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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

मध्‍यप्रदेश नगरपालिक विधि ( तृतीय संशोधन ) विधेयक 2021.....

Published 24 February 2021

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
96
Identifier
in.gazette.madhya.2021-02-24.96.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
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मध्यप्रदेश शासन

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 96 ]

भोपाल, बुधवार, दिनांक 24 फरवरी 2021 - फाल्गुन 5, शक 1942

विधान सभा सचिवालय , मध्यप्रदेश

भोपाल , दिनांक 24 फरवरी , 2021

क्र. 2967 - मप्रविस - 15- विधान 2021.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम -64 के उपबंधों के पालन में , मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( तृतीय संशोधन ) विधेयक, 2021 ( क्रमांक 3 सन् 2021 ) जो विधान सभा में दिनांक 24 फरवरी 2021 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

191 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 फरवरी 2021

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मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक ३ सन् २०२१

मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( तृतीय संशोधन ) विधेयक , २०२१ मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम , १ ९ ५६ तथा मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , १ ९ ६१ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.

भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान- मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

संक्षिप्त नाम.

१. इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( तृतीय संशोधन ) अधिनियम, २०२१ है.

भाग- एक

मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम , १ ९ ५६ ( क्रमांक २३ सन् १ ९ ५६ ) का संशोधन २. मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम , १ ९ ५६ ( क्रमांक २३ सन् १ ९ ५६ ) में,-

मध्यप्रदेश अधिनियम

क्रमांक २३ सन् १९ ५६ का संशोधन.

धारा ९ में, -

(१)

उपधारा ( १ ) में, खण्ड ( क ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, (क)

अर्थात्:-

" ( क) नगरपालिक क्षेत्र से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा निर्वाचित महापौर अर्थात् सभापतिः ".

(ख) उपधारा (४ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- " ( ४ ) यदि कोई नगरपालिक क्षेत्र महापौर का निर्वाचन करने में असफल रहे या कोई वार्ड पार्षद् का निर्वाचन करने में असफल रहे , तो यथास्थिति, ऐसे नगरपालिक क्षेत्र या वार्ड के स्थान को भरने के लिए छह माह के भीतर नई निर्वाचन कार्यवाही प्रारंभ की जाएगी और जब तक उस स्थान को भरा नहीं जाता उसे आकस्मिक रिक्ति समझा जाएगाः

परंतु अधिनियम के अधीन अध्यक्ष या समिति में से किसी के निर्वाचन की कार्यवाहियां , ऐसे स्थान का निर्वाचन लंबित रहते स्थगित नहीं की जाएंगी. " .

(२) धारा १० में, उपधारा ( ४ ) में, प्रथम परन्तुक में, शब्द " दो माह " के स्थान पर, शब्द " छह माह " स्थापित किए जाएं.

(३) धारा १४ में, -

(क) उपधारा ( १ ) में, शब्द " पार्षदों " के पश्चात्, शब्द " तथा महापौर " अन्तःस्थापित किए जाएं.

(ख) उपधारा ( २ ) में, शब्द " पार्षदों " के पश्चात्, शब्द " तथा महापौर " अन्तःस्थापित किए जाएं.

(४) धारा १४ - क में, उपधारा ( १ ) में, शब्द " पार्षद " के स्थान पर, शब्द " महापौर अथवा पार्षद्" स्थापित किए जाएं.

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2021

(५) धारा १४ - ख में , शब्द " पार्षद " के स्थान पर, शब्द " महापौर अथवा पार्षद्" स्थापित किए जाएं.

(६) धारा १४ - ग में, शब्द " पार्षद " के पश्चात् शब्द " या महापौर " अन्तःस्थापित किए जाएं.

(७) धारा १५ में, -

(क) शब्द " पार्षदों " के पश्चात्, शब्द " या महापौर " जोड़े जाएं.

(ख) परंतुक के स्थान पर, निम्नलिखित परंतुक स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" परन्तु कोई भी व्यक्ति यथास्थिति, पार्षदों के किसी निर्वाचन में या महापौर के निंर्वाचन में, एक से अधिक बार मतदान नहीं करेगा. ".

(८) धारा १६ में, उपधारा ( ३ ) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा जोड़ी जाए, अर्थात्ः-

" ( ४ ) यदि कोई व्यक्ति महापौर और पार्षद दोनों पदों के लिए निर्वाचित हो जाता है , तो उसे निर्वाचित घोषित किए जाने की तारीख से सात दिन के भीतर किसी एक पद से अपना त्यागपत्र देना होगा.".

(९) धारा १७ में, -

(क) पार्श्व शीर्ष में, शब्द " पार्षद " के पश्चात्, शब्द " या महापौर " जोड़े जाएं;

उपधारा ( १ ) में, -

(ख)

) प्रारंभिक पैरा में, शब्द " पार्षद " के पश्चात् शब्द " या महापौर " अन्तःस्थापित किए जाएं;

(एक

खण्ड ( ख ख ) में, शब्द " पार्षद " के पश्चात्, शब्द " या महापौर " अन्तः स्थापित किए जाएं.

(दो)

(ग) उपधारा ( २ ) में, -

एक ) पार्श्व शीर्ष में, शब्द " पार्षद " के पश्चात्, शब्द " या महापौर " जोड़े जाएं;

(

प्रारंभिक पैरा में , शब्द " पार्षद " के पश्चात्, शब्द " या महापौर " अन्तःस्थापित किए जाएं.

(दो)

(तीन ) खण्ड (ङ) में, शब्द " पार्षद " के पश्चात्, शब्द " या महापौर " अन्तःस्थापित किए जाएं.

(घ) उपधारा ( ३ ) में, शब्द " पार्षद " जहां कहीं भी वह आया हो , के स्थान पर, शब्द " पार्षद या महापौर " स्थापित किए जाएं.

धारा १७ - ख में, -

(१०)

(क) पार्श्व शीर्ष में , शब्द " पार्षद " के स्थान पर, शब्द " महापौर तथा पार्षद " स्थापित किए जाएं.

(ख) उपधारा ( १ ) में, प्रारंभिक पैराग्राफ में, शब्द " प्रत्येक पार्षद " के स्थान पर, शब्द " महापौर तथा प्रत्येक पार्षद्" स्थापित किए जाएं.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2021

192(2)

उपधारा ( २ ) में, -

(ग)

(एक ) प्रारंभिक पैराग्राफ में, शब्द " पार्षद " जहां कहीं भी आया हो , के स्थान पर, शब्द " महापौर या पार्षद्" स्थापित किए जाएं;

(दो) परन्तुक में, शब्द " पार्षद " के स्थान पर, शब्द " महापौर या पार्षद" स्थापित किए जाएं .

धारा १८ में, - (११)

(क) पार्श्व शीर्ष के स्थान पर, निम्नलिखित पार्श्व शीर्ष स्थापित किया जाए, अर्थात्ः- " अध्यक्ष ( स्पीकर ) का निर्वाचन";

उपधारा ( १ ) में, शब्द " तथा महापौर " का लोप किया जाए.

(ख)

धारा २० में, स्पष्टीकरण में, शब्द " तथा महापौर " का लोप किया जाए.

(१२)

धारा २३ - क में, -

(१३)

(क) पार्श्व शीर्ष में तथा उपधारा ( १ ) में, शब्द " या महापौर " जहां कहीं भी वे आए हों, का लोप किया जाए.

(ख) उपधारा ( २ ) के खण्ड ( दो ) में, शब्द " अध्यक्ष , महापौर " के स्थान पर, शब्द " महापौर " स्थापित स्थापित किया जाए.

धारा २३ - क के पश्चात्, निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्ः- (१४)

"२४.

महापौर का वापस बुलाया जाना.

(१ ) किसी निगम के प्रत्येक महापौर द्वारा अपना पद तत्काल रिक्त कर दिया गया समझा जाएगा , यदि उसे ऐसी प्रक्रिया के अनुसार, जैसी कि विहित की जाए, निगम क्षेत्र के मतदान करने वाले मतदाताओं की कुल संख्या के आधे से अधिक मतदाताओं के बहुमत द्वारा गुप्त मतदान से वापस बुलाया जाए:

परन्तु वापस बुलाने की ऐसी कोई प्रक्रिया तब तक आरम्भ नहीं की जाएगी जब तक कि निर्वाचित पार्षदों की कुल संख्या के कम से कम तीन चौथाई पार्षदों द्वारा प्रस्ताव पर हस्ताक्षर न कर दिए जाएं और उसे संभागीय आयुक्त को प्रस्तुत न कर दिया जाएः

परन्तु यह और कि ऐसी कोई प्रक्रिया, -

(एक) उस तारीख से, जिसको कि ऐसा महापौर निर्वाचित होता है और अपना पद धारण करता है, दो वर्ष की कालावधि के भीतर; और

(दो) महापौर के उप चुनाव में निर्वाचित होने की दशा में उसकी पदावधि की आधी कालावधि का अवसान हो गया हो ,

आरम्भ नहीं की जाएगी:

परन्तु यह और भी कि महापौर को वापस बुलाए जाने की प्रक्रिया उसकी संपूर्ण पदावधि में एक बार ही आरम्भ की जाएगी.

192(3)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2021

(२) संभागीय आयुक्त, अपना समाधान कर लेने और यह सत्यापित कर लेने के पश्चात् कि उप- धारा ( १ ) में विनिर्दिष्ट तीन चौथाई पार्षदों ने वापस बुलाए जाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजेगा और राज्य सरकार उसे राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देशित करेगी.

(३) निर्देश प्राप्त होने पर , राज्य निर्वाचन आयोग , वापस बुलाए जाने के प्रस्ताव पर, ऐसी रीति में , जैसी कि विहित की जाए, मतदान कराने की व्यवस्था करेगा. " .

(१५) धारा ४४१ में , उपधारा ( २ ) में, खण्ड ( ख ) में, उपखण्ड ( तीन ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपखण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" (तीन ) महापौर के निर्वाचन की दशा में, नगरपालिक क्षेत्र के किसी मतदाता द्वारा . ".

भाग-दो

मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , १ ९ ६१ ( क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ ) का संशोधन

मध्यप्रदेश ३. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, १ ९ ६१ ( क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ ) में, -

अधिनियम क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ कासंशोधन (१) धारा १ ९ में, -

(क) उपधारा ( १ ) में , खण्ड ( क ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्:-

" ( क ) नगरपालिक क्षेत्र से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा निर्वाचित अध्यक्ष अर्थात् सभापति ( चेयरपर्सन ) ; "

(ख) उपधारा ( ४ ) के स्थान पर , निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" (४ ) यदि कोई नगरपालिक क्षेत्र, अध्यक्ष का निर्वाचन करने में असफल रहे या कोई वार्ड, पार्षद् का निर्वाचन करने में असफल रहे, तो यथास्थिति, ऐसे नगरपालिक क्षेत्र या वार्ड के स्थान को भरने के लिए छह माह के भीतर नवीन निर्वाचन कार्यवाहियां प्रारंभ की जाएंगी और जब तक उस स्थान को भरा नहीं जाता, उसे आकस्मिक रिक्ति के रूप में समझा जाएगा:

परंतु अधिनियम के अधीन उपाध्यक्ष या समितियों में से किसी के निर्वाचन की कार्यवाहियां, ऐसे स्थान का निर्वाचन लंबित रहते स्थगित नहीं की जाएंगी. ".

(२) धारा २० में, उपधारा ( २ ) में, खण्ड ( ख ) में, उपखण्ड ( तीन ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपखण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्:-

" ( तीन ) अध्यक्ष के निर्वाचन की दशा में नगरपालिक क्षेत्र के किसी मतदाता द्वारा; ".

(३ ) धारा २ ९ में , उपधारा ( ४ ) में प्रथम परन्तुक में, शब्द " दो माह " के स्थान पर, शब्द " छह माह " स्थापित किए जाएं.

(४) धारा ३२ में, -

(क) उपधारा ( १ ) में, शब्द " पार्षदों " के स्थान पर, शब्द " अध्यक्षों तथा पार्षदों " स्थापित किए जाएं;

(ख) उपधारा ( २ ) में , शब्द " पार्षदों " के स्थान पर, शब्द " अध्यक्षों तथा पार्षदों " स्थापित किए जाएं;

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2021

192(4)

(५) धारा ३२ - क में, उपधारा ( १ ) में , शब्द " पार्षद " जहां कहीं भी वह आया हो, के स्थान पर, शब्द " अध्यक्ष तथा पार्षद " स्थापित किए जाएं.

धारा ३२ - ख में, शब्द " पार्षद " के स्थान पर, शब्द " अध्यक्ष तथा पार्षद्" स्थापित किए जाएं.

(६)

(७) धारा ३२ - ग में, शब्द " पार्षद्" के स्थान पर, शब्द " पार्षद या अध्यक्ष " स्थापित किए जाएं.

धारा ३३ में, -

(८)

प्रारंभिक पैरा में, शब्द " पार्षदों " के पश्चात्, शब्द " या अध्यक्ष " जोड़े जाएं;

(क)

(ख) विद्यमान परंतुक के स्थान पर , निम्नलिखित परंतुक स्थापित किया जाए, अर्थात्ः- " परन्तु कोई भी व्यक्ति यथास्थिति, पार्षदों के किसी निर्वाचन में या अध्यक्ष के किसी निर्वाचन में एक से अधिक बार मतदान नहीं करेगा. ".

(९ ) धारा ३५ में, शब्द " पार्षद के रूप में निर्वाचन या नामनिर्देशन " के पूर्व, शब्द " अध्यक्ष के रूप में निर्वाचन या " अन्तःस्थापित किए जाएं.

धारा ४३ में,-

(१०)

पार्श्व शीर्ष में, शब्द " अध्यक्ष तथा " का लोप किया जाए;

(क)

उपधारा ( १ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- ( ख)

" ( १ ) परिषद् का अध्यक्ष तथा निर्वाचित पार्षद् धारा ५५ की उपधारा ( १ ) में यथानिर्दिष्ट प्रथम सम्मिलन में विहित रीति में निर्वाचित पार्षदों में से उपाध्यक्ष का चुनाव करेंगे. " ;

उपधारा ( ३ ) में, शब्द " अध्यक्ष तथा " का लोप किया जाए.

(ग)

धारा ४३ - क में, -

(११)

(क) पार्श्व शीर्ष में और उपधारा ( १ ) में, शब्द " अध्यक्ष या " जहां कहीं भी वे आए हों, का लोप किया जाए;

(ख) उपधारा ( २ ) में, खण्ड ( दो ) में, शब्द " अध्यक्ष, उपाध्यक्ष " के स्थान पर, शब्द " उपाध्यक्ष " स्थापित किया जाए.

धारा ४६ के पश्चात्, निम्नलिखित धारा अन्तःस्थापित की जाए, अर्थात्ः-

(१२)

"४७.

अध्यक्ष का वापस बुलाया जाना.

(१ ) किसी परिषद् के प्रत्येक अध्यक्ष द्वारा अपना पद तत्काल रिक्त कर दिया गया समझा जाएगा यदि उसे ऐसी प्रक्रिया के अनुसार, जो कि विहित की जाए, नगरपालिका क्षेत्र के मतदान करने वाले मतदाताओं की कुल संख्या के आधे से अधिक मतदाताओं के बहुमत द्वारा गुप्त मतदान से वापस बुलाया जाएः

परन्तु वापस बुलाने की ऐसी कोई प्रक्रिया तब तक आरंभ नहीं की जाएगी जब तक कि निर्वाचित पार्षदों की कुल संख्या के कम से कम तीन चौथाई पार्षदों द्वारा प्रस्ताव पर हस्ताक्षर न कर दिए जाएं और उसे कलक्टर को प्रस्तुत न कर दिया जाएः 192(5)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2021

परन्तु यह और कि ऐसी कोई प्रक्रिया, -

(एक) उस तारीख से , जिसको कि ऐसा अध्यक्ष निर्वाचित होता है और अपना पद धारण करता है , दो वर्ष की कालावधि के भीतर; और

(दो) अध्यक्ष के उप चुनाव में निर्वाचित होने की दशा में उसकी पदावधि की आधी कालावधि का अवसान हो गया हो ,

आरंभ नहीं की जाएगी:

परन्तु यह और भी कि अध्यक्ष को वापस बुलाए जाने की प्रक्रिया उसकी सम्पूर्ण पदावधि में एक बार ही आरंभ की जाएगी .

(२) कलक्टर अपना समाधान कर लेने और यह सत्यापन कर लेने के पश्चात् कि उपधारा ( १ ) में विनिर्दिष्ट तीन - चौथाई पार्षदों ने वापस बुलाए जाने का प्रस्ताव कर दिया है , प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजेगा और राज्य सरकार उसे राज्य निर्वाचन आयोग को निर्दिष्ट करेगी.

(३) निर्देश प्राप्त होने पर , राज्य निर्वाचन आयोग वापस बुलाए जाने के प्रस्ताव पर , ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, मतदान कराने के लिये व्यवस्था करेगा. ".

(१३) धारा ५५ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

साधारण निर्वाचन के पश्चात् सम्मिलन. प्रथम " ५५. ( १ ) मुख्य नगरपालिका अधिकारी, विहित प्राधिकारी के अनुमोदन से , प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पन्द्रह दिन के भीतर, उपाध्यक्ष का निर्वाचन करने के प्रयोजन के लिए निर्वाचित पार्षदों का सम्मिलन बुलाएगा.

(२) उपधारा ( १ ) के अधीन बुलाए गए परिषद् के प्रथम सम्मिलन की अध्यक्षता कलक्टर द्वारा नियुक्त किए गए ऐसे अधिकारी द्वारा , जो नगरपालिका परिषद् के मामले में डिप्टी कलक्टर की पद श्रेणी से निम्न पद श्रेणी का न हो तथा नगर परिषद् के मामले में तहसीलदार की पद श्रेणी से निम्न पद श्रेणी का न हो, की जाएगी और इस अध्याय में अंतर्विष्ट वे समस्त उपबंध जो परिषद् के सम्मिलनों के बारे में है , यथाशक्य ऐसे सम्मिलन के संबंध में लागू होंगेः

परन्तु अध्यक्षता करने वाले अधिकारी को ऐसे सम्मिलन में मत देने का अधिकार नहीं होगा और मतों के बराबर होने की दशा में परिणाम का विनिश्चय लॉट द्वारा किया जाएगा. " .

(१४) धारा ५६ में, अंक, चिन्ह, अक्षर तथा अल्पविराम " ४३ - क, " के पश्चात्, अंक तथा अल्पविराम " ४७, " अन्तःस्थापित किए जाएं.

(१५) धारा ६२ में, उपधारा ( ३ ) में, खण्ड ( तीन ) के परंतुक में, अंक, चिन्ह तथा अक्षर " ४३ - क " के पश्चात्, शब्द, अंक तथा अल्पविराम " या ४७, " का अन्तःस्थापित किए जाएं.

(१६) धारा ६३ में, परन्तुक में, शब्द " अध्यक्ष " के पूर्व , शब्द " उपाध्यक्ष या " , अन्तःस्थापित किए जाएं.

(१७) धारा ३२८ में , उपधारा ( १ ) में, खण्ड ( ख ) में, शब्द " अध्यक्ष तथा " जहां कहीं भी वे आए हों, का लोप किया जाए.

तथा ४. (१ ) मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( तृतीय संशोधन ) अध्यादेश , २०२० ( क्रमांक १३ सन् २०२० ) एतद्वारा निरसन व्यावृत्ति.

निरसित किया जाता है .

( २ ) उक्त अध्यादेश के निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंध के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई समझी जाएगी.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 24 फरवरी 2021

192(6)

उद्देश्यों के कारणों का कथन

नगरपालिक निगम में महापौर तथा नगरपालिक परिषद् के अध्यक्ष के प्रत्यक्ष निर्वाचन के उपबंध करने के उद्देश्य से यह प्रस्तावित किया गया है कि वे संबंधित क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा निर्वाचित किए जाएंगे. यदि नगरीय निकायों के महापौर अध्यक्ष, नगरीय निकाय क्षेत्र के नागरिकों द्वारा प्रत्यक्षतः निर्वाचित किए जाते हैं, तो उन्हें अपनी पसंद का जन प्रतिनिधि चुनने का अवसर प्राप्त होगा . निर्वाचित जन प्रतिनिधि, अपने क्षेत्र के विकास के लिए नागरिकों के प्रति सीधे तौर पर उत्तरदायी होंगे .

२. राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा यह भी देखा गया है कि क्षेत्र को जोड़ने अथवा हटाने अथवा वार्ड का पुनर्गठन करने के लिए दो मास की कालावधि पर्याप्त नहीं है, अतएव उक्त कालावधि को दो मास के स्थान पर छह मास के लिए बढ़ाया जाना प्रस्तावित है, क्योंकि तीन मास का समय मतदाताओं की सूची के पुनरीक्षण के लिए ही आवश्यक है.

३. वर्तमान में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्राधिकारी नियुक्त करने के लिए परिषद् का प्रथम सम्मिलन आहूत करने का उपबंध सरल तथा व्यावहारिक नहीं है . अतएव यह प्रस्तावित किया गया है कि निर्वाचन के पश्चात् परिषद् का प्रथम सम्मिलन बुलाने तथा उसकी अध्यक्षता करने के लिए कलक्टर को प्राधिकृत किया जाए.

४. चूंकि मामला अत्यावश्यक था तथा विधान सभा का सत्र चालू नहीं था , अतएव , मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( तृतीय संशोधन ) अध्यादेश , २०२० ( क्रमांक १३ सन् २०२० ) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किया गया था. अब उक्त अध्यादेश के स्थान पर , राज्य विधान- मण्डल का अधिनियम बिना उपांतरण के लाया जाना प्रस्तावित है.

५. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.

भोपाल :

भूपेन्द्र सिंह भारसाधक सदस्य, तारीख १२ फरवरी , २०२१ .

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 24 फरवरी 2021

192(7) प्रत्यायोजित विधि निर्माण के सम्बन्ध में व्याख्यात्मक ज्ञापन

प्रस्तावित विधेयक के जिन खण्डों द्वारा विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन किया जा रहा हैं उनका विवरण निम्नानुसार है:-

खण्ड-२ ( १४ ) महापौर को वापस बुलाने के संबंध में प्रक्रिया विहित किये जाने,

खण्ड-३ ( १० ) ( ख ) निर्वाचित पार्षदों में से उपाध्यक्ष का निर्वाचन किये जाने की रीति विहित किये जाने, (१२ ) ( १ ) अध्यक्ष को वापस बुलाने के संबंध में प्रक्रिया विहित किये जाने , तथा

(३ ) अध्यक्ष को वापस बुलाये जाने के प्रस्ताव पर मतदान कराये जाने की रीति विहित किये जाने ,

के संबंध में नियम बनाये जाएंगे जो सामान्य स्वरूप के होंगे.

अध्यादेश के संबंध में विवरण

नगरपालिक निगम में महापौर तथा नगरपालिक परिषद् के अध्यक्ष के प्रत्यक्ष निर्वाचन के उपबंध करने के उद्देश्य से यह प्रस्तावित किया गया है कि वे संबंधित क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा निर्वाचित किए जाएंगे. यदि नगरीय निकायों के महापौर/ अध्यक्ष , नगरीय निकाय क्षेत्र के नागरिकों द्वारा प्रत्यक्षतः निर्वाचित किए जाते हैं, तो उन्हें अपनी पसंद का जन प्रतिनिधि चुनने का अवसर प्राप्त होगा. निर्वाचित जन प्रतिनिधि, अपने क्षेत्र के विकास के लिए नागरिकों के प्रति सीधे तौर पर उत्तरदायी होंगे साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा यह भी देखा गया है कि क्षेत्र को जोड़ने अथवा हटाने अथवा वार्ड का पुनर्गठन करने के लिए दो मास की कालावधि पर्याप्त नहीं है, उक्त अवधि को बढ़ाया जाना आवश्यक था.

वर्तमान में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्राधिकारी नियुक्त करने के लिए परिषद् का प्रथम सम्मिलन आहूत करने का उपबंध सरल तथा व्यावहारिक नहीं था.

नगरीय निकायों का कार्यकाल पूर्ण हो गया था. राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय निकायों के निर्वाचन की कभी भी घोषणा किये जाने की संभावना थी. विधान सभा सत्र प्रचलित न होने के कारण अध्यादेश लाया जाना आवश्यक था. उपरोक्त प्रयोजनों को पूरा किये जाने के उद्देश्य से माननीय राज्यपाल महोदय द्वारा " मध्यप्रदेश नगर पालिक विधि ( तृतीय संशोधन) अध्यादेश २०२० ( क्रमांक १३ , सन् २०२० ) प्रख्यापित किया गया था.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2021 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 24 February 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2021-02-24.96.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2021-02-24.96.Extraordinary.