प्रशासक
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सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
चैत्र 22 , शक 1943
भोपाल , सोमवार, दिनांक 12 अप्रैल 2021 -
क्रमांक 213]
श्रम विभाग
मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल
भोपाल, दिनांक 8 अप्रैल 2021
एफ: 01/05/2020/ए-16 , निम्नलिखित प्रारूप नियम , जिसे राज्य सरकार औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (2020 का 35) की धारा 99 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा राज्य सरकार द्वारा निर्मित-
(एक) मध्यप्रदेश औद्योगिक विवाद नियम , 1957 ; और
(दो) मध्यप्रदेश व्यवसाय संघ विनियम , 1961 ; और
(तीन) मध्यप्रदेश औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) नियम, 1963
के अधिक्रमण में तथा औद्योगिक संबंध संहिता की धारा 104 द्वारा निरसित होने वाले औद्योगिक विवाद अधिनियम , 1947 ( 1947 का 14) , व्यवसाय संघ अधिनियम , 1926 ( 1926 का 16) तथा राज्य शासन द्वारा निरसित होने वाले यथास्थिति मध्यप्रदेश औद्योगिक नियोजन ( स्थायी आदेश ) अधिनियम, 1961 (1961 का 26) , ऐसे अधिक्रमण से पूर्व किए जाने वाले कार्यों को अथवा किए जाने को छोड़कर , निम्न प्रारूप नियमों को एतद्वारा अधिसूचित करती है, जो उक्त धारा 99 की उप- धारा (1 ) द्वारा इससे प्रभावित होने की संभावना वाले सभी व्यक्तियों को एतद्वारा सूचना दी जाती है कि उक्त प्रारूप अधिसूचना पर , मध्यप्रदेश राजपत्र जिसमें इस अधिसूचना को प्रकाशित किया गया हो, कीतिथि से तीस दिनों की अवधि की समाप्ति के पश्चात , विचार किया जाएगा।
आपत्तियां और सुझाव , यदि कोई हों, उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन, श्रम विभाग , मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल को या ई -मेल [email protected] पर प्रेषित किया जा सकताहै।
उपर्युक्त अवधि की समाप्ति से पहले उक्त प्रारूप अधिसूचना के संबंध में किसी भी व्यक्ति या संगठन से प्राप्त होने वाली आपत्तियों और सुझावों पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा विचार किया जाएगा,:-
425 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426
प्रारूप नियम
अध्याय- ।
प्रारंभिक
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार-
(एक) इन नियमों को संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश औद्योगिक संबंध नियम, 2020 है ।
(दो) इसका विस्तार संपूर्ण मध्यप्रदेश राज्य में होगा, जिनकी औद्योगिक स्थापनाओं और मामलों के संबंध में समुचित सरकार राज्य सरकार होगी ।
1 क. परिभाषा-
(1 ) इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -
(क) " संहिता" से अभिप्रेत है औद्योगिक संबंध संहिता, 2020;
(ख) . "धारा " से अभिप्रेत है संहिता की धारा;
( ग) " इलेक्ट्रॉनिक रूप से " से अभिप्रेत है संहिता के निहितार्थ कोई सूचना जिसे ई - मेल द्वारा प्रस्तुत किया गया हो अथवा जिसे विनिर्दिष्ट पोर्टल पर अपलोड किया गया हो अथवा किसी भी रूप में डिजिटल भुगतान किया गया हो।
(2) इन नियमों में प्रयुक्त शब्द और अभिव्यक्तियां जो कि परिभाषित नहीं हैं, लेकिन संहिता में परिभाषित हैं, उनका वही अर्थ होगा जो संहिता में दिया गया है ।
2. धारा 2 के खंड (यझ ) के तहत सुलहकर्ता अधिकारी के समक्ष समझौते के लिए लिखित करार- नियोक्ता और कामगार के बीच लिखित समझौते के लिए धारा 2 के खंड ( यझ) के तहत करार प्ररूप । में निर्दिष्ट प्ररूप में होगा और इस करार में पक्षकारों द्वारा हस्ताक्षर किया जाएगा और इसकी एक प्रति संबंधित समझौता अधिकारी को भेजी जाएगी ।
अध्याय - दो
द्विपक्षीय मंच
3. कार्य समिति का गठनः-
(1 ) प्रत्येक नियोक्ता, जिसे धारा 3 की उप- धारा (1 ) के संबंध में श्रम आयुक्त द्वारा आदेश दिया गया है, वह इन नियमों में यथा विनिर्दिष्ट रीति में कार्य समिति का गठन करने के लिए कार्रवाई करेगा ।
(2) समिति का गठन करने वाले सदस्यों की संख्या इस तरह तय की जाएगी ताकि विभिन्न श्रेणियों, समूहों और कामगारों के वर्ग और श्रेणी, दुकानों या विभागों के प्रतिनिधियों को प्रतिनिधित्व दिया जा सकेः परन्तु कार्य समिति के सदस्यों की कुल संख्या बीस से अधिक नहीं होगीः
परन्तु यह कि कार्य समिति में कामगार के प्रतिनिधियों की संख्या नियोक्ता के प्रतिनिधियों की संख्या से कम नहीं होगी ।
(3) इस नियम के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, कार्य समिति में नियोक्ता के प्रतिनिधियों को नियोक्ता द्वारा जहां तक संभव हो सके, औद्योगिक स्थापना के जिन अधिकारियों के साथ कर्मचारीगण साथ काम कर रहे हों अथवा काम काज के दौरान सीधे संपर्क में हों, नामित किया जाएगा।
(4) (क) जहाँ औद्योगिक स्थापना का कोई भी कामगार पंजीकृत व्यवसाय संघ का सदस्य है, तो नियोक्ता ऐसे व्यवसाय संघ से उसे लिखित रूप में सूचित करने के लिए कहेगा कि कितने कर्मचारी ऐसे व्यवसाय संघ के सदस्य हैं; तथा मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(1) (ख) जहां किसी नियोक्ता के पास यह विश्वास करने का कारण है कि पंजीकृत व्यवसाय संघ द्वारा खंड (क) के तहत उसे दी गई जानकारी गलत है, तो वह उस व्यवसाय संघ को सूचित करने के बाद इस मामले को श्रम आयुक्त अथवा उसके द्वारा नामांकित किसी अधिकारी को, जो श्रम अधिकारी के पद से न्यून न हो, को संदर्भित कर सकता है, जो पक्षों को सुनने के बाद मामले को तय करेगा और उसका निर्णय अंतिम होगा।
(5) उप -नियम (4) के तहत मांगी गयी सूचना प्राप्त होने पर, नियोक्ता निम्न्न दो समूहों में समिति में कामगारों के प्रतिनिधि के चयन के लिए इसे उपलब्ध कराएगा , अर्थात्ः -
(क) पंजीकृत व्यवसाय संघ अपनी सदस्यता के अनुपात में कार्य समिति के सदस्यों के रूप में अपने प्रतिनिधि चुन सकते हैं।
(ख) जहां कोई पंजीकृत व्यवसाय संघ नहीं है, कामगार कार्य समिति के लिए कामगारो मे से प्रतिनिधि चुन सकते हैं।
(
(6) क) कार्य समिति में अपने पदाधिकारियों में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष, एक सचिव और एक संयुक्त सचिव होंगे । सचिव और संयुक्त सचिव का चुनाव हर साल किया जाएगा ।
( ख) अध्यक्ष को नियोक्ता द्वारा कार्य समिति में नियोक्ता के प्रतिनिधियों में से नामित किया जाएगा और वह जहां तक संभव हो , औद्योगिक स्थापना मे औद्योगिक सम्बंध का प्रमुख होगा । (ग) सदस्यों द्वारा कामगारों का प्रतिनिधित्व करने वाली कार्य समिति में उपाध्यक्ष को उनके बीच से ही चुना जाएगाः
परन्तु उपाध्यक्ष के चुनाव में वोटों की समानता की स्थिति में , इस मामले का फैसला ड्रॉ निकाल कर किया जाएगाः
(घ) कार्य समिति सचिव और संयुक्त सचिव का चुनाव करेगीः
परन्तु जहां सचिव को नियोक्ताओं के प्रतिनिधियों में से चुना जाता है, संयुक्त सचिव को कामगारों के प्रतिनिधियों और विलोमतः चुना जाएगाः
परन्तु यह कि यथास्थिति, सचिव या संयुक्त सचिव के पद पर, नियोक्ता या कामगार के प्रतिनिधि लगातार दो वर्षों तक नहीं बने रहेंगे:
परन्तु यह भी कि नियोक्ता के प्रतिनिधि कामगार के प्रतिनिधियों के बीच से यथास्थिति, सचिव या संयुक्त सचिव के चुनाव में, भाग नहीं लेंगे, और केवल कामगार के प्रतिनिधि ऐसे चुनावों में वोट देने के हकदार होंगे ।
(ङ) खंड (घ) के तहत किसी भी चुनाव में, वोटों की समानता की स्थिति में, यह मामला ड्रा निकाल कर तय किया जाएगा।
(7) (क) आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए चुने गए सदस्य के अलावा कार्य समिति में प्रतिनिधियों का कार्यकाल दो वर्ष का होगा;
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(2)
(ख ) एक आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए चुना गया सदस्य अपने पूर्ववर्ती के अपूर्ण कार्यकाल हे पद धारण करेगा;
(ग) एक सदस्य, जो कार्य समिति से अवकाश प्राप्त किए बिना , समिति की तीन लगातार बैठकों मे भाग लेने में विफल रहता है, उसकी सदस्यता समाप्त हो जाएगी ।
(8 ) कामगार के प्रतिनिधि को उप -नियम (7 ) के खंड (ग) के तहत सदस्यता समाप्त होने या उसके स्थापना मे नियोजन समाप्त होने या इस्तीफे, मृत्यु या अन्यथा किसी स्थिति में, इस नियम के प्रावधानों के अनुसार ही उसके उत्तराधिकारी को उसी समूह में से चुना जायेगा जिससे पद खाली करने वाला सदस्य संबंधित होता है ।
(9) कार्य समिति को परामर्शदात्री क्षमता में ऐसे व्यक्तियों का सहयोजन का अधिकार होगा, जो औद्योगिक स्थापना में कार्यरत हैं तथा चर्चा मे आये किसी मामले की विशेष जानकारी या विशिष्ट ज्ञान रखते हैं । इस तरह के सह-योजित सदस्य वोट करने के हकदार नहीं होंगे और केवल उस अवधि के लिए बैठकों में उपस्थित होंगे, जिसके दौरान कार्य समिति के समक्ष विशिष्ट प्रश्न विचाराधीन हों।
(10) (क) कार्य समिति जितनी बार आवश्यक हो, बैठक बुला सकती है ।
(ख) कार्य समिति अपनी पहली बैठक में अपनी प्रक्रिया को विनियमित करेगी।
(ग ) कार्य समिति की बैठक अध्यक्ष को दी गई सूचना के तीन दिवस के भीतर उक्त बैठक के कारणों को वर्णित करते हुए बुलाई जायेगी, यदि कार्य समिति के प्रतिनिधियों में से कम से कम आधे सदस्यों द्वारा उस सूचना पर हस्ताक्षर किये हों।
( 11 ) ( क) नियोक्ता , कार्य समिति की बैठक आयोजित करने के लिए स्थान प्रदान करेगा। वह कार्य समिति और उसके सदस्यों को कार्य समिति के कार्यों को पूरा करने के लिए सभी आवश्यक सुविधाएँ भी उपलब्ध कराएगा । कार्य समिति सामान्यतःकिसी भी कार्य दिवस पर संबंधित औद्योगिक स्थापना के कार्य के समय में बैठक करेगी और बैठक में भाग लेने के दौरान कामगार के प्रतिनिधि को कर्तव्य पर माना जाएगा;
(ख) कार्य समिति के सचिव , अध्यक्ष की पूर्व सहमति के साथ औद्योगिक स्थापना के सूचना पटल पर कार्य समिति के कार्य और बैठक के बारे में सूचना प्रदर्शित कर सकते हैं ।
4. धारा 4 की उप- धारा (2) के तहत शिकायत निवारण समिति के लिए नियोक्ताओं और कामगारों से सदस्यों को चुनने की प्रक्रियाः शिकायत निवारण समिति में नियोक्ता और कामगारों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों की समान संख्या होगी, जो दस से अधिक नहीं होगी।
(2) नियोक्ता के प्रतिनिधियों को नियोक्ता द्वारा नामित किया जाएगा और जहां तक संभव हो, वे औद्योगिक स्थापना के कार्यकलाप के साथ प्रत्यक्ष रूप से जुड़े या उनसे संबंधित अधिकारी या अधिमानतः औद्योगिक स्थापना के विभागों के प्रमुख होंगे ।
(3) श्रमिकों के प्रतिनिधियों को पंजीकृत व्यवसाय संघ द्वारा चुना जाएगा और जहां एक वार्ता परिषद मौजूद है, ऐसे प्रतिनिधियों को उसी अनुपात में चुना जाएगा जैसा कि ट्रेड यूनियनों को क्रमशः वार्ता परिषद में प्रतिनिधित्व प्राप्त हैं। ऐसे मामले में जहां कोई मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(3) पंजीकृत व्यवसाय संघ या वार्ता परिषद नहीं है, सदस्य को औद्योगिक स्थापना के श्रमिकों द्वारा चुना जा सकता हैः
परन्तु शिकायत निवारण समिति में महिला कामगारों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व होगा और इस तरह का प्रतिनिधित्व औद्योगिक स्थापना में कार्यरत कुल कामगारों में से महिला कामगारों के अनुपात से कम नहीं होगाः
परन्तु यह शिकायत निवारण समिति के सदस्यों की कार्यावधि पंजीकृत ट्रेड यूनियन के सदस्यों की कार्यावधि के साथ समकालिक होगीः
परन्तु यह और कि पंजीकृत ट्रेड यूनियन के न होने पर शिकायत निवारण समिति के सदस्यों की कार्यावधि शिकायत निवारण समिति के गठन की तिथि से दो वर्षों की अवधि के लिए होगी।
(4) जहां औद्योगिक स्थापना का कोई भी कामगार पंजीकृत व्यवसाय संघ का सदस्य है, नियोक्ता ऐसे व्यवसाय संघ को लिखित रूप में उसे सूचित करने के लिए कहेगा -
(क) कितने कामगार ऐसे व्यवसाय संघ के सदस्य हैं;
(ख) जहां किसी नियोक्ता के पास यह विश्वास करने का कारण है कि पंजीकृत व्यवसाय संघ द्वारा खंड (क ) के तहत उसे दी गई जानकारी गलत है, तो वह उस व्यवसाय संघ को सूचित करने के बाद इस मामले को श्रम आयुक्त अथवा उसके द्वारा लिखित मे नामांकित किसी अधिकारी को, जो श्रम अधिकारी के पद से न्यून न हो, को संदर्भित कर सकता है, जो पक्षों को सुनने के बाद मामले को तय करेगा और उसका निर्णय अंतिम होगा।
(5) उपनियम (4 ) के अधीन चाही मई जानकारी प्राप्त होने पर नियोजक दो समूहों में समिति में कर्मकारों के प्रतिनिधियों के चयन के लिए उपबंध करेगा , अर्थात्: -
(क) रजिस्ट्रीकृत व्यवसायी संघ अपने प्रतिनिधियों को सदस्यता के अनुपात में शिकायत निवारण समिति के सदस्य के रूप में चुन सकेगा।
(ख) ऐसे कर्मकारों में से जो रजिस्ट्रीकृत व्यवसायी संघ के सदस्य नहीं है , अपने में से शिकायत निवारण समिति के प्रतिनिधियों के रूप में चुन सकेंगे ।
5. धारा 4 की उप- धारा (5) के अधीन किसी भी पीड़ित कर्मचारी द्वारा शिकायत निवारण समिति के समक्ष दायर किए जाने वाले किसी भी विवाद के संबंध में आवेदन कोई भी पीड़ित कामगार शिकायत निवारण समिति के समक्ष अपना विवाद का विवरण बताते हुए आवेदन दाखिल कर सकता है जिसमें उसका नाम, पदनाम , कर्मचारी कोड, विभाग , जहां उसे नियुक्त किया गया है, वर्षों में सेवा की अवधि, कामगार की श्रेणी, पत्राचार के लिए पता, संपर्क का नम्बर , शिकायतों का विवरण और मांगी गई राहत का विवरण दिया जायेगा । इस तरह के आवेदन को इलेक्ट्रॉनिक रूप से या स्पीड पोस्ट से या पंजीकृत डाक से भेजा जा सकता है। शिकायत ऐसे विवाद के उत्पन्न होने के कारण उद्भूत होने की तिथि से एक वर्ष के भीतर की जा सकती है।
6. धारा 4 की उप- धारा (8 ) के अंतर्गत सुलहकर्ता अधिकारी के पास शिकायत निवारण समिति के शिकायत निवारण संबंधी निर्णय के विरुद्ध आवेदन दाखिल करने का स्वरूप कोई भी कामगार जो शिकायत निवारण समिति के निर्णय से पीड़ित है या जिसकी शिकायत का निवारण आवेदन मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(4)
प्राप्त होने के तीस दिनों के भीतर उक्त समिति द्वारा नहीं किया जाता है , वह शिकायत निवारण समिति के निर्णय की तारीख से यथास्थिति साठ दिनों की अवधि के भीतर अथवा उस तारीख से जिस पर धारा 4 की उप- धारा (6) में निर्दिष्ट अवधि समाप्त हो जाती है, व्यवसाय संघ के माध्यम से, जिसमें वह सदस्य है या अन्यथा, सुलहकर्ता अधिकारी को समाधान हेतु एक आवेदन इलेक्ट्रॉनिक रूप से या स्पीड पोस्ट से या पंजीकृत डाक से दाखिल कर सकता है:
परन्तु आवेदन के रजिस्टर्ड डाक से या स्पीड पोस्ट से प्राप्त होने पर, सुलहकर्ता अधिकारी उसे डिजिटलीकृत करेगा तथा उसके विवरण को संबंधित कामगार को सूचित करते हुए ऑन लाइन प्रणाली से दर्ज करेगा ।
अध्यायतीन
व्यवसाय संघ
7. धारा 7 की उपधारा (च) एवं धारा 15 की उपधारा (4) के अधीन व्यवसाय संघों को सदस्यों द्वारा शुल्क का भुगतान:-
(1 ). पंजीकृत व्यवसायिक संघ उनके सदस्य , पदाधिकारी एवं अन्य से पंजीयक द्वारा
अनुमोदित नियमों के अंतर्गत मासिक, त्रैमासिक, छः माही, और वार्षिक रूप से उप नियम (2) में विहित की गई राशि को शुल्क के रूप में ले सकेंगे ।
(2) व्यवसाय संघ के सदस्यों द्वारा न्यूनतम शुल्क का भुगतान पंजीयक द्वारा व्यवसाय संघ के अनुमोदित नियमों के अनुसार होगा लेकिन इनसे कम नहीं होगा-
(क) ग्रामीण कर्मकारों के लिए बीस रूपये वार्षिक।
(ख) असंगठित क्षेत्र के कर्मकारों के लिए तीस रूपये वार्षिक; और
(ग) अन्यके लिए पचास रूपये वार्षिक ।
या राज्य शासन द्वारा समय - समय पर यथा निर्धारित किये अनुसार ।
8. व्यवसाय संघ का धारा 7 की उपधारा ( ञ) के अंतर्गत वार्षिक अंकेक्षणः-
(1) इस विनियम के उप - विनियम (2) , (3 ) , (4) और (5) के अंतर्गत, जैसा विनिर्दिष्ट है, किसी पंजीकृत व्यवसाय संघ के वार्षिक अंकेक्षण , भारतीय कंपनीज एक्ट, 1956 ( 1956 का 1 ) की धारा 226 की उप धारा ( 1 ) में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता रखने वाले अंकेक्षक से करवाना होगा।
(2) जहां पर पंजीकृत व्यवसाय संघ की सदस्यता 31 दिसम्बर को समाप्त होने वाले वर्ष की अवधि में , किसी भी समय , 2000 से अधिक नहीं है, लेखा का वर्षिक अंकेक्षण निम्न द्वारा किया जाना होगा-
(क) लोक लेखा के परीक्षण हेतु राज्य सरकार द्वारा अधिकृत किसी अंकेक्षक के द्वारा ; या
( ख ) किसी व्यक्ति के द्वारा , जो राज्य सरकार के अधीन अंकेक्षण या लेखा विभाग में नियुक्त रहा हो और जो 5000 रू. प्रतिमाह से कम पेंशन राशि का अर्जन नहीं करता हो;
(ग) किसी चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट के द्वारा;
(3) जहां पर पंजीकृत व्यवसाय संघ की सदस्यता 31 दिसम्बर को समाप्त होने वाले वर्ष की अवधि में, किसी भी समय , 1000 से अधिक नहीं हो, लेखा वार्षिक अंकेक्षण निम्म्र द्वारा किया जाना होगा- 426(5)
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(क) किसी दो व्यक्तियों के द्वारा जो कोई निगम , नगर पालिका , स्थानीय जिला पंचायत जनपद पंचायत के सदस्य हों , या
(ख) किसी व्यक्ति के द्वारा जो शासन के अंकेक्षण एवं लेखा विभाग में राज्य के द्वारा नियुक्त रहा हो और पेंशन के रूप में 5000 रूपये प्रतिमाह से कम प्राप्त नहीं कर रहा हो,
(ग) किसी सहकारिता संस्थान के लेखे के अंकेक्षण हेतु शासन द्वारा या सहकारिता संस्थानों के रजिस्ट्रार द्वारा या शासन द्वारा मान्यता प्राप्त सहकारिता संगठन के द्वारा इस प्रयोजन हेतु नियुक्त कोई अंकेक्षक;
(4) जहां पर पंजीकृत व्यवसाय संघ की सदस्यता 31 दिसम्बर को समाप्त होने वाले वर्ष की किसी अवधि में 250 से अधिक न हो, लेखों का वार्षिक अंकेक्षण, ऐसे पंजीकृत व्यवसाय संघ के किन्हीं दो सदस्यों के द्वारा, जो कि कार्यकारिणी के सदस्य उस लेखा वर्ष में न हो, जिसका अंकेक्षण किया जाना हो ।
(5) जहां पर पंजीकृत व्यवसाय संघ, व्यवसाय संघों का फेडरेशन हो, और ऐसे सदस्य संघों की संख्या, 31 दिसम्बर को समाप्त होने वाले वर्ष की किसी अवधि में क्रमशः 50, 15 या 5 की संख्या से अधिक ना हो, तो फेडरेशन के लेखों का अंकेक्षण यह मानकर किया जायेगा जैसे कि उसकी सदस्यता 31 दिसम्बर को समाप्त होने वाले वर्ष मे किसी समय क्रमशः 2000 से अधिक अथवा 2,000 , 1,000 या 250 से अधिक नहीं थी।
(6) अंकेक्षण की अयोग्यता: इन विनियमों में किसी ऐसी बात के ना होते हुए, कोई व्यक्ति , जो वर्ष के किसी भी समय , जिसके लिये लेखों का अंकेक्षण किया जाना है , पंजीक्रत व्यवसायिक संघ की निधि या प्रतिभूति के किसी भी भाग का न्यस्त किया गया हो, वह उस संघ के लेखे का अंकेक्षण करने योग्य नही होगा।
(7) लेखा पुस्तकों तक पहुंच: अंकेक्षक या अंकेक्षकों जो कि इस विनियम अनुसार नियुक्त किए गये हो, संबंधित पंजीकृत व्यवसाय संघ के लेखा पुस्तकों को देख सकता है और सामान्य विवरण को सम्बन्धित लेखा एवं वाउचर के अनुरूप सत्यापित करेंगे और उसके पश्चात् संलग्न घोषणा पत्र जो प्ररूप दो में होगा, अपने हस्ताक्षर के साथ अलग से उपदर्शित करेंगे या उनके हस्ताक्षर के साथ विवरण प्रस्तुत करेंगे कि किस आधार पर उन के द्वारा उसे गलत पाया गया है कि क्या वे वाउचर से नहीं मिलते या अधिनियम के अनुसार नहीं है। विवरण में दी गयी जानकारियो मे यह दर्शित होना चाहिए कि -
(अ) कोई भी भुगतान जो सम्बन्धित व्यवसाय संघ के विनियमों के अंतर्गत अनाधिकृत दृष्टिगत या अधिनियम के प्रावधानों के विरूद्ध हो ,
(ब) राशि मे कोई कमी या नुकसानी, जिससे कि यह दृष्टिगत हो कि वह किसी व्यक्ति के लापरवाही या दुराचार के कारण हुई है;
(स) किसी राशि की तादाद जो होना चाहिए था, किन्तु किसी व्यक्ति के द्वारा उसे लेखे में नहीं लाया गया हो। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(6)
9. धारा 7 की उपधारा (ट) एवं (ठ) के अंतर्गत नियमों को संशोधित और व्यवसाय संघ को विघटित किये जाने की रीति:-
(1) जब एक पंजीकृत व्यवसाय संघ को विघटित किया जाता है तो विघटन की सूचना और किसी अन्य संशोधन की सूचना प्ररूप तीन में रजिस्ट्रार को प्रेषित की जायेगी।
( 2) उपनियम (1 ) के अंतर्गत किसी व्यवसाय संघ के नियमों में किसी संशोधन या बदलाव की सूचना धारा 7 की उपधारा (ट) में प्राप्त होती है तो रजिस्ट्रार , जब तक कि उसे यह विश्वास होने का कारण न हो कि यह व्यवसाय संघ के नियमों में प्रावधानित रीतियों के अनुरूप नहीं है या कि वे संशोधन या बदलाव संहिता के प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं, नियमों में संशोधन या बदलाव को इस उद्देश्य हेतु संधारित पंजी में पंजीकृत करेगा एवं इस तथ्य से व्यवसाय संघ के सचिव को सूचित करेगा कि ऐसा कर दिया गया है।
(
3) उपनियम (1 ) के अंतर्गत किसी व्यवसाय संघ के विघटन की सूचना धारा 7 की उपधारा (2) में प्राप्त होती है तो रजिस्ट्रार, जब तक कि उसे यह विश्वास होने का कारण न हो कि व्यवसाय संघ का विघटन संहिता मे प्रावधानित रीतियों के अनुरूप नहीं है, विघटन को इस उद्देश्य हेतु संधारित पंजी में पंजीकृत करेगा एवं इस तथ्य से व्यवसाय संघ के सचिव को सूचित करेगा कि ऐसा कर दिया गया है ।
(4) शुल्क रूपये पचास या जैसा कि समय - समय पर राज्य शासन द्वारा निर्धारित किया जावे, देय होगा और यह इलेक्ट्रॉनिक रूप से शासन के खाते में समुचित मद में जमा किया जाएगा। 10. धारा 8 एवं 9 के अंतर्गत व्यवसाय संघ का पंजीयन एवं उनका निरस्तीकरण: -
(1 ) पंजीयन हेतु आवेदन का प्ररूप: व्यवसाय संघ के पंजीयन हेतु प्रत्येक आवेदन प्ररूप चार में इलेक्ट्रॉनिक या अन्य रूप से जमा किए गये शुल्क की पावती और औध्योगिक सम्बंध संहिता, 2020 की धारा 9 के अंतर्गत अपेक्षित अन्य दस्तावेजों के साथ रजिस्ट्रार को किया जाएगा। आवेदक द्वारा उपनियम ( 1 ) के अंतर्गत पंजीयन और पंजीयन के निरस्तीकरण के लिए जमा किए गए आवेदन के साथ एक शपथ पत्र प्ररूप पांच में संलग्न किया जाएगा। (2)
(3) आवेदन के लिए अधिकारिता को सिद्ध करने हेतु प्रमाणः व्यवसाय संघ के पंजीयन हेतु आवेदन पर रजिस्ट्रार ऐसे प्रमाण जो कि यह दर्शित करने के लिए आवश्यक हैं कि आवेदक को व्यवसाय संघ की ओर से आवेदन करने की अधिकारिता है एवं अन्य विवरण प्ररूप छह में मांग सकताहै।
(4) पंजीयन हेतु शुल्क व्यावसाय संघ के पंजीयन हेतु शुल्क एक सौ रू. अथवा राज्य शासन द्वारा समय - समय निर्धारित किये अनुसार होगा एवं राज्य शासन के समुचित खातों की मदों में इलेक्ट्रॉनिक रूप से भुगतान किया जायेगा ।
(5) रजिस्टर का प्ररूप रजिस्ट्रार द्वारा व्यावसायिक संघों का रजिस्टर प्ररूप सात में इलेक्ट्रॉनिकया अन्यथा रूप से संधारित किया जाएगा ।
(6) पंजीयन प्रमाण पत्र प्ररूप : आवेदन के साथ दी गई जानकारी एवं विवरण के रजिस्ट्रार द्वारा स्वयं अथवा किसी अधिकृत अधिकारी द्वारा आवश्यक सत्यापन के पश्चात सही पाये जाने पर प्ररूप सात में पंजीयन हेतु प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा । पंजीयक द्वारा आवेदन प्राप्त होने के तीस दिवस में प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा अथवा तीस दिवस के भीतर रजिस्ट्रार द्वारा ऐसे आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लेने और उसे इलेक्ट्रॉनिक रूप से या स्पीड पोस्ट से या पंजीकृत डाक से संसूचित नहीं करने पर पंजीयन को जारी कर दिया गया है, ऐसा माना जाएगा।
(7) निकासी और निरस्तीकरण हेतु आवेदन का प्ररूप: व्यावसाय संघ द्वारा पंजीयन के प्रमाण पत्र की निकासी या निरस्तीकरण हेतु प्रत्येक आवेदन रजिस्ट्रार को प्ररूप नौ में इलेक्ट्रॉनिक रूप से या स्पीड पोस्ट से या पंजीकृत डाक से रू एक सौ शुल्क अथवा जैसा कि शासन द्वारा 426(7)
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समय- समय पर निर्धारित किया गया है , राज्य शासन के खाते की समुचित मद में इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा किये जाने की पावती सहित प्रस्तुत किया जाएगा । रजिस्ट्रार द्वारा आवेदकों से ऐसे प्रमाण मांग सकेगा, जो यह प्रदर्शित करने के लिए आवश्यक हों कि आवेदक ऐसा आवेदन प्रस्तुत करने के लिए व्यवसाय संघ की ओर से समुचित रूप से अधिकृत हैं,
(8) आवेदन का सत्यापन एवं मान्यता रजिस्ट्रार किसी व्यवसाय संघ के पंजीयन, निकासी अथवा पंजीयन के निरस्तीकरण का आवेदन प्राप्त होने पर इसे मान्य करने के पूर्व यह सुनिश्चित करेगा कि यह आवेदन व्यवसाय संघ की सामान्य सभा द्वारा पारित किया गया है या यदि यह इस तरह पारित नहीं किया गया है तो इसे व्यवसाय संघ के सदस्यों के बहुमत द्वारा मान्य किया गया है । इस उददेश्य के लिए रजिस्ट्रार आवेदक से ऐसी जानकारी जो वह उचित समझे, प्राप्त कर सकेगा तथा व्यवसाय संघ के किसी पदाधिकारी का परीक्षण कर सकेगा।
11. धारा 10 के अंतर्गत पंजीयन न करने या पंजीयन के निरस्तीकरण पर अपील किसी भी पीडित व्यक्ति द्वारा पंजीयक के आदेश के विरूद्ध ऐसे आदेश की प्राप्ति के तीस दिवस में अपील औद्योगिक न्यायाधिकरण को अपील के कारण को दर्शाते हुए पंजीयक के आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ प्रस्तुत करेगा।
12. धारा 11 के अंतर्गत रजिस्ट्रार द्वारा पंजीयन की जानकारी में परिवर्तन की व्यवसाय संघ को और व्यवसाय संघ द्वारा रजिस्ट्रार को संसूचना: -
(
1) रजिस्ट्रार द्वारा पंजीकृत व्यवसाय संघों को समस्त संसूचनाएं और सूचनाएं अनुमोदित डाक के पते पर एवं रजिस्टर में दर्शित ई- मेल पते पर भेजे जाएंगे।
(2) व्यवसाय संघ के विवरण या उसके नियमों या उसके पदाधिकारियों या सदस्यता में किसी परिवर्तन या सदस्यों की संख्या के 10 प्रतिशत या एक सौ से कम होने , जो भी कम हो , के संबंध में कोई भी संसूचना रजिस्ट्रार को उसके आधिकारिक डाक के पते एवं ई- मेल पते पर ऐसे परिवर्तन या घटना की तिथि से तीस दिवस के भीतर की जाएगी।
(3) उपनियम (2) के अंतर्गत वर्णित प्रति के इलेक्ट्रानिक रूप से अथवा अन्य प्रकार से संसूचना प्राप्त होने पर जब तक कि इस विश्वास का कारण न हो कि ऐसी संसूचना व्यवसाय संघ के नियमों में दिये गए तरीके से नहीं की गई है या ऐसी संसूचना एवं परिवर्तन संहिता के प्रावधानों के अनुसार नहीं है , ऐसी संसूचना या परिवर्तन को रजिस्ट्रार इस उद्देश्य के लिए संधारित किए गए रजिस्टर में दर्ज करेगा और उसने ऐसा कर लिया है, इस तथ्य को व्यवसाय संघ के सचिव को उप नियम ( 1 ) में विहित तरीके से संसूचित करेगा।
(4) ऐसी संसूचना या नियमों के परिवर्तन हेतु शुल्क पचास रूपए या शासन द्वारा समय - समय पर निर्धारित किये अनुसार, राज्य शासन के समुचित खातों के मद में इलेक्ट्रॉनिक रूप से भुगतान योग्य होगा और एक समय में किए गए प्रत्येक परिवर्तन के सेट हेतु भुगतान किया जाएगा। 13. वे मामले जिनमें वार्ताकारी संघ और वार्ताकारी परिषद धारा 14 की (1 ) और (2) के अंतर्गत वार्ता कर सकेंगे -
(1) वार्ताकारी संघ या वार्ताकारी परिषद नियोजक या नियोजकों के साथ निम्नलिखित में से सभी या किन्हीं मामलों में वार्ता करने के हकदार होंगे, नामतः-
(एक) औद्योगिक संबंध संहिता , 2020 की तृतीय अनुसूची से संबंधित सभी मामले। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(8)
(दो) कर्मकार के सेवा समाप्ति या बर्खास्तगी या सेवा से पृथक किये जाने से संबंधित सभी मामले।
(तीन) हड़ताल और तालाबंदी से संबंधित सभी मामले ।
(चार) कर्मकारों को ले-ऑफ, छंटनी और स्थापना के बंदीकरण से संबंधित सभी मामले।
(2) यदि किसी औद्योगिक स्थापना में केवल एक व्यवसाय संघ है जिसके पास उस स्थापना के बीस प्रतिशत या अधिक कर्मकारों की सदस्यता है, ऐसा संघ उपनियम (1 ) के प्रावधानों के अंतर्गत नियोजक से बातचीत करने का हकदार होगा।
(3) धारा 14 की उपधारा (3 ) के अंतर्गत वार्ताकारी संघ के कर्मकारों के सत्यापन का तरीका:- रजिस्ट्रार, ऐसे व्यवसाय संघ या औद्योगिक स्थापना के प्ररूप - दस में किए गए आवेदन पर व्यवसाय संघ को किसी औद्योगिक स्थापना हेतु वार्ताकारी संघ घोषित करने के लिए या तो रजिस्ट्रार की स्वयं की उपस्थिति में या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी की उपस्थिति में या सदस्यों द्वारा व्यवसाय संघ को शुल्क के भुगतान के सत्यापन की पद्धति से व्यवसाय संघ की सदस्यता का सत्यापन करेगा। इस हेतु कम से कम 7 दिवस के पूर्व समस्त कर्मकारों और नियोजक को ऐसे सत्यापन की तिथि, दिनांक और स्थान को इंगित करते हुए सूचना देगा । सत्यापन कर प्रतिवेदन प्राप्त होने पर रजिस्ट्रार सत्यापन के 15 दिवस के भीतर आदेश पारित करेगा और इलेक्ट्रॉनिक रूप से या स्पीड पोस्ट से या पंजीकृत डाक से ऐसे व्यवसाय संघ और नियोजक को संसूचित करेगा तथा औद्योगिक स्थापना के सूचना पटल पर या इलेक्ट्रॉनिक सूचना बोर्ड पर एक प्रति को प्रदर्शित किया जाएगा । रजिस्ट्रार ऐसे व्यवसाय संघ के नाम को औद्योगिक स्थापना के लिए वार्ताकारी संघ के रूप में अभिलेख में प्रविष्ट करेगा। औद्योगिक स्थापना ऐसे व्यवसाय संघ को स्थापना के लिए वार्ताकारी संघ के रूप में मान्यता देगा।
(4) धारा 14 की उपधारा (4) के अंतर्गत वार्ताकारी परिषद के व्यवसाय संघ के कर्मकारों के सत्यापन का तरीका: - रजिस्ट्रार , औद्योगिक स्थापना द्वारा प्ररूप- दस में किए गए आवेदन पर संघ को वार्ताकारी परिषद् में रखे जाने को निर्णीत करने के लिए या तो रजिस्ट्रार की उपस्थिति में या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी की उपस्थिति में या सदस्यों द्वारा व्यवसाय संघ को शुल्क के भुगतान का सत्यापन की पद्धति से व्यवसाय संघ की सदस्यता का सत्यापन करेगा। इस हेतु कम से कम 7 दिवस के पूर्व समस्त कर्मकारों और नियोजक को ऐसे सत्यापन की तिथि, दिनांक और स्थान को इंगित करते हुए सूचना देगा। सत्यापन कर प्रतिवेदन प्राप्त होने पर रजिस्ट्रार सत्यापन के 15 दिवस के भीतर आदेश पारित करेगा और इलेक्ट्रॉनिक या अन्य रूप से ऐसे व्यवसाय संघ और नियोजक को संसूचित करेगा और औद्योगिक स्थापना के सूचना पटल पर या इलेक्ट्रानिक सूचना बोर्ड पर एक प्रति को प्रदर्शित किया जाएगा। रजिस्ट्रार ऐसे व्यवसाय संघ के नाम को औद्योगिक स्थापना के लिए वार्ताकारी परिषद में रखे जाने हेतु अभिलेख में प्रविष्ट करेगा । औद्योगिक स्थापना ऐसे व्यवसाय संघ को स्थापना के लिए वार्ताकारी परिषद् में रखे जाने हेतु मान्यता देगा।
(5) धारा 14 में संदर्भित और उपनियम (3 ) , (4 ) या (5) में सत्यापित की गई वार्ताकारी संघ और वार्ताकारी परिषद् के सदस्यों की सूची पंजीयक द्वारा प्ररूप - ग्यारह में संधारित की जाएगी।
(6) धारा 14 की उपधारा ( 7 ) के अंतर्गत वार्ताकारी संघ और वार्ताकारी परिषद् को उपलब्ध कराये जाने वाली सुविधाएं: -
(एक) कर्मचारियों के साथ उपक्रम की परिसीमा में विचार - विमर्श का अधिकार: - वार्ताकारी संघ और वार्ताकारी परिषद् के सदस्य व्यवसाय संघों को यह अधिकार होगा और 426(9)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
नियोक्ता द्वारा उन्हें अनुमति दी जावेगी कि वे उस संस्थान में नियुक्त सम्बन्धित कर्मचारियों से उपक्रम की परिसीमा में विचार- विमर्श कर सकेंगे , बशर्ते कि-
(क) संघ उसके अधिकारी या अधिकारियों के नाम या इस हेतु अधिकृत सदस्यों के नाम और विभाग या विभागों के नाम जहां पर सम्बन्धित सदस्य नियोजित है, यह पूर्व सूचना नियोक्ता को देगा; और
(ख) विचार-विमर्श इस प्रकार होगा कि उपक्रम के कार्य में किसी प्रकार की बाधा न हो।
(दो) नियोक्ता के साथ उपक्रम की परिसीमा में विचार- विमर्श का अधिकार वार्ताकारी संघ और वार्ताकारी परिषद् के सदस्य संघों का यह अधिकार होगा कि वे नियोक्ता या उसके द्वारा इस उद्देश्य से नियुक्त किसी व्यक्ति से उसके संस्थान में नियोजित सदस्य कर्मचारियों की समस्याओं के संबंध में विचार - विमर्श उपक्रम में ही निम्न शर्तों के अधीन कर सकेंगे , जैसे कि;
(क
) विचार-विमर्श सामान्यतः सप्ताह में दो दिन , दिन पाली के कार्यकारी घण्टों में जैसा कि नियोजक और संघ द्वारा निर्धारित किया जाए , उन अति-आवश्यक प्रकरणों को छोड़ कर , जबकि पूर्व अनुमति से किसी भी दिन किसी भी समय में चर्चा की जा सकेगी;
(ख) संघ सामान्यतः समस्याओं का स्वरूप जिन पर वह विचार - विमर्श करना चाहता हो, यह पूर्व में ही संसूचित करेगा ;
(ग) अधिकारी या इस संबंध में अधिकृत सदस्यों के नाम या तो नियोक्ता को पूर्व सूचना के साथ दिये जायेंगे या ऐसे अधिकारी अधिकार पत्र अपने साथ में रखेंगे।
(तीन) वार्ताकारी संघों के कतिपय अधिकारियों द्वारा उपक्रम के परिसीमा में राशि एकत्रीकरण : - वार्ताकारी संघों का प्रत्येक अधिकारी और संघों के सदस्य जिन्होंने सदस्यता के छह माह पूर्ण कर लिए हैं और जो अध्यक्ष के द्वारा इस कार्य हेतु अधिकृत किए गये हों , वे निम्नलिखित शर्तों के अनुसार उपक्रम की परिसीमा में जहां पर मजदूरी का भुगतान किया जाता है, उनके सदस्यों से नियमानुसार देय राशि एकत्रीकरण की पात्रता रखेंगे -
(क) अधिकारी या अधिकारियों के नाम या इस कार्य हेतु अधिकृत सदस्यों के नाम की पूर्व सूचना नियोक्ता को दी जावेगी और उसमें यदि किसी प्रकार का परिवर्तन होता है तो एकत्रीकरण दिनांक के 24 घण्टे पूर्व इसकी सूचना नियोक्ता को दी जावेगी ।
(ख) अधिकारी एवं सदस्य जो इस सम्बन्ध में उपक्रम में जावेंगे वे अपने साथ अधिकार पत्र साथ रखेंगे;
(ग) किसी भी कर्मचारी पर किसी प्रकार का बल प्रयोग या दबाव नहीं दिया जावेगा;
(घ) एकत्रीकरण का कार्य उपक्रम के स्टॉफ के कार्य में किसी प्रकार के बाधा उत्पन्न किये बगैर की जावेगी;
(ड. ) जहां पर राशि एकत्रीकरण का कार्य होगा, वहां पर दस से अधिक कर्मचारी एकत्रित नहींहोंगे;
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 12 अप्रैल 2021
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(च). एकत्रीकरण का कार्य सामान्य भुगतान दिवस या दिवसों और उसके आगे तीन दिनों तक तथा उस दिन को जब अदावाकृत मजदूरी का भुगतान किया जावेगा।
(चार) उपक्रम में वार्ताकारी संघ का सूचना पटल प्रदर्शित करना:- वार्ताकारी संघ का अध्यक्ष या अध्यक्ष या महा मंत्री द्वारा अधिकृत व्यक्ति टाईम कीपर के कार्यालय या अन्य किसी सहजगोचर स्थान पर नियोक्ता एवं संघ की सहमति से संघ की सूचना प्रदर्शन की पात्रता रखेंगे और सूचना उपक्रम के कार्य के घंटों में ही चस्पा की जावेगी , परन्तु
(क) नोटिस बोर्ड जिस पर चस्पा किया जाए, युक्तियुक्त आकार का हो;
(ख) चस्पा किये जाने वाली सूचना अध्यक्ष के द्वारा या उपाध्यक्ष के द्वारा जो अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उसका कार्य देख रहा हो या महामंत्री, मंत्री के द्वारा हस्ताक्षरित होगी; और
(ग) ऐसी सूचनाएँ संघ की विधि सम्मत कार्यवाहियों से सम्बन्धित होंगी और वह आक्रामक या उत्तेजक प्रकृति की नहीं होगी।
14. धारा 15 की उपधारा ( 1 ) के अधीन उद्देश्य जिन पर साधारण निधियां व्यय की जा सकेंगी, - (1 ) पंजीकृत व्यवसायं संघ की साधारण निधियां निम्नलिखित से भिन्न किन्हीं उद्देश्यों पर व्ययन नहीं की जाएंगी, अर्थात्:-
(क) व्यवसाय संघ के पदाधिकारियों को वेतन, भत्तों और व्ययों का संदाय ;
(ख) व्यवसाय संघ के प्रशासन के लिए व्ययों का संदाय , जिसके अन्तर्गत व्यवसाय संघ की साधारण निधियों के लेखाओं की संपरीक्षा आती है ;
(ग ) जबकि किसी विधिक कार्यवाही का, जिसका वह व्यवसाय संघ या. उसका कोई सदस्य पक्षकार है, अभियोजन या प्रतिवाद, व्यवसाय संघ के उस रूप में के अधिकारों को या ऐसे अधिकारों को, जो किसी सदस्य के उसके नियोजक के साथ या किसी ऐसे व्यक्ति के साथ , जिसे वह सदस्य नियोजित करता है , सम्बन्धों से उद्भूत होते हों, सुनिश्चित या संरक्षित करने के प्रयोजन के लिए किया जाता है तब ऐसा अभियोजन या प्रतिवाद ;
(घ) व्यवसाय संघ या उसके किसी सदस्य की ओर से व्यवसाय-विवादों का संचालन ;
(ङ) व्यवसाय-विवादों से उद्भूत होने वाली हानि के लिए सदस्यों को प्रतिकर का दिया जाना;
(च) सदस्यों की मृत्यु, वृद्धावस्था, रुग्णता, दुर्घटनाओं या बेकारी के कारण ऐसे सदस्यों या उनके आश्रितों को दिए जाने वाले भत्ते ;
(छ ) सदस्यों के जीवन के बीमा की पालिसियों अथवा रुग्णता , दुर्घटना या बेकारी के विरुद्ध सदस्यों का बीमा करने वाली पालिसियों का दिया जाना या उनके अधीन दायित्व का ग्रहण;
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मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 12 अप्रैल 2021
(ज) शैक्षणिक, सामाजिक या धार्मिक प्रसुविधाओं का ( जिसके अन्तर्गत मृत सदस्यों की अन्त्येष्टि या धार्मिक कर्मों के व्ययों का संदाय आता है) सदस्यों के लिए या सदस्यों के आश्रितों के लिए उपबन्ध;
(झ) मुख्यतः नियोजकों या कर्मकारों पर उनकी उस हैसियत में प्रभाव डालने वाले प्रश्नों पर चर्चा करने के प्रयोजन के लिए सामयिकी को चालू रखना;
(ञ) उन उद्देश्यों में से, जिन पर व्यवसाय संघ की साधारण निधियां व्यय की जा सकती हैं, किसी को अग्रसर करने में, अभिदायों का किसी ऐसे हेतु के लिए संदाय , जिसका आशय साधारण तया कर्मकारों को फायदा पहुंचाना है:
परन्तु ऐसे अभिदायों की बाबत किसी भी वित्तीय वर्ष में व्यय किसी भी समय उस कुलयोग के चतुर्थांश से अधिक नहीं होगा, जो उस वर्ष के दौरान में उस सकल आय को, जो उस व्यवसाय संघ की साधारण निधियों में उस वर्ष के दौरान उस समय तक प्रोद्भूत हुई हो, और उस वर्ष के प्रारम्भ पर उन निधियों में जमा अतिशेष को मिला कर हो ; तथा (ट) अधिसूचना में अन्तर्विष्ट किन्हीं शर्तों के अध्यधीन रहते हुए , कोई ऐसा अन्य उद्देश्य जो राज्य शासन द्वारा शासकीय राजपत्र में अधिसूचित किया गया हो।
(2) धारा 15 की उपधारा (2) के अंतर्गत पृथक निधि की संरचना:-
(1 ) रजिस्ट्रीकृत व्यवसाय संघ एक पृथक् निधि का ऐसे अभिदायों से गठन कर सकेगा जो उस निधि के लिए पृथकतः उद्गृहीत किए गए हों या दिए गए हों, जिसमें से संदाय, संहिता में विनिर्दिष्ट उद्देश्यों में से किसी को अग्रसर करने में उसके सदस्यों के नागरिक और राजनीतिक हितों के संवर्धन के लिए संदाय किए जा सकेंगे ।
(
2) उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट उद्देश्य निम्नलिखित हो संकेंगे: -
(क) संविधान के अधीन गठित किसी विधायी निकाय के या किसी स्थानीय प्राधिकारी के सदस्यके रूप में निर्वाचन के लिए अपनी अभ्यर्थिता निर्वाचन के संबंध
में निर्वाचन के पूर्व , दौरान या पश्चात् किसी अभ्यर्थी या भावी अभ्यर्थी द्वारा
प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः उपगत व्ययों का संदाय ; अथवा
(ख ) ऐसे किसी अभ्यर्थी या भावी अभ्यर्थी के समर्थन में किसी सभा का आयोजन , या किसी साहित्य या दस्तावेजों का वितरण; अथवा
(ग) किसी ऐसे व्यक्ति का भरणपोषण जो संविधान के अधीन गठित किसी विधायी निकाय का या किसी स्थानीय प्राधिकारी का सदस्य है ; अथवा
(घ)संविधान के अधीन गठित किसी विधायी निकाय के लिए या किसी स्थानीय प्राधिकारी के लिए निर्वाचकों का रजिस्ट्रीकरण या अभ्यर्थी का चयन अथवा (ङ) किसी भी प्रकार की राजनीतिक सभाओं का आयोजन या किसी भी प्रकार के राजनीतिक साहित्य या राजनीतिक दस्तावेजों का वितरण । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426( 12)
(3) कोई भी सदस्य उपधारा ( 1 ) के अधीन गठित निधि में अभिदाय करने के लिए विवश नहीं किया जाएगा और कोई सदस्य , जो उक्त निधि में अभिदाय नहीं करता है, व्यवसाय संघ के फायदों में से किसी से भी अपवर्जित न किया जाएगा और न उक्त निधि में उसके द्वारा अभि दाय न किए जाने के कारण उसे उक्त निधि के नियंत्रण या प्रबंध के संबंध में के सिवाय व्यवसाय संघ के अन्य सदस्यों की तुलना में किसी भी मामले में प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः किसी निर्योग्यता या किसी अलाभ के अधीन रखा जाएगा , और उक्त निधि में अभिदाय करना व्यवसाय संघ में प्रवेश के लिए शर्त के रूप में नहीं होगा ।
15. धारा 22 की उपधारा (1 ) के अंतर्गत न्यायाधिकरण के समक्ष न्यायानिर्णयन हेतु आवेदन देने का तरीका, औद्योगिक न्यायाधिकरण के समक्ष धारा 22 में दिए गए किसी विवाद के घटने से या रजिस्ट्रार द्वारा ऐसे विवाद के संबंध में पारित किए गए किसी आदेश से तीस दिवस के भीतर ऐसे विवाद या आदेश से संबंधित दस्तावेजों की प्रतियों या विवाद के कारणों को दर्शाते हुए आवेदन किया जा सकेगा और न्यायाधिकरण समस्त संबंधित पक्षकारों को सुनवाई का अवसर प्रदान करेगा और पैतालीस दिवसों के भीतर आदेश पारित करेगा।
16. धारा 24 की उपधारा (2) और (3) के अंतर्गत व्यवसाय संघ के समामेलन और नाम परिवर्तन का तरीका और उसे रजिस्ट्रार को भेजा जाना-
(1) व्यवसाय संघ का समामेलन सूचना का प्ररूप
(एक) आवेदक व्यवसाय संघ द्वारा समामेलन की सूचना रजिस्ट्रार को इलेक्ट्रॉनिक रूप से या रजिस्ट्रर्ड डाक या स्पीड पोस्ट द्वारा दो प्रतियों में प्ररूप - बारह में दी जाएगी। (दो) जब रजिस्ट्रार द्वारा समामेलन को दर्ज कर लिया जाता है , वह ऐसे समामेलन को उसके हस्ताक्षर के अधीन प्रमाणित करेगा और प्रमाण पत्र को इलेक्ट्रॉनिक या रजिस्ट्रर्ड डाक या स्पीड पोस्ट द्वारा सभी सम्बंधित व्यवसाय संघों को जारी करेगा और ऐसे समामेलन को समस्त समुचित अभिलेखों में प्रविष्ट करेगा।
(तीन) व्यवसाय संघ के नाम में परिवर्तन की कोई सूचना रजिस्ट्रार को इलेक्ट्रॉनिक या रजिस्ट्रर्ड डाक या स्पीड पोस्ट द्वारा प्ररूप - तेरह में की जाएगी।
(चार) जब रजिस्ट्रार द्वारा नाम परिवर्तन को दर्ज कर लिया जाता है, वह ऐसे व्यवसाय संघ के ऐसे नाम परिवर्तन को उसके हस्ताक्षर के अधीन प्रमाणित करेगा और आवेदक व्यवसाय संघ को पंजीयन जारी करेगा तथा नाम परिवर्तन को समस्त समुचित अभिलेखों में प्रविष्ट करेगा।
17. धारा 25 की उपधारा (2) के अंतर्गत विघटन होने पर व्यवसाय संघ की निधियों का विभाजन :- जब रजिस्ट्रार को यह आवश्यक हो जाए कि धारा 25 की उपधारा (2 ) के अधीन , पंजीकृत व्यवसाय संघ के निधि की राशि का विभाजन , जो विघटित हो गया है, किया जाना है तो उसे सदस्यों के मध्य उस अनुपात में जितनी राशि सदस्यता अवधि में सदस्यता राशि के रूप में उन्होंने अंशदान किया है, विभाजित करेगा।
18. धारा 26 की उपधारा ( 1 ) के अंतर्गत व्यवसाय संघ का वार्षिक विवरण (साधारण विवरण):-
(एक) धारा 26 के अधीन साधारण विवरण रजिस्ट्रार को प्रत्येक वर्ष के 31 मार्च तक इलेक्ट्रॉनिक या रजिस्ट्रर्ड डाक या स्पीड पोस्ट द्वारा प्ररूप-चौदह में भेजा जाएगा ।
(दो) साधारण विवरण का अंकेक्षण इन नियमों के नियम 8 में निहित किए गए तरीके से लिया जाएगा। 426(13)
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 12 अप्रैल 2021
(तीन) रजिस्ट्रार द्वारा लिखित मांग किए जाने पर , इन नियमों के अंतर्गत किए गए किसी अंकेक्षण प्रतिवेदन को रजिस्ट्रार द्वारा विनिर्दिष्ट समय सीमा के भीतर प्रस्तुत किया जाएगा।
(चार) रजिस्ट्रार साधारण विवरण के बारे में और अंकेक्षण प्रतिवेदन के बारे में अन्य कोई विवरण जैसा कि वह ऐसे साधारण विवरण और अंकेक्षण प्रतिवेदन के तथ्यों का पता लगाने के लिए ठीक समझे, लिखित में व्यवसाय संघ से मांग सकता है।
19. धारा 27 की उपधारा (2) के अंतर्गत राज्य स्तर पर व्यवसाय संघ की मान्यता: -
( 1 ) व्यवसाय संघ या व्यवसाय संघों के महासंघ द्वारा राज्य शासन या राज्य शासन द्वारा अधिकृत अधिकारी को इस संबंध में प्ररूप- पन्द्रह में आवेदन प्रस्तुत किया जाएगा।
(2) राज्य शासन या राज्य शासन द्वारा अधिकृत अधिकारी द्वारा आवश्यक जांच , जैसा कि वे उचित समझें, के पश्चात आवेदन प्राप्ति के 60 दिवस के भीतर उसे निर्णीत किया जाएगा और निर्णय की प्रति आवेदक को एवं प्रतिलिपि श्रमायुक्त और रजिस्ट्रार को भेजी जाएगी ।
(3) ऐसी मान्यता के संबंध में यदि कोई विवाद उत्पन्न होता है तो शासन या राज्य शासन द्वारा अधिकृत अधिकारी औद्योगिक न्यायाधिकरण को विवाद संदर्भित करेगा। औद्योगिक न्यायाधिकरण आवेदक को सुनवाई का अवसर प्रदान करके और प्रकरण के सम्बन्धित अभिलेखों को देखकर अपील का निर्णय पैतालीस दिनों के भीतर करेगा और यह आदेश पक्षकारों पर बाध्यकारी होगा।
अध्याय चार
स्थायी आदेश
20. धारा 30 की उप- धारा (3 ) के तहत प्रमाणीकरण अधिकारी को सूचना अग्रेषित करने की विधि - (1 ) यदि नियोक्ता अपने औद्योगिक स्थापना से संबंधित मामलों के संबंध में धारा 29 में निर्दिष्ट राज्य सरकार के आदर्श स्थायी आदेश को अपनाता है या तत्पश्चात वह संबंधित प्रमाणीकरण अधिकारी को इलेक्ट्रॉनिक रूप से उस विशिष्ट तिथि को जिससे आदर्श स्थायी आदेश के प्रावधानों को जो उसकी स्थापना के लिए प्रासंगिक हैं, को मान्य किया गया है, सूचित करेगा।
(2) उप -नियम ( 1 ) में सूचना मिलने पर प्रमाणीकरण अधिकारी ऐसी प्राप्ति से तीस दिनों की अवधि के भीतर यह परीक्षण कर सकेगा कि नियोक्ता को कुछ प्रावधानों को शामिल करना आवश्यक है जो उसके स्थापना के लिए आवश्यक हैं और आदर्श स्थायी आदेश के उन प्रासंगिक प्रावधानों को इंगित करते हुए , जिन्हें अपनाया नहीं गया है, उस नियोक्ता को इस तरह के निर्देश देगा कि वह निर्देश की प्राप्ति की तारीख से तीस दिनों की अवधि के भीतर , उन्हें जोडने, विलोपन या संशोधन के द्वारा , स्थायी आदेश में संशोधन करेगा। इस आशय का पालन प्रतिवेदन उन प्रावधानों के संबंध में इलेक्ट्रॉनिक तरीके से नियोक्ता द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा जिनको प्रमाणीकरण अधिकारी द्वारा संशोधित करने के निर्देश दिये गये हैं ।
(3) यदि उप - नियम ( 1 ) और (2) में निर्दिष्ट जानकारी प्राप्त होने के तीस दिनों की अवधि के भीतर प्रमाणीकरण अधिकारी द्वारा कोई टिप्पणी नहीं की जाती है, तो नियोक्ता द्वारा स्थायी आदेश को अपनाया जाना मान्य किया जाएगा।
21. धारा 30 की उप- धारा (5) के खण्ड (दो) के अधीन जहां कोई व्यवसाय संघ संचालित नहीं है वहां औद्योगिक स्थापना अथवा उपक्रम के कामगारों के प्रतिनिधियों का चयन करने के लिए प्रमाणीकरण अधिकारी द्वारा नोटिस जारी करने की रीति-जैसा कि धारा 30 की उक्त उप - धारा ( 5) के खंड (एक) में निर्दिष्ट किया गया है , जहां ऐसा कोई व्यवसाय संघ वार्ता संघ या परिषद या नहीं है तो प्रमाणीकरण मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
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अधिकारी निर्देश देने की तिथि से दस दिन में तीन प्रतिनिधियों को चुनने के लिए कामगारों को निर्देश देगा। इन प्रतिनिधियों के नाम सत्यापन हेतु सुलह अधिकारी को भेजेगा एवं सत्यापन होने पर उन्हे स्थायी आदेश की एक प्रति को किसी प्रकार की आपत्ति, यदि कोई हो , की अपेक्षा अनुसार भेजेगा एवं उक्त चुने गये कामगार नोटिस की प्राप्ति से दस दिनों के भीतर आपत्ति, यदि कोई हो, प्रस्तुत करेंगे। 22. धारा 30 की उप-धारा ( 8) के अधीन प्रमाणित स्थायी आदेशों के सत्यापन की रीति- स्थायी आदेशों अथवा स्थायी आदेशों में रूपांतरण , जिसे धारा 30 की उपधारा (8 ) के अनुसरण में प्रमाणित किया गया हो या धारा 33 की उपधारा ( 1 ) के तहत अपीलीय प्राधिकारी के आदेश की प्रतियां , यथा स्थिति प्रमाणीकरण अधिकारी या अपीलीय प्राधिकारी द्वारा प्रमाणित किया जाएगा और सभी संबंधितों को एक सप्ताह के भीतर इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजा जाएगा, लेकिन उन मामलों में जहां नियोक्ता ने आदर्श स्थायी आदेशों को अपनाया है वहां एवं धारा 30 की उप - धारा ( 3 ) के अधीन डीम्ड प्रमाणीकरण के मामलों में किसी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं होगी।
23. धारा 30 की उप-धारा (9 ) के अधीन प स्थायी आदेशों के प्ररूप के साथ संलग्न की जाने वाली विवरणी - विवरणी के साथ -
(एक) प्रारूप स्थायी आदेश में, विवरण जैसे कि औद्योगिक स्थापना अथवा संबंधित उपक्रम का नाम, पता, ई- मेल पता, संपर्क नंबर और उसमें काम करने वाले कामगारों की संख्या के साथ - साथ उस व्यवसाय संघ का विवरण शामिल होगा जिससे कामगार जुड़े हों, अंतर्विष्ट करेगा; तथा
(दो) विद्यमान स्थायी आदेशों में प्रारूप संशोधन , ऐसे स्थायी आदेशों के विवरणों को अंतर्विष्ट करेगा जो एक सारणीकृत विवरण के साथ संशोधित किए जाने के लिए प्रस्तावित है, जिसमें प्रभावी और प्रस्तावित उपांतरण के प्रासंगिक सुसंगत में से प्रत्येक के कारणों का विवरण दिया गया है और इस तरह के विवरण पर औद्योगिक स्थापना या उपक्रम के अधिकृत व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किया जाएगा।
24. धारा 30 की उप- धारा (10) के अधीन समान स्थापना में प्ररूप स्थायी आदेश प्रस्तुत करने की शर्तें समान औद्योगिक स्थापना में शामिल नियोक्ता के समूह के मामलों में धारा 30 के अधीन और आगे की कार्यवाही के लिए उप- धारा ( 1 ) , ( 5), (6) , (8) और (9) में विनिर्दिष्ट संबंधित व्यवसाय संघ या वार्ता संघ या वार्ता परिषद, यदि कोई है , के साथ परामर्श करने के बाद ऐसा समूह संयुक्त प्रारूप स्थायी आदेश प्रस्तुत कर सकता हैं ;
परन्तु समान औद्योगिक स्थापना में शामिल नियोक्ता के समूह के मामलों में , संयुक्त प्रारूप स्थायी आदेशों का प्रारूप तैयार किया जाएगा और श्रम आयुक्त को प्रस्तुत किया जाएगा जो संबंधित प्रमाणीकरण अधिकारी के साथ परामर्श करते हुए उक्त संयुक्त प्रारूप स्थायी आदेश में अपेक्षित कारणों को अभिलिखित करते हुए प्रमाणन को स्वीकार अथवा अस्वीकार कर सकते हैं।
25. धारा 32 के अधीन अपीलीय प्राधिकारी द्वारा अपील के निपटारे का तरीका:-
(1 ) कोई नियोक्ता अथवा श्रमिक अथवा संघ वार्ता संघ जो धारा 30 की उप- धारा ( 5) के अधीन प्रमाणीकरण अधिकारी द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ अपील करना चाहता है, तो वह ऐसे आदेश की प्राप्ति के 60 दिनों के अंदर तालिकाबद्ध रूप में एक अपील ज्ञापन तैयार करेगा जिसमें 426(15)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
उन स्थायी आदेशों के उपबंधों जिन्हें परिवर्तित अथवा संशोधित अथवा लोप किया जाना अथवा जोड़ा जाना अपेक्षित है तथा इसके कारणों के विवरण का उल्लेख होगा और यह अपील , अपीलीय प्राधिकारी को इलेक्ट्रोनिक या अन्य रूप से दायर की जाएगी.
(2) अपीलीय प्राधिकारी अपील की सुनवाई के लिए एक तारीख निर्धारित करेगा तथा इसका सीधा नोटिस दिया जाएगा;
(क) जहां अपील नियोक्ता अथवा किसी कामगार द्वारा दायर की जाती है, तो वहां औद्योगिक स्थापना के कामगारों के श्रमिक संघ को अथवा संबंधित कामगारों के वार्ता संघ या परिषद को अथवा नियोक्ता को व्यवसाय ;
(ख) जहां अपील किसी श्रमिक संघ द्वारा दायर की जाती है, तो वहां नियोक्ता तथा औद्योगिक स्थापना के अन्य सभी श्रमिक संघों को; और
(ग) जहां कामगारों के प्रतिनिधि द्वारा अपील दायर की जाती है , वहां नियोक्ता तथा अन्य किसी कामगार को जिसको अपीलीय प्राधिकारी द्वारा अपील में पक्षकार के रूप में शामिल किया जाता है ।
(3) अपील कर्ता प्रत्येक प्रतिवादी को अपील ज्ञापन की एक प्रति उपलब्ध कराएगा।
(4) अपीलीय प्राधिकारी कार्यवाही के किसी स्तर पर किसी साक्ष्य की मांग कर सकता है यदि वह इसे अपील के निपटान के लिए आवश्यक समझता है।
(5) अपील की सुनवाई के लिए उपनियम ( 3 ) के अधीन निर्धारित तारीख को, अपीलीय प्राधिकारी उस साध्य को लेगा जिसकी उसके द्वारा मांग की गई है अथवा प्रस्तुत करने पर सुसंगत माना गया हो और पक्षकारों को सुनने के पश्चात अपील का निपटारा करेगा ।
26. धारा 33 कीउपधारा (1 ) एवं (2) के अधीन स्थायी की भाषा तथा इसे रखने की रीति-
(1) धारा 30 के अंतर्गत मानद सत्यापन के मामले को छोड़कर सत्यापन अधिकारी द्वारा अंतिम रूप से सत्यापित स्थायी आदेश को इलेक्ट्रॉनिक ढंग से भेजा जाएगा ।
(2) अंतिम रूप से सत्यापित अथवा सत्यापित माने गए स्थायी आदेश अथवा इस अध्याय के अधीन अंगीकृत आदर्श स्थायी आदेश की विषय वस्तु को नियोक्ता द्वारा हिंदी में एवं अंग्रेजी में रखा जाएगा।
27. धारा 34 के अधीन स्थायी आदेश की अंतिम प्रमाणित प्रति के लिए रजिस्टर-
(1) प्रमाणीकरण अधिकारी सभी संबंधित औद्योगिक स्थापना के इलेक्ट्रॉनिक या अन्य रूप से सभी प्रमाणित अथवा प्रमाणित माने गए अथवा अंगीकृत आदर्श स्थायी आदेशों का रजिस्टर रखेगा जिसमें अन्य के साथ- साथ निम्नलिखित विवरण होगाः
(क) प्रत्येक स्थाई आदेश को दी गई विशिष्ट संख्या;
(ख) औद्योगिक स्थापना का नाम;
(ग) औद्योगिक स्थापना की प्रकृति;
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(16)
(घ) प्रत्येक स्थापना अथवा उपक्रम द्वारा प्रमाणन की तारीख अथवा मानद प्रमाणन की तारीख अथवा आदर्श स्थायी आदेश को अंगीकृत करने की तारीख;
(ड. ) औद्योगिक स्थापना के संचालन का क्षेत्र; और
(च) स्थाई आदेशों को पुनः प्राप्त करने के लिए सुसंगत ऐसे अन्य विवरण तथा ऐसे सभी स्थाई आदेशों के डेटाबेस का निर्माण करना।
(2) प्रमाणीकरण अधिकारी आवेदन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को प्रमाणित स्थाई आदेशों अथवा मानद प्रमाणित स्थाई आदेशों, जैसा भी मामला हो , के प्रति पृष्ठ दस रुपये की दर से या राज्य शासन द्वारा अधिसूचना से समय - समय पर निर्धारित दर से राज्य सरकार के लेखा के उचित शीर्ष में इलेक्ट्रानिक रूप में भुगतान करने पर उसकी प्रति उपलब्ध कराएगा।
28. धारा 35 की उपधारा (2) के अधीन स्थाई आदेश में संशोधन हेतु आवेदन धारा 35 की उप - धारा (2) के अधीन विद्यमान स्थाई आदेश में उपांतरण के लिए आवेदन इलेक्ट्रॉनिक या अन्य रूप से दिया जाएगा तथा तालिका में विवरण जिस में प्रवृत्त स्थाई आदेश के सुसंगत उपबंधों का विवरण तथा उनमें प्रस्तावित संशोधन , उनके कारण , तथा इसके अधीन कार्यरत पंजीकृत श्रमिकसंघों का विवरण सहित संशोधन के लिए प्रस्तावित ऐसे स्थाई आदेश के विवरण शामिल होंगे तथा ऐसे विवरण पर औद्योगिक स्थापना अथवा उपक्रम द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा, जैसी भी स्थिति हो , हस्ताक्षर किए जाएंगे । इस तरह के आवेदन को इन नियमों के नियम 22 से 27 अधीन यथा उपबंधित तरीके से निपटान किया जाएगा ।
अध्याय पांच
परिवर्तन की सूचना
29. धारा 40 के खण्ड (झ) के अधीन प्रभावी किए जाने वाले प्रस्तावित परिवर्तन हेतु सूचना देने की रीति.-
(1 ) कोई भी नियोक्ता इस संहिता की तृतीय अनुसूचीं में विनिर्दिष्ट किसी मामले के संबंध में किसी कामगार पर लागू सेवा शर्तों में कोई बदलाव करना चाहता है, तो ऐसे परिवर्तन से प्रभावित ऐसे कामगार या कामगारों को प्ररूप -सोलह में नोटिस देगा।
(2) उप-नियम (1 ) में निर्दिष्ट नोटिस को नियोक्ता द्वारा औद्योगिक स्थापना के मुख्य प्रवेश द्वार पर विशिष्ट रूप से नोटिस बोर्ड तथा औद्योगिक स्थापना से संबंधित प्रबंधक के कार्यालय में दर्शाया जाएगाः
परन्तु जहां औद्योगिक स्थापना से संबंधित कोई पंजीकृत व्यवसाय संघ है, वहां ऐसे नोटिस की प्रति ऐसे व्यवसाय संघ के सचिव अथवा ऐसे व्यवसाय संघों के प्रत्येक सचिव को, जैसा भी मामला हो , दी जाएगी ।
अध्याय छह
विवादों को स्वैच्छिक रूप से माध्यस्थम् करार निर्णयन हेतु भेजना
30. धारा 42की उप -धारा (3 ) के अधीन माध्यस्थम् करार का प्ररूप एवं उसका तरीका -
( 1 ) जहां नियोक्ता एवं कामगार विवाद को न्याय माध्यस्थम के लिए भेजने को सहमत हो जाते हैं, वहां न्याय माध्यस्थम् करार प्ररूप -सत्रह में होगा तथा करार के पक्षकारों द्वारा इस पर हस्ताक्षर 426(17)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
किए जाएंगे। करार के साथ मध्यस्थ अथवा मध्यस्थों की लिखित अथवा इलेक्ट्रोनिक सहमति होगी ।
(2) उप -नियम ( 1 ) में निर्दिष्ट माध्यस्थम् करार पर हस्ताक्षर किए जाएंगे.-
(एक) नियोक्ता के मामले में , स्वयं नियोक्ता द्वारा अथवा जहां नियोक्ता एनकारपोरेटेड कम्पनी है अथवा अन्य निकाय कार्पोरेट है, वहां ऐसे प्रयोजन हेतु प्राधिकृत कार्पोरेशन के एजेंट , प्रबंधक अथवा अन्य अधिकारी द्वारा;
(दो) कामगारों के मामले में, इस संबंध में प्राधिकृत पंजीकृत श्रमिक संघ के अधिकारी द्वारा अथवा ऐसे प्रयोजन हेतु आयोजित संबंधित कामगारों की बैठक में सम्यक् रूप से प्राधिकृत कामगारों के तीन प्रतिनिधियों द्वारा;
(तीन) किसी एक कामगार के मामले में, स्वयं कामगार द्वारा अथवा व्यवसाय संघ के अधिकारी द्वारा, जिसका वह सदस्यहै।
स्पष्टीकरणः-
(1 ) इस नियम में, अभिव्यक्ति ' अधिकारी ' से अभिप्रेत है ऐसे प्रयोजनार्थ प्राधिकृत किसी पंजीकृत व्यवसाय संघ अथवा नियोक्ता संघ के किसी अधिकारी से है।
(2) इस नियम में 'अधिकारी' से अभिप्रेत है निम्नलिखित अधिकारियों में से किसी अधिकारी से होगा, अर्थात्ः-
(क) अध्यक्ष;
(ख) उपाध्यक्ष;
(ग) सचिव (महासचिव सम्मिलित करते हुए)
(घ) एक संयुक्त सचिव; और
(ड. ) संघ के अध्यक्ष एवं सचिव की ओर से इस निमित्त प्राधिकृत व्यवसाय संघ का कोई अन्य अधिकारी ।
31. धारा 42 की उप - धारा (5) के अधीन अधिसूचना जारी करने का रीति- जहां कोई औद्योगिक विवाद माध्यस्थम् को निर्दिष्ट किया गया है तथा राज्य सरकार इस बात से संतुष्ट है कि मामले को भेजने वाले व्यक्ति प्रत्येक पक्ष के बहुमत का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो यह उन नियोक्ताओं एवं कामगारों की सूचना के लिए जो इस माध्यस्थम् करार के पक्षकार नहीं है परन्तु विवाद से संबंधित है, इस निर्मित में सरकारी राजपत्र में तथा इलेक्ट्रोनिक ढंग से एक अधिसूचना प्रकाशित करेगी ताकि वे इस प्रयोजनार्थ नियुक्त माध्यस्थ अथवा माध्यस्थां के समक्ष अपने मामले को रख सकें।
32. जहां धारा 42 की उप - धारा (5) के अधीन कोई व्यवसाय संघ नहीं है, वहां कामगारों के प्रतिनिधियों को चुनने का रीति - जहां कोई श्रमिक संघ नहीं है, वहां धारा 42 की उप - धारा (5) के परन्तुक के खण्ड ( ग) के अनुसरण में आर्बीट्रटर्स के समक्ष उनका मामला प्रस्तुत करने के लिए कामगारों के प्रतिनिधि का चयन संबंधित कामगारों के बहुमत द्वारा प्ररूप- अठारह में पारित प्रस्ताव द्वारा किया जाऐगा जिसमें उन्हें मामले के प्रतिनिधित्व के लिए प्राधिकृत किया जाएगा । ऐसे कामगार प्रतिनिधियों के क्रियाकलापों द्वारा बाध्य होंगे जिन्हें मध्यस्थ या मध्यस्थों, जैसा भी मामला हो, के समक्ष प्रतिनिधित्व करने के लिए प्राधिकृत किया गया है। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
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अध्याय सात
औद्योगिक विवादों के निपटान हेतु तंत्र
33. धारा 44 की उप- धारा (9) के अधीन रिक्ति को भरने की रीति तथा धारा 44 की उप- धारा (4) एवं (5) के अधीन औद्योगिक न्यायाधिकरण के न्यायिक सदस्य के चयन की प्रक्रिया, वेतन एवं भत्ते तथा अन्य निबंधन एवं शर्तें- इन नियमों में इसके पश्चात् औद्योगिक न्यायाधिकरण के रूप में निर्दिष्ट है। (1 ) औद्योगिक न्यायाधिकरण के न्यायिक सदस्य ( इस अध्याय में इसके पश्चात् न्यायिक सदस्य के रूप में निर्दिष्ट हैं) की नियुक्ति के लिए अर्हता धारा 44 की उप- धारा (4) में यथाउपबंधित होगी।
(2) उप -नियम (3 ) में विनिर्दिष्ट न्यायिक सदस्य की नियुक्ति, खोज-सह-चयन समिति ( एससीएससी) द्वारा सिफारिश किये जाने पर राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।
(3) खोज-सह-चयन समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल होंगे , अर्थात्: -
(एक) के मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन; अध्यक्ष और
(दो) प्रमुख सचिव या सचिव, मध्यप्रदेश शासन , श्रम विभाग- सदस्य,
(तीन) प्रमुख सचिव या सचिव, मध्यप्रदेश शासन , विधि विभाग- सदस्य,
(चार) प्रमुख सचिव या सचिव , मध्यप्रदेश शासन , उद्योग विभाग- सदस्य.
(4) खोज-सह- चयन समिति ( एससीएससी) अपनी सिफारिश करने के लिए प्रक्रिया का निर्धारण करेगी और योग्यता, उपयुक्तता, गत निष्पादन का रिकार्ड, सत्यनिष्ठा के साथ- साथ औद्योगिक न्यायाधिकरण की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए न्यायनिर्णयन अनुभव को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक पद पर नियुक्ति हेतु दो अथवा तीन व्यक्तियों, जो यह उचित समझे , के एक पैनल की सिफारिश करें ।
(5) किसी न्यायिक सदस्य की नियुक्ति को केवल रिक्ति अथवा खोज- सह- चयन समिति में किसी सदस्य की अनुपस्थिति के कारण अवैध घोषित नहीं किया जाएगा।
(6) एक न्यायिक सदस्य कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से चार वर्ष की अवधि अथवा पैसंठ वर्ष की आयु , जो पहले हो, तक अपने पद पर बना रहेगा।
(7) न्यायिक सदस्य के पद पर आकास्मिक रिक्ति होने के मामलें में , राज्य सरकार किसी अन्य राज्य औद्योगिक न्यायाधिकरण के न्यायिक सदस्य को वहां न्यायिक सदस्य के रूप में कार्य करने के लिए नियुक्त करेगी।
(8) (क) एक न्यायिक सदस्य को प्रतिमाह 2,25,000/- रुपये वेतन का भुगतान किया जाएगा तथा वह राज्य सरकार में समूह ' क' पद पर समान वेतन वाले किसी अधिकारी को देय भत्ते भी प्राप्त करने का पात्र होगा।
(ख) सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायधीश की नियुक्ति के मामले में, उसके वेतन में से उसके द्वारा प्राप्त की जा रही पेंशन की राशि घटा दी जाएगी।
(9) (क) सेवारत उच्च न्यायालय के न्यायधीशों के मामले में, औद्योगिक न्यायाधीकरण में दी गई सेवा की गणना जिस सेवा से संबंधित हैं, उसके वर्तमान नियमों के अनुसार प्राप्त की जाने वाली पेंशन के लिए की जाएगी तथा वे सामान्य भविष्य निधि (केन्द्रीय सेवा) नियम, के उपबंधों तथा उन पर लागू पेंशन के नियमों द्वारा शासित होंगे। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(19) (ख ) सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायधीशों के मामले में, वे उनके पुनर्नियोजन की अवधि के दौरान नियमों के अनुसार अंशदायी भविष्य निधि योजना में शामिल होने के पात्र होंगे तथा राज्य औद्योगिक न्यायाधीकरण में दी गई सेवा के लिए अतिरिक्त उपदान का भुगतान नहीं किया जाएगा ।
( 10) एक न्यायिक सदस्य सरकार में समूह ' क' के पद पर समान वेतन वाले किसी अधिकारी को देय दर से मकान किराए भत्ते अथवा समुचित शासकीय आवास का पात्र होना।
(11 ) (क) सेवारत उच्च न्यायालय के न्यायधीशों के मामले में , सेवारत उच्च न्यायालय के न्यायधीशों को देय अवकाश इन्हें भी देय होगा।
(ख) सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायधीशों के मामले में , राज्य सरकार में समूह 'क' के पद पर समान वेतन वाले किसी अधिकारी को देय अवकाश इनको भी देय होगा।
(12) (क) न्यायिक सदस्य के लिए अवकाश स्वीकृति प्राधिकारी राज्य सरकार होगी।
(ख) न्यायिक सदस्य के विदेशी दौरे के लिए स्वीकृति प्राधिकारी राज्य सरकार होगी।
(13) राज्य सरकार में समूह 'क' के पद पर समान वेतन वाले किसी अधिकारी को देय राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना सुविधाएं इन पर भी लागू होंगी।
(14) (क) किसी न्यायिक सदस्य को यात्रा भत्ता राज्य सरकार में समूह 'क' के पद पर समान वेतन वाले किसी अधिकारी की पात्रता के अनुसार देय होगा।
(ख ) सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायधीशों के मामले में, राज्य औद्योगिक न्यायाधिकरण में कार्यभार ग्रहण करने के लिए अपने होम टाउन से मुख्यालय तथा कार्य की समाप्ति पर मुख्यालय से होम टाउन के लिए स्थानांतरण यात्रा भत्ता भी राज्य सरकार में समूह ' क' के पद पर समान वेतन वाले किसी अधिकारी की पात्रता के अनुसार देय होगा ।
(15) एक न्यायिक सदस्य राज्य सरकार में समूह 'क' के पद पर समान वेतन वाले किसी अधिकारी को देय छुट्टी यात्रा रियायत का भी पात्र होगा।
(16) एक न्यायिक सदस्य राज्य सरकार में समूह 'क' के पद पर समान वेतन वाले किसी अधिकारी को देय परिवहन भत्ते का भी पात्र होगा ।
( 17) किसी भी व्यक्ति को न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्त नहीं किया जाएगा जब तक कि उसे इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किसी प्राधिकारी द्वारा मेडिकली फिट घोषित न किया जाए।
(18) (क) यदि किसी न्यायिक सदस्य पर अभद्रता का निश्चित आरोप अथवा इस पद पर कार्य करने की अक्षमता के संबंध में कोई लिखित तथा सत्यापन योग्य शिकायत राज्य सरकार को प्राप्त होती है, तो राज्य सरकार ऐसी शिकायत की प्राथमिक जांच करेगी।
(ख) यदि प्राथमिक जांच करने पर, राज्य सरकार का मत है कि किसी न्यायिक सदस्य द्वारा अभद्रता अथवा अक्षमता की सत्यता की जांच करने के लिए तर्कसंगत आधार हैं, तो यह जांच करने के लिए मामले को खोज- सह - चयन समिति को संदर्भित करेगी।
(ग) खोज-सह-चयन समिति इस जांच को छः माह के समय अथवा राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट अतिरिक्त समय में पूरा करेगी।
(घ) जांच की समाप्ति के पश्चात, खोज- सह - चयन समति अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को देगी जिसमें प्रत्येक आरोप पर अलग- अलग तथा पूर्ण मामले में, जो यह उचित समझे, परिणामों, कारणों का अपनी टिप्पणियों के साथ उल्लेख होगा। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
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(ड. ) खोज- सह-चयन समति सिविल प्रक्रिया संहिता , 1908 ( 1908 का 5) द्वारा निर्धारित प्रक्रिया से बाध्य नहीं होगी परन्तु प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से निर्देशित होगी तथा अपनी जांच की तारीख , स्थान तथा समय निर्धारित करने सहित अपनी स्वयं की प्रक्रिया को विनियमित करने कीशक्ति होगी।
( 19) एक न्यायिक सदस्य किसी भी समय राज्य सरकार को संबोधित स्वयं लिखित नोटिस देकर अपने पद से त्यागपत्र दे सकता है:
परन्तु वह न्यायिक सदस्य , जब तक कि उसे राज्य सरकार द्वारा उसे अपना पद पहले त्यागने के लिए अनुमति न हो, ऐसे नोटिस की प्राप्ति की तारीख से तीन महीने की समाप्ति तक अथवा उस पद पर उसके उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त व्यक्ति द्वारा कार्यभार ग्रहण करने अथवा उसके कार्यकाल की समाप्ति तक, जो भी पहले हो, अपने पद पर बना रहेगा।
(20) (अ) राज्य सरकार, खोज- सह- चयन समिति की सिफारिश पर किसी न्यायिक सदस्य को अपने पद से हटा देगी, जो -
(क) दिवालिया घोषित किया गया हो; अथवा
(ख) किसी अपराध से दोषसिद्ध किया गया हो जिसमें नैतिक अघमता शामिल हो; अथवा
(ग ) न्यायिक सदस्य के रूप में कार्य करने के लिए शारीरिक अथवा मानसिक रूप से अक्षम हो गया हो; अथवा
(घ) ऐसा वित्तीय एवं अन्य लाभ प्राप्त किया हो जिससे उसके न्यायिक सदस्य के रूप में उसके कार्य की निष्पक्षता प्रभावित होने की संभावना हो; अथवा
(ड. )अपने पद का इस प्रकार से दुरूपयोग किया हो कि उसका अपने पद पर बना रहना लोक हित में न हो।
परन्तु जब किसी न्यायिक सदस्य को खंड (ख) से (ड. ) में विनिर्दिष्ट किसी आधार पर अपने पद से हटाया जाना प्रस्तावित हो, तो उसे उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों के बारे में सूचित किया जाए तथा उन आरोपों के संबंध में उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
(21 ) न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्त प्रत्येक व्यक्ति अपने पद पर आसीन होने से पहले, पद और गोपनीयता की शपथ लेगा और इन नियमों से संलग्न प्ररूप -बीस पर हस्ताक्षर करेगा।
(22) न्यायिक सदस्य की सेवाओं की निबंधन और शर्तों से संबंधित मामला जिसके संबंध में इन नियमों में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किए गए हैं, राज्य सरकार को औद्योगिक न्यायाधिकरण द्वारा उसके निर्णय हेतु भेजा जाएगा , तथा राज्य सरकार के निर्णय बाध्यकारी होगा।
(23) राज्य सरकार को लिखित में अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से किसी व्यक्ति श्रेणी या वर्ग के संबंध में इन नियमों में से किसी के प्रावधान में ढील देने की शक्ति प्राप्त होगी।
34. धारा 44 की उप- धारा ( 9) के अंतर्गत रिक्ति भरने की पद्धति और धारा 44 की उप - धारा (4) एवं (5) के अंतर्गत औद्योगिक न्यायाधिकरण के न्यायिक सदस्य के चयन, वेतन और भत्ते एवं अन्य निबंधन और शर्तों हेतु कार्य प्रक्रिया -
(1) राज्य औद्योगिक न्यायाधिकरण के न्यायिक सदस्य की नियुक्ति हेतु योग्यता (इसके बाद इस अध्याय में न्यायिक सदस्य के रूप में संदर्भित) धारा 44 की उप- धारा (4) में दिए अनुसार होगी । (2) न्यायिक सदस्य की नियुक्ति इस नियम के उप- नियम (3 ) में विनिर्दिष्ट खोज- सह -चयन समिति की सिफारिश पर राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। 426(21)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
(3) खोज- सह- चयन समिति में निम्नलिखित सदस्य सम्मिलित होंगे, अर्थात्ः -
(एक) मध्यप्रदेश सरकार के मुख्य सचिवः अध्यक्ष; और
(दो) प्रमुख सचिव या सचिव, मध्यप्रदेश शासन , श्रम विभाग- सदस्य,
(तीन) प्रमुख सचिव या सचिव , मध्यप्रदेश शासन , सामान्य प्रशासन विभाग – सदस्य,
(चार) प्रमुख सचिव या सचिव, मध्यप्रदेश शासन , उद्योग विभाग- सदस्य.
(4) खोज- सह-चयन समिति ( एससीएससी) अपनी सिफारिश देने की कार्यप्रक्रिया का निर्धारण करेगी, और राज्य औद्योगिक न्यायाधिकरण की अपेक्षा को ध्यान में रखते हुए अर्हता , उपयुक्तता, विगत कार्य- प्रदर्शन के रिकॉर्ड, सत्यनिष्ठा के साथ- साथ अनुभव पर भी विचार करने के बाद उक्त पद पर नियुक्ति हेतु उपयुक्त लगने पर दो या तीन सदस्यों के पैनल की सिफारिश करेगी।
(5) खोज-सह- चयन समिति में एक रिक्ति या किसी सदस्य की अनुपस्थिति के कारण मात्र से न्यायिक सदस्य की किसी नियुक्ति को अमान्य घोषित नहीं किया जाएगा।
(6) न्यायिक सदस्य अपना पदभारग्रहण करने के दिनांक से चार वर्ष की पदावधि के लिए या पैसंठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक, जो भी पूर्वतर हो, अपना पद धारण करेगा ।
(7) न्यायिक सदस्य के कार्यालय में आकस्मिक रिक्ति के मामले में, राज्य सरकार न्यायिक सदस्य के रूप में कर्तव्य पूरा करने के लिए किसी अन्य औद्योगिक न्यायाधिकरण के न्यायिक सदस्य को नियुक्त करेगी।
(8) न्यायिक सदस्य को रू. 2,25,000/- प्रतिमाह वेतन का भुगतान किया जाएगा तथा वह समान वेतन प्राप्त करने वाले राज्य सरकार के समूह ' क' पद पर पदस्थ किसी अधिकारी के लिए यथा स्वीकार्य भत्ते आहरित करने के हकदार होंगे। सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी के मामले में , उनके वेतन में उनके द्वारा आहरित पेंशन की कुल राशि द्वारा कटौती की जाएगी।
(9) (क) सेवारत सरकारी अधिकारी के मामले में, राज्य औद्योगिक न्यायाधिकरण में की गई सेवा की गणना उनकी सेवा से संबंधित विद्यमान नियमों के अनुसार आहरित की जाने वाली पेंशन के लिए की जाएगी तथा यह सामान्य भविष्य निधि (केन्द्रीय सेवा) नियम, 1960 द्वारा शासित होगी।
(ख) सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों के मामले में, वे अपने पुनर्नियोजन की अवधि के दौरान विद्यमान नियमों के अनुसार अंशदायी भविष्य निधि योजना में शामिल होने के हकदार होंगे । राज्य औद्योगिक न्यायाधीकरणों में न्यायिक न्यायाधिकरण द्वारा की गई सेवा के लिए अतिरिक्त उपदान स्वीकार्य नहीं होगा।
(10) न्यायिक सदस्य समान वेतन वाले राज्य सरकार के समूह ' क' पद पर आसीन किसी अधिकारी को यथा स्वीकार्य दर पर मकान किराया भत्ते अथवा समुचित शासकीय आवास का पात्र होगा।
(11 ) (क) सेवारत सरकारी अधिकारी के मामले में , छुट्टी संबंधित अधिकारी की सेवा के विद्यमान नियमों के अनुसार स्वीकार्य होगी।
(ख) सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों के मामले में, छुट्टी समान वेतन पाने वाले समूह ' क ' पद के राज्य सरकार के किसी अधिकारी को यथा स्वीकार्य अनुसार होगी;
(12) (क) राज्य सरकार, न्यायिक सदस्य के लिए छुट्टी स्वीकृत करने वाली प्राधिकारी होगी ।
(ख) राज्य सरकार न्यायिक सदस्य की विदेश यात्रा को स्वीकृत करने वाली प्राधिकारी होगी। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
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(13 ) यथा स्वीकार्य राज्य सरकारी स्वास्थ्य योजना सुविधाएं समान वेतन पाने वाले राज्य सरकार के समूह 'क' पद पर आसीन राज्य सरकार के अधिकारी को लागू होंगी।
( 14) (क) न्यायिक सदस्य को यात्रा भत्ता, समान वेतन पाने वाले राज्य सरकार के समूह 'क' पद पर आसीन राज्य सरकार के किसी अधिकारी की पात्रता के अनुसार स्वीकार्य होगा।
(ख) सेवानिवृत्त शासकीय अधिकारी के मामले में, नियत कार्य की समाप्ति पर गृह नगर से मुख्यालय और इसके विपरीत राज्य औद्योगिक न्यायाधीकरण में कार्यग्रहण करने के लिए स्थानांतरण यात्रा भत्ता भी समान वेतन पाने वाले राज्य सरकार के समूह 'क' पद पर आसीन राज्य सरकार के किसी अधिकारी की पात्रता के अनुसार स्वीकार्य होगा ।
( 15) कोई न्यायिक सदस्य समान वेतन पाने वाले राज्य सरकार के समूह ' क ' पद पर आसीन राज्य सरकार के किसी अधिकारी को यथा स्वीकार्य छुट्टी यात्रा रियायत का पात्र होगा।
(16) कोई न्यायिक सदस्य समान वेतन पाने वाले राज्य सरकार के समूह ' क' पद पर आसीन राज्य सरकार के किसी अधिकारी को यथा स्वीकार्य परिवहन भत्ते का पात्र होगा ।
( 17 ) किसी व्यक्ति को न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्त नहीं किया जाएगा , जब तक कि उसे इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किसी प्राधिकारी द्वारा चिकित्सीय रूप से स्वस्थ घोषित न कर दियाजाए।
(18) (क) यदि राज्य सरकार द्वारा कोई लिखित और सत्यापन योग्य शिकायत प्राप्त की जाती है, जिसमें कथित तौर पर कदाचार या न्यायिक सदस्य के रूप में कार्य- निष्पादन करने की अक्षमता का कोई निश्चित आरोप लगाया गया हो, तो यह इस शिकायत की प्रारंभिक संवीक्षा करेगी।
(ख) यदि प्रारंभिक संवीक्षा पर , राज्य सरकार की यह राय है कि किसी न्यायिक सदस्य के किसी कदाचार या अक्षमता की सच्चाई की जांच करने के यथोचित आधार हैं, तो यह जांच कराने के लिए खोज- सह -चयन समिति को इसका हवाला देगी।
(ग) खोज- सह-चयन समिति छह माह के भीतर अथवा राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार आगे किसी अवधि के भीतर जांच पूरी करेगी।
(घ) जांच की समाप्ति के बाद, खोज- सह-चयन समिति समस्त प्रकरण पर अपने विवेकानुसार निष्कर्षो के साथ प्रत्येक आरोप पर अलग- अलग कारणों और अपने निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
(ङ) खोज- सह-चयन समिति व्यवहार प्रक्रिया संहिता, 1908 ( 1908 का 5 ) द्वारा निर्धारित कार्यप्रक्रिया द्वारा बाध्य नहीं होगी बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होगी तथा अपनी जांच की तारीख , स्थान और समय के निर्धारण सहित अपनी स्वयं की कार्यप्रक्रिया विनियमित करने की शक्ति होगी ।
( 19) कोई न्यायिक सदस्य राज्य सरकार को संबोधित इस आशय का अपना हस्तलिखित नोटिस देकर किसी भी समय अपने पद से त्याग -पत्र दे सकेगाः
परन्तु न्यायिक सदस्य, राज्य सरकार द्वारा करने शीघ्रतम अपना पद त्यागने की अनुमति न दी जाए , यह नोटिस मिलने की तारीख से तीन माह की समाप्ति तक या उसके पद पर उत्तराधिकारी के रूप में विधिवत नियुक्त व्यक्ति के उसके कार्यालय में प्रवेश करने तक अथवा उसका कार्यकाल समाप्त होने तक , जो भी पहले हो , पद पर बना रहेगा-
(20) राज्य सरकार, खोज-सह- चयन समिति की सिफारिश पर, किसी भी न्यायिक सदस्य को पद से हटा देगी, जो - 426(23)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
(क) दिवालिया घोषित कर दिया गया हो; या
(ख) किसी ऐसे अपराधं का सिद्धदोषी पाया गया हो जिसमें नैतिक अधमता अंत वलित हो; या (ग) ऐसे सदस्य के रूप में कार्य करने हेतु शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम हो गया हो; या (घ) ऐसा कोई वित्तीय या अन्य हित उपार्जित किया हो जिससे न्यायिक सदस्य के रूप में उसके कार्यों के प्रतिकूल रूप से प्रभावित होने की संभावना हो; या
(ङ) जनहित के प्रतिकूल पद पर बने रहने के लिए अपने पद का इस प्रकार दुरुपयोग किया होः परन्तु जहां किसी न्यायिक सदस्य को खण्ड (ख) से (ङ) में विनिर्दिष्ट किसी आधार पर हटाया जाना प्रस्तावित हो, तो उसे उसके विरुद्ध आरोपों की सूचना दी जाएगी तथा उन आरोपों के संबंध में सुनवाई का अवसर दिया जाएगा।
(21 ) न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्त प्रत्येक व्यक्ति अपने पद का पदमार ग्रहण करने के पूर्व इन नियमों में संलग्न प्ररूप - बीस में पद और गोपनीयता की शपथ लेगा और हस्ताक्षर करेगा।
(22) न्यायिक सदस्य की सेवाओं के निबंधन और शर्तों से संबंधित मामला जिसके संबंध में इन नियमों में कोई स्पष्ट उपबंध नहीं बनाए गए हैं, औद्योगिक न्यायाधिकरण द्वारा राज्य सरकार को इसके निर्णय हेतु निर्दिष्ट किया जाएगा, तथा इस पर राज्य सरकार का निर्णय बाध्यकारी होगा।
(23) राज्य सरकार को लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों किसी भी श्रेणी या वर्ग के व्यक्तियों के संबंध में इनमें से किन्हींनियमों के उपबंधों में छूट देने की शक्ति प्राप्त होगी।
35. उप- धारा (1 ) के अधीन सुलह कार्यवाही करने की पद्धति, उप- धारा (4) के अधीन पूर्ण रिपोर्ट, तथा धारा 53की उप- धारा (6) के अंतर्गत आवेदन तथा इस आवेदन पर निर्णय लेने की रीति ;-
(1 ) ( एक) जहां कोई औद्योगिक विवाद विद्यमान हो या आशंका हो या धारा 62 के अंतर्गत नोटिस दिया गया हो, तो सुलह अधिकारी, ऐसा आवेदन प्राप्त होने पर, आवेदन का परीक्षण करेगा तथा वह पाता है कि विवाद राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार से संबंधित है ।
(दो) नियोक्ता एवं कामगारों के प्रतिनिधि प्रथम सुलह बैठक् में विवाद से संबंधित विषय की उनकी जानकारी प्रस्तुत करेंगे;
(तीन) सुलह अधिकारी विवाद में सुलह के उददेश्य से समझौता कार्यवाही प्रारंभ करेगा एवं ऐसे सभी कार्य करेगा जिससे कि पक्षों के मध्य एक सुखद एवं न्यायपूर्ण निपटारा हो सके।
(2) यदि उप-नियम (1 ) में निर्दिष्ट सुलह की कार्यवाही में ऐसा कोई निपटारा नहीं होता है, तो सुलह अधिकारी सुलह कार्यवाही के समापन के सात दिवस की समयावधि में मध्यप्रदेश सरकार के श्रम विभाग के श्रम विभागीय पोर्टल पर प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगा और उक्त पोर्टल पर उपलब्ध करायेगा।
(3) उप- नियम (2) में निर्दिष्ट रिपोर्ट उक्त श्रम पोर्टल पर संबंधित पक्षकारों की सुगम पहुंच के भीतर होगी। (4) उप-नियम (2) में निर्दिष्ट रिपोर्ट में अन्य बातों के साथ- साथ यथास्थिति नियोजक, कामगार या श्रमिक संघ, के प्रस्तुतीकरण शामिल होंगे , तथा इसमें पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण निपटान कराने में सुलह अधिकारी द्वारा किए गए प्रयास , विवाद का सुलह करने में पक्षकारों के इन्कार के कारण तथा सुलह अधिकारी का निष्कर्ष भी शामिल होंगे।
(5) कोई विवाद जो सुलह कार्यवाही के दौरान निपटारा नई किए गए विवाद के संबंध में, इसके पश्चात, कोई भी संबंधित पक्षकार उप- नियम (2) के अंतर्गत रिपोर्ट की तारीख से नब्बे दिन के भीतर श्रम विभाग के. पोर्टल के माध्यम से या रजिस्टर्ड पोस्ट या स्पीड पोस्ट द्वारा न्यायाधिकरण के समक्ष प्ररूप- इक्कीस में आवेदन कर सकता है । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
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( 6) सुलह कार्यवाही के दौरान निपटारा न किए गए किसी भी औद्योगिक विवाद के की दशा में, किसी भी संबंधित पक्षकार द्वारा अधिनिर्णयन हेतु न्यायाधिकरण के समक्ष आवेदन किया जा सकता है । न्यायाधिकरण विवाद उठाने वाले पक्षकार को संबंधित दस्तावेजों , समर्थक दस्तावेजों की सूची और गवाहों सहित पूर्ण विवरण के साथ दावे की विवरणी आवेदन प्रस्तुत करने की तारीख से तीस दिन के भीतर फाईल कराने का निदेश देगा । ऐसी विवरणी की प्रतिलिपि विवाद में शामिल प्रत्येक विरोधी पक्षकार को इलेक्ट्रॉनिक या रजिस्टर्ड डाक या स्पीड पोस्ट द्वारा भेजी जाएगी ।
(7) यह पता लगाने के बाद कि दावे की विवरणी और अन्य संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां विवाद उठाने वाले पक्षकार द्वारा अन्य पक्षकार को प्रस्तुत कर दी गई हैं, न्यायाधिकरण शीघ्रातिशीघ्र और आवेदन की प्राप्ति की तारीख से एक माह के भीतर पहली सुनवाई नियत करेगा। विरोधी पक्षकार या पक्षकार समर्थक दस्तावेजों और इनकी सूची तथा गवाहों की सूची, यदि कोई हो, के साथ अपनी लिखित कथन पहली सुनवाई की तारीख से तीस दिन के भीतर दर्ज करेंगे तथा इसी के साथ- ही सेवा हेतु विरोधी पक्षकार या पक्षकारों को इसकी प्रतिलिपि अग्रेषित करेंगे।
(8) जहां न्यायाधिकरण पाता है कि विवाद उठाने वाले पक्षकार ने, इसके निर्देशों के बावजूद , दावे की विवरणी और अन्य दस्तावेजों की प्रतिलिपि विरोधी पक्षकार या पक्षकारों को अग्रेषित नहीं की, तो न्यायाधिकरण दावे की विवरणी और अन्य दस्तावेज समय पर फाईल नही कराने के पर्याप्त कारण पाए जाने पर पंद्रह दिन का विस्तार देते हुए संबंधित पक्षकार को निर्देश देगा कि वह विरोधी पक्षकार या पक्षकारों को विवरणी की प्रतिलिपि प्रस्तुत करें।
(9) साक्ष्य यथास्थिति या तो न्यायाधिकरण में रिकॉर्ड किया जाएगा अथवा शपथ- पत्र पर दर्ज कराया जाएगा लेकिन शपथ-पत्र के मामले में विरोधी पक्षकार को शपथ- पत्र दर्ज कराने वाले प्रत्येक प्रतिवादी से प्रति परीक्षा करने का अधिकार प्राप्त होगा । जहां प्रत्येक गवाह की मौखिक जांच की कार्यवाही की जाती है , वहां न्यायाधिकरण निपटारा किए जा रहे विषयवस्तु का ज्ञापन देगा। मौखिक साक्ष्य रिकॉर्ड करते समय , न्यायाधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता , 1908 ( 1908 का 5) की प्रथम अनुसूची के आदेश अठारह के नियम 5 में अधिकथित प्रक्रिया का पालन करेगा ।
(10) साक्ष्य के समापन पर, तर्क सुना जा सकता है तत्काल या तक के लिए तारीख नियत की जाएगी , जो साक्ष्य के समापन से पंद्रह दिन की अवधि से अधिक नहीं होगी।
( 11 ) अधिकरण, सामान्यतः एक समय में एक सप्ताह से अधिक की अवधि के स्थगन की मंजूरी नही देगा, लेकिन किसी भी मामले में विवाद के पक्षकारों के दृष्टांत पर कुल तीन स्थगनों से अधिक स्थगन की मंजूरी नहीं देगाः
परन्तु अधिकरंण, लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों के लिए, सामान्यतः एक समय में एक सप्ताह से अधिक की अवधि के स्थगन की मंजूरी देगा, लेकिन किसी भी मामले में विवाद के पक्षकारों के दृष्टांत पर कुल तीन स्थगनों से अधिक स्थगन की मंजूरी नहीं देगा।
(12) कोई पक्षकार किसी प्रक्रमण पर उपस्थित होने में चूक करने या असफल रहने की दशा में न्यायाधिकरण प्रकरण पर एक- पक्षीय कार्यवाही कर सकता है, तथा चूककर्ता पक्षकार की अनुपस्थिति में आवेदन पर निर्णय दे सकता है:
परन्तु अधिकरण निर्णय देने से पहले प्रस्तुत किए गए किसी भी पक्षकार के आवेदन पर, एक पक्षीय आदेश रद्द कर सकता है यदि वह संतुष्ट हो कि पक्षकार की अनुपस्थिति न्यायोचित आधार पर थी, तथा विवादित मामले पर निर्णय करने के लिए आगे की कार्यवाही करेगा।
( 13) अधिकरण अपना निर्णय घोषणा से एक माह की अवधि में इलेक्ट्रॉनिक या अन्य रूप में संबंधित पक्षकारों और समुचित सरकार के सुलह अधिकारी को संसूचित करेगा। 426(25)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
(14) अधिकरण मामले पर निर्णय करने के लिए सारवान प्रतीत होता है किसी भी व्यक्ति के साक्ष्य हेतु समन भेज सकता है और परीक्षण कर सकता है तथा इसे दण्डप्रक्रिया संहिता , 1973 (1974 का 1 ) की धारा 345, 346 और 348 के अर्थ में भीतर सिविल न्यायालय माना जाएगा।
(15) जहां न्यायाधिकरण के समक्ष कार्यवाही के संबंध में धारा 49 की उप - धारा ( 5) के अंतर्गत इसे सलाह देने के लिए असेसर की नियुक्ति की जाती है, वहां न्यायाधिकरण इन असेसरो की सलाह लेगा, लेकिन यह सलाह इन न्यायाधिकरणों पर बाध्यकारी नहीं होगी।
(16) किसी अधिनिर्णय में शामिल पक्षकार, जो अधिनिर्णय या अन्य दस्तावेज की प्रतिलिपि प्राप्त करना चाहता है, वह न्यायाधिकरण में इलेक्ट्रॉनिक रूप में शुल्क निम्नलिखित रीति में जमा करने के पश्चात निर्णय या अन्य दस्तावेज की प्रतिलिपि प्राप्त कर सकता है , अर्थात्: -
(क) अधिकरण राष्ट्रीय अधिकरण की किसी भी कार्यवाही में किसी अधिनिर्णय या दस्तावेज की प्रतिलिपि प्राप्त करने हेतु दो रुपये प्रति पृष्ठ की दर या जैसा कि समय - समय पर राज्य शासन द्वारा अधिसूचना के माध्यम से तय किया जाए , शुल्क।
( ख ) ऐसे किसी अधिनिर्णय या आदेश या दस्तावेज की प्रतिलिपि को प्रमाणित करने के लिए, दो रुपये प्रति पृष्ठ या जैसा कि समय - समय पर समुचित सरकार द्वारा अधिसूचना के माध्यम से तय किया जाए , का शुल्क देय होगा।
(ग ) प्रतिलिपिकरण और प्रमाणन शुल्क इलेक्ट्रॉनिक रूप में देय होगा ।
(घ) जहां पक्षकार ऐसे किसी अधिनिर्णय या दस्तावेज की प्रतिलिपि तत्काल देने का आवेदन करता है, वहां इन नियम के अंतर्गत वसूली योग्य शुल्क के आधे के समतुल्य अतिरिक्त शुल्क देय होगा।
(17) न्यायाधिकरण के समक्ष उपस्थित होने वाले पक्षकारों के प्रतिनिधियों को जांच, जिरह तथा साक्ष्य के लिए बुलाए जाने पर जाने पर न्यायाधिकरण को संबोधित करने का अधिकार प्राप्त होगा।
(18) न्यायाधिकरण के समक्ष कार्यवाही खुले न्यायालय में की जाएगीः
परन्तु न्यायाधिकरण किसी भी कार्यवाही को अपने समक्ष वीडियो कांफ्रेंसिंग के द्वारा आयोजित करने का निर्देश दे सकता है ।
परन्तु यह कि न्यायाधिकरण किसी भी चरण में निर्देश दे सकता है कि किसी भी गवाह की जांच की जाएगी या इसकी कार्यवाही कैमरे में की जाएगी।
अध्याय आठ
हड़ताल और तालाबंदियां
36. उन व्यक्तियों की संख्या जिनके द्वारा हड़ताल का नोटिस दिया जाएगा, वह व्यक्ति या वे व्यक्ति जिनको यह नोटिस दिया जाएगा तथा धारा 62 की उप - धारा (4) के अंतर्गत यह नोटिस देने की रीति -
धारा 62 की उप-धारा ( 1 ) में निर्दिष्ट हड़ताल का नोटिस किसी औद्योगिक स्थापना के नियोजक को प्ररूप - बाईस में दिया जाएगा जो इस औद्योगिक स्थापना के ऐसे पंजीकृत व्यवसाय संघ के सचिव और पांच चयनित प्रतिनिधियों द्वारा सम्यक रूप से हस्ताक्षरित किया जाएगा जो कि या तो संबंधित औद्योगिक स्थापना हेतु वार्ताकारी संघ होगा या वार्ताकारी परिषद का सदस्य संघ होगा । इसकी प्रतिलिपि इलेक्ट्रॉनिक रूप में या अन्यथा संबंधित सुलह अधिकारी, श्रमायुक्त और राज्य सरकार को पृष्ठांकित की जाएगी।
37. उप- धारा (5) के अंतर्गत तालाबंदी का नोटिस देने की रीति तथा धारा 62 की उप- धारा (6) के अंतर्गत प्राधिकार- मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
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(1 ) धारा 62 की उप - धारा (2) में संदर्भित तालाबंदी की सूचना किसी औद्योगिक स्थापना के नियोजक द्वारा प्ररूप - तेईस में इसकी प्रतिलिपि इलेक्ट्रॉनिक रूप में संबंधित सुलह अधिकारी, श्रमायुक्त और राज्य सरकार को पृष्ठांकित करते हुए प्रत्येक पंजीकृत व्यवसाय संघ के सचिव को दी जाएगी । यह सूचना नियोजक द्वारा स्पष्ट रूप से औद्योगिक स्थापना के मुख्य प्रवेश द्वारा पर लगाए गए नोटिस बोर्ड पर या इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड पर प्रदर्शित की जाएगी।
(2) यदि किसी औद्योगिक स्थापना का नियोजक स्वयं द्वारा नियोजित किसी व्यक्ति से धारा 62 की उप- धारा ( 1 ) में निर्दिष्ट हड़ताल की सूचना प्राप्त करता है , तो वह इस सूचना की प्राप्ति की तारीख से पांच दिन के भीतर इसकी सूचना की जानकारी इलेक्ट्रॉनिक या अन्य रूप में संबंधित सुलह अधिकारी और श्रमायुक्त को देगा। (3) यदि नियोजक उसके द्वारा नियोजित किसी व्यक्ति को तालाबंदी की सूचना देता है , तो वह इस सूचना की प्राप्ति की तारीख से पांच दिन के भीतर इसकी सूचना इलेक्ट्रॉनिक या अन्य रूप में संबंधित सुलह अधिकारी और श्रमायुक्त को देगा।
अध्यायनौ
ले-ऑफ, छंटनी और बंदी
38. धारा 70 के खण्ड (ग) के अंतर्गत कर्मकार की छंटनी से पहले नोटिस देने की रीति यदि नियोजक अपने औद्योगिक स्थापना में नियोजित किसी कामगार की छंटनी करने की वांछा करता है जो उसके अधीन एक वर्ष तक निरंतर सेवा दे चुका हो, तो यह नियोजक केन्द्रीय सरकार, और संबंधित श्रमायुक्त एवं राज्य सरकार को ई- मेल के माध्यम से या , पंजीकृत अथवा स्पीड पोस्ट द्वारा प्रारूप - चौबीस में छंटनी का नोटिस देगा।.
39. धारा 72 के अंतर्गत छंटनी किए गए कार्मकारों के पुनर्नियोजन हेतु अवसर देने की रीति-
जहां किसी औद्योगिक स्थापना में कोई रिक्ति उत्पन्न होती है तथा इस रिक्ति को भरने के प्रस्ताव से पूर्व के एक वर्ष के भीतर छंटनी किए गए इस औद्योगिक स्थापना के कामगार मौजूद हों , तो इस औद्योगिक स्थापना का नियोजक राज्य के नागरिक ऐसे छंटनी किए गए कामगारों को पंजीकृत डाक या स्पीड पोस्ट के द्वारा तथा ई- मेल के माध्यम से कम -से - कम 10 दिन पहले श्रम आयुक्त एवं सुलह अधिकारी को एक प्रति के साथ अवसर की प्रस्ताव करेगा । यदि ये कामगार नियोजन हेतु अपनी रजामंदी देते हैं, तो नियोजक इस रिक्ति को भरने में अन्य व्यक्तियों पर उन्हें वरीयता देगा।
40. धारा 74 की उप- धारा (1 ) के अधीन बंद करने के आशय के लिए नियोजक द्वारा नोटिस देने की रीति - यदि नियोजक किसी औद्योगिक स्थापना को बंद करने का आशय रखता है, तो वह इस बंदी का नोटिस राज्य सरकार को प्ररूप-पच्चीस में देगा तथा इसकी प्रतिलिपि संबंधित श्रमायुक्त एवं सुलह अधिकारी को ई -मेल या पंजीकृत डाक अथवा स्पीड पोस्ट द्वारा देगा ।
अध्याय दस
कतिपय स्थापना में कामबंदी, छंटनी और बंदी से संबंधित विशेष प्रावधान
41. धारा 78 की उप- धारा (2) के अधीन आशयित कामबंदी के लिए नियोजक द्वारा राज्य सरकार को आवेदन करने तथा कामगारों को इस आवेदन की प्रतिलिपि पेश करने की रीति धारा 78 की उप- धारा ( 1 ) के अंतर्गत नियोजक द्वारा प्ररूप- छब्बीस आशयित कामबंदी के कारणों का स्पष्ट रूप से उल्लेख करते हुए अनुमति का आवेदन राज्य शासन या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी को किया जाएगा तथा इस आवेदन की प्रतिलिपि संबंधित कामगार एवं सुलह अधिकारी को इलेक्ट्रॉनिक रूप में तथा पंजीकृत डाक या स्पीड पोस्ट द्वारा इसके साथ - ही - साथ भेजी जाएगी। यह नोटिस नियोजक द्वारा स्पष्ट रूप से औद्योगिक स्थापना के मुख्य प्रवेश द्वारा पर लगाए गए नोटिस बोर्ड पर या इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाएगा । 426(27)
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42. धारा 78 की उप -धारा (3 ) के अधीन कामबंदी जारी रखने के लिए राज्य सरकार की अनुमति हेतु आवेदन करने की रीति- नियोजक किसी औद्योगिक स्थापना के धारा 78 की उप - धारा (3) में विनिर्दिष्ट खान होने की दशा में जहां कामगारों ( बदली कामगार या दिहाड़ी आकस्मिक कामगारों के अलावा) को धारा 78 की उपधारा (1 ) के अधीन आग , बाढ़ या ज्वलनशील गैस या विस्फोट की अधिकता के कारणों से ले - ऑफ कर दिया गया हो, ऐसे ले-ऑफ के प्रारंभ की तारीख से तीस दिन के भीतर ले-ऑफ किए गए कामगारों की संख्या, औद्योगिक स्थापना में नियोजित कामगारों की कुल संख्या , ले-ऑफ की तारीख तथा इस ले- ऑफ को जारी रखने के कारण सूचित करते हुए; दिनों की संख्या का उल्लेख करते हुए ले-ऑफ जारी रखने की अनुमति हेतु राज्य सरकार या उसके द्वारा अधिकृत अधिकारी को इलेक्ट्रॉनिक या रजिस्टर्ड डाक या स्पीड पोस्ट द्वारा प्ररूप-छब्बीस में पंजीकृत या स्पीड पोस्ट द्वारा आवेदन करेगा एवं इसकी प्रति श्रमायुक्त एवं संबंधित सुलहकर्ता अधिकारी को पृष्ठांकित करेगा।
43. धारा 78 की उपधारा (7) के अधीन समीक्षा हेतु समय - सीमा- राज्य सरकार या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी या तो अपने प्रस्ताव पर या नियोक्ता या किसी भी कामगार द्वारा किए गए आवेदन पर ऐसा आदेश जारी करने की तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर धारा 78 की उप- धारा (4 ) के अधीन अनुमति देने या अनुमति देने से इनकार करने के अपने आदेश की समीक्षा कर सकती है ।
44. धारा 79 की उप- धारा (2) के अधीन कामगारों को आशयित छंटनी और ऐसे आवेदन की प्रतिलिपि देने की रीति तथा नियोक्ता द्वारा राज्य सरकार को आवेदन करने की रीति- धारा 79 की उप-धारा ( 1 ) में निर्दिष्ट अनुमति के लिए एक आवेदन राज्य सरकार या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी को नियोक्ता द्वारा प्ररूप - सत्ताईस में इलेक्ट्रॉनिक या अन्य रूप से दिया जाएगा जिसमें आशयित छंटनी के कारणों के बारे में स्पष्ट रूप से बताया जाएगा और ऐसे आवेदन की एक प्रति भी कामगारों को इलेक्ट्रॉनिक या पंजीकृत डाक या स्पीड पोस्टसे भेजी जाएगी । इस तरह के आवेदन को नियोक्ता द्वारा नोटिस बोर्ड या इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड पर औद्योगिक स्थापना के मुख्य द्वार पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।
45.धारा 79 की उप- धारा (6) के अंतर्गत समीक्षा की समय -सीमा- राज्य सरकार या उसके द्वारा प्रधिकृत कोई अधिकारी या तो अपने प्रस्ताव पर या नियोक्ता या किसी भी कामगार द्वारा किए गए आवेदन पर उस तिथि जब यह आदेश जारी किया गया से तीस दिनों की अवधि के भीतर धारा 79 की उप- धारा (3 ) के अधीन अनुमति देने या अनुमति देने से इनकार करने के अपने आदेश की समीक्षा कर सकती है ।
46. किसी औद्योगिक स्थापना को बंद करने के लिए नियोक्ता द्वारा राज्य सरकार को आवेदन करने की प्रणाली और धारा 80 की उप-धारा ( 1 ) के तहत कामगारों के प्रतिनिधियों को ऐसे आवेदन उपलब्ध कराने की प्रणाली- कोई नियोक्ता जो एक औद्योगिक स्थापना को बंद करने का विचार करता है, जिसके लिए संहिता का अध्याय दस लागू होता है , जिस दिन को बंद करने का आशय है , उससे कम से कम नब्बे दिन पूर्व राज्य सरकार को अनुमति के लिए इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्ररूप- अठाईस में आवेदन करेगा जिसमें स्पष्ट रूप से औद्योगिक स्थापना के बंद होने के कारणों को बताया जाएगा और साथ ही साथ इस तरह के आवेदन की एक प्रति कामगारों के प्रतिनिधियों एवं श्रमायुक्त तथा सुलहकर्ता अधिकारी को इलेक्ट्रॉनिक और पंजीकृत डाक या स्पीड पोस्ट द्वारा भेजी जाएगी।
47. धारा 80 की उप- धारा (5) के अंतर्गत समीक्षा की समय -सीमा- राज्य सरकार या तो अपने प्रस्ताव पर या नियोक्ता या किसी भी कामगार द्वारा किए गए आवेदन पर उस तिथि से तीस दिनों की अवधि के भीतर धारा 80 की उप- धारा (2 ) के तहत अनुमति देने या अनुमति देने से इनकार करने के अपने आदेश की समीक्षा कर सकती है, जिस दिन से ऐसे आदेश पारित किए गए हैं। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
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अध्याय ग्यारह
कामगार पुर्नकौशल निधि
48. धारा 83 की उप- धारा (3) के अंतर्गत निधि के उपयोग करने की प्रणाली प्रत्येक नियोक्ता जिसने इस संहिता के अंतर्गत किसी कामगार या कामगारों की छंटनी की है, उसे दस दिनों के भीतर, किसी कामगार या कामगारों की छंटनी के समय , राज्य सरकार द्वारा अनुरक्षित किए जाने वाले खाते ( खाते का नाम राज्य सरकार के श्रम विभाग की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा) में ऐसे छटनी किए गए कामगार या कामगारों के अंतिम आहरित वेतन के पंद्रह दिनों के बराबर राशि का अंतरित करेगा । जो निधि प्राप्त होती है, उसे नियोक्ता से निधि प्राप्त होने के पैंतालीस दिनों के भीतर राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक कामगार या कामगारों के खाते में इलेक्ट्रॉनिक रूप से अंतरित कर दिया जाएगा और कामगार ऐसी राशि का उपयोग अपने पुर्नकौशल के लिए करेगा। नियोक्ता प्रत्येक छंटनी किए गए कामगार के नाम से युक्त सूची भी प्रस्तुत करेगा , जो प्रत्येक कामगार के संबंध में पंद्रह दिनों के वेतन के बराबर राशि उनके बैंक खाते के विवरण के साथ अंतिम रूप से राज्य सरकार को उनके संबंधित खाते में राशि अंतरित करने में सक्षम करेगी। नियोक्ता प्रत्येक छटनी किए गए कामगारों के नाम से युक्त सूची भी राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा ताकि प्रत्येक कामगारों को उनके बैंक खाते का विवरण के संबंध में अंतिम आहरित पंद्रह दिनों की मजदूरी के बराबर राशि उनके संबंधित खाते में अंतरित किया जा सके ।
अध्याय बारह
अपराध और शास्ति
49.धारा 89 की उप- धारा ( 1 ) के अंतर्गत निर्धारित राजपत्रित अधिकारी द्वारा अपराधों के प्रशमन की प्रणाली और धारा 89 की उप - धारा (4) के अंतर्गत निर्धारित किसी अपराध की कम्पाउन्डिंग हेतु आवेदन करने की प्रणाली-
(1 ) धारा 89 की उपधारा ( 1 ) , के तहत अपराधों की कम्पाउन्डिंग के प्रयोजनार्थ राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अधिकारी ( जिसे इसके पश्चात कंपाउंडिंग अधिकारी के रूप में संदर्भित किया गया है) उन अपराधों में जिनमें अभियोजन स्थापित नहीं है, यदि कंपाउंडिंग अधिकारी का यह विचार है कि संहिता के तहत कोई भी अपराध जिसके लिए धारा 89 के अंतर्गत कंपाउंडिंग की अनुमति है, वह तीन भागों से मिलकर बने प्ररूप-उन्तीस में अभियुक्त को श्रम विभाग के पोर्टल के माध्यम से नोटिस भेजेगा। ऐसे फॉर्म के भाग -1 में , कंपाउंडिंग अधिकारी अन्य बातों के साथ-साथ अपराधी और उसके अन्य विवरणों के नाम को अंतर-निर्दिष्ट करेगा, अपराध का विवरण और जिस धारा में अपराध किया गया है, कंपाउंडिंग राशि को अपराध के संघटन हेतु भुगतान किया जाना चाहिए। यदि अपराध की कंपाउंडिंग नहीं हुई है तो फॉर्म का भाग-।। उन परिणामों को निर्दिष्ट करेगा जो कम्पाउन्डिंग न होने पर होंगे और फॉर्म के भाग- III में अभियुक्त द्वारा दायर किए जाने वाले आवेदन शामिल होंगे . यदि वह अपराध की कम्पाउन्डिंग करना चाहता है। प्रत्येक नोटिस में एक अनवरत अद्वितीय संख्या आसानी से पहचान के प्रयोजनार्थ होगी जिसमें अक्षर या संख्यात्मक और अन्य विवरण होंगे जैसे नोटिस भेजने वाला अधिकारी , वर्ष , स्थान , निरीक्शन का प्रकार ।
(2) जिन अभियुक्तों को उप-नियम ( 1 ) में निर्दिष्ट नोटिस दिया गया है , वे अपने द्वारा भरे गए फॉर्म के भाग III को इलेक्ट्रॉनिक अथवा अन्य किसी रूप से कंपाउंडिंग अधिकारी को भेज सकते हैं और कंपाउंडिंग राशि को नोटिस की प्राप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर नोटिस में कंपाउंडिंग अधिकारी द्वारा निर्दिष्ट खाते में, जमा कर सकता है। 426(29)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
(3) जहां अभियुक्त के विरुद्ध पहले से ही अभियोजन सक्षम न्यायालय में स्थापित किया गया है , वह न्यायालय में उसके और न्यायालय के विरुद्ध अपराध को कम्पाउन्डिंग करने के लिए आवेदन कर सकता है और न्यायालय, आवेदन पर विचार करने के बाद, धारा 89 के प्रावधानों के अनुसरण में कंपाउंडिंग अधिकारी द्वारा अपराध के निर्धारण की अनुमति दे सकता है।
(4) यदि अभियुक्त उप-नियम (2) की अपेक्षाओं का अनुपालन करता है, तो कंपाउंडिंग अधिकारी अभियुक्त द्वारा जमा की गई राशि के लिए अपराध को कम करेगा; और
(क) यदि अभियोजन के अपराध को कम कर दिया जाता है, तो अभियोजन के लिए कोई शिकायत अभियुक्त के विरुद्ध नहीं की जाएगी; तथा
( ख) यदि न्यायालय की अनुमति से उप- नियम (3 ) के तहत अभियोजन स्थापित होने की संस्था के बाद अपराध की कम्पाउन्डिंग की जाती है, इसके बाद, कंपाउंडिंग अधिकारी इस मामले को समाप्त मान लेगा जैसे कि कोई अभियोजन आरंभ नहीं किया गया था और खंड (क ) के अंतर्गत संघटन के अनुसरण में कार्रवाई करेगा और सक्षम न्यायालय को अपराध की संरचना को सूचित करेगा, जिसमें अभियोजन लंबित है और ऐसी सूचना प्राप्त होने के बाद , न्यायालय अभियुक्त को मुक्त कर देगा और अभियोजन को बंद कर देगा ।
(5) राज्य सरकार के निर्देश, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अध्यधीन, इस नियम के अंतर्गत कंपाउंडिंग अधिकारी इस कानून के तहत अपराध को कम करने हेतु शक्तियों का प्रयोग करेगा।
अध्याय तेरह
प्रकीर्ण
50. धारा 90 की उप - धारा (3) और उप- धारा (4) के अंतर्गत संरक्षित कामगार -
(1 ) किसी औद्योगिक स्थापना जिसपर यह संहिता लागू होती है, से जुड़े प्रत्येक ट्रेड यूनियन द्वारा प्रत्येक वर्ष 30 अप्रैल के पहले नियोक्ता को यूनियन के ऐसे अधिकारियों के नाम और पते सूचित करेगा जो उस स्थापना में नियोजित हैं और जिन्हें यूनियन की राय में " संरक्षित कामगार " के रूप में मान्यता दी जा सकती है। ऐसे किसी अधिकारी के पद धारण में किसी परिवर्तन की सूचना यूनियन द्वारा नियोक्ता को ऐसे परिवर्तन के 15 दिनों के भीतर सूचित की जाएगी।
(2) नियोक्ता धारा 90 की उप-धारा (3 ) और उप- धारा (4) के अध्यधीन ऐसे कामगारों को धारा 90 के प्रयोजनार्थ "संरक्षित कामगार" होने के लिए मान्यता देगा और उप- नियम (1 ) के अंतर्गत नाम और पते की प्राप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर , संरक्षित कामगारों के रूप में मान्यता प्राप्त कामगारों की सूची लिखित रूप में संघ को सूचित करेगा, जो ऐसे पत्राचार की तारीख से बारह महीने की अवधि के लिए मान्य होगा।
(3) जहां नियोक्ता को धारा (90) की उप -धारा ( 4) के अंतर्गत औद्योगिक स्थापना के लिए स्वीकार्य संरक्षित कामगारों की अधिकतम संख्या से अधिक संख्या में कुल नाम प्राप्त होते हैं, नियोक्ता द्वारा केवल कामगारों की अधिकतम संख्या तक ही संरक्षित कामगारों को मान्यता दी जाएगीः
परन्तु औद्योगिक स्थापना में एक से अधिक पंजीकृत ट्रेड यूनियन हैं, तो नियोक्ता द्वारा यूनियनों के बीच अधिकतम संख्या इतनी वितरित की जाएगी कि व्यक्तिगत यूनियनों में मान्यता प्राप्त संरक्षित कामगारों की संख्या व्यावहारिक रूप से यूनियनों की सदस्यता के आंकड़ों के समान एक दूसरे के अनुपात में होती है। नियोक्ता मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
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उस मामले में प्रत्येक संबंधित संघ के अध्यक्ष या सचिव को लिखित रूप में सूचित करेगा जो उसके लिए आवंटित संरक्षित कामगारों की संख्या है:
परन्तु यह कि यह कि इस उप - नियम के तहत एक संघ को आवंटित संरक्षित कामगारों की संख्या जहां संरक्षण चाहने वाले संघ के अधिकारियों की संख्या से कम हो जाती है, संघ उन अधिकारियों का चयन करने का हकदार होगा जिन्हें संरक्षित कामगार के रूप में मान्यता दी जानी है । ऐसे चयन संघ द्वारा किया जाएगा और इस संबंध में नियोक्ता के पत्र की प्राप्ति के पांच दिनों के भीतर नियोक्ता को सूचित किया जाएगा।
(4) जब इस नियम के अंतर्गत ' संरक्षित कामगारों' की पहचान से जुड़े किसी भी मामले में किसी नियोक्ता और किसी पंजीकृत ट्रेड यूनियन के बीच विवाद उत्पन्न होता है, तो विवाद को संबंधित सहायक श्रम आयुक्त को भेजा जाएगा, जिसपर उनका निर्णय अंतिम होगा।
51. धारा 91 के अंतर्गत असंतुष्ट कामगार द्वारा शिकायत करने की प्रणाली-
(एक) संहिता की धारा 91 के अंतर्गत प्रत्येक शिकायत इलेक्ट्रॉनिक और पंजीकृत डाक या स्पीड पोस्ट द्वारा 'प्ररूप- तीस द्वारा भेजी जायेगी और उसके साथ शिकायत में उल्लिखित विपरीत पक्षों की संख्या के अनुसार प्रतियां होनी चाहिए ।
(दो) उप -नियम ( 1 ) के अंतर्गत शिकायतकर्ता या सुलह अधिकारी, मध्यस्थ, अधिकरण , को संतुष्ट करने हेतु कामगार के प्राधिकृत प्रतिनिधि द्वारा जो मामले के तथ्यों से परिचित हो , प्रत्येक शिकायत सत्यापित की जाएगी।
52. धारा 94 की उप - धारा ( 1 ) के अंतर्गत किसी भी कार्यवाही में प्रतिनिधित्व करने के लिए कामगारों को प्राधिकृत करने की प्रणाली जहां कामगार किसी भी ट्रेड यूनियन का सदस्य नहीं है, तो, उद्योग में नियोजित किसी अन्य कामगार द्वारा या उसके साथ जुड़े किसी भी ट्रेड यूनियन के कार्यकारी या अन्य पदाधिकारी या सदस्य कामगार द्वारा , जो उद्योग में नियोजित हैं, ऐसे कामगार द्वारा किसी विवाद से संबंधित किसी कार्यवाही में उसका प्रतिनिधित्व करने के लिए प्ररूप - इक्तीस में प्राधिकृत किया जा सकता है जिसमें कामगार कोई पक्ष है ।
53. धारा 94 की उप- धारा (2) के अंतर्गत किसी कार्यवाही में प्रतिनिधित्व के लिए प्राधिकरण की प्रणाली- जहां नियोक्ता , नियोक्ताओं के किसी भी संघ का सदस्य नहीं है, वह प्ररूप - बत्तीस में नियोक्ताओं के किसी भी सम्बंधित संघ के एक अधिकारी या किसी अन्य नियोक्ता को, जो कि नियोक्ता से सम्बंधित उद्योग से हो, को संहिता के अंतर्गत प्रचलित किसी पक्ष के विवाद से संबंधित किसी कार्यवाही में उसका प्रतिनिधित्व करने के लिए प्राधिकृत कर सकता है ।
54. धारा 85 की उप- धारा के अंतर्गत जांच की प्रणाली-
(1 ) शिकायत- धारा 86 की उप - धाराओं (3) , (5 ) , ( 7 ) , ( 8 ) , ( 9 ) , ( 10 ) , ( 11 ) और ( 20 ) और धारा 89 की उप-धारा (7) के अंतर्गत किए गए अपराध की शिकायत मिलने पर उसको धारा 85 की उपधारा ( 1 ) के अंतर्गत राज्य सरकार के अवर सचिव या सहायक श्रम आयुक्त के पद से अन्यून अधिकारी ( बाद में जांच अधिकारी के रूप में संदर्भित ) द्वारा जांच की जाएगी ।
(2) नोटिस को जारी करना- यदि दायर की गई शिकायत को जांच अधिकारी द्वारा स्वीकार किया जाता है, तो वह व्यक्ति या व्यक्तियों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजे जाने वाले नोटिस के माध्यम से और श्रम विभाग के पोर्टल पर पोस्ट की जाने वाली एक प्रति के साथ सभी संबंधित दस्तावेजों और गवाहों , यदि कोई हो, के साथ 426 (31)
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एक निर्दिष्ट तिथि पर उनके समक्ष उपस्थित होने के लिए बुलाएगा और ऐसी निर्दिष्ट तिथि को शिकायतकर्ता को सूचित करेगा।
(3) यदि व्यक्ति या उसका प्रतिनिधि निर्दिष्ट तिथि पर उपस्थित होने में विफल रहता है, तो जांच अधिकारी शिकायत की सुनवाई करने और एकपक्षीय निर्णय लेने के लिए कार्रवाई कर सकता है।
(4) यदि शिकायतकर्ता लगातार दो तारीखों को जांच अधिकारी को किसी सूचना के बिना निर्दिष्ट तिथि पर उपस्थित होने में विफल रहता है, तो शिकायत को खारिज किया जा सकता है ।
परन्तु शिकायतकर्ता और विपरीत पक्ष द्वारा किए गए संयुक्त आवेदन पर तीन से अधिक स्थगन न दिए जाएं।
परन्तु यह कि जांच अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्ष या किसी भी पक्ष , जैसा भी मामला हो, को सुनने के लिए अपने विवेक पर अनुमति दे सकते हैं।
(5) प्राधिकार प्रदान करना- धारा 85 की उप- धारा (2) के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति की ओर से प्रकट होने का प्राधिकार एक प्रमाण पत्र या इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण पत्र, जैसा भी मामला हो, द्वारा दिया जाएगा जिसे सुनवाई अधिकारी को शिकायत की सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी को प्रस्तुत किया जाएगा और उसे अभिलेख का हिस्सा बनाया जाएगा ।
(6)प्रकट होने की अनुमति- कोई भी व्यक्ति जो शिकायतकर्ता की ओर से कार्यवाही में उपस्थित होने का विचार रखता है, वह जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होगा और अपनी उपस्थिति का कारण बताते हुए एक संक्षिप्त लिखित विवरण प्रस्तुत करेगा। जांच अधिकारी बयान पर एक आदेश रिकॉर्ड करेगा और इनकार करने के मामले में उसके कारण शामिल करेगा , और इसे रिकॉर्ड में शामिल करेगा ।
(7) दस्तावेजों की प्रस्तुति-शिकायत से संबंधित शिकायत या अन्य दस्तावेज जांच अधिकारी द्वारा निर्धारित घंटों के दौरान किसी भी समय जांच अधिकारी को स्वयं प्रस्तुत किए जा सकते हैं, या उसे इलेक्ट्रॉनिक रूप से या पंजीकृत डाक या स्पीड पोस्ट द्वारा भेजा जा सकता है ।
(8 ) जांच अधिकारी, प्रत्येक दस्तावेज के प्रस्तुतिकरण या प्राप्ति की तारीख का सत्यापन या सत्यापन किए जाने वाले कारण, या जैसा भी मामला हो, को सत्यापित करेगा। यदि दस्तावेज़ इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रस्तुत किए गए हैं, तो ऐसा कोई सत्यापन अपेक्षित नहीं होगा।
(9) शिकायत पर विचार करने से मना करना-
(एक) जांच अधिकारी धारा 85 की उप- धारा ( 1 ) के अंतर्गत प्रस्तुत की गई शिकायत पर विचार करने से मना कर सकता है यदि शिकायतकर्ता को सुनवाई का अवसर देने के बाद , जांच अधिकारी संतुष्ट है, तो कारणों के लिए लिखित में दर्ज किया जाना है कि-
(क) शिकायतकर्ता शिकायत प्रस्तुत करने का हकदार नहीं है; या
(ख) इस संहिता के प्रावधानों के अंतर्गत शिकायतकर्ता को परिसीमन द्वारा रोक दिया जाता है । (ग) शिकायतकर्ता धारा 85 की उपधारा (2 ) के तहत जांच अधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने में विफल रहता है ।
(दो) जांच अधिकारी शिकायत पर विचार करने से इनकार कर सकता है, जो अन्यथा अपूर्ण है। वह शिकायतकर्ता से दोषों को ठीक करने के लिए कह सकता है और यदि जांच अधिकारी को लगता है कि शिकायत को ठीक नहीं किया जा सकता है तो वह दोषों को दर्शाने वाली शिकायत वापस कर सकता है और यदि वह ऐसा करता है, तो दोषों को दर्शाते हुए उसे वापस कर देगा। दोषों को ठीक करने के बाद , यदि शिकायत को फिर से प्रस्तुत किया जाता है, तो अभ्यावेदन की तारीख को धारा 85 की उप-धारा (1 ) के प्रयोजनार्थ प्रस्तुति की तारीख माना जाएगा। 426(32)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
(10) कार्यवाहियों के अभिलेख- जांच अधिकारी सभी मामलों में विवरण सहित आदेश पारित करने के समय विवरण , अर्थात शिकायत की तारीख , शिकायतकर्ता का नाम और पता, विपरीत पक्ष या पक्षों का नाम और पता, किए गए अपराध का खंड- वार विवरण, विपरीत पक्ष की दलील , कारण के निष्कर्षों एवं परिणाम का संक्षिप्त विवरण और हस्ताक्षर, तिथि के साथ लगाए गए अर्थ- दंड का उल्लेख करेगा। (11 ) शक्तियों का प्रयोग- सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अन्तर्गत प्रदत्त सिविल न्यायालय की शक्तियों के प्रयोग में जांच अधिकारी को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की पहली अनुसूची के प्रासंगिक आदेशों द्वारा कार्य -प्रणाली के संबंध में उसके मूल - भाव को प्रभावित किए बिना, जैसा जांच अधिकारी आवश्यक समझे , उन्हे मामले को आत्मसात करने और ऐसे मामले से बचाने के लिए जहां वे इस संहिता या इन नियमों के व्यक्त प्रावधानों के विरुद्ध हैं, ऐसे बदलावों के साथ निर्देशित किया जाएगा।
(12) आदेश या निर्देशन कब किया जाना है- जांच अधिकारी मामले को सुनने के बाद इस प्रयोजनार्थ निर्धारित किए जाने वाले भविष्य की तारीख पर आदेश या निर्देशन का आदेश दे सकता है।
(13) दस्तावेजों का निरीक्षण- कोई व्यक्ति, जो या तो शिकायतकर्ता हो या विपरीत पक्ष का हो या उसका प्रतिनिधि या उप- धारा (3) के अंतर्गत दी गई अनुमति के अनुसार किसी व्यक्ति को किसी भी शिकायत या पूछताछ अधिकारी के साथ दायर किए गए किसी दस्तावेज़ को उस मामले में, जिसमें वह पक्षकार है, का निरीक्षण करने का अधिकार होगा। 426(33)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
प्ररूप-एक
(नियम 2 देखें)
(सुलह के दौरान नियोक्ता और उनके कामगारों के मध्य हुए समझौता/ या सुलह प्रक्रिया के अतिरिक्त किसी अन्य तरीके से हुए समाधान का ज्ञापन)
पक्षों का नामः
नियोक्ता का प्रतिनिधि
कामगार का प्रतिनिधि
मामले के संक्षिप्त विवरण
समझौते की शर्तें
पक्षों के हस्ताक्षर
साक्षीः
(1)
(2)
'सुलहकर्ता अधिकारी के हस्ताक्षर
यदि नियोक्ता और उसके कामगारों के मध्य निपटान हो जाता है या अन्यथा समझौते के दौरान होने वाली कार्यवाही के मामले में ज्ञापन की प्रति संबंधित श्रम आयुक्त को भेजी जाएगी। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(34)
प्ररूप-दो
(नियम 8 का उप-नियम (7) देखे)
अंकेक्षण का घोषणा पत्र
निम्न हस्ताक्षरकर्ता ने के पुस्तकों एवं लेखाओं को देखने एवं पूर्वगामी विवरणों के परीक्षण करने और उपलब्ध वाउचरों के आधार पर जांच करने पर, उचित वाउचरों के आधार पर सही पाने से उस पर हस्ताक्षर किये और विधि के अनुरूप दिए गए टिप्पणी के अध्यधीन, यदि कोई हो, जो कि संलग्न है, एवं यह भी प्रमाणित करता है कि सदस्यता पंजी और लेखा पुस्तकों को समुचित रूप से रखा है एवं सदस्यों ने अपने अंशदान , जो रू......... पैसे.. का भुगतान ने होता है , को कर दिया है, जो कि व्यावसायिक संघ की सामान्य नीति की लेखा में पूर्वगामी विवरणी में दर्शाया गया है, दिय गये टिप्पणी के अध्यधीन , यदि कोई हो, जो संलग्न है।
(1) अंकेक्षक
(2) अंकेक्षक
टिप्पणी: - प्रत्येक अंकेक्षक अपने हस्ताक्षर के नीचे यह स्पष्ट रूप से अंकित करेगा कि वह किस हैसियत से नियम 8 में संदर्भानुसार व्यवसायिक संघ के लेखाओं का अंकेक्षक करने हेतु अर्हित है। 426(35)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
प्ररूप-तीन
(नियम 9का उपनियम (1 ) देखें)
व्यावसायिक संघ के विघटन और नियमों में संशोधन की सूचना
व्यावसायिक संघ का नाम
पंजीयन क्रमांक
दिनांक
वर्ष
माह
प्रति,
रजिस्ट्रार , व्यावसायिक संघ
मध्यप्रदेश
एतद्वारा सूचना दी जाती है कि उपरोक्त उल्लिखित व्यावसायिक संघ नियमों के अनुसार आज दिनांक को विघटित होता है।
या
एतद् द्वारा सूचना दी जाती है कि अनुसूची । के तहत दिए गए ट्रेड यूनियन के निम्नलिखित नियमों को के नियमों के अनुसरण में संशोधित करने का प्रस्ताव है। 2020 का दिन .....
हम सम्यक् रूप से संघ के द्वारा इस हेतु अधिकृत किए गए हैं, कि उक्त सूचना को उनकी ओर से अग्रेषित करें , ऐसा अधिकार सामान्य सभा में प्रस्ताव पारित कर दिनांक प्रति संलग्न है। को दिया गया , जिसकी 1 ..
हस्ताक्षर
2 .
3 .
4.
5.
6.
7
8 ..
*यहां दिनांक लिखा जावे या यदि कोई प्रस्ताव पारित ना हो, यह उल्लिखित किया जावे कि किस अन्य रीति से यह अधिकार दिया गया। मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(36)
अनुसूची एक
नियम में संशोधन
कॉलम (1 ) और (2) में विस्तृत मामलों के लिए नियमों में संशोधन कॉलम (3 ) में दिए गए हैं: -
प्रस्तावित संशोधन (3)
मूल नियम (2)
मामला (1)
1. व्यवसायिक संघ का नाम
2. संघ का उद्देश्य जिसके लिए संघ की स्थापना की गई है ।
3. सभी प्रायोजन जिसके लिए संघ की सामान्य निधि लागू होगी
4. सदस्यों की सूची का रखा जाना
5. सदस्यों की सूची के पदाधिकारियों और सदस्यों द्वारा निरीक्षण हेतु सुविधा
6. सामान्य सदस्यों का प्रवेश
7. अवैतनिक एवं अस्थायी सदस्यों का प्रवेश
8. नियमों के द्वारा सदस्यों को आश्वस्त सुविधा संबंधी शर्ते
9. शर्ते जिसके अधीन जुर्माना या राजसात का अधिरोपण या फिरफार
10. तरीके जिसके द्वारा नियमों में संशोधन , परिवर्तन या विखण्डन किया जाएगा
11. तरीके जिसके द्वारा कार्यकारिणी के स्वरूप तथा संघ के अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति एवं निष्कासन होगा
12. निधि के सुरक्षा अभिरक्षण
आवेदक के हस्ताक्षर 426(37)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
प्ररूप-चार
(नियम 10का उप नियम ( 1 ) देखे)
व्यवसाय संघ के पंजीयन हेतु आवेदन
व्यवसाय संघ का नाम
पता
दिनांक
1. यह आवेदन ऐसे व्यक्तियों द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है जिनके नाम पाद पर हस्ताक्षरित हैं।
वह नाम जिसके अधीन यह प्रस्तावित है कि व्यवसाय संघ जिसकी ओर से यह आवेदन प्रस्तुत किया गया 2. है, पजीकृत किया जाना है , विनियम क्र.. में वर्णित है। दिनांक में संघ के नाम के प्रस्ताव के अनुमोदन की एक प्रति संलग्न है। की बैठक 3. संघ के मुख्यालय का पता , जिस पर सभी संदेश एवं सूचनाएं भेजी जा सकेगी, वह है।
4. संघ , दिनांक से अस्तित्व में आया ।
5. यह संघ , नियोक्ताओं का संघ/कर्मचारी जो ..उद्योग में या... .रोजगार/ या... .(संस्थान) और कुल ..सदस्य है ।
6. औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की धारा 8 के अंतर्गत आवश्यक जानकारियां , अनुसूची -1 में दी गई हैं। रीति एवं नियुक्ति/चयन ; संघ के पदाधिकारी के सम्बन्ध में कार्यवाही संलग्न है।
7. अनुसूची- IIमें दिया विवरण यह प्रावधानित करता है कि औद्योगिक संबंध संहिता , 2020 धारा 7 में दिए गए विषय वस्तु का विवरण नियमों के प्रावधानानुसार है। दिनांक की बैठक में पारित प्रस्ताव की एक प्रति जिसमें नियमों को अनुमोदित किया गया , संलग्न है।
8. (ऐसे संघों द्वारा , जिन्होंने अपना कार्यकाल आवेदन दिनांक से एक वर्ष पूर्ण नहीं कर लिय गया है, यह पद काट दिया जावे)
9. संघ के नियमों की दो प्रतियां इस आवेदन के साथ औद्योगिक संबंध संहिता , 2020 की धारा 6 के अधीन आवश्यक सात या सात से अधिक सदस्यों के नाम के साथ दी जा रही हैं।
10. पंजीयन दिनांक को संघ की सामान्य निधि लेखा में बचत राशि का विवरण ।
11. हम, संघ की ओर से आवेदन प्रस्तुत करने हेतु सम्यक् रूप से प्राधिकृत हैं, ऐसा प्राधिकार जो सुसंगत है। *
नाम
पता
व्यवसाय
हस्ताक्षर 1
2
3
4
* यहां पर यह उल्लिखित किया जावे कि आवेदन देने का प्राधिकार क्या व्यवसाय संघ के सामान्य सभा में पारित प्रस्ताव के द्वारा दिया गया है , यदि नहीं तो, किसी अन्य प्रकार से दिया गया। मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(38 )
प्रति,
रजिस्ट्रार, व्यवसाय संघ
मध्यप्रदेश , इन्दौर
अनुसूची -एक
अधिकारियों की सूची
व्यवसाय संघ का नाम
नाम
क्र. संघ में धारित पद
उम्र
पता
व्यवसाय
1
2
3
अन्य
अनुसूची -दो
नियमों के संदर्भ
विभिन्न विषय - वस्तुओं, जो कालम ( 1 ) में दी गई हैं , के लिए नियमों की संख्या का प्रावधान , कालम नंबर (2) में निम्न है-
मामला ( 1)
नियमों की संख्या (2)
1 . व्यावसायिक संघ का नाम
2. संघ का उद्देश्य जिसके लिए संघ की स्थापना की गई है।
3. सभी प्रायोजन जिसके लिए संघ की सामान्य निधि लागू होगी
4. सदस्यों की सूची का रखा जाना
15. सदस्यों की सूची की पदाधिकारियों और सदस्यों द्वारा निरीक्षण हेतु सुविधा
सामान्य सदस्यों का प्रवेश
6.
अवैतनिक एवं अस्थायी सदस्यों का प्रवेश
7.
8. नियमों के द्वारा सदस्यों को आश्वस्त सुविधा संबंधी शर्ते
9 . शर्ते जिसके अधीन जुर्माना या राजसात का अधिरोपण या फिरफार
10. तरीके जिसके द्वारा नियमों में संशोधन , परिवर्तन या विखण्डन किया जाएगा
11. तरीके जिसके द्वारा कार्यकारिणी के स्वरूप तथा संघ के अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति एवं निष्कासन किया गया
12. निधि के सुरक्षा अभिरक्षण
13 . लेखाओं का वार्षिक अंकेक्षण
14. सदस्य एवं अधिकारीगणों द्वारा संघ के लेखाओं के निरीक्षण हेतु सुविधा।
15. तरीके जिसके द्वारा संघ का विघटन किया जा सकेगा। 426(39)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
अनुसूची -तीन
इस प्रपत्र की प्रस्तुति की आवश्यकता नहीं होगी यदि संघ पंजीयन हेतु आवेदन दिए जाने के दिनांक से एक वर्ष पूर्व निर्मित हुआ है।
दिनांक
को देनदारियों एवं सम्पत्ति का विवरण
देनदारियां
रूपये . पैसे ...
सम्पत्ति
रूपये .. पैसे...
सामान्य निधि की राशि
नगदी
राजनैतिक निधि की राशि
खजान्ची के पास
उधार
मंत्रीके पास
..के पास
कर्ज को देय हो
बैंक में
अन्य देनदारियां (विशिष्टता हो)
बैंक में
निम्न सूची अनुसार प्रतिभूतियां
अदेय चंदा जो उधारी में देय
अचल सम्पत्तियां
सामान एवं फर्नीचर
अन्य सम्पत्तियां ( विवरणीत होवे)
कुल देनदारियां
कुल सम्पत्ति
प्रतिभूतियों की सूची
विवरण
अंकित मूल्य
बाजार मूल्य
लागत मूल्य
(1)
(2)
(3)
(4)
हस्ताक्षर 1
2
3
4 मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(40)
प्ररूप-पांच
(नियम 10 का उप नियम (2) देखें)
शपथ- पत्र का प्रारूप ( कोर्ट न्यायालय शुल्क स्टाम्प)
आत्मज श्री.
पता.
व्यवसाय ..
आयु..
सत्य प्रतिज्ञा के साथ लिख
.को..
देता हूं कि दिनांक..
क्षेत्र के.
व्यवसाय उद्योग के सेवा युक्तों की श्री..
सभा हुई थी जिसमें...
.(संघ का नाम) का निर्माण मैं. वर्ष के सभापतित्व में एक आम किया गया उसे व्यावसायिक संघ अधिनियम सन् 192६ के अन्तर्गत पंजीयन करने या पंजीयन निरस्त करने का निश्चय किया गया तथा इसके लिये दिनांक.. की आम सभा में निम्न व्यक्तियों को अधिकृत किया गया: -
क्र
उघोग में पद
नाम( पिता के नाम)
उघोग का नाम
आयु
1.
श्री
2.
श्री
3.
श्री
4.
श्री
5.
6.
श्री
7.
श्री
श्री
उपरोक्त समस्त अधिकृत व्यक्ति उनके नाम के सामने बतलाये पद पर तथा उद्योग में . उक्त दिनांक को कार्यरत थे आज भी कार्यरत है तथा संघ के सदस्य है ।
दिनांक.
दिनांक..
..की आम सभा में संघ का विधान स्वीकृत किया गया तथा .को कार्यकारिणी का निर्वाचन किया गया।
उपर्युक्त अधिकृत व्यक्तियों ने मेरे समक्ष पजीयन संबंधी पा पंजीयन निरस्त करने सम्बंधी आवेदन-पत्र पर हस्ताक्षर किये है । मेरी जानकारी के अनुसार आवेदन- पत्र में दी गई समस्त माहिती एवं संलग्न सदस्यता सूची सत्य है ।
आवेदक
मैं... ..शपथ पूर्वक घोषित करता हूँ कि उपरोक्त
कथन मेरी जानकारी से सत्य है और इस शपथ पत्र पर मैंने अपने हस्ताक्षर आज दिनांक को स्वेच्छा से किए है ।
आवेदक 426(41)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
प्ररूप-छह
(नियम 10का उप नियम (3) देखे)
(1 ) अधिकारियों की सूची-
व्यवसाय संघ का नाम
क्र. संघ में धारित पद
नाम
उम्र
पता
व्यवसाय
1
2
3
अन्य
(2) आवेदक/आवेदकों को प्राधिकृत किए जाने संबंधी पारित प्रस्ताव की प्रमाणित प्रति संलग्न करें।
प्ररूप-सात
व्यवसाय संघों की पंजी (नियम 10 का उप नियम (5) देखे)
निरस्तीकरण
कादिनांक
संघ का
कार्यालय का पता
पंजीयन दिनांक
समामेलन का दिनांक
नाम
सदस्यों की संख्या
वर्तमान पदाधिकारियों केनाम
विघटन का दिनांक
व्यवसाय संघ का नाम जिससे समामेलन हुआ
1 2
3
4
5
6
7
8
9
रिमार्क
अन्य कोई जानकारी
पदाधिकारियों केनाममें परिवर्तन का दिनांक
नियमों में बदलाव का दिनांक
10
11
12
13
रजिस्ट्रारके हस्ताक्षर
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(44)
प्ररूप-दस
(नियम 13 का उप नियम (3) और (4) देखे )
वार्ताकारी व्यावसायिक संघ के वार्ताकारी संघ या वार्ताकारी परिषद् के सदस्य घोषित करने हेतु आवेदन व्यवसाय संघ का नाम
दिनांक
पता के दिन. 20
प्रति,
रजिस्ट्रार , व्यावसायिक संघ,
मध्यप्रदेश,
महोदय ,
मैं यह उल्लिखित करना चाहता हूं कि कि उपरोक्त संघ को वार्ताकारी संघ/ वार्ताकारी परिषद के सदस्य के रूप में औद्योगिक स्थापना के लिए ....... पता. औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की धारा 14 की उप धारा (3 ) (4) के अधीन घोषित किया जाए और मैं निवेदन करता हूं कि पंजीयक के अभिलेखों में इसे दर्ज किया जाए । इस संबंध में अधिकृत व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित विवरण और अन्य दस्तावेजों की प्रति संलग्न है।
2. व्यावसायिक संघ दिनांक .को पंजीकृत हुई है जिसके पंजीयन प्रमाण पत्र का क्रमांक. ..है जो पंजीयक व्यावसायिक संघ द्वारा जारी की गयी है ।
3. व्यावसायिक संघ के नियम की प्रति संलग्न है ।
4. संघ के मुख्यालय का पता जिस पर सभी पत्र व्यवहार किया जाना है, वह है।
5. उपरोक्त वर्णित औद्योगिक स्थापना में सदस्यों की संख्या हैऔर उद्योग में नियोजित कर्मचारियों का प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते है ।
भवदीय
अधिकृत हस्ताक्षरी
(नियम 13 का उप नियम (3) और (4) देखें)
व्यवसाय संघ का नाम
पंजीयन क्रमांक
एतद्वारा घोषित किया जाता है कि औद्योगिक संबंध संहिता , 2020 की धारा 14 की उप धारा (3) (4) के प्रावधान द्वारा .. औद्योगिक स्थापना. वार्ताकारी संघ / वार्ताकारी परिषद् का सदस्य संघको हेतु घोषित किया जाता है।
रजिस्ट्रार, मध्यप्रदेश 426(45)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
प्ररूप - ग्यारह
(नियम 13 का उपनियम (5)देखे )
वार्ताकारी संघ/वार्ताकारी परिषद् की पंजी
वार्ता
अनुक्रमाक
पंजीयन दिनांक
सदस्यों के नाम
वर्तमान
कर्मचारिवृंदों
का नाम
औधोगिक स्थापना का पता
औधोगिक स्थापना का नाम
कार्या लय का पता
कारी संघ का नाम
वार्ताकारी संघ / वार्ताकारी परिषद् का नाम
श्रमिकों की कुल संख्याजो कि व्यपारिक संघके सदस्यहैं। 1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
टिप्पणी
अन्य जानकारी
पंजीयक द्वारा घोषणा की तारीख
वार्ताकारी संघ /वार्ताकारी परिषद् के सदस्य श्रमिकों का प्रतिशत
11
12
13
14
रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर
व्यापारिक संघ, मध्यप्रदेश के रजिस्ट्रार की मुद्रा एवं हस्ताक्षर मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(46)
प्ररूप-बारह
(नियम 16 का उप नियम (1 ) देखें)
व्यवसाय संघो के समामेलन संबंधी सूचना
अ . व्यवसाय संघ का नाम
ब. पंजीयन संख्या
स.क्र
व्यवसाय संघ का नाम
पंजीयन क्रमांक
पता
(1)
(2)
(3)
(4) 1
2
3
दिनांक
वर्ष.
माह
प्रति,
रजिस्ट्रार, व्यावसायिक संघ, मध्यप्रदेश,
एतद् द्वारा सूचना दी जाती है कि औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की धारा 24 की आवश्यकताओं के अनुसार, उपरोक्त उल्लिखित प्रत्येक व्यपारिक संघो के सदस्यों के द्वारा यह प्रस्ताव पारित करते हैं कि वे मिलकर एक संघ में समामेलित होते है। समामेलन प्रस्ताव संबंधी पारित प्रस्ताव की एक प्रति संलग्न है। (शर्ते उल्लिखित करें)
और कि यह अपेक्षित है कि व्यावसायिक संघ आगे कहलाएगा।
इस सूचना के साथ, समामेलित व्यावसायिक संघ जिन नियमों को ग्रहण करने का इच्छुक हैं, की प्रति संलग्न है।
( प्रत्येक व्यावसायिक संघो के सात सदस्य और सचिव द्वारा हस्ताक्षरित)
1.
सचिव
2. .सदस्य
3.
4.
5.
6.
7.
426(47)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
प्ररूप -तेरह
(नियम 16 का उप नियम ( 1 ) की कंडिका (3 ) देखे)
नाम परिवर्तन की सूचना
पूर्व से पंजीकृत व्यावसायिक संघ का नाम
पंजीयन क्रमांक .पता दिनांक .दिवस .
प्रति,
रजिस्ट्रार , व्यवसायिक संघ ,
मध्यप्रदेश,
एतद् द्वारा सूचित किया जाता है कि औघोगिक संहिता , 2020 की धारा 24 के प्रावधान का अनुपालन करते हुए उपरोक्त उल्लिखित व्यावसायिक संघ का नाम परिवर्तित इस रूप से किया गयाः-
.. के द्वारा प्राप्त की गई।
सदस्यों की सहमति......
/सचिव
(हस्ताक्षर) 1
2
3
.सदस्य
4
5
*सामान्य सभा के जनमत से या प्रस्ताव पारित करके सहमति प्राप्त की गई। यदि प्रक्रिया नियमानुसार की गई है तो नियम उल्लिखित करें। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(48)
प्ररूप-उन्तीस
(नियम-49देखिए)
इस संहिता के अधीन नियोक्ता, जो पहली बार उल्लंघन करता है , धारा 89 की उप- धारा (4 ) के उल्लंघन के प्रशमन के लिए सूचना
i औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की धारा 89 की उप- धारा (1 ) के अंतर्गत अधोहस्ताक्षरकर्ता और प्रशमन अधिकारी , इसके द्वारा यह सूचित करता है कि इस संहिता के विभिन्न उपबंध के उल्लंधन के लिए नीचे दिए गए विवरण के अनुसार आरोप लगाया गया हैः-
भाग-एक
1. उल्लंघन करने वाले नियोक्ता का नाम औरःपता
2. स्थापना का नाम
3. अपराध का विवरण
4. संहिता की धारा , जिसके अंतर्गत अपराध किया गया है
5. अपराध की संरचना के लिए भुगतान की जाने वाली परिशुमन राशि
भाग-दो
औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की धारा 89 के अनुसार अपराध के प्रशमन के लिए, आपको इस सूचना के भाग -तीन में भरे गए आवेदन के साथ इस सूचना के जारी होने की तारीख से पंद्रह दिनों के भीतर उपयुक्त राशि जमा करने की सलाह दी जाती है।
धारा यदि आप निर्दिष्ट समय के भीतर उक्त राशि जमा करने में विफल रहते है, तो आगे कोई अवसर नहीं दिया जाएगा और के अंतर्गत अभियोजन दायर करने के लिए आवश्यक दिशानिर्देश जारी किया जाएगा।
(प्रशमन अधिकारी के हस्ताक्षर) तारीखः
स्थानः 426(49)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
भाग-तीन
अपराध की के परिशमन के लिए धारा 89 की उप- धारा (4 ) के अधीन आवेदन
1. आवेदक का नाम (औद्योगिक संबंध संहिता , 2020 के अधीन नियोक्ता जिसने अपराध किया है का नाम निर्दिष्ट करना है) 2. आवेदक का पता
3. उल्लंघन का विवरण
4. संहिता की धारा जिसके अधीन अपराध किया गया है
5. जमा की गई प्रशमन राशि के ब्यौरे ( इलैक्ट्रॉनिक रूप से सृजित रसीद संलग्न करें)
6. उपर्युक्त उल्लिखित उल्लघंन के लिए अपराधों , यदि दर्ज हैं तो, के लिए अभियोजन के ब्यौरे दिए जा सकते हैं ।-------
7. क्या यह अपराध पहला अपराध है या आवेदक ने इस अपराध से पहले कोई अन्य अपराध किया था, यदि किया था, तो, इस अपराध का पूरा ब्यौरा दें
8. अन्य कोई सूचना जिसका आवेदक प्रदान करने का इच्छुक है
(नाम और हस्ताक्षर) तारीखः
स्थानः
आवेदक मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(50 )
प्ररूप-तीस
(नियम 51 देखिए)
(औद्योगिक संबंध संहिता , 2020 की धारा 91 के अधीन शिकायत)
न्यायाधिकरण
समक्ष, सुलह अधिकारी/मध्यस्थ/ न्यायधिकरण या राष्ट्रीय
इस विषय में
संदर्भ संख्या
क
शिकायतकर्ता
विरुद्ध
ख
विपक्षी दल
व्याख्यानः याचिकाकर्ताओं द्वारा औद्योगिक संबंध संहिता की धारा 90 के उपबंधों के उल्लंघन करने पर विपक्षी दल के दोषी होने की शिकायत की गई है। जैसा कि नीचे दर्शाया गया है:
(यहां कथित तौर पर उल्लंघनों को उस तरीके से बताया गया है जिस प्रकार वह घटित हैं और प्रबंधन के आदेश या कानून को किस आधार पर चुनौती दी गई है) ।
र
शिकायतकर्ता तदनुसार सुलह अधिकारी /मध्यस्थ/ औद्योगिक न्यायाधिकरण या राष्ट्रीय न्यायाधिकरण से ऊपर उल्लिखित शिकायत को तय करने के लिए प्रार्थना कर सकता है तथा जो उस पर ऐसे आदेश पारित कर सकेगा जो वह सही और उचित समझे ।
औद्योगिक संबंध संहिता की नियम 91 के अधीन शिकायत और उसुंक्त अनुबंध की आवश्यक प्रतिलिपियों इसके साथ जमा की जाती है।
दिन -20
यहदिनांक
शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर
सत्यापन
मैं निष्ठापूर्वक यह घोषणा करता हूं कि ऊपर पैराग्राफ----
और यह कि ऊपर पैराग्राफ सत्यापन पर मेरे द्वारा वर्ष 20 में जो कहा गया है वह मेरी जानकारी के अनुसार सत्य है में जो कहा गया है वह प्राप्त सूचना पर आधारित है और मेरे विश्वास के अनुसार सत्य है । इस वैदिन में हस्ताक्षर किया जाता है।
हस्ताक्षर 426(51)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
प्ररूप-इकतीस
(नियम 52 देखिए)
(कामगार द्वारा औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 धारा 94 के अन्तर्गत अधिकृत किया जाना)
प्रति,
प्राधिकारी का नाम -
पता -
जो मैं ( आवेदक का नाम)
एतदद्वारा श्री
व्यवसाय संघों में कार्यकारी /..
पद पर है , जिसका पंजीयन क्रमांक
है, को जो औद्योगिक स्थापना (नाम एवं पता) ....
में नियोजित हूं, को निम्न विषय पर मेरा प्रतिनिधित्व करने हेतु अधिकृत करता हूं।
विषय का विवरण-
हस्ताक्षर
आवेदक का नाम
पद
प्ररूप- बत्तीस
(नियम 53 देखिए)
(नियोक्ता द्वारा औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की धारा 94 में अधिकृत किया जाना)
प्रति,
प्राधिकारी का नाम -
पता
मैं (आवेदक का नाम)
औद्योगिक स्थापना / संगठन का नाम व नाम पता. ....पदनाम औद्योगिक स्थापना का व श्री पता पदनाम को निम्न विषय पर मेरा प्रतिनिधत्व करने के लिए एतद्वारा अधिकृत करता
विषय का विवरण-
आवेदक के हस्ताक्षर तथा नाम एवं पता
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार, मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(52)
प्ररूप-चौदह
(नियम 18 का खण्ड (एक) देखे)
भाग-अ
औद्योगिक संहिता, 2020 की धारा 26 के अधीन निर्धारित वार्षिक विवरणी ( सामान्य विवरणी
1 जनवरी 20 ..
से 31 दिसम्बर 20 ...
तक
1. व्यावसायिक संघ का नाम
2. पता
3. पंजीकृत मुख्यालय कार्यालय
4. पंजीयन प्रमाणपत्र का क्रमांक एवं दिनांक क्रमांक दिनांक
5. व्यवसायिक संघ किस प्रवर्ग के उद्योग से संबंधित है
6. उपरोक्त उल्लिखित उद्योग किसके प्रधिकार में आता है?
केन्द्रीय शासन अथवा राज्य शासन
7. क्यासंघ किसी भारतीय संस्था से संबद्ध है ?
यदि ऐसा है , तो नाम एवं संबद्धता क्रमांक बताया जाए
8. संबंद्धता की फीस
रूपये
पैसे.
एवं 9. अखिल भारतीय संस्था में संबद्धता की फीस के भुगतान को रसीद क्रमांक.. तारीख.
10. कार्यकारी समिति के सदस्यों की संख्या
11. यदि कार्यकारी समिति में बाहरी सदस्य हों तो उसकी संख्या
12. उधोग का नाम जिससे संघ संबंधित है .
13. संघ के कार्यक्षेत्र के संबंध में जानकारी
14. सदस्योके लिए मासिक चंदे की दर
15. ( यह जानकारी संघो के परिसंघ को देने की आवश्यकता नहीं है)
(क) वर्ष के प्रारंभ में किताबों में दर्ज संख्या
(ख) वर्ष में बने सदस्यों की संख्या
कुल संख्या (अ ) एवं ( ब)
(ग) वर्ष में संघ की सदस्यता छोड़ने वाले सदस्यो की संख्या (अ) एवं (ब) के जोड़ से घटाने पर अतिशेष
(घ) वर्ष के अंत मे किताबों में कुल सदस्यों की संख्या (अर्थात् 31 मार्च )
पुरूष
महिला
कुलजोड़
(ड. ) राजनैतिक निधि राशि में योगदान करने वाले सदस्यों की संख्या
(च) वर्ष पर्यन्त हेतु अंशदान करने वाले सदस्यों की संख्या
16. व्यावसायिक संघो के परिसंघ के द्वारा विवरणी प्रस्तुत करना-
(क) वर्ष में प्रारंभ में संबद्ध संघों की संख्या
(ख) चालू वर्ष में सम्मिलित होने वाले संघों की संख्या
(ग ) चालू वर्ष में असंबद्ध होने वाले संघों की संख्या 426(53)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
( घ) वर्ष के अंत में संबद्ध होने वाले संघो की संख्या
पैसे
(ड) संबद्ध संघों से प्राप्त सदस्यता शुल्क की राशि .रू.
(च) संबद्ध संघों की संख्या, जिनसे वर्ष के दौरान सदस्यता शुल्क की राशि प्राप्त की गई (छ) संबद्ध संघों की संख्या , जिन्होंने राजनैतिक निधि को अंशदान दिया
(ज) संबद्ध संघों की सदस्यता की संख्या
पुरुष
महिला
कुलजोड़
नोट- के संबंध में जानकारी
1. (क) भाग ए के कॉलम 1 से 13 इस कथन के दोनों श्रेणियों, संघो और परिसंघो द्वारा भरा जाना है । (ख) कॉलम 14 और 15 केवल संघों द्वारा भरा जाना है , ना कि परिसंघो द्वारा
(ग) कॉलम 16 केवल परिसंघों द्वारा भरा जाना है।
2. व्यावसायिक संघ के नियमों की एक प्रति, जो कि वार्षिक विवरणी के विवरणों के साथ संलग्न करने के लिए प्रेषण तिथि तक सही है। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(54)
भाग- 'ख'
सामान्य निधि लेखा
आवक
वर्ष के प्रारंभ में बचत 1.
सदस्योंसे प्राप्त अंशदान 2.
(अ) चालू वर्ष में प्राप्त अंशदान
(ब) चालू वर्ष के लिए अंशदान का बकाया
(1)तीन माह या कम अंशदान का बकाया
(2)6माह या 6 माह से अधिक बकाया अंशदान
(स) एक वर्ष से अधिक बकाया अंशदान
योग
3 चंदा.
4 निवेशोंपर ब्याज
5 सामयिक पत्रिकाओं , किताबों एवं नियमावली का विक्रय 6 विभिन्न स्त्रोतों से आय
1.
2.
3.
योग
खर्च
रूपए एवं पैसे
रूपये एवं पैसे
वेतन, भत्ता एंव अधिकारियों का खर्च
खर्च वेतन, भत्ता और संस्थान से अन्य
अंकेक्षक फीस
3.
विधिकफीस
4.
5. व्यावसायिक विवादों को संचालित करने वाला खर्च
6. व्यावसायिक विवादों में सदस्यों को होने वाली क्षति की पूर्ति पर खर्च
7. दाह संस्कार, बुढ़ापा, बीमारी, बेकारी भत्ता आदि
8. शैक्षणिक , सामाजिक एवं धार्मिक सुविधाएं
सामयिक पत्रिकाओं का प्रकाशन
9.
10. किराया, कर एवं दर
11. स्टेशनरी, प्रिंटिंग एवं पोस्टेज
12. अन्य व्यय जो औद्योगिक संहिता, 2020 के प्रावधानों के अनतर्गत किये गये
13. अन्यव्यय (विस्तृत जानकारी)
(1) .
(2).
(3) .
कुल व्यय
वर्षान्तमें शेष
1.
2.
3.
योग
कोषाध्यक्ष मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(55)
भाग 'ग'
व्यावसायिक संघ की देनदारियां एवं संपत्ति का विवरण देनदार आस्तियां दिनांक को
देनदारियां
सम्पत्तियां
क्र.
विवरण
रू.पैसे .
विवरण
रू.पैसे .
नवद
1. सामान्य निधि की राशि ....
1.
2. राजनैतिक निधि की राशि
(क) खजांची को हस्तगत
3. कर्ज से-...
(ब) सचिव अथवा अन्य नामित व्यक्ति को हस्तगत
2. बैंकमें
4. बकाया, जो भुगतान किया जाना है - 3. प्रतिभूतियां (घ भाग व की सूची अनुसार)
4. बकाया देय अशंदान ( भाग ख के कालम -ख एवं ग में दर्शाए अनुसार)
(क) चालू वर्ष के अंशदान की राशि
5. अन्य देनदारियां विनिर्दिष्ट की जाएं-
( 1 ) .
(ख) पूर्व वर्ष के अंशदान की राशि
5. 20/-
अधिकारी
(अ)
(4) ...
(ब) सदस्य
अन्य
(स)
6.
अचल सम्पत्ति
7.
सामान एवं फर्नीचर
चालू वर्ष में
(अ)
पूर्व वर्ष में
(ब)
8.
अन्य आस्तियां
योग.
योग.
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(56)
भाग-'घ'
प्रतिभूतियों की सूची
विवरण अंकित मूल्य
कहाँजमा
परिव्यय मूल्य (कास्ट
वेल्यू)
बाजार मूल्य, जिस दिन लेखा संपन्न किया गया
(1)
(2)
(3)
(4)
(5)
भाग - 'ड'
राजनैतिक निधि लेखा
क्र.
विवरण
रू.पैसे .
विवरण
रू. पैसे .
1. वर्ष के प्रारंभ में बचत
1. औद्योगिक संबंध भारतीय व्यवसाय संघ अधिनियम, 1926 की धारा 16(2) में विनिर्दिष्ट उद्देश्यों पर संदाय संहिता, 2020 की धारा 16(2 ) के अन्तर्गत व्यय
2. सदस्यों से प्राप्त राशि
2. (अ)व्यवस्था का व्यय (पूर्णतः विनिर्दिष्ट)
3 .
वर्षान्तमें शेष
योग
योग 426(57)
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 12 अप्रैल 2021
भाग - 'च'
अंकेक्षक का घोषणा पत्र
निम्न हस्ताक्षरकर्ता ने के पुस्तकों एवं लेखाओं को देखने एवं पूर्वगामी विवरणों के परीक्षण करने और उपलब्ध वाउचरों के आधार पर जांच करने पर, उचित वाउचरों के आधार पर सही पाने से उस पर हस्ताक्षर किये और विधि के अनुरूप दिए गए टिप्पणी के अध्यधीन, यदि कोई हो, जो संलग्न है , यह भी प्रमाणित करता है कि पंजी और लेखा पुस्तकों को समुचित रूप से रखा है एवं सदस्यों ने अपना अंशदान जो रू. पैसे . ने सदस्यता है, का भुगतान को दिया है, जो कि व्यावसायिक संघ की सामान्य नीति की लेखा में पूर्वगामी विवरणी में दर्शाया गया है, दिए गए टिप्पणी के अध्यधीन , यदि कोई हो, जो संलग्न है।
(1 ) अंकेक्षक
(2) अंकेक्षक
टिप्पणी: - प्रत्येक अंकेक्षक अपने हस्ताक्षर के नीचे यह स्पष्ट रूप से अंकित करेगा कि वह किस हैसियत से नियम 8 में संदर्भानुसार व्यावसायिक संघ के लेखाओं के आडिट करेन हेतु अर्हित है। मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(58)
भाग-'छ'
अधिकारियों का निर्वाचन या नामांकन
नाम जन्मतिथि निवास का पता व्यवसाय संघ में धारित पद
निर्वाचन या नामांकन
दिनांक .जिस
को खण्ड (5) में पद ग्रहणं किया (1) (2)
(3)
(4)
(5)
(6)
(7)
भाग - 'ज'
वर्ष
में निम्न अधिकारी परिवर्तित हुए अधिकारी जिन्होंने पद त्यागा
क्र. नाम
कार्यालय
पदत्याग का दिनांक
(1) (2)
(3)
(4) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(59)
प्ररूप-पंद्रह
(नियम 19 का उप नियम (1 ) देखें)
राज्य व्यवसाय संघ के रूप में मान्यता के लिए आवेदन
व्यवसाय संघ/ परिसंघ का नाम
संघ -
पता
दिनांक.
.दिवस .
..2020
प्रति,
प्रमुख सचिव या प्राधिकृत अधिकारी (पदनाम),
मध्यप्रदेश शासन , श्रम विभाग ,
महोदय,
मैं यह कथन करता हूँ कि उपर्युक्त व्यवसाय संघ/व्यवसाय संघों के परिसंघ के सदस्यों की आम सभा/कार्यकारिणी की सभा जो दिनांक को पर आयोजित की गयी थी, में यह निर्णय पारित किया गया है कि व्यवसाय संघ/व्यवसाय संघों के परिसंघ द्वारा आपके समक्ष इसे औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की धारा 27 की उप धारा (2) के अन्तर्गत राज्य व्यवसाय संघ के रूप में मान्यता दिए जाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया जावे । उक्तानुसार पारित निर्णय की अध्यक्ष/ महासचिव द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाणित प्रति संलग्न की जा रही है।
2. यह व्यवसाय संघ/व्यवसाय संघों के परिसंघ रजिस्ट्रार, व्यवसाय संघ, मध्यप्रदेश द्वारा दिनांक ........... को पंजीकृत है तथा पंजीयन क्रमांक है।
3. व्यवसाय संघ/व्यवसाय संघों के परिसंघ के नियमों की प्रति संलग्न है।
4. व्यवसाय संघ/व्यवसाय संघों के परिसंघ का पता जिस पर पत्राचार किया जाएगा, निम्नानुसार है - 5. व्यवसाय संघ/व्यवसाय संघों के परिसंघ के साथ राज्य में जो अन्य व्यवसाय संघ संबद्ध हैं, उन व्यवसाय संघों की सूची, उनका नाम, पता, पंजीयन संबंधी विवरण तथा सदस्य संख्या की जानकारी संलग्न है।
6. व्यवसाय संघ/व्यवसाय संघों के परिसंघ की राज्य में कुल सदस्य संख्या - व्यवसाय संघवार सदस्यता की जानकारी संलग्न की जावे) है। (जिला वार,
भवदीय,
महासचिव/सचिव (नाम एवं पदनाम -
.. ) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(60)
प्ररूप -सोलह
(नियम 29 देखें)
(नियोक्ता द्वारा कामगारों की सेवा शर्तों में परिवर्तन के संबंध में परिवर्तन सूचना का प्रस्ताव) नियोक्ता का नाम -
पता
दिनांक
दिवस .
.2020
औद्योगिक संबंध संहिता की धारा 40( 1 ) के अनुसार मैं/हम सभी संबंधितों को यह सूचित करता हूं/ करते हैं कि मैं/ हम इस संहिता की तीसरा अनुसूची में निर्दिष्ट किए गए मामले के संबंध में कामगारों पर सेवा शर्तों में दिनांक परिवर्तन /परिवर्तनों को लागू करना चाहता हूं/चाहते हैं। से अनुबंध में
हस्ताक्षर...............
नाम एवं पद.
परिशिष्ट
(यहाँ प्रस्तावित परिवर्तन/ परिवर्तनों का विवरण दें)
1
2
प्रति,
(1) अध्यक्ष/ महासचिव , व्यवसाय संघ ( नाम एवं पता)
(2) श्रम आयुक्त, म.प्र. शासन
(3) संबंधित सुलह अधिकारी 426( 61)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
प्ररूप-सत्रह
(स्वैच्छिकमध्यस्थता के लिए समझौता)
(नियम 30का उपनियम (1 ) देखें)
.नियोक्ता का प्रतिनिधित्व करने वाले पक्षों का नाम
और
कामगार का प्रतिनिधित्व करने वाले पक्षों का नाम
के बीच
निम्नलिखित विवाद को मध्यस्थता के लिए .[यहां मध्यस्थ के नाम और पते का उल्लेख करें] को भेजने पर सहमति हुई है। (एक) विवाद के विनिर्दिष्ट मामले
(दो) शामिल स्थापना या उपक्रम के नाम और पते सहित विवाद के पक्षों का विवरण
(तीन) कामगार का नाम, यदि वह स्वयं विवाद में शामिल हो या यूनियन, यदि कोई हो जो प्रश्नगत कामगार या कामगारों का प्रतिनिधित्व करता हो, का नाम
(चार) प्रभावित उपकर में नियोजित कामगारों की कुल संख्या
(पांच) विवाद से प्रभावित कामगार या संभावित प्रभावित की अनुमानित संख्या
'हम सहमत है कि मध्यस्थों के अधिकांश निर्णय हम पर वाध्यकर हैं, यदि मध्यस्थ अपने विवाचन में बराबर विभाजित होते हैं तो वह मध्यस्थ के रूप में एक अन्य व्यक्ति नियुक्त करेंगे जिसके निर्णय हम पर बाध्यकर होंगे ।
केंद्रीय सरकार द्वारा अधिकारिक राजपत्र में इस समझौते के प्रकाशन के दिनांक से ( पार्टी द्वारा समझौते की अवधि उल्लिखित करें) ....की अवधि के भीतर या लिखित रूप में हमारे मध्य आपसी समझौते द्वारा आगे बढ़ाए गए समय के भीतर मध्यस्थ को अपना निर्णय लेना होगा यदि, उपर्युक्त उल्लिखित अवधि में भी निर्णय नहीं किया गया तो मध्यस्थ का संदर्भ स्वतः खारिज हो जाएगा और हम इसे नए मध्यस्थ से निपटान के लिए मुक्त हो जाएंगे।
कामगारों के प्रतिनिधि/कामगार/ नियोक्ता के प्रतिनिधि पक्षकार के हस्ताक्षर
साक्षीः
(1)
(2)
प्रतिः (i ) सुलह अधिकारी ( संबंधित क्षेत्र के लिए सुलह अधिकारी का कार्यालय पता लिखें]
(ii) श्रम आयुक्त
(iii) प्रमुख सचिव, श्रम विभाग, म.प्र. शासन, भोपाल मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(62)
प्ररूप अठारह
(नियम 32देखें)
(इस संहिता के अंतर्गत प्राधिकारी के समक्ष कार्रवाई में प्रतिनिधित्व करने वाले कामगार , कामगार के समूह, नियोक्ता, नियोक्ता के समूह के द्वारा प्राधिकार प्रदान करना )
समक्ष प्राधिकारी
(यहां संबंधित प्राधिकारी का उल्लेख करें) ।
इस संबंध में :
(कार्रवाई का नाम उल्लिखित करें)
..कामगार
बनाम
नियोक्ता
मैं । हम श्री/सर्व श्री 1 .
.3 . उपर्युक्त मामले में प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत करता हूं/ करते हैं। (यदि एक से अधिक प्रतिनिधि है) को दिनांक
.दिन.. .20 ..
मनोनीत प्रतिनिधि (यों ) के हस्ताक्षर
मान्य पता
प्ररूप-उन्नीस
(नियम 33 का उपनियम (21 ) देखें)
औद्योगिक न्यायाधिकरण के प्रशासनिक सदस्य के पद के लिये शपथ का प्रपत्र(जो लागू हो)
मैं ..औद्योगिक न्यायाधिकरण के प्रशासनिक सदस्य के रूप में नियुक्त किए जाने पर सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूं । ईश्वर की शपथ लेता हूं कि मैं अपनी अधिकतम क्षमता, ज्ञान और विवेक से, किसी भय या पक्षपात, राग या द्वेष के बिना प्रशासनिक सदस्य, औद्योगिक न्यायाधिकरण(न्यायाधिकरण का नाम ) के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करूंगा और संविधान और कानून के अनुसार कार्य करूंगा ।
(हस्ताक्षर) स्थानः
दिनांकः 426(63)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
प्ररूप-बीस
(नियम 34 का उप-नियम(21 ) के लिए)
औद्योगिक न्यायाधिकरण के प्रशासनिक सदस्य के लिए पद के शपथ का प्रपत्र
मैं औद्योगिक न्यायाधिकरण--- के प्रशासनिक सदस्य के रूप में नियुक्त किए जाने पर सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूं /ईश्वर की शपथ लेता हूं कि मैं अपनी अधिकतम क्षमता , ज्ञान और विवेक से, किसी भय या पक्षपात , राग या द्वेष के बिना प्रशासनिक सदस्य, औद्योगिक न्यायाधिकरण ( न्यायाधिकरण का नाम ) के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करूंगा और संविधान और कानून के अनुसार कार्य करूंगा।
(हस्ताक्षर) स्थानः
दिनांकः
प्ररूप-इक्कीस
(नियम 35 का उप-नियम(5) देखिए)
(सुलह अधिकारी द्वारा मामले का निपटान नहीं होने पर न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किया जाने वाला आवेदन )
समक्ष.
..(यहां संबंधित क्षेत्र के क्षेत्राधिकार वाले न्यायाधिकरण के नाम का उल्लेख करें)
..आवेदक
पता.
विरूद्ध
विपक्षी पक्ष/पक्षकार
पता....
उपर्युक्त आवेदन के मामले में निम्नलिखित का उल्लेख करना चाहता हूं:
( यहां मामले के सुसंगत तथ्यों और परिस्थितियों को उल्लिखित करें)
आवेदक इस मामले को प्रशासनिक निर्णय के लिए स्वीकार करने और उचित निर्णय जारी करने का अनुरोध करता है।
दिनांक
स्थान
हस्ताक्षर मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(64)
६
प्ररूप-तेईस
(नियम 37 का उप नियम (1 ) देखिए)
(औद्योगिक स्थापना के नियोक्ता द्वारा की जाने वाली तालाबंदी की सूचना)
नियोक्ता का नाम
पता.
दिनांक
...का दिन. 20 .
औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की धारा 62के उपबंधों के अनुसार मैं/हम सभी संबंधितों को सूचना देते हैं कि उपांबध में बताए गए कारणों के लिए दिनांक से मेरे/ हमारे द्वारा स्थापना के विभाग ( गों) करने का विचार है। ..में तालाबंदी हस्ताक्षर
उपाबंध
कारणों का कथन
1.
(संलग्न जानकारी सत्यापित होनी चाहिए )
प्रति अग्रेषित:
(1) पंजीकृत यूनियन के सचिव / महासचिव यदि कोई हों ।
(2) प्रमुख सचिव म.प्र. शासन , श्रम विभाग , भोपाल
(3) सुलह अधिकारी
(4) श्रम आयुक्त 426(65)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
प्ररूप-चौबीस
(नियम 38 देखे )
(नियोक्ता द्वारा राज्य सरकार को छंटनी की सूचना देना)
(भाग-1 के प्रकरणों में छंटनी प्रारंभ करने से 30 दिन पूर्व सूचना दी जाए)
औद्योगिक स्थापना /उपक्रम/नियोक्ता का नाम.
पता
श्रमिक पहचान संख्या.
दिनांक,
प्रति,
प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन / प्राधिकृत अधिकारी, श्रमविभाग
भाग 1 -छंटनी
1.औद्योगिक संबंध संहिता , 2020 की धारा 70 की कंडिका (क) के अन्तर्गत मैं/हम सूचित करते हैं कि मैंने/ हमने दिनांक. से कुल .कामगारों की छंटनी का निश्चय किया है। प्रभावित होने वाले कामगारों की जानकारी अनुलग्नक-। में है तथा छंटनी के कारण अनुलग्नक -।।में वर्णित है ।
को एक माह की सूचना लिखित में , जैसा अपेक्षित है, दी गयी है। 2. संबंधित कामगारों को दिनांक या.. कामगारों को दिनांक .को सूचना के एवज में एक माह का वेतन दिया गया है ।
.कामगार कार्यरत हैं। जिनमें से कुल कामगारों की छंटनी की 3. औद्योगिक स्थापना /उपक्रम में कुल गई है।
4. मैं/ हम घोषणा करते हैं कि सभी कामगारों को संहिता की धारा 70व 75 के प्रावधानानुसार सूचना की अविध समाप्त होने के पूर्व समस्त स्वत्वों का भुगतान कर दिया जाएगा।
5. मैं/ हम घोषणा करते हैं कि इस विषय पर किसी न्यायालय के समक्ष कोई प्रकरण लंबित नहीं है ।
6. मैं/हम घोषणा करते हैं कि इस सूचना व अनुलग्नकों एवं सूची में दी गयी सभी जानकारी मेरी /हमारी जानकारी अनुसार सही है एवं मैं/ हम इस जानकारी की सत्यता के लिए जवाबदार होंगे तथा मैंने/ हमने कोई तथ्य या साक्ष्य छिपाए नहीं हैं।
हस्ताक्षर मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(66)
प्ररूप-बाईस
(नियम 36 देखें)
(यूनियन (यूनियन का नाम) / कामगारों के समूह द्वारा की जाने वाली हड़ताल की सूचना )
कामगारों के पांच निर्वाचित प्रतिनिधियों के नाम
दिनांक
दिन
20 .
सेवामें ,
(नियोक्ता का नाम)
महोदय/महोदया,
औद्योगिक संबंध संहिता की धारा 62 की उप धारा (1 ) में निहित उपबंधों के अनुसार उपाबंध में बताए गए कारणों के लिए मैं / हम आपको सूचना देते हैं कि हम दिनांक 20 को हड़ताल का आह्वान कर रहेहैं।
भवदीय,
(यूनियन का सचिव) संलग्न संकल्प के द्वारा.........(दिनांक) को आयोजित बैठक में सम्यक् रूप से निर्वाचित कामगारों के पांच प्रतिनिधि
उपाबंध
मामले का विवरण
प्रतिः
1. श्रम आयुक्त
2. संबंधित क्षेत्र का सुलह अधिकारी 426(67)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
उपाबंध-एक
अनुक्रमांक
अभ्युक्तियां कामगार कानाम
नियोक्ता के साथ नियुक्ति कीतारीख
आवेदन की तारीख में मजदूरी
कालम 7 की तरह " यथावत्"
यूएएन/ सीएम पीएफ ओ
वर्ग अतिकुशल/ कुशल/अर्ध कुशल/ अकुशल
कुल देय मजदूरी क्षतिपूर्ति एवं अन्य बकाया (शीर्षवार ब्यौरे)
उपाबंध-दो
छंटनी के कारणों का कथन
1.
2.
प्रति,
1 श्रम आयुक्त
2 संबंधित क्षेत्र का सुलह अधिकारी मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(68)
प्ररूप-पच्चीस
(नियम 40 देखिए)
(नियोक्ता द्वारा राज्य शासन को बंदीकरण की सूचना देना)
(भाग -एक के प्रकरणों में बंदीकरण के साहूँ दिन पूर्व सूचना दी जानी चाहिए)
औद्योगिक स्थापना /उपक्रम/नियोक्ता का नाम
पता
श्रमिक पहचान संख्या.
दिनांक/माह/वर्ष..
प्रति,
प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन / प्राधिकृत अधिकारी,
श्रम विभाग, भोपाल
श्रीमान्जी
भाग-एक बंदीकरण
1. औद्योगिक संबंध संहिता , 2020 की धारा 74 की उप धारा ( 1 ) के अंतर्गत मैंने/ हमने औद्योगिक स्थापना /उपक्रम/नियोक्ता.. ..को दिनांक/माह/वर्ष से बंद करने का निर्णय लिया है । प्रभावित होने वाले कामगारों की जानकारी उपाबंध- एक में है तथा इसके कारण उपाबंध -दो में वर्णित है।
2. औद्योगिक स्थापना /उपक्रम/नियोक्ता द्वारा बंदीकरण के कारण उन कामगारों की संख्या, जिनकी सेवाएं समाप्त होगी
3. मैं/हम घोषणा करते हैं कि संबंधित सभी कामगारों को संहिता की धारा 75 के अनुसार उनको देय समस्त भुगतान कर दिए गए हैं/ इस सूचना की अवधि के समाप्त होने के पूर्व कर दिए जाएंगे।
उपाबंध -दो
4. मैं/हम घोषणा करते हैं कि इस विषय पर किसी न्यायालय के समक्ष कोई प्रकरण लंबित नहीं है ।
5. मैं/हम घोषणा करते हैं कि इस सूचना व अनुलग्नकों एवं सूची में दी गयी जानकारी मेरी /हमारी जानकारी अनुसार सही है एवं मैं/ हम इस जानकारी की सत्यता के लिए जवाबदार होंगे तथा मैंने /हमने कोई तथ्य या साक्ष्य छिपाए नहीं है। (नियोक्ता/प्राधिकृत प्रतिनिधि का नाम एवं पदनाम)
उपाबंध -एक
अनुक्रमांक
" यथावत्" अभ्युिक्तियां कामगार का नाम
आवेदन की तारीख में मजदूरी
यूएएन/ सीएमपी एफओ
नियोक्ताके
साथ
नियुक्ति की
तारीख
वर्ग अतिकुशल/ कुशल/ अर्ध कुशल/ अकुशल
कुल देय मज़दूरी क्षतिपूर्ति एवं अन्य बकाया (शीर्षवार ब्यौरे)
1
2
उपाबंध-दो
नियम 25 एवं नियम 27 तथा प्ररूप आठ के संदर्भ सहित बंदीकरण के लिए कारणों का कथन
1.
2.
हस्ताक्षर..
पद.
प्रति,
3. श्रम आयुक्त
4. संबंधित क्षेत्र का सुलह अधिकारी 426(69)
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 12 अप्रैल 2021
प्ररूप-छब्बीस
(नियम 41देखिए)
[औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के अध्याय दस के प्रावधानों और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अंतर्गत राज्य सरकार/ प्राधिकृत अधिकारी को नियोक्ता । औद्योगिक स्थापना / उपक्रम द्वारा दिए गए कामबंदी (ले-ऑफ) /कामबंदी(ले- ऑफ) के 15 दिन पूर्व जारी रहने की अनुमति के लिए आवेदन]
सेवामें,
प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश शासन/ प्राधिकृत अधिकारी ,
श्रमविभाग,
औद्योगिक स्थापना या उपक्रम या नियोक्ता का नाम एवं पता
श्रमिक पहचान संख्य...
(ऑन लाइन जमा किया जाना है/ अनिवार्यता के मामले में निम्न निर्धारित प्रारूप में लिखित में) दिनांक/माह/वर्ष.. (टिप्पणीः निम्न्न दर्शाए गए रूप में राज्य सरकार को आवेदन देना होगाः कामबंदी-आशयित कामबंदी से कम से कम तीस दिन पहले
कामबंदी जारी रहना - पिछले कामबंदी की समाप्ति से कम से कम 15 दिन पहले
1. ....(दिन /माह/ वर्ष) से मेरे / अपने औद्योगिक ..कामगारों की कामबंदी/ कामबंदी जारी करने औद्योगिक संबंध संहिता , 2020 की धारा 78 के अंतर्गत मैं/ हम.. स्थापना या उपक्रम में नियोजित कुल... ..कामगारों में से. की अनुमति के लिए आवेदन करते हैं। कामबंद कामगारों की सूची एवं उनकी सेवा एवम भुगतान संबंधी अन्य विवरण अनुलग्नक । में संलग्न हैं। कामबंदी के कारणों का कथन एवं अन्य आवश्यक जानकारी उपाबंध- दो में संलग्न है।
या
2. कामबंदी/ कामबंदी की निरंतरता की इस संहिता की धारा 79 के अन्तर्गत को सूचना लिखित रूप में दी गयी है । ...दिन /माह/वर्ष)के पूर्व सभी कामगारों
या लिखित रूप में सूचना नहीं दी गयी है. क्योंकि इस संबंध में समझौता किया गया है, जिसकी प्रति संलग्न है। 3. मैं/ हम यह घोषित करते हैं कि समाप्ति अवधि पर या पहले इस संहिता की धारा 79 के साथ धारा 67 के अंतर्गत संबंधित कामगारों को बकाया और बकाया मुआवजे का भुगतान कर दिया गया है।
4.
5.
मैं/ हम एतद्वारा यह घोषित करता हूं । करते हैं कि इस मामले से संबंधित कोई मामला किसी न्यायालय में लंबित नहीं है । मैं/ हम यह घोषित करते हैं कि इस नोटिस और संलग्ग्रक में मेरे/ हमारे द्वारा दी गई उपर्युक्त जानकारी सत्य है। मैं/ हम इसकी सटीकता के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार हैं और मामले में कोई तथ्य / सामग्री छिपाई नहीं गई है । कृपया मांगी गई अनुमति प्रदान की जाए।
भवदीय
हस्ताक्षर मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(70)
उपाबंध-एक
अनुक्रमांक
"यथावत्" अभ्युक्तियां कामगार कानाम
नियुक्ति तारीख
आवेदन
की तारीख
में मजदूरी
यूएएन/ सीएम पीएफ ओ
कुल देय मजदूरी क्षतिपूर्ति एवं अन्य बकाया शीर्षवार ब्यौरे
वर्ग अतिकुशल/ कुशल/अर्ध कुशल/ अकुशल
1
2
उपाबंध-दो
विवरण
अभ्युक्तियां, यदि कोई हों 1. डाक का पूरा पता, ई- मेल , मोबाइल तथा लेंड लाइन सहित उपक्रम का नाम
2. उपक्रम की स्थिति
संलग्न करना है कपंनी की प्रवस्थिति दर्शित करें
(एक)क्या केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र/ राज्य सार्वजनिक क्षेत्र/ इत्यादि
(दो) क्या एक निजी लिमिटेड कंपनी/पार्टनरशिप फर्म/साझेदारी फर्म
(तीन) क्या उपक्रम के पास लाइसेंस है । पंजीकरण है और यदि हां तो, अनुज्ञप्ति देने / पंजीकरण करने वाले प्राधिकरण का नाम और अनुज्ञप्ति /पंजीकरण प्रमाण-पत्र संख्या
3. (क) एमसीए संख्या
ब्यौरे संलग्न हैं
(ख) जीएसटीएन संख्या
(ग) श्रम विभाग का पंजीयन
4.
ब्यौरे संलग्र हैं
(एक) पिछले तीन वर्षों के लिए मदवार वार्षिक उत्पादन - (दो) पिछले 12 माह के लिए उत्पादन संबंधी माहवार व्यौरे
5.
संलग्न करना हैं
पिछले तीन वर्षों के लिए बैलेंस शीट , लाभ और हानि संबंधी ब्यौरे सहित स्थापना / उपक्रम की लेखा परीक्षा रिपोर्ट
6. एक ही प्रबंधन के तहत अंतः संबद्ध कंपनियों या कंपनियों के नाम
संलग्न करना हैं
7.
संलग्न करना हैं
प्रत्येक ऐसी कामबंदी / कामबंदी की निरंतरता में शामिल ऐसी कामबंदी की, कामगारों की संख्या सहित पिछले तीन वर्षों में की गई कामबंदी, छंटनी, सेवा समाप्ति का ब्यौरा
8.
संलग्र करना हैं
कोई भी अन्य प्रासंगिक विवरण, जिसका असर कामबंदी होने पर है।
9. कामबंदी के कारणों का कथन एवं प्रमाण
संलग्न करना हैं
इस प्ररूप की एक प्रति श्रम आयुक्त को एवं क्षेत्र के संबंधित सुलह अधिकारी को प्रस्तुत करनी होगी। 426(71)
मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 12 अप्रैल 2021
प्ररूप-सत्ताइस
(नियम 44देखिए)
[औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के अध्याय दस के उपबंधों और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अंतर्गत राज्य सरकार/ प्राधिकृत अधिकारी को नियोक्ता । औद्योगिक स्थापना / उपक्रम द्वारा दिए गए कामगारों की छंटनी की अनुमति हेतु आवेदन]
छंटनी से 60दिन पहलेआवेदन देना होगाः
सेवामें,
प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश शासन/ प्राधिकृत अधिकारी ,
श्रमविभाग,
1. (क) औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 की धारा 79 के अंतर्गत मैं / हम औद्योगिक स्थापना या उपक्रम में नियोजित कुल..... कामगारों में से (दिन /माह/ वर्ष) से मेरे / अपने कामगारों की छंटनी की अनुमति के लिए आवेदन करते हैं । छंटनी किए जाने वाले कामगारों की सूची एवं उनकी सेवा एवम् भुगतान संबंधी अन्य विवरण उपाबंध-दो में संलग्न है। छंटनी के कारणों का कथन एवं अन्य आवश्यक जानकारी उपाबंध- एक में संलग्न है।
2. छंटनी की जाने वाले कामगारों को इस संहिता की धारा 79 के अन्तर्गत तीन माह पूर्व सूचना लिखित रूप में दी गयी है। .....दन माह/ वर्ष)के पूर्व सभी कामगारों को 3. मैं। हम यह घोषित करते हैं कि छंटनी की अनुमति प्राप्त होने पर छंटनी करने के पहले इस संहिता की धारा 79 के अंतर्गत संबंधित सभी कामगारों को मुआवजा और सभी बकाया स्वत्वों का भुगतान कर दिया जायेगा और आपको प्रस्तुत कर दिया जाएगा।
4. मैं/ हम एतद् द्वारा यह घोषित करता हूं । करते हैं कि इस मामले से संबंधित कोई मामला किसी न्यायालय में लंबित नहीं है । 5. मैं/ हम यह घोषित करते हैं कि इस नोटिस और संलग्नक में मेरे/ हमारे द्वारा दी गई उपर्युक्त जानकारी सत्य है । मैं/ हम इसकी सटीकता के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार हैं और मामले में कोई तथ्य / सामग्री छिपाई नहीं गई है। कृपया मांगी गई अनुमति प्रदान की जाए।
भवदीय (जो लागू न हो उसे काट दें) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
426(72)
उपाबंध-एक
क्र.सं.
कामगार का नाम
यूएएन/सीए मपीएफओ
वर्ग अतिकुशल/ कुशल/अर्ध कुशल/ अकुशल
टिप्प णियां आवेदनकी तारीख के अनुसार वेतन
संबंधित
स्थापना
/उपक्रम/
नियोक्ता के साथ
सेवाकी तिथि
1
2
कुल देय वेतन एवं अन्य बकाया स्वत्वोंएवं मुआवजे की राशि(मदवार विवरण दें)
कुल देय वेतन एवं अन्य बकाया स्वत्वों एवं मुआवजे के भुगतान की प्रस्तावित तिथि
उपाबंध-दो
विवरण
1. डाक का पूरा पता, ई -मेल , मोबाइल तथा लेंड लाइन सहित उपक्रम का नाम
2. उपक्रम की स्थिति
अभ्युक्तियां, यदि कोई हों
(एक) क्याकेंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र/ राज्य सार्वजनिक क्षेत्र/ इत्यादि
कंपनी की स्थिति दर्शित करें
(दो) क्या एक निजी लिमिटेड कंपनी/पार्टनरशिप फर्म/साझेदारी फर्म
(तीन) क्या उपक्रम के पास अनुज्ञप्ति है । पंजीकरण है और यदि हां तो,
अनुज्ञप्ति देने/पंजीकरण करने वाली प्राधिकरण का नाम और अनुज्ञप्ति / पंजीकरण
प्रमाण-पत्र संख्या
3. (क) एमसीए संख्या
(ख) जीएसटीएन संख्या
(ग) श्रम विभाग का पंजीयन 4. (एक) पिछले तीन वर्षों के लिए मदवार वार्षिक उत्पादन -
(दो) पिछले 12 माह के लिए उत्पादन संबंधी माहवार व्यौरे
5. पिछले तीन वर्षों के लिए बैलेंस शीट , लाभ और हानि संबंधी व्यौरे सहित स्थापना / उपक्रम की लेखा परीक्षा रिपोर्ट 6. एक ही प्रबंधन के तहत अंतः संबद्ध कंपनियों या कंपनियों के नाम
7. प्रत्येक ऐसी छंटनी में शामिल कामगारों की संख्या सहित पिछले तीन वर्षों में की गई छंटनी, कामबंदी एवं सेवा समाप्ति का ब्यौरा
8. कोई भी अन्य प्रासंगिक विवरण , जिसका असर छंटनी होने पर है ।
9. छंटनी के कारणों का कथन एवं प्रमाण
ब्यौरे संलग्न हैं
ब्यौरे संलग्न हैं
ब्यौरे संलग्न हैं
ब्यौरे संलग्न हैं
ब्यौरे संलग्न हैं
ब्यौरे संलग्न हैं
ब्यौरे संलग्न हैं इस प्ररूप की एक प्रति श्रम आयुक्त को एवं क्षेत्र के संबंधित सुलह अधिकारी को प्रस्तुत करनी होगी। 426(73)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
प्ररूप-अठाईस
(नियम 46देखिए)
[औद्योगिक संबंध संहिता , 2020 के अध्याय दस के प्रावधानों और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अंतर्गत राज्य सरकार को नियोक्ता । औद्योगिक स्थापना / उपक्रम द्वारा दिए गए नियोक्ता । औद्योगिक स्थापना / उपक्रम के बंदीकरण की अनुमति हेतु आवेदन] टिप्पणीः निम्न दर्शाए गए रूप में राज्य सरकार को बंदीकरण से कम से कम 90 दिन पहले आवेदन देना होगाः
सेवामें,
प्रमुख सचिव, मध्य प्रदेश शासन,
श्रम विभाग ,
1. भोपाल औद्योगिक संहिता , 2020 की धारा 80 के अंतर्गत मै/हम..... ..(दिन /माह/ वर्ष) से मेरे / अपने औद्योगिक स्थापना या उपक्रम के बंदीकरण की अनुमति के लिए आवेदन करते हैं। बंदीकरणके कारण प्रभावित होने वाले कामगारों की सूची एवं उनकी सेवा एवम् भुगतान संबंधी अन्य विवरण अनुलग्नक । में संलग्न है। बंदीकरण के कारणों का कथन एवं अन्य आवश्यक जानकारी अनुलग्नक ।। में संलग्न है।
2. बंदीकरणके कारण प्रभावित होने वाले कामगारों को इस संहिता की धारा 79 के अन्तर्गत दिन/माह/ वर्ष)के पूर्व सभी कामगारों को तीन माह की पूर्व सूचना लिखित रूप में दी गयी है ।
3. मैं/ हम यह घोषित करते हैं कि बंदीकरण की अनुमति मिलने पर बंदीकरण करने के पहले इस संहिता की धारा 79 के अंतर्गत संबंधित सभी कामगारों को मुआवजा और सभी बकाया स्वत्वों का भुगतान कर दिया जाएगा और आपको प्रस्तुत कर दिया जाएगा ।
4. मैं/ हम एतद्वारा यह घोषित करता हूं । करते हैं कि इस मामले से संबंधित कोई मामला किसी न्यायालय में नहीं है । 5. मैं/ हम यह घोषित करते हैं कि इस नोटिस और संलग्रक में मेरे/ हमारे द्वारा दी गई उपर्युक्त जानकारी सत्य है । मैं/हम इसकी सटीकता के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार हैं और मामले में कोई तथ्य /सामग्री छिपाई नहीं गई है । कृपया मांगी गई अनुमति प्रदान की जाए।
भवदीय
हस्ताक्षर (अधिकृत प्रतिनिध नियोक्ता द्वारा जारी प्राधिकरण पत्र की प्रतिलिपि संलग्न करें)
i.
426(74)
(केंद्रीकरण से प्रभावित कामगारों का ब्यौरा )
क्र.सं.
कामगार का नाम
यूएएन/सीए मपीएफओ
वर्ग अतिकुशल/ कुशल/ अर्ध
कुशल/ अकुशल
संबंधित स्थापना /उपक्रम्/ नियोक्ता के साथ सेवाकीतिथि
1
2
उपाबंध-दो विवरण
1. डाक का पूरा पता, ई- मेल, मोबाइल तथा लेंड लाइन सहित औद्योगिक स्थापना /उपक्रम का नाम
2. उपक्रम की स्थिति
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
कुल देय वेतन एवं
टिप्प णियां आवेदन की तारीख के अनुसार वेतन
अन्य बकाया स्वत्वों एवं "मुआवजे की राशि(मदवार विवरण दें)
कुल देय वेतन एवं अन्य बकायास्वत्वों एवं मुआवजे के भुगतान की प्रस्तावित तिथि
अभ्युक्तियां, यदि कोई हों
(एक)क्या केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र/ राज्य सार्वजनिक क्षेत्र/ इत्यादि
कम्पनी की स्थिति दर्शित करें
(दो) क्या एक निजी लिमिटेड कंपनी/ पार्टनरशिप फर्म/ साझेदारी फर्म
(तीन) क्या उपक्रम के पास अनुज्ञप्ति है । पंजीकरण है और यदि हां तो, अनुज्ञप्ति
देने / पंजीकरण करने वाली प्राधिकरण का नाम और अनुज्ञप्ति /पंजीकरण प्रमाण- पत्र संख्या
3. (क) एमसीए संख्या
(ख) जीएसटीएन संख्या
(ग ) श्रम विभाग का पंजीयन 4. प्रस्तावित बंदीकरण से प्रभावित होने वाले कामगारों के नाम एवं पहचान संख्या
5. (एक) पिछले तीन वर्षों के लिए मदवार वार्षिक उत्पादन -
(दो) पिछले 12 माह के लिए उत्पादन संबंधी माहवार व्यौरे
6. पिछले तीन वर्षों के लिए बैलेंस शीट, लाभ और हानि संबंधी ब्यौरे सहित स्थापना / उपक्रम की लेखा परीक्षा रिपोर्ट 7. कम्पनी की कुल नेटवर्थ
8. एक ही प्रबंधन के तहत अंतः संबद्ध कंपनियों या कंपनियों के नाम
9. बंदीकरण में शामिल कामगारों की संख्या सहित पिछले तीन वर्षों में की गई छंटनी, कामबंदी एवं सेवा समाप्ति का ब्यौरा एवं शामिल कामगारों की संख्या
10. कोई भी अन्य प्रासंगिक विवरण, जिसका असर बंदीकरण होने पर है।
11. बंदीकरण के कारणों का कथन एवं प्रमाण
ब्यौरें संलग्न है
केन्द्रीय भविष्य निधि संगठन का सामाजिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत् यूएएन संख्या
ब्यौरे संलग्न हैं
ब्यौरे संलग्न हैं
ब्यौरे संलग्न हैं
ब्यौरे संलग्न हैं
संलग्न करना है
संलग्न करना है
संलग्न करना है इस प्ररूप की एक प्रति श्रम आयुक्त को एवं क्षेत्र के संबंधित सुलह अधिकारी को प्रस्तुत करनी होगी। 426(75)
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 12 अप्रैल 2021
प्ररूप-इकतीस
(नियम 52 देखिए)
(कामगार द्वारा औद्योगिक संबंध संहिता , 2020 की धारा 94 के अन्तर्गत अधिकृत किया जाना)
प्रति,
प्राधिकारी का नाम -
है, को मेरा प्रतिनिधित्व करने के लिए , जो औद्योगिक स्थापना (नाम एवं पता मैं (आवेदक का नाम) एतदद्वारा श्री जो पता) . व्यवसाय संघों में कार्यकारी /... पद पर है , जिसका पंजीयन क्रमांक .में नियोजित हूं, को निम्न विषय पर प्रतिनिधित्व करने हेतु अधिकृत करता हूं।
विषय का विवरण-
हस्ताक्षर
आवेदक का नाम
पद
प्ररूप -बत्तीस
(नियम 53 देखिए)
(नियोक्ताद्वारा औद्योगिक संबंध संहिता , 2020 की धारा 94 में अधिकृत किया जाना)
प्रति,
प्राधिकारी का नाम -
पता -
औद्योगिक मैं ( आवेदक का नाम)
स्थापना
पदनाम का नाम पता. श्री पदनाम व औद्योगिक स्थापना / संगठन का नाम व पता ..
. को निम्न विषय पर प्रतिनिधत्व करने के लिए एतद्वारा अधिकृत करता हूं ।
विषय का विवरण-
आवेदक के हस्ताक्षर तथा नाम एवं पता
मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार,
उमाकांत उमराव , प्रमुख सचिव.
नियंत्रक , शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2021 .