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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

मध्‍यप्रदेश लोक संवाओं के प्रदान की गारंटी (संशोधन) विधेयक 2021.......

Published 25 February 2021

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
106
Identifier
in.gazette.madhya.2021-02-25.106.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

मध्यप्रदेश शासन

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सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 106 ]

भोपाल , गुरुवार, दिनांक 25 फरवरी 2021- फाल्गुन 6, शक 1942

विधान सभा सचिवालय , मध्यप्रदेश

भोपाल, दिनांक 25 फरवरी 2021

क्र. 3184- मप्रविस - 15- विधान-2021 .- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम-64 के उपबंधों के पालन में मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी ( संशोधन ) विधेयक, 2021 ( क्रमांक 12 सन् 2021 ) जो विधान सभा में दिनांक 25 फरवरी , 2021 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.

ए. पी. सिंह

प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक १२ सन् २०२१

मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी ( संशोधन ) विधेयक, २०२१

विषय -सूची

खण्ड :

१. संक्षिप्त नाम.

२. धारा २ का स्थापन.

३. धारा ३ का संशोधन.

४. धारा ५ का संशोधन.

५. निरसन तथा व्यावृत्ति.

211 212

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 25 फरवरी 2021

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक १२ सन् २०२१

मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी ( संशोधन ) विधेयक, २०२१ मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम , २०१० को और संशोधित करने हेतु विधेयक.

भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश राज्य विधान- मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:-

संक्षिप्त नाम.

१. इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी ( संशोधन ) अधिनियम , २०२१ है.

धारा २ का स्थापन. २. मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, २०१० ( क्रमांक २४ सन् २०१० ) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) की धारा २ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्:-

परिभाषाएं.

" २. इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) " आवेदन प्ररूप " से अभिप्रेत है, कोई आवेदन, जो आवेदक द्वारा पदाभिहित पोर्टल पर भरा जाएगा;

(ख) " मान्य अनुमोदन " से अभिप्रेत है, धारा ५ की उपधारा ( ३ ) के अनुसार उत्पन्न कोई अनुमोदन, जो पदाभिहित पोर्टल द्वारा किसी व्यक्ति के हस्तक्षेप के बिना हो;

( ग ) " पदाभिहित इकाई " से अभिप्रेत है , पदाभिहित पोर्टल के प्रशासन के लिए राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित कोई इकाई;

( घ) " पदाभिहित अधिकारी " से अभिप्रेत है, धारा ३ के अधीन सेवा प्रदान करने के लिये इस रूप में अधिसूचित कोई अधिकारी;

(ङ) " पदाभिहित पोर्टल " से अभिप्रेत है , पदाभिहित इकाई द्वारा सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से अनुरक्षित कोई इलेक्ट्रानिक पद्धति;

(च) " पात्र व्यक्ति " से अभिप्रेत है, अधिसूचित सेवाएं प्राप्त करने के लिए पात्र कोई व्यक्ति;

(छ) " प्रथम अपील अधिकारी " से अभिप्रेत है , कोई अधिकारी जो धारा ३ के अधीन इस रूप में अधिसूचित किया गया है ;

( ज ) " कपट " से अभिप्रेत है , ऐसा कृत्य जो भारतीय दण्ड संहिता , १८६० ( १८६० का ४५ ) की धारा ४२१ अथवा भारतीय संविदा अधिनियम, १८७२ ( १८७२ का ९ ) की धारा १७ के अधीन परिभाषित है;

(झ ) " विहित " से अभिप्रेत है, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित;

(ञ) " सेवा का अधिकार " से अभिप्रेत है, धारा ४ के अधीन नियत समय - सीमा के भीतर सेवा अभिप्राप्त करने का अधिकार;

(ट) " द्वितीय अपील प्राधिकारी " से अभिप्रेत है , धारा ३ के अधीन इस रूप में अधिसूचित कोई अधिकारी;

(ठ) " सेवा " जिसमें अनुमतियां सम्मिलित हैं, से अभिप्रेत है , धारा ३ के अधीन अधिसूचित कोई सेवा;

212(1 )

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 25 फरवरी 2021

(ड ) " राज्य सरकार " से अभिप्रेत है, मध्यप्रदेश सरकार;

(ढ) " नियत समय- सीमा " से अभिप्रेत है , अधिकतम समय जिसके भीतर धारा ३ के अधीन यथा अधिसूचित पदाभिहित अधिकारी द्वारा सेवा प्रदाय की जानी है या प्रथम अपील अधिकारी द्वारा अपील का विनिश्चय किया जाना है.".

धारा ३ का संशोधन.

३. मूल अधिनियम की धारा ३ के प्रारंभिक पैराग्राफ को उसकी उपधारा ( १ ) के रूप में क्रमांकित किया जाए और उसके पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा जोड़ी जाए, अर्थात्:-

" ( २ ) राज्य सरकार, समय - समय पर, उन सेवाओं को अधिसूचित कर सकेगी जिनको कि मान्य अनुमोदन के उपबंध लागू होंगे. " .

धारा ५ का संशोधन.

४. मूल अधिनियम की धारा ५ में, उपधारा ( २ ) के पश्चात्, निम्नलिखित उप धाराएं जोड़ी जाएं .

अर्थात्:-

" ( ३ ) यदि पदाभिहित अधिकारी , धारा ३ की उपधारा ( २ ) के अधीन अधिसूचित किसी सेवा के लिए प्राप्त आवेदनों का, नियत समय- सीमा के भीतर विनिश्चय करने में असफल रहता है तो, ऐसी सेवा के लिए मान्य अनुमोदन पदाभिहित पोर्टल द्वारा उत्पन्न किया जाएगा . ऐसे मान्य अनुमोदन की कानूनी वैधता, पदाभिहित अधिकारी द्वारा प्रदान किए गए अनुमोदन के समान ही होगी.

(४) उपधारा ( ३ ) के अधीन उत्पन्न किया गया अनुमोदन इस अधिनियम की धारा ६ तथा धारा ७ के उपबंधों को आकर्षित नहीं करेगा.

(५ ) कपटपूर्ण कृत्य या मिथ्या जानकारी प्रस्तुत करके प्राप्त की गई सेवा की दशा में, पदाभिहित अधिकारी उसका तत्काल प्रभाव से प्रतिसंहरण करेगा. " .

तथा

व्यावृत्ति.

५. ( १ ) मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी ( संशोधन ) अध्यादेश , २०२१ ( क्रमांक ९ निरसन सन् २०२१ ) एतद्वारा निरसित किया जाता है.

( २ ) उक्त अध्यादेश के निरसित होते हुए भी उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कार्रवाई या की गई कोई बात, उक्त अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई कार्रवाई या की गई बात समझी जाएगी.

उद्देश्यों के कारणों का कथन

राज्य सरकार द्वारा राज्य की जनता को विहित समय - सीमा के भीतर राज्य सरकार के समस्त विभागों की सेवाएं प्रदान करने हेतु वर्ष २०१० में मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, २०१० (क्रमांक २४ सन् २०१० ) अधिनियमित किया गया था, जिसके द्वारा जनता को विभिन्न विभागों की सेवाएं प्राप्त करने का अधिकार प्रदान किया गया था.

२. वर्तमान में अधिनियम के अधीन विनिर्दिष्ट समयावधि के भीतर सेवाएं प्रदान करने का उपबंध है. तथापि, कुछ महत्वपूर्ण सेवाएं (जैसे कि निवेश योजनाओं की स्थापना से संबंधित ) आवेदकों को अपील , शास्ति एवं पुनरीक्षण जैसे प्रकरणों में समय पर प्राप्त नहीं हो पाती हैं. अतएव, ऐसी चिन्हित सेवाओं के लिए यह उपबंध लाया जाना प्रस्तावित है कि जहां पदाभिहित अधिकारी प्राप्त आवेदनों का नियत समय - सीमा के भीतर विनिश्चय करने में असफल रहता है तो ऐसी सेवा के लिए मान्य अनुमोदन पदाभिहित पोर्टल द्वारा उत्पन्न किया जा सकेगा . राज्य सरकार, समय - समय पर, ऐसी सेवाओं को अधिसूचित कर सकेगी. कपटपूर्ण कृत्य या मिथ्या जानकारी प्रस्तुत कर प्राप्त की गई किसी सेवा की दशा में, पदाभिहित अधिकारी तत्काल प्रभाव से उसका प्रतिसंहरण करेगा.

३. चूंकि मामला अत्यावश्यक था तथा विधान सभा का सत्र चालू नहीं था, अतएव, मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी (संशोधन ) अध्यादेश , २०२१ ( क्रमांक ९ सन् २०२१ ) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किया गया था. अब उक्त अध्यादेश के स्थान पर, राज्य विधान- मण्डल का अधिनियम बिना किसी उपांतरण के लाया जाना प्रस्तावित है.

४. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.

भोपाल :

डॉ. अरविंद सिंह भदौरिया तारीख : १७ फरवरी , २०२१ .

भारसाधक सदस्य.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 25 फरवरी 2021

212(2)

प्रत्यायोजित विधि निर्माण संबंधी ज्ञापन

प्रस्तावित विधेयक के खण्ड ३ द्वारा मान्य अनुमोदन के उपबंध लागू किये जाने हेतु उन सेवाओं को अधिसूचित किये जाने संबंधी विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन राज्य सरकार को किया जा रहा है जो सामान्य स्वरूप का होगा.

अध्यादेश के संबंध में विवरण

राज्य शासन द्वारा राज्य की जनता को निश्चित समय - सीमा के भीतर सेवाएं प्रदान करने हेतु वर्ष २०१० में मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम , २०१० ( क्रमांक २४ सन् २०१० ) अधिनियमित किया गया था, जिसके द्वारा जनता को विभिन्न विभागों की सेवाएं प्राप्त करने का अधिकार प्रदान किया गया था. अधिनियम के अधीन विनिर्दिष्ट समयावधि के भीतर सेवाएं प्रदान करने का उपबंध है. उक्त उपबंधों के अधीन प्रस्तावित सेवाओं के सफल परिचालन में कुछ व्यावहारिक कठिनाई दृष्टव्य हो रहीं थीं. जिनका समाधान किया जाना आवश्यक था.

चूंकि विधानसभा का सत्र चालू नहीं था और विधान बनाया जाना आवश्यक हो गया था, अतः उपरोक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिये मध्यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी ( संशोधन ) अध्यादेश, २०२१ ( क्रमांक ९ सन् २०२१ ) प्रख्यापित किया गया था.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2021 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 25 February 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2021-02-25.106.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2021-02-25.106.Extraordinary.