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Madhya Pradesh Gazette · Government of Madhya Pradesh

मध्‍यप्रदेश नगरपालिक विधि‍ ( संशोधन ) विधेयक 2021...

Published 10 August 2021

Department
विधान सभा सचिवालय
Type
Extraordinary
Gazette no.
320
Identifier
in.gazette.madhya.2021-08-10.320.Extraordinary
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

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मध्यप्रदे श

शासन

सत्यमेव जयते

मध्यप्रदेश राजपत्र

( असाधारण )

प्राधिकार से प्रकाशित

क्रमांक 320 ]

भोपाल, मंगलवार, दिनांक 10 अगस्त 2021 - श्रावण 19, शक 1943

विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश

भोपाल , दिनांक 10 अगस्त 2021

क्र. 12488 - मप्रविस - 15 - विधान-2021 .- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम-64 के उपबंधों के पालन में, मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( संशोधन ) विधेयक, 2021 ( क्रमांक 24 सन् 2021 ) जो विधान सभा में दिनांक 10 अगस्त, 2021 को पुरःस्थापित हुआ है . जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है .

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.

639 640

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021

मध्यप्रदेश विधेयक

क्रमांक २४ सन् २०२१

मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( संशोधन ) विधेयक, २०२१

मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम, १ ९ ५६ तथा मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, १ ९ ६१ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.

भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान -मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः - १. इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( संशोधन ) अधिनियम, २०२१ है .

संक्षिप्त नाम.

भाग-एक

मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम , १ ९ ५६ ( क्रमांक २३ सन् १ ९ ५६ ) का संशोधन २. मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम , १ ९ ५६ ( क्रमांक २३ सन् १ ९ ५६ ) में,-

(१ ) धारा ५ में, -

मध्यप्रदेश अधिनियम क्रमांक २३ सन् १९५६ संशोधन. का

(एक) खण्ड ( १० - क ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः- " (१० - क) " कालोनाईजर " से अभिप्रेत है , कोई व्यक्ति, जो अधिनियम के अधीन सक्षम प्राधिकारी द्वारा कालोनाईजर के रूप में रजिस्ट्रीकृत हो; " ;

(दो) खण्ड ( १० - ख ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः- " ( १० -ख ) " कालोनी " से अभिप्रेत है, किसी भूमि का भाग जिसे आवासीय या गैर आवासीय या दोनों के प्रयोजन से , भूखण्डों में विभाजित करके या उस पर अपार्टमेंट निर्मित करके विक्रय करने या अन्यथा अंतरित करने के आशय से विकसित किया गया है या वह विकास के अधीन है; ";

(तीन ) विद्यमान खण्ड ( ५७ - क) को खण्ड ( ५७ - ख ) के रूप में पुनर्क्रमांकित किया जाए और इस प्रकार पुनर्क्रमांकित खण्ड ( ५७ -ख ) के पूर्व निम्नलिखित खण्ड अन्तःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" (५७-क) " अनधिकृत कालोनी " से अभिप्रेत है , कोई कालोनी जिसे इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन आवश्यक अनुज्ञा प्राप्त किए बिना विकसित किया गया है या जो विकास के अधीन है;".

(२) धारा ८० के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

अचल अथवा चल सम्पत्ति का व्ययन.

" ८० . निगम के स्वामित्व की या उसमें निहित अथवा उसके प्रबंधन के अधीन कोई भी अचल अथवा चल सम्पत्ति का विक्रय , पट्टे, अंतरण या अन्यथा द्वारा व्ययन , राज्य सरकार द्वारा यथा विहित के सिवाय नहीं किया जाएगा .".

(३) धारा ८१ -क का लोप किया जाए.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021

640 ( 1) (४) धारा २ ९ २ - क के स्थान पर , निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" २९ २ - क. ( १ ) राज्य सरकार, कालोनाइजर के रूप में किसी व्यक्ति को रजिस्ट्रीकृत करने के लिए सक्षम प्राधिकारी पदाभिहित करेगी.

कालोनाइजर के रूप रजिस्ट्रीकरण. में ( २ ) रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन सक्षम प्राधिकारी को ऐसी रीति में किया जाएगा जैसा कि राज्य सरकार विहित करे:

परन्तु राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा , ऐसी शासकीय इकाई को, जिसे वह उचित समझे , कालोनाइजर के रूप में रजिस्ट्रीकरण से छूट दे सकेगी.

(३) सक्षम प्राधिकारी , ऐसे निबंधनों तथा शर्तों, जैसी कि राज्य सरकार द्वारा विहित की जाएं, के अतिक्रमण के लिए कालोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण निलंबित या रद्द कर सकेगाः

परन्तु कालोनाइजर को ऐसी रीति में, जैसी कि विहित की जाए, सुनवाई का अवसर दिए बिना ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.

(४) उपधारा ( ३ ) के अधीन जारी निलंबन या रद्दकरण के आदेश के विरुद्ध अपील, ऐसे प्राधिकारी के समक्ष , जैसा कि राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए, की जा सकेगी. ".

(५) धारा २९ २ - ख के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्:-

" २ ९ २ -ख. ( १ ) कालोनाइजर , आयुक्त से ऐसी रीति में, जैसी कि राज्य सरकार विहित करे, कालोनी का विकास करने के लिए अनुज्ञा प्राप्त करेगाः

कालोनियां विकसित करने के लिए अनुज्ञा.

परन्तु कालोनी का विकास करने के लिए कोई आवेदन तब तक अस्वीकार नहीं किया जाएगा जब तक कि आवेदक को सुनवाई का अवसर न दे दिया गया होः

परन्तु यह भी कि, आयुक्त द्वारा अनुज्ञा प्रदान करने से इंकार करने के आदेश के विरुद्ध अपील ऐसे प्राधिकारी को की जाएगी , जैसा कि राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए.

(२ ) (क) कालोनाइजर द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तथा निम्न आय समूह के व्यक्तियों को भी पूर्ण विकसित भूखण्ड अथवा निर्मित निवास इकाईयां उपलब्ध कराई जाएंगी.

(ख ) ऐसे भूखण्डों या निवास इकाईयों का आकार, संख्या या अवस्थिति ऐसी होगी , जैसी कि राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए.

(ग) ऐसे भूखण्डों या निवास इकाईयों का विक्रय मूल्य तथा उन व्यक्तियों जिन्हें कालोनाइजर द्वारा यह विक्रय किए जा सकते हैं, के चयन की प्रक्रिया, ऐसी होगी जैसी कि राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए.

(३) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , उपधारा ( २ ) में उल्लिखित भूखण्डों या निवास इकाईयों के अतिरिक्त या उनके बदले में, राज्य सरकार ऐसे मामलों में, जैसा कि वह उचित समझे, शुल्क अर्थात् आश्रय शुल्क अधिरोपित कर सकेगी . आश्रय शुल्क का निर्धारण, संग्रहण तथा उपयोग ऐसी रीति में किया जाएगा जैसी कि विहित की जाए.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021

640 (2)

(४) ऊपर उपधारा ( १ ) के अधीन प्रदान की गई अनुज्ञा के अनुसार, कालोनाइजर नागरिक अधोसंरचना जैसे, सड़कें, खुला स्थान , जल आपूर्ति, बिजली, सीवेज तथा आमोद - प्रमोद क्षेत्र उपलब्ध कराएगा.

(५) कालोनाइजर , उपधारा ( ४ ) में यथा उल्लिखित विकास की लागत के विरुद्ध बैंक गारण्टी या ऐसी संख्या में यथास्थिति, भूखण्डों या भवनों का बंधक प्रस्तुत करेगा. ऐसी बैंक गारण्टी या बंधक सम्पत्तियों को ऐसी रीति से, जैसी कि राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए, मुक्त किया जाएगा.

(६) कालोनाइजर, विहित रीति में , कालोनी की समस्त सही जानकारी बड़े पैमाने पर जनता के लिए प्रदर्शित करेगा.

(७) कालोनाइजर, उपधारा ( १ ) के अधीन प्रदान की गई विकास अनुज्ञा के निबंधनों तथा शर्तों का पालन करेगा.

(८) विकास पूर्ण होने पर, आयुक्त, राज्य सरकार द्वारा यथा विहित रीति में समापन प्रमाण - पत्र जारी करेगा.

(९) उपधारा ( ५ ) के सिवाय , इस धारा के उपबंध धारा २ ९ २ - क की उपधारा ( २ ) के परन्तुक में उल्लिखित इकाई पर ऐसे उपांतरण के साथ , जैसा कि राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए, लागू होंगे . ".

(६) धारा २ ९ २ - ख के पश्चात्, निम्नलिखित धारा जोड़ी जाए, अर्थात्ः-

अनुज्ञा के अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई.

" २९ २ -ख क. ( १ ) यदि धारा २ ९ २ - ख की उपधारा ( १ ) के अधीन प्रदान की गई अनुज्ञा के निबंधनों तथा शर्तों का अतिक्रमण होता है तो आयुक्त, उस सीमा तक जितना कि आवश्यक हो, राज्य सरकार द्वारा विहित रीति में, धारा २९ २ - ख की उपधारा ( ५ ) के अधीन बैंक प्रत्याभूति को भुना सकेगा या बंधक सम्पत्ति को समपहृत तथा व्ययन कर सकेगा. इस प्रकार वसूल की गई राशि, अनुज्ञा के निबंधनों तथा शर्तों को पूरा करने के लिए, ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, उपयोग की जाएगी:

परन्तु यदि समपहृत संपत्तियों के व्ययन से या बैंक प्रत्याभूति भुनाकर वसूल की गई राशि से अनुज्ञा के निबंधनों तथा शर्तों को पूरा करने के लिए आवश्यकता की पूर्ति नहीं होती है तो शेष राशि कालोनाइजर से भू- राजस्व के रूप में वसूली योग्य होगी:

परन्तु यह और कि कालोनाइजर को ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, सुनवाई का. अवसर दिए बिना ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. " .

(७) धारा २९ २ - ग के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

अपराध तथा दण्ड.

धारा २ ९ २ - ग. ( १ ) यथास्थिति, कोई भूमि स्वामी या व्यक्ति अथवा दोनों, जो इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन अनुज्ञा प्राप्त किए बिना कालोनी के विकास का कार्य करता है, तो वह अनधिकृत कालोनी विकसित करने का अपराध कारित करता है .

(२) कोई कालोनाइजर, जो धारा २ ९ २ - ख की उपधारा (४ ) में उल्लिखित प्रयोजनों के लिए अभिहित किसी भूमि का विक्रय द्वारा या अन्यथा अंतरित करता है या ऐसी भूमि पर अनुज्ञेय से भिन्न अन्य निर्माण करता है, तो वह अनुज्ञा के अतिक्रमण का अपराध कारित करता है.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021

640(3 ) (३) उपधारा ( १ ) और उपधारा ( २ ) के अधीन अपराध संज्ञेय होंगे किन्तु कोई पूछताछ या जांच या अन्वेषण , आयुक्त या उसके द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत अधिकारी द्वारा लिखित शिकायत के सिवाय नहीं कि जाएगी.

(४) जो कोई उपधारा ( १ ) और ( २ ) के अधीन कोई अपराध कारित करता है या करने का दुष्प्रेरण करता है , तो वह ऐसे कारावास से जो तीन वर्ष से कम नहीं होगा, किन्तु जो सात वर्ष तक हो सकेगा तथा जुर्माने से जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा. " .

८. धारा २ ९ २ - घ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" २९ २ - घ. ( १ ) आयुक्त, कोई सूचना प्राप्त होने पर या अन्यथा किसी अनधिकृत कालोनी की पहचान कर सकेगा.

अनधिकृत कालोनियों में नागरिक अधोसंरचना के उपबंध.

(२) आयुक्त, ऐसी कालोनी को अनधिकृत कालोनी के रूप में अवधारित करने के विरुद्ध आपत्तियां आमंत्रित करने के लिए सार्वजनिक सूचना जारी करेगा.

(३) आयुक्त, प्राप्त आपत्तियों पर, यदि कोई हों, विचार करने के पश्चात्, कारणों को कथित करते हुए, किसी कालोनी को अनधिकृत कालोनी के रूप में घोषित कर सकेगा.

(४) आयुक्त, ऐसी कालोनी का प्रारूप अभिन्यास तैयार करेगा तथा अनधिकृत कालोनी में नागरिक अधोसंरचना उपलब्ध कराने के प्रयोजन से अभिन्यास को अंतिम रूप देने के लिए हितधारकों से, ऐसी रीति में, जैसी कि विहित की जाए, आपत्तियां तथा सुझाव आमंत्रित करने के लिए एक सार्वजनिक सूचना प्रकाशित करेगा.

(५) उपधारा ( १ ) से (४ ) के अधीन कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी , यदि अनधिकृत कालोनी,-

(क) शासकीय भूमि या विकास प्राधिकरण/गृह निर्माण तथा अधोसंरचना विकास मण्डल/नागरिक स्थानीय निकायों की भूमि पर विकसित की गई है;

(ख) विकास योजना में सड़कों पार्कों, खेल के मैदानों , सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्रों, नदियों, नालियों के क्षेत्रों, आमोद- प्रमोद के क्षेत्रों तथा जल निकायों के रूप में अभिहित क्षेत्र पर अवस्थित है ;

(ग) राज्य तथा राष्ट्रीय राजमार्गों के वर्जित क्षेत्र में अथवा किसी केन्द्रीय या राज्य विधि के अधीन अधिसूचित किसी अन्य वर्जित क्षेत्र पर विकसित की गई है;

(घ) ऐसे किसी क्षेत्र में है जो कि राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए.

(६) उपधारा ( ४) के अधीन प्रारूप अभिन्यास ( ले आउट ) मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम , १ ९ ७३ ( क्रमांक २३ सन् १ ९ ७३ ) तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अतिउत्तम संभव अनुपालन में तैयार किया जाएगा.

(७) आयुक्त, कालोनी के हितधारकों को सुनेगा तथा आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के पश्चात् अनधिकृत कालोनी के अभिन्यास ( ले आउट ) को अंतिम रूप देगा तथा नागरिक अधोसंरचना उपलब्ध कराने के लिए प्राक्कलन, ऐसी रीति में , जैसी कि राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए, करेगा:

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021

640(4)

परन्तु ऐसी अधिसूचना धारा २९ २ - ग की उपधारा ( ३ ) के अधीन आयुक्त द्वारा लिखित शिकायत किए जाने के पश्चात् ही जारी की जाएगी.

(८) आयुक्त, हितधारकों से, ऐसी रीति में, जैसी कि राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए, विकास शुल्क अवधारित करने तथा संग्रह करने के लिए प्राधिकृत होगाः

परन्तु नागरिक अधोसंरचना उपलब्ध कराने की लागत निगम से उपलब्ध होने वाली निधि में से भी प्राप्त हो सकेगी या जैसा कि राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए.

(९) आयुक्त, उस व्यक्ति की सम्पत्तियों को जिसने धारा २ ९२ - ग की उपधारा ( १ ) तथा ( २ ) के अधीन अपराध कारित किया है, परिलक्षित कर सकेगा तथा कुर्क कर सकेगा , चाहे ऐसी सम्पत्ति कालोनी में या कहीं बाहर अवस्थित है. इस प्रकार कुर्क की गई सम्पत्तियों का निराकरण नागरिक अधोसंरचना के विकास की लागत प्राप्त करने के लिए किया जाएगा . उसकी कुर्की तथा विक्रय की रीति ऐसे होगी जैसी कि राज्य सरकार द्वारा विहित की जाएः

परन्तु ऐसे आदेश के विरुद्ध अपील ऐसे प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी जैसा कि राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए. ".

धारा २९ २ - घ का लोप किया जाए.

(९)

(१० ) धारा २ ९ २ -ङ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" २ ९ २ -ङ ( १ ) मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम , १ ९७३ तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, धारा २ ९ २ - घ के अधीन कालोनी का अभिन्यास ( ले आउट ) , लागू विकास योजना के अनुसार है ऐसा समझा जाएगा .

अनधिकृत कालोनियों में अभिन्यास ( ले आउट ) तथा भवन अनुज्ञा का नियमितिकरण.

(२) यथास्थिति, भूखण्ड अथवा मकान का स्वामी, ऐसी कालोनी के लिए यथाविहित शर्तों को पूर्ण करने पर ही भवन निर्माण , पुनर्निर्माण अथवा प्रशमन की अनुज्ञा के लिए आवेदन करने हेतु पात्र होगा.".

धारा २ ९ २ - च का लोप किया जाए.

(११)

धारा २९ २ - छ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

(१२)

अनधिकृत कालोनी के विकास के विरुद्ध कार्रवाई न करने के लिए दण्ड.

" २९ २ - छ. आयुक्त के अधीनस्थ कोई अधिकारी या सेवक जिसे उसके द्वारा किसी अनधिकृत कालोनी निर्माण में किसी सन्निर्माण का या तो निरीक्षण करने, रिपोर्ट देने , रोकने या हटाने के लिये प्राधिकृत किया गया है , जानबूझकर ऐसी अनधिकृत कालोनी के विकास या उसमें सन्निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई करने में चूक करता है या अनधिकृत कालोनी निर्माण या उसमें अनधिकृत सन्निर्माण को हटाने के लिये पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के दायित्वाधीन कोई पुलिस अधिकारी , पर्याप्त संरक्षण और सहायता उपलब्ध नहीं कराता है तो वह सादा करावास से, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा , या दोनों से, दण्डित किया जाएगा:

परन्तु इस संबंध में आयुक्त द्वारा लिखित शिकायत के सिवाय इस धारा के अधीन पुलिस अधिकारी द्वारा कोई पूछताछ या जांच या अन्वेषण नहीं किया जाएगा. ".

640(5)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021

धारा ३०८ - क के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

(१३)

" ३०८ - क. (१ ) इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किन्हींनियमों या बनाई गई उपविधियों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , आयुक्त, अनुज्ञा के बिना या प्रदान की गई अनुज्ञा के प्रतिकूल भवनों का सन्निर्माण करने के अपराध का प्रशमन कर सकेगा, यदि ऐसा सन्निर्माण ,-

अनुज्ञा के बिना या अनुज्ञा के प्रतिकूल भवनों के सन्निर्माण के अपराधों का किया प्रशमन जाना.

नियमित भवन पंक्ति को प्रभावित नहीं करता है;

(क)

(ख) राज्य सरकार द्वारा पर्वतीय स्थान या पर्यटन महत्व या पारिस्थितिकी की दृष्टि से संवेदनशील स्थान के रूप में अधिसूचित क्षेत्र के भीतर नहीं आता है;

वाहनों की पार्किंग करने के लिए विनिर्दिष्ट क्षेत्र के भीतर नहीं आता है ;

(ग)

(घ) सड़क की सीमाओं के भीतर या सार्वजनिक सड़कों के सरेखण को प्रभावित करने वाले क्षेत्र के भीतर नहीं आता है ;

जल निकायों के लिए विनिर्दिष्ट क्षेत्र के भीतर नहीं आता है;

( ङ)

(च) नदी किनारे से तीस मीटर या ऐसी और अतिरिक्त दूरी के भीतर नहीं आता है , जैसी कि संबद्ध नगर के मास्टर प्लान में विनिर्दिष्ट की जाए;

किसी नाले और जल धारा के क्षेत्र के भीतर नहीं आता है ;

(छ)

(ज) संरचनात्मक और अग्नि सुरक्षा को प्रभावित नहीं करता है:

परन्तु अनधिकृत निर्माण से संबंधित मामलों में , जिनमें अनधिकृत कालोनियों में हुए अनधिकृत निर्माण सम्मिलित हैं, के प्रशमन में फीस ऐसी दर से तथा ऐसी शर्तों पर जैसी कि राज्य सरकार द्वारा विहित की जाएं प्रभारित की जाएगी:

परन्तु यह और कि कोई व्यक्ति जो किसी भवन या भूमि, जिस पर सन्निर्माण किया गया है, कोई अधिकार नहीं रखता है , प्रशमन के लिए आवेदन नहीं करेगा .

(२ ) अनधिकृत निर्माण , जिसमें सीमांत खुले स्थानों में किया गया निर्माण सम्मिलित है, विहित फर्श क्षेत्र अनुपात के अतिरिक्त, ३० प्रतिशत की सीमा तक प्रशमन योग्य होगा. ".

भाग-दो

मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम , १ ९ ६१ ( क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ ) का संशोधन

मध्यप्रदेश ३. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, १ ९ ६१ ( क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ ) में, -

अधिनियम क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ कासंशोधन.

(१) धारा ३ में, -

(एक) खण्ड (५ -ख ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-

" (५ - ख ) " कालोनाइजर " से अभिप्रेत है, कोई व्यक्ति, जो अधिनियम के अधीन सक्षम प्राधिकारी द्वारा कालोनाइजर के रूप में रजिस्ट्रीकृत हो; " ;

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021

640 (6)

(दो) खण्ड ( ५ - ग ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः- " (५ -ग) "कालोनी" से अभिप्रेत है, किसी भूमि का भाग जिसे आवासीय या गैर आवासीय या दोनों के प्रयोजन से, भूखण्डों में विभाजित करके या उस पर अपार्टमेंट निर्मित करके विक्रय करने या अन्यथा अंतरित करने के आशय से विकसित किया गया है या वह विकास के अधीन है;" ;

(तीन) विद्यमान खण्ड ( ३७ - क) को उपधारा ( ३७- ख ) के रूप में पुनर्क्रमांकित किया जाए और इस प्रकार पुनर्क्रमांकित खण्ड ( ३७ - ख ) के पूर्व निम्नलिखित खण्ड अन्तःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः- " (३७-क) " अनधिकृत कालोनी " से अभिप्रेत है, कोई कालोनी जिसे इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन आवश्यक अनुज्ञा प्राप्त किए बिना विकसित किया गया है या जो विकास के अधीन है;".

(२) धारा १०१ का लोप किया जाए.

(३) धारा १० ९ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

अचल अथवा चल सम्पत्ति का व्ययन.

" १०९ . परिषद् के स्वामित्व की या उसमें निहित अथवा उसके प्रबंधन के अधीन कोई भी अचल अथवा चल सम्पत्ति का विक्रय पट्टे , अंतरण या अन्यथा द्वारा व्ययन , राज्य सरकार द्वारा यथाविहित के सिवाय नहीं किया जाएगा. ".

(४) धारा १८७ -क के स्थान पर , निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" १८७- क. ( १ ) इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या बनाई गई उपविधियों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, सक्षम प्राधिकारी अनुज्ञा के बिना या प्रदान की गई अनुज्ञा के प्रतिकूल भवनों का सन्निर्माण करने के अपराध का प्रशमन कर सकेगा, यदि ऐसा सन्निर्माण, -

अनुज्ञा के बिना या अनुज्ञा के प्रतिकूल भवनों के सन्निर्माण के अपराधों का प्रशमन किया जाना.

नियमित भवन पंक्ति को प्रभावित नहीं करता है;

(क)

(ख) राज्य सरकार द्वारा पर्वतीय स्थान या पर्यटन महत्व या पारिस्थितिकी की दृष्टि से संवेदनशील स्थल के रूप में अधिसूचित क्षेत्र के भीतर नहीं आता है;

(ग) वाहनों की पार्किंग करने के लिए विनिर्दिष्ट क्षेत्र के भीतर नहीं आता है ;

(घ) सड़क की सीमाओं के भीतर या सार्वजनिक सड़कों के सरेखण को प्रभावित करने वाले क्षेत्र के भीतर नहीं आता है ;

जल निकायों के लिए विनिर्दिष्ट क्षेत्र के भीतर नहीं आता है ;

(ङ)

(च) नदी किनारे से तीस मीटर या ऐसी और अतिरिक्त दूरी के भीतर नहीं आता है जैसी कि संबद्ध नगर के मास्टर प्लान में विनिर्दिष्ट की जाए;

किसी नाले और जल धारा के क्षेत्र के भीतर नहीं आता है ;

(छ)

(ज) संरचनात्मक और अग्नि सुरक्षा को प्रभावित नहीं करता है:

640 (7)

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021

परन्तु अनधिकृत निर्माण से संबंधित मामलों में , जिनमें अनधिकृत कालोनियों में हुए अनधिकृत निर्माण सम्मिलित हैं, के प्रशमन में फीस ऐसी दर से तथा ऐसी शर्तों पर जैसी कि राज्य सरकार द्वारा विहित की जाएं प्रभारित की जाएगीः

परन्तु यह और कि कोई व्यक्ति जो किसी भवन या भूमि जिस पर सन्निर्माण किया गया है, कोई अधिकार नहीं रखता है, प्रशमन के लिए आवेदन नहीं करेगा.

(२) अनधिकृत निर्माण, जिसमें सीमांत खुले स्थानों में किया गया निर्माण सम्मिलित है , विहित फर्श क्षेत्र अनुपात के अतिरिक्त, ३० प्रतिशत की सीमा तक प्रशमन योग्य होगा.".

(५) धारा ३३ ९ - क के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" ३३ ९ -क. ( १ ) राज्य सरकार कालोनाइजर के रूप में किसी व्यक्ति को रजिस्ट्रीकृत करने के लिए सक्षम प्राधिकारी पदाभिहित करेगी.

कालोनाइजर के रूप में रजिस्ट्रीकरण.

(२) रजिस्ट्रीकरण के लिए आवेदन सक्षम प्राधिकारी को ऐसी रीति में किया जाएगा जैसा कि राज्य सरकार विहित करे:

परन्तु राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा , ऐसी शासकीय इकाई, जिसे वह उचित समझे, कालोनाइजर के रूप में रजिस्ट्रीकरण से छूट दे सकेगी.

(३) सक्षम प्राधिकारी , ऐसे निबंधनों तथा शर्तों, जैसी कि राज्य सरकार द्वारा विहित की जाएं, के अतिक्रमण के लिए कालोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण निलंबित या रद्द कर सकेगाः

परन्तु कालोनाइजर को ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, सुनवाई का अवसर दिए बिना ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.

(४) उपधारा ( ३ ) के अधीन जारी निलंबन या रद्दकरण के. आदेश के विरुद्ध अपील, ऐसे प्राधिकारी के समक्ष , जैसा कि राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए, की जा सकेगी . ".

(६ ) धारा ३३ ९ - ख के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" ३३ ९- ख. ( १ ) कालोनाइजर, सक्षम प्राधिकारी से ऐसी रीति में, जैसी कि राज्य सरकार विहित करे, कालोनी का विकास करने के लिए अनुज्ञा प्राप्त करेगाः

कालोनियां विकसित करने के लिए अनुज्ञा.

परन्तु कालोनी का विकास करने के लिए कोई आवेदन तब तक अस्वीकार नहीं किया जाएगा जब तक कि आवेदक को सुनवाई का अवसर न दे दिया गया होः

परन्तु यह और कि, सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुज्ञा प्रदान करने से इंकार करने के आदेश के विरुद्ध अपील ऐसे प्राधिकारी को की जाएगी, जैसा कि राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए.

(२ ) (क) कालोनाइजर द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तथा निम्न आय समूह के व्यक्तियों को भी पूर्ण विकसित भूखण्ड अथवा निर्मित निवास इकाईयां उपलब्ध कराई जाएंगी .

(ख) ऐसे भूखण्डों या निवास इकाईयों का आकार, संख्या या अवस्थिति ऐसी होगी , जैसी कि राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए;

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021

640 (8)

(ग) ऐसे भूखण्डों या निवास इकाईयों का विक्रय मूल्य तथा उन व्यक्तियों जिन्हें कालोनाइजर द्वारा यह विक्रय किए जा सकते हैं, के चयन की प्रक्रिया, ऐसी होगी जैसी कि राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए.

(३ ) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, उपधारा ( २ ) में उल्लिखित भूखण्डों या निवास इकाईयों के अतिरिक्त या उनके बदले में, राज्य सरकार ऐसे मामलों में, जैसा कि वह उचित समझे , शुल्क अर्थात् आश्रय शुल्क अधिरोपित कर सकेगी. आश्रय शुल्क का निर्धारण, संग्रहण तथा उपयोग ऐसी रीति में किया जाएगा जैसी कि विहित की जाए.

( ४) ऊपर उपधारा ( १ ) के अधीन प्रदान की गई अनुज्ञा के अनुसार, कालोनाइजर नागरिक अधोसंरचना जैसे, सड़कें, खुला स्थान, जल आपूर्ति, बिजली , सीवेज तथा आमोद- प्रमोद क्षेत्र उपलब्ध कराएगा.

(५) कालोनाइजर, उपधारा (४ ) में यथा उल्लिखित विकास की लागत के विरुद्ध बैंक गारण्टी या ऐसी संख्या में यथास्थिति भूखण्डों या भवनों का बंधक प्रस्तुत करेगा. ऐसी बैंक गारण्टी या बंधक सम्पत्तियों को ऐसी रीति से, जैसी कि राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए, मुक्त किया जाएगा.

(६) कालोनाइजर विहित रीति में, कालोनी की समस्त सही जानकारी बड़े पैमाने पर जनता के लिए प्रदर्शित करेगा.

(७) कालोनाइजर, कालोनी विकसित करने के लिए उपधारा ( १ ) के अधीन दी गई अनुज्ञा के निबंधनों तथा शर्तों का पालन करेगा.

(८) विकास पूर्ण होने पर, आयुक्त, राज्य सरकार द्वारा यथा विहित रीति में समापन प्रमाण पत्र जारी करेगा.

(९) उपधारा ( ५ ) के सिवाय , इस धारा के उपबंध, धारा ३३ ९ - क की उपधारा ( २ ) के परन्तुक में उल्लिखित इकाई पर , ऐसे उपांतरणों के साथ , जैसा कि विहित किया जाए, लागू होंगे.

(७) धारा ३३ ९ -ख के पश्चात्, निम्नलिखित धारा जोड़ी जाए, अर्थात्ः-

अनुज्ञा के अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई.

" ३३ ९ -ख क. ( १ ) यदि धारा ३३९ - ख की उपधारा ( १ ) के अधीन प्रदान की गई अनुज्ञा के निबंधनों तथा शर्तों का अतिक्रमण होता है तो सक्षम प्राधिकारी , उस सीमा तक जितना कि आवश्यक हो, राज्य सरकार द्वारा विहित रीति में, धारा ३३९ - ख की उपधारा ( ५ ) के अधीन बैंक प्रत्याभूति को भुना सकेगा या बंधक संपत्ति को समपहृत तथा व्ययन कर सकेगा . इस प्रकार वसूल की गई राशि, अनुज्ञा के निबंधनों तथा शर्तों को पूरा करने के लिए, ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, उपयोग की जाएगीः

परन्तु यदि समपहृत संपत्तियों के व्ययन से या बैंक प्रत्याभूति भुनाकर वसूल की गई राशि से अनुज्ञा के निबंधनों तथा शर्तों को पूरा करने के लिए आवश्यकता की पूर्ति नहीं होती है तो शेष राशि कालोनाइजर से भू राजस्व के रूप में वसूली योग्य होगी :

परन्तु यह और कि कालोनाइजर को ऐसी रीति में जैसी कि विहित की जाए, सुनवाई का अवसर दिए बिना ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी ." .

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(८) धारा ३३ ९ - ग के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

अपराध तथा दण्ड.

" ३३ ९ - ग. ( १ ) यथास्थिति, कोई भूमि स्वामी या व्यक्ति अथवा दोनों , जो इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन अनुज्ञा प्राप्त किए बिना कालोनी के विकास का कार्य करता है, तो वह अनधिकृत कालोनी विकसित करने का अपराध कारित करता है.

कोई कालोनाइजर, जो धारा ३३ ९ - ख की उपधारा ( ४ ) में उल्लिखित प्रयोजनों के लिए अभिहित

(२)

किसी भूमि का विक्रय द्वारा या अन्यथा अंतरित करता है या ऐसी भूमि पर अनुज्ञेय से भिन्न अन्य निर्माण करता है, तो वह अनुज्ञा के अतिक्रमण का अपराध कारित करता है.

(३) उपधारा ( १ ) और उपधारा ( २ ) के अधीन अपराध संज्ञेय होंगे किन्तु कोई पूछताछ या जांच याअन्वेषण, सक्षम प्राधिकारी या उसके द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत अधिकारी द्वारा लिखित शिकायत के सिवाय नहीं की जाएगी .

(४) जो कोई उपधारा ( १ ) और ( २ ) के अधीन कोई अपराध कारित करता है या करने का दुष्प्रेरण करता है, तो वह ऐसे कारावास से जो तीन वर्ष से कम नहीं होगा, किन्तु जो सात वर्ष तक हो सकेगा तथा जुर्माने से जो दस लाख रूपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा . " .

(९) धारा ३३ ९ - घ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

" ३३ ९ -घ. ( १ ) सक्षम प्राधिकारी, कोई सूचना प्राप्त होने पर या अन्यथा किसी अनधिकृत कालोनी की पहचान कर सकेगा.

अनधिकृत कालोनियों में नागरिक अधोसंरचना के उपबंध.

(२) सक्षम प्राधिकारी , ऐसी कालोनी को अनधिकृत कालोनी के रूप में अवधारित करने के विरूद्ध आपत्तियां आमंत्रित करने के लिए सार्वजनिक सूचना जारी करेगा.

(३) सक्षम प्राधिकारी , प्राप्त आपत्तियों पर, यदि कोई हों , विचार करने के पश्चात्, कारणों को कथित करते हुए, किसी कालोनी को अनधिकृत कालोनी के रूप में घोषित कर सकेगा.

(४) सक्षम प्राधिकारी ऐसी कालोनी का अभिन्यास प्रारूप तैयार करेगा तथा कालोनी में नागरिक अधोसंरचना उपलब्ध कराने के प्रयोजन से अभिन्यास को अंतिम रूप देने के लिए हितधारकों से, ऐसी रीति में, जैसी कि विहित की जाए, आपत्तियां तथा सुझाव आमंत्रित करने के लिए एक सार्वजनिक सूचना प्रकाशित करेगा.

उपधारा ( १ ) से (४ ) के अधीन कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, यदि अनधिकृत कालोनी, -

(५)

(एक) शासकीय भूमि या विकास प्राधिकरण/गृह निर्माण तथा अधोसंरचना विकास मण्डल /नागरिक स्थानीय निकायों की भूमि पर विकसित की गई है;

(दो) विकास योजना में सड़कों, पार्कों, खेल के मैदानों, सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्रों, नदियों, नालियों के क्षेत्रों, आमोद- प्रमोद के क्षेत्रों तथा जल निकायों के रूप में अभिहित क्षेत्र पर अवस्थितहै ;

(

तीन ) राज्य तथा राष्ट्रीय राजमार्गों के वर्जित क्षेत्र में अथवा किसी केन्द्रीय या राज्य विधि के अधीन अधिसूचित किसी अन्य ऐसे वर्जित क्षेत्र पर विकसित की गई है;

(चार ) ऐसे किसी क्षेत्र में है जो कि राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए.

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(६) उपधारा ( ४ ) के अधीन ले अभिन्यास ( ले आउट) प्रारूप मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, १ ९७३ (क्रमांक २३ सन् १ ९७३ ) तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अतिउत्तम संभव अनुपालन में तैयार किया जाएगा.

( ७) सक्षम प्राधिकारी , कालोनी के हितधारकों को सुनेगा तथा आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के पश्चात्, अनधिकृत कालोनी के अभिन्यास ( ले आउट ) को अंतिम रूप देगा तथा नागरिक अधोसंरचना उपलब्ध कराने के लिए प्राक्कलन ऐसी रीति में, जैसी कि राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए, करेगाः

परन्तु ऐसी अधिसूचना धारा ३३ ९ - ग की उपधारा ( ३ ) के अधीन सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिखित शिकायत किए जाने के पश्चात् ही जारी की जाएगी.

( ८) सक्षम प्राधिकारी , हितधारकों से, ऐसी रीति में, जैसी कि राज्य सरकार द्वारा विहित की जाए, विकास शुल्क अवधारित करने तथा संग्रह करने के लिए प्राधिकृत होगाः

परन्तु नागरिक अधोसंरचना उपलब्ध कराने की लागत निगम से उपलब्ध होने वाली निधि में से भी प्राप्त हो सकेगी या जैसा कि राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए.

(९ ) सक्षम प्राधिकारी , उस व्यक्ति की सम्पत्तियों को जिसने धारा ३३ ९ - ग की उपधारा ( १ ) तथा ( २ ) के अधीन अपराध कारित किया है, परिलिक्षित कर सकेगा तथा कुर्क कर सकेगा, चाहे ऐसी सम्पत्ति कालोनी में या कहीं बाहर अवस्थित है. इस प्रकार कुर्क की गई सम्पत्तियों का निराकरण नागरिक अधोसंरचना के विकास की लागत प्राप्त करने के लिए किया जाएगा. उसकी कुर्की तथा विक्रय की रीति ऐसी होगी जैसी कि राज्य सरकार द्वारा विहित की जाएः

परन्तु ऐसे आदेश के विरूद्ध अपील ऐसे प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी जैसा कि राज्य सरकार द्वारा विहित किया जाए. ".

धारा ३३ ९ - घ क का लोप किया जाए.

(१०)

धारा -३३ ९ ङ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

(११ )

अनधिकृत

कालोनियों में

" ३३ ९ - ङः ( १ ) मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, १ ९७३ तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी , धारा ३३ ९ - घ के अधीन कालोनी का अभिन्यास (ले अभिन्यास ( ले

आउट) , लागू विकास योजना के अनुसार है ऐसा समझा जाएगा.

आउट ) तथा भवन

अनुज्ञाका

नियमितिकरण.

(२) यथास्थिति, भूखण्ड अथवा मकान का स्वामी , ऐसी कालोनी के लिए यथाविहित शर्तों को पूर्ण करने पर ही भवन निर्माण , पुनर्निर्माण अथवा प्रशमन की अनुज्ञा के लिए आवेदन करने हेतु पात्र होगा. ".

धारा-३३ ९ -च का लोप किया जाए.

(१२) मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021

640 ( 11) धारा ३३ ९ - छ के स्थान पर , निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-

(१३ )

अनधिकृत कालोनी के विकास के विरूद्ध कार्रवाई न करने के लिए दण्ड.

" ३३ ९ - छ. सक्षम प्राधिकारी के अधीनस्थ कोई अधिकारी या सेवक जिसे उसके द्वारा किसी अनधिकृत कालोनी निर्माण में किसी सन्निर्माण का या तो निरीक्षण करने , रिपोर्ट देने , रोकने या हटाने के लिये प्राधिकृत किया गया है, जानबूझकर ऐसी अनधिकृत कालोनी के विकास या उसमें सन्निर्माण के विरूद्ध कार्रवाई करने में चूक करता है या अनधिकृत कालोनी निर्माण या उसमें अनधिकृत सन्निर्माण को हटाने के लिये पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के दायित्वाधीन कोई पुलिस अधिकारी, पर्याप्त संरक्षण और सहायता उपलब्ध नहीं कराता है तो वह सादा करावास से, जो तीन वर्ष तक काहो सकेगा या जुर्माने से, जो दस हजार रूपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा:

परन्तु इस संबंध में सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिखित शिकायत के सिवाय इस धारा के अधीन पुलिस अधिकारी द्वारा कोई पूछताछ या जांच या अन्वेषण नहीं किया जाएगा. ".

४. ( १ ) मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( संशोधन ) अध्यादेश , २०२१ (क्रमांक १३ सन् २०२१ ) एतद्वारा निरसित किया जाता है .

निरसन व्यावृत्ति. तथा ( २ ) उक्त अध्यादेश के निरसन के होते हुए भी उक्त अध्यादेश के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंध के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई समझी जाएगी.

उद्देश्यों और कारणों का कथन

राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) दिनांक २१-०९ -१ ९९ ८ में अधिसूचना द्वारा मध्यप्रदेश नगरपालिका ( कालोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण निबंधन एवं शर्तें ) नियम , १ ९९८ में नियम १५ - क को अन्तःस्थापित करके सरकार द्वारा यथा नियत प्रशमन शुल्क के संदाय पर, जहां स्वत्व विलेख उन भूखण्ड धारकों में निहित होता है, जिन्होंने इन कालोनियों में भवन निर्माण किया है, नियमों एवं विनियमों में छूट देते हुए दिनांक ३१-०६-१९९ ८ तक अनधिकृत कालोनी तथा भूखण्डों परं किए गए निर्माण को नियमित करने की योजना जारी की गई थी ।

२. राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश राजपत्र ( असाधारण ) में तारीख ३१-०१-२००३ , ०३-०९ -२०१३ एवं १ ९ - ०५-२०१७ को अधिसूचना प्रकाशित कर योजना की समय - सीमा को क्रमशः ३०-०६-२००२, ३१-१२-२०१२ एवं ३१-१२-२०१६ तक बढ़ाया था और उक्त नियम में आदेशित किया गया कि विकास योजना सड़क, उद्यानों, खेल के मैदानों, सांस्कृतिक विरासतों के क्षेत्रों, नदी तालाब या नालों के क्षेत्र , हरित क्षेत्र या आमोद- प्रमोद के क्षेत्र में स्थित अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण नहीं किया जाएगा. नियम १५ - क के अधीन प्रमुख रूप से ६८७६ अनधिकृत कालोनियों को नियमितीकरण के लिए प्रकाशित किया गया तथा अंतिम अधिसूचना द्वारा ५००७ कॉलोनियों का नियमितीकरण किया गया और नियमों के अनुसार शुल्क एवं प्रशमन शुल्क प्राप्त करने के पश्चात् नगरीय स्थानीय निकायों के कब्जे में ली गई किन्तु इस दौरान मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने रिट याचिका २०१८ क्रमांक १०४१४ में दिनांक ०३-०६-२०१९ को निम्न आदेश पारित कियाः- " परिणामतः , अधिनियम के मूल उपबंध, नियम , १ ९९ ८ के नियम १५ - क के अधिकारातीत होने की घोषणा पर, उस पर की गई समस्त कार्रवाईयां अवैध घोषित की जाती हैं. आयुक्त, नगरपालिका निगम और संबंधित नगरपालिकाओं के सक्षम प्राधिकारियों को मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम, १ ९ ५६ ( क्रमांक २३ सन् १ ९ ५६ ) की धारा २९ २ घक के साथ पठित धारा २ ९ २ङ के अधीन तथा मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, १ ९ ६१ ( क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ ) की धारा ३३ ९ घक के साथ पठित धारा ३३ ९ङ के अधीन कार्रवाई शुरू करने के लिए निदेशित किया जाता है. ".

३. उपरोक्त नियम के अभिखंडित होने के कारण अनधिकृत निर्माण को ढा देने के लिए परिणामिक कार्रवाई सरकार/स्थानीय निकायों द्वारा की जाना होगी . हजारों भवनों को ढा देने का परिणाम बहुत अधिक अपव्यय होगा जिससे आमजनता को कठिनाई होगी और ऐसा विध्वंस जनता के साथ मुकदमेबाजी को आमंत्रित कर सकता है और राज्य राजकोष से बहुत व्यय होगा. नियम के अधिकारातीत घोषित किए जाने के पूर्व सरकार ने नियम १५ - क के अनुसार कई अनधिकृत कॉलोनियों एवं निर्माण को नियमित किया था और संबंधित व्यक्तियों ने बड़ी रकम संदत्त की. इस प्रकार निकायों द्वारा पूर्व में ही संग्रहीत रकम का प्रतिसंदाय राज्य में स्थानीय निकायों के विकास कार्यक्रमों को बाधित करेगा.

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४. ऐसी कठिनाइयों , बड़े वित्तीय व्यय एवं मुकदमेबाजी से बचने के लिए, सरकार ने,-

(एक) अनधिकृत कॉलोनी को परिभाषित करना;

(दो) " कालोनी" की परिभाषा को अधिक स्पष्ट करना;

(तीन) कालोनाइजर की प्रक्रिया या रजिस्ट्रीकरण और " कालोनी " के विकास के लिए अनुज्ञा का सरलीकृत करना;

(चार) कालोनी के विकास के लिए अनुज्ञा के अतिक्रमणों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए उपबंध करना;

( पांच ) नागरिक अधोसंरचना एवं सार्वजनिक स्थानों के लिए आशयित भूमि बेचे जाने या अन्यथा उपयोग किए जाने से संज्ञेय अपराध के लिए ऐसी कार्रवाई के द्वारा सुरक्षा करना;

(छह) अनधिकृत कालोनी के विकास में किए गए अपराध के लिए दण्ड उपबंधों को अधिक कड़ा बनाना;

(सात) अनधिकृत कालोनियों में नागरिक अधोसंरचना का उपबंध करने के लिए सरकार/ स्थानीय निकायों को समर्थ बनाना;

(आठ) अनधिकृत कालोनियों में भवन अनुज्ञाओं को तथा अनधिकृत निर्माण प्रशमन का विनियमित करना;

नगरपालिक अधिनियमों में यथोचित संशोधन करने का विनिश्चिय किया है.

अनुज्ञात फर्श क्षेत्र अनुपात से अधिक निर्माण के नियमितीकरण के लिए प्रशमन के उपबंधों में भी संशोधन अपेक्षित है. वर्तमान में प्रशमन के उपबंध फर्श क्षेत्र अनुपात के १० % तक प्रतिबंधित हैं जिन्हें १० % से ३० % तक बढ़ाना अपेक्षित है. अतएव मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम, १ ९ ५६ एवं मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, १ ९ ६१ में कतिपय संशोधन किए जाना प्रस्तावित हैं.

५. चूंकि मामला अत्यावश्यक था तथा विधान सभा का सत्र चालू नहीं था , अतएव, मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि ( संशोधन ) अध्यादेश , २०२१ ( क्रमांक १३ सन् २०२१ ) इस प्रयोजन के लिए प्रख्यापित किया गया था. अब उक्त अध्यादेश के स्थान पर, राज्य विधान - मण्डल का अधिनियम बिना उपांतरण के लाया जाना प्रस्तावित है.

६. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.

भोपाल :

भूपेन्द्र सिंह 'भारसाधक सदस्य.

तारीख २ अगस्त, २०२१ .

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प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में व्याख्यात्मक ज्ञापन

प्रस्तावित विधेयक के जिन खण्डों द्वारा राज्य सरकार को विधायनी शक्तियों का प्रत्यायोजन किया जा रहा है , उनका विवरण निम्नानुसार है:-

भाग-एक

खण्ड ३ ( २ ) निगम के स्वामित्व या निहित या प्रबंधन के अधीन किसी भी अचल अथवा चल संपत्ति के विक्रय , पट्टे, अंतरण या अन्यथा द्वारा व्ययन किये जाने,

(४ ) कॉलोनाइजर के रूप में किसी व्यक्ति को रजिस्ट्रीकृत करने एवं आवेदन की रीति विहित किये जाने, अतिक्रमण के लिए कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण निलंबित या रद्द करने तथा निलंबन या रद्दकरण के आदेश के विरुद्ध अपील के लिए प्राधिकारी नियुक्त करने, (५ ) कॉलोनियां विकसित करने की अनुज्ञा की रीति विहित करने अथवा अनुज्ञा प्रदान करने से इंकार करने की रीति विहित करने , कॉलोनाइजर द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर तथा निम्न आय वर्ग के व्यक्तियों के लिए भूखण्डों या निवास इकाईयों का आकार, संख्या, विक्रय मूल्य, चयन की प्रक्रिया, उक्त भूखण्डों या निवास इकाईयों के अतिरिक्त या बदले में आश्रय शुल्क अधिरोपित करने , बैंक गारंटी या बंधक संपत्तियों को मुक्त किए जाने की रीति विहित करने , कॉलोनाइजर द्वारा कॉलोनी की समस्त जानकारी प्रदर्शित करने , विकास पूर्ण होने पर विहित रीति में समापन प्रमाण - पत्र जारी करने,

(६ ) अनुज्ञा के अतिक्रमण के विरुद्ध विहित रीति में कार्यवाही करने.

(८ ) अनाधिकृत कॉलोनी में नागरिक अधोसंरचना उपलब्ध कराने हेतु आपत्तियां तथा सुझाव आमंत्रित करने की रीति विहित किए जाने, अभिन्यास को अंतिम रूप दिये जाने , नागरिक अधोसंरचना उपलब्ध कराने संबंधी प्राक्कलन संबंधी रीति विहित किए जाने , हितधारकों के लिए विकास शुल्क अवधारित तथा संग्रह किये विकास शुल्क, कुर्की तथा विक्रय की रीति विहित किये जाने,

(१३ ) अनुज्ञा के प्रतिकूल भवनों के संनिर्माण के अपराधों का प्रशमन किये जाने,

भाग-दो

खण्ड ४(४ ) अनुज्ञा के प्रतिकूल भवनों के संनिर्माण के अपराधों का प्रशमन किये जाने,

(५ ) कालोनाइजर के रूप में किसी व्यक्ति को रजिस्ट्रीकृत करने एवं आवेदन की रीति विहित किये जाने , अतिक्रमण के लिए कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण निलंबित या रद्द करने तथा निलंबन या रद्दकरण के आदेश के विरुद्ध अपील के लिए प्राधिकारी नियुक्त करने, (६ ) कालोनियां विकसित करने की अनुज्ञा की रीति विहित करने अथवा अनुज्ञा प्रदान करने से इंकार करने की रीति विहित करने , कालोनाइजर द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर तथा निम्न आय वर्ग के व्यक्तियों के लिए भूखंडों या निवास इकाईयों का आकार, संख्या, विक्रय मूल्य, चयन की प्रक्रिया, उक्त भूखंडों या निवास इकाईयों के अतिरिक्त या बदले में आश्रय शुल्क अधिरोपित करने, बैंक गारंटी या बंधक संपत्तियों को मुक्त किए जाने की रीति विहित करने , कॉलोनाइजर द्वारा कॉलोनी की समस्त जानकारी प्रदर्शित करने विकास पूर्ण होने पर विहित रीति में समापन प्रमाण - पत्र जारी करने,

(७ ) अनुज्ञा के अतिक्रमण के विरुद्ध विहित रीति में कार्यवाही करने,

(९ ) अनाधिकृत कॉलोनी में नागरिक अधोसंरचना उपलब्ध कराने हेतु आपत्तियां तथा सुझाव आमंत्रित करने की रीति विहित किए जाने , अभिन्यास को अंतिम रूप दिये जाने, नागरिक अधोसंरचना उपलब्ध कराने संबंधी प्राक्कलन की रीति विहित किए जाने , हितधारकों के लिए विकास शुल्क अवधारित तथा संग्रह किये विकास शुल्क, कुर्की तथा विक्रय की रीति विहित किये जाने,

के संबंध में नियम बनाये जायेंगे जो सामान्य स्वरूप के होंगे.

ए. पी. सिंह

प्रमुख सचिव

मध्यप्रदेश विधान सभा.

मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021

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अध्यादेश के संबंध में विवरण

मध्यप्रदेश नगरपालिक निगम अधिनियम, १ ९ ५६ (क्रमांक २३ सन् १ ९ ५६ ) की धारा २ ९ २ घक के साथ पठित धारा २ ९ २ङ के अधीन तथा मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, १ ९ ६१ ( क्रमांक ३७ सन् १ ९ ६१ ) की धारा ३३ ९ घक के साथ पठित धारा ३३ ९ङ के अधीन कार्रवाई शुरू करने के लिए माननीय उच्च न्यायालय की रिट याचिका क्रमांक १०४१४ दिनांक ०३-०६-२०१९ में पारित निर्णय के अनुक्रम में दोनों अधिनियमों में निम्नानुसार पुनरीक्षण आवश्यक हो गया थाः-

(एक) अनधिकृत कालोनी को परिभाषित करना;

(दो) " कालोनी" की परिभाषा को अधिक स्पष्ट करना;

(तीन ) कॉलोनाइजर की प्रक्रिया या रजिस्ट्रीकरण और " कालोनी " के विकास के लिए अनुज्ञा का सरलीकृत करना;

(चार) कालोनी के विकास के लिए अनुज्ञा के अतिक्रमणों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए उपबंध करना;

(पांच) नागरिक अधोसंरचना एवं सार्वजनिक स्थानों के लिए आशयित भूमि बेचे जाने या अन्यथा उपयोग किए जाने से संज्ञेय अपराध के लिए ऐसी कार्रवाई के द्वारा सुरक्षा करना;

(छह) अनधिकृत कालोनी के विकास में किए गए अपराध के लिए दण्ड उपबंधों को अधिक कड़ा बनाना;

(सात) अनधिकृत कालोनियों में नागरिक अधोसंरचना का उपबंध करने के लिए सरकार स्थानीय निकायों को समर्थ बनाना;

(आठ) अनधिकृत कालोनियों में भवन अनुज्ञाओं को तथा अनधिकृत निर्माण प्रशमन का विनियमित करना;

चूंकिविधान सभा का सत्र चालू नहीं था एवं उपरोक्तानुसार विधान बनाया जाना आवश्यक था. उपरोक्त प्रयोजनों को पूरा किये जाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश नगर पालिक विधि ( संशोधन ) अध्यादेश २०२१ ( क्रमांक १३ सन् २०२१ ) एतद्वारा प्रख्यापित किया गया था.

ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव

मध्यप्रदेश विधान सभा.

नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय, भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2021 .

Cite this issue. Madhya Pradesh Gazette, Government of Madhya Pradesh, 10 August 2021. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.madhya.2021-08-10.320.Extraordinary/. Archive identifier in.gazette.madhya.2021-08-10.320.Extraordinary.