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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषको की भागीदारी (संशोधन) विधेयक 2021...

Published 25 February 2021

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
103
Identifier
in.gazette.madhya.2021-02-25.103.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

मध्यप्रदेश शासन

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सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 103 ]

भोपाल , गुरुवार, दिनांक 25 फरवरी 2021- फाल्गुन 6, शक 1942

विधान सभा सचिवालय , मध्यप्रदेश

भोपाल , दिनांक 25 फरवरी 2021

क्र. 3175- मप्रविस - 15- विधान- 2021.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम-64 के उपबंधों के पालन में मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी ( संशोधन ) विधेयक, 2021 ( क्रमांक 13 सन् 2021 ) जो विधान सभा में दिनांक 25 फरवरी , 2021 को पुरःस्थापित हुआ है . जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 25 फरवरी 2021

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक १३ सन् २०२१

मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी ( संशोधन ) विधेयक, २०२१ मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी अधिनियम , १ ९९९ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.

भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान - मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.

१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी ( संशोधन ) अधिनियम, २०२१ है.

( २ ) यह मध्यप्रदेश राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा.

धारा ४ का स्थापन.

२. मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी अधिनियम , १ ९९९ ( क्रमांक २३ सन् १ ९९९ ) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) की धारा ४ के स्थान पर , निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्:-

जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति.

" ४. ( १ ) प्रत्येक जल उपभोक्ता संथा के लिए एक प्रबंध समिति होगी जो उनके अपने-अपने प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से , धारा ३ की उपधारा ( ४ ) के खण्ड ( क ) के उपखण्ड ( एक ) में यथाविनिर्दिष्ट जल उपभोक्ताओं द्वारा प्रत्यक्षतः निर्वाचित धारा ३ की उपधारा ( २ ) में यथाविनिर्दिष्ट प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के सदस्यों से मिलकर बनेगी.

(२) जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति एक अभंग निकाय होगी , जिसके एक तिहाई निर्वाचित सदस्य उपधारा ( ३ ) में विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार, प्रत्येक दो वर्ष में सेवानिवृत्त होंगे.

(३) प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के सदस्यों की पदावधि, यदि उन्हें अधिनियम के उपबंधों के अधीन वापस नहीं बुलाया गया हो या हटाया नहीं गया हो या निरर्हित नहीं किया गया हो , धारा २१ की उपधारा ( १ ) के अधीन सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति की तारीख से छह वर्ष होगी:

परन्तु प्रथम निर्वाचन में , समस्त प्रादेशिक क्षेत्रों के सदस्य एक बार में निर्वाचित किए जाएंगे , जिनमें से एक तिहाई सदस्य दो वर्ष पूर्ण हो जाने पर, दूसरे एक तिहाई सदस्य चार वर्ष पूर्ण होने के पश्चात्, तथा शेष एक तिहाई सदस्य पद के छह वर्ष पूर्ण हो जाने के पश्चात्, सेवानिवृत्त होंगे और उनकी सेवानिवृत्ति की अवधि को प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के सदस्यों का प्रथम निर्वाचन प्रारम्भ होने के पूर्व लॉट डालकर विनिश्चित किया जाएगा .

(४) जिला कलक्टर, किसी जल उपभोक्ता क्षेत्र के प्रत्येक प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र से एक सदस्य से मिलकर बनने वाली प्रबंध समिति के निर्वाचन के लिए गुप्त मतदान द्वारा विहित रीति में व्यवस्था कराएगा .

(५) जिला कलक्टर , विहित रीति में, जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति के सदस्यों में से प्रबंध समिति के एक अध्यक्ष के निर्वाचन की भी व्यवस्था करेगा.

(६) यदि उपधारा ( ४ ) और ( ५ ) के अधीन किसी निर्वाचन में जल उपभोक्ता संथा के अध्यक्ष या प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के सदस्य निर्वाचित नहीं किए जा सके हों तो विहित रीति में नया निर्वाचन कराया जाएगा.

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 25 फरवरी 2021

(७) जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति का अध्यक्ष , यदि उसे अधिनियम के उपबंधों के अधीन वापस नहीं बुलाया गया हो या हटाया नहीं गया हो या निरर्हित नहीं किया गया हो, निर्वाचन की तारीख से दो वर्ष की कालावधि के लिए या प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र के सदस्य के रूप में उसका कार्यकाल पूरा होने तक जो भी पूर्वतर हो, पद पर रहेगा.

( ८) सामान्य निर्वाचन के पश्चात् बनाई गई समस्त जल उपभोक्ता संथाओं की प्रबंध समिति के अध्यक्ष तथा सदस्यों की पदावधि भी उसी समय समाप्त हो जाएगी जबकि वह उस समय समाप्त होती यदि वह सामान्य निर्वाचन में निर्वाचित हुआ होता.

(९ ) प्रबंध समिति, जल उपभोक्ता संथा की शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों का पालन करेगी.".

धारा ६ का संशोधन.

३. मूल अधिनियम की धारा ६ की उपधारा ( ७ ) का लोप किया जाए.

धारा ८ का संशोधन.

४. मूल अधिनियम की धारा ८ की उपधारा ( ६ ) का लोप किया जाए.

उद्देश्यों और कारणों का कथन

जल उपभोक्ता संथा के कार्य करने में निरन्तरता बनाए रखने की दृष्टि से, जल उपभोक्ता संथा का कार्यकाल वर्तमान में छह वर्ष किया जाना प्रस्तावित है और प्रत्येक दो वर्ष पश्चात्, प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के एक तिहाई सदस्य चक्रानुक्रम में निर्वाचित किए जाना प्रस्तावित है. मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी अधिनियम , १ ९९९ ( क्रमांक २३ सन् १ ९९९ ) में, धारा ४ की उपधारा ( ६ ) में यह उपबंधित है कि जल उपभोक्ता संथा की प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य को यदि पूर्व में वापस न बुलाया गया हो, तो वे सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति की तारीख से पांच वर्ष की पदावधि के लिए पद पर रहेंगे . जल उपभोक्ता संथा के पदाधिकारियों को उनकी क्षमता के निर्माण के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है. ५ वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात्, प्रबंध समिति के नए अध्यक्ष/ सदस्यों को निर्वाचित करने के लिए नए निर्वाचन किए जाते हैं. जल उपभोक्ता संथा की अवधि में निरंतरता नहीं है. निर्मित सिंचाई क्षमता तथा वास्तविक सिंचाई के बीच दूरी को कम करने के लिए, सैच्य क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन कार्यक्रम जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है. भारत सरकार के दिशा- निर्देशों के अनुसार जल उपभोक्ता संथा स्वाभाविक रूप से जल संसाधन मंत्रालय , भारत सरकार द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे सैच्य क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन कार्यक्रम के लिए आवश्यक कार्यान्वयन अभिकरण है. अतः जल उपभोक्ता संथा की अवधि में निरंतरता की आवश्यकता अनुभव की गई है. अतएव, मध्यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी अधिनियम, १ ९९९ की धारा ४, ६ और ८ में यथोचित संशोधन प्रस्तावित हैं.

६. अतएव, यह विधेयक प्रस्तावित है.

भोपाल:

तुलसीराम सिलावट भारसाधक सदस्य.

तारीख १६ फरवरी , २०२१.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 25 फरवरी 2021

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प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन

प्रस्तावित विधेयक के खण्ड २ ( ४ ) , ( ५ ) एवं ( ६ ) द्वारा प्रबंध समिति के निर्वाचन गुप्त मतदान से करने , प्रबंध समितियों में एक अध्यक्ष के निर्वाचन की व्यवस्था तथा अध्यक्ष या प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र के सदस्य निर्वाचित नहीं किए जा सकने की स्थिति में नया निर्वाचन कराए जाने के संबंध में रीति विहित किये जाने संबंधी प्रत्यायोजन राज्य सरकार को किये जा रहे हैं , जो सामान्य स्वरूप के होंगे.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश विधान सभा.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2021 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 25 February 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2021-02-25.103.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2021-02-25.103.Extraordinary.