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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक 2021.....

Published 15 March 2021

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
151
Identifier
in.gazette.madhya.2021-03-15.151.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

मध्यप्रदे श शासन

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सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

भोपाल, सोमवार, दिनांक 15 मार्च 2021- फाल्गुन 24, शक 1942

क्रमांक 151 ]

विधान सभा सचिवालय , मध्यप्रदेश

भोपाल, दिनांक 15 मार्च, 2021

क्र. 5609 - मप्रविस - 15- विधान- 2021.- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम 64 के उपबंधों के पालन में , मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी ( संशोधन ) विधेयक, 2021 ( क्रमांक 21 सन् 2021 ) जो विधान सभा में दिनांक 15 मार्च, 2021 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक २१ सन् २०२१

मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी ( संशोधन ) विधेयक , २०२१

विषय-सूची.

खण्ड:

१. संक्षिप्त नाम तथा प्रारंभ.

२. धारा ४८ -क का संशोधन,

३. धारा ४९ का संशोधन.

४. धारा ५२ का संशोधन.

५ . धारा ५३ का संशोधन.

६. निरसन तथा व्यावृत्ति.

301 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 मार्च 2021

302

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक २१ सन् २०२१

मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी ( संशोधन ) विधेयक , २०२१ मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम , १ ९ ६० को और संशोधित करने हेतु विधेयक.

भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान-मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:-

१. (१ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी ( संशोधन ) अधिनियम, २०२१ है.

संक्षिप्त नाम तथा

प्रारंभ.

(२ ) यह मध्यप्रदेश राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा.

धारा ४८ क का संशोधन.

२. मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम , १ ९ ६० ( क्रमांक १७ सन् १ ९ ६१ ) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) की धारा ४८ क में, उपधारा ( ४ ) में, -

( एक ) खण्ड ( क ) में, शब्द " संसद या विधान सभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित हो जाता है या का लोप किया जाए.

खण्ड ( ख ) का लोप किया जाए.

(दो)

धारा ४ ९ का संशोधन.

३. मूल अधिनियम की धारा ४९ में, उपधारा ( ७ - क ) में, खण्ड ( ख ) में, प्रथम परंतुक में, पूर्ण विराम के स्थान पर , कॉलन स्थापित किया जाए और उसके पश्चात्, निम्नलिखित परन्तुक अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्:-

" परन्तु यह और कि किसी शीर्ष अथवा केन्द्रीय सोसाइटी की दशा में , यदि रजिस्ट्रार की राय में, प्रशासक को उसके पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में सहायता करने के लिए समिति गठित की जाना आवश्यक है , तो रजिस्ट्रार, निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनने वाली एक समिति नियुक्त कर सकेगा, अर्थात्:-

(क) उक्त सोसाइटी के अधिकतम तीन सदस्य जो सोसाइटी के संचालक मंडल के सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के लिए अर्ह हों;

(ख ) रजिस्ट्रार का एक प्रतिनिधि;

(ग ) वित्तपोषक संस्थाओं का एक प्रतिनिधि.".

धारा ५२ का संशोधन.

४. मूल अधिनियम की धारा ५२ में, उपधारा ( ५ ) में, खण्ड ( क ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात् :-

" ( क ) सहकारी साख संरचना में राज्य सरकार की अंश पूंजी के लिये अधिकतम सीमा ऐसी होगी जैसी कि राज्य सरकार द्वारा समय - समय पर अधिसूचित की जाए; ".

302( 1)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 15 मार्च 2021

धारा ५३ संशोधन.

५. मूल अधिनियम की धारा ५३ में,

(एक) उपधारा ( १ ) में, प्रथम परन्तुक के पश्चात्, निम्नलिखित परन्तुक अन्तःस्थापित किया जाए, अर्थात्:-

" परन्तु यह और कि किसी शीर्ष अथवा केन्द्रीय सोसाइटी की दशा में, यदि रजिस्ट्रार की राय में, प्रशासक को उसके पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में सहायता करने के लिए समिति गठित की जाना आवश्यक है , तो रजिस्ट्रार, निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनने वाली एक समिति नियुक्त कर सकेगा, अर्थात् :-

(क) उक्त सोसाइटी के अधिकतम तीन सदस्य जो सोसाइटी के संचालक मंडल के सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के लिए अर्ह हों;

(ख ) रजिस्ट्रार का एक प्रतिनिधि;

(ग ) वित्तपोषक संस्थाओं का एक प्रतिनिधि.".

(दो) उपधारा ( १२ ) में, प्रथम परन्तुक में, पूर्ण विराम के स्थान पर, कॉलन स्थापित किया जाए और उसके पश्चात् निम्नलिखित परन्तुक अन्तःस्थापित किया जाए, अर्थात्: -

" परन्तु यह और कि किसी शीर्ष अथवा केन्द्रीय सोसाइटी की दशा में , यदि रजिस्ट्रार की राय में, प्रशासक को उसके पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में सहायता करने के लिए समिति गठित की जाना आवश्यक है, तो रजिस्ट्रार, निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनने वाली एक समिति नियुक्त कर सकेगा , अर्थात्:

(क) उक्त सोसाइटी के अधिकतम तीन सदस्य जो सोसाइटी के संचालक मंडल के सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के लिए अर्ह हों;

(ख ) रजिस्ट्रार का एक प्रतिनिधि;

(ग ) वित्तपोषक संस्थाओं का एक प्रतिनिधि. ".

निरसन व्यावृत्ति. तथा ६. ( १ ) मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी ( संशोधन ) अध्यादेश , २०२१ ( क्रमांक १२ सन् २०२१ ) एतद्वारा निरसित किया जाता है .

( २ ) उक्त अध्यादेश के निरसित होते हुए भी उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात , या की गई कोई कार्रवाई

इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई बात या की गई कार्रवाई समझी जाएगी.

उद्देश्यों के कारणों का कथन

राज्य में सहकारी संचालन को सशक्त और विकसित किए जाने हेतु, राज्य की सहकारी सोसाइटियों द्वारा समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा किसानों को वित्तीय सहयोग तथा सहायता का विस्तार करने तथा राज्य की वित्तीय स्थिति में वांछित सुधार लाने की दृष्टि से सहकारी सोसाइटियों के क्षेत्र में लोकतांत्रिक नेतृत्व हेतु प्रतिनिधित्व के व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जाना प्रस्तावित हैं . यह और प्रस्तावित है कि रजिस्ट्रार को, प्रशासक को उसके कर्तव्यों के निर्वहन में सहायता करने के लिए एक समिति नियुक्त करने के लिए प्राधिकृत किया जाए.

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 15 मार्च 2021

302(2)

२. सहकारी साख संरचना की वित्तीय स्थिति को सशक्त करने तथा उसके अन्य उद्देश्यों को पूर्ण करने हेतु, यह प्रस्तावित है कि राज्य सरकार सहकारी साख संरचना में राज्य की अंश पूंजी की सीमा, अधिकतम सीमा को हटाकर जो कि वर्तमान में केवल २५% तक है , नियत कर सकेगी. अतएव, मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम, १ ९ ६० ( क्रमांक १७ सन् १ ९ ६१ ) को संशोधित किया जाना प्रस्तावित है.

३. चूंकि मामला अत्यावश्यक था तथा विधानसभा का सत्र चालू नहीं था , अतएव, मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी ( संशोधन ) अध्यादेश , २०२१ ( क्रमांक १२ सन् २०२१ ) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किया गया था. अब उक्त अध्यादेश के स्थान परं, राज्य विधान- मण्डल का अधिनियम बिना किसी उपांतरण के लाया जाना प्रस्तावित है .

४. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है .

भोपाल :

डॉ. अरविन्द सिंह भदौरिया भारसाधक सदस्य.

तारीख २ मार्च , २०२१

प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन

प्रस्तावित विधेयक के खण्ड ४ द्वारा सहकारी साख संरचना में राज्य सरकार की अंशपूंजी के लिये अधिकतम सीमा अधिसूचित किए जाने के संबंध में विधायनी शक्ति का प्रत्यायोजन राज्य सरकार को किया जा रहा है , जो सामान्य स्वरुप का होगा.

अध्यादेश के संबंध में विवरण

प्रदेश में सहकारी सोसाइटियों के क्षेत्र में लोकतांत्रिक नेतृत्व हेतु प्रतिनिधित्व के व्यापक अवसर उपलब्ध कराये जाने के प्रावधान के साथ रजिस्ट्रार को किसी शीर्ष अथवा केन्द्रीय सोसाइटी में नियुक्त प्रशासक को उसके पदीय कर्तव्यों के निवर्हन में सहायता देने हेतु एक समिति नियुक्त करने के लिये प्राधिकृत किये जाने और सहकारी साख संरचना में राज्य शासन द्वारा दी जाने वाली अंशपूंजी की अधिकतम सीमा राज्य शासन द्वारा नियत करने संबंधी प्रावधान सहकारी अधिनियम में किये जाना आवश्यक हो गए थे .

२. अतः तात्कालिक आवश्यकता को देखते हुये तथा विधान सभा का सत्र चालू नहीं होने के कारण मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी ( संशोधन ) अध्यादेश , २०२१ ( क्रमांक १२ सन् २०२१ ) उक्त उद्देश्यों को पूरा करने हेतु प्रख्यापित किया गया था.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2021 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 15 March 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2021-03-15.151.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2021-03-15.151.Extraordinary.