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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

दण्‍ड विधि (मध्‍यप्रदेश संशोधन) विधेयक 2021....

Published 09 March 2021

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
140
Identifier
in.gazette.madhya.2021-03-09.140.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

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मध्यप्रदेश

शासन

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 140]

भोपाल , मंगलवार, दिनांक 9 मार्च 2021- फाल्गुन 18 , शक 1942

विधान सभा सचिवालय , मध्यप्रदेश

भोपाल, दिनांक 9 मार्च 2021

क्र. 5052 - मप्रविस - 15- विधान- 2021.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम-64 के उपबंधों के पालन में, दण्ड विधि ( मध्यप्रदेश संशोधन ) विधेयक, 2021 ( क्रमांक 20 सन् 2021 ) जो विधान सभा में दिनांक 9 मार्च 2021 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

279 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 9 मार्च 2021

280

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक २० सन् २०२१

दण्ड विधि ( मध्यप्रदेश संशोधन ) विधेयक, २०२१

विषय-सूची

खण्ड :

अध्याय- एक

प्रारंभिक

१. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.

अध्याय-दो

दण्ड प्रक्रिया संहिता, १ ९ ७३ का संशोधन

मध्यप्रदेश राज्य को लागू हुए रूप में केन्द्रीय अधिनियम, १ ९७४ का संख्यांक २ का संशोधन . २.

३. धारा ३५७ - ख का स्थापन.

४. प्रथम अनुसूची का संशोधन.

अध्याय-तीन

भारतीय दण्ड संहिता , १८६० का संशोधन

५. मध्यप्रदेश राज्य को लागू हुए रूप में केन्द्रीय अधिनियम, १८६० का संख्यांक ४५ का संशोधन.

६. धारा २७२ का संशोधन.

७. धारा २७३ का संशोधन.

८. धारा २७३ - क का अंतःस्थापन.

९. धारा २७४ का संशोधन.

१०. धारा २७५ का संशोधन.

११. धारा २७६ का संशोधन .

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 9 मार्च 2021

280 ( 1 )

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक २० सन् २०२१

दण्ड विधि ( मध्यप्रदेश संशोधन ) विधेयक , २०२१

मध्यप्रदेश राज्य को लागू हुए रूप में दण्ड प्रक्रिया संहिता, १ ९ ७३ और भारतीय दण्ड संहिता , १८६० को और संशोधित करने हेतु विधेयक.

भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान- मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-

अध्याय- एक

प्रारंभिक

१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम दण्ड विधि ( मध्यप्रदेश संशोधन ) अधिनियम, २०२१ है.

संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.

( २ ) यह मध्यप्रदेश राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा.

अध्याय-दो

दण्ड प्रक्रिया संहिता , १ ९ ७३ का संशोधन

मध्यप्रदेश राज्य को २. मध्यप्रदेश राज्य को लागू हुए रूप में दण्ड प्रक्रिया संहिता, १ ९७३ ( १ ९ ७४ का २ ) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) को इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रीति में संशोधित किया जाए.

लागू हुए रूप में केन्द्रीय अधिनियम, १९७४ का संख्यांक २ का संशोधन.

३. मूल अधिनियम की धारा ३५७ - ख के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्: -

धारा ३५७ -ख का स्थापन.

" ३५७-ख. धारा ३५७- क के अधीन राज्य सरकार द्वारा संदेय प्रतिकर भारतीय दण्ड संहिता , १८६० (१८६० का ४५) की धारा २७२, २७३, २७४, २७५ , २७६ , धारा ३२६ - क, धारा ३७६-कख , ३७६ - घ, ३७६घक और धारा ३७६घख के अधीन पीड़ित को जुर्माने का संदाय करने के अतिरिक्त होगा.

प्रतिकर का भारतीय दण्डसंहिता, १८६० ( १८६० का ४५) की धारा २७२ , २७३ , २७४ , २७५ , २७६ , धारा ३२६- क, धारा ३७६कख, ३७६-घ, ३७६घक और धारा ३७६ घख केअधीन जुर्माने के अतिरिक्तहोना.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 9 मार्च 2021

280 (2)

४. मूल अधिनियम की प्रथम अनुसूची में, -

प्रथम अनुसूची का संशोधन.

(एक) धारा २७२ तथा २७३ तथा उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित धाराएं तथा उससे संबंधित धारा २७२ और २७३ कासंशोधन.

प्रविष्टियां स्थापित की जाएं, अर्थात् :-

अपराध

धारा

दण्ड

(२)

(१)

(३) " २७२ विक्रय के लिए आशयित खाद्य या पेय का ऐसा अपमिश्रण जिसमें वह अपायकर बन जाए .

२७३ खाद्य और पेय के रूप में किसी खाद्य या पेय को यह जानते हुए कि वह अपायकर है बेचना.

जमानतीय या अजमानतीय

संज्ञेय या असंज्ञेय

किस न्यायालय द्वारा विचारणीय है (४)

(५)

(६)

सेशन न्यायालय

अजमानतीय

आजीवन कारावास तथा जुर्माने संज्ञेय का भी दायी होगाः परन्तु न्यायालय, निर्णय में उल्लिखित पर्याप्त कारणों से, आजीवन कारावास से कम कारावास का दण्ड अधिरोपित कर सकेगा.

अजमानतीय सेशन न्यायालय .".

आजीवन कारावास तथा जुर्माने संज्ञेय का भी दायी होगा: परन्तु न्यायालय , निर्णय में उल्लिखित पर्याप्त कारणों से, आजीवन कारावास से कम कारावास का दण्ड अधिरोपित कर सकेगा.

धारा २७३ - क का अंतःस्थापन. (दो) धारा २७३ के पश्चात्, निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्: -

धारा

अपराध

(१ )

(२)

" २७३ - क. खाद्य की अवधि की समाप्ति के पश्चात्खाद्य और पेय काविक्रय.

दण्ड

संज्ञेय या असंज्ञेय

जमानतीय या अजमानतीय

(५)

किस न्यायालय द्वारा विचारणीय है (६) (३)

(४)

सेशन न्यायालय.".

अजमानतीय

संज्ञेय

पांच वर्ष के लिए कारावास या एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 9 मार्च 2021

280 (3 ) (तीन) धारा २७४, २७५ तथा २७६ तथा उससे संबंधित प्रविष्टियों के स्थान पर, निम्नलिखित धाराएं तथा उससे संबंधित प्रविष्टियां स्थापित की जाएं, अर्थात् :-

धारा

अपराध

दण्ड (१ )

(३)

(२)

" २७४.

आजीवन कारावास तथा जुर्माने का भी दायी होगाः परन्तु न्यायालय , निर्णय में उल्लिखित पर्याप्त कारणों से , आजीवन कारावास से कम कारावास का दण्ड अधिरोपित कर सकेगा.

विक्रय के लिए आशयित किसी औषधि या भेषजीय निर्मिति का ऐसा अपमिश्रण जिससे उसकी प्रभावकारिता कम हो जाए या उसकी क्रिया बदल जाए या वह अपायकर हो जाए.

२७५. किसी औषधि या भेषजीय निर्मिति को जिसके बारे में ज्ञात है कि वह अपमिश्रित है बेचने की प्रस्थापना करना या औषधालय से देना.

आजीवन कारावास तथा जुर्माने का भी दायी होगाः परन्तु न्यायालय, निर्णय में उल्लिखित पर्याप्त कारणों से , आजीवन कारावास से कम कारावास का दण्ड अधिरोपित कर सकेगा.

२७६. किसी औषधि या भेषजीय निर्मिति को भिन्न औषधि या भेषजीय निर्मिति के रूप में, जानते हुए बेचना या औषधालय से देना.

आजीवन कारावास तथा जुर्माने का भी दायी होगाः परन्तु न्यायालय, निर्णय में पर्याप्त कारण का उल्लेख करते हुए आजीवन कारावास से कम कारावास का दण्ड अधिरोपित कर सकेगा.

संज्ञेय या असंज्ञेय

जमानतीय या अजमानतीय

किस न्यायालय द्वारा विचारणीय है

(५)

(६) (४)

सेशन न्यायालय अजमानतीय

संज्ञेय

अजमानतीय सेशन न्यायालय संज्ञेय

सेशन न्यायालय." अजमानतीय

संज्ञेय

अध्याय-तीन

भारतीय दण्ड संहिता, १८६० का संशोधन.

५. मध्यप्रदेश राज्य को लागू हुए रूप में भारतीय दण्ड संहिता , १८६० ( १८६० का ४५) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) को इसमें इसके पश्चात् उपबंधित रीति में संशोधित किया जाए.

मध्यप्रदेश राज्य को लागू हुए रूप में केन्द्रीय अधिनियम, १८६० का संख्यांक ४५ का संशोधन.

धारा २७२ का संशोधन.

६. मूल अधिनियम २७२ में , शब्द अर्ध विराम तथा पूर्ण विराम, " दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी , या जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से , दण्डित किया जाएगा. ", के स्थान पर , शब्द अर्धविराम, कोलन और पूर्ण विराम , " आजीवन कारावास से दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा:

परन्तु न्यायालय , निर्णय में पर्याप्त कारण का उल्लेख करते हुए आजीवन कारावास से कम कारावास का दण्ड अधिरोपित कर सकेगा . " , स्थापित किए जाएं .

280 (4)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 9 मार्च 2021

धारा २७३ का संशोधन.

७. मूल अधिनियम की धारा २७३ में शब्द, अर्ध विराम तथा पूर्ण विराम, " दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी , या जुर्माने से , जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जाएगा. ", के स्थान पर, शब्द, अर्ध विराम, कोलन तथा पूर्ण विराम, " आजीवन कारावास से दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा :

परन्तु न्यायालय , निर्णय में पर्याप्त कारण का उल्लेख करते हुए आजीवन कारावास से कम कारावास का दण्ड अधिरोपित कर सकेगा. ", स्थापित किए जाएं.

८. मूल अधिनियम की धारा २७३ के पश्चात्, निम्नलिखित धारा अंतःस्थापित की जाए, अर्थात्ः- धारा २७३ -क का अंतःस्थापन.

खाद्य की कालावधि के अवसान के पश्चात्खाद्य या पेय काविक्रय.

२७३ - क. जो कोई यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि खाद्य या पेय की कालावधि का अवसान हो चुका है , किसी खाद्य या पेय का विक्रय करता है या विक्रय की प्रस्थापना करता है या विक्रय के लिए अभिदर्शित करता है , वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी तथा जुर्माने से जो एक लाख रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से , दण्डित किया जाएगा .

धारा २७४ का संशोधन.

९. मूल अधिनियम की धारा २७४ में , शब्द, अर्ध विराम तथा पूर्ण विराम , " दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी , या जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा , या दोनों से दण्डित किया जाएगा. ", के स्थान पर , शब्द, अर्ध विराम , कोलन तथा पूर्ण विराम, " आजीवन कारावास से दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा:

परन्तु न्यायालय , निर्णय में पर्याप्त कारण का उल्लेख करते हुए आजीवन कारावास से कम कारावास का दण्ड अधिरोपित कर सकेगा. " , स्थापित किये जाएं.

धारा २७५ का संशोधन.

१०. मूल अधिनियम की धारा २७५ में शब्द, अर्ध विराम तथा पूर्ण विराम, " दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से , जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जाएगा. ", के स्थान पर, शब्द, अर्ध विराम, कोलन तथा पूर्ण विराम, " आजीवन कारावास से दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगाः

परन्तु न्यायालय , निर्णय में पर्याप्त कारण का उल्लेख करते हुए आजीवन कारावास से कम कारावास का दण्ड अधिरोपित कर सकेगा. " , स्थापित किए जाएं.

धारा २७६ का संशोधन.

११. मूल अधिनियम की धारा २७६ में , शब्द, अर्ध विराम तथा पूर्ण विराम, " दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी , या जुर्माने से , जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जाएगा. ", के स्थान पर, शब्द, अर्ध विराम , कोलन तथा पूर्ण विराम, " आजीवन कारावास से दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगाः

परन्तु न्यायालय , निर्णय में पर्याप्त कारण का उल्लेख करते हुए आजीवन कारावास से कम कारावास का दण्ड अधिरोपित कर सकेगा. ", स्थापित किए जाएं .

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 9 मार्च 2021

280 ( 5)

उद्देश्यों और कारणों का कथन

खाद्य एवं औषधि के संबंध में विभिन्न विधियों के प्रवर्तन में रहने के बाद भी खाद्य और औषधि में अपमिश्रण के खतरों की आशंका सर्वविदित है. पूर्व में खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, १ ९ ५४ ( १ ९ ५४ का ३७ ) लागू किया गया था . इसके द्वारा खाद्य अपमिश्रण के लिए न्यूनतम छह माह का कारावास उपबंधित था किन्तु खाद्य अपमिश्रण में रोक का उद्देश्य प्राप्त नहीं हो सका था . इसके पश्चात् खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम, २००६ ( २००६ का ३४ ) प्रवर्तन में आया. इसके द्वारा खाद्य अपमिश्रण संबंधित प्रकरणों में भारी शास्ति अधिरोपित की जाने लगी , किन्तु यह जानकारी में आया है कि अधिनियम के उपबंध अपमिश्रण के दुष्प्रभाव को रोकने में प्रभावी नहीं रहे. मध्यप्रदेश राज्य में विशेषतः चम्बल और मालवा संभाग में अपमिश्रित दूध और दूध के उत्पाद बड़ी संख्या में निर्मित किये जा रहे हैं. यह खाद्य उत्पाद न केवल अपमिश्रित हैं किन्तु ऐसे रसायन तथा अन्य उत्पादों के प्रयोग द्वारा निर्मित किये जा रहे हैं जो कि मानव जीवन के लिए खतरनाक हैं. व्यापार में अंतर्विष्ट धन आपराधिक तत्वों को इन अपमिश्रित खाद्य उत्पादों और औषधि के निर्माण के लिए प्रोत्साहित कर रहा है .

२. कोविड-१ ९ वैक्सीन के संदर्भ में इन्टरपोल द्वारा यह बताया गया है कि बाजार में नकली वैक्सीन प्रदाय की जा सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कोविड -१ ९ के प्रभाव की निरंतरता का कथन किया है . अतएव यह आवश्यक हो गया है कि राज्य में कोविड -१ ९ की दवाओं और वैक्सीन का अपमिश्रण रोकने के लिए प्रभावी उपाय किए जाएं.

३. खाद्य और सुरक्षा मानक अधिनियम, २००६ में केवल असुरक्षित खाद्य के बारे में कारावास के उपबंध हैं जबकि अपमिश्रण के लिए दण्ड के प्रावधान विद्यमान हैं.

४. भारतीय दण्ड संहिता , १८६० ( १८६० का ४५ ) की धाराओं २७२ से २७६ तथा दण्ड प्रक्रिया संहिता, १ ९ ७३ ( १ ९ ७४ का २ ) की प्रथम अनुसूची में खाद्य तथा दवाओं के अपमिश्रण के अपराध के लिए दाण्डिक उपबंध हैं जो कि बहुत ही कम हैं . अपमिश्रणकर्ताओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के लिए दण्ड प्रक्रिया संहिता, १ ९७३ की धारा २७३ में विशिष्ट कालावधि के कारावास के उपबंध प्रस्तावित किए जा रहे हैं. अपमिश्रणकर्ताओं को समाज में अपमिश्रित खाद्य तथा दवाओं के प्रदाय पर रोक लगाना आवश्यक हो गया है , क्योंकि मध्यप्रदेश में खाद्य और दवाओं के अपमिश्रण निरंतर बढ़ रहे हैं. ओडिशा , उत्तरप्रदेश और पश्चिम बंगाल राज्यों में भारतीय दण्ड संहिता, १८६० के साथ ही दण्ड प्रक्रिया संहिता, १ ९ ७३ में पूर्व से ही संशोधन किए जा चुके हैं. इन राज्यों ने वर्ष १ ९७३ , १ ९ ७५ तथा १ ९९९ में संशोधन कर लिए हैं और उन राज्यों ने अपमिश्रणकर्ताओं के विरुद्ध आजीवन कारावास की भारी शास्ति का उपबंध किया है . अतएव मध्यप्रदेश राज्य में खाद्य और दवाओं का अपमिश्रण रोकने के उद्देश्य से भारतीय दण्ड संहिता, १८६० की धारा २७२ से २७६ में स्थानीय संशोधन के साथ ही धारा २७३ क का अन्तःस्थापन प्रस्तावित है, वैसे ही दण्ड प्रक्रिया संहिता, १ ९७३ की धारा ३५७ ख और उसकी प्रथम अनुसूची में धारा २७२ से २७६ को संशोधित किया जाना तथा धारा २७३ क को अन्तःस्थापित किया जाना प्रस्तावित है. अतएव भारतीय दण्ड संहिता , १८६० और दण्ड प्रक्रिया संहिता, १ ९ ७३ में यथोचित संशोधन प्रस्तावित हैं .

५. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है .

डॉ. नरोत्तम मिश्र भोपाल :

भारसाधक सदस्य.

तारीख २ मार्च , २०२१ .

नियंत्रक, शासकीय मुहण तथा लेखन वामग्री , मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित -2021 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 09 March 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2021-03-09.140.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2021-03-09.140.Extraordinary.