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मध्य प्रदेश शासन
सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 102]
भोपाल, गुरुवार, दिनांक 25 फरवरी 2021 - फाल्गुन 6 , शक 1942
विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश
भोपाल, दिनांक 25 फरवरी , 2021
क्र. 3172- मप्रविस - 15- विधान-2021 .- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम-64 के उपबंधों के पालन में , मध्यप्रदेश सिविल न्यायालय ( संशोधन ) विधेयक, 2021 ( क्रमांक 14 सन् 2021 ) जो विधान सभा में दिनांक 25 फरवरी 2021 को पुरःस्थापित हुआ है . जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
203 204
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 25 फरवरी 2021
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक १४ सन् २०२१
मध्यप्रदेश सिविल न्यायालय ( संशोधन ) विधेयक , २०२१
मध्यप्रदेश सिविल न्यायालय अधिनियम , १ ९ ५८ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.
भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान- मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:-
संक्षिप्त नाम.
१. इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश सिविल न्यायालय ( संशोधन ) अधिनियम, २०२१ है.
२. मध्यप्रदेश सिविल न्यायालय अधिनियम, १ ९ ५८ ( क्रमांक १ ९ सन् १ ९ ५८ ) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) की धारा २ के खण्ड ( क ) , धारा २५ तथा धारा २६ को छोड़कर, सर्वत्र मूल सर्वत्र मूल अधिनियम में कतिपय वाक्यांशों कास्थापन.
अधिनियम में, -
(एक ) शब्द " जिला न्यायाधीश " जहां कहीं भी वे आए हों, के स्थान पर, शब्द " प्रधान जिला न्यायाधीश " स्थापित किए जाएं;
(दो) शब्द " अपर जिला न्यायाधीश " जहां कहीं भी वे आए हों, के स्थान पर, शब्द " जिला न्यायाधीश " स्थापित किए जाएं ;
(तीन) शब्द तथा अंक " व्यवहार न्यायाधीश प्रथम वर्ग " जहां कहीं भी वे आए हों, के स्थान पर, शब्द " व्यवहार न्यायाधीश , वरिष्ठ खण्ड " स्थापित किए जाएं;
(चार) शब्द तथा अंक " व्यवहार न्यायाधीश द्वितीय वर्ग " जहां कहीं भी वे आए हो , के स्थान पर, " व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ खण्ड " स्थापित किए जाएं.
धारा २ का
३. मूल अधिनियम की धारा २ में, खण्ड ( क) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, संशोधन.
अर्थात्:-
" (क) " उच्चतर न्यायिक सेवा का संवर्ग " से अभिप्रेत है, जिला न्यायाधीशों का संवर्ग और उसमें सम्मिलित हैं, प्रधान जिला न्यायाधीश , जिला न्यायाधीश ( प्रवेश स्तर ) तथा जिला न्यायाधीश ( चयन श्रेणी ) ; " .
धारा १८ का
४. मूल अधिनियम की धारा १८ में, शब्द " जिला न्यायालय " के स्थान पर , शब्द " प्रधान जिला न्यायालय " संशोधन.
स्थापित किए जाएं.
उद्देश्यों और कारणों का कथन
सेट्टी वेतन आयोग ( प्रथम राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग ) ने देश में उच्चतर न्यायिक सेवा तथा निम्नतर न्यायिक सेवा के सदस्यों के वेतनमान , भत्ते, परिलब्धियां, चिकित्सा सुविधाएं, सेवानिवृत्ति प्रलाभों और संबंधित मामलों के संबंध में अनुशंसाएं की थीं, जिनमें से एक अनुशंसा उच्च न्यायिक सेवा तथा निम्नतर न्यायिक सेवा के सदस्यों के एक समान पदाभिधान अंगीकृत करने की है जो माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा रिट याचिका ( सिविल ) क्रमांक १०२२/ १ ९ ८ ९ आल इंडिया जजेस एसोसिएशन विरुद्ध यूनियन आफ इंडिया तथा अन्य में पारित निर्णय दिनांक ८ फरवरी, २००१ द्वारा अनुमोदित की गई है.
२. उपरोक्त विषयक माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार " मध्यप्रदेश उच्च न्यायिक ( सेवा भर्ती तथा सेवा शर्तें) नियम , २०१७ " में नाम पद्धति पहले से ही सम्मिलित कर दी गई है किन्तु जब तक मध्यप्रदेश सिविल न्यायालय अधिनियम , १ ९ ५८ (क्रमांक १ ९ सन् १ ९ ५८ ) संशोधित नहीं किया जाता, तब तक न्यायिक अधिकारियों का पदाभिधान परिवर्तित नहीं किया जा सकता.
३. उपरोक्त के आलोक में और माननीय उच्चतम न्यायालय के निदेशों के अनुसार अन्य राज्यों के साथ न्यायिक अधिकारियों के पदाभिधान को समरूप करने के आशय से मध्यप्रदेश सिविल न्यायालय अधिनियम, १ ९ ५८ को यथोचित रूप से संशोधित किया जाना प्रस्तावित है .
४. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.
भोपाल:
डॉ. नरोत्तम मिश्र भारसाधक सदस्य.
तारीख १ ९ फरवरी , २०२१.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री , मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2021 .