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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

धार्मिक स्‍वतंत्रता विधेयक 2021.....

Published 01 March 2021

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
124
Identifier
in.gazette.madhya.2021-03-01.124.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

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मध्य प्रदे श शासन

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 124]

भोपाल, सोमवार, दिनांक 1 मार्च 2021- फाल्गुन 10, शक 1942

विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश

भोपाल, दिनांक 1 मार्च 2021

क्र. 3715 - मप्रविस- 15- विधान-2021 .- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम -64 के उपबंधों के पालन में, मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक, 2021 ( क्रमांक 1 सन् 2021 ) जो विधान सभा में दिनांक 1 मार्च 2021 को पुरःस्थापित हुआ है . जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 मार्च 2021

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक १ सन् २०२१

मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक, २०२१

विषय-सूची.

खण्ड:

१. संक्षिप्त नाम , विस्तार और प्रारंभ.

२. परिभाषाएं.

३. एक धर्म से अन्य धर्म में विधि विरुद्ध संपरिवर्तन का प्रतिषेध.

४. धर्म-संपरिवर्तन के विरुद्ध परिवाद.

५. धारा ३ के उपबंधों के उल्लंघन के लिए दण्ड.

६. किसी व्यक्ति का धर्म- संपरिवर्तित करने के आशय के साथ किया गया विवाह अकृत तथा शून्य होगा.

७. न्यायालय की अधिकारिता.

८. उत्तराधिकार का अधिकार.

९. भरणपोषण का अधिकार.

१०. धर्म-संपरिवर्तन से पूर्व घोषणा.

११. किसी संस्था अथवा संगठन द्वारा अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन के लिए दण्ड.

१२. सबूत का भार.

१३. अपराध का संज्ञेय , अजमानतीय और सत्र न्यायालय द्वारा विचारण योग्य होना.

१४. अन्वेषण.

१५. कठिनाइयां दूर करने की शक्ति.

१६. नियम बनाने की शक्ति.

१७. मध्यप्रदेश अधिनियम क्रमांक २७ सन् १ ९ ६८ का निरसन तथा व्यावृत्ति.

१८. मध्यप्रदेश अध्यादेश क्रमांक १ सन् २०२१ का निरसन तथा व्यावृत्ति.

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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 मार्च 2021

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक १ सन् २०२१

मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक, २०२१

दुर्व्यपदेशन , प्रलोभन, धमकी या बल प्रयोग , असम्यक् असर, प्रपीड़न, विवाह या किसी अन्य कपटपूर्ण साधन द्वारा एक धर्म से दूसरे धर्म में संपरिवर्तन का प्रतिषेध कर धार्मिक स्वतंत्रता तथा उससे संबंधित या उससे आनुषंगिक विषयों के लिए उपबंध करने हेतु विधेयक.

भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान-मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम , २०२१ है.

नाम , संक्षिप्त विस्तार और प्रारंभ.

( २ ) इसका विस्तार संपूर्ण मध्यप्रदेश राज्य पर होगा.

(३ ) यह ऐसी तारीख से प्रवृत्त होगा जैसा कि राज्य सरकार, राजपत्र में , अधिसूचना द्वारा नियत करे.

परिभाषाएं.

२. (१ ) इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) " प्रलोभन " से अभिप्रेत है और इसमें सम्मिलित है , नगद अथवा वस्तु के रूप में कोई दान या परितोषण या भौतिक लाभ या रोजगार, किसी धार्मिक निकाय द्वारा संचालित विद्यालय में शिक्षा, बेहतर जीवन शैली, दैवीय प्रसाद या उसका वचन या अन्यथा के रूप में किसी प्रलोभन देने का कोई कार्य ;

(ख) " प्रपीड़न " से अभिप्रेत है, किसी व्यक्ति को किसी माध्यम से जो कुछ भी हो जिसमें मनोवैज्ञानिक दबाव या शारीरिक क्षति कारित करने वाले भौतिक बल प्रयोग या उसकी धमकी द्वारा अपनी इच्छा के विरुद्ध कार्य करने हेतु बाध्य करना;

(ग) " धर्म संपरिवर्तन " से अभिप्रेत है , एक धर्म को त्याग करना तथा कोई अन्य धर्म अंगीकृत कर लेना किन्तु किसी व्यक्ति का अपने पैतृक धर्म में मुड़ कर वापस आना धर्म परिवर्तन नहीं समझा जाएगा;

स्पष्टीकरण.- संपरिवर्तित व्यक्ति के पैतृक धर्म से उस व्यक्ति के जन्म के समय उसके पिता का धर्म अभिप्रेत होगा.

(घ) " बल " में सम्मिलित है , बल - प्रदर्शन या धर्म- संपरिवर्तित करने वाले या धर्म - संपरिवर्तन की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को या उसके माता पिता को या सहोदर भाई बहन को या विवाह, दत्तक ग्रहण , संरक्षकता या अभिरक्षा द्वारा संबंधित व्यक्ति को या सम्पत्ति को किसी प्रकार की क्षति पहुंचाने की धमकी, जिसमें दैवीय अप्रसाद या सामाजिक जाति बहिष्कार की धमकी सम्मिलित है ;

(ङ) " कपटपूर्ण " में सम्मिलित है, किसी भी प्रकार का दुर्व्यपदेशन या कोई अन्य कपटपूर्ण उपाय;

(च) " सरकार " से अभिप्रेत है , मध्यप्रदेश सरकार;

(छ) " अप्राप्त वय " से अभिप्रेत है, अठारह वर्ष से कम आयु का कोई व्यक्ति;

(ज) " धर्माचार्य " से अभिप्रेत है और इसमें सम्मिलित है, किसी धर्म को मानने वाला कोई व्यक्ति और जो किसी धर्म के अनुष्ठान/रस्में, जिसमें शुद्धिकरण संस्कार या धर्म- संपरिवर्तन समारोह सम्मिलित मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 मार्च 2021

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है, करता है और किसी भी नाम जैसे पुजारी, पंडित, काजी, मुल्ला, मौलवी तथा फादर से जाना जाता हो;

( झ) " असम्यक् असर " से अभिप्रेत है , ऐसे असर का प्रयोग करने वाले व्यक्ति की इच्छा के अनुसार कार्य करने हेतु अन्य व्यक्ति को प्रेरित करने के उद्देश्य से किसी व्यक्ति द्वारा अपनी शक्ति का अंतःकरण के विरुद्ध प्रयोग या अन्य व्यक्ति पर असर डालने से है.

(२) शब्द और अभिव्यक्तियों जिनका इस अधिनियम में उपयोग किया गया है परन्तु इसमें परिभाषित नहीं किया गया है परन्तु दण्ड प्रक्रिया संहिता, १ ९ ७३ ( १ ९ ७४ का २ ) और भारतीय दण्ड संहिता, १८६० ( १८६० का ४५ ) में परिभाषित हैं अन्यथा उपबंधित के सिवाय वही अर्थ होगा जैसा कि क्रमशः उन्हें समनुदेशित किया गया है .

३. ( १ ) कोई व्यक्ति,-

(क)

एक धर्म से अन्य धर्म में विधि विरुद्ध संपरिवर्तन का प्रतिषेध.

दुर्व्यपदेशन, प्रलोभन, धमकी या बल प्रयोग , असम्यक् असर, प्रपीड़न, विवाह या किसी अन्य कपटपूर्ण साधन द्वारा किसी भी व्यक्ति को प्रत्यक्षतः या अन्यथा संपरिवर्तित नहीं करेगा या प्रत्यक्षतः या अन्यथा संपरिवर्तित करने का प्रयास नहीं करेगा;

(ख) ऐसे संपरिवर्तन का दुष्प्रेरण या षडयंत्र नहीं करेगा.

जाएगा. ( २ ) कोई भी धर्म संपरिवर्तन , जो इस धारा के प्रावधानों के विपरीत किया गया हो, वह अकृत एवं शून्य समझा धर्म संपरिवर्तन के विरुद्ध परिवाद.

४. कोई पुलिस अधिकारी उपरोक्त धारा ३ के उल्लंघन में संपरिवर्तित व्यक्ति अथवा उसके माता- पिता या सहोदर भाई या बहन या न्यायालय की अनुमति से किसी व्यक्ति जो रक्त, विवाह या दत्तक ग्रहण , संरक्षकता या अभिरक्षा, जो भी लागू हो, द्वारा संबंधी हो , के लिखित परिवाद के सिवाय जांच या अन्वेषण नहीं करेगा.

धारा ३ के उपबंधों के उल्लंघन के लिए दण्ड.

५. जो कोई भी धारा ३ के उपबंधों का उल्लंघन करता है , कारावास से जो एक वर्ष से कम का नहीं होगा परन्तु जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा तथा जुर्माने का भी दायी होगा जो पच्चीस हजार रुपए से कम का नहीं होगा, दण्डित किया जाएगा :

परन्तु यह कि जो कोई भी किसी अप्राप्त वय , किसी स्त्री या अनुसूचित जाति या जनजाति के किसी व्यक्ति के संबंध में धारा ३ के उपबंधों का उल्लंघन करता है कारावास से जो दो वर्ष से कम का नहीं होगा परन्तु जो दस वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने का भी दायी होगा जो पचास हजार रुपए से कम का नहीं होगा , दण्डित किया जाएगा:

परन्तु यह और कि जो कोई भी , उसके द्वारा माने जाने वाले धर्म से भिन्न किसी धर्म के व्यक्ति से विवाह करना चाहता है और अपना धर्म इस प्रकार छिपाता है कि अन्य व्यक्ति जिससे वह विवाह करना चाहता है, विश्वास करता है कि उसका धर्म वास्तव में वही है जो कि उसका है, कारावास से जो तीन वर्ष से कम का नहीं होगा परन्तु जो दस वर्ष तक का हो सकेगा तथा जुर्माने का भी दायी होगा जो पचास हजार रुपये से कम का नहीं होगा , दण्डित किया जाएगा:

परन्तु यह और कि जो कोई सामूहिक धर्म संपरिवर्तन के संबंध में धारा ३ के उपबंधों का उल्लंघन करता है, कारावास से जो पांच वर्ष से कम का नहीं होगा परन्तु जो दस वर्ष तक का हो सकेगा तथा जुर्माने का भी दायी होगा जो एक लाख रुपए से कम का नहीं होगा, दण्डित किया जाएगा:

परन्तु यह भी कि इस धारा में उल्लिखित दूसरे या उत्तरवर्ती अपराध की दशा में , कारावास पांच वर्ष से कम का नहीं होगा परन्तु दस वर्ष तक का हो सकेगा तथा जुर्माने का भी दायी होगा.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 1 मार्च 2021

248 (3) स्पष्टीकरण.- सामूहिक धर्म संपरिवर्तन से अभिप्रेत है ऐसा धर्म - संपरिवर्तन जहां एक ही समय में दो से अधिक व्यक्तियों ने धर्म- संपरिवर्तन किया है .

६. धारा ३ के उल्लंघन में किया गया कोई विवाह अकृत तथा शून्य समझा जाएगा.

किसी व्यक्ति का धर्म- संपरिवर्तित करने के आशय के साथ किया गया विवाह अकृत तथा शून्य होगा.

न्यायालय की अधिकारिता.

७. धारा ६ के अधीन किसी विवाह को अकृत तथा शून्य घोषित करने के लिए प्रत्येक याचिका, धारा ४ में उल्लेखित किसी व्यक्ति द्वारा परिवार न्यायालय के समक्ष या जहां परिवार न्यायालय स्थापित नहीं है, वहां स्थानीय सीमाओं के भीतर किसी परिवार न्यायालय की अधिकारिता रखने वाले न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी , जहां,-

(क) विवाह किया गया था; या

(ख) प्रत्यर्थी, याचिका प्रस्तुत करते समय निवास करता है; या

(ग) विवाह के दोनों पक्षकार अंतिम बार साथ- साथ निवासरत् थे; या

(घ) जहां याचिकाकर्ता याचिका प्रस्तुत करने की तारीख पर निवास कर रहा है.

उत्तराधिकार का अधिकार.

८. ( १ ) धारा ६ के उपबंधों अथवा इसमें उपरोक्त धारा ७ के अधीन सक्षम न्यायालय के विनिश्चय के होते हुए भी धारा ३ के उल्लंघन में किए गए विवाह से जन्मा कोई बच्चा वैध समझा जाएगा.

( २ ) उपरोक्त धारा ६ के उपबंध के होते हुए भी ऐसे बच्चे का संपत्ति का उत्तराधिकार पिता के उत्तराधिकार को विनियमित करने वाली विधि के अनुसार होगा.

(३ ) उपधारा ( २ ) में अंतर्विष्ट किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि किसी विवाह से , जो कि धारा ६ के अधीन अकृत तथा शून्य है तथा जो धारा ७ के अधीन सक्षम न्यायालय द्वारा रद्द किया गया है, जन्मे किसी बच्चे को अपने पिता से भिन्न, किसी व्यक्ति की संपत्ति में अथवा उस पर कोई अधिकार प्रदान करता है.

भरणपोषण का अधिकार.

९ . तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी उपबंध के होते हुए भी ऐसी महिला जिसका विवाह धारा ७ के अधीन अकृत तथा शून्य घोषित किया गया है तथा उसके बच्चे दण्ड प्रक्रिया संहिता, १ ९ ७३ ( १ ९ ७४ का २ ) के अध्याय ९ में यथा उपबंधित भरणपोषण पाने के लिए हकदार होंगे.

धर्म- संपरिवर्तन से पूर्व घोषणा.

१०. ( १ ) कोई व्यक्ति जो धर्म - संपरिवर्तित करना चाहता है इस कथन के साथ कि वह स्वयं की स्वतंत्र इच्छा से तथा बिना किसी बल , प्रपीड़न, असम्यक् असर या प्रलोभन के अपना धर्म - संपरिवर्तन करना चाहता है, जिला मजिस्ट्रेट को विहित प्ररूप में, ऐसे धर्म- संपरिवर्तन से साठ दिवस पूर्व , इस आशय की घोषणा प्रस्तुत करेगा.

( २) कोई धर्माचार्य और/ या कोई व्यक्ति जो धर्म- संपविर्तन का आयोजन करना चाहता है , उस जिले के जिला मजिस्ट्रेट कोजहां ऐसा धर्म - संपरिवर्तन आयोजित किया जाना प्रस्तावित है , ऐसे प्ररूप में जैसे कि विहित किया जाए साठ दिवस की पूर्वसूचना देगा.

( ३ ) जिला मजिस्ट्रेट उपधारा ( १ ) तथा ( २ ) के अधीन सूचना प्राप्त होने पर ऐसे प्ररूप में, जैसा कि विहित किया जाए ऐसी पूर्व सूचना की पावती देगा.

(४) जो कोई भी उपधारा ( २ ) के उपबंधों का उल्लंघन करता है कारावास से जो तीन वर्ष से कम का नहीं होगा परन्तु पांच वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने का भी दायी होगा जो पचास हजार रुपए से कम का नहीं होगा, दण्डित किया जाएगा.

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(५ ) कोई भी न्यायालय संबंधित जिला मजिस्ट्रेट की मंजूरी के बिना इस धारा के अधीन कारित अपराध का संज्ञान नहीं लेगा.

११. ( १ ) जहां कोई संस्था या संगठन इस अधिनियम के किसी उपबंध का उल्लंघन करता है, वहां यथास्थिति ऐसी संस्था अथवा संगठन के कामकाज का भारसाधक व्यक्ति इस अधिनियम की धारा ५ में यथा उपबंधित दण्ड का दायी होगा.

किसी संस्था अथवा संगठन द्वारा अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन के लिए दण्ड.

( २ ) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का दोषी पाए जाने पर संस्था अथवा संगठन का पंजीयन सक्षम प्राधिकारी द्वारा विखंडित किया जाएगा.

सबूत का भार

१२. सबूत का भार, कि कोई धर्म - संपरिवर्तन , दुर्व्यपदेशन, प्रलोभन, बल प्रयोग, बल प्रयोग की धमकी, असम्यक् असर, प्रपीड़न के माध्यम से या विवाह या धर्म परिवर्तन कराने के प्रयोजन से किसी अन्य कपटपूर्ण साधन द्वारा नहीं किया गया था , आरोपी पर होगा.

१३. ( १ ) दण्ड प्रक्रिया संहिता, १ ९७३ में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन कारित प्रत्येक अपराध संज्ञेय, अजमानतीय और सत्र न्यायालय द्वारा विचारण योग्य होगा.

अपराध का संज्ञेय , अजमानतीय और सत्र न्यायालय द्वारा विचारण योग्य होना.

( २ ) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के विचारण के समय, सत्र न्यायालय इस अधिनियम के अधीन अपराध से भिन्न किसी अपराध का विचारण भी कर सकेगा, जिससे कि आरोपी उसी विचारण में दण्ड प्रक्रिया संहिता, १ ९७३ के अधीन आरोपित किया जाए.

अन्वेषण.

१४. पुलिस उपनिरीक्षक से निम्न पद श्रेणी का कोई पुलिस अधिकारी इस अधिनियम के अधीन पंजीकृत किसी अपराध का अन्वेषण नहीं करेगा.

कठिनाइयां दूर करने कीशक्ति.

१५. ( १ ) इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में यदि कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो सरकार राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसे उपबंध कर सकेगी जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं हैं, जैसा कि कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों:

परन्तु ऐसा आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तारीख से दो वर्ष की कालावधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा.

(२ ) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक आदेश इसके बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र विधान सभा के समक्ष रखा जाएगा.

नियम बनाने की शक्ति.

१६. ( १ ) सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा , इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए नियम तथा विनियम बना सकेगी.

(२ ) उपधारा ( १ ) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित की जाएगी और इसके बाद ही यह लागू होगी.

१७. ( १ ) मध्यप्रदेश धर्म - स्वातन्त्रय अधिनियम , १ ९ ६८ ( क्रमांक २७ सन् १ ९ ६८ ) तथा उसके अधीन बनाए गए नियम एतद्वारा निरसित किये जाते हैं.

मध्यप्रदेश अधिनियम २७ सन् १ ९६८ का निरसन तथा व्यावृत्ति.

( २ ) ऐसे निरसन के होते हुए भी , परन्तु मध्यप्रदेश सामान्य खण्ड अधिनियम, १ ९ ५७ ( क्रमांक ०३ सन् १ ९ ५८ ) की धारा १० की प्रयोज्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इस प्रकार निरसित अधिनियम के अधीन अथवा उसके अनुसरण में की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई, या किए जाने के लिए तात्पर्यित कोई बात या कोई कार्रवाई जहां तक कि वह इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं है , इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन अथवा अनुसरण में की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई समझी जाएगी .

१८. ( १ ) मध्यप्रदेश धर्म- स्वतंत्रता अध्यादेश , २०२० ( क्रमांक १ सन् २०२१ ) एतद्वारा निरसित किया जाता है.

मध्यप्रदेश अध्यादेश क्रमांक १ सन् २०२१ का निरसन तथा व्यावृत्ति.

( २ ) उक्त अध्यादेश के निरसन के होते हुए भी उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई. इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई बात या की गई कार्रवाई समझी जाएगी.

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मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 मार्च 2021

उद्देश्यों और कारणों का कथन

१. भारत के संविधान के अनुच्छेद २५ , २६ , २७ एवं २८ के अधीन समस्त नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को प्रत्याभूत किया गया है . इस अधिनियम का उद्देश्य भारत में पंथनिरपेक्षता की आत्मा को स्थिर करता है . संविधान के अनुसार , राज्य का कोई धर्म नहीं है और सभी धर्म राज्य के समक्ष समान हैं और किसी भी धर्म को अन्य धर्म पर अधिमानता नहीं दी जाएगी.

२. कुछ व्यक्ति, संस्थाएं तथा संगठन प्रलोभन , दुर्व्यपदेशन, धमकी देकर या हमला करके , असम्यक् प्रभाव, प्रपीड़न, विवाह या किसी अन्य कपटपूर्ण साधन का प्रयोग धर्म संपरिवर्तन के लिए करते हैं. इससे संविधान के अधीन प्रत्याभूत धर्म की स्वतंत्रता का बुरी तरह से हनन तथा अतिलंघन होता है इस अवस्था पर ठीक से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है जिससे संविधान प्रदत्त स्वतंत्रता के अधिकार का भाषा और भाव की दृष्टि से पालन हो सके.

३. मध्यप्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम , १ ९ ६८ ( क्रमांक २७ सन् १ ९ ६८ ) लगभग ५२ वर्ष पूर्व राज्य में अधिनियमित किया गया था . वर्तमान सामाजिक, सांस्कृतिक परिवेश में उक्त अधिनियम के उपबंध यथोचित नहीं हैं और उक्त अधिनियम को निरसित किए जाने तथा प्रस्तावित विधेयक के रूप में नया अधिनियम लाए जाने की आवश्यकता है.

४. मध्यप्रदेश धर्म स्वतंत्रता विधेयक, २०२१ , -

(क) दुर्व्यपदेशन, बल, असम्यक् असर या प्रपीड़न द्वारा या कपटपूर्ण साधनों द्वारा या विवाह के माध्यम से धर्म परिवर्तन को अपराध बनाकर इसका प्रतिषेध करने;

(ख ) अवयस्क, महिला या अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के संबंध में ऐसे धर्म परिवर्तन हेतु अधिक से अधिक दंड का उपबंध करने;

(ग) सबूत का भार अभियुक्त पर होने के लिए उपबंध करने;

(घ) धर्म परिवर्तन का इच्छुक प्रत्येक व्यक्ति सक्षम प्राधिकारी को धर्म परिवर्तन की पूर्व सूचना प्रस्तुत करेगा, इसके लिए उपबंध करने;

(ङ) ऐसे विवाह को, जो इस अधिनियम के उल्लंघन में सम्पन्न किया गया है , अकृत एवं शून्य घोषित करने; का प्रयास करता है.

५. चूंकि मामला अत्यावश्यक था तथा विधान सभा का सत्र चालू नहीं था, अतएव , मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश, २०२० (क्रमांक १ सन् २०२१ ) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किया गया था. अब उक्त अध्यादेश के स्थान पर, राज्य विधान- मण्डल का अधिनियम बिना किसी उपातंरण के लाया जाना प्रस्तावित है.

६. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र भोपाल :

भारसाधक सदस्य तारीख : ११ फरवरी , २०२१ मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 1 मार्च 2021

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प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में व्याख्यात्मक ज्ञापन

प्रस्तावित विधेयक के जिन खण्डों द्वारा राज्य शासन को विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन किया जा रहा है, उनका विवरण निम्नानुसार है:-

खण्ड १ - अधिनियम के विभिन्न उपबंधों को विभिन्न तारीखों से अधिसूचना जारी करके लागू किये जाने;

खण्ड १० - धर्म संपरिवर्तन से पूर्व घोषणा संबंधी प्ररूप नियत करने;

खण्ड १५ - विधेयक के उपबंधों के प्रभावी क्रियान्वयन करने में उद्भूत कठिनाईयों को दूर करने; तथा

खण्ड १६ - अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने;

के संबंध में नियम बनाये जाएंगे, जो सामान्य स्वरूप के होंगे .

अध्यादेश के संबंध में विवरण

मध्यप्रदेश राज्य में वर्ष १ ९ ६८ में धर्म स्वातन्त्रय अधिनियम पारित किया गया था एवं वर्ष १ ९ ६ ९ में इसके नियम बनाये गये थे. वर्तमान परिवेश में उक्त अधिनियम के प्रावधान पर्याप्त नहीं होने से मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश , २०२० लागू किये जाने की नितांत आवश्यकता थी.

दुर्व्यपदेशन , बल , असम्यक असर या प्रपीड़न द्वारा या कपटपूर्ण साधनों द्वारा या विवाह के माध्यम से धर्म संपरिवर्तन को अपराध बनाकर इसका प्रतिषेध करने , अथवा अवयस्क, महिला या अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के संबंध में ऐसे धर्म संपरिवर्तन हेतु अधिक से अधिक दंड का उपबंध किया जाना आवश्यक था चूंकि विधान सभा का सत्र चालू नहीं था एवं विधान बनाना आवश्यक हो गया था. अतः उक्त प्रयोजन को पूरा करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश , २०२० ( क्रमांक १ सन् २०२१ ) प्रख्यापित किया गया.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2021 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 01 March 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2021-03-01.124.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2021-03-01.124.Extraordinary.