ध्य प्रदे श शासन
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सत्यमेव जयते
मध्यप्रदेश राजपत्र
(असाधारण )
प्राधिकार से प्रकाशित
भोपाल , मंगलवार , दिनांक 10 अगस्त 2021 - श्रावण 19 , शक 1943
क्रमांक 323]
विधान सभा सचिवालय, मध्यप्रदेश
भोपाल, दिनांक 10 अगस्त 2021
क्र. 12499- मप्रविस - 15- विधान -2021 .- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियम 64 के उपबंधों के पालन में, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) विधेयक, 2021 ( क्रमांक 27 सन् 2021 ) जो विधान सभा में दिनांक 10 अगस्त 2021 को पुरःस्थापित हुआ है. जनसाधारण की सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.
ए. पी. सिंह प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश विधान सभा.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक २७ सन् २०२१
मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) विधेयक , २०२१
विषय-वस्तु
खण्ड:
१. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ .
२. धारा ७ का संशोधन.
३. धारा १६ का संशोधन.
४. धारा ३५ का संशोधन.
५. धारा ४४ का स्थापन .
६. धारा ५० का संशोधन.
७. धारा ७४ का संशोधन.
८. धारा ७५ का संशोधन.
९. धारा ८३ का संशोधन.
१० . धारा १०७ का संशोधन .
११. धारा १२ ९ का संशोधन.
१२. धारा १३० का संशोधन.
१३. धारा १५१ का स्थापन.
१४. धारा १५२ का संशोधन.
१५. अनुसूची २ का संशोधन.
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021
मध्यप्रदेश विधेयक
क्रमांक २७ सन् २०२१
मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) विधेयक, २०२१
मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ को और संशोधित करने हेतु विधेयक.
भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में मध्यप्रदेश राज्य विधान - मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो:-
१. ( १ ) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश माल और सेवा कर ( संशोधन ) अधिनियम, २०२१.
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ (२ ) इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित के सिवाय , इस अधिनियम के उपबंध ऐसी तारीख से प्रवृत्त होंगे जैसा कि राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करेः
परंतु इस अधिनियम के विभिन्न उपबंधों के लिए विभिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी.
संशोधन. धारा ७ का २. मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, २०१७ ( क्रमांक १ ९ सन् २०१७ ) ( जो इसमें इसके पश्चात् मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है ) की धारा ७ में, उपधारा ( १ ) में, खण्ड ( क) के पश्चात्, निम्नलिखित खण्ड अंतःस्थापित किया जाए और १ जुलाई, २०१७ से अंतःस्थापित किया गया समझा जाएगा, अर्थात्ः-
" (कक) किसी व्यक्ति से भिन्न, अन्य व्यक्ति द्वारा नकद, आस्थगित संदाय या अन्य मूल्यवान प्रतिफल के लिए, उसके सदस्यों या घटकों या इसके विपरीत क्रम में कोई क्रियाकलाप या हस्तांतरण.
स्पष्टीकरण. - इस खंड के प्रयोजन के लिए, एतद्वारा , यह स्पष्ट किया जाता है कि, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि या किसी न्यायालय , अधिकरण या प्राधिकरण के किसी निर्णय , डिक्री या आदेश में किसी बात के होते हुए भी, व्यक्ति और उसके सदस्यों या घटकों को दो अलग- अलग व्यक्ति समझा जाएगा और उनके मध्य परस्पर गतिविधियां या संव्यवहार का प्रदाय ऐसे व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के मध्य होना समझा जाएगा.
धारा संशोधन. १६ का ३. मूल अधिनियम की धारा १६ में, उपधारा ( २ ) में, खंड ( क ) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतः स्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" (कक) आपूर्तिकर्ता द्वारा खंड ( क ) में निर्दिष्ट इनवॉइस या डेबिट नोट का विवरण आउटवर्ड आपूर्ति के विवरण में प्रस्तुत किया गया है और ऐसे विवरण ऐसे इनवॉइस या डेबिट नोट के प्राप्तकर्ता को धारा ३७ के अधीन विनिर्दिष्ट रीति में, सूचित किए गए हैं . ".
४. मूल अधिनियम की धारा ३५ में, उपधारा ( ५ ) का लोप किया जाए.
धारा ३५ का संशोधन.
५. मूल अधिनियम की धारा ४४ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-
धारा ४४ का संशोधन.
"४४. इनपुट सेवा वितरक , धारा ५१ या धारा ५२ के अधीन कर संदाय करने वाले व्यक्ति, नैमित्तिक कराधेय व्यक्ति और अनिवासी कराधेय व्यक्ति से भिन्न प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ति, प्रत्येक वित्त वर्ष के लिए इलेक्ट्रोनिक रूप से , ऐसे समय के भीतर और ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में जो विहित की जाए, एक वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करेगा , जिसमें वित्तीय वर्ष के लिए प्रस्तुत वार्षिक विवरणियों में घोषित प्रदायों के मूल्य का संपरीक्षित वार्षिक वित्तीय विवरण के साथ मिलान करते हुए, एक स्वसत्यापित समाधान विवरण सम्मिलित हैः मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021
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परन्तु आयुक्त, परिषद् की सिफारिश पर, अधिसूचना द्वारा, किसी वर्ग या रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों को इस धारा के अधीन वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने से छूट दे सकेगाः
परन्तु यह और कि इस धारा में अंतर्विष्ट कोई बात केन्द्र सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकरण के किसी विभाग पर लागू नहीं होगी , जिनकी लेखा बहियां भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक अथवा तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन स्थानीय प्राधिकरणों के लेखाओं की संपरीक्षा के लिए नियुक्त किसी संपरीक्षक द्वारा संपरीक्षा के अध्यधीन हैं. ".
धारा ५० का
संशोधन.
६. मूल अधिनियम की धारा ५० में, उप - धारा ( १ ) में, परन्तुक के स्थान पर, निम्नलिखित परन्तुक स्थापित किया जाए और १ जुलाई , २०१७ से स्थापित किया गया समझा जाएगा , अर्थात्ः-
" परंतु किसी कर अवधि के दौरान की गई पूर्तियों के संबंध में संदेय कर पर ब्याज को, जिसे धारा ३ ९ के उपबंधों के अनुसार नियत तारीख के पश्चात् उक्त अवधि के लिए प्रस्तुत की गई विवरणी में घोषित किया गया है , सिवाय वहां के जहां ऐसी विवरणी को उक्त अवधि के संबंध में धारा ७३ या धारा ७४ के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के प्रारंभ होने के पश्चात् प्रस्तुत किया जाता है, कर के उस भाग पर देय होगा जिसका संदाय इलैक्ट्रानिक नकद खाते से विकलित कर किया जाता है. ".
धारा ७४ का
संशोधन.
७. मूल अधिनियम की धारा ७४ में , स्पष्टीकरण १ में, खण्ड ( दो ) में, शब्द और अंक " धारा १२२, १२५, १२ ९ और १३० के स्थान पर, शब्द और अंक " धारा १२२ और १२५ " स्थापित किए जाएं.
धारा ७५ का
८. मूल अधिनियम की धारा ७५ में, उपधारा ( १२ ) में, निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाए, संशोधन.
अर्थात्ः-
स्पष्टीकरण.- इस उपधारा के प्रयोजन के लिए, पद " स्वतः निर्धारित कर " में धारा ३७ के अधीन प्रस्तुत जावक पूर्तियों के ब्यौरों के संबंध में देय कर सम्मिलित है किन्तु धारा ३ ९ के अधीन प्रस्तुत की गई विवरणी में सम्मलित नहीं है. " .
धारा ८३ का
९. मूल अधिनियम की धारा ८३ में, उपधारा ( १ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, संशोधन.
अर्थात्:-
" ( १ ) जहां, अध्याय १२ , अध्याय १४ या अध्याय १५ के अधीन किसी कार्यवाही के प्रारंभ होने के पश्चात्, आयुक्त का यह मत है कि सरकारी राजस्व के हित का संरक्षण करने के प्रयोजन के लिए ऐसा करना आवश्यक हो तो वह लिखित आदेश द्वारा अनंतिम रूप से ऐसे कराधेय व्यक्ति या धारा १२२ की उपधारा ( १ क ) में विनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति की संपत्ति, जिसके अंतर्गत बैंक खाता भी है, को ऐसी रीति में, जैसा कि विहित की जाए, कुर्क कर सकेगा. ".
धारा १०७ का
संशोधन.
१०. मूल अधिनियम की धारा १०७ में, उपधारा ( ६ ) में, पूर्ण विराम के स्थान पर , कोलन स्थापित किया जाए और तत्पश्चात् निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाए, अर्थात्ः-
" परंतु यह कि धारा १२ ९ की उपधारा ( ३ ) के अधीन किसी आदेश के विरुद्ध कोई अपील नहीं की जाएगी , जब तक कि अपीलार्थी द्वारा शास्ति के पच्चीस प्रतिशत के बराबर राशि का भुगतान नहीं कर दिया जाता." .
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021
११. मूल अधिनियम की धारा १२ ९ में, -
धारा १२ ९ का संशोधन.
(एक) उपधारा ( १ ) में, खण्ड ( क) और ( ख ) के स्थान पर, निम्नलिखित खण्ड स्थापित किए जाएं,
अर्थात्ः-
" (क) ऐसे माल पर देय कर के दो सौ प्रतिशत के बराबर शास्ति के संदाय पर, और छूट प्राप्त माल की दशा में , माल के मूल्य के दो प्रतिशत के बराबर रकम या पच्चीस हजार रुपए, जो भी कम हो, के संदाय पर, जहां माल का स्वामी ऐसी शास्ति के संदाय के लिए आगे आता है;
(ख) माल के मूल्य के पचास प्रतिशत अथवा ऐसे माल पर देय कर के दो सौ प्रतिशत, जो भी अधिक हो, के बराबर शास्ति के संदाय पर, और छूट प्राप्त माल की दशा में , माल के मूल्य के पांच प्रतिशत के बराबर रकम या पच्चीस हजार रुपए, जो भी कम हो , के संदाय पर, जहां माल का स्वामी ऐसी शास्ति के संदाय के लिए आगे नहीं आता है ; " ;
उपधारा ( २ ) का लोप किया जाए;
(दो)
(तीन) उपधारा (३ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-
" ( ३ ) माल की अभिरक्षा या अभिग्रहण या प्रवहण करने वाला समुचित अधिकारी संदेय शास्ति को विनिर्दिष्ट करते हुए, ऐसी अभिरक्षा या अभिग्रहण के सात दिवस के भीतर नोटिस जारी करेगा और उसके पश्चात्, उपधारा ( १ ) के खण्ड ( क) या खण्ड ( ख ) के अधीन शास्ति के संदाय के लिए, ऐसे नोटिस की तामील की तारीख से सात दिवस की कालावधि के भीतर आदेश पारित करेगा. " ;
(चार) उपधारा (४) में, शब्द " कर, ब्याज या शास्ति " के स्थान पर, शब्द " शास्ति " स्थापित किया जाए;
(पांच) उपधारा ( ६ ) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः-
" (६ ) जहां किसी माल का परिवहन करने वाला व्यक्ति या माल का स्वामी , उपधारा ( ३ ) के अधीन पारित आदेश की प्रति की प्राप्ति की तारीख से पंद्रह दिवस के भीतर, उपधारा ( १ ) के अधीन रकम या शास्ति का संदाय करने में असफल रहता है, इस प्रकार अभिरक्षित या अभिग्रहीत माल या प्रवहण उपधारा ( ३ ) के अधीन देय शास्ति वसूल करने के लिए, ऐसी रीति में तथा ऐसे समय के भीतर जैसा कि विहित किया जाए, विक्रय या अन्यथा व्ययन का दायी होगा:
परन्तु प्रवहण, उपधारा ( ३ ) के अधीन शास्ति अथवा एक लाख रुपए, जो भी कम हो, का परिवाहक द्वारा संदाय किए जाने पर मुक्त किया जाएगाः
परन्तु यह और कि जहां अभिरक्षा या अभिग्रहण का माल शीघ्र नष्ट होने योग्य या खतरनाक या समय के साथ मूल्य में ह्मस की प्रकृति का है तो उक्त पंद्रह दिवस की अवधि समुचित अधिकारी द्वारा कम की जा सकेगी.
मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021
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धारा १३० का
१२. मूल अधिनियम की धारा १३० में, -
संशोधन.
(एक) उपधारा ( १ ) में, शब्द " इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी यदि " के स्थान पर, शब्द " जहां " स्थापित किया जाए;
(दो) उपधारा ( २ ) में , द्वितीय परन्तुक में, शब्द, कोष्ठक और अंक " धारा १२ ९ की उपधारा ( १ ) के अधीन उद्ग्रहणीय शास्ति की रकम " के स्थान पर , शब्द " ऐसे माल पर देय कर की सौ प्रतिशत के बराबर शास्ति " स्थापित किए जाएं;
(तीन) उपधारा ( ३ ) का लोप किया जाए.
१३. मूल अधिनियम की धारा १५१ के स्थान पर, निम्नलिखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- धारा १५१ का स्थापन.
जानकारी मांगने की शक्ति.
" १५१. आयुक्त या उसके द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी आदेश द्वारा किसी व्यक्ति को इस अधिनियम से संबंधित किसी मामले के संबंध में जानकारी , ऐसे समय के भीतर, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में, जो इसमें विनिर्दिष्ट की जाए प्रस्तुत करने हेतु निर्देश दे सकेगा. ".
१४. मूल अधिनियम की धारा १५२ में, -
धारा १५२ का संशोधन.
(एक ) उपधारा ( १ ) के स्थान पर , निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाए, अर्थात्ः- " (१ ) धारा १५० या धारा १५१ के प्रयोजनों के लिए दिए गए किसी मामले के संबंध में सूचना, संबंधित व्यक्ति या उसके प्राधिकृत प्रतिनिधि की लिखित में पूर्व सहमति के बिना ऐसी रीति में प्रकाशित नहीं की जाएगी ताकि विशिष्ट व्यक्ति को ऐसी विशिष्टियों की पहचान हेतु समर्थ बना सके और ऐसी सूचना संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिए बिना इस अधिनियम के अधीन किन्हीं प्रक्रियाओं के प्रयोजन के लिए उपयोग में नहीं लाई जाएंगी. " ;
(दो) उपधारा ( २ ) का लोप किया जाए.
अनुसूची २ का
संशोधन.
१५. मूल अधिनियम की अनुसूची २ में , पैरा ७ का लोप किया जाए और १ जुलाई , २०१७ से विलोपित किया गया समझा जाए.
उद्देश्यों और कारणों का कथन
प्रदाय, इनपुट कर प्रत्यय , संपरीक्षा, वार्षिक विवरणी , ब्याज, शास्ति की कार्यवाहियां, स्वतः निर्धारित कर से संबंधित स्पष्टीकरण, अनंतिम कुर्की, अपील , चलित जांच के दौरान शास्ति, जब्ती, जानकारी मंगाया जाना, सूचना के प्रकटन का वर्जन से संबंधित मध्यप्रदेश माल तथा सेवा कर अधिनियम, २०१७ ( क्रमांक १ ९ सन् २०१७ ) के कतिपय उपबंधों और अनुसूची-२ को यथोचित रूप से संशोधित किया जाना अपेक्षित है.
२. अतः यह विधेयक प्रस्तुत है .
जगदीश देवड़ा भोपाल :
भारसाधक सदस्य.
तारीख ६ अगस्त, २०२१ .
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मध्यप्रदेश राजपत्र, दिनांक 10 अगस्त 2021
" संविधान के अनुच्छेद २०७ के अधीन राज्यपाल द्वारा अनुशंसित.".
प्रत्यायोजित विधि निर्माण के संबंध में ज्ञापन
प्रस्तावित विधेयक के जिन खण्डों में प्रत्यायोजन संबंधी प्रस्थापनाएं हैं, उनका विवरण निम्नानुसार है:-
खण्ड क्रमांक १- अधिनियम के विभिन्न उपबंधों को, विभिन्न तारीखों को अधिसूचना जारी कर लागू करने;
खण्ड क्रमांक ५- करदाताओं को ऑडिटेड वार्षिक वित्तीय विवरण से मिलान करते हुए किसी वित्तीय वर्ष में प्रस्तुत विवरणियों के आधार पर स्वप्रमाणित समाधान विवरण के साथ वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करने;
खण्ड क्रमांक ९- सरकारी राजस्व के हित का संरक्षण करने के प्रयोजन के लिए संपत्ति कुर्क किए जाने की रीति निहित किये जाने;
खण्ड क्रमांक ११ ( पांच )- अभिरक्षित या अभिग्रहीत माल या प्रवहण संबंधी शास्ति की वसूली की समय - सीमा विहित किए जाने; तथा
खण्ड क्रमांक १३- किसी व्यक्ति को अधिनियम से संबंधित जानकारी दिए जाने की रीति एवं प्ररूप विहित किए जाने;
के संबंध में नियम बनाये जायेंगे , जो सामान्य स्वरूप के होंगे .
ए. पी. सिंह
प्रमुख सचिव,
मध्यप्रदेश विधान सभा.
नियंत्रक, शासकीय मुद्रण तथा लेखन सामग्री, मध्यप्रदेश द्वारा शासकीय केन्द्रीय मुद्रणालय , भोपाल से मुद्रित तथा प्रकाशित- 2021 .