम में राज्य सरकार होगी :

परंतु भोपाल विकास योजना क्षेत्र के भीतर स्थित भूमि के आवंटन के मामले में 'भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये नजूल निर्वर्तन समिति" की अनुसंशा पर निर्वर्तन का निर्णय राज्य के मंत्रिपरिषद द्वारा लिया जाएगा ।

35. भूमि आवंटन के लिये अर्हताएँ- (1 ) केवल ऐसे राजनैतिक दल को कार्यालय भवन निर्माण के लिए नजूल भूखण्ड आवंटन के लिये अहर्ता होगी जो तत्समय भारत निर्वाचन आयोग के द्वारा राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त हो ।

(2) उपकंडिका (1 ) के अधीन अर्हता रखने वाले राजनैतिक दल को अपने प्रादेशिक कार्यालय के लिए प्रदेश में केवल एक भूखण्ड आवंटन की तथा एक जिले में जिला कार्यालय के लिये केवल एक भूखण्ड आवंटन की पात्रता होगी ।

(3 ) यदि किसी राजनैतिक दल को प्रादेशिक कार्यालय या जिला कार्यालय के लिये पूर्व से शासकीय भूखण्ड आवंटित है तो ऐसे दल को यथास्थिति प्रादेशिक कार्यालय या उसी जिले में जिला कार्यालय के लिए पुनः शासकीय भूखण्ड के आवंटन की पात्रता नहीं होगी ।

(4) भूखंड का आवंटन किसी व्यक्ति या किसी पदाधिकारी के नाम से नहीं किया जाएगा, बल्कि आवंटन राजनैतिक दल के नाम से किया जाएगा ।

36. भूमि आवंटन के लिये आवेदन- (1 ) राजनैतिक दल के द्वारा इस निमित्त अधिकृत किए गए पदाधिकारी द्वारा लैण्ड बैंक में से भूमि का चयन कर कलेक्टर को प्ररूप एक में आवेदन पत्र प्रस्तुत किया जाएगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (36)

(2) आवेदक द्वारा प्रकिया शुल्क रुपए दस हजार शासकीय खजाने में परिशिष्ट ' क' में उल्लेखित मद में जमा कर उसकी पावती की छायाप्रति आवेदन पत्र के साथ संलग्न की जाएगी । प्रकिया शुल्क आवेदन के अमान्य होने की दशा में वापिस नहीं किया जाएगा और न ही मान्य होने की दशा में किसी देय राशि के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा ।

37. आवेदन पत्र का परीक्षण तथा जांच प्रतिवेदन (1 ) कलेक्टर आवेदन पत्र का संक्षिप्त परीक्षण कर लेखबद्ध किये जाने वाले कारणों के आधार पर उसे अमान्य कर सकेगा ।

(2) उपकंडिका (1) के अंतर्गत आवेदन पत्र अमान्य न किये जाने की दशा में उसे संबंधित नजूल अधिकारी को जांच व प्रतिवेदन के लिए प्रेषित किया जाएगा। (3) नजूल अधिकारी द्वारा आवेदन पत्र के संबंध में कंडिका 142 में विहित रीति में सार्वजनिक उद्घोषणा जारी कर दावे, आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे । (4) सार्वजनिक उद्द्घोषणा का उस स्थानीय क्षेत्र में जहां पर भूमि स्थित है व्यापक रूप से परिचालित दो समाचार पत्रों में, जिनमें से कम से कम एक हिन्दी का होगा, आवेदक राजनैतिक दल के व्यय पर प्रकाशन भी कराया जाएगा ।

(5) सार्वजनिक उद्घोषणा में यह भी लिखा जाएगा कि यदि कोई अन्य अर्हता प्राप्त राजनैतिक दल आवेदित भूमि का आवंटन चाहता है तो वह उ‌द्घोषणा में उल्लेखित अंतिम तिथि तक प्ररूप एक में आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकेगा । ऐसे आवेदक द्वारा प्रकिया शुल्क रुपए दस हजार शासकीय खजाने में परिशिष्ट 'क' में उल्लेखित मद में जमा कर उसकी पावती की छायाप्रति आवेदन पत्र के साथ संलग्न की जाएगी । प्रकिया शुल्क आवेदन के अमान्य होने की दशा में वापिस नहीं किया जाएगा और न ही मान्य होने की दशा में किसी देय राशि के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा । (6) नजूल अधिकारी द्वारा स्थानीय निकाय , नगर तथा ग्राम निवेश और यदि आवेदित भूमि किसी अन्य विभाग के आधिपत्य में की भूमि से लगी हुई हो तो उस विभाग के जिला कार्यालय का अभिमत प्राप्त किया जाएगा । स्थानीय निकाय , नगर तथा ग्राम निवेश या अन्य विभाग के जिला कार्यालय अभिमत सामान्यतः पंद्रह दिन मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (37) में देंगे , यदि तीस दिन की अवधि में भी अभिमत प्राप्त नहीं होता है तो यह माना जाएगा कि उन्हें प्रस्तावित आवंटन में कोई आपत्ति नहीं है ।

(7) नजूल अधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन में अन्य बातों के अलावा निम्न बिंदुओं का भी समावेश किया जाएगा-

(क) तत्समय प्रवृत्त विकास योजना में आवेदन अनुसार भूमि उपयोग अनुमत है अथवा नही? ;

(ख

) भवनों के निर्माण के लिए संबंधित क्षेत्र के लिए लागू तल क्षेत्र अनुपात (एफ.ए.आर.) के अधिकतम उपयोग के आधार पर भूमि की न्यूनतम आवश्यकता का आकलन;

(ग) आवेदित भूमि का पूर्ण उपयोग करने की कार्ययोजना तथा उसके लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता; और

(घ) क्या आवेदित भूमि की आवश्यकता किसी अन्य महत्वपूर्ण लोक प्रयोजन के लिए है या भविष्य में संभावित है?

(8 ) यदि किसी भू- खण्ड प्राप्त करने के लिए अर्हता रखने वाले एक से अधिक राजनैतिक दल आवेदन करते हैं तो राज्य की विधानसभा में जिस राजनैतिक दल के विधायकों की संख्या अधिक होगी उसे वरीयता दी जाएगी । यदि विधायकों की संख्या बराबर हो तो जिस राजनैतिक दल के राज्य से निर्वाचित लोकसभा सदस्यों की संख्या अधिक हो उसे वरीयता दी जाएगी । यदि ऐसे लोकसभा सदस्यों की संख्या भी बराबर हो तो जिस राजनैतिक दल के संसद सदस्यों की संख्या अधिक हो उसे वरीयता दी जाएगी ।

(9) नजूल अधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन प्ररूप दो में तैयार किया जाकर जिला नजूल निर्वर्तन समिति के सदस्य सचिव को प्रेषित किया जाएगा ।

38. जांच प्रतिवेदन पर सक्षम प्राधिकारी का निर्णय- (1 ) नजूल अधिकारी द्वारा प्रस्तुत किया गया जांच प्रतिवेदन जिला नजूल निर्वर्तन समिति तथा संभाग नजूल निर्वर्तन समिति के अभिमतों के साथ राज्य शासन को प्रेषित किया जाएगा । (2) यथास्थिति राज्य नजूल निर्वर्तन समिति या भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये गठित नजूल निर्वर्तन समिति द्वारा मामले में निर्णय लिया जाकर आवेदक राजनैतिक दल (या दलों) , जिला नजूल निर्वर्तन समिति तथा संभाग नजूल निर्वर्तन समिति को सूचित किया जाएगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 38 )

39. प्रब्याजि तथा भू- भाटक- (1) राजनैतिक दल को स्वीकृत किए जाने वाले स्थायी पट्टों पर प्रब्याजि निम्नानुसार देय होगी-

भूखण्ड का क्षेत्रफल

प्रब्याजि

(बाजार मूल्य का प्रतिशत) (क) 1000 वर्गमीटर तक

50 प्रतिशत

(ख) 1000 वर्गमीटर से अधिक

100 प्रतिशत

(2) ऐसे स्थायी पट्टे पर मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण एवं पुनर्निर्धारण) नियम, 2018 के अंतर्गत निर्धारण की विहित दर से दो गुना वार्षिक भू-भाटक अधिरोपित किया जाएगा ।

(3) पट्टे की अवधि के दौरान वार्षिक भू-भाटक के संबंध में कंडिका 19 की उपकंडिका (2) के प्रावधान लागू होंगे ।

40. पट्टे का निष्पादन तथा उसमें सामान्य शर्तों के साथ अन्य अनिवार्य शर्तें जोड़ी जाना- (1 ) सक्षम प्राधिकारी से पट्टे की स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात पट्टे के निष्पादन की कार्यवाही इस अध्याय के भाग- छ के उपबंधों के अनुसार की जाएगी ।

(2) राजनैतिक दल को रियायती दर पर स्वीकृत स्थायी पट्टे में सामान्य शर्तों के साथ- साथ निम्न शर्तें जोड़ी जाएंगी-

(क) पट्टा अहस्तांतरणीय होगा तथा विभाजन नहीं किया जाएगा;

(ख) राजनैतिक दल द्वारा उसे आवंटित भूमि पर एक वर्ष के भीतर निर्माण प्रारंभ कर तीन वर्ष में निर्माण पूर्ण करना होगा ताकि भूमि का समुचित उपयोग सुनिश्चित हो;

(ग) यदि किसी कारणवश राजनैतिक दल अस्तित्व में नहीं रहता है तो आवंटित भूखंड एवं उस पर निर्मित संरचना (भवन) राज्य शासन में वेष्ठित हो जाएंगे तथा उसके द्वारा भूखंड के लिए राज्य शासन को प्रब्याजि अथवा भू- भाटक के मद्दे जमा की गई राशि वापिस नहीं लौटाई जाएगी और न ही भूखंड पर निर्मित संरचना के लिए कोई प्रतिफल देय होगा; और मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (39) (घ) यदि विकास योजना में व्यावसायिक उपयोग अनुमत है तो आवंटित भूमि पर राजनैतिक दल के द्वारा निर्मित क्षेत्र के अधिकतम 10 प्रतिशत क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां अनुज्ञेय होंगी तथा ऐसे क्षेत्र के लिये व्यावसायिक उपयोग हेतु वार्षिक भू- भाटक देय होगा । 41. इस भाग के प्रावधान लागू न होना- राजनैतिक दल को भूखण्ड आवंटन के ऐसे मामलों में इस भाग के प्रावधान लागू नहीं होंगे , जिनमें पूर्व में भूमि आवंटन के आदेश सक्षम स्तर से जारी किए जा चुके हैं । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (40)

भाग ङ

मध्यप्रदेश विद्युत उत्पादन, पारेषण तथा वितरण कम्पनियों को भूमि आवंटन 42. मध्यप्रदेश विद्युत उत्पादन, पारेषण तथा वितरण कम्पनियों को भूमि का आवंटन- मध्यप्रदेश विद्युत उत्पादन, पारेषण तथा वितरण कम्पनियों को भूमि राजस्व विभाग द्वारा सीधे आवंटित नहीं की जाएगी । राजस्व विभाग के द्वारा विद्युत उत्पादन , पारेषण तथा वितरण संबंधी परियोजनाओं के लिए अध्याय- दो में विहित प्रक्रिया के अनुसार ऊर्जा विभाग को भूमि हस्तांतरित की जाएगी । इस प्रकार हस्तांतरित भूमि ऊर्जा विभाग द्वारा मध्यप्रदेश शासन द्वारा गठित मध्यप्रदेश विद्युत पारेषण कम्पनी, मध्यप्रदेश विद्युत उत्पादन कम्पनी तथा मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कम्पनियों को ऊर्जा विभाग की विभागीय नीति के अनुसार स्थायी पट्टे पर दी जाएगी । 650 (41) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

भाग च

चहुँमुखी विकास के लिए निजी पूंजी निवेश के मामलों में भूमि आवंटन पूजा 43. निजी पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए नजूल भूमि का आवंटन- (1 ) प्रदेश के चहुँमुखी विकास के लिए औद्योगिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक आदि विभिन्न क्षेत्रों में निजी पूंजी निवेश को आकर्षित कर प्रदेश में अधोसंरचना विकास के साथ - साथ रोजगार के वृहद् अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से निवेशकों को शासकीय भूमि उपलब्ध कराई जाना वांछनीय है ।

(2) राज्य शासन के निम्न विभागों द्वारा जारी की गई विभागीय नीतियों / निर्देशों के अंतर्गत निवेशकों को भूमि का निर्वर्तन इन विभागों द्वारा किया जाता है-

(क) औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन विभाग;

(ख) सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग ;

(ग) विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग;

(घ) नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग ;

(ङ) पर्यटन विभाग;

(च) पशुपालन विभाग; और

(छ) अन्य विभाग (जो भविष्य में मंत्रि - परिषद के अनुमोदन से उनकी विभागीय नीति जारी किये जाने पर शामिल होगा) ;

राजस्व विभाग के द्वारा उपरोक्त विभागों को, उनकी मांग प्राप्त होने पर , इन निर्देशों के अध्याय- दो में विहित प्रकिया के अनुसार भूमि हस्तांतरित की जाएगी । संबंधित विभाग के द्वारा अपनी विभागीय नीति के अनुसार निवेशकों को भूमि का निर्वर्तन किया जाएगा । निर्वर्तित भूमि पर प्रब्याजि तथा भू- भाटक का अधिरोपण , वसूली , पट्टे का निष्पादन, प्रशासन तथा नवीनीकरण आदि समस्त कार्यवाहियां संबंधित विभाग के द्वारा अपनी विभागीय नीति के अनुसार की जाएंगी । संबंधित विभाग का यह उत्तरदायित्व होगा कि उसे राजस्व विभाग से हस्तांतरित भूमि तथा निवेशकों को निर्वर्तित की गई भूमि के नक्शे, ले - आउट , सूचियां तथा अन्य आवश्यक अभिलेख समुचित रूप से संधारित करे व राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा मांग किए जाने पर उन्हें उपलब्ध कराए ।

(3) उपकंडिका (2) में उल्लेखित विभागों द्वारा अपनी विभागीय नीतियों / निर्देशों के अधीन भूमि आवंटन के मामलों को छोड़कर अन्य मामलों में राजस्व विभाग के द्वारा ऐसे निवेशकों को, जो राज्य शासन के किसी विभाग की नीति के अंतर्गत दी जाने मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (42)

वाली सुविधाओं का लाभ प्राप्त करते हुए शासकीय भूमि प्राप्त करने के इच्छुक हों, आगामी कंडिकाओं अनुसार नजूल भूमि का स्थायी पट्टे पर आवंटन किया जाएगा । 44. सक्षम प्राधिकारी- निवेशकों को स्थायी पट्टे पर भूमि आवंटन की स्वीकृति देने के लिए सक्षम प्राधिकारी नीचे दी गई तालिका के अनुसार होंगे-

तालिका

निवेशकों को स्थायी पट्टे पर भूमि आवंटन की स्वीकृति देने के लिए सक्षम

प्राधिकारी

क्र.

भूमि का क्षेत्रफल एवं बाजार मूल्य

सक्षम प्राधिकारी (1)

(2)

(3) 1. नगरीय क्षेत्र में 4000 वर्गमीटर तक या नगरेतर क्षेत्र में पाँच हेक्टेयर तक क्षेत्रफल की भूमि जिसका बाजार मूल्य रुपये एक करोड़ तक है

जिला नजूल निर्वर्तन समिति

2.

संभाग नजूल निर्वर्तन समिति

नगरीय क्षेत्र में 4000 वर्गमीटर से अधिक परन्तु एक हेक्टेयर तक या नगरेतर क्षेत्र में पांच हेक्टेयर से अधिक परन्तु दस हेक्टेयर तक क्षेत्रफल की भूमि जिसका बाजार मूल्य रुपये पाँच करोड़ तक है

3 संभाग नजूल निर्वर्तन समिति की अधिकारिता के बाहर के मामले

राज्य नजूल निर्वर्तन समिति

45. निवेशक द्वारा विभाग को आवेदन पत्र प्रस्तुत किया जाना- (1 ) निवेशक परियोजना का विस्तृत विवरण (Detailed Project Report-डी.पी.आर.) पूंजी निवेश के प्रस्ताव के साथ विभागीय नीति में घोषित सुविधाओं का उल्लेख करते हुए लैंड बैंक में से भूमि का चयन कर संबंधित विभाग को भूमि आवंटन के लिए आवेदन प्ररूप एक में करेगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (43) (2) आवेदक द्वारा प्रकिया शुल्क रुपए दस हजार शासकीय खजाने में परिशिष्ट 'क' में उल्लेखित मद में जमा कर उसकी पावती की छायाप्रति आवेदन पत्र के साथ संलग्न की जाएगी । प्रकिया शुल्क आवेदन के अमान्य होने की दशा में वापिस नहीं किया जाएगा और न ही मान्य होने की दशा में किसी देय राशि के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा ।

46. विभाग के द्वारा निवेशक के आवेदन का परीक्षण करना- आवेदन प्राप्त होने पर संबंधित विभाग निवेशक के आवेदन और परियोजना विवरण का विधिवत् परीक्षण करेगा । संबंधित विभाग यदि प्रस्तावित परियोजना को विभागीय नीति के अंतर्गत उपयुक्त पाता है तो परियोजना के लिए आवेदित भूमि के संदर्भ में अपनी विभागीय नीति के प्रावधानों के अनुसार अथवा विकास योजना (मास्टर प्लान) एवं मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम , 2012 के अंतर्गत अनुमत भूमि उपयोग (land use ) तथा तल क्षेत्र अनुपात (एफ.ए.आर. ) के पूर्ण उपयोग के आधार पर रांगावित ऊर्ध्वाकार (vertical ) निर्माण को ध्यान में रखते हुए भूमि की न्यूनतम आवश्यकता का आंकलन करेगा ।

47. विभाग द्वारा आवेदन पत्र का परीक्षण करने के लिए समय- सीमा- संबंधित विभाग के द्वारा किसी माह के अंतिम कार्य दिवस तक प्राप्त आवेदन पत्र का परीक्षण आगामी माह के प्रथम सप्ताह के भीतर किया जाएगा तथा पात्र तथा उपयुक्त पाए गए आवेदन को भूमि आवंटन के लिए उपयुक्तता तथा विभागीय नीति के अंतर्गत भूमि आवंटन के मामले में दी जाने वाली सुविधाओं (जिसमें प्रब्याजि एवं भू-भाटक की देयता में रियायत आदि का स्पष्ट उल्लेख होगा) का प्रमाणीकरण करते हुए और आवंटन की स्वीकृति की दशा में जारी किये जाने वाले स्थायी पट्टे में विभागीय नीति के अनुसार अधिरोपित की जाने वाली विशिष्ट शर्तों के उल्लेख के साथ माह के द्वितीय सप्ताह के सोमवार को और यदि सोमवार अवकाश दिवस है तो आगामी कार्य दिवस को संबंधित कलेक्टर को अग्रेषित किया जाएगा ।

48. कलेक्टर द्वारा आवेदन पत्र का परीक्षण- (1 ) कलेक्टर लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों के आधार पर आवेदन पत्र अमान्य कर सकेगा अथवा आवेदन पत्र को संबंधित नजूल अधिकारी को परीक्षण कर प्रस्तुत करने के लिए प्रेषित करेगा । (2) नजूल अधिकारी द्वारा आवेदन पत्र का परीक्षण किया जाएगा जिनमें प्रमुखतः निम्न बिन्दु शामिल होंगे- मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (44)

(क) आवेदित भूमि संबंधी भू- अभिलेख जिसमें नोईयत का उल्लेख भी होगा एवं मानचित्र;

(ख) आवेदित भूमि की उपलब्धता;

(

ग) विभागीय नीति के प्रावधानों के अनुसार अथवा विकास योजना (मास्टर प्लान) एवं मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम, 2012 के अंतर्गत अनुमत भूमि उपयोग (land use ) तथा तल क्षेत्र अनुपात (एफ ए आर) के पूर्ण उपयोग के आधार पर संभावित ऊर्ध्वाकार (vertical) निर्माण को ध्यान में रखते हुए भूमि की न्यूनतम आवश्यकता;

(घ) यदि भूमि विकास योजना क्षेत्र में स्थित है तो विकास योजना में नियत भूमि उपयोग; तथा यदि भूमि विकास योजना क्षेत्र के बाहर स्थित है तो आवेदित भूमि उपयोग के लिए ग्राम तथा नगर निवेश विभाग के प्रतिवेदन अनुसार भूमि उपयोग की उपयुक्तता;

(ङ) लैण्ड बैंक में अंकित प्रविष्टि के अनुसार आवेदित भूमि कृषि भिन्न प्रयोजन हेतु, जिस हेतु आवंटन चाहा गया है, आवंटन योग्य है अथवा नहीं;

(च) मध्यप्रदेश बाजार मूल्य मार्गदर्शक सिद्धान्तों का बनाया जाना तथा उनका पुनरीक्षण नियम, 2000 के अंतर्गत कलेक्टर द्वारा जारी की गई गाइड लाइन के अनुसार आवेदित भूमि का वर्तमान बाजार मूल्य;

(छ) संबंधित विभाग द्वारा अग्रेषित आवेदन के अनुसार उस विभाग की विभागीय नीति के अनुसार देय प्रब्याजि एवं वार्षिक भू-भाटक;

(ज) स्थानीय निकाय- नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद या ग्राम पंचायत से परामर्श;

(झ) यथा आवश्यक अन्य विभागों के जिला अधिकारियों से सामान्यतः पंद्रह दिवस की अवधि में अभिमत/ परामर्श लिया जाएगा , यदि तीस दिवस में भी कोई अभिमत/ परामर्श प्राप्त नहीं होता है तो यह माना जाएगा कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है;

(ञ) भूमि की मौके पर उपलब्धता संबंधी विस्तृत जॉच जिसमें अतिक्रमण आदि का भी उल्लेख होगा; और

(ट) अन्य कोई अनुषांगिक विषय । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (45) (3 ) नजूल अधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन प्ररूप दो में तैयार किया जाकर सामान्यतः दो माह के भीतर कलेक्टर को प्रस्तुत किया जाएगा ।

(4) जांच प्रतिवेदन के परीक्षण उपरांत कलेक्टर यदि पाता है कि निवेशक को आवेदित भूमि का आवंटन नहीं किया जा सकता तो वह तदनुसार विभाग को सूचित करेगा ।

(5) यदि कलेक्टर यह पाता है कि निवेशक को भूमि आवंटित करने पर विचार किया जा सकता है तो वह नजूल अधिकारी को इस आशय की सार्वजनिक उद्घोषणा जारी कर आपत्ति / सुझाव आंमत्रित करने के लिए निर्देशित करेगा । 49. सार्वजनिक उद्घोषणा- (1 ) नजूल अधिकारी द्वारा कंडिका 142 में विहित रीति में सार्वजनिक उद्घोषणा जारी कर न्यूनतम पंद्रह दिवस की अवधि देते हुए आपत्तियां / सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे ।

(2) सार्वजनिक उद्घोषणा का उस स्थानीय क्षेत्र में जहां पर भूमि स्थित है व्यापक रूप से परिचालित दो समाचार पत्रों में, जिनमें से कम से कम एक हिन्दी का होगा, आवेदक के व्यय पर प्रकाशन भी कराया जाएगा ।

(3) नजूल अधिकारी द्वारा सार्वजनिक उद्घोषणा में प्राप्त आपत्तियों तथा सुझावों पर जांच कर अपना अभिमत अंकित किया जाएगा ।

(4) एक ही भूमि या उसके अंशभाग के आवंटन हेतु यदि एक से अधिक आवेदन प्राप्त होने की दशा में उनके संबंध में आपत्तियों और सुझावों के निराकरण के पश्चात् आवंटन हेतु पात्र आवेदन पत्रों से किसी एक के चयन के लिए नजूल अधिकारी द्वारा निम्न बिन्दुओं पर तुलनात्मक परीक्षण किया जाएगा-

( क) परियोजना द्वारा सृजित होने वाला सीधा रोजगार ;

(ख ) परियोजना में किए जा रहे निवेश का आकार;

(ग) आवेदक द्वारा प्रदेश में पूर्व से स्थापित और गतिशील परियोजनाएँ ; और (घ) परियोजना की स्थापना से जिले को प्राप्त होने वाले अन्य लाभ (उदाहरण के लिए स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता में गुणात्मक या परिमाणात्मक वृद्धि) । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (46)

(5) नजूल अधिकारी अपने जांच प्रतिवेदन तथा प्राप्त आपत्तियों/ सुझावों के संबंध में अपने अभिमत के साथ मामला जिला नजूल निर्वर्तन समिति के सदस्य सचिव को प्रेषित करेगा ।

50. जांच प्रतिवेदन पर सक्षम प्राधिकारी का निर्णय- (1 ) जिस मामले में जिला नजूल निर्वर्तन समिति स्थायी पट्टा स्वीकृत करने के लिए सक्षम प्राधिकारी है उसमें उसके द्वारा निर्णय लिया जाकर आवेदक (या आवेदकों) तथा संबंधित विभाग (या विभागों) को सूचित किया जाएगा । जिस मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति अथवा राज्य नजूल निर्वर्तन समिति सक्षम प्राधिकारी है उसमें जिला नजूल निर्वर्तन समिति के द्वारा अपने अभिमत के साथ मामला संभाग नजूल निर्वर्तन समिति को प्रेषित किया जाएगा ।

(2) जिस मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति स्थायी पट्टा स्वीकृत करने के लिए सक्षम प्राधिकारी है उसमें उसके द्वारा जिला नजूल निर्वर्तन समिति से प्राप्त मामले में निर्णय लिया जाकर आवेदक (या आवेदकों), संबंधित विभाग (या विभागों) तथा जिला नजूल निर्वर्तन समिति को सूचित किया जाएगा । जिस मामले में राज्य नजूल निर्वर्तन समिति स्थायी पट्टा स्वीकृत करने के लिए सक्षम प्राधिकारी है उसमें संभाग नजूल निर्वर्तन समिति द्वारा अपना अभिमत अंकित कर मामला राज्य नजूल निर्वर्तन समिति को प्रेषित किया जाएगा ।

(3) जिला नजूल निर्वर्तन समिति तथा संभाग नजूल निर्वर्तन समिति द्वारा प्रकरण प्राप्त होने की दिनांक से पन्द्रह दिवस के भीतर निराकरण किया जाएगा । (4) जिस मामले में राज्य नजूल निर्वर्तन समिति स्थायी पट्टा स्वीकृत करने के लिए सक्षम प्राधिकारी है उसमें उसके द्वारा संभाग नजूल निर्वर्तन समिति से प्राप्त मामलों में निर्णय लिया जाकर आवेदक (या आवेदकों), संबधित विभाग (या विभागों) , जिला नजूल निर्वर्तन समिति तथा संभाग नजूल निर्वर्तन समिति को सूचित किया जाएगा । 51. प्रब्याजि तथा भू- भाटक- (1 ) ऐसे मामलों में बाजार मूल्य के बराबर प्रब्याजि तथा मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण एवं पुनर्निधारण ) नियम, 2018 के अंतर्गत निर्धारण की विहित दर से दो गुना भू- भाटक देय होगाः

परन्तु यदि किसी विभाग की नीति के अनुसार निवेशक को प्रब्याजि या भू-भाटक पर कोई रियायत प्राप्त करने की पात्रता है तो आवंटित भूमि के संबंध में ऐसी दरों पर प्रब्याजि तथा भू- भाटक देय होगा । 650(47) मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

(2) पट्टे की अवधि के दौरान वार्षिक भू- भाटक के संबंध में कंडिका 19 की उपकंडिका (2) के प्रावधान लागू होंगे ।

52. पट्टे का निष्पादन तथा उसमें सामान्य शर्तों के साथ अन्य अनिवार्य शर्तें जोड़ी जाना- ( 1 ) सक्षम प्राधिकारी से पट्टे की स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात् पट्टे के निष्पादन की कार्यवाही इस अध्याय के भाग- छ के उपबंधों के अनुसार की जाएगी ।

(2) ऐसे स्थायी पट्टों में सामान्य शर्तों के साथ - साथ संबंधित विभागीय नीति में उल्लेखित शर्तें तथा निम्न शर्तें जोड़ी जाएंगी-

(क) परियोजना , जिसके लिए भूमि आवंटित की गई है, की स्थापना का कार्य आवंटन उपरांत भूमि का आधिपत्य सौपे जाने की दिनांक से एक वर्ष के भीतर प्रारंभ किया जाएगा तथा तीन वर्ष के भीतर पूर्ण कर परियोजना प्रारंभ की जाएगी;

(ख ) आवंटिती द्वारा आवंटित भूमि या उसके किसी भाग को विक्रय , दान, उप पट्टा या अन्यथा अंतरित नहीं किया जाएगा; और

(ग) आवंटिती अथवा उसकी सहमति से किसी अन्य द्वारा आवंटित भूमि या उसका कोई भाग राज्य शासन की पूर्वानुमति के बिना बंधक नहीं रखी जाएगी ।

उपरोक्त शर्तों का अपालन या उल्लंघन पाए जाने पर आवंटन स्वतः निरस्त समझा जाएगा ।

53. स्थायी पट्टे की शर्तों का पालन कराने के संबंध में संबंधित विभाग का उत्तरदायित्व- कलेक्टर स्वीकृति आदेश की एक प्रति के साथ निष्पादित पट्टे की प्रति संबंधित विभाग को प्रेषित करेगा । पट्टे की शर्तों तथा विभागीय नीति का आवंटिती से पालन कराना सुनिश्चित करने का दायित्व उस सीमा तक, जो संबंधित विभाग द्वारा नीति का उल्लेख करते हुए प्रस्तावित की गयी हो, संबंधित विभाग का होगा ।

54. आवंटित भूमि के प्रयोजन में परिवर्तन की स्थिति में देय राशि (1 ) किसी निवेशक को यदि किसी एक प्रयोजन के लिए भूमि आवंटित की जाती है और भविष्य में राज्य शासन की पूर्वानुमति से उसे किसी अन्य प्रयोजन में उपयोग में लाया जाता है तो निवेशक द्वारा शमन राशि का राज्य शासन को भुगतान करना मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (48 )

होगा जो यथास्थिति रियायत देते हुए आवंटित भूमि के मामले में कंडिका 82 की उपकंडिका (2) की तालिका के सरल कमांक 8 और अन्य मामलों में कंडिका 82 की उपकंडिका (2) की तालिका के सरल कमांक 6 अनुसार होगी ।

(2) नए प्रयोजन के लिए तत्समय देय वार्षिक भू- भाटक का पुनर्निधारण किया जाएगा जो पट्टे की शेष अवधि के लिए देय होगा ।

55. निजी पूंजी निवेशकों को आवंटित शासकीय पट्टे की भूमियों के अभिहस्तांकन (conveyance) की अनुमति- (1 ) ऐसी शासकीय भूमि, जो निजी पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए आवंटित की गई है, को अभिहस्तांकित कर वित्तीय संस्थाओं तथा बैंकों से परियोजना के लिए ऋण प्राप्त करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से अनुज्ञप्ति प्राप्त अनुसूचित बैंकों एवं कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 4(1 ) के अंतर्गत घोषित लोक वित्तीय संस्थाओं के पक्ष में पट्टाधिकारों का अभिहस्तांकन की अनुमति आगामी उपबंधों के अधीन उपलब्ध होगी ।

(2) यह स्पष्ट किया जाता है कि अभिहस्तांकन (conveyance ) बंधक (mortgage) नहीं है, न ही आवंटिती को पट्टाधिकार के अभिहस्तांकन की पूर्ण शक्ति (full power) या समग्र प्राधिकार (absolute authority ) है । आवंटिती की अभिहस्तांकन की शक्ति सीमित है ।

56. अभिहस्तांकन की शर्तें- अभिहस्तांकन की अनुमति निम्नलिखित शर्तों पर दी जा सकेगी:-

(क) भूमि पर राज्य शासन को देय प्रभार प्रथम दायित्व होगा, किसी बैंक या वित्तीय संस्था या अन्य का नहीं;

(ख) भूमि के अभिहस्तांकन के उपरान्त भी भूमि का उपयोग यथापूर्व प्रयोजन के लिये ही किया जा सकेगा, प्रयोजन परिवर्तन नही किया जा सकेगा;

(ग) पट्टाधारी से किसी राशि की वसूली के लिये किसी न्यायालय या प्राधिकरण या प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत वाद या दावे में राज्य शासन आवश्यक पक्षकार होगा । अभिहस्तांकिती ऐसा वाद या दावा राज्य शासन को पक्षकार बनाए बिना प्रस्तुत नहीं कर सकेगा;

(घ) अभिहस्तांकिती अपनी देय राशि प्रथमतः अभिहस्तांकित भूमि पर स्थित समस्त चल सम्पत्ति से वसूल कर सकेगा, उसके बाद भूमि पर स्थापित संरचना से वसूल कर सकेगा;

650 (49)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

(ङ) पट्टेदार और बैंक या वित्तीय संस्था के बीच ऋण की शर्तों के तहत वसूली की कार्यवाही करने के पूर्व बैंक या वित्तीय संस्था को कम से कम 3 माह पूर्व राज्य शासन को नोटिस देना होगा;

(च) बैंक या वित्तीय संस्था द्वारा वसूली के अनुकम में अभिहस्तांकित भूमि के लीज का हस्तांतरण पट्टे की शेष अवधि के लिए होगा और इसके पश्चात् हस्तांतरिती को पट्टे का नवीनीकरण कराना होगा;

(छ) कम्पनी के मामलों में हस्तांतरण से तात्पर्य वही माना जायेगा जो कम्पनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों में निहित है;

(ज) भूमि का मूल्यांकन हस्तांतरण के समय प्रचलित बाजार मूल्य के आधार पर किया जाएगा । इस प्रकार संगणित बाजार मूल्य और आवंटन दिनांक को आवंटिती द्वारा प्रब्याजि के रूप में भुगतान की गयी राशि के अन्तर की 10 प्रतिशत राशि के बराबर हस्तांतरण शुल्क सरकारी खजाने में परिशिष्ट ' क' में उल्लेखित मद में जमा करना होगा । अभिहस्तांकन के प्रत्येक पश्चात्वर्ती मामले में भी पश्चात्वर्ती तथा पूर्ववर्ती हस्तांकनों के समय के संगणित बाजार मूल्यों के अंतर की 10 प्रतिशत राशि के बराबर हस्तांतरण शुल्क अधिरोपित किया जाएगा;

(झ) अभिहस्तांकिती प्रश्नाधीन भूमि के संबंध में सभी पर्यावरणीय दायित्वों के निर्वहन के लिये उत्तरदायी होगा;

(ञ) यदि अभिहस्तांकन के उपरान्त कभी भी यह प्रकट होता है कि अभिहस्तांकन की नीति अथवा उसकी वर्जना संबंधी शैथिल्य किसी तथ्य के छुपाने (suppression) या किसी दुर्व्यपदेशन (misrepresentation) या छल से प्राप्त किया गया है तो अभिहस्तांकन शून्य समझा जाएगा;

(ट) केवल उसी ऋणदाता के पक्ष में अभिहस्तांकन अनुमत होगा जो या तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 के अंतर्गत एक शेड्यूल्ड बैंक है अथवा कम्पनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत एक लोक वित्तीय संस्थान है:

परन्तु यदि ऋणदाता एक कॉन्सॉर्शियम (consortium ) है और उसके सभी सदस्य रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 के अंतर्गत शेड्यूल्ड बैंक अथवा कम्पनी अधिनियम , 2013 के अंतर्गत लोक वित्तीय संस्थान नहीं हैं, तो यथास्थिति ऐसे कॉन्सॉर्शियम द्वारा नियुक्त ट्रस्टी अर्थात् अग्रणी ( lead) बैंक का रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 के अंतर्गत शेड्यूल्ड बैंक होना अथवा वित्तीय संस्था के मामले में मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

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उसका कम्पनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अंतर्गत लोक वित्तीय संस्थान होना आवश्यक होगा;

(ठ) यदि ऋण एक कॉन्सॉर्शियम (consortium) द्वारा दिया गया है, तो इस विशेष परिस्थिति को दृष्टिगत रखते हुए ऋणदाताओं के पक्ष में यथास्थिति उनके द्वारा नियुक्त ट्रस्टी अर्थात् अग्रणी ( lead) बैंक अथवा वित्तीय संस्था को आवेदक कम्पनी के साथ अभिहस्तांकन या अन्तरण अनुबंध हस्ताक्षरित करने की अनुमति होगी;

(ड) अभिहस्तांकन के मामलो में लैण्डर्स स्टेप- इन राईट ( lender's step- in right) का सिद्धान्त लागू होगा; और

(ढ) यदि परियोजना हेतु स्वीकृत पुनर्वास पैकेज की या अन्य किसी या किन्हीं निर्धारित शर्तों का कोई उल्लंघन पाया जाता है तो अनुमति निरस्त की जा सकेगी ।

57. अभिहस्तांकन की अनुमति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया जाना- (1 ) अभिहस्तांकन की अनुमति के लिए अभिहस्तांतरणकर्ता कलेक्टर को आवेदन प्रस्तुत करेगा । अभिहस्तांतरणकर्ता अपने आवेदन के साथ,-

(क) इस आशय का शपथ-पत्र देगा कि वह अभिहस्तांकन विषयक किसी निर्योग्यता अथवा अक्षमता से ग्रस्त नहीं है;

(ख) इस आशय का अदेयता प्रमाण - पत्र प्रस्तुत करेगा कि राज्य शासन को देय किसी भी प्रकार का कर, उपकर, प्रभार या भू- राजस्व बकाया नहीं है; और

(ग) ऐसी संस्थाओं की सूची जिनके पक्ष में अभिहस्तांकन प्रस्तावित है, प्रस्तुत करते हुए अभिहस्तांकन के लिए आवश्यकता के कारणों का विवरण, आवश्यक दस्तावेज तथा ऐसे अन्य विवरण जिनसे यह सिद्ध हो सके कि अभिहस्तांकन के बिना परियोजना का कार्यान्वयन संभव नहीं है, प्रस्तुत करेगा ।

(2) कलेक्टर अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत राजस्व अधिकारी जो तहसीलदार से अनिम्न श्रेणी का होगा, प्राप्त आवेदन की जांच के लिए समस्त प्रासंगिक तथ्यों एवं दस्तावेजों का निरीक्षण कर सकेगा एवं इस हेतु भूमि पर प्रवेश कर सकेगा । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 51) 58. कलेक्टर द्वारा प्रतिवेदन तैयार कर राज्य शासन को प्रेषित करना- (1 ) कलेक्टर मामले में परीक्षण निम्न बिन्दु सम्मिलित करते हुए अपना प्रतिवेदन तैयार करेगाः-

(क) प्रकरण का तिथिवार तथ्यात्मक विवरण;

(ख) आवेदक या अभिहस्तांतरणकर्ता की परियोजना की वर्तमान स्थिति;

(ग) आवेदक आवंटिती को प्रश्नाधीन भूमि पूर्ण प्रब्याजि पर आवंटित की गई है अथवा रियायती दर पर; रियायती दर पर आवंटित भूमि के मामले में कलेक्टर, आवेदक आवंटिती द्वारा भूमि आवंटन के समय भुगतान की गयी प्रब्याजि की राशि का उल्लेख करते हुए , अभिहस्तांकन की अनुमति की अनुशंसा करते समय यह स्पष्ट उल्लेख करेगा कि भूमि का आवंटन रियायती दर पर किया गया है;

(घ) ऋणदाता रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 के अंतर्गत एक शेड्यूल्ड बैंक है अथवा कम्पनी अधिनियम , 2013 के अंतर्गत एक लोक वित्तीय संस्थान हैः

परन्तु यदि ऋणदाता एक कॉन्सॉर्शियम (consortium) है और उसके सभी सदस्य रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 के अंतर्गत शेड्यूल्ड बैंक अथवा कम्पनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत लोक वित्तीय संस्थान नहीं हैं, तो यथास्थिति ऐसे कॉन्सॉर्शियम द्वारा नियुक्त ट्रस्टी अर्थात् अग्रणी ( lead) बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट , 1934 के अंतर्गत शेड्यूल्ड बैंक है अथवा वित्तीय संस्था कम्पनी अधिनियम , 2013 के प्रावधानों के अंतर्गत लोक वित्तीय संस्थान है;

(ङ) यदि ऋण एक कॉन्सॉर्शियम (consortium) द्वारा दिया गया है, तो इस विशेष परिस्थिति को दृष्टिगत रखते हुए ऋणदाताओं के पक्ष में यथास्थिति उनके द्वारा नियुक्त ट्रस्टी अर्थात् अग्रणी ( lead) बैंक अथवा वित्तीय संस्था के साथ अभिहस्तांकन या अन्तरण अनुबंध हस्ताक्षरित करने के लिए आवेदक या अभिहस्तांतरणकर्ता सहमत है;

(च) आवेदक या अभिहस्तांतरणकर्ता का इस आशय का स्वीकारोक्ति पत्र (undertaking) कि उसे अभिहस्तांकन की अनुमति जिन शर्तों पर दी जाएगी, वह पालन करने को तत्पर है;

(छ) आवेदक या अभिहस्तांतरणकर्ता द्वारा आवंटन की किसी शर्त का उल्लंघन या अपालन नहीं किया गया है;

(ज) परियोजना के लिए यदि कोई पुनर्वास पैकेज स्वीकृत है तो आवेदक या अभिहस्तांतरणकर्ता द्वारा ऐसे पैकेज का पालन किया गया है; और मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

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(झ) अन्य बिन्दु जिसे कलेक्टर उचित समझे ।

(2) कलेक्टर उक्तानुसार जांच उपरान्त अभिहस्तांकन की अनुमति के लिए केवल उन्हीं मामलों में अनुशंसा करेगा, जिनमें उसकी संतुष्टि हो जाए कि प्रश्नाधीन भूमि के संबंध में संहिता की धारा 182 की उपधारा (2) के अंतर्गत पुनः प्रवेश के अधिकार का प्रयोग करने के आधार उपलब्ध नहीं हैं ।

(3) कलेक्टर उक्तानुसार प्रतिवेदन तैयार कर अपनी अनुशंसा या अभिमत के साथ आयुक्त को प्रस्तुत करेगा जो कलेक्टर के प्रतिवेदन पर अपना स्पष्ट अभिमत अंकित कर उसे राज्य शासन, राजस्व विभाग को प्रेषित करेगा ।

59. राज्य शासन के द्वारा अभिहस्तांकन की अनुमति के आवेदन पर निर्णय लिया जाना- राज्य शासन आयुक्त के माध्यम से कलेक्टर के प्रतिवेदन के साथ प्राप्त अभिहस्तांकन की अनुमति के आवेदन पर विचार करेगा और प्रकरण के गुण- दोष पर विचार उपरान्त ऊपर कंडिका 56 में वर्णित शर्तों पर अभिहस्तांकन की अनुमति दे सकेगा ।

60. ऋणदाता संस्था के पक्ष में अभिहस्तांकित भूमि का हस्तांतरण- अभिहस्तांकन की अनुमति जारी होने पर यदि ऋणदाता संस्था द्वारा अभिहस्तांकित भूमि के हस्तांतरण की स्थिति उत्पन्न होती है तो ऋणदाता संस्था कंडिका-56 की शर्तों की पूर्ति करते हुए राज्य शासन को आवेदन करेगी जिस पर विचार कर राज्य शासन लीज के हस्तांतरण के लिए अनुमति जारी करेगा । 650 ( 53)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

भाग-छ

स्थायी पट्टे का निष्पादन, अग्रिम आधिपत्य तथा समर्पण

61. प्रब्याजि तथा वार्षिक भू- भाटक जमा करना (1 ) सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्थायी पट्टे के आवंटन की स्वीकृति जारी करने की दिनांक से दो माह की अवधि के भीतर आवंटिती द्वारा ऐसे आदेश के पालन में देय प्रब्याजि एवं वार्षिक भू- भाटक की राशि जमा करना अनिवार्य होगा । इस प्रकार नियत समयावधि के भीतर राशि जमा नहीं करने की दशा में आवंटन की स्वीकृति का आदेश स्वतः समाप्त समझा जाएगा ।

(2) यदि आवंटिती द्वारा स्थायी पट्टे के आवंटन की स्वीकृति की दिनांक से दो माह की अवधि के अवसान के पूर्व देय राशि जमा कराने के लिए अतिरिक्त समय देने के लिए आवेदन कलेक्टर को प्रस्तुत कर दिया जाता है तो कलेक्टर युक्तियुक्त आधारों पर अधिकतम एक माह की अतिरिक्त समयावधि स्वीकृत कर सकेगा । ऐसी दशा में राशि के भुगतान की तिथि को लागू बाजार मूल्य के आधार पर प्रश्नाधीन भूमि पर संगणित प्रब्याजि एवं उस तिथि को प्रश्नाधीन भूमि पर लागू दर पर वार्षिक भू- भाटक और ऐसी कुल देय राशि पर अतिरिक्त स्वीकृत समयावधि के लिए 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर से ब्याज देय होगा । ऐसी देय राशि का भुगतान अतिरिक्त समयावधि के भीतर जमा न किए जाने पर पट्टे के आवंटन की स्वीकृति का आदेश स्वतः समाप्त समझा जाएगा ।

62. पट्टे का निष्पादन तथा भू-अभिलेखों में प्रविष्टियों का अद्यतनीकरण- (1 ) स्थायी पट्टे की स्वीकृति या अस्थायी पट्टे का स्थायी पट्टे में परिवर्तन की स्वीकृति तथा यथास्थिति प्रब्याजि या परिवर्तन शुल्क और वार्षिक भू- भाटक के भुगतान के पश्चात् कलेक्टर प्ररूप- तीन में पट्टा- विलेख तीन प्रतियों में तैयार करवायेगा ।

(2) स्थायी पट्टे की सामान्य शर्तों के साथ - साथ इन निर्देशों के द्वारा विहित की गई अतिरिक्त शर्तों और पट्टा आवंटन की स्वीकृति आदेश में उल्लेखित विशेष शर्तों का पट्टा-विलेख में यथास्थान अंकित किया जायेगा ।

(3) पट्टा विलेख में कंडिका 19 की उपकंडिका (2) में उल्लेखित शर्त का उल्लेख , ऐसे मामले में जहां लागू हो, जोड़ा जाएगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

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(4) पट्टा- विलेख कलेक्टर को हस्ताक्षर हेतु प्रस्तुत करने के पूर्व नजूल अधिकारी के द्वारा पट्टा-विलेख की निम्न बिन्दुओं के विषय में सावधानीपूर्वक जाँच- पड़ताल की जाएगी कि-

(क) प्ररूप में केवल अनपेक्षित अंश ही काटा / हटाया गया है;

(ख) अपेक्षित अंश रखा गया है;

(ग) खाली स्थान ठीक से भरे गये हैं;

(घ) जिस दिनांक से पट्टेदार भू- भाटक का भुगतान करने के लिए बाध्य है, वह ठीक से लिखी गई है;

(ङ) विशिष्ट मामले में आवश्यकताओं के अनुरूप समुचित परिवर्तन कर दिये गये हैं, विशेषतः यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इन निर्देशों में विहित की गई अतिरिक्त शर्तों और पट्टा आवंटन की स्वीकृति आदेश में उल्लेखित विशेष शर्तों का पट्टा-विलेख में यथास्थान अंकित किया गया है;

(च) पट्टे में ऐसे अतिरिक्त खण्ड जोड़ लिये गये हैं, जो कि स्वीकृति आदेश के अनुसार आवश्यक हों और यदि आवंटित भूखंड किसी सर्वेक्षण संख्यांक, ब्लॉक संख्यांक या प्लाट संख्याक का अंशभाग है तो ऐसे अंशभाग को नक्शे में स्पष्ट दर्शाया गया है;

(छ) संबंधित भू-खण्डों के भू- खण्ड संख्यांक और क्षेत्रफल आदि ठीक से लिखे गये हैं; और

( ज) पट्टे पर यथाविधि प्रश्नाधीन भूमि के प्रमाणित रेखा- चित्र की प्रति अनुलग्न की गई है ।

(5) कलेक्टर द्वारा मध्यप्रदेश के राज्यपाल की ओर से समुचित अधिकारी के रूप में पट्टा विलेख पर हस्ताक्षर किए जाएंगे ।

(6) मुद्रांक शुल्क का भुगतान पट्टेदार द्वारा किया जाएगा । निष्पादन के बाद पट्टे की मूल प्रति पट्टेदार को दी जायेगी और दूसरी प्रति संदर्भ के लिए राजस्व मामले में रखी जायेगी ।

(7) पट्टे के पंजीयन के उपरांत भू-अभिलेखों में प्रविष्टियां अद्यतन की जाएंगी तथा उसके पश्चात् ही मामला अभिलेख कक्ष में जमा किया जाएगा ।

(8) कभी- कभी पट्टा- विलेख निष्पादित करने के पूर्व ही भू- खण्ड का कब्जा दे दिया जाता है । कभी-कभी लिखे गए पट्टा-विलेख का पंजीयन नहीं किया जाता 650 (55) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

है या वह किसी अन्य प्रकार से अनुपयोगी हो जाता है और नया पट्टा- विलेख लिखना आवश्यक हो जाता है । ऐसे मामलों में वह दिनांक ठीक- ठीक लिखना आवश्यक है जब से कि पट्टेदार भू- भाटक का भुगतान करने को बाध्य हो । पट्ट के प्ररूप में ऐसे समुचित परिवर्तन किए जाने चाहिए , जो कि प्रत्येक मामले की विशेष परिस्थितियों के अनुकूल हों ।

(9 ) ऐसे मामलों में , जिनमें बिना प्रब्याजि लिए या एक रुपये प्रब्याजि लिये तथा एक रुपये वार्षिक भू- भाटक लेकर स्थायी पट्टे मंजूर किए गए हैं और आधिपत्य भी सौंपा जा चुका है किन्तु पट्टा निष्पादित नहीं है, उनमें प्ररूप- तीन में पट्टा निष्पादित किया जाएगा ।

63. भूमि का आधिपत्य देना- पट्टे पर दिये गये भूखंड का आधिपत्य पट्टेदार को पट्टे के यथाविधि निष्पादित होने के बाद ही दिया जाएगा ।

64. पट्टे का आरंभ और भू- भाटक की देयता- (1 ) पट्टा, पट्टेदार द्वारा उसके निष्पादित किए जाने की दिनांक से अथवा पट्टे में उल्लेखित की गई दिनांक से या अग्रिम आधिपत्य के मामले में अग्रिम आधिपत्य सौंपे जाने की दिनांक से प्रारम्भ होगा । पट्टा प्रारंभ होने की दिनांक के राजस्व वर्ष की अंतिम दिनांक को पट्टावधि का प्रथम वर्ष समाप्त माना जाएगा ।

(2) वार्षिक भू- भाटक, पट्टा निष्पादन के राजस्व वर्ष की पहली दिनांक अर्थात् 01 अप्रैल से देय होगा तथा शेष पट्टावधि के उत्तरवर्ती वर्षों के लिये भी अप्रैल से देय होगा । 01 (3 ) सभी निष्पादित स्थायी पट्टों में पट्टे के आरंभ और भू- भाटक की देयता के लिये उपकंडिका (1 ) एवं (2) के प्रावधान लागू होंगे ।

65. स्थायी पट्टे की अवधि- (1 ) स्थायी पट्टा 30 वर्ष की अवधि के लिये दिया जाएगा जो पट्टावधि के अवसान के एक वर्ष पूर्व आवेदन करने पर इस अध्याय के भाग-झ के उपबंधों के अधीन नवकरणीय होगा ।

(2) पट्टावधि के तीस वर्ष की गणना पट्टे के प्रारंभ वर्ष को प्रथम वर्ष मानते हुए की जाएगी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

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(3) उपकंडिका (1 ) में किसी बात के होते हुए भी कतिपयं विशिष्ट मामलों में वित्त विभाग की सहमति से राजस्व विभाग द्वारा 99 वर्ष की अवधि के लिए स्थायी पट्टा स्वीकृत किया जा सकेगा।

66. स्थायी पट्टा समर्पण या पुनर्प्रवेश के मामले में प्रब्याजि वापसी- ( 1 ) इस कंडिका के प्रावधान केवल ऐसे स्थायी पट्टों के मामलों पर लागू होंगे जो इन निर्देशों के अधीन कंडिका 19 की उपकंडिका (1 ) में उल्लेखित सक्षम प्राधिकारी द्वारा अथवा कंडिका 142 में निरसित किये गये निर्देशों के अनुसार राज्य शासन या कलेक्टर द्वारा आवंटित हुये हैं । ये प्रावधान राज्य शासन के अन्य विभागों या उपक्रमों (जैसे औद्योगिक नीति एवं प्रोत्साहन विभाग, सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग, पर्यटन विभाग, मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अद्योसंरचना मंडल, विकास प्राधिकरण, औद्योगिक केन्द्र विकास निगम आदि) के माध्यम से आवंटित पट्टों के मामलों में लागू नहीं होंगे ।

(2) कृषि भिन्न प्रयोजन यथा-आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, शैक्षणिक या अन्य प्रयोजन के लिये स्थायी पट्टे पर आवंटित भूमि का आवंटिती अथवा पट्टेदार द्वारा उपयोग नहीं किये जाने पर, राज्य शासन के पक्ष में समर्पण कलेक्टर या उसके द्वारा अधिकृत किए गए अपर कलेक्टर के द्वारा स्वीकार किया जा सकेगा जिसे इस कंडिका में आगे ' प्राधिकृत अधिकारी' कहा जाएगा ।

(3 ) आवंटिती अथवा पट्टेदार पट्टाधीन भूमि राज्य शासन के पक्ष में समर्पित करने तथा उसके द्वारा जमा कराई गई प्रब्याजि की राशि प्राप्त करने हेतु प्राधिकृत अधिकारी को आवेदन करेगा । आवंटिती अथवा पट्टेदार अपने आवेदन के साथ इस आशय का घोषणा- पत्र भी प्रस्तुत करेगा कि पट्टाधीन भूमि पूर्णतः विल्लंगम मुक्त (free from all encumbrances ) है तथा किसी भी न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष विवादित नहीं है ।

(4) ऐसा आवेदन प्राप्त होने पर प्राधिकृत अधिकारी तहसीलदार से स्थल प्रतिवेदन प्राप्त करेगा । तहसीलदार द्वारा अपने प्रतिवेदन में प्रमुखतः पट्टाधीन भूमि की वास्तविक स्थिति का उल्लेख किया जाएगा, यथा- स्थल पर पट्टाधीन भूमि रिक्त है; कोई अतिक्रमण आदि नहीं है; आवंटिती अथवा पट्टेदार या किसी अन्य द्वारा भूमि पर कोई स्थाई या अस्थाई निर्माण आदि नहीं किये गये हैं; यदि कोई निर्माण 650 (57) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

किया गया था तो उसे हटा लिया गया है और स्थल पर पट्टाधीन भूमि को उसी स्थिति में वापस लाया जा चुका है जिस स्थिति में आवंटिती अथवा पट्टेदार को आवंटन के समय कब्जा सौंपा गया था । तहसीलदार अपने प्रतिवेदन में सम्यक् जांच उपरांत यह भी पुष्टि करेगा कि पट्टाधीन भूमि पूर्णतः विल्लंगम मुक्त (free from all encumbrances ) है ।

(5) तहसीलदार अपना प्रतिवेदन नजूल अधिकारी के माध्यम से प्राधिकृत अधिकारी को प्रस्तुत करेगा ।

(6) यदि प्राधिकृत अधिकारी पट्टा समर्पण का आवेदन मान्य करने योग्य पाता है तो वह आवंटन स्वीकृति अथवा पट्टे में उल्लेखित वार्षिक भू- भाटक का बकाया तथा अन्य देय प्रभार की गणना कर पट्टेदार के वसूली योग्य राशि निर्धारित करेगा ।

(7) प्राधिकृत अधिकारी पट्टाधीन भूमि के लिए आवंटिती अथवा पट्टेदार द्वारा जमा की गई प्रब्याजि की राशि में से प्रारंभिक कटौती के रूप में जमा राशि के 10 प्रतिशत के बराबर तथा आवंटन स्वीकृति की दिनांक से पट्टाधीन भूखण्ड समर्पण के आवेदन की दिनांक के बीच की अवधि के लिए प्रत्येक वर्ष के लिए दो प्रतिशत के मान से संगणित राशि समर्पण शुल्क के रूप में कटौती कर शेष राशि आवंटिती अथवा पट्टेदार को वापस लौटाये जाने का निर्णय लेगा । उदाहरण के लिये 15 वर्ष पश्चात् समर्पण किये जाने पर 10 + 30 = 40 प्रतिशत राशि काटी जाएगी । प्रब्याजि से वापस की जाने वाली संगणित राशि पर कोई ब्याज देय नहीं होगा ।

(8) प्राधिकृत अधिकारी द्वारा पट्टाधीन भूमि समर्पण के आवेदन को स्वीकृत किए जाने तथा आवंटिती अथवा पट्टेदार को राशि लौटाए जाने का निर्णय लिए जाने पर आवंटिती अथवा पट्टेदार प्राधिकृत अधिकारी अथवा उसके द्वारा निर्दिष्ट अधिकारी को पट्टाधीन भू- खंड का रिक्त कब्जा सौंपेगा ।

(9) यदि पट्टा निष्पादित किया जा चुका है, तो प्राधिकृत अधिकारी द्वारा राशि लौटाए जाने का निर्णय लिए जाने पर पट्टेदार 30 दिवस के भीतर, पट्टा निरस्तीकरण विलेख तैयार कराकर प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगा, जिसे प्राधिकृत अधिकारी पंजीकृत करायेगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

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(10) पट्टा निरस्तीकरण विलेख पंजीकृत किये जाने के उपरांत प्राधिकृत अधिकारी के द्वारा उपकंडिका (6) में संगणित वापसी योग्य राशि में से उपकंडिका (5) में निर्धारित की गई वसूली योग्य राशि घटाकर शेष राशि आवंटिती अथवा पट्टेदार को वापस लौटाई जाएगी ।

(11 ) प्राधिकृत अधिकारी द्वारा उपरोक्तानुसार आवंटिती अथवा पट्टेदार को राशि लौटाये जाने का निर्णय लिए जाने पर 'पट्टा निरस्तीकरण विलेख' के आधार पर भू-अभिलेख में अद्यतन प्रविष्टि प्रमाणित करने हेतु संबंधित तहसीलदार को निर्देशित किया जाएगा जो भू-अभिलेख अद्यतन करने की कार्यवाही सुनिश्चित करेगा । (12) रियायती दर पर आवंटित पट्टों पर भी यह प्रावधान समान रूप से लागू होगा । ऐसे मामलो में रियायती आधार पर जमा प्रब्याजि में से आनुपातिक कटौती कर राशि लौटाई जा सकेगी ।

(13) प्रब्याजि में से लौटाई जाने वाली राशि को दोनों ही मामलों में, चाहे आवंटिती अथवा पट्टेदार द्वारा समर्पण के लिये आवेदन दिया गया हो अथवा कलेक्टर द्वारा पुनर्प्रवेश (री-एंट्री) की कार्यवाही की गयी हो, एक समान रूप से संगणना अनुसार राशि वापस लौटाई जाएगी ।

(14) यदि भूमि पर कोई निर्माण आदि है और आवंटिती अथवा पट्टेदार द्वारा समर्पण चाहा गया है किन्तु ऐसा निर्माण नहीं हटाया गया है तो समर्पण का आवेदन स्वीकार किये जाने के उपरांत पट्टाधीन भूमि का कब्जा राज्य शासन हित में लिए जाने पर भूमि के साथ ऐसा निर्माण भी शासन में वेष्ठित समझा जाएगा और निर्माण के लिये कोई प्रतिकर देय नहीं होगा ।

(15) यदि भूमि का अधिपत्य उद्योग या परियोजना हेतु आवंटिती अथवा पट्टेदार को दिया गया है तो उपकंडिका (6) के अनुसार राशि की कटौती की जावेगी, परन्तु यदि वनीकरण अथवा इसी प्रकार के अन्य प्रयोजन हेतु भूमि आवंटित हुई है और आधिपत्य आवंटिती अथवा पट्टेदार को नहीं दिया गया है तो कटौती नहीं की जावेगी ।

(16) प्राधिकृत अधिकारी द्वारा समर्पित की जा रही भूमि अन्य प्रयोजनों के लिए उपयुक्त प्रमाणित किए जाने पर, आवंटित भूमि के अंश भाग को भी समर्पित किया जा सकेगा । 650 (59 ) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

(17) अंश भाग समर्पित किये जाने की दशा में उपरोक्त प्रक्रिया के अनुसरण में समानुपातिक गणना कर राशि वापिस की जाएगी ।

67. सरकारी पट्टेदार के अधिकार तथा दायित्व (1 ) राज्य सरकार या उसके द्वारा प्राधिकृत प्राधिकारी द्वारा स्थायी पट्टे पर आवंटित भूखंडों के मामले में सरकारी पट्टेदार के अधिकार एवं दायित्व पट्टे में उल्लेखित निबंधन या शर्तों के अध्यधीन होंगे ।

(2) नजूल भूमि का स्थायी पट्टे पर आवंटन मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, 1959 की धारा 182 के उपबंधों के अनुसार सरकारी अनुदान अधिनियम, 1895 (1895 का संख्यांक 15) के अर्थ के अंतर्गत अनुदान समझा जाता है, अतः ऐसे सरकारी पट्टेदार को उसकी भूमि से संहिता के उक्त प्रावधान के अनुसार कलेक्टर द्वारा कतिपय आधारों पर बेदखल किया जा सकता है । कलेक्टर उक्त धारा 182 के अंतर्गत पट्टे के किसी निबंधन या शर्त के उल्लंघन या अपालन के संबंध में, यदि शमन नहीं किया गया है, सरकारी पट्टेदार को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के उपरांत बेदखली का आदेश पारित कर सकेगा ।

(3) कलेक्टर द्वारा उक्त उपकंडिका के अनुसरण में पारित किया गया आदेश संहिता की धारा 182 के अंतर्गत पारित आदेश होगा और ऐसे आदेश के संबंध में आगे समस्त कार्यवाहियां संहिता के प्रावधानों के अंतर्गत की जा सकेंगी ।

68. गृह निर्माण सहकारी समितियों के उप पट्टेदारों के मामलों मे कार्यवाही- (1 ) राज्य शासन द्वारा गृह निर्माण सहकारी समितियों को उनके सदस्यों के लिए आवासीय प्रयोजन हेतु भूखंड उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थायी पट्टे पर भूमि उपलब्ध कराई गई है । ऐसी समितियों द्वारा अपने सदस्यों को राज्य शासन से प्राप्त स्थायी पट्टे की भूमि आवासीय प्रयोजन हेतु उपपट्टे पर दी गई है । ऐसी समितियां जो कियाशील नहीं है, उनके उपपट्टेदारों के पट्टों के नवीनीकरण की समस्या है । (2) ऐसी समितियों के संबंध में जो कियाशील नहीं है, रजिस्ट्रार सहकारी समितियां द्वारा मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम , 1960 के अंतर्गत कार्यवाही करते हुए परिसमापन किए जाने पर परिसमापन आदेश कलेक्टर को संसूचित किया जाएगा जिसमें परिसमापित समिति को स्थायी पट्टे पर आवंटित भूमि के ब्यौरे एवं ऐसी भूमि में से समिति के सदस्यों को प्रदत्त उपपट्टों के ब्यौरे होंगे । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

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(3) ऐसे उपपट्टेदारों या उनके वैध उत्तराधिकारियों, वसीयत प्राप्तकर्ताओं या अंतरितियों को सरकारी पट्टेदार समझा जाएगा तथा उन पर उपपट्टे में उल्लेखित निबंधन एवं शर्तें यथावत् लागू रहेंगी ।

स्पष्टीकरण- भूखण्ड पर एक से अधिक प्रकोष्ठधारी होने की दशा में उक्त उपबंध मध्यप्रदेश प्रकोष्ठ स्वामित्व अधिनियम, 2000 (क्रमांक 15 सन् 2001 ) के अध्यधीन होंगे ।

(4) उक्त उपकंडिका (3) अनुसार समझे गए सरकारी पट्टेदारों के संबंध में उसी प्रकार कार्यवाही की जाएगी जैसे कि उन्हे सीधे राज्य शासन से स्थायी पट्टे पर भूखंड आवंटित किये गये हैं ।

(5) कार्यशील सहकारी समितियां, जिनके कतिपय उप पट्टेदारों द्वारा शर्त उल्लंघन किया गया है, के मामले में मूल पट्टेदार (सहकारी समिति) अपने मूल पट्टे के नवीनीकरण के आवेदन के साथ ऐसी शर्त उल्लंघन के संबंध में प्रतिवेदन कंडिका 77 में उल्लेखित सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत करेगी, जिस पर सक्षम प्राधिकारी ऐसे उप पट्टेदार को इन निर्देशों की कंडिका 82 के उपबंध अनुसार शर्त उल्लंघन का शमन कराने हेतु युक्तियुक्त अवसर प्रदान करेगा और ऐसा उप पट्टेदार यदि शमन राशि जमा कराता है तो मूल पट्टा ऐसी समिति के पक्ष में नवीकृत किया जा सकेगा, अन्यथा ऐसे उप पट्टेदार (जो शर्त उल्लंघन हेतु शमन नहीं कराते) के उप पट्टे सहकारी समिति द्वारा निरस्त किये जाने पर उप पट्टों के भूखंडों को कम करते हुए मूल पट्टे के शेष भाग का पट्टा नवीकृत किया जायेगा तथा ऐसे उप पट्टेदारों के उप पट्टे के प्रश्नाधीन भूखंडों के मामले में कंडिका 85 के उपबंध अनुसार कार्यवाही की जायेगी जिसमें पुनर्प्रवेश की कार्यवाही भी सम्मिलित है । 650 ( 61 )

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

भाग ज

भूमि के अग्रिम आधिपत्य देने पर प्रतिबंध तथा अग्रिम आधिपत्य के पुराने मामलों में भूमि का आवंटन, प्रब्याजि व वार्षिक भू- भाटक का अधिरोपण तथा पट्टा निष्पादन

69. भूमि के अग्रिम आधिपत्य देने पर प्रतिबंध- (1 ) इन निर्देशों के प्रभावशील होने के बाद स्थायी पट्टे पर आवंटन के किसी भी मामले में नजूल भूमि का अग्रिम आधिपत्य राज्य शासन के अनुमोदन के बिना नहीं दिया जायेगा ।

(2) राज्य शासन के अनुमोदन से अग्रिम आधिपत्य सौंपने के पश्चात् भूमि का स्थायी पट्टा स्वीकृत किए जाने के मामले में अग्रिम आधिपत्य दिये जाने की दिनांक को लागू प्रब्याजि तथा वार्षिक भू- भाटक की दरें देय होंगी । इस प्रकार कुल देय संगणित राशि में अग्रिम आधिपत्य के समय जमा की गई राशि को समायोजित करते हुए अग्रिम आधिपत्य सौंपे जाने की दिनांक से भुगतान दिनांक तक की अवधि के लिए प्रथम एक वर्ष तक 12 प्रतिशत वार्षिक और उसके पश्चात् अदायगी दिनांक तक शेष अवधि के लिए 15 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देय होगा ।

70. इस भाग के प्रावधानों का लागू होना- इन निर्देशों के प्रभावशील होने के पूर्व जिन मामलों में कृषि भिन्न प्रयोजन के लिए शासकीय भूमि या नजूल भूमि की तात्कालिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भूमि का अग्रिम आधिपत्य दिया गया है और ऐसे प्रकरणों में औपचारिक आवंटन आदेश बाद में जारी किए गए हैं अथवा औपचारिक आवंटन आदेश जारी होना शेष हैं, उनमें आगामी कंडिकाओं के अनुसार स्थायी पट्टे के आवंटन तथा निष्पादन की कार्यवाही की जाएगी ।

71. प्रब्याजि का निर्धारण- (1 ) भूमि आवंटन के ऐसे मामलों में जिनमें राज्य शासन , आयुक्त या कलेक्टर द्वारा तत्समय प्रभावशील राजस्व पुस्तक परिपत्र खंड चार कमांक -1 या अन्य किन्हीं तत्समय विद्यमान निर्देशों के अनुसार औपचारिक आवंटन की स्वीकृति के पूर्व भारत सरकार के किसी मंत्रालय, विभाग, उपक्रम या राज्य सरकार के किसी उपक्रम (निगम, मंडल या विकास प्राधिकरण आदि) , सहकारी संस्थाएं, गृह निर्माण सहकारी संस्थाएं , स्थानीय निकाय , सुधार न्यास , पूर्त संस्थाएं अथवा औद्योगिक या व्यावसायिक प्रयोजन या शैक्षणिक प्रयोजन के लिए किसी व्यक्ति या संस्था को भूमि का अग्रिम आधिपत्य सौंपा गया है और ऐसे मामलों में अंततः राज्य सरकार द्वारा भूमि आवंटन का निर्णय लिया जाता है तो जिस वर्ष भूमि मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

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का अग्रिम आधिपत्य सौंपा गया था उस वर्ष के संगणित बाजार मूल्य को आधार मानकर कंडिका 19 में दी गई तालिका में सुसंगत प्रयोजन के लिए दर्शाए गए प्रतिशत के बराबर प्रब्याजि का निर्धारण किया जाएगा ।

(2) यदि आवंटिती द्वारा अग्रिम आधिपत्य के समय प्रब्याजि के पेटे कोई राशि जमा कराई गई है तो ऐसी राशि का उक्तानुसार निर्धारित प्रब्याजि में समायोजन किया जायेगा ।

(3) यदि उपकंडिका (2) के अनुसार राशि के समायोजन के उपरांत कोई राशि आवंटिती के पक्ष में देय होती है तो ऐसी स्थिति में ऐसी राशि का समायोजन आगामी वर्षों के वार्षिक भू- भाटक के पेटे किया जाएगा ।

(4) यदि उपकंडिका (2) के अनुसार राशि के समायोजन के उपरांत कोई राशि राज्य शासन के पक्ष में देय होती है तो ऐसी बकाया राशि और उस पर भुगतान दिनांक तक की अवधि के लिए प्रथम एक वर्ष तक 12 प्रतिशत वार्षिक और उसके पश्चात् अदायगी दिनांक तक की शेष अवधि के लिये 15 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज राशि वसूल की जाएगी ।

72. वार्षिक भू-भाटक का निर्धारण- (1 ) ऐसे मामलों में अग्रिम आधिपत्य दिये जाने की दिनांक को प्रभावशील वार्षिक भू- भाटक की दरें लागू होंगी तथा उस पर भुगतान दिनांक तक की अवधि के लिए प्रथम एक वर्ष तक 12 प्रतिशत वार्षिक और उसके पश्चात अदायगी दिनांक तक शेष अवधि के लिए 15 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज देय होगा ।

(2) मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (पूर्व नाम मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल) , स्थानीय निकाय और विकास प्राधिकरणों के ऐसे विशिष्ट मामलों में जिनमें अग्रिम आधिपत्य सौंपे जाने की दिनांक से 30 वर्ष की अवधि व्यतीत हो चुकी है और किन्हीं कारणों से आवंटन आदेश जारी नहीं हो पाया है, उनमें औपचारिक आवंटन जारी किया जाएगाः

परन्तु ऐसे आवंटन आदेश में अग्रिम आधिपत्य की दिनांक से दिनांक 31 मार्च 2020 तक के लिए उपकंडिका (1) के अनुसार परिगणित वार्षिक भू- भाटक प्रभावशील रखा जाएगा तथा इसके बाद की अवधि के लिए कंडिका 19 में दी गई तालिका में दर्शाई गई दर के अनुसार लागू दर पर वार्षिक भू- भाटक नियत किया जाएगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (63) 73. वार्षिक भू-भाटक की गणना की प्रक्रिया- (1 ) ऐसे मामलों में जिनमें इन निर्देशों के प्रभावशील होने के पूर्व अग्रिम आधिपत्य दिया गया है, उनमें वार्षिक भू- भाटक का निर्धारण आवासीय / शैक्षणिक प्रयोजन के मामलों में प्रब्याजि के 5 प्रतिशत और आवासीय /शैक्षणिक से भिन्न प्रयोजन के मामले में प्रब्याजि के 7.5 प्रतिशत के मान से किया जाएगा ।

(2) ऐसे मामलों में जिनमें इन निर्देशों के प्रभावशील होने के पश्चात् अग्रिम आधिपत्य दिया जाता है, उनमें वार्षिक भू- भाटक का निर्धारण मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण एवं पुनर्निर्धारण ) नियम , 2018 के अंतर्गत निर्धारण की विहित दर से दो गुना के मान से किया जाएगा ।

74. आवंटिति संस्था द्वारा प्रब्याजि तथा वार्षिक भू-भाटक की उप पट्टेदार से वसूली- ऐसे मामलों में जिनमें भूमि का अग्रिम आधिपत्य किसी निकाय या संस्था को इस आशय के साथ सौंपा गया है कि भूमि का स्थल पर विकास उपरान्त विकसित भूखंडों को उप -पट्टे पर दिया जाएगा, उनमें कंडिका 71 , 72 तथा 73 के अनुसार निर्धारित प्रब्याजि एवं वार्षिक भू- भाटक आवंटिती संस्था द्वारा उप पट्टेदार से समानुपातिक निर्धारण के आधार पर वसूल किया जा सकेगा , उससे अधिक नहीं ।

75. पट्टे का निष्पादन- (1 ) ऐसे मामलों में जिनमें तत्समय प्रभावशील नियमों या परिपत्रों के अंतर्गत सक्षम प्राधिकार से किसी उपक्रम , संस्था , उद्योग या व्यक्ति के पक्ष में भूमि का आवंटन जारी किया गया है और आवंटिती द्वारा आवंटन आदेश की शर्त अनुसार मांग पत्र के आधार पर प्रब्याजि की राशि और उस पर देय वार्षिक भू-भाटक की वर्तमान तक की बकाया राशि जमा कराई गयी है तो ऐसे आवंटिती के पक्ष में स्थायी पट्टा निष्पादित किया जाएगाः

परन्तु यदि ऐसे मामले में प्रब्याजि या वार्षिक भू-भाटक की कोई राशि बकाया है तो ऐसी बकाया राशि और उस पर प्रथम एक वर्ष तक 12 प्रतिशत वार्षिक और उसके पश्चात् अदायगी दिनांक तक 15 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज राशि जमा कराए जाने पर पट्टा निष्पादित किया जाएगा ।

(2) ऐसे मामलों में जहां इन निर्देशों के प्रभावशील होने के पश्चात औपचारिक आवंटन आदेश जारी किए जाएँ उनमें कंडिका 71 , 72 तथा 73 के अनुसार देय प्रब्याजि तथा वार्षिक भू- भाटक का निर्धारण कर उसकी बकाया राशि तथा उस पर मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

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प्रथम एक वर्ष तक 12 प्रतिशत वार्षिक और उसके पश्चात् अदायगी दिनांक तक 15 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज राशि जमा कराए जाने पर पट्टा निष्पादित किया जाएगा ।

(3) पट्टे के निष्पादन, पंजीयन तथा भू-अभिलेखों में प्रविष्टियों की अद्यतनीकरण के संबंध में इस अध्याय के भाग-छ में दिए गए उपबंधों के अनुसार कार्यवाही की जाएगी ।

76. इस भाग का पूर्व में निर्वर्तित मामलों में लागू न होना- ऐसे मामलो में जिनमें पट्टा निष्पादन की कार्यवाही पूर्ण हो चुकी है, इस भाग के प्रावधान लागू नहीं होंगे, तात्पर्य यह कि पूर्व में निर्वर्तित हो चुकेचुके मामलों को प्रब्याजि एवं वार्षिक भू- भाटक की संगणना के लिये पुनः नहीं खोला जाएगा ।

स्पष्टीकरण- 'निर्वर्तित मामला' से तात्पर्य है, ऐसा मामला जिसमें सक्षम प्राधिकार से स्वीकृति आदेश जारी किए जाने के उपरान्त पट्टा निष्पादन किया जा चुका है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (65)

भाग- झ

स्थायी पट्टे का नवीनीकरण

77. स्थायी पट्टे के नवीनीकरण के लिए सक्षम प्राधिकारी- स्थायी पट्टे के नवीनीकरण एवं शर्त उल्लंघन के शमन (compounding ) के लिए कलेक्टर या उसके द्वारा प्राधिकृत अपर कलेक्टर सक्षम प्राधिकारी होंगे ।

78. स्थायी पट्टे का नवीनीकरण (1 ) पट्टेदार स्थायी पट्टे की अवधि के अवसान वर्ष की दिनांक 01 अप्रैल से अवसान दिनांक तक की अवधि के दौरान कभी भी पट्टे के नवीनीकरण के लिये सक्षम प्राधिकारी को आवेदन कर सकेगा ।

(2) ऐसे मामलों में जहां उपकंडिका (1 ) के अनुसार नवीनीकरण के लिये आवेदन नहीं किया जाता है, उनमें सक्षम प्राधिकारी

(क) पट्टावधि के अवसान होने के बाद विलंब से प्रस्तुत किये गये नवीनीकरण के आवेदन पर पट्टा नवीनीकरण योग्य पाये जाने पर विलंब के लिये शमन राशि अधिरोपित करेगा; तथा

(ख) विलंब के लिये अधिरोपित शमन राशि नियत किये जाने पर प्रकरण के पट्टे की शर्तों के उल्लंघन या अपालन का परीक्षण करते हुए नवीनीकरण के लिये अग्रसर होगा ।

(3 ) सक्षम प्राधिकारी ऐसे स्थायी पट्टों, जिनकी अवधि का अवसान हो चुका है, के नवीनीकरण के लिए इस भाग के प्रावधानों के अनुसार परीक्षण करते हुए स्वप्रेरणा से भी कार्यवाही कर सकेगा ।

(4) स्थाई पट्टों के नवीनीकरण एवं शर्त उल्लंघन तथा अपालन के मामलो में ऐसे प्रकरणों पर जिनमें पूर्व के परिपत्रों (जो निरसित हैं या इन निर्देशों की कंडिका 148 द्वारा निरसित किये जा रहे हैं) के आधार पर शमन राशि अधिरोपित की गयी है एवं पट्टेदार द्वारा शमन राशि का भुगतान नहीं किया गया है और इस कारण ऐसे प्रकरणों में लीज नवीनीकरण लंबित है, ऐसे मामलों को अंतिम रूप से निराकृत नहीं मानते हुए पुनर्विचार में लेकर इन निर्देशों के अनुसार निराकृत किया जाएगा और तदनुसार निर्धारित शमन राशि जमा किये जाने पर पट्टे के नवीनीकरण की कार्यवाही की जाएगीः मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 66)

परन्तु जिन मामलों में निरसित परिपत्रों के आधार पर शमन राशि का आदेश पारित किये जाने के आधार पर निराकृत प्रकरणों में शमन राशि का भुगतान शासन पक्ष में किया जा चुका है, ऐसे मामलों को अंतिम रूप से निराकृत मानते हुए पुनः विचारण में नहीं लिया जायेगा ।

79. नजूल अधिकारी से जांच प्रतिवेदन प्राप्त करना- सक्षम प्राधिकारी मामले में नजूल अधिकारी से निम्न बिन्दुओं पर रिपोर्ट प्राप्त करेगाः-

(क) पट्टेदार द्वारा वार्षिक भू- भाटक जमा किया गया है या नहीं, क्या उस पर कोई बकाया शेष है, यदि शेष है तो कब से, और अद्यतन बकाया राशि का विवरण;

(ख) पट्टेदार द्वारा पट्टे की शर्तों का पालन किया गया है या नहीं, यदि किन्हीं शर्तों का उल्लंघन या अपालन पाया जाता है तो उल्लंघन या अपालन का विवरण;

(ग) भूखण्ड का उपयोग तत्समय प्रवृत्त विकास योजना (मास्टर प्लान) में नियत प्रयोजन के अनुसार किया जा रहा है अथवा नहीं;

(घ) यदि भूमि उपयोग में परिवर्तन कर शर्त उल्लंघन किया गया है तो ऐसी दशा में भूखण्ड के पूर्ण या अंश भाग , जिसका भूमि उपयोग परिवर्तित किया गया है, का क्षेत्रफल तथा नजरी नक्शा;

(ङ) पट्टेदार द्वारा पट्टे की अवधि के दौरान किसी शर्त के उल्लंघन या अपालन किए जाने पर ऐसे उल्लंघन या अपालन के मामले में किसी सक्षम प्राधिकार से शमन स्वीकृत किया गया है या नहीं और यदि हाँ तो ऐसे आदेश का विवरण; और

(च) ऐसा अन्य कोई बिन्दु जिसे सक्षम प्राधिकारी उचित समझे । 80. स्थायी पट्टे की शर्त का उल्लंघन या अपालन न होने की दशा में पट्टे का नवीनीकरण- नजूल अधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन के परीक्षण के उपरांत यदि सक्षम प्राधिकारी की संतुष्टि हो जाती है कि स्थायी पट्टे की शर्त का कोई उल्लंघन या अपालन नहीं हुआ है या उल्लंघन या अपालन का शमन स्वीकृत हो चुका है और पट्टेदार पर कोई बकाया शेष नहीं है तो सक्षम प्राधिकारी के द्वारा सामान्यतः पट्टे का नवीनीकरण आगामी तीस वर्ष की अवधि के लिये किया जाएगाः 650 (67) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

परन्तु मूल पट्टे में यदि तीस वर्ष से भिन्न पट्टावधि रही है तो ऐसी दशा में पट्टे का नवीनीकरण उतनी अवधि, जितनी कि मूल पट्टे की पट्टावधि रही है, के लिये किया जायेगा ।

81. स्थायी पट्टे के नवीनीकरण पर वार्षिक भू- भाटक का पुनर्निर्धारण- (1 ) यदि स्थायी पट्टे की अवधि का अवसान इन निर्देशों के प्रभावशील होने के दिनांक को या उसके पश्चात् हुआ है तो ऐसे पट्टे का नवीनीकरण करते समय सक्षम प्राधिकारी मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण एवं पुनर्निर्धारण) नियम, 2018 के अंतर्गत नवीनीकरण करने की दिनांक को लागू दर से दो गुना वार्षिक भू-भाटक पुनर्निर्धारित करेगा ।

(2) यदि स्थायी पट्टे की अवधि का अवसान इन निर्देशों के प्रभावशील होने की दिनांक के पूर्व हुआ है तो सक्षम प्राधिकारी-

(क) पट्टा अवसान की दिनांक से इन निर्देशों के प्रभावशील होने की दिनांक की अवधि के लिए-

(एक) यदि ऐसी अवधि तीस वर्ष का या उससे कम है तो ऐसी अवधि के लिए पट्टे में उल्लेखित वार्षिक भू-भाटक दर का छः गुना वार्षिक भू- भाटक पुनर्निधारित करेगा; और

(दो) यदि ऐसी अवधि तीस वर्ष से अधिक है तो प्रत्येक तीस वर्ष के पूर्ण या आंशिक कालखंड के लिए उसके ठीक पूर्ववर्ती कालखंड के लिए निर्धारित वार्षिक भू- भाटक का छः गुना वार्षिक भू-भाटक पुनर्निर्धारित करेगा; और

(ख) इन नियमों के प्रभावशील होने के दिनांक से उपकंडिका (1) के अनुसार वार्षिक भू-भाटक पुनर्निर्धारित करेगा ।

(3) नवीनीकृत पट्टे में नियत वार्षिक भूभाटक के संबंध में कंडिका 19 की उपकंडिका (2) के प्रावधान लागू होंगे ।

(4) उपकंडिका (1 ) , (2) तथा (3) के प्रावधान ऐसे स्थायी पट्टों, जो नाममात्र वार्षिक भू- भाटक पर दिए गए हैं, पर लागू नहीं होंगे और ऐसे पट्टों की नवीनीकरण अवधि के दौरान पूर्वानुसार नाममात्र वार्षिक भू- भाटक अधिरोपित किया जाएगा । 82. स्थायी पट्टे की शर्त का उल्लंघन या अपालन होने की दशा में पट्टे का नवीनीकरण- (1 ) स्थायी पट्टों की शर्तों में से किसी शर्त का उल्लंघन या अपालन मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (68)

प्रतिवेदित होने या पाए जाने पर सक्षम प्राधिकारी पट्टेदार को सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान करने के उपरान्त प्रकरण का निराकरण करेगा ।

(2) सक्षम प्राधिकारी निम्नलिखित तालिका के अनुसार शमन राशि लेकर पुनर्प्रवेश (re-entry) के अधिकार का त्यजन करते हुए शर्त उल्लंघन के मामले का निराकरण कर सकेगा-

तालिका

स्थायी पट्टे के शर्त उल्लंघन या अपालन के मामले में देय शमन राशि शर्त उल्लंघन या अपालन का स्वरूप

शमन राशि स. क्र.

(1)

(2)

(3)

1

प्रत्येक चूक वर्ष के लिए आवेदन के दिनांक को लागू बाजार मूल्य के 0.01 प्रतिशत के मान से । पट्टा अवधि अवसान के बाद नवीनीकरण हेतु प्रस्तुत आवेदन के मामले में विलंब माफी के लिये (पट्टा अवधि अवसान से आवेदन के दिनांक तक के वर्षों हेतु)

2 पट्टा अवधि के अवसान होने की तिथि को कुल देय भू- भाटक की राशि जमा नहीं किए जाने की दशा में

देय बकाया राशि, देय बकाया राशि पर बकाया की दिनांक से प्रथम एक वर्ष तक 12 प्रतिशत और उसके पश्चात् अदायगी दिनांक तक शेष अवधि के लिये 15 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज एवं बकाया राशि के 10 प्रतिशत के मान से शास्ति ।

3 निर्धारित अवधि में भूमि पर निमार्ण कार्य नहीं करना-

3.1

शमन राशि के निर्धारण हेतु आदेश के दिनांक को लागू बाजार मूल्य के 0.05 प्रतिशत के मान से । पट्टे में निर्माण हेतु उल्लेखित अवधि में निर्माण कार्य पूर्ण न किए जाने पर, पुनर्प्रवेश के अधिकार का त्यजन करते हुए एक बार तीन वर्ष की 650 ( 69 ) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

शमन राशि

शर्त उल्लंघन या अपालन का स्वरूप

स. क्र.

(3)

(2)

(1)

अतिरिक्त अवधि निर्माण करने हेतु प्रदान करने के लिए

3.2

शमन राशि के निर्धारण हेतु आदेश के दिनांक को लागू बाजार मूल्य के 0.1 प्रतिशत के मान से ।

स.क. 3.1 के अनुसार प्रदत्त अतिरिक्त अवधि की समाप्ति एवं पट्टा अवसान के मध्य की अवधि में निर्माण करने पर , पुनर्प्रवेश के अधिकार का त्यजन करने के लिए

3.3 पट्टे अवधि अवसान होने के उपरांत निर्माण कार्य नहीं किये जाने की स्थिति में पट्टे का नवीनीकरण करने पर पुनर्प्रवेश के अधिकार का त्यजन कर एक बार पुनः तीन वर्ष की अवधि निर्माण हेतु प्रदान करने के लिए

शमन राशि के निर्धारण हेतु आदेश के दिनांक को लागू बाजार मूल्य के 10 प्रतिशत के मान से । टीप- पट्टे का नवीनीकरण किये जाने पर वार्षिक भू- भाटक का निर्धारण स्थायी पट्टे के नवीनीकरण के सामान्य प्रावधान के अनुसार होगा (देखें कंडिका 81 ) 4 अंतरण की प्रतिबंधित अवधि के भीतर तथा / अथवा बिना समुचित अनुमति प्राप्त किये दान अथवा विक्रय द्वारा या अन्यथा (उत्तराधिकार के आधार पर नामांतरण को छोड़कर) भूखण्ड अंतरित किये जाने की दशा में

अंतरण दिनांक के बाजार मूल्य के 0.5 प्रतिशत के मान से राशि और उस पर प्रथम वर्ष के लिये 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से और उसके पश्चात् की अवधि के लिये भुगतान दिनांक तक 15 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज टीप- अंतरणीय पट्टे के मामले में ही शमन स्वीकृत किया जाएगा, अहस्तांतरणीय पट्टे के मामले में नहीं । अन्य मामलों में पुनर्प्रवेश की कार्यवाही की जाएगी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 70)

शर्त उल्लंघन या अपालन का स्वरूप

शमन राशि स. क्र.

(1)

(2)

(3)

5 भूखण्ड के विभाजन के साथ हस्तांतरण-

5.1

एक मुश्त रूपये 2,000 /- उत्तराधिकार के आधार पर भूखण्ड का विभाजन किये जाने पर

टीप- ऐसे प्रकरणों में तभी शमन किया जाएगा जब तत्समय प्रभावशील विकास योजना के अंतर्गत भूखण्ड का विभाजन अनुज्ञेय हो ।

5.2 उत्तराधिकार से भिन्न आधार पर भूखण्ड का विभाजन किये जाने पर

आदेश के दिनांक को लागू बाजार मूल्य के 0.5 प्रतिशत के मान से ।

टीप- ऐसे मामलों में तभी शमन किया जाएगा जब तत्समय प्रभावशील विकास योजना के अंतर्गत भूखण्ड का विभाजन अनुज्ञेय हो ।

6

(क) जहां पटटेदार द्वारा ऐसे उपयोग के लिए आवेदन किया जाए-

आवासीय प्रयोजन के भूखंड का आवासीय से भिन्न प्रयोजन हेतु भूमि उपयोग किए जाने की दशा में, यदि ऐसे भिन्न प्रयोजन के लिए भूमि उपयोग तत्समय प्रवृत्त विकास योजना (मास्टर प्लान) तथा अन्य विधिक प्रावधानों के अनुसार अनुज्ञेय हो

(एक) ऐसे भिन्न प्रयोजन के लिए उपयोग में लाए जाने वाले क्षेत्रफल के, आदेश के दिनांक को लागू बाजार मूल्य का 1 प्रतिशत राशि के बराबर प्रब्याजि प्रयोजन परिवर्तन शुल्क के रूप में ली जाएगी;

कृपया इस तालिका के सरल कमांक 8 और नीचे इस कंडिका की उपकंडिका (4) तथा कंडिका 83 भी देखें,

(दो) ऐसे भिन्न प्रयोजन के लिए उपयोग में लाए जाने वाले क्षेत्रफल पर मध्यप्रदेश 650 ( 71) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

शमन राशि

शर्त उल्लंघन या अपालन का स्वरूप

स. क्र.

(3)

(2)

(1)

भू- राजस्व संहिता (निर्धारण और पुनर्निर्धारण ) नियम, 2018 के अंतर्गत विहित दर से दो गुना के आधार पर परिगणितं वार्षिक भू-भाटक नियत किया जाएगा; और

(तीन) मूल प्रयोजन में उपयोग में लाए जाने वाले शेष क्षेत्रफल के लिये मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (निर्धारण और पुनर्निर्धारण ) नियम, 2018 के अंतर्गत विहित दर से दो गुना के आधार पर संगणित वार्षिक भू-भाटक नियत किया जाएगाः

परन्तु इन निर्देशों के प्रभावशील होने से पूर्व जारी पट्टों के मामलों में मूल प्रयोजन में उपयोग में लाए जाने वाले क्षेत्रफल के लिये पूर्वानुसार भू- भाटक देय होगा और परिवर्तित क्षेत्रफल के लिये मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (निर्धारण और पुनर्निर्धारण ) नियम, 2018 के अंतर्गत विहित दर से दो गुना के आधार पर संगणित वार्षिक भू-भाटक नियत कियां मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 72)

शर्त उल्लंघन या अपालन का स्वरूप

शमन राशि स. क्र.

(1)

(2)

(3)

जाएगा ।

(ख) जहां पटटेदार द्वारा बिना अनुमति प्रयोजन परिवर्तन कर लिया जाता है-

(एक) ऐसे भिन्न प्रयोजन के लिए उपयोग में लाए जाने वाले क्षेत्रफल के, आदेश के दिनांक को लागू बाजार मूल्य का 2 प्रतिशत राशि के बराबर प्रब्याजि प्रयोजन परिवर्तन शुल्क के रूप में ली जाएगी;

(दो) ऐसे भिन्न प्रयोजन के लिए उपयोग में लाए जाने वाले क्षेत्रफल पर मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (निर्धारण और पुनर्निर्धारण) नियम, 2018 के अंतर्गत विहित दर से दो गुना के आधार पर परिगणित वार्षिक भू-भाटक नियत किया जाएगा; और

(तीन) मूल प्रयोजन में उपयोग में लाए जाने वाले शेष क्षेत्रफल के लिये मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (निर्धारण और पुनर्निर्धारण) नियम , 2018 के अंतर्गत विहित दर से दो गुना के आधार पर संगणित वार्षिक भू-भाटक नियत किया 650 (73) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

शमन राशि शर्त उल्लंघन या अपालन का स्वरूप

स. क्र. (1)

(2)

(3)

जाएगाः

परन्तु इन निर्देशों के प्रभावशील होने से पूर्व जारी पट्टों के मामलों में मूल प्रयोजन में उपयोग में लाए जाने वाले क्षेत्रफल के लिये पूर्वानुसार भू-भाटक देय होगा और परिवर्तित क्षेत्रफल के लिये मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (निर्धारण और पुनर्निर्धारण ) नियम , 2018 के अंतर्गत विहित दर से दो गुना के आधार पर संगणित वार्षिक भू-भाटक नियत किया जाएगा ।

(ग) सभी मामलों में पट्टे में कंडिका 19 की उपकंडिका (2) में विहित शर्तें भी जोड़ी जाएंगी

7

एक मुश्त रुपये 20,000 / - प्रयोजन परिवर्तन की शर्त उल्लंघन का नोटिस दिये जाने पर भूखण्ड का परिवर्तित प्रयोजन में उपयोग बंद कर उसे मूल प्रयोजन में उपयोग में लाए जाने की दशा में

8

(एक ) इस तालिका के सरल कमांक 6 के उपबंधानुसार प्रयोजन परिवर्तन शुल्क राशि तथा मूल पट्टा स्वीकृति के समय प्रब्याजि में दी गई रियायत के प्रतिशत को वर्तमान प्रब्याजि या भू- भाटक में रियायत देते हुए जारी किए गये आवासीय पट्टे में उल्लेखित भूमि उपयोग में परिवर्तन कर शर्त उल्लंघन किए जाने की दशा में, यदि ऐसा परिवर्तित मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (74)

शर्त उल्लंघन या अपालन का स्वरूप

शमन राशि स. क्र.

(1)

(2)

(3)

बाजार मूल्य से गुणा करने पर परिगणित राशि प्रब्याजि के रूप में ली जाएगी; और

भूमि उपयोग तत्समय प्रवृत्त विकास योजना (मास्टर प्लान) तथा अन्य विधिक प्रावधानों के अनुसार अनुज्ञेय हो

(दो) इस तालिका के सरल कमांक 6 के उपबंध अनुसार भू-भाटक भी नियत किया जायेगा ।

उदाहरण- ( 1 ) आवंटिती 'क' को

बाजार मूल्य के 25 प्रतिशत प्रब्याजि के आधार पर आवंटित भूखंड के मामले में इस तालिका के सरल क्रमांक 6 के उपबंधानुसार प्रयोजन परिवर्तन शुल्क और (प्रब्याजि में दी गई रियायत का प्रतिशत 100 25 = 75% होगा) वर्तमान बाजार मूल्य के 75 प्रतिशत के बराबर की राशि प्रब्याजि के रूप में और मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (निर्धारण और पुनर्निर्धारण) नियम, 2018 के अंतर्गत विहित दर से दो गुना के आधार पर संगणित वार्षिक भू-भाटक नियत किया जाएगा

(2) आवंटिती ' क' को बिना प्रब्याजि के आधार पर आवंटित भूखंड के मामले में इस तालिका के सरल कमांक 6 के उपबंधानुसार प्रयोजन परिवर्तन 650 ( 75)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

शर्त उल्लंघन या अपालन का स्वरूप

शमन राशि

स. क्र.

(1)

(2)

(3)

शुल्क और (प्रब्याजि में दी गई रियायत का प्रतिशत 100 - 0 = 100% होगा ) वर्तमान बाजार मूल्य के 100 प्रतिशत के बराबर की राशि प्रब्याजि के रूप में और मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (निर्धारण और पुनर्निर्धारण ) नियम , 2018 के अंतर्गत विहित दर से दो गुना के आधार पर संगणित बार्षिक भू-भाटक नियत किया जाएगां (तीन) सभी मामलों में पट्टे में कंडिका 19 की उपकंडिका (2) में विहित शर्तें भी जोड़ी जाएंगी (3 ) उपरोक्तानुसार शमन राशि की गणना करते समय आंशिक वर्ष के मामले में छह माह या अधिक की अवधि की गणना एक वर्ष के रूप में की जाएगी ।

(4) तालिका के सरल क्रमांक 6 के संबंध में स्पष्ट किया जाता है किः-

(

एक) (क) आवासीय उपयोग हेतु आवंटित भूखण्ड में पट्टेदार द्वारा आवासीय उपयोग के साथ - साथ संरचना के 25 प्रतिशत से कम भाग का उपयोग स्वयं अथवा परिवार के किसी सदस्य द्वारा ट्यूशन कार्य अथवा सिलाई- कढ़ाई, पापड़- बड़ी जैसे कुटीर उद्योग हेतु किया जाता है तो उसे व्यावसायिक प्रयोजन में परिवर्तन नहीं माना जावेगाः

परंतु संरचना या उसके किसी भाग का उपयोग कोचिंग क्लासेस जैसे कार्य हेतु अथवा बुटीक, ब्यूटी पार्लर जैसे व्यवसाय के लिये उपयोग किया जाता है तो इसे व्यावसायिक प्रयोजन में परिवर्तन माना जायेगा; और मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 76)

(ख) आवासीय प्रयोजन हेतु आवंटित भूखण्ड पर निर्मित संरचना को यदि आवासीय प्रयोजन के लिये किराए पर दिया जाता हो , इसे व्यावसायिक प्रयोजन में परिवर्तन नहीं माना जाएगाः

परंतु संरचना के सम्पूर्ण अथवा अंश भाग का उपयोग गेस्ट हाउस अथवा होस्टल के रूप में किया जाता है तो इसे व्यावसायिक प्रयोजन में परिवर्तन माना जाएगा ।

(दो) राज्य सरकार द्वारा मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल, * विकास प्राधिकरण या विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण को आबंटित भूमि के मामले में तालिका के सरल कमांक 6 एवं 8 के उपबंध लागू नहीं होंगे ।

(5) तालिका के सरल कमांक 8 के संबंध में स्पष्ट किया जाता है कि रियायती पट्टे से तात्पर्य है पूर्ण बाजार मूल्य से कम राशि प्रब्याजि के रूप में जमा किये जाने के आधार पर आवंटित भूमि के पट्टे ।

83. आवासीय भूखंड के भूमि उपयोग में परिवर्तन के लिए आवेदन- (1 ) यदि आवासीय भूखंड के पट्टेदार पट्टावधि के दौरान अथवा नवीनीकरण की कार्यवाही के दौरान पूर्ण भूखण्ड अथवा उसके अंश भाग का उपयोग परिवर्तित करना चाहता है और ऐसा परिवर्तन विकास योजना में अनुमत है तो वह सक्षम प्राधिकारी को इस हेतु अनुमोदित ले-आउट प्लॉन एवं विकास योजना में उक्त भूमि के उपयोग की सक्षम स्वीकृति के प्रमाण के साथ आवेदन करेगा ।

(2) सक्षम प्राधिकारी इस बात की संतुष्टि करेगा कि परिवर्तित भूमि उपयोग तत्समय प्रचलित विकास योजना (मास्टर प्लान) तथा अन्य प्रचलित विधिक प्रावधानों के अनुसार अनुमत है और ऐसी संतुष्टि के उपरांत उपरोक्त तालिका के सरल कमांक 6 में वर्णित प्रयोजन परिवर्तन के कारण प्रयोजन परिवर्तन शुल्क एवं वार्षिक भू- भाटक तथा सरल क्रमांक 6 से भिन्न आवासीय पट्टों के मामलों में सरल कमांक 8 में वर्णित प्रयोजन परिवर्तन शुल्क, प्रब्याजि अंतर की राशि एवं वार्षिक भू-भाटक निर्धारित करेगा । आवेदक द्वारा इस प्रकार संगणित राशि जमा किये जाने पर सक्षम प्राधिकारी भूमि के उपयोग परिवर्तन की स्वीकृति दे सकेगा ।

(3) सक्षम प्राधिकारी द्वारा ऐसी स्वीकृति जारी होने पर पट्टे की शर्तों को उस सीमा तक संशोधित माना जायेगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (77) 84. भूखण्ड में अनुमत क्षेत्रफल से अधिक निर्माण के मामलों में कार्यवाही- यदि भूखण्ड में पट्टे की शर्त में निर्माण के लिये अनुमत क्षेत्रफल से अधिक क्षेत्रफल पर निर्माण किया गया है और ऐसे निर्माण के लिए स्थानीय निकाय द्वारा लिखित अनुमति दी गई है अथवा शमन कर दिया गया है तो पट्टे की ऐसी सुसंगत शर्तों को उस सीमा तक संशोधित माना जाएगा ।

85. पट्टे की अन्य शर्तों के उल्लंघन के मामलों में कार्यवाही- कंडिका-82 में दी गई तालिका में उल्लेखित मामलों के सिवाय पट्टे मे अंकित किसी अन्य शर्त के उल्लंघन की दशा में अथवा शमन राशि का भुगतान न करने की स्थिति में अथबा पर्याप्त अवसर दिए जाने के उपरांत भी पट्टा नवीनीकरण न कराये जाने की दशा में सक्षम प्राधिकारी द्वारा गुण - दोषों के आधार पर प्रकरण का निराकरण छह माह में किया जाएगा । निराकरण में पुनर्प्रवेश की कार्यवाही भी सम्मिलित रहेगी ।

86. नवीनीकरण के पूर्व नामांतरण की कार्यवाही करना- (1 ) पट्टे के नवीनीकरण के ऐसे मामले में जिसमें मूल पट्टेदार की मृत्यु हो चुकी है और पट्टे के नामांतरण की कार्यवाही नहीं कराई गई है, उसमें नवीनीकरण के पूर्व सर्वप्रथम पट्टेदार के उत्तराधिकारियों द्वारा यथास्थिति उत्तराधिकार या वसीयत के आधार पर पट्टे के नामांतरण की कार्यवाही कराना अनिवार्य होगा ।

(2) ऐसे मामले में जिसमें पट्टेदार द्वारा भूखण्ड का विक्रय या दान से या अन्यथा अंतरण किया गया है, किन्तु पट्टे के नामांतरण की कार्यवाही नहीं कराई गई है, अंतरिती द्वारा पट्टे के नामांतरण की कार्यवाही कराना अनिवार्य होगा । यह कार्यवाही अहस्तांतरणीय स्थायी पट्टों के संबंध में नहीं की जा सकेगी ।

(3 ) देय बकाया राशि एवं शमन राशि के भुगतान के उपरान्त ही नामांतरण की कार्यवाही की जाएगी । पट्टे के नामांतरण होने के उपरान्त ही नियमानुसार नवीनीकरण की कार्यवाही की जाएगी । यह कार्यवाही अहस्तांतरणीय स्थायी पट्टों के संबंध में नहीं की जा सकेगी ।

(4) ऐसे मामले में जिसमें पट्टावधि अवसान होने के बाद पट्टे का नवीनीकरण कराए बिना ही भूखण्ड का अंतरण किया गया है, अंतरिती द्वारा पट्टे का नवीनीकरण चाहे जाने पर नवीनीकरण के अन्य प्रावधानों के अध्यधीन रहते हुए सर्वप्रथम मूल पट्टेदार के नाम कल्पित नवीनीकरण स्वीकार करते हुए , तद्क्रम में मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 (78)

अंतरण के आधार पर अंतरिती के नाम से नवीनीकरण किया जाएगा । यह कार्यवाही अहस्तांतरणीय स्थायी पट्टों के संबंध में नहीं की जा सकेगी ।

87. शमन राशि का जमा किया जाना- शर्त उल्लंघन के मामले में शमन राशि जमा किए जाने की सूचना देने के एक माह के अंदर आवेदक को शमन राशि जमा करना होगा ।

88. पट्टावधि के दौरान भू-अभिलेखों में प्रविष्टियां अद्यतन की जाना- पट्टावधि के दौरान स्थायी पट्टे की शर्त उल्लंघन या अपालन के शमन किये जाने पर या अनुज्ञेय अंतरण के मामले में यथास्थिति भू- अभिलेख में प्रविष्टियां अद्यतन की जायेंगी । इस प्रकार प्रविष्टि अद्यतनीकरण के लिये रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 के अंतर्गत पंजीयन की अनिवार्यता नहीं होगी ।

89. पट्टावधि के अवसान पर नवीकृत पट्टा विलेख का निष्पादन तथा पंजीयन- (1) पट्टावधि के अवसान पर

(क) यदि पट्टावधि के दौरान कोई परिवर्तन नहीं किए गये हैं, तो नवीनीकरण किये जाने पर नवीकृत पट्टा विलेख का पंजीयन कराया जायेगा; और

(ख) जिन मामलों में पट्टावधि के दौरान भू- अभिलेख की प्रविष्टियों में विधिसंगत परिवर्तन अंकित किये गये हैं, उनके अद्यतन भू-अभिलेख के अनुसरण में नवीकृत पट्टा विलेख का पंजीयन कराया जायेगा । (2) यदि पट्टेदार नवकृत पट्टा निष्पादित न कराए तो यह माना जाएगा कि उसने नवकरण की अपनी मांग वापस ले ली है या उसे त्याग दिया है । अतः उसे ऐसी सूचना दी जाने पर भी कि यदि निर्दिष्ट अवधि में उसने पट्टा- विलेख निष्पादित न कराया तो यह माना जाएगा कि वह भूमि को पट्टे पर चालू नहीं रखना चाहता; यदि पट्टेदार नवकृत पट्टा निष्पादित नहीं कराता तो ऐसी स्थिति में पट्टेदार को अतिक्रमणकर्ता मानकर बेदखल करने की कार्यवाही की जाएगी ।

(3) नवकृत पट्टे की अवधि मूल अवधि समाप्त होने की आगामी दिनांक से प्रारम्भ मानी जाएगी और भू- भाटक का पहला भुगतान उस दिनांक के तुरंत बाद की पहली अप्रैल को देय होगा । 650 ( 79 ) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

(4) इसकी संभावना नहीं है कि कोई पट्टेदार नया पट्टा पंजीकृत कराने से मना करेगा तथापि यदि कोई ऐसा करने से इंकार करें, तो भी उसके द्वारा पहले से निष्पादित पट्टा वैध माना जाएगा , क्योंकि पंजीयन अधिनियम, 1908 (क्रमांक सोलह, सन् 1908 ) की धारा 90 (1 ) (घ) के उपबंधों की दृष्टि से उसका पंजीयन अनिवार्य नहीं है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 80)

भाग - ञ

अस्थायी पट्ट

90. वर्तमान अस्थायी पट्टों का निराकरण- (1 ) इन निर्देशों के प्रभावशील होने के बाद नजूल भूमि का निर्वर्तन अस्थायी पट्टे द्वारा नहीं किया जायेगा ।

(2) पूर्व में जो अस्थायी पट्टे जारी किए जा चुके हैं, उन्हें आगे नवीकृत भी नहीं किया जायेगा; किन्तु ऐसे अस्थायी पट्टे जो विधिसंगत आदेश द्वारा प्रदत्त किए गये हैं, उनकी पट्टावधि अवसान तक प्रभावशील रहेंगे ।

(3 ) ऐसे अस्थायी पट्टे जिनकी पट्टावधि का अवसान हो चुका है, किन्तु नवीकृत नहीं कराए गये हैं और पट्टेदार अथवा उसका विधिक उत्तराधिकारी भूमि पर काबिज है या ऐसे अस्थायी पट्टे जिनकी पट्टावधि शेष है, को यदि अस्थायी पट्टेदार या उसका विधिक उत्तराधिकारी जो काबिज है स्थायी पट्टे में परिवर्तित कराना चाहता है, तो वह स्थायी पट्टे में परिवर्तन के लिये प्ररूप चार में कलेक्टर को आवेदन दे सकेगाः

परंतु उक्त उपबंध मध्यप्रदेश नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्ति (पट्टाधृति अधिकारों का प्रदान किया जाना) अधिनियम, 1984 (क्रमांक 15 सन् 1985) के अंतर्गत प्रदत्त पट्टाधृति अधिकार के मामले में लागू नहीं होंगे ।

(4) कलेक्टर ऐसा आवेदन प्राप्त होने पर यदि पट्टे का प्रयोजन विकास योजना (यदि कोई लागू है) के अनुरूप है (वर्तमान उपयोग पूर्व में दिये गये अस्थायी पट्टे के प्रयोजन से भिन्न होने के स्थिति में भी) , तो स्थानीय निकाय का परामर्श प्राप्त कर, यदि कलेक्टर यह पाता है कि ऐसे प्रश्नाधीन भूखण्ड को स्थायी पट्टे में परिवर्तित किये जाने पर कोई लोक प्रयोजन प्रतिकूल प्रभावित नहीं होगा या लोक स्वास्थ्य के लिये हानिकर नहीं होगा तो

(एक) ऐसे अस्थायी पट्टे के अवसान की दिनांक से वर्तमान तक की अवधि के लिये मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू-राजस्व का निर्धारण एवं पुनर्निर्धारण) नियम , 2018 के अंतर्गत विहित दर से दो गुना की दर पर वार्षिक भू- भाटक की संगणित राशि और ऐसे अस्थायी पट्टे की प्रश्नाधीन भूमि के वर्तमान बाजार मूल्य के 10 प्रतिशत के बराबर की राशि, परिवर्तन शुल्क के रूप में लेकर स्थायी पट्टे में परिवर्तित कर सकेगा और मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण एवं 650 ( 81) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

पुनर्निर्धारण) नियम, 2018 के अंतर्गत विहित दर से दो गुना वार्षिक भू-भाटक नियत करेगा; और

(दो) ऐसे अस्थायी पट्टे जिनकी पट्टावधि शेष है पट्टे की प्रश्नाधीन भूमि के वर्तमान बाजार मूल्य के 5 प्रतिशत के बराबर की राशि, परिवर्तन शुल्क के रूप में लेकर स्थायी पट्टे में परिवर्तित कर सकेगा और मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण एवं पुनर्निर्धारण) नियम, 2018 के अंतर्गत विहित दर से दो गुना वार्षिक भू- भाटक नियत करेगा ।

(5) कलेक्टर द्वारा उपकंडिका (4) में परिवर्तन हेतु स्वीकृति दिये जाने पर परिवर्तन शुल्क एवं वार्षिक भू भाटक की राशि परिशिष्ट ' क' में उल्लेखित मदों में जमा की जाएगी ।

(6) ऐसे स्थायी पट्टों पर कंडिका 19 की उपकंडिका (2) के उपबंध भी लागू होंगे । (7) स्थायी पट्टे में परिवर्तन की स्वीकृति के पश्चात् स्थायी पट्टे के निष्पादन की कार्यवाही इस अध्याय के भाग छ के अनुसार की जाएगी ।

(8 ) ऐसे अस्थायी पट्टे , जिनकी पट्टावधि का अवसान हो चुका है और जिनके संबंध में उपकंडिका (4) के अंतर्गत स्थायी पट्टे में परिवर्तित नहीं किया गया है , के भूखण्ड पर काबिज व्यक्ति को अप्राधिकृत रूप से कब्जे में मानते हुए , संहिता की धारा 248 के अंतर्गत कार्यवाही की जाएगी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 82)

अध्याय - चार

नगरीय निकाय को तथा विकास प्राधिकरण/ विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण को भूमिस्वामी हक में नजूल भूमि दी जाना

भाग- क

नगरीय निकाय को भूमिस्वामी हक में नजूल भूमि का आवंटन

91. सक्षम प्राधिकारी- नगरीय निकाय को नजूल भूमि भूमिस्वामी हक में आवंटन करने के लिए सक्षम प्राधिकारी संभागीय मुख्यालय में स्थित भूमि के मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति तथा अन्य स्थान पर स्थित भूमि के मामले में जिला नजूल निर्वर्तन समिति होगाः

परंतु भोपाल विकास योजना क्षेत्र के भीतर स्थित भूमि के आवंटन के मामले में सक्षम प्राधिकारी 'भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये नजूल निर्वर्तन समिति" होगी ।

92. प्रयोजन- नगरीय निकाय को भूमिस्वामी हक में भूमि का आवंटन निम्न तालिका में उल्लेखित प्रयोजनों के लिए किया जाएगा-

तालिका

नगरीय निकाय को भूमिस्वामी हक में नजूल भूमि का आवंटन : प्रयोजन तथा प्रब्याजि

सरल कमांक

प्रयोजन जिसके लिए नजूल भूमि नगरीय निकाय को भूमिस्वामी हक में दी जाना है

प्रब्याजि (भूमि के बाजार मूल्य का प्रतिशत) (1)

(2)

;

(3)

1

शून्य

सार्वजनिक प्रयोजन के लिए- जैसे सड़क, उद्यान, खेल का मैदान, फिल्टर प्लांट, कचरा खन्ती (ट्रेंचिंग ग्राउंड), अस्पताल, स्कूल , कार्यालय आदि

2

शत प्रतिशत राज्य पोषित योजना हेतु

शून्य

3

शून्य

ऐसी भूमि जिन पर बिना खास निर्माण किए आय होती है- जैसे हाट बाजार, मनोरंजन स्थल के लिये 650 ( 83) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

सरल कमांक

प्रयोजन जिसके लिए नजूल भूमि नगरीय निकाय को भूमिस्वामी हक में दी जाना है

प्रब्याजि (भूमि के बाजार मूल्य का प्रतिशत)

(3)

(2)

(1)

4

शून्य

केन्द्र सरकार / राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित आवासीय योजनाओं के लिये

5

50 प्रतिशत ऐसी भूमियां जिन पर योजना बनाकर निर्माण करने से नियमित आय होती है- जैसे मार्केट , कॉम्प्लेक्स, बस स्टेंड आदि के लिये

50 प्रतिशत 6

ट्रान्सपोर्ट नगर के लिए

50 प्रतिशत

7

नगरीय निकाय द्वारा अपने कर्मचारियों की आवासीय

योजना के लिए

93. भूमि का चिन्हांकन तथा आवेदन- (1 ) नगरीय निकाय द्वारा लैण्ड बैंक में से भूमि का चयन किया जाएगा । भूमि आवंटन के लिए यथास्थिति नगर निगम आयुक्त या मुख्य नगरपालिका अधिकारी के द्वारा कलेक्टर को प्ररूप एक में आवेदन किया जाएगा ।

(2) शून्य प्रब्याजि पर भूमि आवंटन की श्रेणी से भिन्न मामले में आवेदन पत्र के साथ प्रकिया शुल्क रुपए दस हजार शासकीय खजाने में परिशिष्ट 'क' में उल्लेखित मद में जमा कर उसकी पावती की छायाप्रति आवेदन पत्र के साथ संलग्न की जाएगी । प्रक्रिया शुल्क आवेदन के अमान्य होने की दशा में वापिस नहीं किया जाएगा और न ही मान्य होने की दशा में किसी देय राशि के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा ।

94. जांच प्रतिवेदन- (1 ) कलेक्टर लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से आवेदन पत्र को अमान्य कर सकेगा अथवा आवेदन पत्र को संबंधित नजूल अधिकारी को जांच व प्रतिवेदन के लिए प्रेषित करेगा ।

(2) नजूल अधिकारी द्वारा आवेदन पत्र के संबंध में कंडिका 142 में विहित रीति में सार्वजनिक उद्घोषणा जारी कर दावे, आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

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(3) सार्वजनिक उद्घोषणा का उस स्थानीय क्षेत्र में जहां पर भूमि स्थित है व्यापक रूप से परिचालित दो समाचार पत्रों में, जिनमें से कम से कम एक हिन्दी का होगा, आवेदक नगरीय निकाय के व्यय पर प्रकाशन भी कराया जाएगा ।

(4) नजूल अधिकारी द्वारा नगर तथा ग्राम निवेश और यदि आवेदित भूमि किसी अन्य विभाग के आधिपत्य में की भूमि से लगी हुई हो तो उस विभाग के जिला कार्यालय का अभिमत प्राप्त किया जाएगा । नगर तथा ग्राम निवेश या अन्य विभाग के जिला कार्यालय अभिमत सामान्यतः पंद्रह दिन में देंगे , यदि तीस दिन की अवधि में भी अभिमत प्राप्त नहीं होता है तो यह माना जाएगा कि उन्हें प्रस्तावित आवंटन में कोई आपत्ति नहीं है ।

(5) नजूल अधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन में अन्य बातों के अलावा निम्न बिंदुओं का भी समावेश किया जाएगा-

(क) तंत्समय प्रवृत्त विकास योजना में आवेदन अनुसार भूमि उपयोग अनुमत है अथवा नही?;

(ख) भवनों के निर्माण के लिए संबंधित क्षेत्र के लिए लागू तल क्षेत्र अनुपात (एफ.ए.आर.) के अधिकतम उपयोग के आधार पर भूमि की न्यूनतम आवश्यकता का आकलन;

(ग) आवेदित भूमि का पूर्ण उपयोग करने की कार्ययोजना तथा उसके लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता; और

(घ) क्या आवेदित भूमि की आवश्यकता किसी अन्य महत्वपूर्ण लोक प्रयोजन के लिए है या भविष्य में संभावित है?

(6) नजूल अधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन प्ररूप दो में तैयार किया जाकर जिला नजूल निर्वर्तन समिति के सदस्य सचिव को प्रेषित किया जाएगा ।

95. नगरीय निकाय को नजूल भूमि भूमिस्वामी अधिकार में आवंटित करने की स्वीकृति- (1 ) जिस मामले में जिला नजूल निर्वर्तन समिति सक्षम प्राधिकारी है उसमें उसके द्वारा निर्णय लिया जाकर नगरीय निकाय को सूचित किया जाएगा । जिस मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति सक्षम प्राधिकारी है उसमें जिला नजूल निर्वर्तन समिति द्वारा अपना अभिमत अंकित कर मामला संभाग नजूल निर्वर्तन समिति को प्रेषित किया जाएगा । 650 ( 85) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

(2) जिस मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति सक्षम प्राधिकारी है उसमें उसके द्वारा जिला नजूल निर्वर्तन समिति से प्राप्त मामले में निर्णय लिया जाकर नगरीय निकाय तथा जिला नजूल निर्वर्तन समिति को सूचित किया जाएगा किन्तु भोपाल विकास योजना क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति द्वारा अपना अभिमत अंकित कर मामला राज्य शासन को प्रेषित किय जाएगा । (3) जिस मामले में भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये गठित नजूल निर्वर्तन समिति सक्षम प्राधिकारी है उसमें उसके द्वारा संभाग नजूल निर्वर्तन समिति से प्राप्त मामले में निर्णय लिया जाएगा जो राजस्व विभाग द्वारा नगरीय निकाय तथा जिला नजूल निर्वर्तन समिति को सूचित किया जाएगा ।

96. प्रब्याजि तथा भू-राजस्व- आवंटित की गई भूमि पर कंडिका 92 की तालिका के कालॅम (3) में विहित दर से प्रब्याजि तथा मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू-राजस्व का निर्धारण तथा पुनर्निर्धारण ) नियम, 2018 के अनुसार वार्षिक भू-राजस्व देय होगा ।

97. आवंटन आदेश एवं भू-अभिलेखों की प्रविष्टियों का अद्यतनीकरण- (1 ) सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त होने पर नगरीय निकाय के द्वारा प्रब्याजि की राशि जमा कर दिए जाने के उपरांत कलेक्टर द्वारा नगरीय निकाय के पक्ष में भूमि के भूमिस्वामी अधिकार में आवंटन का आदेश प्ररूप पांच में जारी किया जाएगा । (2) कलेक्टर, आवंटन आदेश के पश्चात् तथा देय शोध्य , यदि कोई हो, के जमा कराये जाने के पश्चात्, प्ररूप छह में 'भूमिस्वामी अधिकार में अंतरण विलेख' निष्पादित करेगा ।

(3) भूमिस्वामी अधिकार में अंतरण विलेख पर देय मुद्रांक शुल्क एवं पंजीयन शुल्क नगरीय निकाय द्वारा वहन किया जायेगा ।

(4) भूमिस्वामी अधिकार में अंतरण विलेख निष्पादित होने के पश्चात् नगरीय निकाय को भूमि का आधिपत्य सौंपा जाएगा तथा भू-अभिलेखों की प्रविष्टियां अद्यतन की जाएंगी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

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भाग ख

स्थानीय निकाय को ध्वजदंड अथवा प्रतिमा की स्थापना के लिए भूमि का आवंटन 98. सक्षम प्राधिकारी - स्थानीय निकाय को ध्वजदंड या प्रतिमा स्थापित करने के लिए भूमिस्वामी हक में नजूल भूमि का आवंटन करने के लिए सक्षम प्राधिकारी संभागीय मुख्यालय पर स्थित भूमि के मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति तथा अन्य स्थान पर स्थित भूमि के मामले में जिला नजूल निर्वर्तन समिति होगाः परंतु भोपाल विकास योजना क्षेत्र के भीतर स्थित भूमि के आवंटन के मामले में सक्षम प्राधिकारी 'भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये नजूल निर्वर्तन समिति" होगी ।

99. भूमि का आकार ऐसे प्रयोजनों के लिए युक्तियुक्त आकार की भूमि जो सामान्यतः 10x10 मीटर (एक सौ वर्गमीटर) से अधिक नहीं होगी , दी जा सकेगी । 100. आवंटन की प्रक्रिया (1 ) यदि कोई संस्था ध्वजदंड अथवा अखिल भारतीय या राज्य स्तर के ख्याति प्राप्त व्यक्ति की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव करे तो वह लैंड बैंक में से भूमि का चयन कर अपना आवेदन प्ररूप एक में कलेक्टर को प्रस्तुत करेगी ।

(2) आवेदक द्वारा प्रकिया शुल्क रुपए दस हजार शासकीय खजाने में परिशिष्ट ' क' में उल्लेखित मद में जमा कर उसकी पावती की छायाप्रति आवेदन पत्र के साथ संलग्न की जाएगी । प्रकिया शुल्क आवेदन के अमान्य होने की दशा में वापिस नहीं किया जाएगा और न ही मान्य होने की दशा में किसी देय राशि के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा ।

(3) कलेक्टर लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से आवेदन पत्र को अमान्य कर सकेगा अथवा आवेदन पत्र को संबंधित नजूल अधिकारी को जांच व प्रतिवेदन के लिए प्रेषित करेगा ।

101. जांच प्रतिवेदन- (1) नजूल अधिकारी द्वारा आवेदन पत्र के संबंध में कंडिका 142 में विहित रीति में सार्वजनिक उद्घोषणा जारी कर दावे, आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे । 650(87)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

(2) नजूल अधिकारी द्वारा स्थानीय निकाय , नगर तथा ग्राम निवेश और यदि आवेदित भूमि किसी अन्य विभाग के आधिपत्य में की भूमि से लगी हुई हो तो उस विभाग के जिला कार्यालय का अभिमत प्राप्त किया जाएगा । स्थानीय निकाय , नगर तथा ग्राम निवेश या अन्य विभाग के जिला कार्यालय अभिमत सामान्यतः पंद्रह दिन में देंगे और यदि तीस दिन की अवधि में भी अभिमत प्राप्त नहीं होता है तो यह माना जाएगा कि उन्हें प्रस्तावित आवंटन में कोई आपत्ति नहीं है ।

(3) स्थानीय निकाय प्रस्तावित ध्वजदंड या प्रतिमा की स्थापना के लिए सहमत है तो उसे यह स्पष्ट स्वीकारोक्ति अनिवार्यतः देनी होगी कि ध्वजदंड या प्रतिमा की स्थापना के उपरांत भविष्य में उसे संरक्षित , गरिमामय एवं दर्शनीय स्थिति में रखा जाएगा जिसका दायित्व स्थानीय निकाय का होगा ।

(4) नजूल अधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन में अन्य बातों के अलावा निम्न बिंदुओं को भी शामिल किया जाएगा

(क) प्रस्तावित प्रयोजन के लिए भूमि की न्यूनतम आवश्यकता का आंकलन;

(ख) ध्वजदंड या प्रतिमा की गरिमा एवं दर्शनीयता की दृष्टि से प्रस्तावित स्थल की उपयुक्तता;

(ग) सड़क सुरक्षा तथा यातायात की दृष्टि से प्रस्तावित स्थल की उपयुक्तता; और

(घ) प्रस्तावित स्थल पर भविष्य में समय समय पर कार्यक्रम आयोजित होने (जैसे जयंती, पुण्यतिथि आदि अवसरों पर ) अथवा बड़ी संख्या में लोगों के एकत्रित होने की संभावना की दृष्टि से स्थल की उपयुक्तता ।

(5) सड़क, चौराहा या तिराहा के बीच में ध्वजदंड या प्रतिमा की स्थापना की अनुमति नहीं दी जाएगी क्योंकि यह सड़क सुरक्षा तथा यातायात की दृष्टि से उपयुक्त नहीं है । साथ ही भविष्य में सड़क, चौराहा आदि के विस्तार की स्थिति निर्मित होने पर प्रतिमा के अन्यत्र विस्थापन पर विवाद की संभावना रहती है । (6) नजूल अधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन प्ररूप दो में तैयार किया जा कर जिला नजूल निर्वर्तन समिति को प्रेषित किया जाएगा ।

102. जांच प्रतिवेदन पर सक्षम प्राधिकारी का निर्णय और भू- राजस्व की देयता- (1 ) यदि जिला नजूल निर्वर्तन समिति मामले में सक्षम प्राधिकारी है तथा भूमि का आवंटन करना उपयुक्त समझती है तो वह राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

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तथा संस्कृति विभाग को अपना प्रतिवेदन प्रेषित कर उनकी सहमति प्राप्त करेगी । सामान्य प्रशासन विभाग तथा संस्कृति विभाग की सहमति प्राप्त होने पर जिला नजूल निर्वर्तन समिति ध्वजदंड या प्रतिमा स्थापना के लिए स्थानीय निकाय को भूमि का आवंटन बिना प्रब्याजि के भूमिस्वामी हक में स्वीकृत कर सकेगी ।

(2) जिस मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति सक्षम प्राधिकारी है उस मामले में जिला नजूल निर्वर्तन समिति नजूल अधिकारी का जांच प्रतिवेदन अपने अभिमत के साथ संभाग नजूल निर्वर्तन समिति को प्रेषित करेगी । यदि संभाग नजूल निर्वर्तन समिति भूमि का आवंटन करना उपयुक्त समझती है तो वह अपना प्रतिवेदन राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग तथा संस्कृति विभाग को प्रेषित कर उनकी सहमति प्राप्त करेगी । सामान्य प्रशासन विभाग तथा संस्कृति विभाग की सहमति प्राप्त होने पर संभाग नजूल निर्वर्तन समिति स्थानीय निकाय को भूमि का आवंटन बिना प्रब्याजि के भूमिस्वामी हक मे कर सकेगीः

परन्तु भोपाल विकास योजना क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति अपने अभिमत के साथ मामला राज्य शासन को प्रेषित करेगी । ऐसे मामले में भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये गठित नजूल निर्वर्तन समिति भूमि का आवंटन बिना प्रब्याजि के भूमिस्वामी हक में कर सकेगी ।

(3) आवंटन आदेश प्ररूप पांच में जारी किया जाएगा ।

(4) उपकंडिका (1 ) अथवा (2) के अंतर्गत आबंटित की गई भूमि पर मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण तथा पुनर्निर्धारण) नियम , 2018 के अनुसार वार्षिक भू- राजस्व देय होगा ।

(5) कलेक्टर , आवंटन आदेश के पश्चात् प्ररूप छह में 'भूमिस्वामी अधिकार में अंतरण विलेख ' निष्पादित करेगा ।

(6) भूमिस्वामी अधिकार में अंतरण विलेख पर देय मुद्रांक शुल्क एवं पंजीयन शुल्क नगरीय निकाय द्वारा वहन किया जायेगा ।

103. भूमि का कब्जा सौंपना सक्षम प्राधिकारी से भूमि आवंटन की स्वीकृति प्राप्त होने तथा भूमिस्वामी अधिकार में अंतरण विलेख निष्पादित होने पर कलेक्टर स्थानीय निकाय को भूमि का कब्जा सौपेगा । तदुपरांत भू-अभिलेखों में प्रविष्टियां अद्यतन की जाएगी । 650(89)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

भाग ग

विकास प्राधिकरण /विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण को भूमिस्वामी हक में नजूल भूमि

का आवंटन

104. सक्षम प्राधिकारी- (1 ) मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 (क्रमांक 23 सन् 1973) की धारा 50 के अंतर्गत नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी द्वारा अंतिम नगर विकास स्कीम प्रकाशित किये जाने पर ऐसी स्कीम से आच्छादित क्षेत्र के भीतर स्थित नजूल भूमि यथास्थिति विकास प्राधिकरण या विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण को भूमिस्वामी अधिकार में निर्वर्तित की जा सकेगी ।

(2) कंडिका 104 में वर्णित नगर विकास स्कीम से आच्छादित क्षेत्र में स्थित नजूल भूमि, यदि स्कीम के अधीन आने वाली भूमि के कुल क्षेत्रफल के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हैं, के भूमिस्वामी हक में आवंटन के लिये सक्षम प्राधिकारी संभागीय मुख्यालय में स्थित मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति तथा अन्य स्थान पर स्थित भूमि के मामले में जिला नजूल निर्वर्तन समिति होगीः

परंतु भोपाल विकास योजना क्षेत्र के भीतर स्थित भूमि के आवंटन के मामले में सक्षम प्राधिकारी ' भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये नजूल निर्वर्तन समिति" होगी ।

105. प्रयोजन , प्रब्याजि तथा भू- राजस्व (1 ) विकास प्राधिकरण / विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण को भूमि का आवंटन कंडिका 104 में वर्णित उनकी घोषित स्कीम में उल्लेखित प्रयोजनों के लिये भूमि के बाजार मूल्य के 50 प्रतिशत के बराबर की प्रब्याजि राशि लेकर भूमिस्वामी हक में दी जा सकेगी ।

(2) आवंटित की गई भूमि पर मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण तथा पुनर्निर्धारण ) नियम, 2018 के अनुसार वार्षिक भू- राजस्व देय होगा ।

(3) विकास प्राधिकरण/ विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा भूमिस्वामी अधिकार में भूमि आवंटन के आदेश की दिनांक से तीन वर्ष के भीतर प्रब्याजि की राशि जमा कराई जा सकेगी । आवंटन की दिनांक से दो वर्ष तक कोई ब्याज देय नहीं होगा किन्तु दो वर्ष की अवधि के अवसान उपरांत देय राशि पर 15 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर से देय होगा । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

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(4) विकास प्राधिकरण/ विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा नियत भू-राजस्व आवंटन की दिनांक से देय होगा । भू- राजस्व की अदायगी में चूक के मामले में बकाया पर प्रथम वर्ष के लिये 12 प्रतिशत और उसके पश्चात् अदायगी दिनांक तक की शेष अवधि के लिये 15 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज देय होगा । 106. भूमि आवंटन के लिये आवेदन- (1 ) यथास्थिति विकास प्राधिकरण / विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 (कमांक 23 सन् 1973) की धारा 50 के अंतर्गत नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी द्वारा अंतिम नगर विकास स्कीम प्रकाशित किये जाने पर ऐसी स्कीम से आच्छादित क्षेत्र के भीतर स्थित नजूल भूमि में से भूमि का चयन कर भूमिस्वामी अधिकार में आवंटन के लिये कलेक्टर को प्ररूप एक में आवेदन किया जाएगा ।

(2) आवेदन पत्र के साथ प्रकिया शुल्क रूपये दस हजार सरकारी खजाने में परिशिष्ट ' क' में उल्लेखित मद में जमा कर उसकी पावती की छायाप्रति आवेदन पत्र के साथ संलग्न की जाएगी । प्रकिया शुल्क आवेदन के अमान्य होने की दशा में वापिस नहीं किया जाएगा और न ही मान्य होने की दशा में किसी देय राशि के विरूद्ध समायोजित किया जाएगा ।

107. जांच प्रतिवेदन- (1 ) कलेक्टर लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से आवेदन पत्र को अमान्य कर सकेगा अथवा आवेदन पत्र को संबंधित नजूल अधिकारी को जांच व प्रतिवेदन के लिए प्रेषित करेगा ।

(2) नजूल अधिकारी द्वारा आवेदन पत्र के संबंध में कंडिका 142 में विहित रीति में सार्वजनिक उद्घोषणा जारी कर दावे , आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे । (3) सार्वजनिक उद्घोषणा का उस स्थानीय क्षेत्र में जहां पर भूमि स्थित है व्यापक रूप से परिचालित दो समाचार पत्रों में, जिनमें से कम से कम एक हिन्दी का होगा, आवेदक नगरीय निकाय के व्यय पर प्रकाशन भी कराया जाएगा।

(4) नजूल अधिकारी द्वारा नगर तथा ग्राम निवेश और यदि आवेदित भूमि किसी अन्य विभाग के आधिपत्य में की भूमि से लगी हुई हो तो उस विभाग के जिला कार्यालय का अभिमत प्राप्त किया जाएगा । नगर तथा ग्राम निवेश या अन्य विभाग के जिला कार्यालय अभिमत सामान्यतः पंद्रह दिन में देंगे, यदि तीस दिन की अवधि में भी अभिमत प्राप्त नहीं होता है तो यह माना जाएगा कि उन्हें प्रस्तावित आवंटन में कोई आपत्ति नहीं है । 650( 91)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

(5) नजूल अधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन प्ररूप दो में तैयार किया जाकर जिला नजूल निर्वर्तन समिति के सदस्य सचिव को प्रेषित किया जाएगा ।

108. विकास प्राधिकरण/ विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण को नजूल भूमि भूमिस्वामी हक में आवंटित करने की स्वीकृति- (1 ) जिस मामले में जिला नजूल निर्वर्तन समिति सक्षम प्राधिकारी है उसमें उसके द्वारा निर्णय लिया जाकर नगरीय निकाय को सूचित किया जाएगा । जिस मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति सक्षम प्राधिकारी है उसमें जिला नजूल निर्वर्तन समिति द्वारा अपना अभिमत अंकित कर मामला संभाग नजूल निर्वर्तन समिति को प्रेषित किया जाएगा ।

(2) जिस मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति सक्षम प्राधिकारी है उसमें उसके द्वारा जिला नजूल निर्वर्तन समिति से प्राप्त मामले में निर्णय लिया जाकर नगरीय निकाय तथा जिला नजूल निर्वर्तन समिति को सूचित किया जाएगा किन्तु भोपाल विकास योजना क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति द्वारा अपना अभिमत अंकित कर मामला राज्य शासन को प्रेषित किय जाएगा ।

(3) जिस मामले में भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये गठित नजूल निर्वर्तन समिति सक्षम प्राधिकारी है उसमें उसके द्वारा संभाग नजूल निर्वर्तन समिति से प्राप्त मामले में निर्णय लिया जाएगा जो राजस्व विभाग द्वारा नगरीय निकाय तथा जिला नजूल निर्वर्तन समिति को सूचित किया जाएगा ।

109. आवंटन आदेश एवं भू अभिलेखों में प्रविष्टियों का अद्यतीकरण- (1 ) सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त होने पर यथास्थिति विकास प्राधिकरण / विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के पक्ष में भूमि के भूमिस्वामी अधिकार में आवंटन का आदेश प्ररूप पांच में जारी किया जाएगा ।

(2) कलेक्टर, आवंटन आदेश के पश्चात् तथा देय शोध्य , यदि कोई हो , के जमा कराये जाने के पश्चात्, प्ररूप छह में 'भूमिस्वामी अधिकार में अंतरण विलेख' निष्पादित करेगा ।

(3) भूमिस्वामी अधिकार में अंतरण विलेख पर देय मुद्रांक शुल्क एवं पंजीयन शुल्क यथास्थिति विकास प्राधिकरण या विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा वहन किया जायेगा ।

(4) भूमिस्वामी अधिकार में अंतरण विलेख निष्पादित होने के पश्चात् यथास्थिति विकास प्राधिकरण /विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण को भूमि का आधिपत्य सौंपा जाएगा तथा भू अभिलेखों में प्रविष्टियां अद्यतन की जाएंगी । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

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अध्याय

पांच

नजूल भूमि का नीलामी द्वारा भूमिस्वामी हक में निर्वर्तन

110. नीलामी द्वारा नजूल भूमि के निर्वर्तन के लिए भूमि का चयन - (1 ) सामान्यतः निम्न प्रकृति की भूमियां नीलामी द्वारा भूमिस्वामी हक में निर्वर्तन के लिए चयनित की जाएंगी-

(क) ऐसी नजूल भूमियां जो व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित हैं या निजी भूमियों से घिरी हुई हैं या अन्य कोई भूमियां जिनका निर्वर्तन व्यावसायिक प्रयोजनों के लिए किया जा सकता है; और

(ख) नगरीय क्षेत्र में स्थित बडे आकार की रिक्त नजूल भूमियां जो विकास योजना के अनुरूप प्रयोजन हेतु नीलामी द्वारा निर्वर्तित किए जाने योग्य हैं ।

(2) ऐसी भूमियां जिनकी आवश्यकता किसी महत्वपूर्ण लोक प्रयोजन के लिए है या भविष्य में संभावित है , नीलामी द्वारा निर्वर्तन के लिए चयनित नहीं की जाएंगी । 111. नीलामी द्वारा निर्वर्तन के लिए भूमि का चयन करने एवं नीलाम करने के लिए सक्षम प्राधिकारी- ( 1 ) नीलामी निर्वर्तन के लिये भूमि के चयन एवं नीलाम करने के लिये सक्षम प्राधिकारी निम्न तालिका अनुसार होंगे:-

तालिका

नीलामी हेतु भूखण्ड के चयन एवं स्वीकृति की प्राधिकारिता

सक्षम प्राधिकारी क्र.

भूमि का क्षेत्रफल एवं बाजार मूल्य

चयन हेतु नीलामी की कार्यवाही हेतु

(3)

(4)

(2)

(1 )

1.1

1.

संभांग नजूल निर्वर्तन समिति

नगरीय क्षेत्र में 10,000 वर्गमीटर तक के क्षेत्रफल के मामले में

जिला नजूल निर्वर्तन समिति 1.2 नगरेतर क्षेत्र में 50,000 वर्गमीटर तक के क्षेत्रफल के मामले में

2.

भूमि प्रबंधन प्राधिकारी 2.1 नगरीय क्षेत्र में 10,000 वर्गमीटर से अधिक के क्षेत्रफल के भूखण्ड के मामले में

राज्य नजूल निर्वर्तन समिति की अनुशंसा पर भूमि प्रबंधन प्राधिकारी

2.2 नगरेतर क्षेत्र में 50,000 वर्गमीटर से अधिक के क्षेत्रफल के भूखण्ड के मामले में 650(93)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

(2) उक्त तालिका में उल्लेखित भूमि प्रबंधन प्राधिकारी राज्य सरकार द्वारा पृथक से अधिसूचित किया जाएगा ।

112. नीलामी द्वारा निर्वर्तन के लिए भूमि के चयन के लिए प्रतिवेदन तैयार करना- (1 ) नजूल अधिकारी कलेक्टर के निर्देश पर लैण्ड बैंक में उपलब्ध किसी नजूल भूमि को नीलामी द्वारा निर्वर्तित किये जाने हेतु चयनित करने के लिए प्रतिवेदन तैयार करेगा ।

(2) नजूल अधिकारी द्वारा प्रस्तावित भूमि के नीलामी द्वारा निर्वर्तन के संबंध में कंडिका 142 में विहित रीति में सार्वजनिक उद्घोषणा जारी कर दावे , आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे ।

(3) नजूल अधिकारी द्वारा स्थानीय निकाय , नगर तथा ग्राम निवेश और यदि आवेदित भूमि किसी अन्य विभाग के आधिपत्य में की भूमि से लगी हुई हो तो उस विभाग के जिला कार्यालय का अभिमत प्राप्त किया जाएगा । स्थानीय निकाय, नगर तथा ग्राम निवेश या अन्य विभाग के जिला कार्यालय अभिमत सामान्यतः पंद्रह दिन में देंगे , यदि तीस दिन की अवधि में भी अभिमत प्राप्त नहीं होता है तो यह माना जाएगा कि उन्हें प्रस्तावित निर्वर्तन में कोई आपत्ति नहीं है ।

(4) नजूल अधिकारी अपना प्रतिवेदन प्ररूप सात में जिला नजूल निर्वर्तन समिति के सचिव को प्रेषित करेगा जिसमें एक से अधिक भूखण्ड होने की दशा में अथवा किसी बड़े भूखण्ड का अंशभाग होने की दशा में ऐसे निर्वर्तन किये जाने वाले प्रत्येक भूखण्ड तक आवागमन के लिये युक्तियुक्त माप के पहुंचमार्ग को भी प्रतिवेदन के साथ संलग्न नक्शे में दर्शाया जाएगा । किसी बड़े भूखण्ड के अंशभाग के निर्वर्तन के मामले में शेष भाग के लिये भी भविष्य में पहुंचमार्ग उपलब्ध रहे यह भी सुनिश्चित किया जाएगा ।

113. सक्षम प्राधिकारी द्वारा नीलामी द्वारा निर्वर्तन हेतु भूमि के चयन की स्वीकृति- (1 ) नजूल अधिकारी के प्रतिवेदन का परीक्षण कर जिला नजूल निर्वर्तन समिति अपने अभिमत के साथ मामला संभाग नजूल निर्वर्तन समिति को प्रेषित करेगी । (2) जिस मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति सक्षम प्राधिकारी है वहां उसके द्वारा नीलामी द्वारा निर्वर्तन हेतु भूमि के चयन की स्वीकृति देने के संबंध में अंतिम निर्णय लेकर जिला नजूल निर्वर्तन समिति को सूचित किया जाएगा । जिस मामले में मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

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राज्य नजूल निर्वर्तन समिति सक्षम प्राधिकारी है उसमें संभाग नजूल निर्वर्तन समिति अपने अभिमत के साथ मामला राज्य नजूल निर्वर्तन समिति को निर्णय हेतु मामला प्रेषित किया जाएगा ।

(3) जिस मामले में चयन हेतु राज्य नजूल निर्वर्तन समिति सक्षम प्राधिकारी है वहां उसके द्वारा संभाग नजूल निर्वर्तन समिति से प्राप्त मामले में नीलामी द्वारा निर्वर्तन हेतु भूमि के चयन की स्वीकृति देने के संबंध में निर्णय लेकर भूमि प्रबंधन प्राधिकारी को सूचित किया जाएगा ।

(4) सक्षम प्राधिकारी द्वारा नीलामी द्वारा निर्वर्तित किये जाने हेतु चयनित भूमि का आधार मूल्य (अपसेट प्राईज) नियत किया जायेगा जो चयनित भूमि के लिये अनुमत प्रयोजनों के लिये निर्धारित दरों में से उच्चतम दर के आधार पर संगणित बाजार मूल्य से कम नहीं होगा ।

114. चयनित भूमि के क्षेत्रफल का सत्यापन एवं सीमांकन- सक्षम प्राधिकारी द्वारा चयनित भूखण्डों की नीलामी की प्रकिया प्रारंभ करने के पूर्व स्थल पर क्षेत्रफल सत्यापन कराएगा और सीमांकन उपरांत प्रत्येक भूखण्ड पर सीमाचिन्ह स्थापित कर पृथक-पृथक दर्शाया जाएगा ।

115. नीलामी की प्रक्रिया (1 ) नीलामी द्वारा निर्वर्तन हेतु भूमि के चयन की स्वीकृति सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त होने तथा कंडिका 114 के अनुसार सीमांकन तथा क्षेत्रफल का सत्यापन किये जाने के उपरांत ऐसी भूमि को नीलाम किया जायेगा । (2) नीलामी की कार्यवाही कंडिका 111 में उल्लेखित सक्षम प्राधिकारी के निर्देशन में की जाएगी ।

A

(3) सक्षम प्राधिकारी नीलामी की सार्वजनिक उद्घोषणा प्ररूप आठ में कंडिका 142 में विहित रीति से जारी करेगा, जिसमें नीलामी में भाग लेने के इच्छुक व्यक्ति या संस्था को पंजीयन हेतु न्यूनतम 21 दिवस का समय दिया जायेगा ।

(4) सार्वजनिक उद्घोषणा उस स्थानीय क्षेत्र में जहां पर भूमि स्थित है व्यापक रूप से परिचालित दो समाचार पत्रों में, जिनमें से कम से कम एक हिन्दी का होगा, किया जाएगा । व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए नीलामी के विज्ञापन का प्रकाशन दोहराया भी जा सकता है । 650(95)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

(5) नीलामी ई-ऑक्शन की प्रक्रिया के अनुसार की जायेगी , जिसमें समस्त कार्यवाही चिन्हित पोर्टल के माध्यम से सम्पादित की जाएगी ।

(6) चिन्हित पोर्टल पर ई-ऑक्शन किये जा रहे भूखण्ड का ब्यौरा , उसकी पहचान, उसका सांकेतिक स्थल मानचित्र , निविदा दस्तावेज का अवलोकन करने एवं डाउन लोड करने के निर्देश, कंडिका 113 की उपकंडिका (4) के अनुसार संगणित भूमि का न्यूनतम आधार मूल्य (अपसेट प्राईज ), और उसके आधार पर मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण एवं पुनर्निर्धारण) नियम, 2018 के अनुसार वार्षिक निर्धारण (भू- राजस्व) तथा निविदा में भाग लेने के लिये अन्य आवश्यक जानकारी यथा- निविदा ऑफर जमा करने एवं निविदा खोलने की तिथि, समय तथा स्थान और प्रतिभूति राशि (अर्नेस्ट मनी) जो भूखण्ड के न्यूनतम आधार मूल्य (अपसेट प्राईज) के दो प्रतिशत के मान से होगी, आदि महत्वपूर्ण ब्यौरे भी प्रदर्शित किए जाएंगे । निविदा दस्तावेज राजस्व विभाग तथा जिले के कलेक्टर की वेबसाइटों से भी डाउन लोड किए जा सकेंगे ।

(7) भूखंड की नीलामी में भाग लेने के लिये इच्छुक व्यक्ति या संस्था को उक्त पोर्टल पर निर्धारित प्रक्रिया अनुसार प्रथमतः निर्धारित प्रतिभूति राशि (अर्नेस्ट मनी) वेबसाइट के माध्यम से, अपने वांछित विवरण तथा आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर अपना पंजीयन कराना होगा ।

(8) पंजीयन उपरांत इच्छुक व्यक्ति या संस्था लॉग -इन आई. डी. एवं पासवर्ड का उपयोग करते हुए ई- नीलामी के लिए नियत समयावधि (टाइम विंडो) के भीतर अपना ऑफर दर्ज कर नीलामी की ऑन लाइन प्रक्रिया में भाग ले सकेगा ।

116. निविदा में भाग लेने हेतु पात्रता- राज्य में भूमि धारण करने के लिए पात्र सभी व्यक्ति तथा संस्थाएँ नीलामी में भाग ले सकेंगे जब तक कि उन्हें किसी विधि द्वारा या उसके अधीन नीलामी में भाग लेने से निरर्ह न किया गया हो ।

117. निविदाओं का परीक्षण एवं निराकरण (1 ) चिन्हित पोर्टल पर निविदाकर्ताओं के द्वारा दिए गए ऑफरों के तुलनात्मक पत्रक के आधार पर उच्चतम निविदा ऑफरकर्ता की निर्धारित प्रतिभूति राशि (अर्नेस्ट मनी ) रोक कर अन्य निविदाकर्ताओं द्वारा जमा की गयी निर्धारित प्रतिभूति राशि (अर्नेस्ट मनी) उनके द्वारा उपलब्ध कराये गये बैंक खाते में अंतरित कर वापिस की जाएगी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

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(2) कंडिका 111 की तालिका के सरल कमांक 1 के मामलों में, नजूल अधिकारी नीलामी की कार्यवाही का प्रतिवेदन प्ररूप नौ में तैयार कर जिला नजूल निर्वर्तन समिति के सदस्य सचिव को प्रेषित करेगा । जिला नजूल निर्वर्तन समिति नीलामी की कार्यवाही पर अंतिम निर्णय लेकर जिला कलेक्टर को आगामी कार्यवाही हेतु संसूचित करेगी ।

(3) कंडिका 111 की तालिका के सरल क्रमांक 2 के मामलों में, भूमि प्रबंधन प्राधिकारी नीलामी की कार्यवाही पर अंतिम निर्णय लेकर प्ररूप दस में निर्णय की संसूचना राज्य शासन (राजस्व विभाग) को प्रेषित करेगा । राज्य शासन प्राप्त संसूचना के आधार पर जिला कलेक्टर को उप कण्डिका 4 के अनुसरण में कार्रवाई हेतु संसूचित करेगा ।

(4) कलेक्टर यथास्थिति उप कंडिका (2) या (3) के निर्णय के अनुसरण में सफल निविदाकार को संसूचित करते हुए यह अपेक्षा करेगा कि उसके द्वारा ऑफर राशि में धरोहर राशि के समायोजन उपरांत शेष राशि नियत कालावधि जो तीस दिवस से अधिक की नहीं होगी, के भीतर परिशिष्ट ' क' में उल्लेखित मद में जमा करे । कलेक्टर सफल निविदाकार के आवेदन पर अपेक्षित शेष राशि जमा करने के लिए नियत समयावधि में 60 दिवस से अनधिक वृद्धि स्वीकृत कर सकेगाः

परन्तु ऐसी वृद्धि तभी स्वीकृत की जा सकेगी जब सफल निविदाकार अपने आवेदन पत्र के साथ अतिरिक्त अवधि के लिए देय राशि पर बारह प्रतिशत वार्षिक के दर से साधारण ब्याज जमा करने पर सहमति दे ।

(5) नियत समयावधि और यदि अतिरिक्त अवधि स्वीकृत की गई है तो ऐसी अतिरिक्त अवधि के अवसान तक निविदाकार द्वारा अपेक्षित शेष राशि जमा नहीं करायी जाती है तो निविदा स्वतः निरस्त हो जाएगी और निविदाकार द्वारा जमा प्रतिभूति राशि (अर्नेस्ट मनी) राजसात हो जाएगी ।

(6) उपरोक्त उपकंडिका (5) के अधीन निविदा निरस्त होने पर प्रश्नाधीन भूखण्ड की पुनः नीलामी की जा सकेगी ।

(7) नीलामी की प्रक्रिया, प्राप्त निविदाओं के परीक्षण एवं निराकरण तथा अन्य अनुषांगिक बिन्दुओं पर कार्यवाही राज्य शासन द्वारा समय - समय पर जारी निर्देशों के अधीन होगी । 650(97)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

118. भू- राजस्व- नीलामी से भूमिस्वामी हक में निर्वर्तित की गई भूमि पर मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण तथा पुनर्निर्धारण ) नियम , 2018 के अनुसार वार्षिक भू- राजस्व देय होगा ।

119. विकय विलेख निष्पादन, पंजीयन एवं कब्जे का प्रदाय- सफल निविदाकार की ओर से समस्त राशियां जमा किए जाने पर कलेक्टर द्वारा विक्रय विलेख प्ररूप ग्यारह में निष्पादित किया जाएगा जिसे निविदाकार स्वंय के व्यय पर पंजीकृत करवाएगा । पंजीकृत विक्रय विलेख की प्रमाणित सत्य प्रतिलिपि कलेक्टर को प्रस्तुत किए जाने पर भूखण्ड का कब्जा क्रेता को सौंपा जाएगा । तदुपरांत भू-अभिलेखों की प्रविष्टियां अद्यतन की जाएंगी ।

120. वित्तीय प्रावधान- भू-खण्डों की नीलामी किए जाने पर होने वाले व्यय के लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान प्रमुख राजस्व आयुक्त के बजट में राजस्व विभाग द्वारा किए जाएंगे । प्रमुख राजस्व आयुक्त द्वारा आवश्यकतानुसार इस मद में जिलों को बजट आवंटन दिया जाएगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

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अध्याय - छह

लाइसेंस

121. प्रयोजन जिनके लिए नजूल भूमि लाइसेंस पर दी जा सकती है- इन निर्देशों के प्रभावशील होने के बाद नजूल भूमि निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए लाइसेंस पर दी जा सकेगी-

(क) खुली नजूल भूमि, जो अतिक्रमित नहीं की गई है, भूमि पर किसी प्रकार के निर्माण किए बिना नियत अवधि के लिए उपयोग में लाने के लिए ;

(ख) नदी या नाले पर आवागमन के लिये पुल, पुलिया निर्माण या कन्वेयर बेल्ट अथवा रोप ट्रॉली द्वारा सामग्री एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने के लिये न्यूनतम आवश्यक निर्माण के साथ उपयोग में लाए जाने के लिए; और

(ग) गौशाला के लिए ।

122. सक्षम प्राधिकारी- (1 ) लाइसेंस देने के लिए सक्षम प्राधिकारी निम्नानुसार होंगे-

(क) खुली नजूल भूमि यथा तम्बू या शामियाना लगाने या निर्माण सामग्री इकट्ठी कर रखने के लिए अधिकतम 3 माह की अवधि के लिए- कलेक्टर;

(ख) नदी या नाले के ऊपर से पुल, पुलिया निर्माण के लिए या सामग्री एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने हेतु कन्वेयर बेल्ट या रोप ट्रॉली के निर्माण के लिए अधिकतम 10 वर्ष की अवधि के लिए- जिला नजूल निर्वर्तन समिति;

(ग) गौशाला के लिये दस एकड़ तक भूमि, अधिकतम 10 वर्ष के लिये- जिला नजूल निर्वर्तन समिति; और

(घ) गौशाला के लिये दस एकड़ से अधिक भूमि, पशुपालन विभाग द्वारा निर्धारित लाइसेंस अवधि के लिये- पशुपालन विभाग द्वारा प्राधिकृत अधिकारी । 650(99)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

(2) लाइसेंस नवीकृत नहीं किया जाएगा । यदि आवेदक लाइसेंस की समयावधि में वृद्धि चाहता है तो उसके आवेदन पर नया लाइसेंस तत्समय प्रचलित नियमानुसार स्वीकृत किया जा सकेगा ।

123. पुल , पुलिया, कन्वेयर बेल्ट या रोप ट्रॉली निर्माण के लिये लाइसेंस की अहर्ताएँ और शर्तें- (1 ) ऐसे धारक को, जिसकी भूमियां किसी नदी या नाले के दोनों किनारों पर स्थित हों, अपने दोनों भू-भागों में आवागमन को सुगम बनाने के लिये नदी या नाले पर, जल प्रवाह को अवरुद्ध किए बिना, समुचित ऊँचाई की पुल , पुलिया निर्माण के लिए या कन्वेयर बेल्ट या रोप ट्रॉली के माध्यम से सामग्री एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए लाइसेंस दिया जा सकेगा ।

(2) लाइसेंस में ऐसे पुल, पुलिया , कन्वेयर बेल्ट या रोप ट्रॉली की अनुमत ऊँचाई, अन्य सामान्य शर्तें तथा ऐसी विशिष्ट शर्तें जिन्हें कलेक्टर आवश्यक समझे, का उल्लेख किया जाएगा ।

(3) लाइसेंसधारी द्वारा पुल, पुलिया कन्वेयर बेल्ट या रोप ट्रॉली के निर्माण का संरचना रूपांकन (Structural Design) पंजीकृत संरचना यंत्री (Registered Structural Engineer) से तैयार कराकर, लोक निर्माण विभाग अथवा स्थानीय निकाय के कार्यपालन यंत्री से अनुमोदन कराया जाएगा ।

(4) पुल , पुलिया, कन्वेयर बैल्ट या रोप ट्रॉली जैसी संरचना के रख रखाव का दायित्व लाइसेंस अवधि के दौरान लाइसेंसधारी पर होगा और अवधि अवसान के पश्चात्, यदि नया लाइसेंस स्वीकृत नहीं किया जाता है तो ऐसी संरचना लाइसेंस अवधि के पश्चात् तीन माह की अवधि के भीतर लाइसेंसधारी द्वारा हटाई जाएगी । यदि नियत अवधि में ऐसी संरचना नहीं हटाई जाती है तो कलेक्टर लाइसेंसधारी के व्यय पर उसे हटवा सकेगाः

परंतु यदि ऐसी संरचना लोक हित में उपयोगी है तो कलेक्टर उसे राजसात करते हुए स्थानीय निकाय अथवा लोक निर्माण विभाग या अन्य एजेंसी को प्रबंधन एवं संधारण के लिये सौंप सकेगा । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

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(1 ) गौशाला के लिये भूमि का निर्वर्तन लाइसेंस 124. गौशाला के लिए लाइसेंस

पर निम्न तरीकों से किया जा सकेगाः-

(क) जिला नजूल निर्वर्तन समिति द्वारा - गौशाला समितियों को दस एकड़ तक भूमि; और

(ख) पशुपालन विभाग द्वारा - पशुपालन विभाग को हस्तांतरित भूमि तथा पशुपालन विभाग के पास पूर्व से उपलब्ध भूमि परः

परंतु जिला नजूल निर्वर्तन समिति अथवा पशुपालन विभाग द्वारा ऐसी भूमि जो किसी नगरीय क्षेत्र अथवा विकास योजना क्षेत्र की बाहरी सीमा से 5 किलोमीटर के उपांत क्षेत्र में स्थित है या किसी नेशनल हाईवे एक्ट , 1956 (क्रमांक 47 सन् 1956) विनिर्दिष्ट किये गये या उसके अधीन घोषित किये गये राष्ट्रीय राजमार्ग के या मध्यप्रदेश हाईवेज एक्ट, 1936 (कमांक 34 सन् 1936) की धारा 2 के अधीन अधिसूचित लोक मार्ग के दोनों ओर एक किलोमीटर की दूरी के भीतर या प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना अंतर्गत निर्मित मार्ग के दोनों ओर पॉच सौ मीटर की दूरी के भीतर स्थित हो , बंटित नहीं की जाएगी ।

(2) लाइसेंस दिये जाने की प्रक्रिया निम्नानुसार होगी-

(क)- उप कंडिका (1 ) के खण्ड (क) के मामले में-

(एक) जिला नजूल निर्वर्तन समिति द्वारा तत्समय प्रवृत्त अधिनियमिति के अंतर्गत पंजीकृत गौशाला समिति की मांग पर एवं भूमि की उपलब्धता के आधार पर एक ग्राम पंचायत में एक गौशाला समिति के लिये प्रति 100 गौवंश के लिये अधिकतम 2.5 एकड़ तक भूमि लाइसेंस पर दी जा सकेगी , किन्तु किसी गौशाला समिति को दस एकड़ से अधिक भूमि लाइसेंस पर नही दी जाएगी ।

(दो) समिति को गौशाला हेतु दिये जाने वाले लाइसेंस में सामान्य शर्तों के अतिरिक्त निम्नलिखित शर्तें भी जोड़ी जाएंगी: -

(क) गौशाला में पंचायत क्षेत्र के ऐसे गौवंश (गाय, बछड़ा) रखे जाएंगे जिनका कोई स्वामी न हों, अशक्त, बीमार या वृद्ध हों; ऐसे कम से कम पचास गौवंशी पशु उपलब्ध हों;

(ख) गौवंश के जीवित पशु व मृत पशु से होने वाली आय गौशाला के खाते में जमा होगी और उसका व्यय गौशाला के उन्नयन पर किया जाएगा ।

(ग) भूमि का उपयोग केवल गौशाला एवं तत्संबंधी गतिविधियों के लिए ही किया जा सकेगा;

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(घ) लाइसेंस प्राप्त भूमि को विक्रय , दान, पट्टा, उप - पट्टा, बंधक या किराये पर अथवा अन्यथा हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा;

(ङ) भूमि के उपयोग का लाइसेंस अस्थाई तौर पर केवल गौशाला के उपयोग मात्र के लिए ही होगा; मूलतः यह भूमि शासकीय सम्पत्ति रहेगी तथा भू-अभिलेख में भूमिस्वामी के कॉलम में "मध्यप्रदेश शासन " लिखा रहेगा;

(च) गौशाला की स्थापना के पश्चात् संचालक समिति को गौशाला का पंजीयन मध्यप्रदेश गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड में कराना अनिवार्य होगा;

(छ) गौशाला के संचालन के लिये मध्यप्रदेश गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड द्वारा नियमों के अनुसरण में समय - समय पर जारी किये गये अनुदेशों का पालन करना होगा; और

(ज) अन्य ऐसी शर्तें जो सक्षम प्राधिकारी उचित समझे ।

(तीन) किसी शर्त उल्लंघन की स्थिति में उसी गौशाला समिति को भविष्य में प्रदेश में गौशाला के लिये भूमि उपयोग हेतु लाइसेंस देने के लिये विचार में नहीं लिया जाएगा ।

(चार) गौशाला से संबंधित संरचना के रख रखाव का दायित्व लाइसेंस अवधि के दौरान लाइसेंसधारी पर होगा और अवधि अवसान के पश्चात्, यदि नया लाइसेंस स्वीकृत नहीं किया जाता है तो ऐसी संरचना लाइसेंस अवधि के अवसान पर तीन माह की अवधि के भीतर लाइसेंसधारी द्वारा हटाई जाएगी । यदि नियत अवधि में ऐसी संरचना नहीं हटाई जाती है तो कलेक्टर ऐसी संरचना राजसात करेगा अथवा लाइसेंसधारी के व्यय पर उसे हटवा सकेगा ।

(ख)- उप कंडिका (1 ) के खण्ड (ख) के मामले में-

(एक) गौपालन की परियोजना के लिये प्रति 100 गौवंश के लिये अधिकतम 2.5 एकड़ तक भूमि लाइसेंस पर दी जा सकेगी ।

(दो) 1000 गौवंश या इससे अधिक निराश्रित गौवंश की गौशालाओं के लिये गोबर , गौमूत्र व दूध से विभिन्न उत्पादों के निर्माण से संबंधित परियोजनाओं हेतु अधिकतम पॉच एकड़ अतिरिक्त भूमि के मान से लाइसेंस पर दी जा सकेगी ।

(तीन) पशुपालन विभाग द्वारा भूमि लाइसेंस पर दिये जाने के लिये आवश्यकतानुसार शर्तें निर्धारित की जा सकेंगी जिसमें लाइसेंस की मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

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अवधि, लाइसेंस शुल्क तथा लाइसेंसधारी के दायित्व आवश्यक रूप से उल्लेखित होंगे ।

(3 ) पशुपालन विभाग से मांग प्राप्त होने की स्थिति में दस एकड़ से अधिक भूमि गौशाला स्थापित किये जाने हेतु इन निर्देशों के अध्याय दो में विहित प्रक्रिया के अनुसार पशुपालन विभाग को हस्तांतरित की जाएगी ।

125. लाइसेंस के लिये आवेदन एवं प्रकिया शुल्क (1 ) आवेदक कलेक्टर को प्ररूप बारह में लाइसेंस के लिए आवेदन करेगा, जिसमें यथास्थिति अपनी विस्तृत परियोजना नक्शा सहित संलग्न करेगा ।

(2) आवेदक द्वारा प्रकिया शुल्क, जो लौटाया नहीं जाएगा, के रूप में छः माह से कम अवधि के लिए लाइसेंस के मामले में पांच सौ रुपये तथा अन्य मामलों में एक हजार रुपये की राशि शासकीय खजाने में परिशिष्ट 'क' में उल्लेखनीय मद में जमा कर उसकी पावती की छाया प्रति आवेदन पत्र के साथ संलग्न की जाएगी । प्रकिया शुल्क आवेदन के अमान्य होने की दशा में वापिस नहीं किया जाएगा और न ही मान्य होने की दशा में किसी देय राशि के विरुद्ध समायोजित किया जाएगाः परंतु गौशाला के लिये आवेदन के मामले में प्रकिया शुल्क देय नहीं होगा । 126. लाइसेंस फीस - (1 ) जहां कलेक्टर द्वारा खुली नजूल भूमि यथा तम्बू या शामियाना लगाकर या निर्माण सामग्री इकट्ठी कर रखने के लिये लाइसेंस दिया जाता है वहां लाइसेंस फीस प्रत्येक माह या उसके भाग के लिये भूखण्ड के बाजार मूल्य के आधा प्रतिशत की राशि के बराबर देय होगी ।

(2) नदी या नाले के ऊपर से पुल , पुलिया निर्माण के लिए या सामग्री एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने हेतु कन्वेयर बेल्ट या रोप ट्रॉली के निर्माण के लिए वार्षिक लाइसेंस फीस उपयोग में लाई गई भूमि के क्षेत्रफल के बाजार मूल्य के एक प्रतिशत के बराबर देय होगी ।

स्पष्टीकरण- पुल , पुलिया, कन्वेयर बैल्ट या रोप ट्रॉली निर्माण के मामले में उपयोग में लाई गई भूमि के क्षेत्रफल की संगणना में ऐसे पुल, पुलिया, कन्वेयर बेल्ट या रोप ट्रॉली के नीचे आने वाली युक्तियुक्त चौड़ाई की भूमि शामिल होगी ।

(3 ) गौशाला के लिये भूमि वार्षिक एक रूपया सांकेतिक शुल्क (लाइसेंस फीस ) पर दी जाएगी ।

127. लाइसेंस का प्ररूप- लाइसेंस प्ररूप तेरह में निष्पादित किए जाएंगे । 650( 103)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

अध्याय सात

भूमिस्वामी हक में कृषि प्रयोजन के लिए भूमि का आवंटन

128. सक्षम प्राधिकारी - कंडिका 133 के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए , नगरेतर क्षेत्र में भूमिहीन व्यक्ति को भूमिस्वामी हक में कृषि प्रयोजन के लिए भूमि आवंटित करने के मामले में जिला नजूल निर्वर्तन समिति सक्षम प्राधिकारी होगी ।

129. आवंटन के लिये पात्रता- भूमि केवल उन्हीं व्यक्तियों को आवंटित की जा सकेगी जो भूमिहीन व्यक्ति हो परंतु किसी ऐसे व्यक्ति को पात्रता नहीं होगी जिसने सरकार से आवंटित भूमि किसी अन्य को अंतरित कर दी हो ।

130. बंटन के लिये भूमि- ग्राम की आबादी एवं निस्तार अधिकारों की आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित किये जाने के उपरांत, उसी ग्राम के अथवा समीपवर्ती (सीमा से जुड़ा हुआ) ग्राम के कोटवार को यदि नियमानुसार भूमि देना शेष हो तो उसके लिये निर्धारित भूमि सुरक्षित की जाकर उस ग्राम में उपलब्ध काबिलकाश्त भूमि ही भूमिहीन व्यक्तियों को कृषि प्रयोजन के लिये बंटित की जा सकेगीः

परंतु ऐसी भूमि जो किसी नगरीय क्षेत्र अथवा विकास योजना क्षेत्र की बाहरी सीमा से 5 किलोमीटर के उपांत क्षेत्र में स्थित है या किसी नेशनल हाईवे एक्ट, 1956 (क्रमांक 47 सन् 1956) विनिर्दिष्ट किये गये या उसके अधीन घोषित किये गये राष्ट्रीय राजमार्ग के या मध्यप्रदेश हाईवेज एक्ट, 1936 (क्रमांक 34 सन् 1936 ) की धारा 2 के अधीन अधिसूचित लोक मार्ग के दोनों ओर एक किलोमीटर की दूरी के भीतर या प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना अंतर्गत निर्मित मार्ग के दोनों ओर पाँच सौ मीटर की दूरी के भीतर स्थित हो, बंटित नहीं की जाएगी ।

131. पात्रता में प्राथमिकता कम- बंटन की पात्रता के लिये प्राथमिकता कम निम्नानुसार होगाः-

(क) आदिम जनजाति;

(ख) अनुसूचित जाति;

(ग) पिछड़ा वर्ग ; और

(घ) अन्य वर्ग ।

132. कृषि प्रयोजन के आवंटन की सीमा- भूमिहीन व्यक्ति को असिंचित अधिकतम दो हेक्टेयर या सिंचित अधिकतम एक हेक्टेयर कृषि प्रयोजन हेतु भूमि, यदि उसके पास पूर्व से भूमिस्वामी धारणाधिकार में कृषि भूमि उपलब्ध है तो उतना क्षेत्रफल कम मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

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कर जो कि उसके पास पूर्व से है, भूमिस्वामी अधिकार में निःशुल्क आवंटित की जा सकेगीः

परन्तु यदि उस ग्राम में या निकटतम ग्राम में उपलब्ध भूमि पर्याप्त न हो , तो पात्रता रखने वाले अधिक से अधिक व्यक्तियों को भूमि बंटन करने का प्रयास इस प्रकार किया जायेगा कि बंटिती के पास एक हेक्टेयर से कम भूमि न हो ।

133. आवंटन की प्रकिया- (1 ) इस अध्याय के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए , कृषि प्रयोजन के लिये बंटन, राज्य शासन द्वारा कार्यकारी निर्देश जारी किये जाने पर ही किया जा सकेगा ।

(2) उपकंडिका (1 ) के अधीन जारी किये गये कार्यकारी निर्देशों के अनुसरण में सक्षम प्राधिकारी अर्थात् जिला नजूल निर्वर्तन समिति प्रस्तुत प्रस्ताव पर विचारोपरांत निर्णय लेगी । यदि सक्षम प्राधिकारी द्वारा कृषि भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया जाता है तो अपने निर्णय में आवंटिती के नाम (उनके पूर्ण पता सहित) , उन्हें आवंटित की जाने वाली कृषि भूमि के विवरण- सर्वेक्षण संख्यांक, ( यदि किसी बड़े आकार के सर्वेक्षण संख्यांक में के अंश भाग आवंटित किए जाते है तो नक्शा संलग्न करते हुए ऐसे अंश भाग को पृथक -पृथक दर्शाया जाए) और उनके क्षेत्रफल के विवरण दिए जाएंगे ।

134. आवंटित कृषि भूमि पर भू- राजस्व का निर्धारण - यदि जिला नजूल निर्वर्तन समिति द्वारा कृषि भूमि के आवंटन का निर्णय लिया जाता है तो ऐसी दशा में आवंटित भूमि का आवंटिती के पक्ष में भूमिस्वामी अधिकार पत्र जारी किए जाने के पूर्व कलेक्टर द्वारा संहिता की धारा 60 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए निर्धारण नियत किया जाएगा ।

135. भूमिस्वामी अधिकार पत्र जिला नजूल निर्वर्तन समिति द्वारा लिए गए निर्णय के अनुपालन हेतु कलेक्टर के निर्देश के अनुसरण में संबंधित तहसीलदार आवंटिती के पक्ष में भूमिस्वामी अधिकार पत्र प्ररूप चौदह में जारी करेगा ।

136. भू-अभिलेख में प्रविष्टि तहसीलदार कंडिका 135 में जारी किए गए भूमिस्वामी अधिकार पत्र की संबंधित भू-अभिलेखों में प्रविष्टियां दर्ज कराएगा और संबंधित आवंटिती को भू- अधिकार पुस्तिका प्रदत्त करेगा और स्थल पर आवंटिती को आवंटित कृषि भूमि का आधिपत्य भी सौंपेगा । 650 ( 105)

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अध्याय - आठ

स्थायी पट्टे का भूमिस्वामी अधिकार में संपरिवर्तन

137. स्थायी पट्टाधिकार का भूमिस्वामी अधिकार में संपरिवर्तन- (1 ) राज्य सरकार या राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा आवासीय प्रयोजन के लिये प्रदान किये गये स्थायी पट्टाधिकार, मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल या विकास प्राधिकरण या मध्यप्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ मर्यादित या मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी आवास निगम या तत्सयम प्रवृत्त अधिनियमिति के अधीन पंजीकृत गृह निर्माण सहकारी सोसायटी को प्रदत्त पट्टाधिकार को छोड़कर, को भूमिस्वामी अधिकार में संपरिवर्तित कराया जा सकेगाः

परंतु किसी व्यक्ति/ संस्था के पक्ष में मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल या विकास प्राधिकरण या मध्यप्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ मर्यादित या मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी आवास निगम या तत्सयम प्रवृत्त अधिनियमिति के अधीन पंजीकृत गृह निर्माण सहकारी सोसायटी द्वारा, उसे राज्य शासन से प्राप्त स्थायी पट्टे की भूमि में से 30 वर्ष या अधिक अवधि के लिये आवासीय प्रयोजन हेतु निष्पादित उपपट्टे के आधार पर पट्टाधिकार दिया गया है, ऐसे व्यक्ति/ संस्था , यथास्थिति ऐसे मण्डल या प्राधिकरण या संघ या निगम या सोसायटी से अनापत्ति प्रमाण - पत्र प्राप्त करने के उपरांत , संपरिवर्तन के लिये पात्र होंगे । ऐसे अनापत्ति प्रमाण- पत्र के लिए उक्त संस्थाओं द्वारा कोई शुल्क प्रभारित नही किया जाएगाः

परंतु यह और कि उक्त उपबंध,-

(क) मध्यप्रदेश नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्ति (पट्टाधृति अधिकारों का प्रदान किया जाना) अधिनियम, 1984 (क्रमांक 15 सन् 1985) के अंतर्गत प्रदत्त पट्टाधृति अधिकार के मामले में; तथा

(ख) निजी पूँजी निवेशक को यदि किसी परियोजना के कार्यान्वयन के लिए राज्य सरकार या राज्य सरकार के उपकम और ऐसे निवेशक के मध्य निष्पादित किसी अनुबंध के अनुक्रम में भूमि का आवंटन किया गया है, ऐसी भूमि के मामले में ;

लागू नहीं होंगे ।

(2) स्थायी पट्टाधिकार को भूमिस्वामी अधिकार में संपरिवर्तन के लिये सक्षम प्राधिकारी कलेक्टर होगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

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(3 ) कोई व्यक्ति जो संपरिवर्तन के लिये पात्र सरकारी पट्टेदार के रूप में भूमि धारण करता है सक्षम प्राधिकारी को प्ररूप पन्द्रह में आवेदन कर सकेगा । संपरिवर्तन के लिये प्रस्तुत आवेदन पर कोई प्रकिया शुल्क देय नहीं होगा ।

138. संपरिवर्तन की प्रक्रिया (1 ) आवेदन पत्र प्राप्त होने पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा आवेदन पत्र के संबंध में कंडिका 142 में विहित रीति में सार्वजनिक उद्घोषणा जारी कर दावे, आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किये जाएंगे ।

(2) हितबद्ध व्यक्तियों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करने के पश्चात् सक्षम प्राधिकारी आवेदित संपरिवर्तन मंजूर कर सकेगा , यदि समाधान हो जाता है कि

(क) भूमि का पट्टा वैध है;

(ख) पट्टों की शर्तों से संबंधित सभी शोध्यों के भुगतान कर दिये गये हैं;

(ग) पट्टे की शर्तों का उल्लंघन / अपालन नहीं हुआ है और यदि किन्हीं शर्तों का उल्लंघन / अपालन हुआ है तो ऐसे उल्लंघन / अपालन के लिये कंडिका 82 के अनुसरण में शमन कर दिया गया हैं;

(घ) पट्टे की शर्तें संपरिवर्तन प्रतिषिद्ध नहीं करती हैं; और

(ड़) आवेदक द्वारा एक शपथ पत्र प्रस्तुत कर दिया गया है कि किसी न्यायालय अथवा किसी प्राधिकारी के समक्ष ऐसी भूमि के संबंध में कोई मामला लंबित नहीं हैं ।

(3) सक्षम प्राधिकारी उक्तानुसार प्रक्रिया के अनुसरण में परीक्षण उपरांत कंडिका 139 के अनुसार संगणित संपरिवर्तन प्रभार परिशिष्ट ' क' में उल्लेखित मद में जमा कराये जाने पर संपरिवर्तन की मंजूरी दे सकेगा ।

139. संपरिवर्तन प्रभार संपरिवर्तन प्रभार में सम्मिलित होगा,-

(क) संपरिवर्तन आदेश की दिनांक के आधार पर नियत दर पर पट्टे के नवीनीकरण की आगामी तिथि तक का वार्षिक भू- भाटक; और

(ख) पट्टाधीन भूमि के वर्तमान बाजार मूल्य के 2 प्रतिशत की राशि के बराबर संपरिवर्तन शुल्क ।

140. हस्तांतरण विलेख- सक्षम प्राधिकारी के पट्टाधिकार से भूमिस्वामी अधिकार में संपरिवर्तन मंजूर करने के लिये आदेश के पश्चात् तथा संपरिवर्तन प्रभार एवं अन्य 650 ( 107)

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शोध्य , यदि कोई हो, के जमा कराये जाने पर प्ररूप सोलह में हस्तांतरण विलेख निष्पादित करेगा और रजिस्ट्रीकरण अधिनियम , 1908 (क्रमांक 16 सन् 1908 ) के अधीन रजिस्ट्रीकृत करायेगा तथा मुद्रांक शुल्क सम्मिलित करते हुए , ऐसे पंजीयन के खर्चे पट्टेदार द्वारा वहन किये जाएंगे ।

141. भू- राजस्व - भूमिस्वामी अधिकार में संपरिवर्तित भूमि पर वार्षिक भू- राजस्व मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण तथा पुनर्निर्धारण) नियम, 2018 के अंतर्गत निर्धारित एवं देय होगा । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

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अध्याय नौ

प्रकीर्ण

142. सार्वजनिक उद्घोषणा जारी करने की रीति (1 ) इन निर्देशों के अंतर्गत नजूल भूमि के निर्वर्तन के मामलों में दावे, आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करने के लिये सार्वजनिक उद्घोषणा का प्रकाशन आयुक्त, कलेक्टर, तहसील तथा स्थानीय निकाय के कार्यालयीन सूचना पटलों पर कराया जाएगा ।

(2) उद्घोषणा की एक प्रति उद्घोषणा में संदर्भित भूमि पर या उसके समीप किसी लोक समागम के स्थान पर प्रकाशित की जाएगी ।.

(3) उद्घोषणा का प्रकाशन राजस्व विभाग तथा संबंधित जिले के कलेक्टर की अधिकृत वेबसाइटों पर भी किया जाएगा ।

(4) जहां इन निर्देशों में विशिष्ट रूप से ऐसा विहित किया जाए उद्घोषणा का प्रकाशन समाचार पत्रों में ऐसे निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।

143. नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र- (1 ) भूमिस्वामी हक में धारित अथवा सरकारी पट्टेदार के रूप में धारित भूखंडों पर निर्माण के पूर्व स्थानीय निकाय तथा नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के अधिकारी से तत्समय प्रभावशील विधि के उपबंधों के अंतर्गत अनुमतियां प्राप्त करना आवश्यक होता है । ऐसी अनुमतियां जारी करने के पूर्व स्थानीय निकाय तथा नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के अधिकारी यह सुनिश्चित करते हैं कि उनके द्वारा जारी की जाने वाली अनुमति के आधार पर किसी ऐसे भूखंड पर निर्माण न हो जाये जो वस्तुतः धारक द्वारा धारित न होकर राज्य शासन की दखलरहित या नजूल भूमि हो ।

(2) नजूल अधिकारी के द्वारा समस्त नजूल भूमि के विवरण संबंधित स्थानीय निकाय और नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के अधिकारी को उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि वे उपकंडिका (1 ) में उल्लेखित अनुमतियां जारी करने के पूर्व आवश्यक संतुष्टि कर लें । नजूल अधिकारी का यह दायित्व होगा कि वह ऐसे विवरणों में हुए परिवर्तनों को स्थानीय निकाय और नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के अधिकारी के ध्यान में लाए तथा प्रतिवर्ष जनवरी माह में नजूल भूमि के अद्यतन विवरण उन्हें भिजवाए । 650 ( 109)

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(3 ) उपरोक्त उपकंडिका (2 ) अनुसार अपेक्षित विवरण स्थानीय निकाय और नगर तथा ग्राम निवेश को उपलब्ध कराये जाने के लिये अंतरिम व्यवस्था के रूप में उपकंडिका (4) , (5) और (6) में विहित प्रकिया के अनुसार नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किये जाएंगे, उसके उपरांत नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किये जाएंगे ।

(4) नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिये आवेदन प्ररूप सत्रह में नजूल अधिकारी को प्रस्तुत करना होगा, जो यथास्थिति नगर सर्वेक्षक या राजस्व निरीक्षक से प्रतिवेदन प्राप्त कर इस आशय की संतुष्टि करेगा कि आवेदित भूखण्ड अभिलेख अनुसार रिक्त नजूल भूमि का अंश नहीं है और न ही आवेदित भूखण्ड का कोई भाग रिक्त नजूल भूमि पर अतिक्रमित है ।

(5 ) नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिये प्रस्तुत किये गये आवेदन की आवेदक / संस्था को तत्काल पावती दी जाएगी जिस पर प्रस्तुति दिनांक अंकित होगी ।

(6) नजूल अधिकारी आवेदन प्रस्तुति की दिनांक से तीस दिवस के भीतर उपकंडिका (4) के अनुसार परीक्षण उपरांत प्ररूप अट्ठारह में यथास्थिति नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र / आपत्ति पत्र जारी करेगा, जिसकी सूचना संबंधित स्थानीय निकाय / नगर तथा ग्राम निवेश को भी दी जाएगी । नियत अवधि में अनापत्ति प्रमाण पत्र / आपत्ति पत्र जारी नहीं किये जाने की दशा में स्थानीय निकाय / नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा नजूल की अनापत्ति समझी जाएगी ।

144. शासकीय निर्माण कार्य के लिये निजी भूमि का शासकीय भूमि से विनिमय -(1 ) निजी भूमि का शासकीय भूमि से विनिमय केवल उन्ही मामलों में अनुमत होगा जहां किसी शासकीय निर्माण कार्य के लिए निजी भूमि का उपयोग अपरिहार्य हो । ऐसे मामले में केवल उतनी निजी भूमि का विनिमय किया जाएगा जो निर्माणकर्ता विभाग के मत में निर्माण के लिये आवश्यक है ।

(2) विनिमय की स्वीकृति देने के लिए संभाग मुख्यालय में स्थित शासकीय भूमि के मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति तथा अन्य मामले में जिला नजूल निर्वर्तन समिति सक्षम प्राधिकारी होगी । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

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(3 ) नगरेतर क्षेत्र की निजी भूमि का विनिमय नगरीय अथवा विकास योजना क्षेत्र की शासकीय भूमि से नहीं किया जाएगा ।

(4) विनिमय के प्रत्येक प्रकरण में शासकीय भूमि एवं योजना में उपयोग में ली जा रही निजी भूमि के संगणित बाजार मूल्य के बराबर होना चाहिए । भूमि के कुल मूल्य के साथ साथ विनिमय की जाने वाली भूमियों की मूल्य दर भी यथासंभव समान हो । किसी भी स्थिति में निजी भूमि के मूल्य से अधिक मूल्य की शासकीय भूमि विनिमय में नहीं दी जाएगी ।

(5) निर्माणकर्ता विभाग द्वारा भूमि विनिमय के लिए आवेदन पत्र कलेक्टर को प्रस्तुत किया जाएगा । इस हेतु कोई प्रकिया शुल्क देय नहीं होगा । विनिमय के प्रकरण पर विचार तभी किया जाएगा जब संबंधित विभाग द्वारा यह प्रमाणित किया जाए कि योजना / परियोजना हेतु भू-अर्जन किए जाने के लिए राशि का प्रावधान नहीं है तथा निजी भूमि के बिना योजना का कियान्वयन संभव नहीं है । आवेदन प्राप्त होने पर कलेक्टर प्रकरण जांच हेतु नजूल अधिकारी को भेजेगा ।

(6) यदि विनिमय के लिए प्रस्तावित भूमि संहिता की धारा 237 की उपधारा (1 ) के अंतर्गत निस्तार अधिकार के लिए पृथक रखी गई भूमि है अथवा धारा 233- क के अंतर्गत नगरीय क्षेत्र में लोक प्रयोजन के लिए पृथक रखी गई भूमि है तो कलेक्टर यथास्थिति सर्वप्रथम संहिता की धारा 237 की उपधारा (3) के अंतर्गत ऐसी शासकीय भूमि के व्यपवर्तन करने की या धारा 233-क के खण्ड (ग) के अनुसार अपेक्षित कार्यवाही करेगा ।

(7) नजूल अधिकारी द्वारा 15 दिवस का समय देते हुए कंडिका 142 में विहित रीति में सार्वजनिक उद्घोषणा जारी की जाएगी जिसमें सर्वसाधारण से , जिनके हितों पर विनिमय से प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना हो, आपत्तियां / सुझाव आमंत्रित किये जाएंगे ।

(8 ) नजूल अधिकारी द्वारा स्थल निरीक्षण कर प्रतिवेदन तैयार किया जावेगा एवं प्राप्त आपत्तियों / सुझावों पर अभिमत देते हुए एवं शासकीय एवं निजी भूमियों के मूल्य की गणना देते हुए प्रकरण जिला नजूल निर्वर्तन समिति के सदस्य सचिव को प्रेषित किया जाएगा । 650 ( 111 )

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(9) जिस मामले में जिला नजूल निर्वर्तन समिति विनिमय स्वीकृत करने के लिए सक्षम प्राधिकारी है उसमें उसके द्वारा निर्णय लिया जाकर आवेदक विभाग तथा निजी भूमिस्वामी को सूचित किया जाएग । जिस मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति सक्षम प्राधिकारी है उसमें जिला नजूल निर्वर्तन समिति द्वारा अपना अभिमत अंकित कर मामला संभाग नजूल निर्वर्तन समिति को प्रेषित किया जाएगा ।

(10) जिस मामले में संभाग नजूल निर्वर्तन समिति विनिमय स्वीकृत करने के लिए सक्षम प्राधिकारी है उसमें उसके द्वारा जिला नजूल निर्वर्तन समिति से प्राप्त मामले में निर्णय लिया जाकर आवेदक विभाग, निजी भूमिस्वामी तथा जिला नजूल निर्वर्तन समिति को सूचित किया जाएगा ।

(11 ) सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति प्राप्त होने पर विनिमय पत्र का पंजीयन कराया जाएगा और तत्पश्चात् भू अभिलेखों में प्रविष्टियां अद्यतन की जाएंगी ।

145. अभ्यावेदन- (1 ) इन निर्देशों में अन्यथा उपबंधित के सिवाय इन निर्देशों के अधीन पारित किए गये किसी मूल आदेश के विरुद्ध अभ्यावेदन निम्नानुसार प्रस्तुत किया जा सकेगा-

(क) कलेक्टर के अधीनस्थ अधिकारी द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध कलेक्टर को;

(ख ) कलेक्टर द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध आयुक्त को;

(ग) जिला नजूल निर्वर्तन समिति के निर्णय के आधार पर पारित आदेश के विरुद्ध संभाग नजूल निर्वर्तन समिति को; और

(घ) संभाग नजूल निर्वर्तन समिति के निर्णय के आधार पर पारित आदेश के विरुद्ध राज्य नजूल निर्वर्तन समिति को ।

(2) ऐसा अभ्यावेदन आलोच्य आदेश की दिनांक से 45 दिन के भीतर प्रस्तुत किया जा सकेगा ।

(3) मूल आदेश / निर्णय के विरुद्ध प्रस्तुत अभ्यावेदन पर पारित आदेश के विरुद्ध कोई अभ्यावेदन ग्राहय नहीं होगा ।

146. स्वप्रेरणा से पुनरीक्षण- (1 ) राज्य शासन किसी भी समय राज्य नजूल निर्वर्तन समिति, संभाग नजूल निर्वर्तन समिति , आयुक्त, जिला नजूल निर्वर्तन समिति, मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 112)

कलेक्टर या उसके अधीनस्थ किसी अधिकारी द्वारा की गई किसी भी कार्यवाही को अथवा उसके द्वारा पारित आदेश को स्वप्रेरणा से पुनरीक्षण में ले सकेगा ।

(2) आयुक्त किसी भी समय जिला नजूल निर्वर्तन समिति, कलेक्टर या उसके अधीनस्थ किसी अधिकारी द्वारा की गई किसी भी कार्यवाही को अथवा उसके द्वारा पारित आदेश को स्वप्रेरणा से पुनरीक्षण में ले सकेगा ।

(3) कलेक्टर किसी भी समय उसके अधीनस्थ किसी अधिकारी द्वारा की गई किसी भी कार्यवाही को अथवा उसके द्वारा पारित आदेश को स्वप्रेरणा से पुनरीक्षण में ले सकेगा ।

(4) किसी भी आदेश को पुनरीक्षण में तब तक फेरफारित नहीं किया जायेगा या उलटा नहीं जाएगा जब तक कि हितबद्ध पक्षकारों पर सूचना की तामील न कर दी गई हो और उन्हें सुनवाई का अवसर न दे दिया गया हो ।

147. नजूल भूमि के निर्वर्तन के मामलों में प्राप्त राशि शासकीय खजाने में जमा किया जाना- नजूल भूमि के निर्वर्तन के मामलों में प्राप्त विकय धन, प्रब्याजि, भू- राजस्व, वार्षिक भू- भाटक , लाइसेंस फीस , प्रकिया शुल्क, स्थायी पट्टे का भूमिस्वामी अधिकार में संपरिवर्तन के लिये देय संपरिवर्तित शुल्क, अस्थायी पट्टे का स्थायी पट्टे में परिवर्तन के लिये देय परिवर्तन शुल्क तथा अभिहस्तांकन के मामले में अंतरण शुल्क, एवं उनके बकाया पर देय ब्याज की राशि यथासंभव ऑनलाइन पद्धति से शासकीय खजाने में परिशिष्ट ' क' में उल्लेखित मद में जमा की जायेगी । 148. निरसन तथा व्यावृत्ति (1 ) मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश, 2020 के प्रभावशील होने के दिनांक से-

(क) विद्यमान राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड एक कमांक-5 - ऐसी भूमियों का जो राज्य की सम्पत्ति हो, हस्तांतरण या अदला- बदली;

(ख) विद्यमान राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड एक कमांक-6 - व्यावसायिक और औद्योगिक प्रयोजनों के लिये शासकीय भूमि का हस्तांतरण अदला- बदली या पट्टे पर दिया जाना;

(ग) विद्यमान राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड एक कमांक-7 - भारत शासन के विभागों, मंत्रालयों, इकाइयों या सार्वजनिक उपक्रमों की मध्यप्रदेश राज्य में विकास योजनाओं के लिए शासन की भूमि का हस्तांतरण;

650( 113)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

नगर (घ) विद्यमान राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड चार क्रमांक-1 निगमों, नगरपालिकाओं , नगरों तथा अधिसूचित क्षेत्रों की सीमाओं के भीतर नजूल भूमियों की विधि तथा व्यवस्था;

(ङ) विभाग का राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड चार क्रमांक 3 की कंडिका 20 के अदला बदली के वर्तमान प्रावधान में संशोधन नवीन कंडिका 20 का प्रतिस्थापन विषयक परिपत्र कमांक एफ 16-49 / 2010 /सात /2 ए दिनांक 12 सितम्बर , 2011 ;

(च) गैर वनपड़त भूमि के विकास एवं उपयोग के संबंध में राज्य की नीति परिपत्र क्रमांक 1873 - एफ-4-7/ 96 / सात / 2 ए दिनांक 04.10.2006; और

(छ) उपरोक्त परिपत्रों के संदर्भ में समय - समय पर राज्य शासन द्वारा जारी किए गए निर्देश , हिदायतें या परिपत्र , चाहे वे उक्त परिपत्रों के विषय में उन्हें स्पष्ट करने के लिए जारी किए गए हों या उनमें संशोधन, परिवर्तन या परिवर्धन करने के लिये जारी किए गए हों;

निरसित किए जाते हैं ।

(2) ऐसे निरसन के फलस्वरूप निरसित किए गए परिपत्रों, निर्देशों या हिदायतों के अधीन पूर्व में निराकृत किए जा चुके मामले अप्रभावित रहेंगे ।

(3) ऐसे मामले जो मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन, 2020 के प्रभावशील होने की तिथि को निरसित परिपत्रों, निर्देशों या हिदायतों के अंतर्गत लंबित हैं, उनमें जब तक कि इन निर्देशों में अन्यथा उपबन्धित न हो , इन्ही निर्देशों के अनुसार कार्यवाही की जाएगीः

परन्तु राज्य शासन किसी लंबित मामले या लंबित मामलों के वर्ग के निराकरण के लिए ऐसे निर्देश दे सकेगा जैसा कि वह उपयुक्त समझे । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 114)

परिशिष्ट ' क'

मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश, 2020

(देखें कंडिका 147)

विवरण

सरल कमांक

(2)

(1)

1 1. नजूल भूमि के वार्षिक भू- भाटक के बकाया पर ब्याज;

2. नजूल भूमि का नगरीय निकाय या विकास प्राधिकरण/ विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण भूमिस्वामी अधिकार में आवंटन के मामले में देय भू-राजस्व के बकाया पर ब्याज 3. नजूल भूमि के भूमिस्वामी अधिकार में संपरिवर्तन किये जाने पर देय भू- राजस्व के बकाया पर ब्याज; तथा

4. नजूल भूमि पर लाइसेंस फीस के बकाया पर ब्याज; जमा करने हेतु मद

2 1. नजूल भूमि का वार्षिक भू- भाटक;

2. नजूल भूमि के भूमिस्वामी अधिकार में संपरिवर्तन किये जाने पर देय भू राजस्व; तथा

3. नजूल भूमि का नगरीय निकाय या विकास प्राधिकरण/ विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण भूमिस्वामी अधिकार में आवंटन के मामले में देय भू-राजस्व

4. नजूल भूमि पर लाइसेंस फीस; जमा करने हेतु मद

3 नजूल भूमि के शर्त उल्लंघन/ अपालन के मामले में शमन शुल्क जमा करने हेतु मद 4 1. नजूल भूमि के परिवर्तन से देय प्रब्याजि के बकाया पर ब्याज

2. नजूल भूमि के नीलामी से निर्वर्तन में देय विकय धन के बकाया पर ब्याज

3. नजूल भूमि का नगरीय निकाय या विकास प्राधिकरण/ विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण भूमिस्वामी अधिकार में आवंटन के मामले में देय प्रब्याजि के बकाया पर ब्याज

स्कीम

लघु शीर्ष

मुख्य शीर्ष उप मुख्य शीर्ष

(6)

(5)

(4)

(3)

101-Land Revenue/Tax

00-Land Revenue

0029-Land Revenue

0011 - Interest on Land Revenue from Nazul land

0016 - Rent from Nazul lands

101-Land Revenue/Tax

00-Land Revenue

0029-Land Revenue

0013-Penalty and for feitures 00 -Land Revenue

800-Other Receipts

0029-Land Revenue

00-Land Revenue

0029-Land Revenue

800 -Other Receipts

0012- Interest on Nazul land premium मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 115) 4. अभिहस्तांकन के मामले में अंतरण शुल्क के बकाया पर ब्याज

5. स्थायी पट्टे का भूमिस्वामी अधिकार में संपरिवर्तन प्रभार के बकाया पर ब्याज;

6. अस्थायी पट्टे का स्थायी पट्टे में परिवर्तन शुल्क के बकाया पर ब्याज; तथा

7. वार्षिक भू भाटक या लाइसेंस फीस के बकाया पर ब्याज; जमा करने हेतु मद

5 1. नजूल भूमि के निर्वर्तन से देय प्रब्याजि;

0015 -Premium from Nazul lands

00-Land Revenue

0029 - Land Revenue

800-Other Receipts

2. नजूल भूमि के निर्वर्तन से देय विक्रय धन;

3. नजूल भूमि का नगरीय निकाय या विकास प्राधिकरण/विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण भूमिस्वामी अधिकार में आवंटन के मामले में देय प्रब्याजि

4. अभिहस्तांकन के मामले में अंतरण शुल्क;

5. स्थायी पट्टे का भूमिस्वामी अधिकार में संपरिवर्तन प्रभार; तथा

6. अस्थायी पट्टे का स्थायी पट्टे में परिवर्तन शुल्क; जमा करने हेतु मद

6

00-Land Revenue

0029-Land Revenue

800-Other Receipts

आवेदन के लिये प्रकिया शुल्क जमा करने हेतु मद

0019- Feefor Revenue Cout case registration and processing मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 116)

प्ररूप एक

(देखें कंडिका 12, 21 , 28, 29, 36, 37, 45, 93,100 और 106)

नजूल भूमि के हस्तांतरण / आवंटन के लिए आवेदन का प्ररूप

यह प्ररूप निम्न श्रेणी के मामलों में प्रयुक्त किया जाएगा-

1. राज्य शासन के किसी विभाग द्वारा नजूल भूमि के हस्तांतरण के लिए आवेदन

2. स्थायी पट्टे पर नजूल भूमि के आवंटन के लिए आवेदन

3. नगरीय निकाय द्वारा नजूल भूमि की भूमिस्वामी अधिकार में आवंटन के लिए आवेदन

4. ध्वजदण्ड अथवा प्रतिमा की स्थापना के लिए नजूल भूमि आवंटन के लिए आवेदन

5. विकास प्राधिकरण/ विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण भूमिस्वामी अधिकार में आवंटन के लिय आवेदन प्रति,

कलेक्टर,

विषयः- जिला..

तहसील / नगर.... ..के ग्राम/ सेक्टर . में (हेक्टेयर / वर्गमीटर ) नजूल भूमि के हस्तांतरण / स्थायी पट्टे पर आवंटन के लिए आवेदन पत्र

आवेदक की श्रेणी (सुसंगत बॉक्स को चिन्हित करें)

मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय

केन्द्र शासन का विभाग

Π राज्य शासन का विभाग

राजनैतिक दल

केन्द्र शासन के अधीनस्थ संगठन

राज्य शासन के अधीनस्थ संगठन

ध्वजदण्ड अथवा प्रतिमा की

निजी निवेशक

नगरीय निकाय , विकास

स्थापना के लिए

पूर्त संस्था

युद्ध में मृत सैनिक का परिवार प्राधिकरण /विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण

पंचायती राज संस्था

सहकारी संस्था

भाग - एक

(सभी आवेदकों द्वारा भरा जाए)

1.1 आवेदक का नाम

1

(जिसके नाम से भूमि का आवंटन चाहा जा रहा है)

(संस्थागत आवेदन के मामले में)

1.2 आवेदनकर्ता पदाधिकारी का

पदनाम 650 ( 117)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

(व्यक्तिगत आवेदन के मामले में)

1.3. आवेदक के पिता/ माता/ पति का नाम

1.4 लिंग

2.1 पत्राचार के लिए पता

2

2.2 दूरभाष कमांक

2.3 मोबाइल नम्बर

2.4 ई-मेल पता

2.5 संस्थागत आवेदन के मामले में, स्थानीय समन्वय हेतु अधिकृत कार्यालय का नाम , पता, कार्यालय के प्रमुख का नाम, पदनाम , दूरभाष कमांक, तथा ई- मेल पता दें

3 प्रकिया शुल्क जमा करने के विवरण (जहां लागू हो)

3.1 जमा की गई राशि

3.2.चालान कमांक

3.3 जमा करने की दिनांक

4 आवेदित भूमि के विवरण

तहसील

जिला

नगरीय क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले में

नगर

नगरेतर क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले में राजस्व निरीक्षक वृत्त

सेक्टर

पटवारी हल्का

ग्राम

क्र.

आवेदित क्षेत्रफल हेक्टेयर / वर्गमीटर में)

कुल क्षेत्रफल (हेक्टेयर / वर्गमीटर ( में)

खसरा क्रमांक / शीट कमांक /ब्लॉक कमांक / भूखण्ड क्रमांक

1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 118)

2

3

योग

5 आवेदित भूमि की आवश्यकता किस लिए है?

6 (क) आवेदित क्षेत्रफल की आवश्यकता का औचित्य बताते हुए समर्थनकारी दस्तावेज , यदि कोई हों, संलग्न करें

(ख) क्या आवेदित क्षेत्रफल की गणना अधिकतम अनुमत क्षेत्र तल अनुपात (F.A.R. ) के आधार पर की गई है? यदि नहीं तो कारण दें

(ग) आवेदित क्षेत्रफल का पूर्ण उपयोग करने की कार्ययोजना और उसके लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का विवरण दें तथा समर्थनकारी दस्तावेज, यदि कोई हों, तो संलग्न करें 650(119)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

भाग दो

(आवेदक की श्रेणी के अनुसार लागू खण्ड का प्रयोग करें)

खण्ड क

(यह खण्ड राज्य शासन या केन्द्र शासन का विभाग या उसके अधीनस्थ संगठन , नगरीय निकाय या पंचायती राज संस्था, विकास प्राधिकरण /विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के लिए भूमि आवंटन के मामलों के लिए प्रयुक्त होगा )

7 आवेदित भूमि पर क्रियान्वयन हेतु प्रस्तावित योजना/ परियोजना /कार्य आदि के संबंध में विवरण दें

7.1 नाम

7.2 प्रशासकीय स्वीकृति आदेश के विवरण (आदेश की प्रतिलिपी संलग्न करें)

7.3 योजना/ परियोजना/ कार्य के घटक जिनमें आवेदित भूमि का उपयोग प्रस्तावित है .

7.4 योजना/ परियोजना /कार्य के की लिए वित्तीय संसाधनों उपलब्धता का विवरण (समर्थनकारी दस्तावेज, यदि कोई हों, तो संलग्न करें)

7.5 स्थानीय निकाय के मामले में भूमि आवंटन के लिए स्थानीय निकाय के संकल्प की प्रतिलिपि संलग्न करें

7.6 विकास प्राधिकरण /विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम , 1973 (क्रमांक 23 सन् 1973) की धारा 50 के अंतर्गत घोषित नगर विकास स्कीम में स्थित नजूल भूमि के मामले में (स्कीम की प्रतिलिपि संलग्न करें)

7.7 अन्य कोई जानकारी जो देना चाहें मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 120)

खण्ड ख

(यह खण्ड पूर्त संस्था के लिए भूमि आवंटन के मामलों के लिए प्रयुक्त होगा)

7 7.1 संस्था किस विधान/नियम के अंतर्गत पंजीकृत है?

7.2पंजीयन करने वाले अधिकारी का पदनाम

7.3 पंजीयन क्रमांक और दिनांक

7.4 पंजीयन प्रमाणपत्र की स्वप्रमाणित प्रतिलिपि संलग्न करें

7.5 संस्था के उद्देश्य

(संस्था के मेमोरेन्डम आफ एसोशिएशन तथा उपनियमों की स्वप्रमाणित प्रतिलिपियां संलग्न करें)

7.6 संस्था के पदाधिकारियों का विवरण

टिप्पणी

व्यवसाय

पदनाम

पता तथा दूरभाष

नाम

क्रमाक

वैतनिक अथवा अवैतनिक (वैतनिक हो तो वार्षिक वेतन दर्शाया जाय)

1

2

3

4

5

6

7

8

9

10

वर्ष

कुल

कुल आय

7.7 संस्था के पास उपलब्ध

संस्था के कार्पस

संस्था के उद्देश्यों 650( 121)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

व्यय

अधोसंरचना के विवरण दें

पर किया गया व्यय

निधि में उपलब्ध राशि 7.8 विगत तीन वर्षों में संस्था के कार्यकलापों, भौतिक तथा वित्तीय उपलब्धियों का विवरण दें तथा प्रशासकीय प्रतिवेदनों को संलग्न करें

योग

7.9 संस्था में कार्यरत कर्मचारियों तथा उनके वेतन पर किए जा रहे वार्षिक व्यय के विगत तीन वर्षों के विवरण दें

7.10 विगत तीन वर्षों की कुल आय कुल व्यय तथा संस्था के द्वारा अपने उद्देश्यों पर किए गए व्यय तथा कार्पस निधि ( Corpus Fund ) के विवरण दें

(विगत तीन वर्षों की अंकेक्षित बैलेन्स शीट, आय - व्यय लेखा तथा प्राप्ति और अदायगी लेखों की प्रतियां संलग्न करें Audited Balance Sheet, Income- Expenditure Account and Receipts and Payment Account)

7.11 संस्था को आयकर विभाग से जारी स्थायी लेखा क्रमांक, यदि कोई हो (Permanent Account Number)

7.12 संस्था द्वारा विगत तीन वर्षों में दाखिल की गई आयकर विवरणियों (Income Tax Returns ) की प्रतियां संलग्न करें

7.13 क्या संस्था आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 12A के अंतर्गत पंजीकृत है? यदि हाँ तो पंजीयन कमांक, दिनांक तथा पंजीयनकर्ता अधिकारी के विवरण दें तथा पंजीयन प्रमाणपत्र की प्रति संलग्न करें

7.14 क्या संस्था आयकर अधिनियम, मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 122)

1961 की धारा 80G के अंतर्गत पंजीकृत है? यदि हां तो पंजीयन कमांक, दिनांक तथा पंजीयनकर्ता अधिकारी के विवरण दें तथा पंजीयन प्रमाणपत्र की प्रति संलग्न करें

7.15 संस्था को प्रदेश में यदि पूर्व में कोई शासकीय भूमियां आवंटित की गई हों तो उनके पूर्ण विवरण दें, वर्तमान में उन भूमियों के किये जा रहे उपयोग की जानकारी दें तथा अब की जा रही भूमि की मांग का औचित्य बताएं

7.16 क्या संस्था की गतिविधियों अथवा लाभार्थियों में जाति, समुदाय या धर्म मे आधार पर भेदभाव किया जाता है?

7.17 क्या संस्था की आय तथा आस्तियां उन्हीं उद्देश्यों के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं जो कि उसके उद्देश्यों तथा उपविधियों में वर्णित हैं?

7.18 क्या संस्था की आय का कोई अंश प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उसके सदस्यों, संचालकों या उनसे संबंधित व्यक्तियों को वितरित किया जाता है या किए जाने योग्य है?

7.19 क्या संस्था की उपविधियों के अनुसार संस्था के परिसमापन पर उसकी निबल आस्तियां ( Net assets ) उसकी देनदारियों की पूर्ति के उपरांत उसके सदस्यों, संचालकों, संस्थापकों व दानदाताओं को वापस होती है?

7.20 अन्य कोई जानकारी जो देना चाहें

इस खण्ड में दी गई जानकारी का मैं शपथपूर्वक कथन करता हूँ कि इस भाग में दी 650 (123)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

सत्यापन

गई जानकारी सत्य है । मुझे ज्ञात है कि यदि यह जानकारी असत्य, त्रुटिपूर्ण या भ्रामक पाई गई तो राज्य शासन मेरे तथा संस्था के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही कर सकेगा और भूमि का आवंटन निरस्त कर सकेगा ।

आवेदक के हस्ताक्षर ....

नाम....

पदनाम ...

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 124)

खण्ड ग

(यह खण्ड मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनैतिक दल के लिए भूमि आवंटन के मामलों के लिए प्रयुक्त होगा) 7

हां / नहीं

7.1 क्या आवेदक राजनैतिक दल प्रतीक (आरक्षण और आवंटन) आदेश , 1968 के अनुसार राष्ट्रीय दल के रूप में भारत निर्वाचन आयोग के द्वारा अधिसूचित है?

7.2 यदि हां, तो भारत निर्वाचन आयोग की नवीनतम अधिसूचना की प्रति संलग्न करें ।

7.3 दल के पदाधिकारियों का विवरण:

क्रमांक

नाम

पदनाम

व्यवसाय

पता तथा दूरभाष

1

2

3

4

5

6

7

8

9

10

7.4 दल को मध्यप्रदेश में राज्य शासन द्वारा पूर्व में आवंटित भूमि/ भवन के विवरण :

क्रमांक आवंटिती का नाम

ग्राम/ नगर जिला

वर्तमान उपयोग का विवरण

भूमि/ भवन

(वर्गमीटर में)

का विवरण

आवंटित/ आधिपत्य एवं दिनांक आदेश का क्रमांक

(1) (2)

(3)

(4)

(5)

(6) 650( 125)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

7.5 अन्य कोई जानकारी जो देना चाहें

सत्यापन इस खण्ड में दी गई जानकारी का मैं शपथपूर्वक कथन करता हूँ कि इस भाग में दी गई जानकारी सत्य है । मुझे ज्ञात है कि यदि यह जानकारी असत्य , त्रुटिपूर्ण या भ्रामक पाई गई तो राज्य शासन मेरे तथा संस्था के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही कर सकेगा और भूमि का आवंटन निरस्त कर सकेगा ।

आवेदक के हस्ताक्षर.........

पदनाम ..

खण्ड घ

(यह खण्ड युद्ध में मृत सैनिक का परिवार के लिए भूमि आवंटन के मामलों के लिए प्रयुक्त होगा)

7. युद्ध में मृत हुए सैनिक के नाम तथा सक्षम प्राधिकार से जारी प्रमाणपत्र के विवरण दें तथा उसकी स्वप्रमाणित प्रतिलिपि संलग्न करें

खण्ड ङ

(यह खण्ड निजी पूंजी निवेशक के लिए भूमि आवंटन के मामलों के लिए प्रयुक्त होगा)

7. 7.1 विभाग का नाम जिसकी नीति के अंतर्गत भूमि आवंटन के लिए आवेदन किया जाना है

7.2 विभागीय नीति का आदेश. कमांक तथा दिनांक दे तथा आदेश की प्रतिलिपि संलग्न करें

7.3 परियोजना का विस्तृत विवरण (Detailed Project Report - डी.पी.आर ) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 126)

7.4 परियोजना का संक्षिप्त वर्णन करें तथा डी.पी.आर. की स्वप्रमाणित प्रति संलग्न करें

7.5 परियोजना द्वारा सृजित किया जाने वाला सीधा रोजगार

7.6 परियोजना में किए जा रहे निवेश का आकार

7.7 आवेदक द्वारा प्रदेश में पूर्व से स्थापित और गतिशील परियोजनाएं

7.8 परियोजना की स्थापना से जिले को प्राप्त होने वाले अन्य लाभ

खण्ड च

(यह खण्ड ध्वजदण्ड अथवा प्रतिमा की स्थापना के लिए भूमि आवंटन के मामलों के लिए प्रयुक्त होगा)

7. 7.1 प्रस्तावित कार्य का प्रकार (ध्वजदण्ड की स्थापना, व्यक्ति की प्रतिमा की स्थापना आदि)

7.2 प्रस्तावित कार्य की पृष्ठभूमि तथा औचित्य

7.3 प्रस्तावित. कार्य का निर्माण किसके द्वारा किया जाएगा?

7.4 प्रस्तावित कार्य की अनुमानित लागत तथा उसके लिए वित्तीय व्यवस्था के विवरण

7.5 प्रस्तावित कार्य सम्पन्न करने की समय-सीमा

7.6 प्रस्तावित कार्य के संरक्षण तथा उसे गरिमामय एवं दर्शनीय स्थिति में रखने का दायित्व स्वीकार करने बाबत् स्थानीय निकाय के पत्र की प्रतिलिपि संलग्न करें

7.7 प्रस्तावित स्थल पर भविष्य में 650(127)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

समय समय पर जयंती , पुण्यतिथि आदि अवसरों पर कार्यक्रम आयोजित होने पर क्या बड़ी संख्या में लोगों के एकत्रित होने की संभावना है?

(टीप- सड़क, चौराहा या तिराहा के बीच में ध्वजदंड या प्रतिमा की स्थापना की अनुमति नहीं दी जाएगी)

आवेदक के हस्ताक्षर......

कार्यालय की मोहर

पदनाम ...

संलग्नक

(1 ) आवेदित भूमि के खसरा की प्रति

(2) भूमि का नक्शा

(3)

(4)

(5) मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650( 128)

प्ररूप दो

(देखें कंडिका13, 22, 29,37,48, 94, 101 और 107)

नजूल अधिकारी द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले जांच प्रतिवेदन का प्ररूप

यह प्ररूप निम्न श्रेणी के मामलों में प्रयुक्त किया जाएगा

1. राज्य शासन के किसी विभाग द्वारा नजूल भूमि के हस्तांतरण के लिए आवेदन

2. स्थायी पट्टे पर नजूल भूमि के आवंटन के लिए आवेदन

3. नगरीय निकाय द्वारा नजूल भूमि की भूमिस्वामी हक में आवंटन के लिए आवेदन

4. ध्वजदण्ड अथवा प्रतिमा की स्थापना के लिए नजूल भूमि आवंटन के लिए आवेदन

5. विकास प्राधिकरण/ विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण भूमिस्वामी अधिकार में आवंटन के लिय आवेदन कार्यालय नजूल अधिकारी

राजस्व प्रकरण क्रमांक .

प्रति,

कलेक्टर

जिला......

जांच प्रतिवेदन

(दिनांक...............

आवेदक की श्रेणी (सुसंगत बॉक्स को चिन्हित करें)

केन्द्र शासन का विभाग

राज्य शासन का विभाग

मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनैतिक दल

केन्द्र शासन के अधीनस्थ संगठन

राज्य शासन के अधीनस्थ संगठन

निजी निवेशक

नगरीय निकाय , विकास

ध्वजदण्ड अथवा प्रतिमा की स्थापना के लिए

पूर्त संस्था

युद्ध में मृत सैनिक का परिवार प्राधिकरण/ विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण

पंचायती राज संस्था

सहकारी संस्था 650( 129)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

भाग - एक

सामान्य (सभी मामलों के लिए लागू)

1 1.2 आवेदक का नाम (जिसके नाम से भूमि का आवंटन चाहा जा रहा है) (संस्थागत आवेदन के मामले में)

1.2 आवेदनकर्ता पदाधिकारी का पदनाम

(व्यक्तिगत आवेदन के मामले में)

1.3. आवेदक के पिता/ माता/ पति का नाम

1.4लिंग

2 आवेदक के डाक पता , ईमेल पता तथा दूरभाष कमांक के विवरण

मोबाइल नम्बर सहित

3 आवेदन पत्र के साथ संलग्न किए गए दस्तावेजों के विवरण

4 प्रक्रिया शुल्क जमा करने के विवरण (जहां लागू हो)

4.1 जमा की गई राशि

4.2चालान कमांक

4.3 जमा करने की दिनांक

5. 5.1 आवेदन पत्र कलेक्टर कार्यालय को प्रस्तुत करने का दिनांक

5.2 कलेक्टर द्वारा आवेदन पत्र प्राप्त होने पर की गई कार्यवाहियों के विवरण

5.3 मामला जांच व प्रतिवेदन हेतु जांचकर्ता अधिकारी को प्राप्त होने का दिनांक मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 130)

6. आवेदित भूमि के विवरण

..तहसील.

जिला

नगरीय क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले में नगरेतर क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले में

नगर

राजस्व निरीक्षक वृत्त

सेक्टर

पटवारी हल्का

ग्राम

क्र.

आवेदित क्षेत्रफल (हेक्टेयर / वर्गमीटर में)

कुल क्षेत्रफल (हेक्टेयर/ वर्गमीटर में)

खसरा क्रमांक / शीट कमांक/ब्लॉक कमांक/ भूखण्ड कमांक

1

2

3

योग

7. 7.1 सार्वजनिक उद्घोषणा जारी करने के विवरण

7.2 प्राप्त आपत्तियों, दावों और सुझावों के विवरण

7.3 प्राप्त आपत्तियों, दावों और सुझावों पर जांच अधिकारी द्वारा की गई विवेचना तथा निष्कर्ष

8. 8.1 स्थानीय निकाय, नगर तथा ग्राम निवेश तथा अन्य विभाग के अभिमत प्राप्त करने के लिए की गई कार्यवाही के विवरण

8.2 प्राप्त अभिमतों के विवरण

8.3 प्राप्त अभिमतों पर जांच अधिकारी मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650( 131) का निष्कर्ष

9. आवेदित भूमि के संबंध में कोई प्रकरण किसी न्यायालय में लंबित हो तो उसके विवरण दें तथा न्यायालय द्वारा कोई स्थगन आदेश जारी किया गया हो तो उसके विवरण दें मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 132)

भाग - दो

आवेदक की श्रेणी के लिए सुसंगत बिन्दुओं पर जानकारी / प्रतिवेदन (आवेदक की श्रेणी के अनुसार लागू खण्ड का प्रयोग करें)

खण्ड क

(यह खण्ड राज्य शासन या केन्द्र शासन का विभाग या उसके अधीनस्थ संगठन, नगरीय निकाय , विकास प्राधिकरण /विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण या पंचायती राज संस्था के लिए भूमि आवंटन के मामलों के लिए प्रयुक्त होगा)

10. 10.1 योजना / परियोजना / कार्य का नाम, प्रशासकीय स्वीकृति, भौतिक तथा वित्तीय घटक और आवेदित भूमि का प्रस्तावित उपयोग , तथा उसके लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता आदि पर प्रतिवेदन दें

10.2 स्थानीय निकाय की ओर से आवेदन की दशा में भूमि आवंटन के लिए स्थानीय निकाय के संकल्प को विवरण

10.3 विकास प्राधिकरण / विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 (क्रमांक 23 सन् 1973) की धारा 50 के अंतर्गत घोषित नगर विकास स्कीम में स्थित नजूल भूमि के मामले में (स्कीम के विवरण)

खण्ड ख

(यह खण्ड पूर्त संस्था के लिए भूमि आवंटन के मामलों के लिए प्रयुक्त होगा)

10. 10.1 आवेदक संस्था के पंजीयन, उद्देश्यों, पदाधिकारीगण पर प्रतिवेदन दें

10.2 विगत तीन वर्षों में संस्था के कार्यकलापों, भौतिक तथा वित्तीय उपलब्धियों का विवरण दें

10.3 संस्था के पास उपलब्ध अधोसंरचना पर प्रतिवेदन दें

10.4 संस्था में विगत तीन वर्षों में कार्यरत कर्मचारियों तथा उनके वेतन 650( 133)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

पर किए जा रहे वार्षिक व्यय पर प्रतिवेदन दें

:

10.5 विगत तीन वर्षों की कुल आय कुल व्यय तथा संस्था के द्वारा अपने उद्देश्यों पर किए गए व्यय तथा कार्पस निधि (Corpus Fund) पर प्रतिवेदन दें

10.6 संस्था द्वारा विगत तीन वर्षों में लेखों के अंकेक्षण व आयकर विवरणी दाखिल करने की स्थिति पर प्रतिवेदन दें

10.7 आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 12A के अंतर्गत संस्था के पंजीयन की स्थिति पर प्रतिवेदन दें

10.8 आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80G के अंतर्गत संस्था के पंजीयन की स्थिति पर प्रतिवेदन दें

10.9 संस्था को प्रदेश में यदि पूर्व में कोई शासकीय भूमियां आवंटित की गई हों तो उनके पूर्ण विवरण , वर्तमान में उन भूमियों के किये जा रहे उपयोग तथा अब की जा रही भूमि की मांग के औचित्य पर प्रतिवेदन दें

10.10 क्या संस्था की गतिविधियों अथवा लाभार्थियों में जाति, समुदाय या धर्म मे आधार पर भेदभाव किया जाता है?

10.11 क्या संस्था की आय तथा आस्तियां उन्हीं उद्देश्यों के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं जो कि उसके उद्देश्यों तथा उपविधियों में वर्णित हैं?

10.12 क्या संस्था की आय का कोई अंश प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उसके सदस्यों, संचालकों या उनसे संबंधित व्यक्तियों को वितरित किया जाता है मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 134)

या किए जाने योग्य है?

10.13 क्या संस्था की उपविधियों के अनुसार संस्था के परिसमापन पर उसकी निबल आस्तियां ( Net assets ) उसकी देनदारियों की पूर्ति के उपरांत उसके सदस्यों, संचालकों, संस्थापकों व दानदाताओं को वापस होती है?

10.14 अन्य कोई बिन्दु

10.15 क्या संस्था मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश , 2020 की कंडिका 27 के अनुसार भूमि आवंटन के लिए अर्हता रखती है?

10.16 आवेदित भूमि के लिए अन्य संस्थाओं के द्वारा मांग की जाने की दशा में प्रत्येक संस्था के संबंध में कंडिका 1 से 11 तथा इस खण्ड की समस्त उपकंडिकाओं पर पृथक-पृथक विवरण/ प्रतिवेदन दें

10.17 आवेदित भूमि के लिए एक से अधिक अर्ह संस्थाओं के द्वारा मांग किए जाने की दशा में मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश , 2020 की कंडिका 29 की उपकंडिका (8) में दिए गए मानदण्डों पर उनका तुलनात्मक परीक्षण कर भूमि आवंटन के लिए उनका वरीयता कम निर्धारित करें 650 ( 135)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

खण्ड ग

(यह खण्ड मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनैतिक दल के लिए भूमि आवंटन के मामलों के लिए प्रयुक्त होगा)

10. 10.1 क्या आवेदक राजनैतिक दल प्रतीक (आरक्षण और आवंटन) आदेश , 1968 के अनुसार राष्ट्रीय दल के रूप में भारत निर्वाचन आयोग के द्वारा अधिसूचित है?

10.2 दल के पदाधिकारियों के विषय पर प्रतिवेदनं दें

10.3 दल को प्रदेश में पूर्व में आवंटित शासकीय भूमियों के पूर्ण विवरण, वर्तमान में उन भूमियों के किये जा रहे उपयोग तथा अब की जा रही औचित्य पर भूमि की मांग के प्रतिवेदन दें

10.4 अन्य कोई बिन्दु

10.5 क्या दल मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश , 2020 की कंडिका 35 के अनुसार भूमि आवंटन के लिए अर्हता रखता है?

10.6 आवेदित भूमि के लिए अन्य राजनैतिक दलों के द्वारा मांग की जाने की दशा में प्रत्येक राजनैतिक दल के संबंध में कंडिका 1 से 11 तथा इस खण्ड की समस्त उपकंडिकाओं पर पृथक-पृथक विवरण/ प्रतिवेदन दें

10.7 आवेदित भूमि के लिए एक से अधिक अर्ह दल के द्वारा मांग किए जाने की दशा में मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश, 2020 की कंडिका 37 की उपकंडिका (8 ) में दिए गए मानदण्डों पर उनका तुलनात्मक परीक्षण कर भूमि आवंटन के लिए उनका वरीयता कम निर्धारित करें मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 136)

खण्ड घ

(यह खण्ड युद्ध में मृत सैनिक का परिवार के लिए भूमि आवंटन के मामलों के लिए प्रयुक्त होगा)

10. 10.1 युद्ध में मृत हुए सैनिक का नाम तथा सक्षम प्राधिकार से जारी प्रमाणपत्र पर प्रतिवेदन दें

10.2 अन्य बिन्दु

खण्ड ङ

(यह खण्ड निजी पूंजी निवेशक के लिए भूमि आवंटन के मामलों के लिए प्रयुक्त होगा )

10. 10.1 राज्य शासन की नीति जिसके अंतर्गत भूमि आवंटन के लिए आवेदन किया गया है से संबंधित विभाग का नाम, आदेश कमांक तथा दिनांक

10.2 संबंधित विभाग के द्वारा परियोजना को भूमि आवंटन किए जाने की अनुशंसा पर प्रतिवेदन दें

10.3 परियोजना का संक्षिप्त विवरण दें

10.4 परियोजना में प्रस्तावित सीधे रोजगार पर प्रतिवेदन दें

10.5 परियोजना में प्रस्तावित निवेश के आकार पर प्रतिवेदन दें

10.6 आवेदक द्वारा प्रदेश में पूर्व से स्थापित और गतिशील परियोजनाओं पर प्रतिवेदन दें

10.7 परियोजना की स्थापना से जिलो को प्राप्त होने वाले अन्य लाभ पर प्रतिवेदन दें

10.8अन्य कोई बिन्दु

10.9 आवेदित भूमि के लिए अन्य निवेशकों के द्वारा मांग की जाने की दशा में प्रत्येक निवेशक के संबंध में कंडिका 1 से 11 तथा इस खण्ड की 650( 137)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

समस्त उपकंडिकाओं पर पृथक- पृथक विवरण / प्रतिवेदन दें

10.10 आवेदित भूमि के लिए एक से अधिक अर्ह निवेशक के द्वारा मांग किए जाने की दशा में मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश, 2020 की कंडिका 49 की उपकंडिका (4) में दिए गए मानदण्डों पर उनका तुलनात्मक परीक्षण कर भूमि आवंटन के लिए उनका वरीयता कम निर्धारित करें

खण्ड च

(यह खण्ड ध्वजदण्ड अथवा प्रतिमा की स्थापना के लिए भूमि आवंटन के मामलों के लिए प्रयुक्त होगा)

10. 10.1 संस्था का नाम जिसके द्वारा ध्वजदंड अथवा अखिल भारतीय या राज्य स्तर के ख्याति प्राप्त व्यक्ति की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है

10.2 यदि स्थानीय निकाय प्रस्तावित ध्वजदंड या प्रतिमा की स्थापना के लिए सहमत है तो क्या उसके द्वारा यह स्पष्ट स्वीकारोक्ति दी गई है कि ध्वजदंड या प्रतिमा की स्थापना के उपरांत भविष्य में उसे संरक्षित , गरिमामय एवं दर्शनीय स्थिति में रखा जाएगा जिसका दायित्व स्थानीय निकाय का होगा?

10.3 प्रस्तावित प्रयोजन के भूमि की न्यूनतम आवश्यकता का आकलन

10.4 ध्वजदंड या प्रतिमा की गरिमा एवं दर्शनीयता की दृष्टि से प्रस्तावित स्थल की उपयुक्तता

10.5 सड़क सुरक्षा तथा यातायात की दृष्टि से प्रस्तावित स्थल की उपयुक्तता

10.6 प्रस्तावित स्थल पर भविष्य में समय समय पर कार्यक्रम आयोजित होने (जैसे जयंती, पुण्यतिथि आदि अवसरों पर) अथवा मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650( 138)

बड़ी संख्या में लोगों के एकत्रित होने की संभावना की दृष्टि से स्थल की उपयुक्तता

(टीप- सड़क, चौराहा या तिराहा के बीच में ध्वजदंड या प्रतिमा की स्थापना की अनुमति नहीं दी जाएगी क्योंकि यह सड़क सुरक्षा तथा यातायात की दृष्टि से उपयुक्त नहीं है । साथ ही भविष्य में सड़क, चौराहा आदि के विस्तार की स्थिति निर्मित होने पर प्रतिमा के अन्यत्र विस्थापन पर विवाद की संभावना रहेगी) 650( 139)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

भाग तीन जांच अधिकारी की अनुशंसा

(सभी मामलों के लिए लागू)

11. 11.1 भूमि का प्रस्तावित उपयोग

11.2 लैण्ड बैंक की प्रविष्टि के अनुसार क्या आवेदित भूमि कृषि भिन्न प्रयोजन हेतु जिसके लिए आवंटन चाहा गया है, आवंटन योग्य है?

11.3 क्या आवेदित भूमि विकास योजना (मास्टर प्लान ) क्षेत्र में स्थित है? यदि हां, तो क्या भूमि का प्रस्तावित उपयोग विकास योजना में अनुमत है?

11.4 क्या आवेदित भूमि पहाड़, चट्टान या पानी के नीचे मदों में दर्ज है? यदि हां, तो विवरण दें

11.5 क्या आवेदित भूमि/ संहिता की धारा 237 के अधीन निस्तार अधिकार के प्रयोग के लिए पृथक रखी गई है / थी? यदि हां, तो कलेक्टर द्वारा नोईयत परिवर्तन करने के आदेश के विवरण दें तथा आदेश की प्रतिलिपि संलग्न करें

11.6 क्या आवेदित भूमि संहिता की धारा 233 -क के अंतर्गत किसी लोक प्रयोजन के लिए पृथक् रखी गई है/ थी? यदि हां , तो विवरण दें । क्या भूमि जिस प्रयोजन के लिए मांग की गई है वह ऐसे लोक प्रयोजन के अनुसार है? यदि कलेक्टर द्वारा भूमि लोक प्रयोजन के लिए पृथक् रखने की कार्यवाही खत्म की गई हो या लोक प्रयोजन में परिवर्तन किया गया हो तो उसके विवरण दें तथा आदेश की मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 140)

प्रतिलिपि संलग्न करें

11.7 क्या आवेदित भूमि मौके पर रिक्त है? यदि नहीं तो उस पर कब्जे/ अतिक्रमण के विवरण दें

11.8 राज्य/ केन्द्र शासन के विभाग या उसके अधीनस्थ संगठन, नगरीय निकाय , पंचायती राज संस्था या सहकारी संस्था के द्वारा भूमि की मांग के मामले में परीक्षण कर अभिमत दें कि क्या आवेदित भूमि की आवश्यकता किसी अन्य महत्वपूर्ण लोक प्रयोजन के लिए है या भविष्य में संभावित है?

11.9 कंडिका 11.8 में उल्लेखित आवेदकों की श्रेणी से भिन्न आवेदक द्वारा भूमि की मांग के मामले में परीक्षण कर अभिमत दें कि क्या आवेदित भूमि की आवश्यकता किसी लोक प्रयोजन के लिए है या भविष्य में संभावित है?

11.10 आवेदित भूमि की उपलब्धता तथा प्रस्तावित प्रयोजन के लिए उपयुक्तता पर जांचकर्ता अधिकारी का अभिमत

12 12.1 भूमि आवंटन के लिए आवेदक की अर्हता तथा उपयुक्तता पर जांचकर्ता अधिकारी का अभिमत

12.2 एक से अधिक आवेदक होने की दशा में भूमि का आवंटन किसे किया जाना उचित होगा इसके संबंध में जांचकर्ता अधिकारी की अनुशंसा

13 13.1 भवनों के निर्माण के लिए संबंधित क्षेत्र के लिए लागू तल क्षेत्र अनुपात (एफ.ए.आर. ) के अधिकतम उपयोग के आधार पर 650 ( 141)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

भूमि की आवश्यकता का आकलन करें

13.2 यदि कंडिका 13.1 में किए गए आकलन से अधिक क्षेत्रफल की मांग की गई है तो क्या उसे मान्य करने के लिए पर्याप्त औचित्य है?

13.3 आवेदित भूमि का पूर्ण उपयोग करने की आवेदक की कार्ययोजना तथा उसके लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता पर परीक्षण करे तथा उस पर अभिमत दें

13.4 आवेदक को भूमि का कितना क्षेत्रफल आवंटित किया जाना युक्तियुक्त होगा इस बारे में जांचकर्ता अधिकारी की अनुशंसा

14 यदि आवेदक को भूमि का अग्रिम आधिपत्य सौंपा गया हो तो उसके विवरण

15 मध्यप्रदेश बाजार मूल्य ( मार्गदर्शक सिद्धांतों का बनाया जाना तथा उनका पुनरीक्षण ) नियम, 2000 के अधीन वर्ष के अनुसार बाजार मूल्य की गणना

16 मामले में देय प्रब्याजि तथा वार्षिक भू-भाटक

17 अन्य कोई बिन्दु

18 मामले में नजूल अधिकारी की स्पष्ट और सकारण अनुशंसा

हस्ताक्षर

कार्यालय की सील

नाम

पदनाम मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 142)

प्ररुप तीन

(देखें कंडिका 62)

नजूल भूमि का स्थायी पट्टा

पक्षकार 1. यह अनुबन्ध आज दिनांक..... मास सन् ...प्रथम पक्ष मध्यप्रदेश के राज्यपाल (जिन्हें इसमें इसके पश्चात् पट्टाकर्ता कहा गया है) और द्वितीय पक्ष ..(नाम, पिता/ माता/पति का नाम, पूर्ण पता ई-मेल एवं मोबाईल फोन नम्बर सहित, यथास्थिति संस्था/ कंपनी/ राजनैतिक दल आदि के मामले में पदाधिकारी का पदनाम तथा प्राधिकार पत्र के विवरण दें) (जिन्हें इसमें इसके पश्चात् पट्टेदार कहा गया है) के बीच किया जाता है ।

प्रीमियम चूंकि पट्टाकर्ता ने पट्टेदार को

(क) पूर्ण प्रीमियम और वार्षिक भू-भाटक पर

अथवा

(ख) प्रीमियम और / या वार्षिक भू- भाटक में निम्नानुसार रियायत निम्न कारणों से देते हुए-

प्रीमियम...

वार्षिक भू-भाटक

(रियायत के विवरण दें)

रियायत के कारण

अथवा

(ग) अस्थायी पट्टे को स्थायी पट्टे में परिवर्तन की स्वीकृति के आधार पर देय परिवर्तन शुल्क...

(जो लागू न हो, काट दें)

एतपश्चात् वर्णित भूमि पट्टे पर देना मान्य किया है; और चूंकि पट्टेदार द्वारा प्रीमियम / परिवर्तन शुल्क के रूप में ............रुपये (शब्दों में रुपये...... सरकारी खजाने में चालान कमांक...... ...दिनांक तथा पट्टावधि के प्रथम वर्ष के वार्षिक भू भाटक के रूप में रुपये (शब्दों में रुपये.. सरकारी खजाने में चालान क्रमांकदिनांक द्वारा संदाय किए हैं, जिसकी कि प्राप्ति को पट्टाकर्ता एतद्वारा अभिस्वीकार करता है, अतएव यह अनुबंध इस बात का साक्षी है कि पट्टेदार की ओर से की गई प्रसंविदाओं के, जो इसमें इसके पश्चात् अन्तर्विष्ट है;

प्रतिफलस्वरूप-

पट्टान्तरण पट्टाकर्ता एतद्वारा , पट्टेदार को.........जले की नगर/ग्राम तहसील के........... के भीतर स्थित वह संपूर्ण भूमि, जो माप में......... वर्गमीटर /हेक्टेयर या उसके लगभग है और जो इसके नीचे दी गई अनुसूची में अधिक विशिष्टतः वर्णित है, तथा अधिक स्पष्टता की दृष्टि से जिसकी 650(143)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

सीमाएँ इससे उपाबद्ध रेखांक में चित्रित की गई हैं और उसमें............रंग से बतलाई गई है,

अवधि इस अनुबन्ध की दिनांक से प्रारम्भ होने वाली तथा 31 मार्च सन्.........को समाप्त होने वाली अवधि के लिये उसे धारण करने के हेतु निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन रहते हुए पट्टान्तरित करता है, -

(1 ) प्रयोजन- पट्टेदार पट्टान्तरित की गई भूमि का उपयोग उस पर का निर्माण करने तथा उसके सामान्य शर्तें

अनुरक्षण करने के प्रयोजनों तथा उसके सहायक प्रयोजनों के लिए करेगा और वह उसको या उस पर निर्मित भवनों को या उनके किसी भी भाग को किसी भी अन्य प्रयोजन के लिए न तो उपयोग में लाएगा और न उपयोग में लाए जाने की अनुमति देगा ।

(2) भू-भाटक-

(सामान्यतः देय भू-भाटक)

वार्षिक भू-भाटक रुपये ..(केवल ......रुपये), जो कि मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण तथा पुनर्निर्धारण ) नियम, 2018 के अनुसार संगणित भू- राजस्व के दो गुनी राशि के बराबर होगी और जो पट्टावधि के दौरान उक्त नियमों के अध्यधीन परिवर्तनीय होगा, देय होगा जो पट्टेदार अप्रैल के प्रथम दिन से जून के अंतिम दिन के दौरान सरकारी खजाने में जमा करेगा ।

अथवा

(अग्रिम अधिपत्य में सौंपी गई भूमि के मामले में)

चूँकि पट्टादाता द्वारा पटटान्तरित भूमि का अग्रिम आधिपत्य दिनांक

को पट्टेदार को सौंपा जा चुका है, अतः अग्रिम आधिपत्य सौंपे जाने की दिनांक से तत्समय प्रभावशील उपबंधानुसार वार्षिक भू भाटक .............. ......(केवल.. ....रुपये) देय होगा जो पट्टावधि अवसान के पश्चात् नवीनीकरण किये जाने की दशा में आगामी वर्ष से मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण तथा पुर्नर्निर्धारण) नियम, 2018 के अनुसार संगणित भू- राजस्व के दो गुनी राशि के बराबर देय होगा जो पट्टेदार ऐसी नवीकृत अवधि के पश्चात् प्रारंभ होने वाली आगामी अवधि के प्रारंभ वर्ष के अप्रैल के प्रथम दिन से जून के अंतिम दिन के दौरान वार्षिक भू- भाटक की राशि का संदाय सरकारी खजाने में जमा करेगा;

नियत अवधि में भू- भाटक की राशि जमा नहीं किये जाने की दशा में पट्टेदार ऐसी बकाया राशि पर देयता की दिनांक से एक वर्ष तक बारह प्रतिशत और उसके पश्चात् अदायगी दिनांक तक की शेष अवधि के लिये पंद्रह प्रतिशत वार्षिक की दर साधारण ब्याज की राशि जमा करायेगा ।

अथवा मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 144)

(रियायती भू-भाटक पर दी गई भूमि के मामले में)

वार्षिक भू-भाटक रुपये (केवल.. रुपये) देय होगा जो पट्टेदार अप्रैल के प्रथम दिन से जून के अंतिम दिन के दौरान अथवा पूरी पट्टावधि के लिए एकमुश्त सरकारी खजाने में जमा करेगा ।

(जो लागू न हो, काट दें)

(3) कर, आदि- पट्टेदार समय- समय पर उक्त अवधि के दौरान समस्त समयों पर, ऐसे समस्त कर, प्रभार तथा प्रत्येक प्रकार के निर्धारण का संदाय तथा उन्मोचन करेगा जो कि एतद्वारा पट्टान्तरित की गई उक्त भूमि पर या उस पर निर्मित किए जाने वाले भवनों पर या उसके/ उनके सम्बन्ध में अभिधारी पर इस समय या एतपश्चात् उक्त अवधि के दौरान किसी भी समय निर्धारित , प्रभारित या अधिरोपित किए जाएँ ।

(4 ) निर्माण की कालावधि- पट्टेदार इस पट्टे के प्रारंभ होने की दिनांक से एक वर्ष के भीतर भवन निर्माण करना प्रारम्भ करेगा और ऐसी दिनांक से वर्ष के भीतर निर्माण पूर्ण करेगा ।

(5) भवन का विनियमन- उक्त भूमि पर किसी भवन के निर्माण, पुनर्निर्माण या परिवर्तन के विषय में, पट्टेदार तत्समय प्रवृत्त विधि के उपबन्धों के तथा उन नियमों, उपविधियों एवं आदेशों के, जो कि उसके (उक्त विधि के) अधीन बनाये गये हों, तथा दिए गये हों और जो कि तत्समय प्रवृत्त हों, अध्यधीन रहेगा ।

(6) समुचित अनुरक्षण- पट्टेदार, उक्त अवधि के दौरान, उक्त भूमि तथा उस पर निर्मित भवनों को जिस प्रयोजन के लिए भूमि आबंटित है, के उपयोग के योग्य दशा में रखेगा ।

(7) व्यापार या कारबार- पट्टेदार परिसर पर कोई भी ऐसा व्यापार, कारबार या क्रिया- कलाप , जिसके कि विनियमन के लिये स्थानीय निकाय से सम्बन्धित विधि द्वारा या उसके अधीन तत्समय कोई उपबंध किए गए हों, ऐसे उपबंधों के अधीन ही करेगा या किये जाने की अनुज्ञा देगा ।

(8 )समनुदेशन/अभिहस्तांकन / उप-पट्टा/ अंतरण (क) पट्टेदार पट्टान्तरित भूमि या उसके किसी भी भाग को या इस अनुबंध के अधीन अर्जित किसी भी अधिकार को पट्टाकर्ता की लिखित पूर्व मंजूरी के बिना न तो समनुदेशित या अभिहस्तांकित करेगा, न उप - पट्टे पर देगा, न ही अन्य प्रकार से अंतरित (जो लागू न हो, काट दें)

(जो लागू न हो, काट दें)

(3) कर, आदि- पट्टेदार समय - समय पर उक्त अवधि के दौरान समस्त समयों पर , ऐसे समस्त कर, प्रभार तथा प्रत्येक प्रकार के निर्धारण का संदाय तथा उन्मोचन करेगा जो कि एतद्वारा पट्टान्तरित की गई उक्त भूमि पर या उस पर निर्मित किए जाने वाले भवनों पर या उसके / उनके सम्बन्ध में अभिधारी 650 ( 145)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

पर इस समय या एतद्यश्चात् उक्त अवधि के दौरान किसी भी समय निर्धारित , प्रभारित या अधिरोपित किए जाएँ ।

(4) निर्माण की कालावधि- पट्टेदार इस पट्टे के प्रारंभ होने की दिनांक से एक वर्ष के भीतर भवन निर्माण करना प्रारम्भ करेगा और ऐसी दिनांक से वर्ष के भीतर निर्माण पूर्ण करेगा ।

(5) भवन का विनियमन- उक्त भूमि पर किसी भवन के निर्माण, पुनर्निर्माण या परिवर्तन के विषय में, पट्टेदार तत्समय प्रवृत्त विधि के उपबन्धों के तथा उन नियमों, उपविधियों एवं आदेशों के, जो कि उसके (उक्त विधि के) अधीन बनाये गये हों, तथा दिए गये हों और जो कि तत्समय प्रवृत्त हों, अध्यधीन रहेगा ।

(6 ) समुचित अनुरक्षण- पट्टेदार, उक्त अवधि के दौरान, उक्त भूमि तथा उस पर निर्मित भवनों को जिस प्रयोजन के लिए भूमि आबंटित है, के उपयोग के योग्य दशा में रखेगा ।

(7 ) व्यापार या कारबार- पट्टेदार परिसर पर कोई भी ऐसा व्यापार, कारबार या क्रिया-कलाप, जिसके कि विनियमन के लिये स्थानीय निकाय से सम्बन्धित विधि द्वारा या उसके अधीन तत्समय कोई उपबंध किए गए हों, ऐसे उपबंधों के अधीन ही करेगा या किये जाने की अनुज्ञा देगा ।

(8 )समनुदेशन /अभिहस्तांकन /उप- पट्टा /अंतरण (क) पट्टेदार पट्टान्तरित भूमि या उसके किसी भी भाग को या इस अनुबंध के अधीन अर्जित किसी भी अधिकार को पट्टाकर्ता की लिखित पूर्व मंजूरी के बिना न तो समनुदेशित या अभिहस्तांकित करेगा, न उप - पट्टे पर देगा, न ही अन्य प्रकार से अंतरित करेगा ।

(ख ) उक्त शर्त के अनुक्रम में पट्टेदार द्वारा किये गये प्रत्येक समानुदेशन/अभिहस्तांकन/ उप-पट्टा /अंतरण के फलस्वरूप अंतरिती द्वारा अर्जित अधिकार की सूचना अंतरण की दिनांक से तीस दिवस के भीतर पट्टाकर्ता को देना अनिवार्य होगा ।

(9) (क) पूर्त संस्था के मामले में-

विशिष्ट शर्तें

(एक) पट्टा अहस्तांतरणीय होगा तथा उसका विभाजन नहीं किया जाएगा;

(9) (क) या

(9 ) (ख)

या (9) (ग)

(दो) पट्टेदार संस्था द्वारा उसे आवंटित भूमि पर एक वर्ष के भीतर निर्माण प्रारंभ कर तीन वर्ष में निर्माण पूर्ण करना होगा ताकि भूमि का समुचित उपयोग सुनिश्चित हो;

में से जो

लागू न हो, काट दें ।

(तीन) कलेक्टर या उसके द्वारा प्राधिकृत नजूल अधिकारी, उपखण्ड अधिकारी, तहसीलदार या अन्य व्यक्ति को पट्टेदार संस्था के लेखा अभिलेख का निरीक्षण करने का अधिकार होगा;

(चार) आवंटित भूमि पर संचालित पट्टेदार संस्था की गतिविधियों अथवा लाभार्थियों में जाति, समुदाय या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 146)

किया जाएगा; और

(पांच) आवंटित भूमि पर पट्टेदार संस्था द्वारा आवंटित भूमि में निर्मित क्षेत्र के 10 प्रतिशत तक व्यावसायिक उपयोग अनुज्ञेय होगा । (ख) राजनैतिक दल के मामले में-

(एक) पट्टा अहस्तांतरणीय होगा तथा विभाजन नहीं किया जाएगा;

(दो) पट्टेदार राजनैतिक दल द्वारा उसे आवंटित भूमि पर एक वर्ष के भीतर निर्माण प्रारंभ कर तीन वर्ष में निर्माण पूर्ण करना होगा ताकि भूमि का समुचित उपयोग सुनिश्चित हो;

(तीन) यदि किसी कारणवश पट्टेदार राजनैतिक दल अस्तित्व में नहीं रहता है तो आवंटित भूखंड एवं उस पर निर्मित संरचना (भवन) राज्य शासन में वेष्ठित हो जाएंगे तथा उसके द्वारा भूखंड के लिए राज्य शासन को प्रब्याजि अथवा भू- भाटक के मद्दे जमा की गई राशि वापिस नहीं लौटाई जाएगी और न ही भूखंड पर निर्मित संरचना के लिए कोई प्रतिफल देय होगा; और

(चार) आवंटित भूमि पर पट्टेदार राजनैतिक दल के द्वारा आवंटित भूमि में से निर्मित क्षेत्र के 10 प्रतिशत तक व्यावसायिक उपयोग अनुज्ञेय होगा ।

(ग) पूंजी निवेशकों के मामले में-

विभागीय नीति के अनुकम में आवंटन मंजूरी आदेश में उल्लेखित शर्तें-

(एक)

(दो)

(तीन)

( 10 ) स्वीकृति आदेश में विहित की गई अतिरिक्त शर्तें (यदि कोई हो)

अतिरिक्त शर्तें

(एक)

(दो)

(तीन)

निर्बाध उपयोग

(11 ) निर्बाध उपयोग- पट्टाकर्ता यह प्रसंविदा करता है कि एतद्वारा नियमित रूप से भाटक का संदाय करने वाला और इसमें अन्तर्विष्ट शर्तों का पालन तथा अनुपालन करने वाला पट्टेदार पट्टाकर्ता या उसके अधीन विधिपूर्वक दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा कोई भी विधिपूर्ण विघ्न या विक्षोभ पहुँचाये गये बिना, उक्त अवधि के दौरान उक्त भूमि को शान्तिपूर्वक धारण करेगा और उसका उपभोग करेगा ।

पुनःप्रवेश

परन्तु यदि किसी भी समय, उक्त भाटक या उसका कोई भी भाग, चाहे उसकी विधिपूर्वक मांग की गई हो या नहीं, उस दिनांक के जिसको कि वह शोध्य हो गया हो ठीक पश्चात् एक कैलेण्डर मास तक बकाया या असंदत रहे, या यदि पट्टेदार उक्त शर्तों से किसी भी शर्त का भंग या अपालन करे, तो 650( 147)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

पट्टाकर्ता किसी भी पूर्व कारण का या पुनःप्रवेश के अधिकार का अधित्यजन कर देने पर भी, उक्त भूमि पर प्रवेश कर सकेगा और उसे उसी प्रकार पुनः कब्जे में ले सकेगा मानो कि यह पट्टान्तरण किया ही नहीं गया हो, ऐसी दशा में पट्टेदार ऐसे पुनःप्रवेश की दिनांक से तीन कैलेण्डर मास के भीतर उन समस्त भवनों एवं स्थापकों को हटाने का हकदार होगा जो पट्टान्तरण के चालू रहने के दौरान किसी भी समय उसके द्वारा उक्त भूमि पर निर्मित किये गये हों या लगाये गये हों :

परन्तु यह और भी कि जब पूर्वगामी परन्तुक के अधीन कोई कारण या पुनः प्रवेश का अधिकार उत्पन्न हो जाये, तो पट्टाकर्ता के लिये यह विधिपूर्ण होगा कि वह पुनः प्रवेश की शक्ति को प्रयोग में न लाने के फलस्वरूप इस संबंध में राज्य शासन द्वारा समय- समय पर जारी किए गये निर्देशों के अनुक्रम में शमन राशि जैसी कि कलेक्टर या उसके द्वारा प्राधिकृत अपर कलेक्टर नियत करे, पट्टेदार से प्राप्त करे और यदि पट्टेदार, कलेक्टर या प्राधिकृत अपर कलेक्टर के आदेश द्वारा नियत किये गये समय के भीतर ऐसी धनराशि का संदाय न करे, तो उसे भू- राजस्व के बकाया की भाँति वसूल करे या पूर्वगामी परन्तुक के अधीन पुनः प्रवेश के अधिकार को प्रयोग में लाये ।

नवीकरण ( 12) पट्टाकर्ता यह और प्रसंविदा करता है कि वह एतद्वारा मन्जूर की गई अवधि के अन्त में और उसी प्रकार उसके पश्चात् भी समय-समय पर, ऐसी प्रत्येक आनुक्रमिक उत्तरभावी अवधि के, जो कि पट्टेदार के निवेदन तथा खर्च पर मन्जूर की जायेगी , उक्त भूमि का नवीकृत पट्टा वर्ष की अवधि के लिये निष्पादित करेगाः

परन्तु प्रत्येक नवीकृत पट्टे की मन्जूरी के लिये भू भाटक में तत्समय लागू विधि अनुसार वृद्धि की जा सकेगी और यह कि प्रत्येक नवीकृत पट्टे में, इसमें अन्तर्विष्ट शर्तों में से ऐसी शर्तें जो कि लागू होने योग्य हों और ऐसी अन्य शर्तें जो कि भविष्य के लिये उचित समझी जाएँ, भी अन्तर्विष्ट की जा सकेंगीः

परन्तु यह और भी कि प्रत्येक आनुक्रमिक नवीकरण पर अधिरोपित की जाने वाली शर्तों के बारे में पट्टाकर्ता का विनिश्चय अन्तिम होगा ।

निर्वचन (13 ) इस बात पर सहमति है कि इसमें प्रयोग में लाई गई अभिव्यक्तियों " पट्टाकर्ता" तथा "पट्टेदार " के अन्तर्गत , जब तक कि सन्दर्भ से असंगत न हो, पूर्वकथित के मामले में उसके उत्तरवर्ती यथा समनुदेशिती और पश्चात् कथित के मामले में उसके वारिस , निष्पादक, प्रबन्धक, प्रतिनिधि तथा समनुदेशिती आएंगे । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 148)

अनुसूची

पट्टान्तरित भूमि का वर्णन

आवेदित भूमि के विवरण जिल्ला तहसील

नगर.............सेक्टर...

राजस्व निरीक्षक वृत्तपटवारी हल्का............ग्राम..........

खसरा क्रमांक / शीट क्रमांक/ ब्लॉक कमांक / भूखण्ड कमांक....

माप

नजरी नक्शा

चौहद्दी طيب पूर्वमें

पश्चिम में

उत्तर में

दक्षिण में

जिसके साक्ष्य में इससे संबंधित पक्षकारों ने लिखित दिनांक तथा वर्ष को इस पर अपने-अपने हस्ताक्षर कर दिये हैं ।

साक्षीगण-

1.

2.

मध्यप्रदेश के राज्यपाल की ओर

से कलेक्टर / प्राधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर

नाम...

पदनाम...

कार्यालय की मोहर.................

दिनांक.

साक्षीगण-

1.

2.

पट्टेदार के हस्ताक्षर

नाम...

पदनाम ...

कार्यालय की मोहर..

दिनांक .

650(149)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

प्ररूप चार

(देखिएकंडिका 90)

मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश , 2020 के अंतर्गत अस्थायी पट्टाधिकार को स्थायी पट्टाधिकार में परिवर्तन हेतु आवेदन

प्रति,

आवेदक/ आवेदकों कास्वयं अनुप्रमाणित पासपोर्ट आकार का छायाचित्र सक्षम प्राधिकरी /कलेक्टर

जिला...

.(मध्यप्रदेश)

मैं/ हम, मेरे/ हमारे अस्थायी पट्टाधिकार को स्थायी पट्टाधिकार में परिवर्तित कराना चाहते हैं, मेरे / हमारे विवरण निम्नानुसार हैं:-

1. (क) * आवेदक (पट्टाधारी) का नाम..

(ख) आधार नम्बर........

(ग) माता / पिता/ पति का नाम.......

(घ) स्थायी पता..........

(ङ) वर्तमान डाक का पत्ता.......

(च) दूरभाष कमांक / मोबाईल नं०, (यदि कोई हो)..

(छ) ई-मेल (यदि कोई हो........

*एक ही भूखण्ड के संयुक्त धारणाधिकार में एक से अधिक आवेदक (पट्टाधारी) होने की दशा में प्रत्येक पट्टाधारी के विवरण ऊपर बिन्दु कमांक 1 के खण्ड (क) से (छ) तक पृथक- पृथक दिये जाएं ।

परिवर्तन के लिये एक भूखण्ड के एक से अधिक पट्टेदार होने पर आवेदन किसी एक के द्वारा भी प्रस्तुत किया जा सकेगा किन्तु ऐसे आवेदक को अन्य सहपट्टेदारों की ओर से प्राधिकृत करने हेतु वैध खास मुख्तारनामा प्रस्तुत करना होगा ।

2. अस्थायी पट्टादाता प्राधिकारी के विवरण :

3. अस्थायी पट्टे के विवरण

(एक) अस्थायी पट्टाधारी का नाम

(दो) भू-खण्ड कमांक

(तीन) ब्लॉक क्रमांक.....

(चार) ग्राम.. ./सेक्टर.. ./नगर..

(पांच) भूमि (भू-खण्ड) का क्षेत्रफल.. ..वर्गमीटर

(छः) तहसील ...जिला..

(सात) वर्तमान वार्षिक भू- भाटक: रूपये

(आठ) अस्थायी पट्टे का प्रयोजन जैसा कि पट्टा विलेख में दर्शाया गया है

(नौ) अस्थायी पट्टे की कालावधि.... ...से . ..तक मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 150)

(दस) क्या भुगतान, (यदि कोई शेष हो) , के लिए ब्याज के साथ अद्यतन भू-भाटक संदत्त किया गया है?

हाँ/ नहीं

हाँ/नहीं 4. क्या भूमि का स्थल पर उपयोग वही है जो पट्टानुसार अनुज्ञेय है ?

5. क्या किसी न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष कोई विवाद लंबित है?

हाँ/नहीं 6. संलग्नक :-

(क) अस्थायी पट्टा विलेख की प्रति

(ख) स्थल मानचित्र

अन्य अभिलेख:-

(1 ) अस्थायी पट्टाधारी का विशेष (खास ) मुख्तारनामा (यदि कोई हो)

(2) किसी न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष लंबित मामले का विवरण (यदि कोई हो) (3)

दिनांक:

स्थान:

आवेदक के हस्ताक्षर 650 ( 151)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

प्ररुप पांच

(देखें कंडिका 97 , 102 तथा 109)

नगरीय निकाय / विकास प्राधिकरण / विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण को नजूल भूमि का भूमिस्वामी अधिकार में आवंटन आदेश का प्ररूप

कार्यालय कलेक्टर..

राजस्व प्रकरण क्रमांक क्रमांक

नगरीय निकाय /विकास प्राधिकरण / विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण को नजूल भूमि का भूमिस्वामी अधिकार में आवंटन आदेश

(पारित दिनांक ...

(नगरीय निकाय एवं विकास प्राधिकरण/विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का नाम) के आवेदन पत्र कमांक दिनांक के संदर्भ में यथास्थिति जिला नजूल निर्वर्तन समिति / संभाग नजूल निर्वर्तन समिति / भोपाल विकास योजना क्षेत्र के लिये गठित नजूल निर्वर्तन समिति द्वारा नीचे अनुसूची में उल्लेखित नजूल भूमि.. (नगरीय निकाय एवं विकास प्राधिकरण/विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का नाम) के पक्ष में आवंटित ./इस कार्यालय (जो लागू न हों काट दें) के पत्र किए जाने की स्वीकृति आयुक्त कमांक दिनांक से जारी हुई है ।

2. इसके क्रम में (नगरीय निकाय एवं विकास प्राधिकरण/ विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का नाम) द्वारा प्रब्याजि राशि रुपये. (शब्दों में रुपये चालान कमांक.. दिनांक द्वारा सरकारी खजाने में जमा कर दिए गए हैं ।

अथवा

2. विकास प्राधिकरण/ विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण भूमिस्वामी अधिकार में भूमि आवंटन के इस आदेश की दिनांक रुपये.. निर्देश , 2020 के परिशिष्ट ' क ' से तीन वर्ष के भीतर प्रब्याजि की राशि रुपये (शब्दों में ......शासकीय खजाने में मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन उल्लेखित मद में जमा करेगा । आवंटन की दिनांक से दो वर्ष तक कोई ब्याज देय नहीं होगा किन्तु दो वर्ष की अवधि के अवसान उपरांत देय राशि पर 15 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर से देय होगा ।

3.अतः विकास प्राधिकरण का नाम) को जिला.. (नगरीय निकाय एवं विकास प्राधिकरण/विशेष क्षेत्र ...की तहसील......... के ग्राम / सेक्टर / नगर....... ..की सीमाओं के भीतर स्थित भूमि, जिसका क्षेत्रफल वर्गमीटर है और जिसके बारे में इसमें नीचे दी गई अनुसूची में अधिक विशिष्टतः वर्णित है तथा अधिक स्पष्टता की दृष्टि से जिसकी सीमाएं इसमें आबद्ध रेखांक में चिन्हित की गई हैं और उसमें...........रंग से बतलाई गई हैं, भूमिस्वामी अधिकार में अंतरित किया जाता है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 152)

4. (नगरीय निकाय एवं विकास प्राधिकरण/विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का नाम) को उक्त भूमि पर निर्धारित किये गये भू- राजस्व का प्रतिवर्ष संदाय करना होगा । भू- राजस्व की अदायगी में चूक के मामले में बकाया पर प्रथम वर्ष के लिये 12 प्रतिशत और उसके पश्चात् अदायगी दिनांक तक की शेष अवधि के लिये 15 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज देय होगा ।

अनुसूची

आवंटित भूमि का वर्णन

आवेदित भूमि के विवरण जिल्ला तहसील.......... नगर..... ...सेक्टर..... राजस्व निरीक्षक वृत्त पटवारी हल्का ग्राम खसरा क्रमांक/शीट कमांक /ब्लॉक कमांक/ भूखण्ड कमांक... माप

नजरी नक्शा ...........

चौहद्दी पूर्वमें

पश्चिममें

उत्तर में

दक्षिण में

कार्यालय की मोहर

कलेक्टर

दिनांक

पृष्ठांकन क्रमांक प्रतिलिपिः-

1. विकास प्राधिकरण का नाम) (नगरीय निकाय एवं विकास प्राधिकरण /विशेष क्षेत्र 2. आयुक्त, संभाग

3. महालेखाकार मध्यप्रदेश , ग्वालियर

4. सचिव, मध्यप्रदेश शासन, नगरीय विकास एवं आवास विभाग / पंचायत राज और ग्रामीण विकास विभाग , मंत्रालय, भोपाल..

5. आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास / आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास / संचालक पंचायत राज और ग्रामीण विकास विभाग, मंत्रालय , भोपाल...

6. तहसीलदार, तहसील....... आदेश के पालन में संबंधित नगरीय / स्थानीय निकाय को आवंटित भूखण्ड का आधिपत्य सौंपे तथा भू अभिलेख में समुचित प्रविष्टियां अंकित कराएं ।

7. आदेश पत्रावली ।

कलेक्टर 650( 153)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

प्ररूप छह

(देखिये कंडिका 97 , 102 एवं 109)

मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश , 2020 के अंतर्गत निष्पादित भूमिस्वामी अधिकार में अंतरण विलेख

माह वर्ष यह भूमिस्वामी अधिकार में अंतरण विलेख आज दिनांक 2.0......को मध्यप्रदेश में स्थित पट्टे की भूमियों के संबंध में मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश , 2020 की कंडिका 97 , 102 या 109 (जो लागू न हो, काट दें) के अनुसरण में कलेक्टर मध्यप्रदेश के राज्यपाल (जिन्हें इसके पश्चात् सक्षम प्राधिकारी कहा गया है, जिस अभिव्यक्ति के अंतर्गत जहां कि संदर्भ से वैसा अनुमत हो, उनके पदीय उत्तरवर्ती भी सम्मिलित हैं) प्रथम पक्ष तथा (जिन्हें इसके पश्चात् भूमिस्वामी कहा गया है, जिस अभिव्यक्ति के अंतर्गत , जहां कि संदर्भ में वैसा अनुमत हो, उनके पदीय उत्तरवर्ती, अंतरिती भी सम्मिलित हैं) द्वितीय पक्ष के बीच निष्पादित किया जाता है;

चूँकि, भूमि का समाविष्ट क्षेत्र का माप तहसील ...जिला ..वर्गमीटर स्थित ग्राम/सेक्टर मध्यप्रदेश , जो इससे संलग्न अनुसूची में अधिक विनिर्दिष्ट रूप से वर्णित है , सक्षम प्राधिकारी द्वारा आदेश क्रमांक दिनांक.........माहवर्ष प्रयोजन के लिये भूमिस्वामी अधिकार में देने का निर्णय लिया गया है; द्वारा......

(नगरीय/स्थानीय निकाय के मामले में, यथास्थिति कंडिका 97 या 102)

और चूँकि, भूमिस्वामी द्वारा चालान क्रमांक संपरिवर्तन प्रभार रुपये कर दिया गया है; दिनांक माह वर्ष द्वारा (रुपये केवल) का भुगतान शासकीय खजाने में

अथवा

(विकास प्राधिकरण/विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के मामले में, कंडिका 109)

और चूँकि, भूमिस्वामी इस विलेख के निष्पादन की दिनांक से दो वर्ष के भीतर उक्त भूमि के लिये प्रब्याजि के रूप में रूपये.. ..(शब्दों में रूपये...... ..केवल) का भुगतान शासकीय खजाने में जमा कर करेगा और यदि उक्त अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है तो आगामी एक वर्ष में अदायगी दिनांक तक के लिये देय राशि पर 15 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर से ब्याज सहित प्रब्याजि की राशि जमा करेगा और जमा न करने की स्थिति में देय राशि भू- राजस्व के बकाया के तौर पर वसूलयोग्य होगी;

(उक्त में से जो लागू न हो, काट दें)

और, चूँकि, भूमिस्वामी सक्षम प्राधिकारी के आदेश क्रमांक दिनांक द्वारा नियत किए गये वार्षिक भू- राजस्व रुपये (रुपये माह...........वर्ष.......... केवल) का भुगतान करने हेतु जो मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण तथा पुनर्निर्धारण) नियम, 2018 के अध्यधीन होगा, सहमत है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 154)

अनुसूची

भूमि के विवरण जिल्ला तहसील

...सेक्टर.....

नगर... राजस्व निरीक्षक वृत्त पटवारी हल्का ग्राम खसरा क्रमांक/ शीट क्रमांक /ब्लॉक कमांक / भूखण्ड कमांक

नक्शा

चौहद्दी - पूर्व में

पश्चिम

उत्तर में..........

दक्षिण में..........

जिसके साक्ष्य में इससे संबंधित पक्षकारों ने लिखित दिनांक तथा वर्ष को इस पर अपने-अपने हस्ताक्षर कर दिये हैं ।

स्थान ....

साक्षीगण-

मध्यप्रदेश के राज्यपाल की ओर 1.

से कलेक्टर के हस्ताक्षर

2.

कार्यालय की मोहर ..

दिनांक

साक्षीगण-

भूमिस्वामी के हस्ताक्षर

1.

2.

पदनाम...

दिनांक........

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 155)

प्ररूप सात

(देखें कंडिका 112)

नजूल अधिकारी द्वारा नीलामी के लिये भूमि के चयन हेतु प्रस्तुत किये जाने वाले प्रतिवेदन का प्ररूप

कार्यालय नजूल अधिकारी

राजस्व प्रकरण क्रमांक प्रति,

सदस्य सचिव,

जिला नजूल निर्वर्तन समिति,

जिला

प्रतिवेदन

(दिनांक.......

विषयः- मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश, 2020 के अध्याय 5 के अंतर्गत नीलामी द्वारा भूमिस्वामी हक में निर्वर्तन के लिये भूमि के चयन का प्रस्ताव ।.

संदर्भः- कलेक्टर का निर्देश पत्र क्रमांक ...दिनांक ........(यदि कोई है)

1. नीलामी द्वारा निर्वर्तन के लिये प्रस्तावित नजूल भूमि का विवरण

तहसील

जिला

नगरीय क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले में नगरेतर क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले में

नगर

राजस्व निरीक्षक वृत्त

सेक्टर

पटवारी हल्का

ग्राम

क्र.

कुल क्षेत्रफल (हेक्टेयर/ वर्गमीटर में)

नीलामी हेतु प्रस्तावित क्षेत्रफल (हेक्टेयर/ वर्गमीटर में) खसरा क्रमांक/शीट क्रमांक/ब्लॉक कमांक/ भूखण्ड क्रमांक

1

2

3 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 156)

योग

2. प्रस्तावित भूमि की स्थिति

2.1 क्या प्रस्तावित भूमि व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित है? यदि हाँ तो ऐसे क्षेत्र का सामान्य विवरण

2.2 क्या प्रस्तावित भूमि निजी भूमियों से घिरी हुई है? यदि हाँ तो विवरण (नक्शा संलग्न करते हुए स्थिति स्पष्ट दर्शायें)

2.3 क्या प्रस्तावित भूमि का निर्वर्तन व्यावसायिक प्रयोजन के लिये किया जा सकता है? यदि हाँ, तो कारण / आधार स्पष्ट करें

3. 3.1 सार्वजनिक उद्घोषणा जारी करने के विवरण

3.2 प्राप्त आपत्तियों , दावों और सुझावों के विवरण

3.3 प्राप्त आपत्तियों, दावों और सुझावों पर जांच अधिकारी द्वारा की गई विवेचना तथा निष्कर्ष

4. 4.1 स्थानीय निकाय, नगर तथा ग्राम निवेश तथा अन्य विभाग के अभिमत प्राप्त करने के लिए की गई कार्यवाही के विवरण

4.2 प्राप्त अभिमतों के विवरण

4.3 प्राप्त अभिमतों पर जांच अधिकारी का निष्कर्ष

5. प्रस्तावित भूमि के संबंध में कोई प्रकरण किसी न्यायालय में लंबित हो तो उसके विवरण दें तथा न्यायालय द्वारा कोई स्थगन आदेश जारी किया 650 ( 157)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

गया हो तो उसके विवरण दें

6. 6.1 भूमि का प्रस्तावित उपयोग

6.2 लैण्ड बैंक की प्रविष्टि के अनुसार क्या प्रस्तावित भूमि कृषि भिन्न प्रयोजन हेतु जिसके लिए नीलामी द्वारा निर्वर्तन प्रस्तावित है , आवंटन योग्य है ?

6.3 क्या प्रस्तावित भूमि विकास योजना (मास्टर प्लान) क्षेत्र में स्थित है? यदि हां, तो क्या भूमि का प्रस्तावित उपयोग विकास योजना में अनुमत है?

6.4 क्या प्रस्तावित भूमि पहाड़, चट्टान या पानी के नीचे मदों में दर्ज है? यदि हां, तो विवरण दें

6.5 क्या प्रस्तावित भूमि/ संहिता की धारा 237 के अधीन निस्तार अधिकार के प्रयोग के लिए पृथक रखी गई है/ थी? यदि हां, तो कलेक्टर द्वारा नोईयत परिवर्तन करने के आदेश के विवरण दें तथा आदेश की प्रतिलिपि संलग्न करें

6.6 क्या प्रस्तावित भूमि संहिता की धारा 233- क के अंतर्गत किसी लोक प्रयोजन के लिए पृथक् रखी गई है/ थी? यदि हां, तो विवरण दें । क्या भूमि जिस प्रयोजन के लिए मांग की गई है वह ऐसे लोक प्रयोजन के अनुसार है? यदि कलेक्टर द्वारा भूमि लोक प्रयोजन के लिए पृथक् रखने की कार्यवाही खत्म की गई हो या लोक प्रयोजन में परिवर्तन किया गया हो तो उसके विवरण दें तथा आदेश की प्रतिलिपि संलग्न करें मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 158 )

6.7 क्या प्रस्तावित भूमि मौके पर रिक्त है? यदि नहीं तो उस पर कब्जे/ अतिक्रमण के विवरण दें

6.8 क्या प्रस्तावित भूमि की आवश्यकता किसी लोक प्रयोजन के लिए है या भविष्य में संभावित है?

6.9 प्रस्तावित भूमि की उपलब्धता तथा प्रस्तावित प्रयोजन के लिए नीलामी द्वारा भूमिस्वामी हक में निर्वर्तन की उपयुक्तता पर जांचकर्ता अधिकारी का अभिमत

7. भवनों के निर्माण के लिए संबंधित क्षेत्र के लिए लागू तल क्षेत्र अनुपात (एफ. ए.आर. ) के विवरण

8. मध्यप्रदेश बाजार मूल्य ( मार्गदर्शक सिद्धांतों का बनाया जाना तथा उनका पुनरीक्षण) नियम, 2000 के अधीन वर्ष के अनुसार बाजार मूल्य की गणना

9. भूमिस्वामी हक में दिये जाने पर प्रस्तावित प्रयोजन अनुसार प्रस्तावित निर्धारण

10. अन्य कोई बिन्दु

11. मामले में नजूल अधिकारी की स्पष्ट और सकारण अनुशंसा

कार्यालय की सील

हस्ताक्षर

नाम

पदनाम 650 ( 159 )

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

प्ररुप आठ

(देखें कंडिका 115)

नजूल भूमि के नीलामी द्वारा निर्वर्तन की सार्वजनिक उद्घोषणा का प्ररूप

नजूल भूमि का नीलामी द्वारा निर्वर्तन

सार्वजनिक उद्घोषणा

कार्यालय सक्षम प्राधिकारी..

राजस्व प्रकरण कमांक

शासकीय भूखण्ड की नीलामी का विज्ञापन

नीचे दर्शाये गए विवरण अनुसार शासकीय नजूल भूमि को प्रतिस्पर्द्धात्मक निविदा पद्धति से भूमिस्वामी हक में दिये जाने के लिये ई-ऑक्शन की प्रक्रिया अपनाते हुए ई-ऑक्शन पोर्टल .

(पोर्टल का नाम दें) नीलाम किया जाएगा-

.(2) तहसील

(1) जिला..

(3) नगर पटवारी हल्का नं. (4) सेक्टर (5) वार्ड कमांक .....

.(7) ग्राम.....

भूमि, आधार मूल्य एवं प्रतिभूति राशि का विवरण-

(8)

कुल क्षेत्रफल

सरल कमांक

* वार्षिक भू-राजस्व (रुपये में)

प्रतिभूति राशि (Earnest Money )

आधार मूल्य (Upset Price)

सर्वेक्षण संख्यांक/ब्लॉक संख्यांक/भूखण्ड संख्यांक

विक्रय हेतु

प्रस्तावित

क्षेत्रफल

(वर्गमीटर

में)

विकास योजना (यदि कोई है) में अनुमत भूमि उपयोग

(7) (8)

(5)

(6)

(4)

(3)

(2)

(1)

1.

2.

3.

योग

* ऊपर स्तम्भ 6 में दर्शाया गया वार्षिक भू- राजस्व मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण एवं पुनर्निर्धारण) नियम, 2018 के अध्यधीन होगा ।

(9) ........ समय बजे तक नियत है । नीलामी में भाग लेने के लिये अंतिम तिथि

(10) भूमि का नक्शा एवं अन्य अभिलेख उपरोक्त ई -ऑक्शन पोर्टल पर तथा सक्षम प्राधिकारी ...के कार्यालय में देखे जा सकते हैं । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 160)

(11) उपरोक्त भूमि का निर्वर्तन भूमिस्वामी हक में किया जाएगा । ई-ऑक्शन की प्रक्रिया के विवरण उपरोक्त ई -ऑक्शन पोर्टल पर देखे जा सकते हैं । इच्छुक व्यक्ति/ संस्था द्वारा निर्धारित शुल्क जमा कर तथा आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर पंजीयन कराया जा सकेगा, इसके पश्चात् प्रक्रिया अनुसार प्रथमतः निर्धारित प्रतिभूति राशि (Earnest Money) वेबसाइट के माध्यम से ऑन लाईन जमा कर ई-ऑक्शन के लिये नियत समयावधि में विधिवत् लॉग- इन कर अपना ऑफर दर्ज कर भाग लिया जा सकेगा । (12) प्राप्त ऑफर्स खोलने की दिनांक ..समयबजे नियत है ।

(13) नीलामी के आधार पर प्राप्त ऑफर्स पर अंतिम निर्णय राज्य शासन अथवा उसकी ओर से प्राधिकृत अधिकारी का होगा ।

सील

हस्ताक्षर

दिनांक

सक्षम प्राधिकारी 650 ( 161)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

प्ररूप नौ

(देखें कंडिका 117)

नजूल अधिकारी द्वारा प्रस्तुत किये जाने वाला नजूल भूमि की ई - नीलामी की

कार्यवाही का प्रतिवेदन

कार्यालय नजूल अधिकारी

राजस्व प्रकरण क्रमांक................

प्रति,

सदस्य सचिव, जिला नजूल निर्वर्तन समिति, जिला

प्रतिवेदन (दिनांक.............

पटवारी हल्का... .............ग्राम .......

.सेक्टर.....

विषयः- मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश, 2020 के अध्याय 5 के अंतर्गत नगर ..... ..तहसील . .......वार्ड क्रमांक... ...जिला... में स्थित वर्गमीटर नजूल भूमि की ई - नीलामी दिनांक की कार्यवाही का प्रतिवेदन । 1. नीलामी के लिये चयन की गई नजूल भूमि के विवरण

तहसील..

नगरीय क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले में | नगरेतर क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले

में

नगर

राजस्व निरीक्षक वृत्त

सेक्टर

पटवारी हल्का

ग्राम

क्र.

कुल क्षेत्रफल

(हेक्टेयर / वर्गमीटर में)

खसरा क्रमांक / शीट कमांक /ब्लॉक कमांक / भूखण्ड क्रमांक

नीलामी हेतु चयनित क्षेत्रफल (हेक्टेयर/ वर्गमीटर में ) 1

2 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 162)

3

योग

2. मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश, 2020 की कंडिका 110 के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी द्वारा नीलामी के लिये भूमि चयन की स्वीकृति का विवरण दें तथा निर्णय की प्रति संलग्न करें

3. मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश , 2020 की कंडिका 142(3) के अंतर्गत नीलामी के लिये सार्वजनिक उद्द्घोषणा के प्रकाशन के विवरण दें तथा उद्घोषणा की प्रति संलग्न करें

4. भूमि का निर्धारित किया गया न्यूनतम आधार मूल्य (अपसेट प्राइज) (एक से अधिक भूखण्ड के मामले में प्रत्येक भूखण्ड का अलग - अलग मूल्य दर्शाये)

5. निविदा ऑफर के लिये नियत की गई प्रतिभूति राशि

(एक से अधिक भूखण्ड के मामले में प्रत्येक भूखण्ड का अलग-अलग मूल्य दर्शाये)

6. ई- नीलामी के लिये नियत समयावधि (अंतिम तिथि एवं समय अंकित करें)

7. नीलामी में भाग लेने वाले व्यक्तियों की सूची तथा उनके द्वारा अंकित अंतिम ऑफर के विवरण दिनांक, समय एवं राशिसहित दें

8. 9.1 उच्चतम निविदा ऑफरकर्ता के पूर्ण विवरण (निविदाकर्ता का नाम एवं पता, ई- मेल में 650 ( 163 )

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

तथा फोन/ मोबाईल फोन नम्बर सहित)

9.2 निविदाकर्ता द्वारा जमा की गई अर्नेस्ट मनी के विवरण

(तिथि, राशि एवं जमा करने की रीति)

9. अन्य निविदाकर्ताओं द्वारा जमा की गई प्रतिभूति राशि (अर्नेस्ट मनी) संबंधितों के बैंक खाते में वापिस की गई, के विवरण

10. अन्य बिन्दु (यदि कोई हों)

11. उच्चतम निविदा ऑफरकर्ता के ऑफर को स्वीकृत किये जाने की अनुशंसा टीप (एक से अधिक भूखण्डों के मामले में प्रत्येक भूखण्ड के लिये उच्चतम निविदा ऑफरकर्ता का नाम, ऑफर की गई राशि, ऑफर स्वीकृति की दशा में भूखण्ड पर देय वार्षिक भू- राजस्व की राशि भी दर्शायें)

कार्यालय की सील

हस्ताक्षर नजूल अधिकारी

नाम मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 164)

प्ररूप दस

(देखें कंडिका 117)

भूमि प्रबंधन प्राधिकारी द्वारा प्रस्तुत किये जाने वाला नजूल भूमि की ई - नीलामी के निर्णय की

संसूचना

कार्यालय भूमि प्रबंधन प्राधिकारी

प्रकरण क्रमांक...

प्रति,

प्रमुख सचिव,

मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग, मंत्रालय, भोपाल

निर्णय की संसूचना (दिनांक...........

विषयः- मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश , 2020 के अध्याय 5 के अंतर्गत नगर ........ ...सेक्टर.... ..तहसील .. ...वार्ड क्रमांक... ...जिला . पटवारी हल्का...... में स्थित वर्गमीटर नजूल भूमि की ई - नीलामी दिनांक... के निर्णय की संसूचना । ग्राम ...

1. नीलामी के लिये चयन की गई नजूल भूमि के विवरण

जिला........

तहसील..

नगरीय क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले में नगरेतर क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले में

नगर

राजस्व निरीक्षक वृत्त

पटवारी हल्का

सेक्टर

ग्राम

क्र.

नीलामी हेतु चयनित क्षेत्रफल

कुल क्षेत्रफल

(हेक्टेयर / वर्गमीटर में)

खसरा क्रमांक / शीट कमांक /ब्लॉक कमांक / भूखण्ड कमांक

(हेक्टेयर / वर्गमीटर में) 1

2 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 165) 3

योग

2. मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश, 2020 की कंडिका 110 के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी द्वारा नीलामी के लिये भूमि चयन की स्वीकृति का विवरण दें तथा निर्णय की प्रति संलग्न करें

3. भूमि का निर्धारित किया गया न्यूनतम आधार मूल्य (अपसेट प्राइज) (एक से अधिक भूखण्ड के मामले में प्रत्येक भूखण्ड का अलग -अलग मूल्य दर्शाये)

4. निविदा ऑफर के लिये नियत की गई प्रतिभूति राशि (एक से अधिक भूखण्ड के मामले में प्रत्येक भूखण्ड का अलग -अलग मूल्य दर्शाये)

5. 6.1 सफल निविदाकर्ता के पूर्ण विवरण (निविदाकर्ता का नाम एवं पता, ई-मेल में तथा फोन/ मोबाईल फोन नम्बर सहित)

6.2 निविदाकर्ता द्वारा जमा की गई अर्नेस्ट मनी के विवरण (तिथि, राशि एवं जमा करने की रीति)

6. असफल निविदाकर्ताओं द्वारा जमा की गई प्रतिभूति राशि (अर्नेस्ट मनी) संबंधितों के बैंक खाते में वापिस की गई, के विवरण

7. अन्य बिन्दु (यदि कोई हों) मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650 ( 166)

8. सफल निविदाकर्ता के ऑफर को स्वीकृत किये जाने की निर्णय टीप

(एक से अधिक भूखण्डों के मामले में प्रत्येक भूखण्ड के लिये सफल निविदाकर्ता का नाम, ऑफर की गई राशि, ऑफर स्वीकृति की दशा में भूखण्ड पर देय वार्षिक भू- राजस्व की राशि भी दर्शायें)

कार्यालय की सील

भूमि प्रबंधन प्राधिकारी के प्राधिकृत अधिकारी के

हस्ताक्षर

नाम मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650(167)

प्ररुप ग्यारह

(देखें कंडिका 119)

नजूल भूमि का नीलामी द्वारा निर्वर्तन- विक्रय विलेख

संभाग

कार्यालय कलेक्टर.....

राजस्व प्रकरण कमांक

विक्रय विलेख

(दिनांकको जारी)

यह प्रमाणित किया जाता है कि श्री/ सुश्री.. माता / पिता / पति...... ...निवासी (पूर्ण पता ) दिनांक............को आयोजित नीलामी द्वारा नीचे अनुसूची में उल्लेखित भूमि का क्रेता घोषित किया गया है अतएव यह विक्रय विलेख आज दिनांक ...माह.... सन्प्रथम पक्ष मध्यप्रदेश के राज्यपाल की ओर से कलेक्टर (जिन्हें इसमें इसके पश्चात् विक्रयकर्ता कहा गया है) की ओर से द्वितीय पक्ष....... के पक्ष में निष्पादित किया जाता है । ..(जिन्हें इसमें इसके पश्चात् क्रेता कहा गया है) 2. यह विक्रय विलेख इस बात का साक्षी है कि द्वितीय पक्ष क्रेता द्वारा मूल्य के रूप में संदाय किये गये रुपये. (शब्दों में रुपये की प्राप्ति प्रथम पक्ष विक्रयकर्ता एतद्वारा अभिस्वीकार करता है और द्वितीय पक्षकार यह अभिस्वीकार करता है कि वह इसमें इसके पश्चात् निर्धारित किये गये भू- राजस्व का प्रतिवर्ष संदाय करेगा; ...

और यह भी कि इस विकय विलेख के निष्पादन के प्रभाव में प्रथम पक्ष विक्रयकर्ता के एतद्वारा द्वितीय पक्ष क्रेता को जिल........ ....की तहसील ग्राम / सेक्टर / नसीमाओं के भीतर स्थित भूखंड , जिसका क्षेत्रफल वर्गमीटर है और जिसके बारे में इसमें नीचे दी गई अनुसूची में अधिक विशिष्टतः वर्णित है तथा अधिक स्पष्टता की दृष्टि से जिसकी सीमाएं इसमें आबद्ध रेखांक में चिन्हित की गई हैं और उसमें.........रंग से बतलाई गई हैं, भूमिस्वामी अधिकार में अंतरित करता है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650(168)

अनुसूची-विक्रय की गई भूमि सम्पत्ति का वर्णन

कुल क्षेत्रफल

सर्वेक्षण/ब्लॉक/भूखंड संख्यांक

ग्राम/ सेक्टर का नाम

सरल कमांक

भू-राजस्व (रुपये में)

विकीत क्षेत्रफल (वर्गमीटर में)

(5)

(6)

(4)

(1) (2)

(3)

1.

2.

भूखंड की चतुर्सीमा पूर्वमें..

पश्चिम में............

उत्तर में...............

दक्षिण में...............

संलग्न रेखांक जो इस विलेख का भाग है ।

3. उपर्युक्त के साक्ष्य में इससे संबंधित पक्षकारों ने, प्रत्येक मामले में लिखित दिनांक...... माह.........वर्ष...... को इस पर अपने-अपने हस्ताक्षर कर दिये हैं ।

साक्षीगण-

1.1 नाम..

कार्यालय की सील

1.2 पता......

मध्यप्रदेश के राज्यपाल की ओर से कलेक्टर के हस्ताक्षर

नाम..

2.1 नाम............

2.2 पता..

दिनांक

साक्षीगण-

1.1 नाम...

1.2 पता.....

क्रेता के हस्ताक्षर

2.1 नाम...

.पता..

नाम

2.2 पता..........

दिनांक..

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650(169 )

प्ररुप बारह

(देखें कंडिका 125)

नजूल भूमि पर अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) हेतु आवेदन

प्रति,

कलेक्टर

जिला......

विषयः- नजूल भूमि पर अनुज्ञप्ति (लाइसेंस ) हेतु आवेदन ।

1 1.1 आवेदक का नाम (जिसके नाम से भूमि का आवंटन चाहा जा रहा है)

(संस्थागत आवेदन के मामले में)

1.2आवेदनकर्ता / पदाधिकारी का पदनाम

(व्यक्तिगत आवेदन के मामले में)

1.3 . आवेदक के पिता/ माता/ पति का नाम

1.4लिंग

2 2.1 पत्राचार के लिए पता

2.2 दूरभाष कमांक

2.3 मोबाइल नम्बर

2.4 ई-मेल पता

3 प्रक्रिया शुल्क जमा करने के विवरण (जहां लागू हो)

3.1 जमा की गई राशि

3.2चालान क्रमांक

3.3 जमा करने की दिनांक

4 आवेदित भूमि के विवरण

तहसील .

नगरीय क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले में नगरेतर क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले में

नगर

राजस्व निरीक्षक वृत्त मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650(170)

सेक्टर

पटवारी हल्का.....

ग्राम

आवेदित क्षेत्रफल क्र.

(हेक्टेयर / वर्गमीटर में) खसरा क्रमांक /शीट क्रमांक /ब्लॉक कमांक / भूखण्ड कमांक

कुल क्षेत्रफल (हेक्टेयर / वर्गमीटर में)

1

2

3

योग

5 लाइसेंस का प्रयोजन

तम्बू या शामियाना लगाने या निर्माण सामग्री इक‌ट्ठी कर रखने के लिए

पुल/ पुलिया के निर्माण या कन्वेयर बेल्ट या रोप ट्राली के निर्माण के लिए

गौशाला के लिए

अन्य प्रयोजन के लिए (विवरण दें)

तक

से दिनांक

6

दिनांक..

अवधि जिसके लिए लाइसेंस चाहा जा रहा है

दिन/ माह / वर्ष के लिये 7 अन्य जानकारी / दस्तावेज

7.1 पुल-पुलिया निमार्ण या कन्वेयर बेल्ट या रोप ट्राली के निमार्ण के मामले में विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करें

7.2 गौशाला के मामले में निम्न जानकारी/ दस्तावेज दें-

7.2.1. प्रस्तावित गौशाला के निर्माण तथा संचालन की प्रोजेक्ट रिपोर्ट

7.2.2 गौशाला समिति के बैंक खाते के विवरण

7.2.3 गौशाला समिति के अंकेक्षित मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650( 171) लेखाओं की प्रतिलिपी (पिछले तीन वर्षों की)

7.2.4 गौशाला समिति के पदाधिकारियों के नाम , पदनाम, पता, ईमेल, दूरभाष के विवरण

7.2.5 गौशाला की अधोसंरचना के निमार्ण के लिए समिति के पास उपलब्ध पूंजी के विवरण

हस्ताक्षर

दिनांक

नाम..

पदनाम.

कार्यालय की मोहर..

संलग्नक-

(1 ) प्रक्रिया शुल्क पावती की छायाप्रति

(2) आवेदित भूमि के खसरा की प्रति

:

(3) भूमि का नक्शा

(4) अन्य सुसंगत दस्तावेज

(6) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650( 172)

प्ररुप तेरह

(देखें कंडिका 127)

नजूल भूमि पर अनुज्ञप्ति (लाइसेंस)

यह अनुबन्ध आज दिनांक...मास..................प्रथम जिला पक्ष प्राधिकृत मध्यप्रदेश के माध्यम से मध्यप्रदेश के अधिकारी/कलेक्टर राज्यपाल (जिन्हें इसमें इसके पश्चात् अनुदाता कहा गया है, जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत, उनके पद के उत्तरवर्ती आएंगे) और द्वितीय पक्ष...... (नाम, पिता/ माता/पति का नाम, पूर्ण पता ई-मेल एवं मोबाईल फोन नम्बर सहित, यथास्थिति समिति/ संस्था/ कंपनी आदि के मामले में पदाधिकारी का पदनाम तथा प्राधिकार पत्र के विवरण भरें) (जिन्हें इसमें इसके पश्चात् अनुज्ञप्तिधारी कहा गया है, जिस अभिव्यक्ति के अन्तर्गत, जहां कि सन्दर्भ से वैसा अनुमत हो, उनके वारिस , निष्पादक , प्रबन्धक, प्रतिनिधि तथा समनुदेशिती आएंगे) के बीच किया जाता है ।

चूंकि अनुदाता, अनुज्ञप्तिधारी के निवेदन पर, इस बात के लिए सहमत हो गया है कि वह उसे जिला..... तहसील नगर.... ........सेक्टर..... ...राजस्व निरीक्षक वृत्त... पटवारी हल्का.....ग्राम..... ....... (यथास्थिति विवरण भरें) में स्थित नजूल भू- खण्ड क्र.....में से ..वर्गमीटर माप की भूमि, जो नीचे दी गई अनुसूची में अधिक विशिष्टतः वर्णित है तथा अधिक स्पष्टता की दृष्टि से जो इससे उपाबद्ध रेखांक में चित्रित है और उसमें सुर्खी से बतलाया गया है (जो इसमें इसके पश्चात् उक्त भूमि के नाम से निर्दिष्ट है), के ऊपर/पर तम्बू या शामियाना लगाने या निर्माण सामग्री इकट्ठी कर रखने के लिए/पुल-पुलिया के निर्माण या कन्वेयर बेल्ट या रोप ट्राली के निर्माण के लिए या गौशाला के लिए / प्रयोजन के लिए (जो लागू न हो काट दें) (जो इसमें इसके पश्चात् उक्त निर्माण के नाम से निर्दिष्ट है) का निर्माण करने, स्थापन करने, अनुरक्षण करने तथा उपयोग करने के लिए ;- दिनांक.............से दिनांक तक इसके पश्चात् दिए गये निबन्धनों तथा शर्तों के अध्यधीन रहते हुए , अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) मंजूर कर देगा;-

और चूंकि अनुज्ञप्तिधारी , उसे मंजूर की गई अनुज्ञप्ति के प्रतिफलस्वरूप, अनुदाता को इसमें इसके पश्चात् उपबन्धित किये गये अनुसार अनुज्ञप्ति फीस के मद्दे प्रतिमास / प्रतिवर्ष रुपये (शब्दों में... की राशि का संदाय करने के लिये सहमत हो गया है । 2. अतएव यह विलेख निम्नलिखित बातों का साक्षी है और एतद्दद्वारा करार किया जाता है कि अनुज्ञप्तिधारी निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन रहते हुए उक्त भूमि के ऊपर / पर उक्त रचना का निर्माण , स्थापन, अनुरक्षण तथा उपयोग कर सकेगा, अर्थात:-

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650(173)

सामान्य शर्तें

(1 ) (एक ) अनुज्ञप्तिधारी, अनुज्ञप्ति चालू रहने के दौरान प्रतिमास / प्रतिवर्ष दिनांक को या उसके पूर्व, मासिक / वार्षिक फीस के रूप में ...रुपये की राशि का अग्रिम में संदाय करेगा ।

(दो) (क) अनुज्ञप्ति चालू रहने के दौरान यदि अनुदाता को अपने स्वयं के या लोक प्रयोजन के लिए , जिसका कि एक मात्र निर्णायक अनुदाता होगा, उक्त भूमि की आवश्यकता हो , तो अनुदाता, अनुज्ञप्तिधारी से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह उसे उस सम्बन्ध में सूचना प्राप्त होने की तीस दिन के भीतर उक्त निर्माण को हटा ले और तदुपरान्त अनुज्ञप्तिधारी उक्त निर्माण को हटा लेगा और यह अनुज्ञप्ति खत्म हो जायेगी। यदि सूचना द्वारा अनुज्ञात की गई कालावधि के भीतर अनुज्ञप्तिधारी उक्त निर्माण को हटाने में असफल रहे तो अनुदाता के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह उसे मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, 1959 की धारा 248 के उपबन्धों के अनुसार अनुज्ञप्तिधारी के खर्च से हटवा दे ।

(ख) अनुज्ञप्तिधारी उपखण्ड (क) के अधीन उक्त निर्माण को हटा लेने के लिए अपेक्षित किए जाने या अनुज्ञप्ति खत्म किए जाने के लिए कोई प्रतिकर प्राप्त करने का हकदार नहीं होगा और न ही वह जमा की गई अनुज्ञप्ति फीस या उसके किसी अंश की वापसी का हकदार होगा ।

(तीन) यदि उक्त निर्माण/ संरचना, ढह जाये या ऐसी बेमरम्मती की दशा में हो जाए की उनका पुनर्निर्माण अपेक्षित हो जाए , तो अनुज्ञप्ति प्रतिसंहृत हो जाएगी और उक्त जीर्ण-शीर्ण निर्माण को पूरी तरह हटा लिए जाने पर, अनुज्ञप्तिधारी , कलेक्टर को सूचना देगा और तदुपरान्त अनुज्ञप्तिधारी का अनुज्ञप्ति फीस संदाय करने का दायित्व, कलेक्टर पर सूचना की तामील होने की दिनांक से समाप्त हो जायेगा ।

(2) इस विलेख के अधीन अनुज्ञप्तिधारी द्वारा शोध्य होने वाली कोई भी राशि, उससे भू- राजस्व के बकाया की भांति वसूल की जा सकेगी ।

(3) कलेक्टर या उसके द्वारा प्राधिकृत कोई भी अधिकारी किसी भी समय उक्त भूमि पर प्रवेश कर सकेगा और उसका तथा उक्त निर्माण का निरीक्षण कर सकेगा । अनुज्ञप्तिधारी ऐसे निरीक्षण के लिये प्रत्येक सुविधा प्रदान करेगा और कलेक्टर या प्राधिकृत आफिसर द्वारा दिये गये किन्हीं भी अनुदेशों का अनुपालन करेगा ।

(4) अनुज्ञप्तिधारी उक्त भूमि या उसके किसी भी भाग का या उक्त भूमि या उसके किसी भी भाग के सम्बन्ध में इस अनुज्ञप्ति के अधीन उसे प्रदत्त किन्हीं भी अधिकारों का कलेक्टर के पूर्वानुमोदन के बिना किसी भी रीति में अन्तरण नहीं करेगा ।

(5) अनुज्ञप्तिधारी उक्त भूमि का उपयोग प्रयोजन के लिए ही करेगा और कलेक्टर . ...की लिखित पूर्व मंजूरी के बिना, उक्त भूमि या उसके किसी भी भाग का उपयोग किसी भी अन्य प्रयोजन के लिए न तो करेगा, न करवायेगा और न करने की अनुज्ञा देगा या इसके नीचे लिखे हुये उन निर्माणों में, जिसके कि उक्त भूमि पर प्रतिधारित मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650(174)

किए रहने की अनुज्ञा दे दी गई हो, कोई भी परिवर्धन या परिवर्तन न तो करेगा, न करवाएगा और न करने की अनुज्ञा देगा ।

(6) यदि किसी भी समय अनुज्ञप्तिधारी , इसमें अन्तर्विष्ट शर्तों में से किसी भी शर्त को भंग करे, तो अनुदाता अनुज्ञप्ति को तत्काल खत्म कर सकेगा और अनुज्ञप्तिधारी से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह उस सम्बन्ध में सूचना प्राप्त होने के ......दिन के भीतर उक्त निर्माणों को हटा ले । यदि अनुज्ञप्तिधारी , सूचना में अनुज्ञात की गई कालावधि के भीतर उक्त निर्माणों को हटाने में असफल रहे, तो अनुदाता के लिये यह विधिपूर्ण होगा कि वह उन्हें मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, 1959 (क्रमांक 20 सन 1959 ) , की धारा 248 के उपबन्धों में अन्तर्विष्ट प्रक्रिया के अनुसार अनुज्ञप्तिधारी के खर्चे से हटवा दे :

परन्तु अनुदाता के लिये यह विधिपूर्ण होगा कि वह अनुज्ञप्ति को खत्म न करने हेतु प्रतिफल के तौर पर अनुज्ञप्तिधारी से ऐसी बढ़ी हुई फीस प्राप्त करे जैसी कि अनुदाता अवधारित करे ।

(7) अनुज्ञप्तिधारी स्थानीय निकाय द्वारा नाली (ड्रेन) की सफाई में हस्तक्षेप नहीं करेगा अथवा उसके संधारण में बाधा नहीं करेगा ।

विशिष्ट शर्तें

(पुल-पुलिया, कन्वेयर बेल्ट या रोप ट्राली निर्माण की अनुज्ञप्तियों के लिए )

(8) पुल-पुलिया, कन्वेयर बेल्ट या रोप ट्राली की अनुमत ऊँचाई, तथा अन्य नाप (डाइमेंशन) निम्नानुसार होंगे-

(9) अनुज्ञप्तिधारी द्वारा पुल, पुलिया कन्वेयर बेल्ट या रोप ट्रॉली के निर्माण का संरचना रूपांकन (Structural Design) पंजीकृत संरचना यंत्री (Registered Structural Engineer) से तैयार कराकर, लोक निर्माण विभाग अथवा स्थानीय निकाय के कार्यपालन यंत्री से अनुमोदन कराया जाएगा ।

(10) पुल-पुलिया, कन्वेयर बेल्ट या रोप ट्राली की संरचना के रखरखाव का दायित्व अनुज्ञप्ति अवधि के दौरान अनुज्ञप्तिधारी पर होगा और अवधि के पश्चात् यदि नया लाइसेंस स्वीकृत नहीं किया जाता है तो ऐसी संरचना अनुज्ञप्ति अवधि के पश्चात् तीन माह की अवधि के भीतर अनुज्ञप्तिधारी द्वारा हटाई जाएगी । यदि नियत अवधि में ऐसी संरचना नहीं हटाई जाती है तो अनुदाता अनुज्ञप्तिधारी के व्यय पर उससे हटवा सकेगा अथवा राजसात कर सकेगा ।

(जिला नजूल निर्वर्तन समिति द्वारा स्वीकृत गौशाला निर्माण की अनुज्ञप्तियों के लिए) 650(175)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

(11 ) (क) गौशाला में पंचायत क्षेत्र के ऐसे गौवंश (गाय, बछड़ा) रखे जाएंगे जिनका कोई स्वामी न हों, अशक्त, बीमार या वृद्ध हों; ऐसे कम से कम पचास गौवंशी पशु उपलब्ध हों;

(ख) गौवंश के जीवित पशु व मृत पशु से होने वाली आय गौशाला के खातें में जमा होगी और उसका व्यय गौशाला के उन्नयन पर किया जाएगा ।

(ग) भूमि का उपयोग केवल गौशाला एवं तत्संबंधी गतिविधियों के लिए ही किया जा सकेगा;

(घ) लाइसेंस प्राप्त भूमि को विक्रय , पट्टा, उप - पट्टा, बंधक, किराये द्वारा अथवा अन्यथा हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा;

(ङ) भूमि के उपयोग का लाइसेंस अस्थाई तौर पर केवल गौशाला के उपयोग मात्र के लिए ही होगा; मूलतः यह भूमि शासकीय सम्पत्ति रहेगी तथा भू-अभिलेख इत्यादि में भूमिस्वामी के कॉलम में " मध्यप्रदेश शासन " लिखा रहेगा;

(च) गौशाला की स्थापना के पश्चात् संचालक समिति को गौशाला का पंजीयन मध्यप्रदेश गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड में कराना अनिवार्य होगा; और

(छ) गौशाला के संचालन के लिये मध्यप्रदेश गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड तथा उसके द्वारा जारी नियमों के अनुसरण में समय - समय पर जारी किये गये अनुदेशों का पालन करना होगा ।

अतिरिक्त शर्तें

(इस भाग में सक्षम प्राधिकारी द्वारा अधिरोपित अन्य शर्तें अंकित की जाएं)

(12)

(13)

अनुसूची

लाइसेंस पर दी गई भूमि का वर्णन

तहसील..........

आवेदित भूमि के विवरण जिल्ला

नगर सेक्टर...

राजस्व निरीक्षक वृत्त. पटवारी हल्का ग्राम खसरा कमांक/ शीट कमांक /ब्लॉक कमांक/ भूखण्ड कमांक.....

माप

नजरी नक्शा

चौहद्दी पूर्वमें

पश्चिम में

उत्तर में

दक्षिण में

3. जिसके साक्ष्य में पक्षकारों ने प्रत्येक मामलें में विनिर्दिष्ट की गई दिनांक तथा वर्ष को इस पर अपने-अपने हस्ताक्षर कर दिये हैं ।

साक्षीगण-

अनुदाता

1.

दिनांक

2.

साक्षीगण-

अनुज्ञप्तिधारी

1.

दिनांक मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650(176)

प्ररूप चौदह

(देखिये कंडिका 135)

मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश , 2020 के अध्याय सात 'भूमिस्वामी हक में कृषि प्रयोजन के लिये भूमि का आवंटन' के अंतर्गत भूमिस्वामी अधिकार पत्र

..मध्यप्रदेश

...जिला..

न्यायालय तहसीलदार, तहसील..

प्रकरण कमांक .

भूमिस्वामी अधिकार पत्र

मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश , 2020 के अध्याय सात के उपबंधों के अधीन द्वारा लिये गये निर्णय क्रमांक ...दिनांक ..माहवर्ष.... के अनुसरण में कलेक्टर जिल....... ..द्वारा जारी निर्देश क्रमांक..... ..दिनांक... माह........वर्ष... के अनुपालन में ग्राम जिला नजूल निर्वर्तन समिति, जिला.. क्रमांक........... ..राजस्व निरीक्षक वृत्त.. माता/पिता/ पति.. ..तहसील.. पटवारी हल्का ...जिला.. में स्थित भूमि, जिसके विवरण नीचे अनुसूची में दिये गये हैं, श्री.... ...निवासी.. जिल्ला मध्यप्रदेश को भूमिस्वामी अधिकार दिया जाता है । ..तहसील.....

2. अनुसूची में वर्णित भूमि उक्त भूमिस्वामी द्वारा मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, 1959 (कमांक 20 सन् 1959) के उपबंधों और उसके अंतर्गत बने नियमों के अधीन धारण की जाएगी ।

अनुसूची

सर्वेक्षण कमांक

क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

निर्धारण (भू-राजस्व) (रूपये में) ग्राम का नाम पटवारी हल्का कमांक, राजस्व निरीक्षक वृत्त एवं तहसील सहित

(4)

(3)

(2 )

(1)

योग

नक्शा की प्रति संलग्न है । (यदि किसी सर्वेक्षण संख्यांक का अंश भाग भूमिस्वामी अधिकार में किया गया है तो नक्शे में ऐसे भाग को स्पष्टताः दर्शाया जाए । )

तहसीलदार के हस्ताक्षर............

सील

दिनांक

तहसील...........जिला..........

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650(177)

प्ररूप पन्द्रह

(देखिए कंडिका 137)

मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश, 2020 के अंतर्गत स्थायी पट्टाधिकार को भूमिस्वामी अधिकार में संपरिवर्तन हेतु आवेदन

प्रति,

आवेदक/आवेदकों कास्वयं अनुप्रमाणित पासपोर्ट आकार का छायाचित्र सक्षम प्राधिकरी / कलेक्टर

जिला.... .(मध्यप्रदेश)

मैं / हम, मेरे / हमारे स्थायी पट्टाधिकार को भूमिस्वामी अधिकार में संपरिवर्तित कराना चाहते हैं, मेरे / हमारे विवरण निम्नानुसार हैं:-

1. (क) *आवेदक (पट्टाधारी) का नाम..

(ख) आधार नम्बर.....

(ग) माता/ पिता / पति का नाम......

(घ) स्थायी पता....

(ङ) वर्तमान डाक का पता....

(च) दूरभाष क्रमांक / मोबाईल नं० , (यदि कोई हो)..

(छ) ई- मेल (यदि कोई हो)..

* एक ही भूखण्ड के संयुक्त धारणाधिकार में एक से अधिक आवेदक (पट्टाधारी) होने... की दशा में प्रत्येक पट्टाधारी के विवरण ऊपर बिन्दु कमांक 1 के खण्ड (क) से (छ) तक पृथक- पृथक दिये जाएं ।

संपरिवर्तन के लिये एक भूखण्ड के एक से अधिक पट्टेदार होने पर आवेदन किसी एक के द्वारा भी प्रस्तुत किया जा सकेगा किन्तु ऐसे आवेदक को अन्य सहपट्टेदारों की ओर से प्राधिकृत करने हेतु वैध खास मुख्तारनामा प्रस्तुत करना होगा ।

2. पट्टादाता प्राधिकारी के विवरण

(यदि पट्टा राज्य सरकार या उसके द्वारा ऐसा करने के लिए प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा सीधे नहीं दिया गया है)

3. पट्टे के विवरण

(एक) पट्टाधारी का नाम

(दो) भू-खण्ड कमांक

(तीन) ब्लॉक कमांक..

(चार) ग्राम... / सेक्टर / नगर...

..वर्गमीटर /हेक्टेयर..

(पांच) भूमि (भू-खण्ड) का क्षेत्रफल..

(छः) तहसील ...जिला..

(सात) वर्तमान वार्षिक भू-भाटक : रूपये मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650(178)

(आठ) पट्टे का प्रयोजन जैसा कि पट्टा विलेख में दर्शाया गया है अथवा पट्टावधि के दौरान अनुमत परिवर्तन किया गया है....

तक

से

(नौ) पट्टा की कालावधि..

हाँ/ नहीं (दस) क्या भुगतान, (यदि कोई शेष हो) , के लिए ब्याज के साथ अद्यतन भू-भाटक संदत्त किया गया है?

हाँ/नहीं 4. क्या भूमि का स्थल पर उपयोग वही है जो पट्टानुसार अनुज्ञेय है?

हाँ/नहीं 5. क्या किसी न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष कोई विवाद लंबित है?

6. संलग्नक:-

(क) पट्टा विलेख की प्रति

(ख) स्थल मानचित्र

(ग) अनापत्ति प्रमाण-पत्र (यदि कंडिका 137 के अधीन अपेक्षित हो)

अन्य अभिलेख:-

(1 ) पट्टाधारी का विशेष (खास) मुख्तारनामा (यदि कोई हो)

(2) किसी न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष लंबित मामले का विवरण (यदि कोई हो) (3)

दिनांक:

आवेदक के हस्ताक्षर

स्थान:

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650(179)

प्ररूप सोलह

(देखिये कंडिका 140)

मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश, 2020 के अंतर्गत निष्पादित

हस्तांतरण-विलेख

यह हस्तांतरण विलेख आज दिनांक माह वर्ष 20........ को मध्यप्रदेश में स्थित पट्टे की भूमियों के संबंध में मध्यप्रदेश नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश , 2020 की कंडिका 137 में उल्लेखित सक्षम प्राधिकारी , कलेक्टर मध्यप्रदेश के राज्यपाल (जिन्हें इसके पश्चात् सक्षम प्राधिकारी कहा गया है, जिस अभिव्यक्ति के अंतर्गत जहां कि संदर्भ से वैसा अनुमत हो, उनके पदीय उत्तरवर्ती भी सम्मिलित हैं) प्रथम पक्ष तथा (जिन्हें इसके पश्चात् भूमिस्वामी कहा गया है, जिस अभिव्यक्ति के अंतर्गत, जहां कि संदर्भ में वैराा अनुमत हो, उनके पदीय उत्तरवर्ती, अंतरिती भी सम्मिलित हैं) द्वितीय पक्ष के बीच निष्पादित किया जाता है;

चूँकि, भूमि का समाविष्ट क्षेत्र का माप तहसील .............जिला से वर्णित है, दिनांक वर्गमीटर स्थित ग्राम/ सेक्टर मध्यप्रदेश , जो इससे संलग्न अनुसूची में अधिक विनिर्दिष्ट रूप माहवर्ष.. से प्रारंभ होने वाली दिनांक माह.........वर्ष........को समाप्त होने वाली कालावधि के लिए स्थायी पट्टे पर दी गयी थी, सक्षम प्राधिकारी द्वारा आदेश क्रमांक.... दिनांक.........माह....... वर्ष द्वारा अधिकार में देने हेतु संपरिवर्तन मंजूर किया गया है; प्रयोजन के लिये भूमिस्वामी और चूँकि, भूमिस्वामी द्वारा चालान क्रमांक दिनांक माह........वर्ष... .द्वारा संपरिवर्तन प्रभार रुपये (शब्दों में रुपये केवल) का भुगतान शासकीय खजाने में कर दिया गया है;

और , चूँकि, भूमिस्वामी सक्षम प्राधिकारी के आदेश क्रमांक ...दिनांक माह.........वर्ष... द्वारा नियत किए गये वार्षिक भू- राजस्व रुपये (शब्दों में रुपये केवल) का भुगतान करने हेतु जो मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- राजस्व का निर्धारण तथा पुनर्निर्धारण) नियम, 2018 के अध्यधीन होगा, सहमत है;

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650(180)

प्ररूप सत्रह

(देखिये कंडिका 143)

नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र

प्रति,

नजूल अधिकारी,

जिला-

विषयः- नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र देने विषयक ।

महोदय,

निवेदन है, कि मुझे अपनी भूमि पर निर्माण करने के लिये मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम, 2012 के नियम...... ..के अंतर्गत अनापत्ति प्रमाण पत्र की आवश्यकता है । मेरे तथा भूमि के विवरण नीचे दिये जा रहे हैं: -

1. आवेदक का नाम-

2. आवेदक के माता/ पिता/ पति का नाम-

3. पहचान पत्र का विवरण-

(पहचान पत्र- स्वप्रमाणित वोटर आई.डी. / आधार कार्ड / ड्राइविंग लाइसेंस / पासपोर्ट/ राष्ट्रीयकृत बैंक की पासबुक या राजपत्रित अधिकारी द्वारा फोटो सहित पहचान प्रमाण पत्र की प्रति इत्यादि) 4. आवेदक का पता-

5. मोबाईल नं०

6. ई-मेल (यदि कोई हो)

7. भूमि का विवरण जिस के लिये अनापत्ति प्रमाण पत्र चाहा जा रहा है-

जिला

..तहसील

नगरेतर क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले में नगरीय क्षेत्र में स्थित भूमि के मामले में

नगर

राजस्व निरीक्षक वृत्त

सेक्टर

पटवारी हल्का

ग्राम मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 सितम्बर 2020

650(181) क्र. ब्लॉक क्रमांक /भूखण्ड क्रमांक

आवेदित क्षेत्रफल (हेक्टेयर/ वर्गमीटर में)

कुल क्षेत्रफल (हेक्टेयर/ वर्गमीटर में)

1

2

3

योग

8. भूमि पर धारणाधिकार का स्वरूप- (भूमिस्वामी हक या पट्टेदार)

9. प्रयोजन जिस हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र चाहा जा रहा है-

10. संलग्न दस्तावेजों की सूची

(1) पहचान प्रमाण पत्र की स्वप्रमाणित प्रति

(2) भूखंड धारणाधिकार का प्रमाण

(3)

अनुमोदित ले-आउट प्लान की स्वप्रमाणित प्रति (यदि कोई है)

(4) नक्शा/ नजरी नक्शा

(5)

अनुरोध है कि मुझे उपरोक्त भूमि के संबंध में नजूल अनापत्ति प्रमाण- पत्र प्रदान करने का कष्ट करें ।

हस्ताक्षर

आवेदक का नाम

:: सत्यापन:

मैं ...माता /पिता/ पति ..निवासी ..सत्यनिष्ठा पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपर्युक्त जानकारी एवं वर्णित तथ्य पूर्ण एवं सत्य है । मैं यह भी घोषणा करता हूँ कि आवेदित भूखंड आवेदक के भूमिस्वामित्व हक /पट्टेदारी हक के धारणाधिकार का है और रिक्त नजूल भूमि/ सरकारी भूमि का अंश नहीं है और न ही रिक्त नजूल भूमि पर अतिक्रमित है ।

हस्ताक्षर स्थान-

आवेदक का नाम दिनांक- मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 सितम्बर 2020

650(182)

प्ररूप अट्ठारह

(देखिये कंडिका 143)

कार्यालय नजूल अधिकारी ..

जिला

राजस्व प्रकरण क्रमांक ...........

नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र

(दिनांक...../ ../20....)

प्रति,

'सुश्री....

विषयः- आपका आवेदन पत्र कमांक...

दिनांक .....

कमांक.. आवेदक श्री/ सुश्री ..वार्ड.. ...माता/ पिता/ पति का नाम ...निवासी ..के द्वारा जिला..... ..तहसील.. .....पटवारी हल्का ..ग्राम. .नगर ... सेक्टर ..में स्थित भूमि खसरा क्रमांक.... ब्लॉक नं. शीट नं. भूखंड क्रमांक ..रकबा ...वर्गमीटर में से ..वर्गमीटर के संबंध में नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र देने के आवेदन पत्र के संदर्भ में सूचित किया जाता है कि उक्त भूमि शासकीय नजूल भूमि नहीं है और न ही आवेदित भूखंड का कोई अंश शासकीय नजूल भूमि पर अतिक्रमित है ।

यह प्रमाण पत्र निम्न शर्तों के अध्यधीन होगा:-

1. भवन निर्माण के पूर्व नगर एवं ग्राम निवेश तथा स्थानीय निकाय से वांछित अनुमति लेना होगी ।

2. यह प्रमाण पत्र किसी को हक संबंधी कोई अधिकार प्रदान नहीं करता है और न ही किसी स्वत्व संबंधी प्रकरण में इसका उपयोग अनुमत होगा ।

3. उक्त भूमि के संबंध में विवाद निर्मित होने पर यह अनापत्ति किसी विधिक अथवा तथ्य संबंधी बिन्दु के निर्धारण में उपयोग नहीं की जा सकेगी ।

नजूल अधिकारी......

जिला

कार्यालय की सील

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार ,

मुजीबुर्रहमान खान , उपसचिव.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2020.

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 24 September 2020. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2020-09-24.325.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2020-09-24.325.Extraordinary.