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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020.........

Published 28 April 2021

Department
श्रम विभाग
Type
Extraordinary
Gazette no.
218
Identifier
in.gazette.madhya.2021-04-28.218.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

शास

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सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

(असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

भोपाल , बुधवार, दिनांक 28 अप्रैल 2021 - वैशाख 8, शक 1943

क्रमांक 218]

श्रम विभाग

मंत्रालय , वल्लभ भवन, भोपाल

भोपाल, दिनांक 28 अप्रैल 2021

क्र. 599-1856-2020- ए - सोलह, निम्नलिखित प्ररूप नियम, जिन्हें राज्य सरकार, सामाजिक सुरक्षा संहिता , 2020 (2020 की 36) की धारा 154, 156 और 158 द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए तथा- (एक) मध्यप्रदेश कर्मचारी बीमा न्यायालय नियम, 1963

(दो) मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी बीमा (चिकित्सा हितलाभ एवं सुविधा) नियम, 1959 (तीन) मध्यप्रदेश चिकित्सा संस्थान आपूर्ति (कर्मचारी राज्य बीमा योजना) नियम, 1981 (चार) मध्यप्रदेश कर्मकार क्षतिपूर्ति नियम , 1962

435 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436

(पांच) मध्यप्रदेश कर्मकार क्षतिपूर्ति (व्यावसायिक रोग) नियम, 1963

(छह) मध्यप्रदेश मातृत्व हितलाभ नियम, 1965

(सात) उपादान भुगतान (मध्यप्रदेश) नियम, 1973

( आठ) मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार ( विनियमन रोजगार सेवा शर्ते) नियम, 2002 :

यथास्थिति , कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम , 1948 (1948 का 34) , प्रसूति लाभ अधिनियम, 1961 (1961 का 53) , उपदान संदाय अधिनियम, 1972 ( 1972 का 39) , भवन एवं अन्य संनिर्माण कामगार कल्याण उपकर अधिनियम, 1996 (1996 का 48) और असंगठित कामगार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम , 2008 (2008 का 43) के अधीन उक्त संहिता की धारा 164 द्वारा निरस्त किया गया है, को अधिक्रमित करते हुए , ऐसे अधिक्रमण से पूर्व किए जाने वाले कार्यो को अथवा किए जाने को छोड़कर, बनाने का प्रस्तावित है और धारा 158 द्वारा अपेक्षित किए ऐसे समस्त व्यक्तियों की जिनके इससे प्रभावित होने की संभावना है, की जानकारी के लिए एतद्दारा सूचित किया जाता है और यह सूचना दी जाती है कि उक्त प्रारूप के सरकारी राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से इन्हें पैंतालीस दिवस की अवधि के अवसान पर विचार किया जाएगा।

आपत्तियां और सुझाव यदि कोई हों, तो उप सचिव , श्रम विभाग, मध्यप्रदेश शासन, मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल अथवा श्रमायुक्त, मध्यप्रदेश शासन, 518 न्यू मोती बंगला , एम.जी. रोड , इंदौर 452007 या ई- मेल द्वारा - [email protected] या [email protected] पर भेजा जा सकता है।

उक्त प्रारूप अधिसूचना के संबंध में आपत्तियों और सुझाव के किसी भी व्यक्ति से विनिर्दिष्ट कालावधि के अवसान से पूर्व प्राप्त हों, से पहले प्राप्त राज्य सरकार द्वारा विचार किया जाएगा। 436(1)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

प्ररूप नियम

अध्याय - एक

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त शीर्षक, सीमा और प्रारंभ.-

(1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम सामाजिक सुरक्षा संहिता (मध्यप्रदेश ) नियम, 2020 है।

(2) ये नियम संपूर्ण मध्यप्रदेश में लागू होंगे ।

2. परिभाषाएँ.- (1 ) इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) "अपील " से अभिप्रेत है कि धारा 31 की उप धारा ( 1 ) के खण्ड (ख) और धारा ५६ की उप धारा (8) के अधीन दायर अपील;

(ख) "अपीलीय प्राधिकारी " से अभिप्रेत है ( 1 ) धारा 56 की उप - धारा (8) के प्रयोजन के लिए राज्य सरकार या उप श्रमायुक्त या राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट प्राधिकारी; और

(2) धारा 37 की उप- धारा (7 ) के खण्ड (ख ) के प्रयोजन के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित राज्य कर्मचारी बीमा अदालत;

(ग) "प्राधिकारी" से अभिप्रेत है राज्य सरकार या धारा 72 की उप- धारा (3) के अधीन राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट प्राधिकारी ;

(घ) "अंशदान अवधि के दौरान औसत दैनिक मजदूरी" का अर्थ है एक कर्मचारी के संबंध में संहिता के अध्याय IV के अधीन "अंशदान अवधि के दौरान औसत दैनिक मजदूरी " से अभिप्रेत है उन दिनों की संख्या जिनमें ऐसी वेतन मजदूरी देय की से उस कालावधि के दौरान उसे देय मजदूरी कोविभाजित करके प्राप्त समेकित रकम;

(ड़) "एक मजदूरी अवधि के दौरान दैनिक मजदूरी " का अर्थ है संहिता के अध्याय IV के अधीन "एक मजदूरी अवधि के दौरान औसत दैनिक मजदूरी " से अभिप्रेत है-..

(एक) किसी कर्मचारी के संबंध में जो समय - दर के आधार पर नियोजित किया जाता है, के संबंध में मजदूरी की वह राशि जो उसे पूरी मजदूरी अवधि के लिए देय थी यदि उसने उस वेतन अवधि में सभी कार्य दिवसों पर काम किया होता, जिसे 26 से विभाजित किया गया हो , यदि उसकी पाक्षिक आधार पर दर निर्धारित की जाती है तो 13 से विभाजित हो और यदि उसे साप्ताहिक रूप से निर्धारित किया जाता है तो 6 से विभाजित हो और यदि उसका दैनिक आधार पर निर्धारण किया जाता है तो 1 से विभाजित हो।

(दो) किसी अन्य आधार पर नियोजित कर्मचारी के संबंध में, अंशदान अवधि में पूर्ण वेतन अवधि के दौरान अर्जित मजदूरी की राशि जिसे पूर्ण या भाग में दिनों की संख्या से विभाजित किया गया है, जिसके लिए उसने उस मजदूरी अवधि में मजदूरी के लिए काम किया है:

परंतु किसी कर्मचारी को ऐसी मजदूरी कालावधि के दौरान किसी भी दिन काम किए बिना मजदूरी मिलती है, तो उसे 26,13, 6 या 1 दिन या दिन के लिए मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

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काम करने के लिए माना जाएगा यदि मजदूरी की अवधि क्रमशः एक महीने, एक पखवाड़े, एक सप्ताह या एक दिन हो ।

स्पष्टीकरण - जहां कोई भी रात्रि पारी आधी रात के बाद की जारी रहती है, आधी रात के बाद की रात्रि पारी की कालावधि को उस दिन की गणना पूर्व दिन के लिए काम का भाग माना जाएगा;

(च) "लाभ कालावधि" से अभिप्रेत है योगदान अवधि के अनुरूप लगातार छह महीने से अनधिक की कालावधि जैसी कि विनियमों में निर्दिष्ट किया जाए;

(छ) "मण्डल" से अभिप्रेत है मध्यप्रदेश असंगठित कर्मकार कल्याण सामाजिक सुरक्षा मण्डल की धारा 6 एवं धारा 7 के अधीन गठित मध्यप्रदेश शहरी और ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण मण्डल और मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल;

(ज) "केरियर सेंटर" से अभिप्रेत है राज्य सरकार के रोजगार विभाग का जिला रोजगार कार्यालय या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य कोई केन्द्र;

(झ) " अध्यक्ष" से अभिप्रेत है यथास्थिति मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल, मध्यप्रदेश शहरी और ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्याण मण्डल तथा स्थायी समिति, चिकित्सा लाभ समिति या कार्यकारी समिति, के अध्यक्ष;

(ञ) "न्यायालय" से अभिप्रेत है संहिता की धारा 50 के अधीन गठित कर्मचारी बीमा न्यायालय;

(ट) "इलेक्ट्रॉनिक रूप से" से अभिप्रेत हैं संहिता के प्रयोजन के लिए किसी भी मोड में ईमेल द्वारा प्रस्तुत जानकारी या निर्दिष्ट पोर्टल पर अपलोड करने या डिजिटल भुगतान्;

(ठ) "प्ररूप" से अभिप्रेत है कि इन नियमों से संलग्न प्ररूप;

(ड) "निधि" से अभिप्रेत है यथास्थिति धारा 108 तथा धारा 141 में यथा विनिर्दिष्ट सामाजिक सुरक्षा निधि;

(ढ) "सरकार" से अभिप्रेत है मध्यप्रदेश सरकार ;

(ण) "सरकारी प्रतिभूतियों " से अभिप्रेत है सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 2006 में यथा परिभाषित सरकारी प्रतिभूतियाँ ;

(त) "अचल संपत्ति" में सम्मिलिति है भूमि , भूमि से उत्पन्न होने वाले लाभ, पृथ्वी से जुडी चीजें या भूमि से जुड़ी किसी चीज से स्थायी रूप जुड़ा हुआ;

(थ) "चल संपत्ति" से अभिप्रेत है अचल संपत्ति को छोडकर हर ब्यौरे की संपत्ति ;

(द) "नोडल ऑफिसर " से अभिप्रेत है भवन और अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड या राज्य सरकार द्वारा नामित व्यक्ति, जो माइग्रेशन प्रमाण पत्र का पंजीकरण, नवीकरण और जारी करने की सुविधा के लिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से या अन्यथा प्राइवेट सेक्टर , राज्य सरकार , केंद्र 436(3)

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सरकार और केंद्र और राज्य सरकार या स्थानीय प्राधिकरण के सार्वजनिक उपक्रम या निजी रूप से काम करने वाले भवन निर्माण श्रमिकों के किसी भी अन्य कार्य के लिए पदाभिहित है नोडल अधिकारी राज्य सरकार द्वारा नामित लाभार्थी पंजीकरण अधिकारियों के कार्यों की देखरेख और निगरानी भी करेगा;

(ध) "नामांकन" से अभिप्रेत है संहित की धारा 55 के अधीन किया गया नामांकन ;

(न) "पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी" से अभिप्रेत है एक चिकित्सा व्यवसायी, जिसका नाम दवा के चिकित्सकों के पंजीकरण को नियंत्रित करने के किसी भी कानून के अधीन बनाए गए रजिस्टर में अभिलिखित किया गया है। लिए लागू होता है;

(प) "महिला कर्मचारियों का रजिस्टर " से अभिप्रेत है नियम 55 अधीन संधारित महिला कर्मचारियों का एक रजिस्टर ;

(फ) "अनुसूची" से अभिप्रेत है संहिता की अनुसूची ;

(ब) "धारा" से अभिप्रेत है संहिता की धारा ;

(भ) "पोर्टल" से अभिप्रेत है श्रम सेवा पोर्टल अथवा श्रम विभाग मध्यप्रदेश सरकार के किसी अन्य नाम से वेब पोर्टल;

(म) "निर्दिष्ट" से अभिप्रेत है केन्द्र सरकार या राज्य सरकार अथवा ऐसी सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी के आदेश द्वारा निर्दिष्ट । "

(2) उन शब्दों तथा अभिव्यक्तियों का , जिनका इस संहिता में प्रयोग किया गया है, किंतु जिन्हें परिभाषित नहीं किया गया है, वही अर्थ होगा जो केन्द्रीय संहिता में उन्हें दिया गया है।...

अध्याय- दो

सामाजिक सुरक्षा संगठन

अ. मध्यप्रदेश असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा बोर्ड

3. धारा 6 की उप- धारा (9) के अधीन राज्य असंगठित कर्मकार बोर्ड द्वारा शक्तियों के प्रयोग और कृत्यों के निर्वहन की रीति, उप- धारा ( 12 ) के अधीन बोर्ड के सदस्यों के नामनिर्देशन की रीति , उनके पद के निबंधन और सेवा की अन्य शर्ते, उनके द्वारा उनके कृत्यों के निर्वहन, में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया, और बोर्ड के सदस्यों के बीच रिक्तियों को भरने की रीति और उप - धारा ( 14) के अधीन बैठकों का समय, स्थान और कारबार के संव्यवहार से संबंधित प्रक्रिया के नियम ;

मध्यप्रदेश असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा मण्डल का गठन -

(1 ) मध्यप्रदेश असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा बोर्ड, धारा 6 की उप- धारा (9) के अधीन गठित मण्डल माना जाएगा जिसमें निम्नलिखित सदस्य समाविष्ट होंगे: -

मध्यप्रदेश असंगठित कर्मकार कल्याण मंडल में निम्नलिखित होगें:-

(क) श्रम मंत्री, मध्यप्रदेश शासन , पदेन अध्यक्ष के रूप में,

(ख) प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन, श्रम विभाग उपाध्यक्ष के रूप में मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

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(ग) एक सदस्य श्रम एवं रोजगार मंत्रालय , भारत सरकार के प्रतिनिधि

(घ) राज्य शासन द्वारा नामांकित इकतीस सदस्य जिनमें से -

(एक) सात सदस्य जो कि असंगठित कर्मकारों का प्रतिनिधित्व करते हों,

(दो) सात सदस्य जो कि असंगठित कर्मकारों के नियोजकों का प्रतिनिधित्व करते हों,

- (तीन) दो सदस्य जो कि मध्यप्रदेश की विधान सभा का प्रतिनिधित्व करते हों, (चार) पांच सदस्य जो कि समाज के प्रतिष्ठित वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हों, (सामाजिक कार्यकर्ता)

(पांच) दस सदस्य जो कि राज्य सरकार के संबंधित विभागों का प्रतिनिधित्व करते...

होः

परन्तु उपरोक्त सदस्यों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्प संख्यकों एवं महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।

(ड) राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित सदस्य सचिव ,

मध्यप्रदेश शहरी एवं ग्रामीण असंगठित कर्मकार सुरक्षा बोर्ड के अध्यक्ष के अतिरिक्त, राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट अन्य सभी सदस्य श्रम कल्याण , प्रबंधन, वित्त, कानून और प्रशासन के क्षेत्र में प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे।

(2) पदावधि.- नियम 3 के उम नियम ( 1 ) के खण्ड (घ) तथा (ड) के अधीन नियुक्त कोई सदस्य, जब तक कि वह अपना पद त्याग नहीं देता या उसकी मृत्यु नहीं हो जाती या अन्यथा वह पूर्वतर तारीख को अपना पद रिक्त नहीं कर देता , मंडल के एक सदस्य के रूप में उसे नियुक्त करने संबंधी अधिसूचना के मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से तीन वर्ष की ......कालावधि के लिए पद धारण करेगा और पुनर्नियुक्ति का पात्र होगाः

परन्तु कोई बर्हिगामी सदस्य, उसके उत्तराधिकारी की नियुक्ति राजपत्र में अनुसूचित ' होने तक , पद धारण किए रहेगा।

(3) त्यागपत्र.-

(एक) नियम 3 के खण्ड ( च) तथा (ड) के अधीन नियुक्त कोई सदस्य राज्य सरकार को संबोधित अपने हस्ताक्षरित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा।

(दो) त्याग -पत्र , राज्य सरकार द्वारा उसकी स्वीकृति की तारीख से प्रभावशील होगा।

(4) पद में रिक्ति.-

नियम 3 के खण्ड (घ) तथा (ड. ) के अधीन नियुक्त सदस्य द्वारा अपना पद रिक्त कर दिया गया समझा जाएगा, यदि -

(एक) उसे किसी सक्षम न्यायालय द्वारा विकृतचित्त या अनुन्मोचित दिवालिया घोषित कर दिया गया हो, या 436(5)

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(दो) उसे किसी ऐसे अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है, जिसमें राज्य सरकार की राय में, नैतिक अधमता अंतर्वलित है, या

(तीन) वह अध्यक्ष से, अनुपस्थित रहने की अनुमति लिए बिना मंडल के लगातार तीन सम्मिलनों से अनुपस्थित रहा हो , या

(चार) वह ऐसे हितों का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है जिनका कि प्रतिनिधित्व करने के लिए उसे नियुक्त किया गया था।

(पांच) वह राज्य सरकार द्वारा हटा दिया गया है।

(5) आकस्मिक रिक्तियों का भरा जाना. किसी सदस्य की मृत्यु, उसके त्यागपत्र , या अन्यथा उद्भूत हुई आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए नियुक्त किया गया सदस्य, उस सदस्य की पदावधि की शेष कालावधि तक पद धारण करेगा, जिसके स्थान पर उसकी नियुक्ति की गई है।

(6) मंडल का सम्मिलन एवं गणपूर्ति.- ..

(एक) मंडल का सम्मिलन सामान्यतः तीन मास में एक बार होगाः

परन्तु, अध्यक्ष, मंडल के कम से कम एक तिहाई सदस्यों से लिखित में अध्यपेक्षा प्राप्त होने के पन्द्रह दिन के भीतर उसका विशेष सम्मिलन बुला सकेगा।

(दो) मंडल के किसी सम्मिलन में कोई काम काज तक तक संपादित नहीं किया जाएगा, जब तक कि कम से कम 11 सदस्य उपस्थित न हों, जिनमें से कम से कम तीन उन सदस्यों में से होगे जो नियम 3 के खण्ड (9) (क ) ( ख) , (ग) के अधीन नियुक्त किए गए हों।

(7) सम्मिलन की सूचना और कामकाज की सूची. प्रत्येक सम्मिलन की तारीख , समय तथा स्थान... सूचित करने वाली सूचना, सम्मिलन में संपादित किए जाने वाले काम-काज की सूची के स्थान , सम्मिलन से पन्द्रह दिन पूर्व प्रत्येक सदस्य को रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा या विशेष संदेशवाहक द्वारा भेजी जाएगीः

परन्तु जब अध्यक्ष, किसी ऐसे विषय पर विचार करने के लिए, जो उसकी राय में अत्यावश्यक प्रकृति का है, सम्मिलन बुलाते है तो कम से कम तीन दिन की सूचना पर्याप्त समझी जाएगी।

(8 ) अध्यक्ष सम्मिलनों की अध्यक्षता करेंगे.- अध्यक्ष , मंडल के समस्त सम्मिलनों की अध्यक्षता करेंगे और यदि अध्यक्ष, मंडल के सम्मिलन में उपस्थित रहने में किसी कारण से असमर्थ है तो उपाध्यक्ष सम्मिलन की अध्यक्षता करेंगे ।

(9) काम- काज का संपादन. ऐसे समस्त प्रश्न, जो मंडल के किसी सम्मिलन के समक्ष आए, उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों से बहुमत से विनिश्चित किए जाएंगे और मत बराबर होने की दशा में, अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष का द्वितीय या निर्णायक मत होगा।

(10) सम्मिलन के कार्यवृत्त. मंडल की प्रत्येक सम्मिलन की कार्यवाही अभिलिखित की जाएगी तथा मंडल की अगले सम्मिलन में पुष्टि के अध्यधीन रहते हुए , सम्मिलन के पश्चात् यथासंभव शीघ्र अध्यक्ष के अनुमोदन के बाद समस्त सदस्यों को वितरित की जाएगी, ऐसी पुष्टि के पश्चात् वह, कार्यवृत्त पुस्तक में अभिलिखित की जाएगी जो स्थायी अभिलेख के लिए रखी जाएगी।..

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(11 ) अशासकीय सदस्यों को देय भत्ते. मंडल तथा उसकी उप - समितियों की बैठकों में उपस्थित होने के लिए प्रत्येक अशासकीय सदस्य को राज्य सरकार के प्रथम श्रेणी अधिकारियों को अनुज्ञेय दरों पर यात्रा- भत्ता तथा दैनिक भत्ता संदत्त किया जाएगा।

(12) मंडल की उप- समितियां.-

(एक) मंडल ऐसी उप- समितियाँ नियुक्त कर सकेगा , जैसी कि वह उसके कर्तव्यों के समुचित निर्वहन के लिए उचित समझे।

"(दो) प्रत्येक उप-समितियों की अध्यक्षता, मंडल के अध्यक्ष द्वारा की जाएगी तथा उसमें असंगठित कर्मकारों, नियोजकों तथा राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले मंडल के सदस्यों की बराबर संख्या होगी।

(तीन) अध्यक्ष की अनुपस्थिति में, उप - समिति के उपस्थित सदस्य, सम्मिलन की अध्यक्षता करने के लिए अपने में से एक का निर्वाचन करेंगे।

(चार) उप-समिति के सम्मिलन में कोई भी कार्य तब तक संपादित नहीं किया जाएगा , जब तक कि उसके सदस्यों में से कम से कम एक तिहाई सदस्य उपस्थित न हों, जिसमें से नियोजकों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों में से कम से कम एक अवश्य होगा तथा कम से कम एक असंगठित कर्मकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों में से अवश्य होगा।

(पांच) तदर्थ प्रयोजन की अल्प अवधि के लिए गठित उप- समिति को छोडकर किसी उप- समिति का कार्यकाल, उसके गठन की तारीख से एक वर्ष का होगा-

किन्तु उप- समिति जब तक कि नई उप- समिति का गठन नहीं होता है, कार्य करती रहेगीः लेकिन किसी दशा में कोई उप -समिति, उसके मूल गठन की तारीख से दो वर्ष की कालावधि के लिए कार्य नहीं करेगी।

(छह) प्रत्येक उप - समिति की अनुशंसाएं, मंडल के समक्ष उसके विनिश्चिय के लिए रखी जाएंगी । (13) सचिव, अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारिवृन्द की नियुक्ति.-

(एक) मण्डल, राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से भारतीय प्रशासनिक सेवा/राज्य प्रशासनिक सेवा के चयन ग्रेड के अधिकारी उप श्रमायुक्त स्तर के अधिकारी को मण्डल का सचिव नियुक्त करेगी ।

(दो) मंडल, ऐसे अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेगा, जैसा कि वह उसके कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए आवश्यक समझेः

परन्तु मंडल में कोई पद तब तक नहीं भरा जाएगा , जब तक कि उसके सृजन को राज्य सरकार द्वारा पहले से अनुमोदित न कर दिया गया हो।

(14) मंडल के कर्तव्य तथा कृत्य.-

(1 ) संहिता की धारा 6 की उप- धारा ( 15) के अधीन मंडल अपने कर्तव्यों के निष्पादन हेतु निम्न प्रक्रिया अपनाएगाः मंडल विनिर्दिष्ट की गई प्रत्येक सुविधा या प्रसुविधाओं के समूह के बारे में , उन प्रक्रियाओं , प्ररूपों तथा अन्य समस्त अवशिष्ट मामलों को अधिकथित करते हुए एक स्कीम , जो अधिनियम तथा इन नियमों में अभिव्यक्त रूप से उपबंधित 436(7)

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नहीं है, तैयार करेगा और राज्य सरकार को अनुशंसित करेगा जिसके अंतर्गत निम्नलिखित होगा-

(1 ) वे दरें, जिन पर विभिन्न प्रसुविधाएं देय होंगी

(2) आवेदन करने की प्रक्रिया तथा प्ररूप,

(3) मंजूरी देने की प्रक्रिया तथा अनुमोदन देने के लिए सक्षम प्राधिकारी,

(4) संवितरण के लिए प्रक्रिया; और

(5) कोई अन्य आनुषंगिक मामले

(2) मंडल संहिता के प्रशासन संबंधी बिन्दुओं पर समय समय पर राज्य सरकार को सलाह दे सकेगा।

(3) मंडल, अन्य ऐसे कार्य करेगा जो समय -समय पर राज्य सरकार द्वारा सौपे जाए।

(15) मंडल के अधिकारियों और कर्मचारिवृन्द की भर्ती प्रक्रिया तथा सेवा शर्तों.-

(एक) मंडल के अधिकारियों तथा कर्मचारियों का वर्गीकरण, वेतनमान , भत्ते, भर्ती की प्रक्रिया तथा सेवा के निबंधन और शर्ते ऐसी होंगी, जैसी कि राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से, मंडल द्वारा अवधारित की जाएं ।

(दो) यदि किसी विशिष्ट मामले में, किसी उपबंध के निर्वचन या उसके लागू होने के बारे में कोई विवाद या कठिनाई उद्भूत हो तो मामला राज्य सरकार को निर्दिष्ट किया जाएगा, जिसका निर्णय उस पर अंतिम होगा।

ख. मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल

धारा 7 की उप धारा (5) के खण्ड (ग) के अधीन उक्त बोर्ड के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों की नियुक्ति के निबंधन तथा शर्तें, वेतन तथा अन्य भत्ते तथा ऐसे सदस्यों की आकस्मिक रिक्तियों को भरने की तरीका , नियुक्ति के निबंधन तथा शर्तें और सचिव तथा अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों केवेतन तथा भत्ते;

4. मण्डल का नाम – " मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल "

(1 ) मण्डल में निम्नलिखित होंगे -

(एक) श्रम मंत्री, मध्यप्रदेश शासन , पदेन अध्यक्ष के रूप में,

(दो) एक सदस्य, जो कि केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्देशित किया जाएगाः-

(तीन) राज्य शासन द्वारा नियुक्त पांच सदस्य , जो कि शासकीय विभागों का प्रतिनिधित्व करते हों, जिनमें से श्रम विभाग के दो तथा वित्त विभाग का एक प्रतिनिधि होगा तथा दो सदस्य भवन या अन्य संनिर्माण कार्य से संबद्ध विभागों के प्रतिनिधि होगे, (चार) पांच सदस्य जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे जो कि भवन कर्मकारों का प्रतिनिधित्व करते हों; और मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

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(पांच) पांच सदस्य जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किए जाएंगे जो कि भवन कर्मकारों के नियोजकों का प्रतिनिधित्व करते हों:

परंतु भवन निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में राज्य सरकार, नियोजकों और भवन निर्माण कर्मकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले बराबर संख्या में सदस्य सम्मिलित किए जाएंगे और बोर्ड की कम से कम एक सदस्य महिला होगी।

(2) पदावधि.-

(एक) नियम 4 के खण्ड (चार) एवं (पांच) के अधीन नियुक्त कोई सदस्य , जब तक कि वह अपना पद त्याग नहीं देता या उसकी मृत्यु नहीं हो जाती या अन्यथा वह पूर्वतर तारीख को अपना पद रिक्त नहीं कर देता, मंडल के एक सदस्य के रूप में उसे नियुक्त करने संबंधी अधिसूचना के मध्यप्रदेश राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से तीन वर्ष की कालावधि के लिए पद धारण करेगा और पुनर्नियुक्ति का पात्र होगा।

(दो) परन्तु कोई बर्हिगामी सदस्य, उसकी उत्तराधिकारी की नियुक्ति राजपत्र में अनुसूचित होने तक, पद धारण किए रहेगा।

(3) त्याग पत्र.-

(एक) नियम 4 के खण्ड (चार ) तथा ( पांच ) के अधीन नियुक्त कोई सदस्य राज्य सरकार को संबोधित अपने हस्ताक्षरित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा।

(दो) त्याग-पत्र, राज्य सरकार द्वारा उसकी स्वीकृति की तारीख से प्रभावशील होगा।

(4) पद में रिक्ति.-

(1 ) नियम 4 के खण्ड (तीन) तथा (चार) के अधीन नियुक्त सदस्य द्वारा अपना पद रिक्त कर दिया गया समझा जाएगा, यदि-

(एक) उसे किसी संक्षम न्यायालय द्वारा विकृतचित्त का या अनुन्मोचित दिवालिया घोषित कर दिया गया हो, या

(दो) उसे किसी ऐसे अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है, जिसमें राज्य सरकार की राय में, नैतिक अधमता अंतर्वलित है , या

(तीन) वह अध्यक्ष से, अनुपस्थित रहने की स्वीकृति लिए बिना मंडल के लगातार तीन सम्मिलनों से अनुपस्थित रहा हो , या

(चार) वह ऐसे हितों का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है जिनका कि प्रतिनिधित्व करने के लिए उसे नियुक्त किया गया था।

(

पांच) उसे राज्य सरकार द्वारा हटा दिया गया हो।

(5) आकस्मिक रिक्तियों का भरा जाना.- किसी सदस्य की मृत्यु, उसके त्यागपत्र के कारण या अन्यथा उद्भूत हुई आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए नियुक्त किया गया सदस्य, उस सदस्य की पदावधि की शेष कालावधि तक पद धारण करेगा , जिसके स्थान पर उराकी नियुक्ति की गई है। 436(9)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

(6) प्रत्येक मंडल का सम्मिलन एवं गणपूर्ति.-

(एक) मंडल का सम्मिलन सामान्यतः तीन मास में एक बार होगाः

परन्तु, अध्यक्ष, मंडल के कम से कम एक तिहाई सदस्यों से लिखित में अध्यपेक्षा प्राप्त होने के पन्द्रह दिन के भीतर उसका विशेष सम्मिलन बुला सकेगा।

(दो) मंडल के किसी सम्मिलन में कोई काम- काज तक तक संपादित नहीं किया जाएगा, जब तक कि कम से कम 6 सदस्य उपस्थित न हों, जिनमें से कम से कम एक उन सदस्यों में से होगे जो नियम 4 के उप- नियम (3) के अधीन नियुक्त किए गए हों।

(7) सम्मिलन की सूचना और कामकाज की सूची. प्रत्येक सम्मिलन की तारीख , समय तथा स्थान सूचित करने वाली सूचना, सम्मिलन में संपादित किए जाने वाले काम-काज की सूची के स्थान , सम्मिलन से , पन्द्रह दिन पूर्व प्रत्येक सदस्य को रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा या विशेष संदेशवाहक द्वारा भेजी जाएगीः

परन्तु जब अध्यक्ष , किसी ऐसे विषय पर विचार करने के लिए , जो उसकी राय में अत्यावश्यक प्रकृति का है, सम्मिलन बुलाते है तो कम से कम तीन दिन की सूचना पर्याप्त समझी जाएगी।

(8) अध्यक्ष बैठकों की अध्यक्षता करेगे. अध्यक्ष (चेयर पर्सन, मंडल की समस्त बैठकों की अध्यक्षता करेंगे और यदि अध्यक्ष, मंडल के सम्मिलन में उपस्थित रहने में किसी कारण से असमर्थ है तो अध्यक्ष द्वारा इस निमित्त नाम निर्देशित कोई सदस्य तथा ऐसा नाम निर्देशन न होने पर सम्मिलन में उपस्थित सदस्यों द्वारा उनमें से निर्वाचित कोई अन्य सदस्य सम्मिलन की अध्यक्षता करेगे ।

(9) काम काज का संपादनः ऐसे समस्त प्रश्न , जो मंडल की किसी सम्मिलन के समक्ष आऐं, . उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों से बहुमत से विनिश्चित किए जाएंगे और मत बराबर होने की दशा में, अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति का द्वितीय या निर्णायक मत होगा।

(10) सम्मिलन के कार्यवृत्त. मंडल की प्रत्येक सम्मिलन की कार्यवाही अभिलिखित की जाएगी तथा मंडल की अगली सम्मिलन में पुष्टि के अध्यधीन रहते हुए, सम्मिलन के पश्चात् यथासंभव शीघ्र अध्यक्ष के अनुमोदन के बाद समस्त सदस्यों को वितरित की जाएगी , ऐसी : पुष्टि के पश्चात् वह, कार्यवृत्त पुस्तक में अभिलिखित की जाएगी जो स्थायी अभिलेख के लिए रखी जाएगी।

(11 ) अशासकीय सदस्यों को देय भत्ते. मंडल तथा उसकी उप -समितियों की बैठकों में उपस्थित होने के लिए प्रत्येक अशासकीय सदस्य को राज्य सरकार के प्रथम श्रेणी अधिकारियों को अनुज्ञेय दरों पर यात्रा- भत्ता तथा दैनिक- भत्ता संदत्त किया जाएगा। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

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(12) मंडल की उप- समितियां.-

(एक) मंडल ऐसी उप-समितियां नियुक्त कर सकेगा, जैसी कि वह उसके कर्तव्यों के समुचित निर्वहन के लिए उचित समझे।

(दो) प्रत्येक उप- समितियों की अध्यक्षता, मंडल के अध्यक्ष द्वारा की जाएगी तथा उसमें भवन कर्मकारों, नियोजकों तथा राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले मंडल के सदस्यों की बराबर संख्या होगी।

(तीन) अध्यक्ष की अनुपस्थिति में, उप- समिति के उपस्थित सदस्य , सम्मिलन की अध्यक्षता करने के लिए अपने में से एक का निर्वाचन करेंगे।

(चार) उप -समिति की सम्मिलन में कोई भी कार्य तब तक संपादित नहीं किया जाएगा, जब तक कि उसके सदस्यों में से कम से कम एक तिहाई सदस्य उपस्थित न हों, जिसमें से नियोजकों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों में से कम से कम एक अवश्य होगा तथा कम से कम एक भवन कर्मकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों में से अवश्य होगा। (पांच) तदर्थ प्रयोजन की अल्प अवधि के लिए गठित उप -समिति को छोडकर क़िसी उप- समिति का कार्यकाल , उसके गठन की तारीख से एक वर्ष का होगा । किन्तु उप - समिति जब तक की नई उप- समिति का गठन नहीं होता है, कार्य करती रहेगी।

लेकिन किसी दशा में कोई उप- समिति , उसके मूल गठन की तारीख से दो वर्ष की कालावधि के परे कार्य नहीं करेगी।

(छह) प्रत्येक उप- समितिं की अनुशंसाएं, मंडल के समक्ष उस‌के विनिश्चिय के लिए रखी जाएगी।

(13) क्षेत्रीय कार्यालय खोलना. मंडल, राज्य सरकार के अनुमोदन से, उतने क्षेत्रीय कार्यालय खोल सकेगा , जितने वह संहिता के अधीन उसके कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए आवश्यक समझे।

(14) मंडल के कर्तव्य तथा कृत्य.-

(1 ) मंडल , संहिता की धारा 7 की उप धारा (6) के अधीन निम्नलिखित के लिए उतरदायी होगा-

(क) निधि के प्रशासन से संबंधित सभी विषय, जिनमें उसमें जमा राशि के विनिधान के लिए नीतियों अभिकथित करना सम्मिलित है,

(ख) संहिता के अधीन शासन को वार्षिक बजट , वार्षिक रिपोर्ट तथा संपरीक्षित लेखे प्रस्तुत करना, 436(11)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

(ग ) संहिता के उपबंधों के अनुसार लेखाओं को समुचित अनुरक्षण तथा उनका वार्षिक संपरीक्षण,

(घ) निधि में अंशदान एवं अन्य प्रभारों का संग्रहण,

(च) मंडल समय समय पर , सरकार को ऐसी जानकारी देगा जैसी वह ठीक समझे, (ड) संहिता में विनिर्दिष्ट तथा उसके अधीन कृत्यों का पालन करना ।

(2) मण्डल द्वारा सुविधाओं से संबंधित प्रक्रियात्मक तथा अन्य आनुषंगिक मामलों में स्कीम कोअधिसूचनाकरगा

मण्डल , संहिता और इन नियमों में उपबंधित के लिए एक स्कीम विरचित करेगा जिसमें प्रक्रिया प्रवर्ग तथा अन्य आनुषंगिक मामले जैसे प्रत्येक प्रसुविधा या विनिर्दिष्ट प्रसुविधाएं अधिनियमित की जाएंगी तथा राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से उसे अधिसूचित करेगा जिसमें -

(क) वे दरें, जिन पर विभिन्न प्रसुविधाएं देय होंगी,

(ख) आवेदन करने की प्रक्रिया तथा प्ररूप ,

(ग) मंजूरी देने की प्रक्रिया तथा मंजूरी देने के लिए सक्षम प्राधिकारी,

(घ) संवितरण के लिए प्रक्रिया और

(ड़) कोई अन्य आनुषंगिक मामले

(15) सचिव, अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारिवृन्द की नियुक्ति.-

(एक) मंडल , सरकार की पूर्व सहमति से, किसी अधिकारी को, जो उपश्रमायुक्त से निम्न पदश्रेणी का न हो, मंडल के सचिव के रूप में नियुक्त कर सकेगा ।

(दो) मंडल , ऐसे अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों को नियुक्त कर सकेगा, जैसा कि वह उसके कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए आवश्यक समझेः

परन्तु मंडल में कोई पद तब तक नहीं भरा जाएगा , जब तक कि उसके सृजन को राज्य सरकार द्वारा पहले से अनुमोदित न कर दिया गया हो ।

(16) मंडल के अधिकारियों और कर्मचारिवृन्द की भर्ती प्रक्रिया तथा सेवा शर्तें .-

(एक) मंडल के अधिकारियों तथा कर्मचारियों का वर्गीकरण , वेतनमान, भत्ते, भर्ती की प्रक्रिया तथा सेवा के निबंधन और शर्तें ऐसी होंगी, जैसी की राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से, मंडल द्वारा अवधारित की जाएं।

(दो) यदि किसी विशिष्ट मामले में, किसी उपबंध के निर्वचन या उसके लागू होने के बारे में कोई विवाद या कठिनाई उद्भूत हो तो मामला राज्य सरकार को निर्दिष्ट किया जाएगा, जिसका निर्णय उस पर अंतिम होगा। मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

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5. धारा 7 की उप- धारा (6 ) के खंड (ग) के अधीन लाभार्थियों की समूह बीमा योजना, खंड ( घ) के अधीन लाभार्थियों के बच्चों के लाभ के लिए शैक्षिक योजनाएं और खंड (ङ) के अधीन लाभार्थी की प्रमुख बीमारियों के उपचार के लिए चिकित्सा व्यय या इस तरह के आश्रित के लिए प्रीमियम के संबंध में राशिः

संहिता की धारा 7 की उप- धारा (6 ) में उल्लिखित कल्याणकारी योजनाओं के बावजूद, मण्डल , राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन के साथ भवन और अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड श्रमिकों के लिए निम्नलिखित योजनाएं बना सकती हैं -

(1 ) लाभार्थियों की समूह बीमा योजना के लिए प्रीमियम के संबंध में ऐसी राशि का भुगतान करना;

(2) लाभार्थियों के बच्चों के लाभ के लिए शैक्षिक योजनाओं को तैयार करना; तथा

(3) किसी लाभार्थी या उनके आश्रित की प्रमुख बीमारियों के उपचार के लिए इस तरह के चिकित्सा व्यय को प्रदान करना ।

अध्याय-तीन

कर्मचारी भविष्य निधि

अध्याय - चार

कर्मचारी राज्य बीमा निगम

6. रीति और समय जिसके भीतर बीमाकृत व्यक्ति या निगम द्वारा धारा 37 की उप- धारा (7) के खण्ड (ख) के अधीन कर्मचारी बीमा न्यायालय में दूसरी अपील दायर की जा सकती है -

यथास्थिति, बीमित व्यक्ति या कॉर्पोरेशन मेडिकल बोर्ड या मेडिकल अपील ट्रिब्यूनल के निर्णय के नब्बे दिवस के भीतर एक आवेदन प्रस्तुत करके कर्मचारी बीमा न्यायालय में अपील कर सकता है :

परन्तु कर्मचारी बीमा न्यायालय नब्बे दिन की अवधि के पश्चात् एक आवेदन पर विचार कर सकता है, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि अपीलकर्ता के पास उक्त अवधि के भीतर आवेदन प्रस्तुत नहीं करने के लिए पर्याप्त कारण थे।

7. धारा 50 की उप- धारा (2 ) और उप- धारा (3) के अधीन नियमों के अधीन कर्मचारी बीमा न्यायालय द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया.

(1) न्यायालय की संरचना तथा सम्मिलन का स्थान -

(एक) न्यायालय लगा या तथा एक न्यायाधीश से गठित होगाः 436(13)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

परंतु सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा किसी विशिष्ट कार्यवाही या कार्यवाहियों के वर्ग के लिए ऐसी कालावधि के लिए, जो अधिसूचना में उल्लिखित की जाएं , न्यायालय के लिए दो या अधिक न्यायधीशों की नियुक्ति कर सकेगा।

(दो) उप -नियम (3) के उपबंधों के अधधीन रहते हुए न्यायालय की सम्मिलन ऐसे स्थान या स्थानों पर तथा ऐसे समय पर होगी, जैसा कि सरकार समय -समय पर उल्लिखित करें ।

(2) जहां एक से अधिक न्यायालय हों वहां कार्य का वितरण. जहां एक ही स्थानीय क्षेत्र के लिए... एक से अधिक न्यायालय गठित किए गए हों, वहां शासन, सामान्य या विशेष आदेश द्वारा , उनके बीच कार्य का वितरण कर सकेगा।

(3) जहां दो या अधिक स्थानीय क्षेत्रों के लिए एक ही न्यायालय हो, वहां समय का नियत किया जाना, सम्मिलन आदि के संबंध में -

(एक) जहां दो या अधिक स्थानीय क्षेत्रों के लिए एक ही न्यायालय गठित किया गया हो, वहां न्यायालय शासन के अनुमोदन के अधीन रहते हुए, वह समय नियम करेगा जबकि न्यायालय प्रत्येक स्थानीय क्षेत्र के संबंध में या अधिनियम के अधीन कार्यवाहियों के किसी वर्ग के संबंध में बैठेगा।

(दो) उप-नियम ( 1 ) के अधीन नियम किए गए समय की सूचना ऐसी रीति में प्रकाशित की जाएगी जैसी की शासन समय समय पर निर्देशित करे ।

(4) प्रक्रिया जहां एक से अधिक न्यायाधीश हों -

(एक) जहां न्यायालय के लिए एक से अधिक न्यायाधीश नियुक्त किए गए हों, वहां शासन उनकी पदस्थिति ( रैंक) तथा पूर्वता ( प्रिसीडेंस ) उल्लेखित करेगा।

(दो) तत्समय वरिष्ठ न्यायाधीश समय- समय पर न्यायाधीशों के बीच न्यायालय के कार्य के वितरण के संबंध में ऐसी व्यवस्था करेगा जो कि वह उचित समझें।

(तीन) जब दो या अधिक पीठासीन न्यायाधीशों के बीच किसी प्रश्न पर मतभेद हो, तब ऐसे न्यायाधीशों का बहुमत अभिभावी होगा, जहां बहुमत न हो वहां जब तक कि सरकार अन्यथा निर्देशित न करे , वरिष्ठतम न्यायाधीश का मत अभिभावी होगा।

(5) न्यायालय की समाप्ति आदि सरकार राजपत्र में , अधिसूचना द्वारा किसी भी न्यायालय की समाप्ति कर सकेगा या समान अधिसूचना द्वारा न्यायालय का क्षेत्राधिकार परिवर्तित कर सकेगा। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

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न्यायाधीशों की सेवा शर्ते आदि

(6) नियुक्ति वेतन, भत्ते आदि.-

(एक) शासन ऐसे व्यक्ति को जो धारा 48 के अधीन अर्हता रखता हो, न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्तकर सकता है।

(दो) न्यायाधीश ऐसे वेतन व भत्ते प्राप्त करेगा जो कि राज्य सरकार समय - समय पर अवधारित करें ।

(तीन) न्यायाधीश मंहगाई भत्ता, प्रतिकात्मक (नगर) भत्ता, ग्रह भाटक तथा अन्य भत्ते ऐसी दरों के तथा ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए प्राप्त कर सकेगा जो कि उसी स्थान पर नियुक्तकिए गए शासन के उसी पदस्थिति (रैंक) के पदाधिकारियों को लागू होती है । (चार) न्यायाधीश ऐसे अवकाश नियमों के अधीन जो कि समय - समय पर तत्समय स्थिति (स्टेट्स) के तथा उपलब्धियां पाने वाले शासकीय सेवकों को लागू होते है अवकाश तथा वेतन का हकदार होगा ।

(पांच) न्यायाधीश शासकीय कामकाज के सिलसिले में की गई यात्राओं के लिए ऐसे मान (स्केल ) के अनुसार यात्रा' भत्ता का हकदार होगा जो कि उस वर्ग के पदाधिकारियों को, जिससे किशासन की राय में, ऐसा न्यायाधीश सम्बन्धित हो, लागू होता है ।

(छह) न्यायालय ऐसी अन्य सेवा शर्तों के अधीन होगा जो कि राज्य सरकार अवधारित करे। (सात) उप-नियम (2) से (5) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी न्यायाधीश का यदि वह पहले से हो शासन की सेवा में हो वेतन भत्ते तथा अन्य सेवा शर्ते ऐसी होगी जो कि राज्य सरकार सामान्य या विशेष आदेश द्वारा समय - समय पर अवधारित करें।

(7) अन्य पदाधिकारियों तथा अधीनस्थ कर्मचारियों की नियुक्ति -

(एक) शासन ऐसे अनुसचिवीय पदाधिकारियों तथा अन्य कर्मचारिवृन्दों की नियुक्ति कर सकेगा जो कि अधिनियम द्वारा या उसके अधीन कार्यालय को प्रदत्त की गई शक्तियों के प्रयोग तथा उस पर अधिरोपित किए गए कर्तव्यों के निष्पादन के लिए आवश्यक हो।

(दो) न्यायालय के अनुसचिवीय पदाधिकारी तथा अधीनस्थ कर्मचारिवृन्द ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेंगे तथा ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे जो कि न्यायाधीश या यदि एक से अधिक न्यायाधीश हों तो वरिष्ठ न्यायाधीश शासन के किसी आदेश के अधीन रहते हुए समय- समय पर निर्देशित करें ।

(तीन) न्यायालय के अनुसचिवीय पदाधिकारी तथा अधीनस्थ कर्मचारी वृन्द ऐसी सेवा के अधीन होंगे और ऐसे वेतन तथा अन्य उपलब्धियां तथा फायदे प्राप्त करेंगे जो शासन द्वारा निर्धारित किए जाए। 436(15)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

प्रशासनिक नियंत्रण और न्यायालय मुद्रा

(8) उच्च न्यायालय का प्रशासनिक नियंत्रण. समस्त न्यायालय , उच्च न्यायालय के प्रशासनिक नियंत्रण और अधीक्षण के अध्यधीन होंगे; तथा

(एक) ऐसे रजिस्टर, पुस्तकें तथा लेखे रखेंगे जैसे कि उच्च न्यायालय द्वारा समय समय पर विहित किया जाए,

(दो) ऐसी अध्यपेक्षाओं का पालन करेगा जैसा कि सेवा अभिलेख विवरणियां और कथन ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में जैसा कि अध्यपेक्षा करने वाले प्राधिकारी , द्वारा निर्देशित किया जाए की प्रस्तुति के लिए जैसा कि उच्च न्यायालय या सरकार द्वारा की जाए।

(9) मुद्रा.- न्यायालय ऐसे आकार, माप तथा रूपांकन की मुद्रा जैसा कि शासन द्वारा निर्देशित किया जाए; रखेगी।

प्रक्रिया तथा आदेशों का निष्पादन

(10) आवेदन पत्र.-

(एक) धारा 49 के अधीन प्रत्येक कार्यवाही न्यायालय को आवेदन पत्र प्रस्तुत कर संस्थित कीजाएगी ।

(दो) प्रत्येक ऐसा आवेदन पत्र उस रीति में सत्यापित किया जाएगा जिस रीति में सिविल न्यायालय में अभिकथन सत्यापित किया जाता है और उसके साथ उसकी दो प्रतियाँ संलग्नकी जाएगी।

(तीन) आवेदन पत्र प्ररूप-1 में प्रस्तुत किया जाएगा । इसे नियमों के अनुसार सम्यक् रूप से मुद्रांकित किया जाएगा तथा इसमें निम्नलिखित ब्यौरे अंतर्विष्ट होंगे: -

(क) उस न्यायालय का नाम जिसमें आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया हो;

(ख) आवेदक का पूरा नाम जिसमें पिता के नाम सम्मिलित है वर्णन आयु व्यवसाय तथा निवास स्थान;

(ग) विरोधी, पक्षकार का पूरा नाम, पिता के नाम सहित तथा वर्णन आयु, व्यवसाय तथा निवास स्थान सहित, जहां तक सुनिश्चित किया जा सकता है;

(घ) जहां आवेदक या विरोधी पक्षकार अवयस्क हो या विकृत चित्त का व्यक्ति हो वहां उस आशय का कथन तथा उसके वाद- मित्र या संरक्षक का पूरा नाम, आयु,,व्यवसाय तथा पता;

(ड़) वाद कारण (काज आफ एक्सन) की रचना करने वाले तथ्य तथा वह दिनांक जिसकों वह उद्भूत हुआ हो;

(च) यह दर्शाने वाला तथ्य कि न्यायालय का क्षेत्राधिकार है;

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

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(छ) न्यायालय के क्षेत्राधिकार के भीतर यह दर्शाने वाली विशिष्टियां जिन पर कि सूचना या समन आवेदन पर तामील किए जा सकेंगे; और

(ज) अनुतोष जिसका कि आवेदक दावा करता हो ।

(चार) यदि आवेदन पत्र उप - नियम (3 ) के अनुसार न हो तो उसे मंजूर किया जा सकेगा। (11 ) दस्तावेजों का प्रस्तुतिकरण...

(एक) जब कोई आवेदन किसी दस्तावेज पर आधारित हो तो वह दस्तावेज आवेदन पत्र के साथ संलग्न किया जाएगा।

(दो) कोई भी अन्य दस्तावेज , जो कि कोई पक्षकार साक्ष्य में प्रस्तुत करना चाहता हो प्रथम सुनवाई पर या उसके पूर्व प्रस्तुत किया जाएगा।

(तीन) कोई भी दस्तावेज जो यथास्थिति उप - नियम ( 1 ) या (2) में उल्लेखित समय पर या उसके भीतर प्रस्तुत किया गया हो, उस पक्षकार की ओर से, जिसे कि उसे प्रस्तुत करना चाहिये था, न्यायालय की अनुज्ञा के बिना साक्ष्य में ग्राह नहीं होगा।

(चार) ऐसे समस्त दस्तावेजों के साथ प्ररूप -2 में विहित रीति में तैयार की गई उनकी सही सूची होगी।

- (पांच) इस नियम में कोई भी बात ऐसे किसी भी दस्तावेज पर लागू नहीं होगी जो कि गवाही देने के लिए जिरह के लिए तैयार किया जाता है या उसकी याददाश्त को ताजा करने के -लिए किसी गवाह को सौंप दिया जाता है।

...(12) कार्यवाहियों का रजिस्टर. समस्त आवेदन पत्र "कार्यवाहियों का रजिस्टर " कहलाने वाले एक रजिस्टर में, जो प्ररूप-3 में होगा, प्रविष्ट किए जाएंगे। ऐसी प्रविष्टियां प्रत्येक कलेण्डर वर्ष के लिए उस क्रम के अनुसार क्रमांकित की जाएंगी जिस क्रम में आवेदन -पत्र प्रस्तुत किए गए हों।

(13) वाद प्रस्तुत करने का स्थान- ऐसे मामलों में जो नियम 1 के उप नियम (2 ) के अंतर्गत न आते हों किसी भी व्यक्ति के विरूद्ध कार्यवाही उस न्यायालय में संस्थित की जाएगी जिसके कि क्षेत्राधिकार की स्थानीय सीमाओं के भीतर -

(एक) विपक्षी पक्षकार या जहां एक से अधिक विपक्षी पक्षकार हों वहां उनमें से प्रत्येक विपक्षी पक्षकार कार्यवाहियों के प्रारम्भ के समय वस्तुतः तथा स्वेच्छापूर्वक निवास करता हो, या कारबार करता हो या अभिलाभ के लिए व्यक्तिशः कार्य करता हो; या (दो) जहां एक से अधिक विपक्षी पक्षकार हों, वहां कोई भी विपक्षी पक्षकार कार्यवाहियों के प्रारंभ के समय वस्तुतः तथा स्वेच्छा पूर्वक निवास करते हों या अभिलाभ के लिए व्यक्तिशः कार्य न करते हों ऐसे संस्थितिकरण के लिए मौन सम्मति देते हों; या मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(17) विपरीत पक्षकार जो निवास नहीं करते है, या व्यवसाय पर चलते हो या व्यक्तिगत रूप से इस तरह के संस्थान में पूर्वोक्त के रूप में लाभ के लिए काम करते हो या, (तीन) वाद कारण पूर्णतः या अंशतः उद्भूत हुआ हो।

( 14) गलत न्यायालय में प्रस्तुत किए गए पत्र.- ( 1 ) यदि आवेदन पत्र प्राप्त होने पर, न्यायालय को यह प्रतीत हो कि वह किसी अन्य न्यायालय में प्रस्तुत किया जाना चाहिए, तो वह उस पर..... प्रस्तुत किए जाने तथा वापिस किए जाने के दिनांक, उसे वापिस करने का कारण तथा उस न्यायालय का, जिसको कि उसे प्रस्तुत किया जाना चाहिए , पदाभिधान पृष्ठांकित करने के पश्चात(आवेदन पत्र के) आवेदक को वापस कर देगा।

(2) यदि आवेदन पत्र के प्रस्तुतीकरण के पश्चात , किसी भी प्रक्रम पर न्यायालय को यह प्रतीत हो कि आवेदन पत्र उसी राज्य में किसी दूसरे न्यायालय को प्रस्तुत किया जाना चाहिए था, तो वह आवेदन पत्र को ऐसे न्यायालय को, जो उसके संबंध में कार्यवाही करने के लिए सशक्त हो , भेजेगा और आवेदक को (तथा विपक्षी पक्षकार को, यदि उसे नियम 18 के अधीन आवेदन पत्र की प्रति प्राप्त हो चुकी है) तद्नुसार सूचना देगा ।

(3) वह न्यायालय जिसे उप-नियम (2 ) के अधीन आवेदन पत्र अंतरित किया हो , यदि उसका इस बात से समाधान हो जाय कि पक्षकारों के हितों पर इस कारण से कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडेगा, कार्यवाही को इस प्रकार चालू रख सकेगा मानों की कार्यवाही या उसका कोई भाग उसके समक्ष ही हुआ था ।

( 15) समन का जारी किया जाना.- (1 ) न्यायालय , आवेदन पत्र प्राप्त होने पर, यदि वह उसके प्राप्त होने के बीस दिन के भीतर ही नियम 11 के उप-नियम (4) के अधीन नामंजूर न कर दिया गया हो, तो उस पक्षकार को जिससे कि आवेदक अनुतोष का दावा करता हो, ( जो इसमें इसके पश्चात "विपक्षी पक्षकार " के नाम से निर्दिष्ट है) ऐसे दिनांक को , जो ऐसे समन के जारी होने के दिनांक से पंद्रह दिन के पश्चात का नहीं होगा, जो कि उसमें उल्लिखित किया जाएगा, उपसंजात होने तथा आवेदन पत्र का उत्तर देने के लिए यथास्थिति प्ररूप 4 या प्ररूप 5 में समन भिजवायेगा:

परंतु जब आवेदन पत्र के प्रस्तुत किए जाने पर विरोधी पक्षकार उपसंजात हुआ हो और उसके आवेदन का दावा स्वीकार कर लिया हो, तब ऐसे कोई भी समन जारी नही किए जाएगे।

(1 ) के अधीन समन के साथ आवेदन पत्र की एक प्रति भेजी जाऐगी ।

(2) उप-नियम

(16) समन या सूचना की तामीलं.- ( 1 ) समन या सूचना, अपेक्षित फीस के भुगतान पर उस न्यायालय द्वारा , जिसके द्वारा वह जारी की गई हो , या तो रजिस्ट्रीकृत डाक से या ऐसी अन्य रीति में, भेजी जा सकेगी जैसा कि न्यायालय द्वारा उचित समक्षा जाए । मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

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(2) जहां न्यायालय का यह समाधन हो जाता है कि यह विश्वास करने का कारण है कि विपक्षी पक्षकार तामील की अवहेलना कर रहा है या यह किसी कारण से समन या सूचना साधरण ढंग से तामील नहीं की जा सकती, वहां न्यायालय यह आदेश देगा कि समन या सूचना की तामील उसकी एक प्रति न्यायालय भवन के किसी सहज दृश्य स्थान पर, तथा उस गृह के, जिसमें कि विपक्षी पक्षकार का अन्ततः निवास करना या कारबार करना या अभिलाभ के लिए व्यक्तिशः कार्य करना ज्ञात हो, किसी सहज दृश्य भाग पर भी चिपकवाकर या ऐसी अन्य रीति में, जो कि न्यायालय उपयुक्त समझे, की जाए और वह तामील उसी प्रकार प्रभावशाली होगी मानो कि वह विपक्षी- पक्षकार पर व्यक्तिशः की गई हो।

(3) जहां समन या सूचना उप- नियम (2) के अधीन तामील हो चुकी हो, वहां न्यायालय विपक्षी पक्षकार की उपसंजाति के लिए ऐसा समय नियम करेगा जो कि मामले की परिस्थितियों से अपेक्षित हो।

(17) समन में अतिरिक्त बातें. न्यायालय समन जारी करते समय यह अवधारित करेगा कि क्या यह केवल वादपदों के निर्णयन के लिए होगा तथा/या आवेदन पत्र के अंतिम निपटारे के लिए होगा और समन में तदनुसार निर्देश अंतर्विष्ट होगा । न्यायालय उस दिनांक को पक्षकारों को कोई ऐसी साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए भी अपेक्षित कर सकेगा जो वे प्रस्तुत करना चाहते हों।

(18) विकलांगता प्रश्न से जुडी कार्यवाही. ऐसे मामलों में कार्यवाही जहां निर्योग्यता का प्रश्न निहित हो- यदि नवीन न्यायालय के समक्ष किसी कार्यवाही में निर्योग्यता का प्रश्न ( जैसा कि संहिता की धारा 37 में परिभाषित किया गया है) उपस्थित हो और जिस पर मेडिकल बोर्ड या मेडिकल अपील ट्रिब्यूनल का निर्णय प्राप्त नहीं किया गया हो और जिस पर ऐसा निर्णय न्यायालय के समक्ष उपस्थित प्रश्न अथवा दावे के निराकरण हेतु आवश्यक हो तो न्यायालय निगम को निर्देशित करेगा कि वह संहिता की धारा 37 के अनुसार ऐसा निर्णय प्राप्त कर प्रस्तुत करे और तत्पश्चात् न्यायालय द्वारा धारा 49 के अधीन विवेचना अधीन प्रश्न या दावे के निराकरण हेतु कार्यवाही करेगा।

(19) लिखित कथन.- (एक) विपक्षी पक्षकार प्रथम सुनवाई पर या उसके पूर्व या ऐसे समय के भीतर, जो कि न्यायालय अनुज्ञात करे , ऐसे दस्तावेज , जिनका कि वह अवलम्बन लेता हो तथा प्ररूप -2 में उनकी सही सूची सहित अपनी प्रतिरक्षा का लिखित कथन प्रस्तुत कर सकेगा, और यदि ऐसा करने के लिए न्यायालय द्वारा अपेक्षित किया जाय तो प्रस्तुत करेगा ।

(दो) प्रत्येक ऐसा लिखित कथन उसी रीति में सत्यापित किया जायगा जिस रीति में कि सिविल न्यायालय में अभिवचन सत्यापित किया जाता है और उसके साथ उसकी दो प्रतियाँ संलग्न कीजाएंगी।

(तीन) उप- नियम (1 ) के अधीन प्रस्तुत किए गए किसी भी लिखित कथन में विपक्षी पक्षकार, आवेदन द्वारा अभिकथित तथ्य के प्रत्येक अभिकथन का, जिसकी कि सत्यता को वह स्वीकार करता हो, स्वीकार न करता हो, या जिससे वह इंकार करता हो, उल्लेख करेगा। लिखित कथन में ऐसी समस्त बातें, जो यह दर्शाती हो कि आवेदन पत्र विशिष्ट रूप से संधारण योग्य 436(19)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

नहीं है तथा प्रतिरक्षा के समस्त आधार जिनके प्रस्तुत न किए जाने से सम्भवतः आवेदक विस्मय में पड़ जाएगा या तो ऐसे तथ्य संबंधी वाद पद से उदाहरणार्थ कपट , असम्यक असर या दबाव , सम्मोचन, निष्पादन , या संव्यवहार की अवैधता दर्शाने वाले तथ्य , जो आवेदन पत्र से उद्भूत न होते हों, भी अन्तर्विष्ट होने चाहिए।

(20) न्यायालय द्वारा मांगे गए लिखित कथन को प्रस्तुत करने में चूक. जहां कोई पक्षकार जिससे कि लिखित कथन अपेक्षित किया गया हो, न्यायालय द्वारा विहित किए गए समय के भीतर उसे प्रस्तुत करने में असफल रहता है, वहां न्यायालय उसके विरोधी निर्णय सुना सकेगा या कार्यवाही के संबंध में ऐसा आदेश दे सकेगा, जो कि वह उचित समझे।

(21 ) विवाद्यकों की रचना. ( एक) समन जारी कर दिए जाने के पश्चात्, आवेदन की प्रथम सुनवाई पर, न्यायालय आवेदन तथा लिखित कथन , यदि कोई हो, पर विचार करने के पश्चात् या पक्षकारों या किसी व्यक्ति या किसी दस्तावेज की ऐसी परीक्षण करने के पश्चात्, जो कि आवश्यक प्रतीत हो, यह सुनिश्चित करेगा कि तथ्य या विधि की किस सारवान प्रस्थापना (प्रपोजीशन ) पर पक्षकारों में असामंजस्य है, और तदुपरि ऐसे विवाद्यक विरचितः तथा अभिलिखित करेगा, जिन पर कि न्यायोचित निर्णय का निर्भर होना प्रतीत होता हो।...

(दो) अभिलिखित करने में न्यायालयं उन विवाद्यकों जो उसकी राय में तथ्य की बातों से संबंध रखते हों तथा उन विवाद्यकों जो विधि की बातों से संबंध रखते हों, के बीच भेद करेगा। (तीन) न्यायालय , वैसी ही रीति में, अपना अंतिम आदेश पारित करने के पूर्व, किसी भी समय विवाद्यक में, ऐसे निबन्धनों पर , जैसे कि वह उचित समझे , कुछ जोड़ सकेगा , उसमें से कुछ हटा सकेगा, या उन्हें किसी भी प्रकार संबोधित कर सकेगा ।.

(22) उस मामले में आदेश जहां पक्षकार विवादग्रस्त न हों. जहां मामले की किसी भी सुनवाई में यह प्रतीत हो कि पक्षकार विधि या तथ्य के किसी प्रश्न पर विवादग्रस्त नहीं हैं, न्यायालय तत्काल अपना अंतिम आदेश सुना सकेगा।

(23) पक्षकारों का उपसंजात होना और उपसंजात न होने के परिणाम.- (एक) विरोधी पक्षकार को उपसंजात होना तथा उत्तर देने के लिए समन में नियत किए दिन को पक्षकार या तो व्यक्तिशः या अपने-अपने विधि व्यवसाइियों या धारा 51 (2 ) के अधीन प्राधिकृत किए गए किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से न्यायालय में उपस्थित होंगे और यदि न्यायालय द्वारा सुनवाई स्थगित न कर दी जाय , तो आवेदन की सुनवाई की जाएगी।

"(दो) आवेदन की सुनवाई के लिए पुकार लगाए जाने पर, जब कोई भी पक्षकार उपसंजात न हो, न्यायालय यह आदेश कर सकेगा कि आवेदन खारिज कर दिया जाए ।

(तीन) जहां कि आवेदन की सुनवाई के लिए पुकार लगाए जाने पर, विरोधी पक्षकार उपसंजात हो और आवेदक उपसंजात न हो, तो न्यायालय यह आदेश करेगा कि आवेदन खारिज कर दिया जाए , जब तक कि विरोधी पक्षकार दावा या उसके किसी भाग को स्वीकार न करता हो, मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

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जिस दशा में न्यायालय ऐसी स्वीकारोक्ति पर विरोधी पक्षकार के विरोधी आदेश करेगा , और जहाँ दावे का केवल कोई भाग स्वीकार किया गया हो , वहाँ वह मामले को , जहाँ तक कि वह शेष भाग संबंधित हो , खारिज कर देगा ।

(चार) जहां कि आवेदन पत्र की सुनवाई के लिए पुकार लगाए जाने पर, आवेदक उपसंजात हो और विरोधी पक्षकार समन प्राप्त हो जाने के पश्चात भी उपसंजात होने में असफल रहे, न्यायालय एक पक्षीय कार्यवाही कर सकेगाः-

(पांच) जहाँ आवेदन उप नियम (2 ) या (3 ) के अधीन पूर्णतः या अंशतः खारिज कर दिया गया हो, आवेदक ऐसे खारिज किए जाने (डिसमिसल ) के तीस दिन के भीतर ऐसे खारिज किए जाने को अपास्त करने के लिए प्ररूप छह में आवेदन कर सकेगा और न्यायालय, यदि उसका यह समाधान हो जाए कि वह (आवेदक) कार्यवाही की सुनवाई के लिए पुकार लगाए जाने के समय किसी पर्याप्त कारण से उपसंजात नहीं हो सका था, तो वह खर्चे या अन्य बातों के संबंध में ऐसे निबन्धनों पर, जो कि वह उचित समझे , ऐसे खारिज किए जाने को अपास्त करने का आदेश दे सकेगा और मामले में आगे कार्यवाही कर सकेगा या मामले में कार्यवाही करने के लिए दिन नियत कर सकेगाः

परंतु इस उप नियम के अधीन ऐसे आवेदन के संबंध में , जो उप नियम (3 ) के अधीन खारिज कर दिया गया हो, कोई आदेश तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक कि आवेदन की सूचना प्ररूप सात में विरोधी पक्षकार पर तामील न कर दी गई हो।

(छह) किसी भी ऐसे आवेदन में , जिसमें कि विरोधी पक्षकार के खिलाफ एकपक्षीय आदेश किया गया हो, वह ऐसे आदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर उस न्यायालय को, जिसने कि वह आदेश दिया हो, उस आदेश को अपास्त करने के लिए प्ररूप छह में आवेदन कर सकेगा और यदि न्यायालय का यह समाधन हो जाए कि वह कार्यवाही या सुनवाई के लिए. पुकार लगाए जाने के समय किसी पर्याप्त कारण से उपसंजात नही हो सका था तो वह उसकी सूचना प्ररूप सात में आवेदक पर तामील करने के पश्चात् खर्चे तथा अन्य बातों के संबंध में ऐसे निबंधनों पर , जो कि वह उचित समझे, आदेश को अपास्त करने का आदेश दे सकेगा और मामले में कार्यवाही कर सकेगा या उसके संबंध में कार्यवाही करने के लिए दिन नियत कर सकेगा।

(24) साक्षियों को समन.- (एक) विवाद्यक विरचित हो जाने के पश्चात् किसी भी समय , न्यायालय पक्षकारों को विवाद्यकों के समर्थन में अपनी साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बुला सकेगा ।

(दो) न्यायालय, किसी भी पक्षकार के आवेदन पर किसी साक्षी को हाजिर होने या कोई दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए प्ररूप -आठ में समन जारी कर सकेगा।

(तीन) न्यायालय , उप नियम (2) के अधीन आवेदन पर किसी साक्षी को समन करने के पूर्व; यह अपेक्षा कर सकेगा कि न्यायालय में हाजिर होने के लिए होने वाले उसके (साक्षी के) युक्ति- युक्त व्यय उसके पास जमा कर दिए जाएं। 436(21)

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(25) समय का दिया जाना तथा सुनवाई का स्थगन.- (एक) न्यायालय , यदि पर्याप्त कारण बतलाया जाए , आवेदन के किसी भी प्रक्रम पर, पक्षकारों को या उनमें से किसी को समय दे सकेगा और समय -समय पर आवेदन की सुनवाई स्थगित कर सकेगा।

(दो) ऐसे प्रत्येक स्थगन में, न्यायालय आवेदन की आगे की सुनवाई के लिए ऐसा दिन नियत करेगा जो उस दिनांक से, जिसको कि ऐसा स्थगन किया गया हो, पन्द्रह दिन से अधिक का ........नहीं होगा तथा स्थगन द्वारा होने वाले खर्चे के संबंध में ऐसा आदेश दे सकेगा , जैसा कि वह उचित समझेः

परंतु जब एक बार साक्ष्य की सुनवाई प्रारंभ हो चुकी हो, आवेदन की सुनवाई, जब तक के न्यायालय को अभिलेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से, सुनवाई को आगामी दिन के लिए स्थगित करना आवश्यक प्रतीत न हो, प्रतिदिन तक चालू रखी जाएगी जब तक कि समस्त उपस्थित साक्षियों की पृच्छा न हो जाए ।

(26) कार्यवाही प्रारंभ करने का अधिकार. आवेदक को (कार्यवाही) प्रारंभ करने का अधिकार होगा, जब तक कि विरोधी पक्षकार आवेदक द्वारा अभिकथित तथ्यों को स्वीकार न करे और यह प्रतिवाद न करे कि या तो विधि के बिंदु पर या विरोधी पक्षकार द्वारा अभिकथित किन्हीं अतिरिक्त तथ्यों पर आवेदक उसके द्वारा चाहे गए अनुतोष का हकदार नहीं है, उस दशा में कि विरोधी पक्षकार को (कार्यवाही) प्रारंभ करने का अधिकार होगा ।

....(27) कथन तथा साक्ष्य का प्रस्तुत किया जाना. (एक) आवेदन की सुनवाई के लिए नियत दिन को या किसी अन्य दिन को, जिस दिन के लिए कि सुनवाई स्थगित की गई हो, वह पक्षकार जिसको कि (कार्यवाही) प्रारंभ करने का अधिकार हो, अपने मामले का कथन करेगा तथा अपने मामले को प्रस्तुत करेगा और उन विवाद्यको के, जिन्हें कि सिद्ध करने के लिए वह बाध्य हो, समर्थन में अपनी साक्ष्य प्रस्तुत करेगा।

(दो) तब दूसरा पक्षकार अपने मामले का कथन करेगा और अपनी साक्ष्य ( यदि कोई हो) प्रस्तुत करेगा और तब न्यायालय को सामान्यतः सम्पूर्ण मामले के संबंध में निवेदन करेगा । (तीन) कार्यवाही प्रारंभ करने वाला पक्षकार तब सामान्यतः सम्पूर्ण मामले पर उत्तर दे सकेगा। (चार) इस नियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी न्यायालय यह आदेश दे सकेगा कि साक्ष्य का प्रस्तुतीकरण या न्यायालय को किया जाने वाला निवेदन किसी ऐसे क्रम में होगा, जो वह उचित समझे।

(28) साक्ष्य अभिलिखित करने की रीति. प्रत्येक साक्षी का साक्ष्य न्यायाधीश द्वारा या जहां एक से अधिक न्यायाधीश हों, वहां कनिष्ठ न्यायाधीश द्वारा या किसी भी ऐसे न्यायाधीश के लिखवाने पर खुले न्यायालय में, न्यायालय की भाषा में, साधारणतः प्रश्नोत्तर के रूप में लेखबद्ध न की जाकर वर्णनात्मक रूप में अभिलिखित को जाएगी और पूरा हो जाने पर वह ऐसे न्यायाधीश की उपस्थिति में साक्षी को पढकर सुनाई जाएगी या जहां आवश्यक हो वहां उसका अनुवाद कर साक्षी को दिया जाएगा और ऐसा न्यायाधीश, यदि आवश्यक हो, उसे सुधारेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

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(29) किसी साक्षी को वापस बुलाया जाना. न्यायालय किसी कार्यवाही के किसी भी प्रक्रम पर किसी साक्षी को, जिसक परीक्षण किया जा चुका हो, वापस बुला सकेगा और (तत्समय प्रवृत्त साक्ष्य विधि के अध्ययीन रहते हुए) उससे ऐसे प्रश्न पूछ सकेगा , जो कि न्यायालय उचित समझे।

(30) न्यायालय द्वारा निरीक्षण. न्यायालय , कार्यवाही के किसी भी प्रक्रम पर, किसी भी ऐसी सम्पत्ति या वस्तुका, जिसके संबंध में कोई प्रश्न उदभूत हो, निरीक्षण कर सकेगा।

(31 ) आदेश का सुनाया जाना. न्यायालय, आवेदन की सुनवाई के पश्चात् अपना अंतिम आदेश खुले न्यायालय में या तो तुरंत या किसी आगामी दिन को सुनाएगा जिसकी कि सम्यक् सूचना पक्षकारों को दी जाएगी।

(32) आदेश का हस्ताक्षरित किया जाना. अंतिम आदेश उसके सुनाए जाने के समय खुले न्यायालय में दिनांकित तथा हस्ताक्षरित किया जाएगा और एक बार हस्ताक्षरित हो जाने पर तत्पश्चात उसमें लोप या आकस्मिक चूक के कारण उदभूत होने वाली लिपिकीय या गणितीय भूल की दशा में के अतिरिक्त कोई अन्य परिवर्तन या परिवर्धन नहीं किया जाएगा।

(33) प्रत्येक विवाद्यक पर निर्णय का कथन किया जाना. उन मामलों में, जिनमें विवाद्यक विरचित किए गए हों, न्यायालय प्रत्येक पृथक विवाद्यक पर अपना निष्कर्ष या निर्णय उसके कारणों सहित, अलग-अलग कथित करेगा , जब तक कि किसी एक या अधिक विवाद्यक पर निष्कर्ष मामले के निर्णय के लिए पर्याप्त न हो।

(34) वाद का समझौता. जहां न्यायालय के समाधान पद रूप में यह सिद्ध हो जाए कि किसी विधिपूर्ण करार या समझौते द्वारा मामला पूर्णतः या अंशतः समायोजित किया जा चुका है या जहां विरोधी पक्षकार मामले की विषय- वस्तु के संबंध में आवेदक का पूर्ण या आंशिक समाधान कर दे , वहां न्यायालय ऐसे करार , समझौते या समाधान को अभिलिखित किए जाने का आदेश देगा और उसके अनुसार , जहां तक कि वह मामले से संबंधित है, अंतिम आदेश पारित करेगा । "

(35) आदेश की अन्तिमता. धारा 52 में यथा उपबन्धित के सिवाय न्यायालय का आदेश अंतिम तथा पक्षकारों पर बंधनकारी होगा।

खर्चे, डिक्री आदि

(36) खर्च.- (एक) आवेदन के तथा उससे आनुषंगिक खर्चे न्यायालय के विवेक पर होंगे और न्यायालय को यह अवधारित करने कि किसके द्वारा या किस सम्पत्ति में से तथा किस सीमा तक ऐसे खर्चों की भुगतान की जाएगी, तथा पूर्वोक्त प्रयोजनों के लिए समस्त आवश्यक निर्देश देने , की पूर्ण शक्ति होगी। यह तथ्य कि न्यायालय को वाद का परीक्षण करने का क्षेत्राधिकार नहीं है , ऐसी शक्तियों के प्रयोग को वर्जित करने वाला नही होगा।

(दो) जहां न्यायालय यह निदेश देता है कि कोई खर्च परिणाम के अनुरूप नहीं होगा, वहां न्यायालय अपने कारण लिखित में कथित करेगा । 436(23)

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( 37) डिक्री की अन्तर्वस्तु.- ( 1 ) प्ररूप नौ में कोई डिक्री न्यायालय द्वारा किए गए आदेश के अनुरूप तैयार की जाएगी , उसमें आवेदन पत्र का क्रमांक, पक्षकारों के नाम तथा वर्णन तथा दावे की विशिष्टियाँ अन्तर्विष्ट होंगी और वह मंजूर किए गए अनुतोष या कार्यवाही के अन्य अवधारण स्पष्टः करेगा ।

(2) डिक्री में कार्यवाही के संबंध में हुए खर्चे की रकम तथा ऐसे खर्चे किसके द्वारा किन अनुपातों में चुकाए जाएंगे भी वर्णित किया जाएगा ।

(3) न्यायालय यह निदेश दे सकेगा कि एक पक्षकार को अन्य पक्षकार द्वारा देय खर्चे का, किसी ऐसी राशि के प्रति मुजरा किया जाएगा, जो कि पहले द्वारा बाद वाले को शोध्य होना स्वीकार किया जाए।

( 38) आदेश, डिक्री आदि की प्रमाणित प्रतिलिपियों का प्रदान किया जाना. (1 ) पक्षकारों को, अंतिम आदेश, डिक्री या अभिलेख में के किसी अन्य आदेश या मामले की प्रमाणित प्रतिलिपियाँ न्यायालय को आवेदन किए जाने पर उनके व्यय पर प्रदान की जाएंगी।

(2) यदि कोई पक्षकार यथास्थिति, न्यायालय द्वारा किए गए या उसे प्रस्तुत किए गए,किसी आदेश, डिक्री या अभिलेख में के किसी अन्य मामले की प्रतिलिपियां चाहता है तो वह न्यायालय को उसके लिए आवेदन प्रस्तुत करने के अडतालीस घण्टे के भीतर , उसे प्रदान की जाएगी, प्रत्येक ऐसी प्रतिलिपि के लिए वह दो रूपए की अतिरिक्त फीस का भुगतान करेगा।

(3) यदि कोई पक्षकार यथास्थिति न्यायालय द्वारा दिये गए या उसे प्रस्तुत किए गए किसी आदेश, डिक्री या अभिलेख में के किसी अन्य मामले की प्रतिलिपियों के लिए यथास्थिति इस प्रकार दिए जाने या प्रस्तुत किए जाने के तारीख से बारह माह समाप्त होने के पश्चात् आवेदन करे तो वहं दो रूपए की अतिरिक्त खोज (सर्चिग) शुल्क का भुगतान करेगा। (39) निष्पादन.- (1 ) कोई व्यक्ति, जिसके पक्षकार में आदेश पारित किया गया हो, आदेश की तारीख से एक वर्ष के भीतर , में उस न्यायालय को, जिसने कि वह आदेश दिया हो, उस के निष्पादन के लिए प्ररूप- दस आवेदन देगा ।

(2) ऐसे आवेदन पर , न्यायालय उसे आवश्यक अभिलेख सहित सक्षम क्षेत्राधिकार वाले सिविल न्यायालय को उसके निष्पादन हेतु भेजेगा और ऐसे सिविल न्यायालय को उस आदेश का निष्पादन करने के लिए वही शक्तियों प्राप्त होंगी, मानो कि वह उसके द्वारा ही पारित किया गया था।

(40) निष्पादन के तथ्य या अन्यथा की संसूचना. वह सिविल न्यायालय , जिसे कोई डिक्री निष्पादन के लिए भेजी गई हो , ऐसे निष्पादन की वास्तविकता कोई या जहाँ वह न्यायालय उसका निष्पादन करने में असफल रहा हो, वहाँ ऐसी असफलता की परिस्थितियाँ उस न्यायालय से, जिसने कि उसे पारित किया हो , प्रमाणित करेगा। मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

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फीस तथा खर्चे

(41 ) फीस (1 ) धारा 49 में निर्दिष्ट किसी विषय के संबंध में किसी आवेदन पर देय फीस दस रू. होगी । (2) इन नियमों के अधीन न्यायालय द्वारा तलब किए गए लिखित कथन के अतिरिक्त किसी अन्य आवेदन के संबंध में देय फीस पाँच रूपए होगी:

परंतु अभिलेख पर किसी दस्तावेज या यथास्थिति न्यायालय को प्रस्तुत किए गए कथन या न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत डिक्री आदेश की प्रतिलिपि या उसका अनुवाद प्राप्त करने के लिए आवेदन की फीस दो रूपए होगी।

(3) अभिलेख पर किसी दस्तावेज या कथन या आदेश या डिक्री की प्रतिलिपियों के लिए फीस ऐसी होगी, जो कि शासन द्वारा समय- समय पर अवधारित की जाए।

(4) किसी मामले में पक्षकारों में से किसी भी पक्षकार की ओर से धारा 79 के अधीन किसी व्यक्ति की उपसंजाति हेतु किसी प्राधिकरण के लिए फीस दस रूपए होगी।

(5) किसी न्यायालय में किसी दस्तावेज की प्रमाणित प्रतिलिपियाँ फाइल करने के लिए फीस पाँच रूपए होगी।

(6) इस नियम में निर्दिष्ट समस्त फीस साधारण न्यायालयों में उपयोग की जाने वाली न्यायालय फीस मुद्रांकों के रूप में संग्रहीत की जाएगी और कोई भी दस्तावेज, जिसे इन नियमों के अधीन मुद्रांकित होना चाहिये , तब तक विधिमान्य नहीं होगा जब तक वह समुचित रूप से मुद्रांकित न किया गया हो:

परंतु जहाँ ऐसा कोई दस्तावेज भूल से या अनवधानता से समुचित रूप से मुद्रांकित किए बिना ही न्यायालय में ले लिया हो, फाइल कर लिया गया हो, या उपयोग में लाया गया हो, वहाँ न्यायालय , यदि वह उचित समझे, यह आदेश दे सकेगा कि ऐसा दस्तावेज इस प्रकार मुद्रांकित किया जाए जैसा कि वह निदेशित करे और ऐसे दस्तावेज के तद्नुसार मुद्रांकित किए जाने पर वह तथा उससे संबंधित प्रत्येक कार्यवाही उसी प्रकार विधिमान्य होगी मानो वहु , पहले से ही समुचित रूप से मुद्रांकित किया गया था।

(7) किसी भी ऐसे दस्तावेज पर, जो इस नियम के अधीन मुद्रांकित किए जाने के लिए अपेक्षित हो, किसी न्यायालय की किसी भी कार्रवाई में तब तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी जब तक कि मुद्रांक को रद्द न कर दिया गया हो।

(42 ) समन आदि की तामील के खर्चे का भुगतान.- (1 ) किसी मामले में समन या सूचनाओं की तामील के खर्चे या साक्षियों के व्यय या पूर्ववर्ती नियम में निर्दिष्ट न हों किए गए किसी भी विषय के संबंध में, देय फीस, ऐसी रकम होगी, जो कि न्यायालय द्वारा प्रत्येक मामले में विनिर्दिष्ट की जाए , और ऐसी रकम या इन नियमों के अधीन देय कोई अन्य धनराशि का भुगतान ऐसी रीति में तथा ऐसे समय के भीतर किया जाएगा , जो कि वह (न्यायालय ) उसके लिए उल्लिखित करे। 436(25)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

(2) ऐसी कोई रकम, जो उन व्ययों की पूर्ति करने के पश्चात्, जिनके कि लिए वह आशयित थी, यदि कोई हो , बची रहे, न्यायालय द्वारा उस पक्षकार को लौटा दी जाएगी जिसके द्वारा या जिसकी ओर से रकम मूलतः न्यायालय में जमा की गई थी ।

(3) न्यायालय उप- नियम ( 1 ) के अधीन प्राप्त तथा संवितरित की गई रकम के समुचित लेखे रखेगा।

(43) निर्धन व्यक्तियों की फीस तथा खर्चे. न्यायालय , जब कभी भी वह उचित समझे , ऐसे व्यक्तियों से जो अकिंचन हों, इस संहिता के अधीन संस्थित की गई कार्यवाहियों तथा इन नियमों के अधीन दिए गए आवेदन प्राप्त कर सकेगा और उन्हें रजिस्टर कर सकेगा और नियम 31 तथा 32 में वर्णित फीस तथा खर्चे के भुगतान के बिना या आंशिक भुगतान पर ऐसे व्यक्तियों की ओर से समन या सूचना जारी कर सकेगा।

-(44) सिविल प्रक्रिया संहिता , 1908 (1908 का 5) तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872का 1 ) के उपबंधों का लागू होना. प्रक्रिया या साक्ष्य के प्रतिग्रहण से संबंधित विषयों के संबंध में जिनके लिए इन नियमों में कोई विशिष्ट उपबंध न किया गया हो, सिविल प्रक्रिया संहिता , 1908 (1908 का 5) जिसमें उसके अधीन बनाए गए नियम सम्मिलित हैं तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम , 1872 (1872 का 1 ) के उपबंध अधिनियम के अधीन कार्यवाहियों को जहां तक हो सकेलागू होंगे।

(8) धारा 51 की उप-धारा (1 ) के अधीन कर्मचारी बीमा न्यायालय के समक्ष कार्यवाही शुरू करने की रीति, उसकी फीस और प्रक्रिया ( 1 ) निगम , यथास्थिति पीड़ित व्यक्ति या किसी स्थापना के नियोक्ता, जैसी भी स्थिति हो के आवेदन द्वारा कर्मचारी बीमा न्यायालय के समक्ष कार्यवाही शुरू कीजाएगी।

(2) संहिता के अध्याय चार के उपबंधों और सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अध्यधीन रहते हुए कर्मचारी बीमा न्यायालय के समक्ष सभी कार्यवाहियां उस स्थानीय क्षेत्र के लिए नियुक्त न्यायालय में संस्थित किया जाएगा जिसमें बीमित व्यक्ति उस समय कार्य कर रहा था जब प्रश्न या विवाद उद्भूत हुआ था।

(3) यदि न्यायालय का समाधान हो जाता है कि उसके समक्ष लंबित किसी कार्यवाही से उत्पन्न कोई भी मामला उसी राज्य में किसी अन्य कर्मचारी बीमा न्यायालय द्वारा अधिक आसानी से निपटाया जा सकता है, तो वह राज्य सरकार द्वारा इस बाबत बनाए गए किन्ही नियमों के अध्यधीन रहते हुए इस तरह के मामले को निपटाने के लिए ऐसे अन्य न्यायालय में अंतरित करने का आदेश दे सकेगा और उस मामले से जुड़े अभिलेखों को तुरंत ऐसे अन्य न्यायालय को प्रेषित करेगा ।

(4) राज्य सरकार राज्य में के किसी भी कर्मचारी बीमा न्यायालय के समक्ष लंबित किसी मामले को किसी अन्य राज्य के ऐसे किसी न्यायालय में उस राज्य की सहमति से अंतरित कर सकेगी । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

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(5) ऐसा न्यायालय जिसको किसी भी मामले को उप- नियम (3 ) एवं उप - नियम (4 ) के अधीन अंतरित किया जाता है, वह इस प्रकार अपनी कार्यवाही जारी रखेगा जैसे कि वे मूल रूप से इसमें ही संस्थित किए गए थे।

अध्याय - पांच

उपदान

9. बैंक या अन्य वित्तीय संस्थान जिसमें धारा 53 की उप- धारा (1 ) के तृतीय परंतुक के अधीन अवयस्क के लाभ के लिए उपदान का निवेश किया जाएगा। नामनिर्देशितीया उत्तराधिकारी के मामले में , जो अवयस्क है, सक्षम प्राधिकारी ऐसे अवयस्क के लाभ के लिए उसके पास जमा की गई उपदान राशि का निवेश भारतीय स्टेट बैंक या राष्ट्रीयकृत बैंक में करेगा।

स्पष्टीकरण.- "राष्ट्रीयकृत बैंक " से अभिप्रेत है बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण ) अधिनियम, 1970 ( 1970 का 5 ) की प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट कोई तत्स्थानी.. नवीन बैंक या बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण ) अधिनियम, 1980 (1980का 40) । की प्रथम अनुसूची में विनिर्दिष्ट कोई तत्स्थानी नवीन बैंक।

10. धारा 55 की उप- धारा ( 1 ) के अधीन किसी कर्मचारी द्वारा नामनिर्देशन का समय , प्ररूप और रीति, उप- धारा (4 ) के अधीन नवीन नामनिर्देशन करने का समय , उप- धारा (5) के अधीन किसी नामनिर्देशन में उपांतरण का प्ररूप और रीति और उप- धारा (6) के अधीन नवीन नामनिर्देशन के लिए प्ररूप -

(1 ) कोई नामांकन प्ररूप-ग्यारह में होगा और कर्मचारी द्वारा दो प्रतियों में या तो व्यक्तिगत सेवा द्वारा उचित रसीद लेने के पश्चात् या नियोक्ता को किसी पंजीकृत डाक पावती द्वारा या इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।

(एक) किसी ऐसे कर्मचारी की दशा में , जो इन नियमों के प्रारंभ होने की तारीख पर एक वर्ष या उससे अधिक से पहले से ही नियोजित है, परन्तु उसने ऐसी तारीख से नब्बे दिनों के भीतर, आमतौर पर, नामांकन प्रस्तुत नहीं किया है; तथा

(दो) किसी ऐसे कर्मचारी की दशा में, जिसने इन नियमों के प्रारंभ होने की तारीख के बाद सेवा का एक वर्ष पूर्ण किया है, सामान्यतया सेवा के एक वर्ष पूरा होने के तीस दिनों के भीतर है:

प्ररूप -ग्यारह में नामांकन विनिर्दिष्ट अवधि के बाद नियोक्ता द्वारा स्वीकार किया जाएगा, अगर दायर किया गया है और इस प्रकार स्वीकार किया गया कोई नामांकन केवल इसलिए अमान्य नहीं होगा क्योंकि यह विनिर्दिष्ट अवधि के पश्चात् दायर किया गया था । 436(27)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

(2) उप- नियम (1 ) के अधीन प्ररूप-ग्यारह में नामांकन की प्राप्ति के तीस दिनों के भीतर, नियोक्ता नामांकन के प्ररूप यथा लिखित कर्मचारी के सेवा ब्यौरे प्राप्त करेगा, स्थापना के अभिलेखों के संदर्भ में सत्यापित और कर्मचारी को वापसी के पश्चात एक रसीद प्राप्त करने के बाद , प्ररूप- ग्यारह में नामांकन की डुप्लिकेट कॉपी विधिवत रूप से नियोक्ता या उसके द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत अधिकारी द्वारा सत्यापित की जाती है जो कि नियोक्ता द्वारा नामांकन की रिकॉर्डिंग के टोकन के रूप में रखा जाएगा और नामांकन की दूसरी प्रति अभिलिखित की जाएगी।

(3) कोई एक कर्मचारी जिसके पास नामंकन करने के समय कोई परिवार नहीं है परिवार होने के नब्बे दिनों के भीतर उप- नियम (1 ) में विनिर्दिष्ट रीति में एक नवीन नामांकन , जैसा कि धारा 55 की उप- धारा (4 ) के अधीन अपेक्षित है दो प्रतियों में प्ररूप ग्यारह में नियोक्ता को प्रस्तुत करेगा और उसके बाद उप- नियम (2) के उपबंध परिवर्तनों सहित इस प्रकार लागू होंगे जैसे कि यह उप- नियम ( 1 ) के अधीन किया गया था।....

(4) किसी नामांकन के संशोधन की कोई सूचना, उन मामलों सहित जहां कोई नाम निर्देशिती किसी कर्मचारी के पहले मर जाता है , उप - नियम (1 ) में विनिर्दिष्ट रीति में नियोक्ता को प्ररूप- ग्यारह में दो प्रतियों में प्रस्तुत की जाएगी, और उसके बाद उप- नियम (2) के उपबंध यथावश्यक परिवर्तनों सहित लागू होंगे।

(5) कोई नवीन नामांकन या नामांकन के संशोधन की कोई सूचना कर्मचारी द्वारा हस्ताक्षरित की जाएगी या , यदि वह निरक्षर है, तो उसके अंगूठे का निशान लगा होगा तथा कर्मचारी द्वारा इलेक्ट्रॉनिक रूप से या पंजीकृत डाक पावती द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।

(6) नवीन नामांकन या नामांकन के संशोधन की सूचना नियोक्ता द्वारा उसकी प्राप्ति की तारीख से प्रभावी होगी।

11. वह समय जिसके भीतर और वह प्ररूप जिसमें उप - धारा (1 ) के अधीन कोई लिखित आवेदन किया जाएगा और धारा 56 की उप- धारा (5) के खंड (ख) के अधीन सक्षम प्राधिकारी को आवेदन का प्ररूप-

(1 ) उपदान के लिए आवेदनः-

(क) प्ररूप - बारह में नियोक्ता को , कोई कर्मचारी जो संहिता के अधीन उपदान के भुगतान के लिए पात्र है , या उसकी ओर से कार्रवाई करने के लिए लिखित रूप में अधिकृत कोई भी व्यक्ति, सामान्यतः उपदान के देय होने की तारीख से तीस दिनों के भीतर प्ररूप -बारह मे नियोक्ता को आवेदन करेगाः

परंतु जहां किसी कर्मचारी की अधिवार्षिकी या सेवानिवृत्ति की तारीख ज्ञात हो , कर्मचारी अधिवार्षिकी या सेवानिवृत्ति की तारीख के तीस दिन पहले नियोक्ता को आवेदन कर सकेगा। मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

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परंतु यह और कि नियतकालिक रोजगार पर नियुक्त कोई कर्मचारी उपदान के लिए पात्र होगा , यदि वह संविदा के अंतर्गत एक वर्ष की अवधि के लिए सेवा प्रदान करता है और उसे पन्द्रह दिनों के वेतन की दर पर उपदान का भुगतान किया जाएगा जो उसके द्वारा सेवा के प्रत्येक पूर्ण किए गए वर्ष अथवा उसके भाग , जो छह माह से अधिक हो, के लिए उसके द्वारा आहरित अंतिम मजदूरी की दर पर आधारित होगा।

(ख) किसी कर्मचारी का कोई नाम निर्देशिती जो धारा 53 की उप- धारा ( 1 ) के दूसरे परंतुक के अधीन उपदान के भुगतान के लिए पात्र है, जो कि, सामान्यतः उस उपदान देय होने की तारीख से तीस दिनों के भीतर, प्ररूप- बारह मे नियोक्ता को आवेदन करेगाः

परंतु सुसंगत ब्यौरे के साथ सादे कागज में कोई आवेदन भी स्वीकार किया जाएगा। नियोक्ता ऐसे अन्य ब्यौरे प्राप्त कर सकेगा जो उसके द्वारा आवश्यक समझे जाएं। (ग) किसी कर्मचारी का कोई विधिक उत्तराधिकारी, जो धारा 53 की उप- धारा ( 1 ) के दूसरे परंतुक के अधीन उपदान के भुगतान के लिए पात्र है, सामान्यतः उस उपदान देय होने की तारीख से एक वर्ष के भीतर , प्ररूप- बारह में नियोक्ता को आवेदन करेगा।

(घ) जहां इन नियमों के प्रारंभ होने से पहले संहिता के अधीन उपदान देय हो जाता है, वहां उप-नियम ( 1 ) के खण्ड (क ), (ख) और (ग) में विनिर्दिष्ट समय सीमा की अवधि या ऐसे प्रारंभ होने की तारीख से प्रभावशील मानी जाएंगी।.

(ड) इस नियम में विनिर्दिष्ट अवधियों की समाप्ति के पश्चात् उपदान के भुगतान के लिए फाइल किया गया कोई आवेदन नियोक्ता भी नियोक्ता द्वारा स्वीकार दिया जाएगा, यदि आवेदक अपने दावे को प्रस्तुत करने में देरी के लिए पर्याप्त कारण प्रस्तुत करता है, और संहिता के अधीन उपदान के लिए कोई दावा केवल इसलिए अमान्य होगा, कि दावेदार विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर अपना आवेदन प्रस्तुत करने में विफल रहा । इस संबंध में किसी भी विवाद को सक्षम प्राधिकारी को उसके निर्णय के लिए निर्दिष्ट किया जाएगा।

(च) इस नियम के अधीन कोई आवेदन नियोक्ता को इलेक्ट्रॉनिक रूप से या व्यक्तिगत सेवा द्वारा या पंजीकृत डाक पावती द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।

(2) उपदान के भुगतान के लिए सूचना.-

(क) उप -नियम ( 1 ) के अधीन उपदान के भुगतान के लिए किसी आवेदन के प्राप्त होने के पंद्रह दिनों के भीतर, नियोक्ता -

(एक) यदि सत्यापन पर दावा स्वीकार्य पाया जाता है, तो यथास्थिति आवेदक कर्मचारी, नामनिर्देशिती या विधिक उत्तराधिकारी को देय उपदान की राशि विनिर्दिष्ट करते हुए और उसके भुगतान के लिए आवेदन की प्राप्ति की तारीख से तीसवे दिन के अपश्चात् की कोई तारीख तय करते हुए प्ररूप- तेरह में एक सूचना जारी करेगा। 436(29)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

(दो) यदि उपदान के लिए दावा स्वीकार्य नहीं पाया जाता है, तो यथास्थिति, आवेदक कर्मचारी, नामनिर्देशिती या विधिक उत्तराधिकारी को यह कारण बताते हुए कि उपदान के लिए दावे को स्वीकार्य क्यों नहीं माना गया , प्ररूप-तेरह में एक सूचना जारी करेगा।

उपदान अस्वीकार किए जाने की दशा में सूचना की एक प्रति सक्षम प्राधिकारी को पृष्ठांकित की जाएगी ।

(ख) यदि उपदान का भुगतान नियोक्ता के कार्यालय में किए जाने योग्य है , तो उप -नियम (2) के उप -खंड (एक) के अधीन प्ररूप -तेरह में सूचना में इस प्रयोजन के लिए तय की गई तारीख नियोक्ता द्वारा फिर से तय की जाएगी अगर इस संबंध में एक लिखित आवेदन आदाता द्वारा द्वारा बताते हुए किया गया है कि उसके लिए विनिर्दिष्ट तारीख पर व्यक्तिशः उपस्थित होना क्यों संभव नहीं है।

(ग) यदि उपदान के लिए दावेदार नामनिर्दिष्ट व्यक्ति या विधिक उत्तराधिकारी है, तो नियोक्ता ऐसे गवाह या सबूत की मांग कर सकेगा जो यथास्थिति उसकी पहचान स्थापित करने या उसके दावे के पोषण के लिए सुसंगत माना जा सके। उस दशा में, नियोक्ता को उप - नियम (2) के खंड (क) के अधीन सूचना जारी करने के लिए विनिर्दिष्ट समय सीमा यथास्थिति नियोक्ता द्वारा बुलाए गए ऐसे साक्षी या साक्ष्य के नियोक्ता को प्रस्तुत किए जाने की तारीख से प्रभावशील होगी ।

(घ) प्ररूप-तेरह में कोई सूचना आवेदक को या तो रसीद लेने के बाद व्यक्तिगत या पावती के साथ पंजीकृत डाक द्वारा या इलेक्ट्रॉनिक रूप से तामील की जाएगी।.....

(ड़) धारा 56 की उप- धारा (2) के अधीन कोई सूचना प्ररूप- तेरह में होगी।

(3) उपदान के भुगतान की तरीका. संहिता के अधीन देय उपदान का भुगतान डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से या यथास्थिति पात्र कर्मचारी , नामनिर्देशिती या विधिक उत्तराधिकारी के बैंक खाते में जमा करके किया जाएगाः

परन्तु भुगतान के ब्यौरे के बारे में सूचना नियोक्ता द्वारा क्षेत्र के सक्षम प्राधिकारी को दी जाएगी।

(4) धारा 56 की उप -धारा (5) के खंड (ख) के अधीन निर्देश के लिए सक्षम प्राधिकारी को आवेदनः (क) यदि कोई नियोक्ता-

(एक) धारा 34 के अधीन नामांकन को स्वीकार करने या उप- नियम (1 ) के अधीन दायर किए जाने के लिए आवेदन को लेने से इनकार करता है; या

(दो) उप-नियम (2) के खंड (क) के अधीन उपदान की काई राशि, जो आवेदक द्वारा देय से कम समझी जाए विनिर्दिष्ट करते हुए या उपदान के भुगतान के लिए पात्रता को अस्वीकार करते हुए कोई सूचना जारी करता है। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

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(तीन) उप- नियम (1 ) के अधीन कोई आवेदन प्राप्त होते हुए उप- नियम (2) के अधीन आवश्यक सूचना उसमें निर्दिष्ट समय मे भीतर जारी करने में विफल रहता है, तो यथास्थिति दावेदार कर्मचारी नामनिर्देशिती या विधिक उत्तराधिकरी आवेदन के लिए कारण उत्पन्न होने के एक सौ अस्सी दिनों के भीतर, धारा 56 की उप- धारा (5) के अधीन कोई दिशा- निर्देश जारी करने के लिए सक्षम प्राधिकारी को प्ररूप- चौदह में आवेदन कर सकेगा जिसके साथ उतनी अतिरिक्त प्रतियां होंगी जितने किपक्षकार है:

परन्तु सक्षम प्राधिकारी उस उप- नियम के अधीन किसी भी आवेदन को निर्दिष्ट अवधि के समाप्त होने के बाद आवेदक द्वारा पर्याप्त कारण दर्शाए जाने पर स्वीकार कर सकेगा ।

(ख) उप- नियम (4) के खंड़ (क) के अधीन आवेदन और इस तरह के आवेदन से संबंधित अन्य दस्तावेजों को सक्षम प्राधिकारी को व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत किया जाएगा या पंजीकृतं डाक पावती द्वारा या इलेक्ट्रॉनिक रूप में भेजा जाएगा।

(5) निदेश के लिए आवेदन पर कार्यवाही की प्रक्रिया.-

(क) उप-नियम (4) के अधीन कोई आवेदन प्राप्त होने पर सक्षम प्राधिकारी , इलेक्ट्रॉनिक रूप से या पंजीकृत पोस्ट पावती द्वारा या व्यक्तिशः प्ररूप-पंद्रह में सूचना जारी करके, आवेदक के साथ-साथ नियोक्ता को भी या तो स्वयं या उसके अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से सभी संबंधित दस्तावेजों और गवाहों के साथ , यदि कोई हों, विनिर्दिष्ट तारीख, समय और स्थान पर अपने समक्ष पर बुलाएगा।

(ख) कोई भी व्यक्ति नियोक्ता जो यथास्थिति कर्मचारी , नामनिर्देशिती या विधिक उत्तराधिकारी कीओर से कार्रवाई करने की इच्छा रखता है, सक्षम प्राधिकारी को यथास्थिति, नियोक्ता या संबंधित व्यक्ति से अधिकार पत्र प्रस्तुत करेगा , जिसकी ओर से वह इस मामले में लिखित बयान के साथ अपनी रुचि को स्पष्ट करते हुए मिलकर इस प्रकार कार्रवाई करने की अनुमति चाहता है । सक्षम प्राधिकारी अपने अनुमोदन या अनुमति देने से इनकार करने के मामले में , इन्कार करने के कारण विनिर्दिष्ट करते हुए पर एक आदेश अभिलिखित कराएगा।

(ग) प्राधिकृत प्रतिनिधि द्वारा उपस्थित होने वाला कोई पक्षकार प्रतिनिधि के कृत्यों से आबद्ध होगा।

(घ) खण्ड (क) के अधीन नियत तारीख पर सुनवाई पूरी होने के बाद, या ऐसी अन्य साक्ष्य दस्तावेजों, गवाहों, के परीक्षणों, सुनवाई और जांच, जैसी कि आवश्यक समझी जाए, के पश्चात्, सक्षम प्राधिकारी अपने निष्कर्ष अभिलिखित करेगा कि क्या संहिता के अधीन आवेदक को कोई राशि देय है । प्रत्येक पक्षकार को निष्कर्ष की एक प्रति दी जाएगी। 436(31)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

(ड) यदि संबंधित नियोक्ता सूचना की उचित तामीली के बाद पर्याप्त कारण के बिना सुनवाई की निर्दिष्ट तारीख पर उपस्थित होने में विफल रहता है, तो सक्षम प्राधिकारी आवेदन एक पक्षीय सुनने और निर्धारित करने के लिए आगे कार्यवाही कर सकेगा यदि आवेदक सुनवाई की विनिर्दिष्ट तारीख पर पर्याप्त कारण के बिना उपस्थित होने में विफल रहता है, तो सक्षम प्राधिकारी आवेदन को खारिज कर सकेगाः

"परन्तु उप- नियम (5) के खंड ( ङ) के अधीन कोई आदेश की उक्त आदेश के तीस दिनों के भीतर उचित कारण दर्शाए जाने पर समीक्षा की जाएगी और विरोधी पक्षकार को पुनः सुनवाई के लिए नियत तारीख से चौदह अनिम्न दिनों की सूचना देने के पश्चात् आवेदन की पुन सुनवाई की जाएगी।.

(6) सुनवाई का स्थान और समय. सक्षम प्राधिकारी की बैठकें ऐसे समय पर और ऐसे स्थानों पर आयोजित की जाएंगी, जैसा कि वह नियत करे और वह उसके पक्षकारों को ऐसी रीति में. सूचित करेगा जैसी कि वह ठीक समझे।

(7) शपथ का दिलाया जाना. शपथ पत्र बनाने के उद्देश्य से सक्षम प्राधिकारी अपने कार्यालय के किसी लिपिक को शपथ पत्र बनाने के प्रयोजन से शपथ दिलाए जाने हेतु प्राधिकृत कर सकेगा । (8) गवाहों की समन और उनकी उपस्थिति. सक्षम प्राधिकारी, उसके समक्ष कार्यवाही में शामिल किसी भी पक्षकार द्वारा आवेदक किए जाने पर या उसके बिना कार्यवाही के किसी भी स्तर पर , ऐसे निबंधनों पर जो कि सक्षम प्राधिकारी को उचित प्रतीत हों प्ररूप-पंद्रह में, किसी भी व्यक्तिको, किसी निर्दिष्ट तारीख, समय और स्थान पर, या तो सबूत देने के लिए या दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए या दोनो प्रयोजनों हेतु दोनों उद्देश्यों के लिए समन जारी कर सकेगा । (9) समन या सूचना की तामीली.-.

(क) खण्ड ( ख) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी कोई सूचना, समन, आदेशिका या आदेश या तो व्यक्तिशः या पंजीकृत डाक पावती द्वारा इलेक्ट्रॉनिक रूप से या सिविल प्रक्रिया संहिता , 1908 ( 1908 का 5) के अधीन यथा विहित किसी अन्य रीति में तामीली किया जा सकेगा।

(ख) जहां सक्षम प्राधिकारी के समक्ष किसी कार्यवाही के लिए ( पक्षों के रूप में) कई व्यक्ति हों और ऐसे व्यक्ति किसी भी ट्रेड यूनियन या एसोसिएशन के सदस्य हों या किसी प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा प्रतिनिधित्व किए जा रहे हों तो सचिव पर सूचना की तामीली , या जहां कोई सचिव नहीं है, ट्रेड यूनियन या एसोसिएशन के प्रमुख अधिकारी पर , या किसी प्राधिकृत व्यक्ति पर सूचना की तामीली को ऐसे व्यक्तियों पर तामीली समझा जाएगा। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

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(10) सक्षम प्राधिकारी द्वारा मामलों के अभिलेखों का रखरखाव. (क) सक्षम अधिकारी धारा 56 के अधीन प्रत्येक मामले के ब्यौरे अभिलिखित करेगा और आदेश पारित करते समय इस प्रकार अभिलिखित विवरण पर हस्ताक्षर करेगा और दिनांक डालेगा।

(ख) सक्षम प्राधिकारी प्रत्येक मामले में आदेश पारित करते समय, मामले के गुणों पर निष्कर्ष भी अभिलिखित करेगा और आदेश पत्र के साथ साक्ष्य के ज्ञापन के साथ- साथ इसे अभिलिखित करेगा।

(ग) किसी भी आदेश या निर्देश के अभिलेख से भिन्न कोई भी अभिलेख, जिसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित किए जाने के लिए इन नियमों द्वारा अपेक्षित है। सक्षम अधिकारी द्वारा इस प्रयोजनार्थ लिखित रूप में नियुक्त किसी भी अधीनस्थ अधिकारी.. द्वारा सक्षम अधिकारी की ओर से और उसके निर्देशन के अधीन हस्ताक्षर किए जा सकेंगे । (11 ) उपदान के भुगतान हेतु निर्देश. यदि कोई उप- नियम (5) के खंड (ध) के अधीन किया जाता है कि आवेदक संहिता के अधीन उपदान के भुगतान का हकदार है, तो सक्षम अधिकारी इलेक्ट्रॉनिक या पंजीकृत पोस्ट पावती की वजह से या नियोक्ता द्वारा सूचना प्राप्त होने की तारीख से तीस दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी को सूचना के अधीन आवेदक को यथास्थिति देय राशि और उसके भुगतान का निर्देश निर्दिष्ट करता है । सूचना की एक प्रति आवेदक कर्मचारी , नामित या विधिक उत्तराधिकारी को दी जाएगी ।

(12) अपील. (क) संहिता की धारा 56 की उप- धारा (8 ) के अधीन अपील का ज्ञापन, अपीलीय प्राधिकारी को उसकी प्रति और पक्षकार में सक्षम प्राधिकारी को उसकी प्रति के साथ या पंजीकृत पोस्ट पावती द्वारा या इलेक्ट्रॉनिक रूप के साथ दूसरे पक्षकार को भी दिया जाएगा और सक्षम प्राधिकारी या तो व्यक्ति के माध्यम से या पंजीकृत पोस्ट पावती या इलेक्ट्रॉनिक रूप से परिदान करेगा ।

(ख) अपील के ज्ञापन में मामले के तथ्य, सक्षम प्राधिकारी का निर्णय , अपील का आधार और मांगी गई राहत शामिल होगी।

(ग) उपदान के भुगतान के लिए सक्षम प्राधिकारी और निर्देशों की खोज की प्रमाणित प्रति अपील के ज्ञापन के लिए संलग्न की जाएगी।

(घ) अपील के ज्ञापन की प्रति प्राप्त होने पर, सक्षम प्राधिकारी अपीलीय प्राधिकारी को मामले के अभिलेख को अग्रेषित करेगा ।

(ड) अपील के ज्ञापन की प्रति प्राप्त होने के चौदह दिनों के भीतर, विपरीत पक्षकार अपीलकर्ता को एक प्रति के साथ अपीलीय प्राधिकारी को , अतिरिक्त दलीलों के साथ , ज्ञापन के प्रत्येक अनुच्छेद की अपनी टिप्पणी प्रस्तुत करेगा।

(च) अपीली प्राधिकारी अपील को सुनने का एक युक्तियुक्त अवसर पक्षों को देने के बाद अपना निर्णय अभिलिखित करेगा। निर्णय की एक प्रति पक्षों को इलेक्ट्रॉनिक या पंजीकृत डाक या व्यक्ति द्वारा अपील करने के लिए दी जाएगी और उसकी एक प्रति सक्षम अधिकारी को मामले के अपने अभिलेख को वापस भेज दी जाएगी। 436(33)

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(छ) सक्षम प्राधिकारी , अपीली प्राधिकारी के निर्णय की प्राप्ति पर, उसके द्वारा बनाए गए मामले के अभिलेख में आवश्यक प्रविष्टि करेगा।

(ज) अपीली प्राधिकारी के निर्णय की प्राप्ति पर , सक्षम प्राधिकारी, यदि उस निर्णय के अधीन आवश्यक हो, तो उपदान के भुगतान के लिए उसके निर्देश में उपांत्रणऔर प्ररूप - सोलह में संबंधित नियोक्ता को उपांतरित राशि देय और निर्देशन को विनिर्दिष्ट करने के लिए एक सूचना सूचना के अधीन जारी कर सकेगा । नियोक्ता द्वारा... सूचना प्राप्त होने के पंद्रह दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी को सूचित सूचना की एक प्रति के साथ- साथ अपीली कर्मचारी , नामित याः विधिकउत्तराधिकारी को अपीलीय प्राधिकारी को यथास्थिति , अपीली प्राधिकारी को दी जा सकेगी। :

(13) उपदान की वसूली के लिए आवेदन. जहां एक नियोक्ता उप -नियम ( 11 ) या उप- नियम (12) के अधीन सक्षम प्राधिकारी द्वारा सूचना के अनुसार संहिता के अधीन शोध्य का भुगतान करने में विफल रहता है, जैसा यथास्थिति संबंधित कर्मचारी , उसका नामांकित व्यक्ति या विधिकउत्तराधिकारी , यथास्थिति जिस को उपदान देय हो, संहिता की धारा 129 के अधीन उसकी वसूली के लिए प्ररूप सत्रह में डुप्लीकेट में सक्षम प्राधिकारी को आवेदन कर सकेगा।

(12) धारा 58 की उप- धारा (1 ) के अधीन सक्षम प्राधिकारी के रूप में नियुक्त अधिकारी की अर्हताएं और अनुभव. - सक्षम प्राधिकारी को अधिसूचना द्वारा राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा।

अध्याय - छह

प्रसूति प्रसुविधा

(13) प्राधिकरण जिसे धारा 72 की उप-धारा (3 ) के अधीन अपील की जा सकेगी. (1 ) धारा 72 के अधीन शिकायत (क) धारा 72 की उप- धारा ( 1 ) के अधीन एक शिकायत यथास्थिति प्ररूप - अठाराह में लिखित से की जाएगी।

(ख) जब तक कि निरीक्षक- सह- सुविधा प्रदाता द्वारा धारा 72 में संदर्भित शिकायत प्राप्त होती है, तो वह नियोक्ता द्वारा इस निमित बनाए गए सुसंगत अभिलेखों की जांच करेगा, स्थापना में कार्यरत किसी भी व्यक्ति की जांच करेगा और उद्देश्य के लिए आवश्यक बयान लेगा। जांच और अगर वह संतुष्ट है कि प्रसूति प्रसुविधा या राशि अनुचित रूप से रोक दी गई है, तो वह नियोक्ता को धारा 63 के अधीन भुगतान का दावा करने वाली महिला या व्यक्ति को यथास्थिति शीघ्रता पूर्व या विनिर्दिष्ट कालावधि के भीतर भुगतान करने का निर्देश देगा।

(2) धारा 72 के अधीन अपील. (क) धारा 72 की उप - धारा (2) के अधीन निरीक्षक-सह- सुविधाप्रदाता के निर्णय के विरूद्ध एक अपील सक्षम प्राधिकारी को होगी।

(ख) व्यथित व्यक्ति प्ररूप सत्रह में विहित प्राधिकारी को लिखित में अपील करेगा और अन्य सहायक दस्तावेज दाखिल करेंगे। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

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(ग) जब कोई अपील प्राप्त होती है, तो निर्धारित प्राधिकारी निरीक्षण सुविधाकर्ता से नियत तारीख से पहले बुलाकर मामले का अभिलेख अभिलिखित करेगा। यदि आवश्यक हो, तो विहित प्राधिकारी भी व्यथित व्यक्ति और निरीक्षक- सह- सुविधाप्रदाता के बयानों को दर्ज करेगा और यदि आवश्यक हो तो स्पष्टीकरण मांग सकता है।

(घ) दस्तवेजों को ध्यान में रखते हुए , उनके सामने प्रस्तुत किए गए सबूत और उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए तथ्य या उनके द्वारा पता लगाया गया, विहित प्राधिकरण अपना निर्णय देगा।

अध्याय - सात

कर्मचारी प्रतिकर

14. धारा 76 की उप - धारा (7) के अधीन नियोक्ता द्वारा सक्षम प्राधिकारी के साथ कर्मचारी की अंत्येष्टि के व्यय हेतु रकम का जमा कराना;

अंत्येष्टि हेतु रकम - यदि कर्मचारी को हुई क्षति के परिणाम स्वरूप उसकी मृत्यु हो जाती है तो नियोक्ता उप-धारा ( 1 ) के अधीन प्रतिकर के अतिरिक्त सक्षम प्राधिकारी के पास ऐसे कर्मचारी के अंत्येष्टि के व्यय के लिए कर्मचारी के सबसे बड़े उत्तरजीवी आश्रित को, अथवा जहां कर्मचारी का कोई आश्रित नहीं है, या वह अपनी मृत्यु के समय अपने आश्रितों के साथ नहीं रह रहा था , वहां उस .. व्यक्ति को, जिसने वास्तव में ऐसा व्यय उपगत किया है, संदाय के लिए राशि जो 15000 रूपए से कम न हो जमा करेगा। यदि केन्द्रीय सरकार इस उप- धारा ( 1 ) में विनिर्दिष्ट रकम में वृद्धि करती है। तोउसका पालन राज्य सरकार द्वारा भी किया जावेगा।

15. धारा 79 की उप- धारा (1 ) के अधीन शर्ते, जब चिकित्सा व्यवसायी के प्रमाण पत्र के बिना पुनर्विलोकन के लिए आवेदन किया जाता है .-

(1 ) जब चिकित्सीय प्रमाण. पत्र के बिना आवेदन किया जा सकता है संहिता की धारा 79 के अधीन अर्द्ध- मासिक संदाय के पुनर्विलोकन के लिए आवेदन साथ में चिकित्सीय प्रमाण-पत्र संलग्न किए बिना किया जा सकता है -

(क) नियोजन द्वारा , इस आधार पर कि जबसे प्रतिकर के अधिकार का निर्धारण हुआ है कर्मचारी की मजदूरी बढ़ गई है;

(ख) कर्मचारी द्वारा , इस आधार पर कि जबसे प्रतिकर के अधिकार का निर्धारण हुआ है उसकी मजदूरी कम हो गई है;

(ग) कर्मचारी द्वारा , इस आधार पर कि नियोजन ने प्रतिकर अदा करना प्रारम्भ करके प्रतिकर अदा करना रोक दिया है, यह तथ्य होते हुए भी कि कर्मचारी की दशा में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है इस प्रकार रोक का उचित कारण बताना;

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(घ) या तो नियोक्ता द्वारा या कर्मचारी द्वारा , इस आधार पर कि तत्समय प्रवृत प्रतिकर की दर का निर्धारण कपट अथवा अनुचित प्रभाव अथवा अन्य अनुचित साधनों से किया गया था;

(ङ) नियोक्ता द्वारा या कर्मचारी द्वारा, इस आधार पर कि प्रतिकर के निर्धारण में अभिलेख में प्रत्यक्षत: भूल अथवा गलती हुई है।

- (2) पुनर्विलोकन के लिए आवेदन पर प्रक्रिया. नियोक्ता द्वारा पुनर्विलोकन के लिए' दिए आवेदन जिसमे उसने अर्द्ध मासिक संदाय के रोक या कटौती को चाहा है के परीक्षण करने पर अगर सक्षम प्राधिकारी को यह मालूम पड़े कि यह विश्वास करने के लिए युक्तियुक्त कारण है कि नियोक्ता को ऐसी कटौती या रोक का अधिकार है तो वह आवेदन के निर्णय के लम्बित रहते अर्द्ध मासिक संदाय को पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से रोकने का आदेश दे सकताहै।

(3) सारांशीकरण के लिए आवेदन पर प्रक्रिया. ( 1 ) जहां एक मुश्त राशि के संदाय रूप में अर्द्ध मासिक संदाय को प्राप्त करने के अधिकार से छुटकारे के लिए धारा 7 के अधीन सक्षम प्राधिकारी का आवेदन किया जाता है तो सक्षम प्राधिकारी निशक्तता की संभावित अवधि का प्राक्कलन करेगा और संपूर्ण अर्द्ध - मासिक संदाय के बराबर राशि अधिनिर्णीत नहीं करेगा जो उस कालावधि के लिए देय होगी जब तक उसके अनुमान से निःशक्तता जारी रहेगी, उस कालावधि के प्रत्येक महीने की कुल राशि की आधा प्रतिशत कम घटा कर होगी:

परंतु इस प्रकार संगणना में सम्मिलित रूपयों की भिन्नों की उपेक्षा की जाएगी।

(2) किसी ऐसे मामले में जिस पर उप-नियम ( 1 ) लागू होता हो, जब सक्षम प्राधिकारी निःशक्तता की अधिसंभाव्य अवधि का अनुमान आंकलन करने में असमर्थ रहे तो वह समय-समय पर एक अवधि के लिए जो किसी एक समय पर दो महीने से अधिक नहीं हो आवेदन पर निर्णय टाल सकता है ।

16. धारा 82 की उप- धारा (4) के अधीन कर्मचारियों का वर्ग और सूचना पुस्तिका का प्ररूप.- समुचित सरकार यह अपेक्षा कर सकेगी कि विहित वर्ग के नियोक्ता जैसा कि उस सरकार द्वारा बिहित किया जाए, अपने परिसर में जहां कर्मचारी नियोजित है एक सूचना-पुस्तक रखेंगे, (प्ररूप क्रमांक बीस देखिए) जिसे उस सरकार द्वारा विहित किया जाए ऐसे प्ररूप में परिसर में नियोजित किसी भी क्षतिग्रस्त कर्मचारी की या सद्भावपूर्वक उसकी ओर से कार्य करने वाले किसी भी व्यक्ति की सभी युक्तियुक्त समयों पर आसानी से पहुंच हो सकेगी।

17. धारा 84 की उप- धारा (1 ) के परुंतुक के अधीन चिकित्सा परीक्षण के लिए बारंबार अंतराल.- (

1) नियमों के अनुसार के अलावा कर्मचारी चिकित्सीय परीक्षण के लिए प्रस्तुत किए जाने के लिए अपेक्षित नहीं- कर्मचारी जो धारा 11 की उप - धारा (1 ) के द्वारा चिकित्सीय परीक्षण के लिए प्रस्तुत होने को अपेक्षित है इस भाग में अन्तर्विष्ट नियमों के अनुसार ही ऐसा करने को बाध्य होगा और अन्यथा नहीं। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

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(2) कर्मचारी और चिकित्सीय व्यवसायी दोनों के परिसर में होने पर परीक्षण.- जब ऐसा कर्मचारी नियोक्ता के परिसर में उपस्थित हो, और नियोक्ता, उसे प्रत्येक चिकित्सीय व्यवसायी जो उपस्थित है से उप्तकी निःशुल्क चिकित्सीय परीक्षण कराना चाहता है तो कर्मचारी तुरंत परीक्षण के लिए स्वयं को प्रस्तुत करेगा।

(3) अन्यमामलों में परीक्षण. उन मामलों में जिनमें नियम 14 लागू नहीं होता है,

नियोक्ता-

(क) उस स्थान पर चिकित्सा व्यवसायी को भेज सकेगा जहां कर्मचारी उस समय रह रहा हो और इस दशा में कर्मचारी चिकित्सा व्यवसायी द्वारा परीक्षण के लिए आवेदन किए जाने पर अपने को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए प्रस्तुत करेगा; या (ख) कर्मचारी के पास अर्हित चिकित्सा व्यवसायी द्वारा निःशुल्क चिकित्सकीय परीक्षण करवाने के लिए लिखित प्रस्ताव भेज सकेगा, इस दशा में कर्मचारी नियोक्ता के. परिसर में अथवा उसके सामीप्य में ऐसे स्थान पर जैसा कि प्रस्ताव में विनिर्दिष्ट किया जाए और ऐसे समय पर जैसा विनिर्दिष्ट किया जाए चिकित्सीय परीक्षण के लिए प्रस्तुत होगाः

परंतुः-

(एक) इस प्रकार विनिर्दिष्ट समय कर्मचारी की लिखित सहमति के सिवाय शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे के मध्य नहीं होगा; और

(दो) उन मामलों में जिनमें कर्मचारी की दशा ऐसी हो जिसमें उसके स्थान जहां तत्समय वह रह रहा है, को छोड़ना असंभव हो या बुद्धिमानी न समझा जाए तो वह चिकित्सीय परीक्षण के लिए प्रस्तुत होने को ऐसे स्थान के सिवाय अपेक्षित नहीं होगा।

(4) परीक्षणों की संख्या पर निर्बंधन. यदि कर्मचारी अर्द्ध- मासिक संदाय प्राप्त कर चुका है वह दुर्घटना के बाद प्रथम महीने में दो बार से अधिक अथवा बाद के किसी महीने में एक से अधिक बार उस स्थान पर जहां वह तत्समय रह रहा है से भिन्न स्थान पर चिकित्सकीय परीक्षण के लिए प्रस्तुत होने के लिए अपेक्षित नहीं होगा।

(5) प्रतिकर के अधिकार के निलम्बन के बाद परीक्षण. यदि कोई कर्मचारी जिसका प्रतिकर का अधिकार संहिता की धारा 84 की उप- धारा (2) या उप- धारा (3) के अधीन निलम्बित कर दिया है बाद में चिकित्सीय परीक्षण के लिए स्वयं प्रस्तुत होता है तो उसका परीक्षण नियोक्ता के परिसर में या सामीप्य में ऐसे स्थान पर जैसा नियोक्ता द्वारा नियत किया जाए और कर्मचारी की अभिव्यक्त सहमति के सिवाय ऐसे समय पर जो नियोक्ता द्वारा नियत किया जाए पर कर्मचारी द्वारा अपने को प्रस्तुत करने के बाद बहत्तर घंटों से अधिक नहींहो। 436(37)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

(6) महिलाओं का परीक्षण.- (एक) किसी भी महिला की उसकी सहमति के बगैर अन्य महिला की उपस्थिति के सिवाय पुरूष व्यवसायी द्वारा चिकित्सकीय परीक्षण नहीं किया जाएगा । (दो) किसी भी महिला को पुरूष व्यवसायी द्वारा चिकित्सकीय परीक्षण के लिए अपेक्षित नहीं किया जाएगा यदि वह इतनी राशि जमा कर देती है जो किसी महिला व्यवसायी द्वारा परीक्षण के खर्चों के लिए पर्याप्त हो।

18. धारा 88 की उप- धारा (1 ) के अधीन नियोक्ता द्वारा विहित प्ररूप में प्रस्तुत किया गया कथेने;

(एक) संहिता की धारा 88 की उप- धारा ( 1 ) के अधीन सक्षम प्राधिकारी के द्वारा भेजी जाने वाली सूचना प्ररूप - इक्कीस में होगी और प्ररूप- बाईस की सादी प्रतिलिपि के साथ होगी। (दो) धारा 88 के अधीन नियोक्ता के द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला कथन प्ररूप बाईस में होगा।

:..

(तीन) धारा 88 की उप- धारा ( 1 ) के अधीन दुर्घटना के सम्बन्ध में रिपोर्ट उस प्राधिकारी को भेजी जा सकेगी, जिसके पास ऐसी दुर्घटना की सूचना भेजी जानी आवश्यक है ।

19. धारा 89 की उप- धारा (1 ) के अधीन संक्षम प्राधिकारी द्वारा रजिस्टर में ज्ञापन अभिलिखित करने कीरीति.-

(1 ) ज्ञापन का प्ररूप. धारा 89 की उप - धारा ( 1 ) के अधीन समक्ष प्राधिकारी को भेजा गया करार का ज्ञापन , यदि सक्षम प्राधिकारी अन्यथा निर्देश न दे, दो प्रतियों में होता और प्ररूप-तेरह अथवा प्ररूप -चौदह अथवा प्ररूप -पंद्रह के उतने अनुरूप होगा जितनी मामले की परिस्थितियां ग्रहण करें।

(2) प्रक्रिया जहां सक्षम प्राधिकारी यह नहीं मानता कि उसे ज्ञापन अभिलिखत करने से इन्कार करना चाहिए.-

(एक) करार का ज्ञापन प्राप्त करने पर यदि सक्षम प्राधिकारी यह नहीं मानता कि ज्ञापन को अभिलिखित करने से इन्कार करने के आधार है तो वह उन्हें अभिलिखित करने के लिए तारीख तय करेगा और सम्बधित पक्षकारों को प्ररूप छब्बीस में लिखित में एक सूचना जारी करेगा कि आपत्ति के व्यतिक्रम वह इस प्रकार तय तारीख पर ज्ञापन को अभिलिखित करने का प्रस्ताव करता है:

परंतु सूचना किन्हीं भी पक्षकारों को मौखिक रूप से संसूचित की जा सकती है जो उस समय , जब सूचना लिखित रूप में अन्यथा जारी होती, उपस्थित हों। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

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(दो) इस प्रकार नियत तारीख पर, सक्षम प्राधिकारी ज्ञापन अभिलिखित करेगा यदि किन्हीं पक्षकारों को जो प्रस्तुत होकर सुने जाने की इच्छा प्रकट करे जब तक कि वह यह न समझे कि इसे अभिलिखित नहीं किया जाना चाहिए:

परंतु उप - नियम ( 1 ) के अधीन सूचना के विवाद्यक सक्षम प्राधिकारी को इस प्रकार तय तारीख पर ज्ञापन को अभिलिखित करने के लिए इन्कार करने से ....नहीं रोक सकेंगे चाहे सम्बन्धित किसी द्वारा आपत्ति न की गई हो।

(तीन) यदि इस तारीख को सक्षम प्राधिकारी निर्णय करता है कि ज्ञापन अभिलिखित किया जाना चाहिए , यह निर्णय लेता है कि ज्ञापन अभिलिखित नहीं किया जाना चाहिए तो वह अपने निर्णय व इसके कारणों की सूचना उपस्थित पक्षकारों को देगा और यदि ज्ञापन को अभिलिखित कराने की चाह रखने वाला कोई पक्षकार उपस्थित नहीं है, तो वह प्ररूप- सत्ताईस में पक्षकार को सूचना देगा।

(3) प्रक्रिया जहां सक्षम प्राधिकारी यह समझता है कि उसे ज्ञापन अभिलिखित करने से इन्कार करनाचाहिए -

(एक) करार के ज्ञापन को प्राप्त करने पर , यदि सक्षम प्राधिकारी यह समझता है कि ज्ञापन अभिलिखित करने से इंकार करने के पर्याप्त आधार हैं तो वह पक्षकार या पक्षकारों को सुनने के लिए जो ज्ञापन को अभिलिखित कराने की इच्छा रखते हैं; तारीख नियत करेगा और ऐसे पक्षकार या पक्षकारों को और यदि वह उचित समझे , किसी अन्य सम्बन्धित पक्षकार को इस प्रकार नियत तारीख और आधार जिन पर वह यह समझता है कि ज्ञापन अभिलिखित नहीं किया जाना चाहिए , की सूचना देगा।

(दो) यदि सूचना दिए जाने वाले पक्षकार उपस्थित नहीं हो तो प्ररूप-अठ्ठाईस अथवा प्ररूप-उनतीस में यथास्थिति, एक लिखित सूचना उन्हें दी जाएगी , और इस सूचना में नियत तारीख, सूचना जारी होने की तारीख के बाद से सात दिन से कम कीनहींहोगी।

(तीन) उप - नियम (1 ) के अधीन तय तारीख पर यदि ज्ञापन को अभिलेखित कराने की चाह रखने वाला पक्षकार या वाले पक्षकार ज्ञापन को अभिलिखित करने के लिए कार्यवाही करने के लिए उचित कारण दर्शाते हैं तो सक्षम प्राधिकारी यदि सम्बन्धित सभी पक्षकारों को पहले ही सूचना दी जा चुकी है, करार अभिलिखित कर सकेगा । यदि इन सभी पक्षकारों को सूचना नहीं दी गई है तो वह नियम 20 (2) के अनुसार कार्यवाही करेगा। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(39) (चार) इस प्रकार नियत तारीख पर, यदि सक्षम प्राधिकारी ज्ञापन अभिलिखित करने से इंकार करेगा , तो वह उस किसी भी पक्षकार को प्ररूप - सत्ताईस में सूचना भेजेगा जिसने उप-नियम (1 ) के अधीन सूचना प्राप्त नहीं की थी।

( 4) ज्ञापन अभिलिखित करने से इन्कार पर प्रक्रिया. ( एक) यदि किसी मामले में सक्षम प्राधिकारी करार के अभिलिखित करने से इन्कार करता है तो वह अपने इस इन्कार के कारणों का संक्षिप्त रूप से अभिलेखन करेगा।

(दो) यदि, सक्षम प्राधिकारी करार के ज्ञापन को अभिलिखित करने से इंकार करेगा तो वह करार में विनिर्दिष्ट राशि से अधिक किसी राशि या रकम या संदाय करने को निर्देशित करने वाला आदेश पारित नहीं करेगा, यदि राशि अदा करने के उत्तरदायी पक्षकार को यह कारण बताने का कि राशि अदा क्यों नहीं की जानी चाहिए अवसर न देदिया गया हो।

(तीन) जहां करार एक मुश्त राशि के संदाय के द्वारा अर्द्ध मासिक संदायों के छुटकारे के लिए हो, और सक्षम प्राधिकारी यह माने कि करार का ज्ञापन करार में यथा नियतऐसी राशि की रकम की अपर्याप्तता के कारण अभिलिखित नहीं किया जाना चाहिए तो वह कर्मचारी की निःशक्तता की संभाव्य अवधि का अपना आंकलन अभिलिखित करेगा।

(5) अभिलेख के लिए स्वीकार किए गए ज्ञापन का रजिस्ट्रीकरण. करार के ज्ञापन अभिलिखित करने में, सक्षम प्राधिकारी इसको प्ररूप - तीस में एक रजिस्टर में अभिलिखित कराएगा और ज्ञापन की एक प्रति पर अपने हस्ताक्षर द्वारा पृष्ठांकन करवाएगा जो निम्नलिखित निबंधनों में उसके द्वारा रखी जाएगी , यथा:-

"20.

को क्र. नं. 20..............के दिन वाला करार का ज्ञापन को रजिस्टर में अभिलिखित किया गया।

सक्षम प्राधिकारी का हस्ताक्षर 20. धारा 91 की उप- धारा (1 ) के अधीन सक्षम प्राधिकारी के रूप में ऐसा अन्य अनुभव और अर्हताएं.- सक्षम प्राधिकारी की अर्हता -

(एक) जो राज्य न्यायिक सेवा का 5 वर्ष से अन्यून की अवधि के लिए सदस्य है; या

(दो) कम से कम पांच वर्ष की वकालत करने वाला अधिवक्ता; या मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(40)

(तीन) 5 वर्ष से अन्यून की अवधि के लिए ऐसा राजपत्रित अधिकारी , जो कार्मिक प्रबंध , मानव संसाधन विकास , और औद्योगिक सम्बन्धों तथा विधिक मामलों में शैक्षणिक अर्हताएं और अनुभव रखता हो।

(चार) श्रम विभाग का ऐसा अधिकारी जो सहायक श्रम आयुक्त/उप संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य सुरक्षा से कम से कम से कम का न हो।

21. धारा 92 की उप- धारा (1 ) के अधीन नोटिस की रीति और उप- धारा (3 ) के अधीन धन राशि पारेषित करने की रीति -

(1 ) रिपोर्ट के लिए अंतरण.- ( एक) कोई सक्षम प्राधिकारी जो धारा 92 की उप- धारा (2 ) के अनुसार रिपोर्ट के लिए किसी मामले को किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी के पास अन्तरित कर रहा है, उस उप - धारा में निर्दिष्ट दस्तावेज के साथ उस अन्य सक्षम प्राधिकारी के पास ऐसा संक्षिप्त कथन भेजेगा जो उस मामले के उत्तर के लिए जिस पर रिपोर्ट मांगी गई है के प्रश्नों के प्ररूप में हो।

(दो) सक्षम प्राधिकारी जिसके पास रिपोर्ट के. लिए मामला इस प्रकार अंतरित किया गया है किसी विधि के प्रश्न का उत्तर देने के लिए अपेक्षित नहीं होगा।

(2) धन का पारेषण. एक सक्षम प्राधिकारी द्वारा दूसरे सक्षम प्राधिकारी के पास धारा 92 की उप-धारा (2) के अनुसार भेजा गया धन या तो प्रेषण अन्तरण रसीद, या धनादेश या संदेश वाहक द्वारा, जैसा भी धन भेजने वाला सक्षम प्राधिकारी निर्देश दे, पारेषित किया जाएगा। 22. धारा 93 की उप- धारा ( 3) के अधीन दावे या समझौते के लिए आवेदन करने के लिए प्ररूप रीति और फीस एवं धारा 93 की उप-धारा (4) के अधीन आवेदन के निपटारे की समय- सीमा और कार्यवाही के आनुषंगिक की लागत;

(1) परिचय.- इन नियमों में अन्यथा उपबंधित के सिवाय , अधिनियम अथवा नियमों के अधीन मामलों का निपटारा करने के लिए सक्षम प्राधिकारियों द्वारा और ऐसे मामलों में पक्षकारों द्वारा अपनायी जाने वाली प्रक्रिया इस भाग में विहित नियमों के अनुसार अधिनियमित की जाएगी।

(2) आवेदन.- धारा 93 में निर्दिष्ट प्रकृति का कोई आवेदन आयुक्त के पास पंजीकृत डाक द्वारा भेजा जा सकता है अथवा उसके पास प्रस्तुत किया जा सकता है अथवा इस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत किसी भी व्यक्ति को दिया जा सकता है और इस प्रकार भेजा गया या प्रस्तुत किया गया आवेदन यदि सक्षम प्राधिकारी अन्यथा निर्देशित नहीं करता समुचित प्ररूप में दो प्रतियों में बनाया जाएगा , यदि कोई हो तो, और आवेदक द्वारा सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) में विहित रीति से हस्ताक्षरित और सत्यापित किया जाएगा। (प्ररूप इकत्तीस, बत्तीस तथा तैंतीस देखिए) 436(41)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

(3) दस्तावेजों का प्रस्तुत किया जाना.- (एक) जब राहत के लिए आवेदन दस्तावेज पर आधारित हो तो दस्तावेज आवेदन के साथ संलग्न किया जाएगा।

(दो) कोई अन्य दस्तावेज जो कोई पक्षकार साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करना चाहे पहली सुनवाई के दौरान अथवा पहले प्रस्तुत किया जाएगा।

F

(तीन) कोई दस्तावेज जिसे यथास्थिति उप- नियम (1 ) अथवा उप - नियम (2), में विनिर्दिष्ट समय पर या समय में पेश नहीं किया जाता तो वे सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बिना पक्षकार के आवेदक की ओर से साक्ष्य में स्वीकार्य नहीं होगा ।

(चार) इस नियम में कुछ भी किसी दस्तावेज पर लागू नहीं होता जो गवाह की प्रति- परीक्षण के प्रयोजन के लिए पेश किया गया हो या गवाह को उसकी याददाश्त ताजा करने के लिए दे दिया गया हो।

(4) गलत सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत आवेदन.- (एक) आवेदन प्राप्त करने पर यदि सक्षम प्राधिकारी को यह लगता है कि यह किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी को पेश किया जाना चाहिए था तो वह उस समय पर पेश होने व वापस करने की तारीख , वापस करने का कारण और उस सक्षम प्राधिकारी का नाम जिसको यह भेजा जाना चाहिए , पृष्ठांकित कर आवेदक को वापस भेजेगा।

(दो) यदि बाद में किसी प्रक्रम पर सक्षम प्राधिकारी को यह महसूस हो कि आवेदन किसी अन्य संक्षम प्राधिकारी को भेजा जाना चाहिए था तो वह उस सक्षम प्राधिकारी को यह आवेदन भेज देगा जो इसकी सुनवाई करने के लिए सशक्त है और आवेदक को (और विरोधी पक्षकार को) यदि उसने नियम 8 के अधीन आवेदन की एक प्रति प्राप्त कर ली है, तद्नुसार सूचित करेगा।

(तीन) वह सक्षम प्राधिकारी जिसकों उप- नियम (2) के अधीन आवेदन अन्तरित किया गया हैं कार्यवाहियां उसी प्रकार जारी रखेगा मानो पूर्व की कार्यवाहियां अथवा उनमें से कोई कार्यवाही उसके समक्ष की गई हो, यदि वह संतुष्ट हो जाता है कि पक्षकारों के हित पर तद्वारा कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

(5) आवेदक का परीक्षण.- (एक) धारा 93 में निर्दिष्ट प्रकृति का आवेदन प्राप्त करने के बाद सक्षम प्राधिकारी आवेदक की शपथ पर परीक्षण कर सकता है, अथवा आवेदन को इस निमित्त राज्य "सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी के पास भेज सकता है और ऐसे अधिकारी को आवेदक की व उसके गवाहों की परीक्षण लेने का निर्देश दे सकता है और उसके अभिलेख को सक्षम प्राधिकारी के पास भेजने का निर्देश दे सकता है। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

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(दो) उप- नियम (1 ) के अधीन की गई किसी परीक्षण का सार उसी रीति से अभिलिखित किया जाएगा जैसा धारा 97 में साक्ष्य को अभिलिखित करने के लिए उपबंध किया गया है। (6 ) आवेदन का संक्षिप्त रूप में खारिज होना.- (एक) सक्षम प्राधिकारी आवेदन पर उप- नियम (5 ) के अधीन आवेदक की किसी परीक्षण के परिणाम पर विचार करने के बाद आवेदन को, यदि वह उन कारणों की वजह से अभिलिखित किए जाएं इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि उस पर कार्यवाही आगे करने के कोई पर्याप्त आधार नहीं हैं संक्षिप्त रूप में खारिज कर सकता है।

(दो) उप- नियम ( 1 ) के अधीन आवेदन की खारिजी आवेदक को उसी मामले के निपटारे के लिए नवीन आवेदन प्रस्तुत करने से नहीं रोकेगी।

(7) आवेदन में प्रारम्भिक जांच. यदि उप- नियम (6) के अधीन किसी आवेदन को खारिज नहीं किया गया हो , तो सक्षम प्राधिकारी उन कारणों की वजह से जो अभिलिखित किए जायेंगे किसी अन्य पक्षकार को बुलाने से पहले आवेदक को आवेदन के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बुला सकता है, और ऐसे साक्ष्य पर विचार करने के बाद यदि सक्षम प्राधिकारी की यह राय बनती है कि दावा की गई राहत के लिए मामला नहीं बनता तो वह ऐसा करने के लिए अपने कारणों के संक्षिप्त.. कथन के साथ आवेदन को खारिज कर सकेगा।

(8) विरोधी पक्षकार को सूचना. यदि सक्षम प्राधिकारी उप- नियम (8 ) या उप- नियम (7) के अधीन आवेदन खारिज नहीं करेगा, तो वह आवेदन की एक प्रति उस तारीख को सूचना सहित जिस तारीख को वह आवेदन का निस्तारण करेगा उस पक्षकार (यह इसके विरोधी पक्षकार के रूप में विर्निष्ट है) के पास भेजेगा जिससे आवेदक राहत का दावा कर रहा है और पक्षकारों को इस तारीख पर किसी साक्ष्य को प्रस्तुत करने के लिए कहेगा जो वे प्रस्तुत करना चाहें।

(9) विरोधी पक्षकार की पेशी व परीक्षण.- ( एक) विरोधी पक्षकार प्रथम सुनवाई के पहले या उस समय जैसी कि सक्षम प्राधिकारी अनुमति दे आवेदन में किए गए दावे से सम्बन्धित लिखित कथन दायर कर सकता है , और यदि सक्षम प्राधिकारी द्वारा ऐसा अपेक्षित हो, तो लिखित कथन दायर करेगा और ऐसा कोई भी लिखित कथन अभिलेख का हिस्सा होगा।

(दो) यदि विरोधी पक्षकार दावे का विरोध करता है। तो आयुक्त दावे पर उसकी परीक्षण लेने के लिए कार्यवाही कर सकता है, और यदि कोई लिखित कथन प्रस्तुत नहीं किया गया है, तो कार्यवाही करेगा और परीक्षण के परिणाम को लेखबद्ध करेगा ।

(10) विवाद्यकों की विरचना. (एक) किसी लिखित कथन और पक्षकारों की किसी परीक्षण के परिणाम पर विचार करने के बाद सक्षम प्राधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि तथ्य अथवा विधि के किस प्रतिपादन पर पक्षकारों में मतभेद है और तदुपरान्त उन विवाद्यकों को विरचित व अभिलिखित : करेगा जिस पर मामले का सही निर्णय निर्भर करता है। 436(43)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

(दो) विवाद्यकों अभिलेखित करने में, सक्षम प्राधिकारी उन विवाद्यकों जो उसकी राय में तथ्यों से की हैं और उन विवाद्यकों जो विधि बिन्दुओं से सम्बन्धित हैं में भेद करेगा।

(11 ) तथ्यों के विवाद्यकों के विचारण के स्थगन की शक्ति जहां विधि विवाद्यक पैदा होते हों.- जहां एक ही मामले में तथ्य के विवाद्यक व विधि के विवाद्यक पैदा हों और सक्षम प्राधिकारी की यह राय हो किमामले का निपटारा केवल विधि के विवाद्यकों के आधार पर हो सकेगा तो वह उन विवाद्यकों का पहले विचारण करेगा और उस उद्देश्य के लिए , अगर वह उचित समझे, तथ्य के विवाद्यकों को तब तक स्थगित रख सकेगा जब तक कि विधि के विवाद्यकों का निर्धारण नहीं हो जाता।

(12) डायरी.- सक्षम प्राधिकारी आवेदन पर की गई कार्यवाहियों की एक संक्षिप्त डायरी स्वंय बनाए रखेगा।

(13) निर्णय.- (एक) सक्षम प्राधिकारी आदेश पारित करने में संक्षिप्त रूप से निर्णय और विरचित विवाद्यकों के प्रत्येक विवाद्यक पर अपने निष्कर्ष को और अपने निष्कर्ष के कारणों को अभिलिखित करेगा।

(दो) हस्ताक्षर करते समय व निर्णय पर तारीख डालते समय सक्षम प्राधिकारी अपने निर्णय को सुनाएगा, और उसके पश्चात् किसी आकस्मिक भूल अथवा लोप से उत्पन्न लिपिकीय अथवा गणितीय त्रुटि को सुधारने से भिन्न निर्णय में कुछ भी जोड़ा या परिवर्तित नहीं किया जाएगा।

(14) गवाहों को बुलाना.- यदि कार्यवाही के किसी पक्षकार द्वारा गवाहों को बुलाने के लिए आवेदन करता है तो सक्षम प्राधिकारी विहित खर्चों व फीस अदा होने पर ऐसे गवाहों को बुलाने के लिए सम्मन जारी करेगा। जब तक कि वह यह विचार करें कि उनकी उपस्थिति मामले के सही निर्णय के लिए आवश्यक नहींहै।

(15) स्थानीय निरीक्षण के लिए प्रवेश करने का अधिकार. सक्षम प्राधिकारी जिसके समक्ष दुर्घटना द्वारा हुई क्षति से सम्बन्धित कोई कार्यवाही लम्बित हो, स्थानीय निरीक्षण करने के लिए अथवा.. कार्यवाहियों से सम्बन्धित सूचना देने वाले किसी व्यक्ति की परीक्षण करने के लिए उस स्थान में कभी भी प्रवेश कर सकता है जहां कर्मचारी दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, अथवा जहां साधारण तौर पर कर्मचारी कार्य करता था:

परंतु सक्षम प्राधिकारी नियोक्ता अथवा स्थापना के प्रबन्धन के लिए उसके प्रति प्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी किसी व्यक्ति की अनुमति के सिवाय उस स्थापना के सामान्य कार्य समय के दौरान को छोडकर किसी औद्योगिक स्थापना के परिसर में प्रवेश नहीं करेगा।

(16) स्थानीय निरीक्षण के सम्बन्ध में प्रक्रिया.- (एक) यदि सक्षम प्राधिकारी उन परिस्थितियों की जिनमें दुर्घटना घटी की घटना स्थल पर जांच करने की दृष्टि से स्थानीय निरीक्षण करने के लिए प्रस्ताव रखता है तो वह ऐसा निरीक्षण करने के अपने आशय की सूचना पक्षकारों या उनके प्रतिनिधियों को देगा, यदि उसकी राय मे मामले की आवश्यकता इस प्रकार की सूचना को असाध्य न बना दे। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

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(दो) ऐसी सूचना मौखिक या लिखित दी जा सकती है, और नियोक्ता के मामले में, उसे किसी भी व्यक्ति को दी जा सकती है जिस पर धारा 88 की उप-धारा (2) के अधीन दावे का सूचना तामील की जा सकती है, अथवा किसी ऐसे व्यक्ति के किसी प्रतिनिधि को दी जा सकती है। :

(तीन) स्थानीय निरीक्षण में कोई भी पक्षकार , अथवा किसी पक्षकार का प्रतिनिधि सक्षम प्राधिकारी के साथ हो सकेगा

(चार) स्थानीय निरीक्षण करने के पश्चात् सक्षम प्राधिकारी ज्ञापन में संक्षिप्त रूप से देखे गए तथ्यों को लिखेगा और उस किसी पक्षकार को दिखाएगा जो देखना चाहे, और विहित शुल्क के संदाय के बाद, उसकी प्रति किसी भी पक्षकार को देगा।

(पांच) ज्ञापन अभिलेख का प्ररूप भाग होगा।

(17) संक्षिप्त परीक्षण की शक्ति. (एक) सक्षम प्राधिकारी उसके समक्ष लम्बित किसी मामले की औपचारिक सुनवाई के समय के सिवाय स्थानीय निरीक्षण के दौरान अथवा किसी भी समय किसी भी व्यक्ति का संक्षिप्त परीक्षण कर सकता है, जो ऐसे मामले से सम्बन्धित सूचना देने में समर्थ ज्ञात होता हो, चाहे ऐसा व्यक्ति मामले में गवाह के रूप मे पुकारा गया अथवा जाय या नहीं और चाहे कोई पक्षकार या सभी पक्षकार उपस्थित हो या न हों।

(दो) उप-नियम (1 ) के अधीन परीक्षण लिए जाने वाले व्यक्ति को शपथ नहीं दिलाई जाएगी।

(तीन) उप- नियम (1 ) के अधीन जांच किए गए व्यक्तियों द्वारा किए गए कथन, यदि लिखे गए हों, कथन करने वाले व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित नहीं होंगे, न ही यहां इसके पश्चात् जैसा उपबंधित किया गया हो के सिवाय उनको अभिलेख में सम्मिलित किया जाएगा अथवा मामले में निर्णय पर पहुंचने के प्रयोजन के लिए प्रयोग किया जाएगा।

(चार) यदि कोई गवाह जिसकी उप- नियम ( 1 ) के अधीन परीक्षण की गयी है साक्ष्य में कोई सारवान कथन करता है जो ऐसी परीक्षण में उसके द्वारा किए गए और लिखे गए कथन से विरोधात्मक हो तो सक्षम प्राधिकारी उसका ध्यान ऐसे कथन की ओर दिला सकता है और उस स्थिति में निर्देश दे सकता है कि गवाह की परीक्षण अथवा प्रति- परीक्षण लेने के प्रयोजन के लिए ऐसे कथन का सुसंगत भाग पक्षकारों को दे दियाजाएगा।

(पांच) कोई कथन अथवा कथन का हिस्सा जो उप- नियम (4 ) के अधीन पक्षकारों को दिया गया है अभिलेख में सम्मिलित किया जाएगा।

(छह) जहां कोई मामला पक्षकारों के मध्य करार, द्वारा निपटा लिया गया हो तो सक्षम प्राधिकारी उप -नियम ( 1 ) के अधीन किए गए किसी भी कथन को अभिलेख में सम्मिलित कर सकेगा और किए गए करार को स्वीकार करने, अथवा करने से इनकार करने, को न्यायोचित ठहराने के प्रयोजन के लिए ऐसे कथन का प्रयोग कर सकेगा। 436(45)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

(18) सक्षम प्राधिकारी के निर्णय को मानने का करार.- (एक ) यदि कोई पक्षकार सक्षम प्राधिकारी के निर्णय को मानने की अपनी इच्छा लिखित रूप में करता है , तो सक्षम प्राधिकारी इसकी जांच करेगा कि क्या पक्षकार निर्णय मानने का इच्छुक है।

(दो) यदि अन्य पक्षकार सक्षम प्राधिकारी के निर्णय को मानने के लिए सहमत होगा तो उसके करार का तथ्य लिखित में अभिलिखित किया जाएगा और उसके द्वारा हस्ताक्षरित होगा।

(तीन) यदि अन्य पक्षकार सक्षम प्राधिकारी के निर्णय को मानने के लिए सहमत होगा तो प्रथम पक्षकार भी निर्णय मानने के लिए बाध्यता के अधीन नहीं रहेगा।

(19) प्रक्रिया जहां धारा 85 (2) के अधीन क्षतिपूर्ति का दावा किया गया हो.- (एक) जहां विरोधी पक्षकार यह दावा करता है कि प्रतिकर उसके विरोधी वसूला गया तो वह धारा 85 की उप-धारा (2 ) के अधीन ऐसे व्यक्ति द्वारा क्षतिपूर्ति का हकदार होगा, जो मामले का पक्षकार नहीं हैं तो आवेदन का प्रथम बार उत्तर देने के लिए बुलाए जाने पर वह विहित शुल्क के साथ ऐसी सूचना सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत करेगा और सक्षम प्राधिकारी इस पर प्ररूप-चौतीस के अधीन में ऐसे... व्यक्ति को सूचना जारी करेगा।

(दो) यदि कोई व्यक्ति जिसे उप - धारा ( 1 ) के अधीन सूचना तामील कराई गई है आवेदक के प्रतिकर के दावे का विरोध करने की इच्छा करता है, अथवा विरोधी पक्षकार के दावे की क्षतिपूर्ति किए जाने की इच्छा व्यक्त करता है तो वह मामले की सुनवाई के लिए नियत तारीख पर या किसी उस तारीख पर जब तक के लिए मामले को स्थगित किया गया है.... सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होगा और यदि इस प्रकार वह प्रस्तुत होता है, तो कार्यवाही के पक्षकार के सभी अधिकार उसे प्राप्त होंगे , प्रस्तुत होने का व्यतिक्रम करने पर यह माना जाएगा कि विरोधी पक्षकार के विरोधी दिया गया कोई अधिनिर्णय उसे स्वीकार है और उससे वसूले गए किसी प्रतिकर के लिए विरोधी पक्षकार की क्षतिपूर्ति करने का उसका स्वयं का दायित्व स्वीकार है :

परंतु इस प्रकार सूचना तामील किया गया व्यक्ति वाद में प्रस्तुत होकर सक्षम प्रांधिकारी को संतुष्ट कर देता है कि उसके प्रस्तुत न हो पाने का पर्याप्त कारण था तो उपर्युक्त विरोधी पक्षकार को सूचना देने के बाद सक्षम प्राधिकारी ऐसे व्यक्ति को सुनेगा और इन नियमों और ऐसें निबंधनों के अधीन जैसा कि न्याय संगत हो दिए गए किसी अधिनिर्णय को अपास्त कर सकेगा अथवा परिवर्तित कर सकेगा।

(तीन) यदि कोई व्यक्ति, जिसे उप - नियम (1 ) के अधीन सूचना तामील कराई गई है, चाहे वह आवेदक का प्रतिक के दावे का अथवा विरोधी पक्षकार की क्षतिपूर्ति किए जाने के दावे का विरोध करने की इच्छा करे या न करे , दावा करता है कि ठेकेदार होते हुए वह स्वयं . मालिक है और उस व्यक्ति द्वारा क्षतिपूर्ति किए जाने का हकदार है जो उस ठेकेदार जिससे कर्मचारी प्रतिकर वसूली के सम्बन्ध में उसके विरोध में है तो वह उप- नियम ( 1 ) के अधीन दिए गए सूचना में नियत दिनांक पर या पहले विहित शुल्क के साथ सक्षम प्राधिकारी को ऐसे दावे की एक सूचना देगा और सक्षम प्राधिकारी इस पर प्ररूप -पैंतीस में ऐसे व्यक्ति को सूचना जारी करेगा। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

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(चार) यदि कोई व्यक्ति जिसे उप- नियम (3 ) के अधीन सूचना तामील किया गया है आवेदक के प्रतिकर के दावे का विरोध करने की अथवा उप- नियम (3 ) के अधीन क्षतिपूर्ति किए जाने की इच्छा प्रकट करता है तो वह प्ररूप-पैंतीस में तय की गई दिनांक पर या उस दिनांक पर जिसको मामला स्थगित किया गया है सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होगा और यदि वह इस प्रकार प्रस्तुत हो जाता है तो उसे कार्यवाही के पक्षकार के सभी अधिकार प्राप्त होंगे और इस प्रकार प्रस्तुत होने के व्यक्तिक्रम में यह माना जाएगा कि मूल पक्षकार के विरोधी अथवा उस व्यक्ति के विरोधी जिसे उप- नियम ( 1 ) के अधीन गुनना तामील कराया गया है दिए गए अधिनिर्णय को स्वीकार करता है और उस पक्षकार की क्षतिपूर्ति करेन को स्वयं का दायित्व स्वीकार करता है जिसके विरोधी उससे वसूल किए जाने वाले किसी प्रतिकर के लिए अधिनिर्णय दिया गया है :

परंतु यदि कोई व्यक्ति जिसे इस प्रकार सूचना तामील करा दिया गया है बाद में प्रस्तुत होकर सक्षम प्राधिकारी को संतुष्ट कर देता है कि उसे प्रस्तुत होने से पर्याप्त कारण ने रोका था तो अभिलेख पर दिए गए सभी पक्षकारों को सूचना देने के बाद , सक्षम प्राधिकारी ऐसे व्यक्ति को सुनेगा और ऐसे निबंधनों पर जो न्यायोचित हों इस नियम के अधीन ऐसे व्यक्ति के विरोधी दिए गए किसी अधिनिर्णय को अपास्त या परिवर्तित कर सकेगा।

(पांच) उस किसी प्रक्रिया में जिसमें उप- नियम ( 1 ) अथवा उप- नियम (3 ) के अधीन किसी व्यक्ति को सूचना तामील करा दी गई है, तो सक्षम प्राधिकारी अगर वह प्रतिकर का अधिनिर्णय देता है, प्रत्येक व्यक्ति के सम्बन्ध में निष्कर्ष को अपने निर्णय में अभिलिखित करेगा चाहे वह व्यक्ति किसी विरोधी पक्षकार को क्षतिपूर्ति करने का उत्तरदायी हो या नहीं और पक्षकार को यदि कोई हो, विनिर्दिष्ट करेगा जिसकी क्षतिपूर्ति का वह उत्तरदायी है।

(20 ) संसक्त मामलों में प्रक्रिया.- (एक) जहां एक ही दुर्घटना से उत्पन्न दो या दो से अधिक मामले सक्षम प्राधिकारी के समक्ष लम्बित हों और इसके अंतर्वलित कोई भी विवाद्यक दो या अधिक ऐसे मामलों में समान हो तो, जहां तक ऐसे विवाद्यकों में साक्ष्य का सम्बन्ध है, ऐसे मामलों की सुनवाई साथ- साथ की जा सकती है।

(दो) जहां उप-नियम ( 1 ) के अधीन कार्रवाई की जाती है तो उस समान विवाद्यक या विवाद्यकों के साक्ष्य का अभिलेखन एक मामले का अभिलेख अभिलिखित किया जाएगा और सक्षम प्राधिकारी ऐसे किसी अन्य मामले के अभिलेख पर अपने हस्ताक्षर करके उसे प्रमाणित करेगा, उस विस्तार तक कि इस प्रकार अभिलेखित किया गया साक्ष्य ऐसे अन्य मामले में हो, और यह तथ्य कि ऐसे अन्य मामले के पक्षकारों को प्रस्तुत होने का अवसर मिला हो, और यदि वे उपस्थित रहे हों, तो गवाहों की प्रति- परीक्षण का अवसर मिला हो।

(21 ) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के कतिपय उपबंधों का लागू होना. अधिनियम या इन नियमों में अन्यथा उपबंधित होने के सिवाय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की प्रथम अनुसूची के निम्नलिखित उपबंध यथा वे उपबंध जो आदेश पांच, नियम 9 से 13 और 15 से 30 , आदेश नौ, आदेश बारह , नियम 3 से 10, आदेश सोलह, नियम 2 से 21 , आदेश सत्रह, और आदेश अठारह, नियम 1 व 2 में निहित हैं सक्षम प्राधिकारी के समक्ष कार्यवाही में लागू होंगे , जहां तक वे उन पर लागू हों:

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मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

परंतु कि---

(क) उक्त उपबंधों के लागू होने को सुकर बनाने के उद्देश्य के लिए सक्षम प्राधिकारी इन उपबंधों का कुछ ऐसे परिवर्तनों के साथ अर्थ लगा सकता है जो इनके सार को प्रभावित किए बगैर उसके समक्ष मामले के प्रति अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक या उचित हो:

(ख) पर्याप्त कारणों की वजह से, सक्षम प्राधिकारी उक्त उपबंधों के अनुसार से भिन्न कार्यवाही कर सकता है यदि वह संतुष्ट हो जाता है पक्षकारों के हित पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडेगा।

(22) प्ररूपों के हस्ताक्षर के सम्बन्ध में उपबंध. प्रतिकर की रसीद से भिन्न कोई अन्य प्ररूप जो इन नियमों के अधीन सक्षम प्राधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित होना अपेक्षित है उसके निर्देशानुसार व उसकी ओर से इस उद्देश्य के लिए लिखित रूप में उसके द्वारा नियुक्त उसके अधीनस्थ अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित किया जा सकता है।

(23) आश्रितों में प्रतिकर का प्रभाजन करना.- नियम 08, 09 व 21 में निहित उपबंधों के सिवाय , इस भाग के उपबंध, जहां तक हो सके, मृत कर्मचारियों के आश्रितों में प्रतिकर के प्रभाजन से सम्बन्धित किन्हीं कार्यवाहियों के मामले में लागू होंगे ।

(24) स्थगन के कारण अभिखिखित होंगे. यदि आयुक्त किसी आवेदन का निस्तारण एक ही सुनवाई में पूर्ण करना संभव नहीं पाता तो वह उन कारणों को अभिलिखित करेगा जो स्थगन को आवश्यक कर रहे हैं।

(25) खर्चों के संदाय से छूट. यदि सक्षम प्राधिकारी संतुष्ट हो जाता है कि गरीबी के कारण आवेदक विहित फीस अदा करने में असमर्थ है तो वह किसी फीस अथवा सभी फीसों से छुटकारा दे सकता है। यदि मामले का निर्णय आवेदक के पक्षकार में हो जाता तो विहित फीस को जिसे माफ नहीं किया गया होता तो अदा करने के लिए देय होगी , मामले के खर्चे में जोड़ा जा सकता है और उस तरीके से वसूला जा सकता है जैसा सक्षम प्राधिकारी खर्चे सम्बन्धी अपने आदेश में निर्देशित करें।

23. धारा 97 के अधीन ज्ञापन के अभिप्रमाणन की रीति.-

1. आवेदक की परीक्षण.- (1 ) धारा 93 में उल्लिखित प्रकृति का आवेदन प्राप्त करने के बाद आयुक्त आवेदक की शपथ परीक्षण ले सकता है, अथवा आवेदन को इस सम्बन्ध में राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी अफसर के पास भेज सकता है और ऐसे अफसर को आवेदक की व उसके गवाहों की परीक्षण लेने का निर्देश दे सकता है और अभिलेख को सक्षम प्राधिकारी के पास भेजने का निर्देश दे सकताहै।

(2) उप-नियम ( 1 ) के अधीन की गई किसी परीक्षण का सार उसी तरीके से अभिलिखित किया जाएगा जैसा धारा 97 में साक्ष्य को अभिलिखित करने के लिए उपबंध किया गया है। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

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अध्याय- आठ

भवन और अन्य निर्माण कर्मकारों के संबंध में सामाजिक सुरक्षा और उपकर

24. धारा 101 के अधीन उपकर के विलंबित भुगतान के मामले में उपकर की राशि और ब्याज की दर का भुगतान करने की समय सीमा -यदि कोई नियोक्ता संहिता की धारा 100 के अधीन देय उपकर कीकिसी राशि को, ऐसे समय के भीतर जो कि निर्धारण आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए या निर्धारण आदेश के जारी होने की तारीख से 30 दिवस के भीतर, जो भी पूर्वतर हो, भुगतान करने में असमर्थ रहता है, ऐसा नियोक्ता उस तारीख से ऐसा भुगतान शोध्य था से ऐसी राशि का वास्तव में भुगतान नहीं किए जाने तक की कालावधि में समाविष्ट प्रत्येक माह या माह के भाग के लिए भुगतान किए जाने वाले उपकर की राशि पर एक प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान करने का दायी होगा। ,

25. धारा 105 की उप- धारा (2) के अधीन अपील के लिए शुल्क ऐसी अपील अन्य बातों के साथ साथ, आधे प्रतिशत के समतुल्य एक गैर-वापसी योग्य फीस के साथ, किन्तु जो यथास्थिति , विवाद या जुर्माने या दोनों की राशि के पच्चीस हजार रूपय की राशि से अनधिक हो, ऐसी अपील के अधीन राज्य सरकार के साइबर कोषालय में श्रम विभाग के मुख्य शीर्ष खाता 0230-00-101-0555 में जमा की जाएगी।

अध्याय- नौ

असंगठित कर्मकारों, जी आई जी कर्मकारों

-तथा प्लेटफार्म कर्मकारों के लिए सामाजिक सुरक्षा

अध्याय - दस

वित्त तथा लेखे

26. धारा 120 की उप-धारा ( 1 ) के अधीन किसी चल या अचल संपत्ति को अर्जित करने , रखने , बेचने , या अन्यथा किसी अंतरण के लिए शर्तें, उप- धारा (2) के अधीन पूंजी निवेश, पुनः निवेश या निवेश वसूल करने संबंधी निबंधन, उप-धारा (3) के अधीन ऋण प्राप्त करने एवं ऐसे ऋणों की अदायगी हेतु उपायों के निबंधन तथा उप- धारा (4) के अधीन अधिकारियों एवं कर्मचारिवृंद या उनके किसी वर्ग के लाभ हेतु भविष्य या अन्य निधियों हेतु निबंधन-

(1 ) मंडल, यथाशक्य शीघ्र, इन नियमों के प्रवृत में आने के पश्चात् एक निधि का गठन करेगा, जो संहिता और इन नियमों के उपबंधों के अनुसार मध्यप्रदेश सुरक्षा निधि कहलाएगा। निधि मंडल में निहित होगी और मण्डल द्वारा प्रशासित होगी। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(49) (2) निधि से संबंधित समस्त धन राशि को राष्ट्रीयकृत बैंक में अथवा भारतीय न्यास अधिनियम, 1882( 1882का 4) की धारा 20 के खण्ड (क) से (घ) में निर्दिष्ट प्रतिभूति में निवेशित किया जा सकेगा।

(3) धारा 120 की उप- धारा (3) के अनुसार मण्डल राज्य सरकार से अग्रिम में ऋण/ निधि प्राप्त कर सकेगा और उन्हीं निबंधनों तथा शर्तों के अनुसार वापस कर सकेगा।

(4) प्रत्येक सामाजिक सुरक्षा संस्था, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन के साथ और ऐसे निबंधनों पर जैसे कि राज्य सरकार द्वारा विहित किए जाएं, उसके अधिकारियों तथा कर्मचारिवृंद या उनके किसी वर्ग के लाभ के लिए, ऐसी भविष्य निधि या अन्य लाभ निधि जो वह ठीक समझे, का गठन कर सकेगा।

27. धारा 121 के अधीन अवसूलीय शोघ्य को बट्टे खाते में रखने की शर्तें और तरीके.-

(1 ) जहां राज्य सामाजिक सुरक्षा मण्डल का विचार है कि राज्य सामाजिक सुरक्षा मण्डल को देय अभिदाय , उपकर, ब्याज और नुकसानी की राशि अवसूलनीय है, वहां सरकार के पूर्व अनुमोदन से राज्य सामाजिक सुरक्षा मण्डल या उसके द्वारा इस बारे में प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन उक्त राशि को बट्टे खाते में डालने की मंजूरी दे सकेगी: -

(एक) प्रतिष्ठान को पांच साल से अधिक समय से बंद कर दिया गया है और समस्त संभावित प्रयासों के बावजूद नियोक्ता का पता नहीं लगाया जा सकता है;

(दो) राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड द्वारा प्राप्त फैसले को व्यतिक्रमी नियोक्ता की पर्याप्त संपत्ति की कमी के कारण सफलतापूर्वक निष्पादन नहीं किया जा संका; या

(तीन) निम्नलिखित द्वारा अंशदान का दावा पूर्ण रूप से नहीं किया गया है -

(क) दिवालियापन की स्थिति में कारखानों/ स्थापना के परिसमापन में जाने की दशा में परिसमापक अधिकारी द्वारा; या

(ख) इकाई का राष्ट्रीयकरण या सरकार द्वारा लिए जाने की दशा में भुगतान हेतु सक्षम प्राधिकारी द्वारा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(50)

अध्याय - ग्यारह

प्राधिकार, मूल्यांकन , अनुपालन तथा वसूली

28. धारा 122 की उप- धारा (6) के खंड (ड ० ) के अधीन निरीक्षक-सह- सुकरकर्ता की अन्य शक्तियां.- निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता ऐसी शक्तियों का उपयोग कर सकेगा जैसी कि राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर अवधारित की जाएं ।

29. धारा 123 के खंड (क) के अधीन अभिलेखों और रजिस्टरों और अन्य विवरणों और ब्योरों के रखरखाव के लिए प्ररूप और तरीके, खंड (ख ) के अधीन कर्मचारियों के कार्य स्थानों पर सूचना प्रदर्शित करने के तरीके और खंड (घ) के अधीन प्राधिकारी और अधिकारियों को विवणियां दाखिल करने के तरीके और कालावधि-

(1 ) महिला कर्मचारियों का रजिस्टर. (क) प्रत्येक स्थापना का नियोक्ता जिसमें महिलाएं कार्यरत हैं, वे प्ररूप - छत्तीस में इलेक्ट्रॉनिक रूप से या हार्ड कॉपी में महिला कर्मचारियों के एक रजिस्टर को तैयार करेगा और संधारित करेगा । और इसमें स्थापना की समस्त महिला कर्मचारियों की विशिष्टयां दर्ज होंगी ।

इसके अलावा, यह हमेशा निरीक्षक- सह-सुविधाप्रदाता के लिए अधिसूचित निरीक्षण योजना के अधीन निरीक्षण के लिए उपलब्ध रहेगा।

(ख) नियोक्ता महिला कर्मचारियों की ऐसी अन्य विशिष्टियां भी रजिस्टर में दर्ज करेगा जैसी कि संहिता के किसी अन्य प्रयोजन के लिए आवश्यक हों।

(2) अभिलेख.- संहिता के अध्याय- पांच के उपबंधों के अधीन रखे गए अभिलेख और उसके अधीन बने नियमों को उनकी तैयारी की तारीख से दो साल की कालावधि के लिए रक्षित किया जाएगा।

(3) वार्षिक विवरणियां.- (क) वह नियोक्ता जिसके लिए संहिता के अध्याय- पांच के उपबंध लागू होते हैं प्रत्येक वर्ष फरवरी के प्रथम दिन या इससे पूर्व केंद्र सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय के वेब पोर्टल पर ऑनलाइन प्ररूप- छत्तीस। में पूर्ववर्ती वर्ष के संबंध में, विनिर्दिष्ट विशिष्टियां की जानकारी देते हुए, एकीकृत वार्षिक विवरणी अपलोड करेगाः

परन्तु, निरीक्षण के दौरान, निरीक्षक- सह-सुविधाप्रदाता इलेक्ट्रॉनिक रूप में या किसी अन्य किसी रूप से किया संधारित किए जाने हेतु खातों, पुस्तकों, रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों को प्रस्तुत करने की अपेक्षा कर सकेगा स्पष्टीकरणः- इस उप - नियम के प्रयोजनों के लिए, अभिव्यक्ति " इलेक्ट्रॉनिक रूप " का वही अर्थ होगा जो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 की 21 ) की धारा 2 के खंड ( द ) में वर्णित है। 436(51)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

(ख) यदि वह नियोक्ता जिस पर संहिता लागू होती है, स्थापना को बेच देता है, त्याग देता है या काम करना बंद कर देता है, तब वह यथास्थिति, इस तरह की विक्रय या परित्याग की तारीख के एक महीने के भीतर या इस तरह से बंद किए जाने की तारीख के चार महीने के भीतर , श्रम और रोजगार मंत्रालय में केंद्र सरकार के वेब पोर्टल पर खंड (क) से संदर्भित प्ररूप-छत्तीस में एकीकृत विवरणी ऑनलाइन अपलोड करेगा जो कि पूर्ववर्ती वर्ष के अंत तथा विक्रय , परित्याग या संमाप्ति की तारीख के बीच की कालावधि के संबंध मेंहोंगी।

अध्याय - बारह

अपराध एवं शास्तियाँ

30. धारा 138 की उप- धारा (1 ) के अधीन विनिर्दिष्ट प्राधिकृत अधिकारी द्वारा अपराधों के शमन का तरीका तथा उप-धारा (4) के अधीन एक अपराध को शमन करने के लिए आवदेन करने का तरीका.- (1 ) धारा 138 की उप- धारा (1 ) के अधीन अपराधों के शमन के उद्देश्यों हेतु अधिसूचना द्वारा प्राधिकृत अधिकारी प्ररूप- अड़तीस में उन अपराधों के लिए इलैक्ट्रोनिक रूप से शमन सूचना जारी करेगा जो धारा 138 के अधीन शमनीय हैं।

(2) वह व्यक्ति जिसे इस प्रकार की सूचना दी गई है , प्ररूप-अड़तीस के भाग तीन में इलैक्ट्रानिक रूप से आवेदन कर सकेगा तथा सूचना प्राप्त होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर इलेक्ट्रोनिक या किसी अन्य रूप से समस्त शमनीय राशि को जमा करवाएगा।

(3) प्रशमन अधिकारी, कंपोजीशन राशि प्राप्त होने के दस दिनों के भीतर प्ररूप- अड़तीस के भाग चार में ऐसे व्यक्ति को कंपोजीशन प्रमाण-पत्र जारी करेगा , जिससे ऐसी राशि कंपोजीशन सूचना की तुष्टिमें प्राप्त हुई हो।

(4) यदि वह व्यक्ति जिसे सूचना भेजी गयी है, विहित समय के भीतर कंपोजिशन राशि जमा करने में असफल रहता है, तो सक्षम न्यायालय के समक्ष या उस अपराध के संबंध में , जिस में ऐसे व्यक्ति के विरूद्ध सूचना जारी किया गयी थी, अभियोजन संस्थित किया जाएगा।

(5) अभियोजन संस्थित करने के पश्चात् समझौता (क) न्यायालय संहिता की धारा 138 के अधीन एक शिकायत दायर करने के पश्चात् किसी भी समय किसी शमनीय अपराध का शमन कर सकेगा।

(ख) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 320 के प्रावधान ऐसे समझौतों पर लागू होंगे। मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(52)

अध्याय - तेरह

नियोजन सूचना और मॉनिटरी

31. धारा 139 की उप- धारा (2) के अधीन संबंधित कैरियर सैंटर को नियोक्ता द्वारा रिक्तियों को रिपोर्ट करने का तरीका तथा फार्म एवं विवरणी फाईल करना.- ( 1 ) कैरियर सेंटर को रिक्तियाँ प्रस्तुत करनाः- (क) किसी भी राज्य या उसके किसीं क्षेत्र में यह संहिता लागू होने के पश्चात् उस राज्य यां उस क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रत्येक स्थापना में नियोक्ता , उस स्थापना में किसी नियोजन में किसी रिक्ति को भरने से पूर्व कैरियर सैंटर को उस रिक्ति की रिपोर्ट करेगा या रिपोर्ट करने का कारण प्रेषित करेगा, जैसाकि राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए।

(ख) निजी क्षेत्र के प्रत्येक स्थापना में या निजी क्षेत्र में स्थापना की किसी श्रेणी या वर्ग से संबंधित प्रत्येक स्थापना में नियोक्ता उस स्थापना में किसी भी नियोजन में किसी रिक्ति को भरने से पूर्व, उस तारीख से इस प्रकार के कैरियर सेंटर ( क्षेत्रीय ) को प्रेषित करेगा जैसा कि राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए ।

(ग) राज्य सरकार नियोक्ताओं द्वारा रिपोर्ट की गई रिक्तियों की प्राप्ति हेतु एक तंत्र (डिजिटल सहित)... उपलब्ध करवाएगी। कैरियर सेंटर जिसमें ये रिक्तियाँ प्रेषित की गई हैं, रिपोर्ट की गई रिक्तियों के लिए एक विशिष्ट रिक्ति रिपोर्टिंग संख्या उपलब्ध करवाएंगे तथा इसे तुंरत लिखित में , मेल के माध्यम से या डिजिटल या अन्य किसी मीडिया के माध्यम से सूचित करेंगे किन्तु किसी भी दशा में रिक्तियों की रिपोर्टिंग प्राप्ति की तारीख से तीन दिन से अधिक नहीं होंगी।

स्पष्टीकरणः ( 1 ) "सार्वजनिक क्षेत्र " में स्थापना से अभिप्रेत है, एक स्थापना जिसका स्वामित्व हक, नियंत्रण अथवा प्रबंधन निम्नलिखित के द्वारा होगा.-

(एक) सरकार अथवा सरकार का कोई विभाग

(दो) कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 की संख्या 18) की धारा 2 के खंड (45 ) में यथा परिभाषित कोई सरकारी कंपनी;

(तीन) किसी केन्द्रीय या राज्य अधिनियम के अधीन स्थापित कोई निगम (जिसमें ( सहकारी संस्था सम्मिलित है) या कोई स्वायत्त संगठन या कोई प्राधिकारी या कोई निकाय जिसका स्वामित्व नियंत्रण या प्रबंधन सरकार द्वारा किया जाता हो; और

(चार) कोई स्थानीय प्राधिकारी 436(53)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

(2) "निजी क्षेत्र में स्थापना " से अभिप्रेत है, कोई ऐसी स्थापना , जो कि सार्वजनिक क्षेत्र की स्थापना नहीं है तथा जिसमें सामान्य तथा 20 या इससे अधिक कर्मचारी या ऐसी संख्या में कर्मचारी नियोजित हैं जैसा कि राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए ।

(3) राज्य सरकार जिसके पास स्वयं का कोई कैरियर सेंटर या पोर्टल नहीं है, उस क्षेत्र के स्थापना की रिक्तियों की रिपोर्टिंग अधिसूचना द्वारा केन्द्र सरकार के डिजिटल पोर्टल या कैरियर सेंटर कोकी सकेगी।

(2) रिक्तियों का प्रकार और रिक्तियों की रिपोर्ट करने हेतु संबंधित कैरियर सेंटर.-

(क) निम्नलिखित रिक्तियां , अर्थात्-

(एक) स्थापनों में उत्पन्न होने वाली न्यूनतम वेतन या वेतन स्तर या दोनों की तकनीकी और वैज्ञानिक प्रकृति के पदों में, केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित ऐसी सभी रिक्तियां, जिनके संबंध में संहिता के अधीन केन्द्र सरकार ही समुचित सरकार है; और

(दो) उन रिक्तियों को जिसमें नियोक्ता उसकी स्थापना जहां वह स्थित है से राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश के बाहर के केरियर सेंटर को प्रचालित करने की अपेक्षा रखता है वह ऐसे केरियर -

सेंटर (केन्द्र के) को रिपोर्ट करेगा जैसा कि केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए ।

(ख ) उपर्युक्त उप- धारा ( 2) के खण्ड (क) में विनिर्दिष्ट रिक्तियों से भिनन रिक्तियों को संबंधित कैरियर सेंटर ( क्षेत्रीय ) को रिपोर्ट किया जाएगा।

(ग ) रिक्तियां , जो कि कैरियर सैंटर ( क्षेत्रीय ) को रिपोर्ट की जा चुकी हैं और जिनके लिए भर्ती राज्य या अन्तर - राज्य या अखिल भारतीय आधार पर की जानी है, को भी कैरियर सैंटर (केन्द्र) को रिपोर्ट किया जाएगा या अधिसूचना द्वारा केन्द्र सरकार द्वारा यथा विनिर्दिष्ट डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।

(3) रिक्तियों की रिपोर्टिंग का तरीका व प्ररूप.- ( क) रिक्तियों को लिखित रूप में अथवा वैध -कार्यालयीन ई-मेल के द्वारा अथवा डिजिटल रूप से, समुचित सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किए गए कैरियर सैंटर को रिपोर्ट किया जाएगा।

(ख) प्ररूप-उनचालीस में दिए गए प्ररूप के अनुसार, प्रत्येक प्रकार की रिक्ति के संबंध में जितना भी ब्यौरे व्यावहारिक रूप से संभव हो, पृथक रूप में देते हुए , रिक्तियों को रिपोर्ट किया जाएगा।...

(ग) उप-नियम (3 ) के खंड ( क) के अधीन कैरियर सैंटर को पहले ही प्रदान की जा चुकी विशिष्टियों में हुए बदलाव के बारे में, यथास्थिति, लिखित अथवा कार्यालयीन ई- मेल अथवा डिजिटल रूप से , विनिर्दिष्ट कैरियर सैंटर को रिपोर्ट किया जाएगा। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(54)

(4) रिक्तियों को रिपोर्ट करने की समय-सीमा.-

(एक) रिक्तियां , जो कि कैरियर सेंटर (क्षेत्रीय) को रिपोर्ट की जानी आवश्यक हैं, रिपोर्ट की गई रिक्तियों के लिए नियुक्ति के प्रयोजन हेतु अथवा साक्षात्कार लिए जाने अथवा परीक्षण लिए जाने हेतु संभावित अभ्यर्थियों के आवेदन प्राप्त होने की अंतिम तारीख से कम से कम पंद्रह दिन पहले रिपोर्ट की जानी चाहिए।

(दो) रिक्तियां, जो कि कैरियर सेंटर (केन्द्र), को रिपोर्ट की जानी आवश्यक हैं, रिपोर्ट की गई ... रिक्तियों के लिए नियुक्ति के प्रयोजन हेतु अथवा साक्षात्कार लिए जाने अथवा परीक्षण लिए जाने हेतु संभावित अभ्यर्थियों के आवेदन प्राप्त होने की आखिरी तारीख से कम से कम चालीस दिन पहले रिपोर्ट की जानी चाहिए।

(5) अभिलेखों का संधारण. (क) किसी राज्य या उसके क्षेत्र में इस संहिता के प्रारंभ होने के पश्चात् उस राज्य अथवा क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रत्येक स्थापना के नियोक्ता द्वारा मैनुअली या इलैक्ट्रानिक रूप से या डिजिटल रूप से निम्नलिखित अभिलेख संधारित किए जाएंगे-

(एक) प्रत्येक वर्ष की 31 मार्च को कर्मचारियों की कुल संख्या ( नियमित , संविदा या नियत अवधि रोजगार) "

(दो) 31 मार्च को समाप्त होने वाले वर्ष के दौरान नियुक्त व्यक्ति।

(तीन) प्रत्येक वर्ष 31 मार्च को अपने कर्मचारियों के व्यावसायिक ब्यौरे ।

(चार) 31 मार्च को समाप्त होने वाले वर्ष के दौरान ऐसी रिक्तियां जिनके लिए उपयुक्त अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं थे; और

(पांच) अगले वित्तीय वर्ष के दौरान उत्पन्न होने वाली अनुमानित रिक्तियों की संख्या।

(ख) समुचित सरकार अधिसूचना द्वारा , अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार ऐसी तारीख से अपेक्षा कर सकेगी कि निजी क्षेत्र में प्रत्येक स्थापना अथवा निजी क्षेत्र में किसी भी वर्ग अथवा श्रेणी के स्थापना से संबंधित प्रत्येक स्थापना का नियोक्ता हाथ से या इलैक्ट्रानिक रूप से या डिजिटल रूप से निम्नलिखित रिकार्ड संधारित करेगाः-

(एक) प्रत्येक वर्ष की 31 मार्च को कर्मचारियों की कुल संख्या ( नियमित , संविदा या नियत अवधि रोज़गार)

(दो) 31 मार्च को समाप्त होने वाले वर्ष के दौरान नियुक्त किए गए व्यक्ति।

(तीन) प्रत्येक वर्ष 31 मार्च को अपने कर्मचारियों के व्यावसायिक ब्यौरे।

(चार) 31 मार्च को समाप्त होने वाले वर्ष के दौरान ऐसी रिक्तियां जिनके लिए उपयुक्त अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं थे; और

(पांच) अगले वित्तीय वर्ष के दौरान उत्पन्न होने वाली अनुमानित रिक्तियों की संख्या। 436(55)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

(6) विवरणियों को जमा करना. प्ररूप-चालीस में दिए गए अनुसार नियोक्ता प्ररूप ई आई आर (रोज़गार सूचना रिटर्न) में,वार्षिक विवरणियों को संबंधित कैरियर सेंटर क्षेत्रीय को प्रेषित करेगा। संबंधित राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना में यथा विनिर्दिष्ट नियत तारीख के तीस दिनों के भीतर अर्थात् वर्ष की 31 मार्च को वार्षिक विवरणियों को यथास्थिति, हाथ से या इलैक्ट्रॉनिक रूप से या डिजिटल रूप से , प्रस्तुत किया जाएगा।

(7) कार्यकारी अधिकारी की घोषणा. (क ) निदेशक , रोज़गार या उसके समकक्ष अथवा उच्च श्रेणी का अधिकारी , जो संबंधित राज्य सरकार के कैरियर सेंटर ( क्षेत्रीय ) का कार्य नियंत्रित कर रहा हो , संहिता के अध्याय - आठ (रोज़गार सूचना और निगरानी) के प्रवर्तन/कार्यान्वयन के प्रयोजन हेतु प्रत्येक जिले में कैरियर सेंटर (क्षेत्रीय ) के कार्य की देख -रेख के लिए "कार्यकारी अधिकारी " के रूप में लिखित में एक अधिकारी को घोषित करेगा। वह ऐसा अधिकारी होगा जो कि संहिता की धारा 139 में संदर्भित अधिकारों का प्रयोग और कर्तव्यों का निर्वहन करेगा अथवा उन अधिकारों के प्रयोग और कर्तव्यों के निर्वहन हेतु लिखित में किसी व्यक्ति को प्राधिकृत करेगा।

(ख) निदेशक, रोज़गार या उसके समकक्ष अथवा उच्च श्रेणी का अधिकारी , जो रोज़गार महानिदेशालय , श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय , नई दिल्ली का कार्य नियंत्रित कर रहा हो,. संहिता के अध्याय- आठ ( रोज़गार सूचना और निगरानी) के प्रवर्तन/कार्यान्वयन के प्रयोजन हेतु कैरियर सेंटर (केन्द्रीय ) के कार्य की देख -रेख के लिए "कार्यकारी अधिकारी " के रूप में लिखित में एक अधिकारी को घोषित करेगा। वह ऐसा अधिकारी होगा जो कि संहिता की धारा 139 में संदर्भित अधिकारों का प्रयोग करेगा और कर्तव्यों का निर्वहन करेगा।

(8) संहिता के अध्याय-आठ के अधीन शास्ति उद्दूण. निदेशक, रोज़गार या उसके समकक्ष अथवा उच्च श्रेणी का अधिकारी , जो कि संबंधित राज्य के कैरियर सेंटर ( क्षेत्रीय ) के कार्य को नियंत्रित कर रहा हो, संस्थान को अनुमोदित या संहिता के अधीन धारा 133 में यथा वर्णित किसी अपराध हेतु संस्थान पर शास्ति के उद्गहण की मंजूरी देने हेतु सक्षम प्राधिकारी होगा।

(9) दिशा-निर्देशों को जारी करना. सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अध्याय - तेरह से संबंधित उपबंधों तथा उसके नियगों को लागू करने के लिए केन्द्र सरकार विस्तृत दिशा- निर्देश जारी कर सकेगी जिनमें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार संबंधित राज्य सरकार द्वारा बढ़ाना जा सकता है। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(56)

अध्याय-चौदह

प्रकीर्ण

32. धारा 141 की उप- धारा (5) के अधीन निधि के ऐसे अन्य स्त्रोत और प्रशासन तथा निधि का व्यय करने की रीति. -

(१ ) असंगठित कर्णधारों के कल्याण के लिए स्थापित राज्य सरकार किसी सामाजिक सुरक्षा निधि " के निम्नलिखित स्त्रोत' होंगे जिसमें प्राप्त हुई राशि को जमा किया जाएगा:-

(एक) केन्द्रीय सरकार द्वारा पूर्णतः वित्तपोषित;

(दो) भागतः केन्द्रीय सरकार द्वारा वित्तपोषित और भागतः राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित;

(तीन) भागतः योजना के हिताधिकारियों या कर्मचारियों से संग्रहित अंश्दाय , जैसा कि केन्द्रीय सरकार द्वारा योजना में विनिर्दिष्ट किया जाए, अंशदाय से वित्तपोषित;

(चार) किसी अन्य स्त्रोत वित्तपोषित जिसके अंतर्गत कंपनी अधिनियम , 2013 (2013 का 18) के अर्थ के भीतर सामाजिक दायित्व निधि या अन्य ऐसा स्त्रोत जैसा कि योजना में विनिर्दिष्ट किया जाए सम्मिलित है;

(पांच) केन्द्र सरकार से प्राप्त कोई भी अनुदान या ऋण;

(छह) राज्य सरकार द्वारा बजट से वित्तपोषित निधि;

(सात) राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य स्त्रोतः

राज्य सरकार, केन्द्रीय सरकार से इसके द्वारा बनायी गयी योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकेगी।

(2) योजना, हितग्राही के रूप में रजिस्ट्रीकृत असंगिठत कर्मकारों और उसके परिवार के लिए, राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से असंगठित सामाजिक सुरक्षा मण्डल , द्वारा तैयार की जाएगी और निधि अधिसूचित योजना के अधीन उपयोग की जाएंगी।

33. धारा 143 की उप- धारा (1 ) के अधीन उस समय जिसके भीतर राज्य मण्डल, समुचित सरकार को अपना दृष्टिकोण अग्रेषित करेगा. राज्य मण्डल संहिता की धारा 143 के अधीन छूट की मांग करने वाले आवेदन पर अपने विचार समुचित सरकार को छूट के लिए प्रस्ताव के प्राप्त होने के छह महीने के भीतर अग्रेषित करेगा। यदि राज्य मण्डल , उक्त कालावधि के भीतर अपने विचार प्रदान करने में असमर्थ रहता है, तो समुचित सरकार समय - सीमा का विस्तार कर सकेगी या छूट के आवेदन पर जैसा भी ठीक समझे कार्रवाई , कर सकेगी।

34. धारा 143 की उप- धारा (2 ) के अधीन ऐसी छूट के पश्चात् वे शर्तें जिन्हें, यथास्थिति, छूट प्राप्त स्थापना या स्थापना का वर्ग या कर्मचारी या कर्मचारियों का वर्ग , अनुपालन करेगा-

(1 ) संहिता के अध्याय- चार के उपबंध से छूट प्राप्त स्थापना. ( क) छूट दिए गए कर्मचारियों के संबंध में ऐसे अभिलेख संधारित करेगा और निगम को ऐसी विवरणियां और अन्य जानकारी प्रस्तुत करेगा. जैसी कि विनियमों में केन्द्र सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए; और

(ख) विलय, डीमर्जर , अधिग्रहण, विक्रय, समामेलन, सहायता रूपांतरण , चाहे पूर्ण स्वामित्व हो या नहीं, आदि के कारण ऐसी किसी स्थापना जिसे संहिता की धारा 143 के अधीन छूट दी गई है, की विधिक स्थिति में हुए परिवर्तन के मामले में , छूट को रद्द समझा जाएगा और छूट केलिए स्थापना को समुचित सरकार का नवीन आवेदन करना अपेक्षित होगा । मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(57)

प्ररूप - एक

(नियम 7 का उप नियम 10 देखिए)

आवेदक

कर्मचारी बीमा न्यायालय क, ख ( वर्णन तथा निवास स्थान जोड़ें) अधिनियम में . के समक्ष

विरुद्ध

ग, घ (वर्णन तथा निवास स्थान जोड़ें) नियम 13 में विनिर्दिष्ट की गई आवेदन- पत्र की अन्य विशिष्टियां - विरोधी पक्षकार को

दिनांक

आवेदक के हस्ताक्षर

(आवेदकद्वारा सत्यापन)

और सही है । इस आवेदन पत्र में अन्तर्विष्ट तथ्यों के कथन मेरे सर्वोत्तम ज्ञान तथा विश्वास के अनुसार सत्य दिनांक

हस्ताक्षर

प्ररूप - दो

(नियम 7 का उप नियम (11 ) देखिए)

आवेदक/ विरोधी पक्षकार द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की सूची उदाहरणार्थ, वर्णन , विषय, न्यायालय का नाम , क्रमांक आदि.-

क्रमांक दस्तावेज का वर्णन

पक्षकार या अधिवक्ता या किसी प्राधिकृत प्रतिनिधि के हस्ताक्षर

दिनांक यदि कोई है, जो

दस्तावेजों में अंकित हो

(4)

(3)

(2)

(1) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(58)

प्ररूप- तीन

(नियम 7 का उप नियम (12) देखिए)

कार्यवाहियों का रिजिस्टर

.कार्यवाहियों का रजिस्टर वर्ष . .20 कर्मचारी बीमा न्यायालय

आवेदक

विरोधी निवांस

नाम

नाम आवेदन

आवेदन-पत्र

का

पक्षकार वर्णन

वर्णन

स्थान

निवास का स्थान

कार्यवाहि योंका क्रमांक

प्रस्तुत करने का दिनांक

8

7

6

4

5

2

3

1

विरोधी ब्यौरे

पक्षकार

उपसंजाति आवेदक

बाद कारण कब उद्भूत

पक्षकारों के लिए उपसंजात होने के लिए दिनांक

यदि कोई हो तो मूल्य की राशि का दावा

हुआ

14

13

12

11

10

9

अपील

अपील का निर्णय दिनांक

किस रकम के लिए अपील के ब्यौरे की तारीख यदिकोई हो

अंतिम आदेश किसके लिए

19

18

17

16

15

अन्यटिप्पणीयां निष्पादन

में अन्य सिविल न्यायलय को अंतरित करने के आदेश की तारीख

अन्य टिप्पणी यदिकोई हो

खर्चे की रकम

किसके विरोधी

आवेदन पत्र का दिनांक

क्याऔर किस राशिके लिए

25

24

20

23

22

21 436(59)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

प्ररूप - चार

(नियम 7 का उप- नियम (15) देखिए)

कार्यवाही के निपटान के लिए समन ( शीर्षक)

"प्रति,

(नाम ब्यौरे तथा निवास स्थान)

यतः ने आपके विरोधी.. की हैं, अतः आपको एतद्वारा तलब (समन ) किया जाता है कि आप दिनांक में..... ..के लिए कार्यवाहियां संस्थित के मध्यान्ह ...बजे या तो स्वयं या प्राधिकृत अभिकर्ता के मार्फत , जो सम्यक् रूप से अनुदेशित हो तथा मामले से सम्बन्धित समस्त सारवान् प्रश्नों का उत्तर देने में सक्षम हो, या जिसके साथ कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जो समस्त ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने के योग्य हो, इस न्यायालय में दावे का उत्तर देने के लिए उपसंजात हो, और चूँकि आपकी उपसंजाति के लिए निश्चित किया गया दिन कार्यवाहियों के अंन्तिम निपटारे के लिए नियत किया गया है, अतः आपको उस दिन ऐसे समस्त साक्षियों को, जिनकी.... साक्ष्य पर तथा ऐसे समस्त दस्तावेजों को, जिन पर की आप अपनी प्रतिरक्षा के समर्थन में अवलंबित रहने का आशय रखते हों, प्रस्तुत करने के लिए तैयार रहना चाहिये। आप सूचित हों पूर्व वर्णित दिन को आपके उपसंजात होने में चूक होने पर मामला आपकी अनुपस्थिति में सुना जाकर विनिश्चित किया जाएगा।

माह ...सन् मेरे हस्ताक्षर तथा न्यायालय की मुद्रा के अधीन आज दिनांक .20 को जारी किया गया।.

न्यायालय सूचना- ( 1 ) यदि आपको यह शंका हो कि आपके साक्षीगण स्वेच्छा से उपस्थित नहीं होंगे तो आप किसीः .. साक्षी को उपस्थिति होने की अपेक्षा करने का आप अधिकार रखते हों, प्रस्तुति बाध्य करने के लिए इस न्यायालय में समन न्यायालय को आवेदन करके तथा आवश्यक व्यय जमा करके जारी करवा सकते है।

(2) यदि आप दावा स्वीकार करते हैं, तो आप डिक्री के, जो आपके स्वयं के या आपकी सम्पत्ति के या दोनों के विरोधी पारित की जा सकेगी , निष्पादन से बचने के लिए कार्यवाहियों के खर्चे सहित धन न्यायालय को चुका देना चाहिये। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(60)

प्ररूप- पांच

(नियम 7 का उप- नियम ( 15) देखिए)

वाद पदों के व्यवस्थापन के लिए समन

प्रति,

(नाम ब्यौरे तथा निवास स्थान)

यतः ने आपके विरोधी आपकों एतद्वारा तलब (समन) किया जाता है कि आप दिनांक के लिए कार्यवाहियां संस्थित की हैं, अत : 20के मध्यान्ह में सन् ..बजे या तो स्वयं या प्राधिकृत अभिकर्ता के मार्फत , जो सम्यक् रूप से अनुदेशित हो तथा मामले से सम्बन्धित समस्त सारवान् प्रश्नों का उत्तर देने में सक्षम हो या जिसके साथ कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जो समस्त ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में सक्षम हो, इस न्यायालय में दावे का उत्तर देने के लिए उपसंजात हो, और चूँकि आपकी उपसंजाति के लिए निश्चित किया गया दिन कार्यवाहियों के अंन्तिम निपटारे के लिए नियत किया गया है, अत :आपको उस दिन ऐसे समस्त साक्षियों को, जिनकी साक्ष्य परं तथा ऐसे समस्त दस्तवेजों को, जिन पर आप अपनी प्रतिरक्षा के समर्थन में अवलम्बित रहने का आशय रखते हों, प्रस्तुत करने के लिए तैयार रहना चाहिए । आप सूचित हों कि पूर्व वर्णित दिन को आपके उपसंजात होने में चूक होने पर मामला आपकी अनुपस्थिति में सुना जाकर विनिश्चित किया जाएगा। मेरे हस्ताक्षर तथा न्यायालय की मुद्रा के अधीन आज दिनांक .......20 को दिया गया। माह................. सन्

न्यायालय सूचना ( 1 ) यदि आपको यह शंका हो किं आपके साक्षीगण स्वेच्छा से उपस्थित नहीं होंगे तो आप किसी साक्षी को उपस्थिति तथा ऐसे किसी दस्तावेज की जिसके प्रस्तुत करने के लिए किसी साक्षी से अपेक्षा करने का आप अधिकार रखते हों, प्रस्तुति बाध्य करने के लिए इस न्यायालय में समन न्यायालय को आवेदन करके तथा आवश्यक व्यय जमा करके जारी करवा सकते है । (2) यदि आप दावा स्वीकार करते हैं, तो आप डिक्री के, जो आपके स्वयं के या आपकी सम्पत्ति के या दोनों के विरोधी पारित की जा सकेगी, निष्पादन से बचने के लिए कार्यवाहियों के खर्चे सहित धन न्यायालय को चुका देना चाहिये । 436(61)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

प्ररूप - छह

(नियम 7 का उप- नियम (23 ) देखिए)

एक पक्षीय आदेश को अपास्त करने के लिए आवेदन-पत्र

जिसका कि नाम ऊपर अंकित है, निम्नानुसार कथन करता है

(आवेदन के आधार कथित किए जाने चाहिए)

दिनांक

आवेदक के हस्ताक्षर

(आवेदक द्वारा सत्यापन)

आवेदन पत्र में अंतर्विष्ट तथ्य के कथन मेरे सर्वोत्तम ज्ञान तथा विश्वास के अनुसार सत्य तथा सही है। दिनांक

स्थान

हस्ताक्षर मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(62)

प्ररूप - सात

(नियम 7 का उप- नियम (23) देखिए)

केन्द्रीय प्ररूप

(शीर्षक)

प्रति,

"यतः ऊपर उल्लिखित ................को मध्यान्ह में ..ने इस न्यायालय को आवेदन-पत्र दिया है कि सन् बजे इस न्यायालय में या तो स्वयं या सम्यक् रूप से अनुदेशित "अधिवक्ता के मार्फत आवेदन- पत्र के विरोधी कारण बतलाने के लिए उपसंजात हो, जिसमें असफल रहने पर उक्त आवेदन-पत्र एक पक्षीय सुना जाकर अवधारित किया जाएगा।

मेरे हस्ताक्षर और न्यायालय की मुद्रा के अधीन आज दिनांक माह सन् .20 को दिया गया।

न्यायालय 436(63)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

प्ररूप - आठ

(नियम 7 का उप-नियम (24) देखिए)

साक्षी को समन

(शीर्षक)

प्रति,

यतः ऊपर वर्णित कार्यवाहियों में ............ की ओर से के लिए आपकी उपस्थिति अपेक्षित है, अतः आपसे एतद्वारा अपेक्षा की जाती है कि आप दिनांक 20 के समय बजे इस न्यायालय के समक्ष) स्वयं (उपसंजात हो और अपने इस न्यायालय को भेजें। पूर्वान्ह/अपरान्ह में . साथ लाए)या

आपके यात्रा तथा अन्य खर्चे एवं एक दिन के निर्वाह भत्ते के लिए रूपये की राशि इस न्यायालय में जमा की गई है, जिसकी भुगतान आपको उस दिन की जाएगी जिसको कि आप न्यायालय के समक्ष उपस्थित होंगे। यदि आप विधिसंगत हेतु के बिना इस आदेश का पालन नहीं करेंगे तो आप व्यवहार प्रक्रिया संहिता, ) ( 1908 का 5) ( 1908 के आदेश 16 के नियम 12 में अधिकारित अनुपस्थिति के परिणामों के अधीन होंगे।

मेरे हस्ताक्षर और न्यायालय की मुद्रा के अधीन आज दिनांक कोदिया गया। माह......... सन् 20

न्यायालय सूचना (1 ) - यदि आपको केवल दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए ही समन किया हो , साक्ष्य देने के लिए नहीं, तो आप ऐसा दस्तावेज पूर्वोक्त दिन को तथा समय पर इस न्यायालय में प्रस्तुत कर दें, तो यह समझा जाएगा कि आपने समन का पालन किया है।

(2) यदि आप पूर्वोक्त दिन के परे रोके गए, तो आपको उल्लिखित किए गए दिनांक के परे प्रत्येक दिन उपस्थिति के लिए .रूपये की राशि दी जाएगी। मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(64)

प्ररूप- नौ

(नियम 7 का उप-नियम (37) देखिए)

मामले की डिक्री

दावा वास्ते.

यह मामला आज

*. विरोधी पक्षकार की ओर से

आदेश तथा डिक्री दी जाती है कि को रूपये के समक्ष आवेदक की ओर से की तथा की उपस्थिति में अंतिम निपटारे के लिए प्रस्तुत होने पर, यह ..ओर यह कि इस वाद के खर्चे के की राशि उस पर दिनांक से वसूली के दिनांक तक के ब्याज सहित चुकाई जाए । द्वारा प्रति सैकड़ा प्रतिवर्ष की दर से आज के मेरे हस्ताक्षर और न्यायालय की मुद्रा के अधीन आज दिनांक कोदी गई। माह सन् 20

वाद के खर्चे

रूपए पैसे

रूपए पैसे

मुख्तार नामा के लिए मुद्रांक ..

आवेदन पत्र के लिए मुद्रांक

लिखित कथन के लिए मुद्रांक

मुख्तार नामा के लिए मुद्रांक

अधिवक्ता की शुल्क

पदर्शके लिए मुद्रांक

साक्षियों का निर्वाह व्यय

अधिवक्ता की शुल्क

समन तथा सूचनाओं की तामील

साक्षियों का निर्वाह भत्ता

सक्षम प्राधिकारी शुल्क

सक्षम प्राधिकारी शुल्क

समन तथा सूचनाओं की तामील ...........

योग

योग 436(65)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

प्ररूप - दस

(नियम 7 का उप-नियम (39) देखिए)

डिक्री के निष्पादन के लिए आवेदन पत्र

..के न्यायालय में डिक्रीधारी एतद्वारा इसके नीचे उपवर्णित की गई डिक्री के निष्पादन के लिए आवेदन करता है ।

डिक्री का दिनांक

पक्षकार/पक्षकारों के नाम

कार्यवाहियोंका क्रमांक

1

2

3 1949का तीन क, ख , विरोधी पूर्ववर्ती आवेदन यदि कोई हो, दिनांक तथा परिणाम सहित

डिक्री पर ब्याज सहित देय रकम या उसके द्वारा दिया गया कोई अन्य अनुतोष, किसी प्रति (काउन्टर) डिक्री की विशिष्टियों सहित 6

7

मूलधन रूपया 314-51 पैसे (आदेश के दिनांक से भुगतान किए जाने तक 6 रूपये प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज) आवेदन पत्र दिनांक 9 अप्रैल , 1949 पर 72 रू. पच्चीस पैसे अभिलेखबद्ध किए गए

किया गया भुगतान समायोजन यदि कोई हो

क्याडिक्री के विरोधी कोई अपील की गई है

4

5

कोई नहीं नहीं

किसके विरोधी निष्पादन की जानी खर्चे की रकम यदि कोई हो जो प्रदान कीगई हो

9

8

विरोधी पक्षकार ग, घ के विरोधी जैसी किडिक्री हो रूपये, पैसा बाद में उपभोग

(जब जंगम सम्पत्ति की कुर्की तथा विक्रय चाहा जाए)

10 1. मैं प्रार्थना करता हूँ कि रूपए ... की कुल रकम ( मूल धनराशि पर भुगतान के दिनांक तक ब्याज के साथ ) तथा इस निष्पादन को करने के खर्चे, विरोधी पक्षकार की, जंगम सम्पत्ति की, जो कि आवेदन में नीचे विनिर्दिष्ट की गई है कुर्की तथा विक्रय द्वारा वसूल की जाकर मुझे चुकाई जाए। (जब स्थावर सम्पत्ति की कुर्की तथा विक्रय चाहा जाए)

मैं प्रार्थना करता हूँ कि रूपए.. की कुल रकम (मूल धनराशि पर भुगतान करने के दिनांक तक ब्याज के साथ) तथा इस निष्पादन को करने के खर्चे विरोधी पक्षकार की स्थावर सम्पत्ति की, जो कि इस आवेदन पत्र के अधोभाग पर विनिर्दिष्ट की गई है , कुर्की तथा विक्रय द्वारा वसूल की जाकर मुझे चुकाई जाए।

मैं ........ घोषित करता हूँ कि इसमें वर्णित तथ्य मेरी सर्वोत्तम जानकारी तथा विश्वास के अनुसार सत्य हैं।

दिनांक . माह.. सन्............. 20 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(66)

प्ररूप - ग्यारह

[(नियम 10 का उप - नियम (1 ), (2) , (3) और (4) देखिए] नामांकन/नवीन नामाकंन/ नामांकन में संशोधन (जो शब्द लागू न हो काट दें)

सेवा में..

(यहां स्थापना का नाम या व्यौरे पूरे पते के साथ लिखे )

मैं, श्री/श्रीमती/कुमारी.. (यहां पूरा नाम लिखे) जिसके ब्यौरे नीचे अभिव्यक्त किए गए है, एतद्वारा नीचे उल्लेखित व्यक्ति (यों) को / सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 2 के खंड ( 33 ) के अर्थ में अपनाए गए परिवार को.. ..(यहां तारीख लिखें) से निम्नलिखित इंगित तरीके से नामित करता/करती हूं और इसलिए नीचे उल्लेखित व्यक्ति (यों ) को मेरी मृत्यु के पश्चात् देय उपदान और साथ ही मेरी मृत्यु की स्थिति में मुझे क्रेडिट होने वाले उपदान की राशि जो मुझे देय हो गई है, या देय होने का भुगतान नहीं किया गया है और उक्त उपदान की राशि को नामिति/यों को उनके नाम के आगे दर्शाये गए अनुपात में बांट दी जाने का निर्देश देता/ देती हूं।

या

: मैं, श्री/ श्रीमती/कुमारी.. .(यहां पूरा नाम लिखें) जिसके ब्यौरे नीचे अभिव्यक्त किया गया है एतद्वारा ....को नामांकन भरा गया है तथा आपके सूचित किया जाता है कि मेरे द्वारा दिनांक.. दिनांक... किया जाए- के सदर्भ संख्या.. ..के अधीन दर्ज किए गए को निम्नलिखित रीति में संशोधित *अनावश्यक भाग को काट दें।

2. मैं एतद्वारा प्रमाणित करता/ करती हूं कि उल्लेखित व्यक्ति (यों) सामजिक सुरक्षा संहिता , 2020 की धारा 2 के खंड (33) के अर्थ में मेरे परिवार का/के सदस्य (यें) हैं।

3. मैं एतद्वारा घोषाणा करता/करती हूं कि उक्त संहिता की धारा 2 के खंड (33 ) के अर्थ में मेरा कोई परिवार इसके अतंर्गत नहीं है।

4. (क) मेरे पति/माता/माता-पिता/ मुझ पर निर्भर नहीं है ।

(ख) मेरे पिता /माता/माता- पिता मेरे पति पर निर्भर नहीं है

5. मैंने उपरोक्त संहिता की धारा (2 ) के खंड (33 ) की शर्तों के अनुसार संक्षम प्राधिकारी को दिनांक. ..को दिए सूचना के द्वारा अपने परिवार से अपने पति को अलग कर दिया है। 6. यह नामांकन मेरे पुराने नामांकन का अमान्य कर देगा।

नामिति

कर्मचारी से संबंध

अनुक्रमांक

नामिति की आयु

नामिति/ यों का पूरा नाम पूरे पते के साथ

अनुपात जिस के द्वारा उपदान साझा किया जाएगा 1.

2.

3.

इत्यादि 436(67)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

"एक परिवार" को अपनाने का तरीका

(यहां इस बात का ब्यौरे दें कि एक परिवार को कैसे अपनाया गया था, अर्थात विवाह या माता- पिता द्वारा आश्रित होने या अन्य प्रक्रिया जैसे गोद लेना के माध्यम से)

विवरणी

1. कर्मचारी का पूरा नाम

2. लिंग

3. धर्म

4. क्याआप अविवाहित/विवाहित विधवा/विधुर है

5. विभाग / शाखा / अनुभाग जहां नियोजित हैं:

6. पदनाम के साथ टिकट क्रमांक या अनुक्रमांक, यदि कोई होः

8. नियुक्ति की तारीखः

9. स्थायी पताः

उप प्रभाग

थाना

ग्राम

राज्य.

जिला.

डाकघर ..

मोबाइल नम्बर ..

ईमेल आईडी.

स्थानः दिनांकः

कर्मचारी के हस्ताक्षर/ अंगूठे का निशान

नियोक्ता द्वारा प्रमाण पत्र

प्रमाणित किया जाता है कि उपरोक्त नामांकन का ब्यौरे सत्यपित किया गया है और इसे संस्थान में दर्ज कर लिया गयाहै।

नियोक्ता का संदर्भ क्रमांक यदि कोई हो,

नियोक्ता के हस्ताक्षर/ प्राधिकृत अधिकारी का पदनाम/

संस्थान का नाम एवं पता या उसका रबर मोहर दिनांक..

कर्मचारी के द्वारा पावती

मेरे द्वारा भरे गए और नियोक्ता द्वारा प्रमाणित किए गए नामांकत प्रपत्र - ग्यारह की प्रतिलिपि प्राप्त की गई है ।

कर्मचारी के हस्ताक्षर मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(68)

प्ररूप-बारह

(नियम 11 का उप नियम ( 1 ) देखिए)

कर्मचारी/ नामिति/ विधिक उत्तराधिकारी द्वारा उपदान के लिए आवेदन

(जो शब्द लागू न हो उसे काट दें)

सेवा में,

(स्थापना नाम या ब्यौरे पूरे पते के साथ लिखे )

महोदय/ महोदया,

मैं, .(कर्मचारी/नामिति/विधिक .(कर्मचारी का नाम) नाम/स्वर्गीय . उत्तराधिकारी द्वारा का नाम)/स्वर्गीय नामित व्यक्ति का (कर्मचारी का नाम) विधिक उत्तराधिकारी के रूप में, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 53 की उप- धारा ( 1 ) के अधीन हकदार हूं , उपदान के भुगतान के लिए आवेदन करता हूँ -

(क) मेरी अधिवार्षिकी /सेवानिवृत्ति / कम से कम पांच वर्ष की निरंतर सेवा के पूरे करने बाद त्यागपत्र -/दुर्घटना के कारण कुल विकलांगता/ बीमारी के कारण कुल विकलांगता/.. तारीख से प्रभावी नियत अवधि रोजगार के अधीन संविदा अवधि की समाप्ति पर या;

(ख) सेवा में रहते हुए उपर्युक्त कर्मचारी की मृत्यु/ सेवा में वर्ष की समाप्ति के पश्चात् दिनांक .को अर्धवर्षिता/ दिनाकं. उपर्युक्त कर्मचारी की कुल विकलांगता या; ..से. दुर्घटना या सेवा में रहते हुए में बीमारी के कारण (ग ) आपकी स्थापना के सेवा में रहते हुए उपर्युक्त कर्मचारी की मृत्यु/ दिनांक. आयु प्राप्त करने के पश्चात बिना कोई नामांकन के.. को अधिवार्षिकी वर्ष की सेवा पूरी करने के पश्चात/ .(तारीख) से सेवा में रहते हुए उक्त कर्मचारी की दुर्घटना या बीमारी द्वारा कुल विकलांगता;

मेरी नियुक्ति से संबंधित आवश्यक ब्यौरे निम्नानुसार है ।

1. कर्मचारी का पूरा नाम, ( यदि, किसी कर्मचारी द्वारा उपदान का दावा किया जाता है)

क. कर्मचारी की वैवाहिक स्थिति ( अविवाहित / विवाहित / विधवा / विधुर)

ख. कर्मचारी का पूरा पता 436(69)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

या

2. नामिति/विधिकउत्तराधिकारी का नाम (यदि, किसी कर्मचारी द्वारा उपदान का दावा किया जाता है)

क. कर्मचारी का नाम

ख. नामिति/विधिकउत्तराधिकारी की वैवाहिक स्थिति (अविवाहित/ विवाहित/विधवा/ विधुर ) ग. नामिति/विधिकउत्तराधिकारी का कर्मचारी के साथ का संबंध

घ. नामिति/विधिकउत्तराधिकारी पूरा पता

ड. कर्मचारी की मृत्यु की तारीख और मृत्यु का प्रमाण

च. दर्ज किए गए नामांकन की संदर्भ संख्या यदि उपलब्ध हो

3. विभाग/शाखा/अनुभाग जहां अंतिम तैनाती थी -

4. कर्मचारी द्वारा धारित पद -

5. नियुक्ति की तारीख -

6. सेवा समाप्ति की तारीख तथा कारण

7. मृत्यु कीतारीख -

8. कर्मचारी की सेवा की कुल अवधि -

9. कर्मचारी द्वारा आहरित कुल अंतिम वेतन

10. कर्मचारी को देय कुल उपदान/ नामिति/विधिकउत्तराधिकारी द्वारा दावा किए गए उपदान का अंश-

11. मेरे बैंक खाता क्रमांक जाए। में कृपया क्रास बैंक चेक/क्रेडिट द्वारा भुगतान किया

भवदीय/ भवदीया आवेदक कर्मचारी/ नामिति/ विधिकउत्तराधिकारी के हस्ताक्षर/ अंगूठे का निशानं.

स्थानः

तारीखः मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(70)

प्ररूप - तेरह

[नियम 11 का उप-नियम (2) देखिए]

उपदान के दावे का भुगतान/ खारिज किए जाने की सूचना (जो शब्दलागू न हो काट दें)

सेवा

में, (आवेदक कर्मचारी / नामित विधिकउत्तराधिकारी का नाम और पता)

आपको एतद्वारा सूचित किया जाता है कि ,

(क) *सामाजिक सुरक्षा (केंद्रीय) नियम, 2020 पर संहिता के नियम 35 के उप - नियम (2) के खंड (क) के उप- धारा (दो) में अधीन अपेक्षित किए गए अनुसार, उक्त नियमों के अधीन प्ररूप- चार में दिए गए आपके आवेदन पर इंगित उपदान के भुगतान के लिए आपका दावा नीचे कथित कारणों से स्वीकार्य नहीं हैः

कारण (यहां कारण स्पष्ट करें) ; या

( ख) 'सामाजिक सुरक्षा (केंद्रीय) नियम, 2020 के नियम 35 के उप- नियम (2) के खंड (क) के उप-खंड (2 ) के अधीन अपेक्षित किए गए अनुसार, रुपए.... (रुपए... ..........) की राशि का आपको उपदान के रूप में भुगतान किया जाए । आपके द्वारा .पर . गई नामांकन की शर्तों में उपदान के भाग के रूप में और इस स्थापना के कर्मचारी. विधिकउत्तराधिकारी के रूप में किए गए नामांकन की शर्तों में आपके अंश के रूप में तथा दर्ज किया गया । की के दिया गया

..(समय) पर भेंट करें ।

2: * आपके उपदान के भुगतान का क्रास चेक प्राप्त करने के लिए कृपया.... उल्लिखित करें) को .(तारीख ) पर (स्थान 3. आपकी इच्छानुसार देय राशि आपको डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से या आपके बैंक खाते में क्रेडिट द्वारा भेजी जाएगी।

4. गणना का संक्षेप ब्यौरे

(क) नियुक्ति की तारीख।

(ख) समाप्ति / अधिवार्षिकी / त्यागपत्र / विकलांगता / मृत्यु की तारीख।

(ग) संबंधित कर्मचारी की कुल सेवा अवधिःः वर्ष . माह.

(घ ) अंतिम आह्नित वेतनः

(ड) नामांकन/ विधिकउत्तराधिकारी के रूप में देय स्वीकार्य उपदान का अनुपातः

(च) देय राशिः

*पैरा जो लागू न हो काट दें

स्थानः

दिनांकः

नियोक्ता/ प्राधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर स्थापना का नाम या ब्यौरे या उसकी रबर की मोहर उपदान के अस्वीकार्य मामले में सक्षम प्राधिकारी को प्रतिलिपि 436(71)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

प्ररूप -चौदह

[नियम 11 का उप-नियम (4) देखिए]

सामाजिक सुरक्षा , 2020 के अधीन अध्याय पांच के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष निर्देश के लिए आवेदन आवेदन संख्या.

दिनांक...............

(आवेदक के पूरे नाम सहित पूरा पता) तथा (संबंधित नियोक्ता का पूर्ण पते के साथ पूरा नाम) के मध्य

आवेदक उपरोक्त नियोक्ता का एक कर्मचारी , उपरोक्त नियोक्ता के कर्मचारी स्वर्गीय.. ......... के द्वारा नामांकित / उपरोक्त नियोक्ता का कर्मचारी और स्वर्गीय ......... संहिता, 2020 की धारा 53 के अधीन उपदान के भुगतान के लिए स्वयं हकदार है।उक्त कर्मचारी . को अधवार्षिकी आयु प्राप्त की । स्वयं की सेवानिवृत्ति /...... ..विधिकउत्तराधिकारी है और सामाजिक सुरक्षा ..(तारीख ) वर्ष की निरंतर सेवा..... (तारीख) पूरी (तारीख) से दुर्घटना / तारीख को उपर्युक्त कर्मचारी कीमृत्यु। होने पर उपर्युक्त कर्मचारी का त्यागपत्र / उसकी अपनी/ उपर्युक्त कर्मचारी की बीमारी के कारण कुल विकलांगता /

के अधीन एक 2. आवेदक ने सामाजिक सुरक्षा (केंद्रीय) नियम, 2020 के नियम .को किया परंतु उपर्युक्त नियोक्ता ने इसे अस्वीकार्य कर दिया ......... नियम के उप आवेदनं. नियम. के की कम राशि का उल्लेख करता है। के दिनांक. खंड के अधीन दिनांक.. नियम के उप नियम. को मुझे देय उपदान ..खंड के अधीन मेरे उपदान के भुगतान की पात्रता को निरस्त करते हुए को एक सूचना जारी किया है।

उक्त सूचना की एक प्रतिलिपि संलग्न है ।

3. आवेदक ने माना है कि मामले पर कोई विवाद है ( विवाद स्पष्ट करे).

4. आवेदक यहां अनुलग्नक में आवश्यक ब्यौरे प्रस्तुत करता है और प्रार्थना करता है कि सक्षम प्राधिकारी याचिकाकर्ता : को देय उपदान की राशि को निर्धारित करे और उपर्युक्त नियोक्ता को याचिकाकर्ता को उक्त भुगतान करने के लिए निर्देशित कर सकता है ।

5. आवेदक की घोषणा करता है कि उपाबंध में प्रस्तुत ब्यौरे उसके ज्ञान और विश्वास के अनुसार सत्य और सही हैं। दिनांकः

आवेदक के हस्ताक्षर/ अंगूठे का निशान मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(72)

उपाबंध

1. आवेदक का पूरा नाम सहित पूरा पताः-

2. दावे का आधार (मृत्यु/ अधिवार्षिकी / सेवानिवृत्ति / त्यागपत्र / कर्मचारी की विकलांगता / नियत अवधि रोजगार के अधीन संविदा अवधि की समाप्ति)

3. कर्मचारी का पूरा नाम और पता

4. कर्मचारी की वैवाहिक स्थिति (अविवाहित / विवाहित / विधवा / विधुर)

5. नियोक्ता का नाम और पूरा पता

6. विभाग / शाखा / अनुभाग जहां कर्मचारी अंतिम बार कार्यरत था ( यदि ज्ञात हो)

7. टिकट या क्रम संख्या सहित कर्मचारी द्वारा धारित पद, यदि कोई हो ( यदि ज्ञात हो)

-.8. कर्मचारी की नियुक्ति की तारीख ( यदि ज्ञात हो)

9. तारीख तथा कर्मचारी की सेवा समाप्ति का कारण (अधिवार्षिकी/ सेवानिवृत्ति / त्यागपत्र / विकलांगता / मृत्यु / नियत अवधि रोजगार के अधीन संविदा अवधि की समाप्ति)

10. कर्मचारी द्वारा सेवा की कुल अवधि

11. कर्मचारी द्वारा आहरित अंतिम वेतन

12. यदि कर्मचारी मृत है, तो उसकी तारीख और कारण

13. कर्मचारी की मृत्यु के समर्थन में साक्ष्य / गवाह

14. यदि नामिति है, नियोक्ता के साथ नामांकन की संख्या और दर्ज किए जाने की तारीख

15. विधिक उत्तराधिकारी होने के समर्थन में साक्ष्य / गवाह, यदि उत्तराधिकारी है

16. कर्मचारी को देय कुल उपदान ( यदि ज्ञात हो)

17. आवेदक को नामिति / विधिक उत्तराधिकारी के रूप में देय उपदान का प्रतिशत

18. आवेदक द्वारा दावा की गई उपदान की राशि

स्थानः

आवेदक के हस्ताक्षर/ अंगूठे का निशान दिनांकः 436(73)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

प्ररूप - पन्द्रह

[नियम 11 का उप- नियम (5 ) तथा (8) देखिए]

सक्षम प्राधिकारी के समक्ष उपस्थिति के लिए सूचना / समन

(जो शब्द लागू न हो काट दें)

सेवा

में,

(नियोक्ता / आवेदक का नाम और पता)

यतः श्री आप के अधीन एक कर्मचारी / श्री उपरोक्त उल्लेखित नियोक्ता के अधीन एक कर्मचारी के नामिति( यों) / विधिकउत्तराधिकारी ( यों) हैं ने सामाजिक सुरक्षा (केंद्रीय) नियम, 2020 के नियम 35 के उप-नियम (4) के अधीन जो आरोप लगाते हुए एक आवेदन प्रस्तुत किया है ।

(उक्त आवेदन की एक प्रति संलग्न हैं, यदि, समन जारी किया गया है तो आवेदन की प्रति की आवश्यकता नहीं है) अतएव, आपको एतद्वारा बुलाया जाता है/समान किया जाता है/सक्षम प्राधिकारी के ..(स्थान ) पर व्यक्तिगत रूप से या उस आवेदन से संबंधित सभी सामग्री सवालों के जवाब देने के उद्देश्य से इस संबंध में विधिवत रूप से अधिकृत किया गए किसी व्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत होने के लिए - दिन 20.पर बजे पूर्वाह्न में /अपराह्न में/ समर्थन में/ आरोप के जवाब समक्ष देने के लिए; तथा जैसा कि आपके उपस्थिति के लिए तय किए गए दिन को आवेदन के अंतिम निपटान के लिए नियत किया जाता है, आपको उस दिन सभी गवाहों को प्रस्तुत करने के लिए तैयार होना चाहिए जिनके साक्ष्य, और उन दस्तावेजों पर जिन पर आप अपने आरोप / बचाव के समर्थन में देना चाहते हैं।

:

ध्यान दें कि पूर्व में उल्लिखित दिन को आपकी अनुपस्थिति पर , आवेदन को खारिज में सुनवाई करे आपकी अनुपस्थिति में अवधारित की जाएगी।

के पक्षकार पर यतः सबूत देने के लिए आपकी उपस्थिति की अपेक्षित है । आपको नीचे दी गई सूची में दिए दस्तावेज प्रस्तुत करने के द्वारा उपदान के लिए दावे से उत्पन्न मामले में...प्ररूप.. और सामाजिक सुरक्षा संहिता , 2020 की धारा 56 के अधीन आवेदन द्वारा इस प्राधिकारी को संदर्भित किया गया है, कीअपेक्षा है, आपको एतद्दवारा व्यक्तिगत रूप से इस प्राधिकारी के समक्ष दिन 20......... पर ... बजे पूर्वाह्न में अपराह्न में उपस्थित होने के लिए समन जारी किया गया है और उक्त दस्तावेज जो ( इस प्राधिकारी को आपके द्वारा भेजे जाने है) आपको अपने साथ लाने हैं। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(74)

दस्तावेजों की सूची-

1.

2.

3. आगे

20.......के

.इस दिनांक . .. को मेरे हस्ताक्षर तथा मुद्रा से जारी ।

संहिता, 2020 के अधीन सक्षम प्राधिकारी नोटः 1. लागू नहीं होने वाले शब्दों और पैराग्राफों को काट दें.

2. जो भाग लागू न होता हो उसे हटा दें।

3. समन दो प्रतियों में जारी किया जाएगा । द्वितीय प्रति पर हस्ताक्षर किया जाना है और निर्धारित तारीख से पूर्व संबंधित व्यक्तियों द्वारा लौटाया जाना है।

4. यदि समन केवल दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए जारी किया जाता है और साक्ष्य नहीं दिया जाता है तो यह समन का पर्याप्त अनुपालन होगा यदि दस्तावेजों को इस प्रयोजन के लिए नियत दिन और समय पर सक्षम प्राधिकारी के सक्षम पेश किया जाता है 436(75)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

प्ररूप - सोलह

[नियम 11 का उप-नियम ( 11 ) और (12) देखिए] सक्षम/अपीलीय प्राधिकारी द्वारा यथा अवधारित उपदान संदाय हेतु सूचना

* (यदि शब्द लागू न हो उन्हे काट दें)

सेवामें,

(नियोक्ता का नाम और पता)

1. यतः स्वर्गीय ..

.पता थे उनके नामित (तों) /विधिकउत्तराधिकारी (यों) श्री/श्रीमती/कुमारी जो आप के अधीन एक कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 56 के अधीन एक आवेदन दायर किया है; अथवा ने यतः आपको दिनांक सुरक्षा संहिता, 2020 के अधीन उपदान के रूप में अपेक्षा की गई थी। को एक सूचना पत्र दिया गया था जिसमें आपसे सामाजिक .रुपये का भुगतान करने की

की गई थी और सुनवाई के बाद सामाजिक सुरक्षा संहिता , 2020 प्राप्त करने का हकदार है; अथवा 2. और जबकि आवेदन पर आपकी उपस्थिति में सुनवाई दिनांक पता चला कि उक्त / श्रीमती / कुमारी के अधीन उपदान के रूप में रूपए ..

जबकि आप. / आवेदक अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील में गए थे, जिन्होंने विनिश्चित् किया है कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अधीन रुपए.... को भुगतान किया जाए। की देय उपदान राशि का श्री / श्रीमती / कुमारी अत्एव मैं आपको एतद्वारा निदेशित करता हूं कि इस सूचना की प्राप्ति से तीस दिनों के भीतर श्री/ श्रीमती/ कुमारी को रुपए का भुगतान करें

20 की .तारीख को मेरे हस्ताक्षर और मुद्रा के अधीन प्रदान किया गया।

सक्षम प्राधिकारी

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अधीन प्रतिः

1. भुगतान प्राप्त करने के लिए आवेदन नियोक्ता से संपर्क करने की सलाह दी जाती है।

2.अपीलीय प्राधिकारी , यदि लागू हो।

नोट--- (यदि लागू न हों तो पैराग्राफों को काट दें) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(76)

प्ररूप - सत्रह

[नियम 11 का उप- नियम (13) देखिए] उपदान की वसूली के लिए आवेदन

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अधीन अध्याय पांच के लिए सक्षम प्राधिकरण के समक्ष

दिनांक.............

आवेदन क्रमांक

(पूरे पते के साथ आवेदक का पुरा नाम)

तथा

(संबंधित नियोक्ता/न्यास/बीमाकर्ता का पता सहित पूरा नाम)

के बीच

1. आवेदक उपर्युक्त नियोक्ता का कर्मचारी है स्वर्गीय काविधिक उत्तराधिकारी है जो उपर्युक्त नियोक्ता के एक कर्मचारी थे और आपने अपने सूचना में उक्त नियोक्ता को सामाजिक सुरक्षा (केंद्रीय ) नियम, 2020 के अधीन निर्देशित किया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अधीन नियम 35 के उप-नियम (11 ) या उप- नियम ( 12) के अंतर्गत देय उपदान के रूप में रूपये . की राशि का भुगतान किया जाए ।

2. आवेदक यह निवेदन करता है कि हालांकि मैंने भुगतान के लिए उससे संपर्क किया था फिर भी उक्त नियोक्ता आपके द्वारा यथा निर्देशित उपदान राशि का भुगतान करने में विफल रहा है ।

3. अतः आवेदक यह प्रार्थना करता है कि आपके निर्देश के अनुरूप उपदान के रूप में मुझे देय राशि की वसूली के लिए संहिता की धारा 129 के अधीन एक प्रमाण पत्र जारी किया जाए।

आवेदक के हस्ताक्षर / अंगूठे का निशान। स्थानः

दिनांकः

नोट - लागू न होने वाले शब्दों को काट दें। 436(77)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

प्ररूप - अठारह

(नियम' 13 (1 ) (क) देखिए)

निरीक्षक-सह- सुविधाप्रदाता को शिकायत

सेवामें ,

निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता (सामाजिक सुरक्षा, संहिता 2020 पर के अधीन)

महोदय,

मैं ............(महिला का नाम) (नाम और स्थापना का पूरा पता) .. मैं (नाम) धारा 72 के अधीन नामांकित एक व्यक्ति या. में कार्यरत हूं अथवा (महिला का नाम) (नाम और... स्थापना का पूरा पता) . के एक विधिक प्रतिनिधि के रूप में नामित हूं, मैं सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 तथा उसके अंतर्गत नियमों में अधिकथित शर्तों के अनुसार मातृत्व लाभ और चिकित्सीय अधिलाभ के रूप में रुपये पाने की हकदार हूँ और/ अथवा धारा 65 के अधीन छुट्टी अवधि के लिए वेतन के रूप में देय राशि को नियोक्ता द्वारा सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के इस अध्याय- छह के उपबंधों के अनुसार अनुचित रूप से रोक दिया गया है/ काम से उसकी अनुपस्थिति के दौरान उसे हटा दिया गया है या बर्खास्त कर दिया गया है। अतः आपसे अनुरोध है कि नियोक्ता को मुझे राशि का भुगतान करने और नियोक्ता द्वारा कार्य से हटाने या बर्खास्तगी को समाप्त करने के लिए निर्देशित करें।

महिला/नामित/विधिक प्रतिनिधि का हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान दिनांक .

यदि महिला/नामित/विधिक प्रतिनिधि यदि करने में सक्षम नहीं है

तोसत्यापक के

हस्ताक्षर और अंगूठे का निशान

महिला/नामित/विधिकप्रतिनिधि का पूरा पता मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(78)

प्ररूप - उन्नीस

अपील

[नियम 13 के उप - नियम (2) का खण्ड (ख) देखिए ]

सेवा में,

प्राधिकारी,

(सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अधीन नियुक्त)

(पता)

महोदय,

मैं. अधोहस्ताक्षरी , (स्थापना का नाम और पूरा पता) की महिला कर्मचारी हूं, मैं -

*धारा 72. की उप - धारा (2) के अधीन निरीक्षक- सह- सुविधाप्रदाता के आदेश से व्यथित हूं जिसके कारण इसके साथ संलग्र हैं, धारा 68 की उप - धारा (2) के अधीन आपके समक्ष यह अपील प्रस्तुत करती हूं और यह अनुरोध करती हूं कि उक्त नियोक्ता को मुझे देय उपर्युक्त राशि का भुगतान करने का आदेश दिया जाए। इस संबंध में निरीक्षक-सह- सुविधाप्रदाता के आदेश की एक प्रति संलग्र है; या

*श्री (राशि की प्रकृति) जिसे (महिला का निरीक्षक -सह- सुविधाप्रदाता को धारा 72 की उप -धारा (2) के अधीन मातृत्व लाभ या अन्य राशि का भुगतान करने के लिए निर्देशित किया जा रहा है "नाम) सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अध्याय-पांच के उपबंधों के अनुसार हकदार होने/ कार्य से अनुपस्थिति के दौरान या कार्य के अभाव में मेरे द्वारा की गई बर्खास्तगी को रद्द करने के लिए निर्देशित किया गया है । ( अनावश्यक भागकाट दें)

मैं धारा 72 की उप- धारा (3) के अधीन अपील करती हूं। इस के साथ संलग्न ज्ञापन में वर्णित तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए तथा अन्य दस्तावेजों के साथ यह कहा जाता है कि महिला मातृत्व लाभ या उक्त राशि की हकदार नहीं है और इसलिए निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता के आदेश की संलग्न प्रति को निरस्त किया जा सकता है।

* अनावश्यक भाग को काट दें।

महिला/व्यथित व्यक्ति के हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान दिनांक.

महिला/यदि हस्ताक्षर तथा अंगूठे

का निशान लगाने में सक्षम नहीं है तो सत्यापक का

हस्ताक्षर और अंगूठे का निशान महिला/नामित/ विधिकप्रतिनिधि का पूरा पता 436(79)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

प्ररूप- बीस

(नियम 16 देखिए)

दुर्घटना की सूचना पुस्तिका

[कर्मकार के द्वारा अथवा उसकी ओर से भरा जाना है]

दुर्घटना की तारीख तथा समय,

सूचना की तारीख तथा समय

क्षतिग्रस्त व्यक्ति का नाम

पता..

क्षति का कारण ..

सूचना प्रदान करने वाले व्यक्ति का हस्ताक्षर अथवा अंगूठे का निशान [नियोक्ता अथवा उसके अभिकर्ता के द्वारा भरा जाना है]

पारिश्रमिक की दर

दुर्घटनाका स्थान

क्षतियों की प्रकृति

चक्षुदर्शी साक्षियों का नाम

परिस्थितियों का उल्लेख

प्ररूप - इक्कीस

(नियम 18 का उप-नियम (1 ) देखिए)

आपके द्वारा नियोजित यतः मुझे यह सूचना प्राप्त हुई है कि ( 1 ) . कर्मकार की मृत्यु नियोजन के अनुक्रम में उद्भूत तथा दुर्घटना के परिणामस्वरूप हुई है, मैं एतद्वारा आप से सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 की धारा 88 की उप - धारा ( 1 ) के अनुसार इस सूचना की प्राप्ति की तारीख से तीन दिन के भीतर पैरा 1 एवं 2 में आवश्यक विवरण तथा या तो पैरा 3 या 4 में आवश्यक प्रविष्टियों के साथ सम्यकः रूप से भरे हुए प्ररूप को प्रस्तुत करने की अपेक्षा करता हूं। यदि आप प्रतिकर संदत्त करने के दायित्व को स्वीकार कर लेते है, तब अधिनियम की धारा 88 की उप- धारा (2) के अधीन आवश्यक निक्षेप इस सूचना की प्राप्ति के तीस दिन के भीतर किया जाना चाहिए।

वास्ते सक्षम प्राधिकारी कर्मकार . प्रतिकर मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(80)

प्ररूप - बाईस

(नियम 18 का उप-नियम (2 ) देखिए)

वर्ष

जो मेरे द्वारा दिनांक

1. आपकी सूचना दिनांक 20

..20 प्राप्त की गयी थी , के प्रत्युत्तर में यह तर्क किया जाता है कि

दिनांक हो को दुर्घटनाग्रस्त .20 (1 ) नियोजित किया था

वर्ष.

की मृत्यु हो गयी ।

मृतक का मासिक पारिश्रमिक रूपये की धनराशि है।

2. वे परिस्थितियां , जिनमें मृतक की मृत्यु हुई थी, निम्न प्रकार से थीं: -

भुगतान करने की

20

..के पूर्व आपके के 3...मैं मृतक की मृत्यु के कारण प्रतिकर के रूप में रूपए जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं, जिसे दिनांक पास जमा कर दिया गया था कर दिया जाएगा।

4. मैं निम्नलिखित आधारों पर मृतक की मृत्यु के कारण प्रतिकर संदत्त करने दायित्व को अस्वीकार करता हूं -

(1 ) कर्मकार का नाम प्रविष्ट कीजिए:

(2) प्रतिष्ठान का नाम प्रविष्ट कीजिए:

नियोक्ता मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(81)

प्ररूप - तेईस

(नियम 19 का उप -नियम (1 ) देखिए)

करार का ज्ञापन

एतद्वारा निवेदन किया जाता है कि नियोक्ता से उत्पन्न और नियोजन के दौरान हुई दुर्घटना से का दिनांक 20 के निवासी के दिन को व्यक्तिगत क्षति पहुंची और उक्त कर्मचारी की निःशक्तता का कारण बनी जिससे यह अनुमान लगाया गया है कि महीनों की अवधि के लिए उसकी पूर्व की कोई किसी मजदूरी से अधिक नहीं अर्जित कर पाएगा। उक्त कर्मचारी अर्द्ध- मासिक संदाय प्राप्त करता रहा है जो दिनांक . से दिनांक किदिन 20 केदिन .20 ... तककुल .रू. प्राप्त करता रहा ।

उक्त कर्मचारी की अनुमानित मासिक मजदूरी रू. है । कर्मचारी को 15 वर्ष से अधिक आयु का है। .को 15 वर्ष का हो जाएगा यह पुनः निवेदन है कि उक्त कर्मचारी का नियोक्ता, उक्त दुर्घटना से उत्पन्न अस्थायी प्रकृति की सभी निःशक्तता के बाबत सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अधीन सभी दावों के पूर्ण निपटारे में चाहे सभी या बाद में प्रकट किया जाए , रू. की राशि को उक्त कर्मचारी का नियोक्ता अदा करने व उक्त कर्मचारी स्वीकार करने को राजी हो गए हैं। अतः निवेदन है कि ज्ञापन सम्यक रूप से अभिलिखित किया जाए।

नियोक्ताके हस्ताक्षर

दिनांक

.20.

साक्षी के हस्ताक्षर

कर्मचारी के हस्ताक्षर

गवाह

साक्षी के हस्ताक्षर

नोट - करार के पंजीकरण का आवेदन किसी एक पक्षकार के हस्ताक्षर से प्रस्तुत किया जा सकता है परन्तु अन्य पक्षकार निबंधनों से सहमत हो, किन्तु जहां संभव हो दोनों के हस्ताक्षर संलग्न होने चाहिए जहां तक संभव हो ( रसीद तभी भरी जानी चाहिए जब वास्तव में पैसों का भुगतान किया गया हो)

रसीद

(उस समय भरी जाए जब वास्तव में अदा किया जाए)

उपर्युक्तकरार के अनुसार मैंने आज को रूपए की राशिप्राप्त की हैं,

.20 ..

दिनांक

कर्मचारी

धन अदा कर दिया गया है और रसीद मेरी उपस्थिति में हस्ताक्षरित हुई है ।

साक्षी के हस्ताक्षर मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(82)

प्ररूप-चौबीस

(नियम 19 का उप- नियम (1 ) देखिए)

करार का ज्ञापन

एतद्वारा निवेदन किया जाता है कि दिनांक 20 केदिन को निवासी में अपने नियोजन से और के दौरान उत्पन्न दुर्घटना से को व्यक्तिगत क्षति पहुंची।

उक्त क्षतियुक्त कर्मचारी की निम्नलिखित प्रकृति की स्थायी निःशक्तता का कारण बनी, यथा उक्त कर्मचारी की मासिक मजदूरी रू. आंकी गई है।

को 15 वर्ष की आयु का होगा। उक्त कर्मचारी 15 वर्ष की आयु से अधिक है/दिनांक.

रू. दिनांक दिनांक को को .रू.

यह पुनः प्रस्तुत किया जाता है कि उपर्युक्त निःशक्तता के संबंध में कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम, 1923 के अधीन सभी दावों के पूर्ण निपटारे में रू. की राशि उक्त कर्मचारी का नियोक्ता अदा करने व उक्त कर्मचारी स्वीकार करने को सहमत हो गए है और भी निःशक्तताएं प्रकट हैं। अतः यह निवेदन है किंज्ञापन सम्यक् रूप से अभिलिखित किया जाए ।

दिनांक ........... 20..

नियोक्ताके हस्ताक्षर

गवाह

कर्मचारी के हस्ताक्षर

गवाह

नोट - करार को रजिस्टर कराने के लिए एक पक्षकार द्वारा आवेदन दिया जा सकता है बशर्ते अन्य पक्षकार निबंधनों से सहमत हो । परंतु दोनों के हस्ताक्षर जब संभव हो संलग्न हों।

रसीद

(उस समय भरी जाए जब वास्तव में अदा किया जाए)

उपर्युक्त करार के अनुसार मैंने दिनांक राजस्व स्टाम्प को .रू. प्राप्त लिए हैं,

20

दिनांक

कर्मचारी

धन अदा कर दिया गया है और रसीद मेरी उपस्थिति में हस्ताक्षरित हुई है।

गवाह

नोट-विशेष मामलों, उदाहरण के लिए, जब कर्मचारी वैध निशक्तता के अंतर्गत के समय उपजीविका-जन्य रोग करार, इत्यादि से क्षति, से अनुकूल करने के लिए इस प्ररूप को परिवर्तित किया जा सकता है। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(83)

प्ररूप - पच्चीस

(नियम 19 का उप- नियम (1 ) देखिए)

करार का ज्ञापन

है, कि और नियोजन के दौरान .दुर्घटना द्वारा एतद्वारा प्रस्तुत कोदिनांक. वाले .20 को व्यक्तिगत क्षति पहुंची थी। नियोजन से पर रहने उक्त क्षति से उक्त कर्मकार की अस्थायी अशक्तता हुई है जो कर्मकार में प्रति मास वेतन के रूप में प्राप्त करता है।

उक्त कर्मकार की दुर्घटना के पूर्व मासिक मजदूरी रूपए प्राक्कलित है। और यह प्रस्तुत किया गया है कि कर्मकार के नियोक्ता भुगतान करने के लिए सहमत हो गया है तथा कर्मकार की ओर से उक्त अस्थायी दिव्यांगता की अवधि की दर से अर्द्ध मास भुगतान स्वीकार करने के लिए सहमत हो गया है। यह करार इस शर्त के अध्यधीन है कि दिव्यांगता के दौरान उक्त कर्मकार की कमाई में परिवर्तन के कारण खाते पर उक्त संहिता के उपबंधों के अनुसार अर्द्ध मास भुगतान की राशि में , अन्तर हो सकता है यह और कहा गया है कि उक्त संहिता की धारा 93 की उप- ...धारा (3) के अधीन संदान के सभी अधिकार इस करार से अप्रभावित है । अतएव यह अनुरोध किया जाता. है कि इस ज्ञापन को विधिवत् अभिलेखित किया जाए ।

.20

दिनांक

नियोक्ता के हस्ताक्षर

गवाह

कर्मचारी के हस्ताक्षर ..

गवाह

टीप: - करार को रजिस्टर करने के लिए आवेदन एक पक्षकार के हस्ताक्षर करके प्रस्तुत किया जा सकता है परन्तु अन्य पक्षकार निबंधों से सहमत है । किन्तु यदि संभव हो , तो दोनो के हस्ताक्षर संलग्न होना चाहिए।

रसीद

(जब वास्तव में धन का भुगतान कर दिया गया है तब भरा जाए)

उपरोक्त करार के अनुसार, मैंने राशि रूपए .प्राप्त किया है ।

.20 .

दिनांक

कर्मचारी

धन का भुगतान कर दिया गया है तथा इस रसीद में मैने उनकी उपस्थिति में हस्ताक्षर किए है।

गवाह

टीप - यह प्ररूप वाद विशेष मामलों में जैसे उपजिवि रोग के द्वारा क्षतिअन्य , कर्मचारी के वैध निता शक्तः में होने पर समझौता, इत्यादि परिवर्तित किया जा सकता हैं। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(84)

प्ररूप – छब्बीस

(नियम 19 के उप- नियम (2) के खण्ड (एक) देखिए)

यतः प्रतिकर अदा करने का करार और

के दृष्टिगोचर हुआ कहा गया है और इस तथ्य के मध्य

ने कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 89 (1 ) के अधीन करार के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन कर दिया है, और ऐसे करार पर दिनांक एतद्वारा सूचना दिया जाता है कि उक्तः करार के प्रति कोई आपत्ति को विचार किया जाएगा और यह कि दिनांक तारीख को उठाए जाएं। वैध आपत्ति के अभाव में मैं करार के 20 रजिस्ट्रीकरण के लिए कार्यवाही करने के लिए आशयित हूं।

सक्षम प्राधिकारी

प्ररूप - सताइस

[नियम 19 का उप -नियम (2) के खण्ड (तीन) देखिए]

सूचना की जाती है कि दिनांक को आपके

.20 व प्रतिकर का रजिस्ट्रीकरण अदा करने के लिए हुए करार के मध्य

निम्नलिखित कारणों से अस्वीकृत कर दिया गया है: -

20

दिनांक

सक्षम प्राधिकारी मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(85)

प्ररूप - अष्ठाईस

[नियम 19 के उप-नियम (3) के खण्ड (दो) देखिए]

और

मध्य प्रतिकर अदा करने का एक करार हुआ है और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि.... ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 89 (1 ) के अधीन करार के रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन किया है और इस तथ्य को दृष्टिगोचर रखते हुए कि यह मुझे मालूम पड़ता है कि उक्त करार निम्नलिखित कारणों से रजिस्ट्रीकृत नहीं होना चाहिए , अर्थात्ः-

को आपको यह कारण बताने के लिए अवसर .दिनांक दिया जाएगा कि उक्त करार रजिस्ट्रीकृत क्यों होना चाहिए। यदि उस तारीख को कोई उपयुक्त कारण नहीं बताया गया करार का रजिस्ट्रीकरण को अस्वीकृत कर दिया जाएगा।

तारीख 20

सक्षम प्राधिकारी

प्ररूप - उन्तीस [नियम 19 के उप-नियम (3 ) के खण्ड (दो) देखिए]

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 89 (1 ) के अधीन करार कि और ....के मध्य प्रतिकर अदा करने के लिए एक करार हुआ है और यतः कि ने सामाजिक सुरक्षा संहिता , 2020 की धारा 89 ( 1 ) के अधीन करार के लिए आवेदन किया है, और यतः मुझे यह प्रतीत होता है कि उक्त करार निम्नलिखित कारणों से पंजीकृत नही होना चाहिए, अर्थात्ः-

को अवसर दिया जाएगा कि उक्त करार रजिस्टर क्यों किया जाना चाहिए। कोई प्रतिनिधित्व जो आपको उक्त करार के सम्बन्ध में उसी तारीख को किया जाए। यदि उस समय उचित कारण दर्शाया गया हो, तो करार को रजिस्ट्रीकृत किया जा सकेगा।

दिनांक

सक्षम प्राधिकारी मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(86)

प्ररूप - तीस

[नियम 19 के उप -नियम (5) देखिए] वर्ष ........ 19 के लिए करारों का रजिस्टर

कर्मकार

अनुक्रमांक

नियोक्ता

करार की तारीख

रजिस्ट्रीकरण कीतारीख

सक्षम प्राधिकारी के हस्ताक्षर

रजिस्टर परिशोधनकारी आदेशोंका सदर्भ

प्ररूप - इक्तीस

[नियम 22 के उप -नियम (2) देखिए] कर्मकार द्वारा प्रतिकर के लिए आवेदन

सेवा में,

कर्मकार प्रतिकर के लिए सक्षम प्राधिकारी ,

निवास स्थान

आवेदक ,

बनाम

निवास स्थान

विरोधी पक्षकार,

एतद्वारा प्रस्तुत किया जाता हैकिः-

(1 ) दिनांक .20 .. के

.को रोजगार से तथा रोजगार ठेकेदार) द्वारा नियोजन कर्मकार..

दिन विरोधी पक्षकार (के .20 . के के दौरान उत्पन्न दुर्घटना द्वारा व्यक्तिगत क्षति हुई जो दिनांक

दिनं...

को

क्षति का कारण यह था ( साधारण भाषा में क्षति का संक्षिप्त कारण दें) ..

(2) आवेदक को निम्नलिखित क्षतियां कारित हुई हों, अर्थात्: -

(3) आवेदक की मासिक (3) मजदूरी रूपये थी। आवेदक कीआयु के समय 15 वर्ष से अधिक/कम है। 436(87)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

20 केदिनको (4) (क) दुर्घटना की सूचना दिनांक तामील कराया गया था।

(ख) सूचना जहां तक हो सका उतना शीघ्र तामील कराई गई..

..की कारण से ( सही समय पर) तामील (ग) दुर्घटना की सूचना नहीं कराई गई थी ।

(5) आवेदक तद्नुसार प्रप्ति का हकदार है -

(क) दिनांक

वार्षिक भुगतान। 20 से रूपए . तक का अर्द (ख) ..रूपये की एक मुश्त राशि भुगतान।

.परन्तु (6) आवेदक ने करार द्वारा निपटान करने हेतु निम्नलिखित कदम उठाए

"यह विवादित प्रश्नों का निपटान करने में असफल साबित हुआ क्योंकि .

अतः आपसे निवेदन है कि निम्न विवादित प्रश्न का निपटारा करें; अर्थात्ः-

(क) क्या आवेदक संहिता के अधीन एक कर्मकार है।

(ख) क्या दुर्घटना नियोजन के दौरान अनुक्रम में घटित हुई

(गं) क्या क्षतिपूर्ति की राशि, या राशि का कोई भाग बकाया है

(घ) क्याविपक्षी पक्षकार क्षतिपूर्ति जैसा बकाया .के भुगतान हेतु उत्तरदायी है:

(ड. ) आदि, (अपेक्षानुसार).

दिनांक .20 .

जो खण्डलागू न हो उसे काट दें। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(88)

प्ररूप - बत्तीस

[नियम22 का उप-नियम (2) देखिए] जमा प्रतिकर हेतु आदेश के लिए आवेदन

प्रति,

कर्मकार प्रतिकर के लिए सक्षम प्राधिकारी

निवास स्थान..

आवेदक,

बनाम

.विरोधी पक्षकार

निवास स्थान .

एतद्वारा प्रस्तुत किया जाता है कि:

(1) दिनांक ..20 .. के ठेकेदार) द्वारा नियोजित कर्मकार . दिन विरोधी पक्षकार (के को रोजगार से तथा रोजगार के दौरान उत्पन्न दुर्घटना द्वारा व्यक्तिगत क्षति हुई, जो दिनांक ... 20 .. ..के दिनांक. ..को उसकी मृत्यु होने पर क्षति का कारण यह था ( साधारण भाषा में क्षति का संक्षिप्त कारण दें).

(2) उसके नाते आवेदक मूल कर्मकार का /के आश्रित है/ हैं।

(3) मृतक की मासिक मज़दूरी .रूपए थी। मृतक अपनी मृत्यु के समय 15 वर्ष की आयु से अधिक/कम था।

(4) (क) दुर्घटना की सूचना दिनांक. .20....... के दिन को तामील किया गया था । (ख) सूचना जहां तक हो सके उतना शीघ्र तामील की गई थी ।

(ग) दुर्घटना की सूचना ..को कारण से ( सही समय पर) तामील नहीं की गई थी ।

(5) अपनी मृत्यु से पूर्व मृतक ने कुल राशि रूपए प्रतिकर के रूप में प्राप्त किए । (6) प्रार्थी तद्नुसार ..रूपए भुगतान की एक मुश्त राशि प्राप्त करने का हकदार है।

इसलिए आपके निवेदन किया जाता है कि आवेदक को उक्त प्रतिकर अथवा कोई अन्य प्रतिकर जिसका कि वह हकदार है ।

दिनांक

आवेदक

जो खण्ड लागू न हो उसे काट दें। 436(89)

मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 28 अप्रैल 2021

प्ररूप - तैतीस

[नियम 22 का उप-नियम (2) देखिए]

सारांशीकरण के लिए आवेदन

सेवामें,

कर्मकार प्रतिकर के लिए सक्षम प्राधिकारी

आवेदक ,

निवास स्थान ..

बनाम

विरोधी

निवास स्थान

पक्षकार एतद्वारा प्रस्तुत किया जाता है कि:-

(1 ) आवेदक/विरोधी पक्षकार नियोजन तथा नियोजन के दौरान से उत्पन्न दुर्घटना द्वारा अस्थायी निःशक्तता संबंध में तथा दिनांक अर्द्ध-मासिक संदाय प्राप्त करता रहा है । से तक (2) आवेदक इच्छुक है कि अर्द्ध- मासिक संदायों के प्राप्त करने के अधिकार को मोचित कर दियाः जाए।

(3 ) (क) विरोधी पक्षकार अर्द्ध मासिक संदाय प्राप्त करने के अधिकार के मोचन से सहमत नहीं है। (ख) पक्षकार उस राशि के सम्बन्ध में जिसके लिए अर्द्ध-मासिक संदाय प्राप्त करने के अधिकार कोमोचित कर सहमत होने में असमर्थ रहा है।

अतः आपसे निवेदन है कि-

(क) यह निर्देश अर्द्ध मासिक संदाय प्राप्त करने का अधिकार मोचित कर दिया जाए ;

(ख) अर्द्ध मासिक संदाय को प्राप्त करने के अधिकार के मोचन के लिए राशि तय करने के लिए आदेश पारित करें।

.20 .

दिनांक

आवेदक मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(90)

प्ररूप- चौंतीस

[नियम 22 का उप- नियम (19) देखिए]

सूचना

यतः आवेदक

के द्वारा के विरोधी प्रतिकर के लिए दावा किया गया है और उक्त ने यह दावा किया है कि आप सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 93 (3) , (4) के अधीन किसी प्रतिकर के विरोधी उसको क्षतिपूर्ति के लिए उत्तरदायी हैं, जो वह उपर्युक्त दावे को अदा करने के लिए उत्तरदायी है, आपको एतद्वारा सूचित किया जाता है कि आप दिनांक 20 को मेरे समक्ष प्रस्तुत सकते हैं और उक्त आवेदक द्वारा प्रतिकर के दावे अथवा विरोधी पक्षकार द्वारा किए गए क्षतिपूर्ति के दावे का विरोध करें। आपके प्रस्तुत न होने के व्यतिक्रम में ऐसा माना जाएगा कि आप विरोधी पक्षकार के विरोधी दिए गए किसी अधिनिर्णय को और उससे वसूले गए किसी प्रतिकर के लिए विरोधी पक्षकार की क्षतिपूर्ति के लिए आप अपना दायित्व स्वीकार करते है ।

.20 .

दिनांक

सक्षम प्राधिकारी

प्ररूप - पैंतीस

[नियम 22 का उप-नियम ( 19) देखिए]

सूचना

जबकि उक्त

ठेकेदार के सम्बन्ध में उसके विरोधी हैं जिसमें आवेदक यतः जबकि के विरोधी आवेदक के द्वारा प्रतिकर का दावा किया गया है और उक्त ने यह दावा किया है कि आप सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 93 (3) (4) के अधीन उत्तरदायी है किसी प्रतिकर को उसको क्षतिपूर्ति करने के उत्तरदायी हैं जो वह उपर्युक्त दावे के संबंध में अदा करने का उत्तरदायी होगा , और ने सूचना तामील हो जाने पर यह दावा किया है कि आप प्रतिकर वसूल लेता है तो आपको एतद्वारा सूचित किया जाता है कि आप

.20 ... को मेरे समक्ष प्रस्तुत हों और उक्त आवेदक के द्वारा किए गए द्वारा किए गए क्षतिपूर्ति के दावे का विरोध करें। आपको दिनांक दावे अथवा विरोधी पक्षकार

से वसूले गए प्रस्तुत होने के व्यतिक्रम में यह माना जाएगा, कि आप विरोधी पक्षकार

किसी प्रतिकर के लिए उसके विरोधी दिए गए किसी अधिनिर्णय की विधिमान्यता को स्वीकार करते है। दिनांक

.20 ..

सक्षम प्राधिकारी मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(91)

प्ररूप - छत्तीस

[नियम 29 का उप-नियम ( 1 ) देखिए]

महिला कर्मचारियों का रजिस्टर

स्थापना का नाम

1. अनुक्रमांकः

2. महिला का नाम और उनके पिता (या, यदि विवाहित हैं तो पति) का नाम

3. नियुक्तिकी तारीखः

4. कार्य की प्रकृतिः

5. महीने और वर्ष के साथ तारीख जबसे वह नियोजित हैं, कामबंदी और नियोजित नहीं हैं:

नियोजित दिनों की संख्या

महिना

अभ्युक्ति

कामबंदी के दिनों की

संख्या

नियोजित नहीं होने के दिनों की संख्या

क

ख

घ

ग

ङ 6. महिला द्वारा धारा 62 के अधीन सूचना दिए जाने की तारीखः

7. सेवा मुक्त/ बर्खास्तगी, की तारीख यदि कोई होः

8. धारा 62 के अधीन प्रसव के प्रमाण प्रस्तुत करने की तारीखः

9. शिशु के जन्म की तारीखः

10. प्रसव/ गर्भपात/ गर्भावस्था की चिकित्सा समाप्ति/ ट्यूबेक्टोमी ऑपरेशन/ बच्चे की मृत्यु/ गोद लेने के प्रमाण प्रस्तुत करने की तारीखः

11. धारा 65 में संदर्भित अस्वस्थता का प्रमाण प्रस्तुत करने की तारीखः

12. संभावित प्रसव के अग्रिम भुगतान किए गए मातृत्व लाभ की राशि सहित तारीख ।

13. प्रसूति लाभ के अनुवर्ती भुगतान की राशि सहित तारीख ।

14. धारा 64 के अधीन तारीख सहित बोनस की राशि, यदि भुगतान की गई हो।

15. धारा 65( 1 ) और 65(3 ) के अधीन तारीख सहित अवकाश खाते पर भुगतान की गई मजदूरी की राशि सहित तारीख ।

16. धारा 65(2) के अधीन तारीख सहित अवकाश खाते पर भुगतान की गई मजदूरी की राशि सहित तारीख और अवकाश की अवधि।

17. धारा 62 के अधीन महिला द्वारा नामनिर्दिष्ट व्यक्ति का नाम।

18. यदि महिला की मृत्यु होती है, तो उसकी मृत्यु की तारीख , उस व्यक्ति का नाम जिसे मातृत्व लाभ और/ या अन्य राशि का भुगतान किया गया था, उसकी राशि और भुगतान की तारीख।

19. यदि महिला की मृत्यु होती है और शिशु जीवित रहता है, तो उस व्यक्ति का नाम , जिसे बच्चे की ओर से मातृत्व लाभ की राशि का भुगतान किया गया था और वह अवधि जिसके लिए यह भुगतान किया गया था।

20. महिला कर्मचारियों के रजिस्टर में प्रविष्टियों को प्रमाणित करते हुए स्थापना के नियोक्ता के हस्ताक्षर ।

21. निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता के उपयोग के लिए अभ्युक्ति कॉलम। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(92)

प्ररूप - सैंतीस

[नियम 29 का उप-नियम (3) देखिए]

एकीकृत वार्षिक विवरणी

क. सामान्य भागः

(क) स्थापना का नाम

स्थापना का पताः

गली नं . / प्लॉट नं .

मकान नं./फ्लैट नं.

राज्य

पिन

जिला

शहर

संहिता

(ख) नियोक्ता का नाम

नियोक्ता का पताः

मकान नं./फ्लैट नं./

.गली नं./ प्लॉट नं.

राज्य

जिला

.पिन संहिता शहर

मोबाईल नं.

ई- मेल आईडी

दूरभाष नं.

(ग) स्थापना के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार प्रबंधक या व्यक्ति का नाम :

पताः

.गली नं./ प्लॉट नं ..

मकान नं ./ फ्लैट नं .

राज्य

जिला

.पिन संहिता शहर

मोबाईल नं.

ई-मेल आईडी

दूरभाष नं.

ख. नीचे दी गई सारणी के कॉलम (2) में उल्लिखित संहिता के अधीन नियोक्ता का रजिस्ट्रीकरण/अनुक्षप्ति नम्बर:

पंजीकरण

नाम

यदिहां अनुक्रमांक

(रजिस्ट्रीकरण नं. )

(4)

(3)

(2)

(1)

01. व्यावसायिक सुरक्षा स्वास्थ्य और कार्य दशाएं संहिता 2020 (वर्किग कंशिन संहिता, 2020) ।

02 . सामाजिक सुरक्षा संहिता , 2020।

समय प्रवृत्त होने के लिए कोई अन्य विधि।..

03.

436(93)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

ग. नियोक्ता, ठेकेदार और ठेका श्रम के ब्यौरेः

ठेकेदारों के स्थापना के मामले में नियोक्ता का नाम ।

01.

02.

स्थापना के प्रारंभ होने की तारीख।

03.

वर्ष के दौरान स्थापना में कार्यरत् ठेकेदारों के नम्बर।

04 वर्ष के दौरान दिनों की कुल संख्या, जिनमें ठेका श्रमिक नियोजित थे।

05.

वर्ष के दौरान ठेका श्रम द्वारा कार्य किए गए श्रम-दिनों की कुल संख्या।

06 ..

प्रबंधक या एजेंट का नाम ( खदानों के मामले में)

07.

पता मकान नं./ फ्लैट नं.

गली/प्लॉट नं.

शहर

जिला

पिन संहिता

ई-मेल आईडी

मोबाईल नं.

दूरभाष नं.

घ. कार्य घंटे और साप्ताहिक विश्राम दिवसः

01.

वर्ष के दौरान कार्य किए गए दिवसों की संख्या।

02 .

वर्ष के दौरान कार्य किए गए श्रमदिवासों की संख्या।

कार्य के दैनिक घंटे।

03.

04.

विश्राम का साप्ताहिक दिवस।

ङ. वर्ष के दौरान किसी दिन नियोजित व्यक्तियों की अधिकतम संख्याः

अनुक्रमांक. पुरुष महिला...

किशोर ( 14 से 18 वर्ष की

बच्चे ( 14 वर्ष की आयु से कुल

आयु के बीच)

कम)

च. मजदूरी दरें ( श्रेणी-वार):

श्रेणी

कामगारों की संख्या

मजदूरी

कीदरें

संविदा

नियमित

किशोर

किशोर पुरुष महिला बच्चे

बच्चे

पुरुष महिला

उच्च

कुशल

कुशल

अर्धकुशल

अकुशल मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(94)

छ. (क) भुगतान के ब्यौरेः

कटौतियां

भुगतान किया गया सकल

भुगतान कि गई शुध्द मजदूरी मजदूरी

अन्य प्रकार से

अन्य

नकद

नकद अन्य प्रकार से

जुर्माने नुकसान अथवा क्षति के

लिए कटौतियां

(ख) वर्ष के दौरान मजदूरी सहित अवकाश अनुमोदित किए गए कामगारों की संख्या:

वर्ष के दौरान

कामगारों की संख्या

अनुक्रमांक

मजदूरी सहित अवकाश

अनुमोदित ज. सांविधिक स्कीमों के अधीन उपलब्ध कराई गई विभिन्न कल्याण योजनाओं के ब्यौरे :

अनुक्रमांक उपलब्धकराई गई विभिन्न कल्याण सुविधाओं सांविधिक ( संविधि विनिर्दिष्ट करें)

कीप्रकृति

झ. सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत प्रसूति लाभ:

(क) स्थापना, चिकित्सा एवं पैरा- चिकित्सा स्टाफ का ब्यौरेः

01. स्थापना के खुलने की तारीख

02. बंद होने की तारीख , यदि बंद हो तो

03. चिकित्सा अधिकारी का नाम

03(एक) चिकित्सा अधिकारी की योग्यता

03(दो) क्याचिकित्सा अधिकारी (खान अथवा सकर्स) में है?

03(तीन) क्या वह अंशकालिक है , तो कितनी बार स्थापना का दौरा करता/करती है?

03(चार) क्या वहां कोई अस्तपाल है?

03(पांच) यदि हां, तो कितने बिस्तर उपलब्ध है?

03(छह) क्या वहां कोई महिला चिकित्सक है?

03(सात) यदि हां , तो उसकी योग्यता क्या है?

03(आठ) क्या वहां कोई योग्य दाई है?

03(नौ) क्याशिशुगृह की सुविधा उपलब्ध कराई गई है?

(ख) सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत अनुमोदित अवकाश

01. स्थापना में महिला कर्मचारियों की कुल संख्या

02 . अनुमोदित अवकाश के दिनों की कुल संख्या

03. कर्मचारियों की संख्या, जिन्हें प्रसूति अवकाश दिया गया । ईएसआई द्वारा

लाभान्वित हुए

घोषणा

यह प्रमाणित किया जाता है कि उपरोक्त सूचना सत्य एवं सही है तथा यह भी प्रमाणित किया जाता है कि मैंने मेरे स्थापना पर लागू होने वाले श्रम कानूनों के सभी उपबंधों का अनुपालन किया है।

तारीख

स्थान

यहा हस्ताक्षर करें मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(95)

प्ररूप - अड़तीस

[नियम 30 के उप- नियम (1 ) (2) , (3) देखिए]

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 138 की उप- धारा (1 ) के अधीन अपराध की प्रशमन के लिए पहली बार अपराध करने वाले नियोक्ता को सूचना

तारीख:

सूचना क्रमांक

कारण हैं, कि आपने , मेरे समक्ष रखे गए रिकार्ड एवं दस्तावेजों के आधार पर , अधोहस्ताक्षरी के पास यह मानने के लिए ..... स्थापना के नियोक्ता होने के कारण (पंजीकरण संख्या ... ) , सहिता के उपबंधों अथवा स्कीमों अथवा नियमों अथवा उनके अधीन बनाए गए विनियमों के उल्लंघन में नीचे दिए गए ब्यौरे अनुसार अपराध किया गया है: -

भाग - एक

1. व्यक्ति का नामः

2. स्थापना का नाम एवं पताः

3. स्थापना की पंजीकरण संख्या:

4. अपराध के ब्यौरे :

5. संहिता/स्कीम/नियमों/विनियमों के उपबंध जिनके अधीन अपराध प्रतिबद्ध किया गया है:

6. अपराध के संयोजन के लिए भुगतान की जाने वाली अपेक्षित प्रशमन राशि:

7. कॉलम 6 में विनिर्दिष्ट राशि जमा करने के लिए खाते का नाम एवं ब्यौरेः

भाग - दो

उपरोक्त के दृष्टिगत् ऊपर उल्लिखित राशि को भुगतान करने के लिए इस सूचना के जारी होने की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर भुगतान करने तथा इस सूचना के भाग - तीन में भरकर आवेदन को लौटाने का विकल्प है।

उक्त राशि के प्रकरण में विनिर्दिष्ट समय के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो इस संबंध में बिना कोई अवसर दिए अभियोजन दायर करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

(प्रशमन अधिकारी के हस्ताक्षर) तारीखः

स्थानः मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(96)

भाग -तीन

[नियम 30 (2) देखिए]

अपराध की प्रशमन' के लिए धारा 138 की उप- धारा (4) के अधीन आवेदन

तारीख

संदर्भ: सूचना क्रमांक

अधोहस्ताक्षरी ने भाग- एक के कॉलम 6 में विनिर्दिष्ट की गई सम्पूर्ण राशि जमा कर दी गई है तथा भाग -एक में उल्लिखित अपराधों के प्रशमन करने के अनुरोध के साथ भुगतान का ब्यौरे नीचे दिया गया है।

1. जमा की गई प्रशमन राशि का ब्यौरे ( इलैक्ट्रॉनिक ढंग से जारी रसीद की प्रति संलग्न की जानी है):

2. अभियोजन , के ब्यौरे, यदि ऊपर लिखित अपराधों के उल्लंघन के लिए दायर किया गया हो, का ब्यौरेः

3. क्या यह अपराध प्रथम अपराध है अथवा आवेदक ने इस अपराध से पहले कोई अन्य अपराध किया था, यदि किया था तो उस अपराध का पूर्ण ब्यौरे दें:

4. अन्य कोई जानकारी जो आवेदक देना चाहता हो ।

आवेदक के हस्ताक्षर (नामएवं पदनाम) तारीखः

स्थानः

भाग- चार

संघटन प्रमाण-पत्र

[नियम 30 (3) देखिए

तारीखः

संदर्भ: सूचना क्रमांक

यह प्रमाणित किया जाता है, कि संहिता की धारा 133 की उप-धारा श्री (आवेदक) , दिनांकः का सूचना क्रमांक के प्रशमन के लिए (रुपए प्रशमन कर दिया गया है। के अधीन अपराध , जिसके संबंध में (स्थापना का नाम एवं पंजीकरण संख्या) के नियोक्ता को जारी किया गया था , उक्त सूचना के अनुपालन में अपराधों की पूर्ण राशि का भुगतान करने के कारण

(हस्ताक्षर)

अधिकारी का नाम एवं पदनाम तारीखः

स्थानः 436(9

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

प्ररूप - उनतालीस

[नियम 31 (3 ) (ख) देखिए]

कैरियर केन्द्रों को रिक्तियां रिपोर्ट करने के लिए प्ररूप

(प्रत्येक प्रकार के पदों के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रथक प्ररूप)

नियोक्ताका ब्यौरे

1

नामः

पिन संहिता सहित पताः

दूरभाष नं.:

मोबाइल नं.:

ई-मेल पताः

स्थापना का नाम एवं प्रकार (केन्द्र सरकार, राज्य सरकार , पीएसयू, स्वशासी, निजी, इत्यादि)

संहिता के अधीन स्थापना की पंजीकरण संख्या:

आर्थिक क्रियाकलापों के ब्यौरे

2. मांगपत्र अधिकारी का ब्यौराः

नामः

पदनामः

दूरभाष नं.:

मोबाइल नं .:

ई-मेल पता:

3. रिक्ति (रिक्तियों) के ब्यौरे :

(क) भरी जाने वाली रिक्ति ( रिक्तियों) का पदनाम/ नामावली

(ख) पद के कर्तव्यों का वर्णन ( रोजगार भूमिका/कार्यप्रणाली भूमिका)

वांछनीय/प्राथमिकता योग्य

अनिवार्य

(ग) अपेक्षित योग्यताएं/कौशल (शैक्षणिक, तकनीकी, अनुभव)

(एक) शैक्षणिक योग्यता

(दो) तकनीकी योग्यता

(तीन) कौशल

(चार) अनुभव

(घ) आयु सीमा , यदि कोई हो (आवेदन करने की अंतिम तारीख को आयु )

(ङ) प्राथमिकताएं (जैसेकि भूतपूर्व सैनिक, दिव्यांग व्यक्ति, महिलाएं इत्यादि) यदि कोई हों। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(98)

पदों की संख्या

(च) नियोजन की कालावधि

(एक) 3-6 माह

(दो) 6-12माह

(तीन) 12 माह तथा अधिक

4. क्यारिक्तियों को भरने में अनुसूचित जाति ( एससी), अनुसूचित जनजाति ( एसटी) , आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ( ईडब्ल्यूएस) , अन्य पिछड़ा वर्ग ( ओबीसी) , भूतपर्व सैनिक तथा दिव्यांग व्यक्ति (पीडब्ल्यूडी), इत्यादि जैसे व्यक्तियों की किसी श्रेणी को आरक्षण /प्राथनिकता देने की व्यवस्था करने का कोई दायित्व है: हों/नहीं (यदि हां, तो नीचे दिए गए ब्यौरे के अनुसार व्यक्तियों की ऐसी श्रेणियों द्वारा भरी जाने वाली रिक्तियों की संख्या बताई जाए)

श्रेणी

भरी जाने वाली रिक्तियों की संख्या

कुल

(क) अनुसूचित जाति

*प्राथमिकता अभ्यर्थियों द्वारा (केन्द्रसरकार की रिक्तियों के लिए लागू) (ख) अनुसूचित जनजाति

(ग)अन्य पिछड़ा वर्ग

(घ) आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग

(ङ) भूतपूर्व सैनिक

(च) दिव्यांग व्यक्ति (पीडब्ल्यूडी)

(छ) महिलाएं

(ज) अन्य (विनिर्दिष्ट करें)

6. वेतन एवं भत्तेः सरकारी रिक्तियों के लिए अन्य ब्यौरे के साथ मूल वेतन/प्रतिमाह वेतन सहित पद के वेतन स्तर/ वेतन स्केल , यदि कोई हो, का उल्लेख करें । अन्य के लिएः अन्य ब्यौरे के साथ प्रतिमाह न्यूनतम कुल वेतन, यदि कोई हो, का उल्लेख करें ।

7. कार्य स्थल (कस्बे/गांव तथा जिला का नाम , पिन संहिता इत्यादि के साथ, जिसमें यह अवस्थित है)

8. आवेदन का तरीका (ई - मेल , ऑन लाइन, लिखित में, इत्यादि) और आवेदन की प्राप्ति के लिए अंतिम तारीख

9. उस अधिकारी का ब्यौरा जिसकी आवेदन भेजे जाएं/ अभ्यर्थी सम्पर्क करें: (नाम, पदनाम, ई- मेल आईडी, पता, दूरभाष नं. , ऑन लाइन की दशा में वेबसाइट के पते का उल्लेख करें) 436

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

10. भर्ती का तरीका

(कैरियर केन्द्र, प्लेसमेंट एजेंसी , स्व प्रबंधन के माध्यम से, अन्य कोई तरीका (विनिर्दिष्ट करें) }

11.

हां नहीं

क्या कैरियर केन्द्र में पंजीकृत पात्र अभ्यर्थियों की सूची सौंपने को वरीयता देंगे।. اممیں

12. अन्य कोई प्रासंगिक जानकारी

स्थापना/नियोक्ता के प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के मुहर एवं तारीख के साथ हस्ताक्षर , नाम एवं पदनाम (कार्यालनीय उपयोग के लिए- कैरियर केन्द्र द्वारा भरा जाए)

13. कैरियर केन्द्र का नाम, पता, ई-मेल आईडी

14. रिक्तियां प्राप्त होने की तारीख

15. स्थापना का एनआईसी संहिता

16. पद का एनसीओ संहिता

17. विशिष्ट रिक्ति आईडी (नंम्बर)

कैरियर केन्द्र के प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के मुहर एवं तारीख के साथ हस्ताक्षर /नाम एवं पदनाम

टिप्पणीः

1. कैरियर केन्द्र जिसको रिक्तियां रिपोर्ट की जाती हैं, वह रिपोर्ट की गई रिक्ति को एक विशिष्ट रिक्ति रिपोर्टिंग संख्या प्रदान करेगा तथा इसे लिखित में ई-मेल अथवा डिजिटल ढंग से अथवा अन्य किसी मीडिया के माध्यम से तत्काल नियोक्ता को सूचित करेगा परन्तु किसी भी मामले में यह रिक्तियों की रिपोर्टिंग की प्राप्ति की तारीख से 3 कार्य दिवस के पश्चात नहीं करेगा।

2. कोई नियोक्ता , यदि किसी मीडिया में उस रिक्ति का विज्ञापन देता है अथवा किसी अभिकरण अथवा किसी अन्य तरीके से भर्ती करता है, तो वह उस विज्ञापन अथवा भर्ती प्रक्रिया में उस विशिष्ट रिक्ति रिपोर्टिंग . संख्या को हमेशा उल्लिखित करे।

3. कैरियर केन्द्र को पहले से दिए गए विवरणों में कोई परिवर्तन होने पर, इसकी सूचना लिखित में अथवा विधिमान्य आधिकारिक ई- मेल अथवा डिजिटल ढंग से ( पोर्टल के माध्यम सहित) जैसा भी मामला हो, समुचित कैरियर केन्द्र को दी जाएगी। मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(100)

प्ररूप -चालीस

[नियम 31 (6) देखिए

ईआईआर प्ररूप (रोजगार सूचना विवरणी)

.को समाप्त वर्ष के लिए कैरियर केन्द्र (क्षेत्रीय) को प्रस्तुत की जाने वाली वार्षिक विवरणी

सामाजिक सुरक्षा संहिता ( अध्याय -आठ रोजगार सूचना एवं अनुवीक्षण) , 2020 के अधीन प्रस्तुत की जाने वाली निम्नलिखित जानकारी अपेक्षित है

नियोक्ता का नाम एवं पता

क्यामुख्यालय है

शाखा कार्यालय है

स्थापना का प्रकार (सार्वजनिक/निजी क्षेत्र)

व्यवसाय का प्रकार / मुख्य क्रियाकलाप

संहिता के अधीन स्थापना की पंजीकरण संख्या

1. (क) रोजगार

अंशकालिक कामगारों तथा प्रशिक्षुओं को छोड़कर कार्यरत प्रोपराइटर्स/पार्टनर्स/ आकस्मिक भुगतान एवं संविदा कामगारों, आउटसोर्स कामगारों सहित स्थापना की जनशक्ति की कुल संख्या (इन आंकड़ों में वह प्रत्येक व्यक्ति शामिल होना चाहिए , जिसे मजदूरी अथवा वेतन का भुगतान किया जाता है) ।

श्रेणी

पूर्ववर्ती वर्ष के अंतिम कार्य

दिवस को

रिपोर्टाधीन वर्ष के अंतिम कार्य दिवसको

पुरुष

महिला

अन्य (ट्रांसजेंडर)

कुल:

उपरोक्त कुल में से दिव्यांग ( पीडब्ल्यूडी )

(ईआईआर- नियमित) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(101) 2. वर्ष के दौरान हुई रिक्तियों तथा कैरियर केन्द्र को रिपोर्ट की गई रिक्तियों की संख्या तथा वर्ष के दौरान भरी गई रिक्तियों की संख्या

रिपोर्टकी गई हुई रिक्ति

भरी गई

कैरियर केन्द्र

(केन्द्रीय)

कैरियर केन्द्र (क्षेत्रीय)

3 1

2

स्रोत (कैरियर केन्द्र/एनसीएस पोर्टल/ सरकारी भर्ती अभिकरण/निजी प्लेसमेंट संगठन/अन्य) 4

5

*सामाजिक सुरक्षा संहिता , 2020 (अध्याय आठ) के उपबंधों तथा इसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार।

3. जनशक्ति की कमी:

समुचित आवेदकों की कमी के कारण रिक्तियां/ पद रिक्त रह गए । व्यवसाय का नाम अथवा पद का पदनाम

कौशल/योग्यता (शैक्षणिक /तकनीकी /निर्धारित अनुभव)

2

1

रिक्त रिक्तियों /पदों की संख्या

वांछनीय

अनिवार्य

3

4

(कृपया कोई अन्य व्यवसायों को भी सूचीबद्ध करें, जिनके लिए में स्थापना को समुचित आवेदक प्राप्त करने में मुश्किल हुई थी। )

4. अगले कैलेंडर वर्ष के दौरान व्यावसायिक वर्गीकरण अपेक्षित अनुमानित जनशक्ति ( कृपया नीचे प्रत्येक व्यवसाय में कर्मचारियों की संख्या पृथक पृथक दी जाए) व्यवसाय

कर्मचारियों की संख्या

कृपया जहां तक संभव हो सेवानिवृत्ति/ विस्तार अथवा पुनर्संगठन के कारण अगले वित्तीय वर्ष के दौरान आपके द्वारा भरी जाने वाली प्रत्येक व्यवसाय में रिक्तियों की अनुमानित संख्या दें।

ब्यौरे

पुरुष

महिला

3

2

1

कुलः

अन्य

कुल

(ट्रांसजेंडर)

कुल में रो दिव्यांग (पीडब्ल्यूडी) 4

5

6 मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 28 अप्रैल 2021

436(102)

कॉलम में (ब्यौरे ) - अभियंता (मैकेनिकल) , सहायक निदेशक ( मैटलर्जिस्ट) , अनुसंधान अधिकारी (अर्थशास्त्री), पर्यवेक्षक (टेलरिंग ) , इंस्पेक्टर (सैनेटरी) , अधीक्षक ( कार्यालय) , प्रबंधक ( सेल्स) , प्रबंधक (अकांउट्स), कार्यपालक (मार्केटिंग) , डाटा एंट्री आपरेटर.. शब्दों का प्रयोग करें। जैसे वास्तविक

स्थापना के प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ता/नियोक्ता के मुहर एवं तारीख

सहित हस्ताक्षर , नाम एवं पदनाम प्रति,

कैरियर केन्द्र

टीप:- 1. यह विवरणी वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात् 30 दिन के भीतर संबंधित स्थापनाओं/नियोक्ताओं द्वारा कैरियर केन्द्र (क्षेत्रीय) को सामाजिक सुरक्षा संहिता , 2020 (अध्याय -आठ - रोजगार सूचना एवं मोनिटरिंग ) के अंतर्गत अपने दायित्व का प्रस्तुत किया जाना अपेक्षित है।

2. नियोक्ताओं से सूचना प्राप्त करने का मुख्य उद्देश्य (एक) उपलब्ध रिक्तियों/रोजगार के अवसरों; (दो) कार्मिकों का प्रकार जिनका अभाव है और ( तीन ) नौकरी चाहने वालों को व्यावसायिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए भविष्य के जॉब अवसरों का पता लगाना तथा उन्हें नियोक्ताओं से जोड़ना है। यह कौशल आवश्यकताओं का पता लगाने में भी सहायक है। नियोक्ता भी अपनी आवश्यकताओं के अनुसार समुचित अभ्यार्थी लेने के लिए कैरियर केन्द्रों पर कॉल करने में समर्थ होंगे।

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार ,

सचिन सिन्हा, प्रमुख सचिव.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित-2021 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 28 April 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2021-04-28.218.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2021-04-28.218.Extraordinary.