मध्यप्रदेश शासन
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सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक 322]
भोपाल , मंगलवार , दिनांक 10 अगस्त 2021 - श्रावण 19 , शक 1943
विधान सभा सचिवालय , मध्यप्रदेश
भोपाल, दिनांक 10 अगस्त 2021
क्र. 12496- मप्रविस - 15- विधान -2021 .- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम 64 के उपबंधों के पालन में, मध्यप्रदेश आबकारी ( संशोधन ) विधेयक, 2021 ( क्रमांक 26 सन् 2021 ) जो विधान सभा में दिनांक 10 अगस्त 2021 को पुरःस्थापित हुआ है . जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
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मध्यप्रदेश राजपत्र , दिनांक 10 अगस्त 2021
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक २६ सन् २०२१
मध्यप्रदेश आबकारी ( संशोधन ) विधेयक , २०२१
विषय-सूची
खण्ड:
१. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.
२. धारा ४ का स्थापन.
३. धारा ३४ का संशोधन.
४. धारा ३५ का लोप.
५. धारा ३७ का संशोधन.
६. धारा ३८ -क का संशोधन.
७. धारा ४० -क का संशोधन.
८. धारा ४ ९ -क का संशोधन.
९. धारा ५४-क का संशोधन.
१०. धारा ६१ का संशोधन.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021
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मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक २६ सन् २०२१
मध्यप्रदेश आबकारी ( संशोधन ) विधेयक, २०२१
मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, १ ९ १५ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.
भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश विधान -मण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में अधिनियमित हो :-
१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश आबकारी ( संशोधन ) अधिनियम , २०२१ है .
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.
( २ ) यह मध्यप्रदेश राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगा.
धारा ४ का स्थापन.
२. मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम , १ ९ १५ ( क्रमांक २ सन् १ ९ १५ ) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) की धारा ४ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-
"४. " देशी मदिरा " " विदेशी मदिरा " और " हेरीटेज मदिरा " घोषित करने की शक्ति. - इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए या उसके भाग के लिए, राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा , यह घोषित कर सकेगी कि कौन सी मदिरा " देशई मदिरा ", " विदेशी मदिरा " और " हेरीटेज मदिरा " समझी जाए. ".
धारा संशोधन. ३४ का ३. मूल अधिनियम की धारा ३४ में, उपधारा ( ४ ) में , शब्द, कोष्ठक तथा अंक " उपधारा ( २ ) " के स्थान पर, शब्द, कोष्ठक तथा अंक " उपधारा ( ३ ) " स्थापित किए जाएं.
४. मूल अधिनियम की धारा ३५ का लोप किया जाए.
धारा ३५ का संशोधन.
धारा ३७ का संशोधन.
५. मूल अधिनियम की धारा ३७ में, शब्द " एक हजार रुपए " के स्थान पर, शब्द " दस हजार रुपए " स्थापित किए जाएं.
धारा ३८ - क का संशोधन.
६. मूल अधिनियम की धारा ३८ - क में, शब्द " तीन सौ रुपए " और " दो हजार रुपए " के स्थान पर , क्रमशः शब्द " तीस हजार रुपए " और " दो लाख रुपए " स्थापित किए जाएं.
धारा ४० - क का संशोधन.
७. मूल अधिनियम की धारा ४० - क में शब्द " दो वर्ष " तथा " दो हजार रुपए " के स्थान पर, क्रमशः शब्द " तीन वर्ष " तथा " तीन हजार रुपए " स्थापित किए जाएं.
८. मूल अधिनियम की धारा-४९ - क में, -
धारा ४ ९ - क का संशोधन.
(
एक) उप- धारा ( १ ) में, खण्ड ( एक) , (दो) एवं ( तीन ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किए जाएं, अर्थात्ः-
" ( एक) यदि मानवीय उपभोग के लिए अनपयुक्त पाई जाती है-
कारावास से , जो छह मास से कम का नहीं होगा किन्तु जो छह वर्ष तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा और जुर्माने से भी जो एक लाख रुपए से कम का नहीं होगा दण्डनीय होगा;
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021
(दो) मनुष्य को क्षति पहुंचाती है-
कारावास से , जो दो वर्ष से कम का नहीं होगा किंतु जो आठ वर्ष तक का हो सकेगा , दण्डनीय होगा और जुर्माने से भी जो दो लाख रुपए से कम का नहीं होगा दण्डनीय होगा;
(तीन) मनुष्य की मृत्यु कारित
करती है-
कारावास से , जो दस वर्ष से कम का नहीं होगा किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा और जुर्माने से भी जो पांच लाख रुपए से कम का नहीं होगा दण्डनीय होगा. ".
(दो) उपधारा ( २ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- " ( २ ) जब किसी व्यक्ति को इस धारा के अधीन द्वितीय या किसी पश्चात्वर्ती अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया जाता है तो वह परिस्थितियों के सापेक्ष्य में, -
" ( क) उपधारा ( १ ) के खण्ड ( एक )
के अधीन.
कारावास से जो छह वर्ष से कम का नहीं होगा किन्तु जो दस वर्ष तक का हो सकेगा दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी जो पांच लाख रुपए से कम का नहीं होगा दण्डित किया जाएगा;
(ख) उपधारा ( १ ) के खण्ड ( दो ) के अधीन.
कारावास से जो दस वर्ष से कम का नहीं होगा किन्तु जो चौदह वर्ष तक का हो सकेगा दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी जो दस लाख रुपए से कम का नहीं होगा दण्डित किया जायेगा;
(ग) उपधारा ( १ ) के खण्ड ( तीन )
के अधीन.
मृत्यु दण्ड या आजीवन कारावास से दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी जो बीस लाख रुपए से कम का नहीं होगा दण्डित किया जाएगा. ".
(तीन ) उपधारा ( २ ) के पश्चात्, निम्नलिखित स्पष्टीकरण जोड़ा जाए, अर्थात्ः-
" स्पष्टीकरण.- इस धारा में, " विकृत स्पिरिट युक्त निर्मिति " से अभिप्रेत है, कोई ऐसी निर्मिति जो विकृत स्पिरिट से बनाई गई हो और उसके अंतर्गत ऐसी स्पिरिट युक्त निर्मिति से बनी मदिरा , फ्रेन्च पोलिश , वार्निश और तरल दृावक आती हैं. ".
धारा ५४ - क का
९ . मूल अधिनियम की धारा ५४ - क में , परन्तुक का लोप किया जाए.
संशोधन.
धारा ६१ का
संशोधन.
१०. मूल अधिनियम की धारा ६१ में , उपधारा ( १ ) में, खण्ड ( क) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" (क ) इस अधिनियम के अधीन दी गई अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास की किसी शर्त के उल्लंघन के लिए धारा ३४, धारा ३७, धारा ३८ , धारा ३८ - क, धारा ३ ९ और धारा ४४ के अधीन, किसी अपराध का संज्ञान, कलक्टर या जिला आबकारी अधिकारी से अनिम्न पदश्रेणी के किसी ऐसे आबकारी अधिकारी के, जिसे कलक्टर द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाए, लिखित परिवाद या रिपोर्ट पर ही; " .
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उद्देश्यों और कारणों का कथन
मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, १ ९ १५ ( क्रमांक २ सन् १ ९ १५ ) के क्रियान्वयन में कतिपय व्यावहारिक कठिनाइयां अनुभव की गई हैं , उन कठिनाइयों को दूर करने के उद्देश्य से यथोचित संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं . विधेयक की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:-
(१) वर्तमान में आबकारी अधिनियम केवल " देशी मदिरा " और " विदेशी मदिरा " की परिभाषा को अधिसूचित किए जाने का उपबंध करता है. राज्य में उत्पादित स्वदेशी मदिरा को प्रोत्साहित करने और राज्य में अतिरिक्त राजस्व लाने के उद्देश्य से " हेरिटेज मदिरा " नाम से मदिरा की एक पृथक श्रेणी मूल अधिनियम की धारा ४ में सम्मिलित किया जाना प्रस्तावित है .
(२) अध्याय- सात में अधिकथित अपराधों और शास्तियों से संबंधित शास्तियों की सीमाओं को आबकारी अपराधों की गंभीरता के कारण , जिनसे कि कड़ाई से निपटना आवश्यक है, पुनरीक्षित किए जाने की आवश्यकता है. अतएव मूल अधिनियम की धारा ३७ तथा ३८ - क में यथोचित संशोधन प्रस्तावित हैं.
(३) अवैध तथा नकली मदिरा के कारण राज्य में मृत्यु तथा अंधेपन के मामले प्रकाश में आए हैं. वर्तमान में धारा ४९ - क नकली मदिरा से संबंधित दांडिक उपबंध करती है. लोगों को इस अवैधानिक कृत्य में लिप्त होने से भयोपरत करने के लिए दांडिक उपबंधों में वृद्धि किया जाना प्रस्तावित है.
अतः यह विधेयक प्रस्तुत है.
(४)
भोपालः
जगदीश देवड़ा भारसाधक सदस्य.
तारीख ५ अगस्त, २०२१ .
प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन
प्रस्तावित विधेयक के निम्नांकित खण्डों द्वारा विधायनी शक्तियों का प्रत्योजन राज्य सरकार को किया जा रहा है:-
खण्ड ( २ ) मदिरा का प्रकार घोषित किये जाने की अधिसूचना जारी किये जाने ; तथा
खण्ड ( १० ) अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास की किसी शर्त के उल्लंघन के लिये धारा ३४, धारा ३७ , धारा ३८, धारा ३८ -क, धारा ३ ९ और धारा ४४ के अधीन, किसी अपराध का संज्ञान लिये जाने हेतु अधिकारी प्राधिकृत किये जाने;
के संबंध में नियम बनाये जायेंगे, जो सामान्य स्वरूप के होंगे.
ए. पी. सिंह
प्रमुख सचिव,
मध्यप्रदेश विधान सभा.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2021 .