मध्यप्रदेश
शासन
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सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
प्राधिकार से प्रकाशित
भोपाल , शुक्रवार, दिनांक 23 अक्टूबर 2020- कार्तिक 1 , शक 1942
क्रमांक 43 ]
विषय-सूची
भाग 1.- ( 1 ) राज्य शासन के आदेश, ( 2 ) विभाग प्रमुखों के आदेश , (3) उच्च न्यायालय के आदेश और अधिसूचनाएं, (4) राज्य शासन के संकल्प, ( 5 ) भारत शासन के आदेश और अधिसूचनाएं, ( 6 ) निर्वाचन आयोग , भारत की अधिसूचनाएं, ( 7 ) लोक- भाषा परिशिष्ट.
भाग 2.- स्थानीय निकाय की अधिसूचनाएं.
भाग 3.-( 1 ) विज्ञापन और विविध सूचनाएं.
(2) सांख्यिकीय सूचनाएं.
( 2 ) प्रवर समिति के प्रतिवेदन, भाग 4.- ( क ) ( 1 ) मध्यप्रदेश विधेयक, (3 ) संसद् में पुरःस्थापित विधेयक,
(ख) ( 1 ) अध्यादेश, ( 2 ) मध्यप्रदेश अधिनियम, (3) संसद् के अधिनियम,
(ग) ( 1 ) प्रारूप नियम, ( 2 ) अंतिम नियम.
भाग १
राज्य शासन के आदेश
गृह विभाग मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल भोपाल , दिनांक 9 अक्टूबर 2020
क्र. एफ 1 ( ए) 37-2020- ब- 2- दो. राज्य शासन, श्री विकास पाठक , भापुसे , सहायक पुलिस महानिरीक्षक, ( कल्याण ) , पुलिस मुख्यालय, भोपाल को दिनांक 30 से 31 जुलाई 2020 तक , दो दिवस लघुकृत/ परिवर्तित अवकाश की कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान करता है.
(2 ) उक्त अवकाश के उपभोग के एवज में इनके लघुकृत अवकाश खाते से चार दिवस अर्धवैतनिक अवकाश घटाया जाता है.
(3 ) अवकाशकाल में श्री विकास पाठक, भापुसे, को अवकाश वेतन एवं भत्ता उसी प्रकार देय होगा जो उन्हें अवकाश पर जाने के पूर्व मिलता था.
3801
(4 ) प्रमाणित किया जाता है कि यदि श्री विकास पाठक, भापुसे, उक्त अवकाश पर नहीं जाते तो अपने पद पर बने रहते.
भोपाल, दिनांक 13 अक्टूबर 2020
क्र. एफ 1 ( ए) 59-2012- ब-2- दो. विभागीय समसंख्यक आदेश दिनांक 25 मई 2020 द्वारा श्री अशोक गोयल , भापुसे, पुलिस उप महानिरीक्षक, अ.अ.वि. , पुलिस मुख्यालय का पूर्व स्वीकृत अर्जित अवकाश अपरिहार्य कारणों से उपभोग नहीं किये जाने के कारण निरस्त किया जाता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, अन्नू भलावी , अवर सचिव.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2020.
3802
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
विधि और विधायी कार्य विभाग
भोपाल , दिनांक 13 अक्टूबर 2020
फा. क्र. 2933-2020- इक्कीस ब ( एक ) .- राज्य शासन , एतद्वारा , उच्च न्यायालय , जबलपुर एवं लोकायुक्त संगठन, भोपाल में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ निम्नांकित उच्च न्यायिक सेवा के अधिकारियों का स्थानांतरण नियमित न्यायालयों में किये जाने के फलस्वरूप उनकी सेवाएं प्रतिनियुक्ति से वापस लेकर मध्यप्रदेश, उच्च न्यायलय, जबलपुर को सौंपता हैं:-
नवीन पदस्थापना क्र.
नाम तथा पद
(3)
(1)
(2)
पीठासीन अधिकारी विशेष न्यायालय की हैसियत से श्री अजय प्रकाश मिश्र के स्थान पर मुरैना में.
1 श्री जितेन्द्र कुमार शर्मा (सीनियर ) , रजिस्ट्रार (सतर्कता) , उच्च न्यायालय , जबलपुर.
पीठासीन अधिकारी , विशेष न्यायालय की हैसियत से श्री कृष्णमूर्ति मिश्रा के स्थान पर दतिया में.
2 श्री मधुसूदन मिश्रा, विधिक सलाहकार, लोकायुक्त संगठन, भोपाल के पद से प्रतिनियुक्ति से लौटने पर.
फा. क्र. 2947-2020- इक्कीस ब ( एक ) . - राज्य शासन, उच्च न्यायालय की अनुशंसा पर उच्चतर न्यायिक सेवा के अधिकारी श्री प्रशांत कुमार, सचिव , जिला विधि सेवा प्राधिकरण (डी.एल.एस.ए. ) , विदिशा को अस्थायी रूप से, आगामी आदेश होने तक, उनके द्वारा कार्यभार ग्रहण करने की दिनांक से मध्यप्रदेश शासन, विधि और विधायी कार्य विभाग , भोपाल में अतिरिक्त सचिव के पद पर प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त करता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार , सत्येन्द्र कुमार सिंह, प्रमुख सचिव.
भोपाल , दिनांक 12 अक्टूबर 2020
पंजी क्र. 3665-2020- इक्कीस - ब ( दो ) .- राज्य शासन, एतद्वारा , तहसील - मो. बडोदिया, जिला शाजापुर में विभागीय आदेश दिनांक 12 जनवरी 2009 द्वारा नियुक्त नोटरी, श्री विश्वजीत रावल का दिनांक 18 अप्रैल 2019 को निधन होने के कारण उनका नाम शासन द्वारा संधारित नोटरी पंजी से विलोपित करता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, एस. पी. शुक्ल, अपर सचिव.
श्रम विभाग
मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल
भोपाल , दिनांक 1 अक्टूबर 2020
क्र. एफ 9-2-2008- बी- सोलह कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 (34 सन् 1948 ) की धारा 87 द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य शासन, एतद्वारा, इस विभाग की अधिसूचना क्र. एफ 9-2-99- ब- सोलह, दिनांक 11 अगस्त 2014 के अनुक्रम में मेसर्स इंडियन वर्क्स कॉ-आपरेटिव सोसायटी लिमिटेड, जबलपुर को उक्त अधिनियम के प्रावधान अन्तर्गत दिनांक 1 अक्टूबर 2020 से 30 सितम्बर 2021 तक की अवधि के लिए इस शर्त पर छूट प्रदान करता है कि कर्मचारियों को सोसायटी द्वारा दी जा रही सुविधायें कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा दी जा रही सुविधाओं से कम नहीं होगी . सोसायटी द्वारा वर्तमान में दी जा रही सुविधाओं के अंतिरिक्त कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा दिया जाने वाला रिहेबिलिटेशन अलाउन्स की सुविधा भी प्रदान की जावेगी.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, छोटे सिंह, उपसचिव.
औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल भोपाल, दिनांक 5 अक्टूबर 2020
क्र. एफ- 16-56-2020-ए - ग्यारह.- बॉयलर एक्ट, 1923 की धारा 34 ( 2 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राज्य शासन , मेसर्स, झाबुआ पॉवर लि. , ग्राम- बरेला , पोस्ट ऑफिस, अतरिया , जिला- सिवनी मध्यप्रदेश को वाष्पयंत्र क्रमांक एमपी/ 5054 को निम्नलिखित शर्तों पर उक्त अधिनियम की धारा 6 ( सी ) के प्रर्वतन से दिनांक 10 नवम्बर 2020 तक की अवधि हेतु छूट प्रदान 3803
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
करता है:-
1. संदर्भाधीन बायलर को पहुंचने वाली किसी हानि की सूचना बायलर्स अधिनियम , 1923 की धारा 18 ( 1 ) की अपेक्षानुसार तत्काल संचालक बायलर मध्यप्रदेश , भोपाल को दी जावेगी एवं दुर्घटना होने की दिनांक से छूट की मान्यता समाप्त समझी जावेगी .
2. उपर्युक्त अधिनियम की धारा 12 तथा 13 की अपेक्षानुसार संचालक बायलर मध्यप्रदेश के पूर्वानुमोदन के बिना संदर्भाधीन बायलर में किसी प्रकार का संरचनात्मक परिवर्तन अथवा नवीनीकरण नहीं किया जावेगा.
3. संदर्भाधीन बायलर का सरसरी दृष्टि से निरीक्षण किये जाने पर यदि खतरनाक स्थिति में पाया गया तो छूट समाप्त हो जावेगी.
4. नियतकालिक सफाई और नियमित रूप से तलक्षट निकालने (रेग्युलर ब्लोडाउन ) का कार्य किया जावेगा और उसका अभिलेख रखा जावेगा.
5. भारतीय बायलर अधिनियम विनियम , 1950 के विनियम 385. क के अपेक्षानुसार संदर्भाधीन बायलर के संबंध में वार्षिक निरीक्षण शुल्क अग्रिम दी जावेगी.
6. यदि राज्य शासन आवश्यक समझे जो प्रश्नांकित छूट में संशोधन कर सकता है अथवा उसे वापस ले सकता है.
7. आवेदक द्वारा दिये गये आवेदन पत्र एवं संचालक वाष्पयंत्र द्वारा की गई अनुशंसा के आधार पर छूट अवधि में किसी भी तरह की दुर्घटना का दायित्व आवेदक/फर्म/इकाई का होगा.
आदेश दिया जाता है कि इसे मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशित किया जावे.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
बी. विजय दत्ता , उपसचिव.
वाणिज्यिक कर विभाग मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल
भोपाल , दिनांक 9 अक्टूबर 2020
क्र. एफ ए- 6-06-2014-1- पांच. राज्य शासन, एतद्वारा , श्री प्रदीप कुमार व्यास , सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश को मध्यप्रदेश वैट अधिनियम, 2002 की धारा 4 की उपधारा ( 5 ) में किए गए प्रावधान अनुसार मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर अपील बोर्ड में न्यायिक सदस्य के पद पर 65 वर्ष की आयु अथवा 05 वर्ष की अवधि ( जो भी पहले हो ) तक के लिए अस्थायी रूप से नियुक्त किया जाता है .
(2 ) श्री प्रदीप कुमार व्यास, न्यायिक सदस्य का मुख्यालय , भोपाल नियत किया जाता है.
( 3 ) श्री प्रदीप कुमार व्यास, उन्हें प्राप्त होने वाली पेंशन कम करके न्यायिक सदस्य के रूप में ऐसे वेतन तथा भत्ते प्राप्त करेंगे जो उन्होंने सेवानिवृत्ति के समय उच्चतर न्यायिक सेवा के सदस्य के रूप में अंत में प्राप्त किये थे.
क्र. एफ ए- 6-6-2014-1- पांच. राज्य शासन, एतद्वारा , श्री रणजीत सिंह ठाकुर, से. नि. जिला एवं सत्र न्यायाधीश को वैट अधिनियम की धारा 4 की 3A में किए गए प्रावधान अनुसार 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक ( दिनांक 17 जून 2021 तक ) के लिए मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर अपील बोर्ड में अतिरिक्त न्यायिक सदस्य के पद पर इस शर्त के अध्यधीन नियुक्त किया जाता है कि दिनांक 31 मार्च 2021 तक के लिए स्वीकृत अतिरिक्त न्यायिक सदस्य के पद की निरंतरता शासन से आगामी अवधि के लिए प्राप्त नहीं होने पर इनकी नियुक्ति दिनांक 31 मार्च 2021 तक के लिए ही रहेगी.
(2 ) श्री रणजीत सिंह ठाकुर , अतिरिक्त न्यायिक सदस्य का मुख्यालय , भोपाल नियत किया जाता है.
(3 ) श्री रणजीत सिंह ठाकुर को प्राप्त होने वाली पेंशन कम करके न्यायिक सदस्य के रूप में ऐसे वेतन तथा भत्ते प्राप्त करेंगे जो उन्होंने सेवानिवृत्ति के समय उच्चतर न्यायिक सेवा के सदस्य के रूप में अंत में प्राप्त किये थे.
(4) श्री रणजीत सिंह ठाकुर की नियुक्ति दिनांक 10 अक्टूबर 2020 या उनके द्वारा पदभार ग्रहण करने , इनमें से जो भी बाद में हो, से प्रभावशील होगी.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
रत्नाकर झा , उपसचिव.
3804
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
वन विभाग
मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल
भोपाल, दिनांक 12 अक्टूबर 2020
क्रमांक / एफ 15-11 / 2018 /10-2:: मध्यप्रदेश वन (मनोरंजन एवं वन्यप्राणी अनुभव) नियम, 2015 के नियम 3 (1 ) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये राज्य सरकार एतदद्वारा निम्न अनुसूची में दर्शित क्षेत्र को मध्यप्रदेश राजपत्र में इस अधिसूचना प्रकाशित होने के दिनांक से मनोरंजन क्षेत्र घोषित करता है : -
अनुसूची
सीमायें
कक्ष क्रमांक
परिक्षेत्र
स्थल क्रमांक वनमण्डल
समर्धा
1. भोपाल
समर्धा जंगल कैम्प क्षेत्रफल (हेक्टयर)
450.00
आरक्षित वन-169,
170, 180,181 , 179
कटनी
2.
झिरिया
बड़वारा
पूर्व- ग्राम चौपट्टा, गोपीसुर , सतकुण्डा पश्चिम- ग्राम समर्धा उत्तर- बीट गीदगढ़ परिक्षेत्र रायसेन दक्षिण- बीट उत्तर पडरिया कक्ष क्रमांक पी.एफ. 185, 186, 187 54.00
आरक्षित वन-427,
428
पूर्व- ग्राम झिरिया की सीमा पश्चिम-ग्राम पिपरिया कलॉ उत्तर- कक्ष क्रमांक 428 दक्षिण- ग्राम कुठिया महगंवा की सीमा
आरक्षित वन-413
बायसन 3.
रूखड़
हाईवे रिट्रीट पेंच टाईगर रिजर्व, सिवनी
रूखड
4.
दुधिया
तालाब क्षेत्र 1.80 पूर्व- बायसन नाला पश्चिम-राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 7 उत्तर- बायसन नाला दक्षिण- प्रशिक्षण भवन रूखड़ 60.00
आरक्षित
वन -413 ,
421
पेंच टाईगर रिजर्व, सिवनी
पूर्व- दलदली तालाब पश्चिम-राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 7 उत्तर- दुधिया नर्सरी पहुँच मार्ग दक्षिण- दुधिया तालाब
0.0929
आरक्षित वन-390
5.
घाटकोहका
पेंच टाईगर रिजर्व, सिवनी
सामुदायिक सांस्कृतिक एवं प्रशिक्षण केंद्र कर्माझिरी पूर्व- कर्माझिरी वनग्राम पश्चिम-टाईगर रिजर्व का कोर क्षेत्र उत्तर- कर्माझिरी- टिकारी मार्ग दक्षिण- वन विश्राम गृह कर्माझिरी
0.801
आरक्षित वन-680
गोहपारू सीतामढ़ी 6. दक्षिण शहडोल
पूर्व- वन कक्ष क्रमांक 679 पश्चिम- वन कक्ष क्रनांक 679 एवं राजस्व क्षेत्र देवदहा की सीमा उत्तर- वन कक्ष क्रमांक 680 दक्षिण- वन कक्ष क्रमांक 680 3805
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
सीमायें
कक्ष क्रमांक
स्थल
वनमण्डल परिक्षेत्र
क्रमांक
क्षेत्रफल (हेक्टयर)
1.000
आरक्षित वन-662
पूर्व- वन कक्ष क्रमांक 662 गोहपारू
7.7
जलहली शिव मंदिर
पश्चिम- वन कक्ष क्रमांक 662 उत्तर- वन कक्ष क्रमांक 662
दक्षिण- वन कक्ष क्रमांक 662 क्रमांक / एफ 15-11 / 2018 /10-2:: मध्यप्रदेश वन (मनोरंजन एवं वन्यप्राणी अनुभव) नियम, 2015 के नियम 4 (1 ) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये राज्य सरकार एतदद्वारा निम्न अनुसूची में दर्शित क्षेत्र को मध्यप्रदेश राजपत्र में इस अधिसूचना प्रकाशित होने के दिनांक से वन्यप्राणी अनुभव क्षेत्र घोषित करता है :-
अनुसूची
सीमायें
कक्ष क्रमांक
स्थल
परिक्षेत्र
वनमण्डल
क्रमांक
क्षेत्रफल (हेक्टयर)
5.20 पूर्व- कक्ष क्रमांक आर.एफ. 52 हटा
आरक्षित वन-46
झारखण्डी
दमोह
1.
पश्चिम- कक्ष क्रमांक आर.एफ. 45
उत्तर- कक्ष क्रमांक आर.एफ.
50 एवं ग्राम करकोही
दक्षिण- ग्राम गुलाब टपरिया
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
एच. एस. मोहन्ता, सचिव.
भोपाल , दिनांक 12 अक्टूबर 2020
क्रमांक एफ 15-11-2018 - दस- 2.- भारत के संविधान के अनुच्छेद 340 के खण्ड ( 3 ) के अनुसरण में, इस विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ 15-11-2018 - दस -2 , दिनांक 12 अक्टूबर 2020 का अंग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतद्वारा प्रकाशित किया जाता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
एच. एस. मोहन्ता, सचिव.
3806
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
Bhopal , the 12th October 2020
No./F 15-11 / 2018 / 10-2 :: In exercise of the powers conferred by the rule 3 ( 1 ) of Madhya Pradesh Forest ( Recreation and Wildlife Experience ) Rules , 2015. The State Government hereby declares the area mentioned in the following schedule as Recreational Area from the date of publication of this notification in the Madhya Pradesh Gazette : -
Schedule
Site Compartment no.
Forest Division
S. No.
Forest Range
Samardha
1. Bhopal
Boundaries
Area (inHact)
450.00 East- Village Chopatta , Gopisor , Satkunda
Reserve Fores -
169, 170, 180, 181 ,
179
Samardha Jungal Camp
Badwara
2.
Katni
Jhiriya West- Village Samardha
North- Beat Gidhagarh Raisen Range South- Beat North Padariya PF- 185, 186,187
54.00 East-Boundary of Village Jhiriya.
West- Village Pipariyakalaw
Reserve Forest-
427, 428
North- Compartment no 428
South- Boundary of Village Kuthiya Mahagava
East- Bison Nala
1.80
Reserve Forest -413
Rukhad
3.
Bison highway retreat Pench Tinger Reserve, Seoni
Rukhad
4.
Dudhiya talab area West- National highway no . 7 North- Bison Nala
South- Training Center Rukhad 60.000 East-Daldali talab
West-National highway no . 7
Reserve Forest -
413, 421
Pench Tinger Reserve, Seoni
North-Dudhiya nursery access route.
South- Dudhiya talab .
0.0929 East- Village Karmajhiri
Reserve Forest-390
Ghotkohka
5.
Pench Tinger Reserve, Seoni
Communit yCultural and Training Center, Karmajhiri West-Tiger reserve core area.
North - Karmajhiri to Tikari road .
South-Forest rest house Karmajhiri 0.801
Reserve Forest - 680
Sitamani 6.
Gohparoo
South Shahdol
East- Forest Compartment no . 679 West-Forest Compartment no . 679 and boundary of Devdha revenue area .
North- Forest Compartment no . 680 1.000
South- Forest Compartment no . 680 East- ForestCompartment no . 662
Reserve Forest - 662
7.
Gohparoo Jalhali Shiv Mandir West- Forest Compartment no . 662 North- Forest Compartment no . 662 South- Forest Compartment no . 662 3807
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
No./F 15-11 /2018/ 10-2 :: In exercise of the powers conferred by the rule 4( 1 ) of Madhya Pradesh Forest (Recreation and Wildlife Experience ) Rules , 2015. The State Government hereby declares the area mentioned in the following schedule as Wildlife Experience Area from the date of publication of this notification in the Madhya Pradesh Gazette. : -
Schedule
Boundaries
Site
Compartment no . Area (inHact)
Forest Division
S. No.
Forest Range
5.20 East- Compartment No RF 52
Reserve Forest -46
Jharkhandi
Hata
Damoh
1.
West- Compartment No RF 45
North- Compartment No RF 50 and Village Karkohi
South- Village Gulab Tapariya
By order and in the name of the Governor of Madhya Pradesh ,
H. S. MOHANTA , Secy .
नगरीय विकास एवं आवास विभाग
मंत्रालय , वल्लभ भवन , भोपाल भोपाल , दिनांक 13 अक्टूबर 2020
सूचना
क्रमांक एफ-3/ 59/ 2017 /18-5, विभागीय समसंख्यकं सूचना दिनांक19 मार्च 2020 (मध्यप्रदेश साधारण राजपत्र में दिनांक 01 मई 2020 को प्रकाशित) के द्वारा मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, की धारा 19(2) के अंतर्गत जावरा विकास योजना प्रारूप 2031 में उपांतरण पर आपत्ति/ सुझाव आमंत्रित किये गये थे ।
कोविड-19 महामारी के परिप्रेक्ष्य में किये गये लॉकडाउन के कारण संभव है कि, आमजन उक्त विभागीय सूचना पर आपत्ति / सुझाव प्रस्तुत करने से वंचित रहे हो । अतः इस संबंध में पुनः विभागीय सूचना दिनांक 19 मार्च 2020 (म०प्र० राजपत्र मे प्रकाशनं दिनांक 01 मई 2020 ) की निरंतरता में प्रस्तावित उपांतरणों का विवरण पुनः सूचना के माध्यम से प्रकाशित किया जा रहा है उपांतरणों का विस्तृत विवरण वेबसाईट www.mptownplan.nic.in पर उपलब्ध है तथा उनका निम्नलिखित कार्यालयों में कार्यालीन समय में अवकाश के दिन को छोड़कर सूचना प्रकाशन के दिनांक से तीस दिवस की कालावधि में निरीक्षण किया जा सकेगा ।
1. अवर सचिव, म०प्र ० नगरीय विकास एवं आवास विभाग कक्ष क्रमांक ए 227 वी.बी. 2, द्वितीय तल मंत्रालय भोपाल, मध्य प्रदेश
2. कलेक्टर, जिला रतलाम, मध्य प्रदेश [ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
3808
3. उप संचालक , नगर तथा ग्राम निवेश, जिला कार्यालय - रतलाम, मध्य प्रदेश
4. मुख्य नगर पालिका अधिकारी, जावरा जिला- रतलाम, मध्य प्रदेश
उपांतरण का विवरण
अध्याय -4
1. कंडिका 4.6.1 के पश्चात निम्नलिखित स्थापित किया जाना प्रस्तावित है :-
4.6.2 सूचना प्रौद्योगिकी हेतु मापदण्ड सूचना प्रौद्योगिकी के मापदण्ड म.प्र. भूमि विकास नियम 2012 के नियम 42(क) के अनुसार मान्य होगा ।
2. 4.18 उपयोग परिक्षेत्रों में उपयोग परिसरों की अनुमति
सारणी 4- सा -7 के अनुक्रमांक 5 के कॉलम 2 सार्वजनिक एवं आर्द्धसार्वजनिक उपयोग में गैर प्रदूषणकारी उद्योग अतःस्थापित किया जाना प्रस्तावित है ।
3. सारणी 4 - सा -7 अंत में टीप के पश्चात निम्नानुसार अंतःस्थापित किया जाना प्रस्तावित है । व्याख्या:
i) सूचना प्रौद्योगिकी से तात्पर्य है कि म०प्र ० शासन द्वारा सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग की नीति पत्र में वर्णित उद्योग एवं संस्थायें ।
ii) गैर प्रदूषणकारी उद्योग से तात्पर्य है कि म०प्र ० प्रदूषण निवारण मंडल द्वारा सफेद श्रेणी में वर्गीकृत उद्योग ।
iii) कृषि पर्यटन सुविधा से तात्पर्य है कि मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम 2012 के नियम 17 (क) में वर्णित अनुसार
टीपः- उपरोक्त i एवं ii के भूखण्ड हेतु पहुंच मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई 12.0 मीटर होगी । 4. जावरा विकास योजना मानचित्र 2031
1. दिल्ली- मुम्बई कॉरीडोर (8 लेन एक्सप्रेसवे) विकास योजना में समाहित किया जाता है । (ग्राम लालाखेड़ा एवं आक्यावेनी) ।
2. खाचरोद मार्ग (खाचरोद नाका से निवेश क्षेत्र की सीमा तक) तथा पहाड़िया मार्ग (पहाड़िया रोड चौराहे से निवेश क्षेत्र की सीमा तक) के दोनो ओर 150.00 मीटर गहराई तक मिश्रित भूमि उपयोग मान्य होगा।
उक्त उपांतरण विवरण के संबंध में आपत्ति या सुझाव हो तो उसे अवर सचिव, मध्य प्रदेश शासन, नगरीय विकास एवं आवास विभाग मंत्रालय भोपाल के कार्यालय में लिखित रूप से सूचना प्रकाशन की दिनांक से 30 दिवस की कालावधि में प्रस्तुत किये जा सकते है । समयावधि में प्राप्त आपत्ति/ सुझाव पर शासन द्वारा विचारोपरांत निर्णय लिया जा सकेगा । 3809
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
क्रमांक - एफ-3-61 /2020 /18-5:- मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम (संशोधित) 1973 (क्रमांक-1 सन् 2012) , की धारा 23- " क " की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , राज्य सरकार एतद् द्वारा आयुक्त सह संचालक नगर तथा ग्राम निवेश भोपाल की सूचना क्रमांक-2906 /06 / उपां/ टी सी/ उज्जैन /2020 दिनांक 04/08/2020 द्वारा प्रस्तावित किये गये अनुसार प्रवर्तित उज्जैन विकास योजना 2021 में निम्नानुसार उपांतरण की पुष्टि करती है । उपांतरण ब्यौरे एवं शर्ते निम्नानुसार है:-
अनुसूची
क्रं.
ग्राम
खसरा क्रमांक
क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
विकास योजना में निर्दिष्ट भू- उपयोग
उपांतरण पश्चात् प्रस्तावित भू- उपयोग 1.
2.
3.
4.
5.
6.
5.027
1 कस्बा उज्जैन 1738
मिश्रित
1909 6.908
आवासीय, सार्वजनिक एवं अर्ध सार्वजनिक
1920 6.083
18.018 हेक्टेयर
कुल रकबा
शर्तेः-
1 उक्त मिश्रित भूमि उपयोग परिक्षेत्र में स्वीकृत एवं स्वीकार्य गतिविधियों हेतु आवासीय , वाणिज्यिक तथा सार्वजनिक एवं अर्ध सार्वजनिक उपयोग परिक्षेत्र में उल्लेखित समस्त गतिविधियां मान्य होगी ।
2 उक्त मिश्रित गतिविधियों हेतु नियमन , मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम, 2012 के प्रावधानानुसार लागू होंगे ।
3. उपरोक्त उपांतरण उज्जैन विकास योजना 2021 का एकीकृत भाग होगा । [ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
3810
क्रं.एफ-3-68/2018/18-5, मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 (क्रमांक 23 सन् 1973) की धारा 23 सहपठित धारा 19 की उपधारा (4) के अधीन एतद द्वारा सूचना दी जाती है, कि राज्य सरकार द्वारा संचालनालय, नगर तथा ग्राम निवेश की सूचना क्रमांक-1817 / वि.यो . 496/2018, भोपाल दिनांक 31/03/2018 द्वारा प्रकाशित पिपरिया विकास योजना 2021 में उपांतरण हेतु सूचना द्वारा अपेक्षित किये गये अनुसार पिपरिया निवेश क्षेत्र के लिये विकास योजना 2021 में उपांतरण नीचे दी गई अनुसूची के अनुसार मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 19 (1 ) में अनुमोदित किया गया है तथा योजना की प्रति का निम्नलिखित कार्यालयों में कार्यालय समय के दौरान निरीक्षण किया जा सकेगा , अर्थात्ः-
1. आयुक्त नर्मदापुरम, संभाग होशंगाबाद म०प्र० । 2. कलेक्टर होशंगाबाद, जिला होशंगाबाद म०प्र० । 3. उप संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश, जिला कार्यालय होशंगाबाद ।
4. मुख्य नगरपालिका अधिकारी , नगर पालिका परिषद, पिपरिया ।
अनुसूची
अध्याय
सारणी/ कंडिका
/कॉलम का
सरल क्रमांक
विकास योजना में भूमि में उपयोग
क्रं. विकास योजना (नगर कानाम)
विकास योजना की सारणी / कंडिका क्रमांक 1
2
3
4
5
सारणी 6-सा-12
सार्वजनिक 6 एवं अर्द्धसार्वजनिक
1 पिपरिया विकास योजना 2021
6
कृषि
सारणी 6-सा-12 व्याख्या-
उपांतरण प्रस्ताव उपांतरित कॉलम क्रमांक ( 5) एवं कॉलम क्रमांक ( 6) में अतिरिक्त प्रस्तावित स्वीकृत उपयोग
6
7
4
गैर प्रदूषणकारी उद्योग **
7
सूचना प्रौद्योगिकी * गैर प्रदूषणकारी उद्योग ** कृषि पर्यटन सुविधा *** एवं गोदाम के स्थान पर समस्त प्रकार के भण्डारण जो सक्षम अधिकारी द्वारा स्वीकृत होंगे ।
i *सूचना प्रौद्योगिकी से तात्पर्य है कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा सूचना एवं प्रौद्यौगिकी विभाग की नीति पत्र में वर्णित उद्योग एवं संस्थाये । ii **गैर प्रदूषणकारी उद्योग से तात्पर्य है कि मध्य प्रदेश प्रदूषण निवारण मंडल द्वारा सफेद श्रेणी में वर्गीकृत उद्योग ।
iii *** कृषि पर्यटन सुविधा से तात्पर्य है कि मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम 2012 के नियम-17(क) में वर्णित अनुसार ।
टीपः- उपरोक्त i एवं ii के भूखण्ड हेतु पहुंच मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई 12.0 मीटर होगी ।
विकास योजना में किया गया उपांतण मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम , 1973 की धारा 19 की उपधारा (5) के प्रावधान अनुसार राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रवर्तित होगा । 3811
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भाग 1 ]
क्रमांक- एफ- 3-13 / 2015 / 18-5: - मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम उपांतरण ब्यौरे निम्नानुसार है:-
(संशोधित) 1973 (क्रमांक-1 सन् 2012 ) , की धारा 23-" क " की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , राज्य सरकार एतद् द्वारा आयुक्त सह- संचालक नगर तथा ग्राम निवेश भोपाल की सूचना क्रमांक-6633 / 267 /उपां / टीसी / भोपाल / 2017 दिनांक 01/12/2017 द्वारा प्रस्तावित किये गये अनुसार प्रवर्तित भोपाल विकास योजना 2005 में निम्नानुसार उपांतरण की पुष्टि करती है ।
अनुसूची ग्राम
क्रं.
खसरा क्रमांक
उपांतरण पश्चात् भू-उपयोग
क्षेत्रफल
(वर्गमीटर मे)
4. 2.
1.
3 .
3808
330
अरहेडी
1
392
333
900
333
9000 नरेला शंकरी
2
113/1
4920
113/1
340
113/2/7
2160
113/2/8 113/2/6
13080
113/1
340
113/2/7
120
122
4300
323/122
6144
113/21
विकास योजना में निर्दिष्ट भू-उपयोग
6.
5.
मार्ग
वनस्पति उद्यान
मार्ग
वनस्पति उद्यान
वनस्पति उद्यान
मार्ग
मार्ग
आवासीय
मार्ग
वनस्पति उद्यान
आवासीय
मार्ग
मार्ग
आवासीय
आवासीय
मार्ग
आवासीय
मार्ग
आवासीय
मार्ग
आवासीय
मार्ग
आवासीय
वनस्पति उद्यान
45504 वर्गमीटर
कुल रकबा
उपरोक्त उपांतरण भोपाल विकास योजना 2005 का एकीकृत भाग होगा ।
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
शुभाशीष बैनर्जी, उपसचिव.
[ भाग 1 3812
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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग
मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल
भोपाल , दिनांक 26 जून 2020 क्र. एफ 02-01-2020-अ-73.-
S.O ............ ( E ) , Whereas , the use of Aadhaar as an identity document for delivery of services or benefits or subsidies simplifies the Government delivery processes , brings in transparency and efficiency, and enables beneficiaries to get their entitlements directly in a convenient and seamless manner by obviating the need to produce multiple documents to prove one's identity;
And whereas , the Department of Micro , Small & Medium Enterprises , Madhya Pradesh ( hereinafter referred to as the Department ) , is administering the 'Mukhya Mantri Yuva Udymi Yojna ' ( hereinafter referred to as the scheme ) by providing loan to young entrepreneur for self- employment, which is being implemented through the Directorate of industries , Madhya Pradesh at the state level ( hereinafter referred to as theImplementing Agency ;
And whereas , under the Scheme , margin money subsidy, interest subsidy & CGTMSE fee ( hereinafter referred to as the benefit ) is given to the young entrepreneur (hereinafter referred to as the beneficiaries ) , by the Implementing Agency as per the extant Scheme guidelines;
And whereas , the aforesaid Scheme involves recurring expenditure incurredfrom theConsolidated Fund of Madhya Pradesh ;
Now, therefore , in pursuance of section 7 of the Aadhaar (Targeted Delivery of Financial and other Subsidies , Benefits and services ) Act , 2016 ( 18 of 2016) ( hereinafter referred to as the said Act) , the government of Madhya Pradesh , hereby notifies the following , namely: - 3813
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भाग 1 ]
1. (1) Anindividual eligible for receiving the benefits under the scheme shall herėby be required to furnish proof of possession of the Aadhaar number or undergo Aadhaar authentication .
(2) Any individual desirous of availing benefits under the Scheme , who does not possess the Aadhaar number or, has not yet enrolled for Aadhaar , shall be required to make application for Aadhaar enrolment before registering for the Scheme provided that he is entitled to obtain Aadhaar as per section 3 of the said Act, and such individuals shall visit any Aadhaar enrolment centre (list available at the Unique identification Authority of India ( UADAI ) website www.uidai.gov.in ) to getenrolled for Aadhaar .
(3) Asper regulation 12 of the Aadhaar ( Enrolment and Update) Regulations, 201.6, the Department through its Implementing Agency , is required to offer Aadhaar enrolment facilities for the beneficiaries who are not yet enrolled for Aadhaar and in case there is no Aadhaar enrolment centre located in the respective Block or Taluka or Tehsil , the Department through its Implementing Agency shall provide Aadhaar enrolment facilities at convenient locations in coordination with the existing Registrars of UIDAI or by becoming a UIDAI Registrar themselves:
Provided that till the time Aadhaar is assigned to the individual , benefits under the scheme shall be given to such individual , subject to the production of the following documents , namely:
(a) if he has enrolled , his Aadhaar Enrolment identification slip; and
(b) any one of the following documents , namely : -
(i) Bank or Post office passbook with photo ; or
(ii ) Permanent Account Number ( PAN ) Card; or
(jii ) Passport ; or
(iv) Ration Card; or
(v) Voter identity Card ; or
(vi ) MGNREGA card , or
(vii ) Kisan Photo passbook , or [ भाग 1
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(viii ) Driving license issued by the Licensing Authority under the Motor Vehicles Act, 1988 ( S9 of 19BB ) ; or
( ix) certificate of identity having photo of such person issued by a Gazetted Officer or a Tehsildar on an official letter head ; or
(x) any other document as specified by the Department
Provided further that the above documents may be checked by an officer specifically designated by the Department for that purpose .
2. In order to provide benefits to the beneficiaries under the scheme conveniently, the Department through its Implementing Agency shall make all the required arrangements to ensure that wide publicity through the media shall be given to the beneficiaries to make them aware of the said requirement.
3. In all cases , where Aadhaar authentication fairs due to poor biometrics of the beneficiaries or due to any other reason , the following remedial mechanisms shall be adopted , namely : -
(a) in case of poor fingerprint quality , iris scan or face authentication facility shali be adopted for authentication , thereby the Department through its Implementing Agency shall make provisions for iris scanners or face authentication along with finger - print authentication for delivery of benefits in seamless manner ;
(b) in case the biometric authentication through fingerprints or iris scan or face authentication is not successful , wherever feasible and admissible authentication by Aadhaar one Time password or Time-based One -Time Password with limited time validity, as the case may be , shall be offered;
(c) in all other cases where biometric - or Aadhaar one Time password or Time_ based one - Time password authentication is not possible, benefits under the Scheme may be given on the basis of physical Aadhaar letter whose authenticity can be verified through the Quick Response ( QR ) code printed on theAadhaar letter and the necessary arrangement of QR code reader shall be provided at the convenient locations by the Department through its Implementing Agency .
3815
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
4. In addition to the above , in order to ensure that no bona fide beneficiary under the scheme is deprived of his due benefits , the Department through its Implementing Agency shall follow the exception handing mechanism as outlined in the office Memorandum of DBT Mission , Cabinet Secretariat , Government of India dated 19th December 2017 .
5. This notification shall come into effect from the date of its publication in the Official Gazette .
F. No. F 02-01/ 2020 /A - 73
By order and in the name of the Governor of Madhya Pradesh ,
PARWAT SINGH , Dy . Secy.
Bhopal , the 26th June 2020
S.O ............ ( E ) ; Whereas , the use of Aadhaar as an identity document for delivery of services or benefits or subsidies simplifies the Government delivery processes , brings in transparency and efficiency, and enables beneficiaries to get their entitlements directly in a convenient and seamless manner by obviating the need to produce multiple documents to prove one's identity ;.
And whereas , the Department of Micro , Small & Medium Enterprises , Madhya Pradesh ( hereinafter referred to as the Department) , is administering the ' Mukhya Mantri Krishak Udymi Yojna ' ( hereinafter referred to as the scheme) by providing loan to farmer's son/ daughter for self- employment, which is being implemented through the Directorate of industries , Madhya Pradesh at the state level ( hereinafter referred to as the Implementing Agency;
And whereas , under the Scheme , margin money subsidy, interest subsidy & CGTMSE fee ( hereinafter referred to as the benefit) is given to the farmer's son/ daughter ( hereinafter referred to as the beneficiaries) , by the Implementing Agency as per the extant Scheme guidelines ;
And whereas, the aforesaid Scheme involves recurring expenditure incurred from the Consolidated Fund of Madhya Pradesh;
Now , therefore , in pursuance of section 7 of the Aadhaar ( Targeted Delivery of Financial and other Subsidies , Benefits and services ) Act , 2016 ( 18 of 2016 ) ( hereinafter referred to as the said Act ) , the government of Madhya Pradesh , hereby notifies the following, namely : - [ भाग 1
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1. (1) An individual eligible for receiving the benefits under the scheme shall hereby be required to furnish proof of possession of the Aadhaar number or undergo Aadhaar authentication .
(2) Any individual desirous of availing benefits under the Scheme , who does not possess the Aadhaar number or, has not yet enrolled for Aadhaar, shall be required to make application for Aadhaar enrolment before registering for the Scheme provided that he is entitled to obtain Aadhaar as per section 3 of the said Act, and such individuals shall visit any Aadhaar enrolment centre (list available at the Unique identification Authority of India ( UADAI ) website www.uidai.gov.in ) to get enrolled for Aadhaar .
(3) Asper regulation 12 of the Aadhaar ( Enrolment and Update ) Regulations, 20 16, the Department through its Implementing Agency , is required to offer Aadhaar enrolment facilities for the beneficiaries who are not yet enrolled for Aadhaar and in case there is no Aadhaar enrolment centre located in the respective Block or Taluka or Tehsil , the Department through its Implementing Agency shall provide Aadhaar enrolment facilities at convenient locations in coordination with the existing Registrars of UIDAI or by becoming a UIDAI Registrar themselves:
Provided that till the time Aadhaar is assigned to the individual , benefits under the scheme shall be given to such individual , subject to the production of the following documents , namely: -
(a) if he has enrolled , his Aadhaar Enrolment identification slip ; and
(b) any one of the following documents , namely: -
(i ) Bank or Post office passbook with photo ; or
(ii ) Permanent Account Number (PAN ) Card; or
(jii ) Passport ; or
(iv) Ration Card ; or
(v) Voter identity Card ; or
(vi ) MGNREGA card , or
(vii ) Kisan Photo passbook , or 3817
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
(viii ) Driving license issued by the Licensing Authority under the Motor Vehicles Act, 1988 (S9 of 19BB ) ; or
(ix) certificate of identity having photo of such person issued by a Gazetted Officer or a Tehsildar on an official letter head ; or (x) any other document as specified by the Department
Provided further that the above documents may be checked by an officer specifically designated by the Department for that purpose .
2. In order to provide benefits to the beneficiaries under the scheme conveniently , the Department through its Implementing Agency shall make all the required arrangements to ensure that wide publicity through the media shall be given to the beneficiaries to make them aware of the said requirement .
3. In all cases , where Aadhaar authentication fairs due to poor biometrics of the beneficiaries or due to any other reason , the following remedial mechanisms shall be adopted, namely: -
(a) in case of poor fingerprint quality, iris scan or face authentication facility shall be adopted for authentication , thereby the Department through its Implementing Agency shall make provisions for iris scanners or face authentication along with finger - print authentication for delivery of benefits in seamless manner ;
(b) in case the biometric authentication through fingerprints or iris scan or face authentication is not successful , wherever feasible and admissible authentication by Aadhaar one Time password or Time- based One - Time Password with limited time validity , as the case may be , shall be offered;
(c) in all other cases where biometric or Aadhaar one Time password or Time_ based one -Time password. authentication is not possible , benefits under the Scheme may be given on the basis of physical Aadhaar letter whose authenticity can be verified through the Quick Response (QR ) code printed on theAadhaar letter and the necessary arrangement of QR code reader shall be provided at the convenient locations by the Department through its Implementing Agency .
[ भाग 1 3818
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
4. In addition to the above , in order to ensure that no bona fide beneficiary under the scheme is deprived of his due benefits , the Department through its Implementing Agency shall follow the exception handing mechanism as outlined in the office Memorandum of DBT Mission , Cabinet Secretariat , Government of India dated 19th December 2017 .
5. This notification shall come into effect from the date of its publication in the Official Gazette.
F. No. F 02-01/ 2020/A -73
A
By order and in the name of the Governor of Madhya Pradesh , PARWAT SINGH, Dy. Secy.
Bhopal , the 26th June 2020
S.O............ ( E) , Whereas , the use of Aadhaar as an identity document for delivery of services or benefits or subsidies simplifies the Government delivery processes , brings in transparency and efficiency , and enables beneficiaries to get their entitlements directly in a convenient and seamless manner by obviating the need to produce multiple documents to prove one's identity;
And whereas , the Department of Micro, Small & Medium Enterprises , Madhya Pradesh ( hereinafter referred to as the Department ) , is administering the ' Mukhya Mantri Swarojgar Yojna' ( hereinafter referred to as the scheme ) by providing loan to entrepreneur for self- employment , which is being implemented through the Directorate of industries, Madhya Pradesh at the state level ( hereinafter referred to as the Implementing Agency ;
And whereas , under the Scheme , margin money subsidy, interest subsidy & CGTMSE fee (hereinafter referred to as the benefit ) is given to the entrepreneur (hereinafter referred to as the beneficiaries ) , by the Implementing Agency as per the extant Scheme guidelines ;
And whereas , the aforesaid Scheme involves recurring expenditure incurredfrom theConsolidated Fund of Madhya Pradesh ;
Now , therefore, in pursuance of section 7 of the Aadhaar (Targeted Delivery of Financial and other Subsidies , Benefits and services ) Act , 2016 ( 18 of 2016 ) (hereinafter referred to as the said Act ) , the government of Madhya Pradesh , hereby notifies the following, namely: - 3819
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
1. (1) An individual eligible for receiving the benefits under the scheme shall hereby be required to furnish proof of possession of the Aadhaar number or undergo Aadhaar authentication .
(2) Any individual desirous of availing benefits under the Scheme , who does not possess the Aadhaar number or, has not yet enrolled for Aadhaar, shall be required to make application for Aadhaar enrolment before registering for the Scheme provided that he is entitled to obtain Aadhaar as per section 3 of the said Act, and such individuals shall visit any Aadhaar enrolment centre ( list available at the Unique identification Authority of India ( UADAI ) website www.uidai.gov.in ) to get enrolled for Aadhaar .
(3) Asper regulation 12 of the Aadhaar ( Enrolment and Update ) Regulations , 20 16 , the Department through its Implementing Agency is required to offer Aadhaar enrolment facilities for the beneficiaries who are not yet enrolled for Aadhaar and in case there is no Aadhaar enrolment centre located in the respective Block or Taluka or Tehsil , the Department through its Implementing Agency shall provide Aadhaar enrolment facilities at convenient locations in coordination with the existing Registrars of UIDAI or by becoming a UIDAI Registrar themselves :
Provided that till the time Aadhaar is assigned to the individual , benefits under the scheme shall be given to such individual , subject to the production of the following documents , namely : -
(a) if he has enrolled, his Aadhaar Enrolment identification slip ; and (b) any one of the following documents , namely: -
(i) Bank or Post office passbook with photo ; or
(ii ) Permanent Account Number ( PAN ) Card ; or
(jii ) Passport ; or
( iv) Ration Card ; or
(v) Voter identity Card ; or
(vi ) MGNREGA card , or
(vii ) Kisan Photo passbook , or [ भाग 1
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(viii ) Driving license issued by the Licensing Authority under the Motor Vehicles Act , 1988 ( S9 of 19BB ) ; or
( ix) certificate of identity having photo of such person issued by a Gazetted Officer or a Tehsildar on an official letter head ; or
(x) any other document as specified by the Department
Provided further that the above documents may be checked by an officer specifically designated by the Department for that purpose .
2. In order to provide benefits to the beneficiaries under the scheme conveniently, the Department through its Implementing Agency shall make all the required arrangements to ensure that wide publicity through the media shall be given to the beneficiaries to make them aware of the said requirement .
3. In all cases, where Aadhaar authentication fairs due to poor biometrics of the beneficiaries or due to any other reason , the following remedial mechanisms shall be adopted , namely: -
(a) in case of poor fingerprint quality, iris scan or face authentication facility shall be adopted for authentication , thereby the Department through its Implementing Agency shall make provisions for iris scanners or face authentication along with finger - print authentication for delivery of benefits in seamless manner;
(b) in case the biometric authentication through fingerprints or iris scan or face authentication is not successful , wherever feasible and admissible authentication by Aadhaar one Time password or Time- based One- Time Password with limited time validity , as the case may be , shall be offered;
(c) in all other cases where biometric or Aadhaar one Time password or Time_ based one -Time password authentication is not possible , benefits ünder the Scheme may be given on the basis of physical Aadhaar letter whose authenticity can be verified through the Quick Response (QR ) code printed on theAadhaar letter and the necessary arrangement of QR code reader.shall be provided at the convenient locations by the Department through its Implementing Agency . :
4. In addition to the above , in order to ensure that no bona fide beneficiary under the scheme is deprived of his due benefits , the Department through its Implementing Agency shall follow the exception handing mechanism as outlined in the office Memorandum of DBT Mission , Cabinet Secretariat , Government of India dated 19th December 2017 .
5. This notification shall come into effect from the date of its publication in the Official Gazette .
F. No. 02-01-2020 -A- 73
By order and in the name of the Governor of Madhya Pradesh ,
PARWAT SINGH , Dy . Secy .
3821 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
राजस्व विभाग
कार्यालय , कलेक्टर , जिला सतना , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन ,
राजस्व विभाग
सतना, दिनांक 5 सितम्बर 2020
प.क्र.- 280-भू-अर्जन-2020.- कार्यपालन यंत्री, जलसंसाधन, संभाग सतना, मध्यप्रदेश द्वारा अधियारी सागर बांध डूब क्षेत्र नहर निर्माण हेतु निम्नलिखित ग्रामों के भूअर्जन प्रस्ताव प्रस्तुत किये गये थे:-
ग्राम का नाम (1)
अर्जित रकबा (3)
तहसील का नाम
(2)
0.600हे ०
खारा
रामनगर
रामनगर
0.101 हे0
दतवार
0.180 हे0
रामनगर
मेरेटोला
3.151 हे0
रामनगर
मन्नी
0.158 हे0
रामनगर
टटेहरा टोला
0.106 हे०
रामनगर
नादो
उपरोक्त ग्रामों के भू-अर्जन प्रस्तावों में भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 19 का प्रकाशन 08 मार्च 2019 को किया गया था इस प्रकार 09 मार्च 2020 को 1 वर्ष पूर्ण हो चुका है इस अवधि के भीतर अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी रामनगर, जिला सतना द्वारा अवधि विस्तारित किये जाने हेतु अनुरोध किया गया है अतः भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 25 के प्रावधान अनुसार समुचित सरकार को ऐसी परिस्थितियों में 12 माह की अवधि बढ़ाने की शक्ति प्रदत्त की गई है. अस्तु भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 की धारा 25 के प्रावधानों के अंतर्गत उपरोक्त ग्रामों के अधिनिर्णय पारित किये जाने हेतु दिनांक 09 मार्च 2020 से आगामी 07 माह की अवधि विस्तारित की जाती है.
प.क्र.-281 - भू अर्जन- 2020.-
जिला सतना स्थित ग्राम मन्नी राजस्व निरीक्षक मण्डल बडवार तहसील रामनगर जिला सतना म ०प्र ० की निम्न अनुसूची में वर्णित भूमि प्रकरण क्रमांक 25382 / 2012-13 अवार्ड पारित दिनांक 17/12/2013 में भूअर्जन अधिनियम 1894 के प्रावधानों के तहत अधियारी सागर परियोजना अन्तर्गत बांध / नहर निर्माण हेतु अर्जित की गई थी, कार्यपालन यंत्री जलसंसाधन संभाग सतना द्वारा प्रस्ताव कमांक निर्माण/2-08/2015-16/3697 / कार्य / सतना दिनांक18/12/2018 से ये भूमि डूब क्षेत्र से बाहर होने से जलसंसाधन संभाग सतना को इस भूमि की आवश्यकता नहीं है । प्रस्ताव प्राप्त होने पर प्राप्त प्रस्ताव में लोक कल्याणकारी एवं लोकोपयोगी विभागों से जमीन की आवश्यकता हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र / भूमि की आवश्यकता के संबंध में इस कार्यालय के पत्र क्रमांक 189 / भूअर्जन /2019 दिनांक15/03/2019 एवं पत्र कमांक 411 / भूअर्जन / 2019 दिनांक 11/10/2019 द्वारा चाहा गया । नियत समय में किसी भी विभाग द्वारा भूमि की आवश्यकता का प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ इससे यह समाधान होता है कि उक्त प्रश्नाधीन अप्रभावित भूमि की शासकीय प्रयोजन हेतु किसी शासकीय विभाग को आवश्यकता नहीं है । निम्नांकित आराजी एवं रकबा अधिग्रहीत हो जाने से स्वीकृत अवार्ड राशि अवार्डधारी/ पूर्व भूमिस्वामी से अर्जक निकाय म०प्र० शासन जलसंसाधन संभाग सतना को वापस करते हुए अधिग्रहीत भूमि पूर्ववत भूमिस्वामी के नाम दर्ज हो जावेगी । अतएव अनुसूची में वर्णित आराजी नंबर , रकबा एवं प्रकार. भअर्जन से मक्त करते हुए डिनोटिफिकेशन किया जाता है । 3822
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
अनुसूची
सतना
जिला
रामनगर
तहसील
राजस्व निरीक्षक मंडल
बड़वार
मन्नी
ग्राम
8.903 हे0
भूमि वापसी हेतु रकवा
खसरा नं०
क०
अवार्डधारी का नाम जिनकी भूमि
वापस होना है
भूअर्जन प्रकरण क्रमांक एवं ग्राम
डिनोटिफिकेशन हेतु रकवा हे० में
2.024 हे.
153 / 10 क
1 25382 / 12-13 / ग्राम मन्नी सौरव पिता अरूण कुमार तिवारी सा० मैहर उतैली
2.023 हे.
153 / 10 ख
25382 /12-13 / ग्राम मन्नी
2
रामसुशील पिता रामस्वरूप पटेल
साकिन गंजास
2.428 हे.
21/2
3 25382 / 12-13 / ग्राम मन्नी श्रीमती गुलाबरानी पत्नी बीरेन्द्र चतुर्वेदी सा ० बड़ा इटमा
2.428 हे.
4
21/4
25382/ 12-13 / ग्राम मन्नी सूरज जैन पत्नी लालजी जैन सा० बड़ा इटमा
8.903 हे०
भूमि वापसी हेतु रकवा
भूमि का नक्शा (प्लान) का अवलोकन कलेक्टर कार्यालय (भूअर्जन)/ कार्यपालन यंत्री जलसंसाधन संभाग सतना/ अनुविभागीय अधिकारी रामनगर माइको सिंचाई परियोजना उपसंभाग कमांक -1 रामनगर के कार्यालय में कार्यालयीन समय पर (शासकीय अवकाश के दिनों को छोड़कर) देखा जा सकता है ।
कोई भी प्रभावित क्षेत्र के व्यक्ति अधिसूचना के म०प्र ० राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से 15 दिन की अवधि के अन्दर अपना आपत्ति दावा कार्यालय कलेक्टर (भूअर्जन) जिला सतना में प्रातः 10:30 बजे से अपरान्ह 05:00 बजे तक (शासकीय अवकाश के दिनों को छोड़कर) प्रस्तुत कर सकते हैं । उक्त अवधि का अवसान होने पर किसी प्रकार के आपत्ति दावा स्वीकार नहीं किये जावेंगे ।
प.क्र.- 282-भू अर्जन- 2020.-
जिला सतना स्थित ग्राम मन्नी राजस्व निरीक्षक मण्डल बडवार तहसील रामनगर जिला सतना म०प्र ० की निम्न अनुसूची में वर्णित भूमि प्रकरण क्रमांक 25382 / 2012-13 अवार्ड पारित दिनांक 17/12/2013 एवं प्रकरण क्रमांक 26382 / 2011-12 अवार्ड पारित दिनांक 21/09/2012 में भूअर्जन अधिनियम 1894 के प्रावधानों के तहत अधियारी सागर परियोजना अन्तर्गत बांध / नहर निर्माण हेतु अर्जित की गई थी, कार्यपालन यंत्री जलसंसाधन संभाग सतना द्वारा प्रस्ताव क्रमांक भूअर्जन / अंधियारी सागर / 3143 / कार्य/ सतना दिनांक 14/11/2019 से ये भूमि डूब क्षेत्र से बाहर होने से जलसंसाधन संभाग सतना को इस भूमि की आवश्यकता नहीं है । प्रस्ताव प्राप्त होने पर प्राप्त प्रस्ताव में लोक कल्याणकारी एवं लोकोपयोगी विभागों से जमीन की आवश्यकता हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र / भूमि की आवश्यकता के संबंध में इस कार्यालय के पत्र कमांक 84 / भूअर्जन / 2020 दिनांक 13/03/2020 द्वारा चाहा गया । नियत समय में किसी भी विभाग द्वारा भूमि की आवश्यकता का प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ इससे यह समाधान होता है कि उक्त प्रश्नाधीन अप्रभावित भूमि की शासकीय प्रयोजन हेतु किसी शासकीय विभाग को आवश्यकता नहीं है । निम्नांकित आराजी एवं रकबा अधिग्रहीत हो जाने से स्वीकृत अवार्ड राशि अवार्डधारी/ पूर्व भूमिस्वामी से अर्जक निकाय म० प्र ० शासन जलसंसाधन संभाग सतना को वापस करते हुए अधिग्रहीत भूमि पूर्ववत भूमिस्वामी के नाम दर्ज हो जावेगी ।
अतएव अनुसूची में वर्णित आराजी नंबर, रकबा एवं प्रकार, भूअर्जन से मुक्त करते हुए डिनोटिफिकेशन किया जाता है । 3823
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
अनुसूची
सतना जिला
रामनगर तहसील
राजस्व निरीक्षक मंडल
बड़वार
मन्नी ग्राम
12.352हे0 भूमि वापसी हेतु रकवा
भूअर्जन प्र.क्र. / ग्राम
स.क्र.
खसरा नं०
डिनोटिफिकेशन हेतु रकवा हे० में
अवार्डधारी का नाम जिनकी भूमि वापस
होना है
1
0.296 हे.
16/1
फुलवरिया पुत्री सम्हुआ चमार
26382/ 2011-12 / ग्राम मन्नी 2
0.296 हे.
16/2
सम्हुआ पिता बुद्धा चमार
26382 / 2011-12 / ग्राम मन्नी 3
0.296 हे.
16/3
दुलरिया बेवा पिता रामखेलावन चमार
26382/2011-12 / ग्राम मन्नी 4
0.295 हे.
16/4
झल्ला पिता बुद्धा चमार
26382/2011-12 / ग्राम मन्नी 5
0.295 हे.
16/5
रामबहोरी पिता बुद्धा चमार
26382/2011-12 / ग्राम मन्नी 6
0.492 हे.
16/6
संतलाल पिता सुखदेव चमार
26382/ 2011-12 / ग्राम मन्नी 7
0.492 हे.
16/7
बसंतलाल पिता सुखदेव चमार
26382/2011-12 / ग्राम मन्नी
0.492हे.
16/8
रामविशाल पिता बल्देव चमार
8 26382/2011-12 / ग्राम मन्नी 9 26382/ 2011-12 / ग्राम मन्नी मु. बुधिया बेवा कमला दयाराम दिनेश प्रसाद रामप्रसाद अशोक कुमार पिता कोमल प्रसाद मु. मुन्नी बाई बेवा आशाराम आशीष कुमार ना.ब.सर मां मुन्नीबाई बेवा आशाराम तेली
10 26382/ 2011-12 / ग्राम मन्नी काशीप्रसाद शम्भूप्रसाद बालाप्रसाद साहूराम मु. गीताबाई बेवा मंगलप्रसाद नारायण पिता मंगल हिस्सा 1/6 लीलाबाई अच्छेलाल गुडिया कृष्णा पूनम पिता अच्छेलाल ब्रा.
11 26382 / 2011-12 / ग्राम मन्नी
1.619 हे.
19/2
4.049हे.
20/2
20/190 0.543 हे.
चन्द्रभान पिता लोलाराम झुर्रा देवजनी
जमुनीबाई बेवा गुम्मेलाल
12
0.729 हे .
20/191
कोदू सिंह पिता श्यामलाल सिंह
26382 /2011-12 / ग्राम मन्नी 13 25382/ 2012-13 / ग्राम मन्नी गीताबाई बेवा मंगलदास नारायणदास पिता मंगलदास ब्रा.
2.458 हे.
21/3
भूमि का नक्शा (प्लान) का अवलोकन कलेक्टर कार्यालय (भूअर्जन)/ कार्यपालन यंत्री जलसंसाधन संभाग सतना/ अनुविभागीय अधिकारी रामनगर माइको सिंचाई परियोजना उपसंभाग कमांक-1 रामनगर के कार्यालय में कार्यालयीन समय पर (शासकीय अवकाश के दिनों को छोड़कर ) देखा जा सकता है ।
कोई भी प्रभावित क्षेत्र के व्यक्ति अधिसूचना के म०प्र ० राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से 15 दिन की अवधि के अन्दर अपना आपत्ति दावा कार्यालय कलेक्टर (भूअर्जन) जिला सतना में प्रातः 10:30 बजे से अपरान्ह 05:00 बजे तक (शासकीय अवकाश के दिनों को छोड़कर) प्रस्तुत कर सकते हैं । उक्त अवधि का अवसान होने पर किसी प्रकार के आपत्ति दावा स्वीकार नहीं किये जावेंगे । [भाग 1 3824
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
सतना, दिनांक 24 सितम्बर 2020
प.क्र. - 300-भू- अर्जन-2020.- कार्यपालन यंत्री, जलसंसाधन संभाग सतना म० प्र ० द्वारा अधियारी सागर बांध डूब क्षेत्र नहर निर्माण हेतु निम्नलिखित ग्राम के भू-अर्जन प्रस्ताव प्रस्तुत किये गये थे:-
तहसील का नाम
ग्राम का नाम
अर्जित रकबा (हे. में)
(2)
(3)
(1)
3.544 हे0
मैहर
जोवा
उपरोक्त ग्राम के भू-अर्जन प्रस्तावों में भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 19 का राजपत्र में प्रकाशन दिनांक 27 दिसम्बर 2019 को किया गया था इस प्रकार 27 दिसम्बर 2020 को 1 वर्ष पूर्ण हो चुका है इस अवधि के भीतर अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी मैहर, जिला सतना द्वारा युक्ति- युक्ति सर्वेक्षण कार्य पूर्ण न होने के कारण अवार्ड प्रस्ताव एवं पत्रक तैयार नहीं किया जा सका, 01 वर्ष अवधि विस्तारित किये जाने हेतु अनुरोध किया गया है.
अतः भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 25 के प्रावधान अनुसार समुचित सरकार को ऐसी परिस्थितियों में 12 माह की अवधि बढ़ाने की शक्ति प्रदत्त की गई है. अस्तु भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 25 के प्रावधानों के अन्तर्गत उपरोक्त ग्राम के अधिनिर्णय पारित किये जाने हेतु दिनांक 27 दिसम्बर 2019 से 12 माह की अवधि विस्तारित की जाती है.
प.क्र.- 301 - भू-अर्जन-2020.- कार्यपालन यंत्री , जलसंसाधन संभाग सतना म०प्र ० द्वारा अधियारी सागर बांध डूब क्षेत्र नहर निर्माण हेतु निम्नलिखित ग्रामों के भू- अर्जन प्रस्ताव प्रस्तुत किये गये थे:-
तहसील का नाम
अर्जित रकबा (हे. में)
(3)
(2)
ग्राम का नाम (1)
0.600 हे०
मैहर
हिनौता
0.600 हे०
मैहर
टीकरखुर्द
उपरोक्त ग्रामों के भू-अर्जन प्रस्तावों में भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 19 का प्रकाशन दिनांक 8 मार्च 2019 को किया गया था इस प्रकार दिनांक 8 मार्च 2020 को 1 वर्ष पूर्ण हो चुका है इस अवधि के भीतर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं भू-अर्जन अधिकारी मैहर जिला सतना द्वारा युक्ति- युक्ति सर्वेक्षण कार्य पूर्ण न होने के कारण अवार्ड प्रस्ताव एवं पत्रक तैयार नहीं किया जा सका, 07 माह अवधि विस्तारित किये जाने हेतु अनुरोध किया गया है.
अतः भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 25 के प्रावधान अनुसार समुचित सरकार को ऐसी परिस्थितियों में 12 माह की अवधि बढ़ाने की शक्ति प्रदत्त की गई है . अस्तु भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 25 के प्रावधानों के अन्तर्गत उपरोक्त ग्राम के अधिनिर्णय पारित किये जाने हेतु दिनांक 08 मार्च 2020 से 07 माह की अवधि विस्तारित की जाती है.
प.क्र. -302- भू-अर्जन- 2020.- कार्यपालन यंत्री, जलसंसाधन संभाग सतना म०प्र ० द्वारा अधियारी सागर बांध डूब क्षेत्र नहर निर्माण हेतु निम्नलिखित ग्रामों के भू- अर्जन प्रस्ताव प्रस्तुत किये गये थे:-
तहसील का नाम
ग्राम का नाम
अर्जित रकबा (हे. में)
(3)
(2)
(1)
0.270 हे०
मैहर
जोवा 3825 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
उपरोक्त ग्रामों के भू- अर्जन प्रस्तावों में भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 19 का प्रकाशन दिनांक 25 जनवरी 2019 को किया गया था इस प्रकार दिनांक 25 जनवरी 2020 को 1 वर्ष पूर्ण हो चुका है इस अवधि के भीतर अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी मैहर जिला सतना द्वारा युक्ति- युक्ति सर्वेक्षण कार्य पूर्ण न होने के कारण अवार्ड प्रस्ताव एवं पत्रक तैयार नहीं किया जा सका, 01 वर्ष अवधि विस्तारित किये जाने हेतु अनुरोध किया गया है.
अतः भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 25 के प्रावधान अनुसार समुचित सरकार को ऐसी परिस्थितियों में 12 माह की अवधि बढ़ाने की शक्ति प्रदत्त की गई है. अस्तु भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 25 के प्रावधानों के अन्तर्गत उपरोक्त ग्राम के अधिनिर्णय पारित किये जाने हेतु दिनांक 25 जनवरी 2020 से 12 माह की अवधि विस्तारित की जाती है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, अजय कटेसरिया , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय , कलेक्टर , जिला बैतूल , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन ,
राजस्व विभाग
प्र.क्र.-42 अ- 82-2019-20- देवडोंगरी- 11635.-
बैतूल, दिनांक 24 सितम्बर 2020 चूंकि समुचित सरकार को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची (1 ) में वर्णित भूमि के कालम नम्बर 5 में वर्णित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है । इस हेतु अनुसूची-2 में वर्णित भूमिस्वामियों 'का, भूमि अर्जन , पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 ( क्रमांक 30 सन 2013 की धारा 19 के अन्तर्गत, यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है:-
अनुसूची-1
तहसील
नगर/ग्राम
जिला
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
लगभग क्षेत्रफल(है०में)
5
3
4
2
1
5.618
देवडोंगरी
मुलताई
बैतूल (म०प्र०)
पारसडोह उद्वहन परियोजना निर्माण हेतु मध्यम सिंचाई
अनुसूची -2
प्रभावित धारको की सूची
खसरा नम्बर
धारक का नाम
अ० क०
अर्जन की भूमि का रकबा हे० में
से रकबा हे ० में
5
3
4
2
1
1.200
1.869
156/1
1 कलीराम शोभाराम व. अमरलाल सा. नांदकुड़ी 3826
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
4.162
12/1
4.532
2 श्रीराम किशोरी हरिराम दिनू व . नत्थू अन्जी पूरमा प्रमिला पिता नत्थू मंगली कला पिता अंछाराम सुखदेव हेमराज धनराज उर्फ सिही बिसन किसनलाल व. तुलसीराम मीरा सुगन्ती रामरती फूलवंती कलावती निर्मला पिता तुलसीराम पूंजी बेवा बालाराम शान्ता बेवा विजय शंकर सुदन अभीराम व. बालाराम पता निवासी ग्राम इमला लीला उर्मिला रमल सुनीता पिता बालाराम उर्फ प्यारेलाल किराड़ भजनलाल व. विजयशंकर , मीना, उमा, पिता विजयशंकर पता निवासी ग्राम नांदकुड़ी रामकिशन मनोहर जवाहरलाल चन्द्रभान व. फत्या रामप्यारी अनुसया निर्मला पिता फत्या सावजी व. परसराम सुनीता जौ. गुलाबराव निवासी बोरड़ा महाराष्ट्र जाति किराड़
अ० क०
खसरा नम्बर
धारक का नाम
रकबा हे ० में से
अर्जन की भूमि का रकबा हे ० में 1
2
3
4
5 3
28/2
0.256
0.256 जयवंती बेवा भोम्या जाति मेहरा सा. देह
योग
3
6.657
5.618 (1 ) चूंकि पारसडोह मध्यम उद्वहन परियोजना हेतु हित बद्ध व्यक्तियों की भूमि का अर्जन प्रस्तावित है, जिसमें कोई भी व्यक्ति का विस्थापन नही होने से धारा 19 की उपधारा (2) के तहत पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन स्कीम का सार प्रकाशित करने की आवश्यकता नहीं है ।
(2) भूमि का नक्शा (प्लान) का निरीक्षण, अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी मुलताई के न्यायालय में किया जा सकता है ।
(3) समुचित सरकार की वेबसाईट www.betul.nic.in पर भी अपलोड किया गया है ।
प्र.क्र. -49- अ- 82-2019-20 - मल्हारा - 11636.- चूंकि समुचित सरकार को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची (1 ) में वर्णित भूमि के कॉलम नम्बर 5 में वर्णित सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है. इस हेतु अनुसूची (2 ) में वर्णित भूमिस्वामियों का, भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 (क्रमांक 30 सन् 2013 ) की धारा 19 के अन्तर्गत , यह घोषित किया जाता है कि उक्त भूमि की सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आवश्यकता है :-
अनुसूची-1
नगर/ ग्राम
तहसील
जिला
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
लगभग क्षेत्रफल (है०में)
4
5
3
2
1
मल्हारा
2.986
मुलताई
बैतूल (म०प्र०)
मल्हारा जलाशय लघु निर्माण हेतु 3827
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
अनुसूची -2
प्रभावित धारको की सूची
धारक का नाम
अ० क ०
2
1
1 बुधिया पति हिरालाल सा. देह
2 हिरालाल पिता काशीराम गुंजन ज्योती डाली पिता नत्थू सा. देह
3 मधुबाला पिता गोकुलप्रसाद जांति कलार सा. देह
4 रामदिन पिता रामाधार हिरालाल पिता काशीराम रेखा बेवा नत्थू रामदयाल शंकर शिवकुमार पिता नत्थू बेबी पिता नत्थू सा. देह
5 शान्ताबाई पति फुस्या सा. देह 6 फुस्या पिता सुरत सा. देह
7 ओझा पिता सुग्गन रासु पिता सुग्गन सा. देह
धनजी पिता शंकर सा. देह
8
9 कला पिता श्यामू भागा पिता श्यामू गया पिता रामजी विजय सुरेन्द्र पिता रामजी संगीता प्रमिला पिता रामजी सा. देह 10
हिरालाल पिता काशीराम सा. देह
योग
खसरा नम्बर
अर्जन की भूमि का रकबा हे० में रकबा हे ० में से
4
5
3
0.100
2.622
235/2
0.083 0.183
239/1
0.430 4.668
214/1
0.150
0.245
214/2
0.100
1.198
235/3
0.133 0.783
240/4
0.050
0.850
240/3
0.276
0.876
241/1
0.550
0.640
237/3
0.327
0.877
241/2
0.046
0.093
242/2
0.200 2.629
237/2
0.077
1.077
215/2
0.064
0.364
239/2
0.400
1.820
246/3
2.986 15
18.925
(1 ) चूंकि मल्हारा लघु जलाशय हेतु हित बद्ध व्यक्तियों की भूमि का अर्जन प्रस्तावित है, जिसमें कोई भी व्यक्ति का विस्थापन नही होने से धारा 19 की उपधारा (2) के तहत पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन स्कीम का सार प्रकाशित करने की आवश्यकता नहीं है ।.
(2) भूमि का नक्शा (प्लान) का निरीक्षण, अनुविभागीय अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी मुलताई के न्यायालय में किया जा सकता है ।
(3) समुचित सरकार की वेबसाईट www.betul.nic.in पर भी अपलोड किया गया है ।
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, राकेश सिंह , कलेक्टर एवं समुचित सरकार.
3828
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
कार्यालय , कलेक्टर , जिला देवास , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन ,
राजस्व विभाग
देवास , दिनांक 28 सितम्बर 2020 क्र.-1446-भू- अर्जन-2020.-
कार्यपालन यंत्री , नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-23 भोपाल की ओर से प्रस्तुत पत्र क्रमांक 2365 दिनांक 19.08.2020 के पालन में मध्यप्रदेश भूमिगत पाईप लाईन केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम 2012 क्रमांक 5 सन 2013 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए म.प्र. राज्य के देवास जिले में नीचे दी गई अनुसूची में विनिर्दिष्ट मुख्यतया मंजूर छिपानेर माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने एवं उस पर जल परिवहन हेतु अनसंरक्षण प्रबंध और प्रचालन के लिए नीचे अनुसूची के क्रमशः स्तम्भ (3) स्तम्भ (4) स्तम्भ (5) स्तम्भ ( 6) में उल्लेखित जिला तहसील पुलिस थाने और गांवों से संबंधित नीचे अनुसूची के स्तम्भ (2) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त अधिनियम के अधीन सक्षम प्राधिकारी के कृत्यों का पालन करने के लिए सक्षम प्राधिकारी के रूप में प्राधिकृत करता हूं ।
अनुसूची
छिपानेर माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत भूमिगत पाईन लाईन से जल प्रवाह कर सिंचाई कार्य
ग्राम का नाम/ प.ह.नं.
तहसील पुलिस थाना
स.क्र. सक्षम प्राधिकारी जिला
6
4
5
2
3
1
28
काँकरिया
खातेगाँव खातेगाँव
1
देवास
अनुविभागीय
29
खातेगाँव
अधिकारी
सोनखेड़ी
29
बेलखा
खातेगाँव
(राजस्व)
33 खातेगाँव,
रिजगाँव
नेमावर
68 जिला देवास
नेमावर
कुनवासा
71
पिपल्या घाघरिया
नेमावर
69
मालागाँव
नेमावर
69
नेमावर
बिजापुर
68
बवनगाँव
नेगावर
68
नेमावर
इकलेरा
67
नेमावर
गुन्नास
67
सोनगाँव
नेमावर
71
नवलगाँव
नेमावर
67
मवासा
नेमावर
70
नेमावर
धुंध्याखेड़ी
33
खातेगाँव
दीपगाँव
32
खारदा
नेमावर
74
खेडी
नेमावर
74
बापच्या
नेमावर
73
कोलारी
नेमावर
74
खिडकिया
नेमावर
74
पिपलनेरिया
नेमावर
72
बिजलगाँव
नेमावर
72
करोंदमाफी
नेमावर
दैयत
नेगावर
64
चिचली
72
नेमावर
खातेगाँव
34
गुलगाँव 3829 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
मवासी
नेमावर
71
नेमावर
नयागाँव
74
खातेगाँव
जियागाँव
27
देवला
29
खातेगाँव
30
बचखाल
खातेगाँव
खल
31
खातेगाँव
बोरदा
30
नेमावर
70
अकावाल्या
नेमावर
34
खातेगाँव
गुजरगाँव
नेमावर
पीपल्यानानकर
66
69
नेमावर
खूबगाँव
65
नेमावर
बुराड़ा
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, चन्द्रमौली शुक्ला, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय , कलेक्टर , जिला रतलाम , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग
रतलाम, दिनांक 28 सितम्बर 2020 (अंतर्गत मध्यप्रदेश शासन की आपसी सहमती से भूमि क्रय नीति 2014)
प्र.क्र.- 01-3-82-20-21- क्र. भू- अर्जन-2020-2338 .- मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग, मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल के आदेश क्रमांक एफ-112-2-2014- सात-2 ए, भोपाल दिनांक 12 नवम्बर 2014 में प्रकाशित अधिसूचना के परिपालन में मध्यप्रदेश की आपसी सहमति से भूमि क्रय नीति के तहत प्रस्तावित नीचे दर्शाई गई अनुसूची के कॉलम क्रमांक (2 ) में उल्लेखित भूमि धारकों की अनुसूची के कॉलम नंबर (3) एवं (4) अनुसार भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन कोटेश्वर (इमलीपाड़ा) जलाशय योजना अंतर्गत डूब में जाने से: -
अनुसूची
बिरमावल, पटवारी हल्का नंबर 55/101
(क) ग्राम
रतलाम
(ख) तहसील
रतलाम
(ग) जिला
0.590 हेक्टर.
(घ) लगभग क्षेत्रफल
परिसम्पत्तियों काविवरण क्र. कृषक का नाम व पिता/ पति का नाम
खसरा क्रमांक
अर्जित की जाने वाली भूमि का रकबा (हेक्टर में)
सिंचित
असिंचित
कुल
(7)
(5)
(6)
(4)
(2)
(3)
(1)
0.340
0.340
0.000
43
1 अयोध्याबाई पिता भागीरथ जाति भील निवासी मजरा आमलीपाड़ा.
3830
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(7)
(6)
(4)
(5)
(1)
(3)
(2)
0.000
0.030
41
0.030
2 गीताबाई पिता जवरा जाति भील निवासी मजरा आमलीपाड़ा.
0.000
0.040
0.040
42
0.180
0.180
50
3 जमना बैवा दयाराम, बालू, गिरधारी , बद्री, भेरु, दशरथ, शांतिबाई, शामुड़ी, हिराबाई, रुखमाबाई पिता नानूराम गीतबाई, अयोध्याबाई पति स्व. दयाराम जाति भील निवासी मजरा आमलीपाड़ा.
0.000
0.590
4
0.590
महायोग:-
(1 ) उपरोक्त कृषकों की भूमि ग्राम बिरमावल में कोटेश्वर (इमलीपाड़ा) तालाब योजना अंतर्गत जल संसाधन विभाग म.प्र . के पक्ष में क्रय किये जाने पर विचार किया जा रहा है. यदि किसी व्यक्ति को भूमि के स्वत्व के विषय में कोई आपत्ति हो तो नियत अवधि (सार्वजनिक सूचना प्रकाशन के 15 दिवस के अंदर) में आधार सहित कलेक्टर के समक्ष आपत्ति प्रस्तुत कर सकते है.
(2) भूमि का नक्शा (प्लान का निरीक्षण) कलेक्टर, कार्यालय रतलाम अथवा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं भू-अर्जन अधिकारी, रतलाम ग्रामीण तथा कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग रतलाम के कार्यालय समय पर किया जा सकता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, गोपालचन्द्र डाड , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय , भू- अर्जन अधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) , जिला खरगौन , मध्यप्रदेश
खरगौन, दिनांक 13 अक्टूबर 2020 रा.प्र.क्र.-0005-अ-82-2020-21.-
प्ररुप- "ख "
{ नियम- 5 का उपनियम (2)}
अतएव, राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव-बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत इंदिरासागर परियोजना की मुख्य नहर की आर ० डी० 39.00 कि० मी० पर ग्राम- दौड़वा, तह०- भीकनगांव जिला- खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक-01 से ग्राम बोरगांव , तह० भीकनगांव जिला- खरगोन तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- पछाया, प.ह.नं.- 12, तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-21 , सनावद, जिला- खरगोन (म.प्र.) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है , जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है , उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव, मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम, 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है । 3831 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा -3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर , भूमि के नीचे पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
:: अनुसूची::
तहसील
जिला
ग्राम / पटवारी
हल्का कमांक
खसरा कमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
4
5
3
1
2
0.004
5
खरगोन भीकनगांव ग्राम- पछाया, प.ह.नं.- 12
6
0.009
0.010
8/1
0.028
8/2
0.002
10/1
0.007
11/1/2
खरगोन भीकनगांव
0.009
11/1/3
ग्राम- पछाया,
प.ह.नं.- 12
0.011
11/1/4
0.011
11/1/5
0.006
13/1
0.062
13/2
0.002
16/3
0.011
16/6
16/4
0.003
0.034
16/5
15
0.209
कुल योग
3832
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
रा.प्र.क्र.-0006-अ-82-2020-21.-
अतएव, राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव-बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत इंदिरासागर परियोजना की मुख्य नहर की आर 0 डी0 53.63 कि0 मी0 पर ग्राम- बावड़िया तह. सनावद जिला खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक-02 से ग्राम- खारवी तह. भीकनगांव में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक 04 तक एवं उक्त पम्प हाऊस क्रमांक 04 से टेल (ग्राम- बिरुल प.ह.नं.- 39, तह० भीकनगांव , जिला- खरगोन ) तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- घोड़वा, प.ह.नं.- 10, तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री , नर्मदा विकास संभाग कमांक-21 , सनावद, जिला खरगोन (म.प्र. ) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाई जाए । और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में , जिसमें भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है , जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव, मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम, 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013 ) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा -3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर , भूमि के नीचे पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
::अनुसूची::
तहसील
जिला
खसरा कमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का कमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
5
4
3
2
1
0.030
438
खरगोन भीकनगांव ग्राम- घोड़वा, प.ह.नं.- 10
0.098
439
0.040
506
0.112
507
0.080
510
0.032
512
ग्राम- घोड़वा,
खरगोन भीकनगांव
0.008
513
प.ह.नं.- 10
0.047
514
0.028
515
0.036
516
0.042
517
0.033
518
0.023
519
0.609
13
कुल योग
3833 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
रा.प्र.क्र.-0007-3-82-2020-21.-
अतएव, राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव- बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत इंदिरासागर परियोजना की मुख्य नहर की आर0 डी0 53.63 कि0 मी0 पर ग्राम- बावडिया तह. सनावद जिला खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक-02 से ग्राम- खारवी तह. भीकनगांव में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक- 04 तक एवं उक्त पम्प हाऊस क्रमांक- 04 से टेल (ग्राम - बिरुल प.ह.नं. - 39 , तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन) तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- खारवी, प.ह.नं.- 10 , तह० भीकनगांव , जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग कमांक-21 , सनावद, जिला- खरगोन (म.प्र.) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाई जाए । और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है, जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव, मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम , 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा-3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर , भूमि के नीचे पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
::अनुसूची::
तहसील
जिला
खसरा कमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का कमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
4
5
3
2
1
0.055
158
भीकनगांव ग्राम- खारवी,
खरगोन
प.ह.नं.- 10
0.054
269
270
0.051
271
0.069
272
0.036 3834
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
तहसील
जिला
खसरा क्रमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का कमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
5
4
3
2
1
0.024
273
भीकनगांव
खरगोन
0.002
275
ग्राम- खारवी ,
प.ह.नं.- 10
0.102
276
0.022
303
0.042
304
0.024
306
0.036
346
0.078
369
0.005
370
0.024
371
0.051
397
0.001
421
0.035
400
0.008
404
0.044
406
0.763
20
कुल योग
रा.प्र.क्र. - 0008-1-82-2020-21.-
अतएव , राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव- बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत इंदिरासागर परियोजना की मुख्य नहर की आर ० डी० 83.045 कि० मी००मी० पर ग्राम- पिपलई बुजुर्ग, तह० भीकनगांव जिला खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक-03 से ग्राम बड़िया तह० भीकनगांव जिला -खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक- 05 तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- पिपलई बुजुर्ग , प.ह.नं.- 20 , तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-21 , सनावद, जिला- खरगोन (म.प्र.) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है, जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव, मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम, 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है । 3835 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है , उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा-3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर, भूमि के नीचे पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) , भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
::अनुसूची::
तहसील
जिला
खसरा क्रमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का कमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
4
5
2
1
0.045
56/1/1
खरगोन भीकनगांव
0.002
56/1/2
3
ग्राम- पिपलई
बुजुर्ग,
प.ह.नं.- 20
0.027
56/8
56/2/1
0.023
0.024
56/2/2
खरगोन भीकनगांव
0.042
56/5
ग्राम- पिपलई
बुजुर्ग,
प.ह.नं.- 20
56/6
0.031
0.037
58/1
0.231
08
कुल योग
रा.प्र.क्र.-0009-3-82-2020-21.-
अतएव , राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव- बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत इंदिरासागर परियोजना की मुख्य नहर की आर ०डी० 83.045 कि0मी0 पर ग्राम- पिपलई बुजुर्ग , तह ० भीकनगांव जिला खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक-03 से ग्राम- बड़िया तह ० भीकनगांव जिला- खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक- 05 तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- लखापुर, प.ह.नं.- 30 , तह० भीकनगांव , जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-21 , सनावद, जिला- खरगोन (म.प्र.) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है, जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए । 3836
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
अतएव , मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम, 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा-3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर, भूमि के नीचे पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
::अनुसूची::
तहसील
जिला
खसरा क्रमांक
ग्राम / पटवारी
हल्काकमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
4
5
3
2
1
खरगोन भीकनगांव
0.100
64 65/1
ग्राम-
लखापुर,
प.ह.नं.- 30
0.100
01
कुल योग
A
रा.प्र.क्र .- 0010-अ-82-2020-21.-
अतएव , राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव- बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत इंदिरासागर परियोजना की मुख्य नहर की आर 0 डी0 83.045 कि 0 मी0 पर ग्राम- पिपलई बुजुर्ग, तह० भीकनगांव जिला खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक-03 से ग्राम बड़िया तह ० भीकनगांव जिला - खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक- 05 तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- देवला, प.ह.नं.- 27/86, तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-21 , सनावद, जिला खरगोन (म.प्र. ) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है , जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव, मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम , 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013 ) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है , उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा -3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर, भूमि के नीचे पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) , भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा । 3837 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
:: अनुसूची::
तहसील
जिला
ग्राम / पटवारी
हल्का कमांक
खसरा क्रमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
4
5 1
2
0.022 खरगोन भीकनगांव
1/3
0.066
18/1
3
ग्राम- देवला,
प.ह.नं.-
27/86
0.142
19
0.027
21/1
0.026
21/2
0.023
21/3
खरगोन भीकनगांव
0.020
21/4
0.002
21/5/2
ग्राम- देवला,
प.ह.नं.-
27/86
0.004
23
0.017
35
0.098
62/1
0.018
25
0.021
36
0.064
65/1
0.058
65/4
0.032
71
0.020
72/2
0.024
72/3
0.043
72/4
0.002
82/3
0.128
84/2
0.080
84/3
0.937
22
कुल योग
[भाग 1 3838
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
रा.प्र.क्र.-0011 -अ- 82-2020-21.-
अतएव , राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव-बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत इंदिरासागर परियोजना की मुख्य नहर की आर ० डी० 83.045 कि0 मी0 पर ग्राम- पिपलई बुजुर्ग, तह० भीकनगांव जिला खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक-03 से ग्राम बड़िया तह ० भीकनगांव जिला- खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक- 05 तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- ढाकबर्डि, प.ह.नं.- 29, तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग कमांक-21 , सनावद, जिला- खरगोन (म.प्र.) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है, जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव , मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम, 2012 (कमांक 5 सन् 2013) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , राज्य सरकार , उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा-3 की उपधारा (1) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर, भूमि के नीचे पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
::अनुसूची::
तहसील
जिला
खसरा क्रमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का क्रमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
5
4
3
2
1
0.034
65/1
ग्राम-
खरगोन भीकनगांव
0.059
ढाकबर्डि,
66
प.ह.नं.- 29
0.081
69/1
0.015
71/1/2
71/72/73/2
ग्राम-
भीकनगांव
खरगोन
0.075
72, 73
ढाकबर्डि,
71/1/3
प.ह.नं.- 29
0.034
72/1/3
73/1/3
0.054
71/1/172 , 73
0.056
75/4
0.136
78/2
0.544
9
कुल योग
3839
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
रा.प्र.क्र.-0012- अ- 82-2020-21.-
अतएव , राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव-बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत इंदिरासागर परियोजना की मुख्य नहर की आर० डी० 83.045 कि0मी0 पर ग्राम पिपलई बुजुर्ग, तह० भीकनगांव जिला खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक-03 से ग्राम बड़िया तह ० भीकनगांव जिला खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक- 05 तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- भीकनगांव , प.ह.नं.- 43, तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-21 , सनावद, जिला खरगोन (म.प्र.) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है , जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव , मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम, 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा -3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर , भूमि के नीचे पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भीकनगांव, जिला खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
:: अनुसूची :
तहसील
जिला
खसरा क्रमांक
ग्राम / पटवारी
हल्काकमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
5
4
3
2
1
0.052
127/7
भीकनगांव
खरगोन
ग्राम- भीकनगांव,
0.042
127/6
प.ह.नं.- 43
0.038
127/1/2
0.016
127/1/3
ग्राम-
भीकनगांव
खरगोन
: 0.022
127/4
भीकनगांव,
प.ह.नं.- 43
0.063
129/2
6
0.233
कुल योग
[ भाग 1 3840
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
रा.प्र.क्र.-0013- अ- 82-2020-21.-
अतएव , राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव-बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत इंदिरासागर परियोजना की मुख्य नहर की आर 0डी 0 83.045 कि0 मी0 पर ग्राम- पिपलई बुजुर्ग, तह ० भीकनगांव जिला खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक-03 से ग्राम बड़िया तह० भीकनगांव जिला खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक- 05 तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- आवल्या, प.ह.नं.- 27, तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-21 , सनावद, जिला- खरगोन (म.प्र. ) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है, जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव , मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम, 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा -3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर, भूमि के नीचे पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) , भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
::अनुसूची::
तहसील
जिला
खसरा कमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का कमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
4
5
3
2
1
0.040
15/3/1
ग्राम-
खरगोन भीकनगांव
0.048
15/4
0.032
15/3/2
आवल्या,
प.ह.नं.- 27
0.014
16/1/1
0.134
4
कुल योग
A 3841
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
रा.प्र.क्र.- 0014- अ-82-2020-21.-
अतएव , राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव-बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत इंदिरासागर परियोजना की मुख्य नहर की आर 0डी0 83.045 कि0 मी 0 पर ग्राम- पिपलई बुजुर्ग, तह० भीकनगांव जिला खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक-03 से ग्राम बड़िया तह ० भीकनगांव जिला - खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक 05 तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- बंजारी , प.ह.नं.- 30 , तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-21 , सनावद, जिला- खरगोन (म.प्र.) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है, जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव, मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम, 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा -3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर, भूमि के नीचे पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
::अनुसूची::
तहसील
जिला
खसरा क्रमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का क्रमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
5
4
3
2
1
0.004
11/2
ग्राम- बंजारी,
खरगोन भीकनगांव
प.ह.नं.- 30
0.011
9/5
0.024
9/6
0.094
9/1
भीकनगांव
खरगोन
0.020
10/1
ग्राम- बंजारी,
प.ह.नं.- 30
4/2
0.002
5/1
5/2
6
0.155
कुल योग
[ भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
3842
रा.प्र.क्र.- 0015-3-82-2020-21.-
अतएव, राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव-बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत आर०डी० 21.00 कि० मी ० पर ग्राम- बड़िया तह. भीकनगांव जिला- खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक 05 से टेल (ग्राम- महुफाटा, प.ह.नं.- 34 , तहसील- झिरन्या, जिला- खरगोन) तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- पलासी, प.ह.नं.- 65, तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-21 , सनावद, जिला- खरगोन (म.प्र. ) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है , जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव, मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन ) अधिनियम, 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013 ) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा -3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर , भूमि के नीचे पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
:: अनुसूची :
तहसील
जिला
खसरा क्रमांक
ग्राम / पटवारी
हल्काक्रमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
4
5
2
3
1
0.004
खरगोन
15/2
ग्राम- पलासी,
भीकनगांव
प.ह.नं.- 65
0.053
17
0.023
18
0.017
32/10 3843
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
खसरा
तहसील
जिला
क्रमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का कमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
4
5
3
2
1
0.012
57
भीकनगांव
खरगोन
0.017
58/1
ग्राम पलासी,
प.ह.नं.- 65
0.017
59/1
58/2/2
0.021
59/2
0.017
0.010
59/3
69
0.003
0.011
70/2
0.015
70/3
0.013
94/4/3
0.006
94/8
0.018
103
104/2
0.059
130/3
104/4
0.035
130/3
0.007
0.019
105
0.015
109
0.023
111
0.009
112
0.424
23
कुल योग
[ भाग 1 3844
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
रा.प्र.क्र.- 0016- अ-82-2020-21.-
अतएव, राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव-बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत इंदिरासागर परियोजना की मुख्य नहर की आर०डी० 83.045 कि0मी0 पर ग्राम- पिपलई बुजुर्ग, तह० भीकनगांव जिला- खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस कमांक-03 से ग्राम बड़िया तह. भीकनगांव में निर्माणाधीन पम्प हाऊस कमांक 05 तक एवं पम्प हाऊस कमांक- 05 से टेल (ग्राम- महुफाटा, प.ह.नं.- 34, तहसील- झिरन्या, जिला- खरगोन) तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- बड़िया, प.ह.नं.- 64, तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-21 , सनावद, जिला- खरगोन (म.प्र. ) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है, जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव, मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम , 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013 ) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार , उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा -3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर, भूमि के नीचे पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
::अनुसूची::
तहसील
जिला
खसरा क्रमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का कमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
5
3
4
2
1
0.056
3/3
भीकनगांव ग्राम- बड़िया,
खरगोन
प.ह.नं.- 64
0.005
3/6
0.052
3/1
0.002
43 3845
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
तहसील
जिला
खसरा क्रमांक
ग्राम / पटवारी हल्का क्रमांक राजस्वभीकनगांवजि
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
4
5
3
1
2
0.041
24/1
भीकनगांव
खरगोन
0.017
23/4
ग्राम- बड़िया,
प.ह.नं.- 64
0.014
21
0.035
20
0.006
18/1
0.016
77/3
0.027
49/1
0.028
14/1
0.023
14/2
0.024
14/3
0.035
72
0.007
73
0.059
75/3
0.005
75/2/2
0.047
75/2/3
0.045
76/1/1
76/2
0.011
77/2/3
0.013
0.009
76/3/2
0.020
76/3/3
0.597
24
कुल योग
[ भाग 1 3846
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
रा.प्र.क्र.-0017-अ-82-2020-21.-
अतएव , राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव- बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत ग्राम- खारवी तह. भीकनगांव, जिला खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक 04 से टेल (ग्राम- बिरुल प.ह.नं.- 39 , तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन) तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर की ब्रांच माईनर पाईप नहर कमांक-03 में जल परिवहन हेतु ग्राम- नवलपुरा , प.ह.नं.- 95, तह० भीकनगांव , जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-21 , सनावद, जिला- खरगोन (म.प्र .) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है , जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव , मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम, 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013 ) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा 3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर , भूमि के नीचे पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) , भीकनगांव, जिला खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
::अनुसूची::
तहसील
जिला
खसरा क्रमांक
ग्राम / पटवारी
हल्काकमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
5
4
2
3
1
0.071
130/3
खरगोन भीकनगांव ग्राम-
0.002
131/1/4
नवलपुरा,
प.ह.नं.- 95
0,020
131/1/5
0.020
131/1/6
0.022
131/1/7
ग्राम-
भीकनगांव
खरगोन
0.002
132/1/1/1
132/1/2/1
0.048
नवलपुरा,
प.ह.नं.- 95
0.022
132/2/1/1
0.021
132/2/1/3
132/2/1/4
0.007
132/2/3
0.014
0.020
132/2/1/2
0.032
133/1/1
133/1/2
0.009
14
0.310
कुल योग
3847
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
रा.प्र.क्र.-0018-3-82-2020-21.-
V अतएव , राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव-बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत ग्राम- खारवी तह. भीकनगांव, जिला- खरगोन में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक 04 से टेल (ग्राम- बिरुल प.ह.नं.- 39, तह ० भीकनगांव , जिला- खरगोन) तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर की ब्रांच माईनर पाईप नहर क्रमांक-03 में जल परिवहन हेतु ग्राम- नूरियाखेड़ी, प.ह.नं.- 94, तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-21 , सनावद, जिला- खरगोन (म.प्र .) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है, जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव, मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम, 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013 ) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा- 3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर , भूमि के नीचे पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) , भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
:: अनुसूची ::
तहसील
जिला
खसरा कमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का क्रमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
5
3
4
2
1
0.023
भीकनगांव
169/3/1
खरगोन
ग्राम-
0.011
169/3/2/1
नूरियाखेड़ी,
प.ह.नं.- 94
0.017
169/3/2/2
0.051
3
कुल योग
AIN [ भाग 1 3848
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
रा.प्र.क्र.-0019- अ- 82-2020-21.-
अतएव , राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव-बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत ग्राम- खारवी तह. भीकनगांव में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक- 04 से टेल (ग्राम - बिरुल प.ह.नं.- 39, तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन) तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- सिराली, प.ह.नं. 16, तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग कमांक-21 , सनावद, जिला खरगोन (म.प्र. ) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाई जाए । :
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है, जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव, मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम, 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा- 3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर , भूमि के नीचे पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) , भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
:: अनुसूची::
तहसील
जिला
खसरा क्रमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का क्रमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
5
4
3
2
1
0.070
1
ग्राम-
भीकनगांव
खरगोन
सिराली,
0.031
4
प.ह.नं.- 16
0.004
5
0.005
9 3849
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
तहसील
जिला
खसरा क्रमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का क्रमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
4
5
2
3
0.084
10
भीकनगांव
1 खरगोन
0.026
7
0.072
8
ग्राम-
सिराली,
प.ह.नं.- 16
23
0.090
22
0.014
20
0.009
21
0.019
19
0.060
270/2/2
0.024
270/2/3
269/2/1
0.075
0.062
303/1
298
0.008
0.046
303/2
0.058
307/1
0.034
308/465
307/2
0.034
0.088
316/2
0.048
317
0.064
346
342/2/1
0.029
363/3
0.004
0.075
364/1/1
365
0.017
0.042
369
372
0.019
373
1.211
29
कुल योग
[भाग 1 3850
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
रा.प्र.क्र.-0020- अ- 82-2020-21.-
अतएव , राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव-बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत ग्राम- खारवी तह. भीकनगांव में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक 04 से टेल (ग्राम- बिरुल प.ह.नं.- 39 , तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन) तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- बिरुल, प.ह.नं.- 39, तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग कमांक-21 , सनावद, जिला खरगोन (म.प्र.) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाई जाए । और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है, जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव, मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम , 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013 ) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा 3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर, भूमि के नीचे पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
::अनुसूची::
तहसील
जिला
खसरा कमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का कमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
5
4
3
2
1
10/4
खरगोन
ग्राम- बिरुल ,
भीकनगांव
0.065
11/4
प.ह.नं.- 39
10/1
0.025
10/5
0.027
11/5
10/6
0.060
11
0.033
13/1
खरगोन भीकनगांव ग्राम- बिरुल,
0.009
13/2
प.ह.नं.- 39
0.029
12/1
0.078
12/7
0.082
21/1
0.408
09
कुल योग
3851
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
रा.प्र.क्र.- 0021 - अ- 82-2020-21.-
अतएव , राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव- बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत ग्राम खारवी तह. भीकनगांव में निर्माणाधीन पम्प हाऊस कमांक 04 से टेल (ग्राम- बिरुल प.ह.नं. -39 , तह ० भीकनगांव, जिला- खरगोन) तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम एकतासा, प.ह.नं.- 34, तह ० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग कमांक-21 , सनावद, जिला खरगोन (म.प्र. ) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्टबिछाये जाने का प्रस्ताव है, जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव , मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम, 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013 ) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा 3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर, भूमि के नीचे पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
::अनुसूची :
तहसील
जिला
खसरा क्रमांक
ग्राम / पटवारी
हल्काकमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
5
4
2
3
1
0.086
2/2
ग्राम-
खरगोन भीकनगांव
0.057
3/1
एकतासा,
प.ह.नं.- 34
0.076
5
0.002
4
0.110
8
खरगोन भीकनगांव
0.051
9
0.089
10/2
ग्राम-
एकतासा,
प.ह.नं.- 34
0.013
11
13
0.049
0.046
134
0.021
135
137
0.018
12
0.618
कुल योग
[ भाग 1 3852
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
रा.प्र.क्र.- 0022- अ- 82-2020-21.-
अतएव , राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव-बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत ग्राम- खारवी तह, भीकनगांव में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक- 04 से टेल (ग्राम- बिरुल प.ह.नं. - 39, तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन) तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- मछलगांव, प.ह.नं.- 34, तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग कमांक-21 , सनावद, जिला खरगोन (म.प्र. ) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है , जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव, मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम, 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013 ) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा -3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर, भूमि के नीचे पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) , भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
::अनुसूची::
तहसील
जिला
खसरा क्रमांक
ग्राम / पटवारी
हल्काकमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
4
5
3
2
1
0.070
68/1
ग्राम-
खरगोन भीकनगांव
60/2
0.048
मछलगांव,
प.ह.नं.- 34
0.088
61/2
0.038
63/2 3853
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
खसरा
तहसील
जिला
ग्राम पटवारी
कमांक
हल्का कमाकमत
भीकनगांव जिलाखरगोन,म
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
4
5
2
3
1
0.038
63/1
भीकनगांव
खरगोन
0.072
62/3
0.012
61/3
ग्राम-
मछलगांव,
प.ह.नं.- 34
0.074
61/4
0.100
32/4
0.124
166
0.070
170
0.012
279/1
0.028
277/1
0.002
277/4
0.018
274/4
0.030
274/5
0.041
274/7
0.034
274/9
0.008
272
0.064
269/4
0.024
269/3
0.006
268/5
0.118
268/6
0.136
263/2
0.019
262
1.274
25
कुल योग
[ भाग 1 3854
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
रा.प्र.क्र.-0023- अ-82-2020-21.-
अतएव , राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव-बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत ग्राम खारवी तह. भीकनगांव में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक- 04 से टेल (ग्राम- बिरुल प.ह.नं. -39, तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन) तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- नागझिरी , प.ह.नं.- 33 , तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-21 , सनावद, जिला- खरगोन (म.प्र .) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है, जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव, मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम, 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013 ) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा -3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर, भूमि के नीचे पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) , भीकनगांव , जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
:: अनुसूची::
तहसील
जिला
खसरा कमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का कमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
5
4
3
2
1
0.014
294
भीकनगांव
खरगोन
0.041
77
ग्राम-
नागझिरी,
प.ह.नं.- 33
80
0.043
0.053
79 3855
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
खसरा
तहसील
जिला
क्रमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का कमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
5
4
3
2
1
0.041
78
खरगोन भीकनगांव
0.034
84
ग्राम- नागझिरी,
0.023
67
प.ह.नं.- 33
0.040
66
0.027
65
0.002
68
0.058
62
0.044
59
0.029
58
0.063
7
0.016
8
0.041
3
0.039
18
0.034
19
0.028
20
0.670
19
कुल योग
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
3856
रा.प्र.क्र.-0024- अ-82-2020-21.-
अतएव, राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव- बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत ग्राम- खारवी तह. भीकनगांव में निर्माणाधीन पम्प हाऊस कमांक- 04 से टेल (ग्राम- बिरुल प.ह.नं.- 39 , तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन) तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- रामपुरा (कांझर) , प.ह.नं.- 33, तह ० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-21 , सनावद, जिला- खरगोन (म.प्र.) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है, जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव, मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन ) अधिनियम, 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए , राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा -3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर , भूमि के नीचे पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) , भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
::अनुसूची::
तहसील
जिला
खसरा क्रमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का क्रमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
5
4
1
2
3
0.008
289
भीकनगांव
खरगोन
0.016
288
रामपुरा (कांझर),
प.ह.नं.- 33
0.009
286
0.007
285 3857
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
तहसील
जिला
खसरा कमांक
ग्रात पठवकरी
हल्का कमाक
किनगांव
जिलाखरगोनम.प्र.
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
4
5 2
3
1
खरगोन भीकनगांव
284
0.013
रामपुरा
(कांझर),
प.ह.नं.- 33
0.056
282
0.008
272
0.063
275
0.031
276
0.022
277
0.050
226
0.283
11
कुल योग
[ भाग 1 3858
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
रा.प्र.क्र.-0025- अ- 82-2020-21.-
अतएव , राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव- बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत ग्राम- खारवी तह. भीकनगांव में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक– 04 से टेल (ग्राम- बिरुल प.ह.नं.- 39, तह ० भीकनगांव, जिला- खरगोन) तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- लछोरा, प.ह.नं. 39, तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-21 , सनावद, जिला- खरगोन (म.प्र. ) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है, जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव, मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम, 2012 (कमांक 5 सन् 2013) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा -3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर, भूमि के नीचे पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
:: अनुसूची ::
तहसील
जिला
खसरा कमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का कमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
4
3
5
2
1
खरगोन भीकनगांव
0.006
197
ग्राम- लछोरा,
प.ह.नं.- 39
0.006
01
कुल योग
3859
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
रा.प्र.क्र.- 0026- अ- 82-2020-21.-
अतएव, राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव- बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत ग्राम खारवी तह. भीकनगांव में निर्माणाधीन पम्प हाऊस कमांक- 04 से टेल (ग्राम- बिरुल प.ह.नं.-39, तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन) तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- बोरुठ, प.ह.नं.- 10 , तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग कमांक-21 , सनावद, जिला खरगोन (म.प्र.) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाई जाए । और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन , केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है , जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव, मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम , 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा-3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर, भूमि के नीचे पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) , भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
:: अनुसूची::
तहसील
जिला
खसरा कमांक
ग्राम / पटवारी
हल्का कमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
5
3
4
2
1
0.025
504
भीकनगांव
खरगोन
ग्राम- बोरुठ,
प.ह.नं.- 10
0.008
505
519
0.045
0.002
506
भीकनगांव
खरगोन |
516
0.010
ग्राम- बोरुठ,
प.ह.नं.- 10
0.080
517
520
0.020
0.190
7
कुल योग
[ भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
3860
रा.प्र.क्र.-0027- अ- 82-2020-21.-
अतएव , राज्य सरकार को लोकहित में यह आवश्यक प्रतीत होता है कि भीकनगांव-बिंजलवाड़ा माईको उद्वहन सिंचाई परियोजना के अंतर्गत ग्राम खारवी तह. भीकनगांव में निर्माणाधीन पम्प हाऊस क्रमांक 04 से टेल (ग्राम- बिरुल प.ह.नं.-39, तह ० भीकनगांव, जिला- खरगोन) तक बिछाई जाने वाली भूमिगत राईजिंगमेन पाईप नहर में जल परिवहन हेतु ग्राम- कालधा, प.ह.नं. 11 , तह० भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश राज्य में कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास संभाग क्रमांक-21 , सनावद, जिला खरगोन (म.प्र .) द्वारा भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाई जाए ।
और अतएव राज्य सरकार को उक्त भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक प्रतीत होता है कि उस भूमि में, जिसमें भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने का प्रस्ताव है, जो इस अधिसूचना से संलग्न अनुसूची में वर्णित है, उपयोग के अधिकार का अर्जन किया जाए ।
अतएव, मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट (भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन) अधिनियम, 2012 (क्रमांक 5 सन् 2013 ) की धारा 3 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार, उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन करने के अपने आशय की घोषणा करती है ।
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि में हितबद्ध है, उस तारीख से जिसको उक्त अधिनियम की धारा 3 की उपधारा (1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है इक्कीस दिवस के भीतर, भूमि के नीचे पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट बिछाये जाने के संबंध में सक्षम प्राधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भीकनगांव, जिला- खरगोन मध्यप्रदेश को लिखित में आक्षेप भेज सकेगा ।
::अनुसूची::
तहसील
जिला
खसरा कमांक
ग्राम / पटवारी
हल्काक्रमांक
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि (हेक्टेयर में)
4
5
3
2
1
0.006
349.
खरगोन भीकनगांव ग्राम- कालधा, प.ह.नं.- 11
0.094
350
0.072
355
0.015
359/2
खरगोन भीकनगांव
0.080
360
ग्राम- कालधा,
प.ह.नं.- 11
0.018
361/2
0.080
361/3
0.365
7
कुल योग
ओमनारायण सिंह, भू-अर्जन अधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) .
3861
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
कार्यालय , कलेक्टर , जिला श्योपुर , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश राजस्व विभाग
श्योपुर, दिनांक 28 अगस्त 2020 प्र.क्र.-0001-2020-21- अ-82-8385.-
// अधिसूचना //
(भू-अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 कर धारा 19 (1 ) एवं 40 (सहपठित भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन विकास योजना) नियम, 2015 के नियम 10 के अन्तर्गत)
राज्यशासन को इसका समाधान हो चुका है कि लोक प्रयोजनार्थ (चम्बल सूक्ष्म सिचाई परियोजना निर्माण हेतु ) ग्राम लूण्ड प.ह.क. 14 रा.नि.वृत क. 02 तहसील- बड़ौदा उपखण्ड़- श्योपुर जिला-श्योपुर में कुल 1.186 हेक्टेयर भूमि अपेक्षित है, इसलिए घोषणा कि जाती है कि उपर्युक्त परियोजना के लिए निम्नानुसार भूमि जो कि ग्राम लूण्ड़ प.ह.न. 14 राजस्व निरीक्षक वृत-02 तहसील - बडौदा उपखण्ड़-श्योपुर जिला-श्योपुर में उक्त परियोजना के लिए आवश्यकता है ।
अनुसूची
1. भूमि का वर्णन
क. जिला
श्योपुर
बडौदा
ख. तहसील
ग. ग्राम
लूण्ड़
1.186 हेक्टयर
घ. लगभग क्षेत्रफल
भूमि का विस्तृत ब्यौरा निम्नलिखित है :-
हितवद्ध व्यक्ति का नाम व पता राजस्व अभिलखानुसार सर्वे नं.
क्र.
भूमिका प्रकार
स्वामित्व का प्रकार
अर्जन का क्षेत्रफल हेक्टेयर में
6
5
3
4
2
1
0.089
कृषि भूमि
1.
भूमिस्वामी
58/2
बनासीबाई बेवा रामहेत जाति जाटव हिस्सा 124/3643 , रमाबाई पुत्री पन्नालाल जाति जाटव हिस्सा 622/3643, रविशंकर पुत्र रामनिवास जाति मीणा हिस्सा 418/3643, रामकुवार पुत्र पन्नालाल जाति बैरवा हिस्सा 622/3643, रामस्वरूप पुत्र पन्नालाल जाति बैरवा हिस्सा 204/3643 , पिंकी नाबा पुत्री रामहेत सरस्प मॉ जाति जाटव हिस्सा 124/3643, नीलम नाबा पुत्री रामहेत सरपस्त मॉ जाति जाटव हिस्सा. 124/3643 , अमरजीत नाबा पुत्र रामहेत सरपस्त माँ जाति जाटव हिस्सा 125/3643, रामकिशन नाबा पुत्र रामहेत सरपस्त जाति जाटव हिस्सा 125/3643 . कोशल्याबाई पुत्री पन्नालाल जाति जाटव हिस्सा 622/3643, बजरंगीबाई पुत्री पन्नालाल जाति जाटव हिस्सा 533/3643, भूनि स्वामी भू- राजस्व 12.23
0.021
भूमिस्वामी
10/1
कृषि भूमि
2.
केकैयी बाई पुत्री बीरबल जाति मीणा हिस्सा 1/5 वरमाबाई पुत्री चिरंजीव जाति मीणा हिस्सा 1/25 मिथलेश बेवाबेवा सुग्रीव जाति मीणा हिस्सा 1/15 सोनेराम पुत्र बीरबल जाति मीणा हिस्सा 1/5 सुरेन्द्र पुत्र चिरंजीव जाति मीणा हिस्सा 1/25 हेमन्त नाबालिग पुत्र चिरंजीव संरपस्त मॉ जाति मीणा हिस्सा 1/25 मुडी नाबालिग पुत्री चिरंजीव संरपस्त माँ जाति मीणा हिस्सा 1/25 सुनयना नाबालिग पुत्री चिरंजीव सरपस्त मॉ जाति मीणा हिस्सा 1/25 धनश्याम पुत्र बीरबल जाति मीणा हिस्सा 1/5 मोहना नाबालिग पुत्री सुग्रीव सरपस्त मॉ जाति मीणा हिस्सा 1/15 गिरजा नाबालिग पुत्री सुग्रीव सरपस्त मॉ 3862
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भूमिस्वामी
64/2
कृषि भूमि 3.
भूमिस्वामी कृषि भूमि 4/3/2
4.
भूमिस्वामी कृषि भूमि 5. 47/1/2
56/2
कृषि भूमि 6.
भूमिस्वामी
कृषि भूमि
भूमिस्वामी
7. 3/2/2
कृषि भूमि
भूमिस्वामी
8. 38/1क/2
कृषि भूमि
भूमिस्वामी
9. 42/1/1
46/2
कृषि भूमि
भूमिस्वामी
10.
21/2
कृषि भूमि
भूमिस्वामी
11.
भूमिस्वामी कृषि भूमि 47/2/2
12.
किता-12
जाति मीणा हिस्सा 1/15 भू- राजस्व 114.77
0.170 राधेश्याम पुत्र चतरूलाल जाति मीणा पता ग्राम भूमि स्वामी भू-राजस्व 9.80
0.019 प्रेमबाई बैवा रामस्वरूप जाति वैश्य हिस्सा 1/7 श्यामसुन्दर पुत्र रामस्वरूप जाति वैश्य हिस्सा 1/7 त्रिलोकचन्द्र पुत्र रामस्वरूप जाति वैश्य हिस्सा 1/7 विनोद पुत्र रामस्वरूप जाति वैश्य हिस्सा 1/7 मिथलेश पुत्री रामस्वरूप जाति वैश्य हिस्सा 1/7 राजेश पुत्री रामस्वरूप जाति वैश्य हिस्सा 1/7 रेखा पुत्री पुत्र रामस्वरूप जाति वैश्य हिस्सा 1/7 भू- राजस्व 22.58 0.105 रामचरण पुत्र सीताराम जाति मीणा पता ग्राम भूमि स्वामी भू-राजस्व 13.00
0.176 पप्पू पुत्र चतरूलाल जाति मीणा पता ग्राम भूमि स्वामी भू-राजस्व 7.53
0.117 रामदयाल पुत्र मायाराम जाति मीणा निवासी ग्राम भूमिस्वामी भू-राजस्व 2.87
0.054 महावीर पुत्र धनजीत जाति मीणा निवासी ग्राम भूमिस्वामी भू-राजस्व 22.73
0.002 पप्पु उर्फ धरमराज पुत्र प्रभुलाल जाति मीणा निवासी ग्राम भूमि स्वामी भू राजस्व 1.00
0.078 गोबरीलाल पुत्र सोराम जाति बेरवा हिस्सा 1/3 किसना पुत्र सोराम जाति बेरवा हिस्सा 1/3 किरानी, पुत्री सोराम जाति बेरवा हिस्सा 1/3 भू- दानधारी भू- राजस्व 1.64
0.251 बाबूलाल पुत्र मंगला जाति मीणा भू- राजस्व 79.00
0.104 बृजमोहन पुत्र सीताराम जाति मीणा निवासी ग्राम भूमिस्वामी भू-राजस्व 11.21
1.186
1. यह घोषणा हितबद्ध सभी व्यक्तियो के आक्षेपो को सुनने एवं भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 (2013 का 30) में उपबंधित सम्यक जांच के पश्चात की गयी है ।
2. नियमं 4 के अधीन गठित दल द्वार रिपोर्ट प्रस्तुत की है कि भू-अर्जन के कारण विस्थापित होने वाले संभावित कुटुबों की संख्या निरंक है, अतः इनके लिए पुनर्व्यवस्थापन के क्षेत्र चिन्हित करने का प्रश्न अद्भूत नही होता है।
3. उक्त भूमि के या उक्त भूमि के किसी भाग में पडे कोयला, लौहा पत्थर, स्लेट या अन्य खनिजो की खानें है, खनिज और खनिजो के ऐसे भागो में जिन्हे इस प्रयोजन , जिसके लिए भूमि अर्जित की जा रही है, की परियोजना के निर्माण चरण के दौरान खोदे जाने या हटाये या उपयोग किये जाने की अपेक्षा है, को छोडकर आवश्यकता नही है ।
4. कलेक्टर, जिला श्योपुर के कार्यालय और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्योपुर के कार्यालय में किसी भी कार्य दिवस को कार्य समय के दौरान भूमि योजना का निरीक्षण किया जा सकता है ।
विशेष:- धारा 40(2) के कार्यक्षेत्र के भीतर आने वाली परियोजना के लिए भूमि की तत्काल अपेक्षा है । इसलिए भू-अर्जन की अत्यावश्यकता होने से समुचित सरकार द्वारा दिये निर्देशो के प्रकाशन में तथ्यों के परीक्षण उपरान्त प्रकरण में अधिनियम की धारा 40 के प्रावधान प्रवृत्त किये है । अतः इसमें अधिनियम के अध्याय 2 से 6 तक के प्रावधान के उपबंध लागू नही होगे । 3863
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
प्र.क्र.-0002-2020-21 - अ-82-8383.-
(भू-अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 कर धारा 19 (1) एवं 40 (सहपठित भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन विकास योजना) नियम , 2015 के नियम 10 के अन्तर्गत)
राज्यशासन को इसका समाधान हो चुका है कि लोक प्रयोजनार्थ (चम्बल सूक्ष्म सिचाई परियोजना निर्माण हेतु) ग्राम हिरनीखेडा प.ह.क. 08 रा.नि.वृत क. 02 तहसील- बड़ौदा उपखण्ड़- श्योपुर जिला श्योपुर में कुल 0.167 हेक्टेयर भूमि अपेक्षित है, इसलिए घोषणा कि जाती है कि उपर्युक्त परियोजना के लिए निम्नानुसार भूमि जो कि ग्राम हिरनीखेडा प.ह.न. 08 राजस्व निरीक्षक वृत-02 तहसील - बडौदा उपखण्ड़ -श्योपुर जिला श्योपुर में उक्त परियोजना के लिए आवश्यकता है ।
अनुसूची
1. भूमि का वर्णन
क. जिला
श्योपुर
ख. तहसील
बडौदा
हिरनीखेडा
ग. ग्राम
घ. लगभग क्षेत्रफल
0.167 हेक्टयर
भूमि का विस्तृत ब्यौरा निम्नलिखित है:-
सर्वे नं.
हितवद्ध व्यक्ति का नाम व पता राजस्व अभिलखानुसार क्र.
भूमि का प्रकार
स्वामित्व का प्रकार
अर्जन का क्षेत्रफल हेक्टेयर में
6
4
3
2
5
1
0.136
1.
भूमिस्वामी
93/2
कृषि भूमि
हेमराज पुत्र किशनलाल जाति मीणा पता निवासी ग्राम भूमि भू- राजस्व 23.11
0.031
भूमिस्वामी कृषि भूमि
2. 94/1/1/1
देवीराम पुत्र हरजी जाति मीणा पता निवासी ग्राम समानभाग भूमि स्वामी भू- राजस्व 11.00
0.167
किता - 2
1. यह घोषणा हितबद्ध सभी व्यक्तियो के आक्षेपो को सुनने एवं भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 (2013 का 30) में उपबंधित सम्यक जांच के पश्चात की गयी है ।
2. नियम 4 के अधीन गठित दल द्वार रिपोर्ट प्रस्तुत की है कि भू-अर्जन के कारण विस्थापित होने वाले संभावित कुटुबों की संख्या निरंक है, अतः इनके लिए पुनर्व्यवस्थापन के क्षेत्र चिन्हित करने का प्रश्न अद्भूत नही होता है ।
3. उक्त भूमि के या उक्त भूमि के किसी भाग में पडे कोयला, लौहा पत्थर, स्लेट या अन्य खनिजो की खानें है, खनिज और खनिजो के ऐसे भागो में जिन्हे इस प्रयोजन, जिसके लिए भूमि अर्जित की जा रही है, की
परियोजना के निर्माण चरण के दौरान खोदे जाने या हटाये या उपयोग किये जाने की अपेक्षा है, को छोडकर आवश्यकता नही है ।
4. कलेक्टर, जिला श्योपुर के कार्यालय और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्योपुर के कार्यालय में किसी भी कार्य दिवस को कार्य समय के दौरान भूमि योजना का निरीक्षण किया जा सकता है ।
विशेष :- धारा 40 (2) के कार्यक्षेत्र के भीतर आने वाली परियोजना के लिए भूमि की तत्काल अपेक्षा है । इसलिए भू-अर्जन की अंत्यावश्यकता होने से समुचित सरकार द्वारा दिये निर्देशो के प्रकाशन में तथ्यों के परीक्षण उपरान्त प्रकरण में अधिनियम की धारा 40 के प्रावधान प्रवृत्त किये है । अतः इसमें अधिनियम के अध्याय 2 से 6 तक के प्रावधान के उपबंध लागू नही होगे ।
राकेश कुमार श्रीवास्तव , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
3864
राजस्व विभाग
मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल
भोपाल , दिनांक 22 अक्टूबर 2020
अधिसूचना
क्रमांक एफ 13-01-2020- सात-5.- भू-अभिलेख नियमावली भाग -1 , भाग -2, भाग -3, भाग-4 के अन्तर्गत जारी समस्त निर्देश एवं उनसे संबंधित अनुषांगिक हिदायतें जो समय - समय पर जारी की गई हैं, को अतिष्ठित करते हुए नवीन भू- अभिलेख नियमावली भाग -1 , भाग -2 जारी की जाती है जो मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशन दिनांक से प्रभावशील होगी.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
दिनेश कुमार मौर्य, उपसचिव.
विषय सूची
भाग- एक
अध्याय - 1. पटवारियों की नियुक्ति, योग्यताऐं, दण्ड, परिवीक्षा एवं स्थायीकरण संबंधी निर्देश अध्याय 2. पटवारी परीक्षा एवं प्रशिक्षणशाला के प्रावधान
अध्याय 3. पटवारियों के विविध कर्तव्य संबंधी नियम एवं निर्देश
अध्याय - 4. राजस्व निरीक्षकों की नियुक्ति, योग्यताएँ, दण्ड, परिवीक्षा एवं स्थायीकरण संबंधी निर्देश अध्याय 5. राजस्व निरीक्षक परीक्षा तथा प्रशिक्षणशाला के प्रावधान
अध्याय 6. राजस्व निरीक्षक के विविध कर्तव्य संबंधी नियम एवं निर्देश
अध्याय - 7. भू-अभिलेख अधीक्षक एवं सहायक भू-अभिलेख अधीक्षक के कर्तव्य एवं निर्देश
भाग- दो
अध्याय- 8. भू-सर्वेक्षण का परिचय , इतिहास एवं घटक
अध्याय - 9. भू-मापन की विधियां
अध्याय - 10. नियंत्रण बिन्दु ( Control Point )
अध्याय - 11. रुढिचिन्ह (अलामात)
अध्याय -12. भू-अभिलेख तथा भू- सर्वेक्षण संबंधी नियम
अध्याय 13. मसाहती ग्राम खसरा तैयार करने के निर्देश
अध्याय - 14. ड्रोन सर्वेक्षण
अध्याय -15 . ड्रोन के माध्यम से भू सर्वेक्षण
परिशिष्ट - 1
परिशिष्ट - 2
परिशिष्ट - 3
परिशिष्ट- 4
परिशिष्ट - 5
परिशिष्ट - 6
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( भू- सर्वेक्षण तथा भू- अभिलेख ) नियम, 2020 में निर्धारित प्ररूप 3865
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
संक्षेपनाम
विवरण
संक्षिप्त रूप
मध्यप्रदेश भू- अभिलेख प्रबंधन समिति, जो कि राजस्व विभाग का एक अंग है । जिसका उद्देश्य प्रदेश में भू- अभिलेखों के आधुनिकरण सम्बन्धी योजनओं का संचालन एवं क्रियान्वयन करना है ।
MPLRS- Madhaya Pradesh Land Record Management Society मध्यप्रदेश भू-अभिलेख प्रबंधन समिति
WebGIS / Bhulekh Portal वेब जीआईएस / भूलेख पोर्टल
भूलेख पोर्टल ( https://mpbhulekh.gov.in ) आयुक्त, भू- अभिलेख मध्यप्रदेश द्वारा भू- अभिलेखों के आधुनिकीकरण सम्बन्धी योजनाओं के क्रियान्वयन एवं सेवाओं का नागरिकों तक इलेक्ट्रोनिक्ली प्रदाय करने का माध्यम है ।
Revenue Case Management System ( RCMS ) रेवेन्यु केस मेनेजमेंट सिस्टम
RCMS ( https://www.rcms.mp.gov.in/) राजस्व विभाग का एक पोर्टल है जिसके माध्यम से मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, 1959 के प्रावधानों के अन्तर्गत राजस्व न्यायलयों द्वारा विभिन्न प्रकरणों जैसे नामांतरण , बटवारा , सीमांकन आदि के निराकरण की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाता है।
SAARA (SmArt App Revenue Administration) स्मार्ट एप फॉर एडमिनिस्ट्रेशन रेवेन्यू
for स्मार्ट एप्लीकेशन फॉर रेवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन, राजस्व विभाग का एक एप्लीकेशन है , जिसमें एक जगह से विभाग की कई महत्वपूर्ण योजनाओं जैसे कि गिरदावरी , फसल कटाई प्रयोग आदि की मॉनीटरिंग एवं क्रियान्वयन किया जा रहा है । MRR - Modern Record Room मॉर्डन रिकॉर्ड रूम
MRR योजना का उद्देश्य राजस्व अभिलेखागारों को आधुनिक बनाना तथा पुराने राजस्व अभिलेखों का संरक्षण करते हुए उनकी आसान उपलब्धता सुनिश्चित करना है । पुराने राजस्व रिकॉर्ड जैसे पंचशाला खसरा , मिसल जमाबंदी , निस्तार पत्रक , विभिन्न रजिस्टर आदि को स्कैन कर इलेक्ट्रानिक रूप में रखा गया है इनकी डिजिटल प्रतिलिपि भूलेख पोर्टल पर उपलब्ध है। [ भाग 1 3866
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
मध्यप्रदेश भू- अभिलेख नियमावली
भाग एक
3867
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
अध्याय-1
पटवारियों की नियुक्ति, योग्यताऐं, दण्ड, परिवीक्षा , एवं स्थायीकरण 1. अर्हता एवं चयन प्रक्रिया: -
जिले में पटवारियों के रिक्त पदों की पूर्ति मध्यप्रदेश भू- अभिलेख एवं बन्दोबस्त तृतीय श्रेणी, अराजपत्रित ( कार्यपालिक एवं तकनीकी) सेवा भर्ती नियम , 2012 तथा समय - समय पर जारी संशोधित के अनुसार की जाएगी।
2. आरक्षण रोस्टरः-
पटवारी की स्थापना में संबंधित जिला स्तर की रिक्तियों एवं आरक्षण रोस्टर की जानकारी शासन द्वारा जारी आरक्षण नियमों के अनुसार संबंधित जिले के भू- अभिलेख अधीक्षक द्वारा संधारित की जायेगी ।
3. नियुक्तिः-
कलेक्टर द्वारा जिला स्तर पर काउंसलिंग के उपरांत दस्तावेज सत्यापन की कार्यवाही की जाएगी । मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता , 1959 ( यथासंशोधित ) की धारा 104 (2 ) में निहित प्रावधान अनुसार सक्षम प्राधिकारी द्वारा पटवारी पद पर नियुक्ति हेतु पात्र उम्मीदवारों के नियुक्ति आदेश जारी किये जाएंगे । किसी भी चयनित उम्मीदवार की पटवारी के पद पर पदस्थापना उसकी गृह तहसील में नहीं की जाएगी ।
4. परिवीक्षा अवधिः-
पटवारी के पद पर दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि के अधीन नियुक्ति की जायेगी । शासन द्वारा भर्ती नियमों में संशोधन अनुसार परिवीक्षा अवधि में वृद्धि कमी की जा सकेगी । परिवीक्षा अवधि की गणना नियुक्ति उपरांत नियत प्रशिक्षण शाला में उपस्थिति दिनांक से प्रारम्भ की जायेगी ।
5. वरिष्ठता निर्धारणः-
आयुक्त , भू- अभिलेख द्वारा पटवारियों की राज्य स्तरीय वरिष्ठता सूची संधारित की जाएगी जिसमें पटवारियों के नाम , उनके सेवा में उपस्थित होने के दिनांक के क्रम में रखे जायेंगे ।
परन्तु यदि एक से अधिक पटवारियों का सेवा में उपस्थित होने का दिनांक एक ही है , उस स्थिति में , पटवारियों की पारस्परिक वरिष्ठता जन्म दिनांक के आधार पर निर्धारित की जाएगी तथा आयु में वरिष्ठ पटवारी को सूची में आयु में कनिष्ठ पटवारी के ऊपर वरिष्ठता दी जाएगी। [ भाग 1 3868
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
6. पदोन्नतिः-
पटवारी से राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति राज्य शासन द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुसार की जायेगी ।
7. स्थानांतरण: -
किसी पटवारी का एक तहसील से दूसरी तहसील में तथा एक जिले से दूसरे जिले में स्थानान्तरण , मध्यप्रदेश शासन द्वारा समय - समय पर जारी स्थानान्तरण नीति के प्रावधानों के तहत किया जायेगा । पटवारी की तहसील में प्रथम पदस्थापना के समय एवं समय-समय पर उसके हल्के के प्रभार में आवश्यकता अनुसार परिवर्तन उपखण्ड अधिकारी ( राजस्व) द्वारा किया जा सकेगा।
8. आचरण नियमः-
मध्यप्रदेश में शासकीय सेवकों के सिविल सेवा संबंधी आचरण के संबंध में मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण ) नियम , 1965 यथासमय संशोधनों सहित पटवारी के संबंध में भी लागू होंगे ।
9. अवकाशः-
मध्यप्रदेश में शासकीय सेवकों के लिये मध्यप्रदेश अवकाश नियम , 1977 ऐसे संशोधनों सहित , जो इसमें समय - समय पर किये जायें , पटवारियों के अवकाश के संबंध में भी लागू होंगे । पटवारियों को आकस्मिक अवकाश राजस्व निरीक्षक/ नियंत्रक अधिकारी द्वारा स्वीकृत किया जा सकेगा । अर्जित अवकाश के लिए 90 दिवस तक तहसीलदार द्वारा एवं इससे अधिक अवधि का अवकाश उपखण्ड अधिकारी द्वारा स्वीकृत किया जा सकेगा । 10. अनुशासनात्मक कार्यवाहीः-
मध्यप्रदेश में अधीनस्थ सेवाओं के शासकीय सेवकों के दण्ड का विनियमन करने वाले मध्यप्रदेश सिविल सेवा ( वर्गीकरण , नियंत्रण तथा अपील ) नियम, 1966 के तहत ऐसे संशोधनों सहित , जो इसमें समय - समय पर किये जायें , पटवारियों के दण्ड, निलंबन तथा पदच्युति का विनियमन किया जाएगा । पटवारी के विरुद्ध लघु शास्ति की कार्यवाही के लिये तहसीलदार एवं दीर्घ शास्ति की कार्यवाही के मामले में उपखण्ड अधिकारी (राजस्व) सक्षम प्राधिकारी होगा । मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता , 1959 की धारा 104 ( 2 ) की शक्तियों अधिसूचना क्रमांक 11429-सी आर- 635- छह-ना-1 , दिनांक 01 अक्टूबर 1959 द्वारा उपखण्ड अधिकारी को प्रदान की गई हैं । प्रत्योजित शक्तियों के अधीन उपखण्ड अधिकारी पटवारी को पदच्युत करने का अधिकारी है । 3869 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
11. अनुकम्पा नियुक्तिः-
पटवारी की शासकीय सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उसके वारिसान को अनुकम्पा नियुक्ति की पात्रता होगी तथा अनुकम्पा नियुक्ति शासन द्वारा समय - समय पर जारी नियम निर्देशों के अनुरूप की जावेगी । यदि मृत पटवारी के वारिसान को पटवारी पद पर अनुकम्पा नियुक्ति दी जाती है और वह प्रशिक्षण उपरान्त विभागीय परीक्षा में अनुत्तीर्ण रहता हैं तो उसे पात्रता अनुसार रिक्त अन्य पद पर अनुकम्पा नियुक्ति दी जा सकती है ।
12. प्रशिक्षणः-
पटवारी पद चयन उपरांत जिला कलेक्टर से प्राप्त सूची अनुसार संबंधित उपखण्ड अधिकारी (राजस्व) द्वारा नियुक्ति आदेश जारी होने पर संबंधित को नियत पटवारी प्रशिक्षण शाला में उपस्थित होकर अध्याय-2 के उपबन्धों के अनुसार प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा । उपखण्ड अधिकारी ( राजस्व) द्वारा जारी नियुक्ति आदेश प्रशिक्षण केन्द्र पर उपस्थिति दिनांक से प्रभावी होगा। प्रशिक्षण केन्द्र पर निर्धारित समय के भीतर उपस्थित न होने की दशा में नियुक्ति आदेश निरस्त किया जा सकेगा ।
13. परिवीक्षा अवधि की समाप्तिः-
परिवीक्षाधीन पटवारी को 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में प्रशिक्षण उपरान्त आयोजित होने वाली परीक्षा तथा सी.पी.सी.टी. परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा ।
14.स्थायीकरण: -
पटवारी पद पर स्थायीकरण दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पूर्ण होने पर निम्नलिखित दो शर्तों की पूर्ति होने के उपरांत किया जाएगाः-
14.1 अध्याय दो में नियत प्रशिक्षण प्राप्त कर नियत समस्त विषयों की परीक्षा उत्तीर्ण होने के उपरांत ।
14.2 दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि सफलतापूर्वक पूर्ण किये जाने के उपरांत।
15. परिवीक्षा अवधि में वृद्धिः-
पटवारी की परिवीक्षा अवधि में अधिक्तम 01 वर्ष की वृद्धि आयुक्त, भू- अभिलेख द्वारा मूलभूत नियमों के परिप्रेक्ष्य में युक्तियुक्त कारणों के आधार पर की जा सकेगी। [ भाग 1 3870
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
अध्याय - 2
पटवारी परीक्षा एवं प्रशिक्षणशाला के प्रावधान
1. प्रशिक्षण केंद्र-
आयुक्त, भू-अभिलेख चयनित नवनियुक्त पटवारियों के प्रशिक्षण हेतु आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण शाला खोल सकेगा तथा आवश्यक होने पर किसी भी जिले अथवा तहसील में किसी भी स्थान पर अस्थाई रूप से प्रशिक्षण शाला स्थापित कर प्रशिक्षण कराया जा सकेगा। चयनित नवनियुक्त प्रत्येक पटवारी को, इस प्रशिक्षण केंद्र पर उपस्थित होकर , इस अध्याय के उपबंधों में वर्णित प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य होगा ।
2. प्रशिक्षण अवधि एवं कार्य योजना-
प्रशिक्षण की अवधि अनुसूची-1 अनुसार होगी। आयुक्त, भू-अभिलेख द्वारा यथासमय आवश्यकतानुसार सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण , अवधि तथा परीक्षा कार्यक्रम में परिवर्तन किया जा सकेगा ।
3. सैद्धांतिक प्रशिक्षण-
पटवारी पद हेतु सैद्धांतिक प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम अनुसूची-2 के अनुसार होगा। इस पाठ्यक्रम में यथासमय परिवर्तन आयुक्त, भू- अभिलेख द्वारा किया जा सकेगा ।
4. व्यावहारिक प्रशिक्षण-
पटवारी पद हेतु व्यावहारिक प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम अनुसूची-3 के अनुसार नियत होगा , जिसमें यथासमय आवश्यक होने पर आयुक्त , भू- अभिलेख द्वारा परिवर्तन किया जा सकेगा। व्यावहारिक प्रशिक्षण हेतु प्रशिक्षण शाला के प्राचार्य द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को भारमुक्त किया जाकर संबंधित जिला कलेक्टर को सूची उपलब्ध कराई जाएगी तथा जिले के भू-अभिलेख अधीक्षक द्वारा जिला कलेक्टर के अनुमोदन उपरांत इन्हें तहसील आबंटित की जाएगी। संबंधित तहसील में उपस्थित होने पर उपखण्ड अधिकारी राजस्व द्वारा अनुभवी हल्का पटवारी के साथ उन्हें संलग्न किया जाएगा । तदुपरान्त नियत प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के अनुसार उन्हें कार्य आबंटित किया जाएगा तथा प्रशिक्षु पटवारी द्वारा प्रशिक्षण देने वाले राजस्व निरीक्षक / पटवारी के मार्गदर्शन में असाइनमेंट फाइल तैयार की जाकर उपखण्ड अधिकारी को प्रस्तुत की जाएगी । उपखण्ड अधिकारी द्वारा इस फाइल का मूल्यांकन कर अंक प्रदान किए जाएंगे । प्राप्त अंकों की सूचना उपखण्ड अधिकारी द्वारा भू- अभिलेख अधीक्षक के माध्यम से संबंधित प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य को प्रेषित की जाएगी । प्रायोगिक प्रशिक्षण के मूल्यांकन के मामले में उपखण्ड अधिकारी का निर्णय अंतिम होगा। 3871
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
5. परीक्षा-
प्रशिक्षण उपरांत आयोजित होने वाली परीक्षा का विवरण अनुसूची-4 के अनुसार होगा । पटवारी विभागीय परीक्षा हेतु एक प्रश्न पत्र तैयार किया जावेगा जो 4 वर्गों में विभाजित होगा । प्रत्येक वर्ग में कुल 25 प्रश्न होंगे एवं प्रत्येक प्रश्न 4 अंकों का तथा प्रश्न पत्र कुल 100 अंकों का होगा । इस तरह इस परीक्षा में कुल अंक 400 होंगे। परीक्षा की कुल अवधि 3 घण्टे की होगी , जिसमें शासन नियमानुसार विकलांग इत्यादि वर्गों के लिये अतिरिक्त समय सीमा देय होगी । इस परीक्षा हेतु प्रश्न पत्र तैयार करवाना, मूल्यांकन करवाना एवं परीक्षा हेतु किसी संस्था विशेष का निर्धारण किया जाना आदि कार्य आयुक्त , भू-अभिलेख द्वारा संपादित किए जाएंगे ।
6. परीक्षा में सम्मिलित होने हेतु पात्रता-
प्रशिक्षण उपरांत निम्नलिखित दो आधारों पर प्रशिक्षणार्थी को परीक्षा में सम्मिलित होने से वंचित किया जा सकेगा-
6.1 ऐसे प्रशिक्षर्णाथियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाऐगी जिनकी उपस्थिति प्रशिक्षण अवधि के कार्य दिवस की कुल संख्या के 75% से कम हो किन्तु यदि जिला कलेक्टर को इस बात से समाधान हो जाए कि प्रशिक्षणार्थी जानबूझकर अनुपस्थित नहीं रहा था अथवा वह उसके नियंत्रण से परे होने वाले कारणों से अनुपस्थित रहा था तो वह उस प्रशिक्षणार्थी को परीक्षा में बैठने की अनुमति उस स्थिति में दे सकेगा जबकि उपस्थित कार्य दिवसों की कुल संख्या 65% से कम न हो। उपस्थिति की गणना में पूर्णांक के बाद दशमलव में कोई संख्या आती है तो उसे अगला पूर्णांक मानकर गणना की जाएगी ।
6.2 प्रशिक्षणार्थियों द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण हेतु उपस्थित होकर नियत व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करना एवं असाइनमेंट फाइल मूल्यांकन हेतु उपखण्ड अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत न की हो । उक्त दोनों शर्तों की पूर्ति पृथक- पृथक होना अनिवार्य है। इन नियमों में दिए गए किसी प्रावधान के अलावा किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं दी जावेगी। इन नियमों के अधीन पात्र प्रशिक्षणार्थियों को परीक्षा में सम्मिलित होने की अनुमति दिए जाने हेतु प्रशिक्षण केंद्र का प्राचार्य सक्षम होगा। [ भाग 1 3872
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
7. प्रशिक्षक:-
प्रशिक्षण केन्द्रों पर अध्यापन हेतु प्रशिक्षकों की व्यवस्था आयुक्त , भू- अभिलेख द्वारा की जायेगी । प्रशिक्षकों के रूप में सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारी / अधिकारी के अलावा अन्य संस्थाओं के अधिकारी / कर्मचारी की सेवाएं भी ली जा सकेंगी।
8. प्रश्न पत्रों का मूल्यांकन एवं परीक्षा परिणामः-
प्रशिक्षण उपरांत आयोजित परीक्षा का मूल्यांकन कार्य एवं परीक्षा परिणाम की घोषणा आयुक्त, भू- अभिलेख द्वारा करायी जाएगी । परीक्षा के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक विषयों के मध्य अंकों का अनुपात 80:20 रहेगा । न्यूनतम उत्तीर्णांक दोनों परीक्षाओं में पृथक-पृथक रूप से सामान्य वर्ग एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 50% अंक तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 40% रहेंगे ।
9. परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए अधिकतम अवसर-
प्रशिक्षणार्थी को विभागीय परीक्षा में सम्मिलित होने हेतु केवल 03 अवसर दिए जाएंगे। अन्य अवसरों में भी उत्तीर्ण ना होने पर उन्हें सेवा से पृथक कर दिया जाएगा ।
अनुसूची - 1 प्रशिक्षण अवधि
समयावधि
गतिविधि
क्रमांक
3
2
1
04 माह
सैद्धांतिक प्रशिक्षण
1
02माह
व्यावहारिक प्रशिक्षण
2
परीक्षा
3
उपर्युक्त अवधि के भीतर 3873
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
अनुसूची-2 सैद्धांतिक प्रशिक्षण के विषय
विषय
क्र.
पाठ्यक्रम
3
2
1
( 1 ) मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता , 1959
(2) दण्ड प्रक्रिया संहिता , 1973
(3) सिविल प्रक्रिया संहिता , 1908
1 मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, 1959 एवं अन्य अधिनियम नियम व (4) भू- अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिनियम , 2013
(5) पंचायत राज अधिनियम , 1993
(6) नगर पालिका निगम अधिनियम , 1956
(7) नगर पालिका अधिनियम , 1961
(8) वन संरक्षण अधिनियम , 1980
(9) रजिस्ट्रीकरण अधिनियम , 1908
(10) भारतीय स्टाम्प अधिनियम , 1899
( 11 ) अन्य अधिनियम एवं नियम जो आयुक्त, भू- अभिलेख द्वारा निश्चित किये जाएँ तथा अधिनियमों व नियमों के अंतर्गत पटवारियों के कर्तव्यों से जुड़े हुए प्रावधान।
2 भू- अभिलेख एवं उससे नियम संबंधित
भू-अभिलेख नियमावली, भू- सर्वेक्षण , सीमांकन , प्रबंधन संबंधी साफ्टवेयर व GIS के सिद्धांत तथा मध्यप्रदेश राजस्व पुस्तक परिपत्र की सुसंगत कण्डिकाएं ।
1- भू-अभिलेख प्रबंधन संबंधी साफ्टवेयर।
3 कम्प्यूटर व्यावहारिक
2- राजस्व न्यायालय के प्रकरणों से संबंधित साफ्टवेयर ( RCMS ) । 3- फसल ई- गिरदावरी ( Saara मोबाइल एप्लीकेशन द्वारा ) एवं राजस्व विभाग द्वारा उपयोग किए जाने वाले अन्य साफ्टवेयर । 4 पटवारी के कर्तव्यों से जुड़े अन्य विभागों से संबंधित विषय
फसल गिरदावरी एवं कृषि सांख्यिकी, फसल कटाई प्रयोगों की विधि व प्रक्रिया , पंचायती राज व्यवस्था एवं नगर पालिका निगम अधिनियम व नगर पालिका अधिनियम के अन्तर्गत पटवारी के कर्तव्यों से जुड़े प्रावधान । भारतीय स्टाम्प अधिनियम के अंतर्गत बाजार मूल्य निर्धारण का प्रतिवेदन तैयार किया जाना आदि प्रावधान। [ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
3874
अनुसूची -3 प्रायोगिक प्रशिक्षण के विषय
संख्या
विवरण
गतिविधि
क्रमांक
4
3
2
1
05 प्रकरण
प्रकरणों में प्रतिवेदन पेश करना
नामांतरण प्रकरण
1
2
बंटवारा
05 प्रकरण
प्रकरणों में बटवारा फर्द प्रस्तुत करना
02प्रकरण
राहत प्रतिवेदन बनाकर प्रस्तुत करना
3 प्राकृतिक आपदा
05 प्रकरण 4
सीमांकन
मशीन से सीमांकन करना (फील्ड बुक सहित)
5
02 प्रकरण
अतिक्रमण प्रतिवेदन तैयार कर प्रस्तुत करना
शासकीय भूमि पर अतिक्रमण
05 प्रयोग
फसल कटाई प्रयोग करना
6
फसल कटाई प्रयोग
10 प्रकरण 7
प्रकरणों में प्रतिवेदन देना
गरीबी रेखा की अपील
10 प्रकरण
प्रकरणों में प्रतिवेदन देना
जाति प्रमाण-पत्र
8
10 प्रकरण
प्रकरणों में प्रतिवेदन देना
9
शोध क्षमता प्रमाण- पत्र
10 प्रकरण नक्शातरमीम
10
नक्शातरमीम हेतु प्रतिवेदन /अमल
11
02 प्रकरण भू-राजस्व का पुनः निर्धारण
बिना अनुमति भूमि उपयोग परिवर्तन हेतु निर्धारण । पुनः निर्धारण हेतु प्रतिवेदन
01 ग्राम 12 फसल गिरदावरी
मोबाईल एप से ग्राम की गिरदावरी करना
13
01 ग्राम
एक ग्राम के वेब डाटा का सुधार करना
भूलेख पोर्टल डेटा सुधार 3875
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
अनुसूची 4 प्रश्न पत्र
समयावधि
प्रश्नों की संख्या
प्रश्न पत्र
क्रमांक
पूर्णांक
5
4
3
2
1
2 घण्टे
25
100
1
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, 1959 एवं अन्य अधिनियम व नियम
25
100
2
भू-अभिलेख एवं उससे संबंधित नियम
25
100
3
कंप्यूटर व्यावहारिक
25
100
4
पटवारी के कर्तव्यों से जुड़े अन्य विभागों से संबंधित विषय
2 माह
100
प्रायोगिक प्रशिक्षण
5
अनुसूची 3 के अनुसार किये गए प्रायोगिक कार्यों के अनुसार मूल्यांकन
नोट : - प्रश्न पत्र क्रमांक 1 लगायत 4 का एक ही प्रश्न पत्र होगा जिसमें प्रश्नों का स्वरूप वस्तुनिष्ट प्रकार का होगा तथा परीक्षा ऑनलाईन होगी । [ भाग 1 3876
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
अध्याय - 3
पटवारियों के विविध कर्त्तव्य सम्बन्धी नियम एवं निर्देश
1. पटवारियों के विविध कर्त्तव्य सम्बन्धी नियम
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( भू- सर्वेक्षण तथा भू- अभिलेख ) नियम, 2020 में भू-अभिलेख, भू- सर्वेक्षण सीमाएं तथा सीमा चिन्ह पटवारी तथा नगर सर्वेक्षक तथा राजस्व निरीक्षक के कर्तव्य और अभिलेखों के निरीक्षण एवं उनकी प्रमाणित प्रतियों के निरीक्षण तथा उनके प्रदान किये जाने के संबंध में उपबन्ध बनाये गये हैं । कार्य करने के दौरान यह प्रतीत होता है कि संदर्भित नियमों को देखकर कार्यवाही की जाये । इस आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए पटवारी / नगर सर्वेक्षक के कर्तव्य से संबंधित मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू-सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख ) नियम , 2020 के अध्याय-5 में वर्णित नियम -52 से नियम-64 निम्नानुसार है: -
52. इस भाग में पद 'पटवारी' में नगर सर्वेक्षक सम्मिलित हैं ।
53. दैनिक डायरी तथा मासिक रिपोर्ट ( 1 ) प्रत्येक पटवारी एक दैनिक डायरी संधारित करेगा और ऐसे प्ररूप में जैसा कि आयुक्त भू- अभिलेख द्वारा समय समय पर विहित किया जाए मासिक रिपोर्ट भेजेगा । जिसमें वह अफ्ने कर्तव्यों से संबंधित दिन प्रतिदिन की घटनाओं की प्रविष्टि करेगा ।
(2 ) पटवारी अपनी दैनिक डायरी तथा मासिक रिपोर्ट तहसीलदार को प्रेषित करेगा ।
54. अभिलेखों का अच्छी स्थिति में रखा जाना पटवारी, उसे सौंपे गए भू-अभिलेखों की समस्त प्रतियों को तथा किसी अभिलेख को जिसमें डिजिटल अभिलेख ( ई - बस्ता) सम्मिलित है , जिसे कि रखने के लिए उससे इन नियमों अथवा उनके अधीन व्याख्यात्मक अनुदेशों के अधीन अपेक्षित किया जाए अथवा जो राजस्व अधिकारियों द्वारा उसके प्रभार में दिए जाएं, सुरक्षित व अच्छी दशा में रखेगा । 55. हितबद्ध व्यक्ति द्वारा अभिलेखों का निरीक्षण पटवारी, उसकी अभिरक्षा में के किन्हीं ऐसे अभिलेखों का, जिसमें अधिकार अभिलेख सम्मिलित है , किसी ऐसे व्यक्ति को 3877
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
जिसका उसमें हित हो, निरीक्षण करने की तथा उसकी हस्तलिखित प्रतियां व टीप लेने की तथा नियम 93 के अधीन यथाउपबंधित कैमरे का उपयोग करते हुए फोटोग्राफ लेने की अनुमति देगा ।
56. तहसीलदार के आदेश पर भू- अभिलेखों की प्रतियों का भेजा जाना पटवारी, जब तहसीलदार द्वारा ऐसा आदेश किया जाए, अपनी अभिरक्षा में के भू-अभिलेखों की प्रतियां तैयार करेगा उन्हें सत्यापित करेगा तथा उन्हें इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अथवा तहसील के भृत्य से भेजेगा ।
57. विशिष्ट घटनाओं की रिपोर्ट -
( 1 ) पटवारी , तहसीलदार को निम्नलिखित घटनाओं की रिपोर्ट लिखित में अथवा इलेक्ट्रॉनिक रूप में तत्परता के साथ भेजेगा-
क. किसी भूमिस्वामी की बिना उत्तराधिकारी के मृत्यु जिसके परिणामस्वरूप वह खाता राजगामी हो जाए;
ख. कोटवारों अथवा पटेलों की मृत्यु अथवा उनमें परिवर्तन तथा कोटवारों अथवा पटेलों की उनके कर्तव्य से लम्बे समय तक अथवा स्थायी अनुपस्थिति;
ग. आबादी , सेवा भूमि , निस्तार अधिकारों के प्रयोग के लिए पृथक् रखी गई भूमि, वाजिब-उल-अर्ज, धारा 233- क के अधीन लोक प्रयोजन के लिए पृथक् रखी गई भूमि, लोकमार्ग , राजस्व वन अथवा किसी अन्य दखलरहित भूमि पर अथवा किसी अन्य भूमि पर, जो कि सरकार अथवा किसी प्राधिकरण , निगमित निकाय अथवा राज्य के किसी अधिनियमन के अधीन गठित अथवा स्थापित संस्था की हो अथवा कलेक्टर द्वारा प्रबंधित धार्मिक सत्ता से सम्बन्धित भूमि पर अतिक्रमण;
घ. उन शर्तों का उल्लंघन जिनके अधीन राज्य सरकार से कोई अनुदान अथवा भूमि का पट्टा लिया गया है;
ङ. सीमा अथवा सर्वेक्षण चिन्हों का नष्ट होना अथवा उनका खराब होना तथा ग्राम की सीमाओं में परिवर्तन;
च. फसलों की स्थिति;
[ भाग 1 3878
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
छ. निस्तार पत्रक अथवा वाजिब-उल-अर्ज में अभिलिखित किसी अधिकार के विधिपूर्ण प्रयोग में कोई बाधा;
ज. भूमिस्वामी द्वारा भूमि का परित्याग कर दिया जाना;
झ. बाढ़ की मिट्टी, रेत जमा हो जानें अथवा जल भराव के कारण कृषि भूमि का स्थायी रूप से ह्रास;
ञ. उस जल आपूर्ति का स्थायी रूप से अनुपयोगी हो जाना जिससे भूमि की सिंचाई होती है;
ट. कृषिक भूमि तथा आबादी भूमि का उस प्रयोजन से, जिसके कि लिए वह पृथक् रखी गई थी, भिन्न प्रयोजन के लिए व्यपवर्तन तथा बाद में एक गैर कृषिक प्रयोजन से दूसरे गैर- कृषिक प्रयोजन में व्यपवर्तन।
(2 ) उपनियम ( 1 ) के खण्ड ( ग ) के अधीन अतिक्रमणों की रिपोर्ट करने के प्रयोजन से पटवारी प्ररूप- चौबीस में अतिक्रमणों का एक रजिस्टर संधारित करेगा । वह उसके द्वारा पता लगाए गए प्रत्येक अतिक्रमण का मानदण्डों के अनुसार एक संक्षिप्त विवरण तैयार करेगा और अतिक्रमण रिपोर्ट के साथ उसे तहसीलदार को भेजेगा। वह उसके द्वारा रिपोर्ट किए गए अतिक्रमण के मामलों में राजस्व अधिकारी द्वारा अंतिम आदेश पारित कर दिए जाने से सम्बन्धित सूचना के प्राप्त होने पर रजिस्टर के संबंधित कॉलमों की पूर्ति करेगा ।
58. तत्काल रिपोर्ट पटवारी , तहसीलदार को निम्नलिखित घटनाओं की रिपोर्ट लिखित में अथवा इलैक्ट्रॉनिक रूप में तत्काल भेजेगा, -
(क) किसी आपदा की जैसे ओलावृष्टि, टिड्डियां, पाला, आग, बाढ़ , मनुष्य अथवा पशुओं में महामारी अथवा किसी भी कारण से फसलों का नष्ट होना;
(ख ) धारा 240 तथा 241 के अधीन बनाए गए नियमों का कोई उल्लंघन;
(ग ) किसी खदान से विधिपूर्ण प्राधिकार के बिना खनिजों को निकालना या हटाना ।
स्पष्टीकरण - खनिजों में कोई ऐसी रेत व मिट्टी सम्मिलित है जिसे राज्य सरकार वाणिज्यिक मूल्य की अथवा किसी लोक प्रयोजन के लिए आवश्यक घोषित करे । विक्रय के लिए उत्खनित न किए गए ऐसे पत्थरों पर , जो (क ) कुओं के निर्माण 3879
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
या मरम्मत के लिए अथवा अन्य कृषि कार्य के लिए या ( ख ) कृषकों के निवास गृहों के निर्माण अथवा उनमें सुधार के लिए आवश्यक हों कोई स्वत्व शुल्क (रॉयल्टी) वसूल नहीं किया जाता है ।
59. भूमि में अधिकार के अर्जन के बारे में सूचना पटवारी भूमि में अधिकारों अथवा हितों के अर्जन की रिपोर्टों का एक रजिस्टर संधारित करेगा तथा धारा 110 की उपधारा ( 2 ) के अधीन भू- अभिलेखों में नामांतरण के लिए किसी अधिकार अथवा हित के अर्जन की प्रज्ञापना मध्यप्रदेश भू- राजस्व सहिता ( भू- अभिलेखों में नामांतरण ) नियम , 2018 में विहित प्ररूपों तथा रीति में , तहसीलदार को प्रज्ञापित करेगा ।
60. सिवाय आमदनी का रजिस्टर पटवारी , राज्य सरकार द्वारा विहित प्ररूप में सिवाय आमदनी का एक रजिस्टर संधारित करेगा । वह प्रत्येक वर्ष 30 जून के पूर्व तहसीलदार को प्रत्येक भू- खण्ड से होने वाली आमदनी की संभावित राशि बताते हुए सिवाय आमदनी के स्त्रोतों की रिपोर्ट करेगा।
61. सर्वेक्षण, निरीक्षण तथा रिपोर्ट पटवारी राजस्व अधिकारी के आदेश पर सर्वेक्षण करेगा, क्षेत्र निरीक्षण करेगा तथा फसलों को अभिलेखबद्ध करेगा , नक्शों अथवा भाटक अथवा राजस्व से संबंधित रिपोर्टों अथवा खेती की परिस्थितियों का निरीक्षण तथा पुनरीक्षण करेगा।
62. कलेक्टर के आदेशों का अनुपालन- कलेक्टर द्वारा जब आदेशित किया जाए, पटवारी, ( एक ) ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा तथा अपने हल्के में अभाव तथा अकाल संबंधी कार्यों के सम्बन्ध में ऐसी विवरणियां तथा ब्यौरे तैयार करेगा और उन्हें प्रस्तुत करेगा जो कि राज्य सरकार द्वारा समय - समय पर विहित किए जाएं; और
(दो) ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करेगा जो कि कलेक्टर द्वारा निर्देशित किए जाएं।
63. राजस्व अधिकारी द्वारा आदेशित कर्तव्य पटवारी , जब राजस्व अधिकारी द्वारा आदेशित किया जाए , -
(क) भू-अर्जन के लिए देय मुआवजे के निर्धारण;
[ भाग 1 3880
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(ख ) अभ्यास शिविरों अथवा अन्य सैन्य युद्धाभ्यासों द्वारा फसलों को हुई क्षति; अथवा
(ग ) किसी राजस्व न्यायालय के समक्ष लंबित किसी राजस्व मामले के सम्बन्ध में रिपोर्ट , ब्यौरे , विवरणियां अथवा सूचियां तैयार करेगा ।
64. फसलों के मूल्य, मजदूरी तथा फुटकर ग्रामीण मूल्यों की विवरणियां तैयार करना- चयनित केन्द्रों के पटवारी कृषि ( उपज ) मूल्यों के साप्ताहिक विवरण तथा कृषि मजदूरी तथा फुटकर ग्रामीण मूल्यों की मासिक विवरणियां तैयार करेंगे । वे फसल कटाई के सर्वेक्षण के लिए चयनित ग्रामों के भूमि उपयोग के ब्यौरे भी तैयार करेंगे। विवरणियां तथा ब्यौरे आयुक्त , भू- अभिलेख द्वारा समय - समय पर जारी अनुदेशों के अनुसार तैयार किए जाएंगे ।
2. पटवारियों के विविध कर्तव्य के सम्बन्ध में निर्देश
भू- अभिलेख तैयार करने , उन्हें कायम रखने और उनके संशोधन हेतु निम्नलिखित दिशा निर्देशों का पालन किया जावे: -
(1) राज्य शासन व्दारा अन्यथा निर्देशित स्थिति को छोड़ , प्रत्येक ग्राम / सेक्टर के लिए एक नक्शा बनाया जायेगा ,जिसमें ' भू- मापन क्रमांकों' या ' भू- खण्ड क्रमांकों' और पड़ती की सीमाएं दर्शाई जाएगी तथा यह क्षेत्र नक्शा कहलाएगा ।
(2) प्रत्येक ग्राम / ब्लाक/ सेक्टर का क्षेत्र नक्शा डिजीटल फार्मेट में भू- लेख पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा। पटवारी द्वारा गिरदावरी के समय अथवा किसी स्वामित्वधारी द्वारा बटवारा / बटांकन हेतु आवेदन पत्र प्रस्तुत करने पर सक्षम अधिकारी द्वारा पारित आदेशानुसार भू- लेख पोर्टल पर नक्शे में सुधार की कार्यवाही की जावेगी।
(3) पटवारी द्वारा उक्त इलेक्ट्रॉनिक नक्शों में परिवर्तन भूलेख पोर्टल पर खसरा में बटांक कायम करते समय ही किये जायेंगे ।
क. नामान्तरण , बटवारा , शासकीय पट्टों की स्वीकृति के कारण खातों की पुनर्रचना एवं फलस्वरूप नक्शे में सक्षम अधिकारी के आदेश के अमल के साथ ही सुधार किया जायेगा।
ख. नामान्तरण / बटवारा आदि प्रकरण तभी निराकृत माना जाएगा जब इनके अनुरूप नक्शे में तरमीम कर ली जाए । 3881
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
ग. एक नक्शे को यथोचित भागों में बांटकर उनका क्रमांकन करने की प्रक्रिया को तरमीम करना कहा जाता है । इस तरमीम की कार्यवाही को उचित भौतिक जाँच के पश्चात पटवारी द्वारा किया जायेगा । इस बटांकन का अनुमोदन तहसीलदार / नायब तहसीलदार / राजस्व निरीक्षक द्वारा किया जायेगा ।
(4) पटवारी भूलेख पोर्टल पर उपलब्ध वार्षिक खसरा में उन परिवर्तनों को, जो हुए हों, इस प्रयोजन के लिए दिए खानों में प्रतिवर्ष फसल गिरदावरी के समय करेगा । (5) रबी, खरीफ एवं जायद की फसलों की बुवाई एवं कटाई से संबंधित समस्त जानकारी वर्ष में तीन बार गिरदावरी मोबाइल एप्लीकेशन द्वारा अद्यतित की जायेगी ।
(6) भूलेख पोर्टल पर उपलब्ध विभिन्न खसरा एवं नक्शा सुधार मॉड्यूल से संबंधित यूजर मैनुअल एवं ट्रेनिंग मॉड्यूल अनिवार्य रूप से भूलेख पोर्टल पर उपलब्ध होंगे, जिन्हें आयुक्त भू- अभिलेख द्वारा मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, 1959 के उपबंधों एवं उनके अधीन बनाये गये नियमों के अध्यधीन निर्धारित व समय- समय पर अद्यतन किया जा सकेगा ।
(7) पटवारी सामान्य रूप से अपने हल्का मुख्यालय पर निवास करेगा ।
(8) पटवारी प्रत्येक हल्के के लिये निम्न विहित प्ररूप में एवं डिजिटल फार्मेट में दैनिकी रखेगा , जिसमें वह अपने कर्तव्यों से संबंधित प्रतिदिन किये गये कार्यों को उसी दिन दर्ज करेगा ।
दैनिकी का डिजिटल फॉर्मेट
किये गये कार्य का विवरण
स्थान
क्र. दिनांक
4
3
1
2
(9) पटवारी द्वारा निम्नलिखित घटनाएं उसी दिन दर्ज की जाएँगी जिस दिन कि वह उसकी जानकारी में आए- [ भाग 1 3882
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
क. भूमि स्वामियों की मृत्यु या उनके कब्जे में परिवर्तन तथा ऐसे समस्त बंधक, पट्टे, बिक्रियां या अन्य अंतरण जिनसे अधिकार अभिलेख में परिवर्तन होता हो । ख. कोटवारों तथा पटेलों की मृत्यु या उनमें परिवर्तन तथा कोटवारों या पटेलों की अपने कर्तव्यों से दीर्घकालीन या स्थाई अनुपस्थिति।
ग. नजूल भूमि या किसी ऐसी भूमि, वन या सिंचाई निर्माण कार्य पर , जो राज्य का हो, या किसी सार्वजनिक मार्ग पर बेजा कब्जा ।
घ. ऐसी शर्तों का उल्लंघन जिनके अधीन शासन से कोई अनुदान या भूमि का पट्टा लिया गया हो ।
ङ. सीमा या भू- मापन चिन्हों का बिगड़ना या नष्ट होना अथवा गाँव की सीमाओं का फेरबदल ।
च. प्राकृतिक आपदा से संबंधित समस्त जानकारी जैसे ओला , टिड्डी, आग , बाढ़ , पाला इत्यादि, किसी व्यक्ति द्वारा निस्तार संबंधी अधिकारों के उल्लंघन या ऐसे अधिकारों के वैध प्रयोग में बाधा डालने के मामले।
( 10 ) पटवारी द्वारा निम्नलिखित फार्म में डिजिटल प्ररूप में गाँववार सिवाय आय पंजी रखी जाएगी -
सिवाय आय पंजी
कैफियत क्र.
पट्टे पर देने की अवधि
खसरा क्र.
नीलाम या पट्टे पर देने का दिनांक
प्रत्येक खसरा क्र. का क्षेत्रफल
विक्रय आगम की रकम या निश्चित की गई प्रीमियम या पट्टे की रकम
पट्टेदार का नाम तथा उसका पूरा पता
सिवाय आय का साधन / ग्राम का नाम
9
6
7
8
5
4
3
2
1
( 11 ) फसलों के पूर्वानुमान संबंधी प्रयोजनों के संबंध में जानकारी इकट्ठी करना और प्रस्तुत करना पटवारी उन क्षेत्रों के बारे में जाँच पड़ताल करेंगे जिनमें खरीफ / रबी / जायद की फसलें बोई गयी हों तथा जिनके संबंध में पूर्वानुमान तो प्रस्तुत कर दिये गये हों, किन्तु उस समय विशेष गिरदावरी की जाना हो । उन विभिन्न प्रकार की फसलों का क्षेत्रफल तथा उनकी उपज का अनुमान लगाने में, जिनके पूर्वानुमान प्रस्तुत किये जा चुके हों, राजस्व निरीक्षक का आंशिक रूप से मार्गदर्शन पटवारियों द्वारा दी गई जानकारी से होता है, अतएव पटवारी को गिरदावरी करते समय अपने प्रभार की ग्राम फसलों की दशा सुनिश्चित कर लेनी 3883
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
चाहिये तथा वह जब भी आवश्यकता हो राजस्व निरीक्षक को अधिक से अधिक सही जानकारी देगा । गिरदावरी का कार्य मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रदत्त मोबाईल एप्प या शासन द्वारा समय- समय पर निर्देशित अन्य माध्यम से तय समय सीमा में संपन्न किया जावेगा ।
(12) पटवारी स्थानीय जानकारी रखेगा । पटवारियों को अपने हल्कों की परिस्थियों से पूर्ण रूप से परिचित होना चाहिए , जैसे ग्रामवार कुल सर्वे नम्बर , कुल क्षेत्रफल , कृषि अंतर्गत क्षेत्र, शासकीय भूमियों का क्षेत्रफल, आबादी क्षेत्रफल, सीमा , प्रत्येक वर्ग के धारणाधिकारियों द्वारा धारित क्षेत्र शासकीय पट्टेदारों को आवंटित भूमि, भूमि का क्षेत्रफल और उसका स्वरूप , भू- राजस्व तथा उपकर एवं उनकी किश्तों की जानकारी , परिवर्तित भूमियों के ब्यौरे , आबादी का नक्शा, असिंचित भूमियों के विवरण/ प्रभार क्षेत्र के सिंचित विवरण बाजिव-उल-अर्ज, निस्तार पत्रक एवं अन्य शासकीय भूमियों का विवरण।
( 13 ) पटवारी के कार्य- भार में रहने वाले अभिलेख एवं अन्य सामग्री- पटवारियों द्वारा अपने प्रभार के ग्रामों से संबंधित निम्नानुसार अभिलेख ई- बस्ते में इलेक्ट्रानिक रूप में रखे जायेंगे-
(क ) इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों की सूचीः-
a . मिसल बन्दोबस्त (चालू)
b . ग्राम नक्शा (चालू)
c. विद्यमान खसरा ( चालू)
d . जमाबंदी (बी-1 )
e. संशोधन पंजी ( RCMS में )
f. अतिक्रमण पंजी ( RCMS में)
g. प्राथमिक , द्वितीयक , तृतीयक , Ground Control Points (GCP ) एवं सीमा चिन्हों की सूची ।
(ख ) भौतिक रूप से निम्नलिखित सामग्री होगी-
(एक ) परकार , स्केल , कंघी एवं गुनियां।
(दो) चालू नक्शा
जब कभी पटवारी हल्के का कार्यभार अन्य पटवारी को अंतरित किया जाता है तो इलेक्ट्रॉनिक रूप में संधारित अभिलेख इलेक्ट्रॉनिक रूप से एवं भौतिक रूप से रखी गई सामग्री भौतिक रूप से प्रभार में दी जावेगी ।
(14 ) पूर्वेक्षण लाइसेन्स के संबंध में कलेक्टर द्वारा आदेशित किये जाने पर पटवारी भूमि पर क्षेत्र की सीमाओं से आवेदक को अवगत करायेगा।
(15) मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता की धारा 240 और 241 के अधीन कतिपय वृक्षों की कटाई का प्रतिबंध तथा इमारती लकडी की चोरी के संबंध में प्रतिवेदन पटवारी द्वारा तहसीलदार को प्रस्तुत किया जायेगा । [ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
3884
अध्याय - 4
राजस्व निरीक्षकों की नियुक्ति, योग्यता, दण्ड, परिवीक्षा एवं स्थायीकरण
संबंधी निर्देश
1. चयन प्रक्रियाः- प्रदेश में राजस्व निरीक्षक के रिक्त पदों की पूर्ति मध्यप्रदेश भू- अभिलेख एवं बन्दोबस्त तृतीय श्रेणी अराजपत्रित (कार्यपालिक एवं तकनीकी ) सेवा भर्ती नियम, 2012 तथा शासन द्वारा यथासमय संशोधित नियमों के आधार पर की जावेगी ।
2. आरक्षण रोस्टरः राजस्व निरीक्षक राज्यस्तरीय कैडर है । अतः राजस्व निरीक्षक पद की रिक्तियों की जानकारी तथा आरक्षण रोस्टर आयुक्त , भू- अभिलेख मध्यप्रदेश द्वारा संधारित किया जायेगा ।
3. अर्हताऐं: - किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से हायर सेकेण्ड्री परीक्षा ( 10+ 2 ) पद्धति से उत्तीर्ण तथा सर्वे में सिविल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा होना चाहिए ।
4. नियुक्तिः- राजस्व निरीक्षक की नियुक्ति सीधी भर्ती एवं पदोन्नति के माध्यम से की जायेगी ।
4.1. सीधी भर्ती द्वारा भरे जाने वाले रिक्त स्थानों की कुल संख्या निर्धारित करने के पश्चात आयुक्त, भू-अभिलेख मध्यप्रदेश इन पदों को विज्ञापित करायेगे और चयन परीक्षा एवं काउंसलिग के माध्यम से उपयुक्त उम्मीदवारों का चयन करेगें। इस प्रकार चुने हुए उम्मीदवारों को आयुक्त. भू- अभिलेख रिक्त स्थानों की संख्या के आधार पर संबंधित जिलों में नामांकित करेंगे । कलेक्टर नामांकित उम्मीदवारों को रिक्त स्थानों परं नियुक्त करेंगे।
4.2 . राजस्व निरीक्षकों के कुल स्वीकृत पदों के 25 प्रतिशत पद सीधी भर्ती के माध्यम से, 25 प्रतिशत पद सीमित प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से, 49 प्रतिशत पटवारी से, 0.15 प्रतिशत संगणक (सर्वे ) से तथा 0.85 प्रतिशत अनुरेखक से पदोन्नति द्वारा भरे जायेंगे।
5. पदस्थापनाः- राजस्व निरीक्षक की पदस्थापना तहसील स्तर पर रिक्त एवं कार्य की आवश्यकता के अनुरूप कलेक्टर द्वारा की जायेगी ।
6. आचरण नियमः मध्यप्रदेश में शासकीय सेवकों के सिविल सेवा संबंधी आचरण के संबंध में मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण ) नियम , 1965 यथासंभव संशोधनों सहित राजस्व निरीक्षक के संबंध में भी लागू होंगे ।
7. स्थानांतरणः- राजस्व निरीक्षक का एक जिले से दूसरे जिले में स्थानान्तरण, मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी यथासमय संशोधित स्थानान्तरण नीति के प्रावधानों के तहत किया 3885 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
जायेगा । जिले के भीतर राजस्व निरीक्षक वृत्त के प्रभार में आवश्यकता अनुसार परिवर्तन संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा किया जावेगा।
8. अवकाशः- मध्यप्रदेश में शासकीय सेवकों के लिये मध्य प्रदेश अवकाश नियम, 1977 यथासमय संशोधनों सहित राजस्व निरीक्षक के अवकाश के संबध में भी लागू होंगे । सक्षम प्राधिकारी संबंधित राजस्व निरीक्षक को पात्रता अनुसार अवकाश स्वीकृत करेगा ।
9. अनुशासनिक कार्यवाहीः- मध्यप्रदेश में अधीनस्थ सेवाओं के शासकीय सेवकों के दण्ड का विनियमन करने वाले मध्यप्रदेश सिविल सेवा ( वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील ) नियम, 1966 के तहत यथासमय संशोधनों सहित राजस्व निरीक्षक के दण्ड, निलंबन तथा पदच्युति का विनियमन करेंगे । जिले में पदस्थ राजस्व निरीक्षक के विरुद्ध शास्ति अधिरोपित करने की कार्यवाही के लिए संबंधित जिला कलेक्टर सक्षम अधिकारी होगें ।
10. अनुकम्पा नियुक्तिः राजस्व निरीक्षक की शासकीय सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उसके वारिसान को अनुकम्पा नियुक्ति की पात्रता होगी तथा अनुकम्पा नियुक्ति शासन द्वारा जारी यथासमय संशोधित नियम निर्देशों के अनुरूप की जावेगी । दिवंगत राजस्व निरीक्षक के वारिसान को शैक्षणिक योग्यता के आधार पर पटवारी / सहायक ग्रेड -3 / भृत्य के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति की पात्रता होगी ।
11. वरिष्ठता निर्धारणः सीधी भर्ती सीमित प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से नियुक्त राजस्व निरीक्षकों की वरिष्ठता का निर्धारण संबंधित राजस्व निरीक्षक के पद पर नियुक्ति दिनांक से किया जायेगा । पदोन्नति से नियुक्त राजस्व निरीक्षक की वरिष्ठता का निर्धारण पदोन्नति दिनांक से किया जायेगा।
12. पदोन्नतिः- राजस्व निरीक्षक से सहायक भू- अभिलेख अधीक्षक / नायब तहसीलदार के पद पर पदोन्नति राज्य शासन द्वारा यथासमय जारी निर्देशों के आधार पर की जायेगी।
13. प्रशिक्षणः- सीधी भर्ती से राजस्व निरीक्षक पद पर चयनित उम्मीदवारों को आयुक्त, भू- अभिलेख द्वारा नियुक्ति उपरांत संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा पदस्थापना आदेश जारी किया जायेगा। संबंधित को नियत राजस्व निरीक्षक प्रशिक्षण शाला में उपस्थित होकर अध्याय 6 के उपबन्धों के अनुसार प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा । जिला कलेक्टर द्वारा जारी पदस्थापना आदेश प्रशिक्षण केन्द्र पर उपस्थिति दिनांक से प्रभावी होगा । प्रशिक्षण केन्द्र पर निर्धारित समय के भीतर उपस्थित न होने की दशा में आयुक्त, भू- अभिलेख द्वारा नियुक्ति आदेश निरस्त किया जा सकेगा।
सीमित प्रतियोगी परीक्षा से चयनित एवं पदोन्नत राजस्व निरीक्षक को भी 9 माह का प्रशिक्षण प्राप्त करना एवं परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा ।
14. परिवीक्षा अवधिः सीधी भर्ती/ पदोन्नति / सीमित प्रतियोगी परीक्षा से चयनित राजस्व निरीक्षकों को दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर नियुक्ति दी जायेगी। परिवीक्षा अवधि की गणना नियुक्ति उपरांत नियत जिले में उपस्थितिः दिनांक से मान्य की जायेगी। परिवीक्षाधीन राजस्व निरीक्षक को 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में प्रशिक्षण उपरांत आयोजित होने वाली परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा ।
15. स्थायीकरणः- राजस्व निरीक्षक पद पर स्थायीकरण दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पूर्ण होने पर निम्नलिखित शर्तों की पूर्ति होने के उपरांत किया जाएगाः-
15.1 . अध्याय -5 में नियत प्रशिक्षण प्राप्त कर समस्त विषयों की परीक्षा उत्तीर्ण होने पर , 15.2. दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि सफलतापूर्वक पूर्ण किये जाने पर ।
16. परिवीक्षा अवधि में वृद्धिः आयुक्त. भू-अभिलेख युक्तियुक्त कारणों के आधार पर राजस्व निरीक्षक की परिवीक्षा अवधि में अधिक्तम 01 वर्ष की वृद्धि कर सकेंगे । [ भाग 1 3886
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
अध्याय-5
राजस्व निरीक्षक परीक्षा एवं प्रशिक्षणशाला के प्रावधान
1. प्रशिक्षण केंद्रः- नवनियुक्त राजस्व निरीक्षक का प्रशिक्षण आयुक्त, भू- अभिलेख द्वारा निर्धारित प्रशिक्षण शाला में कराया जायेगा । नवनियुक्त प्रत्येक राजस्व निरीक्षक को, इस प्रशिक्षण केंद्र पर उपस्थित होकर , इस अध्याय के उपबंधों में वर्णित प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
2. प्रशिक्षण अवधि एवं कार्य योजनाः प्रशिक्षण की अवधि 9 माह की होगी । आयुक्त, भू- अभिलेख द्वारा आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण, अवधि तथा परीक्षा कार्यक्रम में परिवर्तन किया जा सकेगा ।
3. प्रशिक्षणः- राजस्व निरीक्षक पद हेतु प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम अनुसूची-1 के अनुसार होगा। इस पाठ्यक्रम में यथासमय परिवर्तन आयुक्त, भू- अभिलेख द्वारा किया जा सकेगा । प्रशिक्षण उपरांत जिला कलेक्टर द्वारा राजस्व निरीक्षक वृत्त का आवंटन किया जायेगा ।
4. परीक्षाः प्रशिक्षण उपरांत आयोजित होने वाली परीक्षा का विवरण अनुसूची-2 के अनुसार होगा । इस परीक्षा हेतु प्रश्न पत्र तैयार करवाना, मूल्यांकन करवाना आदि सभी कार्य आयुक्त , भू- अभिलेख द्वारा संपादित किए जाएंगे ।
5. परीक्षा में सम्मिलित होने हेतु पात्रताः ऐसे प्रशिक्षर्णाथियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी जिनकी उपस्थिति प्रशिक्षण अवधि के कार्य दिवस की कुल संख्या के 75 % से कम हो तथापि यदि आयुक्त , भू-अभिलेख का इस बात से समाधान हो जाए कि प्रशिक्षणार्थी जानबूझकर अनुपस्थित नहीं रहा था अथवा वह उसके नियंत्रण से परे होने वाले कारणों से अनुपस्थित रहा था तो वह उस प्रशिक्षणार्थी को परीक्षा में बैठने की अनुमति दे सकेगा , परंतु यह तब जबकि उपस्थिति कार्य दिवसों की कुल संख्या के 65 % से कम न हो। उपस्थिति की गणना में पूर्णांक के बाद दशमलव में कोई संख्या आती है तो उसे अगला पूर्णांक मानकर गणना की जाएगी ।
6. प्रशिक्षकः प्रशिक्षण केंद्रों पर अध्यापन कार्य हेतु प्रशिक्षकों की व्यवस्था आयुक्त, भू- अभिलेख द्वारा की जाएगी । प्रशिक्षकों के रूप में सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारी/अधिकारी के अलावा अन्य संस्थाओं के अधिकारी / कर्मचारियों की सेवाएं भी ली जा सकेंगी ।
7. प्रश्न पत्रों का मूल्यांकन एवं परीक्षा परिणामः प्रशिक्षण उपरांत आयोजित परीक्षा का मूल्यांकन कार्य एवं परीक्षा परिणाम की घोषणा आयुक्त , भू अभिलेख द्वारा की जाएगी । परीक्षा हेतु न्यूनतम उर्तीर्णांक सामान्य वर्ग एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 48 % तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए 38 % प्राप्तांक रहेंगे । आयुक्त, भू- अभिलेख उपयुक्त मामलों में किसी प्रशिक्षणार्थी को , जो दो से अधिक विषयों में अनुत्तीर्ण न हो , प्रत्येक विषय में 3 तक अनुग्रहांक प्रदान कर सकेगा।
8. परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए अधिकतम अवसरः प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी को केवल 03 अवसर दिए जाएंगे। दिए गए 3 अवसरों में भी अनुत्तीर्ण होने पर सीधी भर्ती से नियुक्त राजस्व निरीक्षक को सेवा से पृथक किया जायेगा तथा सीमित प्रतियोगी परीक्षा अथवा पदोन्नति से नियुक्त राजस्व निरीक्षक को गूल पद पर वापरा किया जाएगा। 3887
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
अनुसूची -1 प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम
पाठ्यक्रम
प्रश्न पत्र
क्र.
3
2
1
1. मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहित, 1959 एवं उसके अन्तर्गत बनाये गये नियम
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता की धारायें 2 , 11 , 12 , 57 से 76 तक, 104 से 135, 137 से 145 तक, 167 से 183 तक, 203 , 204, 222 से 256 तक एवं उपरोक्त धाराओं के अंतर्गत बनाये गये नियम
2. मध्यप्रदेश भू-अभिलेख नियमावली मध्यप्रदेश भू-अभिलेख नियमावली भाग 1 व 2 तथा भू- अभिलेखों के कम्प्यूटरीकरण का उद्देश्य, प्रक्रिया एवं उसके लाभ।
3. तरतीव कागजात
दी गई आधार सामग्री से पटवारी पत्रक (अभिलेख ) तैयार करना।
4. मध्यप्रदेश भू-अभिलेख संबंधी अन्य अधिनियम
(क) मध्यप्रदेश कृषि जोत उच्चतम सीमा अधिनियम 1960-1974;
(ख ) हिन्दु उत्तराधिकार नियम 1956 ;
(ग) मुस्लिम उत्तराधिकार अधिनियम;
(घ ) भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम;
(ङ) भारतीय पंजीयन अधिनियम;
(च) भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899;
(छ) मध्यप्रदेश पंचायत अधिनियम;
(ज) संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम;
(झ ) नजूल राजस्व पुस्तक परिपत्र 4 ( 1 ) के अनुसार नजूल जॉच एवं कर निर्धारण तथा तदर्थ नजूल;
नगर भूमि सीमा अधिनियम; (ञ)
5 .
अ. भू- मापन ( सिद्धांत ): -
सर्वे सैद्धांतिक एवं राजस्व सर्वेक्षण
1. परिभाषाएं , भू-मापन का उद्देश्य
2. भू-मापन और प्लाट बनाने में प्रयुक्त होने वाले उपकरण उनकी रचना कार्यप्रणाली एवं अंक संशोधन ( केलिब्रेशन )
3. भू-मापन की रीतियाँ: -
क. ट्रावर्सिंग (खुला एवं बंद ट्रावर्स )
ख. त्रिभुज मापन [ भाग 1 3888
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
ग. आयतीकरण
घ. स्थिति निर्धारण के लिए खगोलिय अवलोकन
ङ. त्रिभुज मापन और जरीब रेखा के एक रेखण से साधारण जरीब भू- मापन , ऊँची नीची भूमि को नापते समय जरीब को आगे बढाने का तरीका क्रास स्टाफ और ऑप्टीकल स्क्वायर द्वारा अनुबंध (ऑफसेट ) लेना। क्षेत्रपंजी तैयार करना और एक विशेष पैमाने पर उसका स्थितिआंकलन (प्लाट बनाना ) स्याही लगाना, क्रमांक और क्षेत्रफल का हिसाब लगाना ।
च. ग्राम का नक्शा / ट्रावर्स और उप चिन्हों का उपयोग उन निश्चित बिन्दुओं से भू- मापन अनुछेद मूल को किस प्रकार सर्वोत्तम ढ़ग से कम से कम किया जा सकता है , कभी नीची सतह से भी लंबी दूरी में जरीब रेखा में पडने वाली बाधाओं को किस प्रकार दूर करें और अंतर्वती झण्डियों का रेखण ।
छ. हवाई सर्वेक्षण तकनीकी से सर्वे नक्शे की तैयारी ।
ज. नक्शा समझना और रूढिगत चिन्हों (अलामात ) गाँव के सीमा चिन्ह और भू- मापन क्रमांक, भू- खण्डों का समाकलन , कदम गिनकर और देखकर क्षेत्रफल का अनुमान लगाना नक्शे में सुधार करना और पूर्वानुमान करना।
ब. राजस्व सर्वेक्षण की प्रक्रियाः-
क. परिभाषा , आवश्यकता, उदघोषणा, प्रशासनिक संगठन।
ख. कार्यालयीन कार्य असंगति सूची, ग्राम सीमा , सर्वे नक्शे के निर्माण की पूर्व तैयारी, विसंगतिः की सूची एवं आंशिक खसरा निर्माण। 3889
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
ग. क्षेत्रीय कार्य अभिलेख निर्माण कार्य:-
ग्राम सीमा, विसंगति जॉच एवं नक्शा संशोधन , परिवर्तन सूची , आंशिक खसरा निर्माण (खानापूरी ) , आबादी पत्रक की तैयारी।
घ. प्रमाणीकरण एवं नवीन अभिलेख निर्माण , अधिकार अभिलेख , निस्तार पत्रक , रूढि पत्रक आदि का प्रमाणीकरण , नवीन खसरे एवं नक्शे आदि का निर्माण ।
6. सर्वे व्यवहारिक (आधुनिक पद्धति )
1. प्लेन टेबल एवं थ्योडोलाइट , ट्रावर्स का उपयोग करना तथा प्लेन टेबल द्वारा 1/4000 के पैमाने पर घिरे हुए क्षेत्र का विस्तृत भू- मापन करना ।
2. जरीब भू- मापन (चैन सर्वे): - जरीब एवं ऑप्टीकल स्क्वायर की सहायता से 1/4000 के पैमाने पर विस्तृत भू- मापन करना तथा क्षेत्रपंजी (फील्ड बुक ) तैयार करना।
3. आधुनिक पद्धति से भू- मापनः ETS मशीन की सहायता से 1/4000 के पैमाने पर विस्तृत भू- मापन करना तथा क्षेत्रपंजी ( फील्ड बुक) तैयार करना।
3.1 प्लाट बनानाः क्षेत्र पंजी से भू- मापन किये गये क्षेत्र का अंकन क्षेत्र कंघी (एरिया कॉम्ब) की सहायता से क्षेत्रफल निकालना, रूढिगत चिन्हों का उपयोग और भू- खण्डों ( प्लाट ) का क्रमांकन । ETS मशीन की सहायता से किये गये भू-मापन के डाटा के आधार पर कम्प्यूटर से मैप जनरेट करना एवं फील्डबुक का प्रिन्ट निकालना ।
टीप:- आयुक्त भू- अभिलेख द्वारा समय-समय पर सर्वे की नवीनतम तकनीकी पद्धति अपनाये जाने की दशा में तदनुसार पाठयक्रम में परिवर्तन किया जायेगा। [ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
3890
7.
खण्ड-अ कृषि-
कृषि एवं कृषि सांख्यिकी
(क ) कृषि का अर्थ , महत्तव एवं कृषि उत्पादन ।
(ख ) कृषि का अर्थ, प्रकार एवं भूमि सुधार।
(ग ) जलवायु की परिभाषा तथा जलवायु को प्रमाणित करने वाले तत्व।
(घ ) सिंचाई के साधन , सिंचाई के प्रकार , सिंचाई का महत्व ।
(ङ) खरीफ एवं रबी मौसम की प्रमुख फसलें।
(च ) हरी खाद , गोबर की खाद , उर्वरकों के प्रकार ।
(छ ) परंपरागत एवं आधुनिक कृषि यंत्र तथा इनका उपयोग।
(ज) कीटनाशक द्रव्य उपयोग करने की विधि।
खण्ड- ब कृषि सांख्यिकी-
1. कृषि सांख्यिकी का अर्थ , महत्तव एवं उपयोग ।
2. पटवारी के गिरदावरी कार्य की वैज्ञानिक जॉच पद्धति।
3. प्रमुख फसलों के क्षेत्रफल तथा उत्पादन के अनुमान समय पर भेजने की योजना ( टी.आर.एस. ) अन्तर्गत गिरदावरी कार्य ।
4. सामान्य फसल कटाई प्रयोग , राष्ट्रीय फसल बीमा योजना एवं नई राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के प्रयोग करने की विधि।
5. फसल पूर्वानुमान तैयार करने के आधार , आनाबारी ज्ञात करना , मौषम एवं फसल स्थिति का साप्ताहिक प्रतिवेदन ।
6. भूमि उपयोग वर्गीकरण, ऋतु एवं फसल प्रतिवेदन तैयार करना ।
7. कृषि संगणना एवं आदान सर्वेक्षण के उद्देश्य एवं पत्रक तैयार करना ।
8. लघु सिंचाई संगणना के उद्देश्य एवं पत्रक तैयार करना ।
9. थोक भाव , प्रक्षेत्रीय भाव एवं ग्रामीण कृषि मजदूरी 3891
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
प्रतिवेदन।
10. वर्षा की जानकारी का संकलन।
खण्ड- ग SAARA App
SAARA ( Smart Application for Revenue Administration ) के माध्यम से गिरदावरी / फसल कटाई का सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण।
1. कम्प्युटर द्वारा खसरा एवं जमा बंदी तैयार करना । 8. भू- अभिलेख कम्प्युटरीकरण व्यवहारिक
2. भू-अभिलेख से संबंधित सॉफ्टवेयर एवं एप्लीकेशन की जानकारी ।
अनुसूची 2 प्रश्न पत्र
समयावधि प्रश्न पत्र
पूर्णांक
क्र
4
3
2
1
100
1 म.प्र . भू- राजस्व संहिता , 1959 एवं उसके अन्तर्गत बनाये गये नियम
100
2 म.प्र. भू- अभिलेख नियमावली
100
3 तरतीव कागजात
3 घण्टे
100
म.प्र. भू- अभिलेख संबंधी अन्य अधिनियम
4
100
5 सर्वे सैधांतिक एवं राजस्व सर्वेक्षण
100
सर्वे व्यवहारिक ( आधुनिक पद्धति )
6
100
7 कृषि एवं कृषि सांख्यिकी
1 घण्टा
50
8 भू-अभिलेख कम्प्यूटरीकरण व्यवहारिक [ भाग 1 3892
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
अध्याय-6
राजस्व निरीक्षक के विविध कर्तव्य संबंधी नियम एवं निर्देश 1. राजस्व निरीक्षकों के विविध कर्त्तव्य सम्बन्धी नियम
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू- अभिलेख ) नियम, 2020 में भू- अभिलेख एवं उनसे संबंधित विषयों के नियम बनाये गये हैं । कार्य करने के दौरान यह प्रतीत होता है कि संदर्भित नियमों को देखकर कार्यवाही की जावे। अतः इस आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए राजस्व निरीक्षक से संबंधित नियमों जो कि नियमों के अध्याय-5 में नियम 65 से नियम 82 तक वर्णित हैं , को यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है: -
65. पटवारियों के कार्य का अधीक्षण- राजस्व निरीक्षक, अपने वृत्त के पटवारियों के कार्य के निरीक्षण तथा अधीक्षण के लिए तथा उनके बीच व्यापक अनुशासन लागू करने के प्रति उत्तरदायी होगा। वह आयुक्त , भू- अभिलेख द्वारा समय -समय पर जारी अनुदेशों के अनुसार बिना पूर्व सूचना दिए यदृच्छा छाँटे गए ग्रामों में पटवारियों के कार्य का निरीक्षण भी करेगा ।
66. पटवारियों का अनुदेश- राजस्व निरीक्षक अपने वृत्त के पटवारियों को सर्वेक्षण करने , नक्शा बनाने , क्षेत्रफल निकालने तथा पटवारी नियमों और अनुदेशों की हिदायतें देने के लिए उत्तरदायी होगा ।
67. पटवारी द्वारा भू- अभिलेखों तथा उपसंगी (सहायक) क्षेत्र अभिलेखों का यथार्थ रूप में तैयार किया जाना व उनका संधारणः राजस्व निरीक्षक का यह उत्तरदायित्व होगा कि अपने वृत्त के पटवारियों से ग्रामों के भू- अभिलेख तथा उपसंगी ( सहायक) क्षेत्र अभिलेख तथा कृषि उपज के मूल्य तथा ग्रामीण और कृषि विषयक मजदूरी तथा ग्रामीण फुटकर मूल्यों के लेखे यथार्थरूप से तैयार कराये तथा रखवाये । वह विशेषतः आयुक्त, भू-अभिलेख द्वारा समय-समय पर जारी किये गए अनुदेशों में विहित रीति अनुसार नियमित रूप से मिलान तथा जांच करके क्षेत्र के अभिलेखों को तैयार किये जाने में उनका यथार्थ होना सुनिश्चित करेगा । 3893
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
68. पटवारियों द्वारा उनके अन्य कर्तव्यों के पालन के विषय में उत्तरदायित्व- राजस्व निरीक्षक का यह सुनिश्चित करने का उत्तरदायित्व होगा कि उसके वृत्त के पटवारी उन पर संहिता की धारा 104 की उपधारा (2) तथा उसके अंतर्गत स्पष्टीकरण कारक अनुदेशों द्वारा आरोपित अन्य कर्तव्यों का पालन करते हैं । विशेषतः उसे यहं देखना चाहिए कि उसके अधीनस्थ पटवारीगण उन पंजियों का सावधानी से तथा पूर्ण रूप से मिलान करते हैं जो पटेल और कोटवार रखते हैं , वे स्पष्ट और शुद्ध प्रविष्टियाँ करते हैं और वे उक्त मिलान करते समय ज्ञात हुए अंतरों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हैं ।
69. ट्रावर्स तथा सीमा चिन्हों इत्यादि में समुचित मरम्मत राजस्व निरीक्षक को यह देखना चाहिए कि उसके वृत्त के सभी ग्रामों में समस्त ट्रावर्स स्टेशन, सीमा चिन्ह, सर्वेक्षण चिन्ह तथा ट्राई जंक्शन पिलर साथ ही प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक समूह नियंत्रक बिन्दुओं की समुचित मरम्मत की गयी है। वह तहसीलदार को उन समस्त अवसरों की, जब्कि मरम्मत में उपेक्षा की गयी हो तथा चिन्हों इत्यादि के अनुरक्षण के लिए उत्तरदायी व्यक्तियों के नामों की रिपोर्ट करेगा ।
70. पटवारी हल्कों का भ्रमण ( 1 ) राजस्व निरीक्षक अपने प्रभार में के प्रत्येक पटवारी हल्के का मास में एक बार भ्रमण करेगा ।
(2 ) राजस्व निरीक्षक डिजिटल अभिलेखों की नियत अवधि पर जांच करेगा तथा पटवारियों द्वारा उन्हें अद्यतन किया जाना सुनिश्चित करेगा तथा तहसीलदार व भू- अभिलेख अधीक्षक को रिपोर्ट भेजेगा।
71. डायरी का संधारण राजस्व निरीक्षक, ऐसे प्ररूप में , जैसा कि आयुक्त, भू- अभिलेख द्वारा समय समय पर विहित किया जाए , एक डायरी संधारित करेगा ।
72. फसलों, वर्षा, पशुओं में बीमारियों के प्रकोप इत्यादि के बारे में तहसीलदार को रिपोर्ट- ( 1 ) राजस्व निरीक्षक , जब वैसा करने को कहा जाए , तहसीलदार को ऐसे प्ररूप में , जैसा कि आयुक्त, भू- अभिलेख द्वारा विहित किया जाए, फसलों, वर्षा , खाद्यानों तथा पशुओं के चारे के मूल्यों की स्थिति तथा अपने वृत्त के लोगों की परिस्थितियों के बारे में रिपोर्ट देगा । रिपोर्ट की एक प्रति भू-अभिलेख अधीक्षक को भी भेजी जायेगी । [ भाग 1 3894
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( 2 ) किसी आपदा के घटित होने , पशुओं में महामारी फैलने या लोगों, फसलों, अथवा पशुओं की दशा को असामान्य रूप से प्रभावित करने वाली बात की तत्काल तहसीलदार को रिपोर्ट दी जाएगी ।
( 3 ) राजस्व निरीक्षक, किसी जल आपूर्ति के, जिससे कि भूमि की सिंचाई होती है, स्थायी रूप से अनुपयोगी होने की तथा बाढ़ की मिट्टी, रेत जमा हो जाने अथवा जल भराव के कारण किसी भूमि के स्थायी ह्रास की रिपोर्ट तहसीलदार को देगा।
73. फसल कटाई प्रयोग राजस्व निरीक्षक प्रतिवर्ष आयुक्त, भू- अभिलेख द्वारा यथाविहित आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए फसल कटाई प्रयोग करेगा।
74. राजस्व निरीक्षक द्वारा सर्वेक्षण किया जाना राजस्व निरीक्षक, जब भी उससे किसी राजस्व अधिकारी द्वारा वैसा करने की अपेक्षा की जाए, कोई सर्वेक्षण अथवा पैमाइश करेगा अथवा नक्शे तैयार करेगा अथवा इन नियमों के अधीन विहित किन्हीं सर्वेक्षण संक्रियाओं का अधीक्षण करेगा ।
75. स्थानीय जांच राजस्व निरीक्षक , जब उससे किसी राजस्व अधिकारी द्वारा यह अपेक्षा की जाए , ग्राम अभिलेखों में की प्रविष्टियों की शुद्धता की जांच करेगा और भूमि या कृषि के विषय में जानकारी एकत्रित करेगा;
परंतु कलेक्टर की अनुमति के बिना उसे ऐसी जांच करने को नहीं कहा जाएगा जो सिविल न्यायालय की आदेश द्वारा सामान्यतः आयोग ( कमीशन ) से कराई जाती है । 76. उपज का पूर्वानुमान तथा कृषि मूल्यों के विवरण का प्रस्तुत किया जाना राजस्व निरीक्षक , ऐसे दिनांकों को और ऐसे प्ररूप में ऐसी उपजों के लिए जो समय- समय पर आयुक्त, भू- अभिलेख द्वारा विहित की जाएं , उसके प्रभार की उपज के पूर्वानुमान तथा कृषि मूल्यों का विवरण यथार्थ व नियत समय पर भू- अभिलेख अधीक्षक को प्रस्तुत करने के लिए उत्तरदायी होगा ।
77. कृषि भूमि के गैर- कृषि प्रयोजनों के लिए व्यपवर्तन के मामलों का पता लगाना व उनकी रिपोर्ट की जाना राजस्व निरीक्षक , कृषि भूमि तथा आबादी भूमि के उस प्रयोजन से , जिसके कि लिए वह अलग रखी गई थी , किसी भिन्न प्रयोजन के लिए किए गए व्यपवर्तन के प्रत्येक मामले का तथा बाद में एक गैर - कृषि प्रयोजन से दूसरे गैर- कृषि प्रयोजन में व्यपवर्तन का पता लगाने तथा तहसीलदार को उसकी रिपोर्ट देने के लिए उत्तरदायी होगा। 3895
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भाग 1 ]
78. नक्शोंऔर रजिस्टरों की जांच राजस्व निरीक्षक आयुक्त , भू- अभिलेख द्वारा विहित की गई रीति में तैयार किये गये आबादी के नक्शों की जाँच करेगा । वह विहित रीति में पटवारी निर्माण के प्रयोजनों के लिए उपलब्ध भू- खण्डों तथा आरक्षित भू- खण्डों के खुले स्थानों के विन्यास ( ले - आउट ) के पटवारी द्वारा विहित रीति में तैयार किये गए डिजीटल रजिस्टरों की भी जांच करेगा ।
79. भूमि का मापन तथा सीमा चिन्ह लगाया जाना राजस्व निरीक्षक , जब तहसीलदार द्वारा उसे वैसा करने के लिए आदेश दिया जाए , सर्वेक्षण संख्यांक अथवा ब्लॉक संख्यांक अथवा भूखण्ड संख्यांक अथवा उनके उपविभाजन का मापन करेगा तथा उन पर सीमा चिन्ह भी लगवाएगा ।
80. रिपोर्ट का मिलान किया जाना राजस्व निरीक्षक , गिरदावरी निरीक्षण के दौरान जलोढ़ अथवा जल प्लावन द्वारा किसी खाते के क्षेत्रफल में हुए परिवर्तन के संबंध में पटवारी द्वारा दी गई रिपोर्ट की जांच करेगा ।
81. भू- अभिलेखों से भिन्न कार्य राजस्व निरीक्षक को लगाए जाने हेतु पूर्व अनुमति का लिया जाना ( 1 ) राजस्व निरीक्षक को उन कर्तव्यों से भिन्न किसी कर्तव्य पर नहीं लगाया जायेगा जो इन नियमों में विहित किये गए हों अथवा जो राज्य सरकार द्वारा बनाये गए अन्य नियमों के अधीन उसे सौपें गएँ हों, और उसे आयुक्त, भू- अभिलेख की अनुमति के बिना उसके विहित कार्य से नहीं हटाया जायेगा ।
(2 ). किसी ऐसी आपात स्थिति में जब आयुक्त , भू- अभिलेख की पूर्वानुमति प्राप्त किया जाना व्यवहार्य ना हो , कलेक्टर ऐसी अनुमति दे सकेगा , और इस बात की आयुक्त , भू- अभिलेख को तत्काल रिपोर्ट देगा ।
82. राजस्व अधिकारियों द्वारा आदेशित कर्तव्य राजस्व निरीक्षक , जब राजस्व अधिकारी द्वारा आदेश किया जाए , ऐसे विवरण , विवरणी अथवा सूचियां तैयार करेगा एवं ऐसे अन्य कर्तव्यों का निर्वहन करेगा जो कलेक्टर द्वारा निर्देशित किए जाएं। [ भाग 1 3896
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2. राजस्व निरीक्षकों के विविध कर्तव्य संबंधी निर्देश
( 1 ) राजस्व निरीक्षकों का अवकाश -राजस्व निरीक्षकों के सम्बन्ध मे लागू होने वाले नियमों के अधीन दिये जा सकने वाले समस्त प्रकार के अवकाश कलेक्टर / सक्षम अधिकारी द्वारा दिये जा सकेंगे । आकस्मिक अवकाश नियंत्रणकर्ता अधिकारी द्वारा दिया जा सकेगा । उपखण्ड अधिकारी / प्रभारी अधिकारी को एक बार में 120 दिन तक का अर्जित अवकाश देने की शक्ति प्रदान की गई है ।
(2) आकस्मिक अवकाश तथा इसकी स्वीकृति के लिये सक्षम अधिकारी शासन द्वारा समय- समय पर जारी किये गये आदेशों के अधीन दिया जा सकने वाला आकस्मिक अवकाश राजस्व निरीक्षकों को तहसीलदार द्वारा दिया जा सकेगा । अवकाश स्वीकृत करने वाला अधिकारी अवकाश का लेखा रखेगा। तहसीलदार द्वारा राजस्व निरीक्षकों को दिये गये अवकाश के सम्बन्ध में भू अभिलेख अधीक्षक को सूचना दी जाएगी ।
(3 ) जिला मुख्यालयों में ठहरने के लिये दैनिक भत्ता वे राजस्व निरीक्षक, जिनके मुख्यालय जिला मुख्यालय के अलावा किसी अन्य स्थान पर स्थित हों , यदि ऐसे मुख्यालय उनके कर्तव्य क्षेत्र में आते हों और उन्हें जिला मुख्यालय में बुलाया गया हो तथा उनके साधारण दौरा क्रम को छोड किसी विशेष कार्य के लिए रोका गया हो, तो जिला मुख्यालय की गई यात्रा के संबंध में मूलभूत नियम 44 के नीचे दिये गये पूरक नियम 32 ( क ) में निर्दिष्ट दरों पर दैनिक भत्ता ले सकेंगे ।
(4) राजस्व निरीक्षक की डायरी -राजस्व निरीक्षक , निम्नलिखित प्ररूप में डिजिटल डायरी संधारित करेगा
राजस्व निरीक्षक की डिजिटल डायरी
किया गया कार्य
स्थान
दिनांक
3
2
1 3897
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भाग 1 ]
अध्याय
7
भू- अभिलेख अधीक्षक एवं सहायक भू- अभिलेख अधीक्षक के मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता 1959 के अधीन कर्तव्य एवं निर्देश
भू-अभिलेख अधीक्षक तथा उसके सहायक भू- अभिलेख अधीक्षक संबंधी गतिविधियों हेतु , कलेक्टर के निरीक्षण प्रतिनिधि रूप में होते हैं, जो भू- अभिलेख की संक्रियाओं के क्रियान्वयन / निरीक्षण हेतु कार्य संपादित करेंगे । आयुक्त, भू-अभिलेख द्वारा समय - समय पर सौंपे गये कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए वे कृषि सांख्यिकी, कृषि संगणना , लघु सिंचाई संगणना, वर्षा के आंकड़े, भाव पत्रक, फसल कटाई प्रयोग , फसल गिरदावरी राजस्व विभाग की योजनाओं का क्रियान्वयन आदि कार्य संपादित करेंगे ।
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता , 1959 की धारा 11 के अधीन भू- अभिलेख अधीक्षक एवं सहायक भू- अभिलेख अधीक्षक को राजस्व अधिकारियों की श्रेणी में शामिल किया गया है । संहिता की धारा 20 में भू- अभिलेख अधीक्षकों एवं सहायक भू- अभिलेख अधीक्षक की नियुक्ति एवं कर्तव्यों के संबंध में प्रावधान किया गया है ।
धारा 20 भू- अभिलेख अधीक्षकों तथा सहायक भू-अभिलेख अधीक्षकों की नियुक्ति-
(1 ) राज्य सरकार प्रत्येक जिले के उतने व्यक्तियों को, जितने की वह ठीक समझे , भू- अभिलेख अधीक्षक तथा सहायक भू- अभिलेख अधीक्षक नियुक्त कर सकेगी।
(2) भू-अभिलेख अधीक्षक तथा सहायक भू- अभिलेख अधीक्षक ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेंगे जो इस संहिता द्वारा संहिता के अधीन या तत्समय प्रवृत किसी अन्य अधिनियमि द्वारा या उसके अधीन उन्हें प्रदत्त की गई हैं तथा ऐसे कर्तव्यों का पालन करेंगे जो इस संहिता द्वारा या इस संहिता के अधीन या तत्समय प्रवृत्तकिसी अन्य अधिनियमति द्वारा या उसके अधीन उन पर अधिरोपित किये गये हैं । 3898
[भाग- 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भू- अभिलेख अधीक्षक एवं सहायक भू- अभिलेख अधीक्षक के कर्तव्यों के संबंध में निर्देश
भू-अभिलेख अधीक्षक तथा सहायक भू- अभिलेख अधीक्षक कलेक्टर के सहयोगी अधिकारी के रूप में जिले के भू- अभिलेख प्रबंधन हेतु पदस्थ होते हैं, जिनका कार्य मुख्य रूप से विभाग की योजनाओं की निगरानी एवं क्रियान्वयन होता है । भू-अभिलेख अधीक्षक को भू-अभिलेख कार्यालय का कार्यालय प्रमुख एवं आहरण संवितरण अधिकारी घोषित किया गया है । भू-अभिलेख प्रबंधन हेतु मध्यप्रदेश भू- अभिलेख प्रबंधन समिति संस्थात्मक रूप से सूचना प्रौद्यौगिकी ( Information Technology ) से जुड़ी सभी गतिविधियों जैसे सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन , मोबाइल एप्लीकेशन , MIS डेशबोर्ड इत्यादि का प्रबंधन एवं संचालन करती है। प्रबंधन में संगठनात्मक समितियों ( जैसेकि जिला बेब जीआईएस सेल , जिला स्तरीय समिति) मध्यप्रदेश भू- अभिलेख प्रबंधन समिति एवं आयुक्त भू-अभिलेख के साथ समन्वय बिठा कर भू- अभिलेख प्रबंधन का कार्य सुचारू रूप से करती है । इस पूरी संरचना को कार्यान्वित करने में भू- अभिलेख अधीक्षक तथा सहायक भू-अभिलेख अधीक्षक की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है ।
इस भूमिका का विवरण निम्नानुसार है-
1. भू- अभिलेख प्रबंधन हेतु प्रमुख कर्तव्य-
1.1 . आबादी , नजूल एवं अन्य भूमियों का सर्वेक्षण एवं समन्वय का कार्य ।
1.2. नक्शा निर्माण एवं नक्शा संशोधनः जिले के अंतर्गत नक्शा विहीन , जीर्ण शीर्ण और अपूर्ण नक़्शे वाले ग्रामों का चिन्हांकन एवं उनके निर्माण हेतु मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता में प्रावधानित सर्वे नियमों के अंतर्गत प्रक्रिया का क्रियान्वयन कराना ।
1.3 . दो ग्रामों के मध्य सीमाओं का विवाद होने पर उसका निराकरण करना ।
1.4. सीमांकन विवाद एवं सर्वे के पश्चात निर्मित विवादों का निराकरण उचित प्रक्रिया के तहत करना ।
1.5 . वन राजस्व भूमि सीमाओं के निर्धारण हेतु आवश्यक कार्यवाही एवं समन्वय । 3899 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
1.6. सर्वे उपकरण का संधारण एवं प्रशिक्षणः भू-अभिलेख अधीक्षक सर्वे एवं सीमांकन में प्रयुक्त होने वाले उपकरणों / मशीनों का संधारण एवं प्रशिक्षण का संचालन करेगा। 2. भू- अभिलेख प्रबंधन की योजनाओं के क्रियान्वयन एवं निगरानी संबंधित कर्तव्य
2.1 . मध्यप्रदेश भू- अभिलेख प्रबंधन समिति ( MPLRS ) की जिला कार्यान्वयन निगरानी समिति के सदस्य सचिव के रूप में भू-अभिलेख प्रबंधन की विभिन्न योजनाओं यथा भूलेख पोर्टल ( WebGis ) , RCMS , SAARA APP , Girdwari , आदि का क्रियान्वयन एवं निगरानी करना ।
2.2 . जिला स्तर पर उपयोगकर्ताओं द्वारा सूचित की जाने वाली तकनीकी, प्रक्रिया / कार्यात्मक और परिचालन संबंधी समस्याओं को जिला बेब जी आई एस सेल के माध्यम से निराकृत करना।
2.3 . जिले में भू- अभिलेख प्रबंधन से संबंधित विभिन्न तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करना ।
2.4. राज्य स्तर से निर्धारित एजेंडा तथा स्थाई एजेंडा अनुसार जिला स्तर पर समय- समय पर समीक्षा बैठकें आयोजित करना तथा विभाग द्वारा निर्धारित एजेंडा बिन्दुओं का अनुपालन सुनिश्चित कराना।
2.5. भूलेख पोर्टल के माध्यम से सरकारी भूमि के क्षेत्र में किए गए परिवर्तनों की निगरानी एवं इस विषय में जिला कलेक्टर को अवगत करना।
3. कृषि सांख्यिकी योजना अंतर्गत भू- अभिलेख अधीक्षक / सहायक भू- अभिलेख अधीक्षक द्वारा निम्नांकित कार्य किये जायेंगे: -
3.1 . फसल पूर्वानुमान फसल पूर्वानुमान के माध्यम से फसलों की स्थिति नियत अवधि में प्रेषित करना ।
3.2 . फसल गिरदावरी पटवारी द्वारा की गई फसल गिदावरी की जांच करना, त्रुटि का सुधार करना एवं आकड़ों का अनुमोदन करना।
3.3 . फसल कटाई प्रयोग -फसल बीमा योजनाओं के अंतर्गत राजस्व निरीक्षक / पटवारी द्वारा फसल कटाई प्रयोगों का निरीक्षण , त्रुटि सुधार करना एवं ऑनलाइन आंकडों का अनुमोदन करना । [भाग 1 3900
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
3.4. वर्षा संबंधी आंकड़े जिले में स्थापित वर्षा मापी केन्द्रों से आंकड़ों का संकलन कर अंतिम रूप प्रदान कर नियत समय में कार्यालय आयुक्त भू- अभिलेख एवं अन्य कार्यालयों को भेजना।
3.5. वार्षिक कृषि सांख्यिकी सारणी राजस्व निरीक्षक / पटवारी से जानकारी प्राप्त कर वार्षिक कृषि सांख्यिकी तैयार कर एवं अनुमोदन करने के उपरांत नियत समय में आयुक्त भू- अभिलेख कार्यालय को भेजना।
3.6. कृषि संगणना- राजस्व निरीक्षक / पटवारी से सर्वे का कार्य कराना , उसका निरीक्षण करना एवं त्रुटि सुधार कर कृषि विभाग को नियत समयावधि में भेजना। 3.7. लघु सिंचाई संगणना- राजस्व निरीक्षक / पटवारी से सर्वे का कार्य कराना , उसका निरीक्षण करना एवं त्रुटि सुधार कर कृषि विभाग को नियत समयावधि में भेजना। 4. कंडिका 2 व 3 में वर्णित कार्यों के कियान्वयन में लापरवाही करने के वाले अधिकारी । कर्मचारी के विरूध कार्यवाही प्रस्तावित कर जिला कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत कराना । 5. अधीक्षक भू- अभिलेख द्वारा जिला स्तर पर राजस्व निरीक्षक एवं पटवारियों के भरे हुये एवं रिक्त पदों की जानकारी निर्धारित वर्गवार संधारित करना एवं नवनियुक्त पटवारियों के प्रशिक्षण की आवश्यकता जिला स्तर पर होने की स्थिति में समन्वय स्थापित कर प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था करना।
6. अपने अधिकार क्षेत्र का दौरा कर राजस्व निरीक्षक तहसील के ऑफिस कानूनगो, तहसील कार्यालयों में स्थित मार्डन रिकार्ड रूम के द्वारा संधारित पंजियों , संचालन की स्थिति तथा पटवारी के डिजिटल अभिलेख की जाँच करना । 3901 भाग 1 ]
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मध्यप्रदेश भू- अभिलेख नियमावली
भाग-दो
3902
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
अध्याय-8
भू-सर्वेक्षण का परिचय , इतिहास एवं घटक
सर्वेक्षण से अभिप्राय उस क्रियाकलाप से है जिसमें मानव एवं मशीनों की सहायता से किसी भू- भाग से सम्बंधित विभिन्न मापन संबधी जानकारियों को एकत्र किया जाता है । तथा उक्त मापन सम्बन्धी जानकारी को प्रक्षेपित कर मानचित्र तैयार किया जाता है तथा इस नक़्शे का उपयोग विभिन्न गतिविधियों में किया जाता है सर्वेक्षण भू- प्रबंधन हेतु एक आवश्यक एवं महत्वपूर्ण अवयव है ।
1. भू-सर्वेक्षण की परिभाषा-
सर्वेक्षण वह तकनीक है , जिसमे सर्वेक्षण उपकरणों की सहायता से धरातल पर मापी गई क्षैतिज दूरियों, कोणों एवं ऊंचाइयों को किसी प्रचलित विधि के अनुसार लघुकृत पैमाने (Small Scale) पर मानचित्र के रूप में प्रदर्शित किया जाता है ।
इस प्रकार सर्वेक्षण में निम्नलिखित तीन कार्य सम्मिलित होते हैं-
क्षेत्रीय कार्य ( Field Work ) : इस कार्य में सर्वेक्षण उपकरणों की सहायता से क्षेत्र में निश्चित किये गये बिन्दुओं के बीच की क्षैतिज दूरियों, कोणों , दिशाओं एवं ऊंचाइयों इत्यादि को नाप कर क्षेत्र पुस्तिका ( Field Book ) में अंकित किया जाता है ।
मानचित्रण ( Mapping): - इस कार्य में क्षेत्र पुस्तिका में अंकित मापों को मानचित्रण (Mapping ) के नियमों के अनुसार आरेखित कर क्षेत्र का मानचित्र बनाया जाता है । मानचित्र पर आकृति धरातल पर सर्वेक्षित की गई आकृति का लघुकृत ( Small ) रुप होती है, तथा मापमान ( स्केल ) द्वारा धरातल से सम्बद्ध होती है ।
अभिकलन ( Computation ) : - इस कार्य में स्थितियों क्षेत्रफलों को निश्चित करने के लिये आवश्यक गणना कार्य किया जाता है । जैसे किसी भू- खण्ड का क्षेत्रफल निकालना, उसे नम्बरिंग देकर पहचान देना , स्थाई एवं अस्थाई संरचनाओं को प्रतीकात्मक रुप से प्रदर्शित करना इत्यादि । 3903 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1]
2. भू- सर्वेक्षण का विधिक पक्ष-
भू- सर्वेक्षण का उपयोग यद्यपि कई क्षेत्रों में किया जाता है जिसमें एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र भू- प्रबंधन भी है , इस हेतु भू- राजस्व संहिता 1959 की धारा 61 के अध्याय 7 भू- सर्वेक्षण में भू-सर्वेक्षण को निम्नलिखित रूप से परिभाषित किया गया है ।
2.1 भू- सर्वेक्षण की परिभाषा भू- सर्वेक्षण से अभिप्रेत. है-
(क) समस्त या निम्नलिखित क्रियाकलापों में से कोई क्रियाकलाप
(एक ) भूमि का सर्वेक्षण संख्यांकों में विभाजन , विद्यमान सर्वेक्षण संख्यांकों को मान्य करना , उन्हें पुनर्गठित करना या कृषि प्रयोजनों तथा उनसे अनुषांगिक क्रियाकलापों के लिए उपयोग की जाने वाली भूमि में नवीन सर्वेक्षण संख्यांक विरचित करना ।
(दो ) भूमि का भूखण्ड संख्यांकों में विभाजन , विद्यमान भूखण्ड संख्यांकों को मान्य करना , उन्हें पुनर्गठित करना तथा गैरकृषि प्रयोजनों तथा उनके आनुषांगिक क्रियाकलापों के लिए उपयोग में लायी जाने वाली भूमि में नये भूखण्ड संख्यांक विरचित करना तथा उन्हें ब्लॉक में समूहीकृत करना।
(तीन) नगरेत्तर क्षेत्रों में सर्वेक्षण संख्यांकों (दो ) तथा ब्लॉक को ग्रामों में तथा नगरीय क्षेत्रों को सेक्टर में समूहीकृत करना तथा उनके अनुषांगिक क्रियाकलाप । (ख ) यथास्थिति, प्रत्येक सर्वेक्षण संख्यांक , ब्लॉक संख्यांक या भूखण्ड संख्यांक का क्षेत्रफल , वर्तमान भूमि उपयोग तथा अन्य विशेषताओं का वर्णन करने वाली क्षेत्रपुस्तिका (फील्डबुक ) तैयार करना ।
( ग ) यथास्थिति, खेत का नक्शा तैयार करना या उसका पुनरीक्षण करना या उसमें सुधार करना ।
(घ ) किसी स्थानीय क्षेत्र में भू- अभिलेखों को अद्यतन रखने के उद्देश्य से अधिकार अभिलेख तैयार करना ।
(ड ) कोई अन्य अभिलेख तैयार करना जैसा कि विहित किया जाए । 3904
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
3. भू- सर्वेक्षण का इतिहास-
सर्वेक्षण विज्ञान का वास्तविक विकास रोमन काल में हुआ था। विस्तृत रोमन साम्राज्य में बड़े - बड़े परिवहन मार्गों के निर्माण में सर्वेक्षण को बहुत प्रोत्साहन मिला। मध्यकालीन युग में यूनानी विद्वानों के सर्वेक्षण सम्बन्धी ज्ञान को अरब विद्वानों ने जीवित रखा। सोलहवीं शताब्दी में लिखी गई कुछ पुस्तकों में सर्वेक्षण के साथ- साथ जरीब , प्लेन टेवल, थियोडोलाइट इत्यादि सर्वे उपकरणों का वर्णन किया गया था। 1783 में रेम्सडेन ने सर्वे का प्रथम परिशुद्ध उपकरण बनाया था । और उसके बाद सर्वेक्षण की विधियों एवं उपकरणों में निरन्तर सुधार होता गया। आधुनिक युग में आवश्यकता एवं समय के संचय को ध्यान में रखते हुए सर्वेक्षण की आधुनिकतम तकनीकों एवं उपकरणों का प्रयोग किया जाने लगा। जिसके परिणामस्वरुप आधुनिक तकनीकों से सर्वेक्षण की कई नयी-नयी विधाओं का प्रयोग होने लगा जिनमें प्रमुख रूप से ETS Machine , DGPS , Arial Photography, Drone Survey, Satellite Imageryआदि शामिल हैं ।
4. गुणवत्तायुक्त भू- सर्वेक्षण हेतु आवश्यकताएं-
सर्वेक्षण वस्तुतः विज्ञान एवं कला का मिश्रण है । क्योंकि एक सर्वेक्षक को न केवल सर्वे सिद्धांतों, सर्वे उपकरणों की बनावट एवं उनके प्रयोगों का तकनीकी ज्ञान तथा पर्याप्त अभ्यास होना आवश्यक है , अपितु उसे मानचित्रण कला ( Cartography ) के सामान्य नियमों की भी पूर्ण जानकारी होना भी आवश्यक है । रेखाचित्र का ज्ञान , उच्च प्रेक्षण क्षमता ( High observation capability ) तथा शीघ्र सही निर्णय लेने का गुण भी एक अच्छे सर्वेक्षक में होना आवश्यक है । कोणों एवं ऊंचाइयों को किसी परंपरागत विधि के अनुसार लघुकृत पैमाने (Small Scale ) पर मानचित्र के रूप में प्रदर्शित किया जाना भी आवश्यक है।
5. भू- सर्वेक्षण का सिद्धांत-
भू-सर्वेक्षण की विभिन्न विधियां मूलतः संपूर्ण से आंशिक भाग का सर्वेक्षण ( working from whole to part ) सिद्धांत पर आधारित है । संपूर्ण से आंशिक भाग का सर्वेक्षण (working from whole to part ) वह सिद्धांत है, जिसमे संपूर्ण भाग से आंशिक भाग की ओर क्रमिक रूप से सर्वेक्षण करते हैं इसके अंतर्गत संपूर्ण भू- भाग जिसका सर्वेक्षण किया जाना हो को छोटे छोटे भागों में विभाजित किया जाता है इसके लिए पूरे भाग में कुछ 3905 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
नियंत्रण बिंदु ( Traverse Station ) अत्याधिक शुद्धता के साथ स्थापित कर दिए जाते हैं इन नियंत्रण बिंदुओं से उप नियंत्रण ( Sub Control Point ) बिंदु भी स्थापित किए जाते हैं इन सभी बिंदुओं को आपस में मिलाने से विस्तृत सर्वेक्षण भू- भाग छोटे- छोटे भागों में विभाजित हो जाता है । सर्वेक्षण के इस सिद्धांत का मुख्य उद्देश्य सर्वेक्षण कार्य में होने वाली त्रुटि संचयन (Accumulation of Error ) को रोकना या कम करना है, यदि किसी बिंदु के स्थापन में कोई त्रुटि हो गई है तो वह त्रुटि उसी बिन्दु तक सीमित रहती है तथा उसका प्रभाव अन्य मुख्य स्टेशनों पर नगण्य पड़ता है । कुछ प्रभागों के सर्वेक्षण में होने वाली किसी भी त्रुटि को उसी में समायोजित ( Adjust ) कर दिया जाता है ।
6. भू- सर्वेक्षण से प्राप्त नक्शा ( Cadastral Map )
मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता , 1959 के अनुसार भू- नक्शा प्राथमिक भू- अभिलेख है । संहिता की धारा 107 ( 1 ) (क ) में प्रत्येक ग्राम के लिए सर्वेक्षण संख्यांकों तथा ब्लाक संख्यांकों की सीमाओं को दर्शाने वाला , धारा 107 ( 1 ) ( ख ) में आबादी नक्शा एवं धारा 107 (1 ) (ग ) में व्यपवर्तित भूमियों के लिए ब्लॉक का नक्शा तथा धारा 107 उपधारा ( 2 ) में सेक्टर एक पृथक- पृथक नक्शा तैयार किये जाने की व्यवस्था की गई है । सर्वप्रथम किसी ग्राम का नक्शा, उस क्षेत्र का सर्वेक्षण करने के उपरान्त तैयार किया जाता है जिसमें ग्राम सीमा के साथ-साथ कृषकों के प्रत्येक खेत की सीमाओं को भी प्रदर्शित किया जाता है । इसके अतिरिक्त उस ग्राम की समस्त शासकीय भूमियों की सीमायें भी दर्शाई जाती हैं नक्शे में तैयार की गई सभी शासकीय या निजी भूमि की सीमाओं से बनी आकृति को पहचान करने के लिये पृथक- पृथक नम्बर दिये जाते हैं, जिन्हें सर्वे नम्बर या खसरा नम्बर कहा जाता है । इस प्रकार सर्वेक्षण उपरांत उस ग्राम की सीमा के अन्दर आने वाले सभी भू- खण्डों को पृथक- पृथक क्रमांक देकर ग्राम का नक्शा तैयार किया जाता है । ये नक्शे ही ग्राम के नक्शे ( Cadastral Map ) कहलाते हैं । भू- नक्शा से मौके की स्थिति का सत्यापन होता है ।
6.1 कैडस्ट्रल मैप किसी भी भूमि प्रबंधन प्रणाली का एक मुख्य घटक है और इससे जमीन की सीमा , स्थिति ( Location ) से भूमि मूल्य के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है, जो भूमि रिकॉर्ड को अभिलिखित करने और अद्यतन 3906
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
करने के लिए आवश्यक हैं । यह नक्शे उस स्केल पर तैयार किये जाते हैं जो राज्य शासन द्वारा निर्धारित किया जाए ।
6.2 कैडस्ट्रल मैप के चार मुख्य उद्देश्य हैं
6.2.1 भूमि का अधिकार अभिलेख तैयार करना ।
6.2.2 शासकीय तथा निजी भूमि का मानचित्रित रिकॉर्ड प्रदान करना ।
6.2.3 भूमि के मूल्यांकन और कराधान में सहायता करना।
6.2.4 भूमि का प्रबंधन एवं स्वामित्व के हस्तांतरण की सुविधा प्रदान करना । 7. भू- सर्वेक्षण के लक्ष्य
भू-सर्वेक्षण के लक्ष्यों से अभिप्राय विभिन्न सर्वेक्षण पद्धतियों का उपयोग कर भू- प्रबंधन हेतु निम्नलिखित उद्देश्यों को प्राप्त करने से है
स्वामित्व ( Ownership ) स्थापित करना
क्षेत्रफल (Area ) निश्चित करना
आकार (Shape ) निर्धारित करना
भूस्थिति ( Location ) नियत करना
7.1 स्वामित्व ( Ownership ) स्थापित करना
स्वामित्व स्थापना से अभिप्राय कैडस्ट्रल मैप तैयार हो जाने पर जो भूखंड अपनी पृथक पहचान रखते हैं उन भूखंडों को धारित करने वाले व्यक्तियों , संस्थाओं आदि को धारण अधिकार विधिक रूप से प्रदान करने से है । इस हेतु विधिवत रूप से भूस्वामियों की जानकारी को जुटाना तथा भूखंडों के साथ सम्बद्ध किया जाना चाहिए । 7.2 क्षेत्रफल (Area ) निश्चित करना
किसी समतल या वक्रतल के द्वि-आयामी ( Two - Dimentional ) आकार के माप परिमाण को क्षेत्रफल कहतें हैं । जिस क्षेत्र के क्षेत्रफल की बात की जाती है वह क्षेत्र प्रायः नियंत्रण -बिन्दुओं से नियंत्रित क्षेत्र होता है । क्षेत्रफल से अभिप्राय सर्वेक्षित भू- भाग में 3907 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
सम्मिलित क्षेत्र से है भू- सर्वेक्षण से विषम बहुभुजों ( Irregular Polygons ) का क्षेत्रफल भी निश्चित किया जाता है ।
7.3 आकार ( Shape ) निर्धारित करना
आकर से अभिप्राय किसी भू- भाग की बाहरी सीमा , विशिष्ट रूप या आकृति की रूपरेखा को मानचित्रित करने से है । भूखंड के विन्यास ( Land Parcel Configration ) हेतु यह महत्वपूर्ण होता है । इस आकर का निर्धारण मानव निर्मित तथा प्राकृतिक संरचनाओं के सटीक मापन से निर्धारित किया जाना चाहिए ।
7.4 भूस्थिति ( Location ) नियत करना
भू-सर्वेक्षण के उक्त लक्ष्य से अभिप्राय सर्वेक्षित भू- भाग को वैश्विक स्थिति के आधार पर लोकेशन प्रदान करने से है। परंपरागत एवं आधुनिक पद्धतियों में इस लक्ष्य की प्राप्ति सटीक नियंत्रण बिंदुओं ( Control Point ) की स्थापना कर की जाती है ।
अध्याय-9
भू- मापन की विधियां
1.1 भू- मापन से आशय
भू- मापन से आशय ऐसी प्रक्रिया से है जिसके माध्यम से किसी भी भू- भाग पर प्राकृतिक या मानव निर्मित आकर को किसी निश्चित मापन पर निर्धारित मापमान के उपकरणों द्वारा माप कर मानचित्र के रूप में शीट पर अंकित किया जा सकता है ।
1.2 भू- मापन के उदेश्य
भू- मापन से निम्नलिखित उद्देश्यों की प्राप्ति भिन्न भिन्न यंत्रो का प्रयोग कर की जाती है स्थल की स्थिति को नक़्शे के रूप में शीट पर बनाना एवं जमीन पर स्थित विभिन्न बिन्दुओ जैसे नदी , नालो, फील्ड बन्ड्स , पहाड़, पेड़ आदि की सापेक्ष स्थिति ज्ञात करना विभिन्न योजनाओं उद्देश्यों को दृष्टिगत रखते हुए भिन्न - भिन्न वांछित मापमानों पर मानचित्र बनाए जाने हेतु भू- मापन कार्य किए जाते हैं ।
1.3 . भू- मापन की पद्धतियां
विस्तृत भू- मापन को सर्वे उपकरणों , उपयोग में लायी जाने वाली विधियों के आधार पर भू- मापन दो वृहद रूपों में वर्गीकृतकिया जाता है जो निम्नलिखित प्रकार से है: - 3908
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
क. परम्परागत पद्धति ( Traditional Method)
भू- मापन हेतु यंत्रों तथा उनके अनुप्रयोगों के आधार पर परम्परागत पद्धति में कुछ विधियाँ बहुत ही प्रचलित एवं वृहद् रूप से उपयोग में लाई जाती रही है जिनमें से ज़रीब सर्वेक्षण एक प्रचलित विधि है जिसका प्रयोग भू- मापन हेतु किया जाता रहा है जरीब से भू- मापन निम्न प्रकार से संचालित किया जाता है-
(1 ) जरीब सर्वेक्षण (चैन सर्वे)
यह सर्वे की परम्परागत पद्धति ( Traditional Method ) है । प्राचीन समय में जब तकनिकी ( Technology) विकसित नहीं थी तब चैन सर्वे कार्य का सबसे शुद्धतम तरीका था । चैन सर्वे में चैन की सहायता से उपलब्ध क्षेत्र को नापा जा सकता है और उस क्षेत्र का नक्शा तैयार कर सकते हैं । किसी भी क्षेत्र की जानकारी रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बिंदु मैप होता है । चैन सर्वे की सहायता से हम केवल रेखीय मापन ( Linear Measurement ) करते हैं कोंणीय मापन के लिए अन्य उपकरण जैसे कंपास आदि की सहायता लेते हैं । चैन सर्वे सीमित क्षेत्र के सर्वे के लिए अधिकतर उपयोग होने वाली विधि है ।
चैन या जरीब की मदद से किया गया सर्वेक्षण कार्य परम्परागत पद्धति से किये जाने वाले कार्य की श्रेणी में आता है । इस सर्वेक्षण कार्य में मुख्य रूप से निम्नलिखित उपकरणों का उपयोग किया जाता है ।
जरीब
परकार
गुनिया
डायगोनल स्केल
पैमाना
राईट ऐंगल
सूजा
कंधी
लट्ठा
झण्डी
बांस
कुदाल 3909 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
जरीब
यह लोहे के मोटे तार की बनाई जाती है । इसका निर्माण स्थल की परिस्थितियों के तापमान को ध्यान रखकर एक निश्चित तापमान में किया जाता है जिससे कि उस पर गर्मी तथा सर्दी का प्रभाव को नियंत्रित किया जा सके। इससे स्थल पर भूमि की दूरी नापी जाती है । एक जरीब में 100 कडियों होती हैं जो छल्लों से जुडी रहती हैं । जरीब के दोनों सिरे पर दो हत्थे लोहे या पीतल के लगे रहते हैं । हत्थे को पकडकर जरीब को खींचा जाता है । हत्थे को जोडने वाली कील ढीली लगी होती है जिससे हत्थे को मोडने पर अन्टा नहीं लगता है । सिरे की कड़ी की नाप में हत्था भी शामिल होता है ।
Metric Chain
जरीब के हत्थे को मिलाकर अंतिम कड़ियों की लंबाई बाकी कड़ियों के बराबर होती है । जरीब 10 बराबर भागों में बटी हुई होती है । जरीब में निर्धारित लंबाई पर धातु संकेतक ( Metalic Indicator ) लगे होते हैं ।
One link
Tallies
1 Brass handle
2Collar
3. Eyebolt
4.Circular ug
प्रत्येक दशवे भाग में 10 कड़ी होती है पहली 10 कड़ी के बाद एक फुल्ली पीतल या लोहे की नोकदार पत्तियां ( Tally) लगाई जाती हैं , इन निशान को फूल भी [भाग 1 3910
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
कहते हैं । 10 कड़ी पर एक नोकवाली, 20 कड़ी पर दो नोंकवाली , 30 कढ़ी पर तीन नोंकवाली , 40 पर 4 नोंकवाली एवं 50 पर एक गोल निशान लगा रहता है । 50 के बाद फिर चार , तीन , दो, तथा एक नोक की टेली के निशान लगे रहते है । जो क्रमशः 60 , 70,80 तथा 90 कड़ी बताते हैं ऐसा इसलिए है कि जरीब का उपयोग दोनों तरफ से किया जाता है ।
20 m
5m
5m
1 m
Brass Ring
Brass ring
Tally at 10 m length al every meter length
8 Tally at 15 m length at 5 m length Tallyat
8
20 METER CHAIN
चैन सर्वे करने के पहले चैन को केडा अथवा स्टील बेडटेप से नाप कर जांच कर लेना चाहिए कि चेन की लंबाई सही है, कम अथवा अधिक लंबाई होने पर उसे ठीक करना चाहिए । स्वतंत्रता से पूर्व भारत वर्ष की विभिन्न देसी राज्यों में विभिन्न प्रकार की जरीबों की लंबाई थी। ब्रिटिश भारत के अधिकांश भाग में गंटर जरीब का उपयोग होता था । मध्यप्रदेश में विलीनीकृत राज्यों में भी भिन्न- भिन्न लंबाई की जरीब थी । अभी तक उन देसी राज्यों के मानचित्र उन्हीं जरीब के मापमान पर निर्मित है । अब एक अप्रैल 1957 से यद्यपि नापतोल अधिनियम लागू हो गया है, जिसके अनुसार अब केवल मेट्रिक प्रणाली के अर्थात Metric स्केल के ही सर्वे यंत्र बनेंगे अन्य स्केल के नहीं बनेंगे । 3911 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
जरीब कई प्रकार की होती है, मुख्यतः निम्न प्रकार की है-
क्षेत्रफल की इकाई
1 जरीब की लम्बाई मीटर
में
क्रमांक
1 कड़ी की लम्बाई
जरीब का नाम
भाग
फुट
मीटर में
पूर्ण
गज
इंच सें.मी.
9
8
6
7
5
4
2
3
1
विस्वा 20विस्वा = 1 बीघा
50.29 165.00
50.29 55.00
19.80
1 शाहजहानी
20विस्वा = 1 बीघा
विस्वा
157.52
48.01
48.01 52.51
18.90
2 फरुखावादी
152.50
46.48
46.48 50.83
18.30
3 सहारनपुरी
20विस्वा = 1 बीघा
विस्वा
150.01
45.72
45.72 50.00
18.00
4 ग्वालियरी
40.23 131.99
40.23 44.00
15.84
5 फतेहपुरी
100.00
30.48
6
12.00 30.48 33.33
इन्जीनियरिंग
30.00 98.43
32.81
30.00
11.81
7
मैट्रिक जरीब(30)
आरे 100आरे = 1 हैक्टर मैट्रिक
65.62
20.00
20.00 21.87
07.87
8
जरीब (20)
डेसीमल 100 डेसीमल 1 एकड
20.12 66.01
20.12 22.00
गंटरी
07.92
9 3912
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
उपरोक्त क्र. 1 से 4 एवं क्रमांक 6 प्रकार की जरीबों से एक जरीब लम्बा व एक जरीब चौडा भू- भाग एक बीघा होता है । ग्वालियर जरीब 150 फीट की होती है परन्तु अधिक लम्बी होने के कारण व्यवहार में 75 फीट की जरीब का उपयोग किया जाता है । अधिकतर प्रान्तों में गन्टर जरीब का प्रयोग किया जाता है । गंटरजरीब 66 फीट की होती है। वर्तमान में मैटिक प्रणाली लागू हो जाने से मीटर की जरीब उपयोग में लाई जाती है । जिससे सम्पूर्ण भू- भाग में एक पैमाने पर क्षेत्रनक्शा तैयार किया जा सके। इसके मापमान को आरे , हैक्टर में लिखा जाता है यह जरीब 20 मीटर की होती है । इसमें 100 कंडी होती हैं । प्रत्येक कडी 20 से.मी. की होती है ।
परकारं ( Divider )
यह यन्त्र पीतल या लोहे का होता है । इसकी बनाबट चिमटे जैसी होती है । इससे स्केल या डायगोनल स्केल से लम्बाई नापकर कागज पर उस लम्बाई को कायम किया जाता है। इसके द्वारा प्लाटिंग कार्य के समय त्रिभुज निर्माण , जरीब लाईन की दूरी और आफसेट स्थान कायम किया जाता है । प्लाट का रकबा कंघी से परकार से ही निकाला जाता है ।
Stock
गुनिया ऑफ़सेट स्केल
यह यंन्त्र प्लास्टिक या पीतल का होता है । लम्बाई में इसके एक किनारे पर जरीब व कडी के निशान बने रहते हैं । इसके मध्य भाग में चौडाई से चौडाई तक एक सीधी रेखा होती है । 3913 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
Gunia Scale
यह रेखा समकोण के समरुप होती है। भू- मापन करते समय खेतों के कोने , मोड जरीब लाईन के दाहिने व बायें को राईट ऐंगल द्वारा लम्ब रुप मे लिए जाते हैं उन्हें ही प्लाटिंग शीट या पेपर पर गुनिया की सहायता से लम्ब रुप में स्थान की दूरी निश्वत की जाती है व नक्शा बनाया जाता है ।
डायगोनल स्केल
डायगोनल स्केल लकडी या पीतल का बनाया जाता है । इसकी लम्बाई 30 जरीब व चौडाई 10 जरीब होती है । यह आयाताकार पट्टी के रुप में बनाया जाता है । तीस जरीब के तीन भाग दस - दस जरीब के किये जाते हैं । दस जरीब के एक भाग को पुनः 10 भागों में एक एक जरीब के अन्तर से रेखा खींचकर विभाजित किया जाता है।
10
CENTIMETERS
B
METERS
DECIMETERS
इस प्रकार आडे भाग में दस जरीब को दस भागों में बांटा जाता है । इसके पश्चात खडे भाग में भी दस तिरछी रेखा एंव इस प्रकार बनाई जाती है कि उससे खडे भाग में बनी दस जरीबों के प्रत्येक भाग के समान अनुपात के दस भाग हो जाते हैं । भीतरी जरीब तो पूरी जरीब के रुप में बन जाती है और दोनों किनारों की दस - दस जरीबों में प्रत्येक में नौ नौ त्रिभुज समान अनुपात की भुजाओं के बन जाते हैं । इस प्रकार इसका निर्माण समान अनुपात के त्रिभुज के आधार पर किया गया है । प्रत्येक एक छोटे त्रिभुज की भुजाओं से उससे बडे त्रिभुज की भुजाओं में दस का अन्तर है । इस प्रकार एक जरीब की सौ कडी के दस भाग किये गये हैं। 3914
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
पैमाना
यह यंन्त्र प्लास्टिक , पीतल , लकडी स्टील आदि का होता है । यह आकार में आयाताकार होता है । यह पृथक- पृथक मापमान पर होता है । मापमान के अनुसार बडे से बडे तथा लम्बे- चौडे फासलों को उनकी मूल आकृति में छोटे रुप में निर्मित किया जाता है ।
राइट ऐंगल ( Right angle ) /ऑप्टिकल स्क्वायर ( Optical square )
इसे ऑप्टीकल स्कायर भी कहते है । भू- मापन कार्य के समय इस यन्त्र से जरीब लाइन पर लम्ब ( 90 °Angle ) ज्ञात किया जाता है । जरीब की दाहिनी तथा बाँयी ओर जिन टेड़, मोड़ , कोना , सिमेड़ा या चौमेड़ा आदि को परिमापित करना होता है , उन्हें समकोण के रुप में लिखने के लिए इसी यन्त्र से जरीब को आधार भुजा मानकर देखा जाता है । राइटऐंगल के चित्र में ' अ' ' ब' झण्डी देखने के छिद्र तथा ' स' - ' द' झण्डी तथा लट्ठा देखने के दर्पण कांच हैं । राइट एंगल ( Optical square) की जांच उचित प्रकार से कर लेना चाहिए ।
यह उपकरण पीतल से निर्मित एक वेज रूपी खोखले बाक्स जैसा होता है जिसके झुके हुए पश्रवों पर अन्दर की तरफ एक दुसरे से 45 के कोंण पर दो आयताकार दर्पण लगे होते हैं ।
प्रत्येक दर्पण के ऊपर पार्श्व में एक आयताकार झिल्ली कटी होती है जिससे दोनों पार्थों के आर पार देखा जा सकता है । 3915 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
प्रिज्म स्कवायर ( Prism square )
यह ऑप्टिकल स्क्वायर के समान सिद्धांत पर काम करता है । 90 डिग्री पर एक लाइन को दूसरी लाइन पर सेट करने के लिए उपयोग किया जाता है । इसकी योग्यता यह है कि इसमें समायोजन की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि कोंण b/w परावर्तक सतह स्थिर है जो 45 डिग्री है ।
सूजा
सूजा या Arrow यह लोहे की मोटी तार का बनाया जाता है । इसकी लम्बाई लगभग 18 इंच होती है । इसका एक सिरा गोल होता है । इससे सूजों को हाथ में पकड़ने में सुविधा होती है । सूजा का दूसरा सिरा नोंकदार होता है ।
50mm
enamelled
black
dia,wire
4mm
400mm5
झण्डी
झण्डी या Flage का बांस लगभग 10 फुट लम्बा होता है । झण्डी के ऊपर के सिरे में दो प्रकार के कपड़ों के तिखुटे या चौछूटे फरारे लगाये जाते हैं । 3916
[ भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
लट्ट्ठा
लट्ट्ठा प्रायः सीधे बांस का बनाया जाता है। यह जरीब की 10 कड़ी की लम्बाई के बराबर होता है। इसका उपयोग भू- मापन करते समय जरीब के दाहिने तथा बायें के समकोणों की Offset's की दूरी नापने में होता है ।
आफसेट रॉड (Offset- Rod )
यह गोलाकार लकड़ी का 10 फुट लम्बा होता है । यह एक-एक फुट के क्रम से क्रमशः काला तथा सफेद रंग होता है। इसका उपयोग लट्ठे की तरह आफसेट लेने में होता है।
फील्डबुक
चैन सर्वे का स्थल कार्य इस बुक पर लिखा जाता है। जरीब की पूर्ण दूरी झण्डी से झण्डी या गोदा से गोदा या कैचीलाइन या शिकमीलाइन इत्यादि प्रत्येक की दूरी लिखी जाती है । प्रत्येक ज़रीब लाइन के दाहिने या बांये पड़ने वाले कोने, टेढ़-मोड का आफसेट तथा जरीब पर पड़ने वाले कटान आदि को फील्डबुक में उसी दिशा में लिखते हैं , जिन भू- खण्डों का पूर्ण आकार जरीब लाइन पर बनता जाता है, उसे तत्काल फील्ड बुक में बनाते जाते हैं । जिन भू- खण्डों का आकार पूर्ण रूप से जरीब लाइन पर नहीं बनता हैं, उसका कटान , दाखिली-खारिजी उसी रूप में फील्डबुक में अंकित किया जाता है । प्लाटिंग का कार्य फील्ड बुक लिखने के दिन ही अधिकांशतः किया जाता है , क्योंकि उस दिन मौके की याद ताजा रहती है । जिस क्षेत्र का भू- मापन करना होता है, उसमें जरीब इस प्रकार चलाते हैं कि प्लाट बांये हाथ को पड़े । एक लाइन की फील्डबुक उपरोक्त प्रकार लिखी जाती है । फील्ड बुक स्पष्ट लिखना चाहिए , इसमें कटान खारजी लाइने, स्पष्ट दिखाई जानी चाहिए ।
कंघी
कंघी पीतल धातु की आयाताकार होती है । कंघी का भीतरी भाग आयाताकार में खुला रहता है । उसकी लम्बाई की भुजाओं में , भीतरी भाग में दोनों ओर समानान्तर दूरी पर बारीक छिद्र रहते हैं । बीघा तथा एकड की कंघी में इन छिद्रों की परस्पर दूरी एक-एक जरीब की होती है । 3917 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
हैक्टर की कंघी में छिद्रों की परस्पर दूरी सबा जरीव ( 25 मीटर ) की होती है । छिद्रों की चौडाई की ओर धागा डाला जाता है। कंघी की पट्टी के ऊपर क्षेत्रफल की गणना के लिए स्केल बनी रहती है । हैक्टर की कंघी में कुल डेढ हैक्टर का पैमाना होता है । कंघी का निर्माण मध्य लम्ब गुणित चौडाई क्षेत्रफल के सिद्धांत पर किया सर्वे नंबर का क्षेत्रफल कंघी गया है । नक्शे में नंबरिंग होने के पश्चात एक अथवा अन्य यंत्र की सहायता से निकाला जाएगा।
प्रपोशनल कम्पास
परकार की तरह इस यंत्र के ऊपर तथा नीचे दो नोकदार सिरे होते हैं । प्रत्येक सिरे में दो नोंक एक बराबर की होती है इनको लिम्ब्स कहते हैं । इसके मध्य में एक पेंचकस लगा होता है । जब इसके लिम्ब्स को एक- सा करके कस दिया जाता है तो यह एक जैसा दिखता है । पेंच का उपयोग बन्द करने या खोलकर लिम्ब्स को ढीला करने में होता है । इस यंत्र का उपयोग किसी मानचित्र को छोटे से बड़ा या बड़े से छोटा करने में होता है । इसके पेंच को जितना ऊपर या नीचे करते हैं, उतने ही छोटे या बड़े आकार का नक्शा बनता है । इस यन्त्र की भुजा पर स्केल अंकित होती है । जिस स्केल पर पेंच को कस दिया जाता है । उसी स्केल में नक्शा छोटे से बड़ा या बड़े से छोटा बनाया जाता है । 3918
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
टेप
यह 50 फीट या 100 फीट लम्बा कपड़े या स्टील की पत्ती का होता है । किसी में एक ओर फीट व इंच तथा दूसरी ओर मीटर तथा सेन्टीमीटर अंकित रहता है । किसी में सिर्फ फीट व इंच एवं मीटर व सेन्टीमीटर ही अंकित रहता है । फीता के बाहरी सिरे पर एक छल्ला लगा होता है जो फीट के फीते में इंच का होता है या कुछ सेन्टीमीटर का होता है । इस छल्ला से पकड़ने व फीता की दूरी फैलाने में सुविधा होती है । यह जरीब की शुध्दता की जाँच करने या विविध प्रकार की दूरी तथा ऊँचाई या नीचाई नापने के काम में लिया जाता है । मैटिक प्रणाली में 20 मीटर व 30 मीटर के स्टीलबैंड टेप आते हैं ।
5
34
(2) जरीब एवं फीता से विस्तृत भू मापन-
1. संपूर्ण भाग से आंशिक भाग की ओर क्रमिक सर्वेक्षण करना सर्वेक्षण का मुख्य सिद्धांत है। इसके अंतर्गत संपूर्ण भू- भाग जिसका सर्वेक्षण किया जाना हो को छोटे- छोटे भागों में विभाजित कर दिया जाता है , इसके लिए पूरे भाग में कुछ नियंत्रण बिंदु अत्यधिक परिशुद्धता के साथ स्थापित किये जाते हैं । इन नियंत्रण बिंदुओं से उप नियंत्रण (Sub traverse ) बिंदु भी स्थापित किए जाते हैं। इन सभी बिंदुओं को आपस में मिलाने से विस्तृत सर्वेक्षण किया जाने वाला भू- भाग छोटे- छोटे क्षेत्रों में बट जाता है।
ii . शुद्धता पूर्वक भू- मापन का कार्य पूर्ण करने के लिए 20X20 या 20X15 जरीब के ब्लॉक में क्षेत्र को विभाजित किया जाता है जिसे मुरब्बा कहा जाता है । मुरब्बा का आकार परिस्थितियों के अनुसार कुछ कम या कुछ अधिक किया जा सकता है, इस विभाजन कार्य को मुरब्बा तरासी (आयतीकरण ) कहते हैं । मुरब्बा का अर्थ वर्गाकार होता है किन्तु भू- मापन कार्य में बनाए जाने वाले भाग वर्गाकार नहीं होते फिर भी भू- मापन कार्य की प्रचलित भाषा में प्रत्येक उप - भाग को मुरब्बा कहे जाने की प्रथा है तथा इस प्रकार उप- भाग बनाने के कार्य को मुरब्बा तरासी कहते है । 3919 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
ग्राम या क्षेत्र को उप - भागों (टुकड़ों ) में विभाजित करने के लिए जो लाइने डाली जाती है ऐसी लाइनों को मुरब्बा लाइन कहते हैं। जैसे A, D से C तथा ८ से चांदा 5 की लाइनें इत्यादि । मुरब्बा- तरासी के समय बनने वाले मुरब्बा का नजरी नक्शा भी तैयार किया जाता है , प्रत्येक छोटे क्षेत्र को टाई स्टेशन स्थापित करके और भी छोटे-छोटे क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है ।
iv. अब प्रत्येक छोटे भाग का विस्तृत भू- मापन करने के लिए इन मुरब्बों में 3-3 जरीब की दूरी पर सीधी जरीब रेखाएं डालकर विस्तृत भू- मापन कर लिया जाता है। एक मुरब्बा में जरीब लाइन आड़ी डाली जाती है तो उस मुरब्बे से लगे हुये दूसरे मुरब्बे में खड़ी जरीब लाईन डाली जाती है । ऐसा इसलिये किया जाता है जिससे त्रुटि (error) एक ही दिशा में न जाये । ग्राम की सर्वे त्रुटि, ग्राम के अन्दर , समान रूप से समायोजित ( adjust ) हो जाये । इस प्रकार सम्पूर्ण मुरब्बों का विस्तृत भू- मापन कर लिया जाता है और ग्राम के सम्पूर्ण भू-खण्डों की आकृति बना ली जाती है जो उस ग्राम का क्षेत्र नक्शा कहलाता है।
V. इसके बाद जल्दी से आगे की झंडियों को क्रमशः जरीब चलाई जाती है प्रत्येक जरीब लाइन के दाएं और बाएं के ऑफसेट्स लिए जाते हैं जरीब के नीचे के कटान लिखे जाते हैं सर्वे का जो भी कार्य रेखा से दूर होता है उसको करण , सिकमी लाइन आदि डालकर पूर्ण की जाती है । सर्वेक्षण करते समय प्लाटों में स्थित रूढी चिन्हों का ऑफसेट उनके केंद्र बिंदु के मान से लेना लेते हैं ।
जाए पं. प्लाटिंग कार्य:- भू- मापन किये गये क्षेत्र के आकार को निर्धारित पैमाने पर फील्ड बुक के अनुसार उसकी मूल सूरत को छोटे रूप में बनाया जाता है इसको प्लाट कहते हैं । किसी क्षेत्र का भू- मापन जरीब लाइन, शिकमी लाइन , कैंची लाइन, कर्ण रेखा आदि से पूर्ण किया जाता है । इन सब में कर्ण रेखा का महत्व अधिक होता है । कर्ण के द्वारा ही त्रिभुज या त्रिभुजों का निर्माण होता है । जिस क्षेत्र का चैन द्वारा सर्वेक्षण किया उसकी प्लॉटिंग उसी दिन नक्शे पर कर लेना चाहिए। सर्वेक्षण उपरांत नक्शे पर प्लाटिंग कार्य कर नक्शा निर्माण किया जाना चाहिए तथा स्थल पर जाकर मेड़ मिलान कार्य करना चाहिए ताकि यह ज्ञात हो सके की खेतों की मेंड़े सही ढंग से मिलाई गई है अथवा नहीं यदि गलत मिलाई गई है तो उन्हें स्थलानुसार अनुसार ठीक करना चाहिए ।
ii . प्लाटिंग कार्य की विधिः प्रत्येक प्रकार की चैन सर्वे में प्लाटिंग कार्य की विधि एक ही है । सर्वप्रथम किसी एक रेखा को आधार भुजा के रूप में खींचा जाता है। इसके बाद कर्ण की सहायता से समस्त जरीब लाइन खींची जाती हैं । इस कार्य को फ्रेम वर्क भी कहते हैं। प्रत्येक जरीब रेखा को परकार की सहायता से कायम किया जाता है । पैमाने पर से परकार में एक चांदे से दूसरे चांदे की दूरी भरकर चांप काटकर चांदों का स्थान निश्चित किया जाता है ।
iii . सीमा मिलान कार्य : - नक्शा बन जाने के बाद सीमावर्ती ग्रामों की सीमाओं का मिलान करना चाहिए। भू- मापन के समय ग्राम सीमाओं का मापन करते समय निम्न 3920
[ भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
बिंदुओं का ध्यान रखा जाता है दो ग्रामों के बीच की सीमा दो बंदोबस्त इकाइयों की , दो तहसीलों, दो जिलों तथा दो राज्यों की मध्य की सीमा हो सकती है
जहां सीमावर्ती दोनों ग्रामों का भू- मापन एक ही क्षेत्रीय काल में किया जाता है वहां यथासंभव दोनों भू- मापकों द्वारा ग्राम सीमा साथ साथ चल कर अपनी-अपनी क्षेत्र पुस्तिका तैयार की जाती है और रेखांकन के पश्चात दोनों शीटों की सीमाओं का मिलान किया जाता है ।
यदि एक ही क्षेत्रीय काल में पृथक पृथक समय पर सीमा की माप की जाती है तो पूर्व में मापित दिशा के आधार पर ही पश्चातवर्ती वह मापक द्वारा नापी जाती है ताकि स्थल पर दहाई पंजों के चिन्हों में भिन्नता ना हो सके और लंबाई का अंतर होने पर पुनः दोनों को मिलाकर वृद्धि कर दी जाए । विसंगति की स्थिति में पटवारी नक्शे को आधार मान कर सीमाएं रखनी चाहिए ।
ix सर्वे कार्य की शुद्धता का परीक्षण क्षेत्र नक्शा तैयार हो जाने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आवश्यकतानुसार पड़ताल , लाईन डालकर जाँच की जाती है । यदि कोई त्रुटियां पाई जाती हैं तो आवश्यक सुधार किया जाएगा । यह कार्य दो अधिकारियों द्वारा किया जाता है। a) प्रथम अधिकारी
(1) जांच लाइन या पड़ताल रेखा चलाकर फील्डबुक तैयार कर भू- मापन कार्य की शुद्धता की जांच की जाती है ।
(2) शीट पर बनाई गई भूखंडों की सीमाओं का मिलान स्थलों की सीमाओं से किया जाता है ।
(3) पड़ताल रेखा को शीट पर खींचकर इस रेखा पर लिए गए कटान ऑफसेट के द्वारा सर्वे कार्य शुद्धता की जांच की जाती है
(4) भू मापक द्वारा चलाई गई रेखाओं में से कुछ रेखाओं का सर्वे कार्य परीक्षक द्वारा पूरा कर भू- मापक के सर्वे कार्य की शुद्धता की जांच की जाती है । b ) दूसरा अधिकारी
यह अधिकारी प्रथम अधिकारी से उच्च पद का होता है । इसका कार्य यह होता है कि प्रथम परीक्षण अधिकारी की रेखाओं को 25 % रेखाओं का पुनः परीक्षण करता है तथा अलग से रेखा चलाता है । इस फील्ड बुक के आधार पर शुद्धता की जांच की जाती है । 3921 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
X नम्बरिंग कार्य : - ग्राम का सम्पूर्ण भू- मापन होने के बाद तैयार नक्शे में उत्तर पश्चिम के कोने से नम्बरिंग प्रारम्भ की जाती है एवं दक्षिण पूर्व के कोने पर समाप्त की जाती है । जैसे-उत्तर पश्चिम के कोनें का सर्वे नं. 1 से नम्बरिंग प्रारम्भ व दक्षिण पूर्व के सर्वे नम्बर 17 पर नम्बरिंग समाप्त।
xi . ग्राम के नक्शे में नम्बरिंग सर्पिलाकार ( Serpentine ) की जाती है क्षेत्र जिसमें बसाहट या आबादी रहती है नक्शे में पृथक से नंबर दिया जाता है । निस्तार के लिए सुरक्षित रखी गई भूमि को पृथक सर्वे नंबर दिया जाएगा ।
xi . मार्जिन का खेत जो 2 शीटों में होता है जिस शीट पर बड़ा भाग होता है उस शीट के खेत पर नंबर डाला जाता है । एक से अधिक शीटों का गांव है तो पहले शीट में , फिर दूसरी शीट में क्रमशः अन्य सीटों में नंबरिंग का कार्य किया जाएगा।
xii . नक्शा निर्माण के दौरान ग्राम के नक्शे में नम्बरिंग कार्य पूर्ण हो जाने के बाद यदि जाँच में यह पता लगे कि नक्शे में नम्बरिंग करने से कोई खेत शेष रह गया है तो ऐसे खेत को नक्शे के आखिरी सर्वे नम्बर के आगे का नम्बर देकर जिस स्थान पर नम्बर देना शेष रह गया है, उसके पास वाले नम्बर को बटे (Denominator ) नम्बर के रुप में लिख दिया जाता हैं। ऐसे नम्बर को उड़ान नम्बर कहते है । जैसे- सर्वे नं. 9 के पास एक खेत नम्बर देने से शेष रह गया है जिसे बाद में 18/9 नम्बर दिया गया है । ( चित्र में दर्शाये अनुसार )
किसी ग्राम का नक्शा नमूना
कोना उत्तर पश्चिम
ट्रावर्स स्टेशन
2
3
4
1
8
5
6
कुदान नम्बर
ग्राम सीमा
18/9
10
12
कोना कुदान
18
15
ट्रावर्स रेखा
WE
13
11
14
उडान नम्बर
फोना दक्षिण पूर्व [भाग 1 3922
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(3) जरीब से फील्ड सर्वे के समय ध्यान रखने योग्य व्यवहारिक बातें
i . जरीब को एक झण्डी से दूसरी झण्डी की ओर ठीक सीधी रेखा में चलाते हुए प्रत्येक जरीब के पश्चात सूजा लगवाएँ। जरीब सीधी व टाइट पोजिशन में होना चाहिए ।
ii . जहाँ कटान ( मोड़ ) आवे उसकी जरीब रीडिंग फील्ड बुक में दर्ज करें ।
जरीब लाइन पर राइट ऐंगल की सहायता से ऑफसेट बिन्दु को देखें। ऑफसेट पर रखी रॉड काँच में तथा खुली विन्डो से देखा जाएगा । जहाँ पर भी ऑफसेट रॉड काँच में तथा खुली विन्डो में झण्डी एक दूसरे के ठीक ऊपर नीचे, अर्थात ओवरलैप हो जावे उस पिन पॉइंट को जरीब लाइन पर Measure करने के पश्चात फील्ड बुक में लिखेंगे ।
iv. ऑफसेट बिन्दु से चली मेड़ जिस जगह जरीब लाइन से मिलती है, उसे खारिजी से जोड़ें । प्रत्येक ऑफसेट पर ध्यान देवें कि कुल कितनी लाइनें वहाँ से निकलती हैं व किस दिशा की ओर जाती हैं , अनुमानतः कोण मानते हुए खारिजी चित्र बनावें । जरीब लाइन पर एक ही रीडिंग पर एक ही ओर दो या अधिक ऑफसेट आते हैं , तो पास वाले को पहले लिखें तत्पश्चात बांट कर दूसरे ऑफसेट की दूरी लिखें । ऐसे ऑफसेट लिखते समय पॉइंट , कोमा, हायफन, सेमी कोलन जैसे चिन्हों का प्रयोग न करें ।
V. जरीब लाइन पर कटान आने पर खारिजी दोनों तरफ दर्शायी जायें साथ ही ध्यान रखा जावे कि मोड़ जरीब लाइन को किस ओर, किस कोंण पर काट रही है, उसी अनुमानतः कोंण पर खारिजी दर्शायी जावेगी ।
पं . एक झण्डी से दूसरी झण्डी तक चलने पर भी यदि कोई ऑफसेट लेने से छूटा रहता है एवं संभावना की वह ऑफसेट किसी भी जरीब लाइन से कंट्रोल नहीं होगा तब गोदा लाइन डाले गन्तव्य झण्डी पर पहुंचने के पश्चात जरीब को उस झण्डी से आगे की ओर फैला लेवें व ऑपोजिट दिशा की ओर से दोनों झण्डियों की सीध में जरीब रखें व ऑपोजिट मुंह करके दोनों झण्डियों की ओर देखते हुए ऑफसेट सेट करें व झण्डी से उस बिन्दु तक की दूरी लिखें । झण्डी पर पहुंचने के पश्चात गोदा कायम करना हो तो झण्डी की रीडिंग को गोल घेरने के पश्चात उस झण्डी पर गोदा लाइन बढ़ाने में एक एरो (Arrow) लगा देते हैं जो गोदा लाईन कायम किए जाने की दिशा को सूचित करता है । vi . चेन सर्वे करते समय विभिन्न प्लॉटों में स्थित स्थला कृतियों, अलामात का ध्यान रखना चाहिए व उनका ऑफसेट उनके केन्द्र बिन्दु के मान से लेना चाहिए । जैसे कुआ, बाबड़ी, मंदिर, मस्जिद, पेड़ , पोल इत्यादि । जो स्थलाकृतिया आलामात प्लॉट के संपूर्ण रकबे पर फैली हैं तो उनका ऑफसेट नहीं लिया जाना चाहिए जैसे आबादी, चरनोई, बड़े झाड़ का 3923 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
जंगल , छोटे झाड़ का जंगल , खेल का मैदान, रास्ता, नाला आदि। उक्त ऐसी सभी अलामातों को उपयुक्त निशान से फील्डबुक व प्लॉटिंग में अवश्य दर्शाया जाना चाहिए । iii . जरीब लाइन चलते समय उसके दोनों ओर ( Left- right) 1.5 जरीब तक के ऑफसेट अवश्य उठा लेना चाहिए । यदि कोई ऐसा 1.5 जरीब से अधिक दूरी का है , और किसी भी लाइन पर मेजर होने की संभावना नहीं रखता है तो ऐसे ऑफसेट को भी लिया जा सकता है । सर्वे करने वाले व्यक्ति को अपनी स्थिति के बिन्दु से 1.5 जरीब की रेडियस ( त्रिज्या ) के सभी ऑफसेट उठा लेने चाहिए । एक ही ऑफसेट को बार- बार Measure करने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए । यदी कोई ऑफसेट पूर्व में लिया जा चुका है के उसे पुनः उसे Measure करने की आवश्यकता नहीं है चाहे वह सर्वेयर की स्थिति से 1.5 जरीब की रेडियस में ही हो । इससे समय की बचत होती है तथा कन्फ्यूजन की स्थिति से भी बचा जा सकता है । ix चारों भुजाओं पर चलने के पश्चात विकर्ण चलना चाहिए व चारों भुजाओं पर लिए गए ऑफसेटों अतिरिक्त अन्य सभी ऑफसेट विकर्ण पर लिए जाना चाहिए । चाहे कोई भी ऑफसेट Measure होने से छूट न जावे। विकर्ण पर पड़ने वाली सभी कटानों को उनकी angular स्थिति अनुसार खारिजी दी जानी चाहिए, साथ ही उन खारिजी लाइनों पर बनने वाले कोने, तिमेड़ा, चौमेड़ा जैसी स्थिति को बनाया जाना चाहिए , भले ही उनके Measure नहीं किया जा रहा हो । (4) चैन सर्वे के लाभ (Advantages of chain survey)
चैन सर्वे सुगम एवं साधारणतया उपयोग में लाया जाता है चैन सर्वे में उपयुक्त उपकरण बहुत ही सरल एवं आसानी से उपलब्ध एवं रिप्लेस किए जा सकते हैं चैन को आसानी से पढ़ा जा सकता है चैन सर्वे में ज्यादा व्यक्तियों की आवश्यकता नहीं होती मुख्यतः चैन सर्वे में तीन व्यक्ति की आवश्यकता होती है ।
(5) चैन सर्वे की कमियां ( Disadvatage of Chain Survey) -
Chain Survey के द्वारा आबादी क्षेत्र या बड़े क्षेत्र में सर्वे में कटाई होती है, इसमें कई त्रुटियों की संभावना होती है जो लिंक को जोड़ने वाले रिंग के फैलने से हो सकती हैं परिणामस्वरूप मांप मान में गलती हो जाती है, इस सर्वे के उपकरण काफी भारी होते हैं इसके खोलने और समेटने में कठिनाई होती है , इस प्रक्रिया में अत्यधिक समय लगता है पहाड, चट्टान 3924
[ भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
एवं तालाब नदी वाले क्षेत्र का चयन सर्वे करना कठिन होता है, इसमें मानवीय भूल की अधिक संभावना रहती है ।
ख. आधुनिक पद्धति से भू- मापन
आधुनिक पद्धति से भू- मापन से अभिप्राय आधुनिक यंत्रो तथा विधियों से किसी भी भू- भाग पर प्राकृतिक या मानव निर्मित आकर को किसी निश्चित मापन पर निर्धारित मापमान के उपकरणों द्वारा माप कर मानचित्र के रूप में शीट पर अंकित किया जा सकने से है । आधुनिक पद्धति से रेखीय एवं कोणीय भू- मापन विभिन्न यंत्रों की सहायता से किया जाता है जैसे रेखीय मापन के लिए परंपरागत रूप से जरीब एवं टेप का उपयोग किया जाता है ।
इस पद्धति में विभिन्न प्रकार की विधियों एवं यंत्रो को प्रयोग में लाया जाता है जो निम्नलिखित है-
1. इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन मशीन ( ETSM ) से भू- मापन
2. उपग्रह चित्र (Satellite Image ) आधारित भू-मापन
1. इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन मशीन ( ETSM ) से भू- मापन
आधुनिक तकनीकी में विकास के साथ ही सर्वे यंत्रों में भी सुधार हुआ है जिसकी परिणिति के रूप में सर्वाधिक उपयोग किए जाने वाले यंत्र इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन मशीन ( ETS ) का उपयोग किया जा रहा है ETS मशीन से रेखीय एवं कोणीय मापन एक साथ हो जाता है ETS मशीन से किए गए सीमांकन कार्य में पूरी तरह से पारदर्शिता एवं परिशुद्धता के साथ लिखित आंकड़े प्राप्त होते हैं । इस यन्त्र से भू- मापन करने हेतु चंक्रमण ( Traversing ) का प्रयोग किया जाता है जिसमें किसी एक नियंत्रण बिंदु से चंक्रमण ( Traverse ) कर अन्य बिंदुओं को ज्ञात किया जाता है एवं सभी बिंदुओं को मिला कर क्षेत्र सीमा का निर्माण किया जाता है । इस विधि में मानचित्र में अंकित विभिन्न कोनों , मोड़ो, तिमेडा, चौमेडा, जैसे बिंदुओं को चुनकर एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक की रेखीय दूरी को पैमाना पर नाप कर उसी पैमाने में भूमि पर चिन्हत किया जाता है साथ ही मानचित्र में मेंड़ो के बीच का कोणीय मापन कर उसी कोणीय मापन को भूमि पर सत्यापित किया जाता है । 3925 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन मशीन ( ETSM ) सामान्य परिचय
दूरी और कोण सर्वेक्षण के लिए सबसे अनिवार्य पहलु है । सर्वेक्षण में हम समतल या गोलाकार पर दो बिंदुओं के बीच के कोण और दूरी की गणना का पता लगाते हैं। हम चैन, टेप , ईडीएम , आदि की मदद से दूरी को माप सकते हैं इस प्रकार कोण और दूरी को मापने के लिए हम एक ही समय में दो या अधिक प्रकार के उपकरणों का उपयोग करते हैं । लेकिन ETSM में हम एक ही समय में एक ही परिवेश में दो या अधिक बिंदुओं के बीच के कोंण और दूरी को माप सकते हैं । टीएसएम दो या अधिक बिंदुओं के बीच के कोण और दूरी को मापने के लिए एक पूर्ण साधन है । इसलिए इसे TOTAL STATION मशीन कहते हैं । यह एक Electronic Theodolite Machine की तरह है । जिसमे में Electronic Distance Meter के साथ- साथ Initial Data Storage की व्यवस्था होती है । इस मशीन के द्वारा सर्वे और सीमांकन का कार्य सुलभता से किया जा सकता है ।
ETSM मूलतः तीन प्रमुख भागों से मिलकर बनती है
EDM ( Electronic Distance Meter )
Anglemeasuring instrument
Simplemicroprocessor
यह मशीन पूरी तरह कम्प्यूटराइज्ड, विन्डोस , टच स्क्रीन सुविधा युक्त मशीन है। जिसमें लगी EDM से दूरी एवं मशीन के क्षैतीज , उर्ध्वाधर विस्थापन होने पर कोंणीय मापन किया जाता है। उक्त प्रकार का समस्त कार्य मशीन की आंतरिक मेमोरी में सेव हो जाता है । यह मशीन प्रिज्म मोड व लेजर मोड दोनों में काम 3926
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
करती है । इस मशीन की सहायता से लेजर मोड में 400 मी० की त्रिज्या एंव प्रिज्म मोड में 3000 मी. की त्रिज्या दूरी तक के आफसेट आसानी से माप सकते हैं। इस मशीन की परिशुध्दता दूरी में 1 पीपीएम एवं कोणीय मापन में 3 सेकेण्ड माप है । फलस्वरुप सर्वे/ सीमांकन के दौरान दो बिन्दुओं के बीच की दूरी एवं कोणीय मापन अधिक परिशुध्द प्राप्त होते हैं । यह मशीन कोर्डिनेट फार्म में डाटा लेती है एवं उसी फार्मेट में आउट पुट देती है । यह मशीन किसी भी कोर्डिनेट सिस्टम में कार्य करने समर्थ है । चाहे वह WGS - 84, एवेरेस्ट या local या अन्य प्रचलित सिस्टम हो । मशीन से प्राप्त डाटा को विभिन्न साफ्टवेयर में प्रोसेस कर फील्डबुक , स्केलिंग मेप प्राप्त किया जाता है । जिन्हें प्रिन्ट किया जा सकता है । इस मशीन से प्राप्त सर्वेक्षण अत्यधिक परिशुध्द, व कम लागत वाले अल्प समय में प्राप्त होते है । साथ ही सर्वे डाटा लिखित में रहता है , जिससे पारदर्शिता बनी रहती है । यह एक विश्वसनीय सर्वे मशीन है , जिसका प्रचलन निरन्तर बढ़ता जा रहा है । ETS मशीन से भू- मापन/ सीमांकन की कार्य विधि
ETS मशीन से सीमांकन कार्य के लिए मौके पर जाकर मशीन को ऐसी जगह स्थापित किया जाता है जहां से अधिकतम क्षेत्र सुगमता से दिखाई देता हो एवं जहां तक संभव हो सीमांकन वाला क्षेत्र एवं स्थाई बिंदु के रूप में स्थापित चांदे, नियंत्रण बिंदु Control point भी दिखाई देते हो ताकि उनके observation मशीन की सहायता से लिए जा सकें मशीन को ऐसे चयनित स्थान पर स्थापित किया जाता है जहां मशीन के से उपकरण ट्राइपॉड को लगाकर ट्राई बेंच की सहायता से Centering एवं Leveling की जा सके इसके बाद ट्राई बेंच पर मशीन को लगाया जाता है एवं मशीन को setup किया जाता है ।
Setup- सेटअप मशीन के main मैन्यू पर go to work option मैं रहता है जिसे open कर setup option मिलता है सेटअप option मुख्य रूप से पूर्व रूप से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर select किए जातेहैं क्योंकि मशीन ज्यामितिक निर्देशांक ( Co - ordinate ) के रूप में डाटा ग्रहण करती है और उसी Formate मैं observed डाटा प्रदान करती है यदि हमारे पास कोई भी निर्देशांकीय आंकड़े उपलब्ध नहीं है तो मशीन को और बैटरी cordinate 3927 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1]
देते हुए लोकल कोऑर्डिनेट सिस्टम का बेस तैयार किया जाता है एवं उत्तर दिशा से उसे orient करना होता है तब Set Orientation Option चयनित Select करते हैं यदि पूर्व से ही किसी भी कॉर्डिनेट सिस्टम के अंतर्गत विषय अंकित बिंदुओं के कोऑर्डिनेटर उपलब्ध है मशीन में जनरेट किया जाता है तो मशीन मैं जनरेट ऐसे बिंदुओं में सेटअप हेतु known backsight Resection Option का चयन किया जाता है जब कोई भी डाटा और नेट फॉर्मेट उपलब्ध ना हो तो Setori entation option को चयनित कर उस बिंदु पर मशीन स्थापित की गई जिसको एक पहचान ID कहते हैं एवं काल्पनिक Eeasting , Northing , Elevation को मीटर में निर्धारित पंक्तिमें भर देते हैं एवं मशीन के लिए माने हुए काल्पनिक नॉर्थ की तरफ टेलिस्कोप का मुंह करके मशीन को सेट कर देते हैं इस तरह मौके पर लगी हुई मशीन बिंदु एवं माने गए उत्तर दिशा के बीच एक रेखा प्राप्त होती है जिसकी बियरिंग 0° 00′00″ मान ली जाती है इसके बाद मशीन के सर्वे ऑप्शन को चयनित कर दो या दो से अधिक ऐसे स्थाई बिंदुओं का सर्वे कर लिया जाता है जिसकी स्थिति मानचित्र के अनुसार मौके पर ही अर्थात उन बिंदुओं की स्थिति में विगत सर्वेक्षण जिसके आधार पर पटवारी में तैयार किया गया है आज तक मौके की स्थिति में कोई परिवर्तन ना हुआ हो ऐसे बिंदु स्थाई बिंदु कहलाते हैं यह संरचनाएं चीरा चांदी बंदोबस्ती कुवें, तिमेडा, चोमेडा इत्यादि होते हैं जिन दो या दो से अधिक बिंदुओं का सर्वे किया गया है उन बिंदुओं के आधार पर ETS मशीन के Cogo Option मैं जाकर इंटरसेक्शन ऑप्शन पर चयन करते हैं इंटरसेक्शन ऑप्शन में डबल डिस्टेंस ऑप्शन का चयन करते हैं जिसमें सर्वे किए गए स्थाई बिंदुओं से सीमांकन वाले सर्वे के कोनो की दूरियों को मशीन में वांछित जगह अंकित कर कैलकुलेट किया जाता है ट्रिग्नोमेट्री की Trilatration ( भुजाओं की दूरी मापन के आधार पर त्रिभुज का निर्माण ) सिद्धांत अनुसार मशीन में पॉइंट का बिंदु कोडनेट फॉर्मे मैं जनरेट हो जाता है इसी विधि से सीमांकन वाले सर्वे नंबर के सभी कोणों मोड़ो एवं अन्य वांछित बिंदुओं को कैलकुलेट कर मशीन के अंदर बना लिया 3928
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
जाता है एवं एरिया एडिंग ऑप्शन में जाकर आकृतिके सभी वांछित बिंदुओं को मिलाकर एरिया बना लिया जाता है ।
Stakeout - ETS मशीन को उसी सेटअप में रखकर जिस सेटअप में मशीन में पॉइंट जनरेट है मशीन के बिंदुओं को एक - एक करके चयनित करके उनकी स्थिति को पता लगाया जा सकता है उसके लिए मशीन में स्टेकआउट ऑप्शन यूज करते हैं इसके लिए Go to Work में जाकर स्टेकआउट ऑप्शन चयनित करते हैं स्ट्राइक आउट में जॉब में सिलेक्ट करते हैं एवं मौके पर स्थापित किए जाने वाले बिंदु को चयनित करते हैं फिर उस बिंदु को मौके पर चिन्हित करने हेतु प्रिज्म को उस दिशा में भेजा जाता है जहां उसके होने की संभावना होती है फिर प्रिज्म और टेलिस्कोप की सहायता से फोकस कर मशीन से उसकी दूरी डिस्ट ऑप्शन ( F2) को दबाकर देखी जाती है यदि इस बिंदु पर प्रिज्म नहीं होताहै तो मशीन में होरिजेंटल से दूरी इन /आउट तथा दिशा लेफ्ट /राइट के रूप में प्रदर्शित होती है इस प्रकार प्रिज्मा और वास्तविक बिंदु के रूप में कितना अंतर है एवं उसी अनुसार प्रिज्म को आगे पीछे दाएं बाएं सिर्फ करते हैं मशीन से प्रिज्म को बार - बार डिस्ट मापन कर प्रिज्म को ऐसी स्थिति में ले आते हैं कि मशीन की स्क्रीन पर प्रदर्शित दिशा दूरी लेफ्ट राइट / इन आउट 00 हो जावे सैद्धांतिक रूप से ऐसा इसलिए होता है कि मशीन में बने प्रत्येक बिंदु एवं मशीन से रेखीय दूरी कोणीय दूरी दोनों होती हैं एवं उसी अनुसार मशीन रेखीय दूरी कोणीय दूरियां प्रदर्शित करते हैं इसी विधि कैसे सीमांकन वाले क्षेत्र के सभी बिंदुओं को मौके स्थल पर ढूंढ लिया जाता है एवं उन पर खेत सीमा चिन्ह गढ़वा कर सीमाओं का अंकन कर लिया जाता है उक्त संपूर्ण विधि गणितीय ज्योमैट्रिक आधारित होती है जिसमें कोड एवं दूरी के आधार पर बिंदु बनते हैं एवं उन्हें स्थल पर ढूंढा कर सीमा निर्धारित की जाती है । 3929 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
2. उपग्रह चित्र ( Satellite Imagery ) आधारित सर्वेक्षण
इस पद्धति में High Resolution Satellite Imagery का उपयोग कर खसरा नक्शा तैयार किया जाता है । तैयार खसरा नक्शा का स्थल पर सत्यापन कर अंतिम रूप दिया जाता है। High Resolution Image को आधार बनाकर कृषि भूमि के Field Bunds को डिजिटाइज्ड किया जाता है एवं फील्ड वेरिफिकेशन कर मैप तैयार किया जाता है इस कार्यप्रणाली DGPS सर्वेक्षण एक बहुत ही महत्वपूर्ण तत्व है । उच्च रिज़ॉल्यूशन उपग्रह इमेजरी सटीक भूनियंत्रण बिंदुओं का उपयोग करके Geo -Reference किया जाता है । प्रत्येक ग्राउंड कंट्रोल पॉइंट (GCP ) के लिए DGPS निर्देशांक को एक सटीक तरीके से एकत्र कर संसाधित किया जाता है एवं Photogrammetry की विभिन विधियों से चरणबद्ध तरीके से उच्च सटीकता के साथ आधार हेतु Ortho-image तैयार की जाती है ।
इस प्रकार के सर्वेक्षण के चरणों का क्रम निम्नलिखित है-
a) Control Point Establishment
b) Satellite Data Acquisition
c) DEM Generation
d) Ortho Product Generation
e) Feature Extraction Using G.I.S Technology
f) Participatory Ground Truthing of Land Parcels
a) Control Point Establishment
नियंत्रण बिंदुओ की स्थापना का कार्य इस कार्य विधि में महत्वपूर्ण अवयव है नियंत्रण बिंदु की स्थापना का कार्यजिस क्षेत्र के लिए किया जाना होता है उस में पहले जियोमेट्रिक नेटवर्क ( Ground Control Network ) बनाया जाता है तथा उसको स्थल पर स्थापित किया जाता है इस हेतु निम्न आवश्यक बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए। i . सर्वेक्षित क्षेत्र के मध्य में नियंत्रण बिन्दु की स्थापना करना ।
ii . 72 घंटों तक dual frequency geodetic DGPS receivers के माध्यम से DGPS के लिए डाटा एकत्रित करना।
नियंत्रण बिन्दु का निर्धारण भारतीय सर्वेक्षण विभाग के निर्देशांकों के आधार पर भी किया जा सकता है ।
iv. सेटेलाइट इमेज के आधार पर GCP स्थानों की पहचान करना।
V. GCP स्थानों पर 3 घंटों तक GPS डाटा एकत्रित करना । 3930
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
vi . DGPS mode में प्राथमिक नियंत्रण बिन्दुओं के संदर्भ में द्वितीयक एवं तृतीयक नियंत्रक बिन्दुओं का निर्धारण करना।
vii . सर्वेक्षित क्षेत्र में जहाँ कन्ट्रोल पॉइंट स्थापित हैं उनकी overlapping Image ली जाती है और उन सभी इमेज को एक साथ papallax समायोजन किया जाता है । समायोजन की इस प्रक्रिया को Bundle Block समायोजन कहा जाता है । नोट- "नियंत्रण बिंदु" स्थापना कार्य का विस्तृत विवरण "नियंत्रण बिंदु" अध्याय में विस्तृत रूप से उल्लेखित किया गया है ।
b) Satellite Data Acquisition
उपग्रह आधारित इमेजरी ( Satellite Image ) पृथ्वी या अन्य ग्रहों की छवियां हैं जो दुनिया में सरकारों और व्यवसायों द्वारा संचालित उपग्रहों के इमेजिंग द्वारा एकत्र की जाती हैं । सैटेलाइट इमेजिंग कंपनियां/ शासकीय एजेंसियां उपग्रह चित्रों को सरकारों और व्यवसायों को उपलब्ध कराती हैं इन इमेजेज में धरातल का स्केल व्यू ( Scaled view) संरक्षित किया जा सकता है। किसी भी इमेज की गुणवत्ता को उससे प्राप्त की जा सकने वाली जानकारियों से निर्धारित किया जाता है जिसे निम्नलिखित आधारों पर मूल्यांकित किया जा सकता है । Spatial Resolution
Spatial Resolution भी सेटेलाइट इमेज में रेसोलुशन का प्रकार है जिससे अधिकांश लोग परिचित हैं । स्थानिक रिज़ॉल्यूशन को आमतौर पर पिक्सेल के एक तरफ की लंबाई के रूप में रिपोर्ट किया जाता है । उदाहरण के लिए , world view 2 सॅटेलाइट का डाटा में 0.5 मीटर spatial resolution है । दूसरे शब्दों में, 0.5 मीटर स्थानिक Resolution के साथ एक छवि का मतलब है किएक पिक्सेल ( Pixel ) जमीन पर एक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है जो कि 0.5 मीटर के पार है । Pixel से अभिप्राय चित्र मे दिखाई गयी यूनिट से है ।
1pixel (0.5m) 3931 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
Spectral Resolution
Spectral Resolution से अभिप्राय एक उपग्रह छबि में कितने " बैंड" को संदर्भित कर रिकॉर्ड करता है । Spectral Resolution को इस बात से भी परिभाषित किया जाता है कि प्रत्येक बैंड किस प्रकार " विस्तृत " है या एकल बैंड द्वारा कवर की गई तरंगदैर्ध्य है । मोनो तस्वीरों में केवल 1 बैंड होता है जो visible Spectrum को कवर करता है , यपि Multi Spectral ( RGB ) छवियों में 3 बैंड होते हैं राजस्व विभाग के पास उपस्थित वर्ल्ड व्यू-२ सेटेलाइट डाटा में 4 band कवरेज किये गए हैं ।
Temporal Resolution
Remotesensing डेटा समय में एक scene को कैप्चर करता है । टेम्पोरल रिज़ॉल्यूशन एक क्षेत्र के लिए बाद के डेटा अधिग्रहणों के बीच का समय है । इसे " वापसी समय " या " पुनरावृत्ति समय " के रूप में भी जाना जाता है । टेम्पोरल रिज़ॉल्यूशन मुख्य रूप से प्लेटफ़ॉर्म एवं Spatial Resolution पर निर्भर करता है ।
c) Digital Photogrammetry and Digital Elevation Model (DEM ) Generation.
Aerial triangular and block adjustment techniqes are performed using a high - end digital photogrammetry system with automatic image matching feature . All aerial photographs/Satellite image/ Drone images covered are thus associated with first order points , mass points, and tie points in a single block and thus the accuracy maintained is a location accuracy of 20 cm.
Digital elevation models (DEMs ) are generated at a closest interval to the grid points and terrain features are added to obtain a digital field model . These digital terrain models are edited and tested for accuracy . Altitude accuracy is within one meter , which is sufficient to generate cadastral maps.
[ भाग 1 3932
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
d) Ortho - Rectified satellite Image Generation
1 . Generating an image corrected for terrain - induced distortions for achieving better planimetric accuracy .
II . Ortho - rectification of Worldview - 2 images for the entire District area physically separate images , but virtually seamless .
III . Data Fusion- synergistic merging of higher resolution black- and- white( panchromatic0.5M resolution ) data with coarser resolution colour (multi - spectral 2 meter) data for getting colour- coded images of high resolution ortho rectified satellite data .
e) Feature Extraction Using G.I.S Technology
i. भौगोलिक सूचना प्रणाली सामान्य परिचय
भौगोलिक सूचना प्रणाली या तंत्र का शाब्दिक अर्थ एक ऐसे तंत्र से है, जो भौगोलिक संसार की सूचनाओं को दर्शाता है । यह एक कम्प्यूटर संचालित तंत्र है जिसमें भौगालिक आंकडों को विभिन्न साफ्टवेयर की सहायता से प्रोसेस कर जानकारी परक बनाया जाता हैं । इस प्रकार GIS को इस प्रकार परिभाषित कर सकते हैं- GIS कम्प्यूटर आधारित एक ऐसा तंत्र है, जिसके अन्तर्गत वास्तविक संसार या पृथ्वी के धारातल के आंकडों अथवा सूचनाओं को प्राप्ति , संग्रहण , प्रक्रियन , परिचालन , विश्लेषण , व्यवस्थीकरण तथा प्रर्दशन किया जाता है । जब किसी भी योजना में भौगालिक सूचना प्रणाली का उपयोग किया जाता है तो यह हमें कई महत्वपूर्ण प्रश्नों का उत्तर देता है । भौगालिक सूचना का उपयोग कर निम्न जानकारी प्राप्त होती है -
बसाव स्थिति ( Location )
जी.आई.एस. के विश्लेषण से किसी भी वस्तु या स्थान की स्थिति आसानी से ज्ञात की जा सकती है । जी . आई . एस . में भौगालिक संदर्भित आकडों का उपयोग किया जाता है।
दशा ( Condition)
दशा से अभिप्राय यह है कि कोई भी वस्तु कहीं पर किन कारणों से तथा किन दशाओं में स्थित है । यहां पर कार्य एवं कारण का संबध स्पष्ट होता है । किसी भी वस्तु के लोकेशन स्थिति की पहचान जी.आई.एस. प्रक्रिया से की जा सकती है। प्रवृति(Trend)
प्रवृति का अर्थ है, चरों (variables ) का परिवर्तन । मानचित्र में कुछ तत्व घटते या 3933 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
बढते रहते हैं । यह बदलाव किस दिशा में हो रहा है किन स्थानों के समूह में हो रहा है जिनका पता जी. आईएस . की सहायता से आसानी से लगाया जा सकता है । एनीमेशन एवं इफ़ेक्ट
GIS की मदद से स्थानों को वर्चुअल रियलिटी एवं ऑगमेंटेड रियलिटी का प्रयोग स्थितिक सटीकता के साथ किया जा सकता है ।
ii . GIS Data Model
(डाटामॉडल्स) - डाटा माडल एक ऐसी संरचना है जिसके अंतर्गत वास्तविक संसार के अलग भौगोलिक दृश्यों एवं लक्ष्यों को आंकडों में परिवर्तित कर रखा जाता है । डाटा मॉडल धरातलीय सूचनाओं को पहले डिजिटल आंकडों में परिवर्तित कर कम्प्यूटर पर उन्हें प्रदर्शित करता है । इस क्रिया विधि को एक माडल के रुप में विकसित किया जाता है जिरो आंकडा गोंडल कहते है । आंकड़ा मॉडल दो प्रकार के होते हैं ।
रास्टर ( Raster)
इसमें आंकडों को लघु ग्रिड सेलों के सेट द्वारा प्रदर्शित किया जाता है जिसे पिक्सल भी कहते हैं । प्रत्येक ग्रिड सेल को निर्देशाकों के प्रयोग से अंकित किया जाता है जो स्वतत्र रुप से लाक्षणिक ( Attribute ) आंकडों के मान को दर्शाता है । वेक्टर (Vector)
आंकडों को प्रदर्शित करने का एक दूसरा मॉडल भी प्रयोग किया जाता है जिसे वेक्टर मॉडल कहते है । वेक्टरमॉडल में बिन्दु रेखा तथा बहुभुज सैगमेन्ट को x एवं Y निर्देशांकों की सहायता से दर्शाया जाता है। निर्देशांक धरातलीय आकृतियों की लोकेशन स्थति को निर्धारित करते है । वेक्टर माडल बहुत कम storage घेरता है । इसके द्वारा निर्मित मानचित्र अतिउत्तम होते है । इनके द्वारा क्षेत्रफल तथा सीमाओं का मापन शुद्ध होता है । वेक्टर मॉडल में आंकडों का सम्पादन करना बहुत सरल है जो बहुत जल्दी से किया जा सकता है ।
iii . फीचर एक्सट्रैक्शन हेतु किये जाने वाले कार्य
फिल्ड बुन्ड्स व निर्मित आकृतियों को पूर्व से मौजूदप्राकृतिक तथा मान , Ortho- Rectified Imagery पर प्लॉट पार्सल को क्लाउड फ्री ऑर्थो इमेज से- delineate किया जाना होता है । [भाग 1 3934
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
DSPS और ईटीएस का उपयोग करके अस्पष्ट / कठिन क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया जाता है । इस प्रकार Remote Sensing/ DGPS/ ETS सर्वेक्षण के माध्यम से प्राप्त वेक्टर डेटासेट को GIS वातावरण में एकीकृत किया जाता है ताकि आगे चल कर settlement/title आदि की पुष्टि जैसी गतिविधियों के लिए बेस कैडस्ट्राल वेक्टर डेटासेट उत्पन्न किया जा सके । मौजूदा कैडस्ट्राल वेक्टर डेटा को स्थानिक विशेषताओं में किसी भी परिवर्तन को अद्यतन करने के लिए ताजा खरीदे गए और ऑर्थो-रेक्टिफाइड इमेजरी डेटासेट पर अध्यारोपित किया जाता है ।
iv. फीचर एक्सट्रैक्शन में समिलित ज्यामितियाँ
फीचर एक्सट्रैक्शन प्रमुख रूप से तीन ज्यामितियों से होता है जो निम्नलिखित है बिंदु आधारित ( point based )
कुओं , मंदिरों , पेड़ों इत्यादि की विशेष बिंदुओं को रुढ़ि चिन्ह के रुप में डिजिटाइज़ किया जायेगा ।
रुढ़ि चिन्ह सेटेलाइट इमेज के केंद्र बिन्दु के रुप में रखा जायेगा जिसमें यह स्पष्ट रहे ।
एक स्थान पर केवल एक बिंदु होना चाहिए एवं प्रत्येक फीचर में एक यूनिक आईडी होनी चाहिए।
रेखा आधारित ( Line based )
रोड सेंटर लाइन , रेलवे लाइन , अस्थायी गाड़ी ट्रैकसेट जैसी विशेष लाईनों को डिजीटल किया जायेगा ।
रोड सेंटरलाइन को सड़क के बिल्कुल केंद्र में डिजिटाइज़ करके कैप्चर किया जाना चाहिए ।
यदि सड़कों को डिवाइडर द्वारा विभाजित किया जाता है, तो सड़क के दोनों किनारों पर ट्रैक को कैप्चर किया जाना चाहिए ।
रेलवे लाइन को ट्रैक की चौड़ाई के बिल्कुल केंद्र में डिजिटाइज़ किया जाना चाहिए ।
उक्त प्रकार के फीचर बनाते समय होने त्रुटियाँ Overshoot एंड Undershoot को Topology का निर्माण कर सुधारना अनिवार्य होता है। 3935 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
बहुभुज आधारित ( polygon based )
बहुभुज जैसे कृषि भूमि , सड़क की चौड़ाई , पथरीली भूमि, वन भूमि, नदी, नाला , तालाब , किसी भी अन्य भूमि आदि का डिजिटलीकरण किया जाना चाहिए ।
पार्सल सीमा को इस तरह से डिजिटाइज़ किया जाना चाहिए कि परिणाम स्वरूप वेक्टर लाइन खेत की मेड़ फील्ड बैंडके केन्द्र में रहे ।
पार्सल की सीमाएं आम तौर पर सीधी होती हैं इसलिए इसे बहुभुज के आकार को ध्यान में रखते हुए केवल 2 नोड्स / कोने का उपयोग करके डिजिटल किया जाना चाहिए। अथवा उक्त विशेषताओं को कम से कम vertices काउपयोग कर डिजिटाइज़ किया जाना चाहिए । लेकिन उक्त कार्य में लाइनस के बीच कोण तथा smoothness सही / ठीक बनी रहे।
फीचर को ऐसे डिजिटाइज़ किया जाना चाहिए कि arcs में duplicate की स्थिति न रहे ।
यह Polygon Close होना चाहिये जिसमें किसी भी प्रकार के dangles or slivers न हो।
प्रत्येक बहुभुज में कोडिंग योजना के अनुसार एक अद्वितीय के.आई.डी. (uniqueKID) होना चाहिए ।
5 आर्क्स , नोड स्नैपिंग और वर्टीकल के लिए सहिष्णुता मान ( tolerance values ) ऐसा होना चाहिए कि उसे identify करने वाले snap with in the pixels रहे और साइड snap न करें ।
f) Participatory Ground Truthing of Land Parcels
The field work shall commence as per the schedule published.
The field team shall mark boundaries of the land parcels on the bromide/ coated paper prints , as shown by the concerned owner( s)/ enjoyer(s ) in the presence of the owner(s )/ enjoyer ( s ) of the adjacent land parcels.
After identifying boundaries in the presence of the owner (s )/ enjoyer ( s ) and marking them in the bromide /coated paperprints, [भाग 1 3936
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
the survey team should obtain an acknowledgement from the owner(s) / enjoyer ( s )/ concerned officials that the boundaries and details of the land parcel are recorded in their presence and to their satisfaction . The details of the surveyors , who have carried out the survey, should also be recorded .
In case the parcel limits are obscured in the ortho - photo , or the ortho -photo is not available , parcel boundaries , as shown by the concerned owner ( s)/ enjoyer (s ) in the presence of the owner (s )/ enjoyer( s ) of the adjacent land parcels, shall be surveyed using TS/DGPS . In such cases , the survey agency shall generate the land parcel map based on their TS readings and obtain acknowledgement of each plot/ parcel from the owner (s) / enjoyer(s).
The tertiary control point should be used as the reference station for DGPS . The tertiary control point and auxiliary point should be used for TS survey . The plot boundaries can also be surveyed using the offsets from the details appearing on the ortho - photo , in which case, tertiary control and auxiliary points will not be needed.
The survey team should take care that the ridges , which are not actually boundaries of the parcels , are not taken into account for delineation of the parcel boundaries .
In cases where collective cultivation is done, or where boundaries arenot demarcated , the parcel boundaries should be recorded only after their demarcation on the ground has been carried out with reference to the existing land records and as per the procedure laid down in the relevant Revenue manual , in the presence of the concerned owner( s) / enjoyer(s ).
Eachland parcel should be identified by its owner ( s )/enjoyer (s) and should be given a unique ID, which shall be used for linking the attributes data collected in respect of the land parcel .
3937 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
The land owner ( s ) / enjoyer ( s ) , who intend to affix stones at their field junctions , may be shown the points where stones can be affixed .
The current land use , irrigation status and other land attributes data shall also be collected by the survey team as per the Data Model Structure ( DMS ) .
अध्याय-10
नियंत्रण बिन्दु ( Control Point )
1. नियंत्रण बिन्दु ( Control Point ) की परिभाषा-
प्रारंभिक माप एवं वैश्विक स्थिति के निर्धारण के लिए उपयोग किया जाने वाले प्राथमिक / आधार नियंत्रण बिन्दुओं जो दूरी और दिशा के सटीक नियंत्रण को स्थापित करने में सक्षम हो ऐसे बिन्दुओं को नियंत्रण बिन्दु ( Control Point ) कहा जाता है । नियंत्रण बिदुओं को परंपरागत भू- सर्वेक्षण में चांदा पत्थरों के रूप में जाना जाता है तथा आधुनिक भू- सर्वेक्षण में यह प्राथमिक ( Primary ) , द्वितीयक ( Secondary ) एवं तृतीयक ( Tertiary ) नियंत्रण बिन्दुओं के रूप में जाने जाते हैं तथा CORS तकनीक में यह CORS स्टेशन के रूप में जाने जाएगें । इन नियंत्रण बिंदुओं की संबद्धता सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा पूर्व से स्थापित किए गए स्थाई चिन्हों ( Bench Marks ) से की जाती है ।
2. नियंत्रण बिन्दु स्थापना हेतु पद्धतियाँ-
क्षेत्र का भू- मापन करने के लिये प्रस्तावित संपूर्ण क्षेत्र की बाहरी सीमा का फ्रेम वर्क तैयार करना होता हैं जिस हेतु विभिन्न सर्वेक्षण विधियों द्वारा नियंत्रण बिंदुओं (Control Point ) की स्थापना की जाती है जिनको दिशा , दूरी एवं कोण मापने के तरीकों के आधार पर निम्नलिखित पद्धतियाँ में विभक्त किया जाता है ।
1 ) परिमितीयकरण या चंक्रमण ( Traversing ) पद्धति-
किसी क्षेत्र का भू- मापन करने के लिये पूर्व से निश्चित दो स्थायी नियंत्रण चिन्हों की स्थापना की जाती है दोनों के बीच परस्पर जुड़ी हुयी आधार रेखाओं के आधार पर उस क्षेत्र के लिये Traverse Stations की एक श्रंखला तैयार की जाती है इस कार्य को परिमितिकरण / चंक्रमणपद्धति से नियंत्रण बिंदुओं की स्थापना की के रूप में जाना जाता है किसी क्षेत्र के सर्वेक्षण के लिए पूर्व निर्धारित नियंत्रण 3938
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
बिन्दुओं ( Control Point ) के अनुक्रम (Succession ) को जोड़ने वाली सरल रेखाओं को Traverse line कहते हैं तथा जिस बिन्दु पर यह रेखा अपनी दिशा बदलती है, उसे नियंत्रण बिन्दु ( Control Point ) या चंक्रमण- केन्द्र ( Traverse Station ) कहा जाता है । इस प्रकार सर्वेक्षण में Traverse Line को बनाने वाली समस्त घटक रेखाओं को मापा जाता है तथा प्रत्येक Control Point / Traverse Station पर दो सरल रेखाओं के बीच का कोण ज्ञातं किया जाता है । तथा नियंत्रण बिंदुओ को स्थितिगत निर्देशांक प्रदान किया जाता है, धरातल पर दूरियाँ मापने के लिये ज़रीब , फीते का प्रयोग करते हैं तथा कोणिक मापों को प्रिज़मीय कम्पास ( Prismatic Compass ) अथवा थियोडोलाइट के द्वारा ज्ञात किया जाता है । इस विधि का प्रयोग प्रायः समतल क्षेत्रों में किया जाता है जहाँ धरातलीय बाधाओं का अभाव होने के कारण दूरियाँ मापने में सरलता रहती है ।
चंक्रमण ( Traversing ) पद्धति दो प्रकार की होती है-
बन्द मालारेखा चंक्रमण ( Closed Traverse )
खुली मालारेखा या विवृत चंक्रमण ( Open Traverse )
बन्द मालारेखा ( closed traverse)
परिमितीयकरण का यह प्रकार Traverse रेखाके द्वारा निर्मित क्रमशः बन्द ज्यामितीय आकृति पर आधारित है । बन्द मालारेखा में कोई सर्वेक्षक जिस चंक्रमण बिन्दु से कार्य प्रारम्भ करता है , सर्वेक्षण के अन्त में वह पुनः उसी बिन्दुपर लौट आता है । (चित्र )
First and
the laust
traverse
Included
angle
point
C
A
D
Closed traverse line
A
E
उदाहरणार्थ, किसी खेत या मैदान की सम्पूर्ण सीमा के साथ- साथ किया गया चंक्रमण बन्द मालारेखा कहा जायेगा । 3939 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
खुली मालारेखा या विवृत चंक्रमण ( Open Traverse )
इसके विपरीत खुली मालारेखा में सर्वेक्षक निरन्तर आगे की ओर बढ़ता जाता है तथा प्रारम्भिक चंक्रमण- बिन्दु पर नहीं लौटता है ।
Deflection angle
B 60° R
C
45° L
Defectvin angle
AFirst Traverse point
Open traverse line
B
(चित्र ) । किसी सड़क या नहर के किनारे किया गया सर्वेक्षण खुली मालारेखा का उदाहरण है ।
उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि बन्द मालारेखा में प्रारम्भिक तथा अन्तिम नियंत्रण बिन्दु एक ही होता है जबकि खुलीमाला रेखा में ये बिन्दु अलग- अलग होते है। 2 ) त्रिभुजीकरण ( Triangulation ) पद्धति
त्रिभुजीकरण पद्धति में दो स्थाई नियंत्रण बिंदुओं के आधार पर किसी क्षेत्र का त्रिभुजीकरण कर तीसरे नियंत्रण बिंदु की स्थिति ज्ञात की जाती है एवं तीसरे नियंत्रण बिंदु की स्थापना की जाती है यह कार्य ज्ञात नियंत्रण बिंदुओं के आधार पर किया जाता है उपरोक्त प्रक्रिया द्वारा किसी इकाई क्षेत्र का त्रिभुजीकरण कर के उसे छोटे - छोटे भागों तथा विभागों में त्रिभुज के रूप में विभाजित करके उसके भीतर के प्रत्येक भूखंड की सीमाओं का मापन किया जाता है । प्रस्तावित इकाई क्षेत्र का त्रिभुजीकरण करते समय दोनों के बीच की दूरी माप कर उन्हें वांछित पैमाने पर इस प्रकार अंकित किया जाता है , कि वह कागज पर उस क्षेत्र की स्थिति का प्रतिनिधित्व कर सके । इस प्रकार रेखांकित दो चांदों के आधार पर तीसरा चांदा रेखांकित किया जा सकता है । संक्षिप्त में उपरोक्त कथन के अनुसार दो 3940
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
चिन्हों के आधार पर से तीसरा चिन्ह नापने का कार्य ही त्रिभुजीकरण से नियंत्रण बिंदु स्थापित करना है ।
D
IV
11
b
C
Checkbase
Baseline
1
E
C
B
Chain of simple triangles
किसी क्षेत्र को त्रिभुजों में बाटने के फलस्वरूप तीन प्रकार की त्रिभुजन आकृतियाँ (Triangulation Figures ) बनती है
एकल त्रिभुजों की श्रृंखला ( Chain of Single Triangles ) ,
बहुभुजों की श्रृंखला ( Chain of Polygons )
चतुर्भुजों की श्रृंखला ( Chain of Quadrilaterals )
एकल त्रिभुजों की श्रृंखला ( Chain of Single Triangles )
सर्वेक्षण में सरलता के विचार से एकल त्रिभुजों की श्रृंखला को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है । इस श्रृंखला में एक ही मार्ग को अपनाकर आधार रेखा के आगे की ओर स्थित त्रिभुजों की भुजाओं की लम्बाइयों को अभिकलित ( Compute ) किया जा सकता है ।
E
G
A
H
D 3941 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
बहुभुजों की श्रृंखला ( Chain of Polygons )
बहुभुज श्रृंखला में त्रिभुजों के द्वारा निर्मित बहुभुजों ( Polygons ) पर नियंत्रण बिन्दु एवं आकृतियों का समूह होता है। श्रृंखला का प्रत्येक बहुभुज तीन या उससे अधिक ओर से घिरा होता है तथा सभी बहुभुज के त्रिभुजों के शीर्ष उसके भीतर एक साझा नियंत्रण ( Comman Control Point) बिन्दु पर स्थित होते हैं।
G
N
B C
J
E
H
D
F
M
K
चतुर्भुजों की श्रृंखला ( Chain of Quadrilaterals )
इस श्रृंखला में चतुर्भुजों का एक क्रम बन जाता है तथा कई नियंत्रण बिंदुओं का निर्माण होता है ।
G
C
C
E
D
यद्यपि त्रिभुजन के द्वारा छोटे से छोटे अथवा बड़े से बड़े सभी प्रकार के क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया जा सकता है परन्तु धरातलीय बाधाओं के क्षेत्र में , जहाँ ज़रीब आदि से दूरियाँ मापने में कठिनाई होती है ऐसे भू- भाग के सर्वेक्षणों में यह विधि परम उपयोगी है ।
3. नियंत्रक बिन्दु स्थापन में आवश्यक सावधानियाँ
भू- सर्वेक्षण को नियंत्रण बिन्दुओं के बीच सीमित रखने से परिशुद्धता प्राप्त होती है अतः जब किसी क्षेत्र का भू- सर्वेक्षण करना हो , तब उसके आकार , सर्वेक्षण का 3942
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
उद्देश्य, अनिवार्य परिशुद्धता ( Extenet of Accuracy ) की मात्रा , आदि सभी बातों पर विचार कर लेना चाहिए ।
नियंत्रण बिन्दु ऐसी जगह स्थापित किया जाना चाहिए जहां उनके क्षतिग्रस्त होने की संभावना कम हो।
प्रमाणित आकार के पिलर स्थाई नियंत्रण बिन्दु पर इस प्रकार लगाना चाहिए कि वे लम्बे समय तक टिकाऊ व मजबूत रहें ।
नियंत्रण बिंदुओं को स्थापित करते समय ऐसे बिन्दुओं का चयन किया जाना चाहिए जो ग्राम सीमा के पास हो तथा जिनके आधार पर ट्रावर्स ( Travers ) के साथ साथ सीमा के घुमाव आदि का सर्वे किया जा सके।
जब किसी क्षेत्र का सर्वेक्षण किया जाए तब सबसे पहले उसमें एक आधार रेखा (baseline) नापी जाए और इस आधार रेखा की सही दिशा स्थिति खगोलशास्त्र के अनुसार निश्चित किया जाए । आधार के एक सिरे के अक्षांश ( Latitude ) और देशान्तर ( Longitude) भी निश्चित कर लिए जाते हैं एवं वह आधार त्रिभुज पद्धति ( Triangulation method ) द्वारा बढाया जाना चाहिए ।
सर्वेक्षक को यह ज्ञात होना चाहिए कि किस नियंत्रण बिंदु पर कौन- कौन सी त्रुटियां पाई गयी है और उनका स्रोत क्या है तथा वे कैसे सुधारी जा सकेंगी ।
परम्परागत पद्धति से स्थापित दो नियंत्रण बिन्दु आपस में अन्तर दृश्य होना चाहिए ।
जहां तक संभव हो नैसर्गिक ( Natural ) सीमा को ही ग्राम की सीमा निर्धारित किया जाना चाहिए ।
नियंत्रण बिन्दु यथासम्भव समतल धरातल पर स्थापित किया जाना चाहिए तथा सुस्पष्ट पहचान के लिए उसे यूनिक पहचान नंबर ( Unique I.D. ) दी जानी चाहिए जो Geo-Referenced होना चाहिए ।
प्रत्येक नियंत्रण बिन्दु पर गाडे गये प्रमाणित आकार के चिन्ह जो पत्थर या लोहे या आर . सी. सी . ( R.C.C. ) के बने हों पर उसका पिन पॉइंट सेन्टर भी दर्शाया जाना चाहिए ताकि सभी मापन इन्ही केन्द्रों से सटीकता से किये जावे । 3943 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
4. नियंत्रण बिंदु स्थापना में उपयोगी यंत्र ( Instruments ) एवं उनके अनुप्रयोग-
नियंत्रण बिन्दुओं की स्थापना त्रिभुजन या ट्रावर्सिंग चाहे जिस भी पद्धति से की जाये परन्तु इस कार्य को करने में विभिन्न प्रकार के सर्वेक्षण यंत्रो का प्रयोग किया जाता है । सर्वेक्षण यन्त्र प्रारम्भ में एनॉलॉग यन्त्र हुआ करते थे तथा आधुनिक समय में ये यन्त्र डिजिटल तथा सेमि- डिजिटल होते हैं । प्रारंभिक सर्वेक्षणों में उपयोगी यंत्रों से रीडिंग्स को भौतिक रूप से एक से दूसरे बिंदु पर स्थानांतरित किया जाता था जिसमें मानव श्रम का उपयोग अधिक होता था परन्तु वर्तमान समय में ऐसे यंत्रो का विकास हुआ है जो विद्युत एवं इंटरनेट के माध्यम से रीडिंग ट्रांसफर करने में सक्षम हैं जिससे मानव श्रम तथा समय दोनों की बचत होती है ।
नियंत्रण बिन्दुओं की स्थापना में उपयोग में लाये जाने वाले यंत्रो के कार्य पद्धति के आधार पर उक्त कार्य को दो भागो में विभक्त किया जा सकता है: -
i . परम्परागत यंत्रों द्वारा नियंत्रण बिंदु स्थापना
ii . आधुनिक यंत्रों द्वारा नियंत्रण बिंदु स्थापना
i . परम्परागत यंत्रों द्वारा नियंत्रण बिंदु स्थापना
परम्परागत यंत्रों में वे यन्त्र शामिल किये जाते है जिन यंत्रो के संचालन में नियंत्रण बिंदुओं की भौतिक दृश्यता आवश्यक होती है तथा इन यंत्रों की सहायता से किये जाने वाले सर्वेक्षण कार्य में रीडिंग्स को यन्त्र की मेमोरी में संरक्षित नहीं किया जा सकता है अतः फील्ड बुक में लिखकर ही बाद में इसका मानचित्रण किया जा सकता है नियंत्रण बिंदु स्थापना एवं भू- सर्वेक्षण कार्य में उपयोग किये जाने वाले महत्वपूर्ण परंपरागत यंत्र निम्न प्रकार है-
थियोडोलाईट (Theodolite ) a)
b) प्रिजमेटिक कंपास ( Prismatic Compass )
c) प्लेन टेबल ( Plane Table Survey)
d) कम्पास ( Compass) 3944
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
a) थियोडोलाईट (Theodolite )
थियोडोलाइट परिशुद्ध सर्वेक्षण करने का एक उपयोगी उपकरण है । इस उपकरण की सहायता से क्षेत्र में क्षैतिज ( Horizontal ) एवं ऊर्ध्वाधर (Vertical ) कोणों की सही -सही माप की जा सकती है । इस उपकरण से क्षैतिज कोणों की माप के आधार पर क्षेत्र का प्लान बनाया जाता है तथा ऊर्ध्वाधर कोणों के आधार पर विभिन्न स्थानों की ऊँचाइयों के अन्तर ज्ञात किये जाते हैं । कोण मापन के अतिरिक्त दूरी मापन, दिक्मान प्रेक्षण, तल-मापन क्षैतिज कोणों के निर्धारण ( Laying off Horizontal Angles ) एवं सर्वेक्षण रेखाओं के दीर्घण ( Prolongation ) आदि, में भी इस उपकरण का प्रयोग किया जा सकता है । बहु - उपयोगी ( Multipurpose ) प्रकृति के कारण कभी- कभी थियोडोलाइट को सार्वभौमिक सर्वेक्षण उपकरण (Universal Survey Instrument ) की संज्ञा दी जाती है । कुछ समय पूर्व तक में लगभग सभी उच्च कोटि के सर्वेक्षणों में इस उपकरण का प्रयोग होता था । क्षेत्र के विवरणों एवं सर्वेक्षण स्टेशनों को लक्ष्य करने हेतु थियोडोलाइट में एक दूरबीन (Telescope ) लगी होती है, जिसे क्षैतिज व ऊर्ध्वाधर दोनों तलों ( Planes ) में आवश्यकतानुसार घुमाया जा सकता है । थियोडोलाईट मशीन से रेखामापन चिन्ह स्थाई रूप से बनाए जाते हैं इनकी स्थिति निर्देशांक ( Co- ordinates ) के रूप में की गई सटीक संगणना के द्वारा सही स्थिति निश्चित की जाती है निर्देशांकों को अंतिम रूप से स्वीकार करने से पहले प्रत्येक रेखामापन चिन्ह की सही स्थिति संगणना द्वारा सिद्ध की जाती है ।
थियोडोलाईट मशीन के मुख्य तीन अंग होते हैं-
दूरबीन (Telescope )
वर्टिकल लिंबस ( Vertical Limbs )
होरिजेंटल लिंबस ( Horizontal Limbs) .
3945 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
Optical sight
Focusing screw Telescope
Vertical adjustment
Horizontal adjustment
Base
* थियोडोलाईट मशीन से नियंत्रण बिंदु आधारित रेखा मापन की विधि-
जिस क्षेत्र के Traversing का कार्य रेखामापन थियोडोलाईट मशीन से करना होता है उसके चारों ओर उपयुक्त स्थानों पर चांदे ( Control Point ) स्थापित किए जाते हैं । ट्रावर्सिग मापन के कार्य को उत्तर पश्चिम के कोने से प्रारंभ किया जाता है ।
प्रथम चांदा पर थियोडोलाईट मशीन के लेवल तथा सोहावल को सही करके अंतिम चांदा को ०° अथवा 360° पर बांधा जाता है । इसके बाद लोअर प्लेट को कसकर स्लो मोशन स्क्रू की सहायता से जीरो पर बांधने वाली झंडी को सही काटते हैं इसके बाद अपर प्लेट खोल दी जाती है और आगे के चांदा जिसकी रवानगी लेना होती है, उसको देखते हैं यह झंडी देखने पर अपर प्लेट को कसकर स्लो मोशन स्क्रू की सहायता से रवानगी वाली झंडी को काटते हैं एवं रीडिंग ली जाती है । इसके बाद लोअर प्लेट को खोलकर अंतिम ज्यादा जिसको जीरो पर अथवा 360 ° पर बांधा था पर फिर ले जाते हैं और झंडी देखने पर लोअर प्लेट कसकर स्लोमोशन स्क्रू की सहायता से झंडी काटते हैं । इसके बाद अपर प्लेट को खोलकर रवानगी झंडी को देखते हैं और अपर प्लेट को कसकर झंडी को काटकर एंगल को नोटकर के नीचे की प्लेट को खोलकर फिर अंतिम चांदा पर ले जाते हैं इस प्रकार प्रत्येक चांदा का तीन बार आतंरिक कोण (Inner Angle ) और एक बाह्य कोण (Outer Angle) की रीडिंग नोट करते हुए संपूर्ण चांदो का रेखामापन कार्य थियोडोलाईट मशीन से पूरा किया जाता है, प्रत्येक 15 या 20 स्टेशन के पश्चात सन ऑब्जरवेशन किया जाता है जिससे रेखामापन कार्य की स्वतंत्र जांच हो जाती है, सर्किट के अंत में जिस स्टेशन से शुरुआत की थी उस स्टेशन पर पहुंचकर पुनः सन ऑब्जरवेशन लिया जाता है , सर्किट की ट्रैवर्सिंग ( Traversing ) करते 3946
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
समय यदि कोई जीटी स्टेशन (Geodatik Trangulation Station ) अथवा पूर्व का कोई Traverse स्टेशन उपलब्ध हो तो उसे ऑब्जर्व कर फील्ड बुक में लिखा जाता है।
Traversing in Surveying
Types and Methods
इस प्रकार के भू- मापन कार्य में नियंत्रण बिंदुओं पर कोंण और दूरी नापी जाती है इस प्रक्रिया में कतिपय त्रुटियों का होना स्वाभाविक है , परंतु इन त्रुटियों को कार्य के प्रत्येक स्तर पर एक दूसरे से समायोजित किया जाता है ।
सूर्य वेध ( Sun- Observation )
थ्योडोलाईट मशीन से भू- सर्वेक्षण हेतु सूर्यवेध अतिआवश्यक गतिविधि है इस हेतु सूर्य के आधार पर पृथ्वी की स्थिति का समय विशेष में स्थल विशेष पर विनिश्वयन किया जाता है । वास्तविक उत्तर दिशा ( True North ) की जानकारी प्राप्त करने के लिए सूर्य का संबधित रेखा में कितने अंश का कोंण है , यह ज्ञात करने के लिए सूर्य के मध्य बिन्दु की, थ्योडोलाईट मशीन द्वारा मापकर गणितीय विधि से सही कोंण ज्ञात किया जाता है ताकि मानचित्र में वास्तविक उत्तर दिशा ( True North ) नियत किया जा सके। लगभग 20 चांदा स्टेशनों पर पुनः सूर्यवेध किया जाता है, ताकि उत्तर की स्थिति सभी चांदों पर ठीक से रहे । मानचित्र में सभी भू- खण्डों की सभी आकृतियों की स्थिति उत्तर दिशा के आधार पर सही बनी रहे। थ्योडोलाईट यन्त्र का सुहावल तथा लेबल करके ऊपर प्लेट को ० ° पर बांधा जाता है, इसे मार्क कहते हैं । इसके पश्चात् नीचे की प्लेट को कस देते हैं तथा ऊपर की प्लेट को खोल देते हैं । सूर्यवेध करने से पहले रंगीन काँच आई होंल में लगाते हैं । इसके थ्योडोलाईट की नाल को सूर्य पर ले जाते हैं । सूर्य टेलिस्कोप में दिखाई देने 3947 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
और कोलीमेशन वायर ( Collimation Wire ) के खाना नम्बर 2 के दोनों ओर के वायरों में टच होने पर नीचे की दोनों वर्नियर प्लेट तथा ऊपर के प्रोट्रेक्टर की रीडिंग ली जाती है । इसके पश्चात अपर प्लेट का स्कु खोलकर टेलिस्कोप को सूर्य पर ले जाते हैं । जब सूर्य दिखाई देता है और कोलीमेशन वायर के खाना 4 के दोनों ओर के वायर में टच होता है , तो नीचे की दोनों व्हर्नियर प्लेट तथा ऊपर के प्रोट्रेक्टर की रीडिंग ली जाती है । इस प्रकार की रीडिंग 3 या 5 बार ली जाती है । सुबह के समय सूर्यबेध का कार्य उस समय किया जाता है , जब सूर्य 20 से 35 ° के बीच में होता है । सुबह का समय ठण्ड के मौसम में 7 से 9 बजे तक गर्मी में 6 से 8 बजे का होता है ।
b) प्रिज्मितीय कंपास ( Prismatic Compass )
इस यंत्र का उपयोग मुख्यतः किसी सरहद की मालारेखा मापन या सड़क और नदी आदि की चौड़ाई मापन में होता है , यह भी कोण (Angle ) सिद्धांत पर कार्य करता है । इसमें सर्वे करते समय प्रोटेक्टर के चांदा पर से एंगल पढ़कर फील्ड बुक लिखी जाती है । इस फील्ड बुक के आधार पर प्लाटिंग कार्य पूर्ण किया जाता है । इस सर्वे में फॉरवर्ड बेयरिंग और बैक बेयरिंग के मापन से सर्वे किया जाता है ।
प्रिजमेटिक कंपास से नियंत्रण बिंदु आधारित रेखा मापन की विधि
इसमें एक तिपाई होती है इसमें सेंटरिंग ( Centre align ) और लेवल का कार्य किया जाता है एक गोलाकार डिबिया में प्रोटेक्टर पर 360 ° अंकित होती हैं तथा 20 मिनट तक का भाग पढ़ने के लिए प्रत्येक डिग्री तीन भागों में विभाजित होती है बीच में एक चुंबकीय सुई होती है जो उत्तर एवं दक्षिण दर्शाती है , डिब्बी की एक 3948
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
तरफ ऑब्जेक्ट बेन लगी रहती है और दूसरी तरफ प्रिज्म लगा रहता है। प्रिज्मेटिक कंपास से दिशाओं और दिक्मानों ( Calculation of Angles ) का भी ज्ञान होता है । ऑब्जेक्ट बेन से सीध मिलान किया जाता है एवं प्रिज्म से कोण को देखा जाता है । रेखामापन की प्रत्येक नियंत्रण बिन्दु पर इस मशीन को जमाया जाता है जिससे सर्वप्रथम सेंटरिंग ( Centre align ) व लेवलिंग की जाती है और बाद में दिक्मान ( Calculation of Angles ) को नापने के लिए आगे तथा पीछे की झंडी को काटा जाता है एवं दोनों बिन्दुओं के अंतर से बनने वाले बियरिंग प्राप्त किए जाते हैं ।
यदि दोनों झंडी पूर्व से पश्चिम किसी एक दिशा की ओर हो तो बड़े बियरिंग से छोटा बियरिंग घटाकर जो Angle आएगा वह हमारा रेखामापन का आंतरिक angle होगा यदि दोनों झंडी या दो विपरीत दिशा में हैं तो हमें आंतरिक angle के बजाय बाहरी angle मिलेगा जिसे 360 ° में घटा देने पर अंदरूनी angle मिल जाएगा ।
उपरोक्त प्रक्रिया प्रत्येक नियंत्रण बिंदु पर करना होती है एवं प्रत्येक बिंदु पर प्राप्त आंतरिक कोण को तैयार करना होता है ।
दो नियंत्रण बिंदुओं के बीच की दूरी को दो विभिन्न चैनलों से नापना होगा एवं देखना होगा कि दोनों से प्राप्त दूरी समान है इस प्रकार हमें प्रत्येक बिंदु का कोण एवं दो नियंत्रण बिंदुओं के बीच की दूरी ज्ञात हो जावेगी जिसे संगणना द्वारा जांचकर हमें कॉर्डिनेट प्राप्त होंगे जिससे मालारेखा की प्लाटिंग हो सकेगी ।
इस यंत्र से विस्तृत भू- मापन का कार्य नहीं किया जाता, इस यंत्र पर लोहे धातु की वस्तुओं का प्रभाव पड़ता है अतएव यंत्र का उपयोग करते समय सावधानी रखी जानी चाहिए कि उसके आसपास लोहे की बनी कोई वस्तु नहीं हो अन्यथा इस यंत्र की चुम्बकीय सुई लोहे की वस्तु की ओर अवश्य प्रभावित होगी और एंगल की रीडिंग गलत हो जाएगी ।
प्लेन टेबल
c)
प्लेन टेबल एक ऐसा सर्वेक्षण यन्त्र है जिससे सर्वेक्षण कार्य तथा नक्शा निर्माण दोनों साथ- साथ किये जा सकते हैं । इस तरह के सर्वेक्षण में फील्ड बुक बनाने की जरूरत नहीं होती है । त्रिभुजन एवं थियोडोलइट के द्वारा पूर्व निश्चित किये गए 3949 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
स्टेशनों ( Control Points ) के मध्य सम्बंधित क्षेत्र के अन्य विवरणों को अंकित करने के लिए प्लेन टेबल सर्वे बहुत उपयोगी माना जाता है ।
इस यंत्र से माला रेखा मापन का कार्य किया जाता है तथा माला रेखा मापन के चरणों के मध्य भाग या उपयुक्त स्थान पर एक या एक से अधिक चांदा ( Control Points ) कायम करके परिमार्जित किए जाने वाले क्षेत्र का त्रिभुज खंडन किया जाता है। प्लेन टेबल सर्वे का मुख्य उपयोग किसी क्षेत्र या गांव जिसका सर्वे करना होता है के चारों ओर स्थाई बिंदु ( Control Points ) कायम करने में होता है । क्षेत्र के स्थाई चिन्ह Theodolite मशीन द्वारा कायम करने से अधिक शुद्धता होती है , यद्यदि प्लेन टेबल द्वारा स्थाई चिन्हों को कायम करने में Theodolite की अपेक्षा कम शुद्धता आती है ।
* प्लेन टेबल सर्वेक्षण में निम्नलिखित उपकरणों व साज- सामान की आवश्यकता होती है
प्लेन टेबल
स्पिरिट लेविल
त्रिपाद-स्टैण्ड
ज़रीब के तीर
ड्राइंग कागज़
साहुल या साहुल पिण्ड
ड्राइंग पिनें तथा
साहुल काँटा
आलपिन
ट्रफ कम्पास
ज़रीब अथवा फीता
ड्राइंग-उपकरण
सर्वेक्षण दंड
दर्शरेखक या ऐलीडेड 3950
[ भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
* प्लेन टेबलसे नियंत्रण बिंदु आधारित रेखा मापन की विधि-
इस सर्वे पद्धति से किसी एक चांदा से अन्य सभी चांदो को काटकर और फिर जरीब से दूरी नाप कर सर्वे किया जाता है । इसके अतिरिक्त किसी दो चांदा स्थानों से अन्य सभी झंडियों को काटकर अन्य सभी झंडियों के स्थिति बिना सर्वे किए कायम कि जाती है तथा पैमाना और परकार से शीट पर से नाप की दूरियां लिखी जाती हैं । केवल प्रथम दो चांदों जिनको आधार मानकर अन्य झंडियां काटी जाती हैं उनकी दूरी जरीब से नाप कर लिखी जाती है । इस सर्वे में कुतुबनुमा से दिशा कायम करके रवानगी और वापसी के सिद्धांत के अनुसार सर्वे कार्य पूर्ण किया जाता है ।
Check
Check ine
प्लेन टेबल सर्वे में सबसे अच्छी और असाधारण बात यह है कि इसके माध्यम से भू- मापन के दोनों कार्य स्थल मापन और रेखांकन एक साथ ही हो जाते हैं । यह कार्य अन्य किसी भी यंत्र द्वारा संभव नहीं है । इससे स्थल पर ही मानचित्र तैयार हो जाता है तथा स्थल पर ही कार्य करते समय भूल और त्रुटि की जानकारी उपलब्ध हो जाती है और उसे सुधार किया जाता है , इसमें समय की बचत होती है ।
d) कम्पास ( Compass )
यह पीतल का यंत्र है । यह वृताकार होता है । इसकी गोलाई 360° डिग्री में बटी रहती है । 1 डिग्री चार समान भागों में बटी रहती हैं । प्रत्येक भाग 15 मिनट का होता है । इस वृत में दो व्यास एक दूसरे पर समकोण बनाते हुए बने रहते हैं। यह सर्वेक्षण के कार्य में कोंण ( Angle ) देखने के काम में आता है । इसे प्रोटेक्टर चांदा या कोण मापक यंत्र कहते हैं । एक प्रोट्रेक्टर पूरा होता है दूसरा आधा होता 3951
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर, 2020
भाग 1 ]
है । आधे प्रोट्रेक्टर दो प्रकार के होते हैं । एक अर्ध वृताकार दूसरा आयताकार होता है।
जिस ग्राम की ट्रांवर्सिंग ( नियंत्रण बिंदु आधारित ) प्रोट्रेक्टर से करना होती है , तो सर्वेअर Surveyor प्रथम उस गांव के चारों ओर योग्य स्थानों पर चांदे कायम करता है । चांदे कायम करते समय ध्यान रखा जाता है कि जो ट्रावर्स लाइने चलेगीं , उनसे गांव की सरहद ( Boundary ) आसानी से Mark हो जाएगी ।
* प्रिज्मीय कम्पास सर्वेक्षण में निम्नलिखित उपकरणों की आवश्यकता होती है:
प्रिज्मीय कम्पास तथा त्रिपाद स्टैण्ड
ज़रीब अथवा फीता ,
ज़रीब के तीर,
साहुल एवं काँटा,
स्पिरिट लेविल ,
सर्वेक्षण दण्ड,
कागज़ तथा ड्राइंग उपकरण ।
* कम्पास से नियंत्रण बिंदु आधारित रेखा मापन की विधि
प्रोट्रेक्टर को तख्ते पर कसकर , तख्ते को उत्तर - पश्चिम चांदा पर सुहाबल व लेवल मिलाकर नियत किया जाता है । प्रोट्रेक्टर की उत्तर दिशा बताने वाली रेखा से शिस्त( Object Vane ) का बाँया किनारा ठीक मिलाकर रखा जाता है फिर तख्ते को घुमाकर शिस्त ( Object Vane ) में वापसी झण्डी को धागे की आड़ में [भाग 1 3952
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देखकर काल्पनिक उत्तर ( Mangnatic North ) मानकर तख्ते को बाँयें हाथ से पकड़कर दाहिने हाथ से पेंच को कसते हैं फिर देखा जाता है कि तख्ता हटा तो नहीं। इस तरह से जब उत्तर दिशा ( North Direction ) नियत हो जाती है तब शिश्त को घुमाकर रवानगी की झण्डी को देखते हैं । जितनी डिग्री व मिनट पर झण्डी दिखाई देती है उसको फील्डबुक में बायीं ओर लिख देते हैं । इस कोण को अन्तःकोण ( Inside Angle ) कहते हैं ।
इसके बाद उत्तर- दक्षिण बताने वाली रेखा से पहले की तरह शिस्त मिला कर नीचे का पेंच ढीलाकर के तख्ते को घुमाते है और रवानगी की झण्डी को वापसी की तरह देखकर काल्पनिक उत्तर से मिलाकर पेच कस दिया जाता है । इसके बाद केवल शिश्त ( Object Vane ) को ही घुमाकर वापसी की झण्डी को देखकर ऐंगल पढ़कर दाहिनी ओर लिखा जाता है । इसको बाह्य कोण ( Outer angle ) कहते हैं।
जब आन्तरिक कोण और बाह्य कोण निकल आते हैं, तब प्रोट्रेक्टर की उत्तर बताने वाली रेखा से बियरिंग का किनारा ठीक मिलाकर रखते हैं । इसके बाद तख्ता व बियरिंग मेग्नेटिक निडिल का पेंच ढीला करके तख्ता को इतना घुमाते हैं कि मेगनेटिक नीडल उत्तर दक्षिण बताने वाली रेखा के समान हो जाये । फिर पेंच कस दिया जाता है । पेंच कसने में मेग्नेटिक नीडल हटना नहीं चाहिये ।
रवानगी वापसी निकालने के पश्चात शिस्त ( Object Vane ) को घुमाकर रवानगी की झण्डी को मिलाया जाता है । जब रवानगी ठीक मिल जाती है , तब डिग्री व मिनट लिखते हैं । रवानगी को Forward bearing कहते हैं।
वापसी- दिशा निश्चित करने के पश्चात प्रोट्रेक्टर के केन्द्र बिन्दु पर शिस्त को रखकर पीछे की झण्डी को देखा जाता है । जितनी डिग्री व मिनट पर झण्डी दिखाई देती है , फील्ड बुक में लिखी जाती है । इसको Backward bearing भी कहते हैं । 3953
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भाग 1 ]
ii . आधुनिक यंत्रो द्वारा नियंत्रण बिंदु स्थापना-
नियंत्रण बिंदु स्थापना हेतु आधुनिक यंत्रो से अभिप्राय ऐसे यंत्रों से है, जो सर्वेक्षण कार्य को डिजिटली सम्पादित एवं संरक्षित करने की क्षमता रखते हैं एवं दूरी एवं कोणों की मापों को डिजिटली पद्धति कर इंटरनेट के माध्यम से या अन्य किसी इलेक्ट्रिक्ट कम्युनिकेशन के माध्यम से ट्रांसफर करने की क्षमता रखते हों। वर्तमान प्रचलित यन्त्र जो सर्वेक्षण कार्य को उक्त प्रकार से करने में सक्षम हैं वे निम्नलिखित प्रकार के हैं
a) Differential Global Positioning System ( DGPS )
b) Continuously Operating Reference Stations ( CORS)
a) Differential Global Positioning System (DGPS)
इस तकनीक में उपग्रह की सहायता से पृथ्वी के विभिन्न स्थानों को शुद्धतम वैश्विक स्थिति, निर्देशांक के रुप में ज्ञात किये जा सकते हैं । DGPS तकनीक भू- सर्वेक्षण तथा धरातलीय विश्लेषणों के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के रूप में विकसित हुई है । इसका लाभ यह है कि सर्वेक्षण की परम्परागत तकनीकों की तुलना में अधिक सरल , मितव्ययी , सुविधाजनक, कम समय में उपयोग की जाने वाली तकनीक है । DGPSअनिवार्य रूप से जीपीएस सिग्नल को स्थितिगत सुधार प्रदान करने के लिए एक प्रणाली है । DGPS एक निश्चित , ज्ञात स्थिति का उपयोग करता है ताकि Pseudo Range त्रुटियों को समाप्त करने के लिए वास्तविक समय के जीपीएस संकेतों को समायोजित किया जा सके। DGPS Equipment की सहायता से हमें सेंटीमीटर के गणंक तंक की सटीकता प्राप्त हो सकती है । सटीकता स्थिति की और गणना में लगने वाले समय के आधार पर DGPS सर्वे पद्धति को दो भागो में बांटा जाता है ।
Static Method
DGPS की यह पद्धति रोवर एवं बेस इंस्ट्रूमेंट द्वारा Satellite से भेजे गए डाटा को संगृहीत कर डाटा को सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्रोसेस कर सटीक स्थिति की जानकारी प्राप्त करने का कार्य करती है । इस पद्धति में बेस एवं रोवर दोनों यंत्रों के बीच सर्वेक्षण करते समय कोई सम्बन्ध स्थापित नहीं होता है अपितु बाद में दोनों 3954
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
यंत्रों से संगृहीत डाटा को सॉफ्टवेयर की सहायता से प्रोसेस कर सटीक स्थिति प्राप्त की जाती है । इन यंत्रों की कार्य पद्धति चित्र में दर्शाई गई है
H
RTK ( Real Time Kinematics ) Method
DGPS की यह पद्धति रोवर एवं बेस इंस्ट्रूमेंट द्वारा संगृहीत डाटा को सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्रोसेस कर सटीक स्थिति की जानकारी प्राप्त करने का कार्य करती है परन्तु इस प्रकार के method में रोवर एवं बेस दोनों आपस में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से कनेक्ट होते हैं साथ ही ये सेटेलाईट से भी कनेक्ट होते हैं जिससे रीडिंग में रियल टाइम सुधार किया जा सकता है एवं लैब डाटा प्रोसेसिंग की आवश्यकता नहीं होती है। इन यंत्रों की कार्य पद्यति चित्र में दर्शाई गई है । 3955 भाग 1 ]
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-Radio Link
Cartier Phase
Same SateliteConstellation
Trammsssion Antenna
BaseStation
Rover
GPS Racer
* DGPS प्रणाली को उपयोग में लाने हेतु निम्नलिखित उपकरणों की आवश्यकता होती है: -
रोवर हैंडसेट हैण्डसेट एक ऐसा यन्त्र है जिससे Field डाटा कलेक्ट करने में उपयोग किया जाता है ।
बेस डाटा रिसीवर यह यन्त्र एक स्थान पर फिक्स होता है तथा सेटेलाइट से लगातार सिंग्नल को प्राप्त करता रहता है तथा लोकेशन डाटा को रोवर के डाटा के साथ प्रोसेस करने में सहायता करता है ।
ट्रांसमीटर ( Transmitter ) - यह यन्त्र RTK मोड पर कार्य ही कार्य करता है । इस यन्त्र का कार्य रोवर एवं बेस रिसीवर को आपस में सम्बन्ध स्थापित करना है । यह संबद्धता ब्लूटूथ , रेडिओ, GSM माध्यमों से स्थापित होती है ।
* DGPS का उपयोग कर नियंत्रण बिंदुओ की स्थापना: -
इस प्रकार के नियंत्रण बिंदुओं की स्थापना सेटेलाइट इमेज ड्रोन इमेज को स्थितिक लोकेशन प्रदान करने हेतु की जाती है इस प्रकार के नियंत्रण बिंदु एक दूसरे को आधार मानकर बनाया जाता है जिनकी रीडिंग अंतर्संबंधित होती है इन नियंत्रण बिंदुओं को दूरी , क्षेत्रफल तथा स्मारक स्थापना के आधार पर निम्नलिखित तीन भागो में वर्गीकृत किया गया है।
प्राथमिक नियंत्रण बिन्दु ( Primary Control Point) [ भाग 1 3956
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यह भूमि के अत्याधिक बडे भू- भाग पर त्रिकोणीय पद्धति से लगाये जाते हैं । इसमें सैकड़ों वर्ग किलोमीटर का भू- भाग क्षेत्र आ जाता है इनकी परिशुद्धता उच्च स्तर की होती है , क्योंकि यह बेस पाइन्टस होते हैं जिन पर उनके अन्दर के भू- भाग का सर्वेक्षण आधारित होता है । प्राथमिक नियंत्रण बिन्दु लगभग 16 X 16 किलोमीटर पर लगाये जाते हैं जो 256 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र को नियंत्रित करते हैं । नियंत्रण बिन्दु लगाते समय यह ध्यान रखा जायेगा कि सर्वे ऑफ इंडिया के जीरो लेवल कंट्रोल पॉइंट, स्मारक ( Piller ) जो अच्छी स्थिति में जमीन पर उपलब्ध हो को इन नियंत्रण बिंदुओ से रीडिंग ट्रान्सफर के जरिये जोड़ा जाए । नियंत्रण बिंदुओं के लिए साइट एक सुरक्षित स्थान पर होनी चाहिए जैसे सरकारी कार्यालयों के परिसर के भीतर , स्कूल, सामुदायिक केंद्र, पंचायत भवन , अस्पताल आदि । तथा वह स्थान जमीन से 15 डिग्री के cut- off cone के साथ अवरोधों के बिना स्थान खुला होना चाहिए। स्थान के पास कोई इलेक्ट्रो- मैग्नेटिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए जैसे कि रेडियो / मोबाइल टावरों , उच्च तनाव वाले विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मर , उच्च आवृत्ति डिश एंटीना , रडार आदि । रक्षा या किसी अन्य एजेंसी द्वारा सिग्नल अवरूध क्षेत्र से दूर होना चाहिए । स्थानों पर प्राकृति/ मानव निर्मित गतिविधियों द्वारा विनाश की न्यूनतम संभावनाएं होनी चाहिए ।
प्राथमिक नियंत्रण बिंदुओं के स्मारक हेतु आवश्यक मापदंड ( Monumentations of primary Control points )
आकार 25 सेमी X 25 सेमी X 120 सेमी
सामग्री -पूर्व निर्धारित आर.सी.सी.
ग्राउंड फिक्सिंग ग्राउंड लेवल से 80 cm नीचे एवं 40 cm उपर
15 cm सीमेंट ब्लाक का उपयोग कर जमीन पर स्थिर किया जावे
स्मारकों का अंकन ( Monumentation Marking)
स्मारकों के मध्य में शीर्ष पर एक क्रॉस को लगाना चाहिए और 40 सेंटीमीटर स्टील रॉड डाला जाना चाहिए (कॉक्रीट सतह क्रास दिखना चाहिये ) । स्मारक पर यूनिक आईडी अंकित किया जाएगा । ( चित्र में दर्शाए अनुसार ) 3957 भाग 1 ]
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Control PointType
District Code AL-Allrajpur
P-Primary 5-Secondary
UniqueGCP Number
PlateforGeo- referencing
प्राथमिक नियंत्रण बिंदुओं की आईडी के लिए नंबर योजना
प्राथमिक नियंत्रण बिंदुओं की पहचान के लिए नंबर योजना प्राथमिक नियंत्रण बिंदुओं को PDDNNNN के रूप में गिना जाएगा , जहाँ DD जिला कोड का प्रतिनिधित्व करेगा और NNNN 1 से शुरू होने वाली संख्याओं को दर्शाएगा ।
द्वितीयक नियंत्रण बिन्दु (Secondary Control Point )
प्राथमिक प्रकार के नियंत्रण बिन्दुओं को आधार मानकर उनके अन्दर समाहित क्षेत्र को द्वितीयक बिंदुओं में त्रिभुजन पद्धति से स्थापित किया जाएगें। द्वितीयक प्रकार के बिन्दु, प्राथमिक बिन्दुओं की दूरी से अपेक्षाकृत कम दूरी पर लगाये जाते हैं । इसमे कई किलोमीटर क्षेत्र नियंत्रित किया जाता है । प्रत्येक द्वितीयक नियंत्रण बिन्दु 4 किमी X 4 किमी पर लगभग स्थापित किये जायेगें । जिनसे 16 वर्ग किमी घनत्व क्षेत्र नियत्रित किया जाता है ।
द्वितीयक नियंत्रण बिंदुओं के स्मारक हेतु आवश्यक मापदंड ( Monumentations of Secondary Control points)
आकार 23 सेमी X 23 सेमी X 75 सेमी
सामग्री- पूर्व निर्धारित आर.सी.सी.
ग्राउंड फिक्सिंग जमीन से 15 सेमी ऊपर और जमीन से 60 सेमी नीचे कम से कम 15 सेंटीमीटर सीमेंट ब्लॉक का उपयोग करके जमीन पर स्थिर मुद्रीकरण अंकन ( Monumentation Marking )
शीर्ष पर मध्य और 15 सेमी स्टील रॉड तथा कंक्रीट सतह पर क्रॉस दिखना चाहिए । 3958
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
द्वितीयक नियंत्रण बिंदुओं की आईडी के लिए नंबर योजना
द्वितीयक नियंत्रण अंक SDDNNNNN के रूप में गिने जाएंगे, जहाँ DD जिला कोड का प्रतिनिधित्व करेगा और NNNNN 1 से शुरू होने वाली संख्याओं की गिनती कर रहा है।
तृतीयक नियंत्रण बिन्दु ( Tertiary Control Points )
प्राथमिक एवं द्वितीयक बिन्दुओं को आधार मानकर उनके बीच में के भू- भाग पर त्रिकोणीयन विधि से तृतीयक प्रकार के बिन्दु लगाये जाते है। इन बिन्दुओं के बीच की दूरी लगभग 1 से 4 वर्ग किलोमीटर आवश्यकता अनुसार रखी जाती है । इन बिन्दुओं को स्थापित करते समय पर भी उच्च परिशुद्धता ( high accuracy ) रखी जाती है।
तृतीयक नियंत्रण बिन्दुओं के लिये आवश्यक मापदंड
आकार 15 सेमी X 15 सेमी X 45 सेमी
सामग्री - पूर्व निर्धारित आर.सी.सी.
ग्राउंड फिक्सिंग जमीन से 35 सेमी ऊपर और जमीन से 10 सेमी नीचे तल पर कोयला और चूने के मिश्रण के साथ एक गड्ढे में जमीन केलिए निर्धारित
शीर्ष पर क्रॉस दिखना चाहिए
तृतीयक नियंत्रण बिंदुओं की आईडी के लिए नंबर योजना
तृतीयक नियंत्रण अंक TDDNNNNN के रूप में गिने जाएंगे , जहाँ DD जिला कोड का प्रतिनिधित्व करेगा और NNNNNN1 से शुरू होने वाली संख्याओं की गिनती कर रहा है।
नियंत्रण बिन्दुओं के स्थापन एवं उपयोग
ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के प्रति गांव का न्यूनतम नियंत्रण बिंदु स्थापित किया जाएगा तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के प्रत्येक गांव में , कम से कम चार नियंत्रण बिंदु स्मारक स्थापित करने की आवश्यकता होती है। 3959
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भाग 1 ]
नियंत्रण बिंदुओं की स्थापना का संचालन करते समय , टीम को स्थान की उपग्रह छवि के प्रिंट आउट ले जाने चाहिए और जमीन पर बिंदु के सटीक स्थान को प्रिंट आउट में स्मारक आईडी के संदर्भ में चिन्हित किया जाना चाहिए, इन शीट्स को उपग्रह चित्रों के Geo - processing के लिए GIS / Photogrammetric Operator को आपूर्ति करने की आवश्यकता होती है।
टीम वैकल्पिक रूप से, एक लैपटॉप ले जा सकती है , और आवश्यक बिंदु के साथ उपग्रह छवियों के संदर्भ में नियंत्रण बिंदु साइटों के स्थानों को चिह्नित करने के लिए Shape file ( Feature Layer ) बना सकती है।
नियंत्रण बिंदुओं की जिओ-टैग ( Geo- Tagged ) की गई डिजिटल तस्वीरों का लिया जाना आवश्यक है ।
b) Continuously Operating Reference Stations (CORS ) : -
CORS एक GNSS ( Global Navigational Satellite System) आधारित प्रणाली है जिसमें नियंत्रण बिंदुओं की स्थापना , स्थाई CORS stations के रूप में होती है यह प्रणाली data को संरक्षित करने की सुविधा प्रदान करती है इसके साथ यह स्वतः ही GPS/GNSS data को और अधिक सटीक स्थिति अनुसार संशोधित करते हुये उपयोगकर्ता को वितरण करती है । इसमें डेटा की सही स्थिति सुनिश्चित करने के लिये एक से अधिक नियंत्रण स्टेशन कार्य करते हैं । जिससे दूरी पर आधारित त्रुटियों को बहुत हद तक कम किया जा सकता है । यह डेटा की पोजीशन के लिये तेज व आर्थिक रुप से किफायती तकनीक है । तथा इसके उपयोग से उपयोगकर्ता रियलटाइम में संशोधित डाटा उपयोग कर सकता है ।
GNSS Satelites
L LL
Netwerk Processing
Centre
L
Rever Station
L
L
CORS Station [भाग 1 3960
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यह ± 20 mm की सटीकता के साथ त्वरित स्थिति बता सकता है । यह तकनीक पूरी दुनिया में अपनी 3D स्थिति के लिये पसंद की जा रही है। इसकी मांग सर्वेक्षण , नेविगेशन, निर्माण , खनन , सटीक कृषि और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे उपयोगो में बहुत अधिक है , जिनके लिए अधिक से अधिक स्थिति की सटीकता , साथ ही डेटा की निरंतरता की आवश्यकता होती है । यह तकनीक लगातार विकसित हो रही है जिससे भविष्य में CORS सुविधाओं की और भी बड़ी भूमिका होगी।
CORS तकनीक में प्रयोग होने वाले उपकरण
CORS तकनीक में विभिन्न प्रकार के सर्वेक्षण यंत्रो का प्रयोग सटीक एवं रियल टाइम स्थितिगत जानकारी जुटाने के लिए किया जाता है जो निम्नलिखित प्रकार से है-
CORS Station Tower
यह स्थाई टावर के रूप में स्थापित यन्त्र होता है जो की निरंतर रूप से सेटेलाइट से सिंग्नल एकत्र करता रहता है तथा सेंट्रल सर्वर को भेजता रहता है इस प्रकार के CORS Station मध्यप्रदेश में स्थापित किये जा रहे हैं ।
توي
Rover
रोवर हैण्डसेट एक ऐसा यन्त्र है जिससे Field डाटा कलेक्ट करने में उपयोग में लिया जाता है तथा ये यन्त्र सेंट्रल सर्वर को लोकेशन हेतु संपर्क करते है एवं पास के CORS Station से सटीक लोकेशन सुधार प्राप्त करते हैं ।
SmartMobile phone
यह उपकरण सामान्य एंड्राइड बेस मोबाइल फ़ोन होता है जो इसमें इनस्टॉल सॉफ्टवेयर एवं GNSS receiver के माध्यम से CORS station का
104 3961 भाग 1 ]
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डाटा सेंट्रल सर्वर से डाउनलोड कर वास्तविक समय में सटीक स्थिति को प्राप्त करता है ।
CORS स्टेशन आधारित नियंत्रण बिंदुओं के लाभ का
ईटीएस आधारित सीमांकन कार्य में अधिक मानव संसाधन तथा कार्य की आवश्यकता होती है, लेकिन इस प्रणाली के उपयोग से उक्त कार्य केवल एक ही व्यक्ति के द्वारा GNSS Dual Frequency Receiver का उपयोग किया जा सकता है । अब सर्वेकर्ता वजन में हल्के, छोटे व परिष्कृत GNSS Receiver जैसे उपकरणों का प्रयोग कर सर्वे कार्य कर सकता है ।
अब Demarcation / Mapping करने के लिये खेत में फसल का खड़ा होना कोई बाधा नहीं है ।
इस पद्धति से Mapping कार्य बहुत कम समय में किया जा सकता है ।
सभी मापन कार्य पृथ्वी के Co- ordinate System का उपयोग कर किये जायेंगे ताकि भूमि की वास्तविक स्थिति से भिन्न स्थिति निर्मित ना हो ।
कोर्स आधारित सर्वे या सीमांकन कार्य में बाद में स्थितिगत प्रोसेसिंग की आवश्यकता नहीं होती एवं रियल टाइम में ही नक्शा तैयार किया जा सकता है । 3962
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
अध्याय -11
रुढिचिन्ह ( अलामात )
1.1 . रुढि चिन्हों से तात्पर्य नियत आकार प्रकार की ऐसी आकृति से है जो नाप के लिये प्रस्तावित इकाई क्षेत्र के भू- खण्डों से निर्मित या प्राकृतिक रुप से विद्यमान है और उनका चित्रण मानचित्र के उस भूखण्ड में इसलिए किया जाता है कि वह उस निर्माण का प्रतिनिधित्व मानचित्र पर करता है ।
1.2 . स्थल की कुछ आकृतियों चाहे वे मानव निर्मित हो अथवा प्राकृतिक स्थल की पहचान के लिये उन्हें नक्शे पर चिन्हों के रुप में अंकित किया जाता है । इन चिन्हों को नक्शे की भाषा में रुढिचिन्ह या अलामात कहा जाता है ।
1.3 . यह रुढिचिन्ह सभी देशों एवं स्थानीय क्षेत्र के लिए सार्व भौमिक होते हैं जिसके कारण' किसी देश , प्रान्त , या क्षेत्र का सर्वेयर इसे आसानी से पढ़ सकता है ।
1.4. मानचित्र का आरेखन बनाते समय रुढिचिन्हों को मानचित्र में दर्शित किया जाना चाहिए । 1.5. रुढिचिन्हों को एक मैप में एक ही आकार का बनाया जाना चाहिए ।
1.6. रुढिचिन्हों को मानचित्रों में उत्तर दिशा मानकर चित्रण किया जाना चाहिए। * उपयोग मानचित्र में रुढ़िचिन्ह का उपयोग निम्न प्रकार है-
विभिन्न स्तरों पर ग्राउंड से मानचित्र मिलान करने में रूढ़ि चिन्ह सहायता करते हैं। मानचित्र पढ़ने और स्थल से मिलान करते समय मानचित्र के अंक अक्षर तथा रुढि चिन्हों के शीर्ष उत्तर की तरफ रखे जाने से पढ़ने और मिलाने में सहायता मिलती है । स्थल के अतिरिक्त कहीं भी मानचित्र देखने से यह जानकारी तत्काल उपलब्ध हो जाती है कि रुढ़ि चिन्ह वाले भूखंड का उपयोग उस रूढ़ चिन्ह के अनुसार हो रहा है। 3963 भाग 1 ]
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2. नक्शें में रुढिचिन्ह साफ स्पष्ट तथा सुव्यक्त रुप से बनाये जाने चाहिए । वर्तमान में निम्नलिखित रुढिचिन्ह प्रचलन में है ।
00
1. श्मशान 2. कब्रिस्तान का मापन करने और उन्हे क्रमांक देने के पश्चात इस रुप में दर्शाया जाना चाहिए ।
22
सैनिक शिविर स्थल- ये हमेशा भूमि पर पक्के मुनारों द्वारा दर्शाये जाते हैं । मापन कर उन्हे क्रमांक दिये जाने चाहिए तथा खम्भों की सही स्थिति भी नक्शें में दर्शाई जानी चाहिए ।
सड़कें सभी सड़कों का मापन कर उन्हें क्रमांक दिए जाते हैं सड़क की पूरी लंबाई के लिए केवल एक क्रमांक का उपयोग किया जाता है ।
==
पक्की सड़कें ये बीच में दो टूटी रेखाओं द्वारा विशिष्ट रुप में दर्शाई जाएंगी , किन्तु इन रेखाओं को पृथक क्रमांक नहीं दिया जाना चाहिए । इन सड़कों की चौडाई समान होगी।
brond Gauge
NarrowGauge
रेल मार्ग इनकी चौड़ाई वीर सीमा पत्थरों द्वारा दर्शाई जाती है यदि सड़क से संलग्न कोई क्षेत्र रेलवे द्वारा आयोजित कर दिया गया है तो केवलं सीमाओं का मापन किया जाएगा ।
कच्ची सड़कें केवल दो रेखाओं द्वारा जो की सड़क की चौड़ाई होगी दर्शाई जाएगी और उनके बीच में एक टूटी रेखा होगी ।
कच्ची सड़कें केवल दो रेखाओं द्वारा जो की सड़क की चौड़ाई होगी दर्शाई जाएगी और उनके बीच में एक टूटी रेखा होगी ।
अस्थाई खुले मौसम के गाड़ी मार्ग जब गाड़ी मार्ग अस्थाई हो और परंपरा अनुसार केवल उसी समय जबकि खेत में कोई फसल न खड़ी हो, किसी खेत में से 3964
[भाग 1
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होकर जाते हो तो टूटी हुई रेखाओं द्वारा दर्शाए जाएंगे किंतु उन्हें क्रमांकित नहीं किया जाएगा कुछ स्थानों में यह मार्ग स्थिति की दृष्टि से वर्ष प्रतिवर्ष थोड़ा बहुत बदलते रहते हैं यह परिवर्तन दर्शाने के लिए नक्शे में परिवर्तन नहीं किए जाने चाहिए । यह रूढी एक ऐसा रूढ़ चिन्ह (अलामात) मात्र माना जाना चाहिए जो कि वहां से जाने आने का अधिकार दर्शाता है ना कि मार्ग की वास्तविक स्थिति ।
पग इण्डियां अन्य ग्रामों जल स्त्रोतों या जंगलों को जाने वाली और सभी ग्रामीणों द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली सभी मान्य और स्थाई पगडंडियों एक टूटी हुई रेखा द्वारा दर्शाई जाएंगे किंतु क्रमांकित नहीं की जाएगी। गाड़ी मार्गों और पगडंडियों की संपूर्ण लंबाई नक्शे में दर्शाइए जानी चाहिए और बीच में कोई खाली स्थान नहीं छोड़ना चाहिए उदाहरणार्थ ग्राम सीमा से परे तक जाने वाली गाड़ी मार्ग सीमा रेखा तक अपनी पूरी लंबाई में दर्शाए जाने चाहिए ।
22 23
क्रमांकों और खेतों की सीमाओं के लिए विभिन्न प्रकार की रेखाएं- सीधी रेखाएं जब दो क्रमांकों के बीच की सीमा रेखा भूमि पर निश्चित हो तब वह सीधी रेखा द्वारा दर्शाई जाएगी ।
22 23
छोटी-छोटी ( डेस -डॉट ) रेखाएं - दो क्रमांकों के बीच (विभिन्न अधिकारों या कब्जे के अंतर्गत धारित ) सीमा रेखाओं जो भूमि पर सुस्पष्ट रूप से निश्चित ना हो छोटी-छोटी रेखाओं ( डेस - डॉट ) लाइन द्वारा दर्शाई जाएंगी। 3965
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भाग 1 ]
23
बिंदु रेखाएं - किसी खेत के भीतरी विभाग (जहां धान की खेती की डोलिया भी दर्शाई जानी हो ) किंतु रेखाओं द्वारा दर्शाई जाएंगी ।
22
22
किसी क्रमांक के ऐसे नाले जिनमें वस्तुतः खेती तो ना की जाती हो किंतु जो कब्जे में रखे गए हों तथा अन्य गैर मुमकिन भूमि भी इसी प्रकार दर्शाई जाएगी। बिंदु छोटे गोल और समान दूरी पर होने चाहिए जिसके कि पहले से ही बनाई गई टूटी रेखा से कोई भ्रम ना हो सीधी और छोटे- छोटे रेखाओं का उपयोग क्रमांकों की सीमा के रूप में किया जाता है , टूटी और बिंदु रेखाओं का क्रमांकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
बंधान खेतों के बड़े बांध बाजू में बतलाए अनुसार दर्शाए जाने चाहिए । रेखा छाया (हैचिंग ) की लंबाई और दूरी एक ही होनी चाहिए ।
तालाब बंधान- पृथक क्रमांकित किए जाने चाहिए रेखा छाया (हैचिंग ) की दूरी समान होना चाहिए ।
2
कुओं का भू- मापन किया जाना चाहिए और यदि वे स्थाई स्वरूप के हों तो नक्शे पर उनकी सही स्थिति दर्शाई जानी चाहिए ।
20kadi
पक्का (दोहरे रूप में )
कच्चा (एक व्रत में )
20kadi
स्थाई बावड़ी 3966
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[भाग 1 नदी नाले
जहां नदी पर पुल बनाकर सड़क बनाई गई हो- जहां किसी नदी या नाले पर पुल बनाकर सड़क बनाई गई हो वहां सड़क लगातार बनाई जानी चाहिए और नदी को टूटी हुई दर्शाई जानी चाहिए।
जहां नदी पर रपट बनी हो वहां नदी लगातार बताई जाए और सड़क को टूटे रूप में दर्शाया जाए ।
102
नहरें- सिंचाई और अन्य नहरें दो रेखाओं द्वारा जो कि उनकी चौड़ाई होगी दर्शाई जानी चाहिए ।
खाइयां ( बेहड़ ) - जब गहरी हो तभी नक्शे पर दर्शाए (बतलाई ) जाएं किंतु उन्हें जब तक प्रथक क्रमांक नहीं दिए जाने चाहिए जब तक कि उन्हें नदीयां और नाले का हिस्सा नहीं माना जाए ।
25
धान के खेत की डोलिया धान के खेत की डोलियों की पहली कतार आंख से देख कर अंदाज से खींची जानी चाहिए और वह क्रमांक की सीमा के चारों ओर नुक्तेदाररेखा द्वारा दर्शाई जानी चाहिए शेष अलामात के जरिए बतलाई जावे रेखाएं समान दूरी पर होनी चाहिए ।
वृक्ष- रुढ़ि चिन्ह अलामात हमेशा लंबे रूप में दर्शाए जाने चाहिए । झुके रूप या तिरछी कभी भी नहीं होना चाहिए । 3967 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
इक्के दुक्के वृक्ष बड़े- बड़े इक्के दुक्के विरले वृक्ष स्थाई चिन्हों जो कि मुस्तकिल निशानातका काम देते हो वह भू-मापन कर नक्शे में अपनी ठीक जगह बनाना चाहिए ताड़ के वृक्ष का रूढ़ चिन्ह (अलामात ) अलग है ।
बड़े वृक्ष के उपवन ऐसे चित्र का जिसमें बड़े वृक्षों के उपवन हो। ( उदाहरर्णाथ आम ) , भू- मापन और क्रमांकन किया जाना चाहिए । उपवन ( बाग बगीचे ) दर्शाने के लिए कुछ रूढ़ि चिन्ह (अलामात ) बनाए जाने चाहिए जो अलग-अलग वृक्षों के चिन्ह ( निशानात ) के बराबर हो।
छोटे वृक्षों के उपवन ( बगीचे ) पंक्तियों ( कतारों ) के लगाए गए फल के छोटे वृक्षों के चिन्ह अपेक्षाकृत छोटे होने चाहिए और पंक्तियों में दर्शाए जाने चाहिए।
요요
बड़े वृक्षों के वन- इस क्षेत्र के संबंध में कुछ चिन्ह (निशानात ) लगाना पर्याप्त होगा उपवन ( बगीचों ) के चिन्ह से भिन्न दर्शाने के लिए दो- दो वृक्ष एक साथ बतलाए जाने चाहिए , और यह चिन्ह उपवन या इक्के दुक्के वृक्षों से बड़े होने चाहिए ।
पड़ती बंजर भूमि के वृक्ष-जहां पड़ती भूमि में अनेक वृक्ष हो वहां भूमि की स्थिति दर्शाने के लिए चिन्ह बनाए जाने चाहिए ।
पड़ती बंजर भूमि घास ऐसे क्षेत्र पर कुछ न लगाना पर्याप्त होगा ।
छोटे झाड़ का जंगल घास के बीच फैले हुए इक्के दुक्के कुछ वृक्षों के निशानात बतलाना पर्याप्त होगा।
पहाड़ी इक्की दुक्की पहाड़ियां अपनी ठीक स्थिति में दर्शाई जानी चाहिए । 3968
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
चट्टाने या खेती के अयोग्य (गैरमुमकिन ) पथरीली जमीन- इसे दर्शाने के लिए एक या दो चिन्ह पर्याप्त होंगे ।
1 - मंदिर 2- मस्जिद 3 - गिरजाघर 4 - गुरुद्वारा इनका सर्वेक्षण किया जाना चाहिए और प्रत्येक के सामने बतलाए गए अलामात द्वारा उनकी ठीक स्थिति दर्शाई जानी चाहिए ।
आबादी क्षेत्र के बाहर डाक बंगले शालाएं और सराएं
L12
इनका भू- मापन और क्रमांकन किया जाना चाहिए और आबादी के चिन्ह लगाए जाने चाहिए किंतु वह छोटे होने चाहिए । चिन्ह की दक्षिणी और पूर्वी रेखाएं अपेक्षाकृत मोटी होगी।
ट्रावर्सस्टेशन इन्हें और इन्हें जोड़ने वाली रेखाओं को नक्शे पर नीली स्याही ( कोबाल्ट ) में दर्शाया जाना चाहिए ।
ग्राम सीमा पर स्थित स्टेशनों को भीतरी स्टेशनों से कुछ बड़ा बनाकर भिन्न रूप में दर्शाया जाएगा 16 इंच = 1 मील के पैमाने पर के स्टेशनों की त्रिज्या 0.5 चैन और भीतरी स्टेशनों की 0.4 चैन होगी ।
तिगढडा ( Trijunctions ) इन्हें समान आकार के खाली वर्ग द्वारा जिसके बीच में एक बिंदु हो को दर्शाना चाहिए ।
Π
तिगड्डा ट्रावर्स स्टेशन, चोगड्डा ट्रावर्स स्टेशन जब तिगड्डा ट्रावर्स स्टेशन भी हो तो वर्ग नीले व्रत के अंदर रहना चाहिए। 3969
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
ग्राम सीमा -ग्राम सीमा सीधी मोटी रोड़ा द्वारा दर्शाई जानी चाहिए और सभी सीमा स्तंभ अपनी ठीक स्थिति में दर्शाई जानी चाहिए ।
4
3
2
जब ग्राम सीमा शासकीय वन में हो जब ग्राम सीमा शासकीय वन में हो तो वह सीमा रेखा के प्रत्येक स्तंभ का भू- मापन किया जाना चाहिए और उसकी सही स्थिति उसके नीचे उसका क्रमांक देकर दर्शाई जानी चाहिए ।
नदी को पार करने वाली ग्राम सीमा जब कोई ग्राम सीमा किसी नदी को पार करें तो वह पास पास दो बिंदुओं नुक्ते रखकर बतलाई जाबे ।
नदी में ग्राम सीमा हो यदि 2 ग्रामों की सीमा नदी के बीच में हो तो उसे नदी के मध्य से छोटी किंतु मोटी डेस-डॉट रेखाओं द्वारा बनाई जानी चाहिए ।
जहां इसके लिए पर्याप्त जगह ना हो वहां बिंदु नदी के दोनों और एक के बाद एक बतलाए जावे इस बात की सावधानी रखी जाएगी ।
किसी एकग्राम के संबंध में बिंदु रेखा के रूप में दर्शाई गई सीमा रेखा उसी स्थान पर हो जहां की निकटस्थ ग्राम के संबंध में खींची गई सीमा रेखा है ।
ग्राम सीमा जो नदी के किसी हिस्से पर हो जहां किसी नदी का भाग ही ग्राम सीमा हो वहां रेखा को नदी के मध्य में शेष सीमा से सही रूप में जोड़ने की सावधानी बरतनी चाहिए और जब आधी नदी ग्राम में सम्मिलित हो तो उसे संपूर्ण नदी ग्राम में सम्मिलित होने के स्थान से एक पृथक पृथक क्रमांक दिया जाए । 3970
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
ग्राम आबादी नक्शे में आबादी की रेखाएं ग्राम सीमा रेखा के समान ही मोटी तथा सीधी रेखा द्वारा दर्शाया जाना चाहिए। रुढ़ि चिन्ह खाली स्थान की गुंजाइश को देखते हुए बनाना चाहिए इन चिन्हों की दक्षिणी और पूर्वी रेखाएं उत्तरी पश्चिमी रेखाओं की अपेक्षा कुछ मोटी होनी चाहिए । आबादी, ग्राम आबादी ।
१२ 3
अब
अक्षरांकन और क्रमांकन सभी अक्षर अंकन और क्रमांकन पूर्व से पश्चिम की दिशा में किया जाना चाहिए भूखंड प्लाट की ढलान की दिशा में नहीं जब भूखंड प्लाट में पर्याप्त जगह ना हो तो क्रमांक उसके बगल में लिखा जाना चाहिए । क्रमांक सभी जगह एक आकार और स्वरूप के होने चाहिए और अक्षर एक ही स्वरूप के होने चाहिए किंतु उन का आकार उस प्रयोजन के अनुसार जिसके लिए उनका उपयोग किया गया हो बदलता रहेगा । अक्षरों और क्रमांकों का स्वरूप वही होगा जो वहां दिया गया है ।
مه
10.2 cm
नक्शा का शीर्षक मानचित्र का शीर्षक तीन- एक के केंद्रीय व्रतों में जिसमें से बीच के व्रत की रेखा अपेक्षाकृत मोटी होगी , बनाया जाना चाहिए । उस ग्राम का नाम जिसका वह नक्शा हो तहसील या जिले के नाम की अपेक्षा बड़े टाइप में लिखा जाना चाहिए जिससे कि दृष्टि पहले पहल उसी पर पड़े उत्तर दिशा हमेशा एक तीर द्वारा दर्शाई जानी चाहिए।
निकटस्थ ग्रामों के नाम इन्हें बड़े टाइप में लिखा जाना चाहिए पूरी सीमा पर फैलाते हुए लिखकर सीमा के लगभग बीच में पूरब से पश्चिम दिशा में लिखना चाहिए अक्षरों का आकार और मोटाई तथा उनके बीच की दूरी प्रत्येक नाम में एक ही होनी चाहिए। 3971 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
Π
REWA
RAIPUR
Flyover फिलाई ओवर
FLYOVER BRIDGE ICON
Mobile Tover मोबाइल टॉवर
(8)
Expressway
National highway नेशनल हाईवे
National Highway Authority of India
स्कूल , कॉलेज , कारखाना
ऐतिहासिक स्थल
गेस्ट हाउस फारेस्ट, सिचाईं , अन्य
बोरवेल , टूबवेल
①
घर , अस्पताल, बाजार , कॉलोनी
रेल्वे स्टेशन , हवाई अड्डा
TO PO PS
ऑफिस- टेलीफोन , पोस्ट, पुलिस , अन्य
G 2000
बड़े वृक्षों के उपवन , छोटे वृक्षों के उपवन 3972
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
अध्याय -12
भू- अभिलेख तथा भू- सर्वेक्षण संबंधी नियम
राजस्व विभाग का मूल कार्य भू-अभिलेखों को तैयार करना उन्हें अद्यतन करना और उन्में निरंतरता बनाये रखना है । इस कार्य को करने के लिए तत्समय प्रवृत्त विधि एवं नियमों का पालन करना होता है । वर्तमान में इससे संबंधित नवीन नियमों का प्रकाशन मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( भू- सर्वेक्षण एवं भू-अभिलेख ) नियम, 2020 किया गया है । आगामी अध्याय में भू- सर्वेक्षण के विस्तृत दिशा निर्देश हैं जिनमें इन नियमों का उल्लेख है अतः भू- अभिलेख का निर्माण एवं उनके रख रखाव से संबंधित नियम , जो कि उक्त नियमों के अध्याय 2 , 3 एवं 4 में नियम 3 से 51 तक वर्णित हैं को यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है: -
3. भू- अभिलेखों का तैयार किया जाना (1 ) मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता की धारा 114 में विनिर्दिष्ट समस्त भू-अभिलेख भू- सर्वेक्षण में नये सिरे से तैयार किए जाएंगें:
परन्तु भू- अधिकार पुस्तिकाएं भू- सर्वेक्षण में तैयार किए गए भू- अभिलेखों को नियम 22 के अधीन कलेक्टर को सौंपे जाने के पश्चात् तैयार की जाएंगी:
परन्तु यह और कि भू-सर्वेक्षण में तैयार किया गया पुनर्क्रमांकन रजिस्टार धारा 114 की उपधारा ( 1 ) के खण्ड ( छ ) अथवा उपधारा ( 2 ) के खण्ड ( छ ) के अधीन भू-अभिलेख होगा ।
(2 ) आयुक्त, भू-अभिलेख समय- समय पर भू- अभिलेखों को तैयार करने , उनका अनुरक्षण करने तथा परिरक्षण करने तथा उनमें की किसी प्रविष्टि को उपांतरित के लिए संहिता या उसके अधीन बनाए गए नियमों से अन्असंगत निर्देश जारी कर सकेगा । (3 ) उपनियम ( 1 ) के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जब कभी राज्य सरकार धारा 108 की उपधारा ( 2 ) के अधीन अधिकार अभिलेख तैयार करने के लिये निर्देश दें , ऐसे अधिकार अभिलेख इन नियमों के अध्याय- तीन में विहित की गई प्रक्रिया का अनुसरण करते हुए तैयार किया जायेगाः
परन्तु ऐसे मामले में नियम 13 के अधीन भू- सर्वेक्षण की सीमा ऐसे अधिकार अभिलेख तैयार करने मात्र तक सीमित रखी जाएगी ।
4. उपसंगी (सहायक ) क्षेत्र अभिलेखों का तैयार किया जाना ( 1 ) प्रत्येक ग्राम तथा सेक्टर के लिए निम्नलिखित उपसंगी ( सहायक ) क्षेत्र अभिलेख तैयार किए जाएंगे, - 3973 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(क ) खातावार खतौनी अथवा जमाबन्दी;
(ख) आसामीवार खतौनी;
(ग ) सरकारी पट्टों का रजिस्टर; और
(घ ) सीमा चिन्हों तथा संदर्भ बिन्दुओं का रजिस्टर ,
( 2 ) सम्पूर्ण राज्य के लिए " राज्य व्यापी भूमिस्वामीवार खतौनी " के नाम से ज्ञात एक उपसंगी ( सहायक ) क्षेत्र अभिलेख तैयार किया जाएगा ।
5. नक्शों का तैयार किया जाना और पैमाने ( स्केल ) ( 1 ) धारा 107 की उपधारा ( 1 ) में यथाउपबंधित प्रत्येक ग्राम के लिए एक ग्राम का नक्शा, एक आबादी का नक्शा तथा एक ब्लॉक का नक्शा तैयार किया जाएगा ।
( 2 ) धारा 107 की उपधारा ( 2 ) में यथाउपबंधित प्रत्येक सेक्टर के लिए एक सेक्टर का नक्शातैयार किया जाएगा ।
( 3 ) समस्त नक्शे इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में तैयार किए जाएंगे । भू- सर्वेक्षण ऐसी रीति में किया जाएगा जिससे कि समस्त नक्शों को 1 : 500 तक के पैमाने ( स्केल ) पर तैयार किया जाना संभव हो सके । इस प्रकार तैयार किए गए नक्शों को निम्नलिखित पैमाने (स्केल ) में रखा जाएगा;
(क) ग्राम का नक्शा 1 : 4000 के पैमाने (स्केल ) में;
(ख ) आबादी का नक्शा अथवा ब्लॉक का नक्शा 1 : 500 के पैमाने ( स्केल ) में और (ग ) सेक्टर का नक्शा 1 : 500 के पैमाने (स्केल ) में ।
6. भू-अभिलेखों के प्ररूप भू- अभिलेख निम्नलिखित प्ररूपों में तैयार किए जाएंगे -
(क ) किसी ग्राम अथवा सेक्टर का खसरा ( फील्ड बुक ) , प्ररूप- एक में;
(ख ) मसाहती खसरा , प्ररूप- दो में;
(ग ) अधिकार अभिलेख , प्ररूप-तीन में ;
(घ ) भू- अधिकार पुस्तिका, प्ररूप- चार में;
(ङ ) व्यपवर्तित भूमि के ब्यौरे , प्ररूप पांच में ;
(च ) पुनर्क्रमांकन ( Re- numbering ) रजिस्टर , प्ररूप- छह में , और
(छ) ( एक ) दखलरहित भूमि के अभिलेख;
(दो) निस्तार पत्रक;
3974
[ भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(तीन ) वाजिब-उल-अर्ज; और
(चार ) धारा 233- के के अधीन लोक प्रयोजनों के लिए पृथक रखे गए भूमि के अभिलेख;
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( दखलरहित भूमि आबादी तथा वाजिब-उल-अर्ज ) नियम , 2020 में इनके लिए विहित प्ररूपों में ।
स्पष्टीकरण - मसाहती खसरा से अभिप्रेत है पहाडी क्षेत्र के ऐसे ग्राम का खसरा जिसका सीमांकन नहीं किया गया हो और जिसके लिए कोई ट्रावर्स डाटा तैयार नहीं किया जा सकता हो ।
7. भू- अधिकार पुस्तिका के लिए फीस भू- अधिकार पुस्तिका, भूमिस्वामी को ऐसे फीस का संदाय किए जाने पर उपलब्ध करवाई जाएगी जो कि राज्य सरकार द्वारा समय समय पर नियत की जाए:
परन्तु भू- सर्वेक्षण के पश्चात् पहली बार तैयार की गयी भू- अधिकार पुस्तिका निःशुल्क प्रदाय की जाएगी ।
8. उपसंगी ( सहायक ) क्षेत्र अभिलेखों के प्ररूप उपसंगी ( सहायक ) क्षेत्र अभिलेख निम्नलिखित प्ररूपों में तैयार किए जाएंगे-
(क) खातावार खतौनी अथवा जमाबंदी प्ररूप- सात में;
(ख ) ग्राम / सेक्टरव्यापी भूमिस्वामी वार खतौनी प्ररूप- आठ में;
(ग ) सरकारी पट्टों का रजिस्टर प्ररूप नौ में ;
(घ ) सीमा चिन्हों तथा निर्देशांकों ( रिफरेन्स प्वाईट ) का रजिस्टर प्ररूप- दस में; तथा (ड) राज्य व्यापी भूमिस्वामीवार खतौनी प्ररूप ग्यारह में ।
9. संक्रमण काल के दौरान पुराने प्ररूपों की विधि मान्यता- इन नियमों के प्रारंभ होने के पूर्व तैयार किए गए भू- अभिलेख तथा उपसंगी (सहायक ) क्षेत्र अभिलेख इन नियमों में विहित प्ररूपों द्वारा प्रतिस्थापित किए जाने तक निरंतर मान्य बने रहेंगे ।
10. भू-सर्वेक्षण की अधिसूचनाएं ( 1 ) आयुक्त, भू-अभिलेख किसी तहसील अथवा उसके किसी भाग में भू- सर्वेक्षण प्रारंभ होने की अधिसूचना धारा 64 के अधीन प्ररूप- बारह में जारी करेगा जो शासकीय राजपत्र में प्रकाशित की जायगी ।
(2 ) उपनियम (1 ) के अधीन अधिसूचित भूमियाँ , उक्त अधिसूचना की तारीख से तब तक भू- सर्वेक्षण के अधीन धारित समझी जाएगी जब तक कि आयुक्त भू-अभिलेख द्वारा 3975
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
नियम 28 के अधीन प्ररूप तेरह में ऐसे भू- सर्वेक्षण को बंद किये जाने की घोषणा करने वाली अधिसूचना जो कि शासकीय राजपत्र में प्रकाशित की जाएगी, जारी न कर दी जाये ।
11. भू- सर्वेक्षण के लिये कर्मी तथा एजेंसियां: - ( 1 ) आयुक्त भू- अभिलेख जिला सर्वेक्षण अधिकारी को उतने कर्मियों की सेवाएं उपलब्ध करवाएगा जितने की वह भू- सर्वेक्षण संक्रियाओं का निर्वाहन करने के लिये आवश्यक समझे । जिला सर्वेक्षण अधिकारी इन कर्मियों को तथा जिले पदस्थ ऐसे अन्य कर्मियों को जिन्हें कि वह उचित समझे ऐसी रीति में जैसी कि वह ठीक समझे, नियोजित कर सकेगा ।
( 2 ) आयुक्त भू- अभिलेख के नियंत्रण में रहते हुए , जिला सर्वेक्षण अधिकारी, भू- सर्वेक्षण संक्रियाओं करने के लिए सहायता हेतु एजेंसीयों का लगा सकेगा ।
12. भू- सर्वेक्षण कर्मी को नक्शे तथा भू- अभिलेखों का दिया जाना- कलेक्टर भू- सर्वेक्षण के अधीन आने वाले क्षेत्रों के नक्शे तथा भू- अभिलेख जिला सर्वेक्षण अधिकारी अथवा उनके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कर्मचारी को दिलवाएगा ।
13. भू-सर्वेक्षण किए जाने की सीमा तथा रीति- जिला सर्वेक्षण अधिकारी , भू- सर्वेक्षण के अधीन आने वाले क्षेत्रों में उस सीमा तक तथा ऐसी रीति में जो कि आयुक्त, भू- अभिलेख द्वारा निर्देशित की जाए सर्वेक्षण पुनः सर्वेक्षण अथवा नक्शों में सुधार करेगा । 14. भू- सर्वेक्षण संक्रियाओं को प्रारंभ करने की उदघोषणा- ( 1 ) जिला सर्वेक्षण अधिकारी भू- सर्वेक्षण के अधीन वाले क्षेत्र में सार्वजनिक जानकारी के लिए सर्वेक्षण संक्रियाओं के प्रारंभ होने की उदघोषणा प्ररूप- चौदह में जारी करेगा ।
( 2 ) ऐसी उदघोषणा भू- राजस्व संहिता ( राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया ) नियम , 2019 के नियम 31 में विहित रीति में जारी की जायेगी और ऐसे क्षेत्र में व्यापक रूप से प्रसारित होने वाले दो दैनिक समाचार पत्रों में भी प्रकाशित की जायेगी तथा ऐसे अन्य माध्यमों से भी उदघोषणा की जायेगी जिनका कि आयुक्त भू- अभिलेख निर्देश दें ।
15. माप पुस्तिकाएं- ( 1 ) भू- सर्वेक्षण संक्रियाओं के समस्त माप ऐसी माप पुस्तिकाओं में ऐसे स्वरूप में अभिलिखित किये जाएंगे तथा ऐसी कालावधि तक संरक्षित रखे जायेंगे जैसे की आयुक्त, भू-अभिलेख निर्देशित करें । [भाग 1 3976
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(2 ) अधीनस्थ सर्वेक्षण अमले द्वारा किए गए प्रारंभिक मापों की, मापन कर्मचारीवृन्द के प्रभारी अधिकारी द्वारा या ऐसे अन्य अधिकारी द्वारा ऐसी रीति में तथा उस सीमा तक, जैसी कि जिला सर्वेक्षण अधिकारी निदेशित करे , जांच की जाएगी ।
16. प्रारूप भू- अभिलेखों का तैयार किया जाना- जिला सर्वेक्षण अधिकारी पैमाइश के अनुसार अद्यतन किए गये विद्यमान भू- अभिलेखों तथा भू- सर्वेक्षण के दौरान किये गये अवलोकनों का उपयोग करते हुए प्रारूप भू- अभिलेख तैयार करेगाः :
परंतु यदि ऐसे कोई भू- अभिलेख उपलब्ध न हो तो इन्हें भू- सर्वेक्षण के दौरान लिए गये माप तथा किए गये अवलोकन के आधार पर तैयार किया जायेगा ।
17. प्रारूप भू- अभिलेख का प्रकाशन तथा दावे व आपत्तियों का आमंत्रित किया जाना- ( 1 ) जिला सर्वेक्षण अधिकारी प्रारूप अभिलेखों को प्ररूप- पद्रह में एक उदघोषणा के साथ प्रकाशित करेगा जिसमें हितबद्ध व्यक्ति से उदघोषणा में यथावर्णित दिनांक को या उसके पूर्व जो कि उदघोषणा के प्रकाशित होने की दिनांक से पन्द्रह दिन से कम की नहीं होगी, उसके समक्ष दावे तथा आपत्तियां , यदि कोई हो, फाइल करने की अपेक्षा की जायेगी। यह उदघोषणा मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया ) नियम , 2019 के नियम 31 में विहित रीति में जारी की जायेगी तथा क्षेत्र में व्यापक रूप से प्रसारित होने वाले दो दैनिक समाचार पत्रों में भी प्रकाशित की जायेगी ।
(2) जिला सर्वेक्षण अधिकारी प्रत्येक ऐसे भूमिस्वामी तथा सरकारी पट्टेदार को जिसका नाम प्रारूप अधिकार अभिलेख में हो यथास्थिति उसके खाते अथवा पट्टे से संबंधित प्रारूप अधिकार अभिलेख के उद्धरण तथा सुसंगत ( संबंधित ) नक्शों के साथ प्रारूप - सोलह में सूचना जारी करेगा तथा उदघोषणा में विनिर्दिष्ट अंतिम दिनांक अथवा उसके पूर्व दावे तथा आपत्तियाँ , यदि कोई हो , फाइल करने में उससे अपेक्षा की जाएगी ।
(3 ) उपनियम (2 ) के अधीन दी जाने वाली सूचना की तमीली मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया ) नियम , 2019 के भाग- दो में समनों की / तामीली के लिये विहित रीति में करवायी जायगी तथा प्ररूप- सत्रह में संधारित रजिस्टर में तामीली की अभिस्वीकृति ली जाएगी । संयुक्त खाते की दशा में धारकों में से किसी एक खातेदार को सूचना तामील करवाया जाना पर्याप्त होगा ।
18. दावों और आपत्तियों की सुनवाई ( 1 ) कोई व्यक्ति जिसका प्रारूप भू- अभिलेखों में की किसी पृविष्टि के बारे में विरोध है , जिला सर्वेक्षण अधिकारी के समक्ष नियम 17 के 3977
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
उपनियम ( 1 ) के अधीन जारी की गई उदघोषणा में दावे तथा आपत्तियाँ फाइल करने के लिए विनिर्दिष्ट किये गये अंतिम दिनांक को अथवा उसके पूर्व प्ररूप- अठारह में अपने दावे तथा आपत्तियाँ फाइल कर सकेगा ।
(2) जिला सर्वेक्षण अधिकारी किये गये दावों तथा आपत्तियों की ऐसी जाँच कर सकेगा तथा भूमि के ऐसे माप ले सकेगा जिन्हें कि वह उचित समझे तथा प्रत्येक दावे तथा आपत्ति पर संहिता के सुसंगत उपबंधों के अधीन आदेश पारित करेगाः
परन्तु किसी भी पक्षकार के विरुद्ध उसे सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए विना कोई आदेश नहीं किया जाएगाः
परन्तु यह और कि ऐसा कोई दावा जिसमें धारा 109 के अधीन अधिकारों के अर्जन की सूचना हो अथवा 178 या 178 क के अधीन खाते के विभाजन का आवेदन हो इन कार्यवाहियों में विनिश्चित नहीं किया जायगा किन्तु वह संहिता तथा उसके अधीन बनाए गये नियमों के सुसंगत उपबंधों के अधीन पृथक कार्यवाहियों में विनिश्चित किया जायेगा । 19. जिला सर्वेक्षण अधिकारी, इत्यादि द्वारा शक्तियों का प्रयोग किया जाना भू-सर्वेक्षण के दौरान जिला सर्वेक्षण अधिकारी , उप सर्वेक्षण अधिकारी तथा सहायक सर्वेक्षण अधिकारी धारा 66 के उपबंधों के अनुसार शक्तियों का प्रयोग करेंगे ।
20. अंतिम भू- अभिलेखों का तैयार किया जाना, प्रकाशन और संरक्षण ( 1 ) जिला सर्वेक्षण अधिकारी समस्त दावों और आपत्तियों को विनिश्चित करने के पश्चात् प्रारूप भू- अभिलेखों में आवश्यक परिवर्तन करेगा और अंतिम भू- अभिलेख इलेक्ट्रानिक रूप में तैयार करेगा । (2 ) जिला सर्वेक्षण अधिकारी अंतिम भू- अभिलेख प्रारूप उन्नीस में सूचना के साथ ऐसी बेबसाइट पर प्रकाशित करेगा जो कि आयुक्त भू- अभिलेख द्वारा निदेशित की जाये । (3 ) अंतिम भू-अभिलेख , ऐसी रीति में , जैसी की राज्य सरकार द्वारा समय - समय पर निर्देशित की जाये , प्राधिकृत और संरक्षित किये जायेंगे।
21. लम्बित मामलों की सूची का तैयार किया जाना ( 1 ) जिला सर्वेक्षण अधिकारी दावों तथा आपत्तियों की सुनवाई के पश्चात् प्ररूप - बीस में उन समस्त मामलों की एक सूची तैयार करेगा जिनमें किसी न्यायालय का ऐसा निर्णय प्राप्त हुआ हो जो भू- अभिलेखों में की प्रविष्टियों को प्रभावित करता हो ।
(2) जिला सर्वेक्षण अधिकारी अंतिम भू- अभिलेख तैयार करते समय अपने न्यायालय में लंबित मामलों की सूची प्रारूप इक्कीस में तैयार करेगा । 3978
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
22. अन्तिम भू- अभिलेख , अन्य सर्वेक्षण अभिलेख तथा राजस्व मामलों का सौंपा जाना-जिला सर्वेक्षण अधिकारी , कलेक्टर अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी को-
(क) अन्तिम भू- अभिलेखः
(ख ) अन्य सर्वेक्षण अभिलेखः
(ग ) भू- सर्वेक्षण के दौरान उसके द्वारा विनिश्चित किए गए समस्त राजस्व मामलों की सूची तथा अभिलेख; और
(घ ) नियम 21 के उपनियम ( 1 ) तथा (2) के अधीन तैयार की गई मामलों की सूचियां व अभिलेख , सौंपेगा ।
23. अंतिम भू- अभिलेख की प्रतियों की उपलब्धता अंतिम भू- अभिलेख की प्रति यथास्थिति जिला अभिलेखागार , तहसील अभिलेखागार में तथा संबंधित पटवारी और नगर सर्वेक्षक के पास रखी जायेगी । वे ऐसे अन्य कार्यालयों में अथवा ऐसे अन्य प्राधिकारियों के पास भी रखी जाएंगी , जो कि संहिता अथवा उसके अधीन बनाए गए नियमों में विहित किए जाएं अथवा जैसा कि राज्य सरकार द्वारा निदेशित किया जाए ।
24. अन्य सर्वेक्षण अभिलेख तथा विनिश्चित किए गए राजस्व मामलों की अभिरक्षा- अन्य सर्वेक्षण अभिलेख तथा विनिश्चित किए गए राजस्व मामलों के अभिलेख जिला अभिलेखागार अथवा तहसील अभिलेखागार में , जैसा कि कलेक्टर द्वारा निदेशित किया जाए , रखे जाएंगे ।
25. लम्बित राजस्व मामलों का निपटारा कलेक्टर अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी को नियम 22 के अधीन प्राप्त लम्बित मामलों की सूची व अभिलेख आगामी कार्रवाई के लिए सक्षम राजस्व न्यायालय को भेजे जाएंगे ।
26. सर्वेक्षण की कार्यवाहियों को पूर्ण किए जाने के लिए समय सीमा किसी ग्राम अथवा सेक्टर अथवा उसके किसी भाग का भू- सर्वेक्षण सामान्यतया नियम -14 के अधीन भू- सर्वेक्षण संक्रियाओं के प्रारंभ होने की उद्धघोषणा के जारी होने की तारीख से आठ मास के भीतर पूर्ण किया जाएगा।
27.विहित कालावधि में सर्वेक्षण पूर्ण न होने पर कार्रवाई का किया जाना जहाँ नियम 26 में विहित की गई कालावधि में भू- सर्वेक्षण पूर्ण किया गया हो वहाँ जिला सर्वेक्षण 3979
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
अधिकारी तथा आयुक्त भू- अभिलेख को मामले की रिपोर्ट दी जाएगी जो भू- सर्वेक्षण को शीघ्रता से पूर्ण करने के लिए ऐसी कार्रवाई कर सकेंगे जो वे उचित समझें ।
28. आयुक्त, भू- अभिलेख को रिपोर्ट तथा भू- सर्वेक्षण बन्द किए जाने की अधिसूचना का जारी किया जाना जिला सर्वेक्षण अधिकारी की रिपोर्ट प्राप्त होने पर आयुक्त, भू- अभिलेख प्ररूप -तेरह में भू- सर्वेक्षण बन्द करने की घोषणा करते हुए एक अधिसूचना जारी करेगा जो शासकीय राजपत्र में प्रकाशित की जायेगी ।
29. भू- अधिकार पुस्तिका का तैयार किया जाना और उसका वितरण - भू- सर्वेक्षण बन्द होने के पश्चात् प्रत्येक भूमिस्वामी को उसके खाते के लिए भू- अधिकार पुस्तिका निःशुल्क दी जायेगी । प्रारूप- बाइस में उन व्यक्तियों का अभिलेख संधारित किया जायेगा जिन्हें कि भू-अधिकार पुस्तिका दी गई हैं:
परन्तु संयुक्त खाते की दशा में केवल एक भू- अधिकार पुस्तिका तैयार की जायेगी और दी जायेगी ।
30. विशिष्टताओं का नक्शों पर दर्शाया जाना यथास्थिति, सर्वेक्षण , पुनसर्वेक्षण अथवा नक्शा के शुद्धिकरण के अनुसार नक्शे तैयार किए जाएंगे और उन पर सर्वेक्षण अथवा नक्शों को शुद्ध करने की कार्यवाहियों के दौरान पाए गए सर्वेक्षण संख्यांक, ब्लाक संख्यांक , भूखंड संख्यांक, सीमाएं , सीमा चिन्ह, सारैखिक , उप सांरैखिक तथा प्राथमिक , द्वितीयक तथा तृतीयक ज्यामितीय भू- मापन के संबंध में माप बिन्दु तथा ऐसी स्थलाकृतिक विशिष्टताऐं दर्शाई जाएंगी जिन्हें कि आयुक्त भू- अभिलेख निदेशित करें ।
31. लगे हुए ग्रामों अथवा सेक्टरों की सीमा रेखाओं का मिलान किया जाना- लगे हुए ग्रामों अथवा सेक्टरों की सीमा रेखाओं का मिलान किया जाएगा तथा ऐसे सर्वेक्षण के पश्चात् किसी गंभीर त्रुटि अथवा विसंगति को, जो आवश्यक हो दूर किया जायेगा । इसी समय यह भी सुनिश्चित किया जायेगा कि समस्त संबंधित ग्रामों अथवा सेक्टरों के नक्शों में ग्राम अथवा सेक्टर की सीमा रेखा को क्रॉस ( पार ) करने वाली स्थलाकृतिक विशिष्टताएं उसी स्थिति में दर्शा दी गई हैं ।
32. मार्गों, नहरों तथा भूमि के अलग अलग भागों का नक्शे पर लाया जाना- ऐसी भूमि के समस्त भागों का , जिसकी विशिष्टताएं अथवा स्वामित्व, लगी हुई , भूमि जैसे मार्गों , नहरों तथा रेलवे लाइन इत्यादि से अलग हैं , जो पूर्ववर्ती राजस्व सर्वेक्षण अथवा भूसर्वेक्षण से - अस्तित्व में आए हों, सर्वेक्षण किया जाएगा तथा उन्हें नक्शे पर लाया जाएगा। [ भाग 1 3980
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
33.जहां नक्शे में और फील्ड में आकार अथवा क्षेत्रफल एक समान नहीं हो-. जहां किसी सर्वेक्षण संख्यांक , ब्लाक संख्यांक अथवा भू- खण्ड संख्यांक का आकार अथवा क्षेत्रफल वैसा नहीं है जैसा कि वह नक्शे में है तो वहां सम्बन्धित पक्षकारों की सीमा के सम्बन्ध में बनी सहमति के अनुसार अथवा यथास्थिति सहायक सर्वेक्षण अधिकारी अथवा तहसीलदार द्वारा अवधारित किए गए अनुसार नक्शे को शुद्ध किया जाएगा।
34. भूमि का सर्वेक्षण संख्यांकों, ब्लाक संख्यांकों तथा भू- खंड संख्याओं में विभाजन ( 1 ) ग्राम अथवा सेक्टर की समस्त भूमि सर्वेक्षण संख्यांकों तथा ब्लाक संख्यांकों में विभाजित की जाएगी।
(2) प्रत्येक सर्वेक्षण संख्यांक, -
(क) धारा 59 के अधीन कृषिक प्रयोजन के लिए निर्धारित भूमि;
(ख ) राज्य सरकार द्वारा कृषिक प्रयोजन के लिए दिए गए पट्टे के अधीन धारित भूमि; और
(ग ) सेवा भूमि में विरचित किया गया भूमि का संस्पर्शी भाग होगा ।
(3 ) प्रत्येक ब्लाक संख्यांक,
(क ) धारा 59 के अधीन कृषिक प्रयोजन से भिन्न प्रयोजन के लिए निर्धारित भूमि;
(ख ) राज्य सरकार द्वारा कृषिक प्रयोजन से भिन्न प्रयोजन के लिए दिए गए पट्टे के अधीन धारित भूमि;
(ग) आबादी भूमि अथवा ऐसी भूमि जो किसी नगरीय क्षेत्र के संघटक ग्राम की आबादी रही हो; और
(घ ) दखलरहित भूमि जिसमें धारा 237 के अधीन निस्तार अधिकारों के प्रयोग के लिए पृथक रखी गई भूमि अथवा धारा 233-क के अधीन लोक प्रयोजनों के लिए पृथक रखी गई भूमि सम्मिलित है , के रूप में विरचित भूमि; का संस्पर्शी भाग होगा । (4) प्रत्येक ब्लाक संख्यांक एक या एक से अधिक भू- खण्ड संख्यांकों से मिलकर बनेगा और एक भू- खण्ड संख्यांक एक से अधिक ब्लाक संख्यांक का भाग नहीं होगा। ( 5 ) इन नियमों के प्रवृत्त होने के समय विद्यमान समस्त सर्वेक्षण संख्यांक, ब्लाक संख्यांक तथा भू- खण्ड संख्यांक जब तक कि वे इन नियमों के उपबंधों के अनुसार उपांतरित अथवा निरस्त नहीं कर दिए जाते , यथास्थिति सर्वेक्षण संख्यांक, ब्लाक संख्यांक तथा भू- खण्ड संख्यांक के रूप में मान्य बने रहेंगे । 3981 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
35. भू- सर्वेक्षण के दौरान , सर्वेक्षण संख्यांकों की विरचना ( 1 ) भू- सर्वेक्षण के दौरान , जिला सर्वेक्षण अधिकारी भूमि के ऐसे संस्पर्शी प्रत्येक भाग को एक पृथक सर्वेक्षण संख्यांक देगा जो, -
(क ) पृथक् स्वत्वाधिकार के अधीन धारित है तथा धारा 59 के अधीन कृषिक प्रयोजन के लिए निर्धारित है ;
(ख ) राज्य सरकार द्वारा कृषिक प्रयोजन के लिए दिए गए पृथक् पट्टे के अधीन धारित है; अथवा
(ग ) सेवा भूमि है
और इस प्रयोजन के लिए विद्यमान सर्वेक्षण संख्यांकों को मान्य कर सकेगा, सर्वेक्षण संख्यांकों को पुनर्गठित कर सकेगा, नवीन सर्वेक्षण संख्यांक विरचित कर सकेगा, विद्यमान सर्वेक्षण संख्यांकों को विभाजित अथवा समामेलित कर सकेगा या ब्लाक संख्याको अथवा उनके भाग को सर्वेक्षण संख्यांकों में संपरिवर्तित कर सकेगा ।
(2) विद्यमान सर्वेक्षण संख्यांक तब तक वैसे ही बने रहेंगे जब तक कि उन्हें पुनर्क्रमांकित किया जाना आवश्यक न समझा जाए , ऐसी दशा में उन्हें नए सिरे से पुनर्क्रमांकित किया जाएगा ।
(3) 0.02 हेक्टेयर से कम क्षेत्र का कोई नवीन सर्वेक्षण संख्यांक विरचित नहीं किया जाएगा ।
(4) इस प्रकार बनाए रखे गए अथवा परिवर्तित किए गए संख्यांक, सर्वेक्षण संख्यांक कहलाएंगे ।
36. भू-सर्वेक्षण के दौरान ब्लॉक संख्यांकों की विरचना ( 1 ) भू- सर्वेक्षण के दौरान जिला सर्वेक्षण अधिकारी , नियम 34 के अध्यधीन रहते हुए कुछ आम विशिष्टताओं जैसे स्थान (परिक्षेत्र ) भूमि उपयोग प्रशासनिक इकाई इत्यादि के आधार पर उतने ब्लाक संख्यांक विरचित कर सकेगा जितने कि वह ठीक समझे । इस प्रयोजन के लिए वह विद्यमान ब्लाक सख्यांकों को मान्य कर सकेगा , ब्लाक संख्यांकों को पुनर्गठित कर सकेगा , नवीन ब्लाक सख्यांक विरचित कर सकेगा विद्यमान ब्लाक संख्याकों को विभाजित अथवा समामेलित कर सकेगा या सर्वेक्षण संख्याकों अथवा उनके भाग को ब्लॉक संख्यांकों में संपरिवर्तित कर सकेगा । 3982
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(2 ) विद्यमान ब्लाक संख्यांक तब तक वैसे ही बने रहेंगे जब तक कि उन्हें पुनर्क्रमांकित किया जाना आवश्यक न समझा जाए, ऐसी दशा में उन्हें नए सिरे से पुनर्क्रमांकित किया जाएगा ।
(3) इस प्रकार बनाए रखे गए अथवा परिवर्तित किए गए संख्यांक ब्लाक संख्यांक कहलाएंगे ।
37. भू-सर्वेक्षण के दौरान भू- खण्ड संख्यांकों की विरचना ( 1 ) भू- सर्वेक्षण के दौरान जिला सर्वेक्षण अधिकारी ब्लॉक संख्यांक के भीतर ऐसी भूमि से संस्पर्शी प्रत्येक भाग को एक पृथक भूखंड संख्यांक देगा जो-
(क) पृथक स्वत्व अधिकार के अधीन धारित है तथा धारा 59 के अधीन कृषिक प्रयोजन से भिन्न प्रयोजन के लिए निर्धारित है ।
(ख ) राज्य सरकार द्वारा कृषिक प्रयोजन से भिन्न प्रयोजन के लिए दिए गए पृथक पट्टे के अधीन धारित है; '
(ग) आबादी के भीतर भू- खण्ड के रूप में मान्य है जिसमें मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( दखलरहित भूमि आबादी तथा वाजिब- उल- अर्ज ) नियम , 2020 के अधीन तैयार किये गये विन्यास (ले- आउट ) के भू- खण्ड भी सम्मिलित हैं, अथवा
(घ) पृथक शीर्ष के अधीन वर्गीकृत दखलरहित भूमि अथवा धारा 237 की उपधारा ( 1 ) में विनिर्दिष्ट किसी सुभिन्न प्रयोजन के लिए अथवा धारा 233-क के अधीन किसी सुभिन्न लोक प्रयोजन के लिए पृथक रखी गई भूमि है ।
स्पष्टीकरण-एक-यदि उपरोक्त खण्ड (क ) अथवा खण्ड ( ख ) में एक से अधिक प्रयोजन के लिए ऐसी भूमि धारित है जिसकी सीमाओं को स्पष्ट रूप से सीमांकित किया जा सकता हो, तो ऐसे प्रत्येक प्रयोजन के लिए पृथक-पृथक भू- खण्ड संख्यांक विरचित किए जाएंगे । स्पष्टीकरण. दो- सार्वजनिक भूमि जैसे मार्ग , उद्यान , आबादी में खुले स्थान , सार्वजनिक भवन तथा परिसर , नाले, नदियां , तालाब, छोटी पहाड़ियां तथा दखलरहित भूमि में रिक्त स्थानों में उतनी संख्या में भू- खण्ड विरचित किए जाएंगे जितनी कि आवश्यक हो । (2 ) विन्यास (ले-आउट ) अनुमोदित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी , जिला सर्वेक्षण अधिकारी द्वारा मांग किए जाने पर सर्वेक्षण के अधीन भूमि के अनुमोदित विन्यास (ले- आउट ) की प्रतियां उसे प्रस्तुत करेगा । इस प्रकार अनुमोदित विन्यास ( ले - आउट ) के भू- 3983
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
खण्ड संहिता के अधीन भू- खण्ड संख्यांक समझे जाएंगे और ऐसे प्राधिकारी के अनुमोदन के बिना उनके विन्यास (ले - आउट ) में कोई परिवर्तन मान्य नहीं किया जाएगाः
परंतु यदि ऐसा प्राधिकारी मांग किए जाने से तीस दिन के भीतर अनुमोदित विन्यास (ले- आउट ) की प्रतियां प्रस्तुत नहीं करता है तो जिला सर्वेक्षण अधिकारी किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उसे प्रस्तुत किए गए विन्यास (ले- आउट ) के भू- खण्डों को मान्य कर सकेगा अथवा ऐसे भू- खण्ड संख्यांक विरचित कर सकेगा जो वह ठीक समझे ।
(3 ) विद्यमान भू- खण्ड संख्यांक तब तक वैसे ही बने रहेंगे जब तक कि उन्हें पुनर्कमांकित किया जाना आवश्यक न समझा जाए. ऐसी दशा में उन्हें नए सिरे से पुनर्क्रमांकित किया जाएगा ।
(4) सुसंगत भू- नियोजन विधि के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए 9 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल वाला कोई नवीन भू- खण्ड संख्यांक विरचित नही किया जायेगा।
(5) इस प्रकार बनाए रखे गए अथवा परिवर्तित किए गए संख्यांक भू- खण्ड संख्यांक कहलाएंगे ।
38. भू- सर्वेक्षण के दौरान सर्वेक्षण संख्यांकों, ब्लॉक संख्यांकों तथा भू- खण्ड संख्यांकों का क्रमांकित किया जाना ( 1 ) भू- सर्वेक्षण के दौरान ग्राम अथवा सेक्टर के समस्त सर्वेक्षण संख्यांकों तथा ब्लॉक संख्यांकों को अनन्य ( युनिक ) संख्यांक दिये जायेगे ।
(2) प्रत्येक भू- खण्ड संख्यांक दो भागों से बना संयुक्त संख्यांक होगा जिसमें प्रथम भाग ब्लॉक संख्यांक होगा जिससे कि भू- खण्ड संख्यांक संबंधित है तथा दूसरा भाग अनन्य (युनिक ) संख्यांक होगा।
39. जलोढ़ भूमि ( 1 ) यदि जलोढ़ भूमि का क्षेत्र आधे हेक्टेयर से अधिक नहीं है तो पश्चात्वर्ती भू- सर्वेक्षण होने तक उसको लगे हुए सर्वेक्षण संख्यांक के एक उपविभाजन के रूप में रखा जायेगा और लगे हुए सर्वेक्षण संख्यांक का भूमिस्वामी धारा 203 के उपबंधों के अनुसार ऐसी जलोढ भूमि का उपयोग करने का हकदार होगा । पश्चात्वर्ती भू- सर्वेक्षण में उक्त विभाजन को लगे हुए सर्वेक्षण संख्यांक के साथ समामेलित किया जाएगा।
(2 ) यदि जलोढ़ भूमि का क्षेत्र आधे हेक्टेयर से अधिक है तो इसको एक नवीन सर्वेक्षण संख्यांक दिया जाएगा और ऐसी भूमि राज्य सरकार में निहित होगी ।
40. जब क्षेत्र भू- सर्वेक्षण के अधीन न हो , सर्वेक्षण संख्यांकों की विरचना, विभाजन तथा समामेलन- ( 1 ) जब कोई क्षेत्र भू- सर्वेक्षण के अधीन नहीं है तो कलेक्टर , पूर्वगामी 3984
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
नियमों के अनुसार सर्वेक्षण संख्यांकों को पुनर्गठित कर सकेगा, नवीन सर्वेक्षण संख्यांक विरचित कर सकेगा, विद्यमान सर्वेक्षण संख्यांकों को विभाजित अथवा समामेलित कर सकेगा अथवा ब्लॉक संख्यांकों अथवा उनके भाग को सर्वेक्षण संख्यांकों में संपरिवर्तित कर सकेगा ।
(2) कोई नवीन सर्वेक्षण संख्यांक 0.02 हेक्टेयर से कम क्षेत्र का विरचित नहीं किया जाएगा,
(3) दो अथवा अधिक संस्पर्शी सर्वेक्षण संख्यांकों को समामेलित किया जा सकेगा बशर्ते प्रत्येक सर्वेक्षण संख्यांक के भूधृति धारी समान हों।
(4 ) ऐसे पुनर्गठित , विरचित, विभाजित अथवा समामेलित सर्वेक्षण संख्यांकों को अनन्य (युनिक ) संख्यांक दिए जाएंगे । पश्चात्वर्ती भू- सर्वेक्षण में इन सर्वेक्षण संख्यांकों को नये सिरे से पुनर्क्रमांकित किया जाएगा;
परन्तु पुराने सर्वेक्षण संख्यांक अथवा ब्लॉक संख्यांक खसरे से काटे नहीं जाएंगे किन्तु बिना क्षेत्र के तथा नवीन सर्वेक्षण संख्यांकों के प्रति निर्देश सहित दर्शाए जाएंगे तथा पश्चात्वर्ती भू- सर्वेक्षण के दौरान समाप्त कर दिये जाएंगे ।
(5 ) कोई सर्वेक्षण संख्यांक ग्राम अथवा सेक्टर के क्षेत्र का भाग न रह जाने पर ही निरस्त किया जा सकेगा ।
41. जब क्षेत्र भू- सर्वेक्षण के अधीन न हो , ब्लॉक संख्यांकों की विरचना, विभाजन तथा समामेल - ( 1 ) जब कोई क्षेत्र भू- सर्वेक्षण के अधीन ना हो तो कलेक्टर, पूर्वगामी नियमों के अनुसार ब्लॉक संख्यांकों को पुनर्गठित कर सकेगा , नवीन ब्लॉक संख्यांक विरचित कर सकेगा, विद्यमान ब्लॉक संख्यांकों को विभाजित अथवा समामेलित कर सकेगा अथवा सर्वेक्षण संख्यांकों अथवा उनके भाग को ब्लॉक संख्यांकों में संपरिवर्तित कर सकेगा । (2) जब कोई ब्लॉक संख्यांक इस प्रकार विभाजित नहीं किया जायेगा जिससे एक भू- खण्ड एक से अधिक ब्लॉक संख्यांकों में आए ।
(3) दो या दो से अधिक ब्लॉक संख्यांक यदि वे संस्पर्शी हों , समामेलित किए जा सकेंगे ।
(4) ऐसे पुनर्गठित, विरचित, विभाजित या समामेलित ब्लॉक संख्यांकों को अनन्य (युनिक) संख्यांक दिये जाएंगे । पश्चातवर्ती भू- सर्वेक्षण में इन ब्लॉक संख्यांकों को नये सिरे से पुनर्क्रमांकित किया जायेगाः 3985 भाग 1 ]
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परन्तु पुराने ब्लॉक संख्यांक अथवा सर्वेक्षण संख्यांक खसरे से काटे नहीं जाएंगे किन्तु बिना क्षेत्र के तथा नवीन ब्लॉक संख्यांकों के प्रति निर्देश सहित दर्शाए जाएंगे तथा पश्चातवर्ती भू- सर्वेक्षण के दौरान समाप्त कर दिये जाएंगे ।
(5) कोई ब्लॉक संख्यांक ग्राम अथवा सेक्टर के क्षेत्र का भाग न रह जाने पर ही निरस्त किया जा सकेगा ।
42. जब क्षेत्र भू-सर्वेक्षण के अधीन न हो, भू- खण्ड संख्यांकों की विरचना, विभाजन तथा समामेलन , - ( 1 ) जब कोई क्षेत्र भू- सर्वेक्षण के अधीन नहीं है तो कलेक्टर , पूर्वगामी नियमों के अनुसार भू- खण्ड संख्यांकों को विन्यास (ले आउट ) अनुमोदित करने वाले सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के अनुसार पुनर्गठित कर सकेगा , नवीन भू- खण्ड संख्यांक विरचित कर सकेगा , विद्यमान भू- खण्ड संख्यांकों को विभाजित अथवा समामेलित कर सकेगा।
(2) ऐसे पुनर्गठित , विरचित , विभाजित अथवा समामेलित भू- खण्ड संख्यांकों को अनन्य ( यूनिक ) संख्यांक दिए जाएंगे। पश्चात्वर्ती भू- सर्वेक्षण में इन भू- खण्ड संख्यांकों को नए सिरे से पुनर्प्रामांकित किया जाएगाः
परन्तु पुराने भू- खण्ड संख्यांक भू-अभिलेख से काटे नहीं जाएंगे किन्तु बिना क्षेत्र के तथा नवीन भू- खण्ड संख्यांकों के प्रति निर्देश सहित दर्शाए जाएंगे तथा पश्चात्वर्ती भू- सर्वेक्षण के दौरान समाप्त कर दिए जाएंगे ।
43. ग्रामों की विरचना, समामेलन तथा विमाजन . -( 1 ) किसी नगरेतर क्षेत्र में स्थित सर्वेक्षण संख्यांकों तथा ब्लॉक संख्याकों के समूह को ऐसा ग्राम विरचित करने के लिए समूहीकृत किया जाएगा , जिसमें
(क) केवल एक ग्राम स्थल अथवा आबादी हो अथवा यदि एक से अधिक ऐसे आबादी स्थल हों जो एक दूसरे के निकट स्थित हों;
(ख ) ऐसे समस्त क्षेत्र के कृषकों द्वारा जिसे कि ग्राम के रूप में गठित किया जाना है, दखलरहित भूमि पर सामुदायिक अधिकारों का साझा उपयोग किया जाता हो । (ग ) ग्राम का क्षेत्रफल आठ सौ हेक्टेयर से अधिक नहीं हो सिवाय तब के जब कि इसके परिणामस्वरूप किसी अन्य ग्राम का क्षेत्र अस्सी हेक्टेयर से कम हो रहा हो।
(2) दो या दो से अधिक ग्रामों को समामेलित किया जा सकेगा बशर्ते निम्नलिखित शर्तों । की पूर्ति होती हो - 3986
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(क) वे लगे हुए तथा संस्पर्शी हों;
(ख ) ग्राम स्थल अथवा आबादियां लगी हुई हों अथवा केवल एक ग्राम स्थल या । आबादी हो तथा अन्य वीरान ग्राम हो;
(ग ) दखलरहित भूमि पर ग्राम के समस्त कृषक सामुदायिक अधिकारों का साझा उपयोग करते हों; और
(घ ) समामेलन के पश्चात् विरचित नवीन ग्राम का क्षेत्रफल साधारणतया आठ सौ हेक्टेयर से अधिक न हो ।
(3) किसी ग्राम को दो या अधिक ग्रामों में विभाजित किया जा सकेगा बशर्ते निम्नलिखित में से एक या अधिक शर्तों की पूर्ति हो जाती हो , अर्थात्ः
(क ) एकल इकाई के रूप में सुविधापूर्वक प्रबंध करने की दृष्टि से विद्यमान ग्राम का क्षेत्रफल बहुत अधिक हो;
(ख ) अलग अलग तथा सुभिन्न इकाईयों में स्थित दखलरहित भूमि पर सामुदायिक अधिकारों का उपयोग किया जा रहा हो;
( ग ) किसी ऐसे विद्यमान ग्राम की दशा में जो भागतः अथवा पूर्णतः पुराने वीरान ग्रामों से मिलकर बना हो , इनमें से एक या अधिक तब से स्थिर आबादी वाले क्षेत्रों में विकसित हो गए हों , और
(घ ) इसी प्रकार के अन्य कारण हों:
परन्तु किसी ग्राम का इस प्रकार कोई विभाजन अनुज्ञात नहीं किया जाएगा जिसके परिणामस्वरूप ऐसा ग्राम विरचित हो जहां निम्नलिखित में से कोई स्थिति बनती हो-
(क) अस्सी हेक्टेयर से कम क्षेत्र;
(ख ) पिछली जनगणना के आधार पर दो सौ से कम जनसंख्या; अथवा (ग ) नवीन और पुराने ग्रामों की आबादियों के बीच दो किलोमीटर से कम की दूरी ।
(4) इस प्रकार समामेलन अथवा विभाजन के पश्चात् नवीन विरचित प्रत्येक ग्राम के समस्त सर्वेक्षण संख्यांक , ब्लॉक संख्यांक तथा भू- खण्ड संख्यांक नए सिरे से पुनक्रमांकित किए जाएंगे तथा भू- अभिलेखों के नए सेट तैयार किए जाएंगे । ऐसा समामेलन अथवा विभाजन आगामी राजस्व वर्ष के प्रारम्भ से प्रभावी होगा। 3987 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
44. सेक्टर का नगरेत्तर क्षेत्र के रूप में अधिसूचित होना. यदि नगरीय क्षेत्र अथवा उसके भाग का कोई सेक्टर नगरेत्तर क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया जाता है तो यह एक ग्राम के रूप में विरचित होगा । ऐसे सेक्टर अथवा उसके भाग के भू- अभिलेख नवीन विरचित ग्राम के भू- अभिलेख होंगे । उपखण्ड अधिकारी धारा 233 -क के अधीन लोक प्रयोजनों के लिए पृथक रखी गई भूमि, यदि कोई हो , को ध्यान में रखते हुए धारा 234 के अधीन ऐसे ग्राम के लिए निस्तार पत्रक तैयार करेगा।
45. सेक्टरों की विरचना , समामेलन तथा विभाजन. ( 1 ) किसी नगरीय क्षेत्र में स्थित निकटवर्ती सर्वेक्षण संख्यांकों, ब्लॉक संख्यांकों तथा भू-खण्ड संख्यांकों के समूह को सेक्टर विरचित करने के लिए समूहीकृत किया जाएगा ।
(2) प्रत्येक सेक्टर सामान्यतया इस प्रकार विरचित किया जाएगा जिससे कि वह नगरीय स्थानीय निकाय के एक या अधिक वार्डों का सह विस्तारी हो । तथापि, यदि किसी कारण से यह संभव न हो तो सेक्टरों की विरचना में निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखा जाएगा
(क) स्थानीय नगरीय निकायों के वार्डों की सीमाएं;
( ख ) भू- भाग की स्थायी अथवा महत्वपूर्ण विशिष्टताएं जैसे जल निकाय , पहाड , सड़कें नहरें इत्यादिः और
(ग) सेक्टर का क्षेत्रफल , जो 40 से 200 हेक्टेयर के बीच होना चाहिए ।
(3) दो या अधिक सेक्टरों को उनके भाग के रूप में नवीन अभिलेख विरचित करने के लिए समामेलित किया जा सकेगा अथवा किसी सेक्टर को दो या अधिक सेक्टरों में विभाजित किया जा सकेगा। इस प्रकार समामेलन अथवा विभाजन हो जाने पर प्रत्येक नवीन विरचित सेक्टर के समस्त सर्वेक्षण संख्यांक, ब्लॉक संख्यांक तथा भू- खण्ड संख्यांक नए सिरे से पुनक्रमांकित किए जाएंगे तथा भू- अभिलेखों के नए सेट तैयार किए जाएंगे । ऐसा समामेलन अथवा विभाजन आगामी राजस्व वर्ष के प्रारम्भ से प्रभावी होगा ।
46. समस्त भूमियों का निर्धारण, जिला सर्वेक्षण अधिकारी ऐसी समस्त भूमियों पर, जिन पर भू- सर्वेक्षण विस्तारित होता है , मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( भू- राजस्व का निर्धारण तथा पुनर्निधारण ) नियम , 2018 के उपबंधों के अनुसार निर्धारण करेगा चाहे, ऐसी भूमियां भू- राजस्व के भुगतान के दायित्वाधीन हों या न हों।
47. नियोजन विधि के उल्लंघन में भूमि का विकास.- इन नियमों के अधीन भू- अभिलेख तैयार करने तथा उन्हें अद्यतन करने का उद्देश्य एक डाटाबेस तैयार करना व उसका अनुरक्षण करना है जो फील्ड की वास्तविक स्थिति का रूपण कर सके। अतः एव जिला 3988
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
सर्वेक्षण अधिकारी , कलेक्टर, किसी अन्य राजस्व अधिकारी अथवा इन नियमों के अधीन उनके अनुदेशों के अनुसार कार्य कर रहे व्यक्तियों द्वारा की गई कोई कार्यवाही किसी व्यक्ति द्वारा किए गए भू- नियोजन विधि के किसी उल्लंघन को माफ नहीं करेगी और न ही ऐसा उल्लंघन माफ कर दिया गया समझा जाएगा ।
48. नक्शे तथा अधिकार अभिलेख तैयार करने में सहायता की अध्यपेक्षा. किसी राजस्व अधिकारी , राजस्व निरीक्षक, नगर सर्वेक्षक अथवा पटवारी द्वारा भूमि के किसी धारक तथा आबादी में किसी धारक को धारा 120 के अधीन जारी नोटिस प्ररूप-तेईस में होगा और उसमें वह दिनांक विनिर्दिष्ट होगा जिसको कि नोटिस ग्रहीता से स्थल पर उपस्थित होने की अपेक्षा की जाए। यदि नियत दिनांक को नोटिस ग्रहीता उपस्थित नहीं होता है तो राजस्व अधिकारी , राजस्व निरीक्षक, नगर सर्वेक्षक अथवा पटवारी मामले में एक पक्षीय कार्यवाही कर सकेंगे ।
49. ग्राम की सीमाओं का सीमांकन.- ( 1 ) किसी ग्राम की सीमाओं का कम से कम 10 सीमा चिन्हों से सीमांकन किया जाएगा जिनकी विशिष्टियां अनुसूची- एक में दिए गए अनुसार होंगी ।
(2) धारा 124 की उपधारा ( 2 ) के अधीन नियत सीमा चिन्हों की विशिष्टियां अनुसूची-एक में दिए गए अनुसार होंगी ।
(3 ) आयुक्त, भू-अभिलेख , समय समय पर सीमा चिन्हों का स्थान निर्धारित करने, उन्हें नियत करने तथा उनके अनुरक्षण के लिए निर्देश जारी कर सकेगा।
50. धारक की भूमि और दखलरहित भूमि के बीच सीमा चिन्ह. किसी धारक की भूमि और दखलरहित भूमि के बीच की सीमा को धारा 127 के अधीन पत्थर लगा कर अथवा वृक्षारोपण किया जाकर सीमांकित किया जाएगा । दखलरहित भूमि से. लगी हुई निजी भूमि पर पत्थर लगाए जाएंगे अथवा वृक्षारोपण किया जाएगा। पत्थरों की विशिष्टियां अनुसूची- एक में दिए गए अनुसार होंगे।
51. धारा 135 के अधीन आदेश के प्रकाशन की रीति. -( 1 ) धारा 135 की उपधारा ( 1 ) अधीन कलेक्टर द्वारा पारित आदेश निम्नलिखित रीति में प्रकाशित किया जाएगाः-
(एक) इसकी एक प्रति ग्राम में लोक समागम के किसी स्थान पर चस्पा की जाएगी.
(दो) इसे ग्राम में डुग्गी पीट कर उद्घोषित किया जाएगा; और 3989-
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
(तीन ) इसकी एक प्रति अर्जन से प्रभावित होने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भेजी जाएगी ।
(2) आदेश की एक प्रति तहसीलदार को भेजी जाएगी जो सम्बन्धित भू- अभिलेखों में आवश्यक परिवर्तन करवाएगा । 3990
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
अध्याय -13
मसाहती ग्राम खसरा तैयार करने के निर्देश
जिन पहाड़ी क्षेत्रों के गांवों की सीमाएं निश्चित नहीं होती हैं तथा जिन गांवों के लिए कोई ट्रावर्स डेटा तैयार नहीं किये जा सकते हैं, उन्हें मसाहती ग्राम कहा जाता है । जिन गाँव का ट्रैवर्स डाटा पूर्व में तैयार नहीं हुआ है उन्हें भी मसाहती ग्राम के रूप में जाना जाता है। मसाहती ग्रामों का अभिलेख नियत प्ररूप में तैयार किया जायेगा ।
जिन गांवों का भू- मापन नहीं हुआ हो, उनका खसरा तैयार करने संबंधी निर्देश -
जिन गांवों का भू- मापन नहीं हुआ हो उन गांवों का अभिलेख तैयार करते समय निम्नलिखित निर्देशों का पालन किया जाएगा
1. मसाहती खसरा नियमों में निर्धारित प्ररुप- दो में रखा जावेगा ।
2. प्रत्येक खेत में अंतर करने के लिए, ( 1 ) गांव के उस भाग संबंधी खार , हार , चक्क या तर्फ जिसमें वह स्थित हो, तथा (2) खेत के नाम संबधी व्यौरे प्रविष्ट किए जाएंगे । यदि खेत का कोई नाम न हो तो पटवारी को उसका कोई न कोई स्थानीय नाम देना चाहिए । 3. किसी एक व्यक्ति के द्वारा धारित भूमि के संबद्ध क्षेत्र को एक ही खेत माना जाता है भले ही उसमें अनेक भू- खण्ड,डोलियां या बंधिया हों ।
4. खसरे में खाते की भूमि और ऐसी अन्य भूमि सम्मिलित होगी जिनको भू-मापन क्रमांक दिये गये हों या जिन्हें किसी विशेष प्रायोजन के लिए रक्षित रखे जाने हेतु कोई नाम दिया गया हो ।
5. पटवारी मसाहती खसरा लिखने के पूर्व , गांव की अनुमानतः मोटी रुपरेखा तैयार कर लेगा और उसमें उन विभिन्न भागों को चिह्नाकित कर लेगा, जिनमें कि वह विभाजित है ताकि उसे खसरा लिखने में सहायता मिल सके।
6. प्रत्येक खेत का क्रमांक देने के बाद प्ररूप - दो के कॉलम 2 में इसकी प्रविष्टि की जावेगी। 7. प्रत्येक खेत क्रमांक की प्रविष्टि एवं स्थल निरीक्षण के उपरान्त उक्त खेत पर कब्जेदार का नाम आदि की प्रविष्टि प्ररूप- दो के कॉलम 4 में की जाएगी ।
8. प्रत्येक खेत की नम्बरिंग उपरान्त उसका क्षेत्रफल , जो डिजिटली प्राप्त हुआ है, प्ररूप - दो के कॉलम 5 में अंकित किया जाएगा ।
9. खेत में उगाई गई फसले प्ररूप-दो के कॉलम 6 में प्रविष्टि की जाएंगी। जब किसी खेत में एक से अधिक फसलें हों या उसमें आंशिक रुप से फसल बोई गई हो और आंशिक रुप 3991 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
से वह पड़ती हो तो पटवारी उसके कुल क्षेत्रफल को स्थल पर सर्वेक्षण कर वास्तविक रुप से पडती का रकबा प्ररूप- दो के कॉलम 10 में अंकित करेगा ।
10. प्ररूप- दो के कॉलम 7 में ली गई फसल का क्षेत्रफल अंकित किया जाएगा । यदि फसल सिंचित है तो क्षेत्रफल को गोले के अन्दर दर्शाया जाएगा। सिंचाई का साधन कैफियत प्ररूप-दो के कॉलम 11 में अंकित किया जाएगा ।
11. कब्जेदार का क्षेत्र संबंधी ब्यौरा तथा उसके द्वारा भुगतान की गई पट्टे की रकम सहित कैफियत के खाने में लिखा जाएगा ।
12. खसरे के अंत में पटवारी निम्नलिखित ब्यौरा प्रविष्ट करेगा -
अ- वर्ष के दौरान सिंचाई के लिए प्रयोग में लाए गए कुओं की संख्या।
ब- सिंचाई के लिए प्रयोग में लाए गए तालाबों की संख्या ।
स- गांव में हलों की संख्या।
द- गांव में जुताई के लिए काम में आने वाले पशुओं की संख्या ।
य- जुताई के लिए उपयोग में आने वाले ट्रेक्टरों की संख्या। 3992
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
अध्याय-14
ड्रोन सर्वेक्षण
वर्तमान में सर्वेक्षण की आधुनिक तकनीको में ड्रोन तकनीकी से सर्वेक्षण एक महत्वपूर्ण विधा है। यद्यपि सेटेलाइट इमेज से सर्वेक्षण भी प्रचलन में है परन्तु कुछ विशिष्ट गुणों के कारण ड्रोन सर्वे सेटेलाइट इमेज से ज्यादा उपयोगी एवं प्रभावशाली सिद्ध होता है जो निम्नलिखित है: -
1. सर्वेक्षण का समय सर्वेक्षक स्वयं तय सकता है एवं अंतराल भी निश्चित कर सकता है । 2. ड्रोन द्वारा ली गयी इमेज का रिज़ोल्युशन सेटेलाइट इमेज की तुलना में ज्यादा होता है जिससे बहुत ही सूक्ष्म लेवल का डिटेल सर्वे भी संभव है ड्रोन द्वारा ली गयी इमेज में छत पर रखी गयी बाल्टी को भी चिन्हित किया जा सकता है ।
3. ड्रोन सर्वे छोटे क्षेत्र सर्वेक्षण हेतु सस्ता एवं सुविधाजनक भी है सेटेलाइट इमेज कैप्चर में न्यूनतम सर्वेक्षण क्षेत्र की बाध्यता होती है जबकि ड्रोन सर्वे में सर्वेक्षक छोटा क्षेत्र भी सर्वे हेतु चुन सकता है ।
ड्रोन सर्वेक्षण हेतु सर्वेक्षण प्रक्रिया
यद्यपि ड्रोन सर्वेक्षण से सर्वेक्षक कम समय में अधिक क्षेत्र का सर्वेक्षण कर सकता है परन्तु सटीकता एवं सर्वेक्षण के उद्देश्यों के अनुसार इस इस प्रक्रिया को बहुत ही कुशलता के साथ किया जाना जरूरी है । ड्रोन सर्वेक्षण हेतु सर्वेक्षण प्रक्रिया को प्रमुख रूप से तीन भागों में विभक्त किया जा सकता है: -
1. बेस स्टेशन की स्थापना;
2. ड्रोनफ्लाइंग;
3. फीचर एक्सट्रैक्शन ।
1. बेस स्टेशन की स्थापना एवं DGPS observation
ड्रोन सर्वेक्षण हेतु यह बहुत ही महत्वपूर्ण चरण होता है वर्तमान में बेस स्टेशन को स्थेतिक रूप देने के लिए DGPS ( Differential Global positioning System ) प्रयोग किया जाता है जबकि भविष्य में यह CORS ( Continuously Operated Reference station ) द्वारा संचालित हो सकेंगे ।
बेस स्टेशन की स्थापना दो प्रकार से की जा सकती है
1. पूर्व निर्धारित स्टेशन पर ( DGPS ) का उपयोग कर
II . नवीन चयनित स्थान पर ( DGPS ) का उपयोग कर 3993 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
i . पूर्व निर्धारित स्टेशन पर ( DGPS ) का उपयोग कर
बेस स्टेशन की स्थापना हेतु प्रयास यह हो कि पूर्व निर्धारित नियंत्रण बिंदुओ पर इसकी स्थापना की जावे । जिससे पूर्ववत किये गए सर्वेक्षण के साथ किये जा रहे सर्वेक्षण की समरूपता स्थापित की जा सके। राजस्व विभाग द्वारा पूर्व में स्थापित नियंत्रण बिंदुओ के नेटवर्क का उपयोग करने हेतु भूलेख पोर्टल पर या पटवारी बस्ता से इनकी स्थिति प्राप्त की जा सकती है ।
ii . नवीन चयनित स्थान पर ( DGPS ) का उपयोग कर
यदि पूर्व निर्धारित नियंत्रण बिंदु की उपलब्धता नहीं है या निर्धारित सर्वेक्षित क्षेत्र से दूरी नियत दूरी पर उपलधता नहीं है तो नवीन नियंत्रण बिंदु की स्थापना की जा सकती है। इस हेतु नवीन बिंदु पर ट्रावेर्स कर पूर्व निर्धारित बिंदुओ से Co- ordinate transfer किये जाते हैं । ड्रोन फ्लाइंग से पूर्व जियोमेट्रिक नेटवर्क को बनाया जाता है ।
बेस स्टेशन की स्थापना एवं ऑब्जरवेशन से सम्बधित महत्वपूर्ण तथ्य निमंलिखित है- बेस स्टेशन पर एंटीना को निर्धारित बिंदु के शीर्ष पर रखे ।
बेस स्टेशन पेड़ , मकान आदि बाधाओं से छायांकित ना हो ।
ऑब्जरवेशन करते समय सर्वेक्षक को इंस्ट्रूमेंट से दूर रहना चाहिए और इसके पास में नही खड़े होना चाहिए ।
Transition altitude
Aaomare how toBase
Select
Switchto manual hover
commands10m
Manualhover
10 m
Base(10 m above HomeWaypoint)
Switch to manual hover
Automabs, ver to Base
Select roww
Manualhover commands10m
0m 3994
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
यह सुनिश्चित करे की observation यंत्र यूएसबी केबल के माध्यम से पॉवर बैंक कनेक्ट हो , फलस्वरूप बाधा रहित पॉवर सप्लाई प्राप्त की जा सके।
2. ड्रोन फ्लाइंग
ड्रोन फ्लाइंग इस सर्वेक्षण की महवपूर्ण प्रक्रिया है । ड्रोन फ्लाईंग कितनी हाइट पर किया जा रहा है, इस से ही ड्रोन इमेज का रेसोलुसन ( GSD ) में निर्धारित होता है एवं डाटा का स्केल भी निर्धारित हो जाता है ।
ड्रोन फ्लाइंग सर्वेक्षण प्रक्रिया हेतु सावधानियाँ :
ड्रोन सर्वेक्षण हेतु उड़ान के लिए खुला स्थान चुना जाना चाहिए जिससे जन- धन हानि की संभावना ना हो ।
सुनिश्चित करें कि मौसम की स्थिति उड़ान के लिए उपयुक्त है।
वायु गति ( जमीन ) 7 मीटर / सेकंड तक ।
आदर्श तापमान-12 ° C से 40 ° CI
वर्षा या हिमपात में सर्वेक्षण हेतु ड्रोन ना उड़ाए ।
उड़ान का समय 40 मिनट तक सीमित हो ।
सुनिश्चित करें कि बैटरी पर्याप्त रूप से चार्ज है ।
सुनिश्चित करें कि फर्मवेयर अपडेटेड हैं।
3 नक्शा निर्माण करना: -
फीचर एक्सट्रैक्शन ड्रोन सर्वेक्षण का एक महत्वपूर्ण अवयव है । ड्रोन सर्वेक्षण फीचर एक्सट्रैक्शन से अभिप्राय ड्रोन इमेज प्राप्त कर उनका ओर्थो-रेक्टीफीकेसन कर सर्वेक्षण हेतु संरचनाओं के वेक्टर बनाने से है । सर्वप्रथम ओर्थो-रेक्टीफीकेसन की प्रक्रिया पूर्ण की जाती है। तदुपरांत नक्शा निर्माण एवं ग्राउंड सर्वे कर अधिकार अभिलेख का निर्माण किया जाता है । 3995
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
चित्र में ड्रोन फ्लाइंग से प्राप्त ड्रोन इमेज दर्शाई गयी है एवं दूसरे चित्र नक्शा निर्माण से प्राप्त नक्शा दर्शाया गया है-
चित्र- ग्राम 035 - पिटरीमाल, हल्का 00014-दुल्लोपुर , रा.नि.म. 01 - रयपुरा , तहसील 02- शहपुरा, जिला 52-डिंडोरी [ भाग 1 3996
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
अध्याय-15
ड्रोन ( UAV ) के माध्यम से भू- सर्वेक्षण
मध्यप्रदेश की सीमाओं के भीतर स्थित किसी भी भूमि का सर्वेक्षण करने का कार्य मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता , 1959 एवं उसके अर्न्तगत निर्मित भू- सर्वेक्षण तथा भू- अभिलेख नियम, 2020 के अंतर्गत किया जा सकता है । सर्वेक्षण के कार्य में अत्याधिक मानवीय श्रम और समय की आवश्यकता होती है । यदि इस कार्य को वर्तमान में उपलब्ध तकनीक का प्रयोग कर किया जावे तो मानवीय श्रम की बचत कार्यपूर्णता में लगने वाले समय में कमी तथा कार्य करने में सहज होने वाली मानवीय त्रुटियों में कमी लाई जा सकती है अर्थात मानवीय श्रम एवं तकनीकि का समुचित उपयोग कर कम समय में सर्वेक्षण कर गुणवत्ता युक्त अधिकार अभिलेख तैयार किया जा सकता है ।
मध्यप्रदेश में आबादी भूमि के नक्शे एवं अधिकार अभिलेख नहीं बने थे । ड्रोन तकनीक का प्रयोग करते हुए आबादी क्षेत्र का नक्शा तथा कम्प्यूटर एवं इंटरनेट का उपयोग करते हुए सॉफ्टवेयर के माध्यम से अधिकार अभिलेख तैयार किया गया इस हेतु संहिता के अधीन नियमों में परिवर्तन करते हुए सर्वेक्षण की प्रक्रिया निर्धारित की गई एवं विभिन्न चरणों एवं विभिन्न स्तरों पर किये जाने वाले कार्यों को लिपिबद्ध कर सर्वेक्षण की मार्गदर्शिका तैयार की गई।
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, 1959 की धारा 64 , 107 ( 1 ) (ख ) एवं मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख ) नियम, 2020 के अंतर्गत समस्त भूमि के सर्वेक्षण किये जाने का प्रावधान एवं प्रक्रिया का निर्धारण किया गया है । किसी भूमि सर्वेक्षण एवं अधिकार अभिलेख निर्माण के लिए आवश्यक है कि सर्वे की प्रक्रिया के प्रारंभ से ही इसके हितग्राहियों की सक्रीय सहभागिता सुनिश्चित की जावे । इस हेतु विशेष ग्राम सभा आयोजित कर हितग्राहियों को योजना की विशिष्टताओं से अवगत कराया जावे । ग्राम सभा में रखे जाने वाले विषय "परिशिष्ट-1 " में वर्णित हैं ।
सफल तरीके से सर्वेक्षण कार्य पूर्ण करने हेतु यह आवश्यक है कि ड्रोन उडाने पर प्रारूप नक्शा तैयार करने का कार्य तकनीकि रूप से सक्षम एजेंसी द्वारा किया जाये। प्रारूप नक्शा के आधार पर अधिकार अभिलेख निर्माण का कार्य राजस्व अमले द्वारा किया जावे। प्ररूप नक्शा के साथ-साथ अधिकार अभिलेख को अंतिम रूप देने के उपरान्त एजेंसी द्वारा अंतिम नक्शा तैयार कर प्रदान किया जाना सर्वे कार्य की पूर्णता के लिए आवश्यक है । ऐजेंसी , राजस्व अमला एवं नागरिक इन सभी की सहभागिता ही सफल भू- सर्वेक्षण की कुंजी है । 3997
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
सर्वेक्षण एवं अधिकार अभिलेख निर्माण हेतु मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( भू- सर्वेक्षण तथा भू- अभिलेख ) नियम , 2020 के अंतर्गत निर्देश निम्नानुसार हैं , इन निर्देशों में जहाँ भी नियम का उल्लेख किया गया है उसका आशय उक्त नियमों से है ।
1. ड्रोन या सेटेलाइट इमेजरी के आधार पर भू- सर्वेक्षणः-
नवीन तकनीकों के माध्यम से भू- सर्वेक्षण का कार्य तीन चरणों में किया जायेगा, जो निम्नानुसार हैं:
A. प्रथम चरण : प्रारंभिक तैयारी
इस चरण में निम्न कार्य किये जायेंगे:
a. कार्य करने के लिए एजेंसी का चयन
b . महत्त्वपूर्ण जानकारी का आदन-प्रदान
८. सर्वेक्षण की पूर्व तैयारी
1.. विभिन्न समितियों का गठन
H.
विभिन्न स्तर पर निगरानी के लिए चैकलिस्ट
B. द्वितीय चरण: सर्वे की कार्यवाही
इस चरण में निम्न कार्य किये जायेंगे:
a . प्रारूप नक़्शे के निर्माण से पूर्व के कार्य
b. प्रारूप नक़्शे का निर्माण
८. प्रारूप नक़्शे का सत्यापन ( groundtruthing) एवं अधिकार अभिलेख का निर्माण
८. तृतीय चरणः सर्वे पश्चात कार्यवाही
a) प्रारूप अधिकार अभिलेख का प्रकाशन
b) दावा-आपत्ति
c) अधिकार अभिलेख का अंतिम प्रकाशन
2. प्रथमचरण : प्रारंभिक तैयारी
2.1 . प्रदेश स्तर पर सर्वे कार्य हेतु एजेंसी का चयन करने की कार्यवाही की जावेगी ।
2.2 . महत्वपूर्ण जानकारी का आदान प्रदान
2.2.1 . आयुक्त भू-अभिलेख द्वारा ग्राम के खसरा नक्शा एवं उपलब्ध सैटेलाईट इमेजरी में सर्वेक्षण भूमि के स्थानिक विवरण ( Spatial Distribution ) का अवलोकन एवं विश्लेषण कर सर्वेक्षण भूमि की सीमा निश्चित कर ऐजेंसी को दिया जायेगा । [ भाग 1 3998
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
2.2.2 . ड्रोन द्वारा सर्वेक्षण क्षेत्र के प्रारूप नक्शे को संपत्ति धारक की जानकारी से लिंक करने हेतु सर्वे सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जायेगा ।
2.2.3 . आयुक्त भू- अभिलेख द्वारा राजस्व ग्रामवार सेटेलाइट इमेज के ऊपर सर्वेक्षण भूमि की सीमा को सुपरइम्पोस कर सर्वेक्षित भूमि के नक्शा की इमेज भेजी जाएगी । जिससे पटवारी द्वारा मौके पर सर्वेक्षित भूमि की सीमा निर्धारित करने में आसानी होगी (" परिशिष्ट-2 " इमेज का उदाहरण ) में प्रदर्शित है ।
2.3 . सर्वेक्षण की पूर्व तैयारी
2.3.1. विभिन्न समितियों का गठन
जिले में सर्वे के कार्य का क्रियान्वयन एवं सतत निगरानी विभिन्न समितियों के माध्यम से की जायेगी। उन समितियों का स्वरूप निम्नानुसार होगा: -
I. जिला स्तरीय समिति-
पद
समिति के सदस्य
क्र.
3
2
1
अध्यक्ष
कलेक्टर (जिला सर्वेक्षण अधिकारी )
1.
सदस्य
2.
पुलिस अधीक्षक
सदस्य
3. मुख्य कार्यपालन अधिकारी , जिला पंचायत
सदस्य
4. प्रभारी अधिकारी भू-अभिलेख
सदस्य-सचिव
5. अधीक्षक भू-अभिलेख
सदस्य
6. जिला सूचना अधिकारी, एनआईसी
सदस्य
7. जिला प्रबंधक, जिला ई- गवर्नेस सोसायटी
विशेष आमंत्रित सदस्य एजेंसी का प्रतिनिधि
8.
समिति के कर्तव्यः
1 ) जिला स्तरीय समिति द्वारा महीने में कम से कम एक बार योजना के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा ।
2) आम जनता में जागरूकता एवं योजना के प्रचार- प्रसार की कार्यवाही ( IEC) । 3999
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
3 ) जिले में उपस्थित एजेंसी के अधिकारीगण एवं कर्मचारियों की लोजिस्टिक्स सहायता हेतु संपर्क अधिकारी की नियुक्ति।
4 ) यह सुनिश्चित करना कि प्रशिक्षण आयोजित करने हेतु कार्यशाला, भवन या जिला पंचायत ग्राम / जनपद पंचायत / पंचायत के सभागृह आदि निःशुल्क उपलब्ध कराये जावें ।
5 ) यह सुनिश्चित करना कि तहसील स्तरीय प्रशासनिक अमला तथा जिला पंचायत , जनपद पंचायत , ग्राम पंचायत के सदस्य एवं आम जनता को सर्वेक्षण की प्रक्रिया एवं गतिविधियों से भली- भांती अवगत कराया जाये जिससे इस कार्य में उनकी सहभागिता प्राप्त हो सके ।
6 ) विभिन्न हितधारियों के प्रशिक्षण ( कैपेसिटी बिल्डिंग ) कार्यक्रमों का प्रबंध एवं प्रशिक्षकों से समन्वय ।
7 ) प्रशिक्षण हेतु लोजिस्टिक्स का प्रबंध ।
II . तहसील स्तरीय समिति-
समिति के सदस्य
पद
क्र.
3
2
1
अध्यक्ष
1. अनुविभागीय अधिकारी
सदस्य-सचिव 2. तहसीलदार
सदस्य
3 . मुख्य कार्यपालन अधिकारी , जनपद पंचायत
4. संबंधित थाना प्रभारी
सदस्य
5.
सदस्य
अधीक्षक भू- अभिलेख अथवा उनके द्वारा नामांकित
सदस्य
समिति के कर्तव्यः
1 ) सर्वेक्षण करने के लिए जमीनी स्तर की गतिविधियों के लिए समन्वय । [भाग 1 4000
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
2) उपस्थित एजेंसी के उपस्थित अधिकारीगण एवं कर्मचारियों द्वारा जमीनी स्तर पर किये जाने वाले कार्य में सहायता एवं समन्वय ।
3) आम जनता में जागरूकता एवं योजना के प्रचार प्रसार की कार्यवाही ।
4 ) यह सुनिश्चित करना की विभिन्न विभागों को भू- सर्वेक्षण में शामिल उनकी संपत्ति के चिन्हांकन हेतु उपस्थिति की सूचना दे दी गयी है ।
III . ग्राम पंचायत स्तरीय समिति-
पद
समिति के सदस्य
क्र.
3
2.
1
अध्यक्ष
1. सरपंच , संबंधित ग्राम पंचायत
सदस्य
2. सचिव , ग्राम पंचायत
सदस्य-सचिव
पटवारी
3.
ग्राम कोटवार
सदस्य
4.
सदस्य
5. ग्राम सभा द्वारा नामांकित दो सदस्य
समिति के कर्तव्यः
1 ) सर्वेक्षण के बारे में गाँव के निवासियों में जागरूकता पैदा करना।
2 ) ड्रोन उड़ान के पूर्व चूने के घोल से चिन्हांकन का कार्य सुनिश्चित करना।
3 ) डोर टू डोर सर्वे में सहायता एवं समन्वय ।
4) अधिकार अभिलेख संपादन कार्य में सहायता।
5 ) सर्वेक्षण करने के लिए जमीनी स्तर की गतिविधियों के लिए समन्वय ।
6 ) दावे-आपत्ति के समाधान में सहायता करना ।
7 ) ड्रोन द्वारा भू- मापन कार्य के संपादन के लिए आवश्यकता अनुसार श्रमिक एवं सामग्री इत्यादि का प्रबंध ग्राम पंचायत द्वारा किया जाना ।
2.3.2 . अधिकारियों द्वारा कार्य की प्रगति एवं निगरानी हेतु चैकलिस्ट 4001
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
**1 ) तहसीलदार एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत द्वारा भूमि सर्वे के कार्य में अधीनस्थ कर्मचारियों में समन्वय एवं विभिन्न चरणों में कार्य की प्रगति को बनाये रखने का दायित्व निर्वहन किया जाना है अतः उनके द्वारा किये जाने वाले कार्यों की चैकलिस्ट क्रमशः "परिशिष्ट-3 " एवं " परिशिष्ट-4 " पर संलग्न है ।
2 ) ग्राम स्तर पर दल द्वारा किये जाने वाले कार्यों की निगरानी हेतु जानकारी पटवारी के माध्यम से प्राप्त किये जाने हेतु पटवारी की चैकलिस्ट " परिशिष्ट- 5" पर संलग्न है । :
3. द्वितीय चरण सर्वे की कार्यवाही
3.1 . प्रारूप नक़्शे के निर्माण से पूर्व के कार्य
3.1.1 . अधिसूचना का प्रकाशनः आयुक्त , भू- अभिलेख द्वारा संहिता की धारा 64 के अन्तर्गत चयनित ग्रामों की भूमि के सर्वेक्षण हेतु नियमों में विहित प्ररूप - बारह अधिसूचना जारी की जायेगी ।
3.1.2. न्यायालय में प्रकरण दर्ज करनाः अधिसूचना अनुसार कलेक्टर जिला सर्वेक्षण अधिकारी के न्यायालय में प्रत्येक ग्राम के लिए पृथक -पृथक प्रकरण दर्ज किये जायेंगे ।
3.1.3 . उदघोषणा का प्रकाशनः जिला सर्वेक्षण अधिकारी सर्वेक्षण प्रारम्भ होने की उदघोषणा नियमों में विहित प्ररूप- चौदह में जारी करेगा । ऐसी उदघोषणा मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता ( राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया ) नियम , 2019 के नियम 31 में विहित रीति में जारी की जाएगी और उस क्षेत्र में व्यापक रूप से प्रसारित होने वाले दो दैनिक समाचार पत्रों में भी उदघोषणा प्रकाशित की जाएगी । 3.1.4 . ग्राम सभा का आयोजनः जिला कलेक्टर द्वारा निर्धारित दिनांक को विशेष ग्राम सभा आयोजित की जावेगी । ग्रामसभा में ड्रोन सर्वेक्षण के महत्व, लाभ एवं कार्य पद्धति की जानकारी एवं जनजागृति राजस्व अधिकारी / कर्मचारी , सरपंच , उपसरपंच, सचिव, ग्राम पंचायत सदस्य, जनप्रतिनिधि व नागरिकों को दी जायेगी । 3.2. प्रारूप नक्ों का निर्माण
3.2.1 शासकीय भूखंडों का चिन्हांकनः पटवारी , सचिव एवं सम्बन्धित विभाग के कर्मचारी द्वारा सर्वेक्षण भू- भाग (क्षेत्र में ) में स्थित शासन के विभिन्न [भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
4002
विभागों की परिसम्पत्तियों ( स्कूल, आंगनबाडी, अस्पताल इत्यादि ) की जानकारी तहसीलदार द्वारा गठित दल को दी जायेगी एवं स्थल पर चिन्हांकित किया जावेगा ।
3.2.2 ड्रोन सर्वे के ठीक पूर्व की तैयारी
1. ड्रोन द्वारा भूमि सर्वेक्षण हेतु निश्चित दिनांक के एक दिवस पूर्व ड्रोन द्वारा सर्वे कार्य की जानकारी ग्रामवासियों को दिये जाने हेतु सार्वजनिक मुनादी करायी जावे ।
II . पटवारी द्वारा सर्वेक्षण भूमि की बाह्य सीमा को चूना / चूने के घोल के माध्यम से मौके पर चिन्हित किया जायेगा ।
III . सर्वेक्षण भूमि में यदि आबादी भूमि शामिल है तो आबादी भूमि पर निर्मित क्षेत्र एवं उसके संलग्न खुला क्षेत्र की सीमाएँ संबंधित संपत्ति धारक से चूना / चूने के घोल से चिन्हित कराई जाये । निर्मित संपत्ति के साथ खुला क्षेत्र न होने की स्थिति में उक्त संपत्ति सीमाओं को चिन्हित करने की आवश्यकता नही है । संपत्ति की सीमायें चिन्हित करते समय यदि कोई विवाद उत्पन्न होता है तो ग्राम स्तरीय समिति के सहयोग से इसका निराकरण किया जायेगा ।
IV शासकीय सार्वजनिक उपयोग की ग्राम पंचायत की संपत्ति एवं विभिन्न विभाग की संपत्तियों का चिन्हांकन तहसीलदार द्वारा गठित दल के द्वारा किया जायेगा । विभागों की संपत्ति के चिन्हांकन के समय संबंधित विभाग का प्रतिनिधि उपस्थित रहेगा ।
V ड्रोन के उड़ान भरने एवं उतरने हेतु खुला स्थान चुना जाये जिससे आमजन या सार्वजनिक संपत्तियों को कोई नुकसान न पहुंचे।
V. आबादी भूमि में स्थित शासकीय , सार्वजनिक ग्राम पंचायत संपत्तियों के चिन्हाकंन हेतु आवश्यकता अनुसार श्रमिकों की व्यवस्था संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा सुनिश्चित की जायेगी ।
VI . सर्वे की तैयारी हेतु चैकलिस्ट पटवारी द्वारा " परिशिष्ट -5 " में तैयार की जायेगी तथा हस्ताक्षर कर तहसीलदार को भेजी जायेगी । 4003
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
3.3 . प्रारूप नक़्शे का सत्यापन (groundtruthing ) एवं अधिकार अभिलेख का निर्माण 3.3.1 . प्रारूप नक्शाः ऐजेंसी द्वारा तैयार किया गया प्रारूप नक्शा आयुक्त, भू- अभिलेख द्वारा संबंधित जिला कलेक्टर/ जिला सर्वेक्षण अधिकारी को उपलब्ध कराया जायेगा । प्रारूप नक़्शे में सर्वेक्षित क्षेत्र के सभी भूखण्ड क्रमांकित होंगे । यह क्रमांक उत्तर- पश्चिम के कोने से प्रारंभ होकर दक्षिण-पूर्व के कोने पर समाप्त होंगे। यदि आबादी क्षेत्र भी सर्वे में शामिल है तो इस प्रारूप नक़्शे में आबादी क्षेत्र की सीमा से लगे हुए अतिरिक्त प्लाट ( यदि कोई हों तो ) भी दर्शित होंगे, जिन पर क्रमांक नहीं होगा । इनका उपयोग भौतिक सत्यापन में सुविधा के लिए किया जा सकेगा।
3.3.2 . नक़्शे का स्थल सत्यापनः तहसीलदार / सहायक सर्वेक्षण अधिकारी द्वारा प्रारूप नक़्शे का स्थल सत्यापन संबंधित पटवारी , ग्राम पंचायत सचिव एवं कोटवार से मौके की स्थित अनुसार कराया जावेगा। आबादी सर्वेक्षण हेतु यह कार्य डोर - टू- डोर सर्वे के आधार पर कराया जायेगा ।
मौके पर या डोर- टू-डोर सर्वे की प्रक्रिया :
:
1. घर - घर जाकर किये गये सर्वे के समय जो लोग कृषि भूमि पर काबिज या आबादी भूमि पर निवासरत पाये जाते हैं उनके मामलों में उनके अधिभोगी होने की शासन द्वारा निर्धारित दिनांक अथवा उसके पश्चात् की दिनांक में विधिपूर्वक काबिज / बसे होने की तसदीक की जायेगी ।
2. पटवारी , ग्राम पंचायत सचिव एवं कोटवार द्वारा घर- घर जाकर नियम-6 में वर्णित अधिकार अभिलेख प्ररूप-तीन में प्रत्येक प्लॉट की प्रविष्टियाँ संधारित की जायेगी ।
3 प्रारूप नक़्शे में दर्शित भूखण्ड / प्लाट के अधिभोगी परिवार के मुखिया का नाम तैयार की जा रही अधिकार अभिलेख में लिखा जायेगा ।
4. अधिकार अभिलेख संधारित करने हेतु समग्र आई.डी. का उपयोग प्राथमिकता से किया जायेगा । इसके अलावा व्यक्तिगत जानकारी जैसे कि मोबाइल क्रमांक, ईमेल एवं आधार क्रमांक इत्यादि भी संकलित की जाएगी ।
5.जिन मामलों में समग्र आई.डी. नहीं होगी पंचायत से समग्र आई.डी. विधिवत जारी कराते हुए जानकारी पंजी में संधारित की जायेगी।
6. यदि एक भूखण्ड में एक से अधिक परिवार काबिज / निवासरत है तो प्रत्येक परिवार के मुखिया का नाम आपसी सहमति के आधार पर उनके हिस्सा का [ भाग 1 4004
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
उल्लेख करते हुए अधिकार अभिलेख में दर्ज किया जायेगा । संपत्ति धारक के नाम का निर्धारण करने की विभिन्न परिस्थितियां "परिशिष्ट -6" में वर्णित हैं । परिवार की परिभाषाः परिवार से आशय ऐसे व्यक्तियों का समूह जो सामान्यतः एक साथ रहते हैं तथा एक ही रसोई से तैयार भोजन ग्रहण करते हैं जब तक की व्यवसाय की बाध्यता के कारण उनमें से कोई सदस्य ऐसा न करता हो । 7. अधिकार अभिलेख हेतु संधारित जानकारी की सर्वे सॉफ्टवेयर पर विधिवत प्रविष्टि की जायेगी। सर्वे सॉफ्टवेयर पर प्रविष्टि दर्ज करने की कार्यवाही पूर्ण होने के उपरांत सॉफ्टवेयर के माध्यम प्रारूप अधिकार अभिलेख का प्रिंट लिया जा सकेगा।
3.3.3 . प्रारूप नक्शा में संशोधनः स्थल जॉच व सत्यापन किये जाने के पश्चात प्रारूप नक्शा, यदि प्रारूप नक्शा में संशोधन प्रस्तावित किया गया तो, आवश्यक संसोधन किये जाने हेतु आयुक्त , भू-अभिलेख के माध्यम से ऐजेंसी को भेजा जाएगा ।
3.3.4 . संशोधित प्रारूप नक्शाः ऐजेंसी उपरोक्तानुसार संशोधित प्रारूप नक्शा तैयार कर आयुक्त , भू- अभिलेख के माध्यम से संबंधित जिले के कलेक्टर/ जिला सर्वेक्षण अधिकारी को भेजेगें ।
4. तृतीय चरणः सर्वे पश्चात कार्यवाही
4.1 . प्रारूप अधिकार अभिलेख का प्रकाशनः
जिला / सहायक सर्वेक्षण अधिकारी प्रारूप अधिकार अभिलेख को नियम -17 के तहत प्ररूप- पंद्रह में एक उदघोषणा के साथ प्रकाशित करेगा जिसमें हितबद्ध व्यक्ति से उंदघोषणा में यथावर्णित तारीख को या उसके पूर्व जो कि उदघोषणा के प्रकाशित होने की दिनांक से पन्द्रह दिन से कम की नहीं होगी , उसके समक्ष दावे तथा आपत्तियां , यदि कोई हों, फाइल करने की अपेक्षा की जाएगी । इसके अतिरिक्त हितबध्द संपत्ति- धारकों को नियम -17 के तहत प्ररूप - सोलह में व्यक्तिगत सूचना पत्र भी जारी किया जायेगा तथा नियम-17 के तहत प्ररूप - सत्रह में इसकी प्राप्ति ली जावेगी ।
4.2. दावा आपत्ति
सहायक सर्वेक्षण अधिकारी द्वारा ग्रामवासियों की ओर से प्राप्त दावे/आपत्तियों की जांच , विहित रीति से सुनवाई करते हुए , की जावेगी। जांच हेतु निम्न कार्यवाही की जाएगीः 4005
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
4.2.1 . सूचना पत्र में नियत दिनांक को अधिकार अभिलेख में दर्ज प्रत्येक प्रविष्टि को सहायक सर्वेक्षण अधिकारी द्वारा उपस्थित व्यक्तियों को पढ़कर सुनाया जाएगा एवं प्रविष्टियों की जांच की जाएगी ।
4.2.2 . यदि हित रखने वाला कोई व्यक्ति किसी प्रविष्टि का ठीक होना स्वीकार कर ले और कोई अन्य व्यक्ति उस पर आपत्ति ना उठाए , तो उसकी स्वीकारोक्ति अधिकारी द्वारा टिप्पणी के खाने में दर्ज कर ली जाएगी और प्रविष्टि को अंतिम रूप दे दिया जाएगा ।
4.2.3 . सहायक सर्वेक्षण अधिकारी द्वारा अंतिम भू-अभिलेख तैयार करते समय अपने न्यायालय में लंबित प्रकरणों की सूची नियम -21 के तहत प्ररूप- इक्कीस में तैयार की जाएगी।
4.2.4 . यदि कोई विसंगति पायी जाती है तो अधिकार अभिलेख में विधि अनुसार यथोचित संसोधन किया जायेगा ।
4.3. अधिकार अभिलेख का अंतिम प्रकाशन
4.3.1 . जिला सर्वेक्षण अधिकारी द्वारा अधिकार अभिलेख के प्रारुप के प्रकाशन उपरान्त प्राप्त समस्त दावे/आपत्ति का निराकरण होने के बाद अधिकार अभिलेख को अंतिम रूप दिया जाएगा। यदि नक़्शे में कोई संशोधन हुआ है तो उक्त संशोधन को ऐजेंसी के माध्यम से संशोधित कराया जायेगा । ऐजेंसी उपरोक्तानुसार नक्शा संशोधित कर आयुक्त भू- अभिलेख के माध्यम से संबंधित जिले के जिला सर्वेक्षण अधिकारी को भेजेगें ।
4.3.2 . जब किसी ग्राम का अधिकार अभिलेख अंतिम रूप से तैयार हो जाए , तब जिला सर्वेक्षण अधिकारी द्वारा नियम-20 के तहत प्ररुप-उन्नीस में सूचना का प्रकाशन www.rcms.gov.in पर किया जायेगा ।
4.3.3 . जिला सर्वेक्षण अधिकारी दावे-आपत्ति की सुनवाई के पश्चात अंतिम भू- अभिलेख तैयार करते समय , यदि किसी न्यायालय का ऐसा निर्णय प्राप्त हुआ जो भू- अभिलेख में दर्ज प्रविष्टियों को प्रभावित करता हो, ऐसे मामलों की सूची नियम -21 के तहत प्ररूप - बीस में तैयार करेगा ।
4.3.4. जिला सर्वेक्षण अधिकारी , कलेक्टर अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी को नियम-22 में वर्णित समस्त दस्तावेज हस्तांतरित करेगा, जो रिकॉर्ड रूम में संग्रहित किये जायेंगे । 4006
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
4.3.5 . उपरोक्त समस्त कार्यवाही पूर्ण होने के पश्चात् आयुक्त, भू- अभिलेख द्वारा सर्वेक्षण की कार्यवाही समाप्त घोषित किये जाने हेतु नियम -28 के तहत प्ररूप- तेरह में सर्वे समाप्त किये जाने की अधिसूचना जारी की जायेगी।
2. सर्वेक्षण कार्य के क्रियान्वयन हेतु समय- सीमा का निर्धारण
समय-सीमा
जिम्मेदारी गतिविधियां
क्र.
3
2
1
T+0
1.
आयुक्त, भू- अभिलेख सर्वेक्षण की अधिसूचना जारी किया जाना
2
जिला सर्वेक्षण अधिकारी जिला सर्वेक्षण अधिकारी द्वारा अधिसूचना में वर्णित ग्रामों में सर्वेक्षण हेतु उदघोषणा जारी किया जाना
3. ग्रामवासियों को सर्वेक्षण की जानकारी देने हेतु ग्राम सभा का आयोजन
जिला सर्वेक्षण अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत 4
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत परियोजना कार्य का लाभ उठाने के बारे में ग्रामीणों को संवेदनशील बनाना
ग्राम पंचायत पटवारी 5 ड्रोन उडान के पहले संपत्तिधारकों के साथ संम्पत्ति की सीमाओं पर चूना लाईन द्वारा अंकन
टिप्पणी ( यदि कोई हो )
5
4
Days
संहिता की धारा-64 के अधीन सर्वेक्षण हेतु अधिसूचना
T+8 Days
विशेष ग्राम सभा का आयोजन
T+ 15 Days
T+ 30 Days
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सरपंच एवं पंचायत सचिव के माध्यम से ग्रामीणों को सर्वेक्षण एवं उसके लाभ के संबंध में जानकारी प्रदाय करेंगे।
T+45
Days
सर्वेक्षण क्षेत्र में ड्रोन द्वारा सर्वेक्षण के पहले भूमि धारकों की संपत्ति की सीमाओं पर चूना/चूने के घोल द्वारा 2 दिन पूर्व अंकन किया जावेगा । 4007 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
चयनित ऐजेंसी
T+45 Days
6 ड्रोन द्वारा सर्वेक्षण क्षेत्र की फोटोग्राफी करना
चयनित ऐजेंसी
T+75 Days
7 ड्रोन डेटा प्रोसेसिंग और आर्थो रेक्टीफिकेशन
पटवारी / सचिव
8 डोर- टू-डोर सर्वे कार्य
T+ 120 Days
9
सहायक सर्वेक्षण
अधिकारी
T+ 150 Days
अधिकार अभिलेख का प्रकाशन एवं दावा आपत्तियों का निराकरण
10
जिला
सर्वेक्षण
अधिकारी
T+ 165 Days
अधिकार अभिलेख एवं नक्शा का अंतिम प्रकाशन
आयुक्त
भू
अभिलेख
T+ 180 Days
11 सर्वेक्षण संक्रियाओं के समापन की अधिसूचना जारी किया जाना । 4008
[ भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
परिशिष्ट - 1
आबादी सर्वे हेतु विशेष ग्राम सभा में रखे जाने वाले विषय
1. ग्राम पंचायत का हित
संपत्ति रजिस्टर तैयार होने से ग्राम पंचायत की स्थायी आय की व्यवस्था होगी ।
ग्राम पंचायत को उसके क्षेत्राधिकार में संपत्ति धारण करने वालों की जानकारी से समग्र आई.डी. से अद्यतन रहने पर ग्राम विकास की योजना बनाने में सुविधा होगी।
ग्राम पंचायत की संपत्ति, शासकीय व सार्वजनिक संपत्ति की सीमा एवं क्षेत्रफल निश्चित होने से उनका रखरखाव किया जा सकेगा और उनसे संबंधित सीमा विवाद में कमी आवेगी ।
प्रत्येक संपत्ति की सीमा एवं क्षेत्रफल सुनिश्चित होने से ग्राम में निजी सम्पत्ति के विवाद कम होंगे।
2. ग्राम वासियों के हित
प्रत्येक संपत्ति धारक को संपत्ति का प्रमाण-पत्र एवं भूमिस्वामित्व प्राप्त होगा ।
यंत्रों (ड्रोन ) के माध्यम से कार्य होने के कारण अभिलेख का निर्माण शीघ्रता एवं शुद्धता के साथ होगा ।
सार्वजनिक उपयोग की संपत्ति का संरक्षण होगा ।
रास्ते, ग्राम पंचायत की खुली जगह, नाले, सरोवर इनकी सीमाएं निश्चित होंगे जिससे उनका उपयोग भी सुनिश्चित हो सकेगा ।
संपत्ति का प्रमाण पत्र प्राप्त होने से मकान पर बैंक से कर्जा लेना आसान होगा।
आबादी क्षेत्र का भू- मापन पूर्णतः पारदर्शी होगा और हर एक संपत्ति धारक को उनका अधिकार अभिलेख प्राप्त होगा ।
3. ड्रोन सर्वे कार्य के समय ग्रामवासियों के कर्तव्य
ग्राम सभा में अधिक से अधिक सख्या में उपस्थित होकर आबादी क्षेत्र के भू- मापन की प्रक्रिया एवं उससे होने वाले लाभ की जानकारी प्राप्त करें ।
ग्राम पंचायत को अपनी संपत्ति की जानकारी देना चाहिए ।
ग्रामपंचायत सचिव एवं पटवारी को अपनी सम्पत्ति, नाम, पता, मोबाइल नंबर , आधार नम्बर , समग्र आदि जानकारी देना चाहिए जिससे अधिकार अभिलेख में सही जानकारी आ सके।
गांव में अपने पडोसी मित्र और रिश्तेदारों को ड्रोन सर्वे के बारे में जानकारी देना चाहिए ।
ऐसे व्यक्ति जिनकी गांव में संपति है और वे गांव से बाहर रहते है उनको इस सर्वे के बारे में जानकारी देनी चाहिए और उनके मोबाइल नंबर पटवारी अथवा पंचायत सचिव को उपलब्ध कराना चाहिए ।
ड्रोन से सर्वे के दौरान संपत्ति धारकों द्वारा अपनी संपत्ति को चूना डालकर सीमा बनाने से वे भविष्य में होने वाले विवादों को रोक सकेगे।
यह कार्य नये सिरे से होने के कारण सम्पत्ति धारक मौके पर आपसी सहमति से चूना लाइन डालकर अपने विवादों को पूर्णरूप से हल कर सकेगें ।
किसी सम्पत्ति के विषय में यदि कोई विवाद किसी न्यायालय में चल रहा है तो उसके बारे में जानकारी देना चाहिए । 4009
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
+
זור
INDEX
PREPAREDBY
1700
VillageTeharkaKhas,TehsilNiwari,Dist.Niwari
1783
1781/8
परिशिष्ट-2
आबादीभूमिकीसेटेलाइटइमेज:
नोट:-यहाँयहजाननाआवश्यकहै,आबादीमेंस्थितशासकीय,सार्वजनिकग्रामपंचायतसंपत्तियोंकेचिन्हाकंनकी सैटिलाइटइमेजरीकारेसोल्यूशन0.5मीटरहोनेसेकुछस्थानोपरयहसीमापेड़ोंअथवाभवनोंकेऊपरसेगुज़रतीहुई प्रतीतहोगीइसस्थितीमेंउससीमाकोमौकेपरमापकरचूना/चूनेकेघोलसेचिन्हितकरायीजाए।यदिकिसीजगह आबादीसीमामौकेपरचिन्हितकरनेमेंविवादकीस्थितिहैतोतहसीलदारद्वारागठितदलइसकासत्यापनकरचूना/ चूनेकेघोलसेआबादीकीसीमाचिन्हितकीजावेगी। 2 4010
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
परिशिष्ट- 3
तहसीलदार / सहायक सर्वेक्षण अधिकारी की चेकलिस्ट
जिला...
तहसील ..
ग्राम का नाम ..
क्षेत्रफल
आबादी का सर्वे नम्बर
..........
गांव की जनसंख्या .
हाँ / नही
दिनांक
विवरण
क्रमांक
1 क्या उक्त ग्राम की आबादी क्षेत्र का ड्रोन सर्वे पहले नही हुआ है?
2 क्या ड्रोन उडान की सक्षम अधिकारी से प्राप्त स्वीकृति सर्वे ऑफ़ इंडिया को प्राप्त हो चुकी है?
3 क्या स्थानीय पुलिस थाना को ड्रोन सर्वे की जानकारी और समय सारणी दे दी गई है?
4 क्या कर्मचारियों को समय सारणी के अनुसार कार्य का वितरण किया है?
5 क्या ड्रोन सर्वे की समय सारणी ग्राम पंचायत के पटल पर प्रदर्शित की है?
6 क्या विशेष ग्राम सभा आयोजित कर सर्वे की जानकारी ग्राम वासियों को दी गई है ?
7 क्या आबादी भूमि में निवासरत व्यक्तियों की जानकारी को समग्र डाटा में अद्यतन कर दिया गया है ?
8 शासकीय विभाग की सम्पत्तिओं के चिन्हांकन के संबंध में सर्व सम्बन्धित को उपस्थित होने हेतु सूचित किया गया है?
9 क्या सेटेलाइट इमेज पर अंकित ग्राम आबादी की सीमा मौके पर चिन्हित की गयी है ?
क्या चूने/ चूने के घोल द्वारा सभी संपत्तियो को चिन्हित किया है?
10
11 पटवारी एवं सचिव द्वारा आबादी सीमा में शासन के विभिन्न विभागों को आबंटित भूमि (स्कूल , आंगनबाडी , अस्पताल इत्यादि ) की जानकारी तहसीलदार द्वारा गठित दल को दी गयी है ?
ड्रोन द्वारा सर्वेक्षण होने के पूर्व यह सूची तहसीलदार उपखण्ड/ उप जिला सर्वेक्षण अधिकारी को सौपेगे ।
हस्ताक्षर व दिनांक
तहसीलदार
तहसील ...... जिला.....
4011
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
परिशिष्ट - 4
मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत की चेकलिस्ट
जिला...
तहसील ..
ग्राम का नाम....
.क्षेत्रफल
आबादी का सर्वे नम्बर
गांव की जनसंख्या.
दिनांक हाँ नही
विवरण
क्रमांक
1 क्या विशेष ग्राम सभा आयोजित कर सर्वे की जानकारी ग्राम वासियों को दी गई है?
2 क्या ड्रोन सर्वे की समय सारणी ग्राम पंचायत के पटल पर प्रदर्शित की है?
3 क्या आबादी भूमि में निवासरत व्यक्तियों की संपत्तियों को समग्र आई.डी. डाटा में अद्यतन कर दिया गया है ?
4 क्यासार्वजनिक / शासकीय संपत्ति को चिन्हित करने के लिएग्राम पंचायत के पास पर्याप्त मात्रा में चूना/ चूने के घोल उपलब्ध है ?
5 क्या ड्रोन उडान के पूर्व की सभी तैयारियां हो चुकी है?
ड्रोन द्वारा सर्वेक्षण होने के पूर्व यह सूची मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुविभागीय अधिकारी को सौपेगे
हस्ताक्षर व दिनांक
मुख्य कार्यपालन अधिकारी
जिला
जनपद पंचायत 4012
[ भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
परिशिष्ट - 5
ड्रोन से आबादी सर्वे के दौरान पटवारी की चेकलिस्ट
ग्राम का नाम .............
तहसील..
.क्षेत्रफल
आबादी का सर्वे नम्बर
गांव की जनसंख्या
यह सूची पटवारी तहसीलदार को सौपेगे ।
हाँ / नही
दिनांक
विवरण
क्रमांक
1 क्या अलग-अलग क्रम मे ड्रोन सर्वे के बारे मे शुरू से आखरी तक नोटिस वितरण आदि कार्यों को पूर्ण कर लिया गया है?
2 क्या ग्राम वासियों को ड्रोन सर्वे के बारे में मुनादीकर जानकारी दी गयी है ?
3 सेटेलाइट इमेज के ऊपर प्राप्त आबादी क्षेत्र सीमा का प्रतिरूपण कर चूना/ चूने के घोल से सीमा नियत कर दी गई है ?
4 क्या निर्देशानुसार सम्पतियों को चुना/ चूने के घोल से चिन्हित किया जा चुका है?
5. क्या ड्रोन सर्वे प्रारंभ होने से समाप्त होने तक सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारियों/ ग्रामीणों की सर्वे कार्य के संबंध में सहायता हेतु आपके दल के सभी सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित कर ली गयी है ?
हस्ताक्षर व दिनांक
पटवारी का नाम व मोबाईल नंबर 4013
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
परिशिष्ट - 6
आबादी सर्वे कार्य के दौरान संपत्ति धारक के नाम का निर्धारण करते समय निम्नांकित परिस्थितियों मौके पर हो सकती हैं : -
परिस्थिति-01-ऐसी संपत्ति जहाँ एक मकान में एक परिवार निवासरत हो, उसमें परिवार के मुखिया का नाम संबंधित प्लॉट नंबर के साथ अंकित किया जावेगा।
Plot No. 2001
उदाहरण 02- प्लॉट नंबर 2001 , राहुल पुत्र राजेश
परिस्थिति-02 - ऐसी संपत्ति जहाँ एक मकान में एक से अधिक परिवार निवासरत हैं, उसमें प्रत्येक परिवार के मुखिया का नाम एवं हिस्सा की जानकारी संबंधित प्लॉट नंबर के साथ अंकित किया जावेगा ।
Plot No. 2001
उदाहरण 02- प्लॉट नंबर 2001 , राहुल पुत्र राजेश हिस्सा 1/2 , रवि पुत्र मोहनचंद्र हिस्सा 1/2
परिस्थिति-03 - ऐसी संपत्ति जहाँ निर्मित मकान में एक से अधिक परिवार निवास करते हैं और उनकी छत आपस में जुड़ी हुई हैं, किन्तु आने - जाने हेतु अलग-अलग दरवाजा है और स्थल पर उक्त सम्पत्ति को अलग अलग संपत्ति के रूप में नक़्शे में विभाजित कर दर्शाया जा सकता हो । प्ररूप नक्शे में ऐसी संपत्ति हेतु यदि एक ही प्लॉट नंबर अंकित किया गया है। 4014
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
Plot no1001/1
Platno1001/2
उदाहरण 03- प्राप्त प्लॉट नंबर 1001 जिसमे 02 पृथक दरवाजे हैं, दोनों परिवार के निकास हेतु, एवं परिवार की परिभाषा अनुसार 02 पृथक परिवार हैं
प्लॉट नंबर 1001/1 राहुल पुत्र राजेश
प्लॉट नंबर 1001/2 रवि पुत्र मोहनचंद्र
परिस्थिति-04 - ऐसी संपत्ति जिसमें निर्मित मकान की छत आपस में जुड़ी हुई हैं और एक से अधिक परिवार निवास करते है एवं आने- जाने हेतु एक ही दरवाजा है , या एक मकान एक मंजिल में एक या अधिक परिवार एवं दूसरी मंजिल में एक या अधिक परिवार निवासरत हों , ऐसे प्लॉट को शामिल संपत्ति माना जाकर निवासरत परिवारों के मुखिया के नाम अंकित कर हिस्सा अंकित किया जावेगा ।
उदाहरण 04- प्लॉट नंबर 1005 जिसमे निकास हेतु एक दरवाजा है एवं परिवार की परिभाषा अनुसार 03 परिवार शामिल रूप से निवासरत हैं , या तीनों परिवार मकान की अलग-अलग मंजिल / हिस्से पर निवासरत हैं, वहाँ निम्नानुसार जानकारी अंकित की जा सकेगी : -
प्लॉट नंबर 1005
राहुल पुत्र राजेश हिस्सा 1/3 , रवि पुत्र मोहनचंद्र हिस्सा 1/3 , अतुल पुत्र ज्ञानी हिस्सा 1/3 1 4015
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
(12)
सुधारकेआदेश
कॉलमसंख्या (1)से(9)तक मेंप्रविष्टियोंमें
1.भूमिकीसिंचाई संबंधीप्रास्थिति 2.भूमिपर
संरचना/वृक्ष
3.अन्यअभ्युक्तियां
4.वर्षकेदौरान
(11)
फसलके अधीन क्षेत्रफल
(10)
फसल
फसलके ब्यौरे
..खरीफ
2.रबी 3.जायद 4.अन्य
(6)
भूमि
पर
विल्लंगमतथा
प्रभार
1.बंधक
प्रक्रियाधीन1
2.दृष्टिबंधक
3.भू-अर्जन
जिला
(8)
कृषक(यदि
कोईहो)का
नाम,उसकी
माता/पिता/
पतिकानाम
तथानिवास
कापता
खसरा
प्ररूप-एक
तहसील
(7)
(नियम6देखिए)
अधीनक्षेत्रफल
.सरकारी
पट्टेदारका
नाम,उसकी
माता/पिता/
पतिकानाम
तथानिवास
कापता
2.पट्टेकी
अवधि
3.पटटेके
(6)
प्रत्येक भूमिस्वा भीका अंश
(5)
मध्यप्रदेशभू-राजस्वसंहिता(भू-सर्वेक्षणतथाभू-अभिलेख)नियम,2020
2.शासकीयभूमि
1.भूमिस्वामीका
नाम,उसकी
माता/पिता/
पतिकानाम
तथानिवास
कापता
(4)
निर्धारणकिया
गयाहै।
क्षेत्रफल (हैक्टेयर/वर्ग मीटरमें)
3.भू-राजस्व/भू -भाटक(रु. में)
2.भूमिउपयोग
जिसकेलिए
पटवारीहल्काकमांक/सेक्टरक्रमांक
(3)
भू-खण्ड1. संख्यांक (ब्लॉक कीदशा में)
(2)
भूमिके
भागका
प्रकार
(सर्वेक्षण
संख्यांक/
ब्लॉक
संख्यांक)
निर्धारितप्ररूप-मध्यप्रदेशभू-राजस्वसंहिता(भू-सर्वेक्षणतथाभू-अभिलेख)नियम,2020मेंनिर्धारितप्ररूप
ग्राम/नगर
(1)
भूमि के भाग की यूनिक आईडी [ भाग 1 4016
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
अभ्युक्तियां
(10)
बंजरभूमि अन्य कारकबा (2से5 वर्षतक) (हैक्टेयर में)
(9)
वर्तमानमें बंजरभूमि का क्षेत्रफल (प्रथमवर्ष केलिए) (हैक्टेयर में)
(8)
फसलका
क्षेत्रफल
(हैक्टेयर
में)
(7)
(हेक्टेयर
में)
जिला
(6)
वर्षकेदौरानउगाईगईफसलें
फसलकाक्षेत्रफल नाम
1.फसलकेब्यौरे
3. दोहरी
2. खेतीकारकबा
तहसील
(5)
मसाहतीखसरा
प्ररूप-दो (नियम6देखिए)
क्षेत्रफल (हैक्टेयर/वर्ग मीटरमें)
(4)
मध्यप्रदेशभू-राजस्वसंहिता(भू-सर्वेक्षणतथाभू-अभिलेख)नियम,2020
अधिकार,राजस्वतथा भाटकस्पष्टकरतेहुए अधिभोगीकानाम, माता/पिता/पतिका नामतथानिवासका पता
(3)
क्षेत्र में सम्मिलित भू-खण्डोंका संख्यांक
(2)
...........पटवारीहल्काक्रमांक/सेक्टरक्रमांक
क्षेत्र का संख्यांक अथवा/और नाम
(1)
ग्राम/नगर
ग्रामकेउस भागका नामजिसमें क्षेत्रआता हो 4017
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
अभ्युक्तियां
2.अन्यब्यौरे
1.सिंचाईसंबंधी प्रास्थिति
प्रक्रियाधीन
(11)
तथाप्रभार
3.भू-अर्जन
भूमिपरविल्लंगम
1.बंधक
2.दृष्टिबंधक
(10)
1.अधिभोगी कृषकका नाम(यदि कोईहो)
2.उसकी माता/पिता /पतिका नाम 3.निवासका पता
.जिला
(9)
संयुक्त खातेकी दशामें प्रत्येक खातेदार
केहित कीसीमा
(8)
अधिकार की प्रकृति
अधिकारअभिलेख
प्ररूप-तीन (नियम6देखिए)
(7)
3.निवासका पता
2.उसकी
माता/पिता
/पति/
पालकका
नाम
1.भूमिस्वामी/ सरकारी पट्टेदारका नाम
(6)
भूमि
उपयोग
जिसके
लिए
निर्धारण
किया
गयाहै।
मध्यप्रदेशभू-राजस्वसंहिता(भू-सर्वेक्षणतथाभू-अभिलेख)नियम,2020
(5)
1.क्षेत्रफल (हैक्टेयर/ वर्गमीटर में)
2.भू-राजस्व
(रुपयेमें)
(4)
पूर्ववर्ती सर्वेक्षण संख्यांक
(3)
भू-खण्ड संख्यांक (ब्लॉक कीदशा में)
(2)
सर्वेक्षण संख्यांक /ब्लाक संख्यांक
(1)
सरल कमांक
ग्राम/नगर...........पटवारीहल्काकमांक/सेक्टरक्रमांकतहसील 4018
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
प्ररूप-चार
(नियम 6 देखिए)
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख) नियम, 2020
मध्यप्रदेश शासन
भू-अधिकार पुस्तिका
फोटो भूमिस्वामी का नाम......
माता / पिता / पति का नाम
ग्राम / नगर का नाम
पटवारी हल्का कमांक/ सेक्टर क्रमांक
तहसील......
जिला
मुद्रा
सक्षम प्राधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर
कार्यालय का नाम व मुद्रा 4019
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
भाग- एक (क)
भू-अभिलेख
खाता संख्यांक.....
वर्ष.
भूमि में अधिकार का वर्ग (भूमिस्वामी) 1. क्षेत्रफल (हैक्टेयर / वर्ग मीटर में)
भू- खण्ड संख्यांक
(ब्लॉक की दशा में)
भूमि के भाग की यूनिक आईडी
भूमि के भाग का प्रकार (सर्वेक्षण संख्यांक /ब्लॉक संख्यांक)
(2)
(1)
2. भूमि उपयोग जिसके लिए निर्धारण किया गया है । 3. भू-राजस्व (रुपये में)
(4)
(3)
प्रत्येक भूमिस्वामी
का अंश
1. भूमिस्वामी का नाम, उसकी माता /पिता/ पति का नाम तथा निवास का पता
शासकीय भूमि
2.
(5)
(6) मौरूषी कृषक (यदि कोई हो) का नाम उसकी माता / पिता / पति का नाम तथा निवास का पता
(7) 4020
[ भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग-एक (ख)
भू-राजस्व के भुगतान के ब्यौरे
भाग-दो
न्यायालय के उपयोग के लिए (न्यायालयीन प्रकरणों में जमानत के ब्यौरे) प्रकरण क्रमांक
मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर व मुद्रा न्यायालय का नाम
जमानत की
राशि
(रुपयों में)
अभियुक्त का नाम जिसके लिए जमानत दी गई है
जमानत पर छोड़े जाने संबंधी आदेश के ब्यौरे तथा दिनांक
(5)
(3)
(4)
(6) (1) (2) 4021
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
टिप्पणी
(क) राष्ट्रीय राजमार्ग से दूरी.. से अनधिक
1. भूमि की अवस्थिति
हां
नहीं
(ख ) राज्य राज मार्ग से दूरी से अनधिक
नहीं
हां
नहीं
हां
(ग) क्या संहिता की धारा 165 के अधीन जारी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट क्षेत्र के भीतर है?
नहीं
हां
(घ) क्या संहिता की धारा 165 के अधीन जारी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट क्षेत्र भिन्न क्षेत्र में है?
नहीं
हां
(ड.) क्या भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी अनुसूचित क्षेत्र(बिहार, गुजरात , मध्यप्रदेश तथा उड़ीसा) आदेश, 1977 में वर्णित अनुसूचित क्षेत्र में है?
2. खाते का आकार
(क) लघु कृषक
नहीं
हां
(ख) सीमान्त कृषक
नहीं
हां
(ग) अन्य
नहीं
हां
3. भूमिस्वामी
(क) अवयस्क
नहीं
हां
(ख) मूर्ति अथवा पूर्त संस्था
नहीं
हां
नहीं
(ग) संहिता की धारा 165 की उपधारा (6) के अधीन घोषित आदिम जनजाति
नहीं
हां
(घ) मध्यप्रदेश भूदान यज्ञ अधिनियम, 1968 (क्रमांक 28 सन् 1968) की धारा 33 में विनिर्दिष्ट
नहीं
हां
(ड. ) संहिता की धारा 158 की उपधारा (3 ) के अधीन भूमिस्वामी अधिकार में भूमि धारण की गई है
4. क्या भूमि बंधक रखी गई है? यदि हां तो बंधकदार का नाम दीजिए
नहीं
हां
5. क्या भूमि में अधिकार पैतृक है? अथवा स्वअर्जित
स्वअर्जितत
पैतृक
संहिता से अभिप्रेत है मध्यप्रदेष भू- राजस्व संहिता , 1959 (क. 20 सन् 1959) 4022
[ भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(8)
अभ्युक्तियां
संरचना कॉलमसंख्या (1)से(7)तक मेंप्रविष्टियोंमें सुधारके आदेश
2.अन्य
3.वर्षकेदौरान
1.भूमिपर
(7)
1.बंधक
2.दृष्टिबंधक
3.भू-अर्जन प्रक्रियाधीन
तथाप्रभार भूमिपरविल्लंगम
(6)
प्रत्येक
जिला
भूमिस्वामीका अंश
(5)
उसकी माता/ पिता/ पतिका नामतथा निवासका पता
भूमिस्वामी कानाम,
तहसील........
प्ररूप-पांच (नियम6देखिए)
(4)
जिसकेलिए
निर्धारणकिया
गयाहै।
भू-राजस्व (रुपयोंमें)
2.
भूउपयोग
1. क्षेत्रफल (वर्गमीटरमें)
मध्यप्रदेशभू-राजस्वसंहिता(भू-सर्वेक्षणतथाभू-अभिलेख)नियम,2020 ग्राम/सेक्टरकीव्यपवर्तितभूमिकेब्यौरे
(3)
भू-खण्ड संख्यांक
(2)
ब्लॉक संख्यांक
(1)
भूमि के भाग की यूनिक आईडी
ग्राम/नगर...........पटवारीहल्काकमांक/सेक्टरक्रमांक 4023
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
जिला
अभ्युक्तियां
(4)
(3)
पुनर्कमांकनरजिस्टर
प्ररूप-छह (नियम6देखिए)
पूर्ववर्तीराजस्व/भू-सर्वेक्षणके दौरानतैयारकिएगएखसरामें यथाअभिलिखितपुरानासंख्यांक
संख्यांक
सर्वेक्षण
(2)
मध्यप्रदेशभू-राजस्वसंहिता(भू-सर्वेक्षणतथाभू-अभिलेख)नियम,2020
संख्यांक/ब्लॉक संख्यांक/भू-खण्ड
ग्राम/नगर..........पटवारीहल्काकमांक/सेक्टरक्रमांक तहसील
सरल क्रमांक (1) [भाग 1 4024
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
अभ्युक्ति यां
(15)
देयराषि
(14)
(13)
2.भुगतानकी विषिष्टियां
भुगतानगईराषि जिसमेंभुगतान केब्यौरेशामिल हो(रुपयोंमें) 1.भुगतानगई राषि
(12)
अद्यतनकुल मांग (रुपयोंमें)
(11)
आजदिनांक ब्याज (मध्यप्रदेष भू-राजस्व संहिता,1959 कीधारा143 केअनुसार) (रुपयोंमें)
बकाया यदि कोईहो रुपयों मे)
(10)
(9)
चालूवर्ष कीमांग (रुपयोंमें)
योग
योग!
(8)
प्ररूपसात
शास्ति(यदिकोईहै)
वाणिज्यिकफसलउपकर
(यदिकोईहै) प्रीमियम(यदिकोईहै
शालाउपकर(यदिकोईहै) पंचायतउपकर(यदिकोईहैं)
कुलभू-राजस्य(कौलम6का
(नियम8देखियें)
खातावारखतौनीअथवाजमाबंदी
*भू-राजस्वकाशीर्ष
छूट
(7)
58-कके
मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1950की धारा अधीन
(6)
निर्धारण (रुपयों मे)
(5)
भूमिका उपयोग जिसके लिए निर्धारण किया गयाहै
मध्यप्रदेशभू-राजस्वसंहिता(भू-सर्वेक्षणतथाभू-अभिलेख)नियम,2020
(4)
भूमिकोदर्षाताहै)
क्षेत्रफल(हेक्टेयर/
वर्गमीटरमें)
1.
सर्वेक्षण संख्यांक/भू-खण्ड संख्यांककेसाथ इसका/ब्लाक संख्यांकसहित ('S'कृषकभूमिको तथा'P'गैरकृषिक 2.
योग
खातेदारका
आईडी
प्रत्येक सहित कमांक) (3)
उनकेनाम
खातेदार (खातेदरों) काआईडी कमांक (संयुक्तखाते कीदषामें
यदिखातेकोमध्यप्रदेषभू-राजस्वसंहिता,1959कीधारा58-ककेअधीनछूटप्राप्तहैतोउसेकॉलम(7)में'छूटप्राप्त'केरूपमेंदर्षायाजाएगा।
(2)
*
हिस्सा
1.खातेदार (खातेदरों)का नाम,उसकी माता/पिता/ पतिकानाम तथापता
2. खातेमें
(1)
खाता कमां क 4025
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
(15)
(14)
13)
भुगतानगईराषिदेयराषि अभ्युक्तियां जिसमेंभुगतानके ब्यौरेशामिलहो
(रुपयोंमें) 1.भुगतानगईराषि 2. भुगतान की विषिष्टियां
अद्यतनकुल मांग (रुपयोंमें)
(12)
केअनुसार) (रुपयोंमें)
अद्यतनब्याज (मध्यप्रदेष भू-राजस्व संहिता,1959 कीधारा143
(11)
जाएगा।
दिनांक.....
(10)
बकायायदि कोईहो (रुपयोंमें)
(9)
चालूवर्ष कीमांग (रुपयोंमें)
योग
तहसील.....
(8)
शास्ति(यदिकोईहै)
(यदिकोईहै) प्रौमियम(यादकोईहै) शास्ति(यदिकोईहै)
(यदिकोईहै) प्रीमियम(यदिकोईहै)
भू-राजस्वकाशीर्ष
योग) शालाउपकर(यदिकोईहै)
पंचायतउपकर(यदिकोईहै) वाणिज्यिकफसलउपकर
पंचाययतउपकर(यदिकोई वाणिज्यिकफसलउपकर
प्ररूपआठ
कुलभू-राजस्व(कॉलम6का
कुलभू-राजस्व(कॉलम5का घोग) शालाउपकर(यदिकोईहै।
(नियम8देखिये)
(7)
*मध्यप्रदवे भू-राजस्व संहिता. 1959की धारा58-क केअधीन
(6)
निर्धारण (रुपयोंमें)
(5)
भूमिका उपयोग जिसकेलिए निर्धारणकिया गयाहै
कमांक/सेक्टरकमांक.
ग्रामवार/सेक्टरव्यापीभूमिस्वामीवारखतौनी
मध्यप्रदेशभू-राजस्वसंहिता(भू-सर्वेक्षणतथाभू-अभिलेख)नियम,2020
(4)
पटवारी हल्का
इसकेब्लाकसंख्यांक
सहित('S'कृषकभूमिको
तथा'P'गैरकृषिकभूमि
कोदर्षाताहै) 2. क्षेत्रफल(हेक्टेयर /वर्गमीटरमें)
संख्यांक /भू-खण्डसंख्यांक
1.सर्वेक्षण
योग
खाता संख्या अंश
खाता संख्या अंश
(3)
ग्राम/सेक्टरमें स्थितसभी खातों के
ग्राम/नगर
तथापता
खातेदार (खातेदरों)का नाम,उसकी माता/पिता/कमांक पतिकानाम
(1)
खातेदार काआईडी कमांक
* यदिखातेकोमध्यप्रदेषभू-राजस्वसंहिता,1959कीधारा58-ककेअधीनछूटप्राप्तहैतोउसेकॉलम(7)में'छूटप्राप्त'केरूपमेंदर्षाया 4026
[ भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
अभ्युक्तियां
(12)
(11)
भूमिपर संरचनाएं
(10)
भूमिकीसिंचाई संबंधिप्रास्थिति (कृषिकप्रयोजनके लिएदियेगयेपट्टे कीदषामें)
(9)
फसलके अधीन क्षेत्रफल
(8)
फसलकेब्यौरे(कृषिक भूमिकीदषामें)
फसल
1.खरीफ
2.रबी
3.जायद
4.अन्य
जिला..
(7)
भूमि पर विल्गंगमतथा प्रभार 1.बंधक 2.दृष्टिबंधक 3.भू-अर्जन कीप्रक्रियाधीन
तहसील
(6)
प्रत्येक पट्टेदार काहिस्सा (संयुक्त पट्टेकी दशामें)
प्ररूपनौ (नियम8देखियें)
सरकारीपट्टोंकारजिस्टर
पट्टेदार (पट्टेदारोंकानाम) उसकीमाता/ पिता/पतिका नामतथापता
मध्यप्रदेशभू-राजस्वसंहिता(भू-सर्वेक्षणतथाभू-अभिलेख)नियम,2020
1.भमिका
उपयोग
जिसकेलिए
पट्टादिया
गयाहै
2.
वार्षिक
भू-भाटक
(रुपयोंमे)
(3)
(हेक्टेयर/
वर्गमीटरमें)
1.पट्टेकी अवधि......... 2.पट्टेके से...तक) अधीन क्षेत्रफल
(2)
क्षेत्रफल (हेक्टेयर/ वर्गमीटरमें)
दिनांक......
ग्राम/नगरपटवारीहल्काकमांक/सेक्टरकमांक........
(1)
सर्वेक्षण
संख्यांक/
भू-खण्ड
संख्यांकब्लाक
संख्यांकसहित
('S'कृषकभूमि
कोतथा'P'गैर
कृषिकभूमिको
दर्शाताहै)
4027
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
(7)
(6)
सेवाभूमि/निस्तार भूमि/सरकारीभूमि 2.
1.भूमिस्वामी/पट्टेदारकाअभ्युक्तियां नामउसकीमाता/पिता/पति कानामतथापता
(5)
संख्यांक सर्वेक्षणसंख्यांक/ब्लॉक संख्यांक/भू-खण्ड
(4)
देशांतर
(3)
अक्षाष
प्ररूपदस (नियम४देखियें)
(2)
मध्यप्रदेशभू-राजस्वसंहिता(भू-सर्वेक्षणतथाभू-अभिलेख)नियम,2020 सीमाचिन्होंतथानिर्देशांकों(रिफरेंसप्वाइंट्स)कारजिस्टर
संख्यांक/भू-खण्डसंख्यांक)
संख्यांक/भू-खण्डसंख्यांककेभागपर
3.दखलरहितभूमिपर(ब्लॉक
2.सर्वेक्षणसंख्यांक/ब्लॉक
4.खातेदारकीभूमितथामार्ग/नालेके
बीच
सीमाचिन्होंकीअवस्थिति 1.ग्रामकीसीमाकेसीमाबिन्दुपर
5.वनतथाराजस्वभूमिकेबीच(सर्वेक्षण संख्यांक/ब्लॉक संख्यांक संख्यांक/भू-खण्ड
..पटवारीहल्काक्रमांक/सेक्टरकमांक तहसील जिला....
(1)
ग्राम /नगर..............
निर्देशांकों(रिफरेंसप्वाइंट्स)
1.चांदापत्थर
3.द्वितीयकग्राउण्डकंट्रोलबिन्दु
2.प्राथमिकग्राउण्डकंट्रोलबिन्दु
4.तृतीयकग्राउण्डकंट्रोलबिन्दु 4028
[ भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
अभ्युक्तियां
(14)
देयराषि रूपयेमें) (आजदिनांक तक)
विषिष्टियां
भुगतानगईराषि जिसमेंमुगतान
(13)
राषि 2.भुगतानकी
केव्यौरेशामिल हो(रुपयोंमें) 1. भुगतानगई
(12)
अद्यतन कुलमांग (रुपयोंमें)
(11)
बकाया यदिकोई हो (रुपयों में)
(10)
दिनांक...
(9)
चालूवर्ष कीमांग (रुपयों में)
योग
योग)
योग)
(8)
कोईहैं)
शास्ति(यदिकोईहैं)
प्रीमियम(यदिकोईहै)
शास्ति(यदिकोईहै)
कोईहै। प्रीमियमयदिकोई।
भू-राजस्वकाशीर्ष
वाणिज्यिकफसलउपकर(यदि
पंचायतउपकर(यदिकोईहै) वाणिज्यिकफसलउपकर(यदि
पंचायतउपकर(यदिकोईहै)
शालाउपकर(यदिकोईहै)
शालाउपकर(यदिकोईहै)
कुलभू-राजस्व(कॉलम6का
कुलभू-राजस्व(कॉलम6का
प्ररूपग्यारह
(नियम8देखिये)
(7)
58-कके अधीनछूट
*मध्यप्रदवे भू-राजस्व संहिता, 1659की धारा
(6)
निर्धारण (रुपयोंमें)
मध्यप्रदेशभू-राजस्वसंहिता(भू-सर्वेक्षणतथाभू-अभिलेख)नियम,2020
(5)
राज्यव्यापीभूमिस्वामीवारखतौनी
भूमिका उपयोग जिसके लिए निर्धारण कियागया है
योग
(4)
2.क्षेत्रफल(हेक्टेयर/वर्गमीटर
सर्वेक्षणसंख्यांक/भू-खण्ड संख्यांकब्लाकसंख्यांकसहित ('5'कृषकभूमिकोतथा'P'गैर कृषिकभूमिकोदर्शाताहै)
में)
हिस्सा
जिला
हिस्सा
(3)
तहसीलतथा
तहसीलतथा जिला
पटवारीहल्का
पटवारीहल्का
कमांक/सेक्ट
कमांक/सेक्ट
रक्रमांक,
खाताक्रमांक
२कमाक
खाताक्रमांक
ग्राम/नगर,
ग्राम/नगर,
राज्यमेंस्थित1. सभीखातोंके
(2)
खातेवार(खातेदारों)
माता/पिता/पति कानामतथापता
कानाम,उसकी
खातेदा एका आईडी क्रमांक
(1)
*यदि खातेकोमध्यप्रदेशभू-राजस्वसंहिता,1959कीधारा58ककेअधीनछूटप्राप्तहैतोउसेकॉलम(7)में'छूटप्राप्त'केरूपमेंदर्शायाजाएगा। 4029
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
प्ररूप-बारह
(नियम 10 देखिए)
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू- अभिलेख) नियम, 2020
ग्वालियर, दिनांक...
क्रमांक-/भू- सर्वेक्षण/-/2020
अधिसूचना
भू-सर्वेक्षण का प्रारम्भ
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख) नियम, 2020 के नियम 10 के साथ पठित मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, 1959 (क्रमांक 20 सन 1959) की धारा 64 द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए आयुक्त, भू- अभिलेख , मध्यप्रदेश एतद्वारा यह अधिसूचित करते हैं कि नीचे दी गई अनुसूची के कॉलम (5) में वर्णित क्षेत्र भू- सर्वेक्षण के अधीन लिए गए हैं:-
अनुसूची
तहसील
जिला
ग्राम/नगर
भू-सर्वेक्षण के अधीन लिए गए क्षेत्र
पटवारी हल्का कमांक/ सेक्टर क्रमांक
सरल क्रमांक
(6)
(6)
(4)
(3)
(1) (2)
आयुक्त, भू-अभिलेख, मध्यप्रदेश
प्ररूप-तेरह
(नियम 10 देखिए)
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू- अभिलेख) नियम, 2020
ग्वालियर, दिनांक
कमांक-/भू- सर्वेक्षण /-/2020
अधिसूचना
भू- सर्वेक्षण को बन्द करने की घोषणा
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख ) नियम, 2020 के नियम 10 के साथ पठित मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता, 1959 (क्रमांक 20 सन 1959) की धारा 64 द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए आयुक्त, भू-अभिलेख , मध्यप्रदेश एतद्वारा यह घोषित करते हैं कि राजपत्र दिनांक प्रकाशित आयुक्त, भू- अभिलेख , मध्यप्रदेश द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक वर्णित क्षेत्र पर संचालित भू- सर्वेक्षण बन्द किया जाता है । दिनांक में में
आयुक्त, भू-अभिलेख, मध्यप्रदेश 4030
[ भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
प्ररूप-चौदह
(नियम 14 देखिए)
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख) नियम , 2020
कार्यालय जिला सर्वेक्षण अधिकारी, जिला
दिनांक
कमांक-/भू- सर्वेक्षण /-/2020
अधिसूचना
सर्वेक्षण संक्रियाओं के प्रारंभ होने की उद्घोषणा
मध्यप्रदेशं भू- राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू- अभिलेख ) नियम , 2020 के नियम 14 में अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अनुसरण में, मैं जिला सर्वेक्षण अधिकारी , एतद्वारा यह घोषित करता हूं कि आयुक्त, भू- अभिलेख , मध्यप्रदेश द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक दिनांक जो कि राजपत्र में प्रकाशित की गई है , जिसमें वर्णित क्षेत्र भू- सर्वेक्षण के अधीन अधिसूचित किए गए हैं ।
भू- सर्वेक्षण के दौरान नवीन अधिकार अभिलेख तैयार किया जाएगा जिसमें समस्त खातेदारों के नाम , उनके अंश , दायित्व तथा सुखाचार अधिकार अभिलिखित किए जाएंगे तथा ग्रामों के लिए निस्तार पत्रक तथा वाजिब- उल-अर्ज भी तैयार किया जाएगा ।
उन सभी व्यक्तियों से जो कि प्रभावित हो सकते हों, यह अपेक्षा की जाती है कि वे उक्त सर्वेक्षण संक्रियाओं के दौरान अपने क्षेत्र में उपस्थित रहें तथा अभिनियोजित कर्मचारियों को सहयोग करें तथा भूमि में उनके स्वत्व, सीमाओं, अंशों, दायित्वों और अधिकारों को उपलब्ध कराएं । यह समस्त कृषकों के हित में होगा । स्थान
दिनांक
मुद्रा
जिला सर्वेक्षण अधिकारी के हस्ताक्षर
जिला 4031
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1]
प्ररूप - पन्द्रह
(नियम 17 देखिए)
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख ) नियम, 2020 कार्यालय जिला सर्वेक्षण अधिकारी, जिला
दिनांक..
कमांक- /भू- सर्वेक्षण /- /2020
उद्घोषणा
प्रारूप भू- अभिलेख के संबंध में दावे तथा आपत्तियां आमंत्रित किया जाना ।
मध्यप्रदेष भू- राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख ) नियम, 2020 के नियम 17 में अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसरण में सर्वसाधारण के लिए यह उद्घोषणा जारी की जाती है कि ग्राम / नगर पटवारी हल्का क्रमांक / सेक्टर क्रमांक के अधिकार अभिलेखों को जिला सर्वेक्षण अधिकारी अथवा इस प्रयोजन के लिए प्राधिकृत अधिकारी द्वारा अंतिम रूप दिया जाएगा । अधिकार अभिलेखों की प्रति एतद्वारा पर प्रदर्षित की गई है जिसमें प्रस्तावित संषोधनों के समस्त ब्यौरे वर्णित हैं । कृप्या ब्यौरों का अध्ययन कर लें अथवा उन्हें किसी अन्य व्यक्ति से समझ लें । यदि किसी प्रविष्टि के संबंध में किसी व्यक्ति को कोई आपत्ति है तो वह अपनी आपत्तियों को दिनांक के पूर्व जिला सर्वेक्षण अधिकारी अथवा प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष लिखित में अथवा व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत कर सकता है ।
इस उद्घोषणा में ऊपर दी गई दिनांक का अवसान हो जाने पर दावों तथा आपत्तियों पर विचार किया जाएगा ।
स्थान-
दिनांक
मुद्रा
जिला सर्वेक्षण अधिकारी / प्राधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर
जिला 4032
[ भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
प्ररूप-सोलह
(नियम 17 देखिए)
मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख) नियम, 2020 कार्यालय जिला सर्वेक्षण अधिकारी, जिला
दिनांक.
क्रमांक-/भू- सर्वेक्षण /-/2020
सूचना
प्रारूप भू- अभिलेख के संबंध में दावे तथा आपत्तियां आमंत्रित किया जाना
प्रति,
खातेदार का नाम..............
(भूमिस्वामी/ सरकारी पट्टेदार)
ग्राम/ नगर
पटवारी हल्का क्रमांक / सेक्टर क्रमांक.............
तहसील.. ..जिला..
मध्यप्रदेष भू-राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू- अभिलेख ) नियम, 2020 के नियम 17 में अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसरण में आपको यह सूचित किया जाता है कि ग्राम / सेक्टर के अधिकार अभिलेखों को जिला सर्वेक्षण अधिकारी अथवा इस प्रयोजन के लिए प्राधिकृत अधिकारी द्वारा अंतिम रूप दिया जाएगा । आपसे संबंधित खाता संख्यांक.. के अधिकार अभिलेख के प्रारूप की प्रति एतद्वारा संलग्न है जिसमें प्रस्तावित संषोधनों के समस्त ब्यौरे वर्णित हैं । कृपया ब्यौरों का अध्ययन कर लें अथवा उन्हें किसी अन्य व्यक्ति से समझ लें । यदि किसी प्रविष्टि के संबंध में आपको कोई आपत्ति है तो आप अपनी आपत्तियों को अधिकार अभिलेखों को अंतिम रूप दिए जाने के दौरान जिला सर्वेक्षण अधिकारी अथवा प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष लिखित में अथवा व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत कर सकते हैं ।
संलग्नक- अधिकार अभिलेखों के प्रारूप की प्रति ।
स्थान
दिनांक
मुद्रा
जिला सर्वेक्षण अधिकारी / प्राधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर
जिला 4033 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
प्ररूप- सत्रह
(नियम 17 देखिए)
मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख ) नियम, 2020
कार्यालय जिला सर्वेक्षण अधिकारी , जिला सूचनाओं की तामीली की अभिस्वीकृति का रजिस्टर
पटवारी
अभ्युक्तियां
हल्का
करने के
प्राप्त वाले
प्रकरण क्रमांक
सरल कमांक
हस्ताक्षर
उस व्यक्ति का नाम सूचना की गई है । जिसे जारी
क्रमांक / सेक्टर कमांक को सम्मिलित करते हुए ग्राम/ नगर का नाम
सूचना प्राप्त करने वाले का नाम तथा उस व्यक्ति से संबंध जिसे कि सूचना जारी की गई है ।
(7)
(5)
(6)
(3)
(4)
(1) (2)
प्ररूप अठारह
(नियम 18 देखियें)
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख) नियम, 2020
प्रारूप भू-अभिलेख पर दावे तथा आपत्तियां
.(प्राधिकारी का पदनाम) जिला .....के समक्ष
क. आपत्तिकर्ता के विवरण
1. दावे या आपत्तियां प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति का नाम
2. माता/ पिता / पति का नाम
3. निवास तथा डाक का पूर्ण पता
4. मोबाईल फोन नम्बर
ख.भूमि का विवरण
5.जिला
6. तहसील
7. ग्राम/ नगर तथा पटवारी हल्का क्रमांक/ सेक्टर क्रमांक
8. प्रारूप भू-अभिलेख का नाम तथा प्रविष्टियां जिनके संबंध में दावे तथा आपत्तियां प्रस्तुत की जा रही हैं
ग. दावे तथा आपत्तियों का विवरण
9. दावे/आपत्तियां
1.
2.
10. संलग्न दस्तावेजों की सूची
3..
हस्ताक्षर दिनांक
नाम.
स्थान 4034
[ भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
प्ररूप-उन्नीस
(नियम 20 देखिए)
मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख ) नियम, 2020
कार्यालय जिला सर्वेक्षण अधिकारी , जिला
अंतिम भू-अभिलेखों के प्रकाशन की सूचना
मध्यप्रदेष भू- राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू- अभिलेख ) नियम , 2020 के नियम 20 के उप नियम (2) में अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसरण में एतद्वारा , सर्वसाधारण को यह सूचित किया जाता है कि ग्राम/ नगर.. पटवारी हल्का क्रमांक / सेक्टर क्रमांक.. तहसील...जिला मध्यप्रदेश के भू-अभिलेखों को अंतिम रूप दिया जा चुका है और बेबसाईट.. ......... पर प्रकाशन किया जा चुका है ।
स्थान
दिनांक
मुद्रा
जिला सर्वेक्षण अधिकारी के हस्ताक्षर
जिला
ग्ररूप-बीस
(नियम 21 देखिए)
मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (भू-सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख ) नियम, 2020
कार्यालय जिला सर्वेक्षण अधिकारी, जिला
उन प्रकरणों की सूची जिनमें किसी न्यायालय के विनिश्चिय से भू-अभिलेख की प्रविष्टियां प्रभावित हो रही हों :
प्रकरण क्रमांक
अभ्युक्तियां
प्रकरण का संक्षिप्त विवरण
सरल क्रमांक
न्यायालय का नाम
प्रविष्टि दिनांक
(5)
(2)
(1 )
(3)
(4) 4035
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
प्ररूप- इक्कीस
(नियम 21 देखिए)
मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख) नियम, 2020
जिला सर्वेक्षण अधिकारी के न्यायालय में लम्बित प्रकरणों की सूची
सरल क्रमांक
अभ्युक्तियां
प्रकरण का संक्षिप्त विवरण
प्रकरण क्रमांक तथा दायरा का दिनांक
(4)
(3)
(2)
(1)
प्ररूप बाईस
(नियम 29 देखिए)
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख ) नियम, 2020 उन व्यक्तियों का अभिलेख जिन्हें भू-अधिकार पुस्तिका दी गई है
...जिला..
..तहसील
क्रमांक
सेक्टर
क्रमांक /
हल्का
पटवारी
ग्राम/नगर
अभ्युक्तियां अनुक्रमांक
भूमिस्वामी का नाम
खाता संख्यांक
प्राप्त करने वाले के हस्ताक्षर और दिनांक
भू-अधिकार
पुस्तिका
संख्यांक
(4)
(5)
(2)
(3 )
(1 ) 4036
[भाग 1 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
प्ररूप तेईस
(नियम 48 देखिए)
मध्यप्रदेश भू- राजस्व संहिता (भू- सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख) नियम, 2020
यतः , हाशिए में दर्शित किए गए प्रयोजन के लिए यह आवश्यक है कि संलग्न अनुसूची में दर्शित आपके सर्वेक्षण संख्यांक (संख्याकों) /ब्लॉक संख्यांक (संख्याकों)/ भू- खण्ड संख्यांक (संख्यांकों) का उसकी/ उनकी सीमाओं का अवधारण करने की दृष्टि से सर्वेक्षण तथा पैमाईश की जाए ;
यहां वह प्रयोजन दर्शाया जाए
जिसके लिए सर्वेक्षण तथा पैमाईश आवश्यक है.
आपसे उक्त सीमाओं को दिखाने के लिए दिनांक को स्थल पर उपस्थित रहने की अपेक्षा की जाती है । यदि आप उपस्थित रहने में असफल रहते हैं तो सीमाओं के अवधारणा का कार्य आपकी अनुपस्थिति में किया जाएगा तथा उसके संबंध में किसी भी आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा ।
राजस्व अधिकारी / राजस्व निरीक्षक/ नगर सर्वेक्षक / पटवारी.
दिनांक
अनुसूची
तहसील सर्वेक्षण
ग्राम/ नगर
पटवारी हल्का क्रमांक / सेक्टर क्रमांक
संख्यांक/ब्लॉक संख्यांक
ब्लाक की दशा में भू-खण्ड संख्यांक (यदि कोई हो)
(5)
(3)
(4)
(2)
(1) 4037
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
भाग 1 ]
अभ्युक्तियां
(14)
(13)
अंतिम आदे।के अनुपालन कीरिपोर्ट
(12)
अंतिम आदेश कासार
दिनेशकुमारमौर्य,उपसचिव.
प्रकरण कमांक तथा अंतिम आदेश का दिनांक
(11)
(10)
तहसीलदारको अतिकमणकी रिपोर्टदेनेका दिनांक
मध्यप्रदेशकेराज्यपालकेनामसेतथाआदेशानुसार,
(9)
अतिक्रमणके स्कैचको आवंटित अनुक्रमांक
जिला.......
(8)
अतिक्रमण कीप्रकृति
(7)
तहसील
अतिकमितका क्षेत्रफल (हेक्टेयर/वर्ग मीटरमें)
तहसील
पटवारी/नगरसर्वेक्षक
पटवारीहल्काकमांक/सेक्टरकमांक.....
(6)
अतिक्रमणकारजिस्टर
अतिक्रमणकियागयाहो
प्ररूपचौवीस (नियम57देखिए)
*भूमिकी श्रेणी
(5)
क्षेत्रफल (हेक्टेयर/वर्ग मीटरमें)
भूमि काविवरणजिसपर
(4)
सर्वेक्षण संख्यांक/ भू-खण्ड संख्यांकउसके ब्लॉकसंख्यांक सहित
मध्यप्रदेशभू-राजस्वसंहिता(भू-सर्वेक्षणतथाभू-अभिलेख)नियम,2020
(3)
पटवारीहल्काक्रमांक/सेक्टरक्रमांक
अतिक्रमणकरने वालेव्यक्तिका नाम,उसकी माता/पिता/पति कानामतथा पता
(2)
अतिक्रमण कापता लगनेका दिनांक
अनुक्रमांक
(1)
ग्राम/नगर
*भूमिकीश्रेणी-अतिक्रमणकेरजिस्टरकेकॉलम(6)केप्रयोजनकेलिएभूमिकीश्रेणीमेंसम्मिलितहैआबादी,सेवाभूमि,निस्तारअधिकारोंके प्रयोगकेलिएपृथक्रखीगईभूमि,वाजिब-उल-अर्ज,संहिताकीधारा233-ककेअधीनलोकप्रयोजनकेलिएपृथक्रखीगईभूमि,लोकमार्ग, राजस्ववनअथवाकोईअन्यदखलरहितभूमिअथवाकोईअन्यभूमि,जोकिसरकारअथवाकिसीप्राधिकरणकी,किसीराज्यकेअधीनगठित अथवास्थापितकिसीनिगमितनिकाययासंस्थाकीहोअथवाकलक्टरद्वाराप्रबन्धितधार्मिकसत्तासेसंबंधितभूमिकेरूपमेंअभिलिखितहो। 4038
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
राज्य शासन के आदेश
राजस्व विभाग
कार्यालय , कलेक्टर , जिला झाबुआ, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग
झाबुआ, दिनांक 24 जुलाई 2020
मध्यप्रदेश भूमिगत पाईप लाईन, केबल एवं डक्ट ( भूमि की उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन ) अधिनियम , 2012 क्र. 724- भू- अर्जन- री -1-2020.- एतद्वारा सर्व साधारण को सूचित किया जाता है, कि माही परियोजना , तहसील पेटलावद, जिला- झाबुआ की नहरों के लिये भूमिगत पाईपलाईन बिछाये जाने का प्रस्ताव है.
अतएव राज्य सरकार को ग्राम पेटलावद, तहसील पेटलावद, जिला- झाबुआ के खातेदारों की निजी भूमि से नहरों हेतु भूमिगत पाईपलाईन बिछाने के प्रयोजन के लिये यह आवश्यक प्रतीत होता है, कि उस भूमि में जिसमें भूमिगत पाईपलाईन बिछाये जाने का प्रस्ताव है, जो इस अधिसूचना के संलग्न सूची में वर्णित है, उपयोग के लिये अधिकारों का अर्जन किया जावें.
अतएव मध्यप्रदेश भूमिगत पाईपलाईन, केबल एवं डक्ट्स ( भूमि के उपयोक्ता के अधिकारों का अर्जन ) अधिनियम ( क्रमांक 5 सन् 2013 ) की धारा 3 की उपधारा ( 1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार , उसमें उपयोग के अधिकार का अर्जन , करने के अपने आश्य की घोषणा करती है .
कोई व्यक्ति जो उक्त अनुसूची में वर्णित भूमि के हितबद्ध है , उस तारीख को जिसको उक्त अधिनियम की धारा 3 की उपधारा ( 1 ) के अधीन अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होती है, 30 दिवस के भीतर भूमि के नीचे पाईप लाईन एवं डक्टि बिछाये जाने के संबंध में सक्षम भू-अर्जन अधिकारी , तहसील पेटलावाद, जिला- झाबुआ ( मध्यप्रदेश ) को लिखित में भेज सकेगा:-
जिला
अनुसूची
खसरा क्रमांक
तहसील
क्र.
ग्राम/पटवारी हल्का क्रमांक (2)
(1)
(3) (4) 1
पेटलावद पेटलावद/ 26 झाबुआ
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
उपयोग के अधिकार के लिये अर्जित की जाने वाली भूमि
(हे. में. )
(6)
(5)
0.001
317
0.034
318
0.008
299
300
0.102
0.030
289
286
0.002
0.011
284
406
0.005
287
0.011
407
0.021
0.029
900
896
0.033
0.106
894
0.043
893
0.044
864
0.019
859/2
0.065
859/1
0.564
कुल योग
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, प्रबल सिपाहा, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
भाग 1 ]
4039
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
कार्यालय , कलेक्टर , जिला सिवनी , मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग
सिवनी, दिनांक 9 सितम्बर 2020
रा. प्र. क्र. 09 - अ- 82-2019-20-5378.- मध्यप्रदेश शासन , राजस्व विभाग , मंत्रालय वल्लभ भवन, भोपाल का आदेश क्रमांक एफ- 12-2-2014- सात- शा.-2- ए, भोपाल दिनांक 12 नवम्बर 2014 द्वारा जारी " आपसी सहमति से भूमि क्रय नीति " ( Consent Land Purchase Policy ) के तहत पेंच व्यपवर्तन परियोजना की बखारी शाखा नहर के निर्माण हेतु निजी भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन के लिये भूमि क्रय किये जाने हेतु मध्यप्रदेश शासन , जल संसाधन विभाग के पक्ष में क्रय किया जाना प्रस्तावित है. उक्त अनुसूची में दर्शाये गये कृषकों की निजी भूमि से संबंधित कृषकों को प्रारूप " क " में सूचना दी जाकर उनसे प्रारूप " ख " में सहमति ले ली गई है .
इसके द्वारा यह भी घोषित किया जाता है कि उक्त निज भूमि की उक्त प्रयोजन में पेंच व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत बखारी शाखा नहर के निर्माण हेतु निजी भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है:-
भूमि का वर्णन
नगर/ग्राम
तहसील
जिला
क्रय की जाने वाली प्रस्तावित भूमि के भूमिस्वामी का नाम एवं पता (2)
(3)
(4) (1)
सिवनी सिवनी ग्राम पिपरिया
ब. नं. -337
अनुसूची
खसरा
नम्बर
योजना जिसके लिये भूमि क्रय की जाना प्रस्तावित है क्रय किये जाने वाला प्रस्तावित रकबा (हे. )
(5)
(6)
(7) 120/2
0.10
रामवती पति रामदीन
मेहरा, निवासी ग्राम
प.ह.नं. - 02
भूमिस्वामी.
रा.नि.मं. - बंड़ोल.
पेंच व्यपवर्तन परियोजना की बखारी शाखा नहर के निर्माण हेतु.
(2) उपरोक्त अनुसूची में दर्शाई गई भूमि के संबंध में किसी जन सामान्य को भूमि अथवा भूमि के स्वत्व एवं प्रस्तावित भूमि के भू- भाग पर स्थित सम्पत्तियों के संबंध में कोई आक्षेप/आपत्ति है तो वह जारी दिनांक से 15 दिवस के भीतर लिखित रूप में स्वयं अथवा अभिभाषक के माध्यम से न्यायालय कलेक्टर, सिवनी के कार्यालय में कार्यालयीन समय पर प्रस्तुत कर सकते हैं. नियत अवधि के पश्चात कोई भी आक्षेप/आपत्ति स्वीकार नहीं की जावेगी.
रा. प्र. क्र. 10- अ-82-2019-20-5379.- मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग, मंत्रालय वल्लभ भवन, भोपाल का आदेश क्रमांक एफ- 12-2-2014- सात- शा.- 2-ए, भोपाल दिनांक 12 नवम्बर 2014 द्वारा जारी " आपसी सहमति से भूमि क्रय नीति " (Consent Land Purchase Policy ) के तहत पेंच व्यपवर्तन परियोजना की. बखारी शाखा नहर के निर्माण हेतु निजी भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन के लिये भूमि क्रय किये जाने हेतु मध्यप्रदेश शासन , जल संसाधन विभाग के पक्ष में क्रय किया जाना प्रस्तावित है. उक्त अनुसूची में दर्शाये गये कृषकों की निजी भूमि से संबंधित कृषकों को प्रारूप " क " में सूचना दी जाकर उनसे प्रारूप " ख " में सहमति ले ली गई है .
इसके द्वारा यह भी घोषित किया जाता है कि उक्त निज भूमि की उक्त प्रयोजन में पेंच व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत बखारी शाखा नहर के निर्माण हेतु निजी भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है:-
भूमि का वर्णन
जिला तहसील
नगर/ग्राम
क्रय की जाने वाली प्रस्तावित भूमि के भूमिस्वामी का नाम एवं पता
(3)
(2)
(4) (1)
सिवनी ग्राम-बांधी
सिवनी
ब. नं. -447
प.ह.नं.- 17
राजेशकुमार पिता नारायणप्रसाद कुर्मी निवासी. ग्राम भूमिस्वामी .
रा.नि.मं. - बंड़ोल.
अनुसूची
खसरा क्रय किये जाने
नम्बर
योजना जिसके लिये भूमि क्रय की जाना प्रस्तावित है वाला प्रस्तावित रकबा ( हे. )
(6)
(7) (5)
0.19
309
पेंच व्यपवर्तन परियोजना की बखारी शाखा नहर के निर्माण हेतु.
4040
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(2) उपरोक्त अनुसूची में दर्शाई गई भूमि के संबंध में किसी जन सामान्य को भूमि अथवा भूमि के स्वत्व एवं प्रस्तावित भूमि के भू- भाग पर स्थित सम्पत्तियों के संबंध में कोई आक्षेप/ आपत्ति है तो वह जारी दिनांक से 15 दिवस के भीतर लिखित रूप में स्वयं अथवा अभिभाषक के माध्यम से न्यायालय कलेक्टर, सिवनी के कार्यालय में कार्यालयीन समय पर प्रस्तुत कर सकते है. नियत अवधि के पश्चात कोई भी आक्षेप/आपत्ति स्वीकार नहीं की जावेगी.
सिवनी , दिनांक 17 सितम्बर 2020
क्र. 5522 - भू- अर्जन. - 2020- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इसमें संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 11 की उपधारा (1 ) के उपबंधों के अनुसार एतद्वारा सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में अन्तर्गत व्यक्तियों को इस आवश्यकता की सूचना दी जाती है. कि राज्य शासन, इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में भूमि अर्जन , पुनर्वासन, एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा -12 में दी गई शक्तियों के प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. इस संबंध में राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उपरोक्त भूमि के अधिग्रहण किये जाने के संबंध में धारा -15 के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू होंगे:-
अनुसूची
भूमि का विवरण
जिला
अर्जित की जाने वाली भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन तहसील/ रा.नि.मं.
भूमि अर्जन अधिनियम 2013 की धारा -12 तहत प्रधिकृत अधिकारी
ग्राम/ प.ह.न./ ब. नं.
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि का लगभग क्षेत्रफल (हे. में)
(6)
(5)
(3)
(4)
(1) (2)
2.20
मुंडा जलाशय की नहर निर्माण हेतु.
सिवनी तहसील- लखनादौन मुंडा रा.नि.मं. -लखनादौन प.ह.नं. -89
कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन विभाग , संभाग क्रमांक-1 सिवनी, जिला सिवनी.
(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, कार्यालय , अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) एवं भू- अर्जन अधिकारी लखनादौन , जिला- सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है .
(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, कार्यालय , कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग क्रमांक -1 , सिवनी जिला सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है.
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय , अनुविभागीय अधिकारी , जल संसाधन उपसंभाग घंसौर, जिला सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है.
(5 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई भी व्यक्ति " भूमि अर्जन , पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा-15 ( 1 ) के अधीन इस अधिसूचना प्रकाशन के 60 दिनों के अंदर भूमि अर्जन के बारे में कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू- अर्जन अधिकारी लखनादौन, जिला सिवनी में आक्षेप यदि कोई हो, फाईल किए जा सकेंगे .
क्र. 5523 - भू- अर्जन. - 2020- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इसमें संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 11 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार एतद्वारा सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में अन्तर्गत व्यक्तियों को इस आवश्यकता की सूचना दी जाती है. कि राज्य शासन , इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में भूमि अर्जन , पुनर्वास , एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 की धारा -12 में दी गई शक्तियों के प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. इस संबंध में राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उपरोक्त भूमि के अधिग्रहण किये जाने के संबंध में धारा -15 के उपबंध उक्त भूमि 4041 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
के संबंध में लागू होगें:-
अनुसूची
भूमि का विवरण
जिला
अर्जित की जाने वाली भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन तहसील/ रा.नि.मं.
भूमि अर्जन अधिनियम 2013 की धारा-12 तहत प्रधिकृत अधिकारी
ग्राम/ प.ह.न./ ब. नं.
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि का लगभग क्षेत्रफल (हे. में)
(6)
(5)
(3)
(4)
(1) (2)
2.88
मुंडा जलाशय की नहर निर्माण हेतु.
सिवनी तहसील- लखनादौन मलखेड़ा प.ह.नं. - 89
रा.नि.मं. -लखनादौन
कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन विभाग, संभाग क्रमांक-1 सिवनी, जिला सिवनी.
(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, कार्यालय , अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू- अर्जन अधिकारी लखनादौन, जिला- सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है.
(3 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , कार्यालय , कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग क्रमांक -1 , सिवनी जिला सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है.
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय , अनुविभागीय अधिकारी, जल संसाधन उपसंभाग घंसौर, जिला सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है.
(5) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई भी व्यक्ति " भूमि अर्जन , पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 की धारा -15 ( 1 ) के अधीन इस अधिसूचना प्रकाशन के 60 दिनों के अंदर भूमि अर्जन के बारे में कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू-अर्जन अधिकारी लखनादौन, जिला सिवनी में आक्षेप यदि कोई हो, फाईल किए जा सकेंगे.
क्र. 5528 - भू-अर्जन. - 2020-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इसमें संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भूमि अर्जन , पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 की धारा 11 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार एतद्वारा सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन इसके द्वारा, अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में अन्तर्गत व्यक्तियों को इस आवश्यकता की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा -12 में दी गई शक्तियों के प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. इस संबंध में राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उपरोक्त भूमि के अधिग्रहण किये जाने के संबंध में धारा -15 के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू होंगे:-
अनुसूची
भूमि का विवरण
जिला
अर्जित की जाने वाली भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन तहसील/ रा.नि.मं.
भूमि अर्जन अधिनियम 2013 की धारा -12 तहत प्रधिकृत अधिकारी
ग्राम/ प.ह.न./ ब. नं.
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि का लगभग क्षेत्रफल (हे. में)
(6) (3)
(4)
(5)
(2)
(1)
0.28
मलखेड़ा
मुंडा जलाशय परियोजना के बांध क्षेत्र में स्पिल चैनल हेतु.
प.ह.नं. - 89
सिवनी तहसील- लखनादौन रा.नि.मं. -लखनादौन
कार्यपालन यंत्री , जल संसाधन विभाग, संभाग क्रमांक-1 सिवनी, जिला सिवनी.
[भाग 1 4042
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, कार्यालय, अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) एवं भू- अर्जन अधिकारी लखनादौन, जिला- सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है.
(3 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , कार्यालय, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग क्रमांक -1 , सिवनी, जिला सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है .
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय, अनुविभागीय अधिकारी , जल संसाधन उपसंभाग घंसौर, जिला सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है .
(5) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई भी व्यक्ति " भूमि अर्जन , पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा -15 ( 1 ) के अधीन इस अधिसूचना प्रकाशन के 60 दिनों के अंदर भूमि अर्जन के बारे में कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू-अर्जन अधिकारी लखनादौन, जिला सिवनी में आक्षेप यदि कोई हो, फाईल किए जा सकेंगे .
क्र. 5529 - भू- अर्जन. - 2020- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इसमें संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 11 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार एतद्वारा सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में अन्तर्गत व्यक्तियों को इस आवश्यकता की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा -12 में दी गई शक्तियों के प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . इस संबंध में राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उपरोक्त भूमि के अधिग्रहण किये जाने के संबंध में धारा -15 के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू होंगे:-
अनुसूची
भूमि का विवरण
जिला
अर्जित की जाने वाली भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन तहसील/ रा.नि.मं.
भूमि अर्जन अधिनियम 2013 की धारा -12 तहत प्रधिकृत अधिकारी
ग्राम/ प.ह.न./ ब. नं.
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि का लगभग क्षेत्रफल (हे. में)
(6)
(4)
(5)
(3)
(2)
(1)
मुंडा जलाशय की नहर निर्माण हेतु.
खमरिया 0.86 प.ह.नं. - 01
सिवनी तहसील- धनौरा रा.नि.मं.- धनौरा
कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन विभाग , संभाग क्रमांक -1 सिवनी, जिला सिवनी .
(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, कार्यालय , अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) एवं भू- अर्जन अधिकारी लखनादौन, जिला- सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है.
(3 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , कार्यालय , कार्यपालन यंत्री , जल संसाधन संभाग क्रमांक -1 , सिवनी, जिला सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है .
(4 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय , अनुविभागीय अधिकारी , जल संसाधन उपसंभाग घंसौर , जिला सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है.
(5 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई भी व्यक्ति " भूमि अर्जन , पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा -15 ( 1 ) के अधीन इस अधिसूचना प्रकाशन के 60 दिनों के अंदर भूमि अर्जन के बारे में कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू- अर्जन अधिकारी घंसौर, जिला सिवनी में आक्षेप यदि कोई हो, फाईल किए जा सकेंगे .
4043 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
सिवनी, दिनांक 24 सितम्बर 2020
क्र. 5640 - भू- अर्जन. - 2020- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इसमें संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भूमि अर्जन , पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 11 की उपधारा (1 ) के उपबंधों के अनुसार एतद्वारा सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में अन्तर्गत व्यक्तियों को इस आवश्यकता की सूचना दी जाती है . राज्य शासन, इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 की धारा -12 में दी गई शक्तियों के प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . इस संबंध में राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उपरोक्त भूमि के अधिग्रहण किये जाने के संबंध में धारा -15 के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू होंगे:-
अनुसूची
भूमि का विवरण
जिला तहसील/ रा.नि.मं.
अर्जित की जाने वाली भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
भूमि अर्जन अधिनियम 2013 की धारा -12 तहत प्रधिकृत अधिकारी
ग्राम/ प.ह.न./ ब. नं .
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि का लगभग क्षेत्रफल (हे. में) (4) 0.50
(3) आगरी
(1) सिवनी
प.ह.नं. - 22
(5) कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग क्रमांक -1 , जिला सिवनी.
(6) ऐरमा जलाशय परियोजना के नहर निर्माण हेतु.
(2) तहसील- कुरई रा.नि.मं. - सुकतरा
अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) (2 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , कार्यालय , एवं भू- अर्जन अधिकारी , कुरई, जिला- सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है.
(3 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, कार्यालय , कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग क्रमांक -1 , सिवनी , जिला सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है .
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई भी व्यक्ति " भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा -15( 1 ) के अधीन इस अधिसूचना प्रकाशन के 60 दिनों के अंदर भूमि अर्जन के बारे में कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू-अर्जन अधिकारी , कुरई, जिला सिवनी में आक्षेप यदि कोई हो, फाईल किए जा सकेंगे.
क्र. 5644 - जि.भू- अ. - 2020- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इसमें संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भूमि अर्जन , पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 की धारा 11 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार एतद्वारा सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में अन्तर्गत व्यक्तियों को इस आवश्यकता की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा -12 में दी गई शक्तियों के प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . इस संबंध में राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उपरोक्त भूमि के अधिग्रहण किये जाने के संबंध में धारा -15 के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू होंगे:-
अनुसूची
भूमि का विवरण
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन जिला
ग्राम/
धारा 11 की उपधारा ( 2 ) के द्वारा प्रधिकृत अधिकारी
तहसील/ रा.नि.मं.
प.ह.न./
क्षेत्रफल अर्जित रकबा ( हे. में)
ब. नं.
(6) (1) (2)
(3)
(5)
धनौरा
(4) 0.08
सिवनी
तिलवारा बांयी तट नहर की वितरक नहर के अंतर्गत m5Lके निर्माण.
तट नहर संभाग केवलारी , जिला सिवनी. कार्यपालन यंत्री , तिलवारा बांयी
देवरीटीका बं. नं.- प.ह.नं. -47 [भाग 1 4044
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(2 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण कार्यालय, अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) एवं भू- अर्जन अधिकारी , घंसौर, जिला- सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है .
(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शे ( प्लान ) का निरीक्षण, कार्यपालन यंत्री, तिलवारा बांयी तट नहर संभाग केवलारी, जिला सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है.
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे ( प्लान ) एवं प्रकरण का निरीक्षण, अनुविभागीय अधिकारी भीमगढ़ दांयी तट नहर उपसंभाग क्रमांक -5 में किया जा सकता है.
(5 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई भी व्यक्ति अधिसूचना प्रकाशन के 60 दिनों के अंदर भू-अर्जन किये जाने के संबंध में आक्षेप लिखित रूप से कलेक्टर सिवनी के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है.
क्र. 5645 - भू-अर्जन. - 2020 - चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इसमें संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 11 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार एतद्वारा सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में अन्तर्गत व्यक्तियों को इस आवश्यकता की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा -12 में दी गई शक्तियों के प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. इस संबंध में राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उपरोक्त भूमि के अधिग्रहण किये जाने के संबंध में धारा -15 के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू होंगे:-
अनुसूची
भूमि का विवरण
अर्जित की जाने वाली भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन जिला तहसील/ रा.नि.मं.
भूमि अर्जन अधिनियम 2013 की धारा -12 तहत प्रधिकृत अधिकारी
ग्राम/ प.ह.न./ ब. नं.
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि का लगभग क्षेत्रफल (हे. में)
(4) 4.95
(3) करहैया प.ह.नं.- 26 .
(6) ऐरमा जलाशय परियोजना के बांध क्षेत्र में स्पिल चैनल निर्माण हेतु.
(5) कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग क्रमांक -1 , जिला सिवनी .
(1) (2) सिवनी तहसील-कुरई रा.नि.मं. - सुकतरा
अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू-अर्जन अधिकारी , कुरई, जिला सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है . (2 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , कार्यालय,
(3 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , कार्यालय , कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग क्रमांक -1 , सिवनी, जिला सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है.
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई भी व्यक्ति " भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 की धारा -15 ( 1 ) के अधीन इस अधिसूचना प्रकाशन के 60 दिनों के अंदर भूमि अर्जन के बारे में कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू-अर्जन अधिकारी , कुरई, जिला सिवनी में आक्षेप यदि कोई हो, फाईल किए जा सकेंगे.
सिवनी, दिनांक 26 सितम्बर 2020
क्र. 5668- भू- अर्जन.- 2020- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इसमें संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 11 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार एतद्वारा सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में अन्तर्गत व्यक्तियों को इस आवश्यकता की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा -12 में दी गई शक्तियों के प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है. इस संबंध में राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उपरोक्त भूमि के अधिग्रहण किये जाने के संबंध में धारा -15 के उपबंध उक्त भूमि के 4045 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
संबंध में लागू होंगे:-
अनुसूची
भूमि का विवरण
जिला
अर्जित की जाने वाली भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन तहसील/ रा.नि.मं.
भूमि अर्जन अधिनियम 2013 की धारा-12 तहत प्रधिकृत अधिकारी
ग्राम/ प.ह.न./ ब. नं.
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि का लगभग क्षेत्रफल (हे. में)
(3)
(4)
(2) धनौरा/ धनौरा
(1) सिवनी
0.37
देवरीमुल्ला प.ह.नं. -40.
(6) अपर तिलवारा नहर की हरदुली मायनर की निर्माण कार्य.
(5) कार्यपालन यंत्री, तिलवारा बांयी तट नहर संभाग , केवलारी, जिला-सिवनी.
(2 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, कार्यालय, अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) एवं भू- अर्जन अधिकारी , घंसौर, जिला- सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है.
(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, कार्यालय, कार्यपालन यंत्री, तिलवारा बांयी तट नहर संभाग केवलारी, सिवनी , जिला सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है.
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई भी व्यक्ति " भूमि अर्जन , पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा -15 ( 1 ) के अधीन इस अधिसूचना प्रकाशन के 60 दिनों के अंदर भूमि अर्जन के बारे में कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू-अर्जन अधिकारी , घंसौर, जिला सिवनी में आक्षेप यदि कोई हो, फाईल किए जा सकेंगे .
क्र. 5670- भू- अर्जन. - 2020- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इसमें संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है. अतः भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 11 की उपधारा (1 ) के उपबंधों के अनुसार एतद्वारा सभी संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में अन्तर्गत व्यक्तियों को इस आवश्यकता की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा -12 में दी गई शक्तियों के प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है . इस संबंध में राज्य शासन यह भी निर्देश देता है कि उपरोक्त भूमि के अधिग्रहण किये जाने के संबंध में धारा 15 के उपबंध उक्त भूमि के संबंध में लागू होंगे:-
अनुसूची
भूमि अर्जन अधिनियम 2013
भूमि का विवरण
जिला
अर्जित की जाने वाली भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन तहसील/ रा.नि.मं.
की धारा -12 तहत प्रधिकृत अधिकारी
ग्राम/ प.ह.न. / ब. नं.
अर्जित की जाने वाली प्रस्तावित भूमि का लगभग क्षेत्रफल (हे. में)
(5)
(6)
(4) 0.28
(1) सिवनी
(2) धनौरा/ धनौरा
(3) सुनवारा प.ह.नं. - 34.
अपर तिलवारा नहर की हरदुली मायनर नहर निर्माण हेतु.
कार्यपालन यंत्री, तिलवारा बांयी तट नहर संभाग, केवलारी , जिला-सिवनी.
( 2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, कार्यालय, अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) एवं भू-अर्जन अधिकारी , घंसौर, जिला- सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है .
( 3 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण, कार्यालय , कार्यपालन यंत्री, तिलवारा बांयी तट नहर संभाग केवलारी, जिला सिवनी के कार्यालय में किया जा सकता है .
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई भी व्यक्ति " भूमि अर्जन , पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 की धारा -15 ( 1 ) के अधीन इस अधिसूचना प्रकाशन के 60 दिनों के अंदर भूमि अर्जन के बारे में कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू-अर्जन अधिकारी , घंसौर, जिला सिवनी में आक्षेप यदि कोई हो , फाईल किए जा सकेंगे.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार , राहुल हरिदास फटिंग, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
4046
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
कार्यालय , कलेक्टर, जिला पन्ना, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव , मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग
पन्ना, दिनांक 12 अक्टूबर 2020
प्र. क्र. 30 - अ- 82 - वर्ष 2020-21.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है अतः भू- अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 ( क्रमांक 30 सन् 2013 ) की धारा 11 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन, इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 12 द्वारा दी गई शक्तियों को प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है: -
अनुसूची
भूमि का वर्णन
तहसील
नगर/ग्राम
जिला
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
(3) बॉधा
(1) पन्ना
(2) पवई
(4) निजी भूमि रकबा 3.125 है. एवं शासकीय भूमि रकबा 0.625 है . कुल रकबा 3.750 है.
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 12 के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5) कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग, पवई.
(6) पवई मध्यम सिंचाई परियोजना अंतर्गत माईनर एवं सब माईनर नहर निर्माण हेतु ग्राम बॉधा बनवार सब माईनर -2 नहर के निर्माण कार्य हेतु धारा -11 का प्रकाशन, ग्राम बॉधा तहसील एवं अनुभाग पवई.
(2 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग पवई, जिला पन्ना के कार्यालय में देखा जा सकता है .
प्र. क्र. 29 - अ- 82- वर्ष 2020-21.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना हैं अतः भू-अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 ( क्रमांक 30 सन् 2013 ) की धारा 11 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 12 द्वारा दी गई शक्तियों को प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है: -
अनुसूची
जिला तहसील
भूमि का वर्णन नगर/ग्राम लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1) पन्ना
(2) पवई
(3) हिनौता
(4) निजी भूमि रकबा 2.188 है. एवं शासकीय भूमि रकबा 0.013 है . कुल रकबा 2.201 है.
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 12 के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5) कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , पवई.
(6) पवई मध्यम सिंचाई परियोजना ' अंतर्गत माईनर एवं सब माईनर नहर निर्माण हेतु ग्राम हिनौता टेल माईनर नहर के निर्माण कार्य हेतु धारा -11 का प्रकाशन, ग्राम हिनौता, तहसील एवं अनुभाग पवई.
(2) भूमि का नक्शा ( प्लान ) कार्यपालन यंत्री, जन्न संसाधन संभाग पवई, जिला पन्ना के कार्यालय में देखा जा सकता है, भाग 1 ]
4047
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
प्र. क्र. 31 - अ- 82- वर्ष 2020-21.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची को खाने ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना हैं अतः भू-अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 (क्रमांक 30 सन् 2013) की धारा 11 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 12 द्वारा दी गई शक्तियों को प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है: -
अनुसूची
भूमि का वर्णन
नगर/ग्राम
जिला तहसील
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
(4) (1) पन्ना
(2) पवई
(3) देवरी सरकार .
निजी भूमि रकबा 4.875 है . एवं शासकीय भूमि रकबा 0.113 है . कुल रकबा 4.988 है .
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 12 के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5) कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग, पवई.
(6) पवई मध्यम सिंचाई परियोजना अंतर्गत माईनर एवं सब माईनर नहर निर्माण हेतु ग्राम देवरी सरकार कृष्णगढ़ डिस्ट्रीब्यूटरी नहर के निर्माण कार्य हेतु धारा 11 का प्रकाशन, ग्राम देवरी सरकार तहसील एवं अनुभाग पवई.
(2 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग पवई, जिला पन्ना के कार्यालय में देखा जा सकता है.
प्र. क्र. 28 - अ- 82- वर्ष 2020-21.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है अतः भू- अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम , 2013 ( क्रमांक 30 सन् 2013 ) की धारा 11 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है . राज्य शासन , इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 12 द्वारा दी गई शक्तियों को प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-
अनुसूची
भूमि का वर्णन
जिला
नगर/ग्राम
तहसील
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1) पन्ना
(2) पवई
(3) सिमरिया गुलाबसिंह
(4) निजी भूमि रकबा 8.725 है . एवं शासकीय भूमि रकबा 0.400 है . कुल रकबा 9.125 है.
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 12 के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6)
कार्यपालन यंत्री , जल संसाधन संभाग, पवई.
पवई मध्यम सिंचाई परियोजना अंतर्गत माईनर एवं सब माईनर नहर निर्माण हेतु ग्राम सिमरिया गुलाबसिंह बनवार सब माईनर-2 , सिमरिया सब माईनर एवं टेल माईनर नहर के निर्माण कार्य हेतु धारा 11 का प्रकाशन , ग्राम सिमरिया गुलाबसिंह तहसील एवं अनुभाग पवई.
(2 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग पवई, जिला पन्ना के कार्यालय में देखा जा सकता है.
4048
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
प्र. क्र. 25 - अ- 82- वर्ष 2020-21 .- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की , अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है अतः भू-अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 ( क्रमांक 30 सन् 2013 ) की धारा 11 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 12 द्वारा दी गई शक्तियों को प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है: -
अनुसूची
भूमि का वर्णन
तहसील
नगर/ग्राम
जिला
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1)
(3)
(2)
(4) पवई
पन्ना
बराहो निजी भूमि रकबा 0.45 है. एवं शासकीय भूमि रकबा 0.05 है. कुल रकबा 0.500 है.
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 12 के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(6)
(5)
कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग, पवई.
पवई मध्यम सिंचाई परियोजना अंतर्गत माईनर एवं सब माईनर नहर निर्माण हेतु ग्राम बराहो एस.एम. - 3 माईनर नहर के निर्माण कार्य हेतु धारा -11 का प्रकाशन, ग्राम बराहो तहसील एवं अनुभाग पवई.
(2) भूमि का नक्शा ( प्लान ) कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग पवई, जिला पन्ना के कार्यालय में देखा जा सकता है.
प्र. क्र. 26 - अ- 82- वर्ष 2020-21.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना हैं अतः भू अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 ( क्रमांक 30 सन् 2013 ) की धारा 11 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 12 द्वारा दी गई शक्तियों को प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-
अनुसूची
भूमि का वर्णन
नगर/ग्राम
जिला तहसील
लगभग क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1)
(3) मनकी
(2) पन्ना पवई
(4) निजी भूमि रकबा
1.413 है. एवं शासकीय भूमि रकबा 0.00 है. कुल रकबा 1.413 है.
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 12 के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5)
(6)
कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , पवई.
पवई मध्यम सिंचाई परियोजना अंतर्गत माईनर एवं सब माईनर नहर निर्माण हेतु ग्राम मनकी बनवार सब माईनर -2 नहर के निर्माण कार्य हेतु धारा -11 का प्रकाशन ग्राम मनकी तहसील एवं अनुभाग पवई.
(2) भूमि का नक्शा ( प्लान ) कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग पवई, जिला पन्ना के कार्यालय में देखा जा सकता है.
भाग 1 ]
4049
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
प्र. क्र. 23 - अ-82- वर्ष 2020-21.-चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि, इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से ( 4) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है अतः भू- अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 ( क्रमांक 30 सन् 2013) की धारा 11 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की, सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 12 द्वारा दी गई शक्तियों को प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-
अनुसूची
भूमि का वर्णन
जिला
नगर/ग्राम
तहसील
लगभग क्षेत्रफल (हैक्टेयर में) (2)
(1)
(3)
मैनहा
पन्ना गुनौर
(4) निजी भूमि रकबा 5.025 है. एवं शासकीय भूमि रकबा 0.363 है. कुल रकबा 5.388 है.
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 12 के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5) कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , पवई.
(6) पवई मध्यम सिंचाई परियोजना अंतर्गत माईनर एवं सब माईनर नहर निर्माण हेतु ग्राम मैनहा, मैनहा सब माईनर -2 नहर के निर्माण कार्य हेतु धारा -11 का प्रकाशन ग्राम मैनहा, तहसील एवं अनुभाग गुनौर.
(2 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग, पवई, जिला पन्ना के कार्यालय में देखा जा सकता है.
प्र. क्र. 27- अ- 82 - वर्ष 2020-21.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि, इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है अतः भू- अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम , 2013 ( क्रमांक 30 सन् 2013 ) की धारा 11 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय की सूचना दी जाती है. राज्य शासन, इसके द्वारा , अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 12 द्वारा दी गई शक्तियों को प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-
अनुसूची
भूमि का वर्णन
तहसील
नगर/ग्राम
जिला
(3)
लगभग क्षेत्रफल (हैक्टेयर में) (4) (1) पन्ना
मुड़वारी
(2) गुनौर
निजी भूमि रकबा 8.989 है. एवं शासकीय भूमि रकबा 15.384 है. कुल रकबा 24.373 है.
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन
धारा 12 के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5) कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग, पवई.
(6) पवई मध्यम सिंचाई परियोजना अंतर्गत माईनर एवं सब माईनर नहर निर्माण हेतु ग्राम मुड़वारी , मुड़वारी माईनर , गर्रा माईनर , मैनहा माईनर , मैनहा सब माईनर -1 एवं मैनहा सब माईनर-2 नहर के निर्माण कार्य हेतु धारा -11 का प्रकाशन, ग्राम मुड़वारी, तहसील एवं अनुभाग गुनौर.
(2 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) कार्यपालन यंत्री , जल संसाधन संभाग , पवई, जिला पन्ना के कार्यालय में देखा जा सकता है .
4050
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
प्र. क्र. 07- अ - 82 - वर्ष 2019-20.- भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा -15 ( 1 ) के अंतर्गत प्रारंभिक अधिसूचना के प्रकाशन तारीख से प्रावधानित समय - सीमा 60 दिवस की समयावधि में कोई आपत्ति प्रस्तुत नहीं होने के कारण भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 15 ( 2 ) के अंतर्गत रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं हुई तथा इस आधार पर राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गई अनुसूची की कंडिका क्रमांक ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची की कंडिका क्रमांक ( 2 ) में वर्णित प्रयोजन के लिये आवश्यकता है, इस प्रकरण में किसी भी परिवार को विस्थापित नहीं किया जाना है , इसलिये पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन की स्कीम की आवश्यकता नहीं है , अतः भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 19 के अंतर्गत यह घोषित किया जाता है कि निम्न अनुसूची के कंडिका क्रमांक ( 1 ) में वर्णित भूमि कंडिका क्रमांक ( 2 ) में वर्णित लोक प्रयोजन के लिये अपेक्षित है:-
(1 ) भूमि का वर्णनः-
( क) जिला- पन्ना
(ख) तहसील- पवई
(ग ) ग्राम- कुड़गवा, प.ह.नं. 04
(घ) क्षेत्रफल-0.32 हेक्टेयर.
खसरा नम्बर
क्रमांक
अनुसूची
भूमि का प्रकार
कुल अर्जित रकबा
(हैक्टेयर में)
(1)
(2)
443/1
1
(3)
(4)
0.32
निजी भूमि
कुल अर्जित रकबा 0.32
(2) सार्वजनिक प्रयोजन जिसके लिये आवश्यकता है पटना तालाब योजना के अन्तर्गत बॉध निर्माण कार्य हेतु.
(3) भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) एवं भू-अर्जन अधिकारी, पवई में किया जा सकता है.
प्र. क्र. 24- अ - 82 - वर्ष 2020-21.- चूंकि, राज्य शासन को यह प्रतीत होता है कि, इससे संलग्न अनुसूची के खाने ( 1 ) से (4) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के खाने ( 6 ) में उसके सामने दिये गये सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है अथवा आवश्यकता पड़ने की संभावना है अतः भू-अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 ( क्रमांक 30 सन् 2013 ) की धारा 11 की उपधारा ( 1 ) के उपबंधों के अनुसार इसके द्वारा , सभी संबंधित व्यक्तियों को इस आशय , की सूचना दी जाती है. राज्य शासन , इसके द्वारा अनुसूची के खाने ( 5 ) में उल्लेखित अधिकारी को उक्त भूमि के संबंध में उक्त धारा 12 द्वारा दी गई शक्तियों को प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत करता है:-
जिला
भूमि का वर्णन नगर/ग्राम
तहसील
लगभग क्षेत्रफल (हैक्टेयर में ) (1) पन्ना
पवई (3)
(2) पवई
(4) निजी भूमि रकबा 22.348 है. एवं शासकीय भूमि रकबा 0.813 है. कुल रकबा 23.161 है .
अनुसूची
सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन धारा 12 के अंतर्गत प्राधिकृत अधिकारी
(5) कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग, पवई.
(6) पवई मध्यम सिंचाई परियोजना अंतर्गत माईनर एवं सब माईनर नहर निर्माण हेतु ग्राम पवई बनवार माईनर, नयाखेरा माईनर एवं टेल माईनर नहर के निर्माण कार्य हेतु धारा -11 का प्रकाशन , ग्राम पवई, तहसील एवं अनुभाग पवई.
(2 ) भूमि का नक्शा ( प्लान ) कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , पवई, जिला पन्ना के कार्यालय में देखा जा सकता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, संजय कुमार मिश्र, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
भाग 1 ]
4051
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
राजस्व विभाग
कार्यालय , कलेक्टर, जिला सिवनी, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग सिवनी, दिनांक 24 सितम्बर 2020
क्र. 5635- भू.अर्जन -2020. - चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि, नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि, के अनुसूची पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि की सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. पेंच व्यपवर्तन परियोजना की नहर निर्माण में किसी भी परिवार को विस्थापित नहीं किया जाना है , इसलिए इस प्रकरण में अधिनियम की धारा 19 ( 2 ) के अंतर्गत पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन स्कीम के सार की आवश्यकता नहीं है. अतः " भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 " की धारा -19 के अंतर्गत, इसके द्वारा , यह भी घोषित किया जाता है, कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है:-
अनुसूची
(1 ) भूमि का वर्णन- (क) जिला- सिवनी
(ख) तहसील- सिवनी
(ग ) नगर/ग्राम-भाटीवाड़ा ब. नं. - 452 , प.ह.नं. -42, रा.नि.मं.-भोमा.
(घ) अर्जित किये जाने वाला प्रस्तावित क्षेत्रफल -3.66 हेक्टेयर एवं प्रस्तावित क्षेत्रफल पर आने वाली संपत्तियां.
निजी भूमि का रकबा
प्रस्तावित
खसरा नम्बर
प्रस्तावित रकबा (हेक्टेयर में )
(2)
(1)
0.04
299/1
0.28
298/4
0.10
297/4
297/3
0.10
0.09
297/1
0.17
296/1
0.08
296/2
239/4
0.01
239/5
0.66
0.32
241/1
0.12
241/2
(2)
(1)
0.15
242
0.08
244
247
0.64
250
0.40
251/1
0.13
251/2
0.01
264
0.28
योग . 3.66
(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का विवरण जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है:- पेंच व्यपवर्तन परियोजना की ड़ी-4 उपवितरक नहर की बजरवाड़ा माईनर नहर के निर्माण हेतु निजी भूमि के अर्जन के संबंध में.
(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा (प्लान ) का निरीक्षण , भू- अर्जन अधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) , सिवनी के न्यायालय में किया जा सकता है .
( 4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा (प्लान ) का निरीक्षण , कार्यालय , कार्यपालन यंत्री, पेंच व्यपवर्तन परियोजना नहर संभाग , सिगना तहसील चौरई जिला में किया जा सकता है .
क्र. 5636- भू.अर्जन-2020.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि, नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि, के अनुसूची पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि की सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है . पेंच व्यपवर्तन परियोजना की नहर निर्माण में किसी भी परिवार को विस्थापित नहीं किया जाना है , इसलिए इस प्रकरण में अधिनियम की धारा 19 ( 2 ) के अंतर्गत पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन स्कीम के सार की आवश्यकता नहीं है. अतः " भूमि अर्जन , पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 " की धारा-19 के अंतर्गत, इसके द्वारा , यह भी घोषित किया जाता है , कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है:-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला-सिवनी
(ख ) तहसील- सिवनी 4052
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(ग ) नगर/ग्राम-सरगापुर ब. नं.- 537, प.ह.नं. -42, रा.नि.मं. - भोमा.
(घ) अर्जित किये जाने वाला प्रस्तावित क्षेत्रफल-3.35 हेक्टेयर एवं प्रस्तावित क्षेत्रफल पर आने वाली संपत्तियां.
निजी भूमि का रकबा
प्रस्तावित रकबा प्रस्तावित
खसरा नम्बर
(हेक्टेयर में )
(2)
(1)
0.02
105
0.14
94/1
0.09
94/2
0.11
94/3
0.10
95/1
0.08
95/2
0.04
95/3
0.25
92
0.58
91/1
0.02
91/2
0.09
97/1
0.03
97/2
0.07
98/2
0.18
70/8
0.01
73/5
0.01
98/4
70/7
0.07
0.11
70/6
70/5
0.16
0.24
70/2
0.20
71
0.13
73/1
73/7
0.26
0.11
73/3
74
0.25
3.35
योग
(2 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का विवरण जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है:- पेंच व्यपवर्तन परियोजना की डी 4 उपवितरक नहर की बजरवाड़ा माईनर नहर के निर्माण हेतु निजी भूमि के अर्जन के संबंध में.
( 3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा (प्लान ) का निरीक्षण , भू-अर्जन अधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) , जिला सिवनी के न्यायालय में किया जा सकता है.
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा (प्लान) का निरीक्षण , कार्यालय , कार्यपालन यंत्री, पेंच व्यपवर्तन परियोजना नहर संभाग , सिगना तहसील चौरई जिला में किया जा सकता है.
क्र. 5639 - भू.अर्जन-2020 .- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि, नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि, की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. पेंच व्यपवर्तन परियोजना अंतर्गत नहर निर्माण से किसी भी परिवार को विस्थापित नहीं किया जाना है, इसलिए इस प्रकरण में अधिनियम की धारा 19 ( 2 ) के अंतर्गत पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन स्कीम के सार की आवश्यकता नहीं है. अतः " भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 " की धारा 19 के अंतर्गत , इसके द्वारा , यह भी घोषित किया जाता है, कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है: -
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- सिवनी
(ख ) तहसील- सिवनी
नगर/ग्राम-कांचना ब. नं .- 62, प.ह.नं. -45, रा.नि.मं.-भोमा . (ग)
(घ) अर्जित किये जाने वाला प्रस्तावित क्षेत्रफल-0.84 हेक्टेयर एवं प्रस्तावित क्षेत्रफल पर आने वाली संपत्तियां.
निजी भूमि का रकबा
प्रस्तावित
प्रस्तावित रकबा (हेक्टेयर में) खसरा नम्बर (1)
(2)
1
0.15
0.40
2
0.11
4/1
0.01
37/1
4/2
0.06
0.11
39
योग . 0.84
(2 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का विवरण जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है:- पेंच व्यपवर्तन परियोजना की डी-4 उपवितरक नहर की जोगीवाड़ा माईनर नहर के निर्माण हेतु.
(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा (प्लान ) का निरीक्षण, अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) , सिवनी एवं भू-अर्जन अधिकारी , सिवनी के न्यायालय में किया जा सकता है.
भाग 1 ]
4053
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा (प्लान ) का निरीक्षण, कार्यालय, कार्यपालन यंत्री, पेंच व्यपवर्तन परियोजना नहर संभाग, सिगना , तहसील चौरई, जिला छिन्दवाड़ा में किया जा सकता है .
क्र. 5641 - भू.अर्जन-2020.-चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि, नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि, की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि की सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. पेंच व्यपवर्तन परियोजना की नहर निर्माण में किसी भी परिवार को विस्थापित नहीं किया जाना है, इसलिए इस प्रकरण में अधिनियम की धारा 19 ( 2 ) के अंतर्गत पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन स्कीम के सार की आवश्यकता नहीं है. अतः " भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 " की धारा-19 के अंतर्गत , इसके द्वारा , यह भी घोषित किया जाता है , कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है:-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- सिवनी
(ख) तहसील - सिवनी
(ग) नगर/ग्राम- खापा ब. नं. 110, प.ह.नं. -42, रा.नि.मं. -भोमा.
(घ) अर्जित किये जाने वाला प्रस्तावित क्षेत्रफल-0.56 हेक्टेयर एवं प्रस्तावित क्षेत्रफल पर आने वाली संपत्तियां .
निजी भूमि का रकबा
प्रस्तावित
खसरा नम्बर
प्रस्तावित रकबा (हेक्टेयर में )
(1)
(2)
0.15
1
0.05
64
0.36
29
योग . 0.56
(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का विवरण जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है:-पेंच व्यपवर्तन परियोजना की डी-4 उपवितरक नहर एवं खापा माईनर नहर के निर्माण हेतु. निजी भूमि के अर्जन के संबंध में.
(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा (प्लान ) का निरीक्षण , भू- अर्जन अधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) , सिवनी के न्यायालय में किया जा सकता है .
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा (प्लान ) का निरीक्षण, कार्यालय, कार्यपालन यंत्री, पेंच व्यपवर्तन परियोजना नहर संभाग . सिगना, तहसील चौरई जिला में किया जा सकता है .
क्र. 5642- भू.अर्जन-2020 .- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि, नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि, की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि की सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. पेंच व्यपवर्तन परियोजना की नहर निर्माण में किसी भी परिवार को विस्थापित नहीं किया जाना है, इसलिए इस प्रकरण में अधिनियम की धारा 19 ( 2 ) के अंतर्गत पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन स्कीम के सार की आवश्यकता नहीं है. अतः " भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 " की धारा -19 के अंतर्गत, इसके द्वारा , यह भी घोषित किया जाता है , कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है:-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क ) जिला- सिवनी
(ख ) तहसील - सिवनी
(ग) नगर/ग्राम- मगरकठा ब. नं .- 470 , प.ह.नं. -42, रा.नि.मं.-भोमा.
(घ) अर्जित किये जाने वाला प्रस्तावित क्षेत्रफल-4.07 हेक्टेयर एवं प्रस्तावित क्षेत्रफल पर आने वाली संपत्तियां.
निजी भूमि का रकबा
प्रस्तावित
खसरा नम्बर
प्रस्तावित रकबा (हेक्टेयर में ) (1)
(2)
64
0.12
0.18
66
0.21
109
0.23
108
107/2
0.03
0.26
107/5
0.21
107/1
98/2
0.01
97
0.02
0.01
96/1
96/2
0.01
0.02
96/3
0.05
95
94
0.04
93
0.02
0.04
92
38
0.04
40
0.09
0.08
27/1 4054
[ भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(1)
(2)
0.11
27/2
0.18
24/1
0.17
24/2
0.04
21/3
0.11
21/2
0.06
21/1
20
0.21
0.11
19
0.12
18
0.15
9
0.17
10/1
10/2
0.18
10/3
0.12
0.33
11
0.17
14/1
0.17
14/2
योग 4.07
(2 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का विवरण जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है:- पेंच व्यपवर्तन परियोजना की डी-4 उपवितरक नहर बजरवाड़ा माईनर नहर के निर्माण हेतु. निजी भूमि के अर्जन के संबंध में.
(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा (प्लान ) का निरीक्षण , भू-अर्जन अधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) , सिवनी के न्यायालय में किया जा सकता है .
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा (प्लान ) का निरीक्षण, कार्यालय , कार्यपालन यंत्री, पेंच व्यपवर्तन परियोजना नहर संभाग , सिगना तहसील चौरई जिला में किया जा सकता है .
क्र. 5643 - भू.अर्जन-2020. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि, नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि, के अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. पेंच व्यपवर्तन परियोजना की नहरों के निर्माण में किसी भी परिवार को विस्थापित नहीं किया जाना है , इसलिए इस प्रकरण में अधिनियम की धारा 19 ( 2 ) के अंतर्गत पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन स्कीम के सार की आवश्यकता नहीं है. अतः " भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 " की धारा -19 के अंतर्गत, इसके द्वारा , यह भी घोषित किया जाता है , कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है:-
अनुसूची
(1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- सिवनी
(ख ) तहसील- सिवनी
(ग) नगर/ग्राम-ग्राम मोआरी रैयत ब. नं.-479 , प.ह.नं. -42, रा.नि.मं.- भोमा.
(घ) अर्जित किये जाने वाला प्रस्तावित क्षेत्रफल-1.80 हेक्टेयर एवं प्रस्तावित क्षेत्रफल पर आने वाली संपत्तियां.
निजी भूमि का रकबा
प्रस्तावित
खसरा नम्बर
प्रस्तावित रकबा (हेक्टेयर में)
(2)
(1)
55/1
0.32
54/1
0.09
0.10
54/2
54/3
0.12
53
0.14
52
0.12
51
0.09
0.05
50
0.02
49
44/1
0.06
44/3
0.09
0.15
45/1
0.20
45/2
0.25
योग .. 1.80
( 2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का विवरण जिसके लिये भूमि की आवश्यक्रता है:- पेंच व्यपवर्तन परियोजना की बजरवाड़ा माईनर नहर के निर्माण हेतु.
(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा (प्लान ) का निरीक्षण , अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) एवं भू-अर्जन अधिकारी सिवनी के न्यायालय में किया जा सकता है .
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा (प्लान) का निरीक्षण, कार्यालय, कार्यपालन यंत्री, पेंच व्यपवर्तन परियोजना नहर संभाग , सिगना, तहसील चौरई जिला छिन्दवाड़ा के कार्यालय में किया जा सकता है.
क्र. 5646 - भू.अर्जन-2020. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि, नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि, की अनुसूची पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि की सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. पेंच व्यपवर्तन परियोजना की नहर निर्माण में किसी भी परिवार को विस्थापित नहीं किया जाना है , इसलिए इस प्रकरण में अधिनियम की धारा 19 ( 2 ) के अंतर्गत पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन स्कीम के सार की आवश्यकता नहीं है. अतः " भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित भाग 1 ]
4055
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 " की धारा -19 के अंतर्गत, इसके द्वारा , यह भी घोषित किया जाता है , कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है:-
अनुसूची
(1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- सिवनी
(ख ) तहसील- सिवनी
(ग) नगर/ग्राम- ग्राम उमरिया, ब. नं. - 27 , प.ह.नं. - 26 . रा.नि.मं. बंड़ोल.
(घ) अर्जित किये जाने वाला प्रस्तावित क्षेत्रफल-2.18 हेक्टेयर एवं प्रस्तावित क्षेत्रफल पर आने वाली संपत्तियां.
निजी भूमि का रकबा
प्रस्तावित खसरा नम्बर
प्रस्तावित रकबा (हेक्टेयर में ) (1)
(2)
0.04
174
172
0.06
0.15
106/1
106/2
0.01
85/2
0.15
0.15
84
70
0.06
66
0.13
69
0.10
0.20
71
0.02
83
0.09
72
0.26
73
0.06
75/2
0.22
75/3
0.08
75/4
0.06
76
0.01
78/4
0.06
82
74
0.23
0.04
59
योग 2.18
(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का विवरण जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है:-पेंच व्यपवर्तन परियोजना की डी-3 वितरक नहर की माईनर नहर के निर्माण हेतु निजी भूमि के अर्जन के संबंध में,
(3 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा (प्लान ) का निरीक्षण, भू- अर्जन अधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) सिवनी, के न्यायालय में किया जा सकता है .
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा (प्लान) का निरीक्षण , कार्यालय , कार्यपालन यंत्री, पेंच व्यपवर्तन परियोजना नहर संभाग , सिगना तहसील चौरई जिला छिन्दवाड़ा में किया जा सकता है.
क्र. 5647- भू.अर्जन -2020.-चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि, नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि, की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि की सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. पेंच व्यपवर्तन परियोजना की नहर निर्माण में किसी भी परिवार को विस्थापित नहीं किया जाना है, इसलिए इस प्रकरण में अधिनियम की धारा 19 ( 2 ) के अंतर्गत पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन स्कीम के सार की आवश्यकता नहीं है. अतः " भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम , 2013 " की धारा -19 के अंतर्गत, इसके द्वारा , यह भी घोषित किया जाता है कि उक्त निजी भूमि तथा स्थित संपत्ति के अर्जन हेतु उक्त प्रयोजन के लिए आवश्यकता है:-
अनुसूची धारा -19
(1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- सिवनी
(ख) तहसील-छपारा
(ग ) नगर/ग्राम- गोहना ब. नं. -177 ,
प.ह.नं. - 38 , रा.नि.मं.- छपारा
(घ) लगभग क्षेत्रफल- 0.38 हेक्टेयर एवं अर्जित क्षेत्रफल पर आने वाली संपत्तियां.
(अ ) निजी भूमि का विवरण
खसरा नम्बर
अर्जित क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) (1)
(2)
158/6
0.02
158/5
0.03
0.05
158/4
158/8
0.01
158/2
0.01
158/3
0.26
योग (अ) 0.38
( 1 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है:- पेंच व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत सिवनी शाखा नहर से निकलने वाली D - 4 माईनर नहर के निर्माण हेतु. निजी एवं शासकीय भूमि अर्जन हेतु.
4056
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे (प्लान ) निरीक्षण , भू-अर्जन अधिकारी सिवनी एवं अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व) लखनादौन, जिला सिवनी के न्यायालय में किया जा सकता है .
(3 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे (प्लान) एवं प्रकरण का निरीक्षण कार्यालय, कार्यपालन यंत्री पेंच व्यपवर्तन परियोजना, नहर संभाग सिंगना तहसील चौरई , जिला छिन्दवाड़ा के कार्यालय में भी किया जा सकता है.
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे (प्लान) एवं प्रकरण का निरीक्षण कार्यालय , अनुविभागीय अधिकारी पेंच व्यपवर्तन परियोजना बांयी तट नहर उपसंभाग क्रमांक -6 सिवनी के कार्यालय में भी किया जा सकता है.
क्र. 5648- भू.अर्जन-2020.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि, नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि, की अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि की सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. पेंच व्यपवर्तन परियोजना की नहर निर्माण में किसी भी परिवार को विस्थापन नहीं किया जाना है, इसलिए इस प्रकरण में अधिनियम की धारा 19 ( 2 ) के अंतर्गत पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन स्कीम की आवश्यकता नहीं है. अतः " भूमि अर्जन , पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 " की धारा 19 के अंतर्गत , इसके द्वारा , यह भी घोषित किया जाता है, कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है:-
अनुसूची धारा -19
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- सिवनी
(ख) तहसील-छपारा
(ग) नगर/ग्राम- झिलमिली, ब. नं .- 271 , प.ह.नं. - 37 , रा.नि.मं. - छपारा
(घ) लगभग क्षेत्रफल-1.06 हेक्टेयर एवं अर्जित क्षेत्रफल पर आने वाली संपत्तियां.
( अ ) निजी भूमि का विवरण
खसरा नम्बर
अर्जित क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
(1)
(2)
0.05
207
0.02
197/2
0.15
197/3
0.04
193/2
156/2
0.03
0.07
194/2
0.05
193/1
(2)
(1)
0.18
156/1
161/2
0.05
161/1
0.03
0.05
159/1
0.02
159/2
160
0.23
0.01
161/3
योग (अ) 1.06
( 2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है:- पेंच व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत सिवनी शाखा नहर से निकलने वाली डी-3 माईनर नहर के निर्माण हेतु निजी एवं शासकीय भूमि अर्जन हेतु.
(3) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे (प्लान) निरीक्षण , भू-अर्जन अधिकारी सिवनी एवं अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) लखनादौन, जिला सिवनी के न्यायालय में किया जा सकता है.
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे (प्लान) एवं प्रकरण का निरीक्षण कार्यालय , कार्यपालन यंत्री पेंच व्यपवर्तन परियोजना, नहर संभाग सिंगना तहसील चौरई, जिला छिन्दवाड़ा के कार्यालय में भी किया जा सकता है.
(5 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे (प्लान ) एवं प्रकरण का निरीक्षण कार्यालय, अनुविभागीय अधिकारी पेंच व्यपवर्तन परियोजना बांयी तट नहर उपसंभाग क्रमांक 7 सिवनी के कार्यालय में भी किया जा सकता है .
क्र. 5649 - भू.अर्जन-2020. चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि, नीचे दी गई अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि, की अनुसूची के पद (2 ) में उल्लेखित भूमि की सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. पेंच व्यपवर्तन परियोजना की नहर निर्माण में किसी भी परिवार को विस्थापन नहीं किया जाना है, इसलिए इस प्रकरण में अधिनियम की धारा 19 (2 ) के अंतर्गत पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन स्कीम की आवश्यकता नहीं है. अतः " भूमि अर्जन , पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 " की धारा 19 के अंतर्गत, इसके द्वारा , यह भी घोषित किया जाता है , कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है:-
अनुसूची धारा -19
(1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- सिवनी
(ख ) तहसील- छपारा भाग 1 ]
4057
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(ग) नगर/ग्राम- सिमरिया, ब . नं . -723 , प.ह.नं. - 38, रा.नि.मं. -छपारा
(घ) लगभग क्षेत्रफल- 1.30 हेक्टेयर एवं अर्जित क्षेत्रफल पर आने वाली संपत्तियां.
( अ ) निजी भूमि का विवरण
खसरा नम्बर
(हेक्टेयर में) अर्जित क्षेत्रफल (1)
(2)
265
0.07
258/1
0.39
256/2
0.02
0.28
254/1
254/2
0.06
0.40
245
0.07
243
240
0.01
योग (अ) 1.30
(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है:- पेंच व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत सिवनी शाखा नहर से निकलने वाली डी -4 माईनर नहर के निर्माण हेतु निजी एवं शासकीय भूमि अर्जन हेतु.
(3 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे (प्लान ) निरीक्षण , भू-अर्जन अधिकारी सिवनी एवं अनुविभागीय अधिकारी ( राजस्व ) लखनादौन, जिला सिवनी के न्यायालय में किया जा सकता है .
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे (प्लान) एवं प्रकरण का निरीक्षण कार्यालय , कार्यपालन यंत्री पेंच व्यपवर्तन परियोजना , नहर संभाग सिंगना तहसील चौरई , जिला छिन्दवाड़ा के कार्यालय , में भी किया जा सकता है.
(5 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे (प्लान ) एवं प्रकरण का निरीक्षण कार्यालय , अनुविभागीय अधिकारी पेंच व्यपवर्तन परियोजना बांयी तट नहर उपसंभाग क्रमांक-6 सिवनी के कार्यालय में भी किया जा सकता है.
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार , राहुल हरिदास फटिंग , कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
कार्यालय , कलेक्टर, जिला छिन्दवाड़ा, मध्यप्रदेश एवं पदेन उपसचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग छिन्दवाड़ा, दिनांक 12 अक्टूबर 2020
क्र. 7623 - भू- अर्जन -2020.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गयी अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि की सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः " भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता काअधिकार अधिनियम, 2013 " की धारा 19 के अंतर्गत , इसके द्वारा , यह भी घोषित किया जाता है , कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है:-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- छिन्दवाड़ा
(ख) तहसील-मोहखेड
(ग ) नगर/ग्राम- ग्राम- हीरावाडी, प.ह.नं. - 02, ब. नं. -604, रा. नि. मं.- सांवरी.
(घ) अर्जित किये जाने वाला प्रस्तावित क्षेत्रफल-
कुल रकबा 14.911 हेक्टेयर एवं प्रस्तावित क्षेत्रफल पर आने वाली संपत्तियां.
प्रस्तावित खसरा नम्बर
प्रस्तावित रकबा (हेक्टेयर में) (1)
(2)
430/2
0.606
430/4
0.050
427/6
0.024
430/1
2.161
430/3
0.522
430/5
0.250
427/7
0.168
429
0.093
433
2.878
420
0.120
422
0.180
437/1
2.675
434/1
1.439
434/3
0.239
437/3
0.080
434/7
0.240
437/7
0.080
434/4
0.240
437/4
0.080
434/5
0.240
437/5
0.080 4058
[भाग 1
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(1)
(2)
437/2
0.080
0.241
434/2
438/2
0.728
438/5
0.350
421
0.216
0.072
240/1
419/1
0.031
240/2
0.053
241
0.106
242
0.053
244
0.130
251
0.087
0.239
434/6
0.080
437/6
योग कुल रकबा.. 14.911 हेक्टेयर एवं प्रस्तावित क्षेत्रफल पर
आने वाली
संपत्तियां.
( 2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है- हीरावाडी जलाशय के बांध निर्माण हेतु लघु सिंचाई योजना के लिये निजी भूमि के अर्जन के संबंध में.
(3 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई व्यक्ति अधिसूचना प्रकाशन की जानकारी वेबसाईट http://www.chhindwara.mp . gov.in एवं म. प्र. शासन, राजस्व विभाग , भोपाल की वेबसाईट http://www.mprevenue.nic.in/ पर भी देखा जा सकता है.
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा(प्लान ) का निरीक्षण , भू- अर्जन अधिकारी , तहसील- सौंसर, जिला छिन्दवाड़ा के न्यायालय में कार्यालयीन समय पर किया जा सकता है .
(5) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे (प्लान) का निरीक्षण, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , छिन्दवाड़ा के कार्यालय में कार्यालयीन समय पर किया जा सकता है .
(6) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शा (प्लान ) एवं प्रकरण का निरीक्षण , अनुविभागीय अधिकारी, कन्हरगांव नहर परियोजना उपसंभाग क्रमांक- 2 छिन्दवाड़ा, जिला छिन्दवाड़ा के कार्यालय में कार्यालयीन समय पर किया जा सकता है .
क्र. 7624- भू-अर्जन-2020.- चूंकि, राज्य शासन को इस बात का समाधान हो गया है कि नीचे दी गयी अनुसूची के पद ( 1 ) में वर्णित भूमि की, अनुसूची के पद ( 2 ) में उल्लेखित भूमि की सार्वजनिक प्रयोजन के लिये आवश्यकता है. अतः " भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता काअधिकार अधिनियम , 2013 " की धारा 19 के अंतर्गत, इसके द्वारा , यह भी घोषित किया जाता है , कि उक्त भूमि की उक्त प्रयोजन के लिये आवश्यकता है:-
अनुसूची
( 1 ) भूमि का वर्णन-
(क) जिला- छिन्दवाड़ा
(ख) तहसील-मोहखेड
(ग) नगर/ग्राम- ग्राम डोडिया, प.ह.नं. -02 , ब. नं. - 230, रा. नि. मं.- सांवरी.
(घ )
कुल रकबा 07.525 अर्जित किये जाने वाला प्रस्तावित क्षेत्रफल-
हेक्टेयर एवं प्रस्तावित क्षेत्रफल पर आने वाली संपत्तियां.
प्रस्तावित खसरा
नम्बर
प्रस्तावित रकबा (हेक्टेयर में) (1)
(2)
378/2
0.467
378/3
0.485
378/1
0.738
378/5
0.921
0.910
378/4
380/1
0.050
375/3
01.417
377
0.882
375/2
0.408
376
0.630
375/1
0.282
367/1
0.030
366/2
0.093
367/2
0.030
366/1
0.092
0.030
367/3
367/4
0.030
367/5
0.030
योग कुल रकबा.. 07.525 हेक्टेयर एवं
प्रस्तावित
क्षेत्रफल पर
आने वाली
संपत्तियां.
4059 भाग 1 ]
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 23 अक्टूबर 2020
(5) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के नक्शे (प्लान ) का निरीक्षण, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग , छिन्दवाड़ा के कार्यालय में कार्यालयीन समय पर किया जा सकता है.
(2) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित भूमि के सार्वजनिक प्रयोजन का वर्णन जिसके लिये भूमि की आवश्यकता है- हीरावाडी जलाशय के बांध निर्माण हेतु लघु सिंचाई योजना के लिये निजी भूमि के अर्जन के संबंध में.
(6 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा (प्लान ) एवं प्रकरण का निरीक्षण , अनुविभागीय अधिकारी , कन्हरगांव नहर परियोजना उपसंभाग क्रमांक- 2 छिन्दवाड़ा, जिला छिन्दवाड़ा के कार्यालय में कार्यालयीन समय पर किया जा सकता है.
(3 ) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि के बारे में हितबद्ध कोई व्यक्ति अधिसूचना प्रकाशन की जानकारी वेबसाईट http://www.chhindwara.mp . gov.in एवं म. प्र. शासन , राजस्व विभाग , भोपाल की वेबसाईट http://www.mprevenue.nic.in/ पर भी देखा जा सकता है .
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार , सौरभ कुमार सुमन, कलेक्टर एवं पदेन उपसचिव.
(4) अर्जित की जाने वाली उल्लेखित प्रस्तावित भूमि का नक्शा ( प्लान ) का निरीक्षण , भू- अर्जन अधिकारी, तहसील- सौंसर, जिला छिन्दवाड़ा के न्यायालय में कार्यालयीन समय पर किया जा सकता है .