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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

मध्‍यप्रदेश कराधान अधिनियमों की पुरानी बकाया राशि का समाधान विधेयक 2021...

Published 24 February 2021

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
92
Identifier
in.gazette.madhya.2021-02-24.92.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

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मध्यप्रदेश शासन

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

भोपाल , बुधवार, दिनांक 24 फरवरी 2021 - फाल्गुन 5 , शक 1942

क्रमांक 92]

विधान सभा सचिवालय , मध्यप्रदेश

भोपाल , दिनांक 24 फरवरी , 2021

क्र. 2955 - मप्रविस - 15- विधान-2021 .- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम-64 के उपबंधों के पालन में , मध्यप्रदेश कराधान अधिनियमों की पुरानी बकाया राशि का समाधान विधेयक, 2021 ( क्रमांक 7 सन् 2021 ) जो विधान सभा में दिनांक 24 फरवरी 2021 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव , मध्यप्रदेश विधान सभा.

183 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 फरवरी 2021

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मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक ७ सन् २०२१

मध्यप्रदेश कराधान अधिनियमों की पुरानी बकाया राशि का समाधान विधेयक, २०२१

विषय-सूची

खण्ड:

१. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ .

२. परिभाषाएं.

३. सक्षम प्राधिकारी.

४. समाधान राशि.

५. समाधान की शर्तें.

६. आवेदनों का निराकण.

७. भूलों का परिशोधन.

८. अपील.

९. समाधान आदेश का प्रतिसंहरण.

१०. इस अधिनियम के अधीन आयुक्त की शक्ति.

११. नियम बनाने की शक्ति.

१२. कठिनाइयां दूर करने की शक्ति.

१३. निरसन तथा व्यावृत्ति.

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 फरवरी 2021

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मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक ७ सन् २०२१

मध्यप्रदेश कराधान अधिनियमों की पुरानी बकाया राशि का समाधान विधेयक, २०२१

वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा प्रशासित मध्यप्रदेश सामान्य विक्रय कर अधिनियम , १ ९ ५८ ( क्रमांक २ सन् १ ९ ५९ ) ( निरसित ) , मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर अधिनियम , १ ९९४ ( क्रमांक ५ सन् १ ९९ ५ ) निरसित, मध्यप्रदेश वेट अधिनियम , २००२ ( क्रमांक २० सन् २००२ ) , केन्द्रीय विक्रय कर अधिनियम, १ ९ ५६ ( १ ९ ५६ का ७४ ) , मध्यप्रदेश होटल तथा वास गृहों में विलास वस्तुओं पर कर अधिनियम , १ ९ ८८ ( क्रमांक १३ सन् १ ९ ८८ ) ( निरसित ) तथा मध्यप्रदेश विलासिता, मनोरंजन , आमोद एवं विज्ञापन कर अधिनियम , २०११ ( क्रमांक ११ सन् २०११ ) ( निरसित ) के अधीन पुरानी बकाया की राशि के समाधान के लिए तथा उससे संसक्त या उसके आनुषंगिक विषयों के लिए उपबंध करने हेतु विधेयक.

हो:- भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान-मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित

संक्षिप्त नाम , विस्तार और प्रारंभ.

१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश कराधान अधिनियमों की पुरानी बकाया राशि का समाधान अधिनियम, २०२१ है.

( २ ) इसका विस्तार संपूर्ण मध्यप्रदेश राज्य पर होगा.

(३ ) यह मध्यप्रदेश कराधान अधिनियमों की पुरानी बकाया राशि का समाधान अध्यादेश , २०२० ( क्रमांक ११ सन् २०२० ) के राजपत्र में , इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा.

परिभाषाएं.

२. ( १ ) इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) " अपीलीय प्राधिकारी " से अभिप्रेत है , अधिनियम की धारा ८ में विनिर्दिष्ट अपीलीय प्राधिकारी;

( ख ) " निर्धारित कर " से अभिप्रेत है, सुसंगत अधिनियम के अधीन निर्धारण या पुनर्निर्धारण के किसी आदेश के अधीन देय के रूप में निर्धारित कर;

(ग ) " आवेदक" से अभिप्रेत है , ऐसा व्यक्ति, जो सुसंगत अधिनियमों के अधीन पुरानी बकाया का भुगतान करने का दायी है और इसमें वह व्यक्ति भी सम्मिलित है जो किसी अन्य व्यक्ति की, जो इस अधिनियम के अधीन शर्तों के अनुपालन द्वारा समाधान की प्रसुविधा का लाभ उठाने का इच्छुक है, पुरानी बकाया राशि का समाधान करने की वांछा करता है.

(घ ) " आयुक्त " से अभिप्रेत है, मध्यप्रदेश वेट अधिनियम , २००२ ( क्रमांक २० सन् २००२ ) की धारा ३ के अधीन नियुक्त वाणिज्यिक कर आयुक्त;

(ङ) " सक्षम प्राधिकारी " से अभिप्रेत है , अधिनियम की धारा ३ की उपधारा ( २ ) में विनिर्दिष्ट सक्षम प्राधिकारी;

(च ) " विवादित राशि " से अभिप्रेत है, कोई मांग जिसके विरूद्ध किसी अपीलीय प्राधिकारी या न्यायाधिकरण के समक्ष कोई वाद प्रस्तुत किया गया हो, परन्तु इसमें ऐसी मांग सम्मिलित नहीं होगी, जहां शासन ने ऐसी मांग के विरुद्ध वाद किसी अपीलीय प्राधिकारी अथवा न्यायाधिकरण के समक्ष या इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के पूर्व प्रस्तुत कर दिया हो;

(छ ) " पुरानी बकाया " से अभिप्रेत है, -

(एक) सुसंगत अधिनियम के अधीन कर, चाहे वह किसी भी नाम से जाना जाता हो;

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2021

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(दो) सुसंगत अधिनियम के अधीन देय ब्याज;

(तीन) सुसंगत अधिनियम के अधीन अधिरोपित शास्ति :

परंतु किसी सांविधिक आदेश के संबंध में , जहाँ ३१ मार्च, २०१६ को या उसके पूर्व समाप्त होने वाली किसी कालावधि हेतु निर्धारण , पुनर्निर्धारण और/ या शास्ति और/या ब्याज के किसी आदेश के संबंध में समाधान की वांछा की गई है, जो धारा ५ की उपधारा ( १ ) के अधीन आवेदन प्रस्तुत करने की तारीख को भुगतान के लिये शोध्य होः

परंतु यह और कि पुरानी बकाया में मध्यप्रदेश वेट अधिनियम , २००२ ( क्रमांक २० सन् २००२ ) की धारा ५५ या ५७ के साथ पठित सुसंगत अधिनियम के अधीन पारित किसी सांविधिक आदेश द्वारा सृजित कोई मांग और सुसंगत अधिनियमों के अधीन राज्य सरकार द्वारा समय - समय पर जारी कर योजनाओं के आस्थगन से संबंधित कोई बकाया सम्मिलित नहीं होगी;

(ज) " समाधान आदेश " से अभिप्रेत है, सुसंगत अधिनियम के अधीन पुरानी बकाया राशि के समाधान तथा पुरानी बकाया राशि के अधित्यजन के संबंध में इस अधिनियम के अधीन जारी किया गया कोई आदेश;

(झ ) " सुसंगत अधिनियम " से अभिप्रेत है, -

(एक) मध्यप्रदेश सामान्य विक्रय कर अधिनियम, १ ९५८ ( क्रमांक २ सन् १ ९ ५९ ) ( निरसित ) ; या (दो) मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर अधिनियम, १ ९९ ४ ( क्रमांक ५ सन् १ ९९ ५ ) ( निरसित ) ; या (तीन) मध्यप्रदेश वेट अधिनियम, २००२ ( क्रमांक २० सन् २००२ ) ; या

(चार ) केन्द्रीय विक्रय कर अधिनियम, १ ९५६ (१ ९५६ का ७४ ) ; या

(पांच) मध्यप्रदेश होटल तथा वास गृहों में विलास वस्तुओं पर कर अधिनियम , १ ९ ८८ ( क्रमांक १३ सन् १ ९८८ ) ( निरसित ); या

(छह ) मध्यप्रदेश विलासिता, मनोरंजन , आमोद एवं विज्ञापन कर अधिनियम , २०११ ( क्रमांक ११ सन् २०११ ) ( निरसित ) ;

और इसमें इसके अधीन बनाए गए नियम या जारी की गई अधिसूचनाएं सम्मिलित हैं;

(ञ) " समाधान राशि " से अभिप्रेत है , आवेदक द्वारा पुरानी राशि के समाधान के लिए अपने आवेदन के साथ , भुगतान की जाने वाली राशि जिसमें धारा ६ की उपधारा ( २ ) के अधीन जारी सूचना पत्र के अनुसार भुगतान की जाने वाली राशि सम्मिलित हैं;

(ट ) इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए, " सांविधिक प्रमाण- पत्र " से अभिप्रेत है, केन्द्रीय विक्रय कर (पंजीकरण एवं टर्नओवर ) नियम, १९ ५७ के नियम १२ के अधीन उल्लिखित घोषणाएं और प्रमाणपत्र;

(ठ) " सांविधिक आदेश " से अभिप्रेत है, सुसंगत अधिनियम के अधीन पारित नवीनतम आदेश जिसके अधीन देय कर और/या ब्याज और/या शास्ति की मांग की गई है;

(ड) " अविवादित राशि " से अभिप्रेत है, ऐसी राशि जो विवादित नहीं है या जो सांविधिक प्रमाण- पत्रों या घोषणाओं से संबंधित नहीं है.

(२ ) उन शब्दों एवं अभिव्यक्तियों का, जो कि इस अधिनियम में प्रयोग की गई हैं किन्तु परिभाषित नहीं की गई हैं, वही अर्थ होगा जैसा कि सुसंगत अधिनियम के अधीन उन्हें समनुदेशित किया गया है.

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सक्षम प्राधिकारी.

३. ( १ ) वाणिज्यिक कर आयुक्त, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए आयुक्त होगा.

( २ ) मध्यप्रदेश वेट अधिनियम, २००२ ( क्रमांक २० सन् २००२ ) की धारा ३ की उपधारा ( १ ) में यथाविनिर्दिष्ट तथा मध्यप्रदेश वेट अधिनियम, २००२ की धारा ३ की उपधारा ( ४ ) में यथाविनिर्दिष्ट अधिकारिता रखने वाले सहायक आयुक्त , वाणिज्यिक कर, वाणिज्यिक कर अधिकारी और सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए सक्षम प्राधिकारी होंगे .

(३ ) उपधारा ( २ ) में यथाविर्निदिष्ट सक्षम प्राधिकारी को किसी आवेदन के संबंध में पुरानी बकाया की निम्नलिखित सीमाओं के अनुसार वित्तीय अधिकारिता होगी-

(एक) ५ लाख रुपए से अनधिक राशि के लिये सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी;

(दो) १५ लाख रुपए से अनधिक राशि के लिए वाणिज्यिक कर अधिकारी;

(तीन) किसी भी राशि के लिये सहायक आयुक्त :

परंतु आयुक्त या तो स्वप्रेरणा से या किसी आवेदक द्वारा प्रस्तुत किए गए आवेदन पर किसी एक या समस्त आवेदनों को, एक सक्षम प्राधिकारी से अन्य सक्षम प्राधिकारी को अंतरित कर सकेगा.

४. ( १ ) पुरानी बकाया के समाधान के लिये प्रत्येक आवेदन के साथ संदाय की जाने वाली समाधान राशि समाधान राशि. नीचे दी गई सारणी के अनुसार होगी , अर्थात्: -

सारणी

प्रकरणों के प्रकार

क्र.

समाधान हेतु कर से

संबंधित संदत्त की जाने

वाली राशि

समाधान हेतु ब्याज और/या शास्ति से संबंधित संदत्त की जाने वाली राशि (४)

(३)

(२)

(१)

(१ ) वैधानिक प्रमाण- पत्र/घोषणा पत्र से संबंधित राशि.

सांविधिक आदेश के अनुसार ब्याज की मांग का १० प्रतिशत .

आवेदन की तारीख को शोध्य आवेदक द्वारा प्रस्तुत स्वीकृत करने योग्य प्रमाण पत्र/घोषणा पत्रों के मूल्य में अंतर्वलित कर की राशि कम करके विवादित कर के बकाया की शेष राशि का १०० प्रतिशत या कर की ऐसी बकाया की पहले ही भुगतान की गई राशि, जो भी अधिक हो;

( २) अविवादित राशि

( क ) १० प्रतिशत , यदि अधिनियम के प्रवृत्त होने के ६० वें दिन या उसके पहले भुगतान किया जाता है.

आवेदन दिनांक को किसी सांविधिक आदेश में कर की अतिरिक्त मांग के विरूद्ध पहले ही भुगतान की गई राशि को घटाकर शेष राशि मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2021

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(४)

(३)

(२)

(१ )

(ख ) २० प्रतिशत, यदि अधिनियम के प्रवृत्त होने के ६०वें दिन के पश्चात् किन्तु ९ ० दिन के पूर्व भुगतान किया जाता है .

(ग) ३० प्रतिशत, यदि अधिनियम के प्रवृत्त होने के ९ ०वें दिन के पश्चात् किन्तु १२० दिन के पूर्व भुगतान किया जाता है:

परंतु किसी भी दशा में प्रतिदाय नहीं किया जाएगा यदि उपरोक्त दी गई सीमा से अधिक राशि का भुगतान कर दिया गया हो.

( ३ ) विवादित राशि

किसी सांविधिक आदेश में कर की मांग का ५० प्रतिशत. यदि पूर्व में जमा की गई राशि ५० प्रतिशत से अधिक हो तो उसकी वापसी नहीं की जाएगी.

( क ) मांग का ५ प्रतिशत, यदि अधिनियम के प्रवृत्त होने के ६० दिनों के भीतर भुगतान किया गया हो, यदि पूर्व में जमा की गई राशि ५ प्रतिशत से अधिक हो तो उसका प्रतिदाय नहीं किया जाएगा.

(ख ) मांग का १० प्रतिशत , यदि अधिनियम के प्रवृत्त होने के ६० दिनों के पश्चात् भुगतान किया गया हो , यदि पूर्व में जमा की गई राशि १० प्रतिशत से अधिक हो तो उसका प्रतिदाय नहीं किया जाएगा.

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2021

परंतु यह कि, जहां स्वतंत्र रूप से शास्ति या ब्याज के आदेश हेतु समाधान आवेदन प्रस्तुत किया गया है केवल उस पर तब विचार किया जाएगा जबकि सुसंगत कर की मांग का भुगतान कर दिया गया हो अथवा अधिनियम के अधीन समाधान आदेश पारित कर दिया गया हो:

परंतु यह और कि समाधान राशि की संगणना के लिए यदि किसी सांविधिक आदेश के संबंध में किसी अंश कर/ब्याज/ शास्ति को शामिल करते हुए संयुक्त अंश का भुगतान कर दिया गया है तो ऐसी संयुक्त अंशतः भुगतान राशि सांविधिक आदेश केअनुसार कर, ब्याज , तथा शास्ति की राशि के अनुपात में शोध्य कर, ब्याज तथा शास्ति की बकाया राशि के विरुद्ध आनुपातिक रूप से समायोजित की जाएगी.

( २ ) समाधान राशि का भुगतान , यथास्थिति, सुसंगत अधिनियम के अधीन या मध्यप्रदेश वेट नियम , २००६ के नियम ३७ के उपनियम ( ६ ) के अधीन विहित चालान के प्ररूप में इलेक्ट्रॉनिक रूप से किया जाएगा.

समाधान की शर्तें.

५. ( १ ) पुराने बकाया का समाधान चाहने वाला आवेदक, अधिनियम के प्रवृत्त होने की तारीख से १२० दिन के भीतर, आयुक्त द्वारा यथाविनिर्दिष्ट प्ररूप में, धारा ४ की उपधारा ( १ ) के अनुसार आवश्यक समाधान राशि के भुगतान के प्रमाण के साथ, सक्षम प्राधिकारी को आवेदन करेगाः

परंतु राज्य सरकार , यदि लोकहित में आवश्यक समझती है तो उपरोक्त समय - सीमा और अधिनियम की धारा ४ की उपधारा ( १ ) की सारणी के कॉलम (४ ) में विनिर्दिष्ट समय सीमा में वृद्धि कर सकेगी .

जाएंगे. ( २ ) आवेदक द्वारा प्रत्येक सुसंगत अधिनियम के अधीन, प्रत्येक सांविधिक आदेश के लिये पृथक् आवेदन प्रस्तुत किए

(३ ) आवेदक, सुसंगत अधिनियम के अधीन पुरानी बकाया की ऐसी राशि के संबंध में किसी प्राधिकारी या न्यायाधिकरण के समक्ष किसी लंबित अपील, पुनरीक्षण या किसी याचिका के बारे में प्रगटन करेगा और यदि किसी प्राधिकारी या न्यायाधिकरण के समक्ष कोई अपील , पुनरीक्षण या कोई याचिका लंबित है तो उसके द्वारा यह कथन करते हुए एक वचनपत्र प्रस्तुत किया जाएगा कि इस अधिनियम के अधीन समाधान का लाभ उठाने की दशा में, वह सांविधिक आदेश के विरुद्ध किसी प्राधिकारी या न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित ऐसा मामला प्रत्याहरित कर लेगा . जब सक्षम प्राधिकारी द्वारा समाधान आदेश पारित कर दिया जाता है तब आवेदक ऐसी लंबित सुसंगत अपील, पुनरीक्षण या कोई याचिका तत्काल प्रत्याहरित करने के लिए आवेदन प्रस्तुत करेगा एवं समाधान आदेश प्राप्त करने के ७ दिवस के भीतर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष ऐसा करने का युक्तियुक्त साक्ष्य प्रस्तुत करेगा , जिसमें असफल होने पर, सक्षम प्राधिकारी द्वारा आवेदक को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात्, उसका समाधान आदेश रद्द किए जाने का दायी होगा.

(४) आवेदक, समाधान की अतिरिक्त राशि का भुगतान करेगा यदि धारा ६ की उपधारा ( २ ) के अधीन भुगतान करने की अपेक्षा की जाती हो और सक्षम प्राधिकारी के समक्ष उसका साक्ष्य प्रस्तुत करेगा .

(५ ) धारा ६ की उपधारा ( ३ ) के अधीन समाधान का आदेश पारित होने के पश्चात्, आवेदक को किसी अपील या न्यायाधिकरण में उस सांविधिक आदेश को, जिसके संबंध में समाधान आदेश पारित किया गया है. चुनौती देने का अधिकार नहीं होगा.

(६ ) इस अधिनियम या सुसंगत अधिनियमों के किन्हीं उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी किसी भी दशा में, आवेदक द्वारा समाधान राशि या अतिरिक्त समाधान राशि के रूप में निक्षिप्त की गई राशि से कोई राशि प्रतिदाय नहीं की जाएगी .

(७) इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार, यदि कोई आवेदन नामंजूर कर दिया जाता है तो आवेदक द्वारा निक्षिप्त कीगई समाधान की राशि/अतिरिक्त राशि, आवेदक की पुरानी बकाया के विरुद्ध समायोजित की जाएगी और उसे प्रतिदाय नहीं कीजाएगी.

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(८ ) सुसंगत अधिनियम के किन्हीं उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां कोई आवेदन उपधारा ( १ ) के अधीन प्रस्तुत किया जाए, प्रस्तुत किये गये आवेदन में अंतर्वलित पुरानी बकाया की वसूली, धारा ६ की उपधारा ( ३ ) के अनुसार अथवा धारा ६ की उपधारा ( २ ) के परन्तुक के अनुसार आवेदन के अंतिम निराकरण तक रुकी रहेगी:

परंतु जहां धारा ६ की उपधारा ( २ ) के परन्तुक के अनुसार आवेदन नामंजूर कर दिया जाता है तो वसूली पर ऐसी रोक, धारा ८ के अधीन अपील प्रस्तुत करने की कालावधि समाप्त होने तक जारी रहेगी . यदि धारा ८ के अधीन कोई अपील प्रस्तुत कीजाती है तो वसूली पर ऐसी रोक, अपील के नामंजूर होने या धारा ८ की उपधारा (४ ) के अधीन प्रत्यावर्तित आवेदन के अंतिम निपटारे तक जारी रहेगी.

का

आवेदनों निराकरण.

६. ( १ ) सक्षम प्राधिकारी प्रस्तुत किए गए आवेदन की संवीक्षा करेगा और यदि वह किसी भी रीति में अपूर्ण या अशुद्ध पाए जाते हैं तो आवेदन दाखिल करने के ३० दिन के भीतर आवेदक को एक सूचनापत्र, ऐसे सूचनापत्र के संसूचित किए जाने के ७ दिन के भीतर उसमें सुधार करने के लिए जारी किया जाएगा.

( २ ) आवेदक, सूचनापत्र की संसूचना से ७ दिन के भीतर त्रुटियों को ठीक करेगा तथा समाधान की अतिरिक्त राशि, यदि कोई हो , का भुगतान करेगा तथा तदनुसार सक्षम प्राधिकारी के समक्ष ब्यौरे प्रस्तुत करेगाः

परंतु जहां आवेदक उपरोक्तानुसार उपबंधों का अनुपालन करने में असफल रहता है तो सक्षम प्राधिकारी , कारणों को लिखित में अभिलिखित करते हुए तथा सुनवाई का एक अवसर देने के पश्चात्, लिखित आदेश द्वारा समाधान के लिए प्रस्तुत आवेदन नामंजूर कर सकेगाः

परंतु यह और कि इस उपधारा के अधीन आवेदक द्वारा जमा की गई समाधान की अतिरिक्त राशि पर कोई ब्याज देय नहींहोगा.

(३ ) सक्षम प्राधिकारी , आवेदक द्वारा इस अधिनियम की सभी शर्तों की पूर्ति किये जाने बारे में समाधान होने के पश्चात्, प्रत्येक आवेदन के लिए, उसमें समाधान की राशि तथा पुरानी बकाया राशि के अधित्याग को विनिर्दिष्ट करते हुए, पृथक से समाधान आदेश जारी करेगा . यह समाधान आदेश , आवेदक द्वारा आवेदन प्रस्तुत किये जाने के ७५ दिन के भीतर पारित किया जायेगा. यह आदेश आयुक्त द्वारा यथाविनिर्दिष्ट प्ररूप में जारी किया जाएगा:

परंतु जहां कोई आवेदन धारा ८ की उपधारा ( ४ ) के अधीन सक्षम प्राधिकारी को पुनर्विचार के लिये प्रत्यावर्तित किया जाताहै वहां यथास्थिति, उपधारा ( १ ) तथा उपधारा ( २ ) के उपबंधों के अनुसार समाधान का आदेश अथवा आवेदन की नामंजूरी का आदेश, अपील आदेश के पारित होने के ३० दिनों के भीतर पारित किया जाएगा.

(४) सुसंगत अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी भी बात के होते हुए भी, आवेदक को, सुसंगत अधिनियमों के अधीन उसके द्वारा देय पुरानी बकाया राशि का संदाय करने के उसके दायित्व से, जिसके लिए समाधान आदेश पारित किया गया है . उन्मोचित किया गया समझा जाएगा और समाधान आदेश के अनुसार इस अधिनियम के अधीन जमा तथा अधित्याग की गई राशि के आधार पर सुसंगत अधिनियम के अधीन शास्ति /ब्याज अधिरोपित करने की आगे और कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी .

७. सक्षम प्राधिकारी,-

भूलों का परिशोधन.

(क) स्व प्रेरणा से या आयुक्त के निर्देश पर; या

( ख ) किसी आवेदक द्वारा कोई आवेदन समाधान का आदेश प्राप्त होने के ३० दिन के भीतर प्रस्तुत करने पर, खण्ड ( क) के मामले में समाधान का आदेश पारित होने के दिनांक से ९ ० दिन के भीतर तथा खण्ड ( ख ) के मामले में आवेदन - पत्र प्राप्त होने के ९ ० दिन के भीतर किसी लिपिकीय या गणना संबंधी भूल को या किसी लोप के कारण उसमें उद्भूत किसी त्रुटि को सुधारने के लिए, समाधान आदेश को परिशोधित करने के लिये आदेश पारित कर सकेगा:

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परंतु ऐसा कोई भी परिशोधन, जबकि वह आवेदक को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता हो, तब तक नहीं किया जाएगा , जब तक कि सक्षम प्राधिकारी ने आयुक्त द्वारा यथाविनिर्दिष्ट प्ररूप में ऐसा किये जाने के, अपने आशय की सूचना आवेदक को नहीं दे दी हो तथा आवेदक को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर नहीं दे दिया गया हो.

अपील.

८. ( १ ) सुसंगत अधिनियम के अधीन प्रथम अपीलीय प्राधिकारी की अधिकारिता के संबंध में किसी अधिसूचना के होते हुए भी, अधिनियम की धारा ६ की उपधारा ( २ ) के परन्तुक के अधीन पारित आदेश के विरुद्ध कोई अपील,अपीलीय प्राधिकारी को होगी , जो मध्यप्रदेश वेट अधिनियम , २००२ ( क्रमांक २० सन् २००२ ) की धारा ३ की उपधारा (४ ) में यथाविनिर्दिष्ट अधिकारिता रखने वाला वाणिज्यिक कर विभाग का संभागीय उपायुक्त होगा.

( २ ) आवेदक, धारा ६ की उपधारा ( २ ) के परन्तुक, या धारा ७ या धारा ९ के अधीन पारित आदेश के विरुद्ध कोई अपील ऐसे आदेश की तामील की तारीख से ३० दिन के भीतर प्रस्तुत कर सकेगा.

(३ ) धारा ३ की उपधारा ( ३ ) के परन्तुक के अधीन पारित आदेश के विरुद्ध या धारा ६ की उपधारा ( ३ ) की अधीन पारित समाधान आदेश के विरुद्ध कोई अपील नहीं होगी.

(४) अपीलीय प्राधिकारी, प्रत्येक अपील का निराकरण, ऐसी अपील प्रस्तुत किये जाने की तारीख से ६० दिन के भीतर करेगा तथा अपील का निराकरण करने में, अपीलीय प्राधिकारी-

(एक) आवेदन की नामंजूरी के आदेश को अपास्त कर सकेगा तथा आवेदन पुनर्विचार के लिए सक्षम प्राधिकारी को प्रतिप्रेषित कर सकेगा, यदि यह पाया जाता है कि आवेदक को उसका आवेदन नामंजूर करने के पूर्व सुनवाई का यथोचित अवसर नहीं दिया गया था अथवा आवेदक के निवेदन पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा पुनर्विचार किया जाने की आवश्यकता है; अथवा

अपील को नामंजूर कर सकेगा.

(दो)

(५ ) समाधान के लिए प्रतिप्रेषित किये गए आवेदन की नामंजूरी के आदेश के विरुद्ध कोई अपील नहीं होगी जहां कि ऐसा आवेदन ऊपर उपधारा ( ४ ) के अधीन एक बार प्रतिप्रेषित किया जा चुका था.

(६ ) अपीलीय प्राधिकारी द्वारा पारित आदेश अंतिम होगा .

(७ ) आयुक्त, स्व प्रेरणा से या अपीलर्थी द्वारा प्रस्तुत किए गए आवेदन पर किसी या समस्त अपीलों को एक अपीलीय प्राधिकारी से अन्य को अंतरित कर सकेगा.

समाधान आदेश का प्रतिसंहरण.

९. इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां सक्षम प्राधिकारी को स्व प्रेरणा से या आयुक्त के निर्देश पर यह प्रतीत होता है कि आवेदक ने कोई तात्विक जानकारी या विशिष्टियों को छिपाते हुए अथवा कोई गलत या असत्य जानकारी देकर समाधान का लाभ प्राप्त किया है अथवा यदि सुसंगत के अधीन कोई अन्य कार्यवाहियों में तात्विक जानकारी का कोई छिपाव, किन्हीं विशिष्टियों का छिपाया जाना पाया जाता है, तो सक्षम प्राधिकारी , लिखित में अभिलिखित किये जाने वाले कारणों से और आवेदक को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात्, समाधान आदेश पारित होने के ५ कलैंडर वर्ष के भीतर धारा ६ की उपधारा ( ३ ) के अधीन पारित समाधान आदेश को प्रतिसंह्नत कर सकेगा. ऐसी दशा में, आवेदक द्वारा जमा की गई समाधान की राशि को उसके बकाया शोध्यों के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा .

इस अधिनियम के अधीन आयुक्त की शक्ति.

१०. ( १ ) आयुक्त, समय- समय पर, ऐसे अनुदेश तथा निदेश जारी कर सकेगा जैसे कि इस अधिनियम के प्रयोजनों को पूरा करने के लिए वह उचित समझे , जिसमें इस अधिनियम की धारा ७ तथा ९ के प्रावधान सम्मिलित हैं .

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 फरवरी 2021

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( २ ) आयुक्त, आदेश द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए आवश्यक प्ररूपों तथा परिशिष्टों को विनिर्दिष्ट कर सकेगा.

नियम बनाने की

शक्ति.

११. ( १ ) राज्य सरकार , अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिये नियम बना सकेगी.

( २ ) इस धारा के अधीन बनाए गए समस्त नियम, उनके बनाए जाने के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र , विधान सभा के पटल पर रखे जाएंगे.

कठिनाइयां दूर करने की शक्ति.

१२. इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने में यदि कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो राज्य सरकार, राजपत्र में प्रकाशित सामान्य या विशेष आदेश द्वारा , ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों, जो कठिनाई दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों.

व्यावृत्ति.

निरसन तथा १३. ( १ ) मध्यप्रदेश कराधान अधिनियमों की पुरानी बकाया राशि का समाधान अध्यादेश , २०२० ( क्रमांक ११ सन् २०२० ) एतद्वारा निरसित किया जाता है.

( २ ) उक्त अध्यादेश के निरसित होते हुए भी उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कार्रवाई या की गई कोई बात, उक्त अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई कार्रवाई या की गई बात समझी जाएगी .

उद्देश्यों और कारणों का कथन

राज्य सरकार, वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा प्रशासित मध्यप्रदेश सामान्य विक्रय कर अधिनियम , १ ९ ५८ ( क्रमांक २ सन् १ ९५ ९ ) (निरसित ) , मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर अधिनियम , १ ९९४ ( क्रमांक ५ सन् १ ९९५ ) ( निरसित ) , मध्यप्रदेश वेट अधिनियम, २००२ (क्रमांक २० सन् २००२ ) , केन्द्रीय विक्रय कर अधिनियम , १ ९ ५६ ( १ ९ ५६ का ७४ ) , मध्यप्रदेश होटल तथा वास गृहों में विलास वस्तुओं पर कर अधिनियम , १ ९ ८८ ( क्रमांक १३ सन् १ ९८८ ) ( निरसित ) और मध्यप्रदेश विलासिता, मनोरंजन , आमोद एवं विज्ञापन कर अधिनियम , २०११ ( क्रमांक ११ सन् २०११ ) ( निरसित ) के अधीन पुरानी बकाया, उससे संबंधित तथा उससे आनुषंगिक मामलों का समाधान समीचीन समझती है . उपरोक्त उल्लिखित अधिनियमों के अधीन बड़ी संख्या में पुरानी बकाया लंबित हैं जिसमें राजस्व की बड़ी राशि सम्मिलित है. अतएव , ३१ मार्च, २०१६ को या उससे पूर्व समाप्त होने वाली कालावधि के लिए निर्धारण और/ या शास्ति के किसी आदेश से संबंधित किसी वैधानिक आदेश के संबंध में पुरानी बकाया के समाधान हेतु जो भुगतान के लिए देय है, एक अधिनियम उपबंधित करने का विनिश्चय किया गया है .

२. चूंकि मामला अत्यावश्यक था तथा विधान सभा का सत्र चालू नहीं था, अतएव , मध्यप्रदेश कराधान अधिनियमों की पुरानी बकाया राशि का समाधान अध्यादेश , २०२० ( क्रमांक ११ सन् २०२० ) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किया गया था . अब उक्त अध्यादेश के स्थान पर राज्य विधान- मण्डल का अधिनियम बिना किसी उपांतरण के लाया जाना प्रस्तावित है .

३. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.

भोपाल:

जगदीश देवड़ा भारसाधक सदस्य.

दिनांक १२ फरवरी , २०२१ .

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2021

184 ( 9) प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन

प्रस्तावित विधेयक के जिन खण्डों द्वारा विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन राज्य सरकार को किया जा रहा है, उनका विवरण निम्नानुसार है :-

खण्ड ५ ( १ ) द्वारा आवेदन प्रस्तुत करने की समय - सीमा में वृद्धि करने;

खण्ड ६ ( ३ ) द्वारा समाधान आदेश का प्रारूप विनिर्दिष्ट करने;

खण्ड १० ( १ ) द्वारा अधिनियम के प्रयोजनों को पूरा करने के लिए समय - समय पर अनुदेश तथा निदेश जारी करने;

( २ ) इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए प्ररूपों तथा परिशिष्टों को विनिर्दिष्ट करने;

खण्ड ११ द्वारा नियम बनाकर अधिसूचित करने; तथा

खण्ड १२ द्वारा इस अधिनियम को कार्यान्वित करने में उद्भूत कठिनाईयों को दूर किये जाने; के संबंध में राज्य सरकार नियम बना सकेगी, जो सामान्य स्वरुप के होंगे .

अध्यादेश के संबंध में विवरण

वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा प्रशासित मध्यप्रदेश सामान्य विक्रय कर अधिनियम , १ ९ ५८ ( क्रमांक २ सन् १ ९५९ ) (निरसित ) , मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर अधिनियम, १ ९९४ (क्रमांक ५ सन् १ ९९ ५ ) (निरसित ) , मध्यप्रदेश वेट अधिनियम, २००२ (क्रमांक २० सन् २००२ ) , केन्द्रीय विक्रय कर अधिनियम, १ ९ ५६ ( १ ९ ५६ का ७४ ) , मध्यप्रदेश होटल तथा वास गृहों में विलास वस्तुओं पर कर अधिनियम, १ ९८८ ( क्रमांक १३ सन् १ ९ ८८ ) ( निरसित ) और मध्यप्रदेश विलासिता, मनोरंजन , आमोद एवं विज्ञापन कर अधिनियम , २०११ ( क्रमांक ११ सन् २०११ ) ( निरसित ) के अधीन बड़ी संख्या में पुरानी बकाया , राशियां लंबित हैं, जिसमें राजस्व की बड़ी राशि सम्मिलित है. इन राशियों की वसूली के लिये ३१ मार्च, २०१६ को या उससे पूर्व समाप्त होने वाली कालावधि के लिए निर्धारण और/या शास्ति के किसी आदेश से संबंधित किसी वैधानिक आदेश के संबंध में पुरानी बकाया के समाधान हेतु योजना लाए जाने का निर्णय लिया गया. इस बारे में वर्तमान में कोई अधिनियमित विधि नहीं है.

उपरोक्त उद्देश्यों को पूरा किया जाना अत्यावश्यक था तथा विधान सभा का सत्र चालू नहीं था , अतएव , मध्यप्रदेश कराधान अधिनियमों की पुरानी बकाया राशि का समाधान अध्यादेश , २०२० ( क्रमांक ११ सन् २०२० ) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किया गया था.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश विधान सभा.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री , मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2021 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 24 February 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2021-02-24.92.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2021-02-24.92.Extraordinary.