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मध्यप्रदे श शासक
सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 93 ]
भोपाल , बुधवार, दिनांक 24 फरवरी 2021- फाल्गुन 5, शक 1942
विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश
भोपाल , दिनांक 24 फरवरी , 2021
क्र. 2958 - मप्रविस- 15- विधान- 2021.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम-64 के उपबंधों के पालन में, सिविल प्रक्रिया संहिता ( मध्यप्रदेश संशोधन ) विधेयक , 2020 ( क्रमांक 10 सन् 2020 ) जो विधान सभा में दिनांक 24 फरवरी 2021 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है .
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2021
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक १० सन् २०२०
सिविल प्रक्रिया संहिता ( मध्यप्रदेश संशोधन ) विधेयक , २०२० मध्यप्रदेश राज्य को लागू हुए रूप में सिविल प्रक्रिया संहिता, १ ९ ०८ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.
भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान- मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-
१. इस अधिनियम को संक्षिप्त नाम सिविल प्रक्रिया संहिता ( मध्यप्रदेश संशोधन ) अधिनियम, २०२० है .
संक्षिप्त नाम.
२. मध्यप्रदेश राज्य का लागू हुए रूप में सिविल प्रक्रिया संहिता , १ ९ ०८ ( १ ९ ०८ का ५ ) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) को इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रीति में संशोधित किया जाए.
मध्यप्रदेश राज्य को लागू हुए रूप में केन्द्रीय अधिनियम १ ९०८ का ५ का संशोधन.
३. मूल अधिनियम की पहली अनुसूची में, -
पहली अनुसूची का संशोधन.
( १ ) आदेश १८ में, -
(एक) नियम ४ में, -
(क) विद्यमान पार्श्व शीर्ष के स्थान पर, निम्नलिखित पार्श्व शीर्ष स्थापित किया जाए, अर्थात् :-
" वाणिज्यिक न्यायालय में साक्ष्य लेखबद्ध करना" ;
(ख) उपनियम ( १ ) में, शब्द " प्रत्येक वाद में " के स्थान पर, शब्द, कोष्ठक और अंक " कॉमर्शियल कोर्ट एक्ट, २०१५ ( २०१६ का ४) की धारा ३ की उपधारा ( १ ) के अधीन गठित वाणिज्यिक न्यायालय में विचारण योग्य किसी विनिर्दिष्ट मूल्य के वाणिज्यिक विवाद के संबंध में किसी वाद में" स्थापित किए जाएं;
(दो) नियम ४ के पश्चात्, निम्नलिखित नियम अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात् : - साक्षियों की परीक्षा खुले न्यायालय में कीजाएगी.
" ४-क. नियम ४ में यथा उपबंधित के सिवाय , हाजिर साक्षियों का साक्ष्य खुले न्यायालय में न्यायाधीश की उपस्थिति में और उसके वैयक्तिक निदेशन और अधीक्षण में मौखिक रूप से लिया जाएगा.".
( २ ) आदेश, २० - क के पश्चात्, निम्नलिखित आदेश अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात् : - आदेश २० - ख का अंतःस्थापन.
" आदेश २० -ख
इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षरित आदेशों, निर्णयों और डिक्रियों की मान्यता १. इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षरित आदेशों , निर्णयों और डिक्रियों की मान्यता.- कोई पारित आदेश , सुनाया गया निर्णय या तैयार की गई डिक्री , जिसका न्यायाधीश द्वारा हस्ताक्षरित किया जाना अपेक्षित है, न्यायाधीश द्वारा हस्ताक्षरित की गई समझी जाएगी, यदि ऐसा आदेश , निर्णय या डिक्री को ऐसी रीति में, जैसी कि उच्च न्यायालय द्वारा विहित की जाए, न्यायाधीश द्वारा किए गए इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर के माध्यम से अधिप्रमाणित किया गया है. ".
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2021
उद्देश्यों और कारणों का कथन
वर्ष २००२ में, केन्द्र सरकार ने, विचारण में विलंब को रोकने तथा न्यायालय के समय की बचत करने के आशय से सिविल प्रक्रिया संहिता, १ ९ ०८ ( १ ९ ०८ का ५ ) के आदेश १८ के नियम ४ को संशोधित किया है किन्तु यह अनुभव किया जा रहा है कि पक्षकार द्वारा साक्षी के रूप में या साक्षी द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र में असंगत बातें अंतर्विष्ट होती हैं, जिसमें ऐसी बातें भी होती हैं जो साक्षी के व्यक्तिगत ज्ञान में नहीं होतीं, वस्तुतः संपूर्ण अभिवचन पुनः प्रस्तुत कर दिए जाते हैं, अतएव , विरोधी पक्षकार के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह साक्षी के प्रत्येक बिन्दु पर प्रतिपरीक्षा करे, जो कि बहुमूल्य न्यायिक समय का अपव्यय है.
२. साक्षी की प्रतिपरीक्षा के समय , यह अनुभव किया जा रहा है कि साक्षी को शपथ- पत्र पर दिए गए मुख्य परीक्षा में उल्लिखित तथ्यों का कोई ज्ञान नहीं होता और न्यायालय भी साक्षी की भावभंगी को अभिलिखित करने में असफल रहता है, क्योंकि प्रतिपरीक्षा आयुक्त के समक्ष अभिलिखित की जाती है. प्रक्रिया के अनुसार, भले ही मुख्य परीक्षा शपथपत्र पर प्रस्तुत की गई हो, तो भी दस्तावेजों की ग्राहयता को विनिश्चित करने के लिए मुख्य परीक्षा न्यायालय के समक्ष ही अभिलिखित की जाती है.
३. न्यायालय अभिलेखों का डिजिटीकरण समय की आवश्यकता है. ई - न्यायालय परियोजना , राष्ट्रीय नीति एवं ई - समिति ( भारत का उच्चतम न्यायालय ) द्वारा प्रस्तुत भारतीय न्यायपालिका-२००५ में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी ( आईसीटी ) के क्रियान्वयन के लिए कार्य योजना, के आधार पर न्यायालयों के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी को सक्षम बना कर भारतीय न्यायपालिका के रूपांतरण की परिदृष्टि से अवधारित की गई थी. ई -न्यायालय समेकित मिशन रीति परियोजना, देश के उच्च न्यायालयों एवं जिला/अधीनस्थ न्यायालयों में क्रियान्वित की जा रही राष्ट्रीय ई- गवर्नेस परियोजनाओं में से एक है. ई -न्यायालय परियोजना का उद्देश्य देश में जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों के सार्वभौमिक कम्प्यूटरीकरण द्वारा मुवक्किलों, अधिवक्ताओं एवं न्यायपालिका को अभिहित सेवाओं को प्रदान करना एवं न्याय प्रक्रिया की सूचना एवं संचार सक्षमता की वृद्धि है.
४. मध्यप्रदेश के जिला न्यायालयों में ई - न्यायालय समेकित मिशन रीति परियोजना के अधीन डिजिटीकरण प्रक्रिया जारी है और भविष्य में कागज रहित न्यायालय बनाने की स्कीम है. चूंकि न्यायालयों द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश को सिविल प्रक्रिया संहिता, १ ९ ०८ के आदेश २० के नियम ३ के अनुसार न्यायाधीश द्वारा हस्तकृत हस्ताक्षर किया जाना अपेक्षित है और वर्तमान में डिजिटल हस्ताक्षर द्वारा निर्णय पर अधिप्रमाणन/हस्ताक्षर का कोई ऐसा उपबंध नहीं है, यदि यह विधि द्वारा अधिप्रमाणित नहीं किया जाता है, तो इसका कोई महत्व नहीं होगा.
५. उपरोक्त दृष्टिकोण से और विचारण में विलम्ब को रोकने के आशय से तथा न्यायालय के समय की बचत करने हेतु, मध्यप्रदेश राज्य को लागू हुए रूप में सिविल प्रक्रिया संहिता, १ ९ ०८ के आदेश १८ के नियम ४ को संशोधित करने तथा नियम ४ - क को अंतःस्थापित करने तथा डिजिटल हस्ताक्षर द्वारा निर्णय पर अधिप्रमाणन/हस्ताक्षर के संबंध में आगे की परेशानियों से बचने के लिए नए आदेश २० - ख को अंतःस्थापित करने की आवश्यकता अनुभव की गई है.
६. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है .
भोपाल :
डॉ. नरोत्तम मिश्र भारसाधक सदस्य.
तारीख १४ सितम्बर , २०२० .
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प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन
प्रस्तावित विधेयक के खण्ड-३ द्वारा सिविल प्रक्रिया संहिता, १ ९ ०८ ( १ ९ ०८ का अधिनियम संख्यांक ५ ) की प्रथम अनुसूची में अंतःस्थापन किए जाने वाले आदेश २० - ख के नियम १ में ऐसा आदेश , निर्णय डिक्री न्यायाधीश द्वारा किए गए इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर के माध्यम से किए जाने हेतु नियम विहित किये जाने संबंधी विधायनी शक्तियां उच्च न्यायालय को प्रत्यायोजित की गई है .
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2021.