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मध्यप्रदेश
शासन
सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
भोपाल, सोमवार, दिनांक 15 मार्च 2021- फाल्गुन 24, शक 1942
क्रमांक 150 ]
विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश
भोपाल, दिनांक 15 मार्च, 2021
क्र. 5606 - मप्रविस - 15 - विधान-2021 .- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम -64 के उपबंधों के पालन में, मध्यप्रदेश वित्त विधेयक, 2021 ( क्रमांक 19 सन् 2021 ) जो विधान सभा में दिनांक 15 मार्च, 2021 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा .
299 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 15 मार्च 2021
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मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक १ ९ सन् २०२१
मध्यप्रदेश वित्त विधेयक , २०२१
मध्यप्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम , २००५ तथा मध्यप्रदेश आकस्मिकता निधि अधिनियम , १ ९५७ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.
भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान - मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो : - संक्षिप्त नाम और
१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश वित्त अधिनियम , २०२१ है.
प्रारंभ.
२. यह मध्यप्रदेश राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा .
धारा ९ का
संशोधन.
२. मध्यप्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम , २००५ (क्रमांक १८ सन् २००५ ) में धारा ९ में, उपधारा ( २ ) में , खण्ड ( ख ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" ( ख ) यह सुनिश्चित करेगी कि वित्तीय वर्ष २०२१-२२ एवं २०२२-२३ के लिए राजकोषीय घाटा जी.एस.डी.पी. के क्रमशः ४.०० प्रतिशत एवं ३.५० प्रतिशत तथा वित्तीय वर्ष २०२३-२४, २०२४- २५ एवं २०२५-२६ के जी.एस.डी.पी. के ३.०० प्रतिशत से अधिक न रहे . ( विद्युत क्षेत्र में कार्य निष्पादन के आधार पर ) वित्तीय वर्ष २०२१-२२ से २०२४-२५ के लिए राजकोषीय घाटे में उस वर्ष के जी.एस.डी.पी. के ०.५ प्रतिशत तक की वृद्धि की जा सकेगी . " .
धारा ३ का
संशोधन.
३. मध्यप्रदेश आकस्मिकता निधि अधिनियम , १ ९ ५७ ( क्रमांक ७ सन् १ ९५७ ) की धारा ३ में, शब्द " पांच सौ करोड़ रुपए " के स्थान पर , शब्द " एक हजार करोड़ रुपए " स्थापित किए जाएं.
उद्देश्यों और कारणों का कथन
पंद्रहवें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार, राज्य सरकार से अपेक्षित है कि वह यह सुनिश्चित करेगी कि वित्तीय वर्ष २०२१-२२ एवं २०२२-२३ के लिए राजकोषीय घाटा जी.एस.डी.पी. के क्रमशः ४.०० प्रतिशत एवं ३.५० प्रतिशत तथा वित्तीय वर्ष २०२३-२४ से २०२५-२६ के जी.एस.डी.पी. के ३.०० प्रतिशत से अधिक न रहे . विद्युत क्षेत्र में कार्य निष्पादन मानदंड के आधार पर वित्तीय वर्ष २०२१-२२ से २०२४-२५ की कालावधि के लिए राजकोषीय घाटे में जी.एस.डी.पी. के ०.५ प्रतिशत तक वृद्धि की जा सकेगी.
२. उपरोक्त अनुशंसाओं की दृष्टि से, मध्यप्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम , २००५ ( क्रमांक १८ सन् २००५ ) की धारा ९ की उपधारा ( २ ) के खण्ड ( ख ) में यथोचित संशोधन किया जाना प्रस्तावित है.
३. मध्यप्रदेश आकस्मिकता निधि अधिनियम, १ ९ ५७ ( क्र. ७ सन् १ ९ ५७ ) , मध्यप्रदेश आकस्मिकता निधि को प्रारंभ में दो करोड़ रुपए के अग्रदाय के साथ स्थापित करने का उपबंध करता है . चूंकि राज्य की बढ़ती हुई आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए यह रकम अपर्याप्त पाई गई , अतएव समग्र निधि में समय- समय पर वृद्धि की गई और वर्तमान में यह पांच सौ करोड़ रुपए है. बाद में यह राशि भी आकस्मिकताओं से संबंधित अनवेक्षित व्ययों की पूर्ति करने के लिए अपर्याप्त पाई गई. योजना व्यय एवं अन्य व्यय में वृद्धि की दृष्टि से यह समीचीन है कि समग्र आकस्मिकता निधि में वृद्धि की जाए.
४. अतएव , मध्यप्रदेश आकस्मिकता निधि अधिनियम , १ ९५७ की धारा ३ को संशोधित कर आकस्मिकता निधि को एक हजार करोड़ रुपए तक बढ़ाया जाना प्रस्तावित है .
५. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.
जगदीश देवड़ा भोपाल :
भारसाधक सदस्य, तारीख १ मार्च, २०२१
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री , मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2021 .